अपडेट 76
आदित्य ने अपने जिस हाथ से उसका हाथ पकड़ा हुआ था उस हाथ को धीरे धीरे हाथ से बाजु और कंधे की तरफ ले जाने लगा जिससे संध्या की भी भावनाएं भड़काने लगी. वो हाथ ऊपर होते हुए उसके गलों तक पंहुच गया और अपने हाथ से उसकी गर्दन और फिर गाल सहलाते हुए अपने अंगूठे से उसके होठों को मसलते हुए पूछने लगा 'एक बात बताओ जब पापा आ जायेंगे तब आपको अगर दोनों में से सिर्फ और सिर्फ एक को चुनना पड़े तू आप किसको चुनोगी'
संध्या ये प्रश्न सुनकर हंसने लगी और काफी देर हंसने के बाद वो आदित्य को निहारते हुए कहने लगी 'मेरे से तुम चुनने के लिए कह रहे हो, इससे बड़ा मज़ाक क्या हो सकता है. तुम जिन लोगों में से चुनने के लिए कह रह हो, उनमे से एक तू मुझे अभी छोड़कर चले गए हैं और पता नहीं कब वापिस आएंगे या आएंगे hi नहीं. दूसरे हो तुम, तुम्हारा तू अभी पता hi नहीं है की मुझे प्रेमिका मन्ना तू दूर अभी दोस्त भी मानते हो की नहीं, ये भी पता नहीं है, इसलिए मैं क्या जवाब दूँ' इतना कहकर वो सुबकने लगी.
आदित्य उसकी पीठ को सहलाते हुए सान्तवना देता रहा और उससे चुप हो जाने के लिए तू कहा लेकिन ये नहीं बताया की वो अपनी माँ से प्यार करता है की नहीं.
जब थोड़ी देर में संध्या शांत हो गयी तू वो कहने लगी 'मुझे समझ में आ गया है की मैं जो सोच रही हूँ वो काफी हद तक ठीक है'
आदित्य 'आप ऐसा क्या सोच रही हैं'
संध्या 'यही की तुम मुझे गर्लफ्रेंड भी अगर मानते हो तू वो सिर्फ और सिर्फ मज़बूरी में, अन्यथा नहीं, प्यार तू बहुत दूर की बात है'
आदित्य अपनी माँ की बात का जवाब न देकर कहने लगा 'आप एक बात बताओ की जब आप को पापा के अलावा किसी ओर से प्यार हो जाये और अगर वो भी आपको प्यार करने लगे तू पापा के आने के बाद उस प्यार का क्या होगा'
संध्या उसकी बात सुनकर सोच में पद गयी और फिर उसने कहा 'पहले तू मुझे ये पता नहीं की कोई मुझसे प्यार करता है की नहीं और दूसरा अगर कोई प्यार करता भी है तू वो किस हद तक प्यार करता है, उसके बाद hi कुछ सोचा जा सकता है'
आदित्य 'जैसा की मैंने कहा की अगर वो भी आपसे उतना hi प्यार करता हो जितना की आप उससे करती है, तब आप क्या करेंगी'
संध्या 'मैं अभी इस बारे में नहीं सोचना छथि, मैं बस इतना जानती हूँ की जिस से प्यार करती हूँ या मैं जिस से प्यार करुँगी, मेरा प्यार कभी भी काम नहीं होगा चाहे कुछ भी हो जाए'
आदित्य 'ऐसा कैसे हो सकता है आपका प्यार कभी काम नहीं होगा क्यूंकि जब आपको दो में से एक को चुनना पड़ेगा तब आप परेशानी में घिर जाएँगी, मैं इसलिए आपसे पूछ रहा हूँ की आप उसे वक़्त क्या करेंगी लेकिन मुझे लग रहा है की आप इस बात का जवाब देना नहीं छह रही हैं'
संध्या 'लेकिन तुम ये सब क्योँ पूछ रहे हो, जबकि तुम तू अभी मुझे दिल से गर्लफ्रेंड भी नहीं मानते हो'
आदित्य अपनी माँ को वंहा से उठाकर कंप्यूटर टेबल पर ले गया और कुर्सी पर बैठा कर कंप्यूटर में एक फोल्डर खोलकर बोलै 'आप इसको देखो जब तक मैं आपके लिए कॉफ़ी बनाकर लता हूँ' और वो किचन में चला गया.
आदित्य के जाने के बाद संध्या जैसे जैसे कंप्यूटर में वो सब देखती गयी वो हैरान हो गयी और वो गहरी सोच में पद गयी. तभी आदित्य कॉफ़ी और कुछ स्नैक्स बना कर ले आया और उन्हें टेबल पर रख दिया और अपनी माँ की सोचों में घिरा देखकर उसने पूछा 'अब आपने वो सब देख लिया या अभी कुछ और देखना है'
संध्या 'ये सब क्या है'
आदित्य 'ये मेरे खवाबों और ख्यालों की दुनिया है'
संध्या 'तुम किसी लड़की से प्यार करते हो'
आदित्य 'आपको क्या लगता है'
संध्या 'तुम अगर किसी लड़की से प्यार करते हो तू मुझे बता देते, काम से काम मैं ये सब देखकर दुखी तू न होती'
आदित्य 'आपको ये सब देखने से दुःख क्योँ हो रहा है'
संध्या 'जब तुम किसी ओर लड़की से प्यार करोगे तू मुझे क्या अच्छा लगेगा'
उसकी बात सुनकर आदित्य हंसने लगा और फिर उसने कहा 'आप दो दो लोगों से प्यार कर सकती हो और मुझे किसी एक से भी प्यार करने का हक़ नहीं है'
संध्या 'ठीक है तुम्हे जिससे प्यार करना है करो, लेकिन मुझे अब अकेला छोड़ दो, मैं अब अपने कमरे में जा रही हूँ'
आदित्य 'आपको जाना है तू चली जाना, लेकिन आप कॉफ़ी तू ले लीजिये'
संध्या 'मुझे कोई कॉफ़ी नहीं पीनी है'
आदित्य 'आप सिर्फ इस बात से मुझसे खफा हैं की मैं किसी लड़की से प्यार करता हूँ. अब आप सोचो की मैंने आपसे क्या गलत पूछ लिया था की आप शादीशुदा हैं, आपके दो जवान बच्चे हैं, फिर भी आप को हक़ है किसी से भी प्यार करने का, लेकिन आपने कभी सोचा है की इस प्यार का अंजाम क्या होगा. आप अपने साथ साथ उस शख्स की भी जिंदगी ख़राब कर देंगी जिससे आप प्यार करेंगी'
संध्या 'लेकिन तुम्हे इससे तकलीफ क्योँ हो रही है, तुम्हे क्या की मैं सुखी हूँ या दुखी'
आदित्य 'मुझे तू इससे बहुत फरक पड़ता है, लेकिन आप क्या सोचती हैं वो मुझे पता नहीं लग रहा'
संध्या 'तुम्हे मेरी दुखी होने से दुःख क्योँ हो रहा है'
आदित्य 'क्योँ नहीं होना चाहिए'
संध्या 'क्योँ तुम तू मेरे से प्यार करते नहीं'
आदित्य 'मतलब की जो किसी को प्यार करता है सिर्फ और सिर्फ उससे hi दुखी होने का हक़ है और किसी को नहीं'
संध्या 'दूसरा क्योँ दुखी होगा'
आदित्य 'चलो एक मिनट के लिए आपकी बात को मान लेता हूँ तू अब आप ये बताओ, जैसे आप के कहे अनुसार मैं आपसे प्यार नहीं करता तू फिर आप इस बात को लेकर दुखी क्योँ हैं'
संध्या 'मुझे नहीं पता'
आदित्य 'जिस तरह आपको नहीं पता की आप दुखी क्योँ हैं तू उसी तरह से आप के दुखी होने से मैं भी दुखी होता हूँ. मैंने आपसे इसलिए पूछा था की आप किसको चुनोगी', क्योँकि जंहा तक मैं समझता हूँ आप उस वक़्त जो भी फैसला लोगी, उससे आपको दुःख hi होगा और मैं नहीं चाहता की आपको कोई दुःख हो '
संध्या 'अब तू उस बात का सवाल hi नहीं रहा क्योँकि अब तुम तू मुझसे प्यार करते नहीं हो तू चुनने का मौका hi नहीं मिलेगा'
आदित्य 'अगर मौका मिला तू किसको चुनोगी''
संध्या 'पहले तुम बताओ की तुम मुझसे प्यार करोगे?'
आदित्य 'ऐसा करते हैं कफ पीते हैं, फिर इस बारे में बात करेंगे'
संध्या पहले तू मन करने लगी, फिर पता नहीं क्या सोच कर मान गयी और दोनों आमने सामने बैठकर कफ पीते हुए बातें कर रहे थे .
संध्या 'वो लड़की कौन है'
आदित्य 'आप क्या करोगी उसस्के बारे में जानकार'
संध्या 'मुझे उसके बारे में जानना है'
आदित्य 'क्योँ आपको ईर्ष्या हो रही है'
संध्या 'मुझे क्योँ ईर्ष्या होने लगी'
आदित्य 'फिर आप क्या करोगी जानकार'
संध्या 'मुझे दोस्त तू मानते हो न'
आदित्य 'हाँ बिलकुल मंटा हु'
संध्या 'दोस्त को भी नहीं बताओगे'
आदित्य 'दोस्त अब ईर्षालु हो गया है, इसलिए मैं सोच रहा हूँ की न hi बताऊँ'
संध्या 'प्लीज, कुछ बताओ न'
आदित्य 'क्या जानना चाहती हैं'
संध्या 'क्या तुम्हारे साथ पद्धति है'
आदित्य 'इससे जानकर आप क्या करोगी'
संध्या 'क्या वो बहुत सुन्दर है'
आदित्य 'वो तो आपने इतने सरे फोटोज और वीडियोस देख लिए हैं, फिर भी आप पूछ रही हैं'
संध्या 'किसी भी फोटो या वीडियो में उसकी शाखाल दिखाई hi नहीं दे रही थी'
आदित्य 'उससे क्या फरक पड़ता है, खूबसूरती का तू पता लग hi जाता है'
संध्या 'उसका नाम hi बता दो"
आदित्य 'नाम जानकर क्या करेंगी'
संध्या 'वो तुम से प्यार करती हैं'
आदित्य 'क्योँ आप उससे प्रतिस्पर्धा करना चाहती हैं'
संध्या 'तुम तू उसके बारे में कुछ बताना hi नहीं चाहते'
आदित्य 'बता तू रहा हूँ की वो मेरे खवाबों की शहजादी है और वो मेरे दिल में बस्ती है'
संध्या 'चलो अच्छा है, तुम अपने खवाबों की शहजादी के साथ रहो और मैं चली अपने कमरे में'
आदित्य 'क्या करोगी अपने कमरे में जाकर, अपने प्यार की नाकामी पर आंसू बहाने के लिए'
संध्या 'तुम्हे इससे क्या?'
आदित्य 'अगर आप चाहो तू यही रुको और अगर आप बुरा ना मने तू मैं उसके साथ साथ आपसे भी प्यार कर सकता हूँ'
संध्या 'तुम उसके साथ hi प्यार करो और मेरा पीछा छोडो'
आदित्य 'मैं कान्हा आपके पीछे पड़ा हूँ, ये तू आप hi कह रही थी की आप मुझसे प्यार करती हैं. मैंने तू इसलिए कहा था, बाकि आपकी मर्जी'
संध्या 'तुम अगर उस लड़की से प्यार करोगे तू फिर मुझसे प्यार कैसे करोगे'
आदित्य 'जब आप दो लोगों से एक साथ प्यार कर सकती हो तू मैं क्योँ नहीं'
संध्या 'मेरे लिए तू वक़्त मिलेगा hi नहीं'
आदित्य 'ये बात तू आप पर भी लागु होती हैं'
संध्या 'जब तुम दूसरी लड़की से प्यार करोगे तू तुम उसको अधिक महत्व डोज और मुझे काम'
आदित्य 'आपको ऐसा लगता है की मैं ऐसा कुछ करूँगा'
संध्या 'वो इसलिए की दूसरी लड़की जवान है और मेरी उम्र कुछ जयादा है, इसलिए'
आदित्य 'पहली बात तू प्यार में उम्र का कोई महत्व नहीं होता और दूसरी बात आप की उम्र का पता hi नहीं चलता, आप तू जवानो से भी जवान हैं और सबसे बड़ी बात अभी तू मैंने आपको बताया hi नहीं है की उस लड़की की उम्र क्या है. ये भी हो सकता है की उसकी उम्र आप के बराबर हो या आपसे जयादा हो'
आदित्य की बात सुनकर संध्या का मुंह खुला का खुला रह गया और पूछने लगी 'क्या मुझसे भी बड़ी उम्र की औरत के साथ प्यार करते हो'
आदित्य 'मैंने तू सिर्फ आपकी बात का जवाब दिया है, उसकी उम्र तू मैंने बताई hi नहीं'
संध्या 'तुम उससे प्यार करना छोड़ नहीं सकते'
आदित्य 'सिर्फ इसलिए की मैं आपसे प्यार करूँ'
संध्या 'चाहती तू मैं कुछ कुछ ऐसा hi हूँ'
आदित्य 'मतलब की मैं सिर्फ और सिर्फ आपसे प्यार करूँ'
संध्या 'हाँ'
आदित्य 'क्या आप ऐसा कर सकती हैं, अगर आपका जवाब हाँ है, तू मैं भी न चाहते हुए ऐसा कर लूंगा'
संध्या 'मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझी'
आदित्य 'मतलब ये की अगर आप चाहती हैं की मैं सिर्फ और सिर्फ आपसे प्यार करूँ तू फिर आप भी अब के बाद पापा से किसी भी तरह का कोई सम्भन्ध नहीं रखेंगी'
संध्या 'ऐसा कैसे हो सकता है'
आदित्य 'अगर नहीं हो सकता तू फिर आप भी मुझसे ऐसी किसी तरह की उम्मीद न रखे'
संध्या 'मतलब अब तुम मुझे अकेला छोड़ डोज'
आदित्य अपनी कुर्सी से उठकर अपनी माँ की कुर्सी के पास जाकर उसके बांये कंधे पर हाथ रख कर कहने लगा 'मैंने आपको वादा किया है तू उससे मैं निभाउंगा और जिंदगी भर आपको अकेला नहीं छोडूंगा'
संध्या ने अपने बांये हाथ से आदित्य की बाजु को पकड़ कर अपनी आँखों को ऊपर उठाकर बहुत hi इल्तिजा वाले भाव से कहा 'मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए'
आदित्य ने अपनी माँ के हाथ को पकड़ कर अपने सामने खड़ा कर दिया और उसकी आँखों में झांकते हुए 'मैं आपको प्यार करने से मन कान्हा कर रहा हूँ'
संध्या 'मतलब तुम उस लड़की से प्यार करोगे और जो कुछ बच खींचा प्यार होगा, वो मुझे डोज'"
आदित्य ने उसकी बांये बाजु को पकडे पकडे अपनी ओर खींचते हुए उसको थोड़ा अपने नजदीक कर लिया और कहने लगा 'आपसे अगर मैं प्यार करूँगा तू दिल khol.kar करूँगा अन्यथ नहीं करूँगा'
संध्या थोड़ा ओर नजदीक आते हुए 'तुम जब अपना वक़्त उस लड़की को डोज तू फिर मुझे कैसे डोज'
आदित्य 'वक़्त की कोई कमी नहीं होगी, बल्कि आपको तू जो सुविधा है वो उस लड़की को कान्हा है, आप तू जब मर्जी मेरे साथ बैठकर वक़्त बिता सकती हैं'
संध्या 'मतलब तुम उस दूसरी लड़की से प्यार करोगे hi करोगे'
आदित्य अब उसको अपने आगोश में लेते हुए और उसके चेहरे को हाथ से पकड़ कर ऊपर करके उसकी आँखों में झांकते हुए 'मैं किस से प्यार कटा हूँ या नहीं, आप किस्से प्यार करती हैं या नहीं, इन सबसे हमें कोई मतलब नहीं होना चाहिए. हम दोनों एक दूसरे को प्यार करें ये महत्वपूर्ण है और हम दोनों apani.baat को ईमानदारी से पालन करें'
संध्या 'मुझे तुम्हारी शरत मंजूर हैं'
आदित्य 'शर्तो पर किया हुआ प्यार, मेरी नज़र में प्यार नहीं होता, इसलिए प्यार में कोई शर्त नहीं, हमें सिर्फ इतना ध्यान रखना है की दूसरे की भावना को ठेस न पंहुचे'
संध्या ने अपनी पलकों को झुकाते हुए 'हमारे प्यार की हद क्या होगी'
आदित्य 'प्यार को जैसा पहले भी कहा है शर्तो और हदों में नहीं बंधा जा सकता. अगर हम ऐसा करेंगे तू वो प्यार नहीं बल्कि समझौता होगा. हाँ हम जो भी करें एक दूसरे की भावनाओं की कदर करते हुए दोनों की सहमति से करें'
संध्या ने अपने बांये बाजु से आदित्य की पीठ को जकड लिया और सहलाते हुए 'मुझे सब मंजूर है, बस मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए'
आदित्य भी उसकी पीठ सहलाते हुए 'मैं हो सकता किसी ओर से भी प्यार करूँ, लेकिन आप नहीं पूछेंगी, हाँ ये भी वादा है की आपको प्यार करने में कोई कमी नहीं करूँगा' इतना कहकर उसने अपने होठों से उसके माथे को चुम लिया.