इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 10 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अपडेट - 77

मेगा अपडेट

अब तक...


इधर ये दोनों अपने में लगी हुई थी और काफी एक्ससिटेड थी वह पहुचने के लिए पर यहाँ हमारी नेहा खिड़की के साइड से बैठे हुए चलती ट्रैन से बाहर के रात के अँधेरे और चाँद की रौशनी से उजागर हो रहे नज़ारे को देख खोयी हुई किसी सोच में पड़ी थी, क्या उसका बड़ा भाई आएगा? यदि आएगा तोह वो कैसे फेस करे उससे? क्या कैच बदला होगा उसके बारे में इतने महीनो में? क्या वो अब भी वैसा hi है? यदि हां तोह सबके मुँह से उसकी तारीफ क्यों सुन्न ने को मिलती है? राहुल की असली पहचान क्या है?

अब आगे...

कुछ मीलो की दुरी तब करने के बाद आखिर कार ट्रैन लखनऊ पहुची, नेहा समेत बाकी सभी ने अपना अपना सामान कैर्री करके स्टेशन से बहार निकल टैक्सी ढूंढ़ना शुरू किया, और 2 टैक्सी मिलते hi सभी उसमे बैठ के तानिया के घर की और प्रश्तों कर दिए.

अब इस से पहले की ये सभी तानिया के घर पहुचे, आप लोगो को तानिया के घर के मेंबर्स से इंट्रोडस करवाना ज़रूरी है.

इंट्रोडक्शन

डॉ. मुकेश मिश्रा (आगे - 57) : जी हां! सही पढ़ा आपने. ये पेशे से डॉक्टर है, एक बोहत hi जाने माने डॉक्टर अपने शहर के. शहर के मशहूर हॉस्पिटल में काम करते है, पैसे से काफी संपन्न है. ये निशा के बड़े भाई है यानी की राहुल और नेहा के मां जी. इन्होने hi राहुल को तनीषा की डॉक्टरी की पढाई के लिए पैसे दिए थे और तनीषा की पढ़ाई पूरी करवाई थी. सज्जन पुरुष है, कोई पैसो का घमंड नहीं, और अपने बच्चो से बोहत प्रेम करते है.

ललिता मिश्रा (आगे - 53) : मुकेश जी की पत्नी. सुन्दर तोह है hi ये, क्युकी पहले से hi ब्यूटी पार्लर के काम में माहिर है. खुद का पार्लर भी खोला हुआ है, पर नौकर hi चलाते है पार्लर, खुद थोड़ा काम जाती है. पर make-up से लेकर हर्र एक चीज़ आती है इनसे. बच्चो से अत्यधिक प्रेम करती है. सभी के साथ नम्र व्यवहार रखती है.

रूचि मिश्रा (आगे - 27) : मुकेश और ललिता की बड़ी बेटी. पास के hi कॉलेज में प्रोफेसर है. दिखने में बेहद ख़ूबसूरत, नार्मल फिगर, गोरा रंग, लम्बे बाल, माँ और बाप दोनों पे गयी है ये. इनका व्यवहार कभी सख्त तोह कभी नरम रहता है. दिल की बोहत अच्छी है और अपने लोगो से बेहद प्यार करती है. इनकी hi शादी की तैयारी हो रही है घर में.

तानिया मिश्रा (आगे - 22) : मुकेश और ललिता की छोटी बेटी. बेहद ख़ूबसूरत, स्लिम फिगर, उभरे हुए बड़े बूब्स, कातिलाना आँखें, गुलाबी होंठ. कुल मिलाके ये पूरी बोम्ब्शेल है. इसको देखने के बाद एक अजीब सा नशा आता है, जैसे बिलकुल अपने पास बुला रही है. थोड़ी ज़िद्दी है, दोस्तों के लिए दोस्त और दुश्मनो के लिए कट्टर दुश्मन है. मनचाही हरकते करती है. बातो में भी बोहत आगे है, एकदम muh-fatt है. पर अंदर से बोहत hi सेंसिटिव और उतनी hi नरम है. बुरा जल्दी मानती है, हर्ट जल्दी होती है. पर दिल की बोहत अच्छी है. इसको तोह आप सभी जानते hi है अच्छे से अब और क्या बताना.

घर में एक और मेंबर है और वो है इनका एक छोटा भाई जो अभी दसवीं क्लास में है, उसका कहानी में कोई रोले नहीं है इसलिए उसको इन्क्लुडे नहीं किया गया है. तोह अब चलते है वापस से कहानी की तरफ...

टैक्सी अपनी नार्मल रफ़्तार से गुज़र रही थी और नेहा समेत बाकी सभी लखनऊ शहर की बिल्डिंग्स, मार्किट आदि में सभी की नज़रे व्यस्त हो गयी. कही कोई बड़ा सा मॉल दीखता तोह कही पार्क तोह कही fly-overs, तोह कही जाना माना हमारे भारत का ट्रैफिक. टैक्सी कब बताये हुए एड्रेस पर पहुँच गयी, किसी को समय का पता hi नहीं चला, सब नए शहर के नज़ारे में इतना खोए हुए जो थे सिवाए नेहा के.





नेहा और उसका परिवार तोह पहले आ hi चूका था इस शहर कई बार पर अब वो भी कई सालो बाद यहाँ आए है इसलिए बोहत कुछ बदल चूका था. पर अंशु वंशु और उनके परिवार के लिए ये सब कुछ नया था. पहली बार लखनऊ शहर में जो कदम रखा था. दोनों hi बड़ी उत्सुकता से बाहर के नज़ारे को देख रही थी.

टैक्सी रुकी और सभी को उतरना पड़ा, पैसे देने के बाद टैक्सी चली गयी और सभी सामान उठाते हुए आगे बढे, अभी इस वक़्त वो किसी सोसाइटी में थे और राजेश, निशा, नेहा आगे बढ़ते हुए एक घर की और प्रश्तों किये तोह उन्हें देख बाकी सब भी पीछे पीछे चल दिए.





एक घर था, घर नहीं बंगला कहना सही रहेगा क्युकी घर के हिसाब से वो काफी बड़ा था, एक ग्राउंड फ्लोर, एक फर्स्ट फ्लोर, एक सेकंड फ्लोर और फिर टेरेस. घर सजा हुआ था पर बाहर का गेट खुला हुआ था और कुछ लोग दिखाई दे रहे थे, राजेश आगे बढे और तभी सभी के कानो में एक आवाज़ पड़ी...

"अरे!! आइये आइये... किसी हो निशा!??? कैसे हो आप??"

कहते हुए मुकेश आगे आए और निशा को गले से लगा के निशा और राजेश से सवाल किया.

निशा : बस ठीक है भैया! तैयारी तोह बोहत ज़ोर शोर से चल रही है हां?

मुकेश : अब बिटिया की शादी है, कोई कमी कैसे होने दे सकते है? आइये आप सभी... पहले अच्छे से फ्रेश हो लीजिये, सामान में रखवाए देता हु.

राजेश : ठीक...

राजेश ने फिर मुकेश को अपने भैया से और उनकी फॅमिली से भी इंट्रोडस कराया, सारा इंट्रोडक्शन के बाद सभी फर्स्ट फ्लोर पर चले गए, और वह पे hi अपने बैग्स सभी ने रख दिए. घर में पहले से आलरेडी कई और लोग भी रुके हुए थे जो मुकेश के और भी रिलेटिव्स रहे होंगे. तोह कुल मिलाके नेहा और बाकी सभी के लिए बोहत से अननोन लोग भी थे जो घर में रुके हुए थे और बोहत से नोन लोग भी थे, जिनसे निशा और बाकी सभी ने बात चीत की शुरुआत करि.

गड्डो का इंतज़ाम किया गया था सोने के लिए, क्युकी घर में कई लोग थे, और सभी को सिंगल बीएड पे सुलाना तोह हो नहीं पाटा. इसलिए गड्डो का इंतज़ाम किया गया था. फ्रेश हो जाने के बाद निशा और राजेश सहित विनीता और रुपेश बात चीत में लग गए. अब रह गए तोह केवल नेहा और अंशु वंशु.

वंशु : छोटी, राहुल दिखाई नहीं दे रहा!?

अंशु : ी don't क्नोव दी! मय्बे वो शादी वाले दिन hi आए!?

वंशु : कॉल करके पूछ न कहा है

अंशु : मेने किया था अभी थोड़ी देरर पहले hi दी, बूत उन्होंने कॉल पिक नहीं किया, हो सकता है कही बिजी हो?

वंशु : ये कुटी भी न, बताना चाहिए न इसको की कब आ रहा है, आ भी रहा है या नहीं?

अंशु : it's okay दी! आ जाएंगे वो.

कुछ hi देरर बाद तानिया घर में आती है और नेहा और बाकी सभी को देख ख़ुशी से झूम उठती है और दौड़ते हुए उनसे गले मिलती है,

तानिया : कैसे हो आप सब?

अंशु : हम सब बढ़िया है दी, आप बताओ किसी हो? घर तोह आपका बोहत बड़ा है और काफी सुन्दर भी.

तानिया : थैंक्स! में भी अच्छी हु.

वंशु : वैसे तुम थी कहा? हमे यहाँ आए हुए 1 घंटा हो चूका है

तानिया : बस थोड़ा ज़रूरी सामान लेने गयी थी काम तोह करवाना hi पड़ेगा, शादी वाले घर में यही लगा रहता है...

सभी से मिल जल लेने के बाद जहा सभी बातो में अभी भी बिजी रहते है वही नेहा बालकनी में जाकर कड़ी हो जाती है और नीचे देखते हुए किसी खयालो में खो जाती है, होश तोह उससे जब आता है जब उससे पीछे से एकदम से तानिया की आवाज़ पड़ती है,

तानिया : नेहा?? क्या हुआ? यहाँ क्या कर रही हो?

नेहा : हँ??! नहीं... वो... वो में ऐसे hi बस देख रही थी बालकनी...

तानिया : कुछ तोह बात ज़रूर है. सभी लोग अंदर मौज मस्ती कर रहे है और तुम यहाँ पर कड़ी हो अकेले?

नेहा : नहीं दी... में तोह बस ऐसे hi...

तानिया : राहुल से रिलेटेड कुछ बात है क्या?

नेहा : *साइलेंट*

तानिया : ी कनेव आईटी!! देखो नेहा! बे हैप्पी okay? यहाँ आयी हो, तोह काम से काम अपने लिए मोमेंट्स क्रिएट करो, सभी से मिलो जुलो, बातें करो, नए दोस्त बनाओ, तुम्हे अच्छा लगेगा. ऐसे रहोगी तोह तुम्हारे आस पास के लोग भी एफेक्ट होएंगे और उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा.

नेहा : हम्म्म! दी!! थैंक्स! आगे से ऐसा नहीं होगा.

तानिया (स्माइल्स) : मेरी हेल्प की ज़रुरत हो तोह बिना झिजक के आ जाना मेरे पास.

कहते हुए वो चली जाती है और नेहा भी अंदर आकर सभी के साथ घुलने मिलने की कोशिश करने लगती है.

इंगेजमेंट पहले hi हो चुकी थी तोह अब बस बाकी रस्मे बाकी थी. आज की रस्म मेहँदी की रस्म थी, शाम होने का सभी इंतज़ार कर रहे थे. शाम होते hi मेहँदी की रस्म शुरू हुई,

लड़किया एक दूसरे को सुन्दर सुन्दर मेहँदी लगाने में बिजी हो गयी.

अंशु, वंशु और नेहा को भी वह पे आयी हु दूर की रिलेटिव्स में से कोई उन्हें मेहँदी लगाने लगी. रूचि दीदी के हाथो अथवा पेर्रो में भी मेहँदी लगाना शुरू कर दिया.





शाम के माहौल में नाचना गाना भी हुआ, जहा ट्रेडिशनल सांग्स से लेकर कुछ बॉलीवुड सांग्स भी गाये गए और महिलाये एवम लड़किया भी थिरकती हुई मौज मस्ती का आनंद उठाने लगी.

हमारी सभी लड़कियों ने भी मेहँदी लगवाई और खूब एन्जॉय किया और ऐसे hi ये दिन समाप्त हो गया.

अगले दिन संगीत कार्यक्रम रखा गया, ये तोह बना hi महिलाओ के लिए है तोह भला हमारी महिलाए और लड़किया कहा पीछे रहने वाली थी? सब ने अपनी अपनी कोरियोग्राफी स्टेज पर थिरकते हुए दिखाई, एन्जॉयमेंट हुआ सभी ने खूब एन्जॉय किया. नेहा भी अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगी थी और अब सभी चीज़ो को एन्जॉय कर रही थी.





निशा इस बात से काफी खुश थी की आखिर नेहा एन्जॉय कर रही है. पर उससे अभी एक चिंता थी और वो थी की राहुल कहा है? अभी तक जो नहीं आया था... फौरन कॉल लगाना hi बेहतर समझा निशा ने.

निशा : hello?

राहुल : हां माँ!

निशा : हां माँ के बच्चे!? किधर है तू? सबको टेंशन में डालके कहा घूम रहा है?

राहुल (मैं में) : अरे बाप रे!! माँ काफी गुस्से में लग रही है...

राहुल : प्यारी माँ! में शादी वाले दिन hi आऊंगा! आपको आपकी नज़रो के सामने दिख जाऊंगा okay!?

निशा (मुँह बनाते हुए) : हम्फ!! घर की शादी में भी दो दिन पहले नहीं आ सकता!?

राहुल : बिजी था माँ! बूत don't वोर्री! में शादी वाले दिन सुबह hi पहुँच जाऊंगा.

निशा : अच्छा ठीक है! अपना ख़याला रखना बेतु! ध्यान से सफर करना.

राहुल : जी माँ! और वह क्या चल रहा है?

निशा : बस अभी संगीत का कार्यक्रम ख़तम हुआ है, सभी थके हारे बैठे है. सोने hi जाने वाले है सब.

राहुल : ओह्ह! चलो बढ़िया है. आप सब सही से हो न?

निशा : हां बेतु! हम सब बढ़िया है. तेरे ताऊ जी और बाकी सब भी हमारे साथ आये हुए है.

राहुल : ओह्ह्ह! ठीक है माँ! अब में रखता हु, आप भी आराम कीजिये. शादी वाले दिन सुबह मिलता हु.

निशा : हम्म! Bye बेतु! ख़याल रखना!!

*कॉल एंड्स*

अगले दिन तिलक रस्म थी जिसमे घर के पुरुष एवम लड़के लोग लड़के वालो के घर गए और उनका तिलक किया और ये दिन भी ऐसे hi गुज़र गया. अगले दिन शादी थी, और सुबह हल्दी की रस्म होने वाली थी.

सुबह होते hi घर में चेहेल पहल की आवाज़ और लोगो की बातो की आवाज़ों से नेहा और अंशु वंशु की नींद खुल गयी. अभी सुबह के 7:30 हुए थे पर अभी से hi घर में चेहेल पहल बानी हुई थी. शादी का घर ऐसा hi होता है भाई साहब.

आँखें मीस्ते हुए अंशु वंशु फ्रेश होने गयी और बहार आके नाश्ता करने बैठी hi थी की बाहर कुछ शोर सा हुआ तोह दोनों उठ के बाहर गयी और दोनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था जब उन्होंने देखा की सामने राहुल है.

सौरभ के साथ राहुल टैक्सी से बाहर आया और टैक्सी वाले को पैसे दिया, आगे बढ़ते hi उससे दरवाज़े के सामने अंशु वंशु दिखाई दे गयी, जो एकदम से दौड़ते हुए उसके पास आयी और उस से जोरर से कूदते हुए लिपट गयी.





वंशु (प्यार से सीने में मुक्का मारते हुए) : किधर था तू कुटी? कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी में...

अंशु : केवल आप नहीं दी! हम सब भाई का इंतज़ार कर रहे थे.

राहुल (स्माइल्स) : किसी हो आप सब?

अंशु : बस आपके इंतज़ार में पागल हो रहे थे भाई! अब चलिए अंदर, सब बोहत खुश हो जाएंगे आपको देखने के बाद.

सौरभ : उम्!! ये सब कोण??

राहुल : ओह्ह हां! ये मेरी बहने है. वंशु दी और ये अंशु. और ये सौरभ है वंशु दी मेरा अच्छा फ्रेंड.

अंशु : hello!

वंशु : ही!!

सौरभ : hello...hello!!

जैसे hi राहुल अंदर आता है तोह जो जो लोग सो के उठ चुके थे उनकी नज़रे सीधे राहुल पर जाती है. अभी केवल कुछ लोग hi उठे थे, बाकी बोहत से लोग सो रहे थे अभी भी. कल के संगीत कार्यक्रम की थकान जो बची हुई थी.

नेहा वाशरूम में थी तोह उससे अभी बहार क्या हो रहा है कुछ नहीं पता था.

अंदर से मुकेश जैसे hi निकलते है राहुल को देख सरप्राइज होते है और फिर एकदम खुश होते हुए अपने गले से लगा लेते है...

मुकेश : आ गए तुम!!? कहा रह गए थे भाई इतने दिनों तक? बहिन की शादी में इतना लेट आओगे?

मुकेश का रवैया राहुल के प्रति शुरू से hi ऐसा रहा है, वो राहुल को अपने दोस्त जैसा मानते है. यही वजह थी की इनकी इतनी अच्छी बॉन्डिंग के कारण hi मुकेश ने राहुल को तनीषा के लिए पैसे दिए अथवा उससे पढ़ाया भी.

राहुल : मां जी! में चाह रहा था जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी औ पर आ hi नहीं सका. काम में लगा हुआ था, और फ्री होते hi यहाँ आया हु. आप कैसे है?

मुकेश : सब बढ़िया है बीटा! तुम सबसे पहले फटाफट से नाहा धो लो फ्रेश हो लो, और नाश्ता कर लो. ये सामान में रखवाए देता हु.

मुकेश नौकरो को बोलके राहुल और सौरभ का सामान ऊपर रखवाते है, अंशु वंशु नाश्ता लेकर एक जगह बैठ जाती है. सौरभ को लेकर राहुल ऊपर जैसे hi पोहचता है तोह एक कमरे का दरवाज़ा खुलता है और अंदर से निशा आ रही होती है, जैसे hi वो राहुल को देखती है तोह उसके परर वही जम्म जाते है कुछ सेकण्ड्स के लिए तोह. आँखों में हलके हलके आसुओ को लेकर वो फौरन दौड़ते हुए राहुल को अपने गले से लगा लेती है.





राहुल : माँ!!!

निशा : बेतु... केसा है तू? किधर था? खाना पीना सही से खा रहा है या नहीं? देखो तोह कितना दुबला हो गया है!?

कहते हुए निशा राहुल के पूरे मुँह पर चुम्बनों की बरसात कर देती है, 5 महीने बाद जो देख रही थी अपने बेटे को. हर्र माँ का दिल एक जैसा hi होता है. राहुल कितना भी मोटा क्यों न हो जाए पर क्युकी वो अपनी माँ की नज़रो से दूर था तोह माँ को लगा की दुबला हो गया है. यही तोह है प्यार.

सौरभ भी माँ बेटे के मिलान को देख कर उससे अपनी माँ की याद आ गयी और उसने समझदारी दिखाते हुए दोनों को कुछ कह के डिस्टर्ब नहीं किया. जब दोनों माँ बेटे का मिलाप हो गया तोह सौरभ ने भी आगे बढ़कर निशा के परर छुए और फिर निशा ने दोनों को फ्रेश होने के बाद नीचे आ जाने को कहा.

सौरभ : भाई पहले तू होल फ्रेश! में जबतक बैठ के फ़ोन चला रहा थोड़ी देरर! वाशरूम्स तोह बोहत दिख रहे है मुझे बूत इस फ्लोर पे दो hi वाशरूम है और दोनों में कोई आलरेडी पहले से घुसा हुआ है. तोह में तोह थोड़ी देरर से hi होऊंगा फ्रेश.

राहुल : वेल! जैसा तुझे सही लगे. पर ध्यान रहे ज़्यादा लेट नहीं करना.

सौरभ : ोकायययय! बॉस!!!

अभी राहुल वाशरूम की तरफ जाने hi वाला होता है की उससे पीछे से ललिता की आवाज़ पड़ती है...

ललिता : आ गया मेरा बच्चा!? कहा था तू इतने दिन?

कहते हुए वो राहुल को अपने सीने से लगा लेती है,

राहुल : ममी जी! किसी हो आप?

ललिता : चल चल! अब बात मत घुमा! किधर था तू? अपनी रूचि दीदी से बस इतना hi प्यार है? दो दिन पहले भी नहीं आ सका तू उसकी शादी में हां? बोल!?

राहुल : अब आपसे तोह में जीत नहीं सकता. इसलिए कान पकड़ के माफ़ी मांगता हु आपसे! माफ़ कर दीजिये ममी जी!

इधर ये दोनों बात कर रहे थे और अचानक hi वही पर वाशरूम का दूर खुला और नेहा बाहर से निकली, उसका चेहरा गीला था, हल्का हल्का पानी बालो पर भी लगा हुआ था, उसने जैसे hi वाशरूम का गेट बंद कर के पलट कर देखा तोह उसकी आँखें hi चौड़ी हो गयी.

सामने राहुल ममी से बात करते हुए खड़ा था. राहुल ने अभी नेहा को नहीं देखा था पर नेहा तोह आँखें फाड़े अपने सामने उससे देख रही थी. न जाने कितने विचार उसके मैं में तुरंत उमड़ने लगे. बिना कुछ कहे, बिना कुछ हरकत किये वो बस मूर्ति की तरह खड़े होकर राहुल को देखे जा रही थी. आँखें एकदम फैली हुई थी

अब जब वो ध्यान से देख रही थी तोह उसने गौर किया की राहुल पहले से भी काफी हैंडसम हो गया था, ये कोई और नहीं उसका सागा भाई था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे. नेहा खुद को इतने दिनों से प्रेपर कर रही थी की वो खुद कैसे रियेक्ट करेगी ये सब सामने आने पर. पर शायद वो प्रेपरेड़ नहीं थी. राहुल के चेहरे पर एक स्माइल थी, वो स्माइल जो घर में बिलकुल भी देखने को नहीं मिलती थी नेहा को.

वो देख रही थी की कैसे उसका भाई और भी चार्मिंग, और स्मार्ट दिखने लगा है. जैसे hi ललिता वापस गयी और राहुल ने पलट कर देखा तोह वो भी चौंक गया सामने नेहा को देख कर.

उसके सामने वही बहिन कड़ी हुई थी जो संसार में उससे सबसे ज़्यादा नफरत करती है, उसकी सगी बहिन नेहा. पहले से काफी ख़ूबसूरत हो चुकी थी, लम्बे बाल, अभी भी पहले की तरह गुलाबी गाल और होंठ, चंचल आँखें, चेहरा और थोड़े बाल अभी गीले होने के कारण और भी ख़ूबसूरत लग रही थी.

दोनों राहुल और नेहा एक दूसरे को आँखें फाड़े घूरे जा रहे थे, दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी इन् 5 महीनो में. नेहा को बार बार वो दृश्य याद आने लगा जब मोनिका ने उसकी कल्लोर पकड़ के बताया था की राहुल ने hi उससे बचाया है. और आज वही राहुल उसकी नज़रो के सामने था. वही राहुल जिसके बारे में अभी कुछ दिन पहले hi रौशनी ma'am ने बताया था की संजय सर के कारण उसकी जॉब हटी थी और नेहा ने मज़ाक उड़ाया था. आज वही राहुल उसके सामने था.

पर ये बात भी नहीं झुटलाई जा सकती की ये वही राहुल है जो अपनी बहिन से नफरत करता है, उससे मारना चाहता है और न जाने क्या क्या कर चूका है नेहा के साथ. नेहा के मैं में ये दोनों तरफ के पहलु ध्यान में थे. और शायद इसलिए वो समझ नहीं पा रही थी की कैसे रियेक्ट करे.

आगे कदम बढ़ाते हुए राहुल नेहा की तरफ आगे बढ़ता है, तोह नेहा की धड़कन तेज़्ज़ हो जाती है, उसके सास लेने से उसके ूरोज़ ऊपर नीचे होने लगते है.





जब ेदकुम बगल में राहुल आके खड़ा हो जाता है तोह नेहा की तोह जैसे हालत hi खराब हो जाती है, ऐसा नहीं था की वो बोहत डर गयी थी, ये कुछ अलग hi फीलिंग थी. उसके उभार ऊपर नीचे बड़ी hi तेज़ी से हो रहे थे, सासें एकदम तेज़्ज़. राहुल ने आगे बढ़ते हुए उसके कान में कहा...

"कैसी हो??"

आवाज़ में ना ज़्यादा एक्ससिटेमेंट था, न hi कोई गुस्सा, न hi कोई ख़ुशी, न hi कोई गम पर उस एक सवाल से नेहा की रूह कांप गयी, राहुल के शरीर की महक, और उसकी गरम सास और वही पुरानी आवाज़ जब नेहा के कान में पड़ी तोह उसके रोंगटे खड़े हो गए, बदन पूरा सिहर उठा. सारे चेहरे का पानी उड़द चूका था. गहरी सास लेते हुए उसने खुद को कण्ट्रोल किया और दौड़ते हुए वह से एकदम से भाग के चली गयी.

राहुल ने भी गहरी सास लेते हुए खुद के चेहरे पे अपना हाथ दे मारा...

राहुल (मैं में) : क्यों किया मेने ये? ी shouldn't हैवे दोने तहत... रेस्त्रां राहुल! रेस्त्रां योरसेल्फ!

सोचते हुए वो वाशरूम में चला गया...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 78



अब तक...

गहरी सास लेते हुए उसने खुद को कण्ट्रोल किया और दौड़ते हुए वह से एकदम से भाग के चली गयी.

राहुल ने भी गहरी सास लेते हुए खुद के चेहरे पे अपना हाथ दे मारा...

राहुल (मैं में) : क्यों किया मेने ये? ी shouldn't हैवे दोने तहत... रेस्त्रां राहुल! रेस्त्रां योरसेल्फ!

सोचते हुए वो वाशरूम में चला गया...

अब आगे...

शावर ों होते hi राहुल के सर पर पानी की बौछार पड़ती है और वो खुद को दोष दे रहा होता है की आखिर उसने ये सब क्यों किया? क्या ज़रुरत थी उससे आगे बढ़कर कुछ कहने की? नेहा आज सलवार सूट में थी, न जाने उससे देख कर राहुल को क्या हुआ की उसके मुँह से अपने आप hi निकल गया. शामे हाल कुछ नेहा का था.

दौड़ते हुए सीधे नेहा ऊपर टेरेस पर गयी, लम्बी लम्बी उखड़ी हुई सासें ले रही थी, उसका सीना ऊपर नीचे हो रहा था. अपने जज़्बातो को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. खुद को कलम करने की कोशिश कर रही थी.

नेहा : (क्या सोच के आया था मेरे पास? अब क्या चाहिए उससे मुझसे? अभी भी पीछा नहीं चोर्रा क्या उसने मेरा? फिर क्या सोच के मुझसे पूछा उसने की किसी हो? मेरा मज़ाक उड़ाने के लिए? सोच रहा होगा की में पिघल जाउंगी? पुरानी बातें सब भूल जाउंगी? हां! उसने मज़ाक hi तोह किया मेरे साथ? वर्ण वो क्यों ऐसा पूछने लगा मेरे से? दमन आईटी!!! में भी बताउंगी इससे...)

जब नहाने धोने के बाद राहुल वाशरूम से बाहर निकला तोह निकलते साथ hi उससे सामने रूम से बाहर आती तानिया दिखाई दी. तानिया ने भी जैसे hi राहुल को देखा तोह उसके परर वही थम गए, आखें फेल गयी और एक तक राहुल को देखने लगी वो. बदले में राहुल ने स्माइल किया और कुछ कहना चाहा पर उस से पहले hi तानिया रूम के अंदर वापस गयी और जोरर से गेट बंद कर दिया.

राहुल : (ये... अब इससे क्या हो गया? मुझे देखते hi चली गयी, नाराज़ है क्या मुझ से?)

अंदर दरवाज़े को बंद करते hi तानिया दरवाज़े से hi सात कर कड़ी थी और उसकी सासें बोहत तेज़्ज़ चल रही थी.

तानिया : (राहुल?? कब आया? Omg!!! मुझे बोहत शर्म आ रही है, मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही उससे फेस करने की... अब कैसे जाऊ? पर जाना तोह पड़ेगा)

इनका मिलान हो उस से पहले hi निशा ऊपर आयी और सभी को हल्दी की रस्म के लिए नीचे चलने का कह की चली गयी. राहुल भी रेडी हुआ, कपडे पहन के उसके फौरन बाद hi सौरभ भी रेडी होक नीचे पहुँच गया.

तानिया अभी भी राहुल से मिलने से कटरा रही थी, उससे काफी शर्म आ रही थी. जब सभी लोग नीचे इखट्टे हो गए तोह महुअल थोड़ा अलग था.

इसलिए क्युकी बोहत सी लड़किया जो वह आयी हुई थी वो राहुल और सौरभ को पहली बार देख रही थी, और खुशूर पुसुर होना शुरू हो गया.

"यार ये कोण है?"

"ये बाँदा तोह नहीं था कल तक?"

"काफी हॉट है यार! रूचि दीदी का भाई है क्या?"

कुछ ऐसी hi बातें लड़कियों में होने लगी, राहुल और सौरभ इन् सब से अनजान फोटोज क्लिक करने में और सभी से बातो में लगे हुए थे. राहुल के पास भी कई लड़किया आयी और उसके गालो पर हल्दी जान बूझकर लगा के चली गयी.

ये देखते hi जैसे वंशु को रहा नहीं गया और वो आके सीधे राहुल के बगल से कड़ी हो के चिपक गयी. साथ hi साथ अंशु भी आ गयी.

नेहा निशा के साथ hi थी, रूचि दीदी को हल्दी लगायी जा रही थी क्युकी आज रात में शादी थी और ये रस्म शादी के जोड़ो की खूबसूरती बढ़ाने के लिए hi तोह बनायी गयी है.

हल्दी के लेप के बाद जो निखार आता है चेहरे पे उसकी कुछ बात hi अलग है. मस्ती करते हुए सभी एक दूसरे को हल्दी लगा रहे थे. तानिया के गालो पर भी हल्दी लगी हुई थी और वो रूचि दीदी के साथ hi उनके बगल में बैठी हुई थी.

शायद अभी भी शर्मा रही थी राहुल के करीब जाने में. बीच बीच में वो अपनी नज़रे चुरा के राहुल को देखती और फिर शर्मा के नज़रे नीचे कर लेती. यही हाल कुछ नेहा का भी था जो नज़रे चुरा चुरा के राहुल को देख रही थी पर उससे शर्म नहीं बल्कि कन्फूसिओं था.

जैसे hi हल्दी की रस्म ख़तम हुई, वैसे hi तानिया एकदम से राहुल के पास आयी, उसका हाथ पकड़ी और उससे ऊपर अपने कमरे में ले गयी, रूम को अंदर से लॉक किया और फिर पीठ दिखा के कड़ी हो गयी...

राहुल : ोये! छिपकली? तुझे हो क्या गया है? सुबह मुझे देखते hi तू एकदम भाग गयी और बात भी नहीं करि?

राहुल के इतना कहते hi तानिया पलटी और दौड़ के उसकी बाहो में आ के सिमट गयी.

*कुछ देरर बाद*

तानिया (ब्लश) : मुझे शर्म आ रही थी

राहुल : हाय्यएईए!!!

तानिया (ब्लश) : मत कर न प्लीज...

राहुल : चल अच्छा अब चोरर भी! नीचे सब इंतज़ार कर रहे होंगे...

तानिया (ब्लश) : चपडगंजु! तू भूला तोह नहीं न? तुझे याद है न?

राहुल : क्या? कोनसी बात?

तानिया : मुझसे बार बार मत बुलवा चपडगंजु! एक फटका मार दूंगी नहीं तोह...

राहुल : पर कोनसी बात?

तानिया : वही पार्क वाली...

तानिया को डर था की कही उसके प्रपोजल वाली बात राहुल भूल न जाए और उससे लिघ्टलय न लेले, इसलिए वो इस बात पर बोहत जोरर दे रही थी.

राहुल : ओह्ह्ह! एक बार याद तोह दिलाना ज़रा...

राहुल भी जान बुझ के उससे सताने के लिए भूलने का नाटक कर रहा था,

तानिया (ब्लश) : यही ki...I ...ी लव यू!!

राहुल (स्माइल्स) : ी लव यू तू! ये तोह तू भी जानती है. पर यार मेरी छिपकली कितनी बदल गयी है बताओ. जो मुझसे लड़ती थी, आज वो मेरे से ऐसे चिपकी हुई है बताओ

तानिया (ब्लश) : सब तुम्हारी वजह से... तूने hi मुझे ऐसा बनाया... हम्फ!!

धीरे धीरे तानिया अपने पंजो पर उठती है और अपनी नज़रे ऊपर कर राहुल के होंठो को देखने लगती है. राहुल कोई हरकत नहीं कर रहा था, वो बस स्थिर खड़ा हुआ था. और थोड़ी hi देरर बाद तानिया के होंठ राहुल के होंठो से मिल गए.

इतने महीनो बाद तानिया को वापस से वो एहसास मिला जिसके लिए वो कितने समय से बेचैन थी. राहुल के घर से जाने से पहले उसने राहुल के साथ किस्सेस की थी पर सिर्फ थोड़ी सी hi. अब चुकी राहुल यहाँ आ गया था तोह तानिया तोह पूरा हिसाब चुकता करने वाली थी.

एक अलग hi ख़ुशी हो रही थी उससे, अलग hi आनंद आ रहा था उससे, वो हलके हलके वाली किश कब पैशनेट हो गयी दोनों को hi पता नहीं चला. थोड़ी देरर के बाद दोनों अलग हुए, तानिया के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी. एक संतुष्टि वाली मुस्कान.

खर्र! उसके बाद तोह समय यही व्यस्तता में गुज़र गया. राहुल ने बाद में रूचि दीदी से भी मुलाक़ात की और थोड़ी बोहत बातें भी की अकेले में. सौरभ अलग hi सातवे आस्मां में था क्युकी उससे एक लड़की लाइन जो दे रही थी, इसलिए वो यहाँ आके काफी खुश था और श्रुति नाम की लड़की के साथ अपनी सेटिंग जमाने में लगा हुआ था.

सारा दिन और शाम का समय तैयार होने में और बातो में hi निकल गया, अब सभी को वह जाना था जहा शादी होने वाली थी. उसके लिए कार्स तोह थी hi. सभी सजने सवारने में लगे हुए थे.

राहुल ने सूट डाला हुआ था और ये कहने की तोह बात hi नहीं की वो कितना जांच रहा था उसमे. सौरभ ने भी सूट hi डाला हुआ था.

लड़कियों की साइड किसी ने लेहंगा सलवार तोह किसी ने साड़ी पहनी हुई थी. कुल मिलाके सभी बोहत hi आकर्षक लग रहे थे.

समय बीता और शाम ढली, अँधेरा हुआ और सभी कार में बैठ के शादी वाली जगह पर पहुचे.

काफी पैसा खर्च किया था दोनों hi तरफ से, राहुल ने जो पेमेंट मिली थी उससे ख़ुशी को प्रोटेक्ट करने के लिए, उसमे से एक बोहत hi अच्छी सी रिंग रूचि दीदी को पहले hi गिफ्ट करदी थी.

शादी का कार्यक्रम आगे बढ़ा, जैसा की हर्र एक टिपिकल भारतीय हिन्दुओ की शादी में होता है, बिलकुल शामे वैसा hi माहौल था. जब राहुल सारे काम से फ्री हुआ तोह रिफ्रेशमेंट के लिए उसने एक कोल्ड ड्रिंक ली और साइड में खड़ा हो गया.

वो सभी पे नज़रे दाल रहा था पर उसका ध्यान कही और hi था.

दूर से नेहा देख रही थी की राहुल खड़ा हुआ कुछ सोच रहा है, और उससे पता नहीं क्या हुआ की वो आगे बढ़ते हुए राहुल के बगल से जाके कड़ी हो गयी. राहुल ने अभी तक नोटिस नहीं किया था की उसके बगल में नेहा आके कड़ी हुई है. उससे कोल्ड ड्रिंक में कुछ मज़ा नहीं आया इसलिए उसने गिलास वापस से साइड की टेबल में रख दिया. तभी उसकी इस हरकत का नेहा ने जवाब दिया,

नेहा : यहाँ शराब नहीं मिलेगी...

नेहा की आवाज़ सुनते hi राहुल ने उससे मुद में देखा. थोड़ा तोह वो भी सुरप्रीसेड था क्युकी नेहा ने आगे बढ़के कन्वर्सेशन चालू किया. कुछ चेंज था ये पुरानी नेहा से यदि कपड़े किया जाए तोह.

राहुल : शराब में पीटा भी नहीं...

नेहा : हर्र शराबी यही बोलता है...

राहुल (स्माइल्स) : हर्र शराब नहीं पीने वाला भी यही बोलता है

नेहा : पर दुनिया यकीन नहीं मानेगी... दुनिया की नज़रो में जो शराब नहीं पीटा वो भी शराबी है.

राहुल : (ये इससे क्या हो गया एकदम से? कही इसने तोह शराब नहीं पी राखी जो मुझसे आके बातें करने लगी?)

राहुल : दुनिया वालो से मुझे कोई लेना देना नहीं है.

सच बात तोह ये थी की नेहा ने कोई शराब नहीं पी राखी थी बल्कि वो पूरे होश में थी. वो यहाँ इसलिए आयी थी क्युकी वो सुबह का बदला लेना चाहती थी. वो भी बदले में राहुल से कुछ तीखी बातें करना चाहती थी, जैसे सुबह राहुल ने उसका मज़ाक बनाने के लिए कहा था. नेहा की नज़रो में वो मज़ाक hi था. और वो बड़ी हिम्मत करके अभी आयी हुई थी,

नेहा : दुनिया में परिवार नाम की चीज़ भी होती है...

राहुल : परिवार वालो के लिए मेरे दिल में स्पेशल जगह है.

नेहा : और कोण कोण है परिवार में? वो स्पेशल जगह पाने के लिए?

राहुल : माँ एंड डैड

नेहा को पता था उसका नाम नहीं लेगा राहुल, क्युकी वो उस से नफरत जो करता है, पर फिर भी कही न कही डायरेक्ट राहुल के मुँह से ये सुनके उसके दिल में थोड़ी चोट पहुची.

नेहा : और??

राहुल : और बाकी सब... वंशु दी, अंशु, ताऊ जी, तै जी, मां जी... सभी लोग

नेहा : और???

राहुल : और बस. और हां!! तनीषा दी, ऋचा, निकिता.

नेहा : ऋचा दी और निकिता तोह परिवार में आते hi नहीं.

राहुल (स्माइल्स) : जल्द hi आ जाएंगे

नेहा अपनी बॉहे सिकोड़ के राहुल को देखती है, वो राहुल का मतलब भली भाति समझ रही थी पर सबके नाम लेने के बाद भी राहुल ने नेहा का नाम नहीं लिया और ये बात अंदर hi अंदर नेहा को खाए जा रही थी भले hi वो इस फीलिंग से वंचित थी पर उसके दिल में यही बात थी.

नेहा : मेरा भी शामे है.

राहुल : ओह्ह्ह!!! गुड!!

दोनों तरफ से तीखे शब्द फेके जा रहे थे पर हार मान ने को कोई तैयार hi नहीं था.

नेहा : पर एक शक्श और था...

राहुल : ???

नेहा : पर अब उस शक्श का कोई महत्व नहीं है मेरे जीवन में

राहुल : ये तोह अच्छी बात है न

नेहा : हां! बेहद अच्छी बात!

तभी राहुल को सौरभ आवाज़ देता है तोह राहुल उसकी तरफ चला जाता है, और यहाँ नेहा की आँखों हलकी सी नाम हो जाती है और वो जान बुझ के मुस्कुराते हुए शादी के जोड़ो के पास चली जाती है.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

ी क्नोव अपडेट छोटा है पर इसको यहाँ पे hi ख़तम करना ज़रूरी था क्युकी इसके आगे का part लम्बा है और में उससे इन्क्लुडे करता तोह अपडेट हद्द से ज़्यादा लम्बा हो जाता.

इसलिए नेक्स्ट अपडेट में वो पूरा सन दिखा दूंगा.

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 79



अब तक...

नेहा : पर एक शक्श और था...

राहुल : ???

नेहा : पर अब उस शक्श का कोई महत्व नहीं है मेरे जीवन में

राहुल : ये तोह अच्छी बात है न

नेहा : हां! बेहद अच्छी बात!

तभी राहुल को सौरभ आवाज़ देता है तोह राहुल उसकी तरफ चला जाता है, और यहाँ नेहा की आँखों हलकी सी नाम हो जाती है और वो जान बुझ के मुस्कुराते हुए शादी के जोड़ो के पास चली जाती है.

अब आगे...

शादी का कार्यक्रम आगे बढ़ा और धीरे धीरे मौज मस्ती के साथ, साड़ी रस्मो के साथ संपन्न हुआ और अब सुबह होने को आ गयी थी. विदाई की तैयारी हो रही थी. राहुल और बाकी सबको न सोने के कारण थकान महसूस हो रही थी. नेहा भी साड़ी नाईट जाएगी हुई थी तोह उसकी भी आँखों में नींद चढ़ी हुई थी और काफी सुस्ती थी.

जब विदाई का समय हुआ तोह हर्र लड़की की तरह रूचि भी रो पड़ी और अपने माँ बाप से लिपट कर सिसकने लगी. रूचि के हस्बैंड का नाम विजय था और राहुल ने शादी के फोटोशूट के दौरान विजय से अच्छी खासी बात कर ली थी जिस से राहुल को पता चल गया था की विजय एक अच्छा व्यक्ति है और रूचि दीदी का ख़याल बखूबी रखेगा. सभी से गले मिलने के बाद जब रूचि राहुल के पास आयी तोह उससे एक बार देखि, उसके गालो पर अपना मेहँदी से रचा हुआ हाथ सहलाया और फिर रट हुए उस से कास कर लिपट गयी.

राहुल भी रूचि दीदी को कास के हुग करते हुए, उन्हें रोने दिया.

राहुल : दीदी! भूल तोह नहीं जाओगी न?

रूचि (रट हुए) : पागल है क्या रे? फिरसे ऐसा कहा न तोह दो चमाट लगाउंगी...

रूचि की इस बात पे राहुल भी धीरे से मुस्कुराता है और एक बार फिरसे गले से लगा लेता है. बदले में रूचि भी उसके गालो और माथे को अपने होंठो से गीला करके जाने लगती है

तानिया भी काफी रोई, जिस बड़ी बहिन के साथ वो पाली बढ़ी, वो अब से उसके साथ नहीं रहेगी. उसका अपना जीवन है अब, अपना संसार और एक दिन तानिया को भी यही करना होगा. मैं में यही सोचते हुए तानिया की नज़रे राहुल पर टिक गयी.

सब कुछ समाप्त हो जाने के बाद, रूचि की विदाई हो जाने के बाद जब सभी घर को लौटे तोह सभी बोहत थके हारे थे. बड़े तोह फिर भी थोड़ी देरर और जागते रहे पर बच्चो और बाकियो को सोने को कह दिया गया ताकि आराम कर सके.

राहुल भी सौरभ के साथ अपने रूम में आ गया, बोहत से लोग जो घर में रुके हुए थे वो विदाई के बाद hi अपना बोरा बिस्तर समेत अपने अपने घर की और निकल चले. पर कई लोग अभी भी घर में ठहरे हुए थे और कुछ दिन और रुकने वाले थे.

जब आराम कर के सभी लोग दुबारा से तंदरुस्त फील करने लगे तोह सभी ने गैप शाप करते हुए समय बिताया, राहुल निशा के साथ काफी टाइम स्पेंड किया, वही अंशु वंशु भी साथ hi साथ राहुल के आगे पीछे घूमती रही. सौरभ श्रुति के साथ अपनी सेटिंग आगे बढ़ाने में लगा रहा. नेहा राहुल को चोरर सबसे बात करती. ऐसे hi रात का समय हुआ और अब बारी थी सोने की...

अंशु : भाई!! तुम आज हमारे साथ सो जाओ न!?

वंशु (ब्लश) : हां! कुटी! प्लीज!?

राहुल : उम्म्म...

तानिया : सॉरी! बूत राहुल आज मेरे साथ सोएगा. मुझे कुछ बातें करनी है उस से, आप लोग उसके साथ कल सो जाना. वैसे भी राहुल अभी 2 दिन रुकेगा यहाँ.

अंशु : पर??

तानिया : बोलते क्यों नहीं चपडगंजु!?

राहुल : उम्म्म!! O...okay!!

अंशु (मुँह फुलाते हुए) : गलत बात भाई!

वंशु : छोटी कोई बात नहीं! कुटी हमारे साथ कल ृक्क जाएगा. क्यों न हम कुटी को और कुछ दिन रोक ले.

अंशु : हां! दी! अब कही आपने सही बात! अस ा कंपनसेशन... भाई!! अब आपको यहाँ कुछ दिन और रुकना पड़ेगा और हमारे साथ सोना पड़ेगा.

राहुल : अच्छा!? और आपके माँ डैड घर नहीं जा रहे?

अंशु : मो डैड कल लौट जाएंगे घर पर हम चाचा चची और नेहा के साथ यही रुकेंगे और उनके साथ hi लौटेंगे हीहीही

राहुल : ओह्ह्ह्ह!!

जब डिनर के बाद जब सभी अपने अपने रूम्स और बिस्तर में जाने लगे तोह तानिया आयी और राहुल का हाथ पकड़ के उससे अपने रूम में ले गयी, और अंदर से रूम लॉक कर दिया.

राहुल : हां! तोह बोलो! कुछ इम्पोर्टेन्ट बात?

तानिया : कुछ नहीं!! ऐसे hi... पहले तुम ये पियो!

साइड में रखे स्टूल पर एक दूध का गिलास था जो तानिया ने उठा कर राहुल को दिया

राहुल : दूध??

तानिया (ब्लश) : हम्म!!

राहुल चुटिया नहीं था, रात को एक लड़की दूध का गिलास दे रही है पीने को और तोह और वो भी अकेले रूम में, इसका मतलब क्या हुआ?

पर राहुल ने बिना कोई सवाल किये दूध का गिलास ले लिया और धीरे धीरे तानिया को देखते देखते उसने दूध ख़तम किया.

वो जैसे आगे होने वाले सन का इंतज़ार कर रहा था. देखना चाह रहा था की तानिया क्या करती है!?

थोड़ी hi देरर बाद तानिया ने उससे बीएड पर लिटाया और तानिया उसके ऊपर लेत गयी और उसकी आँखों में देखने लगी. तानिया की आँखों में अभी बेशुमार प्यार था जो राहुल भी देख पा रहा था.

तानिया (ब्लश) : चपडगंजु!! ी लव यू! ी लव यू सो मच.

राहुल (ब्लश) : लव यू तू!

तानिया : अब मुझसे और इंतज़ार नहीं होता चपडगंजु!!

राहुल : ????

तानिया आगे बढ़ के राहुल के होंठ अपने मुँह में भर लेती है और पूरे आनंद के साथ उन् होंठो को मुँह में भरके चूसने लगती है. इस मीठी किश में राहुल भी अपने होश खो बैठा. तानिया जैसी लड़की आपको किश करे तोह भला कोण मर्द पीछे हट सकता है? राहुल का लुंड फौरन hi अपने रौद्र रूप में आ गया था और झटके मारने लगा था.

तानिया के गुलाबी और रसीले होंठ इतने मनमोहक थे की बस उन्हें चूसने का hi मैं कर रहा था. दोनों की किश धीरे धीरे इतनी पैशनेट हो गयी की उन्हें सास लेने में प्रॉब्लम होने लगी पर इसके बावजूद दोनों में से कोई नहीं रुका और जोरर जोरर से एक दूसरे की जीभ का मेल मिलाप करते हुए थूक को एक्सचेंज कर जम्म के चुम रहे थे. तानिया तोह एकदम मदहोश हो चुकी थी. उसने ये फैसला तभी कर लिया था जब उससे रूचि दीदी की शादी की डेट का पता चला था.

उसने उसी वक़्त ये फैसला कर लिया था की वो शादी के अगले दिन hi राहुल के साथ अपनी सुहाग रात मनाएगी ताकि वो उनके रिलेशनशिप को एक नए अंजाम पे पहुचा सके जहा से पीछे हटना नामुमकिन हो जाए, यही चाहती थी तानिया.

उधर उसकी बड़ी बहिन रूचि दीदी की सुहाग रात मैं रही होगी और इधर वो अपने चाहने वाले के साथ सुहाग रात मनाएगी. तानिया ये बात सोचते hi इतनी एक्ससिटेड थी की घर की दोनों बेतिया एक hi रात में सुहाग रात मनाएंगी और उस से भी ज़्यादा उससे ये बात एक्साइट कर रही थी की राहुल उसका भाई है.

दोनों एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे बरसो से बिछड़े हुए है. तानिया से अब ज़्यादा रहा नहीं गया और उसने फौरन राहुल की शर्ट उससे किश करते हुए उतार दी और फिर किश तोड़ के उसने अपना टॉप निकाल के फेक दिया. अब वो केवल एक वाइट ब्रा में थी.

तानिया के दूध अपनी निगाहो के जस्ट सामने देखते hi राहुल का लुंड एक और झटका मार दिया. ये वही तानिया थी जो उस से हमेशा लड़ती झगड़ती रहती थी. राहुल ये बात जानता था की तानिया का फिगर सभी में सबसे उत्तम का था. और जब उसके उरोज सामने देखे तोह राहुल तोह जैसे हिल hi गया. थूक गटकते हुए उसने एक बार तानिया के उरोजों को देखा उसके बाद तानिया के चेहरे को.

तानिया की आखो में उसके लिए असीम प्यार दिखाई दे रहा था. एक नशा था उन् आँखों में. समुन्दर के भाति प्यार और एक अजीब सी तालाब थी जो राहुल को बोहत आकर्षित कर रही थी.

तानिया को भी राहुल का चेहरा देख असीम आनंद की अनुभूति हो रही थी, फाइनली वो पल आ hi गया जिसका उससे सबसे ज़्यादा इंतज़ार था. वो अपने चाहने वाले के साथ पल गुज़ार रही थी. अभी उससे राहुल पे इतना प्यार आ रहा था की उसने फौरन राहुल का सर पकड़ा और सीधे अपने उरोजों में घुसेड़ दिया. इतनी कस के उसने राहुल के चेहरे को अपने स्तनों में भीचा की राहुल को सास लेना मुश्किल हो रहा था.

राहुल का चेहरा उस सुन्दर से क्लीवेज में धस्स चूका था और उसके सर के इर्द गिर्द तानिया के हाथ जोरर से बंधे हुए थे जैसे मानो तानिया किसी कीमती चीज़ को खोने से बचा रही हो.

तानिया अपना प्यार जताते हुए उसके बालो एवम माथे पर अनगिनत चुम्मियो की बरसात करने लगी और पुचकारते हुए राहुल का सर अपने क्लीवेज में घुसाने लगी.

इस प्रहार से तोह जैसे राहुल का लुंड विकराल रूप में आ गया और टेंट फाड़ने को तैयार था, उसके ऊपर बैठी तानिया को आलरेडी महसूस हो गया था राहुल का लुंड और वो शर्मा के अपनी कमर मटकाते हुए उससे और जोश दिलाने लगी.

राहुल से स्किन तो स्किन बदन मिलाने पर तानिया को एक अलग hi एहसास हो रहा था, उत्तेजना और आनंद में उसकी आँखें बंद होने लगी थी. राहुल की बॉडी और ठोस शरीर उससे इतना जोश दिला रहा था की वो हर्र जगह अपने हाथ से उससे सेहला रही थी और हर्र जगह उससे चूमती, चाटती. शामे हाल राहुल का था, तानिया का जिस्म उससे पागल कर रहा था, उसकी पतली कमर, खरबूज जैसे बड़े सुडोल ब्रा में क़ैद गोर गोर दूध और तानिया का कातिलाना चेहरा और नशीली आँखें सब कुछ उससे मदहोश करने पर मजबूर कर दिया.

होंठ चूमते चूसते राहुल ने दूध को फाइनली अपने गिरफ्त में लिया और अपने हाथो से उन्हें दबोचा और उसके बाद जो उससे जोश चढ़ा है तोह तब तोह मानो जैसे राहुल किसी जन्नत में आ गया हो ऐसा फील होने लगा उससे. धीरे धीरे राहुल की पकड़ ताकतवर हो गयी और वो जोरर जोरर से उन्हें भींचने लगा बिलकुल वैसे जैसे आता गूंधते वक़्त किया जाता है.

सिकियो की आवाज़ शुरू हो गयी और तानिया हर्र के प्रहार पर बहकने लगी.

तानिया : aaahhhh...aahhhhhh....sssss...aaahhh

Aaaaaaaaaahhhhmmmmmm....yessssss....

बॉब्बीययययय.....

राहुल : चपडगंजु से सीधा बेबी!?

तानिया : जब सिर्फ में और तुम रहेंगे अकेले तोह बेबी...

मुस्कुराते हुए राहुल ने ब्रा भी हटा दी और अब सामने थे नंगे खुले हुए गोर गोर दूध, पिंक निप्पल्स के साथ. राहुल से रहा नहीं गया और उसने सीधा अपना मुँह खोला और निप्पल पे दे मारा और मुँह में भर कर उससे पागलो की तरह चूसने लगा जैसे उसमे से दूध निकाल कर hi रहेगा.

तानिया : aaahhmmmmmmmmmm...ssssssss... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ rahulllll.....babyyyyyyyy....tumm....tum soch...bhi nahi...sakte....ki...ki... मेने इस pal...ka....aaaahhhmmmm...kitna इंतज़ार किया hai....rahullll.....ohhhhh my...g*d.... Yessss..aaaaaaaahhhhhhhh....ummmmmmmmmm

सिसकी लेते लेते उसके गाल लाल हो चुके थे और राहुल के भी क्युकी उसकसला चेहरा उन् स्तनों में जो घुसा हुआ था. राहुल ने तानिया को अपने नीचे लिटाया और जमके उसके ऊपर चढ़ के दूध की चुसाई शुरू कर दिया.

निप्पल पे अपनी जीभ फिराता, उससे छेड़ता, काटता, चुम्मी देता, मुँह में भरता, और सब कुछ करता जिस से बेचारी तानिया पागल सी होने लगी. ऐसा एहसास उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था. राहुल बीच बीच में उसके ऊपर चढ़ के उसकी गर्दन तोह कभी होंठ, कभी गाल, कभी गाला, कभी दूध, सबका स्वाद चख रहा था.

तभी उसने एक बार फिरसे पूछ लिया, क्युकी अभी वो इस पॉइंट पर थे जहा से वापस जाय जा सकता था पर यदि इस से आगे बढे तोह वापस नहीं जाय सकता था.

राहुल : तानिया! अरे यू सूरे!?

राहुल के इस सवाल से तानिया बिना कुछ कहे ृक्क कर उससे देखने लगी और फिर बोली,

तानिया : दो यू लव में लिखे ी दो?

राहुल : ी लव यू!

तानिया : बिलकुल वैसे hi जैसे में प्यार करती हु? एक लवर की तरह?

राहुल : यस! ी दो!

तानिया (स्माइल्स) : तोह बस फिर अब देररि मत करो राहुल! मुझे अपना बना लो बस. में और कुछ नहीं चाहती... में नहीं चाहती मेरी शादी किसी और से होये. ी लव यू और मुझे सिर्फ इतना पता है की प्यार में सब जायज़ है.

राहुल : तानिया...

तानिया : तोह क्या हुआ यदि हम भाई बहिन है! यदि हम सेज भाई बहिन भी होते राहुल, तोह भी में पीछे नहीं हटती और मेरी फीलिंग्स तुम्हारे लिए हरगिज़ नहीं बदलती.

राहुल (भावुक होते हुए) : तानिया...

तानिया (नम्म आँखों से) : नाउ मेक में योर्स राहुल. आओ और मुझे भोगो और हमेशा हमेशा के लिए अपना बना लो. ी don't केयर अबाउट अन्य समाज एंड आल. में सिर्फ तुम्हारे साथ रहना चाहती हु और आज में ये खुल के बोल रही हु. में सिर्फ तुम्हारी हु और किसी और के साथ कभी शादी नहीं करुँगी, ी लव यू, ओनली यू!! प्लीज! मेक में योर्स!!

भावुकता में राहुल आगे बढ़ के जोरर से तानिया को पकड़ के उसके होंठ चूमने लगता है और बदले में तानिया भी जोरर से किश देते हुए रिस्पांस करती है.

अगले hi पल राहुल तानिया का पयजामा उतार देता है और साथ hi साथ पंतय भी उतार देता है. अपनी बहिन तानिया को नंगा बीएड पर लेता देख कर राहुल के मैं में अंदर hi अंदर लड्डू फुट रहे थे.

तानिया शर्माते हुए अपने हाथो से अपना चेहरा धक् लेती है पर छूट को उसने नहीं ढाका. कोमल, मखमल सी गोरी चिट्टी और क्लीन शवेद छूट देख के राहुल का जोश अलग hi लेवल पे था. आगे बढ़ के उसने पहले तानिया के पेट पर किश किया जिस से तानिया की आह निकल गयी. उसके बाद उसकी नाभि में जीभ दाल कर तानिया को फिरसे मदहोश किया और फिर अगले हमले से तोह तानिया की जोरर से एक ाःह निकल गयी.

राहुल ने अपना मुँह सीधा तानिया की छूट पर दे मारा और उससे जंगली जानवर की तरह चूसने चाटने लगा. जीभ को छूट के थोड़ा अंदर भी करता जितना जाती और फिर छूट के दाने को मुँह में भर के उससे चबाता, चूसता और काटता.

तानिया पागलो की तरह सिसकिया ले रही थी और मदहोशी में खो चुकी थी पूरी तरह. राहुल ने छूट पर जैसे धावा बोल दिया था, हर्र हमला तानिया को अलग चरण पर ले जा रहा था.

कुछ देरर की चुसाई के बाद hi तानिया आलरेडी 2 बार बुरी तरह जहर गयी थी. उसने फौरन राहुल का लोअर उतारा और साथ hi साथ अंडरवियर. जैसे hi अंडरवियर को तानिया ने हटाया, एक मुस्सल सी गरम रोड उसके चेहरे पर आ कर जोरर से लगी.

तानिया आखें फाड़े बस राहुल के लुंड को hi देख रही थी. देख रही थी की लुंड कितना बड़ा था. एक मोटा, लम्बा और चमड़े से भरपूर लुंड जिसपर ऊपर से नस भी दिखाई दे रही थी और उसके ऊपर की टोपी इतनी गुलाबी थी की तानिया ये सब देखते hi सेहम गयी.

तानिया ने राहुल को देखा और फिर लुंड को, राहुल समझ गया था की तानिया डर गयी है इसलिए उसने तानिया को कंधे से पकड़ते हुए उससे आस्वाशन दिया. ये पहली बार था जब तानिया किसी का लुंड लाइव देख रही थी अपनी आँखों के सामने.

तानिया ने पोर्न देखि हुई थी और उससे पता था की छूट में डालने से पहले लड़किया लुंड को अपने मुँह में लेकर उससे गीला करती है, उससे चूसती है, चाटती है और वो उसी स्टेप के लिए खुद को तैयार कर रही थी.

तानिया ने बिना कोई झिजक के आगे बढ़ते हुए अपना मुँह खोला और गुलाबी टोपे को पहले प्यार से चूमा, उसकी इस हरकत से राहुल की सिसकी निकला गयी.

फिर तानिया ने अपना मुँह और खोला और सीधा जितना हो सकता था उतना लुंड अपने मुँह के अंदर भर लिया. तानिया को लुंड का स्वाद कुछ समझ नहीं आया पर वो बिलकुल भी पीछे नहीं हटना चाहती थी, आखिर राहुल ने भी तोह उसकी छूट को चूसा था तोह भला वो कैसे पीछे हट सकती है? राहुल ने बिना कोई भाव दिखाए पूरे मैं के साथ उसकी पेशाब वाली जगह पर मुँह लगाया तोह भला तानिया उसके लिए बदले में शामे चीज़ नहीं कर सकती?

वो भी दिखाएगी की वो कितना प्यार करती है राहुल से, यही सोचते हुए तानिया जोरर जोरर से राहुल के लुंड को अंदर बहार मुँह में करते हुए थूक लगाते हुए चूसने लगी. लुंड थूक से गीला हो चूका था पूरा, तानिया पूरा लुंड मुँह में ले भी नहीं पा रही थी पर जितना हो पा रहा था अपनी पूरी कोशिश कर रही थी.

राहुल से अब और रहा नहीं गया और उसने सीधे तानिया को बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगें फैलाते हुए छूट के दर्शन किया पहले उसके बाद अपना लुंड छूट पर रगड़ने लगा. तानिया को पता था अब दर्द होएगा.

राहुल : don't वोर्री! शुरू में बस दर्द होएगा तानिया बाद में अच्छा लगेगा

तानिया : बेबी! ी क्नोव! यू जस्ट दो आईटी! दर्द तोह होना hi है. दर्द में भी अलग hi मज़ा है. तुम बेरहमी से करो मेरे साथ. मुझे भुलाए न भूले ये रात.

उसकी इस बात से राहुल का लुंड झटका मार दिया और राहुल ने सीधे लुंड छूट पर टिकाया, एडजस्ट किया और लगा कर एक करारा शॉट दिया.

राहुल को पता था आवाज़ आएगी इसलिए उसने तानिया मुँह के अंदर कपडा रखने को कह दिया था और तानिया ने वैसा hi किया.

एक शॉट में hi अआधा लुंड छूट की दिवार को चीरता हुआ अंदर घुस गया और इसके साथ hi तानिया की आँखें फटी की फटी रह गयी, उसकी कमर अकड़ गयी, और आँखों से ासु निकल पड़े. कपडा फसा होने के कारण उसकी आवाज़ एक हम्म्म्म में डाब के रह गयी...

तानिया की हालत hi खराब हो गयी. वो रट हुए राहुल को देखे जा रही थी. राहुल को पता था उसका दर्द इसलिए उसने तानिया को हुग किया और थोड़ी देरर वही ृक्क गया.

मुँह से कपडा निकाल कर उसने तानिया को बेतहाशा चूमा और उसका दर्द काम होने दिया फिर जब तानिया को लगा की उसका दर्द काम हो गया है तभी राहुल ने एक ज़ोरदार हमला और किया और सारा का सारा लुंड तानिया की छूट के अंदर पेल दिया. इस हमले से तानिया की पीठ फिरसे अकड़ गयी पर बेचारी चींख नहीं पायी क्युकी उसका मुँह तोह राहुल के मुँह में क़ैद था.

करीब 15 मिनट बाद ऐसे hi लुंड को छूट में दाल कर राहुल ने जब कोई हरकत नहीं की और सिर्फ किस्सेस करि तोह तानिया बोहत हद्द तक कलम हुई और धीरे धीरे अपनी कमर हिलाना स्टार्ट कर दी, इशारा मिलते hi राहुल ने फिर धीरे धीरे आगे पीछे होने स्टार्ट कर दिया और धीरे धीरे गति भद्दा दी...

अब कमरे में केवल फस्छ फस्छ और दोनों की सिसकियों की आवाज़ें आ रही थी...

तानिया : ाः ओह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्हह्ह आआह्ह्ह्ह एससससस babbbyyy...aise hiiii...aaaahhhh ज़ोरररर seee...uhhhhmmmmmm.... में गईइइइइइइइ

तानिया तीसरी बार जहर चुकी थी, ऐसे ओर्गास्म से उसकी आँखें hi पलट गयी. पर राहुल अभी अपनी मंज़िल पर नहीं आया था. जोरर जोरर से धक्के पेलता हुआ राहुल धुआँधार पारी खेल रहा था. बीएड चररर चररर की आवाज़ करते हुए हिल रहा था और लुंड के अंतुले छूट के मुँह से टकराते हुए फैट फैट की आवाज़ कर रहे थे, छूट अंदर गीले होने के कारण फच्च फच्च की आवाज़ कर रही थी.

जब राहुल झरने के करीब आया तोह उसने इशारे में तानिया से पूछा की पानी कहा गिराना है और उसके जवाब में तानिया ने दोनों टांगें राहुल की कमर पर कास दी...

कुछ hi देरर बाद राहुल इतनी जोरर से झरा और इतनी देरर तक झाड़ा की एक बार फिर तानिया की आँखें पलट गयी और राहुल वही उसके ऊपर hi हफ्ते हुए लेत गया और दोनों कुछ hi देरर में नींद की वादियों में चले गए.

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आज के लिए इतना hi गाइस!!
 
अपडेट - 80



अब तक...

कुछ hi देरर बाद राहुल इतनी जोरर से झरा और इतनी देरर तक झाड़ा की एक बार फिर तानिया की आँखें पलट गयी और राहुल वही उसके ऊपर hi हफ्ते हुए लेत गया और दोनों कुछ hi देरर में नींद की वादियों में चले गए.

अब आगे...

सुबह जब राहुल की नींद खुली तोह उससे अपने नीचे कुछ नरम नरम सा एहसास हुआ और माथे पर भी नरम और एक गीला सा एहसास उससे हुआ. जब उसने अपनी आँखें खोल के देखा तोह पाया की तानिया पूरी नग्न उसके नीचे लेती हुई थी और उसके माथे को चूम रही थी.

हलकी लाली उसके चेहरे पर बिखर गयी और उसने फौरन उठते hi अपने कपडे ढूंढ़ते हुए अपनी शर्ट पहनी. तानिया मुस्कुराते हुए बड़े hi प्यार से राहुल को देख रही थी और उसकी इस हरकत पर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

राहुल ने कपडे पहन ने के बाद तानिया के भी कपडे उससे उठा के दिए, तानिया कल की नाईट के बाद से काफी बोल्ड हो गयी थी, उससे नंगे होकर राहुल के सामने बैठने पर एक अलग hi नशा सा चढ़ रहा था. वो पहले की तरह उतना नहीं झिजक रही थी अब.

राहुल (ब्लश) : तानिया कपडे पहन लो

तानिया : उस से पहले मुझे कुछ पूछना है.

राहुल : क्या?

तानिया : यू लव में राइट?

राहुल : ऑफ़ कोर्स!!

तानिया : लिखे ा लवर राइट?

राहुल : हम्म्म हम्म्म्म!!

राहुल के मानते hi एक चौड़ी सी मुस्कराहट तानिया के होंठो में बिखर जाती है.

वो राहुल के हाथो से कपडे लेती है और उसकी आँखों में आँखें डालके पहन ने लगती है.

राहुल बेचारा शर्म के मारे आँख hi नहीं मिला पा रहा था. पहला कारण था तानिया की खूबसूरती. उसका वस्त्रहीन जिस्म इतना मनमोहक था की राहुल का मैं अभी उससे पटक के छोड़ने का कर रहा था. दूसरा कारण था तानिया उसकी कजिन बहिन थी और राहुल ने उसके साथ सेक्स किया और तोह और अपना पानी भी उसके अंदर hi गिरा दिया. क्या अब वो पहले की तरह भाई बहिन रह पाएंगे? या नहीं? वैसे तोह अंशु और वंशु के साथ भी वो ये कर चूका है पर अंशु और वंशु अभी भी उससे लवर के साथ साथ कौसिन्स की फीलिंग्स देती है.

तानिया : यही सोच रहे हो की अब हमारा रिलेशन क्या रहेगा?

तानिया के एकदम से ये प्रश्न उजागर करते hi राहुल थोड़ा चौंक जाता है और उससे देखने लगता है और धीरे से सर हां में हिला देता है.

तानिया को एक बार फिरसे राहुल पे बड़ा hi प्यार आता है. कितना भोला लग रहा था अभी उसका भाई. एक साल बड़े होने के नाते आज पहली बार तानिया को इस बात पर अच्छा लग रहा था की वो राहुल से एक साल बड़ी है और अपने छोटे भाई को दुविधा में देख वो उससे एक बड़ी बहिन की तरह समझाएगी, ये बात उससे बड़ा hi प्रफुल्लित कर रही थी.

तानिया : ज़्यादा मत सोच चपडगंजु! में सीधा क्लियर कट तुझे समझाती हु.

राहुल भी अपने कान खोल के सुन्न ने के लिए रेडी हो गया की आखिर तानिया का फाइनल डिसिशन क्या है?

तानिया उसके पास आयी, उसके ऊपर बैठी, उसका चेहरा अपने हाथो में ली और फिर बोली,

तानिया : अब से हम लवर्स है. मुझे सिर्फ तुम चाहिए. मुझे कोई परवाह नहीं है की हम कौसिन्स है. मेने तुम से प्यार किया, तुमने मुझसे बस उस से ज़्यादा मुझे कुछ नहीं सुन्न न. ी ओनली नीड यू!! भाड़ में जाए समाज और लोगो की सोच. मुझे सिर्फ तुम चाहिए.

राहुल : और... और घरवालों का क्या? क्या कहोगी उनसे?

तानिया : कह दूंगी की मुझे शादी नहीं करना और तुम तोह हो न? तुम अपना बिज़नेस जब बढ़ा लोगे तोह मुझे अपने पास बुला लेना. में फिर हमेशा के लिए वही तुम्हारे साथ रहूंगी. हम शादी कर लेंगे, हमारे बच्चे होंगे...

तानिया : तुम?? तुम शादी तोह करोगे न मुझसे?

राहुल को इसका जवाब अभी अंशु और वंशु भी पूछती तोह उससे नहीं पता था इसका जवाब.

क्युकी उसने तोह ऋचा और तनीषा को वादा दिया हुआ था शादी का. भले hi ऋचा और तनीषा तानिया की शादी के लिए मान जाए पर क्या तानिया राहुल को किसी और के साथ देख कर राज़ी हो सकती है? जवाब था नहीं! इतना राहुल को पता था. तानिया वंशु की तरह hi पोस्सेस्सिवे थी राहुल के लिए पर वंशु की तरह सीढ़ी नहीं थी. वंशु जहा समझाने बुझाने पर मान गयी पर तानिया का कुछ नहीं कह सकते थे.

तानिया वैसे hi बड़ी गुस्से वाली थी. उससे समझाना बोहत मुश्किल था. अब राहुल को आभास हो गया था की वो बोहत बड़ी दुविधा में फस्स चूका है. एक तरफ खायी है तोह दूसरे तरफ कुआ. जाए तोह जाए कहा?

इस से पहले की राहुल जवाब देता, दरवाज़े की खत खत ने दोनों को होश में लाया, जब राहुल ने खून से सनी बेडशीट देखि तोह जल्दी से हड़बड़ा के उसने बेडशीट उठायी और चेंज की और तानिया को गेट खोलने बोलै.

गेट खोलते hi देखा तोह बाहर अंशु और वंशु कड़ी हुई थी.

तानिया : आप दोनों?

अंशु : हेहेहे! Hello... चलिए ब्रेकफास्ट के लिए...

तानिया : उह्ह्ह हआ!

तानिया थोड़ा लड़खड़ाते हुए चल रही थी तोह अंशु की आँखों में एकदम से चमक आ गयी ये देखते हुए, उसने रात में भी दबे पाँव आकर जासूसी करने की सोची थी और उससे कुछ आवाज़ें सुनाई दी थी और अब ये तानिया का लड़खड़ा के चलना, एक hi बात को इशारा कर रहा था की तानिया और राहुल के बीच सेक्स हुआ है.

उससे अंदाजा होते hi उसने ऐसा कुछ बोल दिया जो शायद उससे नहीं बोलना चाहिए था,

अंशु (ख़ुशी से) : तानिया दीदी!? आपने भी भाई के साथ सेक्स कर लिया??

वो अभी खुश इतनी थी की उसने क्या बक दिया उससे होश hi नहीं था. ख़ुशी इस बात की थी की न केवल वंशु बल्कि अब साथ में तानिया भी शामिल हो गयी उसकी बहिन मंडल में और सभी राहुल की प्रेमिकाए है और सब साथ मिलकर रहेंगे, ये सोचते hi अंशु इतनी खुश हो गयी की उसने तानिया को लड़खड़ाते देखते hi ये सब बक दिया.

*सन्नाटा*

कुछ देरर तक तोह तानिया आँखें फाड़े अंशु को देखती रही, वही वंशु और राहुल भी एकदूसरे को और अंशु को देख रहे थे. राहुल ने तोह अपना हाथ सर पर दे मारा. अब तोह सिर्फ ऊपरवाला hi उससे बचा सकता था.

तानिया को समझने में देरर न लगी की अंशु की बात का मतलब क्या था?

आपने भी भाई के साथ सेक्स कर लिया? इसका मतलब क्या हुआ? मतलब अंशु भी राहुल के साथ सेक्स कर चुकी है??? और तोह और उसने ये सब वंशु के सामने कहा... इसका मतलब वंशु भी????

समझते hi उसकी आँख गुस्से से लाल हो गयी और उसने राहुल को हाथ से पकड़ के दरवाज़े तक लाया उससे गुस्से से देखा और पूछा,

तानिया : क्या ये सच है? तुम इसके पहले hi इनके साथ??

राहुल झूठ तोह बोल नहीं सकता था और उससे बोलना भी नहीं चाहिए, इसलिए उसने नीचे सर करके हां में हिला दिया...

*चटाक*

एक ज़ोरदार थप्पड़ सीधे राहुल के गालो पर पड़ा. पूरा गाल लाल हो गया राहुल का. राहुल ने कोई विरोध नहीं किया, उससे पता था गलती उसकी है और ये थप्पड़ उसी गलती का नतीजा था. तोह उसने बिना कुछ कहे सब कुछ एक्सेप्ट किया.

तानिया के ासु निकले और वो रट हुए राहुल की छाती पीटने लगी

तानिया : क्यों?? क्यों किया तुमने ऐसा?? बोलो..

राहुल : में तुम्हे बताने hi वाला था तानिया. गलती मेरी hi है. मुझे सब कुछ क्लियर कर देना था बूत मेने नहीं किया. मुझे तुम्हारी हर सजा मंज़ूर है.

तानिया राहुल से ये एक्सपेक्ट कर रही थी की वो ये कहेगा की सब कुछ झूठ है और वो सिर्फ तानिया का है. पर राहुल के ऐसा कहते hi तानिया का दिल और टूट गया और उसने राहुल को सीधे मुँह पे उसकी नज़रो से दूर जाने के लिए कह दिया.

तानिया : मुझसे दूर हो जाओ... मुझे अकेला चोरर दो. जस्ट गेट लॉस्ट.

अंशु : दीदी बात तोह सुनिए...

तानिया (चिल्लाके) : ी साइड गेट लॉस्ट!

ऊपर हो रही रूम में कुछ आवाज़ के कारण नीचे से निशा ने आवाज़ लगायी और सबको ब्रेकफास्ट के लिए बुलाया, निशा की आवाज़ सुन्न के सब होश में आए.

वंशु : तानिया देखो! पहले बात सुनो...

तानिया : ी don't वांट तो हेअर एनीथिंग. आप जाइये बस.

तानिया ने पलट ते hi तीनो के मुँह पे दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने कमरे में चली गयी. बीएड पर गिरते hi वो जोरर जोरर से रोने लगी. हार्ट ब्रेक! आज उससे पता चला की हार्ट ब्रेक क्या होता है. केसा लगता है हर्ट होने पर!?

तानिया का दिल पूरी तरह से टूट चूका था. उससे पता था राहुल का कुछ चक्कर है ऋचा के साथ पर उसने ज़्यादा सीरियसली नहीं लिया था उसको और वो यही सोचती आ रही थी की सभी बहनो में वो एक है जो अपने भाई से प्यार करती है और उसके साथ सेक्स भी कर चुकी है. इस बात से राहुल कितना एक्ससिटेड होगा और उससे खूब प्यार देगा और वो राहुल के साथ हमेशा अपनी ज़िन्दगी बिताएगी पर हुआ क्या?

जिस राहुल पर उसने भरोसा किया, अपनी विर्जिनिटी तक उससे दे दी वो राहुल तोह पहले hi अपनी दो बहनो के साथ सेक्स कर चूका था.

चहहीइ!!! सबसे पहला ध्यान तानिया को यही आया की राहुल अपनी बहनो के साथ सेक्स कैसे कर सकता है? पर फिर उससे ये भी एहसास हुआ की आखिर वो भी तोह उसकी बहिन hi है!? पर जब उसने राहुल को इतना प्यार दिया तोह ज़रुरत क्या थी राहुल को अंशु और वंशु के पास जाकर सेक्स करने की? अरे राहुल कहता उस से की उससे सेक्स करना है, कोण सा वो मन कर देती? वो तोह ख़ुशी ख़ुशी राज़ी हो जाती. यही बातें तानिया को बोहत हर्ट कर रही थी इस वक़्त. शी वास् कम्प्लीटली हार्ट ब्रोकन.

उससे इस बात से उतना दुःख नहीं था की राहुल ने अंशु और वंशु के साथ सेक्स किया, उससे इस बात से ज़्यादा दुःख था की राहुल ने पहले उसके साथ सेक्स नहीं किया. वो यही सोच रही थी की सभी बहनो में वही सबसे ज़्यादा क्लोज है राहुल के पर राहुल ने उसको गलत साबित कर दिया. जितना वो सोच रही थी इन् सब के बारे में उससे उतनी hi रुलाई फुट रही थी.

बाहर वंशु अंशु को चिलाने लगी,

वंशु : छोटी तेरा दिमाग तोह ठीक है न? क्या बोल दिया तूने ये? सब कुछ तानिया के सामने रख दिया. अब उससे पता है की हम दोनों कुटी के साथ सेक्स करते है! क्या सोच रही होगी वह?

अंशु : पर दी वो भी तोह भाई के साथ कर चुकी है न?

वंशु (गुस्से में) : छोटी एक तोह तू गलती करि ऊपर से ज़बान लड़ा रही है!?

जब अंशु ने राहुल को देखा की वो अपना सर पकडे खड़ा है और काफी चिंतित है तोह उससे और बुरा लगने लगा.

अंशु : भाई! आप चिंता मत करो. मेने सब बिगाड़ा है न तोह में hi सब ठीक करुँगी. में hi तानिया दीदी को मानोगी और देखना आप वो मान जाएगी. I'm सो सॉरी भाई! मेने बिना सोचे समझे कुछ भी बोल दिया, I'm सॉरी दी! मेने आपसे बदतमीज़ी से बात की...

वंशु (पिघलते हुए) : पर सॉरी बोलने से सब कुछ पहले की तरह तोह नहीं हो जाएगा न

अंशु : पहले की तरह तोह नहीं बूत में वादा करती हु की पहले से भी अच्छा हो जाएगा.

एक अजीब सी चमक उसकी आँखों में थी और मैं में वो सोच रही थी, "अब प्लान के लिए एक और शिकार मिल गया हहै! तानिया दीदी को में अपनी टीम में शामिल करके रहूंगी, तभी सब खुश रह पाएंगे"

राहुल हां में सर हिला के नीचे चला जाता है वंशु के साथ और इधर अंशु तानिया का दूर नॉक करते हुए अंदर आने की गुहार लगाने लगती है.

पर तानिया दूर नहीं खोलती, बोहत गहरा सदमा लगा था उससे, बोहत ज़्यादा hi उदास थी.

काफी देरर तक जब खड़े रह कर अंशु लगातार दूर नॉक करती रही तब कही हार माँके तानिया ने दूर ओपन किया, उसकी आँखें पूरी लाल थी, आसुओ से पूरा चेहरा सना हुआ था.

तानिया (रट हुए) : अंशु प्लीज यहाँ से...

इस से पहले की तानिया बोल पाती अंशु अंदर आयी गेट को अंदर से लॉक किया और तानिया का हाथ पकड़ के उससे बीएड पर बिठा दी.

अंशु : में चली जाउंगी दी, पर उस से पहले मेरी बात सुन लीजिये...

*कुछ देरर बाद*

दिन का समय था सभी अपने अपने कमरे में आराम फरमाने निकल चले और राहुल सुबह की hi बात पर जोरर दाल कर सोच रहा था की आखिर क्या होगा? वो तानिया के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार था. तानिया को रोटा देख उसका दिल भी रो रहा था. पर वो सॉरी कह कर कुछ सही नहीं कर पाटा. इस वक़्त राहुल टेंशन में था. करे तोह क्या करे? तभी उसके रूम में दूर को किसी ने नॉक किया.

जैसे hi रूम खोला तोह सामने तानिया थी, अंदर आते hi उसने दूर बंद किया और बीएड पर बैठ गयी.

राहुल वही खड़ा उससे स्तबध सा देख रहा था.

राहुल : तानिया??

तानिया : मेने तुम्हे माफ़ कर दिया है!

उसके इतना कहते hi राहुल का एक झटका सा लगा, सुबह तोह इतना रो रही थी, अंशु ने कोण सी जड़ी बूटी पीला दी इससे?? आखिर कुछ hi देरर बाद तानिया इतनी आसानी से कैसे माफ़ कर सकती है उससे? पर वो बोहत खुश था, उससे क्या अंशु ने क्या बात करि? अब तोह सब सोल्वे हो गया न? बस फिर काहे की चिंता!?

राहुल : तुम सच कह रही हो?

तानिया : हां!!

राहुल : वऊवववव...

तानिया : पर मेरी एक शर्त है! वादा करो की तुम पूरा करोगे उससे!?

राहुल : बेशक तानिया! बोलो! में राज़ी हु. बस कह daalo...kya चाहिए?

तानिया : अपनी बात से पीछे नहीं हटोगे फिर!?

राहुल : हां हां पूछो न??

राहुल को नहीं पता था की तानिया अब उस से वो चीज़ मांगने जा रही थी जो वो सभी से छुपाता आ रहा था,

तानिया : में चाहती हु की तुम्हारे और नेहा के बीच हुई वो घटना, उसकी साड़ी सच्चाई मुझे बताओ. अभी इसी वक़्त...

तानिया की डिमांड सुन्न राहुल अब पचता रहा था. जोश में लिया निर्णय हमेशा डुबाता है. बात तोह सही थी. पर अब क्या? अब तोह पीछे नहीं हैट सकता राहुल. अब तोह एक hi रास्ता है और वो ये की सच बता दिया जाए तानिया को.

राहुल (गहरी सास लेकर) : तुम जान न चाहती हो?

तानिया : हम्म्म!

राहुल : तोह सुनो...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!
 
भाई जबसे पिष्बब गया है मेरा दिमाग खराब था तब से. Img बब में एक पिछ डालने के लिए इतनी लम्बी प्रोसेस है की पूछो मत और gif तोह मूव hi नहीं करते उसमे. इसलिए मेने बोहत काम कर दिया था पिक्स डालना. आगे कोशिश करूँगा कुछ पिक्स दाल दू.
 
साड़ी कहा चूड़ी भाई!? रूचि दीदी की तोह शादी हो गयी , चली गयी वह. बची नेहा तोह उसपे hi तोह स्टोरी बेस्ड है. शादी भाई अभी कुछ कह नहीं सकता में... फिलहाल सिर्फ ऋचा और तनीषा कन्फर्म है शादी के लिए.
 
अपडेट - 81



अब तक...

तानिया की डिमांड सुन्न राहुल अब पचता रहा था. जोश में लिया निर्णय हमेशा डुबाता है. बात तोह सही थी. पर अब क्या? अब तोह पीछे नहीं हैट सकता राहुल. अब तोह एक hi रास्ता है और वो ये की सच बता दिया जाए तानिया को.

राहुल (गहरी सास लेकर) : तुम जान न चाहती हो?

तानिया : हम्म्म!

राहुल : तोह सुनो...

अब आगे...

यहाँ तानिया तोह आ गयी राहुल से डिमांड मांगने पर आखिर ऐसा क्या कहा था अंशु ने जिससे सुन्न तानिया ने राहुल को माफ़ कर दिया? जब तानिया और अंशु अकेले में थे तोह उनके बीच कुछ ये बातें हुई...

तानिया : अंशु देखो... प्लीज यहाँ से चली जाओ. I'm नॉट इन थे मूड तो टॉक now...please

अंशु : चली जाउंगी दी, बूत एक बार मेरी बात सुन्न लीजिये

तानिया : अंशु...

अंशु : ी क्नोव आप हर्ट है...

तानिया : .......

अंशु : दी! ी क्नोव आप भाई से प्यार करती है और भाई भी आपसे प्यार करते है और जब आपने ये जाना की वो आपके अलावा हमारे साथ भी... तोह आपका दिल दुःख गया, और अब आप गुस्सा हो है न?

तानिया : ........

अंशु : दी! इसमें भाई की थोड़ी सी गलती है की उन्होंने आपको क्लियर नहीं किया पहले पर उन्हें पूरी तरह से दोषी नहीं ठहरा सकते.

तानिया : व्हाट दो यू मैं अंशु? हे चीटेड ों में...

अंशु : नूवो हे didn't... आप hi बताओ! क्या वो आपसे प्यार नहीं करते!?

तानिया : हां पर... पर...

अंशु : हम भी तोह उनकी बहने है, क्या वो हमसे और हम उनसे प्यार नहीं कर सकते आपकी तरह!?

तानिया : ी जस्ट...

अंशु : मेरी वंशु दी को एंड्रोफोबिअ था. पुरुषो से डर. भाई ने उन्हें इस दलदल से निकाला और वो भाई से प्यार करने लगी, दी ने पहले hi अपने प्यार का इज़हार कर लिया था और भाई भी मान गए थे क्युकी वो भी दी से प्यार करते थे.

तानिया : .......

तानिया सर झुकाए सब कुछ सुन्न रही थी, उससे बिलकुल भी नहीं पता था की वंशु को एंड्रोफोबिअ था, वंशु के बारे में जान के उससे बोहत hi साद फील हुआ.

अंशु : फिर मुझे उनसे प्यार हुआ... में भाई की जासूसी करती थी की मुझे उनके और नेहा के बारे में कुछ पता चले, पर मुझे वो तोह पता नहीं चल सका पर जितना भी पता चला उस से मेरे होश उड़द गए थे और में भाई की तरफ आकर्षित होने लगी. अंत में मेने खुद को समर्पित कर दिया उन्हें और अपने प्यार का इज़हार कर दिया, भाई इतने स्वीट है की वो मुझे मन hi नहीं कर सके. हां बार बार बोलते ज़रूर थे की ये सब गलत है पर वो मुझे ठुकरा hi नहीं sake...hehe

तानिया : पर...

अंशु : आप जेलस फील कर रही हो है न!?

तानिया (सुरप्रीसेड) : हँ!?? नहीं वो में...

अंशु : आप जेलस फील कर रही हो की आपने भाई को इतना प्यार किया पर भाई पहले से hi हमारे साथ रिलेशनशिप में है और आप उनकी फर्स्ट नहीं हो, है न!??

तानिया सर झुका के अपने निचले होंठ को दातो टेल दबा लेती है, अंशु की हर्र एक बात सच थी और सीधा दिल पे लग रही थी तानिया के.

अंशु : यदि आप इस बात को लेकर जेलस है तब तोह मुझे भी हक़ बनता है की में आपसे जेलस फील करू...

तानिया (सुरप्रीसेड) : हँ!?

अंशु : में कभी भी आपकी तरह शुरू से भाई से बात नहीं कर पायी, इनफैक्ट मेरी और भाई के बीच बातें होती hi नहीं थी. में नेहा का पूरा सपोर्ट करती थी और भाई से बात भी नहीं. पर आप मेरी तरह नहीं थी, आप भाई से नोर्मल्ली बात करती, उन्हें छेड़ती, सताती, प्यार करती. तोह बताइये... क्या में आपसे जेलस फील नहीं करू?

तानिया : wo...ummm

अंशु : वंशु दी को भी आपसे जेलस होना चाहिए फिर तोह! आपकी तरह वो भी भाई से बड़ी है पर भाई हमेशा उन्हें दी कह के hi बुलाते है पर आप को वो डायरेक्ट नाम लेकर बुलाते है. ये क्लोसनेस्स नहीं है तोह क्या है?

अंशु अपने शब्दों के बाढ़ फेक फेक कर तानिया को उलझा रही थी, और वैसे भी उसकी बात सही भी थी. यदि तानिया इस बात से जेलस थी की राहुल उसके पहले अंशु वंशु के साथ था. तोह अंशु और वंशु को भी पूरा हक़ था जेलस होने का.

अब शायद तानिया को रीलीज़ हो रहा था की वो कुछ कुछ गलत थी.

अंशु : भाई को पता था की उनकी गलती है, उन्हें क्लियर कर देना चाहिए था, और इसलिए उन्होंने आपका थप्पड़ ख़ुशी ख़ुशी एक्सेप्ट किया. उसका कोई विरोध नहीं किया.

तानिया को याद आता है की उसने राहुल को ज़ोरदार थप्पड़ मारा था और अब उससे गिलटी फील होने लगता है. उसने राहुल पे पहली बार ऐसे हाथ उठाया था की सीधे छाता hi रसीद दिया.

अंशु (नम्म आँखों से) : आप जानती नहीं हो की भाई पे कितना प्रेशर रहता है, उनका दिल बोहत कमज़ोर है दी, इसलिए वो सभी को प्यार करते है और किसी को भी हर्ट होने नहीं देना चाहते

हम सब की वजह से hi वो अब तक टूटे नहीं है वर्ण वो कब का बिखर गए होते.

तानिया : अंशु...!?

अंशु : हां दी! वो नहीं चाहते थे की आपका दिल हर्ट होये, वो आपसे प्यार करते है इसलिए उन्होंने आपको बताया नहीं, शायद उन्हें डर था की कही वो आपको खो न दे. और आपने उनके डर को हक़ीक़त में बदल दिया.

तानिया : toh...toh मुझसे झूट बोलेगा क्या?

अंशु : हां उन्हें पहले बता देना चाहिए था पर जैसा की मेने कहा, उनपे पहले से hi बोहत प्रेशर है, वो न केवल खुद का बिज़नेस कर रहे है बल्कि घर पर नेहा और अपने माँ डैड को भी प्रोटेक्ट कर रहे है, में जानती हु उन्हें अच्छे से

तानिया : क्या मतलब??

अंशु : तानिया दीदी! माफ़ कर दीजिये भाई को. यदि उन्होंने हमारे साथ पहले किया भी है तोह हम भी तोह आपकी और उनकी बहिन है, इसमें गलत क्या है? प्लीज माफ़ कर दीजिये. आप बदले में भाई से कुछ मांग सकती हो, एंड I'm सूरे वो मन नहीं करेंगे.

तानिया : kya...kya मांग सकती हु?

अंशु : आप उनसे वो सच मांगिये जिससे वो और चाचा चची 5 सालो से छिपाते आ रहे है.

अंशु (मैं में) : हहै!! भाई की जासूसी से तोह पता नहीं चला, पर अब तानिया दीदी के थ्रू मुझे ज़रूर पता चल जाएगा. और फिर निशा चची से कहके सबको... हहै! नेहा! तुम हर बार यही सोचती हो न की में तुम्हे अकेला चोरर के भाई से मिल गयी हु? तोह अब में तुम्हारे लिए वो करुँगी जिस से तुम्हारी आँखों से पत्ता हैट जाएगा और फिर तुम भी मेरे साथ.. हिहि! ी विल वेट फॉर तहत मोमेंट.

आगे बढ़ के अंशु तानिया की बाहो में रोने लगती है,

तानिया (सुरप्रीसेड) : a..anshu!?? Tum...tum क्यों रो रही हो?

अंशु : दीदी!! भाई जितना बहार से स्ट्रांग दीखता है, उतना hi अंदर से कमज़ोर है. आप उस से नाराज़ रहोगी न तोह वो खुद को पूरा दोष देके अंदर hi अंदर हर्ट होता रहेगा. वो ऐसा hi है. प्लीज उससे माफ़ कार्डो. और बदले में आप उनसे वो सच्चाई भी पूछ लेना. क्या आप क्यूरियस नहीं हो वो सच जान ने के लिए?

तानिया : हम्म!! क्यूरियस तोह में भी बोहत हु.

अंशु : तोह प्लीज!! क्या इतना hi प्यार करती है आप उनसे!? माफ़ कर दीजिये न...

तानिया : अच्छा ठीक है... ठीक है. ी विल फॉरगिव हिम.

अंशु (स्माइल्स) : थैंक यू दीदी! आप बोहत स्वीट हो!?

तानिया (अंशु के कान खींचते हुए) : बदमाश! तुझे ज़्यादा क्यूरोसिटी है सच जान ने की और तुम बाद में मुझ से जान न चाहती हो है न?

अंशु : हीहीही...

तानिया : चल अच्छा! में मिल के आती हु उस से.

अंशु : दीदी! आज रात में भाई मेरे और वंशु दी के साथ सोयेगा. यदि आप चाहो... तोह आप भी ज्वाइन कर सकती ho...hehe!!

तानिया (ब्लश) : धत्त्त! चांट कही की...

उसके बाद तानिया सीधे राहुल के कमरे में गयी और उस से सच जान ने के लिए डिमांड राखी.

राहुल ने पूरी सच्चाई उससे जब बताई तोह तानिया सिर्फ सर झुका के सुनती रही. बीच बीच में वो भावुक हो जाती, तोह कभी गुस्से में दातो से अपने निचले होंठ दबा लेती, कभी आँखें नम्म हो जाती.

राहुल : तोह ये है सच्चाई! ी होप तुम अब मुझसे कोई सवाल नहीं करोगी.

तानिया जो अब तक चुप बैठी थी वो उठती है और राहुल के गले लग जाती है, ासु थे आँखों में.

तानिया : मुझे माफ़ करदे भाई!!!

राहुल : नहीं! मुझे सॉरी कहना चाहिए! इसमें तुम्हारी क्या गलती?

तानिया : मेरी गलती बोहत बड़ी है मेरे भाई. एक बहिन होने के नाते में तेरे दर्द को नहीं पहचान पायी, तेरी वो स्माइल जिसके पीछे तू इतना सब कुछ छिपाया रहता रहा उसके पीछे क्या है... में उससे परख तक नहीं पायी... में तुझे अच्छे से जान hi नहीं पायी, और ऐसे वक़्त पे मेने तेरे लिए कुछ नहीं किया. मुझे माफ़ करदे.

राहुल : तुम्हारी गलती नहीं है तानिया! It's आल... *गहरी सास लेते हुए* खर्र!! जाने दो! I'm रियली सॉरी आज जो भी कुछ हुआ.

तानिया : मेने कहा न तुम्हे सॉरी कहने की ज़रुरत नहीं है , पर फिर भी तुम मानोगे नहीं. इसलिए! ी फॉरगिव यू!

आगे बढ़ के तानिया राहुल के गाल पर हाथ सहलाने लगती है.

तानिया : ज़्यादा जोरर से लगी क्या?

राहुल : it's okay!

तानिया फिर से आगे बढ़ राहुल के होंठ चूम लेती है और ये किश 10 मिनट तक धीरे धीरे चलती है और फिर दोनों अलग हो जाते है. जब तानिया रूम का दूर खोलती है तोह बाहर hi अंशु कड़ी हुई थी जो मुस्कुरा रही थी.

तानिया : तुम यहाँ?

अंशु : हेहेहे! में तोह भाई को बताने आयी थी की आज वो हमारे साथ सोने वाले है.

राहुल : ी क्नोव अंशु! मुझे याद है!

अंशु : तानिया दीदी! यदि आप को लोनेलिनेस्स या जेएलओसी फील होये तोह आप इन्वितेद हो, कभी भी बिस्तर में घुस सकती हो आके हमारे. हम मन नहीं करेंगे...

तानिया (ब्लश) : धत्तत्त!!!

कहते हुए वो चली जाती है.

राहुल (ब्लश) : क्या किया तूने? अब कोनसी चाल चल दी?

अंशु (हुग करते हुए) : सब आपके लिए भाई. एन्ड में सब कुछ अच्छा हो जाएगा. आप भरोसा रखिये मुझ पर. में आपके लिए सबको एक कर दूंगी. सब कुछ सुलझ चूका होगा.

राहुल : क्या मतलब?

अंशु : कुछ नहीं! बस इतना ध्यान रखिये की में सब ठीक कर दूंगी आपके लिए.

राहुल : ओह्ह्ह! और मेरे लिए इतना सब कुछ क्यों?

अंशु : आप भी न भाई... अरे आपको पता नहीं है क्या?? It's बिकॉज़ ी लव यू सो मच!!!! मुआअआआह्ह्ह!!!

ऐसे hi रात हुई, राहुल अंशु और वंशु के रूम में पहुचा, वह वंशु और अंशु ने उससे अपने से लगा के धेरर सारा प्यार दिया और ये प्यार कब सेक्स में तब्दील हो गया तीनो को hi पता नहीं चला. दोनों को पटक के छोड़ने के बाद राहुल काफी ेक्सहॉस्टेड था क्युकी पिछली रात तानिया के साथ भी उसने धुआँधार सेक्स किया था. और अब थ्रीसम.

तानिया का मैं ज़रूर था उन्हें ज्वाइन करने का पर उसके अंदर अभी भी मैनर्स नाम की कोई चीज़ थी और वो शर्मा रही थी. वो राहुल के साथ सेक्स को अपने तक hi रखना चाह रही थी. किसी के साथ शेयर नहीं. पर उसके दिल में अंदर hi अंदर एक एक्ससिटेमेंट थी बाकियो के साथ मिलकर राहुल के साथ सेक्स करने की...

समय गुज़रा, अगले दिन राहुल ने निशा के साथ प्यार भरे पल गुज़ारे, एक माँ होने के नाते उससे राहुल की बोहत चिंता लगी रहती थी और वो राहुल से ज़िद्द करने लगी की वो उसके साथ कुछ दिन वही पे रहेगी पर राहुल ने मन कर दिया और वापस घर जाने के लिए कहा.

तानिया ने राहुल की सच्चाई अंशु को बता दी जिससे सुन्न के अंशु के होश hi उड़द गए और वो काफी शॉकेड थी सच जान ने के बाद.

अगले दिन राहुल सहित सभी अपने अपने घर जा रहे थे. निशा बोहत उदास थी की अब न जाने कब वो देखेगी अपने बच्चे के चेहरे को.

निशा : बेतु! अब कब देख पाऊँगी में तुझे?

राहुल : don't वोर्री माँ! आप वीडियो कॉल कर लिया करो कभी भी. आपके लिए में हमेशा फ्री हु.

निशा : पर आएगा कब वापस?

राहुल : अब तोह बिज़नेस सेटल हो रहा है माँ. ी थिंक मुझे वही सेटल होने पड़ेगा.

निशा (नम्म आँखों से) : और अपनी इस लाचार माँ को अकेला चोरर देगा??

राहुल : आप लाचार नहीं हो माँ! और में कहा आपको अकेला चोरर रहा हु. में आपको बाद में वही बुला लूंगा. अब खुश!?

निशा (स्माइल्स) : हम्म्म!!!

अंशु (हुग करते हुए) : भाई!! ी होप हम अगली बार जल्दी मिलेंगे!?

राहुल : बिलकुल!

तानिया (हग्स) : चपडगंजु! वादा याद है न?

राहुल (ब्लश) : याद है छिपकली!

वंशु (हग्स) : कुटी अब कब मिलना होगा?

राहुल : बोहत जल्द दी!!

सभी से हुग करते हुए राहुल और सौरभ दोनों टैक्सी में सामान रखवाते है.

नेहा साइड में कड़ी सब कुछ देख रही थी पर कुछ नहीं बोली. वो राहुल को hi देख रही थी लगातार. उससे इस बात का ज़रा भी ध्यान नहीं था की वो लगातार राहुल को देख रही है और उससे ऐसा करते अंशु भी देख रही है.

अंशु : (बस कुछ समय का इंतज़ार करो नेहा. में सब कुछ ठीक कर दूंगी. आईटी विल हर्ट यू ा लोट बूत ये ज़रूरी है. वर्ण नाइंसाफी हो जाएगी बोहत बड़ी)

और ऐसे hi सभी अपने अपने घरो के लिए रवाना हो जाते है.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 82

अब तक...

अंशु : (बस कुछ समय का इंतज़ार करो नेहा. में सब कुछ ठीक कर दूंगी. आईटी विल हर्ट यू ा लोट बूत ये ज़रूरी है. वर्ण नाइंसाफी हो जाएगी बोहत बड़ी)

और ऐसे hi सभी अपने अपने घरो के लिए रवाना हो जाते है.

अब आगे...

समय धीरे धीरे कब एकदम से आगे बढ़ गया पता hi नहीं चला. रूचि दीदी की शादी के बाद से 2 साल गुज़र चुके थे.

इन् दो सालो में जैसे बोहत कुछ बदल गया था. राहुल और सौरभ जो बिलकुल नीचे से अपना बिज़नेस स्टार्ट करे थे, आज उनके पास कही सारा पैसा था. ऐसा नहीं था की एकदम hi बिल्लिओनेरे हो गए पर उनका बिज़नेस बोहत आगे बढ़ चूका था. राहुल और सौरभ ने धीरे धीरे फंड्स जमा करके और स्पोंसरशिप्स लेके, कम्पनीज से टाई उप करके खुद की कंपनी खोली जो बसीकली दूसरी कम्पनीज को अपना सॉफ्टवेयर बेचती और तोह और कंप्यूटर और मोबाइल के लिए अप्प्स भी बनाती थी. नार्मल पब्लिक के लिए एक फ्री सॉफ्टवेयर वर्शन लांच किया, जो धीरे धीरे बोहत पॉपुलर हो गया और एक प्रीमियम वर्शन निकाला जो की फ्री नहीं था. प्रीमियम वर्शन और भी पॉपुलर हुआ क्युकी फीचर्स बोहत ज़्यादा थे.

थोड़े उतार चढ़ाव भी देखे दोनों ने, कभी प्रॉफिट होता तोह कभी लोस्स होता बूत दोनों ने हार नहीं मानी और आगे बढ़ते रहे. आज उनकी खुद की कंपनी की साइट थी, बिल्डिंग थी जो उन्होंने बोहत जल्द hi कड़ी कर ली मुंबई में hi, अभी भी दोनों को और आगे बढ़ना था बूत राहुल ने बिज़नेस को ऐसा बढ़ाया की 2 साल में hi पूरी काय hi पलट दी. उसने अपना खुद का ब्रांड बना दिया जो धीरे धीरे पॉपुलर हो रहा था. ब्रांड सॉफ्टवेयर के लिए मसहूर होने लगा. कंपनी सॉफ्टवेयर बनाने में बोहत अच्छा काम करने लगी. राहुल ने ढेर्रो होनहार एम्प्लाइज भी रख लिए.

बाहर की अथवा देश की कई कम्पनीज से टाई उप करके कैसे काम निकलवाना है राहुल पूरा मास्टर हो गया था. उसने पहले अपने देश में काम, डायरेक्ट सबसे पहले बाहर के देशो में अपनी ब्रांचेज खोली. क्युकी डॉलर रुपया से बड़ा है और फण्ड यदि डॉलर में जमा होएगा तोह आप उतनी तेज़्ज़ी से बढ़ोगे. बिलकुल ये उतना आसान नहीं था पर जैसे तैसे राहुल और सौरभ ने मशक्कत करके किया ये सब.

राहुल के पास मुंबई की मैं ब्रांच के अलावा 2 और ब्रांच थी. उसने 1 ब्रांच अपनी उसे में खुलवाई, क्युकी यही से उससे डॉलर की सप्लाई मिलने वाली थी, इस ब्रांच को खुलवाने में बोहत म्हणत लगी थी और बोहत पैसा भी. पर दोनों कामयाब हो गए. जो लास्ट ब्रांच थी वो राहुल ने श्री लंका में खुलवाई.

सौरभ ने बोहत पूछा की वो आखिर श्री लंका में अपनी ब्रांच क्यों खोल रहा है? उस से अच्छी जगह भी है जहा पर वो कंपनी खोल सकते थे. फिर एक छोटी सी जगह में क्यों?

पर इसका जवाब सिर्फ राहुल के पास hi था और वो सौरभ को फिलहाल अभी बताना नहीं चाहता था. आज राहुल के पास शोहरत थी, पैसा था, रुतबा था, बैंक बैलेंस था और हां माँ भी थी.

इन् 2 सालो में राहुल निशा से मिलने आता कभी कभी और वापस चला जाता. पर राहुल हमेशा ऐसे टाइम पे आता जब नेहा घर पर नहीं होती.

नेहा भी कम्प्लीटली चेंज हो चुकी थी. वो पढ़ने में और भी होशियार, शातिर हो चुकी थी. रौशनी ma'am उसकी क्लास में बोहत तारीफ करती और उससे बिलकुल अपनी छोटी बहिन की तरह hi ट्रीट करती थी. नेहा का 3रद ईयर कम्पलीट होने वाला था और उसने कॉलेज में अपनी एक इमेज बना ली थी.

इन् 2 सालो में उसने राहुल को देखा hi नहीं, और धीरे धीरे वो अपने कामो और पढ़ाई पर ध्यान देने लगी जिस से वो धीरे धीरे उभरने लगी. रात में बेशक उससे राहुल का चेहरा कभी सपनो में तोह कभी मैं में घूमता जिसके कारण वो बेचैन हो जाती पर पहले से काफी हद्द तक अब वो कण्ट्रोल करने लगी थी.

ऋचा जो की अपनी जॉब कर रही थी, राहुल ने मुंबई में ब्रांच खोलने के बाद hi ऋचा को अपने पास बुला लिया और अब वो राहुल की अस ा सेक्रेटरी उसी की कंपनी में काम करती, उसी के साथ उसके घर पर रहती जो राहुल ने मुंबई में ले लिया था.

राहुल जब वापस अपने शहर ग्वालियर आता तोह तनीषा से भी मिलता, प्रेम जताता, अंशु और वंशु से भी मिलता, सभी को धेरर सारा गिफ्ट्स देता. यहाँ तक राहुल ने अपने मां से लिया पैसा भी चूका दिया वो भी डबल अमाउंट में.

कुल मिलाके सभी की लाइफ आगे बढ़ चुकी थी बस सभी को उस मोमेंट का इंतज़ार था जहा सब एक हो जाए.

अंशु जो की कुछ प्लान करि थी, उसने अपने प्लान को तब तक के लिए रोक के रखा जब तक राहुल सक्सेसफुल नहीं हो जाता क्युकी यदि वो अपने प्लान को पहले अंजाम देती तोह राहुल के लिए संभालना मुश्किल होता. इसलिए अंशु ने वेट किया और अब जब राहुल सक्सेसफुल आदमी बन चूका था, उसने डीडे कर लिया की अब प्लान का लास्ट स्टेप उससे शुरू कर देना चाहिए.

राहुल ने निशा और अपनी बहनो के बैंक अकाउंट में पैसे भेजता रहता था. निशा बोहत खुश थी की उसका बेतु इतना आगे बढ़ गया.

और आज अंशु अपने घर में यु hi बैठे हुए पुराने बीते पालो के बारे में सोच रही थी और उसने ठान लिया की अब hi सब कुछ करना है.

अंशु ने फौरन निशा को कॉल लगाया,

निशा : hello!?

अंशु : चची! अब बस बोहत हुआ!!

निशा : hello? अंशु? K..kya?.. क्या हुआ?

अंशु : चची!! बस अब बोहत हो गया!

निशा : अरे पर हुआ क्या बीटा?

अंशु : चची! भाई को गए दो साल से भी ज़्यादा हो गया, अब आप उनके और नेहा के बीच की बात बता hi क्यों नहीं देती?

निशा (उदासी से) : क्या hi कहु में अंशु? मेरे बस में नहीं है. में चाहु तोह कबका नेहा को बता देती पर में वचन बढ़ हु.

अंशु : आप मुझे इतना बताइये की आप ये चाहती है की नेहा को सच पता चले या नहीं?

निशा : चाहती भी हु और नहीं भी...

अंशु : में समझ सकती हु चची आपकी समस्या. मुझे सच्चाई पता है आलरेडी.

निशा (शॉकेड) : क्या??

अंशु : हां चची! मुझे और तानिया दीदी को पता है. भाई ने hi बताया.

निशा : पर?? बेतु ने क्यों??

अंशु : अरे कुछ नहीं! तानिया दीदी और भाई का थोड़ा झगड़ा हो गया था और गलती भाई की थी तोह बदले में तानिया दीदी ने सच्चाई मांग ली और एन्ड में भाई को बताना पड़ा.

निशा : ओह्ह्ह! तब तोह उसने तुम्हे भी नेहा को बताने से मन किया होगा...

अंशु : हां! बिलकुल! पर में चाहु तोह कुछ और कर सकती हु

निशा : हँ??

अंशु : पर में ऐसा करुँगी नहीं!

निशा : हम्म??

अंशु : क्युकी में ये चीज़ ग्रैंड रखना चाहती हु.

निशा : मतलब?

अंशु : वो आपको बाद में पता चल जाएगा चची. आपको एक बात और बतानी है की मुझे कई चीज़े ऐसी पता है जिन्हे आप जानती भी नहीं है.

निशा (तेनसेद) : क्या? कोनसी चीज़े?

अंशु : में अभी नहीं बता सकती चची! अब आप सुनिए! क्या आप वैसा करेंगी जैसा में कह रही हु?

निशा : k...kya?

अंशु : पहले वादा करिये की करेंगी या नहीं!?

निशा : पर बिना जाने कैसे वादा कर दू?

अंशु : आपको मुझपर भरोसा नहीं है क्या चची?

निशा : भरोसा तोह है अंशु पर तुम करने क्या वाली हो?

अंशु : कुछ ऐसा, जिस से नेहा को सच्चाई पता चल जाएगी, हमारी कसम भी नहीं टूटेगी और सब कुछ सही हो जाएगा.

निशा : k...kya?

अंशु : एक बात बताइये चची! भाई ने आपको कसम देते वक़्त क्या कहा था?

निशा : usne...usne कहा था की "चाहे कुछ भी हो जाये आप ये बात नेहा को कभी नहीं बताओगी"

अंशु : हाआआआ!! एक्साक्ट्ली!!

निशा : ky...kya?

अंशु : यही पर तोह लूपहोल है चची?

निशा : लू.. लूपहोल?

अंशु : भाई ने आपसे, मुझ से, और सभी लोगो को जिन्हे सच्चाई बताई है या पता है उन्हें यही कहा है की नेहा को कभी मत बताना!

निशा : हां!

अंशु : पर भाई ने ये थोड़ी न कहा की नेहा के अलावा हम किसी और को नहीं बता सकते

निशा (शॉकेड) : हँ??

अंशु : क्यों चची? है न लोहोले? अब आप बाकी सब को ये सच्चाई बता hi सकती है.

निशा : पर ऐसे में... परिवार की बात... सबके बीचे...

अंशु : ये ज़रूरी है चची. आप सुनिए मेरी बात... आप सभी अपने घरवालों को बुलाएंगी. जिन्हे ये पता है की नेहा और भाई की आपस में नहीं बनती.

आप सबको ये बोलिये की सभी को एक बात बतानी है जो बोहत ज़रूरी है और सभी का वह होना आवश्यक है.

निशा : फिर?

अंशु : उसके बाद आप सभी को सच्चाई बता दीजियेगा. सब अपने अपने सच बता देंगे जो वो राहुल भाई के बारे में जानते है ताकि सभी को उनके कर्मो के बारे में पता चल सके. तभी तोह सबको पता चलेगा की परिवार में हो क्या रहा है और कोण सही है और कोण गलत.

निशा : ओह्ह्ह्ह

अंशु : पर ध्यान रहे चची! आपको चाचा को उस वक़्त बाहर भेजना पड़ेगा और नेहा को भी. और ये बात आप चाचा को नहीं बता सकती की आप सभी को यहाँ बुलाने वाली हो.

निशा : हां पर!? पर में इनकी जरर हाज़िरी में इनसे सब छुपा के ये कैसे कर सकती हु?

अंशु : आप अभी भी उनकी साइड ले रही हो?

निशा : आंशुओ... तुम नहीं समझोगी!

अंशु : पर में समझ सकती हु चची. आपके लिए ये बोहत हार्ड होगा. पर में आपको वचन देती हु. इन् सब के बाद सब कुछ सही हो जाएगा. ये मेरा आपसे वादा है. भाई और नेहा के बीच पहले से भी अच्छे सम्बन्ध हो जाएंगे और भाई वापस से पहले की तरह खुश रहने लगेंगे.

निशा : अच्छा!? और...

अंशु : और... मुझे पता है आप क्या सोच रही है. घबराइए मत चची! में अपनी जान दे दूंगी पर परिवार में अब और तनाव नहीं आने दूंगी. प्लीज ट्रस्ट में!

निशा : हां अंशु! ी ट्रस्ट यू!

अंशु : जी! अब आप सभी को कॉल करिये और सभी को आपके घर पर आने के लिए बोल दीजिये, बाकी में संभाल लुंगी.

निशा : अच्छा ठीक है! सब ठीक तोह हो जाएगा न?

अंशु : मेने कहा न चची! सब सही हो जाएगा! थोड़ा ऊपर नीचे होएगा बूत एन्ड में सब सही हो जाएगा...

निशा : ऊपर नीचे मतलब? कुछ गड़बड़ तोह नहीं होएगी न?

अंशु : चची! नेहा का थोड़ा लफड़ा है. ी मैं उससे हैंडल करना पड़ेगा बाकी तोह सब ठीक है, एन्ड में सब सही हो जाएगा. Don't वोर्री!!

निशा : अच्छा ठीक है तोह कब बुलाना है?

अंशु : पहले आप चाचा को बाहर भेजिए! कुछ दिनों के लिए!

निशा : क्या? में ये कैसे करुँगी?

अंशु : अरे!!! अच्छा रुकिए!! में डैड से बोलके उन्हें बाहर भिजवाती हु.

निशा : हां!

अंशु : और आप नेहा को ये बता सकती है की सब आपके यहाँ आ रहे है, यदि वो पूछे की क्यों? तोह कहना की ऐसे hi फॅमिली गाथेरिंग राखी थी बोहत पहले. और उससे सामान लेने या फ्रेंड के यहाँ कही भी भेज दीजियेगा.

निशा : अच्छा ठीक है. कभी कभी तोह लगता है की तू मेरी चची है.

अंशु : हाहाहा! ी लव यू चची! आप बेस्ट हो! कभी बुरा नहीं मानती.

निशा : हां हां! मक्खन लगाना तोह कोई तुझसे सीखे.

अंशु : क्या हुआ? उदास क्यों लग रही हो? भाई ने प्यार नहीं किया क्या जब आया था ? हीहीही!

निशा (ब्लश) : धत्त्त! चची हु में तेरी...

अंशु : चची हो तभी तोह आपसे ये सब बातें शेयर कर पा रही हु मेरी प्यारी चची... Don't वोर्री! भाई अब जब आएगा तोह उससे में आपके पास भेजूंगी सबसे पहले.

निशा (ब्लश) : चल चल! बोहत हुआ!

अंशु : हिहि! अच्छा चलिए bye! जैसा कहा है बिलकुल वैसा hi करना!

*कॉल एंड्स*

अगले दिन अंशु अपने डैड यानी की राहुल के ताऊ जी से रिक्वेस्ट करती है की वो राजेश को कुछ दिनों के लिए कैसे भी करके आउट ऑफ़ सिटी भेज दे क्युकी ऐसा करने से सभी को परिवार का सच पता चल पाएगा.

अंशु की रिक्वेस्ट पर उसके डैड राजेश को आउट ऑफ़ सिटी भेज देते है कुछ ज़रूरी काम के लिए, जिससे राजेश छोटा भाई होने पर बिलकुल भी मन नहीं करता और अगले दिन hi घर पर निशा और नेहा को बता के चला जाता है दूसरे शहर.

उसके जाते hi निशा तैयारियों में जुट जाती है क्युकी उसने पहले hi सभी को कॉल करके बता दिया था उसके घर आने के लिए. और ये भी बता दिया था की कोई भी ये बात राजेश को न बताए.

नेहा : क्या हुआ माँ? कोई आ रहा है क्या?

निशा : हां! तेरे मां जी विथ फॅमिली, अंशु वंशु की फॅमिली भी आ रही है.

नेहा : व्हाट? क्यों? कोई फंक्शन है क्या? डैड चले गए और सब एकदम से आ रहे है?

निशा : हां! वो पहले से hi एक फॅमिली गाथेरिंग राखी हुई थी मेने. अब तुम्हारे डैड को अभी ज़रूरी काम पद गया तोह इसमें में क्या करू?

नेहा : हां पर ऐसे अचानक?

निशा : क्यों? तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या?

नेहा : na..nahi! में बस थोड़ा हैरान थी.

निशा : अच्छा सुन्न! में वो अपना क्राकरी आइटम का दूकान वाला है न? उसके यहाँ डिनर सेट के पैसे दे के आयी थी बूत वो सेट उसके यहाँ अवेलेबल नहीं था कल. तुम जाना अभी और उस से सेट ले आना. और तुम्हे कुछ काम था न? कॉलेज का?

नेहा : ओह्ह! हां ले आउंगी! हां वो प्रोजेक्ट का काम था, फ्रेंड के यहाँ बात करने जाना था.

निशा : हां तोह वही से वो भी निपटा के आना.

नेहा : okay!!

तभी बहार गाडी की आवाज़ आती है और अंशु वंशु विथ फॅमिली घर में एंट्री कार्टर है.

निशा : आइये! भाभी!... आइये... अंशु वंशु आओ... बैठो.

अंशु (हुग करते हुए) : नेहुउउ!!! किसी हो??

नेहा (स्माइल्स) : अच्छी hi दी! आप सब यहाँ एकदम से?

अंशु : अरे चची ने बताया नहीं क्या?

नेहा : नहीं में बस ऐसे hi पूछ रही थी. माँ ने आलरेडी बता दिया है.

तभी थोड़ी देरर बाद एक कार और रूकती है और उसमे से तानिया विथ फॅमिली निकलती है और सभी से मिल जुलने के बाद सभी हॉल में hi इखट्टे बैठ जाते है.

निशा : नेहा! जाओ जाके सेट ले आओ, सबको उसी नए सेट में खाना परसूँगी फिर... और अपना काम भी कर आओ.

नेहा : okay माँ! आप सभी बैठिये में अभी आती हु थोड़ी देरर में.

नेहा उठ के जैसे hi अपनी गाडी उठा के निकलती है तभी 5 मिनट बाद निकिता अपनी माँ को स्कूटी से लेके नेहा के घर आती है.

आरती (nikita's माँ) : क्या हुआ निशा? क्या बताने बुलाई है?

निकिता : हां आंटी?

निशा : सभी बैठिये पहले...

निशा ने निकिता और आरती को भी बुलाया था क्युकी उन्हें भी पता था की राहुल और नेहा की आपस में नहीं बनती है और आरती और निशा काफी अच्छे दोस्त थे इसलिए निशा ने आरती को फॅमिली गाथेरिंग में शामिल किया.

मुकेश (निशा के भाई) : अरे निशा बोलो! क्या हुआ? क्या बताने सभी को बुलाया है?

विनीता (अंशु वंशु की माँ) : निशा? कहो भी!

निशा (गहरी सास लेते हुए) : आज मेने आप सभी को वो सच बताने के लिए बुलाया है जिससे में 7 साल से छुपाती आ रही थी...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 83

अब तक...



मुकेश (निशा के भाई) : अरे निशा बोलो! क्या हुआ? क्या बताने सभी को बुलाया है?

विनीता (अंशु वंशु की माँ) : निशा? कहो भी!

निशा (गहरी सास लेते हुए) : आज मेने आप सभी को वो सच बताने के लिए बुलाया है जिससे में 7 साल से छुपाती आ रही थी...




अब आगे...



ललिता (मुकेश की पत्नी) : कहो न निशा! कोनसी बात?

इस से पहले की निशा कुछ कहती उतने में दरवाज़े पर एकदम से कोई अंदर आता है,

"में लेट तोह नहीं हुई न??"

सामने तनीषा थी, जल्दबाज़ी में वो आयी और अभी बोहत हाफ रही थी.

निशा : सही टाइम पर आयी हो बीटा! आ जाओ! बैठ जाओ!

अंशु (मैं में) : यही सही टाइम है... सॉरी राहुल भैया! सॉरी नेहु! बूत ये ज़रूरी है.

मुकेश : ये कोण है निशा?

निशा : ये... तनीषा है! राहुल की डॉक्टर.

तनीषा को समझ आ गया था की निशा ने उससे अभी बहु कहके क्यों नहीं बुलाया. शायद अभी परिवार में सभी क्वेश्चन करने लगते इसलिए निशा ने अभी तनीषा को अस ा डॉक्टर hi बताया.

तनीषा इस बात से बिलकुल भी दुखी नहीं थी उससे पता था की क्या चल रहा है. उससे पहले hi निशा की जुबां मिल चुकी थी की वो इस घर की बहु बनेगी तोह उससे बाकी बातो से कोई लेना देना नहीं था. उससे पता था निशा की कोई मजबूरी होगी और इस वक़्त उससे निशा की मदद करनी चाहिए हां में हां मिला के.

तनीषा : जी में तनीषा. में राहुल को ट्रीट करती हु जब भी उससे चोट लगती है. I'm ा सर्जन ात क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल.

रुपेश (राहुल के ताऊ जी) : सर्जन? क्या बात है! काबिलियत तारीफ! क्या उम्र है बीटा तुम्हारी?

तनीषा : j..jii?? में...28 की होने वाली हु.

रुपेश : वाह! 28 की उम्र में hi एक सर्जन!?

निशा : वो दो साल पहले hi सर्जन बन गयी थी जेठ जी.

रुपेश : क्या बात है!

मुकेश : पर ये यहाँ पर क्यों?

निशा : क्युकी वो हमारी फॅमिली मेंबर जैसी है और राहुल को वो 7 साल पहले से hi जानती है.

मुकेश : ओह्ह्ह!!

तानिया : जी बुआ! आप कुछ बताने वाली थी?

तानिया को तोह पता hi था सच. वो बस सबके सामने न जान ने की एक्टिंग कर रही थी.

वंशु : हां चची! हम सब सुन्न रहे है. कहिये!

निशा (गहरी सास लेकर) : हां! तोह में शुरू करती हु...

अब निशा की ज़ुबानी हम फ्लैशबैक के थ्रू देखेंगे...

*फ्लैशबैक*

बात 7 साल पुरानी है, राहुल ग्यारवी क्लास में था और नेहा आठवीं क्लास में. इन् दोनों के बीच बोहत प्यार था. एक नार्मल भाई बहिन से थोड़ा ज़्यादा. खासकर की नेहा... वो राहुल से चिपकी hi रहती थी. हर्र वक़्त उसके आगे पीछे घूमना, उससे तंग करना, लाढ़ करना, सब करती थी वह. कुछ ज़्यादा hi ऑब्सेस्सेड थी राहुल से. राहुल भी कुछ काम नहीं था ,बेशुमार प्यार देता था वह नेहा को. उसके लिए चीज़े लाना, गिफ्ट्स लाना, उसको घुमाने ले जाना, हर्र काम में उसकी मदद करना. एक आइडियल भाई की तरह था वह नेहा की नज़रो में.

पर न जाने इन् दोनों के प्यार को किसकी नज़र लग गयी. यहाँ ये दोनों तोह अपनी ज़िन्दगी में टेंशन फ्री थे पर राजेश की ज़िन्दगी कुछ सही नहीं चल रही थी.

राजेश अपनी नौकरी करके जब भी घर वापस आता तोह काफी चिढ चिढ़ा व्यवहार रहता उसका. राजेश शराब नहीं पीटा था उसके बाद भी ये चिढ चिढ़ापन किस लिए था ये निशा समझ नहीं पा रही थी. राजेश भी अपने मुँह से कुछ नहीं बोलता था बस सीधे मुँह बात नहीं करता था.

निशा ने कुछ दिन ये सोच के इस बात पर ज़्यादा नहीं टोका क्युकी हो सकता है काम का टेंशन हो और मूड चिढ चिढ़ा हो गया हो. पर जब दिन बा दिन ये होना शुरू हुआ तोह निशा को टेंशन होने लगी.

नेहा इस बात से पूरी तरह अनजान थी की घर में क्या चल रहा है. पर राहुल ने भांप लिया था की उसके डैड कुछ दिनों से सही से बेहवे नहीं कर रहे. राहुल एक डिस्कॉपलीनेड लड़का होने के नाते पेरेंट्स के बीच में नहीं बोलता था और साड़ी बातें अपने अंदर hi रखता था.

एक दिन राजेश जब अपनी नौकरी पर गए, इस वक़्त वो मैनेजर नहीं थे, केवल एक एम्प्लोयी थे बैंक में. स्ट्रेस, वर्क लोड, फ़्रस्ट्रेशन, इन्ही सब से रोज़ झूझना पड़ता था राजेश को.

राजेश बैठा हुआ काम कर रहा था और कुछ सोच रहा था, की कैसे नौकरी में आगे बढ़ा जाए वो केवल एम्प्लोयी बांके तोह नहीं रह सकता न हमेशा!?

तभी उसके बगल में उसके hi बैंक में एक और एम्प्लोयी जो काम करता रहा वो आके बैठ गया और राजेश से बात करने लगा.

"और भाई मिश्रा साहब क्या चल रहा है?"

राजेश : अरे क्या बताऊ अब शुक्ल जी! रोज़ रोज़ वही पंचायत. काम करो, लोगो की समस्याए सुनो, कंप्यूटर में दिमाग खपाओ और घर चले जाओ. कुछ रहा hi नहीं है ज़िन्दगी में.

शुक्ल : भाई ये तोह हर्र शादी शुदा व्यक्ति की समस्या है. खासकर हम मर्दो की.

राजेश : ......

शुक्ल : वैसे... तुमको पता है अभी जो खबर फेल रही?

राजेश : किसी खबर?

शुक्ल : अरे तुम्हे नहीं पता? अरे... वो पांडेय की बेटी है न? भाग गयी कल एक लौंडे के साथ...

राजेश (शॉकेड) : क्या बात कर रहे हो?

शुक्ल : अरे सुबह से उसके hi चर्चे हो रहे है सबमे... पांडेय की भी तोह गलती है.

राजेश : इसमें पांडेय की क्या गलती?

शुक्ल : अरे इतना छूट देके रखा था पांडेय ने उससे. लड़कियों को इतनी छूट नहीं देनी चाहिए. मेरी तोह तीन लड़किया है पर वो सपने में भी ऐसी हरकते करने की नहीं सोच सकती. मेने इतना दर्रा के रखा है उनको.

राजेश : हां पर हमारी बच्चिया ऐसा कभी नहीं करेंगी...

शुक्ल : मेरी का तोह मुझे पता है पर अपनी बेटी पर भी ध्यान दो ज़रा. ये लड़किया बोहत hi चिकल्लस होती है. मेरे घर में तीन तीन पैदा हो गयी. अब एक न एक दिन उन्हें जाना hi है घर चोरर के. उनकी शादी का खर्चा अलग, ऊपर से शादी के पहले उनके किसी ऐरे जर्रे लड़के के प्यार में पद जाने का डर, कही कुछ गड़बड़ न हो जाए उसका डर.

शुक्ल और राजेश की बातें यदि अभी कोई सुनता तोह वो आसानी से देख के ये बता देता की शुक्ल अभी राजेश को भड़का रहा था.

राजेश : मतलब?

शुक्ल : मतलब यही की लड़किया बोहत चिकल्लस होती है. मेरी सोचो... में तोह लूट hi जाऊंगा

तीन तीन लड़कियों की शादी. लड़कियों को हमेशा सख्ती से रखो.

राजेश : पर मेरी नेहा बोहत अच्छी है. उसमे कोई खराबी नहीं है. मेरी प्यारी बच्ची है वह.

शुक्ल : बच्ची सब प्यारी hi रहती है मिश्रा. पर जब ये बड़ी हो जाती है न तोह इनकी हरकते शुरू हो जाती है. पलट के जवाब देना, छोटे छोटे कपडे पहन न, रात में पार्टी में जाना, और न जाने क्या क्या. इस से पहले की हाथ से निकल जाए इन्हे अपने कण्ट्रोल में रखना.

राजेश : ........

शुक्ल : बेचारा पांडेय! मेरा करीबी है वो तोह. में जाता रहता हु उसके घर. कुछ दिन पहले गया था तोह उसकी लड़की मेरे सामने hi पांडेय से ज़बान लड़ा रही थी अब बताओ.

और कल बताओ एक ऐरे जर्रे लौंडे के साथ भाग गयी. पूरे आस पड़ोस में ठु ठु हो रही है पांडेय की. खर्र! यदि वो खुद hi थोड़ी सख्ती बरकता तोह ये अंजाम नहीं देखना पड़ता आज उससे... क्यों है न?

राजेश : हँ? Haa...haaa!

राजेश जो खयालो में खोया हुआ था एकदम से हां में हां मिलाते हुए कहा.

शुक्ल : काम से कभी आराम भी ले लिया करो राजेश. क्या कहते हो? काम के बाद चलोगे? थोड़ा खाने पीने बोले तोह?

राजेश : में शराब नहीं पीटा...

शुक्ल : अरे मत पीना, बस खा लेना कुछ. कुछ और भी लोग चल रहे है. चल दो, थोड़ा अच्छा महसूस होएगा.

राजेश ने भी सोचा की दिन बा दिन काम की वजह से उसका दिमाग वैसे hi खराब रहता है, थोड़ा घूम लेगा तोह अच्छा महसूस होएगा उससे.

राजेश : अच्छा ठीक है!

शाम हुई, बैंक में एम्प्लाइज ने अपना अपना काम ख़तम किया और सभी खाने पीने के लिए एक अच्छे से होटल गए जहा ड्रिंक्स भी सर्वे करि जाती रही.

सब हस्सी मज़ाक करते हुए स्नैक्स का लुत्फ़ लिए, राजेश ने घर पर फ़ोन करके बता दिया की वो लेट आएगा.

शुक्ल : लो भाई राजेश! पीयो!

राजेश : में नहीं पीटा शुक्ल साब बताया था आपको.

शुक्ल जो की पहले hi थोड़े नशे में था आके बगल में बैठ गया और ज़बरदस्ती आधा गिलास भर दिया.

शुक्ल : थोड़ा सा hi पी लो राजेश. ये जड़ीबूटी है. यही तोह हम सब की ज़िन्दगी को मज़े से भर्ती है. यदि ये न होये तोह हम सब तोह परिवार और काम के बोझ के नीचे डाब के मर्डर hi जाए.

राजेश : अच्छा!?

शुक्ल (नशे में) : पी के तोह देखो! में बोहत लाचार हु राजेश... मुझे साला... साला तीन तीन लड़किया हो गयी. एक भी लड़का नहीं. काश... काश मेरी बेतिया न होती

राजेश : ye...ye क्या बात कर रहे हो शुक्ल साब?

शुक्ल : हां राजेश! ये बात तुम्हे तब समझ आएगी जब तुम इसको ध्यान से देखोगे. कभी अपनी बेटी को ध्यान से परखा है? किस के साथ उठती बैठती है स्कूल में? कोण उसके दोस्त है? किस से बात करती है फ़ोन पर? एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगे राजेश? बोलो?

राजेश (थोड़ा गुस्से में) : ये क्या बकवास कर रहे हो आप? नेहा मेरी बच्ची है! मेने उससे क्या संस्कार दिए है ये में जानता हु अच्छे से.

शुक्ल : अच्छा? तोह मेरा जवाब दो न? यदि... यदि वो भाग गयी तब तुम क्या करोगे?

राजेश : में...

शुक्ल : हाहाहा! नहीं है न जवाब? ये लो अब पियो थोड़ी सी. ऐसे समय में सिर्फ यही मदद करती है.

राजेश ने एक बार गिलास को देखा कुछ सोचा और फिर उठा के पीने लगा, उसके ऐसा करते hi शुक्ल के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी.

दरअसल सच्चाई तोह ये थी की शुक्ल की तीन बेतिया ज़रूर थी और वो उनसे परेशां भी था की उनका खर्चा आगे चल के शादी में बोहत लगेगा. पर उस से ज़्यादा उससे इस बात से जलन रहती थी की राजेश के पास राहुल जैसा लड़का था.

राहुल अक्सर बैंक आया करता था, बैंक में राजेश के सभी दोस्त राहुल को जानते थे और उससे एक बोहत hi अच्छे लड़के का टाइटल दिए हुए थे. राजेश को बड़ा प्राउड होता था जब भी वो राहुल को अपने दोस्तों के बीच खड़ा करता था.

पर शुक्ल इसी बात से और जल भून जाता. एक तोह उसका कोई लड़का नहीं था और ऊपर से तीन तीन लड़किया, उसका दिमाग सही से काम करना बंद हो गया था. आज उसने सोचा की यदि वो मैनेजर बन गया तोह आगे चल के अपनी लड़कियों की शादी करने के बाद उसके पास काम से काम कुछ तोह बचेगा. पर यदि सिर्फ एम्प्लोयी hi रहा तोह बेशक वो तोह लूट जाएगा फ्यूचर में.

और उसके रास्ते में सबसे बड़ा काटा था राजेश.

राजेश को हटा तोह नहीं सकता था शुक्ल पर उसको मानसिक रूप से उससे तनाव में ज़रूर दाल सकता था और आज वो यही करने का सोच के आया था.

अपनी बातो से उसने राजेश को शराब पीला पीला कर उसके मैं में एक नया विचार घुसेड़ दिया की लड़किया एक बोझ की तरह है. राजेश भी न चाहते हुए उसका ध्यान बार बार नेहा और उसके फ्यूचर पर hi जा रहा था और फिर पांडेय की बेटी भाग गयी उस बात से उसका सर और दुखने लगा.

सारे एम्प्लाइज खा पी कर होटल से जा चुके थे पर राजेश और शुक्ल अभी तक बैठे हुए थे. शुक्ल कान भरता और शराब का गिलास भी... राजेश ने काफी शराब पी ली थी.

और अभी वो गाडी चलाने की हालत में नहीं था. इस वक़्त राजेश के पास कोई कार नहीं थी. सिर्फ बाइक थी. कार तोह राजेश ने मैनेजर बन्न ने के बाद ली थी.

शुक्ल ने उसको हिदायत दी की वो कुछ देरर यही रहे और जब नशा काम हो जाए तोह वो घर चला जाए.

शुक्ल होटल के मैनेजर को बता गया की राजेश को यही पर रुकने दिया जाए और रात में उससे उठा कर घर भेज दिया जाए.

यहाँ राजेश का दिन तोह कुछ इस प्रकार गुज़रा पर घर में शाम से लेकर रात तक क्या हुआ वो भी जान लेते है...

जब शाम का वक़्त था, थोड़ी थोड़ी आंधी चल रही थी, पत्ते और धुल उड़द के घर के द्वार से अंदर की और आ रही थी, नेहा ने उठ के फौरन गेट को बंद किया.

नेहा : भाई! आज कितनी आंधी चल रही है...

नेहा ने दूर लॉक करते हुए राहुल से कहा जो की वही सोफे पर बैठा हुआ लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था,

राहुल : ......की : भाई???

नेहा के कई बार कहने पर भी जब राहुल ध्यान नहीं देता तोह नेहा चिढ़ते हुए आती है और उसकी गोदी में उसकी तरफ मुँह कर के बैठ जाती है, और उसका चेहरा अपने हाथो में ले लेती है,

राहुल को भी महसूस हो रहा था की अब उसकी बहिन बड़ी होने लगी है, उसकी छथि पे नेहा के हलके उभरे हुए स्तन जो ठीके थे.

नेहा : भाई???

राहुल : गुड़िया! क्या कर रही हो तुम? में काम कर रहा हु न...

नेहा : तुम ये बार बार ताऊ जी का तोह कही डैड का काम क्यों करते रहते हो? तुम अभी सिर्फ स्कूल में hi हो. तुमको ये सब काम तोह बड़े होक करना चाहिए न, फिर डैड लोग तुमको इतना काम क्यों देते है?

राहुल : अब में बड़ा हु तोह मुझे तोह करना hi पड़ेगा न?

नेहा : वही तोह बोल रही हु मेरे भाई!! तुम अभी सिर्फ 11तह क्लास में हो, फिर ये लिस्ट वगैरह बनाना डैड तुमको क्यों देते है? तुम्हारी उम्र अभी पढ़ने की है, ये सब करने की नहीं. पिछली बार ताऊ जी ने तुम्हे दूसरे शहर भेज दिया था काम के लिए और वो भी अकेले.

राहुल : वो तोह छोटा सा काम था गुड़िया और वैसे भी वो शहर कोई बोहत दूर नहीं था.

नेहा : ओह्ह अच्छा? कोण से पेरेंट्स एक 11तह क्लास के स्टूडेंट को दूसरे शहर भेजते है अपने काम के लिए? और वो भी ताऊ जी ने भेजा. डैड ने मन तक नहीं किया उनको. हम्फ!!

राहुल : अच्छा मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर दे...

नेहा : तुम अब से इनके काम नहीं करोगे... मुझे अच्छा नहीं लगता. समझ गए न?

राहुल : जैसी आपकी आज्ञा मेरी माँ...

नेहा : हीहीही...

नेहा आगे बढ़ के राहुल के गालो पर किश कर देती है और उस से गले लग के उसकी छाती में अपना सर रख के चिपक जाती है,

नेहा : आज बोहत आंधी चल रही है भाई...

राहुल उसका सर सहलाते हुए कहता है,

राहुल : हम्म!!

नेहा : आज कुछ बुरा होएगा क्या?

राहुल : तू फ़ालतू बातें मत सोच! बस एन्जॉय कर.

नेहा : हम्म!!

नेहा : भाई???

राहुल : हम्म!?

नेहा (ब्लश) : यू लव में न??

राहुल (स्माइल्स) : ये भी कोई पूछने की बात है गुड़िया?

नेहा : हीहीही! ी लव यू तू!!

रात को नेहा सोने चली जाती है 9 बजे hi, थोड़ी बोहत बातें निकिता से करती है उसके बाद सोने चली जाती है.

इधर निशा और राहुल सोफे पर बैठे बात कर रहे थे,

राहुल : डैड अभी तक नहीं आए माँ? रोज़ तोह वो 8 बजे आ जाते है.

निशा : हां बीटा! मेने फ़ोन किया था, कह रहे थे की 10-11 बजे तक आएँगे.

राहुल : 10:30 तोह बज hi गया है माँ.

निशा : हां! तू अब सजा. वो आ जाएंगे. में भी अपने कमरे में थोड़ी देरर लेट लेती हु.

राहुल : बस अभी चला जाऊंगा, ये काम होने hi वाला है.

निशा उठ के अपने कमरे में चली जाती है, राहुल भी काम करते करते कब वही सोफे पर हलकी नींद में चला जाता है उससे पता hi नहीं चलता.

इधर 10:45 पे होटल में मैनेजर आके राजेश को टटोल के हिलाता है तोह राजेश होश में आता है.

मैनेजर : सर! अब आपको घर जाना चाहिए! क्या आप पहले से रेफ्रेशेड फील कर रहे है? ये पानी आपके लिए...

राजेश : हँ?? ओह्ह!! हां...

पानी पिके राजेश अपना चेहरा थोड़ा धोता है पर अभी भी नशा उसमे बचा हुआ था. उसने गाडी उठायी और तेज़्ज़ तूफ़ान में गाडी चलते हुए राजेश घर की और निकलने लगा.

जब राजेश घर पहुचा तोह काफी गीला हो चूका था. निशा ने दरवाज़ा खोला और देख के चौंक गयी. राजेश ऊपर से नीचे तक गीला था. तेज़्ज़ बदल गरज रहे थे, बिजली चमक रही थी. निशा ने फौरन बैग लेके उससे अंदर आने दिया.

सामने सोफे पे राहुल सोया हुआ था हलकी नींद में. राजेश ने एक नज़र उससे देखा और अंदर बैडरूम में कपडे बदलने चला गया.

निशा ने टॉवल दी और राजेश अपने बाल hi सूखा रहा था...

निशा : आज क्या हुआ? आप इतना लेट आए? कल नेहा का बर्थडे है पता है न आपको?

नेहा का नाम सुनते hi शुक्ल की बातें फिरसे राजेश के मैं में मंडराने लगी. हल्का नशा तोह उससे अभी भी चढ़ा हुआ था क्युकी उसने पहली बार जो पी थी. हैंगओवर अभी हटा नहीं था.

राजेश : पता है न निशा! बार बार क्यों लगी हो उसी बात के पीछे?

निशा : अरे!? पर में तोह आपको सिर्फ याद दिला रही थी. आप लेट क्यों हो गए?

राजेश : अब हो गया लेट! हर्र चीज़ बताऊ क्या तुम्हे?

निशा : अरे?? में तोह सिर्फ पूछ रही हु न?

राजेश : यही तोह प्रॉब्लम है. नौकरी करने जाओ वह सर थपाओ, घर आओ तोह यहाँ तुम सर खाती हो, आदमी जाए तोह जाए कहा. क्या में बिना बताए कही घूमने फिरने भी नहीं जा सकता क्या?

निशा (बॉहे सिकोड़ते हुए) : पर में तोह आपसे सिर्फ पूछ रही थी. बाहर बारिश इतनी हो रही है. चिंता लगी थी इसलिए पूछा मेने...

राजेश : मुझे पता है क्या करना है. चिंता के नाम पे हर वक़्त पीछे पद के मुझसे सवाल जवाब नहीं किया करो...

निशा : अरे... पर... वो तोह नेहा का कल बर्थडे है इसलिए मेने पूछा की आप इतनी लेट क्यों आए? क्या आप बात करने गए थे क्या होटल में? उससे सरप्राइज देना है क्या? या फिर कुछ और काम था? बस इतना hi तोह पूछ रही हु में.

राजेश : कोई सरप्राइज देने के लिए नहीं गया था. दोस्तों के साथ गया था एन्जॉय करने... क्या गलत किया?

निशा जो देख रही थी की राजेश बोलते वक़्त थोड़ा लड़खड़ा रहा था वो समझ गयी की राजेश आज पी के आया हुआ है.

निशा (शॉकेड) : आपने शराब पी??

राजेश : हां पी है! क्या कर लोगी तुम?

निशा : क्यों पी आपने?

राजेश : मेरा मैं! तुम और तुम्हारी लड़की...

निशा : नेहा कहा से आ गयी बीच में?

राजेश : अरे! कहा से नहीं आयी ये पूछो? हर्र वक़्त एन्जॉय करना, किसके साथ उठती है बैठती है स्कूल में हमे क्या पता? वो लकी हरामखोर उस दिन पेरेंट्स टीचर मीटिंग में घर के देख रहा था इसको...

निशा (शॉकेड) : अरे तोह? तोह आप किसी की भी बात का क्या मतलब निकाल रहे हो?

राजेश : किसी की भी बात का? अरे! कल वो पांडेय की लड़की भाग गयी किसी लफंगे के साथ.

निशा (शॉकेड) : k..kya??

राजेश : हां! अपनी लड़की को ज़रा कण्ट्रोल में रखो! समझी?

निशा (ुचि आवाज़ में) : हमारी लड़की ऐसी नहीं है. आपने सोच भी कैसे लिया...? छी! आपके मैं में ख़याल भी कैसे आया नेहा के लिए ऐसा...

इन् दोनों की बहस में राहुल की नींद खुल चुकी थी. वो फौरन उठा और बैडरूम में जाके देखना चाह रहा था की चल क्या रहा है पर दोनों की आवाज़ सुनकर उसने अपने कदम गेट के बाहर hi रोक लिए और सुन्न ने लगा.

राजेश : बस यही तोह दिक्कत है तुमलोगो के साथ, कभी अपनी गलती मान न hi नहीं है!

निशा : क्या गलती? किसी गलती? आप होश में तोह हो?

राजेश : यदि नेहा एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगी?

निशा (तेज़्ज़ स्वर में) : आप वाहियात बातें कर रहे है. आप नशे में है.

राजेश : जवाब नहीं है न? सही कहा मेने एकदम! लड़किया सही में चिकल्लस होती है

निशा (गुस्से में) : आप...

राजेश : काश नेहा पैदा hi न हुई होती.

राजेश की बात सुनके न केवल निशा बल्कि बाहर खड़ा राहुल भी स्तब्ध था.

राहुल : (डैड? क्या बोल रहे है ये? माँ की बात से लगता है डैड होश में नहीं है. पर अभी रात में ये सब? कल गुड़िया का b'day है. ये सब क्यों हो रहा है? मुझे लगा hi था डैड के साथ कुछ गड़बड़ चल रहा है...)

अभी राहुल कुछ और सोचता इस से पहले hi बगल में नेहा की रूम की लाइट एकदम से जल जाती है, नेहा जो की बहस की आवाज़ से उठ चुकी थी वो यही सोच रही थी की क्या बातें हो रही है इतनी रात में डैड और माँ के बीच.

और वो आगे बढ़ के देखने जाने लगती है. बाहर खड़ा राहुल फौरन अलर्ट हो जाता है.

उससे नेहा की परछाई दरवाज़े के नीचे से पास आते हुए दिख गयी, उससे पता चल गया की नेहा इधर hi आने वाले hi और लगता है नेहा ने राजेश की बात भी सुन्न ली है.

राहुल : (ओह्ह no! गुड़िया!? लगता है गुड़िया ने सुन्न लिया है? और अब वो झगड़ने जा रही है. में ऐसा नहीं होने दे सकता. क्या बीतेगी उसपर जब उससे पता चलेगा की डैड ने उसके लिए क्या कहा है? हरगिज़ नहीं! कल गुड़िया का b'day है mein...mein ऐसा नहीं होने दे सकता. हां...)

राहुल एकदम से बैडरूम का दरवाज़ा खोल देता है और अंदर चला जाता है जिससे देख निशा सर राजेश चकित रह जाते है.

राहुल : क्या डैड? आपने मेरी बात क्यों कह दी??

नेहा उठ के आगे बढ़ती है और अपने कमरे का दरवाज़ा खोलती है, और वो माँ डैड के कमरे में जाने hi वाली थी की उसके कानो में राहुल की आवाज़ पड़ती है और वो वही ृक्क जाती है,

राहुल भी माँ डैड के कमरे में hi था?

नेहा कान लगा के सुन्न ने लगती है तोह उससे कुछ ये सब सुनाई देता है,

राहुल : ......बात क्यों कह दी??

निशा : क्या मतलब??

राहुल : मतलब सही hi तोह कहा. पर ये मेरे जज़्बात है. काश नेहा पैदा hi नहीं होती...

नेहा की आँखें चौड़ी हो जाती है अपने भाई के मुँह से ऐसी बात सुन कर...

निशा (चिल्ला कर) : राहुल!! ये क्या बोले जा रहे हो तुम? होश में हो की नहीं?

राहुल : होश में तोह अब आया हु माँ! काश! सिर्फ में होता... नेहा नहीं. तोह कितना अच्छा होता न?

निशा (गुस्से में) : तुम्हे क्या हो गया है एकदम से? आज हो क्या रहा है घर में? किसी बकवास बातें कर रहे हो?

राहुल : हां न माँ! सिर्फ में होता... तोह कितना अच्छा रहता. मुझे कोई बहिन वगैरह नहीं चाहिए थी... पर आपने मुझे एक बहिन देदी. मुझे वह बिलकुल भी पसंद नहीं है माँ...

नेहा के शरीर में रोये खड़े हो जाते है अपने भाई के मुँह से ऐसी बातें सुन कर, उससे यकीन hi नहीं हो रहा था की राहुल उसके बारे में ऐसा कह रहा है.

तभी राहुल पलट कर दरवाज़ा खोल देता है और नेहा कड़ी हुई सबको दिख जाती है, उसकी आँखों में ासु थे, उसके परर काँप रहे थे, उसका बदन सिहर रहा था.

जैसे उस से उसका सब कुछ छीन लिया हो. नेहा को देख निशा के होश hi उड़द गए, साथ hi साथ राजेश के भी.

निशा : ने... नेहा???

नेहा (कापते हुए) : माँ?? ये सब क्या चल रहा है? B..bhai?? ये... ये तुम क्या कह रहे थे अभी? हां? मज़ाक कर रहे हो? ः!! B'day सरप्राइज देने के लिए... है न??

राहुल उससे घूरते हुए आगे बढ़ता है और उसकी आँखों में आँखें दाल के कहता है,

राहुल : ओह्ह्ह्ह! तोह तुमने सब सुन्न लिया?? मुझे लगा तुम नहीं सुन्न पाओगी. खर्र अब जब तुमने सुन्न hi लिया है तोह इससे अपने दिमाग में बइठल लो... ी हेट यू!!

नेहा का शरीर फिरसे काँप उठता है, जिस भाई से अभी वह कुछ देरर पहले प्यार करने की रे ले रही थी, वही भाई उससे कह रहा था की वो उससे हेट करता है, यहाँ तक की वो तोह चाहता hi नहीं था की उसकी बहिन पैदा होये.

नेहा : कह दो की ये झूठ है ... भाई... कह दो की ये झूठ है ... आपने अभी बहार कहा था मुझसे... की... यू लव में. यू लव में राइट? ये सब झूठ है...

राहुल एक कदम आगे बढ़ाता है तोह नेहा एक कदम पीछे चली जाती है,

निशा (चिल्ला कर) : रहलललल!!!

राहुल : नहीं! वो तोह सब नाटक था मेरी गुड़िया. काश तू पैदा hi नहीं हुई होती नेहा...

ी जस्ट हेट यू!!! या फिर तू... ः!!

राहुल फिर से एक कदम आगे बढ़ाता है, और नेहा फिरसे पीछे चली जाती है, वो पूरी तरह से घबराई हुई थी और सिहर रही थी.

पूरा चेहरा आसुओ से भीगा हुआ था. वो तोह यहाँ आवाज़ सुन्न के आयी थी, ये सोचके शायद उसके लिए सबने सरप्राइज प्रेपर किया होगा पर यहाँ तोह कुछ और hi सन था जिसकी उम्मीद शायद नेहा ने कभी नहीं की होगी.

राहुल (धीरे से कान में) : या फिर tu...swarg सिधार गयी होती??

नेहा जोरर से चिल्ला कर रोने लगती है और तभी निशा आगे बढ़ के राहुल को दो थप्पड़ रसीद देती है और चिल्ला के उससे बाहर निकाल देती है,

निशा नेहा को लेकर रूम में चली जाती है और राजेश राहुल को लेकर रूम में चला जाता है.

राजेश की आँखों में ासु थे. वो इसलिए क्युकी राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर लिया. राजेश राहुल की बोहत क़द्र करता था, और इसी वजह से वो अपने होश में आ गया. राहुल की आँखों में भी ासु थे.

राजेश : राहुल??

राहुल : डैड! मेने जितना हो सका उतना बचा लिया. अब आगे आपको संभालना है. दुबारा ऐसी हरकत कभी मत करना.

राजेश को अपनी गलती का एहसास फौरन हो जाता है और वो रट हुए राहुल को पकड़ते हुए खुद को कोसने लगता है.

राजेश : तुझे ये सब करने की क्या ज़रुरत थी बीटा?

राहुल : ज़रा सोचिये डैड! एक लड़की का बाप यदि ये कह दे की वो पैदा hi नहीं हुई होती तोह उससे केसा लगेगा? शुक्र मनाइये की में समय पे आ गया. नेहा ने शायद आपकी बात सुन्न ली थी और इसलिए मुझे ये कहना पड़ा की आप मेरी बात क्यों कह रहे हो? ताकि उससे यकीन हो जाए की आप नहीं बल्कि में चाहता हु की वो पैदा hi न हुई होती.

राजेश : .......

राहुल : माँ बाप का साथ रहेगा तोह गुड़िया सर्वाइव कर लेगी. मेने उससे जनम नहीं दिया है, मेरे कहने का उससे बुरा लगेगा बोहत पर धीरे धीरे वो मुझे भूल जाएगी. पर यदि एक बाप hi उससे ऐसा कहेगा तोह उसका असर कई हद्द तक ज़्यादा रहेगा. शायद वो सर्वाइव hi न कर पाए. अब आपको और माँ को कसम है. आपलोग उससे कुछ भी नहीं बताएंगे. अब ऐसा hi चलने देना. वो मुझे भूल जाएगी बूत एटलीस्ट उसकी शादी के बाद आप लोग तोह टच में रहोगे उसके. ये सही एंडिंग है.

राजेश कुछ भी बोलने लायक नहीं था वो बस अपने को hi दोष दे रहा था.

*फ्लैशबैक एंड्स*

निशा : और यही है सच्चाई...

निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.

निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 84

अब तक...

निशा : और यही है सच्चाई...


निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.

निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!

अब आगे...

निशा : ?? क्या?? क्या कहना है निकिता?

निकिता (क्रिस) : राहुल भैया के बारे में...

आरती : कहो बीटा... क्या कहना है?

निकिता : jii...mom!! बात ये है की...

*फ्लैशबैक*

बात आज से 7 साल पहले की है, जब ये सब घटना हुई और राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर पर ले लिया था. अगले दिन hi उसकी गुड़िया यानी की नेहा का b'day था.

"आज तोह नेहु का b'day है! कमीनी अभी तक इनविटेशन भी नहीं भेजी मुझे! पार्टी दे भी रही है या नहीं?" बैठे हुए निकिता नाश्ता कर रही थी सुबह और नेहा की b'day पार्टी के बारे में सोच रही थी.

अभी वो सोच hi रही थी की इतने में hi उसका कीपैड वाला फ़ोन बजने लगता है और वो फ़ोन उठाती है तोह नेहा का hi था.

निकिता : hello?

नेहा : हां!

निकिता : कमीनी कही की! सुबह तुझे विश करने के लिए फ़ोन लगायी तोह उठायी भी नहीं तू.

नेहा : हां वो सॉरी! लेट उठी!

निकिता : आज तोह जल्दी उठ जाती काम से काम मैडम? जन्मदिन है तुम्हारा!? हैप्पी बर्थडे तो माय बेस्टेस्ट फ्रेंड!

कहा से जल्दी उठ जाती नेहा? रात भर सो hi नहीं पायी बेचारी. रात में जो कुछ भी हुआ वो उसकी ज़िन्दगी का सबसे बुरा वक़्त था. इस से बड़ा सदमा नेहा को कभी नहीं लगा था. पूरी रात रोटी जो रही.

नेहा : हम्म! थैंक यू!

निकिता : ये तू इतनी उखड़ी उखड़ी तरह क्यों बात कर रही है? कुछ हुआ है क्या?

नेहा : नहीं तोह? क्या हुआ? मुझे क्या हुआ? सब सही तोह है!

निकिता : o...okay!

नेहा : शाम 7 बजे से पार्टी है होटल क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स में. आ जाना याद से.

निकिता : ओह्ह! Okay! चल फिर पार्टी में मिलते है.

*कॉल एंड्स*

राजेश ने जो इतनी बड़ी गलती की थी. उससे सुधारना तोह अब उसी का काम था. उसने सुबह hi नेहा के b'day के लिए शाम के लिए होटल में अर्रंगेमेन्ट्स के लिए कॉल कर दिया था.

नेहा तोह पूरी तरह से टूट चुकी थी. वो दिन भर अपने रूम में रोटी hi रही. खुद को समझाती पर फिर फिरसे रोने लगती. उसकी चाहत hi इतनी थी राहुल के लिए. कई बार तोह उसका मैं hi नहीं मानता था की राहुल ने ऐसा किया है.

शाम हुई, इनविटेशन के अकॉर्डिंग सभी इन्वितेद गेस्ट्स पहुँच गए वेन्यू पर और पार्टी शुरू हुई.

नेहा राहुल को फेस नहीं करना चाह रही थी. ये पल उसके लिए सबसे कठिन पल था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे. एक रात में कितना कुछ बदल गया. जिस भाई से वो इतना प्यार करती थी उसी भाई ने उसके साथ ऐसा किया.

निकिता जब अपनी फॅमिली के साथ पहुची तोह नेहा को सभी ने विश किया, गिफ्ट्स दिए, और सभी पार्टी एन्जॉय करने लगे.

"हैप्पी बर्थडे नेहा" एक आवाज़ आयी और निकिता ने जब देखा तोह उसकी बॉहे टेंशन के मारे सिकुड़ गयी.

ये लकी था. लकी एक फ्रेंड होने के नाते नेहा ने उससे इन्विते किया था. पर उसके आने से राहुल निकिता और राजेश तीनो hi खुश नहीं थे. ऐसा इसलिए क्युकी ये तीनो को इस बात का आभास था की ये लकी कुछ सही नहीं है.

राहुल तोह खासकर उसपे hi नज़र रख रहा था. उसके स्कूल के कुछ जूनियर्स हर्र वक़्त खबर देते रहते थे की लकी नेहा के साथ केसा बेहवे करता है और पीठ पीछे क्या क्या बातें करता है.

पार्टी चल रही थी और राहुल थोड़ी दूर खड़ा हुआ था. सभी ने ये बात नोटिस करि और राजेश और निशा से पूछा भी इस बारे में तोह दोनों ने यही जवाब दिया की दोनों के बीच थोड़ा झगड़ा हो गया है थोड़े दिन में सुलझ जाएगा.

बच्चो के झगडे के बारे में सोच कर लोगो ने ज़्यादा प्रश्न नहीं किया क्युकी सिब्लिंग्स में झगडे तोह होते hi रहते है. कोई नयी बात नहीं थी.

राहुल दूर खड़ा स्नैक्स खा रहा था की उससे दिखाई दिया की लकी के कान में एक लड़का कुछ बोलता है और लकी एकदम से खुश हो जाता है.

उसके बाद वही लड़का बाहर निकलता है और उसके पीछे पीछे राहुल उसका छुप कर पीछे करने लगता है.

लड़का निकल के कार में से एक केक का बॉक्स निकालता है और फिर जेब में से कुछ पुड़िया निकालता है और उस केक के बॉक्स को खोलकर केक पर छिड़कने लगता है.

अभी वो ये काम इत्मीनान से कर रहा होता है की एकदम से उसकी गर्दन पर एक मज़बूत हाथ की पकड़ बांधती है. लड़का घबरा के पीछे देखता है और राहुल के देख के उसके होश उड़द जाते है.

राहुल : क्यों बी? क्या कर रहा है यहाँ?

लड़का (घबरा के) : wo..wo केक ले जा रहा था. नेहा के लिए. लकी भाई ने मंगवाया है.

राहुल : अच्छा? और ये केक में क्या मिलाया है?

लड़का (डर के) : wo...wo... वो कुछ nahi...kuch भी तोह नहीं!

राहुल बिना कुछ बोले उसको साइड में घसीटता है और उससे दो घुसे मुँह पे hi रसीद के जड़ देता है. बेचारे लड़के को गांड hi फट जाती है. दो घुसे में hi उसकी हालत खराब हो जाती है और वो गिड़गिड़ाने लगता है.

राहुल : अब बोल! सच सच!

लड़का : wo...wo... ये कोई पाउडर है. लकी भाई ने बोलै था केक में मिला के लाना.

राहुल : क्यों?

लड़का : वो ये केक सिर्फ नेहा के लिए है. जब वो ये केक खाएगी तोह उससे कुछ कुछ होने लगेगा.

राहुल : क्या?

लड़का : मुझे नहीं पता. लकी भाई ने बोलै था की नेहा को कुछ कुछ होने लगेगा और फिर लकी भाई नेहा को किश करेंगे चुपके में. तोह नेहा ख़ुशी ख़ुशी करवाएगी.

ये बात सुनते hi राहुल इतना आग बबूला हो गया की उसने 2 घुसे और जड़ दिए उस लड़के को.

राहुल ने अंदाजा लगाया की ये पाउडर और कुछ नहीं एक अफ्रोदिसिअस टाइप का hi होगा. लकी को किसी ने बताया होगा की इससे मिला देना और लड़की को ज़्यादा होश नहीं रहेगा. और लड़की की सेक्स करने की िक्षा बढ़ जाएगी.

राहुल उस लड़के को पीट कर सीधे घर भगा दिया और जब वो अंदर आया तोह पार्टी ज़ोरो शोरो से चल रही थी.

निकिता : राहुल भैया! आप दूर दूर क्यों भाग रहे हो? अरे आज तोह नेहु का b'day है. जाइये उससे गिफ्ट दीजिये.

राहुल : हँ? Umm...haa! देता हु...

राहुल ने वो केक वाला बॉक्स लिया और वाशरूम में डस्टबिन में फेकने hi जा रहा था. वाशरूम में पर लकी पहले से hi था और जैसे hi उसने देखा की राहुल उसका केक वाला बॉक्स फेकने वाला है, लकी ने दौड़ के उससे छिना लिया.

लकी भागते हुए बाहर जाने लगा. उससे पता था राहुल और नेहा के बीच कुछ झगड़ा हुआ है और नेहा अभी राहुल का सपोर्ट नहीं करेगी.

लकी वाशरूम से बाहर निकल नेहा को आवाज़ दिया, वो किसी भी हालत में नेहा को ये केक खिलाना चाहता था पर जैसे hi नेहा ने उसकी तरफ देखा और राहुल ने पीछे से उससे एक ज़ोरदार ठोकर मारी और केक हवा में उड़के सीधे ज़मीन पर ठप्प से गिरा.

ये वह मौजूद लोगो में लगभग सभी ने देखा.

नेहा जो की सब देख रही थी उसकी आँखें गुस्से से एकदम लाल हो गयी. ऊपर से लकी ने और आग में घी डालने का काम कर दिया.

लकी : नेहा तुम्हारा भाई केसा है? में तुम्हारे लिए केक लाया था और इसने मुझे धक्का देके गिरा दिया. सारा केक बर्बाद कर दिया.

राहुल (नेहा को देखते हुए) : wo...usme...

नेहा (जोरर से) : शुत्टट उपपपप!!!

नेहा के इतनी तेज़्ज़ चिल्लाने से सभी शांत हो गए. सब उससे hi देख रहे थे. निकिता बोहत हैरान थी. ये नेहा को क्या हो गया आज?

राहुल : ी...

नेहा (चिल्ला कर) : ी साइड शुत्टट ुप्प्प! गेट आउट!! गेत्त्त ोुत्तत्त!!!

राजेश : ने...

राहुल : it's okay डैड!

राजर्ष खुद के ऊपर गुस्सा करते हुए डाट पीस रहा था, मुट्ठी कस रहा था. सब उसकी गलती के कारण हो रहा था.

राहुल बाहर जाते जाते लकी को कान में बाहर मिलने के लिए कहता है और लकी के साथ उसके 3 दोस्त थे इसलिए वो बिना दर्रे 3 दोस्तों के लेकर बाहर चला गया. इस वक़्त राहुल को मार्टिकल आर्ट्स नहीं आता था. तोह ज़ाहिर सी बात थी की क्या होने वाला था. हालांकि राहुल 3 साल बड़ा था इन् सब से पर फिर भी 4 लौंडो को एक साथ संभालना थोड़ा मुश्किल काम था उस वक़्त राहुल के लिए.

निकिता : (कुछ चल रहा है नेहा की फॅमिली में. बात कुछ और hi है. नेहा कभी भी राहुल भैया से ऐसे बात नहीं करती. मुझे जाके देखना चाहिए)

कुछ देरर के बाद जब निकिता बाहर जाकर देखती है तोह स्तब्ध हो जाती है. रोड के साइड में लकी और उसके दोस्त अपने अपने पेट पकड़ के कराह रहे थे और राहुल खड़ा हुआ उन्हें देख रहा था. पर जब राहुल पलटा तोह निकिता और हैरान हो गयी.

उसके सर से खून निकल रहा था, और कई जगह चोट भी आयी हुई थी. लगता है किसी ने पत्थर से वार किया था.

निकिता : राहुल भैया??

निकिता सब देख चुकी थी, उस से छिपाने का कोई मतलब नहीं था. इसलिए राहुल जल्दी से उससे सब कुछ बताता है की लकी क्या करने वाला था और राहुल ने उससे क्यों मारा. पर बदले में राहुल ने एक वचन ले लिया निकिता से.

वो था नेहा को कभी भी ये बात नहीं बताना.

और राहुल वह से पता नहीं कहा चल दिया पैदल hi...

निकिता सिर्फ उसकी पीठ देखती रही जो धीरे धीरे रात के अँधेरे में गायब हो गयी.

*फ्लैशबैक एंड्स*

जब निकिता ने बोलना बंद किया तोह वो फुट फुट कर रोने लगी. उसके साथ hi साड़ी लेडीज वह पर बैठी रोने लगी.

तनीषा (रट हुए) : एक मिनट... Omg!!

निशा (रट हुए) : क्या हुआ बीटा??

तनीषा : इसका मतलब... Omg!!!

तनीषा को अब कुछ ऐसा पता चलता है जिससे जानकार वो और रोने लगती है.

निशा : बीटा क्या हुआ बोल न!

तनीषा : मतलब मेरी मुलाक़ात राहुल से उसी दिन हुई thi...mene उस से पूछा था की इतनी चोट कैसे आयी? जब वो रात में मुझे खाली सड़क पर मिला था. उसके सर से काफी खून बह रहा था. तोह उसने जवाब दिया था की ऐसे hi लड़ाई में फस्स गया था... मतलब... वो जैसा की निकिता ने बताया... वो उस वक़्त वह से लड़के निकल आया था और फिर इत्तेफ़ाक़ से मेरी मुलाक़ात उसी वक़्त उस से हुई.

अभी वो सभी सुबक hi रहे थे की इतने में कुछ गिरने की आवाज़ आयी, ऐसा लगा कुछ टूटा है.

दरवाज़े के पास कड़ी अंशु ने अटका हुआ दरवाज़ा जब खोला तोह नज़ारा देख के सबके होश hi उड़द गए.

वंशु : (ओह्ह्ह शीट्ट्ट्ट!!)

नीचे एक क्राकरी डिनर सेट का बॉक्स पड़ा हुआ था जो की अंदर से लगता है टूट चूका था और उसके ठीक पीछे एक व्यक्ति खड़ा हुआ था.

वो कोई और नहीं नेहा hi थी. आँखे फाड़े वो बस सभी को देख रही थी. उसका शरीर कांप रहा था.

निशा नेहा को देख के इतना हैरान हो गयी और डर भी रही थी की अब नेहा कैसे बेहवे करेगी. पर नेहा तोह बॉक्स लेने के बाद अपनी फ्रेंड के यहाँ जाने वाली थी न? फिर इतनी जल्दी कैसे आ गयी?

जब निशा की नज़र दरवाज़े पर कड़ी अंशु पर गयी तोह अंशु के चेहरे पर एक अजीब मुस्कान थी और अंशु ने अपनी नज़रे फेरर ली. निशा को समझने में देरर न लगी की अंशु ने hi कुछ किया है. बस कुछ भी गड़बड़ न होये यही निशा उपरवाले से दुआ कर रही थी.

एक कदम, दो कदम... नेहा धीरे धीरे सभी को आँखे फाड़े देखते हुए आगे बढ़ती है.

वो निशा के पास पहुचती है...

नेहा (कापते हुए होंठो से) : k...kya था ये माँ??? ये सब? Y..ye.. मज़ाक है n..na? है न? हां??

निशा रट हुए अपनी नज़रे झुका लेती है.

नेहा और डर जाती है, वो बगल में कड़ी तानिया के पास जाती है.

नेहा (कांपते हुए) : d...diii.. y..yee देखो न माँ ko...haa? केसा मज़ाक कर रही! आप सब मज़ाक कर रहे हो न? कहते क्यों नहीं!? दी! आप बोलिये न कुछ!

तानिया : (अंशु ने कहा था की बाकी काम मेरा है! लुक्स लिखे मेरी टर्न आ गयी है!)

तानिया : नहीं नेहा! यहाँ कोई मज़ाक नहीं चल रहा. तुमने जो सुना है! वही सच है! एकदम सच!

सभी अपनी अपनी सीट से खड़े हो गए ताकि ये गंभीर माहौल बिगड़े तोह वो संभाल सके.

नेहा को जैसे यकीन hi नहीं हो रहा था. आखिर वो हर्र वक़्त गलत कैसे रह सकती है? राहुल उससे हेट करता है इस बात से तोह वो सूरे थी पर फिरसे वो गलत कैसे साबित हो गयी? नहीं! ये ज़रूर कोई ढोंग है!

नेहा (जोरर से) आप सब झूठ बोल रहे है... सब झूठ है!! सब झूठ! Wo...wo...mujhe मारना चाहता था! वो झूठा था! दिखावटी था! वो एक बुराई से भरा हुआ इंसान है! He's ा लिएर्!!!

तानिया अपनी बॉहे सिकोड़े बस नेहा को hi देख रही थी. उसने एक झलक अंशु को देखा तोह अंशु ने सर हिला कर उससे ok का इशारा किया यानी की तानिया अगले स्टेप के लिए आगे बढे.

तानिया ने गहरी सास ली और फिर कहना स्टार्ट किया.

तानिया : नहीं नेहा! तुमने जो कुछ भी सुना है!

वो सब सच है!

नेहा (रट हुए) : नाहीई!! आप झूठ बोल रही हो! सब झूठ बोल रहे है!

तानिया (गहरी सास लेते हुए) : नेहा...

नेहा (जोरर से) : शुत्टट ुप्प्प!!! सब झूठ है! सब दिखावा है...

तानिया: उसने सब कुछ तुम्हारे लिए किया! तुम्हे सुन्न न होगा मेरी बात! तुम चाहो या न चाहो! बुआ, फूफा जी को कसम थी की तुम्हे ये सच कभी न बताया जाए.

नेहा : झूठ... झूठ!! सब शांत हो जाइये...

नेहा अपना सर पकडे रट हुए सब कुछ सुन्न के स्तब्ध थी! पर शायद अभी उससे पूरी तरह से यकीन दिलाने का काम तानिया के ऊपर था.

नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!

"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"

नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.

पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!

तानिया : तोह में शुरू करती हु...

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आज के लिए इतना hi गाइस!!


धन्यवाद्!!
 
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