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उसे पता चल जायगा की तू कुमारी थी, ज़बी, का जो डर था वह अब्ब निकल जाता है, इधर अब मैं, उसे संत होते हुए एक जोर का एक झटका देता हु जिसकी वजह से मेरा लुंड सारे बंधन को तोड़ते हुए ज़बी की मज़हबी छूट को चीरते हुए उसके आखरी छोर पर जा टकराता है, मेरे ऐसे झटके देने से इस बार फिर से ज़बी अकड़ जाती है और उसकी गांड बिस्तर से थोड़ी उठ सी जाती है और आंखे बहार आ जाती है और जोर से चीखती है आईईए अम्मीईई मर्डर गई. लेकिन इस बार वह बेहोश नहीं होती है, इधर राधे अब देर न करते हुए जोर जोर से झटके देने लगता है बिना परवाह किये की ज़बी को कितना दर्द हो रहा होगा, वही राधे के इतने तेज झटके से किंग साइज बीएड भी छुई.. छुई.. करने लगता है और उस बैडरूम में उन् दोनों के जांघ पास में टकराने से थापा.. ठप्प.. थापा..
ठप्प.. थापा.. ठप्प.. थापा.. ठप्प.. थापा.. थापा.. थापा.. ठप्प.. की ऐसे आवाज़ों को सुन के राधे और ज्यादा एक्सीटेंड हो जाता है और अपनी रफ़्तार को दूंगी कर के छोड़ने लगता है, वही ज़बी, राधे के जोर जोर से झटके अपनी छूट के अंदर लेते हुए, आईईए.. अम्मीी.. मर गई? ओह्ह्ह.. साहेब? धीरी.. आह्हः.. मर गयी धीरे आह्हः.. साहेब थोड़ा धीरी नहीं तो माय मर जाउंगी ऊम्मम आठ सशह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ लेकिन राधे तो उसकी कुछ सुनाने के मोड़ में बिलकुल भी नहीं था, क्युकी राधे कब से सडके करते करते उसका लुंड खड़ा था जिसकी वजह से उसे दर्द सहना पड़ा था अब उसे संत करना उसका पहला फर्ज था, इधर मेरा 12 इंच लुम्बा और 5 मोटा लुंड किसी धरिल मशीन की तरह ज़बी की छूट में गड्ढा किये जा रहा था, वही ज़बी की छूट जितनी अंदर से गरम थी उतनी
hi तित थी, वही राधे आज पहली बार किसी ,. की छूट छोड़ रहा था, जिसकी वजह से उसका लुंड में कुछ ज्यादा hi excite-ment भरा पड़ा था, इस लिए ज्यादा देर तक माय खुद को टिक नहीं पाटा हूँ और करीब 30 मिनट्स की ताबड़ तोड़ चुदाई के बाद आखिरका वह वक़्त आ गया जिसकी कल्पना राधे ने भी नहीं की थी, लेकिन राधे अभी ज़बी को और छोड़ना चाहता था इस लिए वह ज़बी को छोड़ते छोड़ते अचानक रुक जाता है और उसके ऊपर से उठ कर लुंड को उसकी बुर से निकल लेता है, जिसकी वजह से उसका पानी बहार आते आते जैसे रुक सा जाता है, उधर जैसे hi राधे ने अपना लुंड को निकला वैसे hi ज़बी जो दर्द झेल रही थी उसकी आंखे खुल जाती है और आंखे जैसे hi खोली वैसे hi राधे का काला सरीर और चेहरे हस्ते हुए उसे नज़र आता है, यह देखते hi ज़बी
शर्मा कर फिर से पलके बंद कर लेती है, इधर राधे, उसको ऐसा शर्माता देख के फिर से उसके ऊपर लेट जाता है लेकिन लुंड को छूट में नहीं घुसता, वही लेटने के बाद राधे अपने दोनों हांथो से उसके पतली कमर से लेकर उसके हर एक जिस्म को सहलाते हुए ज़बी मेरी जान क्या हुआ तू ऐसे क्यों अपनी आंखे बंद कर ली क्या माय इतना बुरा दीखता हूँ जो मुझे तू एक पल भी नहीं देख सकती यह सुनते hi ज़बी, तुरंत अपनी आंखे खोल कर राधे की आँखों में आंखे दाल कर.. यह आप क्या बोल रहे है माय ऐसा क्यों सोचूंगी भला, राधे, फिर तूने ऐसे अचानक आंखे क्यों बंद कर ली? ज़बी, वह मुझे शर्म आ रही थी, मैं, तू इतना क्यों शर्मा रही है अब तो तेरा हर एक अंग को देख लिया हूँ, अब तू मेरी दिल की मलिका और मेरी जान है, अब चल अगर दर्द नहीं हो रहा है तेरी छूट
तो अपने यार का लुंड को पकड़ के छूट के मुहाने पर रख अभी मेरे लौड़े की आग संत नहीं हुई है और सायद तेरे छूट की आग भी ठंडी नहीं हुई है, ज़बी, राधे की गन्दी बाते सुन कर फिर से शरमाते हुए, आप फिर से सुरु कर दिए गन्दी बाते, वैसे अब बहुत हुआ, अब माय आपका इतना बड़ा और मोटा झेल नहीं पाऊँगी साहेब, मैं, क्यों इतनी देर से तो झेल तो रही थी, तब कुछ नहीं हुआ तो, अब क्या होगा थोड़ा और देर छोड़ने में?, वैसे तेरी पिया मैडम को जब पहली बार छोड़ा था तो वह मेरा लुंड पूरा नहीं ले पाई थी, लेकिन तू पहली लड़की है जो मेरा लुंड पहली बार में hi अपनी आखरी छोर तक ली हो, ज़बी, अपनी छूट की टैरिफ सुन कर गड गड हो जाती है, लेकिन कहती कुछ नहीं है इधर ज़बी को कुछ बोलता न देख के मैं, क्या हुआ अब तुझे नहीं छुड़वाना तो रहने दे ये कह के माय उसके ऊपर से उठने लगा की तभी..
ठप्प.. थापा.. ठप्प.. थापा.. ठप्प.. थापा.. थापा.. थापा.. ठप्प.. की ऐसे आवाज़ों को सुन के राधे और ज्यादा एक्सीटेंड हो जाता है और अपनी रफ़्तार को दूंगी कर के छोड़ने लगता है, वही ज़बी, राधे के जोर जोर से झटके अपनी छूट के अंदर लेते हुए, आईईए.. अम्मीी.. मर गई? ओह्ह्ह.. साहेब? धीरी.. आह्हः.. मर गयी धीरे आह्हः.. साहेब थोड़ा धीरी नहीं तो माय मर जाउंगी ऊम्मम आठ सशह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ लेकिन राधे तो उसकी कुछ सुनाने के मोड़ में बिलकुल भी नहीं था, क्युकी राधे कब से सडके करते करते उसका लुंड खड़ा था जिसकी वजह से उसे दर्द सहना पड़ा था अब उसे संत करना उसका पहला फर्ज था, इधर मेरा 12 इंच लुम्बा और 5 मोटा लुंड किसी धरिल मशीन की तरह ज़बी की छूट में गड्ढा किये जा रहा था, वही ज़बी की छूट जितनी अंदर से गरम थी उतनी
hi तित थी, वही राधे आज पहली बार किसी ,. की छूट छोड़ रहा था, जिसकी वजह से उसका लुंड में कुछ ज्यादा hi excite-ment भरा पड़ा था, इस लिए ज्यादा देर तक माय खुद को टिक नहीं पाटा हूँ और करीब 30 मिनट्स की ताबड़ तोड़ चुदाई के बाद आखिरका वह वक़्त आ गया जिसकी कल्पना राधे ने भी नहीं की थी, लेकिन राधे अभी ज़बी को और छोड़ना चाहता था इस लिए वह ज़बी को छोड़ते छोड़ते अचानक रुक जाता है और उसके ऊपर से उठ कर लुंड को उसकी बुर से निकल लेता है, जिसकी वजह से उसका पानी बहार आते आते जैसे रुक सा जाता है, उधर जैसे hi राधे ने अपना लुंड को निकला वैसे hi ज़बी जो दर्द झेल रही थी उसकी आंखे खुल जाती है और आंखे जैसे hi खोली वैसे hi राधे का काला सरीर और चेहरे हस्ते हुए उसे नज़र आता है, यह देखते hi ज़बी
शर्मा कर फिर से पलके बंद कर लेती है, इधर राधे, उसको ऐसा शर्माता देख के फिर से उसके ऊपर लेट जाता है लेकिन लुंड को छूट में नहीं घुसता, वही लेटने के बाद राधे अपने दोनों हांथो से उसके पतली कमर से लेकर उसके हर एक जिस्म को सहलाते हुए ज़बी मेरी जान क्या हुआ तू ऐसे क्यों अपनी आंखे बंद कर ली क्या माय इतना बुरा दीखता हूँ जो मुझे तू एक पल भी नहीं देख सकती यह सुनते hi ज़बी, तुरंत अपनी आंखे खोल कर राधे की आँखों में आंखे दाल कर.. यह आप क्या बोल रहे है माय ऐसा क्यों सोचूंगी भला, राधे, फिर तूने ऐसे अचानक आंखे क्यों बंद कर ली? ज़बी, वह मुझे शर्म आ रही थी, मैं, तू इतना क्यों शर्मा रही है अब तो तेरा हर एक अंग को देख लिया हूँ, अब तू मेरी दिल की मलिका और मेरी जान है, अब चल अगर दर्द नहीं हो रहा है तेरी छूट
तो अपने यार का लुंड को पकड़ के छूट के मुहाने पर रख अभी मेरे लौड़े की आग संत नहीं हुई है और सायद तेरे छूट की आग भी ठंडी नहीं हुई है, ज़बी, राधे की गन्दी बाते सुन कर फिर से शरमाते हुए, आप फिर से सुरु कर दिए गन्दी बाते, वैसे अब बहुत हुआ, अब माय आपका इतना बड़ा और मोटा झेल नहीं पाऊँगी साहेब, मैं, क्यों इतनी देर से तो झेल तो रही थी, तब कुछ नहीं हुआ तो, अब क्या होगा थोड़ा और देर छोड़ने में?, वैसे तेरी पिया मैडम को जब पहली बार छोड़ा था तो वह मेरा लुंड पूरा नहीं ले पाई थी, लेकिन तू पहली लड़की है जो मेरा लुंड पहली बार में hi अपनी आखरी छोर तक ली हो, ज़बी, अपनी छूट की टैरिफ सुन कर गड गड हो जाती है, लेकिन कहती कुछ नहीं है इधर ज़बी को कुछ बोलता न देख के मैं, क्या हुआ अब तुझे नहीं छुड़वाना तो रहने दे ये कह के माय उसके ऊपर से उठने लगा की तभी..