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Episode 24ा,
इधर राधे, अब तेल की कटोरी को साइड मेज पर रख के ज़बी की कमीज को ऊपर जैसे जैसे करने लगा?? वैसे वैसे ज़बी के बदन के सारे रोंगटे खड़े होने लगे क्युकी राधे की ऊँगली उसके नग्गे बदन को छू रही थी, सायद आज पहली बार ज़बी के बदन को कोई छू रहा था जिसकी वजह से उसके बदन में एक्ससिटेमेंट पल पल बढ़ रही थी, मन में अजीब अजीब से ख्याल आने लगते है, दिल में कुछ कुछ होने लगते है होंठ सूखने लगते है, इधर राधे, जैसे कमीज को उसके चुके तक पहुँचता है, वैसे hi ज़बी अचानक अपने कमीज को पकड़ लेती है, क्युकी ज़बी की कमीज और ऊपर होती तो उसकी बिना ब्रा के चुके (बूब्स) एक दम नग्गे हो जाते, इस लिए ज़बी ने अपनी कमीज पकड़ ली, इधर राधे, भी जबरदस्ती नहीं किया और ऊपर उठाने को, वही राधे, अब सलवार निचे करने के लिए उसकी पतली कमर जो करीब 24 से 26 इंच की थी वह अपने खुरदरे
काले और बड़े बड़े हांथो की मोती ऊँगली को लगा के पहले थोड़ा सहलाया उसके बाद, ज़बी बेटी, मेरे हाँथ तुझे अहसास हो तो रहे है की नहीं, ज़बी, धीरे आवाज़ में है साहेब, इसके आगे कुछ नहीं बोलती, इधर मैं, अब सलवार निचे कर रहा हूँ, इतना कह के माय उसकी इलास्टिक वाली जगह पर अपनी ऊँगली घुसा देता हूँ और जैसे hi मेरे उँगलियों का अहसास उसे हुआ वैसे hi ज़बी, अपनी गांड हलके से उठती है उसके ऐसा करते देख के अरे ज़बी बेटी अभी तो तेरी कमर में थोड़ा मूवमेंट हुआ, लगता है ज्यादा छोट नहीं आई है? बस थोड़ी मालिश करना होगा उसके बाद देखना तू दौड़ने लगेगी, ये कह के राधे सलवार को निचे करने लगा आहिस्ते आहिस्ते से, उधर ज़बी, के बदन में कुछ अलग hi एक्ससिटेमेंट अब पैदा हो रही थी जो आज से पहले उसने कभी अहसास नहीं किया था, क्यों की ज़बी कुमारी लड़की थी उसे बदन का इसरा समझ नहीं आ रहा था, की
उसका बदन एक मर्द और एक लम्बे मोठे ताजे लुंड की मांग कर रहा है जो उसके पाक साफ़ सेक्सी बदन को ठंडा कर सके , इधर राधे, सलवार को उसकी गांड के दोनों भागो के बिच की लकीर के निचे जैसे hi करने वाला होता है वैसे hi ज़बी, झट से अपने हांथो की मदत से अपनी सलवार को कास के पकड़ लेती है उसे अहसास हो गया था की अगर सलवार और निचे हुई तो उसकी गांड पूरी तरह से नग्गी हो सकती है, इधर, राधे, ज़बी को ऐसे अचानक अपने सलवार को पकड़ने से वह रुक जाता है और बिना कुछ बोले तेल की कटोरी उठा के एक बार उसके सलवार जो गांड को दोनों लकीर जो आधा नग्गी हो चुकी थी उस पर थोड़ा गरम तेल गिरा देता है और राधे के ऐसा करते hi ज़बी, साहेब थोड़ा और निचे वह दर्द है, मैं, बेटी तेरी सलवार गन्दी हो जायगी अगर और निचे तेल गिराया तो, ज़बी, कुछ सोच कर अपनी सलवार खुद hi थोड़ी और निचे
करते हुए अब ठीक है न साहेब, मैं, मन में (साली ,. तू तो बहुत hi नादाँ है? एक सीकरी के सामने खुद अपना सीकर करवाना चाहती है) यह सोचने के बाद, नहीं नहीं बेटी अगर दर्द को निकलना है तो सलवार को अपनी गांड से पूरी तरह nikal-na होगा नहीं तो सलवार में पूरा तेल लग जायगा, मेरे मुँह से गांड शब्द सुन कर ज़बी के बदन में एक अजीब एक्ससिटेमेंट का संचार सुरु हो जाता है, लेकिन कहती कुछ नहीं क्युकी आज से पहले ज़बी से कोई ऐसी गन्दी बात नहीं की थी, भले hi ज़बी घर में काम करती थी लेकिन जिस घर में वह पहले काम करती थी? वह वह अकेली नहीं करती थी, वह अपने अम्मी के साथ काम करती थी, लेकिन जब से उसकी अम्मी बीमार हुई? तब से उसकी अम्मी घर पर hi रहती थी, इस लिए वह अपने बेटी को किसी के घर पर अकेले कही काम नहीं करने जाने देती, लेकिन गरीबी के कारन आखिर कार उसकी अम्मी ने अनुमति दे दी
अकेले घर में काम करने को, लेकिन उसकी अम्मी ने maid's एजेंसी में साफ़ बोल दी थी की जो शादी सुदा घर हो वही भेजना उसके बेटी को, क्युकी उसकी अम्मी को यह डर था की कही कोई आदमी उसके बेटी को नापाक (छोड़) न कर दे, इधर ज़बी, शर्म से अपनी सलवार पकडे रहती है, वही मैं, अब अपने झांसे में लेने के लिए, बेटी क्या हुआ? तू कुछ बोली नहीं, क्या मैं अब तेरी गांड नग्गी कर सकता हूँ? नहीं तो तेरी सलवार गन्दी हो जायगी वैसे भी अब मेरे से क्या शर्माना माय तो अब 40 साल का हो चूका हूँ, तू तो मेरी बेटी या छोटी बहन क सामान है, इस लिए तू डर मत मेरे से मेरी बात सुन कर ज़बी का डर और शर्म थोड़ा काम तो होता है, लेकिन पहली बार किसी मर्द के सामने अपना न्नग्गा बदन कर देना उसके लिए बहुत बड़ी बात थी, वैसे भी इन मज़हबी ,. लोग अपना चेहरा तक जल्दी से किसी को नहीं दिखती तो नग्गा बदन किसी के सामने परोश्ना
बहुत बड़ी बात होती है, उधर किसी गैर मर्द के मुँह से गंदे शब्द सुनना ज़बी के मन में अंदर hi अंदर एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट भर रहा था, इधर राधे अपने काम में लगा हुआ था और जहा तेल गिराया था वह अपने बड़े और खुरदरे हाँथ रख के हलके हलके से अब चलने लगता है और सहलाने भी लगता हूँ जिससे ज़बी जैसी मजहबी ,. को वो गरम भी कर सके (राधे पका हुआ मर्द था उसने अब तक कई औरतो के साथ अपनी मीठी मीठी बातो में फसा के सडके किया था और वह अपने मकसद में कामयाब हो कर बहुतो को पेल चूका था तो फिर ये मज़हबी ,. उसके लिए किस खेत की मूली थी), उधर राधे, के हांथो की हलकी चुभन और सहलाने से ज़बी की हलकी सिसकारियां निकल जाती है आह्हः.. अम्मीईई की और सायद राधे की हलकी हांथो की चुभन, अछि लगती है, इस लिए बिना कोई जवाब दिए वह अपने सलवार पर से हाँथ को हटा लेती है,
इधर राधे, अब तेल की कटोरी को साइड मेज पर रख के ज़बी की कमीज को ऊपर जैसे जैसे करने लगा?? वैसे वैसे ज़बी के बदन के सारे रोंगटे खड़े होने लगे क्युकी राधे की ऊँगली उसके नग्गे बदन को छू रही थी, सायद आज पहली बार ज़बी के बदन को कोई छू रहा था जिसकी वजह से उसके बदन में एक्ससिटेमेंट पल पल बढ़ रही थी, मन में अजीब अजीब से ख्याल आने लगते है, दिल में कुछ कुछ होने लगते है होंठ सूखने लगते है, इधर राधे, जैसे कमीज को उसके चुके तक पहुँचता है, वैसे hi ज़बी अचानक अपने कमीज को पकड़ लेती है, क्युकी ज़बी की कमीज और ऊपर होती तो उसकी बिना ब्रा के चुके (बूब्स) एक दम नग्गे हो जाते, इस लिए ज़बी ने अपनी कमीज पकड़ ली, इधर राधे, भी जबरदस्ती नहीं किया और ऊपर उठाने को, वही राधे, अब सलवार निचे करने के लिए उसकी पतली कमर जो करीब 24 से 26 इंच की थी वह अपने खुरदरे
काले और बड़े बड़े हांथो की मोती ऊँगली को लगा के पहले थोड़ा सहलाया उसके बाद, ज़बी बेटी, मेरे हाँथ तुझे अहसास हो तो रहे है की नहीं, ज़बी, धीरे आवाज़ में है साहेब, इसके आगे कुछ नहीं बोलती, इधर मैं, अब सलवार निचे कर रहा हूँ, इतना कह के माय उसकी इलास्टिक वाली जगह पर अपनी ऊँगली घुसा देता हूँ और जैसे hi मेरे उँगलियों का अहसास उसे हुआ वैसे hi ज़बी, अपनी गांड हलके से उठती है उसके ऐसा करते देख के अरे ज़बी बेटी अभी तो तेरी कमर में थोड़ा मूवमेंट हुआ, लगता है ज्यादा छोट नहीं आई है? बस थोड़ी मालिश करना होगा उसके बाद देखना तू दौड़ने लगेगी, ये कह के राधे सलवार को निचे करने लगा आहिस्ते आहिस्ते से, उधर ज़बी, के बदन में कुछ अलग hi एक्ससिटेमेंट अब पैदा हो रही थी जो आज से पहले उसने कभी अहसास नहीं किया था, क्यों की ज़बी कुमारी लड़की थी उसे बदन का इसरा समझ नहीं आ रहा था, की
उसका बदन एक मर्द और एक लम्बे मोठे ताजे लुंड की मांग कर रहा है जो उसके पाक साफ़ सेक्सी बदन को ठंडा कर सके , इधर राधे, सलवार को उसकी गांड के दोनों भागो के बिच की लकीर के निचे जैसे hi करने वाला होता है वैसे hi ज़बी, झट से अपने हांथो की मदत से अपनी सलवार को कास के पकड़ लेती है उसे अहसास हो गया था की अगर सलवार और निचे हुई तो उसकी गांड पूरी तरह से नग्गी हो सकती है, इधर, राधे, ज़बी को ऐसे अचानक अपने सलवार को पकड़ने से वह रुक जाता है और बिना कुछ बोले तेल की कटोरी उठा के एक बार उसके सलवार जो गांड को दोनों लकीर जो आधा नग्गी हो चुकी थी उस पर थोड़ा गरम तेल गिरा देता है और राधे के ऐसा करते hi ज़बी, साहेब थोड़ा और निचे वह दर्द है, मैं, बेटी तेरी सलवार गन्दी हो जायगी अगर और निचे तेल गिराया तो, ज़बी, कुछ सोच कर अपनी सलवार खुद hi थोड़ी और निचे
करते हुए अब ठीक है न साहेब, मैं, मन में (साली ,. तू तो बहुत hi नादाँ है? एक सीकरी के सामने खुद अपना सीकर करवाना चाहती है) यह सोचने के बाद, नहीं नहीं बेटी अगर दर्द को निकलना है तो सलवार को अपनी गांड से पूरी तरह nikal-na होगा नहीं तो सलवार में पूरा तेल लग जायगा, मेरे मुँह से गांड शब्द सुन कर ज़बी के बदन में एक अजीब एक्ससिटेमेंट का संचार सुरु हो जाता है, लेकिन कहती कुछ नहीं क्युकी आज से पहले ज़बी से कोई ऐसी गन्दी बात नहीं की थी, भले hi ज़बी घर में काम करती थी लेकिन जिस घर में वह पहले काम करती थी? वह वह अकेली नहीं करती थी, वह अपने अम्मी के साथ काम करती थी, लेकिन जब से उसकी अम्मी बीमार हुई? तब से उसकी अम्मी घर पर hi रहती थी, इस लिए वह अपने बेटी को किसी के घर पर अकेले कही काम नहीं करने जाने देती, लेकिन गरीबी के कारन आखिर कार उसकी अम्मी ने अनुमति दे दी
अकेले घर में काम करने को, लेकिन उसकी अम्मी ने maid's एजेंसी में साफ़ बोल दी थी की जो शादी सुदा घर हो वही भेजना उसके बेटी को, क्युकी उसकी अम्मी को यह डर था की कही कोई आदमी उसके बेटी को नापाक (छोड़) न कर दे, इधर ज़बी, शर्म से अपनी सलवार पकडे रहती है, वही मैं, अब अपने झांसे में लेने के लिए, बेटी क्या हुआ? तू कुछ बोली नहीं, क्या मैं अब तेरी गांड नग्गी कर सकता हूँ? नहीं तो तेरी सलवार गन्दी हो जायगी वैसे भी अब मेरे से क्या शर्माना माय तो अब 40 साल का हो चूका हूँ, तू तो मेरी बेटी या छोटी बहन क सामान है, इस लिए तू डर मत मेरे से मेरी बात सुन कर ज़बी का डर और शर्म थोड़ा काम तो होता है, लेकिन पहली बार किसी मर्द के सामने अपना न्नग्गा बदन कर देना उसके लिए बहुत बड़ी बात थी, वैसे भी इन मज़हबी ,. लोग अपना चेहरा तक जल्दी से किसी को नहीं दिखती तो नग्गा बदन किसी के सामने परोश्ना
बहुत बड़ी बात होती है, उधर किसी गैर मर्द के मुँह से गंदे शब्द सुनना ज़बी के मन में अंदर hi अंदर एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट भर रहा था, इधर राधे अपने काम में लगा हुआ था और जहा तेल गिराया था वह अपने बड़े और खुरदरे हाँथ रख के हलके हलके से अब चलने लगता है और सहलाने भी लगता हूँ जिससे ज़बी जैसी मजहबी ,. को वो गरम भी कर सके (राधे पका हुआ मर्द था उसने अब तक कई औरतो के साथ अपनी मीठी मीठी बातो में फसा के सडके किया था और वह अपने मकसद में कामयाब हो कर बहुतो को पेल चूका था तो फिर ये मज़हबी ,. उसके लिए किस खेत की मूली थी), उधर राधे, के हांथो की हलकी चुभन और सहलाने से ज़बी की हलकी सिसकारियां निकल जाती है आह्हः.. अम्मीईई की और सायद राधे की हलकी हांथो की चुभन, अछि लगती है, इस लिए बिना कोई जवाब दिए वह अपने सलवार पर से हाँथ को हटा लेती है,