अपडेट 4
वह और कोई नहीं वही आदमी था जो पान खाते हुए अनीता को घूर रहा tha.Anita बाएं तरफ गर्दन घूमा कर उसी को देख रही थी.
उस आदमी ने बिना अनीता के तरफ dekhe,seedha सब्जीवाले को देखकर kaha,''theek ठीक दाम लगाना सब्जी का. मेमसाहब यहाँ नयी लगती है''
वह यह कहने के बाद दये तरफ घूमकर अनीता को देखा. अनीता को अपने आँखों में देखते हुए उसका लुंड में फिर हलचल हो गया. दोनों के चेहरे के बीच में केवल एक फुट का फासला था और अब अनीता उसके मुंह से आ रही गंध से समझ सकती थी की वो पान नहीं बल्कि गुटखा खा रहा था.
सब्जी वाले की आवाज़ सुनकर अनीता घूमकर उसके तरफ dekhi,''Memsaahab आप चिंता न करे मैं सबसे एक hi भाव लेता हूँ''.
अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और फिर कौन से सब्जियों और कितने चाहिए सब्जीवाले को बोल दी उस दुकान के पास वाले दुकान में तीन महिलाएं थी और वो महिलाएं सब्जियां खुद चुनकर टोकरी में रख रही thi.Anita को खुद सब्जियां चुनना पसंद नहीं था तो उसने सब्जीवाले के ऊपर hi सब छोर दिया.
जब वो सब्जियों के नाम बता रही थी तब वह अपनी कमर पर किसी का हाथ महसूस ki,magar वो बिना घबराये चुप चाप सब्जियों के नाम बताती rahi.Woh अब तक समझ चुकी थी की वो हाथ किसका है. सब्जियों के नाम और मात्रा बताकर वह बाएं घूमकर उस आदमी को देखि जो सब्जी वाले को hi देख रहा था मगर अनीता को अपने तरफ देखते हुए पाकर वो उसकी तरफ घूमकर उसकी आँखों में देखने लगा और मुस्कुरा दिया.
अनीता बिना कोई चेहरे पर भाव लाये वापस सब्जी वाले को सब्जी चुनते और तौलते हुए देखने लगी. वह हाथ को थोड़ा नीचे सरक कर अपने गांड के बाए फांक पर महसूस किया.
वह आदमी फिर bola,"Aur सुन्न, ताज़ा सब्जी उठाना. बासी सूखा मत देना".
अनीता यह सुनकर उसे आदमी के तरफ देखि तो वह भी उसके तरफ देखने लगा की तभी सब्जी वाला bola,"Are चिंता मत करो भाई, इहाँ ताज़ा सब्जी hi मिलता है. रोज़ पूरा सब्जी बिक जाता है हमरा तो बसी सब्जी रहने का तो कोई हिसाब hi नहीं है".
अनीता यह सुनकर सब्जी वाले के तरफ देखती हुयी बात सुनने लगी और सब्जी वाला उस आदमी से बोलने के बाद अनीता की तरफ देखकर bola,"Aap बेफिकर रहिये मेमसाहब. हमरे ऊपर भरोसा किये हैं तो हम अच्छा सब्जी hi चुनकर देंगे आपको".
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा दी की तभी वह आदमी उसकी गांड पर हाथ रखे हुए bola,"Abe तुम्हारा सब्जी बिक जाता है तो यह ज़रूरी थोड़ी है की सब्जी ताज़ा hi हो?"
यह सुनकर वह सब्जी वाला उसके तरफ देखने लगा. अनीता भी उसका हाथ अपनी गांड पर महसूस करके थोड़ा आगे हो गयी और उसका बात सुनकर सोचने लगी की तभी सब्जी वाला एक पल सोचकर bola,"Are कहे को हमरा कस्टमर ख़राब करने पर लगे हो भाई? जब रोज़ सब्जी बिक जाएगी तो बासी सब्जी कहाँ से आएगा?"
अनीता भी एहि सोच रही थी की तभी वह आदमी bola,"Kyun नहीं हो सकता".
अनीता यह सुनकर उस आदमी के तरफ देखि तो वह भी अनीता किसी तरफ देखकर bola,"Aap hi बताओ मेमसाहब. यह भी तो हो सकता है की जहाँ से यह सब्जी लेता है पैसे बचाने के लिए यह वहां से बासी और ताज़ा दोनों सब्जी लेकर मिलकर यहाँ बैठकर बेचता हो. का हम ग़लत बोल रहा हूँ?".
अनीता यह सुनकर हल्का मुस्कुराती हुयी boli,"Haan ऐसा हो सकता है".
वह आदमी यह सुनकर सब्जी वाले को देखकर bola,"Dekha मेमसाहब भी बोल रही है की हो सकता है. इसलिए कह रहा हूँ की ताज़ा hi देना".
वह आदमी सब्जी वाले को देख कर यह बोल रहा था की तभी अनीता उस आदमी को एक नज़र ऊपर से नीचे देखि और सोचने lagi,"Yeh आदमी देखने से hi मज़दूर लग रहा है मगर बातें समझ कर और लॉजिकल कर रहा है. सच में किसी को देखकर जज नहीं करना चाहिए. पता नहीं कौन कैसा हो और उसके अंदर क्या गुण हो".
अनीता यह सोचकर फिर चुप चाप वापस सब्जी वाले के तरफ देखने लगी तो सब्जी वाला थोड़ा परेशां होकर bola,"Are जो भी हो भाई लेकिन हम ताज़ा सब्जी hi बेचता हूँ".
वह आदमी यह सुनकर सब्जी वाले से bola,"theek है सब्जी चुनन कर तौलो" और यह बोलकर वह आदमी वापस अनीता की गांड पर हाथ रख दिया.
अनीता कुछ सेकण्ड्स वैसे hi कड़ी रही और उसका हाथ अपनी गांड पर महसूस करती रही और चुप के से इधर उधर देखने के बाद घूमकर उस आदमी के तरफ दुबारा देखकर poochi,''aap कुछ काम वगैरह नहीं करते हैं?''
उस आदमी ने अपने गुटखे को पास hi कूड़ेदान में thuka.Anita उस आदमी को गुटखे को थूकते हुए देख रही थी और साथ hi साथ अपनी गांड पर उसका हाथ महसूस कर रही थी. जब वह आदमी थूकते हुए दूसरे तरफ मुंह किया था तो अनीता अपने आँखों के कोने से उसके हाथों को अपनी गांड को महसूस करते हुए देखि और फिर जल्दी से आस पास का जायजा लेकर देखि की सब लोग अपने काम में बिजी थे.
अगले पल वह सब्जी वाला हस्ते हुए bola,"Are मेमसाहब काम रहता तो यहां ऐसे घूम फिरकर समय थोड़े बीतता"
वह आदमी गुटखा थूकने के बाद सब्जी वाले के तरफ देखकर bola,"Haan सिर्फ तुम hi काम करते हो".
वह यह बोलकर फिर से अनीता के तरफ देखते हुए उसी गंदे अंदाज़ में अपने होठो को अपने हाथ से साफ़ करते हुए मुस्कुराकर जवाब diya,''Karte हैं न काम मेमसाहब. हम क्या आपको निठल्ले लगते hain?wo तो हम काम पर जा hi रहे थे की आपको देखकर सोचा की मेमसाहब नयी लगती hain,unka मदद करते हुए चलूँ''.
वह यह कहकर अनीता की आँखों में देखते हुए उसके गांड को धीरे से दबा दिया. अब तक अनीता उसके हाथों को अपनी बड़ी गद्देदार गांड पर एक जगह स्थिर महसूस कर रही thi,magar अब उसने उसकी आँखों में देखते हुए उसको गांड को दबा दिया.
इससे पहले की और कुछ होता या अनीता के चेहरे की भाव वो आदमी देख paata,sabjiwala अनीता से poochha,''memsaahab अपने भिंडी कितना बोलै?''.
अनीता सब्जीवाले को देखते हुए बोली, ''एक किलो'' और वह थोड़ा आगे को सरक गयी जिसके कारण उस आदमी के हाथों से उसकी गांड आज़ाद हो गयी.
उस आदमी को लगा की वो थोड़ा ज़्यादा कर गया और अनीता की गांड को chhukar,khaaskar उससे बात करते hue,uski जानकारी mein,jo मज़ा उसे मिल रहा था वो ख़तम हो jayega,magar उसे थोड़ी राहत और हिम्मत मिली जब अनीता उसके तरफ देखकर poochhi,''Aese आपको कैसे मालूम की मैं यहां नयी हूँ?''.
वह आदमी यह सुनकर थोड़ा आगे बढ़कर दुबारा से अनीता की गांड पर हाथ रख diya.Anita अपनी आँखों के कोने से अपनी गांड पर देखि और फिर उसकी आँखों में देखने लगी.
उस आदमी ने जवाब diya,''memsaahab इस शहर में रहने वाले लोग जब बाजार में आते है तो सीधा दुकानों पर जाते हैं और सामान लेकर चले जाते hain,magar आप यहाँ वहाँ देखकर बाजार का जायजा ले रही thi,jo की साफ़ साफ़ दर्शाता है की आप यहां नयी हैं''.
अनीता न चाहते हुए भी उसकी बात पर मुस्कुरा दी और उसकी प्रशंसा करते हुए boli,''Aapki नज़रे काफी पारखी hai,aap बस इतनी सी बात से जान गए की मैं यहां नयी हूँ?''.
वह आदमी मुस्कुराते हुए bola,''ji मेमसाहब हम परखने में माहिर hain''.Yeh कहते हुए वह एक बार फिर से अनीता की गांड को दबा दिया.
अनीता अपनी गांड दबाये जाने पर भी नार्मल तरीके से उसे देखकर मुस्कुराती हुयी boli,''ab आप मेरी मदद कर चुके hai,uske लिए dhanyawaad,ab आप काम पर चले जाइये''.
वह आदमी फिर से अनीता की गांड को दबा कर bola,''memsaahab यह भी तो काम hi कर रहा hoon,mera मतलब है किसी की मदद करना भी तो काम hi है ''.
अनीता उसकी आँखों में देखि और हलके से मुस्कुराकर boli,''Haan ठीक है मदद तो करनी chahiye,apne सब्जीवाले को कह दिया की मुझे सही दाम में ताज़ी सब्जी दे. अपने मेरी मदद कर diya,ab ऐसा न हो की मेरी और मदद करने के चक्कर में आप काम के लिए लेट हो जाये''.
अनीता के यह बोलते वक़्त वो आदमी अनीता की गांड पर हाथ रखे हुए था और बीच में एक बार फिर उसकी गांड को हलके से दबा दिया मगर अनीता वैसे hi अपनी बात को जारी राखी.
वह आदमी भी मुस्कुराते हुए जवाब diya,''Are कोई बात नहीं मेमसाहब थोड़ा लेट हो जायेगा तो क्या फ़र्क़ परता hai.Kaun सा हमको रोज़ रोज़ आपका ऐसे मदद करने का मौक़ा मिलेगा''.
अनीता मुस्कुराकर उसे देखती हुयी बात सुनी फिर बिना कुछ बोले सब्जी वाले को सब्जी तौलते देखने lagi.Agle एक मिनट तक अनीता चुपचाप सब्जी वाले को सब्जी तौलते हुए देखती रही और अपनी गांड पर उस आदमी का हाथ महसूस करती रही और वो आदमी अनीता की गांड पर हाथ रखे कभी सब्जीवाले को तो कभी अनीता को देखता.
अनीता चुपचाप कड़ी थी की तभी वह उस आदमी का आवाज़ सुन उसके तरफ dekhi,''us बैगन को चेंज करो''.
अनीता वापस सब्जी वाले को देखकर फिर अपनी नज़रो को उस आदमी की तरफ ले गयी तो उसे खुद की तरफ मुस्कुराता देख वो भी हलके से मुस्कुरा दी की तभी वह आदमी bola,''dekha memsaahab,aap ध्यान नहीं दे रही थी. सदा बैगन वजन कर रहा tha,mere रहने से फायदा हुआ न आपको''
अनीता की गांड पर उस आदमी का हाथ अभी भी था की तभी सब्जीवाला अनीता से माफ़ी मांगने laga,''memsaahab ग़लती से रखा गया''.
अनीता उसकी बात sunkar,''koi बात नहीं'' बोल hi रही थी की उस आदमी ने उसकी गांड को फिर हलके से दबा दिया और अनीता यह बोलकर बिना चेहरे पर किसी भाव के अपने बैग से पानी का बोतल निकलकर पानी पीने लगी.
ठीक उसी वक़्त उस आदमी का मोबाइल बज उठा और वह फ़ोन रिसीव kiya,''Woh फ़ोन पर बात कर रहा था और अनीता की गांड सहला रहा था और अनीता चुपचाप पानी पी रही thi.Anita बातों से समझ गयी की उस आदमी का मालिक फ़ोन करके गुस्से में काम पर आने के लिए बोल रहा है.
वह आदमी इस बार अनीता की गांड पर अपना हाथ फैला कर जितना उसकी गांड को कैद कर सकता था किया और भींच diya.Anita को पहली बार थोड़ी दिक्कत हुयी और वह थोड़ा गुस्से से उसकी तरफ dekhi,magar वह आदमी फ़ोन par,''jee मालिक आता हूँ बस पान खाने के लिए आया था'' यह कहते हुए जल्दी से वहाँ से चला गया.
अनीता उसे जाते हुए देखि और उसे लग रहा था की जिस तरीके से वो उसे छेड़ रहा tha,uski गांड के मज़े ले रहा tha,wo उसे मुद कर वापस ज़रूर देखेगा मगर वैसा हुआ नहीं और वो सीधा चलते बना.
अनीता के साथ ऐसा छेड़ छड़ पहली बार नहीं हुआ tha,Delhi में भी कई बार उसके साथ ऐसा छेड़ छड़ हो चूका था मगर वहां सभी बार छेड़ने वाले उसकी नंगी कमर और पीठ का मज़े लिया करते थे.
आज पहली बार उसकी गांड में किसी ने दिलचस्पी दिखाई थी और वो भी इतना खुल्लम khulla,usse बातें करते hue.Delhi में भी वो थोड़ा देर के बाद थोड़ा दुरी बना लेती थी और छेड़ने वाला दुबारा उसे छेड़ने की कोशिश नहीं करता tha,magar यहाँ इस आदमी ने हिम्मत करके उसे छेड़ना जारी रखा था और जी भर कर उसके जिस्म का मज़ा ले रहा था.
अनीता के चेहरे पर अभी भी नार्मल भाव hi the,jaise की कुछ हुआ नहीं हो. वह उस आदमी को जाते देख hi रही थी की सब्जी वाला bola,"Dekhiye मेमसाहब कैसे बहाना बना कर यहाँ समय बर्बाद कर रहा था और मालिक का फ़ोन आते hi तेज़ी से निकल लिया ".
अनीता सब्जी वाला का बात सुनकर उसके तरफ देखने लगी और उसका बात ख़तम होने पर boli,''thoda हरी मिर्च भी दे दीजियेगा''.
सब्जी वाला उसे देखते हुए bola,''memsaahab यहाँ निठल्ले बहोत मिलेंगे जो पान सिगरेट के बहाने दुकानों से निकल कर बाजार में घुमते फिरते रहते है. आपको उसने बेवजह में तंग तो नहीं किया?''.
अनीता सब्जी वाले को देखकर "न" में सर हिला कर मुस्कुराती हुई boli,''Ulta उसने आपको सदा बैगन तौलते हुए पाकर लिया''.
सब्जीवाला यह सुनकर थोड़ा शर्मिंदा होते हुए नज़र अनीता से हटा कर सब्जी पैक करने लगा तो अनीता चुप चाप आस पास देखकर अपनी गांड पर की साड़ी थोड़ी ठीक कर ली.
सब्जीवाला सब्जी पैक करते हुए bola,''are मेमसाहब ग़लती से रखा gaya,abse नहीं होगा''.
अनीता मुस्कुराकर उसे जवाब देती हुई boli,''are कोई बात nahin''.Sabjiwala सभी सब्जी पैक कर अनीता को हिसाब बता दिया.
अनीता अपनी बैग से पैसे निकल कर सब्जी वाले को दे रही थी की तभी कोई उसकी नंगे कमर को छूटे हुए आगे बढ़ gaya.Anita उधर देखि तो एक तीनगर था जो सीधा चला जा रहा था.
अनीता वापस सब्जी वाले के तरफ देखि और जो उसे छुट्टे पैसे दे रहा था. अनीता वह लेकर गईं hi रही थी की उसकी गांड को छूटे हुए फिर कोई वहां से चला गया, मगर अनीता उस तरफ ध्यान नहीं दी और चुप चाप पैसे गईं कर बैग में रख ली.
अनीता सब्जी लेकर चुप चाप आगे बढ़ रही थी की तभी उसे दो औरतों की फुसफुसाने की आवाज़ aayee,''dekho महारानी ने कैसे ब्लाउज पेहेन रखे हैं. बड़े शहर से यहाँ आयी हुयी लगती hai,kam से काम यहां जिस्म की नुमाइश नहीं करनी चाहिए''.
अनीता उस बात पर मैं hi मैं मुस्कुरा दी यह सोचकर की वह औरतें उसकी ख़ूबसूरती से जलकर ऐसा कह रही हैं. वह आस पास देखि तो पायी की कोई कोई मर्द उसे घूर रहे थे. वह चुप चाप सब्जी लेकर बाजार से निकल गयी.
Chawal,daal,aata यह सब तो पूरे महीने के लिए उसके पति राज ने खरीद कर घर पर रख दिया tha,bas अनीता को सब्जी और फल हर तीन चार दिन पर लाने थे. अनीता सब्जी लेकर बाजार से बाहर आ गयी.