मैं, देखना चाहता था की क्या रति तड़प रही है मेरे किश के लिए या नहीं, वही मैं उसके कापते हुए होंठो को देखते हुए उसके होंठो से लगभग 2 इंच के दुरी पर आकर रुक जाता हु और रति को लगता है की जीजूउउ फिर से अपना मुँह पीछे करने वाले है ुर पता नहीं रति के मन में क्या आता है वो खुद अपने होंठ थोड़ा ऊपर ले जाती है लेकिन माय तो अभी उसको तड़पने के मूड में hi था, इसलिए माय अब फिर से अपना मुँह वापस पीछे ले जाता हु और रति को देख कर स्माइल करता हु जिसे देख के रति को अब अपनी हरकत पर शर्म सी आने लगती है वो खुद hi किश करने जा रही थी इस वक़्त और उससे देखते हुए मेरे चेहरे पर गर्व की स्माइल आ जाती है और माय अब रति के नग्गे गुलाबी दोनों निप्पल को अपने ऊँगली में लेके दबाने लगता हु.. ुर
मैं, उसे छेड़ते हुए बहुत जल्दी है किश करने की क्यों मेरी जान.. हँ? अभी तो शुरू हुआ है ये खेल आज पूरी रात हम इस झोपड़े में बिताने वाले है ऐसा कह कर मैं रति के निप्पल दबाते हुए उसकी छूट की तरफ जाता हु जिससे रति अपने दोनों हाथो को निचे लेजके अपनी छूट को छिपा लेती है, जिसे देखते हुए मैं अब बस भी कर मेरी बहु रानी क्यों छुपा रही है? जब की माय अब तेरे बदन को वो हर हिस्सा देख लिया है जो आज तक सिर्फ तेरा पति ने देखा है मेरे इस बात को सुन के रति कुछ नहीं बोलती, वही मैं अब उसके चुचो को मसलने लगता हु ुर वो आहे भरते हुए मुझे hi देखने लगती है.. मैं, जानता हु की तेरे पति के अलावा किसी ने तेरी फूली हुई बेहद hi खूबसूरत हसीं छूट अभी तक नहीं देखि पर अब माय थोड़ी न कोई पराया हु? है पहले मैं तेरा बड़ी ननद का पति था लेकिन अब माय तेरा
आशिक़ हु ये सुन के रति, इतराते हुए आठ बड़े ए मेरा आशिक़ बनाने उफ्फ्फ्फ़.. kk..kuch भी mat..bol..bolo.. है नहीं तो?, रति अब मुझसे उतना नहीं शर्मा रही थी जो कुछ देर पहले जितना शर्मा और मेरा विरोध कर रही थी वह अब उतना नहीं कर रही थी लेकिन उसके मूड का भरोसा नहीं था की कब उसके संस्कार फिर से जाग जाये इस लिए मैं, देर न करते हुए जिस हांथो से वो अपनी छूट छुपाई थी वह मैं अपना मुँह लेजा के उसकी हाथो पर अपनी जुबान रख कर उसको चाटने और चूमने लगता हूँ, वही मेरी जीभ अपने हांथो पैर महसूस होते hi रति अपने दोनों हाथ को अपनी छूट पर से हटा देती है और मेरे सामने उसकी गुलाबी छूट अब मेरी के आँखों के सामने आ जाती है जिसे देख के, waaahhh...meri जान... तेरी फूली हुई छूट तो एक दम क़यामत है उफ्फ्फ्फ़ इसे देख के तो मैं मर मिटा इस पे क्या बुर है तेरी
और कितनी गोरी और इसकी फांके कितनी गुलाबी है और क्लाइटोरिस तो एक दम छोटी सी है और छेद तो इतनी छोटी है जैसे कोई कुमारी छूट हो? आज तो इसे देख मज़ा आ गया, रति मुझे अपनी छूट के इतना पास पाकर फिर से अपनी छूट छिपाने लगती है ये देख के मैं, मत छुपा अब इसको मेरी जान.. ये स्वर्ग का दरवाजा है है.. स्वर्ग का.. ये छूट तूने सिर्फ रामु को दिखाई थी न? आज मुझे दिखा कर तूने मान लिया है मुझे अपना महबूब? है न मेरी जान, रति, मेरी बातो से शर्मा जाती है वही वो अपने छूट को ढकने की कोशिश कर रही थी की लेकिन मैं, अब अपने हाथ उसके हाथो पर रख कर उनको छूट पर से हटा रहा था और हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखे जा रहे थे और थोड़े सेकंड के बाद माय थोड़ा आगे झुक कर उसकी गुलाबी और उभरी और फूली हुई छूट को सूंघने लगता हु और सूंघने के बाद मैं, hhmm...wahhh.. क्या खुशबु है?
वाह्ह्हह्ह.. मेरी जान? और क्या छूट है तेरी एक दम फूली हुई कचोरी की तरह और एक दम साफ़ कोई भी झांटे नहीं एक दम चिकनी इसे देख के मेरा दिल खुस होगया, ये सुन के रति दिल hi दिल में बहुत ख़ुशी हो रही थी और उसका दिल अपनी छूट को उभर के दिखने का मान हो रहा था लेकिन उसका संस्कार बिच में ा जा रहे थे, इधर रति अपनी छूट की तारीफ सुन के खुद hi शर्म से पानी पानी हो जाती है. वही मैने उसके दोनों हाथ पकडे हुए थे और (रति एक तक बस मुझे hi देख रही थी.. क्युकी आज माय दूसरा मर्द था उसकी पिंकी बुर को देखने वाला इस लिए उसे मुझ पे प्यार बहुत आ रहा था लेकिन वो अपने सोच से काफी हद तक खुद से लड़ रही थी), इधर मैं, तेरी छूट की खुशबु के सामने तो सब कुछ फ़ैल है मेरी दिल की रानी? वही रति मेरी बात सुन शर्म से लाल हो जाती है. इधर
मैं, अब सूंघने के लिए फिर से उसकी फूली हुई गुलाबी छूट की तरफ आगे झुकता हु तभी मेरी नोक दर नाक रति की फूली हुई छूट पर जा लगती है.. रति, अह्हह्ह्ह्ह... सस्शह्ह्ह्ह... ऊऊफफफफफ.. मैं, हाहाहा.. क्या हुआ मेरी जान को? रति कुछ नहीं बोलती और शर्म से दूसरी तरफ अपना चेहरा करके देखने लगती है. मैं, मेरी नाक से अगर ऐसी हालत है तो सोच मेरा कला लुंड घुसेगा तब क्या होगा तेरी इस मासूम फूली हुई छूट का बोल?, रति अब अपनी आँखे बड़ी कर के मुझे गुस्से से देखने लगती है उसके गुस्से वाले चेहरे को देख के मेरे चेहरे पर हसी थी और माय हस्ते हुए अब अपनी जुबान बहार निकल कर रति की आँखों में आंखे दाल के देखने लगता हु, रति को समझ नहीं आ रहा था की नन्दोई जी अब उसके साथ क्या करने वाले है ऐसे अपने जुबान बहार निकल कर इधर मैं, अब कोई देर न करते हुए अब अपनी लुम्बी जुबान को हलके से रति की फूली छूट की उभर पर रखता हु,