The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 21 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)



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Episode 7बी,

रति, आईईए.. ओह्ह.. मम्मी.. ुम्मःहः.. उफ्फ्फ.. आठ.. मरररररर.. गईइइइइइइ.. जीजूउउ?, मैं, दर्द हो रहा है मेरी जान को है?, रति, इस बार दर्द को रोक नहीं पाई और उसके मुँह से 'हुन्न्न' की आवाज़ निकलते हुए वो मुझे बता दी और वही रति, को अपने टांगो के बीच अब राधे का कला मुसल लुंड महसूस होने लगा था जो पंत में टैंकर लोहे जैसा सख्त हो चूका था और वही रति, अब कामवासना में एक दम चूर वह अपने दोनों हांथो को दीवार पर रख देती है और अपनी बड़ी और उभरी गांड को हलके से पीछे करने लगती है.. ये मेरे लिए ये अनएक्सपेक्टेड था क्यों की इससे पहले वो मेरा बहुत विरोध की थी वही अब अपनी गांड मेरे काळा लुंड पर रगड़ने के लिए पीछे करने में लगी थी?, रति की इस हरकत से मेरे लिए अब कण्ट्रोल कर पाना न मुमकिन हो जाता है और माय रति की पतली कमर पकड़ कर पीछे से एक जोर का जतका मरता हु और मेरे..

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धक्का लगते hi रति, आह्हः.. धीरे लगती है न, माय लगातार 6-7 तगड़े झटके मरता हु और रति दीवार पर हाथ रख के अपनी गांड को और उभर लेती है ुर उसके ऐसा करने.. से मेरा मुसल लुंड उसकी भरी गांड के दरार से होते हुए उसकी गांड की सुराख़ के चले पे वार होता है जिससे रति, दर्द से आईईए.. मम्मी.. ऊंठ.. प्लीज धीरे ओह्ह गॉड, वह चिल्लाने लगती है उसको मेरा लोहे जैसा सख्त मुसल लुंड अपनी गांड की सुराख़ के चले पर कुछ ज्यादा hi तेजी से चुभने लगता है उसकी ाहों को सुन कर झटके देते हुए क्या हो गया मेरी जान रति चिल्ला क्यों रही है तू ऐसे?, मैं भोला बनाने का नाटक कर रहा था, रति, पीछे मुड़कर मुझे गुस्से से देखती है पर कुछ नहीं बोलती, इधर मैं, उसका इशारा समाज जाता हु की उसे मेरा लौड़ा जो पंत में कैद था उसे परेशान कर रहा है और अब माय, उसको सर घुमा कर उसके होंठो पर अपने

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होंठ रख देता हु और रति एक पल के लिए शॉक हो जाती है पर अगले hi पल उसकी आँखे बंद हो जाती है और वो थोड़ा घूम के मेरे गले में अपना एक हाथ डालकर मुझे चूमने लगती है इस बार रति भी मेरे खुले मुँह में अपनी जीभ को दाल देती है जिसे कभी मैं उसकी जीभ को चूसने लगता तो कभी वो मेरी जीभ को चूसने लगती है हम दोनों के थूक और लार एक दूसरे के मुँह के अंदर बहार हो रहे थे वही रति के ऊपर अब कामवासना भरी हो चुकी थी उसका दिमाग काम उत्तेजना में काम hi नहीं कर रहा था और वो बेशर्म होकर राधे के होंठो को चूसने जा रही थी.. इधर माय, किश को थोड़ी देर के लिए छोड़ के रति के दोनों पके ामो के निप्पल को अपने मुँह में भर कर अच्छे से थूक लगा लगा कर चूसने में लग जाता हु और रति अपनी तिरछी निगाहों से मुझे देख के सोच रही थी की (कैसे उसने गैर मर्द से वो अपने चुके चुसवाने का अल्लोव

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कर बैठी और ये बात उसको ुर बी गर्म कर रही थी क्युकी मर्द हो या औरत जब चोरी छुपे एक दूसरे के जिस्मो से खेलते है तब वो शमा कुछ और hi होता है और मर्दो की तरह औरते के अंदर भी बहुत कामवासना कूट कूट के भरी होती है बस एक चिंगारी लगने की देरी होती है वही हम दोनों एक गाओ के झोपड़े में एक दूसरे के jismo..se खेल रहे थे और अब वह का माहौल काफी गर्म हो चूका था.. लगभग 10 मिनट्स तक माय रति के 36 साइज के चुके की पिंकी निप्पल को अपने थूक से सारा भोर करने के बाद अब हम दोनों एक दूसरे को हवस भरी नज़रो से देखने लगते है उसे देखते हुए माय अब बिना देरी किये रति की पंतय निचे करने लगता हु ये देख के वो एक बार मेरे.. बड़े हांथो के ऊपर अपने कोमल हाथ को रोकने की कोशिश करती है पर मैं उसका हाथ को हटा कर उसकी लाइनर पंतय को निकल कर उस झोपड़े के बिस्तर पे फेक देता हु अब वो मेरे सामने पूरी नंगी कड़ी थी,
 
उधर रति, को मेरी ऐसी हरकत एकदम से चुका देती है और वो अपने चुके और छूट दोनों हाथो से छुपाते हुयी ोुह्ह्ह्ह jijuuuuuu...ye अपने क्या किया??, मैं, उसके नंगे जिस्म को देखने लगता हु और अपने पंत के अंदर हाँथ दाल के अपने एनाकोंडा को आगे पीछे करते हुए वहहह क्या सेक्सी बदन है तेरा मेरी जान इस सेक्सी बदन को देख कर तो बूढ़े के भी लौड़े में एक दम से जानन आ जायगी?, इधर रति, के अंदर के संस्कार फिर से जागने लगते है और वो मेरी तरफ गुस्से से देख के ye..ye..ye क्या अपने किया जिजुओ मेरी मेरी.. पंतय क्यों निकल दी भला.. है, मैं, क्या जरुरत है तुझे अब उस पंतय की वैसे भी हम दोनों अब इस ठण्ड के मौसम में एक होने वाले है तो तुझे कपड़ो की क्या जरुरत वैसे भी इस ठण्ड के मौसम में देख तेरा बदन कैसे पसीने छोड़ रहा है? यह देख के लग

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रहा है तू भी मेरे जैसे अपनी बदन को आग को ठंडा करना छह रही है रति, चुप राहू बेशरम कहिके अब आप.. मेरे कपडे लेकर आओ जहा फेकि है अपने, मैं, थोड़े गुस्से से अब तभी खोजूंगा जब हम दोनों की जिसम की प्यास बुझेगी, रति मेरी गुस्से को देख क समझ जाती ह. इधर मैं, जोर से अपने लुंड को सेहला रहा था और रति की नज़र बार बार मेरी पंत की उभरी हुई सतह पर hi जा रही थी, मैं, उसको देखते हुए थोड़ा उसके पास गया और अब पंत से हाथ निकल कर रति के हाथ पर रखने hi वाला था की, रति ने अपने चुचो पर से हाथ हटा देती है क्युकी उसको मेरे गन्दा हाथ अपने हाँथ पर नहीं चाहिए था लेकिन जैसे hi वह अपना हाथ हटती है उसके गोर बड़े चुके मेरे सामने आ जाते है और मैं उसके चुके पर हाथ रख कर उसको जोर जोर से अन्ते की तरह गुथने लगता हु साथ hi चुके दबाते हुए अपनी गन्दी ऊँगली उसके मुँह में दाल देता हु जिससे रति, जल्दी से मेरी ऊँगली अपने मुँह से निकल के.. चीई.. हटाओ अपना गन्दा हाथ जीजू?,

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मैं, क्या गन्दा हाथ? अपना लुंड हिला रहा था इस हाथ से.. तो गन्दा हो गया, रति, ीववव छीटीए... हटाओ हाथ.. मैं, मेरी जान.. जब यही मुसल कला मोटा लुम्बा लुंड तेरी छूट में जायेगा थोड़ी देर बाद, तब तू क्या करेगी बोल?, रति मेरी बात से शर्म से लाल हो जाती है उसके अंदर फिर से काम उत्तेजना का संचार सुरु होने लगता है रति आज जितना मैं मन रहा था उतना तो अपने बीवी को कभी नहीं मान्य था लेकिन इन सब का बदला जरूर लूंगा यही सोच रहा था. इधर मैं उसकी शर्माती नज़र देख अब उसकी चुके पर से हाथ हटा के रति को बहो में ले लेता हु और रति बिना विरोध के मेरे बहो में समां सी जाती है और अपनी गरम सांसे मेरे साइन पे करने लगती है वही मैं उसकी पतली कमर पे रख के धीरे से उस झोपड़े के बिस्तर के ऊपर लिटाने लगता हु जिसे देखते हुए

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रति,.. प्ल्ज़्ज़.. जीजूउउ आगे... अब... नहीं.. बस हो गया और आगे मत बढिये न?, मैं, शह्ह्ह्ह.. चुप.. अब कुछ मत बोल.. अब बस प्यार करने का वक़्त है.. चुप रति, नहीं.. प्लीज छोड़ दो... जीजूउउउ ये सब पाप ुर बहुत गलत हो रहा है?, मैं, क्या गलत मेरी जान? सब कुछ सही हो रहा है तू प्यासी है मैं भी जब से तुम्हारी बड़ी ननद मरी है उसके बाद से मैं भी प्यासा हु वैसे हम तो बस अपनी प्यास बुझा रहे है यहाँ पर और अपनी माशूका की प्यास बुझाना हर आशिक़ का फ़र्ज़ होता है मेरी जान रति?, रति मेरी क्लीयरिंग बातो से फिर से अपना आप खोने लगती है वही मैं, अब उसको फिर से बिस्टेर पे धक्का देके लिटा देता हु और अपनी वाइट शर्ट की बोटों खोलने लगता हु और रति मुझे गुस्से से देख रही थी और वो उठने की फिर से कोशिश करती है लेकिन माय एक हाँथ से उसके साइन पे हाँथ रख के शर्ट खोलने लगता हु,

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जब शर्ट के सरे बोटों खुल जाते है तब मैं उसे उतर देता हु और शर्ट के अंदर माय कुछ नहीं पहना था वही रति मेरे नग्गे काळा साइन को देख के उसकी आंखे बड़ी सी हो गई और मान में (हे भगवन जीजू का 40 के होने के बाद भी इनका सीना कितना सख्त है और पेट में अलग से एड्स बने हुए है जैसे टीवी में हीरो लोगो का बॉडी बिलकुल पहलवानो की तरह उसी तरह इनका सीना है उफ्फ्फ ऐसा सीना मेरे रामु का क्यों नहीं है देखो तो जीजू के साइन पे कैसे काळा और सफ़ेद बाल के गुच्छे है ऐसे बाल मेरे पति रामु के क्यों नहीं है उसका सीना एक दम चिकना है और एक दम लड़कियों की तरह चिकनी लेकिन जीजू का साइन में बाल भी है और उनका सीना कितना सख्त है जैसे कोई पत्थर अभी जब थोड़ी देर पहले मुझे कास के अपनी बहो में भरे थे तो मेरी दम hi निकलने वाली थी ऐसा उन्होंने अपनी बहो में जकड़ा था),
 
इधर मैं, अपनी शर्ट खोलने के बाद उसके बगले में मैं भी लेट जाता हु और उसके चुचो को दबाते हुए उसका दूसरा हाथ जो वो छूट पर कवर की हुई थी उसे वह से हटा देता हु ुर मैं रति के नंगे जिस्म को घूरते हुए वह मेरी जान क्या गोरा बदन है तेरा एक दम दूध जैसा सफ़ेद ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत से तुझे बनाया है एक एक बारीकी सी चीजों से गाढ़ी गई है तू, रति मेरी बात को सुन थोड़ा शर्माती जाती है और अपने बगल में लेते मुझे देखने लगती है उसे देख के फिर से क्या बदन है मेरी जान तेरा पति तो बिलकुल पागल है जो तेरी जैसी हसीं औरत को छोड़ कर पता नहीं सहर में क्यों नौकरी कर रहा है अगर तेरे जैसी मेरी पत्नी होती तो मैं उसे रात दिन अपने लुंड के निचे लेता के रोज hi छोड़ता अपने काळा मुसल लुंड से तू सच में बहुत hi करारी माल है, रति सच में तुझे बहुत

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प्यार करने लगा हु? अब तू मेरी जान भी मांगेगी तो माय वो हस्ते हस्ते दे दूंगा (रति को क्या पता की माय ये लाइन कितनी लड़कियों और औरतो को बोलै है?), वही मेरी बातो से रति मान hi मान बहुत खुस हुई की उसे कोई इतना ज्यादा प्यार करता है लेकिन वो अपने चेहरे पे कोई भी भाव नहीं लती ुर बस घर रही थी मुझे, माय, तेरा पति साला नौकरी hi कर रहा है या फिर किसी और के साथ उसका कोई चक्कर चल रहा है?, रति मेरी बातो सुन के, वो वह काम hi करने गए है न की कोई औरत पटाने समझे, मैं, है जनता हु कितना काम करता है अभी सो रहा होगा घोड़े बेच के वही आज मैं उसकी बीवी के साथ में बिस्तर गर्म करने वाला हु?, मेरी बात पर रति का चेहरा शर्म से लाल हो जाती है और मान hi मान सोचती है (हे भगवन जीजू कितने कमीने हो गए है कोई ऐसे लड़की से बात करता है),

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और ये सोचते हुए क्या बोल रहे हो आप? आपको अपनी कोई इजाजत नहीं दी है. और आप मेरे साथ जबरदस्ती से कर रहे हो.. , उसकी बात पर मैं, हस्ता हु और उसके बगल से उठ के थोड़ा निचे झुक कर रति की मोती बेदाग गोर जांघो को चूमने लगता हु. मेरी जुबान अपनी गोरी जांघो पर लगते hi वो जोर से सिसकारियां लेने लगती है, मैं, सच में माय तेरे साथ जबरदस्ती कर रहा हु? मैं अपनी जुबान उस की गोरी जांघ पर फेरने लगा जिससे रति के बदन की नसों में अब एक तेज़ लहार सी दौड़ने लगी.. रति, आठ.. जीजूउउउउ गुदगुदी हो रही.. ाऊच्छ्ह.. हेहेहे... सस्शह्ह्ह्हह्ह.. मैं, बोल न.. मई तेरे साथ जबरदस्ती कर रहा हु क्या? तू है रही है अपने नन्दोई के साथ अय्याशी करते वक़्त है?. मेरी बात का जवाब अब उसके पास नहीं था वही वो अब किसी भी तरह का विरोध नहीं कर पा रही थी इधर मैं, अब उसकी

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जांघो को चूमते हुए उस के ऊपर आ जाता हु ुर अब दोनों के जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए थे अचानक रति के ऊपर आने से वो मेरा आँखों में देखने लगती है वही रति बिलकुल नग्गी थी और मैं ऊपर से बिलकुल नग्गा लेकिन अभी भी मैं निचे पंत पहना हुआ था वही हम दोनों उस झोपड़े के एक टूटी फूटी लकड़ी वाले बीएड के बिस्तर पर जिसपे हम दोनों लेते हुए थे और उसकी नंगी मोती मोती जाँघे मेरी पंत वाली जांघो पर घिस रही थी.. उसकी घड़साद से उसके फेस पे अलग सा नासा चने लगता है और वही अब मेरी आँखों में भी रति के कामवासना का नशा साफ़ साफ़ देखा जा सकता था.. उधर रति, को अब अपनी गोरी टांगो के बिच में मेरा लुंड जो पंत में कैद था उसकी उभर वो अपनी गरम छूट के ऊपर अच्छे से महसूस कर रही थी जिसकी वजह से वो तेज़ी सी सासे लेते हुए मुझे hi

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देख रही थी और उसको ऐसा घूरता पके मैं अपने होंठ रति के गुलाबी होंठो के पास धीरे धीरे लेजाता हु जिसे देख के रति के पिंक होंठ थरथराने लगते है, वो मेरे सामने अपने आप को बेबस महसूस प् रही थी और वो अब बिना कोई विरोध किये मुझे घूरती रहती है और वही मैं अपने होंठ वापिस पीछे कर लेता हु जिसे देख के उसके चेहरे पर अजीब सी नाराज गई छ जाती है उसको देखते हुए मैं, फिर से अपने होंठ उसके करीब ले जाता हु.. इस बार रति को लगता है के मैं किश करूँगा लेकिन बेहद करीब जाकर फिर से अपने होंठ वापस कर लेता हु, मेरी इन् हरकतों से रति कुछ समझ नहीं पा रही थी ुर वो सोच रही थी की (जीजूउउ मेरे होंठो पे किश कर क्यों नहीं रहे है जब की अब माय बिलकुल तैयार बैठी हु फिर भी वो मुझे किश नहीं कर रहे है?) इधर मैं फिर से एक बार और अपने होंठ रति के होंठो के पास लता हु,
 
मैं, देखना चाहता था की क्या रति तड़प रही है मेरे किश के लिए या नहीं, वही मैं उसके कापते हुए होंठो को देखते हुए उसके होंठो से लगभग 2 इंच के दुरी पर आकर रुक जाता हु और रति को लगता है की जीजूउउ फिर से अपना मुँह पीछे करने वाले है ुर पता नहीं रति के मन में क्या आता है वो खुद अपने होंठ थोड़ा ऊपर ले जाती है लेकिन माय तो अभी उसको तड़पने के मूड में hi था, इसलिए माय अब फिर से अपना मुँह वापस पीछे ले जाता हु और रति को देख कर स्माइल करता हु जिसे देख के रति को अब अपनी हरकत पर शर्म सी आने लगती है वो खुद hi किश करने जा रही थी इस वक़्त और उससे देखते हुए मेरे चेहरे पर गर्व की स्माइल आ जाती है और माय अब रति के नग्गे गुलाबी दोनों निप्पल को अपने ऊँगली में लेके दबाने लगता हु.. ुर

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मैं, उसे छेड़ते हुए बहुत जल्दी है किश करने की क्यों मेरी जान.. हँ? अभी तो शुरू हुआ है ये खेल आज पूरी रात हम इस झोपड़े में बिताने वाले है ऐसा कह कर मैं रति के निप्पल दबाते हुए उसकी छूट की तरफ जाता हु जिससे रति अपने दोनों हाथो को निचे लेजके अपनी छूट को छिपा लेती है, जिसे देखते हुए मैं अब बस भी कर मेरी बहु रानी क्यों छुपा रही है? जब की माय अब तेरे बदन को वो हर हिस्सा देख लिया है जो आज तक सिर्फ तेरा पति ने देखा है मेरे इस बात को सुन के रति कुछ नहीं बोलती, वही मैं अब उसके चुचो को मसलने लगता हु ुर वो आहे भरते हुए मुझे hi देखने लगती है.. मैं, जानता हु की तेरे पति के अलावा किसी ने तेरी फूली हुई बेहद hi खूबसूरत हसीं छूट अभी तक नहीं देखि पर अब माय थोड़ी न कोई पराया हु? है पहले मैं तेरा बड़ी ननद का पति था लेकिन अब माय तेरा

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आशिक़ हु ये सुन के रति, इतराते हुए आठ बड़े ए मेरा आशिक़ बनाने उफ्फ्फ्फ़.. kk..kuch भी mat..bol..bolo.. है नहीं तो?, रति अब मुझसे उतना नहीं शर्मा रही थी जो कुछ देर पहले जितना शर्मा और मेरा विरोध कर रही थी वह अब उतना नहीं कर रही थी लेकिन उसके मूड का भरोसा नहीं था की कब उसके संस्कार फिर से जाग जाये इस लिए मैं, देर न करते हुए जिस हांथो से वो अपनी छूट छुपाई थी वह मैं अपना मुँह लेजा के उसकी हाथो पर अपनी जुबान रख कर उसको चाटने और चूमने लगता हूँ, वही मेरी जीभ अपने हांथो पैर महसूस होते hi रति अपने दोनों हाथ को अपनी छूट पर से हटा देती है और मेरे सामने उसकी गुलाबी छूट अब मेरी के आँखों के सामने आ जाती है जिसे देख के, waaahhh...meri जान... तेरी फूली हुई छूट तो एक दम क़यामत है उफ्फ्फ्फ़ इसे देख के तो मैं मर मिटा इस पे क्या बुर है तेरी

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और कितनी गोरी और इसकी फांके कितनी गुलाबी है और क्लाइटोरिस तो एक दम छोटी सी है और छेद तो इतनी छोटी है जैसे कोई कुमारी छूट हो? आज तो इसे देख मज़ा आ गया, रति मुझे अपनी छूट के इतना पास पाकर फिर से अपनी छूट छिपाने लगती है ये देख के मैं, मत छुपा अब इसको मेरी जान.. ये स्वर्ग का दरवाजा है है.. स्वर्ग का.. ये छूट तूने सिर्फ रामु को दिखाई थी न? आज मुझे दिखा कर तूने मान लिया है मुझे अपना महबूब? है न मेरी जान, रति, मेरी बातो से शर्मा जाती है वही वो अपने छूट को ढकने की कोशिश कर रही थी की लेकिन मैं, अब अपने हाथ उसके हाथो पर रख कर उनको छूट पर से हटा रहा था और हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखे जा रहे थे और थोड़े सेकंड के बाद माय थोड़ा आगे झुक कर उसकी गुलाबी और उभरी और फूली हुई छूट को सूंघने लगता हु और सूंघने के बाद मैं, hhmm...wahhh.. क्या खुशबु है?

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वाह्ह्हह्ह.. मेरी जान? और क्या छूट है तेरी एक दम फूली हुई कचोरी की तरह और एक दम साफ़ कोई भी झांटे नहीं एक दम चिकनी इसे देख के मेरा दिल खुस होगया, ये सुन के रति दिल hi दिल में बहुत ख़ुशी हो रही थी और उसका दिल अपनी छूट को उभर के दिखने का मान हो रहा था लेकिन उसका संस्कार बिच में ा जा रहे थे, इधर रति अपनी छूट की तारीफ सुन के खुद hi शर्म से पानी पानी हो जाती है. वही मैने उसके दोनों हाथ पकडे हुए थे और (रति एक तक बस मुझे hi देख रही थी.. क्युकी आज माय दूसरा मर्द था उसकी पिंकी बुर को देखने वाला इस लिए उसे मुझ पे प्यार बहुत आ रहा था लेकिन वो अपने सोच से काफी हद तक खुद से लड़ रही थी), इधर मैं, तेरी छूट की खुशबु के सामने तो सब कुछ फ़ैल है मेरी दिल की रानी? वही रति मेरी बात सुन शर्म से लाल हो जाती है. इधर

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मैं, अब सूंघने के लिए फिर से उसकी फूली हुई गुलाबी छूट की तरफ आगे झुकता हु तभी मेरी नोक दर नाक रति की फूली हुई छूट पर जा लगती है.. रति, अह्हह्ह्ह्ह... सस्शह्ह्ह्ह... ऊऊफफफफफ.. मैं, हाहाहा.. क्या हुआ मेरी जान को? रति कुछ नहीं बोलती और शर्म से दूसरी तरफ अपना चेहरा करके देखने लगती है. मैं, मेरी नाक से अगर ऐसी हालत है तो सोच मेरा कला लुंड घुसेगा तब क्या होगा तेरी इस मासूम फूली हुई छूट का बोल?, रति अब अपनी आँखे बड़ी कर के मुझे गुस्से से देखने लगती है उसके गुस्से वाले चेहरे को देख के मेरे चेहरे पर हसी थी और माय हस्ते हुए अब अपनी जुबान बहार निकल कर रति की आँखों में आंखे दाल के देखने लगता हु, रति को समझ नहीं आ रहा था की नन्दोई जी अब उसके साथ क्या करने वाले है ऐसे अपने जुबान बहार निकल कर इधर मैं, अब कोई देर न करते हुए अब अपनी लुम्बी जुबान को हलके से रति की फूली छूट की उभर पर रखता हु,
 
रति का ये पहला अनुभव था की उसके छूट के ऊपर आज किसी ने अपनी गरम जुबान राखी थी जिसकी वजह से रति बड़ी सी अहहैं भर्ती हुई उम्म्म्म.. अह्ह्ह्हहह्हीईईए... मैं उस की सिसकारी सुन कर मुस्कुरा देता हु, और मैं जानता था की अब रति वापिस नहीं जा सकती इस मुकाम पर आकर.. मैं फिर से रति को देखते हुए अपनी जुबान उसकी गुलाबी छूट पर रख देता हु और फिर से हलके से उसकी छूट पर से फेरने लगता हु मेरी गर्म बड़ी जीभ और सासे उस को मदहोश करने लगती है. उसके दिमाग पर अब हवस छाने लगी थी और वो मेरे सर को दूर करते हुए आअह्ह्ह्ह.. सस्शह्ह्ह जीजूउउउ.. वो गन्दी जगह है वह कोई मुँह लगता है क्या हटाओ वह से मुँह अपनी नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा?, इधर मैं, उसकी धमकी को इग्नोर करते हुए फिर से अपनी जुबान उसकी फूली छूट पर रख कर चलता हूँ और रति इस बार..

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मेरे ऐसा करते hi खुद को मेरे हवाले छोड़ते हुए और आहे भरते हुए अब्ब अपनी आँखे बंद कर देती है वही मैं, अब्ब निचे हाँथ ले जेक अपनी पंत की बटन को खोला और साथ में एक झटके में अपना अंडरवियर भी निकल कर वही बीएड के बगल में रखे हम दोनों के बेग के ऊपर फेक देता हु और अपना कला लुंड को हाँथ से सहलाने लगता हु हम दोनों अब पुरे नंगे थे इस वक़्त ुर रति अपने पति से बेवफाई कर रही थी लेकिन इस वक्त पर उसके सामने अब बस कामवासना भरी पद रही थी अब वो कुछ सोचने समझने की हालत में नहीं थी वही मैं, रति के जो दोनों हाथ अपने एक हाँथ से पकडे थे.. उसे छोड़ देता हु और उस हाँथ को दूसरे कामो में लगा देता हु जैसे रति की छूट सहलाने में जिससे रति का जिस्म अकड़ सा जाता है और वो अब अपने दोनों हाथ मेरे सर पे रख के बालो में उंगलिया दाल के उसको सहलाने लगती है जिसे देखते हुए

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मैं, लगता है मेरी जान की प्यास अच्छे से तेरा पति रामु नहीं बुझा पता क्यों?.. रति, मदहोशी ह्ह्हम्म्म्म.. जीजूउउउउ?, मैं, अब फ़िक्र मत कर मेरी रति जाने.. मन अब माय आ गया हु तेरे पति की जगह लेने.. हहहहए.. और तेरी छूट को ऐसा छोडूंगा की तू अपने पति को भूल जायगी और आज hi तेरे बच्चे दानी में अपना होने वाले बच्चे के लिए बीज बोऊँगा यह कह के मैं, अब रति की छूट पर से ऊँगली फेरने लगता हु?, उधर रति, मेरी बातो से (आठ नन्दोई जी क्या बोल रहे है 1 hi बार में माय प्रेग्नेंट हो जाउंगी जब की रामु जी इतने सालो से लगे हुए है उफ्फ्फ्फ़ जीजू भी न), रति, को यकीं नहीं हो रहा था की मैं उसे प्रेग्नेंट कर पाउँगा क्युकी की उसकी आस अब टूट चुकी थी प्रेग्नेंट होने की?, इधर उसकी छूट की तित फैंको को अपनी मोती काली ऊँगली से थोड़ा फैला के अपनी बड़ी जुबान को क्लाइटोरिस पर रख कर अब चाटने लगता हु, कभी निचे से ऊपर तो कभी

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ऊपर से निचे और मेरा ऐसा करते hi रति मेरी बड़ी जीभ की जादू में फसने लगती है रति, सशह्ह्ह जीजू वह मत मुँह लगाओ न वो गन्दी जगह है वह भी कोई मुँह लगता है क्या छोड़ो न नन्दोई जी प्लीज?, मैं, अरे मेरी जान तेरी छूट इतनी खूबसूरत है की मेरे से रहा नहीं गया बिन कहते अब मेरा काम करने दे समझी ये कह के माय अब अपने एक हाथ पर थूक लगा कर अपने लुंड को मसलने लगता हु मैं थोड़ी देर तक अपनी जुबान बहुत hi धीरे से, प्यार से रति की छूट पर से फेरते हुए अपने लुंड को मसलता रहता हु और इधर रति मस्ती में बस उम्मम्मम.. ओह्ह्ह.. जिजुओ.. आईये.. आह्ह्ह्ह.. सष्ठ.. हिय करती रहती है और वो अपनी होंठ बड़ी सेक्सी तरीके है और आँखे बंद किये हुए अपनी छूट पर फिर रही बड़ी जुबान का मजा लेने लगती है, लेकिन माय उसको ुर तड़पना चाहता था साली ने बहुत नाटक की थी अब तक, तो इतना तो बनता है मेरा तड़पना..
 
इसलिए मैं, अब एक दम से रुकते हुए उसके नंगे दूध से गोर बदन पर लेट जाता हु और मेरा कला एनाकोंडा अब उसकी दोनों जांघो के बीच उसकी फूली हुई छूट के उभर क ऊपर म घिसने लगता हु मेरी लुंड की गर्मी का एहसास होते hi रति अपनी बड़ी आंखे करके मुझे 1 तक देखने लगती है.. मैं, लगता है तेरी जांघो के बीच में काफी गर्मी है मेरी बुलबुल है न हहै.. रति को यकीन नहीं हो रहा था इस वक्त उसकी दोनों टैंगो के बीच में एक कला अज़गर लुंड फसा हुआ और उसकी फूली हुई छूट के फैंको को सहला रहा था जिसकी वजह से उसकी गरम बुर फाड् फाड़ने लगती है इधर मैं रति की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को उसकी जांघो के बीच छूट के आस पास घिसने लगता हु जिसके कारन और मेरे गरम सरिया की तरह लुंड अपने बुर पे पते hi रति के मुँह से गरम यह निकलने लगती है जैसे आअह्ह्ह्ह.. सस्शह्ह्ह.. ऊऊफफफऊ.. हहहहययययय.. ऊम्मम,

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इधर मेरी आँखों में हवस की ज्वाला भड़की हुई थी जो अब कभी भी ख़तम हो सकती थी लेकिन अभी भी रति के मान में उथल पुथल हो रहा थी लेकिन रति अभी कुछ ढंग से सोच नहीं प् रही थी अपने काम उत्तेजना के चलते वही मैं अब आगे झुक कर रति को किश करने hi वाला था के वो मुझे जोर से अपने ऊपर से धकेल देती है और मैं एकदम से बिस्तर के दूसरी तरफ गिर जाता हु और रति बिस्तर से उतर के नग्गी कड़ी होकर जल्दी से दरवाजे की तरफ भागने लगती है लेकिन गेट के पास जेक वो रुक जाती है पर वो मुझे देखती नहीं वही मैं, उसकी नग्गी बड़ी गांड देख के लुंड को मसलता हु और बिस्तर से उठ के अपने मान में (हराम जड़ी साली.. एक दम से इसके संस्कार फिर से जाग गए लगता है.. थोड़ी देर और लगेगी फिर तुझे और तेरे संस्कार दोनों को माँ बहन छोडूंगा अपने काळा लौड़े से रण्डी.),

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यह सोचते हुए मैं उसके करीब पंहुचा अभी हम दोनों झोपड़े के दरवाजे के पास खड़े थे बिलकुल नंगे और मैं रति के पीछे एक सात सा गया और लुंड जो मेरा खड़ा था वो रति की बड़ी गांड जो करीब 36 साइज की थी उसकी दरार में जा घुसा और रति एक बार थोड़ी हिली और उसके रोंगटे खड़े हो गए वही मैं, रति को पीछे से अपनी बहो में लेके तू सोच क्या रही थी मेरी जान?, यहाँ से भागने के बारे में? हालत देख अपनी पूरी नंगी है तू ऐसे भाग कर जाना चाहती है? अपने घर तो चली जा लेकिन जायगी कैसे वह भी इतनी रात में और बहार इतनी बर्फ बरी हो रही है और हमें सर छुपाने के लिए यह टूटी झुपड़ी मिली है भले hi वैसी सुभिदा न हो लेकिन ठण्ड से जान जाने से तो अच्छा है और आज हम एक दूसरे के बहो में सोना चाहिए जिससे हम दोनों को अपने अपने बदन की गर्मी एक दूसरे को दे के इस ठण्ड से बच पाए यह बोल के

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मैं, फिर उसे अपनी तरफ घुमाया अब उसका चेहरा मेरे सामने था वही मेरी बातो को सुन के रति, अपने सेक्सी नंगे बदन को अपने हांथो से ढकने लगती है लेकिन अचानक उसकी नज़र मेरे काळा एनाकोंडा लौड़े पर चली जाती है और वह मेरे कला अज़गर जो एक हाँथ की उसकी लम्बाई और मोटाई अपनी बाजु जितनी को देख वो डर और शर्म से झट से अपनी नजर दूसरी तरफ कर देती लेती है, माय उसको लुंड निहारते हुए देख लेता हु और उसको पकड़ कर दीवार से उसकी पीठ सत्ता कर के अपने काळा अज़गर लुंड जो एक दम खड़ा था उसे अपने काळा हांथो में पकड़ के उसकी फूली हुई छूट के फैंको के ऊपर रख के अब सहलाता हूँ? जिससे मेरा कला सख्त लुंड रति को अपनी गरम छूट के ऊपर घुसता हुआ महसूस होने लगता है उसके अंदर के संस्कार उसको मन कर रहे थे मेरे लुंड को निहारने के लिए, पर उसकी आँखे बार बार मेरे काळा लुंड को निहार रही थी,

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ये देख के मैं, तू भाग क्यों रही है है, अब बस कर यह सब नौटंकी मेरी जान, रति,.. आह्ह्ह्हह्ह.. अभी नहीं.. प्लीज,?, मैं, अभी नहीं तो कभी? आज अच्छा मौका हमें उपरवाले ने दिए है इतनी सुहानी रात में हम एक साथ वह भी बिलकुल अकेले इस झोपड़े में? एक बार सोच के तो देख? तेरा पति तो कभी तेरी प्यास नहीं बुझा पायेगा तो वह काम मुझे करने दे.. रति, जीजूउउउ.. क्यों बार बार रामु का नाम ले रहे हो? हम दोनों खुश है अपनी2 ज़िन्दगी में?, (वो बिलकुल घुट बोल रही थी) वही मैं, उसका जवाब देते हुए खुश होती तो अभी तेरी छूट पानी नहीं छोड़ रही होती.. रति मेरी बात सुनकर शॉक हो जाती है उसकी छूट से अब गीला लॉस लैसा टाइप का काम राश टपकते हुए निचे जमीं पे गिर रहा था, रति ये देख कर शर्मसार हो जाती है.. वही मैं उसको शर्माता हुए देख के,
 
तेरी छूट सच बता रही है.. एक बार अपने मन के जगह अपने दिल से सोच तेरा पति बहार सहर काम करने जाता है और जब कभी 1 या 2 महीने में आता होगा वो भी थका हारा, उसी बिच जब वो रात को तेरे साथ हम बिस्तर होता होगा, तब वह जल्दी से निपट कर सो जाता होगा क्यों सही कहा न आज ये बात तूने डॉक्टर के सामने बोली भी थी फिर अब क्या हुआ?, रति, ai...aisa..kuch नहीं.. जीजूउउउ,.. ये बोल के वो मान में ("है ऐसा hi होता है जीजू जब रामु 4 से 5 धक्के लगा के अपना काम कर के सो जाते है वही मैं रात भर अपने बदन की आग में जलती रहती हूँ), इधर मैं, रति से सात के अपने लुंड को एक हाँथ से सहलाते हुए फिर एक बार उसकी छूट पर रगड़ने लगता हु, जिससे रति आहे भरते हुए मुझे देखने लगती है.. उसकी अहो को सुन के माय सब सच बोल रहा हूँ तेरा मन कह रहा है यहाँ से भाग,

जाने के लिए पर जरा दिल से सोच तू? इस बात को माय रति को जिस्म को मसलते हुए बोल रहा था और रति भी अब अपना विरोध काम कर के मेरी बात को सुनाने लगती है मैं, तू मेरे साथ अय्याशी करेगी तो किसी को पता नहीं चलेगा कोई सपने में भी नहीं सोचेगा की क्युकी मैं तेरे hi घर में रहता हु और जब तेरा मान करेगा तू मेरे रूम में आ सकती है और जब मेरा मान करेगा तो तुझे आधी रात में अपने रूम में बुला के रात भर छोडूंगा तो कितना मज़ा आएगा "चुदाई" की बात से रति को अजीब सी एक्ससिटेमेंट फील होने लगती है अपनी बदन में वही माय एक बार सोच ले दिल ुर दिमाग से फ़िलहाल तू बस अपनी काम उत्तेजना को मिटने अपना ध्यान फोकस कर, रति मुझे देख रही थी और मेरी बातो को अच्छे से समझने की कोशिश कर रही थी इधर माय रति का मासूम और क्यूट सा चेहरा देख कर खुद को और भी गरम..

महसूस कर रहा था और फिर मैं अचानक आगे झुक कर अपने होंठ उसके मुलायम होंठो पर रख कर चूसने लगता हु रति के दिमाग पर अब मेरी कही हुई बात एग्री हो जाती है और वो भी वापिस से मेरे किश का जवाब को अपने किश से देने लगती है इसे देख मैं, मान में (कहा क्या मासूम चेहरा है इस पारी का.. देखो तो कैसे खुस होकर चुम रही है मुझे.. अब बस इसको छोड़ के अपना लुंड का मुहर लगाना बाकि है), रति के दोनों हाथ अब मेरे गले में थे और मेरे दोनों हाथ रति के चुचो पर मैं दोनों चुके अच्छे से मसल रहा था और रति ाठी भरते हुए मेरे होंठो को चूस जा रही थी हम दोनों के बदन सामने से लिपटे हुए थे एक दूसरे से जैसे मनो नाग नागिन एक दूसरे से गुत्थम गुत्थी कर रहे हो वही रति, को अपनी गोरी टांगो के बिच में फिर से मेरा..

गरम और सख्त कला लौड़ा महसूस हो रहा था और वो अनजाने में अपनी दोनों जंघे खोल के मेरे लुंड को अपनी फूली हुई छूट से दबाने लगती है इधर मैं, अब्ब रति के होंठो पर से अपने होंठ हटा देता हु और थूक की एक लकीर अब हम दोनों के होंठो पर लगी हुई थी. वही हम दोनों एक दूसरे को देख तेज साँसे ले रहे थे और फिर रति को अपनी गॉड में जैसे hi उठाया वैसे hi रति, धीरे से ये क्या कर रहे हो जीजू छोड़ो माय गिर जाउंगी. मैं, चुप रह साली जब देखो तब नाटक करते रहती है ये कह के मैं उसे उठाये हुए बिस्तर तक ले जेक लेता देता हु और उसकी गोरी जंगो को फैला के रति की और झुकते हुए उसका एक बड़े ुर गोर चुके के गुलाबी छोटी निप्पल को अपने मुँह में भरकर जैसे hi चूसने लगता हु.. वैसे hi रति फिर से पागल होते हुए आह्ह्ह्हह... ऊह्ह्ह्ह.. जीजूउउउ.. सस्शह्ह्ह.. ऊम्मम,

मैं अपने दातो के बिच रति के निप्पल दबाते हुए चुस्त हु और उसके दूसरे चुके को अपने बड़े काळा हांथो से मसलने में लग जाता हु और रति अपने होंठ काटते हुए मेरे काळा घने बालो में अपनी ऊँगली दाल के हाथ फेरने लगती है. मैं अपनी थूक से रति के दोनों चुचो को भीगा कर अब अपने मुँह को हटा लेता हु जिसकी वजह से रति की सासे उखड चुकी थी उसके चुके थूक से गीले होक चाँद की तरह एक से चमक रखे थे और उसके पिंक निप्पल एक दम खड़े थे रति अभी बिलकुल कामवासना दुब चुकी थी, वही मैं, अब अपना मुँह साफ़ करते हुए रति के सामने hi खड़ा हो जाता हु और रति जो बिस्तर पे लेती हुई थी और मेरे खड़े होने से वो निचे से ऊपर की और उसकी नज़र पड़ती है मेरे काळा सख्त लुंड पर तो उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है आज पहली बार उसने इतना करीब से किसी..
 
गैर मर्द का लुंड देखि थी इससे पहले रति सिर्फ अपने पति का छोटा 3 इंच लुम्बा और एक इंच मोटा लुल्ली hi सिर्फ देखि थी उसे तो विश्वास नहीं हो रहा था की इतना बड़ा भी किसी दूसरे का लुंड होता है तो अपने पति के जितने बड़े लिंग hi सोचती की इतने hi बड़े होते होंगे लेकिन उसकी सोच आज एक दम से बदल सी गई थी वही मेरा लुंड की मोठे सुपडे की छेद से कुछ चिप छिपा सा निचे उसके बड़े और गोर चूचियों पर गिरने लगता है, जिसे देख रति, ेववव.. cccchiiiiiiiiii.. ीीवववव.. cccchiiiiiiiiii.. जीजूउउ.. दुर्र.. कक्क.. कारु.. ना.. इसी?, मैं, अरे मेरी जान.. मेरा लुंड भूखा है तेरी छूट में जाने के लिए... और इतनी खूबसूरत गुलाबी छूट देख कर मेरा साला मुसल लुंड वो अपना लार टपका रहा है वही छूट और लुंड के शब्द सुनकर रति शर्मा जाती है और लेते लेते हुए hi वो अपना मुँह फेर के देखने लगती है, ुर

रति, मन में ("कितना बेशरम है जीजूउउ ये बिलकुल भी नहीं जानते की औरतो के साथ कैसे बात करनी चाहिए इन्हे और इनका लिंग कितना मोटा है बाप रे बाप और लम्बाई कितनी है मेरे एक हाँथ जितना बड़ा ये मेरे अंदर कैसे घुसेगा उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ और कितना कला है जैसे कोई कला कोबरा हो?"), वही मैं, रति के दोनों तरफ अपने पेअर रखे हुए उसके सामने अपना लुंड हिलने लगता हु मेरे लुंड का लाल सुपडे पर से मेरे बड़े हाँथ आगे पीछे हो रही थी और रति वो सब देखते हुए बड़ी hi जोर से सासे लेने लगती है, और वो गौर से मेरे लुंड को देखती है तो पाती है की मेरे काळा लुंड के आस पास काली झांटो का जंगल भरा हुआ था और उस जंगल के बीचो बिच एक कला मोटा सांप फानन फैला रहा था इधर रति, बार बार अपनी नज़र दूसरी तरफ कर रही थी पर मेरे लुंड से टपक रहा चिप छिपा सा काम राश

रति को गर्म कर रहा था. वो तिरछी निगाहों से मुझे और मेरे लुंड को देख जा रही थी, मैं भी कामिनी स्माइल के साथ रति को देखते हुए अपना लुंड हिलाते हुए, शर्मा क्यों रही है मेरी जान ऐसा लुंड तो कभी देखा नहीं होगा सपने में भी tune..hai न?.. रति कुछ नहीं बोलती और बस दूसरी तरफ मु फेर के देखती रहती है लेकिन मैं, देख मेरे लुंड को?, कैसे सख्त हो गया है लोहे जैसे और कैसा पानी टपका रहा है तेरे चुके की गुलाबी निप्पल को देख कर?, उधर रति, को मेरी गन्दी और गरम बाते उसे और गर्म कर रही थी और वो अपनी दोनों जांघो को एक दूसरे पर रख के घिस रही थी वही अब्ब मैं रति, के हाथ पकड़ कर बीएड पे hi खड़ा कर के उसे दीवार से सत्ता कर उसे सामने से अपनी बाहो में समां लेता हु और अब मेरा सख्त मुसल एनाकोंडा लुंड अब रति फूली हुई फैंको पर लग रहा था लुंड के एहसास से वो आहे भरते हुए..

मुझे देखने लगती है इधर मैं अब अपना मुसल लुंड को निचे से थोड़ा एडजस्ट कर के अब उसकी छूट के ऊपर रखता हु और जैसे hi रति को अपनी छूट पर मेरा लुंड का सूपड़ा महसूस हुआ वो एकदम से उछाल पड़ती है और मुझे कास के पकड़ लेती है ये देख मैं, तू छूने बार से hi उछाल पड़ी तो सोच जब ये मेरा लुंड तेरे अंदर जायेगा तो क्या होगा तेरा?, रति, मेरी बात सुन कर शर्मा कर हलकी मुस्कराहट के साथ दूसरी और मुँह कर लेती है और मैं, मन में ("साली शर्मा रही है आगे2 देख तेरी ये शर्म कैसे मैं निकलता हु एक बार छोड़ने की देरी है फिर तो तुझे ऐसा बेशर्म बनाऊंगा की फिर जहा कहूंगा वह तू मुझसे खुसी2 छुड़ेगी बिना किसी के दर और बिना किसी शर्म के यही प्लान है मेरा की तू मेरी रैंड बने), मैं अब हलके से अपनी कमर को आगे पीछे करने लगता हु और मेरा लुंड अब..

उसकी गरम छूट में कभी ऊपर तो कभी निचे होने लगता है लेकिन छूट की छेद में नहीं घुसा रहा था उधर रति, का बुरा हाल होने लगा और वो सिसकारियां भरते हुए मेरे सख्त साइन पर हाथ रख कर मुझे थोड़ा पीछे करने लगती है और इधर मैं, आगे झुक कर उसके गालो को तो कभी गर्दन चूमता हुए फिर उसके दोनों चुचो को अपने हाथो में भरके मसलता हु ुर मेरे इस कदम से रति, आअह्ह्ह्ह.. मायआ.. ऊह्ह्हह्ह.. सशह्ह्ह, अब्ब मेरे इतने पास और मेरी सामने में होने से शर्मा कर रति अपने होंठ सेक्सी तरीके से काटते हुए दूसरी तरफ मुँह फेर के देखने लगती है उसे ऐसा देख कर मैं, अपना चेहरा मेरी तरफ तो क्र बहु, रति, सर हिला कर ना में जवाब देती है ुर मन में (नन्दोई जी कितने बे शर्म हो गए है, बहु भी बोल रहे है और मुझे अपने आप को देखने के लिए बोल रहे है),
 
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