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जिस्म की आग बुझाने के बाद जब दोनों कोई आधे घंटे बाद उठे तो सर्वनाड़ जैसे और प्यासा था सब सोच सोच कर के उसस्के bête के होने वाले पत्नी के साथ वह गुलछर्रे ुरा रहा है और वैसे सोच उस्सको सेक्स करने के लिए और भी ुसकता है और ज़्यादा मैं करता है करने को…… उस्सने पद्मिनी को किश करना शुरू किया फिर से… पद्मिनी अपनी बाहों को उसस्के बाहों के निचे से उस्सको लपेटे हुवे उस्सको किश करते हुवे पूछती है, “तो किआ अब मैं आप की बहु बनूँगी? आप ने मेरे पास कोई चॉइस hi नहीं छोरा, मुझको ज़बरदस्ती आप की बात को माननी hi पड़ी क्यों के आप के बिना रहा नहीं गया आप की यादें बहोत सताती थी आप से मिलने को मैं मचल जाता tha….magar यह कैसा रिश्ता होगा भला?”
सर्वानंद का लुंड फिर से एकदम खड़ा होगया था और पद्मिनी की जाँघों के बीच ठीक पुसी के ऊपर रागढ रहा था और साथ साथ बातें भी कर रहा था वह पद्मिनी के साथ, उस्सने कहा, “देखा अभी अभी जो सेक्स हम दोनों ने पानी में किया कितना ज़बरदस्त था… कितना मज़ा आया है नाह? अब ज़रा सोचो चुप चुप कर ऐसे सेक्स करने में कितना मज़ा आएगा हम दोनों को? ज़रा सोचो जब तुमको पता होगा के तुम मेरी बहु हो, मैं तुम्हारे पति का बाप हूँ और मुझसे शारीरिक सम्बन्ध करने जा रही हो तो कितना मज़ा आएगा करते हुवे…. यह होगी मज़े की बात इस रिश्ते का…..”
पद्मिनी बोली, “हाँ मानती हूँ एक अजीब सी कशिश होगी मगर अस्सल बात तो यह होगी के मैं आप के पत्नी जैसी हूँ और वह आप का बीटा मेरे साथ?? तो??” इस पर सर्वनाड़ और एक्साइट होगया और पद्मिनी से कहा, “अरे यह तो और भी मज़ेदार बात हो gayi…ab ज़रा यह सोचो तो, तुम जब रमेश के साथ हमबिस्तर होने जाओ तो दिमाग़ में सोचना के तुम मेरी बीवी हो, और वह मेरे बीटा तो फिर तुम उस्सकी माँ हुवी, तो तुम्हारा बीटा तुम्हारे साथ करेगा, वह!! कितना एक्ससिटेमेंट hogi…tumko बहोत मज़ा ayega…tum हर वक़्त उस में अपना बीटा hi देखना और जब भी शारीरिक सम्बन्ध रखो उसस्के साथ बस सोचना तुम माँ हो और वह तुम्हारा बीटा तब देखना तुमको कितना मज़ा आएगा छोड़ने mein…behad मज़ा आएगा….. और जब मेरे साथ करने आओगी तब दिमाग़ में यह सोचना के मैं तुम्हारा ससुर हूँ और ससुर से छोड़ने जा रही हो तब भी देखना कितना मज़ा आएगा tumko…are यार तुम तो बहोत लकी हो यार!! चलो एक बार फिर करते हैं नाह…”
पद्मिनी यह सब सोच सोच कर निचे भीग गयी, उस्सको खुद पता नहीं था के ाचा लग रहा है यह सब सुनकर या किआ हो रहा है ussko…magar जिस्म में एक अजीब सी लेहेर थी सर्वानंद की सरे बातों को सुनकर…. और पद्मिनी ेंखें मुंढे सर्वनाड़ की मुंह को अपने मुंह में लिए उसस्के अघोष में खोटी गयी यहाँ तक के आहिस्ते आहिस्ते सर्वानंद ने फिर से उस के कपडे उतार दिए और अधनंगी पद्मिनी सर्वानंद के नीचे उस्सकी जिस्म की गर्मी टेल अपनी जिस्म को सिंख रही थी…. दोनों ने एक बार फिर छोड़ा…. वैसे hi ऊपर ऊपर सर्वनाड़ ने अपने लुंड को उस्सकी छूट के ऊपर उभरे हुवे छूट की गोश्त पर अपना लुंड रगड़ता गया जब तक के उस ने पिचकारी न छोड़ी… पद्मिनी उस्सने निचे कहर रही थी उसस्के जिस्म को अपने बाहों में जाकर और उस्सको चूमते चाटते……
ाअखिर में सर्वनाड़ ने कहा के वह उस के पिता से बात करने जायेगा अपने bête के रिश्ते के लिए उसस्के साथ…. तो दोनों गए पद्मिनी के यहाँ… पद्मिनी ने अपने बापू से सर्वनाड़ को फिर मिलाया और सर्वनाड़ ने अपने bête की रिश्ते की बात की उस खेत के आदमी से जिसस्ने ख़ुशी ख़ुशी इकरार किया… पद्मिनी उस रोज़ की तरह एक कोने में कड़ी सब बातें सुन रही थी और बातें होजाने के बाद वह सर्वनाड़ को चोर्ने गयी उस्सकी गाडी तक… चलते चलते दोनों ने बातें की, और सर्वानंद को चरते हुवे पद्मिनी ने कहा, “तो पिताजी आप कब आएंगे अपने bête के साथ मुझको देखने को? आप के bête ने अभी तक मुझको नहीं देखा है….” सर्वनाड़ को बहोत अचछह लगा जब पद्मिनी ने उस्सको पिता जी कहके phukara…aur उस को जवाब दिया, “ऐसे रिश्ते में यह सब करना ज़्यादा मज़ा देता है, अगर सच में मैं तुमसे शादी करलेता तब वह मज़ा नहीं होता जो अब है…” इस बात से पद्मिनी राज़ी थी क्यूंकि उस्सको खुद कुछ अजीब सा लगता था सर्वनाड़ से सेक्स करते वक़्त जब वह सोच रही थी के यह आदमी उस्सकी होने वाला ससुर है…. सच में ज़्यादा मज़ा ारः था यह फील करते हुवे के अपने ससुर के लुंड को अपने हाथों में पाकर रही थी, उस्सको चूस रही थी, अपने होने वाले ससुर की लुंड को अपने जिस्म पर रगड़वा रही थी, अपनी जवान कुंवारी चूचियों को होने वाले ससुर से चुस्सवा रही थी और खुद होने वाले ससुर को चुम रही थी चाट रही थी….. जो मज़ा मिला वैसे छोड़ने में उस्सको नहीं मिला था पहले चुदाई में तो पद्मिनी को पता चल गया था के शादी के बाद ससुर के साथ बेहद मज़ा आएगा छुड़वाने में…..
पद्मिनी ने पुछा, “वैसे आप का बीटा रमेश कैसा है? किआ वह राज़ी होगा मुझसे शादी करने को ?» सर्वनाड़ ने कहा, «कल उस्सको यहाँ ला रहा हूँ तुमको देखने को तो खुद hi देख लेना के वह कैसा है….. » तब पद्मिनी ने अपनी बाहों का हार उस के गले में डालते हुवे और अपनी पूरी जिस्म को उसस्के जिस्म पर रगड़ते हुवे कुछ नटखट अंदाज़ में पद्मिनी ने कहा, «तब तो मैं अपने ससुर के साथ कल नहीं एन्जॉय कर पाउंगी अगर आप का बीटा साथ आएगा तो ?» सर्वनाड़ एकदम खड़ा होगया यह अलफ़ाज़ सुनकर… फिर पद्मिनी की जिस्म को अपने जिस्म की रागढ देते हुवे उस ने जवाब दिया, «तुम फ़िक्र क्यों करती ho..main आखिर उस्का बाप hoon…tumko देखने के बाद मैं उस्सको किसी काम पर लगा दूंगा इस ज़मीन पर और हम दोनों ेश kareinguey…thik है ?» तब पद्मिनी सर्वनाड़ के गालों पर अपना जीभ फेरते हुवे कहती है, «ठीक है पिता जी, जैसे आप उचित समझे मैं तो वही करुँगी जो आप कहेंगे….. मगर एक और सवाल है, जब मैं शादी करके आप के घर में ाजावूँगी तब आप के पत्नी होगी तो हम दोनों को कैसे मौका मिलेगा भला ? » सर्वानंद ने कहा, «तुम इस्सकी फ़िक्र क्यों करती हो ? मैं उस घर का बॉस हूँ मुझे पता है कैसे किआ करना hoga…aur वैसे मैं ने कहा न चोरी छुपे करने में बहोत ज़्यादा मज़ा आएगा…. » पद्मिनी ने हाँ में अपने सर हिलाया और सर्वनाड़ उस्सको एक आखरी किश करे अपने गाड़ी को स्टार्ट किया और पद्मिनी के bye वेव किया और एक फ्लाइंग किश भी भेजा जो सर्वानंद के कैच किया…..
तो बे कॉन्टिनोएड……………
जिस्म की आग बुझाने के बाद जब दोनों कोई आधे घंटे बाद उठे तो सर्वनाड़ जैसे और प्यासा था सब सोच सोच कर के उसस्के bête के होने वाले पत्नी के साथ वह गुलछर्रे ुरा रहा है और वैसे सोच उस्सको सेक्स करने के लिए और भी ुसकता है और ज़्यादा मैं करता है करने को…… उस्सने पद्मिनी को किश करना शुरू किया फिर से… पद्मिनी अपनी बाहों को उसस्के बाहों के निचे से उस्सको लपेटे हुवे उस्सको किश करते हुवे पूछती है, “तो किआ अब मैं आप की बहु बनूँगी? आप ने मेरे पास कोई चॉइस hi नहीं छोरा, मुझको ज़बरदस्ती आप की बात को माननी hi पड़ी क्यों के आप के बिना रहा नहीं गया आप की यादें बहोत सताती थी आप से मिलने को मैं मचल जाता tha….magar यह कैसा रिश्ता होगा भला?”
सर्वानंद का लुंड फिर से एकदम खड़ा होगया था और पद्मिनी की जाँघों के बीच ठीक पुसी के ऊपर रागढ रहा था और साथ साथ बातें भी कर रहा था वह पद्मिनी के साथ, उस्सने कहा, “देखा अभी अभी जो सेक्स हम दोनों ने पानी में किया कितना ज़बरदस्त था… कितना मज़ा आया है नाह? अब ज़रा सोचो चुप चुप कर ऐसे सेक्स करने में कितना मज़ा आएगा हम दोनों को? ज़रा सोचो जब तुमको पता होगा के तुम मेरी बहु हो, मैं तुम्हारे पति का बाप हूँ और मुझसे शारीरिक सम्बन्ध करने जा रही हो तो कितना मज़ा आएगा करते हुवे…. यह होगी मज़े की बात इस रिश्ते का…..”
पद्मिनी बोली, “हाँ मानती हूँ एक अजीब सी कशिश होगी मगर अस्सल बात तो यह होगी के मैं आप के पत्नी जैसी हूँ और वह आप का बीटा मेरे साथ?? तो??” इस पर सर्वनाड़ और एक्साइट होगया और पद्मिनी से कहा, “अरे यह तो और भी मज़ेदार बात हो gayi…ab ज़रा यह सोचो तो, तुम जब रमेश के साथ हमबिस्तर होने जाओ तो दिमाग़ में सोचना के तुम मेरी बीवी हो, और वह मेरे बीटा तो फिर तुम उस्सकी माँ हुवी, तो तुम्हारा बीटा तुम्हारे साथ करेगा, वह!! कितना एक्ससिटेमेंट hogi…tumko बहोत मज़ा ayega…tum हर वक़्त उस में अपना बीटा hi देखना और जब भी शारीरिक सम्बन्ध रखो उसस्के साथ बस सोचना तुम माँ हो और वह तुम्हारा बीटा तब देखना तुमको कितना मज़ा आएगा छोड़ने mein…behad मज़ा आएगा….. और जब मेरे साथ करने आओगी तब दिमाग़ में यह सोचना के मैं तुम्हारा ससुर हूँ और ससुर से छोड़ने जा रही हो तब भी देखना कितना मज़ा आएगा tumko…are यार तुम तो बहोत लकी हो यार!! चलो एक बार फिर करते हैं नाह…”
पद्मिनी यह सब सोच सोच कर निचे भीग गयी, उस्सको खुद पता नहीं था के ाचा लग रहा है यह सब सुनकर या किआ हो रहा है ussko…magar जिस्म में एक अजीब सी लेहेर थी सर्वानंद की सरे बातों को सुनकर…. और पद्मिनी ेंखें मुंढे सर्वनाड़ की मुंह को अपने मुंह में लिए उसस्के अघोष में खोटी गयी यहाँ तक के आहिस्ते आहिस्ते सर्वानंद ने फिर से उस के कपडे उतार दिए और अधनंगी पद्मिनी सर्वानंद के नीचे उस्सकी जिस्म की गर्मी टेल अपनी जिस्म को सिंख रही थी…. दोनों ने एक बार फिर छोड़ा…. वैसे hi ऊपर ऊपर सर्वनाड़ ने अपने लुंड को उस्सकी छूट के ऊपर उभरे हुवे छूट की गोश्त पर अपना लुंड रगड़ता गया जब तक के उस ने पिचकारी न छोड़ी… पद्मिनी उस्सने निचे कहर रही थी उसस्के जिस्म को अपने बाहों में जाकर और उस्सको चूमते चाटते……
ाअखिर में सर्वनाड़ ने कहा के वह उस के पिता से बात करने जायेगा अपने bête के रिश्ते के लिए उसस्के साथ…. तो दोनों गए पद्मिनी के यहाँ… पद्मिनी ने अपने बापू से सर्वनाड़ को फिर मिलाया और सर्वनाड़ ने अपने bête की रिश्ते की बात की उस खेत के आदमी से जिसस्ने ख़ुशी ख़ुशी इकरार किया… पद्मिनी उस रोज़ की तरह एक कोने में कड़ी सब बातें सुन रही थी और बातें होजाने के बाद वह सर्वनाड़ को चोर्ने गयी उस्सकी गाडी तक… चलते चलते दोनों ने बातें की, और सर्वानंद को चरते हुवे पद्मिनी ने कहा, “तो पिताजी आप कब आएंगे अपने bête के साथ मुझको देखने को? आप के bête ने अभी तक मुझको नहीं देखा है….” सर्वनाड़ को बहोत अचछह लगा जब पद्मिनी ने उस्सको पिता जी कहके phukara…aur उस को जवाब दिया, “ऐसे रिश्ते में यह सब करना ज़्यादा मज़ा देता है, अगर सच में मैं तुमसे शादी करलेता तब वह मज़ा नहीं होता जो अब है…” इस बात से पद्मिनी राज़ी थी क्यूंकि उस्सको खुद कुछ अजीब सा लगता था सर्वनाड़ से सेक्स करते वक़्त जब वह सोच रही थी के यह आदमी उस्सकी होने वाला ससुर है…. सच में ज़्यादा मज़ा ारः था यह फील करते हुवे के अपने ससुर के लुंड को अपने हाथों में पाकर रही थी, उस्सको चूस रही थी, अपने होने वाले ससुर की लुंड को अपने जिस्म पर रगड़वा रही थी, अपनी जवान कुंवारी चूचियों को होने वाले ससुर से चुस्सवा रही थी और खुद होने वाले ससुर को चुम रही थी चाट रही थी….. जो मज़ा मिला वैसे छोड़ने में उस्सको नहीं मिला था पहले चुदाई में तो पद्मिनी को पता चल गया था के शादी के बाद ससुर के साथ बेहद मज़ा आएगा छुड़वाने में…..
पद्मिनी ने पुछा, “वैसे आप का बीटा रमेश कैसा है? किआ वह राज़ी होगा मुझसे शादी करने को ?» सर्वनाड़ ने कहा, «कल उस्सको यहाँ ला रहा हूँ तुमको देखने को तो खुद hi देख लेना के वह कैसा है….. » तब पद्मिनी ने अपनी बाहों का हार उस के गले में डालते हुवे और अपनी पूरी जिस्म को उसस्के जिस्म पर रगड़ते हुवे कुछ नटखट अंदाज़ में पद्मिनी ने कहा, «तब तो मैं अपने ससुर के साथ कल नहीं एन्जॉय कर पाउंगी अगर आप का बीटा साथ आएगा तो ?» सर्वनाड़ एकदम खड़ा होगया यह अलफ़ाज़ सुनकर… फिर पद्मिनी की जिस्म को अपने जिस्म की रागढ देते हुवे उस ने जवाब दिया, «तुम फ़िक्र क्यों करती ho..main आखिर उस्का बाप hoon…tumko देखने के बाद मैं उस्सको किसी काम पर लगा दूंगा इस ज़मीन पर और हम दोनों ेश kareinguey…thik है ?» तब पद्मिनी सर्वनाड़ के गालों पर अपना जीभ फेरते हुवे कहती है, «ठीक है पिता जी, जैसे आप उचित समझे मैं तो वही करुँगी जो आप कहेंगे….. मगर एक और सवाल है, जब मैं शादी करके आप के घर में ाजावूँगी तब आप के पत्नी होगी तो हम दोनों को कैसे मौका मिलेगा भला ? » सर्वानंद ने कहा, «तुम इस्सकी फ़िक्र क्यों करती हो ? मैं उस घर का बॉस हूँ मुझे पता है कैसे किआ करना hoga…aur वैसे मैं ने कहा न चोरी छुपे करने में बहोत ज़्यादा मज़ा आएगा…. » पद्मिनी ने हाँ में अपने सर हिलाया और सर्वनाड़ उस्सको एक आखरी किश करे अपने गाड़ी को स्टार्ट किया और पद्मिनी के bye वेव किया और एक फ्लाइंग किश भी भेजा जो सर्वानंद के कैच किया…..
तो बे कॉन्टिनोएड……………