Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 7 - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 61

जिस्म की आग बुझाने के बाद जब दोनों कोई आधे घंटे बाद उठे तो सर्वनाड़ जैसे और प्यासा था सब सोच सोच कर के उसस्के bête के होने वाले पत्नी के साथ वह गुलछर्रे ुरा रहा है और वैसे सोच उस्सको सेक्स करने के लिए और भी ुसकता है और ज़्यादा मैं करता है करने को…… उस्सने पद्मिनी को किश करना शुरू किया फिर से… पद्मिनी अपनी बाहों को उसस्के बाहों के निचे से उस्सको लपेटे हुवे उस्सको किश करते हुवे पूछती है, “तो किआ अब मैं आप की बहु बनूँगी? आप ने मेरे पास कोई चॉइस hi नहीं छोरा, मुझको ज़बरदस्ती आप की बात को माननी hi पड़ी क्यों के आप के बिना रहा नहीं गया आप की यादें बहोत सताती थी आप से मिलने को मैं मचल जाता tha….magar यह कैसा रिश्ता होगा भला?”

सर्वानंद का लुंड फिर से एकदम खड़ा होगया था और पद्मिनी की जाँघों के बीच ठीक पुसी के ऊपर रागढ रहा था और साथ साथ बातें भी कर रहा था वह पद्मिनी के साथ, उस्सने कहा, “देखा अभी अभी जो सेक्स हम दोनों ने पानी में किया कितना ज़बरदस्त था… कितना मज़ा आया है नाह? अब ज़रा सोचो चुप चुप कर ऐसे सेक्स करने में कितना मज़ा आएगा हम दोनों को? ज़रा सोचो जब तुमको पता होगा के तुम मेरी बहु हो, मैं तुम्हारे पति का बाप हूँ और मुझसे शारीरिक सम्बन्ध करने जा रही हो तो कितना मज़ा आएगा करते हुवे…. यह होगी मज़े की बात इस रिश्ते का…..”

पद्मिनी बोली, “हाँ मानती हूँ एक अजीब सी कशिश होगी मगर अस्सल बात तो यह होगी के मैं आप के पत्नी जैसी हूँ और वह आप का बीटा मेरे साथ?? तो??” इस पर सर्वनाड़ और एक्साइट होगया और पद्मिनी से कहा, “अरे यह तो और भी मज़ेदार बात हो gayi…ab ज़रा यह सोचो तो, तुम जब रमेश के साथ हमबिस्तर होने जाओ तो दिमाग़ में सोचना के तुम मेरी बीवी हो, और वह मेरे बीटा तो फिर तुम उस्सकी माँ हुवी, तो तुम्हारा बीटा तुम्हारे साथ करेगा, वह!! कितना एक्ससिटेमेंट hogi…tumko बहोत मज़ा ayega…tum हर वक़्त उस में अपना बीटा hi देखना और जब भी शारीरिक सम्बन्ध रखो उसस्के साथ बस सोचना तुम माँ हो और वह तुम्हारा बीटा तब देखना तुमको कितना मज़ा आएगा छोड़ने mein…behad मज़ा आएगा….. और जब मेरे साथ करने आओगी तब दिमाग़ में यह सोचना के मैं तुम्हारा ससुर हूँ और ससुर से छोड़ने जा रही हो तब भी देखना कितना मज़ा आएगा tumko…are यार तुम तो बहोत लकी हो यार!! चलो एक बार फिर करते हैं नाह…”

पद्मिनी यह सब सोच सोच कर निचे भीग गयी, उस्सको खुद पता नहीं था के ाचा लग रहा है यह सब सुनकर या किआ हो रहा है ussko…magar जिस्म में एक अजीब सी लेहेर थी सर्वानंद की सरे बातों को सुनकर…. और पद्मिनी ेंखें मुंढे सर्वनाड़ की मुंह को अपने मुंह में लिए उसस्के अघोष में खोटी गयी यहाँ तक के आहिस्ते आहिस्ते सर्वानंद ने फिर से उस के कपडे उतार दिए और अधनंगी पद्मिनी सर्वानंद के नीचे उस्सकी जिस्म की गर्मी टेल अपनी जिस्म को सिंख रही थी…. दोनों ने एक बार फिर छोड़ा…. वैसे hi ऊपर ऊपर सर्वनाड़ ने अपने लुंड को उस्सकी छूट के ऊपर उभरे हुवे छूट की गोश्त पर अपना लुंड रगड़ता गया जब तक के उस ने पिचकारी न छोड़ी… पद्मिनी उस्सने निचे कहर रही थी उसस्के जिस्म को अपने बाहों में जाकर और उस्सको चूमते चाटते……

ाअखिर में सर्वनाड़ ने कहा के वह उस के पिता से बात करने जायेगा अपने bête के रिश्ते के लिए उसस्के साथ…. तो दोनों गए पद्मिनी के यहाँ… पद्मिनी ने अपने बापू से सर्वनाड़ को फिर मिलाया और सर्वनाड़ ने अपने bête की रिश्ते की बात की उस खेत के आदमी से जिसस्ने ख़ुशी ख़ुशी इकरार किया… पद्मिनी उस रोज़ की तरह एक कोने में कड़ी सब बातें सुन रही थी और बातें होजाने के बाद वह सर्वनाड़ को चोर्ने गयी उस्सकी गाडी तक… चलते चलते दोनों ने बातें की, और सर्वानंद को चरते हुवे पद्मिनी ने कहा, “तो पिताजी आप कब आएंगे अपने bête के साथ मुझको देखने को? आप के bête ने अभी तक मुझको नहीं देखा है….” सर्वनाड़ को बहोत अचछह लगा जब पद्मिनी ने उस्सको पिता जी कहके phukara…aur उस को जवाब दिया, “ऐसे रिश्ते में यह सब करना ज़्यादा मज़ा देता है, अगर सच में मैं तुमसे शादी करलेता तब वह मज़ा नहीं होता जो अब है…” इस बात से पद्मिनी राज़ी थी क्यूंकि उस्सको खुद कुछ अजीब सा लगता था सर्वनाड़ से सेक्स करते वक़्त जब वह सोच रही थी के यह आदमी उस्सकी होने वाला ससुर है…. सच में ज़्यादा मज़ा ारः था यह फील करते हुवे के अपने ससुर के लुंड को अपने हाथों में पाकर रही थी, उस्सको चूस रही थी, अपने होने वाले ससुर की लुंड को अपने जिस्म पर रगड़वा रही थी, अपनी जवान कुंवारी चूचियों को होने वाले ससुर से चुस्सवा रही थी और खुद होने वाले ससुर को चुम रही थी चाट रही थी….. जो मज़ा मिला वैसे छोड़ने में उस्सको नहीं मिला था पहले चुदाई में तो पद्मिनी को पता चल गया था के शादी के बाद ससुर के साथ बेहद मज़ा आएगा छुड़वाने में…..

पद्मिनी ने पुछा, “वैसे आप का बीटा रमेश कैसा है? किआ वह राज़ी होगा मुझसे शादी करने को ?» सर्वनाड़ ने कहा, «कल उस्सको यहाँ ला रहा हूँ तुमको देखने को तो खुद hi देख लेना के वह कैसा है….. » तब पद्मिनी ने अपनी बाहों का हार उस के गले में डालते हुवे और अपनी पूरी जिस्म को उसस्के जिस्म पर रगड़ते हुवे कुछ नटखट अंदाज़ में पद्मिनी ने कहा, «तब तो मैं अपने ससुर के साथ कल नहीं एन्जॉय कर पाउंगी अगर आप का बीटा साथ आएगा तो ?» सर्वनाड़ एकदम खड़ा होगया यह अलफ़ाज़ सुनकर… फिर पद्मिनी की जिस्म को अपने जिस्म की रागढ देते हुवे उस ने जवाब दिया, «तुम फ़िक्र क्यों करती ho..main आखिर उस्का बाप hoon…tumko देखने के बाद मैं उस्सको किसी काम पर लगा दूंगा इस ज़मीन पर और हम दोनों ेश kareinguey…thik है ?» तब पद्मिनी सर्वनाड़ के गालों पर अपना जीभ फेरते हुवे कहती है, «ठीक है पिता जी, जैसे आप उचित समझे मैं तो वही करुँगी जो आप कहेंगे….. मगर एक और सवाल है, जब मैं शादी करके आप के घर में ाजावूँगी तब आप के पत्नी होगी तो हम दोनों को कैसे मौका मिलेगा भला ? » सर्वानंद ने कहा, «तुम इस्सकी फ़िक्र क्यों करती हो ? मैं उस घर का बॉस हूँ मुझे पता है कैसे किआ करना hoga…aur वैसे मैं ने कहा न चोरी छुपे करने में बहोत ज़्यादा मज़ा आएगा…. » पद्मिनी ने हाँ में अपने सर हिलाया और सर्वनाड़ उस्सको एक आखरी किश करे अपने गाड़ी को स्टार्ट किया और पद्मिनी के bye वेव किया और एक फ्लाइंग किश भी भेजा जो सर्वानंद के कैच किया…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 62

उसस्के बाद सर्वानंद बहोत खुश घर अपने पत्नी से बात करता है रमेश की शादी की और कहता है के लड़की को देखने लेजाएगा उस्सको. और दूसरे दिन रमेश को साथ लेकर उस गाओं में जाता है जहाँ पद्मिनी बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी. वैसे वह तो रमेश की नहीं मगर उसस्के पिता का वेट कर रही थी फिर भी उसस्के मैं में जैसे के सर्वानंद ने उस्सको बताया था के दोनों बाप बीटा से अलग अलग रिश्ते में छोड़ने को बहोत मज़ा आएगा तो पद्मिनी ज़रा उसस्के बातों से प्रभावित हुवी थी और रात भर मैं में सोच रही थी के कैसे bête का लुंड चुस्सने के बाद बाप का लुंड संभालेगी, उस्सने कभी सपने में भी नहीं सोचा था के एक दिन ऐसा होगा के उस्सको एक बाप और bête दोनों से छुड़वाना पड़ेगा….. एक किसम की कशिश थी जो पद्मिनी को चंचल बना रही थी इन् सब के बारे में सोच कर और सिर्फ सोचने पर hi पद्मिनी भीग जाती थी, तो उस्सको पता चला के वह बहोत एन्जॉय करेगी इस रिश्ते को…..

सर्वानंद सीधा पद्मिनी के घर पोंहचा उसस्के पिता के खेत जाने से पहले. पद्मिनी वैसी hi लिबास में थी, एक छोटी सी तंग चोली और छोटी सी स्कर्ट में, जांघ और बूब्स दिख रहे थे, मगर वह एक कोने में कड़ी उन् लोगों को देख रही थी. सर्वानंद ने पद्मिनी के पिता को रमेश से मिलवाया और कहा के उसस्के लिए वह पद्मिनी का हाथ मांगता है शादी के लिए. बूढ़ा बहोत खुश हुवा और पद्मिनी को बुलाया. जब पद्मिनी थोड़ा शर्माती हुवी आयी तो रमेश की नज़र भी बाप की तरह पद्मिनी की बूब्स, जांघ और कमर पर gayi…..aur उस्सने एक hi पल में पद्मिनी की जवानी को पसंद किया और अपने बाप से कहा के लड़की पसंद है उस्सको. सर्वानंद को रमेश की कुछ टास्ते का पता था इस लिए उस्सको पूरा यकीन था के वह रिश्ते का इकरार करेगा. अगर नहीं भी करता तो सर्वनाड़ उस्सको ज़मीन की लालच देकर मनवलेता.

पद्मिनी रमेश से ज़्यादा उसस्के पिता को देख रही थी और कुछ चंचल अंदाज़ से उस्सको रिझा रही थी और रमेश समझा के लड़की उस्सको सडके कर रही है….. आखिर में पद्मिनी के पिता की ज़मीन जाकर देखने की बात हुवी पाहारी के पास. तो बूढ़े ने पद्मिनी को कहा के उन् लोगों को वह ज़मीन दिखा लाएं….. मगर पद्मिनी ने ज़िद की के वह भी साथ चले और उधर से hi खेत चले जाये…. तो सर्वानंद ने भी कहा के सब साथ चलते हैं और वापस आते वक़्त वह पद्मिनी को घर चोर देगा तो पद्मिनी का पिता भी साथ गया 4क्ष4 में.

सर्वानंद ड्राइव कर रहा था, रमेश आगे बैठा था अपने बाप के पास और पद्मिनी और उस्का बाप पीछे वाले सीट पर बैठे थे. सर्वानंद रियर मिरर में पद्मिनी को निहार रहा था और वह भी उनको देखती जा रही थी उस आईने में मुस्कुराती हुवी….. सर्वानंद ने नोटिस किया के गाड़ी की सीट पर बैठने से पद्मिनी के छोटी स्कर्ट और ज़्यादा उअप्र उठ गयी थी और उस्सकी जांघ का चाह हिस्सा दिख रहे थे और वह अपने पिता के करीब बैठी थी….. तो सर्वानंद के मैं में अचानक एक बात खांका……. उस ने सोचा, ‘यह पद्मिनी अपने पिता के सामने इतने छोटी स्कर्ट पहनती है और पिता कुछ नहीं कहता, और उस्सकी जिस्म का इतना हिस्सा दिख रहे है और बाप उसस्के पास बैठा है तो उस्सको कुछ नहीं होता, इतना भी बूढ़ा तो नहीं है वह आदमी बस खेत की धुप में झुलस गया है…. सर्वानंद का दिमाग़ शैतानों जैसा काम कर रहा था और बाप बेटी की चुदाई के बारे में सोचने laga….uss ने सोचा किआ पता पद्मिनी अपने पिता को भी वैसे hi खुश करती हो जैसे उस्सको!!! यह सोच सोच कर सर्वानंद का लुंड उठ गया पंत में और उस्सको मैनेज करना पड़ा जब के पद्मिनी उस्सको देख कर मज़े ले रही थी….

ज़मीन पर पोहोंच गए वह लोग, पद्मिनी का बाप ने होने वाले जमाई और समधी को ज़मीन दिखाई और अपने खेत चले गए वहीँ से….. पद्मिनी सर्वानंद को अकेले पाते hi उस्सको एक ेंख मरी और जीभ को होंठों के बीच रख कर उस्सको इशारा किया नज़रों को अपनी छाती पर करते हुवे…. मगर रमेश साथ था और हालां के सर्वानंद को बहोत मैं कर रहा था उस्सको छोड़ने को पर मुश्किल tha…aur सर्वानंद के दिमाग़ में यह भी बात था के वह उस्सको रमेश के साथ कुछ करते हुवे देखे…… वह उन् दोनों को अकेले चूर्ण चाहता tha…magar कैसे……. आखिर में डीडे हुवा के पद्मिनी को घर छोड़कर वह अपनी खरीदी हुवी ज़मीन को रमेश का विजिट करवाएगा…. उस्सने ऐसा इस लिए सोचा के वह रमेश से अकेले में बात करना चाहता था…..

तो पद्मिनी को घर चोर कर कहा के वह थोड़ी देर में वापस आएगा…. और चला गया रमेश के साथ बग़ीचे में… अब रमेश का रिश्ता अपने बाप से बिल्कुल दोस्तों जैसा था दोनों खुल कर कोई बात किया करते थे….. तो सर्वानंद ने पुछा, “क्यों किसी लगी पद्मिनी तुमको यार?” रमेश ने कहा, “फीव, एकदम हॉट है पापा!” सर्वानंद ने रिप्लाई किया, “हम्म देखा न, मैं तेरा बाप हूँ और मुझको तेरी पसंद मालूम है, पहले दिन जब मैं ने उस्सको देखा तब hi पसंद कर लिया था उस्सको तेरे लिए यार.” रमेश ने फिर पुछा, “पापा उस्सकी ड्रेस बहोत hi सेक्सी है किआ वह ऐसी hi ड्रेस होती है हमेशा?” तो सर्वानंद ने कहा, “यह इस गाओं की ट्रेडिशनल ड्रेस है यार, दूसरे लड़कियां भी वैसी hi कपडे पेहेनते हैं…..” तब रमेश बोलै, “अपने पिता के सामने वैसी ड्रेस में रहना कुछ अजीब लगा मुझे….” उस वक़्त सर्वानंद का माथा फिर से खांका… उस्सने सोचा के रमेश ने भी वही नोटिस किया जो उस ने kiya….to वह फिर सोचने लगा के कहीं पद्मिनी और उसस्के बाप के बीच कुछ…..??

मगर फिलहाल सर्वानंद पद्मिनी को रमेश के साथ देखना चाहता था तो उस्सने रमेश से कहा, “तुमको कुछ वक़्त उस लड़की के साथ रहना चाहिए था रमेश, एक दूसरे को ज़रा जान लो और वैसे वह तुमको सेक्सी दिखती है तो ज़रा मौज मस्ती करले उसस्के साथ क्यों?” रमेश ने कहा, “मैं तो चाहता hi हूँ के कुछ टाइम रहूँ उसस्के साथ मगर कहाँ वक़्त मिला?” तो सर्वानंद ने कहा, “ठर्र मैं उस्सको लेकर अत हूँ…” और उस्सने उन् जगहों की पता बताया रमेश को जहाँ वह अकेले पद्मिनी के साथ कुछ एन्जॉय कर सके…. फिर चला गया पद्मिनी को लाने….

पद्मिनी को लेकर आते वक़्त गाड़ी में उस्सने पद्मिनी को समझाया के रमेश उसस्के साथ कुछ टाइम रहना चाहता है तो वह कुछ वक़्त दे उस्सको…. और यह भी समझाया, “देखो मेरा बीटा शहर का लड़का है और तेज़ भी है तो ज़रा तुमको चुवा अगर तो इंकार मत करना, बस समझलो के वह तुम्हारा पति हो चुक्का है आलरेडी….. कुछ किश विस्स किया तो आराम से कर लेना टेंशन मत लेना यह सब मामूली बात है शहर के लोगों के लिए, समझी?” पद्मिनी सिर्फ हाँ में सर हिलाती रही मुस्कुराते हुवे….

बग़ीचे में पोंहचे तो उस झील के पास रमेश वेट कर रहा था और सर्वानंद ने दोनों को मिलवाया यह कहकर, “यह लो तुम दोनों कुछ गपे शेप मारो मैं ज़रा अपने इस ज़मीन का मुआएना कर के अत हूँ कोई एक घंटे में…”…………. सर्वानंद दोनों को अकेले चोर कर एक कोने में चुप कर देखता रहा के कब दोनों के बीच कुछ होगा… आधे घंटे से ज़्यादा वह छुपकर देखता रहा मगर सिर्फ बातें करते रहे दोनों… … पद्मिनी के जांघ इतना दिखा रहा था मगर रमेश की हिम्मत नहीं हुवी उस्सको चुने को और सर्वानंद को ग़ुस्सा आया और वापस चला आया वहां और पद्मिनी को वापस चोर्ने गया उसस्के घर. रमेश से कहा वहीँ उस्का वेट करें.

घर पोहोचते hi पद्मिनी को ज़ोर से अपने बाहों में जकरा और दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने लगे जैसे दोनों भूके भरए हो…. सर्वानंद का हाथ पद्मिनी की जांघ पर पोहंचा और तेज़ी से उस्सने वह स्कर्ट ऊपर उठाया बिल्कुल पद्मिनी की कमर तक और उस्सकी पूरी दोनों जांघ बहार थे और सर्वानंद अपने घुटनों पर गया पद्मिनी की कमर पर अपने दोनों बाहों को लपटे उस्सने पद्मिनी की पंतय को चूमना चाटना शुरू किया जब पद्मिनी ेंखें मुंध कर जोश मैं सर्वानंद के सर के बालों को अपने उँगलियों में पके खींचता गया सिसकियों के साथ…… सर्वानंद ने अपने डेंटन से उस्सकी पंतय उतरी, फिर पद्मिनी की घुटनों से चेतना शुरू करते हुवे ऊपर जाँघों से होते हुवे उस्सकी पुसी तक pohncha…Padmini एकदम hi भीग गयी थी और खुद अपनी छूट को दबा रही थी सर्वानंद के मुंह पर कहँरते हुवे….. अपने कमर को दोल रही थी और हर एक मूवमेंट से अपनी छूट को सर्वानंद के मुहं से रागढ खा रही थी अपनी भीगी हुवी छूट को……

उस के बाद, जब के सर्वानंद पद्मिनी की छूट की पाँखुरियों को तराशते हुवे अपने उँगलियों से उन् पंखुरियों को खोलकर अपना जीभ रागढ रहा था उन् पंखुरियों के गुलाबी नरम हिस्सों पर तब पद्मिनी खुद अपनी चोली उतार फेकि और अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को खुद मसल रही थी और कमर दोल रही थी सर्वानंद के मुहं पर…… सर्वानंद को नमकीन लाज़त आयी जीभ पर क्यों के पद्मिनी का पानी बह रहा था वहां जो सर्वनाड़ ने खूब मज़े से छाता……

पद्मिनी से रहा न गया और उस्सको ऊपर अपने ऊंचाई तक खिंचा और दोनों के मुंह में मुंह एक दूसरे के जीभ का रस चुस्सने lage…chustey वक़्त पामिनी ने hi आहिस्ते आहिस्ते सर्वानंद के पंत को उतरा और कमीज को बाहर निकल फेंका, फिर अपनी चूचियों को उसस्के छाती पर रगड़ते हुवे किश में डूबे रहे और एक हाथ से पद्मिनी ने सर्वानंद के लुंड को अपने हाथों में लिए खुद अपने छूट पर रगड़ने लगी…… दोनों खड़े हुवे पोजीशन पर थे और पद्मिनी की आग इतनी ज़्यादा थी के खड़े खड़े hi उस्सने अपने दोनों पैरों को कुछ फैलाया और सर्वानंद की लुंड को अपने छूट के अंदर लिया तो सर्वनाड़ अपने कमर को हिलाते हुवे अंदर पुश किया और लुंड पूरा लम्बा पद्मिनी के छूट में घुस गया और उस्सने एक पतली आवाज़ में ज़ोर से, “िष्श्षषस, ोीएमअआअ आआह्ह्हआआआ…” कही और फिर अपने बाहों को सर्वानंद के कांधों पर लपेटे हुवे उसस्के काँधे को चुस्ती गयी जब तक सर्वानंद ढाका देता गया एक से बढ़ कर एक ज़ोरदार ढाका और बहोत जल्द hi पद्मिनी झड़ने लगी चिलाती हुवे, “आआआआहहहहहहह हाआए reeeeeee…bahot मज़ाआआ ारः hai…ufffff मेरी माआआआआ……..” सर्वनाड़ अंदर बहार करता गया अपना लुंड और ठीक झड़ने के वक़्त उस्सको निकाला और बग़ैर पूछे पद्मिनी जल्दी से नीचे बैठ गयी उसस्के लुंड को अपने मुंह में लेने को और सर्वानंद का झरना पद्मिनी के मुंह के अंदर गया….. कुछ पद्मिनी ने घूंट ली और कुछ थूक दिया बाहर…. फिर पद्मिनी सर्वानंद के लुंड को अपने हाथ में लिए हिलाती गयी जब तक के वह बिल्कुल नरम और छोटा न होगया……..

तब जाके सर्वानंद का माथा खांका एक बार फिर यह सोचते के पद्मिनी तो कुंवारी वर्जिन नहीं है?!!!!! यह तो चुद चुकी है पहले से hi…kiss ने छोड़ा इस मासूम भोली भली दिखती पद्मिनी को?

तो बे कॉन्टिनोएड……………………(2970 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 63

सर्वानंद ने कुछ नहीं कहा उस वक़्त पद्मिनी को इस बारे में, बस अपने आप में सोचता रहा के यह बड़ी चालू चीज़ है यह Padmini…jitna देखने में भोली है उतनी है नहीं. उस्सने पद्मिनी को कहा के उस का मैं बहोत करता है उसस्के साथ hi रहने को मगर रमेश को वापस शहर चूर्ण है इस लिए वह उस्सको चोर कर वापस आएगा. पद्मिनी खुश हुवी और कहा के उस्का इंतज़ार वह बग़ीचे में hi करेगी झरने के पास.

तो सर्वनाड़ चला गया रमेश को चोर्ने 100 कंस ड्राइव करते. इधर पद्मिनी बेहद खुश थी के सर्वनाड़ ने उस के साथ अंदर तक पेनेट्रेशन किया और उस्सको बहोत मज़ा आया, मगर पद्मिनी को यह भी पता था के अब सर्वनाड़ को पता चल गया के वह वर्जिन नहीं है और तैयार थी उस्सको जवाब देने को अगर उस ने पुछा तो…..

दो घंटे के बाद तक़रीबन, सर्वानंद वापस आया झरने के पास. पद्मिनी वेट कर रही थी उसी छोटी स्कर्ट और तंग चोली mein…jeise जिस्म की आग अभी ठंडी नहीं हुवी हो और ज़्यादा की ज़रुरत हो…. देर न करते हुवे सर्वनाड़ ने उस्सको अपने गॉड में बिठाया और अपने हाथों को उस्सकी जाँघों पर फेरते हुवे उस्सकी जीभ को चूसने laga….Padmini अपने बाहों का हार सर्वानंद के गले में डेल उस्सकी जीभ से रस निचोड़ रही थी और सर्वानंद के हाथ पद्मिनी के स्कर्ट के नीचे अंदर की तरफ घुसा जा रहा था किश करते दौरान. फिर अचानक सर्वनाड़ ने किश को रोकते हुवे पुछा, “यार तुम तो वर्जिन नहीं हो! मैं इतने दिनों से तुमसे ऊपर ऊपर सेक्स करता रहा और तुमने कहा भी नहीं के अंदर मैं दाल सकता था!!” पद्मिनी ने अपना सर निचे झुकाते हुवे चेहरे पर लाली लिए कहा, “मैं कहना तो चाहती थी, कितना मेरा मैं कर रहा था के आप मेरे जिस्म के गहराई में जाये मगर कैसे कहती आप ने मुझको वर्जिन जो समझ लिया था…. लज्जा आरही थी कहने को जी…” सर्वनाड़ बहोत प्यार से उस्सकी गालों को सहलाते हुवे पुछा, “चाह कोई बात नहीं तब कुछ नहीं कहा मगर अब तो बताओ कब से तुमको सेक्स की गहराई का पता है और कौन है वह खुश नसीब जिसस्ने इस कोमल सील को तोडा माय डिअर?”

पद्मिनी कुछ घबराई सी लगी और सर्वानंद के गॉड से उठ कड़ी हुवी और सर ज़मीन पर झुकाये एक तरफ देखने लगी, उस्का दिल ज़ोरों से धारक रहा था और वह पसीना पसीना हो रही थी…. सर्वनाड़ उसस्के पीछे गया और पीछे से hi पद्मिनी को अपने बाहों में लिए अपने लुंड को उस्सकी गांड पर रगड़ते हुवे पुछा, “बोल न मेरी रानी किश खुशनसीब से छुड़वाई थी पहली बार और कब की बात है यह!! और किआ अभी तक कोई और यह सब करता है किआ तेरे साथ? बता नाह!” पद्मिनी का गाला सुख गया था और अपने थूक को घंटे हुवे उस्सने कहा, “आप यह मत पूछिए के किश ने किया बस मैं आप को बता देता हूँ के कब से यह हुवा मेरे साथ मगर प्लीज आप मत पूछए के किश ने किया मैं नहीं बता पाउंगी….” सर्वानंद ने जवाब दिया, “चाह ठीक है मत बता किश के साथ मज़ा किया था बता दे कब किया था…..” जब के पीछे से सर्वनाड़ ने उस्सको जकरा हुवा था तो पद्मिनी ने अपने कलाई को सर्वनाड़ के हाथों पर फेरते हुवे कुछ शर्माते हुवे कहा, “मैं तब ** साल की थी जी….. मुझे कुछ समझ में नहीं आया था फिर भी मैं ने पसंद किया था सब जो हुवा था….” सर्वनाड़ का लुंड जमके खड़ा हो उठा यह सुनकर के ** साल की उम्र में hi किसी ने उस्सको छोड़ दिया था, और वह समझ रहा था के एक भोली भली कुंवारी को वह पहला मर्द छह रहा hai…apne मर्दानगी पर गर्व हो रहा था उस्सको मगर अब सोचने लगा के कितना उल्लू बनाया इस लड़की ने उस्सको…..

सर्वानंद को थोड़ा सा घुसा आया फिर भी अपने आप को काबू में लाते हुवे उस्सने पद्मिनी से कहा, “देखो डिअर, अब सवाल पर सवाल अपने आप hi उठेगा, अब तो मैं यह पूछूंगा के कैसे हुवा यह, कहाँ पर हुवा? तुमने क्यों नहीं रोका? सब से बड़ा सवाल मेरा यह होगा के किआ आज भी तुम उसस्के साथ यह करती हो या सिर्फ एक बार हुवा था या कई बार? सब डिटेल्स में बताओ मुझको…” पद्मिनी को समझ में नहीं आरही थी के कैसे शुरू करे और कहाँ से बात को शुरू करे……

तो फ्रेंड्स मैं आप लोगों को बताता हूँ के अस्सल में हुवा किआ था, और एहि बात जो मैं आप लोगों को लिख कर बताउंगा पद्मिनी ने सर्वानंद को बताई.

तो हुवा यह था के पामिनी की माँ का देहांत हो गया जब वो 12 साल की थी. और कोई भाई बेहेन न होने के कारण पद्मिनी अपने पिता की बड़ी दुलारी थी. एक hi अवलाद होने के कारण 12 साल की उम्र से वह अपने पिता के साथ hi सोती थी. बहोत प्यार था पिता को पद्मिनी से और हमेशा साथ रखती थी अपने दिल के टुकड़े को वह. कभी कोई बुरा ख़याल नहीं था अपने बेटी पर उस पिता को. सब ठीक से चल रहा था और पद्मिनी स्कूल जा रही थी सभी गाओं के बच्चों की तरह. स्कूल के बाद पद्मिनी ने अपने पिता से hi खाना पकाना सीखा. अछि काम करलेती थी घर की सभी छोटी थी तब से hi. माँ के मरने के बाद घर की माँ बन गयी थी पद्मिनी. अपने पिता की खूब ख़याल रखती थी.

परन्तु कुछ सालों के बाद एक शाम को कॉलेज की लड़कियां पद्मिनी के बारे में कुछ अनाप शनाप बक रहे थे जो किसी दूसरे गाओं के लोगों ने सुना और वह बात पद्मिनी के पिता के कानों तक पोंछी. वह बात यह थी के स्कूल का किसी एक टीचर को पद्मिनी के साथ अकेले किसी एक लड़की ने देखा था… यह बात इतनी बढ़ गयी थी के सब कहते थे के वह टीचर हमेशा पद्मिनी को अकेले क्लास में अपने साथ रखता है ब्रेक के वक़्त और स्कूल ख़तम होने पर पद्मिनी के साथ कहीं किसी जंगल के हिस्से में जाता hai…aur बहोत तरह की बातें हो रहे थे पद्मिनी और उस टीचर को लेकर. और जब बात गाओं के मर्दों तक पोंछे तब सब ने खुलम खुला यह कहा के पद्मिनी को वह टीचर छोड़ता है. और बाकी गाओं की लड़कियां भी एहि बात करने लगे और पद्मिनी से दूर रहने लगे. पद्मिनी सब लड़कियों से बहोत ज़्यादा खूब सूरत थी और सब से खूबसूरत जिस्म भी थी उस्सकी और रंग भी सब से गोरी थी. उस छोटे से गाओं में पद्मिनी जैसे कीचड़ में खिला एक गुलाब था.

और फिर बाकी मर्दों की नज़र पद्मिनी की एवं पर पर्ने लगी और सब मर्द उसस्के साथ सोने की ीचा करने लगे. तो कानों कानों यह बात पद्मिनी के पिता तक पोंछा तो एक रात उस्सने पद्मिनी को अपने पास प्यार से पूछने के लिए बुलाया. अब क्यों के पिता ने खुद सुना के पद्मिनी को एक टीचर छोड़ता है तो खुद पिता भी अपनी बेटी की एवं को देखने लगा सवाल करते वक़्त. पिता ने उस वक़्त ड़याँ से पद्मिनी को देखा तो नोटिस किया के उस्सकी चूचियां बड़ी हो गयी है, गांड उभर ए हैं, जिस्म एकदम एक जवान ाव्रत की जिस्म जैसी हो गयी है हालां के उम्र उतनी नहीं हुवी थी तब भी……. पिता को आदत थी पद्मिनी को अपने गॉड में बिठा कर बात करने की तो उस्सको अपने गॉड में लिया और प्यार से पुछा, “यह सब बातें जो तेरे बारे में हो रहे हैं किआ सच हैं?” पद्मिनी शर्माती हुवी बोली, “कौन सी बातें बापू?” उस वक़्त पिता को महसूस हुवा के उस्का लुंड खड़ा हो रहा था पद्मिनी के जाँघों के बीच, और उस ने फील किया के उस्सकी बेटी बड़ी हो गयी है अब…. और इतनी खूबसूरत लड़की है उसस्के घर में उस ने कभी ग़ौर hi नहीं किया था……

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 64

तो पद्मिनी का बाप अपने लुंड को अपने हाथों से पंत के अंदर सीधा करते हुवे पद्मिनी की जाँघों को छूटे हुवे बात करता गया अपनी बेटी से…. जिस वक़्त उस ने यह किया पद्मिनी को अच्छी तरह से पता चला के किआ कर रहा था उस्का पिता और सर झुकाये अपने होंठों को डेंटन में दबाये लाल पीली हो रही थी. तो बाप ने फिर बड़े प्यार से पुछा, “बोल तो ज़रा मेरी बिटिया किआ बातें सुन रहा हूँ तेरे बारे में मैं?” “किआ बातें बापू, किआ कह रहे हो आप मेरी तो कुछ समझ में नहीं आरही है!” पद्मिनी ने कुछ नटखटी अंदाज़ में जवाब दिया.

बापू ने अपने हाथों को उस वक़्त हलके से पद्मिनी की जाँघों के ऊपर फेरा और अपने हाथ को उस्सकी छोटी स्कर्ट के नीचे डालना चाहा मगर सहस नहीं हुवी उस्सकी तो रुक गया और कहा, “देखो, मुझे अच्छी तरह से पता है के तुम खूब समझ रही हो के मैं किश बारे में बात कर रहा हूँ, और तुम भोली बन रही हो, मुझसे शर्माने के बजाये तुमको मुझसे खुल कर साड़ी बातें बता देनी चाहिए पद्मिनी मेरी रानी बिटिया.” पद्मिनी ने बचपना की और झट से अपने बाप की गॉड से उतर कर किचन के तरफ जाने लगी यह कहकर के उस्सको छाए बनाना है……. पिता को समझ में नहीं ारः था के कैसे उस से उस बारे में बात करे. वह पद्मिनी के पीछे किचन तक गया और दरवाज़े पर खड़े होकर खुद अपनी बेटी को वासना की नज़र से देखने लगा यह सोचते के कोई टीचर से चुदवाती है उस्सकी बेटी!

पद्मिनी ने नज़र तिरछी करके देखा के उस्का बापू उस्सको घर रहा है दरवाज़े के पास खड़े होकर. उस वक़्त वह वैसी hi एक तंग चोली और छोटी स्कर्ट में थी जैसे हमेशा से घर पर पहना करती है. और उस्का बाप ने ग़ौर से पद्मिनी की चूचियों पर अपना नज़र दौड़ाया, फिर नज़रों को पद्मिनी की चौत्रों पर किया और उस्सकी गोरी गोरी उभरे हुवे जाँघों पर नज़र डाला बाप ne…aur अपने लुंड को फिर सीधा करने लगा अपने पंत में होंठों पर जीब फेरते हुवे….. पद्मिनी ने फिर एक बार अपने बापू को लुंड पंत में सीधा करते देखा और होंठों को डेंटन में दबाया एक छोटी सी मुस्कराहट के साथ. उस्का बाप धीरे धीरे पद्मिनी के पास पोंहचा और वह पीठ किये किचन के टेबल के पास कड़ी थी तो पीछे से hi बाप के अपनी बाँहों को पद्मिनी के कांधों पर डालते हुवे हाथों को पद्मिनी के आगे रखते हुवे अपने जिस्म को उसस्के पीछे की जिस्म से चिपकते हुवे अपने गालों को पद्मिनी के गालों से सहलाते हुवे कहा, «तुम बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिख रही हो बिटिया, जब वह जवान थी तो बिल्कुल ऐसी hi दिख रही थी तेरी माँ, उस्सकी याद आगयी आज. » और यह कहते वक़्त पद्मिनी ने खूब अछि तरह से फील किया के उसस्के बापू का लुंड उसस्के चुतरों पर दबा हुवा था और बाप ने हलके से एक रागढ दी उसस्के चुतरों par…Padmini ने खूब अछि तरह से अपने बापू का मोटा लुंड को महसूस किया अपने गांड पर….. जब से उस्सकी माँ की देहांत हुवी थी यह पहली बार था जब के उसस्के बापू उसस्के साथ वैसा व्योहार कर रहा था, वार्ना हमेशा से उस्सको एक छोटी बची की नज़र से देखता था उसस्के बापू… रात को 12 साल की उम्र से उसस्के साथ सोती थी मगर कभी भी उसस्के बापू ने उस्सको बुरी नज़र से नहीं देखा tha…aur अब पद्मिनी को समझ में ारः था के उस्सकी जवानी उसस्के बाप को भी गरम कर रहा है….. और पद्मिनी को यह भी बिल्कुल पता हो गया था के उस टीचर से रिश्ते वाली बात को लेकर उसस्के बापू ने उस्सको वैसे नज़रों से देखा……. मगर पद्मिनी को समझ में नहीं ारः था के किआ करें…. खुद तो उम्र का तकाज़ा था और जिस्म की गर्मी भी थी और वैसी जवान जिस्म लिए वह मर्दों को बिल्कुल एक्साइट तो करती थी hi मगर उस्सने सोचा नहीं था के खुद उस का बापू भी उन् मर्दों में से एक होजाएगा….

बापू ने पद्मिनी को वैसे hi जाकर हुवे पीछे से कहा, «कितनी लम्बी होगयी है तू अचानक, ज़रा देखूं तो तेरा कद कहाँ तक पोहोचता है मेरे बराबर किआ ? » उस्सने पद्मिनी को अपने तरफ मोड़ते हुवे उस्सको अपने सीने से लगाकर उस्सकी कद देखना चाहा तो उस वक़्त पद्मिनी की चूचियां बिल्कुल बाप के छाती से रागढ खा रहे थे और पद्मिनी को मज़ा ारः था खुद हैरानी के साथ…. बाप ने कहा, «देख तो तेरा सर मेरे बिल्कुल कांधों के ऊपर आगया है, अभी कुछ दिन पहले तो तू मेरे छाती तक थी, अब तक़रीबन मेरे इतना ऊंचा होगयी hai…itni जल्दी तू अचानक कैसे बढ़ गयी ऋ पद्मिनी ? हम्म और तेरा जिस्म भी कितना बदल gaya…har रोज़ मेरे सामने hi तो रहती है तू मगर मुझको क्यों नहीं दिखा ? » पद्मिनी ने मुस्काते हुवे अपने बापू के कमर के दोनों तरफ अपने बाँहों के लपेटे हुवे जवाब दिया, «ोफो बापू, लड़कियां जल्दी बड़ी होते हैं किआ आप को मालूम नहीं किआ ?» यह कहते वक़्त पद्मिनी ने नटखट अंदाज़ में अपने दोनों पैरों को ज़मीन पर पीटा, और बाप ने उसको ज़ोर से अपने बाहों में जकरा और गालों पर चुमबन्द दिए उस्सकी पीठ को सहलाते हुवे….. इस बार पद्मिनी ने उस्का लुंड अपने पथ के थोड़ा नीचे छूट के नज़दीक महसूस किये…. वह अब भी बहोत मोटा और तगड़ा रागढ रहा था उस कोमल जगह पर और पद्मिनी ने ेंख मुंध ली उस्सको फील करते हुवे और अपने बापू को ज़ोर से बाँहों में जाकर लिया.

पद्मिनी का बाप के समझ में नहीं ारः था के कैसे शुरुवात करे…. उस्सको डर भी था के कहीं पद्मिनी नाराज़ न हो जाये और उस से बात करना छोड़ दें या पुलिस को खबर कर दें या स्कूल में टीचर से कह dein…yeh सब सोच सोच कर वह कुछ घबरा रहा tha…magar हु पद्मिनी को अब छोड़ना hi चाहता था….. पद्मिनी अब उसस्के लिए एक पत्नी से कम नहीं थी और वह सच में उस्सकी पत्नी की तरह दिख रही थी, उम्र में छोटी थी मगर रूप बिल्कुल उस्सकी माँ की धारण की थी पद्मिनी ने. बाप ने खूब सोच विचार करने के बाद पद्मिनी को कहा, “चाह अगर तुम अभी नहीं बताना चाहती टीचर वाले बात तो रात को जब हम सोवेंगे तब आहिस्ते आहिस्ते सब बतादेना मुझको, देखो मैं घुसा नहीं करूँगा और वडा है के मैं तुमसे फिर भी बहोत प्यार करूँगा और अगर तुमने ग़लती भी किया है तो माफ़ kardunga.Thik है?” पद्मिनी ने यह सुनकर ख़ुशी से कहा, “चाह प्रॉमिस करो के आप मुझको डांटेंगे नहीं और कुछ ऐसी वैसी बात गालियां वग़ैरा नहीं देंगे…” तो बापू ने कहा, “किआ मैं ने कभी तुमको गलियां दी है मेरी रानी? हम्म? तुमतो मेरे दिल के टुकड़े हो, मेरी जान हो, जितना प्यार मैं तुमको करता हूँ शायद hi दुन्या में कोई बाप अपनी बेटी को करता होगा” यह सब कहते वक़्त उस्सने अपने लुंड को ज़्यादा ज़ोरों से दबाया पद्मिनी के पथ के निचे और थोड़ा रगड़ा भी और पद्मिनी को अपने दोनों पैरों के अंगूठों पर खड़ा होना पड़ा बाप के गले लगते हुवे ……और उस्सने ेंखें बांध करके बाप के गले लगते हुवे उस्सको को हलके से चूमा और गहरी सांस लेते हुवे एक छोटी सी सिसकियाँ छोड़ी…..

उसस्के बाद बाप ने कहा, “मुझे आज पीने का मूड है मैं बाहर जा रहा हूँ थोड़ा सा पी कर वापस ावुंगा तब तक रात

होजाएगी फिर बातें करेंगे ठीक है?” वह हफ्ते में दो दिन पीटा था, और जैसे उस्सकी पत्नी उस्सको डांटा करता था जब पीटा था, तो अब पद्मिनी भी अपनी माँ की तरह उस्सको डांटता है जब वह पीटा है तो….. और जब बापू दन्त खता है पद्मिनी से तो बस हँसता है…. तो जब जाने लगा तो पद्मिनी ने कहा, «खबरदार अगर ज़्यादा पी कर ए तो! मैं आप से बात नहीं करुँगी अगर आप नशे में होंगे तो, केहड़ेटी हूँ हाँ!” बाप मुस्कुराता हुवा जवाब देता है, “हाँ मेरी माँ ज़्यादा नहीं पियूँगा…. मगर याद रहे तुम ने कुछ वेड किये हैं आज रात को बिस्तर पर सोने के waqt….mujhe उस वक़्त का इंतज़ार rahega…hmmm?” पद्मिनी सर झुका कर “हम्म” कहा.

बाप निकल गया, तो पद्मिनी को ऐसा लगा के उस्का बाप ने अभी अभी उस्सको छोड़ने को प्रोपोज़ किया रात को….. खुद उस्सको अजीब सा लग रहा था और उस्सने अपनी उँगलियों को अपने छूट तक पोंछायी तो देखा के भीग गयी hai…..aur खुद से कहा, ‘लो! बापू से भी बात करके भीग रही हूँ ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ उधर टीचर भीगा देता है मुझको, अब बापू के साथ भी किआ हो रहा है मुझे?!’

पद्मिनी का बाप जब बार में पीना गया तो पद्मिनी की तस्वीर उसस्के ेंखों के सामने दोल रहा था, वह उस्सकी मस्त जिस्म, उस्सकी मुस्कराहट, उस्सकी नाज़ुक गाल और मुस्कान, उस्सकी गोरी कोमल जांघ, उस्सकी ुंभरे हुवे चूचियों को सोच सोच कर पी रहा था और उस्का लुंड एक दम मस्त खड़ा हुवा था पंत के अंदर और छोड़ने को बिल्कुल तैयार था….. मगर सोच रहा ता के किआ वह पद्मिनी को छोड़ पायेगा? किआ पद्मिनी छोड़ने देगी? किआ वह इंकार नहीं करेगी? अगर उस्सने इंकार किया और शोर मचाई तो किआ करेगा?.......

तो बे कॉन्टिनोएड…………………..
 
अपडेट 65

जब वह बार पोहंचा तो एक दोस्त का देहांत का न्यूज़ मिला उस्सको और वह पीने से पहले वहां चला गया…. एक लड़के को अपने घर भेजा पद्मिनी को यह कहने को के वह एक फ्यूनरल में जा रहा है, लेट वापस आएगा उस्का इंतज़ार न करें और टाइम पर सजाये. उस लड़के ने पद्मिनी को जब आकर कहा के उस्का पिता लेट आएगा तो डिनर के बाद पद्मिनी सोने चली गयी सभी बातों को भूलकर. अब पद्मिनी गाओं की लड़की थी तो रात को निघ्त्य नहीं पहनती थी बल्कि वैसी hi सोती थी जिस ड्रेस में रहती थी, याने वही छोटा स्कर्ट और छोटी सी तंग चोली में….. सुबह उठकर नहाती थी तब ड्रेस चेंज करती थी हर रोज़.

तो अपने पापा के पास सोती थी तो उसस्के बिस्तर पर सगाई पद्मिनी. और उधर उस्का बाप फ्यूनरल से होने के बाद रघु के बार में गया और पीना शुरू किया. जब पी रहा था तो उस ने सुना कुछ लोग पद्मिनी की बातें कर रहे थे. फुसफुसा रहे थे कुछ लोग ke,”Yehi उस लड़की का पिता है, किआ माल है इस्सके घर में यार, मेरी वैसी बेटी होती तो मैं hi उस्सको छोड़ देता!! किआ जिस्म है, किआ जांघ है उस्सकी यार, किआ नाज़ुक नाज़ुक कोमल उभरे हुवे चूचियां है, रस्ते में चलती है तो उसी वक़्त लुल्ली कड़ी होजाती है और उस्सको छोड़ने को मैं करता ha…Jane उस टीचर से कितना चुदवाती है, बहोत मज़ा अत होगा उस सेल टीचर को, किआ किस्मत पाया है साला!” तो एक दूसरे जवान मर्द जो उन् लोगों के साथ बैठा था यह कहा, “अरे बाप, जब पद्मिनी कॉलेज के यूनिफार्म में स्कूल जाती है तब देखा है उस्सको? किआ छोटा सा स्कर्ट पहनती है बाप! उस्का बाप खुद उस्सकी जांघ को निहारता होगा इसी लिए छोटी छोटी स्कर्ट्स पेहनवती होगी ussko…ek घर में जिस में माँ नहीं हो लड़की वैसे कपडे पहने बाप के सामने तो समझ जाना चाहिए किआ मामला है yaar….khub मज़ा करता होगा यह भी अपनी एक लौटी बेटी के saath….kia माल है इस के घर में बाप!”

यह सब बातें सुनकर पद्मिनी के पिता को ग़ुस्सा नहीं आया बल्कि उस्सको चाह लग रहा था सब सुनने को और उस्का लुंड खड़ा होगया था और सोच रहा था के, अगर लोग सोचते हैं के वह पद्मिनी को छोड़ता है तो उस्सको छोड़ना hi चाहिए उस्सने सोचा, और अपने आप से कहा के चाह डिसिशन लिया है उस्सने आज पद्मिनी को छोड़ने को…. ‘घर जाकर ज़रूर छोडूंगा आज पद्मिनी ko…pata नहीं उस टीचर ने उस्सकी सील तोड़ी है या मुझको hi काम तमाम करना पड़ेगा…. Dekheinguey….pata नहीं चिलायेगी अगर सील तोडना पड़ा तो’…. खुद में बड़बड़ा रहा था पद्मिनी का बाप पीते वक़्त….

आखिर में वह पीने के बाद वहां से निकला और पद्मिनी को मैं में सोचते चले जा रहा था वापस अपने घर जाते वक़्त, के रास्ते में एक एक्सीडेंट होगयी किसी एक जान पहचान की. अब पद्मिनी का बाप उस आदमी का जान पहचान वाला था और उस बेचारे ने बिनती की के वह उसस्के साथ हॉस्पिटल चलें क्यों के उस वक़्त कोई भी उस के साथ जाने वाला नहीं था…. तो मजबूरन उस्सको हॉस्पिटल तक उस आदमी के साथ जाना पड़ा…… अब हॉस्पिटल में जितना वक़्त गुज़रा सब फॉर्मलिटीज पूरी करने और उस आदमी को एडमिट करने में तब तक सारा नशा उतर गया और फिर से पीने गया, जब फिनिश किया तो रात के 11 बज गए थे और पद्मिनी गहरी नींद में सोई हुवी थी जब वह घर पोंहचा तो…..

वह सीधे अपने बैडरूम में गया और पद्मिनी के पास बैठ कर अपने कपडे उतारने लगा….. बिस्तर पर hi बैठ कर ुंदरेस हो रहा था तब धीरे से आधी नींद में पद्मिनी ने ेंख को मुंढे हुवे कहा, “आप खाना खा लेना बापू.” और यह कहकर वह फिर सगाई, नींदः में hi वह बात केह्गाई…… बापू ने लरखराते जुबां से धीरे से कहा, “खा चुक्का हूँ, अब तो तुझ को खाना है ऋ!” पद्मिनी ने कुछ नहीं सुना सच में गहरी नींद में थी वह उस वक़्त.

बापू सिर्फ अपने अंडरवियर में बैठा था बीएड पर और बगल में उसी बीएड पर पद्मिनी गहरी नींद में सोई हुवी थी तो बाप ने धीरे धीरे, बिल्कुल आहिस्ते आहिस्ते पद्मिनी के ऊपर से चादर को हटाता गया…. पद्मिनी करवट सो रही थी अपनी दाएं बाहों पर पैरों को मूढ़ कर. अब पेयर मोड़ने की वजह से तो उस्सकी छोटी सी स्कर्ट और भी ऊपर उठ गयी थी और वह किआ नज़ारा था उस्सकी खूबसूरत जवान जाँघों की…. बापू के मुंह में पानी आगया… और हाँ, उस पोजीशन में पद्मिनी की गांध भी ाचे फॉर्म में दिख रही थी, ज़रा सोचिए दोस्तों जब एक जवान लड़की पैरों को मोड़कर अपने दाएं बाहों पर सोई हुवी हो और छोटी सी स्कर्ट में हो तो कैसा नज़ारा देखने को मिलता है!! वही नज़ारा बापू के ेंखों के सामने था और उस का लुंड अंडरवियर से बाहर निकलने को उछाल गया….

पद्मिनी के बाप ने हलके से अपने हाथों को पद्मिनी के गांध पर फेरते हुवे अपने हाथ हो ऊपर के तरफ लेता गया जब तक के उस का हाथ पद्मिनी की अधनंगी बाज़ुओं के ऊपर न पोंछा….. वहां से फिर उस्सने अपने हाथ को पद्मिनी की बाँहों के नीचे फेरा जहाँ छोटे छोटे बाल गए थे और अपने नाक को वहां रागढ कर सूंघना शुरू किया….. पद्मिनी की पसीने की खुशभू या बडभू कहलो, किसी को उस जगह की बह पसंद होता है, किसी को नहीं पर पद्मिनी की बापू को पद्मिनी के बाहों टेल वाला बह बहोत पसंद था और उस महक ने उस्सको और भी एक्साइट कर दिया…. उस्सने हलके से अपने जीभ को उस नाज़ुक जगह पर फेरा और छाता उस नमकीन लाज़त वाले हिस्से को, और पद्मिनी ने नींद में hi एक छोटी सी अंगराई ली….. तब बापू ने बीएड के दूसरे तरफ जाते हुवे, पद्मिनी को अपने सामने पाया, पहले तो उस्सकी पीठ पर था अब सामने था…. और सोई हुवी पद्मिनी की चूचियों को ऊपर निचे उठक बैठक करते देख रहा था जब वह सेंसें ले रही थी सोते वक़्त….. उस तंग चोली में एक दम ज़बर्दत सेक्सी, गरम दिख रही थी पद्मिनी वैसे सोई हुवी और बापू से बिल्कुल सबर नहीं हुवा…. उस ने अपना अंडरवियर उतार फेंका और बीएड पर ऊपर गया….. पहले तो अपने जीभ को पद्मिनी की होंठों पर फेर कर छाता, पद्मिनी नींद में अपने हाथ से भीगी हुवी होंठ को पोंछा, फिर बापू नीचे के अवर पोंहचा पद्मिनी के जाँघों के तरफ….. उस्का लुंड एकदम तना हुवा खड़ा था, और जब वह घुटनों के बल बिस्तर पर पद्मिनी के पैरों के पास से गया तो उस का लुंड पद्मिनी के कमर से चुवा जिस से उस्सको एक अजीब सी कशिश हुवी और ‘िश’ निकला उस्सकी हलक से….. पद्मिनी के जाँघों के पास बैठ कर बापू ने हलके से अपना हाथ फेरा उस्सकी कोमल, मुलायम नाज़ुक जाँघों पर साथ साथ ऊपर पद्मिनी के चेहरे पर देख रहा था के उस्सकी किआ रिएक्शंस hogi…magar वह तो नींद में थी उस्सको उस वक़्त कुछ भी पता नहीं था…..

बापू पागल हो रहा था, उस्सने आहिस्ते से पद्मिनी की स्कर्ट को ऊपर उठाया, और वह तो इतनी छोटी थी के पल भर में पद्मिनी की छोटी सी पंतय नज़र अन्य लगी और बापू के मुंह में पानी आगया…. देर न करते हुवे उस्सने अपने उँगलियों को पद्मिनी की पंतय पर ठीक छूट के पास फेरा…. फिर अपने जीभ से उस्सकी दोनों जाँघों के दरमियान वाला नाज़ुक हिस्से को चाटना शुरू किया हलके हलके….. एक तरफ जांघ चाट रहा था और उस्सकी ऊँगली पद्मिनी की छूट पर पंतय के ऊपर से hi रागढ रहा था धीरे धीरे….. उस्का लुंड तो कब से तैयार था घुसने को मगर कैसे भी हो उसस्के मैं में अब भी एक डर सा था….. क्यों के अभी तक तो पद्मिनी की रज़ामंदी नहीं मिली थी और वह तो नींद में थी और जो बापू कर रहा था वह तो बिल्कुल एक चोरी की तरह tha…yeh सोचते हुवे बापू कुछ घबराया भी फिर भी इंतज़ार नामुमकिन tha….woh आगे बहरता गया…..

आहिस्ते से उस ने अपने आप को लम्बा करके पद्मिनी के जिस्म के लम्बाई तक सोने की कोशिश की… अब उस्का लुंड पद्मिनी के जांघों के बीच ो बीच था, उस्सने खुद दोनों जाँघों को थोड़ा उठाकर अपने लुंड को बीच में डाला, और ऊपर उस्सने पद्मिनी की चोली को ढीला कर के उस्सकी नरम, छोटी सी नाज़ुक चूचियों को सहलाना शुरू किया…… यह वह वक़्त था जब पद्मिनी की नींद tooti…magar उस्सने सोने की नाटक करना शुरू किया अब…… अपने मैं में पद्मिनी बोली, “हाय Ram…bapu तो शुरू होगया…. मैं किआ करूँ अब… चलो देखती हूँ कहाँ तक उस्सकी पोहोंच जाता hai…main सोने की नाटक करती हूँ , ऐसे सुबह उस्सकी ेंखों में देख सकुंगी….’

तो अब पद्मिनी को सब पता था मगर वह जान बुझ कर सोने की ड्रामा कर रही थी…. अपने आप को मुश्किल से संभाल रही थी क्यों के खुद एक्साइट हो रही जिस तरह से उस्का बाप उस्सको छू रहा था… अपने बापू के मोठे लुंड को अपने जाँघों के बीच पाकर पद्मिनी की छूट भीग गयी और वह कसमसाने लगी …. बापू ने पद्मिनी को उस्सकी पथ पर सुलाया…. और खुद अब पद्मिनी के गांड पर अपना लुंड रगड़ना शुरू किया….. फिर, उस्सको चाह नहीं लगा क्यों के उस्सकी पंतय से उसस्के लुंड पर रागढ कहते हुवे दर्द हो रहा था तो उस ने धीरे धीरे पद्मिनी की पंतय उतारना शुरू किया आहिस्ते आहिस्ते एक नज़र देखते हुवे के कहीं पद्मिनी जग न जाये, उस्सको नहीं पता था के पद्मिनी जाएगी हुवी है और सब पता है उस्सको के वह की कर रहा है उसस्के साथ…. पद्मिनी बहोत मुश्किल से अपने दोनों मुठियों को बांध करके, अपने छाती के नीचे दबाये ज़ोरों से डेंटन को जब्री में दबाये सेह रही थी इस अनोखी कांटेक्ट को अपने बापू के साथ…. उस्सको दिल hi दिल में मज़ा भी ारः था मगर एक डर भी लग रही थी क्यों के यह उस्का पिता कर रहा था उसस्के साथ… वैसे तो हर रात एक सात सोती है 12 साल की उम्र से मगर ऐसा पहली बार हो रहा था….

तो बापू ने पंतय उतार कर उस्सकी छूट को छाता और हैरान हुवा देखकर के वह एकदम भीगी हुवी थी वहां…. “किआ इस्को फील हो रहा है नींद में भी के इतनी भीग गयी है?” बापू ने सोचा ऐसा…. फिर अपने आप से कहा, “चलो देखता हूँ के उस टीचर ने सील तोड़ दिया है या नहीं, अगर वर्जिन होगी तो ऊपर ऊपर hi छोड़ लूंगा और अगर सील टूटा हुवा है तो घुसा दूंगा अंदर अपना पूरा लुंड….” तो बापू ने अपनी बेटी की भीगी हुवी छूट में पेहली जीभ घुसाने की कोशिश की, पर नाकामयाब रहा तो ऊँगली से काम लिया….. धीरे धीरे आहिस्ते आहिस्ते अपने ऊँगली को छूट के छेद में डालना शुरू kiya…Padmini बहोत मुश्किल से संभाल रही थी अपने आप ko…ussko ज़ोर से चिलाने को मैं कर रहा था मगर नींद का बहाना जो कर रही थी तो सब सहना पर रहा था बड़ी ज़ोरों से अपने डेंटन को मुंह में दबाये पद्मिनी सेह रही थी अपने बाप की ऊँगली को अपने अंदर लेते हुवे….. बापू की ऊँगली आधा से कम पोंहचा और उस्सने उस से थोड़ा ज़्यादा जाने की कोशिश की तो पद्मिनी चीला उठी….. मगर जैसे के सपने में थी ताके बापू को पता न चले के वह जाएगी hai…bapu अचनाक चाहोंक गया और उस्सको पता चल गया के उस्सकी बाटी वर्जिन है अभी तक…… और उस्सको चाह लगा यह जानकार…..

तो बापू ने अपनी बेटी की छूट को खूब जी भर के छाता और चूसा …जैसे के ख़ुशी से एक इनाम के तौर पर उस्सको चुस्सना और चाटना था क्यूंकि वह अभी तक वर्जिन थी…… मगर खूब चूमा छाती के बाद अब बापू से रहा न गया और ऊपर गया पद्मिनी के…. पद्मिनी सोच रही थी, “उफ़ किआ करेगा यह बापू अब!! ओह माय गॉड? कहीं अंदर तो नहीं डालेगा मैं किआ करुँगी अगर अंदर डाला तो??” मगर बापू ने अंदर नहीं डाला, पद्मिनी के चुतरों के बीच दोनों ऊंचे हिस्सों के बीच वाले कैनाल में अपना लुंड रगड़ता गया थोड़ा सात हुक लगाके और बहोत hi जल्द, ज़्यादा hi जल्दी झड़ने लगा पद्मिनी को ज़ोर से अपने बाहों में जाकर और अपने मुंह को उस्सकी गर्दन पर दबाते हुवे अपने जीभ को उस्सकी गले पर फेरती चाटते….. उस्का लुंड वही रहा काफी देर तक और अपने पुरे जिस्म की वज़न से वह देर तक छोटी सी पद्मिनी पर पारा रहा, अपना गिला लुंड, पद्मनी की भीगे चुतरों पर रखे…. उस्का सारा पानी बेहरहा था पद्मिनी के चुतरों के बीच और फिर पद्मिनी को उसस्के मुहं से शराब की बह आयी तब पद्मिनी ने जखोत मूठ के नींद में करवट बदलने की नाटक की तब बापू जल्दी से उस पर से हैट एक तरफ गया, और जल्दी से एक कपडे से अपनी बेटी को पोंछा और फिर उस्सको पंतय वापस पहनाया और उस्सको बाँहों में लेकर सोगया…..

पद्मिनी उस्सको सोता देख कर मुस्कुरा रही थी और धीरे से उसस्के लुंड तक जाकर उस्का सोया हुवा नरम लुंड को चुम कर अपने जीभ को ुसस्पर फेरते हुवे अपने बापू के चेहरे पर देख रहा था और आहिस्ते से कहा , ‘शुक्रिया बापू’.

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….(2174 वर्ड्स)
 
अपडेट 66

सुबह को यूँ तो हर रोज़ बापू पहले उठता है और छाए बना कर खेत जाने से पहले पद्मिनी को जगा कर जाता था और उस को छाए देकर जब वह जग जाए तब घर से निकलता था हर रोज़. पद्मिनी उसस्के बाद नहाती थी और कॉलेज के लिए तैयार होकर घर से निकलती थी. स्कूल जाते वक़्त बापू के खेत के पास से गुज़रती और घर की चाभी उस्सको देकर तब कॉलेज जाती. हर रोज़ ऐसा चलता था.

मगर इस सुबह को जब पद्मिनी की ेंखें खुली तो देखा के बापू उस्सको उठाने के लिए नहीं आया था, और रात की गुज़री हुवी सेक्स को सोचकर शर्मा रही थी बापू से ेंख मिलाने को…… मैं hi मैं सोच रही थी कहीं बापू भी ेंख नहीं मिला पाया उस से इसी लिए शायद चुप चाप खेत चला गया होगा. तो पद्मिनी उठी और कमरे से निकली, तो बाथरूम जाते वक़्त किचन के पास से गुज़ारना परता था तो देखा के बापू किचन में बैठा रेडियो सुन्न रहा था जो धीरे से बज रहा था. जब बापू ने देखा के पद्मिनी बाथरूम जा रही है तो बापू जल्दी से उठकर उसस्के तरफ आया और कहा, “जाग गयी मेरी गद्य? किसी रही रात?” पद्मिनी ेंख मसलते हुवे बोली, “आज आप अभी तक यहीं हो बापू, खेत नहीं गए और अभी तक लुंगी में हो तैयार नहीं होना खेत जाने के लिए किआ?” तो बापू ने कहा के आज थोड़ी देर से खेत जाएगा, आज वह अपनी गद्य को कॉलेज की यूनिफार्म में तैयार होना देखना चाहता है! पद्मिनी एक अंगराई लेते हुवे बाथरूम में चली गयी नहाने के लिए….. बापू से तो अब उस्सकी एवं नहीं देखि जा रही थी, रात कैसे अपने लुंड को उस्सने उस्सकी गांड के बीच ो बीच रागढ कर अपना पानी छोरा था याद करके उस्का लुंड फिर से एकदम से खड़ा होगया और अपने लुंगी के टेल उस ने लुंड को सीधा किया…..

बाथरूम के पास खड़े होकर बापू से पद्मिनी को आवाज़ दी, “मैं तब तक तेरे कॉलेज की यूनिफार्म को स्त्री करदेता हूँ बीटा.” पद्मिनी ने जवाब दी, “मैं स्त्री कर चुकी हूँ बापू! कल रात आप कितने बजे वापस ए थे मुझको नींद लग गयी थी आप ने मुझको जगाया क्यों नहीं?” पद्मिनी नहाते हुवे कुछ ऊंची आवाज़ में नादान बनते हुवे बापू से पुछा. तो बाहर बाथरूम के दरवाज़े के पास खड़े बापू ने जवाब दिया, “किआ तुझको कुछ नहीं पता रात के बारे में?” पद्मिनी अपनी जीभ को डेंटन में दबाते हुवे भोली बनने की कोशिश करते हुवे बोली, “किआ कुछ नहीं पता रात के बारे में बापू? किआ हुवा था रात को? कुछ हुवा था किआ? हम्म?” बापू ने कहा, “नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi….”

बापू पद्मिनी को कमरे में इंतज़ार करने को चला गया. वह देखना चाहता था के पद्मिनी कैसे बाथरूम से बाहर निकलेगी, किआ पहनकर आएगी और कौन सा हिस्सा उस्सकी जिस्म की दिखेगा उस्सको…. कुछ 20 मिनट इंतज़ार के बाद पद्मिनी कमरे में आयी तो सर के बालों को एक तौलिया में लपेटा हुवा था और एक गाउन पहनी थी पद्मिनी ने, और वह गाउन ठीक उस्सकी घुटनों पर अति थी, मगर गाउन स्लीवलेस थी और काफी बड़ी लग रही थी पद्मिनी पर इस वजह से उस्सकी बौवों के टेल से उस्सकी चूचियां साफ़ दिख रही थी, गोआल गोआल नरम मुलायम, जैसे के एक छोटा सा सेब या ऐसा लगता था के एक छोटा सा घबरा जिस में थोड़ा पानी भर दिया गया हो…. वैसा hi नरम दिख रही थी उस्सकी चूचियां उस के बाज़ुओं के टेल और बापू खूब ेंखें फॉर फॉर कर देख रहा था…. वैसे हर रोज़ तो पद्मिनी उसी ड्रेस को बाथरूम से पेहेन कर निकलती थी मगर उस वक़्त कभी भी बापू घर पर नहीं हुवा करता था तो पद्मिनी बेफिक्र वैसे रहती थी… और अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी क्यूंकि कॉलेज की यूनिफार्म पहने के वक़्त ब्रा पहनती थी…..

बापू बिस्तर पर बैठ कर पद्मिनी को निहार रहा था….. उस्सको लग रहा था के अपनी स्वर्गवासी पत्नी को जवान देख रहा है… वैसे hi वह भी सजती सवारती थी उसी कमरे में अलमारी की आईने के सामने…. तो यहाँ पद्मिनी ने अपनी माँ की जगह ली हुवी थी, जवान, कुंवारी, khubsurat…bus जान लेवा थी…… बापू से रहा नहीं गया उस्सने कहा, «तू कब इतनी खूबसूरत और जवान होगयी मुझको पता hi नहीं चला, इतने सालों से मेरे बगल में सोती है तू और मैं आज तुझको ऐसे देख रहा hoon…bilkool अपनी माँ पर गयी है तू मेरी गद्य, तुझपे बहोत प्यार ारः है ज़रा मेरी बाँहों में तो अजा मेरी रानी बीत्या… » यह सुनकर पद्मिनी को भी बापू पे बहोत प्यार आया और वह जल्दी से अपने कोमल बाहों का हार बापू के गले में दाल दी और उसस्के सीने से चिपक गयी. बापू ने खड़े खड़े उस्सको बहोत ज़ोर से सीने से लगते हुवे उसस्के सर को चुम कर आहिस्ते आहिस्ते उस्सकी गले को चूमने लगा…. पद्मिनी ने सर को पीछे के तरफ करते हुवे ेंखों को बांध कर लिए जब बापू के गरम होंठ उस ने अपने गले पर महसूस किये तो….. और बापू लुंगी के निचे से अपने लुंड को संभल नहीं पा रहा था और कैसे भी पद्मिनी के जांघों के बीच, ड्रेस के ऊपर से hi रागढ खा रहा था, और पद्मिनी को भी अछि तरह से महसूस हो रहा था….. पद्मिनी सच में अपने बापू से बहोत प्यार करती थी, ख़ास कर जब से उस्सकी माँ चल बस्सी थी और बिलककोल एक पत्नी की तरह hi उस्का ख़याल रखती thi…sab जो उस्सकी माँ किया करती थी बापू के लिए वह सब पद्मिनी 12 साल की उम्र से अपने बापू के लिए करती चली आ रही थी सिवाए छोड़ने की….. बापू के कपडे धोना, खाना पकाना, खाना परोसना, और सब वह काम जो उस्सकी माँ करती थी बापू के लिए वह सब पद्मिनी करती थी और बहोत प्यार से….. अब घर में और कोई तो था hi नहीं, न भाई न बेहेन, तो सारा प्यार सिर्फ बापू और पद्मिनी में hi बनता जाता था….. बापू भी बेहद प्यार करती थी पद्मिनी से बचपन से hi और कभी भी बुरी नज़र से नहीं देखा था उस्सको, और हमेशा एक छोटी बच्ची समझता था उसको मगर जब से टीचर वाली बात सुनी और लोगों के बातें सुनी तो ग़ौर से पद्मिनी को देखने के बाद, वह प्यार ने किसी और रुख ले liya…pyar तो था hi, बहोत प्यार था, मगर वह प्यार जो एक मर्द और ाव्रत के बीच होता है वैसा प्यार भी मैं में उभरने लगा पद्मिनी के prati…usski जिस्म का हर एक हिस्सा अब बापू को बेहद प्रिय लगने लगा और हर उस हिस्से को वह अपनाना चाहता था….. अब बापू नहीं चाहता था के कोई और मर्द उन् मुलायम जिस्म के हिस्सों को चुवे उसस्के सिवाए….. एक जलन सी भी हो रही थी बापू के दिल में यह सोचकर के कोई और मर्द इतनी खूबसूरत जवान कुंवारी बेटी को चुवे…. उस्सने सोचा यह मेरी बेटी है, मेरी अपनी है, किसी और की नहीं हो sakti…main ने पाल पास कर बड़ा किया है, मेरे घर में रहती है, मेरी अपनी है तो कोई और क्यों इस्को ले मेरे सिवा.. जैसे के अगर मैं किसी फल का पेयर को रोपूँ, उस्सको सींच कर बड़ा करूँ, और जब वह पेयर फल देने लगे तो क्यों और कोई उस फल को खाये मेरे इलावा !! मेरा है तो मैं खाउंगा…. ऐसे विचार आरहे थे बापू के मैं में…..

बापू पद्मिनी के गले को चूमते हुवे निचे पोहोंच गया और उस का मुंह पद्मिनी की मुलायम छाती पर पड़ा तो पद्मिनी ने ज़्यादा ज़ोर से बापू को जकरा और सिसकारियां ली और खुद पद्मिनी ने अपनी कमर को थोड़ा सा ज़्यादा बापू के जिस्म से दबाया और बापू के लुंड को अपने पथ के निचे मोटा और तन्ना हुवा फील किया…. तब बापू ने अपनी कमर को हिलाया और दो छोटे छोटे ढाका दिए अपने लुंड से पद्मिनी के जाँघों के बेच और पद्मिनी ने ेंख खोल कर बापू के ेंकहोम में देखना चाहा तो देखा के बापू के दोनों ेंखें बांध थे और वह पद्मिनी की जिस्म को एन्जॉय कर रहा tha..usska हाथ पद्मिनी के बाज़ुओं के नीचे से उस्सकी चूचियों को चुने की कोशिश कर रहा था तब अचानक पद्मिनी ने कहा, «बापू ! बापू बस, कॉलेज के लिए देर हो जाएगी मुझे…. » और अपने बापू के बाहों से रहा होते hi अलमारी के पास से एक कंघी से अपने बालों में फेरने लगी यह कहते, «आज आप ने मुझको छाए नहीं दी मेरे लिए एक कप छाए लडिजिये तब तक मैं तैयार होती हूँ…. » तो बापू छाए लेने किचन में चला गया और जल्दी जल्दी पद्मिनी ने अपनी यूनिफार्म पहली…. अपनी छोटी साइज की ब्रा पहनी थी और बापू के सामने पेहेन्ने में उस्सको शर्म ारहै थी इसी लिए भगाया उस्सको किचन के तरफ…. अपनी सफ़ेद रंग की पंतय भी पहली और वाइट ब्लाउज और डार्क ब्लू स्कर्ट जो कॉलेज की यूनिफार्म थी…. अब उस्सकी स्कर्ट तो घुटनों के ऊपर तक थी, और घुटनों के ठीक ऊपर से जांघ की शुरुवात से, वह रंग जो धीरे धीरे ज़्यादा गोरी दिखाई देती है उन् हिस्सों पर, साफ़ दिख रहे थे और बहोत hi सेक्सी लग रही थी…. वैसे तो सभी नौजवान लड़के गाओं के पद्मिनी का वेट करते थे रास्ते में जब वह कॉलेज जाती थी और वापस आती थी तब… सिर्फ जवान लड़के hi नहीं बल्कि सभी मर्द की नज़र पद्मिनी की जाँघों पर hi होते थे और उस्सकी चाल पर…. उस्सकी खूबसूरती पर, उस्सकी लम्बे काळा बालों पर, उस्सकी उभरे हुवे चुतरों पर, उस्सकी कलायिओं पर, उस्सकी हर एक जिस्म के हिस्से पर और उस्सकी अदाओं पर….. पद्मिनी में वह सब था जो किसी भी मर्द को रिझा सके जवान से अधेड़ उम्र की चाचवां तक…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………………. (3786 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 67


बापू छाए लेकर आया तो पद्मिनी आईने के सामने कड़ी ेंखों में काजल लगा रही थी. हलकी सी लिपस्टिक भी लगायी थी होंठों पर और मेक उप कर ली थी, पेर्फुमेस भी लगायी और कमरा खुभू से महक उठा था…. बापू दीवाना होगया अपनी पद्मिनी को देख कर…. वह उस्सको रोकना चाहता था, दिल करता था के आज उस्सको कॉलेज नहीं जाने दे और पूरा दिन उसस्के साथ बिताये उस्सकी कमरे में बिस्तर पर… सोच रहा था के आज एक और सुहाग रात मनाये खुद अपनी बेटी के साथ…. दीवाना हो रहा था बिल्कुल…. उस्का दिल पागल हो रहा tha….samajh में नहीं ारः था उस्सको के कैसे पद्मिनी से सब वह कहे जो उसस्के दिल में था….. किआ समझेगी Padmini..kia अपने पिता का प्यार स्वीकार करेगी? किआ एक कॉलेज जाने वाली लड़की, पढ़ी लिखी ऐसे बेहूदा बात को मानेगी? बग़ावत कर बैठी तो?? किआ करेगा बापू तब? उस्सको हमेशा के लिए खो देगा….. बापू के समझ में नहीं ारः था के कैसे बात की शुरुवात करे अपने पद्मिनी के साथ…. पद्मिनी आईने में से hi बापू को देख कर मुस्कुरा रही थी, और थैंक्स कहा छाए के लिए…. बापू पीछे से पद्मिनी के पीछे वाली जांघ का हिस्सा देख रहा था और आईने में उस्सकी छाती की नाप……

जब पद्मिनी मुड़कर छाए लेने जा रही थी टेबल पर से तो बापू ने उस्सको फिर से बाँहों में जाकर कर किश किया और बिस्तर पर पद्मिनी को थामे हुवे बैठने को गया. जब बैठ गया तो पद्मिनी ने कहा, «ोफो बापू देर हो जाएगी मुझको, मैं छाए तो पिळुन…..” और पद्मिनी अपने आप को उसस्के बाँहों से चूह्रा कर छाए की तरफ गयी और जल्दी से छाए घूंट लिया…. और अपनी स्कूल बैग को उठाने वाली थी तब बापू ने इशारे से उस्सको उस के गॉड में बैठने को कहा. पद्मिनी ने आस्मां की तरफ अपनी ेंखों को उठाकर कहा, “उफ़ बापू, आप आज मुझको देर कारवाही डोज आप, अब किआ है bapu…ati hoon…bus थोड़ा सा okay?” तब पद्मिनी अपने बापू के गॉड में बैठी और बापू ने एक हाथ को उस्सकी कांधों पर रखा और एक हाथ को पद्मिनी की जांघ पर क्यूंकि बैठने से तो जांघ का ज़्यादा हिस्सा दिख रहा था, तो बापू ने हौले से अपने एक हाथ को पद्मिनी की जांघ पर फेरते हुवे सहलाया, और पद्मिनी ने एक छोटी सी सिसकारी छोड़ी….. फिर बापू धीरे धीरे अपने हाथ को स्कर्ट के नीचे डालता गया और तक़रीबन उस्सकी पंतय को चुने hi वाला था मगर पद्मिनी उठ कड़ी हुवी यह कहकर, “अब मुझको जाना चाहिए किआ आप फील्ड नहीं जाओगे आज ?”

बापू पद्मिनी के आगे घुटनों पर आगया और जल्दी से उस्सकी कमर पर दोनों बाँहों के लपेटे हुवे, कुछ कमर पर कुछ बाँहों का हिस्सा पद्मिनी की चुतरों पर था और बापू का मुहं ठीक पद्मिनी की छूट पर मगर कपडे के ऊपर….. पद्मिनी पीठ पर स्कूल बैग लिए हुवे बापू के उस अदा से अचानक झुक गयी और बापू के कांधों को पाकर कर मीठी आवाज़ में कहा, “किआ होगया आप को आज बापू, मुझे स्कूल नहीं जाने डोज किआ? चोरए मुझे, बस करो प्यार करना, कितना दुलार करेंगे आज आप मेरे साथ?” बापू ने एक आशिक की तरह कहा, “मैं तुमको बहोत चाहता हूँ मेरी गद्य, किआ तू अपने इस बापू को खुश करेगी?” पद्मिनी एक मुस्कान के साथ कहती है, “ोफो बापू जब मुझे जल्दी है स्कूल जाने की तभी आप को यह सब बातें करनी है किआ? हमेशा तो आप को खुश करती hi हूँ तो अब किआ बापू?” बापू घुटनों पर hi था और सर ऊपर उठाकर पद्मिनी से कहा, “बस अपना यह स्कर्ट ऊपर उठाकर बापू को अंदर की जांघ और अपनी पंतय दिखादे, मैं बहोत खुश होजावूंगा…..” पद्मिनी ला पीली होते हुवे, शर्म के मरे सिर्फ कहती है, “किआ??” तब तक बापू उस्सकी स्कर्ट को उठाने की कोशिश में था, और पद्मिनी झुक कर अपनी स्कर्ट पर दोनों हाथों को रखते हुवे कहती है, “आज आप क्यों टीचर की तरह बेहवे कर रहे हैं बापू?” तब बापू ने अचानक कहा, “अरे हाँ तुम ने तो अभी तक मुझको कहा hi नहीं जो बातें की जा रही है तेरे और टीचर के बीच?!” पद्मिनी ने कहा, “स्कूल से आने के बाद आज पक्का बताउंगी सब कुछ आप को ठीक है बापू?” फिर बापू ने कहा ?” उस्सकी जाँघों को छूटे हुवे, ”मगर यह तो दिखादे जाने से पहले मेरी gudya…kia तुम बापू को प्यार नहीं करती” …… तब पद्मिनी को जैसे बापू पर कुछ तरस आया और कहा, “ाचा सिर्फ एक बार okay? फिर मैं निकलती हूँ…..” बापू ने ख़ुशी से अपने लुंड पर लुंगी के नीचे हाथ डालते हुवे कहा, “हाँ ठीक है मगर धीरे धीरे, हौले हौले स्कर्ट को उठाना, और मेरे हाथों को थोड़ा सा चुने देना …..” पद्मिनी मुस्कुराते हुवे सर हाँ में हिलाते हुवे अपने दोनों हाथों के उँगलियों से अपनी स्कर्ट की नीचे वाले हिस्से को थाम कर उठाना शुरू करती है जब बापू वहीँ ठीक उसस्के सामने गुणों पर पारा था….. जून जून स्कर्ट उठता गया यूँ यूँ बापू के ेंखें मोटा मोटा पढता गया और पद्मिनी की गोरी जांघें और भी गोरी दिखाई देने लगी स्कर्ट के निचे वाले हिस्से…. कहीं पर गुलाबी रंग तो कहीं सफ़ेद रंग की जाँघों को देखते हुवे बापू अपने लुंड को एक हाथ में थामे कुछ कुछ उस्सको हिलने laga…lungi के निचे लुंड था तो पद्मिनी को नज़र तो नहीं आरही थी मगर उस्सको खूब पता था के बापू मुठ मार रहा है उस्सकी जाँघों को देखकर….. स्कर्ट और ऊपर उठता गया और ऊपर और थोड़ा सा ऊपर पद्मिनी उठती गयी अपने बापू को खुश करने के लिए और बापू ज़ोरों से अपना हाथ मारता गया अपने लुंड पर लुंगी के नीचे…. और जैसे hi पद्मिनी की सफ़ेद पंतय थोड़ा सा नज़र आयी बापू ने अपना मुंह जल्दी से उस मुलायम पंतय पर रख दिया और चाटने लगा एक हाथ से मुठ मारते और एक हाथ से पद्मिनी की चुतरों को थम kar…Padmini ने ‘आह इस्स्स्सह्ह्ससससस ‘ की धीमी सी आवाज़ दी जब अपने बापू के जीभ को फील किया अपने पंतय पर और एक लम्बी सिसकारी छोड़ी पद्मिनी ने जब बापू का जीभ वहां से हट कर उस्सकी जाँघों को चाटने लगा और अचानक बापू ने कहांरना शुरू किया, “AAGHGHGHGH…AAAAAHAHAHAHAAAAAA” और पद्मिनी ने देखा उस्सकी लुंगी भीग गयी उसस्के झरने से….. मुतहमार कर बापू खुश होगया सिर्फ पद्मिनी की जांघ और पंतय देख कर और छह कर……

पद्मिनी ने अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुवे धीरे से बापू के कानों मेइओन झुक कर कहा, “अब मैं चलती हूँ आप को तो मज़ा आगया नाह बापू मेरे?” और बापू के दोनों गैलन पर ज़ोर से चुम्बन देकर पद्मिनी घर से दौड़ते हुवे निकल गयी…… बापू ज़ोर से चिल्ला कर कहा, “भूलना मत के आज शाम को तुम मुझको टीचर के बारे में सब बताओगी” पद्मिनी दावते हुवे बाहर से चिल्ला कर जवाब दिया, “हाँ बापू ज़रूर बताउंगी आज वापस आने के बाद bye bye बापू, लव यू!” और एक फ्लाइंग किश सेंड किया बापू को जो बापू ने हवा में से कैच किया और अपने होंठों को चूमकर कहा, «लो मेरी एक नयी जीवन अर्धांगिनी मिल गयी मुझको !! » और आसमान को देखते हुवे बापू ने कहा «हे पुष्प तुम ने फिर से जनम लेलिया पद्मिनी के रूप में ऋ ! रूबरू तुम बस्सी हो उस में, किआ तुम सच में आगयी है किआ ऋ अपनी पद्मिनी में ? उस्सकी जिस्म से तुम्हारी खुशभु अति है मुझे, उस्सकी बाज़ुओं के नीचे का महक बिल्कुल तेरी महक है जो मुझे बहोत पसंद था…. मुझे माफ़ करना पुष्प अगर ग़लत कर रहा हूँ तो मगर उस में तू बस्सी है तो मैं तुमको कैसे चोर सकता हूँ ? कभी नहीं छोड़ूंगा….. हमेशा अपने साथ hi रखूँगा उस्सको अपनी जीवन साथी बना लूंगा अपनी पद्मिनी ko…mujhko तो लगता है तुम ने सब प्लान किया हुवा था, तुमको पता था के तू चली जाएगी इसी लिए तुम उस्सको चोर गयी मेरे लिए है नाह पुष्प ?? » पुष्प पद्मिनी की माँ का नाम था.

और बापू ने कुछ देर बाद सभी पुष्पा की तस्वीरों को निकाल कर देखने लगा और उस्सकी और पद्मिनी की तस्वीरों को मिलकर दोनों के बीच का फरक देख रहा tha….farak था hi नहीं बिल्कुल जैसे के पुष्प hi की तस्वीर है जब वह जवान थी तब….. बापू को एक अजीब सा मज़ा ारः था सब सोच सोच कर के उस्सको दुबारा एक कुंवारी छूट मिलगया छोड़ने ko…itni खूबसूरत जवान लड़की मिलेगी उस्सको, उस ने सपने में भी नहीं सोचा था… उस ने याद किया किश तरह से पद्मिनी ने अपनी स्कर्ट ऊपर उठाकर अपनी जांघ और पंतय दिखाई उस्सको और जब के वह मुठ मार रहा था अपनी जवान बेटी के सामने… सब याद कर कर के वह फिर से मुठ मारने लगा तस्वीरों को देखते और पद्मिनी की जाँघों को याद करते और उस दृष्ट को याद करते जिस तरह से पद्मिनी कड़ी थी उस के बिल्कुल सामने धीरे धीरे अपनी स्कर्ट को ऊपर उठाते और उस्सको अपनी खूबसूरत जाँघों को दिखते…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………..
 
अपडेट 68

कॉलेज में पद्मिनी दिन भर बापू के बारे में सोचती रही और अकेली मुस्कुराये जा रही थी. दोस्तों ने कई बार उस्सको टोका के, “किआ पागल होगयी. किश के ख्यालों में इतना खोयी हुवी है, कोई मिलगया किआ?” तो चेहरे पर लाली लिए पद्मिनी अपने बापू को दिमाग़ में सोचती हुवे दोस्तों से कहा, “हाँ मिलगया है कोई जो मेरा इंतज़ार करेगा आज शाम को….” तो हाल यह था के पद्मिनी प्यार करने लगी थी अपने बापू से… अब यह कैसा प्यार था किस्को पता… जब से उस्सकी माँ गुज़री है तब से अपने बापू के बहोत ज़्यादा करीब हो गयी थी और उस के साथ सोने से और ज़्यादा करीब होगयी थी…. और जून जून उस्सकी उम्र भर्ती गयी और जिस्म में अलग किसम की छह बढ़ती गयी तो कोई और मर्द के न होते हुवे उस्सकी ज़िन्दगी में उस्सने अपना सारा प्यार बापू पर hi निछावर kiya…magar कब से वह बापू से वैसे लगाव से बंदी थी? किआ बापू ने पहल किया आज या पद्मिनी खुद यह चाहती थी, चलें देखे….

क्लास में पद्मिनी बापू के साथ वाली सवेरे वाला दृष्ट को फ़्लैश बैक में देख राइ thi…khud सोच रही थी के किश तरह उस्सने बिना झिझक अपने स्कर्ट को धीरे धीरे ऊपर उठाया था बापू को अपनी जांघ और पंतय दिखने के liye….aur किश जोश से बापू ने उस्सको वहां पाकर के चूमा और छठा था….. और किश तरह उस्सने अपने बापू को मुठ मारते देखा उसस्के saamne…lungi के नीचे कितने ज़ोरों से बापू हाथ चला रहा था और अचानक लुंगी भीग gayi…sab नज़ारा पद्मिनी के ेंखों के सामने नाच रहे थे….. यह सब सोचते पद्मिन की पंतय भीग गयी क्लास में hi, और वह जल्दी से टॉयलेट गयी अपने आप को साफ़ करने और वहां खुद ऊँगली भी किया टॉयलेट में अपने होंठों को डेंटन में दबाये……….

आखिर शाम को वापस घर आयी और पता था उस्सको के बापू बेताब इंतज़ार कर रहा होगा….. जैसे hi अंदर दाखिल हुवी बापू ने बेसब्री से उस्सको अपने बाहों में ज़ोर से जकरा और चूमने लगा, गालों पर, मुहं पर, गले पर, उस्सकी पुरे जिस्म को सहलाते…… पद्मिनी थोड़ा बहोत नखरें दिखते हुवे कहा, “ोफो बापू, किआ होगया, मुझे छाए पिणि है, खाना पकाना है, सब घर के काम करने हैं चोरो नाह…” बापू जैसे दीवाना होगया था और कुछ नहीं समझ रहा था, पद्मिनी को चूमता जा रहा था जहाँ भी उसका मुंह परता tha…aakhir में उस्का हाथ पद्मिनी के स्कर्ट के नीचे पोंहचा और उस्सने उस्सकी जांघ सहलाना शुरू किया उस्सकी गर्दन को चूमते huwe…..tab तक पद्मिनी के दोनों हाथ बापू को अपने आप से अलग करने में लगी हुवी थी पर जब उस्सने अपने बापू के हाथ को अपने स्कर्ट के नीचे पंतय पर फील किया तो उस्का पूरा जिस्म कम्प उठा और पद्मिनी ने खुद अपने बदन को बापू के जिस्म से चिपका लिया और अपने हाथों को बापू के गले का हार बना दिया….. तब पद्मिनी ने भी हौले से बापू के गले पर एक चुम्बन दिया और बापू को बहोत चाह लगा और तड़पते हुवे आवाज़ में कहा, “और, और किश कर न मुझको मेरी रानी, देख मैं कितना चुम रहा हूँ तुझको, और ज़रा सा चुम न, अपने हाथों को ऐसे मेरे पीठ पर सहलाती जा और इधर चूमती जा…”

पद्मिनी थोड़ा मुस्कुरा रही थी अपने बापू को उस तरह से एक छोटे बचे की तरह उस से बिनती करते हुवे, फिर उस ने अपने बापू को निराश न करने के लिए बहोत प्यार से उसस्के गालों पर फिर, गले पर पर मुंह पर चुम्बन दिए और उसी दौरान बापू के पीठ पर अपनी कोमल मुलायम हाथों को फेरती गयी…. बापू का लुंड एक दम खड़ा पद्मिनी की स्कर्ट के निचे रागढ रहा tha…tab पद्मिनी ने अपने बाँहों से बापू के गले को ज़ोर से जकरते हुवे ेंखें बांध कर्ली और बापू को करने दिया जो वह कर रहा था और छोटी छोटी सिसकारियां चोरटी गयी धीमी धीमी आवाज़ में….. बापू तो उस वक़्त अपने लुंड को पंत की ज़िप खोल कर बाहर निकल रहा tha…Padmini की जिस्म कम्प उठी वह देख कर और एक ‘िष’ किया उसने बापू के गले को चूमते हुवे और अपनी चूचियों को बापू के छाती पर दबाते हुवे……. और बापू उसी वक़्त जब के पंत से अपना लुंड निकल रहा था, तब ऊपर पद्मिनी को चूमते और कहते जा रहा था, उस्सने ऊपर ब्लाउज की सभी बटन्स खोल दिए थे और पद्मिनी की ब्रा पर भी अपना जीभ चला रहा था जिस से पद्मिनी कसमसा रही thi….aur बापू को धीरे करवाने के लिए पद्मिनी ने अचानक कहा, “तो अब आप टीचर वाली बात को नहीं सुन्ना चाहते बापू?”

यह सुनकर बापू रुक गया और पद्मिनी जैसे के उस्सकी बाहों में थी तो बापू ने पद्मिनी के शूटरों पर अपने हाथों को फेरते हुवे कहा, “हम्म मैं भूल गया था, चाह चल बीएड पर वहां सब sunana…aur फिर बापू ने अपनी पद्मिनी को गॉड में उठाया जैसे एक छोटे बचे को लेते है, वैसे पद्मिनी को लेकर बीएड पर pohncha……aur पद्मिनी को बिस्तर पर लेता दिया, और उस्सकी पैरों के तरफ बैठ कर उस्सकी स्कर्ट को उठाते हुवे जांघ पर अपना जीब फेरा और कहा, “चाह बोल किआ मामला है तेरा टीचर के साथ?”

पद्मिनी ने देखा के उसस्के बापू सिर्फ उस्सकी स्कर्ट के नीचे उस्सकी पंतय को देख रहा है तो उस्सने हाथों से अपने स्कर्ट को नीचे करके जाँघों को धक् diya…..usspar बापू ने कहा, “आरी पुगली, इतनी खूबसूरत जांघें हैं तेरी, तेरी माँ से भी ज़्यादा खूबसूरत और सेक्सी है देखने दे नाह, इस्को खा जाने को मैं करता है मुझको…… “पद्मिनी बोली, “पहले मुझे सुन लिजीये जो मुझे कहना है टीचर के बारे में फिर देखना wahan…aur जो मैं में ए करना…!!” तो बापू ने कहा, “ ठीक है बोल”

पद्मिनी ने कहा, “बापू कुछ ख़ास नहीं है टीचर के saath…woh मुझको क्लास में बहोत देखता रहता था…. फिर एक दिन मेरी सहेली नहीं आयी थी तो मेरे पास वाले जगह खली थी तो टीचर मेरे पास बैठने आया… मुझसे थोड़ी देर बात करने के बाद उस ने अपने हाथों को मेरे जाघों पर रखा, जैसे के मेरी स्कर्ट यहाँ तक है और जब बैठती हूँ तो और ज़्यादा ऊपर हो जाती है और जांघ ज़्यादा दिखती है, तो मैं ने उस्का हाथ हटते हुवे कहा, “सर आप किआ कर रहे हैं?” तो उस ने धीरे से कहा, “शशसस” और मेरे कानों में कहा, “तुम बहोत खूबसूरत और सेक्सी हो, किआ तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?” तो मैं ने कहा, “नहीं मेरा कोई बॉय फ्रेंड नहीं.” तो टीचर ने जवाब दिया, “तो फिर मैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड बन जाता हूँ. मैं बहोत शर्मायी और चरों तरफ देख रही थी के दूसरे स्टूडेंट्स हम दोनों के बातें न सुन रहे हो….. उस दिन के बाद हर रोज़ टीचर

की नज़र सिर्फ मुझ पर और मेरे स्कर्ट पर रहता…… और जब भी मैं फ्री होती तो वह मुझसे बातें करने अत और धीरे धीरे मौका देख कर वह मुझको चुहने लगा….. मैं इंकार करती फिर भी वह बहोत ज़िद्दी था और मुझको बिल्कुल अकेली नहीं चोरता था…. वह सच में जैसे मेरा बॉयफ्रेंड था, ब्रेक में मुझको अपने पास बुलाता क्लास में जब सभी स्टूडेंट्स बाहर होता ho….aur एक दिन वैसे hi मैं उस के साथ थी क्लास में बिलककोल अकेली तो उस्सने मुझको किश किया था और मेरे जिस्म पर अपने हाथों को फेरा था….. मैं डर रही थी मगर पता नहीं क्यों वह मुझे चाह लगता था…… और उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता वह मुझको किश करता और अक्सर मुझको अपने गॉड पर बिठाता और निचे से ढाका देता, और मेरे ब्लाउज खोल कर वहां चूमता……. दो महीने तक वैसा करता रहा मेरे साथ फिर दूसरे स्टूडेंट्स को पता चल गया और एक एक करके बात फेल गयी कॉलेज में…… अब स्कूल रिलीज़ होने के बाद भी वह मेरे साथ चलता और एकांत बार मुझको अपने साथ उस जंगल वाले रास्ते में लेजाता और वहां मेरे साथ ऐसा hi करता जैसे आप करते हो!!! बस एहि हुवा है टीचर के साथ कुछ ज़्यादा नहीं बापू……..”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
अपडेट 69

जितनी देर पद्मिनी बापू को टीचर के बारे में बोल रही थी बापू तब तक पद्मिनी को कभी, शूटरों पर मसल रहा था तो कभी उस्सकी चूचियों दबा रहा था तो कभी किश किये जा रहा था उस्सको सुनते हुवे. अपने पंत में से ज़िप खोल कर अपना लुंड निकलने वाला था जब पद्मिनी ने शुरू किया था टीचर के बारे में कहना, फिर रुक गया था जब पद्मिनी ने बोलना स्टार्ट किया, तब जब पद्मिनी बोले जा रही थी तब बापू ने आहिस्ते से अपना लुंड पंत से बाहर निकल कर पद्मिनी के जाँघों पर छह रहा था उस्सको सुनते हुवे…. बैठें करते दौरान पद्मिनी फील कर रही थी के उस्का बापू उसस्के जाँघों पर अपना मोटा लुंड रागढ रहा है मगर वह नादान बन रही थी जैसे कुछ नहीं समझ रही थी के किआ हो रहा है…..

अब बातें कह डाली तो बापू ने उसको चूमते हुवे कहा, “बस एहि हुवा है तो कोई ख़ास बात नहीं है, मैं उस टीचर को भागवुंगा क्यों के तू मेरी है अब!” यह कह कर बापू ने अचानक जैसे उंगली जानवर बनगया हो, पद्मिनी की ब्लाउज को ज़ोर से खिंचा के ब्लाउज पहात गयी, और उस्सको बहार खिंच फेका…. जब उस्सने वैसा किया तो पद्मिनी घबरा गयी और मोती मोती ेंखों से बापू को हैरानी से देख रही थी, फिर धीरे से कहा, “क्यों मेरी ब्लाउज फॉर डाली आप ने! मेरी यूनिफार्म की ब्लाउज है यह!!” तब तो पद्मिनी अपनी छोटी साइज की ब्रा में थी और बापू उस ब्रा को, अपने हाथों को पद्मिनी के पीठ पर किये उन्हुक कर रहा था और पद्मिनी बापू के छाती पर झुकी हुवी थी उस वजह से…. जैसे hi ब्रा खुला, बापू ब्रा को भी ज़मीन पर फेकते हुवे पद्मिनी की छोटी चूचियों को अपने मुहं में लिया और पूरा चुकी बापू के मुंह में घुल गया….. पद्मिनी ने अपनी गार्डन को पीछे के तरफ करते हुवे अपने बालों को खोलना शुरू किया और सारे बाल उस्सकी पीछे के तरफ ज़मीन को छह रहे थे, बापू एक चुकी को मुहं में लिए चूस रहा था और दूसरा वाला उसस्के हाथों से मसल रहा था जब के पद्मिनी सिसकारियां धीमी आवाज़ में दिए जा रही थी……

बापू बिस्तर पर बैठ गया पद्मिनी को अपने गॉड में लिए, और एक तरफ उस्सकी बहोत hi नाज़ुक चूचियों को चूस रहा था और दूसरी तरफ उस्का एक हाथ पद्मिनी की स्कर्ट के नीचे उस्सकी पंतय पर पोहोंच रहा था, तब जल्दी से पद्मिनी ने अपने हाथों को बापू के हाथ पर रखा और ज़्यादा नहीं बाहरणे दिया अपने बापू को….. मगर बापू किआ रुकने वाला tha?....ussne चुकी को चोर कर अपना मुहं जाँघों पर फेरना शुरू किया और जीभ से जांघ को चाटना भी…. पद्मिनी कहांरने लगी और ‘उफ़, aaaie…bus करो नाह मुझे कुछ हो रहा है बापू….” बापू कहाँ सुन रहा था उस ने पद्मिनी को अब बिस्तर पर लेटाया और अधनंगी पद्मिनी उसस्के सामने पड़ी थी बिस्तर पर, अपने बालों को सर के नीचे से फैलाते हुवे और बापू ने एक मिनट अपनी पद्मिनी को उसस्के गले से छाती पर देखते हुवे पथ के ऊपर अपने नज़र को रोक कर फिर निचे के तरफ नज़रें फेरता गया और जल्दी से स्कर्ट को ऊपर उठा कर अपना मुंह पंतय के ऊपर लगाया…. उस पर पद्मिनी ने एक छोटा सा चीख निकली मगर बापू ने नज़र अंदाज़ किया उस्सकी चीख को, पद्मिनी अपने हाथों को अपनी पंतय पर दबाया था और बापू को वहां नहीं रीच होने दे रही थी, अब बापू और पद्मिनी में एक छोटा सा स्ट्रगल हो रहा था, बापू अपने मज़बूत हाथों से पद्मिनी के हाथों को वहां से हाथ रहा था पर पद्मिनी पूरा ज़ोर लगा कर, दोनों जाँघों को एक दूसरे के ऊपर क्रॉस करके अपनी पंतय छुपा रही थी और बापू को रीच नहीं होने दे रही थी…… थोड़ा बहोत चीला भी रही थी और साथ में हंस भी रही थी और कहती थी, “बापू बस करो मुझको गुदगुदी हो रही है, hahahaha!!hihihi…hehehe… हटाओ अपना हाथ वहां से बहोत गुदगुदी हो रही है मुझे…..” बापू तब तक उस्सकी पंतय उतरने की कोशिश में लगा हुवा था पर पद्मिनी ने तो अपने पैरों को मोड़ लिए थे और पैरों को पथ पर दबाये ज़ोरों से हंसी जा रही थी, उस्सको हँसते हुवे देख कर बापू को भी हंसी आयी और हँसते हँसते उस्सने बोलै, “हटाओ अपना हाथ यार , उतारने दो नाह, ज़रा देखूं तो कितनी मुलायम और नरम है यह जगह…”

खूब हंसने के बाद पद्मिनी उठ बैठी बिस्तर पर और अपने बापू को सीने से लगाए रही कुछ देर तक हम्प्टी हुवे….. बापू उस्सकी चूचियों को अपने छाती पर फील करके बहोत चाह महदूस कर रहा था और पद्मिनी अपने बापू की छाती के बालों को अपने चुचायों पर रगड़ते हुवे कसमसा रही थी तब भी हम्प्टी हुवे…… उसस्के बाद कुछ लम्हों के बाद बापू ने प्यार से पद्मिनी के चेहरे को अपने हाथों में लिए उस्सकी ेंखों में अपने ेंखों में देखते बोलै, “तू बापू से बहोत प्यार करती है नाह?” पद्मिनी ने जवाब दिया बहोत hi नरम धीमी आवाज़ में, “इस में कोई शक है किआ बापू, दुन्या में सब से ज़्यादा आप से hi तो प्यार करती हूँ, है कौन और मेरा आप के सिवा?” तब बापू ने कहा, “आज अगर तेरी माँ ज़िंदा होती तो किआ मुझे तुझसे इस प्यार के लिए तरसना पड़ता? किआ तुमको नहीं पता वह कितनी प्यार करती थी मुझसे? तो किआ बापू के इस प्यास को ऐसे hi रहने देगी? तुम ने तो हर तरह से अपनी माँ की जगह लेली है मेरी ज़िन्दगी में तो अब क्यों मुझको तारपा रही है मेरी गद्य?” उस वक़्त दोनों फिर से बिस्तर पर लेट गए थे और पद्मिनी बापू के बाँहों में थी, ऊपर नंगी मगर नीचे स्कर्ट और पंतय वहीँ थी जिस्म पर और बापू का हाथ तब भी जाँघों के ऊपर पंतय के पास दौड़ रहा था और पद्मिनी अपने बापू के उन् बातों को सुनकर खामोश होगयी थी फिर भी उस ने कहा बहोत hi प्यार से, “ बापू मैं तो उस दिन से आप से इस तरह का प्यार करती हूँ जिस दिन से आप के बिस्तर पर आप के पास सोने को आयी थी…… उस रात को मैं ने सिर्फ एक छोटी सी टीशर्ट पहनी हुवी थी और मैं सिर्फ 12 साल किट hi, और जब आप ने मुझको अपने बाँहों में लेकर सोया था उस रात से मैं आप की हो चुकी हूँ बस आप है जो देर कर रहे हैं!!”

यह सुनकर बापू चाहोंक गया और सोचा के उस के बिस्तर पर इतने सालों से उस्सकी बेटी तैयार है उसस्के लिए और उसी को कुछ नहीं दिख रहा था!!! तब बापू ने अपना सर पद्मिनी के स्कर्ट के नीचे डाला और अपने डेंटन से उस्सकी पंतय को खींचने लगा आहिस्ते आहिस्ते….. पद्मिनी ने ‘उफ़, एआईईईए’ कहते हुवे एक अंगराई लेकर बापू को अपना काम करने दिया, पर अपने हाटों से अपने छूट को ढँक दिया लाज के मारे….. बापू ने उसस्के हाथों को ज़रा सा हटते हुवे उस्सकी छूट को देखा, और पाया के पद्मिनी की छूट एक दम साफ़ थी, बाल नहीं थे, पद्मिनी हेयर रेमोवेर इस्तेमाल करती thi….Bapu को बहोत चाह लगा और अपने जीब को वहां पर चलाया, पद्मिनी के हाथों को हटते huwe…..Padmini सिसकारिओं से बिस्तर पर कहर रही थी और बापू धीरे धीरे अपनी जवान कुंवारी बेटी की छूट को चेतना शुरू किया……

पद्मिनी ने अपने दोनों हाथों से बापू के सर को ज़ोर से पकरि थी, और लम्बी ठंडी सेंसें ले रही थी ‘उफ़, इससष, ाः’ करते हुवे और बापू आहिस्ते आहिस्ते पद्मिनी की जवान कुंवारी छूट की पंखुरियों को अपने उँगलियों से आराम से हटते हुवे अपने जीब को उन् मुलायम हिस्सों पर फेर रहा था जो ज़्यादा लाल और नाज़ुक होते हैं, और जो कुछ भीगी सी थी….. बापू चाटता गया और पद्मिनी सिसकारियों में डूबती गयी, उस्सकी ेंखें जैसे नशीले होगये हो, जैसे के उस्सने शराब पिली हैं और अपने बापू के सर को अपने छूट पर दबाये तृप्ति गयी धीमी धीमी आवाज़ में, दोनों जाँघों को दोनों तरफ फैलाये……. बापू एन्जॉय करता गया कोई 7/8 मिनट्स से भी ज़्यादा उसी पोजीशन में और पद्मिनी बेहाल हो रही थी, कभी सर उठाकर बापू को देखती, तो कभी सर बिस्तर पर पटकती और कभी उठ बैठती……. उसस्के बाद पद्मिनी एक शारबी आवाज़ में बोली, «बापू बस भी करो अब, यहाँ ावो मेरे पास, मैं आप को बाहों में लेना छाती हूँ, ावो नाह…. » यह कहकर पद्मिनी ने खुद अपने चूचियों को दबाते हुवे अपने हाटों से, अपने जीब फेरते हुवे अपनी होंठों पर, नशीली ेंखों से बापू को देख रही थी…. तब कुछ देर में बापू ने छूट को छोरा और स्कर्ट को निकल बहार फेंका और ऊपर गया पद्मिनी की बाहों में. पद्मिनी ने धीमी आवाज़ में बापू को किश करते वक़्त कहा, «आप अपने पंत नहीं उतरेंगे किआ?» तो बापू ने कहा तुम्ही उतार दो नाह, बहोत मज़ा आएगा mujhko…hmmm ?» पद्मिनी ने फिर कहा, «चाह ठीक है आप लेथ जाईये और हिलना मत मैं उतारती हूँ…. »

बापू पीठ के बल लेथ गया अपने हाथों को सर के नीचे किये, और नंगी पद्मिनी बापू के पैरों के बीच घुटनों पर थी जब अपने बापू पर झुक कर पंत को आहिस्ते आहिस्ते खोल रही थी, और बापू उस्सको निहार रहा था, उस्सकी छोटी छोटी नरम चूचियों को देख रहा था, उस्सकी फ्लैट पथ को देखता तो कभी उस्सकी पतली कमर पर उस्सकी नज़र जाता और कमर के निचे वाला हिस्सा तो उभरा हुवा था वहां से लेकर जाँघों तक तो एकदम एक ाव्रत लग रही थी, ऊपर एक छोटी बची दिखती थी…… बापू एक एक करके पद्मिनी की नंगी जिस्म को निहारता गया और उस्का लुंड तो एकदम तना हुवा था पंत के अंदर जिस से पद्मिनी को पंत उतारने में तकलीफ हो रही थी…. एकांत बार उस्सकी मुलायम हाथ बापू के मोठे तने हुवे लुंड पर भी दबे और बापू को बजट मज़ा ारः था….. बहोत एन्जॉय कर रहा था बापू, पद्मिनी जितनी देर लगा रही थी पंत उतारने में उतना hi मज़ा ारः था बापू को…. आखिर मैं जब पंत को निचे से खींचना शुरू किया पद्मिनी ने तो बापू को कहा, «अरे आप ऊपर उठाइए तो…. » बापू ने मुस्कुराते हुवे पुछा, “किआ ऊपर उठवून?” पद्मिनी भी मुस्कुरायी और आसमान के तरफ देखते हुवे कहा, “बापू मैं गाली देना नहीं छाती आप उठाइए ऊपर…” उस्का गांड ऊपर उठाना था ताके पंत निकाल सके पद्मिनी वही उठाने को कह रही थी….. तो बापू हँसते हुवे अपने गांड को ऊपर उठाया और पद्मिनी ने उसस्के पंत को निकल फेंका ज़मीन पर….. अब अंडरवियर में बापू का लुंड एकदम फॉर्म में था और पद्मिनी एक एक बार अपनी नज़र वहां करके मुस्का रही थी और बापू ने कहा, “अब उस्सको कौन उतरेगा बिटिया?” बापू का इशारा उस्का अंडरवियर पर था तो शर्माती हुवी पद्मिनी बोली, “वह मैं नहीं उतारने वाली आप hi उतारो उस्सको!!” बापू ने कहा, “आरी, मैं ने जैसे तेरी पंतय उतारा था वैसे hi तू भी उतार नाह!” पद्मिनी बोली, «आप ने जब पंतय उतरी तो वहां कुछ इतना मोटा नहीं था पंतय के नीचे यहाँ पर यह है !» अपनी ऊँगली के इशारे से पद्मिनी मुस्कुराते हुवे चेहरे पर लाली लिए बापू के लुंड के तरफ ऊँगली दिखाई………..

कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट
 
अपडेट 70

बापू ने ज़िद की के वही उस्सकी अंडरवियर को उतरे…. पद्मिनी नखरें कर रही थी, बापू उसस्के हाथों को खिंच कर अपने लुंड पर रखा और अंडरवियर उतारने की बिनती की….. पद्मिनी बापू के दोनों फैले हुवे जाँघों के बीच बैठी हुवी थी हाथों को बापू के अंडरवियर पर रखे मगर उतार नहीं रही थी….. बापू के बहोत रिक्वेस्ट करने के बाद पद्मिनी ने अपनी ेंखों को बांध कर्ली और अंडरवियर को खींचना शुरू किया…. आधा निकला पर ऊपर वाला हिस्सा तना हुवा लुंड पर अटका हुवा था पद्मिनी को ेंख खोल कर देखना hi पारा फिर अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुवे एक छोटी से मुस्कान के साथ पद्मिनी ने अपनी उंगलियों से लुंड को उस जगह से हटाया जहाँ अंडरवियर में अटका हुवा था फिर अंडरवियर को खिंच कर निकाल फेंका नीचे ज़मीन पर…. और अपनी ेंखें बांध कर ली उस्सने मुस्कुराते हुवे……

बापू ने पद्मिनी के सर को थाम कर अपने लुंड के तरफ खिंचा और ruka…Padmini ने ेंखों को बांध किया हुवा था उस को समझ में आगयी थी के बापू किआ चाहता है मगर वह बहोत शर्मा रही थी और कुछ हिचकिचा रही थी आगे बाहरणे के लिए….. बापू ने पद्मिन के हाथों को अपने खड़े हुवे लुंड पर रखा और सिसकती आवाज़ में कहा, इस्को सेहला, और सहलाती jaa….aja अजा अजा कर कर ऐसे eise…karti जा….” पद्मिनी के हाथों को अपने लुंड पर फेरते हुवे यह सब कहा उस्सको….. पद्मिनी बापू के लुंड अपने हाथों पर फील करते हुवे एक कांप सी महसूस की अपने जिस्म में और उस्सकी रूह भी कांप uthi…zindagi में कभी भी एक लुंड को अपनी हाथों में नहीं थमा था उस्सने….. और फिर अपने ेंखों को बांध करते हुवे अपने छोटी मुलायन हाथों में पहली बार अपने बापू के मोठे लुंड को पद्मिनी ने पकड़ा और उस्सको सहलाना शुरू kiya….bapu लेथ गया पुरे जिस्म को रिलैक्स करते और ज़ोर से आवाज़ निकला, “AAAAAAHAHHHH..ISSHSHSHSHSSSSSSS बहोत मज़ा ारः है मेरी रानी, और ज़ोर से, और ज़ोर से अपना हाथ चला मेरी जान, ऐसे ऐसे, थेर बताता हूँ, यह देख अपने मुठी को ज़रा सा बांध करके ऐसे अब हाथ को चला, ज़ोर से चलती जाना …” बापू ने गहरा सांस लेते हुवे पद्मिनी को सिखाया कैसे वह अपने हाथ को उसस्के लुंड पर चलाये….. और जब पद्मिनी ने वैसे करना षुरे किया ठीक से तो बापू फिर लेथ गया मज़ा लेते हुवे आवाज़ निकालता गया तड़पते huwe…Padmini को ेंखों को खोलना पड़ा जब सुना के उसस्के बापू कितना तरप रहा है, और खुद पद्मिनी ने फील किया के उस्सकी छूट में ज़्यादा पानी उतर रहा है यह सब करने पर…..

ाअखिर में बापू ने पद्मिनी को अपने मुहं में लुंड को लेने को kaha…Padmini इंकार कर रही थी मगर बापू ने समझाया जैसे उस्सने उस्सकी छूट को छठा और चूसा वैसे hi उस्सको भी लुंड को चाटना चुस्सना चाहिए, यह सब प्यार करने का एक तरीका होता है और दोनों जनों को बहोत मज़ा और आराम मिलता है…. बहोत समझने पर इंकार करते हुवे hi पद्मिनी झुक गयी बापू के लुंड पर और पहले बापू के कहने पर अपने जीब को लुंड के ऊपरी वाले हिस्से पर फेरा, फिर और एक बार फिर से और एक baar..dhire धीरे छाती गयी चाटती गयी यहाँ तक के लुंड को आधा मुहं में लेलिया और चूसने लगा और बापू चिलता गया ख़ुशी और मज़े के मरे…. “आआआआह, हाआनंनं और ज़्यादा, और अंदर लेले अपने मुंह में मेरी बिटिया रानी, और चूस, चुस्ता जा अपने बापू को, मेरी तो किस्मत खुल गयी रे!! ाहः ाहः!! हाय रे हाय कितना मज़ा ारः है मेरी रानी ए हाय हाय….”

बापू को उस तरह से मज़ा लेते हुवे पद्मिनी ने कभी नहीं देखा था तो सोचा वह अपने बापू को इतना मज़ा दे रही है तो क्यों न और खुश करें अपने बापू को, तो इस लिए बहोत अच्ची तरह से चुस्ती गयी अपने बापू के लुंड को और हाथों से रगड़ती गयी एक साथ पुरे लुंड को चूसते वक़्त….. अपने जीब से ऊपर से नीचे तक खूब छाता अपने बापू के लुंड को और बहोत चूसा…. फिर पद्मिनी ने अपने जीभ पर नमकीन स्वाद फील किया तो समझ गयी के बापू का प्रेकम है, और तब लुंड के छेद पर अपनी जीभ रगड़ने लगी और बापू बेहाल हो रहा था उस रागढ से चिलाती हुवे…. पद्मिनी ेंखों को ऊपर उठाकर बापू का हाल बेहाल होता देख रही थी और खुद पद्मिनी ने महसूस किया के उस्सको भी मज़ा ारः है बापू के लुंड को चूस्ते हुवे एक अजीब सा अलग सा मज़ा जो उस्सने कभी नहीं फील किया था… उस लुंड को अपने हाथों में लिए अपने मुहं में लेकर जीब से चाटते चूस्ते हुवे एक अलग सा मज़ा और फीलिंग था जो पद्मिनी पहली बार ज़िन्दगी में महसूस कर रही थी….. काफी देर बापू के लुंड को चुस्सने के बाद पद्मिनी बोली, “बापू मेरा मुंह दुःख गया अब, बस करती हूँ….”

तब आखिरकार बापू ने पद्मिनी को अपने गॉड में इस तरह से लिया, के खुद बैठा था अपने गांड पर, पद्मिनी के दोनों जाँघों को अपने जाँघों के दोनों तरफ बाहर किया और पद्मिनी को नंगी अपने लुंड पर बिठाया…. पद्मिन बैठी वैसे hi और बापू के मोटे लुंड को अपनी छोटी छूट पर चहते हुवे महसूस करके सिमट गयी अपने बापू के कांधों पर अपने बाहों को लप्पेट kar…usski गाल अपने बापू के गालों से रागढ रही थी ेंखों को बांध किया और अपने बापू की लुंड को फील कर रही थी रगड़ते हुवे अपने छूट पर नीचे के तरफ….. धीरे धीरे अपने बापू के कांधों पर दन्त काठ रही थी पद्मिनी जिस से बापू को मज़ा ारः था….. फिर बापू के कहने पर पद्मिनी अपने दोनों पैरों पर थोड़ा सा कड़ी हुवी और बापू ने अपने लुंड पर थोड़ा थूक लगाया और पद्मिनी की छूट पर भी फिर पद्मिनी की गांड को ज़रा सा ऊपर उठाकर बापू ने अपने लुंड की हेड को पद्मिनी के छूट की छेद पर थोड़ा सा पुश kia….Padmini ने एक छोटी से चीख दी और ऊपर उठा लिया गांड को, और लुंड एक तरफ हाथ गया…. बापू ने फिर वही किआ, और जैसी hi उस्का लुंड पद्मिनी की छूट की छेद पर घुस्सने को था पद्मिनी ने फिर एक चीख देते हुवे गांड को ऊपर उठा लिया और लुंड हैट गया…… बापू ने फिर मिशनरी पोजीशन किया….. पद्मिनी को पीठ पर लेतादिया…. उस्सको चूमे लगा, उस्सकी चूचियों को चुस्सने लगा और उस्सकी पुरे जिस्म को चाटने लगा चारों taraf…Padmini को प्रेपर कर रहा था, तैयार कर रहा था अपनी बेटी की छूट में अपना मोटा लुंड घुसाने के लिए…… पद्मिनी ेंख मुंढे अंगडायिओं के साथ सिसकारियां लेते हुवे बापू को किश कर रही थी…. आखिर में बापू ने पद्मिनी की दोनों पैरों को दोनों तरफ फेतयलटी हुवे खुद बीच में ग़ुस्सा और अपने हाथों से अपने लुंड को पद्मिनी की छूट पर रगड़ा फिर थूक से भीगा कर छूट की छेद में डालने की कोशिश में लगा रहा… हर बार जब लुंड घुसने वाला था तो पद्मिन अपनी कमर हिला देती और लुंड एक तरफ हैट जाता…..

मगर बापू थका नहीं हिम्मत करके उस ने तरय जारी रखा, और एक बार तो अपने दोनों हाथों से पद्मिनी की दोनों जाँघों को दबाया और अपने लुंड को घुसाने की कोशिश की छूट की छेद mein….upar वाला हिस्सा थोड़ा सा अंदर जाते hi पद्मिनी ज़ोर से चिलायी, “Nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiin!! नहीं बापू मुझको डर लग रही है, दुखेगी, मत डालो अंदर प्लीज….” बापू ने पद्मिनी को प्यार से सहलाया, गालों पर अपने हाथों को फेरा, पद्मिनी को किश किया, बहोत फुसलाया फिर अपने कार्य को जारी रखा….. दूसरी बार लुंड की टॉप को छूट में घुसाया और पद्मिनी चिल्ला uthi…magar इस बार बापू ने पद्मिनी की जांघ और गांड को दबाया हुवा था और लुंड वहां से नहीं निकला और बापू ने और ज़ोर लगाकर पुश किया और आधा लुंड अंदर गया पद्मिनी की छूट मैं और पद्मिनी बहोत ज़ोर से चिल्लाते हुवे अपनी कमर को हिलाते हुवे बापू के टेल से निकलना चाहती थी यह कहते, “नहीं बापू, नहीं बस करो अब नहीं डालना, दुःख रही है, मुझको दर्द हो रहा है, निकालो निकालो बाहर …” और पद्मिनी रोने लगी, ेंसू बहने लगी ….. बापू को बहोत मज़ा ारः था और ऐसे वक़्त में लुंड को छूट से निकालना नामुमकिन था उसस्के LIYA…USSNE पद्मिनी को फिर फुसलाया यह कहते हुवे, “मेरी रानी, थोड़ा सा दर्द होगा क्यूंकि यह तुम्हारी पहली बार है बस थोड़ी देर में दर्द कम होजाएगी थोड़ी देर और मेरी जान….” यह कहकर बापू ने एक और ढाका दिया और लुंड पूरा अंदर घुस गया पद्मिनी की छूट में और पद्मिनी चिलाती गयी, रोटी गयी, बिनती करती गयी, “नहीं बापू नहीं, ऐसा मत करो, निकालो इस्को, बहोत दर्द हो रहा है, प्लीज निकालो नहीं तो मैं कॉलेज में सब से कहदूंगी के आप ने मेरा रपे किया HAI…NIKALO जलन सा भी हो रहा THA…PHAT गयी है अंदर यह किआ कर दिया आप ने मुझको बापू, निकालो नाह……” मगर बापू ने ढाका देना शुरू कर दिया था तो वह आगे बहरता गया एक से बढ़ कर एक ज़बरदस्त ढाका देता गया और अपने मोठे लुंड को पद्मिनी की छूट की गहराई में तुस्ता गया, घुसता गया और मज़ा लेता गया यह कहते हुवे, “वह कितना टाइट है तेरी छूट मेरी रानी आज अपने बापू को खुश कर दिया तुम, ahahaha….ab तो हर रोज़ छोडूंगा अपनी छोटी रानी को अब तो तू मुझसे हर रात को छुडवाएगी, चिल्लाना बांध कर मेरी जान अभी कुछ दिनों के बाद तू खुद मुझसे छुड़वाने को kahegi..abhi पहली बार है इसी लिए थोड़ा सा दर्द हो रहा hai…tu एन्जॉय तो कर नाह ज़रा…….” पद्मिनी रोटी जा रही थी और बापू छोड़ता गया , छोड़ता hi गया ज़ोरों से छोटी पद्मिनी को और अचानक चीला उठा, “हआ मैं झड़ने वाला हूँ मेरी रानी ाआअह बहुत माज़आआआ ारः है आइए हाय हाय हाय……” अपने लुंड को बाहर निकाल कर पिचकारी छोड़ता है पद्मिनी के पथ के ऊपर छूट के ऊपर रगड़ते हुवे और बापू के पानी पद्मिनी के चेहरे तक GAYA…aur रोटी हुवी पद्मिनी चेहरे साफ़ करते हुवे चादर पर छूट के पास देखते हुवे ज़्यादा ज़ोर से चिलाती…. “देखो खून निकाल दिया है आप ने, आप ने मुझको घायल कर दिया है बापू, बहोत जलन हो रही है और दर्द भी…..” और पद्मिनी रोटी gayi…..Bapu ने समझाया के सील टूटी उस्सकी विर्जिनिटी की इसी लिए खून निकली है कोई बड़ी बात नहीं है और पद्मिनी को बाहों में लेकर उस्का सर सहलाते हुवे बापू ने पद्मिनी को छुपा कराया…….

तो बे कॉन्टिनोएड…………………… (3587 वर्ड्स इन बोथ उपदटेस)
 
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