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- Dec 5, 2013
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कुछ वक्त पीछे
माधुरी चेयर पे बैठी थी पहलवान जो दुबला पतला नधुरी के पाव ( लग ) दबा रहा था दबा काम हाथ ज्यादा घुमा रहा था माधुरी ने आराम करने आंखे बंद कर ली और अपने हाथो को गर्दन के पीछे ले जा के बैठी जिस से 34 के नोकीले बूब्स आगे हो गए.
ये देख के जांय भी गरम हो जाता हे सायद उन्हे इतनी ब्यूटीफुल लेडी को टाच करने को पहेली बार मौका मिला था तो जांय माधुरी के कंधे दबाने के बहाने पीछे आ जाता हे और कंधे दबाने लगता हे माधुरी कंधो के टाच होते आँखे खोल के पीछे ऊपर की तरफ देखती हे और दोबारा आंखे बंद कर लेती हे.
दोनों कमीने लालची मोके का फायदा उठा ते हे और दबाना छोड़ हाथ घूमने लगते हे. पहलवान हाथ घूमते घूमते साड़ी को ऊपर की तरफ ले जाता हे और हाथो के धीरे धीरे जंगो तक घूमता हे. माधुरी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करती बस जैसे नींद में खोई हो जांय भी कंधो को दबाना छोड़ हाथो को कंधे और गर्दन पे हाथ गुमने लगता हे दोनों के लैंड टाइट तम्बू बन जाता हे.
माधुरी जैसे नींद के आगोश में खो जाती हे मजा तो उसे भी आ रहा था पहलवान लालच से और आगे बढ़ता हे वो धीरे धीरे अपने पंजो को आगे करने से पंतय ( चड्डी ) ( जंगिया ) की किनारी को छूटा हे. पहलवान की आँखों में चमक और डिल की धड़कने तेज हो जाती हे. माधुरी की भी आंखे बंद थी और सांसे तेज होती हे जिस से बूब्स के उभर धीरे धीरे उप डाउन होने लगते हे. जांय ये नजारा देख के पागल हो जाता हे अपने लैंड की ठोकर कपड़ो में से hi माधुरी की चेयर पे मरने लगता हे. और अपने पंजो को धीरे धीरे आगे बढ़ाते बूब्स की तरफ बढ़ता हे. पहलवान हिमत कर के अपने पजो को माधुरी की पंतय के ऊपर से hi छूट पे घुमा देता हे माधुरी के भी पाव अपने आप थोड़े खुल जाते हे और पहलवान को उंगलियों में गीलापन महसूस होता हे. वो धीरे धीरे खुलकर चड्डी में हाथ गुमने लगता हे. जांय भी अपने हाथो को निचे डाउन करता हे माधिरि की छाती तक पहेच चूका था और बूब्स को उंगलियों से टाच करता हे. हिमत जूता के बूब्स पे हल्का सा हाथ घुमा देता हे.
दोनों चुतियो की हरकतों से माधुरी गरम होने लगती हे माधुरी के लिप्स थोड़े कप जाते हे और हलके से खुल जाते हे. जांय हिमत कर के बूब्स को अपने पंजो की गिरफ्त में लेता हे और हलके हलके दबाने लगता हे. जांय की हिमत और बढ़ती हे अपने पंजी को ब्लाउज के अंदर उंगलिया घूमता हे और उसकी ऊँगली ब्रा को भी क्रॉस कर के निप्पल को थोड़ा टाच होती हे पहलवान भी हिम्मत करता हे और अपनी उंगलियों को चड्डी के अंदर दाल के छूट के ऊपर घूमता हे. बिना बालो वाली रसीली छूट से निकल रहे रास से पहलवान की उंगलिया भीग जाती हे.
इतने में एक आवाज आती हे.
सूखा ; मेडम चाय ( टिया )
आवाज सुनकर माधुरी झटके से कड़ी होती हे और बोलती हे.
माधुरी ; मदर्चुडोऊ. में यहाँ काम करने आई हु या तुम्हारे लैंड खड़े करने
.
और उठ कर जाने लगती हे.
सूखा ; मेडम चाय तो पि लो.
माधुरी ; अपनी गांड में दाल ले
और माधुरी बहार निकल जाती हे बहार घसीटा बीड़ी पि रहा होता हे.
माधुरी ; जीप कितनी हे ???
घसीटा ; मेडम 3 गाड़ी हे.
माधुरी ; में एक लेजा रही हु.
माधुरी जीप लेकर निकल जाती हे. सूखा को जांय और पहलवान गालिया देने लगते हे.
माधुरी गाड़ी चलते हुए आगे बढ़ती हे सामने से आती हवा में माधुरी के बल उड़द रहे होते हे माधुरी का सेक्स की खुमारी में जल रही होती हे अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकती हे और एक पाव ( लग ) को बहार निकलती हे. पाव बहार निकलने से जो सामने से आ रही हवा माधुरी के निचे के हिस्से से अंदर की तरफ लगती हे. माधुरी हवा को अपनी पंतय तक महसूस करती हे और थोड़ा मुस्कुराती हे.
चल रही हवा माधुरी को अलग hi आनंद दे रही थी. वो एक हाथ से स्टेरिंग पकडे हुए थी और दूसरे हाथ को अंदर दाल के अपनी पंतय खींच रही थी फेस पे एक सेक्सी मुश्कान. गाड़ी चलते उसकी नज़र वही मंदिर पे गई जब सुबह तपन उस मदिर में गया था और तपन के सामने उसने अग्नि परीक्षा देने को तैयार हो गई थी.
वो रुक जाती हे और मदिर को देखती हे अपने सर को स्टेरिंग पे रख के फुट फुट कर रोटी हे. एक बूढ़ा साधु वह से गुजर रहा होता हे उसे रोटा देख के वो माधुरी के पास आता हे.
साधु ; मत रो बेटी तू तो भगवन के दरवाजे पर हे वो तेरी साडी समस्या सुलझा देगा.
माधुरी ; बाबा में तो अपने hi भगवन को धोखा दे रही हु बाबा.
साधु ; मत रो बेटी वो भगवन हे उस से क्या छुपा होगा तेरी पूजा में सच होगा तो वो बार बार तुजे माफ़ करेगा.
माधुरी ; बाबा में बीमार हु कुछ मजबूर हु.
साधु ; तेरी आँखों में पश्च्याताप के साथ सचाई हे जा फ़िक्र मत कर तू अपना करम कर वो तुजे खुद hi इस दाल दाल से निकलेगा.
माधुरी कुछ वक्त वही रूकती हे फिर फोन लगाती हे.
रिंग - ट्रिंग ट्रिंग.
माधुरी ; बिल्ली.
तिगर ; बोल रैंड क्या हो गया तुजे?
माधुरी ; में ज्यादा रुक नहीं सकती. मुझे पहला टारगेट बताओ में ये सब जल्दी ख़तम करना चाहती हु.
तिगर ; थोड़ा सबर कर अभी तेरे पंजे छोटे हे और उनकी गर्दन बहोत दूर हे.
माधुरी ; इन सब के चाकर में में अपना परिवार खो बेठुंगी.
तिगर ; कोनसा परिवार तेरे जैसी रैंड का भी कोई परिवार हो सकता हे क्या जो अपने पति को धोखा दे रही हो.
माधुरी ; में मजबूर हु. में बीमार हु जिस दिन उन्हें पता चल गया जो मुझे छोड़ देंगे मुझे उनसे अलग होने का दर हे. में उनके बिना नहीं जी सकती.
माधुरी गुस्से में थी. उसकी आँखों में आंसू थे. कुछ देर खामोसी के बाद
तिगर ; उसे तेरी करतूत देखि हे पता हे उसे.
माधुरी ; क्या ?
तिगर ; है उसे पता हे तुजे वो देख चूका हे. उसे छोड़ना होता तो तुजे कब का छोड़ चूका होता लेकिन वो बेचारा भी लगता हे तुजसे सच्चा प्यार करता हे.
माधुरी ; में उनसे बात करुँगी आज hi.
तिगर ; ऐसी गलती मत करना कही वो बात सामने आने पर तुजे छोड़ के वो सच में न चले जाए.
माधुरी ; ( रट हुए ) में क्या करू ?
तिगर ; वक्त का इंतजार कर सब ठीक हो जाएगा.
माधुरी कॉल काट करके कुछ देर रूकती हे और गाड़ी आगे बढाती हे. माधुरी घर की तरफ चल देती हे करीम बैठा उसे देख रहा होता हे. वो गाड़ी कड़ी कर के दुकान में जाती हे करीम को देख के उसे सुबह वाला किस्सा याद अत हे और वो मुस्कुरा के करीम क पास पहोच जाती हे.
मेने देखा माधुरी करीम की दुकान में गई में अपनी पुराणी जगह से दुकान के आगे के हिस्से में पहोच गया और उनकी हरकत देखने लगा. माधुरी उस कमीने बूढ़े को देख के मुस्कुरा रही थी.
माधुरी अपना पल्लू हटा के ब्लाउज में टेम 34 के बूब्स दिखती हे.
माधुरी ; देखो न तुमने मेरे ब्लाउज का क्या हल किया हे. (प्यार से)
करीम माधुरी के तने हुए बूब्स को देख के ललचा जाता हे और कपट हाथो से माधुरी के बूब्स पे हाथ रखता हे.
माधुरी ; आह .....स्स्सस्स्स्स.
करीम जोर जोर से बूब्स को अपने हाथो से मसलने लगता हे.
माधुरी ; धीरीईए.... Ufff...ssses.
करीम ; है है है अपना ब्लाउज उतरेगी तभी तो में ठीक करूँगा.
करीम माधुरी की पतली कमर और तने हुए नोकीले 34 साइज के बूब्स के उभर को देख के पागल हो गया करीम की जीभ लड़खड़ा जाती हे और बूब्स दबाते हाथ कप जाते हे. करीम खुद hi माधुरी के ब्लाउज के हुक खोलने लगता हे.
माधुरी ; ारामसीए अह्ह्ह्ह. सैस तोड़ोगे क्या.
करीम से एक हुक टूट गया लेकिन फिर भी सरे हुक खोलने में कामयाब हो जाता हे. माधुरी के खुले ब्लाउज और वाइट ब्रा को देख रहा था करीम का फेस शॉकिंग और आंखे बड़ी हो गई थी वो सिर्फ 1 फिट की दुरी से माधुरी के बूब्स और नंगी पतली कमर को hi देख रहा था.
करीम हडबडात से माधुरी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से hi चूसने लगा करीम की लसीली गन्दी लार से ब्रा बूब्स के हिस्से से भीग गई वो माधुरी की कमर और नाभि को कुत्ते के जैसे चाटने लगा पूरी कमर और नाभि तक करीम के गंदे थूक और लार चिपक जाती हे करीम अपनी जीभ को माधुरी के नाभि के छेड़ में दाल देता हे और गोल गोल घूमने लगता हे.
माधुरी भी आंखे बंद कर के सिसकिया ले रही थी अचानक माधुरी को कमर से पकड़ के करीम झटके से घूमता हे और घुटनो के बल बेथ कर माधुरी के घाघरे को उसकी कमर तक उठा देता हे माधुरी भी कमर पे हाथ रख के घाघरे को पकड़ लेती हे. करीम माधुरी की पेंटी को खींच के निचे गिरा देता हे माधुरी की पेंटी माधुरी की चप्पल में फास जाती हे और करीम अपना मुँह माधुरी की गांड की दरारों में दाल देता हे. माधुरी सिसकारियां लेने लगी.
में ये सब देख के सेक्स के नशे में खो गया और मेरे पेण्ट की जीप खुल गई और कब में अपना लैंड निकल के हिलने लगा मुझे पता नहीं चला.
करीम ; साली रैंड मुझे थपड मारा न ( बोलके वापस मुँह को माधुरी की गांड की दरार में घुसा कर चाटने लगा )
माधुरी की गोरी गांड में बढ़े भूढ़े का घुसा फेस देख कर में पागल हो रहा था मेरे हाथ जोर जोर से चलने लगे.
माधुरी ; आह सैस.... में क्या करती ुनकाआ हुकुमममम...... था.
करीम उठता हे और अपने मोठे लडन को माधुरी की गांड के छेड़ में सेट कर के जोर से झटका मरता हे.
करीम ; शैली रैंड तू मेरी रंडी होक उसकी बात बनती हे अब उसके सामने तुजे छोडूंगा अपनी रखेल बना कर.
माधुरी ; नहीं प्लीसीई अह्ह्ह्ह.... ( माधुरी करीम के झटके से सहम जाती हे और उसकी आंखे बड़ी हो जाती हे.
करीम ; है उसके सामने छोडूंगा और वो तुजे छुड़वाते देखेगा और अपना कमजोर सा लैंड हिलाएगा बोल छुडवाएगी न उसके सामने
करीम की बातो से माधुरी गरम होने लगती हे
माधुरी ; है आउच... सससससस उफ्फ्फ्फ़
करीम ; बोल में मेरे पति के सामने छुडवाउंगी.
माधुरी ; है छुडवाउंगी.
करीम ; पूरा बोल.
माधुरी ; है में मेरे पति के सामने तुमसे छुडवाउंगी.
माधुरी की बातो से मुझे कुछ हो रहा था में ज्यादा उत्तेजित हो गया और मेरी पिचकारी छूट गई में थोड़ा दुखी भी हुआ और वह से जाने लगा.
माधुरी छुड़वाते छुड़वाते उसकी नजर तपन पे जाती हे वो घबरा जाती हे सोचती हे कही उन्होंने देख तो नहीं लिया और वो करीम से कहती हे.
माधुरी ; रुको.
करीम ; नहीं अब नहीं रुकूंगा.
माधुरी उसे जातक देती हे करीम फिर भी माधुरी का हाथ पकड़ लेता हे.
माधुरी ; मेरे पति आ गए.
करीम को पता लग चूका था वो कामयाब नहीं हो पाएगा तो कहता हे.
करीम ; रत को आओगी न.
माधुरी ; देखूंगी
और माधुरी करीम को जातक के पेंटी ऊपर सरका के भागने लगी तपन ऊपर जा चूका था. माधुरी भी पीछे जाने लगती हे.
में ऊपर पहोच कर लॉक खोलता हु और अंदर आ जाता हु फें चालू कर के बेथ जाता हु. मेरी आंखे बंद थी 3 से 4 मिनिट बाद माधुरी घर में आती हे. और मेरे सामने मुजरिम की तरह आके कड़ी हो जाती हे. माधुरी ने अपना फेस डाउन करा हुआ था.
माधुरी चेयर पे बैठी थी पहलवान जो दुबला पतला नधुरी के पाव ( लग ) दबा रहा था दबा काम हाथ ज्यादा घुमा रहा था माधुरी ने आराम करने आंखे बंद कर ली और अपने हाथो को गर्दन के पीछे ले जा के बैठी जिस से 34 के नोकीले बूब्स आगे हो गए.
ये देख के जांय भी गरम हो जाता हे सायद उन्हे इतनी ब्यूटीफुल लेडी को टाच करने को पहेली बार मौका मिला था तो जांय माधुरी के कंधे दबाने के बहाने पीछे आ जाता हे और कंधे दबाने लगता हे माधुरी कंधो के टाच होते आँखे खोल के पीछे ऊपर की तरफ देखती हे और दोबारा आंखे बंद कर लेती हे.
दोनों कमीने लालची मोके का फायदा उठा ते हे और दबाना छोड़ हाथ घूमने लगते हे. पहलवान हाथ घूमते घूमते साड़ी को ऊपर की तरफ ले जाता हे और हाथो के धीरे धीरे जंगो तक घूमता हे. माधुरी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करती बस जैसे नींद में खोई हो जांय भी कंधो को दबाना छोड़ हाथो को कंधे और गर्दन पे हाथ गुमने लगता हे दोनों के लैंड टाइट तम्बू बन जाता हे.
माधुरी जैसे नींद के आगोश में खो जाती हे मजा तो उसे भी आ रहा था पहलवान लालच से और आगे बढ़ता हे वो धीरे धीरे अपने पंजो को आगे करने से पंतय ( चड्डी ) ( जंगिया ) की किनारी को छूटा हे. पहलवान की आँखों में चमक और डिल की धड़कने तेज हो जाती हे. माधुरी की भी आंखे बंद थी और सांसे तेज होती हे जिस से बूब्स के उभर धीरे धीरे उप डाउन होने लगते हे. जांय ये नजारा देख के पागल हो जाता हे अपने लैंड की ठोकर कपड़ो में से hi माधुरी की चेयर पे मरने लगता हे. और अपने पंजो को धीरे धीरे आगे बढ़ाते बूब्स की तरफ बढ़ता हे. पहलवान हिमत कर के अपने पजो को माधुरी की पंतय के ऊपर से hi छूट पे घुमा देता हे माधुरी के भी पाव अपने आप थोड़े खुल जाते हे और पहलवान को उंगलियों में गीलापन महसूस होता हे. वो धीरे धीरे खुलकर चड्डी में हाथ गुमने लगता हे. जांय भी अपने हाथो को निचे डाउन करता हे माधिरि की छाती तक पहेच चूका था और बूब्स को उंगलियों से टाच करता हे. हिमत जूता के बूब्स पे हल्का सा हाथ घुमा देता हे.
दोनों चुतियो की हरकतों से माधुरी गरम होने लगती हे माधुरी के लिप्स थोड़े कप जाते हे और हलके से खुल जाते हे. जांय हिमत कर के बूब्स को अपने पंजो की गिरफ्त में लेता हे और हलके हलके दबाने लगता हे. जांय की हिमत और बढ़ती हे अपने पंजी को ब्लाउज के अंदर उंगलिया घूमता हे और उसकी ऊँगली ब्रा को भी क्रॉस कर के निप्पल को थोड़ा टाच होती हे पहलवान भी हिम्मत करता हे और अपनी उंगलियों को चड्डी के अंदर दाल के छूट के ऊपर घूमता हे. बिना बालो वाली रसीली छूट से निकल रहे रास से पहलवान की उंगलिया भीग जाती हे.
इतने में एक आवाज आती हे.
सूखा ; मेडम चाय ( टिया )
आवाज सुनकर माधुरी झटके से कड़ी होती हे और बोलती हे.
माधुरी ; मदर्चुडोऊ. में यहाँ काम करने आई हु या तुम्हारे लैंड खड़े करने
.
और उठ कर जाने लगती हे.
सूखा ; मेडम चाय तो पि लो.
माधुरी ; अपनी गांड में दाल ले
और माधुरी बहार निकल जाती हे बहार घसीटा बीड़ी पि रहा होता हे.
माधुरी ; जीप कितनी हे ???
घसीटा ; मेडम 3 गाड़ी हे.
माधुरी ; में एक लेजा रही हु.
माधुरी जीप लेकर निकल जाती हे. सूखा को जांय और पहलवान गालिया देने लगते हे.
माधुरी गाड़ी चलते हुए आगे बढ़ती हे सामने से आती हवा में माधुरी के बल उड़द रहे होते हे माधुरी का सेक्स की खुमारी में जल रही होती हे अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकती हे और एक पाव ( लग ) को बहार निकलती हे. पाव बहार निकलने से जो सामने से आ रही हवा माधुरी के निचे के हिस्से से अंदर की तरफ लगती हे. माधुरी हवा को अपनी पंतय तक महसूस करती हे और थोड़ा मुस्कुराती हे.
चल रही हवा माधुरी को अलग hi आनंद दे रही थी. वो एक हाथ से स्टेरिंग पकडे हुए थी और दूसरे हाथ को अंदर दाल के अपनी पंतय खींच रही थी फेस पे एक सेक्सी मुश्कान. गाड़ी चलते उसकी नज़र वही मंदिर पे गई जब सुबह तपन उस मदिर में गया था और तपन के सामने उसने अग्नि परीक्षा देने को तैयार हो गई थी.
वो रुक जाती हे और मदिर को देखती हे अपने सर को स्टेरिंग पे रख के फुट फुट कर रोटी हे. एक बूढ़ा साधु वह से गुजर रहा होता हे उसे रोटा देख के वो माधुरी के पास आता हे.
साधु ; मत रो बेटी तू तो भगवन के दरवाजे पर हे वो तेरी साडी समस्या सुलझा देगा.
माधुरी ; बाबा में तो अपने hi भगवन को धोखा दे रही हु बाबा.
साधु ; मत रो बेटी वो भगवन हे उस से क्या छुपा होगा तेरी पूजा में सच होगा तो वो बार बार तुजे माफ़ करेगा.
माधुरी ; बाबा में बीमार हु कुछ मजबूर हु.
साधु ; तेरी आँखों में पश्च्याताप के साथ सचाई हे जा फ़िक्र मत कर तू अपना करम कर वो तुजे खुद hi इस दाल दाल से निकलेगा.
माधुरी कुछ वक्त वही रूकती हे फिर फोन लगाती हे.
रिंग - ट्रिंग ट्रिंग.
माधुरी ; बिल्ली.
तिगर ; बोल रैंड क्या हो गया तुजे?
माधुरी ; में ज्यादा रुक नहीं सकती. मुझे पहला टारगेट बताओ में ये सब जल्दी ख़तम करना चाहती हु.
तिगर ; थोड़ा सबर कर अभी तेरे पंजे छोटे हे और उनकी गर्दन बहोत दूर हे.
माधुरी ; इन सब के चाकर में में अपना परिवार खो बेठुंगी.
तिगर ; कोनसा परिवार तेरे जैसी रैंड का भी कोई परिवार हो सकता हे क्या जो अपने पति को धोखा दे रही हो.
माधुरी ; में मजबूर हु. में बीमार हु जिस दिन उन्हें पता चल गया जो मुझे छोड़ देंगे मुझे उनसे अलग होने का दर हे. में उनके बिना नहीं जी सकती.
माधुरी गुस्से में थी. उसकी आँखों में आंसू थे. कुछ देर खामोसी के बाद
तिगर ; उसे तेरी करतूत देखि हे पता हे उसे.
माधुरी ; क्या ?
तिगर ; है उसे पता हे तुजे वो देख चूका हे. उसे छोड़ना होता तो तुजे कब का छोड़ चूका होता लेकिन वो बेचारा भी लगता हे तुजसे सच्चा प्यार करता हे.
माधुरी ; में उनसे बात करुँगी आज hi.
तिगर ; ऐसी गलती मत करना कही वो बात सामने आने पर तुजे छोड़ के वो सच में न चले जाए.
माधुरी ; ( रट हुए ) में क्या करू ?
तिगर ; वक्त का इंतजार कर सब ठीक हो जाएगा.
माधुरी कॉल काट करके कुछ देर रूकती हे और गाड़ी आगे बढाती हे. माधुरी घर की तरफ चल देती हे करीम बैठा उसे देख रहा होता हे. वो गाड़ी कड़ी कर के दुकान में जाती हे करीम को देख के उसे सुबह वाला किस्सा याद अत हे और वो मुस्कुरा के करीम क पास पहोच जाती हे.
मेने देखा माधुरी करीम की दुकान में गई में अपनी पुराणी जगह से दुकान के आगे के हिस्से में पहोच गया और उनकी हरकत देखने लगा. माधुरी उस कमीने बूढ़े को देख के मुस्कुरा रही थी.
माधुरी अपना पल्लू हटा के ब्लाउज में टेम 34 के बूब्स दिखती हे.
माधुरी ; देखो न तुमने मेरे ब्लाउज का क्या हल किया हे. (प्यार से)
करीम माधुरी के तने हुए बूब्स को देख के ललचा जाता हे और कपट हाथो से माधुरी के बूब्स पे हाथ रखता हे.
माधुरी ; आह .....स्स्सस्स्स्स.
करीम जोर जोर से बूब्स को अपने हाथो से मसलने लगता हे.
माधुरी ; धीरीईए.... Ufff...ssses.
करीम ; है है है अपना ब्लाउज उतरेगी तभी तो में ठीक करूँगा.
करीम माधुरी की पतली कमर और तने हुए नोकीले 34 साइज के बूब्स के उभर को देख के पागल हो गया करीम की जीभ लड़खड़ा जाती हे और बूब्स दबाते हाथ कप जाते हे. करीम खुद hi माधुरी के ब्लाउज के हुक खोलने लगता हे.
माधुरी ; ारामसीए अह्ह्ह्ह. सैस तोड़ोगे क्या.
करीम से एक हुक टूट गया लेकिन फिर भी सरे हुक खोलने में कामयाब हो जाता हे. माधुरी के खुले ब्लाउज और वाइट ब्रा को देख रहा था करीम का फेस शॉकिंग और आंखे बड़ी हो गई थी वो सिर्फ 1 फिट की दुरी से माधुरी के बूब्स और नंगी पतली कमर को hi देख रहा था.
करीम हडबडात से माधुरी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से hi चूसने लगा करीम की लसीली गन्दी लार से ब्रा बूब्स के हिस्से से भीग गई वो माधुरी की कमर और नाभि को कुत्ते के जैसे चाटने लगा पूरी कमर और नाभि तक करीम के गंदे थूक और लार चिपक जाती हे करीम अपनी जीभ को माधुरी के नाभि के छेड़ में दाल देता हे और गोल गोल घूमने लगता हे.
माधुरी भी आंखे बंद कर के सिसकिया ले रही थी अचानक माधुरी को कमर से पकड़ के करीम झटके से घूमता हे और घुटनो के बल बेथ कर माधुरी के घाघरे को उसकी कमर तक उठा देता हे माधुरी भी कमर पे हाथ रख के घाघरे को पकड़ लेती हे. करीम माधुरी की पेंटी को खींच के निचे गिरा देता हे माधुरी की पेंटी माधुरी की चप्पल में फास जाती हे और करीम अपना मुँह माधुरी की गांड की दरारों में दाल देता हे. माधुरी सिसकारियां लेने लगी.
में ये सब देख के सेक्स के नशे में खो गया और मेरे पेण्ट की जीप खुल गई और कब में अपना लैंड निकल के हिलने लगा मुझे पता नहीं चला.
करीम ; साली रैंड मुझे थपड मारा न ( बोलके वापस मुँह को माधुरी की गांड की दरार में घुसा कर चाटने लगा )
माधुरी की गोरी गांड में बढ़े भूढ़े का घुसा फेस देख कर में पागल हो रहा था मेरे हाथ जोर जोर से चलने लगे.
माधुरी ; आह सैस.... में क्या करती ुनकाआ हुकुमममम...... था.
करीम उठता हे और अपने मोठे लडन को माधुरी की गांड के छेड़ में सेट कर के जोर से झटका मरता हे.
करीम ; शैली रैंड तू मेरी रंडी होक उसकी बात बनती हे अब उसके सामने तुजे छोडूंगा अपनी रखेल बना कर.
माधुरी ; नहीं प्लीसीई अह्ह्ह्ह.... ( माधुरी करीम के झटके से सहम जाती हे और उसकी आंखे बड़ी हो जाती हे.
करीम ; है उसके सामने छोडूंगा और वो तुजे छुड़वाते देखेगा और अपना कमजोर सा लैंड हिलाएगा बोल छुडवाएगी न उसके सामने
करीम की बातो से माधुरी गरम होने लगती हे
माधुरी ; है आउच... सससससस उफ्फ्फ्फ़
करीम ; बोल में मेरे पति के सामने छुडवाउंगी.
माधुरी ; है छुडवाउंगी.
करीम ; पूरा बोल.
माधुरी ; है में मेरे पति के सामने तुमसे छुडवाउंगी.
माधुरी की बातो से मुझे कुछ हो रहा था में ज्यादा उत्तेजित हो गया और मेरी पिचकारी छूट गई में थोड़ा दुखी भी हुआ और वह से जाने लगा.
माधुरी छुड़वाते छुड़वाते उसकी नजर तपन पे जाती हे वो घबरा जाती हे सोचती हे कही उन्होंने देख तो नहीं लिया और वो करीम से कहती हे.
माधुरी ; रुको.
करीम ; नहीं अब नहीं रुकूंगा.
माधुरी उसे जातक देती हे करीम फिर भी माधुरी का हाथ पकड़ लेता हे.
माधुरी ; मेरे पति आ गए.
करीम को पता लग चूका था वो कामयाब नहीं हो पाएगा तो कहता हे.
करीम ; रत को आओगी न.
माधुरी ; देखूंगी
और माधुरी करीम को जातक के पेंटी ऊपर सरका के भागने लगी तपन ऊपर जा चूका था. माधुरी भी पीछे जाने लगती हे.
में ऊपर पहोच कर लॉक खोलता हु और अंदर आ जाता हु फें चालू कर के बेथ जाता हु. मेरी आंखे बंद थी 3 से 4 मिनिट बाद माधुरी घर में आती हे. और मेरे सामने मुजरिम की तरह आके कड़ी हो जाती हे. माधुरी ने अपना फेस डाउन करा हुआ था.