Meri Police wali Biwi - Page 2 - SexBaba
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Meri Police wali Biwi

मधरी जैसे hi स्टूल पे हलके से बेथ जाती हे करीम उसके पीछे आ जाता हे करीम के हाथ माधुरी के कंधो पर थे करीम की नज़र सिर्फ माधुरी के बूब्स पर थी

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करीम ; महोतरमा ये तो अब भी नहीं रुक रहे हे

और पीछे से माधुरी की बगल से होते हुई अपने गंदे हाथो को बढ़ता हे और माधुरी के बूब्स को जकड लेता हे करीम ज़ुकता हे और अपने होठो को माधुरी के नंगे कंधो पे रख के चलने लगता हे माधुरी काफी गरम हो जाती हे और आँखों को बंद कर के सिसकारियां भरे जा रही थी.

Sssss...ahhhh..ass..ahhh...

उसकी हर सिसकारी के साथ हालत मेरी ख़राब हो रही थी. मुझे पता hi नहीं चला मेने कब अपनी जीब खोल दी और नजाने कब से अपना लैंड मसल रहा था. मेरा हल माधुरी से काम बुरा नहीं था. मेरी ब्यूटीफुल बीवी को मेरे hi सामने एक बुद्धा मसल रहा था और मेरी बीवी भी उसे सब करने दे रही थी.

अब करीम का पाजामे में बना तम्बू से करीम अपने लैंड को मेरी बीवी की नंगी पीठ पर रगड़ रहा था मधरी अचानक हुए लैंड की छुअन से कप जाती हे और गर्दन और सर को पीछे की तरफ और अपनी ब्रेस्ट को आगे की तरफ कर देती हे इसका फायदा करीम तुरंत उठता हे और अपने गंदे पंजो से मेरी खूबसूरत बीवी के सुन्दर बूब्स को दबा के मसल देता हे अचानक करीम हाथो को हटाता हे जिस से माधुरी हलकी सी गर्दन घुमा के पीछे देखने की कोसिस करती हे

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करीम अपने पाजामे का नाडा खींचता हे उसका पजामा उसके पेरो में गिर जाता हे अब करीम का 11" लम्बा लैंड मेरी आँखों के सामने आ जाता हे जिसे माधुरी नहीं देख सकीय. वो अपने लैंड को मधरी की पीठ में रगड़ता हे करीम का सूपड़ा काफी मोटा था माधुरी को पीठ पर काफी गरम महसूस होता हे माधुरी काफी गरम हो जाती हे. में भी ये सब देख के हक्का बक्का रहे जाता हु. करीम अपने लैंड को पहले पीठ पर रगड़ता हे फिर वो मधरी की बगल में घुसा देता हे. माधुरी के बगल में लैंड डालने से हाथो के निचे और कमर तक काफी गरम महसूस होता हे मधरी की सांसे काफी तेज चल रही थी.

धीरे धीरे लैंड के झटके और मेरा लैंड का मसलना दोनों कारवाही साथ हो रही थी. मधरी का ब्लाउज तो ब्रा जैसा hi था अचानक लैंड को बगल से निकल कर माधुरी के गाल पर रगड़ने लगता हे जिस गलो को में रोज चूमा करता था उस गलो पर एक खुसठ बुद्धा अपना लैंड रगड़ रहा था इस हरकत से मधरी थोड़ा पीछे सर घूमती हे तो लैंड सीधा मधरी के लिप्स पे टाच होता हे

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करीम ऐसा मौका कहा जाने देता. वो माधुरी के लिप्स पर लैंड का टोपा रगड़ ने लगता हे जिसे में रोज चूमा करता था लैंड को मधरी के लिप्स पर कभी नक् (नोज) के नथुनों पर रगता हे लैंड की खुसबू ले रही माधुरी बिलकुल नहीं हिलती अपनी सेक्सी नशीली नजरो से वो करीम को देखे जा रही थी.

करीम लिप पे टोपा रगड़ता जिस से मधरी के जबड़े और सुन्दर मोतियों जैसे डट पे भी रगड़ लगती मनो ऐसा लगता हे जैसे वो अपने लैंड से माधुरी को टूथ ब्रश करा रहा हो

करीम ; मोहतरमा थोड़ा मुँह तो खोल दो थोड़ी हम पर भी रहमत कर दो

माधुरी की सांसे रूकती हे और हल्का सा मुँह खुल जाता हे करीम अपना टोपा मधरी के मुँह में hi ठूस देता हे और झटके मरने लगता हे ऐसा लगता हे जैसे वो माधुरी के जबड़े की चुदाई कर रहा हो करीम आहिस्ता से आगे की तरफ खिसकते सामने की और आ जाता हे और हलके हलके माधुरी के मुँह में जठके मरने लगता हे वो हलके हलके माधुरी के मुँह की चुदाई कर रहा था ये सब देख के में भी मुट्ठ मरने लगा बहार अँधेरा हो चूका था रोड पर कोई भी आवा गमन नहीं हो रहा था
 
माधुरी का मुँह पूरा खुल जाता हे और 4" लैंड माधुरी के मुँह में होता हे करीम का पजामा करीम के कदमो में होता हे करीम धीरे धीरे माधुरी के मुँह में अपना मोटा लैंड अंदर बहार कर रहा था. माधुरी लैंड पर बिलकुल दबाव नहीं दे रही थी. 4 या 5 मिनिट खेल के बाद करीम अपना लैंड बहार निकलता हे तो माधुरी के मुँह से ढेर साड़ी लार मधरी के मुँह से निकलती हे और माधुरी की थोड़ी और चेस्ट पे गिरती हे जिसे वो बिलकुल नहीं पोछती.

अब माधुरी का खुला मुँह धीरे धीरे बंद होने लगा. करीम उसे देखते हुई कस्मिनी स्माइल करता हे माधुरी भी उसे hi देखती हे वो स्तब्ध थी बैठी हुई एक पुतले की तरह. माधुरी का फेस सिर्फ सोक था एक डैम मासूम वो न है रही थी न hi रो रही थी और नहीं उस कमीने बूढ़े को रोक रही थी सिर्फ उस कमीने को देखे जा रही थी

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करीम ; महोतरमा मुँह तो खोलो???? खोल्दो न देखो मेरा जानदार लैंड तुम्हे पसंद आया न.

और वो कमीना बुद्धा अपने लैंड का टोपा माधुरी के लिप्स के पास लेजाता हे और रुक जाता हे.

करीम इसका स्वाद आप भूल नहीं पाओगी.

हे भगवानंन्न.... अचानक मध्रुरी भी अपनी आँखों को बंद करती हे और मुँह खोल देती हे. साला बूढ़ा देर न करते हुई मुँह में फिर थुश देता हे और 10 मिनिट तक अंदर बहार करता हे. इस बार माधुरी के गाल बह ी पिचकते कभी फूलते पिचकते कभी फूलते में समाज गया की अब मधरी खुद hi उस कमीने भुद्दे के लैंड को चूस रही हे.

कुछ मिनिट बाद बुद्धा रुक जाता हे. लैंड माधुरी के मुँह में hi था माधुरी अपनी आँखों को खोलती हे और अपनी नजर उसकी इस हरकत को फिर उस कमीने के फेस को देखती हे वो कमीना करीम अपनी गन्दी हसी के साथ माधुरी को hi देखता हे.

करीम ; तुम्हे मजा आ रहा हे न ? तुम भी थोड़ी महेनत कर दो!!!

मेरी जान निकली जा रही थी अचानक माधुरी ने अपने दोनों हाथो को उठाया और अपनी नाजुक कलाइयों को बूढ़े की कमर पे रखा और जकड के अपने नज़दीक खींचा लैंड को और अंदर लिया अब माधुरी खुद अपने फेस को हिलने लगी. में ये सब देख के पागल हो गया मुझे थोड़ा दुःख हुआ लेकिन मजा ज्यादा आ रहा था.

अब मधरी खुद hi उसका लैंड चूसे जा रही थी. अब सकक करीम को लगा करीम खुद पे काबू नहीं प् सका और उसकी पिचकारी माधुरी के मुँह में hi छूट गई लेकिन माधुरी पागल हो चुकी थी में माधुरी ला ये रूप कई बार देख चूका हु लेकिन मेरे साथ करीम कराह जाता हे.

आह्ह्ह्ह.... मुतरमाआआ.....

अचानक माधुरी कड़ी होने वाली थी में भगा और जल्दी सिडिया चढ़ते घर का दरवाजा खोला और जा कर सीधा बैडरूम में जाते बीएड पर लेट गया.

4 मिनिट बाद मुझे माधुरी के आने की आहात हुई मेने अपनी आंखे बंद कर ली वो अंदर आ चुकी थी. एकदम से मुझे मेरी नक् पे कुछ गरम सांसे महसूस हुई. वो माधुरी थी मेने आंखे नहीं खोली. माधुरी ने झुक के मेरे लिप्स को चूसना चालू किया मेरा मुँह खुल गया वो पागलो की तरह मुझे किश किये जा रही थी.

मुझे महसूस हुआ उसके मुँह में लार के साथ कुछ चिकना चिकना लिक्विड था. वो कमीने बूढ़े करीम का पानी था मेरी आंखे खुली लाइट नहीं जल रही थी. मेने महसूस किया माधुरी की थोड़ी गाल गले और बूब्स के ऊपरी हिस्सा गिला था. मेरे मुँह में माधुरी की लार और भूढ़े का पानी घूम रहा था जो में थोड़ा माधुरी पी गए थे लेकिन किश ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रही थी मेरी सांसे फूलने लगी सायद माधुरी का भी यही हल होगा में एक बार हिलाते हिलाते डिस्चार्ज हो चूका था लेकिन माधुरी की जानदार किश से फिर खड़ा हो चूका था.

अचानक मेरे मोबाईल पे कोई कॉल आया और मेने माधुरी को हटाया और हमारी किश भांग हुई.
 
मेरे मोबाईल पे रिंग बजती हे तो मेने थोड़ा हल्का सा माधुरी हो दक्का दिया हम दोनों बुरी तरह से हाफ रहे थे

में ; तुम कमल हो.

माधुरी ; आप के प्यार का असर हे वो नशीली आँखों से मुझे देखती हे और मेरी गॉड में बेथ कर मेरे कण ( एअर ) को अपने मुँह में ले कर जीभ घूमती हे मुझे काफी उत्तेजना महसूस हुई में उसे रोक नहीं प् रहा था. फिर भी कॉल की तरफ देखता हु और कॉल पिक करता हु.

कॉल से कोई लेडी की आवाज आती हे.

लेडी ; क्या आप तपन हो.

में ; जी है.

लेडी ; क्या आपने अग्रवाल सीओ लमत में क्लार्क की पोस्ट के लिए अप्लाई किया हे.

में ; जी मेम.

लेडी ; आप कल इंटरव्यू के लिए आ सकते हो 9 से 01 बज तक.

में ; जी सुक्रिया मेम.

क्या में जान सकता हु आप कोण हो???

लेडी ; वैसे ये जरुरी नहीं फिर भी बता देती हु. में अग्रवाल सीओ लमत की मद शिल्पा अग्रवाल हु कल में hi तुम्हे देखूंगी तुम इस जॉब के लायक हो. Ok गॉड बी & बेस्ट ऑफ़ लक.

में ; थैंक यू मेम.

फ़ोन काट जाता हे.

में ये तो बड़ी घमंडी लेडी हे

माधुरी ; किसका कॉल था

में ; कल एक जॉब के लिए जाना हे.

माधुरी ; कोई जरुरत नहीं हे कोई जॉब वेब करने की किसी के नौकर बांके गुलामो की तरह काम करने की.

में ; जान जॉब तो में करूँगा ये में पेसो के लिए नहीं कर रहा सिर्फ अपने लिए कर रहा हु. और पसंद नहीं आई तो छोड़ दूंगा.

मध्रुरी ; लेकिन मुझे समाज नहीं आ रहा आप को क्या जरुरत हे जॉब की घर बैठो टीवी देखो किताबे पढ़ो में हु तो सही

क्या मेरे खुदा को भरोसा नहीं हे क्या अपनी इस कनीज गुलाम पर.

में सोचता हु मुझे अपना खुदा बोलने वाली मेरी बीवी कुछ देर पहले एक गंदे 70 साल के बूढ़े का लैंड चूस के आई हे.

में ; मुझे तुम पर पूरा भरोसा हे और में कोई खुदा नहीं हु और नहीं तुम मेरी गुलाम हो

तुम मेरी बीवी हो सिर्फ मेरी

मेरे डिल की धड़कन. ये बात मेरी सिर्फ जुबा hi नहीं मेरा डिल भी कह रहा था सायद आज शादी कर के पहेली बार मुझे माधुरी को खोने का दर लगा

में ; टूल तो अपना ब्लाउज लेने गई थी ???.

मधरी ; है वो कुत्ते ने सिला नहीं हे बोल रहा हे 2 हॉर्स में ले जाना

में : तो इतनी देर बैठी रही देख लेना कही वो तुम्हारा दीवाना बूढ़ा कही तुम्हे अपने हेडपम्प का पानी न पीला दे.

माधुरी ; हम्म्म अच्छाआ ???.

अगर में पि के आ गई तो क्या करोगे?

में ; में .... में क्या कर सत्ता हु??? तुम खुद hi पि के आओगी तो !!!

माधुरी मेरी आँखों में देखती हे कही

माधुरी ; मुझे छोड़ तो नहीं डोज ??

उसके फेस पे दया का भाव था मनो मुझसे भीख मांग रही हो.

में ; पागल हो क्या तुम्हे छोड़ने का में सपने में भी नहीं सोच सकता उल्टा दर लगता हे कही ऐसे बूढ़े का हेडपम्प देख के कही तुम मुझे छोड़कर नहीं चली जाओ.

माधुरी ; पागल हो क्या इस दुनिया में मेरा कोई अपना नहीं हर किसी को कुछ न कुछ चाहिए दौलत रुपया पैसा ये खूबसूरत जिस्म लेकिन तुम तुम निष्पाप हो कोई स्वार्थ नहीं.

तुम तो भगवान हो भगवन

तुम्हे पाकर में बहोत खुदकिस्मत समझती हु दोबारा कभी ऐसा मत सोचना में तुम्हे किसी भी जनम में नहीं छोड़ने वाली हर जनम में तुम्हारी दासी बनूँगी.

सायद माधुरी को समझना मुश्किल हे. हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते हे और स्माइल के साथ

में ; सच ???

माधुरी ; है सच.

में ; सच में ीे ??? ( थोड़ा जोर देके )

माधुरी ; है बाबा है है है.

और जम्प कर के मेरे लैंड पे बेथ जाती हे.

माधुरी का पल्लू लटकने की वजह से ऊपर ला हिस्सा नंगा था सिर्फ ब्रा जैसा ब्लाउज
 
मधरी मेरे लैंड पर सवार थी उसका घाघरा का घेरा फैला हुआ था मेरे लैंड पहले से hi खुला था. मेरे लैंड पे माधुरी की छूट घिस रही थी. माधुरी की छूट की रगड़ मुझे उत्तेजित कर रही थी. मेरा लैंड माधुरी की छूट से बुरी तरह से रगड़ा खा रखा था बिच में

सिर्फ उसकी पेंटी ( चड्डी ) थी. मजा कीर किरा हो गया जब माधुरी कड़ी हो गई. में माधुरी को निहार रहा था वो थोड़ा ज़ुकी दोनों हाथो से अपने घाघरे में पीछे की तरफ से हाथ डाला और आहिस्ता से अपनी पेंटी को निचे की तरफ खिसकती गई वो मेरी आँखों में hi देख रही थी नजरो को बिलकुल नहीं हटाया. वो ज़ुकी हुई थी अचानक वो रुक गई अपने होतो से अपने दातो को कटा और अचानक से पेंटी निकल कर कड़ी हो गई वो मुझे देख कर है रही थी. फिर वो पेंटी को अपनी एक ऊँगली में दाल कर अपना हाथ हवा में उठती हे और गोल गोल घूमते हुए मुझे देखती हे. मसंसा फेस और उकसी खूबसूरती जान लेवा जिस्म का हर कोई देवना था. माधुरी जम्प कर के बाद से कूद जाती हे और मेरे सामने मेरे पाव ( लग ) की तरफ घुटनो के बल बैठ जाती हे.

मधरी की नशीली आंखे और हरकत देख कर ऐसा लगता हे जैसे वो एक खुखार

बिल्ली ( कैट ) हो वो मुझे hi कातिल नजरो से देख रही थी. अब भी वो घटना के बल निचे बैठी हुई थो. नजरो मेरी नजरो को मिलाए वो आगे को ज़ुकी और पाना मुँह खोल के मेरे

पाव ( लग) क अंगूठे को और साथ 2 उंगलियों को मुँह में लिया. माधुरी की लार से भरा मुँह मेरे पाव के अंगूठे को और उंगलिओ को भिगो रहा था फिर उंगलिओ को छोड़ कर सिर्फ मेरे पाव के अंगूठे को लड़ के जैसे चूसने लगी. मेने अपनी ऊँगली से माधुरी को ऊपर आने का हिसार किया. वो मुस्कुराई और मेरे पाव के पंजो से अपने लिप्स को रगड़ते हुए मेरे लैंड तक पहोची अपना सर उठकर सेक्सी निगाहो से मेरी आँखों में देखा अपनी जीभ निकली और मेरे 6" के लैंड को जड़ से टोपे तक छठा फिर पूरा लैंड मुँह में ले लिआ.

मुझे मजा बहोत आ रहा था. मुझे खुस करने के लिए मेरी बीवी जो कर रही थी वो बहोत काम लोगो को नसीब होता हे लेकिन में तो बहोत hi लकी था क्यों की ऐसी जबरदस्त सेवा माधुरी दे रही थी वो आंखे बंद कर पे बहोत प्यार से और पुरे मन से लैंड चूस रही थी. में अपने लैंड पे माधुरी की जीभ का स्पर्श और माधुरी की लार महसूस कर रहा था. माधुरी मजा तो बहोत ज्यादा दे रही थी लेकिन मुझे खलित ( डिस्चार्ज भी नहीं होने दे रही थी मेने माधुरी के सर को खींचा वो भी ऊपर की तरफ उठी मेने सीधा माधुरी को खींच कर अपने लैंड पे बिठा दिया. मेरा लैंड सीधा माधुरी की चिकनी और गीली छूट में घुस गया. जो माधुरी ने सोचा नहीं था. माधुरी की हलकी सी चीख और फिर सिसकारी निकली.

औछह.. अह्ह्ह... Ass...ssss. ओह.

माधुरी धीरे धीरे उप डाउन हो रही थी नंगे बूब्स भी उछाल रहे थे माधुरी ने अपने दोनों हाथो को अपने बालो में घूमना सुरु किया माधुरी सात सात काम देवी लग रही थी. वो मुझे पूरा मजा देना चाहती थी.

में ; जान थोड़ा फ़ास्ट करो अहह.. मुझे बहोत मजा आ रहा हे.

माधुरी ; नहीं जणू तुम्हे टकककलीफ़ होगी. Ass's... तुम्हे चोट लगगगग सककककति हे.

में झटके से उठा और वो मेरे लैंड पे सवार हवा में अपने दोनों पैर को मोड़ के मेरे कमर को जकड लेती हे मेरे दोनों हाथ माधुरी के हिप्स पर जकड जाते हे और में उसे हवा में लटका कर झटके मरना सुरु करता हु. वो उतरती हे और घूम कटी हे माधुरी की पीठ मेरे साइन से सात जाती हे

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मेने माधुरी को आगे की तरफ झुकाया और खड़े खड़े hi उसे डौगी स्टाइल में छोड़ने लगा. हम दोनों सेक्स के नसे में लीन थे बहोत मजा आ रहा था. काफी देर हो चुकी थो मेने लैंड बहार निकला माधुरी को घुमाया और निचे दबाया माधुरी समाज गई और घुटनो के बल बेथ गई. मेरे लैंड को गैप से पूह में ले लिया.

में ; आज तो तुम्हारे सैस... Muhhh...me ही.

वो समाज गई और थोड़ा सा जोर लगाया और मस्त चूसने लगी मेरा सबर का बांध टुटा और पिचकारी मुँह में hi निकल गई वो उठने की कोसिस करती लेकिन मेने सर को दबाए रखा मेने ऐसा माधुरी में साथ पहेली बार किया सायद ये उस बूढ़े से जलन थी. मुझे बहोत मजा आया. मेरा वीर्य की एक बून्द भी माधुरी के मुँह से बहार नहीं निकली मेने मच जो दबा रखा था वो सब पी गई. मेने उसे छोड़ा वो उठी और हाफ ने लगी उसके फेस पे प्यारी स्माइल थी.

माधुरी ; मुझे बहोत मजा आया. आपने पहेली बार जबरदस्ती किया में बहोत खुस हु.

वो बहोत खुस हुई और मेरी बहो में समां गई. लेकिन बाद में मुझे अफ़सोस हुआ मेने जलन के मरे क्या किया मेने ऐसा पहले कभी नहीं किया.
 
माधुरी बीएड से उत्तरी से उसके बूब्स खुले थे 34 साइज के तीखी पहाड़ी. घाघरा में थी सिर्फ बीएड के निचे साइड में उसका ब्रा जैसा ब्लाउज और पिंक चड्डी ( पंतय) पड़ी थी. वो हलकी स्माइल के साथ मुझे hi देख रही थी बीएड के निचे घुटनो के बल बैठी.

माधुरी ; सुनो जी.?

में ; हम्म

माधुरी ; आप को भूख नहीं लगी क्या आप को ?

में ; है लेकिन तुम्हारे प्यार की.

माधुरी ; वो भूख तो मुझे भी हे तुम्हारे प्यार की

ऐसा बोलके वो उठी और मेरी कमर के बाजु में बेथ गई और नेरे सीने में दोनों हाथ टिका के आधी लेट गई उसके बल मेरे फेस पे आ गए. मेने भी उसे बहो में ले लिया.

माधुरी ; बोलो न क्या खाओगे.

में ; तुम्हे

माधुरी हस्ती हे और बोलती हे.

कच्चा hi खाओगे या चले पे बेथ जाऊ.

में ; खुश नहीं खाना.

माधुरी ; न कुछ तो खाना पड़ेगा में बुखा नहीं सोने दूंगी.

में ; फिर चावल फ़्राय कर दो.

माधुरी ; अभी बनती हु.

माधुरी किचन में जाती हे पुलाव बना ने रखती हे और नहाने जाती हे. कुछ देर में नाहा कर निकलती हे. उसने सेक्सी निघ्त्य पहनी थी

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माधुरी ; खाना लगा दू.

में ; हम्म्म

वो पुलाव की थाली लेकर आती हे गई की खुसबू आ रही थी.

में ; घी की खुसबू आ रही हे.

माधुरी ; हम्म्म आप को पसंद हे न.

में ; मुझे तो तुम्हारे निचे घी निकलता हे वो ज्यादा पसंद हे.

में है के बोलै माधुरी को भी हसी आ गई

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माधुरी ; आप भी न.

माधुरी ; वैसे आप की गाढ़ी क्रीम जितनी मेरा घी टेस्टी नहीं होगा

में ; तुम भी खा लो न साथ hi.

माधुरी ; एक बात बोलू ??!!

में ; बोलो

माधुरी ; मुझे आप अपने हाथो से खिलौना.

में ; इसमें ऐसे रिक्वेस्ट क्यों कर रही हे जो भी मूड हो बता दिया करो.

माधुरी ; वैसे मेरा मूड तो जिंदगी भर तुम्हारी बहो में रशेने को करता हे फ़िलहाल अपनी गॉड में hi बिठा लो.

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में उसके लिए तो तुम्हे अपनी पंतय उतरनी पड़ेगी.

माधुरी ; मेने पहले से तयारी में आई हु मुझे पता था आप के लिए निचे से नुदे hi हु.

में ; फिर बैठो.

में थाली साइड में रखता हु वो हलके से धीरे धीरे बैठती हे में धीरे से उसके हिप्स को छोड़ा करता हु उसके गांड के छेड़ को लैंड के टोपे पे सेट करता हु. सॉरी जब वो नाहा के निकली उसे निघ्त्य में देखते hi मेरा खड़ा हो गया था. जैसे hi माधुरी बैठती हे मेरा अंदर घुसते जाता हे और उसका मुँह सेक्स के नशेमे खुल जाता हे और माधुरी के मुँह से गर्म हवा निकल ने लगती हे

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हम्म दो सेक्स करते करते खाना कहते हे पुलाव से ज्यादा गरम तो मेरी खूब सूरत बीवी हे खाना में उसे अपने हाथ से खिलाया. खाना तो ख़तम हो गया था लेकिन सेक्स नहीं.

वो जो टंगे लम्बी कर के बैठी थी अपनी टैंगो को थोड़ा पीछे खींचा जिस से टंगे थोड़ क्लोज हुई अपने हाथो के दोनों पंजे मेरी जंगो पे टिका के उप डाउन होने लगी.

माधुरी बहोत hi नशीली थी

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वो खुद hi उछल के झटके लगा रही थी और हर जातको को इंजॉय कर रही थी.

मेने कहा मजा आया.

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माधुरी ; ओह्ह्ह आप लाइफ टाइम ऐसे hi रहे मेरे अंदर .

में ; में कैसे.!?

माधुरी ; लाइफ टाइम एक बीएड पे हम दो नुदे रहे और आप का लैंड मेरी छूट में hi रहे और में आप की बहो में. और हमारी चुदाई कई सालो तक चलती रहे न खाने को न पिने की जरुरत हो.

मुझे माधुरी की बातो से हसी आ गई .

में ; मेरा लैंड तुम्हे इतना पसंद हे .

माधुरी ; है तुम्हारा लैंड भी तुम्हारी हर ऐडा तुम्हारा मुझे प्यार से देखना तुम्हारी फरमाइसे जो तुम बहोत hi कसम करते हो तुम्हारी बाटे तुम्हारा हसना तुम्हारा प्यारा सा डिल तुम्हारा ये सरीर चहहहरररी रूह और तुम्हारे डिल में मेरे लिए पनप रहा प्यार. मूठा ( किश ). लव यू सो मच.

में वो किश लिए?

माधुरी ; मुझे इस जनम में मिल जाने के लिये.

माधुरी के प्यार को देख के मेरा डिल में कम्प्पन हुई. मुझे ये पता था की माधुरी मुझसे बहोत ज्यादा प्यार करती हे लेकिन ये मुझे पहेली बार पता चला की माधुरी के डिल में जो प्यार हे वो एक पागलपन सवार हे उसका प्यार पागलपन था मुझे पहेली बार ऐसा लगा वो मेरे लिए किसी की जान भी ले सकती हे वो स्ट्रांग थी बहादुर थी.

मेरा लैंड उसकी बातो से दर की वजह से मुरझा गया जो उसे पता चल गया.

माधुरी क्या हुआ मुद नहीं हे कोई बात नहीं लेट जसो.

वो उठी मुझे अपने हाथ से पानी पिलाया उसी ग्लास से बचा हुआ खुद पिया एक पानी से भरे कटोरा ले मेरे हाथ धोए टावल से पोछा और चली गई. में पूरा नंगा hi सो रहा था मेरी आंखे बसंद हुई की अचसनक मुझे लैंड में गुदगुदी महसूस हुई माधुरी मेरा लैंड चूस रही थी मेरा पूरा लैंड उसके मुँह में था मुझे बशॉट मजा आ रहा था. वो पूरी महेनत से मेरे लैंड को चूस रही थी बहोत मजा आ रहा था अचानक मेरे पिचकारी छूती वो फिर भी चालू राखी. मेरी आखरी बून्द तक चुस्ती रही वो सटासट मेरा सत्ता वीर्य पी जा रही थी बाद में मेरे लैंड को अच्छी तरह से साफ करि वो भी पूरा लैंड चाट के और बोली अब आप को अच्छी नींद आएगी में अपना ब्लाउज लेके आती हु आप सो जसो और उठ कर ज़ुकी मेरे माथे पे एक किश की.

लेकिन जैसे hi ब्लाउज का नाम सुन्ना तो मुझे झटका लगा और मेरी आंखे झटके से खुल गई
 
करीम की दुकान में करीम के मोबाईल पे रिंग बजती हे.

ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग.

करीम ; hello कोण?

सामने से कोई लड़की की आवाज आती हे.

??? ; अस साला वालेकुम चाचा पहचाना?

करीम ; कोण ???

??? ; वो कल बताया था न मेरे निगाह हे. निकाह का जोड़ा सिलवाना था.

करीम ; ओह मोहतरम याद आ गया वैसे निकाह कब हे.

??? ; 3 नोव को.

करीम ; क्या तारीख काज़ी सब ने मुकर्रर की हे.

??? ; नहीं उनका काम तो बस निगाह करवाना हे. मौलवी सब ने मुकर्रर की हे.

करीम ; सुभान अल्लाह वैसे बारात तो पहले hi आएगी. आतिशबाजी का इंतजाम हो गया?

??? ; आप अपने काम पे मतलब रखिये ज्यादा बकवास मत कीजिये हमें ये निगाह किसी भी कीमत पे रुकने नहीं देना.

वैसे मेने आप को कहा था गुलकंद की बर्फी पर नजर रखना कुछ ध्यान भी हे आप को.

करीम ; है नजर हे में तो चख भी रहा हु.

??? ; याद रहे कोई मखहि हे जो बर्फी के पास मद्र रही हे उसे ढूंढो नहीं तो हम बारातियो को बर्फी नहीं खिला पाएंगे.

रखती हु खुदा हाफिस.

करीम ; खुदा हाफिस
 
कही दूर खरे के ढेर पड़े हुए थे. एक बूढ़ा लड़ते हुए ढेर के बिच में से निकलता हुआ जा रहा था. उसके कंधो पे सफ़ेद प्लास्टिक की बोरी थो. बोरी में प्लास्टिक की खली बोतले थी आगे समुन्दर किनारा आता हे एक कस्ती वह कड़ी थी एक कला जवान लड़का कस्ती में बैठा था बूढ़ा लड़ते कस्ती में आता हे. कस्ती में आते बिच में बेथ जाता हे.

लड़का ; क्या भाव बेचोगे ये बोतले बाबा?

बूढ़ा ; ढाई रुपए किलो बिक जाएगी.

बूढ़े जहा बैठा था उसके सामने कस्ती में अंदर रास्त खुलता हे बूढ़ा एक कदम आगे सरक कर रस्ते से निचे उतर जाता हे.

अंदर का नजारा कुछ और था. वो एक ख़ुफ़िया अड्डा था. हथियार गैजेट बनाना इस्तेमाल करना सब हो रहा तहत. अंदर बूढ़ा जो लंडा रहा था अब सीधा चलने लगता हे खली बोतलों की बोरी ऊपर कस्ती में hi छोड़ चूका था. सीधा सामने की तरफ जाते सब अंदर के अगांत उसे hello मास्टर कह रहे थे वो भी सब को hello बोलता सिगनल रूम में पहोचा और रिस्वर उठा कर बोलै hello तिगर कैसे कॉल किया.

तिगर ; M.P पुलिस को बता दो वो वही धमाका करेंगे.

मास्टर ; और क्या मश्ग हे.

तिगर ; वो बिल्ली को बर्फी समाज रहे हे.

गुलकंद की बर्फी.

मास्टर ; तुम्हे भरोसा हे बिल्ली पर.

तिगर ; खुद से भी ज्यादा

मास्टर ; और कुछ.

तिगर वैसे लगता हे धमाका इनडोर में hi होगा ऐसा मुझे लगता हे फिर भी आप भोपाल पे भी नजर रखे.

वैसे शैतान सींग का क्या हल हे कही ऐसा न हो बारातियो को वही साथ ला रहा हो.

मास्टर ; तुम सही हो तिगर.

वैसे तिगर तुम बिल्ली पर भरोसा कर रहे हो वो एक no की आईएस हे मुझे नहीं लगता वो कर पाएगी.

तिगर की हसने की आवाज आती हे.

तिगर ; वो जरूर करेगी मुझे भरोसा हे उसके जुनून पर में खुद भी कर सकता हु लेकिन ये काम वो खुद hi करेगी.

मास्टर ; उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी तुम्हारी.

है है है तिगर फिर हस्ता हे
 
जैसे माधुरी ने ब्लाउज का नाम लिया मेरी आंखे झटके से खुली. दरवाजा खुलने की आवाज आती हे वो जा चुकी थी. लाइट वो बंद कर के गई थी.

में विंडो पे आया माधुरी वही सेक्सी निघ्त्य में जा रही थी जो काफी सेक्सी थी मेरे जहँ में वही पिचर बार बार घूम रही थी जब माधुरी उस बूढ़े करीम का लैंड मस्तानी हो कर चूस रही थी.

में सोच में पद गया क्या करू मेने धीरे से दरवाजा खोला और पीछे चल दिया. धड़कने मेरी बहोत तेज़ हो रही थी.

माधुरी जाती हे दुकान के सामने कड़ी हो जाती हे एक बार पीछे मुद कर ऊपर अपने फलते की तरफ देखती हे फिर दोबारा घूम कर सामने के दवाजे पर हाथ रखती हे

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अंदर जाते hi बूढ़ा करीम उसे hi देखता मुस्कुरा रहा था.

करीम ; आइये महोतरमा आइये ब्लाउज चाहिए न.

माधुरी स्तब्ध कड़ी थी न वो है रही थी न वो कोई और प्रतिक्रिया दे रही थी.

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में अपनी वही जगह पे पहोच जाता हु रोड पे कोई स्ट्रीट लाइट थी नहीं दुकान में बल्ब की हलकी रोशनी आ रही थी.

करीम ; आओ अपना ब्लाउज लो.

माधुरी ; जी जी

माधुरी अपना हाथ धीरे से आगे करती हे करीम पजामा निचे कर के अपना लैंड बहहर निकलता हे वो ब्लाउज को अपने लैंड पर टेंगा देता हे.

माधुरी अपना हाथ पीछे खींच लेती हे

करीम ; अरे ले लो न अपना ब्लाउज.

और माधुरी हाथ धिरे धीरे आगे बढाती हे. करीम जाट से उसका हाथ पकड़ के आगे खींचता हे और अपना लैंड जबर दस्ती पकड़ा देता हे और हिलने लगता हे

करीम ; वह मोहतरमा क़यामत हो तुम.

में ये खेल देख रहा था. माधुरी बाहेक रही थी..

करीम माधुरी के हाथ में पकड़कर हिला रहा था उसकी आंखे माधुरी के फेस पे थी माधुरी भी उसकी आँखों में देख रही थी..

करीम धीमी आवाज में .

करीम ; केसा लगा मेरा हथियार

माधुरी खामोस रहती हे. माधुरी के गाल पे एक हाथ रखता हे और उंगलिया गलो पे घूमता हे.

माधुरी ; सैस .

करीम ; बोलो न बुल बुल

माधुरी कुछ नहीं बोलती करीम अपना हाथ माधुरी के गर्दन के पीछे ले जाता हे.

करीम ; बोलो न केसा लगा मेरा ये.

माधुरी ; अस्स स अह्ह्ह बहोत बड़ा हे.

माधुरी बहोत धीमी आवाज में बोलो

करीम माधुरी का फेस गर्दन से पकड़ के अपने करीब लता हे उसके लिप्स को अपने लिप्स के करीब सिर्फ 2 इस पे रुक जाता हे.

तुम्हे चाहिए.

माधुरी कोई जवाब नहीं देती अब जो हाथ निचे माधुरी के हाथ से अपना लैंड हिलने में बिज़ी था उसे उठा कर माधुरी को कमर पे रख देता हे लेकिन माधुरी का हाथ करीम के लैंड पर था. वो धीरे धीरे उसके लैंड को हिला hi रही थो.

करीम ; तुम्हारा सोहर जग रहा हे?.

माधुरी न में गर्दन हिलती हे.

करीम ; सो गया ?

माधुरी हलके से है में गर्दन हिलती हे.

करीम ; यहाँ आ तो नहीं जाएगा???

माधुरी न में हसलके से गर्दन हिलती हे.

करीम ; तो थोड़ा जोर से हिलाओ न.

माधुरी अपने पंजो को थोड़ा सख्ती से पकड़ती हे और धीरे धीरे से हिलती हे.

वो दोनों एक दुसरो की आँखों में hi देख रहे थे

मेरा लैंड ये सब देख के टाइट हो गया था माधुरी उस कमीने बूढ़े का लैंड हिला रही थी और करीम अपने दोनों हाथ के माधुरी की कमर पकड़ के सहेला रहा था वो दोनों एक दूसरे की आँखों में hi देख रहे थे करीम अपनी कामिनी मुस्कान फैलाए था तो माधुरी का फेस मासूमियत भरा खामोस.

अचानक मुझे झटका लगा वो दोनों एक दुसरो की आँखों में देख रहे थे तो माधुरी मुस्कुरा पड़ी.

यानि माधुरी बाहेक नहीं रही थी वो मेरे साथ चीटिंग hi कर रही थी.
 
माधुरी जो स्तब्ध कड़ी थी उसकी निगाहे करीम की निगाहो में थी कोई भी भाव फेस पाए नहीं था.

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अचानक वो मुस्कुरा पड़ी. और करीम भी खुश हो गया.

करीम ; मुझे पता था मेरा लैंड देखने के बाद तुम मेरे निचे जल्दी hi आ जाउंगी.

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माधुरी ; लेकिन ध्यान रहे मेरे पति के सामने कोई ऐसी वैसी हरकत मत करना .

करीम माधुरी का हाथ पकड़ के खींचता हे और माधुरी को अपनी बहो में आसानी से आ जाती हे ये देख के मेरा कलेजा जल उठता हे. माधुरी सेक्स और चीटिंग के नशे में खुश थी वही मेरा डिल रो रहा था

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में ये देख नहीं प् रहा था और माधुरी खूब है है के बेवफाई का मज़ा ले रही थी वो दोनों एक दूसरे की बहो में थे करीम अपने गंदे लिप्स को माधुरी के करीब लता हे

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लेकिन बेवफा माधुरी भी आगे बढ़ जाती हे और दोनों लॉन्ग किश करते हे 5 मिनिट तक वो एक दूसरे को चूमते और काट ते रहते हे. फिर वापस गले लग जाते हे करीम के हाथ माधुरी की 36 गांड पस घुमा रहा था उसने निचे से माधुरी की निघ्त्य उठा दी पंतय के ऊपर से hi माधुरी के हिप्स मसल रहा था. करीम की उंगलिया हिप्स की दरारों में घूम रही थी.

वो माधुरी का हाथ पकड़ के पीछे रूम में ले जाता हे. माधुरी भी हस्ती हुई उसके साथ चल देती हे.

मेरा डिल रो रहा था जिसे मेने इतना चाहा प्यार किया वो माधुरी एक गंदे बूढ़े 70 साल के बूढ़े के साथ हवस का गन्दा खेल खेल रही थी. में अब उसे देख नहीं प् रहा था में उठा और घर के पीछे की तरफ जाने लगा साइड में कोई विंडो या दरवाजा नहीं था में घर के पीछे चले गैस मेने पीछे देखा दरवाजा खुला था में छुपके अंदर गया.

अंदर जाते देखा तो एक बूढ़ा सामने वाले दरवाजे से छुपकर कुछ देख रहा था माधुरी और करीम की सेक्सी आवाजे आ रही थी. मतलब वो उन दोनों की चुदाई देख रहा था और खड़े खड़े अपना लैंड हिला रहा था मेने देखा वह एक खली कोई फ्रिज का कार्टून रखा था में उसमे छुप गया में सोच रहा था ये कोण हे जो उन दोनों को देख रहा हे. कही ये भी माधुरी के साथ

मेरी आँखों में आंसू थे.

उधर करीम माधुरी को अंदर रूम में लता हे और अपनी बहो में भर लेता हे

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माधुरी घूम जाती हे और करीम माधुरी के गर्दन पर अपने गंदे होठ रख देता हे और रगड़ने लगता हे

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माधुरी भी उसका साथ देती हे और माधुरी के तने हुए बूब्स उप डाउन होने लगते हे

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लेकिन उन्हें अब कोई और hi देख रहा था और गन्दी स्माइल के साथ अपना 8" का लैंड होल होल हिल्ला रहा तहत.

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करीम गर्दन से बूब्स तक फिर नाभि से होते हमे पेंटी तक अपने पजो की रगड़ता हुआ निचे घुटनो के बल बेथ जाता हे. और निघ्त्य को ऊपर उठा के गांड की दरारों में अपना फेस दबा देता हे नरम नरम हिप्स पे अपना फेस रगड़ने लगता हे.

माधुरी मचल उठती हे. माधुरी के फेस चेंज होने लगता हे

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.

माधुरी के मुँह से aahhhhh.....ssssssss..

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ आवाजे निकलती हे जिसे देख वो बूढ़ा लैंड जोर से हिलता हे और वह छुपे तपन के डिल को और दुखता हे.

तपन देख तो नहीं प् रहा था लेकिन उसके कानो पे पद रही माधुरी की आवाज त्स्पन के डिल को छल्ली कर रही थी. आँखों में आंसू लिए तपन जान ने की कोसिस कर रहा था ये हो क्या रहा हे.

करीम उठता हे और माधुरी को एक गंदे से बाद पर ले जाता हे पंतय को खींच कर निकल देता हे और दोबारा गांड चाटने लगता हे.

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करीम अपनी जीभ माधुरी के गांड की दरारों में घुसा देता हे और माधुरी का मुँह खुल जाता हे माधुरी के मुँह से आवाज के बदली सिर्फ गरम हवा hi निकलती हे

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अब खरिम उठता हे और माधुरी के ऊपर चढ़ जाता हे माधुरी ने निघ्त्य खुद hi खींच के उतर दी अंदर ब्रा माधुरी ने नहीं पहनी थी.

माधुरी की नंगी पीठ और खुली चूतड़ देख के करीम और बूढ़े का लैंड तन तना जाता हे करीम देर नहीं करता माधुरी के गांड के छेड़े को खोल कर करीम दक्का लगता हे धीरे से.

माधुरी ; अहह धीरीई सीईई.

करीम के लैंड का टोपा 2" समेत अंदर घुस जाता हे. ऐसा लगता हे माधुरी की गांड रबाट की हो और होल से कोई लोहे की और स्लो मोसन में अंदर घुस रही हो.

करीम ; ओह्ह वह मस्त टाइट हे मेरी बुल बुल.

माधुरी पेट के बल लेती हस्ती हे और अपनी गांड में घुसे लैंड का मज़ा लेती हे.

माधुरी ; ओह्ह मुझे बहोत मजा अअअअअ रहहा ही उफ्फफ्फ्फ़.....

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करीम धीरे धीरे ढको की स्पीड बढ़ता हे माधुरी भी बहोत जोस में आती हे माधुरी की आंखे बंद हो जाती हे दोनों डौगी स्टाइल में आ जाते हे करीम पूरा लैंड माधुरी की गांड में अंदर बहार करता जा रहा था माधुरी की सेक्सी आवाज मुँह से निकल रही थी.

माधुरी ; ओह्ह्ह मज़्ज़ज़्ज़ज़ा आए गया.

करीम ; केस लगा मेरी जान.

माधुरी ; बहोत अच्छा.

करीम ; क्या रोज़ छुडवाओगी मुझसे?

माधुरी ; हम्म्म रोज आउंगी.

करीम ; में पसंद आया तुम्हे.

माधुरी ; ह्म्म्मम्म बहहुत.

माधुरी की आंखे बंद थी वो करीम के हर झटके का अपनी गांड से मजा ले रही थी.

माधुरी की बाटे सुन के करीम और वो बूढ़ा बहोत खुस हो रहा था लेकिन तपन दुखी रो रहा था.

करीम और माधुरी की कई देर चली चुदाई का अंत आने वाला था. करीम जोर दर कराहता हे और पिचकारी माधुरी की हैंड में hi छूट जाती हे माधुरी भी बाद पे hi पेट के बल लेट जाती हे. करीम भी माधुरी पे hi ढेर हो जाता हे दोनों hi तेज़ तेज़ सांसे लेने लेट हे.

और कुछ देर वैसे hi पड़े रहने के बाद.

करीम ; मज़ा आया मोहतरमा?

माधुरी मुस्कुराते

माधुरी ; हम्म्म बहोत.

करीम ; क्या रोज़ आओगी.

माधुरी ; हम्म अब तो आना hi पड़ेगा लेकिन ध्यान रहे मेरे पति को कुछ पता न चले.

करीम अरे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा जानेमन बस ये अपने खुबशुरत भरा बदन मुझसे मसलवाने आती रहना अपनी जवानी का जैम पिलाती रशेना.

माधुरी; परदे में रहे तो तुम्हारी चंडी कर दूंगी और तुम्हारे जानदार हेडपम्प का पानी पीती रहूंगी.

दोनों है रहे थे.

करीम ; में जरा फारिग होक आता हु जाओ फिर मुझे भी जाना हे.

करीम खड़ा होता हे और अंदर जाता हे करीम और वो बूढ़ा एक दूसरे को देख के मुस्कुराते हे और धीरी आवाज में बात करते हे.

करीम ; बहोत कड़क हे ये औरत सब आप भी चख के देख लो सेटन सब.

में ये शैतान कोण हे.

शैतान सिंह ; मजा लो करीम इस रैंड को तो में भरे बाजार में नंगी कर के कोठे पे नचाउंगा.

करीम ; जरूर साहब आप जैसा चाहे तब तक तो बुलबुल का मज़ा लेने दो.

शैतान सींग ; लो लो अब में चलता हु कल पार्सल तुम्हारे पास आ जाएगा.

करीम ठीक हे आप जाइये में और इस साली को रगड़ता हु.

करीम बहार जा कर खुले में मूतने लावा फिर वापस माधुरी के पास आ जाता हे.

में ये सब मुझसे देखा नहीं जाता में उठ के अपने घर आ जाता हु. और अपने बाद पे गिरते hi रो पड़ता हु.
 
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