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मेरी आशिकी तुमसे hi.....
अपडेट 126
प्रिंस रूही के सर पे अपना हाथ रख के उसके सर में वाइट रेज़ चोर देता है ताकि रूही का दर्द और सूझन जल्द ख़तम हो जाए.... और वो उसे सुबह अपने साथ सुल्तानगढ ले जा सके....
प्रिंस : जान कल सुहब तक तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी....
प्रिंस की बात पे रूही हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है....
फिर दोनों एक दूसरे को किश कर के लिपट के सो जाते हैं....
इधर अचानक से गुलिस्तां का मौसम बदलने लगता है जिसे देख सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है की अचानक से ये क्या और क्यों हो रहा है....??????
अब आगे.....
इधर जैसे hi सूरज की पहली किरण खिड़की से टकरा के प्रिंस के जिस्म पे पड़ती है उसके जिस्म में कुछ बदलाव आने लगते हैं.... उसका जिस्म पहले से कई ज़्यादा मज़बूत और आकर्षक होने लगता है.... साथ hi उसकी आकर्षण शक्ति भी काफी बढ़ जाती है.... पूरे जिस्म में एक अलग hi तेज फैल जाता है.... उसके बाल थोड़े लम्बे हो जाते है.... कुछ अलग स्टाइल में.... फिर कुछ पल में वो होता है जो समझ के परे है..... अचानक से प्रिंस के सीने से नीली रौशनी निकल के रूही के जिस्म में जाने लगती है.... देखते hi देखते रूही का पूरा जिस्म नीली रौशनी से भर जाता है.... उसके जिस्म में कुछ झटके लगने लगते हैं.... फिर कुछ देर बाद रूही का जिस्म नीले से गुलाबी हो जाता है और फिर उसके जिस्म से गुलाबी रौशनी निकल के प्रिंस के जिस्म में सामने लगती है..... प्रिंस का जिस्म उस गुलाबी रौशनी की वजह से गुलाबी हो जाता है..... फिर कुछ देर बाद दोनों के जिस्म नार्मल हो जाते हैं.... कुछ ख़ास बदलाव के साथ.... अब ये बदलाव क्या और क्यों हुए ये आगे पता चल जाएगा....
जब तक चलिए चल के देखते हैं की अचानक से गुलिस्तां का मौसम क्यों बदलने लगा और ऐसा क्या हुआ जिसे देख सब बुरी तरह से चौंक गए.....?
वो हुआ ये था की जैसा की आप जानते हैं की रूही और अवनि पारी का hi हिस्सा हैं.... जो चीज़ एक को महसूस होता है उसे बाकी दोनों भी महसूस कर लेते हैं.... चाहे वो ख़ुशी हो गम हो गुस्सा हो या फिर सेक्स से भरा मज़ा.....
ठीक वही पारी ने महसूस किया.... जो जो प्रिंस ने रूही के साथ किया उसे रूही के साथ साथ अवनि और पारी ने भी महसूस किया.... दोनों के बीच हुए सेक्स को उस वक़्त बिताये हर एक पल को हर एक एहसास को हर एक मज़े को.... होंठों के चूसने को बूब्स के दबाने से छूट में उभरी मस्ती की तेज़ लेहेर को.... छूट से निकलते कामर्स की बूंदों को.... प्रिंस के हाथों से बूब्स और चूतड़ के दबने को.... छूट के दाने के रगड़ने को.... छूट में घुस के प्रिंस के लुंड से सील के टूटने और उस से उठने वाले तेज़ दर्द को.... फिर मस्ती भरे लम्हों को जो प्रिंस के उसके होंठों को चूसने और चूची के दबाने से महसूस हुए थे.... फिर मस्ती भरे चुदाई के एहसास को.... झड़ते वक़्त छूट से निकले काम रास के एहसास को.... फिर चौड़ाई के ज़बरदस्त धक्कों को जो उसकी छूट में घुस के उसकी बच्चेदानी तक पहुँच के उसे जन्नत का मज़ा दे रहे थे.... रूही के साथ साथ अवनि और पारी को भी जन्नत की सैर करवा रहे थे..... फिर आखरी में प्रिंस के लुंड से निकले वार्य के मदहोश और तृप्त कर देने वाले एह्साह को.... महसूस करके दोनों जन्नत की सैर कर रही थी.... पारी के महसूस किये हर एक एहसास पे गुलिस्तां का मौसम बदल रहा था.... जब उसे तकलीफ होती तो गुलिस्तां का मौसम बिगड़ने लगता.... आसमान में काले बादल चने लगते.... बिजलियाँ कदने लगती.... गुलिस्तां की ज़मीन हिलने लगती.... और जब उसे मस्ती का एहसास होता तो.... गुलिस्तां का मौसम बेहद खुशनुमा हो जाता... चारो तरफ हरियाली छाने लगती.... पेड़ों पे बैठे पंछी मधुर संगीत बजने लगते... हलकी हलकी बार गिरने लगती चारो तरफ फूल खिलने लगते.... गुलिस्तां को देख ऐसा लगता जैसे वहां जन्नत नज़र आ रहा हो..... फिर अचानक से मौसम खुशनुमा से बदल के खौफनाक हो जाता.... फिर अचानक से बदल के जन्नत से भी हसीं हो जाता.... रात भर गुलिस्तां का मौसम हर गुज़रते पल के साथ बदलता रहा.... जिसे देख सब के दिल में खौफ सामने लगा... किसी की कुछ समझ नहीं आ रहा है की आखिर ये सब कैसे और क्यों हो रहा है... सिवाए बाबा के.... गुलिस्तां का हाल देख के उन्हें ये समझते देर नहीं लगती की ये सब कैसे और क्यों हो रहा है... इस सब को देख जहाँ वो बेहद खुश हो जाते हैं वहीँ उनके चेहरे पे परेशानी के भाव भी उभर आते हैं..... और सुबह जो होता है उसे देख सब के साथ साथ बाबा का दिल भी एक पल के लिए देहल जाता है.... जिसे देख बेगम साहिबा न चाहते हुए भी बाबा से इस सब की वजह पूछने पे मजबूर हो जाती है....
बेगम साहिबा : बाबा आखिर ये सब क्या है....? ये अचानक से गुलिस्तां के मौसम को क्या हुआ....? ये हर गुज़रते पल के साथ क्यों बलदल रहा है....? और आपके चेहरे पे मुस्कराहट के साथ साथ आपकी आँखों में खौफ और परेशानी के भाव क्यों नज़र आ रहे हैं....? बताइये बाबा आखिर बात क्या है....?
बाबा : ये वो hi हो रहा है जो होना लिखा है..... होनी को कोई नहीं बदल सकता.... मगर इस तरह होगा ये सोचा न था.... जहाँ खुशियां भी हैं साथ hi बेइन्तेहाँ गम भी.... जहाँ ख़ुशी के साथ साथ तकलीफ भी है.... एक के हिस्से में सिर्फ ख़ुशी आयी है तो दूसरे के हिस्से में जितनी ख़ुशी नहीं आयी उस से कई ज़्यादा गम....
बेगम साहिबा : बाबा आप क्या कह रहे हैं कुछ समझ नहीं आ रहा है... आप किस ख़ुशी और गम की बात कर रहे हैं....? और वो कौन हैं....?
बाबा : वो और कोई नहीं बल्कि प्रिंस और पारी हैं.... कल रात रूही और प्रिंस का प्रेम मिलान हो गया.... जिसके साथ hi काल चक्र की शुरुवात भी हो चुकी है.... जो पारी के लिए खुशियां और प्रिंस के लिए जितनी खुशियां नहीं उस से कई ज़्यादा गम ले के आयी है.... उस मिलान के साथ hi प्रिंस की कुछ पावर्स के साथ साथ पारी की पावर्स भी एक्टिवटे हो गयी है.... जल्द hi एक बार फिर से वक़्त खुद को पहले की तरह दोहराने वाला है.... बस देखना ये है की इस बार वक़्त अपने साथ कुछ बदलाव लाता है या फिर पिछले बार जैसा हुआ इस बार भी वैसा hi होगा.... क्या इस बार भी न चाहते हुए भी प्रिंस को अपनी पाक और सच्ची मोहोब्बत को साबित करने के साथ साथ अपनी जान को बचने लिए अपनी जान की क़ुर्बानी देनी पड़ेगी....? क्या इस बार भी प्रिंस अपनी ये ज़िन्दगी भी हार जाएगा.... क्या इस बार भी प्रिंस उसी बेइन्तेहाँ तकलीफ को सहेगा....? क्या इस बार भी उसकी जान पारी और मलिका सुनहरी उसकी जान लेगी....? क्या इस बार भी शैतान अघोरा प्रिंस को दर्दनाक मौत तक पहुँचने में कामियाब हो पायेगा....? क्या इस बार वो प्रिंस की पावर्स को उस से चीन पायेगा...? या फिर हर बार की तरह इस बार भी प्रिंस के हाथों पूरी तरह न मर के वो 1000 साल तक दर्द में तड़पते हुए आधा जिस्म लिए मौत की फ़रियाद करते हुए के गुज़रेगा.... क्या इस बार भी प्रिंस उसे पूरी मौत नहीं दे पायेगा....? क्या हर बार की तरह वो श्राप प्रिंस को इस बार भी अपनी जान से दूर कर देगा....? क्या होगा आगे ये सोच के मैं घबरा रहा हूँ....
बाबा की बात सुन के बेगम साहिबा के साथ साथ वहां मौजूद सभी बुरी तरह से घबरा जाते हैं.... सब के दिल में तेज़ दर्द सा उठता है.... पिछली बातें याद करके उनकी रूह तक कांप जाती है... साथ hi आँखों से आंसुओं की नदी सी बहने लगती है....
बेगम साहिबा : बाबा क्या इस बार भी हम कुछ नहीं कर सकते.....? क्या इस बार भी हम प्रिंस को अपनी जान क़ुबान करते हुए देखते रह जाएंगे....? क्यों बाबा क्यों....? आखिर कब तक प्रिंस अपने सच्चे प्यार का सबूत देता रहेगा....? क्यों वो दोनों उसके सच्चे प्यार को नहीं समझती....? क्यों बस एक को चोर बाकी सब उसे अपना दुश्मन मानती हैं....? एक वो hi है जो हर बार प्रिंस के लिए अपने दिल में सच्चा प्यार लिए उसकी खातिर अपनी जान हस्ते हस्ते क़ुर्बान करती आयी है..... क्या इस बार भी उसका प्यार अधूरा रह जाएगा....? क्या इस बार भी वो अपनी जान प्रिंस के लिए अपनी जान क़ुर्बान कर देगी....? या फिर उसका सच्चा प्यार देख के उसे अपना लेगा.....? क्यों वो दोनों आज भी प्रिंस को अपना दुश्मन मानती हैं....? क्यों....? क्या किसी को टूट के चाहने का ये hi सिला मिलता है....? क्या सच्चे प्यार का यही अंजाम होता है....? अगर हाँ तो फिर अब बस अब और नहीं..... अब चाहे गुलिस्तां तबाह हो जाए या फिर मुझे उन दोनों कामिनियों को जान से hi क्यों न मारना पड़े.... इस बार मैं पहले जैसा नहीं होने दूंगी.... इस से पहले की उन दोनों कामिनियों की वजह से इस बार भी प्रिंस वो बेइन्तेहाँ दर्द सही.... मैं उनकी जान ले के इस को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर दूंगी.... इस बार न hi प्रिंस अपनी जान उन कामिनियों के लिए क़ुर्बान करेगा और न hi वो प्रिंस की खातिर उसके प्यार की खातिर अपनी जान देगी.... प्रिंस के साथ साथ उस मासूम को भी उसका प्यार जाने कब हासिल होगा....
बाबा : ये मुमकिन नहीं.... जब तक प्रिंस ज़िंदा है तुम तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा कोई नहीं जो उन दोनों को छू भी सके... उन्हें नुक्सान पहुँचाना तो बहुत दूर की बात है... न hi प्रिंस के ज़िंदा रहते न hi उसके मरने के बार.... प्रिंस मर के भी उन्हें कुछ नहीं होने देगा.... अगर उन्हें मार सकता तो मैं खुद कब का उन्हें मार देता.... मगर सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से वो मर के भी आज भी ज़िंदा हैं.... चाहे जो हो जाए प्रिंस को कितने hi जनम क्यों न लेने पड़े जब तक प्रिंस उनका प्यार पा नहीं लेगा वो न तो खुद उन्हें कोई नुक्सान पहुंचाएगा और न hi किसी और को उन्हें नुक्सान पहुँचाने देगा.... ये मुमकिन नहीं.... काश वो हुआ hi न होता....? काश वो मनहूस रात आयी hi न होती.....? काश वो श्राप दिया hi न गया होता...? काश वो ".............." हुआ hi न होता....
क्या वाकई में ऐसा होगा जो बाबा ने कहा या फिर इस बार प्रिंस के साथ साथ उस मासूम को भी उसका सच्चा प्यार हासिल होगा.... ये आगे पता चलेगा.... फिलहाल चलिए चलके देखते हैं की प्रिंस और रूही का क्या हाल है.....?
सुबह जब रूही की आँख खुलती है तब बीएड पे अपने सीने से किसी को लिपटे महसूस कर वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... मगर जैसे hi उसकी नज़र प्रिंस पे पड़ती है.... उसके दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... उसके चेहरे पे प्यारी सी स्माइल आ जाती है.... वो आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों को चुम लेती है.... उसके ऐसा करते hi प्रिंस नींद में उसके अपनी बाहों में कास लेता है.... रूही का नंगा जिस्म प्रिंस के जिस्म से कास के लिपट जाता है.... उसके ठोस बूब्स प्रिंस के सीने में डाब जाते हैं.... साथ hi प्रिंस का खड़ा लुंड उसकी छूट पे ठोकर मारने लगता है.... प्रिंस के नंगे जिस्म ख़ास करके उसके सीने और नीचे खड़े लुंड को महसूस कर के रूही का जिस्म मस्ती में सिहर उठता है.... उसे अपने और प्रिंस के नंगे होने का एहसास होता है... साथ hi उसे रात की दुमदार चुदाई याद आ जाती है.... जिसे सोच वो शर्म से पानी पानी हो जाती है.... वो शर्मा के अपना चेहरा प्रिंस के सीने में छुपाने की कोशिश करती है मगर कर नहीं पाती.... वो ऐसा करती उस से पहले hi प्रिंस नींद में आगे बढ़ के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगता है.... रूही भी किश में उसका साथ देने लगती है.... प्रिंस प्यार से उसके होंठों को चूसने लगता है... कुछ देर रूही कुछ ज़्यादा hi जोश में आ जाती है और वाइल्ड तरीके से उसके होंठों को चूसने लगती है.... उसकी छूट से तेज़ी से कामर्स बह के प्रिंस के खड़े लुंड को भिगोने लगता है.... रूही की इस वाइल्ड किश से प्रिंस की आँख खुल जाती है.... पहले तो वो बुरी तरह से चौंक जाता है फिर जब उसकी नज़र रूही पे पड़ती है तब वो ख़ुशी से उछाल पड़ता है और किश में उसका साथ देने लगता है.....
कुछ hi देर में रूही का जिस्म अकड़ जाता है और मस्ती में वो झड़ने लगती है.... उसे इतना मज़ा आता है की मस्ती में वो कब प्रिंस के होंठों को अपने दाँतों से कास के काट लेती है उसे समझ नहीं आता.... प्रिंस के होंठों से खून निकल के रूही के मुँह में जाने लगता है.... झड़ने के बाद जब रूही कुछ शांत होती है तब उसे अपने मुँह में कुछ अलग सा टास्ते महसूस होता है.... वो थोड़ा पीछे हैट के जब प्रिंस के चेहरे की तरफ देखती है तब प्रिंस के होंठों से निकल रहे खून को देख उसे ते समझते देर नहीं लगती की ये उसी की वजह से हुआ है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं... वो फ़ौरन आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों से बहते खून को चूसने लगती है साथ hi रोने भी लग जाती है.... प्रिंस प्यार से उसके सर पे हाथ फेर के उसे चुप करता है और उसे अपने सीने से लगा लेता है....
रूही रट हुए प्रिंस से माफ़ी मांगने लगती है....
रूही : सॉरी प्रिंस.... मुझे माफ़ कर दो... मैंने ये जान के नहीं किया.... जाने कब ये हो गया....
प्रिंस : कोई नहीं मेरी जान हो जाता है मस्ती में कभी कभी.... वैसे काफी वाइल्ड किश करती है मेरी रूह....
प्रिंस के मुँह से वाइल्ड किश सुन के रूही शर्मा जाती है... मगर फिर जब रूह सुनती है तब ख़ुशी से उसका दिल झूमने लगता है.... वो कास के प्रिंस को अपने सीने से लगा लेती है....
प्रिंस : आज के बाद इन आँखों में कभी आंसू नहीं आने देना.... मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकता हूँ मगर अपनी रूह की आँखों में आंसू नहीं देख सकता.... वादा करो मुझसे चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए तुम्हारी आँखों में ाँसे नहीं आएंगे....
रूही : मैं वादा करती हूँ जान... मगर तुमसे भी एक वादा चाहती हूँ की चाहे कुछ भी क्यों नान हो जाए तुम मुझे इसी तरह चाहते रहोगे... कभी चोर के नहीं जाओगे....
प्रिंस : मैं चहुँ तब भी तुम्हे चोर नहीं सकता.... मैं जिस्म हूँ और तुम मेरी रूह.... रूह के बिना जिस्म ज़िंदा नहीं रह सकता.... और एक बात हमेशा याद रखना.... तुम एक शेर की शेरनी हो.... शेरनी न hi किसी से डर्टी है और न hi कभी रोटी है.... वो तो बस डरना जानती है.... या फिर शिकार करना.... मुझे वो hi शेरदिल रूही चाहिए जो किसी से नहीं डर्टी थी... सब को डरा के रखती थी... वो दबंग शेरनी रूही जिसे पहली नज़र में देखते hi मुझे उस से प्यार हो गया था....
रूही : वो तो मैंने तुम्हारी वजह से खुद को रोके रखा था.... वर्ण डर्टी तो मैं अपने बाप से भी नहीं.... बस एक तुम hi हो जिसे देखते hi इस शेरनी का गुस्सा हवा हो जाता है और उसकी जगह प्यार ले लेता है.... तुम्हे और तुम्हारे सेक्सी जिस्म को देखते hi तुमपे प्यार आने लगता है....
प्रिंस : हाँ देखा था तुम्हारा प्यार अभी कुछ देर पहले.... कैसे मेरे होंठों को काट के मेरा खून चूस रही थी....
रूही : है जान जी तो चाहता है की तुम्हे कच्चा hi खा जाऊं.... है कितने हॉट सेक्सी और डैशिंग हो तुम.... और आज सुबह से कुछ ज़्यादा hi सेक्सी लग रहे हो....
प्रिंस : अब तो तुम से बच के रहना होगा... वैसे भी शेरनी के मुँह को खून लग गया है... जाने कब खा जाए.... और वैसे भी मैं भरी जवानी में नहीं मरना चाहता....
रूही : मुझसे से बच के कहीं नहीं जा पाओगे.... जहाँ जाओगे मुझे अपने पास hi पाओगे.... भूल गए रूह को भला कोई जिस्म से अलग कर पाया है क्या....
प्रिंस : मैं भी अपनी रूह से अलग नहीं रह सकता.... मगर रूह तुम्हारे आलावा मेरी किस्मत में और भी कई लफ्कियों का प्यार लिखा है....
रूही : मुझे पता है.... मैं बस इतना चाहती हूँ की मुझे मेरे हिस्से का प्यार मिलता रहे... बस और कुछ नहीं चाहिए... जब तक मुझे मेरे हिस्से का प्यार मिलता रहेगा ये शेरनी शांत रहेगी... जिस दिन मेरे हिस्से का प्यार तुमने किसी और को दिया उस दिन उसके साथ साथ तुम्हे भी जान से मार दूंगी और साथ खुद की जान भी ले लुंगी.... वैसे आज तक ऐसी कोई पैदा नहीं हुई जो मेरे शेरनी से उसके शेर को चीन सके.....
प्रिंस : ये कही न तुमने मेरे दिल जीतने वाली बात.... मुझे मेरी शेरनी ऐसी hi चाहिए एक दम दबंग स्टाइल वाली... यार आज तू ने मेरा दिल जीत लिया.... इस बात पे हो जाए एक और बार वो क्या है की रात में जल्दबाज़ी में ठीक से मज़ा नहीं आया आज दिन के उजाले में जैम के सुहागरात.... ी मैं सुहागदिन मानते हैं....
प्रिंस की बात सुन के रूही शर्मा जाती है....
रूही : धत तुम भी न जान... कुछ भी कहते हो.... रात भर मेरी बजा के तुम्हे चैन नहीं आया.... के दिन में भी मेरी हालत खराब करना चाहते हो... जानते हो अभी तक मुझे दर्द हो रहा है.... ( फिर अपनी सूझी छूट दिखा के कहती है... देखि क्या हाल कर दिया है तुमने और तुम्हारे एनाकोंडा ने मेरा और मेरी छूट का....
प्रिंस : वाओ यार कसम से क्या सेक्सी जिस्म है मेरी रूह का और सब से ख़ास तो उसकी छूट है और उस से भी ख़ास है उसकी छूट के पे वो काला टिल... है उसे देख के तो मुर्दे का लुंड भी खड़ा हो जाए.... मेरा तो पहले से hi खड़ा है....
प्रिंस की बात सुन के रूही को अपने नंगेपन का एहसास होता है साथ hi ये भी की जोश जोश में वो क्या बोल गयी.... शर्म के मारे वो धत कह के फ़ौरन बाथरूम में भाज जाती है.... उसे यूँ शरमाते देख प्रिंस हसने लगता है...
फिर कुछ देर बाद वो फ्रेश हो के बहार निकलती और प्रिंस को फ्रेश होने बाथरूम में भेज देती है....
फ्रेश हो के दोनों साथ में नीचे आते हैं.... प्रिंस को वहां देख सब को हैरत सी होती है साथ hi ख़ुशी भी...
रूही की माँ : अरे बीटा तुम कब आये....?
प्रिंस : माँ रात को आया था... आप सब सो रहे थे तो आपको डिस्टर्ब नहीं किया... आप सब की बड़ी याद आ रही थी ख़ास कर के मेरी रूही की तो उसे लेने चला आया.... अब से वो मेरे साथ रहेगी...
प्रिंस की बात सुन के रूही का दिल ख़ुशी से झूमने लगता है....
र माँ : मगर बीटा वो....
प्रिंस : माँ जो बीत गया उसे प्लीज आप सब एक बुरा सपना समझ के भूल जाइये.... और अब से कोई न hi उस सब को याद करेगा और न hi उसके बारे में कोई बात करेगा.... मैं अपनी जान रूही के साथ एक नयी शुरुवात करना चाहता हूँ जिसकी शुरुवात कल रात हो चुकी है.... अब हम को कोई अलग नहीं कर सकता... कोई नहीं मतलब कोई नहीं....
र माँ : ठीक है बीटा जैसा तुम कहो.... अपने बच्चों की ख़ुशी में hi मेरी ख़ुशी है....
फिर सब मिल के रूही और प्रिंस को इस नयी शुरुवात की मुबारकबाद देते हैं....
सिमी तो रात की बात सुन के रूही के पीछे पद जाती है.... बड़ी मुश्किल से रूही उसे बाद में बताने का कहके उस से पीछा छुड़ा लेती है....
सब के साथ नाश्ता करने के बाद....
प्रिंस : रूही तुम आराम करो मैं ज़रा ऑफिस जा के आता हूँ.... वहां का काम भी देख लूंगा साथ hi अपने दोस्तों से भी मिल लूंगा....
रूही : जान मैं भी तुम्हारे साथ ऑफिस चलती हूँ....
तभी सिमी जो कहती है उसे सुन के रूही गुस्से से मुँह बना के उसे देखती है.... जैसे उसे खा hi जायेगी....
सिमी : ........?????
(वर्ड्स : 3309)
अपडेट 126
प्रिंस रूही के सर पे अपना हाथ रख के उसके सर में वाइट रेज़ चोर देता है ताकि रूही का दर्द और सूझन जल्द ख़तम हो जाए.... और वो उसे सुबह अपने साथ सुल्तानगढ ले जा सके....
प्रिंस : जान कल सुहब तक तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी....
प्रिंस की बात पे रूही हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है....
फिर दोनों एक दूसरे को किश कर के लिपट के सो जाते हैं....
इधर अचानक से गुलिस्तां का मौसम बदलने लगता है जिसे देख सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है की अचानक से ये क्या और क्यों हो रहा है....??????
अब आगे.....
इधर जैसे hi सूरज की पहली किरण खिड़की से टकरा के प्रिंस के जिस्म पे पड़ती है उसके जिस्म में कुछ बदलाव आने लगते हैं.... उसका जिस्म पहले से कई ज़्यादा मज़बूत और आकर्षक होने लगता है.... साथ hi उसकी आकर्षण शक्ति भी काफी बढ़ जाती है.... पूरे जिस्म में एक अलग hi तेज फैल जाता है.... उसके बाल थोड़े लम्बे हो जाते है.... कुछ अलग स्टाइल में.... फिर कुछ पल में वो होता है जो समझ के परे है..... अचानक से प्रिंस के सीने से नीली रौशनी निकल के रूही के जिस्म में जाने लगती है.... देखते hi देखते रूही का पूरा जिस्म नीली रौशनी से भर जाता है.... उसके जिस्म में कुछ झटके लगने लगते हैं.... फिर कुछ देर बाद रूही का जिस्म नीले से गुलाबी हो जाता है और फिर उसके जिस्म से गुलाबी रौशनी निकल के प्रिंस के जिस्म में सामने लगती है..... प्रिंस का जिस्म उस गुलाबी रौशनी की वजह से गुलाबी हो जाता है..... फिर कुछ देर बाद दोनों के जिस्म नार्मल हो जाते हैं.... कुछ ख़ास बदलाव के साथ.... अब ये बदलाव क्या और क्यों हुए ये आगे पता चल जाएगा....
जब तक चलिए चल के देखते हैं की अचानक से गुलिस्तां का मौसम क्यों बदलने लगा और ऐसा क्या हुआ जिसे देख सब बुरी तरह से चौंक गए.....?
वो हुआ ये था की जैसा की आप जानते हैं की रूही और अवनि पारी का hi हिस्सा हैं.... जो चीज़ एक को महसूस होता है उसे बाकी दोनों भी महसूस कर लेते हैं.... चाहे वो ख़ुशी हो गम हो गुस्सा हो या फिर सेक्स से भरा मज़ा.....
ठीक वही पारी ने महसूस किया.... जो जो प्रिंस ने रूही के साथ किया उसे रूही के साथ साथ अवनि और पारी ने भी महसूस किया.... दोनों के बीच हुए सेक्स को उस वक़्त बिताये हर एक पल को हर एक एहसास को हर एक मज़े को.... होंठों के चूसने को बूब्स के दबाने से छूट में उभरी मस्ती की तेज़ लेहेर को.... छूट से निकलते कामर्स की बूंदों को.... प्रिंस के हाथों से बूब्स और चूतड़ के दबने को.... छूट के दाने के रगड़ने को.... छूट में घुस के प्रिंस के लुंड से सील के टूटने और उस से उठने वाले तेज़ दर्द को.... फिर मस्ती भरे लम्हों को जो प्रिंस के उसके होंठों को चूसने और चूची के दबाने से महसूस हुए थे.... फिर मस्ती भरे चुदाई के एहसास को.... झड़ते वक़्त छूट से निकले काम रास के एहसास को.... फिर चौड़ाई के ज़बरदस्त धक्कों को जो उसकी छूट में घुस के उसकी बच्चेदानी तक पहुँच के उसे जन्नत का मज़ा दे रहे थे.... रूही के साथ साथ अवनि और पारी को भी जन्नत की सैर करवा रहे थे..... फिर आखरी में प्रिंस के लुंड से निकले वार्य के मदहोश और तृप्त कर देने वाले एह्साह को.... महसूस करके दोनों जन्नत की सैर कर रही थी.... पारी के महसूस किये हर एक एहसास पे गुलिस्तां का मौसम बदल रहा था.... जब उसे तकलीफ होती तो गुलिस्तां का मौसम बिगड़ने लगता.... आसमान में काले बादल चने लगते.... बिजलियाँ कदने लगती.... गुलिस्तां की ज़मीन हिलने लगती.... और जब उसे मस्ती का एहसास होता तो.... गुलिस्तां का मौसम बेहद खुशनुमा हो जाता... चारो तरफ हरियाली छाने लगती.... पेड़ों पे बैठे पंछी मधुर संगीत बजने लगते... हलकी हलकी बार गिरने लगती चारो तरफ फूल खिलने लगते.... गुलिस्तां को देख ऐसा लगता जैसे वहां जन्नत नज़र आ रहा हो..... फिर अचानक से मौसम खुशनुमा से बदल के खौफनाक हो जाता.... फिर अचानक से बदल के जन्नत से भी हसीं हो जाता.... रात भर गुलिस्तां का मौसम हर गुज़रते पल के साथ बदलता रहा.... जिसे देख सब के दिल में खौफ सामने लगा... किसी की कुछ समझ नहीं आ रहा है की आखिर ये सब कैसे और क्यों हो रहा है... सिवाए बाबा के.... गुलिस्तां का हाल देख के उन्हें ये समझते देर नहीं लगती की ये सब कैसे और क्यों हो रहा है... इस सब को देख जहाँ वो बेहद खुश हो जाते हैं वहीँ उनके चेहरे पे परेशानी के भाव भी उभर आते हैं..... और सुबह जो होता है उसे देख सब के साथ साथ बाबा का दिल भी एक पल के लिए देहल जाता है.... जिसे देख बेगम साहिबा न चाहते हुए भी बाबा से इस सब की वजह पूछने पे मजबूर हो जाती है....
बेगम साहिबा : बाबा आखिर ये सब क्या है....? ये अचानक से गुलिस्तां के मौसम को क्या हुआ....? ये हर गुज़रते पल के साथ क्यों बलदल रहा है....? और आपके चेहरे पे मुस्कराहट के साथ साथ आपकी आँखों में खौफ और परेशानी के भाव क्यों नज़र आ रहे हैं....? बताइये बाबा आखिर बात क्या है....?
बाबा : ये वो hi हो रहा है जो होना लिखा है..... होनी को कोई नहीं बदल सकता.... मगर इस तरह होगा ये सोचा न था.... जहाँ खुशियां भी हैं साथ hi बेइन्तेहाँ गम भी.... जहाँ ख़ुशी के साथ साथ तकलीफ भी है.... एक के हिस्से में सिर्फ ख़ुशी आयी है तो दूसरे के हिस्से में जितनी ख़ुशी नहीं आयी उस से कई ज़्यादा गम....
बेगम साहिबा : बाबा आप क्या कह रहे हैं कुछ समझ नहीं आ रहा है... आप किस ख़ुशी और गम की बात कर रहे हैं....? और वो कौन हैं....?
बाबा : वो और कोई नहीं बल्कि प्रिंस और पारी हैं.... कल रात रूही और प्रिंस का प्रेम मिलान हो गया.... जिसके साथ hi काल चक्र की शुरुवात भी हो चुकी है.... जो पारी के लिए खुशियां और प्रिंस के लिए जितनी खुशियां नहीं उस से कई ज़्यादा गम ले के आयी है.... उस मिलान के साथ hi प्रिंस की कुछ पावर्स के साथ साथ पारी की पावर्स भी एक्टिवटे हो गयी है.... जल्द hi एक बार फिर से वक़्त खुद को पहले की तरह दोहराने वाला है.... बस देखना ये है की इस बार वक़्त अपने साथ कुछ बदलाव लाता है या फिर पिछले बार जैसा हुआ इस बार भी वैसा hi होगा.... क्या इस बार भी न चाहते हुए भी प्रिंस को अपनी पाक और सच्ची मोहोब्बत को साबित करने के साथ साथ अपनी जान को बचने लिए अपनी जान की क़ुर्बानी देनी पड़ेगी....? क्या इस बार भी प्रिंस अपनी ये ज़िन्दगी भी हार जाएगा.... क्या इस बार भी प्रिंस उसी बेइन्तेहाँ तकलीफ को सहेगा....? क्या इस बार भी उसकी जान पारी और मलिका सुनहरी उसकी जान लेगी....? क्या इस बार भी शैतान अघोरा प्रिंस को दर्दनाक मौत तक पहुँचने में कामियाब हो पायेगा....? क्या इस बार वो प्रिंस की पावर्स को उस से चीन पायेगा...? या फिर हर बार की तरह इस बार भी प्रिंस के हाथों पूरी तरह न मर के वो 1000 साल तक दर्द में तड़पते हुए आधा जिस्म लिए मौत की फ़रियाद करते हुए के गुज़रेगा.... क्या इस बार भी प्रिंस उसे पूरी मौत नहीं दे पायेगा....? क्या हर बार की तरह वो श्राप प्रिंस को इस बार भी अपनी जान से दूर कर देगा....? क्या होगा आगे ये सोच के मैं घबरा रहा हूँ....
बाबा की बात सुन के बेगम साहिबा के साथ साथ वहां मौजूद सभी बुरी तरह से घबरा जाते हैं.... सब के दिल में तेज़ दर्द सा उठता है.... पिछली बातें याद करके उनकी रूह तक कांप जाती है... साथ hi आँखों से आंसुओं की नदी सी बहने लगती है....
बेगम साहिबा : बाबा क्या इस बार भी हम कुछ नहीं कर सकते.....? क्या इस बार भी हम प्रिंस को अपनी जान क़ुबान करते हुए देखते रह जाएंगे....? क्यों बाबा क्यों....? आखिर कब तक प्रिंस अपने सच्चे प्यार का सबूत देता रहेगा....? क्यों वो दोनों उसके सच्चे प्यार को नहीं समझती....? क्यों बस एक को चोर बाकी सब उसे अपना दुश्मन मानती हैं....? एक वो hi है जो हर बार प्रिंस के लिए अपने दिल में सच्चा प्यार लिए उसकी खातिर अपनी जान हस्ते हस्ते क़ुर्बान करती आयी है..... क्या इस बार भी उसका प्यार अधूरा रह जाएगा....? क्या इस बार भी वो अपनी जान प्रिंस के लिए अपनी जान क़ुर्बान कर देगी....? या फिर उसका सच्चा प्यार देख के उसे अपना लेगा.....? क्यों वो दोनों आज भी प्रिंस को अपना दुश्मन मानती हैं....? क्यों....? क्या किसी को टूट के चाहने का ये hi सिला मिलता है....? क्या सच्चे प्यार का यही अंजाम होता है....? अगर हाँ तो फिर अब बस अब और नहीं..... अब चाहे गुलिस्तां तबाह हो जाए या फिर मुझे उन दोनों कामिनियों को जान से hi क्यों न मारना पड़े.... इस बार मैं पहले जैसा नहीं होने दूंगी.... इस से पहले की उन दोनों कामिनियों की वजह से इस बार भी प्रिंस वो बेइन्तेहाँ दर्द सही.... मैं उनकी जान ले के इस को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर दूंगी.... इस बार न hi प्रिंस अपनी जान उन कामिनियों के लिए क़ुर्बान करेगा और न hi वो प्रिंस की खातिर उसके प्यार की खातिर अपनी जान देगी.... प्रिंस के साथ साथ उस मासूम को भी उसका प्यार जाने कब हासिल होगा....
बाबा : ये मुमकिन नहीं.... जब तक प्रिंस ज़िंदा है तुम तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा कोई नहीं जो उन दोनों को छू भी सके... उन्हें नुक्सान पहुँचाना तो बहुत दूर की बात है... न hi प्रिंस के ज़िंदा रहते न hi उसके मरने के बार.... प्रिंस मर के भी उन्हें कुछ नहीं होने देगा.... अगर उन्हें मार सकता तो मैं खुद कब का उन्हें मार देता.... मगर सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से वो मर के भी आज भी ज़िंदा हैं.... चाहे जो हो जाए प्रिंस को कितने hi जनम क्यों न लेने पड़े जब तक प्रिंस उनका प्यार पा नहीं लेगा वो न तो खुद उन्हें कोई नुक्सान पहुंचाएगा और न hi किसी और को उन्हें नुक्सान पहुँचाने देगा.... ये मुमकिन नहीं.... काश वो हुआ hi न होता....? काश वो मनहूस रात आयी hi न होती.....? काश वो श्राप दिया hi न गया होता...? काश वो ".............." हुआ hi न होता....
क्या वाकई में ऐसा होगा जो बाबा ने कहा या फिर इस बार प्रिंस के साथ साथ उस मासूम को भी उसका सच्चा प्यार हासिल होगा.... ये आगे पता चलेगा.... फिलहाल चलिए चलके देखते हैं की प्रिंस और रूही का क्या हाल है.....?
सुबह जब रूही की आँख खुलती है तब बीएड पे अपने सीने से किसी को लिपटे महसूस कर वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... मगर जैसे hi उसकी नज़र प्रिंस पे पड़ती है.... उसके दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... उसके चेहरे पे प्यारी सी स्माइल आ जाती है.... वो आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों को चुम लेती है.... उसके ऐसा करते hi प्रिंस नींद में उसके अपनी बाहों में कास लेता है.... रूही का नंगा जिस्म प्रिंस के जिस्म से कास के लिपट जाता है.... उसके ठोस बूब्स प्रिंस के सीने में डाब जाते हैं.... साथ hi प्रिंस का खड़ा लुंड उसकी छूट पे ठोकर मारने लगता है.... प्रिंस के नंगे जिस्म ख़ास करके उसके सीने और नीचे खड़े लुंड को महसूस कर के रूही का जिस्म मस्ती में सिहर उठता है.... उसे अपने और प्रिंस के नंगे होने का एहसास होता है... साथ hi उसे रात की दुमदार चुदाई याद आ जाती है.... जिसे सोच वो शर्म से पानी पानी हो जाती है.... वो शर्मा के अपना चेहरा प्रिंस के सीने में छुपाने की कोशिश करती है मगर कर नहीं पाती.... वो ऐसा करती उस से पहले hi प्रिंस नींद में आगे बढ़ के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगता है.... रूही भी किश में उसका साथ देने लगती है.... प्रिंस प्यार से उसके होंठों को चूसने लगता है... कुछ देर रूही कुछ ज़्यादा hi जोश में आ जाती है और वाइल्ड तरीके से उसके होंठों को चूसने लगती है.... उसकी छूट से तेज़ी से कामर्स बह के प्रिंस के खड़े लुंड को भिगोने लगता है.... रूही की इस वाइल्ड किश से प्रिंस की आँख खुल जाती है.... पहले तो वो बुरी तरह से चौंक जाता है फिर जब उसकी नज़र रूही पे पड़ती है तब वो ख़ुशी से उछाल पड़ता है और किश में उसका साथ देने लगता है.....
कुछ hi देर में रूही का जिस्म अकड़ जाता है और मस्ती में वो झड़ने लगती है.... उसे इतना मज़ा आता है की मस्ती में वो कब प्रिंस के होंठों को अपने दाँतों से कास के काट लेती है उसे समझ नहीं आता.... प्रिंस के होंठों से खून निकल के रूही के मुँह में जाने लगता है.... झड़ने के बाद जब रूही कुछ शांत होती है तब उसे अपने मुँह में कुछ अलग सा टास्ते महसूस होता है.... वो थोड़ा पीछे हैट के जब प्रिंस के चेहरे की तरफ देखती है तब प्रिंस के होंठों से निकल रहे खून को देख उसे ते समझते देर नहीं लगती की ये उसी की वजह से हुआ है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं... वो फ़ौरन आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों से बहते खून को चूसने लगती है साथ hi रोने भी लग जाती है.... प्रिंस प्यार से उसके सर पे हाथ फेर के उसे चुप करता है और उसे अपने सीने से लगा लेता है....
रूही रट हुए प्रिंस से माफ़ी मांगने लगती है....
रूही : सॉरी प्रिंस.... मुझे माफ़ कर दो... मैंने ये जान के नहीं किया.... जाने कब ये हो गया....
प्रिंस : कोई नहीं मेरी जान हो जाता है मस्ती में कभी कभी.... वैसे काफी वाइल्ड किश करती है मेरी रूह....
प्रिंस के मुँह से वाइल्ड किश सुन के रूही शर्मा जाती है... मगर फिर जब रूह सुनती है तब ख़ुशी से उसका दिल झूमने लगता है.... वो कास के प्रिंस को अपने सीने से लगा लेती है....
प्रिंस : आज के बाद इन आँखों में कभी आंसू नहीं आने देना.... मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकता हूँ मगर अपनी रूह की आँखों में आंसू नहीं देख सकता.... वादा करो मुझसे चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए तुम्हारी आँखों में ाँसे नहीं आएंगे....
रूही : मैं वादा करती हूँ जान... मगर तुमसे भी एक वादा चाहती हूँ की चाहे कुछ भी क्यों नान हो जाए तुम मुझे इसी तरह चाहते रहोगे... कभी चोर के नहीं जाओगे....
प्रिंस : मैं चहुँ तब भी तुम्हे चोर नहीं सकता.... मैं जिस्म हूँ और तुम मेरी रूह.... रूह के बिना जिस्म ज़िंदा नहीं रह सकता.... और एक बात हमेशा याद रखना.... तुम एक शेर की शेरनी हो.... शेरनी न hi किसी से डर्टी है और न hi कभी रोटी है.... वो तो बस डरना जानती है.... या फिर शिकार करना.... मुझे वो hi शेरदिल रूही चाहिए जो किसी से नहीं डर्टी थी... सब को डरा के रखती थी... वो दबंग शेरनी रूही जिसे पहली नज़र में देखते hi मुझे उस से प्यार हो गया था....
रूही : वो तो मैंने तुम्हारी वजह से खुद को रोके रखा था.... वर्ण डर्टी तो मैं अपने बाप से भी नहीं.... बस एक तुम hi हो जिसे देखते hi इस शेरनी का गुस्सा हवा हो जाता है और उसकी जगह प्यार ले लेता है.... तुम्हे और तुम्हारे सेक्सी जिस्म को देखते hi तुमपे प्यार आने लगता है....
प्रिंस : हाँ देखा था तुम्हारा प्यार अभी कुछ देर पहले.... कैसे मेरे होंठों को काट के मेरा खून चूस रही थी....
रूही : है जान जी तो चाहता है की तुम्हे कच्चा hi खा जाऊं.... है कितने हॉट सेक्सी और डैशिंग हो तुम.... और आज सुबह से कुछ ज़्यादा hi सेक्सी लग रहे हो....
प्रिंस : अब तो तुम से बच के रहना होगा... वैसे भी शेरनी के मुँह को खून लग गया है... जाने कब खा जाए.... और वैसे भी मैं भरी जवानी में नहीं मरना चाहता....
रूही : मुझसे से बच के कहीं नहीं जा पाओगे.... जहाँ जाओगे मुझे अपने पास hi पाओगे.... भूल गए रूह को भला कोई जिस्म से अलग कर पाया है क्या....
प्रिंस : मैं भी अपनी रूह से अलग नहीं रह सकता.... मगर रूह तुम्हारे आलावा मेरी किस्मत में और भी कई लफ्कियों का प्यार लिखा है....
रूही : मुझे पता है.... मैं बस इतना चाहती हूँ की मुझे मेरे हिस्से का प्यार मिलता रहे... बस और कुछ नहीं चाहिए... जब तक मुझे मेरे हिस्से का प्यार मिलता रहेगा ये शेरनी शांत रहेगी... जिस दिन मेरे हिस्से का प्यार तुमने किसी और को दिया उस दिन उसके साथ साथ तुम्हे भी जान से मार दूंगी और साथ खुद की जान भी ले लुंगी.... वैसे आज तक ऐसी कोई पैदा नहीं हुई जो मेरे शेरनी से उसके शेर को चीन सके.....
प्रिंस : ये कही न तुमने मेरे दिल जीतने वाली बात.... मुझे मेरी शेरनी ऐसी hi चाहिए एक दम दबंग स्टाइल वाली... यार आज तू ने मेरा दिल जीत लिया.... इस बात पे हो जाए एक और बार वो क्या है की रात में जल्दबाज़ी में ठीक से मज़ा नहीं आया आज दिन के उजाले में जैम के सुहागरात.... ी मैं सुहागदिन मानते हैं....
प्रिंस की बात सुन के रूही शर्मा जाती है....
रूही : धत तुम भी न जान... कुछ भी कहते हो.... रात भर मेरी बजा के तुम्हे चैन नहीं आया.... के दिन में भी मेरी हालत खराब करना चाहते हो... जानते हो अभी तक मुझे दर्द हो रहा है.... ( फिर अपनी सूझी छूट दिखा के कहती है... देखि क्या हाल कर दिया है तुमने और तुम्हारे एनाकोंडा ने मेरा और मेरी छूट का....
प्रिंस : वाओ यार कसम से क्या सेक्सी जिस्म है मेरी रूह का और सब से ख़ास तो उसकी छूट है और उस से भी ख़ास है उसकी छूट के पे वो काला टिल... है उसे देख के तो मुर्दे का लुंड भी खड़ा हो जाए.... मेरा तो पहले से hi खड़ा है....
प्रिंस की बात सुन के रूही को अपने नंगेपन का एहसास होता है साथ hi ये भी की जोश जोश में वो क्या बोल गयी.... शर्म के मारे वो धत कह के फ़ौरन बाथरूम में भाज जाती है.... उसे यूँ शरमाते देख प्रिंस हसने लगता है...
फिर कुछ देर बाद वो फ्रेश हो के बहार निकलती और प्रिंस को फ्रेश होने बाथरूम में भेज देती है....
फ्रेश हो के दोनों साथ में नीचे आते हैं.... प्रिंस को वहां देख सब को हैरत सी होती है साथ hi ख़ुशी भी...
रूही की माँ : अरे बीटा तुम कब आये....?
प्रिंस : माँ रात को आया था... आप सब सो रहे थे तो आपको डिस्टर्ब नहीं किया... आप सब की बड़ी याद आ रही थी ख़ास कर के मेरी रूही की तो उसे लेने चला आया.... अब से वो मेरे साथ रहेगी...
प्रिंस की बात सुन के रूही का दिल ख़ुशी से झूमने लगता है....
र माँ : मगर बीटा वो....
प्रिंस : माँ जो बीत गया उसे प्लीज आप सब एक बुरा सपना समझ के भूल जाइये.... और अब से कोई न hi उस सब को याद करेगा और न hi उसके बारे में कोई बात करेगा.... मैं अपनी जान रूही के साथ एक नयी शुरुवात करना चाहता हूँ जिसकी शुरुवात कल रात हो चुकी है.... अब हम को कोई अलग नहीं कर सकता... कोई नहीं मतलब कोई नहीं....
र माँ : ठीक है बीटा जैसा तुम कहो.... अपने बच्चों की ख़ुशी में hi मेरी ख़ुशी है....
फिर सब मिल के रूही और प्रिंस को इस नयी शुरुवात की मुबारकबाद देते हैं....
सिमी तो रात की बात सुन के रूही के पीछे पद जाती है.... बड़ी मुश्किल से रूही उसे बाद में बताने का कहके उस से पीछा छुड़ा लेती है....
सब के साथ नाश्ता करने के बाद....
प्रिंस : रूही तुम आराम करो मैं ज़रा ऑफिस जा के आता हूँ.... वहां का काम भी देख लूंगा साथ hi अपने दोस्तों से भी मिल लूंगा....
रूही : जान मैं भी तुम्हारे साथ ऑफिस चलती हूँ....
तभी सिमी जो कहती है उसे सुन के रूही गुस्से से मुँह बना के उसे देखती है.... जैसे उसे खा hi जायेगी....
सिमी : ........?????
(वर्ड्स : 3309)