Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 9 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 76

मैक्स : इस क्यों का जवाब नहीं है मेरे पास.... इस का जवाब तो सिर्फ तेरी नानी hi दे सकती है....

प्रिंस : वो तो कुछ भी बताने से रही... अब एक तू hi है जो मुझे सब बता सकता है.... और सब से बड़ी बात ये की तुझे ये सब कैसे पता चला..... क्या तुझे नानी ने ये बताया है....? बता मुझे जवाब दे....

मैक्स : नहीं नानी ने मुझे कुछ नहीं बताया..... ये सब तो मुझे गलती से पता चल गया था.....

प्रिंस : तुझे जो भी पता है वो सच सच बता दे.... वो भी जल्दी... इस से पहले की मुझे गुस्सा आ जाए....

प्रिंस की बात सुन के मैक्स अपना सर पीट लेता है.....

मैक्स : यार ये मैं कहाँ फस गया.... आगे कुँवा है तो पीछे खायी.... मैं न आगे जा सकता हूँ और न hi पीछे.... बस बेच में फस के रह गया हूँ.....

प्रिंस : तू सच बताता है की नहीं....

मैक्स : ठीक है तू जान न hi चाहता है तो सुन.....

अब आगे.....

मैक्स की बात सुन ने के लिए जहाँ सब उसे घेर के बैठ जाते हैं.... वहीँ ज़रा प्रिंस से चिपक के बैठ जाती है और उसके चेहरे को प्यार से देखने लगती है....

प्रिंस : यार क्या कर रही है....? यहाँ इतनी इम्पोर्टेन्ट बात चल रही है और तू है की....

ज़रा : क्या करूँ यार तुझे देख के दिल तेरा दीवाना हुआ जाता है.... दिल करता है तुझ में समां जाऊं..... जी भर के तुझे प्यार करूँ.....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है.....

प्रिंस : यार हद है.... तुझे प्यार के सिवाए और कुछ नहीं सूझता क्या....? जब देखो तब हाथ धो के पीछे पद जाती है....

ज़रा : इसमें मेरी कोई गलती नहीं है..... तू है hi इतना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम की तुझे देखते hi तुझे जी भर के प्यार करने को दिल करता है.... और वैसे भी कल रात के बाद से तू कुछ ज़्यादा hi हैंडसम और डैशिंग हो गया है.... मेरा दिल कर रहा है की मैं न तुझे....

प्रिंस : यार अब बस भी कर.... जो करना हो बाद में कर लेना मैं तुझे मन नहीं करूँगा....

प्रिंस की बात सुन के ज़रा ख़ुशी से उछाल पड़ती है....

ज़रा : सच्ची.... मैं जो चाहे वो कर सकती हूँ....

प्रिंस : हाँ.... जो चाहे कर लेना.... मगर अभी चुप हो जा ताकि मैं मैक्स की बात सुन सकूँ....

ज़रा : नहीं ऐसे नहीं पहले वादा कर की बाद में मैं जो चाहे करूँ तू मुझे न hi रोकेगा और न hi कुछ कहेगा.... जो मेरा दिल चाहेगा मैं वो करुँगी.....

ज़रा की बात सुन के सैर और बाकी सब उसकी चालाकी समझ के प्रिंस को वादा करने से रोकने वाले होते हैं... मगर इस से पहले की कोई कुछ कहता प्रिंस वादा कर देता है..... उसके हाँ कहते hi जहाँ ज़रा ख़ुशी से नाचने लगती है वहीँ बाकी सब अपना सर पीट लेते हैं...

सैर : प्रिंस ये तू ने क्या किया....? ज़रा के बारे में सब कुछ पता होने के बाद भी तू ने वादा कर दिया.....

प्रिंस : मुझे पता है मैंने क्या किया है.... अब यार प्लीज कुछ पल के लिए सब खामोश रहोगे ताकि मैं मैक्स से सच जान सकूँ..... हाँ तो मैक्स....

ये कह के प्रिंस मैक्स की तरफ देखता है मगर वो वहां है hi नहीं.... प्रिंस को सब के साथ बातों में लगे देख मैक्स वहां से खिसक लेता है.... मैक्स को वहां न पा के प्रिंस के चेहरे पे गुस्सा आने लगता है.....

प्रिंस गुस्से में : इस से पहले की मेरा गुस्सा और तेज़ हो जाए.... जल्द से जल्द उस कमीने मैक्स को पकड़ के यहाँ ले आओ....

प्रिंस को गुस्से में देख सब फ़ौरन मैक्स को ढूंढने निकल जाते हैं..... ज़रा फ़ौरन सिक्योरिटी गॉर्डस को अलर्ट कर देती है और ये कहती है की 2 मिनट के अंडर मैक्स को पकड़ के प्रिंस के पास लाया जाए.... इधर मैक्स जल्द से जल्द छुपते हुए अंडरग्राउंड गटर के ज़रिये हॉस्पिटल से बहार निकल आता है....

मैक्स : बाल बाल बच गया.... वर्ण सच जान ने के बाद न जाने प्रिंस क्या करता.... प्रिंस तो फिर भी ठीक है... जब उन्हें ये पता चलता की उनके मन करने पे भी मैंने प्रिंस को सब सच सच बता दिया है.... तब तो जाने क्या होता.... मैं तो बिना शादी किये hi स्वर्ग सिधार चूका होता.... अच्छा हुआ की मैंने प्रिंस को कुछ नहीं बताया और वक़्त रहते वहां से निकल लिया....

मैक्स अभी खुद से बातें कर hi रहा था की तभी पीछे से कोई उसपे वार करता है और उसके दोनों हाथों को पकड़ के उसे पीछे से बांध देता है.... मैक्स पलट के उस शख्स की तरफ देखता है....

ये और कोई नहीं ज़रा है जो अपनी टीम के साथ वहां पहुँच के मैक्स को रस्सी से बांध देती है ताकि वो वहां से भाग न जाए....

ज़रा : ोये किधर चला हाँ....

मैक्स हैरत से : तुम्हे कैसे पता चला की मैं यहाँ हूँ.....?

ज़रा मुस्कुराते हुए : तुझे क्या लगा तू यहाँ से बिना किसी को कुछ बताये निकल लेगा और प्रिंस देखता रह जाएगा.... तू होगा बहुत बड़ा जासूस... मगर प्रिंस तुझ से भी बड़ा जासूस है.... उसकी ताक़त के साथ साथ उसके दिमाग का भी कोई मुक़ाबला नहीं है.... उसी ने मुझे ये बताया की तू कहाँ मिल सकता है.... और देख उसने जो कहा वो ठीक निकला और अब तू हमारी पकड़ में आ गया.... अब ये नौटंकी चोर और चल के प्रिंस को वो बता जो वो जान न चाहता है.... क्या तू नहीं जानता की उसका गुस्सा कितना भयानक है.... इस से पहले की वो तेरी बंद बजा दे जल्दी से उसके पास चल के उसे सब कुछ सच सच बता दे....

मैक्स : यार मेरी बंद तो हर हाल में बजनी है.... अब चाहे ये बंद प्रिंस बजाये या फिर वो.... प्रिंस तो शायद एक दोस्त होने के नाते फिर भी मुझपे थोड़ा रेहम कर जाए... मगर उनसे तो रेहम की उम्मीद करना भी बेकार है....

ज़रा : ये तू बार बार किसकी बात कर रहा है.....? ज़रा खुल के बताएगा....

मैक्स : अब जो भी बताना है वो मैं प्रिंस को hi बताऊंगा.....

ज़रा : ये तो अच्छी बात है.... चल जल्दी से.... तेरी कहानी ख़तम होने के बाद मुझे अपनी कहानी शुरू करनी है.....

मैक्स : अब तेरी कौन सी कहानी है.....?

ज़रा शरमाते हुए : मेरी और प्रिंस की लव स्टोरी.... मतलब मुझे अपनी जान को जी भर के प्यार करना है.... और वैसे भी अब प्रिंस ने भी वादा किया है...

मैक्स : Kyaaaaaaaaaaaaaa....? प्रिंस ने वादा किया....? कैसा वादा.....?

ज़रा : यार तू न.... सब कुछ अभी जान लेगा बाद के लिए भी तो कुछ चोर दे.... इस से पहले की प्रिंस का गुस्सा और भी ज़्यादा तेज़ हो जाए.... जल्दी से उसके पास चल...

मैक्स के आते hi....

प्रिंस : साले अब और कोई नौटंकी नहीं.... इस से पहले की मेरा दिमाग घूम जाए.... जल्द से जल्द मुझे सब सच सच बता दे.....

मैक्स मरता क्या न करता मजबूरन वो प्रिंस को सब सच बताने को तैयार हो जाता है....

मैक्स : हे उपरवाले बचा लेना... अब बस एक तेरा hi सहारा है....

प्रिंस गुस्से में : अबे साले बताता है की नहीं.....

मैक्स डरते हुए : बता रहा हो यार थोड़ा डैम तो लेने दे....

प्रिंस : चल अब जल्दी बता की क्या बात है....?

मैक्स : ये बात हमारे इंडिया आने से 1 दिन पहले की है.... शायद तुझे याद हो.... तू ने मुझे किसी की जन्मकुंडली निकालने को कहा था..... तू जल्द से जल्द उसके बारे में जान न चाहता था..... उसका पता लगा के मैं उसकी पूरी हिस्ट्री के साथ तुझसे मिलने तेरे घर गया.... तू उस वक़्त घर पे नहीं था....

प्रिंस : हाँ याद है.... उस दिन मैं घर पे नहीं था और जब वापिस आया तब मैंने तुझे बुरी तरह से घबराये हुए घर से बहार की तरफ भागते देखा था.... तुझे उस हाल में देख के मुझे बड़ी हैरानी हुई..... मैंने तुझे आवाज़ दे के रोकने की बहुत कोशिश की मगर तू नहीं रुका.... मुझे ये बात बड़ी अजीब लगी.... क्यों की ऐसा पहली बार हुआ था की तू ने मेरी बात को अनसुना किया हो.... वजह जान ने के लिए मैं तेरे पीछे जाना चाहता था मगर नहीं जा सका.... उस वक़्त मेरे लिए सब से ज़्यादा ज़रूरी जो काम था वो था नानी को मन के इंडिया आना..... ताकि यहाँ मैं खुद की पहचान बना सकूँ.... फिर जब नानी ने मुझे मेरे सपने को पूरा करने की इजाज़त दे दी तब मैं इतना खुश हुआ की तेरी बात को भूल hi गया....

मैक्स : हाँ मुझे पता है.....

प्रिंस : हाँ तो अब बता.... आखिर वो क्या वजह थी की तू उस दिन मेरे घर से निकलते वक़्त इतना डरा हुआ था.... तू ऐसे भाग रहा था जैसे की कोई तेरी जान लेने के लिए तेरे पीछे पड़ा हुआ हो.....

मैक्स : बात hi कुछ ऐसी थी.... अगर उस वक़्त मैं वहां से भगा न होता तो शायद मैं आज ज़िंदा न होता.... उसी पल मेरी मौत हो जाती....

सैम : मौत....!!!! मगर तुझे कोई क्यों मारना चाहता था....?

सैर : कहीं वो इंसान तो नहीं जिसके बारे में प्रिंस ने तुझे पता करने को कहा था....

मैक्स : जी नहीं ये वो नहीं थी और न hi वो कोई इंसान थी.... बल्कि वो इंसान न होक कुछ और hi थी.....

सैर : थी से क्या मतलब वो कोई लड़की थी.... और तू एक लड़की से दर रहा है..... और कुछ और थी से तेरा क्या मतलब है.... बता जल्दी....

इस से पहले की मैक्स कुछ कहता....

प्रिंस : अबे तुम सब चुप रहोगे तब न वो कुछ बताएगा....

प्रिंस की बात सुन के न चाहते हुए भी सब खामोश हो जाते हैं..... वहां मौजूद कोई भी प्रिंस के गुस्से का सामना नहीं करना चाहता....

प्रिंस गुस्से में सब की तरफ देखते हुए : मैक्स तू बोल.... अब तुझे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.....

मैक्स : हाँ तो सुनो वो इंसान न होक कुछ और hi थी.... वो क्या थी मैं नहीं जानता... मगर इतना उसको देख के इतना ज़रूर कह सकता होइन की हमारी तरह वो इंसान नहीं थी.... उसे इंसान न कहने की सबसे बड़ी वजह ये थी की उसके पाँव ज़मीन से टच नहीं थे... वो हवा में कड़ी थी... वो अकेली नहीं थी बल्कि उसके साथ एक और भी औरत थी.... वो भी उस लड़की की तरह उस वक़्त हवा में कड़ी थी....

मैक्स की बात सुन के सब को बड़ी हैरानी होती है.... सब के मन में इस वक़्त बहुत से सवाल उमड़ रहे हैं... वो इस का जवाब मैक्स से पूछना चाहते हैं... मगर प्रिंस के दर से सब खामोश हैं.... मैक्स आगे बोलता है....

मैक्स : जब मैं उस शख्स की जन्मकुंडली ले के प्रिंस के घर गया तो मुझे वो अपने कमरे में नहीं मिला.... मैंने उसका फ़ोन तरय किया मगर वो भी स्विच ऑफ आ रहा था.... घर के नौकरों को भी नहीं पता की प्रिंस कहाँ गया है.... मैंने सोचा क्यों न प्रिंस की नानी से चल के पुछा जाए.... ये सोच के मैं नानी के रूम की तरफ चल दिया.... नानी के रूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था... मैंने जैसे hi दरवाज़े को नॉक करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया hi था की तभी कुछ ऐसी बात मुझे सुनाई दी जिसे सुनके मेरे हाथ हवा में hi रुक गए.... वो बात सुन के मैं बुरी तरह से चौंक गया.... मैंने हलके से दरवाज़े की साइड से अंडर झाँक के जो देखा उसे देखते hi एक पल के लिए तो मेरे होश hi उड़द गए... अंडर का नज़र था hi ऐसा हैरतअंगेज़ की दर के मारे मेरी हालत खराब हो गयी.... अंडर नानी के साथ एक औरत और एक लड़की बातें कर रही थी.... नानी के पेअर तो ज़मीन को छू रहे थे मगर उन दोनों के पेअर ज़मीन से कुछ ऊपर थे.... मतलब उस वक़्त वो दोनों हवा में कड़ी थी.... एक पल के लिए तो मैंने सोचा की वहां से भाग जाऊं मगर दूसरे hi पल मैं वहां रुकने को मजबूर हो गया.... बात hi कुछ ऐसी थी.... जो प्रिंस से जुडी हुई थी... जिसे प्रिंस भी नहीं जानता था.... वो था एक राज़ बहुत बड़ा राज़.... जो मुझे उन तीनो की बातें सुन के hi पता चल सकता था.... मैंने अपने दर को दबा के चुप के उनकी बातें सुन के फैसला किया.... वो राज़ जो मेरे सब से अच्छे और जिगरी दोस्त से जो जुड़ा था.... उस राज़ को जाने बगैर मैं वहां से हटना नहीं चाहता था.... मैं डरते डरते वहीँ खड़े खड़े उनकी बातें सुन ने लगा.... वो सब किसी पारी का नाम ले रहे थे साथ hi बंगारू बाबा और वो क्या था.... G....G.... हाँ गुलिस्तां की बात कर रहे थे.... वो सब तो मुझे समझ में नहीं आया मगर हाँ जब उन्होंने प्रिंस के दूर जा के अपने पैरों पे खड़े होने की बात की तो मेरे कान खड़े हो गए.... मैं गौर से उनकी बातें सुन ने लगा.....

नानी : जानती है वो यहाँ से दूर जाना चाहता है... ताकि वो अपने दम पे अपना नाम बना सके....

औरत : बेगम साहिबा....

लड़की : शलाका.....

औरत : हाँ तो जाने दीजिये न.... इसमें गलत क्या है.... और यहाँ से दूर रह के वो सेफ भी तो रहेगा....

नानी : तेरी बात कुछ हद तक ठीक भी है मगर फिर भी मेरा दिल उसे खुद से दूर करने को नहीं कर रहा है.... मुझे दर है की यहाँ से जाने के बाद वो कहीं उन लोगों के पास न चला जाए... जिन से बड़ी मुश्किल से मैंने उसे बचा के इतनी दूर अपने पास रखा था.... उन लोगों ने में मासूम प्रिंस के साथ जो किया था उसका बदला मैं उसी वक़्त उन सब को मार के ले सकती थी.... मगर प्रिंस ने मुझे अपनी कसम दे के रोक दिया था.... वो उन सब से बेहद प्यार करता था.... वो नहीं चाहता था की उनके एक खरोच भी आये.... वो अपने जिस्म पे लाख ज़ख्म बर्दाश्त कर सकता है मगर उनकी ज़रा सी भी तकलीफ उसे तड़पा देती थी.... प्रिंस की कसम के आगे मजबूर होक मैंने उन हैवानो को ज़िंदा चोर दिया था... वर्ण जो सलूक उन कमीनो ने मेरे प्रिंस के साथ किया था वो कोई की ज़ालिम शैतान के साथ भी न करे....

शलाका : मगर वो तो उसका अपना परिवार था न.... उसके अपने माँ बाप.... उसकी बहने.... उसके चाचा चची... मां ममी... बुआ और उनके बच्चे... फिर उन्होंने उसके साथ ऐसा हैवानो जैसा सलूक क्यों किया....?

नानी : मुझे नहीं पता... मैंने प्रिंस से इस बारे में जान ने की बहुत कोशिश की मगर उसने कुछ नहीं बताया हर बार वो बस इतना कहके चुप हो जाता था की....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 77

नानी : प्रिंस की कसम के आगे मजबूर होक मैंने उन हैवानो को ज़िंदा चोर दिया था... वर्ण जो सलूक उन कमीनो ने मेरे प्रिंस के साथ किया था वो कोई की ज़ालिम शैतान के साथ भी न करे....

शलाका : मगर वो तो उसका अपना परिवार था न.... उसके अपने माँ बाप.... उसकी बहने.... उसके चाचा चची... मां ममी... बुआ और उनके बच्चे... फिर उन्होंने उसके साथ ऐसा हैवानो जैसा सलूक क्यों किया....?

नानी : मुझे नहीं पता... मैंने प्रिंस से इस बारे में जान ने की बहुत कोशिश की मगर उसने कुछ नहीं बताया हर बार वो बस इतना कहके चुप हो जाता था की....?????

अब आगे....

नानी : मुझे नहीं पता... मैंने प्रिंस से इस बारे में जान ने की बहुत कोशिश की मगर उसने मुझे कुछ नहीं बताया हर बार वो बस इतना कहके चुप हो जाता था की.... मैंने कुछ नहीं किया नानी.... उस में मेरी कोई गलती नहीं थी.... फिर भी मेरी सोना मुझसे नाराज़ हो गयी.... वो मेरी बात नहीं मान रही नानी.... मैंने कुछ नहीं किया.... प्लीज आप उस से कहिये न की मेरी बात मान ले.... और मुझसे नाराज़ न हो.... उसकी नाराज़गी मुझसे सही नहीं जा रही है नानी.... प्लीज मेरी सोना को मन लो नानी.... ये कहते कहते वो बेहोश हो गया.... उसकी हालत उस वक़्त बेहद बुरी थी.... उसके सर से और जिस्म के कई हिस्से से खून निकल रहा था.... हर गुज़रते पल के साथ उसकी हालत खराब होती जा रही थी.... 8 साल का मासूम प्रिंस खून में लतपथ मौत के दरवाज़े पे खड़ा था.... अपनी पावर्स के ज़रिये मैं उसे ठीक करने की कोशिश की मगर मेरी किसी भी पावर्स का असर प्रिंस के जिस्म पे नहीं हो रहा था.... ( बंगारू बाबा की वजह से गुलिस्तां का किसी भी शख्स के किसी भी पावर्स का प्रिंस के जिस्म पे कोई असर नहीं होगा.... यहाँ तक की उनके अपने पावर्स भी प्रिंस पे काम नहीं करेंगे.... ये तभी काम करेंगे जब उन पावर्स के साथ प्रिंस के अपने पावर्स भी शामिल हो जो की पारी के जिस्म में है.... ये बात बंगारू बाबा के अलावा और कोई नहीं जानता.... इस लिए प्रिंस के जिस्म में नील ज़हर के असर को काम करने के लिए बंगारू बाबा ने सीधे अपनी पावर्स प्रिंस के जिस्म में नहीं डाली बल्कि पारी के जिस्म में अपनी पावर्स डाली.... पारी के जिस्म में प्रिंस की जो पावर्स है उसके साथ मिल के बंगारू बाबा की पावर्स प्रिंस के जिस्म में गयी और उसने नील ज़हर के असर को काम किया.... ) जब मैंने देखा की मैं अपनी पावर्स से प्रिंस को ठीक नहीं कर पा रही हूँ तब.... और वक़्त न बर्बाद करके मैं फ़ौरन उसे वहां से लेके हॉस्पिटल आ गयी.... उसका इलाज करने के बाद डॉ ने जो कहा उसे सुन के मेरे होश hi उड़ गए....

औरत : ऐसा क्या कहा डॉ ने....?

नानी : उसकी जान तो बच गयी है मगर सर पे गहरी चोट लगने की वजह से वो गहरी नीड सो गया था.... यानी कोमा में चला गया था.... उसे कब होश आएगा कहा नहीं जा सकता.... ये सुनते hi मेरे पैरों टेल से ज़मीन निकल गयी.... मुझे ऐसा लगा की मेरी दुनिया hi उजाड़ गयी..... एक मेरा प्रिंस hi तो था मेरे जीने की वजह मगर अब वो भी मुझे चोर के नींद की अँधेरी गलियों में खो गया था..... रो रो के मेरा बुरा हाल हो गया था.... मुझे ऐसा लग रहा था की मैं अब और ज़िंदा नहीं रह पाउंगी..... अपने नाती की ऐसी हालत देख के मेरा दिल रो रहा था.... आखिर क्या बिगाड़ा था उस मासूम ने किसी का जो उसके साथ ऐसा बत्तर सलूक हुआ.....? वो तो उन्हें दिल ो जान से चाहता था.... फिर क्यों उन लोगों ने उसके साथ ऐसा किया....? क्या किसी को दिल से चाहने का यही सिला मिलता है.....? ये और इस जैसे कई सवाल उस वक़्त मेरे दिल में आ रहे थे.... जिन का जवाब अब वो लोग hi दे सकते थे जिन्होंने मेरे प्रिंस के साथ ऐसा किया था..... गुस्से से मेरा दिमाग फटने लगा.... गुस्से में मैं उन्हें मारने के लिए वहां से निकल hi रही थी की तभी मुझे प्रिंस की कसम याद आ गयी और मेरे पेअर वहीँ जैम गए.... नानी वो मेरे अपने हैं... जहाँ अपने प्यार करते हैं वहीँ लड़ते भी हैं.... अपनों को एक दूसरे से प्यार करने का लड़ने का हक़ होता है.... जहाँ प्यार होता है वहां नाराज़गी भी होती है.... अगर गुस्से में वो मेरे साथ कुछ करते हैं तो इसका मतलब ये नहीं की मैं भी उनके साथ वैसा hi करूँ.... नहीं नानी ये मैं नहीं कर सकता.... जिन्हे मैं अपना मानता हूँ जिन्हे मैं प्यार करता हूँ.... उनके साथ कभी न तो खुद कुछ गलत कर सकता हूँ और न hi किसी और को उनके साथ कुछ गलत करने दे सकता हूँ.... मेरे अपनों तक पहुँचने से पहले मौत को भी मुझसे हो के गुज़ारना होगा.... रही बात आपकी तो आप को मेरी कसम है आप उन्हें कुछ नहीं करेंगी..... चाहे जो हो जाए... मेरी जान hi क्यों न चली जाए मगर अपने एक खरोच भी आये ये मुझे नाकाबिले बर्दाश्त होगा.... मैं पलट के प्रिंस के पास गयी और उस से लिपट के रो ने लगी.... क्यों दी तू ने मुझे ऐसी कसम जिसे मैं छह के भी नहीं तोड़ सकती.... मगर हाँ मैं इतना ज़रूर कर सकती हूँ की तुझे उन कमीनो से इतना दूर ले जाउंगी की वो छह के भी तुझ तक नहीं पहुँच पाएंगे..... रात भर मैं प्रिंस के पास बैठी रो टी रही फिर अगली सुबह चुप चाप प्रिंस को वहां से लेके यहाँ आ गयी.... मैं रो टी रहती और साथ hi ऊपर वाले से प्रिंस के लिए दुआ मांगती रहती.... एक साल के लम्बे इंतज़ार के बाद एक दिन ऊपर वाले को हम पे रेहम आ गया और प्रिंस गहरी नींद के से जाएगा.... प्रिंस को ठीक देख के मेरी ख़ुशी का ठिकाना hi नहीं था.... मगर वो ख़ुशी कुछ hi देर में गम में बदल गयी जब प्रिंस ने मुझे देखने के बाद वो सवाल किया....

प्रिंस : आप कौन हैं....?

नानी : ये तू क्या कह रहा है....? अपनी नानी को नहीं पहचानता....?

प्रिंस : .........

प्रिंस बिना कुछ कहे एक तक बस मुझे hi देख रहा था जैसे की पहचान ने की कोशिश कर रहा हो.... फिर उसने जो कहा उसे सुन के मुझे एक बहुत बड़ा झटका लगा.....

प्रिंस : मैं कौन हूँ....? मैं कहाँ हूँ....? क्या नाम है मेरा....?

प्रिंस की बात सुन के मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो ऐसा क्यों कह रहा है.... मुझे लगा की 1 साल तक कोमा में रहने की वजह से उसे कुछ याद नहीं.... कुछ देर बाद उसे सब याद आ जाएगा.... मगर ऐसा नहीं हुआ.... मिनट घंटे में बदले और घंटे दिनों में.... मगर प्रिंस है की 3 दिन बीत जाने पे भी उसे कुछ याद नहीं आ रहा था.... ये बात मुझे परेशान करने लगी... मैं उसे साथ ले के हॉस्पिटल गयी वहां उसके काफी टेस्ट हुए.... फिर जो डॉ ने मुझे बताया उसे सुन के मेरे पैरों टेल से ज़मीन निकल गयी.... मेरा दिल तड़प उठा.... मेरी आँखों से आंसू बहने लगे....

डॉ : ये अपनी यादाश्त खो चूका है... इसे पिछले कुछ भी याद नहीं....

प्रिंस को साथ लेके मैं घर आ गयी.... पहले तो मुझे लगा की ऊपर वाले ने मेरे प्रिंस के साथ बहुत बड़ा ज़ुल्म किया है.... मगर जब मेरी नज़र प्रिंस पे पड़ी तो उसके मुस्कुराते चेहरे को देख के मुझे ये समझ में आया की नहीं ऊपर वाला जो भी करता है वो अच्छे के लिए hi करता है.... अच्छा हुआ की प्रिंस अपनी पिछली ज़िन्दगी भूल गया काम से काम अब वो चैन से खुश हाल ज़िन्दगी जी तो पायेगा.... वर्ण पीछा सब याद करके न वो जी पाटा और न hi मर पाटा..... इसे ऊपर वाले की मर्ज़ी मान के मैं प्रिंस को उसकी पिछली ज़िन्दगी के सच के बारे में कुछ न बता के उसे उसकी आगे की ज़िन्दगी जीने में उसका साथ देने लगी.....

मैंने प्रिंस का एडमिशन यहाँ का सब से बड़े स्कूल में करवा दिया.... वहां उसे एक लड़की मिली ज़रा.... वो हमेशा प्रिंस के hi साथ चिपकी रहती.... कई बार तो ऐसा हुआ की वो स्कूल से वापसी के वक़्त अपने घर जाने के बजाये यहाँ आ जाती.... पहले तो उसने ऐसा कुछ hi दफा किया.... मगर फिर तो ये उसकी रोज़ की आदत सी बन गयी थी.... स्कूल के बाद वो अक्सर प्रिंस के साथ यहाँ आ जाय करती.... प्रिंस के लाख मन करने पे भी वो उसकी बात नहीं मानती.... न hi वापिस अपने घर जाती.... जब भी प्रिंस उसे वहां से जाने के लिए कहता वो मुस्कुरा के उसे एक hi जवाब देती.... अब तो ये ज़िन्दगी तेरे नाम हो चुकी है... तू क्या मैं खुद भी चहुँ तब भी तुझ से अलग नहीं हो सकती.... मैं तेरा साया हूँ जो हमेशा तेरे साथ hi रहेगी.... एक बार रूह को जिस्म से जुड़ा किया जा सकता है मगर साये को नहीं.... मरने के बाद भी साया साथ नहीं चोरता.... और अगर मुझे चोर के तू ने किसी और के पास जाने का सोचा भी तो देख लेना तेरी टाँगे तोड़ के हमेशा के लिए तुझे अपने पास रख लुंगी.... ज़रा की बात सुन के जहाँ प्रिंस अपना सर पीट लेता है वहीँ मुझे इस बात का यकीन हो गया की वो प्रिंस की सच्ची दोस्त है वो उसे न कभी चोर के जा सकती है और न hi उसे कभी कुछ होने दे सकती है.... उस के साथ प्रिंस हमेशा hi खुश रहेगा.... इस बात की मुझे बेहद ख़ुशी थी.... मगर एक बात का दर भी था की अगर कहीं प्रिंस को अपनी पिछली ज़िन्दगी याद आ गयी तब क्या होगा....? अगर गलती से भी वो कहीं सुल्तानगढ पहुँच के अपने परिवार से मिला तब क्या होगा....? शायद वो दिन किसी क़यामत से काम न होगा.... तो याद रहे चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए ये बात प्रिंस को नहीं पता चलनी चाहिए.... अगर गलती से भी किसी ने प्रिंस को कुछ बताया तो मैं उसकी जान ले लुंगी.....

मैक्स : ये बात सुन के दर के मारे मेरी जान निकल गयी.... मैंने सोचा इस से पहले की ये लोग मुझे देखे मुझे यहाँ से फ़ौरन निकल लेना चाहिए.... मगर मेरी खराब किस्मत की जैसे hi मैं वहां से भागने के लिए पलटा मेरा हाथ लग के वहां पड़ा वास नीचे गिर के टूट गया.... वास के टूटने की आवाज़ सुन के तीनो पीछे palti...unki नज़र मुझपे पद गयी....

शलाका : ये कौन है....?

नानी : ये तो मैक्स है प्रिंस का दोस्त.... मगर ये इतना डरा हुआ क्यों है....?

शलाका : शायद इस ने हमारी साड़ी बात सुन ली है.....

मैक्स : उस लड़की (शलाका) के ये कहते hi मैं दर के मारे वो बोल गया जो मुझे नहीं कहना चाहिए था.... नहीं मैंने कुछ नहीं सुना न hi प्रिंस के परिवार के बारे में और न hi सुल्तानगढ के बारे में.....

शलाका : अच्छा अगर तू ने कुछ नहीं सुना तो फिर तुझे प्रिंस के परिवार और सुल्तानगढ के बारे में कैसे पता....? बता जवाब दे....

मैक्स डरते हुए : W....W....wo....

फिर ये सोच के की बीटा इस से पहले की ये लोग तेरी जान ले ले निकल ले यहाँ से.... मैं वहां से भाग लिया....

औरत : कहीं वो प्रिंस को सब बता न दे.... शलाका जाके रोक उसे.... अगर प्यार से माने तो ठीक है वर्ण.... आगे तू खुद समझदार है....

औरत की बात सुनते hi वो लड़की मुझे जान से मारने के लिए मेरे पीछे भागी.... मगर जैसे hi उसने प्रिंस को बहार मुझे आवाज़ लगते देखा तो वो मुझे मारे बगैर उलटे पाँव तेज़ी से घर के अंडर चली गयी.... कौन थी वो औरत मुझे नहीं पता.... मैंने उस औरत और उस लड़की को पहली बार प्रिंस के घर में देखा था.... फिर अचानक से कुछ देर बाद वो मुझे ढूंढते हुए मेरे घर तक आयी और मुझे धमका के चली गयी की अगर मुझे अपनी जान प्यारी है तो मुझे खामोश रहना होगा.... इस राज़ को अपने सीने में दफ़न करना होगा... जिस दिन मैंने इस राज़ को खोला वो दिन मेरा आखरी दिन होगा.... उसी वक़्त वो मुझे जान से मार देगी...

सैम : यार मैक्स तू ने जो भी कुछ कहा वो सब समझ में आया मगर एक बात समझ में नहीं आयी की उस लड़की ने तुझे ज़िंदा क्यों चोर दिया....?

सैम की बात सुन के मैक्स गुस्से में कहता है....

मैक्स : साले तू दोस्त है की दुश्मन.... मेरे ज़िंदा रहने पे तुझे हैरत हो रही है....

इस से पहले की मैक्स आगे कुछ और कहता सैर बीच में बोलती है....

सैर : नहीं मैक्स जैसा तुम सोच रहे हो बात वैसी नहीं है.... सैम को hi नहीं बल्कि तुम्हारी बात सुन के हम सब को इस बात की हैरानी हो रही है की जिस सच को प्रिंस से छुपाने के लिए वो लड़की तुम्हे जान से मारने के लिए तुम्हारे पीछे भागी थी.... उसने तुम्हे कुछ क्यों नहीं किया....? ये जान के भी की तुम कभी न कभी प्रिंस को सच ज़रूर बता डोज.... उसने फिर भी तुम्हे सिर्फ धमकी दे के ज़िंदा चोर दिया....? ये बात कुछ समझ नहीं आयी....

मैक्स : ये तो मेरे भी समझ में नहीं आया की उसने मुझे कुछ क्यों नहीं किया....?

प्रिंस : शायद मेरी वजह से.... क्यों की तुझे आवाज़ देने के बाद भी जब तू नहीं रुका तू मैं घर के अंडर चला गया..... वहां मैंने नानी को देखा.... मैंने उनसे मैक्स के इस तरह भागने की वजह पूछी तो उन्होंने जवाब देने के बजाये.... उल्टा मुझ से hi एक सवाल किया....?

नानी : ये मैक्स कौन है और तेरे लिए क्या मायने रखता है....?

प्रिंस : नानी मैं आपसे क्या पूछ रहा हूँ और आप हैं की मेरी बात का जवाब देने के बजाये उलटे मुझसे hi सवाल कर रही हैं....

नानी : बेकार की बात चोर और मैंने जो सवाल किया है उसका जल्दी से जवाब दे....

प्रिंस : ज़रा की तरह मैक्स भी मेरा सब से जिगरी है.... जैसे ज़रा मेरे दिल के बेहद करीब है वैसे hi मैक्स है.... ज़रा मेरा साया है तो मैक्स मेरे लिए सेज छोटे भाई की तरह है.... ज़रा मेरे लिए किसी की भी जान ले सकती है और अपनी जान ख़ुशी ख़ुशी दे सकती है वैसे hi मैक्स भी.... ठीक वैसे hi मैं भी इन दोनों के लिए अपनी जान दे भी सकता हूँ और किसी की जान ले भी सकता हूँ.... शायद ये सुन ने के बाद नानी ने उस लड़की को मैक्स के साथ कुछ भी करने से रोक दिया....

प्रिंस की बात सुन के जहाँ मैक्स की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ जाते हैं वहीँ ज़रा ख़ुशी में वो कर जाती है जिसे देख के हैरत से वहां सभी की आँखें बड़ी हो जाती हैं साथ hi मुँह खुला का खुला रह जाता है.....

ज़रा ख़ुशी से झूम उठती है और आगे बढ़ के प्रिंस का चेहरा अपने हाथों में ले के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उन्हें चूसने लगती है.... किसी ने सोचा भी नहीं था की ज़रा ऐसा कुछ करेगी.... सब हैरत से बस उसे hi देखते रहते हैं.... प्रिंस भी बुरी तरह से चौंक जाता है वो ज़रा को खुद से दूर करने की कोशिश करता है मगर ज़रा है की उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं.... वो तो बस ख़ुशी में प्रिंस के होंठों को चूसे जा रही है.... फिर जब उसकी साँसें उखाड़ने लगती हैं तब कहीं जा के वो प्रिंस को चोरटी है.... फिर अपनी साँसें काबू करने के बाद प्रिंस को आँख मार के कहती है.....

ज़रा : है जान तेरे होंठों का अमृत रुपी शहद पी के मज़ा आ गया.... ममममममम..... ऐसा टास्ते मैंने आज तक नहीं चखा..... वाओ...

प्रिंस : अबे पागल तो नहीं हो गयी ये क्या किया तू ने....? तुझे पता भी है की लड़की अपना पहले किश किसे करती है.....?

ज़रा : हाँ उसे जिस से वो प्यार करती है.... जो उसकी जान हो.... और मैं तुझे आज से नहीं बल्कि तब से प्यार करती आ रही हूँ जब मुझे प्यार का मतलब भी नहीं पता था.... और वैसे भी तेरे साथ ये मेरा पहला किश नहीं है....

ज़रा की बात सुन के वहां सब एक बार फिर से चौंक जाते हैं....

इस से पहले की प्रिंस कुछ कहता....

सैर हैरत से : पहला किश नहीं है मतलब.... तो क्या इस से पहले भी तुम दोनों ने किश किया है....?

ज़रा शरमाते हुए : हम दोनों ने नहीं बल्कि मैंने प्रिंस को किश किया है....

प्रिंस हैरत से : तू ने मुझे पहले भी किश किया है.... मगर कब....?

ज़रा शरमाते हुए : वो मैं नहीं बता सकती वो क्या है न मुझे बड़ी शर्म आ रही है.....

प्रिंस : शर्म की बच्ची बता जल्दी.... तू ने इस से पहले कब मुझे किश किया है....?

ज़रा शरमाते हुए : मममममम.... शायद 15 या फिर 20 बार....

प्रिंस : Kyaaaaaaaaaaaaaa.....? तू ने 15 से 20 बार मुझे किश किया और मुझे पता भी नहीं चला.....

ज़रा : अरे नहीं नहीं तुम समझे नहीं..... मैं तो ये कह रही हूँ की पिछले 10 साल में मैं सिर्फ तुम्हे 15 से 20 दिन किश नहीं किया है....

सैर : मतलब 10 साल में तू ने रोज़ प्रिंस को किश किया है..... मगर कब....?

ज़रा : अब दिन में तो मैं इसे किश कर नहीं सकती थी.... इस के घर में सब मुझे अच्छे से जानते थे.... वहां मुझे किसी भी वक़्त आने जाने की इजाज़त थी... तो रात में जब ये गहरी नींद में होता था तब.... मैं चुपके से इसके रूम में जा के इसे किश कर लेती थी....

तभी विजय जो बड़े गौर से सब बातें सुन रहा था वो बीच में बोल पड़ता है....

विजय : है क्या किस्मत पायी है प्रिंस तू ने.... दुनिया की सब से हॉट खूबसूरत और सेक्सी लड़की पिछले 10 साल से रोज़ तुझे किश करती आ रही है.... और एक हम हैं की हम को छह के भी एक किश तक नसीब नहीं हो रही.... नसीब होता है तो बस थप्पड़....

विजय की बात सुन के ज़रा गुस्से में उसे घूर के कहती है....

ज़रा : साले अगर तू ने अपनी बकवास बंद न की तो एक झन्नाटेदार थप्पड़ तुझे ज़रूर पड़ेगा.... बोल चाहिए क्या.....?

ज़रा की बात सुन के विजय को प्लेन की मार याद आ जाती है और वो अपने गाल छुपा के दर के मारे पीछे हो जाता है....

सैर प्रिंस को देख के आँख माते हुए ज़रा से पूछती है....

सैर : अच्छा ज़रा एक बात तो बता.... तू ने सिर्फ प्रिंस को किश hi किया है या आगे भी कुछ....?

सैर की बात सुन के ज़रा का गुस्सा हवा हो जाता है और वो शरमाते हुए कहती है....

ज़रा शरमाते हुए : है.... करना तो मैं बहुत कुछ चाहती थी मगर कर न सकीय.... किश से आगे बढ़ने की मेरी हिम्मत hi नहीं हुई... आफ्टर आल मैं भी एक शर्मीली लड़की hi हूँ....

प्रिंस : तू और शर्मीली.... अगर तुझे शर्मीली कहा जाए तो फिर बेशर्म किसे कहा जाएगा....?

ज़रा प्रिंस को आँख मार के कहती है...

ज़रा : तू बस एक बार कह के तो देख मुझे बेशर्म बनने में ज़रा भी वक़्त न लगेगा... मैं तो कब से तेरी हाँ का इंतज़ार कर रही हूँ.... और वैसे भी आज तू ने ये कह के की मैं तेरे दिल के बेहद करीब हूँ.... अपने प्यार का आधा इकरार तो कर दिया है.... अब बस इंतज़ार है उस पल का जब तू खुल के मुझसे अपने प्यार का इज़हार करेगा....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है...

वो कुछ कहने hi वाला होता है की तभी वहां कोई आता है.... उसकी बात सुन के सब खामोश हो जाते हैं....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 78

ज़रा शरमाते हुए : आफ्टर आल मैं भी एक शर्मीली लड़की hi हूँ....

प्रिंस : तू और शर्मीली.... अगर तुझे शर्मीली कहा जाए तो फिर बेशर्म किसे कहा जाएगा....?

ज़रा प्रिंस को आँख मार के कहती है...

ज़रा : तू बस एक बार कह के तो देख मुझे बेशर्म बनने में ज़रा भी वक़्त न लगेगा... मैं तो कब से तेरी हाँ का इंतज़ार कर रही हूँ.... और वैसे भी आज तू ने ये कह के की मैं तेरे दिल के बेहद करीब हूँ.... अपने प्यार का आधा इकरार तो कर दिया है.... अब बस इंतज़ार है उस पल का जब तू खुल के मुझसे अपने प्यार का इज़हार करेगा....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है...

वो कुछ कहने hi वाला होता है की तभी वहां कोई आता है.... उसकी बात सुन के सब खामोश हो जाते हैं....?????

अब आगे....

तभी वहां डॉ आ के सब को बाहर जाने को कहता है.....

डॉ : ये हॉस्पिटल है और आप सब हो की शोर मचा रहे हो..... चलो अब सब बहार जाओ और पेशेंट्स को आराम करने दो....

डॉ की बात सुन के सब वहां से जाने लगते हैं.....

सैर : ज़रा तू भी चल साथ....

ज़रा : नहीं मैं नहीं जा सकती....

सैर : वो क्यों भला....? और वैसे भी अभी प्रिंस की हालत काफी ठीक भी है....

ज़रा : कभी सुना है की जिस्म से साया अलग हुआ हो.... नहीं न.... तो फिर....

सैर : वो तो ठीक है मगर हम सब के साथ तू भी कल रात से यहीं है तुझे भी तो आराम की ज़रुरत है....

ज़रा : हाँ तो उसके लिए कहीं बहार जाने की क्या ज़रुरत है.... यहाँ मैं अपनी जान के साथ उसके बीएड पे सुकून से आराम कर सकती हूँ....

ज़रा की बात सुन के सैर प्रिंस को आँख मार के कहती है....

सैर : प्रिंस बच के रहना.... कहीं ऐसा न हो की आँख लगी और दुघटना घाटी.... मतलब तू सोया और ज़रा ने तेरी इज़्ज़त लूट ली.... पहले तो वो सिर्फ किश करती आयी है... मगर अब शायद वो किश से आगे बढ़ जाए..... क्यों ज़रा मैंने ठीक कहा न....

सैर की बात सुन के ज़रा शरमाते हुए : हाँ सही कहा तू ने मैं भी कई दिनों से ऐसा कुछ करने की सोच रही हूँ आज शायद ऊपर वाले ने मुझे मौका दे दिया.... इस मौके को हाथ से गवाना ठीक नहीं....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस खुद को चादर से धक् के कहता है....

प्रिंस : तुम दोनों पागल तो नहीं हो गयी.... ये क्या बकवास किये जा रही हो....

सैर : ये बकवास नहीं है मेरी जान आज तो पक्का तेरी इज़्ज़त लूटने वाली है....

मैक्स : कोंग्रटुलतिओन्स मेरे भाई....

प्रिंस : अबे क्या कोंग्रटुलतिओन्स.... साले ये क्या कोई कम्पटीशन है जीके जितने की बधाई दे रहा है.... साले यहाँ मेरी इज़्ज़त खतरे में है और तुम लोगों को मज़ाक सूझ रहा है... इस ज़रा का कोई भरोसा नहीं.... यहाँ मैं सोया नहीं की मेरी इज़्ज़त लूटी....

प्रिंस की बात सुन के ज़रा हसने लगती है....

ज़रा : याअहूऊओऊ.... आज तो मेरे मज़े होने वाले हैं.... हहहहहहह.... आज मुझे जन्नत का मज़ा आने वाला है.... ममममममम.....

प्रिंस : तू क्या दांत दिखा रही है.... ऐसा सोचना भी नहीं वर्ण मैं तुझे नहीं छोड़ूंगा....

ज़रा : मैं भू तो वही कह रही हूँ की मुझे मत चूर्ण और मैं भी आज तुझे नहीं छोड़ूंगी.... जब तक पूरा मज़ा न ले लून.... है मुझे तो सोच के hi इतना मज़ा आ रहा है.... जब मैं तेरे साथ वो करुँगी तब कितना मज़ा आएगा.... मममममम....

प्रिंस : अबे बेशर्म लड़की तुझे पता भी है की तू क्या बक रही है.... और वैसे भी एक बीमार इंसान के साथ क्या ये सब करना ठीक होगा....

ज़रा : चल अब तू इतना कह रहा है तो आज के लिए तुझे चोर देती हूँ.... मगर हाँ जैसे hi तू पूरी तरह से ठीक हुआ.... उस दिन तेरी इज़्ज़त ज़रूर लूटूँगी.... है उसमे कितना मज़ा आएगा....

प्रिंस : पागल है क्या कुछ भी.... मैं तुझे कुछ करने दूंगा तब न तू कुछ करेगी....

ज़रा : ये गलत बात है प्रिंस.... तू ने वादा किया है.... तू अपने वादे से नहीं मुकर सकता.....

प्रिंस : अबे वादा इस बात के लिए थोड़े hi किया था....

ज़रा : याद कर तू ने क्या वादा किया था.... मैं तेरे साथ जो चाहूंगी वो करुँगी... और तू मुझे नहीं रोकेगा....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : यार ये मैं कहाँ फस गया....

मैक्स : साले बोलै था तुझे मत कर वादा..... मगर नहीं तू ने मेरी तो क्या किसी की बात न मानी और वादा कर दिया....

प्रिंस : अबे साले मुझे थोड़े hi पता था.... इस चिपकू चुहिया के दिमाग में ये खुराफाती बात चल रही है.... अब बता मैं क्या करूँ....?

मैक्स : क्या करूँ क्या....? वादा किया है तो अब उसे पूरा कर....

प्रिंस : यार ये मैंने क्या कर दिया..... कहाँ खुद को फसा लिया....

तभी प्रिंस को किसी के रोने की आवाज़ आने लगती है.... वो पलट के ज़रा की तरफ देखता है जो रो रही है....

प्रिंस : ये अचानक से तुझे क्या हुआ.... अभी तो ख़ुशी से नाच रही थी और अब अचानक से रोने क्यों लगी....?

ज़रा : मैं बहुत बुरी हूँ न.... तेरे न चाहने पे भी तेरे साथ ज़बरदस्ती कर रही हूँ....

प्रिंस : नहीं यार ऐसा नहीं है....

ज़रा : नहीं ऐसा hi है....

प्रिंस : यार रो मत.... तुझे पता है न की मैं तुझे रो ते हुए नहीं देख सकता..... तेरी आँख में आंसू मुझसे सही नहीं जाते.... मेरे दिल में तकलीफ सी होने लगती है....

ज़रा : नहीं मैं बहुत बुरी हूँ... तेरे न चाहते हुए भी तेरे साथ ज़बरदस्ती कर रही हूँ....

ज़रा की बात सुन के मैक्स कुछ कहने hi वाला होता है की तभी ज़रा प्रिंस से नज़र बचा के गुस्से में घूर के उसे देखती है.... मैक्स कहते कहते खामोश हो जाता है....

मैक्स : अबे ये तुझे फिर से फसा........

प्रिंस : किसने कहा की तू बुरी है.... तू तो मेरी प्यारी पारी है.... और रही बात ज़बरदस्ती की तो वो तो ये मुमकिन hi नहीं की तू मेरे साथ ज़बरदस्ती करे..... क्यों की तू मेरा साया है.... तुझे पूरा इख़्तेयार है मेरे साथ कुछ भी करने का....

ज़रा अपने आंसू पोछते हुए : कुछ भी....

प्रिंस : हाँ कुछ भी.... चल अब जल्दी से अपने रोना बंद कर और मेरे गले लग जा....

ज़रा ख़ुशी से उछलते हुए प्रिंस के सीने से लिपट जाती है.... और मैक्स मुस्कुराते हुए वहां से बहार की तरफ चल देता है.... वो ये अच्छे से जानता है की ज़रा प्रिंस को दिल ो जान से चाहती है.... वो न तो खुद कभी उसके साथ कुछ बुरा कर सकती है और न hi किसी और को उसके साथ कुछ बुरा होने दे सकती है....

कुछ देर प्रिंस के सीने से लिपटे रहने के बाद ज़रा उस से अलग हो के जाने लगती है....

प्रिंस : क्या हुआ....? कहाँ जा रही है...?

ज़रा : सोचा की तेरे पास यहां सो जाऊं मगर मेरे यहाँ सोने से तुझे तकलीफ होगी न.... मैं अपनी जान को तकलीफ में कैसे देख सकती हूँ.... इस लिए सोफे पे सोने जा रही हूँ....

प्रिंस : बातें करना कोई तुझसे सींचे.... किसने कहा की तेरे यहाँ मेरे पास सो ने से मुझे तकलीफ होगी....

ज़रा : नहीं प्रिंस मेरा दिल रखने के लिए तुम तकलीफ सहो.... क्या ये मुझे अच्छा लगेगा.... नहीं कभी नहीं....

प्रिंस : तू और मुझे तकलीफ देगी.... ये इस जनम में तो मुमकिन नहीं....

ज़रा : हाँ वो तो सच है.... मगर फिर भी....

प्रिंस : चल अब ज़्यादा नौटंकी मत कर.... मैं ये अच्छे से जानता हूँ की मेरे पास सोने के लिए तू मरी जा रही है... बस दिखावा के नाम पे नौटंकी कर रही है.... चल अब जल्दी से यहाँ आ....

ज़रा : नहीं प्रिंस मैं सच कह रही हूँ.... मैं वहां सोफे पे hi सो जाती हूँ.....

प्रिंस ज़रा की बात समझ जाता है और ये भी की वो बस बातें बना रही है.... जबकि वो खुद प्रिंस के पास सो ने के लिए मरी जा रही है.... वो बस इतना चाहती है की प्रिंस उसे खुद अपने पास सोने को कहे.... मगर प्रिंस भी प्रिंस hi है.... वो ज़रा की चाल उसी पे पलट देता है....

प्रिंस : चल ठीक है अगर तेरी यही मर्ज़ी है तो मैं तुझे फाॅर्स नहीं करूँगा.... तू आराम से सोफे पे सो जा....

ये कह के प्रिंस मुस्कुराने लगता है....

प्रिंस की बात सुन ज़रा फ़ौरन पलट के कहती है.....

ज़रा : नहीं नहीं... अब तू इतना ज़ोर दे hi रहा है तो मैं तुझे मन नहीं करुँगी.... चल तेरे पास सो hi जाती हूँ तू भी क्या याद करेगा किस दिलदार से पाला पड़ा है....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस हँसते हुए अपनी बाहें फैला के कहता है....

प्रिंस : हहहहहहहह.. तू और तेरी ये नौटंकी..... जाने कब ख़तम होगी.... चल जल्दी से आ....

ज़रा फ़ौरन धउरते हुए जा के प्रिंस के सीने से लिपट जाती है.... दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपट के सो जाते हैं....

अगली सुबह जब रूही की आँख खुलती है तब वो खुद को हॉस्पिटल के बीएड पे महसूस करके चौंक जाती है....

सिमी : शुक्र है ऊपर वाले का तुझे होश आ गया.... अब तेरी तबीयत कैसी है.....?

रूही : मैं ठीक हूँ.... मगर मैं यहाँ कैसे आयी....?

सिमी रूही को कल हुई पूरी बात बताती है..... जिसे सुन के रूही को जितना गुस्सा आता है उतनी hi तकलीफ भी होती है..... वो पलट के प्रिंस की तरफ देखती है.... प्रिंस के साथ ज़रा को सोये देख रूही को उसपे बेहद गुस्सा आता है..... वो गुस्से में उस पे बादक जाती है.... ज़रा भी कहाँ खामोश रहने वाली थी वो भी उसकी हर एक बात का जवाब देने लगती है..... इस से पहले की बात आगे बढ़ती प्रिंस फ़ौरन दोनों को दूर हटा के कहता है....

प्रिंस : ये हॉस्पिटल है.... मैं यहाँ कोई तमाशा नहीं चाहता जो भी बात करनी है घर चल के करेंगे....

प्रिंस की बात सुन के दोनों खामोश हो जाती है.... मगर एक दूसरे को गुस्से से देखते हुए मन में हज़ार गालियां देने लगती हैं....

शाम तक प्रिंस और रूही की तबीयत ठीक हो जाती है और उन्हें डिस्चार्ज मिल जाता है.....

हॉस्पिटल से निकलते hi ज़रा प्रिंस के साथ चिपक जाती है.... वो प्रिंस का साथ चोर्ने को तैयार hi नहीं.... प्रिंस जैसे hi कार में बैठता है ज़रा फ़ौरन उसके बगल में बैठ जाती है.... रूही छह के भी उसे रोक नहीं पाती.... मजबूरन उसे पीछे सैर के साथ बैठना पड़ता है....

घर पहुंच के भी दोनों प्रिंस का साथ नहीं चोरटी जहाँ जहाँ प्रिंस जाता है वहां वहां वो दोनों भी आ जाती है.....

प्रिंस : तुम दोनों कर क्या रही हो....? तुम दोनों का दिमाग तो ठीक है.... यहाँ मैं हिला नहीं की तुम दोनों मेरे पीछे आयी नहीं....

ज़रा : वो तो मैं तुम्हारे साथ इस लिए आ रही थी ताकि तुम्हे कभी भी मेरी ज़रुरत हो तो मैं साथ रह के तुम्हारी हर ज़रुरत पूरी कर सकूँ.... और ख़ास कर के इसकी (रूही की तरफ इशारा कर के) वजह से.... नज़र हटी दुर्घटना घाटी.... क्या पता तुम्हे अकेला पा के ये कमीनी फिर तुम पे हुम्ला कर दे.... जैसा की इस ने पहले भी किया था... और ख़ास कर के उस दिन....

ज़रा के इलज़ाम लगते hi रूही बेहद गुस्से में आ जाती है....

रूही गुस्से में : मैं प्रिंस पे हुम्ला नहीं किया था... सुना तू ने वो हुम्ला मैंने नहीं किया था....

ज़रा : चिल्लाने से सच झूट में नहीं बदल जाएगा....

रूही : सच यही है की मैं प्रिंस को दिल ो जान से चाहती हूँ.... वो मेरा पति hi नहीं जान है मेरी.... सु न तू ने जान है वो मेरी....

ज़रा : अच्छा इसीलिए उस दिन अपनी hi जान लेने के लिए तू ने वो खंजर प्रिंस के सीने में मारा था.... वो तो प्रिंस की वजह से तू बच गयी वर्ण मैं उसी वक़्त तुझे जान से मार चुकी होती.... तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे प्यार पे जान लेवा हुम्ला करने की... इस बार मैंने अपनी जान प्रिंस के सड़के में तेरी जान बक्श दी मगर अब और नहीं.... अब अगर गलती से भी तू ने मेरी जान पे जान लेवा हुम्ला करना तो दूर उसके बारे में गलती से सोच भी तो उसी पल तेरे जिस्म से तेरी जान निकालने में मुझे एक लम्हा भी नहीं लगेगा... वो पल तेरी ज़िन्दगी का आखरी पल होगा....

रूही : एक बात तेरी समझ में नहीं आती क्या.... मैं प्रिंस पे कोई हुम्ला नहीं किया था.... ये झूठा इलज़ाम मुझपे लगाना बंद कर.....

ज़रा : तू ने नहीं तो क्या तेरे भूत ने प्रिंस पे हुम्ला किया था.... देखो तो झूटी को.... एक तो जान लेवा वार करती है और ऊपर से सीना तान के झूट भी बोलती है..... इसे ज़रा भी शर्म नहीं है...

रूही : शर्म झूट बोलने पे आती है सच बोलने पे नहीं और मैं सच कह रही हूँ....

ज़रा : तेरे इस झूट के कई सबूत हैं मेरे पास.... प्रिंस की पूरी सिक्योरिटी गॉर्डस की टीम ने तुझे प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला करते देखा था... यहाँ तक की खुद प्रिंस ने.... बोलो प्रिंस ये सच है की नहीं.....

फिर प्रिंस जो कहता है उसे सुन के वहां मौजूद सभी के होश उड़द जाते हैं... किसी को उसकी बात पे यकीन नहीं आता.... सब के मुँह से एक साथ एक hi सब्द निकलता है और वो है....

Kyaaaaaaaaaaaaaa....?

प्रिंस : हाँ ये सच है की रूही ने मुझपे जान लेवा हुम्ला किया था.... मगर वो रूही नहीं थी कोई और hi थी... रूही को देख के ऐसा लगा जैसे की वो रूही न हो के कोई और hi हो.... उसकी आवाज़ भी काफी अलग थी.... ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की उस वक़्त रूही के जिस्म में कोई और लड़की थी.... उसे लड़की कहना ठीक न होगा.... वो ऐसी थी जैसे की कोई आत्मा या फिर कुछ और.... वो क्या और कौन थी मैं नहीं जानता.... उस वक़्त मैंने रूही के चेहरे में किसी और का चेहरा देखा था.... जो की बेहद खूबसूरत होने के साथ साथ बेहद खौफनाक भी था..... जब उसने मुझे पे वार किया तब मुझे एक बात की बड़ी हैरानी हुई.... मुझपे वार करते वक़्त जहाँ उसके होंठों पे ज़हरीली हंसी थी वहीँ उसकी आँखों में बेपनाह दर्द था... जो उसकी आँखों के बहते आंसुओं को देख के पता चल रहा था.... मुझे खंजर मारते hi उसकी वो हंसी कहीं खो सी गयी और उसकी जगह उसके चेहरे पे दर्द च गया बेइन्तेहाँ दर्द... मुझे तकलीफ में देख के वो तड़प गयी.... खंजर लगने के बाद जब मैं दर्द से चीखा तो मेरी चीख सुन के वो भी तड़प के चीख उठी.... उस चीख के साथ उसके दर्द भरे दिल से होते हुए उसके होंठों से एक नाम निकला....

मैक्स : नाम.... कैसा नाम....? किसका नाम.....???????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 79

प्रिंस : हाँ ये सच है की रूही ने मुझपे जान लेवा हुम्ला किया था.... मगर वो रूही नहीं थी कोई और hi थी... रूही को देख के ऐसा लगा जैसे की वो रूही न हो के कोई और hi हो.... उसकी आवाज़ भी काफी अलग थी.... ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की उस वक़्त रूही के जिस्म में कोई और लड़की थी.... उसे लड़की कहना ठीक न होगा.... वो ऐसी थी जैसे की कोई आत्मा या फिर कुछ और.... वो क्या और कौन थी मैं नहीं जानता.... उस वक़्त मैंने रूही के चेहरे में किसी और का चेहरा देखा था.... जो की बेहद खूबसूरत होने के साथ साथ बेहद खौफनाक भी था..... जब उसने मुझे पे वार किया तब मुझे एक बात की बड़ी हैरानी हुई.... मुझपे वार करते वक़्त जहाँ उसके होंठों पे ज़हरीली हंसी थी वहीँ उसकी आँखों में बेपनाह दर्द था... जो उसकी आँखों से बहते आंसुओं को देख के पता चल रहा था.... मुझे खंजर मारते hi उसकी वो हंसी कहीं खो सी गयी और उसकी जगह उसके चेहरे पे दर्द च गया बेइन्तेहाँ दर्द... मुझे तकलीफ में देख के वो तड़प गयी.... खंजर लगने के बाद जब मैं दर्द से चीखा तो मेरी चीख सुन के वो भी तड़प के चीख उठी.... उस चीख के साथ उसके दर्द भरे दिल से होते हुए उसके होंठों से एक नाम निकला....

मैक्स : नाम.... कैसा नाम....? किसका नाम.....???????

अब आगे....

प्रिंस : ममममम.... वो नाम क्या था... शायद हाँ याद आया... सुलतान.... हाँ यही नाम लिया था उसने.... वो बार बार किसी सुलतान का नाम ले रही थी....

मैक्स : वो रूही नहीं थी तो वो कौन थी....? और ये सुलतान कौन है....?

प्रिंस : पता नहीं.... न hi मुझे ये पता है की वो कौन थी और न hi ये की ये सुलतान कौन है....? और सब से बड़ी बात तो ये की जब उसने मुझपे जान लेवा हुम्ला किया तब वो रोई क्यों....? मेरी तकलीफ देख के उसे इतनी तकलीफ क्यों हुई....?

ज़रा : मुझे पता है.... वो और कोई नहीं बल्कि चुड़ैल थी.... और वो चुड़ैल और कोई नहीं बल्कि ये कमीनी रूही hi थी.... और रही बात सुलतान की तो खुद को बचने के लिए ये सुलतान सुलतान कह के चीखने लगी....

ज़रा की बात सुन के रूही गुस्से में चीखती है.....

रूही : तुझे एक बात समझ में नहीं आती क्या....? वो मैं नहीं थी.... जिसने प्रिंस पे हुम्ला किया था.... वो कौन थी मुझे नहीं पता.... न hi ये की सुलतान कौन है.... और हाँ अगली बार मुझे गलती से भी तू ने चुड़ैल कहा न तो मैं यकीनन तेरी वो हालत करुँगी की तू आइंदा कभी किसी को कुछ बोलने लायक न रहेगी....

रूही की बात सुन के ज़रा बेहद गुस्से में आ जाती है... और उसे मारने के लिए उसपे झपट पड़ती है.... मगर तभी वो होता है जिसे देख के सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.....

ज़रा : साली कमीनी.... एक तो मेरे प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला करती है और दूसरा मुझे ज़रा को धमकी देती है रुक अभी बताती हूँ मैं तुझे....

ज़रा आगे बढ़ के रूही के गाल पे एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर देती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

ज़रा का झन्नाटेदार थप्पड़ खा के रूही पीछे गिरती है.... उसके होंठों से खून निकलने लगता है... जिस से वो बेहद गुस्से में आ जाती है....

रूही : साली तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझपे रूही पे हाथ उठाने की.... रुक अभी तुझे बताती हूँ की मैं क्या चीज़ हूँ....

ये कह के रूही वो कर जाती है जिसे देख के वहां मौजूद सब के साथ साथ रूही खुद भी बुरी तरह से चौंक जाती है....

रूही गुस्से में आगे बढ़ के ज़रा को एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद करती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

ज़रा के थप्पड़ से तो रूही पीछे सिर्फ 3 से 4 फ़ीट दूर hi गिरी थी.... मगर रूही का थप्पड़ पड़ते hi ज़रा हवा में उड़ती हुई काफी दूर पीछे पड़े सोफे पे जा गिरती है.... उसके होंठों से भी खून निकलने लगता है....

इस बात से सब हैरत से कभी रूही को तो कभी ज़रा को देखते हैं....

एक पल के लिए तो ज़रा भी इस झन्नाटेदार थप्पड़ से हिल जाती है.... मगर फिर वो खुद को संभाल के उठती है.... वो वर्ल्ड की बेस्ट हार्डकोर फाइटर है.... वो एक मामूली लड़की से कैसे हार मान सकती है.... ये सोच के वो गुस्से में रूही को मारने के लिए उसके पास आती है.... इस से पहले की वो रूही को मार पाती रूही एक और थप्पड़ उसे रसीद कर देती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

ज़रा इस बार भी हवा में उड़ती हुई पीछे उसी सोफे पे जा गिरती है....

एक बार फिर से सब हैरत से दोनों को देखने लगते हैं....

ज़रा एक बार फिर से उठती है और रूही को मारने उसके पास आती है....

इस बार इस से पहले की रूही ज़रा को मारती ज़रा एक तरफ झुक के एक झन्नाटेदार थप्पड़ रूही को मारती है....

रूही संभल नहीं पाती और पीछे जा गिरती है.... वो गुस्से में उठ के ज़रा को मारने hi वाली होती है की तभी उन्हें रोकने के लिए प्रिंस बीच में आ जाता है.... रूही का थप्पड़ जो ज़रा को पड़ना था वो प्रिंस को पद जाता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

उस थप्पड़ से प्रिंस पूरा हिल जाता है.... वो ज़रा की तरह उड़ते हुए पीछे तो नहीं गिरता मगर फिर भी वो खुद को संभाल नहीं पाटा और करीब 2 फ़ीट पीछे जा गिरता है.... उसके होंठों से खून निकलने लगता है.... जिसे देख सब का दिल तड़प जाता है.... साथ hi सब बेहद गुस्से में आ जाते हैं..... वो फ़ौरन प्रिंस के पास दौर जाते हैं.... रूही भी अपनी जान की ऐसी हालत देख के तड़प के उसके पास आती है.... मगर सब उसे प्रिंस से दूर कर देते हैं.... प्रिंस के होंठों से बहते खून को देख रूही की आँखें नाम हो जाती हैं... उन में से आंसू बहने लगते हैं....

प्रिंस के होंठों से निकल रहे खून को देख के ज़रा के साथ साथ सैर भी बेहद गुस्से में आ के रूही को मारने के लिए आगे बढ़ती है.... मगर प्रिंस उन्हें रोक देता है....

प्रिंस : नहीं... रुक जाओ.... कोई रूही को हाथ नहीं लगाएगा....

ज़रा : नहीं प्रिंस अब और नहीं.... मैंने पहले hi कहा था अगर इस ने गलती से भी तुमपे हाथ उठाने का सोचा भी तो मैं उसी वक़्त इसकी जान ले लुंगी.... और अब मैं वो hi करुँगी.... इसने तुम पे हुम्ला करके अपनी मौत को दावत दी है.... आज मैं इसे ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी....

प्रिंस : नहीं ज़रा तू ऐसा कुछ नहीं करेगी.... सुना तू ने....

ज़रा : मगर क्यों....?

प्रिंस : मैंने कह दिया नहीं मतलब नहीं.... चल अब हैट वहां से.... आ इधर आ मेरे पास....

प्रिंस की बात मान के ज़रा न चाहते हुए भी रूही के पास से वापिस प्रिंस के पास आ जाती है....

ज़रा : ( रूही से) तुझे तो मैं बाद में देख लुंगी.....

सैर अभी भी वहीँ कड़ी गुस्से में रूही को देख रही है....

प्रिंस : सैर तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा.... चल वापिस आ मेरे पास....

प्रिंस की बात सुन के सैर भी वापिस उसके पास आ जाती है....

सिमी फ़ौरन रूही के पास जाती है.... और उस से उसका हाल पूछती है.... मगर रूही है की उसे कुछ होश hi नहीं वो तो बस अपनी जान प्रिंस को hi देखे जा रही है प्रिंस के होंठों से बहते खून को देख उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.....

रूही के थप्पड़ से प्रिंस को इस बात का एहसास तो हो जाता है की ऐसा ज़ोरदार थप्पड़ कोई आम इंसान तो कभी नहीं मार सकता.... और किसी लड़की का तो सवाल hi नहीं उठता.... इस के पीछे कोई बात तो ज़रूर है.... क्यों की इतनी ताक़त किसी आम लड़की में होना न मुमकिन है.... सब से बड़ी हैरानी की बात तो ये की प्रिंस जिसे दुनिया का बड़े से बड़ा पहलवान नीचे नहीं गया सका उसे रूही जैसे मामूली लड़की के एक थप्पड़ ने कैसे गिरा दिया....

प्रिंस भी रूही को hi देखे जा रहा है.... सिमी रूही को वहां से चलने को कहती है मगर रूही उसकी बात सुन ने को तैयार hi नहीं.... वो अपनी जान को वहां चोर के नहीं जाना चाहती.... उसकी नज़र बस प्रिंस पे hi तिकी हुई है.... वो रोये जा रही है साथ hi प्रिंस को देखे भी जा रही है....

सिमी के समझने पे भी जब रूही वहां से नहीं हिलती तब सिमी मुद के प्रिंस की तरफ देखती है जैसे की कहना छह रही हो की अब तुम hi इसे समझा सकते हो.... प्रिंस उसकी बात समझ जाता है...

प्रिंस : सिमी रूही को उसके रूम में ले जाओ.....

ये कह के वो रूही को जाने का इशारा करता है.... मगर रूही न में अपनी गर्दन हिला देती है..... रूही को न जाते देख प्रिंस एक बार फिर से सिमी से कहता है....

प्रिंस : सिमी तुमने सुना नहीं मैंने क्या कहा.... रूही को उसके रूम में ले जाओ....

फिर रूही की आँखों में देखते हुए प्यार से प्लीज कहता है....

इस बार रूही उसकी बात को नहीं ताल पाती क्यों ये बात प्रिंस ने दिल से जो कही थी.... प्रिंस के मुँह से प्लीज सुनते hi रूही न चाहते हुए भी सिमी के साथ अपने रूम में चली जाती है....

ज़रा फ़ौरन प्रिंस के पास आ के अपनी जेब से रुमाल निकाल के उसके होंठों से बह रहे खून को साफ़ करने लगती है.... खून तो इस वक़्त उसके होंठों से भी बह रहा है.... मगर उसे इस वक़्त खुद से ज़्यादा फ़िक्र प्रिंस की है....

सैर : कोई डॉ को बुलाओ जल्दी.... दिखाई नहीं दे रहा प्रिंस के होंठों से खून निकल रहा है....

ज़रा : नहीं डॉ को बुलाने की ज़रुरत नहीं है.... और रही बात प्रिंस के होंठों से निकल रहे खून की तो मुझे पता है की इसे कैसे रोका जाए....

इस से पहले की कोई कुछ कहता ज़रा प्रिंस का चेहरा अपने हाथों में ले के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है....

सब उसकी इस हरकत पे बुरी तरह से चौंक जाते हैं....

प्रिंस ज़रा को खुद से दूर करने की बहुत कोशिश करता है मगर कर नहीं पाटा ज़रा उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं वो बस प्रिंस के होंठों को चूसे जा रही... और तब तक चूसती रहती है जब तक प्रिंस के होंठों से खून निकलना बंद नहीं हो जाता.... तब जा के वो उसे चोरटी है....

सैर : अरे क्या बात है ज़रा क्या इलाज किया है.... तेरे इस इलाज से प्रिंस के होंठों का hi नहीं बल्कि तेरे अपने होंठों से निकल रहा खून भी रुक गया..... अब से मैं भी ऐसा hi इलाज करुँगी....

ज़रा : खबरदार जो प्रिंस के साथ ऐसा करने के बारे में तू ने गलती से भी कभी सोचा तो.... तेरे साथ साथ मैं प्रिंस की टांगें भी तोड़ दूंगी.... प्रिंस का ऐसा इलाज सिर्फ मैं hi कर सकती हूँ.... और कोई नहीं.... समझी....

सैर : अरे मेरी माँ मैं प्रिंस की बात नहीं कर रही थी बल्कि सैम की बात कर रही थी.... तू तो बिना पूरी बात जाने hi मेरी टांगें तोड़ने चली....

ज़रा : हाँ तो क्यों न तोडूं..... जब भी कोई मेरे माल पे डाका डालने की सोचेगा तब उसकी टांगें तो ज़रूर टूटेंगी....

सैर : माल....!!!! कैसा माल....?

प्रिंस : अबे तू भी न सैर.... ये पागल मेरे बारे में कह रही है....

सैर : अभी कुछ देर पहले तक तो तू इंसान था.... ये माल कब से हो गया.....?

ज़रा : जब से मैंने कह दिया.... तब से ये मेरा माल हो गया.... आज से बल्कि अभी से ये मेरा माल है.... माय पर्सनल प्रॉपर्टी....

ज़रा की बात सुन के जहाँ प्रिंस अपना सर पीट लेता है वहीँ सब हसने लगते हसने लगते हैं....

हहहहहहह....

प्रिंस : चल अब बहुत हो गयी तेरी नौटंकी.... चल जल्दी से जा के फ्रेश हो जा.... फिर हम को ऑफिस भी जाना है.... और तुम सब भी क्या दांत दिखा के हंस रहे हो.... तुम सब भी जा के रेडी हो जाओ और 1 घंटे में रेडी हो के डाइनिंग टेबल पे मुझे ज्वाइन करो....

ज़रा : मगर....

प्रिंस : कोई अगर मगर नहीं.... अभी मतलब अभी....

प्रिंस की बात मान के ज़रा के साथ साथ बाकी सब भी अपने अपने रूम की तरफ चल देते हैं.... और प्रिंस चल देता है अपनी जान रूही के रूम की तरफ.....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 80

ज़रा की बात सुन के जहाँ प्रिंस अपना सर पीट लेता है वहीँ सब हसने लगते हसने लगते हैं....

हहहहहहह....

प्रिंस : चल अब बहुत हो गयी तेरी नौटंकी.... चल जल्दी से जा के फ्रेश हो जा.... फिर हम को ऑफिस भी जाना है.... और तुम सब भी क्या दांत दिखा के हंस रहे हो.... तुम सब भी जा के रेडी हो जाओ और 1 घंटे में रेडी हो के डाइनिंग टेबल पे मुझे ज्वाइन करो....

ज़रा : मगर....

प्रिंस : कोई अगर मगर नहीं.... अभी मतलब अभी....

प्रिंस की बात मान के ज़रा के साथ साथ बाकी सब भी अपने अपने रूम की तरफ चल देते हैं.... और प्रिंस चल देता है अपनी जान रूही के रूम की तरफ.....

अब आगे.....

इधर रूम में रूही न तो सिमी को अपने पास आने दे रही है और न hi अपने होंठों से बह रहे खून को बहने से रोक रही है.... बस खामोश बैठी रोये जा रही है....

सिमी डॉ को कॉल करने लगती है मगर रूही उसके हाथ से मोबाइल चीन के उसे कॉल नहीं करने देती....

सिमी : रूही ये क्या कर रही है तू.... देख तेरे होंठों से कितना खून बह रहा है.... इसे रोकना ज़रूरी है.... न तो तू खुद इसे रोक रही है.... न hi मुझे रोकने दे रही है.... और न hi डॉ को बुलाने दे रही है.... अब तू hi बता की ये खून कैसे रुकेगा....?

तभी दरवाज़ा खुलता है और प्रिंस रूम में आ के कहता है....

प्रिंस : मैं बताता हूँ की ये खून कैसे रुकेगा....

प्रिंस की आवाज़ सुन के दोनों दरवाज़े की तरफ देखते हैं.... प्रिंस को देख के और कुछ देर पहले की बात याद कर के रूही का रोना और तेज़ हो जाता है उसकी आँखों से और भी तेज़ी से आंसू बहने लगते हैं...

सिमी : अच्छा हुआ प्रिंस जो तुम आ गए.. अब तुम hi समझाओ इसे मेरी तो ये कोई बात सुन ने को तैयार hi नहीं....

प्रिंस रूही के पास जाता है और उसका चेहरा अपने हाथों में ले के उसके होंठों से बह रहे खून को देखता है.... साथ hi उसकी आँखों से बहते आंसुओं को भी.... जिसे देखते hi प्रिंस का दिल तड़प जाता है.... और वो फ़ौरन रूही के होंठों को अपने मुँह में ले के चूसने लगता है....

प्रिंस के इस हरकत को देख के रूही के साथ साथ सिमी भी बुरी तरह से चौंक जाती है.... वहीँ दरवाज़े के पास कड़ी रूही की माँ भी चौंके बिना नहीं रह पाती.... क्यों की किसी को भी प्रिंस से इस हरकत की उम्मीद नहीं थी....

रूही प्रिंस से अलग होना चाहती है मगर प्रिंस उसे खुद से दूर होने नहीं देता..... उसके होंठों को तब तक चूसता रहता है जब तक रूही के होंठों से बेहटा खून नहीं रुक जाता.... रूही किश में खो सी जाती है.... जब प्रिंस को एहसास होता है की रूही के होंठों से खून निकलना बंद हो गया है तब जा के वो उसके होंठों को चोरता है....

सिमी : वाह प्रिंस क्या इलाज किया है.... मान न पड़ेगा....

रूही बस एक तक प्रिंस की आँखों में देखती रहती है.... उसके होंठों से बस इतना hi निकलता है....

रूही : क्यों....?

प्रिंस : क्यों की तुम मेरी रूह हो.... और रूह कभी जिस्म से जुड़ा नहीं हो सकती....

रूही : नफरत सी हो गयी है मुझे इस रूह से.... जानते हो क्यों.... क्यों की इस बाद रूह ने अपने जिस्म को जाने कितनी hi तकलीफ पहुंचाई है....

प्रिंस : आज कह दिया मगर दोबारा गलती से भी मेरी रूह के बारे में कुछ बुरा कहा न तो मुझसे बुरा कोई न होगा.... मेरी रूह तो हर गलती से पाक है.... अपने जिस्म को तकलीफ पहुँचाने के बारे में वो सपने में भी नहीं सोच सकती.... और रही बात इन मामूली चोट की तो.... इन कसौटियों पे hi तो घिस के सच्चा प्यार अमर होता है....

जहाँ सिमी को दोनों की कोई बात समझ नहीं आ टी वहीँ दरवाज़े के पास कड़ी रूही की माँ प्रिंस की कही हर बात समझ जाती है....

सिमी अपना सर खुजाते हुए कहती है....

सिमी : यार तुम दोनों ये क्या बात कर रहे हो.... मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.... ये रूह और ये जिस्म क्या है....? किसकी रूह और किसका जिस्म....?

इस से पहले की प्रिंस कुछ कहता रहना बेच में बोलती है....

रहना : मैं बताती हूँ....

रहना की बात सुन के तीनो पलट के दरवाज़े की तरफ देखते हैं....

रहना : रूह मतलब रूही और जिस्म मतलब प्रिंस.... मगर प्रिंस क्या मतलब है ऐसी रूह का जो अपने hi जिस्म को ज़ख्मो से भर दे.... अपने hi दिल को चीयर के रख दे.... उसमे बेइन्तेहाँ दर्द भर दे.... ऐसी रूह को जिस्म से अलग कर देना hi बेहतर है....

प्रिंस : नहीं माँ ऐसा गलती से भी न करना.... क्यों की रूह के बिना जिस्म ज़िंदा तो वैसे भी नहीं रह पायेगा.... रूह के अलग होते hi वो तड़प के मर....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की रूही आगे बढ़ अपने हाथ प्रिंस के होंठों पे रख देती है....

प्रिंस पलट के रूही की तरफ देखता है...

रूही : जब तक रूह ज़िंदा है.... जिस्म को कुछ नहीं हो सकता.... रूह अपने जिस्म को कुछ भी होने नहीं देगी.... ये वादा है रूह का अपने जिस्म से.... रूह खुद मिट के भी जिस्म को ज़िंदा रखेगी.... वक़्त आने पे रूह अपने जिस्म में इस कदर समां जायेगी की मौत भी उन्हें अलग नहीं कर पाएगी....

रूही की बात सुन ते hi प्रिंस उसे अपने सीने से लगा लेता है.... वहीँ रहना कुछ कहने hi वाली होती है की तभी प्रिंस जो कहता है उसे सुन ने के बाद रहना आगे कुछ कह hi नहीं पाती....

रहना : बाद रूह के जिस्म में जाने से जिस्म को तकलीफ के सिवाए और कुछ हासिल नहीं होगा.... जब तक ये बाद रूह जिस्म के साथ रहेगी उसे तकलीफ पहुंचती hi रहेगी.... इस लिए मैं तो कहती हूँ प्रिंस की....

प्रिंस : बस माँ प्लीज चुप हो जाइये.... मैं अपनी रूह के बारे में कोई भी गलत बात नहीं सुन सकता.... चाहे उसे गलत कहने वाली उसकी अपनी माँ hi क्यों न हो.... ये चाहे जैसी भी है.... मेरी बीवी है.... मेरे hi जिस्म का हिस्सा है.... और मेरे जिस्म का हिस्सा खराब हो.... ये हो hi नहीं सकता.... मुझे जान से मारना बहुत दूर की बात है.... मेरे जिस्म पे एक खरोच भी आ जाए तो मेरी रूह तड़प जाती है.... और रही बात मेरी जान की तो वो तो इसकी कब की हो चुकी है.... जिस पे मेरी रूह का पूरा इख़्तेयार है.... इसे मेरी जान लेने की ज़रुरत नहीं मैं इस्पे अपनी जान बहुत पहले hi वार चूका हूँ.... मैं तो बस इसका साथ पा के hi ज़िंदा हूँ.... वर्ण मैं तो कब का मर....

प्रिंस की बात सुन के रूही बेहद खुश हो जाती है वहीँ उसके मरने की बात सुन के उसकी आँखों से आंसू बह जाते हैं उसका दिल तड़प जाता है और वो फ़ौरन प्रिंस को आगे कुछ भी कहने से रोक देती है..... इस बार वो अपने हाथों के बजाये अपने होंठों का इस्तेमाल करती है.... वो प्रिंस के होंठों को अपने मुँह में ले के उन्हें चूसने लगती है....

सिमी जो इनकी साड़ी बातें सुन रही थी... उसकी आँखों में भी नमी आ जाती है.... उसकी आँखों से भी आंसू बहने लगते हैं.... लेकिन जैसे hi वो रूही को प्रिंस को किश करते हुए देखती है उसके जिस्म में भी एक करंट सा दौर जाता है.... इधर रहना भी ये सब देख के रट रट हंस देती है....

रहना : अबे बेशर्मो.... माना की तुम दोनों शौहर बीवी हो..... इस का मतलब ये नहीं की कभी भी कहीं भी शुरू हो जायो.... अबे काम से काम मेरा तो लिहाज़ कर लो..... मेरे सामने hi शुरू हो गए....

रहना की बात सुन के दोनों फ़ौरन एक दूसरे से अलग होते है... शर्म के मारे दोनों की गर्दन झुक जाती है....

रहना : अब यहीं खड़े शर्माते रहोगे या आ के मेरे गले भी लगोगे....

ये कह के रहना अपनी बाहें फैला देती है.... दोनों फ़ौरन आगे बढ़ के उसके सीने से लिपट जाते हैं....

रहना प्रिंस के सर पे हाथ फेरते हुए कहती है....

रहना : तू इतना अच्छा क्यों है....? इतना भी अच्छा होना ठीक नहीं की अच्छाई hi तकलीफ पहुँचाने लगे.....

प्रिंस : माँ अपने कभी तकलीफ नहीं पहुंचते.... ये तो बस समझ का फेर है.... जिसे आप तकलीफ समझ रही हैं.... वो मेरे लिए रहत के बराबर है... तालीफ़ तो तब होती है जब आपके के अपने आप से दूर हो जाए....

रहना : कभी कभी तेरी अच्छाई से दर लगता है.... किसी दिन तेरी यही अच्छाई तेरी जान की दुश्मन न बन जाए....

प्रिंस : माँ आप बेकार दर रही हैं.... मुझे कभी कुछ नहीं हो सकता.... जानती हैं क्यों.... क्यों की मेरी जान मेरे अपने हैं.... जब तक मेरे अपने मेरे साथ हैं मुझे कुछ नहीं हो सकता.... और मुझे इस बात का पूरा यकीन है की मेरे अपने कभी मुझसे दूर नहीं हो सकते.... और हाँ माँ आप से एक बेहद ज़रूरी बात केहनी थी.... नहीं बात नहीं बल्कि आप से मैं एक वादा चाहता हूँ....

रहना : वादा कैसा वादा....?

प्रिंस : वादा कीजिये की जो मैं आप से करने को कहूंगा अप्प वो hi करेंगी....

रहना : पहले बता तो सही की तू मुझे ऐसा क्या करने को कहने वाला है जिसके लिए तुझे मुझसे वादा लेने की ज़रुरत पद गयी....

प्रिंस : वो मैं आपको बाद में बताऊंगा पहले आप वादा कीजिये....

रहना : नहीं पहले तू वो बात बता... फिर मैं कोई वादा करुँगी....

प्रिंस : क्या माँ आपको मुझपे इतना भी भरोसा नहीं है....

रहना : तुझपे तो मुझे खुद से भी ज़्यादा भरोसा है....

प्रिंस : तो फिर बिना कोई सवाल किये ये वादा कीजिये की मैं आपको जो भी करने को कहूंगा आप वो hi करेंगी.... खाइये मेरी कसम....

रहना : चल ठीक है मैं वादा करती हूँ की तो जो भी करने को कहेगा मैं वो करुँगी.... मुझे तेरी कसम है.... अब बता बात क्या है....?

प्रिंस : चाहे जो हो जाए.... क़यामत hi क्यों न आ जाए.... आप रूही को एक लफ्ज़ भी नहीं कहेंगी... न hi कभी उसका साथ छोड़ेंगी.... हर हाल में उसका साथ देंगी....

रहना : नहीं कभी नहीं.... ये मुमकिन नहीं.... अगर कभी इसने तेरे साथ कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो मैं ये भूल जाउंगी की ये मेरी बेटी है.....

प्रिंस : माँ आपने वादा किया है.... मेरी कसम खायी है.... क्या आप अपना वादा तोड़ देंगी....? क्या आपकी नज़र में मेरी कसम की कोई एहमियत नहीं है... और सब से बड़ी बात ये की आप एक गैर के लिए अपनी बेटी के साथ ऐसा करेंगी....

रहना : खबरदार जो तू ने खुद को गलती से भी कभी गैर कहा तो.... तू गैर नहीं बल्कि अपनों से भी ज़्यादा अपना है..... तू वो है जो हमारे दिए सारे दर्द बर्दाश्त कर के मुस्कुराता रहा... तू ने कभी उफ़ तक नहीं किया.... न hi कभी पलट के हमारे साथ कुक्सह गलत किया.... बल्कि तुझे खुद से ज़्यादा हमारी फ़िक्र रहती है.... तेरे जैसा बीटा तो किस्मत वाली माँ को hi मिलता है... काश मेरी किस्मत भी इतनी hi अच्छी होती.....

प्रिंस : माँ आप ने ऐसा कह के मुझे बेगाना बना दिया.... मैं तो आप को अपनी माँ मानता था हूँ और हमेशा मानता रहूँगा.... मगर शायद आप मुझे अपना बीटा नहीं माटी....

प्रिंस की बात सुन के रहना उसे अपने सीने से लगा के कहती है....

रहना : नहीं ऐसा नहीं है.... तू मेरा बीटा है....

प्रिंस : अगर वाकई में ऐसा है.... तो फिर मुझसे किया वादा आप कभी नहीं तोड़ेंगी.... आप कभी भी रूही पे किसी भी बात को लेके नाराज़ नहीं होंगी..... ख़ास कर के अगर वो बात मुझसे जुडी हो तो...

रहना : चल ठीक है तो कहता है तो मान लेती हूँ तेरी साड़ी बात.... नहीं कहूँगी रूही को कभी कुछ भी....

प्रिंस : अगर ऐसा है तो मेरे साथ साथ मेरी रूह को भी गले लगा लीजिये.... देखिये ये कब से अपनी माँ के गले लग के उनके प्यार को पाने को तड़प रही है.... उसे गले लगा के उसकी तड़प मिटा दीजिये....

प्रिंस की बात सुन के रहना अपनी बेटी की तरफ देखती है और साथ hi अपनी बाहें फैला देती है.... रूही भाग के माँ के पास आ के उनके सीने से लिपट जाती है.... गले लग के दोनों माँ बेटी को बड़ा सुकून मिलता है.... गले लगते hi माँ बेटी के गीले शिकवे दूर हो जाते हैं....

रूही : माँ मुझे माफ़ कर दीजिये.... मैं कुछ भी जान के नहीं किया.... वो सब अनजाने में हुआ....

रहना : मैं जानती हूँ मेरी बच्ची.... उस सब में तेरा कोई दोष नहीं है....

रूही : तो आपने मुझे माफ़ कर दिया....

रहना : हाँ.... मगर आइंदा से कभी भूल के भी प्रिंस के साथ कुछ गलत मत करना....

प्रिंस : ये सही नहीं है.... ये क्या बात हुई.... आप दोनों माँ बेटी क्या मिली मुझे भूल गयी...

रहना : चल अब ज़्यादा नौटंकी मत कर और जल्दी से नाहा के तैयार हो जा मैं नाश्ता रेडी करती हूँ.... रूही तू भी जल्दी से रेडी हो जा.... चल सिमी तू भी तैयार हो जा....

दोनों बहार की तरफ जाने लगती हैं तभी जाते जाते सिमी पलट के रूही और प्रिंस को आँख मार के कहती है....

सिमी : ज़्यादा देर मत लगा देना.... जल्दी आ जाना.... हमारे बहार जाते hi कहीं सुहागरात नहीं मानाने लग्न....

रहना सिमी के सर पे चपत लगा के कहती है....

रहना : तेरी ज़बान बड़ी तेज़ चलने लगी है.... कुछ तो शर्म कर लिया कर....

सिमी : अरे चची.... आप भी न समझती नहीं..... इस शर्मा शमी के चक्कर में रहे न तो कुछ नहीं होगा.... इनके बेशर्म बन ने पे hi आप नानी बन पाएंगी और मैं खला.... क्यों रूही मैंने ठीक कहा न....

सिमी की बात सुन के रूही बुरी तरह से शर्मा जाती है....

रूही : सिमी की बच्ची रुक अभी बताती हूँ मैं तुझे.....

इस से पहले की रहना कुछ कहती सिमी हस्ती हुई वहां से 9 2 11 हो जाती है....

रहना भी हस्ती हुई किचन की तरफ चल देती है.... इधर रह जाते हैं तो प्रिंस और रूही.... रूही की नज़र जैसे hi प्रिंस पे पड़ती है... शर्म के मारे वो बाथरूम में घुस जाती है.... प्रिंस भी हस्ते हुए अपने रूम की तरफ चल देता है.... कुछ देर बाद सब डाइनिंग टेबल पे साथ बैठ के नाश्ता करते हैं.... यहाँ प्रिंस के एक तरफ ज़रा है तो दूसरी तरफ रूही है.... नाश्ते के वक़्त भी दोनों प्रिंस को लेके लड़ने से बाज़ नहीं आते.... दोनों प्रिंस को अपने हाथों से नाश्ता करने और खुद उसके हाथों से नाश्ता करके लिए लड़ाई शुरू कर देते हैं... बड़ी मुश्किल से प्रिंस दोनों को शांत करता है... फिर प्यार से दोनों को अपने हाथों से नाश्ता करने लगता है और खुद भी उनके हाथों से नाश्ता करने लगता है....

विजय : यार प्रिंस क्या किस्मत है तेरी यहाँ एक नसीब नहीं होती और तू है की एक साथ दो दो हॉट और खूबसूरत लड़कियां....

मैक्स : साले जब भी बोलेगा गलत hi बोलेगा.... कमीने दोनों भाभी है तेरी....

सैर : दोनों भाभी कैसे हुई....? प्रिंस का निकाह तो सिर्फ रूही से हुआ है न... ज़रा से कहाँ....

ज़रा : जल्द hi हो जाएगा.....

प्रिंस उन तीनो सैर ज़रा और मैक्स की बात सुन के अपना सर पीट लेता है.....

प्रिंस : अबे तुम लोगों को और कोई काम नहीं है क्या....? जल्दी से ऑफिस चलो...

प्रिंस को गुस्से में देख सब वहां से उठ के फ़ौरन ऑफिस के लिए निकल लेते हैं....

दोपहर को प्रिंस सब को कांफ्रेंस रूम में बुला के मीटिंग करता है फिर....

प्रिंस : मैक्स तैयारी कर ले आज शाम hi हम "सुल्तानगढ" के लिए निकालेंगे.... इस वक़्त मुझे एक बेहद ज़रूरी काम है उसे पूरा करके मैं तुझे घर पे आ के मिलता हूँ....

इस से पहले की कोई प्रिंस से कुछ कहता प्रिंस तेज़ी से बहार की तरफ चल देता है...

शाम को जब प्रिंस घर पे आता है तब वहां का हाल देख के वो बुरी तरह से चौंक जाता है.....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 81

प्रिंस : अबे तुम लोगों को और कोई काम नहीं है क्या....? जल्दी से ऑफिस चलो...

प्रिंस को गुस्से में देख सब वहां से उठ के फ़ौरन ऑफिस के लिए निकल लेते हैं....

दोपहर को प्रिंस सब को कांफ्रेंस रूम में बुला के मीटिंग करता है फिर....

प्रिंस : मैक्स तैयारी कर ले आज शाम hi हम "सुल्तानगढ" के लिए निकालेंगे.... इस वक़्त मुझे एक बेहद ज़रूरी काम है उसे पूरा करके मैं तुझे घर पे आ के मिलता हूँ....

इस से पहले की कोई प्रिंस से कुछ कहता प्रिंस तेज़ी से बहार की तरफ चल देता है...

शाम को जब प्रिंस घर पे आता है तब वहां का हाल देख के वो बुरी तरह से चौंक जाता है.....????

अब आगे.....

वहां का हाल देख के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.....

प्रिंस : अबे ये क्या है....? तुझे मैंने अपना सामान पैक करने को कहा था न की पूरे शहर का....

मैक्स : ये मेरे अकेले के बैग नहीं हैं....

प्रिंस : तो फिर किसके हैं....?

मैक्स : अपने पीछे देख ले तुझे सब पता चल जाएगा....

मैक्स की बात सुन के प्रिंस ने जैसे hi पीछे पलट के देखा हैरत से उसकी आँखें बड़ी हो गयी..... सब वहां तैयार हो के बैठे थे....

प्रिंस : तुम सब yahan....aur ये तैयार हो के कहाँ जा रहे हो....?

ज़रा : वहीँ जहाँ तुम जा रहे हो.... अब साया तो अपने जिस्म के साथ hi जाएगा न.... और वैसे भी मैं तेरी जान होने के साथ साथ तेरी सिक्योरिटी गॉर्ड भी हूँ.... तो तेरी हिफाज़त के लिए मुझे तेरे साथ जाना hi है..... और वैसे भी मुझे पता है तू मेरे बिना कहीं जाएगा नहीं तो तेरे कहने से पहले hi तेरे मन की बात जान के मैं पहले hi तैयार हो गयी.... देखा मेरा दिमाग.... मैंने वक़्त और एनर्जी दोनों बचा ली.... हूँ न मैं स्मार्ट....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है.... फिर बाकी सब की तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : और तुम सब....?

प्रिंस की बात सुनते hi सब एक एक करके अपनी अपनी वजह बताने लगते हैं....

सैम : मेरे बगैर वहां प्लानिंग कौन करेगा....?

सैर : मेरे रहते तुझे किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होगी.... हथियार से ले के हैकिंग तक मैं हर चीज़ का इंतेज़्ज़म चुटकी में कर दूंगी....

विजय : वहां हो सकता है तुझे कभी रूप बदलने की ज़रुरत पद जाए... उसमे मैं तेरा पूरा साथ दूंगा....

सिमी : मैं आवाज़ बदलने में माहिर हूँ.... तुझे जब भी ज़रुरत पड़ेगी मैं आवाज़ बदलने में तेरी मदत करुँगी....

रूही : मैं तो तेरी रूह हूँ... और रूह तो जिस्म में hi हो होती है.... साथ hi कार हो चाहे बाइक.... स्पीड में मेरा मुक़ाबला कोई भी नहीं कर सकता.... तो मैं मुश्किल वक़्त पे हमेशा तेरे साथ hi रहूंगी.... साथ hi ज़रुरत पड़ने पे स्पीड से तेरे साथ सब को मुश्किल वक़्त में वहां से निकाल लुंगी....

यार तुम सब ये क्या कह रहे हो....? मैं वहां कोई जुंग लड़ने नहीं जा रहा हूँ... बल्कि अपने परिवार को ढूंढने जा रहा हूँ.... वहां मुझे न तो किसी सिक्योरिटी गॉर्ड की ज़रुरत है.... न hi प्लानिंग एक्सपर्ट की... न hi हथियार और हैकिंग की.... न hi रूप बदलने की.... न hi आवाज़ बदलने की.... न hi स्पीड की.... और अब तो मुझे किसी जासूस की भी ज़रुरत नहीं है.... साले खुद को जासूस कहता है... और एक काम भी तुझसे ठीक तरह से नहीं होता.... साले क्या ज़रुरत थी ढिंढोरा पीटने की चुप चाप नहीं चल सकता था क्या....?

मैक्स : इस में मेरी गलती नहीं है... तू ने hi कांफ्रेंस हॉल में सब के सामने सुल्तानगढ जाने की बात की थी भूल गया....

प्रिंस : हाँ तो हो जाती है गलती.... आफ्टर आल मैं भी इंसान हूँ....

ज़रा : इसीलिए तो हमारा तेरे साथ जाना और भी ज़्यादा ज़रूरी है.... हमारे रहते तू कभी गलती नहीं करेगा.... और अगर फिर भी तुझसे कोई गलती हो गयी तो हम उसे मिल के सुधार लेंगे....

प्रिंस : नहीं बात सिर्फ इतनी सी नहीं है.... बल्कि बात कुछ और hi है.... कुछ भयानक सी.... कुछ अजीब सी....

मैक्स : तू आखिर कहना क्या चाहता है....?

प्रिंस : चलो तुम सब मेरी एक बात का जवाब दो.... क्या कोई भी परिवार अपने खानदान के बेटे को बिना बात के जान से मारने की कोशिश कर सकता है....?

सब : नहीं....

प्रिंस : क्या किसी मासूम 8 साल के बचे की गलती इतनी बड़ी हो सकती है की उसे जान से मारा जाए....?

सब : नहीं....

प्रिंस : क्या कभी कोई माँ बाप अपने hi बेटे की जान लेने की कोशिश कर सकते हैं....?

सब : नहीं....

प्रिंस : क्या कभी कोई नानी बिना किसी बड़ी वजह के अपने नाती को उसके माँ बाप से उसके परिवार से दूर कर सकती है....?

सब : नहीं....

प्रिंस : ज़रूर इस सब के पीछे बहुत बड़ी वजह है.... एक राज़....

सब : राज़.... कैसा राज़....?

प्रिंस : वो राज़ क्या है नहीं पता....? मगर कोई राज़ तो ज़रूर है जो सुल्तानगढ के सीने में दफ़न है.... मुझे उस राज़ को जान न है.... उस सब सवाल के जवाब पता करने हैं.... और सब से ज़्यादा ज़रूरी अपने परिवार को ढूंढना है... वो भी ऐसे की किसी को कुछ भी पता न चले.... हम सब के एक साथ वहां जाने से किसी न किसी को हम सब पे शक ज़रूर हो सकता है.... तो बेहतर यही होगा की पहले मैं अकेले वहां जाऊं.... फिर एक एक कर के सब को वहां बुलाऊँ.... इस से किसी को कोई शक भी नहीं होगा और जो मैं चाहता हूँ वो भी हो जाएगा.....

रहना जो अब तक चुप चाप कड़ी सब की बात सुन रही....

रहना : मुझे लगता है प्रिंस ठीक कह रहा है.... ऐसा करने से बिनि किसी को कुछ भी पता चले प्रिंस आसानी से सब कर सकेगा.....

ज़रा : वो तो ठीक है मगर वहां प्रिंस का अकेले जाना भी तो ठीक नहीं.... अगर किसी ने इस्पे हुम्ला कर दिया तो....?

प्रिंस : चल ठीक है तू जो कहती है वो एक पल के लिए मान लेते हैं.... की हो सकता है कोई मुझपे हुम्ला कर सकता है.... वैसे तो मुमकिन नहीं है.... मगर फिर भी अगर किसी ने मुझे पे हुम्ला कर भी दिया तो तुझे क्या लगता है क्या होगा....? क्या प्रिंस इतना कमज़ोर है की उनका मुक़ाबला नहीं कर सकता....? क्या इस पूरी दुनिया में ऐसा कोई है जो प्रिंस को हरा सकता है....?

ज़रा : नहीं ऐसा इस पूरी दुनिया में कोई नहीं है....

प्रिंस : अच्छा अगर वो लोग 5 - 10 न हो के 50 हुए तो....?

ज़रा : वो 100 भी क्यों न हो प्रिंस का कुछ नहीं बिगाड़ सकते....

प्रिंस : सही कहा तू ने.... तो अब तू hi बता की जब 100 लोग मिल के भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते तो फिर कैसा दर....

मैक्स : चल ठीक है मान ली तेरी बात.... अब तू मुझे ये बता की अगर नानी को ये पता चल गया की तू सुल्तानगढ गया है तो सोच की तब क्या होगा.....?

प्रिंस : पहली बात तो ये की उन्हें ये बात बताएगा कौन....? और दूसरी अगर फिर भी उन्हें ये बात पता चल गयी तो....

मैक्स : हाँ तो....?

प्रिंस : अव्वल तो ऐसा होगा नहीं.... अगर फिर भी कहीं ऐसा हो गया तो मैं उन्हें ये कह दूंगा की अपनी कंपनी का नया ब्रांच खोलने मैं सुल्तानगढ आया हूँ.... इस से आगे न वो कुछ पूछेंगी और न मैं कुछ बताऊंगा....

ज़रा : और अगर नानी ने वहां ब्रांच खोलने से मन किया तो....?

प्रिंस : तो फिर उन्हें मुझे वहां ब्रांच न खोलने की वजह बतानी पड़ेगी.... अब वो ये तो नहीं कह सकती की वहां मेरा परिवार रहता है और वो नहीं चाहती की मैं अपने परिवार से मिलूं.... इस वजह से वो मुझे वहां नहीं रहने देना चाहती.... सिंपल.... बात वहीँ ख़तम हो जायेगी...

ज़रा : बात इतना भी आसान नहीं है जितना तू समझ रहा है.... नानी किसी न किसी तरह तुझे वहां से वापिस बुला hi लेगी.... वो ये कभी नहीं चाहेगी की उनका नाती ऐसे लोगों के बीच रहे जिन्होंने उनके नाती की जान लेने की कोशिश की....

प्रिंस : यही तो मैं जान न चाहता हूँ.... की वो क्या वजह थी की मेरे अपनों ने hi मेरी जान लेने की कोशिश की....?

ज़रा : मगर फिर भी अगर नानी को....

प्रिंस : अब कोई अगर मगर नहीं.... नानी को जब पता चलेगा तब का तब देखा जाएगा.... फिलहाल मुझे जल्द से जल्द वहां के लिए निकलना होगा....

वहां मौजूद कोई भी ये नहीं छह रहा है की प्रिंस अकेले सुल्तानगढ जाए.... वो सब उसके साथ जाना चाहते हैं मगर प्रिंस उन्हें फिलहाल साथ नहीं ले जाना चाहता इस बात से सब बेहद दुखी हैं.... मगर प्रिंस की बात भी सही है.... सब की आँखें नाम हैं सब के दिल में एक अनजाना सा दर समाया हुआ है.... सब के चेहरे उतरे हुए हैं....

प्रिंस : यार प्लीज मान भी जाओ.... तुम्हे क्या लगता है.... तुम सब को यहाँ चोर के जाने से मुझे ख़ुशी हो रही है.... नहीं जितना दुःख... जितनी तकलीफ तुम्हे हो रही है उस से कई ज़्यादा मुझे हो रही है.... मगर क्या करूँ जाना भी ज़रूरी है और फिर कुछ hi दिन की तो बात है... जल्द hi एक एक कर के तुम सब को वहां बुलवा लूंगा.... चलो अब अपने ये मुरझाये हुए चेहरे ठीक करो.... तुम सब को ऐसे देख जानते हो मुझे क्या लग रहा है....?

सब : क्या....?

विजय : यही न की जैसे की कोई दुल्हन विदा हो रही है और घर वाले उसके जाने से दुखी हैं....

विजय की बात सुन के सब के उतरे हुए चेहरे पे हंसी आ जाती है.... जब की प्रिंस के चेहरे पे गुस्से की लाली च जाती है...

प्रिंस : साले कमीने.... तुझे मैं दुल्हन नज़र आता हूँ.... साले दूल्हे को दुल्हन कहता है.... रूह अभी तुझे मार मार के दुल्हन बनता हूँ....

प्रिंस को गुस्से में देख दर के मारे विजय फ़ौरन वहां से निकल लेता है.....

प्रिंस एक एक कर के सब के गले मिल के वहां से जाने को तैयार हो जाता है...

वो गेट तक पहुंचा hi था की तभी रूही दौरति हुई उसके पास जाती है और उसका चेहरा अपने हाथों में ले के उसे किश करने लगती है.... ये देख वहां मौजूद सभी चौंक जाते हैं.... ज़रा का चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है वो आगे बढ़ के रूही को प्रिंस से अलग करना चाहती है मगर कर नहीं पाती... गुस्से में कड़ी रूही को देखती रहती है....

कुछ देर बाद रूही प्रिंस से अलग होती है.... प्रिंस मुद के वहां से जाने hi वाल होता है की तभी ज़रा उसे रोक के कहती है.....

ज़रा : प्रिंस एक मिनट रुकना तो....

सैर : क्यों तुझे भी प्रिंस को किश....

अभी सैर ने इतना hi कहा था की तभी ज़रा आगे बढ़ के रुमाल से प्रिंस के होंठों पे रूही के लिपस्टिक के निशाँ को पूछ के प्रिंस के होंठों को अपने होंठों में ले के उसे चूसने लगती है.... वो रूही से भी लम्बा किश करती है.... फिर जब उसकी साँसें फूलने लगती है तब जा के वो प्रिंस से अलग होती है....

ये देख रूही बुरी तरह से जल उठती है और प्रिंस को दोबारा किश करने आगे बढ़ती है.... मगर प्रिंस उसे वहीँ रोक देता है....

प्रिंस : यार ये क्या पागलपन है.... मैं क्या तुम दोनों को कोई कम्पटीशन की चीज़ लगता हूँ जो जीतने के लिए बार बार मुझे किश करने आ रही हो....

प्रिंस की बात सुन के रूही गुस्से में ज़रा को देख के कहती है....

रूही : तुझे तो मैं बाद में देखूंगी....

ज़रा भी कहा उस से पीछे रहने वाली है.... वो फ़ौरन उसकी बात का जवाब देती है जिसे सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

ज़रा : तू क्या मुझे देखेगी.... बस एक बार प्रिंस को जाने दे... फिर देख मैं तेरा क्या हाल करती हूँ....

बस फिर क्या था गुस्से में दोनों एक दूसरे को मारने के लिए एक दूसरे पे झपट पड़ती हैं....

प्रिंस फ़ौरन बीच में आ के उन्हें रोकता है.....

प्रिंस : तुम दोनों पागल तो नहीं हो गयी.... क्यों बेकार में लड़ रही हो....?

रूही : इसकी हिम्मत कैसे हुई तुम्हे किश करने की....?

ज़रा : ठीक वैसे hi जैसे तेरी हिम्मत हुई मेरी जान को किश करने की.... आइंदा अगर तू ने गलती से भी ये गलती की न तो फिर तू कभी कोई गलती करने लायक नहीं रहेगी...

रूही : अरे जा जा ये धमकियाँ किसी और को देना....

प्रिंस : बस बहुत हो गया.... अब अगर तुम दोनों में से किसी ने एक लफ्ज़ भी और कहा तो मैं उस से नाराज़ हो जाऊँगा.... उस से कभी बात नहीं करूँगा....

प्रिंस की बात सुन के दोनों फ़ौरन खामोश हो जाती हैं....

प्रिंस : तुम्हे क्या लगता है तुम दोनों को इस तरह मेरे लिए एक दूसरे से लड़ते देख मुझे अच्छा लगता है.... नहीं मुझे बेहद तकलीफ होती है.... मेरा दिल तड़प जाता है... जानती हो क्यों....? क्यों की तुम दोनों hi मुझसे जुड़ा नहीं हो.... एक मेरी रूह है तो एक मेरा साया.... तुम दोनों hi मेरे लिए 1 एक हो.... तुम दोनों में मेरे लिए कोई दूसरा नहीं है.... जब मैं तुम दोनों को 2 नहीं मानता तो फिर तुम क्यों खुद को 2 मानती हो.... दोनों hi मेरे जिस्म का हिस्सा हो.... तुम दोनों में से किसी के गलती से भी अलग होते hi मेरा ज़िंदा रहना मुश्किल हो जाएगा....

प्रिंस की बात सुन के दोनों का दिल तड़प जाता है दोनों एक साथ कहती हैं...

दोनों : ये तुम क्या कह रहे हो....?

प्रिंस : वही जो सच है.... अब तुम दोनों बताओ की तुम दोनों क्या चाहती हो.... एक दूसरे के साथ रह के मुझे ख़ुशी देना या फिर एक दूसरे के साथ झगड़ के अलग हो के मेरा ज़िंदा रहना मुश्किल करना....

दोनों : नहीं ऐसा तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकती....

प्रिंस : अगर ये सच है तो फिर एक दूसरे के गले लग के मुझसे ये वादा करो की दोनों फिर कभी नहीं लड़ेगी.... हमेशा hi हर बात में ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे का साथ डौगी....

अब ये कैसे मुमकिन है की सौतन एक दूसरे को अपना ले.... एक दूसरे के साथ खुश रहे.... जो आज तक नहीं हुआ वो अभी तो क्या कभी नहीं हो सकता.... मगर फिर भी प्रिंस का दिल रखने के लिए वो एक दूसरे के गले मिल के ये वादा करती हैं की वो कभी नहीं लड़ेंगी.... हमेशा hi हर बात में ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे का साथ देंगी....

प्रिंस : अच्छी बात है.... शुक्र है ऊपर वाले का की अब सब ठीक है... चलो अब मैं चलता हूँ....

ज़रा : ठीक है मगर एक बात याद रखना वहां जा के गलती से भी किसी और को पटाने की कोशिश भी की तो याद रखना.... (रूही को देख के) एक को तो मैंने बर्दाश्त कर लिया है.... मगर किसी और के साथ कुछ भी ऐसा वैसा किया न तो उसकी टांगें तो मैं बाद में टोरूँगी पहले तेरी टांगें तोड़ के तुझे अपने पास रख लुंगी ताकि तू कभी मुझे चोर के किसी और के पास न जा सके....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : अरे पागल लड़की.... मैं वहां अपने परिवार को ढूंढने जा रहा हूँ.... न की किसी और को पटाने.... समझी ...

ज़रा : मैं तो समझ गयी मगर तू मेरी बात समझा की नहीं....

प्रिंस : समझ गया मेरी माँ....

ज़रा : मैं तेरी माँ नहीं हूँ... बल्कि मैं तो तेरा साया हूँ.... जिसे तेरी हर बात की खबर रहती है....

ज़रा की बात सुन के सब हंस देते हैं वहीँ प्रिंस एक बार फिर से अपना सर पीट लेता है....

फिर इस से पहले कोई और कुछ कहता प्रिंस फ़ौरन वहां से निकल लेता है.... सब उसे तब तक जाते हुए देखते रहते हैं जब तक वो उनकी आँखों से ओझल नहीं हो जाता.... प्रिंस के जाने का दुःख सभी को है.... सब की आँखें नाम हैं... मगर इस बात की ख़ुशी भी है की जल्द hi वो सब प्रिंस के पास होंगे.... वो दिल hi दिल में ऊपर वाले से दुआ करने लगते हैं की प्रिंस उन्हें जल्द से जल्द अपने पास बुला ले.... दुखी तो इस वक़्त प्रिंस भी है.... न चाहते हुए भी उसे अपनों से दूर जाना पद रहा है... ताकि वो अपने परिवार को ढूंढ सके.... उनसे मिल सके और उनसे अपने सारे सवालों के जवाब मांग सके....

तो आइये चलते है प्रिंस के साथ उसके सफर पे जिसका नाम है....

"सुल्तानगढ"

....................?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 82 "सुल्तानगढ......"

ज़रा : मैं तेरी माँ नहीं हूँ... बल्कि मैं तो तेरा साया हूँ.... जिसे तेरी हर बात की खबर रहती है....

ज़रा की बात सुन के सब हंस देते हैं वहीँ प्रिंस एक बार फिर से अपना सर पीट लेता है....

फिर इस से पहले कोई और कुछ कहता प्रिंस फ़ौरन वहां से निकल लेता है.... सब उसे तब तक जाते हुए देखते रहते हैं जब तक वो उनकी आँखों से ओझल नहीं हो जाता.... प्रिंस के जाने का दुःख सभी को है.... सब की आँखें नाम हैं... मगर इस बात की ख़ुशी भी है की जल्द hi वो सब प्रिंस के पास होंगे.... वो दिल hi दिल में ऊपर वाले से दुआ करने लगते हैं की प्रिंस उन्हें जल्द से जल्द अपने पास बुला ले.... दुखी तो इस वक़्त प्रिंस भी है.... न चाहते हुए भी उसे अपने अपनों से दूर जाना पद रहा है... ताकि वो अपने परिवार को ढूंढ सके.... उनसे मिल सके और उनसे अपने सारे सवालों के जवाब मांग सके....

तो आइये चलते है प्रिंस के साथ उसके सफर पे जिसका नाम है....

"सुल्तानगढ"

....................?????

अब आगे.....

सुल्तानगढ के रहस्मयी सफर की शुरुवात......

प्रिंस चल देता है उस जगह की तरफ जहाँ उसका परिवार रहता है.... और वो जगह है सुल्तानगढ.....

जहाँ बहुत से राज़ दफ़न हैं और साथ hi मौजूद है मलिका सुनहरी..... जो सदियों से पलके बिछाये अपने सुलतान का इंतज़ार कर रही है.... इस उम्मीद से की एक दिन उसका सुलतान उसके पास लौट के ज़रूर आएगा.... सुलतान ने अपनी सुनहरी से वादा जो किया था..... चाहे जो हो जाए क़यामत hi क्यों न आ जाए.... वो अपनी जान मलिका सुनहरी के पास जरूर लौट आएगा.... वो अपनी जान मलिका सुनहरी की नाराज़गी दूर कर के उसे अपने सच्चे प्यार से खुद में समेत लेगा.... और बरसो के बिछड़े 2 प्रेमी हमेशा हमेशा के लिए एक हो जाएंगे....

ये सुनते hi बेगम साहिबा के होश उड़द जाते हैं....

बेगम साहिबा : ये आप क्या कह रहे हैं बाबा.....?

बाबा : वो hi जो नियति है...

बेगम साहिबा : लेकिन अगर ऐसा हुआ तो प्रिंस और पारी के सच्चे प्यार का क्या होगा....

पारी का नाम सुनते hi बाबा के चेहरे के भाव बदलने लगते हैं.... उनके चेहरे पे गुस्से की लाली छाने लगती है....

बाबा बेहद गुस्से में : क्या मतलब है ऐसे प्यार का जिसकी वजह से बेइन्तेहाँ दर्द सहते हुए मासूम प्रिंस को हर बार अपनी जान गावनि पड़े....? बताओ मुझे kyuuuuuuuuuunnnn....? आखिर उस मासूम की गलती hi क्या थी जो हर बार उसके साथ ऐसा हुआ.....? उस मासूम ने तो प्यार किया था न सच्चा प्यार.... फिर क्यों सिर्फ उसे hi उसके प्यार की खातिर अपनी जान कुर्बान करनी पड़ी....? प्रिंस hi क्यों.... ये पारी क्यों नहीं....? बताओ मुझे जवाब दो....

बाबा को इतने गुस्से में किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ भी कहने की.... सब दर के मारे वहां चुप चाप खड़े बाबा की बात सुन रहे हैं.... गुस्से में बाबा पारी को जान से मारने उसके पास जाते हैं.... पारी जो इस वक़्त बेहोश पड़ी है.... आज 2 दिन बीत जाने पे भी उसे होश नहीं आया है....

बाबा बेहद गुस्से में पारी के पास जाते है और अपने हाथ आगे बढ़ा के पारी का गाला कास के पकड़ के उसे दबाने की कोशिश करने लगते हैं.... उन्हें ऐसा करते देख वहां मौजूद सभी की रूह तक कांप जाती है.... सब अच्छे से जानते हैं की पारी के मरते hi प्रिंस की पावर्स उसके जिस्म से निकल के पूरे गुलिस्तां को तबाह कर देगी.... पारी के मरते hi वहां कोई ज़िंदा नहीं बचेगा.... न चाहते हुए भी सब मौत की गहरी नींद सो ने को मजबूर हो जाएंगे..... वो आगे बढ़ के बाबा को रोकना चाहते हैं मगर रोक नहीं पाते.... वो ये अच्छे से जानते हैं की बाबा के गुस्से के आगे कोई नहीं टिक सकता.... एक प्रिंस के सिवाए कोई उन्हें नहीं संभाल सकता.... कोई उनके गुस्से को शांत नहीं कर सकता.... बाबा को रोकना भी ज़रूरी है अगर उन्हें नहीं रोका गया तो गुलिस्तां को तबाह होने से कोई नहीं बचा पायेगा.... सब अभी ये सोच hi रहे थे की तभी.....

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इधर प्रिंस सुल्तानगढ की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है.... जैसे जैसे वो सुल्तानगढ के करीब जा रहा है.... उसके दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही है.... उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.... साथ hi उसके होंठों पे मुस्कराहट फैलती जा रही है....

रात भर के लम्बे सफर के बाद आखिर प्रिंस वहां पहुँच hi जाता है.... वो अपनी कार रोक के बहार निकलता है और एक तक बस सामने बड़े से पत्थर पे लिखे उस नाम को देखने लगता है.... वो नाम है सुल्तानगढ....

जी हाँ उस पत्थर पे शेर का चेहरा बना हुआ है और साथ hi एक नाम लिखा है सुल्तानगढ.....

इधर सुबह की पहली किरण खिड़की के अंडर आ के ख़्वाबों की दुनिया में खोयी हुई बेहद खूबसूरत सी लड़की के चेहरे पे पड़ती है.... वो मुस्कुरा के अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है....

लड़की : क्या कर रहे हो सुलतान....? सो ने दो न.... ये भी कोई तरीका है अपनी सोना को जगाने का.... चलो जाओ यहाँ se....mujhe अभी और सो न है.... रात भर तो तुमने मुझे सो ने नहीं दिया.... प्यार से रात भर मुझे देखते हुए खुद भी जागते रहे और मुझे भी जगाये रखा.... और देखो अब जब मैं गहरी नींद में सो रही थी तो आ गए मुझे जगाने.... चलो अब जाओ यहाँ से... और हाँ आज कोई शरारत मत करना.... न hi किसी करना.... हाँ हाँ मुझे पता है... मुझे किसी किये बिना तुम्हारी नींद नहीं खुलती... तुम्हारा दिन अच्छा नहीं जाता.... मगर आज नहीं.... आज मुझे बहुत नींद आ रही है.... आज तुम्हे कोई किसी नहीं मिलेगी.... जानते हो क्यों.... हाँ हाँ वो hi बता रही हूँ.... वो इस लिए क्यों की आज की किसी तुमने कल रात hi ले ली थी.... ये पहली बार नहीं है की तुम ऐसा कर रहे हो... ये तो अब तुम्हारी हमेशा की आदत सी हो गयी है.... रात में मुझे बातों में फसा के सुबह की किसी एडवांस में ले लेते हो और फिर सुबह होते hi फिर से किसी लेने आ जाते हो.... और मैं बावली तुम्हारे प्यार में खो के तुम्हे मन नहीं कर पाती.... मगर आज नहीं आज मैं तुम्हारी बातों में नहीं आ ने वाली.... चलो अब जाओ यहाँ से....

ये कह के वो मुस्कुराते हुए अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा के घूम के सो जाती है.....

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इधर प्रिंस काफी देर तक उस पत्थर पे बने शेर के चेहरे को और साथ hi उस नाम सुल्तानगढ को देखता रहता है.... फिर वो जैसे hi आगे बढ़ के अपना पहला कदम सुल्तानगढ की ज़मीन पे रखता है.... अचानक से वहां का मौसम बदल जाता है... आसमान में बिजलियाँ कड़कने लगती है..... पूरा सुल्तानगढ एक तेज़ रौशनी में चमक उठता है.... धीरे धीरे वो रौशनी तेज़ हो के एक जगह जमा होने लगती है.... धीरे धीरे वो एक गोले का रूप लेने लगती है और तेज़ी से प्रिंस की तरफ बढ़ने लगती है.... प्रिंस हैरत से बस एक तक उस रौशनी को देखे जा रहा है.... देखते hi देखते वो रौशनी प्रिंस के जिस्म में समां जाती है.... उसे एक तेज़ झाका सा लगता है..... फिर अचानक से शांत हो जाता है..... प्रिंस को कुछ समझ नहीं आ रहा है आखिर अभी जो भी कुछ हुआ वो क्या tha.....Prince अभी ये सोच hi रहा था की तभी तेज़ हवा उसके जिस्म से टकरा के दूसरी तरफ चली जाती है.... वो हवा जैसे hi प्रिंस के जिस्म से टकराती है.... प्रिंस के कान में किसी लड़की की प्यारी आवाज़ गूँज उठती है.... साथ hi उसे एक नाम सुनाई देता है....

सुलताआआआआ......

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इधर जैसे hi प्रिंस के कदम सुल्तानगढ की ज़मीन पे पड़ते हैं.... ख़्वाबों में खोयी सोना का जिस्म पूरी तरह से हिल जाता है... उसे फ़ौरन अपने सुलतान के आने का एहसास हो जाता है.... वो उसका नाम ले के छीकते हुए उठती है....

सोना : Sultaaaaaaaaaaaaaannnnnn.....

उठ के वो सुलतान को इधर उधर ढूंढने लगती है.... मगर सुलतान उसे कहीं नज़र नहीं आता.... वो परेशां हो जाती है और रोने लगती है....

सोना की चीख सुन के उसके घर वाले दौर के उसके रूम के पास आते हैं.... सोना को देख वो सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... एक तरफ जहाँ सोना की आँखों से आंसू बह रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ उसके होंठों पे हंसी है.... कुछ देर तक वो वैसे hi रोटी और साथ साथ हस्ती रहती है फिर धीरे धीरे उसकी आँखें बोझिल होने लगती है और वो बेहोश हो के बीएड पे गिर जाती है.... उसकी ऐसी हालत देख के दरवाज़े के पास खड़े हर शख्स का दिल तड़प जाता है.... वो उसके पास जाना चाहते हैं मगर वो मजबूर हैं.... छह के भी वो उसके पास नहीं जा पाते.... वो ये अच्छे से जानते हैं की सोना को किसी का भी उस कमरे में आ न पसंद नहीं है.... अगर कोई गलती से भी उस कमरे में जाता है तो समझ लो की क़यामत के साथ साथ उसकी सहमत भी आ गयी.....

सोना सब बर्दाश्त कर सकती है मगर किसी का उस कमरे में आना उसे बर्दाश्त नहीं है.... इस कमरे में वो किसी के साये को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती.... ये कमरा और यहाँ की हर एक चीज़ उसे अपनी जान से भी ज़्यादा अज़ीज़ है.... इस कमरे की हर एक चीज़ से उसे जितना प्यार है उतनी hi नफरत भी.... चलिए ज़्यादा सस्पेंस न बढ़ते हुए बता देता हूँ की ये कमरा और किसी का नहीं बल्कि सुलतान का है... हाँ सुलतान का.... उस सुलतान का जिस से इस घर का हर एक शख्स नफरत करता है बेइन्तेहाँ नफरत.... अब इस नफरत की वजह क्या है ये आगे पता चलेगा....

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इधर गुलिस्तां में बाबा को गुस्से में पारी का गाला दबाते देख वहां मौजूद सभी के होश उड़द जाते हैं.... किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा है की उन्हें कैसे रोके.... सब दर में मारे खड़े बस उन्हें पारी का गाला दबाते हुए देख रहे हैं.... सब को एक hi बात सत्ता रही है की अगर जल्द hi कुछ न किया गया तो अनर्थ हो जाएगा....

शलाका : B....B.... बेगम साहिबा कुछ कीजिये.... ये वक़्त चुप रहने का नहीं है... अगर जल्द hi उन्हें रोका न गया तो अनर्थ हो जाएगा.... पारी की जान चली जायेगी और गुलिस्तां के साथ साथ हम सब भी ख़तम हो जाएंगे.... प्रिंस की कुर्बानी बेकार हो जायेगी.... प्लीज कुछ कीजिये... रोकिये बाबा को....

सलाका की बात शूम के बेगम साहिबा भी बुरी तरह से घबरा जाती है.... उसे समझ में नहीं आ रहा है की बाबा को रोके तो रोके कैसे.....? तभी अचानक से उनके दिमाग में एक बात आती है.... और वो ज़ोर से प्रिंस का नाम ले के चीखती है....

बेगम साहिबा : Princeeeeeeeeeee.....

प्रिंस का नाम सुनते hi बाबा का गुस्सा काम हो जाता है और वो पारी का गाला चोर के दूर हैट जाते हैं.... साथ hi रोने भी लगते हैं....

बाबा को यूँ अचानक से रट देख सब एक बार फिर से चौंक जाते हैं....

बाबा : नहीं मैं नहीं मार सकता इसे.... मैं चहुँ तब भी नहीं.... इसे तो क्या मैं उन तीनो (रूही अवनि और वो जिसमे पारी का दिल है) को भी नहीं मार सकता.... इन्हे मारने का मतलब है प्रिंस को मारना.... मैं भला अपने प्रिंस को कैसे मार सकता हूँ.... वो तो मेरे लिए बेटे से भी बढ़ के है....

फिर अचानक से बाबा हसने लगते हैं....

हहहहहहहह.....

उनको यूँ हस्ते देख सब फिर से चौंक जाते हैं....

बेगम साहिबा : बाबा आप अचानक से रट रट यूँ हसने क्यों लगे....?

बाबा : मैं हंस नहीं रहा बल्कि खुश हो रहा हूँ.... जान न नहीं चाहोगे की मेरी ख़ुशी की क्या वजह है....?

सब हाँ में अपनी गर्दन हिला देते हैं....

बाबा : मेरी ख़ुशी की वजह है सुल्तानगढ... हाँ सुल्तानगढ....

प्रिंस सुल्तानगढ में दाखिल हो चूका है... वो वहां सुरक्षित है.... जब तक प्रिंस सुल्तानगढ में रहेगा.... तब तक वहां उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा.... न hi पारी और न hi वो तीनो.... सुल्तानगढ प्रिंस की हर तरह से हिफाज़त करेगा.... वो अपने प्रिंस को कुछ नहीं होने देगा.... मगर.....

बेगम साहिबा : मगर क्या बाबा....?

बाबा : मगर ये की सुल्तानगढ पहुँचते hi प्रिंस के सभी दुश्मनो को उसकी खबर लग गयी है.... और वो उसपे हुम्ला करने की तैयारी में लग गए हैं... इस से पहले की प्रिंस के साथ कुछ गलत हो.... मुझे जल्द hi प्रिंस के पास जाना होगा.... उसे उसकी पावर्स को पाना का तरीका बताना होगा.... साथ उसकी पावर्स को और साथ hi उसके जिस्म में जो नीलम पावर्स है उनपे काबू करना भी सीखना होगा.... जल्द hi मैं उसके पास जाऊँगा.....

************************************

प्रिंस हैरत से इधर उधर देखता है.... सामने का नज़ारा देख के उसे बड़ी हैरानी सी होती है..... सामने हवा चल रही है.... पेड़ मस्ती में झूमते हुए फूलों की बारिश कर रहे हैं..... देखते hi देखते सामने का रास्ता फूले से धक् जाता है.... प्रिंस के जिस्म पे फूल गिरने लगे हैं.... ये देख के ऐसा महसूस हो रहा है जैसे की बेहद hi आलिशान तकरीके से किसी राजा का स्वागत किया जा रहा है.... ये देख प्रिंस को बेहद ख़ुशी हो रही है.... उसके होंठों पे स्माइल आ जाती है.... वो एक पल के लिए उस में खो सा जाता है.... और उसके होंठों से अचानक hi एक लफ्ज़ निकलता है....

प्रिंस : सुनहरी.....

प्रिंस मुस्कुरा के अपनी बाहें फैला के सुनहरी.... कह के पुकारता है.... उसकी आवाज़ फ़िज़ा में गूंजने लगती है.... प्रिंस बार बार सुनहरी कह के पुकारने लगता है.... उसकी पुकार सुन के हवा और भी ज़्यादा तेज़ी से चलने लगती है.... पेड़ मदमस्त हाथी की तरह झूमने लगते हैं.... देखते hi देखते सामने के जंगल से जानवर आ के वहां जमा होने लगते हैं.... सब रोड के दोनों तरफ खड़े हो के प्रिंस के सामने अपना सर ऐसे झुकाते हैं जैसे प्रजा अपने राजा का सम्मान करने के लिए उसके सामने नतमस्तक होती है.... प्रिंस अभी भी इस खूबसूरती में खोया हुआ था की तभी किसी की आवाज़ शूम के उसकी तंत्र टूट टी है.... सामने का नज़ारा देख के दर के मारे प्रिंस की हालत खराब हो जाती है....

सामने से एक बेहद hi विशालकाय शेर दहाड़ते हुए आ रहा है.... उस शेर को देख प्रिंस के पसीने छूट जाते हैं.... वो कोई आम शेर न हो के एक बेहद hi विशालकाय शेर था.... कद काठी में वो शेर वो किसी बड़े हठी से काफी बड़ा जो था.... प्रिंस वहां से भागना चाहता है मगर भाग नहीं पाटा... उसके पेअर वहां जैम से जाते हैं.... धीरे धीरे शेर प्रिंस की तरफ बढ़ रहा है.... ये देख प्रिंस की हालत खराब हो जाती है.... वैसे तो प्रिंस किसी से नहीं डरता था.... मगर यहाँ वो बात नहीं थी.... कोई आम शेर होता तो एक बार प्रिंस उस से लड़ने की सोच भी लेता.... मगर यहाँ तो बात कुछ अलग hi है.... ये शेर इतना बड़ा है की एक hi वार में बड़े से बड़े हठी को भी पहाड़ के रख दे.... फिर उसके सामने प्रिंस तो मामूली चींटी के बराबर है.... शेर रुपी मौत को अपनी तरफ बढ़ते देख प्रिंस hi हालत बाद से बत्तर हो जाती है... बड़ी मुश्किल से वो अपनी हिम्मत बटोर के अपना कदम वहां से पीछे की तरफ बढ़ता है.... ये देखते hi शेर ज़ोर से दहाड़ता है..... जैसे की प्रिंस को चेतावनी दे रहा हो की वहां से हिलने की कोशिश भी मत करना.... अगर हिले तो.....?

शेर की बात समझ के प्रिंस अपने पेअर वहीँ रोक लेता है.... शेर प्रिंस के बेहद करीब पहुँचते hi उसपे छलांग लगा देता है.... और फिर जो होता है उसे देख प्रिंस के होश उड़द जाते हैं.... दर के मारे उसकी जान सूख झाती है.... लेकिन तभी अचानक hi.....???????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 83

सामने से एक बेहद hi विशालकाय शेर दहाड़ते हुए आ रहा है.... उस शेर को देख प्रिंस के पसीने छूट जाते हैं.... वो कोई आम शेर न हो के एक बेहद hi विशालकाय शेर था.... कद काठी में वो शेर वो किसी बड़े हठी से काफी बड़ा जो था.... प्रिंस वहां से भागना चाहता है मगर भाग नहीं पाटा... उसके पेअर वहां जैम से जाते हैं.... धीरे धीरे शेर प्रिंस की तरफ बढ़ रहा है.... ये देख प्रिंस की हालत खराब हो जाती है.... वैसे तो प्रिंस किसी से नहीं डरता था.... मगर यहाँ वो बात नहीं थी.... कोई आम शेर होता तो एक बार प्रिंस उस से लड़ने की सोच भी लेता.... मगर यहाँ तो बात कुछ अलग hi है.... ये शेर इतना बड़ा है की एक hi वार में बड़े से बड़े हठी को भी पहाड़ के रख दे.... फिर उसके सामने प्रिंस तो मामूली चींटी के बराबर है.... शेर रुपी मौत को अपनी तरफ बढ़ते देख प्रिंस hi हालत बाद से बत्तर हो जाती है... बड़ी मुश्किल से वो अपनी हिम्मत बटोर के अपना कदम वहां से पीछे की तरफ बढ़ता है.... ये देखते hi शेर ज़ोर से दहाड़ता है..... जैसे की प्रिंस को चेतावनी दे रहा हो की वहां से हिलने की कोशिश भी मत करना.... अगर हिले तो.....?

शेर की बात समझ के प्रिंस अपने पेअर वहीँ रोक लेता है.... शेर प्रिंस के बेहद करीब पहुँचते hi उसपे छलांग लगा देता है.... और फिर जो होता है उसे देख प्रिंस के होश उड़द जाते हैं.... दर के मारे उसकी जान सूख झाती है.... लेकिन तभी अचानक hi.....???????

अब आगे......

शेर हो या बब्बर शेर प्रिंस किसी से हार नहीं मान सकता.... छलांग लगा के शेर प्रिंस पे अपने तलवार जैसे नुकीले पंजो का वार करने hi वाला होता है की तभी प्रिंस अपने जिस्म की पूरी ताक़त अपने राइट हैंड में बटोर के एक तेज़ घुसा शेर के जबड़े पे मारता है..... और तभी अचानक से वहां फ़िज़ा में किसी लड़की की हंसी गूँज उठती है और माहौल बदल जाता है.... शेर के साथ साथ वहां मौजूद सभी जानवर ऐसे गायब हो जाते हैं की जैसे वो वहां कभी मौजूद थे hi नहीं.... यहाँ तक की उनके पैरों के निशाँ भी वहां की ज़मीन से गायब हो जाते हैं....

ये देख प्रिंस बेहद हैरान हो जाता है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर ये हो क्या रहा है.....? उसे कभी कुछ नज़र आ रहा है तो कभी कुछ.... ये कोई जादू है या फिर उसका भ्रम... उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है.... वो गहरी सोच में गम था की तभी किसी के हिलने से उसकी आँखें खुलती है.....

प्रिंस आँखें खोल के चौंक के अपने अगल बगल देखता है तो खुद को अपनी कार में बैठा पाटा है.... वो फ़ौरन सामने की तरफ देखता है.... वहां उसे कुछ नज़र नहीं आता.....

प्रिंस : क्या मैं सपना देख रहा था....? क्या वाकई में वो सब मैंने सपने में देखा था....? मगर वो सब तो बिलकुल सपने जैसा नहीं था.... मैंने उन फूलों को खुद पे गिरते हुए महसूस किया था.... उस हवा ने भी मुझे एक अलग सा hi एहसास कराया था..... वो लड़की के हसने की मीठी आवाज़ अभी तक मेरे कान में गूँज रही है.... वो जानवर और सब से बढ़ कर वो शेर.... कितना विशालकाय था वो.... जब उसने मुझपे छलांग लगायी तो एक पल में लिए मैं दर से कांप गया.... इस से पहले की वो मुझ पे हुम्ला कर पाटा मैंने अपने जिस्म की पूरी ताक़त को अपने हाथ में इकठ्ठा करके उसके जबड़े पे घूँसा मारा hi था की अचानक से वो सब वहां से ऐसे गायब हुए की.... जैसे वो वहां थे hi नहीं......

तभी अचानक से किसी ने उसका कन्धा पकड़ के उसे ज़ोर से हिलाया....

प्रिंस ने फ़ौरन मुद के पीछे की तरफ देखा.... वहां किसी को देख वो बुरी तरह से चौंक गया..... वो एक लड़की थी..... इस से पहले की प्रिंस उस से कुछ पूछता.....

लड़की : अरे होश में आओ.... और जल्दी से चलो यहाँ से इस से पहले की देर हो जाए....

प्रिंस : चलो....!!! कहाँ चलो....?

लड़की : हमारे घर और कहाँ.... अब जल्दी चलो....

प्रिंस : अबे तुम हो कौन और मेरी कार में कहाँ से आयी....? और तुम्हारे साथ ये कौन है....? और सब से बड़ी बात ये की तुम दोनों ने अपना चेहरा क्यों छुपाया हुआ है....?

लड़की : वो सब मैं तुम्हे रस्ते में बता दूंगी... पहले जल्दी से निकलो यहाँ से.... इस से पहले की और देर हो जाए.... हम आलरेडी काफी लेट हैं.... हम को तो रात में hi पहुँच जाना चाहिए था... मगर... अब चलो भी.... क्या यहीं बैठे बैठे पूरी बात जान लोगे.... जल्दी चलो मैं रस्ते में तुम्हे सब बता दूंगी....

प्रिंस : अबे ये क्या बात हुई जान न पहचान मियां जी सलाम..... मैं न hi तुम्हारा ड्राइवर हूँ और न hi ये तुम्हारी कार है.... ये मेरी कार है और ये मेरी मर्ज़ी से चलती है.... और ये अब तभी चलेगी जब तुम मुझे ये बताओगी की तुम हो कौन और तुम्हारे साथ ये कौन है....? इस का चेहरे क्यों ढाका हुआ है....? और तुम दोनों यहाँ कहाँ से आयी....? और तो और मेरी कार में क्या कर रही हो....?

लड़की : यार तुम भी अजीब लड़के हो.... एक लड़की तुमसे मदद मांग रही है.... उसकी मदद करने के बजाये तुम यहाँ बैठे बैठे सवाल पे सवाल किये जा रहे हो.... बड़े अजीब हो यार तुम तो.... मदद नहीं करनी तो बोल दो.... हम किसी और को ढूंढ लेंगे.... हम पहले hi काफी लेट हैं और तुम हो की बेकार की बात करके हमारा वक़्त बर्बाद कर रहे हो....

तभी उसकी बगल में बैठी लड़की धीरे से लेहती है....

लड़की 2 : यार जल्दी से कुछ कर.... कैसे भी कर के इसको चलने को राज़ी कर इस से पहले की और देर हो जाए.... अगर हम वक़्त पे घर नहीं पहुंचे तो समझ ले आज तो पक्का शामत आ जायेगी....

लड़की 1 : वो hi मैं करने की कोशिश कर रही हूँ मगर ये है की चलने के बजाये सवाल पे सवाल किये जा रहा है....?

लड़की 2 : रुक मैं कुछ करती हूँ.... (प्रिंस को देख के कहती है....) देखिये हम मुश्किल में हैं.... प्लीज आप हमारी मदत कीजिये और जल्द से जल्द हम को हमारे घर पहुंचा दीजिये.... मेरा यकीन कीजिये हम अच्छे घर की लडकियां हैं.... जल्दी से कार चलाइये मैं रास्ते में आपको सब बताती हूँ....

प्रिंस : सब सच बताना होगा...

लड़की 2 : हाँ बता दूंगी....

प्रिंस : चलो ठीक है... मगर आगे आ के बैठो....

लड़की 1 : आगे क्यों....?

प्रिंस : वो इस लिए की मैं तुम दोनों का ड्राइवर नहीं हूँ.... जो मालकिन की तरह दोनों पीछे बैठ गयी.... चलो जल्दी से आगे आओ....

लड़की 1 : नहीं हरगिज़ नहीं....

प्रिंस : तो फिर ये कार भी नहीं चलेगी....

प्रिंस की न सुन के दोनों बेचैन सी हो जाती हैं.... न चाहते हुए भी लड़की 2 आगे प्रिंस की बगल में बैतब जाती है....

लड़की 2 : लीजिये मैं बैठ गयी अब तो कार चलाइये प्लीसीएएएएए......

उस लड़की के मुँह से प्लीज सुन के प्रिंस जाने क्यों उसकी बात मान लेता है और कार को आगे बढ़ा देता है.... कार के चलते hi दोनों चैन की सांस लेती हैं.... कुछ देर चलने के बाद....

प्रिंस : चलो अब जल्दी से बताओ की आखिर माजरा क्या है....?

इस से पहले की लड़की 2 कुछ कहती लड़की 1 उसे अपनी तरफ खींच के धीरे से कहती है....

लड़की 1 : तू पागल तो नहीं हो गयी.... ये क्या करने जा रही है.... अगर तू ने इसे सब बता दिया और इसने घर वालो को तो पता है क्या होगा.... क़यामत आ जायेगी.... वो हिटलर हमारा खून पी जायेगी....

प्रिंस : ये क्या खुसर पुसार हो रही है.... जल्दी से अपनी बात शुरू करो कहीं ऐसा न हो की कार रुक जाए.....

लड़की 2 : नहीं वो तो मैं इसे कह रही थी की हम को तुम्हे सब सच सच बता देना चाहिए.... ताकि हमारी मदद करने में तुम्हे कोई प्रॉब्लम न हो....

लड़की 1 : ये तू....

लड़की 1 ने अभी इतना hi कहा था की लड़की 2 इसे आँख मार के कहती है....

लड़की 2 : हाँ यार हम को इसे अब सच बताना hi होगा....

लड़की 2 की बात समझ के लड़की 1 खामोश हो जाती है.... फिर लड़की 2 प्रिंस को एक मनघडंत कहानी सुनाने लग जाती है....

लड़की 2 : वो क्या है न हम यहाँ से 500 कम दूर अजबगढ़ में रहती है.... हम बहुत गरीब हैं.... वहां हमारे बापू के साथ साथ हमारी सौतेली माँ और उसकी 3 कामचोर बेटियां भी रहती हैं.... वो दिन रात हम दोनों मासूम बहनो से घर और बाहर का सारा काम कराती हैं.... बदले में हम को पेट भर खाना भी खाने नहीं देती... वो या तो हमे गालियां देती है या तो फिर मारती हैं.... माँ बेटियां सालो से दिन रात हम पे ज़ुल्म करती आयी हैं.... और अब तो उनके ज़ुल्म की इन्तेहाँ hi हो गयी.... जब पैसों के लालच में हमारी सौतेली माँ ने कमीने सरपच से हम दोनों बहनो का सौदा किया... उसने सरपच के शराबी बेटों से हम दोनों बहनो की शादी तय कर दी.... कल शाम ज़बरदस्ती वो हम दोनों बहनो की शादी सरपंच के शराबी और जुवारी बेटों से करने वाली थी.... तभी मौका देख हम वहां से भाग आयी.... जब ये बात उन लोगों को पता चली तो वो हम को पकड़ने हमारे पीछे लग गए बड़ी मुश्किल से हम उनसे बच के यहाँ आ गयी.... यहाँ मेरी दूर की मासी रहती है... वो हम दोनों बहनो को अपनी बेटी की तरह hi मानती हैं.... हम उन्ही के पास जा रही हैं.... अब उनके सिवाए हमारा इस दुनिया में और है hi कौन....?

ये कह के वो लड़की झूट मूट का रोने लगती है ताकि प्रिंस उसकी झूटी कहानी को सच मान ले....

प्रिंस : कहानी तो तुमने काफी अच्छी बनायीं है..... वैसे किस फिल्म से कॉपी की है....?

प्रिंस की बात सुन के लड़की 2 चौंकते हुए प्रिंस की तरफ देखती है फिर खुद को संभालते हुए रट हुए कहती है....

लड़की 2 : हमारी तकलीफ तुम्हे कहानी लग रही है....

प्रिंस : वैसे झूट मैं बोलता नहीं और सच तुम कह नहीं रही....

लड़की 2 : सच यही है की....

तभी लड़की 1 कहती है....

लड़की 1 : जी आप लेफ्ट में कार मोड़ दीजिये... हमारा घर आ गया.... ( फिर अपनी जुबां को दांतो टेल दबाते हुए) मेरे कहने का मतलब है की हमारी मासी का घर आ गया....

प्रिंस : हमारा घर हाँ....

लड़की 2 फ़ौरन बात को संभालती हुई कहती है....

लड़की 2 : अरे आप समझे नहीं मासी का घर भी तो हमारा घर hi हुआ न...

प्रिंस : अच्छा....

लड़की 2 : आप हम को यहीं उतार दीजिये... यहाँ से हम पैदल hi चली जाएंगी.....

फिर प्रिंस सामने जब घर को देखता है तो उसे बड़ी हैरानी होती है.... फिर वो पलट के उन दोनों की तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : तुम तो कह रही थी की तुम लोग बहुत गरीब हो.... और ये घर तो काफी आलिशान है.... आखिर बात क्या है... सच सच बताओ नहीं तो....

लड़की 2 : नहीं तो क्या हाँ....? तुम हमारे hi घर में आ के हम को hi धमकी दे रहे हो....?

प्रिंस : वाह यार तुम्हारे तो तेवर hi बदल गए.... अभी कुछ देर पहले तो बड़ी मिन्नतें कर रही थी और अब देखो.... उल्टा चोर कोतवाल को दांत रही है....

लड़की 1 : चोर किसे कहा बे....?

प्रिंस : क्या बात है....? आप से सीधे बे पे उतर आयी.... तुम्हारे तो तेवर hi नहीं संभल रहे.... अब तो तुम दोनों का दिमाग ठिकाने लगाना hi पड़ेगा.... अब ये कार घर के अंडर जा के hi रुकेगी... मैं अब तुम्हारी सो कॉल्ड मासी को खुद अपने मुँह से सब सच बाटूंगा.... आखिर उन्हें भी तो पता चले की उनकी बेहेन की मासूम बच्चियों पे कैसा ज़ुल्म हो रहा है....

लड़की 2 : नहीं प्लीज ऐसा कुछ मत करना... प्लीज.....

प्रिंस : ये तुम दोनों को मुझसे बदतमीज़ी करने से पहले सोचना चाहिए था....

अभी दोनों कुछ कहने hi वाली होती हैं की तभी प्रिंस कार को उनके घर के गेट के पास रोक के ज़ोर से हॉर्न बजने लगता है....

हॉर्न की आवाज़ सुन के दर के मारे दोनों की हालत खराब हो जाती है.... वो झुक के खुद को कार में छुपाने की कोशिश करने लगती हैं.... तभी दरवाज़ा खुलता है और एक आदमी घर के बाहर आता है.... वो और कोई नहीं इन दोनों लड़कियों के डैड हैं... अपने डैड को देख के दोनों की हालत खराब हो जाती है.... दोनों के मुँह से एक साथ धीरे से निकल जाता है डैड... जिसे सुन के प्रिंस के होंठों पे मुस्कराहट फैल जाती है...

प्रिंस बहार आके उन्हें बड़े अदब से उन्हें सलाम करता है....

आदमी : जी मैंने आपको पहचाना नहीं... आप यहाँ किस से मिलने आये हैं....?

आदमी की बात सुन के प्रिंस पलट के कार की तरफ देखता है.... और मुस्कुराते हुए कार में छुपी लड़कियों को इशारा करता है... की बता दूँ....

लड़की मासूम सी रोनी शकल बना के हाथ जोड़ के ना में अपनी गर्दन हिलती है.... प्रिंस उसे देख के मुस्कुराते हुए उसे अपने कान पकड़ने का इशारा करता है.... पहले तो वो लड़की गुस्से में ना में अपनी गर्दन हिलती है... मगर जब प्रिंस उसे इशारे से उसके डैड को सच बताने की बात करता है तो मजबूरन वो लड़की अपने कान पकड़ के उसे सॉरी कहती है....

इधर प्रिंस को कुछ न कहते देख वो आदमी....

आदमी : ये आप अपनी कार की तरफ देख के मुस्कुरा क्यों रहे हैं....?

प्रिंस फ़ौरन पलट के उनकी बात का जवाब देता है.....

प्रिंस : जी वो बस ऐसे hi....

आदमी : क्या ऐसे hi....? ऐसे hi भला कोई किसी के घर आता है क्या....?

प्रिंस : जी आप समझे नहीं.... मेरे कहने का मतलब ये है की मुझे रसूल चाचा ने बताया था की आप अपने घर के साइड का हिस्सा किराये पे देना चाहते हैं मैं उसी सिलसिले में यहाँ आया हूँ....

आदमी : हाँ रसूल का फ़ोन आया था उसने बताया की कोई घर देखने आने वाला है.... मगर तुम इतनी सुबह सुबह आ जाओगे ये नहीं कहा था उसने....

प्रिंस : जी अब इसमें सुबह क्या और शाम क्या....? मेरा ये मान न है की जो काम वक़्त पे पूरा हो जाए वो hi सही है.... क्या मैं घर का वो हिस्सा देख सकता हूँ....?

आदमी : जी हाँ क्यों नहीं.... वैसे मेरा नाम इमरान अली है....

प्रिंस हाथ आगे बढ़ा के कहता है....

प्रिंस : जी मेरा नाम प्रिंस है....

प्रिंस के मुँह से उसका नाम सुन के कार में बैठी दोनों लड़कियां मुँह बनाते हुए कहती है....

दोनों : प्रिंस तो ऐसे कह रहा है जैसे सही में कहीं का प्रिंस हो.... देखने में तो एक नंबर का चोर लगता है....

दोनों की बात सुन के प्रिंस पलट के कार की तरफ जाता है और कार के आधे खुले काले शीशे से अंडर झांके के कहता है.... देखने में तो तुम दोनों काफी हसीं लगती हो मगर हो पूरी चुड़ैल....

प्रिंस के मुँह से अपनी तारीफ सुन के पहले तो दोनों खुश हो जाती है मगर जैसे hi प्रिंस उन्हें चुड़ैल कहता है गुस्से में उनका चेहरा तमतमा जाता है.... वो गुस्से में आगे बढ़ के प्रिंस का मुँह नोचना चाहती हैं.... मगर वो ऐसा कर नहीं पाती.... अपने डैड के दर से दोनों अपना गुस्सा दबा के कहती हैं....

दोनों : तुम्हे तो हम बाद में देख लेंगे...

प्रिंस : अब तो यहीं रहना है.... रोज़ देखती रहना....

दोनों : तुम्हे हम यहाँ रहने देंगे तब न तुम यहाँ रहोगे....

प्रिंस : मुझे यहाँ से निकलना अब मुमकिन नहीं... क्यों की प्रिंस ने एक बार जो बात ठान ली उसे कोई नहीं बदल सकता....

दोनों : सकल बन्दर जैसी और बातें टाइगर जैसी....

प्रिंस : टाइगर जैसी नहीं बल्कि मैं टाइगर hi हूँ..... जल्द hi दोनों को पता चल जाएगा... जंगली बिल्लियां....

प्रिंस के मुँह से अपने लिए जंगली बिल्लियां सुन के गुस्से में दोनों का चेहरा लाल हो जाता है.... वहीँ अपने डैड की आवाज़ सुन के फ़ौरन सफ़ेद भी हो जाता है... उनके चेहरे के बदलते रंग को देख प्रिंस की हंसी छूट जाती है...

प्रिंस : वाओ यार तुम दोनों तो गिरगिट से भी ज़्यादा फ़ास्ट हो.... तुम दोनों का रंग पल पल में बदल जाता है....

फिर उन्हें आँख मार के कहता है....

प्रिंस : वैसे एक बात सच है की गुस्से में तुम दोनों और भी ज़्यादा हसीं और खूबसूरत लगती हो....

प्रिंस को यूँ देख के वो इमरान एक बार फिर से चौंक जाता है.... और उसे आवाज़ दे के कहता है....

इमरान : ये तुम फिर से अपनी कार से क्या बातें करने लगे....?

अपने डैड की आवाज़ सुनते hi दोनों लडकियां फ़ौरन नीचे दुबक जाती है और प्रिंस पलट के उनकी तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : जी वो मैं कार से बातें नहीं कर रहा बल्कि कार में मेरा मोबाइल रह गया था.... वो hi ले रहा था....

इमरान : ले लिया हो तो अब चलें....

प्रिंस : हाँ हाँ... ज़रूर...

इमरान प्रिंस को घर के उस हिस्से में लेजा के उसे दिखता है.... प्रिंस को वो हिस्सा काफी पसंद आता है....

प्रिंस : जी काफी खूबसूरत घर है आपका.... मुझे ये घर पसंद aaya....Aaj से मैं यहाँ रहना चाहूंगा....

इमरान : मैं पेपर्स बनवा लेता हूँ....

प्रिंस : जी उसकी ज़रुरत नहीं.... मैं पेपर्स साथ लाया हूँ.... मैंने इनपे सिग्न कर दिया हैं.... अब बस आप के सिग्न की ज़रुरत है....

इमरान : हैरत है यार घर देखने से पहले hi तुमने पेपर्स बनवा लिए थे....?

प्रिंस : जी वो क्या है की रसूल चाचा के मोबाइल में घर के फोटे और वीडियो देखते hi मुझे ये घर पसंद आ गया था.... तो मैंने सोचा वक़्त बर्बाद करने से अच्छा है की क्यों का पेपर्स बनवा के साथ ले चलूँ.... इस से काम जल्दी हो जाएगा और मैं जल्द से जल्द आगे का काम शुरू कर पाऊंगा...

इमरान : आगे का काम मतलब....?

प्रिंस : जी वो क्या है की मैं यहाँ एक छोटी सी कंपनी खोलने आया हूँ.... जिसका काम मुझे जल्द से जल्द शुरू करना है.....

इमरान : अच्छा एक बात पूछूं अगर बुरा न लगे तो....?

प्रिंस : हाँ हाँ पूछिए न....

इमरान : यहाँ हमारे घर से भी कई ज़्यादा खूबसूरत और बहुत सस्ते घर हैं यहाँ जो किराये पे मिल सकते हैं तो फिर तुमने इसी घर को hi किराये पे लेने के लिए hi क्यों चुना.....?

प्रिंस मन में : वो इस लिए क्यों की मेरे यहाँ रहने से किसी को मुझ पे शक नहीं होगा क्यों की ये घर शहर के कुछ अलग हैट के है.... यहाँ से मैं अपना काम आसानी से पूरा कर सकूंगा....

प्रिंस को कुछ न कहते देख इमरान एक बार फिर से अपना सवाल दोहराता है... जिसके जवाब में प्रिंस जो कहता है उसे सुन ने के बाद इमरान उस से आगे कुछ नहीं पूछता...

प्रिंस : जी आप जो कह रहे हैं वो सही है... मगर इस घर को पसंद करने के पीछे दो वजह है.... पहली ये की आपका ये घर शहर की भीड़ भाड़ से हैट के है.... यहाँ काफी सुकून है.... और मुझे सुकून बेहद पसंद है.... और दूसरी वजह ये की मुझे अपनी कंपनी के लिए जैसी जगह चाहिए वो आपके इस घर से काफी करीब है.... तो इस तरह से यहाँ रह के मैं अपनी कंपनी का काम भी आसानी से शुरू कर पाऊंगा....

प्रिंस की बात सुन के इमरान मुस्कुरा देता है....

प्रिंस : अब आप भी जल्दी से इस्पे सिग्न कर दीजिये ताकि मैं आज से hi यहाँ रहना शुरू कर दूँ....

इमरान : ये सब मेरे बड़े भाई अरबाज़ अली देखते हैं.... तो इनपे वो hi सिग्न करेंगे.... तुम यहाँ रोको मैं उनके सिग्न ले के अभी आता हूँ....

ये कह के इमरान जाने लगते हैं.... प्रिंस उन्हें रोक के उन्हें एक लिफाफा दे के कहता है....

प्रिंस : जी आप उन्हें ये लिफाफा भी दे दीजियेगा.... इसमें डिपोसिट और रेंट के चेक हैं....

इमरान वो लिफाफा ले के अपने भाई अरबाज़ अली का सिग्न लेने चल देते हैं....

इधर इमरान के जाते hi वो दोनों लडकियां भी चुपके से अपने घर में घुस जाती हैं....

इमरान अपने बड़े भाई के पास आ के उन्हें पूरी बात बताते हैं.... जिसे सुन के अरबाज़ को ख़ुशी होती है.... वो काफी दिन से अपने घर के उस हिस्से को किराये पे देना छह रहे थे.. मगर शहर से दूर होने की वजह से वहां कोई रहना नहीं छह रहा था.... आज जब उसके लिए किरायेदार मिल गया तो वो बेहद खुश हो गए.... मगर जैसे hi वो उन पेपर्स को पड़ते हैं हैरत से उनकी आँखें बड़ी हो जाती हैं.... वो फ़ौरन प्रिंस से मिलने के लिए चल देते हैं....

इमरान : प्रिंस इनसे मिलो ये मेरे भाई अरबाज़ हैं... और भाई ये है प्रिंस जो हमारा ये घर रेंट पे लेना चाहता है.....

अरबाज़ प्रिंस को ऊपर से नीचे की तरफ देखते हैं फिर कुछ सोचने लगते हैं....

प्रिंस : क्या बात है....? आप मुझे इस तरह क्यों देख रहे हैं....?

अरबाज़ : देख नहीं रहा बल्कि सोच रहा हूँ की जिस घर का डिपाजिट 40 लाख और रेंट 2 लाख से ज़्यादा नहीं होना चाहिए उसे तुम 1 करोड़ डिपोसिट और 5 लाख महीने के रेंट पे क्यों ले रहे हो....? और इतना hi नहीं बल्कि 2 साल का रेंट तुम एडवांस में क्यों दे रहे हो....? ये बात मेरी समझ में नहीं आयी....?

अरबाज़ की बात सुन के प्रिंस मुस्कुरा के कहता है....

प्रिंस : सिंपल सी बात है.... जैसा की मैंने बताया की मैं यहाँ अपनी कंपनी खोलने आया हूँ.... और जिस जगह मैं अपनी कंपनी खोलने वाला हूँ वो जगह यहाँ से बेहद करीब है... और आपका ये घर शहर से थोड़ी दुरी पे होने की वजह से यहाँ भीड़ भाड़ भी नहीं है.... जो मुझे बेहद पसंद है.... और मैं नहीं चाहता की बार बार मुझे घर बदलना पड़े जो की अक्सर होता है.... और शायद यहाँ भी हो.... आपको कोई ज़्यादा रेंट देने वाला मिल जाए और आप मुझे यहाँ से जाने को कह दे.... तो इस से बेहतर यही है की मैं आपको पहले hi इतना रेंट दे दूँ की और कोई उस से ज़्यादा न दे सके.... इस तरह से आप को सुकून रहेगा और मुझे भी बार बार घर बदलने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी....

प्रिंस की बात दोनों भाई की समझ में आ जाती है.... अरबाज़ पेपर्स पे सिग्न कर के प्रिंस को दे देते हैं....

अरबाज़ : लो आज से घर का ये हिस्सा 2 साल के लिए तुम्हारा हुआ.... अब तुम यहाँ आराम से रह सकते हो.... और हाँ किसी चीज़ की ज़रुरत हो तो बेझिझक मुझसे कह सकते हो....

प्रिंस : जी ज़रूर....

अरबाज़ : एक बात मेरी समझ में नहीं आयी.... तुम इतनी छोटी उम्र में ये सब कर रहे हो..... ये उम्र तुम्हारे पड़ने की है... पढ़ने के बजाये तुम कंपनी खोलना चाहते हो.... ये बात कुछ समझ नहीं आयी....

उनकी बात सुन के प्रिंस वो कहता है जिस से उन्हें कोई शक भी न हो.... और वो उस से कोई सवाल भी न करें...

प्रिंस : जी आपने ठीक कहा मेरी उम्र पढ़ने की है... और मैं अभी पढ़ भी रहा हूँ.... और साथ hi कंपनी भी खोल रहा हूँ.... जब मेरी पढ़ाई पूरी हो जायेगी तब मेरी कंपनी भी अच्छी चलने लगेगी.... और फिर मैं पूरी तरह से उसे आगे बढ़ने में लग जाऊँगा.... ताकि वो आस्मां की ऊंचाइयों को चूमे.... मैंने यहाँ के .......... कॉलेज में अड्मिसिशन ले लिया है... 2 दिन बाद से कॉलेज जाने लगूंगा और कॉलेज के साथ साथ कंपनी का काम भी शुरू कर दूंगा.....

प्रिंस की बात सुन के दोनों भाई खाफी प्रभावित होते हैं.... वो उसकी तारीफ किये बिना रह नहीं पाते..... फिर वो दोनों अपने घर की तरफ चले जाते हैं और प्रिंस फ्रेश होने चल देता है....

नहाने से पहले वो अपने कपडे निकालने के लिए जैसे hi अपना बैग खोलता है... उसके होश उड़द जाते हैं.... पहले तो उसे गुस्सा आता है फिर अचानक से उसके चेहरे पे हंसी फैल जाती है और वो.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 84

प्रिंस : जी आपने ठीक कहा मेरी उम्र पढ़ने की है... और मैं अभी पढ़ भी रहा हूँ.... और साथ hi कंपनी भी खोल रहा हूँ.... जब मेरी पढ़ाई पूरी हो जायेगी तब मेरी कंपनी भी अच्छी चलने लगेगी.... और फिर मैं पूरी तरह से उसे आगे बढ़ने में लग जाऊँगा.... ताकि वो आस्मां की ऊंचाइयों को चूमे.... मैंने यहाँ के .......... कॉलेज में अड्मिसिशन ले लिया है... 2 दिन बाद से कॉलेज जाने लगूंगा और कॉलेज के साथ साथ कंपनी का काम भी शुरू कर दूंगा.....

प्रिंस की बात सुन के दोनों भाई खाफी प्रभावित होते हैं.... वो उसकी तारीफ किये बिना रह नहीं पाते..... फिर वो दोनों अपने घर की तरफ चले जाते हैं और प्रिंस फ्रेश होने चल देता है....

नहाने से पहले वो अपने कपडे निकालने के लिए जैसे hi अपना बैग खोलता है... उसके होश उड़द जाते हैं.... पहले तो उसे गुस्सा आता है फिर अचानक से उसके चेहरे पे हंसी फैल जाती है और वो.....?????

अब आगे.....

चलिए चल के पता करते हैं की सोना का क्या हाल है....

इधर जैसे hi प्रिंस के कदम सुल्तानगढ की ज़मीन पे पड़ते हैं.... ख़्वाबों में खोयी सोना का जिस्म पूरी तरह से हिल जाता है... उसे फ़ौरन अपने सुलतान के आने का एहसास हो जाता है.... वो उसका नाम ले के छीकते हुए उठती है....

सोना : Sultaaaaaaaaaaaaaannnnnn.....

उठ के वो सुलतान को इधर उधर ढूंढने लगती है.... मगर सुलतान उसे कहीं नज़र नहीं आता.... वो परेशां हो जाती है और रोने लगती है....

सोना की चीख सुन के उसके घर वाले दौर के उसके रूम के पास आते हैं.... सोना को देख वो सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... एक तरफ जहाँ सोना की आँखों से आंसू बह रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ उसके होंठों पे हंसी है.... कुछ देर तक वो वैसे hi रोटी और साथ साथ हस्ती रहती है फिर धीरे धीरे उसकी आँखें बोझिल होने लगती है और वो बेहोश हो के बीएड पे गिर जाती है.... उसकी ऐसी हालत देख के दरवाज़े के पास खड़े हर शख्स का दिल तड़प जाता है.... वो उसके पास जाना चाहते हैं मगर वो मजबूर हैं.... छह के भी वो उसके पास नहीं जा पाते.... वो ये अच्छे से जानते हैं की सोना को किसी का भी उस कमरे में आ न पसंद नहीं है.... अगर कोई गलती से भी उस कमरे में जाता है तो समझ लो की क़यामत के साथ साथ उसकी सहमत भी आ गयी.....

सोना सब बर्दाश्त कर सकती है मगर किसी का उस कमरे में आना उसे बर्दाश्त नहीं है.... इस कमरे में वो किसी के साये को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती.... ये कमरा और यहाँ की हर एक चीज़ उसे अपनी जान से भी ज़्यादा अज़ीज़ है.... इस कमरे की हर एक चीज़ से उसे जितना प्यार है उतनी hi नफरत भी.... चलिए ज़्यादा सस्पेंस न बढ़ते हुए बता देता हूँ की ये कमरा और किसी का नहीं बल्कि सुलतान का है... हाँ सुलतान का.... उस सुलतान का जिस से इस घर का हर एक शख्स नफरत करता है बेइन्तेहाँ नफरत.... अब इस नफरत की वजह क्या है ये आगे पता चलेगा....

सब परेशान हो जाते हैं उन्हें समझ नहीं आ रहा है आखिर करे तो क्या करे...? तभी वो होता है जिसे देख सब घबरा जाते हैं.... सोना की माँ जमीला का दिल अपनी बेटी सोना की ऐसी हालत देख के तड़प जाता है... वो फ़ौरन दौर के उसके पास जाती है और उसके सिरहाने बैठ के उसके सर को अपनी गॉड में ले उसे होश में लाने की कोशिश करने लगती है... जमीला को रूम में देख सब बुरी तरह से घबरा जाते हैं..... कोई भी आगे नहीं जाना छह रहा है.... उन्हें दर है की अगर सोना होश में आ गयी और सब को इस में उसने देख लिया तब तो वो कोहराम मचा देगी..... ये रूम और किसी का नहीं बल्कि सुलतान का है जिस से सब बेइन्तेहाँ नफरत करते हैं.... खुद सोना भी मगर जाने कभी कभी उसके साथ ऐसा होता है की वो सुलतान के रूम में खींची चली आती है और वहां बैठ के सुलतान की तस्वीर बनाने लगती है..... तस्वीर को बनाते वक़्त एक तरफ सोना का चेहरा गुस्से में लाल रहता है तो दूसरी तरफ उसके होंठों पे प्यार स्माइल उभर आती है.... सुलतान की तस्वीर को देख उसे गुस्से भी आ रहा है और प्यार भी.... पिछले 10 साल में सोना ने न जाने सुलतान की कितनी तस्वीर बना डाली है....

जमीला : वहां खड़े देख क्या रहे हो... जल्दी से मेरी बेटी को इस नरक से निकाल के उसके रूम में ले चलो और कोई डॉ को बुलाओ जल्दी....

जमीला की बात सुन के सोना के डैड फ़ौरन अंडर रूम में आते हैं और अपनी बेटी को उठा के उसके रूम में ले जाते हैं....

कुछ देर में डॉ वहां आ जाते हैं और सोना का चेक उप करने के बाद उसे इंजेक्शन लगा दे ते हैं....

जमीला : डॉ क्या हुआ मेरी बेटी को.....?

डॉ : वो अभी ठीक है... मैंने इंजेक्शन दे दिया है जल्द hi वो होश में आ जायेगी....

जमीला : मगर मेरी बेटी को अचानक से ये क्या हो गया....?

डॉ : शायद उसे किसी बात का गहरा सदमा लगा है... या फिर कोई बहुत बड़ी ख़ुशी का उसे एहसास हुआ है.... जिसकी वजह से उस का ब्लड प्रेशर बहुत हाई हो गया और वो बेहोश हो गयी..... घबराइए मत वो जल्द hi होश में आ जायेगी.... मगर हाँ इस बात का ख़ास ख़याल रखियेगा की आइंदा उसके साथ ऐसा कुछ न हो... उसे इस वक़्त हर तकलीफ से दूर रखिये....

ये कह के डॉ वहां से चले जाते हैं....

जमीला अपनी बेटी सोना के सीने से लिपट के रोने लगती है....

इधर प्रिंस अपना मोबाइल ों करता है और उसमे देखते हुए मुस्कुराने लगता है.... फिर ज़रा को कॉल लगता है.... रिंग जा रही है मगर ज़रा कॉल रइवे नहीं कर रही.... रात भर उसने प्रिंस की याद में रात गुज़ारी थी.... प्रिंस को याद करते करते वो गहरी नींद में बेखबर सोई हुई है..... उसे मोबाइल की रिंग सुनाई hi नहीं दे रही....

प्रिंस बार बार उसे कॉल कर रहा है मगर ज़रा है की उठने का नाम hi नहीं ले रही.... प्रिंस ज़ोर से ज़रा का नाम ले के चीखता है....

प्रिंस की आवाज़ सुन के ज़रा हड़बड़ा के उठ जाती है और इधर उधर देखने लगती है..... जैसे की प्रिंस को ढूंढ रही हो.....

प्रिंस : अबे चिपकू चुहिया इधर उधर क्या देख रही है.... फ़ोन उठा जल्दी....

प्रिंस की आवाज़ सुन के ज़रा की नज़र सामने पड़े अपने मोबाइल पे पड़ती है..... जिसमे किसी का कॉल आ रहा है.... ज़रा लपक के मोबाइल उठा के कॉल रइवे करती है....

ज़रा : Hello....

प्रिंस : Hello की बच्ची.... मैं कब से तुझे फ़ोन लगा रहा हूँ और तू है की घोड़े बेच के सो रही है.....

ज़रा : हाँ तो सौं नहीं तो और क्या करूँ.....? रात भर तेरी मीठी यादों ने सोने नहीं दिया और अब जब नींद आयी तो तू ने कॉल करके मुझे उठा दिया.... वैसे है मैं सड़के जाऊं मेरी जान को आखिर मेरी याद आ hi गयी.... एक पल भी तुझसे मेरे बिना नहीं रहा गया न..... हाँ यार ये प्यार चीज़ hi ऐसी है.... हर पल दिल चाहता है की अपनी जान की बाहों में रहूं....

प्रिंस : सुबह हुई नहीं की तुझपे प्यार का भूत सवार हो गया....

ज़रा : और नहीं तो क्या....? अब तो ये भूत मरने के बाद भी नहीं उतरेगा.... वैसे एक बार तू चढ़ तो जा.... फिर मैं तुझे कभी उतरने नहीं दूंगी....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : अबे कुछ तो शर्म कर....

ज़रा : क्या करूँ जान हम दोनों में से किसी को तो बेशर्म बन न hi होगा न.... तभी तो प्यार की रेल गाडी आगे बढ़ेगी.... अब तुझसे तो मुझे ऐसी उम्मीद नहीं... तो सोचा क्यों न मैं hi बेशर्म बन जाऊं... है उसमे भी एक अलग hi मज़ा होगा..... जब मैं दिल खोल के तेरी सवारी करुँगी.... है तब तो जन्नत का मज़ा आएगा.....

प्रिंस : यार तू फिर शुरू हो गयी....

ज़रा : इसमें मेरी कोई गलती नहीं है.... तू है hi इतना हैंडसम और सेक्सी की तुझे देखते दिल तेरा दीवाना हुआ जाता है....

प्रिंस : तू ने मुझे कब देख लिया....?

ज़रा : मन की आँखों से मेरी जान.... मैंने आँखें बंद की नहीं की तू और तेरी सेक्सी बॉडी मेरे सामने आ जाती है और मैं....

प्रिंस : चुप एक दम चुप.... अब अगर तूने एक और लफ्ज़ कहा न तो मैं कॉल कट कर दूंगा....

ज़रा : चल चल नहीं कहती कुछ.... अब मुँह मत पहला और बोल इतनी सुबह सुबह क्यों कॉल किया....?

प्रिंस : तेरी करतूत बताने के लिए....

ज़रा : मैंने कहाँ कुछ किया.... या फिर कुछ किया है.....

फिर कुछ सोचने का नाटक करते हुए....

ज़रा : ममममम... क्या किया मैंने.....? हाँ याद आया तू रात हमारी किश की बात तो कर रहा है न.... हे कहीं ऐसा तो नहीं की तू चाहता है की मैं फिर से तुझे वैसे hi किश करूँ.... मुउउउउठ्हहहहह.... वाओ क्या किश थी वो.... है.... तेरे होंठों से शहद को चूस के मज़ा आ गया.... ( फिर अपने होंठों पे अपनी जुबां फेर के कहती है) पता है अब तक मुझे अपने होंठों पे तेरे होंठों का शहद रुपी रास महसूस हो रहा है.... मममममम... अब किश चाहिए तो तुझे यहाँ आ न होगा.... अब इतनी दूर से तो हमारी किश होने से रही.....

प्रिंस : तू कभी नहीं सुधर सकती.... समझ नहीं आता की तेरा मैं क्या करूँ....?

ज़रा : सिंपल है... मुझे जी भर के प्यार कर और क्या....? अब क्या ये भी मुझे hi सीखना पड़ेगा....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : तू न यार.... खैर चोर.... पहले मुझे ये बता की ऊपर वाला जब अकाल बाँट रहा था तब क्या तू घूमने गयी थी....

ज़रा : नहीं तो क्यों....?

प्रिंस : तो फिर तू ने मेरे बैग से मेरे कपडे निकाल के उसमे अपने कपडे क्यों रख दिए.....?

ज़रा : उसके पीछे एक ख़ास वजह है....

प्रिंस : क्या मैं ये जान सकता हूँ की वो क्या ख़ास वजह है.....?

ज़रा : वो ये की जब मुझे पता चला की तू सुल्तानगढ जाने वाला है... तो ये ज़ाहिर सी बात है की वहां तू अकेला तो जाएगा नहीं.... मैं भी तेरे साथ hi जाउंगी.... आफ्टर आल मैं तेरा साया हूँ.... तो घर आ के मैंने हम दोनों के कपडे निकाल के दो बैग में रख दिए.... फिर मैंने सोचा की जब हम दोनों अलग नहीं हैं तो फिर हमारे कपडे क्यों एक दूसरे से अलग रहे... ये सोच के मैं अपने बैग से अपने कपडे निकाल के तेरे बैग में रखने लगी.... मगर दो बैग के कपडे एक बैग में कैसे आएंगे..... फिर पता है मैंने क्या किया.... मैंने तेरे कपडे बहार निकाले और अपने कपडे उसमे पहले रख दिए.... उसके बाद मैं तेरे कपडे वापिस रखने hi वाली थी की तभी तू घर आ गया..... और आते के साथ hi सुल्तानगढ के लिए निकलने लगा.... ये देख मैं फ़ौरन पलट के रूम में गयी और बैग को बंद कर उसे ले के बाहर आ गयी..... फिर आगे जो हुआ उसके बाद मुझे ये ख़याल hi नहीं रहा की जो बैग तू साथ ले जा रहा है उसमे सिर्फ तेरे कपडे तो हैं hi नहीं....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस एक बार फिर से अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : अबे पागल लड़की ये तू ने क्या किया...? अब बता मैं क्या पह्नु....?

ज़रा : तेरा तो फिर भी ठीक है मगर मैं अब क्या पहनुंगी.... मेरे सारे कपडे तो तू ले गया है....

प्रिंस : तेरा न कुछ नहीं हो सकता.... तू खुद भी दीवानी है और साथ में मुझे भी दीवाना बना देगी....

ज़रा : है ये तो और भी अच्छा होगा न.... कितना मज़ा आएगा.... लोग हमको देख के कहेंगे देखो वो जा रहे हैं... दीवाने दो.....

ये कह के ज़रा हसने लगती है....

हीहीहीहीहीही.....

प्रिंस : तेरा न कुछ नहीं हो सकता....

ज़रा : अब तो जो भी होगा वो हम दोनों का साथ में hi होगा.....

प्रिंस : चल अब अपनी ये नौटंकी बंद कर और जा के फ्रेश हो जा तब तक मैं भी जा के अपने लिए कुछ कपड़ों का इंतज़ाम करता हूँ....

प्रिंस की बात सुन के ज़रा उठ के वाशरूम की तरफ चल देती है.... मगर तभी प्रिंस जो कहता है उसे सुन के वो बुरी तरह से चौंक जाती है.....

प्रिंस : और हाँ इस छोटी सी रोज फ्लावर वाली पिंक निघ्त्य में बहार नहीं चली जाना....

प्रिंस की बात सुन के ज़रा चौंकते हुए इधर उधर देखने लगती है....

प्रिंस : अब यूँ बन्दर की तरह इधर उधर उछाल के क्या देख रही है.....?

ज़रा : टी.... तू.... इस वक़्त कहाँ है....?

प्रिंस : सुल्तानगढ में क्यों....?

ज़रा : तू सच में वहीँ है.....

प्रिंस : हाँ क्यों....?

ज़रा : अच्छा तो फिर तुझे ये कैसे पता की इस वक़्त मैंने रोज फ्लावर वाली पिंक कलर की निघ्त्य पहनी है....

प्रिंस : तू निघ्त्य की बात कर रही है... मुझे तो तेरी जांघ का वो खूबसूरत सा टिल भी साफ़ नज़र आ रहा है.... वाकई में यार इस निघ्त्य में तू बेहद खूबसूरत और सेक्सी लग रही है....

प्रिंस के मुँह से टिल वाली बात सुन के ज़रा बुरी तरह से चौंक जाती है....

ज़रा : T.....T.....Tu सच में यहाँ नहीं है...?

प्रिंस : नहीं यार तेरी कसम.... और वैसे भी तुझे पता है मैं कभी झूट नहीं बोलता....

ज़रा : अगर तू वहां है तो फिर तू मुझे कैसे देख पा रहा है....?

ज़रा की बात सुन के खुद प्रिंस भी बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस को कुछ न कहते देख....

ज़रा : क्या हुआ अचानक से तू खामोश कैसे हो गया....? बता मुझे तू इतनी दूर रहके मुझे कैसे देख पा रहा है....?

प्रिंस : यार तेरे इस क्यों का जवाब तो मेरे पास भी नहीं है.... मुझे भी ये समझ नहीं आ रहा है की मैं कैसे और क्यों तुझे देख पा रहा हूँ....?

ज़रा : ये कैसे मुमकिन है.....?

प्रिंस : पता नहीं... मगर कोई तो बात ज़रूर है.... वो क्या है पता नहीं....?

ज़रा : कहीं तेरे अंडर जादुई पावर्स तो नहीं आ गयी....?

प्रिंस : पागल है क्या ऐसा कुछ नहीं है....

ज़रा : तो फिर तू hi बता की अचानक से ऐसा क्या हो गया की इतनी दूर रहके भी तू वो देख पा रहा है जो किसी भी आम इंसान के लिए नामुमकिन है....

प्रिंस ज़रा को बाद में कॉल करने का कह के कॉल कट कर देता है.... वो कास के अपनी आँखें बंद कर के खोलता है... अब उसे ज़रा नहीं नज़र आ रही है जो अभी कुछ देर पहले तक उसे दिखाई दे रही थी....

प्रिंस गहरी सोच में डूब जाता है....

प्रिंस : जब से मैं यहाँ आया हूँ.... सब कुछ अजीब अजीब सा हो रहा है.... पहले अचानक से बिजलियों का कड़कना.... फिर उस रौशनी का आना और मेरे जिस्म में समां जाना.... फिर किसी लड़की के हसने की आवाज़.... फिर फूलों का मुझपे गिरना..... फिर वो सारे जानवर.... फिर वो विशालकाय शेर.... और अब ज़रा का नज़र आना.... आखिर ये सब कैसे और क्यों हो रहा है.....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 85

ज़रा : कहीं तेरे अंडर जादुई पावर्स तो नहीं आ गयी....?

प्रिंस : पागल है क्या ऐसा कुछ नहीं है....

ज़रा : तो फिर तू hi बता की अचानक से ऐसा क्या हो गया की इतनी दूर रहके भी तू वो देख पा रहा है जो किसी भी आम इंसान के लिए नामुमकिन है....????

प्रिंस ज़रा को बाद में कॉल करने का कह के कॉल कट कर देता है.... वो कास के अपनी आँखें बंद कर के खोलता है... अब उसे ज़रा नहीं नज़र आ रही है जो अभी कुछ देर पहले तक उसे दिखाई दे रही थी....

प्रिंस गहरी सोच में डूब जाता है....

प्रिंस : जब से मैं यहाँ आया हूँ.... सब कुछ अजीब अजीब सा हो रहा है.... पहले अचानक से बिजलियों का कड़कना.... फिर उस रौशनी का आना और मेरे जिस्म में समां जाना.... फिर किसी लड़की के हसने की आवाज़.... फिर फूलों का मुझपे गिरना..... फिर वो सारे जानवर.... फिर वो विशालकाय शेर.... और अब ज़रा का नज़र आना.... आखिर ये सब कैसे और क्यों हो रहा है.....??????

अब आगे.....

प्रिंस काफी देर तक गहरी सोच में डूबा रहता है.... जब उसे कुछ समझ नहीं आता तो वो उठ के बाहर की तरफ चल देता है..... वो अभी रूम से निकला hi था की तभी उसका मोबाइल बजने लगा....

प्रिंस : हाँ यार मैक्स बोल....

मैक्स : क्या यार न hi न hello सीधे बोल... क्या बात है तू ठीक तो है न....?

प्रिंस : नहीं यार वो सफर की थकान है बस....

मैक्स हैरत से : तू कब से थकने लगा....? जहाँ तक मैं तुझे जानता हूँ... तू इतनी जल्दी थकने वालों में से नहीं है.... तो अब यूँ बात को घूमना चोर और सीधे सीधे बता की आखिर बात क्या है....?

प्रिंस : कुछ नहीं यार सही में बस थकान है और कुछ नहीं....

मैक्स : चल ठीक है तू कहता है तो मान लेता हूँ.... और बता पहुँच गया सुल्तानगढ....?

प्रिंस : हाँ पहुँच भी गया और रेंट पे घर भी ले लिया....

मैक्स : क्या बात कर रहा है रेंट पे घर ले लिया..... मुझे तो लगा की तू वहां किसी होटल में रुकेगा....?

प्रिंस : सोचा तो पहले मैंने भी यही था की होटल में hi रुकूंगा.... मगर फिर ये सोच के अपना इरादा बदल दिया की शहर के किसी होटल में रहने से बेहतर है की मैं शहर के बहार किसी घर में रह के अपना काम करूँ... इस से किसी को मुझपे शक भी नहीं होगा और मैं इत्मीनान से अपना काम भी कर पाऊंगा....

फिर प्रिंस मैक्स को वो सब बताता है जो उसने इमरान और अरबाज़ को बताया था की वो यहाँ रह के कॉलेज में पढ़ने के साथ साथ अपनी कंपनी भी स्टार्ट करना चाहता है.....

प्रिंस की बात सुन के मैक्स चौंक जाता है....

मैक्स : यार कंपनी स्टार्ट करना तो ठीक है मगर तेरे कॉलेज में एडमिशन लेने वाली बात समझ नहीं आयी....

प्रिंस : यार उसके पीछे एक ख़ास वजह है.... वो ये की प्रिंस याने की मैं बचपन में स्कूल में तो पढता hi रहा होऊंगा.... तो स्कूल में मुझे अपने बचपन के बारे में कुछ न कुछ तो पता चल hi जाएगा....

मैक्स : माना जो तू कह रहा है वो ठीक है.... मगर वहां तू ने किसी स्कूल में नहीं बल्कि कॉलेज में एडमिशन लिया है..... जबकि तुझे कॉलेज से नहीं बल्कि वहां के किसी स्कूल से प्रिंस यानी तेरे बारे पता चल सकता है.... क्यों की बात तेरे बचपन की है जब तू 8 साल का था... अब 8 साल का बच्चा स्कूल में hi पढ़ सकता है न की कॉलेज में.....

प्रिंस : अबे ये मुझे भी पता है.... मगर शायद तू ये भूल गया की न hi इस वक़्त मैं 8 साल का हूँ और न hi इतना छोटा की किसी स्कूल में एडमिशन ले सकूँ.... इस लिए मैंने कॉलेज में एडमिशन ले लिया....

मैक्स : वो hi तो मैं कह रहा हूँ की कॉलेज से तेरा क्या फायदा होगा....?

प्रिंस : अबे यार तुझे किसने जासूस बना दिया.... बस ज़रा मुझे उसका नाम बता दे.... उस साले की ऐसी जगह मारूंगा न की वो फिर कभी किसी को जासूस नहीं बना पायेगा.... यहाँ तक की जासूस का नाम सुन के भी उसे दर लगेगा....

मैक्स : अबे अब मैंने ऐसा क्या कह दिया जो तू इतना भड़क रहा है....?

प्रिंस : अबे साले तू ने बात hi ऐसी की है....

मैक्स : अबे तू पूरी बात बताएगा तब न मुझे कुछ समझ आएगा....

प्रिंस : हद है यार.... साले कभी कभी न मुझे शक होता है की तू जासूस है भी की नहीं.... या बस डींग हांकने के लिए खुद को जासूस बताता फिरता है....

मैक्स : अब मेरी तारीफ करना बंद कर और वो बता जो बात तेरे दिमाग में चल रही है....

प्रिंस : तो सुन बात ऐसी है की मैं अपने बचपन की तस्वीर ले के यहाँ सब को दिखा दिखा तो नहीं पूछ सकता न की किसी को मेरे बारे में पता है की नहीं....

मैक्स : हाँ मगर अपने डैड और माँ के नाम से तो पता कर सकता है न की वो लोग कहाँ रहते हैं.....

प्रिंस : साले भूल गया तू ने खुद hi तो बताया था की इस पूरे शहर में ऐसे कोई हस्बैंड वाइफ नहीं है जिनके नाम मेरे डैड और माँ से मिलते हैं....

मैक्स : हाँ हाँ याद आया... मैंने hi बताया था.... मगर तेरे कॉलेज में एडमिशन लेने वाली बात अब तक मेरे समझ में नहीं आयी....

प्रिंस : समझाता हूँ.... यहाँ 4 स्कूल और 3 कॉलेज हैं..... जिसमे से एक hi ऐसा कॉलेज है जो स्कूल से जुड़ा हुआ है... मतलब वहां नर्सरी से ले के इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई की जा सकती है.... जैसे की यूनिवर्सिटी में होती है.... तो मैंने वहां एडमिशन ले लिया जिस से वहां रहके मैं अपने और अपने परिवार के बारे में पता कर सकूँ....

मैक्स : हाँ मगर वो hi School/College क्यों....? वहां और भी तो कई स्कूल हैं.... ये भी तो हो सकता है की बचपन में तू उनमे से किसी स्कूल में पड़ता हो....

प्रिंस : नहीं हो सकता.... क्यों की वो सब स्कूल ऐसा नहीं है की उनमे पैसे वालो के बच्चे पढ़े.... वो सब मामूली स्कूल्ज हैं.... ज़रा सोच जब मेरी नानी इतनी पैसे वाली है तो मेरे डैड और उनका परिवार भी तो पैसे वाला hi होगा न.... और वो अपने बच्चे को किसी बड़े स्कूल में hi पढ़ा रहे होंगे न की छोटे से स्कूल में...

मैक्स : हाँ हो सकता है.... मगर ये भी तो हो सकता है न की तेरे डैड और उनका परिवार उतना पैसे वाला न हो के गरीब हो....

प्रिंस : अबे साले क्या करूँ मैं तेरा....?

मैक्स : अबे अब मैंने ऐसा क्या बोल दिया....?

प्रिंस : साले तू ने खुद hi तो बताया था की तू ने नानी के मुँह से सुना था की मैं जिस घर में रहता था वो एक भरा पूरा परिवार था.... और साथ hi मेरे डैड अच्छे बड़े पैसे वाले परिवार से थे.... तो पैसे वाले अपने बच्चे को किसी बड़े स्कूल में hi पढ़ाएंगे न की छोटे से स्कूल में....

मैक्स : हाँ ये सही है.... मगर फिर भी तेरे कॉलेज में एडमिशन लेने की ज़रुरत क्या थी....? स्कूल में जा के वहां के ऑफिस से भी तो तेरे डैड और माँ और उनके घर का पता लगाया जा सकता था न....

प्रिंस : ये मुमकिन नहीं है क्यों की कुछ साल पहले अचानक से उस स्कूल में आग लगने की वजह से वहां के सारे रिकार्ड्स जल गए थे.... वो आग इतनी भयानक थी की उस आग में स्कूल के कुछ टीचर्स और स्टूडेंट्स भी जल के मर गए थे.... और जो टीचर बच गए उन्होंने वो स्कूल चोर दिया.... वहां किसी को नहीं पता की इस वक़्त वो टीचर्स कहाँ हैं.....

मैक्स : जब वहां कोई है hi नहीं तो फिर तेरे बारे में कैसे पता लगाया जाए.....? खुल के किसी से तो पूछ भी नहीं सकते.....

प्रिंस : हाँ मगर वहां रह के तो पता लगाया जा सकता है न.... स्कूल में न सही उस स्कूल से जुड़े कॉलेज में पढ़ते हुए तो पता लगाया जा hi सकता है.... हो सकता है की मेरी क्लास के बच्चों में से कोई उस कॉलेज में पढ़ रहा हो.... हो सकता है कॉलेज में कोई ऐसा हो जो मेरे बारे में जानता हो.... शायद कोई मेरे बचपन का दोस्त निकल आये.... कोई ऐसा जिसे मेरे डैड माँ और घर के बारे में सब पता हो....

मैक्स : हाँ शायद....

प्रिंस : बस इस लिए मैंने कॉलेज में एडमिशन ले लिया....

मैक्स : चल वो सब तो ठीक है मगर अब ये बता की मुझे वहां कब बुला रहा है....?

प्रिंस : जल्द hi....

मैक्स : चल ठीक है... तू रेस्ट कर मैं ऑफिस निकलता हूँ...

ये कह मैक्स अपने रूम का दरवाज़ा खोलने hi वाला होता है की तभी प्रिंस की बात सुन के वो बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : अबे साले जासूस तू कब से बिना पंत के ऑफीस जाने लगा.... साले बहार जाने से पहले काम से काम अपनी पंत तो पेहेन ले...

ये कह के प्रिंस कॉल कट कर देता है... वहीँ उस की बात सुनके जब मैक्स नीचे देखता है तो खुद को बिना पंत के देख फ़ौरन दरवाज़ा बंद करके अपनी पंत पेहेन ने लेता है....

मैक्स : अच्छा हुआ प्रिंस ने बता दिया.... वातना मैं बिना पंत पहने hi बहार चला जाता..... और सब के सामने मेरी इज़्ज़त नीलाम हो जाती....

ये कह के मैक्स बहार की तरफ चल देता है.... तभी अचानक से कुछ सोच के उसे एक तेज़ झटका सा लगता.... वो फ़ौरन भाग के रूम में जाता है और गौर से रूम की हर एक चीज़ हर एक कोने को देखने लगता है.... वो जिस चीज़ को ढूंढ रहा है जब वो उसे वहां नहीं मिलती तो वो बुरी तरह से चौंक जाता है..... वो फ़ौरन प्रिंस को कॉल लगा देता है.....

प्रिंस : हाँ मैक्स बोल....

मैक्स : प्रिंस एक बात बता.... तुझे कैसे पता चला की मैंने पंत नहीं पहना.....? ये मत कहना की तू ने कक्तव या सीक्रेट कमरे से मुझे देख के कहा था.... क्यों की मैंने पूरा रूम चेक कर लिया है.... यहाँ न hi कोई कक्तव कैमरा है और न hi कोई सीक्रेट कैमरा..... और न hi हम वीडियो कॉल पे बात कर रहे थे.... जो भी कैमरा है वो किसी के भी रूम में नहीं लगे हुए है..... फिर भी तू ने मुझे देखा.... कैसे.....????? देख सच बता....

प्रिंस : जो तू कह रहा है वो सच है.... वहां किसी भी रूम में कोई कैमरा नहीं है.... फिर भी मैंने तुझे देखा.... इतना hi नहीं तुझ से बात करने से पहले जब मैं ज़रा से बात कर रहा था तब मैं उसे भी देख पा रहा था.... क्यों और कैसे इस बात का जवाब तो मेरे पास भी नहीं है.... मगर हाँ इतना ज़रूर है की कुछ तो है जो मेरी समझ के बाहर है....

फिर प्रिंस आज सुबह जो हुआ वो मैक्स को बताने लगता है.... जिसे सुन के मैक्स को बड़ी हैरानी होती है....

मैक्स : यार तू जो कह रहा है उसपे यकीन करना मुमकिन नहीं मगर फिर भी ये कोई ऐसा बात नहीं जिसे इग्नोर किया जा सके.... अच्छा एक बात बता क्या अब भी तू मुझे देख पा रहा है....

प्रिंस : न कहूंगा तो गलत होगा....

मैक्स : मतलब तू अब भी मुझे देख रहा है....

प्रिंस : हाँ इस वक़्त तू ब्लैक शर्ट क्रीम पंत पहने बीएड के पास खड़ा है.... और हमेशा की तरह तेरे बीएड पे गीला टावर पड़ा हुआ है....

मैक्स : यार ये कैसे मुमकिन है....?

प्रिंस : पता नहीं....

मैक्स : तू सिर्फ मुझे और ज़रा को hi देखा है या फिर किसी और को भी....

प्रिंस : अभी तक तो सिर्फ तुम दोनों को hi देखा है.... रुक किसी और को देखने की कोशिश करता हूँ....

ये कह के प्रिंस आँखें बंद करता है और कुछ सोच के फिर अपनी आँखें खोल देता है उसे जो नज़र आ रहा है वो मैक्स को बताने लगता है....

प्रिंस : ये रूही है.... जो अभी भी घेरि नींद में सोई हुई है.... उसके होंठों पे प्यारी सी मुस्कान है जो उसकी खूबसूरती को और भी ज़्यादा बढ़ा रही है....

प्रिंस की बात सुन के मैक्स बुरी तरह से चौंक जाता है....

मैक्स : k.....k....kya वाकई में तू रूही को देख पा रहा है....?

प्रिंस : हाँ.... मगर कैसे पता नहीं.... अब कोई तेरे रूम की तरफ जाते हुए नज़र आ रहा है.... ये और कोई नहीं सैर है.... जो पिंक ड्रेस पहने तेरे रूम की तरफ जा रही है.... वो तेरे रूम के पास पहुँच गयी है और ये उसने दरवाज़ा खोला....

ठीक तभी मैक्स के रूम का दरवाज़ा खुलता है और पिंक ड्रेस पहने सैर रूम में आती है.... सैर को देख मैक्स बुरी तरह से चौंक जाता है उसके मुँह से चीख निकल जाती है....

सैर : क्या हुआ मैक्स तू ठीक तो है न....?

मैक्स फ़ौरन खुद को संभालता है....

मैक्स : H....H....Haan... मैं th...eek हूँ....

सैर : अच्छा तो फिर अचानक से तू चीखा क्यों...? और ये तेरी जुबां क्यों लड़खड़ा रही है...?

मैक्स : वो तू अचानक से रूम में आयी तो मैं घबरा गया....

मैक्स की बात सुन के जहाँ सैर को बड़ा अजीब लगता है वहीँ सैर के पीछे कोई ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है....

ये और कोई नहीं बल्कि विजय है....

विजय : क्या बात है यार आज पहली बार देख रहा हूँ की जासूस साहब को भी दर लगता है.... हहहहहहह.....

ये कह के विजय हसने लगता है....

विजय को यूँ हस्ते देख मैक्स को उसपे गुस्सा आ जाता है....

मैक्स : साले भूल गया उस दिन कैसे भूत भूत कर के दर रहा था.... साले फत्तू कहीं का.... रही बात मेरी तो मैं डरा नहीं बल्कि सैर के यूँ अचानक से रूम में आने से चौंका ज़रूर था.... वैसे सुबह सुबह तुम जोनो मेरे रूम में क्या कर रहे हो......?

सैर : यार वो प्रिंस का फ़ोन नहीं लग रहा बहुत देर से तरय कर रही हूँ... मगर बुजी आ रहा है.... मुझे उसकी फ़िक्र हो रही थी.... वो ठीक से पहुंचा की नहीं.... तेरी उस से कुछ बात हुई की नहीं यही पूछने मैं यहाँ चली आयी....

मैक्स : हाँ मेरी बात हो गयी है.... वो ठीक से वहां पहुँच गया है.... और वहां उसने रेंट पे एक रूम भी ले लिया है....

फिर मैक्स उन दोनों को वो सब बताता है जो प्रिंस ने उसे बताया था..... वो उन्हें सिर्फ उतना hi बताता है जितना ज़रूरी है.... अब उन्हें वो ये बताता भी तो कैसे की प्रिंस ने वहां क्या क्या देखा और महसूस किया.... यहाँ तक की सुल्तानगढ में रह के भी वो यहाँ सब को देख पा रहा है..... जब की इस बात को जान के वो खुद बेहद हैरान है.....

इस सब को जान के कुछ और भी लोग हैं जो प्रिंस मैक्स और ज़रा की तरह हैरान हैं और वो हैं.....
 
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