Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 15 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-119

जब दरवाज़ा खोला तो सामने मनीषा कड़ी थी. मैंने उसे अंदर आने का राष्ट दिया और दरवाज़ा बंद कर लिया. मनीषा सीधे अपने कमरे में चली गई और मैं भी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और अपने कमरे में चला gaya.thodi देर बाद मम्मी पापा भी आ गए, क्योंकि आज शादी में जाना था और वो जगह घर से लगभग 25 कम दूर थी, इसलिए वो आज जल्दी आ गए थे. मैं निचे आया तो सभी लोग हॉल में बैठे थे. और जाने के बारे में डिसकस कर रहे थे.

पापा- चलो मनीषा, अभी और सरिता सभी लोग रेडी हो जाओ. शर्मा जी की बेटी की शादी में जाना है.

मनीषा- पापा मैं नहीं जाउंगी. मेरी बिलकुल इच्छा नहीं है जाने की

पापा- ये क्या बात हुई जब सब को बुलाया है तो चलने में क्या परेशानी है तुमको.

सरिता दी- रहने दो न पापा, जब उसका मन नहीं है तो क्यों फाॅर्स कर रहे हैं चलने के लिए.

पापा- इसके नहीं जाने पर किसी को यहाँ रुकना पड़ेगा फिर.

सरिता di(mujhe देखकर)- अभी रुक जायेगा मनीषा के साथ.

पापा- चलो ठीक है. अभी तुम इसके साथ hi रुकना. कही भी बहार मत जाना इसे अकेला छोड़कर.

Main(natak करते हुवे)- लेकिन पापा मैं भी चलना चाहता हूँ.

पापा- किसी एक को तो रुका है. मैं तो नहीं रुक सकता. क्योंकि मुझे तो जाना hi होगा. तुम रुक जाओ अभी. अब मनीषा को घर में अकेले भी तो नहीं छोड़ सकते हैं.

मैं( नाटक करते हुवे)- ठीक है पापा अगर आप कह रहे हैं तो ठीक है मैं रुक जाता हूँ.

इतना कहकर मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. मनीषा मेरी तरफ hi देख रही थी. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी. तो मैं वह से उठकर अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद जब जाने का समय हुवा तो पापा ने मुझे आवाज़ दी. मैं निचे आया तो पापा ने कहा.

पापा- अच्छा सुन अभी. हो सकता है की हम कल सुबह आये. तो तुम घर को अचे से लॉक कर लेना और मनीषा का ख्याल रखना. ठीक है न.

मैं- (सरिता दीदी की तरफ देखकर) आप फ़िक्र मत कीजिये पापा. मैं उसका बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा.

इसके बाद सभी लोग कार में बैठकर शादी के लिए निकल गए. मैं दरवाज़ा बंद करके जब अंदर आया तो मनीषा वही बैठी हुई थी. वो कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी थोड़ा शर्मा रही थी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया और उसे देखते हुवे कहा.

मैं- क्या हुवा मनीषा तू ऐसे क्यों रियेक्ट कर रही है तू.

मनीषा- कुछ नहीं भैया. बस ऐसे hi.

मैं- नर्वस हो रही हो क्या.

मनीषा( मेरी तरफ देख कर)- ऐसा तो कुछ नहीं है. मैं क्यों नर्वस होउंगी. आप भी न कुछ भी सोचते रहते हैं.

मैं- नहीं मुझे लगा इसलिए मैंने पूछा तुझसे.

मेरी बात सुनकर मनीषा अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने मनीषा से कहा.

मैं- मनीषा आज खाना थोड़ा जल्दी बना लेना.

मनीषा- क्यों भैया. कोई खास बात है क्या.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी गॉड में खींच लिया और उसकी एक चुकी को दबाते हुवे कहा.

मैं- हाँ मनीषा आज मेरा मन ढेर सारा और देर तक तुम्हारा दूध पिने का मन कर रहा है.

मनीषा- धत्त्त भैया. आपको बिलकुल भी शर्म नहीं आती.

इतना कहकर मनीषा मेरी गॉड से उठकर अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर मैं वही बैठा रहा फिर मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और मनीषा की चुदाई से पहले उसके pahan-ne के लिए जो कपडे लाया था उसको लेकर मनीषा के कमरे की तरफ चल पड़ा. मैंने बिना गेट नॉक किया उसके कमरे में चला गया. कमरे में घुसते hi मैं वही पर जैम सा गया. निचे जो उसने कपडे पहने थे वो उसके जिस्म पर थे hi नहीं उसे शायद पता था की मैं उसके कमरे में आऊंगा इसलिए उसने अपने कपडे उतर दिए थे. इस समय उसके जिस्म पर एक ब्रा और कापरी थी.



दरवाज़ा खुलने के बाद उसने एक ऐडा के साथ अपने हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख कर थोड़ा तिरछा होकर दीवाल से सत्कार कड़ी होकर मुझे देखने लगी. मैं तो बस मनीषा को hi देखे जा रहा था. मनीषा को देखकर मेरा लुंड मेरी लोअर में उव के अंदर फूल गया था. मुझे इस तरह अपनी चूचियों को घूरते हुवे मनीषा ने कहा.

मनीषा- ऐसा क्या देख रहे हो भैया.

मैं- क्या यार मनीषा. क्यों मेरी जान लेने पर तुली हुई हो.

मनीषा- मैंने ऐसा क्या किया है भैया.

मैं- अगर ऐसे कपडे पहनकर मेरे सामने तुम रहोगी तो मेरी तो जान hi किसी दिन निकल जाएगी.

मनीषा- एक बात आप भूल रहे हैं की ये मेरा कमरा है. और मुझे कोई सपना थोड़ी आया था की आप मेरे कमरे में बिना नॉक किये बेशर्मो की तरह चले आएँगे.

मैं- अब तुम्हारे कमरे में भी आने के लिए मुझे परमिशन लेनी पड़ेगी.

मनीषा- परमिशन नहीं भैया. लेकिन अगर आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हूँ. तो आपको लौट जाना चाहिए था. लेकिन आप तो किसी प्यासे कुत्ते की तरह मुझे देखकर लार टपका रहे हैं.

मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के पास जाकर खड़ा हो गया और मनीषा की कमर में हाँथ डालकर उसे अपने साथ चिपका लिया, जिससे उसकी चूचिया मेरे साइन में धस गई. मनीषा के मुंह से sssssssssss भैया की आवाज़ आई. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- क्या करू मनीषा. जब किसी कुत्ते को मास्स के इतने बड़े बड़े टुकड़े दिखेंगे तो कुत्ता उसे खाने के लिए अपनी लार तो टपकायेगा hi.

इतना कहकर मैंने एक हाँथ उसकी चुकी पर रखकर उसे इशारा किया. और उसकी चुकी को दबा दिया. मनीषा आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करके मुझे अपने से दूर कर दिया और जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने कड़ी हो गई और बोली.

मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. और ये कोई मास्स का टुकड़ा नहीं है मेरे शरीर है. बेशर्मी के भी हद होती है भैया.

मैं- मैं भी कोई कुत्ता नहीं हूँ. तेरा भाई हूँ और वो भी बेशरम.

मेरी बात सुनकर मनीषा मुस्कुराने लगी. उसने मुझे अब तक बहार जाने के लिए नहीं कहा था और न hi उसने अभी तक अपने कपडे पहने थे. मैं चलते हुवे जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने मनीषा से सात कर खड़ा हो गया और एक हाँथ उसके कंधे पर रखकर एक हाँथ उसकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. कंधे वाले हाँथ की ऊँगली से मैंने उसकी ब्रा की स्टेप को पकड़कर खींचा और छोड़ दिया. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गई.



मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्ह भैईया. मत्तट करिये न.

मैं- (उसकी गांड को सहलाते हुवे) क्या न करू मनीषा

मनीषा- मुझे चोट लगती है कंधे पर भैया. ऐसा मत करिये.

मनीषा की बात सुनकर मैंने एक हाँथ आगे बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और निचे उसकी गांड एक हाँथ से दबाने लगा. मैंने ड्रेसिंग टेबल के मिरर में देखा तो मनीषा अपने होंठ को काट रही थी उसकी सांसे तेज़ तेज़ से चलने लगी थी. मैं कुछ देर उसकी चुकी और गांड दबाने के बाद अपना हाँथ उसकी गांड से हटाकर उसकी दूसरी चुकी पर रख दिया और दबाने लगा और उसके कंधे को चूमने लगा. थोड़ी देर चुकी दबाने के बाद मैंने उसकी चुकी को जोर से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी.

मनीषा- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययीय. थोड़ा धीरे दबाइये भीआयाआ.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी चुकी को दबाते हुवे पीछे से मनीषा से सत्कार खड़ा हो गया और अपना लुंड उसकी गांड पर प्रेस करने लगा. थोड़ी देर उसकी गांड पर लुंड का दबाव डालने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से दबाया और अपनी कमर को एक झटका दिया. मनीषा दर्द और मज़े से चीखी.

मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ. थोड़ा धीरे दबायी. मुझे दर्द होता है.

इतना सुनकर मैंने मनीषा की ब्रा का हुक पकड़ा जो आगे की hi तरफ था और उसे खोल दिया. जिससे ब्रा उसके दोनों कंधो पर झूल गई और मैंने उसकी नंगी चूचियों कर अपने हाँथ रख दिया और दबाने लगा. मनीषा बस ऊऊह्ह्ह्हह्ह भैयाआआआ आआह्ह भइया कर रही थी. तोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को दबाने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को जोर से दबा दिया. मनीषा मस्ती में बोली.



मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. बस आईसीई हीई करीईई.

इतना कहकर मनीषा ने हाँथ पीछे करके मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद मनीषा को लुंड सहलाने में दिक्कत हो रही थी इसलिए उसने मेरे लुंड से अपना हाँथ हटा लिया. इसलिए मैंने एक हाँथ उसकी चुकी से हटाकर उसका हाँथ पकड़कर अपनी लोअर और उव के अंदर डालकर नंगे खड़े लुंड पर रख दिया. लुंड पर मनीषा का हाँथ पड़ते hi मेरे मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह मनीषा की आवाज़ निकल गई

मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआ मेरीए जांणण.

मनीषा मेरे लुंड को उव के अंदर सहलाने लगी और मैं मनीषा की चूचियों को दबाते उसकी ब्रा उसके कंधे से हटाकर उसके कंधे को चूमने लगा. मनीषा अब मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी. इसलिए उसने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. लगभग 5 मिनट तक मैंने मनीषा की चूचिया दबाई और मनीषा ने मेरे लुंड को अच्छी तरीके से दबाया. उसके बाद मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे लाल हो गाइट hi. मनीषा वासना से भर चुकी थी.

मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ बढाकर उसके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मनीषा ने भी मेरा पूरा साथ दिया. कुछ देर तक नार्मल किश करने के बाद मनीषा मेरे होंठो को फोरस्फुल्ली किश करने लगी.



और अपनी जीभह निकल कर मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैंने भी मनीषा की जीभ को अपने मुंह में बंद कर लिया और जोर जोर से चूसने लगा. और दोनों हाँथ निचे बढाकर उसकी गद्देदार और कातिल गांड पर रख दिया और जोर जोर से दबाने लगा. थोड़ी देर तक उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसकी जीभ को छोड़ दिया और अपनी जीभ निकलकर मनीषा के चेहरे से शुरू करके उसकी चूचियों तक लगभग 5 मिनट तक खूब छठा. जिससे उतनी भाग थूक से एकदम गिला हो गया था और चमक रहा था.

फिर मैंने अपना मुंह खोलकर उसकी एक चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मैं एक हाँथ से मनीषा की गांड दबाने लगा और एक हाँथ को उठाकर मनीषा की चुकी पर रख दिया. इस तीन तरफ से अपने शरीर पर पड़ने वाले हमले से मनीषा एकदम मदहोश हो गई और अपने एक हाँथ मेरे सर पर रखकर बालो को सहलाते हुवे बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैइय्याहा. बहुतत्त अछ्हा लगगग रहा हीी. ऐसी होई कॅरियई. ाअप्प्प बहुत्त अछ्हा कर रही हैंन.

इतना कहकर मनीषा ने अपना हाँथ निचे बहदाकार लोअर और उव के ऑडर डालकर मेरे खड़े लुंड को पकड़ लिया और मसलने लगी मैं sssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स करने लगा और साथ साथ मनीषा की चूचिय को पिता रहा. मैंने उसकी गांड वाला हाँथ उठाकर मनीषा की छूट पर कापरी के ऊपर से रख दिया. उसका कापरी उसके चुतरस से गिला हो गया था. शायद उसने अंदर पंतय नहीं पहनी हुई thi.thodi देर उसकी छूट को कापरी के ऊपर से दाबने के बाद मैंने अपना हाँथ उसकी कापरी के अंदर दाल दिया और उसकी नंगी छूट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा के शरीर में झुरझुरी हुई और उसने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया. मैं aaaaaaaaahhhhhhhhhh मनीषआआआ बोल पड़ा.

मैं उसकी छूट को सहलाते हुवे कभी उसकी छूट में ऊँगली दाल देता तो कभी उसकी छूट को मुठी में भरकर मसल देता. मनीषा बस ससससस ssssssssssshhhhhhhh आआअह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह करके रह जाती. कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने ऊके निप्पल को ऊँगली और अंगूठे में पकड़कर मसल दिया और छूट को मुट्ठी में बाहरकर मसला तो मनीषा के मुंह से नशीली आवाज़ निकल गई.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii भाइयाँआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh बहुत अच्छा लगगग रहा हैई. ऐसी होई कार्र्र्टी राहीईईए. औरर जोररर जोरर सीए करिये भैया. Aaaahhhhhhhhhh.

ये कहकर मनीषा के हाँथ मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगा. मैं मनीषा को चुकी बदलकर दूसरी चुकी को पैने लगा और चुकी वाला हाँथ उठाकर मनीषा की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. ऊपर मैं उसकी चुकी बदल बदल कर पि रहा था. निचे उसकी गांड दबाने और छूट में ऊँगली करने से मनीषा बहुत गरम हो गई और वो झड़ने के करीब पहुंच गई और कहने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhh भैय्याअ. ाप्प बहुत्त अछ्हीई छूटत कोऊ उंगली सी छोड़ती हैंन. औरर करिये भईया. औरर पीजिये मेरीए चूचियों को. जोर जोर से चूसिये इनको. बहुतत्त भुक्खी थी अप्प दूढः की लिये. तो पीई जाइये इनका सारा दूधहहह. Aaaaahhhhhhhhhh भैया मुझी कुछः हूँ ररहठा हीी. कुछःह करूओ भैया. मैंनं मार जौऊंगीए.

मैं मनीषा को चुदाई होने तक गरम रखना चाहता था. इसलिए मनीषा की बात सुनकर मैंने उसे छोड़कर एक झटके में उससे अलग हो गया. मनीषा की हालत ऐसी हो गई जैसे उससे उसका मनपसंद खिलौना छीन लिया गया हो. वो मेरी तरफ नशीली नज़रो से देखते हुवे बोली.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप ऐसे दूर क्यों हो गए मुझसेइ. करिये न जो कर रहे थे.

मैं- नहीं मनीषा. ये गलत है मैं तुम्हारे साथ ये गलत काम नहीं कर सकता. तुम मेरी बहन हो.

मेरी बात सुनकर मनीषा मुंह फाडे मुझे देखने लगी. उसे बिलकुल भी विस्वास नहीं था की मैं ऐसा कुछ भी बोल सकता हूँ. मनीषा थोड़े गुस्से भरी आवाज़ में बोली.

मनीषा- ये क्या है भैया. इतने दिन से आप मेरे साथ गन्दी गन्दी हरकते कर रहे हो तब आप को या ख्याल नहीं आया की मैं आपकी बहन हूँ. और अब बोल रहे हो की आप मेरे साथ ये नहीं कर सकते.

Main-haan मनीषा. मुझे अभी अभी रीलीज़ हुवा है की मैं जो कर रहा हूँ वो गलत है.

मनीषा मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी और मरते हुवे बोली.

मनीषा- आप ने जब दोनों दीदियो को फंसकर छोड़ा तो ये आपको गलत नहीं लगा. लेकिन जब मैं आपसे फंस गई हूँ तो ये आपको गलत लग रहा है. आप बहुत गंदे हो भैया और कमीने भी.

मैं- क्या कहा तुमने अभी मनीषा. तुम भी मुझसे……………… मैंने ठीक से सुना नहीं.

मनीषा- हाँ भैया मैं भी आपसे फंस गई हूँ. आपने दोनों दीदियो की तरह मुझको भी फंसा लिया है.

मैं- क्या सच में मनीषा. मैंने तो दोनों दीदियो को फ़साने के बाद उनके साथ कुछ और भी किया था. अब तुम भी मुझसे फंस गई हो तो मतलब मैं तुम्हारे साथ भी कर सकता हूँ.

मनीषा मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली. तो मैं उसके पास जाकर उसकी चुकी को एक हाँथ से दबाते हुवे पूछा.

मैं- बताओ मनीषा. मैं तुम्हारे साथ भी वो सब कर सकता हूँ न.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे धीरे से कहा.

मनीषा- hhhhhhhhhhhhh.

मैं- ऐसे नहीं मनीषा. पूरा बोलो किट ुम क्या चाहती हूँ.

Manisha-(nashili आँखों से देखते हुवे)- हाँ भैया जो आपने दोनों दीदियो के साथ किया है वो मेरे साथ भी कर सकते हो.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के होंठो को चुम लिया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका.

आपका सुझाव बिलकुल सही है, लेकिन कहानी पहले hi बहुत ज्यादा लम्बी हो चुकी है 119 अपडेट हो चुके हैं और मनीषा अभी भी बची हुई है.

मैं इसे कसकर मनीषा का कन्वर्सेशन और ज्यादा लम्बी नहीं खींच न चाहती और न hi इतना छोटा करना चाहती हूँ की कहानी का मज़ा ख़तम हो जाये.

मैं लगभग 50 दिन से रेगुलर 2 अपडेट दे रही हूँ. अब रेगुलर अपडेट देने के लिए मेरे पास समय बहुत काम है.

इसलिए मैं कोशिश कर रही हूँ की कहानी को ज्यादा से ज्यादा रोचक और अच्छी तरीके से काम समय में ख़तम कर सकू.

साथ बने रहिएगा.
 
अपडेट-120

मनीषा- hhhhhhhhhhhhh.

मैं- ऐसे नहीं मनीषा. पूरा बोलो किट ुम क्या चाहती हूँ.

Manisha-(nashili आँखों से देखते हुवे)- हाँ भैया जो आपने दोनों दीदियो के साथ किया है वो मेरे साथ भी कर सकते हो.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के होंठो को चुम लिया.

अब आगे.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसके होंठ चुम लिए. मैंने मनीषा को खींचकर अपनी बहो में भरते हुवे उसके कण में धीरे से कहा.

मैं- मतलब तुमको भी अपने भाई का लुंड पसंद आ गया है.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना सर झुका लिया और शर्माने लगी. मैंने मनीषा की ठुड्डी पकड़कर उसके सर को ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा भी मेरी आँखों में देखने लगी. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद मनीषा ने फिर शर्माकर अपनी पलके झुका ली. मैंने मनीषा के होंठो को चूमते हुवे कहा.

मैं- ऐसे मत सरमाओ मेरी जान. मेरी आँखों में देखो और मेरी बात का जवाब दो.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपनी पलके उठाकर मेरी आँखों में देखते हुवे जवाब दिया.

मनीषा- hhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmm

मैं- क्या यार मनीषा. अब अगर सबकुछ करना hi है तो शर्मा क्यों रही हो मुझसे. तुमने तो सब देखा हुवा है. कैसे दोनों दीदी बेशरम होकर मेरे साथ अपनी जवानी का मज़ा लूटा. तुम अगर शरमाओगी तो फिर कैसे काम चलेगा. अपनी ये शर्म छोड़ दो मनीषा और मेरे साथ खुलकर मज़े लो. में तुम्हे जन्नत की सैर करवाऊंगा.

मनीषा- हाँ भैया मुझे आपका लुंड पसंद है. आप मुझको भी दोनों दीदी की तरह जवानी का मज़ा दीजिये. मैं वो सब देख देख के कब से इस मज़े के लिए तरस रही हूँ.

मैं- ठीक है मेरी जान. आज रत तुम्हारी ज़िन्दगी की सबसे हसीं रत होगी. ये रत तुम कभी नहीं भूल पाओगी डार्लिंग.

इतना कहकर मैं मनीषा से अलग हुवा और अपने साथ लाया हुवा वो कपडा मनीषा को देते हुवे कहा.

मैं- रात को तुम यही कपडा pahan-na. मैं तुम्हे इन कपड़ो में देखना चाहता हूँ. बोलो पहनोगी न तुम इनको.

मनीषा- आप जो बोलेंगे. मैं वो करुँगी भैया.

मैं- तो ठीक है मनीषा. अब जल्दी से खाना बना लो. ताकि हम दोनों को ज्यादा से ज्यादा समय मिल सके. मैं अब थोड़ी देर के लिए बहार जा रहा हूँ तुम कपडे पहन लो और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लो. मैं 1 हॉर्स में वापस आ जाउगा. फिर दोनों मिलकर खाना खाएंगे.

इतना कहकर मैं मनीषा को उसके कमरे में छोड़कर ऊपर बाथरूम में चला गया और फ्रेश होने के बाद अपने कमरे में जाकर कपडे चेंज किया और मनीषा को दरवाज़ा बंद करने के लिए कहकर बहार चला गया. मैं वह पास के एक पार्क में चला गया और बेंच पर बैठ गया. अभी थोड़ी देर hi मुझे पार्क में आए हुवे थे की मेरा मोबाइल बजने लगा. मैंने देखा तो सविता दी की कॉल थी मैंने फ़ोन पिक किया तो उधर से जीजा जी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

मैं- प्रणाम जीजा जी.

जीजा जी- प्रणाम सेल साहिब. और कैसे हॉल चाल हैं आपके.

मैं- ठीक हूँ मैं आप कैसे हैं.

जीजा जी- मैं भी ठिक्क hi हूँ. एक काम था तुमसे.

मैं- हाँ बताइये न.

जीजा जी- बात ये है की मुझे एक ट्रेनिंग के सिलसिले में 2 हफ्ते के लिए 4 दिन बाद मुंबई जाना है तो मैं सोच रहा हूँ की तुम यहाँ पर 15 दिन के लिए अपनी दीदी के पास आ जाओ.

जीजा की बात सुनकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. मैं खुद दीदी के पास जाने के लिए बेताब था और पापा ने भी परमिशन दे दी थी. और अब तो जीजा जी भी बुला रहे हैं. तो मैं ख़ुशी के साथ उनसे बोलै.

Main-(mazakiya लहले में) ये भी कोई कहने की बात है जीजा जी आप आदेश कीजिए बाँदा हाज़िर हो जाएगा. वैसे अगर आप बुरा न मने तो एक बात कहूँ.

जीजा जी- हाँ हाँ बोलो.

मैं- मैं सोच रहा था की आप 15 दिन के लिए जा रहे हैं तो क्यों न मैं दीदी को यहाँ ले औ. दीदी भी सबसे मिल लेंगी. मनीषा और सरिता डिब hi बोल रही थी दीदी से मिलने के लिए. जब आप आ जायेंगे तो अगर आप कहियेगा तो मैं दीदी को पंहुचा दूंगा.

जीजा जी- ले जी इसमें बुरा man-ne की क्या बात है भाई. तुम ठीक कह रहे हो. इसी बहाने सविता भी सब घरवालों से मिल लेगी.

मैं- ठीक है जीजा जी मैं आपके जाने के पहले हो वह आ जाऊंगा.

जीजा जी- ठीक है अभी. अब रखता हूँ फ़ोन. मिलकर बात कर्नेगे.

मैं- ठीक है जीजा जी. प्रणाम.

इतना कहकर मैंने फ़ोन रख दिया. थोड़ी देर पार्क में टहलने के बाद मैं अपने आपको थोड़ा तरोताज़ा महसूस करने लगा. लगभग 1 हॉर्स के बाद मैं घर चला गया. मनीषा ने गेट खोला. मैंने अंदर जाकर गेट को लॉक किया और जाकर सोफे पर बैठ गया और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर में मनीषा ने खाने के लिए पूछा तो मैंने टाइम देखा तो 8 बज गया था. फिर हम दोनों ने मिलकर खाना खाया. खाना खाने के बाद मनीषा ने बर्तन समेटकर सिंक में रखकर उसे साफ करने लगी. तो मैं भी किचन में चला गया मनीषा को पीछे से अपनी बहो में भर लिया और उसकी चुकी को दबाते हुवे उसकी गार्डन को चूमने लगा. थोड़ी देर तक ऐसा करने से मनीषा फिर से गरम हो गई.



मनीषा गरम होकर एक हाँथ मेरी गार्डन पर लप्पेट लिया और बर्तन साफ करना बंद करके लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. थोड़ी देर बाद मैं मनीषा को छोड़कर पीछे हटा और मनीषा के कण में कहा.

मैं- मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ. जब तुम फ्री हो जाना तब मुझे बताना.

इतना कहकर मैं किचन से निकलकर अपने कमरे में चला गया.

कमरे में पहुंच कर मैंने अपनी लोअर और t-shirt उतर दी और सिरग उव में hi कमरे में बैठ गया. मैंने अपना डरोएर खोला और उसमे से कैंची निकल कर बहार रख ली और मनीषा के कॉल का इंतज़ार करने लगा. लगभग 1.5 हॉर्स बाद मनीषा ने मिस कॉल दी. मैं अपने कमरे से बहार निकला और मनीषा के कमरे की तरफ चल पड़ा. कुछ hi पल में मैं मनीषा के कमरे पास खड़ा था. मैंने कमरे का दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया.

कमरे में घुसते hi मरे नज़र मनीषा पर पड़ी. उसने मेरे दिए हुवे कपडे पहने थे. कपडा एकदम ट्रांसपेरेंट था. मनीषा उस कपडे में एकदम नंगी दिख रही थी. वो कपड़ा मनीषा के शरीर से पूरी तरह से चिपका था. मनीषा मेज़ के ऊपर अपना हाँथ टिकाये कड़ी हुई थी. दरवाज़ा खुलने के बाद मनीषा ने एक नज़र मेरी तरफ डाली और फिर शर्मा कर वह दूसरी तरफ देखने लगी.



मनीषा ने भले hi मुझे अपना ाधनागा या पूरा नंगा बदन दिखाकर तैसे किया था, लेकिन आज उसे पता था की मैं उसको छोड़ने आया हूँ तो मनीषा शर्मा रही थी. मैं दरवाज़े के पास खड़ा होकर मनीषा के नंगे जिस्म को देखते हुवे कहा.

मैं- वाह्ह मनीषा. क्या हुस्न है तुम्हारा. एकदम तराशा हुवा. उपरवाले ने तुम्हे बड़ी फुर्सत में बनाया है. और मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है की तुझे मेरी बहन बनाकर भेजा.

मेरी बात सुनकर और अपनी तारीफ सुनकर मनीषा के चेहरे पर हंसी आ गई. और वो उसी तरह कड़ी होकर मुस्कुराने लगी. मैं चलता हुवे मनीषा के पास पहुंच गया और मनीषा को अपनी तरफ घूमने के लिए कहा. मेरे कहने के बाद मनीषा शरमाते हुवे मेरी तरफ घूम गई और अपनी ड्रेस को दोनों हांथो से पकड़ कर उससे खेलने लगी. उस कपडे में मनीषा का नंगा जिस्म और उसकी जालिम चूचियों को सामने से देखकर मेरी हालत ख़राब हो गई. मैं मनीषा को देखते हुवे बोलै.



Main-Sach में मनीषा तुम्हारे हुस्न का कोई जवाब नहीं है. तुम्हारे ये दूध जैसा गोरा बदन एकदम चमक रहा है. तुम्हे देखकर देखो मेरा ये भी खड़ा हो गया है.

इतना बोलकर मैं अपने लुंड को मसलने लगा. मनीषा की नज़र भी मेरे लुंड पर चली गई और वो बोली.

मनीषा- छी भईया. आप को शर्म नहीं आती मेरे कमरे में आप उव में आये हैं.

मैं- मेरी छोडो मनीषा तुम अपने आपको देखो एकदम नंगी कड़ी हो मेरे सामने.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और भागकर खिड़की के पास बिस्टेर पर बैठ गई. मैं मनीषा के भागते समय उसकी कातिल गांड को देखने लगा जो उसके भागने से इधर उधर हिल रही थी. मैं अपना लुंड मसलते हुवे मनीषा से कहा.



मैं- क्या यार मनीषा. तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे तुमने मुझे पहली बात ऐसे देखा है. देखो मनीषा अगर ज़िन्दगी का असली आनंद लेना है तो ये शर्माना छोडो और खुलकर मेरा साथ दो. मैं तुम्हे यकीन दिलाता हूँ की मैं तुम्हे निराश नहीं करूँगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी तरफ देखा और नज़ारे झुका ली. मैं चलता हुवा मनीषा के पास पंहुचा और उसे उठाकर खड़ा कर दिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा भी मेरी तरफ देख रही थी. इस बिच मनीषा को पता नहीं क्या हुवा उसने दोनों हांथो से मेरे सर को मजबूती से पकड़ा और जंगली बिल्ली की तरह मेरे होंठो पर टूट पड़ी और चूसने लगी. मैं भी उसके सर को पकड़कर उसका होंठ चूसै में साथ देने लगा. मनीषा पूरी वाइल्ड तरीके से मेरे होंठ चूस रही थी. लगभग 10 मिनट पूरी तल्लीनता से मेरे होंठ चूसने के बाद जब हम दोनों की सांसे भरी होने लगी तो मनीषा ने मेरे होंठ काट लिए और अपने मुंह हटा लिया. मेरी होंठो से खून निकलने लगा. मैंने मनीषा से कहा.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh क्या करती हो मनीषा. दन्त क्यों गदया.

मनीषा- क्यों भैया मज़ा नहीं आया क्या. जब आप करते हो तब तो आपको बहुत मज़ा आता है और जब मैं कर रही हूँ तो दर्द हो रहा है.

इतना बोलकर मनीषा फिर से मेरे होंठो पर टूट पड़ी और पहली बार से भी ज्यादा जोर जोर से मेरे होंठो को चूसने लगी काटने लगी. मैं तो उसकी वील्डनेस देख कर हैरान था. थोड़ी देर बाद उसने मेरे होंठो को आज़ाद किया. मेरे होंठो पर जगह जगह मनीषा ने काट लिया था. जिसके निशान बन गए थे. मैंने मनीषा की तरफ देखते हुवे कहा.

मैं- तुम एकदम जंगली बिल्ली की तरह बेहवे कर रही हो आज.

मनीषा- क्यों भैया मज़ा नहीं आ रहा है क्या मेरे इस बेहवे से.

मैं- बहुत मज़ा आ रहा है मनीषा. मुझे ऐसे hi पार्टनर चाहिए जो मेरी तरह बेशर्म होकर मेरा साथ दे.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मुझे धक्का देखर बिस्टेर पर धकेल दिया और मेरे साइन पर चढ़कर बैठ गई और अपने नाख़ून से मेरे निप्पल को कुरेदते हुवे बोली.

मनीषा- मैं क्या चीज हूँ भैया ये आपको आज पता चल जायेगा. बस मैं जो भी करूँ आप मुझे रोकना मत. फिर देखना मुझसे पहले मैं आपको जन्नत की सैर कराती हूँ.

Main(shankit नज़रो से देखते हुवे)- तुम करना क्या चाहती हो.

मनीषा- बस भैया आप देखते जाइये. आपको खुद पता चल जायेगा. मैं जो भी आपके साथ करुँगी. उसमे आपको मज़ा तो आएगा लेकिन मेरी एक शर्त है की इस दौरान आप मेरे जिस्म को टच नहीं करेंगे.

मैं- ठीक है मनीषा. जैसा तुम चलोगी वैसा hi होगा.

इतना कहकर मनीषा मेरे दोनों निप्पल को अपने दोनों हांथो से सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे निप्पल को सहलाने के बाद मनीषा ने अपनी एक एक ऊँगली उनपर फिरना शुरू कर दिया. मेरे मुंह से आआह्ह्ह्हह्ह ssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मनीषा मेरे दोनों निप्पल पर ऊँगली फिरते हुवे अपना नखों मेरे निप्पल पर दबा दिया. मेरे मुंह से हलकी सी आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा की आवाज़ निकल गई.

मेरी आवाज़ सुनकर मनीषा ने अपने नाख़ून से मेरे दोनों निप्पल को कुरेदना शुरू कर दिया. थोड़ी देर ऐसे hi निप्पल कुरेदने के बाद मनीषा ने अपने मुंह से ढेर सारा थोक मेरे दोनों निप्पल पर गिरा दिया और अपनी ऊँगली से मेरे साइन पर मलने लगी. जब मेरा सीना और निप्पल गिला हो गया तो मनीषा ने मेरे दोनों निप्पल को अपने ऊँगली और अंगूठे के बिछ लेकर जोर से मसल दिया. मेरे मुंह से जोर से आवाज़ निकल गई और मैंने मनीषा के हाँथ को पकड़ लिया.



मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मनीषआआआ. क्याआ करररर राहीईई हैईईई टूउउ. मेरिइइइ जाननं लेंना छहत्ती हैई क्या.

मनीषा- ये क्या भैया आपने मेरे शरीर को टच क्यों किया. आपको मैंने कहा था की आप मेरे शरीर को टच नहीं करेंगे. और अभी तो ये शुरुवात है भैया अभी आपको बहुत मज़ा मिलने वाला है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसके हांथो से हटा लिया मनीषा ने फिर से मेरे दोनों निप्पल को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बिच लेकर मसल दिया. इस बार मैं मज़े और दर्द से चीख पड़ा.

मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मेररिई जायंनननननन. क्या काअररर रहियी हैई चू. कहहहा सी सिक्खा तुणी यी साबबब ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह.

मेरी बात सुनकर उसने फिर से ढेर सारा थूक मेरे दोनों निप्पल पर गिराया और जोर जोर से मेरे साइन पर मसलने लगी. साइन पर थूक मसलने के बाद मनीषा ने मेरे दोनों साइन को अपने मुठी में भर लिया और उसे आते की तरह गूंदने लगी. मेरे मैं आँखे बंद किये हुवे ooooooooohhhhhhhhhhh मनीषा आआह्ह्ह्हह्ह मनीषा करने लगा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर मेरे साइन को गूंदने के बाद मनीषा मेरे साइन से सरककर थोड़ा पीछे हुई और झुककर मेरे साइन पर अपनी जीभ फिरने लगी. मेरी तो मज़े की इन्तहा हो गई और मैं मनीषा से बोलै.

मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh डार्लिंगगगगगग. कहा सी सीखा यी साब्ब तुणीऐ. मुझी बहूत्त अच्छा लग रहा हैई. ऐसा ही करतीय राहू.

मनीषा मेरी बात इग्नोर करते हुवे मेरी साइन को लगातार चाट रही थी. थोड़ी देर मेरा सीना चाटने के बाद मनीषा ने मेरे निप्पल को अपने दांतो के बिच दबा लिया और हल्का हल्का बाईट करने लगी. मेरा तो मज़े से पूरा चेहरा लाल हो गया. मनीषा मेरे निप्पल को कभी खींचती तो कबि चबा लेती. उसके ऐसा करने से मैं मस्ती के सागर में गोते लगाने लगा. मैं मनीषा को कहने लगा.

मैं- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhh मनीषा. ऑर्डर जूरर सी कर यार. मुझी बहुत्त अच्छा लग रहा ही. आज टाक मुझी ऐसा प्यार कीसीई नई नाहीइ किया. तुणी तू मुझी इतना मज़ा देखेर अपना गुलाम बना लिया हैई. औरर जोरर सी चुसो मनीषा. बा ऐसे ही. Aaaahhhhhhhhhh.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने लगभग 5 मिनट तक ऐसे हो मेरे निप्पल को दांतो से हल्का हल्का kat-ti चबाती रही. मैं बस आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा ऊऊह्ह्ह्हह्ह मनीषा करता रहा. उसके बाद मनीषा ने मेरे निप्पल को अपने मुंह से निकला और मेरे ऊपर की तरफ गार्डन और कंधे पर चूमने लगी. गार्डन को चूमने के बाद मनीषा ने गार्डन और कंधे को भी अपने दांतो से पकड़कर हल्का हल्का kat-ti हुई स्वीट बाईट करने लगी. मुझ बहुत मज़ा आ रहा था और मैं मनीषा को ऐसा करने के लिए कह रहा था.

मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा. तुम बहुत्त अच्छआ करररर रहियी हूँ. मुझी बहुत्त hi माज़ा आ रहा ही. ऐसे होई कर्त्तीय राहु.

मेरी बात सुनकर मनीषा छोटा छोटा लव बाईट बनाते हुवे गार्डन से निचे आने लगी. और मेरे पेट को भी चूमने के बाद अपने मुंह में भरकर दांतो से हल्का हल्का काट काट कर लव बाईट बनती रही. मैं मस्ती में बोलने लगा.

मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआ. टूउउ साछहः मई बहूत्त काम्म्म कोई लड़की हैई. इतना मज़ा मुझी कभी नही आया. तुणी मुझी बहुत्त मज़ाआ दिया ही.

मेरे इतना कहने के बाद मनीषा मेरे पेट पर जोर से दंड गड़ाकर मुझसे अलग होकर बैठ गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-121

मनीषा ने मुझे लव बाईट देते हुवे मेरे पेट पर दन्त गदा दिया. जिससे मैं चीख पड़ा.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मनीषा क्या कर रही हैई. मुझे दर्द होता है.

मेरा ऐसे कहने पर मनीषा ने फिर से मेरे पेट को चूमा शुरू कर दिया और वापस चूमते हुवे मेरे साइन पर आई और मेरे एक साइन को हांथो से मसलने लगी और एक साइन को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी. मेरा बहुत मन कर रहा था की मैं भी मनीषा के जिस्म को सहलौ उनसे खेलु, लेकिन मनीषा ने मन किया जुवे था इसलिए मैं कुछ नहीं कर प् रहा था. थोड़ी देर तक मनीषा ने मेरे साइन को मुंह में भरकर चूसा. फिर अपने मुंह में भरकर दन्त से काट लिया अब मुझसे बर्दास्त के बहार हो गया तो मैं फिर से सिसक पड़ा और मनीषा से बोलै.

मैं- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा बाससस कररर. मेरीए जान लेकारर हीईई मानेगी क्या. Ooohhhhhhhhhh aaaaahhhhhhhhhhhhhh जांणण.

इसके बाद मनीषा ने मुझको पलट कर पेट के बल लिटा दिया और मेरी पूरी पीठ पर हलके हलके काट काट कर लव बाईट बनाने लगी. मैं मस्ती में आँखे बंद किये मज़ा लेता रहा 5 मिनट बाद मनीषा ने मुझे छोड़ा और हटकर बीएड पर बैठ गई. मैं उठाकर बैठ गया और मनीषा की तरफ देखा तो वो कमुख नजरो से मेरी तरफ देख रही थी.



थोड़ी देर तक मैं भी मनीषा को hi देखता रहा उसके बाद मैंने मनीषा को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठो को चूमने लगा. उसके होंठो को चुनमे के साथ साथ मैं उसकी चुकी को भी एक हाँथ से दबाने लगा. मनीषा ने भी हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और आगे पीछे करने लगी. थोड़ी देर किश करने के बाद मैं उसकी गार्डन और कंधे को चूमने लगा. मनीषा भी मदहोशी में मेरे सर को अपनी गार्डन पर दबाने lagi.aise ही लगभग 5 मिनट तक उसकी गार्डन और कंधे को किश करने और चुकी दबाने के बाद मैंने मनीषा को छोड़ा और बीएड से उतारकर टेबल पर से कैची को उठाकर मनीषा के पास आ गया. मनीषा ने जब मेरे हाँथ में कैची देखि तो उसने कहा.

मनीषा- इसकी क्या जरूरत है भैया. क्या करने वाले हैं आप.

मैं- बस अब तुम चुपचाप देखती जाओ और मज़ा लो.

इतना कहकर मैं मनीषा के पास आ गया और उसकी चुकी को दबाते हुवे उसके कपडे को उसकी चूचियों के ऊपर से पकड़ा और कैची कैची से kat-te हुवे निचे की तरफ आने लगा. मैंने उसके पुरे कपडे को कैची से काट दिया और कपडा गार्डन से उसके पीछे कर दिया और मनीषा की चुकी नंगी हो गई और मनीषा अपने सर को उठाकर मुझे देखने लगी.



मैंने कैची वापस राखी और मनीषा को देखते हुवे उसके होंठो पर टूट पड़ा और चूसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने वाइल्ड किश करना शुरू कर दिया मनीषा भी मेरे होंठो को जोर से चूस रही थी. उसके होंठो को चूसते हुवे उसे अपने से सत्ता लिया जिससे मनीषा बिस्टेर पर अधलेटी अवस्था में मेरे ऊपर लग गई. मैंने कुछ देर उसके होंठो को चूमा और फिर उसको उठाकर जमीं में खड़ा कर दिया और उठकर उसके पिचई आकर खड़ा हो गया.

उसके पीछे खड़ा होने के बाद मैंने मनीषा का कपडा पकड़कर पीछे की तरफ निचे खींच दिया तो मनीषा हाँथ बढाकर अपना कपडा पकड़ने की कोशिश करने लगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी



तब तक मैंने उसके बदन से अलग कर दिया. मनीषा अब एकदम नंगी अपने कमरे में कड़ी थी. मैंने भी अपने उव उतर दी और मनीषा से एकदम सत्कार खड़ा हो गया. मैं मनीषा की दोनों चुचायो को आगे हाँथ बढाकर पकड़ लिया और लुंड उसकी गांड में ठूसकर उसकी चुकी दबाने लगा. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी. मैं मनीषा के कंधे गार्डन और पीठ को भी चुम और चाट रहा था.

थोड़ी देर तक धीरे धीरे उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने उसकी चूचियों को जोर से मसल दिया और अपने लुंड को उसकी गांड पर एक धक्का दिया. मनीषा मस्ती में सिसकार उठी.

मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhh भाईयाँआ. बॉस ऐसी होई धीरे धीरी दबाई इन्ही. बहुत अच्छा लग रहा है.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसकी चूचिया खुद जोर जोर से दबाने लगा और अपनी कमर को हलके हलके उसकी गांड पर चलने laga.thodi देर ऐसा करने के बाद मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ किया और उसकी आँखों में देखने लगा. थोड़ी देर उसकी आँखों में देखने के बाद मैंने अपनी ऊँगली से उसके होंठो को मसलना शुरू कर दिया. मनीषा ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और अपने होंठ मसलवाने लगी. थोड़ी देर उसके होंठो को मसलने के बाद मैंने मनीषा को जमीन पर बैठा दिया. मेरा खड़ा लुंड मनीषा की आँखों के सामने लहराने लगा. मनीषा ने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा और मेरे लुंड को अपने हांथो से पकड़ लिया.

मनीषा मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद मनीषा ने मेरे लुंड पर एक जोरदार चुम्मा जड़ दिया और जीभ निकलकर मेरे लुंड को चाटने लगी. मनीषा मेरे लुंड को बहुत hi तल्लीनता से चाट रही थी. मैंने भी अपने हाँथ मनीषा के सर के ऊपर रख दिए और सहलाने लगा. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने अपना मुंह खोलकर लुंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी.



मनीषा पहले धीरे धीरे लुंड को चूस रही थी उसके बाद उसने लुंड चूसने की गति बढ़ा दी और जोर जोर से लुंड को चूसने लगी. मेरे मुंह से आअह्हह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हह्ह की आवाज़ निकल रही थी. और मेरी पकड़ मनीषा के सर पर तेज़ होती जाती जा रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने मनीषा के सर को पकड़ कर अपने लुंड उसके मुंह में अंदर बहार करने लगा. लुंड मनीषा ने अपने सर आगे पीछे करना बंद कर दिया और अपना पूरा मुंह खोल दिया. मैं झटके मर मर के लुंड अंदर बहार करता रहा. मनीषा के मुंह से गूऊऊऊललललल गगगगगगगूऊऊलललल की आवाज़ निकल रही थी.

थोड़ी देर तक धीरे धीरे मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी से लुंड अंदर बहार करने लगा. मनीषा भी एकदम एक्सपर्ट की तरह मेरा लुंड चूस रही थी. मैंने मनीषा का सर मज़बूती से पकड़ा और एक जोर का धक्का मार्कर अपना पूरा लुंड उसके मुंह में घुसा दिया और अपनी कमर को कुछ देर रोके रखने के बाद अपना लुंड उसके मुंह से निकल लिया. मनीषा जोर जोर से खांसने लगी और साँस लेने लगी. उसने नज़र उठाकर मेरी आँखों में देखा मैंने उसके मुंह में अपना लुंड फिर दाल दिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. मनीषा गगगगगूउऊउउउउ गगगगगूउऊउउउउउ की आवाज़ निकलने लगी. लगभग 5 मिनट बाद मैंने उसके मुंह से अपना लुंड बहार निकला और उसे उठाकर बिस्टेर पर फेंक दिया.

मनीषा को बिस्टेर पर फेंकने के बाद मैं मनीषा के दोनों पैरो के बिच जाकर बैठ गया और उसकी एक तंग को अपनी गॉड में रखकर चूमने लगा. थोड़ी देर चूमने के बाद के बाद मैंने अपनी सर मनीषा के छूट के पास किया और जीभ निकलकर मनीषा की छूट चाटने लगा. मेरा मुंह अपनी छूट पर लगते hi मनीषा के मुंह से aaaaahhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गयी. मैं एक हाँथ बढाकर उसकी एक चुकी पकड़ ली और एक हाँथ से उसकी क्लीट को सहलाने लगा. मनीषा मस्ती में पागल हो गई और बोली.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैयाआ. बहुत अचे से चाट रहे हो आप. और जोर से चाटिये भैया. मुझे स्वर्ग की सैर कराइये भैया. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh

मनीषा की बात सुनकर मैं और तेज़ी से उसकी छूट चाटने लगा. छूट चाटने के साथ साथ मैं उसकी क्लीट और चूचियों को मसल रहा था. थोड़ी देर छूट चाटने के बाद मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. छूट में ऊँगली घुसाने के बाद मैंने उसकी छूट चाटने बंद नहीं की जिससे मनीषा का जिस्म कपकपाने लगा और वो बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भियाआआअ. बहुउट्ठ अछ्हा छुटत चाटत रही हैंन्न ाअप्प्प. मुझी मास्तत्त कार्र दिया अपनी bhaiyaaaa.aaurr जोरर सी चटियई औरर जोरर सी भैयाआ.

मैं मनीषा की छूट जोर जोर से चाटने लगा और जोर जोर से ऊँगली उसकी छूट में पेलने लगा. मनीषा की छूट पानी छोड़ने लगी. जिससे मेरी ऊँगली फच फच की आवाज़ करने लगी. थोड़ी देर ऊँगली करने पर मनीषा एकदम मस्त हो गई और मुझसे कहने लगी.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्हह bhaiyaaaaaaaaaa. क्या आएगग लगा डीई हीी अपपनी मेरीए छुटत मई. मेरीए चुउत्त्त जाल रहीए हैई भैया इसकी प्यास बुझाए दोऊ भैया छोड़ू मुझसे भैया. आआआहहहहहहह ohhhhhhhhhhhhhhhhh.

मनीषा मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबाने लगी. मैंने अपना सर ऊपर उठाकर उससे पूछा.

मैं- हाँ मनीषा क्या करूण मैं जिससे तुम्हारी प्यास बुझ जाये.

मनीषा- आअह्ह्ह्ह भैया. अपना हथियार डालल दू मेरे अंडरर औरर मेरीए प्यास बुझा दो.

मैं (उसकी छूट सहलाते हुवे)- कौन सा हथियार और कहा दाल दूँ.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह भैया. अपना लुंड मेरी छूट मी डालल दो और बुझा दो मेरी प्यास.

इतना कहकर मनीषा ने मुझे पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठो को चूमने लगी. मैं भी मनीषा के होंठो को चूमने लगा. थोड़ी देर मनीषा के होंठो को चूमने के बाद मैं उससे अलग हुवा और उसके एक पेअर को पकड़ कर अपने कंधे पर रखा और अपने लुंड पर थोड़ा थूक लगाकर उसको मनीषा की छूट पर रखकर उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तुमको थोड़ा दर्द होगा मनीषा. उसको बर्दास्त कर लेना.

मनीषा- आप मेरे दर्द की परवाह मत कीजिये. मैं मैनेज कर लुंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने एक हाँथ से उसका पेअर पकड़कर और एक हाँथ से अपने लुंड को पकड़कर उसकी छूट पर दबाने लगा. थोड़ी देर छूट पर लुंड दबाने के बाद मेरा लुंड खछ की आवाज़ के साथ मनीषा की छूट में लुंड का टोपा घुस गया. मनीषा के मुंह से हलकी सी आवाज़ निकल गयी.

मनीषा- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ. आरममम सी दर्द्द हो रहा ही.

मैं- बस मनीषा पहली बढ़ा पार हो गयी है. तुम्हे थोड़ा हिम्मत से काम लेना होगा. उसके बाद मज़े hi मज़े हैं.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड को छोड़कर उसकी चुकी को पकड़ लिया और दबाने लगा और एक हल्का सा झटका उसकी छूट पर मारा. Jis-se मेरा लुंड उसकी छूट में 3 इंच अंदर घुस गया. मंशा दर्द से चिल्लाने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआ. बहारररर निकालल लीजीईए. मुझी बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हीी.

मनीषा की आवाज़ सुनकर मैंने अपने एक हाँथ से मनीषा की चुकी दबाने शुरू कर दिया और दूसरे हाँथ से उसकी छूट को मसलने लगा. मनीषा थोड़ी देर तड़पती रही. उसके बाद उसे थोड़ा आराम मिला तो वो मुझे आँख से इशारा करके अंदर डालने के लिए कहने लगी. मैंने उसका इशारा पाकर अपना लुंड टोपे तक बहार खींचा और एक जोर का धक्का मर दिया. जिससे मेरा लुंड 5 इंच अंदर घुस गया और मनीषा के मुंह से एक जोरदार चीख निकल गई.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हैई मुझी. बहार निकाल लू भैया. नही तू मैंन माअररर जौंगीय. मुझी नाहीई चुंदड़वाना. मुझी बाहूऊत्त डार्दद हूँ रहा हीी.

मनीषा की चीख सुनकर मैं वही रुक गया और झुक कर मनीषा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा. एक हाँथ से उन्स्की चुकी मसलने लगा और उसकी छूट को सहलाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा थोड़ी नार्मल हुई तो मैं जितना लुंड उसकी छूट में था उसे अंदर बहार करने लगा. मनीषा को फिर से दर्द होने लगा और वो गूऊऊऊ हूउउउउउउउ करने लगी. मैंने उसके मुंह को नहीं छोड़ा और लगातार चुस्त रहा. 5 मिनट बाद मनीषा नार्मल हो गई और उसने भी मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया. मैं मनीषा की चुकी को जोर जोर से मसलते हुवे लुंड अंदर बहार करने लगा. जब मैंने देखा की मनीषा एकदम नार्मल हो गई है तो मैं उसके मुंह को छोड़कर उसकी तंग को अचे से पकड़कर अपने लुंड को टोपे तक बहार निकला और एक जोरदार धक्का उसकी छूट पर लगा दिया.



मेरा लुंड मनीषा के कौमार्य को छोड़ते हुवे जड़ तक उसकी छूट में समां गया. मनीषा के मुंह से जोरदार दर्द भरी चीख निकल गई.

मनीषा- aaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियी. मैंनं मर्डर गयीईइ. आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ. मुझी नाहीई चूडवाना हैई आपसी. अपना लुंदड़ बाहर निकल लूओ. राहाम्म्म करूओ मुज्झहहपर. बहुत्त डारडडडड हूँ रहा हैई मुझी. Uuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyyy. मुझी बचाए लूओ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा की छूट में मेरे पूरा लुंड घुस चुक्का था. उसकी छूट से खून निकल रहा था. उसकी आँखों से आँशु बहने लगे. वो लगातार मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी, लकिन मैं उसे जकड़े हुवे उसकी छूट को सहला रहा था और उसकी चुकी दबा रहा था. थोड़ी देर उसकी छूट सहलाने और चुकी दबाने के बाद मैंने फिर से अपना लुंड जड़ तक बहार खींचा और फिर से उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा को फिर से दर्द हुवा और वो चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaahhhhhhhhhhh भैयाआ. मैं मर्डर जौंगीीी. रहामं करूऊ मेरे उपररर और अपना लुंड बहार निकाललळ लूओ. Oooooohhhhhhhhhh मुम्ममइय्ययययययय मुझी बचाए लूओ.

मनीषा की चीख सुनकर मैं अपना लुंड धीरे धीरे उसकी छूट के अंदर बहार करने लगा साथ साथ उसकी चुकी को लगातार दबाता रहा. मसलता रहा औरउसकी छूट भी मसलता raha.thodii देर बाद मनीषा को भी कुछ कुछ मज़ा आने लगा. वो भी मेरी तरफ देख रही थी. अब उसकी आँखों से आँशु निकलना बंद हो गया था. वो भी अब हल्का हल्का अपनी कमर चला रही थी. मैं अपने लुंड की स्पीड बढ़ा दी और पूरा लुंड बहार निकल कर अंदर डालने लगा. मनीषा बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- aaaahhhhhhhhhh भैईयाआआ. मुझी दररदद्ड होओओओ रहा हैई ठुड्ढ धीरे करूऊ. Ooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययी. हआ ऐसी होई धीरे धीरे छोड़ू अपनी मनीषा कोऊ. आअह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ.

मैं- ooooooooohhhhhhhhhh मनीषा मेरी जांणण. बहुत्त मसस्त्त छूट हैई तुम्हारीयी मेरा पुर्रा लुंदड़ फंसा फांसा अंडरर जा रहा हैई आआह्ह डार्लिंग.

मैं अब मनीषा की छूट में जोर जोर से धक्के लगाने लगा . थोड़ी देर धक्के लगाने के बाद मैं मनीषा के ऊपर लेट गया और उसके होंठो को चूमने लगा. मनीषा भी मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर होंठो को चूमने के बाद मैंने उसकी गार्डन को पकड़ लिया और जोर जोर से उसकी छूट पेलने लगा. मनीषा मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीआयियियीयआ. बआहूतट अच्छआ लग रहा हैई. ऐसी होई छोडीई मुझी आअह्ह्ह्हह औरर जोरर सी भैया. पूरा लुंदड़ अंडर ड़ालकरर छोड्दिई मुझी. छोडीई अपनी मनीषा को भैया. डैम लगाकर choodiyeee.mainnn इस्सस दीं का काब सी इन्तेज़ाआररर कर रहीए थिई. ऑर्डर जोररर सी छोडीईए भाईया.

माणसीः की बात सुनकर मैं ताबड़तोड़ मनीषा को छोड़ने लगा. मैं पूरा लुंड टोपे तक उसकी छूट से बहार निकलता और एक जोर का झटका मार्कर पूरा लुंड एक hi बार में मनीषा की छूट में दाल देता. मनीषा ताल से टालल मिलकर चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और चुदाई का आनंद उठा रही थी.

मनीषा- ooohhhhhhhhhhhh मेरे ररजाअ भैईयाआ. आआआह्ह्ह्ह मेरी बर्फ. और जोर से छोड़ो अपनी गिर्ल्फ्रेंड को. मैंन कॉब्बब सी आपसी छुडवांना चाहत्ती थीई. लेकिननननन अपनी आअज्ज्ज मुझी छोड्दा हैईईई. औरर चूडू bhaiyaa.oooohhhhhhh.

मैं- हाँ मनीषा ये ली औरर अंडरर टाक ली मेरा लौंडा अपनी छूट में. तू बहुत्त मस्स्ष्ट्ट माललळ ही मनीषा. तुझक्खकोऊ चूडड़डकरर मज़ाआ आ गाया. अब्ब्ब मैंन तुझी रुज्ज़ छोड़ूँगा. लिए मनीसा औरर अंडरर मेरा लुंड.

इतना बोलकर मैं मनीषा को और जोर जोर से छोड़ने लगा. मनीषा इस चुदाई से झड़ने के करीब पहुंच गई थी. इसलिए वो जोर जोर से छोड़ने के लिए बोलने लगी.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh मीटीररररररररी चुदऊ भईया. आह्हः बहुउउत्तत माज़आ आए रहा हैई भइया. मुझी बहुतत्त अच्छा लग रहा हैई. औरर कास कर छोड़िये. मेरीए छूट मी कुछः होओओओ रहा हैई. छूट मी चीटियया रेंगगग रही हैई भइया. इसको अपनी लुद्द से मार दोऊ भाया. मैंन झड़ने ेवालियीहोऊणन्न aaaaaaaahhhhhhhhhhh. ऑर्डर जोररर सी भइया मैंन आआ रहीए हूँ. Ohhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyy.

ये कहकर मनीषा अपना शरीर ैठने लगी. वो भी भलभलाकर झड़ने लगी. मैं भी अब झड़ने के करीब था. इसलिए मैं मनीषा के ऊपर से उठा और मनीषा की दोनों तनड़ो को पकड़कर उसकी चुकी पर लगा दिया और हचक हचक कर मनीषा को छोड़ने लगा. मनीषा के झाड़ जाने के बाद मेरा लुंड एकदम सटासट अंदर बहार हो रहा था. मैं मनीषा को छोड़ते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh मनिशांआ. मैंन भी आए रहा होऊणन्न. चू बहुत्त करारा माललळ हैई री. तुझी छोड़कर मैंन जन्नत मी पहुछः गैया होऊं. मैं तुझी रूजज अपने लुंड पर झुला झुलाऊँगा. रोज तुझे अपने लुंदड़ पारर उछलूँगा. मैं भी आ रहा हूँ मेरी रणीय. Aaaaahhhhhhhhhh oooohhhhhhhhhhhhhhh.

इतना कहकर मैं भी मनीषा की छूट में hi झाड़ा गया और उसके ऊपर लेट कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. मनीषा ने मुझे कसकर अपने से चिपका लिया और मेरी पीठ को सहलाने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका सर जी जो आपने मुझे इस लायक समझा।

लेकिन आप जैसे मंझे हुए रचनाकार के सामने मेरी क्या बिसात। आप एक बहुत ही उम्दा रचनाकार हैं और मैं अभी इस क्षेत्र में बिल्कुल नई हूँ। :ecs: :respekt::hinthint::what1:

आप अपनी कहानी मुझसे भी बेहतरीन तरीके से लिख सकते हैं, इसलिए आप हमारी टाँग मत खीचिए।🤣:ecs::what1::hinthint:

हमारी कहानी को आप अपने बहुमूल्य सुझाव से सहयोग कीजिए।

साथ बने रहिएगा।
 
अपडेट-122

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh मनिशांआ. मैंन भी आए रहा होऊणन्न. चू बहुत्त करारा माललळ हैई री. तुझी छोड़कर मैंन जन्नत मी पहुछः गैया होऊं. मैं तुझी रूजज अपने लुंड पर झुला झुलाऊँगा. रोज तुझे अपने लुंदड़ पारर उछलूँगा. मैं भी आ रहा हूँ मेरी रणीय. Aaaaahhhhhhhhhh oooohhhhhhhhhhhhhhh.

इतना कहकर मैं भी मनीषा की छूट में hi झाड़ा गया और उसके ऊपर लेट कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. मनीषा ने मुझे कसकर अपने से चिपका लिया और मेरी पीठ को सहलाने लगी.

अब आगे.

झड़ने के बाद मैं मनीषा के ऊपर लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. थोड़ी देर तक उसके ऊपर लेते रहने के बाद मनीषा ने मुझे अपने ऊपर से धकेलकर अपने बगल किया और मेरी तरफ देखने लगी. मैं भी अपनी सांसे दुरुस्त करता हुवे मनीषा की तरफ देखने लगा. थोड़ी देर उसे देखने के बाद मैंने उससे पूछा.

मैं- ऐसे क्या देख रही हो मनीषा.

manisha-dekh रही हूँ की मेरे भाई होकर कैसे तुमने मुझे छोड़ दिया. तुम्हारी बेशर्मी देख रही हूँ.

मैं- अब इसमें कौन सी बेशर्मी मेरी जान. ये सब छोडो ये बताओ की मज़ा आया या नहीं.

मनीषा- इतनी बेरहमी से छोड़ा मुझे और पूछ रहे हो की मज़ा आया की नहीं. अभी भी दर्द हो रहा है. फिर भी शुरू शुरू में नहीं लेकिन बाद में बहुत मज़ा आया.

मैं- अरे थोड़ी देर दर्द होगा उसके बाद ठीक हो जाएगा. चलो एकबार और करते हैं फिर.

मनीषा- अभी नहीं. थोड़ी देर बाद करते हैं अभी मैं फ्रेश होकर आती हूँ तब.

इतना कहकर मनीषा फ्रेश होने बाथरूम चली गई. शील टूटने के करार वो थोड़ा थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी. थोड़ी देर बाअद मनीषा फ्रेश होकर बीएड के पास आई तो मैंने उसे पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठो को चूमने लगा. मैं मनीषा के होंठो को दबोच दबोच कर चूस रहा था. मनीषा भी मेरे होंठो को चूसने लगी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में दाल दी. मैं उसकी जीभ चूसने laga.kuchh देर उसकी जीभ चूसने के बाद वो मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा अलग हुई और मेरे चहरे को चूमने लगी. मेरे चेहरे को चूमते हुवे मनीषा निचे की तरफ जाने लगी वो मेरी गार्डन मेरा सीना और मेरा पेट चूमते हुवे निचे पहुंच गई और मेरे लुंड के पास जाकर रुक गई और अपनी गार्डन उठाकर मुझे देखने लगी. मैंने उसे देखते हुवे कहा.

मैं- अब देख क्या रही हो मनीषा इसे अपने शहद जैसे मुंह में लेकर प्यार करो.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को जीभ निकलकर चाटने लगी. मेरे मुंह से सिसकी निकल गई. मनीषा पुरे लुंड पर अपनी जीभ घुमा रही थी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने मेरी बॉल्स को भी अपने हांथो से पकड़कर ऊपर उठाया और उस पर अपनी जीभ फिरने लगी. मेरी तो मज़े के मरे जान निकली जा रही थी और मैं बस आआआहहहहहहह मनीषा ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मनीषा करता रहा.

थोड़ी देर मेरे बॉल्स को चाटने के बाद मनीषा ने अपना मुंह खोला और मेरे बॉल्स को अपने मुंह में भरकर बड़े चाव से चूसने लगी. मैंने हाँथ बढाकर मनीषा का सर पकड़ लिया और उसके बालो को सहलाने लगा. मनीषा ने काफी देर मेरे बॉल्स को चूसा फिर मेरे बॉल्स को छोड़कर मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया जो अब खड़ा हो गया था.



मुझसे भी अब ज्यादा बर्दास्त नहीं हुवा तो मैं कमर उठाकर बैठ गया और मनीषा की टैंगो को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और फिर लेटकर उसे अपने ऊपर खींच लिया. इस दौरान भी मनीषा ने मेरे लुंड को अपने मुंह से निकलने नहीं दिया.

अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए था. मनीषा मेरे लुंड को चूस रही थी. मैंने भी अपने हाँथ उसकी गांड पर रख दिया और अपनी जीभ निकलकर उसकी छूट चूसने लगा. मेरा मुंह छूट पर लगते hi मनीषा ने मेरे लुंड को जोर से मुंह में दबा दिया. मैं मनीषा की छूट चाटने लगा और एक दोनों हांथो से मनीषा की गांड दबाने लगा. मनीषा बहुत जोर जोर से मेरा लुंड चूस रही थी. उसके मुंह से गगगगूउऊउउउउ गग्गूउऊउउउउ की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर उसने मेरा लुंड चूसने के बाद मेरा लुंड मुंह से निकल दिया मेरा पूरा लुंड मनीषा के थूक से भीगा हुवे था. उसने लुंड को मुंह से निकलकर उसे हाथो से मुट्ठ मरने लगी और मुझसे बोली.

मनीषा- भैया इस पोजीशन में बहुत मज़ा आ रहा है. और जोर से चूसिये मेरी छूट को.

मैं मनीषा की बात का कोई जवाब दिए बिना उसकी छूट जोर जोर से चूसने लगा. मनीषा भी मेरे लुंड को फिर से मुंह में ले लिया और चूसने लगी लगभग 5 मिनट तक एक दूसरे की छूट और लुंड चूसने के बाद हम दोनों चुदाई के लिए तड़पने लगे. इसलिए मैंने मनीषा को अपने ऊपर से उठाया और बिस्टेर के सिरहाने तक लगाकर बैठ गया और अपने पेअर को फैला दिया. मैंने मनीषा को अपने ऊपर बैठने का इशारा किया. मनीषा आकर मेरी गॉड में मेरी तरफ मुंह करके बैठने लगी. मैंने अपने लुंड को पकड़कर सीधा किया और मनीषा को बैठने का इशारा किया.

मनीषा ने अपनी छूट मेरे लुंड पर टिकाई और एक हाँथ बिस्टेर पर और एक हाँथ मेरी गार्डन पर डालकर बैठने लगी. मनीषा ने आधा लुंड अपनी छूट में ले लिया. अब उसे दर्द होने लगा था इसलिए वो रुक गई और आधा लुंड अपनी छूट के अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर उसने अपनी छूट में आधा लुंड अंदर बहार kiya.lekin मुझे मज़ा नहीं आ रहा था, इसलिए मैंने मनीषा का कन्धा पकड़कर उसे जोर से निचे दबाया और निचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दी. जिससे मेरे पूरा लुंड सरसराता हुवा मनीषा की छूट में जड़ तक घुस गया. मनीषा को मेरे इस हमले से बहुत दर्द हुवा और वो चीख पड़ी.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्ययययययय. aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मैंन मर्डर gaaaiiiiiiiiii. बआहूतट जालीइममम होऊ तुममम भाइयाँआ. आआह्ह्हह्ह्ह्ह बहुउट्ठ डारडडड होऊ रहा हीी. आपको मेरीए कोईई फिकार्डर नाहीई हाइइइइ. मैंनं डालल तू रहीए थिई अंडर. तू ेक्क्क बार्डर मी डललनीकीय क्या जरूररततत थिई. ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा दर्द से मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने उसे पूरी तरह से अपने बहो में जकड रखा था और अब हल्का हल्का धक्का लगाने लगा और मनीषा से कहा.

मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा. मुझी आधी लुंड से तुम्हारी चुदैई करनी में मज़ाआनाहीइ आ रहा था. औरर तुम होऊ ही इतनी क़तील की मुझसे कोंट्रॉल्ल होई नाहीइ हुवा.

मनीषा- aaaaaahhhhhhhhhhh आपपप ापपणी माज़ी की चाक्करर मी मेरीए जाननं लेना चाहहते हईं. अआप बहुउट्ठ गंदी हैंन. अपनी ही बहाननं कोऊ छोड़ रही हैं.

मैं मनीषा की बात सुनकर निचे से अपनी कमर जोर जोर से चलने लगा. मनीषा भी अब मस्ती में अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरे लुंड पर कूद रही थी और अपनी छूट छुड़वा रही थी. उसने अपने दोनों हाँथ मेरी गार्डन में लप्पेट था. मैं मनीषा को धक्के मरते हुवे बोलै.

मैं- आआअह्ह्ह्ह मनीषा. छुड़ायी करनी सी कोइई लड़कीय मारतीयनही हीी बल्किई उसको चुदाई मी मज़ा बहुत्त आता ही. अगर चुदाई करनी से लड़किया मरने लगती तू अब तक्क तू आधी दुनिया खाली होऊ जाती.

इतना बोलकर मैंने मनीषा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और अपने दोनों हाँथ उसकी गद्देदार गांड पर रखकर उन्हें दबाने laga.manisha मेरे होंठो को धीरे धीरे चूस रही थी. और मैं धीरे धीरे उसकी गांड दबाते हुवे मनीषा को छोड़ रहा था. थोड़ी देर धीरे धीरे चूसने के बाद मनीषा एकदम वाइल्ड हो गई और मेरे होंठो को पूरी ताकत से चूसने लगी. और चूसते चूसते उसने मेरे होंठो को काट लिया. मुझे दर्द हुवा तो मैंने उसकी गांड को जोर से दबा दिया. मनीषा को भी दर्द हुवा और वो सिसकते हुवे बोली



मनीषा- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैईयाआ. क्या कर रही होऊ. इतनी जोरर से क्यों दबा रहे हूँ.

मैं मनीषा की गांड को जोर जोर से बढ़ाते हुवे अपने मुंह निचे करके मनीषा की चूचियों पर रख दिया और उसे पिने लगा. मनीषा की छूट, गांड और चुकी तीनो पर इस समय मैं हमला कर रहा था जिससे मनीषा बहुत गरम हो गई और बोलने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाइयाँआ. बहुत्त मज़ाआ आ रहा हैई. ऐसी होई करिये भैया औरर जोरर से छोड़िये अपनीइ मनीषा को. औरर जोरर से बढाइये मेरी गण्ड को. आआआआह्ह्ह्हह्ह भैया. अआप तू बहुतत्त खिलाडीई आदमी हूँ भैया. मेररीई चूचियों को पीई जाइये भइया. पुर्रा रास निचोड़ लीजीईए. बहुत्त रॉस भारा हैईईई मेरेई चूचियों मी. यी साब आपकी लिए hi हैई मेरी जानऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं और जोर जोर से उसकी चूचियों को पिने लगा. कभी मैं एक चुकी को मुंह में भरकर चुस्त तो कभी दूसरी को चुस्त. अब मैं मनीषा को छोड़ते हुवे उसकी गांड पर हल्का हल्का चपत भी लगाने लगा. मनीषा एकदम मस्ती में सिसक रही थी और अपनी गार्डन ऊपर करके अपनी चूचिया मुझसे चुसवा रही थी और बोल रही थी.

मनीषा- आआह्ह्ह्हह्ह भैयाआ. ाप्प बहुत्त अछ्हीई छूछी चूस रही हैई. और जोरर सी चूसिये ऑर्डर निछोड़ लीजिये इसका रस. बहुत तडपीई हैं एई आपकी मुंह मी जानी की लिये. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भैया.

मैं थोड़ी देर मनीषा को इसी पोज़ में पेलता रहा उसके बाद मैंने मनीषा को अपनी गॉड से उठाकर उसे डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और उसके पीछे आकर अपने लुंड को उसकी छूट पर रखकर एक झटके में पूरा लुंड उसकी छूट में पेल diya.manisha दर्द से दोहरी हो गई और चिल्लाने लगी.



manisha-uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मुनंमयिययियीय. बाहहारर निक्कलललल लूओ अपनी लंदड़ kooo.meriii छुटत पहाड़ डाली तुमनेई जालिम्म इंसाननं. तुमममम एक्दम्मम जंवरर होऊ. मुझी नाहीई छुड़वाना तुमसीए. aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhh.

मनीषा चीखकर आगे की तरफ भागने लगी, लेकिन मैंने उसकी कमर को मज़बूती से पकड़ रखा था इसलिए वो मुझसे छोटकर नहीं जा पाई और अपने आपको छुड़ाने की पूरी कोशिश करती रही. मैं भी उसके दर्द को देखते हुवे वैसे hi रुका रहा और एक हाँथ आगे लेजाकर उसकी चुकी को पहाड़कर दबाने लगा और एक हाँथ से उसकी छूट को सहलाने लगा. थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मनीषा को भी रहत महसूस हुवी , तो उसने अपनी कमर आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

मनीषा के कमर आगे पीछे करता देखकर मैंने भी उसकी कमर को पकड़कर उसकी छूट को हलके हलके ढकी मार्कर छोड़ने लगा. मनीषा भी चुदाई में मेरा साथ देने लगी. थोड़ी धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया और एक हाँथ से मनीषा की गांड पर हलकी हलकी चपत लगाने लगा. मनीषा को भी मज़ा आने लगा और वो बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआ. ऐसे हीई धीरे धीरी स्लैप कीजिये भैया मुझी बहुत्त अच्छा लग रहा हीी. ऐसे ही मेरीए छूट को छोड़िये. आप बहुत्त अछ्हीई चुड़ायी करते हैंन बहिया. अब्ब थोड़ा और जोर जोरर से छोड़िये मुझे. बहुत अच्छा लग रहा हैई. मैंन अब्ब्ब किसी भी समाय झाड़ सकती हूँ भैया. oooooooohhhhhhhhhhhh मुनंमयिययी. तुम्हार्रा बेटा तू चूडू मास्टर हैई. तुम्हारिई 3no बेटीयून को छोड़ दिया िस्नी. aaaaaaaaaahhhhhhhhh

मनीषा की मदभरी आवाज़ सुनकर मैंने मनीषा के सर को दबाकर बिस्टेर पर कर दिया और उसकी कमर को उठा दिया. जिससे उसकी छूट और बहार की तरफ निकल गई. ऐसा करने के बाद मैंने अपने लुंड को टोपे तक बहार निकला और पूरी ताकत से उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा aaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआ करके चीखी और चुदाई का मज़ा लेने लगी. मैं अब बार बार अपना लुंड टोपे तक बहार निकालता और पूरी ताकत से मनीषा की छूट में पेल देता. इस चुदाई से मनीषा का बीएड हिलने लगा. लगभग 5 मिनट तक ऐसे hi ताबड़तोड़ छोड़ने के बाद मनीषा झड़ने के करीब पहुंच गई और बड़बड़ाने लगी.



मनीषा- ahhhhhhhhhhhhhhh ब्राह्ममममम भाआईईईई. कुछःह तू रहम कर. पुररी जँवाररर की तआराहः छोड़ड़ड़ रहा ही अपनी बहानंन्न kooo.aaaaahhhhhh ऑर्डर जोरर से छोडोऊ भैयाआ. मैं आनी वालीए हूँण. मेरा बाडांण हवा मी उड़द रहा ही भैया. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मैं गईई. मुझी सँभालुओ. और जोरर से पेलोऊ मेरी छूट को. पूरा लुंड अपना थूककक दू इसकी ाँदाररर. बहुतत्त खुजलियी होत्तीए हीी इसमेई. आआआआअह्ह्ह्हह भैया मैं गाइइइइइइइइ. साम्भालूओ मुझको. uuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii मम्मीयिययी.

इतना कहकर मनीषा भलभलाकर झाड़ गई और निढाल होकर बिस्टेर पर लेट गई. मैं उसके ऊपर लेट कर उसकी पीठ को किश करना लगा. जीभ निकलकर चाटने लगा. मैंने एक हाँथ बगल से डालकर उसकी चुकी को पकड़कर दबाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा फिर से गरम होने लगी. मैंने मनीषा को उठाकर कुर्शी पर बैठा दिया और झुककर मनीषा के पैरो के निचे बैठ गया और उसकी छूट चाटने लगा. मैंने हाँथ ऊपर करके मनीषा की चूचियों को पकड़कर दबाने लगा. कुछ देर ऐसा करने के बाद मनीषा फिर से गरम होने लगी.

मनीषा ने अपने हांथो से मेरे सर को अपनी छूट पर दबाना शुरू कर दिया. मैं तेज़ तेज़ से मनीषा की छूट चाटने लगा और उसकी चूचिया मसलने laga.manisha ooooooohhhhhhhhhhh भईया आआआआअह्ह्ह्हह भैया करती रही. कुछ देर उसकी छूट चाटने के बाद मैं खड़ा हो गया और पोजीशन लेकर मनीषा की एक तंग उठाकर कुर्सी की हत्थे पर रख दिया और लुंड को उसकी छूट पर सटाकर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लुंड उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा के मुंह से चीख निकल गई.

manisha-ooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh bhaiyaaaaaaaaaaaa. धीरी धीरीई डालूओ.

मैंने मनीषा की बात मणि और धीरे धीरे लुंड उसकी छूट में पेलने लगा. मैंने झुककर मनीषा के सर को ऊपर उठाया और उसके होंठो को चूमने लगा मनीषा भी चुड़ते हुवे मेरे होंठो को चूमने lagi.main हलके हलके झटके लगाकर मनीषा की छूट 5 मिनट कर पेलता रहा और होंठ चुस्त रहा. उसके बाद मैंने उसके होंठो से अपना होंठ हटाया तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- oohhhhhhhhhhh भैयाआ. और तेज़ छोड़ो मुझी. जोर जोर से पेलो मेरी छूट को भीआयाआ.

मनीषा की बात मानकर मैंने अपने धक्को की रफ्तारर बढ़ा दी और हचक्क हाचाक्क कर मनीषा की छूट में लुंड पेलने लगा. थोड़ी देर उसको ऐसे पेलने के बाद मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी गॉड में उठा लिया. मनीषा ने अपने बहे मेरे गले में दाल दी और मुझसे लिपट गई और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए. मैं उसे जोर जोर से अपने लुंड पर उछालने लगा. मनीषा को बहुत मस्ती में बोलने लगी.



मनीषा- aahhhhhhhhhhhhhhhhh हांण भैईया ऐसी ही छोड़दू मुझी मैंनं तुम्हारीई होऊणन आआअह्हह्ह्ह्हह. बहुतत्त अछ्हा लग रहा हैई भइया. आआआआअह्ह्ह्हह भाइययिया ऑर्डर टीज़ज़ज़ कार्रोओओओ क्यूँ तड़पा रही हूँ मुझको. प्यारररररर सी खोजज हचक हचाकक कर छोड़ो मेरे भैया. मुझी हमेशा ऐसी ही छोड़ती राहु. बना लू मुझी अपनी लुंड की रानीई. पतले राहु मेरी छूट भैया. तुम्हारा हथियार बहुतत्त मस्त हैई ooohhhhhhhhhhhh.

मनीषा की मादक सिसकारी सुनकर मैंने धक्के और तेज़ कर दिया और मनीषा से बोलै.

मैं- ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा मेरिइइइइइइ राजनीय. ायबबब तू मैंन तुझी छोड़ी ेक्क्क दिन्नं भी नाहीइ रहहह सक्ता. देखहह तेरा भायी अपनीइ मास्ट माललळ बहन को छोड़ रहा ही तुझ जैसीई गरम्म बहाणं को छोड़ना किस्मत की बात ही मेरीए रणीय. मैं चाह्त्ता हूँ की मेरीए बहन खुशी सी सरई ज़िन्दग़गी मुझसे ऐसी ही चुदवाती रही.

इतना कहकर मैं मनीषा को लिए लिए बिस्टेर पर लेते गया और मनीषा को अपने लुंड पर बैठा लिया और निचे से धक्का लगाने लगा. अब मेरा लुंड मनीषा की बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था. मैंने मनीषा को मोर्चा सम्बहलने के लिए कहा और आराम से बिस्टेर पर लेट गया. मनीषा ने अपने पंजो के बल बीअतकार मेरे लुंड पर उछलने लगी और बोलने लगी.



मनीषा- आह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ. बहुत मज़ा आए रहा हैई. हैं मैंन बाहुटत गारम्म हूँण. लेकिननं यी गर्मी मेरे भाईई की लिये हीी. वहीइ मेरीए गरमी कोऊ थांदड़ा करेगा. मैंन पुरीई ज़िंदगीई तुमसे छुडवाऊंगीए भइया. ooooooooohhhhhhhhhh. जिसका तुममम जईसा भाईईई होओओओ. तू कौंन सीई बहाननं ऐसी भायी को मना कररर सकककटी हैई. निचे सी तुममम भी छोड़ू मुझी मेरा होनी वाला ही.

मैं- हाआआआह आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषआआ मेरा भी होनी वाला हैईईई. चू भी औरर जोरर जोरर सी उछाल मेरे लौड़ी पारर. औरर पूरा ली ली अपनी अंडर औरर बुझा ली अपनीइ प्यास और थांडी कर ली अपनी गरमी.

मनीषा- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भैयाआआ. ऑर्डर जूर्रर सी छोड़ू भैयाआ. तुममम बहुतत्त अच्छा छोड़ रही हूँ. तुमको पता हीी कोई लडकीयो को कैसी छोड़ा जाता हैई ताभ्हीइ तुमने सरिता दी और सरिता डीई को अपना गुलाममम बना कर रख्हा हुवा हैई. आजजज तुमने मुझी भी छोड़कर अपना गुलाम बना लिया ही मेरे चुड़क्कड़ भैया. aaaaaahhhhhhhhhh.

मैं निचे से कमर जोर जोर से ऊपर उचलल रहा था और मनीषा तेज़ी से मेरे लुंड पर कूद रही थी. मैं मनीषा को पेलते हुवे जोर जोर से बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगा.

मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा मेरीए रानीई. मैंन झाड़नी वाला हूँण आआआअह्ह्ह्हह लिए अपनी छुटत मी मेरा लौड़े का पनीई औरर बुझा ली अपनी छुटत की प्यास. aahhhhhhhhhh मनिशांआ मैं गया ooooohhhhhhhhhhhhh.

मेरे झड़ने के साथ साथ मनीषा का भी बदन अकड़ने लगा और वो भी जोर जोर से अपनी छूट मेरे लुंड पर पटकते हुवे झड़ने लगी और बोले लगी.

मनीषा- aaaaaahhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्यययय. मैंनं gaiiiiii.sambhaalooo मुझी. मैं भी झाड़ रहीए हुन्न भैया. मुझी बहूत्त माज़आ आए रहा हैई भइया. aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मैं gaiiiiiiiiii भैइयाआआआ.

इतना कहकर मनीषा भी झाड़ गई और मेरे ऊपर लेट कर अपनी सांसे दुरुस्त करने लगी. मैंने भी अपने बांहे मनीषा के ird-gird दाल ली और उसे अपने साइन से चुपके लिया. थोड़ी देर बाद जब दोनों की सांसे नार्मल हुई तो मैंने मनीषा के होंठ चूमते हुवे पूछा.

मैं- कैसा लगा मेरी प्यारी बहन को.

मनीषा- पूछहु ही मत भैया. मज़ा आ गया. पहली बार से ज्यादा मज़ा आया इस बार.

थोड़ी देर ऐसे hi एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद मनीषा मुझसे अलग होकर बिस्टेर से निचे उतर गई और नंगी hi बहार जाने लगी. मैं उसकी नंगी कातिल और थिरकती गांड देखने लगा. मनीषा को जैसे पता चल गया हो की मैं कहा देख रहा हूँ. उसने दरवाज़े से पलटकर मुझे देखा तो मुझे अपनी नंगी गांड को देखता पाया. तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो लगड़ाते हुवे बाथरूम चली गई. मैं भी उठकर अपने आप को साफ करने के लिए ऊपर बाथरूम में चला गया. अपने को साफ करने के बाद मैंने पैन किलर और i-pil लेकर मनीषा के कमरे में वापस आया.

मनीषा बिस्टेर पर बैठी थी. मैंने उसे पैन किलर खाने के लिए दी. उसने पैन किलर खाया और बिस्टेर पर टेल गई. मैं भी आकर मनीषा के बगल लेट गया और उसके सर को अपने कंधे पर रखकर उसके बालो में ऊँगली फिरने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उसके माथे पर अपना होंठ रख दिया और एक प्यार भरा चुम्बन उसके माथे पर कर लिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-123

मैं और मनीषा बिस्टेर पर एक दूसरे से चिपक कर लेते थे. मैं मनीषा के माथे को चूमकर उसके बाल को सहला रहा था. मनीषा ने मेरी तरफ देखते हुवे मुझसे कहा.

मनीषा- जब मैं बाथरूम जा रही थी तो आप क्या देख रहे थे.

मैं- मैं क्या देख रहा था. कुछ भी तो नहीं

मनीषा- मुझे पता है की आप क्या देख रहे थे. अब छुपाइये मत और बता दीजिये.

मैं- मनीषा. वो क्या है न मुझे तुम्हारी गांड बहुत पसंद है. मैं तुम्हारी गांड भी मरना छठा हूँ.

मनीषा- (मुस्कुरा kar)aap न भैया सच में बहुत कमीने हो. अपनी तीनो बहनो को पाटकर छोड़ लिया आपने और फिर भी आपका मन नहीं भरा तो मेरी गांड के पीछे पद गए हो.

मैं- सच में मनीषा. तुम्हारी गांड बहुत hi मस्त है. जब तुम चलती हो तो उसकी लचक देखकर मेरा मन करता ही की अभी तुम्हारी गांड मर लू.

मनीषा- क्यों दोनों दीदी की गांड मस्त नहीं है क्या.

मैं- मत पूछो मनीषा. मेरी तीनो बहनो की गांड एक से बढाकर एक है. और मैं तुम तीनो की गांड मरना चाहता हूँ.

मनीषा- अच्छा. तो किस किस की गांड मरी है आपने.

मैं- अभी तक तो सिर्फ सरिता दी की hi मरी है. सविता दीदी की गांड मैं आगरा जाकर मरूंगा. लेकिन अभी मुझे तुम्हारी गांड मारनी है. बोली मनीषा.

मनीषा- लेकिन मुझे बहुत दर्द होगा भैया. देखा नहीं सरिता दीदी कैसे 3 दिन ठीक से चल नहीं पायी थी. और वैसे भी आपका बहुत बड़ा है भैया.

main-tumhari गांड भी सरिता दीदी से किसी मामले में काम नहीं है. मैं बहुत प्यार से मरूंगा. तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं होगा मनीषा.

मनीषा( थोड़ी देर सोचकर)- मैं तैयार हूँ भैया, मगर मेरी दो शर्ते हैं. अगर मानोगे तभी मैं आपकी बात मानूंगी.

मैं- अरे मुझे तेरी साडी शर्त मंजूर है मनीषा. तू बोल तो सही. तेरी इस गांड के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ.

मनीषा- इतना ज्यादा उछालो मत भैया. पहले मेरी बात तो सुन लो. ऐसा न हो की मेरी शर्त सुनकर आपका उबाल ठंडा पद जाये और आप मेरी गांड का ख्याल भूल जाये.

मैं- तू बता तो सही पहले.

मनीषा- पहली शर्त ये है की आप मुझे आगे से भी सरिता दीदी और सविता दीदी की तरह रफ़ तरीके से छोड़िये. जैसे उन दोनों को गली देखर छोड़ते हैं वैसे hi मुझे भी छोड़ा करियेगा. मुझे उसमे और भी मज़ा आएगा.

मैं- अरे मनीषा. मैं तुम्हारे साथ रफ़ सेक्स नहीं करना चाहता था इसलिए तुमको बहुत प्यार से मैंने छोड़ा. लेकिन जब तुम खुद चाहती हो तो मैं आगे से तुमको भी रफ़ तरीके से hi छोडूंगा. ये शर्त मुझे मंजूर है. दूसरी शर्त क्या है तुम्हारी.

मनीषा- मेरी दूसरी शर्ट ये है की मुझे पता है की जब आप मेरी गांड मरोगे तो मुझे बहुत दर्द होगा. इसलिए मैं चाहती हूँ की जब आप मेरी गांड मारो तब सरिता दीदी भी साथ में हो और मेरी हेल्प करे

मैं- क्या….. क्या कहा तुमने.. दिमाग तो ठीक है न तुम्हारा, ये कैसी बात कर रही हो यार तुम, सरिता दीदी के सामने तुमको छोड़ू. ये कभी नहीं हो पायेगा मनीषा.

मनीषा- क्यों नहीं हो पायेगा भैया. जब आप मेरे सामने दोनों दीदी को छोड़ सकते हैं तो आप सरिता दीदी के सामने मुझे क्यों नहीं छोड़ सकते.

मैं- तुम पागल हो गई हो. मैंने कब तुम्हारे सामने दोनों दीदी को छोड़ा है. वो तुम छुपकर देखा करती थी. जिसका हम तीनो में से किसी को पता नहीं था. और तुम ये क्यों भूल रही हो की छहपकार देखना और सामने से देखना दोनों अलग अलग चीजे हैं. चलो मन भी लेता हूँ की मैं इसके लिए तैयार भी हो जाता हूँ. लेकिन दीदी का सोचो. उनका क्या. तुमको लगता है की हम दीदी के पास जाकर ये कहेंगे की मैं तुम दोनों को साथ में छोड़ना चाहता हूँ और वो मान जाएँगी. वो कभी नहीं मानेंगी.

मनीषा- इसका भी इलाज़ है मेरे पास. वो मैं कर लुंगी, लेकिन पहले आप तो रेडी हो जाओ इसके लिए.

main(hanskar) ठीक है मैं तैयार हूँ. मुझे एक साथ दो दो हसीनाओ को छोड़ने का मौका मिल रहा है. इससे ज्यादा मुझे क्या चाहिए.

मनीषा- मुझे पता था. आप पुरे कमीने हो. ऐसा मौका आप अपने हाँथ से थोड़े hi जाने डोज.

मनीषा की बात सुनकर मैं हंस पड़ा. मेरी बात सुनकर मनीषा भी हंस पड़ी. उसके बाद हम दोनों काफी देर इधर- उधर की बाते की और फिर एक दुसरे की बहो में नंगे hi सो गए. रात की चुदाई के कारन हम थके हुवे थे और सो hi रहे थे की दरवाज़े पर बेल्ल बजी, लेकिन आलस के कारन मैं दरवाज़ा खोलने नहीं गया. थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल पर सरिता दीदी की कॉल आयी की वो सब बहार खड़े हैं. दरवाज़ा खोल दूँ. मैं उठकर मनीषा को जागकर सब बता दिया और अपने कमरे में चला गया. जल्दी से मैंने लोअर और t-shirt डाली और दरवाज़ा खोलने चला गया. दरवाज़ा खोलने के बाद मां पापा और दीदी अंदर आ गए. मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया और वापस अपने कमरे में आकर सो गया.

लगभग 8 बजे के करीब सरिता दीदी ने आकर मुझे जगाया. मैं आँख मलते हुवे उठा और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस गया. जब मैं फ्रेश होकर बहार आया तो दीदी मेरे बिस्टेर पर बैठी थी. मैं भी जाकर वही बैठ गया तो दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- आज इतनी देर तक क्यों सो रहे थे.

मैं- वो दीदी रात को देर से सोया था इसलिए नींद आ रही थी.

सरिता di(muskura कर) मनीषा भी सो रही है अभी तक. कही मैं जो सोच रही हूँ वो सच तो नहीं.

मैं- नहीं दी ऐसी कोई बात अभी तक नहीं हुई है. वो मनीषा और मैं देर रात तक जागकर बाते करते रहे और मैं उसपे तरय भी करता रहा. इसलिए आज इतनी देर तक सो रही है.

मैं दीदी को इसलिए कुछ नहीं बताया की बहुत hi जल्द मनीषा के प्लान इम्प्लीमेंट करने के बाद दीदी को सब पता hi चल जाना था, लेकिन मैं ये नहीं जनता था की मनीषा आज hi अपने प्लान को इम्प्लीमेंट करने वाली थी.

सरिता दी- तो बात कहा तक पहुंची अभी तक.

मैं- आप को बहुत जल्दी है jan-ne की, बस कुछ दिन में शायद काम बन जाये.

सरिता दी- सेल तू किसी पर तरय करे और वो तुझसे बच जाये ये तो नामुमकिन है. कीप आईटी उप.

दीदी इतना बोलकर बिस्टेर से उठी और मेरे होंठो को किश किया और निचे चली गई. थोड़ी देर बाद मैं नाश्ता करने के लिए निचे आया और जाकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया. पापा मम्मी भी वही थे. कुछ देर बाद मनीषा भी वह आ गई. हम सब ने मिलकर नाश्ता किया. मम्मी पापा जॉब पर चले गए और मैं भी अपने काम पर जाने के लिए कपडे बदलने अपने कमरे में चला गया. मैं कपडा चेंज कर रहा था तो मनीषा कमरे में आ गई. आते hi उसने मुझे पीछे से हूजे किया. मैंने मनीषा से पूछा.

मैं- अब तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा है न.

मनीषा- हाँ भैया थोड़ा बहुत है अभी भी. आज सोल्लगे नहीं जोगी और आराम कर लुंगी तो सब ठीक हो जायेगा.

मैं- ठीक हैई. जैसा तुम्हे ठीक लगे.

इतना कहकर मैंने मनीषा को अपने आगे कर लिए और उसके होंठो पर किश कर लिया और अपने काम पर निकल गया. थोड़ी देर काम करने के बाद मैंने अपना सामान समेटा और बहार घर आ गया. घर आकर मैं अपने कमरे में गया और अपना पूरा काम फिनिश किया और बिस्टेर पर लेट गया. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी की कॉल आई. उन्होंने मुझ अपने कमरे में बुलाया था. मैं दीदी के कमरे में जाने लगा तो मनीषा अपने कमरे से बहार निकल रही थी. मुझे दीदी के कमरे में जाता देख वो मुस्कुराने लगी और आँख मर दी. मैं भी मुस्कुराता हुवा दीदी के कमरे का डोर क्नॉच किया. थोड़ी देर बाद दीदी ने आकर दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलने के बाद दीदी ने मुझे अंदर खींच लिया और दरवाज़ा लॉक कर दिया.

दरवाज़ा बंद करके जब दीदी मेरी तरफ थोड़ा सा घूमी तो मैं उन्हें देखता रह गया. दीदी आज एक टॉप और मिनी से मिनी स्कर्ट पहने हुवे थी. दीदी की चूचिया टॉप को फाड़कर बहार आने को बेताब थी. दीदी की मिनी स्कर्ट इतनी ज्यादा छोटी थी की वो दोनों उनकी गांड पर hi ख़तम हो जाती थी. शायद ये दीदी के स्कूल टाइम की मिनी स्कर्ट थी.



मैं तो दीदी को देखते hi सीधे उनके पास चला गया और उनपर टूट पड़ा. मैंने दीदी को कसकर अपने साइन से लगाया. जिससे दीदी की चूचिया मेरे साइन में धस गयी. मेरा लुंड दीदी की छूट पर जाकर ठोकर मारा. दीदी की आआआअह्हह्ह्ह्हह निकल गई. मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और अपने दोनों हाँथ बढाकर उनकी गांड पर रख दिया. मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे उनकी गांड दबाने लगा. दीदी भी होंठ चूसने में मेरा साथ देने लगी. और अपना हाँथ बढाकर मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी.

मैं दीदी के होंठ चूमते हुवे अपने जीभ दीदी के होंठो पर फिरने लगा. दीदी ने भी मुंह खोलकर मेरी जीभ अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने एक हाँथ दीदी की गांड से उठाकर उनकी छूट पर पंतय के ऊपर से रख दिया और उनकी गांड दबाते हुवे उनकी छूट भी सहलाने गाला. थोड़ी देर तक दीदी से अपनी जीभ चुसवाने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी की चुकी जोर जोर से दबाने लगा और गांड को मसलने लगा. दीदी भी मेरे लुंड को लोअर के अंदर हाँथ डालकर जोर जोर से मुठियाने लगी. मैंने अपना मुंह दीदी के मुंह से हटाया और उनकी गार्डन को चूमने लगा. मैंने दीदी की चुकी को पकड़कर जोर से बड़ा दिया. दीदी सिसक पड़ी.

सरिता दीदी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiii. dhireeeeeeeeeee सीई.

सरिता दीदी की सिसकी सुनकर मैंने हाँथ निचे कर उनकी स्कर्ट के चुके को खोल दिया. स्कर्ट दीदी के पैरो में जाकर गिर पड़ी. अब मैं दोनों हांथो से दीदी की पंतय में फांसी नंगी गांड को दबाने लगा. दीदी जोर जोर से मेरा लुंड मुठियाने लगी. थोड़ी देर दीदी की गांड दबाने के बाद मैंने दीदी को घुमाकर दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाते हुवे दीदी की गांड पर जोर से थप्पड़ मर दिया. दीदी aaaaaaaaaahhhhhhh abhhiiiiiiiiiiiiiii करके सिसक पड़ी.



मैंने तुरंत निचे झुककर दीदी की गांड को चुम लिया. मैंने फिर से दीदी की गांड पर जोरदार थप्पड़ जमा दिया दीदी फिर से aaaaaaaaaahhhhhhhh अभियई करके सिसकी. मैं फिर से झुककर दीदी की गांड को चुम लिया. मैंने लगभग 5 मिनट तक दीदी के साथ यही किया. दीदी को भी इस दर्द भरे खेल में मज़ा आ रहा था. उसके बाद मैंने लास्ट थप्पड़ बहुत जोर से लगा दिया और तुरंत झुककर दीदी की गांड को काट लिया दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कामिनीई. इतनीई ी जोररर सीए क्यूओ काअररर रहा हीी. डारडडड होता हैई मुझी.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को घुमाकर अपनी तरफ किया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे एकदम लाल हो गई थी. दीदी अब छोड़ने के लिए एकदम तैयार थी. मैंने दीदी की टॉप को पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. दीदी ने भी अपना हाँथ ऊपर कर लिया तो मैंने दीदी की टॉप उतर कर वही दरवाज़े के पास फेंक दिया. दीदी अब ब्रा और पंतय में मेरे सामने थी. मैंने दीदी को अपने से सटाकर कास कर गले लगा लिया.



अभी थोड़ी देर hi दीदी को गले लगाए हुवा था की दीदी ने मुझे धक्का देखर एक झटके में मुझे अपने से अलग कर दिया और मुझसे दूर कड़ी हो गई. मैंने नज़र उठाकर दी की तरफ देखा तो उनके चेहरे पर मुझे दर दिखाई दिया. मैंने दी से पूछा.

मैं- क्या हुवा दी. आपने मुझे धक्का क्यों दे दिया.

मेरी बात का दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और वो बूत बैंकर कड़ी रही. मैंने दीदी से फिर पूछा तो दीदी ने फिर से कोई जवाब नहीं दिया. मैंने दीदी की नज़रो का पीछा किया तो दीदी खिड़की की तरफ देख रही थी. मैंने जब खिड़की की तरफ देखा तो वह पर मनीषा कड़ी हुई थी. एक बार तो मनीषा को देखकर मैं दर hi गया, लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे याद आया की मनीषा से डरने की कोई जरूरत hi नहीं है. शायद यही मनीषा का वो प्लान हो जिसके बारे में उसने कहा था. मैंने भी डरने का नाटक करते हुवे धीरे से दीदी से कहा.

मैं- अब क्या होगा didi.isne तो सब कुछ देख लिया.

सरिता दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. उनको जैसे कोई शॉक लगा हो. मैंने दीदी के कंधे से पकड़कर हिलाया तो दीदी होश में आई. उनकी आँखों में आँशु चालक आये थे. वो मुझे देखती हुई बोली.

सरिता दी- अब क्या होगा अभी. मनीषा ने तो सब कुछ देख लिया. अब मैं उससे कैसे नज़ारे मिलाऊँगी.

मैं- कुछ नहीं होगा दी. मैं कुछ न कुछ करके मनीषा को समझा लूंगा.

सरिता दी( सिसकी लेते हुवे)- लेकिन मैं तो मनीषा की नज़रो में गिर गयी न. वो मेरे बारे में क्या सोच रही होगी.

मैंने बात करते हुवे खिड़की की तरफ देखा तो मनीषा वह नहीं थी. तभी दीदी के दूर पर दस्तक हुई और मनीषा की आवाज़ सुनाई दी.

मनीषा- दीदी दरवाज़ा खोलो. मुझे बात करनी है आप दोनों से. दरवाज़ा खोलो बहिया.

मनीषा की आवाज़ सुनकर दीदी भागकर बेडशीट अपने ऊपर लप्पेट लिया और बिस्टेर पर अपनी टंगे सिकोड़ कर उसपर अपना मुंह रखकर बैठ गई. मैंने जाकर दरवाज़ा खोला. तो मनीषा ने मुझे एक स्माइल दी. मैं भी थोड़ा सा मुस्कुरा दिया. मनीषा जल्दी से अपने चेहरे पर गुस्से वाला एक्सप्रेशन ले आयी और मुझे धक्का देते हुवे कमरे में आ गई और जाकर दीदी के सामने बीएड पर कड़ी हो गई. दीदी ने एक नज़र मनीषा को देखा फिर अपनी गार्डन झुका ली. मनीषा ने गुस्से का नाटक करते हुवे कहा.

मनीषा- या सब क्या चल रहा है दीदी आप दोनों में.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. मैं भी अपने प्लान वाले करैक्टर में आ गया और डरते हुवे मनीषा के पास गया और मनीषा को समझने की कोशिश करते हुवे बोलै.

मैं- ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रही हो मनीषा. वो दीदी की आँखों में कुछः चला गया था मैं वही फूंख मार कर निकल रहा था. और कोई बात नहीं है मनीषा.

मेरी बात सुनकर मनीषा बोली.

मनीषा- आप तो चुप hi रहिये भैया. आपसे तो मैं बाद में बात करुँगी. मैं कोई बच्ची नहीं हूँ जो ये न समझ सकू की अंदर क्या हो रहा था. आपको शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ ऐसे करते हुवे. आपने तो बेशर्मी की साडी हाडे पर कर दी.

मनीषा की बात सुनकर एक बार को तो मुझे लगा की कही सच में मनीषा सीरियस तो नहीं हो गई है. लेकिन मनीषा ने अपनी बात ख़तम होने के बाद मुझे आँख मर दी. जिससे मुझे थोड़ी तसल्ली मिली. फिर वो दीदी की तरफ मुड़ी और उनसे मुखातिब होती हुई बोली.

मनीषा- मैंने कुछ पूछा है आपसे दीदी. आपकी ख़ामोशी मुझे बहुत कुछ कह रही है. तो क्या मैं ये मनु की जो मैं आप दोनों के बारे में सोच रही हूँ. सही सोच रही हूँ.

मनीषा की बात सुनकर सरिता दीदी के हिचकियो की आवाज़ आने लगी. उन्होंने अपना चेहरा उठाया तो उनका चेहरा आंसुओ से भीगा हुवा था. वो मनीषा को देखते हुवे लाचारी के साथ बोली.

सरिता दी- मुझे माफ़ कर दे मनीषा. मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई. आगे से मैं ऐसी भूल कभी नहीं करुँगी. मैं तेरे हाँथ जोड़ती हूँ.

दीदी का रोना और माफ़ी मांगना मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा था. लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर सकता था, क्योंकि ये पूरा प्लान मनीषा लीड कर रही थी. मैं तो अपने फायदे के लिए उसके साथ साथ चल रहा था. मनीषा ने गुस्से का नाटक करते हुवे दीदी से कहा.

मनीषा- क्या कहा माफ़ कर दूँ आपको. आप इतनी बड़ी बाल्टी करके बोल रही हैं की आपको माफ़ कर दूँ. आने दो पापा को. मैं उन्हें आप दोनों के बारे में सब बताती हूँ.

मनीषा के बात सुनकर दीदी और जोर जोर से रोने लगी. वो तुरंत बिस्टेर से उठकर मनीषा के पास आई और उसके सामने कड़ी हो गई. बिस्टेर से उठने के कारन चद्दर दीदी के जिस्म से बिस्टेर पर गिर गई. इस बात का दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि इस समय उन्हें किसी तरह मनीषा को मानना था. दीदी मनीषा के सामने सर झुककर कड़ी थी और हिचकी ले रही थी. मैंने मनीषा से कहा.



मैं- या क्या कर रही हो मनीषा. अपनी बहन को रुला रही हो तुम. देखो ये सब पापा को बताने की क्या जरुरत है. हम बहैठ कर बात करते हैं न. मैं तुम्हारी साडी ग़लतफ़हमी दूर कर दूंगा.

मनीषा- ऐसा है भैया. आप चुप hi रहिये. नहीं तो मैं अभी फ़ोन करने जा रही हूँ पापा को. आपसे बाद में बात करुँगी. पहले दीदी से तो निपट लू. हाँ तो बताइये दीदी. इस बात का तो पापा को पता चलना hi चाहिए की उनकी लाड़ली बेटी अपने भाई के साथ क्या क्या गुल खिला रही है.

सरिता di(rote हुवे)- ऐसा मत करना मनीषा. पापा को मत बताना. नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं पापा को मुंह नहीं दिखा पाऊँगी. मैं सकते कर लुंगी. मैं ये कलंक लेकर नहीं जी पाऊँगी. मुझे माफ़ कर दे मनीषा. तू जॉब hi सजा देगी मुझे मंज़ूर है.

दीदी की बात सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उसने अपने प्लान की पहली सीधी पर कर ली थी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-124

मनीषा- ऐसा है भैया. आप चुप hi रहिये. नहीं तो मैं अभी फ़ोन करने जा रही हूँ पापा को. आपसे बाद में बात करुँगी. पहले दीदी से तो निपट लू. हाँ तो बताइये दीदी. इस बात का तो पापा को पता चलना hi चाहिए की उनकी लाड़ली बेटी अपने भाई के साथ क्या क्या गुल खिला रही है.

सरिता di(rote हुवे)- ऐसा मत करना मनीषा. पापा को मत बताना. नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं पापा को मुंह नहीं दिखा पाऊँगी. मैं सकते कर लुंगी. मैं ये कलंक लेकर नहीं जी पाऊँगी. मुझे माफ़ कर दे मनीषा. तू जॉब hi सजा देगी मुझे मंज़ूर है.

दीदी की बात सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उसने अपने प्लान की पहली सीधी पर कर ली थी.

अब आगे.

दीदी ने जो बात कही थी किट ुम जो भी सजा डौगी मुझे मंजूर होगी उसे सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी, लेकिन उसने तुरंत अपने चेहरे पर गुस्सा लाया और दीदी से मुखातिब होते हुवे कहा.

मनीषा- सजा तो आप दोनों को अब पापा देंगे. मैं अभी पापा को फ़ोन करके सब बताती हूँ.

इतना कहकर मनीषा ने अपना फ़ोन हाँथ में लिया और उसमे किछ करने लगी. सरिता दीदी ने तुरंत उसके हाँथ पकड़ लिए और मिन्नत भरी आवाज़ में बोली.

सरिता दी- प्ल्ज़ मनीषा पापा को मत बताओ. मैं पापा की नज़रो में गिरकर नहीं जीना चाहती. तू मुझे माफ़ कर दे और एक मौका दे. मैं तुझसे वडा करती हूँ की जो चाहेगी मैं वो करुँगी.

मनीषा अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लेकर बोली.

मनीषा- ठीक है दीदी जब आप इतना कह रही हैं तो मैं पापा को कुछ नहीं बताउंगी. लेकिन उसके लिए आप दोनों को सजा मिलेगी. और मैं जो कहूँगी आपको मेरी बात man-ni होगी.

सरिता दी- ठीक है मनीषा. तुम जो कहोगी मैं वो सब करुँगी, लेकिन पापा को ये बात मत बताना.

मनीषा- एक बार और सोच लो दीदी, कही मेरी बात सुनकर आप मुकर गई तो.

सरिता दी- मैं नहीं मुकरूंगी. मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी, तुम एक बार कहो तो सही.

दीदी की बात सुनकर मनीषा ने अपना हाँथ बढाकर दीदी के आँशु साफ किये. और अपना हाँथ दीदी के सर के पीछे मज़बूती से पकड़कर दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मनीषा- सच में आप मेरी हार बात मानोगी.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने अपनी गार्डन हाँ में हिला दी. तो मनीषा ने अपना सर आगे झुकाया और अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. ऐसा करते hi दीदी को एक झटका सा लगा और वो मनीषा को अपने से दूर धकेलने लगी, लेकिन मनीषा ने दीदी का सर पकड़ा हुवा था इसलिए दीदी अपने आपको छुड़ा नहीं पाई और कसमसाने लगी. मनीषा ने लगभग 2 मिनट तक दीदी के होंठो को जोर जोर से चूसा और छोड़ दिया. दीदी मनीषा को अपने से दूर धकेला और गुस्से के साथ बोली.



सरिता दीदी- ये क्या बदतमीज़ी है मनीषा. तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो.

दीदी की बात सुनकर मैं और मनीषा मुस्कुराने लगे. दीदी मुझे हँसता देख आँखे फाडे कभी मुझे देखती और कभी मनीषा को देखती. दीदी ने मुझे हँसता देख मुझसे पूछा.

सरिता दी- तुम्हारी हंसी का मतलब है की तुम भी मनीषा के साथ मिले हुवे हो और मेरे साथ ये खेल खेल रहे हो. तुम दोनों को शर्म नहीं आती. मुझे ऐसे जलील करते हुवे.

इतना कहकर दीदी रोने लगी. दीदी को रट देख मैं और मनीषा दीदी के पास गए और उन्हें चुप करवाने लगे. दीदी बार बार मुझे अपने से दूर धकेल रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हुई तो उन्होंने मनीषा और मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- तुम दोनों को मुझे जलील करके क्या मिल गया. और अभी तुमने भी इसका साथ दिया. मैंने तुमको अपना सबकुछ सौप दिया. क्या कमी रह गयी थी मुझमे जो तुमने मेरे साथ ऐसा किया.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी आप पहले चुप हो जाओ. हमने आप को जलील नहीं किया. ये सब मनीषा का प्लान था की हम दोनों को वो रेंज हांथो पकडे और हम दोनों के साथ चुदाई में शामिल हो सके.

मनीषा- हाँ दीदी आप मुझे गलत समझ रही है. मैं तो बस आपको डरा रही थी की आप मेरी बात आसानी से मान जाओ. और मुझे आप दोनों के बारे में शुरू से सब पता था. जब से आप मीरा की बात मानकर भैया को सडके करना शुरू किया तब से आज तक की साडी बाते मुझे पता हैं.

मनीषा की बात सुनकर दीदी का मुंह खुला का खुला रह गया. उन्हें तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की जिन्हे वो इतना सीधा सदा समझती हैं वो बहुत पहुंची हुई चीज़ है. दीदी के मुंह से कोई बोल नहीं फुट रहे थे. मनीषा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मनीषा- आपको याद है की सोनम दीदी की शादी में आपको जाना था, लेकिन आपकी जगह मैं चली गई. जानती हैं क्यों, क्योंकि मैं आप सब को बहुत प्यार करती हूँ और मैं आपको खुश देखना चाहती हूँ, इसलिए मैं बहाना बनाकर वह चली गई ताकि आप दोनों को प्राइवेसी मिल सके. अगर मुझे आपको जलील करना होता तो मैं आपको शुरू में hi ऐसा करते हुवे पकड़ लेती और जलील करती.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने हाँ में गार्डन हिला दी. दीदी ने फिर से मनीषा की तरफ देखा. दीदी को अभी भी भरोषा नहीं हो रहा था की मनीषा ने शुरू से लेकर आखिर तक सबकुछ अपनी आँखों से देखा है. दीदी ने लड़खड़ाती हुई जुबान में मनीषा से फिर पूछा.

मनीषा- जब तुम्हे सब पहले से hi पता था. तो तुम पहले क्यों सामने नहीं आई. आज क्यों आई हो.

इस बार मनीषा की जगह मैं बोलै.

मैं- बात ये है दीदी की कल मैंने मनीषा को भी छोड़ दिया और जब मैंने मनीषा की गांड मरने की सोची तो मनीषा ने ये शर्त रख दी की वो मुझसे गांड तभी मरने देगी जब मैं उसकी गांड आपके सामने मरू और आप इसमें उसकी मदद करे.

मेरी बात सुनकर दीदी मुझे और मनीषा को घूर घूर कर देखने लगी और बोली.

सरिता दी- क्या………….. तुमने मनीषा को छोड़ लिया और मुझे बताया तक नहीं और मैंने तुझसे पूछा तो तुमने मन भी कर दिया की तुम दोनों देर रत तक बात करते रहे और तुम तरय करते रहे. लेकिन काम नहीं हुवा.

मनीषा- क्या………. आप दोनों भी यही चाहते थे पहले से hi.

मैं- हाँ मनीषा. मैं तुम्हे छोड़ सकू इसीलिए मैंने दीदी को शर्मा जी के यहाँ जाने के लिए कहा था.

मनीषा- लो ये तो अच्छी बात है. अब तो कोई पर्दा hi नहीं रह गया है और साडी बाटे क्लेयरे भी हो गई हैं तो क्यों न हम तीनो साथ में मिलकर ये खेल खेले.

सरिता दी- लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं हूँ.

मनीषा- क्यों दीदी. मैंने आपके लिए और आपकी ख़ुशी के लिए इतना कुछ किया. सब कुछ जानते हुवे भी कभी मैंने ये बात किसी पर जाहिर नहीं होने दी. और आप दोनों को प्राइवेसी भी दी ताकि आपको वो ख़ुशी भैया से मिल सके जो आप चाहती थी, लेकिन आप मेरी ख़ुशी के लिए इतना भी नहीं कर सकती.

सरिता दी- हाँ. मैं ये नहीं कर पाऊँगी. तुम सबकुछ जानती हो मैं इस बात से अनजान थी, लेकिन अब मुझे पता चल गया है की तुम्हे सब पता है तो मैं तुम्हारे सामने ये सब नहीं कर पाऊँगी.

मनीषा- तो इसका मतलब आप भैया से कभी नहीं छुडवाएंगी. क्योंकि अब आप भी ये जान गई हैं की मुझे सब कुछ पता चल गया है.

मनीषा की बात सुनकर दीदी खामोश हो गई. उन्होंने मनीषा के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. मनीषा ने दीदी को खामोश देखकर फिर कहा.

मनीषा- मैं जानती हूँ की आप भैया से बिना चूड़े अब नहीं रह सकती और अब मेरा भी यही हॉल है. भैया का लुंड आपको भी चाहिए और मुझे भी. तो क्यों न हम दोनों मिलकर साथ में भैया से चुदाई करवाए.

मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ देर के लिए किसी सोच में डूब गई दीदी अपने नाख़ून को अपने दांतो से कुतरने लगी. थोड़ी देर सोचने के बाद दीदी ने अपना सर ऊपर उठाया और कहा.

सरिता दी- लेकिन मनीषा ये ठीक नहीं है. मैं ये सब कैसे कर पाऊँगी. मुझे शर्म आएगी.

दीदी की बात सुनकर मनीषा को अपनी बात बनती हुई नज़र आने लगी. तो मनीषा ने इमोशनल अत्याचार दीदी के ऊपर करना शुरू कर दिया और दीदी से कहा.

मनीषा- ठीक है दीदी. मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, इसलिए मैंने हमेशा आपकी ख़ुशी चाही है. सोनम दीदी के ः जाने के समय आपने एक वडा मुझसे किया था की मैं आपसे जो कुछ मांगूंगी आप मुझे देंगी. और मैंने उस दिन वो वडा उधर कर दिया था. इसी दिन के लिए, पर शायद आप मुझसे तनिक भी प्यार नहीं करती, इसलिए मैं आपको आपके उस वेड से मुक्त करती हूँ. आप अपनी ख़ुशी में खुश रहिये. मैं किसी को कुछ नहीं बताउंगी. मैं जा रही हूँ और आज के बाद आप दोनों के बिच नहीं आउंगी.

इतना कहकर मनीषा मुड़कर जाने लगी. मुझे भी लगा की अब मनीषा की गांड मुझे कुछ समय मिलने से रही, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था, इसलिए मैं चुप- चाप खड़ा रहा, क्योंकि मुझे कही न कही ये लग रहा था की मनीषा जैसी खुराफाती लड़की इतनी आसानी से तो man-ne वही है नहीं. उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो जरूर चल रहा होगा दीदी को रस्ते पर लेन के लिए.

अभी मनीषा दरवाज़े तक hi पहुंची थी की दीदी ने दौड़कर उसका हाँथ पकड़ लिया और उसको दीवाल से सटाकर कड़ी कर दिया और उसके चेहरे पर अपनी उंगलिया फिरते हुवे बोली.

सरिता दी- तुमने ये कैसे सोच लिए की मैं तुमसे प्यार नहीं करती. मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी इसलिए मैं मन कर रही थी. लेकिन मैंने सोचा की जब तुम मेरे लिए इतना कर सकती हो तो मैं भी तो तुम्हारी ख़ुशी के लिए थोड़ा बहुत तो कर hi सकती हूँ. वैसे भी अब हम सब के बिच कोई सेकरते तो रह नहीं गया है. इसलिए मैं तुम्हारे साथ हूँ मनीषा. अब हम तीनो मिलकर मज़ा करेंगे.

इतना बोलकर दीदी ने अपने होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया.



मनीषा ने भी अपने होंठ दीदी के होंठो से पूरा सटाकर दीदी के होंठ चूसने लगी. दोनों की होंठ चूसै का कार्यक्रम देख कर मैं बहुत खुश हुवा और चलते हुवे उन दोनों के पास पहुंच गया और पीछे से दीदी की गांड में अपने लैंड घुसकर दीदी की गार्डन को चूमें लगा. दीदी ने अपना होंठ मनीषा के होंठो से अलग किया और पलटकर मेरी तरफ हो गयी और मुझसे बोली.

सरिता दी- आज तुम्हारी छुट्टी है अभी. तुम बस चुपचाप बैठकर नज़ारे का आनंद लो. कल दिन में हम तीनो मिलकर चुदाई करेंगे. अभी तुम आराम से जाकर कुर्सी पर बैठो और हमारी रासलीला का आनंद लो.

दीदी की बात सुनकर मैं आकर कुर्सी पर बैठ गया. दीदी फिर से मनीषा की तरफ घूम गई और उसके होंठो को चूसने लगी. मनीषा ने अपने दोनों हांथो से दीदी के सर को पकड़ा और जोर जोर से दीदी के होंठ चूसने lagi.thodi देर होंठ चूसने के बाद मनीषा और दीदी अलग हुवे और दोनों अपनी अपनी जीभ बहार निकलकर आपस में लड़ने लगी.



मनीषा और दीदी की रासलीला देखते हुवे मुझे भी जोश चढ़ने लगा. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो गया. मैंने भी उन्हें देखते हुवे अपने लोअर के ऊपर से hi अपने लुंड को सहलाने लगा.

दीदी और मनीषा अपनी जीभ आपस में ऐसे लगा लहि थी जैसे दोनों के बिच कोई जुंग चल रही हो. जैसे दो तलवार आपसे में टकरा रही हैं. थोड़ी देर तक दोनों अपनी जीभ लगाती रही उसके बाद मनीषा ने दीदी की जीभ अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. दीदी ने मनीषा के सर को पीछे से पकड़ लिया और अपनी जीभ ज्यादा से ज्यादा मनीषा के मुंह में डालने लगी. मैं कुर्सी बार बैठा अपना लुंड सहला रहा था और इस हसीं नज़ारे का आनंद ले रहा था. मेरी दो मस्त जवान बहाने एक दूसरे के जिस्म से खेल रही थी. वो भी अपने भाई के सामने.

थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी के मुंह में अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर जीभ अंदर बहार करने के बाद मनीषा ने अपना पूरा मुंह दीदी के मुंह से चिपका दिया और अपनी पूरी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी.



दीदी जोर जोर से मनीषा की जीभ चूस रही थी. थोड़ी देर एक दूसरे की जीभ चूसने के बाद दोनों ने अपना मुंह हटा लिया. दोनों के होंठ एक दूसरे के थूक से साणे हुवे थे. दोनों ने दरवाज़े के पास खड़े होकर मेरी तरफ देखा. फिर दीदी ने मनीषा के कण में कुछ कहा. तो मनीषा ने मेरी तरफ देखा और कहा.



मनीषा- क्यों भैया कैसा लग रहा है अपनी बहनो का लाइव शो देखकर.

मैं- पूछो मत मनीषा. मुझे ऐसे लग रहा है की मुझसे ज्यादा किस्मत वाला कोई भाई नहीं होगा.

सरिता दी- बस तुम बैठकर शो देखो. अभी तुमको बहुत मज़ा मिलेगा.

इतना कहकर मनीषा और दीदी ने एक दुसरे की तरफ देखा और हंसने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने और हसने के बाद दीदी अपना होठ आगे की तरफ झुकाया तो मनीषा भी दीदी की तरफ झुककर अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और दोबारा से एक दूसरे के होंठ चलने लगी.



दोनों बहुत जोर जोर से एक दुसरे के होंठ चूस रही थी. मैं उन दोनों को देखकर बस अपना लुंड मसल रहा था. थोड़ी देर लुंड मसलने के बाद मैं कुर्सी से उठकर अपनी लोअर निचे सरका दी और कुर्सी पर बैठ कर अपने नंगे लुंड पर हाँथ फेरने लगा. मनीषा और दीदी अभी भी किश में दूभि हुई थी. दोनों एक दूसरे की जीभ को मुंह में लेकर चूस रही थी. जिससे सस्सप्प्प्प्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ स्स्स्सस्स्स्सप्प्प्पपप्पड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दोनों एक दूसरे से अलग हुवे और मेरी तरफ dekha.mujhe नंगा होकर लुंड मसलते देख दोनों मुस्कुराने लगे. सरिता दीदी ने मुझसे कहा.

सरिता दी- ये क्या कर रहे हो अभी. तुमको शर्म नहीं आती अपनी बहन के कमरे में नंगे होकर बैठे ऐसी हारकर कर रहे हो. यहाँ इतना अच्छा शो का इंतेज़ाम हम दोनों ने तुम्हारे लिए किया है, लेकिन तुम इस शो को इग्नोर करके अपने लुंड के साथ खेल रहे हो.

मैं दीदी की बात सुनकर पाने लुंड को दबाकर छोड़ दिया जिससे मेरा लुंड झटके से आकर मेरे पेट पर

ठोकर मरी. मेरे मुंह से aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सरिता निकल गया. मैंने फिर से अपने लुंड को निचे दबाकर छोड़ दिया. मेरा लुंड फिर से जाकर मेरे पेट से टकराया. मेरे मुंह से इस बार आआआहहहहहहह मनीषा निकल गया. दोनों मुझे देखकर हंसने लगी. मैंने उनको देखकर कहा.

मैं- देखो तुम दोनों ने मेरी क्या हालत कर दी है. तुम दोनों के इस कामुक खेल को देखकर मेरा लुंड कैसे हिचकोले मर रहा है. मुझपर ऐसा जुल्म मत करो तुम दोनों. मुझे भी अपने साथ शामिल कर लो. मैं बिकते बैठे बोर हो रहा हूँ.

मनीषा- कैसे भाई हो आप. अपनी बहनो की जवानी देखकर भी आप बोर हो रहे हो. तो आज आपकी यही सजा है की आप केवल दर्शक बैंकर hi इस खेल का आनंद उठाये.

इतना कहकर दोनों चलती हुई मेरे करीब आकर कड़ी हो गई और मेरे लुंड को देखने लगी. मैं भी उन की आँखों में बरी बरी से देखते हुवे लुंड को मसलने लगा. दोनों की आँखे लाल हो गई थी. दोनों की आँखों में वासना साफ दिखाई दे रही थी. कुछ देर मेरा लुंड देखने के बाद मनीषा जाकर दीदी के पीछे कड़ी हो गई और दीदी से चिपक गई. मनीषा ने दीदी की बगल से हाँथ डालकर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी.



दीदी ने भी अपने दोनों हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख लिया. मनीषा ने थोड़ी देर दीदी की चूचियों को धीरे धीरे दबाया. उसके बाद दीदी की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगी. दीदी के मुंह से आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा oooooooooohhhhhhhhh मनीषा की सिसकारी निकलने लगी.

मनीषा दीदी की चूचिया दबाते हुवे अपने होंठो से दीदी की गार्डन चूमने लगी और कभी कभी जीभ निकलकर दीदी की गार्डन भी चाटने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi गार्डन को चूमने चाटने के बाद मनीषा ने दीदी के कान के पास अपना मुजन्ह ले जाकर उनके कण की लौ को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी और दोनों चूचियों को हथेली में भरकर जोर से मसल दिया. दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गयी.

सरिता दी- aaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मनीषा. oooooooohhhhhhhhhh धीरी सीए. टूउउ भठी इस कमीनी की तआर्रआह्ह्ह्ह होई जोरर से दबा रही हीी. aaaaaauuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhh.

मनीषा( उनके कण में सरगोशी करते हुवे)- मुझे पता है दीदी की आपको धीरे दबवाने में मज़ा नहीं आता. तभी तो आप भैया से जोर जोर से दबवाती थी अपनी चूचिया.

मनीषा की बात सुनकर दीदी कुछ नहीं बोली. मनीषा दीदी की दोनों चूचिय. जोर जोर से दबती रही और दीदी की गार्डन और कान को मुंह में भरकर चुस्ती रही. इतना कामुक नज़ारा देखकर मैं अपना लुंड जोर जोर से सहलाने लगा. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैं भी अब इस खेल में शामिल होना चाहता था. तभी मनीषा ने दीदी की चूचियों को फिर जोर से दबा दिया. दीदी मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh meriiiiiiiiiiiiiiii प्यारीइइइइइइ बहाणणणणणणण. ऐसी हीईईई दब्बब्बाऊओऊ. बहुत्तट्ठ माज़आ आ ररहा हैई मुझी.

दीदी की बात सुनकर मनीषा और जोर से दीदी की चूचिया दबाने लगी. मैं भी अब उठकर मनीषा के पीछे जाकर उससे सत्कार खड़ा हो गया. मनीषा ने मेरी तरफ देखा तो उसकी आँखे लाल हो गई थी. चेहरा सुर्ख हो चुक्का था. मनीषा ने मुझे आँखों के इशारे से बैठने के लिए कहा, मगर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड में घुसेड़कर अपना होंठ मनीषा की गार्डन पर रख दिया और उसे चूमने लगा. मनीषा ने उत्तेजना में आकर दीदी के दोनों निप्पल को पानी ऊँगली और अंगूठे के बिच में पकड़ लिया और पूरी ताकत के साथ दीदी के निप्पल को मसल दिया. दीदी चीख पड़ी.

सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyy. क्याआ करररर रही हैई टूउउ मनीषआआ. इतनीई जूर्रर सीए क्यूँ मसलाआ तुणीऐ. मुझी बहुत्त दररदद्ड होऊ रहा हैई. aaahhhhhhhhhhh. oooooooohhhhhhhhhhhhh.

अभी मनीषा कोई जवाब देती इससे पहले hi बहार बेल्ल बजने की आवाज़ आई. मैं तुरंत hi मनीषा के पीछे से हटा और अपना लोअर पहनकर अपने लुंड को ऊपर की तरफ दबाकर डोरी में फंसा दिया. और दोनों को अपना हुलिया दुरुस्त करने का बोलकर निचे दरवाज़ा खोलने के लिए चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-125

दरवाज़ा खोला तो मम्मी बहार कड़ी थी. पापा का पूछने पर पता चला की वो किसी काम की वजह से कही गए हुवे हैं. थोड़े समय बाद आएँगे. मां अंदर आकर अपने कमरे में चली गयी. मैं भी अपने कमरे में आ गया. देर शाम तक मैं कमरे में hi रहा. खाना खाने के समय मैं कमरे से बहार आया और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया. हम सब खाना खाने लगे तो मैंने पापा से कहा.

मैं- पापा, कल जीजा जी का फ़ोन आया था. उनको किसी ट्रेनिंग के लिए मुंबई जाना है 2 हफ्तों के लिए तो उन्होंने मुझे आगरा बुलाया है. क्योंकि दीदी वह अकेली रहेंगी.

पापा- हाँ मेरी बात हुई है राघवेंद्र से. 3 दिन बाद चले जाना वहां.

इसके बाद सभी ने खाना फिनिश किया. मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए मैं वही बैठकर t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी और मनीषा भी किचन समेत कर हॉल में आकर बैठ गयी. हम तीनो एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे. मनीषा ने कहा.

मनीषा- वाह भैया. आपके तो मज़े हैं. अब तो आप दीदी के पास जा रहे हैं.

मैं- हाँ वो तो है. बहुत दिन हो गए हैं दीदी से मिले हुवे. उनकी बहुत याद आती है.

मनीषा- हाँ भायी. याद क्यों नहीं आएगी. और तड़प तो दीदी भी रही होंगी वह. आखिर उन्होंने बहुत कुछ किया है आपके लिए और आपने भी तो उन्हें बहुत ख़ुशी दी है. अब दो प्रेमियों के मिलने का समय नजदीक आ रहा है.

सार्टीअ दी- ये कैसी बात कर रही हो तुम मनीषा. वो दीदी हैं हमारी. उनके लिए ऐसा क्यों बोल रही हो.

दीदी के बात सुनकर मनीषा और मैं हंसने लगे. दीदी हम दोनों की तरफ प्रश्वाचक दृस्टि से देखने लगी. थोड़ी देर देखने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- तुम दोनों हंस क्यों रहे हो. मैंने कोई जोके थोड़े कहा है.

मैं- आप न सच में बहुत भोली हैं दीदी. मनीषा जैसी दिखती है वैसी है नहीं. इसे सब पता है दीदी के बारे में.

मेरी बात सुनकर दीदी का मुंह आश्चर्य से खुल गया. वो मनीषा की तरफ देखने लगी. जैसे पूछ रही हो. की क्या ये सच है. मनीषा ने दीदी की नज़रो को पढ़ लिया और बोली.

मनीषा- हाँ दीदी मुझे आके और दीदी के बारे में शुरू से सब पता है.

सरिता दी- सच में मनीषा तू तो बहुत खतरनाक है यार. मैं तो तुझे भोली भली समझती थी, लेकिन तू तो बहुत तेज़ निकली. तुमने तो किसी को भनक hi नहीं लगने दी की तुम सब जानती हो.

मनीषा- अब तो मान लो दीदी की मनीषा इस थे ग्रेट गर्ल.

मनीषा की बायत सुनकर हम सब हंसने लगे. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी तू 2 हफ्ते दीदी के साथ रहेगा. तेरी तो मौज है वह. लेकिन ये 2 हफ्ते हम कैसे बिताएंगे.

मैं- टेंशन मत लो दीदी मैं सविता दीदी को यही लेकर आऊंगा 2 दिन बाद. तब तक आप दोनों आपस में काम chalana.fir हम सब मिलकर मौज करेंगे. सोच रहा हूँ दीदी की गांड आगरा में hi खोलू.

सरिता दी- तू न सच में कमीना है. अपनी सभी बहहो की गांड के पीछे हाँथ धोकर पड़ा है.

मैं- अब मैं क्या करू. मेरी बहनो की गांड है hi इतनी कातिल की मेरा लुंड देखते hi खड़ा हो जाता है.

सरिता दी- तू सच में बहुत कमीना है अभी. अच्छा चलो अब मैं तो चली सोने. तुम दोनों भी सो जाओ अब.

मैं- लेकिन आज मुझे दूध कौन पिलायेगा. आपको पता है न की मुझे अब इसकी आदत लग चुकी है.

सरिता दी- आज कुछ नहीं. अब जो भी होना होगा वो कल hi होगा. अच्छा मैं चली सोने.

इतना कहकर सरिता दी अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर बाद मनीषा भी अपने कमरे में चली गई. अब मैं अकेला वह बैठकर क्या करता. मैं भी वह से उठकर अपने कमरे में चला गया और लोअर उतर कर उव में hi लेट गया. आज कुछ होना नहीं था इसलिए मैंने फ़ोन निकला और सविता दीदी को कॉल कर दिया. उस समय रात के 11.30 हो रहे the.thodi देर बाद उधर से कॉल पिच हुई और दीदी की सुरीली आवाज़ आई.

सविता दी- hello कमीने. कैसा है तू.

मैं- होई डार्लिंग सविता. बहुत hi मस्त हूँ मैं. तुम बताओ कैसी हो. और जीजा जी कैसे हैं

सविता दी- मैं भी ठीक hi हूँ और तेरे जीजा जी जी बढ़िया हैं. सो रहे हैं वो. लेकिन क्या बात है आज बहुत चहक रहा है. कोई खुशखबरी है क्या.

मैं- कह तो ऐसे रही हो जैसे कुछ पता hi न हो. अरे यार जीजा जी ने तुम्हे बताया तो होगा.

सविता दी- हाँ बताया है की तुम आगरा आ रहे हो मेरे साथ रहने के लिए.

मैं- हाँ. लेकिन मैं सोच रहा हूँ की सरिता दीदी को भेज देता हूँ आपके पास रहने के लिए.

सविता दी- क्यों तू क्यों नहीं आ रहा है यहाँ.

मैं- वो क्या है न दीदी आजकल मैं बहुत ज्यादा व्यस्त हूँ. समय hi नहीं मिल प् रहा है.

सविता दी- ऐसा क्या काम करने लगा है जो अपनी दीदी के पास आने के लिए भी समय नहीं निकल प् रहा है.

मैं- वो क्या है न दीदी की एक तो जो काम करता हूँ उसमे टाइम चला जाता है और जो थोड़ा बहुत टाइम बचता है वो मैं अपनी गफ के साथ स्पेंड करता हूँ.

सविता दी- क्या तुमने गफ बना ली मेरी अनुपस्थिति में और मुझे बताया तक नहीं.

मैं- वो मुझे लगा की आप नाराज़ हो जाओगी ये जानकर इसलिए अभी तक आपको नहीं बताया था.

सविता di-to ये मुझे आज क्यों बता रहा है.

मैं- ऐसा है दीदी की मैं आपसे झूट बोलकर आने के लिए मन नहीं कर सकता था. इसलिए आपको सच बता दिया. अब आप तो समझ hi सकती हो की उसे भी टाइम देना कितना जरूरी है.

सविता दी- लेकिन अभी मैंने बहुत कुछ सोचा था की जब तू आएगा यहाँ तो तेरे साथ खूब मौज मस्ती करुँगी. लेकिन तू तो मन कर रहा है. तू ऐसे न कर भाई. मेरा बहुत मन कर रहा है.

मैं- आप का क्या मन कर रहा है दीदी.

सविता दी- तुझे तो पता है की तेरे जीजा मुझे ठीक से छोड़ नहीं पते है. तो मैं जब से यहाँ आई हूँ बहुत प्यासी हूँ मैंने सोचा था की जब तू मेरे पास आएगा तो मैं तुझसे दिल खोलकर छुडवाउंगी, लेकिन तुझे तो अपनी बहन की नहीं अपनी उस गफ की पड़ी है. क्या वो तेरे लिए मुझसे बढ़कर हो गई है.

मैं- नहीं दीदी आपसे बढाकर कोई नहीं है मेरे लिए. लेकिन मुझको वो जो देती है वो आप नहीं दे पाओगी.

सविता दी- क्यों ऐसा क्या है उसके पास जो वो तुझे देती है. वो भी तुझसे चुदवाती hi है न. और मेरे पास आने के बाद तू जितना चाहे, जैसा भी चाहे मुझे छोड़ सकता है. मैं मन थोड़ी hi करुँगी.

मैं- दीदी वो मुझसे छुड़वाने के आलावा अपनी गांड भी मरवाती है उसकी गांड बहुत hi बड़ी और कातिल है. मुझे उसकी गांड मरने में बहुत मज़ा आता है. इसलिए मैं सरिता दीदी को भेजने के लिए सोच रहा हूँ.

सविता दी- ये तू क्या कह रहा है अभी. तू उसकी गांड मरता है. छियई उसमे क्या मज़ा मिलता है तुझे.

मैं- अब आपको कैसे बताऊ. मुझे बहुत मज़ा आता है गांड मरने में. मैंने आपसे भी कहा था, लेकिन जब आपने मन कर दिया तो मुझे गांड के लिए दूसरी गफ बनानी पड़ी.

सविता दी- लेकिन अभी वो तेरा कैसे लेती होगी अपनी गांड में. तेरा तो बहुत बड़ा और मोटा है. उसको तो बहुत दर्द होता होगा अंदर लेने में.

मैं- आप कैसी बात कर रही हो दीदी. बस शुरू में थोड़ा दर्द हुवा था उसको. लेकिन बाद में वो खुद उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपने गांड में लिए. अब तो ऐसी कंडीशन हो गई है की वो अपनी छूट से ज्यादा अपनी गांड hi मरवाती है.

सविता दी- प्ल्ज़ अभी ऐसा मत कर. मुझे तेरी बहुत जरूरत है. तुझे नहीं पता मैंने अपने आपको अभी तक कैसे संभल कर रख है. मैं बहुत प्यासी हूँ अभी. ऐसा मत कर मेरे साथ.

मैं- ठीक है दी मैं कोशिश करूँगा आने की, लेकिन श्योरे नहीं हूँ की आ पाव मैं.

सविता दी- नहीं अगर तुझे मेरी तनिक भी फ़िक्र है तो तुझे आना hi होगा अभी.

मैं- अच्छा ठीक है दीदी मैं आऊंगा, लेकिन उसके बदले में मुझे क्या मिलेगा.

सविता दी- तू पहले मेरे पास आ तो सही. तुझे जो चाहिए वो सबकुछ मैं तुझे दूँगी.

मैं- कही ऐसा न हो की बाद में तुम अपनी बात से मुकर जाओ और अगर तुम अपनी बात से मुकर गई तो मैं उसी समय वापस चला आऊंगा वह से.

सविता दी- ठीक है मैं नहीं मुकरूंगी. मैं तेरी कसम कहती हूँ. तू जो मांगेगा मैं तुझे दूंगी.

मैं- अच्छा ठीक है दीदी. अपनी कुछ फोटो भेजो न. कई दिन हो गए आपको देखे हुवे.

सरिता दी- रुख थोड़ी देर. यहाँ पर तेरे जीजा जी सो रहे हैं दुसरे कमरे में जाती हूँ फिर भेजती हूँ.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना व्हाट्सप्प ओपन कर लिए .थोड़ी देर बाद दीदी ने अपने एक फोटो ब्रा में भेजी. जिसमे दीदी ने ब्लाउज पहना हुवा था लेकिन उसके बटन निचे की छोड़कर सभी खुले हुवे थे. दीदी बहुत hi सेक्सी लग रही थी. मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या बात है दीदी . आप बहुत hi सुन्दर लग रही ही इसमें. कोई और फोटो भेजो.

मेरी बात सुनकर दीदी नई एक और फोटो भेजी. जिसमे उन्होंने ब्लाउज उतर दिया था और सदी का पल्लू ब्रा के ऊपर डाला हुवा था. इस फोटो में दीदी बहुत hi सेक्सी लग रही थी. थोड़ी देर उस फोटो को देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- दीदी मुझे बहुत दिन हो गए आपको सेक्सी गांड देखे हुवे. प्ल्ज़ एक फोटो उसकी भी भेजो न.

मेरी बात मानकर दीदी ने थोड़ी देर बाद अपनी सेक्सी, बड़ी और कातिल गांड को फोटो भेजी. दीदी की गांड फोटो में बहुत ज्यादा बड़ी लग रही थी. मैंने दीदी की गांड देखते हुवे दीदी से कहा.



मैं- दीदी सच में आपकी गांड बहुत hi जबरदस्त है. आपकी गांड के सामने तो मेरी गिर्ल्फ्रेंड को गांड कुछ भी नहीं है. लगता है जीजा जी ने आपकी गांड मर मर के बड़ी कर दी है.

सविता दी- उसने छूट तो ठीक से मरी नहीं जाती. गांड क्या खाक मरेंगे वो मेरी.

मैं- जीजा कैसे आदमी हैं. उनके घर में इतनी मस्त और कातिल गांड मौजूद है. लेकिन वो कुछ कर hi नहीं प् रहे हैं. उनकी जगह अगर मैं आपका पति होता तो अब तक आपकी गांड मर मर कर और बड़ी कर देता. कसम से दीदी आपकी गांड देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया है. खास मैं आपकी गांड मर पता.

सविता दी- चाल हैट कमीने. बहन की गांड पर नज़र रखता है. तू यहाँ आ तेरी अचे से खबर लेती हूँ.

मैं- अच्छा दीदी एक और फोटो भेजो बिना ब्रा के.

सविता दी- तू दो मिनट रुक तो जा. तुझे बिना ब्रा के देखना है न मुझे अभी तेरे होश उड़ाती हूँ मैं.

मैं थोड़ी देर दीदी के कहे अनुसार वेट करने लगा. थोड़ी देर बाद मश्ग टन बजी. मैंने जब फोटो डाउनलोड की तो मैं उस फोटो को देखता रह गया. दीदी ने एक बहुत hi बारीक निघ्त्य टाइप कपडा पहना हुवा था.



वो इतना ज्यादा सेक्सी था की मेरे लुंड ने झटका मरना शुरू कर दिया. उसका pahan-na या न pahan-na दोनों बराबर था. उसमे से दीदी को दोनों निप्पल और लगभग पूरी चूचिया दिखाई देने लगी. मैंने अपना लुंड हिलाते हुवे एक फोटो खींची और दीदी को भेज दिया और बोलै.



मैं- ये देखो दीदी. आपकी कातिल गांड और आपकी जालिम चूचियों ने मेरा क्या हॉल कर दिया है. अगर आप अभी मेरे साथ होती तो आपको रगड़ रगड़ के छोड़ता मैं.

सविता दी- इसीलिए तो कह रही हूँ की सरिता को मत भेज मेरे पास. तू आ और मुझे रगड़ रगड़ के छोड़.

मैं- हाँ अब तो मैं हो औंग और आपको रगड़ रगड़ कर छोडूंगा और आपकी गांड भी मरूंगा.

सविता दी- नहीं अभी. मैं गांड नहीं मरवाउंगी तुझसे. तेरा बहुत बड़ा है. मुझे बहुत दर्द होगा. मैं तो मर hi जाउंगी तेरा अंदर लेने में.

मैं- कुछ नहीं होगा दीदी. मैं बहुत प्यार से आपकी गांड मरूंगा. आपको तनिक भी दर्द नहीं होगा.

सविता दी- मुझे तेरा प्यार पता है. इसीलिए तो मुझे दर लग रहा है. तू बिलकुल भी रहम नहीं करता.

मैं- मैं अगर आगरा आऊंगा तो इसी शर्त पर आऊंगा की तुम मुझे अपनी गांड डौगी, नहीं तो दीदी जाएंगी.

सविता दी- ये तो गलत है. तू मुझे ब्लैकमेल कर रहा है. अपनी बहन को.

मैं- अब आप जो समझ लो, लेकिन ये मेरी वह आने की शर्त है. अब आप डीडे कर लीजिये क्या करना है.

सविता दी- चल ठीक है. लेकिन तू अच्छा नहीं कर रहा है, मेरी मज़बूरी का फायदा उठा रहा है.

मैं- कोई फायदा नहीं उठा रहा हूँ. आपको ज़िन्दगी का भरपूर मज़ा देना चाहता हूँ, अच्छा अब मैं रख रहा हूँ. अब आगरा आकर बात करता हूँ आपसे.

इतना कहकर मैंने अपना फ़ोन रख दिया और सो गया. सुबह उठकर मैं जिम किया. उसके बाद आराम करके बाथरूम में चला गया. फ्रेश होकर मैं बहार आया तो मनीषा मेरे कमरे में बैठी हुई थी. उसने थोड़ा भड़काऊ कपडे पहने हुवे थे. फिर भी ठीक थक hi थे.



मुझे देखकर वो मुस्कुराने लगी. मैं भी अपनी लोअर उठाकर pahan-ne लगा. मनीषा की नज़र मेरे लुंड पर गयी, लेकिन वो अभी सो रहा था, इसलिए उसे कुछ देखने को नहीं मिला. मैं लोअर और t-shirt पहनकर उसके पास चला गया. मनीषा ने उठकर मुझे हूजे किया और मेरे होंठो को चूमकर मुझे मॉर्निंग किश दिया. मैंने भी अपने दोनों हांथो से मनीषा की चूचियों को दबाकर उसके होंठो को चुम लिया.

हम दोनों ऐसे hi ek-dusre की आँखों में देखने लगे. फिर मैंने अपने होंठो को बढाकर उसके होंठो को किश करने लगा और अपने हांथो से उसकी चूचिया दबाने लगा. अभी मुझे कुछ hi देर हुई थी की सरिता दीदी भी मेरे कमरे में आ गयी और बोली.

सरिता दी- तुम दोनों को बिलकुल भी शर्म नहीं है. अरे काम से काम हाँथ मुंह तो धो लेते.

सरिता दीदी की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ बढाकर उनकी कमर में दाल दिया और उन्हें खींचकर अपने साथ चिपका लिया. अब मेरे साथ दो मस्त हसीनाएं चिपकी हुई थी. एक तरफ मनीषा थी तो दूसरी तरफ सरिता दी. दोनों ने अपने हाँथ मेरे कंधे पर रखे हुवे थी. मैंने दोनों की कमर में हाँथ डालकर अपने से और ज्यादा चिपका लिया. दोनों बंदरिया की तरह मुझसे साइड से लिपटी हुई थी. मनीषा ने अपना एक पेअर उठाकर मेरी कमर में लगा दिया था. सरिता दीदी ने भी ऐसा hi किया. मेरी तो मज़े के कारन सांसे भरी हो गाइट hi. मैं कभी मनीषा को देखता तो कभी सरिता दी को.



थोड़ी देर तक दोनों ऐसे hi मुझसे चिपकी कड़ी रही फिर दोनों ने मुझे कंधे से पकड़कर निचे बैठा दिया और मेरे कंधे को पकड़कर कड़ी हो गई. मैंने भी अपने दोनों हाँथ दोनों की टैंगो के बिच से घुसकर दोनों की गांड को पकड़ लिया और दबाने लगा. थोड़ी देर दोनों की गांड बढ़ाने के बाद मैंने ऊपर की तरफ देखा तो दोनों बहाने एक दूसरे को किश कर रही थी. मैं दोनों के देखते हुवे जोर जोर से उनकी गांड दबाने लगा. थोड़ी दे रेज hi एक दूसरे को किश करने के बाद दोनों अलग हुवी. और मेरे गलो को दोनों तरफ से चूमने लगी. थोड़ी देर चूमने के बाद सरिता दीदी ने कहा.



सरिता दी- चलो अब बहुत हुवा. जल्दी से निचे आओ दोनों. आगे जो भी होना है वो दोपहर में होगा.

इतना कहकर सरिता दीदी मनीषा को लेकर निचे चली गयी. मैं ऊपर अपने लूँ को शांत करने में लग गया. थोड़ी देर बाद जब मेरा लुंड बैठ गया तो मैं भी निचे आ गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी वहां पर आ गए. मैंने दोनों को गम विश किया और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद नाश्ते का समय हो गया तो सरिता दीदी नाश्ता लेकर आई. सभी लोगो ने नाश्ता किया. नाश्ता करने के बाद मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए. मैं वही पर बैठा रहा लगभग 30 मिनट बाद मम्मी पापा अपनी जॉब पर चले गए. मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और अपने काम पर जाने के लिए तैयार होने लगा.

थोड़ी देर बाद मैं भी तैयार होकर निचे आया और अपने काम पर चला gaya.waha पहुंचने के बाद मुझे पता चला की आज काम थोड़ा ज्यादा है तो मुझे वह 2 हॉर्स रुकना पड़ेगा. मैं मन मसोस कर वह रुका और अपना काम करने लगा. 2 हॉर्स तक अपना काम करने के बाद मैंने बचा हुवा काम समेटा और अपने घर की तरफ निकल गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-126

सरिता दी- चलो अब बहुत हुवा. जल्दी से निचे आओ दोनों. आगे जो भी होना है वो दोपहर में होगा.

इतना कहकर सरिता दीदी मनीषा को लेकर निचे चली गयी. मैं ऊपर अपने लूँ को शांत करने में लग गया. थोड़ी देर बाद जब मेरा लुंड बैठ गया तो मैं भी निचे आ गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी वहां पर आ गए. मैंने दोनों को गम विश किया और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद नाश्ते का समय हो गया तो सरिता दीदी नाश्ता लेकर आई. सभी लोगो ने नाश्ता किया. नाश्ता करने के बाद मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए. मैं वही पर बैठा रहा लगभग 30 मिनट बाद मम्मी पापा अपनी जॉब पर चले गए. मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और अपने काम पर जाने के लिए तैयार होने लगा.

थोड़ी देर बाद मैं भी तैयार होकर निचे आया और अपने काम पर चला gaya.waha पहुंचने के बाद मुझे पता चला की आज काम थोड़ा ज्यादा है तो मुझे वह 2 हॉर्स रुकना पड़ेगा. मैं मन मसोस कर वह रुका और अपना काम करने लगा. 2 हॉर्स तक अपना काम करने के बाद मैंने बचा हुवा काम समेटा और अपने घर की तरफ निकल गया.

अब आगे..

घर आने के बाद मैंने बेल्ल बजायी. उदार से मनीषा की आवाज़ आई. मेरे आवाज़ देने पर मनीषा ने गेट खोला. मैं तो उसे देखता hi रह गया. एकदम क़यामत बैंकर मनीषा ने मेरा स्वागत किया. बदन पर सिर्फ एक पंतय और चूचियों पर hi ख़तम हो जाने वाली टॉप मनीषा ने पहना हुवा था. उसने मेरा हाँथ पकड़कर अंदर खींचा और तुरंत दरवाज़ा बंद कर दिया. मैंने पलटकर मनीषा को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, लेकिन मैं उसे इग्नोर करते हुवे ऊपर अपने कमरे में जाने लगा. मनीषा ने पीछे से आवाज़ दी.

मनीषा- क्या हुवा भैया नाराज़ हो क्या हमसे.

मैं- नहीं यार. अभी पहले काम फिनिश कर लून फिर बात करता हूँ.

इतना बोलकर मैं अपने कमरे में चला गया और कपडे उतर कर उव में बाथरूम चला गया जब बाथरूम से आया तो मनीषा बिस्टेर पर बैठी हुई थी. मैं भी जाकर बिस्टेर पर बीअत गया और लैपटॉप निकलकर अपना काम करने लगा. थोड़ी देर बाद मनीषा मेरे पीछे आ गयी और मुझसे मेरी पीठ पर लड़कर कड़ी हो गई. जिससे उसकी चूचिया मुझे अपने पीठ पर फील हो रही थी. कुछ देर वैसे hi कड़ी रहने के बाद मनीषा अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ने लगी. जिससे मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी. मनीषा मेरी गार्डन पर किश करने लगी और अपना हाँथ आगे बढाकर मेरे साइन पर फिरने लगी. मेरा लुंड अब खड़ा होने लगा था.

मैंने भी अपना लैपटॉप बंद किया और मनीषा को पकड़कर आगे की तरफ खींच लिया. मनीषा मेरी जांघो पर लेट गई. मैंने अपने दोनों हांथो से उसकी चूचियों को पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा. मनीषा ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. थोड़ी देर मेरे होंठो को चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ मेरे होंठो पर फिरनी शुरू कर दी. मैंने मनीषा की चूचियों को अपने दोनों हथेली में भरा और पूरी ताकत से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह bhaaaiyyyyyyyyyyaaaaaaaa. धीरीईईई सीए. ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा ही.

मैं- क्युओ बड़ीई मस्ती सूझ रही है न तुम्हे. मुझे काम नहीं करने दे रही हो. अभी तुम्हे मज़ा चखता हूँ.

इतना कहकर मैंने फिर से उसकी दोनों चूचियों को पूरी ताकत से मसल दिया मनीषा फिर से चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैयाआआ. ooooohhhhhhhhhhhh थोड़ाए धीयड़ी दबाइएएएए. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होओओओ रहा हीी.

उसके बाद मैंने मनीषा को छोड़ दिया और उससे कहा.

मैं- मुझे थोड़ा काम करने दो मनीषा. मैं कुछ देर में काम फिनिश करके निचे आ रहा हूँ. अभी तुम jao.aur तुम और दीदी अचे से तैयार हो कर अपने यार का स्वागत करो.

जब मैंने ये बात कही तो मनीषा ने मेरे साइन पर मारा और कहा.

मनीषा- आप न भैया. बहुत hi बेशरम और गंदे हूँ. कुछ भी बोलते रहते हो.

इतना कहने के बाद मनीषा निचे चली गयी. थोड़ी देर मैंने अपना काम किया ऊके बाद मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुवा और मनीषा और सरिता दीदी की चुदाई के लिए निचे चला गया.

सबसे पहले मैं सरिता दीदी के कमरे में गया तो वह पर कोई नहीं था. उसके बाद मैं मनीषा के कमरे में गया और दरवाज़ा क्नॉच किया तो मनीषा ने दरवाज़ा खोला. मैं अंदर चला गया. मनीषा जब दरवाज़ा बंद कर के पलटी तो मैंने उसे देखा. उसने ब्रा और पंतय पहनी हुई थी. वो बड़ी कमुख नज़रो से मुझे देख रही थी. मुझे ऐसे देखते पाकर मनीषा बोली.



मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो bhaiya.jaise पहली बार देख रहे हो.

मैं- देखा तो कई बार है लेकिन हर बार ऐसा लगता है की मैं तुझको ब्रा पंतय में पहली बार देख रहा हूँ. वैसे तू एकदम बेम लग रही है.

manisha(muskurakar)- अरे भैया केवल बेम को hi देखोगे, एटमबम को भी देख लो. जो कब से अपना जलवा आपको देखने के लिए बेताब बैठी हुई है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने बिस्टेर की तरफ देखा तो सरिता दीदी बिस्टेर पर बैठी थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड उव में एकक झटके में खड़ा हो गया. सरिता दीदी इस समय ब्रा और पंतय पहन कर बिस्टेर पर बैठी थी उनकी ब्रा एकदम झीनी थी. ब्रा से उनकी चूचियों की पूरी झलक मिल रही थी और उनकी घुंडीया एकदम नंगी देख रही थी. पंतय भी एकदम पारदर्शी थी. जिसमे से दीदी की छूट साफ दिखाई दे रही थी. मैं दीदी को देखकर अपने लुंड को सहलाने लगा. दीदी ने मुझे देखते हुवे कहा.



सरिता दी- ये क्या कर रहा है अभी. तुझे शर्म नहीं आती अपनी दीदी के सामने अपना लुंड सहला रहा है.

मैं- क्या करू दीदी. तुम्हारी जवानी बहुत hi गरम है. तुम अपनी नंगी चूचिया दिखाकर मेरे लुंड को जगा रही हो तो मैं क्या कर सकता हूँ.

मेरी बात सुनकर मनीषा आकर मेरी पीठ से लिपट गई और अपना हाँथ आगे बढाकर मेरे साइन को सहलाने लगी. मैंने मनीषा की चूचिया अपनी पीठ पर फील करते हुवे कहा.

मैं- आज मैं कुछ नहीं करूँगा. तुम दोनों मुझे अपना जलवा दिखाकर इतना मजबूर कर दो की मैं तुम दोनों को रगड़ रगड़ कर छोड़ सकू. चलो अब देर न करो और शुरू हो जाओ.

इतना कहकर मैं कुर्सी पर बैठ गया. थोड़ी देर मनीषा और दीदी एक दूसरे को देखती रही फिर दीदी उठकर मनीषा के पास आई और उसके होंठो को अपने अंगूठे से मसलने लगी. थोड़ी देर मनीषा के होंठो को मसलने के बाद दीदी ने कुछ देर मनीषा को देखा फिर अपना होंठ मनीषा के होंठो पर रख दिया और किश करने लगी. मनीषा ने भी दीदी को किश करना शुरू कर दिया.



दोनों बहुत hi वाइल्ड तरीके से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे. मैं कुर्सी पर बैठा अपना लुंड सहला रहा था. थोड़ी देर मनीषा ने दीदी का होंठ चूसा उसके बाद मनीषा ने दीदी का पूरा मुंह अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी. दीदी भी मनीषा का पूरा साथ दे रही थी. थोड़ी देर तक मनीषा ने दीदी का मुंह चूसा फिर अपनी जीभ निकल कर दीदी के मुंह में दाल दी. जिसे दीदी बड़े चाव से चूसने लगी. मनीषा ने अपने हाँथ आगे बढाकर दीदी की चूचियों पर रख दिया अरु दबाने लगी. थोड़ी देर अपने जीभ चुसवाने और दीदी की चूचिया दबाने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ दीदी के मुंह से निकल ली और मेरी तरफ देखने लगी. मैं अपना लुंड मसल रहा था. मनीषा मेरी तरफ देख कर बोली.

मनीषा- क्यों भैया मज़ा आ रहा है दोनों बहनो की रासलीला देखकर.

मैं- हाँ मनीषा बहुत मज़ा आ रहा है करती रहो तुम दोनों.

मेरी बात सुनकर मनीषा दीदी को पीछे धकेलते हुवे बिस्टेर तक ले गई और जाकर बिस्टेर पर बैठ गयी. मनीषा के बिस्टेर पर बैठने के बाद दीदी जाकर उसके सामने मुंह करके उसकी गॉड में बैठ गयी और मनीषा की आँखों में देखने लगी. थोड़ी देर मनीषा की आँखों में देखने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकली और मनीषा के होंठो पर फेरनी शुरू कर दी. मनीषा ने अपने दोनों हांथो से दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी. दीदी ने अपना हाँथ मनीषा के हाँथ पर रख दिया, लेकिन उन्होंने मनीषा को रोकने की कोशिश नहीं की.



थोड़ी देर मनीषा ने भी अपनी जीभ बहार निकल ली और दीदी की जीभ पर फिरने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi एक दूसरे की जीभ से जीभ लड़ने के बाद दीदी ने अपनी जीभ मनीषा के मुंह में दाल दी. मनीषा ने अपना मुंह बंद कर के दीदी की जीभ जोर जोर से चूसने लगी. लगभर 3 मिनट तक दीदी की जीभ चूसने के बाद मनीषा ने दीदी की जीभ छोड़ दी और अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी की चूचिया दबती रही. थोड़ी देर दोनों ने एक दूसरे की जीभ चूसने के बाद अपने होंठ एक दूसरे से अलग किये.

उसके बाद दोनों बिस्टेर से उठी और चलती हुई मेरे पास आयी और मेरे लुंड को देखने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखने के बाद सरिता दीदी ने मेरी आँखों में देखा. दीदी की आँखे लाल हो गयी थी. दीदी पर छुडास हावी हो गाइट hi. मैंने दीदी को देखते हुवे कहा.

मैं- देख रही हो दीदी. आप दोनों ने मेरे लुंड को एकदम बेकाबू कर दिया है. देखो आप दोनों को देखकर कैसे एकदम खड़ा हो गया है.

सरिता दी- हाँ देख रही हूँ. तुम्हारा लुंड बहुत बदमाश हो गया है. जब देखो तब खड़ा hi रहता है. रखो अभी मैं इसका इलाज़ करती हूँ.



इतना बोलकर मेरी आंखो में देखती हुई दीदी जमीं पर बैठ गयी और मेरे लुंड को अपने हांथो से पकड़ लिया. मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे झुककर मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिया और चूसने लगी. सरिता दीदी मेरे लुंड को सहला रही थी और मनीषा मेरे होंठ को चूस रही थी. मैं इस दोहरे मज़े से पागल हो रहा था. मैंने अपने एक हाँथ उठाकर सरिता दीदी के सर पर रख दिया और सहलाने लगा और एक हाँथ मैंने मनीषा की चुकी को पकड़ लिया और दबाने लगा.

तोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद दीदी ने मेरी उव को अपनी ऊँगली से फंसकर निचे खिसकने लगी. मैंने अपनी गांड थोड़ी सी उठाकर उव निचे उतरने में दीदी की मदद की. उव उतारते hi मेरे लुंड ने एक जोर का झटका मारा और आकर मेरे पेट से टकराया. आज मेरा लुंड और दिन के मुकाबले मुझको ज्यादा बड़ा लग रहा था. सरिता दीदी मेरे लुंड को देखती हुवी मुझसे बोली.

सरिता दी- क्या बात है अभी. आज तो तेरा लुंड और दिन के मुकाबले बड़ा लग रहा है.

मैं- बड़ा क्यों नहीं होगा दीदी. जब इतनी मस्त मस्त दो बहाने मुझसे छोड़ने के साथ में तैयार बैठी है तो मेरा लुंड यही सोच सोच कर बड़ा हो गया है की आज किसकी छूट छोड़ने में ज्यादा मज़ा आएगा. और छूट के अलावा इसे एक शिल्पक गांड भी मिलने वाली है. यही सोच सोच कर मेरा लुंड बड़ा हो गया है.

मेरी ये बात सुनकर मनीषा ने किश रोक कर मेरी तरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी मनीषा की आँखों में देखते हुवे उसकी चुकी को जोर से मसल िया मनीषा के मुंह से आआआअह्हह्ह्ह्हह भैया निकल गया. थोड़ी देर ऐसे hi लुंड पकडे रहने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड पर रख दी. मेरे मुंह से आआअह्ह्ह सरिता. की आवाज़ निकल गयी. दीदी ने अपनी जीभ कुछ देर मेरे लुंड के टोपे पर चलायी फिर अपनी जीभ मेरे पुरे लुंड पर फिरने लगी. मैं मनीषा का होंठ चूसते हुवे उसकी चुकी को बारे बरी से दबा रहा था. थोड़ी देर दीदी ने मेरा लुंड छठा. फिर अपना मुंह खोलकर लुंड मुंह में भरकर एक चौपा लगाकर पुककक की आवाज़ के साथ लुंड छोड़ दिया. मुझे इतना ज्यादा मज़ा आया की मैंने मनीषा की चुकी जोर से मसल दी. मनीषा के मुंह से चीख निकल गयी.

मनीषा- aaaaaaahhhhhhhhhh भाइयाआआआआ. धीरी सीए दाबाहूऊऊ.

मनीषा की आवाज़ सुनकर सरिता दीदी ने मनीषा की तरफ देखा और फिर से लुंड चूसने लगी. मैं दीदी के सर को अपने हाँथ से अपने लुंड पर दबाने लगा. थोड़ी देर मनीषा ने मेरा मुंह छोड़ा और मेरे गार्डन को चूमती हुई निचे जाने लगी. मनीषा मेरी गार्डन को चूमते हुवे मेरे साइन पर आकर रुकी और मेरे साइन को चूमते हुवे मेरे निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर चूसने के बाद उसने निप्पल को अपने दांतो से दबा दिया. मेरी चीख निकल गई.

मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मनीषआआ. क्याआ काररर रहीए हैई तू. काट क्यों रही है. थोड़ा प्यार से कर न. बहुत मज़ा आ रहा है मुझे. तुम दोनों सच में बहुत जबरदस्त मॉल हो. तुम दोनों की जुगलबंदी कमल की है. अपना जलवा दिखाकर तुम दोनों ने मुझे बेकाबू कर दिया है.

मेरे इतना कहने के बाद दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह से निकला और कहा.

सरिता दी- बस तुम देखते जाओ अभी. आज्ज हम दोनों मिलकर तुझको बहुत मज़ा देने वाले हैं.

दीदी इतना बोलकर फिर से मेरे लुंड को चूसने लगी और मनीषा मेरे निप्पल को अपने मुंह में भरकर खेलने लगी. थोड़ी देर मेरे निप्पल से खेलने के बाद मनीषा मेरे साइन को चूमती हुवी निचे आई और मेरे पेट को चूमने लगी. साथ hi मनीषा ने हाँथ निचे बढाकर मेरी गोटियों को पकड़ लिया और सहलाने लगी. मेरे मुंह से आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा निकल गया. मैंने भी मनीषा की चूचियों को जोर से मसल दिया. मनीषा आआह्ह्ह्ह भैया करके सीसिया उठी. थोड़ी देर पेट चूमने के बाद मनीषा जमीन पर बैठ गयी.

मनीषा के बैठने के बाद सरिता दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह से निकला और अपने हांथो से खेलने लगी और अपने होंठ मनीषा के होंठो पर रख दिया. दोनों एक दूसरे को चुनमे में मसगूल हो गई. दोनों अपने हांथो से मेरे लुंड और गोटियों को सहला रही थी. थोड़ी देर एक दूसरे को चूमने के बाद दोनों अलग हुई और मनीषा ने झुककर मेरे लुंड को चुम लिया और आप हाँथ गोटियों से हटा लिया. दीदी ने भी अपनी जीभ निकलकर मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया. अब मेरे लुंड पर दो हसीनाओ ने अपनी जीभ का कमल दिखाना शुरू कर दिया था. एक तरफ मेरा लैंड मनीषा चाट रही थी और दूसरी तरफ दीदी मेरा लुंड चाट रही थी. मनीषा ने लुंड chat-te हुवे अपना हाँथ दीदी की चुकी पर रख दिया और सहलाने लगी. दीदी ने अपने हाँथ से मेरी गोटियों को पकड़ लिया और उसे हल्का हल्का दबाने लगी. मेरे मुंह से सिसकी निकल गई.



मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhh मेरिइइइइइइ बहाँऊऊऊऊ. कीटनाआ मज़ाआ दी रही हूँ तुम दोन्यू अपनी भईईई को. ऑरररर जोररर सी चातुओ मेरी लुँड्ड्ड कोऊ. मुँहहह मी लेकर चुसू मेरी लौड़ी को. बहुतत्त माज़ा आए रहा हीी मेरीए मनीषआआआ सरिताआए डार्लिंग.

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपना मुंह हीचे किया और मुंह खोलकर मेरी गोटियों को अपने मुंह में ले लिया. मनीषा ने भी लुंड चेतना बंद कर दिया और मुंह खोलकर लुंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैं तो मस्ती के सातवे आसमानमे पहुंच गया था. मैंने दोनों का सर पकड़कर अपने लुंड और गोठियो पर दबाने लगा. थोड़ी देर तक दोनों ने मेरे लुंड और गोटियों को खूब चूसा. मैंने अपने हाँथ से मनीषा के सर को जोर से अपने लुंड पर दबाकर कुछ देर होल्ड किया. मेरा लुंड मनीषा के हलक तक पहुंच गया. कुछ देर बाद मैंने मनीषा को छोड़ दिया वो मेरे लुंड को अपने मुंह से निकल कर जोर जोर से साँस लेने लगी. और बोली.

मनीषा- क्या भैया. इतनी जोर से मेरा सर अपने लुंड पर दबाया आपने. मेरी तो साँस hi रुक गई थी.

मैं- अरे मनीषा. तुमने hi तो कहा था की तुमको भी दोनों दीदी की तरफ रफ़ चुदाई पसंद है. ये तो बस शुरुआत है. अभी बहुत कुछ होने वाला है तुम्हारे साथ.

इतना कहकर मैं कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया. सरिता दीदी ने मेरी गोटिया अपने मुंह से निकल दी. मैंने दोनों का सर सहलाने लगा. खड़ा होने के बाद मेरा लुंड एकदम सिद्ध में बन्दुक की तरह खड़ा था. दीदी और मनीषा ने एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हुवे अपने होंठो को मेरे लुंड पर जड़ से लेकर टोपे तक रगड़ने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने अपने लुंड को दोनों के होंठो के बिच आगे पीछे करने लगा.



मैं दोनों का सर अपने लुंड पर दबाने लगा. जिससे मेरा लुंड कैसा हुवा दोनों के होंठो के बिच आगे पीछे हो रहा था. थोड़ी देर ऐसे hi उनके होंठो के बिच लुंड पेलने के बाद मैंने मनीषा को खड़ा किया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. और एक हाँथ से दीदी का सर पकड़कर अपने लुंड पर दबाने लगा. जिससे दीदी मेरा इशारा शमझ्कर मेरा लुंड पूरा मुंह खोलकर अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

मैं एक हाँथ से दीदी के सर को अपने लुंड पर दबा रहा था और एक हाँथ से मनीषा की चुकी दबाते हुवे उसके होंठ चूस रहा था. थोड़ी देर लुंड चसवाने के बाद मैंने दीदी के बाल पकड़ लिए और दीदी के सर को अपने लुंड पर दबाकर अपनी कमर को एक झटका दिया. जिससे मेरा लुंड जड़ तक दीदी के हलक के निचे उतर गया. दीदी की आँखे बड़ी हो गयी. कुछ देर मैंने दीदी के सर को दबाये रखा उसके बाद मैंने उनका सर छोड़ दिया. दीदी मेरा लुंड अपने मुंह से निकल कर खांसने लगी. और कहने लगी.

सरिता दी- आआआआहहहहह अभियई. तू न सच में जानवर बन जाता है. थोड़ा धीरे से किया कर.

इतना बोलकर दीदी फिर से मेरा लुंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर तक मैंने दीदी को अपना लुंड चुसाया उसके बाद मैंने दीदी को उठाकर अपने आगे खड़ा किया. दीदी को खड़ा करने के बाद मैंने मनीषा को दीदी के सामने दीदी की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया. फिर मैं मनीषा के होंठो को चूसने लगा और अपना लुंड दीदी की गांड में घुसा दिया और हाँथ मनीषा की पीठ पर ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. और उसकी पीठ को सहलाने लगा. कुछ देर मनीषा के होंठ चूसने के बाद मैंने अपना हाँथ दीदी की पीठ पर फिरने लगा और फिरते फिरते दीदी की ब्रा पर रख दिया और उसका हुक खोल दिया.

अब दोनों की ब्रा खुल चुकी थी लेकिन दोनों की चूचिया आपस में दबी होने के कारन ब्रा निचे नहीं गिरी थी. फिर मनीषा ने अपना हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर दबाने लगी और मैं दीदी के कंधे से ब्रा हटाकर उनके कंधे को चूसने लगा. दीदी ने अपना हाँथ उठाकर मेरी गार्डन पर लप्पेट दिया और आँख बंद कर के मज़ा लेने लगी. थोड़ी देर तक ऐसे hi मज़ा लेने के बाद मैं दीदी के पीछे से हैट गया और जाकर बिस्टेर पर बैठ गया, लेकिन दीदी और मनीषा अभी भी एक दूसरे से लगी हुई थी. मैंने दोनों को अपने पास बुलाया. दोनों अपनी गांड मटकती हुई मेरे पास आकर कड़ी हो गयी.

मैंने दीदी को पकड़कर बिस्टेर पर पीठ के बल लिटा दिया और उनकी कमर के निचे 2 तकिया रख दिया मैंने मनीषा को दीदी के ऊपर पेट के बल लेटने के लिए कहा. तो दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- तू ये क्या कर रहा है अभी. तू करना क्या चाहता है.

मैं- अब मैं आप दोनों को मज़ा देखता हूँ. बस मैं जैसा कह रहा हूँ तुम दोनों करती जाओ. और जो मैं करना चाहता हूँ मुझे करने दो. तुम दोनों को बहुत मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने मैंने महिषा को दीदी के ऊपर लिटाया और मनीषा को खींचकर दीदी के ऊपर एडजस्ट किया. जिससे अब दीदी और मनीषा की छूट पास पास हो गई. मैं जमीन पर निचे बैठ गया और पहले दोनों की छूट पर एक एक किश किया और फिर अपनी जीब निकल कर मनीषा की छूट पर फिर दी. और उसकी छूट चाटने लगा. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गयी.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह भाइयाँआ. ऐसी हीई कारु.

मैं मनीषा की छूट चाटने लगा और अपनी बिच वाली ऊँगली सरिता दीदी की छूट में घुसकर दीदी की छूट पेलने लगा. थोड़ी देर मनीषा की छूट चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ सरिता दीदी की छूट पर रख दी और उनकी छूट चाटने लगा और अपनी बिच वाली ऊँगली मनीषा की छूट में पेल दिया. दोनों के मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ आआआह्ह्ह्हह्ह भैय्या निकलने लगा. थोड़ी देर तक मैंने मनीषा की छूट में ऊँगली की फिर मैंने वही ऊँगली निकल कर मनीषा की गांड पर फिरने लगा. ऊँगली फिरते हुवे मैंने अपनी ऊँगली उसके ाशोले पर रख कर दबाव दिया तो मनीषा ने अपनी गांड सिकोड़ ली. मैंने अपना मुंह दीदी की छूट से हटाकर देर सारा थूक मनीषा की गांड पर गिराया और फिर से दीदी की छूट चाटने लगा और अपनी ऊँगली उसके ाशोले में डालने लगा. मेरे जोर लगाने से मेरी ऊँगली थोड़ा सा अंदर गई तो वो दर्द से चीख पड़ी.

मनीषा- आआआआह्ह्ह्हह्ह भैयाआआ. वहा नाहीईईई. ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा हीी.

मनीषा के इतना कहने के बाद मैंने अपनी ऊगली उसकी गांड से हटा ली और उसकी छूट में पेल दिया और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. मैं दीदी की छूट भी जोर जोर से पूरी मुंह में भरकर चूस रहा था. फिर मैं अपनी ऊँगली दीदी की छूट में घुसा दी और मनीषा की छूट चाटने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi दोनों की छूट चाटने के बाद मैंने मनीषा को बिस्टेर पर लिटा दिया और दीदी को मनीषा की छूट चाटने के लिए कहा. दीदी ने कहा.

सरिता दी- मुझे नहीं लग रहा है अभी की मैं ये कर पाऊँगी.

मैं- अरे सरिता तुम तो बहुत कुछ कर सकती हैं और मेरे लिए आपको बहुत कुछ करना भी है. अब ज्यादा देर मत करो डार्लिंग. शुरू हो jao.bahut मज़ा आएगा तुमको.

मेरी बात सुनकर दीदी डोगग्य स्टाइल में हो गई और अपना मुंह मैश की छूट पर रख दिया और चूसने लगी. मणि भी दीदी की दोनों जांघो को पकड़कर दीदी के निचे लेट गया और अपना मुंह दीदी की छूट के सामने करके दीदी की जांघो को पकड़कर अपने मुंह पर खींच लिया. दीदी की छूट मेरे मुंह पर आ गयी तो मैंने अपनी जीभ निकलकर उनकी छूट चाटने लगा. मैं दीदी की छूट चाटने के साथ साथ अपनी बिछ वाली ऊँगली दीदी की गांड पर रख दिया और एक झटके में दीदी की गांड में पेल दिया. दीदी को हल्का सा दर्द हुवा तो उन्होंने मनीषा की छूट से अपना मुंह हटाया और सिसक कर बोली.

सरिता दी- आआआअह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ. थोड़ाआआआ धीरे डाल भाईईई. दर्द्द होता है.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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