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जब दरवाज़ा खोला तो सामने मनीषा कड़ी थी. मैंने उसे अंदर आने का राष्ट दिया और दरवाज़ा बंद कर लिया. मनीषा सीधे अपने कमरे में चली गई और मैं भी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और अपने कमरे में चला gaya.thodi देर बाद मम्मी पापा भी आ गए, क्योंकि आज शादी में जाना था और वो जगह घर से लगभग 25 कम दूर थी, इसलिए वो आज जल्दी आ गए थे. मैं निचे आया तो सभी लोग हॉल में बैठे थे. और जाने के बारे में डिसकस कर रहे थे.
पापा- चलो मनीषा, अभी और सरिता सभी लोग रेडी हो जाओ. शर्मा जी की बेटी की शादी में जाना है.
मनीषा- पापा मैं नहीं जाउंगी. मेरी बिलकुल इच्छा नहीं है जाने की
पापा- ये क्या बात हुई जब सब को बुलाया है तो चलने में क्या परेशानी है तुमको.
सरिता दी- रहने दो न पापा, जब उसका मन नहीं है तो क्यों फाॅर्स कर रहे हैं चलने के लिए.
पापा- इसके नहीं जाने पर किसी को यहाँ रुकना पड़ेगा फिर.
सरिता di(mujhe देखकर)- अभी रुक जायेगा मनीषा के साथ.
पापा- चलो ठीक है. अभी तुम इसके साथ hi रुकना. कही भी बहार मत जाना इसे अकेला छोड़कर.
Main(natak करते हुवे)- लेकिन पापा मैं भी चलना चाहता हूँ.
पापा- किसी एक को तो रुका है. मैं तो नहीं रुक सकता. क्योंकि मुझे तो जाना hi होगा. तुम रुक जाओ अभी. अब मनीषा को घर में अकेले भी तो नहीं छोड़ सकते हैं.
मैं( नाटक करते हुवे)- ठीक है पापा अगर आप कह रहे हैं तो ठीक है मैं रुक जाता हूँ.
इतना कहकर मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. मनीषा मेरी तरफ hi देख रही थी. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी. तो मैं वह से उठकर अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद जब जाने का समय हुवा तो पापा ने मुझे आवाज़ दी. मैं निचे आया तो पापा ने कहा.
पापा- अच्छा सुन अभी. हो सकता है की हम कल सुबह आये. तो तुम घर को अचे से लॉक कर लेना और मनीषा का ख्याल रखना. ठीक है न.
मैं- (सरिता दीदी की तरफ देखकर) आप फ़िक्र मत कीजिये पापा. मैं उसका बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा.
इसके बाद सभी लोग कार में बैठकर शादी के लिए निकल गए. मैं दरवाज़ा बंद करके जब अंदर आया तो मनीषा वही बैठी हुई थी. वो कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी थोड़ा शर्मा रही थी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया और उसे देखते हुवे कहा.
मैं- क्या हुवा मनीषा तू ऐसे क्यों रियेक्ट कर रही है तू.
मनीषा- कुछ नहीं भैया. बस ऐसे hi.
मैं- नर्वस हो रही हो क्या.
मनीषा( मेरी तरफ देख कर)- ऐसा तो कुछ नहीं है. मैं क्यों नर्वस होउंगी. आप भी न कुछ भी सोचते रहते हैं.
मैं- नहीं मुझे लगा इसलिए मैंने पूछा तुझसे.
मेरी बात सुनकर मनीषा अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने मनीषा से कहा.
मैं- मनीषा आज खाना थोड़ा जल्दी बना लेना.
मनीषा- क्यों भैया. कोई खास बात है क्या.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी गॉड में खींच लिया और उसकी एक चुकी को दबाते हुवे कहा.
मैं- हाँ मनीषा आज मेरा मन ढेर सारा और देर तक तुम्हारा दूध पिने का मन कर रहा है.
मनीषा- धत्त्त भैया. आपको बिलकुल भी शर्म नहीं आती.
इतना कहकर मनीषा मेरी गॉड से उठकर अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर मैं वही बैठा रहा फिर मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और मनीषा की चुदाई से पहले उसके pahan-ne के लिए जो कपडे लाया था उसको लेकर मनीषा के कमरे की तरफ चल पड़ा. मैंने बिना गेट नॉक किया उसके कमरे में चला गया. कमरे में घुसते hi मैं वही पर जैम सा गया. निचे जो उसने कपडे पहने थे वो उसके जिस्म पर थे hi नहीं उसे शायद पता था की मैं उसके कमरे में आऊंगा इसलिए उसने अपने कपडे उतर दिए थे. इस समय उसके जिस्म पर एक ब्रा और कापरी थी.
दरवाज़ा खुलने के बाद उसने एक ऐडा के साथ अपने हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख कर थोड़ा तिरछा होकर दीवाल से सत्कार कड़ी होकर मुझे देखने लगी. मैं तो बस मनीषा को hi देखे जा रहा था. मनीषा को देखकर मेरा लुंड मेरी लोअर में उव के अंदर फूल गया था. मुझे इस तरह अपनी चूचियों को घूरते हुवे मनीषा ने कहा.
मनीषा- ऐसा क्या देख रहे हो भैया.
मैं- क्या यार मनीषा. क्यों मेरी जान लेने पर तुली हुई हो.
मनीषा- मैंने ऐसा क्या किया है भैया.
मैं- अगर ऐसे कपडे पहनकर मेरे सामने तुम रहोगी तो मेरी तो जान hi किसी दिन निकल जाएगी.
मनीषा- एक बात आप भूल रहे हैं की ये मेरा कमरा है. और मुझे कोई सपना थोड़ी आया था की आप मेरे कमरे में बिना नॉक किये बेशर्मो की तरह चले आएँगे.
मैं- अब तुम्हारे कमरे में भी आने के लिए मुझे परमिशन लेनी पड़ेगी.
मनीषा- परमिशन नहीं भैया. लेकिन अगर आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हूँ. तो आपको लौट जाना चाहिए था. लेकिन आप तो किसी प्यासे कुत्ते की तरह मुझे देखकर लार टपका रहे हैं.
मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के पास जाकर खड़ा हो गया और मनीषा की कमर में हाँथ डालकर उसे अपने साथ चिपका लिया, जिससे उसकी चूचिया मेरे साइन में धस गई. मनीषा के मुंह से sssssssssss भैया की आवाज़ आई. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.
मैं- क्या करू मनीषा. जब किसी कुत्ते को मास्स के इतने बड़े बड़े टुकड़े दिखेंगे तो कुत्ता उसे खाने के लिए अपनी लार तो टपकायेगा hi.
इतना कहकर मैंने एक हाँथ उसकी चुकी पर रखकर उसे इशारा किया. और उसकी चुकी को दबा दिया. मनीषा आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करके मुझे अपने से दूर कर दिया और जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने कड़ी हो गई और बोली.
मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. और ये कोई मास्स का टुकड़ा नहीं है मेरे शरीर है. बेशर्मी के भी हद होती है भैया.
मैं- मैं भी कोई कुत्ता नहीं हूँ. तेरा भाई हूँ और वो भी बेशरम.
मेरी बात सुनकर मनीषा मुस्कुराने लगी. उसने मुझे अब तक बहार जाने के लिए नहीं कहा था और न hi उसने अभी तक अपने कपडे पहने थे. मैं चलते हुवे जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने मनीषा से सात कर खड़ा हो गया और एक हाँथ उसके कंधे पर रखकर एक हाँथ उसकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. कंधे वाले हाँथ की ऊँगली से मैंने उसकी ब्रा की स्टेप को पकड़कर खींचा और छोड़ दिया. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गई.
मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्ह भैईया. मत्तट करिये न.
मैं- (उसकी गांड को सहलाते हुवे) क्या न करू मनीषा
मनीषा- मुझे चोट लगती है कंधे पर भैया. ऐसा मत करिये.
मनीषा की बात सुनकर मैंने एक हाँथ आगे बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और निचे उसकी गांड एक हाँथ से दबाने लगा. मैंने ड्रेसिंग टेबल के मिरर में देखा तो मनीषा अपने होंठ को काट रही थी उसकी सांसे तेज़ तेज़ से चलने लगी थी. मैं कुछ देर उसकी चुकी और गांड दबाने के बाद अपना हाँथ उसकी गांड से हटाकर उसकी दूसरी चुकी पर रख दिया और दबाने लगा और उसके कंधे को चूमने लगा. थोड़ी देर चुकी दबाने के बाद मैंने उसकी चुकी को जोर से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी.
मनीषा- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययीय. थोड़ा धीरे दबाइये भीआयाआ.
उसकी बात सुनकर मैं उसकी चुकी को दबाते हुवे पीछे से मनीषा से सत्कार खड़ा हो गया और अपना लुंड उसकी गांड पर प्रेस करने लगा. थोड़ी देर उसकी गांड पर लुंड का दबाव डालने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से दबाया और अपनी कमर को एक झटका दिया. मनीषा दर्द और मज़े से चीखी.
मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ. थोड़ा धीरे दबायी. मुझे दर्द होता है.
इतना सुनकर मैंने मनीषा की ब्रा का हुक पकड़ा जो आगे की hi तरफ था और उसे खोल दिया. जिससे ब्रा उसके दोनों कंधो पर झूल गई और मैंने उसकी नंगी चूचियों कर अपने हाँथ रख दिया और दबाने लगा. मनीषा बस ऊऊह्ह्ह्हह्ह भैयाआआआ आआह्ह भइया कर रही थी. तोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को दबाने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को जोर से दबा दिया. मनीषा मस्ती में बोली.
मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. बस आईसीई हीई करीईई.
इतना कहकर मनीषा ने हाँथ पीछे करके मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद मनीषा को लुंड सहलाने में दिक्कत हो रही थी इसलिए उसने मेरे लुंड से अपना हाँथ हटा लिया. इसलिए मैंने एक हाँथ उसकी चुकी से हटाकर उसका हाँथ पकड़कर अपनी लोअर और उव के अंदर डालकर नंगे खड़े लुंड पर रख दिया. लुंड पर मनीषा का हाँथ पड़ते hi मेरे मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह मनीषा की आवाज़ निकल गई
मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआ मेरीए जांणण.
मनीषा मेरे लुंड को उव के अंदर सहलाने लगी और मैं मनीषा की चूचियों को दबाते उसकी ब्रा उसके कंधे से हटाकर उसके कंधे को चूमने लगा. मनीषा अब मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी. इसलिए उसने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. लगभग 5 मिनट तक मैंने मनीषा की चूचिया दबाई और मनीषा ने मेरे लुंड को अच्छी तरीके से दबाया. उसके बाद मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे लाल हो गाइट hi. मनीषा वासना से भर चुकी थी.
मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ बढाकर उसके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मनीषा ने भी मेरा पूरा साथ दिया. कुछ देर तक नार्मल किश करने के बाद मनीषा मेरे होंठो को फोरस्फुल्ली किश करने लगी.
और अपनी जीभह निकल कर मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैंने भी मनीषा की जीभ को अपने मुंह में बंद कर लिया और जोर जोर से चूसने लगा. और दोनों हाँथ निचे बढाकर उसकी गद्देदार और कातिल गांड पर रख दिया और जोर जोर से दबाने लगा. थोड़ी देर तक उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसकी जीभ को छोड़ दिया और अपनी जीभ निकलकर मनीषा के चेहरे से शुरू करके उसकी चूचियों तक लगभग 5 मिनट तक खूब छठा. जिससे उतनी भाग थूक से एकदम गिला हो गया था और चमक रहा था.
फिर मैंने अपना मुंह खोलकर उसकी एक चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मैं एक हाँथ से मनीषा की गांड दबाने लगा और एक हाँथ को उठाकर मनीषा की चुकी पर रख दिया. इस तीन तरफ से अपने शरीर पर पड़ने वाले हमले से मनीषा एकदम मदहोश हो गई और अपने एक हाँथ मेरे सर पर रखकर बालो को सहलाते हुवे बड़बड़ाने लगी.
मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैइय्याहा. बहुतत्त अछ्हा लगगग रहा हीी. ऐसी होई कॅरियई. ाअप्प्प बहुत्त अछ्हा कर रही हैंन.
इतना कहकर मनीषा ने अपना हाँथ निचे बहदाकार लोअर और उव के ऑडर डालकर मेरे खड़े लुंड को पकड़ लिया और मसलने लगी मैं sssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स करने लगा और साथ साथ मनीषा की चूचिय को पिता रहा. मैंने उसकी गांड वाला हाँथ उठाकर मनीषा की छूट पर कापरी के ऊपर से रख दिया. उसका कापरी उसके चुतरस से गिला हो गया था. शायद उसने अंदर पंतय नहीं पहनी हुई thi.thodi देर उसकी छूट को कापरी के ऊपर से दाबने के बाद मैंने अपना हाँथ उसकी कापरी के अंदर दाल दिया और उसकी नंगी छूट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा के शरीर में झुरझुरी हुई और उसने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया. मैं aaaaaaaaahhhhhhhhhh मनीषआआआ बोल पड़ा.
मैं उसकी छूट को सहलाते हुवे कभी उसकी छूट में ऊँगली दाल देता तो कभी उसकी छूट को मुठी में भरकर मसल देता. मनीषा बस ससससस ssssssssssshhhhhhhh आआअह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह करके रह जाती. कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने ऊके निप्पल को ऊँगली और अंगूठे में पकड़कर मसल दिया और छूट को मुट्ठी में बाहरकर मसला तो मनीषा के मुंह से नशीली आवाज़ निकल गई.
मनीषा- uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii भाइयाँआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh बहुत अच्छा लगगग रहा हैई. ऐसी होई कार्र्र्टी राहीईईए. औरर जोररर जोरर सीए करिये भैया. Aaaahhhhhhhhhh.
ये कहकर मनीषा के हाँथ मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगा. मैं मनीषा को चुकी बदलकर दूसरी चुकी को पैने लगा और चुकी वाला हाँथ उठाकर मनीषा की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. ऊपर मैं उसकी चुकी बदल बदल कर पि रहा था. निचे उसकी गांड दबाने और छूट में ऊँगली करने से मनीषा बहुत गरम हो गई और वो झड़ने के करीब पहुंच गई और कहने लगी.
मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhh भैय्याअ. ाप्प बहुत्त अछ्हीई छूटत कोऊ उंगली सी छोड़ती हैंन. औरर करिये भईया. औरर पीजिये मेरीए चूचियों को. जोर जोर से चूसिये इनको. बहुतत्त भुक्खी थी अप्प दूढः की लिये. तो पीई जाइये इनका सारा दूधहहह. Aaaaahhhhhhhhhh भैया मुझी कुछः हूँ ररहठा हीी. कुछःह करूओ भैया. मैंनं मार जौऊंगीए.
मैं मनीषा को चुदाई होने तक गरम रखना चाहता था. इसलिए मनीषा की बात सुनकर मैंने उसे छोड़कर एक झटके में उससे अलग हो गया. मनीषा की हालत ऐसी हो गई जैसे उससे उसका मनपसंद खिलौना छीन लिया गया हो. वो मेरी तरफ नशीली नज़रो से देखते हुवे बोली.
मनीषा- क्या हुवा भैया. आप ऐसे दूर क्यों हो गए मुझसेइ. करिये न जो कर रहे थे.
मैं- नहीं मनीषा. ये गलत है मैं तुम्हारे साथ ये गलत काम नहीं कर सकता. तुम मेरी बहन हो.
मेरी बात सुनकर मनीषा मुंह फाडे मुझे देखने लगी. उसे बिलकुल भी विस्वास नहीं था की मैं ऐसा कुछ भी बोल सकता हूँ. मनीषा थोड़े गुस्से भरी आवाज़ में बोली.
मनीषा- ये क्या है भैया. इतने दिन से आप मेरे साथ गन्दी गन्दी हरकते कर रहे हो तब आप को या ख्याल नहीं आया की मैं आपकी बहन हूँ. और अब बोल रहे हो की आप मेरे साथ ये नहीं कर सकते.
Main-haan मनीषा. मुझे अभी अभी रीलीज़ हुवा है की मैं जो कर रहा हूँ वो गलत है.
मनीषा मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी और मरते हुवे बोली.
मनीषा- आप ने जब दोनों दीदियो को फंसकर छोड़ा तो ये आपको गलत नहीं लगा. लेकिन जब मैं आपसे फंस गई हूँ तो ये आपको गलत लग रहा है. आप बहुत गंदे हो भैया और कमीने भी.
मैं- क्या कहा तुमने अभी मनीषा. तुम भी मुझसे……………… मैंने ठीक से सुना नहीं.
मनीषा- हाँ भैया मैं भी आपसे फंस गई हूँ. आपने दोनों दीदियो की तरह मुझको भी फंसा लिया है.
मैं- क्या सच में मनीषा. मैंने तो दोनों दीदियो को फ़साने के बाद उनके साथ कुछ और भी किया था. अब तुम भी मुझसे फंस गई हो तो मतलब मैं तुम्हारे साथ भी कर सकता हूँ.
मनीषा मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली. तो मैं उसके पास जाकर उसकी चुकी को एक हाँथ से दबाते हुवे पूछा.
मैं- बताओ मनीषा. मैं तुम्हारे साथ भी वो सब कर सकता हूँ न.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे धीरे से कहा.
मनीषा- hhhhhhhhhhhhh.
मैं- ऐसे नहीं मनीषा. पूरा बोलो किट ुम क्या चाहती हूँ.
Manisha-(nashili आँखों से देखते हुवे)- हाँ भैया जो आपने दोनों दीदियो के साथ किया है वो मेरे साथ भी कर सकते हो.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के होंठो को चुम लिया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
जब दरवाज़ा खोला तो सामने मनीषा कड़ी थी. मैंने उसे अंदर आने का राष्ट दिया और दरवाज़ा बंद कर लिया. मनीषा सीधे अपने कमरे में चली गई और मैं भी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और अपने कमरे में चला gaya.thodi देर बाद मम्मी पापा भी आ गए, क्योंकि आज शादी में जाना था और वो जगह घर से लगभग 25 कम दूर थी, इसलिए वो आज जल्दी आ गए थे. मैं निचे आया तो सभी लोग हॉल में बैठे थे. और जाने के बारे में डिसकस कर रहे थे.
पापा- चलो मनीषा, अभी और सरिता सभी लोग रेडी हो जाओ. शर्मा जी की बेटी की शादी में जाना है.
मनीषा- पापा मैं नहीं जाउंगी. मेरी बिलकुल इच्छा नहीं है जाने की
पापा- ये क्या बात हुई जब सब को बुलाया है तो चलने में क्या परेशानी है तुमको.
सरिता दी- रहने दो न पापा, जब उसका मन नहीं है तो क्यों फाॅर्स कर रहे हैं चलने के लिए.
पापा- इसके नहीं जाने पर किसी को यहाँ रुकना पड़ेगा फिर.
सरिता di(mujhe देखकर)- अभी रुक जायेगा मनीषा के साथ.
पापा- चलो ठीक है. अभी तुम इसके साथ hi रुकना. कही भी बहार मत जाना इसे अकेला छोड़कर.
Main(natak करते हुवे)- लेकिन पापा मैं भी चलना चाहता हूँ.
पापा- किसी एक को तो रुका है. मैं तो नहीं रुक सकता. क्योंकि मुझे तो जाना hi होगा. तुम रुक जाओ अभी. अब मनीषा को घर में अकेले भी तो नहीं छोड़ सकते हैं.
मैं( नाटक करते हुवे)- ठीक है पापा अगर आप कह रहे हैं तो ठीक है मैं रुक जाता हूँ.
इतना कहकर मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. मनीषा मेरी तरफ hi देख रही थी. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी. तो मैं वह से उठकर अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद जब जाने का समय हुवा तो पापा ने मुझे आवाज़ दी. मैं निचे आया तो पापा ने कहा.
पापा- अच्छा सुन अभी. हो सकता है की हम कल सुबह आये. तो तुम घर को अचे से लॉक कर लेना और मनीषा का ख्याल रखना. ठीक है न.
मैं- (सरिता दीदी की तरफ देखकर) आप फ़िक्र मत कीजिये पापा. मैं उसका बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा.
इसके बाद सभी लोग कार में बैठकर शादी के लिए निकल गए. मैं दरवाज़ा बंद करके जब अंदर आया तो मनीषा वही बैठी हुई थी. वो कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी थोड़ा शर्मा रही थी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया और उसे देखते हुवे कहा.
मैं- क्या हुवा मनीषा तू ऐसे क्यों रियेक्ट कर रही है तू.
मनीषा- कुछ नहीं भैया. बस ऐसे hi.
मैं- नर्वस हो रही हो क्या.
मनीषा( मेरी तरफ देख कर)- ऐसा तो कुछ नहीं है. मैं क्यों नर्वस होउंगी. आप भी न कुछ भी सोचते रहते हैं.
मैं- नहीं मुझे लगा इसलिए मैंने पूछा तुझसे.
मेरी बात सुनकर मनीषा अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने मनीषा से कहा.
मैं- मनीषा आज खाना थोड़ा जल्दी बना लेना.
मनीषा- क्यों भैया. कोई खास बात है क्या.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी गॉड में खींच लिया और उसकी एक चुकी को दबाते हुवे कहा.
मैं- हाँ मनीषा आज मेरा मन ढेर सारा और देर तक तुम्हारा दूध पिने का मन कर रहा है.
मनीषा- धत्त्त भैया. आपको बिलकुल भी शर्म नहीं आती.
इतना कहकर मनीषा मेरी गॉड से उठकर अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर मैं वही बैठा रहा फिर मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और मनीषा की चुदाई से पहले उसके pahan-ne के लिए जो कपडे लाया था उसको लेकर मनीषा के कमरे की तरफ चल पड़ा. मैंने बिना गेट नॉक किया उसके कमरे में चला गया. कमरे में घुसते hi मैं वही पर जैम सा गया. निचे जो उसने कपडे पहने थे वो उसके जिस्म पर थे hi नहीं उसे शायद पता था की मैं उसके कमरे में आऊंगा इसलिए उसने अपने कपडे उतर दिए थे. इस समय उसके जिस्म पर एक ब्रा और कापरी थी.
दरवाज़ा खुलने के बाद उसने एक ऐडा के साथ अपने हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख कर थोड़ा तिरछा होकर दीवाल से सत्कार कड़ी होकर मुझे देखने लगी. मैं तो बस मनीषा को hi देखे जा रहा था. मनीषा को देखकर मेरा लुंड मेरी लोअर में उव के अंदर फूल गया था. मुझे इस तरह अपनी चूचियों को घूरते हुवे मनीषा ने कहा.
मनीषा- ऐसा क्या देख रहे हो भैया.
मैं- क्या यार मनीषा. क्यों मेरी जान लेने पर तुली हुई हो.
मनीषा- मैंने ऐसा क्या किया है भैया.
मैं- अगर ऐसे कपडे पहनकर मेरे सामने तुम रहोगी तो मेरी तो जान hi किसी दिन निकल जाएगी.
मनीषा- एक बात आप भूल रहे हैं की ये मेरा कमरा है. और मुझे कोई सपना थोड़ी आया था की आप मेरे कमरे में बिना नॉक किये बेशर्मो की तरह चले आएँगे.
मैं- अब तुम्हारे कमरे में भी आने के लिए मुझे परमिशन लेनी पड़ेगी.
मनीषा- परमिशन नहीं भैया. लेकिन अगर आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हूँ. तो आपको लौट जाना चाहिए था. लेकिन आप तो किसी प्यासे कुत्ते की तरह मुझे देखकर लार टपका रहे हैं.
मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के पास जाकर खड़ा हो गया और मनीषा की कमर में हाँथ डालकर उसे अपने साथ चिपका लिया, जिससे उसकी चूचिया मेरे साइन में धस गई. मनीषा के मुंह से sssssssssss भैया की आवाज़ आई. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.
मैं- क्या करू मनीषा. जब किसी कुत्ते को मास्स के इतने बड़े बड़े टुकड़े दिखेंगे तो कुत्ता उसे खाने के लिए अपनी लार तो टपकायेगा hi.
इतना कहकर मैंने एक हाँथ उसकी चुकी पर रखकर उसे इशारा किया. और उसकी चुकी को दबा दिया. मनीषा आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करके मुझे अपने से दूर कर दिया और जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने कड़ी हो गई और बोली.
मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. और ये कोई मास्स का टुकड़ा नहीं है मेरे शरीर है. बेशर्मी के भी हद होती है भैया.
मैं- मैं भी कोई कुत्ता नहीं हूँ. तेरा भाई हूँ और वो भी बेशरम.
मेरी बात सुनकर मनीषा मुस्कुराने लगी. उसने मुझे अब तक बहार जाने के लिए नहीं कहा था और न hi उसने अभी तक अपने कपडे पहने थे. मैं चलते हुवे जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने मनीषा से सात कर खड़ा हो गया और एक हाँथ उसके कंधे पर रखकर एक हाँथ उसकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. कंधे वाले हाँथ की ऊँगली से मैंने उसकी ब्रा की स्टेप को पकड़कर खींचा और छोड़ दिया. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गई.
मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्ह भैईया. मत्तट करिये न.
मैं- (उसकी गांड को सहलाते हुवे) क्या न करू मनीषा
मनीषा- मुझे चोट लगती है कंधे पर भैया. ऐसा मत करिये.
मनीषा की बात सुनकर मैंने एक हाँथ आगे बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और निचे उसकी गांड एक हाँथ से दबाने लगा. मैंने ड्रेसिंग टेबल के मिरर में देखा तो मनीषा अपने होंठ को काट रही थी उसकी सांसे तेज़ तेज़ से चलने लगी थी. मैं कुछ देर उसकी चुकी और गांड दबाने के बाद अपना हाँथ उसकी गांड से हटाकर उसकी दूसरी चुकी पर रख दिया और दबाने लगा और उसके कंधे को चूमने लगा. थोड़ी देर चुकी दबाने के बाद मैंने उसकी चुकी को जोर से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी.
मनीषा- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययीय. थोड़ा धीरे दबाइये भीआयाआ.
उसकी बात सुनकर मैं उसकी चुकी को दबाते हुवे पीछे से मनीषा से सत्कार खड़ा हो गया और अपना लुंड उसकी गांड पर प्रेस करने लगा. थोड़ी देर उसकी गांड पर लुंड का दबाव डालने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से दबाया और अपनी कमर को एक झटका दिया. मनीषा दर्द और मज़े से चीखी.
मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ. थोड़ा धीरे दबायी. मुझे दर्द होता है.
इतना सुनकर मैंने मनीषा की ब्रा का हुक पकड़ा जो आगे की hi तरफ था और उसे खोल दिया. जिससे ब्रा उसके दोनों कंधो पर झूल गई और मैंने उसकी नंगी चूचियों कर अपने हाँथ रख दिया और दबाने लगा. मनीषा बस ऊऊह्ह्ह्हह्ह भैयाआआआ आआह्ह भइया कर रही थी. तोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को दबाने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को जोर से दबा दिया. मनीषा मस्ती में बोली.
मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. बस आईसीई हीई करीईई.
इतना कहकर मनीषा ने हाँथ पीछे करके मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद मनीषा को लुंड सहलाने में दिक्कत हो रही थी इसलिए उसने मेरे लुंड से अपना हाँथ हटा लिया. इसलिए मैंने एक हाँथ उसकी चुकी से हटाकर उसका हाँथ पकड़कर अपनी लोअर और उव के अंदर डालकर नंगे खड़े लुंड पर रख दिया. लुंड पर मनीषा का हाँथ पड़ते hi मेरे मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह मनीषा की आवाज़ निकल गई
मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआ मेरीए जांणण.
मनीषा मेरे लुंड को उव के अंदर सहलाने लगी और मैं मनीषा की चूचियों को दबाते उसकी ब्रा उसके कंधे से हटाकर उसके कंधे को चूमने लगा. मनीषा अब मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी. इसलिए उसने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. लगभग 5 मिनट तक मैंने मनीषा की चूचिया दबाई और मनीषा ने मेरे लुंड को अच्छी तरीके से दबाया. उसके बाद मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे लाल हो गाइट hi. मनीषा वासना से भर चुकी थी.
मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ बढाकर उसके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मनीषा ने भी मेरा पूरा साथ दिया. कुछ देर तक नार्मल किश करने के बाद मनीषा मेरे होंठो को फोरस्फुल्ली किश करने लगी.
और अपनी जीभह निकल कर मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैंने भी मनीषा की जीभ को अपने मुंह में बंद कर लिया और जोर जोर से चूसने लगा. और दोनों हाँथ निचे बढाकर उसकी गद्देदार और कातिल गांड पर रख दिया और जोर जोर से दबाने लगा. थोड़ी देर तक उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसकी जीभ को छोड़ दिया और अपनी जीभ निकलकर मनीषा के चेहरे से शुरू करके उसकी चूचियों तक लगभग 5 मिनट तक खूब छठा. जिससे उतनी भाग थूक से एकदम गिला हो गया था और चमक रहा था.
फिर मैंने अपना मुंह खोलकर उसकी एक चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मैं एक हाँथ से मनीषा की गांड दबाने लगा और एक हाँथ को उठाकर मनीषा की चुकी पर रख दिया. इस तीन तरफ से अपने शरीर पर पड़ने वाले हमले से मनीषा एकदम मदहोश हो गई और अपने एक हाँथ मेरे सर पर रखकर बालो को सहलाते हुवे बड़बड़ाने लगी.
मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैइय्याहा. बहुतत्त अछ्हा लगगग रहा हीी. ऐसी होई कॅरियई. ाअप्प्प बहुत्त अछ्हा कर रही हैंन.
इतना कहकर मनीषा ने अपना हाँथ निचे बहदाकार लोअर और उव के ऑडर डालकर मेरे खड़े लुंड को पकड़ लिया और मसलने लगी मैं sssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स करने लगा और साथ साथ मनीषा की चूचिय को पिता रहा. मैंने उसकी गांड वाला हाँथ उठाकर मनीषा की छूट पर कापरी के ऊपर से रख दिया. उसका कापरी उसके चुतरस से गिला हो गया था. शायद उसने अंदर पंतय नहीं पहनी हुई thi.thodi देर उसकी छूट को कापरी के ऊपर से दाबने के बाद मैंने अपना हाँथ उसकी कापरी के अंदर दाल दिया और उसकी नंगी छूट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा के शरीर में झुरझुरी हुई और उसने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया. मैं aaaaaaaaahhhhhhhhhh मनीषआआआ बोल पड़ा.
मैं उसकी छूट को सहलाते हुवे कभी उसकी छूट में ऊँगली दाल देता तो कभी उसकी छूट को मुठी में भरकर मसल देता. मनीषा बस ससससस ssssssssssshhhhhhhh आआअह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह करके रह जाती. कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने ऊके निप्पल को ऊँगली और अंगूठे में पकड़कर मसल दिया और छूट को मुट्ठी में बाहरकर मसला तो मनीषा के मुंह से नशीली आवाज़ निकल गई.
मनीषा- uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii भाइयाँआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh बहुत अच्छा लगगग रहा हैई. ऐसी होई कार्र्र्टी राहीईईए. औरर जोररर जोरर सीए करिये भैया. Aaaahhhhhhhhhh.
ये कहकर मनीषा के हाँथ मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगा. मैं मनीषा को चुकी बदलकर दूसरी चुकी को पैने लगा और चुकी वाला हाँथ उठाकर मनीषा की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. ऊपर मैं उसकी चुकी बदल बदल कर पि रहा था. निचे उसकी गांड दबाने और छूट में ऊँगली करने से मनीषा बहुत गरम हो गई और वो झड़ने के करीब पहुंच गई और कहने लगी.
मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhh भैय्याअ. ाप्प बहुत्त अछ्हीई छूटत कोऊ उंगली सी छोड़ती हैंन. औरर करिये भईया. औरर पीजिये मेरीए चूचियों को. जोर जोर से चूसिये इनको. बहुतत्त भुक्खी थी अप्प दूढः की लिये. तो पीई जाइये इनका सारा दूधहहह. Aaaaahhhhhhhhhh भैया मुझी कुछः हूँ ररहठा हीी. कुछःह करूओ भैया. मैंनं मार जौऊंगीए.
मैं मनीषा को चुदाई होने तक गरम रखना चाहता था. इसलिए मनीषा की बात सुनकर मैंने उसे छोड़कर एक झटके में उससे अलग हो गया. मनीषा की हालत ऐसी हो गई जैसे उससे उसका मनपसंद खिलौना छीन लिया गया हो. वो मेरी तरफ नशीली नज़रो से देखते हुवे बोली.
मनीषा- क्या हुवा भैया. आप ऐसे दूर क्यों हो गए मुझसेइ. करिये न जो कर रहे थे.
मैं- नहीं मनीषा. ये गलत है मैं तुम्हारे साथ ये गलत काम नहीं कर सकता. तुम मेरी बहन हो.
मेरी बात सुनकर मनीषा मुंह फाडे मुझे देखने लगी. उसे बिलकुल भी विस्वास नहीं था की मैं ऐसा कुछ भी बोल सकता हूँ. मनीषा थोड़े गुस्से भरी आवाज़ में बोली.
मनीषा- ये क्या है भैया. इतने दिन से आप मेरे साथ गन्दी गन्दी हरकते कर रहे हो तब आप को या ख्याल नहीं आया की मैं आपकी बहन हूँ. और अब बोल रहे हो की आप मेरे साथ ये नहीं कर सकते.
Main-haan मनीषा. मुझे अभी अभी रीलीज़ हुवा है की मैं जो कर रहा हूँ वो गलत है.
मनीषा मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी और मरते हुवे बोली.
मनीषा- आप ने जब दोनों दीदियो को फंसकर छोड़ा तो ये आपको गलत नहीं लगा. लेकिन जब मैं आपसे फंस गई हूँ तो ये आपको गलत लग रहा है. आप बहुत गंदे हो भैया और कमीने भी.
मैं- क्या कहा तुमने अभी मनीषा. तुम भी मुझसे……………… मैंने ठीक से सुना नहीं.
मनीषा- हाँ भैया मैं भी आपसे फंस गई हूँ. आपने दोनों दीदियो की तरह मुझको भी फंसा लिया है.
मैं- क्या सच में मनीषा. मैंने तो दोनों दीदियो को फ़साने के बाद उनके साथ कुछ और भी किया था. अब तुम भी मुझसे फंस गई हो तो मतलब मैं तुम्हारे साथ भी कर सकता हूँ.
मनीषा मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली. तो मैं उसके पास जाकर उसकी चुकी को एक हाँथ से दबाते हुवे पूछा.
मैं- बताओ मनीषा. मैं तुम्हारे साथ भी वो सब कर सकता हूँ न.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे धीरे से कहा.
मनीषा- hhhhhhhhhhhhh.
मैं- ऐसे नहीं मनीषा. पूरा बोलो किट ुम क्या चाहती हूँ.
Manisha-(nashili आँखों से देखते हुवे)- हाँ भैया जो आपने दोनों दीदियो के साथ किया है वो मेरे साथ भी कर सकते हो.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के होंठो को चुम लिया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..