Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 14 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

धन्यवाद् आपका अपना सुझाव देने के लिए.

बात ये है की जो हमारा फ़र्ज़ बनता है वो हम कर रहे हैं. सबको साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं. बाकि

अगर किसी को अच्छे शब्द भी बोर करते हैं तो इसमें हम क्या कर सकते हैं. :हैप्पी: :तूहैप्पी: :व्हाट1: :हाइपर:

अभी आपको साथ बने रहिये अच्छा नहीं लग रहा है तो आप उसके बारे में बोल रहे हैं. कल को आगे चलकर आपको धन्यवाद भी अच्छा नहीं लगेगा तो.

अब हम अकेले सभी की ख़ुशी का ख्याल तो नहीं रख रखते हैं न.

फिर भी अगर आपको इस शब्द से कोई परेशानी हैं तो आप hi कोई बढ़िया सा शब्द हमारे लिए खोज कर बता दीजिए.

अब आप इतने अच्छे पाठक हैं तो आप इतनी तो हमारी मैडम कर hi सकते हैं. :hinthint::vhappy1:

आपके सुझाव को हमने नोट कर लिया है. आगे से आपको कमैंट्स पर हम इन शब्दों का उपयोग नहीं करेंगे.

चलिए अब चीललललल मारिये और खुश रहिये.
 
अपडेट-112

उसकी बात सुनकर मैं वही रुक गया और उपर्युक्त बात मनीषा से कही., मनीषा ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. मैं भी खड़ा होकर मनीषा के इस मादक रूप का दीदार करना लगा. थोड़ी देर मुझे अपनी चूचियों का दीदार करवाकर और मेरे लुंड का दीदार कर वो वापस अंदर चली गई.

थोड़ी देर बाद मनीषा एक ब्रा और पंतय पहकर बहार आई. इस बार उसकी चूचिया ब्रा से और बहार झांक रही थी. मैं तो बस उसकी चूचियों में hi खो गया. मैं उसकी चूचियों के दीदार करने में इतना खो गया की कब वो अंदर चली गयी मुझे पता hi नहीं चला.

अब आगे.

मनीषा ने बोल तो दिया था की अगर मैं उसके पास गया तो वो मुझे और कपडे पहनकर नहीं दिखाएगी. लेकिन वो अंदर जाने के बाद काफी देर तक बहार नहीं आई तो मैंने उसे आवाज़ देते हुवे कहा.

मैं- क्या हुवा मनीषा. दुसरे कपडे पहनकर दिखाओ जल्दी. मम्मी पापा के आने का समय हो गया है.

मनीषा- एबीएस अरे कपडे ख़तम हो गए हैं अब मैं निचे जा रही हूँ.

मैं- देखो मनीषा ये चीटिंग है. तुमने अभी कहा की मैं तुम्हारे पास आया तो तुम मुझे और कपडे पहनकर नहीं दिखाओगी. इसलिए मैं नहीं आया तुम्हारे पास लेकिन तुम अपनी बात से पलट रही हो.

मनीषा- लेकिन भाइये ये कपडे तो बहुत पतले हैं इसमें तो मेरा पूरा शरीर देखेगा. मुझे शर्म आएगी आपके सामने.

मैं- मुझसे क्यों सरमाती हो मनीषा. मैं तुम्हारा भाई हूँ. अगर तुम्हारा शरीर दिखेगा भी तो केवल मुझको hi तो dikhega.yahan कौन बहार वाला है जो तुम इतना शर्मा रही हो.

मनीषा- वो तो ठीक है लेकिन भैया………………

Main(uski बात काटकर)- ठीक है मत आओ पहनकर. मैं जा रहा हूँ निचे.

Mainsha(hadbadakar). नहीं भैया आप नाराज़ मत हो. मैं आती हूँ बहार पहनकर.

उसके बाद मनीषा एक कपडा पहनकर बहार आई. जिसका देसिने ब्रा की hi तरह था और कपड़ा झीना था.



जिससे उसका पूरा शरीर झलक रहा था. इसमें दोनों चूचियों तक वूलन का देसिने बना था. वो हल्का तिरछा होकर मुझे देख रही थी. मैं उसकी चूचियों को देखने लगा. मुझे उसकी चूचियों की एक घुंडी की झलक उस कपडे दिख रही थी. मैं उसकी चूचियों को देख कर उसके पास चला गया और उसके पीछे खड़े होकर उसके कंधे को चूमते हुवे कहा.

मैं- वह मनीषा. तू सच में इस कपडे में एकदम मॉल लग रही हो. क्या जिस्म है तुम्हारा. तेरा जिश्म इस कपडे में खिल रहा है. मैं तो कहता हूँ की हमेशा ऐसे hi कपडे पहना कर.

मनीषा- मुझसे दूर रहिये आप. मैंने कहा था की मुझे मत चुना, लेकिन आप तो बहुत कमीने हो. अपनी बहन को ऐसे कपडे pahan-ne के लिए बोलते हो और जब मैं पहकर आई तो मुझे मॉल बोल रहे हो. आप बहुत गंदे हो भैया.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी कमर पर अपना हाँथ रखकर उसे अपने आप से सत्ता लिया जिससे मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh भैया निकल गया. मैं अपना लुंड उसकी गांड में दबाते हुवे कहा.

मैं- दूर से कुछ ठीक से नहीं दिख रहा था मनीषा इसलिए मैं तेरे पास आ गया. और मैं तुझसे झूठ नहीं बोल रहा हूँ. तू सच में एकदम मॉल लग रही है इन कपड़ो में.

मनीषा- आप बहुत बेशरम हो भैया. अच्छा चलिए छोड़िये मुझे. मैं दूसरा कपडा पहनकर आती हूँ.

मैंने मनीषा की बात सुनकर उसे छोड़ दिया. अब कपडे पहन कर मुझे दिखने में मनीषा को भी बहुत मज़ा आ रहा था. इसीलिए इस बार मेरे बिना कहे hi मनीषा अंदर चली गई और मैं वही खड़ा रहा. थोड़ी देर बाद मनीषा एक और कपडा पहनकर आई जो और भी ट्रांसपरेंट्स था. और वो कपड़ा बस ब्रा और पंतय के देसिने का hi था. मनीषा मेरे पास आकर कड़ी हो गई और मेरी आँखों में आँखे डालकर मुझसे पूछा.



मैं- अब मत पूछ बहन. क्योंकि मैं तेरी सुंदरता का बखान नहीं कर सकता. तेरी इस मादक जिस्म के वर्णनके लिए मुझे शब्द नहीं मिल प् रहे हैं. आप मैं और क्या कहूँ तुमसे. बस ये समझ लो की तुम्हारे सामने स्वर्ग की मेनका, उर्वशी और रम्भा भी कुछ नहीं हैं. ये सरे कपडे सिर्फ तेरे लिए hi बने हैं.

मनीषा अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई. मैं अपने लुंड को एक हाँथ से मसलते हुवे एक हाँथ उसकी कमर में डालकर उसे अपने पास खींच लिया और उसके गलो को चूमने लगा. मनीषा बहुत गरम हो चुकी थी. उसने अपनी आँखे बंद कर ली थोड़ी देर मैं उसके गाल चूमने के बाद अपना होंठ उसके होठो पर रख दिया और चूसने लगा. वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी. कुछ देर होंठ चूसने के बाद मनीषा ने मेरे साइन पर अपना हाँथ रखकर जोर लगाकर मुझे अपने से अलग कर दिया और मुझसे कहा.

मनीषा- रुको भैया. अभी एक और कपडा है. उसे भी तो देख लो.

इतना कहकर मनीषा अंदर चली गई. थोड़ी देर बाद मनीषा जो कपडा पहनकर आई वो ठीक वैसा hi कपड़ा था जो एडल्ट फिल्मो में पोर्नस्टार पहनती हैं. वो कपडा भी ट्रांसपरेंट्स hi था. मनीषा ने एक ऐडा से अपने चेहरे को तिरछा करके नज़ारे झुका ली. और अपना एक हाँथ अपने सर के पीछे और एक हाँथ की ऊँगली से अपने जांघो के पास कपडे में लगी स्ट्रेप में फसाया और कड़ी हो गई. मैं तो मनीषा को इस कपडे में देखकर बस देखता रह गया. मैं बस अपना लुंड मसलते हुवे मनीषा को देखता रहा. मनीषा भी तिरछी नजरो से मेरे लुंड को देखती रही. जब थोड़ी देर तक मैंने कुछ नहीं कहा तो मनीषा ने मुझसे पुछा.



मनीषा- क्या हुवा भैया. इन कपड़ो में मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या.

मैं- तू इस कपडे में क्या लग रही है मैं तुझे बता नहीं सकता.

मनीषा- क्यों नहीं बता सकते भैया. मुझे jan-na है की मैं कैसी लग रही हूँ इन कपड़ो में.

मैं- देख मनीषा. तू इस कपडे में बहुत hi अच्छी लग रही है. और जो लग रही है मैं नहीं बता सकता.

मनीषा- बताइये मुझे. मुझे भी तो पता चले की मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं- मैं बताउगा तो तुम नाराज़ हो जाओगी.

मनीषा- मैं नाराज़ नहीं होउंगी. सच में भैया.

मैं- तो सुनो फिर. लेकिन नाराज़ मत होना, नहीं तो आगे से मैं तुम्हारी तारीफ़ नहीं करूँगा. तुम इन कपड़ो में एकदम पोर्नस्टार लग रही हो.

मनीषा मेरी बात सुनकर मुझे घूर कर देखा और मुझसे नाराज़गी जताते हुवे कहा.

मनीषा- आप बहुत कमीने हो भैया. मुझे पोर्नस्टार बोल रहे हो. आपको शर्म नहीं आती.

मैं मनीषा की बात सुनकर उसके सामने जाकर खड़ा हो गया और उसकी आंको में देखने लगा. मैंने धीरे से अपना मुंह उसके कण के पास लेजाकर कहा.

मैं- ऐसे कपडे पोर्नस्टार पहनती हैं और आज तुमने ऐसे कपडे पहने हैं तो तुम भी उन्ही की तरह पोर्नस्टार लग रही हो, इसलिए मैंने ऐसा कहा.

मनीषा- अआप सच में बहुत ख़राब हैं बहिया. आपने मुझे ऐसे गंदे कपडे दिलाये हैं pahan-ne के लिए. जाइये मैं आपसे बात नहीं करुँगी.

मैं- तो कौन सा तुम इसको बहार पहनकर घूमने जा रही हो. जब घर में अकेले होना तो पहन लिया करना कभी कभी. और कभी कभी मुझको भी पहनकर दिखा दिया करना.

मनीषा- छियई. आप सच में बेशरम है. अपनी बहन को ऐसे कपड़ो में देखना चाहते हैं आप.

मैं- और नहीं तो क्या. बहन भाई के बिच इतना सब तो चलता रहता है. और वैसे भी अब मैं तेरा बर्फ भी तो बन गया हूँ.

मनीषा- वह जी वह. अजीब जबरदस्ती है. मैंने कब बनाया आपको अपना बर्फ.

मैं- तुमने नहीं बनाया तो क्या हुवा. मैंने तो तुम्हे अपनी गफ बहा लिया है .

मेरी बात सुनकर मनीषा मुस्कुराने लगी. मैं अभी भी उसके सामने hi खड़ा था. मैं थोड़ा और आगे बढाकर अपना हाँथ उसके कंधे पर रखकर उसके होंठो पर अपना होंठ रख दिया और चूसने लगा. मनीषा भी तोडा न नुकुर के बाद मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर उसके होंठ चूसने के बाद मैंने कहा

Main-ek बात कहु मनीषा अगर तुम बुरा न मनो तो. तुम केवल पोर्नस्टार hi नहीं लग रही हो, बल्कि और भी कुछ लग रही हो.

मनीषा- अब मैं बुआ मन कर कर भी क्या सकती हूँ आपका. और आप बहुत गंदे भैया हो. पता नहीं अपनी बहन को और क्या क्या बनाओगे. अच्छा बताओ और क्या लग रही हूँ मैं.

मैं- तू इस कपडे में पोर्नस्टार के साथ साथ एकदम प्यासी भी लग रही है.

मेरी बात सुनकर मनीषा मेरे साइन पर मुक्का मरने लगी और मुझे अपने से दूर धकेल दिया और बोली.

मनीषा- छियई. भैया. कैसी गन्दी गन्दी बाटे करते हो आप. अब मैं नहीं रुकूंगी यहाँ पर. मैं जा रही हूँ निचे.

इतना कहकर मनीषा अंदर जाने के लिए मुड़ी तो मैंने उसका हाँथ पकड़कर एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया और उसके कण में सरगोशी करते हुवे कहा.

Main-Abhi कहा जा रही हो मेरी रसमलाई. अभी तो मैंने तुझे प्यार भी नहीं किया और तू निचे जा रही है.

इतना कहकर मैंने अपना एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और उसे दबाने लगा और अपना एक हाँथ उसकी गांड पर रखकर मसलने लगा. मनीषा ने अपनी आँखे बंद कर ली और मज़ा लेने लगी. मैं उसकी चूचिया बरी बरी से बदल बदल कर दबाता रहा. मैंने अपनी जीभ निकलकर उसके गलो को छठा और अपने एक हाँथ से उसकी गांड को जोर जोर से दबाता रहा. कुछ देर बाद मैंने उसकी गांड को मुठी में भरकर और एक चुकी को मुठी में भरकर जोर से मसल दिया. मनीषा की मदहोशी में एक चीख निकल गयी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii मम्मीयी. क्याआ कररर रहःही होऊ भैया. ठुड्ड़ा धीयड़ी प्रेस करूओ ना.



मैंने उसकी बात सुनकर उसकी चूचियों और गांड को दबाते हुवे अपना मुंह उसके कण के पास ले गया और उसके कण में धीरे से बोलै.

मैं- मनीषा. क्या मैं तुझसे जो बाटे बोलता हूँ वो तुझे ख़राब लगती है क्या.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने अपने होठ उसकी गरदन पर रखकर चूमने लगा. एक हाँथ से उसकी गांड और एक हाँथ से उसकी चुकी को दबाने लगा. थड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसकी गार्डन को काटकर एक चुकी को मुठी में भरकर और गांड को मुट्ठी में भरकर जोर से दबा दिया. जिससे मनीषा और मदहोशी में चीखी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भाइयाँआ. थोड़ाआ धीरीईई दबाओओओओ डरडडडडडड होत्ता हीी.

मैंने मनीषा की चुकी और गांड लगातार मसलता रहा. जिससे मनीषा और भी गरम हो गई तो मैंने उसके कण के पास मुंह लेजाकर मादक आवाज़ में कहा.

मैं- बताओ मनीषा. मैं तुम्हे जो बोलता हूँ. वो तुम्हे अच्छा लगता है या ख़राब.

Manisha(nashili आवाज़ में)- अच्छा लगता है भैया.

मैं- (उसकी चुकी और गांड दबाते हुवे) इसका मतलब मैं तुम्हे कड़क मॉल बोलता हूँ वो सुनकर तुम्हे अच्छा लगता है.

Manisha(madhoshi में) हाँ भैया अच्छा लगता है.

मैं- (उसकी चुकी और गांड को दबाते हुवे उसके कण को चाटकर)- इसका मतलब तुम मानती हो की की तुम एक कदम मॉल हो.

Manisha-(kanpti आवाज़ में) हाँ भैया मैं एक कड़क मॉल हूँ.

मैं( होंठ कंकर) तुम किसकी कड़क मॉल हो मनीषा.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कुछ नहीं कहा. मैंने एक बार और puchha,lekin उसने कोई जवाब नहीं दिया, तो मैं उसके होंठो को चूमने लगा और उसकी गांड से हाँथ हटाकर मनीषा की छूट पर कपडे के ऊपर से रख दिया. छूट पर हाँथ रखते hi मनीषा के जिस्म ने एक झटका खाया और साथ hi मनीषा ने अपना हाँथ मेरे हाँथ पर रख दिया, लेकिन अपना होंठ मेरे होंठो से नहीं हटाया. मैं अपने हाँथ का प्रेशर देखर उसके हाँथ की पकड़ को काम करते हुवे उसकी छूट सहलाने लगा. जिससे मनीषा मचलने लगी. मैंने लगातार उसकी चुकी छूट मसलने के साथ साथ दबा रहा था और उसके होंठ चूस रहा था. थोड़ी देर उसकी छूट मसलने के बाद मेरे हाँथ से मनीषा के हाँथ की पकड़ ढीली पद गई, उसने अभी भी मेरा हाँथ पकड़ा हुवा था लेकिन जोर उसके हांथो में कोई जोर नहीं था. मैं उसकी छूट सहलाते हुए और उसकी चुकी दबाते हुवे अपने होंठ फिर से उसके कण के पास लेजर उससे कहा.

मैं- तुमने बताया नहीं की तुम किसकी कदम मॉल हो.

मनीषा एकदम मदहोश हो चुकी थी. मेरे सवाल करने पर उसने अपना हाँथ मेरे हाँथ से हटा लिया और अपनी नशीली आँखों से मेरी आँखों में देखते हुवे उसने कहा.

मनीषा- आपकी.

मैं- ऐसे नहीं पूरा बोलो.

मनीषा- मैं आपकी कड़क मॉल हूँ. मैं अपने भाई की कड़क मॉल हूँ.

इतना बोलकर उसने अपनी आँखे शर्म से बंद कर ली. मैंने उसकी छूट से हाँथ उठाकर उसकी दूसरी चुकी को पकड़ लिया. अब मैं एक चुकी को मसल रहा था और दूसरी चुकी को दबा रहा था. दोनों चुकी मसलते और दबाते हुवे मैंने मनीषा से कहा.



मैं- अगर तुम मेरी कड़क मॉल हो तो मैं जो कहूंगा मेरी वो बात मानोगी.

Manisha(madhoshi से मेरी आँखों में देखकर)- मानूंगी भैया.

मैं- तो अगर मैं ये कहूं की मैंने जो कल तुमको गिफ्ट में ब्रा और पंतय दी थी. तुम अभी उसको पहन कर मुझको दिखाओ. तो तुम पहनकर दिखाओगी.

मेरी बात सुनकर मनीषा मेरी आँखों में देखने लगी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया. तो मैं उसकी चूचियों को सहलाता और दबाता रहा और अपनी कमर आगे बढाकर अपना खड़ा लुंड उसकी छूट में सत्ता दिया. मेरा लुंड छूट पर लगते hi उसके मुंह से ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhh स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह की आवाज़ निकल गई. थोड़ी देर चूचियों को सहलाने के बाद मैंने दोनों चूचियों को कसकर पकड़ लिया और अपनी कमर को पीछे करके चूचियों को जोर से दबाते हुवे अपनी कमर को आगे की तरफ झटक दिया. जिससे मेरे लुंड ने उसकी छूट पर ठोकर मरी और मनीषा मदहोशी में सिसक पड़ी.

मनीषा- oooooooooooohhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh जोर से मत दबाओ भैया. थोड़ा धीरीईई सीए.

मैं- तुमने बताया नहीं किट ुम मुझे ब्रा पंतय पहनकर दिखाओगी. बोली मनीषा.

Manisha(nashili और मदहोश आवाज़ में) हाँ भैया मैं वो ब्रा पंतय पहनकर आपको दिखाउंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा की चूचियों को जोर से दबाते हुसे अपने लुंड को एक बार और मनीषा की छूट पर ठोककर उसे छोड़ दिया और थोड़ा पीछे हैट गया. मनीषा जो एकदम मदहोश थी उसने आँख कोलकर मुझे देखा तो मैंने उससे कहा.

मैं- जाओ मनीषा वो ब्रा और पंतय पहनकर मुझको दिखाओ.

Manisha(sir झुककर) मैं उसे पहनकर बहार नहीं आउंगी आपको खुद आकर देखना होगा.

मैंने उसकी बात सुनकर हाँ में अपनी गार्डन हिलायी तो मनीषा चुपचाप अंदर चली गयी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-113

मेरी बात सुनकर मनीषा अंदर चली गई और कपडे pahan-ne लगी. थोड़ी देर तक मैं बहार खड़ा रहा. और आने वाले पल के बारे में सोचता रहा. थोड़ी देर बाद मैंने मनीषा से पूछा.

मैं- क्या हुवा मनीषा. पहन लिया हो तो मैं अंदर आ जाऊ.

Manisha(dhire से). आ जाइये भैया.

मनीषा की बात सुनकर मैं अंदर चला गया, लेकिन जैसे hi मैं अंदर गया मनीषा को देखकर मेरा लुंड एकदम से झटके मरने लगा. उस ट्रांसपरेंट्स ब्रा पंतय में मनीषा एकदम नंगी लग रही थी. उस ब्रा पंतय से मनीषा की चूचिया और उसकी छूट एकदम नंगी थी. वो बिस्टेर पर बैठी थी. मैं मनीषा की चूचियों को देखना लगा और अपना लैंड सहलाने लगा. मनीषा भी मेरी तरफ देख रही थी और शर्मा रही थी. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे मनीषा से कहा.



मैं- क्या बात है मनीषा. तुझपर तो ये ब्रा पंतय बहुत hi अच्छी लग रही है. इस ब्रा पंतय में तेरी पूरी जवानी निकल कर बहार आ रही है. ये बस तेरे लिए hi बनायीं गई है. मैंने सपने में भी नहीं सोचा था की मेरी बहन अब छोटी नहीं रह गई है. वो भरपूर जवान होकर एकदम मॉल बन चुकी है.

मेरी बायत सुनकर मनीषा शर्माने लगी और मुझे देखते हुवे बोली.

मनीषा- क्या भैया आप भी न. कुछ भी बोलते रहते हैं. मैं तो अभी बहुत छोटी हूँ.

मैं- अच्छा कहा से छोटी है तू. तू तो हर जगह से भरपूर औरत बन चुकी है. अगर तेरी शादी अब तक हो गई होती तो तू और भी भरपूर मॉल बन जाती. देख तू मेरी तरफ. तुझे देखने के बाद मेरी क्या हालत हो गई है.

ये बात कहते हुवे मैं अपने लुंड को सहलाने लगा. मनीषा ने भी मेरी तरफ देखा तू उसकी नज़र मेरे लुंड पर पड़ी तो वो बस मेरे लुंड को hi देखे जा रही थी. मैं चलता हुवे उसके पास बिस्तर तक पहुंच गया और उसे देखते हुवे बोलै.

मैं- देखा मनीषा. तेरी जवानी ने तेरे भाई का क्या हॉल कर दिया है. तुझे इस हालत में देखकर मुझे बहुत दर्द हो रहा है.

ये बात कहंते हुवे मैं अपने लुंड को मसलता रहा. मनीषा कभी मुझे देखती तो कभी मेरे लुंड की तरफ देखती. मेरे लुंड को देखते हुवे उसने कहा.

मनीषा- अब बहुत गंदे हो भाई. अपनी बहन के सामने कितनी गन्दी बाटे और हरकत कर रहे हो.

मैं- अब मैंने कौन सी गन्दी बात की है तुम्हारे साथ. अब मुझे दर्द हो रहा है तो वही तो बोलै मैंने

मनीषा मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली तो मैं बिस्तर पर चढ़ गया और उसकी टैंगो के पास बैठ गया और उसकी तंग को सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपनी तंग पर पड़ते hi उसकी तंग कैंप गई. वो जोरो से हिली. मैंने मनीषा की तंग को सहलाते हुवे ऊपर की तरफ उसकी जांघ तक बढ़ गया. और खिसक कर उसके और पास आ गया. मैंने मनीषा की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- मैं जब तुम्हारे जिस्म तो टच करता हूँ तो तुम्हे कैसा लगता है मनीषा.

Manisha(meri आँखों में देखकर) ये कैसा सवाल पूछ रहे हैं आप मुझसे.

मैं- सही सवाल तो पूछ रहा हूँ. अब बताओ तुमको कैसा लगता है.

मेरी बात का मनीषा ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने अपना हाँथ उठाकर उसकी कमर पर रख दिया और सहलाने laga.manisha के शरीर में शंसनहत फ़ैल गई मेरे हाँथ के स्पर्श करने से. मैं उसकी कमर को सहलाते लगा. मनीषा पर मस्ती चढ़ने लगी. मैंने एक हाँथ उठाकर उसकी एक चुकी के ऊपर रख दिया और धीरे धीरे दबाते हुवे उससे फिर पूछा.

Main-batao न मनीषा. जब मैं तुम्हे छूटा हूँ तो तुमको कैसा लगता है.

Manisha(madhosh आवाज़ में) मुझे नहीं पता भैया.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा की चूचियों को बरी बरी से दबाते हुवे अपना हाँथ से मनीषा क ीक हाँथ को पकड़ा और उसे अपने लुंड पर रख दिया. मनीषा अपना हाँथ वापस खींचने लगी लेकिन मैंने उसका हाँथ नहीं छोड़ा. उनसे नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा और न में इशारे करने लगी. लेकिन मैंने उसके इशारे की कोई परवाह नहीं की और उसके हांथो से अपने लुंड को दबाकर सहलाने लगा. थोड़ी देर तक ऐसे hi उसकी हाँथ से अपना लुंड सहलाने के बाद मैंने अपना हाँथ उसके हाँथ से हटा लिया तो मनीषा ने अपना हाँथ वापस खींच लिया.

ऐसा करने के बाद मनीषा बीएड से उठने लगी तो मैंने उसका हाँथ पकड़ किया और मैं बीएड के सिरहाने दोनों टंगे फैलाकर बैठ गया और उसको खींचकर अपनी तनड़ो के भींच बैठा लिया और अपने होंठ उसकी गार्डन पर रखकर किश करने लगा. मनीषा मेरे आगे बैठी मचलने लगी और छूटने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने एक हाँथ से उसका हाँथ और एक हाँथ से उसकी कमर को पकड़ा हुवा था. थोड़ी देर मचलने के बाद मनीषा शांत हो गई. तो मैंने अपने एक हाँथ मनीषा की चूचियों पर रखकर उसे दबाने लगा और और दुसरे हाँथ से मनीषा की पंतय में डालकर उसे पीछे खींचकर अपनी जीभ निकलकर उसकी गार्डन और कन्धा चाटने लगा.



मेरे ऐसा करने से मनीषा गरम होने लगी. मैं उसकी चूचियों को थोड़ी देर बाद जोर जोर से दबाने लगा और मनीषा के कंधे से ब्रा की स्ट्रेप दांतो से पकड़कर ऊपर खींच खींच कर छोड़ने लगा. जिससे मनीषा आआआआह्ह्ह्हह्ह भैईया ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भईया करने लगी. थोड़ी देर ऐसे करने के बाद मैंने मनीषा की दोनों चूचियों को मुठी में भरकर मसल दिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाइय्य्याहा. क्या कररर राही हैं aapp.chhodiyeee मुझी

Main-(uski चूचियों को दबाते हुवे). क्यों अच्छा नहीं लग रहा है क्या तुमको मनीषा.

Manisha(tharhtarati आवाज़ में) मुझे नहीं पता भैया.

मैं मनीषा की बात सुनकर अपने एक हाँथ को निचे सरककर उसकी कमर को सहलाने लगा और उसकी पीठ को chat-te हुवे उसकी एक चुकी को दबाने लगा. मनीषा आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह sssssssssssss करने लगी. मैंने कुछ देर उसकी कमर सहलाने के बाद अपना हाँथ बढाकर उसकी छूट पर पंतय के ऊपर से रख दिया और मुट्ठी में दबोच लिया. मनीषा मेरे इस हमले से मदहोश हो गई और बोली.

मनीषा- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भाइयआआअ. Dhireeeeeeeeee सीए.

मनीषा की सिसकी सुनकर मैं जोर जोर से मनीषा की छूट दबोच दबोच कर छोड़ने लगा. एक हाँथ से मनीषा की चुकी बदल बदल कर दबाने लगा और अपनी जीभ से उसकी पीठ, गार्डन और कंधे को चाटने लगा.



मनीषा अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी. मैंने उसकी एक चुकी को मुठी में भरकर और छूट को मुठी में भरकर मसल दिया. मनीषा मस्ती में सीसिया पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhh mummmmyyyyyyyyyy. बहुत अछ्हा लग रहा है भैयाआ. Ssssssssssss धीरीई करूऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसकी छूट को पंतय के ऊपर से सहलाने लगा. मनीषा की छूट पानी छोड़ रही थी, जिससे उसकी पंतय गीली हो गाइट hi. उसकी चूचिया वासना के कारन एकदम ठोस और निप्पल नुकीले हो गए थे. मैंने अपनी उंगलियों के बिछ में उसके निप्पल को भरकर मनीषा की पंतय को साइड में करके उसकी छूट पर हथेली रखकर दोनों को एक साथ मसल दिया. मनीषा के मुंह से नशीली चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuccccchhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhh भैईयाआआआआ. थोड़ड्डाआंआ धीरीईई सीए. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh.

Main(manisha के कण chat-te हुवे)- बताओ मनीषा. जब मैं तुम्हे छूटा हूँ तो तुमको अच्छा लगता है या नहीं.

Manisha(madhosi में) hhhhhhmmmmmmmmmmm

मैं( उसके कण को चबाते हुवे) ऐसे नहीं. खुलकर पूरा बताओ.

मनीषा( नशीली आवाज़ में). हाँ भैया मुझे अच्छा लगता है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी छूट से अपना हाँथ हटा लिया और उसे मुंह के पास लेकर एक ऊँगली अपने मुंह में डालकर गीली की और फिर से मनीषा की छूट पर रख दिया. मैं उसकी गार्डन पर जुबान घूमते हुवे एक हाँथ से चुकी दबाते हुवे मैंने हन्हट की पहली ऊँगली उसकी छूट के मुंह पर रखा और थोड़ा सा दबाव डाला. दबाव के कारन मेरी ऊँगली ½ इंच उसकी छूट में चली गई. मनीषा के जिस्म में झटका सा लगा. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh bhaiiiyaaaaaaaaaa. वहाआआआ nahiiiiiiiiii. बहार निकल लीजिये प्ल्ज़. मुझे दर्द हो रहा है.

मैं मनीषा की बात सुनकर अपनी ऊँगली वही रोक दी और उसकी चुकी को दबाने लगा. थोड़ी देर तक चुकी दबाने पर उसे कुछ रहत मिली तो मैं अपनी उंगली उसकी छूट में उतनी hi घूमने लगा. मनीषा स्स्सस्स्स्स ssssssssssssssss की आवाज़ करने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi छूट में गई ऊँगली घूमने और चुकी मसलने से मनीषा फिर से गरम हो गई तो मैंने उसकी चुकी को फिर से कसकर मसलते हुवे अपनी ऊँगली हल्का सा बहार निकल कर जोर से उनकी छूट में पेल दी. इस बार मेरी ऊँगली 1.5 इंच मनीष की छूट में घुस गई. मनीषा दर्द से छटपटाने लगी और अपने शरीर को इधर उधर करने लगी और चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyy. निक्कालल्लू बहरररर भैया. बहुत ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा है. प्ल्ज़.

मैं- बस मनीषा थोड़ा बर्दास्त कर लो. तुमको भी बाद में अच्छा लगेगा.

इतना बोलकर मैं मनीषा की छूट में जितनी ऊँगली घुसी थी उतनी ऊँगली अंदर बहार करने लगा और एक हाँथ से उसकी चूचियों को दबाते हुवे उसकी पीठ चूमने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने सा मनीषा को रहत मिली और वो sssssssssssssss aaaaaaaahhhhhhhhhhhhh भैया करने लगी. थोड़ी देर तक उसकी चुकी दबाने और छूट में ऊँगली करने के बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी छूट के मुंह तक बहार निकलगी और एक झटके में उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा दर्द से दोहरी हो गई और चीख पड़ी.

मनीषा- ooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh bbhaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiyaaaaaaaa. बहरररर निकक्कल लूओ बहुतत्त दारररद हो रहा हैई. मुझसेएई बरदस्तटत नाहीई हूँ रहा हीी. Aaaaaahhhhhhhhhhhhh भियाआआआआ. Uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मम्मीयिययीय.

मनीषा की चीख सुनकर मैंने अपनी ऊँगली की रफ़्तार रोक दी और उसकी चूचियों को दबाने लगा. थोड़ी देर चुकी दबाने के बाद मनीषा को रहत मिली तो मैंने उसकी छूट धीरे धीरे ऊँगली से छोड़नी शुरू कर दी. मेरी ऊँगली मनीषा के चुतरस से पूरी तरह से भीग गई थी इसलिए वो अब आसानी से अंदर बहार हो रही थी. मैं उसकी छूट में ऊँगली करते हुवे अपना एक हाँथ उसकी चुकी से हटाकर उसके एक हाँथ को पकड़कर पीछे कर अपने लुंड पर रख दिया जो झटके मर रहा था. मनीषा ने अपने हाँथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसके हाँथ को नहीं छोड़ा और अपने हाँथ से उसके हाँथ को अपने लुंड पर चलने लगा. मनीषा एकदम मदहोश हो चुकी थी इसीलिए उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. जिससे उसकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी. थोड़ी देर उसकी हाँथ से लुंड सहलाने के बाद मैंने अपना हाँथ उसके हाँथ से हटा लिया, इस बार मनीषा ने अपना हाँथ नहीं हटाया. लेकिन उसने अपना हाथ लुंड पर रोक दिया था. मैं उसकी छूट छोड़ते हुवे अपने हाँथ से उसकी चुकी दबाते हुवे मनीषा से कहा.

मैं- क्या हुवा मनीषा. अपने हाँथ मेरे लुंड पर चलाओ न. मुझे भी अच्छा लगेगा.

Manisha-chhhi भैया. कितने गंदे हो आप.

मैं- अब लुंड को लुंड नहीं बोलेंगे तो और क्या कहेंगे तुम hi बता दो.

मनीषा( मदहोशी में) मैं आपकी तरह गन्दी नहीं हूँ भइया.

इतना कहकर मनीषा ने अपने हाँथ को मेरे लुंड पर चलना शुरू कर दिया. उसने अपनी गार्डन मेरे कंधे पर राखी हुई थी. तो मैंने उसके चेहरे को घुमाया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. मैंने उसके होंठो को चूसने लगा और अपना हाँथ हटाकर उसकी चुकी पर रख कर उसे दबाने लगा और निचे हाँथ से उसकी छूट को ऊँगली से छोड़ने लगा. मनीषा एकदम प्यासी हो गाइट hi. उसने मेरे लोड को तेज़ तेज़ से दबाना शुरू कर दिया. मैं उसकी छूट और उसकी चुकी दबाते और छूट में ऊँगली करते हुवे उसके होंठो को चूसकर उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- मनीषा मेरा लुंड बहुत दर्द कर रहा है लोअर के अंदर. तुम कहो तो मैं इसे बहार निकल लून

मनीषा- (मेरी आँखों में देखकर) नहीं भैया मुझे शर्म आएगी.

मैं( उसकी छूट में ऊँगली करते हुवे)- मैं तुम्हारा भाई हूँ पगली. मुझसे क्यों शर्मा रही हो. तुम hi बताओ क्या मैं ऐसे दर्द से तड़पता राहु.

Manisha(madhosh hokar).nahi भैया मैं आपको तड़पने नहीं दूँगी. आप बहार निकल लीजिये.

मैं मनीषा की बात सुनकर अपना हाँथ उसकी चुकी से हटाकर अपने लोअर को पकड़ा और खींचकर उसे निचे कर दिया और मनीषा से अलग होकर उसे अपने पैरो से निकलकर बहार कर दिया. अब मैं मनीषा के सामने निचे से नंगा हो गया tha.manisha ने जब मेरे नंगे लुंड को देखा तो उसकी सांसे ऊपर निचे होने लगी. मनीषा घूर घूर कर मेरा लुंड देख रही थी. कुछ देर अपना लुंड दिखने के बाद मैंने मनीषा को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया तो मेरा लुंड पैंटी के ऊपर से उसकी छूट और गांड में टच होने लगा. मैंने मनीषा की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. उसकी आँखे लाल हो गाइट hi. उसकी आँखों में वासना के डोरे तैर रहे थे. मैंने फिर से अपना हाँथ उसकी चुकी और छूट पर रखकर उसे सहलाने लगा और मनीषा मनीषा की आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- क्या हुवा मनीषा ऐसे क्या देख रही हो.

Manisha(madhoshi में)- कुछ नहीं भैया.

मैं- तुम्हे मेरा लुंड पसंद नहीं आया क्या.

मनीषा मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली और अपनी आँखे बंद कर मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया. मैंने भी इस बार बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में एक झटके में डालकर उसकी चुकी को जोर से मसल दिया. मनीषा मदहोशी में चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh bhaiiyaaaaaaaaaa धीरे सीई.

मैं- मैं जो कर रहा हूँ तुमको अच्छा तो लग रहा है न.

Manisha(nashili आँखे खोलकर मुझे देखते हुवे)- हाँ भैया लेकिन आप बहुत जोर से करते हो.

मैं- अच्छा अब धीरे करूँगा. वैसे एक बात कहु. तू एकदम छुडासी लौंडिया बन गई है मनीषा. देख तुझे देखकर मेरा लुंड कैसे खड़ा हो गया है. तुझे देख कर मेरा मन करता है की मैं तुझे………………………….

मनीषा- (मदहोश आवाज़ me)-kya मन करता है भैया आपका.

मैं- कुछ नहीं मनीषा. जाने de.aur मज़ा ले.

इतना कहकर मैंने मनीषा की छूट को अपनी बिच वाली ऊँगली से छोड़ने लगा और उसकी चुकी को दबाने लगा. मनीषा एकदम गरम हो गाइट hi. उसने अपनी आँखे खोली और मेरी तरफ देखते हुवे अपने होंठो से मेरे होंठो को चूमा और एकदम नशीली आवाज़ में कहा.



मनीषा- बताओ न भैया. मुझे देखकर आपका क्या मन करता है.

मैं- मैं बता तो दूंगा, लेकिन तू नाराज़ तो नहीं होगी न.

मनीषा- बताओ न भैया मैं आपसे बिलकुल भी नाराज़ नहीं होउंगी.

मैं- आज तू एकदम छुडासी लौंडिया लग रही है. तुझे देखकर मेरे मन करता है की मैं अभी तेरी पंतय और ब्रा फाड़कर तुझे यही पर पटक कर छोड़ दालु. आह मनीषा. तू सच में छोड़ने लायक मॉल हो गई है.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरे होंठ अपने मुंह में भर लिया और जोर से काट लिया. जिससे मेरे मुंह से खून बहने लगा. मेरे मुंह से चीख निकल गई.

मैं- आरईईईई मम्मीयियियीयह. क्या करती है तू. इतनी जोर से काट लिया.

मनीषा- आपको तो बिलकुल भी शर्म नहीं आती. अपनी बहन को पता नहीं क्या क्या बोले जा रहे हो. यही आपकी सजा है. अब मैं जा रही हूँ. आप बहुत गंदे हो.

इतना कहकर मनीषा उठी और अपना कपडा पहनकर और बाकि कपडे शॉपिंग बैग में डालकर निचे चली गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-114

मैं- आरईईईई मम्मीयियियीयह. क्या करती है तू. इतनी जोर से काट लिया.

मनीषा- आपको तो बिलकुल भी शर्म नहीं आती. अपनी बहन को पता नहीं क्या क्या बोले जा रहे हो. यही आपकी सजा है. अब मैं जा रही हूँ. आप बहुत गंदे हो.

इतना कहकर मनीषा उठी और अपना कपडा पहनकर और बाकि कपडे शॉपिंग बैग में डालकर निचे चली गई.

अब आगे.

मनीषा के निचे चले जाने के बाद मैं भी बाथरूम में चला गया और अपने लुंड को पानी डालकर ठंडा किया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी आ गए. फिर सभी लोग हॉल में बैठकर मस्ती मज़ाक करने लगे. मैंने इन बातो के बिच पापा से कहा.

मैं- पापा मैं सोच रहा हूँ की अगले हफ्ते मैं दीदी के पास चला जाऊ. उन्होंने कई बार मुझे फ़ोन करके आने के लिए कहा है. और सोच रहा हूँ की उन्हें साथ में लेकर भी औ.

पापा- हाँ क्यों नहीं जरूर जाओ, लेकिन वो अभी अभी तो गई है. उसे अभी लेन का क्या मतलब

मैं- वो क्या है न पापा हम सब को दीदी की बहुत याद आती है.

मैंने ये बात मनीषा को देखते हुवे कही थी. जो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा रही थी. मनीषा ने भी टपक से बोलै.

मनीषा- हाँ पापा दीदी की बहुत याद आती है. जीजा जी को बोल दो न की वो भैया के साथ दीदी को आने दे.

पापा- चलो ठीक है मैं राघवेंद्र से बात करता हूँ

मैं- लेकिन मैं सोच रहा हूँ की काम से काम 3-4 दिन रुक कर आगरा घूम लून. आप क्या कहते हैं पापा.

पापा- हाँ ठीक है अब इतनी दूर जा रहे हो तो थोड़ा घूम फिर कर लेना.

इन बातो के दौरान खाना भी बन गया तो हम सब ने मिलकर खाना खाया. खाना खा कर थोड़ी देर बैठने के बाद मम्मी पापा अपने कमरे में चले गए. मनीषा भी थोड़ी देर बाद अपने कमरे में चली गई. सरिता दीदी किचन में थी तो मैं भी किचन में चला गया और दीदी से बात करने लगा.

मैं- और बताओ दीदी. क्या हॉल है.

सरिता दी- क्या बताऊ तुझे. आज तो पकड़े hi गए थे. मनीषा ने तो मेरी जान hi निकल दी थी.

मैं- इसीलिए मैं कह रहा हूँ की मनीषा को भी इस खेल में शामिल करना होगा. तभी हम दोनों बिना दर के एन्जॉय कर पाएंगे.

सरिता दी- जैसे भी करना है. अब तुझे hi करना है. और तू तो अब इतना एक्सपर्ट हो गया है की मुझे भरोषा है की ज्यादा दिन मनीषा अपने आपको नहीं बचा पाएगी.

Main(didi के पीछे खड़े होकर उनकी चूचियों को दबाकर)- अच्छा वो कैसे.

सरिता दी- जिसने अपनी बड़ी दोनों बहनो, जिनसे तेरा 36 का आंकड़ा था उन को पाटकर छोड़ दिया. तो मनीषा तो बचपन से hi तेरे साथ फ्रेंडली है. तो मुझे नहीं लगता की उसको पटाने में तुमको ज्यादा दिक्कत होगी.

मैं- हाँ ये तो है. ऐसा करना आज भी आप ऊपर मत आना दूध लेकर. फिर मनीषा दूध लेकर आएगी तो मैं कुछ करता हूँ उसके साथ भी.

सरिता दी- सच में सेल तू बहुत बड़ा कमीना है. कैसे मारा जा रहा है मनीषा को छोड़ने के लिए.

Main(unki चूचियों को दबाकर)- ये सब मैं हम दोनों के लिए कर रहा हूँ जानेमन. अच्छा अब आप जल्दी से अपना काम फिनिश करके अपने कमरे में जाइये. मैं भी जा रहा हूँ.

इतना कहकर मैं जब किचन से बहार निकला तो मनीषा दरवाज़े के पास बगल में कड़ी थी. मुझे देखकर उसने एक स्माइल की. तो मैं समझ गया की इसने सब देख और सुन लिया है. मैं भी उसको आँख मार्कर अपने कमरे में चला गया. कमरे में आकर मैं मनीषा के आने के बाद मुझे क्या क्या करना है वही सोचने लगा. मैंने अपना ुन्दरवरे और लोअर दोनों उतर दिया और एक गमछा अपनी कमर में बांध लिया. उसकी लम्बाई बहुत काम थी. मतलब ये की गमछे को एक जांघ से शुरहु करके कमर में लपेटने पर एक राउंड में hi वो दूसरी जानत पर ाककर ख़तम हो जाता था. अगर वो गमछा पहनकर मैं अपनी तंग चौड़ी करके baith-ta तो मेरा लुंड बहार निकल आता.

अभी मैं गमछा पहनकर अभी मैं बिस्टेर पर बैठा hi था की मनीषा दूध लेकर आ गई. वो शाम को हुई छेड़छाड़ की वजह से वो अभी तक गरम थी इसीलिए तो मनीषा एकदम मूड बनाकर आई थी. मुझे लग रहा था की आज कुछ न कुछ जरूर होगा. मनीषा ने जो कपडा पहना था वो उसके दोनों कंधे के 6 इंच निचे से शुरू होता था. जिससे उसकी चूचिया लगभग आधी से ज्यादा बहार दिख रही थी उसने दूध का गिलास मेज़ पर रखकर मुझसे पूछा.



मनीषा- भैया मैं कैसी लग रही होऊं इन कपड़ो में.

उसकी बात सुनकर मने सोचा इसको थोड़ा तड़पाया जाये. इसलिए मैंने उससे कहा.

मैं- सच तुम सुन नहीं पाओगी और झूठ मैं बोलना नहीं चाहता. इसलिए ये सब छोड़ा और मुझसे अपना दूध पिलाओ और जाओ. मुझे नींद आ रही है.

Manisha-(tunakkar)- ये क्या भैया. मैंने खासकर आपके लिए ये ड्रेस पहना था की आप देखकर मुझे बताएंगे की मैं इसमें कैसी लग रही हूँ और आप बता भी नहीं रहे हैं. और सोने की बात कर रहे हैं.

मैं- तो क्या करू मैं. तुम तो मेरी बात पर नाराज़ हो जाती हो. इसलिए क्या बात करू मैं तुमसे.

मनीषा- मैं आपसे नाराज़ कहा होती हूँ. बस आप गन्दी गन्दी बाते करते हैं इसलिए आपकी बातो से मुझे शर्म आती है.

मैं- इसीलिए तो कह रहा हूँ को तुम जाओ. क्योंकि मैं ऐसी hi बाटे करता hoon.AUR तुम्हे मेरी बाट गन्दी लगती हैं.

मनीषा- लेकिन फिर भी भैया मैं आपकी बहन हूँ. और आप अपनी बहन के साथ ऐसी बात करते हैं. ये अच्छी बात नहीं है.

मैं- तुम बहन होने के साथ साथ मेरी अच्छी दोस्त भी हो इसलिए मैं तुमसे ऐसी बात कर लेता हूँ. लेकिन अब नहीं करूँगा. क्योंकि तुम्हे मेरी बाते गन्दी लगती हैं. अब तुम जाओ और जाते हुवे दरवाज़ा बंद करती जाना.

इतना कहकर मैं करवट बदलकर बिस्तर पर लेट गया. जिससे मनीषा को बहुत बुरा लगा. थोड़ी देर वो वैसे hi कड़ी रही फिर मेरे पास आकर बैठ गई और बोली.

मनीषा- भैया. सुनो न भैया.

मैं- हाँ बताओ क्या है.

मनीषा- मैं आपसे बात करने के लिए hi आई हूँ और आप मुझसे नाराज़ हो रहे हैं.

मैं- मैं कहा नाराज़ हो रहा हूँ. नाराज़ तो तू हो जाती है मेरी बाते सुनकर.

मनीषा- अच्छा ठीक है आप नाराज़ मत हो. मैं आपकी किसी भी बात का बुरा नहीं मानूंगी.

मैं- ठीक है मैं तुमसे बात करूँगा. और मैं जो पूछूंगा तुमको उसका भी जवाब देना पड़ेगा.

मनीषा- हाँ भैया अब बताओ मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं इतना तो जान hi गया था की अब मनीषा पूरी तरह से मेरे काबू में है. वो मेरी बातो का बुरा नहीं मानेगी. बस थोड़ा बहुत नखरा दिखाएगी. इसलिए मैं बिस्टेर पर अपनी तंग चौड़ी करके बैठ गया जिससे मेरा लुंड जो की मनीषा को देखकर खड़ा हो गया था, गमछे के दोनों पतों के बिच से बहार निकलकर लहराने लगा. मनीषा मुझे इस तरह बैठता देख मेरी तरफ देखा तो उसकी नज़र मेरे नंगे लुंड पर पड़ी तो वो अब मेरे लुंड को देखने lagi.main भी उसकी चूचियों को देखते हुवे लुंड मसलने लगा मनीषा मेरी हरकत को देखते हुसे बोली.

मनीषा- आपने बताया नहीं भैया. मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं- (अपने लुंड की तरफ इशारा करके) मेरे लुंड को देखकर तुझको अब तक पता नहीं लगा की तुम कैसी लग रही है. तो सुनो तुम इस समय बहुत hi गरम और छुडासी लग रही हो. मेरा मन भी तुमको देखकर अपने काबू से बहार जा रहा है.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्म और मुस्कान के मिले जुले मिश्रण के साथ मुझे देखा और बोली.

मनीषा- आप कितने बेशरम है भैया. आप को तनिक भी शर्म नहीं आती.

मैं- सच में मनीषा. तुझे देखकर मेरा मन कर रहा है की मैं तुझे छोड़ दालु. तू बहुत hi चुड़क्कड़ लग रही है इस समय. तेरी चूचियों को देखकर मेरा लुंड फटा जा रहा है.

मनीषा- छहियी भैया. कितनी गन्दी बाते करते हो आप.

इतना बोलकर मनीषा दूध का गिलास लेकर मेरे और पास आई. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे अपना लुंड सहला रहा था. मनीषा मेरे सामने झुककर गयी. जिसके कारन मेरा लुंड उसकी आँखों से 1 या 1.5 फिट की डोरी पर था. मनीषा मेरे लुंड को देखते हुवे अपने होंठो पर जुबान फिरने lagi.thodi देर मेरे लुंड को देखने के बाद उसने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा तो उसकी नज़रो में मुझे सिर्फ प्यास hi प्यास नजर आई. मुझे देखते हुवे उसने कहा.

मनीषा- ये लीजिए भैया दूध पीजिये.

मनीषा के ऐसा कहने के बाद मैंने हाँथ बढाकर मनीषा के कपडे को उसकी चूचियों के पास से पकड़कर आने की तरफ खींच लिया और उसकी चूचियों की गहराई में झाँकने लगा. मेरे ऐसा करने पर भी मनीषा ने कुछ नहीं कहा और दूध का गिलास लेकर झुकी हुई मेरे लुंड को देखती रही. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे कहा.

मनीषा- ठीक है जैसा आप कहेंगे. मैं वैसे hi करुँगी. अब तो खुश हो जाइये मेरे प्यारे भैया.

इतना कहकर वो बिस्टेर से उठ कड़ी हुई और अपने दोनों हाँथ आगे करके एक ऐडा से दीवाल को देखती हुई मुझसे बोली.



मैं- सच में मनीषा. देखने से hi लग रहा है की दूध बहुत hi स्वादिस्ट होगा.

मनीषा( हल्का मुस्कुराते हुवे)- बिना पिए hi आपको पता चल गया की दूध स्वादिस्ट होगा. मैं कब से लेकर दूध कड़ी हूँ और आप पता नहीं क्या उलूल जुलूल हरकते कर रहे हैं.

मनीषा इतना बोलकर फिर से मेरे लुंड को देखने लगी और अपने होंठो पर जीभ फिरने लगी. मैं मनीषा की बात सुनकर मनीषा की एक चुकी को दबा दिया. मनीषा के मुंह से आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की आवाज़ निकल गई. मैं मनीषा की चुकी को दबाते हुवे कहा.

मैं- इसमें स्वादिष्ट दूध के अलावा बहुत राश भरा है. बहुत मज़ा आएगा इसको पिने में.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई. मैं इतना बोलकर अपने दोनों हाथ बढाकर उसके कपडे को चूचियों के ऊपर से पकड़ लिया और खींचकर निचे कर दिया. अब मनीषा की चूचियों की घुंडी छोड़कर लगभग पूरी चूचिया बहार नज़र आने लगी.



मनीषा ने भी मेरी किसी भी हरकत का अब तक विरोध नहीं किया था. मेरी ऐसी कामुक बाटे और कामुक हरकतों की वजह से मनीषा की साँस तेज़ तेज़ चल रही थी. जिससे उसकी चुकी ऊपर निचे हो रही थी. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे मनीषा से कहा.

मैं- वाह मनीषा. तेरी चूचिया तो बड़ी जानदार हैं. एकदम कड़क. पर्वत की छोटी के सामान एकदम तानी हुई. बड़ी जन्मऋ चूचिया हैं तुम्हारी मनीषा.

मेरे इतना कहने पर मनीषा ने शर्म से अपना सर दूसरी तरफ कर लिया और मुस्कुराते हुवे बोली.

मनीषा- बहुत बेशरम हो आप. अपनी बहन के शरीर के अंगो का नाम ले रहे हो. छहियी.

मैं- जब बहन एकदम गरम और छुडासी हो जाये तो भाई को बेशरम ban-na hi पड़ता है डार्लिंग.

मनीषा- बड़े आये मुझे डार्लिंग बनाने वाले. हटो जाओ इधर से अब ये दूध मैं पिऊँगी. आप को तो कुछ और पसंद आ गया है.

इतना कहकर मनीषा ने मुझे उठाकर खड़ा कर दिया और खुद बिस्टेर पर बैठ गई. उसके बैठने के कारन उसका कपडा फिर से चूचियों के ऊपर हो गया था. मेरे खड़ा होने से मेरा लुंड गमछे से बहार एकदम टैंकर खड़ा हुवा था. मैं मनीषा को देखते हुवे उसको सहला रहा था और मनीषा मेरे लुंड को देखते हुवे अपने होंठो पर जीभ फिरा रही थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखने के बाद मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे अपने चेहरे को ऊपर उठाया और दूध का गिलास ऊपर करके मुंह खोला और दूध अपने मुंह में गिराने लगी.

दूध मुंह में गिरने के बाद मनीषा ने एक भी घुट दूध नहीं पिया. जिसके कारन सारा दूध उसके मुंह से निकलकर उसके गलो से होते हुवे उसकी गार्डन से निचे बैठे हुवे उसकी चूचियों की गहराई में घुस रहा था. ये मंजर देखकर तो मैं पागल हो गया. मैंने पूरी बेशर्मी करते हुवे अपना गमछा अपनी कमर से खोलकर जमीन पर फेंक दिया. अब मैं मनीषा के सामने एकदम नंगा खड़ा था. मनीषा ने भी मेरे लुंड को देखकर अपने होंठो पर जीभ फिरते हुवे अपने होंठो को काट लिया.



ये देखकर मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और आगे बढ़कर मैंने मनीषा के होंठो पर अपने होंठ चिपका दिए. और उसके होंठो को चूसने लगा. इसके साथ hi मैंने हाँथ बढाकर मनीषा की चूचियों को थम लिया और दबाने लगा. मनीषा तो पहले से hi छुडासी पड़ी हुई थी. उसने भी होंठ चूसने में मेरा साथ देना शुरू कर दिया और मेरे होहथ चूसने लगी. उसके होंठ चूसने के बाद मैं मनीषा के दोनों गलो को बरी बरी से चाटने laga.manisha ने भी एक हाँथ मेरी गार्डन में दाल दिए और अपने होंठ और गाल चटवाने लगी. मनीषा के गाल चाटने के बाद मैं मनीषा की गार्डन को चाटने लगा. कुछ देर गार्डन को चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उठाया और उसकी चूचियों की घाटी पर रखकर जीभ निकलकर उसे चाटने लगा.

मेरे ऐसा करने से मनीषा की शरीर में सिहरन दौड़ गई. मैं उसकी चुकी को दबाते हुवे उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को और उसकी क्लीवेज को चाट चाट कर साफ करता रहा. थोड़ी देर बाद मनीषा ने फिर से दूध अपने मुंह में गिराया और दूध बहकर मनीषा की चूचियों में जाने लगा. मैंने जल्दी जल्दी अपनी जीभ निकलकर मनीषा की चूचियों को चाट चाट कर दूध पिने लगा. कुछ देर तक उसकी चूचियों की घाटी को चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उठाया. मेरा मुंह दूध के लगने के करना वाइट हो गया था. मैंने मनीषा की चूचियों को देखते हुवे उससे कहा.



मैं- वाह मनीषा. बहुत hi स्वादिष्ट दूध था.

Manisha-(meri आँखों में देखते हुवे)- लेकिन मुझे तो बिलकुल भी स्वादिष्ट नहीं लगा इसीलिए तो मैंने नहीं पिया.

मैं- जब तुमने पिया तो इसमें स्वाद नहीं था. लेकिन मरे पिने तक दूध ने शहद से भरे हुवे दो ृष्टो को पार किया. एक तुम्हारा शहद जैसा मीठा मुंह और दूसरा तुम्हारी ये जालिम और पहाड़ जैसी उन्नत चूचिया. इनके सानिध्य में आकर फीकी चीज भी मीठी हो जाती है जानेमन.

अपने तारीफ सुनकर मनीषा बहुत खुश हुई. मनीषा अब बहुत गरम हो गाइट hi. उसकी सांसे तेज़ तेज़ चलने लगी थी. मैंने देखा की गिलास में अभी और दूध है तो मैंने हाँथ बढाकर मनीषा के कपडे को दोनों तरफ से पकड़ा और खींचकर निचे कर दिया. जिससे मनीषा की चूचिया एकदम नंगी हो गई. वो बिस्टेर पर बैठी हुई थी. मैं तो बस मनीषा की नंगी चूचियों को hi ताड़ता रहा. सच में मनीषा की चूचिया एकदम ठोस थी. उसमे तनिक भी लचक नहीं थी. एकदम भले के समानं तानी हुई चूचिया और ऊपर से काळा अंगूर के डेन के सामान दो छोटे छोटे किसमिस के आकर के निप्पल दीदी की चूचियों पर चार चाँद लगा रहे थे. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे कहा.



मैं- कसम से मनीषा तेरी चूचियों का कोई जवाब नहीं है. क्या करामाती चूचिया हैं तुम्हारी. तुमने अपनी चूचिया मुझे दिखाकर मेरी आँखों को बहुत ठंडक दी है. तेरी चूचिया सच में कमल की हैं. जब तू अपनी चूचिया उछाल उछाल कर चलती थी. तो मेरे कलेजे पर सांप lot-te थे. मैं आज तेरी चूचियों को एकदम निचोड़ दूंगा मनीषा. इतना कहकर मैं नंगा hi बिस्टेर पर चढ़ गया और मनीषा की चूचियों को दोनों हांथो से पकड़कर दबाने लगा. मनीषा भी आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह करने लगी. थोड़ी देर चूचिया दबवाने के बाद मनीषा गिलास का दूध अपनी दोनों चूचियों पर गिराने लगी. मैं तो भूखे कुत्ते की तरह मनीषा की चूचियों पर अपना मुंह लगा दिया और निप्पल मुंह में लेकर उसे चूसने लगा.

मनीषा की चूचियों को चूसते हुवे मैं मुंह खोलकर उसकी चूचियों का दूध भी चाट लेता था. मनीषा बरी बरी से अपनी चूचियों पर दूध गिरती जा रही थी और मैं चूचिया बदल बदल कर उसकी चूचिया चूसने के साथ साथ दूध भी पिता जार अहा था. थोड़ी देर बाद गिलास में दूध ख़तम हो गया. लेकिन मैं मनीषा की चूचियों से मुंह नहीं हटाया और उसकी चूचियों को पिता रहा. मनीषा भी गिलास साइड में रखकर मेरे सर पर अपने हाँथ फेरने लगी. मेरे सर पर हाँथ फेरती हुई वो बोली.

मनीषा- आपको मज़ा आया मेरा दूध पीकर.

मैं- सच में मनीषा तू बहुत कमल की लौंडिया है रे. मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था की मुझे एक साथ घर का और बहार का दूध पिने का मौका मिलेगा. लेकिन तूने तो आज कमल कर दिया. मुझे एक सेहत दोनों का स्वाद चखकर.

मनीषा- अच्छा अब उठिये और मुझे बाथरूम जाने दीजिये.

इतना कहकर मनीषा बिस्टेर से उठ गयी और एक चद्दर अपने शरीर में लप्पेट कर बहार चाट पर बाथरूम में चली गयी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-115

मनीषा के बाथरूम जाने के बाद मैं बिस्टेर पर तक लगाकर बैठ गया और अपने लुंड को सहलाने लगा. लगभग 10 मिनट बाद मनीषा बाथरूम से निकलकर कमरे में आ गयी और दरवाज़े पर से hi खड़े होकर मुझे लुंड सहलाते हुवे देखने लगी. मैं लुंड सहलाते हुवे बिस्टेर से उठा और मनीषा के पास चला गया. मैंने मनीषा को पकड़कर अंदर किया और दरवाज़ा बंद करके उसे दीवाल के सहारे उल्टा सटाकर खड़ा कर दिया और उसके पीछे खड़ा हो गया. मैंने अपना हाँथ से उसकी कमर को सहलाने लगा. कमर सहलाने के बाद मैंने अपना दोनो हाँथ मनीषा के बगलो से डालकर उसकी दोनों चुचायो को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. मनीषा के मुंह से सिसकी निकलने लगी.

थोड़ी देर उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने मनीषा को अपनी तरफ कहिहकर अपने से चिपका लिया जिससे मेरा लुंड मनीषा की गांड में घुस गया और मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhh भैया निकल गया. मैं अपने लुंड का दबाव उसकी गांड पर बनाते हुवे अपने हांथो से उसकी चुकी दबाता रहा और अपनी जीभ निकलकर मनीषा की गार्डन को चाटने लगा. मनीषा की गार्डन को चाटते हुवे मैंने मिनिषा की पीठ की तरफ आने लगा. मनीषा मस्ती में aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईया ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करती रहियी. थोड़ी देर उसकी पीठ चाटने के बाद मैंने अपने होंठ मनीषा के कण के पास ले जाकर उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से मसलते हुवे अपने लुंड को उसकी कमर से पीछे करके एक झटके से अपनी कमर उसकी गांड पर दे मरी मनीषा दर्द और मस्ती में चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh bhaiiiyaaaaaaaaaaaaa. क्याआआ करररररर राहीईईई होऊ. डरडडडडडड होत्ता हैईईई मुझेईई.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे वासना के कारन लाल हो गयी थी. उसकी होंठ फड़फड़ा रहे थे. कुछ देर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे. थोड़ी देर मनीषा मेरी आँखों में देखने के बाद अपनी गार्डन निचे झुका ली और शर्माने लगी. मैंने मनीषा के दोनों हाँथ पकड़कर दीवाल से सटाकर अपने एक हाँथ से उसके दोनों हांथो को पकड़ लिया. जिससे मनीषा मेरी तरफ देखने लगी. मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना उसके होंठो को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा.

उसके होंठ चूसने से साथ मैंने अपना एक हाँथ निचे ले जाकर मनीषा की छूट पर कपडे के ऊपर से रख दिया. मनीषा की छूट गीली हो गयी थी. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा का शरीर लहराया. मैं उसकी छूट को मुट्ठी में भरकर दबाने लगा. मनीषा बस gggggggguuuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuu कर रही थी. थोड़ी देर मैंने मनीषा का होंठ चूसने के बाद अपनी जीभ उसके होंठो पर फिरने लगा तो मनीषा ने अपना मुंह खोल दिया जिससे मेरी जीभ मनीषा के मुंह में चली गई. जिसे वो चूसने लगी. पहले उसने मेरी जीभ धीरे चूसी. उसके बाद वो जोर जोर से मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर मनीषा ने जीभ चूसने के बाद अपनी जीभ मेरे मुंह दे घुसा दी. मैं मनीषा की जीभ चूसते हुवे उसकी छूट को मुठी में भर भर कर दबाता रहा.

थोड़ी देर तक उसकी छूट दबाने के बाद मैंने उसकी पंतय को साइड में किया और अपनी एक ऊँगली उसकी छूट के मुंह पर रख दी और उसके होंठो से अपने होंठ हटा दिए. मैंने उसकी ाअंखो में देखते हुवे अपनी ऊगली एक झटके में उसकी छूट में पेल दी. मनीषा दर्द से सिसक उठी.

मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईयाआआआआ. निकल्ल्लूऊऊऊ अपनीइ ऊंगलीई कोऊ aaaaaaaaaahhh. मुझे दर्द हो रहा है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसके दोनों हांथो से हटा लिया और एक हाँथ से उसकी छूट छोड़ते हुवे दूसरा हाँथ उसकी चुकी पर रखकर दबाने लगा. और अपने होंठो से उसके पुरे चेहरे को चूमने लगा. मनीषा ने मस्ती में आकर अपना एक हाँथ मेरे लुंड पर रख दिया.

मनीषा का हाँथ लैंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से सिसकी निकल गयी और मैंने उसकी एक चुकी को जोर से दबा दिया. जिससे मनीषा aaaahhhhhhhhhhh भैय्याअ कहकर मेरे लुंड पर अपने हाँथ फिरने लगी. मैं मनीषा के चेहरे को चूमते हुवे निचे उसकी चूचियों तक आया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को चूमने लगा. एक हाँथ की ऊँगली से मैं लगातार उसकी छूट में अंदर बहार करता रहा. मनीषा एकदम गरम हो गाइट hi. और वो एक हाँथ से मेरे लुंड को सहलाते हुवे दूसरे हाँथ से अपनी एक चुकी को भी सहलाने लगी. मैंने अपना हाँथ उसकी छूट से निकलकर उसके चुकी वाले हाँथ पर रख दिया और उसके हांथो को दबाकर उसकी चुकी को दबाने लगा.

थोड़ी देर उसकी चुकी को दबाने के बाद मैंने मनीषा का हाँथ हटाकर दोनों चूचियों को मुट्ठी में भर कर जोर से मसल दिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भाआईईईयाआआआ. थोड़द्दआ धीयड़ी डायबाहु. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के कपडे को निचे से पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. मनीषा भी अपना हाँथ ऊपर उठाकर अपना कपडा उतरने में सहयोग किया कपडा उतारकर मैंने उसे जमीन पर फेंक दिया. अब मनीषा के जिस्म पर सिर्फ एक पंतय बची थी.



मैं उसके संगमरमरी जिस्म को घूरने लगा इस कारन मनीषा ने शर्म से अपनी गार्डन निचे कर ली. मैं मनीषा को पकड़कर बीएड के पास ले गया और बीएड पर बैठकर मनीषा को अपनी गॉड में बैठा लिया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड के निचे डाब गया. मनीषा ने अपने गांड हिलाकर मेरे लुंड को एडजस्ट कर के ठीक से बैठ गयी.

मैं अपनी जीभ निकलकर मनीषा की चिकनी पीठ चाटने लगा और अपने दोनों हांथो में उसकी चूचिया भरकर मसलने लगा. मनीषा मस्ती में आआआआह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मनीषा थोड़ा आगे jhuk-kar अपनी पीठ चतवती रही. उसकी पीठ खूब अच्छी तरह चाटने के बाद मैं उसकी गार्डन और कंधे को चाटने लगा. मनीषा ने मदहोशी में अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया. मैंने भी उसकी एक चुकी से हाँथ हटाकर पंतय को साइड में करके उसकी छूट के ऊपर रख दिया और रब करने लगा.

मनीषा ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और मुझे चुकी और छूट से खेलने की छूट दे दी. मैंने भी मनीषा की चुकी को मुट्ठी में भर भर कर जोर जोर से दबाते हुवे मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली घुसा दी. मनीषा मस्ती में चीख पड़ी.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्ह भाइयाँआ. क्याआ काअररर्र रही होओओओओ. ढ़हिरररीई काअरररओओओओओ भईयाआआआ..

मैं उसकी चुकी को और तेज़ तेज़ दबाने लगा और छूट में तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगा. मनीषा अपना सर मेरे कंधे पर रखे जोर जोर से साँस लेने लगी और अपने होंठो को काटने लगी. मनीषा पर वासना एकदम चरम पर पहुंच गाइट hi इसलिए वो मुझसे बोलने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआ. भुत्तत्त अछ्हा लाजगगग रहहाआ हाइइइइइइ. Ooooooohhhhhhhhhh ऐसी होई करररटीई राहीईईए. मुझीऐ ऑररररर पयार्र्र्रर कीजीईएएए भैया. Uuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्यी.

मनीषा की मस्ती भरी बाटे सुनकर मैं उसकी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुवे दबाते हुवे उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार करते हुवे उसके कण के पास मुंह ले जाकर पूछा.

मैं- तुम्हे अच्छा लग रहा है मनीषा अपनी चूचिया दबवाते और छूट में ऊँगली करवाते हुवे.

मनीषा- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाइययियाआआ. नाहीइइइइइइ एई गाण्डीय बाटत्त माअत कीजियीईइ मुझसेइ. बॉस करती रहीएई. मुझी बाहुटत अछ्हा लाजगगग रहा हैईईई भैईयाआ aaaaaaaoooooooooo ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा की बात सुनकर मैं और जोर जोर से उसकी छूट पेलने लगा. थोड़ी देर तक एक बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में डालने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकल ली और उसकी चुकी से अपना हाँथ हटा लिया. जिससे मनीषा की मस्ती में खलल पैदा हुई और उसने आँख खोलकर मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप रुकक्क क्योंन गयी. करिये ना.

मैं- मैं कहा रुका हूँ मनीषा. और मैं क्या कर रहा था जो करू.

मनीषा- करिये न भैया. क्यों सत्ता रहे हैं मुझे.

Main-jab मुझे पता चलेगा की मुझे क्या करना है तब hi तो मैं करूँगा. और मैं तुझे क्यों सताऊंगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरे एक हाँथ को अपनी चुकी पर रखा और एक हाँथ को उठाकर अपनी छूट पर रख दिया, लेकिन बोली कुछ नहीं. मैं भी वैसे hi हाँथ रखे बैठा रहा तो मनीषा ने फिर कहा.

मनीषा- मुझे क्यों परेशां कर रहे हैं भैया. करिये न. अब तो मैंने आपका हाँथ भी वह पर रख दिया है.

मैं- मैं ऐसे कुछ नहीं करूँगा. तुम्हे मुझे एकदम खुलकर बताना होगा की मैं क्या करू.

Mainsha(tadapti हुई)- क्यों तड़पा रहे हैं भैया अपनी छोटी बहन को. मुझे बोलने में शर्म आ रही है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने उसकी चूचियों को जोर से दबाकर छोड़ दिया और उसकी छूट को मुठी में भरकर दबाया और छोड़ दिया. मनीषा मस्ती में सिसकी और बोली.

मनीषा- ह्ह्हआआआआ भैईया आईईसी हीई केआरईईएई. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh मेंनननननन याहठीीी कररणनई की लियी काअह्ह्ह राहीइ थिई. ऑर्डर करीयीए भैया मुझी बहूत्त अछ्हा लगगग रहा हैई.

मैं- पहली बात तो तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो वो खुलकर मुझसे कहो और दूसरी बात की मैं तुमसे जो कुछ भी पुछु उसका खुलकर सही सही जवाब तुम डौगी मुझको.

Manisha(tadapkar). मैं आपको सब बताउंगी जो भी आप पूछेंगे. ायबबब तू कॅरियई भईया.

मैं- क्या बताओगी सब कुछ. जब तुम ये नहीं बता प् रही हो की तुम मुझसे क्या करने के लिए कह रही हो

मनीषा( एकदम तड़पकर). आप बहुत हरामी हो भैया. अपनी बहनंन कोऊ भी अपनीइ तरह गांद्दी कररर रही हो ाप्प. अह्ह्ह्ह भईया मेरीए चूचियों को खूब दबाओ भैय्या. इनको मसलकर मुझी मज़ा दू. मेरीए वहा अपनी ऊंगलीई घुसाओ. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

मणि- तुम फिर शर्मा रही हो. मैं कहाँ ऊँगली घुसौ. उसका कुछ नाम तो होगा.

Manisha(madhoshi में) आआआअह्हह्ह्ह्हह भीयाआ. मेरीए छूटत मई अपनीइ ऊंगलीई घुसकर मुझसे छोड्दुओ. मेरीए चूचियों को खूबह मसलकरर मुझी प्यार कारूओ भइया. जैसी सविता डीडीई ऑर्डर सरिताआ डीडीईई को करती हैंन आपपप.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी चुकी को मुठी में भार लिया और उसकी छूट के होल पर अपनी पहली दो ऊँगली रखकर चुकी को जोर से दबाते हुवे एकक झटके में दोनों ऊँगली उसकी छूट में पेल दिया. लेकिन मेरी दोनों ऊँगली अंदर नहीं जा सकीय और मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyy. मर्डर गाइइइइइ मैंनं. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या कर रही होओओओ बभाइया. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैई मुझे.

मनीषा की चीख सुनकर मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली जोर से उसकी छूट में पेल दी और जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगा और मनीषा की चुकी जोर जोर से दबाने लगा. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी और अपने दोनों हाँथ मेरी गार्डन में दाल दिया. मैं अपनी ऊँगली ताबड़तोड़ उसकी छूट में पेलते जा रहा था. थोड़ी देर बाद मनीषा फिर से मस्त हो गई और बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैयाआ बहुउट्ठ मज़ाआ आए रहा हीी. ऐसी ही छोड़िये मेरीए छूट कोऊ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भाइय्याअ. आपकी हांथोउ मई जादूओ ही भैया.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको खड़ा कर दिया और बिस्टेर से उठकर मैं खड़ा हो गया और मनीषा को पकड़कर बिस्टेर पर लेता दिया. मनीषा के दोनों पेअर बीएड से निचे लटक रहे थे. मैंने एक तकिया लेकर मनीषा की कमर के निचे रख दिया. और मनीषा की पंतय पकड़कर उसे खींचकर उतर दिया. अब मेरी छोटी बहन एकदम नंगी मेरे सामने लेती थी. उसकी चूचिया तो सामनांए से बहुत बड़ी थी, लेकिन उसकी छूट छोटी थी. मनीषा मेरी तरफ देखकर शर्मा रही थी.

मैं उसकी तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच में बैठ गया और अपनी जीभ निकलकर उसकी दोनों जांघो को चाटने लगा. मनीषा महालने लगी. थोड़ी देर उसकी जांघो को छटने के बाद मैंने अपना मुंह उसकी छूट के ऊपर किया और एक लम्बी साँस ली, जिससे उसकी छूट से निकलने वाली स्मेल मेरी शरीर में समां गई. मैं उसकी छूट सूंघकर मनीषा से कहा.

मैं- waaaaaaaaahhhhhhhhhhh मनीषा. कितनी ाछठीई महक है तेरी छूट की. जब तेरे छूट की महककक इतनी अछि है तो तेरी छूट का पानी कितना स्वादिस्ट होगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा बुरी तरह शर्मा गई और थोड़ा सा उठकर मेरे सर पर मार्कर वापस लेट गई और बोली.

मनीषा- सछह मी आप बहुत बेशरम हैं भैया. अपनी बहन को एकदम नंगा पर दिया आपने आपको शर्मा नहीं आती.

मैं- (उसकी छूट को फिर सूंघते हुवे)- ऐसी शानदार छूट का स्वाद चखने ने लिया hi तो मैं बेशरम बन गया हूँ. और जब बहन खुद नंगा होकर अपनी छूट का रास अपने भाई को पिलाना चाहती है तो भाई को उसकी बात का मन रखना चाहिए.

मनीषा- छ्हीईई भैया. आप कितने गंदे ho.main नंगी नहीं हुई आपने मुझे नंगा किया है. (और इसी फ्लो में बोल गई) और आपने तो अभी तक छूट का रास चखा hi नहीं तो आपको कैसे पता की मेरी छूट का रास स्वादिस्ट है.

main-(garden उठाकर उसकी आँखों में देखते हुवे) इसका मतलब तुम चाहती हो की मैं तुम्हारी छूट का रास चाटकर तुमको बताऊ की ये स्वादिस्ट है या नहीं.

मेरी बात सुनकर अब मनीषा को एहसास हुवा की वो मस्ती में क्या बोल गई है. मेरी बात सुनकर मनीषा शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी और मदहोशी में बोली.

मनीषा- आपने मुझे धोखे से फंसकर नागि कर दिया. और अब आप मुझे परेशां कर रहे हैं. अब मैं आपसे बात नहीं करुँगी.

मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के ऊपर लेट gaya,lekin अपना भर मैंने अपने हांथो पर hi रखा. उसके ऊपर लेटकर मैं उसके होंठो को चूसने लगा. मनीषा ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरे होंठो को चूसकर मेरा साथ देने लगी. मैं कुछ देर मनीषा के होंठो को चूसने के बाद उसके माथे और दोनों आँखों पर किश किया तो उसने अपनी आँखे खोल ली. मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसको आँखों लाल थी. वो फुल गरम हो चुकी थी. मैं उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकलकर उसके गलो को chat-te हुए निचे की तरफ आने लगा. गलो को चाटने के बाद मैंने उसकी गार्डन को चेतना शुरू कर दिया. उसकी गार्डन को चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उठाया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग पर रख दिया.

मनीषा मेरे निचे पड़ी मस्ती में मचल रही थी. मैं उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को chat-te हुवे उसकी क्लीवेज को चाटने लगा और उसकी क्लीवेज को चाटने के बाद मैंने अपने मुंह से थूक मनीषा की दोनों चूचियों की घुंडियो पर गिरा दिया और अपनी जीभ की नोक को उसकी चूचियों की घुंडी पर फेरने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा की जैसे जान hi निकल गई. उसका बदन ैथ गया. और वो मेरे सर को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगी लेकिन मैंने अपने सर ऊपर नहीं उठाया और अपनी जीभ मनीषा से निप्पल को छेड़ने लगा. मैं बरी बरी से मनीषा की घुंडियो को छेड़ रहा था. जिससे मनीषा का बदन काँप रहा था. जब मनीषा से बर्दास्त नहीं हुवा तो वो मुझसे बोली.



मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआआ बस्स्स क़रीय्यी अब्ब्ब. मुझी कुछःह होऊ रहा हैई. मैं अब्ब्ब औरर बर्दात नाहीइ कर पाउँगीीी. Oooooooooooooohhhhhhh भैइयाआ मेर्री निछ्छी कुछः होऊ रहा हीी भईया. कुछः कर्रूआ भईया.

मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.

मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
धन्यवाद आपका सर जी।

20 लाख view पाठकों का इस कहानी के प्रति प्रेम और लगाव के कारण मिला है।

जी हाँ ये मैं पहली कहानी लिख रही हूँ। और अगर ये कहानी पाठकों को पसंद आ रही है तो इसमें आपका भी अप्रत्यक्ष रूप से बहुत बड़ा योगदान है। शुरुआत में मेरे द्वारा की गई कई गलतियों पर आपके महत्त्वपूर्ण सुझाव और अच्छी तरह से कहानी लिखने के लिए प्रेरित करने का श्रेय आपको ही है।

बाकी आपका एक बार फिर से बहुत बहुत धन्यवाद।

मेरी कहानी को ऐसे ही पढ़ते रहिए और अपने महत्त्वपूर्ण सुझाव देते रहिए।

साथ बने रहिए।
 
अपडेट-116

मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.

मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.

अब आगे.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसकी चूचियों की घुंडियो से अपनी जीभ हटाई और उसकी दोनों टैंगो के बिछ आकर बैठ गया और अपने दोनों हाथो से उसकी टांड को फैला दिया. उसकी छूट की फांके आपसे में झड़ी हुई थी. जिसमे से उत्तेजना के कारन मनीषा का कार्मस निकल रहा था. मैंने अपना सर झुककर एक बार जोर की साँस लेकर उसकी छूट की सुगंध अपने अंडाल डाली और अपना होंठ उसकी छूट पर रख दिया. मेरा होंठ छूट पर पड़ते hi मनीषा के जिस्म ने झटका खाया और मनीषा की मस्ती भरी सिसकी निकल गई.

मनीषा- oooooooooooohhhhhhhhhh भैईयाआआआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhhh.

मैं मनीषा की छूट को अपने होंठो से चूमने laga.main उसकी पूरी छूट पर और छूट के आस पास भी चूमने लगा. थोड़ी देर छूट चूमने के बाद मैंने उसकी छूट को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा मचलने लगी. वो मस्ती में अपने दोनों हांथो से अपनी चूचियों को सहलाने लगी. मैं मनीषा की छूट को मुंह में भर भर कर चुस्त रहा. वह मस्ती में बोली.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीयाआ. बायस ऐसी हीईई. बहुतत्त अछहहआ लाजगगग रहा हैई भईया. खूबबब चुसोऊ मेरीए छूटत को आअह्हह्ह्ह्ह भाइय्य्या ाअप्प्प बाहुटत अच्छी haiiin.ooooohhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuiiiiiiiiiii मम्मीयी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने कुछ देर और उसकी छूट को मुंह में भरकर चूसा फिर मैंने अपनी जीभ निकलकर उसकी छूट को चाटने लगा. मैंने एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर उसके हाँथ के ऊपर रख दिया और दुसरे हाँथ की उंगलियों से उसकी क्लीट को सहलाने लगा. इस 3 तरफ़ा हमले से मनीषा एकदम छुडासी हो गई और जोर जोर से बोलने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh भीयाआ. ऑर्डर जूर्रर सीए चुऊशूऊ मेर्री िचुउत्त्त कोऊ. बाहूतट अछ्हा लाग रहहहआ हैईईई . आऍप बाहूऊउत्तत अछ्हा चुस्ती होऊ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईयाँआ कहा जावू मेरररीई चूऊउत्तत कोऊ. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीयाआ.

मनीषा की मस्ती भरी सिसकी सुनकर मैंने अपनी जीभ और तेज़ तेज़ उसकी छूट पर चलनी शुरू कर दी. उसकी छूट को chat-te हुवे मैं उसकी क्लीट भी और जोर जोर से मसलने लगा. उसकी क्लीट को मसलते हुवे मैं एक हाँथ से उसकी चुकी को दबाने लगा. ऐसा करने से मनीषा एकदम मस्त हो गई और अपने जिस्म को ऐंठते हुवे बड़बड़ाने लगी.



मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhhhh भाईयईयाआ डार्लींगगगगग.. ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ चूसोओओओओ मेरीए छुटत कोऊ. आपपपप बहूत्त अछहहआ चुस्स्ती होऊ भईया. खायआ जावूओ मेरीए छूटत कोऊ. Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh भाइय्याअ मुझी कुछःह हूँ रहहा हैई ऐसा लग रहा हैई कोई कुछःह निकालनी वाला ही मेरीए छुटत सीए. औरर जूरर सी चुसू भईया.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसकी चुकी से हटा लिया और उसकी छूट को अपने मुंह में भरकर जोर से चूसकर छोड़ दिया और अपना सर ऊपर उठा लिया. मनीषा एकदम झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी. मेरे ऐसा करने से उसको बहुत बुरा लगा. वो अपनी गार्डन उठाकर मुझे देखने लगी. उसका चेहरा एकदम तमतमाया हुवा था. चेहरा लाल हो गया था. वो मुझसे इशारे में छूट चूसने के लिए कह रही thi,lekin जब मैंने कुछ नहीं किया तो वो बोली.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ रुक्खक्क क्यूँ गयई. छातो न मेरी छूट को. मैं झाड़ने वल्लीइ होऊं.

मैं- मैं तुम्हारी छूट चाटूँगा, लेकिन उसके पहले मेरे कुछ सवालों का सही सही जवाब दो.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आपको जो भी पूछनेआए हूँ वोऊ बाअद मी पूछह लेना. लेकिननं अभी मुझी शांततः कर दोऊ. मेरीए छूट चातुओ भैया.

Main(manisha की क्लीट को सहलाते हुवे). पहले ये बताओ की तुम सविता दीदी, सरिता दीदी और मेरे बारे में क्या- क्या जानती हो.

Manisha(nashili नज़रो से देखते हुवे)- मैं कुछ नाहीइ जैंतीई भैईया. आआअह्ह्ह मेरीए चुउत्त्त. मुझी ठंडा कर दोऊ भईया.

Main(clit सहलाते हुवे)- तुम झूठ बोल रही हूँ. अभी थोड़ी देर पहले तुमने कहा था की मैं तुम्हे दोनों दीदियो की तरह प्यार करू.

मनीषा( सिसकते हुवे) वोओओओ तू माईनेई आईसीए हीईई बुल्ल्ल्ल दिया था. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भईया कुछ कारु.

Main(uski एक चुकी को दबाते हुवे) जब तक तुम नहीं बोलोगी तब तक मैं कुछ नहीं करूँगा.

Manisha(hatash hokar)achhhaaa थीइक हैई भईया मैंनं बाटत्तातीई हूँण. मैंन आपपप तीनूओ की बारी मई साब जानती होऊणन.

मैं- वही तो पूछह रहा हूँ की तू कैसे ये सब जानती है.

Manisha-(machalte हुवे) मैनी जब सीए अआप ाऊररर साविइयत्ता डीईई की भीछहह यी साब षुरूउउ हव्वा तब सीए जानती हूँ. मैनी पाहले दीं सीए लेकर डीई की चूड़ाए ताकक साबबब कुछः अपनी आंखों सी देखा है. लेकिंन आप लोगो कोऊ को कभी पाटा ही नाहीइ छाला की मैं आप लोगो कोऊ चुदाई करती हुवी देखहतीई हूँ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह भैइयाआ अब्ब तू कुछः करूओ. मीरीई छूट चातुओ.

मैं- और सरिता दी के बारे में कैसे पता चला.

मनीषा- ेक्क्क दींनन मैंनं दोपफार मई सरीयता डीडीई की कमरे मई गयी थिई तू व्वू वहा नहीं थी, लेकिननं उनका मोबाइल कमेरी में होई था. मैनी जब उनका मोबाइल उठाया और उसमे कुछ करने लगी तो मुझसे गलती से फेसबुक मैसेंजर खुल गया औरर वही पररर मैनी दीदी को किसी मीरा नाम की लड़की के साथ की गई चाट को पढ़ा. शायद वो पहली चाट थी रात वालीए जिस्मी दी ने कहा था की वो आपके कमरे में गई थी आपको दूधः देने. और आपने उनकी चूचिया देखि. जिसे उन्होंने उस मीरा को बताई तो उसने कहा था की वो आपको पता कर अपनी चुड़ै करवा ले.

तभी से मैंने दीदी पर नज़र रखनी शुरू कर दी. और जब दीदी जिम और कार सिखने के लिए पापा से कहा तो मुझे पूरा विस्वाश हो गया की दीदी ने मीरा की बात मन ली है. फिर तो मैं रोज़ दीदी आपके कमरे में जिम करना सिखने जाती थी और आप दीदी को चुदाई का पथ पढ़ते थे. आआआआहहहहहहह भईया अब्ब तो मैंने आपको सब बता दिया ही अब तू मेरीए प्यास बुझा दू. चट्टू मेरी छूट को.

मैं- (उसकी छूट को चूसकर)- तो तुमने ये सब मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया.

मनीषा- ये भी कोई बताने वाली बात थी भैया. अगर मम्मी पापा को पता चलता इस बारे में तो उन्हें कितनी तकलीफ होती. फिर या तो वो आपको घर से निकल देते. या दोनों दीदियो के साथ कुछ गलत कर देते या फिर अपने साथ कुछ गलत कर लेते. और मैं इन तीनो में से कुछ भी नहीं होने देना चाहती थी. क्योंकि मैं आप सबसे बहुत प्यार करती हूँ. अब खुस भैया. अब तो चुसो मेरी छूट.

Main-(uski छूट को चूसकर)- लेकिन जब तुम्हे शुरू से सब पता था तो तुमने हम सब को क्यों नहीं रोका. और तुम्हे ये सब देखकर बुरा नहीं लगा की हम भाई बहन आपस में चुदाई कर रहे हैं.

मनीषा- मुझे ये देखकर बहुत बुरा लगा की आप तीनो भाई बहन होकर भी चुदाई कर रहे हैं. मन तो कर रहा था की मैं कमरे में घुस जाऊ और अप्प तीनो को मर कर पुछु की आप सब को ऐसा घिनौना काम करते हुवे शर्म नहीं आती, लेकिन मैं कुछ सोचकर ऐसा नहीं कर पाई भैया.

मैं- क्या सोचकर ऐसा नहीं कर पाई तुम.

मनीषा- जाने दो भैया. मत पूछो वो बात मुझसे.

मैं- अब जब इतना सबकुछ बता दिया है तो वो बात भी बताने में कैसी शर्म.

मनीषा- वो क्या है न भैया मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ. और मेरा शुरू से hi आप पर krus(aakarshan) था. और आपने जिम में इतनी सॉलिड बॉडी बनाई हुई है की मैं जब भी आपको टॉपलेस देखती थी तो मुझे आप बहुत ज्यादा अच्छे लगते थे. मेरा मन करता था की मैं दौड़कर आपसे लिपट जाऊ. और मुझे दर था की मेरे ऐसा करने से कही आप शर्मिंदा होकर घर छोड़कर और मुझे छोड़कर न चले जाओ और मैं आपको किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती थी. इसलिए मैंने ये बात सबसे छुपाई.

मनीषा की बात सुनकर मुझे बहुत हैरानी हुई और उसपर प्यार भी बहुत आया. मनीषा को मेरी कितनी परवाह थी. शायद उसके मन में मेरे लिए शुरू से hi कुछ था. इस बात को कन्फर्म करने के लिए मैंने मनीषा से पूछा.

मैं- तो क्या तुम बहुत पहले से hi मुझसे छुड़वाना चाहती थी.

मनीषा- कितनी गन्दी सोच है आपकी भैया. ये बस मेरा आकर्षण मात्र था. मैंने कभी भी आपके साथ ये सब करने का नहीं सोचा था.

मैं- पहले नहीं सोचा था. इसका मतलब अब ये सब करना का तुमने सोचा है.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन अपनी गार्डन दूसरी तरफ करके मुस्कुराने लगी. मैंने उसकी छूट को सहलाते हुवे पूछा.

मैं- अच्छा मनीषा एक बात सच सच बताओ. जब तुम देखती थी की मैं सरिता दीदी और सविता दीदी को छोड़ रहा हूँ ये उनको नंगा करके उनके नशीले जिस्म से खेल रहा हूँ. तो ये सब देख कर तुम्हारे मन में क्या आता था.

मनीषा- अब जाने दो न भैया. आप ने जो पूछा मैंने सब कुछ आपको सच सच बता दिया. अब तो मुझे और न तड़पाओ. कुछ तो रहम करो अपनी बहन पर.

मैं- बस यही बता दो. फिर मैं तुम्हारी तड़प mita-ta हूँ.

मनीषा- जब आप सरिता दीदी को छोड़ते थे और सविता दीदी को नंगा करके उनके बदन से खेलते थे तो ये देखकर मुझे उनसे बहुत जलन होती थी. मैं हमेशा सोचती थी की काश की दीदी की जगह मैं होती तो आप मेरे बदन से खेलते और mujhee……………………..(sharmakar चुप हो गई)

मैं- मतलब तू चाहती थी की दीदी की जगह तू होती और मैं तेरे बदन से खेलता और तुझे छोड़ता. क्या बात है मनीषा तू सच में चाहती है की मैं तुझे छोड़ू.

मनीषा- क्यों तड़पा रहे हो भैया. सब कुछ तो बता दिया है मैंने. अब और क्या बताऊ. यहाँ मेरा जिस्म जल रहा है और आपको मस्ती सूझ रही है.

मैं- नहीं तू पहले बता की तू सच में मुझसे छुड़वाना चाहती है.

Manisha(thoda नाराज़गी के साथ)- आप न भैया, कभी कभी एकदम चुटिया वाली हारकर कर देते हैं. आप दोनों दीदी को छोड़ते हैं. ये बात मैंने किसी को नहीं बताई. और मैं आप सबसे नाराज़ भी नहीं हूँ, उस दिन मौसी के यहाँ सरिता दीदी को जाना था, लेकिन उनकी जगह मैं चली गई, क्योंकि दीदी को आपसे चुदाई करवानी थी और मैंने आपको प्राइवेसी दे दी की आप दीदी को छोड़ सको. और तो और इतनी रात को मैं आपके कमरे में नंगी आपके बिस्टेर पर पड़ी हुई हूँ. फिर भी बार बार वही सवाल पूछ रहे हो की मैं आपसे छुड़वाना चाहती हूँ या नहीं. अब मैं क्या इस बात को माइक लेकर अन्नोउंस करू की मैं आपसे छुड़वाना चाहती हूँ. अरे इस बात को तो कोई चुटिया भी समझ जायेगा, लेकिन आप इतने बड़े ठरकी होकर भी ये फालतू का सवाल पूछ रहे हैं.

मनीषा की बात सुनकर मैं बहुत खुश हुआ. मैंने मनीषा के ऊपर झुककर उसके होंठो को चुम लिया और उसकी चूचियों को जोर से दबाकर कहा.

मैं- वाह्ह्ह्ह मनीषा. तुमने तो आज मुझे खुश कर दिया. तू मुझसे छुड़वाना चाहती है. ये सुनकर मुझे विस्वास नहीं हो रहा है. मैं तुझे बहुत अचे से छोडूंगा. तू एकदम छुड़वाने लायक मॉल हो गई है मनीषा. तुझे छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा.

Manisha(kheejhkar)- ारी यार भैया. आप सच में चुटिया हो. ये सब बाद में सोच लेना. पहले मुझपर ध्यान दो. मेरी छूट जल रही है. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मेरी प्यास बुझा दो अब. चाटो मेरी छूट को.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी टांको को पकड़कर फैला दी और अपनी जीभ निकल कर उसकी छूट चाटने लगा. एक हाँथ बढाकर मैंने मनीषा की चुकी को पकड़ लिया और उसे मसलने लगा. मैं मनीषा की पूरी छूट अपनी जीभ से चाट रहा था. छूट चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ की नोक बनाई और मनीषा की छूट में घुसाने लगा. मनीषा की छूट का छेड़ अभी बहुत छोटा था तो मेरी जीभ बस कुछ सेंटीमीटर hi उसकी छूट में गई. मैं अपनी जीभ से मनीषा की छूट कुरेदने लगा और उसकी चूचियों को दबाने लगा. मनीषा मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईया. और जोरर से भईया. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. ऊऊओह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. हाँ भैया ऐसे ही चुसू.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपनी जीभ हटाकर मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली गुशा दी और अंदर बहार करने लगा. और मनीषा के ऊपर झुककर उसकी चुकी को मुंह में भरकर चूसने लगा. ऐसा करने से मनीषा की सिसकारी तेज़ होने लगी और वो झड़ने के करीब पहुंच गई तो मैंने अपना मुंह उसकी चुकी से हटाकर उसकी छूट पर लगा दिया और एक हाँथ से क्लीट. एक ऊँगली से छूट और मुंह से छूट के ऊपर चाटने लगा. इस 3रे हमले को मनीषा बर्दास्त नहीं कर पायी और बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगी.

मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्हह भैइयाआ. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत अच्छा भैया और जोर जोर से चूसे मेरी छूट, और अंदर तक ऊँगली घुसाओ भैया. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऊऊऊओह्ह्ह्हह आप बहुत अच्छा चूसते हो भैया. आप किसी भी लड़की की को पता सकते हो भैया. आजजज आपने अपनी छोटी बहन को भी पता लियाआआआ. Ooooooohhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyy. मैं गईइइइइइ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैंन आए रहीए हुन्न भैय्या. मैं आकाशःह्ह मी उड़द रहीए हूँण कोइई मुझी सम्भाललली. ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह ागररर मुझी पात्तत्ताआ हॉटटा कोई चूऊउत्तत चाटवानी मी इतना मज़ा आता हैई तू मैंनंदीदिई कूऊहटकरररर उनकीइ जगहहह खुद्द्द अपनी छूटत आपको चाटवा देत्तीय. आआआअह्हह्ह्ह्ह भईया मैंन गाइइइइइइ. मेंननननन गइईईई. Uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiii मममममीयीय.

इतना कहकर मनीषा झड़ने लगी तो उसने अपने पैरो की कैची बनाकर मेरे सर को अपनी छूट पर दबा लिया. मैं मनीषा की छूट का पूरा राश चूस चूस कर पि गया. उसकी छूट का रास बहुत स्वादिस्ट था. मेरी सभी बहनो की छूट का रास स्वादिस्ट है. थोड़ी देर तक मनीषा ऐसे hi लेती रही . फिर मैं उसकी टैंगो के बिच से उठा और मिनिषा को उठाकर जमीन पर बैठा दिया और मैं बीएड पर पािल लटककर बैठ गया और मनीषा से कहा.

मैं- जब तुमने सब कुछ देख hi लिया है तो मुझे नहीं लगता की तुम्हे कुछ बताने की जरूरत पड़ेगी. तुमको पता है की इसके बाद दोनों दिदिया क्या करती.

मेरे बैठने पर मारा लुंड एकदम टैंकर खड़ा था. मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को पकड़ा और सहलाने लगी. थोड़ी देर लुंड सहलाने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड को चाटने लगी.



मनीषा पुरे लुंड पर अपनी जीभ चलकर उसे चाट रही थी. मैं मनीषा को सर की पकड़कर सहलाने लगा. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने ढेर सारा थूक अपने मुंह से मेरे लुंड पर गिराया और अपने हांथो से उसे पुरे लुंड पर मलने lagi.lund पर थूक मलते हुवे मनीषा ने अपना सर निचे किया और मेरे pellhar(goti) को अपने मुंह में पूरा भर लिया और चूसने लगी. मेरी गोटी मनीषा के मुंह में जाते hi मैं सिसक उठा और उसका सर को हल्का सा दबाकर बोलै.



मैं- aaaaaahhhhhhhhhhhh मनीषआआआआ मेरिइइइइइइइ जानननननननन. बस ऐसे hi.

मनीषा मेरे गोटी को कुछ देर चूसने के बाद मेरी गोटी मुंह से निकल कर मुंह खोलकर मेरा 4 इंच लुंड मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मनीषा किसी एक्सपर्ट की तरह मेरा लुंड चूस रही थी. मैं मनीषा के सर को अपने लुंड पर दबाता हुवा बोलै.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh डार्लिंग थोड़ा और अंदर लेकर चुसो मेरा लौंडा. ोुह्ह्हह्ह.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना पूरा मुंह खोलकर जितना लुंड अंदर ले सकती थी. लेकर चूसने lagi.mujhe भी मस्ती छाने लगी. मैंने मस्ती में आकर मनीषा का सर मेरे लुंड बार दबाकर कुछ सेकंड होल्ड किया और फिर छोड़ दिया. मनीषा की आँखों में आँशु आ गए लेकिन उसने किछ कहा नहीं और फिर से मेरे लुंड को चूसने लगी. मैं अब बीएड से उठ खड़ा हुवा और मनीषा के सर को पकड़कर अपना पूरा लुंड एक झटके में उसके मुंह में पेल दिया और 10 सेकंड होल्ड करके लुंड बहार निकल लिया. मनीषा लुंड निकलने के बाद खू खू करने लगी. उसकी आँखों से आँशु बहकर उसके गलो पर आ गए थे. वो मेरे लुंड को हाथो से पकड़कर बोली.



मनीषा- दीदी सही बोलती थी. आप सच में एकदम जानवर हो. बिलकुल भी रहम नहीं करते.

इतना कहकर मनीषा ने फिर से मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने दोनों हांथो में मनीषा का सर पकड़ लिया और एक झटके में पूरा लुंड उसके मुंह में पेल दिया और अंदर बहार करने लगा, मनीषा के मुंह से गगगगूउउउउ गगगगूऊऊ की आवाज़ निकलने लगी मैं मस्ती में उसका मुंह तेज़ तेज़ पेलने लगा और कहने लगा.

मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा मेरीए जाननं. चू सछह मी कमाल की ही. तुणी पहली बार मी ही मेरा लुंड पुर्रा अपने मुंह मी ले लिया ही. तू बहुत अच्छा लुंड चूस रही ही बस ऐसे ही चूस अपने भाई का लुंड. और जोर से चूस जानेमन.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना मुंह और खोल दिया और मैं और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा. मनीषा बस गगगगुणु गगगगगगूउऊउउउ कारण्टी रही. अब मैं भी झड़ने के बिलकुल करीब आ गया था. इसलिए मैं और तेज़ तेज़ उसका मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषआआआ. मेरिइइइ जाणीमण्ण. टेरिइइइ गरम्म जवानी कोई तरहहह तेरा मुंह भी बहुत्त ग्रामं हैई. औरर तेज़्ज़ चूस मनीषा मैं आनी वाला हूँ टीरी मुँहहह मी. मैं गया मनीषा. लिए ऑर्डर अंडरर ले करररर चुसस्स मेरा लौड़ा. मैं गया. Ooooooooohhhhhhhhhh saaliiiiiiiiiii.

इतना कहकर मैं मनीषा के मुंह में झाड़ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-117

मैं भी बड़बड़ाते हुवे मनीषा के मुंह में झाड़ गया. मनीषा मेरी जांघ पर मरने लगी. तो मैंने अपना लुंड उसके मुंह से निकल लिया. लुंड निकलते hi उसने मेरे लुंड का सारा पानी जमीन पर थूक दिया. कुछ बून्द उसके होंठो के दोनों तरफ से बहकर निचे आ गया था. वीर्य जमीं पर ठोकने के बाद मनीषा ने अपना मुंह पोछा और मेरी तरफ देखने लगी. मैं झड़ने के बाद निढाल होकर बीएड पर बैठा हुवा था. जब मनीषा ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उससे कहा.

मैं- क्यों मनीषा मज़ा आया तुमको.

मनीषा- सब कुछ तो ठीक था भैया. लेकिन आपने ये मेरे मुंह में निकलकर पूरा मज़ा ख़राब कर diya.(jameen पर पड़े मेरे वीर्य की और इशारा करके)

मैं- तुमने इस अमृत को वास्ते कर दिया मनीषा. ये लड़कोयो के लिए बहुत hi फायदेमंद होता होता है. इसको पिने से उनके चेहरे पर और निखार आता है. तुम भी तरय करना. कुछ दिन बाद तुम खुद मेरा लुंड चूस चूस कर इसका पानी पियोगी.

मनीषा मेरी बात सुनकर अपनी नज़रे निचे कर ली. थोड़ी देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद मैं आगे बढ़कर मनीषा के होंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और अपना हाँथ मनीषा की चुकी पर रखकर उसे दबाने लगा. मनीषा ने भी मेरा साथ देते हुवे मेरे होंठो को चूमते हुवे एक हाँथ से मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर बाद मेरा लुंड फिर से खड़ा होने लगा तो मनीषा ने किश तोड़ते हुवे कहा.

मनीषा- ारी ये क्या भैया. ये तो फिर से खड़ा हो गया.

मैं- जब तुम्हारे जैसी गर्म जवानी एकदम नंगी होकर अपना जिस्म दिखा रही है और उसे सहला रही है. ये मेरे लुंड को पता चल गया की मनीषा एकदम छुडासी हो गई है. इसलिए ये तुम्हे छोड़ने के लिए खड़ा हो गया है.

मनीषा- चुप रहो भैया. आप हर समय गन्दी गन्दी बाटे hi बोलते रहते हैं. कभी तो सीरियस हो जाया करिये.

मैं- अच्छा ठीक है. तो ये बताओ की तुमको छोड़ने का मौका मुझे कब मिलेगा.

मनीषा- क्या यार भैया फिर वही. आप कभी नहीं सुधरोगे. मेरा शरीर तो अब आपका है और मैं भी अब आपकी हो गई हूँ. तो जब भी आपका मन करे.

मैं- मेरा तो तुझे देखकर अभी hi मन कर रहा है की आज hi तुझको छोड़ दूँ.

मनीषा- छहियी भैया. बहुत गंदे हो आप. मैं जा रही हूँ अब. बहुत रात हो गई है. मुझे नींद भी आ रही है अब.

इतना कहकर मनीषा अपना nam-matr का कपडा pahan-ne लगी. मैंने भी मनीषा को नहीं रोका, क्योंकि मैं उसे मां पापा के रहते हुवे नहीं छोड़ सकता था, इसलिए मैंने उसे नहीं रोका. वो कपडा पहनकर बहार जाने लगी. और दरवाज़े तक जाकर रुक गई और पलटकर मेरी तरफ देखने लगी. थोड़ी देर मुझे देखने के बाद वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे गले से लिपट गई और मेरे होंठो को चूमकर कहा.



मनीषा- ठनक यू सो मच भैया. और हाँ अब बेशर्मो की तरह नंगे मत रहो. कपडे पहन लो. मैं सोने जा रही हूँ.

इतना कहकर मनीषा ने जाते हुवे मेरे लुंड को पकड़कर दबा दिया. जिससे मेरे मुंह से आआअह्हह्ह्ह्ह निकल gai.jise सुनकर मनीषा हँसते हुवे निचे भाग gai.manisha के जाने के बाद मैं भी फ्रेश होकर सो गया. सुबह मेरी आँख समय से खुल गई तो मैंने जिम किया और थोड़ी देर आराम करने के बाद बाथरूम में जाकर फ्रेश हुवा और निचे हॉल में आ गया. वह आने के बाद मैंने सब को गम विश किया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर में नशा बन गया और सभी मिलकर नष्ट करने लगे तो पापा ने कहा.

Papa-aaj ऑफिस वाले शर्मा जी हैं न तो उनकी लड़की की शादी है. क्योंकि वो हमारे घनिस्ट मित्र हैं तो उन्होंने वह के काम की dekh-rekh के लिए मुझसे कहा है और पुरे परिवार को बुलाया है. तो जिसको चलना हो. वो शाम को तैयार रहे चलने के लिए.

इतना कहकर पापा नाश्ता करने लगे. मम्मी पापा नाश्ता करके जॉब के लिए निकल गए. मैं भी अपने कमरे में आया और तैयार होकर अपने काम पर निकल गया. वह पहुंचकर मैंने अपना काम फिनिश किया और जो काम बचा था उसे समेत कर घर वापस आ गया और अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर तक अपने कमरे में बैठकर काम करता रहा. जब पूरा काम फिनिश हो गया तो मैं निचे पानी पिने के लिए किचन में आया. वह सरिता दीदी पहले से hi मौजूद थी. मैंने दीदी को देखा और उनके पास चला गया और दीदी को बहो में भर लिया और दीदी से कहा.

मैं- कैसी हो मेरी जानेमन.

सरिता दीदी- मैं तो ठीक हूँ. लेकिन तुम ठीक नहीं लग रहे हो. क्या बात है.

मैं- हाँ दीदी. आपको देखते hi मेरी हालत ख़राब हो जाती है. अच्छा ये मनीषा है या सोल्लगे गई है.

सरिता दी- वो तो सोल्लगे गई है.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को पलटकर अपनी तरफ कर लिया और उनके होंठो को चूमने लगा दीदी भी मेरा साथ देने लगी. मैं हाँथ बढाकर दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा. थोड़ी देर उनके होंठ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ उनके होंठो पर फेरनी शुरू कर दी. दीदी ने भी अपनी जीभ बहार निकल ली और मेरी जीभ से खेलने लगी. मैंने अपने मुंह खोलकर दीदी की जीभ अपने मुंह में ले ली और चूसने लगा. और अपना एक हाँथ बढाकर दीदी की छूट पर रख दिया. जैसे hi मेरा हाँथ दीदी की छूट पर पड़ा उन्होंने मुझे अपने से दूर किया और कहा.

सरिता दी- इतना बेश्बर मत बनो. हाफ हॉर्स बॉस कमरे में आना जो भी करना है वही करेंगे. इतना कहकर दीदी बोतल से पानी पिने लगी. तो मैं भी पानी की बोतल लेकर पिने लगा. जब दीदी पानी पीकर जाने लगी तो मैंने दीदी को फिर से पीछे से पकड़कर अपनी बहो में भर लिया और उनके कण में बोलै.

मैं- घर में कोई नहीं है जानेमन. तो क्यों न हॉल में hi अपना कार्यक्रम शुरू किया जाये.

इतना बोलकर मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और अपने दोनों हांथो में दीदी की चूचिया भरकर बढ़ाने लगा. दीदी ने भी अपना एक हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और उसे लोअर के ऊपर से दबाने लगी. मैं दीदी की गार्डन और कन्धा चूमते हुवे दीदी की दोनों चूचिया जोर जोर से दबाने लगा. दीदी के मुंह से आआअह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह अभी की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर तक दीदी की चूचिया दबाने के बाद मैं दीदी की t-shirt को पकड़कर ऊपर करने लगा. दीदी ने भी अपने t-shirt उतरने में मेरा सहयोग करने लगी और अपने दोनों हाँथ ऊपर कर लिए. मैंने दीदी की t-shirt उतर कर सोफे पर रख दी और दीदी की दोनों चूचियों को दबाने लगा.

दी की दोनों चूचिया खूब दबाने के बाद मैंने अपना एक हाँथ उठाकर दीदी की कंधे पर रख दिया और एक कंधे को चूमते हुवे हाँथ वह पर फिरने लगा. दीदी भी मस्ती में मेरा लुंड दबोच दबोच कर दबा रही थी. थोड़ी देर मेरा लुंड दबाने के बाद दीदी अपना हाँथ लुंड पर आगे पीछे करने लगी. मैंने दीदी का कन्धा चूमते हुवे और एक चुकी दबाते हुवे दीदी की ब्रा को कंडे पर से पकड़ा और उनके कंधे से निचे कर दिया और उनके कंधे को चूमने लगा. उसके बाद मैंने एक हाँथ से चुकी दबाते हुवे दूसरे कंधे से भी ब्रा सरककर निचे कर दिया और उनका कन्धा चूमने लगा.



फिर मैंने दोनों हांथो से दीदी की चुकी पकड़कर जोर से दबा दिया और दीदी के कंधे को काट लिया. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh कामिनीईई. धीरीईईए दबाआ. मैंन कहीए भागीय नाहीइ जा रहियी होऊं.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने अपने दोनों हाँथ उनकी चूचियों से उठाकर दीदी के कंधे पर रखा और उसे सरकते हुवे दीदी की ब्रा में दाल दिया और दोनों चूचियों को हांथो में भरकर ब्रा को निचे सरका दिया. अब दीदी की नंगी चूचिया मेरे हांथो में थी. जिन्हे मैं मसल रहा था और दबा रहा था. दीदी मेरे लुंड को जोर जोर से अपने हाथो से मुट्ठ मर रही थी. मैंने दीदी की एक चुकी को मुट्ठी में भरा और एक चुकी की घुंडी को अपनी ऊँगली और अंगूठे में फंसकर दोनों को जोर से दबा दिया. दीदी की माधोसी में चीख निकल गई.



सरिता दी- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh AAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh . धीरे दबाए हरामी. एई टीरियइ बहन कोई चूचीयी हैईईई. टेरिइइइ गफ्फ कोई नाहीई जोऊ इतनीई तेज़्ज़ी सीए दबा रहाहा हीी.

मैं- अब तुममम मेरीए डीडीई कव्वाल घर आलू के सामने हो. अकेले में तुम मेरीए मासकका, मेरीए गुलाम हूँ. समझी.

फिर मैंने दीदी को पकड़कर अपनी तरफ घुमा लिया और दीदी की चूचियों को बरी बरी से मुंह में लेकर चूसने लगा. दीदी ने अभी तक मेरा लुंड नहीं छोड़ा था और वो लगातार उसे दबा रही थी. मैं दीदी की चूचियों को छोड़कर अपना हाँथ दीदी की पीठ पर लेजाकर उनकी ब्रा का हक्क खोल दिया और उसे उतारकर सोफे पर फेंक दिया और एक हाँथ दीदी की छूट पर लोअर के ऊपर से रखकर दबाने लगा. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi दीदी की aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh निकल गई. दीदी अब गरम हो चुकी थी. इसलिए मैंने दीदी को सोफे पर बैठा दिया और अपने हांथो से दीदी की लोअर पकड़कर निकलने लगा. दी ने भी अपने गांड उठाकर लोअर निकलने में मदद की अब दीदी के जिस्म पर सिर्फ एक पंतय hi रह गाइट hi.

मैंने दीदी को सोफे पर लिटा दिया और उनके ऊपर झुककर उनको किश करने लगा. थोड़ी देर दी को किश करने के बाद मैंने अपना मुंह दीदी की चूचियों पर रखकर पिने लगा और एक हाँथ से दीदी की छूट पंतय के ऊपर से मसलने लगा. दीदी अपने हाँथ मेरे सर पर रखकर बालो को सहला रही थी, थोड़ी देर दीदी की चूचियों को पिने के बाद मैं उनकी पेट को चाटने लगा. जिससे दीदी मचलने लगी और आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ssssssssssss करने लगी थोड़ी देर पेट चाटने के बाद मैं दीदी की जांघो को चूमने लगा और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाने लगा. फिर मैंने दीदी की पंतय को अपने मुंह और हाँथ से पकड़कर उनके जिस्म से निकलकर जमीन पर फ़ेंक दिया. दीदी तो एकदम गरम हो गई थी. उनकी छूट पानी बहा रही थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने मुंह दीदी की छूट पर रखकर चूस लिया. दीदी मस्ती में सिसकार उठी.



सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भहाआआईइइइइइइइ. चुस्स्सस्स्स्स मेरिइइइइ चूठ्टटटटट ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने दीदी की छूट को एक हाँथ से फैलाया और अपनी जीभह दीदी की छूट में गुशा दी और चूसने लगा. फिर हाँथ से दीदी की क्लीट को सहलाने लगा. दीदी मस्ती में अपना सर इधर उधर करने लगी. थोड़ी देर जीभ से दीदी की छूट छोड़ने के बाद मैंने अपनी जीभह दीदी की छूट से निकल ली और एक ऊँगली दीदी की छूट में पेल दी और अंदर बहार करते हुवे दीदी की छूट के ऊपर अपनी जीभ फिरने लगा. दीदी मस्ती में बोलने लगी

सरिता di-Aaaaaaaahhhhhhhhhhhh अभीयी. मेरे भैई. कहा जाओ मेरीए छुटत को. बहुतत्त तंगगग करतीय हैई ये मुझी. Oooooooooohhhhhhhhhhh चाट कामिनी ोुरर्र जोरर जोरर सीए चाटत.

इतना बोलकर दीदी मेरे सर को एक हाँथ से पकड़कर अपनी छूट पर दबाने लगी और आह्ह्ह्हह आअह्हह्ह्ह्ह करने लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट चाटने के बाद मैंने उनकी छूट से अपना मुंह हटा लिया और दीदी को उठाकर खड़ा कर दिया और मैं सोफे पर लेट गया और दीदी से कहा.

मैं- आआआअह्हह्ह्ह्ह सरिता डार्लिंगगग अब्ब तुम मेरे लुंड की सेवा करो. फिर देखो तुम्हे कितना मज़ा देता हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी निचे बैठ गई. और लोअर और उव दोने एक साथ निकलकर जमीन पर फेंक दी और मेर लुंड को हांथो से पकड़कर सहलाने lagi.thdi देर मेरा लुंड सहलाने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकलकर मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया.



लुंड चाटने के बाद दीदी ने मुंह खोलकर मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. दीदी जोर जोर से मेरा लुंड चूस रही थी. मैं भी मस्ती में आआह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह करने लगा. थोड़ी देर दीदी लुंड चुस्ती रही फिर लुंड को अपने मुंह में रखकर उसपर जुबान फिरने लगी. मैंने दीदी का सर पकड़ लिया और कमर उठा उठाकर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. दीदी के मुंह से गगगगगगूउऊउउउ गगगगगूउऊउउउ की आवाज़ निकल रही थी. फिर मैंने दीदी के सर को अपने लुंड पर दबाकर होल्ड किया और 10 सेकंड बाद दीदी के सर को छोड़ दिया. दीदी ने अपने मुंह ऊपर किया और हांफने लगी. दीदी के मुंह और लुंड के बिच एक हैंकि थूक की लकीर बानी हुई थी. लुंड मुंह से निकलने के बाद मैं दीदी से कहा.



मैं- सरिता डार्लिंग. आज मैं नहीं आज तुम मेरी चुदाई करो. अपनी दोनों टंगे फैलाकर मेरे ऊपर आओ और अपने हाँथ से लुंड पकड़कर अपनी छूट में डालो.

मेरी बात सुनकर दीदी अपने टंगे फैलाकर मेरी कमर के दोनों तरफ रख लिया और अपने मुंह से ढेर सारा थूक निकलकर अपनी छूट पर लगाया और झुक कर मेरे लुंड को अपने एक हाँथ से पकड़कर बैठने लगी. लुंड छूट के मुंह पर लगाकर दीदी धीरे धीरे मेरे लुंड पर बैठने लगी. मैंने मौके का फायदा उठाया और निचे से अपनी कमर जोर से ऊपर उचका दी. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट में एक hi बार में पूरा घुस गया. दीदी दर्द से चिल्ला ठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh सलएएएए हरामीईईईई. मैंनं लूदडड डालल टूओ रहीए होऊणन अपनी छूटत मई तू चू क्यूओ अपनी गानंदड मरवा रहा हैई कुट्टी. उउउउउइइइइइ मम्मीयियय. मुझी कीटना दररदद्ड हुवेई ही.

Main-(kamar हल्का हल्का चलते हुवे) क्यों नखरा कर रही हो सरिता. कितनी बार तो तुम मुझसे छुड़वा चुइकी हो और चिल्ला तो ऐसे रही हो जैसे पहली बार छुड़वा रही हो.

सरिता दी- आआह्ह्ह्हह कामिनी टुन्नी अपना लुंड देखा हैई एकककदममम घड़ी जैसा लुंड हैई तेरा. भले ही मैं छुड़वा चुकी हूँ तुझसे लेकिंन तेरे गद्दे जैसे लुंड की सम्मन मेरी छूट बहुत छोटी है.

इतना बोलकर दीदी मेरे लुंड पर ऊपर निचे होने लगी. पहले धीरे धीरे फिर तेज़ तेज़ दीदी अपनी छूट को मेरे लुंड पर पटक रही थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी की पेट में अपनी बहे डालकर दीदी को अपने ऊपर लिटाया और अपनी कमर को जोर जोर से धक्के देने लगा. मेरा लुंड सटासट अंदर बहार होने लगा. मैं हाँथ ऊपर करके दीदी की एक चुकी को हाँथ में पकड़ लिया और उसे दबाते हुवे जोर जोर से धक्का मरने लगा. दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था. जो उनके एक्सप्रेशन से साफ़ पता चल रहा था. वो जोर जोर से बोलने लगी.



सरिता दी- Aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भाईईई. ऐसी हीई चूडड़ड मुझी. बहुत्त अछ्हा लग रहा है ooooooooooohhhhhhhh और जूर्रर सीए चूडू मुझी उउउउउउउइइइइइइ मम्मीयीय. मैं मर्डर गईई ोुह्ह्ह्हह्ह अभियई. मरररी ख़ासाममम हैं औरर जोरर सीए छोड़ सल्ल्ली हरामीई. टीरी डीडीई बहुत्त पयासीय हैई. उसकीय पास बुझा दिए मेरे चुदऊ सनमम. Oooohhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाईई.

मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh सरिताआए. टूउउ बआहूतट छुडासीई हैईईई. दीखहहह कईसेई चिल्ला राहीइ हीी चूडड़नी की लिया. ऑर्डर अपनी भाईईसीए छोड़नी की लिये काह रहीए हैईईई. चू बाऊट बड़ीई चुड़कक्कड़ड लाड़कीय हीी. टुन्नी अप्पपणी भाईई कोऊ भी नाहीइ छुङा. सालीईई चुड़कक्कड़ड सरितत्ता.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड की स्पीड काम कर दी और दीदी की दोनों चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा और उनकी गार्डन को जीभ निकलकर चूसने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi चूचिया दबाने और छूट चुदाई से दीदी एकदम मदहोश हो गई और मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- oooooooooooohhhhhhhhhhhhhh मम्मी. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या छुडाईइइइइ करता हैई चू भाईईई. तुझीऐ अच्छी सी पाटा ही की छूट कैसी चूड़ी जाती ही. औरर तेज़ छोड़ड़ड़ साली. बस्स्स इतना hi डैम हैई क्या कामिनी. डैम लगाकर छोड़ मुझी. Aaaahhhhhhhhhh uuuuuuuiiiiiiiiiii मुम्ममइय्यययययय.

मैंने दीदी की बात सुनकर दीदी की दोनों चूचिया पकड़कर मरोड़ दी और पूरा डैम लगाकर हचक हचक कर अपनी कमर उछलकर दीदी को छोड़ने लगा. दीदी झड़ने के करीब पहुंच गई और मस्ती में बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह उउउउउउउइइइइइइइइइ मम्मीयिययियी. फाडड्ड डालललल्लआआआ साली हरामी नई मेरीए छूटत. हायययययय कुट्टी कैसा मुस्टंडा लौड़ा पॉलललल रखा हैई तुणीऐ. ऊऊऊऊह्ह्ह्ह बहनचूड्डड्ड. मेरीए चुउत्त्त फात गाइइइइइइइ. मैंन पहली सीए जान्तीय होउठीई कोई टीर्रा लुंदड़ बुरर्र फ़ाड़ूऊ ही तू कभी भी तुझसी नही चूडड़वाटीई साली. औरर जूर्रर सी पीएल मैंनं झाड़नी वलल्लीए होऊणन्न आआआआह्ह्ह्हह्ह मैंन ागीयी ाभीईई. संम्भालल मुझी. फुकककक मई हरदीररर. कामिनी तू मुझी शुऊररू सीए हीई छोड़ना चाहतत्ता था कुट्टी. देखहह टेर्री लौड़ी नई मेरीए चुउत्त्त पारर पूरा कब्जा कर लिया हैआईईई. मैंनं gaaiiiiiiiiii मेरी साजाननं ऊऊह्ह्ह्हह्ह.

इतना कहकर दीदी झाड़ गई और मेरे ऊपर निढाल हो कर लम्बी लम्बी साँस लेने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-118



सरिता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह उउउउउउउइइइइइइइइइ मम्मीयिययियी. फाडड्ड डालललल्लआआआ साली हरामी नई मेरीए छूटत. हायययययय कुट्टी कैसा मुस्टंडा लौड़ा पॉलललल रखा हैई तुणीऐ. ऊऊऊऊह्ह्ह्ह बहनचूड्डड्ड. मेरीए चुउत्त्त फात गाइइइइइइइ. मैंन पहली सीए जान्तीय होउठीई कोई टीर्रा लुंदड़ बुरर्र फ़ाड़ूऊ ही तू कभी भी तुझसी नही चूडड़वाटीई साली. औरर जूर्रर सी पीएल मैंनं झाड़नी वलल्लीए होऊणन्न आआआआह्ह्ह्हह्ह मैंन ागीयी ाभीईई. संम्भालल मुझी. फुकककक मई हरदीररर. कामिनी तू मुझी शुऊररू सीए हीई छोड़ना चाहतत्ता था कुट्टी. देखहह टेर्री लौड़ी नई मेरीए चुउत्त्त पारर पूरा कब्जा कर लिया हैआईईई. मैंनं gaaiiiiiiiiii मेरी साजाननं ऊऊह्ह्ह्हह्ह.

इतना कहकर दीदी झाड़ गई और मेरे ऊपर निढाल हो कर लम्बी लम्बी साँस लेने लगी.

अब आगे.

दीदी के झाड़ जाने के बाद वो मेरे ऊपर निढाल होकर लेती रही और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मैं अभी भी अपने लुंड को धीरे धीरे दीदी की छूट में पेल रहा था. लगभग दीदी 5-7 मिनट मेरे ऊपर लेती रही फिर मैंने दीदी उठने के लिए कहा और दीदी के उठने के बाद मैं भी सोफे से उठकर खड़ा हो गया और दीदी को अपनी बहो में भरकर उनके होंठो को चूमने लगा. और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाने लगा. दीदी भी मेरे होंठो को चूमने लगी और एक हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी थोड़ी देर दीदी को चूमने के बाद मैंने दीदी को धकेलकर दिवार के सहारे खड़ा कर दिया और एक हाँथ से उनकी छूट को मसलने लगा. दीदी फिर से गरम होने लगी.

मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे उनकी चुकी दबाते हुवे छूट में ऊँगली करने लगा. थोड़ी देर तक ऐसे करने के बाद जब दीदी एकदम गरम हो गई तो मैंने दीदी के एक पेअर को अपने कंधे पर रखा और दीदी को किश करते हुवे अपने लुंड पर थूका लगाकर उसे दीदी की छूट के मुंह पर रख दिया और एक झटके में दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी ने मेरे मुंह से अपने होंठ आजाद किया और मस्ती में सिसकते हुवे बोली.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiii. धीरीईई सीई. बहुतत्त अच्छा लग रहा है.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने दीदी को धीरे धीरे छोड़ना शुरू कर दिया. मैं एक हाँथ से दीदी की चुकी दबा रहा था और अपनी जीभ निकल कर दीदी के चेहरे और गले को चाटने लगा दीदी ssssssssssss aaaaaaaaaaaaa ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करने लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट छोड़ने के बाद दीदी का पांव सरककर मेरी कलाई के पास आ गया. जिसे मैंने अपना ठंठ मोड़कर कपड़ लिया और जोरदार तरीके से दीदी को छोड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh जानऊउउउउ. बहुतत्त अछ्हा छोड़ रही हूँ. औरर जोरर सी छोड़ू मुझही. फाड़ डालू मेरी छूट को. बहुत्त तड़पती है ये मुझी. आजजज िस्किई सरई तड़प मिटता दोऊ. आजजज सी चू मेरा साजन हैई. छोड़ मुझी और जोर से चुड़ड़ड़ड़ड़ भैइयाआ राजा.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को दीवाल से एकदम सत्ता दिया और और चुकी से हाँथ हटाकर दीदी की दूसरी तंग में ललकार उन्हें दीवाल के सहारे ऊपर उठा लिया. अब दीदी के दोनों पेअर मेरी कलाई में फंसे हुवे थे और मैं दीदी की छूट को ताबड़तोड़ टिके से पेल रहा था. शायद दीदी अब दीवाल के सहारे संभल नहीं प् रही थी इसलिए उन्होंने अपने दोनों हाँथ मेरी गर्दम में लप्पेट कर मुझे पकड़ लिया और स्स्स्सस्स्स्स आआह्ह्ह्हह्ह करने लगी. मैं दीदी को दीवाल में सटाकर ताबड़तोड़ धक्के मर्डर रहा था. जिससे दीदी एकदम गरम हो गई और बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कामिनी और जोर से चूडड़ड मुझी पूरा अंडरर टाक डाल कर छोड़ अपना लौड़ा. जल्दी जल्द्दी छोड़ड़ड़. दाम लगाकर चूड्डड्ड साली फाडड्ड दी मेरीए छूट को. टूउउ बहुत्त अछ्हीइ चुड़ायी कर्त्ता हीी औरर जोरर सी चूडड़ड मैंन ायनी वलियी हुऊ कुट्टी. औरर डैम लगा कर चूडड़ड.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार निकल लिया और दीदी की उतर कर जमीन पर खड़ा कर दिया. दीदी एकदम मस्ती में थी और छूटने वाली थी. इसलिए वो मुझसे गुस्से में बोली.

सरिता दी- आआआआहहहहह सेल कामिनी . लुंड क्यों बाहर निकाल लिया तुणी. मैं झड़ने वाली थी और तू मुझी तड़पा रहा ही. कामिनी.

मैं- अब मुझे तुम्हारी गांड मारनी है. उसके बाद hi तुमको ठंडा करूँगा.

सरिता दी- गांड मरना जरुरी है क्या. पिछली बार मैं 3 दिन ठिक्क से चल नहीं पाई थी. क्यों मेरी जान का दुसमन बना हुवा है. छूट hi छोड़ ले. मुझेकितना मज़ा आ रहा था, लेकिन तूने सारा मज़ा ख़राब कर दिया.

मैं- अच्छा ठिक्क है सरिता जैसा तुम कहोगी वैसा hi होगा.

इतना कहकर मैं दीदी को लेजाकर सोफे पर झुका कर खड़ा कर दिया और झुककर अपनी जीभ निकल कर दीदी की छूट चाटने लगा और छूट में एक ऊँगली डालकर गीला किया और उसे दीदी की गांड में पेल दिया दीदी दर्द के साथ कराह उठी.

सरिता दी- आआआहहहहहहह Abhiii.kyaa कर रहा है. वह्हा मत कार मुझी डार्दद होगा.

मैं- (ऊँगली गांड में पेलते हुवे). मैं लैंड कहा दाल रहा हूँ अंदर. बस तुम्हारी गांड है hi इतनी जबरदस्त और कातिल की मैं अपने आपको रोक hi नहीं पाया इसके साथ खेलने से.

इतना कहकर मैं दीदी की छूट चाटते हुवे दीदी की गांड में ऊँगली पेलता रहा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने ढेर सारा थूक दीदी की गांड पर गिरा दिया और उसे दीदी की गांड में डालने लगा. दीदी की गांड में जब मैंने पूरा थोक दाल दिया तो मैंने फिर से अपना ढेर सारा थूक दीदी की गांड पर गिराया और उसे दीदी की गांड में डालने लगा. इसी तरह मैंने कई बार दी की गांड पर थोक गिरता और पूरा अंदर दाल देता. अब दीदी की गांड बहुत चिकनी हो गई इसलिए मैंने मैं उठकर अपने लुंड पर थूक माला और अपना लुंड दीदी की छूट पर रखकर एक झटके से दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी की मस्ती भरी सिसकी निकल गई.

सरिता दी- ooooooooohhhhhhhhhhh अभियई. ारररममम सी छोड़ अपनी दीदी को.

दीदी की बात सुनकर मैंने ढेर सारा थोक झुककर दीदी की गांड पर फिर गिराया और दीदी की गांड में डालने लगा तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- तू मेरी गांड के पीछे क्यों पड़ा है. मुझे तेरे इरादे ठीक नहीं लग रहे हैं.

Main-main कुछ नहीं करूँगा सरिता. बस तुम्हारी गांड को चिकना कर रहा हूँ ताकि मेरी ऊँगली आसानी से तुम्हारी गांड में घुस जाए और तुमको दर्द न हो.

इतना कहकर मैं दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. पूरा सोफे मेरी चुदाई से हिल रहा था. मैं एक हाँथ आगे बढाकर दीदी की चुकी को पकड़कर मसलते हुवे दीदी की छोड़ने लगा. दीदी मस्ती में सिसकारने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी साजाआं. ऐसी ही छोड़ो अपनी सजनी को. और कास कास कर छोड़ू. मुझी बहुत्त अछ्हा लग ग रहा हैई. Ooooooooooohhhhhhhhhh भैई. चू छुडाआईई मई मस्टेररर ही भाआईई. और जोरर सी छोड़ मुझी. फाडड्ड डालल मेरीए छूटत को. बनाए दी इसका भोगसस्सदा. Uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्य्यय्य.

दीदी मस्ती में बड़बड़ा रही थी. मैंने इसी मौके का फायदा उठाकर अपना लुंड दीदी की छूट से निकलकर दीदी की गांड पर रख दिया. अभी दीदी कुछ समझ पति उससे पहले hi मैंने एक करारा शॉट मर दिया. मेरी लुंड दीदी की गांड की दीवार को चीरता हुवा आधा उनकी गांड में घुस गया. दीदी दर्द से चीख पड़ी.



सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मुनमम्मीयिययीय. मर्डर गाइइइइइ मईंण. साली हरामी निक्काललललल. मुझी दररदद्ड हूँ रहःहा हैई.

मैंने दीदी की बात न सुनते हुवे लुंड को टोपे तक दीदी की गांड से निकला और पूरी तकर से अपने लुंड दीदी की गांड में थोक दिया. मेरा धक्का इतना जबरदस्त था की दीदी औंधे मुंह सोफे पर गिर पड़ी. दीदी का चेहरा सोफे के ऊपर से बहार निकल गया . दीदी के मुंह से एक भयानक चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh kamineeeeeeeeee मदरररछोड़ड़ड़ड़. मारररररररर दलाई रीई. बहार निकाल सलेटी. मेरीए गाँण्ड फाड्ड़ड़ड़ड़ डीइइइइइइ तूंबीएए. कोईई बचाऊऊऊ मुझी इस बहाननं की लौड़ी सीए. एई मेरा खूंणंन्न करनी पारर उतरुणु होऊ गया हीी. ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीयीय अपनी सरित्ता कोऊ बाछहा लूओ नाहीइ तू तुम्हारा बेटा उसी मारर्र डालेगा. Uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiii मम्मीयिययीय. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh. निकालल भहाररररर बहनचोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़. मुझी नाहीइ छुड्वाना तुझसी. छोड़ड़ड़ दी मुझी harammiiii.jaanee दी मुज्झी. रहममममम कर अपपनी डीईई पारर भाड़वी.

मैंने दीदी की चीख की परवाह किये हुवे जोर जोर से दीदी को छोड़ता रहा. दीदी की आँखों से आँशु बहने लगे. वो मुझसे छूटने के लिए गुहारर कर रही थी. लेकिन मुझे उस समय सिर्फ और सिर्फ दीदी की गांड नज़र आ रही थी. ऐसे hi 3 मिनट दीदी की गांड छोड़ने के बाद दीदी थोड़ा नार्मल हुई, लेकिन उन्हें अभी भी दर्द हो रहा था. दीदी फिर से अपने आपको छुड़ाने के लिए मुझे गली देते हुवे बोली.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh साली कामिनी. मुझी मारर्र कररर ही दाम्म्म लेगा kyaa.baahar निकालल अपनी लुंड को हरामी. Ooooooohhhhhhhhhhhhhh डीडीईई मुझी बचावूओ इस हांथिई के लौउदी सीए. यी तुम्हारी बहन को मार देगा.. बहुत्त दररदद्ड होऊ रहा हैई मुझी. रहममम कर मुझ्पारररर औरर बाहर निकलल ली.

मैं- लिए ऑरररर अंदर तक्क leee.puraa लुंड ली अपनी गण्ड mee.aaj मैं तेरी गण्ड को फाड़ डालुंगगा. ोुरर्र सविता को कीयू बुल्ला रही हैई. वोऊ तुझी बछायेगीइ मुझसेइ. वो तू खुद्द मेरा लुंड ghot-tii ही. आगार वो आ भी गई थू मैं उसे भी तेरी साथ पटकक कर छोड़ दूंगा. ली सल्लीइ बहुत्त गण्ड मटका कर चलती थी तू न. आज तेरी गांड की साडी नस मैं छोड़ छोड़ कर ढीली कर दूंगा.

इतना कहकर मैं दीदी की गांड छोड़ने लगा. थोड़ी देर दीदी की गांड छोड़ने के बाद दीदी को भी अब अच्छा लगने लगा था. वो भी अपनी गांड पीछे उछाल उछाल कर मेरा लुंड अंदर ले रही थी. मैं दीदी की गांड मरते हुवे अपनी हथेली से दीदी की छूट मसलने लगा. दीदी भी अब मस्ती में आकर अपनी गांड मरवाने लगी. मैंने जब ऊँगली से दीदी की क्लीट मसली तो दीदी एकदम तड़पकर बोली.

सरिता दी- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई. अब्ब्ब मेरिइइइइ छूट की प्यास बुझा दी. मुझी ठंडी कर दी. मेरी गण्ड तुणी मार ली अब्ब मेरी छूट का भी कल्याण कर दे मेरी राजा भैइयाआ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह प्ल्ज़्ज़ भईई.

दीदी के इतना कहने पर मैंने 4-5 जोरदार ढक्की दीदी की गांड पर मार्कर अपना लुंड दीदी की छूट से निकल लिया और दीदी को पलटकर सोफे पर लिटा दिया और उनकी टैंगो के बिच बैठार अपना लुंड छूट पर रखकर एक झटके में पूरा लुंड दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी मस्ती में सिसक उठी.



सरिता दी- aaaaaahhhhhhhhhhhh मेरी सजाननं. आरामम सीए छोडोऊ अपनीइ सजनी को.

दीदी की बात सुनकर मैं तडडतोड़ धक्के मरने लगा. दीदी मस्त हो गई और अपनी कमर उछाल उछाल कर मुझसे छुड़वाने लगी. मैं भी दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. दीदी नशीली आवाज़ में बोली.

सरिता दी- आआह्ह्ह्ह भाईईई. छोड़ मुझी . औरर जोरर सी चूडड़ड. मैं बहुत्त तडपीई हुऊ लुंड के लिये. मेरी प्यास बुझा दी अपनी मोठे लौंडी सी. तुणी अब्ब्ब टाक अपना यी लौड़ा कहाँ छुप्पा कार्र रखा था. बड़ा मुस्टंडा लौड़ा ही तेरा भाई. और हचक हचक कर छोड़ अपनी दीदी को और मेरी छूट की आग को ठंडी कर दे.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh सरिता. बहुत्तत्त जबरदस्त माललळ ही तू. औरर कमाललळ की चुदाई करवाती ही चू. तुझी टू मैं रुजज छोड़ूँगा. तुझी प्यूरी घर्र मी दौड़ा दौड़ाकर छोडूंगा. तू ेक्क्क बार मी थांडी हूँ जानी वाली चीज्ज नाहीइ हैई. तुझीऐ तू रूजज मेरा तागड़ा लुंड ही चूड हुड्ड कर थांडी करेगा. ली सलिई मेरा लुंड पूरा अपनी छूट में.

मैंने दीदी की दोनों तंग को उनकी चूचियों से सत्ता दिया और जोर जोर से उन्हें छोड़ने लगा. मैं और दीदी दोनों अब झड़ने की कगार पर पहुंच गए. इसलिए दोनों मस्ती में बड़बड़ाते हुवे एक दूसरे को गली देने लगे.



मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh सलीईई सरिताआ. बहुत्त करारा माल हैई चू. तुझी छोड़कर तू मुझी जन्नत का मज़ा मिलता है. चू बहुत्त चुड़क्कड़ ही. ले और अंदर ले मेरा लौड़ा. तू बहुत बड़ी रंडी ही सरिता. तुझीऐ तू बिछह चौराही पारर नंगीई करके पटक पटक कर छोड़ना चाहियेए. Aaaaaahhhhhhhhhhh सरिता. मेरा होनी वाला हैई. मैंन आए रहा होऊं. मुझी रास्ता दोऊ सरिता aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh.

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh साली अभी. चू बहुत्त बड़ा ठरकी हैई. तुणीऐ अपनी बहन को भी छोड़ दिया. तुणी मुझी छोड़ कररर अपनी रांदडीई बना लिया हीी कुटीऐई. तेरा जैसी मैं कर्रे जंहा मंत्र करी औरर जब मंत्र करी तू मुझी छोड़ लिए. मैंन तेरी गुलामं हूँ गई होऊं तेरी लौड़ी की गुलामं. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh oooooooooohhhhhhh बाहँणकद्द. मैंन भी झड़ने वालीए होऊं. Aaahhhhhhhhhhh.

मैं और दीदी दोनों साथ में झाड़ गए. मैं झाड़कर दीदी के ऊपर लेट गया. हम दोनों अपनी उखड़ी हुई सांसो को दुरुस्त करने लगे. लगभग 5 मिनट बाद हमारी सांसे नार्मल हुई तो दीदी ने मुझे अपने ऊपर से उठने के लिए कहा, लेकिन मैं नहीं उठा तो दीदी ने मुझे डैम लगाकर तेल दिया जिसके कारन मैं जमीन पर गिर पड़ा. दीदी उठकर सोफे पर बैठ गई. मैंने uth-te हुवे दीदी से कहा.

मैं- ये क्या था यार सरिता.

सरिता दी- सेल तू मेरे ऊपर हठी जैसा पड़ा था. मुझे कितनी तकलीफ हो रही थी. मैंने तुझे उठने के लिए कहा. लेकिन तू मेरी बात सनटैन hi कब है.

मैं- मैंने कब तुम्हारी बात नहीं सुनी. हर बात तो मंटा हूँ तुम्हारी.

सरिता- कुत्ते कमीने हरामी सेल. मेरे मन करने के बाद भी तूने मेरी गांड इतने बेदर्दी से मरी है की इसके सरे नट बोल्ट ढीले हो गए हैं. तू बहुत बेरहम है.

मैं- सच सच बताना. तुमको मज़ा नहीं आया गांड मरवाने में.

सरिता दी- सच कहूँ तो तू जितनी बेरहमी से छोड़ता है मुझे. शुरू शुरू में तो बहुत तकलीफ होती है, लेकिन बाद में इतना मज़ा आता है की पूछो hi मत. सच में तुझसे छुड़वा कर मैं तेरी गुलाम बन गई हूँ. तू अच्छी तरह से जनता है की लड़की को कैसे खुश किया जाता है.

मैं- (आँख मरते हुवे) मैं लड़की को hi नहीं औरत को भी खुश करना जनता हूँ. तभी तो मेरी दोनों बहाने आज मुझसे छुड़वाने के लिए तड़पती रहती हैं.

सरिता दी- चल हैट सेल. मैं नहीं तड़पती वेदपति. तू hi मुझे बहकाकर ये सब करता है मेरे साथ.

मैं- चलो अच्छा है इसी बहाने तुमको भी मज़ा मिल जाता है.

मेरी इस बात पर दीदी मुस्कुराने लगी. थोड़ी दे रेज बैठे रहने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- एक बात कहूँ दीदी.

सरिता दी- हाँ बोल क्या बात है

मैं- आज शर्मा अंकल की लड़की की शादी है तो उसमे जाओगी आप

सरिता दी- नहीं मेरा कोई मन नहीं है वह जाने का. तू ये क्यों पूछ रहा है.

मैं- बात ये है दीदी की मैं सोच रहा था की आप उधर चली जाओ. और मनीषा को मैं यहाँ रोक लेता हूँ. वो अकेले रहेगी तो मैं उसको पटाने का तरय करू.

सरिता di(aankh दिखाकर) देखो कमीने को. दोनों बड़ी बहने को छोड़कर भी इसका मन नहीं भरा. कैसे छोटी बहन के लिए लार टपका रहा है. कुछ तो शर्म कर. तू सच में बहुत बड़ा ठरकी है.

मैं- क्या दीदी आप भी. अगर मैं ठरकी हूँ तो आप भी काम नहीं हो. मैं ये सब केवल अपने लिए hi नहीं कर रहा हों हम दोनों के लिए कर रहा हूँ. क्या आप नहीं चाहती की हम दोनों बिना दर के जब चाहे. एक दूसरे की प्यास बुझा सके.

सरिता दी- चाल अब ज्यादा मस्का मत मार. मुझे पता है की तेरी नियत मनीषा पर भी ख़राब हो चुकी है. मैं तो एक बहाना हूँ. तू मेरे कंधे पर बन्दुक रखकर मनीषा को निशाना बनाना चाहता है. और कह रहा है की ये मेरे लिए कर रहा है.

मैं( शरारत के साथ) तुम्हारे कंधे पर नहीं सरिता बल्कि तुम्हारी छूट में बन्दुक डालकर रोज निशाना लगाना चाहता हूँ. और इसके लिए मनीषा की छूट में एक बार मेरी बन्दुक से सही निशान लगाना बहुत जरूरी हो गया है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी हंसने लगी और हँसते हुवे बोली.

सरिता दी- तू न अभी. सच में पूरा पागल है. कहाँ की बात कहा पंहुचा देता है.

मैं- चलो दीदी अब तो चुदाई हो गई. अब जल्दी से अपने अपने कपडे पहन लो. मनीषा के आने का समय हो गया है.

फिर मैंने और दीदी ने हॉल में पड़े अपने अपने कपडे उठाये और पहनने लगे. अभी हम कपडे पहन hi रहे थे की दरवाज़े की घंटी बजी. दीदी भागकर अपने कमरे में चली गई और मैं कपडे पहनकर t.v. ों किया और दरवाज़ा खोलने चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
बहुत बहुत धन्यवाद आपका सर जी।

आपने मेरी कहानी पर टिप्पणी की। मुझे बहुत ही अच्छा लगा। कोई भी कहानी जो भी मैं पढ़ती हूँ अगर वो विस्तार से लिखी गई है तो मुझे बहुत अच्छी लगती है। इसलिए मैं अपनी कहानी विस्तार से लिख रही ही। हर परिस्थिति को। हर बात-चीत को। इसीलिए मेरी कहानी बहुत लंबी हो गई है। फिर भी कहानी पाठकों को पसंद आ रही है, इसलिए मैं इस कहानी को पूरी सिद्दत से लिख रही हूँ।

मैं तीनों बहनों का अभी के साथ मौज-मस्ती को भी पूरा विस्तार से लिखूँगी।

साथ बने रहिएगा।
 
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