Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 182 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

दोनों भाइयों ने कभी अपनी चचेरी बहनों की चूत में जीभ नहीं डाली थी, लेकिन गुलाबो से मिले प्रशिक्षण के बाद अब वे अपनी चचेरी बहनों को अभूतपूर्व आनंद दे रहे थे। फनलवर की प्रस्तुति।


छोटा भाई बड़ी बहन (दीदी) की चूत चाट रहा था, जबकि मोटा भाई गुड्डी की चूत को चूस रहा था। दोनों ने अपनी-अपनी हिस्से की चूतों पर कब्जा जमा लिया था। उनकी जीभें चूत के होंठों, क्लिटोरिस और अंदर तक घुस रही थीं। दोनों बहनों की चूतें अब पूरी तरह गीली और चमकदार हो चुकी थीं।

“ओह भैया... ये पाप है... भाई-बहन में ऐसा नहीं होना चाहिए...” दीदी ने कराहते हुए कहा, लेकिन उसकी टाँगें खुद-ब-खुद और चौड़ी हो गईं।

छोटा भाई ने दीदी की जाँघों को और फैलाते हुए, चूत पर जोर से चाटते हुए बोला,

“चुप कर... तेरी माँ की चूत भी यहाँ चुसी जा सकती है। तू चुपचाप अपने पैर फैला और मुझे तेरी चूत के अंदर तक जाने दे... बाकी पाप को जाने दे तेरी माँ की गांड में। यहाँ इस घर में कोई पाप नहीं है। तेरे पास चूत है और हमारे पास लंड... लंड और चूत की लड़ाई तो हर घर में होती है... फिर ये पाप कैसे हुआ?”

बड़े भाई ने गुड्डी के पैरों को विपरीत दिशा में खींचते हुए उसकी चूत को और जोर से चूसना शुरू कर दिया। गुड्डी ने अपने कूल्हों को झटका दिया और जोर-जोर से कराह उठी,

“आह्ह्ह... ऊऊऊ... माँआआ... बहुत मजा आ रहा है... आह्ह्ह्ह... बहुत मस्ती... ओह्ह... मर जाऊँगी... पागल हो जाऊँगी... भैया... और चूसो... मेरी चूत चूसो...”
रचयिता फनलवर है।

इस तरह दोनों भाइयों ने कल दोपहर को कार में गुलाबो के साथ हुई अपनी यौन मुठभेड़ को याद किया। उन्होंने 69 पोजीशन ले ली। उन्होंने लड़कियों से सीधे नहीं कहा कि लंड चूसो, लेकिन जब दोनों बहनों ने उनके तने हुए, फड़कते लंड को अपने मुँह के सामने देखा, तो कुछ झिझक के बाद उन्होंने लंड को चूमा और फिर लौड़े के ऊपरी हिस्से को चूसना शुरू कर दिया।

“दीदी... मुझे नहीं पता कि लंड चूसने में मुझे अच्छा लगेगा... मैं तो पूरा लंड खा जाऊँगी...” गुड्डी ने शरमाते हुए कहा।

गुड्डी की बात खत्म होने से पहले ही दीदी ने छोटे भाई का मोटा लंड मुंह में भर लिया। अब दोनों जोड़े ओरल सेक्स का आनंद ले रहे थे। कुछ देर बाद उन्होंने पोजीशन बदली और अपनी चचेरी बहनों की टाइट, गीली चूतों में लंड घुसा दिए।

“आप लोग बहनचोद बन गए हैं...” दीदी ने कराहते हुए कहा और अपने हिप्स ऊपर करके झटका दिया ताकि लंड पूरी तरह अंदर समा जाए।

“और तुम दोनों मादरचोद चुदासी बन गई हो...” बड़े भाई ने गुड्डी की चूत में धक्का मारते हुए कहा।

“लेकिन मैं मुफ्त में नहीं चोदूँगा... एक चुदाई का 10,000 रुपये दूँगा... ताकि तुम दोनों को याद रहे कि कभी रंडी बनकर तुम अपने भाइयों से चुदवाई थी...” बड़े भाई ने मुस्कुराते हुए कहा।

इस तरह दोनों भाइयों ने चचेरी बहनों के साथ खूब मजा लिया। चुदाई का दूसरा दौर खत्म होने के बाद दोनों लड़कियों को दोनों भाइयों का गरम वीर्य पिलाया गया। जैसा बड़े भाई ने कहा था, उन्होंने प्रत्येक को 20,000 रुपये का भुगतान किया और वादा लिया कि जब तक वे घर में रहेंगे, हर रात वे दोनों भाइयों के साथ रंडी की तरह काम करेंगी।

सुबह जब दोनों बहनें कमरे से बाहर गईं, तो किसी को अंदाज़ा नहीं हुआ कि एक ही रात में दोनों ने दो-दो लौड़े लेकर चचेरे भाइयों के साथ चुदाई का मजा लिया है और पैसे भी लिए हैं। उन्होंने असली वेश्या का अनुभव प्राप्त किया था।
निर्मात्री फनलवर है।

अगली दो रातें भी दोनों जोड़ों ने बिना किसी हिचकिचाहट और प्रतिरोध के मजे किए। दूसरी और तीसरी रात लड़कियों ने लेस्बियन क्रिया का भी आनंद लिया और गांड भी चुदवाई। अब तक उन्होंने अपने पतियों के साथ सिर्फ मिशनरी पोजीशन में चुदाई ही की थी।


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Funlover.
 
किरण और परम

जबकि दोनों भाई चचेरी बहनों को बहका रहे थे और उनके साथ मजे कर रहे थे, परम ने पिछली रात की तरह किरण की चुदाई की थी। किरण तो पहले ही एक रखैल बन चुकी थी।
फनलवर द्वारा निर्मित

परम का लंड अपनी चूत में लेते हुए किरण ने सुबह सुंदरी के साथ अपने अनुभव का ज़िक्र किया और बताया,

“मैं बहुत खुश हूँ कि तुम दोनों बाप-बेटे का मस्त लंड मिला... लेकिन तुम्हारे बाप का कोई जवाब नहीं... साले का क्या मस्त सुपारा है... कोई भी चूत को चीरते हुए अंदर तक चला जाता है। वो साला भाभी का ड्राइवर का लौड़ा तुम बाप-बेटे के लंड के सामने कुछ भी नहीं है। तू मेरी शादी में जरूर आना... अपनी भाभी को तुम्हारा लौड़ा दिलवाऊँगी। कुतिया पागल हो जाएगी तेरा तन-तनाता हुआ लोडा लेकर...”

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किरण चुत्तड़ उछाल-उछाल कर मरवा रही थी। उसकी मोटी, गोल गांड परम के हर धक्के पर जोर-जोर से हिल रही थी। परम नीचे से ऊपर की तरफ तेज-तेज धक्के मार रहा था। किरण की चूत अब पूरी तरह गीली, चिपचिपी और लाल हो चुकी थी।

परम को यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि इस कुतिया को उसके बाप (मुनीम) ने भी चोदा है। चुदाई करते हुए परम के मन में एक खतरनाक फैसला पक्का हो गया, कल सुबह मेरे घर जाकर सबसे पहले बाप के सामने माँ को चोदेगा।

“हरामी रोज बेटी की चुदाई करता है... उसकी बेटी मेरा भी माल है... और सबसे बड़ी बात ये है कि साला मेरा बाप मेरे ही मालों के सिल तोड़कर मेरे पास भेजता है...”

किरण ने परम की छाती पर हाथ रखकर कूल्हे तेजी से हिलाते हुए कहा,

“मेरा तो मन करता है कि एक के बाद एक तुम दोनों बाप-बेटे से चुदवाऊँ...”

“इसमें क्या है?” परम ने जमकर धक्का मारा। उसका लंड किरण की चूत के सबसे गहरे हिस्से तक पहुँच गया।

“शादी के बाद हमारे घर चलना... और वहाँ हम दोनों तेरी एक साथ मारेंगे... मैं अपने एक दोस्त को भी बुला लूँगा, साला बहुत बड़ा चुदक्कड़ है। मेरा बाप का लंड तेरी गांड में मत लेना वरना दो दिन तक चल नहीं पाएगी। और वह कहीं भी और कभी भी चोदता रहता है...”
संपादिका मैत्री पटेल

परम ने किरण को और जोर से पेलना शुरू कर दिया। धना-धन... धप-धप की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। किरण ने पैर ऊपर उठाकर चुदाई का पूरा मजा लेने लगी।

“किरण, तेरी चूत तो अभी बहुत जवान है... 3-4 बार ही चुदी है लेकिन वेश्या... तेरी माँ की चूत भी बहुत मस्त है और रसदार भी... आज तेरी माँ को चोदने में मजा आ गया...”

“साला... मेरी माँ को कब चोदा?” किरण ने आश्चर्य और उत्तेजना से पूछा।

परम ने किरण की चूत में लंड घुसाते हुए विस्तार से बताया कि कैसे पूनम ने उसकी माँ को इतना गर्म कर दिया कि वह बुरी तरह लंड चाहने लगी। पूनम ने उसे बुलाया और फिर उसने मौसी (किरण की माँ) को चोदा और उसे ठंडा कर दिया। परम ने उसे यह भी बताया कि छोटी और बड़ी बहू दोनों ने उसे मौसी को चोदते हुए देखा था।

“ऐसा कर... तू अपने साथ अपनी माँ को भी लाना... और फिर हम सब जमकर चुदाई-चुदाई करेंगे... तेरी माँ से तेरा चूत भी चटवाऊँगा...”

“आह्ह्ह परम... फाड़ डाल...” किरण ने जोर से चीखते हुए कहा।
फनलवर का निर्माण

और थोड़ी और देर की चुदाई के बाद किरण थक गई। परम के ऊपर तो टैबलेट का असर था और किरण को थकाने के बाद भी लंड टाइट ही रहा।

किरण ने परम को अपने शरीर से अलग किया और पूछा,

“देख... तेरा लंड अभी भी तैयार है... बुला दूँ कुतिया को... मेरी माँ को फिर चोदेगा?”

लेकिन परम रेखा और बड़ी बहू को चोदना चाहता था, हालाँकि उसे कई दिनों से अच्छा मजा नहीं आया था।

“अभी नहीं... तू थोड़ा आराम कर... तो जा... बाद में हम फिर मजा लेंगे।”

परम ने किरण को बाहों में लिया और उसके जवान, नाजुक बदन को सहलाने लगा। पूरी चुदाई के बाद किरण थक गई थी और मुनीम के लंड के बारे में सोचते हुए सो गई।



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Funlover.
 
परम उठा। किरण को नंगी सोती हुई देखा। वह सीधी सोई हुई थी और शायद अब तक भर बाँध में आ गई थी। उसने उसकी निप्पल को थोड़ा खींचा और फिर छोड़ दिया। लेकिन किरण अब सब घोड़े बेच के सो रही थी।

परम ने उसे थोड़ा पलटा दिया और मस्त मजे की गांड का छेद उसके सामने आ गया। उसने झुककर देखा तो उसकी गांड उसके चुतरस से भीगी पड़ी थी और उसका अपना वीर्य भी शामिल था। गांड का गुलाबी छेद अभी भी थोड़ा खुला हुआ था और वीर्य का कुछ हिस्सा बाहर निकल रहा था। वह उसे ऐसे ही छोड़कर जाने के मूड में था, पर ना जाने क्यों उसकी गांड ने उसे जाने नहीं दिया।

उसने किरण को कमर से पकड़ा और सही जगह पर रखा। उसकी गांड के छेद को थोड़ा सा सहलाया। उसको यह सब करने का मन तो नहीं था क्योंकि उसका मन तो रेखा के पास चला गया था। पर उफ्फ्फ यह गांड उसे जाने देने को तैयार ही नहीं थी।

परम क्या करता बेचारा! उसने फिर से उसकी गांड को थोड़ा सा सहलाया और बोला, “किरण... मस्त गांड की मालिक हो तुम...”

लेकिन उसे कोई जवाब नहीं आया। वह फिर से सोचने लगा कि वैसे भी उसकी चूत मार-मार के बेचारी को थका दिया है और अगर वह उसकी गांड से खेलेगा तो जाग जाएगी और फिर उसके लंड को यहीं फिर से खाली कर देगी। पर एक मन उसकी गांड से आकर्षित हो गया था।
फनलवर की रचना

“भेन्चोद... अब क्या करे!”

उसने थोड़ा सा फिर से गांड को सहलाया। तभी किरण के पैर थोड़े खुले और गांड का छेद और भी ज्यादा खुला। अब कौन मादरचोद रह पाएगा!

परम ने थोड़ा पैर को सही तरीके से सेट किया और उसकी गांड में लंड को टिकाया और एक धक्का मारने की सोच रहा था कि तभी उसे रेखा का ख्याल आया। उसने लंड को फिर से गांड के मुंह से हटा दिया।

एक आकर्षण की वजह से वह ज्यादा तो कुछ नहीं कर पाया, पर उसकी पूरी उँगली उसकी गांड में पिरो दी। किरण हड़बड़ाई और उठ गई, लेकिन परम ने उसे दबाकर सोने को कहा। किरण ऐसा समझ लिया कि वह उसकी गांड मारेगा तो वह भी आराम से आधी नींद में ही अपनी गांड को छोड़ दिया।

परम ने फिर से उँगली बाहर निकाली और फिर से अंदर तक डाल दी। किरण थोड़ी उछली पर वही रही। आखिरकार परम ने उँगली से उसकी गांड मारने का चालू कर दिया। थोड़ी देर ऐसी ही करता रहा, पर अचानक उसके मस्तिष्क में फिर से रेखा के रूम में जाना याद आ गया और वह अपनी उँगली को खींचकर बाहर निकाल ली।

उसने बड़ी बहू के कहने पर साड़ी पहनी और कमरे से बाहर आ गया। उसने इधर-उधर देखा। वहाँ कोई नहीं था। छोटी बहू के कमरे से और दूसरे कमरे से, जहाँ सेठजी के भाई ठहरे थे, कुछ आवाज़ें आ रही थीं। वह समझ गया कि सुंदरी का माल लुटा जा रहा है, और वह भी सेठानी के सामने।

ऊपर से होते हुए वह रेखा के कमरे में पहुँचा। दरवाजा धक्का दिया और रेखा और बड़ी बहू दोनों को नंगी सोता देखकर हैरान रह गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद किया और साड़ी उतार दी।

रेखा को देखकर वह बड़ी बहू और उसके बड़े-बड़े स्तनों को भूल गया जो उसे बुला रहे थे। उसने अपने दोनों हाथ रेखा की कमर के पास रखे और उसकी चूत पर एक चुम्बन दे दिया। वह परम के सपने देख रही होगी और कराह उठी,

“ओह परम... मादरचोद... मुझे चूसो... मुझे चूमो...”
निर्मात्री फनलवर है

लेकिन उसकी आँखें बंद ही रहीं। उसे परम का स्पर्श महसूस हो रहा था। उसकी मस्त और कसी हुई बोबले ऊपर-नीचे हो रहे थे, उसकी साँसों के साथ। परम ने क्लिट को सहलाया और चूत की दरार पर जीभ फिराई। उसका मन कर रहा था कि वह रेखा को चोदकर उसका कौमार्य भंग कर दे, लेकिन उसने तुरंत इस विचार को त्याग दिया।



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बस यही तक दोस्तों। बाकी आपके कोमेंट्स आने के बाद


तब तक के लिए
Funlover की तरफ से जय भारत

397.

 
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