- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 99,559
अपडेट-104
सरिता di-pahla थप्पड़ इसलिए था की तुमने मुझे धोखा देकर छुड़वाने पर मज़बूर किया और दूसरा थप्पड़ इसलिए था की जब तुझको पता था की मैं तुझसे छुड़वाने के लिए इतनी तड़प रही हूँ तो तुमने मुझको छोड़ने में इतनी देरी क्यों की.
दीदी की बात सुनकर मैं हंसने लगा और दीदी भी अपने कण पकड़कर सॉरी का इशारा करते हुवे मुस्कुराने लगी.
अब आगे.
थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi घंटे और मुस्कुराते रहे तभी दीदी ने कहा.
सरिता दी- दूसरी बात अभी रह गयी है वो क्या है.
मैं- वो तो मैं कभी नहीं बताउगा आपको. आप फिर गुस्सा हो जाओगी और मरोगी मुझे.
सरिता दी- अब ज्यादा नाटक मत कर. जब तुमने मेरे साथ गेम खेलकर मुझे छोड़ दिया तब मैं तुझसे नाराज़ नहीं हूँ. तो वो बात इससे बड़ी और शॉकिंग तो नहीं हो सकती न.
मैं- वही तो. ये बात उससे भी ज्यादा बड़ी और शॉकिंग है. इसीलिए तो नहीं बता रहा हूँ.
सरिता दी- बता न अभी. देख तुमने जो चाहा मुझसे मैंने तुझको दिया. और तुमने भी बोलै था की गांड मिल जाने के बाद तू मुझे दोनों बात बताएगा. प्ल्ज़ बताओ न मैं सच में नाराज़ नहीं होऊंगा.
मैं- ऐसे नहीं. पहले एक जोरदार किश देखर मुझे यकीं दिलाओ की तुम मुझसे नाराज़ नहीं होगी.
मेरी बात सुनकर दीदी ने तुरंत अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी. मैं भी दीदी के होंठ चूसने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी मेरे होंठ छोड़कर मुझसे अलग हुई तो मैं सोफे से उठ गया और किचन की तरफ जाने लगा तो दीदी ने कह.
सरिता दी- क्या हुवा अभी कहा जा रहा है.
Main-bas एक मिनट में आया.
मैं किचन में जाकर दो गिलास पानी लिया और वापस हॉल में आ gaya.ek गिलास मैंने दीदी को दिया और दूसरा मैं पिने लगा. पानी पिने के बाद मैंने दोनों गिलास डाइनिंग टेबल पर रख दिए और आकर सोफे पर बैठ गया. और दीदी से कहा.
मैं- आप निचे क्यों बैठी हैं यहाँ मेरी गॉड में बैठ जाओ.
इतना कहकर मैंने दीदी को उठाकर अपनी जांघो पर बैठा लिया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी में मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रखकर कहा.
सरिता दी- अब बता कौन सी बात है.
मैं- आपने उस दिन कहा था की आपके और नताशा के अलावा 3ऋ कौन है जिसको मैंने छोड़ा है.
सरिता दी- हाँ मुझे जानना है की वो कौन है.
Main-main बता तो रहा हूँ लेकिन आप वडा करिये की आप इस बात का जीकर किसी से नहीं करेंगी. किसी से नहीं मतलब किसी से नहीं. और जिसके बारे में बता रहा हूँ अगर वो आपके सामने आ जाएगी तो आप उसे उसी तरह प्यार और सम्मान देंगी. जिस तरह अब तक देती आई हैं. उसके लिए अपने मन में कोई नफरत का भाव मत रखना.
सरिता दी- मैं ऐसा क्यों करुँगी. आखिर वो है कौन जो तू ऐसा बोल रहा है.
मैं- पहले वडा करो. फिर बताऊंगा.
सरिता दी- मैं तेरी कसम कहती हूँ. तू जैसा बोलेगा मैं वैसा hi करुँगी.
मैं- अपनी सविता दीदी
मेरी बात सुनकर दीदी आखे फाड़कर मुझे देखने लगी. जैसे उनको विस्वाह hi न हो की कयने सावता दीदी ऐसा कुछ किया है. वो आश्चर्य चकित होकर मुझसे बोली.
सरिता दी- देख अभी. मैं इस समय मज़ाक के मूड में बिलकुल भी नहीं हूँ. ये तू क्या अनाप सनाप बोल रहा है दीदी के बारे में. कुछ तो शार्क कर. कमीनेपन की भी एक हद होती हैं.
दीदी की बात सुनकर मैंने टाइम देखा तो 12.00 बज गए थे. तो मैंने सविता दीदी को फ़ोन करने का सोचा और मोबाइल उठाकर उनका no. पर कॉल करने लगा और दीदी से कहा.
मैं- अब बताना क्या है. तुम उसकी आवाज़ सुन लो खुद समझ जाओगी, लेकिन एक शब्द भी बोलना मत. कोई आवाज़ मत करना. नहीं तो उसे पता चल जाएगा की कोई मेरे साथ है.
दीदी ने अपना सर सहमति में हिलाया तो मैंने कॉल वाली बत्तों पर प्रेस कर दिया और मोबाइल स्पीकर में दाल दिया. 5 रिंग के बाद दीदी ने फ़ोन उठा लिया और कहा.
सविता दी- hello अभी. इतनी रात को कैसे याद किया.
मैं- ही जानेमन. बस तुम्हारी याद आ गयी तो मैंने याद कर लिया.
जब सविता दीदी ने उधर से सरिता दीदी की की आवाज़ सुनी तो उन्हें बिलकुल भी विस्वास नहीं हो रहा था की ये सब क्या हो रहा है. वो आँखे फाड़ फाड़ कर मुझे देखे जा रही थी. मैंने अपने बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.
मैं- क्या कर रही हो सविता जो अभी तक जग रही हो.
सविता दी- कुछ नहीं बस मूवी देख रही थी. और तुम बताओ क्या कर रहे हो.
मैं- कुछ नहीं सविता. सरिता दीदी ने तरबूज खाने को दिया था. थोड़ा ज्यादा हो गया तो उसी को पचा रहा hoon.(ye बात मैंने सरिता दीदी की गांड को सहलाते हुवे कहा.)
सविता दी- इतनी रत को तरबूज खाने की क्या जरूरत थी. दिन में खाना चाहिए था.
मैं- मैं क्या करू सरिता दीदी से बोलै था तो वो बोली दिन में कुछ और खा लो तरबूज रत में खिलाऊंगी.
सविता दी- चल ठीक है. और बताओ क्या चल रहा है.
मैं- अपना क्या चलना है सविता. चल तो तुम्हारा रहा होगा. दिन रात जीजा जी के साथ लगी रहती होगी.
सविता दी- उनका तो पूछ hi मत. जब से तुमने मुझे छोड़ा है तब से उनके छुड़वाने में मज़ा hi नहीं आता अब.
ये बात सुनकर सरिता दीदी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने चकित होकर अपने मुंह पर हाँथ रख लिया और मेरी तरफ घूर घूर कर देखने लगी. मैंने अपनी बात जारी रखते हुवे कहा.
मैं- ऐसा क्या. लेकिन तुम hi तो मुझे छोड़कर चली गई थी जीजा जी के साथ.
सविता दी- तो क्या करती. आखिर पति हैं मेरे वो. भले नाम के hi हो. अच्छा ये बता कब आ रहा है मेरे पास. मैं तेरे लुंड के बिना बड़ी बचें हूँ. अब रहा नहीं जा रहा है.
मैं- कैसी बात कर रही हो सविता. मैं तुम्हारा भाई हूँ और तुम मेरी बहन हो. तो मुझसे ऐसी बाते मत करो.
सविता दी- चल हैट सेल. जब मुझे छोड़ा था तब ये ख्याल नहीं आया की मैं बहन हूँ तेरी. अब मैं तेरी बहन नहीं रह गई हूँ. मैं तेरी और तेरे लुंड की गुलाम हो चुकी हूँ.
दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी ने अपना एक हाँथ मिक पर रख दिया और धीरे से कहा.
सरिता दी- बाप रे बाप. ये सब क्या हो रहा है.
मैंने उन्हें चुप रहने का इशारा किया और सविता दीदी से बोलै.
मैं- चलो ठीक है बहुत जल्दी मैं आने की कोशिश करता हूँ. अच्छा तब टेक 1-2 फोटो भेज दो उसी से काम चला लूंगा.
मेरे कहने के बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे उन्होंने ब्रा पहनी हुई थी. मैंने उस फोटो को सरिता दीदी को दिखाया और दीदी से बोलै.
एक और फोटो भेजो अच्छी वाली कोई.
इसके कुछ देर बाद दीदी ने अपनी एक और फोटो भेजी जिसमे उन्होंने अपनी नंगी चूचियों पर पल्लू डाला हुवा था लेकिन कपडा इतना पतला था की उनकी चूचिया नज़र आ रही थी.
मेरे फिर से कहने पर दीदी ने एक और फोटो भेजी जिसमे वो पूरी नंगी थी. और मुस्कुरा रही थी. इन सभी फोटो को मैंने सरिता दीदी को दिखाया और दीदी को bye बोलकर फ़ोन कट कर दिया.
जब मैंने दीदी की तरफ देखा तो उन्होंने मुझे तीन चार थप्पड़ खींचकर जड़ दिया और गुस्से से मेरी तरफ देखते हुवे कहा.
सरिता दी- सेल कुत्ते कमीने. तू सच में छूट के लिए वहसि हो गया है. तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुवे. अरे ये तो सोच लेता की वो बहन है तेरी. उनकी शादी हो गई है. क्यों उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी तबाह करने पर तुला हुवा है. तू छूट के लिए इतना अँधा हो गया है की तूने अपने घर में hi डाका दाल दिया. अरे जब इतनी hi आग लगी थी तेरे लुंड में तो जाकर कही रंडी छोड़कर अपनी आग शांत कर लेता बहनचोद.
दीदी इस समय बहुत गुस्से से बोल रही थी. वो मेरी गॉड से उठकर कड़ी हो गई थी. मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखे गुस्से से लाल हो रही थी. मुझे थोड़ा बहुत अंदाज़ा था की दीदी का रिएक्शन इस तरह से हो सकता है इसलिए मैंने अपने आपको पहले से hi तैयार कर लिया था. मैं अपना सर झुकाये बैठा रहा दीदी की बात सुनकर भी जब मैंने कुछ नहीं कहा तो दीदी ने फिर कहा.
सरिता दी- बोलता क्यों नहीं सेल. क्या मैं काफी नहीं थी क्यात ेरे लिए जो तूने दीदी के साथ इतना गलत काम किया. तुझे तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए.
दीदी की बात सुनकर मैंने अपना सर उठाया और एकदम शांत आवाज़ में दीदी से कहा.
मैंने- पहले आप शांत हो जाओ और शांति से मेरी बात सुनो. उसके बाद hi किसी निष्कर्ष पर पहुंचना.
सरिता दी- इतना सब करने के बाद बोल रहा है शांत हो जाऊ. चल ठीक है. बता मैं भी तो सुनु की कौन सी मनगढंत कहानी तू मुझे सुनना चाहता है अपने बचाव में.
मैं- देखो दीदी में जो कहने जार अहा हूँ. उसको एकदम ध्यान से सुनो और अपना गुस्सा थूककर ठन्डे दिमाग से मेरी बात को सोचना. तुम्हे खुद पता चल जाएगा की मैंने सही किया या गलत किया.
इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे गुस्से से hi घूरे जा रही थी. मैंने फिर अपनी गार्डन निचे करके कहना शुरू किया.
मैं- आपको तो अच्छी तरह से याद है की दीदी की शादी को 4 साल हो चुके हैं. और इन चार सालो में वो कितने दिन अपने ससुराल में रही हैं. मुझे बताओ.
सरिता di(ghor कर)- इन सब का उस बात से क्या लेना देना.
मैं- अरे यार. लेना देना है तभी तो बता रहा हूँ. पहले मेरी बात पूरी सुन तो लो.
सरिता दी- लगभग 1 साल
मैं- और जीजा जी के साथ कितने दिन रही हैं.
सरिता दी- यही कोई 2-2.5 महीना.
मैं- हाँ तो सुनो अब. किसी लड़की की जब तक शादी नहीं हुई होती तब तक वो अपने जिस्म की प्यास बर्दास्त कर सकती है. लेकिन एक बार शादी हो जाने के बाद पति से अगर चुदाई हो जाये तो उसे नियमित चुदाई की जरुरत महसूस होती है. और यही जरुरत दीदी को भी महसूस होती थी, लेकिन उन्होंने ये बात किसी से शेयर नहीं किट hi. उन्होंने अपने जिस्म की प्यास को अपने अंदर अभी तक दबा कर रखा था. लेकिन कब तक दबा कर रखती. उस दिन जब कंप्यूटर खरीदने जा रहे थे दोनों लोग तो सामने जानवर आ जाने के कारन मैंने अचानक ब्रेक लगाया तो दीदी का हाँथ गलती से मेरे लुंड पर आ गया.
इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ देखा जो मुझे घूरते हुवे मेरी बात सुन रही थी मैंने आगे कहना शुरू किया.
मैं- उसी दिन उनको मेरे लुंड को लम्बाई और मोटाई के बारे में पता चला, क्योंकि जीजा का लुंड मुझसे 3 इंच छोटा है, जो दीदी ने मुझको बताया. दीदी पहले से hi प्यासी थी और बहार किसी और से छुड़वाने में उनको बदनामी का डार्ट है. इसलिए उन्होंने मुझसे छुड़वाने की सोची, उसके बाद से दीदी एकदम बदल गई. तुम्हारी तरह वो भी मुझे अपना अधनंगा जिस्म दिखने लगी. अब यहाँ पर मेरे पास दो रस्ते थे. या तो मैं दीदी को छोड़कर उनकी प्यास भुजाउ. या फिर दीदी को किसी और से छुड़वाने के लिए छोड़ दूँ.
इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ फिर से देखा तो वो अभी भी मुझे घूरते हुवे मेरी बाते सुन रही थी. मैंने अपनी बात जारी रखते हुवे कहा.
मैं- मैंने भी बहुत सोच विचार किया इस बारे में तो मुझे पहला hi रास्ता सही लगा, नताशा के चले जाने के बाद मुझे भी किसी के साथ की जरूरत थी और दीदी को भी किसी के साथ की जरूरत थी. तो अगर हम दोनों ने एक दुसरे का साथ देकर अपनी जरूरतों को पूरा किया तो इसमें क्या गलत किया.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी किसी सोच में डूब गई. लगभग 10 मिनट तक हॉल में शांति छै रही. इस शांति को दीदी ने तोड़ते हुवे कहा.
सरिता दी( थोड़ा गुस्से भरे स्वर में.)- फिर भी मैं यही कहूँगी की तुमने जो दीदी के साथ किया वो गलत है. चलो तुम्हारी तो ठीक है मर्द सेल ठरकी होते hi हैं. लेकिन दीदी को तो सोचना चाहिए था की तू उनका भाई है. वो कैसे एक भाई के साथ ऐसी गन्दी हरकत कर सकती हैं.
Main-Achha. अगर मैं उनका भाई हूँ तो आपका क्या लगता हूँ मैं.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी एकदम खामोश हो गई और मेरी तरफ देखने लगी. मेरी इस बात से उनका गुस्सा कुछ हद तक काम हो गया था. तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- देखो दीदी. अगर आपको लगता है की सविता दीदी ने गलत किया है तो फिर आपने भी तो गलत किया है. अगर मैं उनका भाई हूँ तो आपका भी तो भाई hi हूँ. और एक बात और जब आप कुंवारी होकर भी अपने प्यासे जिस्म के हांथो मजबूर होकर मेरे साथ सो गई. तो आप सोचो वो तो शादीशुदा हैं और वो पहले से hi जीजा जी से चुद चुकी थी. तो उनके जिस्म में आपसे ज्यादा प्यास है. एक भाई बहन के रिश्ते से अगर देखा जाये तो हम तीनो ने गलत किया है, लेकिन अगर एक औरत और मर्द के नजरिये से अगर देखे तो न अपनी कोई गलती की है, न सविता दीदी ने और न hi मैंने. बाकि अगर आपको अब भी लगता है की मैंने और दीदी ने गलत किया है तो आप ने भी गलत किया है.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी का गुस्सा एकदम शांत हो गया. वो आकर मेरे बगल सोफे पर सर झुककर बैठ गई और सोचने लगी. थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना सर ऊपर किया और मेरी तरफ देखते हुवे कहा.
सरिता दी- सच में अभी तू बहुत बड़ा कमीना है. लेकिन फिर भी मैं पूरी परिस्थिति को जानते हुवे तुझे और दीदी को गलत भी नहीं ठहरा सकती. अभी मैं तुमसे नाराज़ भी नहीं हो सकती लेकिन दीदी कैसे, मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा है. मुझे तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. की ऐसा कुछ हुवा है.
मैंने जब देखा की दीदी अब गुस्सा नहीं हैं और नार्मल बाते कर रही हैं तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- दीदी कैसे का क्या मतलब, और इसमें समझने और न समझने वाली क्या बात है. जैसे तुम पैट गई मुझसे वैसे दीदी भी पैट गई.
सरिता दी- सेल तू बहुत बड़ा कमीना है. मुझे तो तूने पटाया hi. तूने इतनी स्ट्रिक्ट दीदी को भी पता लिया. मन्ना पड़ेगा कमीने तेरे दिमाग को. तेरे से तो कोई भी नहीं बच सकती अब. जो लड़का अपनी दो बड़ी बहनो को पाटकर छोड़ सकता है वो दुनिया की किसी भी लड़की को पता सकता है.
मैं- तारीफ के लिए धन्यवाद सरिता. तुम नाराज़ तो नहीं हो न दीदी के बारे में जानकर.
सरिता दी- चलो अच्छा hi हुवा जो दीदी को तुमने पता लिया. नहीं तो दीदी हमेशा दुखी रहती थी जीजा जी के कारन. मुझे दीदी ने इस जीजा जी के बारे में पहले hi बता रखा था. लेकिन मुझे अंदाज़ा नहीं था की इस सेतुएशन में हैं. चलो अच्छा hi हुवा जो सुख उन्हें जीजा जी से नहीं मिला वो तुमने उनको दिया.
दीदी की बात सुनकर मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कहा.
सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है. दीदी मुझे हर बात शेयर करती थी. बस इस बात को उन्होंने छिपा लिया.
मैं- चालो अच्छा हुवा की तुमको बुरा नहीं लगा. मैं तो समझ रहा था की तुम नाराज़ हो जाओगी.
सरिता दी- बुरा तो मुझे बहुत लगा अभी. और मेरा मन तो कर रहा था की मैं तेरा मुंह नोच लूँ लेकिन साडी सेतुएशन jan-ne के बाद मैं दीदी के लिए मैं बहुत खुश हूँ. मेरी तरह उन्होंने भी बहार जाने के बजाय घर में hi ये सब किया.
मैं- उन्होंने आपकी तरह नहीं किया अआपने उनकी तरह किया है (हँसते हुवे)
मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराते हुवे मुझे मरने लगी. थोड़ी देर तक हॉल में बैठने के बाद दीदी ने कहा.
सरिता दी- अब साडी रात यही बैठे रहने का इरादा है क्या. चलो कमरे में. मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है.
मैंने दीदी को शहर देकर उनके कमरे में ले गया और उन्हें बीएड पर लिटाकर उन्ही बगल में मैं भी सो गया. सुबह मेरी नींद पहले खुली तो मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो गहरी नींद में सो रही थी, उनके चेहरे पर सुकून था. दीदी बहुत hi प्यारी लग रही थी. मैंने दीदी के ऊपर झुककर माथे पर किश कर लिया और उनके कमरे सी निकलकर ऊपर अपने कमरे में चला गया. और बिस्टेर पर लेट गया. और सोचने लगा.
Main-(man में)- मैंने सरिता दीदी को भी छोड़ लिया. अब मेरा नेक्स्ट टारगेट मनीषा है, लेकिन उसको तो पहले से hi सब पता है. तो क्या वो आसानी से मुझसे मन जाएगी ये वो अपनी हरकतों से मुझे तैसे कर रही है. जो भी हो. मुझे जल्द से जल्द मनीषा को भी अपने निचे लाना होगा. ताकि कभी कोई रुकावट न आये चुदाई करने में.
मैं यही सब सोच रहा था की तभी सरिता दीदी की कॉल आई उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया था. जब मैं दीदी के कमरे में पंहुचा तो दीदी बिस्तर पर बैठी हुई थी मैंने उनसे कहा.
मैं- क्या हुवा दीदी. आपने बुलाया.
सरिता दी- मुझे दर्द हो रहा है भाई. ठीक से कड़ी नहीं हो प् रही हूँ.
सरिता di(thoda गुस्से में) सेल मेरी छोटी सी गांड में इतना बड़ा लुंड दाल दिया. तूने सोचा भी की मेरी गांड का क्या हॉल हुवा होगा.
मैं- वो तो ठीक है, लेकिन कर रत उसी छोटी सी गांड में तुम मेरा पूरा लुंड लेकर मजे से छुड़वा रही थी. गलत कह रहा हूँ क्या मैं.
सरिता दी- हाँ ठांण उसी गलती की सजा मैं भुगत रही हूँ कमीने. दो कदम भी चलना मुश्किल हो रहा रहा है. टंगे फैला फैला कर भी ठीक से नहीं चल प् रही हूँ. मेरी छूट अभी भी सूजकर कुप्पा बानी हुई है और गनद के तो पूछो hi मत. वो इतना दर्द कर रही है की लैट्रिन भी करना मुश्किल लग रहा है. नष्पिते तू बहुत बुरी तरह छोड़ता है. कोई और लड़की होती तो मर hi जाती तेरी इस चुदाई से.
मैं- अरे दीदी क्या बात लेकर बैठ गाइट ुम. छोडो न रात गए बात गए. चलो मैं तुमको बाथरूम तक लेकर चलता हूँ. उसके बाद फ्रेश होकर दवा खा लेना और आराम करना. मैं बहार से खाना आर्डर कर दे रहा हूँ.
इतना कहकर मैं दीदी को सहारा देकर बाथरूम तक ले गया और फ्रेश होने के बाद दीदी को उनके कमरे में पहुंचकर किचन में आया और चाय बनाकर बिस्किट और नमकीन लेकर दीदी के कमरे में गया. उन्होंने चाय नास्ता किया तो मैंने उन्हें पेनकिलर खिलाकर निचे आ गया और खाने के टाइम में खाना आर्डर किया. दोनों ने मिलकर दीदी के hi कमरे में खाना खाया. दीदी ने फिर से एक पेनकिलर ले कर आराम करने के लिए लेट गई.
उन दिन कुछ नहीं हुआ क्योंकि दीदी इस स्थिति में नहीं थी. तो मैं भी अपने मोबाइल और t.v. में व्यस्त रहा. शाम को बेल्ल बजी तो मैंने दरवाज़ा खोला. सामने मां, पापा और मनीषा खड़े थे. मैंने उन्हें अंदर आने के लिए रास्ता दिया. मां पापा और मनीषा आकर हॉल में बैठ गए. मैंने उन्हें पानी ला कर दिया. बेल्ल की आवाज़ सुनकर सरिता दीदी भी अपने कमरे से लंगड़ाते हुवे निचे आने लगी तो मैंने आगे बढ़कर सीढ़ियों से उन्हें निचे लेकर आया. उसको देखकर मम्मी ने पूछा.
मम्मी- तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही हो सरिता. क्या हुवा तुम्हे.
सरिता दी- कुछ नहीं मम्मी वो सीढ़ियों से उतारते हुवे कल रात मोच आ गाइट hi. अभी दवा ले आया है. अभी खाई है मैंने.
जिसका जवाब हमने पहले से hi तैयार रखा था की अगर पापा लोगो के आने तक अगर दीदी ठीक नहीं हुई तो क्या बहाना करना है. जब दीदी ने ये बात कही तो मेरी नज़र मनीषा पर thi.didi की बात सुनकर वो मुझे देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. तभी मां ने कहा.
मम्मी- कितनी बार तुम सब से कहा है की सीढ़ियों पर आराम से आया जाया करो लेकिन तुम सब घोड़े की तरह दौड़ते रहते हो. अब भुगतो.
इतना कहकर मम्मी और पापा वह से अपने कमरे की तरफ चले गए. अब हॉल में हम तीनो hi बचे थे. मनीषा अभी भी मुस्कुरा रही थी जब दीदी ने उसको मुस्कुराते हुवे देखा तो उन्होंने कहा.
सरिता दी- तुझे क्या हुवा तू क्यों मुस्कुरा रही है.
मनीषा- मैं भैया के बारे में सोचकर मुस्कुरा रही हूँ. कहा तो रात को आप उनको तरबूज खिलने वाली थी. लेकिन उल्टा भैया को तरबूज मिला hi नहीं उल्टा उन्हें आपको दवा खिलने पद रही है.
मनीषा की बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी. फिर मनीषा को देखकर जवाब दिया.
सरिता दी- नहीं मनीषा ये तरबूज अभी को देने के बाद हुवा. ये तरबूज देखकर एकदम जानवर बन गया था. इसी चक्कर में मेरा ये हॉल हुवा है.
मनीषा- (मुस्कुरा kar)Chalo ठीक है अब जो हो गया वो हो गया अब दवा खाओ और कुछ दिन आराम करो. किचन का काम मैं देख लूंगी.
मनीषा इतना बोलकर अपने कमरे में चली गई. दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी की उन्होंने मनीषा को कैसे बेवकूफ बनाया और मैं मुस्कुरा रहा था की मनीषा ने दीदी को कैसे बेवकूफ बनाया. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को उनके कमरे में पहुंचकर अपने कमरे की तरफ जाने लगा. अभी मैं मनीषा के कमरे के सामने पंहुचा hi था की मेरे मन में एक ख्याल आया की क्यों न मनीषा के कमरे में चला जाये. यही सोचकर मैंने मनीषा के कमरे के दरवाज़े पर हाँथ रख. तो दरवाज़ा खुल गया और मैं अंदर आ गया. अंदर आने के बाद सामने का नज़ारा देखकर मैं तो जैसे दरवाज़े के पास जैम सा गया. और मेरे मुंह से निकला.
मैं- आईये टेरिइइइ kiiiiiiiiii. ये क्याआ.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
सरिता di-pahla थप्पड़ इसलिए था की तुमने मुझे धोखा देकर छुड़वाने पर मज़बूर किया और दूसरा थप्पड़ इसलिए था की जब तुझको पता था की मैं तुझसे छुड़वाने के लिए इतनी तड़प रही हूँ तो तुमने मुझको छोड़ने में इतनी देरी क्यों की.
दीदी की बात सुनकर मैं हंसने लगा और दीदी भी अपने कण पकड़कर सॉरी का इशारा करते हुवे मुस्कुराने लगी.
अब आगे.
थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi घंटे और मुस्कुराते रहे तभी दीदी ने कहा.
सरिता दी- दूसरी बात अभी रह गयी है वो क्या है.
मैं- वो तो मैं कभी नहीं बताउगा आपको. आप फिर गुस्सा हो जाओगी और मरोगी मुझे.
सरिता दी- अब ज्यादा नाटक मत कर. जब तुमने मेरे साथ गेम खेलकर मुझे छोड़ दिया तब मैं तुझसे नाराज़ नहीं हूँ. तो वो बात इससे बड़ी और शॉकिंग तो नहीं हो सकती न.
मैं- वही तो. ये बात उससे भी ज्यादा बड़ी और शॉकिंग है. इसीलिए तो नहीं बता रहा हूँ.
सरिता दी- बता न अभी. देख तुमने जो चाहा मुझसे मैंने तुझको दिया. और तुमने भी बोलै था की गांड मिल जाने के बाद तू मुझे दोनों बात बताएगा. प्ल्ज़ बताओ न मैं सच में नाराज़ नहीं होऊंगा.
मैं- ऐसे नहीं. पहले एक जोरदार किश देखर मुझे यकीं दिलाओ की तुम मुझसे नाराज़ नहीं होगी.
मेरी बात सुनकर दीदी ने तुरंत अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी. मैं भी दीदी के होंठ चूसने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी मेरे होंठ छोड़कर मुझसे अलग हुई तो मैं सोफे से उठ गया और किचन की तरफ जाने लगा तो दीदी ने कह.
सरिता दी- क्या हुवा अभी कहा जा रहा है.
Main-bas एक मिनट में आया.
मैं किचन में जाकर दो गिलास पानी लिया और वापस हॉल में आ gaya.ek गिलास मैंने दीदी को दिया और दूसरा मैं पिने लगा. पानी पिने के बाद मैंने दोनों गिलास डाइनिंग टेबल पर रख दिए और आकर सोफे पर बैठ गया. और दीदी से कहा.
मैं- आप निचे क्यों बैठी हैं यहाँ मेरी गॉड में बैठ जाओ.
इतना कहकर मैंने दीदी को उठाकर अपनी जांघो पर बैठा लिया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी में मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रखकर कहा.
सरिता दी- अब बता कौन सी बात है.
मैं- आपने उस दिन कहा था की आपके और नताशा के अलावा 3ऋ कौन है जिसको मैंने छोड़ा है.
सरिता दी- हाँ मुझे जानना है की वो कौन है.
Main-main बता तो रहा हूँ लेकिन आप वडा करिये की आप इस बात का जीकर किसी से नहीं करेंगी. किसी से नहीं मतलब किसी से नहीं. और जिसके बारे में बता रहा हूँ अगर वो आपके सामने आ जाएगी तो आप उसे उसी तरह प्यार और सम्मान देंगी. जिस तरह अब तक देती आई हैं. उसके लिए अपने मन में कोई नफरत का भाव मत रखना.
सरिता दी- मैं ऐसा क्यों करुँगी. आखिर वो है कौन जो तू ऐसा बोल रहा है.
मैं- पहले वडा करो. फिर बताऊंगा.
सरिता दी- मैं तेरी कसम कहती हूँ. तू जैसा बोलेगा मैं वैसा hi करुँगी.
मैं- अपनी सविता दीदी
मेरी बात सुनकर दीदी आखे फाड़कर मुझे देखने लगी. जैसे उनको विस्वाह hi न हो की कयने सावता दीदी ऐसा कुछ किया है. वो आश्चर्य चकित होकर मुझसे बोली.
सरिता दी- देख अभी. मैं इस समय मज़ाक के मूड में बिलकुल भी नहीं हूँ. ये तू क्या अनाप सनाप बोल रहा है दीदी के बारे में. कुछ तो शार्क कर. कमीनेपन की भी एक हद होती हैं.
दीदी की बात सुनकर मैंने टाइम देखा तो 12.00 बज गए थे. तो मैंने सविता दीदी को फ़ोन करने का सोचा और मोबाइल उठाकर उनका no. पर कॉल करने लगा और दीदी से कहा.
मैं- अब बताना क्या है. तुम उसकी आवाज़ सुन लो खुद समझ जाओगी, लेकिन एक शब्द भी बोलना मत. कोई आवाज़ मत करना. नहीं तो उसे पता चल जाएगा की कोई मेरे साथ है.
दीदी ने अपना सर सहमति में हिलाया तो मैंने कॉल वाली बत्तों पर प्रेस कर दिया और मोबाइल स्पीकर में दाल दिया. 5 रिंग के बाद दीदी ने फ़ोन उठा लिया और कहा.
सविता दी- hello अभी. इतनी रात को कैसे याद किया.
मैं- ही जानेमन. बस तुम्हारी याद आ गयी तो मैंने याद कर लिया.
जब सविता दीदी ने उधर से सरिता दीदी की की आवाज़ सुनी तो उन्हें बिलकुल भी विस्वास नहीं हो रहा था की ये सब क्या हो रहा है. वो आँखे फाड़ फाड़ कर मुझे देखे जा रही थी. मैंने अपने बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.
मैं- क्या कर रही हो सविता जो अभी तक जग रही हो.
सविता दी- कुछ नहीं बस मूवी देख रही थी. और तुम बताओ क्या कर रहे हो.
मैं- कुछ नहीं सविता. सरिता दीदी ने तरबूज खाने को दिया था. थोड़ा ज्यादा हो गया तो उसी को पचा रहा hoon.(ye बात मैंने सरिता दीदी की गांड को सहलाते हुवे कहा.)
सविता दी- इतनी रत को तरबूज खाने की क्या जरूरत थी. दिन में खाना चाहिए था.
मैं- मैं क्या करू सरिता दीदी से बोलै था तो वो बोली दिन में कुछ और खा लो तरबूज रत में खिलाऊंगी.
सविता दी- चल ठीक है. और बताओ क्या चल रहा है.
मैं- अपना क्या चलना है सविता. चल तो तुम्हारा रहा होगा. दिन रात जीजा जी के साथ लगी रहती होगी.
सविता दी- उनका तो पूछ hi मत. जब से तुमने मुझे छोड़ा है तब से उनके छुड़वाने में मज़ा hi नहीं आता अब.
ये बात सुनकर सरिता दीदी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने चकित होकर अपने मुंह पर हाँथ रख लिया और मेरी तरफ घूर घूर कर देखने लगी. मैंने अपनी बात जारी रखते हुवे कहा.
मैं- ऐसा क्या. लेकिन तुम hi तो मुझे छोड़कर चली गई थी जीजा जी के साथ.
सविता दी- तो क्या करती. आखिर पति हैं मेरे वो. भले नाम के hi हो. अच्छा ये बता कब आ रहा है मेरे पास. मैं तेरे लुंड के बिना बड़ी बचें हूँ. अब रहा नहीं जा रहा है.
मैं- कैसी बात कर रही हो सविता. मैं तुम्हारा भाई हूँ और तुम मेरी बहन हो. तो मुझसे ऐसी बाते मत करो.
सविता दी- चल हैट सेल. जब मुझे छोड़ा था तब ये ख्याल नहीं आया की मैं बहन हूँ तेरी. अब मैं तेरी बहन नहीं रह गई हूँ. मैं तेरी और तेरे लुंड की गुलाम हो चुकी हूँ.
दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी ने अपना एक हाँथ मिक पर रख दिया और धीरे से कहा.
सरिता दी- बाप रे बाप. ये सब क्या हो रहा है.
मैंने उन्हें चुप रहने का इशारा किया और सविता दीदी से बोलै.
मैं- चलो ठीक है बहुत जल्दी मैं आने की कोशिश करता हूँ. अच्छा तब टेक 1-2 फोटो भेज दो उसी से काम चला लूंगा.
मेरे कहने के बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे उन्होंने ब्रा पहनी हुई थी. मैंने उस फोटो को सरिता दीदी को दिखाया और दीदी से बोलै.
एक और फोटो भेजो अच्छी वाली कोई.
इसके कुछ देर बाद दीदी ने अपनी एक और फोटो भेजी जिसमे उन्होंने अपनी नंगी चूचियों पर पल्लू डाला हुवा था लेकिन कपडा इतना पतला था की उनकी चूचिया नज़र आ रही थी.
मेरे फिर से कहने पर दीदी ने एक और फोटो भेजी जिसमे वो पूरी नंगी थी. और मुस्कुरा रही थी. इन सभी फोटो को मैंने सरिता दीदी को दिखाया और दीदी को bye बोलकर फ़ोन कट कर दिया.
जब मैंने दीदी की तरफ देखा तो उन्होंने मुझे तीन चार थप्पड़ खींचकर जड़ दिया और गुस्से से मेरी तरफ देखते हुवे कहा.
सरिता दी- सेल कुत्ते कमीने. तू सच में छूट के लिए वहसि हो गया है. तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुवे. अरे ये तो सोच लेता की वो बहन है तेरी. उनकी शादी हो गई है. क्यों उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी तबाह करने पर तुला हुवा है. तू छूट के लिए इतना अँधा हो गया है की तूने अपने घर में hi डाका दाल दिया. अरे जब इतनी hi आग लगी थी तेरे लुंड में तो जाकर कही रंडी छोड़कर अपनी आग शांत कर लेता बहनचोद.
दीदी इस समय बहुत गुस्से से बोल रही थी. वो मेरी गॉड से उठकर कड़ी हो गई थी. मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखे गुस्से से लाल हो रही थी. मुझे थोड़ा बहुत अंदाज़ा था की दीदी का रिएक्शन इस तरह से हो सकता है इसलिए मैंने अपने आपको पहले से hi तैयार कर लिया था. मैं अपना सर झुकाये बैठा रहा दीदी की बात सुनकर भी जब मैंने कुछ नहीं कहा तो दीदी ने फिर कहा.
सरिता दी- बोलता क्यों नहीं सेल. क्या मैं काफी नहीं थी क्यात ेरे लिए जो तूने दीदी के साथ इतना गलत काम किया. तुझे तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए.
दीदी की बात सुनकर मैंने अपना सर उठाया और एकदम शांत आवाज़ में दीदी से कहा.
मैंने- पहले आप शांत हो जाओ और शांति से मेरी बात सुनो. उसके बाद hi किसी निष्कर्ष पर पहुंचना.
सरिता दी- इतना सब करने के बाद बोल रहा है शांत हो जाऊ. चल ठीक है. बता मैं भी तो सुनु की कौन सी मनगढंत कहानी तू मुझे सुनना चाहता है अपने बचाव में.
मैं- देखो दीदी में जो कहने जार अहा हूँ. उसको एकदम ध्यान से सुनो और अपना गुस्सा थूककर ठन्डे दिमाग से मेरी बात को सोचना. तुम्हे खुद पता चल जाएगा की मैंने सही किया या गलत किया.
इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे गुस्से से hi घूरे जा रही थी. मैंने फिर अपनी गार्डन निचे करके कहना शुरू किया.
मैं- आपको तो अच्छी तरह से याद है की दीदी की शादी को 4 साल हो चुके हैं. और इन चार सालो में वो कितने दिन अपने ससुराल में रही हैं. मुझे बताओ.
सरिता di(ghor कर)- इन सब का उस बात से क्या लेना देना.
मैं- अरे यार. लेना देना है तभी तो बता रहा हूँ. पहले मेरी बात पूरी सुन तो लो.
सरिता दी- लगभग 1 साल
मैं- और जीजा जी के साथ कितने दिन रही हैं.
सरिता दी- यही कोई 2-2.5 महीना.
मैं- हाँ तो सुनो अब. किसी लड़की की जब तक शादी नहीं हुई होती तब तक वो अपने जिस्म की प्यास बर्दास्त कर सकती है. लेकिन एक बार शादी हो जाने के बाद पति से अगर चुदाई हो जाये तो उसे नियमित चुदाई की जरुरत महसूस होती है. और यही जरुरत दीदी को भी महसूस होती थी, लेकिन उन्होंने ये बात किसी से शेयर नहीं किट hi. उन्होंने अपने जिस्म की प्यास को अपने अंदर अभी तक दबा कर रखा था. लेकिन कब तक दबा कर रखती. उस दिन जब कंप्यूटर खरीदने जा रहे थे दोनों लोग तो सामने जानवर आ जाने के कारन मैंने अचानक ब्रेक लगाया तो दीदी का हाँथ गलती से मेरे लुंड पर आ गया.
इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ देखा जो मुझे घूरते हुवे मेरी बात सुन रही थी मैंने आगे कहना शुरू किया.
मैं- उसी दिन उनको मेरे लुंड को लम्बाई और मोटाई के बारे में पता चला, क्योंकि जीजा का लुंड मुझसे 3 इंच छोटा है, जो दीदी ने मुझको बताया. दीदी पहले से hi प्यासी थी और बहार किसी और से छुड़वाने में उनको बदनामी का डार्ट है. इसलिए उन्होंने मुझसे छुड़वाने की सोची, उसके बाद से दीदी एकदम बदल गई. तुम्हारी तरह वो भी मुझे अपना अधनंगा जिस्म दिखने लगी. अब यहाँ पर मेरे पास दो रस्ते थे. या तो मैं दीदी को छोड़कर उनकी प्यास भुजाउ. या फिर दीदी को किसी और से छुड़वाने के लिए छोड़ दूँ.
इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ फिर से देखा तो वो अभी भी मुझे घूरते हुवे मेरी बाते सुन रही थी. मैंने अपनी बात जारी रखते हुवे कहा.
मैं- मैंने भी बहुत सोच विचार किया इस बारे में तो मुझे पहला hi रास्ता सही लगा, नताशा के चले जाने के बाद मुझे भी किसी के साथ की जरूरत थी और दीदी को भी किसी के साथ की जरूरत थी. तो अगर हम दोनों ने एक दुसरे का साथ देकर अपनी जरूरतों को पूरा किया तो इसमें क्या गलत किया.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी किसी सोच में डूब गई. लगभग 10 मिनट तक हॉल में शांति छै रही. इस शांति को दीदी ने तोड़ते हुवे कहा.
सरिता दी( थोड़ा गुस्से भरे स्वर में.)- फिर भी मैं यही कहूँगी की तुमने जो दीदी के साथ किया वो गलत है. चलो तुम्हारी तो ठीक है मर्द सेल ठरकी होते hi हैं. लेकिन दीदी को तो सोचना चाहिए था की तू उनका भाई है. वो कैसे एक भाई के साथ ऐसी गन्दी हरकत कर सकती हैं.
Main-Achha. अगर मैं उनका भाई हूँ तो आपका क्या लगता हूँ मैं.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी एकदम खामोश हो गई और मेरी तरफ देखने लगी. मेरी इस बात से उनका गुस्सा कुछ हद तक काम हो गया था. तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- देखो दीदी. अगर आपको लगता है की सविता दीदी ने गलत किया है तो फिर आपने भी तो गलत किया है. अगर मैं उनका भाई हूँ तो आपका भी तो भाई hi हूँ. और एक बात और जब आप कुंवारी होकर भी अपने प्यासे जिस्म के हांथो मजबूर होकर मेरे साथ सो गई. तो आप सोचो वो तो शादीशुदा हैं और वो पहले से hi जीजा जी से चुद चुकी थी. तो उनके जिस्म में आपसे ज्यादा प्यास है. एक भाई बहन के रिश्ते से अगर देखा जाये तो हम तीनो ने गलत किया है, लेकिन अगर एक औरत और मर्द के नजरिये से अगर देखे तो न अपनी कोई गलती की है, न सविता दीदी ने और न hi मैंने. बाकि अगर आपको अब भी लगता है की मैंने और दीदी ने गलत किया है तो आप ने भी गलत किया है.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी का गुस्सा एकदम शांत हो गया. वो आकर मेरे बगल सोफे पर सर झुककर बैठ गई और सोचने लगी. थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना सर ऊपर किया और मेरी तरफ देखते हुवे कहा.
सरिता दी- सच में अभी तू बहुत बड़ा कमीना है. लेकिन फिर भी मैं पूरी परिस्थिति को जानते हुवे तुझे और दीदी को गलत भी नहीं ठहरा सकती. अभी मैं तुमसे नाराज़ भी नहीं हो सकती लेकिन दीदी कैसे, मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा है. मुझे तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. की ऐसा कुछ हुवा है.
मैंने जब देखा की दीदी अब गुस्सा नहीं हैं और नार्मल बाते कर रही हैं तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- दीदी कैसे का क्या मतलब, और इसमें समझने और न समझने वाली क्या बात है. जैसे तुम पैट गई मुझसे वैसे दीदी भी पैट गई.
सरिता दी- सेल तू बहुत बड़ा कमीना है. मुझे तो तूने पटाया hi. तूने इतनी स्ट्रिक्ट दीदी को भी पता लिया. मन्ना पड़ेगा कमीने तेरे दिमाग को. तेरे से तो कोई भी नहीं बच सकती अब. जो लड़का अपनी दो बड़ी बहनो को पाटकर छोड़ सकता है वो दुनिया की किसी भी लड़की को पता सकता है.
मैं- तारीफ के लिए धन्यवाद सरिता. तुम नाराज़ तो नहीं हो न दीदी के बारे में जानकर.
सरिता दी- चलो अच्छा hi हुवा जो दीदी को तुमने पता लिया. नहीं तो दीदी हमेशा दुखी रहती थी जीजा जी के कारन. मुझे दीदी ने इस जीजा जी के बारे में पहले hi बता रखा था. लेकिन मुझे अंदाज़ा नहीं था की इस सेतुएशन में हैं. चलो अच्छा hi हुवा जो सुख उन्हें जीजा जी से नहीं मिला वो तुमने उनको दिया.
दीदी की बात सुनकर मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कहा.
सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है. दीदी मुझे हर बात शेयर करती थी. बस इस बात को उन्होंने छिपा लिया.
मैं- चालो अच्छा हुवा की तुमको बुरा नहीं लगा. मैं तो समझ रहा था की तुम नाराज़ हो जाओगी.
सरिता दी- बुरा तो मुझे बहुत लगा अभी. और मेरा मन तो कर रहा था की मैं तेरा मुंह नोच लूँ लेकिन साडी सेतुएशन jan-ne के बाद मैं दीदी के लिए मैं बहुत खुश हूँ. मेरी तरह उन्होंने भी बहार जाने के बजाय घर में hi ये सब किया.
मैं- उन्होंने आपकी तरह नहीं किया अआपने उनकी तरह किया है (हँसते हुवे)
मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराते हुवे मुझे मरने लगी. थोड़ी देर तक हॉल में बैठने के बाद दीदी ने कहा.
सरिता दी- अब साडी रात यही बैठे रहने का इरादा है क्या. चलो कमरे में. मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है.
मैंने दीदी को शहर देकर उनके कमरे में ले गया और उन्हें बीएड पर लिटाकर उन्ही बगल में मैं भी सो गया. सुबह मेरी नींद पहले खुली तो मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो गहरी नींद में सो रही थी, उनके चेहरे पर सुकून था. दीदी बहुत hi प्यारी लग रही थी. मैंने दीदी के ऊपर झुककर माथे पर किश कर लिया और उनके कमरे सी निकलकर ऊपर अपने कमरे में चला गया. और बिस्टेर पर लेट गया. और सोचने लगा.
Main-(man में)- मैंने सरिता दीदी को भी छोड़ लिया. अब मेरा नेक्स्ट टारगेट मनीषा है, लेकिन उसको तो पहले से hi सब पता है. तो क्या वो आसानी से मुझसे मन जाएगी ये वो अपनी हरकतों से मुझे तैसे कर रही है. जो भी हो. मुझे जल्द से जल्द मनीषा को भी अपने निचे लाना होगा. ताकि कभी कोई रुकावट न आये चुदाई करने में.
मैं यही सब सोच रहा था की तभी सरिता दीदी की कॉल आई उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया था. जब मैं दीदी के कमरे में पंहुचा तो दीदी बिस्तर पर बैठी हुई थी मैंने उनसे कहा.
मैं- क्या हुवा दीदी. आपने बुलाया.
सरिता दी- मुझे दर्द हो रहा है भाई. ठीक से कड़ी नहीं हो प् रही हूँ.
सरिता di(thoda गुस्से में) सेल मेरी छोटी सी गांड में इतना बड़ा लुंड दाल दिया. तूने सोचा भी की मेरी गांड का क्या हॉल हुवा होगा.
मैं- वो तो ठीक है, लेकिन कर रत उसी छोटी सी गांड में तुम मेरा पूरा लुंड लेकर मजे से छुड़वा रही थी. गलत कह रहा हूँ क्या मैं.
सरिता दी- हाँ ठांण उसी गलती की सजा मैं भुगत रही हूँ कमीने. दो कदम भी चलना मुश्किल हो रहा रहा है. टंगे फैला फैला कर भी ठीक से नहीं चल प् रही हूँ. मेरी छूट अभी भी सूजकर कुप्पा बानी हुई है और गनद के तो पूछो hi मत. वो इतना दर्द कर रही है की लैट्रिन भी करना मुश्किल लग रहा है. नष्पिते तू बहुत बुरी तरह छोड़ता है. कोई और लड़की होती तो मर hi जाती तेरी इस चुदाई से.
मैं- अरे दीदी क्या बात लेकर बैठ गाइट ुम. छोडो न रात गए बात गए. चलो मैं तुमको बाथरूम तक लेकर चलता हूँ. उसके बाद फ्रेश होकर दवा खा लेना और आराम करना. मैं बहार से खाना आर्डर कर दे रहा हूँ.
इतना कहकर मैं दीदी को सहारा देकर बाथरूम तक ले गया और फ्रेश होने के बाद दीदी को उनके कमरे में पहुंचकर किचन में आया और चाय बनाकर बिस्किट और नमकीन लेकर दीदी के कमरे में गया. उन्होंने चाय नास्ता किया तो मैंने उन्हें पेनकिलर खिलाकर निचे आ गया और खाने के टाइम में खाना आर्डर किया. दोनों ने मिलकर दीदी के hi कमरे में खाना खाया. दीदी ने फिर से एक पेनकिलर ले कर आराम करने के लिए लेट गई.
उन दिन कुछ नहीं हुआ क्योंकि दीदी इस स्थिति में नहीं थी. तो मैं भी अपने मोबाइल और t.v. में व्यस्त रहा. शाम को बेल्ल बजी तो मैंने दरवाज़ा खोला. सामने मां, पापा और मनीषा खड़े थे. मैंने उन्हें अंदर आने के लिए रास्ता दिया. मां पापा और मनीषा आकर हॉल में बैठ गए. मैंने उन्हें पानी ला कर दिया. बेल्ल की आवाज़ सुनकर सरिता दीदी भी अपने कमरे से लंगड़ाते हुवे निचे आने लगी तो मैंने आगे बढ़कर सीढ़ियों से उन्हें निचे लेकर आया. उसको देखकर मम्मी ने पूछा.
मम्मी- तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही हो सरिता. क्या हुवा तुम्हे.
सरिता दी- कुछ नहीं मम्मी वो सीढ़ियों से उतारते हुवे कल रात मोच आ गाइट hi. अभी दवा ले आया है. अभी खाई है मैंने.
जिसका जवाब हमने पहले से hi तैयार रखा था की अगर पापा लोगो के आने तक अगर दीदी ठीक नहीं हुई तो क्या बहाना करना है. जब दीदी ने ये बात कही तो मेरी नज़र मनीषा पर thi.didi की बात सुनकर वो मुझे देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. तभी मां ने कहा.
मम्मी- कितनी बार तुम सब से कहा है की सीढ़ियों पर आराम से आया जाया करो लेकिन तुम सब घोड़े की तरह दौड़ते रहते हो. अब भुगतो.
इतना कहकर मम्मी और पापा वह से अपने कमरे की तरफ चले गए. अब हॉल में हम तीनो hi बचे थे. मनीषा अभी भी मुस्कुरा रही थी जब दीदी ने उसको मुस्कुराते हुवे देखा तो उन्होंने कहा.
सरिता दी- तुझे क्या हुवा तू क्यों मुस्कुरा रही है.
मनीषा- मैं भैया के बारे में सोचकर मुस्कुरा रही हूँ. कहा तो रात को आप उनको तरबूज खिलने वाली थी. लेकिन उल्टा भैया को तरबूज मिला hi नहीं उल्टा उन्हें आपको दवा खिलने पद रही है.
मनीषा की बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी. फिर मनीषा को देखकर जवाब दिया.
सरिता दी- नहीं मनीषा ये तरबूज अभी को देने के बाद हुवा. ये तरबूज देखकर एकदम जानवर बन गया था. इसी चक्कर में मेरा ये हॉल हुवा है.
मनीषा- (मुस्कुरा kar)Chalo ठीक है अब जो हो गया वो हो गया अब दवा खाओ और कुछ दिन आराम करो. किचन का काम मैं देख लूंगी.
मनीषा इतना बोलकर अपने कमरे में चली गई. दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी की उन्होंने मनीषा को कैसे बेवकूफ बनाया और मैं मुस्कुरा रहा था की मनीषा ने दीदी को कैसे बेवकूफ बनाया. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को उनके कमरे में पहुंचकर अपने कमरे की तरफ जाने लगा. अभी मैं मनीषा के कमरे के सामने पंहुचा hi था की मेरे मन में एक ख्याल आया की क्यों न मनीषा के कमरे में चला जाये. यही सोचकर मैंने मनीषा के कमरे के दरवाज़े पर हाँथ रख. तो दरवाज़ा खुल गया और मैं अंदर आ गया. अंदर आने के बाद सामने का नज़ारा देखकर मैं तो जैसे दरवाज़े के पास जैम सा गया. और मेरे मुंह से निकला.
मैं- आईये टेरिइइइ kiiiiiiiiii. ये क्याआ.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में.