Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 6 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-46

दीदी के जाने के बाद मैं कमरे में आकर बैठ गया और अभी जो हुवा उसके बारे में सोचने लगा. सबकुछ अच्छा hi जा रहा था. तो दीदी ने ऐसे रिएक्शन क्यों दिया. कही दीदी को मेरी रंडी वाली बात तो बुरी नहीं लगी अब ये तो पता नहीं की क्या हुआ दीदी को. लेकिन अगर मैंने जोश में आकर रंडी नहीं बोलता तो जिस तरह से दीदी साथ दे रही थी उस हिसाब से वो ज्यादा से ज्यादा 1 हफ्ते के अंदर मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही होती. लोग तो अपने पेअर पर कुल्हाड़ी मरते हैं. लेकिन मैंने तो अपने लुंड पर कुल्हाड़ी मार ली थी.

फिर मैंने सोचा की हो सकता है की उनका पतिब्रता धर्म जग गया हो. उनको ये एहसास हो गया हो की वो गलत कर रही हैं. अपने पति को धोखा दे रही हैं. और सबसे बड़ी बात अपने भाई के साथ ये सब कर रही हैं. मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा था तो मैंने इस बात को दिमाग से निकलने की सोची तभी मेरे मोबाइल की मश्ग टन बजी. मैंने देखा की मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग है. मैं उनसे बात तो नहीं करना चाहता था. लेकिन मैंने सोचा की एक छूट तो मेरी बकचोदी की वजह से हाँथ से गई. लेकिन इस छूट को क्यों जाने दू तो मैंने दीदी को रपल्य किया.

म- ही सेक्सी.

सरिता दी- कैसी हो आप.

म- ठीक हूँ. आप कैसी हो.

सरिता दी- मैं भी ठीक हूँ. और बताओ क्या हो रहा है.

म- कुछ नहीं बस अभी भाई के साथ थी. अभी फुर्सत मिली तो बैठी हुई थी और आप क्या कर रही हैं.

सरिता दी- कुछ नहीं बस अभी फिऑन्स से बात हो रही थी. फुर्सत मिली तो सोचा तुमसे बात कर लू.

म- अरे वाह क्या बाते हो रही थी दोनों फ्यूचर कपल्स के बिच.

सरिता दी- अरे कुछ खास नहीं बस वही रोज की बाते. हसी मज़ाक बस और क्या बात होगी.

म- बस केवल हंसी मज़ाक और वो वाली बात नहीं करती क्या दोनों लोग.

सरिता दी- वो वाली कौन सी बात ( हँसते हुवे)

म- अरे वही. प्यार मोहब्बत वाली बात. शादी के बाद क्या क्या करना है. कहा कहा करना है. कैसे कैसे करना है. कब कब करना है. हनीमून की बाते. मेरा मतलब है गन्दी वाली बाटे.

सरिता दी- चल हैट बेशरम. कोई ऐसी बाते भी करता है क्या.

म- चल झूठी. मुझे बना रही है. चल बता न क्या क्या प्लान बनाया है शादी के बाद का.

सरिता दी- अरे कुछ ज्यादा खास नहीं. बस रोज कहते हैं. की तुम्हारे साथ ये करूँगा. तुम्हे इनरवेरे में hi घर में रखूँगा. और ऑफिस नहीं जाऊंगा दिन भर तुम्हारे साथ घर में hi रहूँगा. होनीमून के लिए शिमला नैनीताल और मसूरी जाना तय हुआ है.

म- हाउ रोमांटिक. तब तो बहुत मज़ा आने वाला है आपको (हँसते हुवे)

सरिता di-(sharmate हुवे). चल हैट बेशरम. शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुवे.

म- अच्छा अब रखती हूँ. भाई बुला रहा है.

मैं रोज रोज फ़ोन रखने से पहले यही बोलता था की भाई बुला रहा है तो आज दीदी ने पूछ hi लिया.

सरिता दी- एक मिनट. जरा रुको तो.

म- हाँ बताओ क्या हुआ.

सरिता दी- अच्छा ये बताओ रोज तुमको इस वक्त तुम्हारा भाई क्यों बुलाता है उसको इतनी रात को क्या काम रहता है तुमसे. तुम रोज उसके बुलाने के बाद bye बोलकर चली जाती हो.

म- अभी तो नहीं बता सकती जल्दी में हूँ. बाद में आपको बताउंगी. Bye.

उसके बाद मैंने फ़ोन रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा. थोड़े देर बाद मुझे नींद आ गयी.

सुबह मैं देरी से सोकर उठा. आज सविता दीदी ने भी मुझे नहीं जगाया. खैर वो तो कल रात से गुस्सा hi थी. मैं फ्रेश होकर निचे आया. और सोफे पर बैठ गया. वह पर मम्मी पापा मनीषा और सरिता दी थे. आज किचन में सविता दी थी. जब मैं वह बैठा तो सरिता दीदी ने पूछा.

सरिता दी- किससे मार खा कर आ रहा है अभी.

उनकी बात सुनकर मैं चौक गया. मैंने सोचा इन्हे कैसे पता की कल दीदी ने मुझे थप्पड़ मारा. कही दीदी ने बता तो नहीं दिया. नहीं नहीं अगर दीदी ने बता दिया होता तो घर का माहौल दूसरा होता. जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो सरिता दी ने फिर पूछा.

सरिता दी- तुमने जवाब नहीं दिया अभी. इतनी सुबह सुबह किससे मार खा कर आ रहा है.

मैं- मतलब मुझे कौन मरेगा. और आपको कैसे पता की मैंने मार खायी है.

सरिता दी- अपना गाल देख एकदम लाल पड़ा हुवा है जैसे किसी ने बहुत जोर से थप्पड़ मारा हो.

मैंने शीशी में जब अपना चेहरा देखा तो एकदम एक तरफ एकदम लाल हो गया था. तो मैंने धीरे से बुदबुदाया.

मैं- एक जंगली बिल्ली ने बहुत जोर का मारा है.

सरिता दी- क्या बड़बड़ा रहा है. सुनाई नहीं पद रहा है.

मैं- अरे दीदी वो क्या है कल रात कमरे में 2-3 मच्छर आ गए थे. वो बार बार मेरे चेहरे पर बैठ रहे थे और मैं नींद में था. तो उन्हें मरने के लिए हाँथ चला रहा था. शायद कुछ ज्यादा तेज़ी से हाँथ चल गया इसलिए मेरे गाल लाल हो गए हैं.

मैं अपने कमरे में चला गया. आज मेरा बहार जाने का मूड नहीं था तो मैं अपने कमरे में बैठकर अपने लैपटॉप पर सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. लगभग 3 हॉर्स बाद मुझे प्यास लगी तो मैं पानी लेने किचन में जा रहा था. उसी समय सरिता दी बाथरूम से नहाकर बहार निकली. तो उन्होंने अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा हुवा था. वो टॉवल उनकी जांघो तक आ रहा था. दीदी के बाल भीगे हुवे थे. शरीर में पानी की हलकी हलकी बुँदे चमक रही थी. उनके गाल होंठ पानी की बूंदो के करना बहुत कामुक लग रहे थे. उनके बालो से पानी की बुँदे उनकी गार्डन पर गिरकर सरकती हुई उनकी ृषभरी चूचियों की घाटी में ऐसे गायब हो रही थी जैसे नदिया समुन्दर में गायब हो जाती थी.



सेक्सी कहानी पढ़कर मेरा लुंड वैसे भी खड़ा था परनतु दीदी का ऐसा कामुक और मादक रूप देखकर वह झटके मरने लगा. मेरे इस तरह अचानक सामने आ जाने से दीदी एकदम चौक गाइट hi. उनके हाँथ पांव एकदम जैम हो गए थे उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे.

मैं एकटक दीदी के शरीर को घूरने लगा. दीदी ने भी जब ये देखा की मैं उनके शरीर को घूर रहा हूँ तो वह शर्माकर इधर उधर देखने लगी.



फिर एकाएक दीदी की नज़र मेरे खड़े लुंड पर पड़ी तो दीदी एकदम सोक रह गयी. मेरा लुंड पुरे आकर में दीदी के सामने से. जिसे दीदी बस मुंह फाडे मेरे लुंड को घूरे जा रही थी. लगभर ऐसे hi 30 सेकंड तक मेरे लुंड को घूरने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मुझे जैसे होश आया और मैंने कहा.

मैं- सॉरी दीदी वो मुझे प्यास लगी थी तो मैं पानी पिने आया था. मुझे नहीं पता था की वो आप……. Matlab………wo…………

सरिता दी- कोई बात नहीं अभी. लेकिन अपने नज़रो को थोड़ा अपने काबू में रखना सीख ले.

इतना कहने के बाद वो तेज़ी से दौड़कर अपने कमरे में चली गई और मैं पीछे से उनकी मटकती गांड को देखने लगा. उसके बाद मैं पानी पीकर अपने कमरे में आया. मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं कपडे पहनकर थोड़ा फ्रेस होने के लिए बहार निकल आया

लगभर 3 हॉर्स बाद मैं जब घर वापस आया तो घर देखा की घर में मां, पापा, मैश और सविता दीदी हॉल में hi बैठे थे. घर में जैसे मातम चाय हुआ था. सबके चेहरा पर एक उदासी थी थी. मुझे देखते hi पापा ने तेज़ आवाज़ में पूछा.

पापा- अभी कहा गया था तू. हम कब से तेरी रह देख रहे हैं.

पापा के मुंह से ये सुनकर मेरी तो गांड फटकार चौराहा हो गई. मुझे पक्का विश्वास हो गया की दीदी ने पापा को सबकुछ बता दिया है. और आज मेरी सहमत आयी है. तो मैंने डरते डरते पापा से कहा.

मैं- सॉरी पापा वो मुझसे गलती हो गयी. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.

पापा- अरे नालायक. सरिता की शादी पोस्टपोन हो गई है.

पापा की बात सुनकर मुझे ये तो रहत हुई की सविता दीदी ने पापा को कुछ नहीं बताया है. लेकिन सरिता दीदी को शादी पोस्टपोन हो गई है ये सुनकर मुझे जैसे झटका सा लगा. मैंने चौकते हुवे कहा.

मैं- क्या.. Kaise..Kisliye…..

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-47

(ये अपडेट नार्मल है.)

शादी पोस्टपोन होने की खबर सुनकर मैं चौक गया और मेरे मुंह से निकला.

मैं- क्या.. कैसे.. किसलिए…..

पापा- अरे उनका जो बिज़नेस था उसमे उनको बहुत बड़ा नुकसान हो गया है. जिससे उनकी साडी जमा पूंजी ख़तम हो गयी है और सरिता की सास भी हॉस्पिटल में हैं तो उनका भी इलाज में पैसे लग रही हैं. इस समय उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. पैसो की तंगी के कारन hi वो शादी पोस्टपोन कर रहे हैं 6-7 महीने बाद hi ये शादी होगी.

मैं- अरे ऐसे कैसे कर सकते हैं वो लोग. अब शादी में सिर्फ 7 दिन hi बाकि हैं. सब व्यवस्था हो गई है. और मेरी बहन के भी सपने हैं कुछ उसका तो ख्याल रखना चाहिए था न उनको.

पापा- अरे बीटा उसका hi ख्याल रखकर hi तो उन्होंने इस शादी को पोस्टपोन किया है. अब तुम hi बताओ अभी उनके यहाँ कितनी टेंशन का माहौल है. अगर इस टेंशन के माहौल में सरिता की शादी हो जाती है तो वो खुश नहीं रहेगी. इसलिए तुम्हारे जीजा ने बहुत सोच समझकर ये निर्णय लिया है. इस सेतुएशन में मुझे भी ऐसा hi लगता है की ऐसे माहौल में शादी को पोस्टपोन कर देना hi ठीक है.

मुझे भी पापा की बात सही लग रही थी की ऐसे माहौल में अगर दीदी की शादी हो भी गयी तो इस टेंशन के माहौल में दीदी खुश कैसे रहेंगी. हो सकता है की इस टेंशन के माहौल में जीजा जी से उनकी कहासुनी न हो जाये.

मैं- सरिता दी कहा हैं और क्या उनको इस बारे में पता है.

पापा- हाँ उसे पता है और वो अपने कमरे में है. थोड़ी अपसेट हो गई है ये सुनकर.

मैं भी वही सब के साथ सोफे पर बैठ गया और सरिता दीदी के बारे में सोचने लगाकि दीदी ने कितने अरमान शादी के लिए सजा कर रखे थे. उन्होंने इस शादी के लिए एक एक दिन गईं कर कटा है. वो कितना परेशां होंगी. उनको कितना दुःख पंहुचा होगा ये सुनकर की उनकी शादी अभी नहीं हो रही है. मैं कुछ देर निचे बैठा ये सब सोचता रहा फिर उठकर सरिता दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. जब मैं वह पंहुचा तो दीदी फ़ोन पर जीजा जी से बात कर रही थी. जीजा जी को मन रही थी. जीजा जी भी दीदी को समझा रहे थे, लेकिन दीदी थी की समझने की कोशिश hi नहीं कर रही थी. जिससे झुंझलाकर जीजा जी ने फ़ोन रख diya.main कुछ देर बहार hi खड़ा रहा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को आवाज़ लगाई.

मैं- दीदी क्या मैं अंदर आ जाऊ.

और इतना कहकर मैं अंदर चला गया. दीदी मुझे देखते hi दौड़कर मेरे गले लग गई.



दीदी की t-shirt आज भी डीप नैक की थी और दौड़ने से उनकी चूचिया जम्प करके इधर उधर हिल रही थी. जब वो मेरे गले से लगी तो उनकी चूचिया सीधे मेरे साइन में धस गई. लेकिन आज मेरे मन में कोई भी ठरक जैसे चीज़ नहीं थी. मैं आज उन्हें एक बहन की नज़र से देख रहा था. इसलिए मैंने इस बात पर ज्यादा दयँ नहीं दिया. दीदी मेरे गले लगकर डबडबाई आँखों से मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- देख न अभी. तेरे जीजा जी ने शादी पोस्टपोन कर दी है.

मैं- हाँ दीदी मुझे भी पापा ने बताया है. लेकिन आप इतना परेशां क्यों हैं. हम सब हैं न आपके साथ.

सरिता दी- हाँ लेकिन उन्होंने शादी क्यों पोस्टपोन की. शादी तो हो सकती थी न. मैंने पैसे के लिए तो उनसे नहीं कहा की मुझे पैसे चाहिए. फिर क्यों.

मैं- दीदी बात पैसे की नहीं है. जीजा जी को आपकी फ़िक्र है. इसलिए वो आपको टेंशन में नहीं डालना चाहते थे. अभी उनके घर में बहुत टेंशन है. इसलिए उन्होंने शादी को आगे बढ़ाया है.

सरिता दी- लेकिन मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी ऐसे हालत में भी शादी करने में.

मैं- मैं समझ सकता हूँ दीदी. लेकिन आप भी समझिये की अगर ऐसे हालत में शादी हो गई और तो आप भी हर वक्त टेंशन में रहेंगी और आपको टेंशन में देखकर जीजा जी को बहुत तकलीफ होगी.

सरिता दी- लेकिन अभी………

मैं- (उनकी बात काटकर) अच्छा एक बात बताइये दीदी अगर मैं, सविता दीदी, मनीषा या मां पापा में से कोई बहुत बीमार हो गया और होस्पिटलिज़्ड हो गया तो क्या आप शादी कर लेती.

सरिता दी- मैं आप सब के बिना शादी कैसे करती.

मैं- वही तो मैं कह रहा हूँ की उनकी मां होस्पिटलिज़्ड है. तो ऐसे में जीजा जी का हालत समझने की कोशिश कीजिए. वो कितने परेशां होंगे और आपने उन्हें और परेशां कर दिया फ़ोन पर. चलिए अभी फ़ोन करिये जीजा जी को और माफ़ी मांगिये उनसे मेरे सामने.

मेरे समझने से सरिता दीदी को भी ये समझ में आ गया की इस हालत में शादी तो नहीं की जा सकती इसलिए उन्होंने जीजा जी को फ़ोन लगाया और उनसे माफ़ी मांगी और फिर फ़ोन रख कर मेरी तरफ देखने लगी.

मैं- ये हुई न अच्छी बहन वाली बात. अब अपने आंसू साफ करो और जल्दी से निचे आओ. मैं निचे जा रहा हूँ.

मैंने निचे जाकर बताया की सरिता दी को मैंने समझा दिया है अब वो थोड़ा नार्मल हो गई हैं. उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया. इसी तरह लगभग 1 वीक निकल गए. इन 1 सप्ताह में सविता दीदी ने मुझसे बात नहीं की जबकि मैंने एक दो बार माफ़ी भी मांगी. सरिता दीदी को भी मीरा वाली ईद से कई मश्ग किये लेकिन कोई रपल्य नहीं आया. सरिता दी से नॉर्मली रोज मैं बातचीत करता था. लेकिन अब पहले जैसा माहौल नहीं बन प् रहा था.

1 वीक बाद एक रात को मैं बीएड पर लेता हुआ था तभी सरिता दी का मश्ग मीरा वाली ईद पर आया. मैंने तुरंत उन्हें रपल्य किया.

म- ही कैसी है आप.

सरिता दी- ठीक hi हूँ. तुम बताओ कैसी हो.

म- मैं ठीक हूँ लेकिन आपको क्या हो गया है. 1 हफ्ते से कोई कॉन्टैक्ट नहीं. सब ठीक तो है न.

सरिता दी- कुछ ठीक नहीं है यार. इसीलिए तो कुछ दिन ऑनलाइन नहीं आई.

म- क्यों क्या हो गया. बताओ मुझे.

सरिता दी- मेरी शादी पोस्टपोन हो गई.

म- (चुकने का नाटक करते हुवे) क्यों. किसलिए कैसे.

फिर सरिता दी ने पूरी बात मीरा को बता दी. जो मुझे पता थी.

म- तो इसमें इतना परेशां होने की क्या बात है आज नहीं तो 6 मंथ बाद hi सही.

सरिता दी- तुम समझ नहीं रही हो. मेरी क्या हालत है इस समय.

म- क्या हुवा है आपको. तबियत तो ठीक हैं न आपकी.

सरिता दी- हाँ तबियत तो ठीक है. लेकिन इस शादी को लेकर मैंने कितने सपने देखे थे. मैंने एक एक दिन गईं कर काटे थे. लेकिन लगता है मेरे नसीब में खुशिया है hi नहीं.

म- ऐसा क्यों कह रही हो. घर में सभी हैं अच्छा खासा परिवार है. तो इससे बढ़कर ख़ुशी की बात और क्या हो सकती हैं.

सरिता दी- तुम समझ नहीं रही हो. मेरा मतलब हैं मेरी भी कुछ जरूरते हैं. जो शादी के बाद पूरी हो सकती थी.

म- हाँ वो तो है. शादी के बाद पति मिलता और उसके पैसो पर ऐश करती. खूब खर्चा करती. (हँसते हुवे)

सरिता दी- तुम एकदम झल्ली हो. अब तुम्हे मैं कैसे समझौ. पता नहीं तुम मेरे बारे में क्या सोचो.

म- अरे यार हम अचे दोस्त हैं तो जो भी हो मुझे बता दो मैं आपकी पूरी मैडम hi करुँगी.

सरिता दी- अरे मेरा मतलब है की मेरे जिस्म की भी कुछ जरूरते हैं. जो शादी के बाद पूरी हो सकती थी.

म- (हँसते हुवे) अच्छा तो आग लगी है मेरी सेक्सी फ्रंड के जिस्म में. इसलिए बहुत परेशां हो.

सरिता दी- लेकिन लगता है अब 6 महीने मुझे ऐसे hi जल जल के रहना होगा.

म- अरे इसमें टेंशन लेने की क्या बात है. आगे तुम्हे बुरा न लगे तो मैं कुछ सलाह दू.

सरिता दी- हाँ बताओ. तुम्हे पूछने की कोई जरुरत नहीं हैं.

म- इस जिस्म की तड़प को सदी हो या न हो कभी भी बुझाया जा सकता है.

सरिता दी- अच्छा……. वो कैसे. (फिर कुछ सोचकर) कही जो मैं समझ रही हु. तुम वो तो नहीं कहना चाहती हो.

म- अब आप क्या समझ रही हैं ये तो मुझे नहीं पता. लेकिन इस समय आपको एक बर्फ की सख्त जरुरत है.

सरिता दी- ये कैसी बात कर रही हो तुम. मैं उस टाइप की लड़की नहीं हूँ.

अब मैं यहाँ अपना गेम खेलना शुरू कर दिया था. मुझे लग रहा था की दीदी के जिस्म की जो प्यास है उसको और भड़काना होगा. ताकि दीदी चुदाई करने के लिए मज़बूर हो जाये. लेकिन उनको चुदाई के लिए अपनी तरफ भी. मोड़ना था ताकि वो कोई बर्फ न बनाये बल्कि मुझसे चुदाई करे. इसलिए मैंने बात को आगे बढ़ाया.

म- तो मैंने कब कहा की आप उस टाइप की लड़की हो. मैं तो बस ये कह रही थी जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक एक बर्फ बना लो और मौज करो. आपकी जरुरत भी पूरी हो जाएगी. और आपको तड़पना भी नहीं पड़ेगा.

सरिता दी- लेकिन मैं ये सब कैसे कर सकती हूँ. नहीं मुझसे ये नहीं होगा.

म- ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. वैसे एक राष्ट और है. लेकिन पता नहीं आप कर पाएगी या नहीं. और हो सकता है की वो बात सुनाने के बात आप मुझसे दोस्ती भी तोड़ दो.

सरिता दी- ऐसी कौन सी बात है जो तुम ऐसे बात कर रही हो.

म- बात ये है की…………. अच्छा बही रखती हूँ भाई बुला रहा है बाद में बात करती हूँ.

सरिता दी- अरे कहा चली सुनो तो.

मैंने दीदी का मश्ग देखा लेकिन रपल्य नहीं किया. मैं दीदी को सस्पेंस में रखना चाहता था. इसलिए मैंने मोबाइल साइड में रखा और बीएड पर लेट गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

आपने जितनी तारीफ कर दी अभी फिलहाल उतनी तारीफ के हकदार नहीं है।

जहां तक फ़ोटो की बात है तो मुझे भी लगता है कि कम से कम फ़ोटो का प्रयोग होना जरूरी है। इसलिए अब ज्यादा फ़ोटो नहीं डालेंगे।

पूरी पूरी कोशिश करूँगी कि आगे भी आप सभी को कहानी अच्छी लगे।

बस इसी तरह से अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा करते रहिए।

धन्यवाद बहुत बहुत
 
अपडेट-48

बीएड पर लेट कर मैं सोचने लगा की सविता दीदी को कैसे मनौ. उन्होंने पापा से कोई बात नहीं बताई थी. इसलिए मुझे ये लग रहा था की अगर मैं थोड़ी शरारत और भी उनके साथ कर दूंगा तो वो शायद पापा को न बताये. तो मैंने एक बोल्ड स्टेप लिया और एक फोटो दीदी को भेज दिया. अब उस फोटो का क्या रिएक्शन होता है. और अगर उस फोटो का कोई रिएक्शन होता है तो उस रिएक्शन के लिए भी मैंने अपने आपको तैयार कर लिए था. वो फोटो भेजने के बाद मैं गहरी नींद में सो गया.



मैं सुबह उठकर अपना जिम किया और इस इंतज़ार में कमरे से बहार नहीं निकला की शायद दीदी ऊपर आये. क्योंकि मैंने आज प्लान बनाया था की दीदी को अपना खड़ा लुंड पूरा नंगा दिखा दू. हो सकता है की मेरा नंगा लुंड देखने के बाद दीदी पिघल जाए और मेरे लुंड पर आकर बैठ जाये. इसलिए मैंने अपनी लोअर उतर दी और दरवाज़ा खोल कर सविता दीदी का इंतज़ार करने लगा. अपना लुंड खड़ा करने के लिए मैंने एक सेक्सी कहानी पढ़नी शुरू कर दी. कहानी पढ़कर मेरा लुंड ुंडेरवेरे में खड़ा हो चुक्का था. तभी मुझे किसी के कदमो की आहात सुनाई पड़ी. मैंने झांक कर देखा तो सविता दीदी hi थी.

जब दीदी दरवाज़े के सामने आयी तो मैंने अपने ुंडेरवेरे में खड़े लुंड को सहलाना सुरु कर दिया. दीदी की नज़र जैसे hi मेरे लुंड पर पड़ी वो एकदम रुक गई और आँखे फाड़ फाड़ कर मेरे लुंड को देखने लगी.



मैंने दीदी को दो बार लुंड दिखाया था लेकिन इस बार लुंड में तनाव अपने पुरे चरम पर था इसलिए मेरा लुंड उन दो बार की अपेक्षा ज्यादा लम्बा नज़र आ रहा था. मैंने कहकहियो से दीदी को देखा तो वो एकटक मेरे लुंड को hi घूरे जा रही थी. मैंने अपने लुंड को सहलाते हुवे अपने प्लान को आगे बढ़ाते हुवे एकदम खुलकर कहना शुरू किया.

मैं- तू क्यों बात बात पर अपना सर उठाकर खड़ा हो जाता है. तुझे कितनी बार कहा है की इतना उतावलापन अच्छा नहीं है. मैं जनता हूँ की तुझे इस वक्त छूट की बहुत जरुरत है. लेकिन मैं भी क्या करू. जिसको तू पहले छोड़ता था वो रैंड तुझे धोखा देकर चली गई. ुको तुझपर तनिक भी तरस नहीं आया. मैंने भी कोसिस की की तुझे छूट मिल जाये. मैंने एक लड़की को पटाने की कोशिश भी की. है तो वो शादीशुदा और थोड़ा सा सांवली. लेकिन मुझको बहुत hi सुन्दर, हॉट और सेक्सी लगती है.

इतना कहने के बाद मैंने दीदी की तरफ कनखियों से देखा तो दीदी बस मेरे लुंड को hi घूरे जा रही थी. मैंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुवे कहा.

Main-wo इतनी मस्त मॉल है की उसे छोड़ने के लिए तीसरा वर्ल्डवार हो जाये. क्या बताऊ तुझे की वो क्या लगती hai.uske बाल, उसके होंठ, उसकी आँख और उसके गाल की तारीफ के लिए मेरे पास शब्द काम पद गए हैं. उसकी चूचिया इतनी बड़ी और राषबरी हैं की कपडे के ऊपर से hi ऐसे लगता है की जैसे उसमे बहुत दूध भरा है. तू यकीं नहीं करेगा की जब उसकी चूचिया कपड़ो के ऊपर से इतनी मस्त लगती हैं तो बीने कपड़ो के तो क़यामत ला देती होंगी. मैं तो उसका पूरा रास दबदबा कर और निचोड़कर पीना चाहता हूँ. लेकिन वो अपनी चूचिया मुझे पिलाती hi नहीं है.



मैंने दीदी की तरफ कनखियों से देखा तो दीदी की सांसे भरी हो गई थी उनका चेहरा लाल हो गया था. अपने भाई के मुंह से अपनी इतनी गन्दी तारीफ सुनकर भी दीदी वही कड़ी एकटक मेरे लुंड को देके जा रही थी. फिर मैं ईगल स्टेप लेने की सोचा और अपने लुंड को अंदर वेरे से आज़ाद कर दिया. अब मेरा लुंड एकदम नंगा.



फुल खड़ा हुवा दीदी के सामने लहराने लगा. दीदी ने इतना बड़ा नंगा लुंड शायद पहली बार देखा था तभी तो मेरे लुंड को देखते hi दीदी का मुंह पूरा खुल गया. आँखे बड़ी बड़ी हो गई. आश्चर्य के कारन दीदी ने अपने दोनों हाँथ अपने मुंह पर रख लिए. मेरे नंगे लुंड को देखकर दीदी की सांसे बहुत तेज़ चलने लगी. जिसकी आवाज़ मुझे भी सुनाई देने लगी उनकी चूचिया हर साँस के साथ तेज़ी से ऊपर निचे हो रही थी. फिर मैंने अपने नंगे लुंड को सहलाते हुवे आगे कहना शुरू किया.

मैं- तू जनता है उसकी गद्देदार गांड कितनी कातिल है. जब वो चलती है तो मेरे दिल पर छुरिया चलती है. उसकी गांड चलते समय जब मटकती थी. तो तू अपने आप से बहार हो जाता था. इतनी कातिल गांड है की जब एक बार उसकी गांड को देख लेता हूँ तो दिन भर तू खड़ा रहता है. तू सोच की अगर तू एकबार उसकी कातिल गद्देदार गांड में घुस गया तो तू तो कभी बहार hi नहीं निकलना चाहेगा.



मेरी हर एक बात का दीदी पर कामुक असर हो रहा था. मैंने देखा की दीदी वासना के नशे में एकदम लाल हो गई हैं. वो अपने दांतो से अपने होंठो को काट रही हैं. तो मैंने आगे कहना शुरू किया.

मैं- और वो जितनी हसीं है मुझे लगता है की उसकी छूट उससे भी ज्यादा हसीं है. मैंने उसकी छूट तो कभी देखि नहीं है लेकिन ये जनता हूँ की उसकी छूट छोड़ने में तुझे बहुत मज़ा आएगा. लेकिन क्या करू यार. मैं तो उसे छोड़ना चाहता हूँ लेकिन वो मुझसे छुड़वाना नहीं चाहती. तू तो जनता है की मुझे नार्मल चुदाई पसंद नहीं है मैं हार्ड सेक्स ज्यादा पसंद करता हूँ. तो शायद इसलिए वो मुझसे न छुड़वाना चाहती हो.

मैंने फिर से दीदी की तरफ देखा तो उनकी हालत इस समय बहुत hi ख़राब थी. उनका पूरा चेहरा वासना के नाशी में एकदम लाल हो गया था. उनकी आँखों में प्यास दिखाई दे रही थी. उनको होंठ थरथरा रहे थे जिसे वो अपने दांतो से काट रही थी. उनकी साँस धौकनी की तरह बहुत स्पीड में चल रही थी. मैंने अपने नंगे लुंड को सहलाते हुवे बात को आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मैं- ऐसा भी हो सकता है छोटे भाई की वो शादीशुदा है. और उसका पति शायद उसे प्यार भी नहीं करता और मुझे तो लगता है की वो उसे ठीक से छोड़ भी नहीं पता है. तभी तो उसकी जवानी एकदम उफान पर है. हो सकता है वो छोड़ना चाहती हो लेकिन अपने पति और समाज का दर भी लग रहा हो की अगर किसी को पता चल गया तो वो किसी को मुंह दिखने लायक नहीं रहेगी. उसकी बात भी सही है. लेकिन उसको ये नहीं पता है की वो एक बार तुझसे छोड़ने के बाद समाज और पति को भूल जाएगी. और तुझसे हमेशा छोड़ने के लिए तैयार रहेगी. और अगर तू उसको छोड़ेगा तो मैं इतना ख्याल तो रखूँगा hi की इस बात का किसी को पता hi न चले.

मेरी बात सुनकर दीदी से अब बर्दास्त नहीं हो रहा था. तो वो चुपचाप जाने के लिए मुद गई लेकिन मैंने ऐसी बात कही की उनके पेअर वही रुक गए. और वो फिर से पलटकर मेरे लुंड को घूरने लगी.

मैं- लेकिन मैं भी चुटिया हूँ जो इतनी देर से तुझे वो बात बता रहा हूँ जिसका अब कोई मतलब नहीं है. 1 हफ्ते पहले मैंने उसे प्रोपोज़ किया था. लेकिन उसने मुझे थप्पड़ मार दिया. मैं भी चाहता तो उसे थप्पड़ मर सकता था लेकिन मैं उसे थप्पड़ कैसे मार सकता था क्योंकि वो तुझसे hi छोड़ने वाली थी और अगर तुझे पता चलता की मैंने तेरी छूट को थप्पड़ मारा है तो तू मुझसे नाराज़ हो जाता. आज 1 हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं लेकिन उसने अब तक पलटकर बात नहीं की. कल एक मश्ग भेजा उसका भी जवाब नहीं दिया. अब मैं उसको कोई मश्ग नहीं करूँगा. लगता है उसकी छूट अब तुझे नहीं मिलने वाली.

मेरी बात दीदी पता नहीं सुन भी रही थी या नहीं लेकिन मेरे लुंड को घूर घूर कर देख रही थी. उनकी हालत तो ख़राब hi हो गई थी तो. मैंने एक आखिरी आर या पार का वॉर किया. इससे या तो मुझे सविता दीदी की छूट मिल सकती थी या फिर मैं उनकी छूट को हमेशा के लिए खो देता. और ये वॉर था जेएलओसी का वॉर. जिससे शायद hi कोई लड़की बच पाई हो.

मैं- लेकिन तू चिंता मत कर तेरे लिए मैं छूट का इंतज़ाम जरूर करूँगा. मैंने एक बहुत hi सुन्दर लड़की को पटना शुरू कर दिया है. जो उस लड़की से बहुत गोरी है और मज़े की बात ये है की वो भी शादीशुदा hai.(main कुंवारी कहकर दीदी का शक सरिता दीदी की तरफ नहीं करना चाहता था) तो बहुत hi जल्द तेरे लिए एक छूट का बंदोबस्त जो जाएगा. (और एक हल्का सा थप्पड़ लैंड पर मार्कर) चल अब खुश हो जा और बात बात पर अपना सर उठाकर खड़ा होना बंद करदे. अब मुझे बहुत काम है. किसी दिन फुर्सत में मैं फिर तुझसे बात करूँगा.

और इतना कहकर मैंने अपने लुंड को वापस ुंडेरवेरे में दाल लिया. और जब दरवाज़े की और देखा तो दीदी निचे जा रही थी. मेरे हिसाब से तो मैंने बहुत बड़ा रिस्क ले लिया था बहुत बड़ा रिस्क ले लिया था. अब आगे क्या होता है. दीदी इस पर कैसे रियेक्ट करती हैं ये मुझे नहीं पता था. अब या तो मुझे सविता दीदी की छूट मिलेगी या फिर उनसे मेरे सरे रिश्ते ख़तम होंगे. लेकिन अब जो कर दिया था वो कर दिया था मैंने उस बारे में न सोचना hi बेहतर समझा और उठकर बाथरूम में चला गया.

मैं नहाकर निचे आया अपना नाश्ता किया और बहार जाने hi वाला था की सरिता दीदी ने मुझे आवाज़ दी.

सरिता दी- अभी सुन तो. कुछ काम था तुझसे

मैं- हाँ दीदी कहिये. क्या बात है

सरिता दी- वो मुझे कुछ कपडे खरीदने थे तो क्या तू मुझे बाजार ले जा सकता है.

मैं- लेकिन दीदी मैं तो अपने काम से जा रहा हूँ. मुझे वह आधा से एक घंटा लग सकता है

सरिता दी- कोई बात नहीं तू अपना काम समेत लेना उसके बाद मुझे बाजार ले चलना.

मैं- लेकिन आप वह एक घंटे करेंगी क्या. बोर हो जाएंगी आप.

सरिता दी- मैं तो दीदी के साथ जाना चाहती थी लेकिन उनकी तबियत ठीक नहीं है तो इसलिए तुझसे कह रही हूँ.

सरिता दीदी की बात सुनकर मैं समझ गया की उनकी तबियत को क्या हुवा है असल में वो मेरी बात सुनकर कुछ सोच विचार कर रही होंगी. जिसके लिए उन्हें समय चाहिए था. इसलिए उन्होंने सरिता दीदी से तबियत ख़राब होने का बहाना बनाकर घर में hi रुक गाइट hi.

मैं- आप ऐसा करो दीदी की मनीषा के साथ चली जाइये.

सरिता दी- तू मुझे ले चलेगा या नहीं ये बता. बहाना मत बना.

मैं- घर में फोरव्हीलर है तवो व्हीलर है अगर आज आपने गाड़ी सीखी होती तो आज आपको किसी से कहने की जरुरत नहीं पड़ती.

सरिता दी- तो तू सीखा दे न मुझे मेरा भी बहुत मन है गाड़ी चलने का.

मैं- अच्छा सीखा दूंगा. लेकिन अभी आप चलिए. देर हो रही है.

इसके बाद मैंने और दीदी घर से भहर आ गए और बाइक पर बैठकर घर से निकल गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
प्यारे पाठको नमस्कार.

आप सब के प्यार और प्रतिक्रिया को देखते हुवे लग रहा है की कहानी आपको पसंद आ रही है. जिसके लिए आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद.

आप सब से एक सुझाव की जरुरत है.

कुछ अपडेट बाद ऐसी सिचुएशन क्रिएट होने वाली है की सविता दीदी को 1 हफ्ते के लिए अपने पति के पास जाना पद रहा है. जिसमे दो रस्ते नजर आते हैं.

1. सविता दीदी की चुदाई कराकर उसे ससुराल भेजा जाए.

2. अभी थोड़ा और सेडक्टिव किया जाए सविता दीदी का और तड़पाया जाये और ससुराल से वापस आने के बाद या अभी को ससुराल भेजकर छुड़ाया जाये.

मैं जो कहानी सोच रही हूँ और शुरू से सोच राखी है उसके हिसाब से तो अभी सविता दीदी को तड़पना है. मजबूर करना है.

बाकि आप सब पाठको की क्या राइ जरूर बताइये.

फिर सोचते हैं आगे क्या करना है.
 
अपडेट-49

मैं सरिता दीदी को बाइक पर बैठकर चल दिया. दीदी ने t-shirt और लेग्गी पहनी हुई थी और वह दोनों तरफ पेअर करके बैठी हुई थी. सड़क पर गड्ढे होने के कारन मैं बाइक धीरे चला रहा था. दीदी ने मुझसे थोड़ी तेज़ बाइक चलने के लिए कहा तो मैंने सोचा चलो इसी बहाने दीदी से मज़े हो ले हु. मैं तेज़ी से बाइक चलने लगा और बिच बिच में ब्रेअके भी मरने लगा जिससे दीदी मुझसे थोड़ा सात जाती तो उनकी चूचिया मुझे अपने शरीर पर महसूस होती. गाड़ी चलते हुवे मैं ीक बात अचानक से तेज़ ब्रेअके मर दी तो दीदी एकदम झटके से मेरे पीठ के ऊपर लड़ गई.

दीदी ने गिरने से बचने के लिए अपना एक हाँथ से मेरे कंडे को और एक हाँथ से मेरे पेट को पकड़ लिया. लेकिन झटका इतना तेज़ था की दीदी का पेट वाला हाँथ सरक कर मेरे लुंड के ऊपर चला गया. जिसका पता दीदी को नहीं था. मैंने भी दीदी से इस बारे में कोई चर्चा नहीं की और उनके हाँथ के लम्स को अपने लुंड पर महसूस करता रहा. दीदी भी पीछे होकर नहीं बैठ वो मुझसे सटी हुई थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.

Main-Didi अपना हाँथ हटाइये न.

सरिता दी- तू इतने तेज़ ब्रेअके मार रहा है अगर हाँथ हटा लुंगी तो गिर नहीं जाउंगी मैं.

मैं- दीदी कंधे वाला हाँथ नहीं अपना ये हाँथ हटाइये.

मेरे ऐसे बोलने से दीदी ने अपने हाँथ को देखा और जब उन्होंने देखा की उनका हाँथ कहा है तो उन्होंने तुरंत एक झटके से अपना हाँथ खींच लिया और शर्मिंदगी के साथ बोली.

सरिता दी- वो अभी सॉरी. वो गलती से हो गया. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.

मैं- तो मैं कहा आपसे कह रहा हूँ की आपने जानबूझकर किया है. ऐसे गलतिया हो जाती हैं कभी कभी.

सरिता दी- सॉरी अभी.

मैं- इतस ोकक दीदी. वैसे एक बात कहु अगर आप बुरा न मने तो.

दीदी समझ गई की मैं कोई शरारती बात hi करूँगा. लेकिन दीदी ने फिर भी बोलै.

सरिता दी- हां कहो.

मैं- वैसे दीदी मुझे ये आपकी अंजनी गलती बहुत अच्छी लगी. काश आपसे ऐसे गलती अनजाने में हमेशा होती rahe.(ye सब मैंने है कर कहा)

सरिता दी- (शर्माकर नज़ारे झुककर) तू बहुत कमीना है. मुझे तेरे साथ आना hi नहीं चाहिए था.

इसके बाद हम दोनों में कोई बात नहीं हुई. मैं अपने काम पर पहुंच गया और दीदी वही मेरे साथ बैठ बाई. लगभग एक हॉर्स में मैं अपना काम समेटकर दीदी के साथ मार्किट चला गया. जब मैं मार्किट पंहुचा तो उसी दुकान में गया जहाँ सविता दीदी के साथ गया था. वह पर पहुंच कर मैंने दुकानदार से कहा.

मैं- भाई साहब इनके लिए कुछ कपडे चाहिए.

डी- वह वाले काउंटर पर चले जाइये.

फिर दीदी अपना सामान लेने चली गयी और मैं इधर उधर देखने लगा. तभी मुझे शामे तो शामे वही ड्रेस दिखी जो मैंने सविता दीदी के लिए लिट् hi. तो मैंने चुपके से वो ड्रेस पैक करवा ली और उसके साथ एक ब्रा पंतय का सेट भी पैक करवा लिया. उसके बाद दीदी अपनी शॉपिंग करके आयी. मैंने पेमेंट की और हम दोनों घर के लिए निकल पड़े.

जब हम घर पहुंचे तो हॉल में सविता दीदी मौजूद थी. उन्होंने मेरी तरफ देखा, पर मैं उन्हें इग्नोर करता हुवा अपने कमरे में चला गया अपना काम किया और सो गया. लगभग 2 हॉर्स तक सोने के बाद मैंने मीरा वाली ईद से सरिता दीदी को मश्ग किया वो ऑनलाइन थी इसलिए उनका रपल्य भी तुरंत आ गया.

म- ही सेक्सी.

सरिता दी- ही

म- कैसे हैं आप.

सरिता दी- मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो.

म- मैं भी ठीक हूँ.

उसके बाद कुछ देर हमने पढाई के बारे में डिसकस किया. फिर इधर उधर की बाते हुई. उसके बाद सरिता दीदी ने पूछा.

सरिता दी- कल कुछ बात अधूरी रह गई थी.

म- कौन सी बात अधूरी रह गाइट hi.

सरिता दी- तुम मुझे कुछ सुग्गेस्टिव दे रही थी.

म- अरे उसे छोडो जाने दो कुछ और बात करते हैं.

सरिता दी- नहीं बताओ क्या बात कहने वाली थी मुझसे.

म- वो आप न सुने तो बेहतर हैं. और वो बताकर मैं अपनी दोस्ती को तोडना नहीं चाहती. जाने दीजिए.

सरिता दी- ऐसे क्या बात है जिससे अपनी दोस्ती टूट जाएगी. बताओ मुझे.

म- नहीं जाने दीजिए. आप न जानिए उस बात को.

सरिता दी- नहीं मुझे जानना है की आप मुझे कौन सा सुग्गेस्टिव देने वाली थी.

म- पहले वडा करो की मैं आपको जो भी सुग्गेस्टिव दूंगी वो आप मनो या न मनो. लेकिन उसके लिए मुझसे अपने दोस्ती मत तोडना. तभी बताउंगी.

सरिता दी- चलो प्रॉमिस करती हूँ की अपनी दोस्ती पहले जैसे hi रहेगी.

म- मैंने आपसे कहा था न की तुम इन 6 महीनो के लिए कोई बर्फ बना लो. लेकिन इसमें खतरा भी है.

सरिता दी- हाँ इसलिए मैंने मन कर दिया था कल hi.

म- एक साफ रास्ता है जिससे तुम्हारा काम भी हो जाएगा और कोई ब्लैकमेलिंग का भी खतरा नहीं रहेगा.

सरिता दी- अच्छा और वो राष्ट कौन सा है.

म- उससे पहले मुझे ये बताओ की तुम्हारा जो भाई है वो कैसा हैं. आपको कैसा लगता है वो

सरिता दी- अब ये बिच में मेरा भाई कहा से आ गया.

म- अरे यार मैं जो पूछ रही हूँ उसको बताओ पहले.

सरिता दी- मेरा भाई बहुत अच्छा है. और भाई है मेरा तो मुझे तो अच्छा hi लगेगा.

म- अच्छा और आप दोनों में तुन्निंग और बॉन्डिंग कैसी है.

सरिता दी- पहले तो ठीक नहीं थी लेकिन अभी बहुत अच्छी बॉन्डिंग है हम दोनों में.

म- देखो मैं जो कहने जा रही हु. वो सुनकर शायद तुम्हे बुरा लगे लेकिन अभी सबसे बेस्ट ऑप्शन यही है आपके पास.

सरिता दी- अरे यार अब ये पहेलियाँ बुझाना बंद करो और मुद्दे की बात करो.

म- आप ऐसा क्यों नहीं करती इन 6 महीनो के लिए अपने भाई को hi पता लो और अपनी जरूरतों को पूरी कर लो.

मैं इस बात का रिएक्शन जनता था. और वैसा hi रिएक्शन दीदी की तरफ से आया. वो बहुत गुस्सा हो गई और उनका मश्ग आया.

सरिता दी- क्या कहा तुमने. तुम्हारा दिमाग ख़राब है. शराब पि राखी है क्या तो ऐसी बेहूदा बाते कर रही हो. अरे भाई है वो मेरा. और तुम उसी के साथ छिईई. घिन आती है मुझे तुम पर और तुम्हारी सोच पर.

म- अरे यार मैं तो तुम्हारे hi भले के लिए बता रही थी. मुझे तुम्हारी फ़िक्र है इसलिए.

सरिता दी- मेरे भले के लिए था ये. यही फ़िक्र है तुम्हारी. मुझे अपने भाई के साथ hi………..itni घटिया सलाह दे रही हो. ऐसी घटिया सोच तुम्हारे दिमाग में आई कहा से. तुमने सोच भी कैसे लिया की मैं ऐसा कुछ करुँगी.

म- अरे यार इस दुनिया में तुम्ही एकलौती बहन नहीं हो जो अपने भाई को पाटकर अपनी जरुरत पूरी करेगी. ऐसे बहुत से भाई बहन हैं. जो एक दूसरे के साथ खुलकर मज़ा लेते हैं.

सरिता दी- अरे बोलने से पहले कुछ तो शर्म कर लेती. भाई बहन के पवित्र रिश्ते का तो ख्याल कर लेती.

म- वो सब पुराने ज़माने की बाते हो गई हैं. आजकल के भाई बहन एक दूसरे के साथ hi मज़ा मरते हैं. इसलिए मेरी बात मनो और आप भी अपने भाई को पाटकर मज़ा मर लो.

सरिता दी- बंद करो अपनी बकवास. और आज के बाद मुझसे बात करने की कोशिश भी मत करना.

म- इसीलिए मैं आपको बता नहीं रही थी लेकिन आपने hi ज़िद की बताने की. ठीक है आप बात नहीं करना चाहती तो कोई बात नहीं लेकिन जाने से पहले मैं अपनी बात को साबित करके जाउंगी की आजकल भाई बहन एक दूसरे के साथ मौज करते हैं. ये साइट हैं (स्फोरम) इसको ओपन करके देख लेना की मैं सही कह रही हूँ या झूठ. और ये कुछ कहानिया हैं जो मैं भेज रही हूँ इनको पढ़ लेना. तुम्हे पता चल जाएगा की क्या सही है और क्या झूठ.

उसके बाद मैंने कई भाई बहन की कहानिया सरिता दीदी को भेज दी. और bye बोलकर लॉगआउट हो गया.

मैंने अपनी दोनों बहनो के साथ मैंने जुवा खेल दिया था एक के साथ खुलकर तो एक के साथ छुपकर. अब देखना ये था की इसमें कामयाबी कितनी मिलती है.

इसके बाद कुछ खास नहीं हुवा. रत को जब खाना खाने बैठा तो सविता दी मुझे घूरे जा रही थी. जबकि सरिता दीदी कुछ परेशां सी लग रही थी. तो मैंने उनसे पूछा.

मैं- क्या बात है दीदी आप कुछ परेशां सी लग रही हो.

सरिता दी- कोई बात नहीं है अभी. बस सर में हल्का सा दर्द हैं (बहाना मर दिया).

उसके बाद मैं खाना खाकर अपने कमरे में चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-50

कमरे में आकर बैठकर कुछ देर सोचने के बाद मैंने 5-6 भाई बहन की चुदाई वाली ऐसी कहानिया इंटरनेट से निकली जिसमे दोनों भाई बहन खूब गली देकर आपस में चुदाई करते थे और 2-3 कहानिया नार्मल चुदाई वाली निकली. इन सभी कानियो में खास बात या थी की उसमे बताया गया था की बहन को बॉयफ्रंड ने विडिओ बनाकर ब्लैकमेल किया था. लेकिन किसी तरह उन्होंने विडिओ हासिल कर ली और घर की बात घर में रह जाये और शरीर की भूख भी मिट जाये इसलिए भाई को पाटकर चुदाई करवाई. इन साडी कहानियो को जो मैंने सिम ख़रीदा था जरूरत पड़ने पर उसे करने के लिए उससे व्हाट्सप्प का नई अकाउंट वही कोमल नाम से बनाया और सविता दीदी के व्हाट्सप्प पर भेज दी. और उस व्हाट्सप्प अकाउंट को अपने मोबाइल से डिलीट कर दिया.

कहानी भेजने के कुछ देर बाद hi सविता दीदी का मश्ग आया.

सविता दी- कौन हो तुम और ये क्या वाहियात चीज भेजी है.

कोमल- अरे ये आपके पास कैसे पहुंच गई ये तो मैंने अपने भाई को भेजी थी.

सविता दी- भाई को भेजी थी. कितनी बेशर्म हो तुम. अपने भाई को ऐसे गन्दी गन्दी चीजे भेज रही थी.

कोमल- क्या करू उसको पाटकर चुदाई करनी है लेकिन वो मेरी तरफ ध्यान hi नहीं देता इसलिए उसको सडके कर रही हु.

सविता दी- तुम बहुत गिरी हुई लड़की हो. मुझे अगर ऐसे गंदे मश्ग दोबारा आते तो तुम्हारी पुलिस कंप्लेंट कर दूंगी.

लेकिन दीदी को शायद मुझपर शक हो गया था की हो न हो ये मेरा काम भी हो सकता है. इसलिए वो तुरंत ऊपर आई और दरवाज़ा खटखटाने लगी.

सविता दी- अभी.. अभी.. दरवाज़ा खोल.

Main(darwaza खोलते हुवे) अब क्या हुवा. चैन से सोने भी नहीं देते.

सविता दी- तेरा मोबाइल कहा है.

मैं- वो बीएड पर रखा है. लेकिन बताओ तो बात क्या है.

सविता दी ने मेरे सवालो का जवाब देने के बजाय तुरंत बीएड पर गई और मेरा मोबाइल उठाकर देखने लगी. ये तो अच्छा हुवा की मैंने अकाउंट डिलीट कर दिया था. कुछ देर बाद मोबाइल देखने के बाद दीदी ने मोबाइल वापस रख दिया और बहार जाने लगी.

मैं- आखिर बात क्या है. मुझे भी तो पता चले.

सविता दी- कुछ खास नहीं मुझे लगा तू मुझे मश्ग कर रहा है.

इतना बोलकर सविता दीदी निचे चली गई और मैं बाल बाल बच गया. अगली दिन कुछ खास तो नहीं हुवा बस दोनों बहाने तोडा परेशां डिडकी मुझे. लगता था उनके मन में हाँ और ना की लड़ाई चल रही हो. (ये सब मेरे द्वारा भेजी गई कहानियो का असर था). लेकिन रात में जब मैं अपने कमरे ले लेता था तो सरिता दीदी मेरे कमरे में आई. सरिता दीदी क्या माल लग रही थी उस समय. उन्होंने सलवार कमीज पहना हुवा था. जो की थोड़ा बड़े गले का था जिससे उनकी चूचियों की गहराई जज़र आ रही थी. वो मेरे पास आई और बीएड पर बैठ गई. मैं कभी उनके चेहरे को तो कभी उनकी चूचियों को देख रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी मुझे तुझसे कुछ काम था. देख तू मन नहीं करेगा.

मैं- हां दी बताइये.

सरिता di-wo मुझे कुछ सेलेबस डाउनलोड करने थे तो मुझे थोड़ा नेट पर काम था.

मैं- ठीक है दीदी मैं कल आपको कैफे ले चलूँगा. आप अपना काम कर लीजिएगा.

सरिता दी- वो बहुत सारा डाउनलोड करना है इसलिए उसमे बहुत समय लगेगा. इसलिए मुझे तेरा लैपटॉप चाहिए.

मैं- (चुकने का नाटक करते हुवे. मुझे जहा तक अंदाजा था दीदी को वो कहानिया पढ़नी थी. न की सेलेबस डाउनलोड करना था). लैपटॉप. बहार से hi कर लीजिए न.

सरिता दी- दे दे न भाई प्ल्ज़. एक हफ्ते बाद वापस कर दूंगी.

मैं- क्या एक हफ्ते. (फिर कुछ सोचने का नाटक) अच्छा ठीक है आप कमरे में जाइये मैं लेकर आता हूँ. कुछ जरुरी डाक्यूमेंट्स हैं उसको पेण्ड्रीवे में रख लू.

उसके बाद दीदी अपने कमरे में चली गयी और मैं अपने लैपटॉप में जो भाई बहन की कहानिया डाउनलोड की थी और उसको हाईड किया और सर्च हिस्ट्री को क्लेयरे किया और लैपटॉप और डोंगल लेकर दीदी के कमरे की तरफ चला गया. क्योंकि मैं कोई रिस्क लेना नहीं चाहता था. पहले मैं ये देखना चाहता था की क्या मेरा जो अंदाजा है वह सही है. उसके बाद मैं आगे की सोचूंगा.

मैंने दीदी के कमरे में जाकर लैपटॉप ों किया और उसे डोंगल से कनेक्ट करवा दिया और अपने कमरे में आकर सो गया.

सुबह जब मैं सोकर उठा और फ्रेस होकर निचे आया तो पता चला की सरिता दीदी अभी सो रही हैं. पूछने पर पता चला की उन्होंने बताया है की उनकी तबियत ख़राब है. उसके बाद मैं निचे हॉल में बैठा रहा. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी निचे आयी तो मैंने देखा की उनकी आँखे लाल हैं और उनके चेहरे पर थकन नज़र आ रही है. ऐसा तो तभी होता है जब कोई रातभर जागकर पढाई करता हैं. दीदी जब पास आकर बैठी तो मैंने पूछा.

मैं- मैंने सुना आपकी तबियत ख़राब है.

सरिता दी- हाँ वो रात के 3 बजे तक पढाई की तो इसलिए सर हल्का हल्का भरी लग रहा है.

उसके बाद शाम तक कुछ भी नहीं हुआ. शाम को मैं सरिता दीदी से लैपटॉप ये बोलकर ले आया की 1 हॉर्स का काम है बाद में आपको दे दूंगा. लैपटॉप लेकर अपने कमरे में आने के बाद मैंने दरवाज़ा बंद किया और लैपटॉप ओपन कर उसकी हिस्ट्री देखने लगा. लेकिन सर्च हिस्ट्री एकदम खली थी. मैंने पूरा लैपटॉप छान मारा लेकिन कही भी ऐसा सेलेबस डाउनलोड नहीं था. तो मेरा शक यकीं में बदल गया. इसलिए मैंने भाई बहन की चुदाई वाला फोल्डर उनहीदे किया और उसको डेस्कटॉप पर एकदम कोने में रख दिया और ुंस्का नई नाम दिया. मेरी प्यारी बहन.

उसके बाद मैं लैपटॉप को सरिता दीदी के कमरे में रख आया. रात को खाना खाने के बाद सब अपने अपने कमरे में सोने चले गए. लगभग 1 हॉर्स बाद मैंने सरिता दी को फ़ोन किया.

मैं- क्या कर रही हो दीदी.

सरिता दी- कुछ नहीं बस पढाई कर रही हूँ.

मैं- अच्छा दीदी मैं भी आ जाऊ अपनी किताब लेकर आपके साथ पढ़ने. मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करूँगा.

सरिता दीदी-( घबराकर थोड़ा हकलाते हुवे) अरे नहीं तुम मेरे कमरे में मत आओ. वही अपने कमरे में hi पढाई करो.

उनकी घबराहट और हकलाने की आवाज़ से मैं जान गया की दीदी कौन सी पढाई कर रही हैं. मैंने मन hi मन कहा- पढ़ो दीदी पढ़ो यही पढाई एकदिन आपको मेरे लुंड के निचे लाएगी.

मैं- अरे दीदी मैं तो बोर हो रहा था इसलिए सोचा आपके साथ पढ़ लू. चलो ठीक है आप अपनी पढाई करो मैं अब सोने जा रहा हूँ.

उसके बाद मैं सो गया. सुबह जब उठा तो आज फिर सरिता दीदी सोकर नहीं उठी थी. आज भी उनका वही बहाना था. कुछ देर बाद दीदी आयी तो उनकी आँख लाल थी. लेकिन आज वो तिरछी नजरो से मुझे देख भी रही थी. मैंने कई बार उनको अपनी तरफ देखता पाया तो उनसे पूछ लिया.

मैं- दी आपकी तबियत लगता है ठीक नहीं है. चलो दवा लेकर आते हैं.

सरिता दी- नहीं अभी तबियत तो ठीक है. बस देर रात तक पढाई करने के कारन थोड़ा थकन लग रही है बस.

उसके बाद ज्यादा कुछ खास नहीं हुआ. हाँ सविता दी नई नाराजगी मेरे साथ कुछ काम जरूर हो गई थी मेरी नज़र जब भी सविता दीदी पर पड़ती थी वो मुझे hi देखती रहती थी. ये सब मेरे द्वारा भेजी गई कहानियो का असर था. मुझे लग रहा था की बहुत जल्द उनकी नाराज़गी ख़तम हो जाएगी और वो मेरी बहो में होंगी.

इसी तरह 4 दिन और बिट गए इन 4 दिनों में सरिता दीदी रोज लेट सो कर उठती लेकिन अब वो अक्सर चोर नज़रो से मुझे देखा करती थी. इधर सविता दीदी भी अब मुझसे बात करने की कोशिश करने लगी थी लेकिन मैं उन्हें अक्सर इग्नोर करता था. जिससे उन्हें गुस्सा भी आता था. दूसरे दिन वाली रात में जब मैं अपने बिस्टेर पर लेता हुवा था तो सविता दीदी का मश्ग आया.

सविता दी- hello अभी.

मैंने मश्ग रीड कर लिया लेकिन कोई रपल्य नहीं दिया. इसी तरह सविता दीदी का 3 मश्ग आया लेकिन मैंने रपल्य नहीं किया तो फिर से उनका मश्ग आया.

सविता दी- प्ल्ज़ अभी एक बार मुझसे बात तो कर ले मेरे भाई.

मैं- क्या बात है बताइये.

सविता दी- तू मुझसे नाराज़ है क्या अभी.

मैं- मैं क्यों किसी से नाराज़ होने लगा.

सविता दी- तो फिर तू मुझसे बात क्यों नहीं कर रहा हैं.

मैं- मैं किसलिए आपसे बात करू. मैं हूँ hi कौन.

सविता दी- तू मेरा प्यारा भाई और एक अच्छा दोस्त है.

मैं- नहीं मई तो कमीना हूँ कुत्ता हूँ न.

सविता दी- ये कैसी बात कर रहा है तू. तू मेरा अच्छा भाई है.

मैं- नहीं मैं कमीना hi ठीक हूँ.

सविता दी- बहुत ज्यादा नाराज हो मुझसे. अपनी बहन को माफ़ नहीं करोगे.

मैं- वैसे मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ लेकिन फिर भी आपको लगता है की मैं आपसे नाराज़ हूँ तो एक hi शर्ट पर माफ़ करूँगा.

सविता दी- और वो शर्त क्या है.

मैं- कुछ ऐसा करिये जो मुझे अच्छा लगे. कुछ सेक्सी सा.

सविता दी- . तू फिर शुरू हो गया अभी.

मैं- फ़ोन रखिये मैं सोने जा रहा हूँ.

सविता दी- अरे अभी सु तो.

उसके बाद दीदी ने अपने एक डीप नैक ब्लाउज में अपनी एक फोटो भेजी और निचे कैप्शन में लिखा.

सरिता दी- अब तो माफ़ कर दे मेरे भाई.



मैं- अभी मुझे अच्छा नहीं लगा.

उसके बाद दीदी ने फिर से एक फोटो भेजा एकदम सेक्सी पोज़ में. आधी चूचिया बहार निकली हुई थी और कैप्शन लिखा.

सरिता दी- अब तो माफ़ कर दे मेरे भाई.



Main-(kuchh सोचकर). ठीक है माफ़ किया आपको. आप भी क्या याद रखेंगी की किस दिलदार से पला पड़ा था.

मेरी बात सुनकर दीदी खिलखिलाकर हंसने लगी. और उन्होंने मश्ग किया.

सविता दी- थैंक यू मेरे कमीने भाई. ये मुझे माफ़ करने के लिए मेरी तरफ से. गुड नाईट.



सविता दीदी को गुड नाईट बोलकर मैं सो गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-51

अगले दिन मैं उठा फ्रेश होकर निचे आया तो सविता दी किचन में थी और सरिता दीदी आज भी नहीं उठी थी. घर वाले सोच रहे थे की उनकी शादी पोस्टपोन हुई है वो थोड़ा परेशां है इसलिए देर में उठती हैं. लेकिन हकीकत तो मैं और दीदी hi जानते थे. मैं पानी पिने सीधे किचन में चला गया. और दीदी से बोलै.

मैं- गुड मॉर्निंग मेरी सेक्सी दीदी

सविता दी- (चौकते हुवे इधर उधर देखते हुवे). गुड मॉर्निंग और ये क्या तरीका हैं गुड मॉर्निंग विश करने का. अगर किसी ने सुन लिया तो बहुत बड़ी पॉब्लम हो जाएगी.

मैं- मतलब पॉब्लम किसी के देखने से है आपको कोई पॉब्लम नहीं है.

सविता दी- मैंने ऐसा तो नहीं कहा और तुझसे बातो में कोई नहीं जीत सकता.

मैं- आज बड़ी खुश हो आप.

सविता दी- खुसी की hi तो बात है. मेरे प्यारे भाई ने कितने दिन बाद मुझसे बात की.

मैं- लेकिन आपका भाई खुश है या नहीं ये आपको पता है

सविता दी- क्यों क्या हुवा मेरे भाई को.

मैं- (उनकी चूचियों को देखते हुवे)- मेरा ताज़ा दूध पिने का बड़ा मन कर रहा है.

सविता दी- (मुस्कुराते हुवे)- रत में तुमको दूध पिलाऊंगी.

ये सुनकर मैंने दीदी को पीछे से अपनी बहो में भर लिया. मेरे ऐसा करने से दीदी सिसक पड़ी और बोली.



सविता दी- Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh अभी…. क्या कर रहा है aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh haaaaaaaaaaaaaaaa दूर हैट.

मैं- आपको प्यार कर रहा हूँ दीदी.

सविता दी- ककककककककयाआआआआ नहीं चल हैट पीछे अभी घर में सभी हैं किसी ने देख लिया तो पॉब्लम हो जाएगी.

मुझे भी दीदी की बात सही लगी. मैं किचन से निकलकर हाल में आ गया थोड़ी देर में नाश्ता कर के बहार निकल गया. लगभग एक घंटे बाद मैं वापस आया और अपने कमरे में चला गया. और मोबाइल चेक किया तो उसमे सविता दीदी के मश्ग आया हुआ था. मैंने भी उन्हें मश्ग भेजा.

मैं- हाँ दीदी कैसी हो.

सविता दी- तू एकदम पागल हो गया है क्या. वह रसोई में क्या कर रहा था कोई देख लेता तो.

मैं- ठीक है दीदी अब आपके साथ जो भी करूँगा देख कर hi करूँगा.

सविता दी- तू कभी तो सीधी तरह से बात कर लिया कर.

मैं- अच्छा ठीक है. कल रत की तरह कुछ भेजिए. आपको देखने का बड़ा मन कर रहा है.

सविता दी- क्या देखना है मेरे भाई को.

मेरा मन हुवा की दीदी को बोल hi दू की एक्जाम नंगी हो जा. तेरे हर अंग का मुझे राषपन करना है. लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया और मोबाइल रखकर सविता दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. जब मैं उनके कमरे में गया तो वो बिस्टेर पर लेती हुई थी. उन्होंने सदी और बचलेस ब्लाउज विथ डीप नैक पहना हुवा था. दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनकर दीदी बिस्टेर पर उठकर बैठ गई.

सरिता दी- अभी तू इस समय यहाँ क्यों आया है.

मैं- अपनी दीदी का काम तमाम करने.

सरिता दी- तू न कभी नहीं सुधरेगा.

फिर मैं जाकर दीदी के साथ बीएड पर उनसे सत्कार बैठ गया और उनकी खुली हुई पीठ को सहलाने लगा. पीठ पर मेरा हाँथ पड़ते hi दीदी अकड़ गई. मैंने दीदी का हाँथ पकड़कर उन्हें शीशे के सामने लेकर खड़ा कर दिया और उनके पीछे उनसे सत्कार खड़ा हो गया और दीदी से कहा.

Main-Aapko पता है दीदी आप दुनिया की सबसे सुन्दर औरत हो. आपके होंठ बहुत hi प्यारे hain.aapki काली आँखों में डूबने को दिल करता है. आप मुझे बहुत hi सेक्सी लगती हो.

दीदी मेरे मुंह से अपनी तारीफ सुनकर शर्मा रही थी और हल्का हल्का मुस्कुरा भी रही थी. मैं दीदी की तारीफ करने के साथ साथ उनके जिश्म से भी खेल रहा था. मैंने आगे दीदी से कहा.

मैं- दीदी जब भी मैं आपको देखता हूँ तो मैं आपकी सुंदरता में खो जाता हूँ. उसके बाद मुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता. आप इतनी सुन्दर क्यों हो दीदी.

मेरी बात सुनकर दीदी और ज्यादा शर्माने लगी. मैं धीरे धीरे उनके पीठ सहलाते हुवे अपना हाँथ उनके बगल से उनकी चूचियों को छूने की कोशिश कर रहा था. फिर मैंने अपने होंठो को उनकी पीठ पर रख दिया और किश करने लगा. मेरे होंठो का टच मिलते hi दीदी के मुंह से ssssssssssssseeeeeeeeeeeeee की एक आवाज़ निकली. मैंने अपने हाँथ को उनकी बगल से गुजर कर उनकी चूचियों पर रख दिया और अपने होंठो से उनकी पीठ पर एक बाईट कर दिया. जिससे दीदी sssssssssssssssss करके मचलने लगी.



मैं- दीदी मैं जो कर रहा हूँ क्या वो आपको अच्छा नहीं लग रहा है.

सविता दी- लेकिन अभी ये गलत है. हम भाई बहन हैं न.

मैं- लेकिन दीदी मैं आपको एक बहन की नज़र से नहीं देखता अब.

सविता दी- (मेरी आँखों में देखकर)- तो किस नज़र से देखता है अपनी बहन को.

मैं- मैं अब आपको अपनी गर्लफ्रेंड की नज़र से देखता हूँ.

सविता दी- तू कितना कमीना है अपनी बहन को hi अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है. अच्छा ये बता गिर्ल्फ्रेंड बनने में क्या फायदा है मेरा.

इन बातो के दौरान मैंने अपने हांथो से उनकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. मैंने अपने एक हाँथ उनकी गद्देदार गांड पर रख और उनकी गांड को भी हलके हलके सहलाने लगा और अपने होंठो से उनके पुरे पीठ पर बाईट करने लगा. मेरे ऐसा करने से दीदी की सांसे भरी होने लगी थी. उनकी आँखे बंद हो गई थी. मैंने अपने एक हाँथ को निचे सरका कर उनके पेट पर रख दिया और उनके पेट को सहलाने लगा. पेट सहलाते सहलाते मैं उनकी नाभि को भी हलके हलके कुरेदने लगा. इतना सब करते हुवे मेरा लुंड एकदम टैंकर दीदी की गद्देदार गांड की दरार में ठोकर मरने लगा. मैं एक हाँथ से उनकी गांड को थोड़ा तेज़ तेज़ दबाते हुवे कहा.

मैं- मेरी गफ बनाने में आपको बहुत फायदा है. मैं आपको बहार घूमने ले जाऊंगा. सिनेमा दिखाऊगा. आपकी साडी इच्छा पूरी करूँगा. और सबसे बड़ी बात जब भी आपका मन करे आप घर में बिना किसी दर के मेरा लम्बा केला भी खा सकती हैं. जो आपको देख कर और लम्बा हो जाता है इतना कहने के बाद मैं जिस हाँथ से उनकी गांड को दबा रहा था उस हाँथ से दीदी का हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया.



जैसे hi दीदी का हाँथ मेरे लुंड पर पड़ा. मेरे लुंड ने बहुत तेज़ झटका मारा जिसको दीदी ने भी अपने हाँथ पर महसूस किया. दीदी के शरीर ने भी लैंड के लम्स को महसूस कर एक बार हिल गया. वो तुरंत अपना हाँथ झटक कर मुझसे दूर जाते हुवे बोली.

सविता दी- ये क्या है अभी. इतना बड़ा. मेरे मतलब है ये क्या कर रहे हो.

मैं- क्या दीदी आप भी. ये कोई बदतमीज़ी नहीं है. मैं तो अपनी दीदी को बता रहा था की मैं उनसे कितना प्यार करता हूँ.

दीदी जब हाँथ छुड़ाकर मुझसे झटके से दूर भागने लगी थी तो मैंने दीदी का आँचल पकड़ लिया था जिससे दीदी गोल गोल दो बार घूम गाइट hi. जिसके कारन आप उनकी शादी उनके बदन से निकल गई थी. मैं फिर दीदी के सामने आकर खड़ा हो गया और दीदी को अपनी बहो में भर लिया. जिससे दीदी की चूचिया सीधे मेरे साइन से टकराई और मेरा खड़ा लुंड दीदी की छूट से टकरा गया जिससे दीदी के मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की आवाज़ निकल गई. दीदी मुझसे कहने लगी.



सविता दी- छोड़ न क्या कर रहा है. कोई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है क्या.

मैं- किसी और का तो पता नहीं लेकिन मैं तो आपके साथ बहुत कुछ करना चाहता हूँ.

सरिता di(meri आँखों में देखते हुवे)- क्या करना चाहता है पानी बहन के साथ.

मैं- मैं तो आपके साथ वही सब करना चाहता हूँ जो जीजा जी आपके साथ करते हैं. और विश्वास मानिये अगर एक बार आपने मुझसे करवा लिया तो आप गुलाम बन जाएंगी.

सविता दी- कितना कमीना हो गया है तू. अपनी बहन के साथ वो सब करना चाहता है.

मैं- अभी आपने मेरा कमीनापन देखा hi कहा है दीदी.

इतना बोलकर मैंने अपने एक हाँथ को उनके होंठो को सहलाने लगा और एक हाँथ से उनकी चुकी को दबाने लगा. मेरी इस हरकत से दीदी मचलने लगी. वो अपने हाँथ को मेरे चुकी वाले हाँथ पर रख दिया और उसे हटाने लगी. मैं लगातार उनके होंठो को सहलाता रहा और दीदी के हाँथ हटाने की कोशिश के बावजूद उनकी चूचियों को दबाता रहा. जिसके कारन दीदी की आँखे मस्त में बंद हो गई. अब उनके मुंह हलकी हलकी सिसकारी निकलने लगी थी. मैंने उनके होंठ को सहलाते हुवे उनके दोनों गलो को कुछ देर सहलाता रहा और फिर उनकी गार्डन और चूचियों के ऊपरी हिस्से को भी सहलाने लगा.



जब मैंने देखा की दीदी आँखे बंद किये हुवे मदहोस हो गई हैं तो मैंने अपने दोनों हांथो से उनकी चुकी को हलके हलके दबाने लगा. मैं दीदी के गलो को छटने लगा. थोड़ी देर तक मैं दीदी के दोनों गलो को चाट चाट कर थूक से गिला कर दिया. दीदी पर भी मस्ती एकदम चढ़ गई थी. इसलिए मैंने अपने होंठ को दीदी के होंठो पर रख दिया और किश करने लगा. दीदी ने एकबार आँखे खोलकर मेरी तरफ देखा. दीदी की आँखे लाल हो रही थी. उनका चेहरा सुर्ख हो गया था. उन्होंने इशारे से मुझे ऐसा न करने के लिए कहा. लेकिन मैं उनके होंठो को चुस्त रहा.

लगभग 5 मिनट तक उनके होंठो को चूसने और दोनों हांथो से चुकी दबाने से दीदी भी एकदम मस्त हो गई और किश में मेरा साथ देने लगी अब दीदी भी मुझे किस कर रही थी. मैं किश करते करते अपने दोनों हांथो में उनकी चूचिया भरी और जोर से दबा दी. जिससे दीदी के मुंह से एक आनंद दायक दर्द युक्त चीख निकल गई.



सविता di-AAAAAAaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीइइइइइ OOOOOOOOOOohhhhhhhhhhh भाई धीरे.

मैं- क्या हुआ दीदी दर्द हो रहा है क्या.

सविता दी- कितनी जोर से दबत है tu.thoda धीरे daba(Itna बोलकर शर्मा गई)

मैं- अभी आपने देखा hi क्या है. अभी और जोर से दबाऊंगा.

इतना कहकर मैं फिर से दीदी के होंठो को चूसने लगा और अपनर हांथो से दीदी की चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा. जिससे दीदी के मुंह से लगातार siskari,cheekh और आनंद भरी आवाज़े निकलने लगी.

सविता दी- AAAAAAAAAaaaaaaHhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh अभी. धीरे भाई dhire..oooooooooHHHHHHHHHhhh माआआआआ. Hhhhaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyy. दर्द होता है.

मैं- आपको मज़ा तो आ रहा है न दीदी.

मेरे बात का सविता दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. फिर मैंने अपने हाँथ उनकी चूचियों से हटाकर उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उसे हलके हलके दबाने लगा और उनके होंठो को चूसने लगा. फिर मैंने अपनी जीभ निकली और दीदी के मुंह में डालने की कोशिस करने लगा मगर दीदी अपना मुंह नहीं खोल रही थी तो मैं जीभ की नोक को उनके होंठो पर फिरने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैं फिर से दीदी को किश करने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने अपने दोनों हांथो में दीदी की गांड को थम लिया और अपनी किश फाॅर्स के साथ करते हुवे पूरी ताकत से दीदी की गांड को मसल दिया. जिससे दीदी के मुंह से दर्दनाक चीख निकल गई.



सविता दी- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मां. AAAAAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मैं माहाअरररररररर अगगगगगगीीीी. मममममुज्ज्ज्झी बबबबबहछाओ ीीीीिस्स्सस्स्स्सस्स kaaaaaaaaaamine से. ह्ह्ह्हह्हह्हआआआआआययययययययय ाआभी. मेरे भहाआईईई. बहुत डरडडडडडडड ह्ह्हहोताआ है. थोड़ड्डड्डा ढ़ढ़ढ़ढ़ढ़ढ़ईडीईए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-52

फिर मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो से हटाए और उनके चेहरे को चाटने लगा. उनके चेहरे को चाटते हुवे मैं उनकी गार्डन पर आ गया और उनकी गार्डन को चाहते हुवे किश करने लगा. बिछ बिच में हल्का हल्का बाईट भी कर लेता था. दीदी माधोसी के आलम में मेरी गार्डन पर हाँथ रखे कड़ी थी. कुछ देर उनकी गार्डन को चूमने चाटने के बात मैंने धीरे से अपने होंठ उनकी चूचियों के ऊपर क्लीवेज के पास रख दिया और एक भरपूर किश ली. जिससे दीदी के मुंह से सीकरी निकल गयी. इसके साथ hi मैं अपने हाँथ से दीदी की गांड को धीरे धीरे दबा रहा था. कुछ देर मैंने दीदी के क्लीवेज को चाटता रहा फिर उसको मुंह में भरकर दन्त काट लिया. दीदी uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii माआआआ करके रह गई.



जब मैंने गार्डन उठाकर दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या हुवा दीदी ऐसे क्या देख रही हो.

सविता- तू कितना गन्दा है अभी और मुझे भी अपने जैसा hi बना रहा है.

मैं- आप भी मेरी तरह गन्दी बन जाओ दीदी. आपको भी बहुत मज़ा आएगा.

सविता दी- मुझे नहीं करना कोई मज़ा वज़ा. तू hi कर.

फिर मैं जिस हाँथ से दीदी की गांड को दबा रहा था उनको उठाकर दीदी की पीठ पर रख दिया और सहलाने लगा. पीठ सहलाते हुवे मैं दीदी की चूचियों के क्लीवेज को भी छत रहा था. मैं अपनी पूरी जीभ निकलकर क्लीवेज के जितना अंदर हो सकता था जीभको डालकर छत रहा था. जिससे दीदी गरम होती जा रही थी. मैंने दीदी की पीठ को सहलाते हुवे खड़ा हुवा और अचानक से दीदी को पलट कर पीछे गुमा दिया और उनकी गांड की दरार में अपना लुंड डालकर उनसे सत्कार खड़ा हो गया और अपने दोनों हांथो से उनके दोनों कंधे से उनका ब्लाउज निचे करने लगा.

जब मैं उनके कंडे से ब्लाउज निचे करना लगा तो दी ने तुरंत मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रख दिया और मेरी तरफ देखकर कहा.

सविता दी- ऐसा मत कर अभी. मैं बहन हूँ तेरी.

मैं- नहीं अब आप मेरी बहन नहीं हो अब आप मेरी गर्लफ्रेंड हो वो भी सेक्सी वाली.

सविता di-apni बहन को गिर्ल्फ्रेंड बना रहा है. मुझे तेरे इरादे बिलकुल भी ठीक नहीं लग रहे हैं.

मैं- मेरा इरादा बिलकुल भी ठीक नहीं है दीदी. आज तो मैं आपकी ले कर रहूँगा.

सविता दी ने मुझे नशीली आँखों से देखते हुवे मुझसे पूछा.

सविता दी- क्या लेकर रहेगा. मेरे पास ऐसा क्या है.

मैं- आपके पास जो आपका सबसे कीमती चीज है उसे.

सविता दी- मेरे पास तो कोई कीमती चीज़ नहीं है. जिसे तू लेना चाहता है.

मैं- आपके पास तो वो कीमती खजाना है जिसे लेने के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ. आप बहुत कीमती हो

इतना कहकर मैंने फिर से दीदी के कंधे को चूमने लगा चाटने लगा और एक हाँथ को फिर से उनकी चूचियों पर रखकर दबाने लगा. जिससे दीदी फिर से गरम होने लगी. मैं कुछ देर ऐसा hi करता रहा जब दीदी एकदम गरम हो गई तो मैंने फिर से दीदी के कंधे से उनका ब्लाउज पकड़ा और उसे निचे कर दिया इसबार दीदी ने मेरा विरोध नहीं किया. ब्लाउज हटने के बाद मैं नंगे कंधे को चूमने लगा और एक हाँथ से उनकी पीठ को सहलाने लगा. कुछ देर चूमने के बाद मैंने डट से काट लिया. जिससे दीदी सिसक पड़ी.



सविता दी- AAAAAAAAAAAAaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh अभी. धीरे कर न.

मैं- दीदी मुझे धीरे करने में मज़ा नहीं आता.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने मेरी आँखों में देखा तो उसमे मुझे एक प्यास दिखी. थोड़ी देर देखने के बाद दीदी ने अपनी नज़ारे निचे कर ली. फिर मैं थोड़ा सा पीछे हटकर खड़ा हो gaya.jab कुछ देर तक मैंने कोई हरकत नहीं की तो दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा.

सविता दी- क्या हुवा अभी.

मैं- लगता है आपको अच्छा नहीं लग रहा है. तो मैं अपने कमरे मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ.

सविता दी- मैंने ऐसा तो नहीं कहा न अभी.

मैं- मतलब आपको अच्छा लग रहा है.

मेरे ऐसा कहने से दीदी ने मेरी आँखों में देखा और हल्का सा मुस्कुराकर अपनी गार्डन निचे करके आगे की तरफ देखने लगी. मैं फिर से दीदी से सात गया और अपने खड़े लुंड का एक धक्का दीदी की गांड में दे मारा. और अपना हाँथ तुरंत आगे लेजाकर दीदी की चूचियों को जोर से दबा दिया. जिससे दीदी के मुंह से कामुकता भरी एक चीख निकल गई.

सरिता दी- AAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aabhiiiiiiiiii ooooooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyyyy ढहहीईईडीईईई सीई. मुझीऐ दररररडडडडड होता हाऐ.

मैं- अरे दीदी अभी तो ये शुरुआत है. आगे आगे अभी आपको बहुत से दर्द सहने हैं.

फिर मैं दीदी की गांड में लुंड पेले hi अपने हाँथ को उनकी पीठ पर रख लिया और धीरे धीरे सहलाते सहलाते उनकी गार्डन पर ले आया और कुछ देर सहलाने के बाद उनके ब्लाउज की डोरी को पकड़ लिया. मेरे ऐसा करने पर दीदी ने मेरा हाँथ पकड़ लिया और मेरी तरफ देखते हुवे न में गार्डन हिलने लगी. लेकिन मैंने उनपर ध्यान नहीं दिया और जोर लगाकर ब्लाउज की डोरी को खोल दिया. और अपने होंठो से उनकी पीठ का चुम्बन लेने लगा साथ hi साथ उनकी पीठ को सहलाने लगा. मैं किश करते करते और निचे आने लगा और थोड़ी निचे आकर मैं रुक गया लेकिन किश लगातार करता रहा.



मैं अपने हाँथ को सहलाते हुवे दीदी के ब्लाउज के हुक के पास ले आया और उनके ब्लाउज की पट्टी जो पीठ पर कासी हुई थी उनमे हाँथ डालकर उसे बहार खींचा और फिर छोड़ दिया. जिससे दीदी को दर्द हुवा और उनके मुंह से एक घुटी घुटी चीख निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAaaaaaaaHhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाभीयी, ककककमममममममीीीिनी

मैंने फिर से दीदी के ब्लाउज की पट्टी को दोनों और से पकड़ा और उसे खोल दिया जिससे उनके ब्लाउज की पत्तिया दोनों तरफ लटक गई. मैं दीदी की पीठ को चूमते हुवे ऊपर आने लगा और दीदी के कण के पास आकर एक मादक आवाज़ में कहा.



मैं- दीदी अपने ब्लाउज को उतारकर बीएड पर रख दो न.

सविता दी- नहीं अभी ऐसा मत कर न. मुझे शर्म आती है.

मैं- (उनके कान को चूमते हुवे)- उतर दो न. ये आपकी सुंदरता में रुकावट पैदा कर रहे हैं. और मैं नहीं चाहता की मेरी दीदी की सुंदरता में कोई कमी रहे. प्ल्ज़ दीदी.

मेरे ऐसा कहने से दीदी मुस्कुराते हुवे अपना ब्लाउज उतारकर बीएड पर रख दिया. अब दीदी के शरीर पर ब्रा और पेटीकोट था. मैंने दीदी को अपनी तरफ घुमाया और उनको होंटो पर अपने होंठ रख दिए और वाइल्ड तरीके से उन्हें किश करने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा. शुरू शुरू में दीदी ने कोई रिस्पांस नहीं किया लेकिन कुछ देर बाद दीदी भी वासना की आग में जलते हुवे अपना हाँथ मेरी गार्डन में डालकर किस करने लगी. लगभग 10 मिनट तक हम दोनों ने जोरदार किस किया. इस दौरान मैं दीदी को चूचियों को जोर जोर से दबाता रहा. जब हम दोनों की साँस उखाड़ने लगी तो मैंने उनके चूचियों को पूरी ताकत से मसल दिया और अपने होंठ उनके होंठो से हटा लिए. दीदी दर्द और मज़े से कराह उठी.



सविता दी- AAAAAAAAAAAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii मीरीईई भायआई. Ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh dddhhhhhiiiiiiiiiireeeeee. बहहहहहतत द्दारररद्द्द होता हैईईई.

मैं दीदी को देखते हुवे बोलै.

मैं- अब इस दर्द की आदत दाल लो दीदी. वैसे दीदी आप क्या गजब की गदराई हुई मॉल लग रही हो. आपको देखकर तो मेरी नियत ख़राब हो जाती है. मन करता है की आपकी इस गदराई जवानी का पूरा रास पि लू.

सविता दी- कितना बड़ा कमीना है तू अभी. अपनी बहन की जवानी देखकर तेरी नियत ख़राब हो गई. अरे भाई तो अपनी बहन की इज़्ज़त बचता है और तू बहन की hi इज़्ज़त लूटना चाहता है.

मैं- अरे दीदी आपको क्या पता जो मज़ा बहन की इज़्ज़त लूटने में आता है. वो मज़ा कही नहीं आता. मैं तो कब से आपकी इज़्ज़त लूटने के लिए उतावला हो रहा हूँ.

सविगता दी- तू सुच में बहुत बड़ा……………………..

इसके आगे के शब्द दीदी के मुंह में hi रह गए. क्योंकि मैंने फिर से दीदी को किश करना सुरु कर दिया. किश करते करते मैं अपना हाँथ ब्रा के अंदर डालने लगा. जिससे दीदी ने मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रख दिया. कुछ देर मैं उनके हाँथ के निचे से hi अपने हाँथ को हरकत देता रहा और चूचिया दबाता रहा. कुछ समय बाद मैंने फोरस्फुल्ली अपना हाँथ दीदी के ब्रा में दाल दिया और उनकी नंगी चूचियों को दबाने लगा. जिससे दीदी की सांसे तेज़ तेज़ चलने लगी. मेरे किश करने की वजह से उनकी आवाज़ गग्गूऊऊऊओ ggggggggggggoooooooooooo करके बहार आ रही थी. फिर मैंने अपनी जुबान निकली और उसे दीदी के मुंह में डालने की कोसिस करने लगा. दीदी ने कुछ देर अपना मुंह नहीं खोला तो मैंने उनकी नंगी चूचियों को अपनी मुठ्ठी में पकड़ा और जोर से दबा दिया.



सविता di-AAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh अभीयी तुम जानवर हो kya.thoda धीरे नहीं दबा सकते. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

मैं- (अपनी लुंड की तरफ इशारा करके). अरे दीदी अभी मेरा जानवर बहार नहीं आया है. अभी उसके बहार आने में टाइम है.

इतना कहकर मैं फिर से उनके होंठो को चूमने लगा. और अपना हाँथ उनकी चुकी से हटाकर उनके पेट पर रख दिया और पेट को सहलाने अलग. मैंने दीदी के होंठ चूमते हुवे अपनी जीभ फिर घर निकली और दीदी के होंठो पर फिरने लगा. मैंने अपने पेट पर वाले हाँथ को धीरे धीरे निचे की तरफ खिसकने लगा. और लेजाकर दीदी के पेटीकोट ने नदी को पकड़ लिया. दीदी ने तुरंत मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रख दिया और मेरे हाँथ को सख्ती से पकड़ लिया और आंख के इशारे से नाडा खोलने से मन करने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-53

दीदी के पेटीकोट का नाडा खोलने से मन करने लगी तो मैंने अपना हाँथ उनके नदी से हटा लिया और उनका जो हाँथ मेरे हाँथ पर था उसको पकड़ कर अपने खड़े लुंड पर रख दिया. लुंड पर हाँथ पड़ते hi दीदी ने अपने हाँथ हटाने की कोशिश की लेकिन इस बार मैं उनके हाँथ को मज़बूती से पकड़े रहा. कुछ देर बाद उनके हाँथ को अपने हाँथ से लुंड पर सहलाने लगा. साथ hi अपने होंठो से उनके होंठ को फोरस्फुल्ली चूसने लगा. कुछ देर बाद बाद मैंने अपने हाँथ को उनके हाँथ से हटा लिया. लेकिन दीदी ने अपना हाँथ मेरे लुंड से नहीं हटाया.

मैं उनके होंठो को चूसते हुवे अपनी जीभ फिर से उनके होंठो पर फेरनी शुरी कर दी. कुछ देर होंठो पर जीभ फेरने के बाद दीदी ने रिस्पांस दिया और अपने मुंह क हलके से खोल दिया. मैंने ये देखकर अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी. और उनके मुंह में जीभ घूमने लगा. मैंने एक हाँथ को वापस उनके पेटीकोट के नदी पर रखा और झटके से उनका नाडा खोल दिया. जब तक दीदी कुछ समझ पति तब तक उनका पेटीकोट जमीन में पड़ा था. तो दीदी ने कहा.

सविता दी- ये क्या किया अभी. पेटीकोट क्यों उतर दिया.

मैं- अरे दीदी अब मुझे आपके इस कातिल बदन पर कपडे अचे नहीं लग रहे हैं. इसलिए उतर दिया.

सविता दी मेरी बात सुनकर मुस्कुराने लगी. अब दीदी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पंतय में कड़ी थी. क्या गजब की मॉल लग रही थी दीदी इस ब्रा पंतय में. मेरा मन को किया की अभी यही पटक कर इनकी छूट में अपने लुंड पेल दूँ. लेकिन मैंने अपने अपनों कण्ट्रोल किया. मुझे दीदी को चुदाई के लिए इस हद तक तड़पना था, पागल करना था मैं जो भी दीदी से करने के लिए कहूँ. उसके लिए दीदी ज्यादा ना नुकुर न करे. मैंने दीदी से कहा.



मैं- आपको कैसा लग रहा है दीदी.

सविता दीदी- मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा है और पूछता है की मुझे कैसा लग रहा है.

मैं- मैं आपके साथ जबरदस्ती कर रहा हूँ तो मैं चला जाओ फिर.

मेरी इस बात का दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. बस मेरी आंको में अपनी प्यासी आँखों से देखने लगी. फिर मैंने अपने दोनों हांथो से अपने जिस्म से पूरा सत्ता लिया जिससे दीदी की कड़क चूचिया ब्रा में मेरे साइन में डाब गई. जिससे दीदी के मुंह से AAAAAAAAAAAAaaaassssssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकली. फिर मैंने अपने हाँथ को उनकी पीठ पर रखा और उसे सहलाने लगा. मैंने धीरे धीरे अपने हाँथ को उनके पीठ पर सहलाता हुवा निचे की तरफ सरकने लगा और उसको दीदी की दोनों बड़ी गांड पर रख दिया. जिससे दीदी के जिस्म में एक थरथराहट मुझे महसूस हुई.

कुछ देर दीदी की गांड को हल्का हल्का दबाने के बाद मैंने उनकी दोनों गांड को मुठियो में भरा, अपने मुंह को उनके कांके पास ले गया और अपनी कमर को उनकी कमर से थोड़ा सा पीछे किया. फिर दीदी के कान में धीरे से बोलै.



मैं- दीदी मैं आपके साथ वो सब कुछ करना चाहता हूँ जो जीजा जी बिस्तर पर आपके साथ करते हैं.

मेरी बात सुनकर दीदी की धड़कन और तेज़ हो गई. उनकी चूचिया हर साँस के साथ उनपर निचे हो रही थो जो मेरी छाती से रगड़ रही थी. मेरी बात सुनकर दीदी ने नशीले अंदाज़ में कहा.

सविता दी- तेरे जीजा जी मेरे साथ बिस्टेर पर तो बहुत किछ करते हैं. तू क्या करना चाहता है मेरे साथ.

मैं- जीजा जी आपके साथ क्या क्या काम बिस्टेर पर करते हैं. ये तो मुझे नहीं मालूम. लेकिन मैं जीजा जी का एक काम आपके साथ करना चाहता हूँ.

सविता दीदी( माधोसी se)Aur वो कौन सा काम है.

दीदी से इन सब बातचीत के दौरान भी मैंने उनके मादक शरीर से खेलना बंद नहीं किया. मैं लगातार दीदी की गांड हो सकती के साथ दबा रहा था और उनके कण को लौ को चाट रहा था. लेकिन मैंने अपनी कमर को अभी भी दीदी की कमर से थोड़ा दूर करके रखा थल. फिर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी मैं आपको आपके hi बिस्तर पर पूरी नंगी करके आपसे लिपट कर सोना चाहता हूँ.

और इतना बोलकर मैंने उनके कण को मुंह में भरकर चूस लिया और पूरी ताकत से उनकी गांड को दोनों हांथो से मसल दिया और अपनी कमर को एक तेज झटका दीदी की कमर पर दिया. जिससे मेरा कड़ा लुंड पंतय के ऊपर से hi दीदी की छूट पर जा लगा. मेरी इस कामुक हरकत से दीदी एकदम मदहोस हो गई और चीखते हुवे माधोसी के साथ बोली.



सविता di-iiiiiiiiiiiiiissssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh कमीने hhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaayyyyyyyyy mummyyyyyyyyyyy. मुउउउउउउझे मममममममायआर डड्डालआआआआ रईईए. हहआआआ ाअभ्हिई सू ज्जाआँ अपपनी ड्डड्डीीीीिड्डड्डड्डी कोऊ एककदआजम नांगाआआ कार्ककके अप्प्प्पणीई बाआडां सीईए लिप्टकाररररर. माआआआंनंन्न ब्बभईई तेरी सअअअअअअअतःह नांगीइइइइइइइ सुवोनाआ चाहहहहहहःती होऊणन. मुज्झिये naaaaaaaaaaaaannnnnnnngaaa काआआआआर दिए ाब्ब्ब्बीीी ायऔरररर स्स्स्सो जाए मीरीई साथ.

दीदी इतनी ज्यादा गरम हो गाइट hi की उनके मुंह से ठीक से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी. उनकी जुबान लड़खड़ा रही थी. मैंने फिर से अपने होंठो को दीदी को होंठो पर रख दिया और अपने दोनों हांथो को उनकी गांड से सहलाते हुवे ऊपर की तरफ सरकने लगा. मैं दीदी को वाइल्ड किश कर रहा था और दीदी भी मेरा साथ दे रही थी. और मैं निचे से कमर हल्का हल्का धक्का दे रहा था. जिसके कारन मेरा लुंड उनकी चित पर पंतय के ऊपर से घिस रहा था. मैंने अपने हांथो को उनकी पीठ पर सरकते हुवे उनकी ब्रा के हुक पर लाया और दोनों हांथो से पकड़ कर हुक खोलने लगा.

दीदी के ब्रा का एक हुक खुला, फिर दूसरा खुला और फिर तीसरा खुलने वाला था की तभी दरवाज़े पर मनीषा की आवाज़ सुनाई दी. उसकी आवाज़ सुनते hi दीदी झटके से मुझसे अलग कड़ी हो गई. और मेरी तरफ देखने लगी. मैं भी उनकी तरफ देख रहा था उनके सांसे अब भी बेतरतीब थी. चेहरा एकदम कामुकता के कारन लाल हो गया था. हर साँस के साथ उनकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी. दीदी इस समय बहुत hi छुडासी लग रही थी. अगर इस समय घाट में कोई नहीं होता तो शायद सविता दीदी आज मेरे लुंड पर बैठकर झूला झूल रही होती. लेकिन मेरी किस्मत में अभी छूट नहीं लिखी थी.



और मेरी भी हालत बहुत अच्छी नहीं थी लुंड एकदम आसमान की बुलंदी पर था. अब उसे एक छूट की जरूरत थी. और वह मिलने वाली भी थी लेकिन ……….. तभी मेरे कानो में दीदी की आवाज़ सुनाई दी.

सविता दी- अभी अब क्या होगा कही व कमरे में आ गयी और उसने हम दोनों को इस हालत में देख लिया तो वो क्या सोचेगी.

मैं- कुछ नहीं होगा दीदी दरवाज़ा तो बंद है रुको मैं हैंडल करता हूँ तब तक आप अपने कपडे ठीक कर लीजिए.

उसके बाद मैंने अपने आप को ठीक किया और दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था, लेकिन मनीषा की आवाज़ कमरे से आ रही थी. मैंने दीदी से कहा सब ठीक है और अपने कमरे में जाने लगा. दीदी मुझे hi देख रही थी. मैंने जाने से पहले अपने एक हाँथ के अंगूठे और हाँथ को आपस में मिलकर गोल किया और दूसरे हाँथ की एक अंगुली को उसमे अंदर बहार करने लगा और दीदी को इशारा किया. दीदी मेरी ये हरकत देखकर शर्माने लगी और बोली.

सविता दीदी- ढहात बेशरम. तू कभी नहीं सुधरेगा.

उसके बाद मैं आपने कमरे में आ गया. और लेटकर अभी जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोचने लगा. सब लोग घर में थे तो कुछ खास नहीं हुआ. रत को खाना खत समय मैं और सविता दीदी अगल बगल बिकते tha.main खाना कहते हुवे पीछे से उनकी कमर में हाँथ डालकर सहलाने लगा. सब घर वालो के अगल बगल होने के बावजूद मेरी ऐसा करने से दीदी को ठसका लगा. और वो खांसने लगी तो मैंने उन्हें पानी पिने को दिया और पूछा.



मैं- क्या हुवा दी. सब ठीक तो हैं न.

सविता दी- (मुझे घूरकर). कुछ नहीं वो खाना गले में अटक गया था इसलिए ठसका लग गया.

उसके बाद दीदी ने मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रख दिया फिर भी मैं धीरे धीरे उनकी कमर को सहलाता रहा. खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया और दीदी का इंतज़ार करने लगा. लेकिन दीदी चाट पर नहीं आई. तो मैं अपने कमरे में चला गया और बिस्टेर पर लेट गया और मोबाइल से सविता दीदी को मस्सगे कर दिया थोड़ी देर बाद उनका रपल्य आया.

मैं- क्या हुवा दीदी आप अभी तक आई नहीं.

सविता di-kaha आना है अभी.

मैं- अरे मैंछत पर आपका इंतजार कर रहा हूँ.

सविता दी- मेरा इंतज़ार किसलिए कर रहे हो. मैंने तो नहीं कहा इंतज़ार करने के लिए.

मैं- आप जानती हैं फिर भी मेरे मुंह से सुनना चाहती है. और अगर मैं बोल दूंगा तो आप फिर से नाराज़ हो जाओगी. इसलिए मैं नहीं बोलूंगा आप आ जाइये.

सविता दी- बोलना तो तुझे पड़ेगा तभी तो मुझे पता चलेगा की मेरा कमीना भाई अपनी बहन का इंतज़ार क्यों कर रहा है.

मैं- बोल तो दू. लेकिन आप फिर से नाराज़ हो जाओगी.

सविता दी- जब तक तू बताएगा नहीं मुझे पता कैसे चलेगा की तू क्यों मेरा इंतज़ार कर रहा है. अपर मैं नाराज़ नहीं होउंगी तुजसे.

मैं- नहीं आप नाराज़ हो जाओगी. पहले प्रॉमिस करो तब बोलूंगा.

सविता दी- अच्छा चल प्रॉमिस. नाराज़ नहीं होउंगी. चल अब बता दे की तू क्यों इंतज़ार कर रहा था.

मैं- बोल दू फिर.

सविता दी- हाँ बोल दे.

मैं- मैं अपनी बड़ी बहन जो की शादीशुदा है उसकी प्यास बुझाना चाहता हूँ.

सविता दी- तो उसके लिए छत पर आने की क्या जरूरर है. मैं किचन से पानी पि लुंगी.

मैं- अरे दीदी आपको जो प्यास लगी है वो पानी से नहीं बुझने वाली.

सविता दी- अच्छा तुझे बड़ा पता है. तो चल बता मेरी प्यास कैसे बुझेगी.

मैं- अरे दीदी अपनी प्यास मैं बुझाऊंगा न.

सविता दी- अरे वही तो पूछ रही हूँ की मेरी प्यास कैसे बुझेगी.

मैं- और वैसे भी आपकी प्यास एक बार में बुझने वाली नहीं है.

सविता दी. फिर कैसे बुझाएगा मेरी प्यास को

मैं- जब मैं आपके जिस्म को सहलाकर आपको मदहोश करूँगा और आपके जालिम चूचियों को दबाकर इसका रास पाउँगा और आपकी गद्देदार गांड को दबा दबाकर आपको रगड़ रगड़ कर आपकी छूट को रात भर छोडूंगा तब जाकर आपकी प्यास बुझेगी.



सरिता दी- छियईईई कितनी गन्दी बाटे करता है तू. तुझे शर्म नहीं आएगी अपनी बड़ी बहन को छोड़ते हुवे.

मैं- अरे दी मैं तो आपको छोड़ने के लिए पूरी तरह बेशरम बन चुक्का हु. बस आप एक बार मेरा लुंड अपनी छूट में ले लो. फिर देखना आप मेरे लुंड की गुलाम बन जाएंगी. और मुझसे हमेशा छोड़ने के लिए तैयार रहेंगी.

सविता दी- चुप बेशरम अपनी बहन से कितनी गन्दी गन्दी बाते कर रहा है. कुछ तो शर्म कर ले.

मैं- अच्छा ये सब छोडो. पहले आप आओ तो सही. फिर मैं आपकी भी शर्म उतर दूंगा. वैसे कितनी देर में आ रही हो.

सविता दीदी- वो अभी तक बेबी जग रही है तो पहले ये सो जाये फिर देखती हूँ.

इसके आगे की कहानी अगले भार में..
 
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