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- Dec 5, 2013
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अपडेट-46
दीदी के जाने के बाद मैं कमरे में आकर बैठ गया और अभी जो हुवा उसके बारे में सोचने लगा. सबकुछ अच्छा hi जा रहा था. तो दीदी ने ऐसे रिएक्शन क्यों दिया. कही दीदी को मेरी रंडी वाली बात तो बुरी नहीं लगी अब ये तो पता नहीं की क्या हुआ दीदी को. लेकिन अगर मैंने जोश में आकर रंडी नहीं बोलता तो जिस तरह से दीदी साथ दे रही थी उस हिसाब से वो ज्यादा से ज्यादा 1 हफ्ते के अंदर मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही होती. लोग तो अपने पेअर पर कुल्हाड़ी मरते हैं. लेकिन मैंने तो अपने लुंड पर कुल्हाड़ी मार ली थी.
फिर मैंने सोचा की हो सकता है की उनका पतिब्रता धर्म जग गया हो. उनको ये एहसास हो गया हो की वो गलत कर रही हैं. अपने पति को धोखा दे रही हैं. और सबसे बड़ी बात अपने भाई के साथ ये सब कर रही हैं. मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा था तो मैंने इस बात को दिमाग से निकलने की सोची तभी मेरे मोबाइल की मश्ग टन बजी. मैंने देखा की मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग है. मैं उनसे बात तो नहीं करना चाहता था. लेकिन मैंने सोचा की एक छूट तो मेरी बकचोदी की वजह से हाँथ से गई. लेकिन इस छूट को क्यों जाने दू तो मैंने दीदी को रपल्य किया.
म- ही सेक्सी.
सरिता दी- कैसी हो आप.
म- ठीक हूँ. आप कैसी हो.
सरिता दी- मैं भी ठीक हूँ. और बताओ क्या हो रहा है.
म- कुछ नहीं बस अभी भाई के साथ थी. अभी फुर्सत मिली तो बैठी हुई थी और आप क्या कर रही हैं.
सरिता दी- कुछ नहीं बस अभी फिऑन्स से बात हो रही थी. फुर्सत मिली तो सोचा तुमसे बात कर लू.
म- अरे वाह क्या बाते हो रही थी दोनों फ्यूचर कपल्स के बिच.
सरिता दी- अरे कुछ खास नहीं बस वही रोज की बाते. हसी मज़ाक बस और क्या बात होगी.
म- बस केवल हंसी मज़ाक और वो वाली बात नहीं करती क्या दोनों लोग.
सरिता दी- वो वाली कौन सी बात ( हँसते हुवे)
म- अरे वही. प्यार मोहब्बत वाली बात. शादी के बाद क्या क्या करना है. कहा कहा करना है. कैसे कैसे करना है. कब कब करना है. हनीमून की बाते. मेरा मतलब है गन्दी वाली बाटे.
सरिता दी- चल हैट बेशरम. कोई ऐसी बाते भी करता है क्या.
म- चल झूठी. मुझे बना रही है. चल बता न क्या क्या प्लान बनाया है शादी के बाद का.
सरिता दी- अरे कुछ ज्यादा खास नहीं. बस रोज कहते हैं. की तुम्हारे साथ ये करूँगा. तुम्हे इनरवेरे में hi घर में रखूँगा. और ऑफिस नहीं जाऊंगा दिन भर तुम्हारे साथ घर में hi रहूँगा. होनीमून के लिए शिमला नैनीताल और मसूरी जाना तय हुआ है.
म- हाउ रोमांटिक. तब तो बहुत मज़ा आने वाला है आपको (हँसते हुवे)
सरिता di-(sharmate हुवे). चल हैट बेशरम. शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुवे.
म- अच्छा अब रखती हूँ. भाई बुला रहा है.
मैं रोज रोज फ़ोन रखने से पहले यही बोलता था की भाई बुला रहा है तो आज दीदी ने पूछ hi लिया.
सरिता दी- एक मिनट. जरा रुको तो.
म- हाँ बताओ क्या हुआ.
सरिता दी- अच्छा ये बताओ रोज तुमको इस वक्त तुम्हारा भाई क्यों बुलाता है उसको इतनी रात को क्या काम रहता है तुमसे. तुम रोज उसके बुलाने के बाद bye बोलकर चली जाती हो.
म- अभी तो नहीं बता सकती जल्दी में हूँ. बाद में आपको बताउंगी. Bye.
उसके बाद मैंने फ़ोन रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा. थोड़े देर बाद मुझे नींद आ गयी.
सुबह मैं देरी से सोकर उठा. आज सविता दीदी ने भी मुझे नहीं जगाया. खैर वो तो कल रात से गुस्सा hi थी. मैं फ्रेश होकर निचे आया. और सोफे पर बैठ गया. वह पर मम्मी पापा मनीषा और सरिता दी थे. आज किचन में सविता दी थी. जब मैं वह बैठा तो सरिता दीदी ने पूछा.
सरिता दी- किससे मार खा कर आ रहा है अभी.
उनकी बात सुनकर मैं चौक गया. मैंने सोचा इन्हे कैसे पता की कल दीदी ने मुझे थप्पड़ मारा. कही दीदी ने बता तो नहीं दिया. नहीं नहीं अगर दीदी ने बता दिया होता तो घर का माहौल दूसरा होता. जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो सरिता दी ने फिर पूछा.
सरिता दी- तुमने जवाब नहीं दिया अभी. इतनी सुबह सुबह किससे मार खा कर आ रहा है.
मैं- मतलब मुझे कौन मरेगा. और आपको कैसे पता की मैंने मार खायी है.
सरिता दी- अपना गाल देख एकदम लाल पड़ा हुवा है जैसे किसी ने बहुत जोर से थप्पड़ मारा हो.
मैंने शीशी में जब अपना चेहरा देखा तो एकदम एक तरफ एकदम लाल हो गया था. तो मैंने धीरे से बुदबुदाया.
मैं- एक जंगली बिल्ली ने बहुत जोर का मारा है.
सरिता दी- क्या बड़बड़ा रहा है. सुनाई नहीं पद रहा है.
मैं- अरे दीदी वो क्या है कल रात कमरे में 2-3 मच्छर आ गए थे. वो बार बार मेरे चेहरे पर बैठ रहे थे और मैं नींद में था. तो उन्हें मरने के लिए हाँथ चला रहा था. शायद कुछ ज्यादा तेज़ी से हाँथ चल गया इसलिए मेरे गाल लाल हो गए हैं.
मैं अपने कमरे में चला गया. आज मेरा बहार जाने का मूड नहीं था तो मैं अपने कमरे में बैठकर अपने लैपटॉप पर सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. लगभग 3 हॉर्स बाद मुझे प्यास लगी तो मैं पानी लेने किचन में जा रहा था. उसी समय सरिता दी बाथरूम से नहाकर बहार निकली. तो उन्होंने अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा हुवा था. वो टॉवल उनकी जांघो तक आ रहा था. दीदी के बाल भीगे हुवे थे. शरीर में पानी की हलकी हलकी बुँदे चमक रही थी. उनके गाल होंठ पानी की बूंदो के करना बहुत कामुक लग रहे थे. उनके बालो से पानी की बुँदे उनकी गार्डन पर गिरकर सरकती हुई उनकी ृषभरी चूचियों की घाटी में ऐसे गायब हो रही थी जैसे नदिया समुन्दर में गायब हो जाती थी.
सेक्सी कहानी पढ़कर मेरा लुंड वैसे भी खड़ा था परनतु दीदी का ऐसा कामुक और मादक रूप देखकर वह झटके मरने लगा. मेरे इस तरह अचानक सामने आ जाने से दीदी एकदम चौक गाइट hi. उनके हाँथ पांव एकदम जैम हो गए थे उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे.
मैं एकटक दीदी के शरीर को घूरने लगा. दीदी ने भी जब ये देखा की मैं उनके शरीर को घूर रहा हूँ तो वह शर्माकर इधर उधर देखने लगी.
फिर एकाएक दीदी की नज़र मेरे खड़े लुंड पर पड़ी तो दीदी एकदम सोक रह गयी. मेरा लुंड पुरे आकर में दीदी के सामने से. जिसे दीदी बस मुंह फाडे मेरे लुंड को घूरे जा रही थी. लगभर ऐसे hi 30 सेकंड तक मेरे लुंड को घूरने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मुझे जैसे होश आया और मैंने कहा.
मैं- सॉरी दीदी वो मुझे प्यास लगी थी तो मैं पानी पिने आया था. मुझे नहीं पता था की वो आप……. Matlab………wo…………
सरिता दी- कोई बात नहीं अभी. लेकिन अपने नज़रो को थोड़ा अपने काबू में रखना सीख ले.
इतना कहने के बाद वो तेज़ी से दौड़कर अपने कमरे में चली गई और मैं पीछे से उनकी मटकती गांड को देखने लगा. उसके बाद मैं पानी पीकर अपने कमरे में आया. मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं कपडे पहनकर थोड़ा फ्रेस होने के लिए बहार निकल आया
लगभर 3 हॉर्स बाद मैं जब घर वापस आया तो घर देखा की घर में मां, पापा, मैश और सविता दीदी हॉल में hi बैठे थे. घर में जैसे मातम चाय हुआ था. सबके चेहरा पर एक उदासी थी थी. मुझे देखते hi पापा ने तेज़ आवाज़ में पूछा.
पापा- अभी कहा गया था तू. हम कब से तेरी रह देख रहे हैं.
पापा के मुंह से ये सुनकर मेरी तो गांड फटकार चौराहा हो गई. मुझे पक्का विश्वास हो गया की दीदी ने पापा को सबकुछ बता दिया है. और आज मेरी सहमत आयी है. तो मैंने डरते डरते पापा से कहा.
मैं- सॉरी पापा वो मुझसे गलती हो गयी. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.
पापा- अरे नालायक. सरिता की शादी पोस्टपोन हो गई है.
पापा की बात सुनकर मुझे ये तो रहत हुई की सविता दीदी ने पापा को कुछ नहीं बताया है. लेकिन सरिता दीदी को शादी पोस्टपोन हो गई है ये सुनकर मुझे जैसे झटका सा लगा. मैंने चौकते हुवे कहा.
मैं- क्या.. Kaise..Kisliye…..
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
दीदी के जाने के बाद मैं कमरे में आकर बैठ गया और अभी जो हुवा उसके बारे में सोचने लगा. सबकुछ अच्छा hi जा रहा था. तो दीदी ने ऐसे रिएक्शन क्यों दिया. कही दीदी को मेरी रंडी वाली बात तो बुरी नहीं लगी अब ये तो पता नहीं की क्या हुआ दीदी को. लेकिन अगर मैंने जोश में आकर रंडी नहीं बोलता तो जिस तरह से दीदी साथ दे रही थी उस हिसाब से वो ज्यादा से ज्यादा 1 हफ्ते के अंदर मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही होती. लोग तो अपने पेअर पर कुल्हाड़ी मरते हैं. लेकिन मैंने तो अपने लुंड पर कुल्हाड़ी मार ली थी.
फिर मैंने सोचा की हो सकता है की उनका पतिब्रता धर्म जग गया हो. उनको ये एहसास हो गया हो की वो गलत कर रही हैं. अपने पति को धोखा दे रही हैं. और सबसे बड़ी बात अपने भाई के साथ ये सब कर रही हैं. मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा था तो मैंने इस बात को दिमाग से निकलने की सोची तभी मेरे मोबाइल की मश्ग टन बजी. मैंने देखा की मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग है. मैं उनसे बात तो नहीं करना चाहता था. लेकिन मैंने सोचा की एक छूट तो मेरी बकचोदी की वजह से हाँथ से गई. लेकिन इस छूट को क्यों जाने दू तो मैंने दीदी को रपल्य किया.
म- ही सेक्सी.
सरिता दी- कैसी हो आप.
म- ठीक हूँ. आप कैसी हो.
सरिता दी- मैं भी ठीक हूँ. और बताओ क्या हो रहा है.
म- कुछ नहीं बस अभी भाई के साथ थी. अभी फुर्सत मिली तो बैठी हुई थी और आप क्या कर रही हैं.
सरिता दी- कुछ नहीं बस अभी फिऑन्स से बात हो रही थी. फुर्सत मिली तो सोचा तुमसे बात कर लू.
म- अरे वाह क्या बाते हो रही थी दोनों फ्यूचर कपल्स के बिच.
सरिता दी- अरे कुछ खास नहीं बस वही रोज की बाते. हसी मज़ाक बस और क्या बात होगी.
म- बस केवल हंसी मज़ाक और वो वाली बात नहीं करती क्या दोनों लोग.
सरिता दी- वो वाली कौन सी बात ( हँसते हुवे)
म- अरे वही. प्यार मोहब्बत वाली बात. शादी के बाद क्या क्या करना है. कहा कहा करना है. कैसे कैसे करना है. कब कब करना है. हनीमून की बाते. मेरा मतलब है गन्दी वाली बाटे.
सरिता दी- चल हैट बेशरम. कोई ऐसी बाते भी करता है क्या.
म- चल झूठी. मुझे बना रही है. चल बता न क्या क्या प्लान बनाया है शादी के बाद का.
सरिता दी- अरे कुछ ज्यादा खास नहीं. बस रोज कहते हैं. की तुम्हारे साथ ये करूँगा. तुम्हे इनरवेरे में hi घर में रखूँगा. और ऑफिस नहीं जाऊंगा दिन भर तुम्हारे साथ घर में hi रहूँगा. होनीमून के लिए शिमला नैनीताल और मसूरी जाना तय हुआ है.
म- हाउ रोमांटिक. तब तो बहुत मज़ा आने वाला है आपको (हँसते हुवे)
सरिता di-(sharmate हुवे). चल हैट बेशरम. शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुवे.
म- अच्छा अब रखती हूँ. भाई बुला रहा है.
मैं रोज रोज फ़ोन रखने से पहले यही बोलता था की भाई बुला रहा है तो आज दीदी ने पूछ hi लिया.
सरिता दी- एक मिनट. जरा रुको तो.
म- हाँ बताओ क्या हुआ.
सरिता दी- अच्छा ये बताओ रोज तुमको इस वक्त तुम्हारा भाई क्यों बुलाता है उसको इतनी रात को क्या काम रहता है तुमसे. तुम रोज उसके बुलाने के बाद bye बोलकर चली जाती हो.
म- अभी तो नहीं बता सकती जल्दी में हूँ. बाद में आपको बताउंगी. Bye.
उसके बाद मैंने फ़ोन रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा. थोड़े देर बाद मुझे नींद आ गयी.
सुबह मैं देरी से सोकर उठा. आज सविता दीदी ने भी मुझे नहीं जगाया. खैर वो तो कल रात से गुस्सा hi थी. मैं फ्रेश होकर निचे आया. और सोफे पर बैठ गया. वह पर मम्मी पापा मनीषा और सरिता दी थे. आज किचन में सविता दी थी. जब मैं वह बैठा तो सरिता दीदी ने पूछा.
सरिता दी- किससे मार खा कर आ रहा है अभी.
उनकी बात सुनकर मैं चौक गया. मैंने सोचा इन्हे कैसे पता की कल दीदी ने मुझे थप्पड़ मारा. कही दीदी ने बता तो नहीं दिया. नहीं नहीं अगर दीदी ने बता दिया होता तो घर का माहौल दूसरा होता. जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो सरिता दी ने फिर पूछा.
सरिता दी- तुमने जवाब नहीं दिया अभी. इतनी सुबह सुबह किससे मार खा कर आ रहा है.
मैं- मतलब मुझे कौन मरेगा. और आपको कैसे पता की मैंने मार खायी है.
सरिता दी- अपना गाल देख एकदम लाल पड़ा हुवा है जैसे किसी ने बहुत जोर से थप्पड़ मारा हो.
मैंने शीशी में जब अपना चेहरा देखा तो एकदम एक तरफ एकदम लाल हो गया था. तो मैंने धीरे से बुदबुदाया.
मैं- एक जंगली बिल्ली ने बहुत जोर का मारा है.
सरिता दी- क्या बड़बड़ा रहा है. सुनाई नहीं पद रहा है.
मैं- अरे दीदी वो क्या है कल रात कमरे में 2-3 मच्छर आ गए थे. वो बार बार मेरे चेहरे पर बैठ रहे थे और मैं नींद में था. तो उन्हें मरने के लिए हाँथ चला रहा था. शायद कुछ ज्यादा तेज़ी से हाँथ चल गया इसलिए मेरे गाल लाल हो गए हैं.
मैं अपने कमरे में चला गया. आज मेरा बहार जाने का मूड नहीं था तो मैं अपने कमरे में बैठकर अपने लैपटॉप पर सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. लगभग 3 हॉर्स बाद मुझे प्यास लगी तो मैं पानी लेने किचन में जा रहा था. उसी समय सरिता दी बाथरूम से नहाकर बहार निकली. तो उन्होंने अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा हुवा था. वो टॉवल उनकी जांघो तक आ रहा था. दीदी के बाल भीगे हुवे थे. शरीर में पानी की हलकी हलकी बुँदे चमक रही थी. उनके गाल होंठ पानी की बूंदो के करना बहुत कामुक लग रहे थे. उनके बालो से पानी की बुँदे उनकी गार्डन पर गिरकर सरकती हुई उनकी ृषभरी चूचियों की घाटी में ऐसे गायब हो रही थी जैसे नदिया समुन्दर में गायब हो जाती थी.
सेक्सी कहानी पढ़कर मेरा लुंड वैसे भी खड़ा था परनतु दीदी का ऐसा कामुक और मादक रूप देखकर वह झटके मरने लगा. मेरे इस तरह अचानक सामने आ जाने से दीदी एकदम चौक गाइट hi. उनके हाँथ पांव एकदम जैम हो गए थे उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे.
मैं एकटक दीदी के शरीर को घूरने लगा. दीदी ने भी जब ये देखा की मैं उनके शरीर को घूर रहा हूँ तो वह शर्माकर इधर उधर देखने लगी.
फिर एकाएक दीदी की नज़र मेरे खड़े लुंड पर पड़ी तो दीदी एकदम सोक रह गयी. मेरा लुंड पुरे आकर में दीदी के सामने से. जिसे दीदी बस मुंह फाडे मेरे लुंड को घूरे जा रही थी. लगभर ऐसे hi 30 सेकंड तक मेरे लुंड को घूरने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मुझे जैसे होश आया और मैंने कहा.
मैं- सॉरी दीदी वो मुझे प्यास लगी थी तो मैं पानी पिने आया था. मुझे नहीं पता था की वो आप……. Matlab………wo…………
सरिता दी- कोई बात नहीं अभी. लेकिन अपने नज़रो को थोड़ा अपने काबू में रखना सीख ले.
इतना कहने के बाद वो तेज़ी से दौड़कर अपने कमरे में चली गई और मैं पीछे से उनकी मटकती गांड को देखने लगा. उसके बाद मैं पानी पीकर अपने कमरे में आया. मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं कपडे पहनकर थोड़ा फ्रेस होने के लिए बहार निकल आया
लगभर 3 हॉर्स बाद मैं जब घर वापस आया तो घर देखा की घर में मां, पापा, मैश और सविता दीदी हॉल में hi बैठे थे. घर में जैसे मातम चाय हुआ था. सबके चेहरा पर एक उदासी थी थी. मुझे देखते hi पापा ने तेज़ आवाज़ में पूछा.
पापा- अभी कहा गया था तू. हम कब से तेरी रह देख रहे हैं.
पापा के मुंह से ये सुनकर मेरी तो गांड फटकार चौराहा हो गई. मुझे पक्का विश्वास हो गया की दीदी ने पापा को सबकुछ बता दिया है. और आज मेरी सहमत आयी है. तो मैंने डरते डरते पापा से कहा.
मैं- सॉरी पापा वो मुझसे गलती हो गयी. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.
पापा- अरे नालायक. सरिता की शादी पोस्टपोन हो गई है.
पापा की बात सुनकर मुझे ये तो रहत हुई की सविता दीदी ने पापा को कुछ नहीं बताया है. लेकिन सरिता दीदी को शादी पोस्टपोन हो गई है ये सुनकर मुझे जैसे झटका सा लगा. मैंने चौकते हुवे कहा.
मैं- क्या.. Kaise..Kisliye…..
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..