Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 4 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-27

थोड़े देर बाद दीदी भी तैयार होकर हाल में आ गई मैं तो बस उन्हें देखता hi रह गया. आज उन्होंने सलवार शट पहना हुआ था. जिसके गले के पास का कपडा एकदम झीना था. जिससे उनकी चूचियों की गहराई दिख रही थी. उन्होंने दुपट्टा भी लिया था लेकिन उस समय दुपट्टा उनके गले में था. हम दोनों नाश्ता करके मार्किट जाने के लिए निकल गए. जब हम घर से बहार आये तो मैंने दीदी से कहा.



मैं- दी लगता है आज लोग मेरी किस्मत से जलने वाले हैं

सविता दी- वॉक योन

मैं- अरे जब इतनी सुन्दर और खूबसूरत लेडी मेरे साथ होगी तो लोग तो जलेंगे hi न मुझसे.

सविता दी- ज्यादा मस्का मत मार. मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ.

मैं- वो आप मेरी नज़र से देखो की आप कितनी खूबसूरत हैं.

सविता दी- थैंक्स अभी.

फिर जब हम घर से बहार आये तो दीदी ने बाइक न कार से चलने के लिए कहा. लेकिन मैं दीदी के साथ आगे अपनी किस्मत आजमाना चाहता था इसलिए बस से जाना दिसदे किया. थोड़ी देर न नुकुर के बाद दीदी भी बस से मार्किट चलने के लिए मन गई. फिर हम पैदल hi बस स्टैंड पर आ गए. जो हमारे घर से पैदल 15 मिनट के राष्ट था. बस स्टैंड पर आकर हम बस का वेट करने लगे.

बस स्टैंड पर जितने भी मर्द थे सभी दीदी को घूर कर देख रहे थे. मैंने दी को इशारा किया की देखो मैंने सही कहा था न. तो दीदी शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी.



कुछ देर बाद बस आ गयी. बस में बहुत भीड़ थी. दीदी ने तो बस में चढ़ने से इंकार कर दिया. लेकिन मेरे बहुत कहने वह बस पर चढ़ी.

हम बस के बिच में आकर खड़े हो गए. बस स्टॉप पर बहुत से यात्री थे तो सब के बस पर चढ़ जाने के कारन बस में भीड़ और ज्यादा बढ़ गई थी. कुछ दूर बस के चलने के बाद अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा. मैं दीदी के पीछे खड़ा था तो पीछे से दीदी से पूरा सात गया



लेकिन मैं जल्दी से पीछे हैट gaya.sadak पर गड्ढे बहुत थे तो ड्राइवर बार बार ब्रेक मरता था और मैं पीछे से धक्का लगने से दीदी से पीछे से पूरा सात जाता था और कुछ सेकंड बाद जगह बना कर पीछे हैट जाता था. सी पर दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.

सविता दी- क्या कर रहा है अभी ठीक से खड़ा नहीं रह सकता क्या.

में- मैं क्या करू दीदी एक तो इतनी भीड़ है और ऊपर से ड्राइवर बार बार ब्रेक मार रहा है. आप ऐसा करो की ऊपर का हैंडल कसकर पकड़ लो. ताकि अगर अबकी बार मैं आपके ऊपर गिरु तो आप मुझे संभल सको.

सविता दी- (मुस्कुराते हुवे). मैं तुझको कैसे सम्भालूंगी. संभालना तो तुझको मुझे चाहिए.

मैं- मैं तो आपको साडी ज़िन्दगी सँभालने के लिए तैयार हूँ.

सविता दी- बड़ा आया साडी ज़िन्दगी सँभालने वाला. जब मुझे तेरी जरुरत होगी तब देखूंगी की तू मुझे संभालता है या नहीं.

मैं- देख लेना दीदी. मैं इतनी अच्छी तरह से आपको सम्भालूंगा की आप मुझे कभी भूल नहीं पाओगी.

सविता दी- वो तो समय बताएगा.

ये बाते हम लोग धीरे धीरे कर रहे थे जो हम दोनों के आलावा कोई नहीं सुन रहा था. अभी बस कुछ hi आगे बढ़ी तो ड्राइवर ने फिर से ब्रेक मार दी. इस बार मैं फिर से दीदी से पीछे से चिपक गया लेकिन इस बार मैं पीछे नहीं हटा और दीदी से चिपका रहा. अब जब जब बस में हल्का सा झटका भी लगता तो मैं दीदी से और ज्यादा चिपकता जाता. अब हम दोनों इतने चिपक गए थे की दोनों के बिच से हवा भी नहीं निकल सकती थी. दीदी से लगातार चिपकने के कारन मेरा लुंड भी कड़ा हो गया था जो दीदी के चुतरो को टच हो रहा था. दीदी को भी शायद इसका एहसास हो गया था. इसलिए उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा



सविता दी- अभी थोड़ा पीछे हैट जा.

मैं- पीछे जगह hi नहीं है दीदी तो कहा हैट कर जाओ.

अब तक लुंड पंत में पूरा तन चूका था और बस की हिलने से लगातार दीदी के चुतरो पर झटके मार रहा था. मैं भी मौके का पूरा फायदा उठाकर अपने लुंड का प्रेशर दीदी के चूतड़ों पर बनाये हुवे था.



दीदी भी जान गयी थी की उनके चूतड़ों पर क्या चुभ रहा है इसलिए वो अपनी गांड इधर उधर कर मेरे लुंड से बचने की कोशिश कर रही थी. इस बार जब ड्राइवर ने ब्रेक मरी तो मैं अपने दोनों हाँथ को उनके पेट पर रखकर पूरी तरह उनपर लड़ गया. जिससे उनके मुंह से sssssssssssiiiiiiiiiiiiissssssssss….. की आवाज़ निकल गयी.

मैं अभी भी दीदी की गांड पर अपने लुंड का दबाव बनाकर खड़ा था. कुछ देर बाद दीदी ने पीछे मुड़कर मेरी आंको में dekha.mujhe उनकी आँखे हलकी सी सुर्ख नज़र आयी और साँस भी उब्नोर्मल हो गई थी. मैंने उनकी आंको में देखते हुवे अपनी नज़र कंधे के ऊपर से उनकी चूचियों पर जमा दी. और दीदी से कहा.





मैं- वैसे दीदी. बहुत बड़े बड़े हैं.

सविता दी- (चौकते हुवे) क्या बड़े बड़े हैं.

Main-(unki चूचियों के देखते हुवे) सड़क के गड्ढे. वैसे आपने क्या समझा दीदी.

सविता दी- मुझे क्या समझना है. सही कह रहा है तू. तभी बार बार ड्राइवर ब्रेक लगा रहा है.

मैंने क्या कहा था इसका मतलब दीदी ने अच्छी तरह समझ लिया था की मैं उनकी चूचियों की बात कर रहा हूँ. तभी तो मेरे बात बदल देने से उनके चेहरे पर एक मुस्कराहट आकर चली गयी. मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवा कहा

मैं- वैसे दीदी मैंने आपसे कहा था की आप मुझे संभल लोगी.

सविता दीदी- हाँ और देख मैंने तुझे संभाला हुआ है.

मैं- हाँ दीदी मेरा तो बस आप hi संभल सकती हैं

मेरा आप hi संभल सकती हैं मैंने जोर देकर कहा. ऐसा बोलने पर दीदी फिर से मेरी आंको में देखने लगी और मैं भी उनकी आंको में देखने लगा. 10 सेकंड तक हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे और एक दूसरे की आंको को पढ़ने की कोसिस करते रहे. तभी ड्राइवर ने फिर से ब्रेक मेरी दीदी ने रोड छोड़ दी थी जिसके कारन ब्रेक लगने से दीदी आगे को गिरना लगी तो मैंने जल्दी से उन्हें थामना चाहा. लेकिन इस चक्कर में जल्दबाज़ी में मैंने दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा. अब हालत ये थे की मेरा लुंड पीछे से दीदी की गांड में प्रेशर बनाये हुवे था और मेरे दोनों हाँथ में दीदी की रसभरी चूचिया थी जिन्हे मैंने मध्यम प्रेशर के साथ पकड़ा था. मन तो कर रहा था की उनके कपडे को यही फाड़ दूँ और उनकी चूचियों का रा चूस लू. थोड़ी देर तो हम दोनों को कुछ समझ नहीं आया. थोड़ी देर बाद दीदी को होश आया तो उन्होंने मेरे हाँथ को अपनी चूचियों से हटाने के लिए कहा.



सविता दी- अभी अपना हाँथ हटा.

मैं- सॉरी दीदी. वो गलती से हो गया.

इतनी देर में हमारा स्टॉप आने वाला था तो हम दोनों गेट पर आ गए. लेकिन मेरा लुंड अभी भी खड़ा हुआ था. उसको कैसे छुपाऊ समझ में नहीं आ रहा था. इसने में hi बस रुक गई और मुझे और दीदी को उतरना पड़ा. जब हम दोनों निचे उतरे तो अचानक दीदी की नज़र मेरे पंत पर पद गई. लुंड अभी तक बैठा नहीं था तो उसका पूरा शाप दीदी को जज़र आने लगा. लुंड के शाप को देख कर दीदी की आँखे बड़ी हो गई. दीदी कभी मेरी आँखों में देखती तो कभी मेरे लुंड के शाप को. जब मैंने देखा की दीदी मेरे लुंड को देख रही हैं तो मैंने उनसे कहा. तो मैंने उन्हें छेड़ते हुवे कहा



मैं- क्या देख रही हो दीदी.

सविता दीदी………………. कोई जवाब नहीं.( शायद उन्होंने सुना नहीं की मैं क्या पूछ रहा हूँ.

मैं- दीदी… दीदी.

सविता दीदी- (हड़बड़ा कर). हाँ अभी क्ययया हुआ.

मैं- अरे मैंने पूछा क्या देख रही हैं लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया.

सविता दी- (क्या जवाब देती की तेरे लुंड को देख रही थी. कुछ देर बाद वो बोली)

सविता दी- कुछ भी नहीं देख रही थी. चल जल्दी जो करना आये है पहले वो कर ले.

मैं- हाँ दीदी चलो (इतनी देर में लुंड में तनाव कुछ काम हो गया था.)

फिर मैं और दीदी लैपटॉप खरीदने इलेक्ट्रॉनिक की शॉप पर चले गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 


अपडेट- 28


लैपटॉप खरीदते समय मेरे और सविता दीदी में काम को hi लेकर बात चित हुई. फिर हमने 40,000 रस. का लैपटॉप परचेस किया. उसके साथ में इंटनेट चलने के लिए एक डोंगल भी लिया. फिर बिल पाय करके दीदी के साथ दुकान से बहार आये तो दीदी ने कहा.

सविता दी- अभी चलो कुछ शॉपिंग करते हैं.

मैं- मुझे और कुछ नहीं खरीदना.

सविता दी- लेकिन मुझे अपने लिए कुछ कपडे लेने हैं. प्ल्ज़ चल न.

फिर मैं और दीदी कपडे के शो रूम में चले गए. जब हम वह पहुंचे तो दुकान पर एक लड़का था जो दीदी को लगातार घूरे जार अहा था. दीदी ने भी उसे अपनी तरफ घूरता देख लिया था. लेकिन उन्होंने उसे इग्नोर किया और कपडे खरीदने में व्यस्त हो गई. मैं भी दुकान में चारो तरफ देखने लगा. तभी मुझे वह पर एक सेट नज़र आया जो लेडीज पुतले को पहनाया गया था तो मैंने ये सोचकर उसे ले लिया की एक दिन दीदी को ये गिफ्ट करूँगा. मैंने उसे पैक करने के लिए उस लड़के से कहा तो लड़का बोलै.



लड़का- भाई साहब आपकी गर्लफ्रेंड तो बहुत सुन्दर हैं. ये कपडा इनके ऊपर बहुत शट करेगा.

Main-haan भाई इसीलिए तो ये गिफ्ट देने के लिए hi ले रहा हूँ.

जब मैं उस कपडे को पैक करा रहा था तो दीदी ने मुझे देख लिया लेकिन बोली कुछ नहीं. मैंने दीदी से नज़र बचाकर एक बहुत hi स्टाइलिश ब्रा और पंतय का सेट भी खरीद लिया. मैंने अपने कपडे एक अलग बैग में पैक करवा लिए. तब तक दीदी भी अपनी शॉपिंग करके आ गयी. उन्होंने भी दो सेमि ट्रांस्पेरेंट्स निघ्य ली थी साथी में कुछ ब्रा पंतय भी थी. फिर मैंने पेमेंट किया और दुकान से बहार निकर आये. तो दीदी ने मुझसे पूछा.

सविता दी- तूने क्या लिया.

मैं- मैं क्यों बताऊ.

सविता दी- लेकिन मैंने तो देख लिया है की तूने क्या ख़रीदा है. लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही है की जब नताशा चली गई है तो तूने वो ड्रेस किसके लिए ली है.

मैं- है कोई बहुत hi खूबसूरत लड़की. जिसे मैं ये गिफ्ट करूँगा.

सविता दी- अच्छा जरा मैं भी तो जणू की कौन है वो. बता न अभी.

मैं- मैं क्यों बताऊ.

सविता दी- प्ल्ज़ अभी बता न. देख अब हम दोनों दोस्त बन चुके हैं न. तो दोस्तों में कुछ नहीं छुपाते. बता न की कौन है वो.

मैं- अच्छ ठीक है. मैं उसका नाम अभी तो नहीं बता सकता. लेकिन पिछले कई दिनों से मैं उसे सेट करने की कोशिश कर रहा हूँ. जब वो मुझसे जब वो सेट हो जाएगी तो मैं उसका नाम आपको बतौंग और ये गिफ्ट उसे दूंगा.

सविता दी- अरे वाह. तुझे क्या लगता है की वो तुझसे सेट हो जाएगी.

मैं- हाँ दीदी. उसका पॉजिटिव रिस्पांस देखकर मुझे ऐसा लगता है की शायद बहुत जल्द hi वो मुझसे सेट हो जाएगी.

मेरी बात सुनकर दीदी मंद मंद मुश्कुरा रही थी. इसके बाद हम दोनों में कोई बात नहीं हुई और हम दोनों बस स्टैंड पर आ गए. थोड़ी देर में बस आ गई. इस बार बस में ज्यादा भीड़ नहीं थी जिसे देखकर मैं खुश नहीं हुआ. हम दोनों बस में चढ़ गए और एक खली सहित पर बैठ गए. दीदी ने खिड़की की तरफ लैपटॉप का बैग और शॉपिंग का बैग रख दिया और बैठ गई. मैं भी उनके बगल बैठ गया. कुछ देर में hi बस चल पड़ी. बस आते समय जैसी hi चल रही थी बिच बिच में ड्राइवर ब्रेक लगा रहा था.

कुछ देर बाद मैंने दीदी की तरफ वाला हाँथ उठाकर शीट के पीछे से खिड़की की तरफ दीदी के कंधे पर रख दिया. हाथ रखते hi दीदी ने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं. दीदी का दुपट्टा उनके गले में फसा हुआ था जिससे उनकी चूचियों की गहराई नज़र आ रही थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.





मैं- कितना अच्छा नज़ारा है दीदी.

दीदी भी समझ रही थी की मैं किस नज़ारे की बात कर रहा हूँ लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. मैं लगातार उनके कंधे को सहलाता रहा. उनके कंधे को सहलाने पर मुझे बड़े की पट्टी महसूस हो रहा थी. मैंने फिर दीदी से कहा.

मैं- अच्छा दीदी ये बताओ जीजा जी के क्या हाल चल हैं. आप भी उनसे बात करती मुझे नहीं दिखती.

सविता दीदी- वो ठीक हैं. और क्या मैं तुझे बता कर उनसे बात करुँगी क्या.

मैं- अरे नहीं दीदी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था.

इतने में हमारा स्टॉप आ गया तो मैं और दीदी अपना सामान लेकर उतर गए. और पैदल hi घर की तरफ चल पड़े. जब घर पहुंचे तो दोपहर के 2 बज रहे थे. घर पर सरिता दीदी और मनीषा दोनों मौजूद थी मैं अपना अपना सामान लेकर अपने कमरे में चला गया और दीदी अपने कमरे में चली गई. फिर मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और निचे हॉल में आ गया. थोड़ी देर बाद सविता दीदी भी आ गई. फिर मैंने और सविता दीदी ने मिलकर खाना खाया और मैं अपने कमरे में जाने लगा तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- भैया आपने लैपटॉप नहीं दिखाया.

मैं- अभी में सोने जार अहा हूँ बाद में देख लेना.

इतना कहकर मैं अपने कमरे में चला गया और बिस्तर पर लेट गया. थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 29

शाम को मैं सो कर उठा. अपना मोबाइल चेक किया तो मीरा वाली ईद की फ्रेंड रक्स्ट पुरे तीन दिन बाद सरिता दीदी ने एक्सेप्ट कर ली थी. लेकिन उस समय दीदी ऑनलाइन नहीं थी तो मैंने सविता दीदी के व्हाट्सप्प पर मश्ग किया थोड़ी देर बाद दीदी का रपल्य आया.

मैं- Hi दीदी.

सविता दी- ही अभी

मैं- और बताइये कैसी रही शॉपिंग.

सविता दीदी- हां बहुत बढ़िया रही.

मैं- मज़ा आया था आपको अपने भाई के साथ बहार जेने और शॉपिंग करने में.

सविता Didi-…………………………….Koi रपल्य नहीं.

मैं- (कुछ देर बाद). लगता है आपको मेरे साथ शॉपिंग करने जाना अच्छा नहीं लगा. ठीक है अगली बार से अकेले hi चली जाना.

सविता दीदी- नहीं अभी ऐसी बात नहीं है मुझे बहुत मज़ा आया तेरे साथ बहार जाने और शॉपिंग करने में. लेकिन अगली बार से बस से नहीं चलेंगे. सड़क में बहुत गद्दे हैं. तो परेशानी होती है.

मैं- हाँ दीदी मैंने भी देखा बहुत बड़े बड़े थे…. गड्ढे..

सविता दी- (हस्ते हुवे) तू बहुत कमीना है अभी.



मैं- अच्छा. लेकिन मैं तो बहुत सीधा हूँ. अपने भाई की कमीना बोल रही हो आप.

सविता दी- हाँ मुझे पता है की तू कितना सीधा है.

मैं- अच्छा ठीक है अब मैं रखता हूँ बाद में बात करेंगे.

उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ. रात में खाना खाकर मैं अपने रूम में आ गया. आज मैं थका हुआ था तो बिस्टेर पर लेट गया और थोड़ी देर में नींद आ गयी. कुछ देर बाद जब सविता दीदी छत पर आयी तो आज मैं वह नहीं था. सविता दीदी थोड़ी देर छत पर रही इस इंतज़ार में की शायद मैं औ. लेकिन मैं तो सो चुक्का था तब वो निचे जाने लगी. उनके कदमो की आहात से मेरी नींद खुल गयी. जब मैं कमरे से बाहर आया तो. वो अपने कमरे में जा रही हैं तो मैं भी वापस कमरे में आ गया और अपने मोबाइल से मीरा वाली फेसबुक ईद ओपन कर ली उस समय सरिता दीदी ऑनलाइन थी तो मैंने उन्हें मश्ग कर दिया.

(यहाँ मैं मीरा को म लिखूंगा)

म- ही

कुछ देर बाद सरिता दीदी का मश्ग रपल्य आया.

सरिता di-Hii.

म- कैसी हैं आप.

सरिता दी- मैं ठीक हूँ.

म- और आप क्या करती हैं.

सरिता दी- काईन P.Hd कर रही हूँ घर से.

म- आपकी शादी हो गई है.

सरिता दी- पहले तुम ये बताओ की तुम सच में लड़की hi हो या लड़की बैंकर बात कर रहे हो.

म- ओफ़्कौर्से मैं लड़की hi हूँ. क्यों आपको कोई शक है क्या.

सरिता दी- हाँ मुझे लग रहा है की तुम लड़के हो.

M-thik है अगर आपको लगता है की मैं लड़का हूँ तो मैं आपको अब मश्ग नहीं करुँगी लेकिन उससे पहले एक बात आपको कहना चाहती हूँ. की सब को हमेशा शक की नज़र से नहीं देखना चाहिए. ये मेरी फोटो है. जो मेरी hi है ओरिजिनल. ये आपको नेट पर नहीं मिलेगी. क्योंकि ये मैं हूँ.



मैं कानपूर के कांत में रहती हूँ. आप चाहे तो किसी से पता करवा सकती हैं. अब मैं रखती हूँ. अगर आपको भरोषा हो जाए की मैं लड़की हूँ तो आप बात करिये गए और अगर भरोषा न हो तो मत करियेगा. Bye.

इतना कह कर मैं मीरा वाली ईद से लॉगआउट हो गया. मैंने दीदी को बोलने का मौका भी नहीं दिया. मैं अब सोचने लगा की पता नहीं दीदी उस ईद पर मुझसे बात करती हैं या नहीं. अगर उस ईद पर बात नहीं करेंगी तो इनको पटना बहुत hi मुश्किल होने वाला है. मुझे इनके लिए कोई और प्लान सोचना पड़ेगा.

लगभग 15 मिनट बाद मैं अपनी ओरिजिनल ईद से लॉगिन हुआ और दीदी को मश्ग कर दिया.

मैं- Hi दीदी.

सरिता दीदी- हाँ अभी बोलो.

मैं- कैसी हैं आप

सरिता दी- मैं ठीक हूँ. तुम कैसे हो.

मैं- मैं भी ठीक हूँ दीदी. बस आज मार्किट गया था तो थोड़ी थकन हो रही है.

सरिता दी- तो फिर तुझे आराम करना चाहिए.

मैं- अरे अपनी प्यारी दीदी से बात करने के लिए तो मैं चाहे जिस हालत में राहु बात करूँगा.

सरिता दी- (हस्ते हुवे). अच्छा बड़ा आया बात करने वाला. ( फिर कुछ सोचकर) अच्छा एक बात बता अभी.

मैं- हाँ दी बोलिये.

सरिता दी- मुझे फेसबुक पर किसी लड़की ने फ्रंद्र्कस्त भेजी है. और मुझसे बात करना चाहती है लेकिन मुझे लगता है की वह लड़क है.

मैं- अगर आपको ऐसा लगता है तो मत बात करो. और वैसे भी बहुत सी फेक फेसबुक ईद होती है. तो हो सकता है की वह फेक हो. लेकिन ऐसा भी हो सकता है की वो फेक न हो. ओरिजिनल हो. (ये बात मैं दीदी का विश्वास जितने के लिए कह रहा था.)

सरिता दी- लेकिन उसने जितने कॉन्फिडेंस से बात की. अपनी फोटो भी भेजी. अपना एड्रेस भी बताया. उससे मैं कंफ्यूज हो गई हूँ.

मैं- हो सकता है दीदी वो लड़की hi हो. अगर आपको बात करनी हो तो बात कर सकती हैं. भरोषा नाम की भी कोई चीज़ होती है. बाकि आपकी मर्ज़ी

सरिता दी- चल ठीक है मैं तेरे जीजा जी से बात करने जा रही हूँ अब रखती हूँ गुड नाईट.

उसके बाद दीदी लॉगआउट हो गई. और मैं भी सो गया.

इसी तरह एक हफ्ते और बिट गए. मैंने अपनी जॉब भी शुरू कर दी थी. मेरा और दीदियो के बिच जो बात चित होने लगी थी वो चल रही थी. सविता दीदी रोज की तरह छत पर आती और मैं उनकी चूचियों और गांड को ताड़ता रहता. लेकिन उनका रिएक्शन पहले की तरह रहता. इसके आगे अभी तक बात नहीं बड़ी थी.





अब सरिता दीदी की शादी को सिर्फ 15 दिन hi रह गए थे. लेकिन अभी भी मेरी कोशिश उनको पटाने की जारी थी. और सरिता दीदी ने मीरा वाली ईद पर अभी तक कोई रपल्य नहीं किया था तो मैं परेशां था की इनको पटाने के लिए कोई और प्लान सोचना पड़ेगा. इसके लिए मैं आगे क्या करना है वो सोचने लगा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-30

जब मैं रत में सोने के लिए अपने कमरे में पंहुचा तो मैंने सोचा की सविता दीदी के साथ इतने दिन से जो कुछ भी हो रहा है उसको थोड़ा आगे बढ़ाना चाहिए. में उन्ही चिचियो और गांड में इंट्रेस्ट लेता हूँ ये उनको मालूम है. तो क्यों न उन्हें अपने लुंड के दर्शन कराया जाये. हो सकता है की उसे देखने के बाद hi उनके मन में कुछ आगे बढ़ने का विचार आये. लेकिन ये रिस्की भी था. पता नहीं मेरा लुंड देखने के बाद उनका क्या रिएक्शन होगा. इसलिए मैंने शुरू में उन्हें अपना खड़ा लुंड अंडर वेरे में दिखने का निश्चय किया और. सुबह होने का इंतज़ार करने लगा.

क्योकि वो रोज सुबह चाट पर टहलने के लिए आती थी. वही समय मेरे लिए ठीक था उनको अपने लुंड की लम्बाई का एहसास करने के लिए. यही सब sochte-sochte मैं सो गया. सुबह मैं अपने समय से उठ गया और दरवाज़ा अनलॉक कर दिया. अपना लुंड खड़ा करने के लिए भाई बहन की सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. लगभग 7 किसी के पैरो की आहात छत पर मिली तो मैं चुपके से देखा तो वो सविता दीदी hi थी. मैं चुपचाप अपने बीएड पर लेट गया और फिर से सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. मैंने अपने जिश्म से ुंडेरवेरे को छोड़कर सभी क्लॉथ उतर दिए.

अब तक मेरा लुंड पूरी तरह ुंडेरवेरे में खड़ा हो गया था अब तो बस इंतज़ार था मेरे लुंड की रानी का. जो किसी भी समय कमरे में आ सकती है. सविता दीदी ने सोचा की मैं अभी तक नहीं उठा हूँ इसलिए वो मुझे आवाज लगाने लगी.

सविता दी- अभी. उठ जा कितना सोयेगा.

मैंने उनकी आवाज़ सुनकर अपनी आंखे बंद की और एकदम सीधा लेट गया. जिससे मेरा लुंड ुंडेरवेरे में एकदम सीधा सो गया. दीदी के बुलाने से जब मैंने कोई आवाज़ नहीं की तो उन्होंने दरवाज़ा खोलते हुवे आवाज़ लगाई.

सविता दी- अभी. कितना सोयेगा उठ जा 7.30 बजन…… व………..

और इसके आगे के शब्द उनके मुंह में रह गए. क्योंकि वो दरवाज़ा खोलकर कमरे में आ चुकी थी और उनकी नज़र सीधी मेरे खड़े लुंड पर पड़ी. तो उनकी आँखे बड़ी बड़ी हो गई. और उनके मुंह से हलकी सी आवाज़ निकली.

सविता दी- अरे बाप रे ये क्या है.





मैं आँख को हल्का सा खोलकर दीदी की तरफ देखा तो वो मेरे खड़े लुंड को आँखे फाडे घूरे जा रही थी. शायद उन्होंने इतना बड़ा लुंड पहली बार देखा था. थोड़ी देर बाद उन्हें होश आया तो उन्होंने मेरे चेहरे की तरफ देखा. तो मैंने झट से अपनी आँख बंद कर ली. उन्होंने मुझे सोया हुआ जानकर वापस मेरे लुंड को देखने लगी. मैं ये सोचकर की मेरी दीदी मेरे लुंड को देख रही हैं और ज्यादा एक्ससिटेड हो रहा था. जिसके कारन मेरा लुंड ने दो बार झटका मारा. उस झटके को दीदी ने भी महसूस किया.

वो वापस जाने के लिए मुड़ी लेकिन पता नहीं क्या सोचकर हु मेरे लुंड को नज़दीक से देखने के लिए मेरे बीएड के पास आकर कड़ी हो गई. उनके पास आने से मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी. लेकिन मैंने किसी तरह खुद पर काबू किया. दीदी भी आज क़यामत बैंकर आई थी. बड़े गले का ब्लाउज वो भी डीप नैक का था.







वह झुक कर मेरे लुंड को देखने लगी. मैंने हलकी आंके खोलकर देखा. उनके झुकने से उनका आँचल सरक गया जिसके कारन उनकी चूचियों की गहराई दिखने लगी. जिसे देखकर मेरे लुंड ने फिर से झटखा खाया.



तो दीदी ने तुरंत मेरे चेहरे की तरफ देखा. लेकिन मैं सोता बना रहा. लगभग 5 मिनट तक मेरे खड़े लुंड का भरपूर दीदार करने के बाद दीदी वापस जाने लगी और दरवाज़े के पास पहुंच कर उन्होंने पलटकर एक बार फिर मेरे लुंड का भरपूर नज़ारा लिया और बहार निकल गई. बहार निकलकर उन्होंने दरवाज़े को तेज़ तेज़ खटखटाया और चिल्लाते हुवा आवाज़ दी.

सविता दी- अभी ो अभी. कितना सोयेगा. उठ जा 8 बजने वाले हैं.

मेरा दीदी को खड़ा लुंड दिखने का काम हो गया था इसलिए मैंने भी उठना ठीक समझा और उठकर एक

जोरदार अंगड़ाई ली. ताकि उन्हें लगे की मैं बहुत गहरी नींद में था.]

मैं- हाँ दीदी बस उठ गया हूँ.

मैंने तुरंत उठकर अपनी लोअर और t-shirt पहनी और फ्रेश होने बाथरूम जाने लगा. जब मैं बहार निकला तो दीदी बहार hi कड़ी थी. उन्होंने तिरछी नज़रो से मेरे लुंड को जो अभी भी लोअर में उभरा हुआ था उसे देख रही थी.



मैंने भी उन्ही चूचियों को देखते हुवा उनसे पूछा.





मैं- गुड मॉर्निंग दीदी. आप कब आई.

सविता दी- मैं तो बस अभी आई. जब तू नहीं दिखा तो मैंने तुझे आवाज़ लगाई. (दीदी साफ झूठ बोल गई)

मैं- हाँ दीदी आज पता नहीं कैसे नींद hi नहीं खुली.

इतना कहकर मैं बाथरूम में चला गया. मैंने बाथरूम में अपने लुंड पर ठंडा पानी डालकर उसे शांत किया. जब मैं बहार आया तो दीदी निचे जा चुकी थी. मैं भी तैयार होकर निचे आया और नाश्ता करके अपनी जॉब पर निकल गया.

इधर घर में मेरे जाने के बाद सविता दीदी अपने कमरे में अपनी hi सोच में गम थी

सविता दी- क्या मैंने जो देखा वो सही था. इतना बड़ा लुंड भी होता है. कितना बड़ा लग रहा था कपडे के ऊपर से. लेकिन राघवेंद्र का तो इतना बड़ा नहीं है.



छी…… मैं क्या सोचने लगी अभी मेरा भाई है मैं उसके बारे में ऐसा कैसे सोच सकती hoon.mana की वो मेरे शरीर को घूरता रहता है क्योंकि उसकी अभी शादी नहीं हुई है और नताशा भी चली गई तो इसलिए वो ऐसा करता है. लेकिन मैं तो उसकी बहन हूँ फिर भी वो मेरे जिस्म को घूरता रहता है.

फिर दीदी ने अपने मन में चल रहे विचारो को विराम दिया और मुझे कॉल किया. मैं अपने ऑफिस में बैठा अपना काम कर रहा था दीदी का no. देखकर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी. मैं फ़ोन पिक किया

मैं- हां दीदी

सविता दीदी- पहुंच गया ऑफिस.

मैं- हां दीदी. और बताइये कैसे फ़ोन किया.

मैं- वो मैंने इसलिए फ़ोन किया की आते समय कुछ खाने को लेते आना.

मैं- ठीक है दीदी. लेता आऊंगा.

उसके बाद मैं अपना काम करने लगा. फिर शाम को 4 बजे मैं अपने घर के लिए निकल गया. और घर जाते हुवा कुछ खाने का सामान भी पैक करवा लिया. जब मैं घर पंहुचा तो सविता दीदी हॉल में hi बैठी थी. वो बहुत खुश नज़र आ रही थी. मुझे देखता hi दीदी ने कहा.

सविता दी- खाने के लिए क्या लाया अभी.

मैं- गोलगप्पे लाया हूँ दीदी

सविता दी- वाह गोलगप्पे. ले आ जल्दी से. मुंह में पानी आ रहा है.

मैं- दीदी अपने मुंह के पानी को संभल कर रखिये कभी बहुत जरूरत पड़ेगी इसकी.

सविता di-(na समझते हुवे) क्या मतलब

मैं- अरे दीदी. गोलगप्पे में पानी hi होता है. इसलिए अभी आपको अपने मुंह का पानी बचकर रखना है. आगे इसकी जरूरत पड़ेगी.

सविता दी- अच्छा ठीक है अब गोलगप्पे दे.

मैं- नहीं दीदी. आज मैं आपके मुंह में डालूंगा आप बस बैठी रहिये.

सविता di-(muskura कर) तू क्या बहकी बहकी बाटे कर रहा है. कुछ पि कर आया है क्या.

मैं- अरे दीदी आप बस बैठी रहिये. मैं आपके मुंह में खुद अपने हांथो से गोलगप्पे डालूंगा बस आप मुंह खोलकर रखना.

सविता दीदी. अच्छा बाबा ठीक है. तू hi मेरे मुंह में गोलगप्पे डालना. अब ला जल्दी से.

फिर मैंने अपने हांथो से गोलगप्पे बनाकर दीदी के मुंह में डालने लगा. और दीदी खाने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-31

मैं दीदी को अपने हांथो से गोलगप्पे खिलने लगा. गोलगप्पे थोड़े बड़े साइज के थे इसलिए दीदी को ज्यादा मुंह खोलने पद रहा था. जिससे उनके मुंह में दर्द होने लगा था. दीदी ने कहा

सविता दी- कितने बड़े बड़े गोलगप्पे हैं मेरे मुंह में hi नहीं जा रहा यही.

मैं- क्या बात करती हो दीदी आपका मुंह इतना बड़ा है की इससे बड़ा बड़ा आपके मुंह में चला जाएगा.

मैं जो डबल मीनिंग बाटे कर रहा था उसका मतलब दीदी भी समझ रही थी लेकिन वो भी मज़ा ले रही थी. शायद अब उनको भी मेरी बातो ऐसी बातो से कोई तकलीफ नहीं थी. वो भी मेरी बात को आगे बढ़ाते हुवे बोली.

सरिता दी- हाँ लेकिन ये इतना बड़ा है की इसे लेने में मेरा मुंह दर्द करने लगा है.

मैं- अरे दी. कुछ बड़ा लेने के लिए थोड़ा बहुत दर्द तो सहना hi पड़ता है. कुछ दिन आपको तकलीफ होगी उसके बाद आपको बड़ा बड़ा hi लेना अच्छा लगेगा अपने मुंह में.

सरिता दी- तू आजकल बड़ा शरारती हो गया है. बहन से कैसी बात करता है.

मैं- ठीक hi तो कह रहा हूँ. और वैसे जो मज़ा बड़ा लेने में आता है वो छोटे में नहीं आता. बताओ मैंने कुछ गलत कहा क्या.

सविता दी- नहीं तू सही कह रहा है. लेकिन इसके पहले जब भी मैंने गोलगप्पे खाये हैं तो दुकानदार ने छोटे छोटे hi दिए हैं.

मैं- इसीलिए तो आज मैं लाया हूँ और मुझे पता था की आपको बड़ा बड़ा मुंह में लेने में बहुत मज़ा आएगा.

अभी हम बात कर hi रहे थे की सरिता दीदी भी वह आ गयी. उन्होंने एक बहुत hi टाइट t-shirt और लेगी पहन राखी थी. उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था की उनकी चूचिया किसी भी समय t-shirt फाड़कर बहार आ सकती हैं.



मैं उनकी चूचियों पर एक नज़र डाली और वापस दूसरी तरफ देखने लगा. क्योंकि वह पर सविता दीदी भी थी और मैं नहीं चाहता था की उन्हें ये पता चले की मैं सरिता दीदी पर गन्दी नज़र रखता हूँ. मैं दोनों को छोड़ना चाहता था. लेकिन दोनों को एक दूसरे के बारे में पता नहीं लगने देना चाहता था.

मैंने उन्हें भी गोलगप्पे खाने लिए दिए. तो वह गोलगप्पे खाने लगी लेकिन गोलगप्पे वाकई बहुत बड़े थे. इसके लिए पूरा मुंह खोलना पद रहा था तो सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- गोलगप्पे तो बहुत बड़े बड़े हैं. मुंह में hi नहीं जा रहा है.

सरिता दी की बात सुनकर हम दोनों मुस्कुराने लगे. जो उन्होंने देख लिया और कहा.

सरिता दी- अब इसमें हसने की क्या बात है. ये सच में बहुत बड़े बड़े हैं.

सविता दी- (मज़ाकिया लहज़े में). हाँ जब मैंने भी अभी से यही कहा टी वो बड़े गोलगप्पे खाने ने तरीके बता रहा था.

सविता दी की बात सुनकर मैंने उनकी तरफ देखा और तुरंत अपने कमरे की तरफ चल पड़ा. मैं नहीं चाहता था की सरिता दी को इस बारे में कुछ पता चले. सरिता दीदी मुझे पीछे से आवाज़ देती रही लेकिन मैं नहीं रुका.

मैं कमरे में आकर अपने कपडे बदले और फ्रेश होकर निचे हॉल में आया तो T.V. चल रही थी. तब तक सरिता दी गोलगप्पे खा चुकी थी और अपने कमरे में चली गयी थी. सविता दी अभी भी वही थी. वो सोफे पर अधलेटी अवस्था में थी. उन्होंने अपने आंक बंद की हुई थी. उन्होंने दुपट्टा अपने साइन से हटा रखा था. जिसके कारन उनकी जानलेवा चूचिया तानी हुई और उनके निप्पल हल्का हल्का नज़र आ रहे थे. चूचियों की घुंडी कपडे को फाड़कर बहार आना चाहती थी. मैं तो बिना पालक झपकाए उनकी चूचियों को देखने लगा.



मैं- आआअह्ह्ह्हह दीदी क्या जालिम चूचिया हैं तुम्हारी मन तो कर रहा है तो अभी तुम्हारे कपडे फाड़कर इन चूचियों को अपने मुंह में ले कर तब तक चुसू जब तक इसका सारा रास ख़तम न हो जाये. पता नहीं वो दिन कब आएगा. बहुत बड़े बड़े हैं तुम्हारे चुके दीदी.

और बाते तो मैंने मन में कही लेकिन तुम्हारे चुके मेरे मुंह से निकल गया. जिसे दीदी ने सुन लिया तो उन्होंने आँख खोली और कहा.

सविता दी- क्या कहा तूने.

Main(hadbada कर)- क्या कहा…………….. कुछ भी तो nahi…kuchh भी तो नहीं…. अरे हाँ वो सोफे के बगल से अभी एक चूहा गया था मैं उसी को भगा रहा था.

सविता दी- अच्छा लेकिन मैंने तो कुछ और सुना था.

मैं- आजकल आपके कण बहुत बजते हैं. मैं कुछ कहता हूँ और आप कुछ सुनती हैं.

सविता दी- हाँ सायद तू ठीक कह रहा है.

इसके बाद मैं t.v. देखने लगा जिसपर टूरिस्ट प्लेस नैनीताल की खूबियों के बारे में दिखा रहा था. कुछ देर बाद जब मैंने दी की और देखा तो इस बार का नज़ारा तो मेरे लिए बहुत कामुक था सविता दी सोफे पर करवट लेकर लेट गयी. और हाँथ अपने सर के निचे रख लिया. करवट लेकर लेटने के कारन उनकी जानलेवा 36” की चूचिया आपस में मिल गयी थी जिसके कारन चूचिया उनके उनके कपडे से गले की तरफ कुछ ज्यादा hi बहार निकल आयी थी. मैं t.v. देखना भूलकर उनकी चूचियों में खो गया.



नैनीताल से शानदार नज़ारा तो मुझे सोफे पर देखने को मिल रहा था. फिर कोई बेवकूफ hi होगा जो इतने शानदार नज़ारे को छोड़कर t.v. देखेगा.



लगभग 1 मिनट बाद दीदी ने मेरी तरफ देखा और इशारे से पूछा क्या है.



मैं- (मैं उनकी चूचियों की तरफ देखता हुए). बहुत शानदार नज़ारा है दीदी. ऐसा नज़ारा रोज देखने को मिल जाये तो मज़ा आ जाये.

मेरे ये कहने पर दीदी ने मेरी नज़रो का पीछा किया तब उन्हें पता चला की मैं क्या देख रहा हूँ तो वह उठकर बैठ गई और अपना दुपट्टा साइन पर डालते हुवे कहा.

सविता दी- अभी तू सचमुच बहुत कमीना हो गया है. लगता है तेरी शादी बहुत जल्दी करनी पड़ेगी.

मैं- क्या दीदी अब नैनीताल इतना सुन्दर है तो उसकी तारीफ भी न करू. और हाँ दीदी मेरी शादी जल्दी करवा दो. मुझे बीबी की बहुत जरुरत है.

सविता दी- अच्छा बड़ी जल्दी है तुझे शादी की.

मैं- और क्या. मैं भी अपनी बीबी के साथ नैनीताल जाऊंगा और दोनों खूब मज़ा करेंगे.

सविता दी- मज़ा करने के लिए नैनीताल जाने की क्या जरूरत है.

मैं- यहाँ कैसे कर सकता हूँ.

सविता दी- अरे अब तो हम दोनों में जो गलत फहमी थी वो दूर हो गई है और हम अब अचे दोस्त भी बन चुके हैं. और सबसे बड़ी बात बीबी से ज्यादा मज़ा दोस्त के साथ आता है. बीबी परेशां करती भी करती है लेकिन दोस्त हमेशा उस परेशानी से निकलते हैं. समझे बच्चू.

मैं- (हस्ते हुवे). समझ गया मेरी माँ.

इसके बाद दीदी उठकर अपने कमरे में चली गयी और मैं भी t.v. बंद करके अपने कमरे में चला गया.

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अपडेट-32

मैंने अपने कमरा में जाकर अपना मोबाइल उठाया और अपनी लास्ट टाइम मीरा वाली फेसबुक ईद. ईद ओपन करते hi मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. सरिता दीदी ने मश्ग भेजा था. मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. मैं तो ये समझता था की शायद उन्हें पटाने के लिए मुझे कोई नया तरीका खोजना पड़ेगा. लेकिन अब मैं अपने पहले के प्लान पर काम कर सकता था उन्हें पटाने के लिए. मैंने भी उन्हें मश्ग लिखकर सेंड कर दिया.

(एकबार फिर सभी रीडर को ये बता दूँ की मीरा को म लिखकर सम्बिधित किया जायेगा. इसलिए सभी पाठक ध्यान रखे की Abhishek(Abhi) के लिए मैं और मीरा के लिए म लिखा जायेगा)

म- ही

उसके बाद मैंने मोबाइल साइड में रख दिया और किताब निकल कर कुछ पढ़ने लगा. रात में मनीषा ने खाने के लिए आवाज़ दी तो मैं हॉल में आ गया. सब ने मिलकर खाना खाया और अपने कमरे में चले गया. कमरे में आने के कुछ देर बाद मैं छत पर आ गया और सामने रेलिंग के सहारे खड़ा होकर बहार का नज़ारा करने लगा. थोड़ी देर बाद सविता दीदी भी छत पर आ गयी. उनकी निघ्त्य रोज़ के मुकाबले आज कुछ ज्यादा hi खुले गले की थी जिसमे से उनकी चूचियों की गहराई hi नहीं बल्कि उनकी चूचियों का 1/3 भाग बहार दिख रहा था.







मैं roj-roj सविता दीदी में आ रहे चेंज को महसूस कर रहा था. मुझे मेरा काम बनता हुआ नज़र आ रहा था. मैं दीदी के जिस्म को ताड़ने लगा. दीदी एक स्माइल के साथ मुझे कातिल निगाहो से देखा. उनकी निगाहो में मैंने पहले बार कुछ अगल सा महसूस किया



लेकिन वो क्या था अभी में समझ नहीं पाया था. दीदी धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आ रही थी. दीदी जैसे जैसे मेरे पास आ रही थी. नज़ारा और भी कामुक होता जा रहा था. मैं तो उनकी 1/3 छूछीया नंगी देखकर उसमे खो सा गया.



मुझे पता hi नहीं चला की दीदी कब मेरे पास आ कर कड़ी हो गई. जब मैं काफी देर तक बिना पालक झपकाए उनकी चूचियों के देखता रहा तो मेरा लुंड उनकी अधनंगी चूचिया देखकर लोअर में hi अपने पुरे औकात पर आ गया था जो जिसकी लम्बाई बहार से भी साफ़ पता चल रही थी. दीदी की नज़र भी मेरे लुंड पर hi थी.





जिसे दीदी खा जाने वाली जाजारो से देख रही थी. हम दोनों एक दूसरे के अंगो को देख रहे थे. थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे आवाज़ दी.

सविता दी- अभी.. कहाँ खो गया.

मुझे तो जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था. मैं तो बस चूचियों की गहराई में गोते लगा रहा था. दीदी ने मुझे कंडे से पकड़ का हिलाया और फिर से आवाज़ दी.



सविता दी- अभी. अभी. क्या हुआ. कहा खो गए.

मैं- (हड़बड़ाकर. चूकते हुवे). हाँ दीदी…. कुछ कहा आपने.

सविता दी- अरे मैं कब से तुझे आवाज़ दे रही हूँ और तू पता नहीं किस दुनिया में गम है.

मैं- दीदी आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं और ……..(शब्द अधूरा छोड़ दिया)

सविता दी- और आगे क्या बोल

मैं- नहीं दीदी जाने दो. अगर बोल दूंगा तो आप नाराज़ हो जाओगी

सविता दी- नहीं तू बोल और क्या… मैं नाराज़ नहीं हूँगी.

मैं- नहीं आप नाराज़ हो जाओगी. आप पहले पक्का वाला प्रॉमिस करो फिर बोलूंगा मैं.

सविता दी- चल पक्का वाला प्रॉमिस मैं नाराज़ नहीं होउंगी.

मैं- आज आप खूबसूरत के साथ साथ हॉट एंड सेक्सी भी लग रही हैं.

सविता दी- (शर्मा kar).Kyon मज़ाक उदा रहा है मेरा. और तू कितना कमीना है अपनी बहन को सेक्सी बोल रहा है. मैं तो सांवली हूँ तो खूबसूरत कैसे लगूंगी.



मैं- (मैं दीदी की इस बात से जोश में आ गया) कौन कहता है की आप खूबसूरत नहीं हैं कभी आप मेरी नज़र से देखो. मुझे आप दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की लगती हैं. अगर आप मेरी बहन न होती तो……………..

मैं आगे बोलते बोलते रुक गया. मुझे लगा की कही कुछ ज्यादा न बोल दू जिससे बनता काम बिगड़ जाये. मेरे अचानक चुप हो जाने से दीदी ने मेरी आँखों में आँखे डालकर कहा.

सविता दी- क्या बोल रहा है अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता.

मैं- कुछ नहीं दीदी वो जोश में मेरे मुंह से ऐसे hi निकल गया.

सविता दी- नहीं अब तुझे बताना पड़ेगा की अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता.

मैं- जाने दो न दी. कुछ नहीं करता मैं.

सविता दी- (ज़िद करते हुए). नहीं तुझे बताना पड़ेगा अगर मैं तेरी बहन न होती तो क्या करता. तुझे मेरी कसम है.

Main-aap कसम न दो दीदी मैं बोलूंगा तो आप नाराज़ हो जाओगी.

सविता दी- नहीं नाराज़ हूँगी. पक्का वाला प्रॉमिस. (स्माइल के साथ)

मैं- मैं कह रहा था की आप मुझे इतनी खूबसूरत और सेक्सी लगती हैं की अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आप से hi शादी करता. कसम से.

मेरी बात सुनकर दीदी ने घूर कर मुझे देखा. लेकिन उनके चेहरे पर गुस्से का नमो निशान नहीं था. वो बस मुझे ये एहसास करना चाहती थी वो मेरी बात से खुश नहीं हैं. मेरी नज़र अब भी उनकी चूचियों पर थी. उन्होंने मुझसे कहा.

सविता दी- ये क्या कह रहा है अभी. तेरा दिमाग तो ठीक है मैं तेरी बहन हों और तू मुझसे शादी करने की बात कर रहा है.

मैं- मेरी बात आपने ध्यान से नहीं सुनी. मैंने कहा अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आपसे hi शादी करता.

सविता दी- लेकिन फिर भी अभी ये गलत बात है. मैं इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ. अगर मैं खूबसूरत होती तो तेरे जीजा जी मुझे अपने साथ अपने पास रखते.

दीदी ये बात कहते हुवे इमोशनल हो गई उनकी आंके दबदबा गई. तो मैंने बात को बदलने के लिए बोलै. मैं आगे बढ़कर दीदी को पूरी ताकत से अपने अपने गले लगा लिया. जिससे उनकी अधनंगी चूचिया सीधी मेरे साइन से टकराई और मेरा लुंड दीदी ने अपनी छूट पर महसूस किया (कपड़ो के ऊपर से) हम दोनों के मुंह से आनंद भरी एक aaaaaahhhhhhhhhhhhhhahhhhhaaahhhhhhhh…. निकल गई. इस मस्ती के आलम में मेरे हाँथ दीदी की कमर तक पहुंच गए जिन्हे मैं सहलाने लगा थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद मैं दीदी से अलग हुआ और बोलै.



मैं- सॉरी दीदी वो जोश में पता नहीं क्या बोल gaya.mujhe माफ़ कर दीजिए दीदी. मेरा इरादा आपको हुअत करने का नहीं था मैं तो बस आपकी तारीफ कर रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी नार्मल हो गई. फिर हम रेलिंग के पास आकर खड़े हो गए और बहार का नज़ारा लेने lage.main और दीदी एक दूसरे से एकदम सत्कार खड़े थे. मेरा शरीर उनके शरीर से टच हो रहा था. अचानक दीदी को कुछ यद् आया और उन्होंने पूछा.

सविता दी- अच्छा अभी ये बता उस दिन तूने एक गिफ्ट लिया था किसी को देने के लिए उसका क्या हुआ.

मैं- अब क्या बताऊ दी. मैंने गिफ्ट तो लिया था देने के लिए. लेकिन मैं उसको वो गिफ्ट तब डोंगा जब वो मुझसे सेट हो जाएगी.

सविता दी- क्या बही तक बात नहीं बानी क्या तुम्हारी. कुछ पॉजिटिव रिस्पांस मिल रहा है या ऐसे hi उसके पीछे समय बर्बाद कर रहे हो.

मैं- नहीं दीदी पॉजिटिव रिस्पांस मिल रहा है. लेकिन वो समझ hi नहीं रही है मेरे प्यार को

मैं इन सब बातो के दौरान अपना हाँथ अपने साइन पर बांध लिया. जिससे मेरे हाँथ दीदी की चूचियों के बगल में टच होने लगे. दीदी ने भी ये महसूस किया लेकिन मैंने अपना हाँथ नहीं हटाया. और दीदी ने भी इस बारे में कोई बात नहीं की. हम दोनों ने अपनी बातो का सिलसिला जारी रखा.



सविता दी- तुझे उसके लिए उसे अपने प्यार का एहसास करना होगा. ताकि उसे भी तुझसे प्यार हो जाए.

मैं- कैसे उसे अपने प्यार का एहसास करौ. क्या आप इसमें मेरी कोई मदद कर सकती हैं.

सरिता दी- मैं इसमें तेरी क्या मैडम कर सकती हूँ लड़की तुझे सेट करनी है तू hi देख.

मैं- (मुंह फुलाकर). क्या दी. अपने दोस्त की मदद नहीं कर सकती. यही आपकी दोस्ती हैं.

इस दौरान भी मैंने अपने हांथो को उनकी चूचियों के बागल में सहलाने लगा. जिससे दीदी उनकंफर्टबले होने लगी और मुझसे थोड़ी दूर हटकर कड़ी हो गई. मैंने भी मौके की नज़ाकत को देखते हुए अभी के लिए इतने पर hi बस कर दिया. दीदी ने आगे कहा.

सविता दी- अच्छ अब मुंह मत फुला. मैं तेरी मदद करुँगी. तू कल इसी समय मिल मैं तुझे बताउंगी की कैसे तुझे उसे अपने प्यार का एहसास करना है.

मैं- थैंक यू दीदी. मुझे पता था की मेरी अच्छी दोस्त इस काम में मेरी मदद जरूर करेगी.

सविता दी- वैसे उसका नाम तो बता दे.

मैं- अभी तो उसका नाम नहीं बताऊंगा. लेकिन इतना बता सकता हूँ की उसका नाम ‘स’ से शुरू होता है

मेरी बात सुनकर उन्होंने एक शोख नज़र मुझपर डाली और बिना कुछ बोले जाने लगी. मैं भी पीछे से उनकी बड़ी गांड की थिरकन को देखने लगा. सीधी के पास पहुंच कर उन्होंने मेरी तरफ पलटकर देखा और मुस्कुराते हुवे मुझे जीभ देखते हुए कहा.



सविता दी- तू कभी नहीं सुधर सकता. बहुत बड़ा कमीना है तू.

इतना कहकर वो निचे चली गयी और मैं भी अपने चेहरे पर मुस्कान लिए अपने कमरे में चला गया और अपना मोबाइल उठाकर चेक करने लगा.

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अपडेट-33

दीदी के जाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया और बीएड पर लेट गया. मैंने अपना मोबाइल उठाया और मीरा वाली ईद पर लॉगिन हुआ. सरिता दीदी ऑनलाइन hi थी तो मैंने उन्हें मश्ग कर दिया.

म- ही

सरिता दी- ही.

म- कैसी हैं आप

सरिता दी- मैं ठीक हूँ.

म- थैंक्स

सरिता दी- वो किसलिए.

म- मुझपर भरोषा करने के लिए.

सरिता दी- वो तुम्हारी बाटे मुझे सच्ची लगी वैसे भी ये सब मेरे भाई की वजह से हुआ है

म- आपके भाई की वजह से हुआ मैं समझी नहीं.

सरिता दी- मेरा छोटा भाई है अभी नाम है. उसको तुम्हारे बारे में बताया था तो उसने कहा की यहाँ बहुत सी फेक ईद हैं लेकिन उसकी बात में सच्चाई है. और सब पर शक भी नहीं करना चाहिए.

म- अपने भाई को भी मेरी तरफ से थैंक्स बोलियेगा. जो उन्होंने मुझपर बहरोशा किया. वैसे आपके भाई बहुत अचे हैं.

सरिता दी- हाँ वो तो hain.mera भाई बहुत अच्छा है.

(मैं अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुआ)

म- वैसे आपके भाई करते क्या हैं.

सरिता दी- ो hello यहाँ तुम मुझसे बात करने आयी हो या मेरे भाई के बारे में जानने

म- अरे सॉरी आप तो नाराज़ हो gai.main तो वैसे hi पूछ रही थी. वैसे थैंक्स वन्स अगेन.

सरिता दी- इतस OK. अच्छा तुम अपने बारे में कुछ बताओ.

म- उस दिन तो बता दिया था. फिर बता दे रही हूँ. मैं मीरा हूँ कानपूर में रहती हूँ. 25 साल की हूँ अभी.

सरिता दी- अच्छा. घर में और कौन है

म- घर में मां पापा हैं एक एक बहन है मुझसे 5 साल बड़ी और एक भाई है मुझसे 2 साल छोटा.

सरिता दी- अच्छा. ठीक है अब रख रही hoon.baad में बात करुँगी.

म- इतनी जल्दी आप को अभी भी भरोषा नहीं है क्या मुझपर??

सरिता दी- अरे नहीं ऐसी बात नहीं है मुझे अपने फिऑन्सé से बात करनी है अब इसलिए.

म- अच्छा ठीक है गुड नाईट.

उसके बाद मैंने अपनी ईद ओपन नहीं की की कही दीदी को कुछ शक न हो जाये. इसलिए मैंने मोबाइल साइड में रखा और कमरे की लाइट बंद करके मैं सो गया. कुछ देर बाद मुझे नींद आ गई. नीड में hi मुझे ऐसा महसूस हुआ की कोई छत पर हैं. पहले मैंने सोचा की हो सकता है कोई चोर हो इसलिए मई अपने बिस्टेर से उठा और कमरे की लाइट बिना जलाये खिड़की खोलकर बहार देखा तो सरिता दीदी थी जो विडिओ कॉल पर बात कर रही थी. निसंदेह जीजा जी से hi बात कर रही होंगी. फिर मैंने सोने के लिए वापस जाने लगा लेकिन तभी मेरे दिमार में आया की क्यों न इनकी बाते सुनी जाए. इसलिए मैं चुपचाप खिड़की के पास कुर्शी रखकर बैठ गया.

दीदी खिड़की की सामने वाली दिवार पर टेक लगाकर कड़ी थी जब मैंने ध्यान से देखा तो सरिता दीदी ने बड़े गले का सलवार शूट पहना हुआ था जिसमे से वो अपनी आधी चूचिया जीजा जी को दिखा रही थी. उनकी चूचिया चाँद की रोशनी और लाइट की दूधिया रश्मि में चमक रही थी. मैं भी उनकी चूचियों में खो गया.



सरिता दी- मेरा मन अब नहीं लगा रहा है. ये बचे हुए 2 हफ्ता जल्दी से बिट जाए. और फिर हम एक साथ रहेंगे.

फिऑन्सé में आजकल ये सब बाटे कॉमन थी. इसलिए मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगा उधर से जीजा जी ने कुछ कहा.

जीजा ji-Are बात तो ऐसे कर रही हो जैसे मैं तुमको अपने से दूर कर रहा हूँ

सरिता दी- नहीं मैं आपके एक भी दिन दूर नहीं रहूंगी. ये 6 महीने मैंने कैसे गईं गईं कर कटे हैं ये मैं hi जानती हूँ.

जीजा जी- मेरा भी वही हल है जान

सरिता दी- आपको नहीं पता. मेरे जीजा जी मेरी दीदी को अपने पास नहीं बुलाते. उन्हें बिलकुल भी प्यार नहीं करते. दीदी हल्का सा सांवली हैं तो क्या हुवा. खूबसूसरत दिखती हैं. शादी तो की है न. उनको कितना ख़राब लगता है. उनका भी मन होता है उनके पास रहने का. लेकिन जीजा जी को दीदी की फाइलिंग की कोई कदर नहीं है. मेरी दीदी कितनी अच्छी हैं जो उनकी शिकायत किसी से नहीं करती. जीजा जी तो दिन रत पैसा कमाने में लगे रहते हैं.

जीजा जी- हाँ बात तो सही कही तुमने. लेकिन ये भी तो सोचो वो दीदी के लिए hi तो कमा रहे हैं

सरिता दी- हाँ आपको क्या. पैसा hi सबकुछ नहीं होता. एक औरत की और भी जरूरत होती है जो एक पति hi पूरी कर सकता है. लेकिन जीजा जी को मेरी दीदी की परवाह hi नहीं है.

जीजा जी- शादी के बाद तुमकी भी कभी कभी ऐसे hi रहना पड़ा तो.

सरिता दी- नहीं मैं अपने साथ ऐसा नहीं होने दूंगी. शादी के बाद मैं तुम्हारे साथ रहूंगी.

जीजा जी- अच्छा लगता है बड़ी बेताब हो रही हो.

सरिता दी- कैसी बात कर रहे हैं आप. अरे मैं भी अब 27 साल की हो गई हूँ. मेरा भी मन करता है वो सब करने का इसीलिए तो जितनी जल्दी ये 2 हफ्ते बीत जाये उतना hi अच्छा है.

सरिता दी की बात सुनकर तो मैं हैरान रह गया. मतलब जीजा जी से दूर रहने के कारन सविता दी को चुदाई की जरूरत महसूस होती है. और जीजा जी दीदी की भावनाओ को समझ hi नहीं प् रहे हैं. मेरे जीजा जी भी कितने चुटिया हैं ऐसा करारा माल छोड़कर वह अकेले गांड मरवा रहे हैं. शायद इसीलिए दीदी मुझसे थोड़े फ्रैंक होकर अपना मन बहला रही हैं. मतलब मेरा काम सविता दीदी के साथ बन सकता है बस उन्हें भाई बहन की चुदाई की तरफ आकर्षित करना है उसके बाद तो वो मेरा लुंड उछाल उछाल कर लेंगी. इसलिए मैंने सोचा की सुबह एक बार फिर सविता दीदी को अपना आधा लुंड ुंडेरवेरे से बहार कर उसके दर्शन करवा hi देना चाहिए.

फिर मैंने सरिता दीदी के बारे में सोचने लगा की आग तो इनकी भी छूट में बराबर लगी है. इसीलिए इनको अपनी शादी की जल्दी है. दिन कटे नहीं काट रहा है. चलो इनको भी पटाने की कोशिश करता रहता हूँ. कुवारी न मिली तो क्या हुवा हो सकता है शादी के बाद भी इनकी छूट मिल जाये तो कोई घाटे का सौदा नहीं है. मैंने इन सब खयालो को परे रखा और उनकी बात फिर सुनाने लगा.

सरिता दी- रोज तो दिखती हूँ लेकिन आप हैं की आपका मन hi नहीं भरता.

जीजा जी- अरे जान तुम एक बार में मन भरने वाली चीज़ थोड़ी hi हो. वैसे कमरे में नहीं हो क्या तुम

सरिता दी- नहीं आज नेटवर्क में कुछ प्रॉब्लम थी वीडियो कॉल नहीं हो रहा था इसलिए छत पर आई हु.

जीजा जी. तो क्या हुवा अभी तो सब सो रहे है. बस दीदार करा दो.

सरिता दी- पागल हो गए हो क्या. कमरे में अभी सो रहा है. अगर वो उठ गया और उसने देख लिया तो उससे मैं नज़ारे कैसे मिलाऊँगी.

जीजा जी अरे यार कोई नहीं देखेगा. बस तुम अब दिखा दो. एक बार चेक कर लो

सरिता दी- नहीं वो सो रहा होगा उसके कमरे की लाइट बंद है. फिर भी मैं एक बार देख कर आती हूँ आप होल्ड कीजिए.

उसके बाद दीदी मेरे कमरे की तरफ आने लगी तो मैं भागकर बिस्तर पर चला गया और ऐसे धीरे धीरे खर्राटे लेने लगा ताकि दीदी को लगे की मैं सो रहा हूँ. उन्होंने दरवाज़ा खोलकर मेरे रूम में झाका और मोबाइल की टोर्च से मुझे देखा. मुझे सोता हुवा देखकर वह दरवाज़ा लगाकर बहार चली गयी. तो मैं फिर से खिड़की पर आ गया

सरिता दी- हाँ अभी सो रहा है.

जीजा जी. तो शुभ काम में देरी क्यों कर रही हो.

सरिता दी- नहीं अगर वो उठ गया और उसने देख लिया तो.

जीजा जी- तो फिर अपने कमरे में चली जाओ. वह तो कोई नहीं देखेगा न.

सरिता दी- निचे नेटवर्क की पॉब्लम है इसीलिए तो छत पर आई हूँ.

जीजा जी- प्ल्ज़ जान. अपने आशिक का दिल मत तोड़ो.

सरिता दी- आप नहीं मानोगे न. अच्छा रुको मैं दिखती हूँ.

फिर सरिता दीदी ने अपना शट जो बड़े गले का था उसको दोनों कंधो से निचे करने लगी. मैं दीदी की जालिम चूचियों को जीजा जी से ज्यादा बेसबर होकर देख रहा था मैं इस नज़ारे का एक भी पल मिस नहीं करना चाहता था. इसलिए मैंने पलके भी झपकना बंद कर दिया और आखे फाड़ फाड़ कर दीदी की गदराई चूचियों को नंगा होता देखने लगा. फिर दीदी ने अपनी ब्रा पर से शट निचे कर दिया. अब दीदी की जालिम चूचिया ब्रा में मेरे सामने थी जिसे वो जीजा जी को दिखा रही थी. मैं मुंह खोले इस कामुक नज़ारे को देखने लगा. दीदी की चूचिया इतनी ठोस थी की ब्रा एकदम सामने की तरफ तानी हुई थी. उसमे तनिक भी ढीलापन नहीं था. उधर से जीजा जी ने कहा.



जीजा जी- अरे जानेमन एक बार इसको भी उतर कर मुझे धन्य कर दो.

सरिता दी- नहीं इसके आगे शादी के बाद देखना. अभी इतने से hi काम चलाओ.

जीजा जी- वैसे ये बहुत बड़े हैं. किसने म्हणत की है इनपर

सरिता दी- आप बार बार वही बात क्यों पूछते हैं. मैंने कितनी बात आपको बताया है की ये एकदम अनछुई हैं. अभी तक इसे किसी ने टच नहीं किया है. आप पहले होंगे जो इन्हे टच करेंगे.



मैं- (मन में) हे भगवाह मतलब दीदी अभी तक अनछुई काली हैं. जीजा जी की तो लॉटरी लग गई जो उन्हें ऐसा गदराया माल मिल रहा है. जिसको अभी तक किसी ने टच भी नहीं किया. मैं बहुत खुस हुआ ये जानकर की मेरी दीदी ने घर की इज़्ज़त को संभल कर रखा है अभी तक. लेकिन अब उसपर उनके भाई की नज़र पद चुकी है अब देखते हैं की दीदी कब तक अपनी इज़्ज़त संभल कर रखती हैं.



जीजा जी- अरे यार मैं तो मज़ाक कर रहा था. तुम्हारी चूचियों को देखने के बाद अब इंतज़ार नहीं होता. बहुत मन कर रहा है करने का.

सरिता दी- हाँ मेरा भी मन बहुत कर रहा है लेकिन अभी 2 हफ्ते कैसे भी करके निकलने हैं.

जीजा जी- उसके बाद मैं तुम्हे सोने नहीं दूंगा.

सरिता दी- चल हैट बेशर्म.

जीजा जी- अच्छा. पति बन जाने के बाद कैसी शर्म. अच्छा एक बार अपनी चूचियों को हाँथ में लेकर मसलो न.

सरिता दी- मैं नहीं करुँगी. आप रोज ऐसा करने को कहता हैं.

जीजा जी- प्ल्ज़ जान एक बार करो न.

दीदी ने अभी भी अपनी ब्रा को छुपाया नहीं था. जीजा जी के कहने पर दीदी ने अपनी चूचियों को अपने हाँथ में भर लिया और उसे दबाने लगी. मैं तो उनकी चूचियों को hi देख रहा था. मेरा लुंड अब खड़ा हो गया था मेरा मन कर रहा था की मैं अभी बहार जाओ और उनकी चूचियों को पकड़ कर मसल दालु. उनका सारा रास निचोड़ लून. उसकी चूचियों को छोड़ दालु एकदम पटाखा लग रही थी दीदी देखने में.



लेकिन मैं अभी बस सोचने के अलावा और कुछ कर नहीं सकता था. मैं मन मसोस कर रह गया.

सरिता दी- अच्छा अब मैं सोने जा रही हूँ. बाद में बात करते हैं.

जीजा जी- ठीक है. लेकिन जाने से पहले एक किश तो दो.

सरिता दीदी- MMMMMMMMMMmuuuuuuuuuuuuuuuuuuaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh.



जीजा जी- Mmmmmmmmmmmmmuuuuuuuuuuuaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh. गुड नाईट.

सरिता दी. गुड़ नाईट.

उसके बाद दी ने अपने शट से अपनी चूचियों को ढाका और निचे चली गयी. और मैं अपने खड़े लुंड के साथ दीदी की चूचियों को छोड़ने की कल्पना करते हुवे सो गया.

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अपडेट-34

सुबह मैं अपने समय से उठ गया और सविता दीदी के आने का इंतज़ार करने लगा. रात में सरिता दीदी की कातिल चूचिया देखने के बाद मेरे लुंड ने रात भर मुझको परेशां किया और मेरा लुंड अब भी खड़ा hi था. आज सविता दीदी समय से पहले hi चाट पर आ गयी. थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद जब उन्हें लगा की मैं अभी भी सो रहा हूँ तो उन्होंने दरवाज़े के पास से मुझे आवाज़ दी.

सविता दी- अभी उठ गया क्या.

उनकी आवाज़ सुनकर मैंने अपने खड़े लुंड को ुंडेरवेरे की साइड से बहार निकल लिया. जब मैंने कोई आवाज़ नहीं दी तो दीदी दरवाज़ा खोलकर अंदर आ गई. अंदर आते hi उनकी नज़र सीधे मेरे लुंड पर पड़ी. मेरा लुंड देखते hi उन्ही आँखे चुंधिया गई.



उन्होंने तुरंत मेरे चेहरे की तरफ देखा तो मैं आँखे बंद कर के लेता रहा. उन्होंने काफी देर तक दरवाज़े के पास से मेरे लुंड का नज़ारा किया फिर वो मेरे बीएड के पास आ गयी मैं आँखों की झिरी से उनके हर मूवमेंट को देख रहा था. बीएड के पास आते हुवे भी उन्होंने अपनी नज़र एक पल के लिए भी मेरे लुंड से नहीं हटाई.

बाद के पास आकर उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुझे सोता पाकर उन्होंने झुक कर मेरे लुंड को एकदम करीब से देखने लगी. झुकने से उनके गले से उनकी भरी भरकम चूचिया लटक गई जिसका नज़ारा बहुत hi मादक था. मैं उनकी चूचियों को देखने लगा.



ऐसी हाहाकारी चूचिया देखते hi मेरे लुंड ने झटका खाया. तो दीदी ने तुरंत मेरी तरफ देखा. लेकिन मैं सोता बना रहा . फिर दीदी और ज्यादा झुक गई. जिससे उनकी चूचिया जहाँ से निप्पल शुरू होते हैं वह तक उनकी निघ्त्य से दिखने लगे.



ऐसा नज़ारा देखकर मेरे लुंड ने दो तीन लगातार झटके मरे. दीदी इतनी ज्यादा झुकी हुई थी की उनकी गर्म साँस मुझे मेरे लुंड पर महसूस हो रही थी. मेरे लुंड को देखते हुवे वह अपने होठों पर जुबान फिरने लगी.



मैं अब एकदम बेकाबू हो चुक्का था. मन कर रहा था की उनको पकड़कर अभी इसी बिस्तर पर पटक दू और उनकी निघ्त्य फाड़कर चूचियों का सारा रास पि जाऊ. लेकिन मैंने किसी तरह खुद पर काबू किया. और दीदी की चूचियों को देखने लगा. मेरा लुंड इस बिच पता नहीं कितनी बार झटके खा चुक्का था. फिर दीदी ने लुंड को छूने के लिए हाँथ आगे बढ़ाया, पर पता नहीं क्या सोचकर हाथ वापस खींच लिया. इसीतरह 5 मिनट लुंड को जी भर के देखने के बाद दीदी बहार की तरफ जाने लगी और दरवाज़े के पास पहुंचकर एक बार लुंड पर भरपूर नज़र मार्कर एक फ्लाइंग किश देखर बहार चली गयी. कमरे से बहार जाते समय मैंने दीदी की आंको में वासना के डोरे तैर रहे थे.



दीदी बहार जाकर मुझको आवाज़ देने लगी.

सविता दीदी- अभी उठ जा कितना सोता है कब से बुला रही हूँ.

दीदी के बुलाने पर मैं उठकर बैठ गया और कहा.

मैं- हाँ दीदी बस उठ गया हूँ.

मैं लगभग 5 मिनट बाद बहार आया तो दीदी दरवाज़े के पास नहीं थी. मुझे लगा की शायद चली गयी होंगी. तो मैं बाथरूम जाने लगा तो देखा की दीदी चाट पर hi कपडा दोने की तयारी कर रही हैं. तो मैंने कहा.

मैं- अरे दीदी आज यहाँ कपडे धो रही हो. लाओ वासिंग मशीन में दाल देता हूँ जल्दी हो जाएगा.

सविता दी- (मेरे लुंड की तरफ देखते हुवे जो अब बैठ गया था) हां अभी आज कपडे ज्यादा थे तो और गंदे भी हैं टोमैने सोचा की पहले इसको धो लू फिर वाशिंग मशीन में डालूंगी.

उसके बाद मैं बाथरूम चला गया. जब वह से बाहर आया तो सामने का नज़ारा देखकर मेरी आँखे चूंडिया गई. क्योंकि कपडे धोते समय जब दीदी कपडे को चाट पर पटकती तो उन्ही भरी भरकम चूचिया गाढ़ी के पुंडुलाम की तरह लेफ्ट राइट करने लगती.



ये नज़ारा देखकर मेरा लुंड फिर से लोअर माँ खड़ा होने लगा था. मैं उनकी चूचियों को और अचे से देखने के लिए उनके पास गया और चूचियों को ताड़ता हुवा बोलै.

मैं- मैं आपकी कुछ मदद करू दीदी.

सविता दी- तू क्या मदद करेगा मेरी तू जा मैं धो लुंगी.

मैं- अरे दीदी मैं कर दूंगा आपकी मदद. बताइये

सविता दी- जो कपडे ज्यादा गंदे हैं उनको रगड़ने के मेरी मदद कर दे फिर.

मैं- अरे दीदी ये भी कोई कहने की बात है मैं तो आपके कब से रगड़ना चाहता था लेकिन अपने कभी मौका hi नहीं दिया.

सविता दी- (मुस्कुरा कर मुझे देखते हुए)- क्या कहा.

मैं- अरे दीदी मेरे कहने का मतलब है की मैं आपके कपडे को खूब रगड़ रगड़ के साफ करूँगा.

सविता दी- ठीक है तब तक मैं वासिंग मशीन में कपडे दाल देती हूँ.

मैं- आप रहने दीजिए दीदी. मैं आपको रदद रदद कर hi हॉल में डालूंगा.

सविता दी- तू क्या फालतू की बाते करता रहता है. तू जा यहाँ से मैं धो लुंगी.

मैं- नहीं दी मैं आपको बिना रगड़े नहीं जाऊंगा.

मेरी इस बात को सुनकर दीदी को हंसी आ गयी. थोड़ी देर ऐसे hi कपडे धोने से दीदी की निघ्त्य पानी से भीग गाइट hi जिससे उनकी ब्रा एकदम विज़िबल हो गई थी और उसके साथ चूचियों की घुंडीया भी दिखने लगी थी. जिसमे दीदी खुजली कर रही थी. मैं कपडे धोते हुवे बस उनकी चूचियों के देखने लगा.



थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की तरफ देखा तो दीदी को मेरी तरफ देखता पाया. जब मैंने उनकी नज़रो का पीछा किया तो मैं चौक गया. पानी पड़ने से मेरा लोअर भीग गया था जिससे मेरा कड़ा लुंड पूरी तरह से विज़िबल हो रहा था. जिसे दीदी बड़ी hi नशीली नज़रो से देख रही थी.



लुंड को देखते देखते एकाएक दीदी ने मेरी आँखों में आँखे डालकर देखा. मुझे उनकी आँखे इतनी ज्यादा नशीली लगी की जैसे मुझे इन्विते कर रही हो की अभी देख क्या रहा है फाड़ दाल मेरे सरे कपडे और यही छात पर लिटाकर छोड़ दाल अपनी दीदी को. मैं तो बेहोश होते होते बचा. मैं भी एक तक उनकी आँखों में देखने लगा. हम दोनों लगभग 2 मिनट एक दूसरी को आँखों में खो गए. दोनों के हाँथ रुक चुके थे. फिर अचानक से हम दोनों होश में आये. तो मैंने दीदी से कहा.



मैं- दीदी आप कपडे धो लिझे. मैं जा रहा हूँ.

सविता दी ने कुछ भी नहीं कहा और मैं सीधे बाथरूम में चला गया. नहाकर बहार आया तो दीदी कपडे वाशिंग मशीन में डालकर निचे जा चुकी थी मैं भी अपने कमरे में तैयार होने चला गया. तैयार होकर मैं हॉल में आया नाश्ता किया और अपनी जॉब के लिए चला गया.

जॉब पर पहुंच कर मैं अपनी जगह पर बैठ गया. और काम करने लगा. लेकिन मेरा मन काम करने में नहीं लगा रहा था. मैं बार बार सविता दीदी के बारे में सोच रहा था. उनकी आंको में मैंने एक प्यास देखि थी. जैसे वो मुझसे कुछ चाहती ho.Maine सोचा की जिस तरह से मैं उनकी जिश्म को घूरता हूँ. उससे दीदी को इतना तो समझ में आ hi गया होगा की मैं एक भाई की नज़र से उनको नहीं देखता हूँ. उन्होंने भी तो मेरी आंको में अपने जिस्म के लिए एक प्यास देखि थी. इतना तो वो समझ hi गयी होंगी की मैं अब उनके साथ एक भाई का पवित्र रिश्ता न रखकर चुदाई का रिश्ता रखना चाहता हूँ. और जिस तरह से वो मेरे लुंड को घूरती हैं और दो दिन मुझे सोता हुवा समझकर मेरे लुंड का नयनसुख लिया था उससे तो यही लग रहा है की वो भी अपने भाई से छोड़ना चाहती हैं



लेकिन एक औरत को आजतक ब्रम्हा भी नहीं समझ पाए हैं तो मैं किस खेत की मूली हूँ. हो सकता है मैं जो सोच रहा हूँ वो गलत हो. दीदी मेरे साथ सिर्फ अपना मन बहलाव कर रही हो. थोड़ा था मुझे तैसे करके इतने में hi वो खुश हो.

अब मैं क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा है. क्या मुझे आगे बढ़ना चाहिए. अब तक जितना कुछ हो चुक्का है उसके हिसाब से मुझे आगे बढ़ना चाहिए. अगर मेरी सोच के विपरीत हो गया तो मैं माफ़ी मांग लूंगा. मैं यही सब सोच कर की आज दीदी जब छत पर आएंगी तो मैं एक स्टेप और आगे बढ़ने की कोशिश करूँगा मैंने अपना जो भी काम करना था उसको अपने बैग में डाला और घर की तरफ निकल पड़ा.

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अपडेट-35

घर पहुंच कर मैंने अपनी बाइक कड़ी की और अपने कमरे में गया. कपडे बदलने के बाद मैंने सोचा की चालू सरिता दीदी को देखता हूँ क्या कर रही हैं. मैं सीधे उनके कमरे की तरफ चल पड़ा. मैंने दरवाज़ा खटखटाया तो दीदी ने पूछा कौन है. मेरे बोलने पर उन्होंने मुझे अंदर आने के लिए कहा. जब मैं अंदर गया तो दीदी बिस्टेर पर उलटी तरफ लेती फोन पर किसी से बात कर रही थी. इस समय उन्होंने t-shirt पहना हुआ था. जिसके गले से उनकी चूचिया आधी बहार निकली हुई थी.



दीदी फ़ोन पर बार कर रही थिए और मैं दरवाज़े के पास खड़ा उनकी चूचिया ताड़ने लगा लगा. लगभग 2 मिनट तक वो बात करती रही और मैं अपना काम करता रहा. जब उन्होंने फ़ोन रखकर मेरी तरफ देखा और और मुझे कुछ ध्यान से देखता पाकर मेरी नज़रो का पीछा किया तो मुझे अपनी चूचियों को देखता पाकर वो हड़बड़ा कर उठ गई और बोली.







सरिता दी- अभी वह क्यों खड़े हो.

Main-Kuchh नहीं दीदी आपने अपना सामान इतनी अच्छी तरह से सजा के रखा है की मैं उसकी खूबसूरती में गम हो गया था.

मैंने अपना सामान पर बहुत जोर दिया था. लेकिन दीदी शायद शमझ नहीं पाई इसलिए उन्होंने कहा.

सरिता दी- हाँ अभी मुझे सभी चीज़े सजा कर रखने बहुत पसंद है. इसलिए मैं अपने कमरे में हर चीज़ सजा कर hi रखती हूँ.

मैं- (मन में) अरे बेवकूफ मैं तेरी चूचियों की बात कर रहा हूँ और तो कमरे का सामान समझ रही है.

सरिता दी- किस सोच में गम हो गया अभी.

मैं- अरे कुछ नहीं दीदी (मैं उनके बीएड पर उनके साथ बैठ गया)

सरिता दी- इस समय मेरे कमरे में आये हो. कोई काम था क्या.

मैं- नहीं दीदी कर रात में मैं जल्दी सो गया था इसलिए आपसे बात नहीं हो पायी थी तो सोचा अभी आपसे बात कर लू.

सरिता दी- हाँ कल मैंने भी किसी से बात नहीं की वो तेरे जीजा जी का फ़ोन जल्दी आ गया था तो उन्ही से बात करने में ज्यादा समय चला गया.

दीदी की बात सुनकर मुझे कल रात वाला वाक्य याद आ गया जब और मैं मन में सोचने लगा. हाँ कल तो तुम्हे अपनी चूचिया जीजा जी को दिखने से hi फुर्सत नहीं थी तो क्या बात करती. वैसे एक बात तो है चूचिया आपकी हैं जबरदस्त.



मैंने आपकी हैं जबरदस्त शब्द बोल दिया जिसे दीदी ने भी सुन लिया तो उन्होंने पूछा.

सरिता दी- क्या सोच रहा है तू और क्या जबरदस्त है.

उनके बात सुनकर जब मैंने उनकी चूचियों की तरफ देखा तो वह हलकी सी गहराई नजर आ रही थी.

मैं- कुछ नहीं सोच रहा हूँ और आपके सामान बहुत जबरदस्त हैं.

सरिता दी- हाँ वो तो हैं hi. ख्याल जो इतना रखती हूँ अपने सामान का.

मैं- हाँ दीदी वो तो दिख hi रहा है

सरिता दी- अच्छा अभी मैं अभी सोने जा रही हूँ. रात में बात करते हैं.

मैं- ठीक है दीदी.

इतना कहकर मैं उनके कमरे से बहार निकला तो सोचा चलो सविता दीदी को देखता हूँ वो क्या कर रही हैं. मैंने बिना उनके कमरे का दरवाज़ा नॉक किये hi अंदर चला गया. जब मैं कमरे में पंहुचा तो मैंने देखा तो दीदी अपने बीएड पर बैठी हैं और उनकी बेटी निचे जमीन पर खेल रही है. दीदी ने एक निघ्त्य पहनी हुई थी जो बहुत पतली थी. उसके अंदर उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी जिसके कारन उनकी चूचिया और उसकी घुंडी एकदन नुकीले तने हुए नजर आ रहे थे. मैं दीदी के इस रूप का रसपान करने लगा. काफी देर तक मुझे अपनी चूचिया दिखने के बाद दीदी ने कहा.



सविता दी- क्या देख रहा है अभी.

मैं- यहाँ से तो मुझे एक पर्वत की उन्नत छोटी की खूबसूरती नज़र आ रही है. वही देख रहा हूँ.

सविता दी- (मुस्कुरा कर) देख ली या और देखना है.

मैं- अभी कहा दी. अभी उसपर एक आवरण पड़ा हुआ है अगर वो हैट जाये तो वो और भी खूबसूरत लगेंगी

सविता दी- किसी दिन वो भी हैट जाएगी. हर काम अपने समय पर होता है. जब उसका भी हटने का समय आएगा तो वो भी हैट जाएगा.

मैं- (उनके और पास जाकर). पता नहीं वो दिन कब आएगा. जब मैं इन खूबसूरत पहाड़ो का दर्शन करूँगा.

सरिता दी- (बात बदलते हुवे)- अच्छा चल. बहुत बड़ी बड़ी बाते करने लगा है.

मैं- (उनकी आँखों में देखते हुवे) मेरी बाटे hi बड़ी नहीं हैं दीदी. मेरे और भी कुछ बड़ा है. आपने देखे भी होगा.

सरिता दी- ( घबरा कर)- मैंने क्या देखा और कब देखा

मैं- अरे दीदी मैं तो मज़ाक कर रहा हूँ आप तो घबरा गई.

सरिता दी- अच्छा ये सब छोड़. मैं बहुत बोर हो रही हूँ. चल कुछ खेलते हैं.

मैं- मैं तो आपके साथ कब से खेलना चाहता हूँ दीदी लेकिन आप ने कभी मौका hi नहीं दिया. एक बार मेरे साथ खेल कर तो देखो. फिर आप हमेशा मेरे साथ खेलना चाहेंगी.

मैं जब से आया था तब से दीदी से डबल मीनिंग में hi बात कर रहा था. और दीदी भी सब समझ रही थी. उनको भी इसमें मज़ा आ रहा था इसलिए उन्होंने भी इस मौके को गवाना उचित नहीं समझा.

सरिता दी- हाँ इसीलिए तो बोल रही हूँ की कुछ खेल खेलते हैं. ऐसा करते हैं की लूडो खेलते हैं.

मैं- ठीक है लेकिन उसके लिए तो टीम चाहिए और इस समय हैं तीन लोग hi हैं तो कैसे खेलेंगे.

सरिता दी- ये केवल हम दोनों hi खेलेंगे. अकेले अकेले.

मैं- हाँ दीदी आपके साथ अकेले खेलने में बहुत मज़ा आएगा.

मेरे आने के बाद भी दीदी ने अभी तक अपने जिस्म को छुपाने की कोई कोसिस नहीं की. बल्कि बात करते करते कभी कभी दीदी अपने साइन को और बाहर की और तन देती थी जिससे उनकी गदरायी चूचिया कपडा फाड़कर बहार आने को तैयार हो जाती थी.





सविता दी- चलो फिर खेल शुरू करते हैं.

मैं- वैसे दीदी अपने भाई के साथ खेल कहा खेलना चाहोगी. अपने बिस्तर पर या मेरे बिस्टेर पर या फिर जमीन पर.

सविता दी- मेरे बिस्तर पर ज्यादा मज़ा आएगा.

उसके बाद मैं और सविता दीदी उनके बिस्तर पर आ गए. और लूडो से पहले ये डीडे हुआ की कौन किस गोटी से खेलेगा. मेरा फेवरेट रेड था तो मैंने रेड चूसे किया. दीदी ने ग्रीन चूसे किया और हम खेलने बैठ गए.

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अपडेट-36

अभी हम खेलने बैठे hi थे की सविते दीदी ने कहा.

सविता दी- बा एक मिनट रुक अभी. मुझे इन कपड़ो में उनकंफर्टबले फील हो रहा है. मैं जरा कपडे बदलकर आती हूँ.

दीदी की बात सुनकर मेरा मूड hi ख़राब हो गया. कहा तो मैंने सोचा था की दीदी के शरीर का अचे से दीदार करूँगा. और कहा दीदी कपडे बदलने चली गयी. अब मैं कुछ कर तो सकता नहीं था. इसलिए बैठकर उनका इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी वापस आयी तो उन्हें देखते hi मैं पलके झपकना hi भूल गया. कहा तो मैं सोच रहा था की अब उनके शरीर के दर्शन hi नहीं होंगे. और कहा दीदी पूरी माल बैंकर आ गयी थी. मैं तो मुंह फाडे बस उन्हें hi देखता जा रहा था.



दीदी ने जो कपडा पहना था. वो तो और ज्यादा खुला था. उसका गाला इतना ज्यादा बड़ा था की उनकी आधी चूचिया बहार चालक रही थी और चूचियों की गुंडई अब बहार निकली की तब बहार निकली. मैं अपने होशो हवस गँवा चुक्का था. मेरा लुंड लवर में झटके मरने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.



सविता दी- मुंह बंद कर ले अभी नहीं तो मख्खी लात मर देगी( और खिलखिलाकर हंसाने लगी)

Main-(thoda झेपते हुवे)- क्या है दीदी आप भी मेरा मजाक उदा रही हैं.

सविता दी- वो सब छोड़ ये बता मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं- जवाब देने के लिए शब्द hi नहीं हैं मेरे पास. क्या लग रही हो आप.

सविता दी- वही तो पूछ रही हूँ की कैसी लग रही हूँ.

मैं- बहुत टी हॉट, सेक्सी aur………………………..(shabd अधूरा छोड़ दिया).

सविता दी- अपनी बहन को हॉट बोलता है, और आगे क्या बोलना छह रहा था. वो भी बोल दे.

मैं- नहीं दीदी मैं नहीं बोलूंगा.

सविता दी- बोल न अभी. तुझे मेरी कसम.

इतना बोलकर वो बिस्तर के पास आ गयी. और मैं इतने नजदीक से उनकी जन्मऋ चूचियों को देखकर बहुत एक्सीटेंड हो रहा था. दीदी ने तो आज थान रखा था की वो मेरे लुंड को बैठने नहीं देंगी. मेरा लुंड लोअर में झटके पे झटके मार रहा था. मैंने दीदी से कहा.



मैं- कसम न दो दीदी. बहाऊंगा तो आप नाराज़ हो जाओगी. इसलिए जाने दो और आओ बिस्टेर पर. खेल शुरू करते हैं.

सविता दी- बता न अभी मैं नाराज़ नहीं होंगी. अब तो हम दोस्त हैं न.

मैंने सोचा अब चांस ले hi लिया जाये. देखते हैं इनका क्या रिएक्शन होता है.

Main-Aap हॉट & सेक्सी के साथ साथ एकदम पटाखा माल भी लग रही हैं.

(इतना कहने के साथ hi मैंने अपने लुंड को जो लोअर में खड़ा था उसे दीदी की आँखों में देखते हुवे सहला दिया. लेकिन मेरी ये हरकत देखकर बहुत बुरी तरह शर्मा गई और अपना मुंह दूसरी तरफ कर लिया. और धीरे से कहा.



सविता दीदी- (थोड़ी नाराज़गी का दिखावा करते हुवे). तुझे शर्म नहीं आती अपनी बहन को माल बोलते हुवे. यही सब सीखा है तुमने.

मैं- इसलिलिये मैं नहीं बता रहा था आपको नहीं बता रहा था लेकिन आपने अपने कसम देखर मुझसे बात उगलवाली और अब नाराज़ हो रही हो.

सविता दी- मैं नाराज़ नहीं हो रही हु लेकिन कोई अपनी बहन को माल नहीं बोलता. ये गलत बात है.

मैं- अच्छा वो सब छोडो दीदी. आओ बिस्तर पर और जो खेल मैं आपके साथ खेलना चाहता हूँ उसको शुरू करते हैं.

सरिता दी- बड़ी जल्दी है तुझे मेरे साथ खेलने की.

मैं- अरे दीदी आपको नहीं पता की मैं आपके साथ कबसे खेलना चाहता था. मेरी वो इच्छा शायद आज पूरी हो रही है.

सरिता दी- अरे मेरे प्यारे भाई. तेरी साडी िछाये अब मैं पूरी करुँगी.

मेरे मन में आया की अभी hi बोल दू की मैं तुझे बहुत बुरी तरीके से छोड़ना चाहता हूँ तेरी चूचियों का रास पीना चाहता हूँ. तेरे मुंह में अपना लुंड पेलना चाहता हूँ. मेरी ये इच्छा पूरी कर दे. लेकिन मैं जल्दबाज़ी में बनते हुवे काम को बिगड़ना नहीं चाहता था. इसलिए मैंने कहा



मैं- वो तो समय बताएगा की आप मेरी कौन कौन सी इच्छा पूरी करती हैं.

सविता दी- अच्छा अब बाटे न बना और आ खेल शुरू करते हैं.

फिर मैंने और दीदी ने लूडो खेलना शुरू किया. क्योंकि रेड और ग्रीन अगल बगल हो होते हैं इसलिए हम दोनों आमने सामने न बैठकर अगल बगल बैठे थे. मैं दीदी से एकदम सत्कार बैठा था. उनका शरीर बहुत गरम था जो मुझे अपने शरीर पर महसूस हो रहा था. मैं उनसे और जोर से सत्कार बैठ गया तो दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- अब चल चलेगा या ऐसे हो बैठे रहने का इरादा हैं.

मैं दीदी की बात सुनकर उनकी चूचियों पर एक नज़र मार कर खेल शुरू कर दिया. कुछ hi देर बाद दीदी की पूरी गोटिया खुल गई लेकिन मेरी एक hi गोटी खुली फिर ऐसे hi चल चलती रही जब मेरी गोटी दीदी के एरिया में पहुंची तो दीदी ने कहा.

सविता दी- देखन अभी तेरी गोटी मैं कैसे मरती हूँ.

उन्होंने ये बात नार्मल वे में कही थी लेकिन मुझे तो जैसे मौका मिल गया तो मैंने कहा.

मैं- दीदी मरने का काम लड़को का होता है. लड़कियों का काम सिर्फ मरवाने का होता है.

सविता di-aisa कुछ नहीं है लड़किया आजकल लड़को के बराबर चल रही हैं.

मैं- चाहे जितनी बराबर चल ले लड़को के लेकिन वो मर नहीं पाएंगी.

सविता दी- ठीक है फिर आज तुझे दिखा hi देती हूँ की लड़किया भी लड़को की मरना जानते हैं.

इसके बाद खेल अपने रफ़्तार से चलता रहा. कुछ देर बाद मैंने अपने सभी गोटिया दीदी के गोटियों के पीछे लगा दी. अब दीदी के पास कोई राष्ट नहीं था शिवाय इसके की वो अपने सभी गोटियों को फिनिशिंग पॉइंट तक पंहुचा दे. मैं उनके शरीर के साथ अब भी सत्ता हुआ था और उनके शरीर की लम्स पाकर मेरा लुंड और जोर जोर से झटके मार रहा था. जो दीदी भी देख रही थी. तो मैंने दीदी से कहा. मैंने अपनी डबल मीनिंग बाते जारी रखते हुवे कहा

मैं- देखा दीदी अब कहा जाओगी बचकर अब तो मैं आपकी मार कर hi रहूँगा.

सविता दी- अरे नहीं अभी मुझे छोड़ दे. मेरी मत मरना.

मैं- नहीं दीदी अब मैं आपको नहीं छोडूंगा. मैं आपकी मर कर hi डैम लूंगा. बहुत परेशां किया हैं आपने मुझे.

सविता दी- कुछ तो रहम कर अभी. आखिर मैं तेरी बहन हूँ.

मैं- बहन की मरने में तो और मज़ा आता hai.aur बहन की मरने में मैं कोई रहम नहीं करूँगा. रगड़ रगड़ के मरूंगा अपनी बहन की.

सविता दी- (मेरी आंको में देखते हुवे)- तुझे शर्म नहीं आएगी अपनी बहन को मरने में.

मैं- पहले मैं अपनी बहन से कुछ बोलने में शर्माता था. लेकिन जब से अपनी दोस्ती हो गई है तब से मैंने शर्म छोड़ दी है . और देखना दीदी एक दिन आपकी भी मार मार कर आपको भी बेशरम बना दूंगा. उसके बाद आप इतनी बेशरम बन जाओगी की अपने मरवाने के लिए खुद हो अपने भाई के पास आओगी.

सविता दी- ये क्या बोल रहा है अभी. कब से bak-bak कर रहा है. अपनी चाल चलनी है या नहीं.

मैं- क्यों नहीं chalni.chal चलूँगा तभी तो आपकी मरूंगा.

सविता दी फिर भगवन से प्रार्थना करने लगी की हे भगवन मुझे अभी से बचा ले और जल्दी से मुझे मेरे एन्ड पॉइंट तक पंहुचा दे.

मैं- कोई नहीं आएगा आपको मुझसे बचने दीदी. मैं आपकी मार्कर हो रहूँगा.

सविता दी- अब तो मैं फुरि तरह फैन गई तो तेरी मुट्ठी में. अब मारवणी हो पड़ेगी मुझे.

मैं- हाँ दीदी अब मुझसे बचकर कहा जाओगी. अब तो मैं आपकी आगे से भी मरूंगा और पीछे से भी मरूंगा वो भी ragad-ragad के. और आपको इतना मज़ा आएगा की आप हमेशा तैयार रहेंगी मुझसे अपनी मरवाने के लिए. क्यों दीदी सही कह रहा हूँ न.



मेरे ऐसा पूछने से दीदी हड़बड़ा गई और जल्दी से बोली.

सविता दीदी- मुझे नहीं पता. जो तेरा मन हो.

ऐसे बाते करते करते और दीदी की चूचिया देखते हुए मेरा लुंड अब फटने को हो गया था और बहुत फुल हुआ नज़र आ रहा था. दीदी लगातार मेरे लुंड को कनखियों से देख रही थी. जब मैंने उनके चेहरे की तरफ देखा तो उन्होंने मेरी आंको में देखते हुवा अपने होंठो पर जीभ फिर कर आँख मार दी.



उनकी इस हारकर से मैं और बर्दास्त नहीं कर पाया और दीदी को लपक कर अपनी गॉड में बिठा लिया और उनके पेट में अकवरी बांधकर अपने से एकदम चिपका लिया. मेरी इस हरकत के लिए दीदी बिलकुल भी तैयार नहीं थी. वो कसमसाने लगी. मेरा खड़ा लुंड उनकी गांड के निचे दबा हुवा था जिसे दीदी भी महसूस कर रही थी. मैं दीदी को अपने लुंड पर बैठाये हिम्मत करके अपने होंठो को उनकी गार्डन पर रख दिया. जिससे दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकल गयी. उनकी आँखे माधोसी में बंद हो गई.



सविता दी- AAAAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaHHHHHHHHHHHHHHHHhhhhhhh अभी क्या कर रहा है छोड़ मुझे.

वो अपने आपको छुड़ाने की लगातार कोसिस कर रही थी और मेरा लुंड दीदी कैग एंड के निचे फटने को तैयार हो गया था. उनके लगातार मचलने से उनके शट से जो बहुत बड़े गले का था उससे उनकी चूचियों की घुंडी की एक झलक मुझे मिल गयी





अब मुझसे और बर्दास्त करना मुश्किल हो गया और मेरी आंके आनंद की अधिकता में बंद होने लगी और मेरे हाँथ अनजाने में hi दीदी की चूचियों पर पहुंच गया. इतने में मेरे लुंड ने जो दीदी की गांड के निचे दबा हुवा था. ने अपना रास निकलना शुरू कर दिया और मैंने दीदी की चूचियों को पूरी ताकत से मसल दिया. जिससे दीदी के मुंह से जोरदार कामुक सिसकी और आवाज़ निकल गयी.





सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh कमीने. मेरी जान लेगा क्या. बहन हु मैं तेरी.

और इतना कहने के बाद दीदी मेरी गॉड से कूद कर कड़ी हो गई और एकदम गुस्से से मुझे घूरने लगी. लेकिन इस समय मैं दीदी के मादक जिस्म को अपने हर अंग में महसूस कर रहा था. उनकी चूचिया, उनकी गांड के लम्स में मैं खोया हुआ था. मेरा लुंड झटके मार मार कर झाड़ रहा था और दीदी आँखे फाड़े बाद मेरे लुंड को और गीले होते लोअर को देख रही थी.



जब मेरा लुंड झाड़कर शांत हुआ तो मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो गुस्से से मुझे hi देख रही थी. झड़ने के बाद मेरी ठरक उतर चुकी थी. इसलिए मुझे अब वास्तविक स्थिति का एहसास हो रहा था. मुझे लग रहा था की मैंने जोश में आकर जल्दबाज़ी कर दी है. मुझे कुछ दिन और रुकना चाहिए था. तभी दीदी की आवाज़ सुनाई दी.

सविता दी- अभी. कमीने ये तूने क्या किया. अपनी बहन के साइन को तूने टच किया. बहुत गन्दा है तू.

मैं- सॉरी दी. वो गलती से हो गया.

और इतना बोलकर मैं तुरंत अपने कमरे में चला गया. पीछे से दीदी की आवाज़ आती रही. वो और भी कुछ कह रही थी, लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. मैं सीधा छत पर बाथरूम में चला गया और अपने लुंड को साफ किया, ुंडेरवेरे चेंज की और अपने बिस्टेर चला गया. अभी मैं कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं था इसलिए मैंने सोना हो बेहतर समझा.



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