Incest RAKSHASH - SexBaba
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Incest RAKSHASH

hotaks

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रिया सागा की एक और कहानी आपके सामने लेकर आ रही हु, जल्दी hi इसके अपडेट पोस्ट करुँगी, ये कहानी इसी सीरीज की अंतिम कहानी ह, साडी कड़िया इस कहानी से जुड़ती जाएँगी, कैसे क्या क्यों hua,aap सबने मेरी पिछली सभी कहानियो को इतना प्यार दिया ह उम्मीद करुंगीस कहानी को भी आप सब ऐसा hi प्यार दे,

अपने बारे में कुछ बताना चाहती हु, जब से जवान हुई मेरे एक दोस्त ने मुझे गन्दी किताबे पढ़ने का शोक लगा दिया और वो शोक इतना खतरनाक लगा की स्कूल टाइम से hi मेरी किताबो में हमेशा 10-12 एडल्ट किताबे छुपी रहती थी, मैं हमेषा नै नै किताब ढूढंती रहती उसके लिए खुद को बदनाम तक कर गई, धीरे धीरे किताबे मिलनी काम हो गई, फिर पोर्न देखने का चस्का लगा, मोबाइल हाथ में आया तो पोर्न मूवीज देखने लगी, फिर एक दोस्त से पता चला कहानियो के बारे में तो इंटरनेट पैर अलग अलग वेबसाइट पैर कहानिया पढ़ने लगी, फिर मेरे दिमाग में कुछ लिखने का विचार आया, तो मैंने अपनी एक कहानी लिखी किसी दूसरी वेबसाइट पैर वह बहुत प्यार मिला, लेकिन वह इंटरफेरे बहुत था, वो हमारे शब्दों को अपने हिसाब से बदल देते थे, फिर मैं जुडी स्फोरम्स से, और यहाँ मैं कहानिया पढ़ने लगी, कुछ तो इतनी अच्छी कहानिया थी की मैं बस मोबाइल में hi लगी रहती, फिर मैंने देखा मेरी लिखी कहानी किसी ने यहाँ पोस्ट की हुई ह और लोगो ने पसंद की ह, तब मैंने उस कहानी को यहाँ लिखा और पूरा किया, जिसका नाम था ये प्यास बुझती hi nhi,lekin उस कहानी में केवल सेक्स था कोई स्टोरी नहीं थी, क्योकि उस समय मैं सिर्फ सेक्स के बारे में hi सोचती थी, क्योकि मैंने तब से पहले सिर्फ चुदाई से बहरी हुई कहानिया hi पढ़ी थी, रियल स्टोरी तो कभी ठीक से पढ़ hi नहीं पाई, फिर मैंने अपनी अलग स्टोरी लिखी एक माँ के नाम से और आप सबने मुझे इतना प्यार दिया की आप सब मुझे अपना परिवार hi लगने लगे, कुछ लोगो से तो सच में परिवार जैसा रिश्ता लगने लगा, उनका हसी मजाक मस्ती अच्छी लगती h,aur मैं इस वेबसाइट बनाने वालो को बहुत बहुत ठंकु बोलना चहौंगी की उन्होंने ऐसा मौका दिया ह, यहाँ पढ़ने के साथ साथ लिखने वालो को भी इतना मजा आता ह, अब स्टोरी पढ़ने से ज्याद ालिखने में मजा आने लगा h,aap सबका एक बार फिर से बहुत बहुत ठंकु दिल से लव यू,
 
अपडेट-1



अब से कई हजारो साल पहले एक बहुत hi विशाल शरीर वाला एक योद्धा तपश्या करने में लगा हुआ था, और उसकी तपश्या सफल भी हुई, भगवान् ने उसे वरदान भी दिया लेकिन जो वो चाहता था वो नहीं,



ये कहानी एक भोले लड़के और उसकी माँ की ह और एक शैतान की, कैसे एक मस्सों सा लड़का संसार का सबसे बड़ा योद्धा बन गया, और दुनिया के लिए बन गया राक्षश,

और एक शैतान जो इस पूरी धरती का सर्वनाश करने चल दिया था,

इस कहानी के पत्रों का इंट्रो आ जायेगा,

कहानी शुरू होती ह एक गाओं से जिसका नाम ह बसेरा, ये गाओं कोई आधुनिक चीजों का इस्तेमाल नहीं करते, दुनिया से अलग रहते हैं, छोटा सा गाओं ह, न इससे बहार कोई जाता ह न hi इस गाओं में बहार वालो को रहने की परमिशन ह, इस गाओं की लड़किया गाओं के लड़को से hi शादी करती हैं, न किसी दूसरे गाओं की लड़की से शादी करता ह न hi दूसरे गाओं की लड़की को यहाँ शादी करके लाया जाता ह, कहते हैं ये गाओं हजारो साल पुराण ह, इस गाओं का एक राजा ह और एक रानी, पूरा गाओं उसी राजा के कहने पैर चलता ह, यहाँ लोग अपनी खेती से hi कमाते हैं और कहते हैं, इस गाओं के नियम हैं जो सभी मानते हैं, कहा जाता ह कभी इस गाओं पैर किसी का शाशन नहीं हुआ, ये गाओं कभी गुलाम नहीं बना, क्योकि इसका राजा इतना शक्ति शैली ह की उसे हराना नामुमकिन था, वो चाहे तो पूरी दुनिया जीत ले अकेला hi लेकिन फिर भी इस छोटे से गाओं का राजा बना हुआ ह, जहा न कोई सिंघषण ह न hi कोई सेना न hi कोई राजय,






खैर खाने शुरू होती ह जब ह्रदय अंश अंजलि सीमा ाव्य रिया और उनके साथ थी रौशनी जिसे खुद गुरु जी ने बुलवाया था, गुरु जी और बाकि सब के गाओं में पहुंचने से पहले इस कहानी के बारे में जान लेते हैं, ये कहानी शुरू कैसे हुई, क्यों शुरू हुई, और ह्रदय तक कसिए पहुंची,

ये कहानी मेरी यानि आपकी प्यारी रिया सिंह की जुबानी ,

पहले यहाँ गाओं नहीं एक राजय हुआ करता था, बहुत सूंदर राजय, आज से करीब 5000 साल पहले, महाभारत काल के बाद जब पूरी दुनिया में राजाओ और योद्धाओ का अकाल पद गया था, तब ये छोटे छोटे राजय पनपने लगे, जिसमे ये भी एक राजय था जिसका नाम था भवनपुरा, यहाँ के राजा भवर सिंह ने इस राजय को बनाया था उन्ही के नाम पैर ये राजय बना, इस राजय की एक पार्था थी यहाँ कोई भी कार्य बिना राज गुरु को दिखाए नहीं होता था,

खुश हाल राजय था कई राजा आये जो पीढ़ी दर पीढ़ी राजय चलते रहे, फिर एक राजा हुए राजा भवर सिंह, बहुत प्रतापी राजा थे लेकिन उनके अंदर अहंकार बहुत था, वो खुद से ज्यादा बलशाली किसी को नहीं मानते थे, उन्होंने आस पास के राजाओ को हरा क्र उन्हें अपने अधीन कर लिया था, जल्दी hi राजा का अहंकार बहुत बढ़ने लगा था, भवर सिंह की 3 रनिया थी और तीनो रानियों की 2-2 संताने थी,

सबसे बड़ी रानी अमरावती- आगे 42 साल बहुत hi खुबसुरत और भरे हुए बदन की औरत थी वो, उसकी सुंदरता पैर मोहित होकर भवर सिंह ने उससे शादी किट hi, 6 फिट लम्बी 38 की चूचिया और 30 की कमर और 40 की गांड, चलती फिरती आफत थी वो, उसके अंदर बहुत नफरत भरी हुई थी, वो हमेषा दुनिया पैर राज करना छाती थी,






अमृति की बड़ी बेटी- अमिता आगे 22 साल बिलकुल अपनी माँ जैसी एक दम लम्बी और वैसे hi भरे हुए शरीर की मालकिन, साइज 36 की चूचिया 28 की कमर और 38 की गांड, बिलकुल अपनी माँ जैसी थी, वही फितरत





दूसरा बीटा सूरज सिंह- उम्र 21 साल, बहुत hi खतरनाक था वो, बहुत ताकत थी उसमे, अपने पिता जैसा hi घमंड और अहंकार था, सब कुछ प् लेने की इच्छा थी उसकी,

भवर सिंह की दूसरी रानी- सौमित्र देवी उम्र 42 साल, हवस की पुजारिन कह सकते हो इसे, शरीर भी वैसा hi ह इसका 38 की चूचिया और 28 की कमर और 38 की गांड, ये हमेषा ऐसी चीजे कहती ह जिससे इसके अंदर चुदाई की इच्छा जगी रहती ह, और कोशिश करती ह राजा हमेशा इसके पास hi रहे, इसलिए राजा को भी उत्तेजित करने वाली जड़ीबूटियां खिलाती ह,






सौमित्र का बीटा- ज्वाला सिंह, उम्र 21 साल, बहुत बड़ा आयाश इंसान, अपनी माँ की तरह हवस भरी पड़ी ह इसमें, राजय की हर लड़की और औरत को ये अपनी जागीर समझता ह, रोज कोई न कोई उसकी हवस का शिकार हो hi जाती ह,

सौमित्र की बेटी – सोमिया उम्र 20 साल, उप्पेर वाले ने इसे बड़ी फुर्सत से बनाया ह, सुंदरता में अपनी माँ पैर गई ह, लेकिन फितरत माँ जैसी नहीं ह, नखरीली ह लेकिन हवसी नहीं ह, 34 की चूचिया 28 की कमर और 36 की गांड,






भवर सिंह की तीसरी पत्नी- निहारिका, उम्र 36 साल, निहायती खूबसूरत औरत थी वो, ऐसा लगता था जैसे खुद उप्पेर वाले ने अपने हाथो से किसी मूर्ति को बना क्र उसमे जान दाल दी हो, 38 की चूचिया 26 की कमर और 36 की गांड, एक एक उभर इतना खूबसूरत और सही जगह था जैसे किसी कलाकार ने बनाया हो, आँखे एंटी खूबसूरत की कोई भी डूबने को तैयार हो जाये, हॉट गुलाब की पंखुड़ी जैसे,





निहारिका की बेटी- रीवा, अपनी माँ का दूसरा रूप थी उम्र 19 साल, पुरे राजय में सबसे खूबसूरत राजकुमारी थी वो, 34 की चूचिया 26 की कमर और 36 की गांड, पूरा राजय उसे पाने की कामना करता था, यु तो तीनो hi राजकुमारिया बहुत खूबसूरत थी लेकिन रीवा सबसे अलग थी,





निहारिका का बीटा- देवदूत, उम्र 18 साल बहुत hi मासूम और नाजुक सा लड़का, दिखने में बिलकुल अपनी माँ जैसा खूबसूरत शरीर से भी माँ जैसा hi था, न किसी से नफरत न कुछ पाने की इच्छा, वो महल से भी बहार बहुत काम निकलता था, निकलता भी तो बस हरियाली देखने,





भवर सिंह की एक बहन थी – काम्य उम्र 40 साल, वो जितनी खूबसूरत थी उतनी hi बड़ी जलाद थी, 36 की चूचिया 30 की कमर 40 की गांड, उसकी गांड hi उसका आकर्षण था, हर कोई उसकी गांड को hi घूरता था, उसे मर्दो को अपने सामने झुकना सबसे ज्यादा पसंद था, उसका पति खुद उसका गुलाम जैसा था, लेकिन वो उस गुलामी में ऐश की जिंदगी जीर है था, उसका नाम था कुणाल सिंह





काम्य का बीटा- अभिजीत tha,umar 21 माँ जैसा जल्लाद और औरतो का शौकीन, उसे भी हर समय बस चुड़िआ चाहिए थी, वो औरतो के बड़ी बेदर्दी से चुदाई करता था,

काम्य की बेटी- अक्षरा, उम्र 18 माँ जैसी खूबसूरत, लेकिन उतनी hi भोली, अगर देवदूत के अलावा कोई और मासूम था तो वो थी अक्षरा, और पुरे परिवार में देवदूत के सबसे करीब थी भी अक्षरा hi, देवदूत की माँ के अलावा,






भवर सिंह की और भी नाजायज औलादे थी, वो जिस राजय को जीत लेता उसकी राजकुमारी को अपनी रखैल बना लेता उनसे भी औलादे पैदा करता,

भवर सिंह अपने सिवा किसी की नहीं सनटैन था बस अपने राज गुरु की सलाह के बिना कुछ नहीं करता था, राज गुरु hi सब बताते कब क्या करना ह, राज गुरु था तो बहुत ज्ञानी, उसे बहुत सी बातो का ज्ञान होता था,

भवर सिंह ने पहेली शादी की जब वो राजकुमार था, उसके पिता ने उसकी शादी करवाई, अमरावती एक राजा की बेटी थी तो वो पहले से hi घमंडी थी, ये शादी राज गुरु की सलाह से हुई,

दूसरी शादी उसने राजा बनने के बाद की, पड़ोस के राजा को जीतने के बाद उसकी बहन से शादी की और राजय वापस दे दिया, ये भी राजगुरु की सलाह थी, राजगुरु के अनुसार सौमित्र की औलाद राजय के लिए कुछ करेगी, लेकिन तीसरी शादी राज गुरु की सलाह से नहीं हुई, वो भवर सिंह ने निहारिका की सुंदरता में पागल होकर क्र ली थी,

राजय में उत्सव मनाया जा रहा था, पूरा राजय सजा हुआ था, आज भवर सिंह की बहन काम्य का जन्मदिवस था, भवर सिंह को अपनी बहन बहुत प्यारी थी, वो हमेशा उसे अपनी पलकों पैर सजा कर रखता था, जिस वजह से काम्य बहुत जीडी और जालिम बन गई थी, पुरे राजय में उसे रोकने वाला कोई नहीं था, पूरा परिवार खुशिया मन रहा था, राज परिवार था तो उत्सव भी उतना hi बड़ा होना था, सब वह थे लेकिन देवदूत वह नहीं था, किसी को फ़िक्र भी नहीं थी, उसके होने न होने से किसी को फरक नहीं पड़ता था, सबकी नजरो में वो बेकार लचर और कमजोर था, खुद भवर सिंह उसे पसंद नहीं करते थे, क्योकि सूरज सिंह और ज्वालासिंह अपने पिता की तरह बहुत शक्ति शैली थे, उन दोनों की माये राजा को खुश रखती थी, तो राजा का धयान भी बस इन्ही लड़को पैर था, उसके बाद अभिजीत पैर, क्योकि वो भी अपने मां को खुश करने का कोई मौका नहीं जाने देता था,

एक बड़े से मैदान में उत्सव मनाया जा रहा था, पूरा राज परिवार सिंघसनो पैर बैठा था और मैदान के दूसरी तरफ राजय की परजा बैठी हुई थी, आस पास राजय के अधिकारी, सेना पति मंत्री और उनके परिवार बैठे हुए थे, मैदान में खेल चल रहे थे, तलवार बजी, कुश्ती का दंगल, और अलग अलग तरह के नृत्य से सभी का दिल भेलया जा रहा था, और इस सब के बिच में सूरज सिंह नृत्य दिखने वालो के तम्बू में घुसा हुआ था और वह की एक नृतिका को जबरद्दस्ति अपनी हवस का सीकर बना रहा था, वो बेचारी मदद की गुहार लगा रही थी लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं था, क्योकि उस लड़की के मालिक सूरज सिंह का गुलाम जैसा hi था, उसी ने सूरज सिंह को अकेले वह भेजा था,

सूरज सिंह ने बड़े वहशी तरीके से लड़की को छोड़ा और अपने कपडे ठीक करके वह से चला आया, वो लड़की बैठी रोटी रही, लेकिन उसके मालिक ने उसे रोने तक का समय नहीं दिया और अगले नृत्य के लिए तैयार रहने का आदेश दिया, गरीब लड़की अपनी इज्जत लुटवा कर भी अपने काम क्र लिए तैयार रहना पड़ा वर्ण जिस काम्य सिंह के जन्मदिवस के उत्सव में वो नाचने आई थी वही काम्य उसे जान से मार देती, वो बेचारी खुद को तैयार करके नृत्य करने आ गई, नाचते हुए जब वो सूरज सिंह के सामने पहुंची तो सूरज सिंह ने अपने होतो पैर जीभ फिरै, लड़की की आँखो में आंसू आ गए वो तुरंत वह से आगे बढ़ गई, लेकिन ये सब अभिजीत ने देख लिया, जो सूरज सिंह के बराबर में hi बैठा था,

अभिजीत- क्यों बड़े भैया लगता ह बेचारी को काली से फूल बना दिया ह,

सूरज मुस्कुराया – अरे नहीं छोटे फूल तो उसका पहले से hi खुला हुआ था मैंने तो बस अपना रास उसके फूल में डाला ह, ताकि उसमे से मेरे नाम का कमल खिल सके,

दोनों बहुत हरामी थे दोनों के बिच ऐसी बाते होती रहती थी, दोनों राज परिवार से होने का पूरा फायदा उठाते थे,

अभिजीत- अच्छा कैसी थी ये तो बताओ, ढीली थी था कासी हुई

सूरज- थी तो कासी हुई,

अभिजीत- फिर तो एक बार सवाद चखना पड़ेगा,

अभिजीत उठा और उसके तम्बू के अंदर चला गया, वो लड़की अपना नृत्य पूरा करके तम्बू में गई तो वह उसे अभिजीत ने पकड़ लिया और उसके साथ मनमानी की, अब लड़की पूरी तरह टूट गई थी, वो एक कोने में बैठी रोटी रही, इधर उत्सव ख़तम हो गया था, तो उस लड़की ने मौका देखा और काम्य के पास पहुंच गई और उसे अपने साथ हुई साडी बात बताई,

काम्य ने सूरज और अभिजीत को तुरंत बुलवाया, कुछ hi देर में दोनों भाई काम्य के सामने खड़े थे और वो लड़की सर झुकाये कड़ी थी,

अभिजीत- क्या हुआ माँ, आपने हमे बुलवाया,

काम्य- ये लड़की क्या बोल रही ह,

सूरज- हमे क्या पता बुआ क्या बोल रही ह,

काम्य- भोले मत बनो, तुम दोनों ने इसके साथ गतल हरकत की ह,

अभिजीत- माँ वो हम थोड़ा बहक गए थे,

काम्य- हरामजादो अगर ये सब करना ह तो ऐसे करो ताकि कोई आवाज न उठा सके, अगर ये लड़की बहार परजा में जाकर कुछ बोल देती तो बात राज सभा तक पहुंच जाती, और तू लड़की अगर हमारे बच्चो ने थोड़े मजे कर भी लिए तो तेरा क्या बिगड़ गया, तेरा कुछ चीन लिया क्या इन दोनों ने, तुझे भी तो मजा आया होगा न, दो दो राजकुमारों के साथ, राजकुमारों के साथ मजे ऐसे hi नहीं मिलते, तूने भी तो मजे लिए होंगे न, अब मजे करके क्यों शोर मचा रही ह, कुँअरि थी क्या,

काम्य की बात सुनकर लड़की बुरी तरह चौंक गई थी, उसकी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे, उसकी समझ में hi नहीं आ रहा था क्या करे,

लड़की- मैं महारज के पास जाउंगी,

बस यही गलती वो कर गई, तभी काम्य ने एक तलवार उठाई और लड़की के पेट में घुसा दी, लड़की जमीन में गिर क्र तड़पने लगी,

काम्य ने सैनिक को आवाज लगाई- इसे ले जाओ और जंगल जानवरो के लिए फेंक दो, सैनिक लड़की को उठा ले गया, और जंगल में ले गया,

काम्य- आगे से ख्याल रहे ऐसी कोई संशय यहाँ तक न आये, ये सब चुप क्र किया करो,

सूरज- बुआ मैंने तो चुप क्र hi किया था, ये अभिजीत का दिल भी इसी पैर आ गया, और चढ़ गया इसके उप्पेर, इसलिए ये यहाँ तक आ गई वर्ण चुप थी,

काम्य ने दोनों को अपने साइन से लगा लिया,

काम्य- मेरे बच्चे जवान हो रहे हैं, ये जवानी के मजे तो करेंगे hi,

वो लड़की जंगल में पड़ी हुई थी, उसके प्राण अब तक नहीं निकले थे, वो अपनी मोत के लिए तड़प रही थी, वो बेचारी मदद के लिए चीख भी नहीं प् रही थी, बस अपनी मोत का तड़प तड़प क्र इंतजार कर रही थी, तभी वह से ठेलता हुआ देवदूत गुजर रहा था, उसे जंगलो में घूमना, और शांति में रहना बहुत पसंद था, जंगल की शांति में किसी के करहाने की आवाज दूर तक आ रही थी, देवदूत उस तरफ चला गया, जब उसने सामने खून से लथपथ पड़ी हुई लड़की को देखा तो दौड़ क्र उसके पास पंहुचा,

देवदूत- कोण हो तुम क्या हुआ तुम्हे,

लड़की कुछ नहीं बोल प् रही थी, उसके अंदर इतनी ताकत hi नहीं बची थी की वो कुछ बोल सके, उसका बहुत ज्यादा खून बह चुक्का था, देवदूत ने उसे उठाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं था,

देवदूत- किसने किया ये तुम्हारे साथ, मुझे बताओ मैं उसे सजा दिलवाऊंगा,

लड़की ने अपनी पूरी ताकत इकठा करके सूरज और अभिजीत का नाम लिया, उन दोनों के नाम सुनकर देवदूत की आँखे बंद हो गई उसकी आँखों से आंसू निकल आये,

लड़की तड़पते हुए- मेरे माँ बाप, उनका कोई नहीं ह, वो मर जायेंगे,

इतना बोल क्र लड़की ने प्राण त्याग दिए, देवदूत की बहो में लड़की ने अपने प्राण त्याग दिए, मासूम से दिल वाला देवदूत उस लड़की दे दर्द से तड़प उठा, वो काफी देर तक ऐसे hi बैठा रहा, फिर उसने लड़की को अपनी गॉड में उठाया और महल की तरफ चल दिया, लेकिन महल के नजदीक पहुंचने से पहले hi कुछ सैनिक वह आ गए और देवदूत को उस लड़की को महल में ले जाने से रोक दिया, उन्होंने सेनापति को सब बता दिया, सेनापति तुरंत वह पंहुचा और देवदूत को समझने लगा की ऐसा कुछ न करे, पुरे राजय में राजमहल के लिए विद्रोह होने का दर ह,

देवदूत को मजबूर करके सेनापति राजा के पास ले गया एकांत में,

भवर सिंह- ये क्या हरकत थी देवदूत, क्या छाते हो तुम, हमारे राजय में विद्रोह करवाना छाते हो,

देवदूत- पिता जी एक लड़की की जान चली गई ह, उसे न्याय मिलना छाइये, उसके सतह गलत हुआ ह,

भवर सिंह- ये हम तय करेनेगे क्या हुआ क्या नहीं, तुम राजा नहीं हो समझे, अब जाओ यहाँ से और दुबारा ऐसा कुछ मत करना,

देवदूत दुखी हो वह से चला गया और अपनी माँ के पास पंहुचा,

देवदूत की आँखों में आंसू देख क्र निहारिका ने उसे सीने से लगा लिया,

निहारिका- क्या हुआ बीटा, तू ऐसे दुखी क्यों ह,

देवदूत ने साडी बात निहारिका को बताई,

निहारिका- बीटा संसार में सरे नियम परजा के लिए होते हैं, और उन नियमो को बनाना वाला राजा hi उन नियमो को नहीं मंटा, ये न्याय बस प्रजा के लिए होता ह, राजा को कोई सजा नहीं सुना सकता, और राजा के परिवार जो चाहे करे कोई विरोध नहीं कर सकता

देवदूत- ये तो गलत ह न माँ, मुझसे ये सहा नहीं जाता

निहारिका- तेरा मन बहुत साफ़ ह उसमे कोई गन्दगी नहीं ह, इसलिए तुझे दुसरो का दर्द दिखाई देता ह, लेकिन बाकि सब उस दर्द को देखना नहीं छाते,

तभी वह रीवा और अक्षरा आ गई,

अक्षरा- भैया क्या हुआ, मां जी बहुत क्रोधित हो रहे हैं, आपने कुछ किया ह क्या,

देवदूत- मैंने कुछ नहीं किया, वो तो

देवदूत सब बताने वाला था लेकिन निहारिका ने उसे रोक दिया,

रीवा- अरे किया hi होगा, हमेशा ऐसे hi कार्य करता ह जिससे पिता जी क्रोधित हो जाये, ये नहीं बदलने वाला,

अक्षरा- ऐसा क्यों बोल रही हो दीदी

रीवा- तू घूम इसके पीछे, इसके साथ रहेगी तो पिताजी तुझसे भी नाराज रहेंगे, इसे यही रहने दे माँ के अंचल में छुपे हुए,

निहारिका गुस्से में- रीवा ये क्या तरीका ह बात करने का, वो सबसे छोटा ह,

रीवा- ये हमेशा छोटा hi रहेगा, और तो इसके बास्की कुछ ह नहीं,

रीवा वह से चली गई अक्षरा भी चली गई, देवदूत आँखों में आंसू भरे बैठा रह गया, निहारिका अपने बेटे को देख क्र दुखी थी,

रात में महल के अंदर काम्य का जन्मदिवस मनाया जा रहा था, पूरा परिवार साथ बैठ क्र स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठा रहे थे, निहारिका सभी को भोजन परोस रही थी, राजा भवर सिंह का भोजन किसी नौकर के हाथो से नहीं बनवाया जाता था, उसे खुद कोई रानी बनती थी, और वही परोसती भी थी, और हमेशा ये काम निहारिका का hi होता, वो यहाँ सिर्फ नौकरानी बनकर रह गई थी, देवदूत पुरे परिवार से दूर बैठा हुआ था, भवर सिंह उससे नाराज था तो आज उसे परिवार के साथ बैठने तक की आज्ञा नहीं थी, सूरज ज्वाला अभिजीत तीनो खुश थे,

पुरे परिवार के अलग अलग समूह बने हुए थे, सूरज और अभिजीत हमेशा साथ रहते थे, ज्वाला सिंह उनके साथ तो रहता लेकिन वो जो भी गलत काम करता सब अकेले और चुप क्र करता था, वही अमिता और सोमिया हमेषा एक साथ रहती, रीवा उनमे शामिल होने की कोशिश करती ताकि सब उससे खुश रहे, अक्षरा देवदूत का साथ देने की कोशिश करती इसलिए उसे सब दूर रखने की कोशिश करते लेकिन हिम्मत किसी में नहीं थी क्योकि वो काम्य की बेटी थी, और काम्य से सभी डरते थे, और अक्षरा काम्य की सबसे लाड़ली थी,

इसलिए अक्षरा को अपने साथ रखना उनकी मज़बूरी थी, लेकिन देवदूत उसे कोई अपने साथ न रखता न hi कोई सम्मान देता, क्योकि उसकी माँ का hi कोई सम्मान नहीं करता था, इस राजय की सबसे खूबसूरत औरत राजय क्या इस समय धरती की सबसे खूबसूरत औरत थी निहारिका लेकिन यहाँ उसका कोई सम्मान नहीं था,

जब से देवदूत निहारिका के गर्भ में आया था उसके बाद से निहारिका और भवर सिंह के बिच कोई रिश्ता नहीं बना था, भवर सिंह कभी निहारिका के पास नहीं आते थे, जिस खूबसूरत औरत को पाने के लिए उसने राज गुरु तक की बात नहीं मणि आज उसे देखना भी पसंद नहीं करता था, जबकि उसके अंदर हमेशा हवस भरी रहती थी सौमित्र की वजह से,

भवर सिंह के भोजन कर लेने के बाद बाकि परिवार रह गया,

सूरज देवदूत से- आज तो बड़ी शिकायत कर रहा था, बड़ा आवाज आ गए तेरे गले में,

निहारिका- सूरज देव को परेशां मत करो,

अमरावती- तेरा बीटा राजा के पाश मेरे बेटे की शिकायत लेकर गया और तू बोल रही ह उसे परेशां मत करो, इसे तो कोड़े पड़ने चाहिए,

अमिता- शरीर लड़कियों जैसा कमजोर ह और हरकते भी चुगली करने की,

देवदूत- तुम जानते भी हो मैं क्या बोलने गया था, क्या हुआ था,

सौमित्र- तेरा क्या बिगड़ दिया था इन्होने,

निहारिका- देव बीटा तू भोजन कर चुप चाप

रीवा- तू चुप नहीं रह सकता क्या,

सोमिया- रीवा अपने भाई को चुप रखा क्र वर्ण तू हमारे साथ मत रहा कर,

रीवा- माँ अपने इसे पैदा hi क्यों किया, जब से ये पैदा हुआ ह, न आप सुखी हो न hi कोई और सुखी ह, ये पनोती ह

रीवा की बात पैर सब हसने लगे, देवदूत गुस्से में खाना छोड़ क्र उठ क्र चला गया,

निहारिका भी उसके पीछे चली गई,

अक्षरा- तुम सब उसके पीछे क्यों पड़े रहते हो, ये सब गलत ह

काम्य- बेटी तू इस सब से दूर रह, और उस मनहूस से भी दूर रह, वर्ण तेरे मां नाराज हो जायेंगे,

अक्षरा- लेकिन क्यों, उसने ऐसा क्या किया ह जिससे सब नाराज हो जायेंगे, जब से होश सम्हाला ह उसे hi अपमान झेलते देखा ह, मैंने तो उसे कभी कुछ गलत करते नहीं देखा, फिर किस बात की नाराजगी ह उससे,

अमरावती- उसका पैदा होना hi उसकी सबसे बड़ी गलती ह,

काम्य- तू ये सब छोड़ और अपनी जवानी के पालो का आनंद उठा,

इधर देवदूत अपने कमरे में लेता था दुखी, निहारिका उसके पास आई और उसका सर सहलाने लगी,

देवदूत- माँ मैंने क्या अपराध किया ह जो सब मेरा इतना अपमान करते हैं, मेरा शरीर नाजुक ह इसमें मेरी क्या गलती ह,

निहारिका- किसने कहा तेरा शरीर नाजुक ह, तू बस उन सबकी तरह कठोर नहीं ह,

देवदूत- मैं अपने पिता और भाइयो की तरह उतना लम्बा नहीं हु, मैं हमारे राजय में बहुत लोगो से छोटा हु, सभी मुझे छोटा राजकुमार बोलते हैं,

निहारिका- ऐसा नहीं ह देव, जो मिलता ह उप्पेर वाला सोच समझ क्र hi देता ह, मुझे देख ले मैं भी तो तेरी बड़ी माओ से छोटी हु, मेरी जितनी लम्बाई की औरते भी तो नहीं होती,

असल में निहारिका की लम्बाई 5 फिट 8 इंच और देवदूत की लम्बाई 6 फिट 5 इंच थी, लेकिन उस समय इंसानो की लेबिया 7 फिट के आसपास होती थी, और औरतो की 6 फिट के आस पास, इसलिए ये दोनों काम हाइट वाले मने जाते थे,

देवदूत- माँ ऐसा कब तह सेना पड़ेगा हमे,

निहारिका- जब तक नियति में लिखा हुआ ह, तू ये सब छोड़ तुझे भूक लगी होगी, तूने भोजन भी नहीं किया,

देवदूत- वो लोग मुझे भोजन करने hi कहा देते हैं,

निहारिका ने तुरंत अपना एक स्तन बहार निकला और देवदूत के मुँह से लगा दिया, 18 साल की उम्र में भी देवदूत निहारिका का दूध पिता था, और कमल ये था की जब से देवदूत पैदा हुआ था निहारिका दूध कभी बंद hi नहीं हुआ, दूध की वजह से उसके स्तनों में दर्द होने लगता था, इसलिए वो बचपन से hi देवदूत को दूध पिलाती आ रही थी, और कोई तरीका नहीं था दूध को निकलने का, अपने बेटे को पिलाना hi उसने भीतर समझा, और आज तक पिलाती आ रही थी, ये बात उसने कभी किसी को नहीं बताई, बहवर सिंह कभी उसके पास आया नहीं, देवदूत को भी आज तक इस बात का अहसास hi नहीं हुआ की क्या सही होता ह क्या गलत ह, अपनी माँ का दूध पीना गलत कैसे हो सकता ह, बस निहारिका ने उसे समझाया हुआ था की ये बात कभी किसी के सामने न बताये,

निहारिका के खूबसूरत दूध से भरे हुए शैतान के दर्शन आज तक सिर्फ देवदूत hi कर पाया था, लेकिन उसमे कोई हवस या गलत सोच नहीं थी,

देवदूत निहारिका का दूध पिटे हुए उसी से चिपक कर सो गया, देवदूत तो सो गया लेकिन निहारिका के अंदर जो गर्मी का उफान उठा हुआ था उसकी वजह से निहारिका को नींद नहीं थी, पिछले 18-19 सालो से निहारिका को भवर सिंह ने छुआ तक नहीं था, कोई भी औरत कब तक अपने अंदर की आग को दबा क्र रह सकती ह, देवदूत निहारिका के शैतान को चूसता ह तब निहारिका के अंदर की औरत जग उठती ह, देवदूत जब तक बच्चा था तो सब नार्मल था लेकिन अब वो जवान हो चुक्का ह, और जवान लड़का जब ऐसी दूध से बहरी हुई और प्यास में तदपि हुई औरत के शैतान को चुस्त ह तो औरत के अंदर क्या होता ह ये आप लोग समझ सकते हैं,

रात में सब सोये हुए थे वही राज गुरु के घर में तीन भाई बैठे हुए बाते कर रहे थे,

राज गुरु और उनके दो भाई सात्विक और भाविक,

राज गुरु – सात्विक तुम्हारे प्रयोग कहा तक पहुंचे,

सात्विक- भैया सब सही चल रहा ह, जल्दी hi सफलता मिल जाएगी,

बाविक- भैया आप कुछ परेशां लग रहे हैं,

राज गुरु – कुछ भयानक होने वाला ह, सरे ग्रह नक्षत्र यही दर्शा रहे हैं की कुछ भयंकर होने वाला ह,

सात्विक- हमारे राजा बलशाली हैं सक्षम हैं वो सम्हाल लेंगे,

राज गुरु – ये उनसे बहुत बड़ा ह, ऐसा कुछ ह जो किसी से नहीं सम्हलेगा,

भाविक- हमे क्या करना ह



राज गुरु- तुम दोनों को साडी ग्रहो को देखना ह और जो घटनाये आस पास घाट रही हैं उन पैर नजर रखनी हैं, कुछ भी अलग होता ह मुझे बताना ह,
 
अपडेट- 2



सुबह सुबह देवदूत महल से बहार पास के गाओं की तरफ निकल गया था घूमने, रस्ते में एक बहुत hi खूबसूरत लड़की उसके सामने आकर कड़ी हो गई,

देवदूत- कस्तूरी तूने मेरा रास्ता क्यों रोका,

ये ह कस्तूरी, उम्र 19 साल






देवदूत की सच्ची दोस्त, देवदूत निहारिका के अलावा सिर्फ इसी से बात करना पसंद करता ह, ये महल के आचार्य की बेटी ह, बचपन में जब सभी बच्चे आचार्य के पास शिक्षा लेने आते तो वही कस्तूरी से देवदूत की दोस्ती हो गई, कस्तूरी की एक बहन ह सुगंधा, उम्र 20 साल,





कस्तूरी- अब तू मिलने क्यों नहीं आता, पिता जी भी हमेशा तेरी प्रतीक्षा करते रहते हैं, तू आता hi नहीं,

देवदूत- समय hi नहीं मिलता,

कस्तूरी- है है तुझे बहुत राज महल के काम काज करने हैं, कोई तुझसे कुछ करवाता भी ह,

कस्तूरी की बात से देवदूत का मुँह उतर गया, कस्तूरी समझ गई वो दुखी ह,

कस्तूरी- अछ्हा माफ़ कर दे गलती हो गई, चल मेरे साथ पिता जी से मिलते हैं,

देवदूत कस्तूरी के साथ चला गया, वह एक बुजुर्ग आचार्य जी बच्चो को पढ़ा रहे थे, देवदूत ने उनके पेअर छुए और आशीर्वाद लिया, देवदूत की आवाज सुनकर सुगंधा अंदर से डोडी हुई आई, और साथ में उसकी माँ भी,

आचार्य- कैसे हो राजकुमार, बहुत दिन बाद इधर आये हो,

देवदूत- आचार्य जी आप तो राजकुमार मत बोलिये आप तो देवदूत hi बोलिये,

आचर्य- सच कहु बीटा मैंने आज तक तेरे जैसा होनहार बच्चा नहीं देखा, मैंने बहुत राजकुमारों को बहुत से बच्चो को शिक्षा दी ह लेकिन तुमसे होनहार कोई नहीं था,

देवदूत- ये बस आपको hi दिखा आचार्य जी, मेरे अपनों को नहीं,

कस्तूरी- तू हमेषा चिंता में रहता ह, जीवन को आनंद में जिया कर,

वही सुगंधा देवदूत के लिए खाने के लिए ले आई, वो देवदूत के पास कड़ी होकर उसे निहारने लगी, उसकी आँखों में देवदूत के लिए प्यार साफ़ दिख रहा था, सुगंधा की माँ भी ये महसूस कर रही थी,

कुछ देर देवदूत के वह रुकने के बाद वो वह से निकल गया अपने एकांत की तरफ, उसके जाते hi,

कस्तूरी की माँ- तुम तीनो बाप बेटी इस लड़के लिए इतने पागल क्यों हो, उसका अपने परिवार में कोई सम्मान नहीं ह, लेकिन तुम तीनो ऐसा समझते हो जैसे अगला राजा वही होगा,

कस्तूरी- माँ वो राजा का बीटा ह फिर भी इतना साधारण ह, उसके अंदर न कोई घमंड न hi किसी से नफरत ह, वो ह hi ऐसा जिससे सब पसंद करे,

कस्तूरी की माँ- तुम दोनों इतनी खूबसूरत हो, तुम अपना धयान किसी सेनापति के बेटे पैर या बड़े राजकुमारों पैर लगाओ ताकि तुम दोनों का भविष्य रानियों की तरह गुजरे,

आचर्य- मेरी बेतिया किसी बिगड़े हुए राजकुमारों की दसिया बन क्र नहीं जियेंगी

कस्तूरी की माँ- दासी बनने के लिए नहीं पत्नी बनने के लिए बोल रही हु,

सुगंधा- माँ राजाओ की पत्नी दसियो से काम कहा होती हैं,

कस्तूरी माँ- तुम्हे कुछ नहीं पता, मेरे जैसा जीवन मत जियो वर्ण साडी जिंदगी ऐसे hi गुजरा करना पड़ेगा,

कस्तूरी और सुगंधा की माँ बड़बड़ाती हुई अंदर चली गई, दोनों बहेनो के अपनी माँ की बात है क्र ताल दी,

वही महल में राजगुरु भवर सिंह के पास बैठे हुए थे, और उसे आने वाले खतरे के लिए आगाह कर रहे थे,

भवर सिंह- राज गुरु ये किस तरह का खतरा ह हमारे राजय को,

राजगुरु- महाराज, अब तक पूरी जानकरी तो मैं नहीं निकल पाया हु, लेकिन हमे महल की सुरक्षा बढ़ानी पड़ेगी,

भवर सिंह- राजगुरु क्या हमारी ताकत उस लायक नहीं की हम किसी खतरे से लड़ सके,

राज गुरु – महाराज इस संसार में अनेको शक्तिशाली लोग हुए हैं, लेकिन सभी का अंत तो हुआ hi ह,

भवर सिंह- राज गुरु कुछ ऐसा कीजिये जिससे हम हमेशा जीवित रह सके,

राजगुरु- ये कैसा सवपन देख रहे हैं महाराज, आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ ह, ये संभव hi नहीं ह,

भवर सिंह- क्यों संभव नहीं ह, कभी किसी ने कोशिश नहीं की होगी, आप इतने बड़े ज्योतिष के ज्ञाता ह, आप इतने बड़े वैद हैं आपको तो सब जानकरी होगी,

राजगुरु- महाराज किसी को सवस्थ करना और उसका भविष्य की झलकियां देखने से किसी को अमर नहीं बनाया जा सकता,

भवर सिंह- आप कोशिश कीजिये, कुछ तो ऐसा होगा जिससे मैं अमर हो सकू,

राजगुरु सोच में दुब गए, उनके दिमाग में काफी हलचल हो गई, किसी राजा का ऐसा सवपन देखना अपने आप में hi विनाश का कारन ह, राजा का मोह अपने जीवन के लिए बहुत बढ़ता जा रहा ह,

राजगुरु अपने घर लोट आये और सात्विक और भाविक से इस बारे में चर्चा की,

सात्विक- हमे इस पैर विचार करना चाहिए, अगर राजा नाराज हो जायेंगे तो हमे भी दंड दे सकते हैं,

भाविक- भैया उन्हें समझाना होगा, ऐसे विचार त्याग दे,

राजगुरु- मैं कोशिश करूँगा उन्हें समझा सकू फिर भी तुम दोनों इसकी खोज शुरू करो, इसमें क्या हो सकता ह,

बड़े भाई की आज्ञा hi उनके लिए सबसे पहले था दोनों इस काम में लग गए,

वही महल में सूरज और अभिजीत बैठे हुए थे,

सूरज- कोई मदमस्त जवान लड़की चाहिए, आज बहुत मन ह सम्भोग का,

अभिजीत- तो चलो किसी गाओं में घूम आते हैं कोई तो मिल जाएगी,

सूरज- अभिजीत मेरा मन किसी बहुत hi खूबसरूआत औरत का शिकार करने का ह,

अभिजीत- जितनी मुझे जानकारी ह, महाराज की तीसरी पत्नी निहारिका से खूबसूरत औरत इस पुरे राजय में नहीं ह,

सूरज- क्या बोल रहे हो, वो हमारी माँ जैसी लगती हैं,

अभिजीत- माँ तो नहीं ह न, और सुना ह महाराज उनके पास नहीं जाते उन्हें भी जरुरत तो होगी hi न,

अभिजीत की बात सूरज के दिमाग में घूम गई, वही अभिजीत के चेहरे पैर एक खतरनाक मुस्कराहट आ गई थी,

वही काम्य अपने कमरे के बहार बने चौबारे में खिली हुई धुप में बिलकुल नंगी होकर लेती थी, 3 औरते उसकी मालिश कर रही थी, काम्य का हर रोज का था, नहाने से पहले वो मालिश जरूर करवाती थी, उसका नंगा बदन वो भी धुप में तेल की वजह से चमक मर रहा था,

एक दासी- महारानी आपसे खूबसूरत शरीर इस संसार में किसी का नहीं होगा,

दूसरी दासी- लेकिन वो निहारिका, वो कितनी खूबसूरत ह, उस पैर तो उम्र का असर दीखता hi नहीं ह,

काम्य ने तुरंत एक थप्पड़ उस दासी को मर दिया,

काम्य- रंडी उसकी तारीफ करती ह मेरे सामने,

दासी- माफ़ करना महारानी,

काम्य- फिर से ऐसी गलती न हो,

काम्य नंगी hi उठी और कमरे के अंदर चल दी, उसकी चूचिया उसके चलने से उछाल रही थी, और गांड किसी मोरनी की तरह घूम रही थी, तभी कमरे में उसके पति कुणाल सिंह आ गया, काम्य को नंगा देख क्र एक पल के लिए ठिठक गया, कुणाल को वह देख क्र दसिया सर झुका क्र जाने लगी, तभी काम्य ने उसे रोका,

काम्य- यही कड़ी रहो और देखो मेरे पास क्या ह जो उस निहारिका के पास नहीं ह,

काम्य आगे बढ़ी और कुणाल के कपडे उतरने लगी, कुणाल उसे रोकना छटा था लेकिन काम्य जब जींद पैर होती ह उसे कोई नहीं रोक सकता, कुणाल उन दसियो के सामने झीखक रहा था, काम्य ने कुणाल को बिलकुल नंगा कर दिया, कुणाल एक सूंदर शरीर का मालिक था, लेकिन उसका लुंड आज के नार्मल इंसान जैसा hi थी लगभग 7 इंच, जो शायद आज के समय में तो काफी बड़ो में आता ह लेकिन उस समय ये छोटे हतियारो में गिना जाता था,

कुणाल के लुंड को देख क्र दसियो की हसी निकल गई, लेकिन काम्य के गुस्से से दर क्र उन्होंने अपनी हसी को रोक लिया,

काम्य कुणाल को बिस्टेर पैर लिटा क्र उस पैर चढ़ गई और अपने हाथ से लुंड पकड़ क्र अपनी छूट में घुस लिया, लुंड एक बार में hi पूरा छूट में घुस गया, काम्य उसके उप्पेर कूदने लगी,

काम्य- ये सुख ह उस निहारिका के पास, मैं महारानी हु और वो दासी, और दासी की सुंदरता किसी काम की नहीं होती, वो बरसो से प्यासी ह और प्यासी hi रहेगी,

काम्य बहुत जोश में कूद रही थी, काम्य का ये जोश कुणाल बर्दास्त नहीं क्र पाया और कुछ hi देर में उसकी हालत ख़राब हो गई, उसका शरीर कपङे लगा वो काम्य को रोकना छटा था लेकिन काम्य पैर जूनून सवार था, अब कुणाल के लिए मुसीबत हो गई थी, एक तो काम्य अभी शांत नहीं हुई थी और कुणाल झड़ने वाला था दूसरा काम्य के अंदर झड़ना मतलब अपनी मोत को दावत देना था, काम्य का नियम था उसके अंदर नहीं झड़ना,

कुणाल से जब रुकना नामुमकिन हो गया तो उसने जबरदस्ती काम्य को अपने उप्पेर से धकेला और अह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhhh करके लुंड की धार मरने लगा, काम्य बिस्टेर से निचे गिर गई, हवस और गिरने की वजह से उसका गुस्सा सातवे आसमान पैर पहुंच गया, इधर उन दासी के चेरे पैर हसी थी जिसे वो बड़ी मुश्किल से दबाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उनकी किस्मत ख़राब थी काम्य ने वो मुस्कराहट देख ली और गुस्से में तलवार उठा क्र उस दासी को गार्डन पैर वॉर क्र दिया जिसने निहारिका को सूंदर बताया था,

बाकि दोनों दसिया तुरंत काम्य के पैरो में गिर गई,

काम्य- उठो और मुझे शांत करो, वर्ण तुम दोनों भी ऐसे hi यहाँ तड़प रही होगी, दोनों दसिया तुरनत काम्य को बिस्टेर पैर ले गई और काम्य की टैंगो को खोल क्र उसकी छूट को चाटने लगी, दूसरी काम्य की चुच्यो को चूसने लगी, उनकी आँखों में आंसू थे, अपने सहेली को मोत से तड़पते देख क्र और अपनी मोत के दर से उनका शरीर कैंप रहा था, लेकिन फिर भी वो जल्दी से जल्दी काम्य को शांत करने में लगी हुई थी, इधर कुणाल ने शर्मिंदा सा होकर अपने कपडे पहने और चुप चाप बहार निकल गया, काम्य को उन दोनों दसियो के साथ और तीसरी दासी को तड़पते हुए छोड़ क्र,

वही अमरावती अपने बेटे सूरज के साथ अपने कमरे में बैठी हुई थी,

अमरावती- सूरज अब तुम जवान हो चुके हो, राजय के कार्यो में हाथ बताओ महराज का, अगर तुम ये सब हरकते करोगे तो परजा तुम्हे अगला राजा कैसे मानेगी, राजा बनने के बाद परजा तुम्हारा विरोध नहीं करेगी लेकिन जब राजा बनाया जाता ह तो उससे पहले परजा के बिच तुम कैसे हो ये सभी देखते हैं,

सूरज- माँ इसमें मेरी गलती नहीं ह, मैंने सब शांति से किया था, लेकिन वो अभिजीत उसने सब किया, मेरे साथ करने से तो वो चुप रह गई थी लेकिन अभिजीत की वजह से उसने विद्रोह क्र दिया,

अमरावती- इस राजय की हर लड़की पैर तुम्हारा अधिकार ह तुम राजा के बेटे हो और अगले राजा भी हो, लेकिन अभी तुम्हे अपनी पहचान बनानी ह, इसलिए थोड़ा ख्याल रखो और इस अभिजीत से सम्हाल कर रहो, ये अपनी माँ जैसा शातिर ह, शादी के बाद भी इसकी माँ यहाँ पड़ी हुई ह, अपने भाई की लाड़ली बानी हुई ह और पुरे राजय पैर आदेश चलती ह,

सूरज- जिस दिन मैं राजा बना उस दिन बुआ और उसके परिवार को सबसे पहले बह्गाउंगा,

अमरावती- शाबाश बीटा, और इस ज्वाला और उसकी माँ सौमित्र को भी ख़तम करना, इस सौमित्र की वजह से तुम्हारे पिता हमसे मिलने तक नहीं आते,

सूरज- उस सौमित्र को तो मैं दासी बनूँगा, आपके सरे काम किया करेगी

अमरावती- और वो निहारिका

सूरज- uuufffffffffff माँ किसका नाम ले लिया, उसे तो मैं अपनी रखैल बनूँगा, ऐसी औरत मिलना दुर्लभ ह,

अमरावती एक पल के लिए चीड़ सी गई निहारिका की तारीफ सुनकर लेकिन खुश भी हो गई, उसका बीटा निहारिका को रखैल बनाएगा,

अमरावती- न जाने सरे मर्द उसके पीछे hi क्यों पड़े रहते हैं,

सूरज- माँ उस औरत में कुछ तो जादू ह, जब भी उसे देखता हु तो जवानी जोर मरने लगती ह,

अमरावती- शर्म क्र अपनी माँ के सामने ऐसी बात कर रहा ह, और दूसरी औरत की तारीफ क्र रहा ह,

सूरज- माँ उससे आपकी भी सेवा करवाऊंगा, और उसके बेटे से घोड़ो की सेवा करवाऊंगा,

दोनों माँ बीटा अपने आप में hi खुश हो रहे थे,

वही अमिता सोमिया रीवा और अक्षरा राजय में घूमने निकली हुई थी, राजय की सबसे खूबसूरत लड़किया राजय में घूम रही थी, उन्हें देखने के लिए राजय का हर मर्द और लड़का पलके बिछाये खड़ा था,

मर्द आज के हो या किसी भी युग के, उनके सामने खूबसूरत लड़की आये तो अपने नजरो की हवस को छुपा नहीं पते, चाहे उनके सामने कोई महारानी हो या नौकरानी,

ऐसी hi हालत यहाँ के मर्दो की थी, हर किसी के मन में बस उन लकड़ियों को पाने की चाहत थी, उन लड़कियों के साथ सैनिक भी थे, वैसे भी सूरज ज्वाला और अभिजीत की वजह से राजमहल की औरतो के लिए भी लोगो में गुस्सा था, सबको पता था ये तीनो राजय की औरतो लड़कियों के साथ क्या करते हैं, इसलिए पुरे राजय के मर्द महल की औरतो के वही सब करना छाते थे, लेकिन डरते थे,

इधर लड़किया भी जवान हो चुकी थी उनके अंदर भी सम्भोग की िछाये उठने ागि थी, उन्हें मर्दो की नजरो में दिखने वाली हवस में अब सकूं सा मिलने लगा था,

जब कोई लड़की जवानी में कदम रखती ह तो वो अपने शरीर को छुपाती ह लेकिन जब वो पूरी जवान हो चुकी होती ह तो उसी शरीर को दिखने लगती ह, जब तक उसे कोई ऐसा मर्द नहीं मिलता जो उसकी जवानी को अच्छे से शांत क्र सके तब तक उसके दिल के साथ साथ शरीर भी मर्दो को देख क्र रोमांचित हो उठता ह, वही हालत इन सबकी भी थी, इनमे रीवा ऐसी थी जिसके दिल में किसी मर्द के लिए कोई भी भावना नहीं आती थी, लेकिन बाकि तीनो को मर्दो की आँखों से निहारे जाने में मजा आता था,

एक बग्गी पैर चढ़ क्र सभी घूम रही थी और बाते कर रही थी,

अमिता- देखो वो सब मर्द हमे कैसी नजरो से देख रहे हैं, अगर उन्हें मौका मिल ए तो अभी हम पैर टूट पड़े,

सोमिया- हम उनकी पहुंच से बहुत दूर हैं, वो सब सपने hi देख सकते हैं,

अमिता- पिताजी हमारी शादी क्यों नहीं करते, जब हमारी माये हमारी उम्र की थी तो हम पैदा हो चुके थे, और हमने अब तक जवानी का पहला सावन भी नहीं देखा, अब बर्दास्त नहीं होता, अगर पिता जी ऐसे hi देर करते रहे कही हम अपना कौमार्य ऐसे hi किसी सैनिक को न सौंप दे,

अक्षरा- क्या बोल रही हो दीदी, चीई

सोमिया- क्यों तेरा दिल नहीं करता क्या,

अक्षरा- करता तो ह लेकिन इस लोगो के साथ ची नहीं, मेरा राजकुमार तो कोई अलग hi होगा, इतना ताकतवर की दुनिया उसके सामने झुक जाये,

अमिता- रीवा तू बड़ी चुप ह तुझे जरुरत नहीं ह क्या,

रीवा- नहीं दीदी मेरे मन में ऐसी भावनाये नहीं आती किसी के लिए, शरीर को जरुरत होती ह लेकिन दिल में कभी नहीं आता की मैं किसी की तरफ आकर्षित हो जाऊ,

सोमिया- अपनी माँ पैर गई ह न, जैसे वो इतने वर्षो से बिना पति के जी रही ह ऐसे hi ये भी ह, उन्हें भी पति की जरुरत नहीं ह और इसे भी मर्द की जरुरत नहीं ह, कही दोनों माँ बेटी एक साथ तो नहीं कर लेती, हहहहहहहह

सोमिया की बात पैर तीनो है पड़ी, लेकिन रीवा के चेहरा शर्म से झुक गया, वो जवाब देना चाहती थी लेकिन कही उसकी भेने उससे नाराज न हो जाये इसलिए चुप रह गई,

तभी बग्गी रुक गई, सबका धयान उधर गया तो सामने एक बुजुर्ग औरत कड़ी थी,

अमिता बग्गी चलने वाले से- क्या हुआ

बाघी वाला- राजकुमारी वो औरत रास्ता रोक क्र कड़ी ह,

सोमिया- क्या अब कोई भी हमारा रास्ता रोक खड़ा हो जायेगा क्या,

रीवा- एक बार बात सुन लेते हैं, शायद कोई संशय हो,

अमिता- शंश्य होगी तो महाराज से बोले, हमे रोकने का क्या मतलब, सैनको हटाओ इसे, और कोड़े मारो राजकुमारियों का रास्ता रोकने के लिए,

सैनिक तुरंत आगे बढे और औरत को दूर धकेल दिया, वो औरत रट हुए हाथ जोड़ क्र आगे बढ़ी,

औरत- राजकुमारी मेरी गुहार सुनिए, मेरी प्राथना सुनिए, मेरी बेटी लापता ह, मेरी प्राथना सुनिए,

लेकिन उसकी सुनने वाला वह कोई नहीं था, सैनिक ने फिर से धकेला और उसे लात मरी जिससे वो दूर जाकर गिरी तभी वह देवदूत आ गया और उसने उस औरत को पकड़ लिया,

देवदूत- सैनिक ये क्या तरीका, किसी औरत पैर हाथ उठाना hi तुम्हारी मर्दानगी ह,

सैनिक- राजकुमार मुझे राजकुमारियों ने आदेश दिया था,

अमिता- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे दिए आदेश के बिच में आने की,

देवदूत- बिना अपराध के सजा देना, ये कैसा आदेश ह

अमिता- उसने हमारा रास्ता रोका

देवदूत- परजा का अधिकार होता ह राजमहल के लोगो से बात करने का, अगर वो महल तक नहीं आ पते तो हमारी जिम्मेदारी ह उनके पास तक जाये,

अमिता- तुम मेरा अपमान कर रहे हो, इसकी सजा तुम्हे पिता जी देंगे,

अमिता ने बग्गी को आगे बढ़ने का आदेश दिया, देवदूत ने उस औरत को आराम से बैठाया और पानी पिलवाया,

देवदूत- अम्मा क्या हुआ क्या संशय ह मुझे बताओ,

औरत- तुम्हे क्या बताऊ राजकुमार तुम्हारी बात तो तुम्हारी भेने भी नहीं सुनती फिर राजा कैसे सुनेंगे, पहले अपनी पहचान बनाओ फिर किसी की मदद करना, तुम्हरी वजह से अब राजकुमारी भी मेरी बात नहीं सुनेगी,

देवदूत को बड़ा आश्चर्य हुआ, वो उस औरत की सहायता कर रहा था लेकिन ये उल्टा उसे hi कोष रही ह, औरत उठी और अपने घर की तरफ चली गई, देवदूत वही खड़ा रह गया, फिर वो भी दुखी होकर महल में लोट आया, महल में पहुंचते hi उसके पास बुलावा आया की महाराज ने उसे बुलाया ह,

देवदूत महाराज के सामने पंहुचा तो वह अमिता सोमिया रीवा अक्षरा और उनके साथ थी अमरावती,

भवर सिंह कड़क आवाज में- देवदूत तुमने राजकुमारी का अपमान किया आज वो भी परजा के सामने

देवदूत- नहीं महाराज मैंने अपमान नहीं किया, उन्होंने एक औरत को सजा दी वो भी बस इस बात के लिए की उस औरत ने इनका रास्ता रोक क्र अपनी बात खेनि चाही, मैंने बस इनसे कहा की बिन अपराध के सजा क्यों दे जाये,

अमिता- मैंने उससे कहा था की अगर कोई बात खेनि ह तो महाराज के पास जाओ लेकिन वो तो हमे hi रोकना छाती थी, मुझे उसकी कोई चल लगी इसलिए मैंने उसे रस्ते से हटवाया,

अमिता साफ़ झूट बोल गई, लेकिन उसकी बात का समर्थन करने के लिए सोमिया और रीवा ने हामी भर दी, अक्षरा दर से चुप रह गई, देवदूत को झूठा साबित क्र दिया गया,

भवर सिंह- देवदूत तुम्हारी ये सजा ह तुम अगले 15 दिन के लिए महल से बहार रहोगे और राजगुरु के घर रह क्र उनसे कुछ सीखोगे,

देवदूत ने चुप चाप वो सजा मान ली, वो खुद महल से दूर रहना छटा था लेकिन उसे अपनी माँ से दूर रहना था ये hi दुःख था बस,

रात में देवदूत अपनी माँ की गॉड में सर रख क्र लेता हुआ था,

देवदूत- माँ लोग ऐसे क्यों होते हैं,

देवदूत ने आज की हुई साडी घटना निहारिका को बताई,

निहारिका- बीटा लोग ताकत के सामने झुक जाते हैं, लोग उसी को सम्मान देते हैं जो उनसे ताकतवर होता ह, जो इस दुनिया को झुका सकता ह वही इस दुनिया पैर राज कर सकता ह वो अच्छा ह या बुरा इससे लोगो को कोई फरक नहीं पड़ता, उन्हें फरक पड़ता ह की वो उनके काम आ सकता ह या नहीं, और इस समय महाराज अच्छे ह या बुरे किसी को फरक नहीं पद रहा, वो उनकी मदद कर सकते हैं चाहे उसके बदले में वो लोगो से उनका सब कुछ चीन ले, और उसी रस्ते पैर महाराज के सभी बच्चे चल रहे हैं,

देवदूत- आपने मुझे वो रास्ता क्यों नहीं सिखाया, आपने मुझे सबका दर्द देखना क्यों सिखाया

निहारिका- क्योकि मैं तुझे उनके जैसा नहीं बनाना चाहती, तू मेरा बीटा ह तेरे अंदर प्यार दया दुसरो की सहायता करने की हिम्मत होनी चाहिए, संसार को तेरे जैसे लोगो की बहुत जरुरत ह, लेकिन है जब अत्याचार अपनी चरम सीमा पैर पहुंच जाये तो उसे रोना भी जरुरी ह,

देवदूत- माँ मुझे राजगुरु के पास जाने की सजा मिली ह,

निहारिका- इसमें तेरा hi कुछ भला होगा बीटा, उप्पेर सब कुछ सोच क्र hi करवाता ह,

देवदूत राज गुरु के पास जाने की तैयारी क्र रहा था वही जब ये खबर राजगुरु को मिली तो वो काफी परेशां हो गए,

भौमिक- भैया आप कुछ परेशां लग रहे हैं,

राज गुरु- महाराज का छोटा बीटा देवदूत उसे सजा मिली ह 15 दिन मेरे पास रहने की

भौमिक- तो इसमें क्या परेशानी ह

राज गुरु- सजा उसे नहीं मुझे मिली ह, उसका यहाँ आना मेरे लिए सजा ह,

भौमिक- ऐसा क्यों,

राजगुरु- ये लड़का और इसकी माँ, कुछ अजीब ह इन दोनों में, मैं कितनी भी कोशिश कर लू लेकिन इनके बारे में कुछ नहीं जान पता, सिर्फ इस बात के की ये महाराज के लिए ठीक नहीं ह,

भौमिक- आप इसे मेरे पास रहने दीजिये, मैं इसे सम्हाल लूंगा

राजगुरु- ठीक ह, तुम hi देखो इसे, और तुम्हे कुछ जानकारी मिली उस बारे में जो मैंने ढूंढ़ने को कहा था,

भौमिक- अब तक तो नहीं, मैंने आर्युवेद की सभी औषधियों के बारे में जानकरी निकली लेकिन ऐसी कोई औषधि नहीं ह जो इंसान को अमर क्र सके, किसी को लम्बे समय तक जिन्दा रखा जा सकता ह लेकिन अमर नहीं बनाया जा सकता,

राजगुरु- ये बात महाराज को कैसे समझौ, वासी सात्विक कहा ह, आज दिखाई नहीं दिया,

भौमिक- वो भी खोजने में hi लगे हुए हैं, बोल रहे थे उनके कुछ मित्र हैं जिनसे वो जानकरी निकालेंगे,

राजगुरु- आज कल सात्विक कुछ शांत सा रहता ह, उसके सवभाव में भी कुछ बदलाव आ रहे हैं, तुम्हे कुछ बताता ह क्या, उसकी पत्नी ने बताया की वो घर भी नहीं जाता काफी दिन तक, कहा जाता ह,

भौमिक- पता नहीं भैया मैंने इस बात पैर धयान नहीं दिया, आप कहे तो जानकरी निकलू

राजगुरु- नहीं नहीं कही उसे ये न लगे की मैं उस पैर शंका कर रहा ह, मेरा वहां हो सकता ह, सुबह देवदूत आ जायेगा, मैं उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा, अब तुम जाओ और आराम करो,

भौमिक चला गया,

अगले दिन देवदूत पहुंच गया राजगुरु जी की सेवा में, उन्होंने उसे भौमिक के पास भेज दिया, जब देवदूत भौमिक के सामने पंहुचा, ये इन दोनों का पहेली बार आमना सामना था, आज से पहले राजगुरु के भाई कभी राजा के अलावा उनके परिवारों से नहीं मिले थे,

देवदूत को देखते hi भौमिक उसे गोर से देखने लगे, भौमिक लगातार देवदूत को देखे जा रहे थे, देवदूत हाथ जोड़ क्र उनके सामने खड़ा था, एक भोली सी मुस्कान के साथ, चेरे पैर मासूमियत आँखों में भोलापन, शरीर का आकर एक मर्द का लेकिन चेरे और हाथो की त्वचा बिलकुल किसी लड़की की तरह चमकदार और मुलायम दिख रही थी,

देवदूत- प्रणाम गुरु जी

भौमिक होश में आये,

भौमिक- गुरु जी, मैं तुम्हारा गुरु नहीं हु,

देवदूत- आप राजगुरु के भाई ह, वो पुरे राजय के गुरु हैं, आप भी उनकी तरह विद्वान हैं तो आप भी गुरु hi हुए न,

भौमिक- काफी समझदार हो,

देवदूत- बताइये मुझे क्या करना होगा,

भौमिक- अष्धियो के बारे में क्या जानते हो,

देवदूत- थोड़ा बहुत, जिनसे साधारण बीमारियों का इलाज किया जा सके,

भौमिक- तो मेरे साथ चलो इन 15 दिन तुम मेरे साथ औषधियों के बारे में जानोगे, सब कहते हैं तुम्हारा शरीर युद्ध करने योग्य नहीं ह, लेकिन युद्ध सिर्फ हतियारो से नहीं लड़ा जाता, युद्ध में घायल योद्धाओ को औषधि भी दी जाती ह, तुम युद्ध में लड़के न सही लेकिन किसी को बचने के काम तो आ hi सकते हो,

देवदूत- मैं युद्ध कर सकता हु, लेकिन बचपन से मुझे युद्ध कला से दूर रखा गया ह, उसका कारन मैं नहीं जनता, आज तक किसी ने न मेरी ताकत को परखा ह न hi मुझे हतियार उठाने दिए हैं, बस शिक्षा दी ह, मेरे तीनो भाई युद्ध कला में निपुण्ड हैं,

भौमिक- हो सकता ह महाराज को तुम्हारी चिंता हो,

देवदूत- ये कैसी चिंता की मुझे खुद का रक्षा करना भी नहीं सिखाया गया,

भौमिक- अगर तुम्हे किसी ने नहीं सिखाया तो तुम खुद सिख लो, युद्ध कला सिर्फ युद्ध में काम आती ह लेकिन जब खुद की जान पैर आती ह तो अपनी hi ताकत काम आती ह, और जिसके पास ताकत होती ह उसके सामने कोई कला काम नहीं करती,

देवदूत- मुझे नहीं पता मेरे अंदर क्या ह, मैं ऐसा हु तो क्यों हु,


भौमिक- हम पता क्र लेंगे, आओ पहले कुछ जल पैन कर लो,
 
नेटवर्क इतने ख़राब ह की एक एक रिप्लाई करने में घंटो लग रहे हैं,
 
अपडेट-3




महल में अमिता अपनी माँ अमरावती के पास बैठी हुई थी,

अमिता- माँ मेरी शादी कब होगी,

अमरावती- तुझे बड़ी जल्दी हो रही ह शादी की,

अमिता- माँ मेरी उम्र हो गई ह, आपकी शादी भी तो जल्दी hi हो गई थी फिर मेरी क्यों नहीं हो रही,

अमरावती- तेरे लायक कोई राजा या राजकुमार नहीं मिल रहा महाराज को,

अमिता- तो मेरा स्वंवर रखवा दीजिये न, मैं खुद पसंद क्र लुंगी,

अमरावती- स्वंवर बस नाम के लिए होता ह, उसमे लड़की के माता पिता hi बताते हैं किसे अपना पति चुनना होता ह, जिद दिन महाराज को तुम्हारे योग्य लड़का मिल जायेगा वो बता देंगे, तब तक तू खुद पैर सयम रखना, अपना खजाना ऐसे hi मत लुटवा देना, अगर तेरे पति को पता चला तेरा कौमार्य भांग हो चुक्का ह तो राजाओ के युद्ध हो जायेंगे और बहुत बदनमी भी होगी,

अमिता- मतलब जब तक पति न मिले मैंने ऐसे hi तड़पती रहूंगी, आप पिता जी से कहिये जल्दी से मेरी शादी करवाए, अगर कुछ उच्च नीच हो गई तो फिर मुझे दोष मत देना,

अमरावती ने अपना माथा पकड़ लिया,

शाम को जब भवर सिंह अमरावती के पास आया तो अमरावती ने सबसे पहले अमिता की शादी की बात की और समझाया की उनकी बेटी अब बहुत बड़ी हो चुकी ह,

भवर सिंह- अमिता hi नहीं बाकि दोनों लड़किया भी अब बड़ी हो चुकी हैं, और काम्य की बेटी भी शादी लायक हो चुकी ह, मैं सोच रहा हु सभी की शादी एक साथ क्र दी जाये, इससे राजय का खर्च भी काम होगा, बार बार खर्चा नहीं करना होगा, मैंने कुछ राजकुमारों और राजाओ को देखा ह शादी के लायक, मैं उन्हें खबर भिजवाता हु, और एक स्वम्वर का आयोजन करता हु,

अमरावती- जब आपने देख hi रखे हैं तो स्वंवर की क्या जरुरत ह,

भवर सिंह- अगर स्वंवर नहीं होगा तो आस पास के ताकतवर राजा नाराज हो जायेंगे, जो हमारे राजय के लिए अच्छा नहीं ह, और उसी के साथ मैं सोच रहा हु की, ऐसा करो तुम पुरे परिवार को बुलवाओ,

अमरावती- आप क्या सोच रहे ह मुझे तो बताइये,

भवर सिंह- पहले सबको सभा में बुलवाओ फिर वही बताता हु,

अमरावती के मन ने शंका आ गई, लेकिन महाराज का आदेश था तो मन्ना hi था, अमृता ने सबके पास खबर भिजवा दी,

कुछ hi समय में पूरा परिवार महाराज के कमरे के बहार सभा करने के लिए एक कमरे में इकठा हो गए, देवदूत वह था hi नहीं, निहारिका एक कोने में कड़ी हो गई,

काम्य- क्या बात ह भैया सबको इस तरह यहाँ बुलाया

भवर सिंह- मैंने कुछ फैसले लिए हैं, और पहला फैसला ये ह की कुछ hi समय में चारो लड़कियों का स्वंवर होगा, और कुछ राजाओ को मैंने चुना हुआ ह उनके बारे में तुम्हे जानकारी मिल जाएगी, तो उन्हें hi चुनना स्वंवर में,

स्वंवर का नाम सुनकर अमिता और सौमित्र के दिल ख़ुशी से झूमने लगे, लेकिन रीवा के मन में हलचल सी हो गई, वो शादी के नाम से hi विचलित हो जाती थी, अक्षरा अभी जीवन को ख़ुशी से जीना छाती थी,

काम्य- भैया इतनी जल्दी शादी का ैस्ले

भवर सिंह- सभी लड़किया जवान हो चुकी हैं, जल्दी नहीं देर हो चुकी ह, इन सबकी शादी तो काफी समय पहले हो जनि छाइये थी लेकिन सही राजा नहीं मिले थे,

सौमित्र- सही सोचा ह आपने,

भवर सिंह- और उसी स्वंवर के बाद मैं युवराज की घोषणा करूँगा,

ये बड़ा धमाका था, सबके कान खड़े हो गए, अमरावती सौमित्र और काम्य तीनो ने चौंक क्र भवर सिंह को देखा,

काम्य- इसकी या जरुरत ह अभी भैया, अभी तो आप राजा हैं, अभी से युवराज क्यों,

अमरावती- महराज सही सोच रहे हैं, युवराज तो होना hi चाहिए,

सूरज ज्वाला और अभिजीत की आँखों में चमक आ गई थी,

सौमित्र- लेकिन युवराज चुना किस तरह जायेगा,

भवर सिंह- ये ह सही सवाल, तुम सच में बहुत समझदार हो सौमित्र,

सौमित्र की तारीफ से काम्य और अमरावती जल भून गई, और सौमित्र ख़ुशी से झूम उठी,

भवर सिंह- तीनो राजकुमारों को कुछ कार्य दिए जायेंगे, प्रतियोगिता करवाई जाएगी, जो भी राजकुमार जीतेगा वही युवराज बनेगा,

भवर सिंह 3 राजकुमार बोलै था और उसके बेटे भी तीन थे, अब काम्य के दिल में दर बैठ गया, वही अमरावती और सौमित्र सूरज और ज्वाला खुश हो गए की अभिजीत तो पहले hi बहार हो गया, और देवदूत को वो आसानी से हरा hi लेंगे, मुकाबला बस सूरज और ज्वाला में hi होगा,

काम्य- भैया फिर तो हमे अपने राजय चले जाना चाइये अब,

भवर सिंह- ऐसा क्यों बोल रही ह बहन

काम्य- आपके तीनो बेटे युवराज की प्रतियोगिता खेलेंगे हम यहाँ देख क्र क्या करेंगे,

भवर सिंह- मेरे तीनो बेटे, नहीं नहीं तुम गलत समझ रही हो, तीसरा राजकुमार देवदूत नहीं अभिजीत ह, देवदूत इस लायक hi नहीं ह की उसे किसी प्रतियोगिता में उतरा जाये, वो मेरा बीटा ह ये मेरा दुर्भाग्य ह, उसे इस राजमहल में रहने दिया जाता ह वही काफी ह,

भवर सिंह की बात से काम्य खुश हो गई लेकिन अमरावती और सौमित्र के चेरे पैर नाराजगी साफ़ दिख रही थी, सूरज और अभिजीत ने भी एक दूसरे को मुस्कुरा कर सहमति जताई लेकिन उस मुस्कराहट ने जलन साफ़ दिख रही थी,

इस सब के बिच निहारिका एक कोने में कड़ी अपनी भीगी हुई आँखों से मुस्कुरा रही थी, उसे दुःख था उसके बेटे का इस परिवार में कोई सम्मान नहीं ह लेकिन ख़ुशी थी की वो इस प्रतियोगिता से दूर रहेगा,

तभी अक्षरा बोली- मां जी देवदूत को मौका तो मिलना चाहिए अपनी क़ाबलियत दिखने का,

भवर सिंह- बेटी तू उसे नहीं जानती, वो तुम सबके लिए ठीक नहीं ह, उसके बारे में ज्यादा मत सोचा कर, और अब तुम लड़किया अपना घूमने फिरने का शोक पूरा कर लो, फिर शादी होकर पिता जैसे तहत नहीं मिलेंगे, इसलिए कल तुम सब पहाड़ो पैर घूम आओ और तीनो राजकुमार भी साथ जायेंगे, वह काफी अच्छा लगेगा तुम सबको,

सभी ख़ुशी से झूम उठे,

वही देवदूत भौमिक के साथ औषधीय ढूंढ रहा था, और उनके बारे में सिख रहा था, देवदूत आगे बढ़ गया तो भौमिक जी ने आवाज लगाई- देव जरा रुको

देवदूत- आपने मुझे देव क्यों कहा, देव सिर्फ मेरी माँ बोलती ह, बाकि कोई नहीं बोलता,

भौमिक- क्यों बोलती हैं वो तुम्हे देव

देवदूत- प्यार से

भौमिक- तो मतलब जो तुम्हे प्यार करते हैं या पसंद करते हैं वो तुम्हे देव बोल सकते हैं न

देवदूत- है बोल तो सकते हैं

भौमिक- तो मैं तुम्हे पसंद करता हु, तुम मेरे बेटे जैसे हो, इसलिए मैंने तुम्हे देव बोलै और अब से मैं तुम्हे देव hi बोलूंगा, तुम और तुम्हारा रूप किसी देवता से काम नहीं ह,

देवदूत- जैसा आप ठीक समझे गुरु जी,

(यहाँ से देवदूत को देव लिखा जायेगा)

भौमिक ने मन में सोचा- कितना भोला ह ये लकड़ा, कोई इसे नापसंद कैसे कर सकता ह, कोई इसे सजा कैसे दे सकता ह, लेकिन बड़े बहिया खुद इससे दूर रहना छाते हैं तो मतलब उन्होंने इसकी कुंडली में देखा होगा, इसलिए महाराज इससे दूर रहते हैं, मुझे इसकी कुंडली को देखना पड़ेगा, ऐसा क्या ह जिस वजह से इसे इतना सेना पद रहा ह,

कुछ समय बाद दोनों वापस आ गए, और भौमिक जी राजगुरु के पास चले गए, राजगुरु घर पैर नहीं थे, तो भौमिक जी देवदूत की कुंडली उठा लाये,

रात्रि में भौमिक जी देव की कुंडली को पढ़ने लगे, लेकिन उसमे कुछ नहीं मिला था एक दम खली थी, भमिक जी ाश्चरायचकित रह गए, राजगुरु जी के पास राजपरिवार के सभी लोगो की कुंडली होती ह और वो भी पूरी तरह से लिखी हुई, लेकिन देव की कुंडली एक दम खली ऐसा कैसे हो सकता था, राजगुरु जी ने देव की कुंडली में कुछ लिखा क्यों नहीं,

भौमिक जी ने अगले दिन राजगुरु से बात करने का विचार किया,

वही राजगुरु का दूसरा भाई सात्विक, अमरत्व की खोज में एक बहुत बड़े तांत्रिक के पास पहुंच गया था, सात्विक अपने दोनों भाइयो की तरह hi काफी विद्वान् था लेकिन उसके अंदर महेत्वकंषा बहुत यदा थी, उसने जो विद्या प्रपात किट hi उससे संतुष्ट नहीं था, वो और भी ज्ञान पाना चाहता था, और जब राजगुरु ने सात्विक को खोज के लिए भेजा तो उसे मौका मिल गया अलग अलग विद्वानों से मिलने का और ज्ञान प्रपात करने का,

सात्विक जिस तांत्रिक के पास पंहुचा वो कहने को तो तांत्रिक था लेकिन उसने अपनी तंत्र विद्या का कभी गलत इस्तेमाल नहीं किया था, हमेशा लोगो की भलाई के लिए hi उसका इस्तेमाल किया था, इसलिए सब उसे सम्मान की नजरो से देखते थे, दूर दूर से लोग उनसे तंत्र विद्या सिखने आते थे, क्योकि संसार में कुछ शमश्याओ का समाधान मंत्रो में होता ह तो कुछ का संधान तंत्र से होता ह,

सात्विक- तंत्र गुरु मैं आपके पास बड़ी आस लेकर आया हु,

तंत्र गुरु- तू जिस आस से आया ह वो इस संसार का सबसे बड़ा राज ह, तू अमरत्व को खोज में आया ह, और अमरत्व कोई ऐसी चीज नहीं ह जो किसी को भी दान में मिल जाये, बड़े बड़े ज्ञानियों ने अमरत्व को पाने की कोशिश की ह लेकिन कोई अमर नहीं हो पाया, महाविद्वान रवां भी अमरत्व पाने गया था लेकिन उसे भी मृत्यु आई, बहुत ऋषि योद्धा हुए जिन्होंने अमरत्व पाने की कोशिश की लेकिन कोई अमर नहीं हुआ,

सात्विक- लेकिन 7 चिरंजीवी तो ह दुनिया में,

तंत्र गुरु – वो किसी महतवपूरण कार्य के लिए धरती पैर रुके हुए हैं, जिस दिन उनका कार्य समापत हो जायेगा वो भी चले जायेंगे, खुद भगवन ने अमरत्व नहीं रखा अपने लिए फिर तुम कैसे प् सकते हो,

सात्विक- कोई तो होगा जो उसके नजदीक पंहुचा होगा,

तंत्र गुरु- तू मेरे पास आया ह तुझे खली हाथ तो नहीं जाने दूंगा, एक जानकरी देता हु,

हर युग में कोई न कोई ऐसा जरूर आता ह जो अमरत्व पाने की कोशिश करता ह, अमरत्व की इच्छा तो सब पाना चाहते हैं लेकिन कोशिश बहुत काम कर पते हैं, उनमे से एक महायोद्धा था जो अमरत्व तक पहुंच गया था, तुझे उसके बारे में जानना होगा, अगर तूने उसके बारे में जान लिया तो शायद तुझे सफलत मिल जाये,

सात्विक- मैं उसके बारे में कैसे जान पाउँगा

तंत्र गुरु- वह तक पहुंचने में तेरी ये विद्या काम नहीं आएगी, तुझे और ज्ञान की जरुरत ह,

सात्विक- मुझे वो विद्या सीखनी ह,

तंत्र गुरु – तंत्र विद्या सिखने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता ह, मंत्र भगवान् के नजदीक ले जाते हैं लेकिन तंत्र शैतान के नजदीक ले जाता ह, अगर तंत्र इंसान पैर हावी हुआ तो बुराई की तरफ चला जायेगा, मैं तांत्रिक हु लेकिन तंत्र को अपने काबू में रखता हु, क्यात ु ऐसा कर पायेगा,

सात्विक- मैं आपको निराश नहीं करूँगा,

गुरु- ठीक ह तो कल से मैं तुझे सिखाऊंगा,

सात्विक खुश हो गया,

अगली सुबह भौमिक जी राजगुरु के पास चल दिए देव के बारे में बात करने के लिए, वही राजमहल में सभी भाई बहन चाट दिए घूमने फिरने, देव औरषदीयो के बारे में पढ़ने लगा, और मंत्रो को सिखने लगा, और सात्विक की तंत्र विद्या शुरू हो गई,

भौमिक जी- भैया मुझे आपसे जरुरी बात करनी ह,

राजगुरु- है भौमिक बताओ क्या हुआ, तुम कल भी आये थे,

भौमिक- मुझे देवदूत के बारे में बात करनी ह, मैंने इसकी कुंडली पढ़ी लेकिन उसमे कुछ भी नहीं लिखा ह,

राजगुरु- तुम्हे उसकी कुंडली पढ़ने की इच्छा क्यों हुई

भौमिक- मैंने उसके मस्तिष्क को पढ़ा लेकिन ज्यादा कुछ पढ़ नहीं पाया, ऐसा लगा जैसे उसकी जीवन रेखा बिलकुल खली ह,

राजगुरु- इसलिए उसकी कुंडली में कुछ नहीं लिखा ह, मैंने बहुत कोशिश कर ली उसके बारे में जानने की लेकिन कितनी भी कोशिश करू कुछ देख hi नहीं पता, सब खली खली नजर आता ह,

भौमिक- फिर आप उसे खुद से दूर क्यों रखते हैं, फिर महाराज उससे नाराज क्यों रहते हैं,

राजगुरु- जब जब मैंने उसकी कुंडली को देखा ह तब तब एक विध्वंश दिखाई दिया ह, मैं उस विध्वंश का कारन समझ नहीं पाया हु, और जब भी देवदूत की कुंडली भवर सिंह के जोड़ क्र देखता हु तो भवर सिंह का विनाश hi दीखता ह, कारन मेरी समझ से बहार ह, लेकिन इतना समझ आता ह ये लड़का भवर सिंह के लिए ठीक नहीं ह, और न hi इसकी माँ, मैंने भवर सिंह को बहुत रोका इस औरत से शादी न करे, लेकिन वो नहीं मन, उसकी सुंदरता में अपना संयम खो बैठा, लेकिन जब से ये लड़का निहारिका के गर्भ में आया तब से hi भवर सिंह का मोह भांग हो गया,

भौमिक के दिमाग में आया ी निहारिका की कुंडली भी देखनी होगी,

भौमिक- भैया मैं पुरे राजपरिवार की कुण्डलिया देखना चाहता हु,

राजगुरु- ठीक ह ले जाना, फ़िलहाल मुझे समझ नहीं आ रहा, महाराज ने ऐसा फैसला लिया ह जो मेरी समझ में नहीं आ रहा,

भौमिक- क्या हुआ ह

राजगुरु- महाराज ने चारो लड़कियों की शादी का विचार किया ह, और उनके लिए लड़के भी देख लिए हैं, स्वंवर की तैयारी शुरू की जाएगी आज से,

भौमिक- इसमें परेशानी क्या ह शादी तो होनी hi ह एक दिन

राजगुरु- तुम सबकी कुंडली पढ़ो और उसमे देखो क्या लिखा, फिर समझ जाओगे मैं क्यों परेशां हु,

भौमिक ने सबकी कुण्डलिया उठाई और अपने घर ले आया,

देव पहाड़ो से औषदीय लेकर आ रहा था तो उसे रस्ते में कस्तूरी और सुगंधा मिल गई,

कस्तूरी- कहा जार हे हो, यहाँ तुम्हे देखने की उम्मीद नहीं थी,

देव- मैं भौमिक जी के पास रुका हुआ कुछ समय के लिए, लेकिन तुम दोनों यहाँ क्या कर रही हो,

कस्तूरी- मैं और सुगंधा उनके पास औषधि लेने आये थे, पिता जी का स्वस्थ्य कुछ ठीक नहीं ह,

देव- बहुत दूर आये हो, ये तो तुम्हे गाओं में भी मिल जाती,

कस्तूरी- गाओं के वेद जी ने hi यहाँ भेजा ह,

देव- अच्छा अच्छा आओ चलो,

कस्तूरी- तुम कब तक रहोगे यहाँ,

देव- अभी तो एक hi दिन हुआ ह 15 दिन रुकना ह,

कस्तूरी- मैं सोच रही थी मैं भी यही रुक जाऊ,

देव- तुम क्या करोगी यहाँ रह क्र

कस्तूरी- तुम्हारे साथ रहूंगी न, तुम्हे भी कोई अपना मिल जायेगा, और मैं भी कुछ सिख जाउंगी

देव- गुरु जी ऐसे किसी को नहीं रखते, मुझे तो महाराज का आदेश मिला था,

कस्तूरी- मेरी मौसी उनके घर के पास hi रहती हैं, मैं उनके पास रुकूंगी,

देव- जैसा तुम्हे ठीक लगे,

वो उनके साथ चल दिया, सुगंधा हमेशा की तरह खामोश और देव को निहारती हुई उनके पीछे चल दी,

भौमिक जी के पास जाकर कस्तूरी ने कुछ बीमारी बताई जिसकी दवा उन्होंने दे दी, कस्तूरी ने सुगंधा को वो दवाई लेकर वापस भेज दिया, सुगंधा का मन नहीं था जाने का लेकिन जाना पड़ा, कस्तूरी अपनी मौसी के घर चली गई,

महल में सबके दिमाग में तूफ़ान मचा हुआ था, अमरावती सौमित्र और काम्य तीनो के दिमाग में भूचाल आया हुआ था, तीनो hi अपने अपने बेटे को युवराज बनाना चाहती थी, लेकिन भवर सिंह ने किसी को ये पता नहीं चलने दिया था की प्रतियोगिता कैसी होंगी,

काम्य ने अपने गुप्तचरों को लगा दिया ताकि महाराज क्या करने वाले हैं उसकी जानकरी मिल जाये, वही अमरावती ने सेना पति को बुलवाया हुआ था, क्योकि प्रतियोगिता की तैयारी तो सेनापति hi करने वाले थे,

अमरावती- सेनापति मुझे जानना ह की महाराज क्या करने वाले हैं,

सेनापति- महारानी ये मैं कैसे बता सकता हु, महाराज का आदेश ह किसी को कोई जानकरी न दी जाये,

अमरावती- ये तुम मुझसे बोल रहे हो,

सेनापति- माफ़ कीजिये महारानी, अगर मैंने महाराज की बात का उलंघन किया तो वो मुझे जान से मरवा देंगे,

अमरावती- ये बात हमारे बिच hi रहेगी,

सेनापति- इसमें मेरा क्या फायदा होगा,

अमरावती- वही जो हमेशा रहता ह,

सेनापति खुश हो गया, और प्रतियोगिता से जुडी साडी बाते अमरावती को बता दी,

वही सौमित्र अपने हुसैन का जादू भवर सिंह पैर चला रही थी, भवर सिंह बिस्टेर पैर लेते हुए थे और सौमित्र नंगी होकर अपनी भरी भरी चूचिया भवर सिंह की छाती पैर रगड़ रही थी,

भवर सिंह- क्या बात ह आज बहुत उतावली हो रही हो,

सौमित्र- क्या करू जब जब आपको नजदीक पति हु खुद को रोक नहीं पति, आपके अंदर ऐसी hi बात ह, हमेशा मुझे दीवाना बना क्र रखते हो,

भवर सिंह- दीवाना तो तुमने बनाया हुआ ह मुझे अपना, कमल का शरीर ह तुम्हारा, इस उम्र में भी इतना कैसा हुआ ह,

सौमित्र- ये सब आपकी वजह से hi ह, आपका प्यार की वजह से hi ये निखार आता ह मुझमे, और आपका ये शैतान हमेशा मुझे बैचैन किये रखता ह,

सौमित्र ने भवर सिंह के 8 इंच लुंड को पकड़ क्र बोलै,

भवर सिंह- न जाने तुम्हे अंदर ऐसी क्या खूबी ह, हम तुम्हारे पास चले आते हैं, वर्ण अमरावती के पास जाये भी महीनो हो जाते हैं,

सौमित्र- और उस कलमुही निहारिका के पास,

भवर सिंह- उसका नाम मत लिया करो हमारे सामने, न जाने हमे उससे शादी hi क्यों की,

सौमित्र ने तुरंत भवर सिंह के लुंड को अपने जीभ से चाट लिया,

भवर सिंह- ये कला हमने सिर्फ तुम्हारे पास hi देखि ह, आज तक ऐसा किसी औरत ने नहीं किया, सब इसे गन्दा मानती ह तुम बड़े प्यार से इसे चुस्ती हो,

सौमित्र- आप का हर अंग हमारे लिए खास ह, और ये hi तो हमे संतोष देता ह इसे तो प्यार करना हमारा कर्त्तव्य ह,

सौमित्र ने भवर सिंह का लुंड चूसना शुरू कर दिया, भवर सिंह मजे में आंखे बंद किये सौमित्र का सर सहलाने लगा, कुछ देर लुंड चूसने के बाद सौमित्र लुंड के उप्पेर बैठ गई और लुंड को छूट में भर क्र उस पैर कूदने लगी, भवर सिंह सौमित्र की गांड को पकड़ क्र उसे लुंड पैर उछलने लगा,

भवर सिंह- तुम्हारे नितम्ब कितने बड़े हैं,

सौमित्र- आपको पसंद ह इसीलिए तो बड़े किये ह मेरे महाराज, लीजिये न मजा अपनी रानी का, देखिये आपकी रानी कैसे आपके लिंग को अपनी योनि में लेकर उसे निचोड़ रही ह,

भवर सिंह ने सौमित्र को निचे लिटाया और उसके उप्पेर आ गया और जोर से धक्के लगाने लगा, सौमित्र ने भवर सिंह को काफी गरम कर दिया था, भवर सिंह भी काफी देर तक चुदाई क्र लेता था उसका कारन था सौमित्र का उसे उत्तेजक औषदीय खिलाना,

दोनों की चुदाई आधे घंटे से जायदा चली जिसमे दोनों एक साथ झड़ने लगे, भवर सिंह ने अपना पूरा रास सौमित्र की योनि में भर दिया,

जब दोनों शांत हुए,

सौमित्र- आपने मेरे अंदर hi अपना वीर्य छोड़ दिया, मैं इस उम्र में फिर से गर्भवती हो गाइट हो,

भवर सिंह- आज तुम्हे बहुत गरम कर दिया था, वैद से दवाई ले लेना,

सौमित्र – कोई बात नहीं मैं ले लुंगी, आप खुश ह न मुझे बस ये hi छाइये

भवर सिंह- असली ख़ुशी तुम hi देती हो मुझे,

सौमित्र- लेकिन आप क्या करते हैं,

भवर सिंह- क्या करता हु

सौमित्र- जब से मैं यहाँ आई हु आपको असली सुख मैंने दिया और आपने युवराज बनाना के लिए चारो लड़को में प्रतियोगिता रख दी, मेरा बीटा ज्वाला आपके लिए जान तक देने को तैयार रहता ह, आप उसके बारे में सोचते hi नहीं,

भवर सिंह- हहहहह तुम इस बात से नाराज हो, अरे हमारा ज्वाला बहुत होनहार ह, वो ये प्रतियोगिता आराम से पर क्र लेगा, और तुम ये तो सोचो राजा के बाद युवराज कोण बनता ह, राजा का बड़ा बीटा और बड़ा बीटा सूरज ह, मैंने तो ज्वाला को मौका दिया ह, ताकि वो अपनी योग्यता साबित करे और युवराज बन जाये, जिससे परिवार में युद्ध न हो,

अगर मैं ऐसा नहीं करता तो सूरज तो खुद hi युवराज बन जाता राजय के नियम के हिसाब से,

भवर सिंह की बात सुनकर सौमित्र खुश हो गई, उसे बहवर सिंह की बात समझ आ गई,

सौमित्र- लेकिन इस प्रतियोगिता में होने क्या वाला ह, आप मुझे तो बता hi सकते हो,

भवर सिंह सौमित्र के जाल में फास गया था और उसने प्रतियोगिता की साडी बाते सौमित्र को बता दी, इधर भवर सिंह सौमित्र को सब बता रहा था वही काम्य के जासूस अपने काम में लगे हुए थे, जहा प्रतियोगिता की तैयारी हो रही थी वह से साडी जानकरी काम्य तक पंहुचा रहे थे, तीनो माये अपने अपने बेटे को युवराज बनाना के लिए अपनी चल चल रही थी, उधर निहारिका बस अपने बेटे की याद में खोयी थी, जब से वो पैदा हुआ पहेली बार निहारिका से दूर गया ह, निहारिका उसके बिना ाहदुरि थी, जब देव उसके पास नहीं होता तो वो बैचैन हो जाती थी,

इधर देव को अपनी माँ से दूर रहना भी अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन सजा तो पूरी करनी hi थी, शाम को देव औषधियों के बारे में पढ़ रहा था तभी कस्तूरी वह आ गई,

कस्तूरी- क्या कर रहे हो,

देव- तुम यहाँ

कस्तूरी- क्यों मैं तुमसे मिलने नहीं आ सकती क्या, मेरा मन नहीं लग रहा था,

देव- यहाँ मन नहीं लगता तो यहाँ आई hi क्यों थी,

कस्तूरी- तुम सच में पागल हो, कुछ नहीं समझते,

देव- क्या नहीं समझता, समझाओ मुझे,

कस्तूरी- तुम जवान हो गए हो क्या तुम्हारे दिल में कुछ नहीं होता,

देव- मेरे दिल में क्या होगा, और क्यों होगा कुछ

कस्तूरी- मेरे दिल में होता ह,

देव- क्या होता ह

कस्तूरी- जब तुम मुझसे दूर होते हो तो दिल बहुत बैचैन होता ह, कुछ अच्छा नहीं लगता, बस तुम्हारे पास आने का मन करता ह, तुहे देख क्र hi दिल को सकूं आता ह, इस दुनिया में बस तुम hi मुझे अपने लगते हो तुम्हारे अलावा किसी और के बारे में सोचने का भी ान नहीं करता,

कस्तूरी की बात से देव थोड़ा कंफ्यूज सा खड़ा था, क्योकि उसके दिल में भी ऐसी hi हलचल थी लेकिन कस्तूरी के लिए नहीं अपनी माँ के लिए,

देव का मन बहुत साफ़ था, उसमे अब तक कोई हवस या सम्भोग के लिए कोई सोच नहीं थी, कस्तूरी उसकी बहुत अच्छी दोस्त थी लेकिन कस्तूरी के दिल में क्या ह वो कभी समझ नहीं पाया,

कस्तूरी और देव बात कर रहे थे तभी भौमिक जी वह आ गए, कस्तूरी भौमिक जी को प्रणाम करके वह से चली गई और देव के दिमाग में हलचल कर गई,

भौमिक जी- क्या हुआ देव, कहा खोये हुए हो,

देव- गुरु जी एक बात पुछु

भौमिक जी- है है पूछो

देव- ये जो कस्तूरी गई ह, ये मेरी दोस्त ह वो बोलती ह उसका दिल मेरे बिना नहीं लगता, मुझसे मिलने के लिए बैचैन रहती ह, ऐसा क्यों होता ह

भौमिक जी मुस्कुराये- क्योकि वो तुमसे प्रेम करती ह, जब लड़की ऐसा बोले तो समझ जाओ तो तुम्हसे बहुत प्रेम करती ह, और तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,

इतना बोल क्र भौमिक जी अंदर चले गए, देव और कंफ्यूज हो गया, क्योकि उसके दिमाग में तो बस उसकी माँ hi रहती थी, उसने तो कभी कस्तूरी के बारे में ऐसा सोचा hi नहीं, और यहाँ उसकी माँ भी नहीं थी जो उसे इस बारे में कुछ समझा सके,

रात का खाना खा क्र देव सोने चला गया लेकिन भौमिक जी सबकी कुंडली लेकर बैठ गए, और बड़े धयान से सबकी कुंडली पढ़ने लगे, सभी की कुंडली में कुछ न कुछ खास था लेकिन निहारिका और देव की कुंडली एक जगह आकर बिलकुल खली थी, भौमिक जी ने सभी तरह से कुंडली को पढ़ लिया, भौमिक को राजगुरु से ज्यादा ज्ञान था कुंडली पढ़ने में, लेकिन वो भी निहारिका और देव की कुंडली को ठीक से नहीं समझ पाए, और जब चारो लड़कियों की कुंडली पढ़ी तो चौंक गए,

भौमिक जी खुद से hi- ये कैसे हो सकता ह, ये संभव नहीं ह, संसार में इस वक़्त कोई ऐसा नहीं ह जो इस काबिल हो,

भौमिक जी देव की कुंडली को लेकर चिंतित हो गए, देव की कुंडली में न hi मृत्यु का पता चल रहा थान hi hi उसके आगे के जीवन का, जब किसी भी तरह से देव की कुंडली नहीं समझ आई उसके जीवन के बारे में नहीं पढ़ पाए तब उन्होंने एक hi अनुमान लगाया की देव का जीवन लम्बा नहीं ह, और इस बच्चे ने जीवन में खुद की रक्षा करना तक नहीं सीखा, ये कैसे जियेगा, जिसका पिता hi उसके जीने मरने की परवाह न करता हो उसे कोण बचा पायेगा,



देव के लिए भौमिक जी के दिल में दर्द उभर आया, उन्होंने फैसला क्र लिया की वो खुद देव को सब कुछ सिखाएंगे, केवल औषदीयो के बारे में सिखने से इसकी जान नहीं बचेगी, इसे खुद की रक्षा करना तो सीखना hi होगा, पता नहीं मैं उसे सीखा पाउँगा या नहीं, मात्रा 15 दिन में मैं उसे क्या सीखा सकूंगा,
 
अपडेट-4




अगले दिन भौमिक जी ने देव को बिना बताये उसका प्रशिक्षण शुरू क्र दिया, वो देव से ऐसे काम करवाने लगे जिससे उसकी ताकत का अनुमान लग सके, और वो खुद अपनी ताकत को महसूस क्र सके, जैसे लकडिया कटवाना, बजन उठवाना, तलवार की जगह कुल्हाड़ी का इस्तेमाल करवा रहे थे, वही कस्तूरी रोज देव के पास मिलने चली आती थी, जब से कस्तूरी ने देव को अपने दिल का हाल सुनाया था तब से देव का धयान भी कस्तूरी की तरफ भटकने लगा था, उसे कस्तूरी की तरफ आकर्षण महसूस होने लगा था, वो भी समय मिलते hi कस्तूरी के पास पहुंच जाता और उससे बाते करने लगता,

भौमिक जी को ये बात कुछ अच्छी नहीं लग रही थी, उन्हें लग रहा था देव का धयान भटक न जाये, इसलिए उन्होंने कस्तूरी का देव के पास आने पैर रोक लगा दी, लेकिन प्रेम कहा किसी से रुकने वाला होता ह, कस्तूरी न दिन देखती न रात वो मौका मिलते hi देव से मिलने चली आती, दोनों चुप चुप क्र मिलने लगे थे,

अगले 4 दिन यही चलता रहा, उधर अमरावती सौमित्र और काम्य ने अपने अपने जासूस भेज क्र तीनो राजकुमारों सूरज ज्वाला और अभिजीत प्रतियोगिता की जानकरी दे दी, जिससे वो वह अपनी तैयारी में जुट गए,

कस्तूरी और देव का प्रेम आगे बढ़ने लगा था, देव से ज्यादा कस्तूरी उतावली हुई जा रही थी, और उसे उतावले पैन में एक दिन दोनों प्रेमी जोड़े एक पेड के निचे बैठे बाते क्र रहे थे, कस्तूरी देव की बहो में लेती हुई थी, देव उसके गलो पैर उंगलिया फिर रहा था, कस्तूरी मदहोश हुए जार hi थी, देव के मन में कोई गलत भावना नहीं थी,

लेकिन कस्तूरी का मन भटकने लगा था, उसके हैट देव के सर में घूमने लगे थे, और धीरे धीरे कस्तूरी देव को अपने नजदीक लेन लगी थी, दोनों के चेरे एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे, दोनों की ाँकेः एक दूसरे की आँखों में झांक रही थी, दोनों के हॉट एक दूसरे के बहुत करीब थे, कस्तूरी की आँखों में लाली च चुकी थी, कस्तूरी के हॉट खुल गए और उसने देव के होतो को अपने होतो में भर लिया, देव को एक झटका लगा, उसके लिए बहुत hi अनोखा अनुभव था, कस्तूरी के मुलायम फूल जैसे होतो का स्पर्श देव को उत्तेजित क्र गया, देव को अंदाजा नहीं था क्या करना ह लेकिन आनंद बहपुर आ रहा था, कस्तूरी ने हलके हलके अपने होतो से देव के होतो को चूसना शुरू क्र दिया, पहेली बार देव को कामुकता का अहसास हो रहा था, उसके बदन में अकड़न सी होने लगी थी, देव का लिंग में हलचल होने लगी थी, जो कस्तूरी के कमर के निचे दबा हुआ था,

कुछ hi पालो में कस्तूरी को देव के लिंग का अहसास होने लगा था, देव को तो पता भी नहीं चला उसका लिंग कब खड़ा हो गया, उसे कस्तूरी हॉट चस्मे में इतना मजा आ रहा था, देव के हाथ न जाने कब कस्तूरी के शैतान पैर पहुंच गए, कस्तूरी के हाथ भी देव की गार्डन और बालो में घूम रहे थे, जैसे hi देव का हाथ कस्तूरी के शैतान पैर गया तो देव ने हलके से दबा दिया जिससे कस्तूरी और कामुक हो गई और उसने देव के हॉट को काट लिया,

देव को दर्द हुआ और वोट क दम अलग हो गया, उसने कस्तूरी को देखा जो उसे दकह क्र मुस्कुरा रही थी,

देव- ये सब क्यात है,

कस्तूरी- मजा नहीं आया क्या,

देव- तुमने ये सब कहा सीखा, ऐसा कोण करता ह,

कस्तूरी- ये कोई सिखाता तोडना ह, ये तो हर जवान इंसान खुद सिख जाता ह, ये hi तो प्रेम ह, जब किसी से प्रेम होता ह तो ऐसा लड़का और लड़की इसी तरह अपने प्रेम का इजहार करते हैं,

देव- तुम्हे किसने कहा ऐसा करते हैं,

कटोरी- बस मुझे पता ह, मेरे साथ रहोगे तो तुम भी सिख जाओगे,

देव बार बस कस्तूरी के होतो को देखे जार है था, कस्तूरी देव की भावनाओ को समझ रही थी और मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसने दुबारा देव को किश करने की कोशिश नहीं की, और देव में तो हिम्मत hi नहीं थी,

कस्तूरी- अब चलना छाइये वर्ण गुरु जी नाराज हो जायेंगे,

देव को गुरु जी की याद आई तो वो भी तुरंत चल दिया लेकिन उसकी धोती के अंदर उसका खड़ा हुआ लुंड साफ़ हिलता हुआ हसुस हो रहा था, देव को जल्दी जल्दी में उसका अहसास hi नहीं था लेकिन कस्तूरी का धयान बार बार उसके खड़े लुंड की तरफ hi जा रहा था, वो अंदर hi अंदर मुस्कुराती हुई जा रही थी,

देव के घर पहुचन इ पैर भौमिक जी काफी नाराज हुए, क्योकि उन्हें महसूस हो रहा था की देव का धयान बहतक रहा ह, लेकिन देव राजा का बीटा था ो उसे ज्यादा खुश बोल भी नहीं प् रहे थे, फिर भी वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे देव को मजबूत करने की,

यहाँ से सब चल रहा था वही सात्विक तंत्र विद्या सिखने में खुद को समर्पित क्र चुक्का था, तंत्र गुरु भी बहुत खुश थे, बहुत समय बाद कोई ऐसा शिष्य मिला था जो इतनी तेजी से सिख रहा था,

अगले कुछ दिनों तक ऐसे hi चलता रहा, सौमित्र ने भवर सिंह से बोल क्र राजकुमार और राजकुमारियों को वापस बुलवा लिया, सौमित्र चाहती थी की उसका बीटा ज्वाला प्रतियोगिता की तैयारी करे, उसका फायदा अमरावती और काम्य को भी हो गया, तीनो ने अपने अपने बेटे को प्रतियोगिता की तैयारी में लगा दिया,

वही देव प्रेम के वशीभूत हो चुक्का था, कस्तूरी हर समय देव के साथ रहने लगी थी, और दोनों के बिच अब बात चुम्बन से भी आगे बढ़ चुकी थी, अब देव के हाथ कस्तूरी के शरीर पैर भी घूमने लगे थे, वो अपने हाथो से कस्तूरी के शैतान का नाप भी लेने लगा था, और उसकी गांड को अच्छे से मसलने लगा था, केवल 12 दिन में दोनों में प्रेम का इजहार हुआ और बात यहाँ तक पहुंच चुकी थी, उस समय के हिसाब से बहुत तेजी आगे बढ़ रहे थे, कस्तूरी कुछ ज्यादा hi उतावली थी,

इधर सात्विक की ोी खबर नहीं थी जिससे राजगुरु परेशां थे, इससे पहले सात्विक बिना बताये कही नहीं गया था, इस बार भेजा तो राजगुरु ने hi था लेकिन उन्हें जानकरी नहीं थी वो गया कहा ह, राजगुरु की दूसरी चिंता थी राजकुमारियों का स्वंवर, वो भवरसिंघ से इस बारे में बात नहीं कर प् रहे थे, वही भौमिक जी देव को लेकर काफी चिंतित थे, उन्हें पता था प्रतियोगिता में देव को भी हिस्सा लेना होगा और प्रतियोगिता आसान नहीं होगी, लेकिन देव का धयान तो कस्तूरी की तरफ भटक रहा था,

आज सजा का अंतिम दिन था, देव अपने काम में व्याशत था, तभी वह ाकस्तूरी आ गई और देव को लेकर जंगल में चली गई, आज कस्तूरी के इरादे अलग थे, उसे पता था देव का यहाँ अंतिम दिन ह, उसके बाद वो महल में चला जायेगा,

कस्तूरी और देव दोनों नदी किनारे पहुंचे और कस्तूरी देव का हाथ पकड़ क्र नदी में घुस गई,

देव- कस्तूरी गुरु जी नाराज हो जायेंगे, उन्होंने आज मुझे बहुत काम दिया हुआ ह,

कस्तूरी- आज मैं भी तुम्हे कुछ देने आई हु, ऐसा कुछ जो तुम्हे जीवन भर याद रहेगा,

देव को समझ नहीं आया, नदी में भीगने की वजह से दोनों के कपडे भीग क्र शरीर से चिपक गए थे, कस्तूरी के कपडे जब उसके शरीर से चिपके तो उसका ेके क उभर अलग से नुमाया होने लगा, भीगे कपड़ो उसके शैतान और भी बड़े लग रहे थे, कस्तूरी ने आगे बढ़ क्र अपने भीगे हुए शैतान देव की छाती में दबा दिए, देव की सांसे भरी होने लगी थी, कस्तूरी ने नदी के अंदर hi देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, पानी के अंदर दो तपते हुए बदन आपस में रगड़ खा रहे थे, कस्तूरी की चूचिया फूल क्र कड़क हो चुकी थी जो देव के छाती में रगड़ रही थी, देव का लुंड अपनी औकात में आने लगा था, गीले कपड़ो में लुंड सीधा कस्तूरी की योनि के उप्पेर टकरा रहा था, जिससे कस्तूरी और गरम हो गई और वो देव से पूरी तरह चिपक गई,

कस्तूरी ने देव के हाथ पकडे और अपने नितम्बो पैर रख दिए, कस्तूरी के नितम्बो पैर उसके कपडे चिपक और उन्हें और आकर्षक बना रहे थे, देव के हाथ कस्तूरी के नितम्बो पैर कस्ते चले गए, कस्तूरी भी किसी बेल की तरह देव से लिपट गई थी, दोनों एक दूसरे के होतो का रास पिने में लगे हुए थे, काफी देर रसपान करने के बाद जब दोनों के हॉट दुखने लगे तो कस्तूरी ने अपना हाथ निचे लेजाकर देव की जांघो के बिच में घुसा दिया और सीधे उसके लुंड को मुठी में भर लिया, लुंड को पकड़ते hi दोनों को झटका लगा और एक दम चौंक गए,

देव को उम्मीद नहीं थी ऐसा होने की वो तो इसलिए चौंका लेकिन कस्तूरी क्यों चूंकि, कस्तूरी ने देव की तरफ देखा,

कस्तूरी- ये क्या ह,

देव- क्या हुआ

कस्तूरी ने देव का हाथ पकड़ा और पानी से थोड़ा बहार की तरफ ले आई, देव की कुछ समझ में नहीं आ रहा था, कस्तूरी देव की धोती खोलने लगी,

देव- ये क्या कर रही हो,

कस्तूरी- मुझे द्केहना ह

देव- क्या देखना ह

कस्तूरी- तुम्हारा वो,

देव- वो मतलब

कस्तूरी- तुम्हारा लिंग देखना ह मुझे

देव- की गन्दी वो कोई देखने की चीज होती ह क्या,

कस्तूरी- अभी तुम्हे या पता वो क्या क्या करने की चीज होती ह, आज सब सीखा दूंगी तुम्हे,

देव- नहीं मैं नहीं दिखा सकता,

कस्तूरी- तुम मुझसे प्रेम करते हो न

देव- है करता हु

कस्तूरी – तो जो मैं कर रही हु करो दो न,

देव कमजोर पद गया उसने खुद को ढीला छोड़ दिया, कस्तूरी ने जल्दी से देव का धोती खोली और उसका कुरता उप्पेर किया और जब कस्तूरी के सामने देव का लिंग आया तो कस्तूरी की आँखे फटी रह गई, वोट क तक उसे देखती रही,

देव- बस देख लिया

कस्तूरी- रुक जाओ देखने दो, इससे खूबसूरत पुरे संसार में कुछ नहीं हो सकता, तुम हमेशा कहते हो न तुम्हे भगवान् ने कुछ खास नहीं दिया, ये दिया ह खास एक ऐसी चीज जो किसी को दिखाई नहीं जाती लेकिन जिसने देख ली वो तुम्हारे hi गुणगायेगी, दुनिया में इससे खूबसूरत और बड़ा लिंग शायद hi किसी का होगा, तुमने संसार की किसी भी स्त्री के सामने अपना लिंग क्र दिया तो वो तुम्हारी देवानी हो जाएगी, तुम्हारे अलावा कुछ नहीं मांगेगी,

देव- ऐसा क्या ह इसमें

कस्तूरी- तुम्हे अभी ज्ञान नहीं ह इसकी ताकत का, इसके सामने हर औरत कमजोर पद जाती ह, मैं धन्य हो गई ये मुझे मिला ह,

कस्तूरी ने फटाफट देव का कुरता भी उतर दिया और देव बिलकुल नंगा था, शरीर तो देव का साधारण hi था, बस लिंग उसका सबसे जबरदस्त था,

कस्तूरी फिर से देव को पानी में ले आई और अपने कपडे खोलने लगी, देव की आँखों में चमक आ रही थी, उसका लुंड झटके मर रहा था, और जब कस्तूरी ने अपनी चोली खोल क्र देव की तरफ पलटी तो कस्तूरी के शैतान देख क्र देव को निहारिका के शैतान याद आ गए, कस्तूरी के शैतान निहारिका के सामने बहुत छोटे थे,

कस्तूरी- क्या देख रहे हो पसंद आये

देव- तुम्हारे शैतान छोटे हैं,

कस्तूरी- इस उम्र में छोटे hi होते हैं और इतने भी छोटे नहीं हैं, छू क्र देखो कितने कठोर हैं,

देव ने कस्तूरी के सतानो पैर अपने हाथ रख दिए और दबाने लगा,

देव- इनमे दूध भी आता ह

कस्तूरी- अरे बुद्धू वो तो बच्चे होने के बाद आता ह,

कस्तूरी ने निचे के कपडे भी खोल दिए और नदी के बहार फेंक दिए, और देव से चिपक गई, दोनों के नंगे बदन पानी के अंदर एक दूसरे से चिपके हुए थे, देव का लुंड कस्तूरी की जांघो के बिच में घुसा जार है था, कस्तूरी ने एक तंग उठा क्र देव के पैरो में लप्पेट दी, जिससे लुंड इसधे कस्तूरी की छूट पैर टकराने लगा, देव का एक हाथ कस्तूरी की गांड पैर था उंगलिया कस्तूरी की गांड में घुसी हुई थी,

ठन्डे पानी में तो तपते हुए शरीर आग लगा रहे थे,

कस्तूरी- कैसा लग रहा ह

देव- अच्छा लग रहा ह, कुछ अलग

कस्तूरी – अभी और अच्छा लगेगा,

कस्तूरी देव को बहार ले आई और पेड के निचे घास पैर लेट गई, कस्तूरी की गोल चूचिया उभर क्र सामने आ रही थी, सपाट पेड जांघो के उप्पेर हलके हलके सुनहरे बाल, देव के अंदर काम अग्नि फुट रही थी, वही कस्तूरी उंगली से देब को अपने पास बुला रही थी, देव आगे बढ़ा उसका बड़ा लम्बा मोटा लुंड हिल रहा था, कस्तूरी ने हाथ बढ़ा कर लुंड को पकड़ लिया और नीच खींच लिया, देव वही बैठ गया, कस्तूरी ने अपने हॉट देव के होतो से जोड़ दिए, और देव को अपने उप्पेर लिटा लिया और अपने दोनों पेअर खोल दिया, देव उनके बिच में आ गया और देव का लुंड कस्तूरी की छूट से टकराने लगा,

कस्तूरी ने हॉट चूमते हुए hi हाथ निचे लेजाकर देव का लुंड पकड़ क्र अपनी योनि पैर सही जगह लगा दिया,

कस्तूरी- देव घुसा दो अंदर,

देव- ये गलत तो नहीं होगा

कस्तूरी- प्रेम में कुछ गलत नहीं होता, ये प्रेम की पहचान ह, जो हो रहा ह उसे होने दो अब रोको नहीं,

कस्तूरी ने देव के नितम्बो को पकड़ा और अपने तरफ दबाने लगी, लुंड का दबाव योनि पैर पड़ने लगा, देव का लिंग इतना बड़ा था इतनी आसानी से कस्तूरी की योनि में कैसे घुस सकता था, वो अपनी जगह से फिसल गया, कस्तूरी ने फिर से लुंड को पकड़ क्र अपनी योनि पैर लगाया और देव से कहा धक्का लगन ेके लिए, देव ने वैसा hi किया धक्का लगा दिया और धक्का इतना तेज था की लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, कस्तूरी की दर्द भरी चीख निकल गई, कस्तूरी की आँखे फटी रह गई, देव दर गया वोट क दम से उठने लगा, लेकिनकास्टरी ने उसे अपनी बहो में भर लिया,

कस्तूरी- हिलो नहीं, बस ऐसे hi रहो,

देव- तुम्हे दर्द हो रहा ह

कस्तूरी- अरे पगले ये hi तो दर्द एक लड़की को औरत बनता ह, उसके अरमानो को पूरा करता ह, इस दर्द ले लिए hi तो लड़किया इतना इंतजार करती हैं, तुम रुको नहीं हलके हलके अंदर घुसाओ, तेज धक्का मत लगाना बस प्यार से हलके हलके,

देव ने कस्तूरी की बात मणि और हलके हलके लिंग को धकेलने लगा, कुछ देर में कस्तूरी बस बस करने लगी,

कस्तूरी- बस बस और नहीं जा पायेगा, मैं मर जाऊंगा अगर इससे ज्यादा अंदर गया था, अब बर्दास्त नहीं हो रहा, तुम आराम से लेट जाओ मेरे उप्पेर, हिलना मत वर्ण बहुत दर्द होगा,

देव ने वैसा hi किया वो कस्तूरी के उप्पेर शांति से लेट गया, कस्तूरी भी काफी देर तक आँखेबंद किये लेती रही, खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी, देव के लुंड से उसे बहुत दर्द हो रहा था, जब उसे थोड़ी रहत हुई तो उसने निचे से खुद hi कमर हिलनी शुरू क्र दी, देव बस उसके उप्पेर लेता रहा, मजा तो देव को भी आ रहा था लेकिन उसका दिल कर रहा था ो भी ऐसे कमर हिलाये लेकिन कस्तूरी ने उसे मन कर दिया था,

कुछ देर में कस्तूरी की योनि गीली होने लगी थी और वो झड़ने लगी थी, झड़ते हुए कस्तूरी बोली- अब करो हलके हलके,

देव ने तुरंत हलके हलके कमर हिलनी शुरू क्र दी, देव को बहुत मजा आ रहा था, कस्तूरी भी मजे में आहे भर रही थी, कस्तूरी जब जहद क्र शांत होने लगी तो उसे फिर से दर्द होने लगा, क्योकि देव रुक नहीं रहा था, वो झाड़ नहीं रहा था,

कस्तूरी- देव तुम भी कर लो न

देव- क्या कर लू

कस्तूरी- तुम्हे मजा आ रहा ह न

देव- है बहुत मजा आ रहा ह

कस्तूरी- फिर तुम्हारा वीर्य क्यों नहीं निकल रहा

देव- कैसे निकलता ह वीर्य मुझे नहीं पता

अब कस्तूरी की मुसीबत आ गई थी, उसे दर्द हो रहा था और देव का वीर्य hi नहीं निकल रहा था, कस्तूरी ने हिमायत करके फिर से खुद को गरम किया, और देव के गलो ो होतो को कानो को गार्डन को चूमने लगी, देव को और मजा आने लगा उसकी रफ़्तार और बढ़ने लगी, कस्तूरी ने निचे हाथ लेजाकर लुंड को सहलाने की सोची और जैसे hi लुंड पैर हाथ गया तो उसे अहसास हुआ की अभी तो देव का आधा लुंड भी अंदर नहीं घुसा ह, उसे दर लगने लगा था अगर ये पूरा अंदर घुस गया तो वो मर hi जाएगी,

देव काफी देर तक ऐसे hi कस्तूरी की चुदाई करता रहा, कस्तूरी फिर से झड़ने लगी थी, लेकिन देव पैर कोई फरक नहीं पड़ा था ो ऐसे hi छोड़ रहा था, लेकिनअब देव भी थकने लगा था, उसका वीर्य तो नहीं निकल रहा था लेकिन वो लगातार धक्के लगाने से थक गया था, कस्तूरी की भी हालत ख़राब हो चुकी थी,

कस्तूरी को मज़बूरी में देव को रोकना hi पड़ा,

कस्तूरी- देव रुक जाओ बस और नहीं हो पायेगा मुझसे,

देव- बहुत मजा आ रहा था कस्तूरी

कस्तूरी- किसी और दिन ये मजा ले लेना, अब रुक जाओ,

देव ने कस्तूरी की बात मन ली, और उसके उप्पेर से उठ गया, जैसे हो देव उठा लुंड छूट को खींचता हुआ बहार आ गया, कस्तूरी की फिर से दर्द बरी चीख निकल गई, कस्तूरी बेसुध सी पद गाइट hi, उससे अपनी टंगे भी बंद नहीं हो रही थी, वो टंगे खोले पड़ी थी,

देव- कस्तूरी क्या हुआ

कस्तूरी- कुछ देर सांसे लेने दो

देव- तुम्हारी योनि से खून आ रहा ह

कस्तूरी ने एक दम से उठ क्र देखा और वो चौंक गई, उसने अपनी छूट की हालत देखि जहा एक गुफा सी बन गई थी,

कस्तूरी ने अपना सर वापस जमीन पैर रखा और साँस भरने लगी,

कस्तूरी- देव मुझे नदी में ले चलो, शायद वह कुछ रहत मिल जाये,

देव ने नंगे hi कस्तूरी को अपनी गॉड में उठाया और नदी में ले गया, ठंडा ठंडा पानी जब कस्तूरी की योनि में लगा तो उसकी आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई, वो देव से लिपट गई, काफी देर दोनों ऐसे hi खड़े रहे,

तभी वह भौमिक जी आ गए और दोनों को नंगे शरीर नदी में देख उन्हें क्रोध आ गया,

भौमिक जी- देव तुम यहाँ अपनी सजा पूरी करने आये हो या ये अधरम करने, और ये लड़की शादी से पहले इसने ये अधरम किया ह, मैं देव को मजबूत बनाने के लिए क्या क्या कर रहा हु और ये यहाँ खुद को बर्बाद करने में लगा हुआ ह, तुझे सम्भोग का सुख चाहिए न तो मैं तुझे शाप देता हु आज के बाद तेरे मस्तिष्क में बस सम्भोग hi घूमेगा, तू बिना सम्भोग के नहीं रह पायेगा, अगर तूने सम्भोग नहीं किया तो तेरे अंदर का वीर्य hi तेरी जान ले लेगा,

इतना बोल क्र भौमिक जी वह से वापस लोट गए, लेकिन देव और कस्तूरी भौचक्के से वही खड़े रह गए, देव की आँखों में आंसू थे, वो आत्मग्लानि में जल रहा था,

कस्तूरी- तुम इतना क्यों घबरा रहे हो, हमने कुछ गलत नहीं किया ह, हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं, और प्रेम में ये सब गलत नहीं होता,

देव- मैंने गुरु का अपमान किया ह, और उससे ज्यादा गलत कुछ नहीं होता,

देव तुरंत नदी के बहार निकला और कपडे पहन क्र भौमिक जी की तरफ चल दिया, कस्तूरी भी उसके पीछे लड़खड़ाती हुई आई कपडे पहन क्र उसके पीछे पीछे चल दी,

देव भौमिक जी के सामने पंहुचा और उनके पैरो में लेट गया,

देव- गुरु जी मुझे चमा क्र दीजिये, मैंने अपराध किया ह, आका दिल दुखाया ह, आपका अपमान किया ह, आप जो चाहे मुझे सजा दे दीजिये मैं भुगतने के लिए तैयार हु लेकिन आप मुझसे नाराज न रहे,

भौमिक जी- तुमने गुरु शिष्य का नियम तोडा ह,

देव- मैं आपका अपराधी हु,

तभी कस्तूरी वह आ गई,

कस्तूरी- कैसा अपराध, हमने कोई अपराध नहीं किया ह, हम एक दूसरे से प्रेम करते हैं, और मैं कोई बच्ची नहीं हु, मैंने अपनी मर्जी से ये सब किया ह, तुमने मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की थी, इस राजय के राजकुमार लड़कियों के साथ जबरदस्ती करते हैं, उन्हें तो कोई सजा नहीं मिल रही, हमने तो फिर भी अपने प्रेम में अपनी सीमाएं तोड़ी हैं. अगर हमने गलती की ह तो हमे सजा देने का अधिकार हमारे माता पिता का ह, आपने बिना सोचे समझे देव को शाप दे दिया,

देव- कस्तूरी चुप हो जाओ, ये हमारी गलती ह, मेरी गलती ह, मैंने गुर जी का अपमान किया ह,

कस्तूरी- तू भूल ेहो तुम्हे नहीं पता कोई भी तुम पैर अधिकार दिखता ह और तुम उसे अपना मान लेते हो, 15 दिन में इनका इतना अह्दिकर हो गया

देव- कस्तूरी अपना मुँह बंद रखो, गुरु जी के लिए एक भी शब्द मत बोलना,

कस्तूरी- क्यों न बोलू मैं बोलूंगी, इन्होने तुम्हे शाप कैसे दिया, इन्हे क्या पता प्रेम क्या होता ह, इन्होने कभी जीवन में प्रेम किया हो तो पता हो,

देव- बस अगर एक भी शब्द बोलै तो मेंभूल जाऊंगा हमारे बिच कोई रिश्ता ह,

कस्तूरी- ये क्या बोल रहे हो, तुम हमारे रिश्ते को भूल जाओगे,

देव- मैं गुरु का अपमान नहीं सहूंगा,

कस्तूरी कैद अंत गुस्से में भींच गए,

कस्तूरी- तुम मुझे त्याग रहे हो, तुम्हे कोई प्यार नहीं करता मैंने तुम्हे प्यार किया और तुम मुझे टैग रहे हो, आज समझ आया कोई तुम्हे क्यों प्यार नहीं करता, तुम प्यार के पायक hi नहीं हो, तुमने मेरे प्यार का अपमान किया ह, तुम्हे कभी प्यार नहीं मिलेगा,

कस्तूरी वह से गुस्से में चली गई, देव आँखों में आंसू लिए खड़ा रह गया, खुद भौमिक जी भोचके से देखते रह गए,

भौमिक जी को अपनी गलती का अहसास हो रहा था, ये देव एक निजी जीवन था ो उसमे कुछ भी कर सकता था, उन्हें कोई अधिकार नहीं था उसके जीवन में झाकने का और इतना बड़ा शाप दे देने का, देव के जेवण में जो खुशिया आई थी वो उनकी वजह से आज फिर से चीन गई, देव बस जाती hi कस्तूरी को देखता रहा,

भौमिक जी- मुझे चमा कर दो देव, मैंने बिना सोचे समझे तुम पैर क्रोध किया और ऐसा शाप दे दिया,

देव- आप क्यों चमा मांग रहे हैं गुरु जी, गलती मेरी ह

भौमिक जी- नहीं बीटा प्रेम तो निस्वार्थ होता ह उसमे कोई गलती नहीं होती, मैं तुम्हारे प्रेम को समझ नहीं पाया और गलती क्र बैठा, मैंने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया, न जाने क्यों मुझे ितं अक्रोध आ गया और मैंने शाप दे दिया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, इसके पीछे जरूर कोई न कोई बड़ी वजह होगी,

देव- मैं आपके शाप को आपका आशीर्वाद समझ क्र सवीकार करता हु,

भौमिक जी- मैं अपने दिए शाप को तो नहीं बदल सकता लेकिन एक वचन देता हु, जीवन में मैं हर कदम पैर तुम्हारे साथ रहूँगा, आज के बाद तुम्हारी सभी तकलीफो का जवाब मैं दूंगा, तुमने जो सम्मान मुझे दिया ह उसके बदले मैं तुम्हर ऐसा गुरु बनूँगा जो तुम्हार ेहजीवन को बदल देगा,

देव- गुरु से कुछ भी गलती से नहीं होता उसके पीछे कोई न कोई बड़ी वजह होती ह, ाज्जो हुआ उसके लिए भी कोई वजह जरूर होगी,

भौमिक जी- तुम्हारा वापस जाने का समय हो गया ह, और यहाँ जो तुमने कार्य किये हैं उनसे जॉब hi सीखा ह उसका इस्तेमाल प्रतियोगिता में करना,

देव- गुरु जी मैं युवराज नहीं बनना चाहता, न hi कोई मुझे युवराज बनाना चाहेगा,

भौमिक जी- सब कुछ हमारी सोच के हिसाब से नहीं होता, होगा वही जो उप्पेर वाला चाहता ह, इसलिए नियति जो छाती ह वही करते जाओ, और मैं तुम्हारे प्रेम के लिए माफ़ी चाहूंगा

देव- गुरु जी आपने hi कहा ह न जो होता ह उसके पीछे कारन होता ह, शायद इसके पीछे भी कोई कारन हो,

भौमिक जी ने देव को गले से लगा लिया,

देव भौमिक जी से विदा लेकर महल की तरफ चल दिया, उसका मन दुखी था, आज उसने प्रेम की घेरे को समझा था और शायद अपना प्रेम खो भी दिया था, और कस्तूरी ने उसे बात करने का मौका तक नहीं दिया था, कहा कस्तूरी उसके लिए भौमिक जी से लड़ रही थी कहा वो अपने प्यार को hi खो बैठी,



क्रोध ार अहंकार ये दो चीजे हमेशा अपनों को खुद से दूर कर देती हैं,
 
मैंने 3रद और 4तह अपडेट दाल दिए हैं लेकिन उसमे कुछ स्पैलिंग मिस्टेक्स हो सकती हैं, क्योकि मस वर्ड से डायरेक्ट कॉपी करके पेस्ट किये हैं, जो बदलाव पहेली बार किये थे वो नहीं कर पाई, और हो सकता ह, कुछ लाइन मिस भी हो सकती हैं, क्योकि मैं ेउप्दते को मस वर्ड पैर लिखती हु और जब यहाँ अपलोड करती हु तो दुबारा पढ़ती हु उसमे कुछ गलतिया मिलती या कुछ ऐड करना होता ह तो यही क्र देती हु जिसका बदलल मैं कॉपी में नहीं होता, और अब मुझे याद नहीं मैंने क्या क्या बदलाव किये थे, इसलिए कुछ गलती हो जाये तो माफ़ कर देना,

और ेट्वोर्क आज भी प्रॉब्लम क्र रहे हैं,
 
वेबसाइट अभी भी ठीक से नहीं खुल रही ह, मेरे कंप्यूटर पैर ओपन होने में प्रॉब्लम क्र रही ह
 
अपडेट-5



महल पहुंच क्र देव सीधे निहारिका के पास गया और उसके गले लग गया, निहारिका भी आँखों में आंसू लिए देव से लिपट गई, दोनों माँ बेटे आंसुओ से एक दूसरे का स्वागत क्र रहे थे, काफी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे,

निहारिका- तुझे माँ की याद नहीं आई,

देव- माँ आपको क्या बताऊ आपके बिना, मैं कैसे रहा हु वह, लेकिन पिता का आदेश तो मन्ना hi था,

निहारिका- अब ऐसा कोई काम मत करना जिससे तुझे मुझसे दूर रहना पड़े, तेरे सिवा इस दुनिया में मेरा कोई अपना नहीं ह, अगर तू मेरे सामने नहीं होता ह तो ऐसा लगता ह जैसे मेरे शरीर में जान hi नहीं ह,

देव- मेरा भी व्है हाल ह माँ, आपके बिना जीवन अधूरा सा लगता ह,

निहारिका- अच्छा ये बता वह क्या किया, राजगुरु ने अधिक काम तो नहीं करवाया तुझसे

देव- मैं राजगुरु के भाई भौमिक जी के पास था, बहुत अच्छे इंसान हैं, उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया जड़ीबूटियों के बारे में सिखाया, और

इतना कह क्र देव चुप हो गया,

निहारिका- क्या हुआ, कुछ हुआ ह क्या वह, तेरा मन मेरे पास आकर भी दुखी सा लग रहा ह,

देव- ऐसा नहीं ह माँ, बस मैं सोच रहा था मैं प्रतियोगिता में क्या करूँगा,

निहारिका- तुझे युवराज नहीं बनना लेकिन खुद के लिए सम्मान तो कामना होगा न, ये तेरे लिए एक अवसर ह जिससे तू सबको बता सके किट ु कमजोर नहीं ह,

देव- माँ हम यहाँ से कही दूर चले जाते हैं न, मुझसे ये सब बर्दास्त नहीं होता, यहाँ कोई अपना नहीं ह,

निहारिका- मैं छह क्र भी ऐसा नहीं कर सकती

देव- क्यों माँ, ऐसा क्या ह यहाँ जिस वजह से आप नहीं जा सकती,

निहारिका- आज तू ऐसी बाते क्यों क्र रहा ह, क्या हुआ ह,

देव- मैं आपके साथ रहना चाहता हु, बस मैं और आप और कोई नहीं चाहिए मुझे,

निहारिका ने देव को फिर से गले लगा लिया,

देव ने निहारिका से कस्तूरी और भौमिक जी के शाप की बात को छुपा लिया, देव वो सब भूलना छटा था,

तभी वह अक्षरा और रीवा वह आ गई और अक्षरा आते hi देव से लिपट गई, रीवा उसके पास hi कड़ी थी लेकिन उसने कोई रियेक्ट नहीं किया,

अक्षरा- छोटी माँ देखो कैसे कमजोर हो गया ह, वह खाने को नहीं मिलता था क्या

देव- बहेनो का प्यार नहीं मिलता थान ा वह,

देव ने रीवा की तरफ देख क्र ये बात बोली, रीवा ने सर दूसरी तरफ कर लिया,

निहारिका- अब यहाँ आ गया ह न तो अब ठीक हो जायेगा,

रीवा- ऐसा कुछ करता hi क्यों ह जिससे सजा दी जाये, क्यों इस सब से दूर नहीं रहता

ये पहेली बार था जब रीवा ने देव के लिए कुछ चिंता दिखाई थी, शायद ये इस 15 दिन दुरी का असर था,

निहारिका के दिल में थोड़ी सी ख़ुशी आई रीवा की चिंता देख क्र,

अक्षरा- तुमने प्रतियोगिता की तैयारी की या नहीं,

देव- मुझे पार्टियोगिया में कोई दिलचस्पी नहीं ह, मैं हरु या जीतू किसको फरक पड़ता ह,

अक्षरा- पड़ता ह बहुत फरक पड़ता ह, अपने लिए न सही लेकिन हमारी ख़ुशी के लिए तो पूरा जोश में भाग लेना

देव- ठीक ह तुम खेती हो तो जरूर करूँगा,

रात के खाने पैर सभी बैठे हुए थे, देव भी सबके साथ hi था,

भवर सिंह- भौमिक जी के पास कुछ सीखा ह या ऐसे hi समय पूरा करके आ गए,

देव- जी औषधियों के बारे में सीखा ह

अमरावती- चलो किसी काम तो आएगा अब

काम्य- ये औषधियों का ज्ञान किस काम आएगा इसके,

अक्षरा- राजमहल को जितना सैनिको की जरुआत होती ह उससे ज्यादा जरुरत वैद जी की होती ह, और जब घर में hi औषधियों का ज्ञान हो जायेगा तो हमे वैद जी का इंतजार करने की जरुरत hi नहीं पड़ेगी,

अक्षरा की बात पैर भवर सिंह को हसी आ गई,

भवर सिंह- परसो प्रतियोगिता शुरू होगी देखते हैं इसके क्या काम आता ह,

देव- आपने अगर मुझे भी युद्ध कला सिखने दी होती तो शायद मैं भी इस प्रतियोगिता में अपना जोहर दिखता,

देव की बात सुनकर वह बैठे सभी के मुँह खुले रह गए, किसी को उम्मीद नहीं थी की देव कभी इस तरह से अपनी बात को भी रख सकता ह,

भवर सिंह गुस्से में- हमने तुम्हे वह तुम्हारी बतमीजी की सजा दें ेके लिए भेजा था, तुम वह से और अधिक बत्तमीज बन क्र लोटे हो,

देव- पुरे राजय को आपके सामने अपनी बात रखने का अधिकार ह, क्या मेरे परजा जितना भी अधिकार नहीं ह,

देव की इस बात से वह एक दम सनता च गया, भवर सिंह बड़े गोर से देव को देख रहे थे, अमरावती और सौमित्र गुस्से में लाल हो रही थी, निहारिका दरी हुई कड़ी थी उसकी इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपने बेटे के पास जाकर उसे शांत क्र सके या उसे हिम्मत दे सके,

काम्य- लगता ह राजगुरु जी इसे कुछ ज्यादा hi शिक्षा दे रहे हैं, बहुत बोलना सिख गया ह, खैर ये तो प्रतियोगिता में पता चल जायेगा की केवल बोलना सीखा ह या कुछ और भी, सुना ह वह लकडिया बहुत कटवाई हैं उन्होंने, और जंगलो में बड़े बड़े काम किये हैं,

बड़े बड़े काम सुनकर देव का मुँह पीला पद गया, देव ने काम्य की तरफ देखा काम्य देव को देख क्र मुस्कुरा रही थी, काम्य की नजरो से साफ़ लग रहा था उसे कुछ पता ह देव के बारे में, देव थोड़ा घबरा गया और चुप हो गया, जल्दी जल्दी अपना भोजन ख़तम किया और उठ क्र चला गया,

रात में निहारिका देव के पास आई, देव अपने hi खयालो में खोया हुआ था, उसे पता भी नहीं चला निहारिका कब उसके पास आ गई, देव की आँखे नाम थी, उसे कस्तूरी की याद सत्ता रही थी, उसे कोई ऐसी मिली थी जो इतना प्यार करती थी और देव ने उसे खो दिया,

निहारिका ने देव के सर पैर हाथ फिराया- क्या हुआ बीटा इतना उदास क्यों ह,

देव हड़बड़ा क्र उठा- माँ आप कब आई.

निहारिका- जब तू अपने खयालो में खोया हुआ किसी को याद क्र रहा था,

देव- नहीं नहीं माँ ऐसी तो कोई बात नहीं ह,

निहारिका- बीटा इस उम्र में ऐसा होता ह, वैसे मुझे इस उम्र सपने देखने का मौका नहीं मिला लेकिन फिर भी समझती हु, जब इस उम्र में कोई खोया खोया रहने लगे तो समझो उसे प्रेम हो गया ह, अपनी माँ को नहीं बताएगा,

देव- नहीं माँ ऐसी बात नहीं ह, मैं तो बस

निहारिका- तू नहीं बताना चाहता तो कोई बात नहीं, लेकिन मैं तेरी माँ हु, मुझसे कुछ छिपा नहीं रह सकता, खैर ये सब छोड़ और दूध पि ले, तूने बहुत दिन से दूध नहीं पिया ह, मेरे सीने में बहुत दर्द हो रहा ह,

देव- माँ क्या मेरा दूध पीना जरुरी ह

निहारिका- तू जनता ह न अगर तूने दूध नहीं पिया तो मुझे तकलीफ होगी और तेरे अलावा मेरी तकलीफ सुनने वाला कोण ह यहाँ,

देव निहारिका की तकलीफ नहीं देख सकता था, देव ने मुस्कुरा क्र है में सर हिला दिया, निहारिका ने अपनी चोली खोली और अपना स्तन देव के सामने कर दिया, निहारिका का स्तन देख क्र देव को कस्तूरी की चूचियों की याद आ गई, उसके अंदर एक दम से कामुकता का उफान आ गया था, देव समझ नहीं पाया ये क्या हुआ,

देव ने निहारिका के स्तानक ो मुँह में देने की जगह उस पैर अपने हाथ फिराए, ये पहेली बार था, खुद निहारिका चौंक गई, उसने देव की तरफ देखा तब तक देव अपना मुँह खोल क्र निहारिका के शैतान को मुँह में भर चुक्का था, निहारिका देव के चेरे के भाव नहीं देख पाई थी, देव ने निहिरका की चुकी को चूसना शुरू क्र दिया, इतने दिन बाद निहारिका अपनी चूचिया चुसवा रही थी, उसके मुँह से सिसकिया निकल गई, निहारिका की सिसकी से देव को कस्तूरी की सिसकियों की याद आ रही थी, देव के जोश बढ़ता जार है था, उसका हाथ निहारिका की दुश्री चुकी पैर पहुंच चुक्का था जिसे वो शेला रहा था और एक चुकी को चूस रहा था,

निहारिका की आँखे बंद थी, उसे बड़ी रहत मिल रही थी, उसके साइन पैर से इतना बोझ जो उतर रहा था, लेकिन आज देव के चुकी चूसने के तरीके से निहारिका के अंदर की औरत जग रही थी, न छाते हुए भी निहारिका की योनि में गिला पैन आ गया था, देव ने एक चुकी को अच्छी तरह चूसने के बाद दूसरी चुकी को मुँह में भर लिया, देव का लुंड भी अपनी उफान पैर आ चुक्का था, देव को पता भी नहीं चला की उसका लुंड खड़ा हो चुक्का ह, वो तो निहारिका की चूचिया चूसने में खोया हुआ था, वही निहारिका की आँखे भी बंद थी और वो देव के सर पैर हाथ फिराए जा रही थी,

कुछ hi देर में देव ने निहारिका की चुकी को खली क्र दिया, दूध आना बंद हो गया लेकिन देव ने चूसना बंद नहीं किया, निहारिका भी देव को नहीं रोक रही थी, उसे मजा आ रहा था,

अचानक hi निहारिका को अहसास हुआ ये क्या हो रहा ह, वो कामुकता का बहाव में भेटि जार hi ह, उसने जहटके से देव को अलग किया, देव ने चौंकते हुए निहारिका को देखा,

निहारिका की आँखों में शर्म और आश्चर्य था, वही देव पहले तो ऐसे चौंका जैसे उसकी पिरया चीज उससे चीन ली गई हो, लेकिन अगले hi पल उसे अहसास हुआ की वो क्या कर रहा था, उसे अपना खड़ा लुंड भी महसूस हुआ, देव एक दम से उठ कर बैठ गया, कुछ देर के लिए वह ख़ामोशी च गई, निहारिका ने उस ख़ामोशी को तोडा,

निहारिका- क्या सीखा तूने गुरु जी के पास, तूने उन्हें सम्मान तो दिया न

देव- है माँ, वो बहुत अच्छे इंसान ह, उन्होंने मुझे वचन दिया ह की वो मेरा हमेशा साथ देंगे

निहारिका- ये तो बड़ी अच्छी बात ह, प्रतियोगिता के बारे में क्या सोचा ह तूने

देव- मेरी इच्छा नहीं ह माँ लेकिन पिता जी की बात तो माननी होगी,

निहारिका- खुद को सुरक्षित रखना, मुझे इस प्रतियोगिता से कोई मतलब नहीं ह, बस तू सुरक्षित रहना चाहिए,

देव निहारिका से लिपट क्र सो gaya,niharika देव को hi निहारती रही, वही काम्य अभिजीत के साथ अमरावती सूरज के साथ और सौमित्र ज्वाला के साथ योजना बना रहे थे अपने अपने कमरे में, और अमिता और सोमिया अपनी शादी के सपने सजा रही थी, अपने अपने कमरे में लेती अपने hi बदन के साथ खेल रही थी, वही अक्षरा और रीवा एक साथ लेती हुई थी,

अक्षरा- रीवा आज तुमने पहेली बार देव के लिए कुछ सही बोलै ह,

रीवा- इस बात को ज्यादा मत खींच, वो बस ऐसे hi निकल गया था,

अक्षरा- ऐसे hi कुछ नहीं होता,

रीवा- मैं कुछ नहीं कहना छाती इस बारे में

अक्षरा- कुछ न कहने से सच झूट तोडना हो जायेगा, तुम्हारे मन में उसके लिए दया ह, लेकिन तुम दिखती नहीं,

रीवा- अक्षरा तुम इस परिवार को अच्छे से जानती हो, कोई भी माँ और देव को पसंद नहीं करता, उन दोनों ने तो उस नफरत के साथ जीना सिख लिया लेकिन मैं वो नफरत नहीं झेल सकती थी, इसलिए मैंने भी बाकि सबके साथ खुद को बदल लिया, लेकिन वो मेरी माँ ह और देव मेरा भाई ह, लेकिन मैं उनका साथ देकर सबकी नफरत की भागीदार नहीं बनना चाहती,

अक्षरा- तुमने कभी सोचा ह, इस परिवार में निहारिका जैसी माँ और देव जैसा भाई, या यु कहु उन दोनों जैसे भोले इंसान कोई नहीं ह, परिवार तो क्या पुरे राजय में कोई उनके जैसा नहीं ह, सबकी नफरत झेल क्र भी वो एक दूसरे के साथ हैं,

रीवा- वो कमजोर हैं, वो कुछ नहीं कर सकते इसलिए सबकी नफरत झेल रहे हैं,

अक्षरा- मुझे लगता ह हम कमजोर हैं वो नहीं, हमसे कोई नफरत न करे इस दर से हम अपनों का साथ नहीं दे प् रहे, सभी भाई बहेनो के साथ शामिल होने के लिए सच बोलने तक की हिम्मत नहीं ह, लेकिन वो दोनों कितने मजबूत हैं इसका पता तो इसी बात से चल जाता ह की वो कितने वर्सो से सबकी नफरत झेल रहे हैं लेकिन आज तक टूटे नहीं है, कमजोर वो नहीं हम सब हैं,

रीवा- देव मनहूस ह जब से वो पैदा हुआ ह पिता जी हमेशा दुखी रहते हैं, मेरे माता पिता एक दूसरे के करीब तक नहीं आते, ये सब उस देव की वजह से hi ह

अक्षरा- ये तो मुझे भी समझ नहीं आता ऐसा क्यों होता ह, इसके पीछे कोई तो वजह रही होगी,

रीवा- अब सो जाओ मुझे नींद आ रही ह,

अक्षरा सोचती हुई सो गई,

अगली सुबह महल में बहुत तेयारिया चल रही थी, सभी वयश्त थे, अगले दिन से प्रतियोगिता शुरू होनी थी जो 3 दिन चलने वाली थी और उसके बाद स्वंवर होना था, चारो राजकुमारियों को अच्छे से चन्दन के उप्टन का लेप लगाया जा रहा था,

इधर दूसरे राजय के राजा राजकुमार मंत्री भवनपुरा में आने लगे थे, उनका ाचे से स्वागत किआ जा रहा था, देव का यही काम था सबकी आवभगत करना, वही बाकि तीनो राजकुमार दूसरे राजय के राजकुमारों से मेलजोल बढ़ने में लगे हुए थे, सूरज सिंह की दोस्ती एक राजा प्रताप सिंह से हो गई, वो बड़ा hi ायश राजा था, लेकिन उसका राजय सभी से ताकतवर था, वो जिस राजय को जीत लेता उस राजय की रानियों को अपनी रखैल बना क्र रखता, उसे औरतो पैर अत्याचार करने में बहुत मजा आता था, वो जीती हुई औरतो को गले में पत्ता दाल क्र बांध क्र रखता पालतू जानवरो की तरह, उससे दुश्मनी ठीक न समझ क्र भवर सिंह ने उसे भी अपने बेटी की शादी के लिए चुना था,

प्रताप सिंह और सूरज पूरा दिन साथ रहे और मदिरा का सेवन करते रहे, सूरज ने प्रताप सिंह के लिए कुछ दसियो की व्यवस्था भी क्र दी थी, लेकिन प्रताप सिंह को दसियो में कोई रूचि नहीं थी वो तो राजाओ की पत्नियों का शिकार करता था, भवर सिंह ने प्रताप सिंह से अपनी पत्नी और बहन का परिचय करवाया था, प्रताप सिंह की नियत काम्य पैर ख़राब हो राखी थी, लेकिन वो यहाँ शादी के लिए आया था तो कुछ गड़बड़ नहीं करना छटा था,

लेकिन सूरज के साथ घूमते हुए उसकी नजर नारिका पैर पद गई, और प्रताप सिंह ने निहारिका को देखा तो वो मंत्रमुग्ध सा खड़ा रह गया, स्वर्ग की कोई अप्सरा उसके सामने आ गई हो, निहारिका तो वह से निकल गई लेकिन प्रताप सिंह अपनी जगह से हिल नहीं पाया,

सूरज ने प्रताप सिंह की हालत समझ ली थी,

सूरज- क्या हुआ महाराज, कहा खो गए,

प्रताप सिंह- ये अप्सरा कोण ह, इसने हमारे खून में उबाल पैदा कर दिया ह,

सूरज- ये महाराज की तीसरी पत्नी हैं निहारिका,

प्रताप सिंह- aahhhhhhhhhhhhhh दिल चलनी हो गया ये सुनकर, की ये महाराज की पत्नी ह, वर्ण इसे पाने के लिए मैं पुरे राजय को तबाह क्र देता,

सूरज- इसे देख क्र हर किसी के दिल में यही अरमान जागते हैं,

प्रताप सिंह के दिमाग में निहारिका अटक गई थी, वो उसे पाने के लिए उतावला हुआ जा रहा था, वो निहारिका को पाने के लिए कुछ भी कर सकता था,

शाम को राजय सभा में सभी राजा महाराजा राजकुमार बैठे हुए थे, सभी का आदर सत्कार किया जा रहा था,

राजगुरु- सभी राजाओ राजकुमारों का हमारे राजय में स्वागत ह, जैसा की आप सबको पता ह की हमारे राजय की 4 राजकुमारियों का स्वंवर होना ह, उसी के लिए आप सबको यहाँ आमंत्रित किया गया ह, वैसे तो स्वंवर में प्रतियोगिता हुआ करती थी लेकिन हमने फैसला अपनी राजकुमारियों को करने का अधिकार दिया ह, वो जिसे चाहे अपना वेर चुन सकती हैं, और इसी बिच हमारे राजय के युवराज का भी चयन होना ह, जिसके लिए प्रतियोगिता राखी गई ह, जो कल सुबह से प्रारम्भ हो जाएगी, महाराज चाहते हैं आप सब उस प्रतियोगिता के शाक्षी बने, और होने वाले युवराज के लिए अपना समर्थन दे, ताकि आगे चाक र हमारे राज्यों के बिच अच्छे सम्बन्ध बने रहे,

भवर सिंह- स्वंवर तीन दिन बाद होगा जब युवराज की घोषणा के साथ hi, तब तक राजकुमारी सभी राजाओ महाराजाओ से बात करके उनके बारे में जान सकती हैं, हम छाते हैं हमारी बेतिया अच्छे पतियों का चयन करे,

सभी ने ताली बजा कर भवर सिंह के फ लेस्ले का स्वागत किया, अब अगले तीन दिन प्रतियोगता होनी थी और दूसरे राजय से आये राजा राजकुमारी को अपनी पसंद की लड़की को अपनी तरफ आकर्षित करना था,

रात के भोजन के बाद सभी को आराम करने चले गए, राजकुमारिया अपने कमरे में बैठी हुई थी,

अमिता- यार इतने सरे राजा राजकुमार हमसे विवाह करने आये हुए हैं,

अक्षरा- इसमें क्या मजा ह, पिता जी ने सबके सामने कह तो दिया की हम अपनी मर्जी से किसी को पसंद कर्नेगे लेकिन उन्होंने 4 राजा और राजकुमारों के नाम बता दिए हैं की हमे उन्हें hi पसंद करना ह, अब हम आपसे में फैसला करना ह कोण किसे पसंद करेगी,

सोमिया- है यार इतने राजा ह लेकिन हमारे पास बस 4 लोगो के नाम ह,

रीवा- मुझे तो इनमे से कोई भी अच्छा नहीं लगा, सब एक से एक खतरनाक लग रहे हैं,

अक्षरा- सबसे ज्यादा खतरनाक वो प्रताप सिंह ह, उसके बारे में सब बुरा hi बुरा सुना ह मैंने, और पिता जी उसे भी चुनने को कहा ह, मैं तो उसे नहीं चुनने वाली, अगर उससे किसी की शादी हुई तो जीवन भर बर्बादी hi होनी ह,

रीवा- हम राजकुमारियों की जिंदगी उन रत्नो की तरह ह, जब तक राजा उन्हें अपने महल में सजा क्र रखता ह तो पूरा समाज सर झुका क्र प्रसंसा करता ह, और जिस दिन राजा अपनी झूटी शान दिखने के लिए उतर क्र दुसरो को दे देता ह तो सब कोई उसे लूटना तो छाते हैं लेकिन इज्जत नहीं करते,

ऐसे hi हम चारो जब तक इस महल में हैं हमे सब प्यार क्र रहे हैं, लेकिन तीन दिन बाद हमे किसी प्रताप सिंह जैसे हवन के हाथो सौंप दिया जायेगा, जो कभी किसी औरत की इज्जत नहीं करता,

अमिता- सही कहा रीवा, राजकुमारियों को हमेशा अपने राजय को बचने के लिए या पडोसी राजा से मित्रता बढ़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता ह, हमारा भी वही इस्तेमाल हो रहा ह,

सोमिया- अब जो भी हो लेकिन शादी तो करनी hi ह, हम सब यही तय कर लेते हैं कोण किसे अपना पति चुनेगी, ये फैसला लेने का अधिकार हमे दिया ह,

रीवा- क्या तुम तीनो की माओ ने तुम्हे नहीं बताया किसे अपना पति चुनना ह,

रीवा की बात पैर तीनो चुप हो गई,

रीवा- यहाँ बस औपचारिकता hi हो रही ह, मुझे बता दो मुझे किसके गले में जयमाला डालनी ह,

तीनो लड़कियों ने अपने अपने पति का नाम बता दिया, जो बचा था वो था प्रताप सिंह,

रीवा ने अपनी आँखे बंद क्र ली और घेरि साँस भरी, जैसे उसने अपने जीवन की आखरी साँस भरी हो,

अमिता और सोमिया ने भी एक सकूं भरी साँस ली, उन्हें यही चिंता थी कही प्रताप सिंह के साथ उनकी शादी न हो जाये, अमरावती सौमित्र और काम्य ने पहले hi समझा दिया था की प्रताप सिंह को नहीं चुनना,

अगली सुबह पुरे राजय में चहल पहल थी, सभी राजय के प्रतियोगिता सथल की तरफ चले जा रहे थे, पहले hi अपनी अपनी जगह पैर जाकर बैठ गए थे, राज परिवार के लोग भी वह पहुंचने लगे थे,

सभी लोग आ चुके थे, और जब राजकुमारिया सज धज क्र उस सभा में आई तो सभी राजाओ के अरमान उछलने लगे, ये सबको पता था इस राजय से ज्यादा सूंदर राजकुमारिया पुरे संसार में नहीं ह, वही उनके साथ उनकी माये कड़ी थी, कोई भी उनकी माँ नहीं बोल सकता था, सब एक दूसरे की बहन hi लग रही थी, और उन सबमे सबसे खूबसरूआत औरत थी निहारिका, उसे देख क्र तो हर राजा के दिल की धड़कन hi रुक जा रही थी, सबने नारिका के बारे में सुन रखा था लेकिन आज पहेली बार उसे अपने सामने देखा था, प्रताप सिंह तो बेशर्मो की तरह निहारिका को hi घूरे जा रहा था,

प्रताप सिंह की नजर रीवा पैर पड़ी और उसे पता चला की रीवा निहारिका की बेटी ह तो प्रताप सिंह ने रीवा को hi अपनी पत्नी बनाने का फैसला किया, उसके दिमाग में रीवा के जरिये निहारिका को पाने की इच्छा जग गई थी,

राज गुरु एक ऊँची जगह पैर खड़े हो गए,

राजगुरु- मैं यहाँ आये सभी महेमानो और प्रजा जानो का स्वागत करता हु, और आपके सामने प्रतियोगिता के कुछ नियम बताना छटा हु,

ये प्रतियोगिता चार चरणों में होगी, पहला चरण होगा बूढी का, इसमें सभी राजकुमारों की शाश्त्रो की शिक्षा की परीक्षा होगी, दूसरा चरण होगा युक्ति का, इसमें सभी राजकुमार अपनी युक्ति से समश्याओ का संधान कर्नेगे, और तीसरा चरण होगा सहन शक्ति का, इसमें राजकुमारों की शाहन शक्ति का परीक्षण होगा, और चौथा चरना होगा शक्ति का, इसमें राजकुमारों की युद्ध कला और उनकी शक्ति का परीक्षण होगा,

इन चारो परीक्षणों में से जो भी राजकुमार सबसे ज्यादा चरण पर करेगा वही युवराज होगा,

वह बैठे सभी ने तालियों से स्वागत किया, फिर राजगुरु ने भवर सिंह की अनुमति लेकर प्रतियोगिता का आरम्भ किया,

वह राजय के बड़े बड़े ज्ञानी लोगो को बुलवाया गया था, जो शास्त्रों के बहुत विद्वान् थे, फिर एक एक करके राजकुमारों को बुलवाया गया, और उनकी विद्या का परीक्षण होने लगा,

सबसे पहले आया सूरज उससे सवाल जवाब होने लगे, कुछ देर बाद उसे भेज दिया गया उसके बाद आया ज्वाला उससे भी सवाल जवाब होने लगे, उसके बाद अभिजीत और सबसे आखिर में देव, जब देव से सवाल जवाब शुरू हुए तो ऐसा लगा जैसे सवाल ख़तम hi न हो रहे हो, ये देख सभी आश्चर्य चकित थे, बाकि राजकुमारों से कुछ hi सवाल पूछे गए लेकिन देव से सबसे अधिक सवाल पूछे गए, देव भी जवाब देता रहा, वह लोगो की भीड़ में भौमिक जी और आचार्य जइब hi बैठे हुए थे आचर्य जी के साथ सुगंधा भी थी,

जब चारो राजकुमारों का परीक्षण हो गया तो राजगुरु जी विद्वानों के पास आये और उनसे सभी राजकुमारों के बारे में पूछा, जब विद्वानों ने विजेता का नाम बताया तो खुद राजगुरु भी अचंभित रह गए,

राजगुरु ने अपनी जगह पहुंच क्र विजेता का नाम बोलना शुरू किया,

राजगुरु- इस बूढी के परीक्षण में जो राजकुमार तिरसे स्थान पैर आया ह वो ह ज्वाला सिंह,

लोगो ने तालियों से स्वागत किया लेकिन सौमित्र गुस्से से लाल हो गई, जबकि अमरावती और काम्य खुश हो गई,

राजगुरु- दूसरे स्थान पैर आने वाले राजकुमार हैं सूरज सिंह,

सूरज का नाम दूसरे नंबर पैर सुनकर अमरावती के भी दन्त भींच गए, लेकिन काम्य ख़ुशी से उछाल पड़ी थी, भवर सिंह को भी यकीन नहीं हो रहा था की सूरज दूसरे स्थान पैर आ सकता ह, वो सबसे होशिराय लड़का था,

और जब राजगुरु ने पहले विजेता का नाम बोलै तो पूरा राजय खड़ा हो गया,

राजगुरु- और प्रथम स्थान पैर जो राजकुमार हैं वो हैं देवदूत,

किसी को अपने कानो पैर यकीन hi नहीं हुआ ये क्या हुआ, देवदूत पहले स्थान पैर कैसे आ सकता ह,

राजगुरु- आप सभी ने देखा होगा देवदूत से कुछ ज्यादा hi देर तक सवाल किये गए थे वो इसलिए क्योकि उसने सभी सवालो के जवाब सही दिए, और शास्त्रों के ज्ञानियों ने नियम बनाया था वो तब तक सवाल करेंगे जब तक राजकुमार सही जवाब देते रहेंगे, और उसी हिसाब से विजेता का फैसला होगा, तो इसमें राजकुअंर अभिजीत कुछ hi सवालो के जवाब दे पाए, उसके बाद ज्वाला सिंह और फिर सूरज सिंह, और जब देवदूत की बरी आई तो उसने सभी सवालो के जवाब सही दिए, ज्ञानियों के सवाल ख़तम हो गए लेकिन देवदूत का कोई भी जवाब गलत नहीं हुआ,

राजगुरु की बात सुनकर पूरा राजय आश्चर्या चकित था खुद भवर सिंह भी, वही आचार्य जी गर्व से अपना सर ुचा करे बैठे थे, भौमिक जी भी ख़ुशी से मुस्कुरा रहे थे, निहारिका की आँखों में आंसू थे, वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी, लेकिन अगले hi पल उसके चेहरे पैर चिंता के भाव उभर आये, उसकी नजर भवर सिंह पैर गई, भवर सिंह के चेरे पैर खुद गुस्से के भाव थे, निहारिका जानती थी भवर सिंह देवदूत की विजेता देखना पसंद नहीं करेगा,


अब बरी थी अगले चरण की जो था युक्ति, इसमें अपनी युक्ति का प्रदर्शन करना था,
 
अब तक सर्वर ठीक नहीं ह, अगला अपडेट तभी दे पाऊँगी जब सर्वर ठीक हो, पता hi hi चलता संस गे आया नहीं
 
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