अपडेट 65
बिगड़ैल घोड़ी
घर आते हुए अर्जुन और रेखा जी को तक़रीबन 10 बज चुके थे. दोनों हे कुछ बातें करते हुए यहाँ पहुंच गए. घर के प्रवेश द्वार पर हे प्रकाश दिख गया जो शायद टाइगर को घुमा कर वापिस आ रहा था अभी. टाइगर ने भी रेखा जी को देखते हे उछलना शुरू कर दिए. उन्होंने भी इस समझदार जीव को दुलार किआ और इधर अर्जुन ध्यान से सब तरफ देखने लगा.
"आप क्या साड़ी रात यहाँ पहरा देते है क्या?", अर्जुन को और कुछ नहीं सूझा तोह उसने यही बोल दिए.
"नहीं भैया, हम तोह सिर्फ सुबह और रात में हे कुछ देर यहाँ होते है. वह बस टाइगर को घुआंने लेके गए थे भोजन करने के बाद. घर पे बिंदिया रहती है और हम दूकान या खेत के काम देखते है दूध दुहने की साथ हे.", प्रकाश ने अपना पूरा kaam-kaaj जल्दी से बता दिए.
"फिर सोते कब हो आप? सारा समय तोह doodh-dukaan में हे निकल जाता होगा आपका. सुबह 5 से रात के 11 बजे और फिर घर के भी काम रहते होंगे.", अर्जुन ने देखा की उसकी माँ अंदर चली गई तोह वह थोड़ा खुलकर बात करने लगा था. प्रकाश को भी ाचा लगा के घर के छोटे मालिक उसके साथ बात कर रहे है. बिंदिया जहा 24-25 साल की एक गदराई औरत थी वही प्रकाश एक साधारण शरीर का 27-28 साल का मेहनती आदमी था.
"सोने का क्या है भैया, कभी तोह दिन में हे झपकी ले लेते है और फिर रात तोह बेपरवाह हो कर 6-7 घंटे आँख हे नहीं खोलते. बस एक चिल्लूम लगते है थकान मिटने को.", दरवाजा बंद करते हुए वह भैंसो के बाड़े के साथ बने चारा रखने वाले कमरे की तरफ चल दिए तोह अर्जुन भी कोथुल वश उसके साथ हो लिए.
प्रकाश ने वही एक तरफ प्लास्टिक में लिपटी मिटटी की पाइप जैसी चिल्लूम निकल ली और kapde-dandi से उसको साफ़ करने लगा.
"वैसे ये सेहत के लिए बड़ी खराब चीज है भैया. आप बड़े है तोह ज्यादा समझते होंगे.", अर्जुन ने देखा की प्रकाश अपनी जेब से एक और पुड़िया निकल रहा था. फिर कुछ देर वह मुस्कुराता हुआ चिल्लूम तैयार करने लगा और अलाव से एक अंगार चिल्लूम पर रखते हुए काश लगाने के बाद बोलै.
"आप छोटे मालिक है लेकिन जवान है तोह एक बात बता देते है, आपके काम आएगी. ये चिल्लूम बुरी चीज नहीं है लेकिन तम्बाखू जरूर है.", सच में उस धुएं की महक अजीब थी. अर्जुन ने 2 कदम पीछे कर लिए और फिर बोलै.
"मतलब ये तम्बाखू नहीं है क्या?"
"नहीं भैया जी. ये तोह भोले बाबा की बूटी है जो शरीर को आराम पहुँचती है. इसके 4-5 काश लेने के बाद फिर मस्त नींद आती है और कमजोरी नहीं होती. लेकिन एक बात कहूंगा की आप कभी मत करना इसको, एक नशा लग जाता है इसका.", एक लम्बा काश लेने के बाद प्रकाश ने वह चिल्लूम भुजा दी और जमीन पर पड़े खली लौटे को वही रखे मटके से भरते हुए अपना गाला टर्र करने लगा. अभी वह और बातें करते की बिंदिया उधर चली आई. चाल में साफ़ लड़खड़ाहट थी और अर्जुन को देखते हे जैसे झूठा गुस्सा चेहरे पर ले आई वह.
"चलिए जी. बहोत रात हो गई है अब सोने का वक़्त हो चूका. सुबह फिर जल्दी निकल जाओगे.", अर्जुन देख रहा था के कैसे एक हाथ साड़ी के ऊपर से छूट दबाये कड़ी बिंदिया उसको हे देख रही थी. अर्जुन के चेहरे पर मुस्कान आ गई. बिंदिया नजरे फेरती नीचे बैठे अपने पति को देखने लगी.
"चलिए भैया जी. अब हम चलते है सोने नहीं तोह हमारी जोरू कल खाना नहीं देंगी. बिंदिया वह भैंसे को पानी देखती आ जाना तुम", 4 काश खींचने से हे प्रकाश की जुबान और चाल हिल गई थी. अर्जुन देख रहा था के कैसा प्रभाव था इस नशे का उस जवान व्यक्ति पर. बिंदिया की क्या गलती थी अगर पति हे ऐसा नशेड़ी हो और प्रकाश को समझ क्यों नहीं आती की वह अपनी औरत के साथ क्या खिलवाड़ कर रहा है.
"ाचा भैया, शुभरात्रि.", अर्जुन जाने हे लगा था के बिंदिया को अपनी तरफ देखते हुए रुक गया. बिंदिया बाल्टी उठती हुई पास लगी टूंटी के नीचे रख उसको भरने लगी.
"आपने ठीक नहीं किआ आज दोपहर मेरे साथ.", बिना अर्जुन को देखे वह बड़ी धीमी आवाज में कह रही थी.
"मैंने ऐसा क्या कर दिए? अगर तुम्हे मेरे साथ नहीं करना था तोह मन कर देती. और सही बताऊ तोह मुझे इतना याद है के मैं तुम्हारे कमरे में आया था और फिर गया.", अर्जुन ने थोड़ा पानी हाथो पर डालकर उन्हें साफ़ करते हुए कहा.
"याद नहीं? फाड़ के रख दिए है सबकुछ तुमने मेरा. आधा घंटा बाद भी खून रिस्ता रहा बुर के अंदर से और तुम्हे याद नहीं. हथियार दिखाए होते तोह मैं मजाक भी नहीं करती छुड़वाने की बात तोह दूर. ये पानी डालो वह मुझसे नहीं उठने वाली ये.", अर्जुन ने ध्यान से देखा तोह पाया की बिंदिया की टाँगे सच में चौड़ा गई थी. उसको इतना पता था के ये बेचारी ज्यादा चूड़ी नहीं थी और ऊपर से उसके लुंड का आकर.
"माफ़ कीजियेगा आगे से ऐसा नहीं होगा.", अर्जुन ने वह बाल्टी भैंस के सामने बानी प्याऊ में खली करते हुए कहा.
"बात माफ़ी की नहीं है. प्यार से भी कर सकते थे न.? मैंने तोह खुद हे बुलाया था लेकिन तुम तोह बिना सुने बस घंटे भर तक रौंदते रहे. चूचिया तक दुःख रही है. पति या तुम्हारे नाना ने हाथ लगाया तोह पता चल जायेगा, इसलिए माहवारी का बहाना करना पड़ा.", बिंदिया हल्का सा शर्माती हुई बाल्टी फिर से टूंटी के नीचे रखती कहने लगी.
"वैसे सच कहु तोह प्रकाश भैया की किस्मत ाची है जो आप जैसी बीवी मिली है.", अर्जुन ने एक बार और ध्यान से बिंदिया को देखते हुए कहा. भरी कूल्हे, मॉटे दूध और पहले हुए गाल. रंग बेशक सांवला था लेकिन वह एक भरपूर जवान औरत थी.
"मेरे वह अगर ठीक होते तोह क्या मैं तुम्हारे नाना के नीचे आती? या तुमसे करवाने की भूल करती.? किस्मत खराब है मेरी जो अभी तक पेट से ना हो पाई.", बात गंभीर थी लेकिन बिंदिया के चेहरे पर उस हलकी रौशनी में भी मुस्कान थी. अर्जुन ने बाल्टी उठाते हुए फिर से खाली की और जब वापिस आया तोह ब्लाउज के ऊपर से हे एक उभर को दबाते हुए बोल कर निकल गया.
"कल आराम से इलाज करता हु.", बिंदिया अपनी छाती सहलाती दर्द और सिसकारी से बस अर्जुन को जाते हुए देखने लगी.
'कल. हाँ इस बार देखती हु ाचे से. शठ.. जालिम कही का... आह.' और अपने कमरे की तरफ हंसती हुई चल दी.
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"कहा थे तुम? और मैंने कितना इन्तजार किआ खाने पर तुम्हारा.", समय दीदी अर्जुन को अंदर वाले आँगन में हे मिल गई. वह अभी कोई न था क्योंकि पौने ग्यारह का समय हो चला था. 2 मामिया तोह जल्दी बिस्टेर पर जा चुकी थी तबियत की वजह से. कुन्दनलाल जी अपने सम्बन्धी के साथ आज ज्यादा हे पी गए थे तोह वह भी खाने के बाद सो चुके थे. ऐसा हे कुछ सुनंदा जी, अंजना जी और पूजा मामी की माँ का हाल था. भोजन के बाद वह लोग भी सोने चली गई थी.
"आज वह मौसी के घर खाना था तोह उधर समय लग गया. फिर कुछ देर बहार प्रकाश भैया से बातें करने लगा था.", अर्जुन भी सीढ़ियों के पास हे समय के साथ खड़ा हो गया. समय एक रेशमी सफ़ेद पजामा और काली नरम टीशर्ट पहने थी. बालो में रबर लगाए हुए वह साधारण लिबास में भी गज़ब की दिख रही थी इस समय. अर्जुन को अपनी तरफ इस तरह ध्यान से देखते पा कर थोड़ी शर्म से गर्दन झुकाते हुए बोली.
"ाचा कोई बात नहीं. लेकिन आज मैं तुम्हारे कमरे में आउंगी माँ के सोने के बाद. नानी तोह कंचन के साथ सोई है हमारे कमरे में लेकिन अभी माँ का पता नहीं है क्योंकि वह बुआ से बातें कर रही है. स्वाति भी ममता चची के कमरे में थी अभी तोह वही सोयेगी.", इतना कहती वह ऊपर चढ़ने लगी और उसके पीछे हे अर्जुन भी चल दिए. पाजामे से समय के हिलते नितम्भ देख अर्जुन कुछ पल के लिए उनमे खो गया लेकिन ऊपर आने से पहले हे नजरे हटते हुए वह अपने कमरे की तरफ बढ़ गया और समय अपनी माँ के कमरे की और. टोलिया लेते हुए वह बाथरूम में घुस गया जो कमरे से बहार बना था.
दिनभर के हादसे याद करता वह ठन्डे पानी से खुद को ाचे से साफ़ करते हुए नाहा रहा था..
'ये सच में पहले से बड़ा हो गया है. और हलके बाल भी आने लगे इधर.' अर्जुन ने जैसे हे अपने लुंड को साबुन से साफ़ करना शुरू किआ वह खुद भी थोड़ा हैरान हुआ. उसका शरीर बढ़ रहा था अब. दिवार पर लगे डेढ़ फ़ीट के शीशे में खुद को देखा तोह पाया के छातियां भी बहार को उभरने लगी थी और उस पर मासपेशिया ाचे से दिखने लगी थी. ऐसा हे हाल उसकी बाजुओं का था जो पूरी मछली बना रही थी. पेट सपाट तोह था लेकिन वह भी अब सख्ती आ चुकी थी 6 डब्बे से उभर आये थे.
'म्हणत और सही खुराक.' बस इतना बुदबुदा कर वह फिर पानी के नीचे खड़ा हुआ और तक़रीबन 15 मिनट बाद सिर्फ पाजामे में बहार निकल आया. बाल सूखते हुए कमरे में आने के बाद एक बिना ब्याह के टीशर्ट पहन वह टहलने के हिसाब से तीसरी मंजिल की खुली छत्त पर आ गया.
मौसम ाचा था इस समय. चाँद की रौशनी भी थी और आसमान में तारे भी जगमग थे. छत्त पर लम्बाई की तरफ chahal-kadmi करते हुए वह एक तरह से सैर कर रहा था.
"अकेले क्या कर रहे हो यहाँ? नींद नहीं आ रही थी क्या?", ये पूजा मामी थी जो आज एक गहरे रंग के gown-nighty में थी.
"नहीं ऐसा कुछ नहीं है. वह थोड़ी आदत है न सोने से पहले खुली हवा में टहलने की तोह सोचा यहाँ हे घूम लेता हु. आप बताइये मामी जी, आप नहीं सोई अभी तक? थक गई होंगी इतनी म्हणत के बाद.", अर्जुन भी सँभालते हुए उनके हे लहजे में बात का जवाब दे रहा था.
"ऐसा तोह कुछ किआ हे कहा जो थकान होती मुझे. घूमने भी कार में गए थे फिर घर पर तोह आराम हे किआ है. हाँ तुमने ज्यादा म्हणत की थी तोह लगा के शायद तुम सोने चले गए होंगे.", दिवार के साथ दोनों हाथ टिकाये वह एक कामुक तरीके से कड़ी हो गई थी. भारी सतांन इस तरह दोनों हाथो के बीच से और भी उभर के दिखने लगे.
"मैं म्हणत से नहीं घबराता मामी जी. अब शरीर ऐसा है तोह आदत भी हो गई. वैसे यहाँ तोह कुछ म्हणत करने को है नहीं लेकिन अपने घर होता हु तोह बहोत सख्त नियम है.", अर्जुन ने उनका ऐसे खड़ा होना najar-andaaj कर दिए था. पूजा को भी उसके द्वारा ऐसे तिरस्कार करना ाचा न लगा लेकिन वह बड़ी थी और अनुभवी भी. संभाल लिए अपने गुस्से और जलन को.
"वैसे सुना है के म्हणत तोह यहाँ भी काफी की है तुमने. कल रात हे कोई कह रहा था के छत्त पर ज्यादा कसरत की तुमने.", जुबान में मिठास के साथ हे जेहरीले तीर चला रही थी पूजा. अपने हे भांजे से जाने कैसा gila-shikwa था उनको. अर्जुन भी समझ गया था के वह संगीता मामी की बात कर रही है लेकिन लफ्ज़ो को रोक रखा है.
"मामी जी मेरा तोह स्वाभाव हे ऐसा है. जगह ाची हो, मौसम भी वैसा हे हो तोह मैं mehnat-kasrat कर हे लेता हु. आपकी जानकारी के लिए बता दू की कल रात के बाद आज भी 2 बार म्हणत कर चूका हु.", उसने जानभूझ कर 2 कहा 3 नहीं. और उसके ऐसे जवाब पर पूजा जड़ होती हुई उसके चेहरे को देखने लगी. वह कोई मुस्कान न थी बस एक स्पष्ट गंभीरता और तेज. अर्जुन अब तक का सबसे परिपूर्ण व्यक्ति था जो पूजा ने देखा था. 40 पार होने के बावजूद पूजा खुद इस स्कूल जाने वाले लड़के की और आसक्त हो चुकी थी. लेकिन वह सीधा कुछ भी नहीं करना चाहती थी. बस अर्जुन के ये 2 बार कसरत वाले शब्द उसको झिंझोड़ रहे थे.
"साफ़ कहो न कोण 2?", पूजा से और कुछ न कहा गया तोह वह सीधा हे मुद्दे पर आ गई.
"कोण मतलब?", अर्जुन भी अब दिवार के साथ हे आ खड़ा हुआ. वो बहार देख रहा था और पूजा अपने भांजे को.
"मेरे मुँह से हे sun-na चाहते हो तोह सुनो. रात तुमने संगीता के साथ सबकुछ किआ ये मुझे पता है और हम दोनों हे उस कसरत की बात कर रहे है. तोह बताओ के आज 2 कोण थे.?", धैर्य जवाब दे गया था पूजा का जो अपने बेटे की उम्र वाले भांजे से वह ये बात करने लगी थी.
"नाम जान कर क्या करेंगी आप? चलो फिर भी इतना बता देता हु की एक कुंवारी थी और एक शादीशुदा.", अर्जुन इतना कहने के साथ हे सीढ़ियों से नीचे की और चल दिए बिना पूजा मामी पर नजर फिराए. पूजा को एक और झटका लगा ये सुनकर की अर्जुन ने एक कुंवारी और एक शादीशुदा के साथ किआ है.
'अनीता के साथ तोह पता है मुझे की इसने शाम को हे किआ है. दूसरी, दूसरी कही समय तोह नहीं? नहीं वह हरगिज़ ऐसा नहीं करेगी लेकिन वह आज सारा दिन नजर नहीं आई थी. खाना भी सबसे आखिर में खाया था उसने. हे भगवन ये क्या गलती कर बैठी मैं.', पूजा के तोह कान हे गरम हो गए सब सोच कर. कुछ देर वह वैसे हे कड़ी हुई जाने क्या सोचती रही लेकिन फिर चेहरा ठीक करती नीचे चल दी.
सभी कमरों के लाइट बंद थी इस समय ऊपर सिर्फ अर्जुन और खुद उसके कमरे को छोड़ कर. अपने कमरे में निगाह डाली थी तोह देखा की समय पाँव पर चादर किये बगल में तकिया लगाए लेती हुई थी. थोड़ा निश्चिंत होती वह दरवाजा हल्का से ढाल कर दबे पाँव अर्जुन के कमरे की और चल दी. गेट के पास ठिठक कर उसने हलके से दरवाजा बजाय.
"खुला है. अंदर आ जाओ समय दीदी.", अर्जुन ने वैसे हे आवाज लगाई लेकिन पूजा की तोह sitti-pitti गम हो गई अपनी बेटी का नाम सुनते हे. वह सोचने लगी की कही उसकी बेटी का अब रात का तोह कार्यक्रम नहीं बना हुआ इसके साथ. दर्द से सर भारी हो चला था सब सोचते हुए. हिम्मत करती वह दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हुई जहा अर्जुन सिर्फ पाजामे में बिस्टेर से तक लगाए कोई किताब पढ़ रहा था. अपनी मामी को सामने देख कर भी उसको कोई हैरानी नहीं हुई.
"समय क्यों कहा तुमने, बिना देखे हे.?"
"समय दीदी रात को बात करने का बोल रही थी तोह लगा वही होंगी. वैसे तोह कोई आता नहीं इस कमरे. लेकिन ाची बात है के आप आई. बैठिये", अर्जुन ने किताब का एक पन्ना मोड़ते हुए उसको बंद करते हुए एक तरफ रख दिए. अर्जुन की समझदारी और आवाज से गंभीरता देख कर पूजा लाजवाब रह गई थी. फिर भी अपनी नीले रंग की निघ्त्य को ठीक करती वह बिस्टेर के किनारे पर बैठ गई. एक नजर किताब पर डाली जो अब बंद पड़ी थी. 'फंडामेंटल ऑफ़ फिजिक्स' शीर्षक की किताब देख कर वह थोड़ी आश्वस्त हुई के ये लड़का अपने मतलब की किताब हे पढ़ रहा है.
"तुमने नाम क्यों नहीं बताये?", पूजा का स्वर बहोत धीमा था.
"आपको नाम जाकर क्या मिलेगा? इतनी जिज्ञासा क्यों हो रही है मामी आपको? आप खुद से खुश नहीं है या दूसरे लोगो की ज्यादा फ़िक्र रहती है आपको.", अर्जुन का सवाल सटीक था. पूजा कुछ देर खामोश रही और फिर एक बार उसकी तरफ नजर करती कहने लगी.
"तुम्हे नहीं लगता के तुम इन सब चीजों के लिए छोटे हो? ये सब गलत नहीं लगता तुम्हे जो भी तुम यहाँ कर रहे हो?", अर्जुन इस बात पर मुस्कुराते हुए उनके चेहरे को निहारने लगा. पूजा मामी के चेहरे पर गंभीरता जरूर थी लेकिन भरे गाल, उलझी हुई घनी जुल्फे, तीखी बोहेन, बड़ी आँखें और लाल सुरक बड़े होंठ बताते थे के वह सच में एक खूबसूरत और कामुक स्त्री थी. अर्जुन को यु अपनी तरफ निहारते देख अगले हे पल वह नजरे नीची करती चादर पर एक ऊँगली चलने लगी.
"ख़ुशी हर इंसान के लिए जरुरी है न मामी? फिर क्यों किसी को ज्यादा और किसी को बिलकुल भी नहीं मिलती? और सही या गलत का फैंसला कौन करता है? आपके 2 बचे है लेकिन ऐसे भी लोग है जिनके वर्षो बाद भी कोई औलाद नहीं. आपके पास अपने पति है लेकिन ऐसी बहोत सी महिलाये है जिनका सुहाग नहीं है. जितना इंसान का हक़ होता है ज़िन्दगी जीने के लिए उतना उसको देना कोई गलती या अपराध नहीं. अपराध या गलत वह है जो दुसरो के हिस्से की ख़ुशी भी चीन ले. जो दुसरो को दुःख दे या उन्हें सताए. आप बताओ जरा क्या मैंने ऐसा कुछ किआ? आप एक उचित तर्क दीजिये और मैं मान लूंगा की मैं गलत हु.", अर्जुन अब बिलकुल सामने बैठ चूका था अपनी पूजा मामी के जो उसकी कही हर बात को समझ रही थी.
कुछ हे पल बीते थे की उनकी आँखों से tap-tap करते आंसू चादर पर गिरने लगे. वह सुबकना चाहती थी लेकिन आवाज दबाये बस वह अपने आंसुओ को गिरने से नहीं रोक पा रही थी.
"इंसान जब आहात या जख्मी होता है तोह वह 2 तरह के फैंसले करता है. या तोह सबको जख्मी करने का, या फिर कुछ ऐसा करने का जिस से बाकी सब उन जख्मो से बचे रहे जो उसने सही हो. और देखा जाये तोह दोनों अपनी जगह ठीक है. आपको दुःख था कोई तोह वह इतना बढ़ गया की आपने खुद के साथ मुझे भी दर्द देने का फैंसला कर लिए. खुश नहीं हो अपनी ज़िन्दगी से आप? आप बात कर सकती है मेरे साथ मैं बिलकुल बुरा नहीं मानूंगा. आपकी दी हुई दवा भी तोह झेल हे ली थी.", अर्जुन ने आगे बढ़कर रोटी हुई अपनी मामी का चेहरा एक हाथ से ऊपर किआ जहा वह खूबसूरत आंखें रोने से लाल हो चुकी थी, गोर गाल पानी से भीग चुके थे. इस समय वह बिलकुल अलग हे पूजा थी.
"मैं सच में बहोत बुरी हु अर्जुन. दीदी ने मुझे बहोत प्यार दिए और कभी एहसास नहीं होने दिए के मैं उनके घर में बहु हु या बहार से हु. लेकिन मेरे भाई की वजह से मुझे तुम्हारे पिता और परिवार पर बहोत नाराजगी थी. ये कब बदले की भावना में बदल गई पता नहीं चला. फिर तुम्हे देखा तोह अपनी ज़िन्दगी के पुराने दिन याद आ गए. संगीता के साथ तुम्हारे मिलान की बात ने मुझे इतना जला दिए था के मैं सब भूल कर बस तुम्हे अपना गुलाम बना लेना चाहती थी. जिस से सिर्फ तुम मेरे हे आगे पीछे रहो, जब भी हम मिले और साथ हे मैं तुम्हारे परिवार से भी अपने भाई के अपमान का बदला ले सकू. तुम्हारे जिस्म को परखने के लिए हे मैंने वह दवा तुम्हे दी थी की तुम उस काबिल भी हो या इस घर के बाकी सभी मर्दो की तरह तुम्हे भी औरत से परहेज है. मैं बहोत बुरी हु अर्जुन, मुझे माफ़ तोह नहीं कर सकते लेकिन मैं हर सजा की हक़दार हु. आइंदा से खोशिस करुँगी की कभी तुम्हारे सामने न औ.", हाथ जोड़ती हुई पूजा मामी रोये जा रही थी. फिर उठने लगी तोह अर्जुन ने उनके दोनों हाथ पकड़ते हुए वापिस अपने पास बिठा लिए.
"पहली बात तोह ये है की मुझे कोई शिकायत नहीं है आपसे. जो भी किआ उसमे मेरा कोई नुक्सान नहीं हुआ. दूसरा अगर कोई विवाद हुआ है आपके भैया का हमारे परिवार से तोह उन्हें ये बात समझदारी से करनी चाहिए थी क्योंकि गलती उनकी हे होगी ये मैं अभी कह देता हु. क्योंकि मेरे दादाजी गलती करते नहीं और पापा ऐसे है की गलती कोई साबित करने के लिए रहता नहीं. और अब आते है मुझे परखने वाली बात पर तोह अब जरा ये बता दीजिये के परिणाम क्या मिला आपको? उसको बाद मैं सजा पर आऊंगा.", अर्जुन ने परिवार की बात संजीदा हो कर कही थी लेकिन फिर मसखरी करते हुए उसने उनके चेहरे को ऊपर उठाते हुए पुछा. उसकी ऐसी बात पर रोटी हुई पूजा मामी के चेहरे पर भी एक छोटी सी मुस्कान आ गई.
"ऐसा क्या है तुम्हारे दादाजी और पापा में?", अर्जुन का मतलब समझती वह नजरे झुकाये आँखें साफ़ करती पूछने लगी. अर्जुन भी उनके गाल साफ़ कर रहा था अपनी उंगलियों से.
"आप खुद हे मिल लेना कभी क्योंकि मैं तोह छोटा हु न अभी.", शरारत से अर्जुन ने हलके से उनका गाल दबाते हुए कहा.
"ाचा अब तुम आराम करो, मैं चलती हु.", वह बिना अपना चेहरा दूर किये इतना हे बोली. अर्जुन की हरकत उन्हें ाची लग रही थी लेकिन मैं दुखी भी था खुद के ऐसे व्यवहार पर वह भी इस लड़के के साथ जो बड़े दिल के साथ हे समझदार भी था. कितनी बड़ी गलती की थी वह दवा देने वाली लेकिन अर्जुन ने पता होने के बावजूद उन्हें एहसास तक नहीं करवाया. गलत करने पर भी उल्टा अर्जुन ने उन्हें हे सही कहा. ये सब सोचती वह फिर से भर्र गई थी लेकिन अर्जुन ने जैसे ये महसूस कर लिए था.
"सजा दिए बिना तोह मैं आपको जाने नहीं दूंगा मामी. आपने इतना कुछ किआ है मेरे साथ तोह अब मेरी बारी है.", माथे पर हाथ फेरते हुए उनके बिखरे बाल सही करता वह उठा और दरवाजा बंद करता फिर से उनके साथ हे बिस्टेर के किनारे आ बैठा. पूजा मामी किसी nav-byaahta की तरह सेहम सी गई थी दरवाजा बंद होने पर और अब जैसे हे अर्जुन ने उनका हाथ अपने हाथ में लिए तोह सिर्फ एक बार नजरे उठा कर उन्होंने अपने सामने बैठे मुस्कुराते अर्जुन को देखा और अपनी नजरे झुका ली.
"मैं तुम्हारी मामी हु. ये ठीक नहीं होगा.", वह निघ्त्य के कपडे को ऊँगली में लपेट रही थी दूसरे हाथ से. शरीर हल्का कांप रहा था और धड़कन जैसे रेलगाड़ी हो चुकी थी.
"कानून की नजर में कोई रिश्ता नहीं होता, मामी और फिर आपका गुनाह कितना संगीन है. मुझ जैसे जंगली घोड़े को अपने दरवाजे बाँधने वाली थी आप तोह जरा मैं भी देखु मेरी मामी कितनी कुशल घुड़सवार है.", अर्जुन आजतक ऐसे अंदाज में नहीं आया था. बेबाक, बेख़ौफ़ और पूरी तरह बेफिक्र. घुड़सवारी वाली बात सुनते हे पूजा मामी अपना नीचे वाला होंठ काटने लगी.
"वह तोह वैसे हे कह दिए था. मैं इस अर्जुन को नहीं जानती थी उस वक़्त और शायद इस कमरे में आने से पहले मैं अपने पहले परिवार के साये से बहार भी नहीं आ पाई थी. अब मुझे ऐसा कुछ नहीं करना.", अर्जुन उनकी बात सुनता हुआ अपनी मामी की एक ऊँगली को मुँह में लेके चूसने लगा. पूजा मामी की त्वचा पर बाल तोह नहीं थे लेकिन अर्जुन की इस हरकत से सारे रोये जरूर खड़े हो गए थे. सिर्फ ऊँगली को मुँह में लेकर 2-3 बार चूसने भर से उसने पूजा का वजूद हिला दिए था.
"मतलब मैं अब आपको पसंद नहीं?", अर्जुन जिस तरह से बीएड के किनारे उनके साथ बैठा था उसका बया पत् मामी के दाए जांघ से सत्ता हुआ था. कोहनी अर्जुन के जांघ पर तिकी थी जिस हाथ की उंगलिया वह अपनी उंगलियों में जकड़े था.
"मैंने ऐसा तोह नहीं कहा न. मेरा मतलब था के मैं तुम्हे गुलाम नहीं बनाना चाहती अब. और पता लग गया के बना भी नहीं सकती.", उनके पति तेजपाल से पूजा को 2 खूबसूरत बेतिया हुई थी, शादी से पहले भी दिल्ली में उनका एक प्रेमी था लेकिन जो एहसास उन्हें अभी हुआ था वह उनके शरीर में पहले कभी न हुआ था. बिस्टेर में वह खुद अपने पति पर 21 रहती थी और यही वजह थी की उनके पति 15-20 दिन में हे कभी कभार थोड़ा बहोत करते थे और वह भी 10 मिनट बाद या तोह मुँह पलट कर सो जाना या फिर उठकर ड्यूटी चले जाना.
"लेकिन अब मुझे आपको ये तोह यकीन दिलाना हे होगा के मैं सच में क़ाबिल हु या आप सही थी.", अर्जुन ने पहल करते हुए उनका दूसरा हाथ पकड़ कर मामी को अपनी तरफ खींच लिए. पूजा मामी बिलकुल ढीली बैठी थी तोह इस तरह अर्जुन द्वारा अपनी तरफ करने पर सीधा उसके सीने से जा लगी. उनके वह भारी चुके निघ्त्य के अंदर आजाद थे और अर्जुन की छाती से लगते हे किसी नरम गुब्बारे से हिलते हुए डब्ब गए.
पूजा ने अभी तक सुना और देखा था के अर्जुन बहोत हे सय्यम और शांत स्वाभाव वाला लड़का है लेकिन ये अंदाज़ बिलकुल जुड़ा था. आज जैसे पूजा जैसी tej-taraar शिकारी खुद शिकार बन चुकी थी. अर्जुन ने बड़े आराम से बिस्टेर पर बैठे हुए हे अपनी गदराई और सुगठित मामी को अपनी गॉड में बिठा लिए. मखमली कमर को अपनी बाहो में लपेटे वह उन्हें खुद से लगाए चेहरे से 6 इंच दूर था.
"मैंने तोह सुना था के आप हावी होने वाली शक्शियत है लेकिन यहाँ ऐसा क्यों लग रहा है जैसे आप मेरे अधीन हो चुकी है.?", पूजा को उस बारीक निघ्त्य के अंदर अपने नंगे कूल्हों पर अर्जुन के ardh-uttejit लुंड का एहसास हुआ तोह वह शुन्य हे हो गई थी लेकिन उसकी आवाज से वह थोड़ा संभालती हुई शर्माती हुई बोलने लगी.
"आज सजा दे लो और अगर तुम्हे लगे की उसके बाद भी हमे मिलना चाहिए तोह फिर अगली बार जरूर मैं वैसे हे मिलूंगी जैसा तुमने सुना है.", अर्जुन ने उस गहरे नीले रेशमी कपडे में हिलते नारियल से चुके को एक हाथ से दबाते हुए उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए. अर्जुन के सख्त और बड़े हाथ में अपना सतांन महसूस करते हे पूजा ने जाँघे कस ली लेकिन गर्दन पर होंठ की तपिस मिलते हे मुँह से सिसकारी निकलती वह खुद हे गर्दन पीछे लुढ़कती अर्जुन के हाथो में झूल गई.
"मैं वह रूप आज हे देखना चाहूंगा. समझ लीजिये वही सजा का हिस्सा है. आपको तोह पता हे होगा के मैं प्यार से करता हु लेकिन मैं देखना चाहता हु के आप कितना साथ देती है.", निघ्त्य के सामने लगी कपडे की बेल्ट खोलने के साथ हे वह लगे सार बटन कपडे से जुड़ा करता वह उन्हें निर्वस्त्र करके बीच बिस्टेर पर ले आया. 5 फ़ीट 6 इंच लम्बी, गोरी और बेदाग़ जिस्म वाली पूजा के शरीर पर चर्बी सिर्फ 2 जगह हे थी, भारी नितम्भ जो बिलकुल सही आकर में थे और बड़े कड़क चुके, जो कही से भी 38-इ या फ से कम् न थे. गोल भूरे दायरे में मटर के दाने से चूचक जो कड़े हो चुके थे, सपद नरम पेट और गहरी नाभि से 2 इंच नीचे ताज़ी साफ़ की हुई पेडू और 4 इंच लम्बा छूट का गुलाबी चीरा उन मॉटे छूट के बहार वाले होंठो के बीच. गुलाबी नुकीले पत्ते थोड़ा बहार को निकले बता रहे थे की वह कितनी कामुक और संसर्ग में कितनी अग्रणी है.
अर्जुन ने दोनों मॉटे चुचो को कास के पकड़ते हुए उनके ऊपर झुक कर दोनों होंठ अपने मुँह में भर लिए. ये काफी था पूजा को मर्यादा से निकलने के लिए. हमेशा हे कामातुर रहने वाली पूजा अर्जुन की मजबूत पकड़ अपने मॉटे दूध की मटकियों पर पा कर खुद भी सबकुछ भूल उसको बड़ी शिद्दत्त से चूमने लगी. लम्बी जीभ अर्जुन के मुँह में डालती वह कमर भी उठाने लगी थी. इतनी गरम औरत को अपने नीचे पड़ा देख एक पल अर्जुन भी पूर्ण उत्तेजित हो गया था लेकिन उसको पता था के ऐसी महिला को सामने से टक्कर दे कर हे तृप्त किआ जा सकता है.
निप्पल को चुटकी में लेकर मसलते हुए वह भी अपनी जीभ उनके गरम मुँह में डालने लगा जिसको पूजा मामी मजे से चूसने लगी थी. दोनों को हे जब सांस लेने में दिक्कत होने लगी तोह एक पल को अलग हुए और भीगे होंठ उनके मॉटे चूचक पर लगते हुए अर्जुन ने एक हाथ उनकी गीली छूट की दरार पर रख दिए. होंठो में पकड़ कर वह उन्हें बहार की तरफ खींच रहा था और 2 उंगलियों से दरार को फैलते हुए मध्यमा ऊँगली से छूट के छेड़ को कुरेदने लगा.
"आह्ह्ह्ह.. कोई रेहम नहीं करना.. अपने कपडे भी निकल लो ना.. आठ.. और ये लाइट बुझा दो उम्म्म..", अपनी एक टांग अर्जुन के ऊपर करती वह छूट फैलाये ungli-chodan का मजा लेती आहें भर रही थी. अर्जुन ने उनकी बात अनसुनी करते हुए दूसरा चुका मुँह में भरते हुए अपने दूसरे हाथ की 2 उंगलिया उनके मुँह में दाल दी. नीचे छूट में भी 2 लम्बी उंगलिया अंदर बहार होती ाचे से रगड़ रही थी. 3-4 मिनट की इस तेज रगड़ाई और दूध चूसै से हे पूजा मामी bhal-bhal कर अर्जुन के हाथ पर हे झड़ने लगी. उनका yoni-ras कुछ अर्जुन के हाथ पर लगा और बाकी छूट से नीचे गांड तक जाने लगा.
पूजा मामी निढाल होने की जगह जैसे और भड़क गई थी. खुद हे अपना दूसरा सतांन दबती वह एक हाथ से अर्जुन की पीठ सहलाती जैसे उसको और जोर से करने को कह रही थी. अर्जुन बिना कुछ कहे फुर्ती से खड़ा हुआ और बड़ी लाइट भुजते हुए बिस्टेर पर लगे एक लैंप को जलने के बाद पजामा उतार सीधा पूजा की छूट के सामने आ बैठा. दोनों टाँगे फैलते हुए उसने लुंड को उस धीमी रौशनी में हे मामी की मखमली गीली छूट पर घिसते हुए चिकना किआ और पत् को थपथपाते हुए इशारे से अपनी टाँगे वही रोक कर रखने का बोलते हुए एक हाथ से लुंड के सुपडे को छेड़ पर टिकते हुए दबाव देने लगा.
हैरानी से आँखें चौड़ी होने लगी थी मामी की जब वह दहकता हुआ मोटा सूपड़ा छूट के प्रवेश द्वार को फैलता अंदर जाने लगा. कोई आधा इंच सूपड़ा जब स्थिर हुआ तोह अर्जुन ने उनका वह दूसरा पाँव ऊपर उठाते हुए कमर जोर से आगे चला दी.
"ओह्ह्ह्ह... बहनचोद.. आह्हः.. क्या कर दिए रे.. मर्डर गई मैं.. आह..", चार इंच लुंड अंदर जाते हे पूजा मामी और उनकी छूट को अपनी औकात पता चल गई थी अर्जुन के लुंड के सामने. एक खुली हुई छूट को भी इस लड़के के लुंड ने सोच से परे तक चौड़ा करते हुए जैसे अंदर तक भेद दिए था.
"मामी बड़ी कासी हुई हो अभी तक.", उनकी मखमली चिकनी जाँघे फैला कर ऊपर उठाये अर्जुन ने कटाक्ष सा किआ. पूजा मामी के चेहरे पर दर्द की हलकी लहर देख वह समझ गया था के ये अभी और भी ले सकती है.
"संगीता सही थी.. आह्हः.. तेरा इंसान का तोह नहीं.. आह्ह्ह्हह माआ.. बचा..." बाकी सब उनके मुँह में दबा रह गया जब अर्जुन के दूसरे तगड़े धक्के ने पिछली साड़ी गहराई ख़तम करते हुए उनकी छूट के अनछुए हिस्से में दस्तक देते हुए बच्चेदानी से चुम्बन किआ. पूजा को तोह अपनी नाभि तक उसका वह 4 इंच मोटा और बीतते से लम्बा लुंड महसूस हो रहा था. अर्जुन अपनी मामी के होंठ जकड़े था और वही मामी उसको पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी. फटी छूट से भी 2 बूँद खून की चल्लाकक आई थी इस प्रहार से. उनके सख्त मुलायम स्टैनो को कस के मींजते हुए अर्जुन ने 1 मिनट बाद हे मुँह होंठो से हटाया और आधा लुंड उस कासी छूट से झटके से बहार निकलते हुए फिर से जड़ तक अंदर दे मारा.
"माँ.. मर्डर गई मैं.. ऐसी सजा.. आह.. देगा क्या."
"नहीं मामी, ये तोह मजे की शुरुआत है. सजा बाद में दूंगा.." उनके कूल्हे सहलाते हुए वह उनकी चिकनाई और भराव का मजा ले रहा था. लुंड जड़ तक छूट में धंसा और अंडकोष छूट के बाहर ठीके थे. "वैसे सच में आप टक्कर की हो जो 2 झटको में झेल गई. अब तैयार हो जाओ जरा.", अर्जुन ने बात आगे कहते हुए तेजी से आधा लुंड अंदर बहार करते हुए उनकी चीखे भी निरंतर करवा दी. हर धक्के पर जैसे पूजा को छूट और चौड़ी होती महसूस होने लगी. 5-6 मिनट बाद हे लुंड सुपडे तक बहार आता और फिर अंतिम चोरर तक चोट पहुंचने लगा था. चुके लाल हो गए थे जोरदार मर्दन से.
"आह... ये मेरी छूट है कोई बदला लेने की जगह नहीं.. पेट दुख दिए मेरा.. आठ... संगीता -अनीता ने कैसे झेला था इस हब्शी के लुंड को?", अर्जुन की छाती पर नाख़ून गदति वह सिसक रही थी. कूल्हों से लेकर चेहरे तक हर भाग अर्जुन के तगड़े धक्को पर हिल रहा था.
"मामी चलो अब आप ऊपर आओ मेरे.", अर्जुन ने जैसे हे सूपड़ा निकला तोह एक पल के लिए पूजा ने रहत की सांस लेते हुए टाँगे पसरी बिस्टेर पर. छूट से चिपचिपाहट किसी तार सी अर्जुन के लुंड तक लगती अंतत में टूट कर आधी छूट पर और आधी लुंड से जा लगी. सच में अर्जुन ने छूट को ाचे से कूटा था जो वह ऐसा गधा कॉमर्स निकल रही थी.
बिस्टेर पर पीठ के बल लेट कर अर्जुन ने जबरदस्ती उन्हें ऊपर की तरफ खींचा तोह बड़ी अदा से वह मुट्ठी में लुंड की जकड पकड़ती उसको निहारने लगी और फिर गप्प से सूपड़ा होंठो के भीतर. अर्जुन ये देखते हे मुस्कुरा उठा और अपनी मामी के सर पर हाथ रखते हुए सहलाने लगा. पूजा मामी भी अपने मुँह को फैलाये उस सुपडे को धीमी रफ़्तार से गीला करने लगी. परेशानी तोह बहोत हो रही थी लेकिन ऐसा लुंड देख कर वह खुद को रोक न पाई थी. अर्जुन ने थोड़ा सा सर नीचे दबाया तोह आधा लुंड मुँह से होता गले की घंटी पर जा भिड़ा. आँखे बहार निकलने को होने लगी तोह पूजा ने गर्दन को एक ख़ास कोण पर लुंड के सीधे अनुसार ऊँचा कर लिए. हिम्मतत दिखती वह उतने हे लुंड को अब होंठो में कैसे चूस रही थी. 1 मिनट से कुछ हे सेकंड ज्यादा चली ये चूसै सांस लेने की दिक्कत से ख़तम हो गई.
"तुम्हारे मां का मैं पूरा अंदर ले लेती हु लेकिन ये आधे से आगे नहीं ले पाई. जाड नहीं दुखती तोह कुछ देर और करती.", फिर अपने लचीले भारी कूल्हे फैलाती मामी उस मॉटे सुपडे पर धीरे धीरे बैठने लगी और 5-6 इंच के बाद हे ऊपर नीचे होती मजे से चिल्लाने हे लगी थी. उनके साथ हे वह बड़े बड़े चुके भी फुदक रहे थे. जिन्ह पकड़ते हुए अर्जुन ने अपनी कमर नीचे आती मामी के साथ हे ऊपर उठा दी..
"आह्ह्ह्हह.. सच में निर्दई इंसान हो. सब झूठ बोलती है.. आह... फाड़ दी तुमने ये.. माँ." धम्म से वह अर्जुन की छाती पर दोनों पंजे टिकती बैठ हे गई. अर्जुन ने स्टैनो को छोड़ कर उनके लचीले कूल्हे मसलने शुरू कर दिए.
"चूसना कहा से सीखा आपने मामी? क्या मां के सिवा.", अर्जुन ने कूल्हों को बहार खींचते हुए पुछा. उसको उनके ये रबर से नरम और मुलायम कूल्हे कुछ ज्यादा हे भा गए थे.
"नहीं यार. ऐसा नहीं है. हाँ कॉलेज में था एक मेरे साथ लेकिन उसके साथ ऊपर ऊपर से हे सब किआ था. तेरे मां हे हैं जिन्होंने मेरी सील खोली थी लेकिन तूने तोह टूटी सील से भी खून निकल दिए.. उफ़.. सकिंग मैंने वीडियो कैसेटटे से और खली समय में खीरा और गाजर मुँह में लेकर सीखी है. लेकिन तेरा तोह देसी खीरे से भी मोटा है. अभी तक दुःख रहा है मेरा मुँह. और ये भी.", अर्जुन ने उनकी बात सुनकर उन्हें अपने ऊपर झुकाते हुए खुद हे नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए. गांड पर लगते धक्के से अब दोनों हे मजे में उड़ने लगे थे. लेकिन 2-3 मिनट में हे पूजा मामी फिर से अकड़ गई थी और इस बार वह पसीने में भीगी उसकी छाती पर निढाल हे हो गई थी. आधे घंटे में दूसरी बार झड़ी थी वह लेकिन अर्जुन इस बार जल्दी नहीं होने वाला था. वह वैसे हे 3 बार खाली हो चूका था तोह इस बार शायद उसका होना मुमकिन हे न था.
"मामी कड़ी हो जाओ अब.", उन्हें बिस्टेर पर मुँह के बल लिटाते हुए वह खड़ा हुआ और अलमारी से नारियल के तेल की डब्बी लेकर उनके पुष्ट पिछवाड़े के पास आ बैठा. सखलन से बेजान से पड़ी पूजा को तोह गुमान तक न था के अर्जुन आगे क्या करेगा. अर्जुन ने दोनों हाथो पर ाचे से तेल लगते हुए दोनों कूल्हों के साथ पीठ तक मालिश करते हुए उन्हें आराम देना शुरू किआ जिस से वह और भी आनंद में जाने लगी लेकिन फिर चुत्तड़ो की उस गहरी दरार में तेल की ठंडी धार महसूस करते हे दिमाग कोंढा. लेकिन उनके गोल सुडोल पत्तों को दबाये अर्जुन अपनी ऊँगली से उनका वह पीछे का छेड़ कुरेदने लगा.
"वह नहीं अर्जुन.. प्लीज.. आह.", वह नरम लेकिन तंग चीड़ ाचे से चिकना करने के बाद अर्जुन ने तेल से चुपड़ी अपनी तर्जनी ुंली अंदर पेल दी. सच में उनकी गांड बहुत हे नरम और नाजुक सी थी. ऊँगली को भी उनके छेड़ ने कस लिए था लेकिन अर्जुन ने परवाह न करते हुए अंदर बहार करते हुए ाचे से उसमे नारियल का तेल भर दिए. लुंड पर दूसरे हाथ से ढेर सारा तेल चुपड़ने के बाद उसने सूपड़ा उनके गदराये कूल्हों के बीच धंसते हुए उस khulte-sikudte छेड़ पर टिकते हुए अंदर की तरफ दबाया तोह पूजा मामी ने तकिया अपने चेहरे के पास करते हुए मुँह में दबा लिए.
"मामी ढीली छोड़ दो नहीं तोह दर्द ज्यादा होगा.", लुंड फिसल कर ऊपर चला गया तोह अर्जुन ने अपनी मामी को चेताया. सूपड़ा भयंकर फूल कर अँधेरे में भी चमक रहा था. उसकी बात मानते हुए और ज़िद्द के सामने हारती हुई पूजा ने गांड को ढील दे दी.
"अभी तक इधर सिर्फ एक बार हे हुआ है वह भी शादी के बाद. 20 साल से भी पहले. प्लीज आराम से.", अर्जुन ने दोनों कूल्हे एक हाथ से चौडाते हुए दूसरे हाथ से लुंड फिर से उस बंद छेड़ पर लगाया और पूरा दबाव देते हुए वह फूला हुआ सूपड़ा आगे सरका दिए. छेड़ को एक बार mootra-surakh ने चूमा और अगले हे पल कच से किसी गरम छुरी की तरह वह उनकी मक्खन जैसी गांड को काट कर अंदर धंस गया.
कटी कबूतरी की तरह पूजा मामी हाथ पाँव पटकने लगी बिस्टेर पर. आँखों से अश्रुधारा बह निकली और गांड में ऐसा महसूस होने लगा जैसे किसी ने बंद मुट्ठी ठूस दी हो.
"उन्न्नन... आह्ह्ह्ह.. धीरे.. मई नहीं ले सकती.. आह..", रोटी हुई वह गांड को कसने लगी तोह अर्जुन ने चटाक से एक थप्पड़ उनके भारी कूल्हे पर लगाया. वह किसी कुशल नर्तक से थिरक उठे और एक हलकी चीख पूजा के मुँह से निकल गई.
"आह मार क्यों रहे हो... माँ..", थप्पड़ लगने से उन्होंने गांड ढीली की थी और अर्जुन ने बैठे हुए हे धक्का लगते हुए पौने लुंड उस संकरी तंग गली में उतार दिए.
"मामी.. आठ.. यहाँ सच में आप कुंवारी हे हो.. आपके कूल्हे देखते हे मेरा दिल आ गया था आपकी गांड पर.", अब वह भी खुलकर ऐसे शब्द बोल रहा था.
"आह.. तेरा साइज देख.. माँ.. तेरे मां को क्या जवाब दूंगी.. ये भी फट गयी..", अर्जुन ने उनकी बात ख़तम होते हे उनपर लेट कर बिस्टेर पर दबे दोनों चुके पकड़ लिए. आराम से थोड़ा सा लुंड बहार करते हुए फिर से आगे तेल दिए. गांड का चला किसी छोटे रबर की तरह उस मॉटे लुंड पर कैसा था. अर्जुन भी जबड़े भींच कर आराम से आगे पीछे करता उनकी गांड मारने लगा. चुके कसके दबाने से दर्द अब 2 भाग में विभाजित हो गया था पूजा का.
"मामी खड़े हो के करे?, अर्जुन ने जब आधा लुंड चलना शुरू कर दिए तोह अपनी कराहती मामी से पुछा. इस तरह उसका पूरा लुंड उनकी गांड की गहराई में नहीं जा प् रहा था.
"आज रात तू जैसे मर्जी कर ले. कल नहीं आने वाली मैं तेरे आसपास.", उनकी बात पर अर्जुन उन्हें ऐसे लिए हे बिस्टेर पर 2 बार पलट गया. बिस्टेर के किनारे आते हे बिना गांड से लुंड निकले उसने मामी को पेट से पकडे हे अपने साथ जमीन पर खड़ा कर दिए. उनका कद्द अर्जुन से आधा फुट काम था तोह अर्जुन वैसे हे उन्हें जकड कर उठाये अलमारी के सामने आ खड़ा हुआ. एक तरफ से बड़ी लाइट जलाते हुए उसने मामी के एक पाँव को कुर्सी पर रखते हुए थोड़ा झुकाया और आईने में देखते हुए बचा खुचा लुंड भी गांड में पेलते हुए अपने अंडकोष कूल्हों से मिला दिए.
"आह मामी.. सच में मजेदार हो आप. उधर देखो न.", शर्म से आँखें बंद करती पूजा पहले आराम से कड़ी थी लेकिन सार मूसल गांड में उतारते हे वह कराह उठी. अर्जुन ने छूट सहलाते हुए जब उन्हें एक तरफ लगे अलमारी के बड़े दर्पण में देखने को कहा तोह वह भी अपनी हालत देख गरम हो गई. उनकी सोच से भी मोटा वह चिकना लुंड जिसपर मोटी नसे उभरी हुई थी, तरबूज जैसे चूतड़ों के बीच किसी मशीन सा अंदर बहार हो रहा था. नीचे लटकते bhari-bharkam चुके आगे पीछे हिलते इस दृश्य को और कामुक बना रहे थे. उंगलिया छूट चुदाई का अलग सुख देती पूजा को मजे से चीखने पर मजबूर कर रही थी.
"आह.. और तेज मार.. आह.. तू सच में जंगल घोडा है रे.. आह.. फाड़ दे सबकुछ.. माँ छुड़ाए तेरा मां. आह.. आज तोह जान भी लेले तोह कोई गम नहीं. आम.. तू पहले क्यों नहीं मिला रे.. माँ. आठ.." छूट से निकला हल्का फुल्का खून पानी के साथ जांघो पर आ कर सुख चूका था. इधर हर धक्के पर दोनों हे अपने चरम के और पास पहुंच रहे थे.
"मामी अगली बार चिकना नहीं karunga..Aah क्या दूध है आपके.. इनमे दूध नहीं आता बस यही कमी है..", तीन तरफ़ा हमला करता अर्जुन उनकी चिकनी पीठ पर दांत गाड़ते हुए बुरी तरह मामी से लिप्त उनके कूल्हों को और भारी करने लगा था.
"चुदाई ऐसी करता है तोह बचा भी कर हे सकता है.. आह.. तेरे मां के उसमे तोह अब दम रहा नहीं.. तोह तू हे कर कुछ.. मममम मई गई रे..", उनकी बात सुनते हे अर्जुन ने सटाक से लुंड बहार खींच लिए और उन्हें पलट कर झटके में हे लुंड एक बार में हे छूट में पेल दिए. सूपड़ा गांड से निकलता भी दर्द दे गया और छूट के अंदर घुसते हुए भी. "आह जालिम.. आज हे नीव रखेगा क्या?" अर्जुन उन्हें बिस्टेर पर पटकते हुए ताबड़तोड़ धक्के बरसाने लगा. छूट जो चरमसुख से पहले हे गीली हो चुकी थी अब सटासट चलते इस लुंड को भी मजे से निगल रही थी. फिर जब सूपड़ा उत्तेजना से अपनी औकात में आया तोह छूट की नरम दीवारे भी सेहन न कर पाई. 2 मिनट में हे छूट फिर से आंसू बहाने लगी साथ हे अर्जुन ने उनकी दोनों टाँगे फैला कर ऊपर उठाई और हुंकार भरते हुए सीधा गर्भ से सूपड़ा भिड़ा दिए..
"आह्ह्ह्ह.. मामी.. ये हुई सजा आठ.. हम्म्म", हुंकार के साथ हे उसने आज के दिन की सबसे बड़ी वीर्य बौछार उनके बच्चेदानी पर कर दी. गरम गाढ़े वीर्य को अंदर महसूस करते हे पूजा भी चीखती हुई अकड़ गई.
"आह.. भर दे मुझे आठ.. मां की जमीन पर तूने हे खेत जोट दिए.. आह.. ", 5 मिनट तक वह उनके पाँव हवा में उठाये रहा. जैसे गर्भ के अंदर एक के कटरा भर रहा हो. फिर उनकी बगल में लेती कर दोनों चुके प्यार से दबाते हुए बोलै.
"आज से आप मेरी व्यक्तिगत घोड़ी हो आप.", एक निप्पल को कास के मुँह में भर लिए इतना कहने के बाद. पूजा मामी भी उसकी तरफ पलट कर नंगी हे उसकी पीठ सहलाने लगी. अब वह गधा वीर्य बेहटा हुआ छूट से एक धार में बहार निकल रहा था.
"तेरी गुलाम घोड़ी हु अब से मैं. और वडा रहा के अगर तू आँगन के बीच भी नंगा होने को कहेगा तोह वह भी छुड़वा लुंगी. आह.. अब जाने दे न मुझे. डेढ़ घंटे में भी दिल नहीं भरा क्या तेरा.?" रात के साढ़े 12 हो रहे थे.
"यही सो जाओ न." अर्जुन ने एक कूल्हे को दबाते हुए कहा तोह दर्द से सिसक उठी पूजा.
"नहीं... आह.. आज नहीं. शहर में पक्का.. आह..", फिर खुद हे उन्होंने अपनी निघ्त्य पहनी और लंगड़दी कराहती दरवाजा खोल निकल गई. अर्जुन ने भी पजामा पहना और बड़ी लाइट बंद करते बिस्टेर पर आ लेता. वह अँधेरे में हे मुस्कुरा रहा था ये सोच कर की अभी यहाँ क्या हो गया. कहा तोह मामी उसको गुलाम बनाने लगी थी और कहा आज उसने पहली बार में हे उनके तीनो छेड़ खोल लिए. कोई 20 मिनट वह शांति से आँखे बंद किये पड़ा रहा लेकिन फिर अंदर से दरवाजा बंद होने की आवाज सुनते हे एक बार आँख थोड़ी सी खोल कर दबे पाँव आती समय को देख फिर से आँखे बंद कर ली.
"तोह जनाब सो गए. चलो कोई बात नहीं अब डिस्टर्ब नहीं करेंगे.", हलकी आवाज में वह इतना बोलती बड़ी अदा से उसकी नंगी छाती से आ लिपटी. उसको क्या मालूम था के अर्जुन देख चूका है. जब अर्जुन ने करवट लेते हुए उसको बाहों में भरा तोह समय ने आँखें खोल कर देखा.
"जनाब आपका इन्तजार कर रहे थे. मुँह मीठा करके हे सोऊंगा अब.", कमीज के अंदर से नरम पतले पेट को हलके से पकड़ते हुए अर्जुन ने समय के होंठो पर अपने होंठ जोड़ दिए. हैरान होती समय अगले हे पल अपने पहले चुम्बन का मजा लेती उस पर एक तंग रखती चिपक गई. कुछ देर एक दूसरे को इस तरह चूमने के बाद अर्जुन ने पाजामे के ऊपर से हे कूल्हों पर हाथ रखते हुए खुद से चिपका लिए.
"अब सो जाइये. 1 बज चूका है. बाकी प्यार कल करेंगे.", अर्जुन ने समय के कमीज से हाथ अंदर करते हुए नंगी पीठ सहलाते हुए एक बार फिर गाल को चूमा और दोनों ऐसे हे चिपके लेट गए. समय तोह जैसे उस से लिपटने के बाद हे सपनो में चली गई थी. बस तब उसकी आँखें खुली थी लेकिन अब चिपकने और अर्जुन के इस तरह थपकने से आँखें बंद हो गई थी. बिना हिले दोनों ऐसे हे चिपके सो चुके थे.
आज अर्जुन ने वह बिगड़ैल घोड़ी साध ली थी जो उसको कुत्ता बना के रखना चाहती थी. और उसने फैंसला कर लिए था पूजा को अपने बचे की माँ बनाने का.