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- Dec 5, 2013
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दोनों बच्चो की तरह एक दुसरे का हाथ पकड़ जार बाथरूम में चली गयी मैं बाल्टी और पूछा लेकर मूट साफ़ करने लगा, फिर जब तक वो नाहा कर आई तब तक सब साफ़ हो चूका था, फिर मैं नहाने घुस गया, बापिस आया तब तक रज्जो चची कपडे पहन कर तैयार थी और जा रही थी, जाने से पहले उन्होंने मेरे और माँ दोनों के होंठों पर चुम्बन दिया और चली गयी, उनके जाते hi मैं और माँ हंसने लगे,
में- नाटक बहुत करती हो माँ तुम,
माँ- अरे मज़ा आता है, ाचा बता चाय पियेगा,
में- बना लो,
माँ चाय बनाने लगी और मैं आंगन में बैठ कर टीवी देखने लगा इतने में धीरे धीरे बाकी लोग भी आने लगे,
अपडेट 231
चोदामपुर
सब लोग धीरे धीरे बापिस आने लगे थे तो माँ ने सबको चाय दी, मैं चाय पीकर अंजलि से बातें करने लगा फ़ोन करके, और बात करते हुए hi बाघ में चला गया, शाम हो चुकी थी तो मज़दूर भी काम कर के जा चुके थे, हमारी बातें ख़तम नहीं हो रही थी,
अंजलि- वैसे मुझे तुमसे जलन हो रही है
में- मुझसे क्यों भाई?
अंजलि- तुम्हारा परिवार कितना प्यारा है, सब लोग इतने प्यार से साथ रहते हैं,
में- हाँ वो तो है, वैसे इसके पीछे का कारन भी तुम्हे पता है,
अंजलि- हाँ पता तो है, वैसे शुरू में मुझे बहुत अजीब लगा, की कैसे और क्यों कोई अपने घरवालों के साथ करना चाहेगा,
में- क्या करना चाहेगा?
अंजलि- अरे चुदाई और क्या,
में- अरे वाह सीधा hi बोल रही हो,
अंजलि- तुम्हे पता है न मैं वैसे शर्मीली लड़की नहीं हूँ जो जाने सब पर शर्माने का नाटक करती रहे, तुमहाते सामने तो खुल के रहूंगी मैं,
में- मैं भी ये hi चाहता हूँ, तुम आगे बताओ न,
अंजलि- हाँ तो पहले अजीब लगता था पर अब तुम्हारे परिवार से मिलकर लगता है की बिलकुल ऐसा हो सकता है और होना भी चाहिए,
में- ाचा सही में,
अंजलि- हाँ यार तुम्हारी मम्मी इतनी सुन्दर और कामुक हैं, उन्हें देख कर तो मेरा मन डोलने लगा था तुम तो फिर भी लड़के हो, अगर मैं उनका लड़का होती तो मैं भी ज़रूर छोड़ती उन्हें,
में- सच्ची वैसे तुम लड़की होकर भी छोड़ सकती हो माँ मन नहीं करेंगी हेहही,
अंजलि- धत्त्त,
में- वैसे मन तो मेरा भी डोला तुम्हारी मम्मी को देखकर, बहुत मस्त हैं वो भी,
अंजलि- मुझे पता था तुम्हारी नियत फिसलेगी मेरी माँ पर,
में- जब मैंने अपनी माँ को नहीं छोड़ा तो तुम्हारी कैसे छोड़ दूँ,
इस पर हम दोनों हंसने लगे,
अंजलि- अरे यार चुदाई की बात से छूट गीली होने लगी मेरी,.
में- मैं आऊं क्या थोड़ी मदद कर दूंगा.
अंजलि- हाँ बिलकुल मदद तो तुम्हे hi करनी पड़ेगी पर अभी मौका नहीं है, जल्दी hi मौका देख कर अचे से मदद करना,
में- अरे उस मौके का मुझे बेसब्री से इंतज़ार है, Anjali-mujhe भी इंतज़ार है उस पल का तो पर अब सुनो अभी मैं जाती हूँ घर का काम करवाती हूँ,
में- ठीक है
अंजलि- ी लव यू
में- लव यू तू,
फ़ोन रखने के बाद मैं हल्का हल्का अँधेरा हो चूका था, मैंने जानवरों को खाना पानी डाला, और फिर घर की और चल दिया, रस्ते में आया hi था की पीछे से सरजू ने आवाज़ दी,
सरजू- और लौंडे कहाँ जा रहा है?
में- घर जा रहा हूँ तू कहाँ बस से आ रहा है?
सरजू- हाँ यार काम भी तो ज़रूरी है,
में- वो तो है hi,
सरजू- पर भेनचोद गर्मी से बुरा हाल है, चल न पेप्सी पीते हैं,
में- चल, जग्गू को भी बुला लेता हूँ,
सरजू- हाँ बुला ले,
मैंने जग्गू को फ़ोन कर दिया तो वो भी सीधा दुकान पर hi आ गया, और तीनो बैठकर पेप्सी पीने लगे,
सरजू- वैसे हमने सुना आज हमारी होने वाली भाभी जी आई थी,
में- हाँ यार आई तो थी,
जग्गू- सही है जल्दी hi घोड़ी चढ़ने वाला है अपना लोंदा,
में- लोढ़ा भेनचोद अभी तो प्रेम कहानी शुरू हुई है, बाकि उसके घरवाले माने न माने,
सरजू- ऐसे कैसे नहीं मानेंगे, बस कोई कमी है क्या लड़के में,
जग्गू- है न, बहुत बड़ा छोड़ू है, लड़की के साथ साथ उसकी माँ भी छोड़ देगा सुहागरात पर,
इस पर हम सब हंसने लगे,
सरजू- बीटा माँ को तो हम भी नहीं छोड़ेंगे,
में- हरामी हो सेल,
सरजू- उसकी भाभी भी तो मस्त माल है यार एक दम पटाखा,
जग्गू- घर है या माल गाडी हेहही..
इतने में सरजू का फ़ोन बजने लगा,
सरजू- लो घर से फ़ोन भी आ गया, चलो देर हो गयी है चलते हैं,
जग्गू- हाँ तेरी माँ की छूट में खुजली हो रही होगी,
सरजू- यार माँ की छूट में हो न हो, पर भेनचोद पूरे दिन काम करने के बाद जब अपनी माँ को छोड़ो न मज़ा hi आ जाता है, साडी थकान मिट जाती है
जग्गू- ये तो सही कहा,
सरजू- साले कर्मा इसके लिए मैं तुझसे हमेशा कर्ज़े में रहूँगा तेरी वजह से hi मुझे मादरचोद बनने का सुख मिला,
में- चल साले अब नाटक मत कर घर चलो,
जग्गू- हाँ चलते हैं,
हम तीनो hi बातें करते हुए अपने अपने घर आ गए, मैं जब तक आया तब तक खाना बन चूका था तो मैंने सबके साथ खाना खाया, फिर सब बैठ कर बतियाने लगे की उन्हें अंजलि और उसका परिवार कैसा लगा, अंजलि सबको बहुत पसंद आई थी, और उसका परिवार भी, माँ ने तो यहाँ तक कह दिया की अब उसे hi घर की बहु बनाउंगी,
वैसे बाकी सब का भी यही मत था, खैर बातें करते करते चुदाई का माहौल भी बनता जा रहा था, इधर सागर माँ को बार बार पकड़ कर उठा रहा था, उसने आज पहले hi कह दिया था की बड़ी बुआ आज मेरे साथ सोयेंगी, और उससे रहा नहीं जा रहा था,
सागर- बुआ चलो न अब और कितनी बातें करेंगे,
माँ- हाँ लल्ला चल अब बातें नहीं करते,
पापा- एक काम करो तुम दोनों राजन वाले घर में चले जाओ, रात में वो घर भी अकेला छोड़ना ठीक नहीं है,
मामी- हाँ ये तो सही कहा जीजा,
सागर- बढ़िया चलो बुआ जल्दी चलते हैं,
माँ- हाँ बीटा चल
नाना- इससे न सबर नहीं होता थोड़ा भी,
मौसी- बाबा होता तो तुमसे भी नहीं है,
इस पर सब हंस पड़े, माँ उठ कर सागर के साथ चली राजन चाचा के घर में,
राजन- अब भाभी और सागर तो गए बाकी सब की क्या योजना है?
अनुज- चुदाई योजना है,
पल्ली- हेहही इसे बस ये hi सूझता है,
अनुज- हाँ जैसे तू और कुक्सह सोच रही थी?
पल्ली- नहीं सोच तो मैं भी वही रही थी,
किरण- मैं भी हेहही,
मौसा- तो कैसे करनी है अलग अलग या साथ में,
नाना- एक साथ hi ठीक रहेगा,
धीरे धीरे सबके कपडे उतरने लगे, और एक दुसरे के बदन को चूसने चाटने लगे सभी,
कुछ hi देर में आँगन का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था और चुदाई ज़ोरो पर चल रही थी,

वहीं दूसरी और घर पहुँच कर सागर ने जल्दी से दरवाज़ा और कुण्डी लगाई और फिर तुरंत माँ को बाहों में भर लिए,
माँ- अरे हाय ढैय्या कितना बेसबारा हो रहा है तू,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह अब रुका नहीं जा रहा बिलकुल भी,
माँ- ाचा चल रुकने को बोल कौन रहा है,
सागर- ऐसे नहीं .
माँ- फिर कैसे?
सागर- ऐसे,
ये कहके सागर ने माँ को अपनी बाहों में उठा लिया और उठाकर चलने लगा,
माँ- हाय ढैय्या लल्ला गिरा मत दियो,
सागर माँ को उठा करले गया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया, और पागलों की तरह उनके चेहरे को चूमने लगा, जल्दी hi उसके होंठ माँ के होंठों से मिल गए तो माँ के होंठों को चूसने लगा, माँ भी अपने भतीजे का पूरा साथ दे रही थी,
कुछ देर होंठों को चूसने के बाद हांफते हुए उसने होंठों को छोड़ा और फिर माँ के गले और सीने को ब्लाउज के ऊपर से hi चूमने लगा, माँ को उसकी उत्सुकता और बेसब्री पसंद आ रही थी,
कुछ hi पलों में वो माँ के गदराये चिकने पेट को चाटने चूमने लगा, माँ भी उसकी हरकतों से सिसकने लगी,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi,
सागर तो माँ के पेट कमर को ऐसे चाट रहा था जैसे उसने से रास निकल रहा हो, चाटते हुए उसने अपनी जीभ माँ की नाभि में घुसड़ी और उसे जी भर के चूसने लगा माँ उसके नीचे पड़ी हुई सिहर रही थी,
जी भर के पेट और नाभि को चूसने के बाद सागर ने माँ की साड़ी को खींच कर निकल दिया और फिर माँ के ब्लाउज पर ध्यान लगाया और उसके हुक खोलने लगा, जैसे जैसे ब्लाउज खुलता माँ की चूचियों ब्रा में बहार आने लगी जिन्हे देख वो और उत्तेजित होने लगा, जल्दी hi उसने सरे हुक खोलकर माँ के ब्लाउज को खोल दिया

ब्लाउज खोलने के बाद वो ब्रा के ऊपर से hi माँ की भरी चूचियां हाथों में भर के माँ के होंठों को फिर से चूसने लगा, कुछ पल चूसने के बाद होंठ हटते हुए बोलै- अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh तुम्हारा पूरा बदन बिलकुल अप्सरा जैसा है,
माँ- ुहममम लल्लाहहहह मैं बुद्धि कहाँ से तुझे अप्सरा लग रही है,
सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh दुनिया के किसी मर्द से पूछ लो जो तुम्ही ऐसे देख लेगा वो यही बोलेगा,
माँ- बहुत बातें बनाने लगा है तू,
सागर- तुम्हे देख कर अपने आप आ रही हैं, ये कहते हुए सागर पीछे हुआ, और उसने अपनी टीशर्ट उतार फेंकी फिर बिस्तर से नीचे खड़ा होकर माँ को भी खड़ा कर लिए और पीछे से ब्रा के ऊपर से hi माँ की चूचियां दबाते हुए उनकी गर्दन चूमने लगा, साथ hi अपना लुंड माँ की गांड में घिसने लगा,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह कितनी मस्त लगती हो तुम अह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है,
माँ- ुहममम लाला मुझी भी अह्ह्ह्ह बहुत, अह्ह्ह्ह ऐसे hi मसल बुआ के बदन को,
सागर ने माँ की छुच्छी को दबाते हुए अपना हाथ उनके पेट पर खिसकाया और फिर कुछ देर पेट को मसलने के बाद उसने हाथ नीचे ले जाकर माँ के पेटीकोट की गांठ भी खोल दी और उसे उतार दिया

ाव माँ उसके सामने सिर्फ कच्ची और ब्रा में रह गयी, सागर फिर से उनके होंठो को चूमते हुए उनकी छुछियां दबाने लगा,
माँ- सागर की हरकतों पर उसके मुँह में आहें भर रही थी,
जहाँ सागर मेरी माँ के बदन से खेल रहा था वहीं यहाँ हमारे घर में उसकी माँ के साथ भी कुछ ऐसा hi हो रहा था, मामी को नाना पापा और राजन चाचा मिल कर तीनो और से छोड़ रहे थे, चाचा नीचे लेते थे और मामी उनका लुंड लेकर उनके ऊपर पीछे से नाना अपनी बहु की गांड मार रहे थे वहीं पापा मामी का मुँह छोड़ रहे थे,
उनके बगल में hi अपनी पत्नी को तीन तीन पुण्ड से छुड़वाते देख मां अपनी बहन यानि मौसी की गांड मार रहे थे, वहीं मौसा उनकी बेटी यानि किरण को अपने लुंड पर उछाल रहे थे, मैं ममता चची की गांड का भुर्ता बना रहा यह है और अनुज पल्ली का, पर बहुत जल्दी जल्दी hi हम लोग अपने साथी बदल रहे थे, और औरतों को बदल बदल कर छोड़ रहे थे,
इधर सागर ने तब तक माँ को नंगा कर लिए था और माँ ने सागर को, अभी सागर खड़ा हुआ था, और आँखें बंद करके लम्बी लम्बी आहें भर रहा था, और उसके नीचे अपने घुटनो पर बैठकर माँ अपने भतीजे का लुंड चूस रही थी,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh, बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है, कितना गरम मुँह है तुम्हारा,
माँ बस मज़े से उसका लुंड चूसे जा रही थी,
इधर हमारे घर में कई समीकरण बदल चुके थे और अभी मौसी अपने पिता पति और भाई से एक साथ चुद रही थी, नाना का लुंड मौसी की गांड में था मौसा का छूट में और मां का मुँह में,
मामी को अनुज छोड़ रहा था, वहीं मैं और राजन चाचा मिलकर किरण की दोहरी चुदाई कर रहे थे, मेरा लुंड किरण की गांड में था और चाचा का उसकी छूट में, पापा ममता चची के होंठों को चूसते हुए उनकी गांड मार रहे थे, वहीं पल्ली पापा की गांड चाट रही थी,
दुसरे घर में सागर से और ज़्यादा इंतज़ार नहीं हुआ और उसने माँ को पकड़ कर बिस्तर पर पीठ पर लिटा दिया और खुद माँ की टैंगो के बीच आ गया और तुरंत लुंड को छूट पर रख अंदर धकेल दिया,
सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh, अह्हह्ह्ह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी, माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया,
माँ- ुहममम लल्लाहहहह अब छोड़ अपनी बुआहहहहह को,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन,
सागर तेज़ी से माँ की छूट में धक्के लगाने लगा, माँ भी अपनी टाँगे फैला कर उसको और तेज़ छोड़ने के लिए उत्साहित कर रही थी,

माँ- ुहममम लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ अपनीईई बाआहहहहहह को,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह हैं न जाने कब्ज़ी तुम्ही छोड़ना चाहता ठाहहह,
माँ- बच्चा आह्हः आअज करले अपनीईई इच्छा पूरी अह्ह्ह छोड़ ले जितना मन्न्नन हूँ, सागर माँ की छूट में दनादन धक्के लगा रहा था और माँ भी हर धक्के पर सिसक रही थी
सागर- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हारी छूट कितनी गरम और कासी हुई है अंदर से,
माँ- तुझे मज़ा आ रहा है बेताहहह?
सागर- हांण बुआहहहह बहुत्तट्ठ,
सागर ने आगे झुककर माँ की चूचियों को थमते हुए उन्हें छोड़ते हुए कहा,
हमारे घर में मौसी नाना की खास सेवा करते हुए उनकी गांड चाट रही थी, साथ hi पीछे से अनुज उनकी गांड मार रहा था, मैं किरण को अभी भी छोड़ रहा था तो राजन चाचा मामी की गांड में लुंड चला रहे थे, मौसा पल्ली को छोड़ रहे थे तो मां ममता चची की गांड मार रहे थे और पापा उनसे अपना लुंड चुसवा रहे थे,
वहीं रज्जो चची के यहाँ सरजू अपनी मम्मी के ऊपर चढ़कर दनादन धक्के लगा रहा था,
सरजू- आह्हः ये तो बहुत सही हुआ मम्मी की तै ने कर्मा से छुड़वा लिए,
नीतू- हाँ और क्या जल्दी hi उनका परिवार भी हमरो तरह हो जायेगा,
नीतू ने अपने पापा से गांड मरवाते हुए कहा,
दीनू- आह्हः सही में और फिर मुझे शालू को छोड़ने का मौका मिल जायेगा, अह्ह्ह्ह.
रज्जो- देहहकहों तो, बेटीइ की गांड मार रहे हैं पर ध्यान शालू पर है,
बिरजू- गलती पापा की नहीं है मम्मी शालू मौसी हैं भी तो मस्त,
बिरजू ने लाडो से लुंड चुसवाते हुए कहा,
इधर सागर एक बार माँ की छूट को अपने रास से भर चूका था पर इसके बाद भी वो रुका नहीं था या यूँ कहें की माँ ने उसका लुंड चूसकर दोबारा से उसे कड़क कर के चुदाई के लिए तैयार कर दिया था, और इस समय वो वही कर रहा था, माँ और सागर दोनों एक करवट पर लेते हुए थे सागर माँ के पीछे लेटकर उनकी छूट में धक्के लगा रहा था वहीं माँ अपनी टांग उठाकर उसे अपनी गरम छूट का मज़ा एक बार फिर से दे रही थी,

सागर भी पीछे लेटकर माँ की चूचियों को मसलते हुए उनकी गरम छूट का मज़ा अपने लुंड को दे रहा था,
माँ- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लल्लाह तू टूओ कुछ हो दीनू में कितनी मस्त्त चुदाई करना सीख गयाहहह है,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह जब सीखने वाले इतने अचे होंगे तो सिखुन्गाहहह hi बुआहहहह,
सागर ने अपनी गति बढ़ाते हुए कहा,
माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चिंता मत कर बेताहहह तुझे सब सीखा देंगे, अह्ह्ह्ह और तेज़,
सागर ने अपनी बुआ का कहना मान और तेज़ धक्के कर दिए, साथ hi माँ की चूचियों को मसलते हुए उनकी गर्दन को चूमने लगा, माँ भी काफी देर से चुड़ते हुए बेहद गरम हो चुकी थी और सागर के इस तिहरे हमले के आगे उन्होंने अपने चरम को छू लिया और माँ झड़ने लगी, झड़ने के बाद सागर ने माँ को घोड़ी बना लिए और पीछे से उनकी छूट मरने लगा, जल्दी hi सागर भी झड़ने के बेहद करीब पहुंचा तो माँ ने ये महसूस किआ और उसका रास अपने मुँह में लेने की इच्छा जताई और सागर ने वैसा hi किआ, और झड़ने से पहले अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा दिया, जिसे माँ ने चूसा और कुछ hi पलों में अपना रास माँ के मुँह में छोड़ दिया, माँ भी अपने भतीजे का रास तुरंत जातक गयी, झड़ने के बाद सागर माँ से चिपक कर लेट गया,
माँ- थक गया लल्ला,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हे छोड़ना बड़ी म्हणत का काम है, हेहही,
माँ- कोई नहीं अब तू आराम कर ले, मैं भी थक गयी हूँ, छोड़ छोड़ के थका दिया तूने, दोनों hi नंगे एक दुसरे से चिपक कर सो जाते हैं,
इधर घर में हमारी चुदाई भी ख़तम हो चुकी थी और हम सब लोग भी सोने की तैयारी कर रहे थे, बस किरण और पल्ली का प्रोग्राम चल रहा था बस वही देख रहे थे, क्यूंकि दोनों ने hi मर्दों को दो हिस्सों में बाँट कर अपने अपने ऊपर झड़वाया था और सबके झड़ने के बाद दोनों एक दुसरे के चेहरे और चूचियों से रास चाट रही थी, दोनों का प्रोग्राम ख़तम हुआ तो हम लोग भी सब सो गए, वहीं जग्गू के यहाँ भी सब सो चुके थे,
चोदामपुर की एक और सुबह हुई मेरी सुबह बड़ी सुहानी हुई क्यूंकि मेरी जान अंजलि ने अपनी एक प्यारी सी फोटो के साथ गुड मॉर्निंग लिख कर भेजा था, जिसे देखकर मैं खुश हो गया, और मैंने भी जितनी अछि हो सकती थी वैसी फोटो उसे भेज दी अपनी गुड मॉर्निंग लिख कर, फ़ोन रख कर उठा तो देखा लुंड कड़क था जो की सब लड़को का होता hi है चाहे रात को कितनी भी चुदाई कर लो, मैं कमरे से बहार आया और देखा की सब आंगन में बैठे चाय पि रहे हैं, मैं नित क्रिया निपटने बाथरूम में घुस गया, और बहार आकर आंगन में बैठ गया जहाँ पापा मन मौसा नाना चाचा चची मौसी मामी किरण पल्ली अनुज और माँ बैठ कर चाय पि रहे थे सागर अभी भी राजन चाचा के यहाँ सो रहा था, मैं भी आंगन मैं बैठ गया तो किरण ने मुझे चाय लाकर दी, मैंने चाय का कप लिए और साथ hi अपना पजामा नीचे कर लुंड निकल कर बैठ गया,
में- किरण इसे संभल न ज़रा खड़ा है परेशां कर रहा है,
किरण- अभी देखती हूँ भैया,
मैं चाय लेकर बैठ गया और पीने लगा, वहीं किरण नीचे बैठकर मेरा लुंड चूसने लगी, अह्ह्ह मज़ा आ रहा था चाय की चुस्की के साथ लुंड चुसवाने में, मैं चाय पीटा रहा और किरण मेरा लुंड चूसती रही, बाकि सब नए घर की नींव राखी जनि थी उसकी बात कर रहे थे,
पापा- साडी तयारी कर लेना तुम लोग, हम लोग देखते हैं जाकर.
माँ- ठीक है, बस नहाकर आते हैं हम लोग भी,
मौसा- अनुज, ये ले पैसे और जा सागर को और उठा ले और उसे लेकर दुकान से 10 किलो मिठाई करवा ला और साथ hi कुछ कोल्डड्रिंक की बोतलें और समोसा वगेरा ले ाइयो मज़दूरों के लिए,
अनुज- ठीक है मौसा जी अभी लाता हूँ,
मौसी- चलो भाई हम तो चले नहाने,
माँ- हाँ जल्दी जल्दी नहालो सब, गुंजन तुम भी जाओ नहालो,
मामी- हाँ जीजी,
इतने में किरण मेरा लुंड निकल कर बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः तुम्हारा तो आज निकल hi नहीं रहा,
बेचारी की चूस चूस कर हालत ख़राब हो गयी थी नूह से थूक टपक रहा था,
ममता चची- अरे किरण बिटिया तू भी नाहा ले जाकर मैं निकल दूंगी इसका,
किरण उठ गयी और चची आकर मेरा लुंड चूसने लगी, खैर चची ने अपना अनुभव दिखाया और मेरे लुंड के साथ साथ मेरी गोलियां भी चूसी और फिर अपनी जीभ मेरी गांड में घुसा घुसा कर गांड चाटने लगी, मैं उनकी जीभ का हमला अपनी गांड में बर्दाश्त नहीं कर पाया और झड़ने लगा तो चची ने अपने मुँह ने लुंड ले लिए और मेरे रास की एक एक बूँद लुंड से निचोड़ के पि गयी,
खैर अभी तो काम का समय था मैं भी जल्दी से नाहा लिया, धीरे धीरे औरतें भी नाहा धोकर निकलने लगी और तैयार होने लगी, माँ ने पल्ली और किरण को बोल्दिया की वो जाकर जग्गू और सरजू के यहाँ भी बोल आएं तो हम तीनो लोग साथ निकल गए, मैं बाघ की और वो दोनों बुलाने,
खैर बाघ में पहुंचा तो देखा की सरे मर्द तुबेल पर नाहा चुके थे,
में- अरे सब लोग यहीं नाहा कर लिए,
मां- और का वहां औरतें समय लगाती तो यही नाहा लिए,
में- सही भी किआ,
इतने में अनुज और सागर भी आ गए मिठाई और कोल्डड्रिंक लेकर, कुछ देर में जग्गू भी आ गया, साथ hi राजपाल ताऊ भी, सरजू बिरजू दीनू चाचा भी, और करीब आधे घंटे बाद औरतें आईं सब मिलकर, मंजू तै रज्जो चची प्रेमा भाभी और पद्मिनी तै भी बाकि साडी लड़कियां सब लोग साथ में hi थी, नींव की ईंट राखी गयी, पूजन हुआ जो की पल्ली किरण और लाडो ने किआ, क्यूंकि लड़कियों से करवाया जाना शुभ माना जाता है, फिर मज़दूरों में और बाकी सब में मिठाइयां बांटी गयी, कोल्डड्रिंक बांटी गयी, सबने खूब हंसी ठिठोली करते हुए ये सब किआ, औरतों का समूह अलग हो गया था, आदमियों का अलग, लड़कों का अलग लड़कियों का अलग,
सबने खूब खाया पिया खूब हंसी ठिठोली हुई, इसके बाद सब अपने अपने घर की और चल दिए, आते आते करीब 2 बज गए थे, औरतें दोपहर का खाना बनाने में लग गयी, मैं अपनी जान अंजलि से बात करने में व्यस्त हो गया, खाना बन गया तो मुझे बुलाया गया, खाना खा कर मैं सो गया और शाम को फ़ोन बजने पर उठा, देखा तो जग्गू का था,
में- हाँ बेटे,
जग्गू- आजा चल मैच खेलने चल रहे हैं,
में- आता हूँ,
हाथ मुँह धोकर मैं खेलने चला गया काफी देर तक खेले, बापिस आते आते अँधेरा हो चूका था, हम लोग बाघ में आये जहाँ अब मज़दूर काम ख़तम करके जा चुके थे, पापा मौसा चाचा थे बाकी लोग भी घर जा चुके थे,
मैं जानवरो को चारा पानी डालने लगा जग्गू मेरी मदद कर रहा था और, इतने में दीनू चाचा और राजपाल ताऊ कुछ योजना बनाते हुए आये,
दीनू- लो मिल गए नीलेश भैया,
पापा- क्या हो गया, कहे ढूंढ रहे थे,
दीनू- अब बोलो न बड़े भैया,
दीनू चाचा राजपाल ताऊ की और देखकर बोले,
राजपाल ताऊ- अरे हम क्या बोलेन, बोलकर तो तुम hi लाये थे यार,
दीनू- अरे दादा आखिर टाइम पर पलटी न मारो.
पापा- अरे बात का है बताओगे, तुम hi बता दो,
राजन- अरे हम बताते हैं का बात है,
मौसा- बताओ,
राजन- लगानी है, हैं न? हेहही,
इस पर दीनू चाचा और राजपाल ताऊ दोनों हंस पड़े,
राजन- देखा हमने बिलकुल सही पकड़ा है,
पापा- पकड़ा तो सही पर हमारी बीवियां जान ले लेंगी हमारी तुम्हे पता है न दारु से कितनी किलसति हैं,
दीनू- अरे भैया रोज़ रोज़ थोड़े hi करते हैं ख़ुशी का मौका है, वैसे भी रज्जो मन नहीं करेगी,
राजपाल ताऊ- पर मंजू तो करेगी,
पापा- हमारी वाली भी करेगी,
राजन- ममता को कोई दिक्कत नहीं है इतनी,
मौसा- फिर कैसे हो पायेगा,
दीनू- कैसे भी करो दादा करो, आज हमें पीनी है,
मैं और जग्गू इन लोगो की बातें सुनकर हंस रहे थे,
राजन- अब तुम्हारी बात सुनकर हमारा भी मन हो रहा है,
राजपाल ताऊ- क्या करें?
ताऊ ने पापा की तरफ देखकर कहा,
पापा- अब हम क्या बताएं समझ नहीं आ रहा, देखो अगर पिएंगे तो जमुना और ससुरजी को भी साथ लेना पड़ेगा,
मौसा- हाँ ये तो सही कहा, उनके बिना करना गलत होगा,
पापा- पर तुम्हारी भाभी मानेगी नहीं, वो बाबा को पिलाने के बिलकुल खिलाफ हो जाएगी,
राजन चाचा- कुछ तो दिमाग लगाना पड़ेगा न,
मौसा- अरे कर्मा तेरा दिमाग ज़्यादा चलता है, तू hi कुछ बता न,
में- मैं नहीं बता रहा कुछ, अगर माँ या तै को पता चली तो मैं फँसूँगा,
मौसा- अरे तू क्यों फंसेगा जब पिएंगे हम लोग तो,
राजन चाचा- देख ले तेरा ब्याह हमें hi करवाना है,
दीनू- अरे बीटा इतना नहीं करेगा अपने चाचा के लिए,
जग्गू- देख तो कैसे गिड़गिड़ा रहे हैं पीने के चक्कर में, हेहही,
राजपाल ताऊ- बीटा जब तुम्हारे ब्याह हो जायेंगे न तो पता चलेगा तुम्हे पत्नियों का दर,
पापा- कुछ सोचा है कर्मा,
में- अरे सीधा तो है, जैसे किसी एक घर में रखलो प्रोग्राम, वहीं सब इकठ्ठे हो जाओ,
मौसा- पर ये बोलेन कैसे क्या वजह दें,
में- देखो बिलकुल झूठ मत बोलो, क्यूंकि बाद में पता चलेगा तो दिक्कत होगी इससे अच्छे सही सही बतादो,
दीनू- अरे इससे तो फंस जायेंगे,
मौसा- नहीं सही कह रहा है, अगर बाद में पता चली तो फंसेंगे,
में- और क्या बोल्दो आज ख़ुशी का दिन है सरे मर्द एक साथ बैठकर मज़े लेना चाहते हैं,
राजपाल ताऊ - ठीक है हमारे यहाँ बैठ जाते हैं, पर फिर भी दिक्कत है,
दीनू- क्या दिक्कत?
राजपाल ताऊ - अरे तुंहारी भाभी है न वो सुनती रहेगी पीछे से, मज़ा ख़राब कर देगी,
में- तो ऐसा करो न जग्गू और तै आज हमारे यहाँ सो जायेंगे,
मौसा- हाँ ये ठीक रहेगा,
राजन- बहु और संधान रह जाएँगी,
जग्गू- नहीं पद्मिनी तै गाओं गयी हैं कुछ काम आ गया था,
राजपाल ताऊ- अरे जग्गू अपनी माँ और भाभी दोनों को hi लेकर चला जइयो, बहु को भी नहीं पसंद दारु वगेरा,
जग्गू- ठीक है ले जाऊंगा,
में- अब ये हो गया तो औरतें जिन्हे कोई परेशानी नहीं उन्हें अपने साथ ले जाना,
मौसा- हाँ ये भी सही है.
दीनू- मतलब
में- चाचा मतलब जैसे रज्जो चची, ममता चची और जो भी आना चाहे उन्हें अपने साथ ले जाना जिससे दो फायदे होंगे,
राजपाल ताऊ- कौनसे दो फायदे,
में- अरे पीने के बाद चुदाई भी तो करोगे hi उसके लिए, और दूसरा फायदा की अगर औरतें साथ रहेंगी तो माँ या मंजू तै को भी इतनी दिक्कत नहीं होगी,
दीनू- अरे यार मन गए कर्मा बिलकुल सही सोचा है,
मौसा- हैं,
राजपाल ताऊ- अरे पर बाबा और जमुना का क्या वो रहेंगे तो कैसे होगी चुदाई,
राजन- अरे सब हो जायेगा वो भी हमारी तरह हैं, ममता और पल्ली ने दोनों को अपना स्वाद चखा दिया है,
राजपाल ताऊ- अरे वाह सच में, फिर तो मज़ा आ जायेगा,
दीनू- पर मेरी एक परेशानी है,
पापा- अब तुम्हारी क्या है?
दीनू- रज्जो तो मान जाती है पर सरजू और नीतू बहुत बवाल करते हैं पीने के नाम पर वो नहीं जाने देंगे,
Me-are तो रज्जो चची को बोलना वो उन्हें समझा देंगी और या तो उन्हें भी ले जाना साथ, सरजू बिरजू को एक एक डोज तो साडी बात मानेंगे,
दीनू- अरे उन्हें अपने साथ पिलायेंगे का?
राजन- अरे बच्चे बड़े हो गए हैं
मौसा- और जब साथ में चुदाई कर सकते हो थोड़ी पि नहीं सकते,
दीनू- ये बात भी ठीक है, फिर मैं तैयार हूँ,
मौसा- ये हुई न बात तो जल्दी घर चलते हैं, और प्रोग्राम बनाते हैं अपने अपने घर बात करलो,
राजपाल ताऊ- हाँ भाई चलो जल्दी जल्दी,
सब निकल जाते हैं
जग्गू- सही प्रोग्राम बना दिया तूने सबका,
में- अरे बढ़िया है न हम भी कुछ बना लेंगे अपना, हेहही ,
जग्गू- वो तो मुझे पता था बिना अपना बनाये तू कैसे मान जायेगा,
खैर सब लोग घर आ गए पापा मौसा चाचा वगेरा अपना प्रोग्राम बनाने में लग गए, पापा माँ को मानाने लगे तो माँ ने आज बिना किसी रोक टोक के हाँ कह दिया, मौसी ने भी हाँ कह दिया पर उन्होंने बोलै की वो भी उनके साथ चलेंगी, मौसा ने भी सोचा मन करे इससे तो ाचा hi है वैसे भी ममता चची और रज्जो चची होंगी hi वहां, मौसा ने मां को बताया और पापा ने नाना को तो वो तुरंत राजी हो गए, मां ने मामी से अनुमति ली तो मामी बोली जब सब जा रहे हैं तो तुम्हे क्यों रोकूंगी बस थोड़ा संभल कर पीना,
मां- अरे जीजा और बाबा भी जा रहे हैं कोई दिक्कत नहीं होगी मैं बस थोड़ी सी hi लूंगा,
तो कुल मिलकर सब कुछ योजना अनुसार चल रहा था, मैंने भी सोचा की चलो जब सब रात को खास बना रहे हैं तो मैं भी बनता हूँ, और मैंने अनुज और सागर को बुलाया और उन्हें कुछ करने को कहा, वो तुरंत काम पर लग गए,
जल्दी hi जग्गू प्रेमा भाभी कुर मंजू तै को लेकर घर आ गया,
और यहाँ से नाना, पापा, मौसा, राजन चाचा, मां, मौसी, ममता चची, पल्ली और किरण भी ज़िद्द करके पल्ली के साथ चली गयी,
जारी रहेगी,
में- नाटक बहुत करती हो माँ तुम,
माँ- अरे मज़ा आता है, ाचा बता चाय पियेगा,
में- बना लो,
माँ चाय बनाने लगी और मैं आंगन में बैठ कर टीवी देखने लगा इतने में धीरे धीरे बाकी लोग भी आने लगे,
अपडेट 231
चोदामपुर
सब लोग धीरे धीरे बापिस आने लगे थे तो माँ ने सबको चाय दी, मैं चाय पीकर अंजलि से बातें करने लगा फ़ोन करके, और बात करते हुए hi बाघ में चला गया, शाम हो चुकी थी तो मज़दूर भी काम कर के जा चुके थे, हमारी बातें ख़तम नहीं हो रही थी,
अंजलि- वैसे मुझे तुमसे जलन हो रही है
में- मुझसे क्यों भाई?
अंजलि- तुम्हारा परिवार कितना प्यारा है, सब लोग इतने प्यार से साथ रहते हैं,
में- हाँ वो तो है, वैसे इसके पीछे का कारन भी तुम्हे पता है,
अंजलि- हाँ पता तो है, वैसे शुरू में मुझे बहुत अजीब लगा, की कैसे और क्यों कोई अपने घरवालों के साथ करना चाहेगा,
में- क्या करना चाहेगा?
अंजलि- अरे चुदाई और क्या,
में- अरे वाह सीधा hi बोल रही हो,
अंजलि- तुम्हे पता है न मैं वैसे शर्मीली लड़की नहीं हूँ जो जाने सब पर शर्माने का नाटक करती रहे, तुमहाते सामने तो खुल के रहूंगी मैं,
में- मैं भी ये hi चाहता हूँ, तुम आगे बताओ न,
अंजलि- हाँ तो पहले अजीब लगता था पर अब तुम्हारे परिवार से मिलकर लगता है की बिलकुल ऐसा हो सकता है और होना भी चाहिए,
में- ाचा सही में,
अंजलि- हाँ यार तुम्हारी मम्मी इतनी सुन्दर और कामुक हैं, उन्हें देख कर तो मेरा मन डोलने लगा था तुम तो फिर भी लड़के हो, अगर मैं उनका लड़का होती तो मैं भी ज़रूर छोड़ती उन्हें,
में- सच्ची वैसे तुम लड़की होकर भी छोड़ सकती हो माँ मन नहीं करेंगी हेहही,
अंजलि- धत्त्त,
में- वैसे मन तो मेरा भी डोला तुम्हारी मम्मी को देखकर, बहुत मस्त हैं वो भी,
अंजलि- मुझे पता था तुम्हारी नियत फिसलेगी मेरी माँ पर,
में- जब मैंने अपनी माँ को नहीं छोड़ा तो तुम्हारी कैसे छोड़ दूँ,
इस पर हम दोनों हंसने लगे,
अंजलि- अरे यार चुदाई की बात से छूट गीली होने लगी मेरी,.
में- मैं आऊं क्या थोड़ी मदद कर दूंगा.
अंजलि- हाँ बिलकुल मदद तो तुम्हे hi करनी पड़ेगी पर अभी मौका नहीं है, जल्दी hi मौका देख कर अचे से मदद करना,
में- अरे उस मौके का मुझे बेसब्री से इंतज़ार है, Anjali-mujhe भी इंतज़ार है उस पल का तो पर अब सुनो अभी मैं जाती हूँ घर का काम करवाती हूँ,
में- ठीक है
अंजलि- ी लव यू
में- लव यू तू,
फ़ोन रखने के बाद मैं हल्का हल्का अँधेरा हो चूका था, मैंने जानवरों को खाना पानी डाला, और फिर घर की और चल दिया, रस्ते में आया hi था की पीछे से सरजू ने आवाज़ दी,
सरजू- और लौंडे कहाँ जा रहा है?
में- घर जा रहा हूँ तू कहाँ बस से आ रहा है?
सरजू- हाँ यार काम भी तो ज़रूरी है,
में- वो तो है hi,
सरजू- पर भेनचोद गर्मी से बुरा हाल है, चल न पेप्सी पीते हैं,
में- चल, जग्गू को भी बुला लेता हूँ,
सरजू- हाँ बुला ले,
मैंने जग्गू को फ़ोन कर दिया तो वो भी सीधा दुकान पर hi आ गया, और तीनो बैठकर पेप्सी पीने लगे,
सरजू- वैसे हमने सुना आज हमारी होने वाली भाभी जी आई थी,
में- हाँ यार आई तो थी,
जग्गू- सही है जल्दी hi घोड़ी चढ़ने वाला है अपना लोंदा,
में- लोढ़ा भेनचोद अभी तो प्रेम कहानी शुरू हुई है, बाकि उसके घरवाले माने न माने,
सरजू- ऐसे कैसे नहीं मानेंगे, बस कोई कमी है क्या लड़के में,
जग्गू- है न, बहुत बड़ा छोड़ू है, लड़की के साथ साथ उसकी माँ भी छोड़ देगा सुहागरात पर,
इस पर हम सब हंसने लगे,
सरजू- बीटा माँ को तो हम भी नहीं छोड़ेंगे,
में- हरामी हो सेल,
सरजू- उसकी भाभी भी तो मस्त माल है यार एक दम पटाखा,
जग्गू- घर है या माल गाडी हेहही..
इतने में सरजू का फ़ोन बजने लगा,
सरजू- लो घर से फ़ोन भी आ गया, चलो देर हो गयी है चलते हैं,
जग्गू- हाँ तेरी माँ की छूट में खुजली हो रही होगी,
सरजू- यार माँ की छूट में हो न हो, पर भेनचोद पूरे दिन काम करने के बाद जब अपनी माँ को छोड़ो न मज़ा hi आ जाता है, साडी थकान मिट जाती है
जग्गू- ये तो सही कहा,
सरजू- साले कर्मा इसके लिए मैं तुझसे हमेशा कर्ज़े में रहूँगा तेरी वजह से hi मुझे मादरचोद बनने का सुख मिला,
में- चल साले अब नाटक मत कर घर चलो,
जग्गू- हाँ चलते हैं,
हम तीनो hi बातें करते हुए अपने अपने घर आ गए, मैं जब तक आया तब तक खाना बन चूका था तो मैंने सबके साथ खाना खाया, फिर सब बैठ कर बतियाने लगे की उन्हें अंजलि और उसका परिवार कैसा लगा, अंजलि सबको बहुत पसंद आई थी, और उसका परिवार भी, माँ ने तो यहाँ तक कह दिया की अब उसे hi घर की बहु बनाउंगी,
वैसे बाकी सब का भी यही मत था, खैर बातें करते करते चुदाई का माहौल भी बनता जा रहा था, इधर सागर माँ को बार बार पकड़ कर उठा रहा था, उसने आज पहले hi कह दिया था की बड़ी बुआ आज मेरे साथ सोयेंगी, और उससे रहा नहीं जा रहा था,
सागर- बुआ चलो न अब और कितनी बातें करेंगे,
माँ- हाँ लल्ला चल अब बातें नहीं करते,
पापा- एक काम करो तुम दोनों राजन वाले घर में चले जाओ, रात में वो घर भी अकेला छोड़ना ठीक नहीं है,
मामी- हाँ ये तो सही कहा जीजा,
सागर- बढ़िया चलो बुआ जल्दी चलते हैं,
माँ- हाँ बीटा चल
नाना- इससे न सबर नहीं होता थोड़ा भी,
मौसी- बाबा होता तो तुमसे भी नहीं है,
इस पर सब हंस पड़े, माँ उठ कर सागर के साथ चली राजन चाचा के घर में,
राजन- अब भाभी और सागर तो गए बाकी सब की क्या योजना है?
अनुज- चुदाई योजना है,
पल्ली- हेहही इसे बस ये hi सूझता है,
अनुज- हाँ जैसे तू और कुक्सह सोच रही थी?
पल्ली- नहीं सोच तो मैं भी वही रही थी,
किरण- मैं भी हेहही,
मौसा- तो कैसे करनी है अलग अलग या साथ में,
नाना- एक साथ hi ठीक रहेगा,
धीरे धीरे सबके कपडे उतरने लगे, और एक दुसरे के बदन को चूसने चाटने लगे सभी,
कुछ hi देर में आँगन का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था और चुदाई ज़ोरो पर चल रही थी,

वहीं दूसरी और घर पहुँच कर सागर ने जल्दी से दरवाज़ा और कुण्डी लगाई और फिर तुरंत माँ को बाहों में भर लिए,
माँ- अरे हाय ढैय्या कितना बेसबारा हो रहा है तू,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह अब रुका नहीं जा रहा बिलकुल भी,
माँ- ाचा चल रुकने को बोल कौन रहा है,
सागर- ऐसे नहीं .
माँ- फिर कैसे?
सागर- ऐसे,
ये कहके सागर ने माँ को अपनी बाहों में उठा लिया और उठाकर चलने लगा,
माँ- हाय ढैय्या लल्ला गिरा मत दियो,
सागर माँ को उठा करले गया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया, और पागलों की तरह उनके चेहरे को चूमने लगा, जल्दी hi उसके होंठ माँ के होंठों से मिल गए तो माँ के होंठों को चूसने लगा, माँ भी अपने भतीजे का पूरा साथ दे रही थी,
कुछ देर होंठों को चूसने के बाद हांफते हुए उसने होंठों को छोड़ा और फिर माँ के गले और सीने को ब्लाउज के ऊपर से hi चूमने लगा, माँ को उसकी उत्सुकता और बेसब्री पसंद आ रही थी,
कुछ hi पलों में वो माँ के गदराये चिकने पेट को चाटने चूमने लगा, माँ भी उसकी हरकतों से सिसकने लगी,

माँ- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi,
सागर तो माँ के पेट कमर को ऐसे चाट रहा था जैसे उसने से रास निकल रहा हो, चाटते हुए उसने अपनी जीभ माँ की नाभि में घुसड़ी और उसे जी भर के चूसने लगा माँ उसके नीचे पड़ी हुई सिहर रही थी,
जी भर के पेट और नाभि को चूसने के बाद सागर ने माँ की साड़ी को खींच कर निकल दिया और फिर माँ के ब्लाउज पर ध्यान लगाया और उसके हुक खोलने लगा, जैसे जैसे ब्लाउज खुलता माँ की चूचियों ब्रा में बहार आने लगी जिन्हे देख वो और उत्तेजित होने लगा, जल्दी hi उसने सरे हुक खोलकर माँ के ब्लाउज को खोल दिया

ब्लाउज खोलने के बाद वो ब्रा के ऊपर से hi माँ की भरी चूचियां हाथों में भर के माँ के होंठों को फिर से चूसने लगा, कुछ पल चूसने के बाद होंठ हटते हुए बोलै- अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh तुम्हारा पूरा बदन बिलकुल अप्सरा जैसा है,
माँ- ुहममम लल्लाहहहह मैं बुद्धि कहाँ से तुझे अप्सरा लग रही है,
सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh दुनिया के किसी मर्द से पूछ लो जो तुम्ही ऐसे देख लेगा वो यही बोलेगा,
माँ- बहुत बातें बनाने लगा है तू,
सागर- तुम्हे देख कर अपने आप आ रही हैं, ये कहते हुए सागर पीछे हुआ, और उसने अपनी टीशर्ट उतार फेंकी फिर बिस्तर से नीचे खड़ा होकर माँ को भी खड़ा कर लिए और पीछे से ब्रा के ऊपर से hi माँ की चूचियां दबाते हुए उनकी गर्दन चूमने लगा, साथ hi अपना लुंड माँ की गांड में घिसने लगा,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह कितनी मस्त लगती हो तुम अह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है,
माँ- ुहममम लाला मुझी भी अह्ह्ह्ह बहुत, अह्ह्ह्ह ऐसे hi मसल बुआ के बदन को,
सागर ने माँ की छुच्छी को दबाते हुए अपना हाथ उनके पेट पर खिसकाया और फिर कुछ देर पेट को मसलने के बाद उसने हाथ नीचे ले जाकर माँ के पेटीकोट की गांठ भी खोल दी और उसे उतार दिया

ाव माँ उसके सामने सिर्फ कच्ची और ब्रा में रह गयी, सागर फिर से उनके होंठो को चूमते हुए उनकी छुछियां दबाने लगा,
माँ- सागर की हरकतों पर उसके मुँह में आहें भर रही थी,
जहाँ सागर मेरी माँ के बदन से खेल रहा था वहीं यहाँ हमारे घर में उसकी माँ के साथ भी कुछ ऐसा hi हो रहा था, मामी को नाना पापा और राजन चाचा मिल कर तीनो और से छोड़ रहे थे, चाचा नीचे लेते थे और मामी उनका लुंड लेकर उनके ऊपर पीछे से नाना अपनी बहु की गांड मार रहे थे वहीं पापा मामी का मुँह छोड़ रहे थे,
उनके बगल में hi अपनी पत्नी को तीन तीन पुण्ड से छुड़वाते देख मां अपनी बहन यानि मौसी की गांड मार रहे थे, वहीं मौसा उनकी बेटी यानि किरण को अपने लुंड पर उछाल रहे थे, मैं ममता चची की गांड का भुर्ता बना रहा यह है और अनुज पल्ली का, पर बहुत जल्दी जल्दी hi हम लोग अपने साथी बदल रहे थे, और औरतों को बदल बदल कर छोड़ रहे थे,
इधर सागर ने तब तक माँ को नंगा कर लिए था और माँ ने सागर को, अभी सागर खड़ा हुआ था, और आँखें बंद करके लम्बी लम्बी आहें भर रहा था, और उसके नीचे अपने घुटनो पर बैठकर माँ अपने भतीजे का लुंड चूस रही थी,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh, बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है, कितना गरम मुँह है तुम्हारा,
माँ बस मज़े से उसका लुंड चूसे जा रही थी,
इधर हमारे घर में कई समीकरण बदल चुके थे और अभी मौसी अपने पिता पति और भाई से एक साथ चुद रही थी, नाना का लुंड मौसी की गांड में था मौसा का छूट में और मां का मुँह में,
मामी को अनुज छोड़ रहा था, वहीं मैं और राजन चाचा मिलकर किरण की दोहरी चुदाई कर रहे थे, मेरा लुंड किरण की गांड में था और चाचा का उसकी छूट में, पापा ममता चची के होंठों को चूसते हुए उनकी गांड मार रहे थे, वहीं पल्ली पापा की गांड चाट रही थी,
दुसरे घर में सागर से और ज़्यादा इंतज़ार नहीं हुआ और उसने माँ को पकड़ कर बिस्तर पर पीठ पर लिटा दिया और खुद माँ की टैंगो के बीच आ गया और तुरंत लुंड को छूट पर रख अंदर धकेल दिया,
सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh, अह्हह्ह्ह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी, माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया,
माँ- ुहममम लल्लाहहहह अब छोड़ अपनी बुआहहहहह को,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन,
सागर तेज़ी से माँ की छूट में धक्के लगाने लगा, माँ भी अपनी टाँगे फैला कर उसको और तेज़ छोड़ने के लिए उत्साहित कर रही थी,

माँ- ुहममम लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh छोड़ड़ड़ड़ अपनीईई बाआहहहहहह को,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह हैं न जाने कब्ज़ी तुम्ही छोड़ना चाहता ठाहहह,
माँ- बच्चा आह्हः आअज करले अपनीईई इच्छा पूरी अह्ह्ह छोड़ ले जितना मन्न्नन हूँ, सागर माँ की छूट में दनादन धक्के लगा रहा था और माँ भी हर धक्के पर सिसक रही थी
सागर- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हारी छूट कितनी गरम और कासी हुई है अंदर से,
माँ- तुझे मज़ा आ रहा है बेताहहह?
सागर- हांण बुआहहहह बहुत्तट्ठ,
सागर ने आगे झुककर माँ की चूचियों को थमते हुए उन्हें छोड़ते हुए कहा,
हमारे घर में मौसी नाना की खास सेवा करते हुए उनकी गांड चाट रही थी, साथ hi पीछे से अनुज उनकी गांड मार रहा था, मैं किरण को अभी भी छोड़ रहा था तो राजन चाचा मामी की गांड में लुंड चला रहे थे, मौसा पल्ली को छोड़ रहे थे तो मां ममता चची की गांड मार रहे थे और पापा उनसे अपना लुंड चुसवा रहे थे,
वहीं रज्जो चची के यहाँ सरजू अपनी मम्मी के ऊपर चढ़कर दनादन धक्के लगा रहा था,
सरजू- आह्हः ये तो बहुत सही हुआ मम्मी की तै ने कर्मा से छुड़वा लिए,
नीतू- हाँ और क्या जल्दी hi उनका परिवार भी हमरो तरह हो जायेगा,
नीतू ने अपने पापा से गांड मरवाते हुए कहा,
दीनू- आह्हः सही में और फिर मुझे शालू को छोड़ने का मौका मिल जायेगा, अह्ह्ह्ह.
रज्जो- देहहकहों तो, बेटीइ की गांड मार रहे हैं पर ध्यान शालू पर है,
बिरजू- गलती पापा की नहीं है मम्मी शालू मौसी हैं भी तो मस्त,
बिरजू ने लाडो से लुंड चुसवाते हुए कहा,
इधर सागर एक बार माँ की छूट को अपने रास से भर चूका था पर इसके बाद भी वो रुका नहीं था या यूँ कहें की माँ ने उसका लुंड चूसकर दोबारा से उसे कड़क कर के चुदाई के लिए तैयार कर दिया था, और इस समय वो वही कर रहा था, माँ और सागर दोनों एक करवट पर लेते हुए थे सागर माँ के पीछे लेटकर उनकी छूट में धक्के लगा रहा था वहीं माँ अपनी टांग उठाकर उसे अपनी गरम छूट का मज़ा एक बार फिर से दे रही थी,

सागर भी पीछे लेटकर माँ की चूचियों को मसलते हुए उनकी गरम छूट का मज़ा अपने लुंड को दे रहा था,
माँ- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लल्लाह तू टूओ कुछ हो दीनू में कितनी मस्त्त चुदाई करना सीख गयाहहह है,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह जब सीखने वाले इतने अचे होंगे तो सिखुन्गाहहह hi बुआहहहह,
सागर ने अपनी गति बढ़ाते हुए कहा,
माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चिंता मत कर बेताहहह तुझे सब सीखा देंगे, अह्ह्ह्ह और तेज़,
सागर ने अपनी बुआ का कहना मान और तेज़ धक्के कर दिए, साथ hi माँ की चूचियों को मसलते हुए उनकी गर्दन को चूमने लगा, माँ भी काफी देर से चुड़ते हुए बेहद गरम हो चुकी थी और सागर के इस तिहरे हमले के आगे उन्होंने अपने चरम को छू लिया और माँ झड़ने लगी, झड़ने के बाद सागर ने माँ को घोड़ी बना लिए और पीछे से उनकी छूट मरने लगा, जल्दी hi सागर भी झड़ने के बेहद करीब पहुंचा तो माँ ने ये महसूस किआ और उसका रास अपने मुँह में लेने की इच्छा जताई और सागर ने वैसा hi किआ, और झड़ने से पहले अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा दिया, जिसे माँ ने चूसा और कुछ hi पलों में अपना रास माँ के मुँह में छोड़ दिया, माँ भी अपने भतीजे का रास तुरंत जातक गयी, झड़ने के बाद सागर माँ से चिपक कर लेट गया,
माँ- थक गया लल्ला,
सागर- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बुआहहह तुम्हे छोड़ना बड़ी म्हणत का काम है, हेहही,
माँ- कोई नहीं अब तू आराम कर ले, मैं भी थक गयी हूँ, छोड़ छोड़ के थका दिया तूने, दोनों hi नंगे एक दुसरे से चिपक कर सो जाते हैं,
इधर घर में हमारी चुदाई भी ख़तम हो चुकी थी और हम सब लोग भी सोने की तैयारी कर रहे थे, बस किरण और पल्ली का प्रोग्राम चल रहा था बस वही देख रहे थे, क्यूंकि दोनों ने hi मर्दों को दो हिस्सों में बाँट कर अपने अपने ऊपर झड़वाया था और सबके झड़ने के बाद दोनों एक दुसरे के चेहरे और चूचियों से रास चाट रही थी, दोनों का प्रोग्राम ख़तम हुआ तो हम लोग भी सब सो गए, वहीं जग्गू के यहाँ भी सब सो चुके थे,
चोदामपुर की एक और सुबह हुई मेरी सुबह बड़ी सुहानी हुई क्यूंकि मेरी जान अंजलि ने अपनी एक प्यारी सी फोटो के साथ गुड मॉर्निंग लिख कर भेजा था, जिसे देखकर मैं खुश हो गया, और मैंने भी जितनी अछि हो सकती थी वैसी फोटो उसे भेज दी अपनी गुड मॉर्निंग लिख कर, फ़ोन रख कर उठा तो देखा लुंड कड़क था जो की सब लड़को का होता hi है चाहे रात को कितनी भी चुदाई कर लो, मैं कमरे से बहार आया और देखा की सब आंगन में बैठे चाय पि रहे हैं, मैं नित क्रिया निपटने बाथरूम में घुस गया, और बहार आकर आंगन में बैठ गया जहाँ पापा मन मौसा नाना चाचा चची मौसी मामी किरण पल्ली अनुज और माँ बैठ कर चाय पि रहे थे सागर अभी भी राजन चाचा के यहाँ सो रहा था, मैं भी आंगन मैं बैठ गया तो किरण ने मुझे चाय लाकर दी, मैंने चाय का कप लिए और साथ hi अपना पजामा नीचे कर लुंड निकल कर बैठ गया,
में- किरण इसे संभल न ज़रा खड़ा है परेशां कर रहा है,
किरण- अभी देखती हूँ भैया,
मैं चाय लेकर बैठ गया और पीने लगा, वहीं किरण नीचे बैठकर मेरा लुंड चूसने लगी, अह्ह्ह मज़ा आ रहा था चाय की चुस्की के साथ लुंड चुसवाने में, मैं चाय पीटा रहा और किरण मेरा लुंड चूसती रही, बाकि सब नए घर की नींव राखी जनि थी उसकी बात कर रहे थे,
पापा- साडी तयारी कर लेना तुम लोग, हम लोग देखते हैं जाकर.
माँ- ठीक है, बस नहाकर आते हैं हम लोग भी,
मौसा- अनुज, ये ले पैसे और जा सागर को और उठा ले और उसे लेकर दुकान से 10 किलो मिठाई करवा ला और साथ hi कुछ कोल्डड्रिंक की बोतलें और समोसा वगेरा ले ाइयो मज़दूरों के लिए,
अनुज- ठीक है मौसा जी अभी लाता हूँ,
मौसी- चलो भाई हम तो चले नहाने,
माँ- हाँ जल्दी जल्दी नहालो सब, गुंजन तुम भी जाओ नहालो,
मामी- हाँ जीजी,
इतने में किरण मेरा लुंड निकल कर बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाहः तुम्हारा तो आज निकल hi नहीं रहा,
बेचारी की चूस चूस कर हालत ख़राब हो गयी थी नूह से थूक टपक रहा था,
ममता चची- अरे किरण बिटिया तू भी नाहा ले जाकर मैं निकल दूंगी इसका,
किरण उठ गयी और चची आकर मेरा लुंड चूसने लगी, खैर चची ने अपना अनुभव दिखाया और मेरे लुंड के साथ साथ मेरी गोलियां भी चूसी और फिर अपनी जीभ मेरी गांड में घुसा घुसा कर गांड चाटने लगी, मैं उनकी जीभ का हमला अपनी गांड में बर्दाश्त नहीं कर पाया और झड़ने लगा तो चची ने अपने मुँह ने लुंड ले लिए और मेरे रास की एक एक बूँद लुंड से निचोड़ के पि गयी,
खैर अभी तो काम का समय था मैं भी जल्दी से नाहा लिया, धीरे धीरे औरतें भी नाहा धोकर निकलने लगी और तैयार होने लगी, माँ ने पल्ली और किरण को बोल्दिया की वो जाकर जग्गू और सरजू के यहाँ भी बोल आएं तो हम तीनो लोग साथ निकल गए, मैं बाघ की और वो दोनों बुलाने,
खैर बाघ में पहुंचा तो देखा की सरे मर्द तुबेल पर नाहा चुके थे,
में- अरे सब लोग यहीं नाहा कर लिए,
मां- और का वहां औरतें समय लगाती तो यही नाहा लिए,
में- सही भी किआ,
इतने में अनुज और सागर भी आ गए मिठाई और कोल्डड्रिंक लेकर, कुछ देर में जग्गू भी आ गया, साथ hi राजपाल ताऊ भी, सरजू बिरजू दीनू चाचा भी, और करीब आधे घंटे बाद औरतें आईं सब मिलकर, मंजू तै रज्जो चची प्रेमा भाभी और पद्मिनी तै भी बाकि साडी लड़कियां सब लोग साथ में hi थी, नींव की ईंट राखी गयी, पूजन हुआ जो की पल्ली किरण और लाडो ने किआ, क्यूंकि लड़कियों से करवाया जाना शुभ माना जाता है, फिर मज़दूरों में और बाकी सब में मिठाइयां बांटी गयी, कोल्डड्रिंक बांटी गयी, सबने खूब हंसी ठिठोली करते हुए ये सब किआ, औरतों का समूह अलग हो गया था, आदमियों का अलग, लड़कों का अलग लड़कियों का अलग,
सबने खूब खाया पिया खूब हंसी ठिठोली हुई, इसके बाद सब अपने अपने घर की और चल दिए, आते आते करीब 2 बज गए थे, औरतें दोपहर का खाना बनाने में लग गयी, मैं अपनी जान अंजलि से बात करने में व्यस्त हो गया, खाना बन गया तो मुझे बुलाया गया, खाना खा कर मैं सो गया और शाम को फ़ोन बजने पर उठा, देखा तो जग्गू का था,
में- हाँ बेटे,
जग्गू- आजा चल मैच खेलने चल रहे हैं,
में- आता हूँ,
हाथ मुँह धोकर मैं खेलने चला गया काफी देर तक खेले, बापिस आते आते अँधेरा हो चूका था, हम लोग बाघ में आये जहाँ अब मज़दूर काम ख़तम करके जा चुके थे, पापा मौसा चाचा थे बाकी लोग भी घर जा चुके थे,
मैं जानवरो को चारा पानी डालने लगा जग्गू मेरी मदद कर रहा था और, इतने में दीनू चाचा और राजपाल ताऊ कुछ योजना बनाते हुए आये,
दीनू- लो मिल गए नीलेश भैया,
पापा- क्या हो गया, कहे ढूंढ रहे थे,
दीनू- अब बोलो न बड़े भैया,
दीनू चाचा राजपाल ताऊ की और देखकर बोले,
राजपाल ताऊ- अरे हम क्या बोलेन, बोलकर तो तुम hi लाये थे यार,
दीनू- अरे दादा आखिर टाइम पर पलटी न मारो.
पापा- अरे बात का है बताओगे, तुम hi बता दो,
राजन- अरे हम बताते हैं का बात है,
मौसा- बताओ,
राजन- लगानी है, हैं न? हेहही,
इस पर दीनू चाचा और राजपाल ताऊ दोनों हंस पड़े,
राजन- देखा हमने बिलकुल सही पकड़ा है,
पापा- पकड़ा तो सही पर हमारी बीवियां जान ले लेंगी हमारी तुम्हे पता है न दारु से कितनी किलसति हैं,
दीनू- अरे भैया रोज़ रोज़ थोड़े hi करते हैं ख़ुशी का मौका है, वैसे भी रज्जो मन नहीं करेगी,
राजपाल ताऊ- पर मंजू तो करेगी,
पापा- हमारी वाली भी करेगी,
राजन- ममता को कोई दिक्कत नहीं है इतनी,
मौसा- फिर कैसे हो पायेगा,
दीनू- कैसे भी करो दादा करो, आज हमें पीनी है,
मैं और जग्गू इन लोगो की बातें सुनकर हंस रहे थे,
राजन- अब तुम्हारी बात सुनकर हमारा भी मन हो रहा है,
राजपाल ताऊ- क्या करें?
ताऊ ने पापा की तरफ देखकर कहा,
पापा- अब हम क्या बताएं समझ नहीं आ रहा, देखो अगर पिएंगे तो जमुना और ससुरजी को भी साथ लेना पड़ेगा,
मौसा- हाँ ये तो सही कहा, उनके बिना करना गलत होगा,
पापा- पर तुम्हारी भाभी मानेगी नहीं, वो बाबा को पिलाने के बिलकुल खिलाफ हो जाएगी,
राजन चाचा- कुछ तो दिमाग लगाना पड़ेगा न,
मौसा- अरे कर्मा तेरा दिमाग ज़्यादा चलता है, तू hi कुछ बता न,
में- मैं नहीं बता रहा कुछ, अगर माँ या तै को पता चली तो मैं फँसूँगा,
मौसा- अरे तू क्यों फंसेगा जब पिएंगे हम लोग तो,
राजन चाचा- देख ले तेरा ब्याह हमें hi करवाना है,
दीनू- अरे बीटा इतना नहीं करेगा अपने चाचा के लिए,
जग्गू- देख तो कैसे गिड़गिड़ा रहे हैं पीने के चक्कर में, हेहही,
राजपाल ताऊ- बीटा जब तुम्हारे ब्याह हो जायेंगे न तो पता चलेगा तुम्हे पत्नियों का दर,
पापा- कुछ सोचा है कर्मा,
में- अरे सीधा तो है, जैसे किसी एक घर में रखलो प्रोग्राम, वहीं सब इकठ्ठे हो जाओ,
मौसा- पर ये बोलेन कैसे क्या वजह दें,
में- देखो बिलकुल झूठ मत बोलो, क्यूंकि बाद में पता चलेगा तो दिक्कत होगी इससे अच्छे सही सही बतादो,
दीनू- अरे इससे तो फंस जायेंगे,
मौसा- नहीं सही कह रहा है, अगर बाद में पता चली तो फंसेंगे,
में- और क्या बोल्दो आज ख़ुशी का दिन है सरे मर्द एक साथ बैठकर मज़े लेना चाहते हैं,
राजपाल ताऊ - ठीक है हमारे यहाँ बैठ जाते हैं, पर फिर भी दिक्कत है,
दीनू- क्या दिक्कत?
राजपाल ताऊ - अरे तुंहारी भाभी है न वो सुनती रहेगी पीछे से, मज़ा ख़राब कर देगी,
में- तो ऐसा करो न जग्गू और तै आज हमारे यहाँ सो जायेंगे,
मौसा- हाँ ये ठीक रहेगा,
राजन- बहु और संधान रह जाएँगी,
जग्गू- नहीं पद्मिनी तै गाओं गयी हैं कुछ काम आ गया था,
राजपाल ताऊ- अरे जग्गू अपनी माँ और भाभी दोनों को hi लेकर चला जइयो, बहु को भी नहीं पसंद दारु वगेरा,
जग्गू- ठीक है ले जाऊंगा,
में- अब ये हो गया तो औरतें जिन्हे कोई परेशानी नहीं उन्हें अपने साथ ले जाना,
मौसा- हाँ ये भी सही है.
दीनू- मतलब
में- चाचा मतलब जैसे रज्जो चची, ममता चची और जो भी आना चाहे उन्हें अपने साथ ले जाना जिससे दो फायदे होंगे,
राजपाल ताऊ- कौनसे दो फायदे,
में- अरे पीने के बाद चुदाई भी तो करोगे hi उसके लिए, और दूसरा फायदा की अगर औरतें साथ रहेंगी तो माँ या मंजू तै को भी इतनी दिक्कत नहीं होगी,
दीनू- अरे यार मन गए कर्मा बिलकुल सही सोचा है,
मौसा- हैं,
राजपाल ताऊ- अरे पर बाबा और जमुना का क्या वो रहेंगे तो कैसे होगी चुदाई,
राजन- अरे सब हो जायेगा वो भी हमारी तरह हैं, ममता और पल्ली ने दोनों को अपना स्वाद चखा दिया है,
राजपाल ताऊ- अरे वाह सच में, फिर तो मज़ा आ जायेगा,
दीनू- पर मेरी एक परेशानी है,
पापा- अब तुम्हारी क्या है?
दीनू- रज्जो तो मान जाती है पर सरजू और नीतू बहुत बवाल करते हैं पीने के नाम पर वो नहीं जाने देंगे,
Me-are तो रज्जो चची को बोलना वो उन्हें समझा देंगी और या तो उन्हें भी ले जाना साथ, सरजू बिरजू को एक एक डोज तो साडी बात मानेंगे,
दीनू- अरे उन्हें अपने साथ पिलायेंगे का?
राजन- अरे बच्चे बड़े हो गए हैं
मौसा- और जब साथ में चुदाई कर सकते हो थोड़ी पि नहीं सकते,
दीनू- ये बात भी ठीक है, फिर मैं तैयार हूँ,
मौसा- ये हुई न बात तो जल्दी घर चलते हैं, और प्रोग्राम बनाते हैं अपने अपने घर बात करलो,
राजपाल ताऊ- हाँ भाई चलो जल्दी जल्दी,
सब निकल जाते हैं
जग्गू- सही प्रोग्राम बना दिया तूने सबका,
में- अरे बढ़िया है न हम भी कुछ बना लेंगे अपना, हेहही ,
जग्गू- वो तो मुझे पता था बिना अपना बनाये तू कैसे मान जायेगा,
खैर सब लोग घर आ गए पापा मौसा चाचा वगेरा अपना प्रोग्राम बनाने में लग गए, पापा माँ को मानाने लगे तो माँ ने आज बिना किसी रोक टोक के हाँ कह दिया, मौसी ने भी हाँ कह दिया पर उन्होंने बोलै की वो भी उनके साथ चलेंगी, मौसा ने भी सोचा मन करे इससे तो ाचा hi है वैसे भी ममता चची और रज्जो चची होंगी hi वहां, मौसा ने मां को बताया और पापा ने नाना को तो वो तुरंत राजी हो गए, मां ने मामी से अनुमति ली तो मामी बोली जब सब जा रहे हैं तो तुम्हे क्यों रोकूंगी बस थोड़ा संभल कर पीना,
मां- अरे जीजा और बाबा भी जा रहे हैं कोई दिक्कत नहीं होगी मैं बस थोड़ी सी hi लूंगा,
तो कुल मिलकर सब कुछ योजना अनुसार चल रहा था, मैंने भी सोचा की चलो जब सब रात को खास बना रहे हैं तो मैं भी बनता हूँ, और मैंने अनुज और सागर को बुलाया और उन्हें कुछ करने को कहा, वो तुरंत काम पर लग गए,
जल्दी hi जग्गू प्रेमा भाभी कुर मंजू तै को लेकर घर आ गया,
और यहाँ से नाना, पापा, मौसा, राजन चाचा, मां, मौसी, ममता चची, पल्ली और किरण भी ज़िद्द करके पल्ली के साथ चली गयी,
जारी रहेगी,






























































