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- Dec 5, 2013
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सभ्य- आह्हः बछहहाः ह ऐसी होई छोड़ड़ड़ अपनीइ ताआईई को.
सभ्य सरजू का जोश बढ़ाते हुए चुद रही थी.
इधर दूसरी खत पर जग्गू शालू की गांड मार रहा था.
खैर कुछ देर ऐसे hi चुदाई और चलती है एक एक बार सब और झड़ते हैं, तब जाकर शांत होते हैं और उसी समय रज्जो भी घर में आती है और आंगन में आकर देखती है तो उसके मुँह से सिर्फ हाय दिया निकलता है...
अपडेट 245
रज्जो की शुरूआती हैरानी ख़तम होने में ज़्यादा समय नहीं लगता और करीब 5 मिनट के बाद hi वो भी शालू और सभ्य के बगल में घोड़ी बानी होती है और उसके बड़े बेटे सरजू का लुंड उसकी गांड से अंदर बहार हो रहा होता है वहीँ उसके पति दीनू उसके बगल में सभ्य की गांड में अपना लुंड चला रहे होते हैं और छोटा बीटा बिरजू शालू की गांड मार रहा होता है, इसी तरह कुछ देर तक चुदाई चलती है और फिर शालू और सभ्य अपने घर चले जाते हैं.
(कर्मा की ज़ुबानी)
ऐसे hi शाम होती है सब अपने अपने काम में लगे होते हैं, इसी बीच मेरा फ़ोन बजता है तो देखता हूँ की पियूष का होता है,
में- हाँ पियूष भाई कैसे हो?
पियूष- कहाँ है?
में- घर hi हूँ, तुम बताओ.
पियूष- मिलेगा अभी?
में- ठीक है आता हूँ, थोड़ी देर में.
पियूष- अरे नहीं तू रहने दे मैं आता हूँ वहीँ, बाघ में मिल अपने आधे घंटे में.
में- ठीक है आ जाओ,
मैं फ़ोन काटता हूँ और नीचे देखता हूँ जहाँ प्रेमा भाभी नीचे लेती थी और मेरा लुंड उनकी छूट में समाया हुआ था,
भाभी- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह लललललाहहह अब छोड़ू न फ़ोन को छोडो,
में- हाँ भाभी मैं रह नहीं सकता बिना चोदे तुम्हे,
मैं धीरे धीरे भाभी की छूट में धक्के लगाने लगता हूँ और भाभी की आहें निकलने लगती हैं,

करीब 20 मिनट्स तक और भाभी को छोड़ने के बाद मैं उनके मुँह में अपना रास छोड़ कर झाड़ जाता हूँ,
कमरे से बाहर निकलता हूँ तो जग्गू और ताऊजी मिलकर नीतू और तै को पेल रहे होते हैं, मैं उन्हें बता कर घर से निकल जाता हूँ, और कुछ hi देर में बाघ में होता हूँ जहाँ पियूष मेरा इंतज़ार पहले से कर रहा था,
में- अब बताओ क्या हुआ,
पियूष- पेप्सी पियेगा?
में- हाँ चलो,
थोड़ी hi देर में हम लोग हलवाई की दुकान पर होते हैं और पेप्सी और समोसा खा रहे होते हैं,
पियूष कहते हुए कुछ सोचता है और बोलता है- यार रात से hi न एक बात मेरे दिमाग में चल रही है.
में- क्या?
पियूष- वही जो तूने रात को पहले रज्जो चची की वीडियो दिखाई फिर ये बताया की उनका और तेरे पापा का, ये सब जानकर भी तू इतना आराम से कैसे है?
में- तो इसमें परेशां होने वाली बात क्या है?
पियूष- अरे तेरे पापा का तेरे दोस्त की मम्मी के साथ चक्कर है ये परेशां होने वाली बात नहीं है, तेरी मम्मी के साथ धोखा हो रहा है.
में- अरे वो सब छोडो पहले उधर देखो,
मैं पियूष को एक और इशारा करके देखने की कहता हूँ तो पियूष गर्दन घुमा कर उधर देखता है, थोड़ी hi दूर हलवाई की बीवी नल के किनारे बैठ कर बर्तन धो रही होती है. उसका पल्लू सरका हुआ होता है और उसकी चूचियों ककी घाटी नज़र आ रही थी,

पियूष ने उसकी और कुछ पल घूरा और फिर बापिस मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा,
पियूष- कितना कमीना है रे तू, बता मैं यहाँ कितनी गंभीर बात कर रहा हूँ और तेरा ध्यान कहाँ है,
में- अरे क्यों तुम्हे अछि नहीं लगी क्या पिक्चर?
पियूष- अब पिक्चर अछि है तो अछि लगेगी hi, पर मैं जिस बारे में बात कर रहा हूँ वो भी तो सुन कर जवाब दे.
में- आओ चलते चलते जवाब देता हूँ, समोसा और पेप्सी ख़तम हो गए हैं.
इसके बाद हम लोग उठे और चलने लगे.
पियूष- हाँ अब बता,
में- तुम यही पूछ रहे हो न की मैं इतना आराम से कैसे हूँ,
पियूष- हाँ
में- ाचा उससे पहले तुम बताओ रज्जो चची का बदन कैसा है, क्या कोई उन्हें छोड़ने का मौका छोड़ेगा? या तुम छोड़ोगे ईमानदारी से बताओ.
पियूष- अरे यार तूने तो उल्टा मुझ पर hi दाल दिया, वैसे ईमानदारी से कहूं तो नहीं यार मैं भी ये मौका नहीं छोडूंगा.
में- तोह फिर जब हम नहीं छोड़ सकते तो उनसे उम्मीद क्यों करते हैं छोड़ने की सिर्फ इसलिए की वो पापा हैं, हम ये भूल जाते हैं की हमारे माँ बाप होने के साथ साथ वो भी इंसान hi हैं उनकी भी इच्छाएं हैं.
पियूष- कह तो तू सही रहा है पर अगर तेरी मम्मी को ये सब पता चला तो घर में कलेश नहीं हो जायेगा तगड़ा वाला.
में- जहाँ तक मैं अपने माँ पापा को जनता हूँ, माँ को भी इस बारे में ज़रूर पता होगा.
पियूष- पता होगा ये तू कैसे कह सकता है और फिर भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है.
में- क्यूंकि माँ पापा एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते, और दूसरा माँ ने हमें हमेशा यही सिखाया है की परिवार में एक दुसरे से जलन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए, अगर किसी चीज़ से किसी को बिना नुकसान के मज़ा मिल रहा है तो लेने दो.
पियूष- बहुत अलग है यार तेरा परिवार समाज से.
में- यही तो बात है भाई, माँ पापा ने यही सिखाया की समाज के सरे नियम वगेरा घर के बाहर तक सही हैं घर में जो अपने परिवार को ख़ुशी दे वो करो चाहे समाज के लिए सही हो या गलत क्यूंकि अंत में हमें परिवार के साथ hi रहना है हर मुसीबत में परिवार hi काम आता है समाज नहीं.
पियूष- तेरी ये बात तो बिलकुल सही है, मुसीबत में समाज मुँह मोड़ लेता है परिवार hi साथ खड़ा होता है.
में- तभी तो अपने माँ पापा से एक दोस्ती का रिश्ता बना कर रखना चाहिए, ताकि हम अपनी बातें उनसे कर सकें उनकी सुन सकें इससे घर का माहौल ाचा रहता है,
पियूष- यार सच में चाहता तो मैं भी यही हूँ की मेरे और पापा के बीच भी दोस्ती का रिश्ता हो, उनका कोई दोस्त भी नहीं है, और मुझसे सिर्फ उतनी बात होती है जितनी ज़रुरत हो,
में- तो कर लो दोस्ती क्या दिक्कत है?
पियूष- यार इतना आसान नहीं है न, अब तक कुछ नहीं और अचानक से बात करने लग जॉन झिझक होती है,
में- अरे यार जिन्होंने पैदा किआ उनसे क्या झिझक. उनके सामने नंगे घुमते होंगे अब झिझक रहे हो.
इस पर वो हंसने लगा,
पियूष- तो तू hi बता क्या करूँ?
में- करना क्या है थोड़ा समय बिताओ उनके साथ, फिल्म वगेरा देखने जाओ. घूमो फिरो बातें तो अपने आप हो जाएँगी,
पियूष- हाँ यार कह तो तू सही रहा है बहुत दिन हो गए मैं भी घूमा नहीं कहीं
में- तो लेकर जाओ फिर सबको मस्त फिल्म वगेरा दिखाओ.
पियूष- हाँ यार तू चलेगा?
में- अरे पहले सिर्फ परिवार के साथ जाओ हम लोग बाद में चल लेंगे.
पियूष- चल ठीक है ये भी, ाचा तुझसे कुछ बात सांझा कर सकता हूँ
में- हाँ बिलकुल.
पियूष- पर थोड़ी निजी है किसी को बताना मत तुझ पर भरोसा है इसीलिए तुझसे बात कर रहा हूँ.
में- अरे कोई दिक्कत नहीं भाई तुम बेफिक्र बोलो
पियूष- यार मुझे लगता है की मेरे और तेरी भाभी के बीच भी कुछ ठीक नहीं चल रहा.
में- क्यों लड़ाई हुई क्या?
पियूष- अरे लड़ाई नहीं हुई है, बस वो रोमांच सा नहीं लगता जो पहले होता था, चुदाई भी करते हैं वो मन भी नहीं करती पर वो पहले वाली उत्सुकता नहीं दिखती उसके अंदर.
में- बस इतनी सी बात.
पियूष- इतनी सी बात मतलब.
में- मतलब कुछ नहीं बस ये समझो की एक hi चीज़ एक hi तरीके से बार बार करके कोई भी पाक जाता है.
पियूष- फिर क्या करूँ और?
में- थोड़ा नयापन लाओ, कुछ नए तरीके ढूंढो, सिर्फ बिस्तर पर मत करो कभी बाथरूम में करो कभी आँगन में तो कभी छत पर कभी रसोई में,
पियूष- अरे पागल है क्या सब होते हैं घर पर.
में- वही तो रोमांच बढ़ाएगा. थोड़ा छेड़ो बीच बीच में.
पियूष- चल तू कह रहा है तो करके देखता हूँ,
में- ठीक है ज़रूर करना सब सही हो जायेगा,
पियूष- ज्ञानी आदमी है तू इस मामले में तो.
में- वो तो मैं हूँ,
हम दोनों बातें करते हुए बाघ तक आ जाते हैं फिर वो अपनी मोटरसाइकिल लेकर निकल जाता है और मैं घर आ जाता हूँ, और फिर खाना पीना होता है और फिर खा कर सब सो जाते हैं,
मज़ाक कर रहा हूँ चोदामपुर में लोग ऐसे hi सो जाएं कैसे हो सकता है, खाने के बाद चुदाई का दौर चलता है, पहले आँगन में hi सब एक साथ चुदाई करते हैं और फिर अपनी अपनी पसंद अनुसार के साथियों के साथ सोने चले जाते हैं,
मुझे मामी और किरण दोनों माँ बेटी का साथ मिलता है तो अनुज और सागर मिलकर पल्ली को अपने साथ सुलाते हैं, ममता चची को मां और मौसा पकड़ लेते हैं, तो मौसी अपने दोनों जीजा यानी पापा और राजन चाचा के साथ चल देती हैं, इधर नाना तो आँगन में hi सोने वाले थे तो माँ तो नाना के लुंड पर सवार भी हो चुकी थी.

नाना का लुंड माँ की गांड में घुसा हुआ था और नाना नीचे से कमर हिलाकर अपनी बड़ी बिटिया की गांड मार रहे थे..
इसी तरह रात बीती और फिर अगले दो तीन दिन ऐसा hi बीते एक शाम को मेरे पास पियूष का फ़ोन आया और बोलै- अरे सुन यार कल तुझे कहीं जाना तो नहीं?
में- नहीं तो क्यों क्या हुआ?
पियूष- यार कल फॅमिली के साथ फिल्म का प्रोग्राम बनाया है तो गाडी मिल सकती है क्या?
में- हाँ बिलकुल कल सुबह तुम्हारे घर पहुँच जाएगी.
पियूष- फिर ठीक है कल सुबह सबको सरप्राइज देता हूँ.
में- हाँ सब खुश हो जायेंगे.
पियूष- ठीक है फिर कल मिलते हैं.
इतना कहकर वो फ़ोन काट देता है और मैं तुरंत अंजलि को फ़ोन मिलता हूँ और उसे कुछ समझाता हूँ.
अगली सुबह होती है और मैं गाडी लेकर गैंदपुर निकल जाता हूँ,
पियूष मुझे घर के बाहर hi तैयार मिलता है उसके साथ मैं अंदर जाता हूँ तो सबसे नमस्ते करता हूँ,
उसके मम्मी पापा और पत्नी भी तैयार थे पहले से hi, सिर्फ अंजलि नहीं थी क्यूंकि कल मैंने hi उसे कुछ बहाना बनाने को बोल दिया था.
में- सब तैयार हैं पहले से hi?
सावित्री- हाँ बीटा बस अंजलि की तबियत ठीक नहीं तो ये नहीं जा रही है,
रानी- कोई नहीं मम्मी जी थोड़ा आराम करेगी तो हो जाएगी ठीक, हैं न अंजलि?
रानी ने अंजलि की और आंख मरते हुए कहा तो अंजलि ने अपनी भाभी को आँखों से इशारे से hi चुप रहने का इशारा किआ,
सावित्री- और बीटा मम्मी पापा कैसे हैं?
में- अचे हैं आपको याद कर रहे थे,
ये सुनते hi सासु माँ के मन में उस रात के दृश्य ताज़ा हो गए.
सावित्री- अरे याद तो हम भी कर रहे थे.
सावित्री ने थोड़ा शरमाते हुए कहा हालाँकि मैं उस शर्माने के पीछे की वजह जनता था,
पियूष- चलो फिर निकलते हैं हम लोग,
महिपाल सिंह- हाँ समय से निकल चलो तो ाचा है.
पियूष- अरे अंजलि मेरी मोटरसाइकिल की चाबी कर्मा को दे दे ये बापिस उससे चला जायेगा,
अंजलि- दे रही हूँ भैया, पर चाय चढ़ा दी है इनके लिए.
महिपाल सिंह- अरे ाचा किआ बीटा चाय पि कर hi जाना.
में- जी चाचाजी,
पियूष- अरे हम लोग तो निकलते हैं.
सावित्री- हाँ भाई चलो चलो.
जल्दी hi कुछ पलों में सब बाहर आते हैं और फिर गाडी में बैठते हैं और पियूष गाडी लेकर निकल जाता है उनके जाते hi मैं और अंजलि बापिस घर में घुसते हैं अंजलि दरवाज़ा लगाती है और जैसे hi पीछे मुड़ती है मैं उसे बाहों में जकड लेता हूँ, वो थोड़ा खिलखिलाती है और अपनी बाहें भी मेरे बदन पर कास लेती है, कुछ पल बाद hi हम दोनों के होंठ आपस में मिल जाते हैं और एक दुसरे को पागलों की तरह चूमने लगते हैं, उसके रसीले होंठों को चूसने में मुझे जन्नत का मज़ा मिल रहा था सच में एक अलग hi एहसास था उसके होंठों में, मैंने उसे चूमते हुए उठा लिया और बिना होंठों को अलग किये hi उसे आँगन में ले गया और सोफे पर लिटाकर उसे चूसने लगा, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, हम दोनों का मन hi नहीं भर रहा था एक दुसरे के होंठों से और हम अलग नहीं हो रहे थे,
कुछ hi पलों में होंठों के बाद जीभ की बारी थी, हम दोनों की जीभ आपस में कुश्ती कर रही थी, काफी देर तक हम एक दुसरे के होंठों और जीभ को चूसते रहे और हांफते हुए अलग हुए कुछ पल एक दुसरे की आँखों में देखा और फिर से होंठ जुड़ गए इस बार भी काफी देर के बाद होंठ अलग हुए,
अंजलि- बहुत चालक हो तुम ये सब करने के लिए सब को भेज दिया.
में- और क्या वो वहां मज़े करेंगे हम यहाँ,
अंजलि- ाचा और मैं मज़े न करने दूँ तो.
में- तो कोई बात नहीं मेरे लिए तुम्हारे साथ रहना hi बहुत है,
अंजलि- सच्ची?
में- मुछि...
ये सुन कर वो कड़ी हो गयी और मेरी आँखों में देखते हुए मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, शर्ट के बटन खोलते हुए वो मेरे सीने पर चूमने लगी तो मुझे बदन में सरसरी होने लगी, मेरी शर्ट के बटन खोल कर उसने मेरी शर्ट को मेरी बाहों से निकल दिया मैं ऊपर से नंगा हो गया, फिर वो मेरे बदन को जगह जगह चूमने लगी, मेरा बदन उत्तेजना में तपने लगा, शर्ट के बाद उसने मेरी पंत भी निकली अब उसके सामने मैं कच्चे में था मेरा लुंड कच्चे में तम्बू बनाये हुए था,
अंजलि- इसे देखो कैसे सर उठाये खड़ा है,
वो कच्चे के ऊपर से hi मेरे लुंड को सहलाते हुए बोली तो मेरी आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,
अंजलि- बहुत किस्से सुने हैं बच्चू तुम्हारे अब जाकर दर्शन होंगे,
ये कहकर उसने मेरा कच्चा नीचे सरका दिया और मेरा लुंड उसके चेहरे के सामने झूलने लगा,
अंजलि उसे देख हैरान हो गयी और कुछ पल बस झूलते हुए लुंड के साथ उसकी आँखें ऊपर नीचे होने लगी उसका हाथ अनायास hi आगे बढ़ा और मेरे लुंड पर उसकी उँगलियों ने स्पर्श किआ तो मेरे मुँह से एक गरम अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी,
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह कितना गरम और सख्त है ये,
ये कहकर वो अपनी उँगलियों से उसे महसूस करने लगी और मेरी आँखें मज़े से अपने आप बंद हो गयी,
अंजलि- आँखें जब तक मैं न बोलू बंद hi रखना,
में- छ्हम्म ठीक है.
कुछ पल बाद मुझे अंजलि कुछ हरकतें करती हुई महसूस हुई उसका हाथ भी मेरे लुंड से हैट गया, और कुछ पल बाद उसने आँखें खोलने को कहा तो मैंने उसे देखा और हैरान रह गया, वो मेरे सामने अपने घुटनों पर बैठी थी, मेरा लुंड उसके हाथ में था और उसके चेहरे के सामने था पर मेरे लिए हैरानी का कारण कुछ और था और वो कारण था की उसके बदन पर एक भी कपडा नहीं था वो पूरी नंगी मेरे सामने थी, मेरी नज़र तो उसके बदन पर hi जैम गयी वहीँ वो मेरी आँखों में देखते हुए बोली - कैसा लगा सरप्राइज?
में- इससे ाचा कुछ भी नहीं,
अंजलि- और ाचा दिखाऊं?
में- हाँ,
उसने अपना चेहरा आगे किआ और अपनी जीभ निकल कर मेरे लुंड के टोपे पर फिरै और मैं उसकी जीभ के स्पर्श से सिहरने लगा पूरे बदन में कंपकंपी सी दौड़ गयी,
में- ohhhhhhhhhh माआहह.
अंजलि मेरी इस प्रतिक्रिया पर मुस्कुराई और फिर मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी,
मेरी आँखें एक बार फिर से आनंद के मरे बंद हो गयी वो अपना मुँह मेरे लुंड पर चलने लेगी, मैंने कुछ पल बाद आँखें खोल कर देखा तो वो मेरा लुंड पूरा अपने गले तक लेने की पूरी कोशिश कर रही थी और ये देख मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मैं सोचने लगा मैंने अपने लिए बिलकुल सही लड़की चुनी है.

अंजलि ने काफी देर तक मेरा लुंड चूसा और लगातार मेरी आहें निकलती रही, जब मुझे लगा की अब रुक जाना चाहिए नहीं तो रास निकल जायेगा तो मैंने उसे रोक दिया और उसे खड़ा किआ और फिर उसके होंठों को चूसते हुए उसे उठाया और सोफे पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़कर उसकी गर्दन और चेहरे को चूमने लगा और फिर नीचे सरकते हुए उसके सीने पर आ गया,
उसके संतरे की आकर की चूचियां उसके बदन का अनुसार बिलकुल सही अकार की थी मैंने एक चुकी को अपने हाथ में थमा तो हम दोनों की सिसकी निकल गयी मेरी उसकी कोमल चुकी की वजह से तो उसकी मेरे स्पर्श से, मुझसे और फिर रुका नहीं गया और मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा, अह्हह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा था उसकी चूचियों को चूसने में,
वही वो भी मेरे सर पर हाथ फिरते हुए कराह रही थी, मैं बदल बदल कर उसकी चूचियां पि रहा था, चूचियों को अचे से जी भर के चूसने के बाद मैं और नीचे उसके पेट और नाभि को चूसने लगा तो उसका बदन कंपनी सा लगा, उसकी नाभि मुझे बहुत रसीली लग रही थी, जिस मैं खूब स्वाद लेकर चूस रहा था और वो मज़े से तड़प रही थी,
पेट और नाभि के बाद छूट की बारी थी उसकी छूट के सामने हैकर कुछ पल तो मई बस उसकी सुंदरता को निहारता रहा, सच मैं बहुत प्यारी छूट थी उसकी देखते hi मेरे मुँह से पानी बहने लगा, मैंने खुद को और उसे ज़्यादा नहीं तड़पाया और अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया और पागलों की तरह चाटने लगा, वो नीचे लेती हुई मचलने लगी, मैं तो वर्षों के भूखे की तरह उसकी छूट पर टूट पड़ा वो तो ऐसे सिसक और आहें भर रही थी जैसे उसकी जान निकलने वाली हो,
ाचा था घर में कोई नहीं था क्यूंकि पूरे घर में उसकी आहें गूँज रही थी,
कुछ पल बाद hi मुझे उसकी छूट की चासनी अपने मुँह में बहती हुई महसूस हुई और वो मचलते हुए शांत हो गयी, मैंने उसकी जांघों के बीच से मुँह हटाया और उसके चेहरे की और देखा वो हांफते हुए मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, मैं वैसे hi खड़ा हुआ मेरा लुंड तो कब से तैयार था असली खेल के लिए,
हम दोनों की साड़ी बातें आँखों में hi हो रही थी न मैं कुछ बोल रहा था और न वो, माईनस उसके पैरों में जगह ली और लुंड को पकड़ कर टोपे को छूट के ऊपर रखा तो हम दोनों को hi एक सिरहन हुई,
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए आँखों से hi पूछा तो उसने आगे बढ़ने का इशारा किया तो मैंने धीरे से धक्का लगाया पर लुंड उसकी छूट में नहीं घुसा क्यूंकि वो बहुत कासी हुई थी, मैंने उसकी टैंगो को थमा और फिर लुंड को छूट के द्वार में फंसते हुए ज़ोर लगा कर धक्का लगाया तो लुंड उसकी छूट को चीयर कर थोड़ा अंदर घुस गया और उसकी चीख निकल गयी.
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कर्मा आह्हः रुक जोऊ अब नाहीई बहुत दर्द हो रहा है.
में- बस थोड़ा सा फिर नहीं होगा.
ये कहकर मैं धीरे धीरे छोटे छोटे धक्के लगता रहता हूँ और लुंड उसकी छूट में धीरे धीरे घुसता रहता है, फिर मैं लुंड को हल्का सा बाहर खींचता हूँ और फिर उसकी कमर को थम कर एक धक्का लगता हूँ तो लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर घुस जाता है और वो बड़ी तेज़ी से चीखती है,
उसकी आँखों से आंसू बाह रहे होते हैं, मैं कुछ पल यूँ hi रुक जाता हूँ और उसे चुप करने की कोशिश करता हूँ उसकी चूचियों को चूसता हूँ उसके बदन को सहलाता हूँ तब जाकर वो थोड़ी शांत होती है, मैं धीरे धीरे से अपना लुंड थोड़ा बाहर खींचता हूँ तो मुझे उस पर खून लगा दीखता है जो की उसके कुंवारेपन की निशानी था, मैं लुंड को निकल कर एक कपडे से पोंछता हूँ और फिर से लुंड को दोबारा उसकी छूट में घुसा देता हूँ और इस बार लुंड बिना किसी तकलीफ के घुसता चला जाता है,
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह कितने गंदे हो तुम इतना दर्द हुआ मुझे.
में- अरे मेरी जान जितना दर्द हुआ उससे ज़्यादा अब मज़ा भी तो आएगा न,
अंजलि- बड़े आये मज़ा देने वाले इतना मोटा घुसा दिया एक hi झटके में.
में- ाचा माफ़ कार्डो,
अंजलि- अब माफ़ी मत मांगो और जो मज़े की बोल रहे हो वो देकर दिखाओ.
उसने मुस्कुराते हुए कहा तो मैंने झुककर उसके होंठों को चूसा और फिर धीरे धीरे से अपने लुंड को उसकी छूट में चलना शुरू कर दिया वो भी आहें भरते हुए अपनी पहली चुदाई का आनंद लेने लगी,
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सच्ची बहुत्तत्त माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है,
में- मैंने कहा था न मेरी जान बहुत मज़ा आएगा.
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह हाँ सुना तो था पर इतना आएगा ये कभी नहीं सोचायहहह था ऐसे hi छोड़ते रहो,
अंजलि खुद की छूट के दाने को रगड़ते हुए बोली और मैं उसकी छूट में ढके लगते हुए उसकी चूचियों को हाथ बढाकर दबाने लगा.

मैं उसे इसी तरह लगातार छोड़ता रहा फिर कुछ पल बाद hi उसने मुझसे आसान बदलने को कहा और मुझे नीचे लिटाकर खुद मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लुंड को अपनी छूट में भर कर अपने चूतड़ों को उछलने लगी,
अब वो खुलकर चुदाई का मज़ा ले रही थी, देख कर लग hi नहीं रहा था की कुछ देर पहले hi उसकी सील टूटी है, हम दोनों के बदन पसीने से तर होकर चमक रहे थे

मुझे भी उसके साथ एक अलग hi आनंद आ रहा था जो की आज तक नहीं आया था, उसकी उत्तेजना और गरमी देख कर मुझे लग रहा था मैंने सही लड़की से प्यार किआ है, जो हर तरह से मेरा साथ देगी,
कुछ देर के चुदाई के बाद वो थोड़ी थकी और झुक कर धीरे धीरे अपने चूतड़ों को चलने लगी तो मैं भी नीचे से उसे छोड़ने लगा,

Anjali- ahh pata hota tumhara lund itna mazaaaaahhhhhhhh dega to ab tak ise kab ka apani choot mein bhar leti.
Me- ab bhi der nahi hui hai meri jaan ab bahut mauke milenge,
Anjali- ahh ab main thak rahi hun tum chodo na.
Uska itna kahna tha ki maine uski kamar ko thama aur phir tabadtod dhakke lagane shuru kar diye. Wo lagatar aahein bhar rahi thi aur mera lund piston ki tarah uski choot mein andar baahar ho raha tha kuch der ki aisi hi dumdar chudai ke baad hum dono hi bahut uttejit ho gaye the aur na maine aur na usne khud ko rokne ki koshish ki aur jaldi hi main aur wo ek saath jhad rahe the maine apane ras ki pichkari uski choot mein bhar di aur phir uske bagal mein hanfate huye let gaya hum dono ek doosre ki baahon mein kuch der yun hi lipte hute lete rahe kuch pal ke araam ke baad uthe tp usne mere honthon ko choosa aut phir meri aankhon mein dekh kar boli- I love you।
Me- I love you too,
Ek baar phir se maine use chooma phir wo mere badan ko choomti hui neeche sarakne lagi aur mere pairon ke beech baith gayi,
Mera lund jo thoda shant pada hua tha use usne apani ungaliyon mein thaama to jaise usme jaan aane lagi, aur phir usne jhuk kar apane muh mein bhar lia to maano meri jaan nikalte huye bachi, meri aankhon mein dekhte huye usne pahle jeebh se lund ke tope ko chaata to maano main sihar utha aur phir use apane honthon mein bhar lia,

Mera lund to turant hi apane poore aakaar mein aa chuka tha main uski is kamukta bhari kala dekh kar aahein bharne laga,
Kuch der tak wo yun hi mera lund choosti rahi aur main aahein bharta raha usne lund tab chhoda jab wo bilkul santusht ho gayi,
Mera lund uske thook se poora sana hua tha use pakad kar seedha kar wo mere upar aai aur ghoom gayi mujhe laga phir se mere lund par is baar chehra doosri or karke aur usne aisa hi kia aur neeche hote huye mera lund pakada aur phir mujhe hairan karte huye lund ko choot par tikane ki jagah apani gand ke chhed par tika diya.
Me- tum ye kya kar rahi ho choot mein itna dard hua gand to bahut dard karegi.
Anjali- ab chaunkane ki baari tumhari hai,
Ye kahkar usne lund ke upar dabav banaya aur phir lund uski gand ko cheerta hua topa andar ghus gaya,
Uske muh se ek halki si cheekh nikli, aur wo gahri saansein lete huye thoda thoda neeche hone lagi aur halka halka lund uski gand mein utarne laga, main ye sab dekh hairan tha kuch pal baad hi mera poora lund uski gand mein samaya hua tha,
Me- ahhhhhhh uhmmmm yaar kitni garam aur makhmali hai ye par itni asaani se tumne lund gand mein ahhhh kaise le luyaaah।
Anjali- ahhhhhhh asaaani se kahan itni chaudhi kar di hai gaaaannddd ahhhhhh main kheere se apaniii gaanddd ko kholtiii thiiiiahhhh usi ka asar hai,
Me- are waahhhh isse mera fayda ho gaya ab tumhari gand mujhe nahi kholni padi,
Anjali- ahh haan choot mein seal tootne ka dar hota tha to gand par hi sab use karti thi।
Me- ahhhh sahi kia Meri Jaan tabhi to mujhe tumhari ye gand mili aaj maarne ko.
Anjali- ahh ab to mil gayi hai aur lund bhi poora ghus gaya hai ab maaro na baabu,
Bas phir kya tha maine bina lund nikale hi use god mein uthaya aur phir zameen par ghodi bana diya aur phir upar aa kar dheere dheere dhakke lagane laga
Anjali- ahh ohhh yeahhh mazaa aa raha hai thoda tez se maaroo naaahhhh.
Bas mujhe yahi sunna tha aur maine uski gand ko kootna shuru kar diya

हर झटके के साथ वो कराह रही थी पर रुक्नु को नहीं बोल रही थी इसी बात का मैं फायदा उठा रहा था, करीब 10 मिनट्स तक ऐसे गांड मरवाने के बाद वो झड़ने लगी और गिर गयी पर मुझसे अब नहीं रुका जा रहा था मैंने उसे उठा कर अपने ऊपर ले लिया और फिर उसकी टांगो को मोड़ कर अपने हाथों के बीच फंसकर हाथों को सर के पीछे कर के मोड़ लिए जिससे वो बिलकुल आधी मुद गयी,
मैंने फिर नीचे से लुंड चलना शुरू किआ और उसकी गांड मरने लगा वो भी आह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह करके चिल्लाने लगी पर मैं रुका नहीं और लगातार गांड मरता रहा,

उसकी गांड में लुंड लगातार मैं मशीन की तरह चलाये जा रहा था,
में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह क्याआ मस्त्त गाआंनदद्द है तुम्हारिई ओह्ह्ह ऐसा माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कभी नाहीई ायाह्ह्ह.
अंजलि- अहह ओह्ह्ह येअहहह मज़ा आ रहा है कर्माआअह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह मारू अह्ह्ह्हम्मम्मम ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइ गांडड होऊ ओह्ह्ह्हह्ह ममममममिययययययय.
में- अह्हह्ह्ह्ह आजजज कोइइइइइ नाहीई बचाएआ पाएगाआहठ
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह बचनाआ कौंण चाहताऑ है अह्ह्ह्ह छोड़ते राहूऊओऊ,
मैं लगातार उसकी गांड मार रहा था और वो पागलों की तरह चिल्ला रही थी, उसकी छूट से ज़्यादा उसकी गांड ने मुझे जल्दी पिघलने को मज़बूर कर दिया, मेरी पकड़ भी उसके पैरों से ढीली हो गयी मैं किसी तरह उसे थामे बस नीचे से धक्के लगता रहा और तब तक लगता रहा जब तक मेरे लुंड ने उसकी गांड को अपने रास से न भर दिया, झड़ने के बाद मैंने लुंड को उसकी गांड से निकला तो लुंड के पीछे पीछे मेरा रास भी बहकर बाहर आने लगा.

अंजलि भी मेरे साथ साथ झाड़ चुकी थी हम दोनों hi बुरी तरह से हांफ रहे थे, खैर हम थक चुके थे तो थोड़ी देर यूँ hi नंगे एक दुसरे की बाहों में सो गए,
शाम होने तक जब तक उसका परिवार बापिस आने वाला था तब तक मैंने उसे कई बार छोड़ा और वो भी चुदाई में काम नहीं थी हर चीज़ में पूरे जोश से साथ दे रही थी,
उसने मेरे लुंड चूसने के साथ साथ मेरी गांड भी छाती

उसे देख कर लग hi नहीं रहा था की ये सब उसका पहली बार है, पर उसके साथ बहुत मज़ा आ रहा था, उसने मुझे इतना मज़ा दिया तो मैंने भी कोई कमी नहीं छोड़ी उसकी छूट और गांड को जी भर के चूसा और फिर उसकी चुदाई करके उसके चेहरे को अपने रास से रंग दिया,

उसके घरवालों के आने से आधे घंटे पहले मैं उसके घर से निकल गया और फिर करीब घंटे भर बाद उसके भाई का फ़ोन आया तो बापिस उसके घर गया..
जारी रहेगी
सभ्य सरजू का जोश बढ़ाते हुए चुद रही थी.
इधर दूसरी खत पर जग्गू शालू की गांड मार रहा था.
खैर कुछ देर ऐसे hi चुदाई और चलती है एक एक बार सब और झड़ते हैं, तब जाकर शांत होते हैं और उसी समय रज्जो भी घर में आती है और आंगन में आकर देखती है तो उसके मुँह से सिर्फ हाय दिया निकलता है...
अपडेट 245
रज्जो की शुरूआती हैरानी ख़तम होने में ज़्यादा समय नहीं लगता और करीब 5 मिनट के बाद hi वो भी शालू और सभ्य के बगल में घोड़ी बानी होती है और उसके बड़े बेटे सरजू का लुंड उसकी गांड से अंदर बहार हो रहा होता है वहीँ उसके पति दीनू उसके बगल में सभ्य की गांड में अपना लुंड चला रहे होते हैं और छोटा बीटा बिरजू शालू की गांड मार रहा होता है, इसी तरह कुछ देर तक चुदाई चलती है और फिर शालू और सभ्य अपने घर चले जाते हैं.
(कर्मा की ज़ुबानी)
ऐसे hi शाम होती है सब अपने अपने काम में लगे होते हैं, इसी बीच मेरा फ़ोन बजता है तो देखता हूँ की पियूष का होता है,
में- हाँ पियूष भाई कैसे हो?
पियूष- कहाँ है?
में- घर hi हूँ, तुम बताओ.
पियूष- मिलेगा अभी?
में- ठीक है आता हूँ, थोड़ी देर में.
पियूष- अरे नहीं तू रहने दे मैं आता हूँ वहीँ, बाघ में मिल अपने आधे घंटे में.
में- ठीक है आ जाओ,
मैं फ़ोन काटता हूँ और नीचे देखता हूँ जहाँ प्रेमा भाभी नीचे लेती थी और मेरा लुंड उनकी छूट में समाया हुआ था,
भाभी- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह लललललाहहह अब छोड़ू न फ़ोन को छोडो,
में- हाँ भाभी मैं रह नहीं सकता बिना चोदे तुम्हे,
मैं धीरे धीरे भाभी की छूट में धक्के लगाने लगता हूँ और भाभी की आहें निकलने लगती हैं,

करीब 20 मिनट्स तक और भाभी को छोड़ने के बाद मैं उनके मुँह में अपना रास छोड़ कर झाड़ जाता हूँ,
कमरे से बाहर निकलता हूँ तो जग्गू और ताऊजी मिलकर नीतू और तै को पेल रहे होते हैं, मैं उन्हें बता कर घर से निकल जाता हूँ, और कुछ hi देर में बाघ में होता हूँ जहाँ पियूष मेरा इंतज़ार पहले से कर रहा था,
में- अब बताओ क्या हुआ,
पियूष- पेप्सी पियेगा?
में- हाँ चलो,
थोड़ी hi देर में हम लोग हलवाई की दुकान पर होते हैं और पेप्सी और समोसा खा रहे होते हैं,
पियूष कहते हुए कुछ सोचता है और बोलता है- यार रात से hi न एक बात मेरे दिमाग में चल रही है.
में- क्या?
पियूष- वही जो तूने रात को पहले रज्जो चची की वीडियो दिखाई फिर ये बताया की उनका और तेरे पापा का, ये सब जानकर भी तू इतना आराम से कैसे है?
में- तो इसमें परेशां होने वाली बात क्या है?
पियूष- अरे तेरे पापा का तेरे दोस्त की मम्मी के साथ चक्कर है ये परेशां होने वाली बात नहीं है, तेरी मम्मी के साथ धोखा हो रहा है.
में- अरे वो सब छोडो पहले उधर देखो,
मैं पियूष को एक और इशारा करके देखने की कहता हूँ तो पियूष गर्दन घुमा कर उधर देखता है, थोड़ी hi दूर हलवाई की बीवी नल के किनारे बैठ कर बर्तन धो रही होती है. उसका पल्लू सरका हुआ होता है और उसकी चूचियों ककी घाटी नज़र आ रही थी,

पियूष ने उसकी और कुछ पल घूरा और फिर बापिस मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा,
पियूष- कितना कमीना है रे तू, बता मैं यहाँ कितनी गंभीर बात कर रहा हूँ और तेरा ध्यान कहाँ है,
में- अरे क्यों तुम्हे अछि नहीं लगी क्या पिक्चर?
पियूष- अब पिक्चर अछि है तो अछि लगेगी hi, पर मैं जिस बारे में बात कर रहा हूँ वो भी तो सुन कर जवाब दे.
में- आओ चलते चलते जवाब देता हूँ, समोसा और पेप्सी ख़तम हो गए हैं.
इसके बाद हम लोग उठे और चलने लगे.
पियूष- हाँ अब बता,
में- तुम यही पूछ रहे हो न की मैं इतना आराम से कैसे हूँ,
पियूष- हाँ
में- ाचा उससे पहले तुम बताओ रज्जो चची का बदन कैसा है, क्या कोई उन्हें छोड़ने का मौका छोड़ेगा? या तुम छोड़ोगे ईमानदारी से बताओ.
पियूष- अरे यार तूने तो उल्टा मुझ पर hi दाल दिया, वैसे ईमानदारी से कहूं तो नहीं यार मैं भी ये मौका नहीं छोडूंगा.
में- तोह फिर जब हम नहीं छोड़ सकते तो उनसे उम्मीद क्यों करते हैं छोड़ने की सिर्फ इसलिए की वो पापा हैं, हम ये भूल जाते हैं की हमारे माँ बाप होने के साथ साथ वो भी इंसान hi हैं उनकी भी इच्छाएं हैं.
पियूष- कह तो तू सही रहा है पर अगर तेरी मम्मी को ये सब पता चला तो घर में कलेश नहीं हो जायेगा तगड़ा वाला.
में- जहाँ तक मैं अपने माँ पापा को जनता हूँ, माँ को भी इस बारे में ज़रूर पता होगा.
पियूष- पता होगा ये तू कैसे कह सकता है और फिर भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है.
में- क्यूंकि माँ पापा एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते, और दूसरा माँ ने हमें हमेशा यही सिखाया है की परिवार में एक दुसरे से जलन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए, अगर किसी चीज़ से किसी को बिना नुकसान के मज़ा मिल रहा है तो लेने दो.
पियूष- बहुत अलग है यार तेरा परिवार समाज से.
में- यही तो बात है भाई, माँ पापा ने यही सिखाया की समाज के सरे नियम वगेरा घर के बाहर तक सही हैं घर में जो अपने परिवार को ख़ुशी दे वो करो चाहे समाज के लिए सही हो या गलत क्यूंकि अंत में हमें परिवार के साथ hi रहना है हर मुसीबत में परिवार hi काम आता है समाज नहीं.
पियूष- तेरी ये बात तो बिलकुल सही है, मुसीबत में समाज मुँह मोड़ लेता है परिवार hi साथ खड़ा होता है.
में- तभी तो अपने माँ पापा से एक दोस्ती का रिश्ता बना कर रखना चाहिए, ताकि हम अपनी बातें उनसे कर सकें उनकी सुन सकें इससे घर का माहौल ाचा रहता है,
पियूष- यार सच में चाहता तो मैं भी यही हूँ की मेरे और पापा के बीच भी दोस्ती का रिश्ता हो, उनका कोई दोस्त भी नहीं है, और मुझसे सिर्फ उतनी बात होती है जितनी ज़रुरत हो,
में- तो कर लो दोस्ती क्या दिक्कत है?
पियूष- यार इतना आसान नहीं है न, अब तक कुछ नहीं और अचानक से बात करने लग जॉन झिझक होती है,
में- अरे यार जिन्होंने पैदा किआ उनसे क्या झिझक. उनके सामने नंगे घुमते होंगे अब झिझक रहे हो.
इस पर वो हंसने लगा,
पियूष- तो तू hi बता क्या करूँ?
में- करना क्या है थोड़ा समय बिताओ उनके साथ, फिल्म वगेरा देखने जाओ. घूमो फिरो बातें तो अपने आप हो जाएँगी,
पियूष- हाँ यार कह तो तू सही रहा है बहुत दिन हो गए मैं भी घूमा नहीं कहीं
में- तो लेकर जाओ फिर सबको मस्त फिल्म वगेरा दिखाओ.
पियूष- हाँ यार तू चलेगा?
में- अरे पहले सिर्फ परिवार के साथ जाओ हम लोग बाद में चल लेंगे.
पियूष- चल ठीक है ये भी, ाचा तुझसे कुछ बात सांझा कर सकता हूँ
में- हाँ बिलकुल.
पियूष- पर थोड़ी निजी है किसी को बताना मत तुझ पर भरोसा है इसीलिए तुझसे बात कर रहा हूँ.
में- अरे कोई दिक्कत नहीं भाई तुम बेफिक्र बोलो
पियूष- यार मुझे लगता है की मेरे और तेरी भाभी के बीच भी कुछ ठीक नहीं चल रहा.
में- क्यों लड़ाई हुई क्या?
पियूष- अरे लड़ाई नहीं हुई है, बस वो रोमांच सा नहीं लगता जो पहले होता था, चुदाई भी करते हैं वो मन भी नहीं करती पर वो पहले वाली उत्सुकता नहीं दिखती उसके अंदर.
में- बस इतनी सी बात.
पियूष- इतनी सी बात मतलब.
में- मतलब कुछ नहीं बस ये समझो की एक hi चीज़ एक hi तरीके से बार बार करके कोई भी पाक जाता है.
पियूष- फिर क्या करूँ और?
में- थोड़ा नयापन लाओ, कुछ नए तरीके ढूंढो, सिर्फ बिस्तर पर मत करो कभी बाथरूम में करो कभी आँगन में तो कभी छत पर कभी रसोई में,
पियूष- अरे पागल है क्या सब होते हैं घर पर.
में- वही तो रोमांच बढ़ाएगा. थोड़ा छेड़ो बीच बीच में.
पियूष- चल तू कह रहा है तो करके देखता हूँ,
में- ठीक है ज़रूर करना सब सही हो जायेगा,
पियूष- ज्ञानी आदमी है तू इस मामले में तो.
में- वो तो मैं हूँ,
हम दोनों बातें करते हुए बाघ तक आ जाते हैं फिर वो अपनी मोटरसाइकिल लेकर निकल जाता है और मैं घर आ जाता हूँ, और फिर खाना पीना होता है और फिर खा कर सब सो जाते हैं,
मज़ाक कर रहा हूँ चोदामपुर में लोग ऐसे hi सो जाएं कैसे हो सकता है, खाने के बाद चुदाई का दौर चलता है, पहले आँगन में hi सब एक साथ चुदाई करते हैं और फिर अपनी अपनी पसंद अनुसार के साथियों के साथ सोने चले जाते हैं,
मुझे मामी और किरण दोनों माँ बेटी का साथ मिलता है तो अनुज और सागर मिलकर पल्ली को अपने साथ सुलाते हैं, ममता चची को मां और मौसा पकड़ लेते हैं, तो मौसी अपने दोनों जीजा यानी पापा और राजन चाचा के साथ चल देती हैं, इधर नाना तो आँगन में hi सोने वाले थे तो माँ तो नाना के लुंड पर सवार भी हो चुकी थी.

नाना का लुंड माँ की गांड में घुसा हुआ था और नाना नीचे से कमर हिलाकर अपनी बड़ी बिटिया की गांड मार रहे थे..
इसी तरह रात बीती और फिर अगले दो तीन दिन ऐसा hi बीते एक शाम को मेरे पास पियूष का फ़ोन आया और बोलै- अरे सुन यार कल तुझे कहीं जाना तो नहीं?
में- नहीं तो क्यों क्या हुआ?
पियूष- यार कल फॅमिली के साथ फिल्म का प्रोग्राम बनाया है तो गाडी मिल सकती है क्या?
में- हाँ बिलकुल कल सुबह तुम्हारे घर पहुँच जाएगी.
पियूष- फिर ठीक है कल सुबह सबको सरप्राइज देता हूँ.
में- हाँ सब खुश हो जायेंगे.
पियूष- ठीक है फिर कल मिलते हैं.
इतना कहकर वो फ़ोन काट देता है और मैं तुरंत अंजलि को फ़ोन मिलता हूँ और उसे कुछ समझाता हूँ.
अगली सुबह होती है और मैं गाडी लेकर गैंदपुर निकल जाता हूँ,
पियूष मुझे घर के बाहर hi तैयार मिलता है उसके साथ मैं अंदर जाता हूँ तो सबसे नमस्ते करता हूँ,
उसके मम्मी पापा और पत्नी भी तैयार थे पहले से hi, सिर्फ अंजलि नहीं थी क्यूंकि कल मैंने hi उसे कुछ बहाना बनाने को बोल दिया था.
में- सब तैयार हैं पहले से hi?
सावित्री- हाँ बीटा बस अंजलि की तबियत ठीक नहीं तो ये नहीं जा रही है,
रानी- कोई नहीं मम्मी जी थोड़ा आराम करेगी तो हो जाएगी ठीक, हैं न अंजलि?
रानी ने अंजलि की और आंख मरते हुए कहा तो अंजलि ने अपनी भाभी को आँखों से इशारे से hi चुप रहने का इशारा किआ,
सावित्री- और बीटा मम्मी पापा कैसे हैं?
में- अचे हैं आपको याद कर रहे थे,
ये सुनते hi सासु माँ के मन में उस रात के दृश्य ताज़ा हो गए.
सावित्री- अरे याद तो हम भी कर रहे थे.
सावित्री ने थोड़ा शरमाते हुए कहा हालाँकि मैं उस शर्माने के पीछे की वजह जनता था,
पियूष- चलो फिर निकलते हैं हम लोग,
महिपाल सिंह- हाँ समय से निकल चलो तो ाचा है.
पियूष- अरे अंजलि मेरी मोटरसाइकिल की चाबी कर्मा को दे दे ये बापिस उससे चला जायेगा,
अंजलि- दे रही हूँ भैया, पर चाय चढ़ा दी है इनके लिए.
महिपाल सिंह- अरे ाचा किआ बीटा चाय पि कर hi जाना.
में- जी चाचाजी,
पियूष- अरे हम लोग तो निकलते हैं.
सावित्री- हाँ भाई चलो चलो.
जल्दी hi कुछ पलों में सब बाहर आते हैं और फिर गाडी में बैठते हैं और पियूष गाडी लेकर निकल जाता है उनके जाते hi मैं और अंजलि बापिस घर में घुसते हैं अंजलि दरवाज़ा लगाती है और जैसे hi पीछे मुड़ती है मैं उसे बाहों में जकड लेता हूँ, वो थोड़ा खिलखिलाती है और अपनी बाहें भी मेरे बदन पर कास लेती है, कुछ पल बाद hi हम दोनों के होंठ आपस में मिल जाते हैं और एक दुसरे को पागलों की तरह चूमने लगते हैं, उसके रसीले होंठों को चूसने में मुझे जन्नत का मज़ा मिल रहा था सच में एक अलग hi एहसास था उसके होंठों में, मैंने उसे चूमते हुए उठा लिया और बिना होंठों को अलग किये hi उसे आँगन में ले गया और सोफे पर लिटाकर उसे चूसने लगा, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, हम दोनों का मन hi नहीं भर रहा था एक दुसरे के होंठों से और हम अलग नहीं हो रहे थे,
कुछ hi पलों में होंठों के बाद जीभ की बारी थी, हम दोनों की जीभ आपस में कुश्ती कर रही थी, काफी देर तक हम एक दुसरे के होंठों और जीभ को चूसते रहे और हांफते हुए अलग हुए कुछ पल एक दुसरे की आँखों में देखा और फिर से होंठ जुड़ गए इस बार भी काफी देर के बाद होंठ अलग हुए,
अंजलि- बहुत चालक हो तुम ये सब करने के लिए सब को भेज दिया.
में- और क्या वो वहां मज़े करेंगे हम यहाँ,
अंजलि- ाचा और मैं मज़े न करने दूँ तो.
में- तो कोई बात नहीं मेरे लिए तुम्हारे साथ रहना hi बहुत है,
अंजलि- सच्ची?
में- मुछि...
ये सुन कर वो कड़ी हो गयी और मेरी आँखों में देखते हुए मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, शर्ट के बटन खोलते हुए वो मेरे सीने पर चूमने लगी तो मुझे बदन में सरसरी होने लगी, मेरी शर्ट के बटन खोल कर उसने मेरी शर्ट को मेरी बाहों से निकल दिया मैं ऊपर से नंगा हो गया, फिर वो मेरे बदन को जगह जगह चूमने लगी, मेरा बदन उत्तेजना में तपने लगा, शर्ट के बाद उसने मेरी पंत भी निकली अब उसके सामने मैं कच्चे में था मेरा लुंड कच्चे में तम्बू बनाये हुए था,
अंजलि- इसे देखो कैसे सर उठाये खड़ा है,
वो कच्चे के ऊपर से hi मेरे लुंड को सहलाते हुए बोली तो मेरी आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,
अंजलि- बहुत किस्से सुने हैं बच्चू तुम्हारे अब जाकर दर्शन होंगे,
ये कहकर उसने मेरा कच्चा नीचे सरका दिया और मेरा लुंड उसके चेहरे के सामने झूलने लगा,
अंजलि उसे देख हैरान हो गयी और कुछ पल बस झूलते हुए लुंड के साथ उसकी आँखें ऊपर नीचे होने लगी उसका हाथ अनायास hi आगे बढ़ा और मेरे लुंड पर उसकी उँगलियों ने स्पर्श किआ तो मेरे मुँह से एक गरम अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी,
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह कितना गरम और सख्त है ये,
ये कहकर वो अपनी उँगलियों से उसे महसूस करने लगी और मेरी आँखें मज़े से अपने आप बंद हो गयी,
अंजलि- आँखें जब तक मैं न बोलू बंद hi रखना,
में- छ्हम्म ठीक है.
कुछ पल बाद मुझे अंजलि कुछ हरकतें करती हुई महसूस हुई उसका हाथ भी मेरे लुंड से हैट गया, और कुछ पल बाद उसने आँखें खोलने को कहा तो मैंने उसे देखा और हैरान रह गया, वो मेरे सामने अपने घुटनों पर बैठी थी, मेरा लुंड उसके हाथ में था और उसके चेहरे के सामने था पर मेरे लिए हैरानी का कारण कुछ और था और वो कारण था की उसके बदन पर एक भी कपडा नहीं था वो पूरी नंगी मेरे सामने थी, मेरी नज़र तो उसके बदन पर hi जैम गयी वहीँ वो मेरी आँखों में देखते हुए बोली - कैसा लगा सरप्राइज?
में- इससे ाचा कुछ भी नहीं,
अंजलि- और ाचा दिखाऊं?
में- हाँ,
उसने अपना चेहरा आगे किआ और अपनी जीभ निकल कर मेरे लुंड के टोपे पर फिरै और मैं उसकी जीभ के स्पर्श से सिहरने लगा पूरे बदन में कंपकंपी सी दौड़ गयी,
में- ohhhhhhhhhh माआहह.
अंजलि मेरी इस प्रतिक्रिया पर मुस्कुराई और फिर मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी,
मेरी आँखें एक बार फिर से आनंद के मरे बंद हो गयी वो अपना मुँह मेरे लुंड पर चलने लेगी, मैंने कुछ पल बाद आँखें खोल कर देखा तो वो मेरा लुंड पूरा अपने गले तक लेने की पूरी कोशिश कर रही थी और ये देख मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मैं सोचने लगा मैंने अपने लिए बिलकुल सही लड़की चुनी है.

अंजलि ने काफी देर तक मेरा लुंड चूसा और लगातार मेरी आहें निकलती रही, जब मुझे लगा की अब रुक जाना चाहिए नहीं तो रास निकल जायेगा तो मैंने उसे रोक दिया और उसे खड़ा किआ और फिर उसके होंठों को चूसते हुए उसे उठाया और सोफे पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़कर उसकी गर्दन और चेहरे को चूमने लगा और फिर नीचे सरकते हुए उसके सीने पर आ गया,
उसके संतरे की आकर की चूचियां उसके बदन का अनुसार बिलकुल सही अकार की थी मैंने एक चुकी को अपने हाथ में थमा तो हम दोनों की सिसकी निकल गयी मेरी उसकी कोमल चुकी की वजह से तो उसकी मेरे स्पर्श से, मुझसे और फिर रुका नहीं गया और मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा, अह्हह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा था उसकी चूचियों को चूसने में,
वही वो भी मेरे सर पर हाथ फिरते हुए कराह रही थी, मैं बदल बदल कर उसकी चूचियां पि रहा था, चूचियों को अचे से जी भर के चूसने के बाद मैं और नीचे उसके पेट और नाभि को चूसने लगा तो उसका बदन कंपनी सा लगा, उसकी नाभि मुझे बहुत रसीली लग रही थी, जिस मैं खूब स्वाद लेकर चूस रहा था और वो मज़े से तड़प रही थी,
पेट और नाभि के बाद छूट की बारी थी उसकी छूट के सामने हैकर कुछ पल तो मई बस उसकी सुंदरता को निहारता रहा, सच मैं बहुत प्यारी छूट थी उसकी देखते hi मेरे मुँह से पानी बहने लगा, मैंने खुद को और उसे ज़्यादा नहीं तड़पाया और अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया और पागलों की तरह चाटने लगा, वो नीचे लेती हुई मचलने लगी, मैं तो वर्षों के भूखे की तरह उसकी छूट पर टूट पड़ा वो तो ऐसे सिसक और आहें भर रही थी जैसे उसकी जान निकलने वाली हो,
ाचा था घर में कोई नहीं था क्यूंकि पूरे घर में उसकी आहें गूँज रही थी,
कुछ पल बाद hi मुझे उसकी छूट की चासनी अपने मुँह में बहती हुई महसूस हुई और वो मचलते हुए शांत हो गयी, मैंने उसकी जांघों के बीच से मुँह हटाया और उसके चेहरे की और देखा वो हांफते हुए मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, मैं वैसे hi खड़ा हुआ मेरा लुंड तो कब से तैयार था असली खेल के लिए,
हम दोनों की साड़ी बातें आँखों में hi हो रही थी न मैं कुछ बोल रहा था और न वो, माईनस उसके पैरों में जगह ली और लुंड को पकड़ कर टोपे को छूट के ऊपर रखा तो हम दोनों को hi एक सिरहन हुई,
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए आँखों से hi पूछा तो उसने आगे बढ़ने का इशारा किया तो मैंने धीरे से धक्का लगाया पर लुंड उसकी छूट में नहीं घुसा क्यूंकि वो बहुत कासी हुई थी, मैंने उसकी टैंगो को थमा और फिर लुंड को छूट के द्वार में फंसते हुए ज़ोर लगा कर धक्का लगाया तो लुंड उसकी छूट को चीयर कर थोड़ा अंदर घुस गया और उसकी चीख निकल गयी.
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कर्मा आह्हः रुक जोऊ अब नाहीई बहुत दर्द हो रहा है.
में- बस थोड़ा सा फिर नहीं होगा.
ये कहकर मैं धीरे धीरे छोटे छोटे धक्के लगता रहता हूँ और लुंड उसकी छूट में धीरे धीरे घुसता रहता है, फिर मैं लुंड को हल्का सा बाहर खींचता हूँ और फिर उसकी कमर को थम कर एक धक्का लगता हूँ तो लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर घुस जाता है और वो बड़ी तेज़ी से चीखती है,
उसकी आँखों से आंसू बाह रहे होते हैं, मैं कुछ पल यूँ hi रुक जाता हूँ और उसे चुप करने की कोशिश करता हूँ उसकी चूचियों को चूसता हूँ उसके बदन को सहलाता हूँ तब जाकर वो थोड़ी शांत होती है, मैं धीरे धीरे से अपना लुंड थोड़ा बाहर खींचता हूँ तो मुझे उस पर खून लगा दीखता है जो की उसके कुंवारेपन की निशानी था, मैं लुंड को निकल कर एक कपडे से पोंछता हूँ और फिर से लुंड को दोबारा उसकी छूट में घुसा देता हूँ और इस बार लुंड बिना किसी तकलीफ के घुसता चला जाता है,
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह कितने गंदे हो तुम इतना दर्द हुआ मुझे.
में- अरे मेरी जान जितना दर्द हुआ उससे ज़्यादा अब मज़ा भी तो आएगा न,
अंजलि- बड़े आये मज़ा देने वाले इतना मोटा घुसा दिया एक hi झटके में.
में- ाचा माफ़ कार्डो,
अंजलि- अब माफ़ी मत मांगो और जो मज़े की बोल रहे हो वो देकर दिखाओ.
उसने मुस्कुराते हुए कहा तो मैंने झुककर उसके होंठों को चूसा और फिर धीरे धीरे से अपने लुंड को उसकी छूट में चलना शुरू कर दिया वो भी आहें भरते हुए अपनी पहली चुदाई का आनंद लेने लगी,
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सच्ची बहुत्तत्त माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है,
में- मैंने कहा था न मेरी जान बहुत मज़ा आएगा.
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह हाँ सुना तो था पर इतना आएगा ये कभी नहीं सोचायहहह था ऐसे hi छोड़ते रहो,
अंजलि खुद की छूट के दाने को रगड़ते हुए बोली और मैं उसकी छूट में ढके लगते हुए उसकी चूचियों को हाथ बढाकर दबाने लगा.

मैं उसे इसी तरह लगातार छोड़ता रहा फिर कुछ पल बाद hi उसने मुझसे आसान बदलने को कहा और मुझे नीचे लिटाकर खुद मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लुंड को अपनी छूट में भर कर अपने चूतड़ों को उछलने लगी,
अब वो खुलकर चुदाई का मज़ा ले रही थी, देख कर लग hi नहीं रहा था की कुछ देर पहले hi उसकी सील टूटी है, हम दोनों के बदन पसीने से तर होकर चमक रहे थे

मुझे भी उसके साथ एक अलग hi आनंद आ रहा था जो की आज तक नहीं आया था, उसकी उत्तेजना और गरमी देख कर मुझे लग रहा था मैंने सही लड़की से प्यार किआ है, जो हर तरह से मेरा साथ देगी,
कुछ देर के चुदाई के बाद वो थोड़ी थकी और झुक कर धीरे धीरे अपने चूतड़ों को चलने लगी तो मैं भी नीचे से उसे छोड़ने लगा,

Anjali- ahh pata hota tumhara lund itna mazaaaaahhhhhhhh dega to ab tak ise kab ka apani choot mein bhar leti.
Me- ab bhi der nahi hui hai meri jaan ab bahut mauke milenge,
Anjali- ahh ab main thak rahi hun tum chodo na.
Uska itna kahna tha ki maine uski kamar ko thama aur phir tabadtod dhakke lagane shuru kar diye. Wo lagatar aahein bhar rahi thi aur mera lund piston ki tarah uski choot mein andar baahar ho raha tha kuch der ki aisi hi dumdar chudai ke baad hum dono hi bahut uttejit ho gaye the aur na maine aur na usne khud ko rokne ki koshish ki aur jaldi hi main aur wo ek saath jhad rahe the maine apane ras ki pichkari uski choot mein bhar di aur phir uske bagal mein hanfate huye let gaya hum dono ek doosre ki baahon mein kuch der yun hi lipte hute lete rahe kuch pal ke araam ke baad uthe tp usne mere honthon ko choosa aut phir meri aankhon mein dekh kar boli- I love you।
Me- I love you too,
Ek baar phir se maine use chooma phir wo mere badan ko choomti hui neeche sarakne lagi aur mere pairon ke beech baith gayi,
Mera lund jo thoda shant pada hua tha use usne apani ungaliyon mein thaama to jaise usme jaan aane lagi, aur phir usne jhuk kar apane muh mein bhar lia to maano meri jaan nikalte huye bachi, meri aankhon mein dekhte huye usne pahle jeebh se lund ke tope ko chaata to maano main sihar utha aur phir use apane honthon mein bhar lia,

Mera lund to turant hi apane poore aakaar mein aa chuka tha main uski is kamukta bhari kala dekh kar aahein bharne laga,
Kuch der tak wo yun hi mera lund choosti rahi aur main aahein bharta raha usne lund tab chhoda jab wo bilkul santusht ho gayi,
Mera lund uske thook se poora sana hua tha use pakad kar seedha kar wo mere upar aai aur ghoom gayi mujhe laga phir se mere lund par is baar chehra doosri or karke aur usne aisa hi kia aur neeche hote huye mera lund pakada aur phir mujhe hairan karte huye lund ko choot par tikane ki jagah apani gand ke chhed par tika diya.
Me- tum ye kya kar rahi ho choot mein itna dard hua gand to bahut dard karegi.
Anjali- ab chaunkane ki baari tumhari hai,
Ye kahkar usne lund ke upar dabav banaya aur phir lund uski gand ko cheerta hua topa andar ghus gaya,
Uske muh se ek halki si cheekh nikli, aur wo gahri saansein lete huye thoda thoda neeche hone lagi aur halka halka lund uski gand mein utarne laga, main ye sab dekh hairan tha kuch pal baad hi mera poora lund uski gand mein samaya hua tha,
Me- ahhhhhhh uhmmmm yaar kitni garam aur makhmali hai ye par itni asaani se tumne lund gand mein ahhhh kaise le luyaaah।
Anjali- ahhhhhhh asaaani se kahan itni chaudhi kar di hai gaaaannddd ahhhhhh main kheere se apaniii gaanddd ko kholtiii thiiiiahhhh usi ka asar hai,
Me- are waahhhh isse mera fayda ho gaya ab tumhari gand mujhe nahi kholni padi,
Anjali- ahh haan choot mein seal tootne ka dar hota tha to gand par hi sab use karti thi।
Me- ahhhh sahi kia Meri Jaan tabhi to mujhe tumhari ye gand mili aaj maarne ko.
Anjali- ahh ab to mil gayi hai aur lund bhi poora ghus gaya hai ab maaro na baabu,
Bas phir kya tha maine bina lund nikale hi use god mein uthaya aur phir zameen par ghodi bana diya aur phir upar aa kar dheere dheere dhakke lagane laga
Anjali- ahh ohhh yeahhh mazaa aa raha hai thoda tez se maaroo naaahhhh.
Bas mujhe yahi sunna tha aur maine uski gand ko kootna shuru kar diya

हर झटके के साथ वो कराह रही थी पर रुक्नु को नहीं बोल रही थी इसी बात का मैं फायदा उठा रहा था, करीब 10 मिनट्स तक ऐसे गांड मरवाने के बाद वो झड़ने लगी और गिर गयी पर मुझसे अब नहीं रुका जा रहा था मैंने उसे उठा कर अपने ऊपर ले लिया और फिर उसकी टांगो को मोड़ कर अपने हाथों के बीच फंसकर हाथों को सर के पीछे कर के मोड़ लिए जिससे वो बिलकुल आधी मुद गयी,
मैंने फिर नीचे से लुंड चलना शुरू किआ और उसकी गांड मरने लगा वो भी आह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह करके चिल्लाने लगी पर मैं रुका नहीं और लगातार गांड मरता रहा,

उसकी गांड में लुंड लगातार मैं मशीन की तरह चलाये जा रहा था,
में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह क्याआ मस्त्त गाआंनदद्द है तुम्हारिई ओह्ह्ह ऐसा माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कभी नाहीई ायाह्ह्ह.
अंजलि- अहह ओह्ह्ह येअहहह मज़ा आ रहा है कर्माआअह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह मारू अह्ह्ह्हम्मम्मम ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइ गांडड होऊ ओह्ह्ह्हह्ह ममममममिययययययय.
में- अह्हह्ह्ह्ह आजजज कोइइइइइ नाहीई बचाएआ पाएगाआहठ
अंजलि- अह्हह्ह्ह्ह बचनाआ कौंण चाहताऑ है अह्ह्ह्ह छोड़ते राहूऊओऊ,
मैं लगातार उसकी गांड मार रहा था और वो पागलों की तरह चिल्ला रही थी, उसकी छूट से ज़्यादा उसकी गांड ने मुझे जल्दी पिघलने को मज़बूर कर दिया, मेरी पकड़ भी उसके पैरों से ढीली हो गयी मैं किसी तरह उसे थामे बस नीचे से धक्के लगता रहा और तब तक लगता रहा जब तक मेरे लुंड ने उसकी गांड को अपने रास से न भर दिया, झड़ने के बाद मैंने लुंड को उसकी गांड से निकला तो लुंड के पीछे पीछे मेरा रास भी बहकर बाहर आने लगा.

अंजलि भी मेरे साथ साथ झाड़ चुकी थी हम दोनों hi बुरी तरह से हांफ रहे थे, खैर हम थक चुके थे तो थोड़ी देर यूँ hi नंगे एक दुसरे की बाहों में सो गए,
शाम होने तक जब तक उसका परिवार बापिस आने वाला था तब तक मैंने उसे कई बार छोड़ा और वो भी चुदाई में काम नहीं थी हर चीज़ में पूरे जोश से साथ दे रही थी,
उसने मेरे लुंड चूसने के साथ साथ मेरी गांड भी छाती

उसे देख कर लग hi नहीं रहा था की ये सब उसका पहली बार है, पर उसके साथ बहुत मज़ा आ रहा था, उसने मुझे इतना मज़ा दिया तो मैंने भी कोई कमी नहीं छोड़ी उसकी छूट और गांड को जी भर के चूसा और फिर उसकी चुदाई करके उसके चेहरे को अपने रास से रंग दिया,

उसके घरवालों के आने से आधे घंटे पहले मैं उसके घर से निकल गया और फिर करीब घंटे भर बाद उसके भाई का फ़ोन आया तो बापिस उसके घर गया..
जारी रहेगी














































