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- Dec 5, 2013
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महिपाल: अरे जी भर के छोडूंगा दोनों बहनो को, आह ये भी कोई पूछने की बात है.
महिपाल ने अपना कुरता उतारते हुए कहा और फिर पजामा और कच्चा उतर कर पूरा नंगा हो गया.
ये सब बातें hi चल रही थी की दरवाज़ा फिर से हल्का सा खुला और तीनो ने एक साथ दरवाज़े की तरफ देखा तो तीनो हैरान रह गए देख कर.
**अपडेट 258**
चोदम पुर में नीतू अब पूरी तरह जग्गू के मोठे लैंड पर सवार हो चुकी थी. उसकी गोरी जांघें फैली हुई थी, छूट पूरी तरह लैंड को निगल रही थी. Upar-neeche उछलते हुए उसके bhare-bhare चुके zor-zor से हिल रहे थे, निप्पल सख्त होकर खड़े थे. रज्जो उसकी माँ बगल में बैठी बेटी की छूट के दाने को मसल रही थी, तो kabhi-kabhi उसके मोठे चुके मुँह में लेकर चूस लेती.
नीतू: आह माँ... देखो न... जग्गू का मोटा लम्बा लैंड... मेरी chhoti-si छूट को पहाड़ रहा है... उफ्फ्फ... कितना गहरा घुस रहा है... और ज़ोर से ठोको जग्गू आह... हाँ... ऐसे hi... मेरी छूट का पानी निकाल दो...
रज्जो: देख रही हूँ बीटा तेरी छूट कैसे पूरा लैंड निगल रही है बेटी... अपनी माँ के सामने पूरी रंडी बन जा... जग्गू का लैंड खा रही है तेरी छूट... आह... कितना रास टपक रहा है... तेरी छूट से कितनी गीली है तेरी गरम छूट.
जग्गू: ले साली रंडी... तेरी छूट आज मेरे लैंड की गुलाम हो गयी... आह... कितनी टाइट है... चची देखो न... तुम्हारी बेटी कितनी गन्दी हो रही है... आह तुम्हारे सामने hi रंडी बन रही है.
रज्जो: हाँ बीटा... छोड़... मेरी बेटी की छूट पहाड़ दाल... मैं तो dekh-dekh के अपनी छूट में उंगलियां दाल रही हूँ... आह... नीतू... चिल्ला... चिल्ला के बता कितना मज़ा आ रहा है... आह और माँ रंडी है तो बेटी रंडी बनेगी hi न आह.
जग्गू ने नीतू की कमर पकड़ ली और नीचे से zor-zor से ठोके मारने लगा. Chap-chap... chap-chap... कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी. नीतू की आँखें ऊपर चढ़ गयी, वो ज़ोर से चीखी और पहली बार झाड़ गयी. उसकी छूट sikud-fail रही थी, गरम पानी जग्गू के लैंड पर बह रहा था. लेकिन जग्गू रुका नहीं.
इधर ममता चची के कमरे में माहौल और भी गन्दा हो चूका था. ममता अब दोनों भाइयों के बीच सैंडविच बन चुकी थी. सरजू पीछे से उसकी मोती गांड में पूरा लैंड घुसाए हुए zor-zor से थोक रहा था, जबकि बिरजू नीचे से उसकी छूट में लैंड डालकर छोड़ रहा था. ममता की bhaari-bhaari चूचियां बिरजू के चेहरे के आगे झूल रही थी.
ममता: आह... दोनों हरामियों... मेरी छूट और गांड एक साथ पहाड़ दो... उफ्फ्फ सरजू... तेरे लैंड ने मेरी गांड का छेड़ ढीला कर दिया... बिरजू... और ज़ोर से... मेरे चुके मसल... दबा... काट ले... हाँ... मैं तो आज दोनों के लैंड की रंडी बन गयी हूँ...
सरजू: चची... तुम्हारी गांड कितनी गरम है... छूट से भी टाइट... आह और गरम... पूरा लैंड अंदर खींच रही है आह... chap-chap... की आवाज़ कर रही है.
बिरजू: और मेरी चची... तुम्हारी आह छूट तो बिलकुल पानी की नदी बन चुकी है... कितना रास निकाल रही है... आह... ओह ये मोती चूचियां आह.
ममता चीख रही थी मज़े से. उसने बिरजू का लैंड पकड़कर और ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. दोनों भाई रफ़्तार बढ़ा रहे थे. ममता दो बार झाड़ चुकी थी, उसका पूरा बदन पसीने से तर था. आखिरकार सरजू ने गांड में और बिरजू ने छूट में एक साथ रास छोड़ दिया. ममता की छूट और गांड दोनों से सफ़ेद रास बहने लगा.
ममता: आह... भर दी दोनों ने... मेरी छूट और गांड... कितना गाढ़ा रास... उफ्फ्फ... अब मैं तो उठ भी नहीं प् रही बच्चो आह... लेकिन अभी और छोड़ना है...
तीसरी तरफ गुंजन अब घुटनो के बल कड़ी थी, दीनू पीछे से उसे कुत्ते की तरह छोड़ रहा था. उसकी छूट से सफ़ेद रास टपक रहा था, जांघें चिपक गयी थी. दीनू एक हाथ से गुंजन के बाल खींचे हुए था, दुसरे से चुके मसल रहा था.
गुंजन: जीजा... मारो... ज़ोर से मारो... मेरी छूट तुम्हारी हो गयी... आह... तेरे लैंड ने मेरी छूट का बुरा हाल कर दिया... हाँ... और तेज़... मेरी गांड भी थोक दो... मैं तो आज पूरी रात छुडवाउंगी...
दीनू: ले रंडी गुंजन... तेरी छूट कितनी चिकनी है... chod-chod के लाल कर दूंगा... आह... कितने बड़े चुके हैं तेरे.. निप्पल खड़े हो गए... बोल... जीजा का लैंड पसंद है न...
गुंजन ने पीछे हाथ बढाकर दीनू के अंडो को मसलना शुरू कर दिया. दीनू की रफ़्तार और तेज़ हो गयी. कमरा चपचाप, आहों और गन्दी बातों से भर गया.
वही गुंजन का बीटा सागर और अनुज मिलकर मंजू को दोनों तरफ से बजा रहे थे, वही मंजू भी जवान लैंड का पूरा मज़ा ले रही थी. मंजू तै के कमरे में सागर और अनुज दोनों तरफ से लगे हुए थे. सागर पीछे से गांड छोड़ रहा था, अनुज नीचे से छूट में लैंड डाले हुए था. मंजू की भरी हुई देह हिल रही थी, चुके उछाल रहे थे.
मंजू: आह... दोनों हरामी... मेरी छूट और गांड एक साथ... उफ्फ्फ सागर... तेरे लैंड ने मेरी गांड पहाड़ दी... अनुज... और ज़ोर से... मेरे चुके चूस... काट... मैं तो आज तुम दोनों की रंडी बन गयी हूँ... छोड़ो... और छोड़ो... मेरी छूट तुम दोनों की है...
सागर: बुआ आह तुम तो पहले hi रंडी थी आह... तुम्हारी ओह गांड कितनी मोती और गरम है... इस गांड को छोड़ के लाल कर दूंगा...
अनुज: और तै... तुम्हारी छूट तो बिलकुल जवानी वाली hai...aah कितनी गरम और कितना रास भरा है आह... तुम्हे छोड़ कर ऐसा लगता है जैसे मैं माँ को छोड़ रहा हूँ तो माँ जैसी छोड़ रहा हूँ...
मंजू: ओह बीटा तेरी माँ और मुझमे कोई फर्क है क्या आह वो भी अभी आह कहीं टाँगे उठा के चुद रही होगी और मैं भी.
अनुज: आह तै ये तो सही कहा आह आह आह.
अनुज ने आहें भरते हुए मंजू की मोती चूचियों को चूसना शुरू कर दिया.
इधर उसी घर में दुसरे कमरे में कर्मा ने प्रेमा को अब पूरा नंगा कर लिया था और दनादन उसे छोड़ रहा था, कर्मा का लैंड प्रेमा की छूट के अंदर तक चोट कर रहा था और प्रेमा हर झटके के साथ आहें भर रही थी, उसकी उत्तेजना भी अपने चरम पर थी.
प्रेमा: आह लल्ला आह ओह ऐसे hi रुकना मत आह आह आह मैं आने वाली हूँ आह आह मादरचोद आह ऐसे hi छोड़ो ओह.
कर्मा: ओह ओह आह कुटिया आह ले अब नहीं रुकूंगा आह आह ओह.
कर्मा भी उसकी छूट में धक्के लगते हुए बढ़ बढ़ा रहा था दोनों की उत्तेजना उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई दे रही थी.
नाना और राजपाल भी पल्ली और लाडो के जवान बदन का badal-badal कर मज़ा ले रहे थे.
जहाँ राजपाल पीछे से झुकी हुई लाडो की छूट में लैंड पेल रहे थे वही उसका सर नाना की गॉड में था और नाना का लैंड उसके मुँह में, वही उसके नीचे पल्ली थी जो नाना की गोलियों को चाट और चूस रही थी.
राजपाल: ओह ओह आह लाडो आह तेरी छूट आह कैसी कासी हुई और गरम है आह लग रहा है लैंड गाला देगी.
नाना: आह सही कहा जमाई बाबू, ओह और दोनों ऐसे चूस रही हैं मानो आह जान निकाल लेंगी लैंड के रास्ते आह बिटिया,
पल्ली: अरे ऐसे कैसे जान निकाल लेंगे, अभी तो रात भर इस लैंड से छोड़ना है हमे. क्यों लाडो?
लाडो ने बिना मुँह से लैंड निकाले आँखों से hi हां में इशारा किया,
राजपाल: ओह फिर तो हमारी जान तो निकालनी hi है बाबा, बेटियों अपने ताऊ और नाना पर तरस खाना थोड़ा.
राजपाल ने लाडो को छोड़ते हुए कहा, जिस पर पल्ली मुस्कुरायी और नाना की गोलियां चाटने में फिर से लग गयी.
जहाँ पल्ली और लाडो नाना और राजपाल की आहें निकाल रही थी वही उनकी सहेली किरण भी अपने पापा यानि जमुना मां की और राजन की आहें निकलवा रही थी, दोनों बिस्तर पर पीठ के बल लेते हुए थे apni-apni टाँगे पीछे किये और घुटनो को पीछे की तरफ मोड़ कर सर की तरफ किये हुए जिससे दोनों के चूतड़ खुले थे और उनकी गांड का छेड़ भी वही उनकी टांगो के नीचे किरण थी जो दोनों की गांड के छेड़ को उँगलियों से भेदते हुए beech-beech में जीभ से भी कुरेद रही थी.
जमुना: ओह किरण क्या कर रही है आह बहुत अजीब लग रहा है आह.
किरण: अच्छा पापा जब अपना मोटा लैंड मेरी गांड में घुसते हो तब कुछ नहीं लगता अब अजीब लग रहा है.
राजन: अरे जमुना क्या लौंडियों की तरह कराह रहा है मर्द बन देख मैं तो नहीं कराह रहा,
जमुना: अरे जीजा गांड में ऊँगली घुसायेगी तो कैसे मर्द बनेंगे.
राजन: ऐसे hi आह्ह्ह्हह ओह
जमुना: अब क्या हुआ जीजा मर्द bante-bante कैसे सीसीएनए लगे,
राजन: आह अपनी बेटी से पूछ बिना बताये एक और ऊँगली घुसा दी.
किरण: हाहाहा फूफाजी आया मज़ा.
राजन: ओह बिटिया कर ले तू अपने मन की मैं भी देख आज तेरी गांड कैसे मारता हूँ.
किरण: बिलकुल फूफाजी उसी का तो इंतज़ार है.
दूसरी तरफ गैंदापुर में जैसा आप जानते हैं माहौल थोड़ा अजीब था, महिपाल, रानी और पियूष कमरे में थे और तभी दरवाज़ा खुला था और जैसे hi तीनो की नज़र दरवाज़े पर पड़ी तीनो hi हैरान रह गए थे, दरवाज़े पर सविता दिखी पूरी नंगी मुँह खुला हुआ और बदन झटके खाता हुआ दरवाज़ा थोड़ा और खुला तो तीनो की आँखें फटी की फटी रह गयी.
सविता के पीछे शैलेश थे जो उसकी कमर को थाम कर पीछे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, अपनी पत्नी को शैलेश से छुड़वाते देख महिपाल के वही उसके saath-saath रानी और पियूष के भी होश उड़ गए जो जहाँ था वही रह गया, तीनो आँखें पहाड़ के देख रहे थे कोई कुछ बोल नहीं रहा था, दरवाज़े से अंदर आते hi शैलेश ने सविता की एक टांग उठा कर एक दीवार पर टिका दी और फिर dana-dan उसे छोड़ने लगे,
महिपाल तुरंत अपनी बहु के पास से उठ कर दूर खड़ा हो गया और पहली प्रतिक्रिया पियूष की भी कुछ ऐसी hi थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा है और उस पर कैसी प्रतिक्रिया दें, रानी भी ज्यों की त्यों वैसी hi बिस्तर पर लेती हुई थी,
तभी दरवाज़े से एक और आवाज़ आयी: अरे रुक क्यों गए महिपाल भाई लगे रहो,
और फिर दरवाज़े से नीलेश अंदर आये, और आते hi सीधे रानी की तरफ बढ़ कर बिस्तर के बगल में घुटनो पर बैठ गए और इससे पहले कुछ कोई समझता नीलेश का मुँह रानी की छूट पर था, रानी की भी एक आह निकल गयी, नीलेश की जीभ को अपनी छूट पर महसूस करते hi, उधर सविता भी शैलेश के सामने बैठ कर उसका लैंड चूसने लगी, बिना पियूष और महिपाल की तरफ देखे
अब माहौल कुछ ऐसा था की नीलेश और शैलेश रानी और सविता के साथ लगे हुए थे और महिपाल और पियूष बस देख रहे थे,
कुछ पल बाद hi दरवाज़े से सभ्य और शालू भी अंदर आयी और महिपाल और पियूष की तरफ देख कर बोली: अरे तुम लोग ऐसे alag-alag क्यों खड़े हो,
नीलेश: लगता है महिपाल भाई को हमारे यूँ आने से झटका लग गया है,
नीलेश ने रानी के सामने से उठते हुए बोलै और उठ कर अपने कपडे उतारने लगे, सभ्य ने नीलेश के हटने पर रानी को नंगा लेते देख तो वो भी आगे बढ़ी और नीलेश की जगह बैठ कर अपना मुँह रानी की छूट पर लगा दिया, इधर शालू सीढ़ी आगे बढ़ी और जाकर महिपाल के सामने बैठ गयी और उसके लैंड को पकड़ कर मुँह में भर लिया, शालू के छूटे hi मानो महिपाल के बदन और दिमाग में ऊर्जा वापस आ गयी उसका दिमाग भी तेज़ी से काम करने लगा,
महिपाल: ओह आह भाभी जी, नीलेश भाई ये सब क्या हो रहा है आप सब यहाँ? ऐसे?
नीलेश: अरे महिपाल भाई सब सवालों का जवाब मिल जायेगा आराम से अभी तुम मजे लो.
शालू भी उसका लैंड मुँह से निकाल कर बोली: मैं सामने हूँ और तुम सवाल पूछ रहे हो भैया, ये तो मेरी बेइज़्ज़ती है.
ये बोल कर वो उठी और अपनी साडी खोलने लगी, और फिर साडी के saath-saath पेटीकोट को भी निकाल दिया और वापस बैठ कर उसका लैंड चूसने लगी,
महिपाल: आह नहीं शालू, ओह तुम बहुत सुन्दर हो, आह.
शालू: वो तो सुना मैंने कमरे के बहार से जब मेरी और जीजी की कितनी तारीफ कर रहे थे तुम भैया.
शालू ने लैंड चाटते हुए कहा, तो महिपाल अपनी बात पकडे जाने पर हंसने लगा,
दूसरी तरफ पियूष भी आगे बढ़ा और जाकर रानी और सभ्य के बगल में बैठ गया जहाँ सभ्य रानी की छूट चाट रही थी,
वो उन दोनों को देख कर बगल में बैठ कर अपने लैंड को हिला रहा था
रानी: ओह चची आह आह कभी सोचा नहीं था आह तुम मेरी आह ये करोगी आह बहुत अच्छा लग रहा है,
सभ्य: सब कुछ हो सकता है बहु आह तेरी छूट बहुत रसीली है. और खुल कर बोल अब.
सभ्य ने जीभ हटते हुए कहा, दूसरी तरफ सविता लगातार शैलेश से चुद रही थी, शैलेश को भी सविता की गरम छूट में बहुत मज़ा आ रहा था,
शैलेश: आह भाभी आह बहुत मस्त हो तुम ओह मज़ा hi आ गया,
सविता: मज़ा तो तुम्हारा लैंड भी बहुत दे रहा है भैया, छोड़ते रहो ऐसे hi आज मत रुको.
दूसरी तरफ शालू भी महिपाल का लैंड पूरे जोश से चूस रही थी और महिपाल के मुँह से लगातार आहें निकल रही थी. महिपाल हाथ नीचे कर के शालू की मोती चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi मसलते हुए आहें भर रहा था,
पियूष अपनी पत्नी की छूट को सभ्य से चतवते हुए देख गरम हो रहा था और फिर उसने रानी का सर पकड़ कर अपने लैंड पर झुका दिया, रानी ने भी तुरंत उसके लैंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी, ये देख सभ्य भी उठी और पियूष के दूसरी तरफ बिस्तर पर आकर बैठ गयी, पियूष ने उसे देखा और फिर उसकी तरफ चेहरा बढ़ा दिया और उसके होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और चूसने लगा, सभ्य भी पियूष का पूरा साथ देने लगी, कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो पियूष मुस्कुरा रहा था
पियूष: चची तुम बहुत सुन्दर हो और मस्त भी.
सभ्य: चल पागल इतनी सुन्दर बीवी के होते हुए तुझे मैं सुन्दर लग रही हूँ,
पियूष: सच में चाहो तो रानी से hi पूछ लो.
रानी ने भी तुरंत अपने मुँह से लैंड निकाला और बोली: सही में चची सच कह रहे हैं ये.
ये कह कर वो वापस लैंड चूसने लगी, सभ्य भी नीचे होकर उसका सर सहलाने लगी और उसे पियूष का लैंड चूसते हुए देखने लगी,
सभ्य का हाथ रानी के सर से होते हुए जल्दी hi पियूष की गोलियों तक पहुँच गया और वो उन्हें सहलाने लगी, रानी ने सभ्य को पास देखा तो पति का लैंड तुरंत मुँह से निकाला और सभ्य की तरफ कर दिया जिसे सभ्य ने तुरंत मुँह में भर लिया, और चूसने लगी.
रानी भी सभ्य को अपने पति का लैंड चूसते देख मस्त होने लगी, वही पियूष तो सभ्य का गरम मुँह अपने लैंड पर पाकर आहें भरने लगा,
पियूष: आह ओह मुझे तो यकीं नहीं हो रहा की कर्मा की मम्मी मेरा लैंड चूस रही है,
नीलेश ये सुन बोले: कर्मा के पापा भी यहीं है बीटा,
जिसे सुनकर पियूष के चेहरे पर हंसी आ गयी.
ये कहते हुए नीलेश ने रानी के पीछे बिस्तर पर जगह ली और अपना लैंड पीछे से उसकी छूट के द्वार पर घिसने लगे, रानी भी गरम लैंड का एहसास पाकर सिहरने लगी, और फिर नीलेश ने धक्का लगाकर लैंड अंदर घुसा दिया और रानी की आह निकल गयी, नीलेश उसके चूतड़ों को पकड़ कर छोड़ने लगे तो रानी आहें भरने लगी, वही सभ्य लगातार पियूष का लैंड चूस रही थी,
रानी: आह चाचा जी ओह आह कितना मोटा है आह आह आह तुम्हारा ओह आह मारो ऐसे hi आह धक्का,
नीलेश: आह तेरी छूट इतनी गरम और कासी हुई है बहु आह पियूष बीटा बहुत पत्नी मिली है तुझे आह,
नीलेश रानी को छोड़ते हुए बोले,
पियूष: आपको भी चाचा जी,
पियूष सभ्य का मुँह अपने लैंड पर दबाते हुए बोलै, तो दोनों हंसने लगे, उसने फिर सभ्य को अपने लैंड से ऊपर उठाया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा, सभ्य की चूचियों को मसलते हुए, होंठ अलग हुए तो बोलै: ओह चची इन चूचियों को तो दिखाओ बहुत मन है इन्हे नंगा देखने का.
सभ्य: अब भी चची से hi म्हणत करवाएगा बीटा, खुद खोल कर देख ले,
पियूष ये सुनते hi सभ्य के ब्लाउज को खोलने लगा,
उधर सविता की तभी एक चीख निकली क्यूंकि शैलेश ने अपना लैंड उसकी छूट से निकाल कर उसकी गांड में जो घुसा दिया था,
सविता: आह भैया आह गांड hi चीयर दी तुमने तो,
शैलेश: क्या करूँ भाभी रुका hi नहीं गया तबसे देख कर मन कर रहा था,
सविता: अब घुसा hi दिया तो अच्छे से मारो आह कूट दो अच्छे से, देखो तुम्हारी पत्नी भी कैसे इनके साथ प्यार जाता रही है,
सविता ने कमरे के दूसरी तरफ देखते हुए कहा जहाँ शालू और महिपाल एक दुसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थे होंठों को चूसने के बाद शालू ने महिपाल को नीचे लेटने को कहा और महिपाल तुरंत लेट गया शालू भी उसके मुँह के ऊपर अपनी छूट रख कर बैठ गयी दोनों 69 के आसान में एक दुसरे को सुख देने लगे, वही उनके बगल में पियूष ने सभ्य के कपडे उतर कर नंगा कर दिया था और सभ्य भी उसके सामने तुरंत घोड़ी बन गयी और उसे इशारा किया तो पियूष ने तुरंत अपना लैंड उसकी छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा,
पूरे कमरे में चुदाई का खेल पूरे जोश में खेला जा रहा था
महिपाल शालू की छूट चूस रहा था तो शालू उसके लैंड को चूस रही थी, उनके बगल में पियूष सभ्य को घोड़ी बना कर छोड़ रहा था उनसे बायीं तरफ नीलेश रानी को झुका कर गहरे और लम्बे धक्के लगा रहा था और सबसे पीछे शैलेश सविता की गांड खड़े हो कर मार रहा था,
पियूष: आह आह चची आह जबसे तुम्हे पहली बार आह देखा तब सोचा था आह की तुम्हे छोड़ने में आह कितना मज़ा आएगा आह, और जितना सोचा था उससे भी ज़्यादा आ रहा है.
सभ्य: अच्छा ओह बड़ा गन्दा है तू आह अपने दोस्त की माँ के बारे में ऐसा सोचता है तू,
सविता ने उसे छेड़ते हुए कहा,
पियूष: आह जब दोस्त की माँ ऐसी हो तो सोचना पड़ता है,
सभ्य: आह तो अब सोच मत अब तो आह सच में छोड़ रहा है ओह ऐसे hi छोड़ आह और तेज़ आह.
पियूष: ओह आह हाँ चची आह आह आह आह.
नीलेश: देख बहु तेरा पति आह मेरी पत्नी को छोड़ रहा है, आह.
रानी: आह चाचाजी तो ओह तुम भी उसकी पत्नी को छोड़ो न आह और तेज़ अच्छे से ओह पहाड़ दो मेरी छूट अपने मोठे लैंड से, आह मुझे रंडी की तरह छोड़ो चाचाजी.
रानी गरम होते हुए बोली तो नीलेश भी उसकी इच्छा पूरी करने लगे.
शालू: आह भैया अब आह बहुत हो गयी चूसै आह मुझे अब लैंड अपनी छूट में चाहिए,
शालू उठते हुए बोली, और फिर पलट कर महिपाल के लैंड को पकड़ा और अपनी छूट पर लगा दिया, और हलके से अपनी कमर घूमते हुए लैंड के टोपे पर छूट घिसने लगी,
महिपाल: आह ओह अब और मत तड़पाओ शालू आह ले लो अंदर.
शालू ने भी वैसा hi किया और तुरंत नीचे होकर बैठ गयी, जिससे महिपाल की आह निकल गयी,
शालू नीचे होकर तुरंत hi महिपाल के लैंड पर कूदने लगी उसकी मोती चूचियां ब्लाउज से बहार थी और उसके saath-saath uchal-kood कर रही थी, वही शैलेश और सविता ने भी अपना आसान बदल लिया था और अभी शैलेश लेते थे और सविता उनके लैंड पर उछाल रही थी शैलेश नीचे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, नीलेश और रानी, सभ्य और पियूष अभी भी उसी आसान में थे, दोनों महिलाएं घोड़ी बन कर छुड़वा रही थी, रानी बिस्तर पर थी तो सभ्य नीचे और पियूष पीछे से उसकी छूट में अपना लैंड पेल रहा था,
पियूष: आह काश ये पहले पता होता की आप सब लोग इतने खुले ख्यालों के हो आह तो अब तक तो न जाने कितना मज़ा आह कर चुके होते हम लोग.
सभ्य: अभी जवान हो बीटा आह बहुत समय है तुम लोगों के पास मजे करने के लिए,
रानी: आह ये तो आह आह आह आराम से चाचा जी, आह सही कहा चची जी.
नीलेश: आह क्या करूँ बहु तेरी छूट रुकने hi नहीं देती आह बहुत मस्त है आह.
रानी: अब तुम्हारे सामने है आह चाचा जी जितना चाहे छोड़ लो, मेरे पति भी नहीं रोकेंगे.
रानी ने हँसते हुए कहा,
नीलेश: अरे वो कैसे रोकेगा मेरी पत्नी उसे रोकने hi नहीं देगी.
सविता: आह वैसे भी बहु ओह तू मेरी सहमति से चुद रही है कोई नहीं रोकने वाला तुझे,
महिपाल: तुम तो सहमति डौगी hi खुद जो लैंड पर उछाल रही हो,
सविता: अच्छा तुम जैसे खली बैठे हो, क्यों शालू खली हैं क्या ये,
शालू: जीजी इनका पता नहीं आह पर मेरी छूट भरी हुई है अच्छे से आह.
इस पर सब हंस पड़े, तभी एक तरफ से सविता के आहों के तेज़ होने की आवाज़ आयी और सबने उस तरफ देखा तो पाया सविता शैलेश के ऊपर झुक कर कांप रही थी उसकी कमर झटके खा रही थी, शायद पहली बार इतना खुल कर छोड़ने का असर था, झड़ने के बाद वो बेजान सी हो गयी तो शैलेश ने उसे एक तरफ लिटा दिया और खुद उठे और idhar-udhar देखने लगे और अपनी साँसों को भी दुरुस्त करने लगे, पर कुछ देर के बाद बर्दाश्त नहीं हुआ तो नीलेश से बोले: भैया बहु का स्वाद थोड़ा हमे भी चखने दो भाभी तो हार मान गयी.
नीलेश: अरे ऐसे कैसे हार मान गयी, इधर ला हम अभी चाबी भर देते हैं,
शैलेश सविता को उठा कर नीलेश की तरफ कर देते हैं तो नीलेश भी रानी को शैलेश के पास भेज देते हैं नीलेश सविता को पकड़ते हैं और अपने आगे पीठ पर लिटाते हैं और टाँगे फैला कर अपना मोटा लैंड उसकी छूट में घुसा देते हैं, जिससे सविता एक बार फिर से आहें भरने लगती है
सविता: आह ओह भाई साहब आह आह ओह ओह.
नीलेश: क्यों भाभी हार मान ली क्या तुमने?
नीलेश ने धक्के लगते हुए कहा,
सविता: आह अब चाबी भर डोज ऐसे तो आह कहाँ थकावट रह जाएगी,
नीलेश: ये हुई न बात.
दूसरी तरफ शैलेश ने एक कुर्सी खींच ली थी और उस पर बैठ गए थे रानी ने भी उनके ऊपर जगह ली और उनके लैंड पर कूदने लगी थी, इधर पियूष भी नीचे लेता था और सभ्य उसके ऊपर थी उसकी तरफ पीठ करके और पियूष नीचे से धक्के लगा रहा था सभ्य की छूट में, महिपाल ने शालू को घोड़ी बनाया हुआ था और दनादन छोड़ रहे थे.
कमरे में थापें गूँज रही थी और सब apne-apne चरम की तरफ बढ़ रहे थे, महिपाल शालू के चूतड़ों को थामे लगातार अपनी कमर को तेज़ी से घुमा रहे थे आँखें बंद थी दांत पीस रखे थे उनकी हालत देख कर कोई भी बता सकता था की वो अपने चरम की तरफ बढ़ रहे हैं, शालू भी हर झटके पर आह आह आह करके आहें भर रही थी, कुछ देर बाद महिपाल के मुँह से एक गुरर्हत निकली और फिर आह आह करते हुए दो तीन झटके कास के लगाए और फिर अपनी जाँघों को शालू के चूतड़ों से चिपका दिया और फिर गुर्राते हुए झड़ने लगे, शालू भी महिपाल को झाड़ता महसूस कर खुद को रोक नहीं पायी और खुद भी उसकी कमर झटके खाने लगी, जिससे वो आगे होकर गिर गयी वही महिपाल का लैंड उसकी छूट से निकल गया, और महिपाल के रास की पिचकारियों ने उसके चूतड़ों को रंग दिया और फिर थक कर पीछे लेट कर हांफने लगे,
शैलेश के लैंड पर बैठी रानी भी अब शैलेश के लैंड के saath-saath उत्तेजना के घोड़े पर भी सवार थी और अब उसकी कमर झटके खा रही थी वही शैलेश के लिए भी इस कमसिन बहु की गरम छूट की गर्मी और कसावट के आगे फिसलने के करीब थे और जैसे hi झड़ते हुए रानी की छूट ने उनके लैंड को कैसा वो भी खुद को रोक नहीं पाए और उसकी छूट में धार के बाद धार मारने लगे, रानी तो झड़ते हुए पीछे होकर उनके ऊपर लेट गयी शैलेश का लैंड अभी भी उसकी छूट में फंसा हुआ था और रास भर रहा था,
जहाँ पत्नी की छूट में शैलेश का रास भर रहा था तो पति यानि पियूष भी पीछे नहीं था, नीचे से दनादन सभ्य की छूट में धक्के लगा रहा था और दोनों के hi हाव भाव ये बता रहे थे की वो दोनों apne-apne चरम के कितने करीब हैं सभ्य भी अपनी साँसों को थामे आहें भर रही थी और पियूष को लगातार और तेज़ छोड़ने को कह रही थी वही पियूष के लिए भी सभ्य के कामुक बदन को भोगना हर पल के साथ और मुश्किल होता जा रहा था
और फिर एक पल आया की पियूष की कमर ऊपर उठ गयी वो सभ्य के चूतड़ों से चिपक गया और फिर झड़ने लगा, सभ्य भी उसी पल अपने चरम पर पहुंची और झड़ने लगी, एक दो पिचकारी सभ्य की छूट में मारने के बाद पियूष नीचे हो गया और उसका लैंड सभ्य की छूट से निकल गया, सभ्य भी उसके साथ नीचे उसके ऊपर लेट गयी, पियूष के रास की पिचकारियां सभ्य के चूतड़ों और जाँघों को भिगोते हुए शांत हो गयी.
सभ्य के saath-saath नीलेश का भी वही हाल था सविता की छूट में वो भी तूफानी धक्के लगा रहे थे और सविता खुद के मुँह पर हाथ रख कर खुद को चीखने से रोक रही थी, उसका बदन फिर से अकड़ रहा था और एक बार फिर से वो अपने चरम की तरफ बढ़ रही थी नीलेश ने कुछ तगड़े धक्के और लगाए और वो काफी था सविता के लिए और फिर दोनों hi एक साथ झाड़ रहे थे, नीलेश सविता के ऊपर लेट कर उसकी छूट को हाँफते हुए भर रहे थे और सविता भी अपनी छूट को और कमर को मरोड़ते हुए झाड़ रही थी,
चुदाई का तूफ़ान ठाम चूका था पूरे कमरे में अब बस हांफने की आवाज़ें आ रही थी. खैर कुछ देर बाद पियूष उठा और बोलै: कोई पानी पियेगा,
तो सब ने मुस्कुरा कर हामी भरी, पियूष ने बोतल उठायी और खुद पि कर आगे बढ़ा दी,
महिपाल: नीलेश भाई अब तो राज खोल दो की ये सब हुआ कैसे,
शैलेश: ये सब हुआ तुम्हारे मैसेज से महिपाल भाई.
महिपाल: मैसेज से कैसे? समझा नहीं?
शैलेश: शायद दोपहर में पियूष ने अपनी, भाभी की और बहु की चुदाई की वीडियो बना कर तुम्हे भेजी थी?
पियूष: हाँ भेजी तो थी.
पियूष हैरान होकर बोलै,
महिपाल: हाँ आयी थी मेरे पास.
शैलेश: तो कागज़ भेजने के saath-saath तुमने वो भी मुझे भेज दी थी और उसे देख कर hi हमे तुम्हारे इस हसीं राज के बारे में पता चल गया.
नीलेश: तो महिपाल भाई अब पता चल गया है तो ये राज भी खोल दो की ये सब शुरू कैसे हुआ और कब से चल रहा है.
महिपाल: हाँ अब तो बताना hi पड़ेगा, पर तुम्हे भी अपने राज खोलने पड़ेंगे की इतना खुला पैन जीवन में कैसे आया.
नीलेश: बिलकुल पर पहले आप.
जारी रहेगी
महिपाल ने अपना कुरता उतारते हुए कहा और फिर पजामा और कच्चा उतर कर पूरा नंगा हो गया.
ये सब बातें hi चल रही थी की दरवाज़ा फिर से हल्का सा खुला और तीनो ने एक साथ दरवाज़े की तरफ देखा तो तीनो हैरान रह गए देख कर.
**अपडेट 258**
चोदम पुर में नीतू अब पूरी तरह जग्गू के मोठे लैंड पर सवार हो चुकी थी. उसकी गोरी जांघें फैली हुई थी, छूट पूरी तरह लैंड को निगल रही थी. Upar-neeche उछलते हुए उसके bhare-bhare चुके zor-zor से हिल रहे थे, निप्पल सख्त होकर खड़े थे. रज्जो उसकी माँ बगल में बैठी बेटी की छूट के दाने को मसल रही थी, तो kabhi-kabhi उसके मोठे चुके मुँह में लेकर चूस लेती.
नीतू: आह माँ... देखो न... जग्गू का मोटा लम्बा लैंड... मेरी chhoti-si छूट को पहाड़ रहा है... उफ्फ्फ... कितना गहरा घुस रहा है... और ज़ोर से ठोको जग्गू आह... हाँ... ऐसे hi... मेरी छूट का पानी निकाल दो...
रज्जो: देख रही हूँ बीटा तेरी छूट कैसे पूरा लैंड निगल रही है बेटी... अपनी माँ के सामने पूरी रंडी बन जा... जग्गू का लैंड खा रही है तेरी छूट... आह... कितना रास टपक रहा है... तेरी छूट से कितनी गीली है तेरी गरम छूट.
जग्गू: ले साली रंडी... तेरी छूट आज मेरे लैंड की गुलाम हो गयी... आह... कितनी टाइट है... चची देखो न... तुम्हारी बेटी कितनी गन्दी हो रही है... आह तुम्हारे सामने hi रंडी बन रही है.
रज्जो: हाँ बीटा... छोड़... मेरी बेटी की छूट पहाड़ दाल... मैं तो dekh-dekh के अपनी छूट में उंगलियां दाल रही हूँ... आह... नीतू... चिल्ला... चिल्ला के बता कितना मज़ा आ रहा है... आह और माँ रंडी है तो बेटी रंडी बनेगी hi न आह.
जग्गू ने नीतू की कमर पकड़ ली और नीचे से zor-zor से ठोके मारने लगा. Chap-chap... chap-chap... कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी. नीतू की आँखें ऊपर चढ़ गयी, वो ज़ोर से चीखी और पहली बार झाड़ गयी. उसकी छूट sikud-fail रही थी, गरम पानी जग्गू के लैंड पर बह रहा था. लेकिन जग्गू रुका नहीं.
इधर ममता चची के कमरे में माहौल और भी गन्दा हो चूका था. ममता अब दोनों भाइयों के बीच सैंडविच बन चुकी थी. सरजू पीछे से उसकी मोती गांड में पूरा लैंड घुसाए हुए zor-zor से थोक रहा था, जबकि बिरजू नीचे से उसकी छूट में लैंड डालकर छोड़ रहा था. ममता की bhaari-bhaari चूचियां बिरजू के चेहरे के आगे झूल रही थी.
ममता: आह... दोनों हरामियों... मेरी छूट और गांड एक साथ पहाड़ दो... उफ्फ्फ सरजू... तेरे लैंड ने मेरी गांड का छेड़ ढीला कर दिया... बिरजू... और ज़ोर से... मेरे चुके मसल... दबा... काट ले... हाँ... मैं तो आज दोनों के लैंड की रंडी बन गयी हूँ...
सरजू: चची... तुम्हारी गांड कितनी गरम है... छूट से भी टाइट... आह और गरम... पूरा लैंड अंदर खींच रही है आह... chap-chap... की आवाज़ कर रही है.
बिरजू: और मेरी चची... तुम्हारी आह छूट तो बिलकुल पानी की नदी बन चुकी है... कितना रास निकाल रही है... आह... ओह ये मोती चूचियां आह.
ममता चीख रही थी मज़े से. उसने बिरजू का लैंड पकड़कर और ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. दोनों भाई रफ़्तार बढ़ा रहे थे. ममता दो बार झाड़ चुकी थी, उसका पूरा बदन पसीने से तर था. आखिरकार सरजू ने गांड में और बिरजू ने छूट में एक साथ रास छोड़ दिया. ममता की छूट और गांड दोनों से सफ़ेद रास बहने लगा.
ममता: आह... भर दी दोनों ने... मेरी छूट और गांड... कितना गाढ़ा रास... उफ्फ्फ... अब मैं तो उठ भी नहीं प् रही बच्चो आह... लेकिन अभी और छोड़ना है...
तीसरी तरफ गुंजन अब घुटनो के बल कड़ी थी, दीनू पीछे से उसे कुत्ते की तरह छोड़ रहा था. उसकी छूट से सफ़ेद रास टपक रहा था, जांघें चिपक गयी थी. दीनू एक हाथ से गुंजन के बाल खींचे हुए था, दुसरे से चुके मसल रहा था.
गुंजन: जीजा... मारो... ज़ोर से मारो... मेरी छूट तुम्हारी हो गयी... आह... तेरे लैंड ने मेरी छूट का बुरा हाल कर दिया... हाँ... और तेज़... मेरी गांड भी थोक दो... मैं तो आज पूरी रात छुडवाउंगी...
दीनू: ले रंडी गुंजन... तेरी छूट कितनी चिकनी है... chod-chod के लाल कर दूंगा... आह... कितने बड़े चुके हैं तेरे.. निप्पल खड़े हो गए... बोल... जीजा का लैंड पसंद है न...
गुंजन ने पीछे हाथ बढाकर दीनू के अंडो को मसलना शुरू कर दिया. दीनू की रफ़्तार और तेज़ हो गयी. कमरा चपचाप, आहों और गन्दी बातों से भर गया.
वही गुंजन का बीटा सागर और अनुज मिलकर मंजू को दोनों तरफ से बजा रहे थे, वही मंजू भी जवान लैंड का पूरा मज़ा ले रही थी. मंजू तै के कमरे में सागर और अनुज दोनों तरफ से लगे हुए थे. सागर पीछे से गांड छोड़ रहा था, अनुज नीचे से छूट में लैंड डाले हुए था. मंजू की भरी हुई देह हिल रही थी, चुके उछाल रहे थे.
मंजू: आह... दोनों हरामी... मेरी छूट और गांड एक साथ... उफ्फ्फ सागर... तेरे लैंड ने मेरी गांड पहाड़ दी... अनुज... और ज़ोर से... मेरे चुके चूस... काट... मैं तो आज तुम दोनों की रंडी बन गयी हूँ... छोड़ो... और छोड़ो... मेरी छूट तुम दोनों की है...
सागर: बुआ आह तुम तो पहले hi रंडी थी आह... तुम्हारी ओह गांड कितनी मोती और गरम है... इस गांड को छोड़ के लाल कर दूंगा...
अनुज: और तै... तुम्हारी छूट तो बिलकुल जवानी वाली hai...aah कितनी गरम और कितना रास भरा है आह... तुम्हे छोड़ कर ऐसा लगता है जैसे मैं माँ को छोड़ रहा हूँ तो माँ जैसी छोड़ रहा हूँ...
मंजू: ओह बीटा तेरी माँ और मुझमे कोई फर्क है क्या आह वो भी अभी आह कहीं टाँगे उठा के चुद रही होगी और मैं भी.
अनुज: आह तै ये तो सही कहा आह आह आह.
अनुज ने आहें भरते हुए मंजू की मोती चूचियों को चूसना शुरू कर दिया.
इधर उसी घर में दुसरे कमरे में कर्मा ने प्रेमा को अब पूरा नंगा कर लिया था और दनादन उसे छोड़ रहा था, कर्मा का लैंड प्रेमा की छूट के अंदर तक चोट कर रहा था और प्रेमा हर झटके के साथ आहें भर रही थी, उसकी उत्तेजना भी अपने चरम पर थी.
प्रेमा: आह लल्ला आह ओह ऐसे hi रुकना मत आह आह आह मैं आने वाली हूँ आह आह मादरचोद आह ऐसे hi छोड़ो ओह.
कर्मा: ओह ओह आह कुटिया आह ले अब नहीं रुकूंगा आह आह ओह.
कर्मा भी उसकी छूट में धक्के लगते हुए बढ़ बढ़ा रहा था दोनों की उत्तेजना उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई दे रही थी.
नाना और राजपाल भी पल्ली और लाडो के जवान बदन का badal-badal कर मज़ा ले रहे थे.
जहाँ राजपाल पीछे से झुकी हुई लाडो की छूट में लैंड पेल रहे थे वही उसका सर नाना की गॉड में था और नाना का लैंड उसके मुँह में, वही उसके नीचे पल्ली थी जो नाना की गोलियों को चाट और चूस रही थी.
राजपाल: ओह ओह आह लाडो आह तेरी छूट आह कैसी कासी हुई और गरम है आह लग रहा है लैंड गाला देगी.
नाना: आह सही कहा जमाई बाबू, ओह और दोनों ऐसे चूस रही हैं मानो आह जान निकाल लेंगी लैंड के रास्ते आह बिटिया,
पल्ली: अरे ऐसे कैसे जान निकाल लेंगे, अभी तो रात भर इस लैंड से छोड़ना है हमे. क्यों लाडो?
लाडो ने बिना मुँह से लैंड निकाले आँखों से hi हां में इशारा किया,
राजपाल: ओह फिर तो हमारी जान तो निकालनी hi है बाबा, बेटियों अपने ताऊ और नाना पर तरस खाना थोड़ा.
राजपाल ने लाडो को छोड़ते हुए कहा, जिस पर पल्ली मुस्कुरायी और नाना की गोलियां चाटने में फिर से लग गयी.
जहाँ पल्ली और लाडो नाना और राजपाल की आहें निकाल रही थी वही उनकी सहेली किरण भी अपने पापा यानि जमुना मां की और राजन की आहें निकलवा रही थी, दोनों बिस्तर पर पीठ के बल लेते हुए थे apni-apni टाँगे पीछे किये और घुटनो को पीछे की तरफ मोड़ कर सर की तरफ किये हुए जिससे दोनों के चूतड़ खुले थे और उनकी गांड का छेड़ भी वही उनकी टांगो के नीचे किरण थी जो दोनों की गांड के छेड़ को उँगलियों से भेदते हुए beech-beech में जीभ से भी कुरेद रही थी.
जमुना: ओह किरण क्या कर रही है आह बहुत अजीब लग रहा है आह.
किरण: अच्छा पापा जब अपना मोटा लैंड मेरी गांड में घुसते हो तब कुछ नहीं लगता अब अजीब लग रहा है.
राजन: अरे जमुना क्या लौंडियों की तरह कराह रहा है मर्द बन देख मैं तो नहीं कराह रहा,
जमुना: अरे जीजा गांड में ऊँगली घुसायेगी तो कैसे मर्द बनेंगे.
राजन: ऐसे hi आह्ह्ह्हह ओह
जमुना: अब क्या हुआ जीजा मर्द bante-bante कैसे सीसीएनए लगे,
राजन: आह अपनी बेटी से पूछ बिना बताये एक और ऊँगली घुसा दी.
किरण: हाहाहा फूफाजी आया मज़ा.
राजन: ओह बिटिया कर ले तू अपने मन की मैं भी देख आज तेरी गांड कैसे मारता हूँ.
किरण: बिलकुल फूफाजी उसी का तो इंतज़ार है.
दूसरी तरफ गैंदापुर में जैसा आप जानते हैं माहौल थोड़ा अजीब था, महिपाल, रानी और पियूष कमरे में थे और तभी दरवाज़ा खुला था और जैसे hi तीनो की नज़र दरवाज़े पर पड़ी तीनो hi हैरान रह गए थे, दरवाज़े पर सविता दिखी पूरी नंगी मुँह खुला हुआ और बदन झटके खाता हुआ दरवाज़ा थोड़ा और खुला तो तीनो की आँखें फटी की फटी रह गयी.
सविता के पीछे शैलेश थे जो उसकी कमर को थाम कर पीछे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, अपनी पत्नी को शैलेश से छुड़वाते देख महिपाल के वही उसके saath-saath रानी और पियूष के भी होश उड़ गए जो जहाँ था वही रह गया, तीनो आँखें पहाड़ के देख रहे थे कोई कुछ बोल नहीं रहा था, दरवाज़े से अंदर आते hi शैलेश ने सविता की एक टांग उठा कर एक दीवार पर टिका दी और फिर dana-dan उसे छोड़ने लगे,
महिपाल तुरंत अपनी बहु के पास से उठ कर दूर खड़ा हो गया और पहली प्रतिक्रिया पियूष की भी कुछ ऐसी hi थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा है और उस पर कैसी प्रतिक्रिया दें, रानी भी ज्यों की त्यों वैसी hi बिस्तर पर लेती हुई थी,
तभी दरवाज़े से एक और आवाज़ आयी: अरे रुक क्यों गए महिपाल भाई लगे रहो,
और फिर दरवाज़े से नीलेश अंदर आये, और आते hi सीधे रानी की तरफ बढ़ कर बिस्तर के बगल में घुटनो पर बैठ गए और इससे पहले कुछ कोई समझता नीलेश का मुँह रानी की छूट पर था, रानी की भी एक आह निकल गयी, नीलेश की जीभ को अपनी छूट पर महसूस करते hi, उधर सविता भी शैलेश के सामने बैठ कर उसका लैंड चूसने लगी, बिना पियूष और महिपाल की तरफ देखे
अब माहौल कुछ ऐसा था की नीलेश और शैलेश रानी और सविता के साथ लगे हुए थे और महिपाल और पियूष बस देख रहे थे,
कुछ पल बाद hi दरवाज़े से सभ्य और शालू भी अंदर आयी और महिपाल और पियूष की तरफ देख कर बोली: अरे तुम लोग ऐसे alag-alag क्यों खड़े हो,
नीलेश: लगता है महिपाल भाई को हमारे यूँ आने से झटका लग गया है,
नीलेश ने रानी के सामने से उठते हुए बोलै और उठ कर अपने कपडे उतारने लगे, सभ्य ने नीलेश के हटने पर रानी को नंगा लेते देख तो वो भी आगे बढ़ी और नीलेश की जगह बैठ कर अपना मुँह रानी की छूट पर लगा दिया, इधर शालू सीढ़ी आगे बढ़ी और जाकर महिपाल के सामने बैठ गयी और उसके लैंड को पकड़ कर मुँह में भर लिया, शालू के छूटे hi मानो महिपाल के बदन और दिमाग में ऊर्जा वापस आ गयी उसका दिमाग भी तेज़ी से काम करने लगा,
महिपाल: ओह आह भाभी जी, नीलेश भाई ये सब क्या हो रहा है आप सब यहाँ? ऐसे?
नीलेश: अरे महिपाल भाई सब सवालों का जवाब मिल जायेगा आराम से अभी तुम मजे लो.
शालू भी उसका लैंड मुँह से निकाल कर बोली: मैं सामने हूँ और तुम सवाल पूछ रहे हो भैया, ये तो मेरी बेइज़्ज़ती है.
ये बोल कर वो उठी और अपनी साडी खोलने लगी, और फिर साडी के saath-saath पेटीकोट को भी निकाल दिया और वापस बैठ कर उसका लैंड चूसने लगी,
महिपाल: आह नहीं शालू, ओह तुम बहुत सुन्दर हो, आह.
शालू: वो तो सुना मैंने कमरे के बहार से जब मेरी और जीजी की कितनी तारीफ कर रहे थे तुम भैया.
शालू ने लैंड चाटते हुए कहा, तो महिपाल अपनी बात पकडे जाने पर हंसने लगा,
दूसरी तरफ पियूष भी आगे बढ़ा और जाकर रानी और सभ्य के बगल में बैठ गया जहाँ सभ्य रानी की छूट चाट रही थी,
वो उन दोनों को देख कर बगल में बैठ कर अपने लैंड को हिला रहा था
रानी: ओह चची आह आह कभी सोचा नहीं था आह तुम मेरी आह ये करोगी आह बहुत अच्छा लग रहा है,
सभ्य: सब कुछ हो सकता है बहु आह तेरी छूट बहुत रसीली है. और खुल कर बोल अब.
सभ्य ने जीभ हटते हुए कहा, दूसरी तरफ सविता लगातार शैलेश से चुद रही थी, शैलेश को भी सविता की गरम छूट में बहुत मज़ा आ रहा था,
शैलेश: आह भाभी आह बहुत मस्त हो तुम ओह मज़ा hi आ गया,
सविता: मज़ा तो तुम्हारा लैंड भी बहुत दे रहा है भैया, छोड़ते रहो ऐसे hi आज मत रुको.
दूसरी तरफ शालू भी महिपाल का लैंड पूरे जोश से चूस रही थी और महिपाल के मुँह से लगातार आहें निकल रही थी. महिपाल हाथ नीचे कर के शालू की मोती चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi मसलते हुए आहें भर रहा था,
पियूष अपनी पत्नी की छूट को सभ्य से चतवते हुए देख गरम हो रहा था और फिर उसने रानी का सर पकड़ कर अपने लैंड पर झुका दिया, रानी ने भी तुरंत उसके लैंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी, ये देख सभ्य भी उठी और पियूष के दूसरी तरफ बिस्तर पर आकर बैठ गयी, पियूष ने उसे देखा और फिर उसकी तरफ चेहरा बढ़ा दिया और उसके होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और चूसने लगा, सभ्य भी पियूष का पूरा साथ देने लगी, कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो पियूष मुस्कुरा रहा था
पियूष: चची तुम बहुत सुन्दर हो और मस्त भी.
सभ्य: चल पागल इतनी सुन्दर बीवी के होते हुए तुझे मैं सुन्दर लग रही हूँ,
पियूष: सच में चाहो तो रानी से hi पूछ लो.
रानी ने भी तुरंत अपने मुँह से लैंड निकाला और बोली: सही में चची सच कह रहे हैं ये.
ये कह कर वो वापस लैंड चूसने लगी, सभ्य भी नीचे होकर उसका सर सहलाने लगी और उसे पियूष का लैंड चूसते हुए देखने लगी,
सभ्य का हाथ रानी के सर से होते हुए जल्दी hi पियूष की गोलियों तक पहुँच गया और वो उन्हें सहलाने लगी, रानी ने सभ्य को पास देखा तो पति का लैंड तुरंत मुँह से निकाला और सभ्य की तरफ कर दिया जिसे सभ्य ने तुरंत मुँह में भर लिया, और चूसने लगी.
रानी भी सभ्य को अपने पति का लैंड चूसते देख मस्त होने लगी, वही पियूष तो सभ्य का गरम मुँह अपने लैंड पर पाकर आहें भरने लगा,
पियूष: आह ओह मुझे तो यकीं नहीं हो रहा की कर्मा की मम्मी मेरा लैंड चूस रही है,
नीलेश ये सुन बोले: कर्मा के पापा भी यहीं है बीटा,
जिसे सुनकर पियूष के चेहरे पर हंसी आ गयी.
ये कहते हुए नीलेश ने रानी के पीछे बिस्तर पर जगह ली और अपना लैंड पीछे से उसकी छूट के द्वार पर घिसने लगे, रानी भी गरम लैंड का एहसास पाकर सिहरने लगी, और फिर नीलेश ने धक्का लगाकर लैंड अंदर घुसा दिया और रानी की आह निकल गयी, नीलेश उसके चूतड़ों को पकड़ कर छोड़ने लगे तो रानी आहें भरने लगी, वही सभ्य लगातार पियूष का लैंड चूस रही थी,
रानी: आह चाचा जी ओह आह कितना मोटा है आह आह आह तुम्हारा ओह आह मारो ऐसे hi आह धक्का,
नीलेश: आह तेरी छूट इतनी गरम और कासी हुई है बहु आह पियूष बीटा बहुत पत्नी मिली है तुझे आह,
नीलेश रानी को छोड़ते हुए बोले,
पियूष: आपको भी चाचा जी,
पियूष सभ्य का मुँह अपने लैंड पर दबाते हुए बोलै, तो दोनों हंसने लगे, उसने फिर सभ्य को अपने लैंड से ऊपर उठाया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा, सभ्य की चूचियों को मसलते हुए, होंठ अलग हुए तो बोलै: ओह चची इन चूचियों को तो दिखाओ बहुत मन है इन्हे नंगा देखने का.
सभ्य: अब भी चची से hi म्हणत करवाएगा बीटा, खुद खोल कर देख ले,
पियूष ये सुनते hi सभ्य के ब्लाउज को खोलने लगा,
उधर सविता की तभी एक चीख निकली क्यूंकि शैलेश ने अपना लैंड उसकी छूट से निकाल कर उसकी गांड में जो घुसा दिया था,
सविता: आह भैया आह गांड hi चीयर दी तुमने तो,
शैलेश: क्या करूँ भाभी रुका hi नहीं गया तबसे देख कर मन कर रहा था,
सविता: अब घुसा hi दिया तो अच्छे से मारो आह कूट दो अच्छे से, देखो तुम्हारी पत्नी भी कैसे इनके साथ प्यार जाता रही है,
सविता ने कमरे के दूसरी तरफ देखते हुए कहा जहाँ शालू और महिपाल एक दुसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थे होंठों को चूसने के बाद शालू ने महिपाल को नीचे लेटने को कहा और महिपाल तुरंत लेट गया शालू भी उसके मुँह के ऊपर अपनी छूट रख कर बैठ गयी दोनों 69 के आसान में एक दुसरे को सुख देने लगे, वही उनके बगल में पियूष ने सभ्य के कपडे उतर कर नंगा कर दिया था और सभ्य भी उसके सामने तुरंत घोड़ी बन गयी और उसे इशारा किया तो पियूष ने तुरंत अपना लैंड उसकी छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा,
पूरे कमरे में चुदाई का खेल पूरे जोश में खेला जा रहा था
महिपाल शालू की छूट चूस रहा था तो शालू उसके लैंड को चूस रही थी, उनके बगल में पियूष सभ्य को घोड़ी बना कर छोड़ रहा था उनसे बायीं तरफ नीलेश रानी को झुका कर गहरे और लम्बे धक्के लगा रहा था और सबसे पीछे शैलेश सविता की गांड खड़े हो कर मार रहा था,
पियूष: आह आह चची आह जबसे तुम्हे पहली बार आह देखा तब सोचा था आह की तुम्हे छोड़ने में आह कितना मज़ा आएगा आह, और जितना सोचा था उससे भी ज़्यादा आ रहा है.
सभ्य: अच्छा ओह बड़ा गन्दा है तू आह अपने दोस्त की माँ के बारे में ऐसा सोचता है तू,
सविता ने उसे छेड़ते हुए कहा,
पियूष: आह जब दोस्त की माँ ऐसी हो तो सोचना पड़ता है,
सभ्य: आह तो अब सोच मत अब तो आह सच में छोड़ रहा है ओह ऐसे hi छोड़ आह और तेज़ आह.
पियूष: ओह आह हाँ चची आह आह आह आह.
नीलेश: देख बहु तेरा पति आह मेरी पत्नी को छोड़ रहा है, आह.
रानी: आह चाचाजी तो ओह तुम भी उसकी पत्नी को छोड़ो न आह और तेज़ अच्छे से ओह पहाड़ दो मेरी छूट अपने मोठे लैंड से, आह मुझे रंडी की तरह छोड़ो चाचाजी.
रानी गरम होते हुए बोली तो नीलेश भी उसकी इच्छा पूरी करने लगे.
शालू: आह भैया अब आह बहुत हो गयी चूसै आह मुझे अब लैंड अपनी छूट में चाहिए,
शालू उठते हुए बोली, और फिर पलट कर महिपाल के लैंड को पकड़ा और अपनी छूट पर लगा दिया, और हलके से अपनी कमर घूमते हुए लैंड के टोपे पर छूट घिसने लगी,
महिपाल: आह ओह अब और मत तड़पाओ शालू आह ले लो अंदर.
शालू ने भी वैसा hi किया और तुरंत नीचे होकर बैठ गयी, जिससे महिपाल की आह निकल गयी,
शालू नीचे होकर तुरंत hi महिपाल के लैंड पर कूदने लगी उसकी मोती चूचियां ब्लाउज से बहार थी और उसके saath-saath uchal-kood कर रही थी, वही शैलेश और सविता ने भी अपना आसान बदल लिया था और अभी शैलेश लेते थे और सविता उनके लैंड पर उछाल रही थी शैलेश नीचे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, नीलेश और रानी, सभ्य और पियूष अभी भी उसी आसान में थे, दोनों महिलाएं घोड़ी बन कर छुड़वा रही थी, रानी बिस्तर पर थी तो सभ्य नीचे और पियूष पीछे से उसकी छूट में अपना लैंड पेल रहा था,
पियूष: आह काश ये पहले पता होता की आप सब लोग इतने खुले ख्यालों के हो आह तो अब तक तो न जाने कितना मज़ा आह कर चुके होते हम लोग.
सभ्य: अभी जवान हो बीटा आह बहुत समय है तुम लोगों के पास मजे करने के लिए,
रानी: आह ये तो आह आह आह आराम से चाचा जी, आह सही कहा चची जी.
नीलेश: आह क्या करूँ बहु तेरी छूट रुकने hi नहीं देती आह बहुत मस्त है आह.
रानी: अब तुम्हारे सामने है आह चाचा जी जितना चाहे छोड़ लो, मेरे पति भी नहीं रोकेंगे.
रानी ने हँसते हुए कहा,
नीलेश: अरे वो कैसे रोकेगा मेरी पत्नी उसे रोकने hi नहीं देगी.
सविता: आह वैसे भी बहु ओह तू मेरी सहमति से चुद रही है कोई नहीं रोकने वाला तुझे,
महिपाल: तुम तो सहमति डौगी hi खुद जो लैंड पर उछाल रही हो,
सविता: अच्छा तुम जैसे खली बैठे हो, क्यों शालू खली हैं क्या ये,
शालू: जीजी इनका पता नहीं आह पर मेरी छूट भरी हुई है अच्छे से आह.
इस पर सब हंस पड़े, तभी एक तरफ से सविता के आहों के तेज़ होने की आवाज़ आयी और सबने उस तरफ देखा तो पाया सविता शैलेश के ऊपर झुक कर कांप रही थी उसकी कमर झटके खा रही थी, शायद पहली बार इतना खुल कर छोड़ने का असर था, झड़ने के बाद वो बेजान सी हो गयी तो शैलेश ने उसे एक तरफ लिटा दिया और खुद उठे और idhar-udhar देखने लगे और अपनी साँसों को भी दुरुस्त करने लगे, पर कुछ देर के बाद बर्दाश्त नहीं हुआ तो नीलेश से बोले: भैया बहु का स्वाद थोड़ा हमे भी चखने दो भाभी तो हार मान गयी.
नीलेश: अरे ऐसे कैसे हार मान गयी, इधर ला हम अभी चाबी भर देते हैं,
शैलेश सविता को उठा कर नीलेश की तरफ कर देते हैं तो नीलेश भी रानी को शैलेश के पास भेज देते हैं नीलेश सविता को पकड़ते हैं और अपने आगे पीठ पर लिटाते हैं और टाँगे फैला कर अपना मोटा लैंड उसकी छूट में घुसा देते हैं, जिससे सविता एक बार फिर से आहें भरने लगती है
सविता: आह ओह भाई साहब आह आह ओह ओह.
नीलेश: क्यों भाभी हार मान ली क्या तुमने?
नीलेश ने धक्के लगते हुए कहा,
सविता: आह अब चाबी भर डोज ऐसे तो आह कहाँ थकावट रह जाएगी,
नीलेश: ये हुई न बात.
दूसरी तरफ शैलेश ने एक कुर्सी खींच ली थी और उस पर बैठ गए थे रानी ने भी उनके ऊपर जगह ली और उनके लैंड पर कूदने लगी थी, इधर पियूष भी नीचे लेता था और सभ्य उसके ऊपर थी उसकी तरफ पीठ करके और पियूष नीचे से धक्के लगा रहा था सभ्य की छूट में, महिपाल ने शालू को घोड़ी बनाया हुआ था और दनादन छोड़ रहे थे.
कमरे में थापें गूँज रही थी और सब apne-apne चरम की तरफ बढ़ रहे थे, महिपाल शालू के चूतड़ों को थामे लगातार अपनी कमर को तेज़ी से घुमा रहे थे आँखें बंद थी दांत पीस रखे थे उनकी हालत देख कर कोई भी बता सकता था की वो अपने चरम की तरफ बढ़ रहे हैं, शालू भी हर झटके पर आह आह आह करके आहें भर रही थी, कुछ देर बाद महिपाल के मुँह से एक गुरर्हत निकली और फिर आह आह करते हुए दो तीन झटके कास के लगाए और फिर अपनी जाँघों को शालू के चूतड़ों से चिपका दिया और फिर गुर्राते हुए झड़ने लगे, शालू भी महिपाल को झाड़ता महसूस कर खुद को रोक नहीं पायी और खुद भी उसकी कमर झटके खाने लगी, जिससे वो आगे होकर गिर गयी वही महिपाल का लैंड उसकी छूट से निकल गया, और महिपाल के रास की पिचकारियों ने उसके चूतड़ों को रंग दिया और फिर थक कर पीछे लेट कर हांफने लगे,
शैलेश के लैंड पर बैठी रानी भी अब शैलेश के लैंड के saath-saath उत्तेजना के घोड़े पर भी सवार थी और अब उसकी कमर झटके खा रही थी वही शैलेश के लिए भी इस कमसिन बहु की गरम छूट की गर्मी और कसावट के आगे फिसलने के करीब थे और जैसे hi झड़ते हुए रानी की छूट ने उनके लैंड को कैसा वो भी खुद को रोक नहीं पाए और उसकी छूट में धार के बाद धार मारने लगे, रानी तो झड़ते हुए पीछे होकर उनके ऊपर लेट गयी शैलेश का लैंड अभी भी उसकी छूट में फंसा हुआ था और रास भर रहा था,
जहाँ पत्नी की छूट में शैलेश का रास भर रहा था तो पति यानि पियूष भी पीछे नहीं था, नीचे से दनादन सभ्य की छूट में धक्के लगा रहा था और दोनों के hi हाव भाव ये बता रहे थे की वो दोनों apne-apne चरम के कितने करीब हैं सभ्य भी अपनी साँसों को थामे आहें भर रही थी और पियूष को लगातार और तेज़ छोड़ने को कह रही थी वही पियूष के लिए भी सभ्य के कामुक बदन को भोगना हर पल के साथ और मुश्किल होता जा रहा था
और फिर एक पल आया की पियूष की कमर ऊपर उठ गयी वो सभ्य के चूतड़ों से चिपक गया और फिर झड़ने लगा, सभ्य भी उसी पल अपने चरम पर पहुंची और झड़ने लगी, एक दो पिचकारी सभ्य की छूट में मारने के बाद पियूष नीचे हो गया और उसका लैंड सभ्य की छूट से निकल गया, सभ्य भी उसके साथ नीचे उसके ऊपर लेट गयी, पियूष के रास की पिचकारियां सभ्य के चूतड़ों और जाँघों को भिगोते हुए शांत हो गयी.
सभ्य के saath-saath नीलेश का भी वही हाल था सविता की छूट में वो भी तूफानी धक्के लगा रहे थे और सविता खुद के मुँह पर हाथ रख कर खुद को चीखने से रोक रही थी, उसका बदन फिर से अकड़ रहा था और एक बार फिर से वो अपने चरम की तरफ बढ़ रही थी नीलेश ने कुछ तगड़े धक्के और लगाए और वो काफी था सविता के लिए और फिर दोनों hi एक साथ झाड़ रहे थे, नीलेश सविता के ऊपर लेट कर उसकी छूट को हाँफते हुए भर रहे थे और सविता भी अपनी छूट को और कमर को मरोड़ते हुए झाड़ रही थी,
चुदाई का तूफ़ान ठाम चूका था पूरे कमरे में अब बस हांफने की आवाज़ें आ रही थी. खैर कुछ देर बाद पियूष उठा और बोलै: कोई पानी पियेगा,
तो सब ने मुस्कुरा कर हामी भरी, पियूष ने बोतल उठायी और खुद पि कर आगे बढ़ा दी,
महिपाल: नीलेश भाई अब तो राज खोल दो की ये सब हुआ कैसे,
शैलेश: ये सब हुआ तुम्हारे मैसेज से महिपाल भाई.
महिपाल: मैसेज से कैसे? समझा नहीं?
शैलेश: शायद दोपहर में पियूष ने अपनी, भाभी की और बहु की चुदाई की वीडियो बना कर तुम्हे भेजी थी?
पियूष: हाँ भेजी तो थी.
पियूष हैरान होकर बोलै,
महिपाल: हाँ आयी थी मेरे पास.
शैलेश: तो कागज़ भेजने के saath-saath तुमने वो भी मुझे भेज दी थी और उसे देख कर hi हमे तुम्हारे इस हसीं राज के बारे में पता चल गया.
नीलेश: तो महिपाल भाई अब पता चल गया है तो ये राज भी खोल दो की ये सब शुरू कैसे हुआ और कब से चल रहा है.
महिपाल: हाँ अब तो बताना hi पड़ेगा, पर तुम्हे भी अपने राज खोलने पड़ेंगे की इतना खुला पैन जीवन में कैसे आया.
नीलेश: बिलकुल पर पहले आप.
जारी रहेगी
















































































































