Incest Katha Chodampur Ki - Page 36 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 218


नाना को ऐसा आनंद ऐसा मज़ा ज़िन्दगी में कभी नहीं आया था जो बेटी को छोड़ते हुए आ रहा था, नाना कभी आँखें बंद करके उस अद्भुत आनंद को महसूस करते तो कभी आँखें खोल कर अपने सामने नंगी बेटी को देखते और सोचते ये सच है भी की नहीं.

मौसी की ऐसी बातों के बाद भी नाना से कुछ बोलै नहीं जा रहा था वो उत्तेजना के ऐसे स्टार पर थे जहाँ से बोलना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा था, वो अभी सिर्फ भाव और आनंद की नदी में बहे जा रहे थे, ऐसा लग रहा था की सब अपने आप हो रहा था, उनकी कमर खुद बा खुद आगे पीछे होकर लुंड को बेटी की गरम छूट में घुसा रही थी.

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबा आह्ह्ह्हह्ह कितना गरम लुंड है तुम्हारा आअह्ह्ह्ह छूट के अंदर आग लगा देगा,

मौसी की उत्तेजित बातें सुनकर नाना के बदन में एक अलग प्रकार की झुरझुरी हो रही थी ये एहसास की वो अपनी बेटी को छोड़ रहे हैं, ये hi सोच कर वो खुद को रोक नहीं पाए और मौसी की छूट में झड़ने लगे, झड़ते हुए उनके लुंड ने पिचकारी मार मार कर अपना रास मौसी की छूट में भर दिया, इतना तेज़ स्खलन उनका शायद hi कभी हुआ होगा जैसा अभी हुआ था, झड़ने के बाद लुंड निकल कर नाना बगल में hi लेट कर हांफने लगे दोनों बाप बेटी बिलकुल नंगे एक दुसरे के बगल में लेते थे, दिमाग से अब थोड़ी हवस की धुंध हटी तो नाना को ढेरो सवालों और चिंताओं ने घेर लिए,

नाना के चेहरे के भाव hi बदल गए, हवस और वासना की जगह ग्लानि और चिंता ने ले ली, मौसी ने भी नाना के चेहरे को देखा और बोली- का हुआ बाबा? अचानक परेशां से लग रहे हो,

नाना- क्या बोलेन बिटिया सब बर्बाद हो गया..

नाना उठ कर बैठते हुए बोले,

मौसी- ऐसा क्या हो गया?

नाना- महापाप हो गया बिटिया, ऐसा कभी किसी बाप ने अपनी बेटी के साथ नहीं किआ होगा, अपनी बेटी का घर बर्बाद कर दिया हमने अपनी हवस के चक्कर में,

नाना परेशां होते हुए बोले,

मौसी- अरे बाबा इतना क्यों सोच रहे हो परेशां मत हो,

नाना- इतना अंधे हो गए अपनी हवस में की अपनी hi बेटी के साथ ये सब कर डाला, धिक्कार है हम पर,

मौसी- बाबा बाबा, शांत हो पहले परेशां क्यों हो रहे हो कुछ बर्बाद नहीं हुआ है सब ठीक है,

नाना- पर बिटिया,

मौसी- पर वॉर कुछ नहीं मेरी बात सुनो अब, मुझे बहुत मज़ा आया तुमसे छुड़वाने में, सच कह रही हूँ, और पता होता की बाप का लुंड इतना मज़ा देता है तो न जाने कबका छुड़वा लेती,

मौसी जानकार खुले शब्दों का प्रयोग करते हुए बोली ताकि नाना भी सुनकर थोड़ा खुल सकें.

नाना- तू तू ये सब क्या बोल रही है बिटिया?

नाना हैरान होते हुए बोले,

मौसी- सही बोल रही हूँ बाबा, ाचा तुम बताओ क्या तुम्हे मज़ा नहीं आया अपनी बेटी को छोड़ कर, अपनी बेटी की छूट में अपना मुसल जैसा लुंड घुसकर उसे छोड़ने में तुम्हे कोई आनंद नहीं मिला?

मौसी जितना हो सके खुलकर नाना के सामने बात कर रही थी और कहीं न कहीं उन बातों का असर नाना पर भी हो रहा था, अब उनके दिमाग में सही गलत की जगह फिर से अपनी बेटी का बदन आने लगा, मौसी के सवाल के जवाब में वो खुद बोल पड़े- मज़ा तो बहुत आया बिटिया पर,..

बस मौसी के लिए इतना काफी था,

मौसी- पर वॉर क्या फिर बाबा मज़ा आया तो खुल के कहो और मज़े लो, ये सही गलत, समाज के चक्कर में मत पढ़ो, तुम खुश तो रहोगे तो सब खुश.

नाना को मौसी की बातें सुन थोड़ा अजीब सा लगा और सोचने लगे कुछ ऐसी hi बातें तो कर्मा ने भी की थी, पर अभी उस ख्याल को अलग कर नाना बोले- बिटिया पर दामाद जी? ये उनके साथ तो धोखा हुआ न..

मौसी- कोई धोखा नहीं है बाबा, मैंने उन्हें छूट दे राखी है, वो जिसे चाहे उसे छोड़ सकते हैं और वो छोड़ते भी हैं,

नाना- क्या सवह में और तुझे बुरा नहीं लगता?

नाना हैरान होते हुए बोले,

मौसी- अरे बाबा छूट और लुंड है hi मज़े लेने के लिए तो क्यों इसे बस एक hi जगह दबा कर के रखो, जहाँ मौका मिले खूब मज़े लो,.

नाना- चाहे वो अपनी बेटी hi क्यों न हो?

मौसी- बेटी हो, माँ हो, बहु हो या बहन, अगर छोड़ने को तैयार हो तो क्या सोचना.

नाना ये सुन कुछ सोचने लगे, वहीं मौसी ने हाथ आगे बढ़ा कर नाना के हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख लिए, नाना ने भी हाथ हटाए नहीं बल्कि हल्का हल्का दबाने लगे,

मौसी- क्यों बाबा अब खुश हो?

नाना उनकी बात सुन कर मुस्कुराये और बोले- जिसके हाथ में बेटी की भरी हुई चूचियां हो वो तो खुश होगा hi,

मौसी- ये बात सही कही बाबा, अब आये तुम लाइन पर,

नाना भी मौसी की चूचियों को मसलने लगे, और बोले- अब तूने समझाया है तो सोचता हूँ यही सही.

मौसी- और सही hi कह रही हूँ बाबा अगर खुल कर मज़े लोगे तो यहाँ बहुत चूचियां हैं दबाने को.

नाना- मतलब?

मौसी- मतलब का, इतनी बड़ी बड़ी चूचियों वाली औरतें हैं, क्या पता कहीं मौका बन जाये,

नाना- ाचा किस की बात कर रही है तू?

नाना थोड़ा उत्सुक होते हुए बोले.

मौसी- ओह्हो देखो तो अब रहा नहीं जा रहा तुमसे.

मौसी नाना को छेड़ते हुए बोली.

नाना- अरे तू भी न, अब तू खुद hi तो बोल रही थी.

मौसी- अरे हाँ बाबा, और हैं नहीं जीजी हैं, ममता जीजी हैं, गुंजन है, रज्जो जीजी मंजू जीजी कितनी औरतें हैं एक से एक,

नाना- धत्त्त ये सब कभी नहीं मानेगी,

मौसी- अब तक मेरा लगता था की मुझे छोड़ डोज?

नाना- नहीं उम्मीद तो नहीं थी,

मौसी- फिर बस तुम कोशिश करते रहना और जहाँ मौका मिले घुसा देना लुंड छूट में,

नाना- इतना आसान थोड़े hi है,

मौसी- अरे बाबा जैसे मैं औरत हूँ वो सब भी औरतें hi हैं, जितनी छोड़ने की लालसा मुझे होती है उतनी उन सब को भी,

नाना- बाकि सब का तो ठीक है पर बड़की के साथ मुश्किल है,

मौसी- जब छुटकी चुद गयी तो बड़की के साथ क्या मुश्किल, बस कोशिश करते रहो,

नाना उनकी बात पर हंसने लगे और कुछ जवाब देते उससे पहले hi बहार से आवाज़ आई, जो किरण की थी वो सो कर उठ गयी थी.

मौसी- हाँ बीटा अभी आई रुक,

किरण- बड़ी बुआ बुला रही हैं तुम्हे.

मौसी- आई,

ये कह मौसी और नाना ने जल्दी से कपडे पहने और नाना लेट कर सोने का नाटक करने लगे,

तब जाकर मौसी ने दरवाज़ा खोला और बहार चली गयी, इसके बाद बाकि सब अपने अपने काम में लग गए, अनुज और ममी भी बहार आ गए थे, या कहें तो सिर्फ ममी आयी थी अनुज तो जी भर चुदाई करने के बाद सो गया था,

इधर सागर घर से निकल कर सीधा बिरजू के घर पहुंचा था, और दरवाज़ा खटखटाया तो उसकी किस्मत के हिसाब से लाडो ने खोला, एक दुसरे को देख कर दोनों के चेहरे पर hi हलकी सी मुस्कान आ गयी पर फिर सागर सँभालते हुए बोलै- बिरजू है क्या?

लाडो- हाँ अभी बुलाती हूँ,

ये कहकर लाडो अंदर की और मुड़ी तो पीछे से रज्जो चची आई और पूछा कौन है बिटिया?

लाडो- सागर है मम्मी,

रज्जो- अरे तो उसे दरवाज़े पर क्यों रोक रखा है, तू भी न बिलकुल गाढ़ी है,

ये कह रज्जो चची ने दरवाज़ा खोला और बोली- आ बच्चा अंदर आ,

लाडो को अपनी मम्मी से दन्त कहते देख सागर के चेहरे पर हंसी आ गयी जिसे छुपता हुआ बोलै- नहीं बुआ वो मैं बिरजू को बुला रहा था,

रज्जो- क्यों बुआ से नहीं मिलेगा,

सागर- हाँ क्यों नहीं बुआ,

रज्जो- आ फिर अंदर चल बिरजू भी अभी आ रहा है, भैंस को चारा डालने गया है,

रज्जो चची ने सागर को बिठाया और उसके पास बैठ कर बतियाने लगी, उनकी बातों के बीच में hi सागर और लाडो की नज़रें बार बार मिल रही थी, वो दरवाज़े के पास कड़ी हुई थी,

रज्जो- बच्चा कुछ चाय वगेरा पियेगा?

सागर- नहीं बुआ अभी बस खा कर आया हूँ,

इतने में तभी बिरजू और नीतू भी भैंसों को चारा डालकर आगये,

रज्जो- ले आ गया तेरा दोस्त, बिरजू देख सागर तेरा hi इंतज़ार कर रहा था,

सागर- हाँ चल,

बिरजू- बस अभी आया, और बिरजू ने जल्दी से एक टीशर्ट डाली और निकल गया सागर के साथ,

दोनों के जाते hi नीतू ने दरवाज़ा बंद किआ और लाडो की और देख कर मुस्कुरा के बोली- खूब नैन मटक्का चल रहा है..

लाडो- धत्त्त जीजी,

रज्जो- किसका नैन मटक्का?

नीतू- हमारी मैडम और सागर का.

रज्जो- हैं सच्ची ऐसी कुछ बात है का लाडो?

नीतू- अरे मम्मी पल्ली ने बताया मुझे अनुज से बोलै था सागर ने की उसे लाडो अछि लगती है,

रज्जो- अब कुछ दिन पहले ये बात होती तो हम गुस्सा होते बहुत.

रज्जो ने हँसते हुए कहा,

नीतू- अरे गुस्सा होने की क्या बात है मम्मी यही तो उम्र होती है प्यार वयर में पड़ने की, क्यों लाडो,

लाडो ये सुन शर्माकर बोली- कुछ है भी नहीं बेकार में बतंगड़ बना रहे हो,

रज्जो- हाय ढैय्या देखो तो ये लड़की चुड़ते हुए नहीं शर्माती अब कैसे गाल लाल हो रहे हैं इसके,

नीतू- आग दोनों तरफ लगी है मम्मी.

रज्जो- तो अब तो मौका भी है प्रेम कहानी को आगे बढ़ने का,

नीतू- अरे तुम्हे कोई परेशानी नहीं है?

रज्जो- हमें क्या परेशानी होगी, वैसे तो माँ बाप इसलिए डरते हैं की कहीं बहार कोई फायदा उठाकर छोड़ न दे, पर अब चुदाई तो वैसे भी होती है और सागर है भी घर का hi,

नीतू- ये तो है, ले भाई फिर मिल गयी सहमति मम्मी की भी,

लाडो- तुम लोग न साडी कहानी बना लो.

ये कहते हुए शर्मा कर चली गयी,

नीतू और रज्जो चची उसको ऐसे देख हँसते हुए काम पर लग गए,

इधर मैं नीतू के हाथों में अपना हाथ दिए हुए अपनी साड़ी बातें, सरे सच उसे बता रहा था, मैं उसके चेहरे की और भी नहीं देख रहा था मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही थी, खैर बात ख़त्म होने पर आई और मैं जैसे hi रुकने वाला था की नीतू ने मेरा हाथ अचानक से छोड़ दिया, मुझे लगा जिसका दर था वही हुआ, मन में जितनी आशंकाएं मैंने बनाई हुई थी जो सोचा हुआ था की अब अंजलि मुझसे कभी बात नहीं करेगी वगेरा वगेरा, वो सब मुझे सच होती हुई महसूस हुई,

मैंने हिम्मत करके उसके चेहरे की और देखा तो वो गाडी के सामने को देख रही थी, मैंने उसकी नज़र का पीछा किआ और सामने देख कर मैं भी चौंक गया या कहूं दर गया, सामने अंजलि के पापा खड़े थे, अंजलि थोड़ा संभाली फिर पापा कहके तुरंत गाडी से उतर कर अपने पापा के पास पहुँच गयी मैं भी दूसरी और से उतर कर उनके पास जाकर नमस्ते की, पर ससुरे को न जाने क्या चिढ थी नमस्ते भी नहीं ली,

ससुरा- यहाँ क्या कर रही है तू?

अंजलि- वो पापा कॉलेज का कुछ काम था इसलिए आई थी,

ससुरा- ाचा पर इसके साथ ये तो तुम्हारे कॉलेज में नहीं पढता,

अंजलि- वो मैं यहाँ कुछ जानती नहीं पापा और नीतू आज आ नहीं सकती थी तो उसने इन्हे ले जाने को कहा,

ससुरा इसके आगे कुछ बोलता की तभी पीछे से एक और आवाज़ आई जो की अंजलि की माँ की थी,

सविता- अरे हो गया तेरा काम?

अंजलि की माँ ने आगे आते हुए कहा,

अंजलि- हाँ मम्मी और तुम लोग आने वाले थे टुन्ने बताया नहीं, तुम्हारे साथ hi आ जाती,

अंजलि ने खुद सवाल रख दिया,

ससुरा- ये तो अपनी माँ से hi पूछ इन्हे hi अचानक से सूझा खरीददारी करने की,

मैंने आगे बढ़ कर उसकी मम्मी को भी नमस्ते किआ तो उन्होंने प्यार से सर पर हाथ फिरते हुए कहा जग जग जिओ बीटा, तुम कर्मा हो न,

में- हाँ ग.

सविता- बहुत ाचा बच्चा है ग, उस रात को इसने hi घर छोड़ा था हमें, पर बीटा तुम मम्मी को लेकर नहीं आये हमारे पास,

में- अरे वो ध्यान से निकल गया आज आप सब लोग hi घर चलिए न सब से मिल भी लेना,

सविता- आज कहाँ, हम सोच रहे थे उन्हें अपने घर बुलाते और एक नयी सहेली बना लेते फुर्सत में,

में- अरे घर चलोगी तो एक क्या कई सहेली बना जाएगी,

सविता - आउंगी पर पहले तुम अपनी मम्मी को हमारे यहाँ घुमा कर लाओ उसके बाद,

में- ठीक है,

मैंने हँसते हुए कहा, सब के चेहरे पर हंसी थी सिवाए ससुरे के, पता नहीं किस बात से चिढ़ा रहता था,

अंजलि- कर्ली खरीद दरी मम्मी?

सविता- अभी कहाँ, अभी तो घूम hi रहे हैं,

अंजलि- तो कर लो, चलो मैं मदद करती हूँ,

सविता- कर्मा बीटा तुम रुकोगे? अगर कुछ काम हो तो चले जाओ,

अंजलि- वैसे रुक जाते तो ाचा होता इतना सारा सामान उठा कर घूमना मुश्किल हो जायेगा,

में- कोई बात नहीं आप लोग खरीददारी कर लो, मैं रुका हूँ,

ससुरा- अगर जाना हो तो जा सकते हो, हम चले जायेंगे.

में- नहीं नहीं कोई बात नहीं, मैं रस्ते में किसी को नहीं छोड़ता,

अब अंजलि और उसकी मम्मी तो दुकान में चली जाती खरीद करने मैं खड़ूस ससुरे के पास रह जाता, साला पता नहीं क्यों किल्स रहता था मुझसे, कुछ बात करो तो एक बात का जवाब ऐसे देता था जैसे एहसान कर रहा हो,

मैं कुछ देर खड़ा रहा फिर बगल की दुकान से दो कोल्डड्रिंक ले आया और एक उसको दी,

ससुरा- ये सब मत किआ करो बाल झाड़ जायेंगे तुम्हारे,

मैंने ये सुन कर उसके बालों की और देखा जो की आधे सर से गायब थे और उसने मुझे ये करते देख लिए,

में- ग वो वैसे कभी कभी पीटा हूँ, अभी गर्मी लग रही थी न इसलिए ले आया,

ससुरे ने जेब से पैसे निकले और मुझे देते हुए कहा- लो कोल्डड्रिंक के,

में- अरे नहीं नहीं ये क्यों दे रहे हो.

ससुरा- तुम हमारे काम से रुके हो तो खर्चा भी हम करेंगे,

साला उसकी बात सुनकर मन में एक लाइन आई, उफ़ ये तुम्हारे उसूल उफ़ ये तुम्हारे आदर्श,

मैंने बात बदलने के लिए बोलै- सर ग आपका प्रेम विवाह हुआ था न?

ये सुनकर वो थोड़ा चौंक गया फिर बोलै- तुम्हे किसने बताया, फिर खुद hi अपने सवाल का जवाब देकर बोलै- अंजलि ने hi बताया होगा, हाँ प्रेम विवाह हुआ था,

में- कितनी अछि बात है,

मैंने मुस्कुराते हुए कहा,

ससुरा- पर हमारा प्रेम आज कल की तरह नहीं था, आज कल सिर्फ आकर्षण होता है प्रेम नहीं, पहले एक पसंद फिर दो दिन बाद दूसरी,

में- सही कह रहे हो आप, आज के ज़माने में सच्चा साथी ढूंढना बहुत मुश्किल है,

ससुरा- जितनी कठिनाई से हमने और अंजलि की माँ ने खुद को और परिवार को संभाला है हम hi जानते हैं,

में- बिलकुल इसीलिए अब आपके ख़ुशी के दिन हैं बच्चे बड़े हो गए हैं, अब सेवा करवाने का समय आ गया है,

ससुरा- आज कल के बच्चे सेवा कर दें बड़ी बात है मैंने तो बोल दिया है जब तक बदन में ताकत है मुझे किसी की ज़रुरत नहीं,

में- ऐसा hi स्वाभिमान मुझे भी चाहिए जब मैं बढ़ा हो जॉन,

ये सुनकर वो थोड़ा गर्वान्वित हो गया, मैंने भी सोचा ये खुश तो सब खुश,

जल्दी hi अंजलि और उसकी मम्मी ने खरीददारी कर्ली तो मैंने उनका सामान गाडी में लेकर पीछे रखा और फिर ससुरा मेरे बगल में बैठ गया, अंजलि और उसकी मम्मी पीछे, गाडी लेकर मैं गाओं की और चल दिया, कुछ सोचने पर ध्यान आया की जबसे बात ख़तम हुई है तबसे अंजलि ने एक बार भी मेरी नज़रों में देखा तक नहीं है, अब इसका क्या मतलब समझूँ? गुस्सा है या कुछ और,

बीच में शीशे से उसे देखना भी चाहा पर कोई फायदा नहीं था, खैर उसके गाओं के अड्डे पर पहुंचे तो ससुरा बोल पड़ा- यहीं छोड़ दो हम चले जायेंगे यहाँ से,

में- अरे घर तक छोड़ देता हूँ न,

सविता - और का इतना सामान उठाये कहाँ चलेंगे, चलो बीटा घर तक,

मैंने सोचा सासु माँ को पटना पड़ेगा एक एहि हैं जिनकी ससुरे पर चलती है, जल्दी hi मैं उनके घर पहुँच गया, सारा सामान निकल कर रखा, अब भी अंजलि मेरी और देखने से बच रही थी, सामान लेकर उसकी मम्मी और वो अंदर चले गए अब भी उसने एक बार मुझे नहीं देखा, मैं दरवाजे पर आस लगाए देख रहा था शायद बापिस आएगी,

इतने में ससुरा बोल पड़ा- धन्यवाद इतनी मदद करने के लिए,

इतना सुनकर मैंने भी और रुकना ठीक नहीं समझा और उसे नमस्ते बोल कर गाडी मोड़ने लगा, फिर नज़र बार बार दरवाज़े की और जा रही थी की शायद दिख जाये पर कोई फायदा नहीं अंत में गाडी लेकर मैं निकल गया, दिमाग में भसड़ हो गयी थी, क्या है इस लड़की के दिमाग में बात करेगी आगे या नहीं क्या है कुछ बोले तो सही, वो तो एक नज़र देख तक नहीं रही सोचा फ़ोन या मैसेज कर देता हूँ फिर खुद को रोक लिया, की पीछे पड़ने से कोई फायदा नहीं होने वाला, ये सोच मैं गाओं में लौट आया बाघ में गाडी कड़ी करि वहीं घूमने लगा, देखा तो थोड़ा बहुत काम शुरू हो चूका था, पर मौसा और पापा नज़र नहीं आ रहे थे,

मैं उन लोगो को इधर देख रहा था वो दोनों लोग बाघ को पार करके दूसरी और थे और इस समय नीतू के साथ खेल रहे थे,





पापा बिलकुल नंगे होकर नीतू को खड़ा करके उसकी एक तंग उठा कर पीछे से उसकी गांड मार रहे थे, नीतू के बदन पर सिर्फ एक ब्रा रही उसमे से भी उसकी चूचियां बहार थी जो की मौसा के हाथों द्वारा मसली जा रही थी, मौसा भी पूरे नंगे थे और नीतू अपने एक हाथ से उनका लुंड मुठिया रही थी,

थोड़ा रिस्की तो था पर खुले में चुदाई करने का मज़ा hi अलग आता था, वैसे भी हमारे और चाचा के hi खेत थे जिनके चरों और से तार वगेरा बांध कर के अलग भी कर दिया था तो किसी के आने की असंका न के बराबर थी,

मैं कुछ देर यूँ hi बैठ गया और सोचने लगा की क्या करूँ क्या होगा, क्या मेरा और अंजलि का साथ यहीं तक था, और एक बार को वो मान गयी पर उसने बोलै की आगे से मैं किसी के साथ चुदाई नहीं कर सकता तो क्या मैं रह पाउँगा, साला कुछ समझ नहीं आ रहा था अकेले वही ख्याल आ रहे थे इसलिए सोचा पापा मौसा को ढूंढता हूँ सबके साथ रहूँगा तो दिमाग इतना नहीं चलेगा..

मैं समझ तो गया ये लोग कहाँ होंगे तो बाघ को पार करता हुआ मैं भी दूसरी पार राजन चाचा के खेतों की तरफ पहुंचा तो एक बड़ा hi रोचक दृश्य मेरा इंतज़ार कर रहा था, दूर से hi मैंने देखा की बाघ के बहार hi एक जगह पापा ने अपना अंगोछा बिछाया हुआ था उस पर मौसा पीठ पर लेते हुए थे उनके ऊपर नीतू उनका लुंड अपनी गांड में लिए हुए बैठी थी, और पापा उसके पैरों के बीच में थे अपना लुंड नीतू की छूट में घुसाए हुए,

नीतू की दोहरी चुदाई हो रही थी,





नीतू को कितना आनंद आ रहा था इसका अंदाज़ा उसकी आहों और सिसकियों से हो रहा था,

मैं वहां पहुंचा तो तीनो लोग मुझे देख कर मुस्कुराने लगे,

में- आज तो खुले में hi प्रोग्राम चालू है,

नीतू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भइयाझ मैं तो आजम लेने आए थी, ताऊजी और मौसा जी मेरे आम दबाने लगे,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बिटिया, तेरे आमों से मीठे कोई आम नहीं हैं पूरे बाघ में,

मौसा नीचे से उसकी गांड मरते हुए बोले...

पापा- अह्हह्ह्ह्ह ये तो सही कहाहहहह अह्ह्ह्हह तेरी छूट आह्ह्ह्हह्ह कितनी गरम है,

नीतू- तुम्हारा लोढ़ा भी बहुत गरम है ताऊजी.

में- तुझे देख कर लोढ़ा गरमा जाता है नीतू, ये देख मेरा भी गरमा गे,

मैंने अपनी पंत से अपना लुंड निकलते हुए कहा, नीतू ने मेरे लुंड को देखा और अपनी जीभ को होंठों पर फिरते हुए एक अछि चुड़क्कड़ रैंड की तरह मुझे अपने पास बुलाया, मैंने भी अपना लुंड उसके मुँह के करीब कर दिया जिसे तुरंत उसने मुँह में भर लिए और चूसने लगी, मेरे मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,

अब नीतू एक साथ तीन तीन लुंड से चुद रही थी, तीनो छेदों में मोठे मोठे लुंड समाये हुए थे, अब तो बेचारी की आहें भी नहीं निकल रही थी, क्यूंकि मुँह में मेरा लुंड जो घुसा हुआ था, बतियाते हुए हम तीनो लोग उसे तब तक छोड़ते रहे जब तक वो झाड़ न गयी, झड़ने के बाद पापा मौसा ने उसे अंगोछे के ऊपर hi लिटा दिया और फिर अपने अपने कपडे पहनने लगे, नीतू भी तब तक अपनी सांसें ठीक कर रही थी हांफते हुए, तभी मुझे कुछ सूझा और मैं उसके बगल में खड़ा होकर अपने लुंड का निशाना उसकी और लगा कर मूतने लगा, मेरा मूट उसके सीने और बदन को भीगने लगा,

पहले तो वो चौंकी- भइयह कहकर पर फिर मूट में खुद को नहलाने लगी यहाँ तक की मुँह खोल कर भी अपने मुँह में भरने की कोशिश करने लगी, मैंने धार उसके मुँह में कर दी तो उसका मुँह भरगया और फिर मूट उसके चेहरे और गले पर गिरने लगा, वो जातक नहीं रही थी बल्कि अपने मुँह में भर कर खुद पर hi उढेल रही थी, मेरा मूट ख़तम हुआ तो वो भीगी हुई मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी.

पापा- ले हमारा अंगोछा ख़राब कर दिया तूने,

ये कहके आगे आकर खुद भी नीतू के ऊपर मूतने लगे, उनकी देखा देखि मौसा भी शुरू हो गए, और नीतू को दोनों ने मूट से पूरी तरह नहला दिया, जल्दी hi हम सब फिर उठ कर तुबेल पर आये और साथ में नहाये भी, नहाकर कपडे पहन कर नीतू और मैं घर की और चल दिए और पापा मौसा वहीं रुक गए, दूसरी और अनुज ने मामी को तो छोड़ लिए था अब उसकी नज़र किरण पर थी और कैसे भी करके वो कोई मौका ढूंढ रहा था और उसे मौका तब मिला जब माँ ने उसे कुछ सामान लेन को भेजा,

अनुज- चल किरण तू भी थोड़ा घूम भी आएगी, किरण भी ख़ुशी ख़ुशी उसके साथ चल दी,

घर से निकले उन्हें 20 मिनट्स हो चुके थे और अभी इस समय अनुज और किरण गाओं के कोने पर जहाँ राजन चाचा का खेत था वहां थे और अनुज ने किरण को घोड़ी बनाया हुआ था और इधर उधर देखते हुए पीछे से उसे छोड़ रहा था,

किरण का पजामा उसके पैरों में था टीशर्ट नीचे हो राखी थी जिसमे से उसकी दोनों चूचियां बहार लटक रही थी, अनुज उसकी कमर थामे लगातार थापें मार रहा था,





किरण- अह्हह्ह्ह्ह अनुजजज्जज अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह घर्रर्र पररर नहीं छोड़ सकता था,

अनुज- सब थी मौका hi नहीं मिल रहा था आह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है.

किरण- हाआनंनंन्न मुझी भीई, ऐसे हीईईई...

अनुज- टेरिइइइइ छूट बड़ी मस्तट्ठत है, अह्ह्ह्ह माखन जैसी चिकनी,

किरण- अभी तो गांड का स्वाद नहीं चखा तूने,

अनुज- क्या तू गांड भी मरवा लेती है,

किरण- हाआनंनंन्न.

किरण ने गर्व से कहा.

अनुज- मुझे भी मारनी हैईईई.

किरण- मार लिओ मेरे भइईईईई पर यहाँ नाहीई घर पर,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन ठीक कह रहियी है,

जल्दी hi अनुज ने अपना रास किरण के चूतड़ों पर छोड़ दिया और दोनों सामान लेकर घर आ गए, अब शाम हो चली थी सब घर आ रहे थे और अभी तो अनुज और किरण जो कोल्डड्रिंक लाये थे सब उसे पीकर ठंडा हो रहे थे, नाना और मां आज कुछ बेचैन नज़र आ रहे थे, नाना के मन में एक बार फिर से बेटी को भोगने के विचार आ रहे थे तो मां माँ के साथ अपनी कहानी आगे बढ़ने को बेताब थे,

कोल्डड्रिंक ख़तम हो गयी तो माँ बोली- चलो भाई बहुत्त हो गया ठंडा अब खाना बनाते हैं गर्मी में,

मौसी- अरे जीजी.

माँ- क्या जीजी खाना तो बनाना पड़ेगा hi,

मामी- और का जीजी तुम बैठो हम बना देंगे,

माँ- क्यों तुझे गर्मी नहीं लगती गुंजन,

इस पर सब हंस पड़े.

मामी- लगती है पर,

मौसी- अरे गर्मी इन कपड़ो की वजह से ज़्यादा लगती है,

किरण- तो कपडे उतर कर बनाओ. हेहही.

मौसी- धत्त पगली,

किरण- सही कह रही हूँ बुआ, इतनी भरी सारे लपेट लेती हो तुम लोग गर्मी तो लगेगी hi,

माँ- अब का करें बिटिया, साड़ी तो पहननी hi पड़ेगी ना,

इसके बाद औरतें खाना बनाने में लग गयी मर्द लोग टीवी देखने लगे बातें करने लगे, मैं बार बार अपना फ़ोन देखता की अंजलि का कोई मैसेज या फ़ोन आया हो. पर अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ था, थोड़ी देर में ममता चची पल्ली और राजन चाचा भी घर आ गए थे सबने साथ मिलकर खाना खाया, उसी बीच आपस में कुछ योजना बानी और चची ने बोल दिया की मामी आज उनके यहाँ सोयेंगी तो पल्ली ने भी किरण का नाम ले लिए की वो भी चलेगी,

इसके पीछे की वजह ये थी की जबसे सबको मामी और किरण के शामिल होने के बारे में पता चला था तो चची पल्ली चाचा सब बेचैन थे उनका स्वाद चखने के लिए,

पापा मौसा ने भी कहा की वो लोग आज खेत पर सोयेंगे, अनुज ने भी कहा की वो सागर बिरजू भी आज एक साथ सोने वाले हैं, सागर ये सुन खुश हो गया, बचा मैं तो मैंने भी बोल दिया मैं जग्गू और सरजू के साथ सोऊंगा,

माँ- अरे सब बहार सो रहे हो.

मां- मतलब घर पर सिर्फ हम दोनों जीजी और बाबा रह जायेंगे.

मां ने मन hi मन खुश होते हुए कहा, नाना के कान में भी जब ये बात पड़ी तो वो भी मन hi मन खुश होने लगे, जितने काम लोग उनको उतना मौका नज़र आ रहा था अपनी बेटी के साथ बिताने का,

खैर खाना पीना ख़तम हुआ सब लोग धीरे धीरे निकल लिए, अनुज सागर को लेकर बिरजू के घर की जगह जग्गू के घर की और ले गया,

सागर- हम तो बिरजू के यहाँ सोने वाले थे न,

अनुज- अरे वो तो ऐसे hi बोलै था, अगर मज़े करने हैं तो मेरे साथ चल,

सागर- किसके साथ,

अनुज- भाभी के साथ,

सागर- क्या प्रेमा भाभी के साथ,

सागर खुश होते हुए बोलै,

अनुज- हाँ देवर भाभी में मस्ती होती रहती है,

सागर- यार मज़ा आ जायेगा आज तो, भाभी क्या मस्त माल हैं, पर मानेगी?

अनुज- बस देखता जा, पति है नहीं यहाँ तो कोई तो चाहिए न बदन की प्यास बुझाने के लिए वही हम बुझाएंगे,

सागर- बढ़िया मज़ा आ जायेगा, पर वहां बुआ और फूफाजी भी तो होंगे,

अनुज- नहीं आज सब खेत पर सोने वाले हैं भाभी अकेली हैं,

सागर- मज़ा आ गया यार क्या मौका मिला है,

जल्दी hi वो दोनों वहां पहुँच गए और दरवाज़ा भाभी ने खोला जिन्हे देखकर सागर लार टपकने लगा, bhabh,i ने जल्दी hi उन्हें अंदर लिए,

खैर बाकि लोगो की योजना कुछ यूँ थी की ममी और किरण ममता चची और पल्ली, उन्ही के घर पर रात गुजरने वाले थे और उनका साथ पापा मौसा और राजन चाचा देने वाले थे,

दूसरी और मैं, जग्गू, राजपाल ताऊ, मंजू तै, पद्मिनी तै, हम सब लोग दीनू चाचा के यहाँ डेरा जमाये हुए थे, जहाँ उनका पूरा परिवार मौजूद था,

घर पर सिर्फ मां माँ, मौसी और नाना थे, तो आज की रात कैसी गुजरने वाली थी ये सब अगली अपडेट में, जारी रहेगी.
 
अपडेट 219


अनुज और सागर को घर में बुलाकर प्रेमा भाभी बचा हुआ काम निपटने लगी, अनुज मंजू तै वाले कमरे में जाकर बिस्तर पर पसर गया और सागर के मन में चुल्ल हो रही थी,

सागर- अरे कैसे होगा, सच में भाभी मानेगी.

सागर फुसफुसाते हुए बोलै

अनुज- अबे तू शांत रहेगा,

सागर- अरे यार मैं भाभी से इतना मिला भी नहीं हूँ, और अचानक तू ऐसे ले आया कुछ बता भी नहीं रहा है,

अनुज- अबे तू शांत रह देख जब कुछ हो तो जो मैं करूँ तू भी उसमे मेरा साथ देता रहियो तू अपने आप सब समझ जायेगा,

सागर- ठीक है,

उसने ठीक है तो बोल दिया था पर बेचारे की धड़कन इतनी तेज़ चल रही थी इसी असमंजस में की न जाने क्या होगा, कहीं भाभी ने उसकी वजह से मन कर दिया तो? या रूठ गयी तो, अनुज तो यहीं का है पर मैं तो बुआ के यहाँ आया हूँ, कुछ गलत हुआ तो मुझे ज़्यादा पड़ेगी, भाभी ने कोई बवाल मचा दिए तो? पर अगर भाभी के साथ करने को मिल जाये तो मज़ा भी आ जायेगा.. क्या मस्त माल हैं भाभी, मस्त भरा हुआ बदन कैसे हुए चुके, होंठ भी तो कितने रसीले हैं...

सागर यही सब सोच रहा था की इतने में भाभी कमरे में आई और वो तुरंत उठ कर बैठ गया,

प्रेमा- तुम लोग दूध पियोगे क्या?

अनुज- हाँ बिलकुल भाभी पर भैंस का नहीं,

प्रेमा- फिर किसका,

अनुज- खुद समझ जाओ,

सागर अनुज के मज़ाक से थोड़ा हैरान हुआ की वो भाभी से कैसा मज़ाक कर रहा है,

प्रेमा- समझ गयी और सागर भैया तुम?

सागर- मैं मैं भी वही,

प्रेमा- अरे तुम भी कुटिया का दूध पियोगे?

ये बोल वो हंसने लगी, साथ hi ये सुन दोनों की हंसी छूट पड़ी,

अनुज- क्या भाभी बेइज़्ज़ती करदी तुमने तो,

सागर- वो भी एक बॉल से दो विकेट उदा दिए,

प्रेमा- तुमने hi कहा था खुद समझो तो हमें लगा कुटिया का पियोगे,

अनुज- अब तो तुम्हारा पिएंगे,

इस पर सागर की आँखें बड़ी हो गयी,

प्रेमा- हट बदमाश.

अनुज- अरे मेरा मतलब है की तुम जो डौगी,

प्रेमा- बहुत बिगड़ रहे हो तुम.

ये कहके भाभी चली जाती हैं,

सागर- अबे तू मरवाएगा सेल क्या क्या बोले जा रहा था,

अनुज- अबे दर मत भाभी के साथ ऐसे मज़ाक चलते हैं.

सागर- भाभी गुस्सा हो गयी तो?

अनुज- तो कुटिया का दूध पीला देंगी.

सागर- अबे यार.

अनुज- अरे क्यों घबरा रहा है देख, डरेगा तो कुछ नहीं कर पायेगा खुल के रह मज़े ले बाकि मैं तो हूँ hi,

सागर- ठीक है.

इतने में भाभी दूध लेकर आ गयी जिसे दोनों ने पिया,

प्रेमा- अब सोना कैसे है,

अनुज- आँख बंद karke.hehehe

प्रेमा- छोटे देवर बोलते हो तुम, तुम्हे तो बताउंगी,

अनुज- अरे नहीं भाभी बस मज़ाक कर रहा था,

प्रेमा- हूँ भी मज़ाक hi कर रहे हैं लल्ला, और हमें अकेले दर लगता है तुम्हे पता hi है.

अनुज- हाँ भाभी पता है तभी तो हम आये हैं,

प्रेमा- तो एक काम करते हैं यही बिस्तर सबसे बड़ा है इसपर तीनो लोग आ भी जायेंगे आराम से.

सागर ये सुन मन hi मन खुश हुआ की एक hi बिस्तर पर तीनो सोयेंगे,

अनुज- हाँ भाभी पर तुम बीच में सोना मैं सागर से चिपक कर नहीं सोऊंगा,

प्रेमा- हाँ लल्ला हम hi बीच में सोयेंगे.

सागर तो मन hi मन अनुज के दिमाग को सलाम करने लगा क्या सही सोचा है भाभी हम दोनों के बीच में सोयेंगी, ये सोच सोचकर hi सागर के होश उड़ने लगते हैं,

खैर जल्दी hi एक हलकी बत्ती जला कर प्रेमा लेट जाती है और फिर दोनों उसके एक एक तरफ लेट जाते हैं, कुछ देर कमरे में ख़ामोशी होती है, प्रेमा आँखें बंद कर सोने लगती है वहीं सागर के लिए एक एक पल इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा होता है वो रह रह कर हलके से आँख खोल देखता है की अनुज कुछ कर रहा है की नहीं पर अनुज अभी शांत लेता था, खैर करीब 20 लम्बे मिनट्स के बाद सागर को अनुज कुछ हरकत करता हुआ महसूस होता है वो देखता है अनुज अपने हाथ भाभी के घुटनो पर चला रहा है, सागर हलके से सर उठाकर देखता है की भाभी की साड़ी घुटनो से ऊपर है और अनुज उनके कामुक गोर घुटनो को सहला रहा है, अनुज को ये करते देख सागर सर उठा कर अनुज से इशारे में पूछता है अनुज उसे आँख मार के इशारा करता है,

सागर को दर तो लगता है पर वो ऐसा मौका हाथ से जाने भी नहीं देना चाहता तो वो भी फिर से लेट कर और बिलकुल अनुज की तरह hi भाभी के घुटनो और पेअर पर हाथ सहलाने लगता है..





दोनों hi भाभी की तरह hi आँखें बंद करके उनके घुटनो को हलके हलके सहला रहे थे साथ hi साड़ी को भी ऊपर सरका देते, भाभी की बंद आँखें सागर को थोड़ी रहत दे रही थी. की भाभी सो रही हैं जितने मज़े लेने हैं ऐसे hi ले लो..

अनुज ने धीरे धीरे ऊपर बढ़ना शुरू किआ और हाथ पेट की और ले गया और पेट पर फिरने लगा, सागर भी अनुज की हरकतों ध्यान से देख रहा था और फिर खुद भी वैसे hi करता,

वो भी भाभी के पेट और कमर को सहलाने लगा, भाभी की चिकनी गोरी कमर को महसूस कर सागर मज़े से फूला नहीं समां रहा था, इधर अनुज की एक हरकत ने उसकी आँखें चौड़ी कर दी, अनुज ने भाभी का पल्लू पकड़ कर उनके सीने और पेट से हटा कर कमर के नीचे कर दिया, अब भाभी का नंगा पेट दोनों के सामने था जिसका फायदा उठाते हुए अनुज सिर्फ पेट hi नहीं बल्कि भाभी के ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियों को सहलाने लगा, पहले तो सागर को दर लगा पर वो भी हिम्मत करके अनुज की तरह hi भाभी के पेट के साथ साथ उनके सीने पर भी हाथ फिरने लगा,





उत्तेजना में उसका लुंड बिलकुल तन कर खड़ा हो चूका था जिसे वो जाने अनजाने भाभी के पैरों पर चुभा रहा था, वैसे तो भाभी जाग रही थी पर उनके लिए शांत लेटना मुश्किल हो रहा था पर उन्हें भी एक अलग तरह का मज़ा आ रहा था एक दबी हुई उत्तेजना मिल रही थी.. पर उनके लिए सोने का नाटक करना मुश्किल होता जा रहा था और उसी के चलते जब भाभी से नहीं सहा गया तो उन्होंने अनुज की और करवट लेली,

ऐसे पलटने से सागर दर गया और बिलकुल शांत होकर लेट गया, उसके लुंड पर भाभी के गोल चूतड़ सात गए जिनकी गर्मी से उसके बदन में एक अलग hi उत्तेजना होने लगी, वो कुछ देर यूँ hi लेता रहा, उसे कुछ हरकत महसूस तो हो रही थी पर इतनी ज़्यादा नहीं थी, तो कुछ पल बाद उसने हिम्मत करके हलके से सर उठाकर भाभी के कंधो के पार देखा तो चौंक गया, उसने देखा की अनुज ने अपने होंठों को भाभी के होंठों से मिलाया हुआ है और उन्हें चूस रहा है, ये देख तो सागर हैरान हो गया साथ hi जोश में आ गया और फिर खुद भी भाभी से पीछे से चिपक गया और उनके पेट पर हाथ फिरते हुए अपना लुंड उनके चूतड़ों में पीछे से चिपका दिया साथ hi अपने पेअर भी उनकी टैंगो के ऊपर चढाने लगा,





उसकी टैंगो के नीचे और भाभी को दोनों टैंगो के बीच अनुज का एक हाथ घुसा हुआ था जो भाभी की छूट से खेल रहा था जिसके बारे में सागर को अभी नहीं पता था, अनुज जी भर के भाभी के होंठों को चूस रहा था तो सागर पीछे से उनकी गर्दन और बाजू को चूम कर अपनी उत्तेजना बढ़ा रहा था,,

अनुज ने कुछ देर बाद भाभी के होंठों को छोड़ा और नीचे होते हुए उनकी गर्दन को और फिर सीने को चूमने लगा, भाभी के मुँह से न चाहते हुए भी सिसकियाँ निकल रही थी, जिन्हे सुन सागर जोश में आ रहा था ये सोचकर की भाभी दोनों की हरकतों से गरम हो रही है, वैसे भी औरत की गरम सिसकी तो अचे अचे मर्दों को उत्तेजित कर दे सागर तो जवानी से भरा हुआ लड़का था, अनुज ने नीचे और खिसकते हुए भाभी को सीधा लिटा दिया और खुद उनके पेट को चूमने चाटने लगा, अनुज की जीभ जैसे hi भाभी की नाभि में घुसी तो उनसे खुद को आह्ह्ह्हह भरने से रोका नहीं गया, और भाभी की आह्ह्ह्हह सुनकर सागर खुद को रोक नहीं पाया और थोड़ा उठ कर उसने भाभी के ऊपर आते हुए अपने होंठ भाभी के होंठों से लगा दिए और उनके होंठो को पागलों की तरह पूरी आक्रामकता से चूसने लगा, भाभी पहले तो थोड़ा हैरान हुई फिर वो भी उतनी hi गरम जोशी से उसका साथ देने लगी,





भाभी को उसका जोश ाचा लग रहा था, और सागर तो जन्नत में था भाभी के रसीले होंठो का रास पीते हुए, पर भाभी उससे एक कदम आगे थी उन्होंने तुरंत hi अपनी जीभ उसके होंठों में घुसा दी तो सागर और जोश में आते हुए उनकी जीभ को चूसने लगा फिर अपनी जीभ भाभी की जीभ से लड़ने लगा, भाभी को भी अपने दो देवरों के साथ बहुत मज़ा आ रहा था, अनुज उनकी नाभि के रास को पी रहा था तो सागर उनके होंठो के,

अनुज ने जल्दी hi जीभ भाभी की नाभि से निकली और फिर नीचे होकर उनके पैरों और जांघों को चूमता हुआ जल्दी hi उनकी छूट तक गया, जहाँ कच्ची को एक और सरका कर अनुज ने अपने होंठ भाभी की छूट से लगा दिए जिससे भाभी सिहर उठी, उनके होंठो के दोनों जोड़े चूसे जा रहे थे ऊपर वाला सागर चूस रहा था तो नीचे वाले अनुज, और भाभी की उत्तेजना बढ़ रही थी, अनुज ने कीच देर चूसने के बाद अपना मुँह भाभी की छूट से हटाया और उठ गया, ये देख सागर भी भाभी के होंठों से अलग हुआ तो भाभी उससे मुस्कुरा कर बोली- सागर भैया ऊपर के होंठ बहुत चूस लिए अब यही प्यार नीचे वाले होंठों को भी दिखाओ,

ये कह भाभी ने सागर को धक्का देकर पीछे लिटा दिया और खुद अपनी सारी उठाकर उसके मुँह पर अपनी छूट रख कर बैठ गयी सागर बेचारा उनकी साड़ी के नीचे छुप गया पर उसे कोई शिकायत नहीं थी क्यूंकि होंठों पर भाभी की रसीली छूट जो थी, वो जितना आता था उतना hi पूरे जोश में भाभी की छूट को चाटने लगा,

अनुज ने भाभी के पीछे और सागर के सर की और जगह ली और पीछे से हाथ बढाकर भाठी के ब्लाउज को खोलकर अलग फ़ेंक दिया अब भाभी सिर्फ ब्रा में थी जिन्हे बाहों में भर कर अनुज उन्हें पागलों की तरह चूम चाट रहा था, ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों को मसल रहा था, भाभी अपने चूतड़ों को सागर के मुँह पर कमर घुमा घुमा कर घिस रही थी

सागर भी हाथ नीचे से निकल कर भाभी की कमर मसलता तो कभी साड़ी के ऊपर से hi चूतड़ों को,





तीनो एक दुसरे से जुड़े हुए मज़े ले रहे थे खैर अनुज को अपने ममेरे भाई की चिंता हुई और बोलै- भाभी अब उठ जाओ कहीं बेचारे के दम न घुट जाये,

प्रेमा - लो भैया छोड़ दिया है तुम्हारे बेचारे भाई को.

भाभी ने सागर के ऊपर से उठते हुए कहा, उनके हटने के बाद देखा सागर का चेहरा भीगा हुआ था और चेहरे पर बड़ी मुस्कान थी,

सागर- हाय भाभी सही कहूं तो ऐसे दम भी घुट जाये तो कोई चिंता नहीं,

प्रेमा- अरे ऐसे कैसे दम घोंट दूँ देवर ग, अभी तो बहुत सेवा करवानी है तुमसे,

अनुज- सेवा तो करेंगे hi भाभी तुम्हारी इतनी प्यारी भाभी मिली हो क्यों सागर, चल तुझे मौका देते हैं भाभी को नंगा करने का,

सागर ये सुन खुश हो गया और भाभी की साड़ी को पाकर कर उतरने लगा, इधर अनुज ने भाभी का चेहरा अपनी और कर एक बार फिर से अपने होंठ भाभी के होंठों से मिला दिए, भाभी भी उसका साथ देते हुए होंठ चुसवाने लगी, सागर उन्हें देखते हुए भाभी को नंगा करने में लगा हुआ था, साड़ी के बाद पेट को चूमते हुए उसने पेटीकोट का नारा खोल दिया तो पेटीकोट नीचे सरक पड़ा उसके बाद अगले hi पल उसने भाभी की पंतय में हाथ दाल जल्दी से नीचे सरका दिया और ऊपर देखा तो पाया अनुज भाभी की जीभ को चूस रहा था.





सागर के सामने भाभी नीचे से पूरी नंगी थी उनकी रौशनी में उनके चूतड़ों को देख कर वो खुद को रोक नहीं पाया आउट अपना मुँह दोनों चूतड़ों के बीच घुसा कर चाटने लगा जैसे hi उसकी जीभ भाभी की गांड के छेड़ से टकराई तो भाभी ने अह्हह्ह्ह्ह करते हुए अनुज के होंठों को छोड़ दिया,

अनुज ने सागर को भाभी की गांड का स्वाद लेते देखा तो उसका बचा हुआ काम यानि भाभी के बदन पर जो ब्रा थी उसे उतर कर अलग फ़ेंक दिया, अब भाभी पूरी नंगी थी, अनुज ने पीछे होकर अपने कपडे उतरने शुरू कर दिए और खुद भी नंगा हो गया,

अनुज ने नंगे होकर भाभी को आगे खींचा तो सागर से दूर हो गयी,

अनुज- गांड में hi घुसा रहेगा,

प्रेमा- हाँ भैया अब छोटे सागर के भी तो दर्शन करवाओ हमें,

सागर ने शरमाते हुए अपने कपडे उतरे, कच्चे के अंदर उसका लुंड बिलकुल तना हुआ था जो कच्चा हटते hi स्प्रिंग जी तरह बहार आए गया,

प्रेमा- अरे वाह कितना प्यारा और मोटा लुंड है भैया,

सागर का लुंड अनुज से छोटा था पर किसी भी औरत को खुश करने के लिए काफी था,

भाभी ने झुककर सागर के लुंड को मुँह में भर लिए तो सागर अह्ह्ह्ह करते हुए जन्नत में उड़ने लगा,

उधर अनुज उसे मज़े करते देख बिस्तर पर बैठ लुंड को हिला रहा था,

भाभी ने कुछ पल सागर का लुंड चूसा फिर छोड़ा और बोली- अपने छोटे देवर का भी ख्याल रखना पड़ेगा,

और ये कह अनुज के पास जाकर उसकी और पीठ करके अनुज का लुंड अपनी गांड में लगा कर उसके ऊपर बैठ गयी

प्रेमा- आह्हः सागर भैया ने जब से छठा तबसे खुजा रही थी गांड अह्ह्ह्ह अब आराम मिलेगा,

भाभी अनुज के लुंड पर उछालते हुए बोली.

अनुज- आह्हः मज़ा आ गया भाभी,

सागर आँखें फाड़े खड़े होकर देख रहा था,

प्रेमा- तुम क्याःह्ह्ह दूर खड़े हो भैयाहः आओ इधर,

भाभी के बुलाने पर सागर पास गया तो भाभी ने उसे बिस्तर पर खड़ा कर लिया और अनुज से गांड मरवाते हुए सागर का लुंड चूसने लगी





अनुज नीचे से भाभी की गांड में धक्के लगाने लगा,

सागर- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह भाभी, अह्ह्ह बहुत माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है कितना गरम मुँह है तुम्हारा...

अनुज- अह्ह्ह्हह्हह अभी तूने गांड और छूट नहीं महसूस की भाई मेरे अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

सागर- वोऊइहह भी करूंगा अह्ह्ह्हह्हह,

दोनों भाभी को जुगलबंदी से छोड़ने लगे और भाभी भी पूरे जोश में थी, और सागर का लुंड गले तक लेकर चूस रही थी,

करीब 10 मिनट्स तक ऐसे hi चुदाई और चूसै के बाद सागर भाभी के मुँह की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने भाभी के मुँह मेइब मलाई छोड़ दी, क्यूंकि उसका भाभी या इस तरह की चुदाई में पहली बार था तो समझा जा सकता था अभी उसे काफी कुछ सीखना था वैसे चोदामपुर में सीखने की कोई कमी नहीं होने वाली थी पर अभी तो उसने मलाई भाभी को चखा दी थी, पर अछि बात ये थी की झड़ने के बाद ब्बि उसका लुंड पूरी तरह से तन कर खड़ा हुआ था,

भाभी ने ये देखा तो अनुज के लुंड से उठ गयी और बिस्तर पर लेटते हुए सागर को छोड़ने का इशारा किआ, अब सागर इतना तो खुल चूका था की उसे दोबारा कहने की ज़रूरत नहीं थी, उसने तुरंत भाभी के पैरों के बीच जगह ली और अपने लुंड को भाभी की छूट के द्वार पर रखा

और ओह्ह्ह्हह्ह भाभी कहता हुआ अंदर घुसा दिया,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह भाआआअआभीीीी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये तो जन्नत है,

अनुज- अब भाभी को दिखा अपने लुंड की ताकत भाई और उन्हें भी मज़े दे,

सागर ने अनुज की बात सुनी और भाभी की कमर को थाम दनादन छोड़ने लगा, भाभी अनुज की गॉड में सर रखकर उसका लुंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगी,





एक बार फिर से भाभी को दोनों देवरों के लुंड सुख पहुंचने लगे,

अनुज अनुभवी होने के नाते बीच बीच में सागर को कुछ गन और कलाएं भी सिखाता जा रहा था जिन्हे सागर भी पूरी लगन से सीख रहा था, और साथ hi साथ भाभी पर प्रयोग भी कर के देख रहा था, जैसे अनुज ने बताया की छोड़ते हुए छूट के दाने को छेड़ने से औरत पर क्या असर पड़ता है, और सागर ने वो भाभी पर करके भी देखा

और जिसका नतीजा ये हुआ की भाभी उसके लुंड पर झड़ने लगी, सागर ये शक्ति पाकर बहुत खुश हुआ पर उस ख़ुशी में वो अपना संयम खोने लगा और उसे लगा एक बार फिर से वो झाड़ जायेगा, ये बात अनुज ने भी देखि और उसे तुरंत लुंड निकल कर लम्बी सांसें लेकर शांत होने को कहते हुए, अनुज ने सागर को सम्भोग की एक और जादुई कला सीखा दी, जिससे वो अपना झड़ना थोड़े समय के लिए रोक सकता था,

सागर ख़ुशी से सब सीख रहा था और ये देख कर हैरान था की सच में उसने झड़ने से खुद को रोक लिया,

सागर की जगह अनुज ने भाभी के पैरों के बीच जगह ली, और अपना लुंड उनकी गांड में घुसा कर गांड मरने लगा, सागर अपना लुंड सहलाते हुए उन्हें देख रहा था, भाभी के सर के ऊपर hi वो अपने लुंड को हिला रहा था,

भाभी ने हाथ बढाकर उसकी गोलियों को सहलाते हुए कहा- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः बहुत रास भरा है इन गोलियाऊओह्ह्ह्ह में, अह्ह्ह अहहि पिलाया था फिर भी पूरी भरी हुई हैं.

भाभी अनुज से गांड मरवाते हुए सागर की गोलियां सहलाते हुए बोली.





सागर- भाभी तुम जैसी भाभी को देखकर गोलियां अपने आप भर जाती हैं,

अनुज- अरे वाह अह्ह्ह अब्ब्ब खुला तू, ऐसी hi मज़े ले खुल कर बात कर, अह्ह्ह.

प्रेमा- अरे चिंता ना करूऊ भैया आज सागर भैया को अचे से खोल कर hi भेजूंगी...

सागर- हाँ भाभी इसी लिए तुम्हारे पास आये हैं,

सागर ने आगे झुक कर अपना लुंड भाभी के मुँह पर थपथपाते हुए कहा,

सब के साथ और सहारे से अब वो भी खुल रहा था साथ hi उसका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा था जो उसकी हरकतों और बातों में साफ़ दिखाई दे रहा था,

अनुज- सही में भाई आज भाभी को दोनों भाई मिलकर खुश कर देते हैं,

वहीं सरजू के यहाँ तो महफ़िल सजी हुई थी, और सब कुछ शुरू भी हो चूका था लोग खुल कर मज़े ले रहे थे, मैं, सरजू, बिरजू जग्गू जैसे जवान लुंड थे, तो दीनू चाचा और राजपाल ताऊ जैसे अनुभवी भी, वहीं औरतों में मंजू तै, रज्जो चची और पद्मिनी तै जैसी खेली खाई छूटें थी, तो नीतू और लाडो जैसी कमसिन जवान छूटें भी थी,

खैर अभी जो घर के दृश्य थे वो कुछ इस प्रकार थे की मंजू तै पीठ के बल लेट कर सरजू की गोलियां चूसते हुए उसका लुंड सहला रही थी, वहीं उनके बगल में जग्गू ने रज्जो चची के गले मशीन अपना लुंड घुसा रखा था, दोनों hi एक दुसरे की माओं के साथ एक दुसरे के सामने मज़े कर रहे थे,





सरजू- ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म टीई अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi घुमाओ जीभ गोलियों पर,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह चची भी क्याह चूसती हैं यार अह्हह्ह्ह्ह पूरा लुंड चूस लेती हैं...

सरजू- ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म हॉँण्णन मम्मी को लुंड छूओसना बहुत पसंद है,

जग्गू- मेरी मम्मी कुआहहहहहह साडी गंडीई चीज़ें करना पसंद है, आह्ह्ह्ह अपनी गांड चटवा के देख बड़ी मस्त चाटती हैं,

सरजू ने जग्गू की बात सुनकर तुरंत अपनी गांड खोलकर मंजू तै के मुँह पर रख दी और तै ने भी तुरंत अपना काम किआ तो सरजू सिहरने लगा,

सरजू- ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म हॉँण्णन यार अह्हह्ह्ह्ह ताई सहीई में, बड़ा मज़ा आ रहा है,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह आएगा होई , अह्हह्ह्ह्ह तुम भी मज़े दो चची, ये कह कर जग्गू उनके गले में धक्का लगते हुए छोड़ने लगा,

दोनों एक दुसरे की माओं को एक दुसरे से बाँट कर पूरे मज़े ले रहे थे आपस में बात करते हुए, बेचारी माओं के मुँह बंद थे एक का लुंड से सक का गांड से.

इधर जग्गू के यहाँ भी चुदाई पूरे चरम पर रही और भाभी झुककर अनुज का लुंड चूस रही थी और सागर पीछे से झुककर उनकी गांड मार था,

इधर सरजू के यहाँ दुसरे बिस्तर पर दीनू चाचा ने पद्मिनी तै को झुका रखा था और उनकी मस्त छूट का आनंद ले रहे थे, वहीं उनके सामने राजपाल ताऊ लाडो को बिस्तर पर झुककर छोड़ रहे थे,





राजपाल ताऊ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दीनू यार तुंहारी बेटियां बहुत मस्त हैं, अह्ह्ह्हह्हह एक डैम जवानी से भरी हुई,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह भैया तुम्हारी hi बितीयआह्ह्ह्ह है, अह्हह्ह्ह्ह

राजपाल ताऊ- सोचता हूँ जग्गू की भी एक बहन होती तो कितना ाचा होता आह्ह्ह्ह,

राजपाल ताऊ नीतू को छोड़ते हुए बोले,

नीतू- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न ताऊजी ाचाहहहह होता hi वो भी अभी यहीं चुद रही होती बगल में अह्ह्ह,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह ये तो सही कहा बेटाःह्ह्ह, हहहह.

राजपाल ताऊ- हाहाहाहा सही बोलै तूने नीतू,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह संधान जी मज़ा तो आ रहा है न हमारे गाओं में??

दीनू चाचा ने पद्मिनी तै से पूछा,

पद्मिनी तै- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह समधी जी पूछो मत इतना माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कभी ज़िन्दगी में नहीं आया अह्ह्ह इतना तो पूरी ज़िन्दगी में नहीं चूड़ी में, जितना यहां कुछ दिनों में चुद गयी, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ज़िन्दगी बन गयी मेरी छूट और गांड की तो...

राजपाल ताऊ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब्ब्ब्ब समझे दीनू संधान चोदामपुर गाओं लायक hi हैं, ऐसी औरत और कहीं होती तो बेकार hi रह जाती,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह ये तो सही कहा भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी गरम संधान की असली कदर तो बस हमें hi है..

इसी तरह बात चीत करते हुए चुदाई चल रही थी, कमरे के दरवाज़े की और मैं और बिरजू खड़े थे और लाडो बारो बारी हम दोनों के लुंड चूस रही थी,

जग्गू के घर में प्रेमा भाभी की दोहरी चुदाई चल रही थी, अनुज नीचे से उनकी छूट छोड़ रहा था तो सागर पीछे से भाभी की कासी हुई गांड मार रहा रहा,

भाभी के मुँह से लगातार अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह की सिसकियाँ निकक रही थी वहीं अनुज सागर को सीखा रहा था की कैसे दोहरी चुदाई में दुसरे के साथ ले बनाकर चुदाई करते हैं और सागर बहुत जल्दी सीख भी रहा था,

बापिस सरजू के यहाँ माहौल थोड़ा बदल चूका था, रज्जो चची राजपाल ताऊ का लुंड चूस चूस कर गीला कर रही यही, उन्ही के बगल में जग्गू नीतू को लिटा कर छोड़ रहा था, दोनों माँ बेटी, अगल बगल में बाप बेटे की सेवा कर रही थी, वहीं उनके पीछे दुसरे बिस्तर पर मंजू तै दीनू चाचा का लुंड चूस रही थी, और मैं उनके बगल में लाडो को झुका कर छोड़ रहा था,





मेरे पीछे की और सरजू और बिरजू मिल कर पद्मिनी तै की दोहरी चुदाई कर रहे थे,.

रज्जो चची राजपाल ताऊ का लुंड को खुद चूसती फिर मुँह से निकल कर अपनी बेटी के मुँह में घुसा देती, जो एक साथ बाप बेटे के लुंड का मज़ा लेती, जग्गू लगातार नीतू की छूट में धक्के मार रहा था, इसी बीच उसने नीतू की छूट से लुंड निकला और घूम कर रज्जो चची के पीछे आ गया और अपना लुंड पीछे से उनकी गांड में घुसा दिया, नीतू ने जब ये देखा तो वो उठ कर अपनी छूट राजपाल ताऊ के मुँह पर रख कर बैठ गयी, राजपाल ताऊ का लुंड अभी भी रज्जो चची के मुँह में था, जो बेटे से गांड मरवाते हुए बाप का लुंड चूस रही थी, राजपाल ताऊ नीतू की छूट चाटने लगे,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह नीतू तेरी मम्मी की गांड से तो प्यार हो गया हाय,

नीतू- अभी तुम मेरी गांड मरोगे तो भी ये hi बोलोगे,

नीतू ने हँसते हुए कहा,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह अब जो सच है वो तो बोलूंगा hi,

दोनों के बीच हांड़ी ठिठोली चल रही थी, वहीं रज्जो चची और राजपाल ताऊ का मुँह बंद था,

जल्दी hi रज्जो चची ने ताऊ का लुंड मुँह से निकल दिया और फिर जग्गू ने रज्जो चची को अपने पापा के लुंड पर बिठा दिया और खुद पीछे से उनकी गांड में लुंड घुसा दिया और दोनों बाप बेटे मिलकर रज्जो चची की दोहरी चुदाई करने लगे, नीतू भी राजपाल ताऊ के चेहरे से हैट गयी और अपनी मम्मी को खुल कर दोहरी चुदाई करने की जगह दी,

बाप बेटे मिलकर फिर रज्जो चची की छूट और गांड का आनंद उठाने लगे वहीं रज्जो चची भी पूरा मज़ा ले रही थी दो लुंड का,





रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह भाईसाहब ऐसे hi, अह्हह्ह्ह्ह क्या ले बनाते हो अपने बेटे के साथ मिलकररर,

राजपाल ताऊ- अह्हह्ह्ह्ह रज्जो बहु, ले तो बाप बेटे की बन hi जाती है अगर गांड तुम्हारे जैसी हो, अह्हह्ह्ह्ह.

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सही कहा पापाः ऐसी गांड हीी मन करता है छोड़ते रहो,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह तो छोड़ता रह किसने रोका है अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दे देता है तू तुह.

बाप बेटे मिलकर जहाँ माँ को छोड़ रहे थे तो बेटी उठ कर दूसरी तरफ गयी जहाँ उसके पापा मंजू तै की गांड मरने में लगे हुए थे वहीं उनके बगल ने मैं पद्मिनी तै की गांड मार रहा था, नीतू ने पल भर दोनों को देखा और फिर अपने पापा और मंजू तै के आगे टंगे फैला कर लेट गयी और अपनी छूट मंजू तै के मुँह के सामने कर दी मंजू तै भी तुरंत अपना मुँह घुसा कर उसकी छूट चाटने लगी नीतू भी मंजू तै के सर को सहलाते हुए अपनी छूट चटवाने लगी, जैसे नीतू की मम्मी बाप और बेटे के बीच में फांसी हुई थी यहाँ मंजू तै बाप और बेटी के बीच में थी नीतू ने छूट चतवते हुए अगले बिस्तर पर देख हैरान रह गयी क्यूंकि उसकी छोटी बहन लाडो को उसके दोनों भाई मिलकर बुरी तरह छोड़ रहे थे, पर लाडो भी अपने दोनों भाइयों से खुलकर पूरी हिम्मत से छुड़वा रही थी, और अपनी कमर पीछे मार मार कर दोनों भाइयों के लुंड को अपनी छूट और गांड में ले रही थी,





नीतू अपनी बहन का रैंड पैन देख हंस रही थी, लाडो की ये आदत थी वो खुल कर बहुत तगड़ी वाली चुदाई कराती थी फिर झड़ने के बाद थक कर सो जाती थी, आअज भी वही हाल था खुल कर चुदाई करवा रही थी ज़ोरदार, और उसके भाई भी ये सनझ चुके थे इसलिए पूरी लगन से उसे छोड़ रहे थे,

नीतू ने लाडो से चेहरा हटा कर सामने देखा तो पाया की उसके पापा और मैं जगह बदल रहे थे अब मैंने मंजू तै की गांड में लुंड घुसाया तो दीनू चाचा ने पद्मिनी तै की, और फिर से दोनों मस्त गदराई गांड मरने लगे,

नीतू को दुसरे बिस्तर से अपनी मम्मी की आहें सुनाई दे रही थी जिनसे अंदाज़ा हो रहा था की जग्गू और राजपाल ताऊ कितने अचे से उसकी मम्मी की दोहरी चुदाई कर रहे थे, इसी बीच उसका ध्यान एक चीख से लाडो पर गया जो की उसकी उम्मीद के अनुसार hi थरथराते हुए झाड़ रही थी, और झड़ते हुए बिलकुल निढाल हो गयी तो उसके भाइयो ने उसे आराम से एक और लिटा दिया, उसे लिटा hi पाए थे की दूसरी तरफ रज्जो चची भी चीखते हुए झड़ने लगी, राजपाल ताऊ और जग्गू ने उन्हें ऐसा छोड़ा की जल्दी hi उत्तेजना के शिखर पर पहुंचा दिया, नीतू ने जैसे hi ये देखा वो फुर्ती में उठ कर दोनों की और भाग कर गयी और अपनी मम्मी को बगल में लिटा कर खुद उनकी जगह आ गयी तो जग्गू ने उसे तुरंत पलट कर लिटा दिया और उसकी टैंगो को मोड़ दिया जिससे उसकी गांड निकल कर ऊपर उठ जाये और अपना लुंड तुरंत उसकी गांड में घुसा दिया,

नीतू ने इतनी आक्रामकता की उम्मीद नहीं की थी तो लुंड घुसते hi वो अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म अह्हह्ह्ह्ह करके सीसीएनए लगी, पर ज़्यादा देर नहीं कर पाई क्यूंकि राजपाल ताऊ ने उसके ऊपर आकर अपना लुंड उसके मुँह में घुसा दिया, और उसका सिसकना बंद कर दिया, दोनों बाप बेटे मिलकर नीतू की हालत ख़राब करने लगे,





नीतू दोनों के बीच में गुड़िया सी फांसी हुई थी जिसे दोनों बाप और बीटा मिलकर उससे खेल रहे थे,

इधर सरजू और बिरजू भी लाडो के पास से हटकर मेरे और अपने पापा के पास आ गए,

और फिर सरजू ने पद्मिनी तै तो बिरजू ने मंजू तै के मुँह में लुंड घुसा दिया और अब दोनों को दोनों और से लुंड से बजने लगे,

लाडो और रज्जो चची तो सुस्ता रही थी, इसलिए लुंड ज़्यादा थे छूटें काम तो हमने मिलकर थोड़ा सा फेरबदल किआ और अब सब खुश थे,

क्यूंकि मंजू तै और पद्मिनी तै दोनों एक दुसरे के बगल में थी और इतना बगल में की एक दुसरे के होंठों को भी बार बार चूस रही थी, वहीं दोनों hi एक साथ दोहरी चुदाई का आनंद ले रही थी,

मैं और बिरजू मिलकर मंजू तै को छोड़ रहे थे जिसमे मेरा लुंड उनकी छूट में था तो बिरजू का गांड में, हमसर बगल में hi दीनू चाचा अपने बड़े बेटे के साथ मिलकर पद्मिनी तै की दोहरी चुदाई कर रहे थे, खुद गांड मार रहे थे सरजू उनकी छूट का आनंद उठा रहा था, दोनों गदराई औरतें अगल बगल में तगड़ी दोहरी चुदाई करवा रही थी,





लाडो और रज्जो चची कमरे में चल रही तीन जगह दोहरी चुदाई का आनंद ले रहे थे, हालाँकि नीतू की छूट और गांड न सही पर गांड और मुँह में तो लुंड अंदर बहार हो hi रहा था, पर ये भी कुछ देर hi रहा क्यूंकि कुछ पल बाद नीतू की छूट में राजपाल ताऊ का लुंड घुस चूका था और उसकी भी दोहरी चुदाई होने लगी,

दोहरी चुदाई से औरत हो या मर्द दोनों को एक अलग उत्तेजना और आनंद मिलता है, भले hi औरतों को थोड़ा ज़्यादा होता हो पर मर्द को भी बहुत होता है, दोहरी चुदाई का नतीजा जल्दी ये हुआ की नीतू जल्दी hi झड़ने लगी पर अपने साथ साथ साथ वो राजपाल ताऊ और जग्गू को भी ले गयी और दोनों ने मिलकर उसकी छूट और गांड को अपने रास से भर दिया और जैसे hi उन्होंने उसकी गांड और चूर से लुंड निकला अपने बगल में लाडो को देख हैरान हो गए जो थोड़ा आराम कर अपनी बहन की गांड और छूट चाटने आ गयी थी और उसकी गांड में जीभ डालकर चाटने लगी,

अब कहते हैं न खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है तो कुछ वैसा hi हुआ और पद्मिनी तै भी झड़ने लगी, और उनके साथ में दीनू चाचा और सरजू भी,

इधर मैंने और बिरजू ने मंजू ताज को भी अपने लुंड के ज़ोर पर झाड़ा दिया था, पर हम दोनों नहीं झड़े थे, तो मैंने तै की गांड से लुंड निकला और सीधा लाडो के पास गया जो थोड़ी आराम कर चुकी थी और मैंने उसे घोड़ी बनाकर उसकी गांड में लुंड घुसा दिया,

उधर बिरजू भी अपनी बहन के आगे आ गया और उसके सामने बैठ गया लाडो भी उसका लुंड मुँह में भर कर चूसने लगी, थोड़ा सुस्ताने के बाद नीतू उठी और नेरे पीछे आकर मुझे थोड़ा लाडो के ऊपर और झुका दिया और पीछे से मेरे चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड चाटने लगी, उसकी जीभ अपणु गांड पर महसूस कर मैं सिहरने लगा, उधर बिरजू भी मेरी देखा देखि अपनी गांड को लाडो से चटवाने लगा,





नीतू की जीभ ने कुछ ौसा कमल दिखाया की कुछ hi पलोब में मेरे लुंड ने रास की धार लाडो की गांड में छोड़ दी और मैंने अपना सारा रास लाडो की गांड में भर दिया और फिर लुंड निकल कर एक और बैठ गया, वहीं नीतू अपनी बहन को की गांड से मेरा रास चाटने लगी, इधर बिरजू से भी गांड चटाई बर्दाश्त नहीं हुई और उसने अपना रास लाडो में मुँह में छोड़ दिया जिसे लाडो ने मुँह में भर कर अपनी बहन और मम्मी के साथ बांटा, चुदाई का एक दौर पूरा हो चूका था, पर रात अभी जवान थी, सबकी इच्छा अनुसार ये तय हुआ की अपनी पसंद के साथी के साथ हम लोग अपना अपना बिस्तर पकड़ते हैं और छोड़ते हुए सो जायेंगे,

राजपाल ताऊ ने रज्जो चची को चुना और दीनू चाचा ने मंजू तै को, पद्मिनी को सरजू बिरजू लेकर चल दिए, तो लाडो ने कहा वो मेरे साथ सोयेगी, वहीं नीतू और जग्गू साथ सोये, एक बार और अपने अपने साथी या साथियों के साथ चुदाई का दौर चला और फिर सब सो गए,



जारी रहेगी...
 
राजपाल ताऊ ने रज्जो चची को चुना और दीनू चाचा ने मंजू तै को, पद्मिनी को सरजू बिरजू लेकर चल दिए, तो लाडो ने कहा वो मेरे साथ सोयेगी, वहीं नीतू और जग्गू साथ सोये, एक बार और अपने अपने साथी या साथियों के साथ चुदाई का दौर चला और फिर सब सो गए,

अपडेट 220


वहीं राजन चाचा के घर पर भी रात काफी रंगीन रही थी, जब सब लोग पहुँच गए तो राजन चाचा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था ममी और किरण को देख देख कर, पल्ली भी किरण के शामिल होने से बहुत खुश नज़र आ रही थी, और तुरंत hi उस पर चढ़कर उसे चूमने लगी, खैर जल्दी hi सब लोग कमरे के अंदर थे,

राजन- अरे यार हम बड़े खुश हैं, गुंजन तुम्हे छोड़ने की तमन्ना आज पूरी हो जाएगी,

चाचा ने मामी को बाहों में भरते हुए कहा

किरण- और फूफाजी मुझे,

राजन- बिटिया तुझे छोड़ कर तो हम धन्य हो जायेंगे, अह्ह्ह्हह, जब तू 6 महीने की थी तब तुझे गॉड में लेकर खिलाया है तो आज फिर से गॉड में लेकर खिलाएंगे,

मामी- दोनों माँ बेटी खेलेंगी खूब तुम्हारी गॉड में जीजा,

मामी अपने बदन को मसलवटे हुए बोली, चाचा ने तुरंत hi मामी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया, साथ hi उनका ब्लाउज भी खोलने लगे, जल्दी hi मामी का ब्लाउज और ब्रा दोनों उनके बदन से अपग थी और वो ऊपर से नंगी होकर चाचा की बाहों में थी जो पीछे से हाथ दाल कर उनकी चूचियों को मसलते हुए मज़ा ले रहे थे,





मामी उनकी बाहों में कराहते हुए पंत के ऊपर से चाचा जा लुंड सहला रही थी

उनकी तरह hi बाकी लोग भी अपने अपने काम में लग गए, मौसा ने ममता चची को नंगा कर दिया था और उनकी चूचियां चूस रहे थे, वहीं बगल में पल्ली और किरण का एक कामुक चुम्बन चल रहा था जिसे देख देख पापा अपना लुंड सहला रहे थे,

पल्ली किरण के कपडे उतर रही थी उसके होंठो को चूसते हुए और अभी दोनों सिर्फ ब्रा पंतय में थी, कुछ पल बाद पापा उठे और दोनों के बदन से एक करके सरे कपडे उतर दिए, पर वो दोनों तो जैसे एक दुसरे की भूखी थी, और अभी भी एक दुसरे को चूम चाट रही थी, पर पापा से ज़्यादा रुका नहीं जा रहा था तो उन्होंने जल्दी hi पल्ली के पीछे जगह ली और अपना लुंड उसकी छूट में पीछे से घुसा दिया और छोड़ने लगे, पल्ली के मुँह से एक पल को सिसकी निकली पर वो किरण के मुँह में घुट गयी, पापा पल्ली को दनादन छोड़ने लगे साथ hi उन्होंने तीनो को थोड़ा आराम देने के लिए खुद बिस्तर पर बैठ गए और पल्ली को नीचे से छोड़ने लगे, वहीं किरण भी पल्ली के होंठों को चूमना छोड़ अब उसे छोड़ता देख उसके नंगे बदन से खेलने लगी





कभी उसकी चुकी को हाथ से सहलाती तो कभी मुँह में लेकर चूसती, साथ hi अपने फूफाजी के लुंड को अपनी सहेली की छूट में आता जाता देख रही थी,

किरण कुछ पल बाद दोनों के पैरों के बीच आ गयी और झुककर पल्ली की चूचियां चूसने लगी, साथ hi हाथ नीचे लेजाकर उसकी छूट के दाने को भी रगड़ने लगी जिससे पल्ली का मज़ा दोगुना हो गया, किरण उसकी चूचियों को पागलो की तरह चूसने लगी और कुछ पल चूसने के बाद नीचे की और बढ़ने लगी और पल्ली के पेट और नाभि में अचे से जीभ डालकर चूसने लगी जिससे पल्ली और सीसीएनए लगी, नाभि के बाद और नीचे आते हुए, वो अपनी जीभ पल्ली के छूट के दाने पर चलने लगी जिससे पल्ली तो मज़ा से पागल होने लगी, उसकी जीभ के ठीक नीचे पापा का लुंड उसकी छूट में अंदर बहार हो रहा था, किरण ने अपनी जीभ थोड़ी नीचे की और जहाँ लुंड अंदर बहार हो रहा था वहां लगा दी, उसे ये करके ाचा लगा क्यूंकि एक साथ वो अपने फूफाजी और पल्ली दोनों को चाट प् रही थी, तभी पल्ली की छूट से पापा का लुंड निकल गया जिसे किरण ने तुरंत अपने मुँह में भर लिए,

और कुछ पल चूस कर फिर से पल्ली की छूट में घुसा दिया, और फिर खुद थोड़ा पापा की गोलियों को मुँह में भर कर चूसने लगी, इससे पापा के मुँह से भी आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,

दूसरी और जहाँ बेटी पापा के ाँद चाट रही थी, वहीं माँ अब पूरी नंगी होकर राजन चाचा के ऊपर बैठी थी और राजन चाचा नीचे से धक्के लगाकर दनादन मामी को छोड़ रहे थे,





मामी भी एक और नया लुंड पाकर खुश थी और चोदामपुर के रंग में रंग रही थी,

राजन- आह्हः गुंजन रानी अह्ह्ह्ह जय बदन पाया है तुमने अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या छूट है.

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह तुंहारा लुंड भी बहुत मस्त है अह्हह्हं ऐसे हीई,

राजन- आह्हः तुम्हारे जैसे बदन वाली औरत बनती है चुदाई के लिए है अह्हह्हं गदराया बदन जब तक मसल कर छोड़ा न जाये, खिलता नहीं,

मामी- तुओंआहह मसालूओ न जीजाः अब्ब्ब्ब चोदामपुर में आ गयी हूँ तो अचे से मसलवा कर hi रहूंग़ीीी,

राजन- बिलकुल अब सलहज की सेवाआ ना करें हम ऐसाःठ्ठ कैसी हो सक्ताः हीी..

राजन चाचा पीछे से मामी की कमर थाम कर उन्हें छोड़ते हुए बोले,

वहीं उनकी पत्नी यानि ममता चची अभी बोलने की स्तिथि में नहीं थी क्यूंकि मौसा अभी कुछ आक्रामक होकर चची का मुँह छोड़ रहे थे और चची के मुँह से गगगगुणु गूऊ की आवाज़ आ रही थी,





मौसा लगातार चची का मुँह छोड़ रहे थे और चची के मुँह से थूक बहार टपक रहा था hi उनकी बड़ी बड़ी चूचियों पर गिर कर उन्हें और चिकना कर रहा था साथ hi कामुक भी,

मौसा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ले साली रांड अह्ह्ह्हह्हह चुस्स्सस्स अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह....

चची तो बस uhmmmhaaaaaaaaaaaaa की आवाज़ के सिवा कुछ नहीं निकल पा रही थी,

पापा के लुंड पर कूदते हुए पल्ली भी पूरे जोश में आ रही थी, पर कुछ देर बाद वो पापा के लुंड से उठ गयी और बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ताऊजी अब किरण को छोड़ो न मुझे इसे चुड़ते देखना है,

अब भला पापा को इसमें क्या दिक्कत हो सकती थी,

पापा- हम्म्म बिलकुल अहह किरण बिटिया आजा,

पापा के कहते hi किरण उनके बताये अनुसार ुंक्व बगल में आकर लेट गयी,

पल्ली ने झुककर पापा का लुंड पकड़ कर किरण की छूट पर लगाया और पापा ने धक्का देकर घुसा दिया, और पापा उसकी छूट ने लुंड चलने लगे..

किरण- uhiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुहममममम

पल्ली- कैसा लग रहा है मेरी जान,

पल्ली किरण की छूट के दाने को सहलाते हुए बोली.

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह बहुत माज़आह्ह्ह्ह मेरिइइइइ जाननं,

पापा- अह्ह्ह्हह्हह हमें तो ऐसाःठ्ठ लग रहा है जैसी आज तुम दोनों हमारी जान निचोड़ लोगी,

पल्ली- अरे नहीं ताऊजी जान क्यों निचोड़ेंगे, तुम्हारा रास निचोड़ेंगे तुम्हारी गोलियों से,

पल्ली किरण की छूट को सहलाते हुए उसे पापा के लुंड से किरण को चुड़ते हुए देख कर बोली...





किरण- ओह्ह्ह्हह्ह फूफाजी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितनी गहराई तक महसूस हो रहा है तुम्हारा लुंड,

पापा- अह्ह्ह्हह्हह हाँ क्यूंकि तेरी छूट इतनी छोटी और प्याहरी सी है न बिटिया,

पल्ली- देख किरण ताऊजी का लुंड यहाँ तक आ रहा है तेरे,

पल्ली किरण के नाभि के पास हाथ से उसको बताते हुए बोली, और फिर झुक कर किरण की नाभि में जीभ दाल कर चूसने लगी,

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्याःह्ह्ह कर रहीइइइइइइ haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh,

पापा- मज़ा आए रहा है बिटिया

किरण- हाँ फूफाजी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत्तट्ठ,

दूसरी और मौसा ने भी चची को अपने ऊपर बिठा लिए था और उन्हें अपने ऊपर लिटा कर छोड़ रहे थे, चची भी कमर घुमा घुमाकर अपने चूतड़ों को मौसा के लुंड पर पटकते हुए चुद रही थी,

ममता- हाय भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ते रहो जीवन भर ,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह भाभी हमारा बस चले तोहह तुम्हे लुंड पर टंगे hi रखें,

ये बात दूसरी और से राजन चाचा ने सुनी और बोले- शैलेश बाबू, चुदाई तक ठीक है पर तुन hi टंगे रखोगे तो हमारा क्या अह्ह्ह्हह होगा.

चाचा मामी को बिस्तर के किनारे झुककर छोड़ते हुए बोले,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारे लिए तुम्हारिई सालिई अह्ह्ह्ह है ताऊ तुम उसे टांग लेना..

ममता- अह्हह्ह्ह्ह अभी आते हैं मूट आए रहा है,

ममता चची मौसा के लुंड से उठाते हुए बोली,

मौसा- ठीक है भाभी,

चची बहार चली गई तो मौसा ने उठकर पल्ली को पकड़ा और उसे राजन चाचा और मामी के सामने बिलकुल उन्ही जी तरह झुककर छोड़ने लगे,

पल्ली के चेहरे के सामने hi मामी की बड़ी बड़ी चूचियां उछाल उछाल काट उसके चेहरे पर लगने लगी तो पल्ली भी उन्हें हाथों से उछालते हुए छोड़ने लगे,

राजन चाचा मामी को छोड़ते हुए अपनी बेटी को चुड़ते हुए देख रहे थे, मामी और पल्ली दोनों hi अभी काफी उत्तेजित होकर चुद रही थी और दोनों मर्द भी उतने hi उत्तेजित नज़र आ रहे थे,





पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पापाहहहहहहह ऐसी hi और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ छोड़ू मामी को देखो कैसे चूचियां उछाल रही हैं...

राजन- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन बितीयआह्ह्ह्ह,

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह मौसा आए तुम भीई अह्ह्ह्हह्हह छोड़ते राहूऊ...

मामी- अह्हह्ह्ह्ह पल्ली तेरी पापाहहहहहहह बहुत टीज़ज़्ज़ज़्ज़ छोड़ रहे हैं अह्हह्ह्ह्ह.

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह मामी तुम बहुत्तत्त सुन्दर लगतीयी होओओओ चुड़ते हुयीीाहहह.

मामी- सुन्दर तो तू ाः है बिटियाः,

मामी ने बोलने के बाद चेहरा आगे कर पल्ली के होंठों को चूसने लगी,

मौसा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अरे तुम दोनों होई बहुत सूंदर हो अह्ह्ह्ब जिसे मिल जाओ उसके मज़े hi मज़े हैं.

पल्ली- अह्ह्ह्ह जैसी अभी पापा और तुम्हारे हैं मौसा,

मौसा- बिलकुल सही,

दूसरी और किरण ने चुड़ते हुए hi पापा को रोका और उठ गयी और पलट कर उनका लुंड चूसने लगी,

इधर ममता चची पेशाब वगेरा करके जब कमरे में घुसी तो पहले चाचा और ममी साथ hi पल्ली और मौसा को देखा फिर बगल में किरण और पापा को देखा जो की किरण के पीछे लेट कर उसे छोड़ रहे थे पर चची का ध्यान गया और फिर हैरान रह गयी क्यूंकि अभी पापा का लुंड किरण की छूट नहीं बल्कि गांड से अंदर बहार हो रहा था, पापा पीछे से लम्बे लम्बे धक्कों से किरण की गांड मार रहे थे,





किरण खुद की छूट को अपनी उँगलियों से छेड़ते हुए अपनी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी,

चची ने ये देखा तो वहीं बैठ गयी और बोली- अरे वाह भाई साब तुमने तो किरण की गांड भी खोल दी,

ये सुन कर सबका ध्यान उनकी बात और फिर किरण की गांड पर गया जिसमे से पापा का लुंड अंदर बहार होता हुआ सबने हैरानी से देखा,

खासकर मामी जो की अपनी बिटिया के लिए थोड़ी चिंतित हुई,

पापा- अरे भाई हमने नहीं खोलिई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पहले से hi खुली हुई है, आह्हः इसने खुद hi हमारा लुंड गीला कर अपनी गांड पर टीकाःह्ह्ह दिया तो हम भी खुद को रोक नहीं पाए,

मामी- किरण तूने इससे पहले भी गांड मरवाई है का बित्याहहहह.

किरण- हैं मम्मी अह्ह्ह्ह कर्मा भैयाहः से पिछली रात hi,

ममता- लो गुंजन ये लड़की तो सबसे आएगी है,

चची हँसते हुए बोली,

मामी- अह्ह्ह जीजी बेटीइ तो होती hi माँ से दो कदम आगे है,

पल्ली- मेरीए सहेली मेरी तरह hi है, चुदड़ो,

किरण- अह्ह्ह्ह बिलकुल सहीई...

मौसा- वैसे ये बिलकुल सही गाओं में आए है फिर तो यहां..

इस पर सब हंसने लगे, वही पापा ने किरण की गांड मारनी जारी राखी, इधर ये बात चाचा ने जब सुनी तो उन्होंने भी अपना लुंड मामी की छूट से निकल कर उनकी गांड में घुसा दिया और बोले- अब बेटी गांड मरए और माँ नहीं तो अव्हा नहीं लगता न,

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन जान रही हूँ तुम्हारी नज़र कब से ूसीई छेडपर थी,

राजन- आह्हः गुंजन है hi इतना प्यारा अह्ह्ह्ह और गरम भी कितना है,

चाचा ममी की कमर थाम कर गांड मरने लगे इधर सबकी देखा देखि मौसा ने भी पल्ली की गांड में लुंड घुसा दिया.....

इधर ममता चची ने किरण के हाथ को हटाकर अपना मुँह उसकी छूट पर रख दिया हुए चाटने लगी, किरण तो दोहरे मज़े से सिहरने लगी, पापा पीछे से उसकी गांड मार रहे थे और छूट में चची की उंगली बस किरण ज़्यादा नहीं सह पाई और झड़ने लगी, उसके झड़ने के बाद पापा ने उसकी गांड से लुंड निकला तो चची ने भी उसकी छूट का रास सारा चाट लिए, पापा उठे और फिर उन्होंने चची को पकड़ा और उन्हें मामी और पल्ली के बगल में ले जाकर घोड़ी बना दिया और फिर उनकी भी पीछे से गांड मरने लगे, किरण दुसरे बिस्तर पर पड़ी ये सब देख कर गरम हो रही थी, और तीन जोड़ो की गांड मरै देखते हुए अपनी छूट रगड़ रही थी





पर ये सामूहिक गांड चुदाई का खेल ज़्यादा देर तक नहीं चल पाया क्यूंकि मामी और राजन चाचा दोनों hi चुदाई की गर्मी को ज़्यादा नहीं सह पाए और साथ साथ झाड़ गए, उनके झड़ने के बाद माँ बेटी और पापा और मौसा बचे थे, इसलिए चची ने इच्छा जताई की उन्हें दोहरी चुदाई करवानी है तो हुआ भी वैसा hi, पापा और मौसा ने मिलकर चची के दोनों छेदों को भेदा चची के झड़ने के बाद पल्ली ने छलांग लगाई और अपनी मम्मी की जगह ली और फिर उसे भी पापा और मौसा ने एक साथ जी भर छोड़ा पर पल्ली के झड़ते हुए वो खुद को नहीं रोक पाए और खुद भी उसके छेदों को भर दिया,

अब कुछ देर का आराम हुआ, क्यूंकि झड़ने के बाद सबको hi थोड़ा आराम चाहिए था, किरण बिलकुल फ्रेश हो चुकी थी तो वो उठी और उठ कर राजन चाचा के पैरों के बीच बैठ कर उनका लुंड चूसने लगी,

राजन चाचा भी उसके सर पर हाथ फिरते हुए प्यार से बोले- अह्ह्ह मेरी गुड़िया ऐसे hi अह्ह्ह्ह कितनी ाप्यारी है तू.

उधर पल्ली भी उठ कर उनके पास आ गयी और वो झुक कर किरण की छूट चाटने लगी, बाप बेटी के बीच किरण सिहरने लगी,

दूसरी और ममता चची ने मामी को अपने ऊपर बिठा लिए और उनकी छूट का स्वाद लेने लगी, मामी भी चची की जीभ अपनी छूट में घुसकर मस्त हो गयी,

अब पापा और मौसा भी कितना इंतज़ार करते उन्होंने भी आगे बढ़ते हुए अपने अपने लुंड खड़े होकर मामी के चेहरे के सामने कर दिए, मामी जो चची की छूट चटाई से गरम हो चुकी थी वो लुंड देखते hi उन पर टूट पड़ी और दोनों को एक साथ मुँह में भरने की कोशिश करने लगी





मौसा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह गुंजन ज़्यादा hi गरम हो रही हो,

मामी- अह्ह्ह्ह uhmmmhaaaaaaaaaaaaa जीजा बहुत मज़ा दे रही है जीजी, उसी का नतीजा है.

मामी ने लुंड निकलते हुए कहा,

पापा- अह्ह्ह्हह्हह बहु फिर और अच्छे से चूसले,

ये कहते हुए पापा ने अपना लुंड मामी के गले में उतार दिया और उनका मुँह छोड़ने लगे कुछ झटके मार के उन्होंने लुंड निकला तो मौसा ने भी यही किआ, जल्दी hi मामी की हालत ख़राब होने लगी,

आँखों से आंसू निकलने लगे और मुँह से थूक टपक कर चची के ऊपर गिर रहा था पर पापा और मौसा उन पर कोई रहम नहीं दिखा रहे थे,

दूसरी और किरण चाचा ने अपने लुंड पर बिठा लिए और पल्ली अपनी सहेली को अपने पापा के लुंड पर उछलने में मदद कर रही थी, पल्ली किरण के चूतड़ों को थपथपाते हुए मसल रही थी, वहीं चाचा नीचे से किरण की छूट में धक्के लगा रहे थे,





पल्ली- अह्ह्ह्ह मेरी घोड़ी ऐसे hi पटक अपने चूतड़ मेरे पापा के लौड़े पर,

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हांण पटक तो रही हूँ कुटियाःह अह्ह्ह्ह

किरण की अचानक से आआह्ह्ह्हह्ह निकलने की वजह थी पल्ली ने अपनी एक उंगली अचानक से किरण की गांड के छेड़ में जो घुसा दी थी,

पल्ली- साली एक उंगली से अह्ह्ह्हह्हह काट रही है, और अभी इतना मोटा लोढ़ा लिए हुए थी गांड में,

किरण- तो कुटियाःह वो मुझे पता था की घुसने वाला है तूने अचानक से घुसा दी उंगली,

राजन- आह्हः अरे तुम दोनों भी कभी भी शुरू हो जाती हो,

पल्ली- ये तो हमारा प्यार है पापा, क्यों मेरी जान?

पल्ली ने चेहरा झुककर किरण के होंठों को चूसते हुए कहा,

नीचे से राजन चाचा भी दोनों के होंठों का मिलान देखते हुए लुंड चला रहे थे किरण की छूट में, फिर कुछ पल बाद चेहरा उठा कर उन्होंने भी उनके होंठो के बीच अपने होंठ लगा दिए तो तीनो के बीच एक कामुक चुम्बन होने लगा, तीनो की जीभ आपस में अटखेलियां करने लगी,

खैर कुछ देर बाद चुम्बन ख़तम हुआ तो पल्ली उठ कर किरण के और अपने पापा के पैरों के बीच आई और उसने फिर से एक ऊँगली किरण की गांड में घुसा दी, पर साथ hi अपनी दूसरी उंगली से कुछ ऐसा किआ जिससे राजन चाचा हैरान रह गए क्यूंकि दुसरे हाथ की एक उंगली अपने थूक से गीली कर पल्ली ने अपने पापा की गांड में घुसा दी तो चाचा चौंक पड़े,

राजन- आह्हः palliiiiiiiiii क्याःह्ह्ह कर रही है,

पल्ली- हेहही पापा मज़ा आएगा तुम छोड़ते रहो न,

शुरूआती असहजता के बाद चाचा ने भी अपनी बिटिया की ख़ुशी के लिए बात मान ली और और किरण को छोड़ना जारी रखा, पल्ली किरण और अपने पापा दोनों की hi गांड में उंगली अंदर बहार कर रही थी, किरण के लिए तो बेहद उत्तेजित करने वाला था क्यूंकि उसकी एक तरह से दोहरी चुदाई hi हो रही थी, वहीं चाचा भी गांड में बेटी की उंगली होने से एक अलग उत्तेजना महसूस कर रहे थे,

तभी एक चीख से सबका ध्यान दुसरे बिस्तर पर गया जहाँ किरण की मम्मी यानि मामी की सच में दोहरी चुदाई हो रही थी, पापा और मौसा ने उनका मुँह छोड़ने के बाद उन्हें अपने लौडों के बीच फंसा लिए था पापा नीचे लेते थे और उनका लुंड मामी की छूट में था तो वहीं मौसा पीछे से मामी की गांड मार रहे थे,





मामी भी अपने चूतड़ों को फैलाकर आहें भरते हुए अपनी दोहरी चुदाई का पूरा आनंद ले रही थी,

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह हॉँण्णन अह्ह्ह्हह्हह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है हाय ढैय्या.

मौसा- हुमारह लक्ष्य hi हैं गुंजन रानी तुम्हारी हर तरह से सेवा करना, ऊपर नीचे सब तरफ से,

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह अब तो बिना सेवाआहहह करवाए रहा भी नहीं जाएगा आह्ह्ह्हह

पापा- अह्ह्ह्हह्हह गुंजन तुम्हे रहने भी कौन देगा अब,

इधर अपनी मम्मी की दोहरी चुदाई देख कर किरण भी और उत्तेजित हो गयी और अपनी छूट तेज़ी से राजन चाचा के लुंड पर पटक ने लगी साथ hi पल्ली से बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह साली उंगली निकाल और अपनी जीभ दाल न.

पल्ली ने भी वैसा hi किआ और तुरंत अपनी उंगली निकाल कर अपनी जीभ किरण की गांड में घुसा कर चाटने लगी,

दोनों माँ बेटी दोहरे मज़े से उत्तेजना में पागल होती जा रही थी, और जल्दी hi उस उत्तेजना के कारण दोनों hi झड़ने लगी, किरण ने अपना रास चाचा के लुंड पर छोड़ा और ढीली हो कर उनके ऊपर पसर गयी, वहीं मामी भी झाडंर के बाद पापा के ऊपर गिर गयी, खैर दोनों को hi उनकी जगह से हटा कर एक और लिटा दिया गया, किरण की जगह पल्ली ने अपने पापा के लुंड पर ली तो मामी की जगह ममता चची ने ली, और फिर से दोहरी चुदाई होने लगी,

किरण कुछ देर बाद फिर से सांसें ठीक करके उठी और उसने अपनी सगली पल्ली की तरह hi उसके पीछे जाकर पल्ली की गांड चाटने लगी पल्ली भी मज़े में गैन जानने लगी, लेकिन पल्ली को न जाने क्या हुआ वो अचानक से उठी और किरण को पकड़ कर अपनी जगह बिठा दिया और अपने पापा का लुंड पकड़कर किरण की गांड पर टिकते हुए बोली- पापा इसकी गांड भी तो चख कर देखलो,

चाचा तो बेटी की इस हरकत से बिलकुल खुश हो गए बताओ कितनी फ़िक्र है उसे अपने पापा की, ये सोचते हुए चाचा ने भी धक्का लगाकर अपना लुंड किरण की गांड में घुसा दिया... किरण भी इस बार तैयार थी और तुरंत गांड में ले लिए..

राजन चाचा किरण की कासी हुई गांड मरने लगे, और पल्ली बगल में बैठ दोनों का हौसला बढ़ने लगी,





किरण- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फूफाजी.

पल्ली- हाय देख कैसे निगल रही है तेरी गांड पापा का लोढ़ा अह्ह्ह्ह किरण.

राजन- आह्हः सच में बहुत कासी हुई गांड है तेरी किरण बिटियाः आह्हः माहाहहहहह मज़ाआ आ रहा है,

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह फूफाजी मारू अह्ह्ह्ह ऐसे hi,

मामी अपनी बेटी को दोबारा गांड मरवाते हुए देख रही थी लेट कर वहीं ममता चची का ध्यान अभी नहीं था क्यूंकि उनकी छूट और गांड में दो लुंड घुसकर उनकी दुमदार चुदाई कर रहे थे,

चची भी उत्तेजित होकर आहें भर रही थी, वहीं पापा और मौसा भी पूरे जोश में थे, इधर चाचा भी किरण की कासी हुई गांड पाकर फूले नहीं समां रहे थे और खूब तेज़ तेज़ उसकी गांड मार रहे थे जिसका नतीजा ये हुआ की उन्होंने जल्दी hi अपना रास उसकी गांड में भर दिया था, इसके बाद किरण ने उठकर उनका लुंड अपनी गांड से निकला जिसे तुरंत पल्ली ने अपने मुँह में भर कर साफ़ किआ फिर अपनी सहेली की गांड को भी चाट कर साफ़ किआ,

दूसरी और ममता चचो भी कुछ पल बाद झगङे लगी तो पापा और मौसा ने भी ये मौका देखा और उनकी और तेज़ चुदाई शुरू कर दी और खुद को भी खुला छोड़ दिया एयर फिर खुद भी चची के छेदों को अपने रास से भर दिया,

सब झड़ने के बाद शांत हुए, समय काफी हो चूका था तो सबने सोने का hi तय किआ और सब एक दुसरे के साथ नंगे hi सो गए,

जारी रहेगी
 
अपडेट 221


हम सब लोग जहाँ पूरी रात बहार मज़े मार रहे थे वहीं हमारे जाते hi मां और नाना के मन में खूब लाडू फुट रहे थे , मां ये सोचकर खुश हो रहे थे की दिन में जीजी के साथ जो हुआ उसे दोहराने का इससे ाचा मौका नहीं मिलेगा और किस्मत अछि रही तो आगे भी बढ़ सकते हैं, आंगन में टीवी देखते हुए मां की नज़र बार बार रसोई की और जा रही थी जहाँ माँ और मौसी काम निपटा रही थी, नाना का ध्यान भी वहीं था, और वो भी मौसी और माँ को hi देख रहे थे, कुछ देर बाद रसोई का काम निपटा कर माँ भी आंगन में आई और बोली- जमुना, बाबा दूध अभी पियोगे या सोते समय?

मां- सोते समय hi पि लेंगे जीजी.

नाना- हाँ बिटिया और तू और छोटी भी अब आराम करो, समय भी हो गया है हम भी सोने चलते हैं.

मां- हाँ जीजी सही कह रहे हैं बाबा,

माँ- ठीक है चलो फिर हम दूध लेकर आते हैं तुम्हारे कमरों में.

मां ने टीवी बंद की फिर वो और नाना अपने अपने कमरों में चले गए हालाँकि दोनों के hi मन में अलग अलग अरमान भड़क रहे थे, माँ जल्दी hi नाना के कमरे में आई और उन्हें दूध दिया,

नाना- अब तू भी आराम से सो जा जाकर बिटिया, छोटी सो गयी क्या?

नाना ने दूध गटकते हुए पूछा,

माँ- नहीं अभी तो कमरे में गयी है, कुछ काम था क्या बाबा?

नाना- अरे नहीं नहीं हम ऐसे hi पूछ रहे थे,

माँ- ठीक है बाबा.

इतना कह कर माँ उनके कमरे से चली गयी और दूसरा गिलास लेकर मां के कमरे में पहुंची,

मां तो जैसे इसी पल के इंतज़ार में थे और माँ के आते hi तुरंत खड़े हो गए,

मां- अरे जीजी आ जाओ,

माँ- ले दूध पी ले,

मां ने उनके हाथ से दूध लिए, और बगल में रख दिया.

मां- हाँ अभी पी लेंगे जीजी,

मां बहुत कुछ करना कहना छह रहे थे पर उनके मुँह से नहीं निकल रहा था,

माँ- ठीक है जल्दी पीलिओ ज़्यादा गरम नहीं है..

माँ- चल फिर चलती हूँ मैं. तू दूध पीकर सो जाना.

ये कहकर माँ जैसे hi चलने को हुई मां बोले- अरे रुको रुको न जीजी,

माँ- क्या हुआ ?

मां- आओ न जीजी कोई नहीं है इतना ाचा मौका है बातें करते हैं.

माँ- अरे इतनी रात को क्या बातें करनी हैं तुझे नींद नहीं आ रही?

मां- नहीं आ रही जीजी, रुको न मज़ा आएगा.

ये कहकर मां ने दरवाज़े के पास जाकर दरवाज़ा लगा कर अंदर से कुण्डी लगा दी,

माँ- अरे बात करने के लिए तू कुण्डी क्यों लगा रहा है?

मां- अरे वो ऐसे hi जीजी, अब हम आराम से बात कर पाएंगे बिना परेशानी के.

माँ- तू भी न बच्चों जैसी हरकतें करता है.

मां- क्या करूँ जीजी तुम्हारे लिए तो बच्चा hi हूँ,

माँ- वो तो तू रहेगा hi, चल दूध पि ले अब,

मां- अरे पी लूंगा जीजी, पहले अपनी जीजी से प्यार तो कर लूँ.

ये कह कर मां ने माँ को पीछे से बाहों में भर लिए,

माँ- अरे आज कुछ ज़्यादा hi प्यार नहीं आ रहा जीजी पर .

माँ हाथ पीछे लेजाकर उनके बालों को सहलाते हुए बोली...

मां- क्या करूँ जीजी तुम हो hi इतनी प्यारी..

मां साड़ी के ऊपर से hi माँ का पेट सहलाते हुए बोले, पहले से उत्तेजित मां, माँ से चिपके होने के कारन और उत्तेजित हो रहे थे, उनका लुंड पाजामे में पूरी तरह से खड़ा होकर माँ के चूतड़ों में चुभ रहा था,

माँ- मैं प्यारी हूँ या आज तेरी पत्नी नहीं है इसलिए.

मां- अरे नहीं जीजी, पत्नी पत्नी की जगह है तुम्हारी जगह अलग है,

मां मदहोश होते हुए बोले,

माँ- ाचा कहाँ है मेरी जगह?

माँ भी अपने चूतड़ों पर अपने भाई के लुंड की घिसावट से गरम होते हुए बोली...

माँ की और से थोड़ा साथ मिलने पर मां का जोश और हिम्मत और बढ़ गया और वो बोले- हमारे लिए तो सबसे पहले तो तुम hi हो जीजी,

ये कहते हुए मां ने हलके से अपने होंठ माँ की गर्दन पर रखे और धीरे धीरे चूमने लगे.

मां के चूमने से माँ के मुँह से भी आह्ह्ह्हह निकल गयी,

माँ- आह्हः क्या कर रहा आह्हः है जमुना तूऊऊह्ह्ह्ह.

माँ की अह्हह्ह्ह्ह सुनकर मां का जोश और बढ़ गया और वो उत्तेजित होते हुए माँ की गर्दन और पीठ को चूमने लगे माँ उनके हर चुम्बन से मदहोश होने लगी...





मां का जोश हर पल बढ़ रहा था वहीं माँ भी अपने भाई की हरकतों से गरम होती जा रही थी,

माँ- अह्ह्ह्हह्हह जमुनाहहहह ये सब क्यों कर रहा आआह्ह्ह्हह्ह है तेरी पत्नीय हैई अह्ह्हम्म्म उसे बुरा लगेगाहहह,

मां- जीजी अभी मुझीऐ अह्ह्हम्म्म किसी की फ़िक़र नाहीइइइइइइ है अहंम मुझे बस तुम चाहिए,

मां माँ के बदन को चूमते हुए बोले.

माँ- ये सही नाहीई है अह्ह्ह्हह्हह, मेरा परिवार haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh बच्चे हैं, तेरे जीजाः का क्याःह्ह्ह?

मां ने माँ का पल्लू भी उनके कंधे से नीचे से सरका दिया और उनके चिकने गदराये पेट को सहलाते हुए बोले- ओह्ह्ह्हह्ह जीजीईई अभी मैं कुछ नाहीई सोचना चाहतआह्हः बस तुम्हारे बदन को महसूस करना चाहता हूँ,

माँ- अह्ह्ह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पर हम भाई बहन हैं हमें इस तरह से पास नहीं आना चाहिए, ये पाप है..

माँ मां का कोई विरोध नहीं कर रही थी वस् मां को बातों से अपना विरोध दिखने का नाटक कर रही थी,

मां के हाथ लगातार उनकी बहन के नंगे गदराये पेट को सहला रहे थे वहीं मां के होंठ माँ की गर्दन और गालों को चूम रहे थे,





मां- जीजी अगर ये पाप है तो मैं पापी बनना चाहता हूँ, बस आज मुझे मत रोको,

माँ- इस पाप की सजा झेल पायेगा तू?

मां- हाँ जीजी तुम्हे पाने के लिए मुझे हर सज़ा मंज़ूर है, जीजी uhmmmhaaaaaaaaaaaaa..

मां ने माँ का चेहरा अपनी और किआ और माँ के होंठों को अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगे, अपनी बहन के रसीले होंठो का स्वाद पाकर तो जैसे मां स्वर्ग में पहुँच गए अब तो उन्हें पाप पुण्य किसी की परवाह नहीं थी, माँ हालाँकि मां को मन कर रही थी पर मां के होंठों के लगते hi वो भी अपने भाई का पूरी तरह से साथ देने लगी, दोनों एक दुसरे के होंठों को बेहद आक्रामक होकर चूसने लगे,

मां माँ के होंठों को चूसते हुए अपने हाथ माँ के ब्लाउज पर ले आये और ब्लाउज के ऊपर से hi उन्हें मसलने लगे,

माँ के बदन में भी एक अलग उत्तेजना फैलने लगी, अपने बेटों देवर और पति से तो माँ ने छुड़वाया था पर अपने सेज भाई के साथ एक अलग एहसास माँ को हो रहा था, बचपन से अब तक जिस भाई को सामने बड़ा होते देखा आज उसी के साथ हवस का ये खेल खेलना माँ को बेहत उत्तेजित कर रहा था, जल्दी hi दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों हांफ रहे थे, मां ने माँ की चूचियों को मसलना जारी रखा और फिर हाथों को एक साथ लकड़ माँ के ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश करने लगे पर तभी माँ ने उनका हाथ पकड़ कर रोक लिया, जिससे मां थोड़े हैरान हुए क्यूंकि माँ तो अब तक उनका साथ दे रही थी, और अचानक से रोका क्यों.

माँ- ये तेरी बहन का ब्लाउज है जमुना इतनी आसानी से नहीं खुलेगा.

माँ ने मुस्कुराते हुए कहा.

मां- फिर कैसे खुलेगा जीजी,

मां ने भी उसी तरह मुस्कुरा कर अपनी जीजी को जवाब दिया.

माँ- जीजी की चूचियां देखनी हैं तो कीमत चुकानी पड़ेगी.

मां माँ के मुँह से चूचियां सुन गंगना गए,

मां- कैसी कीमत,

माँ- देख तू जैसे hi एक हुक खोलेगा, उसकी कीमत हम तुझसे मांगेंगे अगर तू दे पायेगा तो अगला हुक खोलने को मिलेगा नहीं तो नहीं,

मां- अरे ये कैसी कीमत है जीजी,

मां हैरान होते हुए मुस्कुरा कर बोले,

माँ- ये hi है, तू बता मंज़ूर है या नहीं,

मां तो उत्तेजित थे hi अभी उन्हें कुछ नहीं रोक सकता था उन्होंने हाथ फिर से माँ के ब्लाउज को पकड़ा और जल्दी से एक हुक खोल दिया.

मां- बताओ जीजी क्या कीमत चुकानी पड़ेगी?

माँ- तो सुन इसकी कीमत है अपनी पत्नी को तेरे जीजाजी से छुड़वाएगा,

मां माँ की ये बात सुनकर बिलकुल स्तब्ध रह गए, माँ के मुँह से सीधा सीधा छुड़वाना वो भी अपनी पत्नी को अपनी जीजा से मां का तो दिमाग घूमने लगा,

माँ- बता चूका पायेगा तू ये कीमत, गुंजन को अपने जीजा से छुड़वाते हुए देखेगा, देख पायेगा जब उनका लुंड तेरी बीवी को छूट में अंदर बहार होगा,

माँ जानकर गन्दी और उत्तेजित बातें कर मां को तड़पा रही थी वहीं मां भी ये सोच सोचकर बेहद उत्तेजित और साथ hi परेशां हो रहे थे, ये कैसी शर्त रख दी थी, जीजी ने, अपनी hi पत्नी को किसी और से कैसे छुड़वा दूँ पर सोचा जीजी भी तो किसी और की hi पत्नी हैं,

फिर मां का ध्यान माँ की बातों पर गया और वो कल्पना करने लगे की कैसे जीजा गुंजन को छोड़ेंगे तो ये सोचकर उनका लुंड ठुमके मरने लगा,

मां- हमें मंज़ूर है जीजी,

मां ने बिना ज़्यादा सोचे कह दिया, और तुरंत माँ के ब्लाउज का दूसरा हुक भी खोल दिया,

माँ- देखो तो कितना बेसबर हो रहा है बहन को नंगा करने के लिए.

मां- क्या करें जीजी तुम हो hi ऐसी... ाचा इस हुक की क्या कीमत लोगी?

माँ- बताती हूँ, दूसरी कीमत गुंजन को तुझे तेरे छोटे जीजा और राजन भैया से भी बनता होगा...

मां तो ये सुन बिलकुल hi सुन्न पद गए, उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या बोलेन, पापा का तो ठीक था पर मौसा और चाचा का सुन मां को कुछ समझ नहीं आया,

मां- पर जीजी, उन लोगों से क्यों, बात तो सिर्फ मेरी और तुम्हारी है न,

माँ- नहीं बात परिवार की है, और सोचले तुझ पर कोई दबाव नहीं है, पर अगर मुझे नंगा करना चाहता है तो ये मन्ना hi पड़ेगा.

मां कुछ देर तक कुछ नहीं बोले उनके मन में सवालों का तूफ़ान आया हुआ था, सोच रहे थे ये क्या हो रहा है, क्यों जीजी ऐसी शर्तें रख रही हैं, पर उन्हें मन्ना न मन्ना तो मेरे हाथ में है पर मन कर दिया तो जीजी नहीं मिलेंगी, क्या करूँ, फिर सोचा की जीजी ने माँगा क्या है और अपनी बीवी को तीनो के साथ चुदाई करते हुए कल्पना करने लगे तो उनका लुंड और फड़फड़ाने लगा.

माँ- बता क्या बाँट पायेगा तू?

मां ने कुछ सोचा और फिर माँ के ब्लाउज का अगला हुक खोल दिया,

माँ- अरे वाह लगता है आज तू कुछ भी करके हमें नंगा करके hi मानेगा,

मां- सच में जीजी, तुम्हारे लिए तो सब लूटना पड़े तो भी मंज़ूर है, अब बताओ इसकी क्या कीमत है?

माँ- तुझे बच्चों यानि कर्मा और अनुज से भी गुंजन को छुड़वाना पड़ेगा,

मां एक बार फिर से हैरान थे हर बार उनकी जीजी कुछ ऐसा बोलती थी जिससे वो पूरी तरह हिल जाते, और इस बार भी कुछ ऐसा हुआ, मां सोच में पद गए पर फिर कुछ ऐसा किआ जिससे माँ हैरान हो गयी,

मां- बिलकुल जीजी अपनी मामी पर बच्चों का तो पूरा हक़ बनता है.... हमें मंज़ूर है..

ये कहकर मां ने माँ के ब्लाउज का एक और बटन खोल दिया, अब बस आखिरी हुक बचा था ब्लाउज का खुलने के लिए,

माँ- अरे वाह बड़ी जल्दी मान गया तू..

मां- हाँ जीजी तुम्हारे लिए हम कुछ भी करेंगे, अब बताओ इस हुक की कीमत क्या है?

कहीं न कहीं मां को भी अंदर hi अंदर माँ की इन शर्तों से उत्तेजना हो रही थी वो अपनी पत्नी को सबसे छुड़वाता सोच कर उत्तेजित हो रहे थे,

माँ- इस बार की और बड़ी है, तू दे पायेगा?

मां- जो तुम बोलो जीजी हम सब करेंगे,

माँ- तुझे अपनी बिटिया किरण को छोड़ना होगा,

ये सुनकर तो मां माँ से पीछे हैट गए, इस बार ज़रा जोर का झटका दिया था माँ ने उन्हें,

मां- जीजी, ये क्या बोल रही हो, वो हमारी बेटी है, एक बाप बेटी के साथ ये सब कैसे कर सकता है, नहीं नहीं,

माँ मुस्कुराई और आगे बढ़ कर मां के सीने पर हाथ फिरते हुए बोली- जैसे एक भाई और बहन के बीच हो सकता है, अगर तू अपनी बहन को छोड़ सकता है, मेरी छूट में अपना मोटा लुंड दाल कर मुझे जी भर के छोड़ सकता है अपनी सगी बहन को तो अपनी बेटी को क्यों नहीं? छूट तो छूट है, बहन की हो या बेटी की..

मां माँ की ऐसी बातें सुन भौचक्के रह गए जिस तरह से माँ ने खुले शब्दों में उनसे छुड़वाने की बात कही थी मां को और कुछ सूझ hi नहीं रहा था, उन्होंने एक पल अपनी बिटिया के बारे में सोचा और उसे छोड़ने के ख्याल से hi उनका लुंड लोहे जैसा हो गया,

मां ने एक गहरी सांस ली और फिर से माँ को पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए उनके ब्लाउज का आखिरी हुक भी खोल दिया,

माँ- किरण जैसी कच्ची काली के लिए कोई मन नहीं कर सकता, हम जानते थे,

मां- उसका तो पता नहीं जीजी पर हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकते हैं, बताओ आखिरी हुक की कीमत क्या है?

माँ- कीमत है किरण.

मां- किरण? मतलब.

माँ- मतलब जैसे गुंजन सब से छुड़ेगी, वैसे hi किरण बिटिया को भी सब छोड़ेंगे,

मां इस बार हैरान नहीं हुए, और बोले- मंज़ूर है.

ये कहकर उन्होंने माँ के ब्लाउज को उनके बदन से खोलकर अलग कर दिया,





माँ मां के इतनी जल्दी मैंने से थोड़ा हैरान थी तो खुद hi पूछ बैठी- तू किरण के लिए इतनी जल्दी कैसे मान गया?

मां- जीजी हमें अंदाज़ा था की तुम क्या मांगने वाली हो इसलिए पहले hi सोच लिए था, वैसे भी अगर हम तुम्हे छोड़ सकते हैं, अपनी बिटिया को छोड़ सकते हैं तो गुंजन किरण को भी हक़ है बाकि लोगो के साथ का.

माँ- हाय ढैय्या, इतना सुलझा हुआ है मेरा भाई,

ये कह माँ ने मां के होंठों को चूम लिए, वहीं मां ने माँ के होंठों को चूसते हुए hi अपनी बाहों में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आकर माँ के होंठों को चूसते हुए जल्दी hi जीभ भी चूसने लगे, उनके हाथ ब्रा के ऊपर से hi अपनी बहन की बड़ी बड़ी चूचियों को मसल रहे थे,

जल्दी hi दोनों के होंठ फिर से अलग हुए पर मां की हवस बढ़ती जा रही थी, होंठों के बाद वो मान की गर्दन को चूमते हुए नीचे की और सरकने लगे, ऐसा लग रहा था की मां माँ के बदन के हर हिस्से को चाट लेना चाहता थे ज़रा भी ऐसा हिस्सा नहीं छोड़ना चाहते थे जिसका स्वाद उनकी जीभ पर न हो, माँ भी मां की हरकतों से सिसकियाँ भर रही थी,

मां ब्रा से से बहार माँ के सीने को अचे से चूसने चाटने के बाद और नीचे सरकते हुए माँ के गदराये चिकने पेट को चूमने लगे, और माँ का बदन सिहरने लगा,





जितनी उत्तेजना मां के लिए थी अपनी बहन के साथ ये सब करने की उतनी भी माँ को भी हो रही थी क्यूंकि वो अपने भाई के साथ, अपने सेज भाई के साथ समाज की साडी मर्यादा तोड़ कर चुदाई का एक नया रिश्ता बना रही थी जो समाज में महापाप मन जाता था,

मां माँ का पेट पाकर जैसे सब भूल गए और उसे पागलों की तरह चूमने चाटने लगे, कभी जीभ से चूसते तो कभी होंठों से दबाते और फिर नाभि में जीभ डालकर ऐसे चूसने लगे जैसे उससे रास निकल कर उनके मुँह में घुल रहा था, माँ अपने भाई के नीचे पड़ी हुई आहें भरते हुए तड़प रही थी, मां ने पेट चाटते हुए hi हाथ नीचे लेजाकर माँ की साड़ी को खींचना शुरू कर दिया जो उनके प्रयासों से जल्दी hi खुल गयी, जिसे उन्होंने माँ के बदन से अलग कर दिया, पेट चाटने के बाद मां ने माँ को घुमा कर पेट पर लिटा दिया और अब उनकी पीठ और कमर को उतने hi स्वाद और उत्साह से चाटने लगे जैसे पेट को चाट रहे थे,

माँ- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह तू आज्झहहह अपनी बहन को पागल करके छोड़वगआह्हः

मां- uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह.

मां अभी ज़्यादा बोलने के पक्ष में नहीं थे उनका ध्यान अभी माँ के बदन पर था, पूरी पीठ और कमर को पीछे से भी अचे से चाटने के बाद मां, अपने हाथों से माँ की पीठ को सहलाने लगे,





माँ मां की हर हरकत से आहें भर रही थी... मां का लुंड हालाँकि बिलकुल फटने को हो रहा था पर वो आज इस रात को बिलकुल आराम से अचे से माँ के बदन के साथ खेलते हुए बिताना चाहते थे, इसलिए बहुत संयम से आगे बढ़ रहे थे,

इधर नाना ने माँ का दिया हुआ दूध पिया और कुछ देर कमरे में बैठे रहे, नींद तो उनकी आँखों से कोसों दूर थी, कुछ देर बाद वो अपने कमरे की बत्ती बुझा कर निकले, और बहार आंगन में देखा तो अँधेरा था, उन्होंने सोचा लगता हाउ सब सो गए हैं, उनके बगल वाला कमरा hi मामा मामी का था, धीरे धीरे वो आगे बड़े तो देखा मां का कमरा बंद था, ये देख वो खुश हुए की लगता है जमुना सो गया है, पर उन्हें क्या पता था की कमरे के अंदर उनके बच्चे आपस में क्या कामुक खेल खेल रहे थे,

नाना थोड़ा आगे बढे तो देखा मौसी के कमरे की बत्ती जल्द रही थी और दरवाज़ा भी पूरी तरह से बंद नहीं tha,ye देख नाना खुश हुए और दबे पाऊँ मौसी के कमरे के पास गए और दरवाज़े के बीच झाँक कर देखा तो पाया मौसी बिस्तर सही कर रही थी, नाना तुरंत कमरे में घुस गए और दरवाज़ा बंद कार्लिअ,

वहीं दुसरे कमरे में मां ने आगे बढ़ाते हुए, माँ के पेटीकोट को भी उतर दिया था और माँ अभी सिर्फ उनके सामने ब्रा पंतय में थी वहीं मां ने भी अपना पजामा और कुरता उतर दिया था और वो भी बनियान कच्चे में माँ के चूतड़ों में अपना खड़ा लुंड घुसते हुए ब्रा के ऊपर से hi उनकी चूचियों को मसल रहे थे,





मां- अह्हह्ह्ह्ह जेईईईजीईउऊ ओह्ह्ह्म्म्म क्या बड़ी बड़ी चूचियां हैं तुम्हारी अह्हह्ह्ह्ह इनका तो मैं बचपन से दीवाना हूँ,

मां ने माँ को अपनी और घूमते हुए कहा, साथ hi हाथ पीछे लेजाकर माँ की ब्रा को पीछे से खोल दिया, माँ ने भी ब्रा को अपने कंधे से नीचे सरका दिया तो माँ की नंगी चूचियों देख कर मां की आँखें बड़ी हो गयी, उन्होंने तुरंत hi दोनों चूचियों को पकड़ लिए और फिर अपना मुँह लगा दिया, वो फिर से पागलों की तरह माँ की चूचियों पर टूट पड़े कभी हलके से चूसते तो कभी पूरी छुच्छी को मुँह में भरने की कोशिश करते,

माँ मां की हरकतों से तड़प रही थी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह अह्हह्ह्ह्ह खाजा अपनीई जेईईईजीईउऊ की कुछःठियाआन अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, बचपन से देखता था नाहहहह.

मां ने सिर्फ हाँ में सर हिलाया और वो बदल बदल कर चूचियों को चूसे जा रहे थे,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह मंमंमंमं ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरेईईई भाइयआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअज सैयां बन कर चूस ले,

माँ जितना मां को उत्साहित करती मां उतने hi जोश में माँ की चूचियों को चूसते, और तब तक चूसते रहे जब तक की बिलकुल उनका जी न भर गया हो चूस चूस कर, तब जकात मां ने माँ की चूचियों को छोड़ा,

मां का जी चूचियों से भरा था माँ से नहीं तो मां ने बिना समय गंवाए माँ को बिस्तर पर पेअर फैला कर लेटने का इशारा किआ,

दुसरे कमरे में नाना अपनी छोटी बिटिया के साथ प्यार के कुछ पल बिता रहे थे.

नाना जैसे hi कमरे में आये तो मौसी ने पूछा- अरे बाबा तुम यहाँ कछु चाहिए का?

नाना- हाँ बितीयआह्ह्ह्ह चाहिए न,

नाना ने आगे बढ़ते हुए कहा,

मौसी- क्या?

नाना- हमें तो अपनी छोटी का प्रेम चाहिए,

ये कहते हुए नाना ने मौसी को पीछे से बाहों में भर लिए,

मौसी- ओह्ह्ह बाबा, मत करो किसी ने देख लिया तो,

नाना- अरे सब सो चुके हैं बितीयआह्ह्ह्ह, बस हम दोनों hi जाग रहे हैं और हमने इ दरवाज़ा लगा दिया है तो कौन देखे गए.

मौसी- बहुत शैतान हो रहे हो बाबा तुम, अपनी बिटिया के कमरे में दरवाज़ा बंद करके क्या करना चाहते हो,

मौसी ने नाना की बाहों में hi मचलते हुए पूछा.

नाना- अपनी बिटिया को प्यार करना चाहते हैं, खूब अचे से उसके इस रसीले गदराये बदन को भोगना चाहते हैं,

नाना मौसी के पेट को मसलते हुए बोले.

मौसी- ओह्ह्ह्म्म्म बबाह, अपनी बेटी को भोगना चाहते हो, अह्हह्ह्ह्ह जानते हो पाप है ये,

नाना- हाँ बितीयआह्ह्ह्ह जानते हैं पर हम ये पाप करना चाहते हैं, और बितीयआह्ह्ह्ह के बदन पर पहला हक़ बाप का होता है तो इसमें पाप कैसा अह्ह्ह्ह,

नाना ने मौसी को अपनी और घूमते हुए कहा फिर उनकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ मौसी के होंठों पर रख कर चूसने लगे





मौसी भी अपने पिता का पूरा साथ देते हुए उनके होंठो को चूसने लगी वहीं नाना के हाथ ब्लाउज के ऊपर से hi मौसी की चूचियों को मसलते हुए उनके होंठो का रसपान कर रहे थे,

दुसरे कमरे में मां ने माँ को बिस्तर पर लिटा लिए था और अपनी बहन की टैंगो के बीच बैठकर उनकी और देखते हुए अपने हाथ माँ की कमर पर कासी हुई कच्ची की इलास्टिक में डाले और फिर धीरे धीरे नीचे खिसकने लगे, जैसे जैसे कच्ची नीचे आने लगी वैसे वैसे मां की दिल की धड़कन बढ़ने लगी, कच्ची ठीक छूट के ऊपर आकर रुक गयी क्यूंकि वो माँ के चौड़े चूतड़ों के नीचे दबी हुई थी, जिन्हे उठाकर माँ ने मां को कच्ची सरकने में मदद की, जैसे hi कच्ची माँ की मोती जांघो से नीचे सर्कि तो मां की आँखों के सामने उनकी बहन की छूट आ गयी, जो की उत्तेजना में गीली होकर रास बहा रही थी, मां की नज़रें कुछ पल बस अपनी बहन की प्यारी छूट को निहारती रही,

फिर कुछ पल बाद मां ने एक हाथ आगे बढ़ाया और माँ की छूट को उँगलियों से सहलाते हुए बोले- हाय जीजी क्या छूट है तुम्हारी, कितनी गरम और प्यारी, अह्ह्ह लगता hi नहीं की इससे दो बच्चे निकले हैं,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ तेरी बहन की छूट ऐसी हीई रहतीई हीी हमेशा अह्हह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्हह..

माँ मां की उँगलियों की हरकतों से आहें भरते हुए बोली,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अब मुझे भी इस छूट में अपनी जगह बनाने दो,

माँ- uhmmmmmmmmmmmmmmm कैसी जगह बनाएगा तू अपनी बहन की गरम छूट में,

मां- अपने कड़क लुंड को तुम्हारी छूट में घुसकर, अह्ह्ह जीजी तुम्हारी छूट में जाकर मेरा लुंड धन्य हो जायेगा,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह अपनी बहन की छूट में अपना लुंड घुसकर, अपनी बहन को छोड़ना चाहता है तू?

मां- हाँ जीजी,

मां उत्तेजित होते हुए अपना कच्चा नीचे सरका कर अपने कड़क लुंड को बहार निकलते हुए बोले,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह अपनी बहन को छोड़ कर तू भेनचोद बनना चाहता है? अहहह्म्म..

मां- हाँ जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह हाँ मैं तुम्हारी गरम छूट को छोड़कर बहन छोड़ बनना चाहता हूँ, अह्हह्ह्ह्ह जीजी.

मां अपने लुंड को माँ की छूट पर लगते हुए बोले तो दोनों की आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तो तडपाआहहहहह क्यों रहा है अह्ह्ह्ह घूसाआआअड़े अपना लोड़ाआहहह अपनी बहन की गरम पयासीय चुत में,

माँ ने इतना बोलै hi था की मां ने तुरंत धक्का लगाकर अपना लुंड माँ की छूट में सरका दिया, उनका टोपा माँ की छूट के होंठों को चीरता हुआ अंदर घुसा तो भाई बहन दोनों के मुँह से hi अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह ली तू बन गयाहहह भेंछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़,

मां- हाआनंनं जेईईईजीईउऊ अह्हह्ह्ह्ह क्याआ माखन जैसी छूट हैईईई तुम्हारी अह्हह्ह्ह्ह कितनी गरम कितनी चिकनी, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

मां धीरे धीरे माँ की छूट में लुंड अंदर करते हुए बोले...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह तेरे लुंड के लिए हीई ये इतनी गरम हो रहियी है अह्हह्ह्ह्ह अब छोड़ अपनीई बहन कोऊ,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जेईईईजीईउऊ अब तो रह भी नहीं पाऊंगा अह्ह्ह्ह तुम्हे चोदे बिनाहहहहह

ये कहते हुए मां माँ की छूट में तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए छोड़ने लगे,





माँ भी अपने भाई से चुड़ते हुए उत्तेजित होकर आहें भर रही थी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ऐसी हीई छोड़ड़ड़ड़ड़ मुझी भेनचोद आह्हः अह्हह्ह्ह्ह.

मां जिनके लिए अपनी बहन को छोड़ना hi बड़ी बात थी ऊपर से माँ की इस तरह की बातें उन्हें और उत्तेजित कर रही थी,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जेईईईजीईउऊ तुमहारी छूट में जादू है अह्हह्ह्ह्ह आज तक ैसाआह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह नाहीईईई आगया,

माँ- आज तक अपनीई बहन को भी तो नाहीईईई छोड़वगआह्हः तुणीऐ अह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह, ऐसा माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहन की छूट hi देशी हैईईई.

मां- अह्ह्ह्हह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अब्ब्ब्ब मुझे ये मज़ा अह्हह्ह्ह्ह बार बार चाहिए अह्ह्ह्हह्हह रोज़ चाहिए,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह तो छोड़ लियोऊ रोज़ अपनीइ बहन को, जब मन करे अपना लोढ़ा घुसा दियो मेरी छूट में,

मां- अह्हह्ह्ह्ह परररर जीजा हुए तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.

माँ- तू क्या हुआअह्ह्ह उनके सामने hi घुसा दियो अपना आह्ह्ह्ह लुंड मेरी छूट में अह्हह्ह्ह्ह उनकी बीवी को छोडियो उनके सामने,

मां तो इस ख्याल से hi की अपनी बहन को जीजा के सामने छोड़ने का क्या एहसास होगा उससे hi पागल होने लगे, और माँ की छूट में दनादन धक्के लगते हुए झड़ने लगे, और अपने रास से माँ की छूट भरने लगे,

झड़ते हुए मां माँ के ऊपर hi लेट गए ठक्कर उनका लुंड अब भी माँ की छूट में था माँ की छूट से उनका रास बाह बाह कर बाहर आ रहा था,

इधर नाना और मौसी का भी हवस का खेल जारी था, नाना ने मौसी को बिस्तर पर लिटाया हुआ था और उनके पेट को चूम चाट रहे थे, कभी चाटते तो कभी उनकी नाभि में जीभ डालकर चूसते,





मौसी अपने बाबा की हरकतों से उत्तेजित होकर आहें भर रही थी,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह, ुहममम खा जाओ अपनी बितीयआह्ह्ह्ह के बदन को,

नाना का भी इरादा कुछ वैसा hi था और बहुत hi आक्रामक होकर मौसी को चूम रहे थे,

उधर झड़ने के बाद मां का रास अपनी छूट में भरे हुए माँ बोली- जमुनाहहहह हैट मुझे पेशाब जाना है,

इस पर मां उनके ऊपर से हेट और अपना लुंड माँ की छूट से निकला, माँ नंगी hi उठी और बोली रुक मैं आती हूँ,

और दरवाज़े की और बढ़ने लगी,

मां- जीजी नंगी hi बहार जाओगी?

माँ- हाँ वैसे भी सब सो गए हैं, या एक काम कर तू अपने और मेरे कपडे उठा कर मेरे कमरे में आजा,

माँ ये कह कर दरवाज़ा खोल कर निकल गयी, वहीं मां ने भी जल्दी से कपडे बटोरे और निकल गए, मां जल्दी से माँ पापा के कमरे में पहुँच गए, और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिए, हालाँकि उन्हें मौसी के कमरे की बत्ती जल्दी हुई रोशनदान से दिखी पर उन्होंने उस पर इतना ध्यान नहीं दिया,

कपड़ो को एक और रख वो बिस्तर पर बैठ गए, कुछ पल बाद माँ बाथरूम के दरवाजे से अंदर आई,

मां माँ के नंगे बदन को देख फिर से मचल उठे, उन्हें यकीन नहीं हो रहा था जो इस रात में हो रहा था वो सच था या कोई सपना,

मां बिस्तर पर लेते हुए प्यार से अपनी बड़ी बहन के बदन को निहार रहे थे,

वहीं माँ बिस्तर के पास आई और फिर उनकी टैंगो के पास लेटकर मां के लुंड को हाथ में भरते हुए बोली- ये तो फिर से खड़ा कर लिए तूने,

मां- हम क्या करें जीजी तुम्हे देखते ही अपने आप हो जाता है,

माँ इस पर मुस्कुराई और मां की आँखों में देखते हुए अपना चेहरा आगे कर उनके लुंड को अपने मुँह में भर लिए तो माँ के मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी और वो सिहर उठे..

अपनी बहन के गरम मुँह से लुंड चुसवाने का एहसास उनके लिए परम आनंद जैसा था, और वो लगातार आहें भरने लगे,

माँ भी उनके लुंड को मुठियाते हुए पूरी लगन से चूसने लगी.





मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है,

माँ बस ुहम्म्म्म की आवाज़ के साथ चूसे जा रही थी,

मां- अह्हह्ह्ह्ह चूसतीई रहो जीजीयाःह...

मां लगातार मां को चूसने के लिए उत्साहित कर रहे थे और खुद भी हो रहे थे, माँ ने जल्दी hi मुँह से लुंड निकला और बोली- जमुनाहहहह तूने कहा तू बचपन से मेरी चूचियों को देखना चाहता था? कबसे तेरे मन में हमारे लिए ऐसे ख्याल थे,

माँ ने ये पुछा और दोबारा मां के लुंड को मुँह में भर लिए.

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीजी सही कह रहा था, बचपन से hi अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारे लिए पागल था मैं, अह्हह्ह्ह्ह बहुत मुठियाता था तुम्हे सोच कर,

माँ- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह इतनी जल्दी तू ये सब सीख गया था,

माँ ने लुंड निकलते हुए पूछा, और हाथ से मुठियाने लगी,

मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन जीजी पररर मुझे सीखने वाला वह भूरा था, अह्ह्ह वो और मैं अपनी अपनी बहन को सोचकर हिलाते थे,

माँ- भूरा वो चंपा का भाई? बरगद वाले?

माँ ने बोलकर फिर से मां के लुंड को मुँह में भर लिआ

मां- हाँ जीजी वही, उसी ने मुझे सब सिखाया वो चंपा के लिए मरता था और मैं तुम्हारे और छोटी जीजी को सोच सोच कर... अह्हह्ह्ह्ह

माँ- अह्हह्ह्ह्ह तो फिर कभी कुछ किआ क्यों नहीं क्या बता ये सब पहले हो जाता...

मां- अह्हह्ह्ह्ह डरता था जीजी, भूरा ने चंपा के साथ कोशिश की थी, पर चंपा ने अपनी महतारी को बता दिया और भूरा बहुत पेला गया साथ hi उसे गाओं से भी भेज दिया, तो हम दर गए और तबसे हमने भी बिलकुल बंद कर दिया,

माँ- हेहही सही किआ क्या पता तू भी पेला जाता,

माँ उठाते हुए बोली और फिर मां की और पीठ करके उनकी कमर के दोनों और पेअर करके उनके लुंड पर बैठ गयी और मां का लुंड फिर से अपनी छूट में समां लिए, धीरे धीरे उछलने लगी,

मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.. पर अब सोचता हूँ काश कोशिश की होती तो तुम्हारी छूट पहले मिल जातीय,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ैसाआह्ह नाहीईईई है जमुनाहहहह हर चीज़ का समय होता है, तेरे लुंड और मेरी छूट का मिलान आअज की रत hi होना था,

माँ मां के लुंड पर उछालते हुए बोली.

मां- अह्हह्ह्ह्ह ये तो सही कह रही हो जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह.

मां नीचे से अपनी बहन की छूट में धक्के लगते हुए बोले,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi और तेज़ छोड़ अपनी बहन को जमुनाहहहह.

मां माँ की बात सुनकर और तेज़ नीचे से धक्के लगाने लगे,





माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसी हीईई..

मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह,

इधर मां और माँ की तगड़ी चुदाई चल रही थी तो दूसरी और नाना और मौसी भी धीरे धीरे इसी और बढ़ रहे थे, मौसी बिस्तर पर लेती हुई थी और नाना उनके ऊपर थे और मौसी के होंठों को चूस रहे थे, जल्दी hi होंठों की लड़ाई जीभ की कुश्ती में बदल गयी और बाप बेटी की जीभ आपस में अटखेलियां करने लगी, जीभ की कुश्ती अलग हुई तो दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे, नाना ने फिर से मौसी की गर्दन को चूमते हुए नीचे आना शुरू किआ और फिर उनके सीने को चूमते हुए फिर ब्लाउज के ऊपर से hi चूचियों को चूसते हुए नीचे की और बढ़ते हुए पेट पर आ गए और एक बार फिर से पेट को चूमने चाटने लगे, वहीं पेट को चूमने के बाद नाना ने मौसी की साड़ी को उनके बदन से अलग कर दिया, और फिर खुद सीधे होकर अपना कुरता भी उतर दिया.

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबा आज तो नंगा करके hi मानोगे क्या?

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तेरा ये कामुक बदन देखने के लिए नंगा तो करना पड़ेगा hi.

ये कहते हुए नाना ने मौसी के पेटीकोट को ऊपर सरकना शुरू कर दिया, जैसे जैसे पेटीकोट ऊपर आ रहा था मौसी की गोरी चिकनी टांगें सामने आ रही थी, नाना ने जल्दी hi पेटीकोट को मौसी की जांघों पर इकठा कर दिया और उनकी जांघों के ऊपरी हिस्से को चूमने लगे जिससे मौसी तड़पने लगी,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबा आअह्ह्ह्ह ुहममम.

नाना मौसी की तड़प को बढ़ाते हुए जांघों को चूमते हुए नीचे की और बढ़ने लगे, मौसी आहें भर्ती हुई सिहर रही थी, नाना चूमते हुए जल्दी hi मौसी की जांघों के बिलकुल ऊपर पहुँच गए और जांघों के बीच से जब उन्होंने पेटीकोट हटाकर देखा तो खुश हो गए क्यूंकि मौसी ने कच्ची नहीं पहनी थी, मौसी की गरम गीली छूट देख नाना के मुँह में पानी आ गया और उन्होंने अपना मुँह अपनी बेटी की छूट में घुसा दिया और उसे पागलों की तरह चाटने लगे, मौसी भी अपने बाबा की जीभ को महसूस कर मचलने लगी, और अपनी चूचियों को मसलते हुए आहें भरने लगी.





मौसी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh बाबू आआह्ह्ह्हह्ह ऐसी hi कहाआआआ jaooooooooooo अपनी बेटीई की चूऊउत्तत

मौसी गरम होकर नाना का उत्साह बढ़ा रही थी और नाना उतने hi जोश में मौसी की छूट चाट रहे थे,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआ पि jaooooooooooo मेरिइइइइ चूऊत्त का सारा रसससस अह्ह्ह्हह्हह बबाहहहहह.

इधर मौसी अपने बाबा से छूट चटवाने का आनंद ले रही थी तो उनकी बहन यानि माँ भी अपने भाई से पूरी तरह आनंद ले रही थी, या यूँ कहें की अपने भाई से अपनी सेवा करवा रही थी,

अभी तो माँ बिस्तर पर घुटनो और कोहनी पर थी, और मां अपनी बड़ी बहन को घोड़ी बनाकर उनकी सवारी कर रहे थे, मां का लुंड माँ की छूट से लगातार अंदर बहार हो रहा था

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसी hi छोड़ड़ड़ड़ड़ अपनीई लुंडडडड की पीएसीईई बहन को,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीजी अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह हाँ ऐसी hi छोड़ताआआ राहूंगाःह इतनी मास्त्टट छुडाईइइइइ कराती हो अह्हह्ह्ह्ह,

माँ- कोई रहम मत खाना अपनी बहन पर भइयाझ अह्ह्ह्हह्हह और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ कूट मेरीए पीएसीईई छूट को,

मां- अह्हह्ह्ह्ह हाँ बहना ाः,

और ये कह मां जो अभी तक माँ के पीछे से उन्हें छोड़ रहे थे आगे होकर माँ के ऊपर चढ़ गए, और अपने पेअर माँ के घुटनो से आगे लेजाकर और तगड़े धक्कों से माँ को छोड़ने लगे,





मां के ऐसे धक्के सीधे माँ की छूट में अंदर तक असर कर रहे थे जिससे माँ को व्ही और मज़ा आने लगा,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन जमुनाहहहह आह्हः ऐसी hi छोड़ड़ड़ड़ड़ भेनचोद अह्ह्ह्ह और तेज़,

मां माँ की उत्तेजित करने वाली बातें सुन कर और तेज़ी से माँ को छोड़ने lage,har धक्के के साथ उनकी गति और आक्रामकता बढ़ने लगी तो माँ की सिसकियाँ भी,

माँ- जमुनाहहहह अह्ह्ह्हह्हह मेरे राजाआहहह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छोड़ अपनीई बहन कुआहहहहहह,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi छोड़ताआआ राहूंगाःह जीजाआठ के सामने भी छुडवाआआओजीईईई अह्ह्ह्हह्हह,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह हाँ जीजाआठ के सामने क्याह पुरे घर के सामने छुडवाआआओजीईईई अह्ह्ह,

मां ये सुन और जोश में आ गए और तूफानी धक्के लगाने लगे माँ की छूट में, माँ जो बेहद उत्तेजित हो चुकी थी अपनी भाई की दनादन चुदाई से उत्तेजना के शिखर पर पहुँच कर झड़ने लगी, वहीं मां ने भी अपनी चुदाई इतनी तेज़ और तूफानी कर ली थी की अब उनका खुद को रोकना संभव नहीं था और माँ के साथ साथ मां भी झड़ने लगे, और एक बार फिर से मां ने माँ की छूट में अपना रास भर दिया,

इतनी तूफानी चुदाई के बाद दोनों hi हांफते हुए बिस्तर पर पसर गए,

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीजी मज़ा आ गया,

माँ- हाँ मज़ा तो आएगा hi अपनी बहन की घुड़ सवारी जो कर ली तूने,

मां उन्हें देख मुस्कुराने लगे,

इधर दुसरे कमरे में भी खेल काफी आगे तक निकल चूका था, नाना और मौसी दोनों hi नंगे थे मौसी अपनी टंगे फैलाकर बिस्तर के किनारे थी वहीं नाना अपनी बिटिया की टैंगो के बीच थे और उनका लुंड मौसी की छूट में अंदर बहार हो रहा था.





मौसी के सीने पर नाचती हुई चूचियां देखकर नाना और उत्तेजित हो रहे थे,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह टूउउउनी अह्हह्ह्ह्ह हमारी जवानीई लौटा दी है,

नाना ने मौसी की उछलती चूचियों को मसलते हुए कहा,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुम हमेशा hi जैवाआँ थे अह्हह्ह्ह्ह देखो तभीयी अह्हह्ह्ह्ह कैसे छोड़ रहईये हो मुझी..

नाना- अह्हह्ह्ह्ह सब तेरे अह्हह्ह्ह्ह बदन का कमाल है, तू इतनी कामुक है की तुझे देख मुर्दा भी छोड़ने को तैयार हो जाये..

मौसी- अरे बबआहहह अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारा लुँड्ड्ड अभीयी भीई ैसाआह्ह है जोऊ अचे ाछूओ को पानी पीलाः दे,

नाना- ये तो तेरा आह्ह्ह्हह्ह प्यार है अपने बबाहहहहह के लिए,

नाना ने लगातार मौसी को छोड़ते हुए कहा,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुमममम मुझसे ज़यादाआहहहहह प्यार करते हो या जीजी से,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छ्होटीईई ये कैसा आह्हः सवाल है बाप की लिए अह्ह्ह सरे बचे बराबर होते है अह्ह्ह.

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह तो फिर जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह को कब अपने लुंडडडड का स्वाद चखाओगे अह्ह्ह..

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बड़ीई को कैसीआअह्ह्ह वोओओओओओओ मानजीई,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह है तुमहारी जैसे मुझे मानआठ लिआआ उन्हें भी माना लेनाःह्ह्ह,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह तुझे लगता है वो हंसी छुडवायेगी,

मौसी- तुम कोशिश तो करूऊओ बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

नाना तो माँ के छोड़ने के ख़याल से hi पागल होने लगे और इतना उत्तेजित हो गए की झड़ने लगे, जैसे hi नाना को लगा उनका रास निकलने वाला है उन्होंने तुरंत अपना लुंड निकल कर मौसी के मुँह में घुसा दिया और झड़ने लगे, मौसी भी अपने बाबा की मलाई बड़े छाव से पि गयी, झड़ने के बाद दोनों लोग बिस्तर पर लेट गए,

दुसरे कमरे में माँ लेती हुई थी और मां उनके पैरों के बीच थे और माँ की छूट चाट रहे थे, छूट चाटते हुए मां की जीभ ने थोड़ा नीचे का सफर किआ और फिर जीभ से माँ की गांड चाटने लगे,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह,

मां ने इसे आगे बढ़ने का संकेत समझा और जीभ नुकीली करके माँ की गांड में घुसा दी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन ऐसी ही, माँ ने अपने पेअर मोड़ लिए ताकि उनकी गांड उनके भाई के लिए और खुल जाये, मां भी अपनी जीभ घुसा घुसा कर माँ की गांड का स्वाद लेने लगे, कुछ देर और गांड चटवाने के बाद माँ उठी और मां को बिस्तर पर लिटा दिया और मां का लुंड जो एक बार फिर से कड़क हो चूका था उसे मुँह में भर लिए और चूसने लगी, कुवह hi पल चूसने और अपने थूक से गीला करने के बाद माँ ने तुरंत मां के ऊपर जगह ली, और उनकी और चेहरा कर उनकी कमर के दोनों तरफ पेअर करके बैठ गयी फिर हाथ पीछे लेजाकर मां के लुंड को पकड़ा और उसे अपने गांड के छेड़ पर लगाया और मां को देखते हुए बोली- अपनी जीजी की गांड मारेगा?

मां के लिए इससे ाचा क्या हो सकता था वो तो इस प्रश्न से फूले नहीं समाये और बोले- हाँ जीजी तुम्हारी गांड मारे बिना तो जीवन बेकार है,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह तो लगा धक्का और घुसा दे अपना मुसल अपनी जीजी की गांड में,

मां ने माँ की बात पूरी होती इससे पहले hi धक्का लगा कर लुंड गांड में घुसा दिया

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अब मार.

मां नीचे से धक्के लगते हुए माँ की गांड मरने लगे,



मां- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन तुमहारी गांड तो जन्नत है अह्हह्ह्ह्ह बिलकुल माखन की पोटली जैसी है अह्हह्ह्ह्ह,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जमुनाहहहह मार जीजी की गांड अह्हह्ह्ह्ह अपनी जीजी के तेनुवाहह्ज छेड़ छोड़ लिए तुणीऐ आअज्ज्ज्ज,

मां- अह्हह्ह्ह्ह हैं जीजीयाःह आअज मेरा जीवन बन गयाहहह, भेंछोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ बनकर इतना अच्छा आआह्ह्ह्हह्ह लगेगा कभी सोचा आआह्ह्ह्हह्ह नाहीइ थाह,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइइ तो तुझी बेटीचोद भी बनना हीी, अह्हह्ह्ह्ह अगर अम्मा आआह्ह्ह्हह्ह ज़िंदा होतियई तो मादरचोद भी बनाआती तुझी.

मां- अह्हह्ह्ह्ह जीएजीइइइइइइइऊह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह तुमहारी गांडडडडड बिलकुल अम्मा जैसीई हीी और चूचियां भीई,

माँ- तुझे अभी टककककक याद हैं अम्मा की चूचियां,

मां- अह्हह्ह्ह्ह हाँ जीजी बहुत्तत्त चूऊसी हैं

माँ- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न तू सब्ज़ी छोटा ठाहहह तभी तो 10 साल काः होने तक अम्माए की चूचियों से चिपकाए रहता था तूऊऊह्ह्ह्ह,

मां- आह्हः ुहममममम

मां ने मुज आगे कर माँ की चुकी को मुँह में भरते हुयी आह्ह्ह्हह भरी,

कुछ पल ऐसे hi गांड मरवाने के बाद माँ शायद थक गयी तो वहीं लेट गयी और मामा ने उनके पीछे जगह ली और वैसे hi लेट कर पीछे से लुंड माँ की गांड में घुसा कर उनकी गांड मरने लगे,

मां- अह्ह्ह्हह्हह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या नसीब वाला होताहहह ना ागरररर तुम्हारे साथ साथ अम्मा आह्ह्ह्हह की गांड मार पाटा, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कैसा दृश्य होगा ागरररर बेटाझ माँ की गांड मारे तोअह्ह्ह्ह..

मां ने पीछे से माँ की गांड में धक्के लगते हुए कहा,





माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जमुनाहहहह ऐसाःठ्ठ दृश्याअ यहां रोज़ज़्ज़ज़्ज़ देखनी को मिलताआहहहह haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh..

मां ये सुनकर हैरान हो गए और सोचने लगे क्या मतलब है जीजी का, उनके धक्के भी थोड़े धीरे हो गए,

मां- मतलब जीजी? यहां कौन माँ बेटा है?

माँ- अह्ह्ह धीरे मत कर अह्ह्ह्हह्हह मरता रह,

मां ने फिर से तेज़ी से बहन की गांड में लुंड चलना शुरू कर दिया.

मां- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बताओ नाहहहह जीईजीईउह्ह्ह, कौन माँ बेताआहःहः यहां ऐसाःठ्ठ करते हैंण्ण्न...

माँ- जिस गएआंद को तूऊऊह्ह्ह्ह मार रहा haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh वही गांड तेरे भांजे रोजज़्ज़ज़ मारते हैंण्ण्ठ,

मां तो ये सुन कर बिलकुल सुन्न हो गए, यहाँ तक की उनके झटके भी रुक गए माँ की गांड में...

कुछ पल तो मां की हालत ऐसी हो गयी बिना सिग्नल का मोबाइल फ़ोन फिर जब सिग्नल आये तो मां बोले- जीजी ये ये क्या बोल रही हो तुम क्या ये सछह है?

माँ- ारीये तू रुक क्यों गया, मरता रह न और हाँ ये सच है,

मां को जैसे hi ध्यान आया वो बापिस माँ की गांड मरने लगे, वहीं ये सोच कर की उनकी बहन अपने बेटों से चुदवाती है, उनकी कमर और तेज़ धक्के लगाने लगी,

मां- अह्ह्ह जीजी पर ये कैसी हो सकता है अह्ह्ह्ह वो तुम्हारे बेटे हैंण्ण्ठ माँ बेटी के बीछह ऐसाःठ्ठ सम्भन्ध,

माँ- हाँ अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ hi है, पर तू hi सोचहहह अगर मैं अपने बेटों से नहीं चुदवाती तो अपने भाई से इतनी आसानी से छुडवाहहह लेटीइ,

मां के दिमाग में फिर सारा मामला धीरे धीरे समझ आने लगा,

मां- ओह्ह्ह्ह जीजी तभी तुमने मुझे भी किरण को छोड़ने को कहा अह्ह्ह,

मां ये कहते हुए उठे और माँ को घोड़ी बना लिए और फिर से माँ की गांड में लुंड घुसा कर गांड मरने लगे, और वो भी काफी लम्बे और तगड़े धक्कों से,

गांड मरते हुए मां के दिमाग में माँ की कही साड़ी बातें चल रही थी, और वो वही सोच सोच कर उत्तेजित हो रहे थे और उतने hi जोश में आकर माँ की गांड मार रहे थे





जल्दी hi उनका जोश इतना बढ़ गया की वो खुद को रोक नहीं पाए और माँ की गांड में झड़ने लगे, वहीं माँ भी मां की गांड चुदाई के आगे ढेर हो गयी और जैसे hi मामा के रास की बूँदें उन्हें अपनी गांड में महसूस हुई वो भी झड़ने लगी,

झड़ने के बाद दोनों एक दुसरे के बगल में लेट गए और अपनी सांसें ठीक करने लगे,

कुछ देर के सन्नाटे के बाद मां बोले- जीजी हमारा तो दिमाग घूम रहा है, क्या तुम और बच्चे सच में?

माँ- दिमाग मत घुमा, मैं जानती हूँ तेरे दिमाग में बहुत सरे सवाल होंगे और मैं तेरे सरे सवालों का जवाब भी दूंगी,

माँ ने मां की और करवट लेकर लेटते हुए कहा,

दुसरे कमरे में भी एक बार झड़ने के बाद मौसी ने नाना के लुंड को चूस कर दोबारा खड़ा कर दिया था और अपने बाबा के लुंड को इस बार अपनी गांड की सैर करवा रही थी,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्याहहह मस्त गांड है टेरिइइइइइइइइ अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए राहाहहह हीी,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुह्ह्हह्ह मारो ऑररररर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ आअज अपनी बितीयआह्ह्ह्ह की गांड की सारी खुजली मिटाआहहह दो लुंडडडड सीई,

नाना भी मौसी की खुजली मिटने का पूरा प्रयास करते हुए नज़र आ रहे थे, और मौसी की गांड कास कास के मार रहे थे,





मौसी अपने बाबा के लिए अपने पैरों को पीछे की और मोड़ कर लेती थी जिससे उनकी गांड खुल कर पूरी तरह से उनके बाबा के सामने थी, जिसमे नाना पूरा लुंड दाल कर उसे छोड़ रहे थे,

पर बितीयआह्ह्ह्ह की गांड की गर्मी नाना से ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने जल्दी hi मौसी की गांड को अपने रास से भर दिया, इसके बाद वो थक कर मौसी के बगल में लेट गए, मौसी भी बगल में लेट कर आराम करने लगी, जल्दी hi दोनों की आँख लग गयी,

पर बगल वाले कमरे में अभी भी किसी की आँख नहीं लग रही थी क्यूंकि माँ मां को हमारे सरे राज़ बता रही थी, और मां धड़कते दिल, गर्माते लुंड के साथ सब सुने जा रहे थे और अंत में माँ ने मां को ये भी बता दिया की आज रात भी उनकी बीवी और बेटी राजन चाचा के यहाँ सोने नहीं बल्कि छुड़वाने गयी हैं, खैर अंत में मां सब जान चुके थे, सरे सवालों का जवाब मिलने के बाद वो बिस्तर पर लेते हुए मुस्कुरा रहे थे, और मुस्कुराएं भी क्यों न, माँ एक बार फिर से उनके लुंड पर उछाल रही थी, क्यूंकि इतनी कामुक बातें सुनकर मां का लुंड फिर से खड़ा हो चूका था,





माँ ने मां के लुंड पर भी अपनी खास कारीगरी दिखाई और जल्दी hi मां झड़ने की दहलीज़ पर आये तो माँ ने उनका लुंड छूट से निकल मुँह में भर लिए और अपने भैया की साड़ी मलाई छत कर गयी, अब दोनों भाई बहन भी एक दुसरे से चिपक कर सोने लगे, मां की आँखों में आने वाले समय में उभरती बहुत सी उत्साहित करने वाली संभावनाएं दिखाई दे रही थी, खैर उनकी भी आँख लग गयी और भी नींद की दुनिया में खो गए.

जारी रहेगी...
 
अपडेट 222
अगली सुबह हुई तो आदत अनुसार नाना सबसे पहले उठे, धीरे से आँखें खोली और उठ कर बैठ गए, फिर नज़र अपने बगल में सोती हुई अपनी नंगी बिटिया के बदन पर गयी तो चेहरे पर मुस्कान आ गयी, साथ hi बदन में सरसराहट भी हुई, एक मन किआ की अभी उठाकर फिर से बेटी के बदन का रास पी लें, पर खुद को कुछ सोच कर रोक लिया और फिर बिस्तर से खड़े हुए, अपना पजामा और बनियान पहनी और सोचा किसी के जागने से पहले बिटिया के कमरे से निकल जाते हैं नहीं तो गड़बड़ हो जाएगी किसी ने देख लिए तो.

ये सोच वो कमरे से निकले और सीधा बाथरूम की और चल दिए जैसे hi बाथरूम के दरवाज़े पर पहुंचे उसी वक़्त माँ बाथरूम से बहार निकली, जिन्हे देख नाना बिलकुल चौंक गए, और एक पल को तो माँ भी, नाना के चौंकने का एक कारन और भी था और वो था माँ का पहनावा, अभी माँ ने सिर्फ पेटीकोट और ब्रा पहन राखी थी,





अपनी बड़ी बिटिया को ऐसे देख नाना के बदन में गर्मी आने लगी,

वहीं माँ थोड़ा सम्हालते हुए बोली,

माँ- अरे उठ गए बाबा, चलो तुम हो आओ हम चाय रख देते हैं तुम्हारे लिए,

नाना बेचारे क्या बोलते वो तो अपनी बिटिया का गदराया बदन देख हैरान थे बस, फिर भी नाना ने सँभालते हुए हाँ में सर हिला दिया, और माँ आगे बढ़ गयी,

नाना भी माँ को पलट कर देखते हुए बाथरूम में घुस गए, नाना हलके होते हुए सोचने लगे- हाय क्या बदन है बड़की का, कितना गदराया और कैसा हुआ, क्या मज़ा आएगा अगर वो भोगने को मिल जाये तो, वैसे मज़े तो ले सकते हैं देखा नहीं वो ऐसे बात कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi नहीं, पेटीकोट और बनियान में भी हमारे सामने बिलकुल नहीं झिझकी, और जब छोटी को छोड़ सकते हैं तो कहीं न कहीं बड़की का नंबर भी लगाना पड़ेगा, नाना का लुंड बिलकुल कड़क था,

खैर नाना ने जल्दी से अपना काम निपटाया और हाथ मुँह धोकर जल्दी से फुर्ती में रसोई की और लपके, रसोई में घुसते hi नाना का दिक् खुश हो गया, जैसा उन्होंने सोचा था उससे भी ाचा नज़ारा देखने को मिला,

नाना ने सोचा था की माँ को देखते हुए बातें करेंगे, पर उन्होंने ये नहीं सोचा था की माँ वैसे hi कपड़ो में चाय बना रही होगी, माँ अब भी ब्लाउज पेटीकोट में hi थी और चाय बना रही थी,





नाना ये नज़ारा देख ख़ुशी से फूले नहीं समाये, और पहले तो उन्होंने सोचा क्या करें रुकें या जाएँ या क्या करें, फिर सोचा जब बिटिया नहीं शर्मा रही है तो हमें क्या दर, वैसे भी नाना का विश्वास मौसी को छोड़ने के बाद बढ़ गया था, और उन्होंने भी सोच लिए था की बड़की बिटिया का स्वाद भी चख कर रहेंगे,

नाना- बन गयी चाय बिटिया?

माँ ने पीछे मुद कर देखा और बोली- बस चढ़ाई है बाबा, कुछ साथ में भी बना दूँ,

नाना ने देखा की माँ अब भी उनसे ऐसे hi बात कर रही हैं जैसे कोई बात hi न हो ये सोच नाना को और हिम्मत मिलने लगी,

नाना- देखले बिटिया तेरी मर्ज़ी, हमें तो बस चाय hi चाहिए,

नाना ने हँसते हुए कहा,

माँ- चाय तो मिल जाएगी बाबा, नाश्ता नहीं करोगे,

नाना- नाश्ते में जो तू खिलाड़ी,

नाना ने माँ की चूचियों को घूरते हुए कहा,

माँ- ठीक है फिर आज गोभी के परांठे सेक दूंगी..

नाना- जो तेरा मन करे बिटिया तू सब कुछ hi स्वादिष्ट बनती है,

नाना माँ का पसीने से भीगा पेट देख कर अपनी ज़ुबान अपने होंठों पर फिरते हुए बोले,

माँ- तुम भी न बाबा, बेकार की तारीफ़ करते रहते हो,

नाना- अरे सच कहते हैं तेरे हाथों में बिलकुल तेरी अम्मा का स्वाद है,

माँ- होगा hi उन्ही से तो सब कुछ सीखा है,

माँ नाना की और घूमती हुई बोली

नाना- सही कहा, और सिर्फ स्वाद hi नहीं, तू बिलकुल तेरी अम्मा की छाया hi है, वही कद काठी, वैसे hi नैन नख्स,

नाना माँ के बदन को ऊपर से नीचे तक खुल के निहारते हुए बोले,

माँ- हाँ बाबा ये तो मुझसे सब कहते हैं हमेशा से की मैं बिलकुल अम्मा जैसी दिखती हूँ,

नाना- हाँ तभी तो उसके सरे गन आ गए हैं तुझमें.

माँ थोड़ा रुक कर सोच कर बोली- बाबा अब भी अम्मा को बहुत याद करते हो न तुम,

इस पर नाना थोड़े गंभीर होकर बोले- वैसे तो तुम सब हो बच्चे हैं, तुम्हारे बीच होते हैं तो पता नहीं चलता पर हाँ अकेले में उसकी कमी अब भी महसूस होती है,

माँ- समझती हूँ बाबा, साथी की कमी तो हमेशा hi रहती है, कितना भी बच्चों में मन लगा लो,

ये कहते हुए माँ नाना के पास आ गयी और प्यार से उनके कंधे को सहलाते हुए बोली,

नाना जो नानी को याद करते हुए थोड़े गंभीर हो चले थे अपनी बिटिया की ब्रा में से झांकती इतनी बड़ी बड़ी चूचियों को देखकर फिर से बहकने लगे,

नाना- हाँ अब तो बस उसकी यादें hi रह गयी हैं..

माँ- अरे बाबा अब अपना मन उदास मत करो हम सब हैं न तुम्हारे साथ, पूरा परिवार है, मानती हूँ अम्मा नहीं हैं, उनकी कमी सब को hi महसूस होती है, पर हम सब ख़ुशी से उनको याद कर सकते हैं.

माँ ने नाना के गले से लगते हुए कहा, तो नाना को अपनी बिटिया के गले लगने से एक सुकून सा मिला, उनके हाथ भी माँ को गले लगाने के लिए माँ की पीठ पर आ गए,

नाना- बिलकुल सही कहा बिटिया तूने, इतना ाचा परिवार है हमारा, किस्मत से दोनों दामाद और बहु भी इतने अचे मिले हैं, और का चाहिए,

नाना माँ की पीठ पर हाथ फिरते हुए बोले, अपनी बिटिया का अधनंगा बदन महसूस कर नाना की गंभीरता के भाव उत्तेजना और हवस में बदलने लगे, माँ के बदन की गर्मी महसूस कर नाना भी गरम हो रहे थे, उनके हाथ माँ की पीठ और कमर पर लगातार चल रहे थे, माँ ने अपना चेहरा नाना के सीने पर टिकाया हुआ था, वहीं नाना का कड़क लुंड माँ की जाँघों में चुभ रहा था,

नाना के हाथ जो पहले प्यार से माँ की पीठ पर घूम रहे थे कुछ hi पलों में उत्तेजना में उनके गदराये बदन का नाप ले रहे थे, नाना को माँ की भरी चूचियां अपने सीने ने गढ़ती हुई महसूस हो रही थी, और उन्हें और उत्तेजित कर रही थी. न माँ कुछ बोल रही थी और न hi नाना, दोनों बाप और बेटी एक दुसरे से आलिंगन में लगे हुए थे, पर एक बार हवस चढ़ जाये तो अच्छे अचे खुद को रोक नहीं पाते वही हाल नाना का भी हो रहा था, उनके हाथ माँ की कमर और पीठ को सहलाते हुए धीरे धीरे नीचे सरकने लगे और पेटीकोट के ऊपर से hi माँ के भरे हुए चूतड़ों पर फिरने लगे,

नाना धीरे धीरे अपने हाथों से बिटिया के गोल गोल और भरे हुए चूतड़ों का जायजा लेने लगे, हाथ फिरते हुए तभी उनके कुछ दिमाग में आया, उन्होंने अंदाज़ा हुआ की माँ ने पेटीकोट के अंदर कच्ची नहीं पहनी थी, और ये सोच कर उनका लुंड फड़कने लगा की माँ पेटीकोट के नीचे बिलकुल नंगी थी, नाना ये सोच कर गड़गड़ा गए, उन्होंने एक बार माँ के चेहरे की और देखा तो पाया माँ की आँखें बंद थी और वो बड़े प्यार से अपने बाबा के सीने से लगी हुई थी, नाना को अपनी बिटिया को यूँ देख बड़ा लाड आया पर नीचे से लुंड ने तुरंत लाड को हवस के साथ मिला दिया,

नाना के मन में फिर से वो ख्याल आ गया की पेटीकोट के नीचे बिटिया नंगी है, नाना के हाथ धीरे धीरे माँ के चूतड़ों को गूंथने लगे, नाना और उत्तेजित होने लगे उनका लुंड पाजामे में माँ की जांघों में घुसा जा रहा था,

नाना धीरे धीरे माँ के पेटीकोट को ऊपर की और खिसकने लगे, जैसे जैसे उँगलियों के सहारे पेटीकोट ऊपर उठाने लगा नाना अपने होश खोने, लगे,

माँ अब भी बिलकुल शांत हो कर नाना को सब कुछ करने दे रही थी, जल्दी hi नाना की म्हणत से माँ का पेटीकोट उनके घुटनो से ऊपर आ गया, और फिर धीरे धीरे जांघों से ऊपर उठता हुआ बिलकुल उनके चूतड़ों के पास पहुँच गया, नाना के मन में लड्डू फूटने लगे, नाना ने जैसे hi अपना हाथ पेटीकोट उठाकर माँ के नंगे चूतड़ों पर रखना चाहा वैसे hi माँ पीछे हो गयी और बोली- अरे भूल hi गयी चाय न निकल जाये,

ये कहकर माँ चूल्हे के पास चली गयी, नाना बेचारे खड़े के खड़े रह गए, जिस चाय की वजह से इतना आगे बढे थे उसी के वजह से अटक गए, नाना का दिमाग फिर चलने लगा, वो सोचने लगे- बस हाथ घुसना hi रह गया था, वैसे बड़की ने कुछ कहा भी नहीं और न hi कोई विरोध किआ, इसका मतलब काम बन सकता है, मौका नहीं छोड़ना है, और ये सोच नाना हिम्मत कर आगे बढे और इस बार पहल करते हुए माँ को पीछे से भर लिए, और अपने हाथ माँ के पेट पर कास लिए और मसलने लगे,

माँ- अरे बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या हुआ?

नाना- कछु नहीं बितीयआह्ह्ह्ह बस तुझसे लाड कर रहे हैं,

माँ- लाड के साथ साथ चाय भी पी लो, बिटिया कहाँ भागी जा रही है,

माँ ने घूम कर नाना को चाय पकड़ते हुए कहा,

नाना की मजबूरी थी बेचारे को माँ को छोड़कर चाय पकड़नी पड़ी,

नाना- अच्छा ला दे,

नाना ने चाय हाथों में लेते हुए कहा, माँ ने भी एक कप चाय खुद ली और दोनों बाप बेटी एक साथ चाय की चुस्कियां लेते हुए बातें करने लगे,

नाना- देख चाय भी बिलकुल तेरी अम्मा के जैसी बनती है,

माँ- हाँ बाबा, अब बिटिया हूँ उनकी तो उनके जैसी hi बताउंगी न,

माँ ने हँसते हुए कहा,

नाना- मैं तो कहता हूँ तू छाया है उसकी, हर एक चीज़ उसी के जैसी है,

नाना चाय की चुस्की लगते हुए माँ को हवस भरी नज़रों से ऊपर से नीचे तक देखते हुए बोले,

ऐसी hi बातों में दोनों की चाय ख़तम हो गयी,

माँ- ऐसा करती हूँ तब तक मैं आता गूंथ देती हूँ शालू उठ जाएगी तो परांठे बना देगी,

नाना- जैसा तू ठीक समझे, हमने तो चाय पीली.

नाना ने हँसते हुए कहा,

माँ आता निकल कर उसमे पानी मिलाने लगी, नाना माँ की हिलती चूचियों और चूतड़ को देखकर अंदर hi आहें भरने लगे,

उन्होंने कुछ पल और देखा पर उत्तेजना इस हद तक थी की नाना से रुका नहीं गया तो एक बार फिर से आगे होकर नाना ने माँ के पीछे जगह ले ली, और फिर से उनके पेट को हाथों में भरते हुए उनसे चिलक गए,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ारी बाबा?

नाना- तूने hi बोलै था न चाय पीकर लाड दिखा सकते हैं,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह अच्छा ठीक है मैं कहाँ कुछ कह रही हूँ, बिलकुल बच्चों की तरह करते हो बाबा तुम,

नाना- अपने बच्चों के साथ बच्चा बनना hi ाचा लगता है,

नाना माँ के मांसल पेट को मसलते हुए बोले, तो माँ के मुँह से भी अह्ह्ह निकल गयी, जिसे सुनकर तो नाना की हिम्मत और बढ़ गयी,

इधर माँ हाथों से आते में पानी मिला रही थी वहीं नाना अपने हाथों से माँ के पेट को, इस बार तो नाना का लुंड भी सीधा माँ के चूतड़ों के बीच घुसा था लग रहा था पेटीकोट के साथ hi अंदर घुस जायेगा...

हर बढ़ाते पल के साथ माँ और नाना दोनों की उत्तेजना बढाती जा रही थी, नाना की हिम्मत बढ़ रही थी क्यूंकि माँ की और से कोई विरोध नहीं हो रहा, था, माँ बिलकुल आराम से आता गूंथने में लगी हुई थी, नाना माँ के पेट और कमर को खूब आराम से सहलाते हुए मसल रहे थे, नाना का लुंड माँ के चूतड़ों की दरार में फंसा हुआ था, नाना अपने हाथों को थोड़ा नीचे की और लेजाकर माँ के पेट को सहलाते हुए उनके पेटीकोट को नीचे की और खिसकने लगे,

माँ- ुहममम बबाहहहहह तुम्हे गर्मी नहीं लग रही रसोई में,

नाना- लग रही है थोड़ी बहुत बिटिया, पर तू भी तो यहीं है अगर तू गर्मी खेल सकती है तो हम क्यों नहीं,

माँ- मुझे तो काम है बाबा इसलिए,

नाना - और मुझे तुझे प्यार करना है, तेरे साथ समय बिताना है इसलिए, और रही बात गर्मी की तो ये ले,

नाना ने ये कह कर अपने हाथों को माँ के पेट से हटाए और अपनी बनियान और धोती कुछ hi पलों में उतर दिए, और सिर्फ एक कच्चे में आ गए,

माँ- अरे हेहही बाबा तुमने तो गर्मी का पूरा जुगाड़ कर लिए,

नाना- और का अब गर्मी भी नहीं लगेगी और हम तेरे साथ समय भी बिता पाएंगे,

माँ- ये तो सही कहा बाबा,

नाना फिर से पीछे से माँ से चिपक गए, अब उन्हें भी पता चल चूका था की माँ उनका विरोध नहीं करने वाली, अगर करना चाहती तो अब तक कर चुकी होती, इसलिए वो भी खुलकर आगे बढ़ रहे थे, नाना ने फिर से अपने हाथ माँ के पेट पर रखे और खुद पीछे से बिलकुल माँ से चिपका लिया, अपने नंगे बदन पर माँ के कामुक गरम बदन का स्पर्श पाकर नाना मचल उठे, उनका लुंड एक बार फिर से माँ के चूतड़ों के बीच घुस गया, नाना चालाकी दिखते हुए माँ के पेट को सहलाते हुए अपना हाथ बार बार माँ के पेटीकोट के नारे की और ले जाते हुए उसे खींचने लगे, धीरे धीरे उसकी गाँठ भी ढीली होने लगी,

इधर माँ जो बड़ी मुश्किल से अपना ध्यान आता गूंथने पर लगा पा रही थी क्यूंकि उनके बाबा उनके बदन के साथ खेल जो रहे थे, नाना अब खुद से काबू खोते जा रहे थे, वो माँ की पीठ और गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूमने लगे,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

क्या कर रहे हो?

नाना- ुहम्म्म्म कुछ नही अह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह बस तुझे प्यार दिखा रहा हूँ,

नाना माँ के कन्धों को चूमते हुए बोले,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह ैसाआह्ह प्याआआररर बाप बेटीई सीए जताताआह है क्याहहह,

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह पटाहहह नाहीइइइइइइ पर जटानाः तो चाहियेए, अह्हह्ह्ह्ह खासकर बितीयआह्ह्ह्ह तेरी जैसी हो टूवाह्ह्ह.

नाना के हाथ धीरे धीरे माँ के पेट से सरकते हुए ऊपर उनकी चूचियों पर आ गए और वो माँ की चूचियों को ब्रा के ऊपर से hi मसलने लगे,

माँ के हाथ आता गूंथ रहे थे तो नाना माँ की चूचियों को,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाताअहह नाहीईईई गूंथ पा रही मैं...

नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह कोई बात नहीं मैं गूंथ रहा हूँ,

नाना नीचे से अपनी कमर हिलाकर अपना लुंड कपड़ो सहित माँ की गांड में घुसाने की कोशिश कर रहे थे...

माँ- बबआहहह कोई देख लेगा अह्हह्ह्ह्ह

नाना- तुह्ह्हह्ह क्या हुआ बितीयआह्ह्ह्ह हम अपनी बितीयआह्ह्ह्ह से लाड नहीं कर सकते क्या...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न बिलकुल बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कर सकते हो,

ऊपर चूचियों को मसलते हुए नाना का एक हाथ फिर से नीचे माँ के पेट पर आया और कुछ पल उँगलियों से नाना ने माँ की नाभि को छेड़ा और फिर हाथ को थोड़ा सा नीचे किआ तो फिर से पेटीकोट के नाड़े में उनका हाथ घिसा और इस बार नाड़े की गांठ जो पहले hi लगभग खुल चुकी थी पूरी खुल गयी और माँ का पेटीकोट खुल कर लटक गया, कुछ पल तो किसी को भी खबर नहीं हुई फिर जैसे hi नाना को अहसास हुआ उन्होंने तुरंत नीचे देखा तो पाया की पेटीकोट उनके लुंड और चूतड़ों के बीच में फंसा होने के कारन लटका हुआ है, नाना ने तुरंत अपनी कमर पीछे की तो माँ का पेटीकोट सरक कर नीचे गिर गया, वहीं अपनी बड़ी बिटिया को नीचे से नंगा पाकर नाना होश खो बैठे, और पीछे से अपनी बिटिया के बड़े मोठे चूतड़ों की सुंदरता निहारने में खो गए, माँ के गोल मटोल चूतड़ देख कर नाना तो. बिलकुल सुन्न पद गए उन्हें सूझा hi नहीं क्या करें, फिर जैसे उनको खुद को hi अपने आप कुछ हो रहा हो वो वहीं नीचे घुटनो पर अपने आप बैठ गए,

माँ ने भी चेहरा घुमा कर देखा और नाना को नीचे बैठे पाया तो माँ ने ब्बि बेशर्मी दिखते हुए अपना एक घुटना रसोई की स्लैप पर रख दिए जिससे नाना की आँखें और चौड़ी हो गयी, माँ भी अब पूरा खुल कर अपने एक हाथ से चूतड़ों को फैलाकर अपनी छूट और गांड अपने बाबा को दिखने लगी,





माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वहां क्यों बैठे हो, लाड नाहीइ करोगी अपनी बितीयआह्ह्ह्ह को,

माँ अपनी छूट नाना को दिखते हुए बोली तो नाना खुद को रोक नहीं पाए और आगे खिसकते हुए अपना मुँह माँ की छूट पर लगा दिया और पागलों की तरह चाटने लगे, माँ ने भी अपने बदन से ब्रा को भी अलग कर दिया और वो बिलकुल नंगी हो गयी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बबाहहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi प्याआर करूओणआ अपनीईईई बितीयआह्ह्ह्ह को,

माँ नाना के द्वारा छूट चटवाने पर सीसिया रही थी वहीं नाना तो बिटिया की छूट का स्वाद पाकर बिलकुल प्रसन्न हो गए थे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था की जो हो रहा है वो सपना है या सच, रात भर छोटी बिटिया की चुदाई और सुबह बड़ी की छूट मुँह पर लगी है और क्या चाहिए एक बाप को.

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी चूऊउससस रही हो साराआआअ रससससस पि जाओगे क्याहहह?

नाना- ुहममहंमम.

नाना को तो अभी माँ की छूट से मुँह पल भर को भी हटाना मंज़ूर नहीं था ,

और लगातार चूसे जा रहे थे,

माँ की हालत ख़राब होती जा रही थी, और हो भी क्यों न आखिर उनके पिता उनकी छूट का रास चूस रहे थे, माँ के लिए इससे उत्तेजित और क्या हो सकता था, रात को भाई से चुदाई, सुबह बाप से चूसै,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह्ह uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh...

माँ अपनी चूचियों को मसलते हुए आहें भर रही थी तो नाना उनके चूतड़ों को हाथों से फैलाकर अपना मुँह उनकी छूट में घुसाए हुए लगातार अपनी जीभ चला रहे थे,

इधर मां की नींद खुली तो उठ कर बैठ गए, खुद को नंगा अपनी बड़ी बहन के कमरे में पाया तो रात की साडी कहानी ताज़ा हो गयी, और साथ hi वो सब भी जो जीजी ने बताया था, मां ने उठकर तौलिया कमर से लपेटी और कमरे से बहार निकले आंगन में कोई नज़र नहीं आ रहा था, तो मां आगे बढे देखा मौसी के कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ था, उन्होंने अंदर झांक कर देखा तो चौंक गए, क्यूंकि मौसी बिलकुल नंगी सो रही थी, मां को समझ आ गया रात जो कुछ जीजी ने बताया सब सही था, वो तुरंत कमरे में घुस गए और अपना तौलिया भी कमर से उतर कर मौसी की तरह बिलकुल नंगे हो गए, मां ने अपना कड़क लुंड हाथ में पकड़ा और बिस्तर के किनारे जाकर मौसी के चेहरे पर घिसने लगे, मौसी अब भी नींद में थी पर लगातार चेहरे पर घिसावट से उनकी नींद धीरे धीरे खुलने लगी, उनकी आँखें हलकी सी खुली तो चेहरे पर झिजल्ट लुंड और गोलियां दिखी, मौसी ने अपना मुँह हल्का सा खोला तो लुंड उनके मुँह में घुस गया, मौसी ने फिर से आँखें बंद कर ली,

मां की आँखें मज़े से चढ़ने लगी अपनी छोटी जीजी के मुँह की गर्मी अपने लुंड पर महसूस कर,

मौसी को अभी तक ये अंदाज़ा नहीं था की जिसका लुंड उनके मुँह में है वो मां हैं, उन्हें लग रहा था की नाना hi सुबह उठकर उनके साथ खेल रहे हैं, इसलिए वो आधी नींद में उन्हें अपना मुँह छोड़ने दे रही थी,

मां भी जोश में आकर मौसी के मुँह में धीरे धीरे लुंड पेलने लगे..





हर झटके पर मां की भी सिसकियाँ निकल रही थी, उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की रात को बड़ी बहन के बाद सुबह वो दूसरी बहन के साथ ये सब कर पा रहे थे वो भी इतनी आसानी से,

दूसरी और नाना रसोई में नाना अभी भी नीचे बैठे हुए थे और माँ की छूट और गांड चाट रहे थे, माँ का पूरा बदन काँप रहा था और उन्होंने रसोई की स्लिप को कास के पकड़ कर खुद को संभाला हुआ था, माँ अपने बाबा की जीभ पर झाड़ रही थी, और नाना अपनी बिटिया की छूट से निकलते रास को सारा चाट गए, माँ झाड़ कर शांत हुई तो उन्होंने खुद को नाना के मुँह से आगे किआ, और सीढ़ी हो गयी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या करवा दिया तुमने मुझसे,

नाना- कुछ नहीं बिटिया बस अपने प्यासे बाबा की प्यास बुझाई है तूने अपने रास से,

माँ ने ये सुन कर खुद को झुकाया और नाना के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, नाना भी माँ की हरकत से खुश हुए और माँ के होंठों को तुरंत चूसने लगे, बाप बेटी का चुम्बन जल्दी hi आक्रामक और जोश से और तेज़ हो गया लग रहा था दोनों एक दुसरे के होंठों को खा जायेंगे, माँ नाना के होंठों से अपनी छूट का स्वाद पाकर और गरम हो रही थी, काफी लम्बे चुम्बन के बाद दोनों अलग हुए तो बुरी तरह हांफ रहे थे, माँ तो सांसें ठीक करने लगी पर नाना को संयम नहीं हो रहा था वो माँ की नंगी चूचियों पर टूट पड़े और उन्हें पागलों की तरह चूसने लगे, एक को मसलते दुसरे को चूसते,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह बाबाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कहाआआआ jaooooooooooo अपनी बेटीई की कुछःठियाआन, अह्हह्ह्ह्ह,

नाना बेटी की आहें सुन और जोश में आ रहे थे, उनका लुंड बिलकुल लोहे की तरह कड़क हो चूका था,

नाना ने जी भर के माँ की चूचियों को चूसा और माँ तब तक लगातार आहें भर्ती रही, नाना कुछ देर में अलग हुए और माँ को वहीं रसोई में नीचे लिटा दिया, अब नाना से और इंतज़ार नहीं हो रहा था, नाना तुरंत माँ के पैरों के बीच आये और अपना कच्चा भी नीचे खिसका दिया, नाना ने अपने दहकते लुंड को पकड़ा और पकड़ कर टोपे को माँ की छूट पर लगाया तो उत्तेजना और एहसास से दोनों hi सीसीएनए लगे, नाना ने कुछ पल उस एहसास को लेने के बाद लुंड को छूट के द्वार पर लगाकर माँ की कमर को थाम कर जैसे hi धक्का लगाने को हुए, घर के दरवाजे पर दस्तक हुई और दोनों hi उछलकर खड़े हो गए, नाना का तो बुरा हाल हो गया पर अभी क्या कर सकते थे,

माँ- बाबा हम नहाने जा रहे हैं तुम दरवाज़ा खोल देना,

माँ अपने कपडे उठाते हुए बोली.

नाना- ठीक है बिटिया,

ये कह नाना ने भी जल्दी से कपडे पहने और दरवाज़ा खोलने आगे बढे, बेचारे के साथ आखिरी समय पर धोखा हो गया था, पर कर भी क्या सकते थे, नाना ने जाकर दरवाज़ा खोला तो पापा मौसा और ममी किरण साथ में पल्ली भी थी,

वहीं खटखटाहट से मौसी की भी नींद खुल गयी थी जिनके गले में मां का लुंड फंसा हुआ था और मां उसी वक़्त झड़ने लगे, और अपनी मलाई मौसी के मुँह में छोड़ ने लगे,

मौसी ने रास गटकते हुए जैसे hi देखा की ये उनके बाबा नहीं बल्कि भाई है तो थोड़ी हैरान हुई पर फिर समझ आ गया तो उनका रास गटकते हुए लुंड निकल कर बोली - अरे उठा नहीं सकता था पहली बार लुंड चुसवाया वो भी सोते हुए, चल अब जल्दी से बहार जा सब आ गए हैं लगता है,

मां कुछ नहीं बोल पाए और जल्दी से तौलिया लपेट कर बहार निकल गए, कुछ देर बाद मैं भी घर आ गया,

माँ भी नाहा कर निकल चुकी थी सब नाश्ता कर रहे थे, मां रह रह कर सबको देख रहे थे और सोच रहे थे देखने में कितना साधारण परिवार है हमारा पर अंदर hi अंदर क्या क्या होता है, देखो अभी कैसे सब बिलकुल सामान्य नज़र आ रहे हैं, तभी उनकी नज़र अपनी पत्नी पर गयी जिसे देख कर सोचा बताओ मेरी प्यारी पत्नी रात भर तीन तीन लुंड से छुड़वाई है लग hi नहीं रहा, फिर बेटी को देखा तो सोचा हाय अब अपनी बिटिया की जवानी का रास तो चखना पड़ेगा,

तभी मौसी बोली तो उनका ध्यान सब पर गया,

मौसी- सब आ गए ये दोनों नमूने कहाँ हैं,

मौसी ने सागर और अनुज के बारे में पूछा,

किरण- बुआ जानती हो तुम दोनों को कितने बड़े आलसी हैं अभी भी सो hi रहे होंगे,

मामी- अरे बस तुझे तो मौका मिले दोनों को छेड़ने का अब सो रहे हैं तो सोने दे आज अनुज की तो छुट्टी hi है,

वैसे किरण की बात गलत थी अनुज और सागर सो नहीं रहे थे,

देर रात की चुदाई से ठक्कर सोया सागर देर तक सो रहा था कुछ आवाज़ों से उसकी नींद हलकी हलकी खुली तो उठ कर बैठ गया, आँखें मलते हुए इधर उधर देखा तो खुद को कमरे में अकेला पाया, बहार से कुछ आवाज़ें आ रही थी जिनमे अनुज के हंसने की भी थी,

सागर ने मन में hi सोचा की अनुज भी न खुद चला गया मुझे उठाया भी नहीं काम से काम उठा जाता तो मैं कपडे पहन लेता, नंगा सो रहा था कहीं किसी ने देखा न हो, ये सोचते हुए सागर जल्दी जल्दी अपने कपडे पहनने लगा, वैसे रात में प्रेमा भाभी के साथ मज़ा hi आ गया, साला चोदामपुर कितना मज़ेदार गाओं है, जबसे आया हूँ दो औरतों को छोड़ चूका, जिसमे एक तो प्रेमा भाभी hi हैं, बस अब लाडो और पैट जाये उसकी लेने में बड़ा मज़ा आएगा,

सागर मन hi मन ये सब सोच खुश हो रहा था, कपडे पहन कर वो कमरे से बहार निकला और फिर जैसे hi आंगन की और मुदा, और आँगन में जो उसने देखा उसे देख कर उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी,

जो वो देख रहा था उसने कभी सपनो में भी नहीं सोचा था, बेचारा जहाँ था वहीं खड़ा रह गया, बिलकुल सुन्न पद गया, उसके सामने आंगन में अनुज एक खत के किनारे नंगा अपने पैरों को मोड़ कर लेता था, खत के नीचे प्रेमा भाभी बैठी थी बस जो अनुज का लुंड अपने मुँह में भर कर चूस रही थी, उनकी चूचियां उनकी ब्रा से बहार लटक रही थी जो की उनके बदन पर एक मात्रा कपडा था, पर सबसे चौंकाने वाली बात सागर के लिए थी की भाभी के बगल में कोई और भी बैठी थी जिसकी जीभ अनुज की गांड पर चल रही थी और वो कोई और नहीं बल्कि लाडो थी जो अनुज की गांड चाट रही थी,





सागर ये देखकर बिलकुल स्तब्ध रह गया, उसने सोचा नहीं था की जिसे वो पसंद करने लगा था वो लड़की उसे ऐसे देखने को मिलेगी, लाडो भी पूरी नंगी थी,

इतने में भाभी की नज़र सागर पर पड़ी, और बोली- अरे भैया उठ गए आओ बैठो चाय लाती हूँ तुम्हारे लिए,

भाभी की आवाज़ सुनकर सबका ध्यान सागर की और गया, लाडो ने भी उसे एक नज़र देखा फिर अपने काम में लग गयी,

इतने में तै की आवाज़ आई जो बोली - आजा सागर बबुआ बैठ चाय पी ले,

तब जाकर सागर को एहसास हुआ की आंगन में और भी लोग थे, दूसरी खत पर राजपाल ताऊ पद्मिनी तै और मंजू तै बैठ कर चाय पि रहे थे, वहीं एक तरफ से बाथरूम से जग्गू भी निकल के आ रहा था,

सागर सोचने लगा ये हो क्या रहा है भेनचोद, उसने अपना सर झटक के देखा की वो कहीं सपना तो नहीं देख रहा,

अनुज- अबे आजा न क्या पेड़ की तरह खड़ा हुआ है,

अनुज की बात से वो सोच से बहार आया और सोचा सपना नहीं था,

धीरे धीरे कदम बढ़ता हुआ आगे बढ़ा, सोचने लगा की सबको क्या हो गया है, फूफाजी बुआ सबके सामने ये हो रहा है सब आराम से चाय पि रहे हैं,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह लाडुआहहह जीभ से hi गांड मार लेगी क्याहहह?

अनुज की आवाज़ सुनकर सागर का ध्यान फिर से उनकी और गया और लाडो की जीभ जो अनुज के गांड के छल्ले में अंदर बहार हो रही थी,

इतने में भाभी उसके पास आई और उसके हाथ में चाय पकड़े, सागर ने चाय ली और अनुज के बगल में पड़ी खत पर चाय लेकर बैठ गया, भाभी बापिस अनुज और लाडो के पास गयी और अनुज के लुंड को चूसने लगी,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह भाभी,

सागर अब भी बिलकुल शांत बैठा था हाथ ने चाय लिए हुए, ये जब जग्गू ने देखा तो बोलै- अरे सागर चाय पीले भाई, ठंडी हो जायेगी.

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह ये नहीं पियेगा भइयाझ, बेचारे का दिल जो टूटा है,

मंजू- दिल टूटा है मतलब कैसे? का हुआ बबुआ,

अनुज- तै इसके सपनो की रानी मेरी गांड चाट रही है न बस ये देख कर बेचारे का दिल टूट गया,

ये सुनकर सागर थोड़ा और चौंका वहीं लाडो ने अनुज के पिछवाड़े पर एक चपत लगाई, और सागर की और देख कर मुस्कुराई,

जग्गू- अरे हाँ, सागर लाडो को पसंद करता है सुनने में आया है,

राजपाल ताऊ- अरे वाह फिर तो ब्याह करवा देते हैं तुम दोनों का,

ताऊ भी शामिल होते हुए बोले,

मंजू तै- क्यों बबुआ, पसंद है तुम्हे हमारी लाडो,

अब सागर बोले तो क्या बोले, कैसे कहे की लड़की पसंद है जब लड़की किसी और की गांड चाट रही हो सामने hi, पर बेचारे को कुछ तो बोलना hi था न तो बोलै- अरे बुआ ऐसी बात नहीं है कोई, ये तो बस ऐसे hi,

प्रेमा- अरे अब कहाँ पसंद होगी अब ऐसी जो देख लिए, सब समझते हैं हम मर्दों को,

अनुज- बेचारे की प्रेम कहानी का क्या होगा अब भाभी,

अनुज भी सागर को चिढ़ाते हुए बोलै,

मंजू तै- ऐ कोई छेड़ो मत उसे, और का हो गया अगर लाडो अनुज की गांड चाट रही है तो, हम बबुआ की चाट लेंगे,

ये सुन सागर बिलकुल दांग रह गया, की बुआ क्या बोल रही हैं वो व्ही अपने पति और बेटे के सामने,

ताई उठ कर आई और सागर को खड़ा होने का इशारा किआ तो सागर तुरंत खड़ा हो गया, तै ने तुरंत उसका पजामा और कच्चा बहार आ गया, इतनी कश्मकश के बाद भी लुंड बिलकुल तन कर खड़ा था, तै ने उसे बापिस बिठा दिया या कहें की पीछे की और लिटा दिया, सागर पीछे कोहनी को टिका कर लेट गया और देखने लगा की तै क्या करने वाली हैं, तै ने सागर के लुंड को पकड़ा और फिर उसके टोपे पर जीभ फिरै तो सागर बेचारा सिहरने लगा

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh,

बुआ ने जीभ फिरते हुए उसके लुंड को मुँह में भर लिए तो सागर एक पल को तो खत से पूरा उठ गया फिर बापिस लेट गया, तै उसका लुंड चूसने लगी,

इधर मुझे इन दोनों को बुलाने घर से भेजा था, मैंने जाकर दरवाज़ा खटखटाया जिसे पद्मिनी तै ने खोला और बोली- अरे आओ बाबू,

मैं अंदर आया तो तै ने दरवाज़ा बंद किआ, अंदर आकर मैंने आंगन का नज़ारा देखा जहाँ एक खत पर अनुज लेता हुआ था और उसके ऊपर लाडो उसका लुंड अपनी गांड में लेकर उछाल रही थी,

राजपाल ताऊ अपनी प्यारी बहु की झुककर गांड मार रहे थे मुझे देखते बोले- आजा कर्मा बैठ,

प्रेमा- भैया चाय लेकर दूँ क्या?

में- अरे नहीं भाभी पि कर आया हूँ तुम अपने ससुर की सेवा पर ध्यान दो,

उधर पद्मिनी तै दरवाज़े से आकर जग्गू के सामने बैठ कर उसका लुंड चूसने में लग गयी,

तभी मेरे कानो में सागर की सिसकियाँ पड़ी तो मैंने उस और देखा तो पाया की मंजू तै उसका लुंड अपने गले तक लेकर घोंट रही थी और सागर उनके सामने फड़फड़ा रहा था,





सागर आहें भरता हुआ बार बार अपनी कमर उछाल रहा था और फिर अचानक से उसने तै का सर पकड़ के अपने लुंड पर दबा दिया और अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह करते हुए झड़ने लगा, उसका रास तै गटकने लगी, लुंड की एक एक बूँद तै के मुँह में छोड़ने क्र बाद सागर थोड़ा शांत होकर सांसें लेता हुआ खत पर फिर से लेट गया,

में- अरे वाह आज सागर की ट्रेनिंग चल रही है,

सागर ने मुझे देखा और बोलै- भैया समझ नहीं आ रहा ये सब क्या हो रहा है पर अभी तै ने मुझे जन्नत की सैर करवा दी,

वो झड़ने के बाद थोड़ा खुल गया था अब सबमें शामिल होता हुआ बोलै,

में- अरे समझ आ जायेगा सब धीरे धीरे तू जो हो रहा हैं होने दे और खुल कर मज़े ले बस,

सागर मेरी बात सुन कर मुस्कुराया,

सागर- बिलकुल भैया.

सब को देखकर मेरा भी लुंड कड़क हो चूका था तो मैं देखने लगा की कहाँ जगह है मेरे लिए, तो मैंने जग्गू और पद्मिनी तै के पास जगह ली और अपना लुंड निकल कर पद्मिनी तै के आगे कर दिया जिसे वो तुरंत पकड़ कर चूसने लगी

उधर मंजू तै ने सागर की टांगें मोड़ कर उसे खत के बिलकुल किनारे पर लिटा दिया था, और अपने कहे अनुसार सागर की गांड पर अपनी जीभ चलने लगी, तो सागर आह्हः आह्हः करने लगा,

सागर- आह्ह्ह्हह ताई गुड़गुड़ी हो रही है, अह्ह्ह.

अनुज- अह्ह्ह्ह अचे से चटवा ले सागर, चिकनी होगी फिर तभी तो ताऊजी मार पाएंगे तेरी.

अनुज ने लाडो की गांड उसके पीछे से केतकर मरते हुए कहा,

सागर ने ये सुन कर परेशां होते हुए तै के चेहरे की और देखा जिन्होंने आँखों में hi इशारा किआ तो वो समझ गया मज़ाक कर रहा है और ताई उसकी गांड में जीभ चलने लगी,





सागर- अह्ह्ह्ह बबुआअह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है, गुदगुदी हो रही haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh,

तै ने उसे खुश करते हुए उसकी गांड कुछ पल और छाती फिर बोली- अब्ब्ब अपनी बुआ को छोड़ेगा?

सागर की क्या औकात थी की ऐसे मौके को मन करदे, तै तुरंत उसके ऊपर चढ़ कर उसके लुंड को अपनी छूट में लेकर बैठ गयी,

सागर- अह्ह्ह्हह्हह बाआ ओह्ह्ह्हह्ह कितनी गरम है तुम्हारी,

मंजू तै- अरे क्या गरम है खुल के बोल ना,

सागर- छूट बबुआअह्ह्ह तुम्हारी छूट, अह्ह्ह्ह यकीन नहीं हूँ रहा की फूफा और जग्गू भैया के सामने मैं तुम्हे छोड़ रहा हूँ,

मंजू- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बबुआ यकीन करले, अह्हह्ह्ह्ह और कास के छोड़ अपनी बाआआ को, अह्हह्ह्ह्ह छोड़ अपने जग्गू भैया की माँ को,


मंजू तै उसका जोश बढ़ाते हुए बोली, और उसका फायदा भी हुआ सागर जोश में आकर ताई को नीचे से धक्के लगते हुए छोड़ने लगा,

इधर राजपाल ताऊ अब लेते हुए थे और प्रेमा भाभी अपने ससुरजी के मुँह पर बैठ कर अपनी छूट चटवा रही थी,

दूसरी और उनकी मम्मी यानि पद्मिनी तै हम दोनों यारों के बीच थी,

और जग्गू उनकी छूट में लुंड पेल रहा था वहीं मैं उनके गरम मुँह को अपने लुंड से छोड़ रहा था,





में- अह्हह्ह्ह्ह यार पद्मिनी ताई के आने से और बढ़िया आह्हः हो गया है,

जग्गू- अह्ह्ह्ह ुघठ अह्ह्ह्ह सही कहा, क्या मस्त हैं, तै अह्हह्ह्ह्ह ये गरम छूट,

मंजू तै- सही कहा, हमें भी संधान के रूप में सहेली मिल गयी है,

इस पर पद्मिनी तै भी मेरा लुंड निकल कर बोली- और हमें अह्ह्ह्ह अपना परिवार,

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह और इतने लम्बे लम्बे लुंड भी तो मिले हैं मम्मी,

इस पर सब हंसने लगे, बेचारा सागर अब भी सबके बीच जुड़ने की कोशिश कर रहा था वो भी हंसने लगा, पर बातों से ज़्यादा उसका ध्यान तै की चूचियों पर था जिन्हे मुँह में भर कर वो चूसने लगा,

अभी सागर ऊपर था और तै की छूट में धकधक धक्के लगाकर लुंड पेल रहा था,

अनुज ने लाडो को घोड़ी बना दिया था और पीछे से उसे छोड़ रहा था,

इधर मैंने जग्गू के साथ जगह बदली और अब पद्मिनी तै की गांड में लुंड घुसा कर उन्हें छोड़ने लगा, वहीं जग्गू हमारे पास से उठा और अपनी मम्मी और सागर के पास चला गया जहाँ तै सागर के ऊपर थी और सागर नीचे से लगातार उन्हें छोड़ रहा था,





जग्गू ने देखा सागर का लुंड अपनी मम्मी की छूट में अंदर बहार होते हुए और उसके ऊपर उनकी गांड का छेड़ भी जग्गू ने तुरंत अपनी मम्मी के पीछे जगह ली और सागर को पेअर फैलाने को कहा,

जग्गू- सागर थोड़ा पेअर फैला, हमें भी आने दे.

पहले तो सागर को समझ नहीं आया फिर जैसे hi समझ आया उसका बदन सिहरने लगा, उसे एहसास हुआ की वो माँ को बेटे से चुड़ते देखने वाला है और देखने वाला क्या वो बेटे के साथ मिलकर माँ को छोड़ेगा, ये सोच कर hi वो सिहरने लगा,

सागर ने कहे अनुसार जग्गू के लिए जगह बनाई तो जग्गू ने स्थान लिए और अपना लुंड पकड़ कर अपनी मम्मी की गांड पर रखा और धक्का देकर अंदर घुसा दिया,

मंजू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बेटाःह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ब

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह buaaaaahhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ कैसा लग रहा है?

सागर माँ बेटे की चुदाई का हिस्सा बन बहुत उत्तेजित हो रहा था और उसके मन में बहुत से सवाल आ रहे थे,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह सायःहजार बहुत ाचाहहहह जो माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अपनीई माँ छोड़ने में है वो कहीं नही,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह बच्चोंन्न, अह्ह्ह्ह मार अपनी माँ की गांड बेटाःह्ह्ह,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह बुआहहहहह.

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह सागर, टूउउउउ भी छोड़ना चाहता है अपनी मम्मी कुआहहहहहह,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह हाँ भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ये तो हिलाताः भी हैईईई अह्ह्ह अपनीई मम्मी के नाम पर,

मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह सहीई में बबुआहहह अह्ह्ह्हह्हह अपनीई माँ छोड़ोगे तुम,

सागर भी अब पूरा उत्तेजित हो चूका था और बोलै- अह्हह्ह्ह्ह हाआनंनं बुआहहहहह आह्ह्ह्हह्ह छोडूंगा मैं,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह ज़रूर छोडनाआअह्ह्ह्ह बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आता है अपनी माँ छोड़ने में, अह्ह्ह्ह और तेरी मम्मी तो है भी क्याह मस्त माल बिलकुल गदराई हुई,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तभी तू उनके गदराये बदन को छोड़ने में बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ायेगाहहह,

सागर और जग्गू , तै को दोनों और से छोड़ते हुए मामी को छोड़ने की बात कर रहे थे,





अनुज- अह्हह्ह्ह्ह सही कहा आठ सागर बड़ी मस्तट्ठत हीीं मामी देख कर hi लुंडडडड खड़ा हो जाता है, देख कर hi मन करता है, झुका कर लुंड पेल दूँ

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन मेराअहहह भी मन्न्नन याहीईई. करता है यार...

सागर तेज़ी से तै की छूट में धक्का लगते हुए बोलै,

में- अह्हह्ह्ह्ह कोशिश करता रह जल्दी hi तेरी मम्मी तेरे लुंड पर उछालेंगी,

मैंने पद्मिनी तै की गांड में लुंड चलते हुए बोलै,

पद्मिनी तै- और जब तक अपनी माँ न छोड़ पाओ बाबू तब तक हमें अपनी माँ बना कर छोड़ लेनाःह्ह्ह,

इस पर सब हंसने लगे,

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह सागर तू मेरी माहहहह छोड़ राहाहहह है मुझे भी अपनीइ माँ छोड़ने देगा अह्ह्ह्हह,

सागर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन भइयाझ सब मिलकर छोड़ेंगी जैसे बुआहहहहह को छोड़ रहईये हैं,

राजपाल ताऊ- अह्हह्ह्ह्ह सागर लल्लाहहहह फिर तो हमें भी जोड़द ली हम भी तेरी मम्मी को चखना चाहेंगे,

ताऊ जी प्रेमा भाभी को छोड़ते हुए बोले,

सागर- हेहही बिलकुल फूफाजी,

प्रेमा भाभी- हाआनंनंन्न तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मामाजी को हम और मम्मी देख लेंगे,

इस पर सब हंसने लगे,

लाडो- जबब्ब पूरा परिवार hi आआह्ह्ह्हह्ह रहा है तो किरण को क्यों छोड़ दियाहहह वो भी तो बिलकुल छोड़ने वालाआ माल है,

में- बिलकुल सही कहाँ, हर तरह से मामी पर गयीईइ है वो,

अनुज- सही कहा यार उसे देखकर तो बूढ़ों के भी खड़े हो जाएं,

ताऊजी- सही कहा बेटा हमारा भी हो जाता है, एक बार फिर से ठहाका गूंजा,

लाडो- अरे तौजीय तुम कहाँ बूढ़े हो अभियई,

पद्मिनी- सही कहा समधी जी, अभी तो तुम जवान हो,

राजपाल ताऊ ये सुन थोड़े शर्मा गए,

प्रेमा- अरे देखो तो कैसे शर्मा रहे हैं पापाजी,

मंजू- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह संधान तारीफ कर रही है शर्मायेंगे hi, और आज रात संधान की गांड भी खोलेंगे,

पद्मिनी तै- अह्हह्ह्ह्ह तो क्याःह्ह्ह हुआ हमारी गांड और छूट तो समधी के लिए हमेशा खुली है,

पद्मिनी तै मुझसे गांड मरवाते हुए खुश होकर बोली, साथ hi अपनी उंगली से अपनी छूट को भी खोल कर दिखाया, उनके सीने पर नाचती बड़ी बड़ी चूचियां मुझे और पागल कर रही थी,





में- अह्हह्ह्ह्ह टीई क्याःह्ह्ह सहीई जगहहहह आई हो तुमममम,

जग्गू- अह्ह्ह्ह हाँ हमें ऐसी चुड़क्कड़ औरतों की ज़रुरत है चोदामपुर में,

लाडो- ावहहह पर अभी चुड़क्कड़ किरण की भी बात करलो,

में- बात क्याःह्ह्ह करनी, वो भी छुड़ेगी सबसे अपनी मम्मी की तरह,

अनुज- आह्हः सही में मज़ा आएगा,

लाडो- जिसकी बहन है उससे तो पूछ लो वो देख पायेगा, अपनी बहन चुड़ते हुए,

सागर और लाडो की नज़रें मिली और सागर मुस्कुराया और बोलै- आह्हः बिलकुल माँ की छूट हो या बहन की होतीय तो छोड़ने के लिए है,

लाडो- तुओंआहह तुम भी छोड़ोगे?

सागर- अह्ह्ह्ह हानंन्न मैं भी छोड़ुंगाःह,

सागर ने ये बोलै और साथ hi खुद को अपनी बहन के साथ सोचने लगा तो वो खुद को रोक नहीं पाया और तै की छूट में झड़ने लगा,

उसके झड़ने के बाद जग्गू ने तै को उसके ऊपर से हटाया और उन्हें बगल में लिटा कर अपनी मम्मी की गांड मरना जारी रखा, इधर अनुज ने लाडो को उठाया और उसे लेजाकर सागर के बगल में hi झुका दिया जिससे उसके चेहरे सामने सागर का लुंड आ गया, लाडो ने एक बार सागर को देखा जो आँखें बंद किये हुए अपनी सांसें ठीक कर रहा था और फिर उसके रास से साणे हुए लुंड को देख लाडो ने चेहरा नीचे किया और उसके लुंड को चाटने लगी, सागर ने आँखें खोल कर जब देखा तो पाया लाडो उसके लुंड को चूस रही है तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी,

इधर अनुज ने लाडो को छोड़ा अपना लुंड मंजू तै के मुँह में घुसा दिया जो की जग्गू का लुंड गांड में लेते हुए चूसने लगी, इधर मैं और ताऊ दोनों माँ बेटी यानि भाभी और पद्मिनी तै को एक दुसरे के ऊपर 69 के आसान में करके दोनों की गांड मार रहे थे माँ बेटी एक दुसरे की छूट चाट रही थी,

जग्गू और अनुज ने एक बार फिर से मंजू तै को दोहरी चुदाई का शिकार बना लिया और इस बार जग्गू का लुंड तै ने छूट में लिया तो अनुज ने तै की गांड को भेदा,

उनके बगल में लाडो ने सागर का लुंड चूस कर साफ़ किआ तो वो दुबारा खड़ा हो गया जिसे लाडो ने सागर के ऊपर आते हुए अपनी छूट पर लगाया और उसकी आँखों में देखते हुए नीचे सरक गयी तो सागर के मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गया,

सागर ने लाडो की कमर को पकड़ कर उसे अपने ऊपर खींच लिए और अपने होंठों को उसके होंठों पर लगा दिया, दोनों एक दुसरे को बेहद पागलपन से चूसते हुए छोड़ने लगे, सागर नीचे से लाडो की छूट में धक्के लगा रहा था, सागर के दोनों हाथ लाडो के बदन पर फिर रहे थे,

इधर जल्दी hi मंजू तै दोहरी चुदाई के आगे ढेर हो कर झड़ने लगी तो उनके झड़ने के बाद अनुज एयर जग्गू ने उनसे अपने लुंड चुस्वाए और जैसे hi दोनों झड़ने के करीब पहुंचे तै ने दोनों को पद्मिनी तै के चेहरे पर झड़ने को कहा तो दोनों भागते हुए हमारे पास आये, उन्हें देख कर हम लोग भी अलग हो गए,

तभी न जाने क्या हुआ सागर और लाडो उठकर अंदर कमरे में भाग गए, हमने भी सोचा ाचा है अगर एक साथ समय बिताना चाहते हैं तो,

अनुज और जग्गू दोनों hi पद्मिनी तै से लुंड चुसवाने लगे वहीं प्रेमा भाभी मेरा और ताऊजी का चूसने लगी, जल्दी hi अनुज और जग्गू ने अपने अपने रास से पद्मिनी तै का चेहरा सना दिया और उनसे लुंड साफ़ करवा कर हैट गए, फिर ताऊजी भी झड़ने को हुए तो भाभी ने उनके लुंड का मुँह भी अपनी मम्मी के चेहरे पर कर दिया और ताऊ जी भी अपनी संधान के चेहरे पर झाड़ गए, भाभी ने मेरा लुंड भी अचे से चूसा और मैं भी उनकी मम्मी के चेहरे पर झाड़ा, जब मैं उनके सामने से हटा तो पद्मिनी तै का चेहरा देखने लायक हो गया था,





उनके पूरे चेहरे से रास टपक रहा रहा जिसमे से कुछ तो वो जातक भी गयी थी पर मंजू तै ने कहा था की वो ऐसे hi इसे चेहरे पर रखें,

प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह भैया कितनी सुन्दर लग रही हैं न मम्मी,

मंजू- हाँ बिलकुल बिटिया तेरी मम्मी सबसे सुन्दर और सब्स्र बड़ी रैंड लग रही है, रैंड संधान तै ने मुस्कुराते हुए कहा,

पद्मिनी तै- का जीजी पहले कराती हो खुद hi और फिर हमें गरियाती भी हो.

मंजू तै- अरे ये तो हमारा प्यार है तुम्हारे लिए,

मंजू तै अपनी संधान से बोली,

प्रेमा- पर मम्मी जी तुमने मम्मी को गन्दा तो करवा दिया अब साफ़ तो करवाओ नहलाओ तो,

मंजू- अरे तो इसमें का है नहला दे,

प्रेमा- अरे मम्मी जी जब गन्दा कुछ अलग ढंग में किया है तो नहलाने का ढंग भी कुछ अलग होना चाहिए न,

मंजू- अरे हमें तो समझ नहीं आ रहा का कहना छह रही है,

में- पर हम लोग समझ गए तै. जग्गू आजा,

मंजू- क्या समझ गए,

में- बस देखती जाओ,

ये कहकर हम दोनों पद्मिनी तै के पास खड़े हुए और फिर अपने अपने लुंड का निशाना उनके चेहरे की और कर उनके मुँह पर पेशाब की धार लगाने लगे जिससे उनका चेहरा साफ़ होने लगा, मेरा और जग्गू दोनों का निशाना सीधा उनके चेहरे पर लग रहा था, तै भी बीच में अपना मुँह खोल कर अपने मुँह में मूट को भरने देती फिर चेहरे पर hi उढेल देती,

हमारे मूट से तै का पूरा चेहरा तर हो गया तो जाकर हम दोनों का मूतना बंद हुआ, हमारे हटते hi राजपाल ताऊ और अनुज भी पद्मिनी तै को मूट से नहलाने लगे, जहाँ हम दोनों ने तै के चेहरे को चुना था तो उन्होंने तै की चूचियां और बाकि बदन को चुना और उसे अपने मूट से धोने लगे,





तै का बदन पूरा मूट से चमक गया तब जाकर ताऊजी और अनुज का मूट बंद हुआ, इसके बाद औरतें कैसे पीछे रह जाती, भाभी आगे बड़ी और अपनी मम्मी के चेहरे के आगे थोड़ा झुककर अपनी छूट से सीटी के साथ धार छोड़ी जो तै के चेहरे और चूचियों को भिगोने लगी,

पद्मिनी तै भी अपनी बेटी के मूट का स्वाद लेकर और उत्तेजित हो गयी थी, भाभी के बाद मंजू तै ने भी अपनी संधान को मूट से नहला दिया, .

जारी रहेगी
 
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