Incest Katha Chodampur Ki - Page 35 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

सभी को होली के पावन पर्व की शुभकामनाएं।

खुशी से साफ मन से सब के साथ मिलकर इस त्यौहार की खुशियां मनाएं।

बोतल और होटल से दूर रहें, नहीं तो पुलिस की मार त्यौहार को ज़्यादा बुरी लगती है।


अपनी पत्नी या प्रेमिका को ही सब समझ कर उसी के साथ खेलें बगल की भाभियों से बचकर ही रहें, हर जगह चोदमपुर जैसा वातावरण नहीं होता।
 
आधी अपडेट लिखी थी बूत गोत देलेटेड सोमेहो, हैवे तो व्रिठे अगेन सो थोड़ा लेट होगा



 
किरण ने कुछ सोचा और बोली- हाँ चाहती हूँ बुआ बस मुझे तुमसे एक वादा चाहिए.

सभ्य- कैसा वादा?

किरण- जब मेरा पहली बार होगा तो तुम वहीं मेरे पास होगी और.

सभ्य- और?

किरण- और मेरे साथ साथ तुम भी उस लुंड से चुड़ोगी.

किरण की ये बात सुनकर सभ्य थोड़ा सोच में पद गयी फिर अगले hi पल किरण को मुस्कुरा कर देखा...


अपडेट 213


चोदामपुर में एक और सुबह का आगमन हुआ और आदत अनुसार नानाजी की नींद जल्दी hi खुल गयी, उठ कर बैठे बगल में पड़ा बिस्तर खली था तो सोचा लगता है बच्चे वहीं रुक गए आये नहीं रात को, खैर बहार निकल कर बाथरूम में घुस गए और नित्य क्रिया निपटा कर बापिस कमरे में आये पर आदत के अनुसार चाय की तालाब लगने लगी, सोचने लगे अब क्या करें, बहु या बिटिया तो अभी सो hi रही होंगी, चलो देखते हैं कोई जगा हो तो, ये सोचकर बहार आये देखा तो लग नहीं रहा था कोई जगा है अभी तक, रात दावत की वजह से भी थोड़ा देर से सोये थे सब, एक पल को नाना ने सोचा आवाज़ देकर जगा लें किसी को पर फिर मन नहीं मन, की बहु और बिटिया पूरे दिन लगी रहती हैं अब सो रही हैं तो क्यों hi उनकी नींद बिगाड़ू..

पर चाय की तालाब भी पूरी लग रही थी, फिर अचानक उन्होंने सोचा अरे हम hi बना लेते हैं न क्या दिक्कत है, ये सोचकर hi रसोई में घुस गए पानी और बर्तन तो तुरंत मिल गया, और उसे चूल्हे पर रख भी दिया, पर जैसे hi चायपत्ती के लिए डिब्बों की और नज़र डाली तो सर चक्र गया, इतने सरे डिब्बों में चीनी, चाय किस्मे होगी, पर नाना की भी तालाब तगड़ी थी सोचा खोल के देख लेता हूँ, और एक एक डिब्बा खोलने लगे इसी बीच उनका हाथ लग कर एक डिब्बा नीचे गिर गया, डिब्बे के शोर से बगल के कमरे में सोती हुई मामी और मौसी दोनों की hi नींद खुल गयी क्यूंकि रसोई के बगल में उनका hi कमरा था, दोनों hi उठी,

मौसी- अरे ये बिल्ली तो नहीं आ गयी, कहीं दूध न गिरा दिया हो,

मामी- अरे अभी देखती हूँ जीजी,

दोनों हड़बड़ाहट में उठे और कमरे से निकल कर रसोई में भागे, रसोई में पहुँच कर दोनों hi नाना को देखकर हैरान रह गए और नाना की नज़र भी जैसे hi अपनी बेटी और बहु पर पड़ी तो उनकी आँखें भी चौड़ी हो गयी, क्यूंकि दोनों hi जल्दबाज़ी में ये भूल गयी थी की रात को गर्मी की वजह से दोनों hi बिना साड़ी के सोइ थी और अभी अपने पिता या ससुर के सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी, नाना तो उन्हें देख हैरान रह गए वहीं मामी को जैसे hi ये एहसास हुआ वो तुरंत भागी बापिस और उनके पीछे से मौसी भी, नाना पीछे से पेटीकोट में मौसी के थिरकते चूतड़ों को देखते रह गए,

कमरे में पहुँच कर ममी बोली- हाय ढैय्या जीजी ये तो गड़बड़ हो गयी, हमें तो बहुत शर्म आ रही है,

मामी ने सारी लपेटते हुए कहा

मौसी- अरे इसमें शर्माना क्या? गलती से हो गया जो कुछ हुआ,

मौसी भी सारी बढ़ाते हुए बोली.

मामी - बाबा को ज़रूर तालाब लगी होगी चाय की .

मौसी- अरे तो उठा लेते किसी को, वो भी न,

मामी- जीजी पर हम कैसे जाएं उनके सामने अब.

मौसी- अरे तुम जितना सोच रही हो वैसी बात नहीं है, ाचा मैं जाती हूँ चाय बना देती हूँ उनकी,

ये कहकर मौसी साड़ी लपेट कर चली जाती हैं रसोई में..

मौसी- अरे बाबा चाय पीनी थी तो जगा देते क्यों परेशां हो रहे थे,

नाना- अरे हमने सोचा क्यों तुम लोगो की नींद ख़राब करें.

मौसी- तुम भी न बाबा कुछ भी सोचते रहते हो, अब हटो बनती हूँ चाय,

नाना पीछे हेट तो मौसी रसोई में जाकर चाय बनाने लगी और नाना उन्हें देखने लगे,

मौसी ने जल्द बाज़ी में सारी बंधी थी तो इतने अचे से नहीं बंधी थी, वहीं नाना की नज़रें अपने आप hi मौसी के गोर चिकने पेट और कमर पर चली गयी और जब मौसी घूमी तो उनके ब्लाउज में चमकती उनकी पीठ देख कर नाना के मन में फिर से वही ख्याल आने लगे,





नाना सोचने लगे- छोटी भी बड़की जैसी hi है बदन के मामले ने, जो भी हो हमारी दोनों बेटियों को रूप और कामुकता भर भर के मिली है, बड़े hi नसीब वाले हैं हमारे दोनों दामाद, कितनी गदराई हुई शालू बिटिया, गदराई गोरी कमर, भरी हुई छाती और भरे हुए नितम्भ, कामुकता की मूरत ऐसी hi तो होती है, मौसा को पता भी नहीं चला की उनका लुंड ये सब सोचते हुए खड़ा हो गया था, उनका ध्यान तो मौसी के बदन पर था,

मौसी- बाबा बाबा, अरे क्या सोचने लगे?

नाना- अरे कुछ नहीं बिटिया का हुआ?

नाना अपने ख्यालों से बहार आते हुए बोले.

मौसी- मैं पूछ रही थी की नाश्ते में क्या बना दूँ?

नाना- जो तुझे सही लगे बिटिया, हमें तो बस चाय दे देना.

मौसी- हाँ हाँ बस, बनने वाली है, तुम्हारी चाय की तालाब भी कमाल है, पकोड़े सेक दे रही हूँ.

नाना- जो सब को ठीक लगे वो बनाले.

मौसी- हाँ सबको पसंद हैं पकोड़े तो,

ये कहके मौसी घूम कर पकोड़े बनाने की तयारी करने लगी और नाना ने फिर से अपनी आँखें उनके बदन पर जमा दी,

मौसी को देखते हुए उनका हाथ अपने आप अपने सख्त हो चुके लुंड तक पहुँच गया, और धोती के ऊपर से hi सहलाने लगा,

पहले तो नाना को भी शायद एहसास नहीं हुआ, पर जैसे hi एहसास हुआ उन्होंने लुंड से हाथ हटा लिए, पर तभी न जाने क्या सूझा, वो बापिस धोती के ऊपर से लुंड को सहलाते हुए मौसी को देखने लगे,

इधर ऐसा नहीं था की माँ ने रसोई से आई आवाज़ नहीं सुनी थी, वो भी उठ गयी थी पर भतीजी के साथ नंगी सो रही थी तो उठकर जल्दी जल्दी से कपडे पहने, फिर किरण को भी जगाया की कपडे पहन ले उठ कर और फिर बहार निकली कमरे से, जैसे hi कमरे से निकल कर रसोई की और जाने लगी तो एक जगह जाकर रुक गयी, क्यूंकि उन्होंने कुछ ऐसा देखा जिसने उन्हें रुकने पर मजबूर कर दिया, उन्होंने देखा की उनके बाबा यानि नाना रसोई के एक और खड़े हुए धोती के ऊपर से लुंड को सहला रहे हैं और उनकी नज़र मौसी पर है, अपनी hi बेटी को देख लुंड सहलाता देख कर माँ के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और सोचने लगी, बाप हो या बीटा, है तो मर्द hi, वो कड़ी कड़ी कुछ सोच hi रही थी की पीछे से किरण आवाज़ लगाती हुई आई - बुआ क्या हुआ क्या गिरा था,

किरण की आवाज़ सुनकर नाना सावधान हो गए और अपना हाथ लुंड से हटा लिए, माँ ने भी ये देखा तो किरण के साथ रसोई की और बढ़ गयी,

माँ- क्या हुआ बाबा, शालू? क्या गिरा था?

मौसी- अरे हुआ कुछ भी नहीं, वो बाबा को चाय पीनी थी तो वो हमें जगाने की जगह खुद बनाने की कोशिश कर रहे थे उनसे hi डिब्बा गिर गया था.

किरण- हाहाहा बाबा हमने सोचा बिल्ली होगी ये तो तुम निकले.

माँ- और चाय पीनी थी तो जगाया क्यों नहीं किसी को.

नाना- अरे भाई, छोटी ने सुना दिया है हमें अब तू भी शुरू हो गयी.

इस पर सब हंसने लगे.

किरण- चलो बाबा तुम सब बच्चों को डाँटते हो शालू बुआ ने तुम्हे दांत दिया अब पता चल गया सबसे ज़्यादा किसकी चलती है.

मौसी- धत्त पागल कुछ भी बोलती है, लो बाबा तुम्हारी चाय,

नाना- हाँ भाई ला, इसके चक्कर में hi सब की नींद ख़राब हुई, हाहाहा.

माँ- अरे बाबा नींद क्या, सबको उठना hi था तो उठ गए,

नाना - चलो अब हम चलते हैं चाय के मज़े लेते हैं, ये कहकर नाना चले गए.

माँ- क्या बना रही है शालू?

मौसी- सोचा नाश्ते में पकोड़े सेक दूँ सबके लिए.

किरण- मैं बनवा देती हूँ बुआ,

माँ- तुम बनाओ मैं बाथरूम से होकर आती हूँ,

ये कहकर माँ चली गयी मौसी और किरण नाश्ता बनाने में लग गयी,

थोड़ी देर बाद मां जो रात को पी कर बेसुध सोये थे उनकी नींद किसी के हिलने पर खुली, आँखें खोल कर देखा तो सामने बड़ी बहन यानि माँ थी,

मां- जीजी, अरे आज देर तक सो लिए हम, और सर भी इतना भरी हो रहा है.

माँ- सर तो भरी होगा hi, रात को पी जो ली थी इतनी, तुम लोगो का समझ नहीं आता क्या मज़ा मिलता है दारु में.

माँ की दांत सुन मां तुरंत उठ कर बैठ गए, इधर माँ उन्हें जगा कर कमरे में झाड़ू लगाने लगी,

मां- अरे जीजी ज़्यादा कहाँ पि थी हमने तो बस थोड़ी hi ली थी,

मां माँ को झाड़ू लगते हुए देखकर बोले...





अब जाने दारु का असर था या कुछ और पर उन्हें अपनी बहन आज कुछ अलग hi लग रही थी, कमर में पड़ी सिलवटें बहुत कामुक सी लग रही थी,

माँ- अच्छा थोड़ी सी पी थी? होश तक नहीं था तुझे, बच्चे उठाकर लाये हैं.

मां- अरे ऐसा हो गया था क्या, हमें कुछ याद hi नहीं.

माँ- याद कैसे होगा नशे में धुत जो था,

मां - अरे जीजी हम क्या करते सरे जीजाओं ने मिलकर हमें ज़बरदस्ती पिलाड़ी.

माँ- तू और तेरे सब jeeja,ek hi जैसे हो दारु मिली नहीं की सब भूल जाते हो, अब जा बहार जाकर चाय पि ले सर थोड़ा हल्का होगा, न हो तो मालिश करवा लिओ.

मां- हाँ जीजी अभी जाता हूँ.

मां जल्दी से खिसक लिए कमरे से ये सोचकर की और दांत न पद जाये,

इधर जग्गू के घर में भी जो उठ रहा था जल्दी जल्दी भाग रहा था किसी को जानवरों को चारा डालना था तो किसी को घर का काम था, रात भर चले प्रोग्राम के कारन वैसे भी सब देर से सोये थे, तो देर से उठ रहे थे और भाग रहे थे, पर अभी भी कुछ ऐसे थे जिनका मन नहीं भरा था और उठ कर फिर से लगे हुए थे, जैसे की जग्गू ने सुबह उठते hi लाडो को फिर से दबोच लिए था और उसे नंगा कर छोड़ रहा था,





लाडो- ओह्ह्ह्हह भैया आराम से आह्ह्ह्हह

जग्गू- ओह्ह्ह्हह्ह लाडो तुझे देख रुका नहीं जाता न, आह्हः कितनी कासी हुई छूट है रे तेरी,

लाडो- ावहहह ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब तो बहुत मौके मिलेंगे इस छूट को छोड़ने के अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

इनकी चुदाई चल रही थी की पीछे से रज्जो चची और नीतू घर की और निकल रहे थे तो मंजू तै ने उन्हें रोका

मंजू तै- अरे नाश्ता करके जाती न रज्जो, नीतू,

रज्जो- अरे जीजी सफाई भी करनी होगी, ऊपर से जानवरों को भी खिलाना है,

मंजू तै- अच्छा पर लाडो आराम से आएगी.

रज्जो- उसकी कोई नहीं जीजी जब मन हो तब भेज देना,

इतने में पीछे से बिरजू की आवाज़ आई - मम्मी मैं भी बाद में आऊंगा लाडो के साथ,

सबने मुद कर देखा तो पाया वो अभी भी पद्मिनी तै के पैरों के बीच में था और उन्हें बिस्तर के किनारे लिटा कर छोड़ रहा था,





रज्जो- लो इसका तो पद्मिनी जीजी से मन नहीं भर रहा,

मंजू तै- अरे तो क्या हुआ संधान की सेवा hi तो कर रहा है, ाचा hi तो है,

इस पर सब हंसने लगे, और रज्जो चची और नीतू दरवाज़े पर पहुंचे hi थे की रज्जो चची को किसी ने पकड़ लिए और पकड़ कर खींचने लगा, चची ने मुद कर देखा तो वो अनुज था,

रज्जो- ओह्हो अनुज क्या कर रहा है लल्ला जाने दे,

अनुज- नहीं चची तुम्हे छोड़ने का ठीक से मौका नहीं मिला है, ऐसे नहीं जाने दूंगा.

ये कहकर वो रज्जो को खींचते हुए ले जाने लगा,

रज्जो- अरे ढैय्या ये बच्चे भी न बड़े ज़िद्दी हो गए हैं...

चची ने हँसते हुए कहा

मंजू तै- अरे क्या हो गया कर लेने दे न उसका इतना मन है तो,

रज्जो- ये बिना किये मान भी कहाँ रहा है, देखो कैसे खींचे लिए जा रहा है,

नीतू- कोई नहीं मम्मी मैं जा रही हूँ काम संभल लुंगी सारा तुम लाडो के साथ hi आना,

नीतू ने दरवाज़े से खड़े खड़े hi बोलै फिर दरवाज़ा खोल कर मंजू तै को बोल कर निकल गयी, और कुछ hi देर में रज्जो चची के बदन के सरे कपडे गायब थे और वो अपनी टंगे फैलाये अनुज का लुंड अपनी छूट में लेकर बिस्तर के किनारे लेती थी और अनुज उन्हें दनादन छोड़ रहा था,





रज्जो- ओह्ह्ह्हह्ह माहहहह अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह ऐसे hi छोड़ड़ड़ड़ अपनीई चचईईईई को अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

अनुज - ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह चची बड़ा मज़ाआ आ रहा है, अह्ह्ह्ह तुम्हारी उछलती चूचियां बड़ी मस्त लग रही हैं.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi नचा इन्हे लल्लाहहहह खूब नचा आह्ह्ह्हह्ह कितना मोटा और मस्त लुंड है तेरा आह्ह्ह्हह्ह, बिलकुल अपने बाप और भाई की तरह छोड़ता है अह्हह्ह्ह्ह.

अनुज - अह्हह्ह्ह्ह उन्होंने hi सिखाया है चचईईईई ाहहजह की गरम छूट को शांत कैसे करते हैं..

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह फिर तेरी माँ ने क्या सिखाया तुझे अह्ह्ह उन्होंने कुछ नहीं सिखाया अह्ह्ह,

अनुज इस बात पर कुछ नहीं बोलै तो रज्जो चची का दिमाग काम करने लगा, वो बड़ी hi जिज्ञासु किसम की औरत थी, जिन्हे सब जानने की इच्छा रहती थी, तो छुड़वाते हुए भी वो अनुज से बातें निकलवाने का प्रयास कर रही थी.

इतने में hi कमरे का दरवाज़ा खुला और दो नंगे बदन अंदर आये जिन्हे देख चची चौंक कर बोली- अरे तुम भी यही हो अभी तक गए नहीं,

चची अपने पति यानि दीनू चाचा को देख कर बोली.

दीनू- अरे हम जा hi रहे थे की सरजू बोलै, मैं चला जाता हूँ, ऊपर से अपनी पल्ली बिटिया को छोड़ कर जाने का मन hi नहीं हुआ,

उन्होंने अपनी गॉड में उठायी हुई पल्ली को चूमते हुए कहा, जल्दी hi पल्ली भी बिस्तर पर पीठ के बल पड़ी हुई थी और दीनू चाचा का लुंड उसकी छूट से अंदर बहार हो रहा था,





मैं सरजू, पापा, राजपाल ताऊ मौसा और राजन चाचा और ममता चची पहले hi निकल गए थे अपने अपने काम के लिए वहीं प्रेमा भाभी और मंजू तै अपने घर का काम संभल रही थी.

खैर हम लोगो ने अपना अपना काम निपटाया बाघ में जिसमे मैं पापा मौसा और चाचा थे अभी फिर वहीं तुबेल के नीचे नहाये, जिन्होंने दारू पी थी वो उतरने के लिए, खैर नहाने के बाद हम लोग घर चले आये कुछ देर में अनुज भी आ गया, और सब लोग नाश्ते में लगने वाले थे की ममता चची, राजन चाचा और पल्ली भी आ गए सबने मिलकर साथ नाश्ता किआ, नाश्ते के बाद सब बच्चों ने मिलकर फैसला किआ की आज कोई फिल्म देखि जाये तो टीवी पर फिल्म देखने लगे लगाकर,

इसी बीच नाना ने मां से कहा की गाओं के हाल चाल पता करे पानी थोड़ा काम हुआ की नहीं,

मां- किरण, बिटिया फ़ोन तो दे लेकर,

किरण ने अपने पापा को फ़ोन दिया और बापिस हमारे साथ टीवी देखने लगी,

मां फ़ोन लेकर कमरे में चले गए और किसी को फ़ोन लगाया बात की फिर उसने वीडियो भेजी थी गाओं की, तो मां ने गैलरी खोल वीडियो निकली और देखने लगे, जैसे hi वीडियो ख़तम हुई अगली वीडियो चल गयी और जैसे hi मां ने उसे देखा उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी, क्यूंकि वीडियो में उनकी बड़ी बहन यानि माँ सिर्फ कच्ची और ब्रा में थी और कपडे पहन रही थी,





ये वही वीडियो थी जो रात में किरण ने मज़े मज़े में बनाई थी, अब मां तो अपनी जीजी को यूँ देख बिलकुल हैरान रह गए उनकी समझ नहीं आ रहा था क्या करें, उन्हें पता था की ये उनकी बड़ी बहन की वीडियो है उन्हें नहीं देखनी चाहिए पर फिर भी वो खुद को रोक नहीं पा रहे थे,

अपनी बड़ी बहन का गदराये कामुक बदन को देखकर उनके बदन में सिरहन सी हो रही रही, उन्हें समझ नहीं आ रहा था की वीडियो क्यों बनाई किरण ने, वैसे ये तो साफ़ था की वीडियो उनकी बिटिया किरण ने hi बनाई थी क्यूंकि उसकी आवाज़ साफ़ आ रही थी जो अपनी बुआ से बात करते हुए वीडियो बना रही थी, पर उस वीडियो को देख कर उसके पापा की हालत अभी ख़राब हो रही थी, वीडियो ख़तम होने पर मां दोबारा शुरू से देखने लगते, वो छह कर भी नहीं रुक प् रहे थे, उनकी आँखें बार बार अपनी बहन के गदराये कामुक बदन को देखना चाहती थी,

मां जल्दी से उठे और उठकर कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया, और बापिस बिस्तर पर बैठ गए, बिस्तर पर आते hi उन्होंने अपना पजामा नीचे खिसका दिया और अपने कड़क हो चुके लुंड को बहार निकल लिए, और दोबारा मोबाइल में वीडियो देखने लगे जो ख़तम होने को थी क्यूंकि माँ अपना ब्लाउज पहन रही थी, किरण ने बस वहीं तक की वीडियो बनाई थी,





मां का हाथ वीडियो को देखते हुए अपने लुंड पर चलने लगा, जल्दी hi मां पूरी लगन से अपनी बहन के लिए मुठिया रहे थे और उनकी उत्तेजना का वेग इतना था की कुछ hi देर में उनके लुंड गाडी मलाई उगल दी उनकी बहन के नाम की, मां ने तुरंत एक कपडे से उसको पोंछा और फिर शांत होकर सोचने लगे, अब झड़ने के बाद मन शांत हुआ तो ग्लानि भी आने लगी, अपने मन से hi बातें करने लगे- हमें यकीन नहीं हो रहा हमने अपनी बहन के लिए ऐसा किआ, हमारी बड़ी बहन हैं वो माँ की तरह लाड करती हैं और हम ये सब, आज सालों बाद हमने फिर से वही गलती दोहरादि,

बचपन में मां का एक दोस्त था जिसने उन्हें लड़कियों की बातें मुठी मरना आदि उसी ने सिखाया था, उसी ने फिर मां को अपनी बहनो के बारे में सोच कर मुठ मरना सिखाया, वो भी अपनी बड़ी बहन के लिए मरता था और मां अपनी बहनो के लिए, वो थोड़ा हिम्मत करके अपणु बहन से सोते हुए छूकर मज़े भी लेता था पर मां की हिम्मत नहीं हुई कभी अपनी बहनो के पास जाने की, वो मां को खूब कहता पर मां से नहीं hua,ek दिन उसे उसकी बहन ने ऐसी हरकतें करते हुए पकड़ लिए, और फिर खूब पीटा और अपनी माँ को भी बता दिया, उसकी माँ ने उसे अपनर भाई के यहाँ भेज दिया, उसकी हालत देख मां भी दर गए और तबसे ये सब बिलकुल बंद कर दिया पर आज फिर से वो अरमान जाग चुके थे पर अभी मां को खुद पर ग्लानि हो रही थी की उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था,

नहीं हमें खुद पर काबू रखना चाहिए था, ये सब गलतु किरण की है क्या ज़रुरत थी जीजी की ऐसी वीडियो बनाने की और जल्दी से फ़ोन उठाया और वीडियो को डिलीट मार दिया, न रहेगी वीडियो न देखेंगे न कुछ होगा और ये सोच वो कमरे से बहार निकल गए पर मन से वो दृश्य मिटाना इतना आसान नहीं होने वाला था,

इधर फिल्म देखते हुए मेरा फ़ोन बजा, जग्गू का था मैं उठाकर उससे बात करने लगा तो पल्ली मुझ पर चिल्ला पड़ी की यहाँ बात मत करो फिल्म देखने दो मैं उठ कर अलग आ गया,

में- हाँ अब बोल.

जग्गू- क्या सोचा फिर?

में- किस बारे में?

जग्गू- भूल गया सेल..

में- अरे उसके बारे में, यार अभी पूछ नहीं पाया हूँ पता नहीं माँ मानेगी की नहीं.

जग्गू- देख एक उपाय है मम्मी से बोलूं वो चची से बात करके देखें तो.

में- हाँ उपाय तो ाचा है, एक काम कर मुझे आज आज का समय दे मैं कोशिश करता हूँ अगर नहीं हुआ तो तै से बोल देंगे,

जग्गू- ये भी ठीक है,

में- हाँ चल करता हूँ फिर,

जग्गू- ठीक है,

ये कहकर फ़ोन रख दिया और मैं जग्गू की इच्छा के बारे में सोचने लगा, वैसे मन तो मेरा भी था क्यूंकि सोचकर मुझे भी मज़ा आ रहा था, पर करें कैसे ये समझ नहीं आ रहा था, मैं बापिस बैठ कर टीवी देखने लगा पर मेरा ध्यान टीवी पर नहीं था उसी बात पर था, मैंने सोचा की माँ से बात करके देखता हूँ, वही बताएंगी अब तो, ये सोच मैं सर घुमक्कड़ देखा तो माँ बहार बैठकर कपडे धो रही थी, मैंने तभी एक चीज़ पर गौर किआ की मां बड़े गौर से माँ को देख रहे थे,

बैठने के कारन माँ ने अपनी सारी घुटनो तक उठा राखी थी साथ hi उनका पल्लू भी हल्का सा सरक गया था तो उनकी एक छुच्छी के दर्शन हो रहे थे





मां छुप छुप कर बार बार माँ को देख रहे थे, और अब इतना अनुभव तो मुझे भी था की नज़र को पहचान सकूँ, और वो जिस नज़र से देख रहे थे उसमे वासना साफ़ दिख रही थी, मैं सोचने लगा की साला चोदामपुर की हवा में hi हवस है जो यहाँ आता है हवसी हो जाता है क्या, या फिर सब पहले से hi होते हैं बस दिखा नहीं पाते, खैर मैं उठकर माँ के पास गया और उनके बगल में बैठ गया, मां ने मुझे माँ के बगल में देखा तो अपनी नज़रें टीवी पर लगा ली,

मैं फिर माँ के पास बैठ गया और उन्हें जग्गू की इच्छा के बारे में बताया,

माँ- वैसे सच कहूं तो सोचकर मज़ेदार तो लग रहा है पर तू बता तू क्या कहता है,

में- मुझे भी ाचा लग रहा है,

माँ- कोई दिक्कत तो नहीं होगी,

में- दिक्कत ऐसे तो कुछ नहीं लग रही,

माँ- अब अपने hi हैं वो लोग जग्गू भी अपना hi है तो वैसे पूरी करनी चाहिए न.

में- हाँ मैं भी यही सोच रहा हूँ,

माँ- चल एक बार मैं सोच लेती हूँ फिर बताती हूँ,

में- अगर मैंने जवाब नहीं दिया तो मंजू तै तुमसे बात करेंगी,

माँ- अरे इतनी फरमाइश, चल देखते हैं क्या करना है.

में- वैसे माँ, मां तुम्हे ताड़ रहे हैं छुप छुप कर,

माँ- क्या, जमुना मुझे क्यों भाई, कहीं नहीं देख रहा,

में- अरे अभी मैं आ गया तबसे नज़र हटा ली.

माँ- होगी कोई बात,

में- जिस नज़र से ताड़ रहे थे उससे लगता है मां भी भेनचोद बनना चाहते हैं.

माँ- चल कुछ भी बोलता है,

में- मैं तो सच बोल रहा हूँ,

ये कहकर मैं बापिस आकर बैठ गया, अब मेरी बात सुन माँ ने भी गौर किआ तो पाया की उनका भाई बीच बीच में चुपके से से उन्हें देख तो रहा था, अब माँ भी काम नहीं थी उन्होंने थोड़ा और झुककर अपने पल्लू को नीचे सरका दिया साथ hi झुककर अच्छे से अपनी चूचियों के दर्शन माँ को करवाने लगी





मां तो माँ का दूरदर्शन देख कर गरम होने लगे, इधर माँ ही खूब हिल हिल कर कपडे धोने लगी तो मां का भी खूब मनोरंजन हो रहा था एक बार फिर से उनके लुंड में तनाव आने लगा..

इधर मैंने मां को तो देख लिए था माँ को देखते हुए पर कोई ऐसा भी था जो सबकी नज़र से छुपा हुआ था और वो कोई और नहीं बल्कि नाना थे जो अपनी बड़ी बिटिया के उरोजों को देख आनंदित हो रहे थे,

मैंने कुछ देर और फिल्म देखि पर अब मेरा मन बही कर रहा था तो मैं उठा और घर में घूमने लगा मैं मामी को देख रहा था जो की मुझे मौसी के कमरे में मिली, वो मौसी और ममता चची एक साथ बैठ कर बातें कर रहे थे,

मैं कमरे में पहुंचा तो चची बोल पड़ी- लो गुंजन आ गया तेरा खसम मन नहीं लगा तेरे बिना,

अब मज़ाक में तो मामी सबसे आगे hi थी वो शर्माने वालो में से नहीं थी,

मामी- हाँ तो आएगा hi अपनी बीवी के पास, तुम्हारे कहे खुजली हो रही है तुम्हारी नज़र है का हमारे खसम पर.

चची- नहीं तू hi रख अपने खसम को,

मामी- हम hi रखेंगे, किसी के साथ बांटने नहीं वाले, आओ सैयां जी,

ये कहकर मामी ने मुझे खींचकर अपनी गॉड में लिटा लिए तो सब हंसने लगे मुझे भी शर्म आ गयी.

मौसी- ओह्हो देखो कैसे शर्मा रहा है,

चची- अरे लल्ला इसके चक्कर में मत पद, इसका खसम बनेगा तो दो दो बच्चों का बाप बनना पद जायेगा,

मामी- तो क्या हुआ, हम तो दो और कर लेंगे मिल कर.

मामी ने पलट वार किआ तो फिर से सब हंसने लगे मामी मेरे सर को सहला रही थी.

चची- बच्चे ऐसे नहीं होते बन्नो, उसके लिए बहुत कुछ करना पड़ता है,

मामी- वो तो हमें अचे से आता है, कहो तो अपने खसम से बोलकर तुम्हारी भी खोख भरवा दें.

मौसी- तुम दोनों लोग शर्म नहीं आती उसके सामने ये सब बातें कर रही हो.

मामी- अरे शर्माना का इसमें? अपने पति से कैसी शर्म?

Mausi-tumhara पति है, हमारा तो बीटा है न,

मामी- तुम भी पति मान लो क्या जाता है,

मौसी- धत्त्त तुम भी कुछ भी बोलती हो,

मामी- कुछ भी क्या सही कह रही हूँ, ऐसे तो हमारा भी भांजा है पर हम मानते हैं न.

मौसी- वैसे भी वो जिसको अपनी पत्नी मंटा है वही बनेगी न,

मामी- वो तो तुम्हे भी मान लेगा,

चची- ाचा इसके पति से hi पूछ लेते हैं, क्यों कर्मा कौन है तुम्हारी दुल्हन?

मैंने भी मज़ाक में साथ देते हुए मामी की और इशारा किआ तो सब हंस पड़े,

चची- लो देख लिए अब तो इसने भी बोल दिया,

मामी ने अब मुझे घेर लिए और बोली - कैसे पति हो देखो ये दोनों लोग मिल कर तुम्हारी पत्नी को छेड़ रहे हैं

में- अरे मेरी पत्नी छिड़ने वालो में से नहीं छेड़ने वालो में से है,

मामी- देखो बातें न बनाओ, इतना समय हो गया यहाँ आये गाओं तक घुमाया नहीं, बात करते हो.

चची- हाँ ये बात तो है अपनी बीवी को गाओं तो घुमा कर्मा,

में- अरे बस इतनी सी बात अभी चलो अभी घुमा देता हूँ, चलो मामी,

मामी- ठीक है चलो, चलो जीजी.

मौसी- नहीं हमने बहुत घूम लिए गाओं तुम पति पत्नी hi जाओ,

चची- और का थोड़ा समय बिताओ अकेले में तभी तो बच्चे होंगे,

इस पर सब हंसने लगे,

में- चलो मामी तुम hi चलो,

मामी- ठीक है चलो,

मैं मामी को लेकर निकल गया पहले बाघ घुमाया तुबेल दिखाया फिट खेत दिखने लगा इसी बीच चलते चलते खेतों के बीच मई बोलै - कितना ाचा लग रहा है, जैसे सच में बीवी के साथ घूम रहा हूँ,

मामी- अरे मतलब तुम हमें सच की पत्नी नहीं मानते,

मामी ने रूठने का नाटक करते हुए कहा, और पास में पड़े पत्थर पर जाकर बैठ गयी,

मैं भी जल्दी से उनके बगल में बैठ गया और उन्हें मानाने लगा,

में- अरे मेरी बीवी तो गुस्सा हो गयी, तुम गुस्सा हो जाओगी तो कैसे चलेगा, इक लौटी तो मेरी बीवी हो तुम,

मामी ने कुछ कहा नहीं पैट उनके चेहरे से पता चल रहा था उन्हें अंदर hi अंदर हंसी आ रही थी जिसे वो रोक रही थी.

मैंने उनका हाथ अपने हाथ में ले लिए और बोलै- मेरी जान, मेरी लुगाई बस तुम एक hi तो हो, तुम रूठ जाओगी तो मैं कैसे रह पाउँगा, ये कहकर से मैंने उनका हाथ ऊपर करके चूम लिए.





मामी वैसे तो बड़ी तेज़ थी पर न जाने क्यों शर्मा गयी आज पहली बार मैंने उन्हें शरमाते देखा था,

में- बोलो न जान अब भी गुस्सा हो क्या?

मैं मामी के पास और खिसक कर बैठ गया वो बस होंठों पर हलकी सी मुस्कान लिए सामने की और देखे जा रही थी,

में- बोलो न नहीं तो कुछ और भी तरीके आते हैं मुझे मानाने के

मामी- और कौनसे तरीके हैं..

में- करके दिखाऊं तो ज़्यादा ाचा लगेगा बताने से.

मामी- ठीक है.

में- अरे नहीं रहने दो.

मामी- अरे क्यों क्या हुआ,

में- तुम बुरा मान जाओगी.

मामी- क्यों मैं क्यों बुरा मानने लगी.

Me-mujhe पता है तुम मान जाओगी.

मामी- नहीं मानूंगी बताओ तो.

में- पक्का,

मामी- हाँ पक्का..

मैंने ये सुना तो उनकी आँखों में देखते हुए अपने आपको उनकी तरफ झुकाने लगा, साथ hi उन्हें भी हाथ पकड़ कर अपनी और खींचने लगा जल्दी hi हमारे चेहरे एक दुसरे के सामने थे, मैं लगातार उनकी आँखों में देख रहा था, मैं धीरे से अपने होंठों को उनके होंठो के पास लेजाने लगा तो मामी की साँसे गहरी होती हुई महसूस हुई, मैं कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा था मैं चाहता था मामी को अगर नहीं करना हो तो वो हैट जाएं, पर मामी भी हल्का हल्का खुद जो आगे बढ़ा रही थी, और फिर जैसे hi मैंने होंठों को उनके होंठो से छुआने की कोशिश वो पीछे हो गयी और कड़ी हो गयी





मैं हैरान रह गया की अचानक क्या हुआ वहीं मामी कड़ी होकर boli-acha तो ये था मानाने का तरीका,

में- हाँ पर तुमने मानाने hi नहीं दिया,

मामी- अरे मेरे भोले पतिदेव ऐसे तरीको से खुले में नहीं दुनिआ से छुपके सबसे बछके मनाया जाता है,

में- ाचा तो फिर आओ,

मामी- कहा?

में- दुनिया से छुपके,

ये कहकर मैं उनका हाथ पकड़ कर आगे ले जाने लगा, अभी हम राजन चाचा के खेतों के बीच थे, तो आगे बढ़ते हुए मैं उन्हें एक पुराने खली पड़े तबेले में ले गया, ये राजन चाचा का hi था जिसमे पहले वो जानवर बांधते थे फिर हमारे बाघ के बगल में hi उन्होंने तबेला बना लिए क्यूंकि ये काफी दूर पड़ता था तो अभी ये खाली रहता था,

मैं मामी को तबेले के अंदर ले गया... मामी ने अंदर घुसते हुए पूछा ये किसका तबेला है?

में- राजन चाचा का,

मामी- पर ये तो खली लग रहा है,

में- हाँ पहले ये था अब बाघ के बगल में है न ये दूर पड़ता था,

मामी- हाँ ये भी सही है ये दूर तो है, हम कितनी दूर चल आये न,

में- हाँ इसके बाद दो खेत और हैं राजन चाचा के फिर दूसरा गाओं लग जाता है,

मैंने पास में पड़े धान के ढेर बैठते हुए कहा,

मामी- ाचा, तुन मुझे इस खली तबेले में क्यों लाये हो बाबू?

में- तुम्हे मानाने तुमने hi बोलै था न की दुनिआ से छुपके मानना चाहिए तो देखो यहाँ कोई नहीं है,

मामी- अरे पर मैं तो पहले से hi मान गयी तो अब मानाने का क्या फायदा,

मामी भी मेरे बगल में धान के ढेर पर बैठ गयी

में- अरे वैसे आगे के लिए अभ्यास कर लेते हैं.

मामी- नहीं हमें नहीं करना अभ्यास,

में- करके देखो क्या पता ाचा लगे,

ये कहकर मैं उनको पकड़ कर पीछे लेट गया तो हम दोनों hi लेट गए,

मामी इस पर कुछ हहि बोली तो मुझे भी हिम्मत मिली, मैंने एक हाथ उनके पेट पर रख लिए था हम दोनों के hi चेहरे फिर से एक दुसरे के सामने थे,

में- तुम बहुत सुन्दर हो मामी,

मैंने उनकी आँखों में देख कर कहा,

मामी- जानती हूँ,

में- एक और बात है..

मामी- क्या?

में- यहाँ हमें कोई नहीं देख रहा.

मामी- तो?

में- तो...

ये बोल मैंने अपने होंठों को मामी के होंठों से लगा दिया, और उनके खुले होंठों का स्वाद लेने लगा, मेरी हैरानी के लिए मामी मेरा साथ देने लगी और मेरे होंठों को चूसने लगी बस मुझे और क्या चाहिए था, मैं उनके होंठो को चूसते हुए hi उनके ऊपर आ गया, और ऊपर चढ़ कर उन्हें चूमने लगा, मामी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी...





उनके रसीले होंठों को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे रसमलाई खा रहा हूँ, जल्दी hi होंठों की लड़ाई जीभ में बदल गयी और मैंने अपनी जीभ को उनके मुँह में घुसा दिया जिसे वो तुरंत चूसने लगी वहीं कुछ पल बाद उनकी जीभ मेरे मुँह में थी,

चूसना चूमना तब तक चलता रहा जब तक हमारी सांसें न फूलने लगी और तब जाकर हमारे होंठ अलग हुए मुझे बेहद उत्तेजना हो रही थी ममी को पाकर, उनके होंठों के बाद उनकी गर्दन को चूमने चाटने लगा और वो मेरी पीठ पर हाथ फिरते हुए सिसकने लगी,

मैं उनके ऊपर से उनके बगल में आया और उनके पल्लू को उनके सीने से हटा दिया, मामी का गदराया गोरा पेट मेरे सामने था, जिसे मैं अपने हाथों से सहलाने लगा चूमने लगा





मामी- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाबू, uhmmmmmmmmmmmmmm.

मामी की सिसकियाँ सुन मुझे और जोश चढ़ रहा था, मैं उनके पेट को चाटने लगा, उनका कोमल गोरा पेट मुझे उत्तेजित कर रहा था पेट चाटते हुए मैं उनकी कमर को भी चाटने पगा और मैंने उन्हें पलाद दिया अब ममी की पीठ मेरी तरफ थी और मैं पीछे से उनकी पीठ और कमर को चाट रहा था, पीठ को चाटते हुए मैं उनके पीछे लेट गया, बिलकुल उनसे चिपक कर मेरा लुंड उनके चूतड़ों की दरार में चुभने लगा, मेरे हाथ फिर से उनके पेट पर घूमने लगे वहीं उन्होंने मेरी और चेहरा किआ तो हमारे होठ दोबारा से मिल गए, हम दोनों फिर से एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे मेरा हाथ उनके पेट से सरकता हुआ ऊपर उनके ब्लाउज पर आ गया और नैन ब्लाउज के ऊपर से hi मामी की एक भरी हुई छुच्छी को दबाने मसलने लगा, मामी की पकड़ मेरे होंठों पर और तेज़ हो गयी...





हम दोनों एक दुसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे बरसो बिछड़े हुए प्रेमी मिले हो, हमारे होंठ फिर से अलग हुए तो मामी कुछ ज़्यादा hi गरमा गयी थी और पलट कर मुझे पागलों की तरह चूमने चाटने लगी कभी मेरे होंठो को चूमती तो कभी गालों को तो कभी गर्दन को,

फिर वो मुझे नीचे कर खुद मेरे ऊपर आकर बैठ गयी और एक बार फिर से होंठों को चूमने लगी, मैं नीचे लेते हुए उनकी पीठ को और पेट को सहला रहा था, जब हमारे होंठ अलग हुए तो मैंने अपने हाथ पीछे लेजाकर उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए और उसे उतरने लगा,





जिसे उतरने में मामी ने पूरा साथ दिया, और मेरे ऊपर से खड़े होकर ब्लाउज को अपने बदन से अलग कर दिया, मामी को ब्रा में देख मेरी हालत ख़राब होने लगी उनकी बड़ी बड़ी चूचियों देख मैं और जोश में आ गया, मैंने उन्हें दीवार से टिका दिया और ब्रा के ऊपर से hi उनकी भरी भरी चूचियों को मसलने लगा...

मामी- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाबू आराम से अह्हह्ह्ह्ह दिया,

पर मामी जितना सिसकती मुझे उतनी उत्तेजना और होती,

में- कितनी मस्त चूचियां हैं तुम्हारी अह्हह्ह्ह्ह इतनी बड़ी बड़ी और रसीली,

मामी- ुहममम uhmmmmmmmmmmmmmmmaaaahhhhhhhh बाबू तुम्हारे लिए hi हैं सारा रास निचोड़ लो इनका,

मैंने जल्दी से अपनी टीशर्ट उतरी और फिर ज़े मामी की चूचियों के मर्दन पर लग गया





मामी की सिसकियाँ लगातार मेरे कानो में संगीत की तरह गूँज रही थी, मामी को पाकर मैं एक खिलोने की दुकान में बच्चे जैसा हो गया था, एक साथ सब कुछ करना छह रहा था, कभी उनके होंठों को चूमता तो कभी उनके पेट को कभी चूचियां मसलता तो कभी चूतड़ों को, मैंने आगे बढ़ाते हुए मामी की साड़ी को उनके बदन से अलग कर दिया और फिर उनके होंठो को चूमते हुए अपने हाथो की सफाई दिखते हुए उनके पेटीकोट के नारे को भी खोल दिया तो पेटीकोट भी उनकी मोती चिकनी जांघों से फिसलता हुआ नीचे गिर गया, अब मामी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और कच्ची में थी,





उनके होंठो को चूमने के साथ मैंने उनके बदन पर नीचे की और का सफर शुरू किआ होंठों के बाद उनकी गर्दन को चूमने लगा उसके बाद उनके सीने पर चूमते हुए और नीचे आया तो सामने उनकी दो बड़ी बड़ी चूचियां थी जिन्हे मैंने ब्रा के कप को नीचे कर आज़ाद किआ, उनकी चूचियों को देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया और अगले hi पल मैंने एक चुकी को मुँह में भर लिए तो दूसरी को मसलने लगा,

मामी- अह्ह्ह्ह बाअबूउउउउठ्हहह अह्ह्ह्ह बछहहहह कहाआआ जाआआआआ बाबू अह्ह्ह

मामी की सिसकियाँ मेरा जोश बढ़ा रही थी मेरा सारा ध्यान तो उनकी चूचियां पर था, दोनों को भर भर के चूस रहा था, चूचियों को मन भर चूसने के बाद मैंने नीचे बढ़ना शुरू किआ और उनकी नाभि को चूसने लगा, मामी ने अपने हाथ मेरे सर पर जमा दिए नाभि से रास चूसने के बाद मैं नीचे बैठ गया तो सामने मामी की कच्ची में क़ैद छूट थी, छूट के आगे का भाग कच्ची का गीला था, मैंने चेहरा आगे किया और उनकी छूट के पास जांघ को चूम लिए तो मामी सिसक पड़ी





मामी सिहरने लगी, मैं धीरे धीरे मामी की जांघों को चूमने लगा मामी तड़प रही थी क्यूंकि मैं उनकी छूट के आस पास चूम रहा था पर छूट से दूर था, मैंने दोनों हाथ मामी की कमर पर हाथ रखा और कच्ची की इलास्टिक में उँगलियों को फंसाया और नीचे खिसका दी, मामी की नंगी गीली छूट मेरे सामने आ गयी, उनकी गीली छूट देखकर मुझसे रुका नहीं गया और मैंने अपना मुँह उनकी छूट में लगा दिया, और पागलो की तरह चाटने लगा,

वहीं मामी के मुँह से एक तेज़ आह निकली उनकी टाँगे कंपनी लगी, मुझे लगा वो गिर न जाएं तो उन्हें वहीं नीचे लिटा दिया और उनकी छूट चाटने लगा मामी अपने हाथों से मेरे सर को अपनी छूट में दबा रही थी और मेरी जीभ उनकी छूट में घुस रही थी,

मामी- ओह्ह्ह्हह्ह बाअबूउउउउठ्हहह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी हीईई... कहाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जुओई.

मैं तो वैसे भी लगातार कहते जा रहा था उनके उत्साह बढ़ने से और जोश में चाटने लगा,

कुछ hi पालो में मामी ने मेरे सर को जकड लिए और उनकी कमर झटके खाने लगी मैं समझ गया की मामी झाड़ रही हैं, उनकी छूट से रसीला पानी निकल रहा था जिसे में चाट रहा था,

झड़ने के बाद मामी शांत हुई तो उनकी पकड़ मेरे सर से हलकी हुई, मैं उनकी छूट से सर हटाकर ऊपर आया और उनके होंठो को चूसने लगा वो भी अपनी चूस का स्वाद मेरे मुँह से लेने लगी,

मैंने हाथ नीचे करके अपना पजामा और कच्चा खिसका दिया और अपने लुंड को मामी की छूट ओर घिसने लगा, मामी मेरा लुंड अपनी छूट पर महसूस कर मेरे मुँह में hi सीसीएनए लगी, मैंने उनके होंठों को चूसते हुए hi अपना लुंड उनकी छूट के द्वार पर टिकाया और फिर धक्का देकर अंदर सरका दिया, तो मामी ने अपने होंठों को मेरे होंठो से हटा दिया और एक तेज़ सिसकी उनके मुँह से निकली,

मामी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh, बाअबूउउउउठ्हहह अह्ह्ह्ह घुसा दिया तुमने तुयहहहहह बिना बताये..

में- अपनी बीवी की छूट में भी बता के डालते हैं क्या?

मामी- आह्हः बहुत मोटा है तुम्हारा बाबू आह्हः और लम्बा भी,

में- मज़ा भी बहुत देगा....

मामी- तो छोड़ो न अब रुके क्यों हो baabu,ahhh

मामी का इतना कहना था और मैंने उनकी छूट में धक्के लगाना शुरू कर दिया





में- अह्हह्ह्ह्ह मामी क्या गरम छूट है तुंहारी अह्ह्ह्हह्हह बहुत मज़ाआ आ रहा है,

मामी- अह्ह्ह्हह्हह मुझे भी बाबू, अह्ह्ह छोड़ hi लिआआह्ह्ह तुमने आजजज अपनी दुल्हन को,

में- हांण अह्ह्ह्हह बहुत पुराणी इच्छा पूरी हो गयी अह्हह्ह्ह्ह.

मामी- अह्ह्ह्ह तो और छोड़ो अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बाबू छोड़ छोड़ के छूट फाड़ दो मेरी..

मामी एक बार फिर से गरम हो गयी थी

मैंने भी उनकी इच्छा को सुना और पूरा भी किआ और तगड़े धक्के लगाकर उन्हें छोड़ने लगा,

हर धक्के पर मामी की अह्हह्ह्ह्ह निकल रही थी, मैं और मामी पूरा पसीने में नाहा चुके थे क्यूंकि तबेला बंद था और अंदर गर्मी बहुत लग रही थी,

मामी- अह्ह्ह्ह बाबू बहुत्तट्ठ गर्मी लग रही है, यहाँ,

में- हाँ मुझे भी चलो बहार चलते हैं,

मामी- अरे नहीं नहीं ऐसे नहीं.

में- यहाँ कोई नहीं आता मामी चिंता मत करो हुए मैं मामी को बहार ले आया खींचते हुए, मामी थोड़ा घबरा रही थी, बहार आकर थोड़ा घबरा रही थी पर मैं ऐसे कहाँ छोड़ने वाला था साथ hi खुले में चुदाई करने की एक उत्तेजना उनका भी जोश बढ़ा रबी rhi,bahar लेकर मैंने उन्हें एक जगह बिठा दिया जहाँ टूटी बैलगाड़ी पड़ी गई थी और उनके मुँह के पास अपना लुंड कर दिया जिसे मामी ने तुरंत गपक कर मुँह ने भर लिए और चूसने लगी, मैंने मामी का चेहरा पकड़ा और उनका मुँह छोड़ने लगा,





मामी भी मेरा लुंड गले तक भरने का पूरा प्रयास करती, कुछ देर तक अचे से लुंड चुसवा कर मैं नीचे लेट गया और मामी ने तुरंत मेरे ऊपर जगह ली और मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी दोनों टांगें इधर उधर कर मेरी और पीठ करके लुंड को अपनी छूट के द्वार पर लगा कर बैठ गयी, और मेरे लुंड पर धीरे धीरे उछालना शुरू किआ फिर हर झटके के साथ उनका जोश और बढ़ता गया और मामी तेज़ी से मेरे लुंड पर उछालते हुए छोड़ने लगी,

मामी के इस जोश ने तो मुझे भी हैरान कर दिया,

में- ओह्ह्ह्हह्ह मामी माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है बहुत, अह्ह्ह्ह ऐसे हीई,

मामी- ओह्ह्ह्हह्ह बाअबूउउउउठ्हहह मज़ा तो हमें भी आए रहा है अह्ह्ह्ह तभी तो ऐसे खुल्व में भांजे के मोठे लुंड पररररर अह्हह्ह्ह्ह कूद रहे हैं.

में- अह्हह्ह्ह्ह मामी बड़ी मस्त औरत हो तुम अह्ह्ह्हह्हह.

मामी- अह्ह्ह्ह बाबू अभी तो मामी की मस्ती तुम देखते जाओ,

मामी और तेज़ी से मेरे लुंड पर कूदने लगी,





उनकी पापीती की आकर की चूचियां उनके साथ उछलती हुई बहुत कामुक लग रही थी पर मामी तो जैसे भांजे से खुले में छुड़वाने पर बिलकुल hi उत्तेजित हो गयी थी,

वैसे उत्तेजना तो मुझे भी बहुत हो रही थी हुए किश नहीं होगी अगर मामी जैसे बदन वाली औरत सामने हो तो, मैंने जैसे hi देखा की मामी थोड़ी सी थक रही हैं मैंने उन्हें पकड़ कर पीछे लिटा लिए और वैसे hi लेते लेते पीछे से उनकी छूट में दनादन धक्के लगाने लगा...

मुझे भी अपना रास अब लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था तो मैं मामी को छोड़ते हुए उनके दाने को सहलाने लगा जिससे मामी और सिहरने लगी, उनकी छूट के डेन को छेड़ते हुए मैं उन्हें तेज़ी से छोड़ने लगा





उनके मुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की सिसकियाँ लगातार निकल रही थी, कुछ पल बाद मुझे उनका बदन कांपता महसूस हुआ और उनकी छूट मेरे लुंड के इर्दगिर्द सिकुड़ने लगी बस इतना काफी था मेरे लिए, मैंने उनकी छूट में पिचकारी मरना शुरू कर दिया और उनकी छूट को अपने रास से भरने लगा, मैं और मामी साथ झाड़ रहे थे, झड़ने के बाद कुछ देर तक हम यूँ hi लेटकर अपनी सांसें ठीक करते रहे,

फिर मामी उठी और बोली- अब चलो कपडे भी पहन लो पति देव,

मैं भी उनके साथ उठकर तबेले में चला गया कपडे पहनने,

जारी रहेगी
 
मैं और मामी साथ झाड़ रहे थे, झड़ने के बाद कुछ देर तक हम यूँ hi लेटकर अपनी सांसें ठीक करते रहे,

फिर मामी उठी और बोली- अब चलो कपडे भी पहन लो पति देव,

मैं भी उनके साथ उठकर तबेले में चला गया कपडे पहनने.


अपडेट 214


मैं और मामी उसके बाद घर की और चल दिए मुझे चुदाई के बाद भी मामी के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं दिखा, मैं थोड़ा हैरान था की मामी ने इतनी आसानी से छुड़वा भी लिए और अभी ऐसे लग रही हैं जैसे कुछ हुआ hi नहीं या जैसे भांजे से छुड़वाना बिलकुल आम बात हो, मैं कुछ देर सोचता रहा फिर जब समझ नहीं आया तो मामी से बोलै- मामी कैसा लगा?

मामी- का बाबू?

में- यही अपने पति का प्यार?

मामी- हम्म्म मज़ेदार था, पति का प्यार भी और वो भी,

में- एक बात पूछूं मामी?

मामी- हाँ पूछो न बाबू

में- तुम बिलकुल आराम से हो, जैसे कुछ अलग हुआ hi नहीं जैसे पहले से जो सोचा था वही हुआ,

मामी- ाचा अब ये hi समझो बाबू की जो सोचा था वही हुआ,

में- मतलब?

मामी- मतलब भी समझ आ जायेगा बाबू धीरे धीरे.

में- चलो वो तो धीरे धीरे समझ आएगा पर मुझे अपनी बीवी को और प्यार करना हो तो कैसे करूँ?

मामी- अगर बीवी को प्यार करना है तो हक़ से करो क्या दिक्कत है..

में- ये भी ठीक है..

खैर बातें करते हुए हम दोनों घर आ गए, देखा तो घर में अधिकतर लोग सो रहे थे और सोये क्यों न रात को सब जगे जो थे, मुझे सिर्फ नाना और मां hi टीवी देखते हुए जागते दिखे, मामी नाना की वजह से सीढ़ी कमरे में चली गयी वहीं मैं नाना और मां के साथ बैठ गया टीवी देखने..

कुछ देर बाद नाना मुझसे बोले- कर्मा लल्ला चल थोड़ा बाघ घूम आते हैं.

में- हाँ चलो,

हम लोग मां को टीवी देखता छोड़ बाघ की और निकल गए, मैं नाना को देख रहा था जो की लग रहा था किसी सोच में हैं,

में- क्या हुआ नाना किन ख्यालों में हो?

नाना- कछु नहीं लल्ला बस ऐसे hi,

में- अरे भूल गए हम अब दोस्त हैं, कुछ बात हो तो बताओ.

नाना- क्या hi बताएं, सोच रहे हैं गाओं देख आएं क्या हालत है.

में- अरे सुबह hi तो मां ने पूछा था फ़ोन करके, अभी सब वैसा hi है, और नाना तुम्हे चोदामपुर इतना बुरा लग रहा है क्या?

नाना- वो बात नहीं है लल्ला.

में- फिर क्या बात है?

नाना- बस यहाँ रहकर न हमारा मन में अजीब अजीब से ख्याल आते हैं,

में- कैसे ख्याल?

नाना- अरे क्या बताएं हमसे बताया भी नहीं जायेगा.

में- अरे कैसे नहीं बताया जायेगा, दोस्त हैं हम अब, मैंने तुम्हे अपनी वाली की फोटो तक दिखाई और तुम हो सब छुपा रहे हो.

नाना- अरे छिपा नहीं रहे ाचा सुन हमें लगता है यहाँ रहकर हम पापी होते जा रहे हैं.

में- पापी? वो कैसे,

नाना- गंदे गंदे ख्याल आते हैं मन में,

में- ाचा वैसे ख्याल जैसे उस दिन ममता चची को देख कर आ रहे थे,

नाना- हाँ वैसे hi.

में- तो इसमें पाप कैसा, अरे नाना उस दिन भी बताया तो था, इसमें क्या पाप पुण्य,

बात करते करते हम काफी दूर खेतो के बीच आ गए थे तो एक पेड़ के नीचे बैठते हुए मैंने कहा..

नाना- पर अपनी बेटी के लिए मतलब बेटी जैसे के लिए ये सोचना पाप hi तो है,

नाना भी मेरे बगल में बैठते हुए बोले...

में- कुछ पाप नहीं है नाना, मेरे हिसाब से पाप तब होता है जब किसी को नुकसान पहुचाओ, और तुम hi बताओ तुम्हारे कुछ सोचने से किसी को कुछ नुकसान पहुंच रहा है ?

नाना - नुकसान तो नहीं हो रहा.

में- फिर क्या दिक्कत है?

नाना- दिक्कत ये है लल्ला की हमें पता है ये सब गलत है, फिर भी हम खुद को रोक नहीं पाते और बार बार वही कर रहे हैं.

में- तो जो हो रहा है वो गलत नहीं है नाना, तुम्हारा खुद को रोकना गलत है.

नाना- मतलब.

में- मतलब की अगर तुम नहीं चाहते मन से hi तो ख्याल आते hi नहीं, अगर आ रहे हैं तो मतलब तुम अंदर से चाहते हो पर ऊपर से मन कर रहे हो.

नाना- तो फिर ऐसे में क्या करना चाहिए?

में- खुद को खुला छोड़ दो, जो मन करे वो करो.

नाना- मतलब जान कर और वही सब सोचूं,

में- और क्या, अगर ममता चची को देख कर ख्याल आ रहे हैं तो आँखें बंद कर उन्हें नंगा सोचो और ख्यालों में hi छोड़ो.

नाना- अरे तू तो बिलकुल खुल के बात करने लगा.

में- दोस्ती में ऐसा hi होता है,

नाना - पर अपनी बेटी या बेटी जैसी के लिए ये सब सही होगा,

में- नाना छूट तो छूट होती है चाहे बेटी जैसी की हो या बेटी की hi हो, और लुंड को छूट hi चाहिए होती है,

नाना- ये क्या बोल रहा है, ये hi तो पाप है,

में- अगर सही गलत में रहर तो कुछ मज़े नहीं ले पाएंगे नाना, मेरा मन्ना है छूट मिले तो पहले छोड़ो फिर पहचान पूछो,

नाना मेरी बात सुनकर कुछ सोच में पद गए,

में- और तुम्हे लगता है की सिर्फ तुम्हे hi ऐसे ख्याल आते हैं, तो ये देखो,

इसके बाद मैंने नाना को फ़ोन में पारिवारिक चुदाई की और रिश्तों में चुदाई की कई वीडियो दिखाई, जिसमे बाप बेटी, भाई बहन, माँ बीटा हर तरह की चुदाई थी,

इन वीडियो को देख नाना की आँखें फटी की फटी रह गयी वहीं उनकी धोती में तम्बू भी बन चूका था, नाना कुछ बोल नहीं रहे थे बस फ़ोन में देखे जा रहे थे, मैंने एक कदम और बढ़ाते हुए बोलै- अह्ह्ह्ह अब मुझसे तो रुका नहीं जा रहा.

ये कहकर मैंने पजामा नीचे खिसका कर अपना लुंड बहार निकल लिए और मुठियाने लगा,

नाना का ध्यान जैसे hi मुझ पर गया तो हैरान रह गए और कभी मुझे देखते तो कभी फ़ोन को, फिर मुझे और शायद खुद को भी हैरान करते हुए उन्होंने भी अपना कड़क लुंड धोती से बहार निकला और मुठियाने लगे आँखें बंद करके,

हम दोनों ने मुठी मारी और जल्दी hi अपना अपना पानी बहा दिया और शांत होकर पेड़ से टिक कर बैठ गए,

में- मज़ा आ गया, नाना हम पहले ऐसे नाना पोता होंगे जो साथ में मुठ मरते होंगे,

मैंने हँसते हुए कहा,

नाना- क्या hi कहें हम, कुछ समझ नहीं आ रहा क्या हो रहा है, इतने बेशरम होते जा रहे हैं हम.

नाना ने खड़े होते हुए अपनी धोती ठीक करते हुए कहा.

में- अरे बेशरम बनकर hi मेवा मिलती है नाना,

मैं भी उनके पीछे खड़ा होते हुए बोलै,

नाना- अरे ऐसी क्या मेवा जो अपने hi पोते के साथ ये सब करवाए,

में- अरे नाना तुम इतने में hi बोल रहे हो, मैं तो हम दोनों साथ में चुदाई करेंगे किसी की तो कैसा लगेगा ये सोचने लगा था,

नाना- अरे चुदाई किसकी?

में- वो तो तब होगी न जब तुम राज़ी रहो, पर तुम मुठियाने पर hi इतना बवाल मचा रहे हो.

नाना कुछ देर के लिए चुप हो गए हम आगे चलते रहे,

नाना - अगर हम राज़ी हुए तो हम और तू साथ में चुदाई करेंगे?

नाना ने धीरे से बोलै.

में- हाँ बिलकुल करेंगे कितना मज़ा आएगा,

नाना- हमें नहीं पता की सही है या गलत पर हम राज़ी हैं,

में- सोचलो बाद में पीछे मत हटना.

नाना- तू तो धमका रहा है,

में- नहीं बस इतना बता रहा हूँ की फिर जो भी आये सामने ये मत सोचना की ये सही है या गलत बस छोड़ देना,

नाना- ाचा ये तो थोड़ा सही में सोचना पड़ेगा.

में- क्या सोचना नाना, अरे मज़े लेकर जिओ जीवन के जैसे मिले, जिससे मिलें, ये मत सोचना की किसकी छूट है बस छूट पर ध्यान दो, अगर इस तरह से सोचोगे तो कभी चुदाई की कमी hi नहीं होगी जीवन में.

ये सुनकर नाना बड़े गौर से मुझे देखने लगे और बोले- बातों में तो तू हमारा भी नाना लगता है.

खैर ऐसे hi हंसी खेल करते हुए हम बाघ में बापिस आ गए, शाम हो आई थी तो मैंने जानवरों को पानी दिया और फिर नाना और मैं तुबेल के नीचे नहाये भी इतने में पापा मौसा अनुज वगेरा भी आ गए थे, खैर काम करके हम सब लोग साथ में hi घर की और निकले, आते हुए जग्गू और सरजू मुझे रस्ते में मिल गए तो मैं उनके साथ हो गया,

में- और चूतियों कहाँ घूम रहे हो..

जग्गू- यार इतनी छूटें मिल रही हैं तो चूतिया hi सही.

सरजू- भाई कर्मा यार मज़ा hi आ गया है, यार कभी सोचा नहीं वैसा हो रहा है, घर में जिसे चाहो छोड़ो, फिर कल रात के बाद तो और भी लोग जुड़ गए अब तो.

जग्गू- सेल तुम हमसे जुड़े हो, हम पहले छोड़ू हैं.

इस पर सब हंसने लगे,

में- ऐसी होनी चाहिए न ज़िन्दगी..

सरजू- हाँ यार साला अब तो मन नहीं करता काम पर hi जाने का.

में- बस यही चूतियों वाली बात मत कर, काम सबसे पहले रख, मैं तो कहता हूँ की काम पर जा और म्हणत कर ये सोच कर की घर जा कर माँ को बहन को जिसे चाहे छोड़ सकता है, तो उनके लिए काम कर पैसा कमा.

सरजू- यार कह तो सही रहा है,

जग्गू- हाँ काम सही करेगा तो चुदाई और मज़ेदार हो जाएगी.

में- वही तो, देख काम न हो या पैसे की कमी हो तो घर में कलेश होता है और ऐसे में चुदाई क्या किसी में भी मन नहीं लगता,

सरजू- सही कह रहे हो तुम दोनों, काम गांड फाड़ करो और फिर चुदाई भी गांड फाड़,

जग्गू- ये हुई न बात.

में- चलो पेप्सी पिलाओ फिर.

जग्गू- हाँ चल...

हम तीनो साथ में पेप्सी पीने निकल गए, इधर हमारी तरह hi अनुज सागर और बिरजू साथ में घूम रहे थे, अनुज और बिरजू सागर के सामने खुल कर तो बातें नहीं कर रहे थे पर छूट लुंड की बातें तो चल hi रही थी, सागर बिरजू से कुछ ज़्यादा दोस्ती इसलिए बढ़ाना छह रहा था क्यूंकि उसे कल लाडो नाचती हुई बड़ी पसंद आ गयी थी और वो उसे पटाने की सोच रहा था, लाडो भी पीछे कहाँ थी उसने भी सागर की आँखों में दो चार बार देख लिए था हंसकर, बस तबसे hi सागर के अरमान हवा में थे,

इधर घर पर किरण और पल्ली साथ थे और ऐसे hi बातें करते हुए समय निकल रहे थे, रात से hi जबसे अपनी बुआ के साथ किरण ने वो सब किआ था उसके सोचने का तरीका बदल सा गया था अब वो पल्ली के बदन को भी भांप रही थी की ये नंगी कैसी दिखती होगी, इसकी चूचियां तो मुझसे बड़ी हैं, गांड भी गोल है, इसके साथ वो सब करने में कितना मज़ा आएगा,

पल्ली ने उसकी नज़र पर गौर तो किआ पर उतना जाता नहीं रही थी, इतने में hi लाडो भी आ गयी अब तो तीनो लड़कियों ने मिलकर कमरा बंद कर लिए और बतियाने लगी.

लाडो- क्या बातें कर रही थी तुम दोनों,

किरण- कुछ खास नहीं बस ऐसे hi.

पल्ली- अरे हम लोग सोच रहे थे की तुझे क्या कहकर बुलाएं?

पल्ली ने किरण को आँख मरते हुए कहा.

Laado-kya कहकर बुलाएं मतलब?

किरण- मतलब तू जानती है,

लाडो- नहीं तो बताओ न.

पल्ली- हम सोच रहे थे तुझे लाडो कहें बहन कहें या भाभी?

लाडो- भाभी? धत्त भाभी क्यों कहोगे तुम लोग.

किरण- अरे बस अब इतना भी ड्रामा मत कर.

लाडो- कौनसा ड्रामा.

पल्ली- ओह्हो कितनी भोली बन रही है, हमने नहीं देखा तेरा नैन मटक्का सागर भैया के साथ.

पल्ली ने किरण को ताली मरते हुए कहा

लाडो- अरे वो हेहही वो देख रहा था तो मैंने भी बापिस देख लिए उसे इसमें क्या है,

किरण- ोये उसे नहीं उन्हें बोल,

लाडो- धत्त्त,

किरण- वैसे मुझे रिश्ता मंज़ूर है, मैं तुझे भाभी बनाने के लिए तैयार हूँ.

पल्ली- मैं भी,

लाडो- अरे तुम दोनों कुछ ज़्यादा hi तेज़ नहीं भाग रही, ऐसा कुछ नहीं बस दो बार देख लिए तो तुम तो पीछे hi पद गयी,

पल्ली- ाचा मतलब तुझे सागर पसंद नहीं?

किरण- हाँ बता क्या बुराई है मेरे भाई में?

लाडो- अरे ऐसा नहीं है की पसंद नहीं पसंद है पर.

किरण- आये हाय देखो तो कैसे शर्मा रही है,

पल्ली- अगर पसंद है तो फिर पता ले न, नखरे क्यों कर रही है,

किरण- और क्या पता ले पर हमसे प्रेम कहानी मत छुपा,

लाडो- तुम लोग भी न, बेकार की बातें मत करो.

पल्ली- पर किरण हमें ये देखना तो पड़ेगा न की ये हमारे भाई के लिए ठीक है की नहीं,

किरण- और क्या देखना तो पड़ेगा hi.

हालाँकि किरण को अंदाज़ा नहीं था की पल्ली कैसे देखने की कह रही है बस वो साथ देते हुए बोली.

लाडो- ाचा और कैसे देखोगे तुम लोग ये भी बतादो,

पल्ली- देखेंगे की तू हमारे भाई को खुश कर पायेगी की नहीं.

किरण- हाँ सही बात है,

लाडो- ज़्यादा नहीं हो रहा तुम दोनों का अब,

पल्ली- ज़्यादा क्या है ये तो होगा hi कोई भी चीज़ लेते हैं तो थोक बजा के देखनी पड़ती है क्यों किरण?

पल्ली लाडो के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी,

किरण- हाँ और अब तुझे भी ठोकेंगे लाडो.

किरण खिलखिलाते हुए बोली.

पल्ली- तो फिर चख के देखूं माल कैसा है, मीठा या कड़वा? क्या कहती है किरण?

किरण- बिलकुल देख बिना चखे कैसे पता चलेगा..

इतना सुनने के बाद पल्ली ने लाडो को देखा और आंख मरी जो की किरण को नहीं दिखी और फिर अपने होंठों को लाडो के होंठों से मिला दिया और चूसने लगी, किरण तो ये देख हैरान रह गयी उसे लगा नहीं था की पल्ली सच में hi लाडो को चखेगी, उसे ये देख रात में अपनी बुआ के साथ बिताये पल याद आ गए साथ hi उन्हें देखते हुए उसके बदन में उत्तेजना फैल गयी, उसकी नज़र लाडो और पल्ली पर थी जो पूरी लगन से एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे





किरण सोचने लगी कैसा लग रहा होगा दोनों को, कैसा स्वाद होगा पल्ली और लाडो ka,jaisa बुआ के होंठों का था वैसा hi या अलग, लाडो और पल्ली भी उत्तेजित हो रहे थे एक दुसरे के साथ ये सब करते हुए, किरण की छूट पनियाने लगी थी अपनी सहेलियों का चुम्बन देख कर,

लाडो के हाथ पल्ली के बदन पर फिर रहे थे, वो भी पल्ली का पूरा साथ दे रही थी, किरण को समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे क्यूंकि दोनों ऐसे एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे जैसे वो है hi नहीं वहां पर फिर उसके मन में आने लगा की काश मैं भी कर पाती इनके साथ ये, मुझे भी लाडो और पल्ली के होंठों को चूसने को मिलता,

किरण ये सब सोच hi रही थी की लाडो और पल्ली के होंठ अलग हुए दोनों hi हांफ रही थी जिससे पता चल रहा था की दोनों कितनी म्हणत से एक दुसरे के होंठों को चूस रही थी,

पल्ली- मुझे तो बड़ी मीठी लगी किरण आजा तू भी चख के देख.

वैसे तो पल्ली ने वही कहा जो किरण चाहती थी पर किरण की हिम्मत नहीं हो रही थी कैसे करे वो ये सब,

पल्ली- अरे आ न, क्या बैठे बैठे शर्मा रही है,

पल्ली ने किरण को पकड़ कर अपनी और खींचा और खींच कर जब पास आ गयी तो बोली- चख कर देख.

किरण ने कुछ कहा नहीं, हालाँकि अपनी बुआ के साथ रात उसने सब कुछ किआ था फिर भी उसे इन दोनों के सामने एक झिझक हो रही थी इस झिझक को पल्ली ने महसूस किआ और बोली- अरे क्या सोच रही है बस ऐसे hi तो करना है,

ये कह पल्ली ने उसके चेहरे को पकड़ कर अपने होंठ किरण के होंठों पर रख दिए और चूसने लगी, किरण तो बिलकुल हैरान रह गयी पर पल्ली के होंठों का स्वाद आते hi उसके बदन में बिजली दौड़ गयी और वो भी उत्तेजना वश पल्ली का साथ देने लगी,





लाडो अब भी पल्ली के नीचे दबी हुई थी और दोनों के चुम्बन को नीचे से देख रही थी.. देखते हुए वो एक हाथ से पल्ली का बदन सहला रही थी तो दुसरे हाथ से किरण का, किरण के अंदर की अब साड़ी झिझक ख़तम हो चुकी थी और वो पूरी लगन से पल्ली को चूम रही थी,

लाडो- देखो तो जैसे खा जी जाओगी एक दुसरे को, ऐसे चूस रही हो,

लाडो के मज़ाक के बाद दोनों अलग हुई, अब किरण का भी शर्माना काम हो चूका था, पल्ली लाडो के ऊपर से हटी और बोली - किरण अब तू भी चख ले इसे.

ये सुनकर किरण इस बार बिना शर्माए लाडो के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी और अगले hi पल दोनों के होंठ मिल चुके थे, दोनों पूरी लगन से एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे, पल्ली किरण के पीछे लाडो के ऊपर आ गयी और उसके बदन पर हाथ फेरते हुए पीछे से उसकी गर्दन और पीठ को चूमने लगी, किरण तो इस दोहरे मज़े से और उत्तेजना में भर गयी और लाडो के मुँह में जीभ दाल कर चूसने लगी,

किरण ने एक शर्ट पहनी हुई थी पल्ली पीछे से हाथ आगे लेकर किरण की शर्ट को थोड़ा ऊपर उठा उसके नंगे पेट को हाथों से सहला रही थी किरण की उत्तेजना को हर पल बढ़ा रही थी, लाडो भी उसे चूमने में कोई कसार नहीं छोड़ रही thi,Palli धीरे धीरे किरण की शर्ट के बटन खोलने लगी और जल्दी hi उसकी शर्ट आगे से पूरी खुल गयी तो पल्ली ने उसे उसकी दोनों बाजू से निकल भी दिया, किरण का न ध्यान था शर्ट पर इतना और न hi चिंता थी, अब वो ऊपर से सिर्फ ब्रा में लाडो के ऊपर बैठी थी , पल्ली उसके नंगे पेट पर हाथ फिरते हुए उसकी पीठ और कमर को चूमने चाटने लगी, इधर लाडो और किरण के होंठ अलग हुए तो दोनों hi बुरी तरह हांफ रहज थी पर दोनों के चेहरे पर hi एक बड़ी सी मुस्कान थी, लाडो ने नीचे किरण की ब्रा में से झांकती उसकी चूचियों को देखा तो दोनों हाथ लेजाकर ब्रा के ऊपर से hi उन्हें दबाने लगी, किरण के मुँह दे सिसकियाँ निकलने लगी,

लाडो ने उन्हें दबाते हुए ब्रा के कप को नीचे कर दोनों hi चूचियों को बहार निकल लिए,

किरण की चूचियां उसे बेहद प्यारी लगी, अकार में उससे बड़ी थी पर पल्ली से छोटी थी, पर बेहद मुलायम थी मानो रुई की बानी हो, लाडो से रुका नहीं गया और उसने झुककर किरण की चुकी को मुँह में भर लिए और चूसने लगी,





किरण- अह्हह्ह्ह्ह लाडुआहहह, ुहममम

किरण की सिसकी सुन पल्ली ने भी आगे झुक कर देखा तो लाडो को किरण की चुकी चूसते पाया और किरण की नंगी चुकी देख वो भी तुरंत आगे आई और दूसरी चुकी पर मुँह लगा दिया,

किरण तो मानो उत्तेजना और आनंद से आसमान में उड़ने लगी एक साथ उसकी दोनों चूचियों को चूसा जा रहा था ऐसा लग रहा था की चूचियों से उठती हुई तरंगे उसके पूरे बदन में ऊर्जा भर रही हैं,

लाडो और पल्ली भी किरण की चूचियों को चूसते हुए खुश थे उन्हें अपनी उम्र की एक और सहेली जो मिल गयी थी खेलने के लिए, पल्ली मन hi मन जानती थी की इस पर घर के सरे मर्दों की नज़र होगी, जल्दी hi ये भी हमारी तरह होगी पर तब तक जो मिल रहा है उसका पूरा आनंद उठाओ,

किरण की छूट बिलकुल पनिया गयी थी, उसे तो लग रहा था चूचियां चुसवाने से hi वो झाड़ जाएगी पर तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे तीनो और खासकर किरण का मज़ा किरकिरा हो गया, दरवाज़े पर दस्तक हुई, बहार मौसी थी,

मौसी- अरे लड़कियों क्या कर रही हो दरवाज़ा खोलो लो चाय पीलो.

पल्ली- आई मौसी, ये कहकर पल्ली उठी और सबने अपने कपडे सही किये फिर जाकर दरवाज़ा खोला पल्ली ने तो मौसी ने सबको चाय दी.

गरम चाय के चक्कर में किरण बेचारी गरम होकर अधूरे में छूट गयी थी, और उसे अपनी छूट में चीटिया रेंगती हुई महसूस हो रही थी.

शाम का समय हो चला था, चाय पीकर लाडो और पल्ली चले गए, इधर मां के दिमाग में भी सुबह से बवंडर मचा हुआ था जबसे उन्होंने अपनी बड़ी बहन का वो वीडियो देखा था, उन्हें समझ नहीं आ रहा था वो क्या करें, उनकी बड़ी जीजी का बदन उनके दिमाग से निकल hi नहीं रहा था और उसे सोच सोच के उनका लुंड भी बार बार सर उठा लेता था जिसे छुपाने में उन्हें इतनी परेशानी होती थी,

वो सोच रहे थे क्या करें, इस बारे में किसी से बात भी नहीं कर सकते, पर कुछ न कुछ तो सोचना होगा, नहीं तो हमारा सर ऐसे hi घूमता रहेगा, कुछ सोच कर वो घर से निकले, और सीधा राजन चाचा के घर पहुंचे जहाँ पल्ली ने दरवाज़ा खोला- आओ मां.

मां- जीजा कहाँ है बिटिया?

पल्ली- पापा तो ताऊजी के साथ बाघ में hi हैं मां, तुम अंदर तो आओ.

इतना में पीछे से ममता चची की आवाज़ आई- कौन है पल्ली?

पल्ली- मां हैं,

ममता- अरे जमुना अंदर क्यों नहीं आ रहा.

अंदर से hi चची की आवाज़ आई,

पल्ली- देखो मैं भी बोल रही हूँ आ hi नहीं रहे,

मां- अरे जीजी वो जीजा को ढूंढ रहे थे हम,

मां ने अंदर आते हुए कहा,

ममता- अरे बस जीजा को hi ढूंढ तू जीजी की सुध मत ले लिओ,

चची ने कहा, मां को चची की आवाज़ रसोई की और से आती दिखी तो वो भी उधर बाद गए और वहां जाकर देखा तो उनकी आँखें थोड़ी फैल सी गयी,

रसोई में चची नीचे बैठ कर कुछ साफ़ सफाई में लगी हुई थी, पर जिसे देख मां की आँखें चौड़ी हुई वो था चची का ब्लाउज जो उन्होंने पहना हुआ था जो पीठ पर बिलकुल न के बराबर था और उनकी गोरी चिकनी पीठ पूरी तरह नज़र आ रही थी





वैसे तो ऐसे ब्लाउज माँ मौसी और चची के लिए पल्ली ने बनवाये थे एक साथ उन्हें मॉडर्न दिखने के लिए जबसे परिवार में चुदाई शुरू हुई थी तबसे, वही आज चची ने पहना हुआ था वैसे तो वो पीठ साड़ी से धक् लेती थी तो इतना पता नहीं चलता था पर अभी उनका उतना ध्यान नहीं था क्यूंकि घर पर जो थी,

पर मां का सारा ध्यान उनकी पीठ पर hi था, सोचने लगे ममता जीजी ने कैसा ब्लाउज पहना है, पीठ पूरी नंगी है, पर कितनी गोरी और चिकनी लग रही है, ये सब सोचते हुए उनका लुंड सर उठाने लगा,

ममता- अरे पल्ली चाय रख अपने मां के लिए,

वैसे तो चाय पीकर आये थे मां पर अभी वो न जाने क्यों न नहीं कह पाए और पल्ली चाय बनाने लगी,

वो वहीं रसोई के किनारे खड़े खड़े चची से बातें करते हुए बात करने लगे पर उनका सारा ध्यान चची के बदन पर था और माँ की तरह hi अब वो चची के बदन को भी एक अलग नज़र से देखने लगे, मन में कामुकता जागने लगी, चाय पीते हुए बातें करते हुए उन्हें hi निहार रहे थे, पल्ली चाय देकर ये कहके चली गयी की वो लाडो के यहाँ जा रही है.

खैर चाय ख़तम हुई होने को hi थी की तब तक राजन चाचा भी आ गए,

चाचा- अरे वाह जमुना तुमने तो खुश कर दिया,

मां- हममे कैसे जीजा?

चाचा- यहाँ मिलकर.

मां- ाचा ऐसे.

ममता- अरे तुम्हे hi ढूंढ रहे थे हमने रोक लिया,

चाचा - ाचा हमें क्या हुआ कुछ बात है का?

मां- अरे ऐसे कोई बात नहीं बस ऐसे hi बतियाने का मन हुआ.

चाचा- बहुत ाचा किआ, चलो आओ कमरे में बैठकर आराम से बात करते हैं,

मां- अरे कमरे में कहाँ जीजा, शाम हो गयी है छत पर बैठते हैं.

चाचा- ये भी सही है,

दोनों छत पर खत पर बैठ जाते हैं, चाचा देखते हैं की मां कुछ सोच में हैं जैसे अंदर hi अंदर कुछ सोच रहे हो.

मां- कछु नहीं जीजा, बस ऐसे hi,

चाचा- अब हमसे भी छुपाओगे?

मां- अरे जीजा तुम जानते हो, तुमसे तो हम अपने दोनों जीजा से ज़्यादा खुले हैं, उनसे थोड़ा शरमाते हैं, तुम्हारे साथ बिलकुल नहीं.

चाचा- वही तो फिर मन की बात कहे छुपा रहे हो,

मां- जीजा हमें एक बात परेशां कर रही है,

मां ने छत पर नज़र घुमाकर देखते हुए कहा की कहीं चची या पल्ली तो नहीं,

चाचा- कौनसी बात?

मां- जीजा तुम्हे कभी गलत ख्याल आते हैं?

चाचा- हाँ वो तो सबको आते हैं, किसी तरह की उन्होनी का ख्याल, ऐसे आते हैं.

मां- वैसे नहीं जीजा,

चाचा- फिर कैसे?

मां- अरे वो वाले?

चाचा- कौनसे वाले?

मां- अरे कैसे बताएं तुम्हे हमें समझ नहीं आ रहा,

चाचा- अभी बोल रहे थे तुमसे शरमाते नहीं अभी शर्म आ रही है बताने ने.

मां- वो बात hi कुछ ऐसी है,

चाचा- ाचा बात क्या है बताओ तो.

मां- पर जीजा ये बात बस हम दोनों के बीच रहनी चाहिए,

चाचा- अरे आज तक हमने तुम्हारी बात इधर उधर की कभी?

मां- तभी तो तुम्हारे पास आये हैं.

चाचा- ाचा बात बताओ अब, क्या बात है,

मां- जीजा वो हमारे मन में न कुछ गलत तरह के ख्याल आ रहे हैं.

चाचा- अरे फिर गलत तरह के, सही से बताओ न खुलकर.

मां- कामुक ख्याल,

ये सुन चाचा हंसने लगे, और बोले- यार जमुना तुम भी न बड़े वाले नौटंकी हो, इतना बोलने में इतना समय लगा दिया.

मां- अरे जीजा हमारे लिए मुश्किल हो रहा तुम्हे हंसी आ रही है,

चाचा- हाँ इसमें मुश्किल क्या है और कामुक मतलब चुदाई के ख्याल न, तो सुनो हमें भी आते हैं और बहुत आते हैं.

मां- पर हमें किसी ऐसे को लेकर आ रहे हैं जिनके बारे में हमें नहीं सोचना चाहिए,

चाचा- हमारे बारे में तो नहीं आ रहे,

चाचा ने हँसते हुयी कहा.

मां- अरे जीजा,

चाचा- ाचा बताओ तो किसके बारे में आ रहे हैं.

मां- वो हम नहीं बता सकते,

चाचा- औरत hi है न?

मां- हाँ.

चाचा- तो कहे नहीं बता सकते, और ख्याल hi तो आ रहे हैं उसमे क्या दिक्कत है,

मां- जीजा पर जिसके बारे में आ रहे हैं उनके ख्याल भी नहीं आने चाहिए,

चाचा- ऐसा कौन हो सकता है, और ख्याल तो किसी के भी आ सकते हैं उसमे कोई परेशानी नहीं है,

मां- हमें तो गलत लग रहा है,

चाचा- अब तुम बता hi नहीं रहे हो, किसके आ रहे हैं, ाचा तुम्हारे गाओं में कोई औरत है?

मां- नहीं...

चाचा- ाचा यहाँ है?

मां ने इस पर कुछ जवाब नहीं दिया...

चाचा- यार जमुना तुम भी न सही में बड़े वाले हो.

मां- मतलब..

चाचा- यार औरतों की तरह शर्मा रहे हो, खुल के बात करो, हम समझ गए की क्या परेशानी है तुम्हे.

मां- ाचा क्या परेशानी है,

चाचा- यही की तुम्हारा लुंड किसी को देख देख कर खड़ा हो रहा है, पर रिश्ते के हिसाब से सब यहाँ तुंहारी बहनें हैं तो यही तुम्हे गलत लग रहा है,

मां चाचा की बात सुन शांत पद गए और नज़रें नीची कर ली,

चाचा- यही बात है न,

मां ने कुछ देर बाद हाँ में सर हिला दिया,

चाचा- जमुना बाबू, यार तुम भी अलग चीज़ हो, अगर देख कर खड़ा हो रहा है तो का हुआ, मस्त बदन देख कर लुंड तो खड़ा होगा hi, नहीं तो मर्द किस बात के, तो इतना मत सोचो और खुश रहो,

मां चाचा की बात और इतना खुलापन सुनकर हैरान रह गए.

मां- सच में जीजा ये गलत नहीं है?

चाचा- हमारी नज़र में तो नहीं है, रिश्ता होने से पहले सब मर्द और औरत hi हैं, रिश्ते तो समाज में बने हैं,

मां चुपचाप होकर चाचा से ज्ञान ले रहे थे, और चाचा ज्ञान दिए जा रहे थे.

चाचा- इसलिए इतना मत सोचो, लुंड को खुश रखो तो खुश रहोगे सही गलत में कुछ नहीं रखा.

मां- ाचा जीजा अगर तुम हमारी जगह होते तो क्या करते,

चाचा- करना क्या था पूरे मज़े लेने की कोशिश करता, अगर मौका मिलता तो साडी इच्छा पूरी कर लेता,

मां- सही में ख्यालों में या सच में?

चाचा- जो चीज़ ख्यालों में इतनी अछि हो सोचो सच में कितनी लगेगी,

मां ये सुन चुप हो गए, फिर कुछ सोच कर बोले - तो हमें क्या करना चाहिए?

चाचा- मज़े लो, पटाने की कोशिश करो भले hi कोई भी हो, क्या पता काम बन जाये,

मां- जीजा एक बात कहें सही में मस्त आदमी हो तुम.

चाचा- अरे मस्ती में hi रहो तुम भी खुश रहोगे, वो तो तुम नाम नहीं बता रहे किसे देख कर तुम्हारा खड़ा हो रहा नहीं तो और भी मज़े करवाते,

मां- वो कैसे?

चाचा- अरे वो हमारी बात है, कुछ न कुछ करवाते ज़रूर, वैसे अगर हमारी वाली को देख कर हो रहा है तो ज़्यादा म्हणत भी नहीं करनी होगी, आराम से हो जायेगा काम..

मां तो चाचा की ये बात सुनकर बिलकुल सुन्न पद गए की जीजा अपनी पत्नी के बारे में ये कैसे बोल रहे हैं, पर जो सुना वो सुनकर भी हैरान थे की ज़्यादा म्हणत नहीं कर्णक पड़ेगी इसका क्या मतलब है,

मां को शांत और हैरान देख चाचा बोले- का हुआ जमुना बाबू, अब कौनसी जीजी के ख्यालों में खो गए,

मां- जीजा पर तुम अपनी पत्नी के बारे में ये सब कैसे बोल सकते हो, ये गलत है.

चाचा- अरे हमने कहा न हम समाज के सही गलत से नहीं चलते, हमारे घर में क्या सही क्या गलत है वो हम लोग मिलकर फैसला करते हैं.

मां- मिलकर मतलब जीजी अगर ये सुने तो गुस्सा नहीं होंगी,

चाचा- बिलकुल नहीं हमारर और उसके बीच कुछ नहीं छिपा,

मां एक बार फिर से स्तब्ध थे,

चाचा- अरे जमुना यार तुम शांत अचे नहीं लगते,

मां- जीजा हमें कुछ समाज नहीं आ रहा पहली बार इतने खुले पति पत्नी देख रहा हूँ.

चाचा- फिर तो तुम्हे अभी बहुत कुछ देखना बाकि है सेल साब.

मां- वैसे जीजा तुमने ये क्यों कहा की ममता जीजी के साथ ज़्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ेगी,

चाचा- लो आ गए न अपने फायदे वाली बात पर हम आगे कुछ नहीं बताएँगे.

मां- क्यों? जीजा.

चाचा- इसलिए क्यूंकि तुम अपनी बात तो बता नहीं रहे हमारे राज़ सुने जा रहे हो,

मां- कौनसी बात?

चाचा- वही कौनसी बहन को देख लुंड उठा रहे हो,

मां थोड़ा मुस्कुराये फिर शरमाते हुए बोले- पहले सुबह बड़ी जीजी और अभी नीचे ममता जीजी को देख कर.

चाचा- सही जा रहे हो वैसे सभ्य भाभी चीज़ hi ऐसी हैं देख कर खड़ा हो जाता है.

मां ने इस बात पर थोड़ा मुँह बनाकर देखा तो चाचा बोले- मुँह न बनाओ, बहन तुम्हारी हैं, हमारी तो भाभी हैं और भाभी को जैसे चाहें हम निहारें.

ये सुन मां कुछ नहीं बोले पर बात को घूमते हुए बोले- अब तो वो बताओ न,

चाचा- रहा नहीं जा रहा तुमसे, तो सुनो तुम्हारी ममता जीजी अपने सेज भाई के साथ भी छुड़वा चुकी है तो इसलिए ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी.

मां तो ते सुन कर सुन्न पद गए,

मां- क्या सच में,?

चाचा- हाँ.

मां ने कुछ सोचा और बोले- नहीं जीजा समझ आ गया तुम हमारा चूतिया बना रहे हो,

चाचा- अरे हम तुम्हे चूतिया क्यों बनाएंगे?

मां- ाचा तुम्हे कैसे पता ममता जीजी ने अपने भाई से छू, करवाया है,

चाचा- क्यूंकि हम भी वही थे उसी बिस्तर पर

चाचा ने मुस्कुरा कर कहा,

मां की चेहरे से मुस्कान गायब हो गयी,

मां- टुम वहीं थे और जीजी अपने भाई से छुड़वा रही थी ये कैसे हो सकता है.

चाचा- क्यों नहीं हो सकता, बिलकुल हुआ है,

मां- ाचा तो तुम कुछ नहीं कर रहे थे, उन्हें करवाते देख.

चाचा- कर रहे थे, हम अपनी सलहज को पेल रहे थे,

मां- अरे रे, ये सब सच है,

चाचा- सात प्रतिसत सच.

मां कुछ देर के लिए खामोश हो गए, अब उनके सामने कई तरह के चित्र घूमने लगे एक चित्र में वो ममता जीजी को अपने भाई से छुड़ता देख और जीजा को सेल की पत्नी को छोड़ते हुए दृश्य की कल्पना कर रहे थे, तो दुसरे दृश्य ने खुद को ममता जीजी तो कब्जी सभ्य जीजी या शालू जीजी के साथ प् रहे थे, वही तीसरे दृश्य में देख रहे थे की वो अपनी जीजी को छोड़ रहे हैं और उनके जीजा उनकी बीवी को ये ख्याल आते hi उनका लुंड पाजामे के अंदर ठुमके मरने लगा...

मां- सही है जीजा यार तुम्हारा तो,

चाचा- अरे दुनिया बहुत खुल चुकी है, तुम भी खुले सही गलत मत सोचो, बस किसी के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती मत करो बाकि जो राज़ी हो छोड़ दो, बहन हो या beti.aur दूसरी बात अगर किसी और की औरत छोड़ने की छह हो तो अपनी भी दूसरो से छुड़वाने को तैयार रहो.

मां चाचा की बात सुनकर कुछ सोचने लगे, उनका लुंड पाजामे में पूरी तरह से सख्त हो चूका था, जिसे वो पाजामे में नीचे की तरफ धकेल रहे थे,

मां- सही कहा जीजा अब हम भी तुम्हारी तरह बनेंगे,

चाचा- अरे बिलकुल, कब तक हथियार को पाजामे में दबाते रहोगे,

मां- जीजा तुम न मज़े बड़े लेते हो,

चाचा- अरे सेल के साथ मौज मस्ती नहीं करेंगे तो किसके साथ करेंगे,

मां- ये तो सही कहा जीजा, अब आगे का करें उसका भी कुछ बताओ न,

चाचा- अब ये तो तुम अपना दिमाग लगाओ, हमने रास्ता दिखा दिया है जाना कैसे है तुम्हे देखना है.

मां- हाँ ये भी है, पर एक बात तो बताओ,

चाचा- क्या?

मां- जीजी को कैसे मनाया तुमने?

चाचा इस बात पर मुस्कुराये...

इधर जीजा साले की बातें चल रही थी तो मैं जग्गू और सरजू ठंडा पीने के बाद, सरजू हमें अपने यहाँ ले गया था और जल्दी hi हम लोगो ने अपना प्रोग्राम शुरू भी कर दिया था,

एक और दीनू चाचा बीच में बैठे थे और पल्ली उनका लुंड चूस रही थी वहीं उनके अगल बगल में और जग्गू उनकी दोनों बेटियों को छोड़ रहे थे, मैं लाडो की कासी छूट का मज़ा ले रहा था तो जग्गू नीतू की गरम छूट में धक्के लगा रहा था





दोनों बेटियों को अपने पास छुड़ता देख चाचा बेहद उत्तेजित हो रहे थे और उनकी उत्तेजना पल्ली अपने मुँह में लेकर शांत कर रही थी,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बित्याहहहह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी हीईई चुस्स्सस्स अह्ह्ह्ह क्या सिखाया है तेरे बाप ने अह्हह्ह्ह्ह,

नीतू- आह्हः पापा मस्त चुस्ती है न पल्ली अह्ह्ह्ह, ओह्ह्ह्हह्ह जग्गू ऐसे हीई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

नीतू अपने पीछे से धक्के लगते हुए जग्गू का भी उत्साह बढ़ा रही थी,

जग्गू- अह्ह्ह्ह कभी सोचा नहीं था की चाचा के बगल में तुझे छोडूंगा नीतू अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है,

में- ये तो सही कहा आह्हः बाप के सामने बेटी छोड़ने का माज़ा hi अलग है,

लाडो- ओह्ह्ह्हह भैया पापा के सामने छोड़ने में हमें भी उतना hi मज़ाआ आता है,

इधर पल्ली ने चाचा के लुंड को मुँह से निकल लिए था और फिर उनके लुंड पर चढ़ते हुए बोली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लाडो उतना hi मज़ा पापा से छोड़ने में भी आता है, आह्हः चावहहाआझ.

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बित्याहहहह अह्ह्ह्ह तेरी गरम छूट अह्हह्ह्ह्ह इतना उत्तेजित कर देती है मुझे,

खैर उत्तेजना तो काम रज्जो चची की भी नहीं थी जिन्हे की दुसरे बिस्तर पर लेते हुए मौसा छोड़ रहे थे, मौसा हम तीनो के आने से पहले hi वहां थे जिन्हे दीनू चाचा बुला कर लाये थे, और अभी मौसा उनकी पत्नी को पीछे लेटकर लम्बे लम्बे धक्को से छोड़ रहे थे





रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम भैयाहः कितना ाचा हो गया है ना सब अब.

मौसा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाभी बहुत बढ़िया हो गया है तभी तो तुम्हारी नस्ट छूट छोड़ने को मिल रही है,

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह हमें तो लग रहा है जबसे ये हुआ है सबके साथ चुदाई करने का प्रोग्राम, हम तो बिलकुल जवानी में लौट आये हैं

पल्ली- तुम अभी तक जवान hi हो चाचा आह्हः देखो कैसे जवान लुंड मेरीए कच्ची काली चुत को पीट रहा है,

पल्ली उनके लुंड पर उछालते हुए बोल रही थी,

में- बातों में इससे कोई नहीं जीत सकता,

मैं लाडो को छोड़ते हुए बोलै, इतने में पीछे से प्रेमा भाभी की आवाज़ आई जो की रज्जो चची के पीछे थी और सरजू बिरजू दोनों भाई मिलकर उन्हें दोनों तरफ से बजा रहे थे,

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ुहममम हाय ढैय्या,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह बहुरिया करवा ले सेवा अपने दोनों देवरों से,

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह्ह छाछठीीी दोनों देवर लग रहा है आज मेरे पुर्जे खोल देणगीीेअहहहह,

बिरजू प्रेमा भाभी की गांड मार रहा था तो सरजू का लुंड उनकी छूट में था, पूरे घर में चुदाई का माहौल बना हुआ था,

मैंने लाडो को छोड़ते हुए दीनू चाचा के पास से उठाया और उसे रज्जो चची और मौसा के पास ले गया, जहाँ मौसा का लुंड चची की गांड में अंदर बहार हो रहा था, मैंने लाडो की छूट से लुंड निकला और उसे पल्ली की जगह लेने को कहा,

पल्ली भी तुरंत दीनू चाचा के लुंड से हैट गयी और लाडो ने अपने पापा के लुंड पर जगह लेते हुए उनका लुंड अपनी छूट में लेकर उनके ऊपर बैठ गयी और धीरे धीरे उछलने लगी, इधर मैंने पल्ली को इशारा किआ तो उसने मेरा लुंड चाटने लगी और जल्दी hi उसने अपने थूक से उसे चिकना कर दिया, मैंने फिर लाडो के पीछे और दीनू चाचा के पैरों के बीच जगह ली और अपना लुंड लाडो की गांड के छेड़ पर लगाया तो दीनू चाचा भी एक पल को रुक गए, और मुझे एडजस्ट होने का समय दिया मैंने भी ज़ोर लगाकर अपने लुंड को धीरे धीरे लाडो की गांड में धकेलना शुरू किआ,

लाडो- आह्ह्ह्हह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत मोटा है तुंहारा अह्हह्ह्ह्ह गांड पूरी चिर रही है,

में- अहहह्म्म बस्सस थोड़ा सा और, अह्हह्ह्ह्ह, चाचा क्या मस्त गांड है तुम्हारी बिटिया की,

मैंने दीनू चाचा से कहा,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह हाँ बेटाःह्ह्ह बिटिया hi मस्त है, तभी तो बाप के लुंड पर बैठी है, ओह्ह्ह्हह्ह... लाडो- भैयाहः पापा अब छोड़ना भी शुरू करो,

मैं और चाचा धीरे धीरे लाडो को छोड़ने लगे, लाडो को उसके पापा के साथ छोड़ने में एक अलग hi उत्तेजना का एहसास हो रहा था,





उतना hi मज़ा और उत्तेजना दीनू चाचा और लाडो को भी हो रही थी, दीनू चाचा को भी मेरे साथ अपनी बेटी के छेदों को बाँटना भ रहा था,

बगल में जग्गू अभी नीतू और लाडो को एक दुसरे के ऊपर लिटा कर बदल बदल कर उनकी गांड मार रहा था, दूसरी और प्रेमा भाभी अभी भी दोहरी चुदाई के मज़े ले रही थी सरजू और बिरजू से,

रज्जो चची मौसा के लुंड पर उछाल रही थी,

दीनू चाचा और मेरे द्वारा की गयी दोहरी चुदाई से लाडो का बुरा हाल हो रहा था वो लगातार आहें भर रही थी और फिर थोड़ी देर बाद एक चीख के साथ झड़ने लगी, आउट झाड़ कर बिलकुल बेजान सी अपने पापा के ऊपर गिर गयी, मैंने अपनस लुंड उसकी गांड से निकला और फिर उसे चाचा के ऊपर से उठाकर एक और साइड में लिटा दिया,

मैंने बगल में देखा तो जग्गू नीतू और पल्ली दोनों को एक दुसरे के ऊपर लिटा कर छोड़ रहा था, अभी उसका लुंड पल्ली की गांड में था तो मैंने नीतू को पकड़ के खींच लिए और उसे दीनू चाचा के ऊपर चढ़ा दिया लाडो की जगह,

कुछ hi पलों बाद लाडो की तरह hi नीतू को भी मैं उसके पापा के साथ मिलकर छोड़ रहा था,

दीनू चाचा का लुंड उनकी बड़ी बिटिया की छूट में अंदर बहार हो रहा था और मेरा उसकी गांड में, नीतू के मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी, पर हमारे धक्के उन सिसकियों को सुन और तगड़े होते जा रहे थे





में- अह्हह्ह्ह्ह चचा क्या मस्त बेटियां पैदा की हैं तुमने एक से बढ़कर दूसरी है, आह्हः..

दीनू- ओह्ह्ह्हह्ह बेटा सही कह रहा है, अपनी बेटियों को भोग कर नेरा जीवन सफल हो गया है अह्हह्हं.

नीतू- आह्हः अह्हह्ह्ह्ह ुहममम पापाआआअह्हह्ह्ह्ह बेटी के बदन पर पहलाआहहह हक़्क़ पिता का होताआ है वही हक़ चूका रही हुन्न्न अह्ह्ह....

में- अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ हक़ तो हरररर बेटीई को चुकाना चाहिए अह्ह्ह,

दीनू- सही कहा बेताहहह

जग्गू ने नीतू को दोहरी चुदाई करते देखा फिर अपनी भाभी को भी तो उसने सोचा वो क्यों पीछे रहे तो उसने पल्ली की गांड से लुंड निकला और मौसा और चची के पास गया, जहाँ उसकी इच्छा पता लगते hi मौसा ने उसके लिए जगह बनाई और अगले hi कुछ पलों में अपनी बेटी की तरह hi रज्जो चची भी दोहरी चुदाई के मज़े ले रही थी,

नीचे से मौसा उनकी गांड मार रहे थे तो ऊपर से जग्गू चची की छूट को छोड़ रहा था,





रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम जग्गू बेटाः ऐसे hi चूड्डड्ड अपनी चची को ौसे hi छोड़ो भाई सहाब, अह्ह्ह्ह देखो जैसे मेरी बिटिया को दोनों एक साथ छोड़ रहे हैं,



मौसा और जग्गू भी ये सुन और जोश में आकर चची को छोड़ने लगे,
 
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम जग्गू बेटाः ऐसे hi चूड्डड्ड अपनी चची को ौसे hi छोड़ो भाई सहाब, अह्ह्ह्ह देखो जैसे मेरी बिटिया को दोनों एक साथ छोड़ रहे हैं,

मौसा और जग्गू भी ये सुन और जोश में आकर चची को छोड़ने लगे,


अपडेट 215

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह हाँ रज्जो देख अह्हह्ह्ह्ह तेरी बेटी कैसे अपने बाप और कर्मा के लुंड एक साथ ले रही है अह्हह्ह्ह्ह बिटिया..

नीतू- ुहम्म अह्ह्ह्हह्हह पापा बहुत मज़ा आह्ह्ह्ह आ रहा है, अह्ह्ह्ह कर्मा भइयाझ कस्सस्सस के मार रहे हो मेरी gaaaaaaaaaaaaaannnnnnnnnnnndddddddddd...

में- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह नीतू तेरी गांड है या मक्खन, अह्ह्ह्हह्हह, बहुत मज़ा आ रहा है,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह माखन जैसी hi है मेरी बिटिया कर्माहहह..

नीतू- अह्हह्ह्ह्ह अच्छे से फेटूओ अह्ह्ह्ह माखन को पापाहहहहहहह तभी घेईईई निकलेगा अह्हह्ह्ह्ह..

मैं और दीनू चाचा मिलकर उनकी बेटी को तेज़ी से छोड़ रहे थे..





जिससे नीतू हर पल के साथ उत्तेजना के सागर में गोते लगा रही थी, वैसे यही हाल दूसरी और प्रेमा भाभी और रज्जो तै का भी था क्यूंकि वो भी दोहरी चुदाई के मज़े ले रही थी,

प्रेमा भाभी को सरजू बिरजू दोनों ने मिलकर उनके चरम पर पहुंचा दिया था और प्रेमा भाभी थरथराते हुए झड़ने लगी, उनके झड़ते hi बिरजू सरजू ने उन्हें अपनर ऊपर से हटा कर एक तरफ लिटा दिया, प्रेमा भाभी के हटते hi उनकी जगह पल्ली ने ले ली और कुछ hi पल बाद पल्ली अब दोनों भाइयों से एक साथ छुड़वा रही थी, दोनों भाई पल्ली को छोड़ते हुए बगल में अपनी मम्मी की दोहरी चुदाई देख देख और उत्तेजित हो रहे थे,

रज्जो चची भी जग्गू और मौसा के धक्कों से आहें भर रही थी, मौसा का लुंड उनकी गांड की गहराई में जाकर उसे भरने का एहसास दे रहा था तो जग्गू का उनकी छूट की दीवारों को घिसता हुआ अंदर तक उठक पुथल मचा रहा था,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह जग्गू लल्ला, ओह्ह्ह बेटाःह्ह्ह छोड़ ले अपनी चची को,

जग्गू- हाँ चची तुम्हे छोड़ने के तो न जाने कबसे सपने देखे हैं अह्ह्ह गाओं का हर लड़का मुठ मरता है तुम्हारी बड़ी बड़ी चूचियां देख कर,

जग्गू ने चची की झूलती चूचियों को मसलते हुए कहा,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह तुझे मुठ मरने की कभी ज़रुरत नहीं बेताहहह जब चाहे आकर घुसा डीओ अपना मोटा लुंड मेरी छूट में,

मौसा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माँ हो तो आईसीई जो बेटे के साथ साथ उसके दोस्तों का भी ख्याल रखे,

मौसा चची की गांड में धक्के लगते हुए बोले,

सरजू- सही कहा मौसा, ऐसी माँ किस्मत वालों को hi मिलती है, अह्ह्ह्हह्हह,

सरजू पल्ली की गांड मरते हुए बोलै, पल्ली दोनों भाइयों के बीच उनके लुँडो से छुड़वाते हुए मस्तिया रही थी,

पल्ली- अह्ह्ह्ह ऐसे खुल कर चुदाई करने का मौका hi किस्मत वालों को मिलता है, अह्ह्ह्हह्हह... ऐसे hi छोड़ते रहो अह्ह्ह बिरजू, सरजू भैयाहः...

इधर मेरी और अपने पापा की चुदाई से नीतू का बुरा हाल हो रहा था पर कुछ बोल नहीं प् रही थी क्यूंकि चाचा अपनी बेटी के होंठों को चूसते हुए नीचे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, मैं पीछे से उसकी कासी हुई गांड मार रहा था, वो दोहरी चुदाई का आनंद ज़्यादा देर और नहीं झेल सकीय और कांपते हुए झड़ने लगी, इधर नीतू झड़ी तो उधर उसी समय सरजू बिरजू भी साथ में गुर्राते हुए पल्ली के छेदों को भर रहे थे, पल्ली भी उनके साथ झाड़ रही थी,

लाडो और भाभी एक साथ बैठ कर सबको देख रहे थे, नीतू के झड़ने पर मैंने उसकी गांड से लुंड निकला और उसे चाचा के ऊपर से हटाकर नीचे बैठा दिया और उसके मुँह में लुंड देकर उसे उसका मुँह छोड़ने लगा और फिर जैसे hi मुझे अपना रास बहार आता हुआ महसूस हुआ मैंने लुंड उसके मुँह से निकला और उसके चेहरे के ऊपर निशाना लगते हुए अपने रास की पिचकारी उसके चेहरे पर छोड़ने लगा, वो भी मुँह खोल कर मेरा रास अपने चेहरे और मुँह में लेने की कोशिश करने लगी





मैंने धार के बाद धार मार कर उसके पूरे चेहरे को रंग दिया और जब धार ख़त्म हुई तो उसने लुंड को मुँह में भर उसे चाट कर साफ़ भी कर दिया और फिर लुंड निकल कर अपने पापा की और देखा तो वो बोले- बहुत सुन्दर लग रही है बिटिया,

उनके सामने प्रेमा भाभी और लाडो बैठ गयी नीतू की देखा देखि और चाचा ने भी दोनों को निराश नहीं किआ और दोनों के चेहरे पर अपने रास की पिचकारी छोड़ दी जिसे दोनों ने एक दुसरे के चेहरे से छाता और फिर दोनों hi नीतू पर टूट पड़ी और मेरा रास उसके चेहरे से चाटने लगी,

हमारी देखा देखि जग्गू और मौसा भी ज्यों hi जड़ने को हुए तो उन्होंने भी ऐसा hi किआ और चची और पल्ली को एक दुसरे के बगल कर दोनों के चेहरे को अपने अपने रास से भर दिया, जिसे पल्ली और चची ने एक दुसरे के चेहरे से चाट कर साफ़ किआ,

खैर झाड़कर शांत होने के बाद मैं जग्गू प्रेमा भाभी और मौसा पल्ली सब कपडे पहन कर अपने अपने घर की और निकल गए

जग्गू और प्रेमा भाभी जब घर पहुंचे तो दरवाज़ा अनुज ने खोला और खोलते hi जैसे वो अंदर आये तो देखा वो नंगा था और बापिस कमरे में भाग गया तेज़ी से, उसे देख भाभी और जग्गू दोनों हंसने लगे, दरवाज़ा लगा कर वो लोग भी अंदर गए जिस कमरे में अनुज गया था वहां जाकर देखा तो दोनों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, एक बिस्तर पर जग्गू ने देखा की उसके पापा लेते थे उनके ऊपर उसकी मम्मी मतलब मंजू तै उनका लुंड छूट में लिए हुए बैठी थी और उनके पीछे नीलेश चाचा थे जिनका लुंड उसकी मम्मी की गांड में था,

पापा राजपाल ताऊ के साथ मिलकर उनकी बीवी को छोड़ रहे थे दोनों के लुंड एक ले में छूट गांड में अंदर बहार हो रहे थे





हर धक्के पर तै के मुँह से सिसकियाँ और अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी,

वहीं दुसरे बिस्तर पर नज़र पड़ी तो देखा की अनुज ने पद्मिनी तै को बिस्तर पर लिटाया हुआ था पीछे से उनकी गांड मार रहा था,

राजपाल- ओह्ह्ह्हह्ह नीलेश बाबू कैसी लग रही है अपनी भौजी की गांड,

पापा- अह्ह्ह भैया बहुत मस्त है, तुम्हारे साथ मरने में तो और मज़ा आ रहा है,

राजपाल- आह्ह्ह्हह ाहयेगा हीई, पति के साथ मिलकर पत्नी को छोड़ो तो मज़ाआ दोगुना हो जाता है,

मंजू- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ुहममम पर दो लुंड सीईई एक साथ अह्ह्ह्हह छोड़ने का मज़ा hi सबसे अलग है, अह्ह्ह खास कर एक पाटीईई का हो दूजा देवर काआहहह,

ये बोलते हुयी तै की नज़र दरवाज़े पर पड़ी तो उन्होंने भाभी और जग्गू को देखा और बोली- आअह्ह्ह गए बच्चो,

प्रेमा- हाँ मम्मी तुम लोग लगे रहो मैं खाने की तयारी करती हूँ,

मंजू- थीइइरक़ है बेटाहः...

भाभी कमरे से बहार निकल गए, तभी पद्मिनी तै की एक अह्हह्ह्ह्ह निकली तो जग्गू का ध्यान उनकी और गया उसने देखा की अनुज तै की गांड मरते हुए उनकी छूट को भी छेड़ रहा था जिससे तै उत्तेजित होकर आहें भर रही थी,





जग्गू भी उन्हें देख मुस्कुरा कर कमरे से बहार निकल गया,

इधर मंजू तै भी जल्दी hi अपने पति और देवर के लुंड पर झड़ने लगी, जिनके झड़ने के बाद पापा ने उन्हें ताऊ और अपने बीच से हटाकर बगल में लिटा दिया और अनुज ने जैसे hi ये देखा उसने पद्मिनी तै की गांड से लुंड निकला और उन्हें मंजू तै की जगह पर बिठा दिया, कुछ hi पालो में राजपाल ताऊ और पापा के लुंड उनकी छूट और गांड में अंदर बहार हो रहे थे और अनुज ने अपना लुंड उनके मुँह में भर कर उनके तीनो छेदों को बंद कर दिया,

तै बगल में लेट कर हांफते हुए ये देख रही थी,

पापा- अह्ह्ह्हह्हह कुछ भी कहो भाई, संधान बहुत मज़ेदार है बहु बिलकुल इन पर hi गयी है,

राजपाल- ओह्ह्ह्हह्ह नीलेश बाबू सही कहा अह्ह्ह्हह्हह क्या चुदवाती है यार,

मंजू- तभी तो बुलाया है खूब छोड़ो, रैंड संधान को भी पता चले चोदामपुर के लौडों का स्वाद,

तै ने लेते लेते hi कहा,

पद्मिनी तै क्या hi बोलती बेचारी अनुज ने गले तक अपना लुंड जो घुसा रखा था, वो तो बस अभी टिहरी चुदाई के आनंद में डूबी हुई थी,

पापा- अह्ह्ह्हह्हह बिलकुल भौजी, अह्ह्ह इतना छोड़ेंगे साली को की बिना लुंड रह hi नहीं पाएगी,

मंजू- छोड़ के छूट इतनी फैलाडो बुर छोड़ी की, की पूरा गाओं समां जाये इसमें,

ऐसी hi बातों से चुदाई आगे बढ़ी और उत्तेजित होकर जल्दी hi पद्मिनी तै झाड़ गयी,

उनके झड़ते hi अनुज के कहने पर तीनो ने लुंड उनकर अंदर से निकले और नीचे बैठकर उनके चेहरे और चूचियों पर अपने रास की पिचकारी छोड़ने लगे





पद्मिनी तै को रास में नहाकर ाचा लग रहा था वही पीछे से तै भी सबका जोश बढ़ा रही थी,

मंजू- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हुई हमारी संधान बिलकुल सुन्दर, देखो तो कितनी प्यारी लग रही है,

अनुज- है न तै, बड़ी मस्त लग रही हो.

पद्मिनी- हाँ लल्ला तोहरी मलाई लगा कर तो हम और जवान हो गए,

राजपाल- जवान तो तुम पहले भी थी संधान,

मंजू- अब संधान रैंड लग रही हो.

पापा- कर्मा के लिए भी ऐसी लड़की ढूंढनी पड़ेगी जिसकी माँ संधान जैसी हो,

इस पर सब हंसने लगे,

मंजू- सुनो संधान ये मलाई हटाना मत ऐसे hi रहो बड़ी अछि लग रही हो,

पद्मिनी- अब संधान का आदेश है तो नहीं हटेगी,

खैर इसके बाद अनुज और पापा तैयार होकर घर की और निकल गए,

पल्ली जब घर पहुंची तो दरवाज़ा उसकी मम्मी ने खोला वो अंदर आई देखा ममता चची रसोई में काम कर रही थी, वहां उसने पानी पीने के लिए गिलास में भरा, उसे कुछ कुछ आवाज़ें अंदर वाले कमरे की और से आती हुई सुनाई दी तो वो पानी का गिलास लिये अंदर के कमरे में चल दी वहां जाकर कमरे का दरवाज़ा खोल उसने देखा तो मुस्काने लगी, क्यूंकि अंदर बिस्तर पर उसके पापा यानि राजन चाचा बिलकुल नंगे होकर पीछे से उसकी तै यानी माँ की गांड मार रहे थे और माँ भी बिलकुल नंगी थी उनकी तरह hi,





चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह भाभी बिलकुल लट्टू हुआ पड़ा ही वो तो...

माँ- uhmmmhaaaaaaaaaaaaa तुमने क्या बोलै उससे भैयाहः,

चाचा- बस समझा दिया है अह्ह्ह्ह, और भेनचोद बनने के कुछ गन सिखाये हैं,

पल्ली कमरे में आते हुए उनके सामने बैठ कर पानी पीने लगी,

पल्ली- किसकी बातें कर रहे हो तुम लोग?

चाचा- तेरे जमुना मामा की, भाभी को बता रहा हूँ कैसे वो अपनी बहनो को देख पागल हो रहे हैं..

पल्ली- क्या सही में ताई?

माँ- तेरे पापा hi बोल रहे हैं लल्ली..

चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाभी सही बोल रहा हूँ खुद बोल रहा था..

पल्ली- ये तो बढ़िया है, अगर वो सब शामिल हो जाएं तो हमारे साथ मज़ा hi आ जाये,

पल्ली आगे होकर बिस्तर के बगल में बैठ गयी और माँ की छुच्छी को मुँह में भर के चूसने लगी,

माँ- हानंन्न बीटा फिर ऐसे छुप छुप के छुड़वाना नहीं पड़ेगा,

माँ ने पल्ली के सर पर प्यार से हाथ फिरते हुए कहा

चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाभी तुम्हारी गांड हर बार ऐसा लगता है जैसे पहली बार मार रहे हैं,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भैया तभी तो इतने ज़ोर से मार रहे हो अह्हह्ह्ह्ह लग रहा है फाड़ hi डोज,

पल्ली ने माँ की चुकी को चूसते हुए अपनी दो उंगलियां नीचे लेजाकर माँ की छूट में घुसा दी, माँ और मस्त हो कर गांड मरवाने लगी दोनों बाप और बेटी मिलकर माँ को दोनों और से सुख देने लगे जिसका नतीजा ये हुआ की जल्दी hi माँ का बदन थरथराने लगा ये देख पल्ली ने उनकी चुकी से मुँह हटाया और अपनी उँगलियों को निकल अपना मुँह माँ की छूट पर लगा दिया, माँ का झड़ने का वेग और तेज़ हो गया उनकी गांड चाचा के लुंड पर कसने लगी जो चाचा के लिए भी सहना मुश्किल हो गया और वो भी माँ की गांड में झड़ने लगे, इधर पल्ली माँ की छूट चाटते हुए उनकी छूट का सारा रास चाट गयी और फिर जैसे hi चाचा ने झड़ने के बाद लुंड माँ की गांड से निकला तो पल्ली ने पहले उसे चाट कर साफ़ किआ फिर अपना मुँह माँ की गांड के छेड़ पर लगा अपने पापा का रास चाटने लगी, जीभ दाल दाल कर बापिस निकल रही थी,

तैयार होकर माँ जब घर आई तो सब लोग आ चुके थे खाने की तयारी चल रही थी, मौसी खाना बना रही थी मामी किसी और काम में व्यस्त थी,

नाना रसोई के बहार खड़े अपनी छोटी बिटिया को खाना बनाते हुए देख आँखें सेक रहे थे





गोरी गदराई कमर उसमे पड़ी सिलवटें और ब्लाउज से झांकती हुई पीठ देख कर नाना फिर से गरम हो रहे थे, या फिर से क्या वो आये hi थे अपनी बिटिया के बदन को निहारने ताकि उससे अपनी आँखें सेक सकें, इतने में hi मौसी मुड़ी तो नाना को देखा.

मौसी- अरे बाबा का हुआ कछु चाहिए का?

नाना- हाँ हाँ बिटिया वो पानी पीना था,

मौसी- अरे किसी बच्चे से मंगवा लेते.

नाना- अरे इतने भी बूढ़े नहीं हुए हैं अभी बिटिया,

मौसी- तुम भी बाबा, और सही बात ही बिलकुल बूढ़े नहीं हो तुम,

ये कहते हुए मौसी ने उन्हें पानी का गिलास दिया जिसे नाना वहीं खड़े खड़े पि गए, पर पीने के बाद भी ऐसे hi खड़े रहे

मौसी- कुछ बात है का बाबा,

नाना- नहीं तो, का हुआ,

मौसी- अरे तुम खड़े हो न इसलिए पूछा,

नाना- अरे तुझे काम करता देख ाचा लग रहा है इसलिए खड़े हैं.

मौसी- गर्मी नहीं लग रही रसोई में.

मौसी ने हँसते हुए कहा

नाना- नहीं हम ठीक है तुझे ज़्यादा लग रही है, देख कैसे पसीना पसीना हो रही है,

मौसी- हाँ चूल्हे के आगे तो गर्मी हो hi जाती है, एक मिनट में आयी बाबा,

ये कहके मौसी रसोई से गयी और फिर तुरंत एक कुर्सी लेकर आई और रखकर बोली- लो बाबा बैठो,

नाना- अरे ये क्यों ले आई.

मौसी- ताकि तुम बैठ सको और मैं तुमसे बातें कर सकूँ, इससे खाना बनाने में भी आसानी होगी.

नाना- अरे फिर तो बढ़िया है.

नाना तुरंत कुर्सी पर बैठ गए उनके लिए तो ाचा hi था न अब वो खुल कर मौसी के बदन को निहार सकते थे,

माँ छत पर सूखे हुए कपडे उतरने जा रही थी तो किरण भी उनके पीछे चल दी और छत पर जाकर माँ को अकेले पाकर पीछे से उन्हें बाहों में भरते हुए बोली- बुआ क्या योजना है,

माँ उसके अचानक पकड़ने से चौंकी फिर उसे देख बोली- डरा hi दिए तुमने मुझे,

किरण- वो सब छोडो ये बताओ क्या सोचा.

माँ- किस बारे में?

किरण- अरे भूल गयी रात की बात.

किरण मुँह बनाते हुए बोली..

माँ- मुँह मत बना पापीती की तरह और मुझे सब याद है,

किरण- फिर.

माँ- मैंने सोचा तो पर मेरे मन में कुछ अलग बात आई.

किरण- कौनसी बात?

माँ- मैं चाहती हूँ मेरी लाडो का पहली बार उसकी पसंद के साथी या उसके चुने हुए साथी के साथ हो.

किरण- मतलब.

माँ ने अपना चेहरा किरण के कान के पास किआ और फुसफुसाई.

माँ- मतलब तुझे किस्से पहली बार अपनी छूट की सील तुड़वानी है वो तू चुनेगी, अब तेरी मर्ज़ी तू जिसे चाहे चुन.

किरण- ऐसे कैसे और मान लो मैंने किसी को चुन भी लिए तो उसे कौन मनाएगा,

माँ- वो ज़िम्मेदारी तेरी बुआ की...

किरण- सच्ची?

माँ- हाँ,

किरण कुछ सोचने लगी फिर बोली- पर मेरी शर्त तो नहीं हटेगी वो वाली की जो मुझे छोड़ेगा उससे तुम भी छुडवाओगी.

माँ- ठीक है बिटिया रानी जो तू चाहेगी वही होगा

किरण सोच में पद गयी, माँ कपडे उतरने लगी रस्सी से,

किरण चुपचाप कड़ी होकर सोचती रही तब तक माँ ने कपडे उतर लिए और बोली- सोचती hi रहेगी नीचे चल,

किरण- बुआ मैंने सोच लिए, पर अब देखना तुम पीछे मत हटना,

माँ- मैं क्यों पीछे हटने लगी भला, बता कौन है,

किरण ने माँ के कान में कुछ कहा फिर भाग गयी, माँ के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी,

इधर मेरी भी एक अलग योजना चल रही थी, मैं मामी को रात में फिर छोड़ने की फ़िराक में था, और मैंने मामी को खाने से पहले बोल भी दिया था, पहले तो उन्होंने मन किआ था पर फिर काफी मानाने पर बोली- की देखेंगी अगर मां सो गए तो आएँगी, इसलिए मैंने अपना बिस्तर छत पर लगाया था,

इसके बाद खाना पीना हुआ सबने खाया पिया, किरण रह रह कर माँ की और देख रही थी की वो क्या करने वाली हैं, साथ hi उसका दिल भी ज़ोरों से धड़क रहा था की क्या सच में ये होने वाला है, खैर सोने का समय हो चूका था तो सब कमरों में थे, नाना अनुज सागर एक कमरे में थे, मां ममी एक में मौसा मौसी, किरण माँ के साथ hi सो रही थी, मैं भी छत की और चला तो मुझे किसी ने रोका, इधर किरण माँ के बिस्तर पर पड़ी हुई धड़कते दिल से आने वाले पलों का इंतज़ार कर रही थी, अभी वो कमरे में अकेली थी सोच रही थी की क्या बुआ सच में जो बोलै है वो करने वाली हैं,

इसी बीच कमरे में माँ आई और किरण को मुस्कुरा कर देखा किरण भी मुस्कुराई,

माँ- तैयार है तू?

किरण- हम्म्म

तभी माँ के पीछे से मैं कमरे में घुसा तो किरण मुझे देख बिलकुल शर्मा गयी, उसे समझ नहीं आ रहा था की ये सब सच में कैसे हो सकता था,

मैं कमरे में घुस कर किरण के बगल में बैठ गया माँ ने अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया और वो भी बिस्तर पैट आ गयी,

में- कैसी है मेरी प्यारी बहना?

मैंने कहा तो किरण कुछ नहीं बोली वो अब घबराहट और शर्म महसूस कर रही थी,

में- अरे शर्मा क्यों रही है तूने hi तो मुझे चुना था,

माँ- हाँ अब शांत हो जा तेरे लिए बड़ी रात है,

किरण- पर बुआ, ये कैसे हो सकता है.

माँ- ले तू hi बता रही थी फ़ोन पर की सब होता है अब कह रही है कैसे हो सकता है,

किरण- पर...

में- ाचा अब ये बता तू ये सब करना चाहती है या नहीं, जो होगा तेरी ख़ुशी और मर्ज़ी से होगा.

किरण सोच में पद गयी, मुझे और माँ को देख कर बोली- चाहती तो हूँ पर बहुत शर्म आ रही है.

में- माँ लगता है इसकी शर्म दूर करनी पड़ेगी,

ये कहके मैंने माँ को अपनी और खींच लिए और उनके होंठो को चूसने लगा, किरण की आँखें ये देख बड़ी हो गयी, कुछ देर माँ के होंठों को चूसने के बाद मैं माँ की साड़ी खोलने लगा फिर उनका ब्लाउज, ऐसे करके मैंने माँ को पूरा नंगा कर दिया, किरण बड़े ध्यान से हमारी और देखे जा रही थी नंगी होने के बाद माँ ने मेरे कपडे उतरने शुरू कर दिए, और जल्दी hi मैं भी नंगा था मेरा लुंड बहार आते hi किरण की नज़र उस पर जैम सी गयी,

कुंवारी गरम प्यासी लड़की को कड़क लम्बा लुंड दिख जाये तो उसकी हालत क्या होगी वही उसकी हो रही थी पर उससे भी ज़्यादा क्यूंकि माँ और बेटे को एक साथ नंगा देख रही थी, नंगा हो कर मैं किरण की और झुका और उसकी आँखों में देखते हुए उसको पकड़ कर अपनी और खींचा उसका और मेरा चेहरा एक दुसरे के सामने आ गया, मैंने उसकी आँखों में देखते हुए अपना चेहरा उसकी और बढ़ाया और उसके होंठो के पास अपने होंठ को लेजाकर रुक गया, मैं चाहता था वो पहल करे अपनी तरफ से, उसने मेरी आँखों में देखा उसके होंठ काँप रहे थे, उसनर कुछ सोचा फिर खुद hi होंठों को मेरे होंठों से मिला दिया,

हाय क्या मीठे और कोमल होंठ थे उसके, मैंने तुरंत उसके होंठो को अपने होंठों में भर लिया और धीरे धीरे चूसने लगा, उसकी उत्तेजना भी धीरे धीरे बढ़ रही थी उसके हाथ अब मेरी नंगी पीठ पर चलने लगे, माँ मेरे पैरों की और बैठ कर मेरा लुंड मुठियाते हुए हमें देख रही थी,

होंठों के चूसने से किरण जो गरम और उत्तेजित पहले hi थी धीरे धीरे खुल रही थी, जल्दी hi हमारे होंठ अलग हुए तो वो हांफते हुए मेरी और देख रही थी,

मैं उसके गाल और गले को चूमने लगा, वो अह्ह्ह अहह करने लगी वहीं माँ भी अब मेरा लुंड छोड़ ऊपर की और आ गयी थी और मेरे हटते hi वो किरण के होंठों को चूसने लगी,

अब माँ और बीटा मिलकर किसी लड़की को ऐसे उत्तेजित करें तो कौन नहीं होगा, किरण तो कुंवारी गरम लड़की hi थी, वो बेहद उत्तेजित हो रही थी, मैं थोड़ा नीचे सरका और उसकी टीशर्ट को ऊपर उठा कर उसका पैट चूमने लगा तो उसका बदन कंपनी लगा पर कुछ बोल नहीं पाई क्यूंकि मुँह तो माँ ने बंद कर रखा था, मैंने उसकी बलखाती कमर को हाथों से पकड़ा और उसके पेट और कमर को चूमते हुए उसकी नाभि चूसने लगा, उसने माँ के होंठों से होंठ हटाए और आह्हः भैयाहः कहके सिसकने लगी, माँ ने उसकी सिसकी को बंद करने के लिए अपनी चुकी को उसके मुँह में भर दिया जिसे वो चूसने लगी, मैंने जी भर के उसकी नाभि चूसी उसके बाद उसकी टीशर्ट को ऊपर तक कर दिया गले तक, उसकी चूचियां ब्रा में बंद मेरे सामने थी, माँ ने अपनी चुकी चुसवाते हुए उसकी ब्रा को ऊपर कर उसकी चुकी बहार निकली तो मैं खुद को रोक नहीं पाया और तुरंत उसकी चुकी को मुँह में भर कर चूसने लगा, उसका सीना ऊपर नीचे होने लगा, मैं क्या माँ भी खुद को नहीं रोक पाई और दूसरी चुकी को वो चूसने लगी वो हम दोनों के सर पर हाथ फिरते हुए सिहर रही थी,

मैंने जी भर के उसकी चूचियों को चूसा पर तब तक माँ नीचे की और बढ़ चुकी थी, और उसकी पजामी और कच्ची को नीचे सरका रही थी, और जल्दी hi उतर भी चुकी थी, किरण अब मेरे सामने बिलकुल नंगी थी उसके बदन पर सिर्फ ब्रा थी जो की उसकी चूचियों से ऊपर हो चुकी थी,

मैं ने उसकी टैंगो के बीच जाकर उसकी छूट को देखा बेहद प्यारी लग रही थी,

ऊपर हलके हलके बाल नीचे छोटा सा छेड़ मैंने एक हाथ से धीरे से उसकी छूट को छुआ तो वो सिसक पड़ी मैं धीरे धीरे से उसकी छूट को अंगूठे से मसलते हुए उसकी छूट में एक उंगली घुसा कर अंदर बहार करने लगा, वो अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म करके तड़पने लगी, वोहिब माँ मेरे पैरों के बीच आकर मेरा लुंड चूसने लगी, किरण ये देख और उत्तेजित होने लगी वहीं मैं भी उसकी उत्तेजना बढ़ने की कोई कसार नहीं छोड़ रहा था, और एक हाथ से उसकी छूट को मसलते हुए दुसरे हाथ से उसकी चुकी को भी मसलने लगा...





किरण की तड़प हर पल बढ़ती जा रही थी,

किरण- हम्म्म ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अब रहा नहीं जा रहा अह्ह्ह्हह्हह, बहुत खुजली मच रहियी है

किरण गिड़गिड़ाते हुए बोली..

माँ ने भी मेरा लुंड मुँह से निकला और बोली- अब देर मत कर कर्मा अभी गरम है तो कर ले.

में- हाँ माँ करता हूँ,

ये कहकर मैंने उसे बिस्तर के किनारे किया और उसके पैरों के बीच खड़ा हो गया, माँ ऊपर जाकर उसका सर अपनी गॉड में रख कर बैठ गयी,

में- तैयार है मेरी प्यारी किरण, लड़की से औरत बनने के लिए.

किरण- हाँ भैया, अब और नहीं रहा जा रहा,

माँ- ज़रूर बिटिया बस थोड़ा सा दर्द होगा उसे सह गयी तो ज़िन्दगी भर का मज़ा hi मज़ा मिलेगा,

किरण- हाँ बुआ भैया के लुंड के लिए मैं सब सह जाउंगी.

में- ये हुई न प्यारी बहन वाली बात.

ये कह मैंने अपना लुंड उसकी छूट के ऊपर रखा तो वो सिसक पड़ी

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह भइयाझ कितना गरम है, अह्हह्ह्ह्ह.

में- तेरी छूट भी बहुत गरम है.

मैं कहते हुए अपना लुंड उसकी छूट के ऊपर आगे पीछे कर घिसने लगा,





किरण- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अब मत तरसाओ अह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा है नेरी छूट खुजली से फैट जाएगी,

माँ- कर्मा अब और मत रोक उसे,

में- ठीक है माँ, किरण तू तैयार है?

किरण- हाँ भैया अब बस घुसा दो.

माँ- आराम से कर्मा और बिटिया बस थोड़ा दर्द होगा,

किरण- हाँ बुआ मैं झेल लुंगी.

उसकी सहमति पाकर मैंने लुंड पर थूक लगाया और उसे किरण की छूट के द्वार पर रख कर अंदर तेल दिया, वो सीसीएनए लगी- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ अह्ह्ह्ह मर गयी अह्हह्ह्ह्ह कितना मोटा है अह्ह्ह्हह फैट गयी,

अभी मेरा सिर्फ टोपा गया था, मैंने उठा hi घुसा कर आगे पीछे करने लगा जिससे उसे थोड़ी शांति मिले माँ भी उसे शांत करा रही थी, कुछ पलों में उसकी छूट के होंठ मेरे लुंड की चौड़ाई के अभ्यस्त हो गए तो मैंने धीरे धीरे करके थोड़ा आगे बढ़ना शुरू किआ तो लुंड एक रुकावट से टकरा गया, मैं समझ गया ये किरण की छूट की झिल्ली है, इसे चीरकर hi मुझे किरण का कुंवारापन ख़तम करना होगा,

माँ समझ गयी क्या हो रहा है तो उन्होंने किरण के हाथ पकड़ लिए और अपने होंठों को उसके होंठो से मिला दिया, मैंने भी उसकी कमर को थमा और फिर एक धक्का लगा दिया, और लुंड उसकी छूट की झिल्ली को चीरता हुआ अंदर घुस गया और उसके कुंवारेपन को ख़तम कर आगे बढ़ गया, इस धक्के के बाद वो झटपटाने लगी उसका मुँह माँ ने बंद किआ हुआ था इसलिए उसकी चीखें माँ के होंठों में hi घुट रही थी,

अब मुख्या काम हो चूका था तो मैं धीरे धीरे से लुंड उसकी छूट में आगे पीछे करने लगा, हर धक्के के साथ थोड़ा थोड़ा आएगी बढ़ने लगा, वो भी धीरे धीरे शांत होने लगी, अंदर बहार होते हुए मुझे मेरे लुंड पर खून लगा हुआ दिख रहा था वहीं उसकी छूट से भी बहकर बहार आ रहा था. उसकी आँखों से आंसू बाह रहे थे पर माँ ने उसे संभाला हुआ था, धीरे धीरे पूरे लुंड को किरण की कुंवारी छूट निगलने लगी,

माँ- ले गुड़िया रानी बन गयी तू औरत, अब ज़िन्दगी भर के मज़े hi मज़े..

माँ ने उसके होंठो को आज़ाद करते हुए कहा,

किरण के चेहरे पर भी एक हलकी सी मुस्कान आ गयी, इतने में माँ उठी और उन्होंने एक कपडा बगल में रखे पानी से गीला किआ और मुझे लुंड निकालने को कहा मैंने निकला तो माँ ने मेरे खून से साणे लुंड को साफ़ कर दिया, वहीं वो किरण को कमरे से सटे बाथरूम में ले गयी और अचे से उसकी छूट को साफ़ कर दिया,

बापिस कमरे में आने पर किरण भी अब काफी ठीक लग रही थी और मुझे देख देख मुस्कुरा रही थी, आते hi मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठों को चूसने लगी, मैंने होंठों को चूसते हुए hi उसे फिर से लिटा दिया और बिना देरी के दोबारा से लुंड पर थूक लगा कर उसकी छूट में घुसा दिया, हालाँकि उसे अभी भी थोड़ा दर्द हुआ पर ये दर्द चुदाई के आनंद के सामने कुछ भी नहीं था,

धीरे धीरे धक्के लगते हुए मैं उसे छोड़ने लगा, मैं दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी छूट में धक्के लगाने लगा,





वो अब हर धक्के पर अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह करके सिसक रही थी पर अब उसकी आवाज़ में दर्द की जगह कामुकता छलक रही थी, माँ उठ कर आई और झुककर पहले उसे चूमा और फिर मुझे, फिर झुककर किरण की छूट के दाने को छेड़ने लगी तो किरण और तड़पने लगी और उसी कारन उसे ज़िन्दगी में चुदाई से पहला स्खलन हुआ जिसमें उसकी जान hi निकल गयी,

मैंने उसकी छूट से लुंड निकल लिए और उसे थोड़ा आराम करने को छोड़ दिया... माँ ने तुरंत उसकी छूट पर ढाबा बोल दिया और उसे चाटकर साफ़ किआ, इधर मैंने माँ के चूतड़ों के बीच अपना मुँह घुसा दिया और उनकी छूट चाटने लगा, कुछ देर चाटने के बाद माँ ने अपना मुँह किरण की छूट से हटाया और मुझे लिटा कर मेरे लुंड को चूसने लगी, किरण लेते हुए ये देख रही थी, एक माँ को बेटे का लुंड चूसते हुए देखना उसके लिए भी बेहद उत्तेजित करने वाली बात थी और वो भी जब माँ बीटा उसकी बुआ और भाई हो, वो इतनी उत्तेजित हो गयी की सिर्फ देखने से उसका मन नहीं भरा और वो उठ कर आई और माँ के साथ मेरा लुंड चूसने लगी, अब वो भी जो उसने गन्दी फिल्में देख कर सीखा था उसका अभ्यास करने लगी, माँ के मुँह में मेरा लुंड था तो किरण मेरी गलियों को मुँह में भर के चूसने चाटने लगी,





मेरे तो मज़े hi मज़े थे माँ और किरण से एक साथ अपनी सेवा जो करवा रहा था,

में- अह्हह्ह्ह्ह ऐसाःठ्ठ माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है माआ चूसते रहो ओह्ह्ह्हह्ह किरननननन देखो कैसे मेरीए गोलियां चूस रही haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh.

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः तुम्हारी गोली हैईईई hi इतनी प्यारी सी,

उसने मुँह हटते गए कहा और फिर से गोलियों को मुँह में भर लिए,

माँ- कैसा लग रहा है अब गुड़िया रानी?

माँ ने मेरा लुंड मुँह से निकल कर उसके बालों को सहलाते हुए पूछा.

किरण- मस्त बुआ, अब इतना ाचा लग रहा है खुला खुला.

में- और अब कोई शर्म या हिचकिचाहट?

किरण- बिलकुल नहीं भैया अब तो मैं सब खुल के करुँगी, अभी बुआ से सब सीखना है,

ये कहके उसने मेरा लुंड मुँह में भर लिए और माँ मेरी गोलियों को चाटने लगी, दोनों कभी बदल बदल कर मेरा लुंड चूसती तो कभी एक साथ जीभ से मेरे टोपे को चाटती, मुझे बेहद मज़ा आ रहा था,

कुछ देर बाद किरण ने माँ को कहा की वो अब उन्हें चुड़ते हुए देखना चाहती है माँ ने मुस्कुरा कर उसके होंठो को चूसते हुए हाँ में सर हिलाया और मेरे और पीठ करके मेरी कमर के दोनों और अपने पेअर करके बैठ गयी और किरण से बोली- अहह लल्ली अपने भैया का लुंड घुसा दे अपनी बुआ की छूट में,

ये सुन किरण खुश हो गयी और आगे आकर उसने मेरा लुंड पकड़ा और माँ की छूट पर लगाडिया जिसे माँ ने नीचे होकर अपनी छूट में भर लिए,

किरण के मुँह से ये देखकर hi अह्ह्ह्ह निकल गयी उसके लिए उत्तेजना की बात तो थी hi की वो अपनी बुआ की छूट पर उनके बेटे का लुंड अपने हाथों से लगा कर उन्हें अपने बेटे से छुड़वा रही थी,

मैंने नीचे से धक्के लगाकर माँ को छोड़ना शुरू कर दिया, किरण आगे होकर माँ की चूचियों को चूस कर उनके आनंद को और बढ़ने लगी, मैं नीचे से लगातार धक्के लगाकर माँ को छोड़ रहा था,





माँ- uhmmmhaaaaaaaaaaaaa अह्ह्ह्ह लल्लाह aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh...

में- अह्हह्ह्ह्ह बहुत गरम हो रही है तुम्हारी छूट माँ अह्ह्ह्ह...

ये बात तो थी चाहे कितनी दूसरी औरतों और लड़कियों को छोड़ लूँ पर माँ को छोड़ने की बात hi कुछ अलग थी वो एहसास सबसे अलग होता था,

और अभी उसी आनंद का मैं मज़ा लूट रहा था,

किरण अपनी छूट मसलते हुए माँ की चूचियों को चूस रही थी और माँ बेटे की चुदाई का आनंद ले रही थी,

दूसरी और क्यूंकि माँ ने आज पापा को कमरे से बहार कर दिया था उन्होंने आज मौसा मौसी के कमरे में जगह ली थी आउट आज मौसी पति और जीजा दोनों को एक साथ खुश कर रही थी, अभी तो मौसी लेट कर मौसा का लुंड चूस रही थी और पापा उनके पीछे लेट कर उन्हें छोड़ रहे थे,

मौसा- सही कहूं भइयाझ ऐसी ज़िन्दगी से ाचा कुछ नहीं, जबसे हमारा परिवार ऐसे खुल के चुदाई करने लगा है मैं बहुत खुश हूँ,

मौसा ने लुंड चुसवाते हुए कहा,

पापा- इंसानो को दो hi चीज़ें खुश रखती हैं, चुदाई और प्यार, और हमारे परिवार में दोनों खूब और खुल के मिलता है,

इस पर मौसा पापा दोनों हंसने लगे,

मौसा- बस अभी जब तक बाबा और जमुना का परिवार यहाँ है थोड़ा छुप कर करना पद रहा है,

इस पर मौसी ने मौसा का लुंड मुँह से निकलते हुए बोलै- अब उनसे भी क्या बचना किरण को आज कर्मा और जीजी काली से फूल बना hi देंगे, गुंजन को आज दिन में hi कर्मा ने अपने लुंड का स्वाद चखा दिया और जमुना का तो जीजी ने बताया hi की उसने राजन जीजा से क्या बात की,

पापा- सब हो जायेंगे, हमें तो बस बाबा की चिंता है उन्हें मानना मुश्किल होगा,

मौसी- कोई मुश्किल नहीं होगा जीजा,

ये कहके मौसी ने उन्हें शाम की और सुबह की बात बताई जो घटना रसोई में हुई थी,

पापा- ये तो बढ़िया है अगर ऐसा जो जाये तो साडी चिंता ख़तम.

मौसी- सब हो जायेगा जीजा चिंता न करो.

मौसा- इसी बात पर अब दोनों और से बजने को तैयार हो.

मौसी- बिना बजेर तुम मानोगे कहा.

कुछ hi देर में मौसी एक साथ दो दो लुंड से चुद hi रही थी, मौसा उनकी गांड मार रहे थे और पापा छूट,

वहीं हमारे कमरे में थोड़ा बदलाव हो चूका था और अभी किरण मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही थी और माँ बगल में बैठी उसकी छूट को छेड़ रही थी.





किरण- ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः बाहः अह्ह्ह कितना मज़ा आता है छुड़वाने में अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब से अह्ह्ह मैं एक अह्ह्ह्ब भी दिन बिना छुड़वाए नहीं रहूंगी...

माँ- uhmmmhaaaaaaaaaaaaa मेरी गुड़िया, घर के सरे मर्द बिना तुझे चोदे रह भी नहीं पाएंगे,

में- हाँ तेरे लिए तो अब लाइन लगेगी सबकी,

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह कौन कौन है जो इन सब में शामिल है.. सब बताओ न मुझे,

माँ- सब बताती हूँ गुड़िया तुझे...

और फिर माँ ने उसे हमारी चुदाई की शुरुआत से लेकर कौन कौन शामिल है किसे पता है किसे नहीं पता सब बता दिया और किरण ये सब सुनकर इतनी उत्तेजित हो गयी की झड़ने लगी, उसके झड़ते hi माँ ने उसे पीछे की और लिटा दिया और झुककर उसकी छूट चाटने लगी,

मैंने माँ के पीछे जगह ली और पीछे से लुंड उनकी छूट में घुसा दिया और उन्हें छोड़ने लगा,





किरण- ओह्ह्ह्हह्ह भैयाहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ो ऐसे hi बुआ को अह्हह्ह्ह्ह कैसा लग रहा है अपनी माँ को छोड़कर.

में- अह्हह्ह्ह्ह बहुत अच्छा आआह्ह्ह्हह्ह ऐसा सुख कोई नाहीइइइइइइ...

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह बाआ ुहम्म्म्म aiseeeeeeeeee haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh चाआतु अह्ह्ह्हह्हह माज़आह्ह्ह्ह आ रहा है,

में- अह्हह्ह्ह्ह किरण माँ ने तुझे एक बात नहीं बताइयी, शायद बताना भूल गयी,

किरण- कौन सी?

में- मैंने आज तेरी माँ को भी चोदाहहह.

किरण- क्या सही में मम्मी को?

में- हानंन्न...

किरण ये सुन हैरान हो गयी और बोली- कब? कैसे?

मैंने फिर उसे उसकी मम्मी की चुदाई की पूरी बात बताई तो अंत होते होते वो माँ के चेहरे को अपनी छूट में दबाते हुए दोबारा झाड़ रही थी, और माँ उसका रास सारा जातक रही थी, झड़ने के बाद जब वो शांत हुई तो माँ ने उसे पकड़ कर अपने नीचे खिसकने का इशारा किआ और वो तुरंत हो भी गयी, अब वो माँ के नीचे थे माँ उसके ऊपर और मेरा लुंड माँ की छूट में अंदर बहार हो रहा था, माँ झुक कर उसके होंठो को चूसने लगी तो किरण भी माँ के होंठों से अपनी छूट का रास चाटने लगी, मैं माँ को लगातार चोदे जा रहा था उसके ऊपर लिटा कर,





कुछ hi देर में माँ मेरी चुदाई से झड़ने लगी और झाड़कर वैसे hi किरण के ऊपर लेती रही, मैंने उनकी छूट से लुंड निकल कर नीचे किरण की छूट में घुसा दिया और उसे तेज़ी से छोड़ने लगा, वो अह्ह्ह अहह लगी, अब मुझे भी अपनी गोलियों में से रास लुंड की और भरता हुआ महसूस हो रहा था तो मैंने और तेज़ चुदाई शुरू कर दी और जल्दी hi मेरा लुंड किरण की छूट में पिचकारियां छोड़ रहा था, किरण एक बार फिर से मेरे साथ झाड़ गयी थी,

उसके बाद हम तीनो hi थक चुके थे तो हम तीनो hi एक दुसरे के बगल में नंगे hi सो गए,

आज दिन भर की उत्तेजना और शाम को राजन चाचा के साथ हुई बातों के बाद मां भी गरम थे, उनका लुंड माँ और मौसी को खाने के वक़्त भी देख देख कर खड़ा हो रहा था, तो कमरे में जाते hi वो दरवाज़ा बंद करके मामी पर टूट पड़े, वैसे तो मामी ने मेरे लिए मन बनाया था पर अपने पति की गर्मी देख वो उन्हें भी कुछ नहीं कह पाई, मां ने ममी को जल्दी hi पूरा नंगा कर दिया और उनकर बदन को चूमने चटनर लगे, मामी भी मां की हरकतों से गरम हो गयी, इधर मां ने मामी की छूट में अपना मुँह दिया और छूट चटनर लगे पर उनके दिमाग में अपनी बहनो का ख्याल hi चल रहा था, अपनी पत्नी की छूट चाटते हुए सोच रहे थे की मेरी बहन की छूट कैसी होगी, कैसा स्वाद होगा उसका,

छूट चाटने के बाद मां ने ममी को घोड़ी बना दिया और पीछे से दनादन छोड़ने लगे और आँखें बंद करके कभी माँ को छोड़ने की कल्पना करते तो कभी मौसी को... ममी को मां के अंदर एक अलग hi उत्तेजना दिख रही थी और उनके धक्कों में भी एक अलग जोश था, जल्दी hi मामी और मां तगड़ी चुदाई के बाद झाड़ गए, और नंगे hi लेट गए जल्दी hi मां तो सो गए पर ममी मेरे बारे में सोच रही थी क्यूंकि मैंने उन्हें छत पर आने को कहा था रात को, मामी ने जब देखा की मां नींद में हैं तो वो बिस्तर से उठी और उठकर अपने कपडे देखने लगी, पर उनके लिए समस्या हो गयी क्यूंकि पेटीकोट को छोड़ कर उनके सरे कपडे बिस्तर पर मां के नीचे दबे हुए थे और अगर वो निकलती तो मां के जागने का दर था, ममी ने कुछ सोचा और फिर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी उन्होंने सिर्फ वो पेटीकोट उठाया और उसे ऐसे पहन लिए जब औरतें नहाते हुए पहनती हैं जिससे उनकी चूचियां धक् गयी उसके बाद वो बड़ी सावधानी से चरों और देखती हुई कमरे से बहार निकली हर तरफ सन्नाटा था, ममी आंगन से होते हुए सीधे छत पर गयी वहां जाकर देखा वहां बिस्तर तो लगा था पर मैं नहीं था,

मामी ने सोचा शायद कर्मा मेरा इंतज़ार करने के बाद नीचे जाकर सो गया चलो कोई नहीं,

उसी समय नीचे मौसा अपने कमरे से मूतने के लिए निकले और बाथरूम में घुस गए, कमरे के अंदर पापा अब भी मौसी की गांड मर रहे थे,

इधर मामी मुझे छत पर न पाकर नीचे बापिस चल दी, सीढ़ियों से नीचे आकर आंगन में आते हुए उन्होंने देखा की मौसी के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ है और अंदर लाइट भी जल रही है, ममी ने सोचा इस समय लाइट जला कर ये लोग क्या कर रहे होंगे, वो थोड़ा आगे बढ़ी तो उन्हें हलकी हलकी थापों की आवाज़ भी सुनाई दी जिसे सुनते hi वो पल में समझ गयी की क्या हो रहा है और उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

ममी मन hi मन सोचने लगी- जीजी और जीजाजी भी न दरवाज़ा खोल कर के लगे हुए हैं बत्ती जला कर, कोई देख ले तो, पर साथ hi ये सोच सोच उनके मन में थोड़ी उत्तेजना भी हो रही थी, पहले तो उन्होंने अपने कमरे में जाने का सोचा पर फिर सोचा- एक बार देखती हूँ क्या हो रहा है, बाद में जीजी को खूब चिढ़ाऊंगी.

साथ hi उनके मन की जिज्ञासा और उत्तेजना भी उन्हें कमरे की और जाने के लिए विवश करने लगी, ममी दबे पैरों से चलती हुई आगे बढ़ी और फिर बहुत सावधानी से उन्होंने कमरे के अंदर झाँका और झांककर जो देखा उसे देख उनकर चेहरे पर पहले तो मुस्कान आई पर फिर वो मुस्कान हैरानी में बदल गयी, उन्होंने पहले तो देखा की मौसी ऊपर बैठी हुई हैं और उनकी गांड में लुंड घुसा हुआ है और अंदर बहार हो रहा है,





मौसी की गांड का छेड़ लुंड ने पूरी तरह फैला रखा है, मौसी अपनी छूट को अपनी उँगलियों से छेड़ रही थी,

मामी- हाय ढैय्या ये जीजी को देखो इतना मोटा लुंड गांड में घुसा कर भी चैन नहीं है अब भी छूट को छेड़ रही हैं, और जीजा को देखो कैसे कास कास के गांड मार रहे हैं, पर इतने के साथ hi मामी को पापा का चेहरा नज़र आ गया जिसे देख वो बिलकुल स्तब्ध रह गयी, उन्होंने सोचा था मौसा होंगे पर यहाँ तो पापा थे, ममी बिलकुल हैरान रह गयी,

हाय ढैय्या ये जीजी तो बड़े जीजा के साथ, देखो कितनी बेशरमी से गांड मरवा रही हैं, बताओ न जाने छोटे जीजा कहाँ हैं? कब से चल रहा है ये जीजा साली का चक्कर, मामी उनको देखते हुए ये सब सोचे जारही थी पर साथ hi उन्हें मौसी की गांड मरै का दृश्य उत्तेजित भी बहुत कर रहा था, उनके बदन में गर्मी बढ़ती जा रही थी, साथ hi उनकी सांसें भी तेज़ हो गयी थी, उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या करें, दिमाग कह रहा था की चुपचाप कमरे में जाकर सो जाएं वहीं मन उस नज़ारे को छोड़ने को तैयार नहीं था, वहीं बदन आनंद छह रहा था, मामी के हाथ खुद बा खुद उनकी चूचियों पर पहुँच गए और वो उन्हें मसलने लगी, इसी वजह से उनका पेटीकोट जो सीने पर अटका हुआ था खुल गया और सरक कर उनके पैरों में गिर गया जिससे मामी बिलकुल नंगी हो गयी, पर उनका तो ध्यान भी नहीं गया पेटीकोट के गिरने पर,

पर कोई था जिसका पूरा ध्यान था ममी पर भी उनके नीचे गिरे हुए पेटीकोट पर भी और सबसे ज़्यादा उनके नंगे बदन पर, मौसा मूतने के बाद जब बहार आये तो उन्हें अपने कमरे के बहार एक साया दिखा था वो दबे पाऊँ उसके पास गए और पीछे से देखा तो वो पहचान गए की मामी हैं, और उन्हें सारा मंझरा भी समझ आ गया, और तभी मामी का पेटीकोट भी नीचे सरक गया और ममी का नंगा बदन देख मौसा तो खुद का आप खो बैठे, उन्होंने अपने लुंड पर थूका और मामी के पीछे आकर अचानक से एक हाथ उनके मुँह पर रखा मामी जब तक कुछ समझ पाती तब तक मौसा ने उन्हें आगे झुककर अपना लुंड मामी की छूट में घुसा दिया, मामी तो बिलकुल हैरान रह गयी, हाथ से मुँह दबाये हुए hi मौसा ने दो तीन झटके मार के पूरा लुंड मामी की छूट में घुसा दिया और फिर धीरे से उनके मुँह से हाथ हटाया,

मामी के चेहरे पर घबराहट, हैरानी असमंजस सब थी, उन्होंने चेहरा घुमा कर मौसा की और देखा तो मौसा ने उन्हें चुप रहने का इशारा किआ, और फिर ममी को लेकर बिना किसी आवाज़ के वो कमरे के अंदर घुस गए और घुसते hi दरवाज़ा बंद कर दिया,

कमरे में आते hi मौसी और पापा ने मौसा और साथ hi नंगी ममी को देखा तो वो हैरान हो गए, इधर ममी सबसे ज़्यादा हैरान थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है क्या करें वो बस सबके चेहरे टाक रही थी,

मौसा तो वहीं खड़े खड़े दरवाज़े के पास hi मामी को छोड़ने लगे...

मौसी- अरे ये क्या हो रहा है कुवह बताओगे अचानक से तुम उन्हें छोड़ क्यों रहे हो.

मौसी ने पूछा,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह सब बताऊंगा अह्हह्ह्ह्ह पर अभी एक बार अपनी सलहज को छोड़ लेने दो,

ये कहकर उन्होंने मामी को आगे लेजाकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनकी टैंगो के बीच आकर अगले hi पल अपना लुंड उनकी छूट में घुसा कर उन्हें छोड़ने लगे,

मामी तो बस उनके हाथो में गुड़िया की तरह हो रही थी, उनके चेहरे पर अब भी परेशानी के भाव थे, ये चीज़ मौसी ने देखा तो बोली- भौजी परेशां मत हो अभी मज़े लो थोड़ी देर में सब समझ आ जायेगा,

मामी ने भी सोचा की चुद तो ये भी अपने पति के सामने जीजा से रही हैं और जब छूट में लुंड घुस hi गया है तो क्या सोचना मज़े ले गुंजन, और उनका बदन मन सब पीछे से यही करने को मजबूर भी कर रहा था, किसी के सामने चुदाई करने की उत्तेजना, साथ hi सामने चुदाई होते देखने की उत्तेजना सब मिलकर वो बेहद उत्तेजित भी हो रही थी तो उन्होंने भी पहले अपनी उत्तेजना को शांत करना सही समझा और मौसा से खुल कर छुड़वाने लगी,

इधर पापा भी मौसी की गांड मरते हुए खुश हो रहे थे की एक और मस्त गदराई औरत जिसके ऊपर उनकी नज़र थी उन्हें छोड़ने को मिल जाएगी, उनकी नज़र ममी के बदन पर बानी हुई थी जो अभी मौसा से छुड़वाते हुए अपनी छूट को उँगलियों से भी खुजला रही थी, क्यूंकि उन्हें अभी उत्तेजना hi इतनी हो रही थी,





मौसा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या छूट है तुम्हारी गुंजन अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ गया,

मौसी- ओह्ह्ह्म्म्म तुम्हे तो मज़ा आएगा हीईई अह्हह्ह्ह्ह पता है गुंजन न जाने कितनी बार इन्होने तुम्हे सोच कर मुझे छोड़ा है,

पापा- अह्ह्ह्हह्हह तो इसमें गलत बात क्या है, सलहज को छोड़ने की तो हमने भी कई बार कल्पना की है.

मामी इन सब की बातें और खुलापन देख कर हैरान हो रही थी पर साथ hi उत्तेजित भी,

मौसी- हांण देख रही हूँ जीजा, जबसे गुंजन कमरे में अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए है तुम्हारे झटके तेज़ हो गए हैं मेरी गांड में अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. गुंजन कितने लोडे संभालोगी तुम,

इस पर मामी बस मुस्कुरा दी,

मौसी- अरे ऐसे शरमाओगी तो कैसे मज़े ले पाओगी, खुल के मज़े लो यहाँ कोई तुम्हे गलत नहीं समझेगा,

मामी- अह्ह्ह्ह जीजी तुम्हारर सामने, तुम्हारे hi पति से छुड़वा रहीइइइइइइ हुन्न्न, अह्ह्ह्ह मज़ा तो आए रहा haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh...

ममी ने पहली बार कुछ बोलै तो सब खुश हो गए वैसे भी ममी का व्यवहार hi ऐसा था वो ज़्यादा शर्माती वर्मति नहीं थी, हंसमुख थी सबके साथ, वो तो इतनी जल्दी सब हुआ इसलिए थोड़ा असमंजस में पद गयी थी पर अब वो भी अपने पर आने लगी थी धीरे धीरे,

इधर मौसी पहले दोहरी चुदाई फिर पापा से गांड मरवाना साथ hi अपने पति से अपनी भाभी को चुड़ते देखना इन सब ने मिलकर उनकी उत्तेजना को इतना बढ़ा दिया की वो जल्दी hi अपनी छूट में उंगली करती हुई झड़ने लगी,

मौसी के झड़ते hi पापा ने उन्हें अपने ऊपर से उतर कर बगल में लिटा दिया और बड़ी फुर्ती से सरकते हुए मामी और मौसा के पास जा पहुंचे, मौसा और मामी भी उनकी उत्सुकता देख हंस पड़े,

पापा ममी के सर के पास जाकर घुटनो पर बैठ गए और मामी का एक हाथ पकड़ कर उसे अपने लुंड पर रख दिया,

मामी के हाथ में जैसे hi पापा का लुंड आया उनके बदन में एक झुरझुरी सी हुई, की एक जीजा से चुद रही हूँ और दुसरे का लुंड हाथ में है, पर मामी ने अपना हाथ हटाया नहीं बल्कि वो पापा के लुंड की सख्ती को हाथ आगे पीछे कर महसूस करने लगी, धीरे धीरे वो महसूस करना मुठियाने में बदल गया, मामी मौसा से चुड़ते हुए पापा के लुंड को मुठिया रही थी,





दोनों hi पापा और मौसा मामी की सेवा से आहें भर रहे थे,

दूसरी और लेती मौसी लेते लेते ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी, वो जानती थी की मामी के शामिल होने से उनका परिवार और खुशहाल हो जायेगा, कितना मज़ा आएगा जब सारा परिवार एक हो जायेगा तो...

इधर मौसी अपनी हसीं कल्पना में खोई हुई थी उधर मामी की आहें लगातार बढ़ती जा रही थी वैसे बढ़ तो पापा और मौसा की भी रही थी जिनकी मामी एक साथ सेवा कर रही थी, मौसा अपनी सलहज को छोड़ते हुए कुछ ज़्यादा hi जोश में आते जा रहे थे और उन्हें जब लगने लगा की उनका जोश कहीं उनके लुंड से रास बनकर बाह न जाये, तो उन्होंने कुछ सोचा और धीरे हो गए वो अभी झड़ना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने पापा को जगह बदलने का इशारा किआ जिसके लिए पापा तो बिलकुल तैयार थे,

मौसा ने अपना लुंड मामी की छूट से निकला और हेट तो पापा ने तुरंत उनकी जगह ली और मौसा ममी के सर के पास चले गए, मामी ने तुरंत उनका लुंड पकड़ लिए और उसे मुठियाने लगी, इधर पापा ने मामी की छूट में लुंड को रखा और धीरे धीरे घुसा दिया, मामी इस एहसास से उत्तेजित हो गयी की ये आज चौथा लुंड है उनकी छूट में घुसने वाला, और तीसरा पति के अलावा किसी का, ये सोच कर hi उनके मन में तरंगे उठने लगी, इधर पापा ने दो चार धक्के मामी की छूट में लगाकर पूरा लुंड अंदर घुसा दिया,

मामी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह करके सिसकने लगी, फिर पापा ने मामी की छूट में कुछ लम्बे धक्के लगाए जिसमे वो लुंड पूरा टोपे तक बहार लाते और फिर जड़ तक घुसा देते मामी ऐसी चुदाई से पागल होने लगी, लेकिन तभी पापा ने कुछ ऐसा किआ जिससे मामी का मुँह खुल गया उन्होंने मामी की छूट से लुंड निकल लिए, मामी अह्ह्ह्ह करके राज गयी वो आँखों hi आँखों में पापा से सवाल करने लगी की आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किआ, मामी को अपनी छूट खली महसूस होने लगी. जिसे वो तुरंत अपनी उँगलियों डालकर भरने की कोशिश करने लगी.

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह बापिस्स्सा दालुओ अह्हह्ह्ह्ह रहा नाहीईई जा रहा,

पापा ने उनकी आँखों में देखते हुए लुंड पकड़ा और फिर तुरंत एक धक्का दिया पर उस धक्के से मामी की आँखें चौड़ी हो गयी क्यूंकि पापा ने लुंड उनकी छूट में नहीं बल्कि गांड में घुसा दिया था, पापा के लुंड का टोपा सिर्फ उनकी गांड में फंसा हुआ था..

मामी की उंगलियां उनकी छूट में थी हाथ में मौसा का लुंड था और गांड में पापा का लुंड फंसा हुआ था,

पापा- ओह्ह्ह्हह्ह गुंजन बड़ी कासी हुई है, जमुना लेता नहीं का?

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह वो तो इसी के पीछे पड़े रहते हैंण्ण्न अह्ह्ह्ह पर तुम बता के घुसआते नाहहहह..

पापा- अह्ह्ह्हह्हह कहो तो निकल लें,

मामी- अह्ह्ह्हह्हह अब घुसा हीईई दिया है ताऊ मार hi लू जीजा,

मामी का इतना कहना था की पापा धीरे धीरे लुंड मामी की गांड में चलने लगे,

मौसा- सहिई है भाई साब सीधा गांड में hi घुसा दिया..

पापा- ारी गुंजन का भूरा छोटा सा गांड का छेड़ देख कर रुका hi नहीं गया,

मामी- अह्ह्ह्ह जीएएफआह्ह्हह्ह्ह्ह अब मारो गांड की खुजली मिटा दो..

पापा- अभी लो, एकलौती सलहज की बात तो माननी hi पड़ेगी,

ये कहकर पापा ने दो तीन धक्के लगाकर ममी की गांड में जड़ तक लुंड घुसा दियाहः

मौसी- अह्ह्ह्ह अब गांड मिल गयी है सलहज की तो कोई रहम मत करना जीजा मारो और तेज़.

पापा कहाँ पीछे रहने वाले थे वो तेज़ी से लम्बे लम्बे धक्के लगाकर मामी की गांड मरने लगे वहीं मामी मौसा का लुंड मुठियाते हुए अपनी छूट में उंगलियां कर रही थी





पापा- अह्ह्ह्हह्हह जो भी कहो शालू तुम्हारे घर की औरतों की बात hi कुछ और है अह्ह्ह्ह...

मौसा- ऐसा क्यों कह रहे हो, जीजा

पापा- अह्ह्ह्हह्हह सब एक से बढ़कर एक हो और देखा जाये तो एक जैसी भी,

पापा मामी की गांड मरते हुए बोले..

मौसा- सही कहा भैयाहः ये तो चाहे भाभी हो या गुंजन या शालू सब एक से एक हैं चुदाई में भी बदन में भी..

ये सुनकर मामी को ये समझ आ गया की माँ भी इन सब में शामिल है, जिसे जानकार मामी को और मज़ा आने लगा, इधर पापा को भी अब अपनी गोलियों का रास लुंड की और भरता हुआ महसूस हुआ तो उन्होंने भी मौसा का तरीका अपनाया और जल्दी hi दोनों ने अपनी जगह बदल ली, मौसा अब मामी की गांड का मज़ा उठा रहे थे उधर मामी ने पापा का लुंड पकड़ा तो पर पकड़ के सीधा अपने मुँह में घुसा दिया जिससे पापा की अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी, वहीं मामी मौसा से गांड मरवाते हुए उस हाथ से अपनी छूट में उंगलियां करने लगी..

पापा उनके मुँह में लुंड घुसा कर उनका मुँह छोड़ने लगे, मौसा मामी की गांड मार रहे थे और मामी उँगलियों से अपनी छूट छोड़ रही थी...





पर मामी की गांड के बाद पापा से उनके मुँह की गर्मी बर्दाश्त नहीं हुई और कुछ पल बाद पापा ने अपने रास की पिचकारी मामी के मुँह में छोड़ दी, और तब जाकर उन्होंने ये भी देखा की मामी कितनी गरम और उत्तेजित हैं जब वो एक एक बूँद भी पापा के लुंड के रास की जातक गयी,

पापा झड़ने के बाद थोड़ा पीछे हैट कर बैठ गए काफी देर से चुदाई करने के कारण वो भी थक चुके थे, दूसरी और मौसा भी अब पूरे जोश में मामी की गांड मार रहे थे, मौसी उठ कर पापा के पास आ गयी थी और पापा उनसे चिपक कर लेट कर उनके होंठो को चूसने में लग गए,

जीजा साली का ऐसा प्यार देख कर मामी की उत्तेजना और बढ़ गयी इधर मौसा भी अपना सब कुछ झोंककर मामी की गांड मार रहे थे, मौसा की उत्तेजना का पता इससे चक रहा था की वो मामी का गाला ऊपर से दबाते हुए उनकी गांड मार रहे थे, वहीं नामी इतनी उत्तेजित थी की अपनी छूट को लगातार उँगलियों से कुरेद रही थी





जल्दी hi दोनों की उत्तेजना दोनों को कामुकता के शिखर पर ले गयी और दोनों एक साथ में शिखर पर पहुँच कर झड़ने लगे, मामी की छूट अपनी उँगलियों पर पानी बहाने लगी वहीं मौसा ने मामी की गांड को अपने रास से भरना शुरू कर दिया, जल्दी hi दोनों का झड़ना ख़तम हुआ तो दोनों hi बुरी तरह से हांफ रहे थे, मौसा ने मामी की गांड से लुंड निकला तो मौसी उठ कर आई और अपना मुँह मामी की गांड से लगा दिया, मामी ने उन्हें हैरानी से देखा तो मौसी मुँह हटाकर बोली- मेरे पति का माल है ऐसे कैसे छोड़ दूँ.

इस पर मामी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, और वो अपना सर पीछे करके लेट गयी, मौसा भी पीछे लेट गए ,

मौसी ने कुछ देर अपनी भाभी की गांड छाती फिर साथ में छूट का भी स्वाद लिया जिससे मामी इतनी उत्तेजित हो गयी की दोबारा से मौसी के मुँह में झाड़ गयी क्यूंकि ये पहला मौका था उनका किसी औरत के साथ वो भी अपनी ननद के साथ जिससे उनकी उत्तेजना और बढ़ गयी, खैर मौसी मामी की टैंगो से हैट कर बैठी, मामी भी थोड़ा शांत हो गयी तो बोली- जीजी अब बताओगी ये सब हो क्या रहा है,

मौसी- बिलकुल मेरी प्यारी चुदड़ो भाभी,

इसके बाद तीनो ने मिलकर मामी को अपने सरे राज़ और कहानी सुना दी, ये सब सुनते हुए मामी के चेहरे के भाव देखने वाले थे पर बात ख़तम होने तक वो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की खुद पापा के लुंड पर टूट पड़ी और चूसने लगी,

मौसा मामी के पीछे आकर उनकी छूट चाटने लगे, और वो पापा का लुंड चूस रही थी पापा ममी की मोती चूचियों को दबाने लगे,

इधर मौसी बोली की वो पेशाब करके आती हैं. और कमरे से निकल गयी,

जारी रहेगी...
 
थैंक्यू सो मच फॉर आल योर सपोर्ट
 
इसके बाद तीनो ने मिलकर मामी को अपने सरे राज़ और कहानी सुना दी, ये सब सुनते हुए मामी के चेहरे के भाव देखने वाले थे पर बात ख़तम होने तक वो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की खुद पापा के लुंड पर टूट पड़ी और चूसने लगी,

मौसा मामी के पीछे आकर उनकी छूट चाटने लगे, और वो पापा का लुंड चूस रही थी पापा ममी की मोती चूचियों को दबाने लगे,

इधर मौसी बोली की वो पेशाब करके आती हैं. और कमरे से निकल गयी,



अपडेट 216


इधर पापा और मौसा अपने काम में लगे हुए थे मौसा मामी के चूतड़ों को चाट कर उनका स्वाद चख रहे थे तो मामी पापा का लुंड अपने गले तक भरके चूस रही थी, पापा मामी की भरी चूचियों को मसल रहे थे, कुछ देर बाद आसान बदल गए, और मामी को पीठ पर लिटा दिया गया, पापा बिस्तर के नीचे खड़े होकर ममी की टैंगो के बीच आये और अपना लुंड एक बार फिर से मामी की रसभरी गरम छूट में घुसा दिया उधर मौसा मामी के एक और बैठ कर अपना लुंड उनके मुँह में घुसा कर चुसवाने लगे, दोनों hi अपनी कामुक सलहज के गदराये बदन को बहुत सुख से भोगने लगे, मामी को भी बेहद मज़ा आ रहा था पर कुछ बोल नहीं प् रही थी बेचारी की आहें उनके मुँह में hi घुटे जा रही थी, पापा का लुंड पूरा जड़ तक मामी की छूट में जाता और बहार आता तो एक मधुर संगीत बजा रहा था, उतनी hi मधुर तरंगे मामी की छूट में भी उठ रही थी,

तभी मामी को कमरे का दरवाज़ा खुलता हुआ और फिर बंद होता हुआ महसूस हुआ पर देख नहीं सकती थी क्यूंकि मुँह दूसरी और मौसा के लुंड पर अटका हुआ था, उन्हें फिर बिस्तर पर अपने बगल में कुछ हलचल महसूस हुई, मामी समझ गयी मौसी पेशाब करके बापिस आ गयी हैं, फिर उन्हें ऐसा लगा की बगल में चुदाई हो रही है पर दोनों लुंड तो मेरे अंदर घुसे हुए है फिर ये जीजी को कौन छोड़ रहा है मामी ने मन hi मन सोचा, फिर उनके कानो में एक हलकी सी सिसकी गयी जिसे सुनकर उनकी आँखें चौड़ी हो गयी, और उन्होंने तुरंत झटके से अपना मुँह मौसा के लुंड से हटाया और चेहरा घुमा कर देखा तो उन्हें अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा, उन्होंने जो बगल में देखा उसकी कल्पना तक उन्होंने कभी नहीं की थी उन्होंने जो देखा वो उनके लिए इतना हैरान और उत्तेजित करने वाला था की उसे देखते hi मामी झड़ने लगी, मामी का बदन थरथराने लगा पर पापा ने उन्हें छोड़ना जारी रखा,

मौसा उनके बगल से हैट गए, झड़ते हुए भी मामी की नज़र लगातार अपने बगल में hi जमी हुई थी, जहाँ उनकी बेटी किरण को मैं उनके बगल में लिटा कर छोड़ रहा था, मामी अपनी बेटी की चुदाई देख हैरान भी थी और उत्तेजित कितनी थी ये तो उनके झड़ने से पता चल गया था,

मैं और पापा मिलकर दोनों माँ बेटी की दुमदार चुदाई कर रहे थे कुछ देर में मामी झड़ने के बाद फिर से गरम हो गयी और आहें भरते हुए चुद रही थी मैंने किरण को उनके और पास चिपका कर लिए दिया और ताबड़तोड़ छोड़ने लगा





किरण- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है अह्हह्ह्ह्ह मम्मीयीय dekhooooooooooooohhhhhhhhhhhh नाहहहह..

मामी भी अब पूरी तरह खुल गयी थी और अपनी बेटी की आहें सुनकर बोली- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह टूउउउउ तूऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मुझसे भी टीज़ज़्ज़ज़्ज़ निकलीई अह्ह्ह्हह्हह...

किरण- हाँ मम्मी रहा नाहीईईई गया आह्हः बिना चूड़ी अह्ह्ह्हह्हह कीटनाआ मोटाआ लोडायआ है भैयाहहहह काह्हह्ह्ह्ह, तुमने भी लीआठठ्ठ नाआ दिनन में.

मामी किरण की बात सुन हैरसन हुई फिर मुस्कुराई और बोली- हॉँण्णन तेरे फूफाजी काअह्ह्ह भी मस्त है,

तभी पीछे से मौसी बोली- अह्हह्ह्ह्ह देखूवू तो कैसे दोनों माँ बेटी एक साथ चुड़ते हुए बातें कर रही हैं,

मौसी की आवाज़ सुनकर मामी और किरण ने उनकी और देखा जहाँ वो अपनी बड़ी बहन यानी माँ के हपर झुकी हुई थी माँ उनके नीचे घोड़ी बानी हुई थी, और माँ के पीछे मौसा थे जो लुंड माँ की गांड में घुसते और फिर निकल कर मौसी के मुँह में घुसा देते, और फिर बापिस माँ की गांड में





मामी और किरण ऐसा कामुक और उत्तेजित करने वाला दृश्य देख जिसमे एक बहन अपने पति का लुंड अपनी बहन की गांड से निकला हुआ बार बार बार चाट रही थी ये देख तो दोनों के बदन में कुछ ऐसा हुआ और जो उनके मन में एक दुसरे के सामने छुड़ाने की हिचकिचाहट या मन में जितने भी संशय थे सब गायब हो गए, वो भी अब उनकी तरह बनना चाहने लगी जिसमे कुछ गलत न हो,

किरण तो इतनी उत्तेजित हुई की उसने चेहरा आगे कर अपनी मम्मी के होंठों को होंठों में भर लिए और चूसने लगी, मामी को अब इतने झटके लग चुके थे की अब वो हैरान भी नहीं हो रही थी किसी चीज़ से और वो भी किरण के होंठों को चूसते हुए उसका पूरा साथ देने लगी, माँ बेटी की चुम्मा छाती देख मैं और पापा भी जोश में आ गए और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगे,

दूसरी और से माँ की आहें भी हमारी उत्तेजना बढ़ा रही थी, अपनी पत्नी या माँ को चुड़ते देखना किसी के लिए भी एक उत्तेजित करने वाली बात होती और हम दोनों के लिए अब भी थी,

मामी और किरण के होंठ कुछ देर में अलग हुए तो मैंने पापा को इशारा किआ और हम दोनों ने ममी और किरण की छूट से लुंड निकल लिए और फिर मैं मामी के पैरों के बीच आ गया और पापा किरण के,

किरण ने मुस्कुरा के पापा को देखा और बोली- फूफाजी मुझे छोड़ोगे?

पापा- हाँ गुड़िया, छुडवायेगी अपने फूफाजी से, देगी अपनी प्यारी सी छूट अपने फूफाजी को,

किरण- हानंन्न घुड न फूफाजी अपना मोटा लुंड मेरी छूट में,

किरण को यकीन नहीं हो रहा था की कुछ समय पहले वो कुंवारी थी और अभी दूसरा लुंड उसकी छूट में समां रहा है,

पापा ने बिना देरी के अपना लुंड उसकी छूट के द्वार पर रख अंदर तेल दिया, मैं मामी के पैरों के बीच गया और उनकी टाँगे मोड़ कर अपनी दो उंगलियां उनकी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा,





मामी अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह करने लगी तो मैं और तेज़ तेज़ करने लगा जिससे जल्दी hi मामी की छूट ने थोड़ा पानी छोड़ दिया, उसके बाद मैंने उंगलियां निकल कर उनकी छूट में लुंड घुसा दिया..

एक बार फिर से माँ बेटी की चुदाई शुरू हो गयी बस फ़र्क़ इतना था की इस बार माँ को मैं और बेटी को पापा छोड़ रहे थे,

में- अह्हह्ह्ह्ह मामी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या मस्त छूट पाई है तुमने,

पापा- अह्हह्ह्ह्ह छूट तो किरण बिटिया तेरी बहुत कमाल की है अह्ह्ह्ह कितनी कासी हुई है अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए गया,

किरण- अह्हह्ह्ह्ह फूफाजी तुम्हारा लुंड hi इतना मोटाआहहह हैईईई अह्ह्ह्हह मेरी छूट बिलकुल भर गयी है अह्हह्ह्ह्ह

मामी- अह्हह्ह्ह्ह कर्माहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छोड़ अपनीई मामी कुआहहहहहह, अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi बेटाःह्ह्ह.

दूसरी और मौसा ने माँ और मौसी दोनों को एक दुसरे के ऊपर झुका रखा था दोनों की गांड को एक दुसरे के ऊपर रख काट बदल बदल कर माँ और मौसी की गांड मार रहे थे..





माँ- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह... मज़ाआ आ रहा है,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह भाभी मुझे भी, अह्हह्ह्ह्ह बहुत,

मौसा माँ की गांड मरते हुए बोले फिर लुंड निकल कर मौसी की गांड में घुसा दिया, और फिर उनकी गांड में धक्के लगाने लगे,

इधर मैं और पापा मामी और किरण की गांड ने धक्के लगा रहे थे , दोनों माँ बेटी के लिए hi उत्तेजना अपने चरम पर थी, और हो भी क्यों न जो देख रही थी जो हो रहा था सो साधारण तो नहीं था और उसी उत्तेजना वश मामी और किरण जल्दी hi झाड़ गयी,

उनके झड़ते hi माँ ने मुझे और पापा को अपने पास आने को कहा, मैंने मामी से और पापा ने किरण की जवान छूट से लुंड निकला और बिस्तर के दूसरी और माँ के पास गए जहाँ वो मौसी के नीचे से हटी जिनकी गांड में मौसा का लुंड था माँ ने मुझे पकड़ा और के नीचे जमीन पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरी दोनों तरफ पेअर करके मेरा लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी,

मामी और किरण ध्यान से ये देख रही थी, खासकर मामी हालाँकि उन्हें बता सब दिया गया था पर फिर भी पहली बार माँ को बेटे के साथ ऐसे देखना हर किसी के लिए एक बेहद उत्तेजित करने वाला दृश्य होता है, माँ बेटे का लुंड अपनी गांड में ले रही है, ये देख मामी की छूट झड़ने के बाद दोबारा कुनमुनाने लगी, किरण भी दोबारा अपनी छूट खुजाते हुए ये देख रही थी,

इधर माँ ने मेरे लुंड को गांड में लेने के बाद पापा के लिए जगह बनाई और पापा ने माँ और मेरे पैरों के बीच आकर अपना लुंड माँ की छूट में घुसा दिया





माँ- अह्हह्ह्ह्ह मेरे राजा आह्ह्ह्ह दोनोअहहह बाप बीटा मिलकर अह्हह्ह्ह्ह छोड़ो अब मुझे अह्ह्ह

पापा- ये भी कोई कहने की बात है मेरी रानी,

पापा ने धक्के लगते हुए अपना पूरा लुंड माँ की छूट में घुसा दिया,

में- अह्हह्ह्ह्ह माहहहह तुम्हारी गांड में और मज़ा आता है जब छूट में भी लुंड हो तो.

माँ- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह ले ले माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मा की गांड मरने का मज़ा हर किसी को नहीं मिलताहज

इधर मामी और किरण तुरंत उठ कर हमारे पास आ गयी थी वो पहली बार किसी को एक साथ दो लुंड लेते हुए देख रही थी जिसमे एक बेटे का था और एक पति का, मामी और किरण दोनों hi खुश होकर आँखें फाड़े ये अद्भुत कामुक दृश्य देख रही तहज,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह भाभी सिर्फ माँ की गांड मरने का hi नहीं, माँ को बाप के साथ मिलकर छोड़ने के सुख से बढ़ा क्या सुख होगा,

में- सही कहा अह्ह्ह मौसा,

मैं और पापा अब ले बनाकर माँ को छोड़ने लगे, माँ भी अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह कर रही थी,

किरण- ओह्ह्ह्हह्ह बाआ तुम्हारी दो लुंड से चुदाई देख कर मेरी छूट भी पानी बहाने लगी,

कुरान अपनी छूट को कुरेदते हुए बोली..

इसका जवाब माँ देती उससे पहले hi मौसी ने मौसा का लुंड आगे होते हुए अपनी गांड से निकला और घूम कर बोली- अरे किरण की छूट पनिया रही है, जाओ उसे सम्भालो,

मौसा को क्या परेशानी थी, मौसा ने किरण के पास आकर उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा कर अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, मौसा भी जवान छूट पाकर खुश हो गए और उसकेऊपर झुक कर उसकी चुकी को चूसते हुए उसे छोड़ने लगे...

इधर मौसी ने मामी को पकड़ा और बोली- बेटी तो उधर छुड़वा रही है लाओ तुम्हारी छूट भी शांत कर दूँ.

मामी- अह्ह्ह्ह जीजी आ जाओ मैं भी अपनी ननद का स्वाद चख लूँ,

मौसी मामी को औरत के साथ सम्भोग का पथ पढ़ने लगी, जल्दी hi दोनों के होंठ आपस में मिले हुए थे,

नीचे मैं और पापा दनादन माँ को छोड़ रहे थे, और माँ के मुँह से भी लगातार आहें निकल रही थी दूसरी और किरण भी लगातार सिसक रही थी, मौसा के धक्के बता रहे थे उन्हें कितना मज़ा आ रहा था किरण को छोड़ते हुए,

एक दुसरे के होंठों को चूसने के बाद मौसी मामी की चूचियों का स्वाद ले रही थी, मामी भी खूब मज़े से अपनी ननद से चूचियों को चुसवा रही थी, नीचे माँ का हम बेटे ने मिलकर बुरा हाल कर रखा था और दनादन उन्हें छोड़ रहे थे, माँ पर भी चुदाई का असर ऐसा हुआ की जल्दी hi वो झड़ते हुए धरासाई हो गयी, माँ पीछे होकर मेरे ऊपर गिर गयी, पापा ने छूट से लुंड निकला और फिर उन्हें मेरे ऊपर से उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया,

मामी- हायर ढैय्या कैसा छोड़ा है जीजा और कर्मा ने मिलकर जीजी को, देखो लगता है जान hi निकल दी,

मौसा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाभी को ऐसी hi चुदाई पसंद है गुंजन, तब तक चुदती हैं जब तक जान न रहे,

मामी- हाय ढैय्या बड़ी रंगीन हो बड़ी ननदिया,

मामी ने आगे झुककर माँ के गाल को चूमते हुए कहा, इधर मुझे और पापा को खली देख मौसी ने हमें बिस्तर पर hi तैयार कर दिया और फिर जल्दी hi हम दोनों बाप बेटे मिलकर मौसी को छोड़ रहे थे,

मैं नीचे था मेरा लुंड मौसी की गांड में और मेरे पैरों के बीच पापा जो मौसी की छूट मार रहे थे.





माँ को मामी ने अपनी बाहों में भर लिए था और अभी दोनों के होंठ आपस में मिले हुए थे, माँ मामी के चूतड़ों को सहलाते हुए उनके होंठो को चूम रही थी तो मामी माँ की चूचियों की मसल रही थी,

दूसरी और मौसा ने किरण को छोड़ छोड़ कर झाड़ा दिया था पर उसकी जवान छूट का मौसा पर ऐसा असर हुआ की वो भी खुद को झड़ने से रोक नहीं पाए और किरण क्र झड़ने के बाद खुद भी झड़ने को हुए तो उन्होंने अपना लुंड तुरंत किरण के मुँह में घुसा दिया और पिचकारी छोड़ने लगे, किरण किसी मलाई की तरह मौसा के सरे रास को जातक गयी, मौसा झड़ने के बाद सिरहाने से टिक कर किरण के बगल में बैठ कर लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए अपनी पत्नी की दोहरी चुदाई देखने लगे, वहीं किरण के दूसरी और उनकी साली और सलहज आपस में चिपकी हुई थी और एक दुसरे की जीभ को चूस रही थी,

मौसी भी माँ की तरह hi हम दोनों की चुदाई को अधिक देर तक नहीं रोक पाई और जल्दी hi थरथराते हुए हमारे लुंड पर झड़ने लगी, उनके झड़ने के बाद पापा और मैंने उन्हें भी माँ की तरह उठा कर बगल में लिटा दिया,

हमारे खड़े लुन्डों को देख माँ ने मामी से कहा जा गुंजन अब तेरी बारी.

मामी- क्या जीजी एक साथ दो दो नहीं,

माँ- तो क्या हो गया मैंने और शालू ने भी तो लिए अभी,

मामी- नहीं जीजी दर लगता है मुझे पहले कभी ऐसा करना तो दूर सोचा भी नहीं,

माँ- अरे दर मत एक बार करके तो देख ऐसा मज़ा तुझे जीवन में नहीं आया होगा,

मौसी- अरे करलो गुंजन रानी.

ममी की असमंजस देख मैंने उनका हाथ पकड़ा और पकड़ के खींच लिए और पापा के ऊपर धकेल दिया, मामी अब भी थोड़ी असमंजस में थी पर हम नहीं थे.

में- अरे मामी क्या इतना सोच रही हो, आओ तुम्हे जन्नत दिखते हैं,

ये कह मैंने उन्हें उठाया तो पापा ने भी अपनी जगह ले ली और अपना लुंड नीचे से उनकी छूट पर लगा दिया मैंने मामी को छोड़ दिया तो मामी ने खुद hi नीचे होकर पापा का लुंड अपनी छूट में समां लिए, किरण भी उठकर ध्यान से अपनी मम्मी को देखने लगी,

पापा- अह्हह्ह्ह्ह गुंजन अभी देखो क्या मज़ा आता है तुम्हे .

पापा ने मामी को कमर पकड़ कर अपनी और झुका लिया ताकि नेरे लिए जगह बन सके

मामी- आराम से करना जीजाजी,

पापा- अरे परेशां मत हो, बस मज़े लो..

ये कह पापा अपने चेहरे के सामने लटकती उनकी चूचियों को चूसने लगे,

मैंने भी बगल में बैठी पल्ली का सर पकड़ा अपने लुंड पर झुका दिया पल्ली भी समझ गयी क्या करना है और मेरा लुंड मुँह में भर चाटने लगी, और कुछ hi पलों में उसने थूक से गीला कर दिए तो मैंने लुंड उसके मुँह से निकला और फिर उसका मुँह उसकी मम्मी के चूतड़ों के बीच घुसा दिया जिन्हे वो हाथों से फैलते हुए उनकी गांड के छेड़ को चाटने लगी, और फिर उस पर अपना थूक लगा दिया तो मैंने उसे हटा दिया, और फिर अपना लुंड पकड़ कर मामी की गांड पर लगा दिया, मामी ने एक सांस लेकर खुद को तैयार किआ और मैंने धक्का देकर लुंड मामी की गांड में घुसा दिया,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह कर्माहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीजी.

माँ- क्या हुआ कैसा लग रहा है,

मामी- बहुत भरा भरा आआह्ह्ह्हह्ह

मौसी- बस यही तो अब देखो थोड़ी देर बाद कैसा लगेगा,

में- बस मामी भरोसा रखो,

मैं और पापा धीरे धीरे मामी की गांड और छूट में लुंड चलने लगे और धीरे धीरे हमने एक ले भी पकड़ ली, मामी लगातार अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह करके सिसक रही थी और माँ मौसी उनका उत्साह बढ़ा रही थी, किरण बगल में बैठ कर अपनी माँ की पहली दोहरी चुदाई देख रही थी, कुछ पलों के बाद जब मामी की गांड और छूट से एक साथ खणिकता और उत्तेजना की तरंगे पूरे बदन में फैलने लगी तो मामी को मज़ा आने लगा,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह कर्माहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जिजझहहह अह्हह्ह्ह्ह करते राहूऊओऊ अह्ह्ह्हह्हह छोड़ूऊऊ..

में- कैसा लग रहा ाः है मामीई,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह ऐसा मज़ा कभी नहीं आया आअह्ह्ह्ह बेटाःह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह रहा हीी.

मामी तो इतनी उत्तेजित हो गयी की अपने चूतड़ों को खुद फैलाकर हमें छोड़ने को उत्साहित कर रही थी,





मामी की गरम माखन जैसी गांड मरने में मुझे भी बहुत मज़ाआ आ रहा था और पापा को भी उनकी छूट में उतना hi,

किरण अपनी छूट घिसते हुए ये सब देख रही थी, फिर उसे न जाने क्या सूझा वो उठकर मौसी के मुँह पर अपनी गांड रख कर बैठ गयी तो मौसी समझ गयी क्या करना है और वो अपनी जीभ से किरण की गांड का छेड़ चाटने लगी,

दूसरी और से माँ हमारी उत्तेजना उत्साह सब बढ़ा रही थी...

माँ- ऐसे hi छोड़ो दोनों मिलकर छोड़ छोड़ कर ऐसी आदत लगा दो की ये लुंड के बिना रह hi न पाए,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह जीजी अह्हह्ह्ह्ह नहीं रह पाउँगीीी अब अह्हह्ह्ह्ह इतना मज़ा नाहीईईई आगया कभीयी अह्हह्ह्ह्ह.

माँ- तू hi नखरे कर रही थी रंडी साली,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह अब नहीं करूंग़ीीीी अह्ह्ह्हह समझ जनाः चाहिए था की तुम जैसी रांड अपने बेटी अह्ह्ह और मर्द से एक साथ छुड़वा रही है तो कोई तो बात होगी hi...

इतनी देर में मौसा खड़े हुए और उन्होंने अपना लुंड मामी के मुँह में घुसा दिया, और बोले- अह्हह्ह्ह्ह अब बंद हुए तीनो छेड़ सलहज के..

माँ ये तो और बढ़िया किआ भैयाह छोड़ो रंडी को तीनो और से,

किरण माँ से ऐसी बातें और अपनी मम्मी के लिए गालियां सुन कर माँ को मुस्कुरा कर देख रही थी तो माँ ने उसे अपने पास बुला लिए और बोली- तू क्या देख मुस्कुरा रही है इधर आ बुआ की छूट चाट लल्ली.

किरण तुरंत माँ के पैरों के बीच आकर उनकी छूट चाटने लगी, इधर मैं और पापा ताबड़तोड़ तरीके से मामी को छोड़ रहे थे उनकी आहें मौसा के लुंड पर घुट रही थी, मामी के लिए टिहरी चुदाई सहना कुछ ज़्यादा hi हो गया और वो झड़ने लगी उनका पूरा बदन कांप रहा था वो तो पापा और मैंने दबा रखा था नहीं तो बिस्तर से गिर hi जाती पर उनका ऐसा झड़ना देख कर पापा और मैं भी खुद को रोक नहीं पाए और उनकी छूट और गांड में अपना अपना रास छोड़ दिया, झड़ने के बाद मैंने माँ की गांड से लुंड निकला और उन्हें पापा के ऊपर से उठाया तो,

माँ उठ कर आई और अपना मुँह मामी की गांड से लगा दिया और मेरा रास चाटने लगी, माँ की देखा देखि किरण ने भी अपना मुँह अपनी मम्मी की छूट पर लगा दिया, मामी तो बिलकुल बेसुध सी हो कर लेती हुई थी, मौसी की और ध्यान गया तो वो भी सो चुकी थी, माँ और किरण ने मेरा और पापा का रास मामी की गांड और छूट से छठा फिर उन्हें भी मौसी के बगल में लिटा दिया,

पापा बोले अब उन्हें भी नींद आ रही है और वो भी मामी और मौसी के बगल में लेट गए, किरण ने मेरी और देखा जैसे कहना छह रही हो की मुझे नींद नहीं आ रही मैं समझ गया और उसे बोलै- चल तू और मैं माँ पापा के कमरे में चलते हैं वो ख़ुशी ख़ुशी कड़ी हो गयी और हम दोनों माँ पापा के कमरे में चले आये,

मौसा बेचारे खड़े लुंड के साथ देख रहे थे जो मामी के चूसने पर खड़ा हो गया था, माँ ने उन्हें और उनके खड़े लुंड को देखा और बोली- आ जाओ भैया ऐसे सो नहीं पाओगे, उधर कमरे में hi चलते हैं कर्मा किरण के पास,

माँ और मौसा भी हमारे पीछे पीछे आ गए, जब वो लोग अंदर आये तो मैं बिस्तर पर लेता था और किरण मेरा लुंड चूस रही थी,

मौसा भी मेरे बगल में सिरहाने से टिक कर बैठ गए और माँ ने बिना कोई टाइम लगाए उनके ऊपर जगह ली उनका लुंड अपनी गांड पर टिकाया और बैठ कर उछलने लगी, मौसा ने अपने हाथ से उनकी चूचियों को मसलते हुए पीछे से फिर हाथ नीचे ले गया और दो उंगलियां माँ की छूट में घुसा दी... जिससे माँ को दोहरी चुदाई का मज़ा मिलने लगा,





माँ के मुँह से अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह की आहें निकलने लगी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi करते राहूऊ आह्ह्ह्हह्ह.

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाभी अह्ह्ह्हह्हह गांड पटकती राहूऊओऊ अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह ऐसी हीई...

इधर किरण ने मेरा लुंड चूसना बंद किआ और लुंड को मुँह से निकल कर मेरे ऊपर की और आकर मेरे लुंड को अपनी छूट पर टिकाया और फिर मुझे देखते हुए मुस्कुरा कर बैठी तो सही पर उसकी आह्हः निकल गयी क्यूंकि उसकी छूट जो आज पहली बार चूड़ी थी अब दर्द करने लगी थी,

माँ ने उसे देखा और बोली- गुडियाः थोदाहहह आराम दे उसे पहली बार हुआ है न.

किरण का तो मानो दिल hi टूट गया वो छोड़ना चाहती थी,

में- अरे कोई बात नहीं अब तो इतने मौके मिलेंगे चुदाई के और अभी करेगी तो सूजन आ जाएगी चलने में भी परेशानी होगी.

मैंने उसे झुककर सीने से लगा लिए और उसके होंठो को चूसने लगा, उसकी गर्दन और कंधे को चूमने लगा फिर उसकी चूचियों को, किरण भी मेरा साथ देने लगी,

इधर बगल में माँ मौसा के लुंड पर कूद रही थी और मौसा की अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल रही थी, माँ अपनी गांड उनके ऊपर घुमा रही थी और फिर न जाने अंदर hi अंदर क्या कर रही थी जो मौसा आह्हः करते हुए ऐसा लग रहा था अपना संतुलन खो रहे हैं, और हुआ भी कुछ ऐसा hi, कुछ hi पलों में मौसा माँ की गांड में झड़ने लगे, झड़ने के बाद माँ उनके लुंड से उठी और बगल में लेट गयी

मौसा उनसे हांफते हुए बोले- यी क्या अह्ह्ह था भाभी? ऐसे तो कभी नहीं महसूस किआ..

में- ये माँ की गांड की खास कारीगरी है मौसा जब भी उन्हें किसी को झड़ना हो तो ऐसे hi करती हैं.

मौसा- सही में भाभी खुद को रोक hi नहीं पाए हम.

माँ- अरे ये हमने बहुत पहले सीखा था जब इसके पापा को जल्दी सुलाना होता तो यही करते थे माँ बोली.

मौसा- बहुत मस्त तरीका है इसके आगे कोई टिक hi नहीं सकता, चलो अब सो जाते हैं.

मौसा ने माँ के होंठों को चूमते हुए कहा और फिर उनसे चिपक कर सो गए...

दुसरे कमरे में मामी को भी थोड़ा होश आया तो वो भी उठ गयी और चुपचाप से अपने कमरे में जाकर मां क्र बगल में जाकर सो गयी, .

अब बस मैं और किरण hi बचे थे, उसे नींद नहीं आ रही थी, वो कुछ करना चाहती थी पर अभी उसकी छूट में दर्द था, तभी उसे मुस्कुराते हुए कुछ सूझा और उसने मेरा लुंड पकड़ कर अपनी गांड के छेड़ पर रख दिया,

में- पागल है बहुत दर्द होगा.

मैंने धीरे से बोलै.

किरण- कोई नहीं होने दो, दोनों बुआ और मम्मी भी तो लेती हैं गांड में, मैं सह लुंगी.

में- देख ले मेरा कितना मोटा है और तेरा छेड़ कितना छोटा,

किरण- तभी तो मज़ा आएगा,

ये कह वो मुद गयी और मेरे लुंड पर ढेर सारा थूक लगा दिया, और फिर तुरंत hi सीढ़ी होकर लुंड को अपनी गांड पर टिका कर नीचे होने की कोशिश करने लगी, पर कभी लुंड फिसल जाता या कभी वो अंदर ले hi नहीं पति,

निराश होते हुए बोली- भैयाह हो hi नहीं रहा,

इतने में बगल से में की आवाज़ आई, कर्मा उधर अलमारी से तेल उठा और उसका इतना मन है तो मार ले न गांड उसकी,

किरण- हाँ बुआ मुझे मारवणी है..

में- मुझे कोई परेशानी नहीं माँ वो इसको hi दर्द होगा,

माँ- अरे झेल जाएगी इसकी उम्र में मैंने तुझे पैदा कर दिया था,

किरण और मैं ये सुनकर हंस पड़े माँ मौसा की बाहों में लेते लेते hi हमें निर्देश दे रही थी मौसा तो सो चुके थे,

मैंने माँ के कहे अनुसार ऊपर रखा सरसों का तेल उठाया और फिर किरण को उसकी पीठ पर लिटा दिया, और उसे उसके घुटनो को मोड़कर सर के पास रखने को कहा जिससे उसकी गांड और खुल कर मेरे सामने आ जाये उसने वैसा hi किआ और वो भी ख़ुशी ख़ुशी,

मैं उसकी उत्सुकता देख कर खुश हो रहा था साथ hi चिंतित भी की जब लुंड इसकी गांड में घुसेगा तो इसकी क्या हालत होगी, मैंने तेल लेकर उसकी गांड में लगाना शुरू किआ वो ुयी ुई करके मेरी उंगलियां गांड में घुसवाने लगी, मैंने एक फिर दो ऐसे करके तीन उंगलियां उसकी गांड में दाल कर उसकी गांड को जितना हो सकता था उतनी खोलने की कोशिश करने लगा, साथ hi तेल भी लगा रहा था, उसके बाद मैंने अपने लुंड पर तेल लगाया और फिर उसे वैसे hi तैयार रहने को कहा,

उसने हाँ में सर हिलाया, मैंने लुंड को पकड़ा और चिकने टोपे को उसकी गांड के छेड़ पर रख कर उससे धीरे से पूछा- तू तैयार है?

किरण- हाँ भैया अब तो बस घुड.

में- इतना जोश में मत आ. तैयार रहियो घुसा रहा हूँ.

ये कह कर मैंने धक्का लगाया तो मेरा टोपा उसकी गांड में फंस गया उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की वो तकलीफ में है पर जाता नहीं रही थी, मैं कुछ पल यूँ hi रुक रहा उसे लम्बी सांसें लेने को कहा, जो उसने ली भी,

में- सुन अब आगे डालूंगा तो दर्द होगा तू सच में करना चाहती है न?

किरण- हाँ भैया तकलीफ होगी तो सह लुंगी पर मुझे तुम्हारा लुंड मेरी गांड में चाहिए.

में- ठीक है,

ये कह मैंने उसे चद्दर दी और कहा इसे अपने मुँह में फंसा ले उसने वैसा hi किआ, साथ hi उसने अपने दोनों हाथों से चूतड़ों को फैलाया जिससे मुझे और आसानी हो, मैंने अपने लुंड को हल्का सा खींचा और फिर बापिस उसकी गांड में धकेल दिया, लुंड उसकी गांड को फैलता हुआ अंदर घुसता चला गया.





मैंने उसके चेहरे की और देखा आँखें भरी हुई थी, मुँह से घुटी हुई चीखें निकल रही थी वो सर को इधर उधर झटपटा रही थी पर उसने मुझे रुकने को नहीं बोलै, मैं लुंड घुसा कर रुक गया और उसे थोड़ा शांत होने का अवसर दिया साथ hi उसकी छूट को उंगली से सहलाने लगा जिससे उसका ध्यान बाटे, कुछ पल बाद वो शांत हुई और उसने मुँह से चादर निकली और बोली- अब करो भैया पर धीरे धीरे.

में- तू तो बड़ी बहादुर निकली एक hi दिन में छूट गांड दोनों मरवा ली.

किरण- बुआ और मम्मी जैसा जो बनना है.

उसने हँसते हुए कहा.

मैं धीरे धीरे उसकी गांड में लुंड चलने लगा, वो अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह करने लगी, थोड़ी hi देर में उसकी सिसकियों से पता चल रहा था की उसे मज़ा आ रहा था और मैं भी मज़े से उसकी गांड मरने लगा, वो मदतियाने लगी मैं धीरे धीरे लम्बे धक्के लगा रहा था जो उसे भी मज़ा दे रहे थे कुछ देर और गांड मरते हुए मैं उसकी छूट के दाने को भी छेड़ने लगा जिससे वो झड़ने लगी तो उसकी गांड में मैंने भी अपना रास भर दिया और हम दोनों चिपक कर सो गए,

अगली सुबह नाना हमेशा की जल्दी उठे और नित क्रिया निपटा कर रोज़ की तरह चाय की तालाब होने लगी, तो सोचा आज खुद से नहीं बनाएंगे कल hi छोटी ने दांत लगाई थी ऐसा करते हैं उसे hi बुला लेते हैं.

पर आवाज़ लगाएंगे तो घर में बाकि सब भी उठ सकते हैं, एक काम करते हैं फ़ोन लगते है

नाना ने मौसी के नंबर पर फ़ोन लगाया जिसे मौसी ने थोड़ी रिंग होने के बाद उठाया और boli-haan बाबा.

नाना- बिटिया जाग गयी क्या?

मौसी- हाँ हाँ बाबा, अभी आती हूँ चाय लेकर.

मौसी नाना के बिन कहे समझ गयी तो नाना को भी ख़ुशी हुई, मौसी ने फ़ोन रख दिया, नाना अपने कमरे में बैठे इंतज़ार करने लगे, फिर उन्हें रसोई से थोड़ी खटपट की आवाज़ आई तो समझ गए मौसी आ गयी हैं तो मन hi मन सोचा की चलो छोटी को चाय बनाते देख लूंगा,

नाना रसोई में आये और फिर मौसी को देखा तो हैरान रह गए क्यूंकि मौसी चाय तो बना रही थी पर उनके कपडे कुछ ऐसे थे जिन्हे देख नाना के मन और धोती में हलचल होने लगी, नाना ने देखा की मौसी ने सारी तो पहनी हुई थी पर ऊपर सिर्फ ब्रा थी ब्लाउज नहीं जिसमे मौसी की पीठ बड़ी कामुक लग ताहि थी,





नाना ये देख स्तब्ध रह गए उन्हें समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करें रुकें या जाएँ, पर इतने अचे दृश्य को छोड़ कर उनका जाने का तो बिलकुल hi मन नहीं कर रहा था, तभी मौसी पीछे घूमी और उनकी नज़र नाना पर पड़ी,

मौसी- अरे बाबा तुम कब आये,

नाना- बस अभी..

नाना नज़रें नीचे किये हुए hi बोले जिससे लगे की वो मौसी को ताड़ नहीं रहे, मौसी ने भी ये देखा तो बोली- ाचा अरे बाबा वो जल्दी जल्दी में कपडे भी ठीक से नहीं पहने बस साड़ी लपेट कर आ गए.

नाना मौसी की इस बात से सोच में पद गए की क्या बोलेन, फिर मेरी बात याद करते हुए कुछ सोचा और बोले- कोई बात नहीं बिटिया, वैसे भी रसोई में गर्मी इतनी होती है, जितना हल्का पहनो उतना ाचा है,

मौसी ये सुनकर खुश हुई क्यूंकि उन्हें लगा था की नाना ये सुन कुछ बोल कर कमरे में चले जायेंगे पर वो वहीं थे, साथ hi उनकी बात भी आगे बढ़ा रहे थे,

इधर नाना के मन में तो जाना बिलकुल नहीं था वो इतने अचे नज़ारे को छोड़ कर क्यों जाते उल्टा उन्हें तो मज़ा आ रहा था.

मौसी- वही तो बाबा, एक तो गर्मी ऊपर से इतने कपडे लाडो,

नाना- हाँ गर्मी में साड़ी तो और तकलीफ देती होगी,

नाना ने बोलै और फिर पास में पड़ी कुर्सी रसोई के दरवाज़े पर लगा कर बैठ गए,

मौसी ये देख मन hi मन मुस्कुराई.

मौसी- जीजी तो कई बार बोलती भी हैं और उन्हें गर्मी लगती है, तो वो तो साड़ी वगेरा सब उतरके खाना बनती हैं.

नाना इस बात पर चौंक कर बोले- हैं सही में.

मौसी- हाँ उनका कहना भी सही है कहती हैं बच्चे hi तो हैं अपने इसने क्या शर्माना,

नाना- ये भी सही बात है. तू नहीं बनती कभी वैसे..

नाना अपने सवाल से खुद हैरान रह गए,

मौसी- कभी कभी..

नाना- सही भी है, गर्मी में काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है,

ये सुनकर मौसी के चेहरे पर मुस्कान आई जो नाना नहीं देख सकते थे क्यूंकि उनकी और तो मौसी की पीठ थी, और वो उनकी ब्रा में झांकती पीठ और साड़ी में उभरे हुए नितम्भो को देख रहे थे,

मौसी- बाबा अगर तुम्हे परेशानी न हो तो साड़ी निकल hi दूँ.

नाना तो इस सवाल से हिल hi गए क्यूंकि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं सोचा था, हालाँकि उनका रोम रोम कह रहा था की ये तो बहुत ाचा होगा पर दिमाग में सवाल भी आ रहे थे, नाना फिर खुद को शांत करते हुए बोले- हाँ बिटिया हमें क्या दिक्कत हो सकती है, जैसर बच्चे तेरे बच्चे तो तू हमारी बिटिया.

नाना ने इतना कहा तो मौसी ने तुरंत अपनी साड़ी खोलनी शुरू कर दी और अगले hi पल साड़ी निकल कर इकट्ठी की और हाथ में लेकर नाना की और आई और उनकी गॉड में रखते हुए बोली- पकड़ लो बाबा गन्दी हो जाएगी रसोई में.

नाना तो कुछ बोलने के लिए स्तब्ध थे, मौसी के पास आने से उनकी ब्रा में बंद बड़ी बड़ी चूचियां जो आधी बहार थी, मौसी के गोर चिकने पेट बीच में गोल नाभि को देखकर hi वो बिलकुल सुन्न पड़े हुए थे गॉड में राखी साड़ी के नीचे लुंड बिलकुल कड़क हो चूका था,





नाना तो बस इस नज़ारे को hi आँखों से हटा नहीं प् रहे थे, मौसी बापिस जाकर अपने काम पर लग गयी,

मौसी- बाबा नाश्ते में क्या बनाऊं?... बाबा???

मौसी ने जवाब न मिलने पर दोबारा पूछा, उधर नाना जैसे अपने ख्यालों से बहार निकले और बोले- कुछ ..ुम कुछ भी अपनी पसंद का बना ले बिटिया,

नाना मौसी के चूतड़ों को निहारते हुए बोले, इधर नाना का दिमाग रेलगाड़ी से भी तेज़ भाग रहा था, ये हो क्या रहा है, छोटी मेरे सामने ऐसे, क्या करूँ, अगर वो चाहती तो मुझे जाने को भी तो बोल सकती थी अगर गर्मी लग रही थी तो, पर उसने मेरे सामने साड़ी उतरी और अभी आधी नंगी मेरे सामने खाना बना रही है, पर ऐसा क्यों, क्या जो कुछ कर्मा कह रहा था वो सही है, क्या मुझे भी बस मज़े hi लेने चाहिए, क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा, इधर चूल्हे पर खाना बन रहा था पर गरम नाना हो रहे थे सब सोच सोच कर, उनका हाथ साड़ी के ऊपर से hi अपने लुंड को सहला रहा था, खैर मौसी ने जल्दी hi नाना को चाय पकड़ा दी तो नाना के मन का द्वन्द शांत हुआ, अब उनके पास कोई कारन भी नहीं बचा था रुकने का तो न चाहते हुए भी चाय लेकर आंगन में चले गए, धीरे धीरे बाकी सब भी उठने लगे, माँ ने मुझे भी उठाया किरण को उठाया तो पता चला उसे हल्का बुखार और बदन दर्द था तो माँ ने उसे सोने दिया.

सबने नाश्ता किआ मामी के चेहरे पर एक अलग ख़ुशी नज़र आ रही थी, सागर से अनुज अलग हुआ तो मेरे पास आया और बोलै- रात को कुछ हुआ था क्या?

में- मतलब.

अनुज- अरे मौसी वाले कमरे से आवाज़ें आ रही थी मैं मूतने गया तो, पर पीछे से सागर भी आ गया इसने भी सुनी तो बड़ी मुश्किल से इसे अंदर ले गया ये बोलकर की मौसी और मौसा लगे हुए हैं.

में- सही किआ तू लगाया तो देख लेता तो पागल हो जाता वो, फिर मैंने अनुज को साड़ी बात बताई.

अनुज तो सुन कर हैरान और खुश हो गया

अनुज- सही में मामी और किरण भी...

में- हाँ

अनुज- मज़ा आ गया मुझसे तो इंतज़ार नहीं हो रहा, मौका मिलते hi दबोच लूंगा,

में- किरण को आज रहने दियो उसे बुखार है.

अनुज- ठीक है,

इतने में सागर आ गया और हम इधर उधर की बातों में लग गए, इसी बीच मेरा फ़ोन बजा मैंने निकल कर देखा तो थोड़ा सोच में पद गया क्यूंकि अंजलि का था,

मैंने उठाकर hello बोलै

अंजलि - कहाँ हो?

में- घर पर हूँ,

अंजलि- आधे घंटे में मेरे गाओं के अड्डे पर मिलो.

उसने इतना बोल कर फ़ोन काट दिया मैं सोच में पद गया क्या करूँ, अगर मिलने गया तो वो सच के लिए ज़रूर बोलेगी और मैं क्या बोलूंगा उसे मुझे समझ नहीं आ रहा था,

मैं वहीं बैठ गया मेरा उतरा मुँह देख कर अनुज ने मुझसे पूछा तो मैंने बता दिया

अनुज- तो इसमें सोचने की बात क्या है भैया जाओ बता दो.

में- पागल है क्या? फिर हमेशा के लिए रूठ जाएगी मुझसे.

अनुज- तो ऐसे कब तक बचोगे, अगर प्यार करती होगी तो मानेगी hi अगर नहीं करती होगी तो क्या फ़र्क़ पड़ता है,

में- पर मैं तो उससे करता हूँ, मुझे फ़र्क़ पड़ता है.

अनुज- तभी तो बोल रहा हूँ बतादो, वो करती है इसलिए उसने अपनी सच्चाई बताई तुम करते हो तो तुम्हे भी बतानी चाहिए.

में- पर सच जानने पर वो मुझसे अलग हो जाएगी.

अनुज- ऐसे साथ रहकर भी क्या हो जायेगा.

मैं कुछ सोचने लगा,

अनुज- जाओ तैयार होकर सब सही होगा, मैं मामी को देखूं कहाँ है.

वो तो चला गया पर मैंने उसकी बातों पर गौर किआ तो उसकी बातें बिलकुल सही थी, मैं सोचने लगा की इसे मैं पागल कहता हूँ और ये कितनी आसानी से मुझे समझा कर चला गया,

मैं तुरंत नहाने चला गया, नाहा कर निकला तैयार हुआ और मौसा से गाडी की चाबी ली और निकल गया, इधर माँ मामी को ढूंढ रही थी,

माँ- शालू गुंजन कहाँ है? उसके कपडे कौनसे धोने हैं बता देती,

मौसी- अरे वो मेरा कमरा साफ़ कर रही है पूछ लो.

माँ मौसी के कमरे में जैसे hi दरवाज़ा खोल कर अंदर देखती हैं तो चौंक जाती हैं और तुरंत अंदर से दरवाज़ा बंद कर देती हैं, माँ देखती हैं की बिस्तर के सहारे मामी झुकी हुई हैं उनकी साड़ी कमर तक इकठी है और उनके पीछे अनुज है जिसका लुंड मामी की छूट में अंदर बहार हो रहा है,





माँ- तुम लोगो को बिलकुल अकाल है की नहीं अभी जमुना या सागर कोई देख ले तो,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह माँ जबसे भैया ने बताया की मामी भी हमारे साथ हैं तो खुद को रोक hi नहीं पाया और दरवाज़ा बंद करना भी भूल गया,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह कोई नाहीईईई जीजी अब अनुज कोअहहह भी पूरा प्यार मिलना चाहिए न मामी का...

माँ- अरे पूरा प्यार दो पर दरवाज़ा बंद करके... और ऐसे कैसे छोड़ रहा है तू मामी को.

अनुज- मतलब माँ, ऐसे कैसे?

माँ- अरे पूरा नंगा करके देख, कितना मस्त बदन है तेरी मामी का, पर उससे पहले दरवाज़ा बंद करले और अच्छे से जी भरकर छोड़ लिओ फिर.

मामी- पर ये और सागर?

माँ- उन्हें मैं किसी काम पर लगा दूंगी,

ये कहकर माँ निकल गयी और अनुज ने दरवाज़ा बंद किआ और मामी पर टूट पड़ा, मामी भी अनुज का पूरा साथ दे रही थी, जल्दी hi अनुज ने उन्हें पूरा नंगा कर दिया और खुद भी हो गया, और उन्हें बिस्तर पर लिटाकर छोड़ने लगा.





अनुज- अह्हह्ह्ह्ह माझ्हमी बहुत माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है.

मामी- अह्हह्ह्ह्ह बाबू, हमें भी तुम तीनो बाप बेटे एक जैसे हो चुदाई में..

अनुज- होऊंगा hi मामी भैया और पापा से hi तो सीखा है सब अह्ह्ह्हह और तुम भी बिलकुल माँ और मौसी जैसी हो मस्त.

मामी- अह्हह्ह्ह्ह सच्चीई बाबू?

अनुज- हैं मामीई ahhhhhhhhhh मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है तुम शामिल हो गयी हमारे साथ.

मामी- इतना ाचा मुझे भी कभी नहीं लगा बाबू, अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आराम se.ujmmmm

मामी की बात पूरी होने से पहले अनुज उनके होंठो को चूसते हुए उन्हें छोड़ने लगा,

अनुज को अपनी गोलियों में रास भरता हुआ महसूस हुआ तो उसने खुद को रोका वो अभी झड़ना नहीं चाहता था, अनुज ने मामी को ऊपर आने को कहा, मामी ख़ुशी ख़ुशी अनुज के ऊपर आकर उसका लुंड छूट में लेकर बैठ गयी और उछलंड लगी,

अनुज मामी क्र चूतड़ों को मसलते हुए उनका जोश बढ़ने लगा, मामी कुछ खुद से अनुज के लुंड पर उछली फिर उसके बाद अनुज ने कमान संभाली और नीचे से hi दनादन धक्के लगाकर मामी को छोड़ने लगा





मामी के मुँह से लगातार अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की सिसकियाँ निकल रही थी,

अनुज लगातार पूरी लगन और मज़े से मामी को छोड़ रहा था, जल्दी hi दोनों का जोश एक साथ इतना बढ़ गया की दोनों एक साथ झाड़ गए, मामी की छूट को भरने के बाद अनुज ने लुंड निकल कर मामी को दिया जीसर मामी ने चाट कर साफ़ किआ,

मामी- अब काम करलें बाबू?

अनुज- अभी? अरे अभी तो शुरू हुआ है मामी,

अनुज ने मुस्कुरा कर कहा तो मामी ने दोबारा उसका लुंड मुँह में भर लिए और चूसने लगी.

जारी रहेगी
 
अनुज लगातार पूरी लगन और मज़े से मामी को छोड़ रहा था, जल्दी hi दोनों का जोश एक साथ इतना बढ़ गया की दोनों एक साथ झाड़ गए, मामी की छूट को भरने के बाद अनुज ने लुंड निकल कर मामी को दिया जीसर मामी ने चाट कर साफ़ किआ,

मामी- अब काम करलें बाबू?

अनुज- अभी? अरे अभी तो शुरू हुआ है मामी,

अनुज ने मुस्कुरा कर कहा तो मामी ने दोबारा उसका लुंड मुँह में भर लिए और चूसने लगी. अब आगे...



अपडेट 217

मैं घर से निकला और गाडी लेकर गैंडा पुर पहुंचा वहां बस अड्डे पर कुछ देर इंतज़ार करने के बाद अंजलि आती दिखी उसे आते देख चेहरे पर न जाने क्यों मुस्कान आ गयी पर फिर अपने आप गायब भी हो गयी, आगे क्या होगा ये सोचकर.... वो आकर गाडी में बैठी और मुझे गले से लगाया और बोली- शहर चलो,

मैं उसके कहे अनुसार चल दिया रस्ते में बस ऐसी hi थोड़ी बातें हुई, फिर उसने बोलै क्या खिला रहे हो तो मैं उसे एक खाने की जगह ले गया, पर उसने कहा की पैक करवा लो हम गाडी में hi खाएंगे मैंने वैसे hi किआ और फिर गाडी एक और लगा कर हम खाने लगे,

खाने के बाद उसने मेरी और इशारा किया मैंने पूछा क्या तो बोली- तुम्हारे होंठ पर कुछ लगा है, मैंने साफ़ किआ पर हुआ नहीं तो अचानक उसने खुद से अपना मुँह आगे कर मेरे होंठों को चूम लिए और मुस्कुराते हुए बोली- अब हैट गया,

उसकी इस हरकत पर मुझे हंसी आ गयी, और उस पर प्यार भी तो मैंने भी आगे होकर उसे चूमना चाहा पर उसने पीछे होकर अपना चेहरा हटा लिए,

अंजलि- चुम्मा छाती बाद में पहले जिस लिए बुलाया है वो बताओ.

में- किस लिए बुलाया है?

अंजलि- हमारी शादी के लिए.

में- तो कर लेते हैं न,

अंजलि- करेंगे पर उसके लिए जो मैं चाहती हूँ वो देना पड़ेगा न,

में- क्या.

अंजलि- सच,

सच का नाम सुनकर मेरे माथे पर फिर से शिकन आने लगी,

अंजलि- तुम सच शब्द सुनकर ऐसे परेशां क्यों हो जाते हो, कहीं कोई गुंडे वनडे तो नहीं हो?

में- काश होता.

अंजलि- अरे, खैर छोडो अब बताओ,

उसने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए प्यार से बोलै,

में- बताता हूँ, पता नहीं सुनने के बाद तुम कैसे प्रतिक्रया डौगी, पता नहीं इसके बाद हम कभी आगे मिलेंगे भी या नहीं,

अंजलि- ऐसा क्यों बोल रहे हो.

उसने गंभीर होते हुए पूछा.

में- मेरा सच hi कुछ ऐसा है, पर एक चीज़ मांगता हूँ तुमसे.

अंजलि- क्या?

में- जब तक मैं पूरी बात न बता दूँ तुम यूँ hi मेरा हाथ थामे रखना,

ये सुन वो मुस्कुराई और मेरे हाथ को अपने दोनों हाथों के बीच रख लिया और बोली- अब बोलो.

मुझे समझ नहीं आ रहा था की कैसे शुरू करूँ, हिचकिचाहट भी काफी हो रही थी, पर बताना तो था hi,

में- जैसा तुमने बताया की तुम चुदाई की कितनी शौक़ीन हो वैसे hi कुछ हाल मेरा भी है,

वो ये सुनकर मुस्कुरा कर मुझे देखने लगी, और बोली- फिर तो ज़रूर बताओ.

में- तो बात शुरू होती है कुछ समय पहले से...

इधर घर पर अनुज तो मामी को छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था, मामी की छूट को एक बार मार के जैसे hi मामी ने उसका लुंड दोबारा खड़ा किआ अनुज बोलै- मामी गांड भी मरवाती हो?

मामी ने मुस्कुरा कर कहा- तुम सब मर्द गांड के hi पीछे पड़े रहते हो,

बस इतने में hi अनुज समझ गया और उसने मामी को फिर से बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी टैंगो के बीच आकर अपना लुंड उनकी गांड पर रखा और मामी की सहमति पाकर अंदर धकेल दिया जिसे मामी की गांड ने शुरूआती रुकावट के बाद अंदर ले लिया, धीरे धीरे अनुज मामी की गांड में लुंड चलने लगा तो मामी भी दोबारा गर्म होने लगी और अपनी छूट से खेलते हुए आहें भरने लगी.





मामी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ढैय्या अह्ह्ह अनुज ऐसी होई..

मामी आवाज़ दबाते हुए बोली.

अनुज- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामीई क्या माखन जैसी गांड है तुम्हारी अह्ह्ह्ह... सोचा नहीं था इतनी जल्दी hi अह्हह्ह्ह्ह मरने का मौका मिलेगाआआह्ह्ह.

मामी- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अब्बब्बब सोचा तो हमने भी कुछ ैसाआह्ह नाहीईईई था, कल से एईई पांचवा लुंड है जो हमें छोड़ राहाहहह है,

अनुज- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामीईई तुम्हारी गांड hi ऐसी हीी जो बिनाहहहहह मारे रहा नहीं जाताअहह,

मामी- अह्हह्ह्ह्ह तो मार ले लल्लाहहहह अह्ह्ह्ह हमें भी चैत्र आए जायेगा और तुझे भी, अह्हह्ह्ह्ह.

ऐसे hi दोनों की मस्ती भरी कामुक चुदाई चल रही थी कमरे से बहार माँ ने देखा की आंगन में सिर्फ हैं सागर तो घर से बहार निकल गया था माँ ने कुछ सोचते हुए मां को आवाज़ देकर अपने पास बुलाया ताकि वो मामी को ना ढूंढें,

मां- हाँ जीजी का हुआ?

मां ने आते हुए बोलै,

माँ- अरे जमुना ज़रा ये कपड़ों की बाल्टी ऊपर ले चल, कोई बच्चा दिख नहीं रहा और भरी भी है हमसे नहीं उठ रही.

मां- अरे जीजी हमारे होते हुए तुम क्यों उठाओगी.. चलो हम चलते हैं

मां ने आगे बढ़ कर बाल्टी उठाई और चल दिए माँ उनके आगे आगे सीढ़ियों पर चल दी तो मां अपनी बड़ी बहन के पतीले जैसे चूतड़ों को सीढ़ियों पर ऊपर नीचे होते देख उनके पीछे पीछे चल पड़े,

छत पर लेजाकर मां ने बाल्टी रख दी तो माँ उसमे से कपडे निकल कर सूखने लगी,

माँ का ध्यान कपड़ो पर था और मां का पूरा माँ के बदन पर,

माँ- जमुना क्या खायेगा खाने में?

माँ ने बाल्टी से झुक कर कपडे निकलते हुए कहा,

पर मां तो जवाब तब दें न जब कुछ सुना हो उनका ध्यान तो माँ की नंगी कमर ब्लाउज में से झांकती कामुक पीठ और सारी के अंदर बंद बलखाती कमउम गोल मटोल गांड पर था





मां की और से जवाब न पाकर माँ ने हल्का सा चेहरा घुमा कर मां को देखा तो उन्हें अपने चूतड़ों को निहारता हुआ पाया, माँ ने तुरंत चेहरा आगे कर लिया.. इधर मां की नज़र माँ के बदन पर hi जैसे अटक गयी थी.

माँ- क्या हुआ जमुना बता न क्या खायेगा?

दोबारा आवाज़ देने पर मां को सुनाई दिया और वो होश में आते हुए बोले- किकुछ भी बनालो जीजी, तुम्हारे हाथ का तो हमें सब पसंद है,

मां माँ को ताड़ते हुए बोले और मन में सोचने लगे हाय जीजी एक बार अपनी ये गांड परोस दो, मज़ा hi आ जायेगा,

अपनी बहन के बारे में ऐसा सोचकर मां के बदन में एक झुरझुरी सी दौड़ गयी, उन्हें अपने बचपन की वो साड़ी चीजें फिर से दिखाई देने लगी, उनका लुंड लुंगी के अंदर तनाव में आने लगा,

माँ- अरे फिर भी कुछ बता न हमें तो समझ नहीं आ रहा है.

मां- अरे जीजी बन जायेगा खाना, कहे चिंता करती हो,

माँ- चल ठीक है नहीं करते चिंता.

मां- और का, न जाने कितने दिन हो चुके हम ठीक से आपस में बतियाये भी नहीं हैं.

माँ- अरे तो आज तू हमारे साथ hi रह और जी भर के बातें कर,

मां- ठीक है जीजी तुंहरे काम में मदद भी करते रहेंगे,

माँ- इससे अछि और बात hi का होगी, अरे एक काम कर नीचे से ये बाल्टी भर ला साथ में लोटा भी ले ाइयो.

मां- क्या करोगी?

माँ- अरे गर्मी लग रही है नाहा लुंगी तुझसे बातें भी होती रहेगी.

मां तो हे ये सुनकर खुश हो गए, और जल्दी से बाल्टी उठाकर नीचे गए और जितनी जल्दी भर के आ सकते थे ले आये, साथ में एक बाल्टी और ले आये,

माँ- दो बाल्टी किस लिए लाया है?

मां- कहीं पानी काम न पड़े इसलिए,

माँ- तू भी न..

ये कह माँ छत के कोने पर बैठ गयी क्यूंकि छत पर 4 फुट की चरों और दीवार लगी हुई थी, तो बैठने पर कोई भी आसानी से छुप सकता था, माँ भी बैठ गयी और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, और फिर साड़ी घुमाकर उतर दी और सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में बैठ गयी.

मां भी माँ के सामने बैठ गए और अपनी बड़ी बहन के कामुक बदन को निहारने लगे, माँ ने लोटे से अपने बदन पर पानी डालना शुरू किआ और ठन्डे पानी से अपने बदन को ठंडा करने लगी, वहीं उन्हें देख कर मां के बदन में गर्मी बढ़ने लगी, गीले होने से माँ के कपडे उनके बदन से चिपकने लगे और मां को माँ के बदन के भराव का ाचा आकर मिलने लगा, पूरे बदन को पानी से भिगोने के बाद माँ ने साबुन लगाना शुरू किआ ब्लाउज और पेटीकोट से जो जगह बची हुई थी सब जगह साबुन मलने लगी, अपने पेटीकोट को घुटनो तक करके पैरों पर साबुन लगाया, और फिर अपनी कमर और पेट पर साबुन मलने लगी,





मां तो ये सब देख बिलकुल होश खोये हुए थे, माँ उनसे नहाते हुए बातें कर रही थी पर मां का ध्यान तो माँ के गोर गदराये पेट, गहरी नाभि और कमर की सिलवटों पर था ऊपर से माँ के हाथ पेट को मसल रहे थे जिससे मां का लुंड ठुमके मार रहा था उनका मन कर रहा था काश हम जीजी को यूँ मसल मसल कर नहला रहे होते, गीले ब्लाउज में भरी चूचियों का भर देख मां का मन कर रहा था की उन्हें अपने हाथों में थाम लें और जीजी के सीने से बोझ हल्का कर दें,

माँ- तू नाहा लिया क्या?

मां- हैं, न नहीं अभी कहाँ जीजी,

माँ- अरे तो एक बाल्टी ज़्यादा ले hi आया है तू भी नाहा ले.

मां- अभी?

माँ- और का हम तो इसी बाल्टी में नाहा लेंगे,

मां- ठीक है जीजी.

मां के मन में तो ये सोचकर hi लड्डू फूटने लगे और उन्होंने तुरंत अपनी बनियान उतर दी, फिर जब लुंगी उतरने का सोचा तो थोड़ा सोच में पद गए क्यूंकि कच्चे में तो तम्बू बना हुआ था,

माँ- अरे सोच क्या रहा है आ जा,

मां ने भी सोचा जो होगा देखा जायेगा, धड़कते मन के साथ उन्होंने लुंगी उतरी और कच्चे में बना तम्बू बहार आ गया जिस पर माँ की भी नज़र पड़ी पर उन्होंने ऐसे जताया जैसे देखा hi नहीं,

मां भी वहीं बैठ गए और अपने बदन पर पानी डालने लगे,

माँ- जमुना एक काम कर, ले थोड़ा पीठ पर साबुन तो मालदे,

माँ के ये कहने पर मां थोड़ा चौंके पर अगले hi पल सोचने लगे, जल्दी कर जमुना जीजी के बदन को छूने की इच्छा कर रहा था अब इतना अच्छा मौका हाथ आया है जल्दी लपक ले.

मां- हाँ जीजी अभी लगा देते हैं,

ये कह मां ने माँ के हाथ से साबुन लिया और, और माँ के पीछे बैठ कर उनकी पीठ पर साबुन मलने लगे, जैसे जैसे उनका हाथ माँ के बदन पर चल रहा था उनकी उत्तेजना बढाती जा रही थी, वो सब भूल कामुकता के नशे में डूबते जा रहे थे, उनकी हालत का अंदाज़ा माँ को भी था पर वो उनसे खेल रही थी,

मां उत्तेजित होकर माँ की पीठ पर साबुन लगाने के बाद अपने हाथों से उसके झाग को माँ के गदराये बदन पर मलने लगे, पहले गर्दन के पीछे पीठ पर और फिर धीरे धीरे नीचे ब्लाउज और पेटीकोट के बीच पीठ पर मलने लगे, माँ का बदन मां को बहुत ाचा लग रहा था जितना छूटे उतना और छूने का मन करता,

मां पीठ को मलते हुए थोड़ा थोड़ा हाथ बड़ी चालाकी से माँ की कमर की और भी ले जाने लगे, माँ ने भी कुछ नहीं कहा, तो माँ का जोश और बढ़ने लगे, वो हर बार हाथ फिरते और धीरे धीरे थोड़ा आगे बढ़ाते जाते, माँ की और से कोई प्रतिक्रिया न पाकर उनकी हिम्मत और बढाती जा रही थी और कुछ hi पलों में वो माँ के पेट को मसल रहे थे, उनके हाथ माँ के साबुन से चिकने पेट और कमर पर फिसल रहे थे, कभी पेट को मसल देते तो कभी सहलाते, माँ भी अपने भाई की हरकतों से गरम हो रही थी और उन्हें अपने बदन से खेलने दे रही थी,

मां अब खुल कर माँ के पेट को मसल रहे थे, कभी पूरे पेट को मसलते तो कभी उनकी नाभि को छेड़ते, मां का लुंड उनके कच्चे में ठुमके मार रहा था वो तो माँ के पीछे बैठे थे इसलिए देखे जाने की कोई चिंता नहीं थी, कुछ देर ये सिलसिला चलने के बाद माँ बोली- चल अब तू नहले, ला मैं तेरी पीठ मॉल देती हूँ,

वैसे तो मां का मन नहीं था माँ के पेट को छोड़ने का पर माँ का कहना मन्ना पड़ा, वहीं माँ पलटी और मां को घूमने को कहा और फिर मां घूम के बैठ गए तो कुछ hi पलों में अपनी पीठ पर माँ के हाथ महसूस किये जो मां को ाचा महसूस करने लगे, माँ ने मां की पीठ पर साबुन माला और फिर लोटे में पानी लेकर मां की पीठ को धो दिया, फिर खुद के बदन पर पानी डाला और मां को लोटा देते हुए कहा, ले अब तू नाहा कर नीचे आ जइयो हम कपडे बदल लेते हैं, इसके बाद माँ थोड़ा झुककर सीढ़ियों की और आई और फिर नीचे उतरने लगी मामा की नज़र ने आखिरी तक माँ की गांड जो पेटीकोट में साफ़ नज़र आ रही थी उसे टाडा फिर नहाने में लग गए, मां ने जल्दी से नहाना ख़त्म किआ और अपने कपडे और माँ की साड़ी बाल्टी में डालकर नीचे की और आये, और कपडे लेकर माँ पापा के बगल में जो बाथरूम था उसमे रखने के लिए घुसे, कपडे रख कर उनके मन में फिर कुछ सूझा, बाथरूम का दूसरा दरवाज़ा माँ के कमरे में खुलता था इसलिए मां ने कुछ सोच कर हलके से दरवाज़ा खोल कर कमरे के अंदर झाँका तो मां की आँखें बड़ी हो गयी क्यूंकि अंदर माँ कपडे बदल रही थी, और अभी पेटीकोट और ब्रा में मां की और पीठ करके कड़ी थी





मां की नज़र एक बार फिर से माँ के बदन पर टिक गयी, पर तभी माँ उन्ही की और पलटी और मां को बाथरूम के दरवाजे पर देख लिए,

माँ के द्वारा देखे जाने पर मां की तो सिटी पित्ती गम हो गयी, वो सोचने लगे की अब क्या बोलूंगा, अब क्या होगा, ये सोच घबराने लगे,

माँ- आ गया तू ले तौलिया ले पोंछ ले.

माँ के ये कहते hi मां के सर से साड़ी घबराहट आ गयी और कमरे के अंदर आते हुए माँ के बगल में पड़ी तौलिया उठा कर पोंछने लगे, मां ये देख हैरान थे की माँ उनके सामने कपडे पहन रही हैं जैसे बिलकुल साधारण बात हो, अब इसमें उन्हें क्या दिक्कत हो सकती थी, वो तो ख़ुशी ख़ुशी माँ को देखते हुए अपना बदन पोंछने लगे, माँ ने जल्दी hi ब्लाउज पहन लिए और फिर साड़ी लपेटने लगी, मां ने भी तब तक अपना बदन सूखा लिया था

माँ- जा गीले कपडे बाल्टी में दाल दे कोई नहायेगा तो धूल जायेंगे,

मां- हाँ जीजी, ये कह कर मां बाथरूम में गए और अपना कच्चा उतर कर सिर्फ तौलिया लपेट लिया और बापिस कमरे में आ गए उन्हें एक उत्तेजना हो रही थी की अपनी बहन के साथ बिना कच्चे के हैं, उस पर उनका लुंड था जो सलामी दे रहा था, मां भी अब थोड़ा हिम्मत दिखा रहे थे और उसे छुपा नहीं रहे थे, और बिस्तर पर पेअर लटका कर बैठ गए और माँ से बातें करने लगे.

माँ ने साड़ी लपेट ली पर फिर उतरने लगी,

मां- अरे का हुआ अभी उतर काहे रही हो?

माँ- अरे ये भरी है बहुत गर्मी लगती है इसमें,

माँ ने साड़ी उतारते हुए कहा, और फिर उतर कर उसे बिस्तर पर hi एक और रख कर सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में hi बिस्तर पर सिरहाने से टिक कर बैठ गयी,

मां- हाँ साड़ी में गर्मी तो लगती होगी,

माँ- हमारा बस चले तो घर में साड़ी पहनें hi न.

मां- तो मत पहना करो जीजी हेहेहे,

मां ने अपनी बात मज़ाक के रूप में राखी

माँ- अरे हम नहीं पहनते, वो तो बाबा हैं या कोई बहार से आ जाये इसलिए पहन लेते हैं, नहीं तो सारा काम ऐसे hi करते थे,

मां- ये सही भी है जीजी, वैसे भी काम करते हुए गर्मी तो लगती होगी,


माँ- और का बहुत गर्मी लगती है, मैं तो शालू से भी कहती थी तो उसने भी यही करना शुरू कर दिया, हाय ढैय्या हमारी तो कमर पिराने लगी, ये कह कर माँ थोड़ा आगे खिसक कर लेट गयी,

मां- आराम करो न जीजी तुम hi काम में लगी रहती हो, घर में इतने लोग हैं काम करने वाले,

माँ- अरे आदत है, बिना काम करे मन नहीं लगता,

मां- आदत हो न हो पर अपना ध्यान भी तो रखा करो, वो बाम कहाँ है लगा देता हूँ आराम मिलेगा,

माँ- अरे कहाँ तू परेशां होगा,

मां- इसमें परेशां क्या होना,

माँ- इधर hi देख अलमारी के पास होगी,

मां जल्दी से उठ खड़े हुए और बाम ढूंढने लगे,

माँ- सुन दरवाज़ा लगा डीओ,

मां ने तुरंत अंदर से दरवाज़ा लगा दिया, और फिर से बाम ढूंढने लगे,

मां- मिल नहीं रही जीजी.

माँ- अरे छोड़ ऐसे hi कोई इतनी ज़रुरत नहीं है परेशां मत ho.aa इधर लेट जा हमारे पास,

अब ऐसा न्योता मां कैसे मन करते तुरंत माँ के बगल में आकर लेट गए,

मां- ज़्यादा दर्द तो नहीं है जीजी, ये कहते हुए मां ने बड़ी चालाकी से एक हाथ माँ की कमर पर रख लिया और उसे दबाते हुए बोले

माँ- अरे नहीं बस थोड़ी थकावट सी है अभी ठीक हो जाएगी,

मां- और का हम दबा देते हैं हो जाएगी अभी.

ये कह मां उठ कर बैठ गए और माँ की कमर और पेट को दोनों हाथों से सहलाने लगे,

माँ- तू भी बेकार में परेशां हो रहा है,

मां- इसमें परेशां क्या होना जीजी भाई तो होता hi सेवा के लिए है,

मां ने ये कहते हुए माँ के पेट को कमर को मसलना जारी रखा,

माँ ने भी आँखें बंद कर ली और अपने भाई की हरकतों का आनंद लेने लगी,

मां ने जब देखा माँ की आँखें बंद हैं तो वो और खुलकर माँ के बदन को निहारते हुए उनकी कमर को मसलने लगे, पेट को मसलते नाभि से खेलते,

कुछ देर तक यूँ hi माँ के बदन को यूँ hi मसलते रहे और फिर बोले- अब कैसा लग रहा है जीजी,

पर माँ ने कोई जवाब नहीं दिया, मां ने माँ के चेहरे की और देखा तो पाया आँखें बंद hi थी, मां ने मन में सोचा लगता है जीजी सो गयी हैं, मां कुछ देर और माँ के पेट और नाभि से को मसलते रहे पर अब उनके मन में नए नए ख्याल आने लगे, सोचने लगे की दरवाज़ा बंद है जीजी भी सो गयी हैं ऐसे मौके का तो पूरा फायदा उठाना चाहिए... मां मन hi मन सोचने लगे की क्या करें, एक और दर भी लग रहा था, फिर थोड़ा सोच कर माँ के पेट से हाथ हटाए और झुक कर माँ के चेहरे की और देखते हुए अपने होंठ माँ के पेट पर रख कर चूमने लगे बहुत धीरे धीरे साथ hi माँ के चेहरे की और भी देखे जा रहे थे की कहीं माँ उठ न जाये, पर माँ के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे,

इससे मां को और जोश मिल रहा था, हर पल उनकी उत्तेजना बढाती जा रही थी, मां धीरे धीरे खुद से काबू खोते जा रहे थे, और माँ के पेट को छाते जा रहे थे वो अब माँ के चेहरे को बिना देखे खूब लगन से जीभ से माँ के पेट की कोमल गदराई त्वचा को चाट रहे थे, और फिर पेट को जी भर के चूमने चाटने के बाद उन्होंने अपनी जीभ माँ की नाभि में घुसा दी, और उसे चूसने लगे, उनके हाथ माँ की कमर को लगातार सहला रहे थे, माँ की नाभि को चूसते हुए अचानक उन्होंने माँ के चेहरे की और देखा तो बिलकुल चौंक गए क्यूंकि माँ की आँखें खुली हुई थी और उन्हें hi देख रही थी,

मां की तो अचानक से गांड फैट गयी, उनकी हालत ऐसी हो गयी जैसे चोरी करते हुए पुलिस ने पकड़ लिए हो, मां तुरंत ऊपर उठ गए और सोचने लगे की क्या बोलेन,

माँ- ये क्या कर रहा था तू?

मां के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था? वो बस नज़रें नीची करके बैठ गए और सोचने लगे की काश अभी वो धरती में समां सकते.

माँ- कुछ बोल क्यों नहीं रहा?

मां के हलक से आवाज़ hi नहीं निकल रही थी,

माँ ने उनके बोलने का इंतज़ार किआ पर कोई जवाब न पाकर बोली- दरवाज़ा लगाया था तूने?

मां ने सिर्फ है में सर हिला दिया सर झुकाये हुए hi,

माँ- मुँह झुकाये क्यों बैठा है जमुना,

माँ ने उठकर बैठते हुए कहा, मां तो बेचारे दर और शर्म से गड़े जा रहे थे, माँ ने हाथ बढाकर मां का हाथ पकड़ा और उसे फिर से अपने पेट पर रख दिया तो मां थोड़ा हैरान हुए पर नज़र उठाकर अब भी नहीं देखा, माँ ने मां के दुसरे हाथ को भी अपनी कमर पर रख दिया, मां को थोड़ा सा संशय काम हुआ तो अपना चेहरा उठा कर माँ को देखा तो पाया माँ के चेहरे पर मुस्कान थी, मां ये देख हैरान हुए की जहाँ जीजी को गुस्सा होना चाहिए ये मुस्कुरा रही हैं,

माँ पीछे होकर दोबारा लेट गयी वैसे hi और बोली- करता रह न ाचा लग रहा था,

मां तो ये सुनकर बिलकुल चौंक गए, कुछ पल तो यकीन नहीं हुआ पर फिर जब समझ आया तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और बापिस माँ के पेट पर कूद पड़े, माँ उनके बालों में हाथ फिरते हुए हलकी हलकी सिसकियाँ लेने लगी जिससे मां का जोश और बढ़ गया, मां दोबारा से माँ की नाभि को चूसने लगे कभी कमर को चूमते कभी पेट को, अब माँ की सहमति के बाद तो उन्हें कोई दर नहीं था तो कभी कभी उनके हाथ ब्लाउज के ऊपर से hi माँ की चूचियों को सहला देते, अब मां भी पूरे जोश में आ चुके थे पेट को चूमते हुए ऊपर खिसकने लगे और ब्लाउज के ऊपर से hi माँ की चूचियों में अपना मुँह घुसकर चूमने लगे, माँ की सिसकियों ने उन्हें ये समझा दिया की माँ को भी ाचा लग रहा है बस फिर क्या था मां पूरे जोश में आकर अपनी बड़ी बहन के बदन का मज़ा लेने लगे, ब्लाउज के बीच में चूमते हुए मां ऊपर की और खिसकने लगे, और माँ की गर्दन को चूमने लगे, माँ उनकी पीठ को सहला रही थी, मां के दोनों हाथ अब ऊपर की और आ गए और ब्लाउज के ऊपर से hi माँ की चूचियों को दबाने लगे, साथ hi मां के होंठ माँ की गर्दन को चूम चाट रही थी,

माँ- अह्ह्ह्हह्हह जमुनाहहहह ये क्याःह्ह्ह कर रहा है टूउउ ये पाप है,.

माँ ने उनका साथ देते हुए बोलै ताकि मां के मन को जान सकें, मां ने माँ की बात सुनकर अपने होंठ उनकी गर्दन से पल भर को हटाए और बोले- अह्ह्म्म कुछ पाप नहीं जीजी, बहुत मज़ा आ रहा है,

माँ- ये सही नहीं है जमुनाहहहह,

माँ थोड़ा नाटक करते हुए बोली,

मां- अह्ह्ह जीजी ये तो मैं बचपन से करना चाहता था, न जाने कितनी बार सोचा है ये,

मां ये कहकर दोबारा माँ की गर्दन को पागलों की तरह चूमने लगे,

माँ- पर भाई बहन में ये सबब्ब ठीक नाहीई हमें इससे आगे नाहीइ बढम्म्मममहहहह

माँ इतना hi बोल पाई की मां ने उनका मुँह अपने होंठों से बंद कर दिया और अपनी बड़ी बहन के रसीले होंठों को चूसने लगे,

मां तो माँ के होंठों का स्वाद पाकर बिलकुल पागल हो गए और माँ के होंठों को आक्रामकता से चूसने लगे, साथ hi वो अब तक वो जो माँ के बगल में बैठ कर झुके हुए थे अब माँ के ऊपर आकर लेट गए और माँ के बदन को अपने बदन से धक् लिया, उनकी तौलिया तो पहले hi खुल चुकी थी अब पूरे नंगे वो अपनी बहन के ऊपर थे, उनका तना हुआ लुंड माँ की छूट पर पेटीकोट के ऊपर से hi ठोकर मरने लगा तो माँ और जोश में आ गए वहीं माँ भी अपने भाई के लुंड की चुभन को महसूस कर गरम होने लगी,

मां ऊपर लगातार माँ के होंठों को चूस रहे थे साथ hi नीचे उनकी कमर खुद बा खुद ऊपर नीचे होकर लुंड को माँ की छूट पर घिस रही थी, जिससे मां और माँ दोनों को दोहरा मज़ा मिल रहा था, अब माँ भी चुम्बन में मां का पूरा साथ दे रही थी, और अपने भाई के होंठों को चूम रही थी, नीचे मां का लुंड दोनों टैंगो के बीच में माँ की छूट पर ठोकर मार रहा था और दोनों की हो गर्मी को बढ़ा रहा था खासकर मां की जो अपनी बहन की छूट की गर्मी अपने लुंड पर महसूस कर पागल होते जा रहे थे, और जल्दी hi उस गर्मी के आगे उनके लुंड का लावा पिघल गया और घिसते हुए hi मां के लुंड ने माँ के पेटीकोट के ऊपर अपना रास छोड़ दिया, तब तक वो लगातार माँ को चूमते रहे जब तक एक एक बूँद उनके लुंड से न निकल गयी,

झड़ने के बाद मां शांत हुए तो उनके होंठ अलग हुए, माँ ने उन्हें मुस्कुरा के देखा और धकेलते हुए अपने ऊपर से हटाया और बोली- देख पूरा पेटीकोट गन्दा कर दिया तूने मेरा.

मां के लिए ये ख़ुशी की बात थी जहाँ उन्हें लगा की माँ गुस्सा होंगी वहीं माँ तो उनसे आराम से बात कर रही थी, मां मुस्कुरा कर माँ को देखे जा रहे थे,

माँ- अब देख क्या रहा है जा, कपडे पहन जाकर,

माँ कड़ी होती हुई अलमारी से दूसरा पेटीकोट निकलते हुए बोली, मां ने भी सोचा की अभी इतना कुछ हो गया बहुत है और माँ की बात मान कर तौलिया लपेट कर कमरे से निकल गए,

दूसरी और नाना भी अकेले इधर उधर झांक रहे थे, घर में कोई बच्चा दिख नहीं रहा था, अनुज मामी के साथ कमरे में लगा हुआ था, किरण भी सो रही थी सागर था नहीं, मैं भी बहार था तो कोई था नहीं नाना के साथ समय बिताने के लिए, पापा और मौसा नया घर बनना शुरू हो रहा था तो उसी की देख रेख के लिए गए थे, नाना ने फिर सोचा की जब कोई नहीं दिख रहा तो शालू बिटिया से hi बात कर लेते हैं क्या पता कुछ नज़ारा भी देखने को मिल जाये वैसे भी वो आज कल कुछ ज़्यादा hi दर्शन करवा रही है अपने बाप को,

यही सोच नाना मौसी के कमरे की और बढ़ गए देखा दरवाज़ा अंदर से बंद था तो खटखटाया पर अंदर से मौसी की जगह किसी और की आवाज़ आई और वो थी मामी की, क्यूंकि अनुज ममी को मौसी के कमरे में hi छोड़ रहा था,







ममी- कौन है?

नाना- मैं हूँ बहु? शालू कहाँ है?

नाना ने बहार से hi पूछा,

मामी- बाबा वो दुसरे कमरे में होंगी यहाँ तो मैं सो रही हूँ,

ममी खुद को कैसे भी काबू करते हुए ये सब बोल रही थी क्योंकि अनुज उनके पीछे लेटकर लगातार उनकी छूट में धक्के लगाए जा रहा था,

खैर नाना मामी की बात सुन दरवाज़े से चले आये, और अनुज और ममी की चुदाई जारी रही, अब नाना ने सोचा की आखिर शालू गयी कहाँ?

शायद बहु और जमुना के कमरे में होगी अगर बहु यहाँ है तो,

ये सोचकर नाना मामा ममी वाले कमरे में गए वहां पर भी कोई नहीं दिखा, तो सोचा शायद बहार गयी है, ये सोच कर नाना वहीं बिस्तर पर लेट गए, कुछ पल बाद hi तभी दरवाज़े से मौसी अंदर घुसी उन्होंने एक सारी ओढ़ राखी थी और फिर अंदर घुस कर तुरंत मुद कर कमरे का दरवाज़ा बंद किआ और फिर साड़ी को नीचे गिरा दिया, अब तक मौसी का ध्यान बिस्तर पर नहीं गया था जहाँ नाना लेते हुए थे, पर नाना की तो जैसे आँखें बिलकुल मौसी पर hi टिक गयी थी, क्यूंकि साड़ी के गिरते hi मौसी का सिर्फ ब्रा और कच्ची में बदन नाना के सामने था, नाना अपनी छोटी बेटी को ऐसे देखकर बिलकुल हिल गए, इसी बीच मौसी की नज़र भी नाना पर पड़ी तो वो भी बिलकुल चौंक गयी फिर थोड़ा लज्जा ने का नाटक करने लगी





मौसी- बाबा तुम कब आये?

नाना के लिए तो बोलना मुश्किल हो रहा था वो तो बस लगातार मौसी के कामुक बदन को निहारे जा रहे थे,

मौसी ने दोबारा बाबा बोलै तो जाकर नाना होश में आये और फिर शर्माने का नाटक करते हुए उठ कर जाने लगे.

मौसी- अरे कहाँ जा रहे हो बाबा?

नाना- अरे वो तू कपडे बदल ले बिटिया हमें अंदाजा नहीं था तू ऐसे आएगी,

मौसी- अरे कोई बात नहीं बाबा तुम बैठो, मैं बदल लुंगी कपडे,

मौसी के कहने पर नाना फिर से बैठ गए, और बोले- फिर तू कपडे कैसे बदलेगी?

मौसी- अरे सब हो जायेगा बाबा परेशां क्यों होते हो?

नाना- अरे नहीं इस हालत में किसी ने देख लिए तो क्या सोचेगा,

मौसी- दरवाज़ा बंद है बाबा परेशां मत हो कोई नहीं देख रहा,

ये कह कर मौसी ने बिस्तर पर राखी hi चडफी बनियान में से चड्डी उठाई जिन पर अब तक नाना का ध्यान hi नहीं गया था, और फिर तौलिया उठा कर अपने बदन से लपेटी और फिर नाना से बोली- बाबा थोड़ा उधर चेहरा करना,

मौसी के कहते hi नाना ने तुरंत चेहरा दूसरी और घुमा लिया हालांकि वो चाहते थे की कैसे भी करके ये नज़ारा देखें पर शर्म और दर से नहीं देख रहे थे, मौसी को भी अपने बाबा को तरसने में बहुत मज़ा आ रहा था,

नाना का मन तो कर रहा था की कैसे भी करके वो मौसी को देखें पर चेहरा घूमने की हिम्मत नहीं हो रही थी, मौसी ने अब तक ब्रा और कच्ची उतर दी थी और अब दूसरी कच्ची अपनी जांघों से ऊपर चढ़ा रही थी,

नाना ने बहुत कुछ सोच कर धीरे से मौसी की और चेहरा घुमाया, मौसी ने चड्डी पहन ली थी और ब्रा पहनने के लिए उसी वक़्त तौलिए खोला, और उसी वक नाना की नज़र मौसी पर पड़ी, नाना तो मौसी की और देख कर चेहरा घूमना तो दूर पालक झपकना भी भूल गए क्यूंकि सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था





मौसी की बड़ी बड़ी भरी चूचियों को देखकर तो नाना बिलकुल जैम से गए, इसी बीच मौसी ने नाना को देखा जो उन्हें hi देख रहे थे,

मौसी- अरे बाबा चेहरा क्यों घुमाया,

अब नाना के पास जवाब हो तो कुछ बोलेन वो बस सुन्न हो कर देखे जा रहे थे,

मौसी- बाबा क्या हुआ?

मौसी सोचने लगी की नाना को क्या हो गया बिलकुल ऐसे सुन्न से हो गए हैं,

इस पर भी जवाब न मिलने पर मौसी ने तौलिये को वैसे hi छोड़ दिया और चलकर नाना के पास आई उन्हें लगने लगा कहीं सच में नाना को तो कुछ नहीं हो गया है,

मौसी नाना के पास आई और उनके कंधे से पकड़ कर नाना को हिलाया तो नाना को होश आया, और फिर मौसी को सिर्फ कच्ची में देखकर वो हिल गए, उनका दिमाग घूमने लगा, धोती में उनका लुंड बिलकुल तन गया, नाना ने करीब से नज़र मौसी की चूचियों पर डाली तोह वो खुद से सारा काबू खो बैठे और सब भूल कर मौसी की चूचियों पर टूट पड़े, नाना एक हाथ से मौसी की एक चुकी को मसलने लगे और दूसरी पर तुरंत मुँह लगा दिया और पागलों की तरह चूसने लगे,

नाना की इस हरकत से मौसी भी चौंक गयी पर फिर उन्होंने सोचा की शायद बाबा को ज़्यादा hi गरम कर दिया मैंने और वो अपना काबू खो बैठे हैं.

मौसी- अह्ह्ह्हह्हह बाबा ये क्या कर रहे हो?

नाना ने कुछ जवाब नहीं दिया तो मौसी ने नाटक करते हुए उन्हें हलके हाथों से हटाने की कोशिश की,

मौसी- नहीं बाबा, अब छोडो ये गलत है,

नाना- अब मत रोक बिटिया ाहब मुझसे नहीं रुका जायेगा ये कह नाना ने दोबारा से मुँह लगा दिया मौसी की चूचियों पर और उन्हें पीछे धकेल कर बिस्तर पर लिटा दिया, अगले hi पल अपनी बनियान और धोती एक hi झटके में निकल कर मौसी के ऊपर चढ़ गए.

मौसी का अब भी वही नाटक जारी था और बोल रही थी बाबा नहीं ये गलत है बाबा क्या कर रहे हो, पर विरोध नाम भर का भी नहीं कर रही थी,

नाना मौसी के ऊपर आकर तुरंत उनकी चुकी को मुँह में भर के चूसने लगे, और सिर्फ चूसना क्या पागलों की तरह बदल बदल के चूसने लगे





मौसी अपनी चुकी चुसवाते हुए सोच ताहि थी बाबा के अंदर न जाने कब से दबी हुई वासना है जो आज मुझ पर निकल रही है, अपने बाप की हरकतों और उनके साथ से मौसी भी उत्तेजित हो रही थी और अब नाटक करना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा था, मौसी को अपनी जांघों पर नाना का लुंड ठोकर मरता हुआ महसूस हो रहा था,

नाना अब भी मौसी की चूचियों पर लगे हुए थे,

मौसी- आह्हः बबआह आराम सीईई अह्हह्ह्ह्ह आराम से चूसो अपनी बेटी की चूचियां अह्ह्ह्ह देखो कितनी बड़ी बड़ी हैं नाआहहह,

मौसी अब जानकार ऐसी बातें बोलकर खुद को और नाना को उत्तेजित करने लगी, नाना भी मौसी की बातों से उत्तेजित हो कर और जोश में आ रहे थे उनका लुंड बिलकुल फटने को हो रहा था अब तो उसमे दर्द भी होने लगा था, तब जाकर मजबूरी ने नाना ने मौसी की चूचियों को छोड़ा और उठे, उठकर अपने बदन पर पड़े आखिरी कपडे यानि कच्चे को भी उतर दिया इधर मौसी ने भी तुरंत hi अपनी कच्ची को निकल फेंका, और नाना के सामने बिलकुल नंगी होकर लेट कर मुस्कुराने लगी,

नाना तो अपनी बिटिया की इस हरकत से निहाल हो गए,

मौसी- आ जाओ बाबा आज निकल लो अपनी साडी गर्मी अपनी बिटिया की छूट पर,

ये सुन्ना किसी भी बाप के लिए कितना उत्तेजित करने वाला हो सकता है ये हर कोई कल्पना कर सकता है, नाना भी उतने hi उत्तेजित हुए, और अपना लुंड पकड़ कर आगे आये और मौसी की छूट से लगा दिया,

मौसी- ुहममम घुसा दो बाबा, अब मत तरसाओ न खुद को और न मुझे,

नाना- हाँ बितीयआह्ह्ह्ह अब मुझसे भी सहन नहीं होता.

ये कहकर नाना ने धक्का लगाया और उनका लुंड मौसी की छूट में समां घुस गया जिसके घुसते hi दोनों के मुँह से आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी,

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह बाबा आअह्ह्ह्ह देखो तुम्हारा लुंड तुम्हारी बितीयआह्ह्ह्ह की चूऊत्त में घुस गया अह्हह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे अब अह्हह्ह्ह्ह बन जाओ बेटी छोड़,

मौसी की बातें नाना के लिए एक सक पल रुकना मुश्किल कर रही थी, नाना की कमर खुद बा खुद हिलते हुए मौसी को छोड़ने लगी,





मौसी सिसकियाँ लेकर नाना का हौसला बढ़ाते हुए. छोड़ने लगी..

जारी रहेगी...
 
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