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- Dec 5, 2013
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रिम- घर पर hi कुछ मज़ेदार करते हैं...
चंचल- मज़ेदार पर क्या?
रिम- वही तो सोचना है.
माधुरी - अरे ख़ुशी नहीं दिख रही?
चंचल - वो सो रही है मम्मी जी.
सूजन सिंह- विनीत भी गायब है?
चेतन- वो भी सो रहा है अरे ये बच्चे रात में देर तक फ़ोन चलते रहते हैं फिर लेट तक सोते हैं.
चरण सिंह - अरे कोई नहीं सोने दो यहाँ छुट्टियां मानाने आये हैं आराम करने तो करने दो, वैसे भी बारिश में क्या hi करेंगे.
पंकज- तो फिर क्या किआ जाये आज सोचो सब लोग..
बिमला- बिजली भी नहीं है जो टीवी वगेरा देख कर टाइम काट लें...
चंचल- हाँ अम्मा कुछ और hi सोचना पड़ेगा.. ऐ रिम्मी कुछ सोच न.
रिम- सोच रही हूँ जीजी पर मैं क्या सबब सोचो न... ऐ जी तुम hi सर्च करो न मोबाइल पर कुछ मिल जाये तो...
रमन- एक काम कर सकते हैं... अब आगे.
अपडेट 197
चंचल- क्या?
रमन- अंताक्षरी खेल सकते हैं.
सावित्री - न भैया न ये गण गंवाना नहीं होगा क्यों.
माधुरी- हाँ हमसे भी नहीं होगा..
रिम- अरे मज़ा आता अंताक्षरी में.
उदयवीर- तुम बच्चो का मन हो तो खेल लो अब हमें कहाँ गण याद है कोई.
Poorvi-nahi चाचाजी खेलेंगे तो सब hi...
चंचल- हाँ, खेलेंगे तो सब लोग hi.
पंकज- अरे रमन भाई वो पेन वाला खेल hi बताओ सबको,
पंकज ने रमन को आँख मरते हुए कहा, ये सुनकर जितने भी लोग ये खेल चुके थे वो चौंक गए, रमन भी..
रमन- क्या अरे वो.. वो रहने दो...
रिम- क्यों सही तो था वो hi मज़ेदार था
चेतन- हाँ हाँ वो नहीं कुछ और करते हैं.
चेतन ने रिम्मी को आँखें दिखते हुए कहा...
माधुरी- ऐसा कौनसा खेल था हमें भी बताओ.
सूजन सिंह- हाँ भाई क्या पता हम भी खेल पाएं. क्यों भाई साब.
चरण सिंह - हाँ हाँ बिलकुल. बताओ भाई.
अब रमन का चेहरा देखने लायक था फिर भी वो बातें बनता हुआ बोलै- अरे पापा बेकार सा था वो कुछ और खेलते हैं तुम सब को पसंद नहीं आएगा..
बिमला- अरे बताओ तो छोटे दामाद जी.. अब कछु नहीं तो ये hi खेल लेंगे...
चेतन- अरे तुम सब लोग समझ नहीं रहे, ये साधारण खेल नहीं है.
चेतन झुंझुला कर बोलै.
सूजन सिंह- फिर कैसा खेल है बीटा?
चेतन - एडल्ट खेल है... पंकज भैया तुमने hi धुन लगाडी तुम hi समझाओ..
उदयवीर- दुलत खेल ये कैसा नाम है.
पंकज- अरे चाचाजी, एडल्ट खेल मतलब बड़ों का खेल..
चरण सिंह - अरे तो अब और कितने बढे होंगे हम, अब तो खेल hi सकते हैं. हाहाहाहा.
चेतन और रमन बेचारे परेशां थे की अगर खेल खेला गया तो गड़बड़ हो जाएगी...
चंचल ने चेतन को शांत रहने का इशारा किआ साथ hi चेतन को धीरे से ये भी बोलै- रिस्क ले लो अगर माँ चाहिए तो..... इधर रिमझिम ने भी रमन को आँख मार कर आगे बढ़ने का इशारा किया..
रमन ने गहरी सांस ली और बोलै- तो सब लोग सच में ये खेलना चाहते हो?
सबने हामी भरदी...
चेतन- पर पहले खेल के बारे में जान लो..
माधुरी- हाँ बताओ कैसे खेलना है..
रमन ने फिर सबको खेल के नियम बताये जिस पर पेन जा सिरा रुका उसे सामने वाले के साथ जो लिखा होगा वो करना होगा.
सूजन सिंह- लग तो मज़ेदार रहा है,
बिमला- हाँ भाई साब ऐसा खेल पहले नहीं सुना हमने भी.
चरण सिंह - तो खेलते हैं न फिर.
रमन- उससे पहले मैं पहले hi सबको बता रहा हूँ की कुछ भी लिखा आ सकता है बाद में मत बोलना की ये नहीं करना वगेरा वगेरा, अगर चाहो तो अभी से मत खेलो.
उदयवीर- ये तो कुछ ज़्यादा hi गंभीर खेल लग रहा है,
सूजन सिंह- अरे तो हम भी कहाँ डरते हैं क्यों भाई साब.
चरण सिंह - और क्या जो होगा देखा जायेगा.. क्यों तुम औरतों का क्या कहना है?
माधुरी- हूँ तीनो तो तैयार हैं क्यों बिमला?
बिमला- हाँ हम तैयार हैं, बच्चों तुम लोग.
बिमला ने चंचल रिमझिम और पूर्वी की और पूछा.
रिम- हम भी तैयार हैं चची...
चंचल और पूर्वी ने भी हामी भरी.
रमन- चलो ठीक है फिर शुरू करते हैं...
रमन ने फिर सबको एक गोले में बिठा दिया जिसको जहाँ जगह मिली बैठ गए और इतने में रिम्मी एक बड़ी थाली और बेलन ले आई,
पंकज- बेलन किस लिए?
रमन- आज लोग ज़्यादा हैं तो गोला बड़ा है पेह छोटा रहेगा बेलन सही है. और बेलन को एक तरफ से धागा बांध दिए है जिस तरफ धागे वाला सिरा रुकेगा वो hi पकड़ा जायेगा.
चंचल - हाँ ये सही रहेगा,
रमन- लो पंकज भैया, अपनी ज़िम्मेदारी तुम पकड़ो,
रमन ने फ़ोन पकड़ते हुए कहा.
चरण सिंह - पंकज बीटा की ज़िम्मेदारी मतलब?
रमन- अरे किसको क्या करना है वो फ़ोन में hi लिखा है,
सूजन सिंह- ाचा अच्छा..
रमन ने थाली में रखे बेलन को घुमाया और सब ध्यान से उसे देखने लगे और बेलन सबसे पहले सबकी लाड़ली चंचल पर hi आकर रुका...
चंचल- अरे दादा इतने लोगो के बीच ये हम पर hi रुकना था.
रमन- बताओ पंकज भैया क्या लिखा है भाभी की किस्मत में,
चरण सिंह- अरे अब समझे जिस पर बेलन रुकेगा उसे जो पंकज पढ़ कर काम बताएगा वो करना होगा.
माधुरी- बड़ी जल्दी समझ गए जी..
इस पर सब हंसने लगे,
रिम- अरे जीजा पढ़ो न, देखें तो जीजी की किस्मत में क्या लिखा है.
पंकज- हाँ भाई पढ़ते हैं, तो भाभी तुम्हारे लिए लिखा है- सामने वाले खिलाडी के पसंद के गाने पर नाचना है.
चंचल- धत्त तेरी की.
रिम- मज़ेदार.
बिमला- हाय ढैय्या इसमें भी नाच गाना करना पड़ेगा का?
चेतन- हाँ अम्मा पर जिस पर आये लिखा उसे hi...
सावित्री - किस्मत की बात है फिर तो...
चंचल- पूर्वी, बताओ अपना पसंद का गण ..
चंचल ने खड़े होते हुए कहा...
पूर्वी जो की चंचल के सामने बैठी थी बोली- अरे जीजी कोई भी भोजपुरी गाने पर कमर हिलाडो..
रिम- अरे वाह क्या सही चुना है पूर्वी रुक अभी चलती हूँ एक मस्त भोजपुरी गण
रिमझिम फ़ोन में गाना ढूंढ कर चलने लगी तो सबकी नज़र चंचल पर थी जो गण चलते hi थोड़ा शरमतर हुए नाचने लगी, उसका गदराया बदन और गोरी कमर हिलते देख मर्दों के लुंड उठने लगे

वैसे तो वहां मौजूद सभी मर्दों ने सिवाए उसके बाबा के सबने उसके बदन को भोग लिए था.. पर बेटी को नाचते देख आज उदयवीर को भी एहसास हुआ की उसकी बेटी कितनी सुन्दर है...
पूर्वी और रिम्मी से किसी मामले में काम नहीं, पूर्वी का ख्याल आते hi उनके दिमाग में रात की यादें ताज़ा हो गयी, हाय कल की रात कभी नहीं भूल पाउँगा मैं, जितना मज़ा पूर्वी के बदन को भोगने में आया, वैसे चंचल बिटिया का तो बदन तो उससे भी गदराया हुआ है चंचल बिटिया के साथ और मज़ा आएगा, अरे छी छी ये क्या सोच रहे हैं हम... ये कहकर उदयवीर ने अपने दिमाग को झटका,
इतने में hi चंचल हँसते हुए जगह बदल कर बैठ गयी और खेल आगे शुरू हुआ, चंचल ने आगे आकर बेलन घुमाया जो की सूजन सिंह पर आकर रुका तो सब ताली पीटने लगे.
चंचल - अरे वाह चाचाजी..
माधुरी- अब तो समधी जी नाचेंगे.
सूजन सिंह- अरे संधान जी जो लिखा होगा वही करना है..
चरण सिंह- हाँ क्या पता क्या निकले. पंकज भाई बता तो पढ़ कर.
पंकज- हाँ चाचा पढ़ते हैं., ताऊजी तुम्हारी बरी में लिखा है- सामने वाले खिलाडी के लिए कोई गण गायें...
सूजन सिंह- अरे धत्त्त तेरी की गण कैसे हो पायेगा,
रमन - वो भी मम्मी के लिए गण है पापाजी,
रमन ने कहा तो सूजन सिंह का ध्यान गया की सामने संधान माधुरी थी...
माधुरी- ये सुन शर्माने लगी,
चंचल - गाओ न चाचाजी...
सूजन सिंह- अरे बिटिया अब हमें तो कोई गण याद hi नहीं.
ऋण- अरे पापा याद करो न..
सावित्री- अरे संधान जी तुम hi बोलो न गाने को क्या पता तुम्हारे किये गए दें.
माधुरी- गायें न समधी जी..
माधुरी ने शरमाते हुए कहा...
चरण सिंह - लो भाई अब तो संधान ने भी बोल दिया, सोचलो बेटी की सास की बात नहीं मानोगे..
इस पर सब हंसने लगे,
सूजन सिंह ने थोड़ा सोचा फिर थोड़ा झिझकते हुए बोले- कहाँ फंस गए यार, ाचा तुम लोग भी हमारा साथ देना,
थोड़ा सा झिझकते हुए सूजन सिंह ने गण शुरू किआ- आज हमारे दिल में अजब ये उलझन है... गाने बैठे गाना सामने संधान है..
ये गण सुनते hi शोर मचने लगा और सीटियां बजने lagi..sabka साथ पाकर सूजन सिंह ने यही लाइन एक दो बार और दोहराई फिर हँसते हुए हाथ जोड़ लिए...
उदयवीर- भाई साब मज़ेदार...
चरण सिंह- अरे वाह समधी जी इस प्रतिभा का नहीं पता था तुंहारी.
सूजन सिंह- अरे काहे टांग खींच रहे हैं समधी जी. चलो चलो अब आगे खेल करो रमन बीटा.
रमन- जी पापाजी...
ये कहकर रमन ने hi उनकी जगह बेलन घुमा दिया जो की थोड़ी देर घूमने के बाद बिमला पर जा कर रुका,
सब अरे वाह करके खुश हो गए वहीं बिमला थोड़ा घबरा गयी.
बिमला- हाय ढैय्या हमसे नहीं होगा नाच वगेरा.
रिम- अरे चची डरो मत पापा ने भी तो गया न.
सूजन सिंह- हाँ भाभी जी बस थोड़ी सी हिम्मत दिखानी है जैसे हमने दिखाई थी...
सूजन सिंह की बात सुनते हुए बिमला को रात के नज़ारे याद आ गैर जहाँ सूजन सिंह और विनीत ने मिलकर उसकी जबरदस्त चुदाई की थी, वो ये सोच hi शर्मा गयी और इतना hi बोली- ग भैया कोशिश करुँगी
चंचल - अरे अम्मा हो जायेगा, हम जानते हैं तुम कर लोगी,
बिमला ने अपनी बिटिया को देखा जो की उसका हौसला बढ़ा रही थी और रात के बाद अब उसे चंचल बेटी के साथ साथ एक सहेली भी लगने लगी थी,
रमन - पंकज भैया अब पढ़ो तो सही पता लगे अम्मा को क्या करना है.
पंकज- ग भैया अभी लो, हाँ तो चची तुम्हारे लिए लिखा है- सामने वाले खिलाडी के साथ मिलकर नाचना है किसी प्यारे से गाने पर.
बिमला- लो आ गया न नाचना.
रिम - पर चची अकेले थोड़े hi नाचना है, अपने दामाद के साथ नाचना है,
रिमझिम ने बताते हुए कहा क्यूंकि बिमला के सामने चेतन hi था,
पूर्वी- अरे वाह ये बानी सास और दामाद की जोड़ी.
चंचल- हाँ मज़ा आएगा...
चेतन और बिमला एक दुसरे को देख शर्माने लगे, कल जो कुछ हुआ था उसके बाद दोनों में ज़्यादा बात भी नहीं हुई थी तो दोनों hi थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे, पर कल और रात के बाद से बिमला इतना तो खुल चुकी थी की उसने सोचलिअ वो पीछे तो नहीं हटेगी.
इसलिए खड़े होते हुए उसने बोलै - आओ दामाद जी जल्दी निपटाते हैं.
बिमला से ये सुनकर सब थोड़ा हैरान हुए और खुश भी यहाँ तक की उदयवीर भी अपनी पत्नी को खुलते देख हैरान हो गए पर साथ hi बहुत खुश भी क्यूंकि वो खुद चाहते थे उनकी पत्नी भी खुश रहे ज़्यादा सोचे न और समय का लुत्फ़ उठाये,
चेतन अपनी सास की बात सुनकर खड़ा हुआ और फिर दोनों hi एक और गए,
चेतन- पर गण कौनसा है,
रिम- अभी चलती हूँ कोई रोमांटिक सा.
बिमला- पर हमें नहीं आया तो नाचना उस गाने पर तो?
चेतन- अरे अम्मा तुम हमारा साथ देती रहना बाकि हम सब संभल लेंगे.
चेतन की ये बात सुनकर बिमला को बड़ी ख़ुशी और रहत दोनों मिली,
रिमझिम ने जल्दी hi सरक काजोल का गेरुआ गण लगा दिया और सब ताली बजने लगे,
इधर चेतन अपनी सास के हाथ पकड़ उन्हें अपने कंधे पर रखा और अपने हाथों को अपनी सास की कमर पर रखे और धीरे धीरे इधर उधर हिलने लगे, पहले तो बिमला अपनी कमर पर हाथ पाकर चौंकी पर फिर उसने खुद के दिमाग और बदन को ढीला छोड़ दिया और चेतन अपनी सास को अपने साथ नाचने लगा कभी खुद से चिपकता तो कभी घुमाकर बाहों में ले लेता,
बिमला ठहरी गाओं की नारी उसे कहाँ ऐसा रोमांस करने का मौका मिला था, पर आज अपने दामाद के साथ ये कुछ पल उसे बहुत भ रहे थे, चेतन तो अपनी सास का भरा हुआ बदन महसूस कर उत्तेजित होने लगा था साथ hi खुश भी था..
वैसे सफ़ेद सारी में बिमला के भरे बदन को झूमते देख बाकि मर्दों का मन भी उत्तेजित होने लगा था, चरण सिंह मन hi मन सोचने लगे थे की चंचल को बदन संधान से hi मिला है, उनके लुंड में भी हलचल होने लगी थी, वहीं उनके बेटे रमन का भी यही हाल था, पंकज भी लुंड थामे हुए आँखें जमा कर देख रहा था, सूजन और चेतन hi खुद को खुशनसीब मान रहे थे जिन्होने इस बदन को भोगा था, इधर उदयवीर को अपनी पत्नी को दामाद के साथ देख खुद नहीं पता क्या हो रहा था पर वो उत्तेजित महसूस कर रहे थे,
इधर गाने का अंत होते हुए चेतन ने अपनी सास को पीछे से पकड़ा और उठाते हुए घुमाकर बापिस खड़ा कर दिया,

इतने hi समय में बिमला को अपने चूतड़ों के बीच दामाद का लुंड चुभता हुआ महसूस हुआ तो वो और खुश हो गयी उसे भी नहीं पता क्यों..
खैर दोनों का नाच ख़तम होते hi सबने ताली बजा कर दोनों का स्वागत किआ,
रिम- वाह भैया और चची सच में सरक काजोल की तरह नेचर हो.
माधुरी- हाँ भाई सास दामाद की जोड़ी ने आज रंग जमा दिया.
सावित्री- अरे हम तो बिमला को देख हैरान हैं कितनी सुन्दर लग रही थी नाचते हुए और लगा hi नहीं पहली बार hi कर रही है.
चंचल - हाँ ये तो सही कहा चची मज़ा आ गया देखकर.
चरण Singh-sach में मज़ेदार था..
दोनों ने सबको धन्यवाद् किआ और जगह बदलकर बैठ गए खेल आगे शुरू हुआ और इस बार बेलन चरण सिंह पर आकर रुका,
सूजन सिंह- अब फंसे समधी जी,
चरण सिंह- हाँ यार न जाने क्या करना पड़े इस उम्र में.
पूर्वी- लो अपनी बरी आते hi चाचाजी को उम्र याद आ गयी.
माधुरी- मैं तो कह रही हूँ नाचने को आ जाये तो देखो न जाने क्या क्या याद आएगा.
चरण सिंह- अरे शुभ शुभ बोलो, पंकज बीटा पढ़ दे जल्दी.
सब उनकी नोकझोंक सुन हंसने लगे,
पंकज- चाचाजी तुम्हारी बरी में लिखा है- अपनी सुहागरात की कहानी सुनाओ..
ये सुन सब थोड़ा सा झेंप गए तो कुछ को हंसी आने लगी
चरण सिंह- अरे धत्त्त ऐसे थोड़े hi होता है.
माधुरी - और का ये भी कोई बताने वाली चीज़ है,
चेतन- इसीलिए हमने पहले hi बोलै था की कुछ भी करना पद सकता है..
रमन- हाँ एडल्ट खेल है तो ये सब तो पहले hi बताया गया था,
Savitri-waise बताने में बुराई hi क्या है?
माधुरी- धत्त्त यहाँ बच्चे हैं इनके सामने..
उदयवीर- हाँ बच्चे हैं अच्छा नहीं लगता.
रिम- बच्चे तो ऐसे बोल रहे हो हमें जैसे हम सब दूध पीते बच्चे हैं.
रिमझिम ने कहते हुए रमन को इशारा किआ की साथ दे,
रमन- हाँ अब खेल hi रहे हैं और सब शादीशुदा भी हैं.
सावित्री- हाँ समधी जी बच्चे बढे हो जाएं तो उन्हें दोस्त समझना चाहिए...
माधुरी- अरे बच्चों को ाचा नहीं लगेगा...
सूजन सिंह- अरे बच्चों से hi पूछ लेते हैं वो जैसा कहेंगे वैसा कर लेंगे, क्यों भाई साब.
Udayveer-haan ये सही रहेगा. तो बताओ बच्चों..
रिम- हम तो इंतज़ार में हैं सुनने के,
चंचल - और क्या मज़ा आएगा मम्मी जी और पापाजी के बारे में सुनकर..
रमन- मुझे भी कोई दिक्कत नहीं,
चेतन- मुझे भी नहीं और मम्मी पापा समाज के बनाये नियमो और शर्म छोडो यहाँ आराम करने और आनंद लेने आये हो परिवार के साथ तो खुलकर लो..
चेतन के ये कहने पर चंचल ने उसे छुपके एक चुम्मे का इशारा किआ ये जताते हुए की उसने बहुत सही बोलै...
पंकज- और क्या शर्म के चक्कर में या समाज के हिसाब से चलें तो क्या जो कुछ मज़े मिलते हैं वो मिल सकते...
सूजन सिंह- हाँ भाई ये तो जिंदगी में हमने जाना है की असली मज़ा थोड़ा गलत होने पर hi मिलता है,
ये बात सुनकर सबके मन में अपने अपने काण्ड चलने लगे और जल्दी hi सब लोग हामी भी भरने लगे,
चरण सिंह- ठीक है बच्चो तो सुनो,
Chanchal-je बात.
चरण सिंह ने अपनी सुहागरात के बारे में बताना शुरू किआ हालाँकि उतने अचे से नहीं फिर भी उनका बताना hi रमन और बाकि सब के लिए एक जीत था और चरण सिंह की बात सुनते हुए भी चेतन, रमन, पंकज, चंचल, रिम्मी, और पूर्वी इसे अपनी जीत मानकर मुस्कुरा रहे थे, क्यूंकि इससे आगे का रास्ता खुलता नज़र आ रहा था,
खैर चरण सिंह ने बताना जारी रखा पर बिलकुल सभ्यता के साथ जैसे छूट लुंड की जगह योनि और लिंग और चुदाई की जगह सम्भोग शब्द का प्रयोग किआ, और ये सुन माधुरी नज़रें नीचे किये शर्माए जा रही थी,
बिमला- इन्हे देखो कैसे शर्मा रही हैं नयी दुल्हिन की तरह,
रिम- अरे चची जब की बात है तब तो मम्मी जी नयी दुल्हन hi थी न.
चंचल- हो सकता है मम्मी जी को वो रात याद आ गयी हो,
माधुरी- अभी बताती हूँ तुम दोनों को, हमें छेड़ रही हो...
चंचल - ाचा मम्मी जी एक बात पूछूं?
माधुरी- पूछ...
चंचल- कितनी बार हुआ था?
माधुरी- क्या कितनी बार हुआ था?
चंचल- छुऊं,... वो ससस सम्भोग..
एक पल को तो सबकी आँखें बड़ी हो गयी थी जो चंचल बोलने वाली थी वो सुनकर फिर आखिर में चंचल ने खुद को संभाला...
माधुरी- धत्त्त पिटेगी अभी tu.dekh लो संधान अपनी बिटिया को क्या क्या पूछ रही है..
बिमला- अब तुम सास बहु की बात तुम जानो हमें कुछ नहीं पता.
बिमला का बेबाक जवाब सुन माहौल और बन गया,
रिम - क्या मम्मी जी बहुएं हम हैं शर्मा तुम रही हो ..
माधुरी- तीन बार...
माधुरी ने शरमाते हुए कहा...
इस जवाब पर एक बार फिर से शोर मचा वहीं चरण सिंह और माधुरी शर्माए हुए हंस रहे थे.
माधुरी- अब खेल भी आगे बढ़ाओ..
रमन- हाँ हाँ,
ये कह रमन ने फिर से बेलन घुमाया जो की सावित्री पर आकर रुका,
माधुरी- अब फांसी बीटा बहुत. मज़े ले ताहि थी दूसरो के.
बिमला- कोई नहीं अब हम मज़े लेंगे.
सावित्री- तो का हुआ हम डरते थोड़े hi हैं, पंकज बीटा बताओ क्या लिखा है..
चंचल- ये हुई बात चाची...
रिम- ऐसे hi जोश में खेला जाता है खेल तभी मज़ा आता है...
पंकज- सुनो तै जी तुम्हारी बरी में लिखा है- लो तुम्हे भी नाचना है एक कामुक गाने पर...
चंचल - आज सबको नाचना पद रहा है...
रिम- हाँ
माधुरी- तैयार हो संधान जी...
सावित्री- हाँ बिलकुल गण तो बजाओ कोई.
सावित्री ने खड़े होते कहा, चरण सिंह और उदयवीर उत्सुक हो गए संधान का नाच देखने के लिए...
खैर रिमझिम ने अपनी मम्मी के लिए भी एक भोजपुरी गण लगा दिया और सावित्री भी पूरे जोश में अपनी भरी चूचियां हिलाते हुए थिरकने लगी.. पल्लू तो पहले झटके में hi सरक कर उनकी चूचियों का मादक नज़ारा सबको देने लगा,

भोजपुरी गाने भी कामुकता से भरे होते हैं ये भी वैसा hi रहा तो सावित्री को अपने नाच में भी वैसी hi कामुक भाव चेहरे पर दिखने पड़े जिससे देखने वालों के भाव बदलने लगे, रमन जो की अपनी माँ और भाभी और बहन को छोड़ hi चूका था अब अपनी सास को लेकर भी उसके मन ने अरमान उठने लगे वहीं उदयवीर और चरण सिंह भी सावित्री के जलवों से बचे नहीं रहे, चेतन खुश था जी की उसने रात को इस बदन को भोग लिए है..
खैर जल्दी hi ये नज़ारा भी बंद हुआ, क्यूंकि गण ख़तम हो गया था, और सावित्री हांफती हुई जगह बदल कर बैठ गयी, सबने ताली बाज़ा कर उत्साह बढ़ाया खैर खेल आगे चला बेलन एक बार फिर से घूमा और इस बार मनो सावित्री ने कोई जादू किआ हो माधुरी पर आकर रुका...
सावित्री- अब आये मज़े,
माधुरी- कौनसा टोटका कर दिया तुमने,
रिम- अरे मम्मी जी टोटका नहीं है बेलन ने तुम्हे चुना है,
माधुरी- चुना नहीं फंसाया है.
चरण सिंह- अरे हमारी बारी में बफी खुश हो रही थी अब खुद की आई तो फंसाया है.
माधुरी- ाचा ठीक है न, पंकज बीटा क्या लिखा है पढ़ तो.
पंकज- चची तुम्हारी बरी में लिखा है- अपने सामने के खिलाडी के कहे हुए गाने पर नाचना है.
माधुरी- ले कितना नाचना नाचना आ रहा है...
सावित्री- अब आ गया तो नाचना तो पड़ेगा hi,
बिमला- और क्या हम भी तो नाचे थे.
माधुरी- तुम लोग hi बदला ले रहे हो,
पूर्वी- चलो चाचाजी नचाओ अपनी संधान को.
पूर्वी ने उदयवीर से कहा जो की माधुरी के सामने थे,
उदयवीर- अरे हम कक बताएं जो ठीक लगे करलो.
रिम- ऐसे कैसे चाचाजी इतना ाचा मौका मिला है बेटी की सास को नाचने का,
चंचल - हाँ बाबा, छोडो मत.
सबके उकसाने पर उदयवीर ने कुछ सोचा और बोले- संधान जी का नाम माधुरी है तो माधुरी दीक्षित के hi किसी गाने पर हो जाये.
रिम- अरे वाह क्या आईडिया निकला है चाचाजी.
रिम्मी ने अपने फोर में कोई गण ढूंढते हुए कहा.
इधर माधुरी सबको देख शर्मा रही थी
चंचल- तैयार हो मम्मी और शर्माना छोडो,
रमन- हाँ मम्मी शर्माओ मत खुलकर मज़े लो,.
रमन की बात से माधुरी को अपनी और बेटे की चुदाई याद आ गयी जिसे याद कर उसके अंदर की शर्म जैसे गायब हो गयी उसने सोचा जब बेटे से छुड़वा सकती हूँ तो ये क्या चीज़ है,
तभी रिम्मी ने गण भी चला दिया और गण भी धक् धक् करने लगा,
माधुरी भी माधुरी की तरह अपना सीना और बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे करते हुए कमर हिलने लगी, कुछ hi पलों में उनकक पल्लू नीचे गिर गया जिसको उठाने की माधुरी को कोई ज़रुरत नहीं दिखी और वो कमर हिला हिलाकर नाचने लगी

और उसका भरा हुआ गोरा बदन मांसल पेट और गहरी नाभि देख कर जो लुंड अब तक आधे आधे उठे थे अब पूरे उठ गए थे, रिम्मी आउट चंचल भी अपनी सास का ये रूप देख खुश थी,
चेतन तो अपनी माँ को देख सोचने लगा अभी उठ कर छोड़ दूँ सबके सामने तो वहीं दोनों संधियों का भी बुरा हल था, बस पंकज और रमन खुश थे क्यूंकि वो लोग पहले hi उसे छोड़ चुके थे...
खैर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ ये नाच भी ख़तम हुआ जिसमे उदयवीर तो अपनी संधान पर लट्टू हिहो गए,
खेल आगे बढ़ा और इस बार बिमला पर आकर रुका जो किलसते हुए बोली- अरे ये तो हमारे पीछे hi पद गया है...
माधुरी- अब ये तो बेलन और तुम्हारी दोस्ती है..
सावित्री- हाँ चलो दामाद जी बताओ पढ़ कर बिमला रानी को क्या करना है अब.
बिमला- हाँ बताओ लल्ला देखते हैं क्या होता है..
पंकज- ग चची तुम्हारी बरी में लिखा है- पसंद के गाने पर नाचना.
बिमला- अरे फिर से नाचना ये कैसा खेल है.
माधुरी- हाँ इसमें तो बस नाचना नाचना hi आ रहा है.
पंकज- हाँ भाई रमन बस सब को नचवाते hi रहोगे का आज और कुछ आ जी नहीं रहा है.
रमन- अरे सब परिवार वाले खेल रहे हैं तो हमने आसान और साधारण कामो वाला पेज खोल कर दिया है...
चरण सिंह- अरे आसान कामो वाला क्यों?
चेतन- अरे पापा अगर एडल्ट वाले काम आएंगे तो आप लोग hi चौंक जाओगे बहुत कठिन तो नहीं पर अलग काम होते हैं उसमे..
माधुरी- अलग मतलब कैसे?
रमन- ये समझ लो की जो सुहागरात की कहानी सुनाई थी न वो तो शुरुवात भी नहीं है उसकी और भी ज़्यादा कामुक और उत्तेजक काम...
उदयवीर- अरे सबके सामने करने होते हैं?
पंकज- सबके सामने और किसी के भी साथ.
बिमला- हाय ढैय्या.
कुछ देर के लिए तो सबके बीच शांति ठहर गयी हालाँकि सब के मन में यही जिज्ञासा उठ रही थी की कैसे कैसे काम करने पढ़े होंगे कितने कामुक होते होंगे कैसा लगेगा सबके सामने, पर खुल कर बोलने में भी शर्मा रहे थे, चरण सिंह जो की अपनी दोनों बहुओं को छोड़ चुके थे परिवार में खुलने का उन्हें ाचा मौका लग रहा था, सूजन सिंह तो चाहते hi यही थे, उदयवीर के मन में भी कामुकता जाग रही थी पर उनकी शर्म उन्हें रोक रही थी, माधुरी अपने बेटे से छोड़ने के बाद अब उसे तो खेलने में कोई समस्या नज़र नहीं आ रही थी, वहीं बिमला भी अब पूरी तरह से खुद को खोल चुकी थी वो जानती थी अगर आनंद लेना है तो खुलना hi पड़ेगा,
सबके मन में यही चल रहा था पर कोई भी आगे आकर बोलने को तैयार नहीं था,
रमन- तो बताओ सब क्या करना है? आगे खेलना है इसी पर या दूसरा पेज निकलना है?
इस सवाल से सब एक दुसरे को झाँकने लगे,
रिम्मी ने चंचल और पूर्वी को इशारा किआ की उन्हें hi पहल करनी होगी,
रिम- मैं तो तैयार हँ,
चंचल- मैं भी, सब परिवार वाले hi तो हैं यहाँ, क्या दिक्कत है.
पूर्वी- मैं भी तैयार हूँ.
पंकज- अगर ये लोग तैयार तो हम भी तैयार हैं.
चेतन- मैंने तो कहा hi, अगर आनंद लेना है तो शर्म और नियमो को छोड़कर hi आगे बढ़ना होगा, मैं तो तैयार हूँ.
रमन- मैं भी तैयार हूँ,
अब बच्चों ने पहल कर दी थी और अपना फैसला भी सुना दिया था अब बात बड़ों पर आ गयी थी,
सूजन सिंह- क्या कहते हो भाई साब, उदयवीर भाई साब?
उदयवीर- तुम्हारी क्या राइ है?
सूजन सिंह- हम तो तैयार हैं बच्चों के साथ मिलने के लिए.
चरण सिंह- हम भी यही सोच रहे थे बच्चों की दोस्ती पाने के लिए यही सही रहेगा,
उदयवीर- और तुम तीनो संधानो का क्या ख्याल है?
माधुरी- मैं तो खेलूंगी.
सावित्री- मैं भी तुम बताओ जल्दी बिमला रानी,
बिमला- जो चंचल के पापा सही समझें..
चरण सिंह- लो भाई संधान जी ने तो तुम पार दाल दिया सारा जिम्मा,
उदयवीर थोड़ा सोच में पद गए हालाँकि चाहते वो भी थे फिर भी झिझक रहे थे इतने में hi उनकी नज़र पूर्वी से मिली जिसने हाँ में सर हिलाकर उन्हें इशारा किआ तो अगले hi पल उदयवीर बोले- ठीक है जब सारा परिवार तैयार है तो हमें क्या समस्या होगी...
ये सुनकर सब खुश हो गए,
रमन- बहुत बढ़िया, अब सब राज़ी हैं तो पहले hi बता रहा हूँ कोई बाद में ये न कहे की मैं ये नहीं करूँगा, ंविं ये नहीं कर पाऊँगी, जो आएगा करना होगा.
चेतन- हाँ भाई शर्म को अब भूल जाओ, और हो सकता है इस खेल के बाद कुछ रिश्ते पूरी तरह बदल जाएँ और उस तरह से खुल जाएं जैसा कभी सोचा भी न हो, तो सब तैयार हैं?
सूजन सिंह- अब ओखली में सर दे hi दिया है तो क्या डरना,
चरण सिंह- हाँ बिलकुल.
उदयवीर- अब शुरू करो फिर.
रमन बेलन घूमने चला तो माधुरी ने उसे टोका- अरे बेलन क्यों घुमा रहा है, बिमला रानी पर रुका था उन्ही की बरी है,
बिमला ये सुन मुस्कुराते हुए बोली- देखो तो भूली नहीं,
रमन- हाँ सही में, अरे पंकज भैया, लाओ दूसरा पेज निकल दूँ.
रमन पंकज से फ़ोन लेकर दूसरा पेज खोल कर देता है और अब पढ़ने को कहता है,
पंकज- बिमला चची तुम्हारा नया काम है- अपने किन्ही दो कपड़ो को उतरना और सामने वाले खिलाडी को देना अगर वो चाहे तो बदले में अपना कोई एक कपडा दे सकता है वही पहनना hai.par आपके उतरे हुए कपडे कोई नहीं पहन सकता..
बिमला- हाय ढैय्या ये तो नंगा करवाने लगा,
चेतन- यही तो है कामुक खेल सासुमा.
माधुरी- अब नहीं नहीं मत करना.
बिमला- अरे हूँ कहाँ मन कर रहे हैं, हमारे सामने तो रिम्मी बिटिया है.
रिम- हाँ चची चलो दो कपडे दो मुझे, वैसे चिंता मत करो तुम्हे नंगा नहीं होने दूंगी,
रिम्मी ने खिलखिलाते हुए कहा,
बिमला- कहाँ उतरने हैं?
सावित्री- अरे कमरे में जाकर कर आओ अदला बदली,
बिमला- हाँ हाँ चल रिम्मी.
रिम्मी और बिमला कमरे में गैर बाकि सब उत्तेजित होकर इंतज़ार करने लगे,
सूजन सिंह- ये तो सच में थोड़ी खतरनाक से काम देने लगा,
चेतन- तभी तो हमने पहले hi चेता दिया था सबको..
चरण सिंह- कोई बात नहीं अब हो गया है तो कर hi लेंगे.
खैर कुछ देर बाद पहले रिम्मी बहार निकली जिसमें किसी को कोई बदलाव नहीं दिखा,
रिम- आ जाओ चची काहे शर्मा रही हो सब अपने hi लोग हैं.
रिमझिम के कहने पर बिमला झिझकते हुए बहार आई जिसे देख सबकी आँखें चौड़ी हो गयी

बिमला ने ऊपर सिर्फ एक ब्रा पहन राखी थी साड़ी के साथ वो ब्रा भी रिम्मी की थी जो की बिमला की भरी चूचियों को संभल नहीं प् रही थी, और आधे से ज़्यादा चूचियां सबको नज़र आ रही थी साथ बी गदराया पेट आउट गहरी नाभि भी जिसे देख सरे मर्दों के लोडे टनटनाने लगे,
उदयवीर तो अपनी पत्नी को ऐसे देख आहें भरने लगे- उनका लुंड भी कड़क हो गया,
पूर्वी- हाय चची क्या मस्त लग रही हो हीरोइन फ़ैल हैं.
चंचल- सही में अम्मा, बहुत कॉमिक और सुन्दर लग रही हो,
चरण सिंह अपनी संधान को यूँ देख उत्तेजित होने लगे पर अपने जज़्बातों को दबाते हुए बोले- सच में उदयवीर भाई तुमसे जलन हो रही है हमें तो,
उदयवीर सबको अपनी पत्नी को कामुक तरीके से देख बेहद उत्तेजित हो रहे थे और बोले- आरर भाई साब हम भी पहली बार देख रहे हैं ऐसे.
बिमला- अब सब बातें बंद भी करो आगे खेलते हैं.
बिमला ने जगह बदल कर बैठते हुए कहा..
रमन - हाँ हाँ चलो आगे खेलते हैं
रमन ने आगे बढ़ कर बेलन घुमाया जो की उदयवीर पर आकर रुका,
चरण सिंह- लो भाई पत्नी के बाद पति की बरी आ गयी,
रिम- चाचाजी hi बचे हुए थे बड़ी देर से,
उदयवीर- अब तो फंस गए न बिटिया,
पंकज- चाचाजी तुम्हारी बरी में लिखा है- सामने वाले खिलाडी को अपना एक कपडा दान दो.
उदयवीर- धत्त तेरे की..
सामने सावित्री थी जो की बोली - क्यों भैया क्या दान डोज?
इस पर सब हंसने लगे..
उदयवीर- जो तुम मांग लो भाभी...
सावित्री- तो फिर धोती दे दो कुरता लम्बा है तुम्हारी इज़्ज़त बचाये रखेगा,
इस पर सब हंसने लगे,
माधुरी- लो भाई बीवी का ब्लाउज गया तो पति की तो धोती hi चली गयी,
उदयवीर- देख लीजिये संधान कैसा जुल्म हो रहा है,
खैर उदयवीर ने धोती उतरके सावित्री को दे दी, उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी खेतों में अक्सर कच्चे में hi काम करते थे,
खेल दोबारा शुरू हुआ और बेलन इस बार रमन पर आकर रुका,
रमन- लो घूम फिर कर हम पर hi आगया,
चंचल- कोई नहीं भैया तुम तोह कर hi लोगे तुमने धोती भी नहीं पहनी.
ये सुनकर सब हंसने लगे,
रमन- हाँ भाभी कर तो हम कुछ भी लेंगे, बताओ पंकज भैया क्या लिखा है?
पंकज- भाई लिखा है - अपने सामबे वाले खिलाडी के बदन में जो आपका पसंदीदा हिस्सा हो उसे चूमना है दो मिनट तक,
पूर्वी- अरे बाप रे, क्या पसंद है तुम्हे जीजा?
क्यूंकि पूर्वी hi रमन के सामने थी,
रमन- तुम तो हमें पूरी पसंद हो साली जी..
रमन ने हँसते हुए कहा..
पंकज- अरे भैया पूरी ले जाओगे तो हमारा क्या होगा,
ये सुन सब हंसने लगे,
रमन- आओ साली जी बीच में आओ..
पूर्वी उठ कर आई और रमन के सामने कड़ी हो गयी,
पूर्वी- अब बताओ जीजा क्या पसंद है.
रमन- अभी पता चल जायेगा,
ये कहकर रमन नीचे बैठ गया और पूर्वी की साड़ी उसके पेट से हटाकर अगले hi पल अपने होंठ पूर्वी के पेट पर लगा दिए और जगह जगह चूमने लगा.
पूर्वी- आह्ह्ह्ह ुहममम जीजा..
पहले तो लोग ये नज़ारा देख कर उत्तेजित हुए hi पूर्वी की सिसकी ने उन्हें और उत्तेजित कर दिया, चरण सिंह तो सोचने लगे दोनों बहुएं मिल hi गयी बस पूर्वी भी मिल जाये, उदयवीर का तो लुंड तन गया ये सोच कर की रात को उन्होंने पूर्वी को ठीक से चूसा क्यों नहीं, बाकि सब तो पूर्वी को कई बार भोग hi चुके थे, उधर औरतों को भी ये देख उत्तेजना बढ़ रही थी सब तक ताकि लगाए रमन के होंठ और पूर्वी के पेट को देख रही थी, अगले hi पल रमन ने अपनी जीभ पूर्वी की नाभि में घुसड़ी तो पूर्वी के साथ साथ कई लोगो की आह्ह्ह्ह निकली...
रिम- चलो चलो समय हो गया पूरा तुम तो मेरी बहन के पेट के पीछे hi पद गए..
चेतन - वैसे गलती रमन की नहीं है पूर्वी का बदन है hi इतना सुन्दर...
माधुरी- अरे शर्म करो उसके पति के सामने hi उसके बदन के बारे में ये सब बोल रहे हो.
पंकज - अरे चची यही तो मज़ा है इस खेल का आगे देखो क्या क्या होता है...
माधुरी- लग तो रहा है बड़ा बवाल होगा..
पूर्वी- अरे अब आगे भी खेलो तभी तो पता चलेगा क्या होगा...
चरण सिंह- हाँ भाई खेलो आगे..
रमन ने बेलन घुमाया जो की चंचल पर आकर रुका
चंचल- लो भाई आ गयी हमारी बारी.
रिम- आखिर कार बताओ जीजा जी क्या लिखा है हमारी प्यारी जीजी के लिए.
पंकज- अभी बताते हैं भाभी तुम्हारे लिए लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी को चूमना है तीन मिनट तक....
पूर्वी- लो जीजी तुम्हारा भी नंबर आ गया चुम्मा छाती का...
माधुरी- हाय ढैय्या ये कैसे होगा...
चंचल के सामने बैठी माधुरी ने कहा...
सावित्री - कैसे होगा मतलब.
माधुरी- हमारी बहु और हम कैसे चूम सकते हैं एक दुसरे को.
रिम- अरे मम्मी जी सब हो जायेगा,
चंचल- हाँ मम्मी जी सब हो जायेगा तुम आओ तो सही.
पूर्वी- हाँ चची उठो तो.
माधुरी हिचकिचाते हुए उठी, और चंचल भी अपनी जगह से उठी दोनों बीच में आये,
माधुरी हिचकिचा भी रही थी पर अंदर hi अंदर उत्तेजित भी हो रही थी, हालाँकि उसने अपनी दोनों संधानो के साथ ये सब बहुत किआ था पर बहु की और सबके सामने की बात कुछ और थी,
माधुरी ने चंचल की और देखा तो वो उसे देख मुस्कुरा रही थी, और धीरे से चंचल ने अपना चेहरा आगे बढ़ाना शुरू किआ तो माधुरी भी खुद बा खुद आगे हो गयी और फिर दोनों की hi आँखें बंद हो गयी, अगले hi पल माधुरी को अपने होंठों पर अपनी बड़ी बहु के नरम रसीले होंठ महसूस हुए और उसके बदन में करंट दौड़ गया, उसके होंठ भी खुल गए और बहु के होंठों को उसने अपने होंठों में भर लिए और कुछ hi पालो ने सास बहु बहुत hi कामुक तरीके से एक दुसरे के होंठों को चूसने कागि.
और ये नज़ारा देख बाकि सब की आँखें चौड़ी हो गयी, मर्दों के लुंड तन गए तो औरतें अपनी छूट को पसीजता हुआ महसूस करने लगी, उदयवीर का बुरा हाल था अपनी बेटी को अपनी सास के साथ होंठ चूसते देखते हुए उनका लुंड पूरा अकड़ गया था,
बिमला तो बेटी के साथ ये खेल खेल चुकी थी और उसके बदन को चख चुकी थी इसलिए उसे अंदाज़ा हो रहा था की संधान को कैसा लग रहा होगा, माधुरी और चंचल दोनों hi बेहद उत्तेजित हो गयी थी आउट जब तक समय ख़त्म हुआ तब तक दोनों की छूट से पानी बहने लगा था,
समय ख़त्म होने पर दोनों अलग हुए तो दोनों के चेहरे पर hi मुस्कान थी, सबने ताली बजाकर उत्साह बढ़ाया..
सावित्री- क्यों समाधान जी कैसा लगा,
माधुरी- बड़े मीठे होंठ हैं बहु के, मज़ा आया,
माधुरी ने मुस्कुराते हुए कहा, जिससे पता चल रहा था की अब धीरे धीरे सब खुल रहे हैं क्यूंकि सबने hi इस पर सहमति जताई,
चंचल- तुम्हारे भी बहुत मीठे हैं मम्मी जी, बहुत मज़ा आया मुझे भी..
चरण सिंह- अरे सास बहु का प्यार हो गया तो खेल आगे बढ़ाएं.
Rim-dekho तो पापाजी को जलन हो रही है मम्मी से की बहु के होंठ चूसने का मौका उन्हें मिला इन्हे नहीं..
इस पर सब हंसने लगे...
सूजन सिंह - चलो खेल आगे बढ़ाओ..
रमन ने फिर से बेलन घुमाया, जो की सावित्री पर आ कर रुका,
माधुरी- चलो समाधान हो जाओ तैयार.
सावित्री- हम तो तैयार hi हैं...
पंकज- तो सुनो लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी के साथ बिना हाथों का प्रयोग किये ये बेलन लेकर पूरे कमरे का चक्कर लगाना है..
सावित्री- ये तो आसान है आ जाओ समधी जी..
सावित्री ने चरण सिंह से कहा जो उसके सामने थे,
पंकज- अरे तेजी पूरी बात तो सुन लो,
सावित्री- ाचा अभी और भी है,
माधुरी- और का बड़ी जल्दी हो रही है समधी के पास जाने की.
इस पर सब हंसने लगे.
पंकज- हाँ अब इसमें समस्या ये है की सामने वाले खिलाडी की आँखें बंद रहेंगी और तुम्हे उसे रास्ता बताते हुए आगे लेजाना है, और जितनी बार बेलन गिरेगा दोनों को hi उतने कपडे उतरने पड़ेंगे.
चरण सिंह- अरे बरी संधान की कपडे हमारे क्यों उतरेंगे,
पूर्वी- नियम तो नियम है चाचाजी और बेलन के दोनों सिरे hi खतरनाक हैं.
माधुरी- क्यों संधान हमारी बरी पर बोल रही थी हो जायेगा हो जायेगा अब करो..
सावित्री- हाँ तो कर रहे हैं मन कहाँ कर रहे हैं. आओ समधी जी.
बिमला- कितने प्यार से बुला रही हैं समधी जी को,
चरण सिंह और सावित्री दोनों एक कोने पर पहुंचे दोनों ने एक दुसरे की और मुँह किआ और बेलन के एक एक छोर को अपने अपने पेट पर टिका दिया,
रिम- पापाजी आँखें बंद.
चरण सिंह- हाँ बीटा कार्टर हैं.
चरण सिंह ने आँखें बंद कर ली..
और सावित्री ने उन्हें बताना शुरू किआ पर ऐसे काम के लिए दोनों में तालमेल होना बहुत ज़रूरी था चरण सिंह ने एक कदम आगे पहले बढ़ा दिया और बेलन गिर गया,
सावित्री- ओह्हो समधी जी साथ में रहो न..
चरण सिंह- अरे तुमने hi कहा चलने को..
सावित्री पर हमारे साथ साथ चलो न...
रिम- आज हो गया अब ये पूरा.
चंचल- हाँ..
माधुरी- सही है गिरने दो कपडे उतरेंगे अभी दोनों के..
इसी तरह गिरते गिरते तीन बार बेलन गिरा कर कैसे भी दोनों ने एक चक्कर पूरा किआ...
रमन- चलो पूरा तो हुआ आखिर.
माधुरी- अब कपडे उतरो भाई..
बिमला- तुम्हे बड़ी जल्दी है कपडे उतरवाने की.
माधुरी- अब खेल तो खेल है नियम मैंने पड़ेंगे.
चरण सिंह- कितने उतरने पड़ेंगे.
चंचल- तीन पापाजी.
चरण सिंह- अरे बच्चों दो hi उतर दें तो चलेगा क्या?
रिम- नहीं नहीं चलेगा.
चरण सिंह- अरे तीन hi तो कपडे पहने हैं हमने.
सूजन सिंह - अरे तो क्या हुआ खेल है बच्चे बुरा नहीं मानेंगे..
सावित्री- हाँ अब उतरने हैं तो उतर hi देते हैं
सावित्री अपना ब्लाउज खोलती हुई बोली तो चरण सिंह भी कुरता उतरने लगे, ब्लाउज और कुर्ते के बाद ब्रा और धोती की बरी आई दोनों ने उतर के नीचे गैर दिया तो सावित्री की बड़ी छुछियां सबके सामने नंगी थी वहीं चरण सिंह के बदन पर सिर्फ एक कच्चा था,
चरण सिंह- बच्चों सच में ये भी उतारें क्या?
सूजन सिंह - और क्या..
माधुरी- हाँ बिलकुल उतारो और सावित्री बहन तुम भी..
चरण सिंह ने बात मानते हुए कच्चा नीचे सरका दिया और पूरे नंगे हो गए, उनका कड़क लुंड सबके सामने था पूर्वी और सावित्री बिमला पहली बार देख रही थी जिन्हे लुंड देखकर कुछ हलचल हुई...
चरण सिंह पूरे नंगे होकर जाकर बैठ गए..
रिम- लो पापा जी तो हो गए नंगे अब .
बिमला- अब तुम्हारी मम्मी की बरी.
चंचल- हाँ चची उतरो न.
सावित्री ने गहरी सांस ली और बोली- लो ठीक है उतरती हूँ...
ये कहकर सावित्री ने अपनी साड़ी उतार दी, और सबके सामने पेटीकोट में आ गयी...
और फिर अपनी जगह आकर बैठ गयी, अब कोई भी बता सकता था की आंगन में माहौल गरम हो गया था, सब उत्तेजित हो रहे थे और मर्द रह रहकर सावित्री के नंगे छूछीयो और बिमला की अधनंगी चूचियों को देख रहे थे वहीं औरतें चरण सिंह के लुंड को निहार रही थी जो की उसे छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहे थे..
आगे खेल हुआ, और बेलन इस बार रिमझिम पर आकर रुका,
चंचल- अरे वाह रिम्मी आखिर तेरी बरी आ hi गयी,
रिम- हाँ जीजी ढूंढ hi लिए बेलन ने मुझे,
चेतन- नाचना आना चाहिए बस ये hi नहीं नाची अभी तक,
पूर्वी - तुम तो नक्च लिए जीजाजी अपनी सासु माँ के साथ,
पंकज- लो सुनो साली जी तुम्हे क्या करना है- सामने वाले खिलाडी से उसके कपडे उतरवाने के लिए मानना है, अगर सामने वाले खिलाडी को मानाने में असमर्थ होते हो तो जितने उसके बदन पर कपडे हैं उतने hi तुम्हे उतरने होंगे. सामने वाला खिलाडी मैंने के लिए कुछ बदले में कुछ भी मांग रख सकता है.
चंचल- अरे वाह थोड़ा मुश्किल काम मिला है, पर देखते हैं क्या दिमाग लगाती है रिम्मी.
पूर्वी- सामने हैं भी जेठ जी.
चेतन- हाँ और हम इतनी आसानी से नहीं मैंने वाले,
रिम- ऐसे मत करो भैया,
चेतन- ाचा बदले में हमें क्या मिलेगा..
रिम- वो तो तुम बताओ क्या मांग है तुम्हारी,
चेतन- हम तो कह hi रहे थे की नाच के दिखाओ.
पूर्वी- लो जीजा की सुई अभी तक नाच पर hi अटकी हुई है,
चंचल- अरे सही है हम सबमें सबसे ाचा नाचती है रिम्मी.
चरण सिंह- फिर तो सही मांग है,
बिमला- नाच दे रिम्मी बिटिया हम भी तो देखें..
सबकी मर्ज़ी जानकर रिम्मी कड़ी हुई और एक भोजपुरी कामुक गाने पर अपना बदन बड़ी कामुकता से चलाया की देखने वाले देखते रह जाएं..

रिम्मी का कामुक नाच देख कर उसके नंगे बैठे ससुर का लुंड फुदकने लगा चरण सिंह का मन तो हुआ अभी जाकर बहु के कपडे उतर कर छोड़ने लगें, यही हाल उदयवीर का था जो सोच रहे थे पूर्वी तो थी hi रिम्मी तो अलग hi है, हाय लुंड अकड़ गया इसे देख कर काश इसे भी छोड़ पता एक बार, बाकि सब मर्दों का भी यही हाल था..
खैर नाच ख़तम हुआ तो सबने ताली पीट कर रिम्मी का उत्साह बढ़ाया,
चंचल- क्यों जी क्या दे रहे हो, इतने अचे नाच के बदले रिम्मी को.
चेतन- अरे जो चाहे रिम्मी मांग ले अब.
रिम्मी - तो भैया सरे कपडे उतरदो अपने.
चेतन- अरे सरे? एक दो तो छोड़ दे..
रिम्मी- नहीं भैया फिर मुझे भी उतरने पड़ेंगे.
चेतन- ाचा बस कच्चा छोड़ दे बाकि उतर रहा हूँ.
पूर्वी- ये भी ठीक है रिम्मी मान जा.
रिम- ठीक है भैया..
इसके बाद चेतन ने सरे कपडे उतर दिए सिर्फ कच्चा छोड़कर जिसमे उसका लुंड खड़ा हुआ तम्बू बना रहा था और सबको दिख रहा था, माधुरी एक बेटे से छोड़ने के बाद दुसरे का लुंड देखकर उत्तेजित हो रही thi..aur सोच रही थी की चेतन का लुंड नंगा कैसा दीखता होगा,
चेतन के बाद रिमझिम ने भी अपनी साड़ी उतर दी और सबके सामने पेटीकोट और ब्लाउज में बैठ गयी, जिसे देखकर सब अपनी आँखें सेकने लगे,
खेल आगे शुरू हुआ और बेलन इस बार माधुरी पर आकर रुका,
माधुरी- लो मुआ हम पर रुक गया आकर,
सावित्री- ाचा दूसरो पर रुके तो ठीक खुद पर रुके तो मुआ,
चरण सिंह- और का अपनी बरी पर बिदक जाती हो.
बिमला- कोई नहीं अब पता तो चले संधान जी को करना क्या है,
माधुरी- बता पंकज बीटा क्या लिखा है नसीब में.
चंचल- मम्मी की बरी में मज़ा आता है.
माधुरी- तू बड़े मज़े ले रही है, बता तू पंकज..
पंकज- चची तुम्हारी बरी में लिखा है, - अपने सामने वाले खिलाडी को उसके सरे कपडे उतरने के लिए मानना है और बदले में उसे अपने बदन का उसका पसंदीदा अंग नंगा कर के दिखाना है.
माधुरी- हाय ढैय्या ये तो नंगा करने पर आ गया,
सावित्री- तो क्या हुआ हम तो कबसे अधनंगे hi बैठे हैं.
बिमला- हूँ तो उससे भी पहले.
चरण सिंह- हम तो पूरे नंगे हैं.
चेतन- मैं भी.
सावित्री- तो संधान तुम कहे इतना इत्र घबरा रही हो.
माधुरी- अरे बात हमारी नहीं है हमें सामने वाले खिलाडी को मानना है नंगा होने के लिए,
रिम- तो मनाओ न मम्मी चाचा जी को.
रिम्मी ने उदयवीर की और इशारा करते हुए कहा जो माधुरी के सामने थे, बेचारे सहमे से बैठे थे की आगे क्या होने वाला है.
पूर्वी- अब संधान समधी के कपडे उतर आएंगी..
इस पर सब हंसने लगे,
माधुरी- समधी जी उतर दीजिये न कपडे,
उदयवीर- अरे धोती तो पहले hi नहीं है अब ये hi बचा है बदन पर.
रिम- वही तो उतरवाना है चाचाजी,
माधुरी- चंचल बिटिया समझा न अपने बाबा को.
चंचल - अरे मम्मी हम क्या समझाएं तुम समधी संधान की बात है..
माधुरी- समधी जी मान जाओ न. देखो ये भी तो नंगे बैठे हैं.
उदयवीर- पर कैसे बिटिया है यहाँ उसके सामने.
रिम- अरे खेल है चचही और चंचल जीजी को भी कोई समस्या नहीं होगी.. क्यों जीजी?
चंचल- हाँ बाबा हमें कोई परेशानी नहीं है..
पूर्वी- मान जाओ चाचाजी तभी चाचीजी के बदन का एक अंग देखने को मिलेगा.
ये बात सोच उदयवीर ने कुछ सोचा फिर बोले- ठीक है अब सब hi नंगे हैं तो हम क्यों शर्माएं,
ये कह जोश में आकर उदयवीर ने अपने कपडे इतर दिए और पूरे नंगे हो कर खड़े हो गए उनका मोटा लुंड देख कर एक पल को तो माधुरी का मन हुआ की पकड़ कर देखले, फिर खुद को रोका वही. बाकि औरतें भी लुंड को निहार मन hi मन उत्तेजित होने लगी, चंचल कनखियों से अपने बाबा का लुंड देख मस्ताने लगी...
खैर उदयवीर अपने कपडे उतर बैठ गए,
पूर्वी- अब चाचाजी बताओ क्या देखना है.
चंचल - हाँ बाबा इनाम तो ले लो मम्मी जी से,
रिम- कौनसा अंग पसंद है आपको मम्मी जी का.
उदयवीर- अरे ऐसे क्या बताएं...
बिमला- अरे बताओ बताओ ऐसा मौका नहीं मिलेगा,
उदयवीर- हाँ हाँ बताते हैं.
उदयवीर ने भी सोचा की अब मौका आ hi गया है तो क्यों पीछे हैट रहा है, खुद नंगा बैठा है अब शर्म छोड़ और मज़े ले.
रिम- कहाँ खो गए चाचाजी.
माधुरी- हाँ समधी जी बताओ फिर ये निपटाएं..
उदयवीर ने थोड़ा हिचकिचाते हुए बोलै- वो संधान जी का पिछवाड़ा हमें पसंद है..
ये सुनकर सब हैरान रह गए वहीं शोर भी मचने लगे..
चरण सिंह- क्यों भाई तुम हमारी बीवी के चूतड़ों को देखते रहते हो.
चरण सिंह ने छेड़ते हुए कहा...
उदयवीर- वो मैं तो बस .
सूजन सिंह- अरे तुम्हे छेड़ रहे हैं भाई साब,
पूर्वी- तो चची क्या सोचा.
माधुरी- सोचा क्या बताओ समधी जी, सच में यही करना है.
उदयवीर- हाँ..
माधुरी- अच्छा.
माधुरी सोचने लगी .
रिम- क्या सोच रही हो मम्मी जी अब शर्माना छोडो.
माधुरी को भी ये सब करने में एक अलग उत्तेजना हो रही थी... अपने पूरे परिवार के सामने अपने चूतड़ों को नंगा करके अपने समधी को दिखाना ये सोच कर hi वो उत्तेजित हुए जा रही थी.
माधुरी - ाचा ठीक है करते हैं.
ये कहकर माधुरी उठी और एक तरफ जाकर दीवार को मुँह करके बैठ गयी...
माधुरी- देख लो समधी जी...
वैसे तो माधुरी को कहने की ज़रुरत नहीं थी वहां मौजूद सब लोगो की नज़र उसी पर तिकी हुई थी, उदयवीर के साथ साथ...
माधुरी अपने घुटनो पर आगे को झुकी और फिर अपने दोनों हाथ पीछे लेकर अपनी सारी को उठाना शुरू किआ और फिर साड़ी को अपने चूतड़ों से उठा कर अपने बड़े गोल मटोल चूतड़ उजागर कर दिए, और फिर आगे हाथ टिका कर घोड़ी बन गयी ताकि अचे से लोग उसके चूतड़ों को निहार सकें, आगे झुकने से माधुरी के चूतड़ फैल गए और उसकी गांड का छेड़ और छूट भी सबको अच्छे से दिखने लगी.

ये देख उदयवीर की तो आँखें फटी की फटी रह गयी उनका नंगा लुंड अपनी संधान की गांड देख ठुमके मरने लगा यही हाल दुसरे समधी सूजन सिंह का भी हुआ वो भी माधुरी की गांड देख अपने लुंड को सहलाने लगे, सबसे ज़्यादा बुरा हाल तो चेतन का था जो अपनी माँ को ऐसे देख सब कुछ hi भूल गया था उसका लुंड कच्चे में बिलकुल लोहे का बना हुआ था, ऐसी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी जैसी अभी हो रही थी अपनी माँ को ऐसे देख कर... चेतन का मन तो किआ की अभी जाकर माँ के चूतड़ों के बीच अपना मुँह घुसा कर उनकी गांड के छेड़ को छत लूँ, चेतन की तरह सब hi माधुरी की गांड के साथ कुछ न कुछ करने के सपने देख रहे थे और तभी माधुरी ने बापिस साड़ी से चूतड़ों को ढाका और सीढ़ी हो गयी..
माधुरी- अब तो हो गया न.
हालाँकि किसी का मन तो नहीं था की ये नज़ारा बंद हो पर जो मिला उसकी ख़ुशी भी बहुत थी, सब जानते थे जो हो रहा है वो किसी सभ्य साधारण परिवार में नहीं होना चाहिए पर उत्तेजना वश सब इस कदर पागल थे की कोई न रुकना चाहता था और न hi रोकना.
रिम- हो गया मम्मी अब पता चला पापाजी आज भी क्यों इतने दीवाने हैं तुम्हारे.
चंचल - ाचा क्या पता चला मुझे भी बता.
रिम- देखे नहीं जीजी, मम्मी जी के इतने गोल मटोल बड़े बड़े पतीले देख कर पापाजी क्या तुम्हारे और मेरे पापा भी दीवाने हो गए हैं.
इस पर सब हंस पड़े तो माधुरी ने शर्म से मुँह छुपा लिए वहीं उदयवीर और सूजन सिंह बगले झांकते हुए हंसने लगे ,
माधुरी- अब आगे खेलें.
रमन- हाँ भाई हाँ आगे खेलते हैं.
रमन ने फिर बेलन घुमाया जो की पंकज पर आ कर रुका,
बिमला- लो बिटुआ सब की सजा पढ़ कर सुना रहे थे अब खुद की पढ़ो.
रमन- यही तो मज़ा है यहाँ कोई नहीं बचता.
पंकज- बिलकुल भैया हम कब पीछे हैट रहे हैं.
रिम- तो पढ़ो फिर जीजा,
पंकज- हाँ पढ़ते हैं अह्ह्ह ये रहा - सामने वाले खिलाडी के साथ हस्तमैथुन प्रतिस्पर्धा करनी है, जो पहले स्खलित होगा उसे पूरा नंगा होकर दुसरे खिलाडी को स्खलित होने में जैसी वो चाहे सहायता करनी पड़ेगी...
Madhuri-ye तो कुछ ज़्यादा hi तगड़ा आ गया.
चरण सिंह- तो क्या हुआ कर लेगा पंकज बीटा,
रिम- वैसे जीजाजी मुक़ाबला आसान नहीं होने वाला सामने बिमला चची हैं,
बिमला- अरे पर ये हस्तमैथुन का मतलब का है?
उनके बगल में बैठी सावित्री ने उनके कान में बताया तो बिमला का मुँह फटा रह गया.
बिमला- हाय ढैय्या ये हम कैसे जार पाएंगे सबके सामने.
माधुरी- अरे संधान जी अब ये मत करो हम कैसे कर पाएंगे अभी थोड़ी देर पहले हमारे नंगे चूतड़ देख रही थी न तब नहीं सोचा.
इस पर सब हंस पड़े, जैसे माहौल गरम जो रहा था लोग खुल रहे थे और अब बातें और शब्द भी वैसे hi बोले जा रहे थे पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी.
सावित्री- सही बोलै रमन की मम्मी, हम भी कब से नंगे बैठे हैं सबके सामने, और समधी जी भी तो हैं.
सावित्री ने उदयवीर और चरण सिंह की और इशारा किआ जो बिलकुल नंगे होकर बैठे थे,
Rim-par होगा कैसे?
रमन- अरे दोनों लोग एक दुसरे के सामने होंगे और हस्तमैथुन करेंगे, और एक दुसरे को उत्तेजित करेंगे कुछ भी बोलकर, हाँ एक दुसरे को छूना नहीं है जब तक कोई एक झाड़ न जाये,
चरण सिंह- अरे वाह ऐसा मुक़ाबला देखने में मज़ा आएगा,
उदयवीर थोड़े झिझक रहे थे अपनी पत्नी को सबके सामने ये सब करते देखने के विचार सर पर उत्तेजित भी हो रहे थे,
खैर रमन के कहे अनुसार पंकज अपनी जगह जाकर खड़ा हो गया और फिर सबके उत्साह के साथ बिमला भी झिझकते हुए उसके सामने पहुंच गयी...
दोनों प्रतिद्वंदी एक दुसरे के सामने तैयार थे एक अनोखे मुक़ाबले के लिए...
जारी रहेगी...
चंचल- मज़ेदार पर क्या?
रिम- वही तो सोचना है.
माधुरी - अरे ख़ुशी नहीं दिख रही?
चंचल - वो सो रही है मम्मी जी.
सूजन सिंह- विनीत भी गायब है?
चेतन- वो भी सो रहा है अरे ये बच्चे रात में देर तक फ़ोन चलते रहते हैं फिर लेट तक सोते हैं.
चरण सिंह - अरे कोई नहीं सोने दो यहाँ छुट्टियां मानाने आये हैं आराम करने तो करने दो, वैसे भी बारिश में क्या hi करेंगे.
पंकज- तो फिर क्या किआ जाये आज सोचो सब लोग..
बिमला- बिजली भी नहीं है जो टीवी वगेरा देख कर टाइम काट लें...
चंचल- हाँ अम्मा कुछ और hi सोचना पड़ेगा.. ऐ रिम्मी कुछ सोच न.
रिम- सोच रही हूँ जीजी पर मैं क्या सबब सोचो न... ऐ जी तुम hi सर्च करो न मोबाइल पर कुछ मिल जाये तो...
रमन- एक काम कर सकते हैं... अब आगे.
अपडेट 197
चंचल- क्या?
रमन- अंताक्षरी खेल सकते हैं.
सावित्री - न भैया न ये गण गंवाना नहीं होगा क्यों.
माधुरी- हाँ हमसे भी नहीं होगा..
रिम- अरे मज़ा आता अंताक्षरी में.
उदयवीर- तुम बच्चो का मन हो तो खेल लो अब हमें कहाँ गण याद है कोई.
Poorvi-nahi चाचाजी खेलेंगे तो सब hi...
चंचल- हाँ, खेलेंगे तो सब लोग hi.
पंकज- अरे रमन भाई वो पेन वाला खेल hi बताओ सबको,
पंकज ने रमन को आँख मरते हुए कहा, ये सुनकर जितने भी लोग ये खेल चुके थे वो चौंक गए, रमन भी..
रमन- क्या अरे वो.. वो रहने दो...
रिम- क्यों सही तो था वो hi मज़ेदार था
चेतन- हाँ हाँ वो नहीं कुछ और करते हैं.
चेतन ने रिम्मी को आँखें दिखते हुए कहा...
माधुरी- ऐसा कौनसा खेल था हमें भी बताओ.
सूजन सिंह- हाँ भाई क्या पता हम भी खेल पाएं. क्यों भाई साब.
चरण सिंह - हाँ हाँ बिलकुल. बताओ भाई.
अब रमन का चेहरा देखने लायक था फिर भी वो बातें बनता हुआ बोलै- अरे पापा बेकार सा था वो कुछ और खेलते हैं तुम सब को पसंद नहीं आएगा..
बिमला- अरे बताओ तो छोटे दामाद जी.. अब कछु नहीं तो ये hi खेल लेंगे...
चेतन- अरे तुम सब लोग समझ नहीं रहे, ये साधारण खेल नहीं है.
चेतन झुंझुला कर बोलै.
सूजन सिंह- फिर कैसा खेल है बीटा?
चेतन - एडल्ट खेल है... पंकज भैया तुमने hi धुन लगाडी तुम hi समझाओ..
उदयवीर- दुलत खेल ये कैसा नाम है.
पंकज- अरे चाचाजी, एडल्ट खेल मतलब बड़ों का खेल..
चरण सिंह - अरे तो अब और कितने बढे होंगे हम, अब तो खेल hi सकते हैं. हाहाहाहा.
चेतन और रमन बेचारे परेशां थे की अगर खेल खेला गया तो गड़बड़ हो जाएगी...
चंचल ने चेतन को शांत रहने का इशारा किआ साथ hi चेतन को धीरे से ये भी बोलै- रिस्क ले लो अगर माँ चाहिए तो..... इधर रिमझिम ने भी रमन को आँख मार कर आगे बढ़ने का इशारा किया..
रमन ने गहरी सांस ली और बोलै- तो सब लोग सच में ये खेलना चाहते हो?
सबने हामी भरदी...
चेतन- पर पहले खेल के बारे में जान लो..
माधुरी- हाँ बताओ कैसे खेलना है..
रमन ने फिर सबको खेल के नियम बताये जिस पर पेन जा सिरा रुका उसे सामने वाले के साथ जो लिखा होगा वो करना होगा.
सूजन सिंह- लग तो मज़ेदार रहा है,
बिमला- हाँ भाई साब ऐसा खेल पहले नहीं सुना हमने भी.
चरण सिंह - तो खेलते हैं न फिर.
रमन- उससे पहले मैं पहले hi सबको बता रहा हूँ की कुछ भी लिखा आ सकता है बाद में मत बोलना की ये नहीं करना वगेरा वगेरा, अगर चाहो तो अभी से मत खेलो.
उदयवीर- ये तो कुछ ज़्यादा hi गंभीर खेल लग रहा है,
सूजन सिंह- अरे तो हम भी कहाँ डरते हैं क्यों भाई साब.
चरण सिंह - और क्या जो होगा देखा जायेगा.. क्यों तुम औरतों का क्या कहना है?
माधुरी- हूँ तीनो तो तैयार हैं क्यों बिमला?
बिमला- हाँ हम तैयार हैं, बच्चों तुम लोग.
बिमला ने चंचल रिमझिम और पूर्वी की और पूछा.
रिम- हम भी तैयार हैं चची...
चंचल और पूर्वी ने भी हामी भरी.
रमन- चलो ठीक है फिर शुरू करते हैं...
रमन ने फिर सबको एक गोले में बिठा दिया जिसको जहाँ जगह मिली बैठ गए और इतने में रिम्मी एक बड़ी थाली और बेलन ले आई,
पंकज- बेलन किस लिए?
रमन- आज लोग ज़्यादा हैं तो गोला बड़ा है पेह छोटा रहेगा बेलन सही है. और बेलन को एक तरफ से धागा बांध दिए है जिस तरफ धागे वाला सिरा रुकेगा वो hi पकड़ा जायेगा.
चंचल - हाँ ये सही रहेगा,
रमन- लो पंकज भैया, अपनी ज़िम्मेदारी तुम पकड़ो,
रमन ने फ़ोन पकड़ते हुए कहा.
चरण सिंह - पंकज बीटा की ज़िम्मेदारी मतलब?
रमन- अरे किसको क्या करना है वो फ़ोन में hi लिखा है,
सूजन सिंह- ाचा अच्छा..
रमन ने थाली में रखे बेलन को घुमाया और सब ध्यान से उसे देखने लगे और बेलन सबसे पहले सबकी लाड़ली चंचल पर hi आकर रुका...
चंचल- अरे दादा इतने लोगो के बीच ये हम पर hi रुकना था.
रमन- बताओ पंकज भैया क्या लिखा है भाभी की किस्मत में,
चरण सिंह- अरे अब समझे जिस पर बेलन रुकेगा उसे जो पंकज पढ़ कर काम बताएगा वो करना होगा.
माधुरी- बड़ी जल्दी समझ गए जी..
इस पर सब हंसने लगे,
रिम- अरे जीजा पढ़ो न, देखें तो जीजी की किस्मत में क्या लिखा है.
पंकज- हाँ भाई पढ़ते हैं, तो भाभी तुम्हारे लिए लिखा है- सामने वाले खिलाडी के पसंद के गाने पर नाचना है.
चंचल- धत्त तेरी की.
रिम- मज़ेदार.
बिमला- हाय ढैय्या इसमें भी नाच गाना करना पड़ेगा का?
चेतन- हाँ अम्मा पर जिस पर आये लिखा उसे hi...
सावित्री - किस्मत की बात है फिर तो...
चंचल- पूर्वी, बताओ अपना पसंद का गण ..
चंचल ने खड़े होते हुए कहा...
पूर्वी जो की चंचल के सामने बैठी थी बोली- अरे जीजी कोई भी भोजपुरी गाने पर कमर हिलाडो..
रिम- अरे वाह क्या सही चुना है पूर्वी रुक अभी चलती हूँ एक मस्त भोजपुरी गण
रिमझिम फ़ोन में गाना ढूंढ कर चलने लगी तो सबकी नज़र चंचल पर थी जो गण चलते hi थोड़ा शरमतर हुए नाचने लगी, उसका गदराया बदन और गोरी कमर हिलते देख मर्दों के लुंड उठने लगे

वैसे तो वहां मौजूद सभी मर्दों ने सिवाए उसके बाबा के सबने उसके बदन को भोग लिए था.. पर बेटी को नाचते देख आज उदयवीर को भी एहसास हुआ की उसकी बेटी कितनी सुन्दर है...
पूर्वी और रिम्मी से किसी मामले में काम नहीं, पूर्वी का ख्याल आते hi उनके दिमाग में रात की यादें ताज़ा हो गयी, हाय कल की रात कभी नहीं भूल पाउँगा मैं, जितना मज़ा पूर्वी के बदन को भोगने में आया, वैसे चंचल बिटिया का तो बदन तो उससे भी गदराया हुआ है चंचल बिटिया के साथ और मज़ा आएगा, अरे छी छी ये क्या सोच रहे हैं हम... ये कहकर उदयवीर ने अपने दिमाग को झटका,
इतने में hi चंचल हँसते हुए जगह बदल कर बैठ गयी और खेल आगे शुरू हुआ, चंचल ने आगे आकर बेलन घुमाया जो की सूजन सिंह पर आकर रुका तो सब ताली पीटने लगे.
चंचल - अरे वाह चाचाजी..
माधुरी- अब तो समधी जी नाचेंगे.
सूजन सिंह- अरे संधान जी जो लिखा होगा वही करना है..
चरण सिंह- हाँ क्या पता क्या निकले. पंकज भाई बता तो पढ़ कर.
पंकज- हाँ चाचा पढ़ते हैं., ताऊजी तुम्हारी बरी में लिखा है- सामने वाले खिलाडी के लिए कोई गण गायें...
सूजन सिंह- अरे धत्त्त तेरी की गण कैसे हो पायेगा,
रमन - वो भी मम्मी के लिए गण है पापाजी,
रमन ने कहा तो सूजन सिंह का ध्यान गया की सामने संधान माधुरी थी...
माधुरी- ये सुन शर्माने लगी,
चंचल - गाओ न चाचाजी...
सूजन सिंह- अरे बिटिया अब हमें तो कोई गण याद hi नहीं.
ऋण- अरे पापा याद करो न..
सावित्री- अरे संधान जी तुम hi बोलो न गाने को क्या पता तुम्हारे किये गए दें.
माधुरी- गायें न समधी जी..
माधुरी ने शरमाते हुए कहा...
चरण सिंह - लो भाई अब तो संधान ने भी बोल दिया, सोचलो बेटी की सास की बात नहीं मानोगे..
इस पर सब हंसने लगे,
सूजन सिंह ने थोड़ा सोचा फिर थोड़ा झिझकते हुए बोले- कहाँ फंस गए यार, ाचा तुम लोग भी हमारा साथ देना,
थोड़ा सा झिझकते हुए सूजन सिंह ने गण शुरू किआ- आज हमारे दिल में अजब ये उलझन है... गाने बैठे गाना सामने संधान है..
ये गण सुनते hi शोर मचने लगा और सीटियां बजने lagi..sabka साथ पाकर सूजन सिंह ने यही लाइन एक दो बार और दोहराई फिर हँसते हुए हाथ जोड़ लिए...
उदयवीर- भाई साब मज़ेदार...
चरण सिंह- अरे वाह समधी जी इस प्रतिभा का नहीं पता था तुंहारी.
सूजन सिंह- अरे काहे टांग खींच रहे हैं समधी जी. चलो चलो अब आगे खेल करो रमन बीटा.
रमन- जी पापाजी...
ये कहकर रमन ने hi उनकी जगह बेलन घुमा दिया जो की थोड़ी देर घूमने के बाद बिमला पर जा कर रुका,
सब अरे वाह करके खुश हो गए वहीं बिमला थोड़ा घबरा गयी.
बिमला- हाय ढैय्या हमसे नहीं होगा नाच वगेरा.
रिम- अरे चची डरो मत पापा ने भी तो गया न.
सूजन सिंह- हाँ भाभी जी बस थोड़ी सी हिम्मत दिखानी है जैसे हमने दिखाई थी...
सूजन सिंह की बात सुनते हुए बिमला को रात के नज़ारे याद आ गैर जहाँ सूजन सिंह और विनीत ने मिलकर उसकी जबरदस्त चुदाई की थी, वो ये सोच hi शर्मा गयी और इतना hi बोली- ग भैया कोशिश करुँगी
चंचल - अरे अम्मा हो जायेगा, हम जानते हैं तुम कर लोगी,
बिमला ने अपनी बिटिया को देखा जो की उसका हौसला बढ़ा रही थी और रात के बाद अब उसे चंचल बेटी के साथ साथ एक सहेली भी लगने लगी थी,
रमन - पंकज भैया अब पढ़ो तो सही पता लगे अम्मा को क्या करना है.
पंकज- ग भैया अभी लो, हाँ तो चची तुम्हारे लिए लिखा है- सामने वाले खिलाडी के साथ मिलकर नाचना है किसी प्यारे से गाने पर.
बिमला- लो आ गया न नाचना.
रिम - पर चची अकेले थोड़े hi नाचना है, अपने दामाद के साथ नाचना है,
रिमझिम ने बताते हुए कहा क्यूंकि बिमला के सामने चेतन hi था,
पूर्वी- अरे वाह ये बानी सास और दामाद की जोड़ी.
चंचल- हाँ मज़ा आएगा...
चेतन और बिमला एक दुसरे को देख शर्माने लगे, कल जो कुछ हुआ था उसके बाद दोनों में ज़्यादा बात भी नहीं हुई थी तो दोनों hi थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे, पर कल और रात के बाद से बिमला इतना तो खुल चुकी थी की उसने सोचलिअ वो पीछे तो नहीं हटेगी.
इसलिए खड़े होते हुए उसने बोलै - आओ दामाद जी जल्दी निपटाते हैं.
बिमला से ये सुनकर सब थोड़ा हैरान हुए और खुश भी यहाँ तक की उदयवीर भी अपनी पत्नी को खुलते देख हैरान हो गए पर साथ hi बहुत खुश भी क्यूंकि वो खुद चाहते थे उनकी पत्नी भी खुश रहे ज़्यादा सोचे न और समय का लुत्फ़ उठाये,
चेतन अपनी सास की बात सुनकर खड़ा हुआ और फिर दोनों hi एक और गए,
चेतन- पर गण कौनसा है,
रिम- अभी चलती हूँ कोई रोमांटिक सा.
बिमला- पर हमें नहीं आया तो नाचना उस गाने पर तो?
चेतन- अरे अम्मा तुम हमारा साथ देती रहना बाकि हम सब संभल लेंगे.
चेतन की ये बात सुनकर बिमला को बड़ी ख़ुशी और रहत दोनों मिली,
रिमझिम ने जल्दी hi सरक काजोल का गेरुआ गण लगा दिया और सब ताली बजने लगे,
इधर चेतन अपनी सास के हाथ पकड़ उन्हें अपने कंधे पर रखा और अपने हाथों को अपनी सास की कमर पर रखे और धीरे धीरे इधर उधर हिलने लगे, पहले तो बिमला अपनी कमर पर हाथ पाकर चौंकी पर फिर उसने खुद के दिमाग और बदन को ढीला छोड़ दिया और चेतन अपनी सास को अपने साथ नाचने लगा कभी खुद से चिपकता तो कभी घुमाकर बाहों में ले लेता,
बिमला ठहरी गाओं की नारी उसे कहाँ ऐसा रोमांस करने का मौका मिला था, पर आज अपने दामाद के साथ ये कुछ पल उसे बहुत भ रहे थे, चेतन तो अपनी सास का भरा हुआ बदन महसूस कर उत्तेजित होने लगा था साथ hi खुश भी था..
वैसे सफ़ेद सारी में बिमला के भरे बदन को झूमते देख बाकि मर्दों का मन भी उत्तेजित होने लगा था, चरण सिंह मन hi मन सोचने लगे थे की चंचल को बदन संधान से hi मिला है, उनके लुंड में भी हलचल होने लगी थी, वहीं उनके बेटे रमन का भी यही हाल था, पंकज भी लुंड थामे हुए आँखें जमा कर देख रहा था, सूजन और चेतन hi खुद को खुशनसीब मान रहे थे जिन्होने इस बदन को भोगा था, इधर उदयवीर को अपनी पत्नी को दामाद के साथ देख खुद नहीं पता क्या हो रहा था पर वो उत्तेजित महसूस कर रहे थे,
इधर गाने का अंत होते हुए चेतन ने अपनी सास को पीछे से पकड़ा और उठाते हुए घुमाकर बापिस खड़ा कर दिया,

इतने hi समय में बिमला को अपने चूतड़ों के बीच दामाद का लुंड चुभता हुआ महसूस हुआ तो वो और खुश हो गयी उसे भी नहीं पता क्यों..
खैर दोनों का नाच ख़तम होते hi सबने ताली बजा कर दोनों का स्वागत किआ,
रिम- वाह भैया और चची सच में सरक काजोल की तरह नेचर हो.
माधुरी- हाँ भाई सास दामाद की जोड़ी ने आज रंग जमा दिया.
सावित्री- अरे हम तो बिमला को देख हैरान हैं कितनी सुन्दर लग रही थी नाचते हुए और लगा hi नहीं पहली बार hi कर रही है.
चंचल - हाँ ये तो सही कहा चची मज़ा आ गया देखकर.
चरण Singh-sach में मज़ेदार था..
दोनों ने सबको धन्यवाद् किआ और जगह बदलकर बैठ गए खेल आगे शुरू हुआ और इस बार बेलन चरण सिंह पर आकर रुका,
सूजन सिंह- अब फंसे समधी जी,
चरण सिंह- हाँ यार न जाने क्या करना पड़े इस उम्र में.
पूर्वी- लो अपनी बरी आते hi चाचाजी को उम्र याद आ गयी.
माधुरी- मैं तो कह रही हूँ नाचने को आ जाये तो देखो न जाने क्या क्या याद आएगा.
चरण सिंह- अरे शुभ शुभ बोलो, पंकज बीटा पढ़ दे जल्दी.
सब उनकी नोकझोंक सुन हंसने लगे,
पंकज- चाचाजी तुम्हारी बरी में लिखा है- अपनी सुहागरात की कहानी सुनाओ..
ये सुन सब थोड़ा सा झेंप गए तो कुछ को हंसी आने लगी
चरण सिंह- अरे धत्त्त ऐसे थोड़े hi होता है.
माधुरी - और का ये भी कोई बताने वाली चीज़ है,
चेतन- इसीलिए हमने पहले hi बोलै था की कुछ भी करना पद सकता है..
रमन- हाँ एडल्ट खेल है तो ये सब तो पहले hi बताया गया था,
Savitri-waise बताने में बुराई hi क्या है?
माधुरी- धत्त्त यहाँ बच्चे हैं इनके सामने..
उदयवीर- हाँ बच्चे हैं अच्छा नहीं लगता.
रिम- बच्चे तो ऐसे बोल रहे हो हमें जैसे हम सब दूध पीते बच्चे हैं.
रिमझिम ने कहते हुए रमन को इशारा किआ की साथ दे,
रमन- हाँ अब खेल hi रहे हैं और सब शादीशुदा भी हैं.
सावित्री- हाँ समधी जी बच्चे बढे हो जाएं तो उन्हें दोस्त समझना चाहिए...
माधुरी- अरे बच्चों को ाचा नहीं लगेगा...
सूजन सिंह- अरे बच्चों से hi पूछ लेते हैं वो जैसा कहेंगे वैसा कर लेंगे, क्यों भाई साब.
Udayveer-haan ये सही रहेगा. तो बताओ बच्चों..
रिम- हम तो इंतज़ार में हैं सुनने के,
चंचल - और क्या मज़ा आएगा मम्मी जी और पापाजी के बारे में सुनकर..
रमन- मुझे भी कोई दिक्कत नहीं,
चेतन- मुझे भी नहीं और मम्मी पापा समाज के बनाये नियमो और शर्म छोडो यहाँ आराम करने और आनंद लेने आये हो परिवार के साथ तो खुलकर लो..
चेतन के ये कहने पर चंचल ने उसे छुपके एक चुम्मे का इशारा किआ ये जताते हुए की उसने बहुत सही बोलै...
पंकज- और क्या शर्म के चक्कर में या समाज के हिसाब से चलें तो क्या जो कुछ मज़े मिलते हैं वो मिल सकते...
सूजन सिंह- हाँ भाई ये तो जिंदगी में हमने जाना है की असली मज़ा थोड़ा गलत होने पर hi मिलता है,
ये बात सुनकर सबके मन में अपने अपने काण्ड चलने लगे और जल्दी hi सब लोग हामी भी भरने लगे,
चरण सिंह- ठीक है बच्चो तो सुनो,
Chanchal-je बात.
चरण सिंह ने अपनी सुहागरात के बारे में बताना शुरू किआ हालाँकि उतने अचे से नहीं फिर भी उनका बताना hi रमन और बाकि सब के लिए एक जीत था और चरण सिंह की बात सुनते हुए भी चेतन, रमन, पंकज, चंचल, रिम्मी, और पूर्वी इसे अपनी जीत मानकर मुस्कुरा रहे थे, क्यूंकि इससे आगे का रास्ता खुलता नज़र आ रहा था,
खैर चरण सिंह ने बताना जारी रखा पर बिलकुल सभ्यता के साथ जैसे छूट लुंड की जगह योनि और लिंग और चुदाई की जगह सम्भोग शब्द का प्रयोग किआ, और ये सुन माधुरी नज़रें नीचे किये शर्माए जा रही थी,
बिमला- इन्हे देखो कैसे शर्मा रही हैं नयी दुल्हिन की तरह,
रिम- अरे चची जब की बात है तब तो मम्मी जी नयी दुल्हन hi थी न.
चंचल- हो सकता है मम्मी जी को वो रात याद आ गयी हो,
माधुरी- अभी बताती हूँ तुम दोनों को, हमें छेड़ रही हो...
चंचल - ाचा मम्मी जी एक बात पूछूं?
माधुरी- पूछ...
चंचल- कितनी बार हुआ था?
माधुरी- क्या कितनी बार हुआ था?
चंचल- छुऊं,... वो ससस सम्भोग..
एक पल को तो सबकी आँखें बड़ी हो गयी थी जो चंचल बोलने वाली थी वो सुनकर फिर आखिर में चंचल ने खुद को संभाला...
माधुरी- धत्त्त पिटेगी अभी tu.dekh लो संधान अपनी बिटिया को क्या क्या पूछ रही है..
बिमला- अब तुम सास बहु की बात तुम जानो हमें कुछ नहीं पता.
बिमला का बेबाक जवाब सुन माहौल और बन गया,
रिम - क्या मम्मी जी बहुएं हम हैं शर्मा तुम रही हो ..
माधुरी- तीन बार...
माधुरी ने शरमाते हुए कहा...
इस जवाब पर एक बार फिर से शोर मचा वहीं चरण सिंह और माधुरी शर्माए हुए हंस रहे थे.
माधुरी- अब खेल भी आगे बढ़ाओ..
रमन- हाँ हाँ,
ये कह रमन ने फिर से बेलन घुमाया जो की सावित्री पर आकर रुका,
माधुरी- अब फांसी बीटा बहुत. मज़े ले ताहि थी दूसरो के.
बिमला- कोई नहीं अब हम मज़े लेंगे.
सावित्री- तो का हुआ हम डरते थोड़े hi हैं, पंकज बीटा बताओ क्या लिखा है..
चंचल- ये हुई बात चाची...
रिम- ऐसे hi जोश में खेला जाता है खेल तभी मज़ा आता है...
पंकज- सुनो तै जी तुम्हारी बरी में लिखा है- लो तुम्हे भी नाचना है एक कामुक गाने पर...
चंचल - आज सबको नाचना पद रहा है...
रिम- हाँ
माधुरी- तैयार हो संधान जी...
सावित्री- हाँ बिलकुल गण तो बजाओ कोई.
सावित्री ने खड़े होते कहा, चरण सिंह और उदयवीर उत्सुक हो गए संधान का नाच देखने के लिए...
खैर रिमझिम ने अपनी मम्मी के लिए भी एक भोजपुरी गण लगा दिया और सावित्री भी पूरे जोश में अपनी भरी चूचियां हिलाते हुए थिरकने लगी.. पल्लू तो पहले झटके में hi सरक कर उनकी चूचियों का मादक नज़ारा सबको देने लगा,

भोजपुरी गाने भी कामुकता से भरे होते हैं ये भी वैसा hi रहा तो सावित्री को अपने नाच में भी वैसी hi कामुक भाव चेहरे पर दिखने पड़े जिससे देखने वालों के भाव बदलने लगे, रमन जो की अपनी माँ और भाभी और बहन को छोड़ hi चूका था अब अपनी सास को लेकर भी उसके मन ने अरमान उठने लगे वहीं उदयवीर और चरण सिंह भी सावित्री के जलवों से बचे नहीं रहे, चेतन खुश था जी की उसने रात को इस बदन को भोग लिए है..
खैर जल्दी hi ये नज़ारा भी बंद हुआ, क्यूंकि गण ख़तम हो गया था, और सावित्री हांफती हुई जगह बदल कर बैठ गयी, सबने ताली बाज़ा कर उत्साह बढ़ाया खैर खेल आगे चला बेलन एक बार फिर से घूमा और इस बार मनो सावित्री ने कोई जादू किआ हो माधुरी पर आकर रुका...
सावित्री- अब आये मज़े,
माधुरी- कौनसा टोटका कर दिया तुमने,
रिम- अरे मम्मी जी टोटका नहीं है बेलन ने तुम्हे चुना है,
माधुरी- चुना नहीं फंसाया है.
चरण सिंह- अरे हमारी बारी में बफी खुश हो रही थी अब खुद की आई तो फंसाया है.
माधुरी- ाचा ठीक है न, पंकज बीटा क्या लिखा है पढ़ तो.
पंकज- चची तुम्हारी बरी में लिखा है- अपने सामने के खिलाडी के कहे हुए गाने पर नाचना है.
माधुरी- ले कितना नाचना नाचना आ रहा है...
सावित्री- अब आ गया तो नाचना तो पड़ेगा hi,
बिमला- और क्या हम भी तो नाचे थे.
माधुरी- तुम लोग hi बदला ले रहे हो,
पूर्वी- चलो चाचाजी नचाओ अपनी संधान को.
पूर्वी ने उदयवीर से कहा जो की माधुरी के सामने थे,
उदयवीर- अरे हम कक बताएं जो ठीक लगे करलो.
रिम- ऐसे कैसे चाचाजी इतना ाचा मौका मिला है बेटी की सास को नाचने का,
चंचल - हाँ बाबा, छोडो मत.
सबके उकसाने पर उदयवीर ने कुछ सोचा और बोले- संधान जी का नाम माधुरी है तो माधुरी दीक्षित के hi किसी गाने पर हो जाये.
रिम- अरे वाह क्या आईडिया निकला है चाचाजी.
रिम्मी ने अपने फोर में कोई गण ढूंढते हुए कहा.
इधर माधुरी सबको देख शर्मा रही थी
चंचल- तैयार हो मम्मी और शर्माना छोडो,
रमन- हाँ मम्मी शर्माओ मत खुलकर मज़े लो,.
रमन की बात से माधुरी को अपनी और बेटे की चुदाई याद आ गयी जिसे याद कर उसके अंदर की शर्म जैसे गायब हो गयी उसने सोचा जब बेटे से छुड़वा सकती हूँ तो ये क्या चीज़ है,
तभी रिम्मी ने गण भी चला दिया और गण भी धक् धक् करने लगा,
माधुरी भी माधुरी की तरह अपना सीना और बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे करते हुए कमर हिलने लगी, कुछ hi पलों में उनकक पल्लू नीचे गिर गया जिसको उठाने की माधुरी को कोई ज़रुरत नहीं दिखी और वो कमर हिला हिलाकर नाचने लगी

और उसका भरा हुआ गोरा बदन मांसल पेट और गहरी नाभि देख कर जो लुंड अब तक आधे आधे उठे थे अब पूरे उठ गए थे, रिम्मी आउट चंचल भी अपनी सास का ये रूप देख खुश थी,
चेतन तो अपनी माँ को देख सोचने लगा अभी उठ कर छोड़ दूँ सबके सामने तो वहीं दोनों संधियों का भी बुरा हल था, बस पंकज और रमन खुश थे क्यूंकि वो लोग पहले hi उसे छोड़ चुके थे...
खैर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ ये नाच भी ख़तम हुआ जिसमे उदयवीर तो अपनी संधान पर लट्टू हिहो गए,
खेल आगे बढ़ा और इस बार बिमला पर आकर रुका जो किलसते हुए बोली- अरे ये तो हमारे पीछे hi पद गया है...
माधुरी- अब ये तो बेलन और तुम्हारी दोस्ती है..
सावित्री- हाँ चलो दामाद जी बताओ पढ़ कर बिमला रानी को क्या करना है अब.
बिमला- हाँ बताओ लल्ला देखते हैं क्या होता है..
पंकज- ग चची तुम्हारी बरी में लिखा है- पसंद के गाने पर नाचना.
बिमला- अरे फिर से नाचना ये कैसा खेल है.
माधुरी- हाँ इसमें तो बस नाचना नाचना hi आ रहा है.
पंकज- हाँ भाई रमन बस सब को नचवाते hi रहोगे का आज और कुछ आ जी नहीं रहा है.
रमन- अरे सब परिवार वाले खेल रहे हैं तो हमने आसान और साधारण कामो वाला पेज खोल कर दिया है...
चरण सिंह- अरे आसान कामो वाला क्यों?
चेतन- अरे पापा अगर एडल्ट वाले काम आएंगे तो आप लोग hi चौंक जाओगे बहुत कठिन तो नहीं पर अलग काम होते हैं उसमे..
माधुरी- अलग मतलब कैसे?
रमन- ये समझ लो की जो सुहागरात की कहानी सुनाई थी न वो तो शुरुवात भी नहीं है उसकी और भी ज़्यादा कामुक और उत्तेजक काम...
उदयवीर- अरे सबके सामने करने होते हैं?
पंकज- सबके सामने और किसी के भी साथ.
बिमला- हाय ढैय्या.
कुछ देर के लिए तो सबके बीच शांति ठहर गयी हालाँकि सब के मन में यही जिज्ञासा उठ रही थी की कैसे कैसे काम करने पढ़े होंगे कितने कामुक होते होंगे कैसा लगेगा सबके सामने, पर खुल कर बोलने में भी शर्मा रहे थे, चरण सिंह जो की अपनी दोनों बहुओं को छोड़ चुके थे परिवार में खुलने का उन्हें ाचा मौका लग रहा था, सूजन सिंह तो चाहते hi यही थे, उदयवीर के मन में भी कामुकता जाग रही थी पर उनकी शर्म उन्हें रोक रही थी, माधुरी अपने बेटे से छोड़ने के बाद अब उसे तो खेलने में कोई समस्या नज़र नहीं आ रही थी, वहीं बिमला भी अब पूरी तरह से खुद को खोल चुकी थी वो जानती थी अगर आनंद लेना है तो खुलना hi पड़ेगा,
सबके मन में यही चल रहा था पर कोई भी आगे आकर बोलने को तैयार नहीं था,
रमन- तो बताओ सब क्या करना है? आगे खेलना है इसी पर या दूसरा पेज निकलना है?
इस सवाल से सब एक दुसरे को झाँकने लगे,
रिम्मी ने चंचल और पूर्वी को इशारा किआ की उन्हें hi पहल करनी होगी,
रिम- मैं तो तैयार हँ,
चंचल- मैं भी, सब परिवार वाले hi तो हैं यहाँ, क्या दिक्कत है.
पूर्वी- मैं भी तैयार हूँ.
पंकज- अगर ये लोग तैयार तो हम भी तैयार हैं.
चेतन- मैंने तो कहा hi, अगर आनंद लेना है तो शर्म और नियमो को छोड़कर hi आगे बढ़ना होगा, मैं तो तैयार हूँ.
रमन- मैं भी तैयार हूँ,
अब बच्चों ने पहल कर दी थी और अपना फैसला भी सुना दिया था अब बात बड़ों पर आ गयी थी,
सूजन सिंह- क्या कहते हो भाई साब, उदयवीर भाई साब?
उदयवीर- तुम्हारी क्या राइ है?
सूजन सिंह- हम तो तैयार हैं बच्चों के साथ मिलने के लिए.
चरण सिंह- हम भी यही सोच रहे थे बच्चों की दोस्ती पाने के लिए यही सही रहेगा,
उदयवीर- और तुम तीनो संधानो का क्या ख्याल है?
माधुरी- मैं तो खेलूंगी.
सावित्री- मैं भी तुम बताओ जल्दी बिमला रानी,
बिमला- जो चंचल के पापा सही समझें..
चरण सिंह- लो भाई संधान जी ने तो तुम पार दाल दिया सारा जिम्मा,
उदयवीर थोड़ा सोच में पद गए हालाँकि चाहते वो भी थे फिर भी झिझक रहे थे इतने में hi उनकी नज़र पूर्वी से मिली जिसने हाँ में सर हिलाकर उन्हें इशारा किआ तो अगले hi पल उदयवीर बोले- ठीक है जब सारा परिवार तैयार है तो हमें क्या समस्या होगी...
ये सुनकर सब खुश हो गए,
रमन- बहुत बढ़िया, अब सब राज़ी हैं तो पहले hi बता रहा हूँ कोई बाद में ये न कहे की मैं ये नहीं करूँगा, ंविं ये नहीं कर पाऊँगी, जो आएगा करना होगा.
चेतन- हाँ भाई शर्म को अब भूल जाओ, और हो सकता है इस खेल के बाद कुछ रिश्ते पूरी तरह बदल जाएँ और उस तरह से खुल जाएं जैसा कभी सोचा भी न हो, तो सब तैयार हैं?
सूजन सिंह- अब ओखली में सर दे hi दिया है तो क्या डरना,
चरण सिंह- हाँ बिलकुल.
उदयवीर- अब शुरू करो फिर.
रमन बेलन घूमने चला तो माधुरी ने उसे टोका- अरे बेलन क्यों घुमा रहा है, बिमला रानी पर रुका था उन्ही की बरी है,
बिमला ये सुन मुस्कुराते हुए बोली- देखो तो भूली नहीं,
रमन- हाँ सही में, अरे पंकज भैया, लाओ दूसरा पेज निकल दूँ.
रमन पंकज से फ़ोन लेकर दूसरा पेज खोल कर देता है और अब पढ़ने को कहता है,
पंकज- बिमला चची तुम्हारा नया काम है- अपने किन्ही दो कपड़ो को उतरना और सामने वाले खिलाडी को देना अगर वो चाहे तो बदले में अपना कोई एक कपडा दे सकता है वही पहनना hai.par आपके उतरे हुए कपडे कोई नहीं पहन सकता..
बिमला- हाय ढैय्या ये तो नंगा करवाने लगा,
चेतन- यही तो है कामुक खेल सासुमा.
माधुरी- अब नहीं नहीं मत करना.
बिमला- अरे हूँ कहाँ मन कर रहे हैं, हमारे सामने तो रिम्मी बिटिया है.
रिम- हाँ चची चलो दो कपडे दो मुझे, वैसे चिंता मत करो तुम्हे नंगा नहीं होने दूंगी,
रिम्मी ने खिलखिलाते हुए कहा,
बिमला- कहाँ उतरने हैं?
सावित्री- अरे कमरे में जाकर कर आओ अदला बदली,
बिमला- हाँ हाँ चल रिम्मी.
रिम्मी और बिमला कमरे में गैर बाकि सब उत्तेजित होकर इंतज़ार करने लगे,
सूजन सिंह- ये तो सच में थोड़ी खतरनाक से काम देने लगा,
चेतन- तभी तो हमने पहले hi चेता दिया था सबको..
चरण सिंह- कोई बात नहीं अब हो गया है तो कर hi लेंगे.
खैर कुछ देर बाद पहले रिम्मी बहार निकली जिसमें किसी को कोई बदलाव नहीं दिखा,
रिम- आ जाओ चची काहे शर्मा रही हो सब अपने hi लोग हैं.
रिमझिम के कहने पर बिमला झिझकते हुए बहार आई जिसे देख सबकी आँखें चौड़ी हो गयी

बिमला ने ऊपर सिर्फ एक ब्रा पहन राखी थी साड़ी के साथ वो ब्रा भी रिम्मी की थी जो की बिमला की भरी चूचियों को संभल नहीं प् रही थी, और आधे से ज़्यादा चूचियां सबको नज़र आ रही थी साथ बी गदराया पेट आउट गहरी नाभि भी जिसे देख सरे मर्दों के लोडे टनटनाने लगे,
उदयवीर तो अपनी पत्नी को ऐसे देख आहें भरने लगे- उनका लुंड भी कड़क हो गया,
पूर्वी- हाय चची क्या मस्त लग रही हो हीरोइन फ़ैल हैं.
चंचल- सही में अम्मा, बहुत कॉमिक और सुन्दर लग रही हो,
चरण सिंह अपनी संधान को यूँ देख उत्तेजित होने लगे पर अपने जज़्बातों को दबाते हुए बोले- सच में उदयवीर भाई तुमसे जलन हो रही है हमें तो,
उदयवीर सबको अपनी पत्नी को कामुक तरीके से देख बेहद उत्तेजित हो रहे थे और बोले- आरर भाई साब हम भी पहली बार देख रहे हैं ऐसे.
बिमला- अब सब बातें बंद भी करो आगे खेलते हैं.
बिमला ने जगह बदल कर बैठते हुए कहा..
रमन - हाँ हाँ चलो आगे खेलते हैं
रमन ने आगे बढ़ कर बेलन घुमाया जो की उदयवीर पर आकर रुका,
चरण सिंह- लो भाई पत्नी के बाद पति की बरी आ गयी,
रिम- चाचाजी hi बचे हुए थे बड़ी देर से,
उदयवीर- अब तो फंस गए न बिटिया,
पंकज- चाचाजी तुम्हारी बरी में लिखा है- सामने वाले खिलाडी को अपना एक कपडा दान दो.
उदयवीर- धत्त तेरे की..
सामने सावित्री थी जो की बोली - क्यों भैया क्या दान डोज?
इस पर सब हंसने लगे..
उदयवीर- जो तुम मांग लो भाभी...
सावित्री- तो फिर धोती दे दो कुरता लम्बा है तुम्हारी इज़्ज़त बचाये रखेगा,
इस पर सब हंसने लगे,
माधुरी- लो भाई बीवी का ब्लाउज गया तो पति की तो धोती hi चली गयी,
उदयवीर- देख लीजिये संधान कैसा जुल्म हो रहा है,
खैर उदयवीर ने धोती उतरके सावित्री को दे दी, उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी खेतों में अक्सर कच्चे में hi काम करते थे,
खेल दोबारा शुरू हुआ और बेलन इस बार रमन पर आकर रुका,
रमन- लो घूम फिर कर हम पर hi आगया,
चंचल- कोई नहीं भैया तुम तोह कर hi लोगे तुमने धोती भी नहीं पहनी.
ये सुनकर सब हंसने लगे,
रमन- हाँ भाभी कर तो हम कुछ भी लेंगे, बताओ पंकज भैया क्या लिखा है?
पंकज- भाई लिखा है - अपने सामबे वाले खिलाडी के बदन में जो आपका पसंदीदा हिस्सा हो उसे चूमना है दो मिनट तक,
पूर्वी- अरे बाप रे, क्या पसंद है तुम्हे जीजा?
क्यूंकि पूर्वी hi रमन के सामने थी,
रमन- तुम तो हमें पूरी पसंद हो साली जी..
रमन ने हँसते हुए कहा..
पंकज- अरे भैया पूरी ले जाओगे तो हमारा क्या होगा,
ये सुन सब हंसने लगे,
रमन- आओ साली जी बीच में आओ..
पूर्वी उठ कर आई और रमन के सामने कड़ी हो गयी,
पूर्वी- अब बताओ जीजा क्या पसंद है.
रमन- अभी पता चल जायेगा,
ये कहकर रमन नीचे बैठ गया और पूर्वी की साड़ी उसके पेट से हटाकर अगले hi पल अपने होंठ पूर्वी के पेट पर लगा दिए और जगह जगह चूमने लगा.
पूर्वी- आह्ह्ह्ह ुहममम जीजा..
पहले तो लोग ये नज़ारा देख कर उत्तेजित हुए hi पूर्वी की सिसकी ने उन्हें और उत्तेजित कर दिया, चरण सिंह तो सोचने लगे दोनों बहुएं मिल hi गयी बस पूर्वी भी मिल जाये, उदयवीर का तो लुंड तन गया ये सोच कर की रात को उन्होंने पूर्वी को ठीक से चूसा क्यों नहीं, बाकि सब तो पूर्वी को कई बार भोग hi चुके थे, उधर औरतों को भी ये देख उत्तेजना बढ़ रही थी सब तक ताकि लगाए रमन के होंठ और पूर्वी के पेट को देख रही थी, अगले hi पल रमन ने अपनी जीभ पूर्वी की नाभि में घुसड़ी तो पूर्वी के साथ साथ कई लोगो की आह्ह्ह्ह निकली...
रिम- चलो चलो समय हो गया पूरा तुम तो मेरी बहन के पेट के पीछे hi पद गए..
चेतन - वैसे गलती रमन की नहीं है पूर्वी का बदन है hi इतना सुन्दर...
माधुरी- अरे शर्म करो उसके पति के सामने hi उसके बदन के बारे में ये सब बोल रहे हो.
पंकज - अरे चची यही तो मज़ा है इस खेल का आगे देखो क्या क्या होता है...
माधुरी- लग तो रहा है बड़ा बवाल होगा..
पूर्वी- अरे अब आगे भी खेलो तभी तो पता चलेगा क्या होगा...
चरण सिंह- हाँ भाई खेलो आगे..
रमन ने बेलन घुमाया जो की चंचल पर आकर रुका
चंचल- लो भाई आ गयी हमारी बारी.
रिम- आखिर कार बताओ जीजा जी क्या लिखा है हमारी प्यारी जीजी के लिए.
पंकज- अभी बताते हैं भाभी तुम्हारे लिए लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी को चूमना है तीन मिनट तक....
पूर्वी- लो जीजी तुम्हारा भी नंबर आ गया चुम्मा छाती का...
माधुरी- हाय ढैय्या ये कैसे होगा...
चंचल के सामने बैठी माधुरी ने कहा...
सावित्री - कैसे होगा मतलब.
माधुरी- हमारी बहु और हम कैसे चूम सकते हैं एक दुसरे को.
रिम- अरे मम्मी जी सब हो जायेगा,
चंचल- हाँ मम्मी जी सब हो जायेगा तुम आओ तो सही.
पूर्वी- हाँ चची उठो तो.
माधुरी हिचकिचाते हुए उठी, और चंचल भी अपनी जगह से उठी दोनों बीच में आये,
माधुरी हिचकिचा भी रही थी पर अंदर hi अंदर उत्तेजित भी हो रही थी, हालाँकि उसने अपनी दोनों संधानो के साथ ये सब बहुत किआ था पर बहु की और सबके सामने की बात कुछ और थी,
माधुरी ने चंचल की और देखा तो वो उसे देख मुस्कुरा रही थी, और धीरे से चंचल ने अपना चेहरा आगे बढ़ाना शुरू किआ तो माधुरी भी खुद बा खुद आगे हो गयी और फिर दोनों की hi आँखें बंद हो गयी, अगले hi पल माधुरी को अपने होंठों पर अपनी बड़ी बहु के नरम रसीले होंठ महसूस हुए और उसके बदन में करंट दौड़ गया, उसके होंठ भी खुल गए और बहु के होंठों को उसने अपने होंठों में भर लिए और कुछ hi पालो ने सास बहु बहुत hi कामुक तरीके से एक दुसरे के होंठों को चूसने कागि.
और ये नज़ारा देख बाकि सब की आँखें चौड़ी हो गयी, मर्दों के लुंड तन गए तो औरतें अपनी छूट को पसीजता हुआ महसूस करने लगी, उदयवीर का बुरा हाल था अपनी बेटी को अपनी सास के साथ होंठ चूसते देखते हुए उनका लुंड पूरा अकड़ गया था,
बिमला तो बेटी के साथ ये खेल खेल चुकी थी और उसके बदन को चख चुकी थी इसलिए उसे अंदाज़ा हो रहा था की संधान को कैसा लग रहा होगा, माधुरी और चंचल दोनों hi बेहद उत्तेजित हो गयी थी आउट जब तक समय ख़त्म हुआ तब तक दोनों की छूट से पानी बहने लगा था,
समय ख़त्म होने पर दोनों अलग हुए तो दोनों के चेहरे पर hi मुस्कान थी, सबने ताली बजाकर उत्साह बढ़ाया..
सावित्री- क्यों समाधान जी कैसा लगा,
माधुरी- बड़े मीठे होंठ हैं बहु के, मज़ा आया,
माधुरी ने मुस्कुराते हुए कहा, जिससे पता चल रहा था की अब धीरे धीरे सब खुल रहे हैं क्यूंकि सबने hi इस पर सहमति जताई,
चंचल- तुम्हारे भी बहुत मीठे हैं मम्मी जी, बहुत मज़ा आया मुझे भी..
चरण सिंह- अरे सास बहु का प्यार हो गया तो खेल आगे बढ़ाएं.
Rim-dekho तो पापाजी को जलन हो रही है मम्मी से की बहु के होंठ चूसने का मौका उन्हें मिला इन्हे नहीं..
इस पर सब हंसने लगे...
सूजन सिंह - चलो खेल आगे बढ़ाओ..
रमन ने फिर से बेलन घुमाया, जो की सावित्री पर आ कर रुका,
माधुरी- चलो समाधान हो जाओ तैयार.
सावित्री- हम तो तैयार hi हैं...
पंकज- तो सुनो लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी के साथ बिना हाथों का प्रयोग किये ये बेलन लेकर पूरे कमरे का चक्कर लगाना है..
सावित्री- ये तो आसान है आ जाओ समधी जी..
सावित्री ने चरण सिंह से कहा जो उसके सामने थे,
पंकज- अरे तेजी पूरी बात तो सुन लो,
सावित्री- ाचा अभी और भी है,
माधुरी- और का बड़ी जल्दी हो रही है समधी के पास जाने की.
इस पर सब हंसने लगे.
पंकज- हाँ अब इसमें समस्या ये है की सामने वाले खिलाडी की आँखें बंद रहेंगी और तुम्हे उसे रास्ता बताते हुए आगे लेजाना है, और जितनी बार बेलन गिरेगा दोनों को hi उतने कपडे उतरने पड़ेंगे.
चरण सिंह- अरे बरी संधान की कपडे हमारे क्यों उतरेंगे,
पूर्वी- नियम तो नियम है चाचाजी और बेलन के दोनों सिरे hi खतरनाक हैं.
माधुरी- क्यों संधान हमारी बरी पर बोल रही थी हो जायेगा हो जायेगा अब करो..
सावित्री- हाँ तो कर रहे हैं मन कहाँ कर रहे हैं. आओ समधी जी.
बिमला- कितने प्यार से बुला रही हैं समधी जी को,
चरण सिंह और सावित्री दोनों एक कोने पर पहुंचे दोनों ने एक दुसरे की और मुँह किआ और बेलन के एक एक छोर को अपने अपने पेट पर टिका दिया,
रिम- पापाजी आँखें बंद.
चरण सिंह- हाँ बीटा कार्टर हैं.
चरण सिंह ने आँखें बंद कर ली..
और सावित्री ने उन्हें बताना शुरू किआ पर ऐसे काम के लिए दोनों में तालमेल होना बहुत ज़रूरी था चरण सिंह ने एक कदम आगे पहले बढ़ा दिया और बेलन गिर गया,
सावित्री- ओह्हो समधी जी साथ में रहो न..
चरण सिंह- अरे तुमने hi कहा चलने को..
सावित्री पर हमारे साथ साथ चलो न...
रिम- आज हो गया अब ये पूरा.
चंचल- हाँ..
माधुरी- सही है गिरने दो कपडे उतरेंगे अभी दोनों के..
इसी तरह गिरते गिरते तीन बार बेलन गिरा कर कैसे भी दोनों ने एक चक्कर पूरा किआ...
रमन- चलो पूरा तो हुआ आखिर.
माधुरी- अब कपडे उतरो भाई..
बिमला- तुम्हे बड़ी जल्दी है कपडे उतरवाने की.
माधुरी- अब खेल तो खेल है नियम मैंने पड़ेंगे.
चरण सिंह- कितने उतरने पड़ेंगे.
चंचल- तीन पापाजी.
चरण सिंह- अरे बच्चों दो hi उतर दें तो चलेगा क्या?
रिम- नहीं नहीं चलेगा.
चरण सिंह- अरे तीन hi तो कपडे पहने हैं हमने.
सूजन सिंह - अरे तो क्या हुआ खेल है बच्चे बुरा नहीं मानेंगे..
सावित्री- हाँ अब उतरने हैं तो उतर hi देते हैं
सावित्री अपना ब्लाउज खोलती हुई बोली तो चरण सिंह भी कुरता उतरने लगे, ब्लाउज और कुर्ते के बाद ब्रा और धोती की बरी आई दोनों ने उतर के नीचे गैर दिया तो सावित्री की बड़ी छुछियां सबके सामने नंगी थी वहीं चरण सिंह के बदन पर सिर्फ एक कच्चा था,
चरण सिंह- बच्चों सच में ये भी उतारें क्या?
सूजन सिंह - और क्या..
माधुरी- हाँ बिलकुल उतारो और सावित्री बहन तुम भी..
चरण सिंह ने बात मानते हुए कच्चा नीचे सरका दिया और पूरे नंगे हो गए, उनका कड़क लुंड सबके सामने था पूर्वी और सावित्री बिमला पहली बार देख रही थी जिन्हे लुंड देखकर कुछ हलचल हुई...
चरण सिंह पूरे नंगे होकर जाकर बैठ गए..
रिम- लो पापा जी तो हो गए नंगे अब .
बिमला- अब तुम्हारी मम्मी की बरी.
चंचल- हाँ चची उतरो न.
सावित्री ने गहरी सांस ली और बोली- लो ठीक है उतरती हूँ...
ये कहकर सावित्री ने अपनी साड़ी उतार दी, और सबके सामने पेटीकोट में आ गयी...
और फिर अपनी जगह आकर बैठ गयी, अब कोई भी बता सकता था की आंगन में माहौल गरम हो गया था, सब उत्तेजित हो रहे थे और मर्द रह रहकर सावित्री के नंगे छूछीयो और बिमला की अधनंगी चूचियों को देख रहे थे वहीं औरतें चरण सिंह के लुंड को निहार रही थी जो की उसे छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहे थे..
आगे खेल हुआ, और बेलन इस बार रिमझिम पर आकर रुका,
चंचल- अरे वाह रिम्मी आखिर तेरी बरी आ hi गयी,
रिम- हाँ जीजी ढूंढ hi लिए बेलन ने मुझे,
चेतन- नाचना आना चाहिए बस ये hi नहीं नाची अभी तक,
पूर्वी - तुम तो नक्च लिए जीजाजी अपनी सासु माँ के साथ,
पंकज- लो सुनो साली जी तुम्हे क्या करना है- सामने वाले खिलाडी से उसके कपडे उतरवाने के लिए मानना है, अगर सामने वाले खिलाडी को मानाने में असमर्थ होते हो तो जितने उसके बदन पर कपडे हैं उतने hi तुम्हे उतरने होंगे. सामने वाला खिलाडी मैंने के लिए कुछ बदले में कुछ भी मांग रख सकता है.
चंचल- अरे वाह थोड़ा मुश्किल काम मिला है, पर देखते हैं क्या दिमाग लगाती है रिम्मी.
पूर्वी- सामने हैं भी जेठ जी.
चेतन- हाँ और हम इतनी आसानी से नहीं मैंने वाले,
रिम- ऐसे मत करो भैया,
चेतन- ाचा बदले में हमें क्या मिलेगा..
रिम- वो तो तुम बताओ क्या मांग है तुम्हारी,
चेतन- हम तो कह hi रहे थे की नाच के दिखाओ.
पूर्वी- लो जीजा की सुई अभी तक नाच पर hi अटकी हुई है,
चंचल- अरे सही है हम सबमें सबसे ाचा नाचती है रिम्मी.
चरण सिंह- फिर तो सही मांग है,
बिमला- नाच दे रिम्मी बिटिया हम भी तो देखें..
सबकी मर्ज़ी जानकर रिम्मी कड़ी हुई और एक भोजपुरी कामुक गाने पर अपना बदन बड़ी कामुकता से चलाया की देखने वाले देखते रह जाएं..

रिम्मी का कामुक नाच देख कर उसके नंगे बैठे ससुर का लुंड फुदकने लगा चरण सिंह का मन तो हुआ अभी जाकर बहु के कपडे उतर कर छोड़ने लगें, यही हाल उदयवीर का था जो सोच रहे थे पूर्वी तो थी hi रिम्मी तो अलग hi है, हाय लुंड अकड़ गया इसे देख कर काश इसे भी छोड़ पता एक बार, बाकि सब मर्दों का भी यही हाल था..
खैर नाच ख़तम हुआ तो सबने ताली पीट कर रिम्मी का उत्साह बढ़ाया,
चंचल- क्यों जी क्या दे रहे हो, इतने अचे नाच के बदले रिम्मी को.
चेतन- अरे जो चाहे रिम्मी मांग ले अब.
रिम्मी - तो भैया सरे कपडे उतरदो अपने.
चेतन- अरे सरे? एक दो तो छोड़ दे..
रिम्मी- नहीं भैया फिर मुझे भी उतरने पड़ेंगे.
चेतन- ाचा बस कच्चा छोड़ दे बाकि उतर रहा हूँ.
पूर्वी- ये भी ठीक है रिम्मी मान जा.
रिम- ठीक है भैया..
इसके बाद चेतन ने सरे कपडे उतर दिए सिर्फ कच्चा छोड़कर जिसमे उसका लुंड खड़ा हुआ तम्बू बना रहा था और सबको दिख रहा था, माधुरी एक बेटे से छोड़ने के बाद दुसरे का लुंड देखकर उत्तेजित हो रही thi..aur सोच रही थी की चेतन का लुंड नंगा कैसा दीखता होगा,
चेतन के बाद रिमझिम ने भी अपनी साड़ी उतर दी और सबके सामने पेटीकोट और ब्लाउज में बैठ गयी, जिसे देखकर सब अपनी आँखें सेकने लगे,
खेल आगे शुरू हुआ और बेलन इस बार माधुरी पर आकर रुका,
माधुरी- लो मुआ हम पर रुक गया आकर,
सावित्री- ाचा दूसरो पर रुके तो ठीक खुद पर रुके तो मुआ,
चरण सिंह- और का अपनी बरी पर बिदक जाती हो.
बिमला- कोई नहीं अब पता तो चले संधान जी को करना क्या है,
माधुरी- बता पंकज बीटा क्या लिखा है नसीब में.
चंचल- मम्मी की बरी में मज़ा आता है.
माधुरी- तू बड़े मज़े ले रही है, बता तू पंकज..
पंकज- चची तुम्हारी बरी में लिखा है, - अपने सामने वाले खिलाडी को उसके सरे कपडे उतरने के लिए मानना है और बदले में उसे अपने बदन का उसका पसंदीदा अंग नंगा कर के दिखाना है.
माधुरी- हाय ढैय्या ये तो नंगा करने पर आ गया,
सावित्री- तो क्या हुआ हम तो कबसे अधनंगे hi बैठे हैं.
बिमला- हूँ तो उससे भी पहले.
चरण सिंह- हम तो पूरे नंगे हैं.
चेतन- मैं भी.
सावित्री- तो संधान तुम कहे इतना इत्र घबरा रही हो.
माधुरी- अरे बात हमारी नहीं है हमें सामने वाले खिलाडी को मानना है नंगा होने के लिए,
रिम- तो मनाओ न मम्मी चाचा जी को.
रिम्मी ने उदयवीर की और इशारा करते हुए कहा जो माधुरी के सामने थे, बेचारे सहमे से बैठे थे की आगे क्या होने वाला है.
पूर्वी- अब संधान समधी के कपडे उतर आएंगी..
इस पर सब हंसने लगे,
माधुरी- समधी जी उतर दीजिये न कपडे,
उदयवीर- अरे धोती तो पहले hi नहीं है अब ये hi बचा है बदन पर.
रिम- वही तो उतरवाना है चाचाजी,
माधुरी- चंचल बिटिया समझा न अपने बाबा को.
चंचल - अरे मम्मी हम क्या समझाएं तुम समधी संधान की बात है..
माधुरी- समधी जी मान जाओ न. देखो ये भी तो नंगे बैठे हैं.
उदयवीर- पर कैसे बिटिया है यहाँ उसके सामने.
रिम- अरे खेल है चचही और चंचल जीजी को भी कोई समस्या नहीं होगी.. क्यों जीजी?
चंचल- हाँ बाबा हमें कोई परेशानी नहीं है..
पूर्वी- मान जाओ चाचाजी तभी चाचीजी के बदन का एक अंग देखने को मिलेगा.
ये बात सोच उदयवीर ने कुछ सोचा फिर बोले- ठीक है अब सब hi नंगे हैं तो हम क्यों शर्माएं,
ये कह जोश में आकर उदयवीर ने अपने कपडे इतर दिए और पूरे नंगे हो कर खड़े हो गए उनका मोटा लुंड देख कर एक पल को तो माधुरी का मन हुआ की पकड़ कर देखले, फिर खुद को रोका वही. बाकि औरतें भी लुंड को निहार मन hi मन उत्तेजित होने लगी, चंचल कनखियों से अपने बाबा का लुंड देख मस्ताने लगी...
खैर उदयवीर अपने कपडे उतर बैठ गए,
पूर्वी- अब चाचाजी बताओ क्या देखना है.
चंचल - हाँ बाबा इनाम तो ले लो मम्मी जी से,
रिम- कौनसा अंग पसंद है आपको मम्मी जी का.
उदयवीर- अरे ऐसे क्या बताएं...
बिमला- अरे बताओ बताओ ऐसा मौका नहीं मिलेगा,
उदयवीर- हाँ हाँ बताते हैं.
उदयवीर ने भी सोचा की अब मौका आ hi गया है तो क्यों पीछे हैट रहा है, खुद नंगा बैठा है अब शर्म छोड़ और मज़े ले.
रिम- कहाँ खो गए चाचाजी.
माधुरी- हाँ समधी जी बताओ फिर ये निपटाएं..
उदयवीर ने थोड़ा हिचकिचाते हुए बोलै- वो संधान जी का पिछवाड़ा हमें पसंद है..
ये सुनकर सब हैरान रह गए वहीं शोर भी मचने लगे..
चरण सिंह- क्यों भाई तुम हमारी बीवी के चूतड़ों को देखते रहते हो.
चरण सिंह ने छेड़ते हुए कहा...
उदयवीर- वो मैं तो बस .
सूजन सिंह- अरे तुम्हे छेड़ रहे हैं भाई साब,
पूर्वी- तो चची क्या सोचा.
माधुरी- सोचा क्या बताओ समधी जी, सच में यही करना है.
उदयवीर- हाँ..
माधुरी- अच्छा.
माधुरी सोचने लगी .
रिम- क्या सोच रही हो मम्मी जी अब शर्माना छोडो.
माधुरी को भी ये सब करने में एक अलग उत्तेजना हो रही थी... अपने पूरे परिवार के सामने अपने चूतड़ों को नंगा करके अपने समधी को दिखाना ये सोच कर hi वो उत्तेजित हुए जा रही थी.
माधुरी - ाचा ठीक है करते हैं.
ये कहकर माधुरी उठी और एक तरफ जाकर दीवार को मुँह करके बैठ गयी...
माधुरी- देख लो समधी जी...
वैसे तो माधुरी को कहने की ज़रुरत नहीं थी वहां मौजूद सब लोगो की नज़र उसी पर तिकी हुई थी, उदयवीर के साथ साथ...
माधुरी अपने घुटनो पर आगे को झुकी और फिर अपने दोनों हाथ पीछे लेकर अपनी सारी को उठाना शुरू किआ और फिर साड़ी को अपने चूतड़ों से उठा कर अपने बड़े गोल मटोल चूतड़ उजागर कर दिए, और फिर आगे हाथ टिका कर घोड़ी बन गयी ताकि अचे से लोग उसके चूतड़ों को निहार सकें, आगे झुकने से माधुरी के चूतड़ फैल गए और उसकी गांड का छेड़ और छूट भी सबको अच्छे से दिखने लगी.

ये देख उदयवीर की तो आँखें फटी की फटी रह गयी उनका नंगा लुंड अपनी संधान की गांड देख ठुमके मरने लगा यही हाल दुसरे समधी सूजन सिंह का भी हुआ वो भी माधुरी की गांड देख अपने लुंड को सहलाने लगे, सबसे ज़्यादा बुरा हाल तो चेतन का था जो अपनी माँ को ऐसे देख सब कुछ hi भूल गया था उसका लुंड कच्चे में बिलकुल लोहे का बना हुआ था, ऐसी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी जैसी अभी हो रही थी अपनी माँ को ऐसे देख कर... चेतन का मन तो किआ की अभी जाकर माँ के चूतड़ों के बीच अपना मुँह घुसा कर उनकी गांड के छेड़ को छत लूँ, चेतन की तरह सब hi माधुरी की गांड के साथ कुछ न कुछ करने के सपने देख रहे थे और तभी माधुरी ने बापिस साड़ी से चूतड़ों को ढाका और सीढ़ी हो गयी..
माधुरी- अब तो हो गया न.
हालाँकि किसी का मन तो नहीं था की ये नज़ारा बंद हो पर जो मिला उसकी ख़ुशी भी बहुत थी, सब जानते थे जो हो रहा है वो किसी सभ्य साधारण परिवार में नहीं होना चाहिए पर उत्तेजना वश सब इस कदर पागल थे की कोई न रुकना चाहता था और न hi रोकना.
रिम- हो गया मम्मी अब पता चला पापाजी आज भी क्यों इतने दीवाने हैं तुम्हारे.
चंचल - ाचा क्या पता चला मुझे भी बता.
रिम- देखे नहीं जीजी, मम्मी जी के इतने गोल मटोल बड़े बड़े पतीले देख कर पापाजी क्या तुम्हारे और मेरे पापा भी दीवाने हो गए हैं.
इस पर सब हंस पड़े तो माधुरी ने शर्म से मुँह छुपा लिए वहीं उदयवीर और सूजन सिंह बगले झांकते हुए हंसने लगे ,
माधुरी- अब आगे खेलें.
रमन- हाँ भाई हाँ आगे खेलते हैं.
रमन ने फिर बेलन घुमाया जो की पंकज पर आ कर रुका,
बिमला- लो बिटुआ सब की सजा पढ़ कर सुना रहे थे अब खुद की पढ़ो.
रमन- यही तो मज़ा है यहाँ कोई नहीं बचता.
पंकज- बिलकुल भैया हम कब पीछे हैट रहे हैं.
रिम- तो पढ़ो फिर जीजा,
पंकज- हाँ पढ़ते हैं अह्ह्ह ये रहा - सामने वाले खिलाडी के साथ हस्तमैथुन प्रतिस्पर्धा करनी है, जो पहले स्खलित होगा उसे पूरा नंगा होकर दुसरे खिलाडी को स्खलित होने में जैसी वो चाहे सहायता करनी पड़ेगी...
Madhuri-ye तो कुछ ज़्यादा hi तगड़ा आ गया.
चरण सिंह- तो क्या हुआ कर लेगा पंकज बीटा,
रिम- वैसे जीजाजी मुक़ाबला आसान नहीं होने वाला सामने बिमला चची हैं,
बिमला- अरे पर ये हस्तमैथुन का मतलब का है?
उनके बगल में बैठी सावित्री ने उनके कान में बताया तो बिमला का मुँह फटा रह गया.
बिमला- हाय ढैय्या ये हम कैसे जार पाएंगे सबके सामने.
माधुरी- अरे संधान जी अब ये मत करो हम कैसे कर पाएंगे अभी थोड़ी देर पहले हमारे नंगे चूतड़ देख रही थी न तब नहीं सोचा.
इस पर सब हंस पड़े, जैसे माहौल गरम जो रहा था लोग खुल रहे थे और अब बातें और शब्द भी वैसे hi बोले जा रहे थे पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी.
सावित्री- सही बोलै रमन की मम्मी, हम भी कब से नंगे बैठे हैं सबके सामने, और समधी जी भी तो हैं.
सावित्री ने उदयवीर और चरण सिंह की और इशारा किआ जो बिलकुल नंगे होकर बैठे थे,
Rim-par होगा कैसे?
रमन- अरे दोनों लोग एक दुसरे के सामने होंगे और हस्तमैथुन करेंगे, और एक दुसरे को उत्तेजित करेंगे कुछ भी बोलकर, हाँ एक दुसरे को छूना नहीं है जब तक कोई एक झाड़ न जाये,
चरण सिंह- अरे वाह ऐसा मुक़ाबला देखने में मज़ा आएगा,
उदयवीर थोड़े झिझक रहे थे अपनी पत्नी को सबके सामने ये सब करते देखने के विचार सर पर उत्तेजित भी हो रहे थे,
खैर रमन के कहे अनुसार पंकज अपनी जगह जाकर खड़ा हो गया और फिर सबके उत्साह के साथ बिमला भी झिझकते हुए उसके सामने पहुंच गयी...
दोनों प्रतिद्वंदी एक दुसरे के सामने तैयार थे एक अनोखे मुक़ाबले के लिए...
जारी रहेगी...


























































