उधर अनुज उनकी छूट में उंगली कर रहा था और इधर दीदी मेरा लुंड पूरी शिद्दत के साथ चूस रही थी...
तभी अचानक से बहार से किसी की आवाज़ आई- पूर्वी पूर्वी तुम अंदर हो क्या...???
अपडेट 60
हम तीनो की तो जैसे जान hi अटक गयी और पूर्वी दीदी को जैसे hi ये समझ आया की आवाज़ किसकी है वो तो बिलकुल सुन्न पद गयी...
बहार और कोई नहीं बल्कि दीदी के पति यानि पंकज जीजाजी थे... जीजाजी ने फिर एक बार आवाज़ लगाई पूर्वी बोलो न...
मैंने झट से दीदी के मुँह से लुंड निकला और दीदी को थोड़ा हिलाया की कुछ बोले वो तो दीदी मेरी तरफ देखने लगी.. उनके चेहरे पर दर साफ़ दिख रहा था पर मैंने उनके कान में धीरे से कहा कुछ बोलो दी ...हाँ तो बोलो... फिर दीदी ने जल्दी से अपने कपडे सही कर्रे करते बोलै
पूर्वी- ह्ह्हह्ण हाआनंनं मैं अंदर हूँ....
प जीजाजी- अरे कितनी देर से अंदर हो क्या हुआ तबियत तो ठीक है न...
मैं और अनुज अपनी साँसे रोके खड़े थे वहीं दीदी परेशां thi...ki क्या बोलू और इस मुसीबत से कैसे निकालें?..
पूर्वी- नहीं नहीं सब ठीक है बस थोड़ा पेट ख़राब लग रहा था इसलिए आई thi...aaap यहाँ क्या कर रहे हो...?
दीदी ने अपने कपडे ठीक कर किये थे वहीं हम दोनों ने भी अपने पाजामे ऊपर खिसका लिए थे
प जीजाजी- अरे जब से आये हैं तुमसे ठीक से मिल भी नहीं पाए इतनी भीड़ है और अभी अपनी बीवी को इतना सुन्दर देखा तो खुद को रोक नहीं पाए... और ऊपर चले आये...
उनकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर थोड़ी मुस्कराहट आ गयी... वहीं अब दीदी भी थोड़ी नार्मल लग रही थी वो इतना दर नहीं रही थी पर चिंता अभी भी ये थी की यहाँ से निकालें तो निकालें कैसे... अनुज बस हम दोनों को देखे जा रहा था...
प जीजाजी- वैसे तुम्हे पता है न की एक ख़ास बात और है...
पूर्वी- हाँ मैं जानती हूँ तभी तो आज इतना सजी thi...ye कैसे भूल सकती हूँ मैं...
और दीदी ये सब बोलते हुए शर्मा रही थी... मुझे और अनुज को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या बात हो रही है ये...
प जीजाजी- हाँ हमारी शादी की सालगिरह... यकीन नहीं हो रहा की दो साल कितनी जल्दी बीत गए... तुम्हारे साथ... आअज से ठीक दो साल पहले तुम पत्नी बानी थी मेरी...
ये सुनकर मुझे भी ाचा लगा और एक मुस्कान आ गयी की जीजाजी कितने अचे पति हैं और दीदी को प्यार करते हैं.. वहीं दीदी थोड़ी भावुक भी हो रही थी...
पूर्वी- ग मैं कैसे भूल सकती हूँ वो खूबसूरत दिन जब मैंने आपको अपना सब मान लिए था और इन दो सालो में आपने मुझे इतना प्यार दिया है जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था...
मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था की दीदी कितनी प्यार भरी बातें कर रही है जीजाजी से जबकि अपने ममेरे भाइयों के साथ वाशरूम में अधनंगी है... और अभी कुछ देर पहले hi मेरा लुंड चूस रही थी... और ये सब सोचते हुए मेरा लुंड फिर फुंकारने लगा... जबकि ये दोनों मिया बीवी अपने प्रेम प्रसंग में लगे हुए थे ..
प जीजाजी - तो अब तुम अंदर क्यों हो बाबर आओ न जान तुम्हे ठीक से देख तो लूँ थोड़ा प्यार तो करलु. कितने दिन हो गए हैं तुम्हे अपनी बाहों में तक नहीं लिए...
दीदी ये सुनकर शर्मा रही थी वहीं हमारे होने की वजह से जवाब देने में भी हिचक रही थी मुझे समझ नहीं आया की जब वो हमसे चुद चुकी है तो ऐसी नार्मल बातों के लिए क्या शर्माना पर औरत को कौन जान पाया है...
पूर्वी- ाचा तो इसलिए याद आ रही है आपको मेरी...
प जीजाजी- अरे ऐसा नहीं है मेरी रानी बस तुम्हे बाँहों में लेने का मन है...
पूर्वी- ाचा सिर्फ बाहों में लेने का मन है या कुछ और
प जीजाजी- अरे तुम बहार तो आओ आज तो स्पेशल मौका है आज तो मत तड़पाओ...
बात तड़पने की जीजाजी कर राहु थे पर तड़प मैं रहा था ... मेरा लुंड अब पूरा टाइट हो चूका था पर मैं असमंजस में था की अभी कुछ करूँ या न करूँ... क्यूंकि हालत मेरे अनुकूल नहीं थे... पर मैंने कब दिमाग से सोचा है जब सोचा है लुंड से सोचा है और फिर एक बार मैंने लुंड की बात hi मान ली और फिर दीदी के पीछे खड़ा हो गया और उनके पेट पर हातब फेरने लगा...
दीदी ने मुड़कर मुझे आँखें दिखाई और न करने को बोलै पर मैं कहाँ मानने वाला था..
प जीजाजी- चुप क्यों हो गयी रानी कुछ बोलो...
पूर्वी- हाननमम वो कुछ नहे सोचने लगी थी की मैं कितनी लकी हूँ जो आप मिले मुझे...
प जीजाजी- अरे खुशनसीब तो मैं हूँ रानी आज भी जब वो पल याद करता हूँ तो रोम रोम खुश हो जाता है...
पूर्वी- कौनसा पल ग...
उधर जीजाजी अपनी पत्नी से प्रेम की बातें कर रहे थे वहीं मैं उनकी पत्नी के अधनंगे जिस्म को अपने हाथों से भोग रहा था जिससे मुझे और मज़ा मिल रहा था...
प जीजाजी- वो पल जब मैं सुहागरात को कमरे में आया था और तुम दुल्हन के लाल जोड़े में सजी हुई बीएड पर बैठी थी... कितनी प्यारी लग रही थी... वैसे आज भी तुम वैसी hi लग रही हो...
मैंने ये सुनकर दीदी को जवाब देने का इशारा किआ...
पूर्वी- हाँ मुझे भी याद है मैं दरी हुई सी बीएड पर बैठी थी और आप मुस्कुरा कर मेरे करीब आते जा रहे थे...
फिर जीजाजी हंसने लगे...
मैं अनुज और दीदी तीनो थोड़ा हैरान हो गए की इनको क्या हुआ...
प jeejaji-are याद है तुम्हे की कैसे मेरे बीएड पर बैठते hi तुम बीएड से उठ कर कड़ी हो गई थी...
पूर्वी- अच्छा हाँ हाँ हाँ तो और क्या करती मैं इतनी दरी हुई जो थी...
वैसे तो हम तीनो लोग अभी भी फंसे हुए थे पर बाथरूम का माहौल थोड़ा रिलैक्स हो गया था ... खैर मैं तो दीदी के पीछे खड़ा hi था पर अब अनुज भी काफी रिलैक्स नज़र आ रहा था वहीं दीदी भी और वो मेरी बाहों में थी जबकि बात अपने पति से कर रही थी...
प जीजाजी- हाँ फिर मैं तुम्हारे करीब गया खड़ा होकर भी तो तुम पीछे होने लगी थी पर अगले hi पल मैंने कदम बढाकर तुम्हे पकड़ लिए था... सच कहूं तो मुझे यकीं नहीं हो रहा था उस वक़्त के मुझे इतनी खूबसूरत बीवी मिली है और मैं तुम्हे देखकर रोक भी नहीं पा रहा था खुद को...
पूर्वी- हाँ मुझे याद है...
प जीजाजी- और फिर मैंने तुम्हे अपनी और खींच लिए था और तुम मेरी बाहों में सिमट गयी thi...aaahhhh दिल को कैसा सुकून मिला था... तुम्हे गले से लगाकर बता नहीं सकता मेरी रानी...

मैं भी जीजाजी की बातें सुन कर उत्तेजित होने लगा था वहीं दीदी भी मेरी बाहों में कसमकस रही थी तो मैंने भी जैसा जीजाजी ने बताया वैसे hi दीदी को घुमाया और अपने गले से लगा लिए जैसे उन्होंने सुहागरात में अपनी बीवी को अपनी बाहों में समाया हुआ था अब उनकी बीवी मेरी बाहों में उसी तरह थी और उनसे बात कर रही थी

पूर्वी- आह्ह्ह्हह...
प jeejaji-kya हुआ....?
पूर्वी दीदी ने मेरी तरफ एक बार देखा और बोली...
पूर्वी- कुछ नहीं ाचा लगा याद करके अआप आगे बताएं न...
प जीजाजी- तुम्हे तो सब पता hi है आगे क्या हुआ...
पूर्वी- नहीं ाचा लग रहा है आप बताओ न प्लीज...
प जीजाजी- पर तुम बहार तो आओ न...
पूर्वी- नहीं नहीं ऐसे hi बताओ... और अगर आप मेरी बात मानोगे तो आपको एक स्पेशल चीज़ मिलेगी..
प जीजाजी- तुम्हारी स्पेशल चीज़ के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ
पूर्वी- तो बताओ न
प जीजाजी- हाँ सुनो तो फिर तुम अचानक से शर्मा गयीऔर अलग होकर घूम गयी और अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया... पर इस सब में तुम्हारा पल्लू नीचे गिर गया और मुझे पीछे से तुम्हारी चिकनी कमर नज़र आ गयी जिसे देख कर मैं खुद पर काबू खो बैठा... और पीछे से hi तुम्हारी नंगी कमर पर हाथ रख लिए... क्या एहसास था वो भी...

तुम मेरी बाहों में पिघल सी गयी मेरा हाथ तुम्हारी कमर पर पड़ते hi...
मैंने भी जीजाजी की बात सुनकर दीदी को घुमा दिया और फिर पीछे से अपने हाथ उनकी कमर पर रख दिए और कमर को मसल दिया...

पूर्वी- अह्ह्ह्ह ...... फिर????
प jeejaji-phir मैं तुम्हारी कमर और पेट को अपने हाथो से सहलाने लगा.... कितने सुन्दर और चिकनी है तुम्हारी कमर
मैं भी वैसे hi दीदी की कमर और पेट पर हाथ फिरने लगा... जीजाजी की मजूदगी में दीदी के साथ ये सब करने में एक अलग hi उत्सुकता हो रही थी और दीदी भी थोड़ी गरम होने लगी थी...
प जीजाजी- ोहिर मैंने हाथ फिरते हुए hi तुंहारा चेहरा अपनी और किआ और तुम्हारे होंठो को चूसने लगा...
मैं भी देरी न करते हुए दीदी के होंठों पर होंठ रख दिए और चूसने laga...mujhe देखकर अनुज भी अब हमारे पास आ कर खड़ा हो गया और वह भी दीदी के पेट पर हाथ फिरने लगा... कहाँ जीजाजी अपनी पत्नी को सुहागरात की कहानी बता रहे थे वहीं कुछ फ़ीट दूर उनकी पत्नी को दो दो लड़के भोग रहे थे...
पूर्वी- ुहम्म्म्म
फिर दीदी ने मुझसे होंठ अलग किये और बोली- फिर...
दीदी. इतना hi बोल पायी की अनुज ने उनके होंठो को अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगा...

मैंने दीदी की गर्दन को चूमना चेतना शुरू कर दिया... दीदी जीजाजी की मजूदगी में और भी ज़्यादा गरम हो रही थी...
प जीजाजी- काफी देर तक मैं तुम्हारे रसीले होंठों का रास पीटा रहा और जब हम अलग हुए तो हांफ रहे थे दोनों hi.. और फिर मैंने तुम्हारी गर्दन को चूमा तुम्हारे सीने के ऊपर हिस्से को चूमा...
अनुज भी समझ गया था की उसे क्या करना है जैसे hi जीजाजी ने आगे बोलै उसने दीदी के होंठों को छोड़ दिया और उनके ब्लाउज के ऊपर सीने पर जो खुली जगह होती है उससे चाटने लगा वहीं मैं गर्दन को चूम रहा था... दीदी भी अपने हाथ हम दोनों परफिरा रही थी और कामुक आवाज़ में बोली- फिररररर....
प jeejaji-phir पहले मैंने तुम्हारी ब्लाउज के बहार निकली नंगी पीठ को चूमा और फिर हाय... तुम्हारे चिकने कमर और पेट को नाभि में जीभ घुसा कर उसे भी चूसा... क्या एहसास था वो...
मैं और अनुज तुरंत नीचे हो गए मैंने अपने होंठ दीदी की पीठ पर टिका दिए तो अनुज ने उनके पेट पर... और हमदोनो दीदी के बदन को चाटने लगे..

अनुज पहली बार दीदी के बदन को चूम रहा था तो बहुत hi शिद्दत से हर एक हिस्से को चाट रहा था... मैं भी दीदी की पूरी पीठ को चाट रहा था... फिर अनुज ने अपनी जीभ दीदी की नाभि में घुसड़ी तो दीदी के मुँह से सिसकारी निकल गयी..
पूर्वी- ahhmmmmmmmmmmmmmmm
प jeejaji-kya हुआ..
पूर्वी- कुछ नहीं मज़ा आ रहा है आप आगे बताओ...
प jeejaji-acha तो मेरी जान गरम. हो रही है तो सुनो...
फिर मैंने अपने कांपते हुए हाथ तुम्हारे ब्लाउज पर रखे और ब्लाउज के ऊपर से hi तुम्हारे दो मुलायम रुई जैसे संतरो को महसूस करने लगा उन्हें दबाने लगा... आह्हः क्या बताऊ कैसा लग रहा था उस वक़्त..
मैंने भी अपने हाथ दीदी की छूछीयो की और बढ़ा दोए तो पाया एक छुच्छी पर अनुज का हाथ पहले hi था तो मैं दूसरी को पकड़ कर ब्लाउज के ऊपर से hi दबाने लगा.... दोनों छूछीयो के दबाने से दीदी और गरम हो गयी..
पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फिर..
प जीजाजी- फिर मैंने कांपते हाथों से तुम्हारे ब्लाउज के हुक्स को खोला और ऊपर के कुछ हुक्स खोलने के बाद मुझे तुम्हारी छूछीयो की झलक दीखते hi मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने बिना पूरा ब्लाउज खोले hi तुम्हारी कोमल छूछीयो को बहार निकल लिए... बेहद hi मुलायम.. ऐसा लग रहा था की इनसे खूबसूरत कुछ है hi नहीं दुनिया में.. और मैं जैसे अपने आप hi खोया हुआ झुकता चला गया और तुम्हारी छूछीयो पर अपने होंठों को टिका दिया...
जीजाजी की बात सुनते hi मैंने भी पूर्वी दीदी के ब्लाउज के ऊपर के कुछ हुक्स खोल कर उनकी छूछीयो को बहार निकल लिए और फिर मैंने और अनुज ने अपना मुँह एक एक छुच्छी पर रख दिया और चूसने लगे...
बहार जीजाजी अपनी सुहागरात याद कर रहे थे यहाँ हम उनकी बीवी के साथ सुहागरात मन रहे थे.

पूर्वी- ाःह ममममममममम ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh फिररररर????
प जीजाजी- लगता है रानी ज़्यादा hi गरम हो रही हो कहो तो अंदर आ जॉन?
पूर्वी - ननणणनायहठीय आएगी बताओ आप..
मैं और अनुज लगातार दीदी की छूछीयो को चूस रहे थे वहीं दीदी आँखें बंद करके मज़े में डूबी हुई थी...
प जीजाजी- मेरा लुंड तो बिलकुल लोहे जैसा बन गया था ..तुम्हारे जिस्म को भोग कर ऐसा लग रहा था मैं जन्नत में हूँ... काफी देर तक छूछीयो का रास पीते पीते hi मैंने तुम्हारी साड़ी को खोल कर निकल दिया... और फिर एक hi झटके में तुम्हारे पेटीकोट का नारा भी खोल दिया और पेटीकोट तुम्हारे पैरो के बीच में गिर गया.. अब तुम सिर्फ एक पंतय और ब्लाउज में थी... फिर तुमने मेरी तरफ देखते हुए शरमाते हुए अपना ब्लाउज पूरी तरह उतर दिया.. तुम अब सिर्फ एक ब्रा और पंतय में मेरे सामने थी...

प jeejaji-kitni खूबसूरत लग रही थी तुम और तुम्हारे बड़े बड़े चूतड़ों को देखकर तो मैं होश hi खो बैठा और तुरंत तुम्हारीई पंतय को नीचे सरका के अपना मुँह उनके बीच में घुसा दिया आअह्हह्ह्ह्हह क्या मज़ा आया था..
जीजाजी की बात सुनकर मैंने और अनुज ने भी दीदी की साड़ी पेटीकोट और ब्लाउज को उतर दिया पंतय दीदी ने पहनी नहीं थी तो अब हमारे सामने सिर्फ एक ब्रा में थी और मैंने तुरंत अपना मुँह उनके गद्देदार चूतड़ों के बीच घुसा दिया और जीभ निकल कर चाटने लगा.. मैं चाट रहा था तो अनुज कहाँ पीछे रहने वाला था उसने भी अपना मुँह आगे बैठकर उनकी छूट पर लगा diya..ab हम दोनों भाई दीदी को. दोनों तरफ से अपनी जीभ से सुख देने लगे..

दीदी तो उत्तेजना में उड़ रही थी... छूट और गांड दोनों को एक hi समय पर दो भाई चाट रहे थे कुछ फ़ीट दूर पति tha.kitna गलत पर साथ में उतना hi कामुकता से भरा दृश्य था ये... दीदी बस ये सोचकर hi गरम होती जा रही थी..
बहार खड़े जीजाजी अपनी सुहागरात को याद कर रहे थे इस बात से अनजान के उनकी पत्नी के साथ जो जो वो बोल रहे हैं वो सब हो रहा है और वो भी एक साथ दो दो लड़को के बीच में फांसी हुई है उनकी प्यारी बीवी...
पूर्वी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh ह्म्म्मम्म्म्म ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh ऐसईईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ऑरररररररर छाअअअअअअअततततततताउओ......
प jeejaji-kya कर रहे हो जान.... मेरे होते हुए खुद से खेल रही हो...
पूर्वी दीदी थोड़ा होश सँभालते हुए... और हम दोनों के सर को अपने हैजो से और अंदर की और दबाते हुए...
पूर्वी- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अआप आगे बताएं न...
प जीजाजी- आगे क्या था मैं लगातार तुम्हारी छूट और गांड को चाट रहा था तुम अपनव चूतड़ों को मेरे मुँह पर दबा रही थी मेरी जीभ तुम्हारी छूट में घुसी हुई थी... क्या रास निकल रहा था उसमे से ऐसा रास मैंने कभी नहीं पिया था...
वही रास इस समय हम दोनों भाइयों की जुबान पर था...
प जीजाजी- फिर क्या हुआ की कुछ पल बाद तुम्हारा शरीर कंपनी लगा...
जीजाजी का इतना कहना था की दीदी मेरे और अनुज के मुँह पर झड़ने लगी उनकी छूट से रास बाह रहा था जिसे अनुज पी रहा था... इधर मैंने उनके चूतड़ों को कास कर पाकर रखा था और अपनी जीभ उनकी गांड में घुसा राखी थी..... उनकी गांड का छेड़ मेरी जीभ के किनारे बंद हो रहा था फिर खुल रहा था...
पूर्वी- आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhh marrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ आआह्ह्ह्हह आयजहह maaaaaaaaaaa.....
प jeejaji-kyaaa हुआ रानी तुम ठीक तो हो...
पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह हांण वो मेरा पानी निकल गया याद करते करते..
प jeejaji-to अब मेरा पानी भी निकलवा दो ..ककब तक तडपाओगी..
पूर्वी- पहले पूरी कहानी तो बतादो ..
प jeejaji-aaj तो पूरी जान लेकर मानोगी तुम चलो फिर सुनो...
जह तुम झाड़ गयी तो मुझसे तो बिलकुल रुका नहीं जा रहा था तो मैंने तुम्हे झट से अपनी बाहों में भर लिए और तुमने भी अपने पेअर मेरी कमर पर लपेट लिए..... मेरा लुंड तुम्हारी छूट के द्वार पर टक्कर मार रहा था... जिससे हम दोनों hi तड़प रहे थे...
अनुज बे ये सुनते hi दीदी को अपने ऊपर कर लिए और दीदी ने भी अपने पेअर उसकी कमर से लपेट लिए .. मैंने भी पीछे से दीदी को पकड़ लिए और दीदी ने अपना हाथ मेरी गर्दन में फंसा दिया सपोर्ट के लिए अब दीदी हवा में थी हम दोनों भाइयों के बीच... अनुज का लुंड पूर्वी दीदी की छूट पर टक्कर मार रहा था वहीं मेरा उनकी गांड के छेड़ को चूम रहा था....
पूर्वी- हननननन daaaaaalllllllllllll दोऊ आआआजी...
प जीजाजी- क्या ???
पूर्वी - वो वो आगे बताओ ना मज़ा आ रहा है...
प जीजाजी- फिर मैं अपना एक हाथ तुम्हारे चूतड़ों के नीचे ले गया और अपना लुंड पकड़ा और तुम्हारी छूट के द्वार पर रख दिया... और फिर तुम्हारी आँखों में देखा और हम दोनों के होंठ आपस में अपने आप मिल गए कुछ देर एक दुसरे के होंठ चूसने के बाद अलग हुए...
मैंने और अनुज ने भी बारी बारी से पूर्वी दीदी के होंठों को चूसा...
प जीजाजी- और फिर आया मेरी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल... मैंने लुंड को दोबारा तुम्हारी छूट पर लगाया और तुम्हारे वजन को थोड़ा ढीला छोड़ दिया तो मेरा लुंड का टोपा तुम्हारी छूट के अंदर घुस गया और हम दोनों के मुँह से एक आह्ह्ह्हह निकल गयी...
पूर्वी-- Ahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh maaaaaaaaaaa
तभी पूर्वी दीदी की सच में चीख निकल गयी क्यूंकि मैंने और अनुज ने भी अपने अपने लुंड एक साथ दीदी की छूट और गांड में दाल diye..hum दोनों के लुंड एक साथ घुसाने से दीदी की चीख बिकल गयी जिसे जीजाजी ने सुना और भी लोग सुनते अगर गीत नहीं चल रहे होते तो...
प जीजाजी- क्या हुआ जान...
पूर्वी दीदी ने थोड़ा संभल ते हुए बोलै- वो आप इतने अचे से समझा रहे हो की लगा सच में कुछ घुस गया है अंदर..
वैसे इसमें लग्न क्या था सच में hi दीदी के अंदर दो बड़े बड़े लुंड घुसे हुए थे..
प जीजाजी- बहार आ जाओ रानी सच में घुसा दूंगा....
पूर्वी- आअह्ह्ह्ह आप आगे बताओ न..
प जीजाजी- आगे क्या फिर मुझसे कहाँ सबर होने वाला था छोटे छोटे झटके देकर पूरा लुंड अंदर घुसा दिया और तुम्हे उछलने लगा अपने लुंड पर तुम्हारी आँखें बंद थी और तुम लूँ पर झूल रही थी...
वहीं अभी दीदी मेरे और अनुज के लुंड पर झूल रही थी हम दोनों. दीदी को अपने लुंड पर उछाल रहे थे... एक साथ दो इतने बड़े लुंड लेकर दीदी तो वासना के सागर में डूब रही थी और पति की मजूदगी में चुद रही थी...

मैं और अनुज भी बहुत उत्तेजित हो कर दीदी की चुदाई कर रहे थे... जीजाजी के होते हुए उनकी बीवी की चुदाई कर रहे थे.. बहुत मज़ा आ रहा था... दीदी की गांड में मेरा लुंड बहुत कसके जा रहा था.. जिससे मुझे बहुत ाचा लग रहा था लुंड पर दीदी की गांड घिस रही थी..
वहीं अनुज भी दीदी को बड़ी उत्सुकता से छोड़ रहा था... क्यूंकि वो दीदी को पहली बार छोड़ रहा था तो उसे एक अलग ख़ुशी मिल रही थी जो उसके चेहरे पर भी दिख रही थी...
पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hmmmmmmmmmm छोड़ो ऐसईईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ऑरररररररर tezzzzz....m
प jeejaji-haan ऐसे hi तुम चिल्ला रही थी जब मैं तुम्हे छोड़ रहा था.... और फिर जब मैं थक गया तो तुम्हे लेकर बीएड पर लेट गया और तुम खुद से उछलने लगी मेरे लुंड और मैं तुम्हारे उछालते हुवी छूछीयो को दबाने लगा...
सुनते hi अनुज नीचे लेट गया और दीदी उसका लुंड अपनी छूट में लेकर बैठ गयी और मैंने पीछे आकर लुंड गांड में दाल दिया और फिर से दोनों दीदी को छोड़ने लगे...

हम दोनों दीदी को बड़े मज़े से छोड़ रहे थे दीदी भी दोनों लुंड लेकर बहुत hi ख़ुशी से चुद रही थी...
पूर्वी- आअह्ह्ह बहुत mazaaaaaaaaaaa आआ राहाआआ है aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh
प जीजाजी- हॉँण्णन जानेमन बहुत मज़ा आ रहा था और उसी मज़े की वजह से मैं ज़्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाया और तुम्हारी छूट को भर दिया...
और जहाँ जीजाजी ने छूट को भरने की बात कही hi थी की मैं अनुज और पूर्वी दीदी भी नहीं रुक पाए और झड़ने lage..maine और अनुज ने बड़ी मुश्किल से खुद की आवाज़ को रोका क कहीं बहार जीजाजी न सुन लें...
मैंने अपने वीर्य से दीदी की गांड को तो अनुज ने दीदी की छूट को भर दिया... वहीं दीदी ने भी अपना रास छोड़ दिया...

प जीजाजी- जान अब तो सहा नहीं जा रहा... अब प्लीज अंदर आने दो...
पूर्वी- नहीं नहीं अंदर nahi...ummmmm आप नीचे जाओ और भैंस वाली झोपडी में इंतज़ार करो मैं आती हूँ..
प जीजाजी- यहाँ क्या दिक्कत है...
पूर्वी- नहीं यहाँ कोई भी आ सकता है... आप जाओ न आती हूँ मैं...
प jeejaji-theek है जल्दी आना...
फिर जीजाजी चले गए तो दीदी ने हम दोनों के लुंड को बरी बरी से चाट कर साफ़ किआ... अनुज बेहद खुश था दीदी को छोड़ कर वहीं दीदी ने अपने कपडे पहने और ठीक होकर गेट से बहार निकल गयी... मैं और अनुज भी अपने कपडे पहन कर बहार आ गए...
इसकेआगे की कहानी ऊगली अपडेट में प्लीज अपने कमैंट्स और सुझाव ज़रूर दें... शुक्रिया