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फिर बुआ और पूर्वी दीदी एक साथ बाथरूम में घुस गयी... और हम तीनो भी मुस्कुरहट के साथ अलग हो गए और अपने अपने बिस्तर की और बढ़ गए....
अपडेट 63
मैं छत पर बिस्तर पर पंहुचा तो देखा अनुज सो चूका था और हम दोनों भाइयों की आदत है फ़ैल कर सोने की तो पूरी खत पर वो फ़ैल कर सोया था तो मैंने सोचा एक खत पर दोनों का सोना तो बहुत मुश्किल है तो मैंने अनुज को जगाया और बोलै की बिस्तर नीचे लगा लेते हैं खाट छोटी है नीचे छत पर आराम से फ़ैल कर सोयेंगे...
अनुज भी आँखें माल्टा हुआ उठ गया और बिस्तर लगाने में मेरी मदद की और फिर हम दोनों लेट गए और लेटते hi मेरी आँख लग गयी...
सोते सोते सपने में मुझे ऐसा दिख रहा था की मैं कहीं पर नंगा खड़ा हूँ और मेरा लुंड किसी रस्सी से बंधा हुआ है और कोई दूसरी तरफ से उस रस्सी को खींच रहा है पर रस्सी खींचने के बाद भी मुझे दर्द नहीं हो रहा बल्कि मज़ा आ रहा है... और फिर अचानक से मेरी आँख खुली तो हड़बड़ा कर इधर उधर देखा और जब थोड़ा सही से दिखा और दिमाग स्थिर हुआ तो पाया एक सर दिखाई दिए जो मेरे पेट के नीचे ऊपर नीचे हो रहा tha...aur मेरा लुंड किसी गरम सी चीज़ में था ... तो देर न लगी समझने में कोई मेरा लुंड चूस रहा hai...side में देखा तो अनुज बेखबर होकर आराम से सो रहा था और फिर जब ध्यान से नीचे देखा तो पहचान भी गया की ये तो प्यारी रंडी बच्ची गया है...
उसने एक नज़र उठा कर मेरी आँखों में देखा और फिर उसके होंठों पर जो मेरे लुंड के चारो और चिपके हुए थे उनपर थोड़ी मुस्कान आई और फिर अगले hi पल वो अपने काम में लग गयी... मैं भी नीचे हाथ लेजाकर उसके चेहरे से बालो को हटाकर प्यार से उसके सर पर हाथ फेरने लगा और वो लगातार मेरा लुंड चूसे जा रही थी...

गया के लुंड चूसने में उसका उतावला पैन साफ़ दिख रहा था जो अक्सर इस उम्र में होता है... खुद को साबित करने का जूनून... वही गया में दिख रहा था अभी नयी नयी hi इस चुदाई के खेल में शामिल हुई थी तो मैं भी किसी से काम नहीं यही वो दर्शन चाहती थी... उसके लुंड चूसने से मेरा लुंड लोहे जैसा हो गया था...
गया पूरी कोशिश करके भी मेरा आधा लुंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी..... पर मैं उसके मुँह के एहसास को पूरे लुंड पर महसूस करना चाहता था तो मैंने अपने हाथ से उसके सर को अपने लुंड पर दबाना शुरू कर दिए साथ hi अपनी कमर के झटके भी उसके मुँह में मरने लगा मेरा लुंड थोड़ा और अंदर जाने लगा पर गया की आँखों से आंसू आने लगे मेरा लुंड उसके गले पर टक्कर मार रहा था जिससे उसके मुँह से घ्हुउउउउउउ हूउउउउउ की आवाज़ आ रही थी...
पर लड़की की हिम्मत की भी दाद देनी पड़ेगी एक बार भी नहीं रुकी न hi कुछ ऐतराज़ किआ बस लुंड को और अंदर तक लेने की कोशिश करने लगी... मैं हैरान था की इतने काम समय में ये लड़की कितना कुछ सीख गयी...

मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था उठाते hi इस तरह की कोई सेवा करदे तो मज़ा hi आ जाता है... मैंने छत के चारो तरफ देखा तो सिर्फ हम लोग hi थे बाकि लोग कमरों में सो रहे थे...
मैंने गया का सर पकड़ा और अपने अपने लुंड पर दोबारा दबा दिया मेरा लुंड उसके गले तक पहुँच गया वो थोड़ा झटपटाने लगी कुछ पल ऐसे hi रखने के बाद मैंने लुंड को उसके मुँह से बाहर खींचा तो वो खांसते हुए लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी...
मैंने उसके हाथ को पकड़ कर ऊपर खींचा तो वो ऊपर आ गई और अब मेरी नज़र उसके बाकी के शरीर पर पड़ी जो की पूरा नंगा था बगल में हु उसकी एक टीशर्ट और पजामा पड़ा था शायद मेरा लुंड चूसते हुए उसने उतर दिया होगा और फिर वो ऊपर होकर मेरी कमर के दोनों और पकिर कर के बैठ गयी मैंने उसे थोड़ा और ऊपर खींचा और उसके चूतड़ों को पकड़ लिए और उन्हें मसलते हुए उसे उठा कर अपने चेहरे पर बिठा लिया... सुबह सुबह नाश्ते में रसीली और कासी हुई छूट और गांड चाटने को मिल जाये तो इससे टेस्टी नास्ता क्या मिलेगा...
आँखों के सामने गया की कासी हुई पर बेहद गीली छूट थी जिसमे से रास बहकर बहार आ रहा था जो छूट को और रसीली बना रहा था.. अनजाने में hi उसे देखते हुए मेरी जीभ बहार आ गयी उस स्वादिष्ट छूट के दर्शन से मेरे मुँह में पानी आ गया...
उसकी छूट के बिलकुल नीचे उसकी गांड का छोटा सा भूरे रंग का छेड़ था जो इस समय इतना हसीं दिख रहा था मुझे वो दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ों में से एक मालूम हो रहा था... उसके गांड के छेड़ को देखकर ऐसा लग रहा था की इसमें तो कभी कोई उंगली भी नहीं घुसी होगी लुंड तो दूर की बात है... पर सच्चाई तो ये थी की यही छोटा सा छेड़ मेरा लुंड भी जड़ तक निगल चूका था... उसके छेदों को देखते हुए कब मेरा सर ऊपर उठ गया और कब मेरी जीभ उसकी छूट से टकराई मुझे खुद बी एहसास नहीं हुआ... मेरा मुँह छूट पर लगते hi गया जे मुँह से सिसकारी निकली- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa
जिसे सुनकर मुझे एहसास हुआ और मैं होश में आया तो देखा की मैं गया की छूट चाटने भी लगा... उसकी छूट के रास में जो स्वाद था अचे अचे पकवान फीके पद जाएं.. मैं उसके कोमल गद्देदार चूतड़ों को मसलते हुए गया की छूट चाट रहा था..
गया- (फुसफुसाते हुए) आअह्ह्ह्ह bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa ऐसे hi खा जाआऊऊऊ मेरी choooooooooot कोऊ बहुत खुजली हो रही thiiiiiiiiiiii इसमें...
मैंने हम्म्म करते हुए जवाब दिया और तेज़ी से गया की छूट में जीभ डालते हुए मैंने उसके चूतड़ों को और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया... और फिर मसलते मसलते ऊँगली से उसकी गांड के प्यारे से छेड़ को कुरेदने लगा...
गया तो मेरे मुँह पर बैठी पागल होती जा रही थी वो अपनी छूट को मेरे मुँह पर दबा दबा कर रगड़ रही थी कई बार तो मेरा सांस लेना भी मुश्किल हो जाता... और न जाने क्या क्या अपने hi मुँह में बड़बड़ाये जा रही थी...
गया- आह्ह्ह्ह bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa भेनचोद चबा जाओ मेरी छूट को आह्हः क्या सोच कर आई थी शाआंआड़ड़जीई में ऑरररर यहां आईसीईई खुऊजली लगाई चुत में भैया की अब शांत hi नहीं होती... माँ को भी छुड़ड्डड्डड़आआ meri.....aaahhhh हाँ गाआआनंनंड्डड़ से भीईई खीलल्लूऊ.....
ये सब वो इतनी धीरे बोल रही थी की मुझे भी सुनाई नहीं दे रहा था...
छूट चाटते हुए मैंने एक ऊँगली उसकी छूट में घुसेड़ दी तो वो थोड़ा झटपटई और फिर शांत हो गए...
मैं धीरे धीरे उंगली अंदर बहार करने लगा साथ hi उसकी छूट के डेन को जीभ से सहलाने लगा तो ऐसा लगा जैसे गया की तो साँसे रुक गयी हो और वो फिर लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए अपने चूतड़ों को घुमा घुमाकर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी....
कुछ देर दाने को सहलाने के बाद मैंने अपना मुँह थोड़ा नीचे किआ और अपनी जीभ उसके गांड के छेड़ पर लगाडी साथ hi छूट में उंगली भी लगातार किये जा रहा था.... गया उत्तेजना के बहाव में बहती जा रही थी...
मैंने अपनी जीभ को नुकीला किआ और उसकी गांड के संकरे छेड़ में घुसेड़ने लगा ... एक हाथ से उसके दोनों चूतड़ों को थोड़ा फैलाया तो मेरी जीभ के लिए उसकी गांड का छेड़ थोड़ा सा खुला और जीभ का अगला हिस्सा अंदर चला गया...
गया अब बुरी तरह से हांफ रही थी कुछ बोल पाना उसके शायद अब बस में नहीं था... मैंने उसे थोड़ा और सताने के लिए एक उंगली और उसकी छूट में डालदी साथ hi अपनी जीभ भी उसकी गांड से अंदर बहार करने लगा.... ऐसा करते हुए मुझे 10 सेकण्ड्स hi बीते होंगे के मुझे गया का शरीर कांपता हुआ महसूस हुआ मैंने उसकी छूट से हाथ हटाकर उसकी कमर को पकड़ लिए जिससे वो गिर न जाए और फिर अगले hi पल गया झड़ने लगी मैंने अपने मुँह को गांड से हटाकर छूट पर टिका दिया जिसमे से गया के रास की नदिया बाह रही थी और मैं सरे रास को बड़े चाव से गटकने लगा...
गया की छूट रास बहा रही थी और मैं उसे पिबकार अपनी प्यास बुझा रहा था... मैंने गया के शरीर को अब भी थाम रखा था.. कुछ देर बाद जब झड़ना बंद हुआ तो वो शांत हुई और फिर मेरे मुँह से उठ कर नीचे की और खिसकने लगी और फिर मेरे पेट पर बैठ कर आगे झुक कर अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए और चूसने लगी अपनी छूट के रास का स्वाद मेरे होंठों और जीभ से लेने लगी... अगले hi पल उसकी जीभ ने मेरे मुँह में अपनी जगह बना ली.. और मैंने भी उसका स्वागत उसे चूसते हुए किआ गया की जीभ मेरे मुँह में सैर कर रही थी हम दोनों इतनी बुरी तरह से एक दुसरे की जीभ चूसने में लगे हुए थे की हम दोनों की सांस फूल रही थी और फिर जब सांस लेना मुश्किल हो गया तो हम अलग हो गए...
अलग होते hi हमने अपनी साँसे ठीक की और फिर गया ने मेरा लुंड हाथ में पकड़ा तो वो झटके मरने लगा जिससे गया और मैं दोनों hi समझ गए की ये क्या चाहता है .. गया ने अपने चूतड़ों को उठाया और मेरे लुंड के ऊपर एडजस्ट किआ कुर फिर मेरे लुंड के टोपे को अपनी छूट के छेड़ पर रखा और फिर लुंड को छूट पर ऊपर नीचे घिसने लगी.. जिससे मैं और वो दोनों hi तड़पने लगे... और फिर अचानक से गया ने लुंड को रोका और फिर नीचे हुई मेरे लुंड का टोपा उसकी गरम छूट में घुस गया... हम दोनों के मुँह से एक ाः निकल गयी...
मेरे हाथ खुद बा खुद उसकी कमर पर कास गए और फिर धीरे धीरे वो नीचे होने लगी और मेरा लुंड गया की छूट को चीरता हुआ अंदर जाने लगा जब लुंड आधा गया की टाइट छूट में घुस गया तो गया रुक गयी और मैं समझ भी गया की वो क्यों रुकी है गया ने हाल hi में चुदाई करना शुरू किआ था तो उसकी छूट अभी उतनी खुली नहीं थी साथ hi मेरा लुंड भी काफी बड़ा hai..mera लुंड लेते हुए बुआ जैसी खेली खाई औरत की चीख निकल जाती है तो ये तो बेचारी बच्ची hi थी तो मैंने उसे पूरा समय दिया और साथ में मैं भी अपने लुंड पर गया की छूट की गर्मी महसूस करने लगा जिससे मेरे लुंड को बेहद सुकून मिल रहा था मैंने गया की कमर को सहलाते हुए एक हाथ से उसकी कमर और नाभि को छूड़ने लगा साथ hi दुसरे हाथ से उसके छोटे मगर सख्त छूछीयो से खेलने लगा....
फिर गया थोड़ी आगे को झुकी और मेरे होंठों को चूसने लगी और होंठों चूसते हुए hi वो अपने चूतड़ नीचे करने लगी जिससे मेरा लुंड और अबदार जाने लगा और फिर एक थप की आवाज़ के साथ उसके चूतड़ों मेरी जांघों से टकराये और लुंड पूरा गया की छूट में जड़ तक समां गया... गया को ज़रूर तकलीफ हुई क्यूंकि उसका सबूत उसनेमेरी होंठों को काटकर दिया..
खैर आखिर लुंड पूरा उसकी छूट में था और फिर गया ने मेरे लुंड पर उछालना शुरू किआ.... मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लुंड किसी मख्खन की गरम भट्टी में अंदर बहार हो रहा है... मैं गया की छूछीयो को मसलते हुए नीचे से धक्के लगाकर लुंड गया की छूट में पेल रहा था... गया की चुदाई करने में बेहद मज़ा आ रहा था उसकी छूट में मेरा लुंड कैसा हुआ अंदर बहार हो रहा था जो हम दोनों को hi आनंद दे रहा था...
गया- भैया काश मैं tumhariiiiiiiiiii सगी बहिन होती तो कितना ाचा रहता... मैंन हमेशा तुमसे अपनी छूट मरवा पाती... तुम्हारे बड़े लुंड को अपनी छूट में रोज़ लेती...
गया आगे झुककर मेरे कान में ये सब बोलते हुए अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर मार रही थी....
में- तू अब भी मेरी सगी बहन से काम नहीं है मेरी प्यारी चुड़क्कड़ गुड़िया.. मैं तुझे अपनी बहन समझकर hi छोड़ता हूँ... अह्ह्ह्ह क्या कासी हुई choooooooooot है तेरी आह्ह्ह्ह
मैंने गया को आगे झुककर उसकी छोटी छोटी छूछीयो को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा साथ hi नीचे से कमर उठा उठा कर उसकी छूट में लुंड को जड़ तक पेल रहा tha...sath hi मेरे हाथ उसकी कमर पर थे जो उसे उछलने में मदद कर रहे the...thap थप की आवाज़ रात की ख़ामोशी को तोड़ रही थी...
अगले दो मिनट तक ऐसे hi छोड़ने के बाद गया अचानक से ऊपर उठी थोड़ा तो नेरा लुंड उसकी छूट से निकल गया जिसे उसने तुरंत हाथ से पकड़ लिए और फिर मुझे हैरान करते हुए उसने मेरे लुंड के टोपे को अपनी गांड के कैसे हुए छेड़ पर रख दिया... और इससे पहले की मैं कुछ बोलता वप नीचे हो गयी और मेरे लुंड का टोपा उसकी तंग गांड में फंस गया...
मैं तो गया की हिम्मत देख कर हैरान था और ये भी समझ गया की गया को गांड मरवाना कितना पसंद है हालाँकि दर्द उसे अभी भी हो रहा था क्यूंकि उसने अपने होंठों को दबाकर खुद को चीखने से रोका हुआ था मैं गया के बारे में इतना ज़रूर कह सकता हूँ... की आने वाले समय में छूट से ज़्यादा इसकी गांड में भीड़ लगेगी....
मैं इन्ही ख्यालों में डूबा हुआ था की तब तक गया ने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा कर दो तीन झटको के साथ मेरा पूरा लुंड गांड में ले लिए था....
गया की गांड में बेहद कासी होने के कारन मेरे लुंड को एक अलग hi एहसास हो रहा था... उसकी गर्माहट लुंड को पिघला रही थी... कुछ देर वहीं पर रुकने के बाद गया ने अपना सर मेरे सीने से उठाया और गर्दन आगे बढाकर मेरे होंठो को चूमा और फिर बोली- भैया तुम्हारा लुंड मुझे अपनी गांड में लेने में बहुत मज़ा आता hai...aisa लगता है की बास्तुमसे गांड hi मरवाती रहूं...
में- मेरी जान कभी का टी पता नहीं पर अभी मेरा लुंड तेरी गांड में है होजा शुरू... मुझे भी तेरी गांड मरने में जन्नत का मज़ा मिलता है मेरी रंडी बहन...
और ये कहकर मैंने नीचे से गया गरम गांड में लुंड पेलना शुरू कर दिया.

मुझे हमेशा की तरह hi गांड मरने में बहुत hi ज़्यादा मज़ा आ रहा था और जब गांड गया जैसी मस्त नयी नयी और कासी हुई और कमसिन लड़की की हो तो क्या hi बात है...
अपडेट 63
मैं छत पर बिस्तर पर पंहुचा तो देखा अनुज सो चूका था और हम दोनों भाइयों की आदत है फ़ैल कर सोने की तो पूरी खत पर वो फ़ैल कर सोया था तो मैंने सोचा एक खत पर दोनों का सोना तो बहुत मुश्किल है तो मैंने अनुज को जगाया और बोलै की बिस्तर नीचे लगा लेते हैं खाट छोटी है नीचे छत पर आराम से फ़ैल कर सोयेंगे...
अनुज भी आँखें माल्टा हुआ उठ गया और बिस्तर लगाने में मेरी मदद की और फिर हम दोनों लेट गए और लेटते hi मेरी आँख लग गयी...
सोते सोते सपने में मुझे ऐसा दिख रहा था की मैं कहीं पर नंगा खड़ा हूँ और मेरा लुंड किसी रस्सी से बंधा हुआ है और कोई दूसरी तरफ से उस रस्सी को खींच रहा है पर रस्सी खींचने के बाद भी मुझे दर्द नहीं हो रहा बल्कि मज़ा आ रहा है... और फिर अचानक से मेरी आँख खुली तो हड़बड़ा कर इधर उधर देखा और जब थोड़ा सही से दिखा और दिमाग स्थिर हुआ तो पाया एक सर दिखाई दिए जो मेरे पेट के नीचे ऊपर नीचे हो रहा tha...aur मेरा लुंड किसी गरम सी चीज़ में था ... तो देर न लगी समझने में कोई मेरा लुंड चूस रहा hai...side में देखा तो अनुज बेखबर होकर आराम से सो रहा था और फिर जब ध्यान से नीचे देखा तो पहचान भी गया की ये तो प्यारी रंडी बच्ची गया है...
उसने एक नज़र उठा कर मेरी आँखों में देखा और फिर उसके होंठों पर जो मेरे लुंड के चारो और चिपके हुए थे उनपर थोड़ी मुस्कान आई और फिर अगले hi पल वो अपने काम में लग गयी... मैं भी नीचे हाथ लेजाकर उसके चेहरे से बालो को हटाकर प्यार से उसके सर पर हाथ फेरने लगा और वो लगातार मेरा लुंड चूसे जा रही थी...

गया के लुंड चूसने में उसका उतावला पैन साफ़ दिख रहा था जो अक्सर इस उम्र में होता है... खुद को साबित करने का जूनून... वही गया में दिख रहा था अभी नयी नयी hi इस चुदाई के खेल में शामिल हुई थी तो मैं भी किसी से काम नहीं यही वो दर्शन चाहती थी... उसके लुंड चूसने से मेरा लुंड लोहे जैसा हो गया था...
गया पूरी कोशिश करके भी मेरा आधा लुंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी..... पर मैं उसके मुँह के एहसास को पूरे लुंड पर महसूस करना चाहता था तो मैंने अपने हाथ से उसके सर को अपने लुंड पर दबाना शुरू कर दिए साथ hi अपनी कमर के झटके भी उसके मुँह में मरने लगा मेरा लुंड थोड़ा और अंदर जाने लगा पर गया की आँखों से आंसू आने लगे मेरा लुंड उसके गले पर टक्कर मार रहा था जिससे उसके मुँह से घ्हुउउउउउउ हूउउउउउ की आवाज़ आ रही थी...
पर लड़की की हिम्मत की भी दाद देनी पड़ेगी एक बार भी नहीं रुकी न hi कुछ ऐतराज़ किआ बस लुंड को और अंदर तक लेने की कोशिश करने लगी... मैं हैरान था की इतने काम समय में ये लड़की कितना कुछ सीख गयी...

मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था उठाते hi इस तरह की कोई सेवा करदे तो मज़ा hi आ जाता है... मैंने छत के चारो तरफ देखा तो सिर्फ हम लोग hi थे बाकि लोग कमरों में सो रहे थे...
मैंने गया का सर पकड़ा और अपने अपने लुंड पर दोबारा दबा दिया मेरा लुंड उसके गले तक पहुँच गया वो थोड़ा झटपटाने लगी कुछ पल ऐसे hi रखने के बाद मैंने लुंड को उसके मुँह से बाहर खींचा तो वो खांसते हुए लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी...
मैंने उसके हाथ को पकड़ कर ऊपर खींचा तो वो ऊपर आ गई और अब मेरी नज़र उसके बाकी के शरीर पर पड़ी जो की पूरा नंगा था बगल में हु उसकी एक टीशर्ट और पजामा पड़ा था शायद मेरा लुंड चूसते हुए उसने उतर दिया होगा और फिर वो ऊपर होकर मेरी कमर के दोनों और पकिर कर के बैठ गयी मैंने उसे थोड़ा और ऊपर खींचा और उसके चूतड़ों को पकड़ लिए और उन्हें मसलते हुए उसे उठा कर अपने चेहरे पर बिठा लिया... सुबह सुबह नाश्ते में रसीली और कासी हुई छूट और गांड चाटने को मिल जाये तो इससे टेस्टी नास्ता क्या मिलेगा...
आँखों के सामने गया की कासी हुई पर बेहद गीली छूट थी जिसमे से रास बहकर बहार आ रहा था जो छूट को और रसीली बना रहा था.. अनजाने में hi उसे देखते हुए मेरी जीभ बहार आ गयी उस स्वादिष्ट छूट के दर्शन से मेरे मुँह में पानी आ गया...
उसकी छूट के बिलकुल नीचे उसकी गांड का छोटा सा भूरे रंग का छेड़ था जो इस समय इतना हसीं दिख रहा था मुझे वो दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ों में से एक मालूम हो रहा था... उसके गांड के छेड़ को देखकर ऐसा लग रहा था की इसमें तो कभी कोई उंगली भी नहीं घुसी होगी लुंड तो दूर की बात है... पर सच्चाई तो ये थी की यही छोटा सा छेड़ मेरा लुंड भी जड़ तक निगल चूका था... उसके छेदों को देखते हुए कब मेरा सर ऊपर उठ गया और कब मेरी जीभ उसकी छूट से टकराई मुझे खुद बी एहसास नहीं हुआ... मेरा मुँह छूट पर लगते hi गया जे मुँह से सिसकारी निकली- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa
जिसे सुनकर मुझे एहसास हुआ और मैं होश में आया तो देखा की मैं गया की छूट चाटने भी लगा... उसकी छूट के रास में जो स्वाद था अचे अचे पकवान फीके पद जाएं.. मैं उसके कोमल गद्देदार चूतड़ों को मसलते हुए गया की छूट चाट रहा था..
गया- (फुसफुसाते हुए) आअह्ह्ह्ह bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa ऐसे hi खा जाआऊऊऊ मेरी choooooooooot कोऊ बहुत खुजली हो रही thiiiiiiiiiiii इसमें...
मैंने हम्म्म करते हुए जवाब दिया और तेज़ी से गया की छूट में जीभ डालते हुए मैंने उसके चूतड़ों को और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया... और फिर मसलते मसलते ऊँगली से उसकी गांड के प्यारे से छेड़ को कुरेदने लगा...
गया तो मेरे मुँह पर बैठी पागल होती जा रही थी वो अपनी छूट को मेरे मुँह पर दबा दबा कर रगड़ रही थी कई बार तो मेरा सांस लेना भी मुश्किल हो जाता... और न जाने क्या क्या अपने hi मुँह में बड़बड़ाये जा रही थी...
गया- आह्ह्ह्ह bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa भेनचोद चबा जाओ मेरी छूट को आह्हः क्या सोच कर आई थी शाआंआड़ड़जीई में ऑरररर यहां आईसीईई खुऊजली लगाई चुत में भैया की अब शांत hi नहीं होती... माँ को भी छुड़ड्डड्डड़आआ meri.....aaahhhh हाँ गाआआनंनंड्डड़ से भीईई खीलल्लूऊ.....
ये सब वो इतनी धीरे बोल रही थी की मुझे भी सुनाई नहीं दे रहा था...
छूट चाटते हुए मैंने एक ऊँगली उसकी छूट में घुसेड़ दी तो वो थोड़ा झटपटई और फिर शांत हो गए...
मैं धीरे धीरे उंगली अंदर बहार करने लगा साथ hi उसकी छूट के डेन को जीभ से सहलाने लगा तो ऐसा लगा जैसे गया की तो साँसे रुक गयी हो और वो फिर लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए अपने चूतड़ों को घुमा घुमाकर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी....
कुछ देर दाने को सहलाने के बाद मैंने अपना मुँह थोड़ा नीचे किआ और अपनी जीभ उसके गांड के छेड़ पर लगाडी साथ hi छूट में उंगली भी लगातार किये जा रहा था.... गया उत्तेजना के बहाव में बहती जा रही थी...
मैंने अपनी जीभ को नुकीला किआ और उसकी गांड के संकरे छेड़ में घुसेड़ने लगा ... एक हाथ से उसके दोनों चूतड़ों को थोड़ा फैलाया तो मेरी जीभ के लिए उसकी गांड का छेड़ थोड़ा सा खुला और जीभ का अगला हिस्सा अंदर चला गया...
गया अब बुरी तरह से हांफ रही थी कुछ बोल पाना उसके शायद अब बस में नहीं था... मैंने उसे थोड़ा और सताने के लिए एक उंगली और उसकी छूट में डालदी साथ hi अपनी जीभ भी उसकी गांड से अंदर बहार करने लगा.... ऐसा करते हुए मुझे 10 सेकण्ड्स hi बीते होंगे के मुझे गया का शरीर कांपता हुआ महसूस हुआ मैंने उसकी छूट से हाथ हटाकर उसकी कमर को पकड़ लिए जिससे वो गिर न जाए और फिर अगले hi पल गया झड़ने लगी मैंने अपने मुँह को गांड से हटाकर छूट पर टिका दिया जिसमे से गया के रास की नदिया बाह रही थी और मैं सरे रास को बड़े चाव से गटकने लगा...
गया की छूट रास बहा रही थी और मैं उसे पिबकार अपनी प्यास बुझा रहा था... मैंने गया के शरीर को अब भी थाम रखा था.. कुछ देर बाद जब झड़ना बंद हुआ तो वो शांत हुई और फिर मेरे मुँह से उठ कर नीचे की और खिसकने लगी और फिर मेरे पेट पर बैठ कर आगे झुक कर अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए और चूसने लगी अपनी छूट के रास का स्वाद मेरे होंठों और जीभ से लेने लगी... अगले hi पल उसकी जीभ ने मेरे मुँह में अपनी जगह बना ली.. और मैंने भी उसका स्वागत उसे चूसते हुए किआ गया की जीभ मेरे मुँह में सैर कर रही थी हम दोनों इतनी बुरी तरह से एक दुसरे की जीभ चूसने में लगे हुए थे की हम दोनों की सांस फूल रही थी और फिर जब सांस लेना मुश्किल हो गया तो हम अलग हो गए...
अलग होते hi हमने अपनी साँसे ठीक की और फिर गया ने मेरा लुंड हाथ में पकड़ा तो वो झटके मरने लगा जिससे गया और मैं दोनों hi समझ गए की ये क्या चाहता है .. गया ने अपने चूतड़ों को उठाया और मेरे लुंड के ऊपर एडजस्ट किआ कुर फिर मेरे लुंड के टोपे को अपनी छूट के छेड़ पर रखा और फिर लुंड को छूट पर ऊपर नीचे घिसने लगी.. जिससे मैं और वो दोनों hi तड़पने लगे... और फिर अचानक से गया ने लुंड को रोका और फिर नीचे हुई मेरे लुंड का टोपा उसकी गरम छूट में घुस गया... हम दोनों के मुँह से एक ाः निकल गयी...
मेरे हाथ खुद बा खुद उसकी कमर पर कास गए और फिर धीरे धीरे वो नीचे होने लगी और मेरा लुंड गया की छूट को चीरता हुआ अंदर जाने लगा जब लुंड आधा गया की टाइट छूट में घुस गया तो गया रुक गयी और मैं समझ भी गया की वो क्यों रुकी है गया ने हाल hi में चुदाई करना शुरू किआ था तो उसकी छूट अभी उतनी खुली नहीं थी साथ hi मेरा लुंड भी काफी बड़ा hai..mera लुंड लेते हुए बुआ जैसी खेली खाई औरत की चीख निकल जाती है तो ये तो बेचारी बच्ची hi थी तो मैंने उसे पूरा समय दिया और साथ में मैं भी अपने लुंड पर गया की छूट की गर्मी महसूस करने लगा जिससे मेरे लुंड को बेहद सुकून मिल रहा था मैंने गया की कमर को सहलाते हुए एक हाथ से उसकी कमर और नाभि को छूड़ने लगा साथ hi दुसरे हाथ से उसके छोटे मगर सख्त छूछीयो से खेलने लगा....
फिर गया थोड़ी आगे को झुकी और मेरे होंठों को चूसने लगी और होंठों चूसते हुए hi वो अपने चूतड़ नीचे करने लगी जिससे मेरा लुंड और अबदार जाने लगा और फिर एक थप की आवाज़ के साथ उसके चूतड़ों मेरी जांघों से टकराये और लुंड पूरा गया की छूट में जड़ तक समां गया... गया को ज़रूर तकलीफ हुई क्यूंकि उसका सबूत उसनेमेरी होंठों को काटकर दिया..
खैर आखिर लुंड पूरा उसकी छूट में था और फिर गया ने मेरे लुंड पर उछालना शुरू किआ.... मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लुंड किसी मख्खन की गरम भट्टी में अंदर बहार हो रहा है... मैं गया की छूछीयो को मसलते हुए नीचे से धक्के लगाकर लुंड गया की छूट में पेल रहा था... गया की चुदाई करने में बेहद मज़ा आ रहा था उसकी छूट में मेरा लुंड कैसा हुआ अंदर बहार हो रहा था जो हम दोनों को hi आनंद दे रहा था...
गया- भैया काश मैं tumhariiiiiiiiiii सगी बहिन होती तो कितना ाचा रहता... मैंन हमेशा तुमसे अपनी छूट मरवा पाती... तुम्हारे बड़े लुंड को अपनी छूट में रोज़ लेती...
गया आगे झुककर मेरे कान में ये सब बोलते हुए अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर मार रही थी....
में- तू अब भी मेरी सगी बहन से काम नहीं है मेरी प्यारी चुड़क्कड़ गुड़िया.. मैं तुझे अपनी बहन समझकर hi छोड़ता हूँ... अह्ह्ह्ह क्या कासी हुई choooooooooot है तेरी आह्ह्ह्ह
मैंने गया को आगे झुककर उसकी छोटी छोटी छूछीयो को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा साथ hi नीचे से कमर उठा उठा कर उसकी छूट में लुंड को जड़ तक पेल रहा tha...sath hi मेरे हाथ उसकी कमर पर थे जो उसे उछलने में मदद कर रहे the...thap थप की आवाज़ रात की ख़ामोशी को तोड़ रही थी...
अगले दो मिनट तक ऐसे hi छोड़ने के बाद गया अचानक से ऊपर उठी थोड़ा तो नेरा लुंड उसकी छूट से निकल गया जिसे उसने तुरंत हाथ से पकड़ लिए और फिर मुझे हैरान करते हुए उसने मेरे लुंड के टोपे को अपनी गांड के कैसे हुए छेड़ पर रख दिया... और इससे पहले की मैं कुछ बोलता वप नीचे हो गयी और मेरे लुंड का टोपा उसकी तंग गांड में फंस गया...
मैं तो गया की हिम्मत देख कर हैरान था और ये भी समझ गया की गया को गांड मरवाना कितना पसंद है हालाँकि दर्द उसे अभी भी हो रहा था क्यूंकि उसने अपने होंठों को दबाकर खुद को चीखने से रोका हुआ था मैं गया के बारे में इतना ज़रूर कह सकता हूँ... की आने वाले समय में छूट से ज़्यादा इसकी गांड में भीड़ लगेगी....
मैं इन्ही ख्यालों में डूबा हुआ था की तब तक गया ने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा कर दो तीन झटको के साथ मेरा पूरा लुंड गांड में ले लिए था....
गया की गांड में बेहद कासी होने के कारन मेरे लुंड को एक अलग hi एहसास हो रहा था... उसकी गर्माहट लुंड को पिघला रही थी... कुछ देर वहीं पर रुकने के बाद गया ने अपना सर मेरे सीने से उठाया और गर्दन आगे बढाकर मेरे होंठो को चूमा और फिर बोली- भैया तुम्हारा लुंड मुझे अपनी गांड में लेने में बहुत मज़ा आता hai...aisa लगता है की बास्तुमसे गांड hi मरवाती रहूं...
में- मेरी जान कभी का टी पता नहीं पर अभी मेरा लुंड तेरी गांड में है होजा शुरू... मुझे भी तेरी गांड मरने में जन्नत का मज़ा मिलता है मेरी रंडी बहन...
और ये कहकर मैंने नीचे से गया गरम गांड में लुंड पेलना शुरू कर दिया.

मुझे हमेशा की तरह hi गांड मरने में बहुत hi ज़्यादा मज़ा आ रहा था और जब गांड गया जैसी मस्त नयी नयी और कासी हुई और कमसिन लड़की की हो तो क्या hi बात है...








































