Incest Katha Chodampur Ki - Page 11 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

फिर बुआ और पूर्वी दीदी एक साथ बाथरूम में घुस गयी... और हम तीनो भी मुस्कुरहट के साथ अलग हो गए और अपने अपने बिस्तर की और बढ़ गए....

अपडेट 63

मैं छत पर बिस्तर पर पंहुचा तो देखा अनुज सो चूका था और हम दोनों भाइयों की आदत है फ़ैल कर सोने की तो पूरी खत पर वो फ़ैल कर सोया था तो मैंने सोचा एक खत पर दोनों का सोना तो बहुत मुश्किल है तो मैंने अनुज को जगाया और बोलै की बिस्तर नीचे लगा लेते हैं खाट छोटी है नीचे छत पर आराम से फ़ैल कर सोयेंगे...

अनुज भी आँखें माल्टा हुआ उठ गया और बिस्तर लगाने में मेरी मदद की और फिर हम दोनों लेट गए और लेटते hi मेरी आँख लग गयी...

सोते सोते सपने में मुझे ऐसा दिख रहा था की मैं कहीं पर नंगा खड़ा हूँ और मेरा लुंड किसी रस्सी से बंधा हुआ है और कोई दूसरी तरफ से उस रस्सी को खींच रहा है पर रस्सी खींचने के बाद भी मुझे दर्द नहीं हो रहा बल्कि मज़ा आ रहा है... और फिर अचानक से मेरी आँख खुली तो हड़बड़ा कर इधर उधर देखा और जब थोड़ा सही से दिखा और दिमाग स्थिर हुआ तो पाया एक सर दिखाई दिए जो मेरे पेट के नीचे ऊपर नीचे हो रहा tha...aur मेरा लुंड किसी गरम सी चीज़ में था ... तो देर न लगी समझने में कोई मेरा लुंड चूस रहा hai...side में देखा तो अनुज बेखबर होकर आराम से सो रहा था और फिर जब ध्यान से नीचे देखा तो पहचान भी गया की ये तो प्यारी रंडी बच्ची गया है...

उसने एक नज़र उठा कर मेरी आँखों में देखा और फिर उसके होंठों पर जो मेरे लुंड के चारो और चिपके हुए थे उनपर थोड़ी मुस्कान आई और फिर अगले hi पल वो अपने काम में लग गयी... मैं भी नीचे हाथ लेजाकर उसके चेहरे से बालो को हटाकर प्यार से उसके सर पर हाथ फेरने लगा और वो लगातार मेरा लुंड चूसे जा रही थी...





गया के लुंड चूसने में उसका उतावला पैन साफ़ दिख रहा था जो अक्सर इस उम्र में होता है... खुद को साबित करने का जूनून... वही गया में दिख रहा था अभी नयी नयी hi इस चुदाई के खेल में शामिल हुई थी तो मैं भी किसी से काम नहीं यही वो दर्शन चाहती थी... उसके लुंड चूसने से मेरा लुंड लोहे जैसा हो गया था...

गया पूरी कोशिश करके भी मेरा आधा लुंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी..... पर मैं उसके मुँह के एहसास को पूरे लुंड पर महसूस करना चाहता था तो मैंने अपने हाथ से उसके सर को अपने लुंड पर दबाना शुरू कर दिए साथ hi अपनी कमर के झटके भी उसके मुँह में मरने लगा मेरा लुंड थोड़ा और अंदर जाने लगा पर गया की आँखों से आंसू आने लगे मेरा लुंड उसके गले पर टक्कर मार रहा था जिससे उसके मुँह से घ्हुउउउउउउ हूउउउउउ की आवाज़ आ रही थी...

पर लड़की की हिम्मत की भी दाद देनी पड़ेगी एक बार भी नहीं रुकी न hi कुछ ऐतराज़ किआ बस लुंड को और अंदर तक लेने की कोशिश करने लगी... मैं हैरान था की इतने काम समय में ये लड़की कितना कुछ सीख गयी...





मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था उठाते hi इस तरह की कोई सेवा करदे तो मज़ा hi आ जाता है... मैंने छत के चारो तरफ देखा तो सिर्फ हम लोग hi थे बाकि लोग कमरों में सो रहे थे...

मैंने गया का सर पकड़ा और अपने अपने लुंड पर दोबारा दबा दिया मेरा लुंड उसके गले तक पहुँच गया वो थोड़ा झटपटाने लगी कुछ पल ऐसे hi रखने के बाद मैंने लुंड को उसके मुँह से बाहर खींचा तो वो खांसते हुए लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी...

मैंने उसके हाथ को पकड़ कर ऊपर खींचा तो वो ऊपर आ गई और अब मेरी नज़र उसके बाकी के शरीर पर पड़ी जो की पूरा नंगा था बगल में हु उसकी एक टीशर्ट और पजामा पड़ा था शायद मेरा लुंड चूसते हुए उसने उतर दिया होगा और फिर वो ऊपर होकर मेरी कमर के दोनों और पकिर कर के बैठ गयी मैंने उसे थोड़ा और ऊपर खींचा और उसके चूतड़ों को पकड़ लिए और उन्हें मसलते हुए उसे उठा कर अपने चेहरे पर बिठा लिया... सुबह सुबह नाश्ते में रसीली और कासी हुई छूट और गांड चाटने को मिल जाये तो इससे टेस्टी नास्ता क्या मिलेगा...

आँखों के सामने गया की कासी हुई पर बेहद गीली छूट थी जिसमे से रास बहकर बहार आ रहा था जो छूट को और रसीली बना रहा था.. अनजाने में hi उसे देखते हुए मेरी जीभ बहार आ गयी उस स्वादिष्ट छूट के दर्शन से मेरे मुँह में पानी आ गया...

उसकी छूट के बिलकुल नीचे उसकी गांड का छोटा सा भूरे रंग का छेड़ था जो इस समय इतना हसीं दिख रहा था मुझे वो दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ों में से एक मालूम हो रहा था... उसके गांड के छेड़ को देखकर ऐसा लग रहा था की इसमें तो कभी कोई उंगली भी नहीं घुसी होगी लुंड तो दूर की बात है... पर सच्चाई तो ये थी की यही छोटा सा छेड़ मेरा लुंड भी जड़ तक निगल चूका था... उसके छेदों को देखते हुए कब मेरा सर ऊपर उठ गया और कब मेरी जीभ उसकी छूट से टकराई मुझे खुद बी एहसास नहीं हुआ... मेरा मुँह छूट पर लगते hi गया जे मुँह से सिसकारी निकली- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa

जिसे सुनकर मुझे एहसास हुआ और मैं होश में आया तो देखा की मैं गया की छूट चाटने भी लगा... उसकी छूट के रास में जो स्वाद था अचे अचे पकवान फीके पद जाएं.. मैं उसके कोमल गद्देदार चूतड़ों को मसलते हुए गया की छूट चाट रहा था..

गया- (फुसफुसाते हुए) आअह्ह्ह्ह bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa ऐसे hi खा जाआऊऊऊ मेरी choooooooooot कोऊ बहुत खुजली हो रही thiiiiiiiiiiii इसमें...

मैंने हम्म्म करते हुए जवाब दिया और तेज़ी से गया की छूट में जीभ डालते हुए मैंने उसके चूतड़ों को और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया... और फिर मसलते मसलते ऊँगली से उसकी गांड के प्यारे से छेड़ को कुरेदने लगा...

गया तो मेरे मुँह पर बैठी पागल होती जा रही थी वो अपनी छूट को मेरे मुँह पर दबा दबा कर रगड़ रही थी कई बार तो मेरा सांस लेना भी मुश्किल हो जाता... और न जाने क्या क्या अपने hi मुँह में बड़बड़ाये जा रही थी...

गया- आह्ह्ह्ह bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa भेनचोद चबा जाओ मेरी छूट को आह्हः क्या सोच कर आई थी शाआंआड़ड़जीई में ऑरररर यहां आईसीईई खुऊजली लगाई चुत में भैया की अब शांत hi नहीं होती... माँ को भी छुड़ड्डड्डड़आआ meri.....aaahhhh हाँ गाआआनंनंड्डड़ से भीईई खीलल्लूऊ.....

ये सब वो इतनी धीरे बोल रही थी की मुझे भी सुनाई नहीं दे रहा था...

छूट चाटते हुए मैंने एक ऊँगली उसकी छूट में घुसेड़ दी तो वो थोड़ा झटपटई और फिर शांत हो गए...

मैं धीरे धीरे उंगली अंदर बहार करने लगा साथ hi उसकी छूट के डेन को जीभ से सहलाने लगा तो ऐसा लगा जैसे गया की तो साँसे रुक गयी हो और वो फिर लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए अपने चूतड़ों को घुमा घुमाकर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी....

कुछ देर दाने को सहलाने के बाद मैंने अपना मुँह थोड़ा नीचे किआ और अपनी जीभ उसके गांड के छेड़ पर लगाडी साथ hi छूट में उंगली भी लगातार किये जा रहा था.... गया उत्तेजना के बहाव में बहती जा रही थी...

मैंने अपनी जीभ को नुकीला किआ और उसकी गांड के संकरे छेड़ में घुसेड़ने लगा ... एक हाथ से उसके दोनों चूतड़ों को थोड़ा फैलाया तो मेरी जीभ के लिए उसकी गांड का छेड़ थोड़ा सा खुला और जीभ का अगला हिस्सा अंदर चला गया...

गया अब बुरी तरह से हांफ रही थी कुछ बोल पाना उसके शायद अब बस में नहीं था... मैंने उसे थोड़ा और सताने के लिए एक उंगली और उसकी छूट में डालदी साथ hi अपनी जीभ भी उसकी गांड से अंदर बहार करने लगा.... ऐसा करते हुए मुझे 10 सेकण्ड्स hi बीते होंगे के मुझे गया का शरीर कांपता हुआ महसूस हुआ मैंने उसकी छूट से हाथ हटाकर उसकी कमर को पकड़ लिए जिससे वो गिर न जाए और फिर अगले hi पल गया झड़ने लगी मैंने अपने मुँह को गांड से हटाकर छूट पर टिका दिया जिसमे से गया के रास की नदिया बाह रही थी और मैं सरे रास को बड़े चाव से गटकने लगा...

गया की छूट रास बहा रही थी और मैं उसे पिबकार अपनी प्यास बुझा रहा था... मैंने गया के शरीर को अब भी थाम रखा था.. कुछ देर बाद जब झड़ना बंद हुआ तो वो शांत हुई और फिर मेरे मुँह से उठ कर नीचे की और खिसकने लगी और फिर मेरे पेट पर बैठ कर आगे झुक कर अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए और चूसने लगी अपनी छूट के रास का स्वाद मेरे होंठों और जीभ से लेने लगी... अगले hi पल उसकी जीभ ने मेरे मुँह में अपनी जगह बना ली.. और मैंने भी उसका स्वागत उसे चूसते हुए किआ गया की जीभ मेरे मुँह में सैर कर रही थी हम दोनों इतनी बुरी तरह से एक दुसरे की जीभ चूसने में लगे हुए थे की हम दोनों की सांस फूल रही थी और फिर जब सांस लेना मुश्किल हो गया तो हम अलग हो गए...

अलग होते hi हमने अपनी साँसे ठीक की और फिर गया ने मेरा लुंड हाथ में पकड़ा तो वो झटके मरने लगा जिससे गया और मैं दोनों hi समझ गए की ये क्या चाहता है .. गया ने अपने चूतड़ों को उठाया और मेरे लुंड के ऊपर एडजस्ट किआ कुर फिर मेरे लुंड के टोपे को अपनी छूट के छेड़ पर रखा और फिर लुंड को छूट पर ऊपर नीचे घिसने लगी.. जिससे मैं और वो दोनों hi तड़पने लगे... और फिर अचानक से गया ने लुंड को रोका और फिर नीचे हुई मेरे लुंड का टोपा उसकी गरम छूट में घुस गया... हम दोनों के मुँह से एक ाः निकल गयी...

मेरे हाथ खुद बा खुद उसकी कमर पर कास गए और फिर धीरे धीरे वो नीचे होने लगी और मेरा लुंड गया की छूट को चीरता हुआ अंदर जाने लगा जब लुंड आधा गया की टाइट छूट में घुस गया तो गया रुक गयी और मैं समझ भी गया की वो क्यों रुकी है गया ने हाल hi में चुदाई करना शुरू किआ था तो उसकी छूट अभी उतनी खुली नहीं थी साथ hi मेरा लुंड भी काफी बड़ा hai..mera लुंड लेते हुए बुआ जैसी खेली खाई औरत की चीख निकल जाती है तो ये तो बेचारी बच्ची hi थी तो मैंने उसे पूरा समय दिया और साथ में मैं भी अपने लुंड पर गया की छूट की गर्मी महसूस करने लगा जिससे मेरे लुंड को बेहद सुकून मिल रहा था मैंने गया की कमर को सहलाते हुए एक हाथ से उसकी कमर और नाभि को छूड़ने लगा साथ hi दुसरे हाथ से उसके छोटे मगर सख्त छूछीयो से खेलने लगा....

फिर गया थोड़ी आगे को झुकी और मेरे होंठों को चूसने लगी और होंठों चूसते हुए hi वो अपने चूतड़ नीचे करने लगी जिससे मेरा लुंड और अबदार जाने लगा और फिर एक थप की आवाज़ के साथ उसके चूतड़ों मेरी जांघों से टकराये और लुंड पूरा गया की छूट में जड़ तक समां गया... गया को ज़रूर तकलीफ हुई क्यूंकि उसका सबूत उसनेमेरी होंठों को काटकर दिया..

खैर आखिर लुंड पूरा उसकी छूट में था और फिर गया ने मेरे लुंड पर उछालना शुरू किआ.... मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लुंड किसी मख्खन की गरम भट्टी में अंदर बहार हो रहा है... मैं गया की छूछीयो को मसलते हुए नीचे से धक्के लगाकर लुंड गया की छूट में पेल रहा था... गया की चुदाई करने में बेहद मज़ा आ रहा था उसकी छूट में मेरा लुंड कैसा हुआ अंदर बहार हो रहा था जो हम दोनों को hi आनंद दे रहा था...

गया- भैया काश मैं tumhariiiiiiiiiii सगी बहिन होती तो कितना ाचा रहता... मैंन हमेशा तुमसे अपनी छूट मरवा पाती... तुम्हारे बड़े लुंड को अपनी छूट में रोज़ लेती...

गया आगे झुककर मेरे कान में ये सब बोलते हुए अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर मार रही थी....

में- तू अब भी मेरी सगी बहन से काम नहीं है मेरी प्यारी चुड़क्कड़ गुड़िया.. मैं तुझे अपनी बहन समझकर hi छोड़ता हूँ... अह्ह्ह्ह क्या कासी हुई choooooooooot है तेरी आह्ह्ह्ह

मैंने गया को आगे झुककर उसकी छोटी छोटी छूछीयो को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा साथ hi नीचे से कमर उठा उठा कर उसकी छूट में लुंड को जड़ तक पेल रहा tha...sath hi मेरे हाथ उसकी कमर पर थे जो उसे उछलने में मदद कर रहे the...thap थप की आवाज़ रात की ख़ामोशी को तोड़ रही थी...

अगले दो मिनट तक ऐसे hi छोड़ने के बाद गया अचानक से ऊपर उठी थोड़ा तो नेरा लुंड उसकी छूट से निकल गया जिसे उसने तुरंत हाथ से पकड़ लिए और फिर मुझे हैरान करते हुए उसने मेरे लुंड के टोपे को अपनी गांड के कैसे हुए छेड़ पर रख दिया... और इससे पहले की मैं कुछ बोलता वप नीचे हो गयी और मेरे लुंड का टोपा उसकी तंग गांड में फंस गया...

मैं तो गया की हिम्मत देख कर हैरान था और ये भी समझ गया की गया को गांड मरवाना कितना पसंद है हालाँकि दर्द उसे अभी भी हो रहा था क्यूंकि उसने अपने होंठों को दबाकर खुद को चीखने से रोका हुआ था मैं गया के बारे में इतना ज़रूर कह सकता हूँ... की आने वाले समय में छूट से ज़्यादा इसकी गांड में भीड़ लगेगी....

मैं इन्ही ख्यालों में डूबा हुआ था की तब तक गया ने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा कर दो तीन झटको के साथ मेरा पूरा लुंड गांड में ले लिए था....

गया की गांड में बेहद कासी होने के कारन मेरे लुंड को एक अलग hi एहसास हो रहा था... उसकी गर्माहट लुंड को पिघला रही थी... कुछ देर वहीं पर रुकने के बाद गया ने अपना सर मेरे सीने से उठाया और गर्दन आगे बढाकर मेरे होंठो को चूमा और फिर बोली- भैया तुम्हारा लुंड मुझे अपनी गांड में लेने में बहुत मज़ा आता hai...aisa लगता है की बास्तुमसे गांड hi मरवाती रहूं...

में- मेरी जान कभी का टी पता नहीं पर अभी मेरा लुंड तेरी गांड में है होजा शुरू... मुझे भी तेरी गांड मरने में जन्नत का मज़ा मिलता है मेरी रंडी बहन...

और ये कहकर मैंने नीचे से गया गरम गांड में लुंड पेलना शुरू कर दिया.



मुझे हमेशा की तरह hi गांड मरने में बहुत hi ज़्यादा मज़ा आ रहा था और जब गांड गया जैसी मस्त नयी नयी और कासी हुई और कमसिन लड़की की हो तो क्या hi बात है...
 
मुझे हमेशा की तरह hi गांड मरने में बहुत hi ज़्यादा मज़ा आ रहा था और जब गांड गया जैसी मस्त नयी नयी और कासी हुई और कमसिन लड़की की हो तो क्या hi बात है...

अपडेट 64

गया भी मस्त होकर अपनी गांड उठाकर मुझे पूरी मदद कर रही थी, गया की गांड ने मेरे लुंड को चारो तरफ से जकड रखा था ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लुंड किसी रिंग में अंदर बहार हो रहा हो... मैं हाथो से गया की छूछीयो को मसलते हुए और तेज़ तेज़ झटके मरने लगा...

मैं आधे से ज़्यादा लुंड बहार खींचता और फिर बापिस जड़ तक अंदर दाल देता मेरे ाँद उसके चूतड़ों से जाकर टकरा जाते.. हर झटके के साथ गया का मुँह खुल रहा था और बंद हो रहा था... उसके कोमल गद्देदार चूतड़ हर प्रहार के साथ लहरा रहे थे... फुर उसके मज़े को और बढ़ने के लिए मैंने अपना एक हाथ नीचे लेकर उसके छूट के डेन को सहलाना शुरू काट दिया... वो अपना सर इधर मरने लगी...

Gia-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa maaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ.....

पर मैंने अपनी गति बिलकुल काम नहीं की बल्कि बढ़ा और दी .. गया तो जैसे पागल सी हो गयी.. और उसकी आँखें ऊपर की और तन्ने लगी और कुछ पल बाद hi मैंने अपने पेट पैट गीला महसूस किया मैं समझ गया की गया झाड़ गयी है फिर भी मैं लगातार बिना रुके उसकी गांड में लुंड अंदर बहार कर रहा था... इतना मज़ा जो आ रहा था... खैर वो झाड़ कर मेरे ऊपर गिर गयी साथ hi मेरे झटके भी रुक गए तभी गया ने अपना हाथ नीचे लेजाकर मेरे लुंड को अपनी गांड से निकला जो सरसराता हुआ बहार आया तो गया की गांड का छेड़ कुछ देर के लिए खुला का खुला रह गया और फिर धीरे धीरे सिकुड़ने लगे... गया ने लुंड पकड़े हुए अपने मस्त चूतड़ों को थोड़ा और उठाया और मेरा लुंड छूट के मुँह पर रखकर बैठ गयी और मेरा लुंड छूट में घुस गया..

थोड़ा लुंड छूट के अंदर था जिसे एक करारा धक्का देकर मैंने पूरा अंदर दाल दिया.. गया आगे मेरे सीने से चिपकी हुई थी और मैं उसकी आँखों में देखते हुए नीचे से अपनी कमर को उठा उठा कर उसकी चुदाई कर रहा था... मेरे हर झटके के साथ उसके मुँह पर अलग भाव आते जिन्हे देखने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था...

हम दोनों में से कोई कुछ बोल नहीं रहा था और शायद ज़रुरत भी नहीं थी... जो भी बातें थी वो लुंड और छूट और साथ hi हमारी आँखें आपस में कर रही थी...

गया ने फिर आँखों में देखते हुए hi अपनी गर्दन को लम्बा किआ और मेरे चेहरे के और करीब आ गयी हम दोनों की साँसे अब एक दुसरे को महसूस हो रही थी और फिर गया के होंठ मेरे होंठों से ताम्रा गए मेरे होंठ भी अपने आप खुल गए और उसने मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया... बड़े hi धीरे और कामुक अंदाज़ में वो मेरे होंठों को चूस रही थी... कभी अपनी जीभ से मेरे होंठों के अंदरूनी भाग को सहलाती तो कभी मेरी जीभ को अपने .यह में भरकर चूसने लगती तो कभी दोनों की जीभ आपस में अटखेलियां करती... पर इनसब में कोई आक्रामकता नहीं थी सब कुछ बड़े प्यार से आराम से हो रहा था...

आक्रामकता तो नीचे की और आई हुई थी जहाँ मेरा लुंड सटासट उसकी छूट को भेद रहा था... ऊपर हम जो भी प्यार से कर रहे थे उसका असर नीचे उल्टा हो रहा था मैंने उसे अपने आप से सिमटाए हुए तूफानी धक्क्को से छोड़ रहा था...

हम दोनों की आँखें इस दोहरे सुख का आनंद लेते हुए बंद हो गयी थी... गया के होंठ इतने मुलायम थे जैसे किसी फूल की पंखुरी हो और वैसा hi मीठा रास उसमे से निकल रहा था वहीं उसके निचले होंठ एक अलग hi प्रकार और स्वाद का रास बहा रहे थे.. जिसमे नहाकर मेरा लुंड और टङ्गा होता जा रहा था...

ऊपर और निचे अलग अलग गति और आक्रामकता के साथ कार्य हो रहा था...

मैं और गया बिना किसी झटपटाहट के एक hi गति में सुकून की चुदाई कर रहे थे... आस पास सिर्फ हमारे थप थप की आवाज़ आ रही थी....

तभी अचानक से गया झटपटई उसके होंठ मेरे होंठों पर कास गए और फिर अलग हो गए मेरी भी आँखें खुल गयी... आँखें खुली तो सामने हैरान करने वाला नज़ारा था और गया की झटपटाहट की वजह भी साफ़ हो गयी... मैंने नज़र उठा कर देखा तो अनुज मेरी और गया के पैरों के बीच में था और मुस्कराहट के साथ बड़े ध्यान से नीचे देख रहा था मैं समझ गया की क्या हुआ था..

अनुज ने पीछे से गया की टाइट गांड में लुंड दाल दिया था अब गया के अंदर दो लुंड थे जिससे वो झटपटई थी...





गया भी पीछे मुद कर देख रही थी... उसकी साँसे बहुत तेज़ तेज़ चल रही thi...par गया कुछ बोल नहीं रही थी.....

में- अनुज पागल है क्या बता कर नहीं कर सकता था क्या???

Anuj-mmm भैय्यियया सोते हुए कुछ आवाज़ से नींद टूटी तो देखा आप दोनों लगे हुए थे.. और मेरा लुंड खड़ा हो गया और फिर देखता रहा तो कण्ट्रोल नहीं हुआ तो पीछे से मैं भी आ गया...

में- कण्ट्रोल के बच्चे पूछ तो सकता था एक बार ऐसे अचानक से कोई करता है क्या?

अनुज- सॉरी भैया.. वो कुछ समझ नहीं आया तब..

Me-mujhse क्या गया से बोल सॉरी...

अनुज- सॉरी गया ग..

और ये कहते हुए अनुज ने एक धक्का और लगा दिए और अपना लुंड गया की गांड में और अंदर सरका दिया..

गया ने सर घुमाकर देखा और फिर मेरी तरफ मुस्कुरा कर इशारा किआ की वो ठीक है गुस्सा न करूँ...

में- गया इससे मिलो ये है मेरा और तुम्हारा भी भाई अनुज...

अनुज-( एक धक्का देकर अपना पूरा लुंड गया की गांड में घुसेड़ते हुए) कैसी हो गया?

गया ने भी अपनी गांड पीछे करते हुए जवाब दिया- ठीक हूँ अनुज भैया...

मुझे सोचकर कुछ अलग सा लग रहा था की बताओ अभी तक इन दोनों ने बात तक नहीं की थी उससे पहले hi अनुज का लुंड गया की गांड में घुसा हुआ था... और मैं अब परिचय करवा रहा था जब लुंड जड़ तक गांड में घुसा हुआ था...

में- और अनुज ये गया है रिमझिम दीदी की मां की बेटी...

अनुज ने अब धीरे धीरे गया की गांड में धक्क्के लगाने शुरू भी कर दिए थे... तो मैंने भी नीचे से दोबारा गया की छूट को भेदना चालू कर दिया...

अनुज- ऐसी बहन पहले क्यों नहीं मिली....

गया- बड़ी जल्दी थी भैया आपको बहनचोद बनने की....

अनुज आगे हाथ लेजाकर गया की छूछीयो को मसलते हुए- जब ऐसी बहन हो तो कौन बहनचोद नहीं बनना चाहेगा... हैं न भैया...

में- तुम दोनों hi बहुत बोलते हो...

मैंने नीचे से गया की छूट में झटके मरते हुए कहा...

गया- हाँ भैया बोलना बंद करो और काम पर ध्यान दो...

और गया ने ये बोलकर अपना सर फिर से मेरे सीने पर टिका दिया...

मैंने और अनुज ने भी अपना काम शुरू कर दिया मुझे अपने लुंड पर गया की गांड में अनुज का लुंड घिसता हुआ महसूस हो रहा था... जिससे मेरी उत्तेजना और बढ़ रही थी और मैं और तेज़ी से नीचे से गया को छोड़ने लगा...

Gia-maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हम्म bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa दोनों bhaiiiiiiiiiiiii एक साथ मार रहे हो मेरिइइइइइइइ गाआआनंनंड्डड़ और choooooooooot को आअह्ह्ह्ह ऐसा mazaaaaaaaaaaa कभी nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आया...

Anuj-bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaa क्या गांड है इसकी... जबसे पहली बार देखा था तबसे यही सोच रहा था की ये छोड़ने को मिल जाये... पर जब पता चला की बहिन है तो दिल टूट गया पर क्या पता था इतनी जल्दी दिल की इच्छा पूरी हो जाएगी वो भी बहनचोद बनकर...

अनुज ने गया की गांड में अंदर तक लुंड पेलते हुए कहा...

में- मेरी बहिन है hi एक नंबर की होने वाली रंडी जो रात में अपने दो भाइयों के लुंड अपने समाये हुए बैठी है...

Gia-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhh सालो तुम दोनों इतने बड़े छोड़ू हो न की अगर मेरी जगह यहाँ पर तुम्हारी माँ भी होती न तुम उसे भी साथ में लुंड घुसा घुसा कर छोड़ते...

गया की इस उत्तेजना में कही हुई बात पर हम दोनों भाइयों में से कोई कुछ नहीं बोलै पर ये सुनकर हमारे झटके ज़रूर तेज़ हो गए... और एक पल को मैं भी यही सोचने लगा की क्या वो भी यही चाहता है तभी ये सुनते hi उसकी गति बाद गयी है...

खैर मैंने इनसब बातों को ध्यान से हटते हुए... अभी जो सामने था उस पर ध्यान दिया...

पर माँ वाली बात का असर गया पर उल्टा पड़ा क्यूंकि हमारे झटके तेज़ होने की वजह से वो अलग hi दुनिया में पहुंच गयी थी... और कुछ मिनट्स बाद hi उसकी छूट का फुव्वारा मेरे लुंड पर बाह कर आने लगा.... जिससे मेरा लुंड नहाने laga...Gia का शरीर बुरी तरह से कंपनी लगा.... उसके हाथ मेरे शरीर पर कस्ते चले गए... उसकी आँखें ऊपर की और छड़ी हुई थी... गया की ज़िन्दगी का ये सबसे बड़ा ओर्गास्म लग रहा था मुझे तो... खैर वो काफी देर तक इस धरा में बहती रही... कई मिनट्स बाद वल शांत हुई तो आगे होकर अपने आप को लुंड से अलग करके साइड में गिर gayi...hum दोनों के लुंड बहार निकल गए उसकी छूट और गांड से..

हम दोनों ने भी थोड़ी देर उसे ऐसे hi लेते लेते आराम करने दिए... पर दो बड़े बड़े खड़े हुए लुंड कितना इंतज़ार करते..

तो हम फिर से उसे टटोलने लगे वो अब भी साइड में मुँह करके लेती हुई थी... तो अनुज ने इस बार इशारे में उसकी छूट मरने के लिए कहा और फिर गया के सामने जाकर लेट गया गया अब भी साइड में लेती थी तो अनुज भी अपना मुँह उसकी तरफ कर के लेट गया.. और फिर गया की कमर पकड़ कर उसे खुद से चिपका लिए और गया की एक तंग को अपने ऊपर चढ़ा लिए जिससे दोनों के नीचे का हिस्सा चिपक गया ौस उसी का फायदा उठाते हुए अनुज ने अपने लुंड को पकड़ कर गया की छूट में पिरो दिया.. जिससे गया थोड़ा सा सिसकी... उधर अनुज ने लुंड अंदर जाते hi गया का चेहरा पकड़ा और अपने होंठों को गया के होंठों से भिड़ा दिया और दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे...

मैं भी और कितनी देर रुकता तो मैं भी गया के पीछे लेट गया और चूँकि गया की तंग अनुज के ऊपर होने की वजह से उसकी गांड का छेड़ मुझे नज़र आ रहा था तो मैंने भी अपने लुंड को उसकी गांड के छेद पर लगाया और कमर पकड़ कर अंदर धकेल दिए...

टोपे के घुसेड़ते hi गया अनुज के होंठों के बीच थोड़ा कुनमुनाई और फिर से शांत हो गयी तो मैंने भी अपना काम जारी रखा और हलके हलके धक्के देकर अपना पूरा लुंड गांड के अंदर दाल दिया... दूसरी तरफ से अनुज भी धक्के लगाकर गया को छोड़ने लगा और इधर से मैं उसकी कासी हुई गांड को अपने लुंड से भरने लगा..





हम तीनो hi फिर से चुदाई के खेल में पूरी तरह से लग गए.. गया दोहरे मज़े से पागल सी होती जा रही थी...

Gia-chooodddddddoooo सालो भैंचोड़ो अपनी बहिन को छोड़ो... साडी खुजली मिटादो मेरी छूट और गांड की अपने बड़े बड़े लुँडो से... आह्ह्ह्ह पहले क्यों नहीं छुड़वाया मैंने....

अनुज- गया क्या गरम छूट है तेरी.... आअह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा hai...le साली पूओरिआए लूंणण्ड खा जा....

में- आराम से बोलो कोई आ सकता है.... अह्ह्ह्ह जिआआआआ...

यहाँ हम तीनो चुदाई में लगे हुए थे इसका मतलब ये नहीं की घर के बाकी लोग सो रहे होंगे... जिनको चुदाई का चस्का हो उन्हें बिना चोदे नींद कहाँ आती है... तो अलग अलग जगह अलग अलग दृश्य थे...

एक कमरे में कुछ बच्चे सो रहे थे और वहीं बगल में पड़ी खत पर जीजाजी यानि पूर्वी के पति लेते हुए थे और उनके ऊपर उनकी कमसिन भोली भली बीवी उनका लुंड अपनी छूट में लेकर उछाल रही थी... जीजाजी कभी पूर्वी दीदी की छूछीयो को मसलते तो कभी उनके गदराये चूतड़ों को...





पूर्वी दीदी अपना पत्नी धर्म निभाती हुई अपने पति को खुश करने में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी...

वहीं घर के किसी एक कोने में चुपचाप दूसरो से छुपते छुपाते एक और जगह कुछ हो रहा था रसोई के फर्श पर चारु ममी घोड़ी बानी हुई थी और उनके ऊपर चढ़ कर विनीत उनकी गांड में अपना लुंड दाल कर उनकी सवारी कर रहा था...





चारु ममी अपनी गांड उठा उठा कर अचे से मरवा रही थी तो वहीं विनीत अपने लुंड को जड़ तक चारु ममी की गांड में थोक रहा था...

वहीं बड़े फूपाजी के कमरे में दोनों देवरानी जेठानी एक hi बीएड पर पूरी नंगी लेती हुई थी बड़ी बुआ यानि विनीत की तै जी अपनी पीठ पर लेती थी उनकी टंगे खुली हुई थी और पैरों के बीच उनके लादले देवर यानि हमारे फूपाजी थे जिनका लुंड अपनी प्यारी भाभी की छूट में अंदर बहार हो रहा था... और बड़ी बुआ की छुछियां हर झटके के साथ उछाल कूद कर रही थी वहीं उनके बगल में फूपाजी की बीवी यानि हमारी बुआ एक तरफ करवट लिए हुए लेती थी उनके बड़े चूतड़ एक तरफ को उभरे हुए थे और उन चूतड़ों के बीच में एक लुंड उनकी छूट के अंदर बहार हो रहा था जो की उनके जेठ जी का था जो अपने छोटे भाई की बीवी को दनादन छोड़ रहे थे... बड़े फूपाजी बुआ के चूतड़ों के नीचे की तरफ बैठ कर अपनी कमर हिला हिलाकर लुंड छूट में पेले जा रहे थे...





दोनों भाई एक दुसरे की बीइओ को छोड़ने में लगे हुए थे वो भी एक दुसरे के सामने...

खैर इसी तरह चुदाई का सिलसिला चला कुछ देर और फिर सब अपना अपना काम ख़तम कर के सो गए...

मैंने और अनुज ने भी गया को काफी देर तक छोड़ा और फिर उसकी छूट और गांड को अपने रास से भर दिया जिसे लेकर वो लड़खड़ाती हुई अपने बिस्तर पर चली गयी जहाँ उसकी मुम्ममय भी अपनी गांड में विनीत का रास लिए हुए सो रही थी वो भी बगल में लेट कर सो गयी... मैं और अनुज भी सो गए...

सुबह उठे तो घर में और हलचल थी आज शादी का दिन था पूरा घर धीरे धीरे मेहमानो से भरता hi जा रहा मैं जल्दी जल्दी फ्रेश हुआ जल्फी से नाश्ता किआ और लग गया काम में थोड़ी देर बाद बुआ ने बोलै पास hi के गाओं से पंडित ग को बुला ला तो मैं बाइक लेकर गया पास hi के गाओं में लोगो से पूछ पूछ कर घर पहुंचा तो देखा गेट खुला हुआ था मैंने एक दो बार आवाज़ लगाई पंडित जी पंडित जी करके किसी ने नहीं सुना...

एक तरफ से मुझे मिक्सी के चलने की आवाज़ आ रही थी मुझे लगा शायद इसीलिए मेरी आवाज़ कोई सुन नहीं प् रहा मैं आवाज़ की तरफ बड़ा और जैसे hi एक गेट के पास पहुंचा आवाज़ बंद हो गयी और किसी की आवाज़ आई- अह्ह्ह छोड़िये न पापा ग क्या कर रहे हैं अभी कितना सारा काम बचा हुआ है..

फिर एक आदमी की आवाज़- अरे बहु ज़रा पास तो आ तुझे कैसे छोड़ दूँ... मन hi नहीं भरता...

ये सुनकर मेरे कान खड़े हो gaye...ki ये साला हो क्या रहा है मैंने हौले से सर आगे करके अंदर की तरफ देखा तो पाया एक सुन्दर सी औरत साड़ी पहनकर रसोई में स्लाबे के पास कड़ी थी हाथ मिक्सर पर था.. रंग गोरा था छुछियां भी बड़ी बड़ी थी साड़ी में से झांकती उसकी कमर बेहद गोरी और चिकनी लग रही थी... वहीं उसके पीछे एक अधेड़ उम्र का आदमी माथे पर टीका लगाए हुए खड़ा था उसके हाथ औरत की छूछीयो पर उसकी सारी के ऊपर से. Hi चल रहे थे और कभी कभी दबा भी रहे थे आदमी कपड़ो से और माथे के टीके से मुझे पंडित लग रहा था...





मैं मन hi मन सोच रहा था की ये पंडित भी अपनी hi बहु को निचोड़ रहा है... साला दुनिआ को हो क्या गया है...

बहु- पापाजी आराम से इतनी ज़ोर से मत दबाओ निशान पद जाते हैं...

पंडित- बहु क्या करूँ तेरे ये खरबूजे हैं hi इतने मस्त के खुद को रोक नहीं पाटा.. तेरी सास तो अब बूढी हो चुकी है उसके दबाने में मज़ा नहीं आता...

बहु- पर पापाजी कोई आ जायेगा...

पंडित- कोई नहीं आ रहा बहु..

मैं मन hi मन में- सेल पंडित मैं आ चूका हूँ... खैर मैंने सोचा इनकी रासलीला से मुझे देर हो रही है तो मैं. बापिस गेट पर गया और ज़ोर से गेट पीटा तो अगले hi पल पंडित बहार आया

पंडित- रे भाई कौन हो तुम कैसे गेट पीट रहे हो...

में- पुष्पेन्द्रसिंह के यहाँ से आया हूँ शादी है बताया था न...

पंडित - अहन हाँ बैठो मैं तैयार होकर आता हूँ बैठो....

मैं खाट पर बैठ गया पंडित जल्दी से दुसरे कमरे में गया रसोई से तभी उसकी बहु एक गिलास में पानी लेकर आई और मुझे पानी दिया जैसे hi पानी देने के लिए झुकी उसकी छुछियां उभर कर मेरे सामने आ गयी मेरी नज़र तो उनसे चिपक hi गयी फिर भी खुद को काबू करते हुए मैंने पानी लिया मैं पानी पीने लगा तो वहीं कड़ी हो गयी... मैं पानी पीते हुए उसकी चिकनी कमर को घूर रहा था इतनी गोरी और चिकनी thi...jab तक पानी ख़त्म नहीं हुआ तब तक मैं उसकी कमर को घूरता रहा और फिर गिलास उसे दिया तो वो बोली- चाय पिएंगे?

में- उसके रसीले ामो की तरफ देखते हुए अभी तो नहीं पर फिर कभी ज़रूर पिएंगे आपकी चाय...

वो मुस्कुरा कर मुद कर जाने लगी तो मेरी नज़र उसकी गांड पर गयी... हाय क्या गांड थी उसकी देखते hi लुंड उठने लगा





बड़े बड़े चूतड़ देखकर मन किआ अभी लुंड गांड में घुसा दूँ और घोड़ी बनाकर गांड मरू... मुँह और लुंड दोनों में पानी आ गया...

खैर तभी पंडित तैयार होकर आ गया और बोलै- चलो बीटा...

मैं भी उठा आखिरी बार उसकी गांड को देखा हुए फिर पंडित को बाइक पर बिठा कर घर ले आया... पंडित को लेजाकर बड़ी बुआ से मिलाया तो बड़ी बुआ पंडित से बात करने लगी काम के बारे में पर पसले पंडित की नज़र बड़ी बुइ जे चेहरे पर काम और छूछीयों पर ज़्यादा टिक रही थी... साला ठरकी पंडित फिर मुझे पूर्वी दीदी ने बुला लिए और जैसे hi मैं पूर्वी दीदी के कमरे में घुसा मेरी आँखें बड़ी हो गयी और चेहरे पर ख़ुशी आ गयी..

इसके आगे क्या हुआ जानिये अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके बताते रहिये कहानी कैसी लग रही है... शुक्रिया
 
गाइस प्लीज कमैंट्स एंड सुग्गेस्टियन्स देते रहे... जितना ज़्यादा रेविएवस होते हैं उतना hi लिखने में मज़ा आता है...
 
साला ठरकी पंडित फिर मुझे पूर्वी दीदी ने बुला लिए और जैसे hi मैं पूर्वी दीदी के कमरे में घुसा मेरी आँखें बड़ी हो गयी और चेहरे पर ख़ुशी आ गयी..

अपडेट 65

मैं तो ख़ुशी से गेट पर hi रुक गया और अंदर एक तक देखने लगा... जैसे बहुत समय से किसी चीज़ का इंतज़ार हो और वो मिल जाये तो कितनी ख़ुशी मिलती है वैसे hi मुझे हो रही थी.. मैं तो बस सामने के नज़ारे में खो सा गया था, क्या करना है क्या नहीं करना कुछ समझ hi नहीं आ रहा तह... और आये भी तो कैसे सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था... कमरे क्र अंदर माँ कड़ी हुई थी किसी से बात कर रही थी उसका ध्यान अभी तक मुझपर नहीं गया था... जबकि मेरा ध्यान माँ से हैट नहीं रहा था..

माँ ने एक लाल रंग की साड़ी और पीला ब्लाउज पहन रखा था और हमेशः की hi तरह बहुत खूबसूरत लग रही थी..

माँ का गदराया बदन लाल साड़ी में बेहद कामुक लग रहा था.. ब्लाउज बड़ी बड़ी छूछीयो पर कैसा हुआ था जैसे उन्हें रोकने की असफल कोशिश कर रहा हो... उनकी साड़ी और कमर के बीच से झांकती उनकी चिकनी kamar....haaye इतनी कामुक की देखते hi मुर्दो के लुंड में भी जान आ जाये और रेगिस्तान में प्यासे के मुँह में भी पानी... आज माँ ने साड़ी को काफी नीचे बंधा हुआ था जिससे उनकी कातिलाना कमर कहर hi ध रही थी... चिकना सपाट पेट देखकर hi मन कर रहा था की अभी जीभ से चाट चाट कर गीला करदूँ.. और फिर साड़ी के पीछे से चुपम छुपाई खेलती हुई गहरी नाभि... इस पूरे दृश्य को और कामुक बना रही थी...

इमेजेज-1

मैं तो माँ के रूप में खोया हुआ यूँ hi खड़ा hi रहता अगर पूर्वी दीदी न बोलती तो- अब गेट पर क्या खड़ा है कर्मा... ममी से नहीं मिलेगा... मैं चाय लेकर आती हूँ..

ये बोलकर दीदी चली गयी... और इधर मैं भी होश में आया और फिर माँ को देखते हुए आगे बड़ा और फिर जाकर सीधा माँ को साइड से गले लगा लिए और उन्हें अपने सीने से चिपका लिए... क्यूंकि माँ ने मुझे देखा नहीं था तो अचानक मेरे गले लगाने से वो थोड़ा दर गयी और जब उन्होंने मुझे देखा तो उनके चेहरे पर भी ख़ुशी आ गयी...

जो माँ से बात कर रही थी वो भी हंसने लगी और बोली- चलो आ गया तुम्हारा कर्मा अब मिलो मैं भी कुछ काम कर लेती हूँ...

और वो भी चली गयी.. पर मुझे कुछ पता नहीं था की कौन है कौन गया मुझे तो बस मेरी प्यारी माँ दिख रही थी.. और जिसे सीने से लगाने से मेरे दिल को इतना सुकून मिल रहा था जैसे मेरा कोई हिस्सा टूट गया था और अब बापिस मुझे मिल गया हो...

माँ ने भी अपनी बाहें मेरी पीठ पर लपेट ली थी... अभी इस छान में मेरे अंदर कोई वासना नहीं थी और माँ की आँखों में भी प्यार था एक माँ का बेटे के लिए प्यार... एक माँ और बीटा बहुत समय बाद मिले थे और एक दुसरे की बाहों में समाये हुए the...hum दोनों में से कोई भी अब तक कुछ नहीं बोलै था.. और शायद ज़रुरत भी नहीं थी...

क्यूंकि मैं माँ से काफी लम्बा हूँ तो माँ का चेहरा मेरे कंधे पर tha..maine माँ को देखते हुए उनके सर के ऊपर चूम लिए और फिर माथे पर... माँ मुस्कुरा रही थी और मेरी पीठ पर हाथ फेरे जा रही थी... मैंने फिर अपना सर झुककर माँ के मैथ पर चूम लिए... और फिर मेरस हों अपने आप hi माँ के गाल पर पहुंच गए और मैंने वहां चूम लिए और फिर दुसरे गाल par...maa मेरे इस तरह उतावले पैन से हसने लगी और बोलने लगी...

माँ- बीटा क्याआंम्म्मम्म्म्म

जैसे hi माँ का मुँह क्या बोलने के लिए खुला hi था की मेरे होंठ उनके होंठो से मिल गए और उनकी आवाज़ मेरे मुँह में hi डाब गयी.. एक दो सेकंड hi मैंने माँ के होंठो को चूमा होगा की माँ ने अपने होंठों को अलग कर लिए और इधर उधर देखने लगी की कहीं किसी ने देख तो नहीं लिए...

माँ- कर्मा पागल है क्या कर रहा है अभी कोई देखलेता... कुछ तो सोचा कर..

मुझे भी समझ आया की मैं बिना सोचे समझे क्या कर रहा था किसी ने देख लिया होगा तो कैसे सम्भालूंगा... खैर आस पास देखने से तो नहीं लग रहा था की किसी ने देखा...

में- मा सॉरी पता है तुम्हे देखकर इतनी ख़ुशी हो रही है.. कुछ समझ hi नहीं आया और अपने आप हो गया..

माँ- सोच समझ कर किआ कर बीटा... और ख़ुशी तो मुझे भी बहुत हो रही है मेरे लाल को देखकर...

ये कहकर माँ ने मेरा गाल चूम लिए...

माँ- पता है कितनी याद आई थी मुझे तेरी..

Me-maaa याद तो मुझे भी बहुत आ रही थी तुम्हारी तभी तो तुम्हे देख कर इतनी ख़ुशी हो रही है की क्या बताऊँ..

माँ- मुझे पता है बीटा तू मुझसे बहुत प्यार करता है और उससे कहीं ज़्यादा मैं तुझसे करती हूँ तो सोच मुझे कितनी ख़ुशी होगी...

मैं अपने एक हाथ से माँ की पीठ तो सहलाने लगा जिससे सहलाते हुए मेरा हाथ माँ की नंगी पीठ और कमर पर पहुंच गया और जहाँ मेरे शरीर में अब तक कोई वासना से जुड़ा विचार नहीं था वहीं मेरा हाथ उनके नंगे बदन पर पड़ते hi मेरा लुंड तुरंत कड़क हो गया... और अपना सर उठाने लगा... मेरे पाजामे में तम्बू बनाने लगा और क्यूंकि माँ और मैं गले लगे हुए थे वो माँ को भी चुभने लगा पेट पर...

माँ को ये महसूस होते hi वो थोड़ा कसमसाई और तभी पीछे से पूर्वी दीदी आए गयी

पूर्वी- अरे अभी ख़तम नहीं हुआ माँ बेटे का मिलान चलो ममी बैठो लो चाय पि लो...

मैं और माँ अलग हुए माँ खत पर बैठ गयी मैं भी बगल में बैठ गया दीदी ने माँ को चाय दी फिर मुझे दी और फिर खुद भी. मेरे बगल में बैठ गयी और चाय पिने लगी... मैं दोनों के बीच में बैठा था मेरे दोनों तरफ इतनी कामुक और गदराई औरतें बैठी थी जिनमे से एक मेरी माँ थी तो दूसरी ममेरी बहन और ये सोचते hi ादतनुनसर मेरा लुंड झटके मरने लगा... मैंने कप से एक घूँट पिया चाय का और फिर कप ये बोलकर नीचे रख दिया की अभी चाय बहुत गरम है...

माँ- आराम से पीले... और तू बता पूर्वी कैसा चल रहा है सब तेरी ससुराल में.. तेरी सास तुझे परेशां तो नहीं कर्त...

पूर्वी- नहीं ममी सास तो अछि है यहाँ आई भी हुई है मिलाऊँगी आपको उनसे..

मम्मी और पूर्वी दीदी औरतों की बातें करने लगे मैं बीच मेइब बैठा बैठा दोनों की बातें सुन रहा था.. वहीं अपने लुंड को काबू में करने की कोशिश कर रहा था.. फिर मैंने अपने हाथ पीछे लिए दोनों और अपनी पीठ के पीछे लेजाकर एक हाथ मेरी राइट में पूर्वी दीदी बैठी थी तो उनकी साड़ी और ब्लाउज के बीच नंगी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा... दीदी हाथ लगते hi थोड़ा सा चौंकी पर फिर नार्मल होकर बात करने lagi...maa को ये नहीं दिख रहा था क्यूंकि बीच में मैं था... मैंने दीदी की कमर सहलाते हुए मज़े लेने लगा... फिर मैंने अपना उल्टा हाथ लिए और धीरे से बड़े आहिस्ता से माँ की पीठ पर रख दिया जिसका माँ को पता तो चला पर उन्होंने इतना ध्यान नहीं दिया... मैंने भी धीरे धीरे हाथ फेरना शुरू किआ और सहलाते हुए माँ की नंगी चिकनी कमर पर ले गया... और उनकी कमर का स्पर्श पाते hi मेरा लुंड तो ठुमके मरने लगा पाजामे के अंदर से hi और तम्बो बनाकर खड़ा हो गया... अगर दोनों में से कोई भी मेरी गॉड में देखती तो साफ़ पता चल जाता.. की क्या है ये पर दोनों hi बातों में मसगूल थी...

और मैं इसका फायदा उठा रहा था... मैंने माँ की कमर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया... माँ की कमर इतनी चिकनी थी की क्या बताऊँ... पूर्वी दीदी और माँ के बीच उतना hi अंतर था जितना माँ बेटी के बीच होता है.. फिर भी माँ की कमर उतनी hi चिकनी और कोमल थी जितनी पूर्वी दीदी की... मेरी माँ उम्र के साथ और खूबसूरत और कामुक होती जा रही थी...

माँ को भी ये एहसास था की मेरा हाथ उनकी कमर पर चल रहा है पर पूर्वी दीदी को शक न हो जाये इसलिए वो कुछ भी दिखा नहीं रही थी और नार्मल होकर बात कर रही थी... मैं भी पूरा फायदा उठा रहा था और माँ की कमर को अपने हाथो पर महसूस कर रहा था मेरी उंगलिया अपने आप उनकी कोमल कमर पर फिसल रही थी...

फिर मुझे एक शरारत सूझी और मैंने एक साथ माँ और पूर्वी दीदी दोनों की कमर को मसल दिया.... दोनों थोड़ा सा chaunki..aur खुद को चौंकाने में वो एक दुसरे को नहीं देख पाई और इसी का फायदा हुआ मुझे वर्ण उनका ध्यान दुसरे की हरकत पर ज़रूर जाता...

माँ ने मेरी तरफ एक बार देखा और आँखों आँखों में hi मन किआ वहीं पूर्वी दीदी ने हल्का सा मेरी जांघ पर मारा बाकि कहा किसी ने कुछ नहीं...

मैं बापिस हाथ फिरने लगा और इस बार थोड़ा आगे की तरफ ले गया और अब मेरा हाथ माँ के पेट तक पहुंच गया और मैं माँ के गदराये चिकने पेट को सहलाने लगा... बैठे होने की वजह से उनके पेट में सिलवटें पड़ी थी जो बहुत प्यारी लग रही थी.. मैं उन्ही सिलवटों में अपनी उंगली फिरा रहा था माँ आँखों hi आँखों में मुझे मन कर रही थी.. चुदाई अपनी जगह पर ऐसे माँ के बदन पे हाथ फेरने में भी अलग मज़ा है...

हाथ सहलाते सहलाते हुए मैं उनकी नाभि तक पहुंच गया और मेरी उंगलिया नाभि तक पहुंचते hi माँ थोड़ा सा कसमसाई पर ज़्यादा कुछ नहीं किआ पूर्वी दीदी की वजह से और मैं अपनी उंगली से माँ की नाभि को कुरेदने लगा.. उधर पूर्वी दीदी के साथ भी वही हो रहा था जो माँ के साथ हो रहा था.. मेरी एक उंगली उनकी भी नाभि को छेड़ रही थी वहीं हाथ से पेट की नरम खाल को मसल रहा था... पूर्वी दीदी भी मेरे छूने से गरम होती जा रही थी और बैठी बैठी कसमसा रही थी..

उधर माँ के नरम पेट और नाभि पर हाथ फिरने का अंजाम ये हो रहा था की मेरा लुंड फटने को हो रहा था...

मैं किसी तरह से खुद को काबू किये हुए बैठा था.. घर में इतने मेहमानो की वजह से अभी कुछ भी करना खतरे से खली नहीं था... इसलिए मैं चुप चाप से जितने मज़े ले सकता था ले रहा था... और अब तो माँ थी बगल में तो हाल तो बुआ होना hi था... तभी माँ अचानक बोली..

माँ- कर्मा चाय ठंडी हो रहे है पि ले..

मैंने भी जल्दी से पूर्वी दीदी के पीछे से हाथ निकला और कप उठा लिए और चाय पिने लगा... मेरा एक हाथ अब भी माँ की कमर पर था पर अब मुझे संभल के रहना था नहीं तो पूर्वी दीदी देख सकती थी... पर तभी पूर्वी दीदी बापिस कड़ी हो गयी और बोली- ाचा ममी मैं बाबू को नहला देती हूँ तुम आराम करो...

दीदी फिर कप वगेरा लेकर चली गयी... किस्मत से कमरे में एक दो बच्चो के अलावा कोई नहीं था तो जैसे hi दीदी ने गेट पार किया मैंने माँ को बाहों में भर लिए...
 
दीदी फिर कप वगेरा लेकर चली गयी... किस्मत से कमरे में एक दो बच्चो के अलावा कोई नहीं था तो जैसे hi दीदी ने गेट पार किया मैंने माँ को बाहों में भर लिए...

अपडेट 66

माँ अचानक से मेरे ये करने पर चौंक गयी... पर तब तक मैंने माँ को बैठे बैठे hi अपनी बाहों में जकड लिए tha...aur उन्हें खुद से चिपका लिए...

माँ- कर्मा क्या कर रहा है छोड़ मुझे कोई आ जायेगा... ऐसे नहीं करते बेतुहमममममममम...

माँ के बोलते बोलते hi मैंने एक बार फिरसे होंठ माँ के होंठों से मिला दिए जिससे माँ की आवाज़ मेरे मुँह में hi डाब गयी...





मैं माँ के रसीले होंठों को चूसने लगा... इतने कोमल और रसीले थे माँ के होंठ जैसे लग रहा था की मेरे होंठों में पिघल रहे हैं और साथ hi इतने मीठे की मन कर रहा था ज़िन्दगी भर इनका स्वाद चखता rahu.....par जैसे हर सुखद सपने का अंत होता है इसका भी हुआ और माँ ने अपने होंठों को मुझसे अलग कर लिए..

माँ- कर्मा तू सच में पागल हो गया है.... मत कर ऐसे... कोई देख लेगा...

मैं फिर भी नहीं माना और माँ के गले पर अपने होंठ रख दिए..





माँ के शरीर की खुशबु से मैं और पागल सा होता जा रहा था... मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयी और मैं माँ के गले को चूमने चाटने लगा...

माँ लगातार मुझे मन किये जा रही थी पर मेरी हरकतों से वो भी गरम होती जा रही थी क्यूंकि माँ की तेज़ होती सांसो को मैं महसूस कर प् रहा था..

मैंने माँ के गले को चूमते हुए hi उन्हें पकड़कर पीछे ज़ोर देकर खत पर लिटा लिया और साथ में खुद भी लेट गया... पर बिना अपने होंठों को हटाए, मैं लगातार माँ के गले पर चाट रहा था और माँ के गले में कुछ ऐसी मिठास थी की जियना चाट रहा था उतना hi मैं और चाटने को हो रहा था... साथ hi में लिटाने के बाद मेरा एक हाथ जो पहले माँ की पीठ पर था अब मैं उसे आगे लाया और माँ के हाथ को सहलाते हुए नीचे की तरफ ले गया और साड़ी के ऊपर से hi माँ के पेट पर रख दिया और फिर सहलाने लगा... साड़ी के ऊपर से hi माँ का कोमल पेट इतना मुलायम लग रहा था जैसे मख्खन हो... हाथों को सिर्फ छु भर लेने से आनंद मिल रहा था फिर मैं माँ के पेट को मसलते हुए उनके गले से नीचे की और चाटने लगा....

माँ के पेट का स्पर्श हाथो पर होते hi मैं अचानक से इतना उत्तेजित हो गया की मैं कहाँ हूँ आस पास कौन है ये सब भूल गया बस माँ का गदराया हुआ जिस्म था मेरे सामने मैंने माँ को चूमते हुए सर को एक बार के लिए ऊपर उठाया और एक झटके से उनके पल्लू को पकड़कर नीचे खींच दिया... जिससे माँ की ब्लाउज में कासी हुई छुछियां और उनका नरम पेट मेरी आँखों के सामने आ गया..





जिसे देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया और मैंने अपने होंठों को माँ के पेट पर रख दिया और उनके नरम नरम पेट को एक हाथ से मसलते हुए चाटने लगा... पूरे पेट पर अपनी जीभ और होंठों को घुमा रहा था...

माँ- कर्मा basssssssssssss मत्तत्तट्ठ कर कोइइइइइ आए जायेगा betaaaaaaaaaaaaahhhh...

पर मुझे कोई फ़र्क़ hi नहीं था मैं तो अपनी मस्ती में डूबा हुआ माँ के पेट की नरम मख्खन जैसे बदन को चूमने चाटने में लगा हुआ था... मैं फिर अपनी जीभ को माँ की नाभि के आस पास घूमने लगा... माँ तो जैसे तड़पने लगी उन्होंने अपने हाथ मेरे सर पर रख लिए और मेरा सर पकड़ लिए और फिर मैंने अपनी जीभ माँ की नाभि में घुसड़ी और चूसने लगा.... माँ का पूरा शरीर ऐंठने लगा... माँ की कमर झटक खा रही थी पर मैं दोनों हाथों से माँ की कमर को थामे उनकी नाभि को चूसने में लगा हुआ था... माँ और मैं दोनों hi बेहद उत्तेजित हो चुके थे अगर इस समय कोई आ जाता तो हम ज़रूर पकड़े जाते पर किस्मत अछि थी की कोई अंदर नहीं आया था...

काफी देर तक मैं माँ की नाभि से प्यार जताता रहा और फिर शायद हटाता भी नहीं अगर माँ खुद मेरा सर अपने हाथों से. पकड़ कर ना हटती तो... चेहरा उठाने के बाद भी मेरी नज़र माँ की नाभि पर hi थी... उधर माँ अपनी साँसों को सँभालने की कोशिश कर रही थी... मैं तो जैसे माँ के गदराये पेट और नाभि से सम्मोहित सा हो गया था मुझे उसके अलावा कुछ दिख hi नहीं रहा था... माँ ने मेरे होठों को तो हटा दिया अपनी नाभि और पेट से पर अब मेरा सीधा हाथ वहां पहुँच गया और मैंने अपनी एक उंगली सीढ़ी माँ की नाभि में घुसड़ी... माँ फिर से तड़प उठी...

Maa-Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh betaaaaaaaaaaaaahhhh मत करररररर कोईई आए जायेगा.. ममममममममम...

में- तुम्हारा बदन hi ऐसा है माँ देखकर रुका hi नहीं जाता... अपने बेटे को इसे चखने दो मा...

और मैं माँ की नाभि में उंगली से कुरेदने लगा माँ कसमसाने लगी...





Maa-karma मत्तरत्त कर बेटा ईईई गलत haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii... Meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii बायत मान रुकजा

Me-maaa अब मत रोको बहुत तड़पा हूँ तुम्हारे लिए....

और मैं कभी माँ के पेट को मसलता तो कभी फिर से उनकी नाभि में उंगली घुसा देता.... माँ मुझे मन करती जा रही थी... पर मैं माँ के पेट और नाभि से खेलता जा रहा था पर फिर अचानक से माँ ने मुझे धक्का दिए और मैं साइड हो गया... और माँ जल्दी से उठ कर बैठ गयी और अपनी साड़ी ठीक करने लगी...

मैं हैरान था की माँ को अचानक क्या हुआ मैं उनके चेहरे की तरफ देखे जा रहा था की कुछ पता लगे की हुआ क्या अचानक.... माँ चेहरे से काफी गंभीर लग रही थी...

में- माँ क्या हुआ अचानक?

माँ ने कुछ जवाब नहीं दिया

में- माँ कुछ तो बोलो आखिर हुआ क्या?

माँ ने कुछ सोचा फिर मेरी तरफ देखा..

माँ- तुझे क्या फ़र्क़ पड़ता है.. तुझसे बोल रही हूँ रहने दे बीटा मत कर पर सुन्नी hi नहीं है ज़बरदस्ती कर रहा है... और पूछता है क्या हुआ...

मैं ये सुनकर हैरान हो गया की माँ ऐसी बातें क्यों कर रही हैं... जब लगन के टाइम पर गाड़ी में आये थे तब तो सब ठीक कर दिया था मैंने माँ को छोड़ भी लिए था पर अभी क्या हुआ...

Me-maa तुम ये क्या बोल रही हो... हमारे बीच जो बी हुआ उसके बाद भी अब क्यों मन कर रही हो...

माँ- हाँ कर रही हूँ मन.. गाड़ी में जो भी हुआ था वो इसलिए क्यूंकि बहक गयी थी मैं तब... पर अब नहीं...

मुझे तो जैसे धक्का सा लगा दिल mein...ki कबसे जिस चीज़ का इंतज़ार किया वो hi ख़तम होती दिख रही थी...

में- माँ उसमे बहकना क्या था उस टाइम जो भी हुआ था दोनों की ख़ुशी से हुआ था.. तो फिर अब क्यों ऐसे बोल रही हो..

माँ- देख कर्मा मैंने उस बार के लिए तुझे कुछ नहीं बोलै.. वो दोनों की गलती थी तो उसे गलती समझ कर भूलजा... मैं भी भूल जाउंगी और सब पहले जैसा हो जायेगा...

मुझे माँ की बातों से बुरा लग रहा था साथ hi गुस्सा भी आ रहा था..

में- सही है आपका मन हुआ तो सही था फिर अपने मन से वो गलती हो गयी और अब भूल जॉन मैं उस बात को....

माँ ने देखा मैं गुस्सा हो रहा हूँ तो खिसक कर मेरे पास आ गयी और मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोली.

माँ- बीटा गुस्सा मत कर.. तू क्यों मेरे लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है.. समझने की कोशिश कर मैं तेरी माँ हूँ... माँ बेटे के बीच ये सब नहीं होना चाहिए...

में- पर जो हो चूका है उसे कैसे बदला जा सकता है...?

माँ- बदला नहीं जा सकता पर गलती को सुधारा जा सकता है.. और मैं वो गलती दोबारा नहीं करना चाहती...

में- पर मैं करना चाहता हूँ... मैं उसे गलती मंटा hi नहीं.....

माँ कुछ बोलने वाली थी की उससे पहले hi पूर्वी दीदी की सास कमरे में आ गयी... हम दोनों चुप हो गए मैं ज़मीन की तरफ देखे जा रहा था...

पूर्वी दीदी की सास ने माँ से बात की पर मैं दुःख में इतना खोया हुआ था की मुझे कुछ नहीं पता चला की वो लोग क्या बात कर रहे हैं.. मुझे तो बस रह रह कर माँ की कही हुई बातें सुनाई दे रही थी...

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था तो मैं उठ कर खड़ा हुआ तो माँ ने मेरा हाथ पकड़ कर बिठा लिए और पकड़ कर पूर्वी दीदी की सास से बात करती रही... कुछ देर बाद पूर्वी दीदी की सास चली गयी... उनके जाने पर माँ ने मुझे देखा फिर से और बोली

माँ- कर्मा बीटा तू समझता क्यों नहीं है... समाज की नज़रों में ये पाप है माँ बेटे के बीच ऐसा नहीं होना चाहिए... हमारा समाज इसकी इजाज़त नहीं देता...

में- माँ तुम्हे समाज से मतलब है या मुझसे...? समाज को खुश रखना है मुझे....?

माँ- बीटा मुझे तुझसे hi मतलब है पर रहते तो हम समाज के बीच hi हैं न तो उनके बनाये नियमो का पालन करना पड़ेगा...

में- माँ क्या समाज में सब लोग नियमो का पालन करते हैं.? मैं बताता हूँ कोई नहीं करता कोई कुछ करता है तो कोई कुछ गलत करता है तो हम hi क्यों माने और सबसे ज़रूरी बात माँ हम अपनी ख़ुशी के लिए जो चाहे करें किसी को नुक्सान तो नहीं पंहुचा रहे न...

क्या अपनी ख़ुशी के लिए कुछ करना भी गलत है... और माँ कौन बता रहा है समाज को... ना मैं बताऊंगा न आप फिर क्या दिक्कत है....

माँ कुछ सोच में पद गयी और फिर बोली- बीटा मैं जानती हूँ की तुझे बुरा लग रहा है... मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ तो मैं ये भी नहीं चाहती की तू दुखी हो पर मेरी तरफ से भी तो सोच...

में- ाचा माँ तुम ये बताओ की तुम्हे ाचा लगता है नेरे साथ या नहीं?

माँ- बीटा बात उसकी है hi नहीं... मेरे अचे लगने से या न लगने से फ़र्क़ नहीं पड़ता...

Me-tum वो सब छोडो माँ बस बताओ लगता है या नहीं लगता...

माँ- हाँ मैं मानती हूँ पर उससे क्या होता है...

में- माँ जब हम दोनों को ाचा लगता है हम दोनों को ख़ुशी मिलती है तो फिर समाज के चक्कर में क्यों पद रही हो... और किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला..

माँ- बेटा तुझे मैं कैसे समझों..

में- माँ इसमें समझने वाली बात hi नहीं है आपको समझना चाहिए हम दोनों एक दुसरे से कितना प्यार करते हैं हम दोनों अपनी ख़ुशी के किये जो चाहे वो करें इसमें हमें समाज को क्यों बीच में लाना है...

माँ ने एक लम्बी सांस ली फिर बोली

माँ- चल एक बार को मैं समाज को छोड़ भी दूँ.. पर तेरे पापा का क्या.. वो हम सब को कितना प्यार करते हैं... मैं उन्हें कैसे धोखा दे सकती हूँ.. उन्ही की वजह से मैं परेशां हूँ उस बार करके भी... एक बार धोखा देकर मुझे कितना बुरा लगा है मुझे hi पता है उनसे नज़रें तक नहीं मिला प् रही थी मैं...

में- माँ छोटी सी ज़िन्दगी है उसमे भी अगर हम वो न करें जिसमे हमें ख़ुशी मिलती है तो क्या फायदा जीने का... और रही बात पापा की तो क्या आप अगर मेरे साथ सब कर लोगी तो क्या तुम्हारा प्यार उनके लिए काम हो जायेगा...

माँ- काम नहीं होगा पर फिर भी धोखा नहीं दे सकती मैं उन्हें दोबारा.. उन्हें अगर कभी ये पता चला की मैंने उन्हें धोखा दिया है वो भी अपने बेटे के साथ तो सोचा है उनके मन पर क्या गुजरेगी.. तू कर पायेगा उनका सामना फिर.

Me-maa बात धोखे की है hi नहीं जो बात उन्हें पता नहीं चलेगी वो उन्हें दुःख कैसे दे सकती है... और एक बात बताऊँ माँ अगर आपकी जगह पापा होते तो वो कर चुके होते..

Maa-kya कर चुके होते...?

में- माँ अगर तुम्हे ये पता चले की पापा ने भी तुमसे छुपकर किसी और के साथ चुदाई की है तो क्या तब भी तुम ये बोलोगी..

Maa-kya बकवास कर रहा है तू ऐसे शब्द इस्तेमाल मत कर अपने पापा के बारे में और .. अपनी बात के लिए उनके बारे में कुछ मत बोल...

Me-maa मैंने पुछा है बस की अगर तुम्हे ये पता चलता तो तब क्या बोलती तुम, क्या तब भी मुझे मन करती या नहीं....

माँ- देख अगर ऐसा होता तो अलग बात थी फिर वो कर रहे हैं तो मुझे भी उतना बुरा नहीं लगता...

मैं मन hi मन खुश हो गया..

में- सच में न माँ फिर तुम्हे कोई परेशानी नहीं है न मेरे साथ...

माँ- हां सच में फिर तो कोई परेशानी नहीं होती पर ऐसा है नहीं न... और अब मुझे मानाने के लिए अपने पापा के बारे में कोई झूटी कहानी मत सुनना मुझे... तुझे क्या लगता है तू कोई बी कहानी कहेगा और मैं यकीन कर लुंगी... जब तक मुझे पूरा यकीन नहीं होगा तब तक कुछ नहीं होगा...

मैं मन में सोचने लगा की आधा रास्ता तो माँ ने खुद दिखा दिया है पर बाकि का आधा काफी मुश्किल है... क्यूंकि अगर मैं माँ से चाहे कुछ भी कहूं माँ मेरी बात पर यकीन नहीं करेंगी तो फिर क्या करना है ये समझ नहीं आ रहा था...

Maa-kya हुआ चुप क्यों है कोई कहानी तो नहीं बना रहा...

में- नहीं माँ... कोई कहानी नहीं बना रहा वो मेरे भी पापा है और मैं उनसे भी उतना hi प्यार करता हूँ जितना आप करती हो.. बस मैं ये नहीं समझ पता की सेक्स को प्यार का मीटर क्यों बना देते हैं लोग... सेक्स एन्जॉयमेंट की चीज़ है जबकि प्यार एक भावना है... तो अगर किसी और से सेक्स कर भी लिए तो प्यार थोड़ी काम हो जायेगा वो तो जिससे है उसी से रहेगा न.. बस यही बात है..

माँ- बहुत बड़ी बड़ी बात करने लगा है तू... पर देख मैंने तेरी साड़ी बातें मणि.. पर अब मेरी भी मानेगा एक?

में- हाँ मानूंगा बोलो न माँ..

माँ- तो देख अगर ऐसा कभी हुआ जैसा तू चाहता है तब तक या न भी हुआ तो भी तू इस बात को लेकर न गुस्सा होगा न दुखी और न hi कुछ ज़बरदस्ती करेगा मेरे साथ जैसा पहले था वैसा रहेगा...

Me-sirf तब तक न जब तक तुम्हे यकीन नहीं हो जाता...

माँ- हाँ और अगर ऐसा कभी नहीं हुआ तो तू इस बात का ज़िक्र भी नहीं करेगा कभी...

में- ठीक है माँ. मुझे मंज़ूर है..

माँ बहुत खुश हो गयी मेरी बात सुनकर... हाय मेरा लाल और ये बोलके मुझे गले लगा लिए...

माँ के पास आते hi मेरे शरीर में फिर से करंट दौड़ने लगा पर मैंने खुद पर काबू किआ और सिर्फ वैसे गले लगाया जैसे एक बीटा माँ को लगता है..

खैर फिर माँ मुझसे अलग हुई और बहार चली गयी... ये धमकी देकर की मैं उदास न राहु मैंने वादा किआ है...

मैं भी बहार आ गया कमरे से और फिर शादी के काम और वो भी गाँव में क्या क्या करना पड़ता है.. पूरा दिन सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिली...

एक बार खाना कहते हुए पापा भी दिखे तो मैंने जाकर पेअर छुए उन्होंने हाल चल पुछा और भी ऐसे hi इधर उधर की बातें और फिर वो और मैं अलग अलग अपने अपने काम में लग गए.... उनसे मिलने के बाद सोचा माँ सही कह रही थी पापा बहुत अचे इंसान हैं.. और हम सबसे बहुत प्यार करते हैं.. मुझे बहुत सोच समझ कर कुछ भी करना होगा... कहीं अपने लालच में मैं अपना घर न तुड़वा दूँ... मैं ये भी नहीं चाहता की मेरी वजह से माँ पापा के बीच में कोई दरार आये... तो मुझे बहुत सोच समझकर कुछ भी करना होगा

देखते देखते कब शाम हो गयी 7 बज गए पता hi नहीं चला...

शाम को पूर्वी दीदी ने ज़बरदस्ती पकड़ कर नहाने भेजा और फिर बोलै तैयार होने को... मैं तैयार होकर बाहर आया hi था की तबतक एक और काम आ गया की किसी की गाडी ख़राब हो गयी है उन्हें लेकर आ... मैं उन्हें लेने गया लेकर बापिस आया.. .. बाकि फूपाजी से पुछा कोई काम तो बोले देखते रहो कुछ भी काम न पद जाये बाकि तैयारी तो साडी हो चुकी हैं... बरात भी आने को है बस थोड़े देर में..

मैं भी सब तरफ देख रहा था की कुछ कमी तो नहीं रह गयी... घर के अंदर देखा तो लोगो का हुजूम था हर कोई इधर से उधर भाग रहा था... ज़्यादातर लोग तैयार थे औरतों को तो ऐसे तैयार होना था जैसे रिमझिम दीदी की नहीं उनकी शादी हो.... पर क्या करें औरतों का तो हक़ होता है सजने सँवारने पर...

मैं देख रहा था घर की बहार की हर औरत दूर से hi चमक रही थी... बुआ को तो देख कर मैं पहचान hi नहीं पाया बिलकुल सज धज कर घूम रही थी वहीं पूर्वी दीदी भी किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी... चारु ममी, गया सब बेहद खूबसूरत लग रही थी.. पर मेरी नज़र को तो किसी और की तलाश thi...aur वो थी मेरी माँ... मैं इधर उधर नज़रें घुमा hi रहा था की तभी मेरी नज़र एक जगह रुक गयी ... जिसको ढूंढ रहा था वो सामने कड़ी थी... माँ को देखा तो मैं देखता hi रह गया...

माँ ने एक पीले रंग की सारी पहन राखी थी और क्या बाला की खूबसूरत लग रही थी... एक साधारण सी साड़ी में भी माँ कितनी कामुक लग रही थी.... माँ बिलकुल सदा बनकर आई थी एक सारी ब्लाउज माथे पर बिंदी और बालों में फूल...

(इमेज अपलोड नहीं हो रही नहीं तो ज़रूर दिखता)

किसी ने सही कहा है की सरल चीज़ें hi सबसे ज़्यादा खूबसूरत होती हैं... और मैं वही देख भी रहा tha..maa ने कुछ भी ज़्यादा नहीं किआ था और न hi कुछ ऐसा पहना था जो छोटा हो या काम हो पर इसके बावजूद भी माँ इतनी कामुक लग रही थी की उन्हें देखते hi मेरा लुंड कड़क हो गया... माँ का बदन hi इतना गदराया हुआ था की कपडा कोई भी हो देखने वाले का लुंड खड़ा ज़रूर कर देता था...

ब्लाउज में से बहार आने को बड़ी बड़ी छुछियां.. उनके नीचे साड़ी में से झांकती चिकनी कमर और सपाट पेट गहरी नाभि... और फिर एक और बेहद कामुक नज़ारा था साड़ी में से भी ऊपर को अपना जलवा दिखती हुई माँ की बड़ी बहार को निकली हुई गांड... गांड भी ऐसी की देखते hi मन करे की अभी नंगा कर लुंड पेल दूँ और कास कास कर छोडूं.....

माँ की नज़र भी मुझ पर पड़ी तो उन्होंने इशारे से पुछा की क्या हुआ... क्या देख रहा है... तो मैंने भी इशारे से बोल दिया की बहुत खूबसूरत लग रही हो तो माँ मुस्कुराकर चली और बुआ के साथ काम करवाने लगी...

मेरी नज़र तो माँ से हैट hi नहीं रही थी... और खैर फिर भी मैंने इधर उधर देखा तो सिर्फ मैं hi नहीं था... जो माँ को ऐसे देख रहा था... हर मर्द की नज़र एक न एक बार रुक रुक कर माँ पर पद hi रही थी ... औरो की तो बात hi अलग है जिनकी बेटी की शादी थी यानि हमारे बड़े फूपाजी वो भी एक बार को माँ को देखा तो थोड़ा रुक से गए थे और जब माँ काम कर रही थी तो पीछे से उनकी गांड और छूछीयों को ताड़ रहे थे...

वहीं उनके अलावा जो भी मर्द थे सबकी नज़र रह रह कर माँ की गांड और छूछीयों के दर्शन कर रही थी... चाहे विनीत हो या छोटे फूपाजी यहाँ तक पूर्वी दीदी के पति भी माँ को हवस भरी निगाहों से देख रहे थे... कुछ तो ऐसे देख रहे थे की पंत में hi झाड़ जायेंगे

पहले तो मुझे थोड़ा बुरा सा लगा पर फिर सोचा माँ है hi इतने कामुक और गदराये बदन वाली की मैं उनका बीटा होकर नहीं रोक पता खुद को ये तो फिर भी अलग हैं और रही बात घर के लोगो की तो उनकी भी क्या गलती जो लोग अपनी बेटी, बहन, माँ, भाभी को छोड़ चुके हो... वो माँ जैसी कामुक औरत देखकर तो आहें भरेंगे hi... एक तरह से मुझे ाचा भी लग रहा था की मेरी माँ इतनी खूबसूरत और कामुक हैं....

खैर तभी कहीं से आवाज़ आई की बरात आ गयी है तो मैं भी बहार भगा और फिर वही बारात का स्वागत वगेरा wagera.....hota रहा और इसी में मैं लग गया....

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में तब तक आप लोग प्लीज अपने सुझाव देते रहे बहुत बहुत शुक्रिया.
 
खैर तभी कहीं से आवाज़ आई की बरात आ गयी है तो मैं भी बहार भगा और फिर वही बारात का स्वागत वगेरा wagera.....hota रहा और इसी में मैं लग गया....

अपडेट 67
बरात आई, उनका स्वागत किया गया घर के सब लोग काम में लगे हुए थे, फिर खाना पीना हुआ बारातियों और मेहमानो का मैं देखता रहा किसी भी चीज़ की कमी न पद जाये और फिर वो सब ख़त्म हुआ तो वरमाला का टाइम आया रिमझिम दीदी को स्टेज पर लाया गया, लाल जोड़े में क्या लग रही थी वो इतनी सुन्दर जैसे कोई पारी सीधा स्वर्ग से उतर कर आ रही है... दूल्हा भी दिखने में ाचा था.. पर हमारी दीदी की तो बात hi कुछ और लग रही थी.. दूल्हे की नज़र उनसे हैट hi नहीं रही थी... दूल्हे की hi क्या सबकी नज़र दीदी की खूबसूरती पर hi थी...

फिर एक दुसरे को वरमाला पहनाई दूल्हा दुल्हन ने... और फिर वही एक एक करके सरे मेहमान दूल्हा दुल्हन के साथ फोटो करवाने लगे... अंत में परिवार वालो का नंबर आया पूर्वी दीदी भी अपने पति और सास के साथ गयी अपनी बहन की फोटो के लिए... सरे मर्दो ने एक आह तो ज़रूर भरी होगी उनको देखकर... लहंगा चोली में दीदी का मादक बदन क़हर ध रहा था... पारदर्शी चुनरी में गोरा सपाट पेट गहरी नाभि, चोली के ऊपर से झांकती छुछियां देखकर लोगों के मुँह में पानी आ रहा था,






दीदी और उनके सास और पति के हटने के बाद बाकि के लोगो ने भी दूल्हा दुल्हन के साथ फोटो करवाए.. चारु ममी और गया और गया के पापा आये तो साडी नज़रें माँ बेटी पर hi तिकी हुई थी... गया और चारु ममी दोनों hi बेहद हसीं लग रही थी.. चारु ममी का भरा हुआ शरीर वहीं गया का पतला लेकिन कामुक शरीर देखकर लुंड ठुमके मारने लगा.. खैर मैं भी काम करते करते स्टेज पर भी देख रहा था... जब गया और चारु ममी हेट तो गाँव के कुछ लोग आ गए उन्होंने खिंचवाया और उसके बाद बुआ और फूपाजी पहुंच गए दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद दिए.. मैं बी एक जगह कुर्सी पर बैठकर देखने लगा..

बुआ हलके नीली ट्रांसपेरेंट साड़ी और सफ़ेद ब्लाउज में बेहद सुन्दर लग रही थी.. उनके भरे हुए और गदराये हुए जिस्म पर साड़ी बहुत उत्तेजित कर रही थी... साड़ी से पार दिखता हुआ पेट और नाभि बेहद प्यारी लग रही थी...





मैं पीछे पड़ी कुर्सियों पर बैठकर स्टेज की और देख रहा था और बुआ की खूबसूरती को देखकर सोच रहा था.. की यकीन नहीं होता की इतनी खूबसूरत और कामुक बुआ को मैंने न जाने कितनी बार छोड़ा है... पर अभी भी उन्हें देख कर लुंड सर उठा रहा था...

तभी मेरा ध्यान जहाँ मैं बैठा था उससे अगली लाइन में 4 लोग बैठ कर बातें कर रहे थे उनपर गया... वो सब बाराती थे क्यूंकि मैंने उन्हें बारात में नाचते हुए देखा था...

मैं थोड़ा आगे झुककर उनकी बातें सुनने लगा..

1 आदमी- सही कह रहा है यार एक से एक माल हैं..

2ंद आदमी- यार क्या भरा बदन है साली का... हैं कौन ये तुझे पता है?

3रद आदमी- अबे लड़की की चची है...

4तह- यार गांड तो देख कितनी बड़ी है मन कर रहा है की अभी जाकर लुंड घुसेड़ दूँ दोनों चूतड़ों के बीच.. और गांड मरता रहूं...

2ंद- अबे रहने दे पंत में hi न झाड़ जाये तेरा, हे हे हे...

1सत- बात तो सही है यार ऐसी गांड अगर नंगी देखने को मिल जाये बाँदा पंत में hi झाड़ जाये...

3रद- सेल जैसी चची वैसी भतीजी... दुल्हन भी क्या माल है यार... बाला की खूबसूरत है..

4तह- किस्मत खुल गए दूल्हे राजा की... ऐसा ज़बर का माल मिला है...

मैं उनकी बातें सुन रहा था की सेल कैसे मेरी बुआ और दीदी के बारे में अश्लील बातें कर रहे है पर साथ hi उनकी बातों से मेरा लुंड भी टाइट हो गया.. .

लेकिन तभी बुआ और बड़े फूपाजी नीचे आ गए स्टेज से..

1सत- सालो नज़र लगाडी तुमने देख चली गयी वो...

2ंद- अरे दुल्हन तो है न...

3रद सेल तुम हरामी हो बहुत दुल्हन को तो दूल्हे राजा के लिए छोड़ दो...

4तह- सालो स्टेज पर देखो अब ये कौन है....

2ंद- ये भी काम नहीं hai...yaar तगड़ा माल है

तभी मैंने भी नज़रें उठा कर देखा तो स्टेज पर बड़ी बुआ और फूपाजी थे... अपनी बेटी और दामाद को आशीर्वाद देने के लिए... दूल्हा दुल्हन के एक तरफ बड़े फूपाजी तो दूसरी तरफ बड़ी बुआ थी..

तभी शायद हवा से बुआ की साड़ी का पल्लू उड़ने लगा और साइड हो गया जिससे बुआ की बड़ी बड़ी छुछियां ब्लाउज में कैद सबके सामने आ गयी... उनका थोड़ा निकला हुआ गदराया पेट और उसमे गहरी नाभि भी दिखने लगी... जिसे देखकर सबके लुंड ठुमके मरने लगे..





1सत- अह्हह्ह्ह्ह क्या नज़ारा है यार.. इसकी नाभि में जीभ डालकर चूसने को मिल जाये बस...

4 तह- मुझे तो छुछियां मिल जाएं, ऐसा लग रहा है ब्लाउज में दो पापीती छुपा रखे हैं...

3रद- अरे सालो इसकी गांड तो पिछली वाली से भी ज़्यादा बड़ी है.. पक्का गांड मरवाती होगी...

2ंद- पिछली वाली से बड़ी तो होगी hi आखिर उसकी जेठानी है.. लड़की के माँ बाप हैं ये सालो...

3रद- क्या औरतें हैं इस खंडन में यार एक से बढ़कर एक... इसकी गांड मरने को मिल जाये तो जीवा सफल हो जाये...

मैं उन सब की बातें सुन कर गरम होता जा रहा tha...sale हमारे घर आके हमारा hi खाना खा कर हमारी hi औरतों के बारे में ऐसी बातें कर रहे थे... जहाँ मुझे थोड़ा सा बुरा लग रहा था वहीं साथ hi मेरा लुंड बिलकुल अलग कहानी कह रहा था वो तो टाइट होकर ऐसे खड़ा था की दीवार में भी छेड़ कर dega...jeans के अंदर होने की वजह से अब तो दर्द भी करने लगा था..

मैं कैसे भी करके उसको एडजस्ट करने लगा...

तभी अचानक से फिर वो बोलने लगे..

4तह- अबे ये कौन है ये तो उनसे भी ज़्यादा सुन्दर है जो अब तक आई थी....

3 रद- हाँ यार क्या गदराया हुआ माल है... और चेहरा भी उतना hi प्यारा..

1सत- सही कह रहे हो यार एक दम कैसा हुआ माल है... हर जगह से काम की मूरत है यार ये तो... बड़ी बड़ी चूचियां... सुन्दर चेहरा... हाय रसीले होंठ... इनको चूसने में कितना मज़ा आएगा...

मैंने अपना लुंड एडजस्ट करने के बाद ऊपर नज़र उठाकर देखा तो मेरा दिल ज़ोरो से धड़कने लगा... और मनो लुंड तो और फूल गया.. स्टेज पर और कोई नहीं बल्कि मेरी माँ थी... माँ और पापा भी स्टेज पर दुल्हन दूल्हे को आशीर्वाद देने गए थे...

अपनी माँ के बारे में अनजान लोगो से ऐसी बातें सुनकर मुझे थोड़ा अजीब भी लग रहा था वहीं उत्तेजित भी हो रहा था... मुझे या तो उन्हें चुप करा देना चाहिए था या उठकर चले जाना चाहिए था पर पता नहीं क्यों मेरे अंदर ये भी जान्ने की इच्छा हो रही थी की ये और क्या बोलेंगे मेरी माँ के बारे में... तो मैं वहीं जैम सा गया और माँ को देल्हते हुए उनकी बातें सुनने लगा...

एक तरफ से देखा जाये तो वो कुछ गलत भी नहीं बोल रहे थे माँ लग hi इतनी कामुक और खूबसूरत रही थी की मैं उनका सागा बीटा होते हुए भी लुंड को काबू नहीं कर प् रहा था तो ये तो अनजान लोग थे..





माँ ने एक पीली साड़ी और ब्लाउज पहन रखा था... और उसमे उनका बदन इतना गदराया लग रहा tha...ki देखते hi लुंड महाराज सलामी दे रहे थे...

2ंद- सही बोल रहे हो यार ऐसी औरत बिस्तर पर सबसे ज़्यादा मज़ा देती है... इसका तो हर अंग ऐसा है की मनो खुद कामदेव ने गदा हो... अपने लिए..

3रद- चेहरे से तो साली की उम्र का पता hi नहीं लगता यार... चेहरे एक दम. जवान औरत का और शरीर किसी गदराई हुई 40 साल की औरत का...

4तह- अबे चूतड़ तो देख साली के कितने गोल गोल हैं.. ये नंगी हो जाये तो बिजली गिर जाये...

1सत- पर साली ने अपने बदन को साड़ी में छुपा रखा है...

4तह- गुरु ये hi तो होती हैं संस्कारी औरत जो सब कुछ छुपा कर भी तगड़े तगड़े लुंड से पानी निकल देती हैं...

2ंद- तुम्हारा तो सालो पता नहीं पर इसे देखकर मेरा तो लगता है पंत में hi निकल जायेगा..

इससे आगे मैं कुछ सुनता की तभी किसी ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखा मैंने पीछे मुद कर देखा तो विनीत था..

विनीत- कर्मा चल हम भी फोटो करवाते हैं दीदी जीजाजी के साथ..

और वो मुझे पकड़ कर ले गया वहां अनुज मैंने और विनीत ने साथ में फोटो करवाई...

रिमझिम दीदी पास से और ज़्यादा प्यारी लग रही थी खैर इसके बाद कई सरे काम करवाए और फिर दूल्हा दुल्हन को खाना खिलने ले जाया गया फिर और भी कई साडी रश्में हुईं उसके बाद मंडप में बिठाया गया... वहां घर के सरे लोग ाएस पास बैठे थे और वही ठरकी पंडित मंत्र पढ़ने लगा और शादी करने लगा... माँ, पापा, अनुज, विनीत पूर्वी दीदी, उनके पति, बुआ, फूपाजी, बड़े फूपाजी, बड़ी बुआ, चारु ममी, उनके पति, गया, और भी करीबी घरवाले सब मंडप के आसपास बैठे हुए थे... मेरी नज़र तो सिर्फ माँ पर hi तिकी हुई थी.. और मन में ये चल रहा था की कैसे माँ को करीब लाऊँ... ऐसा क्या करूँ जिससे मैं फिर से माँ के बदन को पा सकू... मैं इधर उधर नज़र घुमाकर देखने लगा... की मुझे कोई उपाय सूझे काफी देर ऐसे hi सोचता रहा.. की तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया.. पर वो कितना काम करेगा उस पर शक था, और फिर मैंने थोड़ा और सोचा और एक पूरा प्लान तैयार कर लिए.. और वो भी जल्दी hi करना था क्यूंकि प्लान के लिए मुझे जिस की ज़रुरत थी वैसी सिचुएशन शायद दोबारा नहीं मिलती.. तो मैंने सोचा जो होगा देखा जायेगा..

मैं विनीत के पास पंहुचा और उसके कान में कुछ बोलै.. और फिर अपनी जगह बापिस आकर बैठ गया और फिर इंतज़ार करने लगा.. करीब 20 मिनट्स बाद मैं उठा और माँ के पास गया और कान में बोलै -माँ मेरा चार्जर ख़राब हो गया है तुम अपने पापा के फ़ोन का लाइ हो न वो देदो मुझे बैग मिल नहीं रहा...

माँ- बड़े वाले बैग की साइड वाली चैन में hi तो रखा है ले ले...

में- माँ बैग hi नहीं मिल रहा तुम चलो न...

माँ- तुझे न कुछ नहीं दीखता अपने आप अभी नैन जाउंगी तो सामने hi दिख जायेगा...

में- अरे माँ तुमने रखा है तो तुम्हे hi दिखेगा न..

माँ- चल..

माँ कड़ी हुई तो एक दो नज़र उन को देखा सब ने पर क्यूंकि शादी चल रही थी तो कोई आ रहा था तो कोई जा रहा था तो इतना कोई ध्यान नहीं दे रहा था..

खैर माँ कड़ी हुई और उनके पीछे पीछे मैं भी चल diya..mera दिल ज़ोरो से धड़क रहा था की न जाने आगे क्या होगा.. खैर घर के अंदर आये तो सन्नाटा था क्यूंकि घर के सरे लोग तो शादी में थे... माँ आगे आगे चल रही थी और मैं उनके बड़े बड़े चूतड़ों को निहारते हुए उनके पीछे पीछे... माँ फिर उस कमरे में घुस गयी जिसमे उनका बैग था मैं भी उनके पीछे अंदर चला गया...

माँ- देख यहीं तो है बैग कर्मा... तू भी न बेकार में परेशां किआ मुझे...

में- मुझे नहीं मिल रहा था माँ...

माँ- ाचा चल अब तो मिल गया न...

में- हाँ चलो...

फिर हम कमरे के बहार आये तो माँ अचानक से रुक गयी...

माँ- ये आवाज़ कैसी आ रही है?

में- कौनसी आवाज़ माँ...

माँ- अरे तुझे नहीं सुनाई दे रही क्या?

में- हाँ माँ अब मुझे भी आई... ये तो बुआ के कमरे की तरफ से आ रही है...

माँ- हाँ उधर से hi आ रही है..

ये बोलकर माँ के कदम उस और बढ़ गए मैं बी उनके पीछे चल लिए...... जैसे जैसे हम आगे बढ़ते जा रहे थे आवाज़ और साफ़ होती जा रही थी.. माँ को भी जैसे जैसे ये समझ सा आने लगा की ये आवाज़ किसकी है तो उनके चेहरे के भाव hi बदल गए और पेअर भी थोड़े धीरे चलने लगे... गेट के पास पहुँच कर माँ ने पलट कर एक बार मुझे देखा.. मैं उनकी आँखों में hi देख रहा था.. माँ की आँखों में सवाल थे जैसे पूछ रही हो क्या किआ जाये...?

मैंने माँ के करीब जाकर उनके कान में कहा माँ गेट बंद है.. बाथरूम में चलो उधर का गेट खुला हो सकता है..

पर माँ ने एक बार मेरी तरफ देखा और कुछ सोचा फिर फुसफुसा कर बोली..

माँ- कहीं नहीं जाना चल हम बापिस चलते हैं...

में- पर माँ..

माँ- पर वॉर कुछ नहीं चल...

और माँ मुद कर जाने लगी...

पर मैं वहीं खड़ा रहा माँ ने कुछ कदम बढ़ाये और फिर मुझे ना आता देख कर रुक गयी.... मैंने जैसे hi देखा माँ रुक गयी है मैं चुपचाप से कदम बढ़ता हुआ बाथरूम की तरफ गया और आराम से गेट खोल कर अंदर घुस गया और इंतज़ार करने लगा की माँ भी पीछे पीछे आ जाये बस बाथरूम में तो आवाज़ें और तेज़ आ रही थी... कुछ देर तक माँ नहीं आयी मुझे लगा प्लान फ़ैल लगता है माँ चली गयी...

तभी कुछ पल बाद माँ बाथरूम में घुस गयी... मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना hi नहीं रहा.. माँ ने घुसते hi मुझे देखा और गुस्से में बोली

माँ- यहाँ क्यों आ गया जब बोलै था चलने को तो...

में- मुझे देखना hai...kaun है अंदर और क्या हो रहा है..

माँ- नहीं कोई ज़रुरत नहीं है..

में- अरे माँ देखने दो न...

और मैंने माँ को थोड़ा साइड करके बाथरूम का दूसरा दरवाज़ा जो बुआ के कमरे के अंदर खुलता था... उसे थोड़ा सा खोल कर अंदर देखा तो नज़ारा जैसा चाहा वैसा hi था.. और मैंने अपनी नज़रें जान बूझ कर वहीं पर टिकली और ऐसा चेहरा बनाया जैसे देखकर मुझे शोक लगा हो...

अंदर बुआ का ब्लाउज खुला हुआ लटक रहा था दोनों और ब्रा के कप नीचे हो रखे थे और उनकी बड़ी बड़ी चूचियां उछाल कूद कर रही थी और कमर के नीचे बुआ पूरी नंगी थी उनकी साड़ी और पेटीकोट बगल में उतरे हुए पड़े थे और बुआ की मसल चिकनी जांघों के बीच उनका बीटा विनीत था जो की नीचे से नंगा था और उसका लुंड बुआ की छूट से अंदर बहार हो रहा था..

मुझे ऐसे अंदर देखते हुए माँ ने भी घूम कर कमरे के अंदर देखा तो माँ तो जैसे जैम hi गयी... अपनी जगह पर...

मेरे चेहरे पर विजयी मुस्कान आ gayi...main जो चाहता था उसका पहला कदम तो मैंने पार कर लिए था...

माँ तो बस माँ बेटे का मिलान देखे जा रही थी बिना कोई हरकत किये.. क्यूंकि माँ मुझसे आगे कड़ी हुई थी तो उनकी पीठ मेरी तरफ थी.. माइनर भी मौके का फायदा उठाते हुए उनके पीछे से चिपक गया और उनके कान में बोलै

Me-maa मुझे भी देखना है...

और मैंने अपना लुंड माँ के बड़े बड़े गोल चूतड़ों से सत्ता दिए और खुद भी पूरी तरह से माँ से चिपक गया...

और नज़र उठा कर अंदर देखा तो इस समय विनीत ने अपना लुंड अपनी मुम्ममय की छूट से निकला था और अगले hi पल बुआ की गांड में घुसेड़ दिया





और फिर बहार निकला और फिर अंदर कर दिया.. दोनों माँ बेटे हर बार आअह्ह्ह अह्ह्ह्ह करके आहें भर रहे थे..

इधर मेरा लुंड माँ के इतने करीब होने और उनके चूतड़ों से रगड़ने की वजह से लोहे का हो चूका था.. अपनी माँ से चिपक कर दुसरे माँ बेटे की चुदाई देखने कक अलग hi मज़ा था...

माँ न कुछ बोल रही थी न कर रही थी बस ऐसे hi नज़रें गड़ाए देखे जा रही थी... मैं अपने होंठ माँ के कान के पास ले गया और फुसफुसाते हुए बोलै..

में- माँ ये बुआ और विनीत क्या कर रहे हैं...

और ये कहते हुए मैंने अपने हाथ माँ की नंगी कमर पर और पेट पर साड़ी के अंदर रख दिए... और कास लिए अब मैं पीछे सर माँ से बिलकुल चिपक गया और मेरा लुंड भी माँ के चूतड़ों के बीच कपडे के अंदर से hi घुसने लगा...

मेरे बोलने से माँ थोड़ा होश में आई और बहुत धीरे से कुछ बोलने की कोशिश की..

माँ- बीटा वो ये.. शशी और विनीत.. ये सब...

माँ कुछ ठीक से बोल नहीं पा रही थी....

मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए अपने हाथ उनकी कमर और पेट पर चलने शुरू कर दिए....

माँ ने कुछ नहीं बोलै वो बस थोड़ा सा कसमसाई पर उनकी नज़र विनीत और बुआ से हैट नहीं रही थी... विनीत तगड़े धक्को से अपनी मुम्ममय की गांड मार रहा था... और हर धक्के का असर मेरी माँ पर हो रहा था...

इधर मैंने भी माँ के गदराये शरीर को मसलना शुरू कर दिया.. और उनके पूरे पेट और कमर को हाथों से मसलने सहलाने लगा...

माँ की साँसे तेज़ तेज़ होने लगी थी... मैंने अपने होंठ माँ के सीधे गाल पर रख दिए और चूमने लगा... माँ थोड़ा और कसमसाने लगी पर माँ ने मुझे रोका नहीं और उनकी नज़रें अभी भी अंदर जमी हुई थी...

मैंने नज़र उठाकर अंदर देखा तो नज़ारा थोड़ा बदला हुआ था... माँ बेटे दोनों एक साइड में लेते हुए थे और विनीत पीछे से अपनी मुम्ममय की गांड में लुंड पेल रहा था





दोनों माँ बेटे दुनिया से बेखबर चुदाई में लगे हुए थे... बुआ की बड़ी बड़ी छुछियां हर झटके के साथ उछाल रही थी..

इधर एक माँ बीटा उनकी चुदाई को देख रहे थे...

मैंने हाथ ऊपर ला कर माँ का पल्लू नीचे गिरा दिया.. और अब अब माँ का ब्लाउज और उसमे कैद उनकी छुछियां सपाट पेट सब सामने आ गया... मैं फिर से उनकी कमर और पेट को मसलने लगा, माँ अब भी अंदर देखे जा रही थी... मैं अपने होंठों को उनके गाल चूमते हुए उनके चिकने गले को चूमने चाटने लगा.. जैसे hi मैंने गले को चूमना शुरू किआ माँ और पीछे होकर मुझसे चिपक गयी... मेरे हाथ अब खुलकर उनकी चिकनी कमर से खेल रहे थे...





माँ का मुँह कभी कुछ कहने के लिए खुलता पर वो कुछ कह नहीं पा रही थी...

मैं लगातार हाथ उनके नंगे बदन पर चला रहा था साथ hi होंठों से चूम ब्बि रहा था...

माँ गरम हो चुकी थी ये मुझे उनकी सांसो से पता चल रहा था... और इससे भी की वो मुझे रोक नहीं रही थी.. साथ hi मैं भी बेहद उत्तेजित हो चूका था मेरा लुंड जैसे फटने को बेताब था.. पर अभी मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता था जिससे कुछ भी बिगड़े...

मैंने माँ को और गरम करने के लिए बोलना शुरू किआ..

में- माँ देखो न विनीत और बुआ कैसे दोनों पूरे नंगे होकर चुदाई में लगे हुए हैं..

ये कहकर मैंने उनके गले को चूम लिए और साथ hi माँ की नाभि में उंगली घुसा कर छेड़ने लगा और नीचे से अपना लुंड उनके चूतड़ों की दरार में घिसने लगा..

फिर मैंने माँ के गले से होंठ हटेए और बोलै..

में- देखो न माँ कैसे बीटा माँ की गांड मार रहा है.. उसका लुंड उसकी माँ की गांड में अंदर बहार हो रहा है..

माँ मेरे ऐसे उत्तेजित करने वाली बातें बोलने से और गरम हो गयी.

माँ- हवंन बीटा..

Me-maa देखो न बुआ कितनी ख़ुशी से अपने बेटे से चुदाई करवा रही है.. उन्हें कितना ाचा लग रहा है...

Maa-hmmmmmmm....

जहाँ माँ गरम हो रही थी तो मैं भी बहुत उत्तेजित हो चूका था मेरा लुंड माँ की गांड में कपड़ों के अंदर से hi घुसा जा रहा था...

में- माँ बेटे की चुदाई में कितना ाचा लगता है न..

और ये कहकर जैसे hi मैंने माँ की और देखा तो उन्होंने पहली बार कमरे के अंदर से नज़र हटाकर मेरी तरफ देखा और फिर माँ मेरी आँखों में देख रही थी मैं उनकी हम दोनों जा चेहरा इतना करीब था की एक दुसरे की साँसे महसूस हो रही थी..

मैंने हिम्मत करके अपने होंठों को थोड़ा आगे करके उनके रसीले होंठों पर रख दिया.. और माँ के रिएक्शन का इंतज़ार करने लगा.. माँ के होंठ का स्पर्श पाते hi मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया और लुंड ने भी झटके लगाड़िये..

मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था की माँ क्या करेगी मेरे होंठों के उनके होंठो पर होने से.. मैंने अपने हाथो का काम जारी रखते हुए उनकी नाभि और पेट को सहलाता रहा..

की तभी माँ ने अपने होंठों को खोल दिया और मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी.. मैं माँ को होंठों को चूसने लगा.. कुछ पल तो माँ ने बस मुँह खुला रखा और कुछ नहीं किआ पर फिर वो भी मेरा साथ देने लगी और मेरे होंठों को चूसने लगी.. उनके रसीले होंठों को चूसने में इतना सुख मिल रहा था.. माँ ान पूरी तरह मेरी तरफ घूम गयी और और हम दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त हो गए...





माँ और मैं वक दुसरे के होंठों को ऐसे चूस रहे थे जैसा उनमे से सच में कोई एएस निकल रहा है... उधर कमरे के अंदर अब भी माँ बेटे चुदाई में लगे हुए थे पर हम दोनों माँ बेटे का ध्यान अभी सिर्फ हम पर hi था..

मेरे लुंड में अब दर्द होने लगा था.. तो जब माँ साथ दे रही थी तो मैंने एक कदम बढ़ने का सोचा और उनका हाथ पकड़ कर अपने जीन्स के ऊपर लुंड के उभर पर रख दिया . माँ को जैसे hi ये महसूस हुआ ये क्या है माँ ने हाथ हटा लिए पर होंठ को चूसना बंद नहीं किआ.. मैंने दोबारा माँ का हाथ लुंड जे ऊपर रख दिया और इस बार अपने हाथ से दबाये रखा और थोड़ा सहलाने भी लगा.. माँ के हाथ का अनुभव पते hi लुंड और फूल गया.. मैंने देखने के लिए.. माँ के हाथ के ऊपर से अपना हाथ हटाया तो मैं खुश हो गया क्यूंकि अब माँ ने हाथ नहीं हटाया और खुद से hi जीन्स के ऊपर से लुंड सहला रही थी....

मैंने जवाब देते हुए अपनी जीभ माँ के मुंह में घुसड़ी जिसे माँ चूसने लगी और साथ hi मैंने माँ की नाभि को उंगली से कुरेद रहा था और दुसरे हाथ से उनकी कमर मसल रहा था...

पर अब लुंड जीन्स में होने की वजह से दर्द कर रहा था तो मैंने माँ की कमर से हाथ हटाकर अपनी जीन्स का बटन खोल दिया साथ hi अपने साइड हाथ लेजाकर जीन्स को नीचे की और खिसका दिया जीन्स के साथ साथ मेरा कच्चा भी नीचे हो गया पर आगे से लुंड खड़ा होने की वजह से और माँ का हाथ रखे होने की वजह से नीचे नहीं हुआ तो मैंने माँ का हाथ हटाया और फिर लुंड को कच्चे से बहार निकला तो वो स्प्रिंग की तरह उछाल कर बहार आ गया.. और माँ के नंगे पेट से जाकर टकराने लगा मैंने माँ का हाथ बापिस उठाकर अपने नंगे गरम लुंड पर रख दिया तो माँ को एक करंट सा लगा और वो और ज़ोर से मेरी जीभ चूसने लगी और फिर अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा di...par माँ ने लुंड से हाथ नहीं हटाया ये मेरव लिए अछि खबर थी... माँ ने लुंड पर हाथ वैसे hi रखा हुआ था पर मैं अपनी कमर आगे पीछे करने लगा जिससे मेरा लुंड उनके हाथ में आगे पीछे होने लगा और मुझे आनंद मिलने लगा.. साथ hi मेरे लुंड का टोपा माँ के चिकने कोमल पेट पर भी रगड़ रहा था जिससे और मज़ा आ रहा था.... मैं इतना उत्तेजित हो चूका था की अब मुझे किसी की भी परवाह नहीं थी.. माँ की जीभ और होंठों को चूस रहा था उनकी नंगी कमर को मसल रहा था.. मेरा लुंड माँ के हाथ में था.. और उनके पेट से रगड़ रहा था..

मुझे बहुत सुकून और मज़ा मिल रहा था और शायद माँ को भी.. क्यूंकि अब माँ की पकड़ भी मेरे लुंड पर कास गयी थी और वो खुद अब मेरे लुंड पर अपना हाथ चला रही थी..

मैंने इसे हरी झंडी मानते हुए अपना हाथ कमर से ऊपर ले हेट हुए उनकी बड़ी छूछीयो पर रख लिया और सहलाने लगा माँ तो जैसे पागल सी हो गयी और मुझसे चिपक गयी मेरा लुंड उनके पेट में गड्ढा करने लगा अंदर धंस गया.. और माँ मेरी जीभ इतनी ज़ोरो से चूसने लगी जैसे उखड कर अपने अंदर समां लेगी...

मैंने छूछीयो को सहलाते हुए ब्लाउज के ऊपर से hi माँ की छूछीयो के निप्पल पर अपना अंगूठा फेरा... उसके लगते hi माँ का शरीर ऐंठने लगा.. माँ कास कर मुझसे चिपक गयी.. उनकी कमर झटके खाने लगी... और जैसे hi मेरे समझ में आया ये क्या हो रहा है... माँ झाड़ रही है.. मेरी वजह से अपने बेटे के द्वारा वो इतनी उत्तेजित हो गयी की बिना छूट पर हाथ लगाए hi वो झाड़ गयी.. इस बात का अहसास होते hi मेरा बांध भी टूट गया मेरा लुंड जो माँ के पेट में धंसा हुआ था झड़ने लगा.. रास की पिचकारियां लुंड से निकक कर माँ ke.pet को भिगोने लगी... मेरी आँखें बंद थी और माँ को अपने आप से चिपकाया हुआ था.. माँ झड़ने के बाद अब शांत हो चुकी थी वहीं कुछ देर बाद मेरा झड़ना बंद हुआ तो मैं तेज़ तेज़ सांस लेते हुए थोड़ा सहज हुआ और माँ को इतने कास के पजदा हुआ था तो उन्हें छोड़ा.. हमारे होंठ इतनी देर बाद एक दुसरे से अलग huye...main एक कदम पीछे हटकर खड़ा हुआ और माँ को देखा पल्लू नीचे गिरा हुआ साँसे उखड़ी हुई.. होंठों को चूसने की वजह से लिपस्टिक होंठों से गायब थी.... ब्लाउज में कासी हुई दोनों छुछियां बहार आने को बेताब थी और इस वक़्त सबसे हसीं नज़ारा था माँ का नंगा पेट पूरी तरह से मेरे रास से भीगा हुआ कुछ रास उनकी नाभि में इकठा हो गया था.. और बाकि पूरे पेट पर फैला हुआ था... माँ मुझे देखती तो कभी मेरे लुंड को की तभी अंदर से चीख आई..

विनीत- मुम्ममय मैं झड़ने वाला हूंणंन्न

बुआ- दाल दे बीटा अपना रास meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii गांड में...

मैंने और माँ ने कमरे के अंदर देखा जल्दी से तो विनीत अपनी माँ को घोड़ी बनाकर गांड मर रहा था और दो तीन झटको के बाद वो रुक गया और बुआ की गांड में झड़ने लगा और कुछ देर बाद उसने बुआ की गांड से लुंड निकला तो उसका रास उसकी माँ की गांड से बहकर बहार आ रहा था..





माँ ने ये भी बड़े ध्यान से देखा और फिर जैसे कुछ अचानक से याद आया हो बोली चल अब यहाँ से सीख लिए न सब देर हो रही है.. माँ मेरी तरफ घूमी और बोली- खड़ा क्या है जल्दी कर न...

और फिर खुद hi मेरे कच्चे को ऊपर किआ और मेरा लुंड पकड़ कर अंदर डाला मेरी जीन्स ऊपर करके पहनाई और फिर बोली- चल अब...

मैं माँ को hi देखे जा रहा था उनका पल्लू अब भी नीचे था और पेट पर मेरा रास बिखरा हुआ था

में- माँ इसका क्या?

माँ ने मेरे इशारे की और देखा और boli-are ये तो भूल hi गयी देख कोई कपडा हो तो...

में- माँ ऐसे hi रहने दो न साड़ी तो रहेगी ऊपर और थोड़ी देर में सूख हयेगा...

Maa-pagal हो गया है तू...

फिर खुद hi अचानक कुछ सोचा और बोली- ाचा पर अब तू तो चल यहाँ से..

तो मैं भी मुस्कुराकर उनके पीछे चल दिया जाने से पहले एक नज़र अंदर डाली तो देखा माँ बेटे तैयार हो रहे हैं... और फिर मैं माँ के साथ बहार आ गया मैं मन hi मन बहुत झष हो रहा था.. आज जो कुछ भी हुआ वो सोचकर..

बहार मंडप में पहुंचकर मैं और माँ एक साथ बैठ गए.. मेरा लुंड फिर से ये सोचकर टाइट होने लगा की माँ के पेट पर मेरा वीर्य लगा हुआ है और माँ सबके सामने बैठी हुई है...

इसके आगे की कहानी ऊगली अपडेट में.. आप लोग प्लीज कमैंट्स करके बताएं आपको कैसी लगी... शुक्रिया
 
थैंक्यू फ़ीडबैक्स अरे वाइटेड..
 
बहार मंडप में पहुंचकर मैं और माँ एक साथ बैठ गए.. मेरा लुंड फिर से ये सोचकर टाइट होने लगा की माँ के पेट पर मेरा वीर्य लगा हुआ है और माँ सबके सामने बैठी हुई है...

अपडेट 68

मैं और माँ बैठकर शादी देखने लगे उधर पंडित मंत्र पद रहा था इधर मेरे मन में अलग मंत्र चल रहे थे.. मैंने माँ की और देखा तो वो देख तो मंडप की तरफ hi रही थी पर उनका ध्यान कहीं और था... अपनी hi सोच में डूबी हुई थी...

में- माँ क्या सोच रही हो?

Maa-main... नहीं कुछ भी नहीं..

में- अरे माँ बताओ न कुछ तो सोच रही हो... वही न जो अभी अंदर देखा..

माँ- हट पागल उसके बारे में बात मत कर..

में- पर माँ जो हुआ है उसके बारे में बात न करके क्या होगा.. बात तो करनी hi होगी नहीं तो दिमाग में चलती रहेगी...

माँ- हाँ मेरी तो समझ नहीं आ रहा की शशि और विनीत ये सब क्यों और कबसे कर रहे हैं... जीजाजी को पता चल गया तो...

में- माँ उनकी ज़िन्दगी है वो वही कर रहे हैं जिसमे उन्हें ख़ुशी मिलती है... ाचा तुम बताओ क्या तुम्हे ये गलत लगा?

माँ- गलत है तो लगेगा hi न...

में- माँ समाज के हिसाब से नहीं... अपने हिसाब से बताओ क्या तुम्हे विनीत और बुआ की चुदाई, यानि एक बीटा जब अपनी माँ को छोड़ रहा था तो तुम्हे देखकर कैसा लगा...

मैं जानबूझकर ऐसे शब्द बोल रहा था जिससे माँ की उत्तेजना बढे..

maa-pagal है क्या.. ये कैसी भाषा बोल रहा है...

Me-maa चुदाई को चुदाई hi बोलूंगा न...

माँ- बेशर्म हो गया है तू...

में- वो सब छोडो ये बताओ क्या गलत laga..tumhe वो सब?

माँ- बात मेरे लगने की नहीं है बात गलत है तो है.. अगर तेरे फूपाजी को पता चल गया तो?

में- माँ देखो हमारे लिए सबसे ज़रूरी बात होती है अपनी और अपने परिवार की ख़ुशी और अगर ऐसे करने से दोनों को ख़ुशी मिल रही है तो गलत क्या है... और चुदाई जिससे हम प्यार करते हैं उनके साथ की जाये तो और मज़ा देती है तो परिवार से ज़्यादा प्यार कौन कर सकता है... एक बेटे को माँ से ज़्यादा प्यार कौन कर सकता है...

maa-tu सही कह रहा है पर तेरे फूपाजी का क्या? उनके साथ तो देखा हो रहा है..

में- माँ ये फूपाजी का hi परिवार है.. और उनके लिए भी सबसे ज़रूरी है उनके परिवार की ख़ुशी.. उनके बेटे और उनकी पत्नी की ख़ुशी और अगर उन्हें पता चलेगा की उनके परिवार की ख़ुशी इसी में है तो वो भी इसको गलत नहीं कहेंगे... वैसे भी बच्चों पर सबसे पहला हक़ माँ बाप का होता है..

माँ- पता नहीं मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा, एक तरफ तो सही लग रहा है तो वहीं साथ hi गलत भी...

me-maa कुछ गलत नहीं है, अपने मन की सुनो जब तुम उन्हें देख रही थी तो खुद भी गरम हुई थी या नन्ही

माँ- चल तू भी ऐसे कोई बोलता है अपनी माँ से?

में- मैं तो सच जानना छह रहा हूँ माँ

माँ- हाँ पता नहीं क्यों ये सब इतना गलत था फिर भी मैं अपनी नज़र नहीं हटा पा रही थी...

me-wo इसलिए माँ क्यूंकि कुछ गलत है hi नहीं.. ाचा गलत होता तो अभी का सोचो तुम्हारे पेट पर तुम्हारे बेटे का. लुंड रास लगा हुआ है अभी तक गीला है... क्या तुम्हे गलत लग रहा hai...ya गलत होता तो तुम ऐसे आराम से बैठ पाती..

माँ- हैट बेशर्म पूरा कमीना हो गया है तू...

मैंने सोचा माँ सही लाइन पर जा रही है तो मैं माँ को ऐसे hi बातों से और गरम करने लगा हूँ बाकि सब से थोड़ी दूर हैट कर बैठे हुए थे.. और मैं माँ से उसी बारे में बात किये जा रहा था और अब माँ भी पूरा इंटरेस्ट लेकर बात कर रही थी... ऐसे hi करीब एक घंटा बीत गया... तभी माँ ने मुझे एक तरफ इशारा किआ तो बुआ उठ कर जा रही थी..

माँ- शशि कहाँ जा रही है.. कहीं फिर से तो नहीं...

में- ( अनजान बनते हुए) फिर से क्या माँ?

माँ- ज़्यादा बन मत तुझे भी पता है मैं क्या कह रही हु... पर विनीत तो यहीं बैठा है तो शायद किसी काम से जा रही है...

में- हाँ माँ शायद किसी काम से जा रही है...

माँ फिर मंडप में देखने लगी पर रह रह कर माँ की नज़र बार बार घर के अंदर की और लगी थी बुआ को देखने के लिए...

जब अगले 10 मीन्स बाद भी बुआ नहीं आई तो माँ बोली- कर्मा इतना टाइम हो गया शशि अभी तक नहीं आई..

में- तो क्या हुआ माँ आ जाएँगी..

माँ- मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही है...

में- कैसी गड़बड़

माँ- चल के देखें??

में- सच में तुम्हे लगता है कोई गड़बड़ होगी..

माँ- हाँ बता तू चल रहा है या नहीं...

में- हाँ माँ चल रहा हूँ न..

फिर माँ कड़ी हुई और अंदर चली गयी और कुछ पल बाद मैं भी उनके पीछे खिसक लिए...

जब अंदर पंहुचा तो देखा माँ बाथरूम का दरवाज़ा खोल रही है... देखकर मुझे हंसी आ गयी...

पर फिर तुरंत hi माँ बहार आ गयी और मुझे देखा और धीरे से बोली- यहाँ तो कोई नहीं है.. फिर माँ दुसरे कमरों की तरफ गयी और उनमे भी देखा तो कोई नहीं मिला..

माँ थोड़ी सी परेशां लगने लगी


माँ- कहाँ गयी ये किसी भी कमरे में नहीं है...

में- माँ छत वाले कमरों में भी तो हो सकती है...

माँ के चेहरे पर जैसे चमक आ गयी...

और माँ तुरंत सीढ़ियों की तरफ बाद गयी और साथ hi मेरा हाथ भी पकड़ लिए...

मैं और माँ छत पर पहुंचे एक कमरे से हलकी सी रौशनी आ रही थी हम थोड़ा उसकी तरफ बड़े तो किसी के थोड़ा बात करने की आवाज़ आने लगी.. मैं और माँ चौकन्ने हो गए... और ध्यान से सुनाने लगे पर कुछ समझ नहीं आ रहा था..

माँ- यहाँ से तो कुछ समझ नहीं आ रहा और इस कमरे में तो बाथरूम भी नहीं है और गेट भी बंद है कैसे पता चलेगा...

मैंने माँ का हाथ पकड़ा और उनने पकड़ कर कमरे के पीछे की तरफ ले गया जिधर छज्जा था और कमरे की एक खिड़की उधर खुलती थी... मैं माँ को उधर ले गया और देखा खिड़की भी खुली हुई थी तो मैंने माँ को अंदर देखने का इशारा किआ और माँ खिड़की के सामने कड़ी हो गयी और अंदर देखने की कोशिश करने लगी..

मैंने भी अपनी पसंदीदा जगह ले ली और इस बार मैंने अपनी जीन्स और कच्चा पहले hi नीचे खिसका दिया और लुंड बहार निकल लिए और माँ के चूतड़ों की दरार में साड़ी के ऊपर से hi फंसा दिया और पीछे से माँ से चिपक गया...

एक हाथ से उनका पल्लू भी नीचे गिरा दिया और अपने हाथ फिर से माँ के नंगे पेट पर रख दिए और चलने लगा जिस पर मेरा रास लगा हुआ था जो अब सूख गया था... मैं अपना मुँह माँ के गले को चूमता हुआ उनके कान के पास ले गया और फुसफुसाते हुए पुछा- कुछ दिखा माँ..

और मैं भी उनके पेट को मसलते हुए और उनके चूतड़ों में लुंड को घिसते हुए अंदर देखने लगा..

माँ- हाँ दिखा तो शशि किसी का लू मतलब वो चूस रही है पर ये कपडे लटके हैं इनकी वजह से आदमी कौन है नज़र hi नहीं आ रहा..

अंदर बुआ घुटनो पर थी और उनके मुँह में एक लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे वो बड़े चौ से चूस रही थी..






सिर्फ बुआ का सर आगे पीछे होता हुआ नज़र आ रहा था.. इसके अलावा माँ और मुझे कुछ नहीं दिख रहा था...

Me-maa उसे लुंड hi कहते हैं.. इसमें क्या शर्माना...

माँ- चुप कर बेशर्म बनादे मुझे अपनी तरह.. पर ये कपडे हेट तो दिखे के शशि के साथ कौन है...

में- थोड़ा सबर करो माँ सब दिखेगा...

और मैंने ये कहकर लुंड का झटका माँ के चूतड़ों में मारा और उनकी गर्दन को चूमने लगा साथ hi उनके पेट और नाभि को मसल रहा था लगातार...

मैं माँ को बहुत गरम कर देना चाहता था... तो जैसे भी हो सकता था माँ को छू रहा tha..tabhi माँ ने मुझे हाथ से थपथपाया और अंदर देखते हुए बोलै- देख कर्मा अब शशि उठ रही है अब दिखेगा उसके साथ कौन है...

मैंने अंदर देखा तो बुआ उठ कर बीएड पर अपनी टंगे फैला कर लेट रही थी उनके पूरे शरीर पर बस एक ब्रा थी वो भी नीचे हो राखी थी और उनकी छुछियां बहार झूल रही थी...

माँ- देख कैसे बेशर्मो की तरह लेती है अभी थोड़ी देर पहले hi बेटे के साथ और अब...

माँ ने इतना hi कहा था की बुआ की टैंगो के बीच वो आदमी आया और अपना लुंड बुआ की फुली हुई छूट में घुसा दिया...





उधर बुआ का मुँह मज़े से खुला का खुला रह गया और इधर मैंने माँ को देखा तो उनका मुँह भी खुला हुआ था...

में- क्या हुआ माँ

माँ ने कुछ नहीं बोलै और बोलती भी कैसे अंदर का नज़ारा hi कुछ ऐसा था जिसे देखकर माँ का ये हाल था... मेरा दिल भी ज़ोरो से धड़क रहा था...

अंदर बुआ की छूट में जो लुंड डालकर उन्हें छोड़ रहा था वो और कोई नहीं बल्कि मेरे पापा the...to इसीलिए माँ को इतना झटका लगा था क्यूंकि उनकी आँखों के सामने उनका पति अपनी सगी बहिन को छोड़ रहा था...

मैं माँ के रिएक्शन का इंतज़ार कर रहा था और बस मन hi मन ये प्रार्थना कर रहा था की कुछ गलत न हो... माँ कहीं गुस्सा न हो जाएं... मैंने सोचा मुझे ऐसे इंतज़ार नहीं करना चाहिए मुझे भी कुछ करना चाहिए... और मैं अपना लुंड माँ की गांड पर ज़ोर से दबाने लगा उनके गले को चूमने चाटने लगा उनके पेट को सहलाते हुए मैं अपने हाथ उनके ब्लाउज के हुक्स पर रख दिए और धीरे धीरे उन्हें खोलने की कोशिश करने लगा





माँ को तो जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं पद रहा था वो तो बस अंदर कमरे में देखे जा रही था जहाँ पापा अपनी बहिन को बड़े ज़ोरो से छोड़ रहे थे इस बात से बेखबर होकर की उनकी बीवी और बीटा उन्हें देख रहे हैं...

मैं धीरे धीरे माँ के ब्लाउज के हुक खोल रहा था.. उत्तेजना में मेरे हाथ काँप रहे थे... खैर धीरे धीरे मैंने सरे हुक खोल दिए और ब्लाउज डुबो तरफ खुल गया अब माँ की ब्रा में कैद छुछियां रसीले आम की तरह लग रही थी सामने आ गयी.. ऐसा लग रहा था की अभी ब्रा फाड़ कर बहार आ जाएँगी..

मैं ब्रा के ऊपर से hi हाथ उनकी छूछीयो पर रख दिए और दबाने सहलाने लगा.. आह क्या मज़ा आ रहा था...

माँ ने कोई रिएक्शन तो नहीं दिया बस मुझे उनकी साँसे तेज़ चलती हुई लगी जो मुझे सही लगा... उनकी छूछीयो को मसलते अंदर देखा तो पापा और बुआ अपनी चुदाई में लगे हुए थे..

मैंने छूछीयो को दबाते हुए माँ की ब्रा के कप को नीचे खींच दिया और माँ के रसीले आम जैसे छूछे बहार आ गए... हलकी रौशनी में नहाये हुए छुछियां क्या लग रही थी...





मैं तो माँ की मुलायम और बड़ी बड़ी छूछीयों का स्पर्श अपने हाथ में पाकर जैसे मज़े में खो गया.. और मेरे हाथ अपने आप उन्हें गूंथने लगे मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयी... मैं हाथो पर उस मखमली एहसास में खोया हुआ न जाने कितनी देर तक उन मक्खन के गोलों को गूंथता रहा..

तभी एक आवाज़ से मेरी आँखें खुली जो की कमरे के अंदर से आ रही थी..

बुआ- हाँ bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa और ज़ोर से छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ूऊऊ अपणीइइइइइइइ बहिन को... भैयाआआ आअह्ह्ह घुसेड़ दो अपना मुसल अपनी बहाना की छूट में..

पापा- तेरी छूट में हमेशा hi सुकून मिलता है.. शशि मन करता है बस लुंड तेरी छूट में घुसाए रखूं...

बुआ- तो रखो न भैया. हमेशा डेल रखो अपना लुंड मेरी प्यासी छूट में...

पापा और बुआ की ऐसे गरम करने वाली बातें सुनकर मैं और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गया... और यही असर शायद माँ पर भी हो रहा था या कुछ और पता नहीं क्यूंकि वो कुछ बोल hi नहीं रही थी तो मुझे थोड़ा दर भी लग रहा था.. मैंने एक कदम आगे बढ़ने का सोचा और माँ के चेहरे को पकड़ कर अपनी और घुमा दिया और उनके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए... और बिना किसी इंतज़ार के चूसने लगा.. मैंने माँ को खुद से चिपका लिए और शिद्दत से उनके होंठो का रास पीने लगा...

होंठों को चूसते हुए मेरे मन में अचानक इच्छा हुई की मैं माँ का रिएक्शन देखूं तो मैंने धीरे से आँखें खोल कर देखा तो माँ की आँखें बंद थी.. माँ पर अपनी तरफ से कुछ नहीं कर रही थी और न hi मुझे रोक रही थी...

मैं फिर भी जैसे जन्नत में था होंठों में माँ के रसीले होंठों का रास और हाथों में उनकी छुछियां...





मज़े से मेरा बुरा हाल था.. लुंड नीचे साड़ी के ऊपर से hi माँ की गांड में घुसा जा रहा था.. मैंने होंठों को चूसते हुए अपनी जीभ माँ के मुँह में डालने की कोशिश की.. और जीभ अंदर जाते hi न जाने क्या जादू हुआ की माँ खुद से मुझसे चिपक गयी... उनके हाथ मेरे सर पर आ गए और वो अब खुद से मेरी जीभ चूसने लगी और नेरा साथ देने लगी... अब दोनों तरफ से बराबर का योगदान दिया जा रहा था.. कभी मेरी जीभ माँ के मुँह में होती तो वो चूसती और कभी उनकी मेरे मुँह में..

साथ hi मेरे हाथ लगातार उनकी चूचियों को गूंथ रहे थे और नीचे उनके चूतड़ों के खेत में मेरा लुंड हल चला रहा था...

बहार की दुनिया से बेखबर होकर हम एक दुसरे में खोये हुए थे.... अंदर पापा और बुआ भी अपनी चुदाई में लगे हुए थे पर अभी हमारा ध्यान उनपर नहीं था...

जब एक दुसरे की जीभ चूसते हुए हमारी सांस फूलने लगी तो हम अलग हुए... हम दोनों hi हांफ रहे थे... हटने के बाद हमने एक नज़र कमरे के अंदर डाली तो देखा पापा बुआ को घोड़ी बनाकर ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहे थे हर धक्के के साथ बुआ के चूतड़ लहार रहे थे... उनके थप थप की आवाज़ बहार तक आ रही थी...





Bua ki badi badi chuchhiyan papeeto ki tarah latak rahi thi... Wo log chudai karte huye kuch baat bhi kar rahe the par wo sunai nahi de raha tha... Bas thap thap ki awaaz aa rahi thi...

Maa ne ek pal ko kamre mein dekha aur phir meri taraf ghoom gayi.. aur ek baar phir se mujhse chipak gayi par is bar samne se... Aur maa ne phir se apane Honthon ko mere honthon par rakh diya aur choosne lagi.. maa itane zoro se mujhe choom rahi thi ki main peeche ho gaya aur chhajje (छज्जे) ki deewar par tik gaya... Maa pHir bhi mujhe choomti rahi... Kuch bhi kaho apani maa ke hontho ka choosne ka maza hi alag hota hai.. wohi maza abhi mujhe mil raha tha.. khaur kuch der baad maa alag hui...

Alag hone ke baad maa ki aankhein mujh par hi thi unki aankhon mein ek alag chamak dikh rahi thi jo mujhe bhi samajh nahi aa raha tha kya hai... Phir maa ne meri aankhon mein dekhte hi blouse ke neeche se apani peeth ki taraf hath kia.. mujhe samajh nahi aaya maa kya kar rahi hai aur agale hi pal maa ka hath bapis aaya aur unke hath mein unki bra thi... Main sochta hi rah gaya ki bina blouse utare maa ne bra kaise nikali ...

Main asamanjas Mein maa ke hathon mein latakti hui bra ko dekhe ja raha tha aur maa meri taraf dekh kar muskura rahi thi...





मैं सम्मोहित सा होकर बस उनकी ब्रा को हिलते हुए देख रहा था..

वो ब्रा मुझे कोई रहस्यमयी चीज़ लग रही थी जिसने मुझे सम्मोहित कर लिए था... और रहस्य की बात तो थी hi की ये छोटी सी ब्रा माँ की इतनी बड़ी छूछीयों को कैसे कैद कर के रख लेती है..

अचानक से माँ ने ब्रा को छोड़ दिया और ब्रा नीचे गिरने लगी.. मुझे लगा जैसे कोई कांच की चीज़ नीचे गिर रही है और टूट न जाये.. खुद बा खुद मेरा हाथ उसे बचने के लिए आगे बाद गया और मैंने उसे पकड़ लिए.. उसे पकड़ने के बाद मुझे ऐसे ख़ुशी हुई जैसे वर्ल्ड कप फाइनल में मैंने कोई कैच पकड़कर इंडिया को जीता दिया हो... मैं ब्रा के साथ अलग hi एक ख्यालों की दुनिया में था..

तभी माँ ने धीरे से बोलै- क्या ब्रा से खेले जा रहा है... दूधु नहीं पीना..

और मैं अपने ख्यालों से बहार आया और सोचने लगा की मैं ये कर क्या रहा था ब्रा के लिए इतना प्यार कहाँ से आया.. अपनी हरकतों पर मुझे हंसी आ गयी... और फिर जैसे hi जो माँ ने कहा था वो मेरी समझ में आया मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ने लगा.. मैंने झट से मुँह आगे किया और माँ की एक छुच्छी को अपने मुँह में भर लिए...

मैं जितना हो सके बड़ा सा मुँह खोल कर माँ की छुच्छी को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मुँह में लेकर चूसने laga....hath में ब्रा को जेब में डाला और दूसरी छुच्छी को दबाते हुए माँ का दूध पीने लगा..

माँ फुसफुसाते हुए- पी मेरा लाल अपनी माँ का दूध पि जा सारा... बहुत सालो से नहीं पिया ना आज जी भर के पी..

माँ बेहद उत्तेजित हो गयी थी जो की उनकी बातों से साफ़ पता चल रहा था.. और उतना hi उत्तेजित मैं था.. माँ की छूछीयो को ऐसे छत रहा था जैसे ये मेरी ज़िन्दगी का आखिरी खाना है... माँ का एक हाथ मेरे बालों में चल रहा था और दूसरा मेरे कंधे पर था .. माँ बालो में उसी तरह हाथ फेर रही थी जैसे एक माँ अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाते हुए उसके सर पर फेरती है..

माँ- भूख लगी है मेरे बच्चे को.. मितले लाल अपनी भूख अपनी माँ के दुधु से..

माँ की बातें इतनी कामुक और उत्तेजक थी की मेरा लुंड फटने को तैयार था फिर बी मेरा ध्यान सिर्फ माँ की छूछीयो पर था ... कभी एक छुच्छी को चूसता तो कभी दूसरी





मैं तो एक छोटे बच्चे की तरह था जिसके सामने उसके क

माँ मुस्कुरा कर मेरे सर पर हाथ फेर रही थी... मशीन बिना सांस लिए माँ की छूछीयो को बदल बदल कर पि रहा था... पर मेरा लुंड मुझे परेशां कर रहा था... लुंड का टोपा फूल कर आलू जैसा हो गया था और अब वो भी प्यार मांग रहा था पर मेरा मन माँ की छूछीयो को छोड़ने का बिलकुल नहीं था.. तो मैंने माँ का एक हाथ जो कंधे पर था उसे पकड़ा और लेजाकर अपने लुंड पर रख दिया... लुंड पर हाथ पड़ते hi माँ ने उसे पकड़ लिया और हाथ टच होते hi मेरे लुंड को जैसे सुकून मिला... मैंने सोचा माँ का हाथ hi इतना सुकून देता है तो बाकि सब की तो बात hi कुछ और है... माँ भी मेरे लुंड पर हाथ चलने लगी और मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया...

मैं बिना रुके माँ की छूछीयो का न जाने कितनी देर तक पीटा रहा... की अचानक अंदर से एक गुर्राने की आवाज़ आई जो की पापा की थी तो मैं समझ गया की वो झड़ने वाले है पर मुझे अभी सिर्फ अपनी पड़ी थी और क्यूंकि हम कमरे के पीछे थे तो इतना दर भी नहीं था उनके देखने का ...

न मैंने और न hi माँ ने अंदर देखने की कोई कोशिश की बस एक दुसरे में लगे रहे..

माँ- कर्मा तेरा ये तो कितना टाइट हो गया है रे... माँ ने मेरे लुंड को मुठियाते हुए कहा...

में- हम्म्म छूछीयों को चूसते हुए मैंने जवाब दिया पर माँ की बात सही थी मेरा लुंड बेहद कड़क हो चूका था...

फिर माँ ने मेरा चेहरा पकड़ कर अपनी छूछीयो से अलग किआ.. उनकी दोनों छुछियां मेरे थूक से गीली हो चुकी थी.. माँ ने एक बार फिर से मेरे होंठों को चूसने लगी.. कुछ देर बाद जब माँ अलग हुई तो मैंने माँ के कंधो पर दबाब देकर उन्हें नीचे बिठा दिया..

माँ घुटनो पर नीचे बैठ गयी.. बहुत प्यारी लग रही थी साड़ी नीचे गिरी हुई ब्लाउज खुला हुआ... नंगी बड़ी बड़ी छुछियां... उनका हाथ अब भी मेरे लुंड पर था.. मैंने एक कदम आगे बढ़ाकर अपना लुंड माँ की दोनों छूछीयों के बीच फंसा दिया और मेरी कमर अपने आप चलने लगी और मेरा लुंड माँ की छूछीयो को छोड़ने लगा... मेरे थूक की वजह से गीली छूछीयो में और लुंड अचे से फिसल रहा था... बाकि माँ भी समझ गयी क्या करना है तो उन्होंने अपनो छूछीयो को लुंड के ऊपर दबा लिया जिससे मुझे और आसानी हो





मेरा लुंड माँ की छूछीयो के बीच बानी गुफा में ट्रैन की तरह आ जा रहा था...

लुंड के चारो तरफ माँ की नरम, गरम और मखमली छूछीयो का एहसास बहुत गजब का लग रहा था... धीरे धीरे मेरी गति अपने आप बढ़ती जा रही थी वहीं माँ मेरी आँखों में देखते हुए मुस्कुरा रही थी और अपनी छुछियां मुझसे छुड़वा रही थी...

माँ का ब्लाउज शायद कुछ तकलीफ दे रहा था इसलिए उन्होंने एक एक हाथ अलग करके उसे उतार दिया पर एक पल को भी मेरे लुंड की ट्रैन को नहीं रुकने दिया...

अब माँ ऊपर से बिलकुल नंगी थी कमर के नीचे साड़ी थी पर ऊपर कपडे का नाम तक नहीं था, कितनी अजीब स्थिति थी.. नीचे भतीजी की शादी हो रही है ऊपर उसकी चची अपने सेज भाई से चुद रही थी और उसी सेज भाई की बीवी खुले आसमान के निचे छत पर ऊपर से बिलकुल नंगी होकर अपने सेज बेटे के लुंड से अपनी छुछिया छुड़वा रही थी...

खुले आसमान के नीचे अपनी माँ की मखमली छूछीयों का आनंद लेकर मैं बेहद उत्तेजित हो गया था.. बाकि इतनी देर से जो लुंड खड़ा था तो नतीजा हुआ की मैं कुछ hi देर में चरम पर पहुँच गया मेरी कमर तेज़ तेज़ चलने लगी मेरी आँखें बंद हो गयी और कुछ पल बाद मेरे शरीर से ऊर्जा जैसे वीर्य के रूप में बहार निकलने लगी...

मेरे लुंड से पिचकारियां निकले जा रही थी और मुझे सुकून मिलता जा रहा था... जब झड़ने की प्रक्रिया आखिरी चरण पर पहुंची तो मेरी आँखें खुली और नीचे देखा तो माँ की दोनों छुछियां मेरे रास से भीगी हुई हैं... और माँ के चेहरे पर मुस्कराहट अब भी है...





माँ- देख मैंने तुझे अपना दूध पिलाया और तूने तो मुझे अपने दूधु से गीला hi कर दिया...

मैं अब बिलकुल शांत हो चूका था..

में- मैंने तुम्हारे दूधु को अपने दुधु से नहला दिया माँ...

Maa-Chal अब पंत पहन और नीचे चल बहुत टाइम हो गया लोग पूछने लगेंगे..

और ये कह कर माँ अपना ब्लाउज उठाने लगी... मैं ये सोचकर हैरान था की माँ ने पापा और बुआ की चुदाई का अब तक जिक्र भी नहीं किआ और वो बिलकुल नार्मल तरीके से बात कर रही थी..

माँ- अरे अब इसे कैसे पह्नु पूरे दूध तो भीगा दिए हैं तूने.. ला ब्रा कहा है दे उसे पहन कर पहनूंगी..

में- अरे माँ ऐसे hi पहन लो न पेट पर गिरा था किसी को पता चला ...

माँ- बीटा ब्लाउज गीला हो जायेगा...

में- अरे माँ पहन लो न... सूख जायेगा अभी...

माँ- बिलकुल ज़िद्दी है तू ये कहकर माँ ने ब्लाउज ोाहणा शुरू किआ और मैंने अपना लुंड अंदर दाल कर पंत ठीक किआ... जब माँ ने ब्लाउज पहन लिए तो व जगह जगह उनकी छूछीयो से चिपक रहा था मेरे रास की वजह से...

माँ- देख कैसे लग रहा है किसी ने देख लिए तो...

में- तो पल्लू भी तो डालोगी न माँ...

Maa-chal तुझसे बातों में कौन जीत सकता है अपनी बात मनवा hi लेता है फिर माँ ने अपनी साड़ी ठीक की और कड़ी हो गयी मैंने कमरे के अंदर झंकार देखा तो कोई नहीं था... माँ साड़ी ठीक कर के जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया...

माँ- अब क्या हुआ चल na..mmmmmm

मैंने माँ के कुछ कहने से पहले उनको चूम लिए और कुछ पल बाद छोड़ दिया...

माँ अलग होकर थोड़ा मुस्कुराई..

Maa-pagal है पूरा तू..

फिर मैं और माँ साथ में नीचे आ गए और फिर बहार मंडप में...

वहां बुआ और पापा पहले से बैठे हुए थे देखकर कोई नहीं कह सकता था की ये दोनों भाई बहन अभी क्या क्र के आ ईहे हैं?..

माँ को देखकर पापा ने इशारे से पूछा क्या हुआ?

तो माँ ने ना में सर हिलाकर जवाब दिया और मेरे साथ बैठ गयी...

मैं थोड़ा हैरान था की माँ ने पापा को भी बिलकुल नार्मल होकर जवाब दिया जैसे कुछ हुआ न हो.. चल क्या रहा है माँ के मन में... मुझे बात करनी पड़ेगी माँ से...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट.... बहुत बहुत शुक्रिया..
 
तो माँ ने ना में सर हिलाकर जवाब दिया और मेरे साथ बैठ गयी...

मैं थोड़ा हैरान था की माँ ने पापा को भी बिलकुल नार्मल होकर जवाब दिया जैसे कुछ हुआ न हो.. चल क्या रहा है माँ के मन में... मुझे बात करनी पड़ेगी माँ से..

अपडेट 69
मैं माँ की तरफ देख रहा था और माँ मंडप में, वो बिलकुल नार्मल लग रही थी उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो उन्होंने इशारो से पुछा ऐसे क्या देख रहा है...

में- माँ तुम ठीक हो न?

माँ- हाँ मैं बिलकुल ठीक हूँ मुझे क्या होगा...

में- वो सब जो हमने देखा उसके बाद भी..

माँ- कर्मा अभी उस बारे में मुझे बात नहीं करनी.. शादी पर ध्यान दे..

मैंने भी सोचा जब माँ नार्मल हैं तो क्यों उन्हें अभी परेशां करूँ पूछ कर..

तो मैं भी चुप होकर बैठ गया...

मंत्र वगेरा के बाद फेरे हुए... और बाकि रस्में हुई... सुबह तक शादी हो गयी... नाश्ता होने के बाद विदाई का समय हुआ.... सबकी आँखें नाम थी... रिमझिम दीदी तो फूट फूट के रो रही थी... एक एक करके सबसे गले मिली जब मेरे गले से लगी तो मेरी आँखें भी नाम हो गयी... उनके साथ बिताये हुए सरे पल आँखों के सामने दिखने लगे यकीन नहीं हो रहा था की अब ये किसी और घर की अमानत हैं...

बड़ी बुआ और बुआ और माँ भी रट हुए उनको समझा रही थी और फिर इसी तरह दुखी होकर उनकी विदाई हुई....

विदाई के बाद घर सूना सूना लग रहा था


साफ़ सफाई का काम चल रहा था मंडप वगेरा ें...

मुझे हल्का होने जाना था तो देखा घर के सरे बाथरूम बिजी हैं लगी भी तेज़ थी तो सोचा आज स्वच्छता अभियान को रोकता हु और खेतों ममें... बोतले लेके निकला hi था की पीछे से आवाज़ आई... कर्मा कहाँ जा रहा है... मैंने देखा तो चारु ममी थी...

me-kheto में जा रहा हूँ ममी क्या हुआ?

च ममी- अरे बीटा मुझे भी फ्रेश होना था पर सरे बाथरूम बिजी हैं... और लगी भी तेज़ है... मुझे भले चल...

में- मेरे साथ करोगी ममी?

च ममी- मुस्कुराते हुए... बेशर्म है तू अरे मतलब खेतो तक छोड़ दे... पर जल्दी चल...

me-theek ह चलो..

फिर मैं और ममी खेतों में पहुंचे ..

me-mami चलो यहाँ करलो...

च ममी- और तू?

में- मैं भी यहीं करूँगा...

च ममी- पागल है क्या साथ में कैसे... किसी ने देख लिया तो...

में- ममी इसीलिए आपको झाड़ियों वाले खेत में लाया हूँ ... देखलो सब तरफ कितनी बड़ी बड़ी झाड़ियां है

च ममी- हम्म्म चल ठीक है वैसे भी मुझसे रुका नहीं जा रहा..

ये कहकर वो एक कोने की तरफ बढ़ गयी और फिर अपनी साड़ी उठाकर बैठ गयी...

उनकी गांड देखकर मन में कुछ कुछ हुआ पर... पेट में अभी बहुत कुछ हो रहा था तो मैंने सोचा पहले इसको निपटाया जाये नहीं तो गड़बड़ हो जाएगी...

फिर मैं भी वहीं बैठ गया 5-10 मिनट्स की कड़ी म्हणत के बाद सुकून mila...par बीच बीच में ममी की तरफ भी देख रहा था पर बैठने की वजह से सिर्फ उनका चेहरा देख प् रहा था... जब मेरा काम ख़तम हुआ तो मैं धो कर खड़ा हुआ तो देखा ममी भी कड़ी थी पहले से hi...

खैर जब अब पेट को सुकून मिल गया तो लुंड ने अंगड़ाई लेनी शुरू की और धीरे धीरे कड़क होने लगा...

मैं ममी के पास पंहुचा और बोलै- ममी पेट तो साफ़ हो गया अब थोड़ी मस्ती हो जाये..

च ममी- लेट हो जायेंगे और ऐसे खुले में सही नहीं है..

me-are ममी खुले में hi तो मज़ा है... एक बार करके तो देखो... और मेरे इसे देखो कैसे खड़ा है आपके लिए...

च mami-ye कभी बैठता भी है...

में- हाँ आपकी छूट में पिचकारी मरने के बाद...

च mami-besharam कहीं का..

मैं ममी को पकड़ कर खेत के दुसरे कोने पर ले गया वहां भी काफी झाड़ियां थी और तब तक कोई नहीं देख सकता था जब तक वो खेत के अंदर न आ जाये...

मैंने समय बर्बाद न करते हुए एक बार ममी के होंठों को चूमा और फिर उनके कंधे पर दबाब देकर उन्हें नीचे बिठा दिया... ममी अपने घुटनो पर बैठ गयी और अपने सर पर पल्लू कर लिए की कोई अगर देखे तो पहचान न पाए और मैंने अपनी जीन्स नीचे खिसका कर लुंड बहार निकल लिया हो स्प्रिंग की तरह उछाल कर बहार आया.

ममी ने भी बिना टाइम गंवाए उसे पकड़ा और अगले hi पल अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी....

क्या मस्त लग रही थी ममी खेतों में मेरा लुंड चूसती हुई...





ममी के गरम मुँह में लुंड को बड़ा आराम मिल रहा था अपने hi आप मेरी आँखें बंद होने लगी... और जब आँखें बंद हो गयी तो सामने माँ के साथ हुए रात के दृश्य दिखने लगे...

माँ के साथ बिताया हुआ हर पल मेरे ज़हन में ताज़ा था... मैं सोचने लगा की इतनी खूबसूरत और गदराई हुई औरत मेरा लुंड खेत में चूस रही है और मैं किसी और के बारे में सोच रहा हूँ...

पर शायद ये hi माँ होती है...

खैर माँ के बारे में सोचते हुए जब मैंने आँखें खोली तो देखा की न जाने कब मेरे हाथ ममी के सर के पीछे पहुंच गए थे और अब वो मेरा लुंड चूस नहीं रही थी बल्कि मैं उनके मुँह को छोड़ रहा था...





मेरा लुंड ममी के गले तक अंदर बहार हो रहा था... ममी को की आँखों में आंसू थे शायद तकलीफ की वजह से पर ममी न मुझे रुकने को बोल रही थी और न hi खुद अपना सर हटाने की कोई कोशिश कर रही thi...to मैं लगातार ममी के मुँह को चोदे जा रहा था... और हर बढ़ते पल के साथ मेरा जोश और गति दोनों बढ़ते जा रहे थे... नेरा लुंड बिलकुल रोड की तरह कड़क होकर ममी के गले के अंदर बहार हो रहा था...





ममी की हालत ख़राब होती जा रही थी पर फिर भी वो हर मैंने को तैयार नहीं थी वहीं अब मैं और आक्रामक होता जा रहा था... क्यूंकि मेरे झड़ने का समय करीब आता जा रहा था... ममी के मुँह की गर्मी मुझे पागल कर रही थी और जिसका नतीजा ये था की अब बस मैं झड़ना चाहता था..

क्यूंकि मैं इतना उत्तेजित हो चूका था उस तरह से खुले में ममी के मुँह को छोड़ते हुए... और कहीं न कहीं ये भी था की अब हम लोग अलग भी होने वाले थे शादी ख़तम हो चुकी थी तो अब सबको अपने अपने घर लौटना था...

खैर अभी तो मेरी गोलियां ममी की चीन पर लौट रही थी बार... मेरे हर झटके के साथ मेरे ाँद उनकी चीन पर जा कर टकराते, और उनकी नाक मेरे झांटो को छू जाती...

मेरे झटके और तेज़ होते चले गए और फिर मैंने ममी के सर को अपने लुंड पर दबा दिया और मेरे लुंड से पिचकारियां निकलने लगी...

जो ममी के गले को तर करने लगी... लुंड रास ममी के मुँह में भरने लगा





ममी मेरा रास निगलने की कोशिश करने लगी पर रास ज़्यादा होने की वजह से उनके मुँह से बहार टपक रहा था... जब रास ज़्यादा हो गया तो ममी अपना मुँह हटाने की कोशिश करने लगी पर मैंने हटाने नहीं दिया और झाड़ता hi गया पर रास ज़्यादा भरता hi गया जो ममी से संभाला नहीं जा रहा था...

और फिर जब ममी से नहीं रहा गया तो वो झटके से पीछे हैट गयी और फिर मेरे रास का फुव्वारा छूट गया





जो ममी के मुँह से बहता हुआ उनकी छूछीयो पर आकर गिरा.. और मेरे लुंड से बची हुई रास की धार ने उनके मुँह और छूछीयों को भीगा दिया... ममी पीछे हाथ टिकाये हुए हांफ रही थी..

इधर मेरा झड़ना बंद हुआ तो मैं भी कुछ शांत हुआ और फिर लुंड को बापिस अंदर डाला और जीन्स बंद की...

ममी बैठे बैठे मेरी तरफ hi देख रही थी..

च ममी- सब कुछ भीगा दिया तूने अब घर कैसे जॉन मैं...

Me-ghar जाकर भी तो नहाना hi है ममी और अभी तो वैसे भी पल्लू से धक् कर रखोगी hi क्या दिखेगा किसी को...

च ममी- पर चेहरा... ाचा रुक...

फिर ममी अपनी उँगलियों से अपने चहरे और छाती पर लगा हुआ मेरा रास बटोर कर चाटने लगी... ममी रास को ऐसे चाट रही थी जैसे कोई मलाई चाटता है...

कोई तुम्हारे रास को ऐसे कहते तो खुद को बहुत उत्तेजित करने वाला अनुभव होता है..

तो ऐसा नज़ारा देख कर मेरा लुंड जो अभी कुछ देर पहले hi शांत हुआ था फिर से मुँह उठाने लगा.. पर समय को ध्यान में रखते हुए मैंने उसको दन्त कर शांत रहने को कहा...

उधर ममी लगातार कामुक तरीके से मेरे रास को चाट रही थी





और मेरा खुद को रोकना मुश्किल होता जा रहा था खैर मैंने किसी तरह से खुद को संभाला और थोड़ी देर में ममी ने भी सारा रास चाट कर साफ़ कर दिया... तो हम दोनों लोग hi अपने कपडे सही करके और बोतले लेकर चल दिए...

चलते हुए अलग होने की बात हुई पर ममी ने मुझसे वादा लिया की मैं जल्दी जल्दी उनसे मिलने आता रहूँगा और बोली की हो सकता है मैं तेरे बच्चे की माँ भी बन जॉन... मुझे सुनकर थोड़ा ख़ुशी भी हुई और अजीब भी लगा की मेरव बच्चे को ममी पैदा करेगी... खैर इसी तरह बातें करते करते हम घर के करीव पहुँच गए तो ममी बोली पहले भैंस वाली झोपडी में चल वहां हाथ मुँह धो लेंगे तो साफ़ हो जायेंगे... अभी भी चिपचिपा सा लग रहा है मुझे...

मैं भी ममी के साथ झोपडी की तरफ चल दिया पाए बी

जब वहां पहुंचे तो कुछ आवाज़ें आ रही थी पर बहार कोई नहीं था झोपडी के अंदर भी कोई नहीं था... पर आवाज़ मुझे और ममी दोनों को सुनाई दे रही थी... हम लोगो ने सब तरफ देखा पर कोई नहीं दिखा...

फिर मैं ममी को लेकर झोपडी के पीछे ले गया और वहां जाकर देखा तो नज़ारा कुछ ऐसा था की

अनुज और विनीत दोनों hi खड़े हुए थे और उन दोनों के बीच में गया लटकी हुई थी... गया के पेअर विनीत के कमर में लिपटे हुए थे वहीं हाथ विनीत की गर्दन में.. और विनीत का लुंड गया की छोटी सी छूट में अंदर बहार हो रहा था... वहीं गया के पीछे अनुज खड़ा था उसने गया को कमर से पकड़ा हुआ था और नीचे अनुज का लुंड गया की गांड में धंसा हुआ था.. गया दोनों लुंड पर तंगी हुई ऊपर नीचे हो रही थी...





गया की कोशिश के बावजूद के आवाज़ न हो उसकी ाः अह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी... हम दोनों उन तीनो को देखकर कोने पर hi रुक गए... और उन्हें देखने लगे..

च ममी- हे राम कोई इस लड़की को देखकर कहेगा की कुछ दिन पहले तक ये कुंवारी थी... और अब देखो दो दो इतनेबड़े लुंड आसानी से ले रही है...

में- यही तो चुदाई क नशा है ममी एक बार लग जाये तो कहाँ रुकता है...

च mami-par मैं तो ये सोच रही हूँ की यहाँ से जाकर ये क्या करेगी कहीं कोई गलत न कर बैठे...

में- गया समझदार लड़की है ममी, और बाकि खुश करने के लिए तुम हो न एक दुसरे की ज़रुरत को पूरा करने के लिए...

च ममी- पर उसे देख लुंड कहाँ से लाऊंगी मैं...

में- अरे ममी उंगलिया हैं न तुम्हारे पास और इतनी मस्त जीभ भी है बाकि जब लुंड चाहिए हो तो यहाँ आ जाया करना... थोड़े थोड़े समय बाद...

च mami-haan करना तो ये hi पड़ेगा... अब मुझसे भी नहीं रहा जायेगा ज़्यादा दिन...

अनुज विनीत और गया की चुदाई देखते देखते मेरा लुंड दोबारा टाइट हो गया... वहीं ममी भी साड़ी के ऊपर से अपनी छूट खुजा रही थी... उन्हें देखते हुए और मुझसे बातें भी किये जा रही थी... जब मेरा लुंड बहुत hi टाइट हो गया तो मैंने ममी को खींचकर अपने आगे किआ और अपनी जीन्स एक बार फिर से नीचे खिसका दी और ममी को आगे की और झुककर दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उनकी साड़ी को उठाकर कमर के ऊपर कर दिया और पीछे से अपना लुंड बिना किसी देरी के उनकी गरम छूट के ऊपर रखा और एक धक्का देकर अंदर घुसेड़ दिया...

च ममी- ahmmmmmmmmmmm अह्ह्ह्ह अह्ह्ह आराम से betaaaaaaaaaaaaahhhh...

में- सच में ममी क्या मस्त छूट है तुम्हारी .

और ये बोलकर मैं ममी की छूट में झटके मरने लगा और उन्हें छोड़ने लगा...





च ममी- अह्ह्ह्हह बहुत याद आएगी रे तेरी और तेरे इस लुंडडडड की अह्हह्ह्ह्ह...

Me-mami याद तो मुझे भी बहुत आएगी तुम्हारी... और तुम्हारी इन बड़ी बड़ी मौसमीयो की...

मैंने उनकी छूछीयो को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाते हुए कहा...

में- तुम्हारी इस choooooooooot की... तुम्हारी इस गांड की....

और ये कहकर मैंने अपनी एक उंगली उनकी गांड में दाल दी...

ममी इस दोहरे हमले से कसमसा गयी... चुत में लगातार मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था...

च mami-haaan मेरे बच्चे ऐसे hi छहःछहुड़ड़ कर्मा अपनी ममी को आआह्ह्ह

ममी चुड़ते हुए उत्तेजित होती जा रही थी... और मुझे उकसा रही थी... ममी की आवाज़ सुनकर उन तीनो ने हमारी तरफ देखा और मुस्कुराये ... खासकर गया अपनी मुम्ममय को छुड़ता देखकर बड़ी खुश हुई पर उन लोगो ने अपना काम जारी रखा..... इधर मैं भी ममी की छूछीयो को मसलते हुए बहुत तेज़ झटको के साथ ममी को छोड़ रहा था...

तभी एक आवाज़ से मेरा ध्यान उन तीनो पर गया तो देखा गया झाड़ रही थी और कोई आवाज़ न निकले इसलिए अनुज ने उसका मुँह दबाया हुआ था... और ऐसे hi कुछ पल बाद गया ढीली ोाद गयी तो तुरंत अनुज और विनीत के धक्के और आक्रामक हो गए... दोनों मिलकर गया को बेदर्दी से छोड़ने लगे... और फिर कुछ पल बाद hi दोनों ने अपने अपने लुंड को जड़ तक गया के छेदों में गाड़ दिया और अपना रास उसके अंदर hi छोड़ने लगे... धार के बाद धार गया की छूट और गांड को भर रही थी और जब उनकी धार बाब्ड हुई तो उन्होंने अपने अपने लुंड को गया के छेदों से निकला तो गया की छूट और गांड से रास बाह बहकर बहार आ रहा था





जब दोनों अलग हुए तो जल्दी से अपने कपडे ठीक करने लगे उधर गया भी अपनी पंतय से अपमी छूट और गांड को साफ़ कर रही थी... विनीत अपने कपडे ठीक करके मेरे पास आया बोलै चल हम लोग भागते हैं घर मैं काम भी काफी पड़ा है और तू भी जल्दी आ ...ताऊजी और मां ढून्ढ रहे थे तुझे...

Me-.hmmm आता हूँ...

अनुज और गया भी कपडे ठीक करके हमारे पास आये और फिर अनुज विनीत के साथ चला गया वहीं गया ने झुककर अपनी मम्मी को चूमा और फिर मुझे भी एक बार चूमा और फिर मुम्ममय जल्दी आना ये बोलकर भाग गयी...

मैं ममी को लगातार तेज़ धक्को से पेल रहा था

च ममी- अह्ह्ह्हह बहुत मज़ा आ रहा है बेटा पर और तेज़ कर ज़्यादा टाइम नहीं है हमारे पास...

मैंने ममी की बात सुनकर उनको और नीचे की तरफ झुका दिया और फिर उनकी कमर पकड़ कर तूफानी रफ़्तार से उन्हें छोड़ने लगा





ममी के दोनों हाथ ज़मीन पर ठीके हुए थे ताकि वो गिर न जाएं क्यूंकि मेरे धक्के hi बहुत तेज़ थे...

च mami-ahhhhh अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह

ममी के मुंह से बस ऐसी आवाज़ें निकल रही थी...

करीब 5 मीन्स की ऐसी hi दुमदार चुदाई से ममी झड़ने लगी मुझे अपने लुंड पर उनका रास बहता हुआ महसूस हुआ तो मेरी कमर भी अपने आप hi तेज़ हो गयी और फिर मैंने अपना लुंड जड़ तक ममी की छूट में गाड़ दिया अपना रास उनकी छूट में छोड़ने लगा..... अपने रास से उनकी छूट को भरने के बाद जब मैंने लुंड निकला तो मेरा रास उनकी छूट से बहार टपकने लगा





मैंने जल्दी से अपना लुंड अंदर डाला और जीन्स ऊपर की वहीं ममी ने भी अपनी साड़ी नीचे की और लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए सीढ़ी हुई और अपने बाकि कपडे ठीक किये.. फिर हम लोग नल पर गए हाथ पेअर धोये और फिर घर आ गए

दोस्तों कैसी लगी अपडेट... अगली अपडेट बहुत hi जल्दी दूंगा वो लिख रहा हूँ अभी ये पोस्ट इसलिए की क्यूंकि फिर डिलीट होने का दर रहता है... अपने सुग्गेस्टियन्स और फीडबैक ज़रूर दें.. शुक्रिया
 
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