Incest Katha Chodampur Ki - Page 9 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

आप सब का बहुत बहुत शक्रिया, दोस्तों नई अपडेट में कुछ नया करने का सोचा है आशा है आप लोगों को पसंद आयेगा। और आपके सुझाव और कहानी के प्रति प्यार के लिए में बहुत बहुत आभारी हूं।
 
thi...subah के 5 बज रहे थे पर यहाँ अभी सोना बाकि था बाकि लोग भी सोने की तैयारी में hi थे और फिर मैं बुआ की छूछीयो को पकड़कर और उनके ऊपर पेअर चढ़कर आँखें बंद करके लेट गया और कब सो गया मुझे खुद पता न चला.....

अपडेट 51

सोने के बाद जब मेरी आंख खुली तो काफ़ी समय तो में बस ये ही सोचता रह गया कि मैं कौन सी दुनिया में हूं कहां हूं क्या कर रहा हूं शायद ज़्यादा ही गहरी नींद सोया था, पर जब सब समझ आया तो फिर सब कुछ याद आ गया।

कमरे में नजर घुमाकर देखा तो सिर्फ मैं ही अकेला था बाकी सब लोग उठ कर जा चुके थे। घड़ी पर नज़र घुमाई तो 11 बज रहे थे, मै उठा और फिर फ्रेश होने चला गया, बाहर जाकर देखा तो सब जागे हुए थे और किसी ना किसी काम में लगे हुए थे उनके चेहरों को देखकर कोई ये नहीं का सकता था कि ये वो ही परिवार है जो चन्द घंटो पहले हवस के ऐसे खेल में डूबा हुआ था जो समाज की नज़रों में किसी पाप से कम नहीं, पर यहां किसी को समाज की कोई चिंता नहीं थी।

मुझे बुआ ने देखा तो तुरन्त बोलीं - उठ गया मेरा बेटा चल बैठ जा तुझे चाय देती हूं।और आलू के परांठे बनाए हैं वो भी खाले बहुत पसन्द हैं ना तुझे।

मैं- हां बुआ बहुत ही ज़्यादा आपकी तरह, जितनी तुम्हारी ये गांड पसन्द है उतने ही।

ये कहते हुए मैंने बुआ के चूतड़ों पर हाथ रख लिया और दबाने लगा, पर बुआ ने तुरन्त मेरा हाथ हटा दिया और आंगन के दूसरी तरफ खाट पर बैठी जिया की ओर इशारा किया साथ ही सीढ़ियों पर रिमझिम भी बैठी थी तो मैंने हाथ हटा लिया,

और फिर बुआ ने नाश्ता दिया और मैंने बैठ कर गरमा गरम परांठे खाए, तो बुआ बोल पड़ी कि बेटा भाई साहब तुझे बुला गए हैं दुकान पर चला जा कुछ समान लेना है विनीत तो भैंस का चारा लेने गया है,

मैं- ठीक है बुआ मैं अभी जाता हूं और फिर खाना ख़त्म करके मैं दुकान की ओर निकल गया, दुकान पर पहुंच कर मैंने बड़े फूफाजी को बताया कि बुआ ने बोला है आने को तो वो मुझे सामान बताने लगे जो मैं उतारने लगा, दुकान में से पर समान निकालते हुए मुझे ये अहसास हुआ कि बड़े फूफाजी मुझसे नज़रें नहीं मिला रहे हैं, और सिर्फ़ काम की बात कर रहे हैं, मैं समझ गया शायद बड़े फूफाजी रात की वजह से थोड़ा शरमा रहे हैं उनकी झिझक अभी तक पूरी तरह नहीं खुली है।

मैं- तो फूफाजी कैसा लगा आपको रात को सब को चोदकर सबके साथ।

मेरा सवाल सुनकर बड़े फूफाजी थोड़ा चौंक गए मैंने भी जानकर ऐसी बात की थी फूफाजी से ताकि उनकी थोड़ी झिझक कम हो पर मेरी बात का काफ़ी देर तक कोई जवाब नही दिया उन्होंने तो मैंने दोबारा पूछा,

मैं - कहां खो गए फूफाजी कोई परेशानी है क्या,

फूफाजी- ना ना नहीं बेटा, कोई परेशानी नहीं है सब सब ठीक है,

मैं- अरे फूफाजी आप भी ना, मैं समझ सकता हूं कि आप झिझक रहे हैं पर अब इस बात का कोई मतलब नही है, अब तो समय है जो भी हो रहा है उसका लुत्फ़ उठाने का, और क्या आप नहीं चाहते थे ये सब।

फूफाजी- चाहता तो मैं भी था कर्मा पर सब कुछ इतनी जल्दी हुआ के अब सोचने पर थोड़ा अजीब लग रहा है, पर तू सही कह रहा है अब इन सबसे कोई फायदा नहीं है, अब मैं भी कोशिश करूंगा कि च्चू चुदाई का भरपूर मज़ा लूं बिना किसी झिझक के।

मैं- मज़ा तो आपने भरपूर लिया था फूफाजी बस यहीं शर्मा रहे हो, रात तो खूब हुचक हूचक कर चोद रहे थे सबको,

फूफाजी मेरी बात सुनकर हंसने लगे और मुझे डांटते हुए बोले बहुत बदमाश है रे तू,

मैं- सब आपसे सीखा है फूफाजी,

बड़े फूफाजी- तूने सीखा है या तुझसे हम सबने सीखा है,

मैं- अच्छा फूफाजी एक बात थी जो शायद आपको अभी तक नहीं पता होगी या शायद किसी ने बताई होगी

बड़े फूफाजी- कौन सी बात बेटा?

मैं- वो बात आपके परिवार के बारे में ही है और जब आप सब कुछ जान गए हैं तो ये बात भी जानने का आपका पूरा हक है।

बड़े फूफाजी- ऐसी कौन सी बात है?

मैं- वो फूफाजी ......... और फिर मैंने उन्हें अपने ओर रिमझिम दीदी के बारे में शुरू से लेकर अंत तक सब कुछ बता दिया, शुरू होने से लेकर अंत होने तक फूफाजी के चेहरे के भाव बदलते रहे और अंत में वो एक गंभीर मुद्रा में थे, जब मेरी बात ख़त्म हो गई तो मैं चुप हो गया, थोड़ी देर खामोशी छाई रही और फिर कुछ पल बाद फूफाजी बोले- जा बेटा समान ले जा घर पर तेरी राह देख रहे होंगे,

मैं- ठीक है मैं जाता हूं इससे ज़्यादा कुछ कहना मुझे भी ठीक नहीं लगा और मैंने समान उठाया और घर आ गया, घर आकर सारा समान बुआ को दिया डब्बों में भरवाया फिर नज़र घुमाकर देखा तो मेरी नजर रिमझिम दीदी पर गई जो मुझे बड़ी अजीब नज़रों से देख रही थी, और मेरे देखते ही अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया,

मुझे समझ नहीं आया कि इन्हें क्या हुआ, फिर मैं अपने काम में लग गया और पूरी मदद करने के बाद मैंने सोचा अब क्या किया जाए तो मुझे एक ख़्याल आया और मैं घर में सब तरफ नज़रें घुमाने लगा पर जो मैं देखना चाह रहा था वो कहीं नहीं दिखा तो मैंने बुआ से पूछा- जिया कहां है बुआ?

बुआ - छत पर है शायद, व्यायाम कर रही होगी

मैं भी तुरंत छत पर आ गया तो मुझे जिया कहीं नहीं दिखी, फिर रिमझिम का कमरा देखा तो उसमे भी नहीं दिखी फिर दूसरा कमरा देखा तो गेट खुलते ही मैं ख़ुश हो गया, और क्यों ना हूं, सामने का नज़ारा ही कुछ ऐसा था, सामने कमरे के अंदर जिया एक्सरसाइज कर रही थी उसने इस समय एक टीशर्ट और एक बेहद टाईट पजामी पहन रखी थी जो उसके चूतड़ों से चिपकी हुई थी, जिससे उसकी गांड का उभार साफ़ दिखाई पड़ रहा था, ये नज़ारा देखते ही मेरा लन्ड खड़ा होने लगा, मेरे पजामे के अन्दर तम्बू बनाने लगा, इस वक्त वो उठक बैठक कर रही थी जिससे उसके चूतड और उभरकर बाहर आ रहे थे,





उसके चूतड बाकी घर की और औरतों की तुलना में छोटे थे पर उसकी उम्र के हिसाब से बिल्कुल सही और उभरे हुए थे, खैर मैं बस उसको देखने लगा उसके शरीर की बनावट, उतार चढ़ाव, पतली कमर, उसके नीचे दो पतीले जैसे चूतड़....

मैं उसको देखने में इतना खो गया कि मुझे पता ही नहीं चला वो कब पलट कर मुझे देखने लगी,

वो मेरे चेहरे की ओर देख रही थी और में उसके बदन को, फिर जब मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो फिर उसने अपने दोनो रसीले होंठों को खोला और बोली- भइया आप यहां?

मैं- अरे वो तो मैं तुम्हे देख रहा था,

ये सुनकर वो थोड़ा शर्मा गई,

मैं- मेरा मतलब है कि तुम्हें एक्सरसाइज करते हुए देख रहा था कि ठीक कर रही हो या नहीं...

जिया- क्या आपको आती है एक्सरसाइज करनी?

मैं- हां सब आता है, एक्सरसाइज, खिंचाव कैसे करें, और भी कई सारी चीज़े सब कुछ कॉलेज में सिखाया गया है,

जिया- तो भैया मेरी मदद करो ना आप देखते रहना और मुझे रोक देना अगर मैं कुछ गलत करूं तो,

मैं- ये भी कोई कहने की बात है, तुम करो मैं देखता हूं

और फिर मैं कमरे के अंदर बेड पर आ कर बैठ गया वहीं मेरे सामने जिया एक्सरसाइज कर रही थी,

अब तो मुझे खुली छूट मिल गई थी उस ताड़ने की और मैं उसके बदन के हर अंग को अपनी आंखों में बसा रहा था वो बहुत ही मन लगाकर एक्सरसाइज कर रही थी पर मुझे अपना खड़ा लंड छुपाकर रखने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी मैंने अपने हाथ से उसे ढक रखा था पर लंड बड़ा था हाथो से भी नहीं छुपरहा था, ख़ैर ऐसे ही काफी देर तक ख़ामोशी में हम दोनों अपना काम करते रहे फिर वो बोली कि भैया ज़रा मेरी पीठ पर दबा दोगे मुझे पूरा खिंचाव करना है, मैं कहां मना करने वाला था

मैं तुरन्त उसके पीछे चला गया वो आगे की तरफ झुकी हुई थी, मैं उसके चूतड़ों के पीछे खड़ा हो गया और उसकी पीठ के निचले हिस्से पर दवाब देने लगा, उसकी गांड का मेरे करीब होने के अहसास से ही मेरा पहले से ही खड़ा लंड ठुमके मारने लगा मुझे भी शरीर में गरमी चढ़ने लगी, मन तो कर रहा था अभी लंड निकाल कर यहीं चोद दूं जिया को पर अपने आप पर काबू रख कर मैं उसकी मदद कर रहा था, फिर जिया बोली भैया थोड़ा ऊपर की तरफ से भी लगाओ तो मैंने अपने हाथ उसकी पीठ पर ऊपर की तरफ किए पर उससे मुझे जिया के और करीब जाना पड़ा जिससे मैं उसकी गांड से सट गया ओर मेरा लन्ड उसके चूतड़ों से छूने लगा और ये बात भी तय थी कि इसका अहसास उसको भी ज़रूर हुआ होगा, पर उसकी तरफ़ से कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दी तो मैंने भी अपनी कमर को ढीला छोड़ दिया और उसकी मदद करने लगा और बदले में उसके चूतड़ मेरे लंड की मदद करने लगे।

मैं जिया के कंधो के पास से उसकी पीठ को नीचे की तरफ दबा रहा था और पीछे से पूरी तरह से उसकी गान्ड से चिपका हुआ था, मेरा लंड अब उसके चूतड़ों के बीच दस्तक दे रहा था और वो भी ये महसूस कर रही थी पर कुछ बोल नहीं रही थी, मैंने उसकी खामोशी को उसकी मर्ज़ी समझ लिया और फिर अपने हाथों को उसकी पीठ पर चलाने लगा, कन्धे से हाथ को फिरात हुए नीचे उसके चूतड़ों के किनारे तक लाता और फिर वापस ऊपर ले जाता उसके चिकने जवान शरीर पर हाथ फिराने और उसकी जवानी को महसूस करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, जब उसने कोई भी जवाब नहीं दिया तो मेरा हौसला और बढ़ गया, मैंने अब हाथ ऊपर ले जाते हुए उसकी टीशर्ट को ऊपर खिसकाना शुरू कर दिया, धीरे धीरे उसकी टीशर्ट ऊपर होने लगी और उसका गोरा चिकना बदन दिखने लगा इतनी गोरी और चिकनी पीठ दिखते ही मेरा लंड बेकाबू होने लगा... मेरे हाथ के हर फेरे के साथ थोड़ी टीशर्ट ऊपर उठ रही थी और वो संगमरमर जैसा बदन मेरे सामने आ रहा था, धीरे धीरे उसकी टीशर्ट पीछे उसकी ब्रा जहां शुरू हो रही थी वहां तक पहुंच गई, मतलब अब उसकी पूरी कमर नंगी थी मैंने उसकी नंगी पीठ पर हाथ चलाने शुरू किए, इतनी चिकनी पीठ जिसपर हाथ ख़ुद ब ख़ुद फिसल रहा था जैसे मखमल का कोई कपड़ा हो, पीठ पर हाथ चलते हुए मेरा हौसला भी थोड़ा बढ़ गया और मैंने अब अपने हाथों को आगे की तरफ ले जाना शुरू कर दिया, उसकी चिकनी कमर को सहलाते हुए मैं अपना हाथ आगे उसके पेट पर गया तो उसका बदन कश्मकसाने लगा, मै उसके पूरे पेट और कमर को अपने हाथों से सहलाने लगा और कभी कभी मसल भी रहा था मेरे मसलने पर जिया के मुंह से एक हल्की सी आह निकल रही थी, इधर मेरे लंड का बुरा हाल था, ये फटने को हो रहा था और नीचे की तरफ दबे होने से दर्द भी हो रहा था मेरा लंड उसके चूतड़ों और मेरे बीच दबा हुआ था और उसकी गांड पर घिस रहा था, मैं अब उसके कोमल पेट और कमर को आटे की तरह गूंथ रहा था, उसका पूरा बदन अब थोड़े थोड़े झटके खा रहा था वो आंखे बंद किए सिर को झुकाए हुए मुझे अपने बदन से खेलने दे रही थी फिर मैंने अपने हाथ को थोड़ा ऊपर ले जाते हुए उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी जवान चूचियों पर रख दिया मेरा हाथ चूचों पर पड़ते ही वो झटके खाने लगी और उसके मुंह से बस भैया निकला उसके बाद अचानक से उसने अपने घुटनों को मोड़ा और वो अब नीचे होकर घुटनों और हाथों के बल चौपायबं गई उसके साथ साथ मैं भी अपने घुटनों पर आ गया उसके पीछे, अब ऐसा नज़ारा था जैसे मैं उसकी चुदाई कर रहा हूं कुतिया की तरह हम दोनों उसी पोजिशन में थे, पर मेरे लंड में अब हद से ज़्यादा दर्द बढ़ने लगा तो मैंने उसके पेट को मसलते हुए अपने एक हाथ से लंड को पकड़ा और पजामे के अंदर ही अबतक लंड का मुंह नीचे की ओर था वो मैंने उठाकर सामने जिया की गांड की तरफ कर दिया और फिर उसकी कमर को पकड़ कर अपने लन्ड के झटके उसके चूतड़ों पर मारने लगा,





मेरे हर झटके के साथ जिया के मुंह से एक आह की सिसकारी निकल रही थी मेरा लंड तो जैसे कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत में घुसा जा रहा था, मैं कमर आगे पीछे कर कर के अपने लंड को उसकी चूत पर दबा रहा था जिससे वो भी गरम हो रही थी मैंने लंड को घिसते हुए अपने हाथों को दोबारा उसकी चूचियों तक पहुंचाया और ब्रा के ऊपर से ही हल्के हल्के सहलाने लगा, मैंने एक बार थोड़ा दबाया तो जिया बोली- आह भैया नहीं,

मैने फिर अपने हाथ का दबाव कम कर लिया, उसकी टीशर्ट उसके गले में फंसी हुई थी नंगे पेट और कमर पर मेरे हाथ घूम रहे थे वहीं चूत पर मेरा लंड ठोकर मारकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था,

मैं - जिया तुमसे कुछ पूछूं?

जिया- अम्म हां भैया,

मैं- तेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड है?

वो मेरे सवाल से थोड़ा चौंक गई,

जिया- क्या मतलब भैया,?

मैने लंड की ठोकर को चूत पर मारते हुए दोबारा पूछा

मैं- ब्वॉयफ्रेंड जिया, इसका मतलब तो तुझे पता ही होगा,

जिया- आह हम्म मम्मी, ना नहीं भैया मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है,

मैं- सच में तेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है?

जिया-हां भैया कोई आह्ह्हह्ह कोई नहीजेईईईईई है,

मुझसे भी अब ज़्यादा सहन नहीं हुआ और अब मैं उससे खुल कर बात करना चाहता था इसलिए

मैंने उसकी कमर पकड़ कर घुमा दिया और अब सीधा लिटा दिया और ख़ुद उसके ऊपर आ गया, मेरा चेहरा उसके चेहरे के ऊपर था मेरा वजन मैंने अपनी कोहनियों पर के रखा था मैं नहीं चाहता था कि वो फूल सी लड़की मेरे वजन से दब जाए, मेरा कमर से नीचे का हिस्सा उसके ऊपर था मेरा लंड उसकी चूत पर अब सामने से ठोकर मार रहा था, वो मेरी आंखों में देख रही थी, उसकी आंखों में थोड़ा नशा सा था तो थोड़ी घबराहट थी, हम दोनो का चेहरा करीब दो इंच दूर था एक दूसरे से, फिर मैंने उससे एक और सवाल पूछा,

मैं- क्या कभी किसी ने तुझे किस किया है?

वो मेरा सवाल सुनकर थोड़ा चौंकी ओर फिर शर्मा गई और फिर अपने सिर को ना में हिलाकर जवाब दिया, उसकी सांसे लंड के चूत पर घिसने की वजह से और साथ ही मेरे इतने पास होने की वजह से बहुत तेज़ और गरम हो गईं थीं,

मैं- तू झूठ बोल रही है इतनी सुन्दर लड़की का भी कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं होगा, ऐसा कैसे हो सकता है,

जिया- नहीं भैया सच में नहीं है कोई स्कूल में कुछ लड़कों ने कोशिश की पर मैंने उन्हें मम्म्मन्न

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही मैंने अपने होंठो को उसके होंठों पर रख दिया और उसके होंठों को चूसने लगा,

पहले तो उसने बस अपने होंठो को ऐसे ही खोल कर रखा और कुछ नहीं किया पर फिर कुछ पल बाद ही उसके हाथ मेरी पीठ पर आ गए और वो भी मेरा साथ देने लगी,





उसके नरम कोमल रसभरे होंठों को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था, उसके हाथ मेरी पीठ पर कसे हुए थे, वो भी बिना किसी झिझक के मेरा साथ दे रही थी, मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिया जैसी खूबसूरत और कोमल लड़की के होंठों को पहली बार चूमने वाला मैं हूं, हम दोनों एक दूसरे के होंठों में खो चुके थे वो कभी मेरे निचले होंठ को चूसती तो मैं उसके ऊपर वाले होंठ का रस पी रहा होता फिर ऐसे ही इसका उल्टा, उसके बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी तो वो अपनी जीभ को मेरी जीभ से रगड़ने लगी, और फिर मैंने उसकी जीभ को अपने मुंह में खीच लिया और चूसने लगा, नीचे से उसकी कमर अब अपने आप झटके ले रही थी और वो अपनी चूत को लंड पर घिस रही थी, एक दूसरे की जीभ को हम काफी देर तक चूसते रहे और फिर मैंने अपने होठों को उसके होठों से अलग किया और उसके गले में फंसी टीशर्ट को उतार दिया अब वो मेरे सामने ब्रा में थी मैंने उसके होठों पर दोबारा होंठ टीका दिए और फिर चूसने लगा साथ ही उसके ब्रा के कप को नीचे कर दिया तो उसके दोनों छोटे छोटे पर नए और कोमल चूचे मेरी आंखों के सामने आ गए और मैंने अपना होंठो को उसके होंठो से हटाया और कुछ देर उसकी जवान और कामुक चूचियों को निहारता रहा फिर अपना एक हाथ उसकी एक चूची पर रखा और दूसरी पर अपना मुंह रखकर चूसने लगा, मेरा मुंह और हाथ अपनी चूचियों पर पड़ते ही वो झटपटाने लगी, पहली बार उसके अलावा किसी ने उसकी चूचियों को छुआ था तो इस अहसास से वो अब तक बिल्कुल अनजान थी और वासना में डूबती का रही थी मैं एक रसीले पके फल की तरह उसकी चूचियों को चूस रहा था





और फिर कभी उसके खुले होठों को चूसने लगता अब जिया के मन में कोई झिझक नहीं रह गई थी वो पूरी तरह से मेरा साथ से रही थी, मैं भी कभी एक चूची को चूसता तो कभी दूसरी जिया के मुंह से आह भैया अहह ऐसी सिसकियां निकल रहीं थीं, उसके हाथ मेरे सिर को अपनी चूची पर दबा रहे थे, मैंने फिर अपनी जीभ से उसके निप्पल को कुरेदना चालू किया तो वो और उत्तेजित हो गई और कसके मेरे बाल पकड़कर दबाने लगी वहीं नीचे से उसकी कमर ऊपर उठ कर बिल्कुल मेरे लंड से चिपक गई और फिर कुछ पलों बाद उसका बदन झटके खाने लगा, मैं समझ गया कि जिया अपनी चुचियों के चुस्वाने से झड़ गई है, उसने मेरा सिर बाल पकड़कर अपनी चूची से हटाया और फिर मेरे होंठों पर अपने होंठं रख दिए और ज़बरदस्त तरीके से चूसने लगी, और चूसते हुए ही अचानक पूरे बदन के कुछ झटकों के बाद उसका शरीर ढीला पड़ गया और उसकी पकड़ भी मेरे सिर पर कुछ ढीली हो गई वहीं उसके होंठो ने भी अब धीरे धीरे होना शुरू कर दिया, और फिर वो पूरी तरह शान्त होकर लेट गई, उसकी सांसे बहुत तेज़ चल रही थी फिर थोड़ी देर बाद वो हांफते हुए ही बोली - ये क्या किया भैया इससे पहले मुझे कभी ऐसा फील नहीं हुआ, ऐसा लग रहा था कि मेरे शरीर से सारी ताकत ख़त्म होती जा रही है पर कभी ऐसा मज़ा भी नहीं आया,

मैं- अभी असली मज़ा तूने देखा कहां है, ये तो बस शुरुआत है,

जिया- फिर बाकी क्या होता है भैया,

मैं- इतनी भोली मत बन तुझे नहीं पता क्या होता है,?

जिया- भैया पता है पर कभी किया नहीं तो कैसा लगता है ये सब नहीं पता,

मैं- अच्छा पता है तो बता क्या होता है?

जिया- अरे वो ही भैया सेक्स। यही होता है बस.

मैं - सेक्स में क्या होता है?

जिया- लड़का लड़की की योनि में अपना लिंग डालकर करता है बस,

मैं- ये तो सब किताबी बाते हैं, ऐसे बात करेगी तो करते हुए बिल्कुल मज़ा नहीं आएगा।

जिया- तो कैसी बातें करते हैं भैया

ये कहते हुए उसने मुझे पलट लिया और मैं सीधा लेट गया और जिया मेरे कन्धे पर सिर रखकर मेरे ऊपर लेट गई,

मैं- सेक्स के दौरान तू जितनी गंदी बातें या अश्लील बातें करेगी उतना ज़्यादा मज़ा आएगा।

जिया - पर भैया मुझे गंदी बातें नहीं आती, मैं तो गाली भी नहीं देती।

मैं- सीख जाएगी उसकी चिंता मत कर बस तूने अब तक जो भी गंदे शब्द सुने हो वो सब याद कर और जो मैं तुझसे पूछूं वो बता

जिया- ठीक है भैया, पूछो।

मैं- सेक्स को और क्या क्या बोलते हैं,

जिया - संभोग, फॅकिंग,

मैं- और?

जिया - और वो.... भैया

मैं- देख शर्माएगी तो कुछ नहीं कर पाएगी, बिना झिझक के बोल,

जिया- भैया शर्म आती है तुम्हारे सामने।

मैं- इसमें शर्माना क्या और मैं खुद बोल रहा हूं तुझसे कहने को, फिर कैसी शर्म। अच्छा एक काम करते हैं एक चीज़ में बोलूंगा और एक तू अब ठीक है?

जिया - ठीक है भैया ऐसे शायद बोल पाऊं।

मैं- तो सेक्स को कहते हैं चुदाई.. क्या कहते हैं?

वो धीरे से झिझकते हुए बोली - चू चुदाई....

मैं - बिल्कुल सही.... अब इसे क्या कहते हैं बता?

मैंने उसकी चूची पर हाथ रखकर पूछा तो वो थोड़ा शरमाई फिर बड़े धीरे से बोली, स्तन, छाती, बूब्स।

मैं- और?

जिया - वो चूची।

और ये कहकर उसने अपना मुंह मेरे सीने में छुपा लिया।

फिर मैंने उसके पीछे गांड पर हाथ रखकर बोला - इसे कहते हैं गांड। तू बोल कर बता?

जिया - गांड हैं ना भैया?

मैं - हां बिलकुल सही, अब तेरी बारी बता इसे क्या कहते हैं?

मैंने अपना हाथ उसके पाजामके ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया तो पता चला पजामे का आगे का हिस्सा पूरा गीला था और मेरा हाथ पड़ते ही उसके मुंह से एक हल्की सी आह निकल गई। मैं भी कपड़े के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।

जिया - योनि आसाग्धघघ...... चपूपूपूट चूत। कहते हैं भैया आह।

मैं - अब तू पूछ तुझे किसका नाम जानना है?

तो उसने अपनी उंगली से मेरे पजामे में बने तम्बू की ओर इशारा किया तो मैं समझ गया ये लंड कि बात कर रही है पर फिर भी अनजान बनते हुए बोला - बता भी ऐसे समझ नहीं आ रहा.

तो उसने फिर से इशारा किया और बोली- भैया इसकी।

मैं- जैसे मैं तुझे हाथ रखकर पूछ रहा हूं वैसे पूछ ना.. सही से।

जिया - भैया आप बहुत बुरे हो

और फिर शर्मा कर अपना हाथ।मेरे पजामे में बने तम्बू पर रख दिया और फिर अचानक से बापिस हटा लिया जैसे छूने पर उसे कोई झटका लगा हो पर फिर हिम्मत करके उसने दोबारा हाथ रखा तो मेरा लंड भी झटके खाने लगा। मुझे भी उसके हाथ का मेरे लन्ड पर होने से बड़ा अच्छा लगा, पर अब भी लंड और हाथ के बीच कपड़े की दीवार थी।

मैं - इसे लिंग कहते हैं पर चुदाई की भाषा में इसे लंड या लौड़ा कहते हैं? कैसा लगा?

जिया- क्या भैया?

मैं- लंड, मतलब नाम इसका?

जिया - लंड हां लंड, अच्छा है बहुत ( वो पाजमे के ऊपर से ही सहलाते हुए बोली) और नाम भी बहुत अच्छा है।

मैं- नाम भी मतलब और कुछ भी पसंद आया क्या?

जिया - अरे वो नहीं भैया मेरा मतलब कि अच्छा नाम है।

मैं - चल ज़्यादा बन मत और ये बता चुदाई कैसे होती है बिल्कुल गंदे तरीके से बता...

जिया - वो लिंग को.....

मैं - क्या लिंग लिंग कर रही है जैसे पूछा वैसे बता ना

और ये कहते हुए मैंने उसकी चूत को दबा दिया और मसलने लगा तो वो थोड़ा कश्मकशाई और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कपड़े के ऊपर ही थोड़ी टाईट हुई ।

जिया - वो वो भैया लंड को वो चूत में डाल कर चुदाई करते हैं।

मैं - देखा तुझे पता सब कुछ है बस बेकार में शर्माती है।

जिया - वो शर्म आती है भैया।

वो मुझे बहुत प्यारी लग रही थी मेरी बाहों में ऊपर नंगी लेटी हुई मुझसे रुका नहीं गया और मैंने उसके होठों को फिर से अपने होंठो में भर लिया और चूसने लगा वो भी मेरा साथ दे रही थी, मैं उसके होंठों को चूसते हुए अपना एक हाथ नीचे ले गया और अपने लंड से उसका हाथ हटाया और फिर अपना पजामा नीचे करके लंड को बाहर निकाल लिया और मैं उसका हाथ दोबारा पकड़ कर रखता लंड पर उससे पहले ही उसने खुद अपना हाथ लंड पर रखा पर इस बार उसके हाथ में नंगा लंड आया जिसका एहसास होते ही उसकी आंखे जो होंठों को चूसने की वजह से बंद थीं वो खुल गईं और वहीं उसके होंठो की पकड़ भी मेरे होंठो पर बढ़ गई वो अब पागलों कि तरह मेरे होंठों को चूस रही थी साथ में ही लंड पर भी उसका हाथ ऊपर नीचे होने लगा, वहीं मैंने भी अपने हाथ से उसकी चूत को और दबाना चालू कर दिया जिससे वो और गरम होने लगी, कुछ पल बाद मैंने अपने हाथ को उसके पेट पर लाया और पेट को सहलाते हुए उसके पजामे की लस्टिक में फंसा कर नीचे की ओर खिसका दिया और धीरे धीरे चूतड़ों ओर जांघो से नीचे घटनों तक कर दिया साथ ही में लगातार उसके होंठों को चूस भी रहा था, फिर ऊपर हाथ लाया तो उसकी गीली पैन्टी पर हाथ पड़ा मैंने उसे भी झट से नीचे खिसका दिया और बापिस हाथ लाया तो मेरा हाथ उसकी नंगी चूत पर पड़ा जिसपर कोई बाल का नामोनिशान तक नहीं था एक दम चिकनी और रसीली चूत , उसके होंठो को महसूस किया तो आपस में जुड़े हुए थे मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अपने होंठो को उससे हटाया और उठकर तुरन्त उसकी टांगो के बीच आ गया और मुझे उसकी अन चुदी चूत मेरी आंखों के सामने आ गई,

इतनी चिकनी और रसीली चूत आज तक मैंने किसी की नहीं देखी थी, पूरी चूत गीली थी एक दम गोरी बेदाग। मेरा हाथ ख़ुद दोबारा उसकी चूत पर चला गया और मैं चूत के इर्दगिर्द हाथ घुमाने लगा जिससे वो थोड़ी और गरम होने लगी

जिया - भैया आह आआआआआा ह्म्म बहुत अजीब सा लग रहा है

मैं- कुछ नहीं होगा अभी देख कितना अच्छा लगेगा, और ये कहके मैं उसकी चूत की खूबसूरती को हाथों से महसूस करने लगा





जिया - हां भैया आह हम्म्म ऐसे ही अच्छा लग रहा है आह भैया।

जिया अपनी चूत रगड़वाने से गरम होती जा रही थी और मेरी उंगली का पूरा आनंद ले रही थी अपनी चूत पर।

फिर मैंने सहलाते हुए धीरे से एक उंगली उसके चूत के संकरे छेद में घुसाने के लिए उसके मुंह पर रखदी जिसके अहसास होते ही जिया की कमर झटके खाने लगी, मैंने फिर भी उंगली को थोड़ा अन्दर धकेल दिया उंगली भी बहुत फंस कर अंदर जा रही थी में सोचने लगा कि जब उंगली इतनी मुश्किल से जा रही है तो लंड वो भी मेरा कैसे जा पायेगा इतनी सी चूत में मैंने थोड़ी सी ही उंगली घुसेड़ कर अंदर बाहर करने लगा और उधर जिया के मुंह से सिसकियां निकलने लगी

जिया- आह भाईय मैं मर जाऊंगी मत करो ऐसा, मुझे ऐसा कभी मह आह मम्मी बहुत अच्छा लग रहा है माआ।

मैं उसके चेहरे और उसकी चूत को देखते हुए अपने काम में लगा हुआ था वहीं दूसरे हाथ से अपना लंड भी सहला रहा था। क्यूंकि लंड को भी अब ध्यान की ज़रूरत थी, मन तो कर रहा था अभी पूरा लंड जिया की चूत में डाल दूं और खूब चोदूं उसे पर मैं उसकी पहली च्चुदाई में ही उसे तकलीफ नहीं देना चाहता था। कुछ देर बाद मैंने अपनी उंगली उसकी चूत से निकली और अपना मुंह उसकी चूत के मुंह पर टिका दिया और अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत पर ऊपर से नीचे की ओर फिराने लगा। मेरी जीभ के चूत पर पड़ते ही जिया तो जैसे बिना पानी के मछली की तरह तड़पने लगी और अपना सिर इधर उधर पटकने लगी, मेरे चेहरे को बालों से पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी, मैं भी मज़े से उसकी अनछुई चूत को चाट रहा था, फिर मैंने अपनी जीभ को नुकीला करके उसकी चूत के छेद के अंदर की ओर घुसेड़ दिया और मेरी जीभ के अंदर जाते ही जिया का बांध टूट गया और वो भरभराके झड़ने लगी उसकी चूत से काम रस बहने लगा जिसे मैं अमृत समझ के पीने लगा, बिना एक भी बूंद को ज़ाया किए मैं सारा रस पी गया जिया बिना जान के शरीर की तरह कुछ देर लेटी रही पर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर चलानी जारी रखी और कुछ देर बाद वो फिर से गरम हो गई, और आह भैया मार डाला कहके सिसकारियां भरने लगी।अब मुझसे भी सहा नहीं जा रहा था तो मैंने अपना मुंह हटाया और उसकी टांगों के बीच बैठ गया, मेरा लंड अब बस चूत मांग रहा था पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूं, मैं उसे चोदना भी चाहता था पर उस तकलीफ़ भी नहीं देना चाहता था, इतनी कम उम्र की कुंवारी लड़की को मैं पहली बार चोदने जा रहा था तो मन में एक अजीब सी घबराहट भी थी, ख़ैर मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और पकड़ कर उसकी चूत के ऊपर रख दिया, लंड के चूत पर छूते ही जिया की नज़रें मेरी नज़र से मिली वो आंखों ही आंखो में मुझसे सवाल करने लगी कि क्या सच में आज मैं उसकी कुंवारी चूत को चोदने वाला हूं और उसे एक लड़की से औरत बनाने वाला हूं, और घबराहट और डर भी था जिसकी वजह से उसका सिर ना मैं हिलने लगा कि मैं जो करने जा रहा हूं वो ना करूं, पर मैं जानता था कि अगर अभी नहीं तो कभी नहीं, मैं अपने लन्ड को उसकी चूत के ऊपर ही घिसने लगा





जिया मेरे लंड को अपने हाथ से सहलाने भी लगी साथ में मेरा लंड उसकी चूत पर भी घिस रहा था,

कुछ देर ऐसे ही घिसने के बाद मैंने आगे बढ़ने के बारे में सोचा और लंड को चूत के द्वार पर ला कर रोक दिया, जिया ने तुरन्त आने वाले दर्द के इंतजार में आंखें बंद करली, पर मैंने लंड पर जब थोड़ा जोर डाला तो बो अंदर नहीं जा रहा था, उसकी चूत का छेद बहुत छोटा था वहीं मेरे लंड का टोपा काफ़ी मोटा था, मैंने फिर भी दोबारा झटका मारा तो लंड ऊपर की तरफ फिसल गया ऐसे ही कई बार कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुआ मेरे चेहरे पर भी अब गुस्सा और बैचेनी थी वहीं जिया अब और ज़्यादा घबराई हुई लग रही थी, मैंने एक बार फिर से लंड को चूत के द्वार पर रखा और जैसे ही धक्का लगाने को हुए पीछे से एक आवाज़ आई और हम दोनों ही चौंक गए -रुको तुम दोनों अभी।

मैंने तुरंत पीछे मुड़ कर देखा तो एक पल के लिए में दर गया पीछे चारु मामी थीं और हाथ में एक कटोरी पकड़े हुए खड़ी थी, मुझे तो पता था कुछ परेशानी नहीं उनसे पर मुझे जिया का दर था कि ना जाने वो कैसे प्रतइक्रिया देगी।

और हुआ भी कुछ ऐसा ही वो अपनी मम्मी की आवाज़ सुनकर वो डर गई और साथ में चौंक भी गई कैसे समझा पाएगी वो अपनी मम्मी को कि वो कर्मा के साथ इस तरह नंगी होकर क्या कर रही है, लेकिन तब तक चारु मामी हमारे करीब आ गईं थीं और उनको देखते ही जिया ने अपने हा थों से अपने नंगे बदन को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी । और कुछ बोलने की भी कोशिश करने लगी तो चारु मामी ने उसे शहह करके चुप करा दिया और हमारे बगल में आकर बैठ गई और कटोरी नीचे रख दी तो मैंने देखा उसमें तेल था जिसे देखकर मुझे बड़ी हैरानी हुई कि एक मां अपनी कुंवारी बेटी को चुदवाने के लिए ख़ुद से तेल लेकर आई है इससे कामुक दृश्य क्या हो सकता है, मैं इन्हीं खयालों में खोया था कि मुझे मेरे लंड पर कुछ महसूस हुआ तो मैंने देखा कि चारु मामी मेरे लंड पर तेल लगा रही थी तो मैंने भी तेल की कटोरी में उंगलियों को डुबो के घुमाया और जब वो तेल में नहा गई तो हटाकर जिया की चूत पर लगा दी और उसकी चूत में तेल लगाकर उसे चिकना करने लगा और अपने लन्ड के लिए जगह बनाने लगा फिर मामी ने अपना हाथ मेरे लंड से हटाया और मेरे लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, पर मैं बहुत हैरान हो गया कि मामी ने अपनी बेटी के सामने ही ऐसे कैसे पर जैसा हाल मेरा था उसका तो मुझसे भी बुरा हाल था वो समझने की कोशिश कर रही थी कि आख़िर ये हो क्या रहा है, उसकी मम्मी उसके सामने लंड चूस रही है और जब तक हम इन सवालों का जवाब ढूंढ पाते कि तब मामी ने कुछ ऐसा किया जिससे हम दोनों ही बिल्कुल चौंक गए l, मामी ने मेरा लंड मुंह से निकला और अपना मुंह अपनी बेटी की चूत के ऊपर टिका दिया और उसकी चूत चाटने लगी, मैं तो उत्तेजना से पागल ही हो ने लगा था वहीं जिया का हाल तो मुझसे कहीं अधिक अजीब था उसकी मम्मी ही उसकी चूत चार रही थी ये सोच कर वो और गरम होती जा रही रही थी, जिस मा ने बचपन से आज तक उसे पाला आज वो उसके शरीर के सबसे छुपा हुए अंग को अपनी जीभ से चाट रही है

जिया- आह मम्मी क्या कर रही हो आह ऐसे ही चाटो अपनी बेटी की चूत.... और अच्छे से आह

बस इन्हीं खयालों के चलते वो एक बार फिर से झड़ने लगी पर इस बार वो किसी और के नहीं अपनी मम्मी के मुंह पर झड़ रही थी जैसे ही उसका झड़ना शान्त हुआ चारु मामी ने तुरन्त अपना मुंह हटा लिया और एक बार तेल लेकर हाथों में जिया की चूत पर लगाया

और उधर उसकी चूत को अच्छे से गीला करने के बाद उन्होंने मेरे लंड के टोपे पर थोड़ा तेल लगाया और फिर लंड को पकड़कर अपनी बेटी की चूत पर रखा, एक मां ख़ुद अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी बेटी की कुंवारी चूत पर रख रही थी और उसे चोदने के लिए बढ़ावा दे रही थी, चारु मामी ने मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया पर आगे बढ़ने से पहले मैंने उनको करीब खींचा और उनके होंठों को चूसने लगा जिया आंखों को बड़ा करके हमारी ओर देख रही थी और फिर होंठ अलग हुए तो मैंने टोपे को बिल्कुल छेद पर लगाकर अंदर की ओर धक्का दिया और ज़ोर लगाया तो टोपे का अगला हिस्सा बड़ी मुश्किल से अंदर जाने लगा मामी ने जिया की चूत की फांकों को उंगलियों से फैला दिया जिससे थोड़ी और जगह मिल गई,

जिया - मम्मी बहुत दर्द हो रहा है आह्व भैया मत करो मैं मर जाऊंगी,

चारु मामी- कुछ नहीं होगा मेरी बच्ची बस थोड़ा सा दर्द होगा और फिर बहुत सारा मज़ा और ये कहकर मामी आगे झुक गई और जिया के होंठों को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगी, जिया भी अपनी मम्मी का साथ से रही थी और खूब अच्छे से चूस रही थी अपनी मम्मी के होंठों को मैंने भी ये समय ठीक समझा और एक ज़ोर का धक्का लगाया जिससे मेरा लंड टोपे के साथ जिया की चूत में फंस गया, जिया इस झटके से तड़पने लगी उसका शरीर इधर उधर होने लगा मैंने उसकी कमर को दबाए रखा नहीं तो लंड वापस निकल जाता उसकी चीख चारु मामी यानी उसकी मम्मी के मुंह में घुट कर रह गई, मैं उसको शान्त करने के लिए उसकी चूचियों को सहलाने लगा वहीं चारु मामी भी किस के साथ साथ उसके बदन पर हाथ फेरने लगी उसकी चूची को मेरे साथ दबाने सहलाने लगी फिर थोड़ी देर बाद जिया शान्त हुई तो मामी ने उसके होंठों को छोड़ा और फिर खड़ी हो गई और अपने कपड़े उतारने लगी वहीं मेरा लंड एक दो इंच जिया की चूत में था और वो लम्बी लम्बी सासें ले रही थी,





उधर चारु मामी ने अपनी साडी और ब्लाउज उतार दिया था और अब अपनी ब्रा उतार रही थी ब्रा के उतरते ही वो ऊपर से बिल्कुल नंगी हो गई वहीं मैं ओर जिया उनकी तरफ ही देख रहे थे तो वो थोड़ा शरमा गई और फिर उन्होंने अपना पेटीकोट भी नाड़ा खोलकर नीचे सरका दिया और अब वो पूरी तरह से नंगी हो गई, जिया भी आंखें फाड़ कर अपनी मा के नंगे बदन को घूर रही थी, इधर मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने हल्का सा धक्का लगा दिया जिससे लंड थोड़ा और अंदर सरका और किसी चीज़ से का कर टकरा गया मैं समझ गया कि ये उसकी चूत की झिल्ली है एक कुंवारी लड़की के कोमार्य का सबूत और शायद लड़की के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़, जिया का ध्यान वापिस मेरे लंड और अपनी चूत पर आ गया, उधर मामी पूरी नंगी होकर वापिस नीचे बैठ गईं और जिया के सिर को अपनी गोद में रख लिया और मुझे इशारा किया कि आगे बढूं, वो अपने हाथों से जिया की चुचियों को सहला रही थी तो मैंने भी देर ना करते हुए कमर का एक तेज़ झटका लगाया और मेरा लंड उसकी चूत कि झिल्ली को चीरता हुआ अंदर चला गया मामी ने अपने हाथ से उसके मुंह को ढक लिया ताकि उसकी चीख ज़्यादा तेज़ ना निकले और हुआ भी ऐसा ही जिया काफ़ी तेज़ चीखी पर हाथ की वजह से उसकी चीख यहीं दब कर रह गई। अगले कुछ मिनट तक सब कुछ शान्त और स्थिर रहा किसी ने कुछ नहीं किया बस जिया की सांसों की आवाज़ आ रही थी, फिर चारु मामी ने अपना सिर झुकाया और जिया की चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी और दूसरी चूची को हाथ से सहलाने लगी, मैंने भी उसकी कमर पर हाथ फेरना चालू कर दिया, मामी के झुके होने से उनकी बड़ी बड़ी चूचियां जिया के चेहरे पर थीं जिन्हें जिया ने अपना मुंह खोल कर अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी, जब जिया का ध्यान थोड़ा बंट गया तो इसका फायदा उठाते हुए मैंने एक झटका और मारा और पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी चूत इतनी टाईट थी कि मुझे लग रहा था मानो मेरा लंड भी कई जगह से छिल गया है, मेरे झटके की वजह से जिया का शरीर अकड़ा ज़रूर पर मामी की चूची उसके मुंह में होने की वजह से कोई चीख नहीं निकली, और कुछ देर बाद जिया ठीक हुई तो मैंने अपनी कमर हिलाना शुरू किया और लंड को उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा, इतनी टाईट चूत मैंने इससे पहले नहीं चोदी थी और मुझे दर्द के साथ साथ मज़ा भी आ रहा था, लंड पूरा घिस के अंदर बाहर हो रहा था मैं हल्के धक्कों से जिया को चोदने लगा चारु मामी अपनी चूची को बेटी से चुसाते हुए अपना हाथ नीचे लाकर उसकी चूत को उपर से सहलाने लगी वहीं मैं हल्के धक्कों से उसकी चुदाई कर रहा था उसकी मा के सामने।





चारु मामी - हां कर्मा चोद मेरी बेटी को आज तूने इसे लड़की से औरत बना दिया, जैसे तूने मुझे अपने इस मूसल से चोद चोद कर खुश किया है अब मेरी बेटी को भी करदे,

मैं- क्या टाइट चूत है मामी तुम्हारी बेटी की ऐसी चूत तो आजतक नहीं चोदी आह, बहुत मज़ा आ रहा है,

चारु मामी - हां बेटे चोद इसे, मैंने अपनी बेटी को सारे सुख दिए हैं, अब तक बस लंड का सुख रह गया था वो भी तुझसे दिलवा दिया, तू बता वेटी कैसा लग रहा है,

जिया ने अपना मुंह मामी की चूची से हटाया

जिया - हां मम्मी बहुत मज़ा आ रहा है ऐसा मज़ा कभी नहीं आया अगर मुझे पता होता इतना मज़ा आता है तो कब का चुदवा लेती, आह भैया बहुत बड़ा है और फिर अपनी मम्मी के हथों के सहलाने और मेरे द्वारा पहली चुदाई के प्रहार से जिया झड़ने लगी, तो मामी ने एक बार फिर से उसके होंठो को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगी, मा बेटी का ऐसा प्यार देखना सच में बहुत ही कामुक दृश्य था, मामी ने उसके होंठों को छोड़ा तो मेरे होंठों को चूसने लगी, मैं भी धक्के लगाते हुए उनके मुंह में जीभ डालकर चूसने लगा, फिर अपना मुंह हटाकर मामी ने मुझसे कहा चलो बेड पर चलते हैं तो मैंने जिया की चूत से लंड निकाला तो चूत में से रस और खून बहकर बाहर आने लगा वहीं थोड़ा मेरे लंड पर भी लगा हुआ था जिसे मामी ने एक कपड़े से साफ किया और जिया की चूत को भी मैं दोबारा जिया की टांगो के बीच आया तो जिया बोली भैया मुझे मम्मी को आपसे चुदाते हुए देखना है तो मामी और मैं थोड़ा मुस्कुराए फिर मामी ने मुझे नीचे लेटने को बोला और मैं लेट गया वहीं मामी मेरे ऊपर आकर अपनी दोनों टांगो को फैलाकर मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर लगाया और नीचे बैठ गई और मेरा लंड उनकी चूत में समा गया,और मामी मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी, उनकी चूत में मेरे लंड का दर्द थोड़ा कम हो गया था जो जिया की चूत मारने से हो रहा था, मैं मामी की कमर पकड़ कर उन्हें अपने लंड पर उछालने लगा, जिया अपनी चूत सहलाते हुए हम दोनों को देख रही थी तो मैंने उसे अपने पास बुलाया और मेरे मुंह पर बैठ जाने को कहा, उसके एक मिनट सोचा फिर अपनी मम्मी की ओर मुंह करके मेरे मुंह पर अपनी चूत रखकर बैठ गई, मैं अपनी जीभ निकालकर उसकी ताज़ा ताज़ा खुली चूत को चाटने लगा।





मैं दोनों मां बेटी को एक साथ मज़ा से रहा था दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते हुए चुदाई का मज़ा ले रही थी जिया की चूत को मैं जीभ से चोद रहा था और मामी की चूत में मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था, जिया ने थोड़ा आगे बढ़कर फिर से अपनी मम्मी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया साथ में ही उनकी बड़ी बड़ी चूचयों को भी दबाने लगी, मामी अपनी बेटी से कहां पीछे रहने वाली थी वो भी जिया की छोटी छोटी चूची को मसलने लगी, फिर होंठो से होंठों को हटाकर जिया मामी की चूची चूसने लगी दोनों चुचियों को लगातार बदल बदल कर चूस रही थी जिससे मामी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वो और तेज़ तेज़ मेरे लन्ड पर उछलने लगी वहीं जिया का भी मेरी जीभ से बुरा हाल था वो भी मेरे मुंह पर अपनी चूत को आगे पीछे करके घिस रही थी और फिर वो मेरे मुंह में झड़ने लगी उसकी चूत से रस बहकर बाहर आने लगा और वो अपनी मम्मी को पकड़ कर झड़ने लगी और फिर झंडने के बाद मेरे मुंह से हटकर साइड में लेट गई। वहीं मामी का भी लग था था की वो भी अब झड़ने वाली है और वैसा ही हुए कुछ पल बाद मामी भी झडने लगी और उनकी चूत मेरे लंड पर बहुत टाइट हुई और ऐसा लगा वो मेरे लंड को चूत से निचोड़ रही हैं जो मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हुआ और में भी अपने शिखर पर पहुंच गया तो मैंने गुर्राते हुए बोला आह मामी मैं भी झड़ने वाला हूं तो तुरन्त जिया बोल पड़ी भैया मुझे भी देखना है आपको झड़ते हुए तो मामी तुरन्त मेरे ऊपर से हट गई और मैं जिया को लिटाकर उसके पेट के दोनों तरफ पैर करके उसके उपर आ गया और अपने लंड को हिलाने लगा और कुछ पल बाद ही मेरे लन्ड ने पिचकारी मारी हो सीधे उसके मुंह पर जा कर गिरी तो उसने अपनी जीभ निकाल कर उसे चाट लिया होंठ के पास से फिर दूसरी भी वहीं उसके बाद कभी चुचियों पर तो कभी गर्दन पर ऐसे ही मैं काफी देर तक उसके जवान बदन को अपने रस से नहलाता रहा और उसके बाद उसके उपर से हटकर साइड में लेट गया तो मामी जिया के ऊपर गई और उसके चेहरे से मेरा रस चाठ्ने लगी और फिर चाटने के बाद जिया के मुंह से मुंह लगाकर उसकी उसके स्वाद का अहसास कराने लगी ऐसे ही मामी ने अपनी बेटी के पूरे बदन को चाट चाट कर साफ कर दिया और सारा रस दोनों ने बांट बांट कर पी लिया।

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में, इसमें पहली बार मैं ने कुछ नया करने की कोशिश की आप लोग ज़रूर बताएं कैसा लगा। आपके कॉमेंट्स का इंतज़ार रहेगा, शुक्रिया।
 
सो गाइस don't वोर्री आईटी वास् जस्ट ान एक्सपेरिमेंट, ी विल कंटिन्यू तो पोस्ट इन हिंगलिश अस it's मच ीसिएर फॉर में तू.. एंड अस फार थे स्टोरी इस कंसर्नड सम आईटी है तो जो लिखे तहत ोथेरविसे थे प्लाट विल बे रुइनेड सो जस्ट गिव में एंड थे स्टोरी ा बिट टाइम, आईटी विल मूव अहेड, एंड ी विल तरय तो मेक आईटी अस गुड अस पॉसिबल.... अस यू आल क्नोव थिस इस माय फर्स्ट स्टोरी सो सोमेतिमेस ी गेट स्टक बूत we're मूविंग फॉरवर्ड आल बिकॉज़ ऑफ़ योर लव एंड सपोर्ट टुवर्ड्स थे story....so थैंक्यू सो मच गाइस..
 
थैंक्यू सो मच गाइस फॉर योर कंसर्न एंड wishes...I ऍम किते वेल now...all बिकॉज़ ऑफ़ योर बेस्ट wishes...will स्टार्ट writing...and सून Update...thankyou फॉर बीइंग सो काइंड एंड पेशेंट...
 
उसके बाद उसके उपर से हटकर साइड में लेट गया तो मामी जिया के ऊपर गई और उसके चेहरे से मेरा रस चाठ्ने लगी और फिर चाटने के बाद जिया के मुंह से मुंह लगाकर उसकी उसके स्वाद का अहसास कराने लगी ऐसे ही मामी ने अपनी बेटी के पूरे बदन को चाट चाट कर साफ कर दिया और सारा रस दोनों ने बांट बांट कर पी लिया।

अपडेट 52
थोड़ी देर लेटने के बाद ममी उठी और अपनी बेटी के होंठों को चूमा और फिर मेरे होंठों को भी कुछ पल चूमा और उठकर कड़ी हो गयी और अपने कपडे पहनने लगी और मुझे और गया को बोली की चलो तुम लोग भी उठ जाओ काफी टाइम हो गया hai….Gia चल बीटा तू गरम पानी से नहले थोड़ा दर्द काम हो जायेगा और तुझे ाचा भी लगेगा, या फिर रुक तुझे मैं आज खुद से नहलाती हूँ

गया- ठीक है मम्मी, मुझे भी मज़ा आएगा,

चारु ममी- कर्मा चल तू भी उठ जा अब कब तक लेता रहेगा,

ममी ने ये कहते हुए अपने कपडे बापिस उतर दिए और गया को भी सहारा देकर उठाने लगी..

में- बस उठ रहा हूँ ममी बस माँ बेटी का प्यार देख रहा हूँ…

चारु ममी- हाँ तो मैं अपनी बेटी से बहुत प्यार करती हूँ और जो बी थोड़ा बहुत पर्दा था हम दोनों के बीच वो भी हैट गया है…

गया- हाँ मुम्ममय मैं भी बहुत प्यार करती हूँ aapse…aur मैं बहुत खुश हूँ की ये सब हुआ और मेरा पहला सेक्स मतलब चुदाई आपके सामने hui…wo भी कर्मा भैया के साथ इससे ाचा तो कुछ हो hi नहीं सकता..

में- अभी तो बहुत कुछ तुझे और पता लग्न है तब बताना इससे ाचा हो सकता है की नहीं..

गया- और क्या बात है भैया..

चारु ममी- तू नहाने चल मैं सब बताती हूँ तुझे….

गया- ोहक मम्मी..

और इतना कहके गया उठने लगी पर उठने से पहले मेरे होंठों को एक बार चूमा और फिर वो दोनों लोग बाथरूम में घुस गए और मैं कुछ देर लेटने के बाद उठा और अपने कपडे पहने और नीचे आ गया.

नीचे सब लोग अपने कामो में लगे हुए the…badi बुआ पूर्वी दीदी के बच्चे को लेकर खत पर बैठी थी.. पूर्वी दीदी वहीं बैठके राशन भर रही थी डब्बो में… बुआ कपडे धो रही थी विनीत वहीं खत पर बैठा हुआ था और रिमझिम रसोई में thi…main भी बड़ी बुआ के पास जाकर बैठ गया और बच्चे के साथ खेलने लगा… पर फिर मेरे पेट में भूख की वजह से थोड़ी हलचल हुई तो मैंने बुआ को बोलै तो बुआ ने बोलै जा रसोई में रिमझिम है वो दे degi…main उठ कर रसोई में गया तो देखा रिमझिम दीदी खाना hi बना रही थी, साड़ी में वो हमेशा की तरह बहुत प्यारी hi लग रही थी… मैं उनके पीछे गया और पीछे से hi उनसे चिपक गया और उन्हें अपनी बाहों में भर lia…pahle तो वो थोड़ा चौंक गयी और फिर सर घुमाकर मुझे dekha…to फिर अपना सर आगे कर लिए.

में- दीदी बहुत भूख लगी है…

और ये ककहकार मैंने अपना हाथ उनके पल्लू के अंदर उनके नंगे चिकने पेट पर रख दिया और सहलाने लगा.

रिम- जा तू बहार बैठ मैं लेकर देती हूँ वहीं..

में- क्या बात है लगता है कोई नाराज़ है मुझसे..

रिमझिम ने कोई जवाब नहीं दिया और मेरा हाथ अपने पेट से हटा दिया..

में- दीदी क्या हुआ तुम सच में गुस्सा हो क्या मुझसे..

रिम- मुझे कुछ बात नहीं करनी तुझसे और न hi मैं तुझसे गुस्सा हूँ…

मैं अपना हाथ बापिस दीदी के पेट पर रख देता हूँ तो वो फिर से पकड़ कर हटाने लगती है. पर मैं नहीं हटाता और अपनी उंगली से उनकी नाभि को छेड़ने लगता हूँ…

रिम- कर्मा छोड़ मुझे काम करने दे…

Me-pahle तुम बताओ की गुस्सा क्यों हो नहीं तो मैं नहीं छोडूंगा..

रिम- नहीं हूँ मैं कोई गुस्सा वुस्सा

मैं पीछे से कसकर उनसे चिपक जाता हूँ और मेरा लुंड उनकी गांड का स्पर्श पाकर खड़ा होने लगता है, उधर मेरे हाथ उनके पेट पर चलने लगते हैं.

Me-batadoo नहीं तो मैं नहीं छोडूंगा मेरी प्यारी दीदी को..

रिम- प्यारी didi..kaisi प्यारी didi..tujhe तो कोई मतलब hi नहीं है मुझसे..

में- ऐसा क्यों बोल रही हो दीदी.. और ऐसा क्यों लगता है तुम्हे?

Rim-kyun नहीं लग्न चाहिए? मुझे नहीं पता की घर में क्या हो रहा hai…poori रात क्या हुआ था पर किसी को मेरा ख्याल आया.. बाकि सब की तो मैं बात hi नहीं करती क्यूंकि मेरी किसी से कोई ऐसी बात hi नहीं हुई कभी पर तू तो सब कर चूका है मेरे साथ., तुझे ख्याल आया मेरा, बाकि कुछ नहीं तो सक बार काम से काम सब बताना भी ज़रूरी समझा तूने या किसी ने भी मुझे..

में- दीदी तुम भी न अब मेरी बात तो सुनो.

रिम- मैं सब समझ गयी हूँ न बताते तो मत बताओ वैसे भी 2-4 दिन और हूँ इस घर में उसके बाद वैसे भी जाना है करो जो जिसको करना है वो.. मुझे भी कोई मतलब नहीं है..

में- ऐसे कैसे मतलब नहीं है, और दीदी ये किसने बोलै तुमसे की मैं तुम्हे कुछ नहीं बताने वाला था, पर बताने का टाइम तो दो कल से पहले की तो साडी बातें तुम्हे पता hi हैं और रात के बाद से लेट सो कर उठा कब बताता, और रही बात बाकी सब की तो कैसे क्या बोलता मैं सब को की रिमझिम दीदी सब जानती है और मैं उन्हें छोड़ भी चूका हूँ और दो दिन बाद इनकी शादी hai...ye सब इतना आसान है kya…par फिर भी मैंने कोशिश की..

मेरे हाथ जो उनके पेट पर घूम रहे थे वो अपनी बात करते हुए एक जगह रुक गए थे और मैंने उनके पेट को दबा रखा था वहीं उनके हाथ अब भी काम में बिजी थे.. मेरा लुंड गुस्सा और उनकी बात की वजह से बापिस थोड़ा शांत हो गया था..

रिम- ाचा क्या कोशिस की है तूने, बता ज़रा..

में- बताऊंगा तो तुम मानोगी नहीं..

Rim-tera काम है बताना बाकि सब की टेंशन मत ले tu..main मानु या न मानु वो मेरी मर्ज़ी है..

में- तो सुनो मैंने हम दोनों के बारे में बड़े फूपाजी को बता दिया है..

Rim-kya सच में?

वो ये सुनकर थोड़ा चौंक गयी और कुछ सोचने लगी.

रिम- तो तो क्या बोलै पापा ने..

में- कुछ नहीं बोलै बस मैंने बता दिया है..

इतना सुनकर उनके चेहरे पर थोड़े और गंभीर भाव आ गए, और वहीं परिस्थिति को समझते हुए मैं भी उनसे दूर हटकर खड़ा हो gaya…kaafi देर तक हम में से कोई कुछ नहीं बोलै उसके बाद वो बोली- ले खाना खा ले..

और दीदी ने मुझे खाने की थाली पकड़ा दी जिसे लेकर मैं बिना कुछ बोले आंगन में आ गया और वहां बैठ कर खाना खाने लगा… थोड़ी देर में रिमझिम दीदी एक थाली में खाना और लाइ और विनीत को दे दिया और बाकि सब से भी बोल दिया खाने ko…main चुपचाप बैठा खाना खा रहा था की तभी बहार से फूपाजी और बड़े फूपाजी भी आ गए उनको भी खाना दिया गया,

सब लोग शादी की तैयारी की बातें कर रहे थे सब ने खाना खाया फिर मुझे और विनीत को मेहमानो के लिए बिस्तर वगेरा का इंतज़ाम करने के लिए कहा गया तो हम दोनों खाना खा कर शहर चले गए बापिस आये तब तक रात हो चुकी thi..khane का वक़्त हो चूका था… घर पहुंचकर हमने खाना पीना khaya…baki सब बिलकुल नार्मल थे, गया आज सबसे पहले से ज़्यादा बातें कर रही थी और काफी खुश भी थी, और मेरी तरफ काफी शर्मा कर देखती थी बीच बीच mein…wohin रिमझिम दीदी अब भी पहले की तरह चुप चुप सी थी.. खैर सबका खाना हुआ और फिर गाओं की कुछ ोारतें आ फाई और उनका गण बजाना चालू हो गया घर की सब औरतें भी उनके पास बैठी थी, मैं बुआ के कमरे में जाकर लेट गया और लेते लेते कब मेरी आँख लग गयी मुझे भी पता नहीं चला…

सोते हुए मुझे अपने सर पर किसी का हाथ महसूस hua…wo हाथ बार बार मेरे सर को हिला रहा था और बालों में हाथ फेर रहा था… मैंने आँखें खोल कर देखा तो धुंधला सा चेहरा दिख रहा था कुछ पल बाद सब कुछ साफ़ हुआ तो पूर्वी दीदी का खूबसूरत चेहरा दिखा और अब उनकी आवाज़ भी सुनाई देने लगी..

पूर्वी- कर्मा उठ बीटा, दूध पि ले..

में- हाँ दीदी दूध तो पीना है, तभी तो ताकत आएगी..

पूर्वी दीदी ने दूध का गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया..

में- दीदी इस दूध से नहीं उस दूध से ताकत अति है मुझमे और ये कहकर मैंने अपना हाथ उनके ब्लाउज के ऊपर से hi दीदी की छुच्छी पर रख दिया,

पूर्वी- शैतान कहीं ka..mere राजा वो दूध भी पिलाऊंगी पहले ये ख़त्म कर और ताऊजी के कमरे में चल उन्होंने सब को वहीं बुलाया है.

में- फिर तो चलना hi पड़ेगा जल्दी se…wahan जाकर तुम्हारी माँ भी तो छोड़नी है,

पूर्वी- बेशरम मुझे गाली देता है..

में- अरे दीदी गाली कहाँ दी मैंने तो सच बोलै है वहां बुआ नहीं होंगी क्या..

पूर्वी- ाचा तो बीटा माँ से पहले बेटी भी छोड़नी padegi..aur अब तू बातें काम कर और दूध ख़त्म kar….Mere से भी इंतज़ार नहीं हो रहा..

और ये कहके दीदी ने मेरे लुंड को पाजामे के ऊपर से hi मसल दिया… मैंने भी जल्दी से दूध ख़त्म किआ और फिर मैं और दीदी बड़े फूपाजी के कमरे की तरफ बढ़ गए, वहां का नज़ारा पहले से hi काफी गरम गरम हो चूका था, पहले से मौजूद लोग अधिकतर पूरे या आधे नंगे थे, कमरे के एक तरफ देखकर मैं थोड़ा हैरान हुआ क्यूंकि गया सिर्फ एक पंतय पहने हुए फूपाजी की गॉड में बैठी हुई थी और फूपाजी उसके छोटे छोटे छूछीयो से खेल रहे मैंने सोचा नहीं था की गया इतनी जल्दी और ख़ुशी ख़ुशी इस सब में शामिल हो जाएगी पर जो हो रहा था सब ाचा hi था… वहीं बीएड पर बड़ी बुआ सिरहाने से टिक कर पूरी नंगी बैठी थी औरउनकी टाँगे खुली हुई थी जिनके बीच उनकी देवरानी यानि बुआ का सर था जो अपनी जेठानी को अपनी जीभ का आनंद दे रही थी पर बुआ अभी भी अपने पूरे कपड़ो में thi…unke बगल में चारु ममी लेती हुई थी और उनके ऊपर झुक कर विनीत उनकी छूछीयो को चूस रहा था तो वहीं चारु ममी उसके लुंड को हाथ में लेकर सहला रही thi…dono के बदन पर कोई कपडा नहीं था.. बड़े फूपाजी कहीं नहीं दिखे तो मैंने पूछ लिए तो बड़ी बुआ बोली बस आते hi होंगे बोलकर गए हैं की 5 मिनट में आ रहा हूँ, तू क्या कपडे पहने खड़ा है चल कपडे उतर कर आ जा मेरे पास और अपना हथियार दे मुझे चूसने को, मैंने भी देरी न करते हुए अपने सरे कपडे उतर फेंके, और बगल में देखा तो पूर्वी दीदी भी अपनी साड़ी उतर रही थी तो मैंने उनका ब्लाउज खोल दिए और फिर ब्रा भी तब तक वो सारी और पेटीकोट उतर चुकी थी और मेरी तरह पूरी नंगी हो गयी थी.. मैं बीएड के किनारे जाकर खड़ा हो गया और बड़ी बुआ के चेहरे की तरफ अपना लुंड कर दिए जो अब तक पूरी तरह खड़ा हो चूका था और पूर्वी दीदी छूछीयो को चूसने लगा साथ में उनके गद्देदार चूतड़ों को मसलने laga…poore कमरे का माहौल गर्माने लगा था, गया के बदन से पंतय भी उतर चुकी थी और अब फूपाजी उसकी टैंगो के बीच बैठकर उसकी चिकनी और जवान छूट को चाट रहे थे जिसे गया का मज़े से बुरा हाल था,





गया- मुम्ममय आअह्ह्ह्हह फूऊऊप्प्प्पप्पाआज्जज्जीीी मज़्ज़ज़्ज़ज़ाअ आए राहाआआ hai….bahuttttttttt ऐसे हीईई…

फूपाजी लगा तर उसकी छूट में अपनी जीभ अंदर बहार कर रहे थे, वहीं बीएड पर चारु ममी और विनीत अब 69 पोजीशन में थे और एक दुसरे को मौखिक सुख दे रहे थे विनीत नीचे लेता था वहीं चारु ममी उसके ऊपर thi…aur उसके लुंड को अंदर तक लेकर चूस रही thi…wohin बड़ी बुआ ने मेरे लुंड को लपक कर मुँह में भर लिए और पूरी शिद्दत से चूस रही थी बुआ अब भी उनकी छूट की गहराइयों को अपनी जीभ से नापने की कोशिश कर रही thi….aur पूर्वी दीदी मेरे बालों में हाथ फेरते हुए मेरे होंठों को चूस रही थी तो कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में आए जाती जिसे मैं बड़े चाव से चूस रहा tha…tabhi कमरे के गेट पर एक साया नज़र आया और जब सबकी नज़र उधर गयी तो सब चौंक गए… और मैं bhi…jo भी जो कर रहा था वहीं रुक गया और गेट की तरफ टकटकी लगाकर देखने लगे….

तो दोस्तों कौन है गेट पर जिसे देखकर सब इतना चौंक गए ये जानिये अगली अपडेट में…. प्लीज कमैंट्स करके अपने सुझाव देते रहे बहुत बहुत शुक्रिया…
 
तभी कमरे के गेट पर एक साया नज़र आया और जब सबकी नज़र उधर गयी तो सब चौंक गए… और मैं bhi…jo भी जो कर रहा था वहीं रुक गया और गेट की तरफ टकटकी लगाकर देखने लगे….

अपडेट 53
सबके चेहरों पर आश्चर्य के भाव थे क्यूंकि दरवाज़े पर जो था उसकी शायद किसी ने उम्मीद नही की थी वो भी ऐसे अचानक क्यूंकि दरवाज़े पर रिमझिम दीदी कड़ी थी सब लोग अपने नंगे बदन पर कपडा डालकर उसको ढंकने की कोशिश करने लगे साथ hi लगातार गेट की तरफ भी देख रहे the...kaafi देर तक वो ऐसे hi कड़ी रही और हम सब लोग उन्हें ऐसे hi देखते रहे और फिर वो कदम बढाकर अंदर आई और उनके पीछे बड़े फूपाजी भी थे... किसी के कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या बोलेन बस सब एक दुसरे को देख रहे the...tabhi बड़ी बुआ ने कुछ बोलने की कोशिश की

बी बुआ- रिम्मी beta..tu yahan...wo ये सब

बी फूपाजी- सावित्री....

ये सुनकर बड़ी बुआ चुप हो गयी अब सबकी नज़र बड़े बड़े फूपाजी और रिमझिम दीदी पर thi...bade फूपाजी आकर बीएड पर बैठ गए और फिर रिमझिम दीदी की और फिर सब की और देखते हुए बोले...

बड़े फूपाजी- मैं जानता हूँ की तुम सब लोगो के मन में कई सवाल होंगे और मैं जो बताने जा रहा हूँ उससे शायद उनका जवाब भी मिल जाये...

सब बड़े फूपाजी की तरफ उम्मीद से देखने लगे वहीं रिमझिम दीदी बस नीचे की तरफ देख रही थी

बड़े फूपाजी- बात है रिमझिम के यहाँ होने की तो कल रात को जब मेरा पूरा परिवार यहाँ था और हम सब आपस में मिलकर मज़े कर रहे थे तो सिर्फ रिमझिम यहाँ नहीं थी जिसका मुझे बार बार ख्याल भी आ रहा था, वैसे भी वो 4 दिन बाद इस घर से बीड़ा हो जाएगी तो इस समय पर उसको अलग थलग करना बहुत गलत लगा मुझे और परिवार का सदस्य होने के नाते उसका पूरा हक़ है सब पता होने का... फिर भी मुझे दर था की जब रिमझिम को ये सब पता चलेगा तो न जाने वो क्या सोचेगी हमारे बारे mein...hum जो भी कर रहे हैं वो कितना भी हमें ाचा लगता ho...samaaj के लिए तो ये पाप hi है...

फिर आज दिन में कर्मा ने मुझे उसके और रिमझिम के बारे में बताया की... रिमझिम अब कुंवारी नहीं है और कर्मा के साथ सब कुछ कर चुकी है.....

पहले तो मुझे बहुत अजीब भी लगा इन दोनों पर गुस्सा भी आया फिर शांत मन से सोचा तो इन दोनों की कोई गलती नहीं लगी जब मैं इस उम्र में खुद को काबू नहीं कर पाटा तो ये तो अभी जवान बच्चे हैं, तो फिर मैंने फैसला किआ की रिमझिम को सब बताऊंगा और मैं ये भी चाहता था की रिमझिम का जो बी फैसला हो वो सब के सामने सुनाये तो इसीलिए आप सब यहाँ हो...

फिर बड़े फूपाजी ने रिमझिम दीदी की और देखा और बड़े प्यार से बोले - रिम्मी बीटा अब तुझे सब पता चल गया है शुरुआत कैसे हुई क्या हुआ वो सब मैं पहले hi तुझे बता चूका हूँ, अब हम सब को बता की तेरा क्या फैसला है??

सब लोग रिमझिम दीदी की और देख रहे थे काफी देर तक वो कुछ नहीं boli...to फूपाजी बोले- बीटा बिना किसी झिझक के या दबाब के जवाब दे जो भी तेरा फैसला होगा वो हमें ख़ुशी ख़ुशी मंज़ूर होगा...

रिमझिम दीदी ने सब की तरफ एक बार नज़र उठा कर देखा फिर एक सांस लेते हुए बोली...

रिम- वो मैं जानती हूँ की आप सब मुझसे प्यार करते हो और जो भी मैं कहूँगी आप लोग मान loge...aur इस बात की मुझे बहुत ख़ुशी भी hai...mujhe ऐसा परिवार मिला इस बात की भी मुझे बहुत ख़ुशी है साथ में दुःख भी है की मुझे जाना पद रहा है आप लोगो को छोड़कर किसी नए घर mein...rahi बात मेरे फैसले की तो जिस में आप लोग खुश हो मैं भी खुश हूँ और आप लोग सब कुछ जारी रख सकते ho...main शामिल होने के लिए अभी तो तैयार नहीं हूँ पर हाँ मैं अगर आप लोगो को अजीब न लगे तो यहाँ रुक कर देखना chahungi...aur अगर मन हुआ तो शामिल भी होउंगी...

बड़े फूपाजी- बहुत बढ़िया मेरी बच्ची तू जैसा चाहेगी वैसा hi hoga...kyun किसी को कोई परेशानी है क्या इस फैसले से?

सब ने न कर दिया और सरे लोग खुश लग रहे थे इस फैसले से...

बड़ी बुआ- मेरी प्यारी bitiya...main बहुत खुश हूँ तेरे लिए..

बुआ- हाँ रिम्मी बीटा एक दुःख सा रहता था की तुझसे सब छुपा है अब वो भी ख़तम हो गया...

फूपाजी- हाँ अब सरे बच्चे साथ हैं इससे अछि क्या बात हो सकती है...

चारु ममी- मैं तो दर hi गयी थी रिम्मी को देखकर...

विनीत और गया भी खुश थे...

पूर्वी- सबसे ज़्यादा बुरा मेरे लिए hi था अब तक बचपन से इससे कोई बात नहीं छुपाई अब छुपानी पद रही थी तो बहुत बुरा लग रहा था पर अब ऐसा नहीं होगा...

और ये कहकर पूर्वी दीदी ने रिमझिम को बाहों में भर लिए.. रिमझिम दीदी ने भी अपने हाथो को पूर्वी दीदी की पीठ पर कास लिए और उन्हें टाइट से गले लगाया...

में- बहुत सही किआ दीदी अब तो सबके सामने आपकी साड़ी उतर पाउँगा...

रिम- तू चुप कर badmash...aur आप सब लोग जो कर रहे थे वो करिये न मुझे भी देखना है...

और ये बोल कर रिमझिम दीदी एक साइड में जाकर बैठ गयी...

बाकि सब लोग खुश तो थे पर थोड़ा शर्मा रहे थे रिमझिम दीदी की वजह से पर फिर विनीत उठा और अपनी मुम्ममय यानि बुआ के पास आया जो बीएड पर सिरहाने से तिकी हुई थी और अपनी मुम्ममय का ब्लाउज खोलने लगा उनके होंठो को चूमते हुए क्यूंकि बुआ ने अभी तक अपने कपडे नहीं उतरे थे...

विनीत को देखकर बाकि लोग भी हरकत करने लग गए...

बड़े फूपाजी- पूर्वी बीटा यहाँ आ ज़रा अपने ताऊजी को भी अपना दूध पीला...

पूर्वी दीदी भी ख़ुशी से उठी और बड़े फूपाजी जो बीएड पर पेअर लटका कर बैठे थे उनकी जाह्गो पर बैठ गयी और और बड़े प्यार से उनका मुँह पकड़ कर अपनी एक छुच्छी पर लगा दिया जिसे बड़े फूपाजी बड़े चाव से चूसने लगे वहीं उनका एक हाथ पूर्वी दीदी की दूसरी चूची को मसल रहा था और दूसरा उनकी कमर के पीछे था और दीदी के गद्देदार चूतड़ों को मसल रहा tha....didi के हाथ भी अपने ताऊजी के लुंड को सहलाने में व्यस्त थे...

दूसरी तरफ गया कुछ नया करने की कोशिश करते हुए फूपाजी के लुंड को चाट रही थी... उसके लिए ये सब कुछ एक नया अनुभव tha...to वो जल्द से जल्द हर चीज़ का आनंद लेना चाहती थी... फूपाजी बड़े प्यार से उसके सर को सहलाते हुए उसे साथ में सिखाते हुए की क्या करना है क्या नहीं और उसके मुँह का आनंद ले रहे थे अपने लुंड पर...

वहीं गया की मम्मी उठ कर मेरे पास आ गयी थी और मेरा लुंड मुँह में भर लिए और चूसने lagi.....idhar बड़ी बुआ ने भी अपने ऊपर से साड़ी हटाई और चारु ममी के साथ बैठकर मेरा लुंड चाटने लगी दोनों साथ मिलकर मेरा लुंड चूस रही थी फिर दोनों ने मेरे लुंड को अपने होंठों के बीच फंसा लिए और मैं अपनी कमर आगे पीछे करके उनके होंठो को छोड़ने लगा





मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था ऐसा लग रहा था जैसे मैं चुदाई कर रहा हूँ... रिमझिम दीदी अपनी माँ और ममी को मेरे लुंड से खेलते हुए देख कर थोड़ी गरम हो रही थी और बार बार अपनी जीभ से होंठों पर चाट रही थी... साथ hi उनके हाथ भी साड़ी को नोच रहे थे...

बीएड के दूसरी और अब पूर्वी दीदी बड़े फूपाजी का लुंड चूसने में लगी हुई thi..bade फूपाजी आँखें बंद करके मज़ा ले रहे the....wohin बीएड के सिरहाने की और विनीत ने बुआ को पूरा नंगा कर दिया था और अब उन्हें घोड़ी बनाकर उनके बड़े चूतड़ों को चाट रहा था साथ hi बुआ की छूट में उंगली कर रहा था...... रिमझिम दीदी की नज़र जब विनीत और बुआ पर गयी तो वो और उत्तेजित होने lagi..maa बेटे के बीच ऐसा प्यार किसी को भी उत्तेजित कर सकता है और ये तो उसकी अपनी चची और भाई थे...

Bua-aaahhh विनीत हैं आराम से चाट मम्मी की गांड आअह्ह्ह्हह्हू

Vineet-mmmmmmmmmmm ह्म्म्मम्म्म्म

बड़े फूपाजी- हाँ पूर्वी बिटिया क्या लुंड चूसती है तू... आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आराम से तेरा पति बहुत खुशनसीब hai...ahhhhjh

पूर्वी- ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh ुग्ग्ग्घहजहहहहह

फूपाजी पूर्वी दीदी के गले तक लुंड डालने लगे





जिसे पूर्वी दीदी पूरे चाव से चूस रही थी..

अपने पापा के लुंड को अपनी चचेरी बहन के मुँह में आता जाता देख रिमझिम दीदी का हाल और बुरा हो रहा tha...ab उनके दोनों हाथ साड़ी के ऊपर से hi उनकी जाह्गो को सहला रहे थे...

तभी एक चीख की वजह से सबका ध्यान कमरे में दूसरी तरफ राखी हुई खाट पर गया जहाँ... गया लेती हुई थी और फूपाजी उसकी टैंगो के बीच थे और उनका लुंड गया की छूट में आधा घुसा हुआ था जिसकी वजह से गया की चीख निकल. गयी thi...phir कुवह पल बाद गया शांत हुई तो फूपाजी ने अपना लुंड उसकी छूट में अंदर बहार करना चालू कर diya...poore कमरे का माहौल गरमा रहा था जिसे सीधा असर रिमझिम दीदी पर पद रहा था जो इतना कुछ देख कर अपने आप को काबू में नहीं रख प् रही थी तो अब दीदी ब्लाउज के ऊपर से hi अपनी छूछीयो को सहला रही thi...aur सहलाते हुए hi उनका पल्लू उनके कंधे से नीचे गिर गया जिसे उठाने की उन्होंने कोई कोशिश नहीं किआ अब दीदी की गोरी चिकनी कमर और ब्लाउज से बहार झांकते छूछे साफ़ दिख रहे थे.....

ये नज़ारा देख कर बड़े फूपाजी खुद को रोके हुए थे और पूर्वी से अपना लुंड चुसवा रहे थे पर अपनी बेटी को इस तरह देखना और उसके सामने खुद पूरा नंगा होना उन्हें उत्तेजित कर रहा tha...wo रिमझिम के फैसले की वजह से रुके हुए थे वर्ण अपनी प्यारी बेटी के साथ वो बहुत कुछ करना चाहते थे और जब अब वो गरम होने लगी थी तो बड़े फूपाजी का पारा और चढ़ने laga...wo बस इंतज़ार में थे की कब उन्हें अपनी बेटी का वो मखमली बदन छ्हूने को milega...Uski कमर को देखकर वो पागल हो रहे थे....

इसके बाद की कहानी अगली अपडेट में आप लोग प्लीज कमैंट्स करके बताते रहिये.... शुक्रिया..
 
वो बस इंतज़ार में थे की कब उन्हें अपनी बेटी का वो मखमली बदन छ्हूने को milega...Uski कमर को देखकर वो पागल हो रहे the....ab आगे

अपडेट 54
जहाँ बड़े फूपाजी का बुरा हाल था तो वहीं रिमझिम दीदी भी बेहाल थी.. उनकी छूट में चीटियां रेंग रहीं थी... अपने चारो तरफ चुदाई का खेल देखकर उनसे काबू करना मुश्किल हो रहा था और वो भी जब सरे परिवार के लोग हो तो ये कितना मुश्किल हो सकता है ये कोई नहीं जनता... शायद दीदी को भी पता नहीं चला पर उनके हाथ अपने आप hi उन्हें और गरम कर रहे थे जहाँ लेफ्ट हाथ से वो अपने ब्लाउज के ऊपर से hi छूछीयो को दबा रही थी तो वहीं दूसरा हाथ साड़ी के ऊपर से hi छूट को सहला रहा था... जिससे उनके मुँह से एक हलकी सी आह निकल रही थी...

बाकि कमरे का माहौल भी पूरा गरमाया हुआ था... फूपाजी अब लेते हुए थे अपनी पीठ पर और गया उनका लुंड अपनी छूट में लेकर उछाल रही थी...





फूपाजी उसके छूछीयो को पकड़ कर उन्हें दबा रहे थे...

फूपाजी- हाँ गया beta...bahut कासी हुई छूट है तेरी ahhhh....ahmmmmmm बहुत मज़ा आ रहा है बीटा...

गया- आअह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह फूपाजी मेरी चौड़ी हो गए है आपके उससे....

फूपाजी- क्या चौड़ी हो गए hai...choot में लुंड है फिर भी शर्मा रहे है खुल के बोल....

गया- meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot आआह्ह्ह कर्मा आह्ह्ह्ह भैया ने आहाज hi खोलीइइइइइ है फिर भीइइइइइइइ देखिये कैसे आपका लुंड पूंऊऊरा जा रहा है....

उधर फूपाजी और गया की चुदाई पूरे ज़ोरो शोरों पर थी तो बीएड पर भी लोग पीछे नहीं थे...

बड़े फूपाजी ने पूर्वी को सामने लिटा रखा था और उसकी छूट चाट रहे the...aur फिर उन्होंने पूर्वी की छूट से मुँह हटाया और फिर सीधे होकर बैठ गए और फिर अपने लुंड को जो पूर्वी के चूसने से चिकना था उसे हाथ में लिए और पूर्वी की छूट पर रख diya...apani छूट पर लुंड को महसूस करते hi पूर्वी दीदी झटपटाने लगी वहीं बड़े फूपाजी अपने लुंड को दीदी की छूट पर ऊपर नीचे घिसने लगे और पूर्वी को तरसने लगे...

पूर्वी- आअह्हम्म्म ताऊ ji...ghused दो न छूट में lund...kyun तड़पा रहे हो...

बड़े फूपाजी पूर्वी के मुँह से ये सुनकर और उत्तेजित हो gaye...aur सिर्फ बड़े फूपाजी hi नहीं रिमझिम दीदी का ध्यान भी पूरी तरह से यहीं पर था वो अपने पापा के लुंड को प्यासी निगाहो से देख रही थी साथ hi पूर्वी की छूट को भी... रिमझिम दीदी की पलके तक नहीं झपक रही thi...unki हाथ साड़ी के अंदर उनकी छूट मसल रहा था साथ hi दूसरा हाथ छूछीयो को भींच रहा tha...idhar बड़े फूपाजी से भी अब रुका नहीं गया और बोले- ले मेरी प्यारी गुडिअ अपने ताऊजी का लुंड....

और उन्होंने लुंड को पूर्वी की छूट के मुँह पर रखकर एक धक्का लगाया जिससे उनका लुंड दीदी की छूट में घुस गया और इसके साथ hi तीन लोगो के मुँह से आअह्हह्ह्ह्हह निकल गए...

बड़े फूपाजी- ahhhhhhhhhhhhhhh बेताआआ

पूर्वी- aaahhhhhhhhhhhhhhhhh मममममममम

रिमझिम- आआअह्हह्ह्ह्हह पापाआआअह

और फिर फूपाजी ने बिना किसी देरी के पूर्वी दीदी की छूट में लुंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया और उन्हें छोड़ने लगे..





पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह हम्म्म्म ताऊजी और तेज़ छोड़िये अपनी गुड़िया रानी को बचपन में गॉड में बिठा कर खिलाया था ab...meri छूट से खेलो अह्ह्ह्हह ताऊजी ...

बड़े फूपाजी- मेरिइइइइइइइइ गुड्ड़ियाआ ये ली ताऊजी का लुंड अपनीचूऊऊत mein....kya रसीली और कासी हुई चुत है बीटा टेरिइइइइइइइ..

रिमझिम दीदी अपने पापा और पूर्वी दीदी की चुदाई देखके अति उत्तेजित हो गए thi....unki साड़ी उनके शरीर से दूर पड़ी हुई थी वहीं उनका पेटीकोट उनकी जांघो तक ऊपर था और उनका हाथ उनकी पंतय के अंदर उनकी छूट पर चल रहा tha...jisse उनके मुँह से आह्ह्हह्ह्ह्ह की सिसकारियां निकल रही थी.......

बीएड के दूसरी तरफ चारु ममी मेरे सामने घोड़ी बानी हुई thi...mera लुंड उनकी छूट में था और वो अपनी गांड आगे पीछे करके मेरा लुंड अपनी छूट में ले रही थी वहीं बड़ी बुआ मेरे होंठों को चूस रही थी.... मैं बड़ी बुआ के बड़े चूतड़ों को मसल रहा था...





Charu-ohhhhhhh ओह्ह्ह्ह ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या लुंड है तेरा aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh इतना मज़ा कभी नहीं आया जितना इन दो दिनों में आआआआआ है.... आअह्ह्ह

मैं और बड़ी बुआ दोनों hi एक दुसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थे तो हमने कोई जवाब नहे दिया पर मैंने एक हाथ से चारु ममी की कमर पकड़ी और लुंड को बहार बिलकुल टोपे तक खींचकर एक तगड़ा झट मारा... जिससे ममी की चीख निकल गए... क्यूंकि लुंड पूरा जड़ तक घुस गया और उनकी बच्चेदानी से टकराया जाकर एक hi झटके में...

चारु ममी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh जाआआआं nikaaaaaaaaaaaaaaallllllllll diiiiiiiiiiiiiii reeeeeeeeeee..... मार dala.....isne meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot फआयआयड दी........

मैं उनको तेज़ तेज़ छोड़ने लगा और वो ाःह अह्ह्ह करते हुए मेरा लुंड ले रही थी...

हमसे बगल में अब बुआ अपनी एक साइड में लेती हुई थी विनीत उनके पीछे की साइड थोड़ा नीचे होकर लेता था और बुआ का एक पेअर विनीत ने हवा में उठा रखा था और अपने लुंड को अपनी मुम्ममय की छूट पर घिस रहा था साथ में hi उनका चेहरा पीछे की और करके उनके होंठो को चूस रहा था...

रिमझिम दीदी का ध्यान अपने पापा और पूर्वी की चुदाई से हटकर बुआ और विनीत पर tha...kyunki एक माँ और बेटे के बीच इतना कामुक खेल किसी के लिए भी अति उत्तेजक दृश्य था वो ध्यान से विनीत के लुंड को विनीत की माँ यानि उनकी चची की छूट पर घिसता हुआ देख रही थी और इतना उत्तेजित हो गए की एक hi झटके में उन्होंने अपने पेटीकोट का नैरा खोल कर उसे नीचे सरका दिया और वो पैरों में जा गिरा तो दीदी ने उसे पेअर उठाकर अपने शरीर से दूर कर दिया अब दीदी नीचे से सिर्फ एक पंतय में थी उनकी पंतय सामने से बिलकुल गीली हो चुकी thi....bade फूपाजी अपनी बेटी को इस हालत में देख कर होश खोते जा रहे थे और पूर्वी दीदी को तगड़े धक्को से छोड़ रहे थे... वहीं रिमझिम दीदी का पूरा ध्यान अभी बुआ और विनीत की और था ....बुआ ने अपनी छूट पर घिसते हुए अपने बेटे के लुंड को एक हाथ से पकड़ा और उसका टोपा अपनी छूट के मुँह पर टिका दिया... जो की विनीत के लिए इशारा था की अब चुदाई शुरू करे तो विनीत ने भी देर ना करते हुए एक करारा धक्का लगाया और उसका लुंड उसकी मम्मी की छूट में घुसता चला गया....

बुआ- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मेरा बछ्ह.... अब छोड़ अपनी मुम्ममय की छूट को बहुत प्यासी है ye...aaahhh

विनीत- मुम्ममय तुम्हारी छूट में लुंड को बहुत आराम मिलता hai...ahhhh क्या मखमली छूट है मुम्ममय तुम्हारी...

बुआ- बेटे का लुंड हर माँ को लेना चाहिए अपनी choooooooooot में... आअह्ह्ह्ह

और विनीत ने कमर हिलाकर अपना लुंड बुआ की छूट में अंदर बहार करना शुरू कर dia....aur दोनों hi माँ बेटे आहें भरने लगे...





वहीं इन माँ बेटे की चुदाई देखकर किसी की साँसे रुकी हुई थी वो थी अपनी रिमझिम दीदी... उनका तो बुरा हाल हो चूका था अपनी पंतय में हाथ डाले वो लगातार अपनी छूट में उंगली अंदर बहार कर रही थी.... उनकी छूट लगातार रास बहाये जा रही थी... उनकी छूट की आग इतनी भड़क चुकी थी जो उनसे बुझाई नहीं जा रही थी....

उधर कमरे के दूसरी तरफ गया की चीखें काफी तेज़ हो चुकी थी और साथ hi वो बहुत तेज़ी से अपनी छूट को फूपाजी के लुंड पर मार रही thi...wo झड़ने के बहुत करीब थी और फिर अचानक से गया का शरीर ढीला पद गया और वो आगे फूपाजी पर गिर गए और उनसे चिपक कर झड़ने लगी उसकी कमर झटके खा रही thii...aur जब झड़ना बंद हुआ तो वो ऐसी hi शांत होकर फूपाजी के ऊपर लेट गए... फूपाजी नीचे से धक्के लगाकर उसको अब भी छोड़ रहे थे और फिर वो भी उसकी टाइट छूट की कसावट अपने लुंड पर ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाए और झड़ने के करीब पहुंच gaye...aur फिर उन्होंने तुरंत गया को अपने ऊपर से उठा दिया जिससे उनका लुंड उसकी छूट से निकल गया और फिर फूपाजी ने गया को नीचे बिठा दिया और उसके सामने खड़े होकर लुंड हिलने लगे

फूपाजी- ले बीटा मेरी मलाई अपने चेहरे पर... जिससे तेरी खूबसूरती और बढ़ जाएगी...

गया- हाँ फूपाजी दो न मुझे अपनी मलाई प्लीज...

फूपाजी- aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

और फिर अपना रास गया के खूबसूरत चेहरे पर छोड़ दिया...





गया भी फूपाजी के रास को अपने चेहरे पर पाकर बहुत खुश हो रहे थी और फिर तुरंत आगे बढ़ कर उसनर फूपाजी के लुंड को जीभ से चाट लिए और phir...aur चाट चाट के साफ़ कर दिया वहीं अपने चेहरे पर लगे रास को भी उंगलिओ में इकठ्ठा कर चाटने लगी तो फूपाजी बोले- तू अपनी माँ से भी बहुत आगे निकलेगी...

गया- मुझे बिलकुल अपनी मुम्ममय जैसी बनना है...

और ये कहकर वो बी वहीं फूपाजी के पास बैठ गयी और उनके लुंड को सहलाने लगी और खुद भी आराम करने लगी...

बड़े फूपाजी अपनी बेटी को आधा नंगा देखकर गरम होते जा रहे थे और काफी तेज़ धक्को से पूर्वी दीदी की छूट में लुंड पेल रहे थे....

पूर्वी- आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह taujiiiiiiiiiiiiiiii... छोड़ छोड़ करररर choooooooooot फायआडडडडडडडड दो आअज अपणीइइइइइइ भतीजी की....

बड़े फूपाजी- betiiiiiiiiiiiiiiiii क्या गरम choooooooooot है teri.....aur कितनी कासी हुई bhi...dhanya हो गया मैं तेरी छूट मर कररररररर...

पूर्वी की उत्तेजना अपने चरम पर थी...

पूर्वी- छहःछहुआउद्ड्ढडो मुझे रंडी की तरह ahhhhhhhhhhhh ताऊजी बेटी choooddddddd....bhar दो मेरी छूट में अपना लुंड.... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मादरचोद सलीबी...

पूर्वी के मुँह से गाली सुनकर फूपाजी की रफ़्तार और उत्तेजना दोनों hi बढ़ गए और कुछ झटको बाद पूर्वी दीदी और नहीं रुक पाई और झड़ंने लगी.... पूर्वी को झाड़ता देख बड़े फूपाजी भी खुद को रोक नहीं पाए और उनका सारा रास उनकी गोलियों से उनके लुंड में आ गया और जैसे hi वो झड़ने वाले थे उन्होंने अपना लुंड पूर्वी की छूट से निकला और उसके ऊपर रास की बरसात करने लगे





एक धार पूर्वी दीदी के चेहरे पर गिरी तो दूसरी चूची पर और बाकि उनके सपाट पेट पर और जब उनके लुब्द ने रास की बूंदे गिरना बंद किआ तो वो आगे पूर्वी के साइड में गिर गए और उसके होंठों को चूसने लगे... पूर्वी भी उनका साथ देने lagi...tabhi जैसे hi ये गया ने देखा वो उठकर भगति हुई आई और पूर्वी दीदी की छूछीयो और पेट से फूपाजी का रास चाटने lagi...shayad उसे वीर्य का स्वाद ाचा लगने लगा था और कुछ hi देर में उसने सारा रास चाट कर साफ़ कर दिया तो पूर्वी दीदी ने उसके सर को पकड़ा और नीचे की तरफ धकेल कर अपनी छूट पर कर दिए गया भी समझ गए की उसे आगे क्या करना hai...baki की तरह अनुभव तो नहीं था पर उसने अपने मन से अपनी जीभ निकली और पूर्वी दीदी की छूट पर फिरने लगी...

पूर्वी- ह्म्म्मम्म्म्म गया मेरी रआआआई चायत ऐसे hi दीदी की छूट ko...aahhh

ये सुनकर गया का कॉन्फिडेंस थोड़ा और बढ़ गया और वो अचे से पूर्वी की छूट चाटने में लग गयी....





गया के छूट चाटने में अनुभव की कमी तो दिख रही थी पर उस कमी को वो अपने जोश और उत्साह से पूरा कर रही थी जिससे पूर्वी दीदी की बहुत आनंद मिल रहा tha...bagal में लेते बड़े फूपाजी इन दोनों की रासलीला देखकर अपना लुंड मुठिया रहे थे जो अब दोबारा से टाइट होने लगा था...

जहाँ पूर्वी अपनी छूट चटवा कर सुख ले रही थी वहीं उसकी मम्मी कहाँ पीछे रहने वाली थी... अपने बेटे से वो अपनीचूऊऊत की गर्मी शांत करवा रही थी...

बुआ अपमी पीठ पर लेती हुई थी और उनके चूतड़ बीएड के किनारे पर थे बुआ की दोनों टैंगो के बीच विनीत बीएड के बगल में खड़ा था और उसका लुंड उसकी मम्मी की छूट के अंदर बहार हो रहा tha...vineet के दोनों हाथ अपनी मुम्ममय की कमर पर the...har झटके पर बुआ की बड़ी बड़ी छुछियां ऊपर नीचे कूद रही थी..





Bua-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मेरा लाल ऐसे hi छहःछहूऊऊडड़ड़ अपणीइइइइइइ मा को मादरचोद ahhhhhhhhhhh daaaaaalllllllllllll अपना मुसल मुम्ममय की छूट mein...aur तेज़ बीटा और तेज़...

विनीत- आअह्ह्ह मुम्ममय लो अपने बेटे आआह आह्ह्ह्हह बेटे का लुंड अपनी रसीली छूट में.. पहले क्यों नहीं छोड़ा मैंने तुम्हे...

बुआ- पता होता betaaaaaaaaaaaaahhhh तो जब तेरा ये लुंड पहली बार खड़ा हुआ था तब hi अपनी choooooooooot में डलवा leti...par अब चुड़ड़ड़ड़ड़ बीटा aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मायआ मैंनं गईइइइइइइ..

व्- ुहंममम हननननन मुम्ममय

और विनीत ने बुआ की कमर से एक हाथ हटाकर उनकी छूट के डेन पर रखकर रगड़ दिए जिसे बुआ सभाल नहीं पाई और भर भरा के झड़ने लगी...

बुआ- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh vineeeeeeeeeeeeeet betaaaaaaaaaaaaahhhh आह्हः आह्हः हॉँण्णन विनीत ने अगले कुछ पल और धक्के मरे अपनी मुम्ममय की छूट में और फिर अपना लुंड बहार निकल lia...bua लेते लेते अपनी साँसे ठीक करने लगी वहीं विनीत ने कमरे में नज़र घुमाई और फिर उठा और जहाँ गया पूर्वी दीदी की छूट चाट रही थी... वहां पहुंच गया और गया जो की घुटनो पर झुककर पूर्वी की छूट चाट रही थी.. तो उसके छोटे क्यूट चूतड़ हवा में the..to विनीत गया के पीछे गया और झुककर अपना मुँह गया के चूतड़ों के बीच laga...aur उसकी छूट चाटने लगा... भले hi विनीत के पास छूटों की कमी नहीं थी पर एक नयी छूट छोड़ने की उत्सुकता सब को होती है और विनीत ने अभी तक गया को नहीं छोड़ा था ऊपर से विनीत ने अभी तक अपनी उम्र से बड़ी hi औरतों को छोड़ा था तो एक काम उम्र की लड़की को छोड़ने की उत्सुकता उसके चेहरे और लुंड पर साफ़ दिख रही थी..

गया ने अपनी छूट पर किसी की जीभ महसूस की पर कुछ बोल नहीं पाई क्यूंकि पूर्वी दीदी ने उसका चेहरा अपनी छूट में दबा रखा था... रिमझिम दीदी ये सब देखकर लगातार अपनी पंतय के अंदर उंगली डाले अपनी छूट में उंगली कर रही thi...par उनकी छूट शांत नहीं हो रही थी..

उधर विनीत ने गया की छूट से अपना चेहरा हटाया और घुटनो के बल खड़ा होकर अपने लुंड को पकड़ा और गया की छूट पर रखकर बिना किसी देर किये झटका मारा और लुंड गया की छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस गया... गया की चीख निकली पर वो पूर्वी की छूट में घुटकर रह गयी और विनीत गया को छोड़ने लगा...





गया छूट में लुंड लेने के बाद भी पूर्वी दीदी की छूट चाट रही thi...Vineet ने अपने धक्को की रफ़्तार और बढ़ा दी...

व्- ुहंममम गया मेरी जाआआआं क्या मस्त टाइट choooooooooot है Teri.....aaaahhhhh लगता है मेरा लुंड खा जाएगी अंदर hi aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh....

गया दोनों भाई बहन के बीच में उन दोनों को hi सुख दे रही थी एक तरफ से विनीत को तो दूसरी तरफ से पूर्वी को

जैसे जैसे विनीत धक्के लगा रहा था वैसे hi हर धक्के के साथ गया आगे होती और उसकी जीभ पूर्वी की छूट में घुस जाती... जिससे पूर्वी और तड़प उठती....

पूर्वी- छोड़ भाई इसकी कासी हुई छूट को और चुड़ड़ड़ड़ड़ ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh और तू साआल्लीीी ऐसे hi चाआत मेरी choooooooooot को आआह्ह्ह..... विनीत फाड़ दे इसकी चुत की इसको लुंड लेने में कभी तकलीफ न हो aaaaahhhjhhhhhhhhhhhhhhh जिआआआआ...

गया तो बस ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh की आवाज़ करके अपने काम में लगी हुई थी वहीं छूट में विनीत का लुंड उसे मज़े दे रहा था.... कहाँ आज तक वो कुंवारी थी और कहाँ ये तीसरा लुंड था जो उसकी छूट की गहराइयों को नाप रहा tha....ek hi दिन में उसकी ज़िन्दगी इतनी बदल जाएगी किसने सोचा था पर सोचने का टाइम hi किसके पास था गया के पास तो बिलकुल hi nahi...choot में लुंड अंदर बहार हो रहा था और सामने रसीली छूट थी वो तो बस इस समय का आनंद उठा रही थी ...

उधर जहा बेटी भाई बहिन के बीच में फांसी हुई thi...uski माँ मेरे लुंड के धक्को से पूरी काँप रही थी और आहें भर रही thi...main चारु ममी की कमर को पकड़ कर... उनकी छूट में तेज़ तेज़ धक्के लगा रहा था... मेरे हर धक्के के साथ थप थप की आवाज़ गूँज रागी थी और चारु ममी के चूतड़ लहार रहे थे... वहीं बड़ी बुआ की एक छुच्छी मेरे मुँह में थी जिसे मैं चूस रहा था...

चारु- अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh बीटा तूने तो छूट फायआडडडडडडडड diiiiiiiiiiiiiii meeeeeeeeeeeerrrrrriiiiiiiiiiii.... और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ मादरचोद ahhhhhhhhhhh...

बड़ी बुआ- साबआष कर्मा और तेज़ चुड़ड़ड़ड़ड़ इस रंडी की choooooooooot को फाड़ दे छोड़ छोड़ के घुसेड़ दे अपना मुसल इसकी बच्चेदानी तक....

Me-ujhmmmmmmmmmmmm ममममममम

चारु- shhhhhhhhhhhh hmmmmmmmmmmmm didddddiiiiiiiiiiiiiii मैंनं गईइइइइइइ आआह्ह्ह्हह आयजहह...

चारु ममी का पूरा बदन कंपनी लगा उनकी कमर झटके खाने लगी और उनकी छूट से रास बहने laga...charu ममी झड़ने लगी मैं फिर भी उनकी छूट में धक्क्के लगा रहा था और कुछ पल बाद वो शांत होकर आगे की तरफ गिर gayi...aur मेरा लुंड उनकी छूट से निकल गया ममी के गिरते hi बड़ी बुआ ने झुककर मेरे लुंड को अपने मुँह में ले लिए और चूसने लगी...

तभी मेरी नज़र रिमझिम दीदी पर पड़ी जो बड़ी बुआ यानि अपनी माँ को मेरा लुंड चूसते हुए ध्यान से देख रही थी... अपनी hi माँ को ऐसे लुंड चूसते हुए देखना किसी भी बच्चे के लिए एक अनोखा दृश्य होता है वही रिमझिम दीदी के साथ हो रहा था... जब मैंने देखा की वो बड़ी बुआ को लुंड चूसते हुए देख रही हैं तो मैंने बड़ी बुआ के सर को पकड़ा और अपना लुंड पूरा उनके मुँह में गले तक घुसेड़ diya....jise देखकर रिमझिम दीदी की आअंखें बड़ी हो गयी और बड़ी बुआ के मुँह से गुगु की आवाज़ आने lagi...kuch पल ऐसे hi रखने के बाद मैंने अपना लुंड निकला तो मेरे लुंड से लगी हुई एक थूक की धार भी निकली जो बुआ के मुँह से मेरे लुंड तक लटक रही थी जिसे बुआ ने चाट कर साफ़ kia...phir बड़ी बुआ बोली बीटा लुंड चुत में दाल अब नहीं सहा जाता..

मैंने भी देर न करते हुए उन्हें वहीं पीछे की तरफ लिटा दिया और खुद उनकी टैंगो के बीच बैठ गया और अपनालूंड पकड़ कर उनके छूट के मुँह पर रखा... और सर घुमाकर रिमझिम दीदी की और देखा तो वो जैसे सम्मोहित सी अपनी मुम्ममय की छूट और मेरे लुंड पर देखे जा रही थी... पहली बार उनकी माँ उनके सामने छोड़ने वाली थी शायद इसी बात से वो बहुत उत्तेजित हो रही थी...

मैंने उनकी तरफ देखते हुए एक धक्का लगाया तो लुंड बड़ी बुआ की छूट में घुस गया.... लुंड माँ की छूट में घुसा था सांस बेटी की अटक gayi...maine दो तीन झटके और मार कर अपना पूरा लुंड बड़ी बुआ की छूट में घुसेड़ दिया.... पूरा लुंड घुसते hi बड़ी बाके की आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल gye...maine रिमझिम दीदी को देखा तो उनकी आँखें बंद हो गए और वो झड़ने लगी... अपनी माँ को छुड़ता हुआ देखकर वो काबू खो बैठी और झड़ने lagi...jhadne के बाद वो आँखें बंद करके वही. पीछे कुर्सी के ऊपर लेट gayi...idhar मैंने भी बड़ी बुआ को छोड़ना शुरू कर दिया..





मैंने उनकी एक तंग हवा में उठाई और उनकी छूट में सटासट लुंड पेलने लगा...

बड़ी bua-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh बीटा चुड़ड़ड़ड़ड़ दे बीटा अपनीई बाआ को आअह्ह्ह्ह बहुत प्यासी है तेरे मुसल के लिए आअह्ह्ह कितना अंदर तक भर देता है... मेरी छूट को...

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी बुआ क्या मास्त्टट चुत पाई है tumne...man करता है पूरे दिन लुंड डालकर छोड़ ते रहो...

ये बोलकर मैंने लुंड को पूरा बहार खींचकर एक तगड़ा झटका मार दिया जिससे एक hi बार में लुंड पूरा अंदर घुस गया...

Bua-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मायआ मार डाला.... आराम से कर ये तेरी मायआ की छूट नहीं है....

में- माँ की होती तब भी ऐसे. Hi फाड़ता bua...aur तुम मेरी माँ से काम नहीं हो...

और मैं बड़ी बुआ को और तेज़ छोड़ने लगा... साथ hi उनकी छूछीयो को भींच रहा था....

उधर बड़े फूपाजी अपनी बेटी को झाड़ता हुआ देख बहुत उत्तेजित हो गए और उनका लुंड जो एक बार झाड़ चूका था वो भी बिलकुल टाइट हो कर खड़ा था.... रिमझिम दीदी अब भी आअंखें बंद करके कुर्सी पर पड़ी हुई थी.. उनके बदन पर एक पंतय और ब्लाउज और ब्रा थी... फूपाजी की आँखों में अपनी बेटी को देखते हुए एक नशा था....

फिर अचानक सेबड़े फूपाजी उठे और रिमझिम दीदी की कुर्सी के सामने पहुंच गए और फिर झुककर अपने होंठों को दीदी के होंठों पर रख diya...apane होंठों पर किसी के होंठों का एहसास पाकर रिमझिम ने अपनी आँखें खोली तो उसकी आँखें उसके पापा के आँखों से मिली और फिर बंद हो गयी और होंठ खुल गए जिससे उसके पापा उन्हें आसानी से चूस sakein....aur फूपाजी ने किआ भी वैसा hi अपनी बेटी के होंठों के खुलते hi उन्होंने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिए और चूसने लगे... रिमझिम भी उनका साथ देने lagi...jab होंठ चूसते हुए बड़े फूपाजी को ये लगा की अब रिमझिम भी मन नहीं करेगी तो उन्होंने अपने हाथ नीचे उसकी कमर पर रख दिए और सहलाने लगा... बेटी के नंगे पेट और कमर को हाथ पर महसूस करके फूपाजी और गरम जोशी से होंठ चूसने लगे....

इधर रिमझिम दीदी के साथ उसके पापा को देखकर विनीत भी काफी गरम हो गया और अपने चरम पर पहुंच gaya...aur गया की छूट में तगड़े धक्को की ज्झादी लगा दी जिन्हे गया नहीं झेल पाई और झड़ने lagi...uska चेहरा पूर्वी दीदी की छूट में और डाब गया और कुछ पल बाद वो एक साइड में गिर gayi...to विनीत ने उसकी छूट से लुंड निकला और उसके चेहरे के पास जाकर बैठ गया aur...uske चेहरे को पकड़ कर अपने लुंड को उसके मुँह पर रखा तो गया ने अपना मुँह खोल लिए और विनीत ने उसके खुले मुँह के अंदर रास की धार मारनी शुरू कर दी...





जब विनीत का झड़ना बंद हुआ तो वो घूम कर पीछे बैट्ज गया और गया अपने मुँह में विनीत का वीर्य लिए पूर्वी के ऊपर गयी और अपना मुँह पूर्वी दीदी के मुँह से भिड़ा दिए और विनीत का रास उसकी बहिन के मुँह में उढेल दिया... पूर्वी दीदी ने भी बड़ी ख़ुशी से गया के होंठों को चूसते हुए अपने भाई का रास पि लिए..

उधर बड़े फूपाजी और रिमझिम दीदी का होंठों का चूसना बंद हो चूका था और अभी बड़े फूपाजी के होंठ उनकी बेटी के नंगे और चिकने पेट पर the...wo रिमझिम दीदी के पेट का हर हिस्सा चाट रहे थे और फिर चाटते हुए वो नाभि के करीब pahuche...aur जीभ से नाभि के चारो तरफ गोला बनाकर चाटने लगे....

रिमझिम दीदी तो इससे बहुत गरम होने लगी और उनका पेट जैसे hi फूपाजी की जीभ पड़ती सिकुड़ने और कंपनी lagta....phir फूपाजी ने अपनी जीभ दीदी की नाभि में दाल दी और चूसने लगे...

रिमझिम- ाःह paaaaaaaaaapaaaaaaaaaaaa.. ह्म्म्मम्म्म्म maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh..

बड़े फूपाजी बिना रुके अपनी बेटी के चिकने जिस्म का आनंद ले रहे थे...

वहीं बड़ी बुआ अपने पति और बेटी के खेल का आनंद ले रही थी और साथ hi मेरे मुसल से चुद भी रही थी तो ज़्यादा देर तक वो इस दोहरे मज़े को झेल नहे paai...aur एक कंपकंपी के साथ झड़ने लगी...

बड़ी बुआ- aahhhhhhhhhh betiiiiiiiiiiiiiiiii रिमझिम ..... आआअह्हह्ह्ह्हह रिमझिम के पापा Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh गए मैं..... और ये कहकर वो पास्ट हो गए और अपने बेटी àुर पति को देखने लगी मैंने उनकी छूट से लुंड निकला और पीछे लेती बुआ जो विनीत से चुदाई के बाद आराम कर रही थी उनके पैरो के बीच जाकर उनकी छूट में दाल diya...aur अंदर बहार करने लगा..



Bua-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मायआ Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh मेरा बच्चा अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह....

में- buaaaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh और ये कहके मैं दो मिनट hi चुदाई की होगी की मुझे लगा मेरा रास निकलने वाला है मैंने तुरंत बुआ की छूट से लुंड निकला और बुआ के छूछीयो के पास बैठ गया और उनकी छूछीयो पर hi अपना सारा रास गिरा दिया....





और उसके बाद नज़र घुमा कर देखा तो गया और पूर्वी दीदी हमारी तरफ hi देख रही थी वो जल्दी से उठ कर दोनों आई और पूर्वी दीदी ने मेरा लुंड मुँह में भर लिए वहीं गया ने बुआ की छुच्छी को मुँह में ले लिए और उस पर से मेरा रास चाटने लगी... पूर्वी दीदी ने चाट कर मेरा लुंड पूरा साफ़ कर दिया और फिर मुँह से निकल दिया और फिर अपना मुँह बुआ यानि अपनी मुम्ममय की दूसरी चुकी पर लगा दिया और चाटने lagi...bua दोनों के बालों में हाथ फेरते हुए अपनी छूछीयो को चुसवा रही थी..... मैं बीएड से टिक कर बैठ गया तभी रिमझिम दीदी की तरफ से एक आवाज़ आई तो देखा बड़े फूपाजी ने रिमझिम दीदी का ब्लाउज पकड़ा और दोनों तरफ से खींच कर पहाड़ diya...aur लहिर पूरी तरह से उतार दिया.. जिसमे रिमझिम दीदी ने उनकी पूरी मदद की..

अब रिमझिम दीदी अपने सरे घरवालों के सामने सिर्फ एक ब्रा और पंतय में थी... सबकी नज़र बाप बेटी पर तिकी हुई थी.... बड़े फूपाजी ने रिमझिम दीदी को उठाकर बीएड के बीच में लिटा दिया और हम सब लोग उनके चारो तरफ घेरा बनाकर बैठ गए...

फिर बड़े फूपाजी ने दीदी को चूमते हुए पीछे हाथ लेजाकर उनकी ब्रा को खोल दिया और अगले hi पल वो उनके बदन से अलग हो गए और सब के सामने दीदी की बड़ी बड़ी और बाला की खूबसूरत छुछियां आ gayi...aisa लग रहा था जैसे दो बड़े बर्फ के गोलों पर अनार के दो दाने रखे हो.... अपनी बेटी की छूछीयो को देखकर तो बड़े फूपाजी की आँखें बड़ी हो गए... बड़े कांपते हुए हाथों से उन्होंने उन्हें थाम लिए तो रिमझिम दीदी तो जैसे पिघल गयी वहीं... अपने पापा के हाथो में अपनी छूछीयो को देकर....

बाकि के सरे लोग भी घेरा बनाकर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले रहे थे साथ में... दोनों प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ा रहे थे...

रिमझिम- आअह्ह्ह्हह पप्पप्पाआआआआ ऐसे hi मसलिये अपनी बेटी की छूछीयो को.... निचोड़ ली जिए इनका सारा रास...

बड़े फूपाजी तो कुछ बोलने की हालत में hi नहीं थे वो अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii की खूबसूरती में खो चुके थे... और फिर उन्होंने आगे झुककर दीदी की एक छुच्छी को मुँह में भर lia...didi का सीना अकड़ गया और उनकी दोनों छुछियां और ऊपर उठ गए जैसे पूरी अपने पापा के मुँह में एक साथ देना चाहती हो...

बड़े फूपाजी ने तो शायद hi इससे स्वादिष्ट चीज़ कभी चखी हो... अपनी बेटी की छुच्छी को वो मुँह में भरकर आअंखें बंद करके चूसने lage...aur उस अमृत रुपी चुकी का आनंद लेने लगे... ये एक वही बाप बता सकता है जिसने अपनी बेटी की छुच्छी को चखा हो की उससे ज़्यादा स्वादिष्ट कोई चीज़ नहीं बानी दुनिया में.....

छूछे के मुँह में होने की वजह से फूपाजी को झुकना पद रहा था जिससे उनका लुंड रिमझिम दीदी की छूट पर पंतय के ऊपर से hi टक्कर मार रहा था जो दोनों की hi उत्तेजना को और बढ़ा रहा था हर ठोकर के साथ रिमझिम दीदी की छूट कुलबुला जाती... वहीं बड़े फूपाजी का लुंड और कड़क हो जाता.... फिर तो फूपाजी की कमर अपने आप hi आगे पीछे हो रही थी और वो लुंड को अपनी बेटी छूट पर मार रहे थे....

फूपाजी- चूसिये अपनी बेटी की छूछीयो को और जो मज़ा मैंने लिए है वो आप भी लेकर देखिये...

बड़ी बुआ- हाँ देवर जी सही कह रहा hain...meri बच्ची पर पहला हक़ तो बाप का hi है...

बुआ- अब होगा हमारा पूरा परिवार पूरा...

पूर्वी- मेरी बहन बस थोड़ी देर और...

चारु- क्या सुन्दर छुछिया पाई है मेरी रिम्मी ने...

में- मैं बहुत खुशनसीब हो क मुझे पहले hi दीदी को चखने को मिला...

विनीत- मुझसे तो रुका नहे जा raha...bas जल्द से जल्द मैं दीदी को बहुत सा प्यार करना चाहता हूँ....

रिमझिम दीदी ने सबकी बातें सुनी और अपने लेफ्ट में बैठे विनीत को अपनी तरफ झुका लिए और उसके होंठों को अपने होंठों पर रख दिया... विनीत कहाँ ऐसे मौके को चूकने वाला था और वो. दीदी के होंठों को चूसने लगा वहीं बड़े फूपाजी बदल बदल कर बेटी की छूछीयो को चूस रहे थे...

कुछ पल तक विनीत और रिमझिम एक दुसरे के होंठों को चूसते रहे और फिर अलग हुए तो रिमझिम ने विनीत के बगल में बैठी चारु ममी को झुका किआ और फिर उनके होंठो को चूसने lagi...mami भांजी के चुम्बन को देखकर सबकी उत्तेजना और बढ़ गए.. विनीत .. फूपाजी और मेरे लुंड तन कर खड़े थे... बड़े फूपाजी अब भी दीदी की छूछीयो को चूस रहे थे वो लगता था आज hi सारा रास पि जाना चाहते थे अपनी बेटी की छूछीयो का..

इधर ममी और भांजी अलग हुए तो चारु ममी की जगह पूर्वी दीदी ने ले ली और अब दोनों बहनें एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी...... इनके होंठो के चूसने में एक दुसरे के लिए प्यार साफ़ दिख रहा था... पूर्वी दीदी ने तो अपनी जीभ भी रिमझिम दीदी के मुँह में डालदी जिसे रिमझिम दीदी चूसने लगी फिर ऐसा hi रिमझिम दीदी ने kia...aur अंत में दोनों हांफते हुए अलग हुए तो देखा गया पहले hi तैयार थी और रिमझिम दीदी पर टूट padi...sabkr चेहरे पर उसकी उत्सुकता देखकर मुस्कराहट आ gayi...Gia अलग हुई तो मेरा नंबर आया और मैंने दीदी की जीभ को काफी देर तक चूसा.. और फिर अलग हुआ मेरे बाद फूपाजी ने अपनी भतीजी के होंठों से होंठ मिला दिए और चूसने लगे.... रिमझिम दीदी भी अपनी जीभ चाचा के मुँह में दाल दाल कर चूस रही थी... चाचा के बाद चची का नंबर आया और बुआ तो जैसे इसी लिए बैठी थी और रिमझिम दीदी के होंठों को चूसने चाटने लगी.. उनकी जीभ को अपने मुँह में ले कर चूसा... उनके होंठो को चूसा और फिर अलग हो gayi...to माँ बेटी की बारी आ गयी बड़ी बुआ ने बड़े आराम से अपनी बेटी के. होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और आराम से चूसने लगी थोड़ी देर बाद दोनों hi काफी आक्रामक हो गए पर उनकी इस आक्रामकता में भी माँ बेटी का प्यार साफ़ नज़र आ रहा tha...phir काफी देर बाद बड़ी बुआ और रिमझिम दीदी अलग huye....aur उसी के साथ बड़े फूपाजी ने भी दीदी की छूछीयो को छोड़ा और फिर उनके पेट और नाभि को चूमते हुए नीचे की तरफ जाने लगे... और फिर पंतय के सामने जाकर रुक gaye....aur रिमझिम दीदी की गीली पंतय को ध्यान से देखने lage...aur फिर झुककर पंतय के ऊपर hi अपना मुँह टिका दिए....

रिमझिम- ममममममममम पापाआआअह आअह्हह्ह्ह्हम्मम्मम्मम्म

और फिर बड़े फूपाजी ने अपने दोनों हाथ रिमझिम दीदी की कमर पर पहुचाये और पंतय की लास्टिक को दोनों तरफ से पकड़ा और एक hi झटके में नीचे उतर दिया...

और फूपाजी के सामने जन्नत का द्वार आ गया.... रिमझिम दीदी की उनकी अपनी बेटी की चिकनी रसीली छूट... जिसे देखकर बड़े फूपाजी के मुँह में पानी आ gaya...aur उनसे रुका नहीं गया तो उन्होंने अपना मुँह बेटी की छूट से मिला दिए...

रिमझिम दीदी तो ये देखते hi तड़प उठी...





रिमझिम- हाआआआंनंन्न पापा खा जाओ अपनी बेटी की छूट... पि जाओ इसका सारा रास बहुत परेशां करती है ये मुझे....

वहीं रिमझिम दीदी के अलावा सभी के मुँह से भी एक आह निकल गए... और सब बहुत उत्तेजित हो गए चारु ममी जो विनीत के बगल में बैठी थी वो विनीत के खड़े लुंड पर झुक गयी और चूसने lagi...wohin पूर्वी दीदी ने चारु ममी के पीछे झुककर अपना मुँह उनके चूतड़ों में लगा दिया और उनकी छूट और गांड पर जीभ फेरने लगी... वहीं विनीत आगे झुका और रिमझिम दीदी की लेफ्ट छुच्छी को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा....

रिमझिम- आह्हः भईईई ुहंममम हननननन....

रिमझिम दीदी तो इस दोहरे हमले से सिहर उठी छूट में पापा की जीभ वहीं एक छुच्छी भाई के मुँह में थी और तभी एक और हमला हुआ और फूपाजी ने भी अपनी भतीजी की एक छुच्छी को मुँह में ले लिए और दोनों बाप बेटे मिलकर एक एक छुच्छी को चूसने लगे...

RIMJHIM-haaaaaaannnnn पापा.... choooooooooot छतो..... vineeeeeeeeeeeeeet ाःह चचाआ चुसोऊ meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii chuchhiyaaaaaannnn.....sara रास्स्सस्स पी लो....

ये तीनो लोग अपने काम में लग गए जो था रिमझिम को सुख देना जहाँ रिमझिम के एक तरफ एक चैन बानी हुई thi...pahle विनीत रिमझिम की छुच्छी चूस रहा था विनीत का लुंड चारु ममी चूस रही थी... और चारु ममी की छूट पूर्वी चाट रही थी....

वहीं दूसरी और फूपाजी एक छुच्छी चूस रहे थे और बड़ी बुआ उनका लुंड चूस रही थी और बुआ उठ कर बड़े फूपाजी के नीचे लेट गयी और उनका लुंड अपने मुँह में भर के चूसने lagi....jisse बड़े फूपाजी के छूट चाटने की गति और तेज़ हो गए और वो और ज़ोरो से अपनी बेटी की छूट चाटने लगे...

मैं जो रिमझिम दीदी के सर के पीछे बैठा था थोड़ा आगे आया और उनके सर को अपनी गॉड के पास रख लिए अब मेरा लुंड उनके गाल से टच हो रहा था उलटी तरफ से तभी मैंने गया को खली बैठे देखा तो उसे बुला लिए और वो उठ कर आई तो मैंने उसे रिमझिम दीदी के मुँह पर बिठा दिया जिससे उसकी छूट रिमझिम दीदी के मुँह पर आ गयी... रिमझिम दीदी ने भी तुरंत जीभ निकल कर उसकी छोटी सी छूट का स्वागत किआ और जीभ से चाटने लगी वहीं मैं झुककर गया के गांड के छेड़ को चाटने लगा... जिससे गया भी दोहरे मज़े से कुलबुला उठी और अपनी कमर हिलाकर अपनी छूट और गांड हमारे मुँह पर घिसने लगी......





इसी तरह मेरी और रिमझिम दीदी की जुगलबंदी से गया मज़े के सागर में गोते लगाने लगी...

रिमझिम दीदी हर जगह से घिरी हुई थी... छूट में पापा जीभ से चाट रहे थे. छूछीयो पर चाचा और भाई वहीं मुँह पर गया की choot....aur जो भी रिमझिम दीदी से जुड़े हुए थे वो भी किसी न किसी क्रिया में व्यस्त hi थे... पर केंद्र बिंदु रिमझिम दीदी hi थी...

ये सिलसिला कुछ देर चला और फिर आखिर इस चौ तरफे हमले के आगे रिमझिम दीदी हार गयी और अपने पापा के मुँह में झड़ने लगी... उनका पूरा बदन अकड़ गया और फिर बापिस गिर गया उनकी जीभ भी गया की छूट से निकल गयी...

और बाकि सब भी अपनी अपनी जगह से हैट कर बैठ गए....

रिमझिम दीदी हांफ रही थी और मुस्कुरा कर सबकी और देख रही थी... कुछ पल बाद बड़े फूपाजी उठे और उन्होंने रिमझिम दीदी को उठा कर बिठा लिए और फिर उन्हें घुटनो पर बिठा कर आगे अपनी और झुका लिए और अब दीदी की आँखों के सामने उनके पापा का लुंड फुंकार रहा था...

इसके आगे क्या हुआ जानिए अगली अपडेट mein...apane कमैंट्स करके सुझाव ज़रूर दें बहुत बहुत शुक्रिया
 
रिमझिम दीदी हांफ रही थी और मुस्कुरा कर सबकी और देख रही थी... कुछ पल बाद बड़े फूपाजी उठे और उन्होंने रिमझिम दीदी को उठा कर बिठा लिए और फिर उन्हें घुटनो पर बिठा कर आगे अपनी और झुका लिए और अब दीदी की आँखों के सामने उनके पापा का लुंड फुंकार रहा था..

अपडेट 55

रिमझिम दीदी ने अपने चेहरे के सामने फुँकारते हुए अपने पापा के लुंड को देखा और फिर नज़र उठाकर अपने पापा की और देखा और फिर अपना हाथ बढाकर उसे थाम lia...beti की उंगलियां लुंड पर छूटे hi बड़े फूपाजी सिहर उठे... अह्ह्ह्ह betiiiiiiiiiiiiiiiii तेरे हाथों में कोई जादू है....

रिमझिम- जादू नहीं पापा आपका प्यार है... बचपन में आपने कितने hi खिलोने लेकर दिए थे मुझे पर सबसे प्यारा खिलौना तो आज दिया hai...khoob खेलूंगी अब इससे....

और ये कहकर रिमझिम दीदी ने अपनी जीभ निकल कर फूपाजी के लुंड के टोपे को चाट लिया... बड़े फूपाजी की तो जैसे साड़ी जाएं hi उनके लुंड में अटक गयी उनकी सांस जहाँ थी वहीं रुक गए उस पल के liye...baki के सब लोग भी इस कामुक दृषिअ को देखकर सिहर उठे...

और फिर रिमझिम दीदी ने अपने पापा की आँखों में देखते हुए उनके लुंड के टोपे को मुँह में भर lia...bade फूपाजी की तो आँखें बंद हो गए बेटी के मुँह की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस करके उनकी साडी जान जैसे उनके लुंड के टोपे में समां गए जो इस वक़्त उनकी बेटी के मुँह में था बड़े फूपाजी को यकीन नहीं हो रहा था की ये सच में हो रहा है... रिमझिम दीदी लुंड को चूसते हुए अपने पापा के चेहरे के बदलते भावों को देखने लगी ...





दीदी को बड़ा ाचा लग रहा था अपने पापा के गरम और मोठे सुपडे को मुँह में लेकर... और कैसे वो अपने मुँह से अपने पापा के भावों को नियंत्रित कर रही थी... रिमझिम दीदी अपने एक हाथ से बाकि लुंड को मुठिया रही थी और टोपा मुँह में भरकर चूस रही थी... उसके पापा का कड़क लुंड उसके मुँह में उसे एक अलग सुख दे रहा था साथ hi ये सोचकर खुश थी की वो अपने पापा को इतना सुख दे पा रही thi...ki वो आँखें बंद करके मज़े में लेते हैं...

सब की नज़रें इसी नज़ारे पर तिकी हुई thi...sab लोग बूत बने हुए अपनी अपनी सांस थामे बात बेटी के इस काम लीला को देख रहे थे... बड़े फूपाजी को तो ऐसा लग रहा था की उनका लुंड उनकी बेटी के मुँह में पिघल जायेगा...... कुछ पल तक ऐसे hi दीदी उनका लुंड चूसती रही इधर जब बाप बेटी का खेल देख रहे फूपाजी से बर्दाश्त नहे हुआ तो वो रिमझिम दीदी के पीछे जाकर झुक गए और उसकी खूबसूरत और कामुक गांड देखने लगे ..दो बड़े बड़े और गोल chutad...unke बीच की वो सीढ़ी सी gali...us गली में बने वो दो मकान ...दोनों मकानों के द्वार से बहता हुआ पानी गली को गीला कर रहा था और फिर क्या था फूपाजी से सहन नहे हुआ और उन्होंने अपनी जीभ गली में तिकड़ी और ऊपर से नीचे तक चाटने लगे....

रिम- ह्म्म्मम्म्म्म ummmmmmmmmmmmmmhaaaaaaaaaghhhhhhh...

रिमझिम के होंठो की पकड़ अपने पापा के लुंड पर और कास गयी जैसे hi उसे अपनी छूट और गांड पर अपने चाचा की जीभ का अनुभव हुआ...

इधर फूपाजी अपनी भतीजी की छूट और गांड को सिद्दत से चाटने लगे और फिर नीचे की तरफ होते हुए अपना मुँह भतीजे की छूट पर टिका दिया हुए छूट के होंठों को अपने होंठो में भर कर चूसने लगे... रिमझिम की तो हालत ख़राब होने लगी बौर उसकी छूट पानी की नदिया बहाने lagi...par ये पोजीशन शायद फूपाजी के लिए थोड़ी असहज थी तो वो नीचे होकर अपनी पीठ पर लेट गए और रिमझिम दीदी के चूतड़ों के नीचे आ गए अब उनकी आँखों के सामने छूट थी जिसे फूपाजी ने रिमझिम के चूतड़ पकड़कर अपने मुँह पर रख लिए अब रिमझिम दीदी अपने चाचा के मुँह पर अपनी छूट रखकर बैठी थी जो उनकी छूट में अपनी जीभ चला रहे the...sath hi में दीदी आगे झुककर अपने पापा का लुंड चूस रही thi...bade फूपाजी तो सब कुछ भूल ककर आँखें बंद करके बस अपनी बेटी के मुँह में अपनर लुंड के एहसास का अनुभव कर रहे थे... उन्हें नहे पता था की ाएस पास क्या हो रहा hai...idhar विनीत से अपने पापा और ताऊजी को अकेले मज़े लेते और म्हणत करते हुए देखा नहीं गया और वो भी अपने पापा के शरीर के दोनों और पेअर रखकर आगे की और झुक गया और अपना मुँह रिमझिम दीदी के गांड के छेड़ से भिड़ा diya...jiska एहसास होते hi रिमझिम उछाल सी पड़ी पर फिर उसने. खुद को संभाला इधर विनीत धीरे से अपनी जीभ से रिमझिम दीदी की गांड के छेड़ को कुरेदने लगा... रिमझिम तो मज़े से दोहरी होती जा rahi...baap बीटा दोनों जुगलबंदी से रिमझिम दीदी को सुख पंहुचा रहे थे....

शायद hi कहीं ऐसा होता होगा की एक लड़की जिसकी कुछ दिन बाद शादी है वो अपने पापा का लुंड चूस रही है जबकि उसके चाचा उसकी छूट चाट रहे हैं और उसका चचेरा भाई उसकी गांड में अपनी जीभ अंदर बहार कर रहा hai...par रिमझिम के साथ ऐसा सच में हो रहा था.. अपनी गांड और छूट पर हो रहे हमलो से खुद को संभालती हुई रिमझिम अब भी अपने पापा के खिलोने से बड़े प्यार से खेल रही थी वहीं उसके पापा किसी और दुनिया में hi थे... और फिर रिमझिम दीदी ने बड़े फूपाजी के लुंड को चूसते हुए अपने हाथों से उनकी गोलियों को सहलाने lagi...bade फूपाजी ये महसूस करके खुद को संभाल न पाए और अपने चरम पर पहुंच gaye...unki कमर झटके खाने लगी और शरीर अकड़ने लगा... फिर कमर आगे की तरफ झटके खाने लगी जिससे लुंड बेटी के. मुँह में और अंदर तक घुस गया और फिर बड़े फूपाजी ने अपने रास की धार अपनी बेटी के मुँह में छोड़ दी.... रिमझिम पहले तो थोड़ा सा चौंक गयी अपने पापा की मलाई अपने मुँह में पाकर बूत फिर उसे अंदर गटकने लगी पर फूपाजी का रास इतना सारा था की उसके मुँह से बहकर बहार आने लगा... और उसके होंठों से होता हुआ नीचे बहने लगा





रिमझिम दीदी जितना पि सकती थी पि गयी और वहीं बड़े फूपाजी एक बार फिर पीछे की तरफ गिर गए... और आँखें बंद कर्ली पर एक हैरानी की बात ये थी की बड़े फूपाजी का लुंड झड़ने के बाद भी खड़ा था शायद बेटी के मुँह मैं झड़ने से इतने उत्तेजित हो गए थे ...वहीं ये एहसास होते hi की मैंने अपने पापा को झाड़ दिया और साथ hi उनका रास भी पि लिया जिस रास से मैं बानी हूँ वो ras...ye सोच कर रिमझिम बहुत उत्तेजित हो गयी साथ hi पीछे से हो रहे दोहरे हमले ने उसकी उत्तेजना को और बढ़ा दिया और रिमझिम की कमर झटके खाने लगी और अगले hi पल उसकी छूट से रास की धार बहने लगी जिसे फूपाजी अमृत समझ कर गटकने लगे... इधर विनीत की जीभ के चारो तरफ भी रिमझिम दीदी की गांड का छेड़ कास गया और उसे जकड लिए... रिमझिम दीदी भी झाड़ कर वही नीचे गिर गयी... थोड़ी देर तक कमरे में सब कुछ शांत रहा...

सब लोग एक दुसरे की तरफ देख रहे थे की अभी आगे क्या और फिर बड़े फूपाजी की आवाज़ आई जिसने कमरे में फैली ख़ामोशी को तोडा...

बड़े फूपाजी- रिम्मी बीटा ज़रा ऊपर उठ कर आ..

रिमझिम ने अपने पापा की आवाज़ सुनी और फिर धीरे से उठी और अपने पापा की जांघों पर हाथ रख कर उनके सामने कड़ी हो गयी.. फूपाजी ने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे अपने ऊपर की और खींच lia...aur वो अपने पापा के ऊपर गिर सी gayi...bade फूपाजी ने फिर बेटी के चेहरे को देखते हुए अपने होंठों को उसके होंठों से मिला दिया और अपने hi रास के स्वाद को बेटी के मुँह से चखने lage...wohin उनके चिपके होने की वजह से अब बड़े फूपाजी का लुंड दीदी की छूट पर रगड़ने लगा जिससे दोनों के बदन सिहरने lage..phir दोनों के होंठ अलग हुए तो बड़े फूपाजी ने एक एक कर के रिमझिम के दोनों पैरो को अपनी कमर के दोनों तरफ कर लिए अब रिमझिम अपने पापा की कमर पर बैठी थी... बड़े फूपाजी को वो पल याद आ गए जब वो छोटी थी और वो ऐसे hi अपने ऊपर बिठा कर उसे खिलते थे और आज वो जवान होकर बिलकुल नंगी उनके ऊपर बैठी है... रिमझिम भी भावुक सी होकर अपने पापा की आँखों में देख रही थी...

घर के बाकी लोग सब कुछ छोड़ कर बस इसी नज़ारे पर अपनी आँखें टिकाये हुए थे...

बड़े फूपाजी ने रिमझिम की आँखों में देखते हुए उसे कमर से पकड़ कर थोड़ा uthaya...wohin रिमझिम पापा का हाथ लगते hi फूल की तरह उठ गयी.. बड़े फूपाजी ने दुसरे हाथ से अपने लुंड को सीधा उपरकी तरफ खड़ा किआ और फिर रिमझिम की कमर से पकड़ कर थोड़ा नीचे kia...didi ने हाथ अपने पापा के सीने पर रख लिए और अपनी गांड को नीचे करने लगी और फिर बड़े फूपाजी का तना हुआ लुंड... रिमझिम के नीचे होने से उसकी छूट से टकरा गया... रिमझिम ने खुद को वहीं रोक lia...aur रिमझिम क्या सब कुछ वहीं रुक gaya...sabki साँसे जैसे वहीं अटक गयी... नज़ारे बिना झपके वहीं अटक गयी थी..

रिमझिम को जैसे hi अपनी छूट पर अपने पापा के लुंड का एहसास हुआ उसकी आँखें बंद हो गयी... रिमझिम दीदी के मुँह से aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापा निकल गयी... वहीं उसके पापा के ख्याल तो कहीं और hi चल रहे the...bade फूपाजी अपने लुंड को बेटी के छूट पर छूटे hi तड़प उठे उनकी आँखें बंद हो गयी और उनकी आँखों के सामने वो दृश्य आ गया जब उन्होंने पहली बार उसे गॉड में उठाया था.. कितनी छोटी और प्यारी सी थी वो बिलकुल नाज़ुक सी बद्र फूपाजी को दर लग रहा था की वो कहीं उसे पकड़ते हुए चोट न पहुचाडे और फिर फूपाजी के सामने रिमझिम के छोटे से बड़े होने के दृश्य किसी फिल्म की तरह चलने लगे और फिर अंत में उन्हें सामने उनके लुंड को अपनी छूट के द्वार पर टिकाये हुए नंगी बैठी हुई बेटी दिखी...

दोनों की नज़रें मिली ना बाप ने कुछ कहा और न बेटी ने बस आँखों का hi इशारा हुआ और बड़े फूपाजी का दूसरा हाथ भी रिमझिम की कमर पर आ गया और फिर रिमझिम दीदी नीचे की और वजन डालने लगी और बड़े फूपाजी के लुंड का सूपड़ा बेटी की छूट के होंठों को चिरत्ता हुआ अंदर घुस गया..

कमरे में मौजूद हर शख्स के मुँह से एक आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गयी... रिमझिम की आँखों में आंसू की बूंदे थी वहीं बड़े फूपाजी के चेहरे पर मुस्कराहट..

रिमझिम ने बड़े धीरे से कहा

रिम- पापाआआअह मुझे प्यार karo...apani बेटी की तरह नहीं एक औरत की tarah...aaj मुझे एक औरत का सुख लेना है पापा....

बड़े फूपाजी ने प्यार से उसके माथे को चूम लिए और फिर... उसे सर हिलाकर इशारा दिया.... और फिर कमरे में एक चीख गूँज गयी और अगले hi पल बड़े फूपाजी का पूरा लुंड रिमझिम दीदी की छूट में जड़ तक समाया हुआ था....

रिम- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापाआआअह हाआआआंनंन्न आ आपका लुंड आपकी बेटी की choooooooooot में पूरा घुस गया है... आअह्ह्ह्ह देखो पापा आपके बेटी की छोटी सी छूट ने पापा का लुंड पूरा समां लिए अपने अंदर अह्ह्ह्ह मा चची देखो नाआ....

रिमझिम ऐसे hi कुछ न कुछ बोले जा रही थी वहीं बड़े फूपाजी को ऐसा लग रहा था जैसे उनका शरीर की साडी जान उनके लुंड में है जो इस वक़्त उनकी बेटी की छूट में tha...wo बाकि शरीर को महसूस hi नहीं कर पा रहे the...bas इस वक़्त सिर्फ लुंड hi उनका अस्तित्वा था और वो पूरा बरती की छूट में था उसकी गर्मी से पिघल रहा tha....phir अचानक से बेटी की आवाज़ सुनकर वो होश में आये...

बड़े फूपाजी- रिम्मी beta.....meri betiiiiiiiiiiiiiiiii.... मेरे से ज़्यादा खुशनसीब बाप नहीं होगा कोई जो मुझे तेरे जैसी बेटी mili...aahhhhh कितनी गरम और कासी छूट है तेरी बेटी लग रहा है लुंड पिघल जायेगा अभी तेरी छूट में...

रिम- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापा अब अब इस कासी हुई चुत को छोड़ छोड़ कर भर दो अपने लुंड से... आअह्ह्ह पापा ह्म्म्मम्म्म्म

फूपाजी- आअह्ह्ह्ह betiiiiiiiiiiiiiiiii

रिम- मेरी शादी से पहले hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii सुहागरात मन लो पापाआआअह मेरे सअअअअअतः...

और रिमझिम की गांड अपने आप hi पापा के लुंड पर ऊपर नीचे होने लगी और उसकी आँखें बंद हो गयी और रिमझिम अपने पापा के सीने पर सर रखकर लेट गयी और कमर हिला हिला के छूट में लुंड लेने लगी... इधर रिमझिम के झटको की वजह से बद्र फूपाजी का जोश भी बाद गया और वो भी खुद को रोक नहीं पाए और नीचे से बेटी की छूट में धक्के लगाने lage...baap का लुंड बेटी की छूट में अंदर तक जाने laga...wohin बेटी की छूट भी पानी बहकर पापा के लुंड का स्वागत कर रही थी...





बाकि घरवालों के चेहरे पर भी एक ख़ुशी थी वहीं बड़ी बुआ की आँखों में ख़ुशी के आंसू थे... रिमझिम दीदी के चूतड़ ऊपर उठाते और फिर एक ठप्प की आवाज़ के साथ नीचे गिरते और लुंड पूरा छूट में समां जाता.... जिसके साथ hi रिमझिम दीदी के मुँह से अह्ह्ह्हह की सिसकी निकल जाती... वहीं बड़े फूपाजी तो जैसे जन्नत में थे अपनी बेटी को छोड़ kar...wo आराम से इस पूरे कार्य का मज़ा ले रहे थे अपने लुंड पर रिमझिम की छूट को रगड़ता महसूस karke...baki घरवाले भी बाप बेटी की इस कामुक लीला को देखकर उत्तेजित हो गए थे और अपने अपने अंगो को मसल रहे थे पर नज़र सभी की वही पर तिकी हुई थी... रिमझिम की आँखें अब भी बंद थी और चेहरा पापा के सीने पर था...

तभी बड़े फूपाजी की आँखें कमरे में अचानक से कुछ ढूंढने लगी और फिर मुझसे mili....bade फूपाजी ने इशारे से मुझसे कुछ पुछा और मैंने हाँ कर दिया दिया..

तो बड़े फूपाजी ने छोटे फूपाजी को धीरे से छोटे कहकर पुकारा और इशारा किआ... फूपाजी हैरान होकर बड़े फूपाजी की तरफ देखने लगे जैसे कन्फर्म करना छह रहे हो की क्या वो सही समझे हैं तो बड़े फूपाजी ने हाँ में सर हिलाकर फिर से राजा मंडी दे di....phir क्या था फूपाजी जल्दी से उठे और अपने लुंड को हाथ में पकड़कर उस पर थूकते हुए रिमझिम दीदी के पीछे और बड़े फूपाजी के पैरों के बीच जाकर खड़े हो गए बड़े फूपाजी ने रिमझिम दीदी के दोनों चूतड़ों को कास के थाम लिए एक पल के लिए जिससे दीदी का हिलना बंद हो गया और फिर फूपाजी ने अपने लुंड के टोपे को अपनी भतीजी की गांड के छेद पर लगाया और बिना किसी इंतज़ार के एक झटका diya....jisse उनके लुंड का टोपा दीदी की गांड के छेड़ में घुस गया....

सबके मुँह से एक चीख निकली पर सबसे तेज़ चीख रिमझिम की थी...

रिमझिम- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh mummmmmmmmmmmmmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy........ Marrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइइ मैं........

और रिमझिम ने तुरंत चेहरा घुमा कर देखा तो अपने चाचा को अपनी गांड के पीछे खड़ा पाया जिनका लुंड उसकी गांड में घुसा हुआ था.... रिमझिम ने बापिस अपना चेहरा आगे कर lia...aur उसकी आँखों से ाआंसु बाह रहे थे.... बड़ी बुआ को बेटी की थोड़ी फ़िक़र होने लगी...

बड़ी बुआ- रिम्मी के पापा छोड़ दो उसे दर्द हो रहा hai....Rimmi बीटा उठ जा tu....lalla निकालो अपना उसकी गांड से...

कुछ पल किसी ने कुछ जवाब नहीं दिया... पर कुछ पल बाद रिमझिम की आवाज़ आई- नहीं मुम्ममय मैं ठीक हूँ... चाचाजी और अंदर डालो...

रिमझिम की बात सुनकर सब हैरान हो गए वहीं चेहरे पर एक मुस्कान भी आ गयी...

बड़े फूपाजी ने तो प्यार से बेटी के होंठों को चूम लिए...

फूपाजी ने भी भतीजी की बात को माणत्व हुए हलके हलके धक्के लगाने शुरू कर diye...har धक्के के साथ रिमझिम के मुँह से सिसकारियां निकल रही थी.... और फिर कुछ पल की म्हणत के बाद फूपाजी का पूरा लुंड रिमझिम की गांड में था....





रिम- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh पापाआआअह हाआआआंनंन्न चाचा... अब दोनों मिलकर छोड़ो अपनी बेटी ko...aap दोनों ने hi मुझे हमेशः एक जैसा प्यार दिया है तो अब भी एक साथ वैसे hi choooooooooooooodo अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii kooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

फूपाजी- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh इतनी गरम और टाइट गाआआनंनंड्डड़ है betiiiiiiiiiiiiiiiii Teriiiiiiiiiiiiiiiiiii.... bhaiyaaaaaaaaaaaaaaa मैं तो धन्य हो गयाआआआआ aaapkaaaaaaaaaa भाई बनकर जो अआपने अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii को भी मेरे साथ बायंट लिआआआआआ...

बड़े फूपाजी- छोटे ये Teriiiiiiiiiiiiiiiiiii भी तो बेटी hai....jitna मेरा हक़ haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii उतना teraaaaaaaaaaa भी haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii तो साथ साथ hi इसे भोगेंगे अब...

रिम तो अब बहुत उत्तेजित और आक्रामक हो गयी थी और अब उससे रुकना मुश्किल हो रहा था

रिमझिम- अह्ह्ह्हह कब तक बाटें करते रहोगे दोनों छोड़ू भी ab......aaaaahhhhhhhhhh बेटी chodo....phaad दाहालो मेरी गांड और छूट को अपने लुंड से......

बड़े फूपाजी और फूपाजी के चेहरे के साथ साथ सभी के चेहरे पर दीदी की बेसब्री देख कर मुस्कान आ गयी....

वहीं दोनों भाइयों ने रिमझिम दीदी को छोड़ना चालू कर दिया और दोनों भाइयो ने बहुत जल्दी hi एक ले पकड़ ली और उसी ले में रिमझिम की छूट और गांड को कूटने लगे....

रिमझिम- हाँ पापा...... हाँ चाचा.... छोड़ो अपनी betiiiiiiiiiiiiiiiii kooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh mummmmmmmmmmmmmyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy देखो तुम्हारी betiiiiiiiiiiiiiiiii को दोनों मिलकर चुद रहे हैंण्ण्न....

बड़े फूपाजी- काआअश तुझे पहले छोड़ लिए होता betaaaaaaaaaaaaahhhh.... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh क्या गरम choooooooooot है तेरी.... गांड कैसी है छोटे.... रिम्मी की...

फूपाजी- बहुत कासी हुई है भैय्या ऐसा लग रहा है जैसे मैं गरम मख्खन में अपना लुंड डाल रहा hun...mera लुंड टूटकर इसी में गिर जायेगा..

रिमझिम- ाःह्ह्पपप

और फिर अचानक से रिमझिम दीदी की आवाज़ बंद हो गयी और इसकी वजह थी विनीत जो की बीएड के बगल में खड़ा था अपने ताऊ जी के सर की तरफ और उसने अपना लुंड दीदी के मुँह में घुसेड़ दिया था....

और दीदी भी बिना किसी झिझक के उसे मुँह में लेकर चूसने lagi....to अब नज़ारा कुछ यूँ था की दीदी के तीनो छेदों में एक एक लुंड था और वो तीनो hi उसके परिवार के थे....

रिमझिम दीदी पूरी तरह से लुंड से भरी हुई थी...





और अब बड़े फूपाजी... और फूपाजी भी काफी गरम हो चुके थे और दोनों hi काफी तेज़ी के साथ चुदाई कर रहे थे... फूपाजी का लुंड अपनी बेटी की छूट को अंदर तक बजा रहा था वहीं फूपाजी भतीजी की टाइट गांड को खोलने में लगे हुए थे विमीत देख देखर इतना उत्तेजित हो गया था की अब उसने रिमझिम के चेहरे को पकड़ रखा था और अपनी कामत को आगे पीछे करके उसका मुँह छोड़ रहा था...

रिमझिम के मुँह से घ्हुउउउउउउ हूउउउउउ की आवाज़ निकल रही थी वहीं उसके चाचा और पापा के लुंड उसे नीचे से पागल कर रहे थे और रिमझिम भी इस तिहरे हमले को झेल नहीं पाई और झड़ने लगी अपने पापा के लुंड पर.... पर तीनो मर्दो बिना कोई तरस खाये उसे छोड़ते. रहे थोड़ी देर tak...phir उसके बाद फूपाजी ने अपना लुंड गांड से निकला और वहीं विनीत ने मुँह से और रिमझिम को खड़ा किआ जिससे बड़े फूपाजी का लुंड भी उसकी छूट से निकल गया... रिमझिम भी लड़खड़ाती हुई कड़ी हुई ...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी और अपने सुझाव भी दें... शुक्रिया
 
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