Incest Kamuk Alka - Page 12 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अपडेट-51

अलका के कहानी ने सारिका पे वो असर कर दिया था की सारिका बिलकुल बेकाबू हो जाती है और अपनी छोटी बहन अलका पे टूट पड़ती hai…khan अलका अपना दुःख बाँट रही थी अपनी बहन को पर उसका दुःख इतना कामुक निकला की उसकी बहन hi उसे नंगा कर के अपने आगोश में लीलती है और ले भी क्यों न अलका जैसी कामुक औरत जब सामने हो तो कोई कैसे खुद को रोक सकता है उसका खुद का सागा बीटा hi अपने आप को नहीं रोक पता…

अगर सारिका की बात करे तो देखा जाये तो अगले कुछ महीने में hi उसकी ज़िन्दगी बिलकुल पलट गयी है खान वो शर्मीली औरत पहले कारन के जाल में फांसी और इस चुदाई के खेल में इतना आगे निकल गयी की पहले अपने सेज भांजे और अब उसकी माँ और अपनी छोटी बहन अलका के साथ सेक्स करने पे मजबूर हो गयी है…

दोनों बहने पे वासना कुछ कदर स्वर हो गया था की दोनों एक दूसरे को पागलो की तरह चूस रही थी दोनों की सनसे उखड़ने लगती है और जब दोनों एक दूसरे से एक लम्बी चुम्बन के बाद अलग होते है तो उनके मुँह से लार टपकने लगता है






दोनों की नज़रे एक बार से आपस में टकराती है और बड़ी प्यासी मजबूर और कामुक नज़रो से एक दूसरे क देखती है… दोनों तेज़ तेज़ हाफ रही थी और अभी ठीक से सांसो पे काबू आया भी नहीं था की सारिका अलका के ऊपर चढ़ के उसे दोबारा से किश करने लगती है





आज इनदोनो घोडियो को एक तगड़े मोठे लुंड की जरुरत है पर वो लुंड अभी इनसे काफी दूर है और इनके अंदर की आग इतनी भड़क चुकी है है की इनसे उतना इंतजार नहीं होने वाला इसलिए ये आज एक दूसरे को शांत करने की पुरजोर कोशिश में लगी हुई है..

सारिका- अलका काश मैं विशाल होती तुझे बहुत छोड़ती कसम से तू बहुत कामुक है पहले मैंने तुझे इस नज़र से देखा hi नै और बी तू मुझे एक रंडी लगने लगी है

अलका- टब hi बड़ी छुपी रुस्तम निकली सरु bête का लुंड ले के बड़ी सीधी सधी बानी फिरती है साली चनर






और दोनों के होंठ एक बार फिर से आपस में मिल जाते hai..alka सारिका के गोदी में बैठ गयी थी और दोनों की छूट आपस में घिसने लगती है

सारिका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh तू बहुत किस्मत वाली है अलका हर तरफ लुंड की बारिश हो रही तेरे पे यह मेरे ज़िदगी में अब जा के विशाल आया है तो असली चुदाई का सुच जान पायी हूँ..

Alka—han छोड़ता तो बड़ी मस्त है विशु बिलकुल अंदर तक झकझोर देता है

सारिका- है नाब तो जब भी टाइम मिलेगा मैं विशाल के सामने नंगी हो जाया करुँगी

अलका- हो जाया कर उसका लुंड भी हम्रेसा तैयार hi रहता है छूट में घुसने के लिए…

इतना कह के अलका सारिका को लिटा देती है और उसके छूट पे अपनी छूट टिका के उसपे अपनी कमर आगे पीछे करते हुवे छूट घिसने लगती है..






सारिका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh अलका क्या कर रही है बहुत मजा आ रहा है uuuuuuffffffffffff जोर जोर से रगड़ अपनी छूट मेर छूट से uuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhh

Alka-lagta है तुझे भी दो दो लुंड चाइये

सारिका- हाँ यार वैसे इतने दिनों से दो लुंड से hi चुद रहे है हम दोनों बहने …

अलका- हाँ ये तो है

सारिका- हाय लका काश मैं तेरी गांड मार पति उफ्फ्फफ्फ्फ़ बहुत कासी हुई गांड है तेरी एक डैम भरा भरा

सारिका के इस के इस बात को सुन के अलका उठती है और अपनी दोनों चूतड़ों कको फैलते हुवे सारिका को दिखती है और कहती है






अब खान से कासी हुई बची है मेरी gand…ye देख विशाल ने छोड़ छोड़ के इस सुराख़ का सुरनग बना दिया है और अब तेरी नज़र भी मेरी गांड पर hi hai…lekin सरु तू मार नहीं सकती है तो क्या चाट तो सकती है मुझे बहुत ाचा लगता है जब कोई मेरी गांड छत्ता है आजा मेरी रंडी बहन आज तू मेरे गंद को चाट ले इतना कह के अलका घोड़ी बनते हुवे गांड सारिका की तरफ उठा देती है..





सारिका भी बिना समय गवाए अलका के मखमली गांड की तरफ बढ़ती है और अपने मुँह को उसके गांड के भूरे सुराख़ के करीब ले जा के पहले उसे सूंघती है फिर उसपे अपनी उंगलिया फिरने लगती है अलका की गांड आईटीआई चुदाई के बाद भी सारिका को बहुत टाइट महसूस हो रही थी सारिका जैसी औरत की उंगलिया भी अलका कैग एंड में बड़े मुश्किल से अपनी जगह बना पा रही थी जिसका एक हल्का और मीठा दर्द अलका को भी होता…





सारिका बड़े प्यार से अलका कैग एंड में ऊँगली डालती है फिर निकल के अपने मुँह में डालती है फिर अलका कैग एंड में डालती है और फिर निकल के अपने मुँह में दाल के चुस्ती है वो ऐसे दाल और निकल रही थी मनो अलका की गांड नन्ही कोई मटका कुल्फी हो जिसमे सारिका ऊंगलीनुमा चमचा दाल क आइसक्रीम निकल और चाट रही थी..

अलका भी मदहोश हुवे अपनी बहन के हरकतों से पागल हो रही थी वो सारिका के सर को अपने गांड पे दबा लेती है और अचे से चूस रंडी कह के उसका मुँह पे अपनी गांड को धकेलने लगती है…






सारिका सच में hi अलका कैग एंड में ऐसे खो गयी थी की मनो उसके पास लुंड होता तो सच में अलका को छोड़ देती और उसकी गांड जोर marti..sarika जो की बड़े मुश्किल से अलका कैग एंड में ऊँगली दाल पा रही थी वो कुछ सोच में पद जाती है जिस से अलका पूछती है

अलका- क्या हुआ का खो गयी???

सारिका- यारे क बात पुछु सच सच बताना

अलका- हाँ पूछ तुझसे अब क्या झूट बोलूंगी तू तो मेरे सरे राज़ जान गयी है अब बचा hi क्या है तुझसे छुपाने को..

सारिका- हाँ ये बात भी सही है

अलका- तो पूछ क्या पूछ रही थी….

सारिका- यार तू इतने दिनों से चुद रही है तेरी गांड भी विशाल और कारन ने खूब मरी है और छूट में भी एक साथ दो दो लुंड दाल दिया जिस से तू मरे हालत में चली गयी थी…

अलका- हाँ तो

सारिका- तो तेरी छूट या गांड देख के लगता नहीं तूने इतना वाइल्ड से किया है ये तो अब भी बहुत टाइट और वर्जिन के जैसा है… कोई खास इलाज य दवा लेती है क्या तू??? अगर हाँ तो मुझे भी बता दे..






अलका- देख सरु मैं तुझसे झूट नहीं कहूँगी और सायद तुझे मेरे बातो पे विस्वास न हो पर मैं सच कहती हु ये मुझे भी नहीं समझ आ रहा है की मेरे बॉडी में कैसे चंगेस आ रहे है. मैं पहले से ज्यादा यंग और छुडासी फील करने लगी हु जितनी भी बेरहमी से चुदाई हो थोड़े टाइम में मेरी छूट और गांड वापस से टाइट हो जाती है… जो की मुझे भी समझ नहीं आता और यही बात विशाल और उसके पापा ने भी कहा है उन्हें लगता है मई कोई सपकल पिल या क्रीम उसे करती हु पर देख इतने दिनों से तेरे सामने तेरे hi घर में हु और ऑलमोस्ट नंगी hi रखते है ये दोनों लड़के हमे

सारिका- हेंक यह तो तू सही रही है पर अगर ऐसा है तो ये तो अछि बात है ये वरदान समझ जो तुझे मिला hai..isliye सभी तेरे गांड के डीएनए रहते है… और ये कह के फिर से अपना मुँह अलका कैग एंड में लगा देती है..






अलका- उनलोगो में तो अब टब hi आ गयी मेरी बहन…

सारिका- हाँ क्यों नहीं तेरी गांड है hi इतनी जानलेवा uuuuffffffffffff

अलका- बाटे चोर अब और नहीं बर्दाश्त हो रहा मेरे से रुक मैं hi कुछ करती हूत ेरे से नहीं हो पायेगा

इतना कह के अलका वापस से सारिका को लिटा के उसपे अपने छूट रगड़ने लगती है दोनों की छूट इतनी गरम हो गयी थी एक दो बार घिसने मात्रा से अलका और सारिका दोनों के छूट से पेशाब और उसके कामर्स का मिलाजुला रूप तेज़ धार के साथ बहने लगता है






सारिका- aaaaaaaaaahhhhhhhhh अलका मई गयी uuuuuuuuuuffffffffffffffff तू सच में रंडी है बहनचोद

अलका- और तू बड़ी रंडी साली चिनार कुटिया गस्ती कही की

और फिर अलका सारिका के मुँह पे बैठ के अपने मूत की धार से उसके मुँह को भरने लगती है






सारिका भी अपने छूट को सहलाते हुवे उसके अंदर से गर्मागर्म धार बहाये जा रही थी और साथ अलका के छूट से निकल रहे अमृत को घुट घुट पिए जा रही थी पेशाब की धार रुकते hi दोनों एक बार फिर से आमने सामने बैठ जाती है और एक दूसरे को वही भूखी और खा जाने वाले नज़रो से घूरे जा रही थी जो इस बात का संकेत था की दोनों की प्यास अभी शांत नहीं हुई है…

फिर सारिका आगे बढ़ते हुवे अलका के बूब्स को आधा से ज्यादा अपनी मुंह मैं लेकर चूसने लगती है, और धीरे धीरे चुस्ती हुई उनकी अलका की गोल गहरी नाभि और फिर उसकी छूट तक पहुँच जाती है, सारिका एक बार फिर से अलका के क्लीन शेव छूट की महक को सूंघने लगती है






अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सरु खा जा मेरी बहन uuuuuuuuffffffffff बहुत तंग करती है ये मुझे…

सारिका भी अलका के छूट को किश करते हुवे उसमे जुबान दाल के चूसते हुवे फिर उसमे ऊँगली दाल कैग ह्यूमेन लगती है..

अलका अब मदहोशी में आंखे बंद करने लगती है…. की सरका की नज़र अलका के सुर्ख गुलाबी होंठो पे पड़ती है आज अलका के हुस्न का जादू उसके सगी बहन पे चल गया था जिस बेचारी को समझ नहीं आ रहा था की वो किसे प्यार करे और किसे चोदे ….

कभी उसे अलका की गांड आकर्षित करती कभी उसकी गोल गहरी नाभि तो कभी उसकी छूट और अभी उसके छूट का साद चखा hi था की उसके होंठ सारिका को अपनी और खींचने लगती है और सारिका भी मनो सम्मोहन के जाल में फस्ती हुई अलका के होंठो ककी और बढ़ती है और उसे छुमने लगती है…

और अभी चूमना सुरु hi किया था की अलका उसे कुछ बुदबुदाते हुवे कहती है जिसे सुन के सारिका हस्ती है और फिर सारिका अलका के मुँह में ढेर सारा थूक थूक देती है जिसका स्वागत अलका मुँह खोल के करती है..






वो थूक सिद्ध अलका के जुबान पे गिरती है जिसे अलका जुबान बहार निकल लेती है और सारिका अपने hi थूक से साणे अलका के जुबान को मुँह में बाहर के चूसने लगती है…

एक औरत जो हलकी से गंदगी बर्दाश्त नहीं करती वो वासना के नशे में इतना पागल हो जाती है की थूक तक निगलने लगती है






अलका- सरु छूट की कुलबुलाहट मुझे पागल कर रही थी और ये शांत तभी हो पायेगा जब इसमें कोई लुंड जायेगा और मेरी एक दमदार चुदाई होगी..

Sarika-yhi हाल मेरा भी हो रहा है अलका पर क्या करे हम दोनों का जो लुंड है वो तो कॉलेज गया हुआ है और जाने कब आएगा….

दोनों बहनो पर चुदाई की खुमारी चने लगी थी छूट का पानी पेशाब के रूप में रह रह के बह रहा था और रुकने का नाम नहीं ले रहा था…






इस बार सारिका अलका में मुँह पे पेशाब करने लगती जिसे अलका बड़े hi आराम से मुँह खोल के पिने लग जाती है… चुदाई की तड़प में दोनों रंडियो को समझ hi नहीं आ रहा था की इस आग को कैसे शांत करे…





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अलका का मुँह सारिका के पेशाब से पूरा भर जाता है कुछ बुँदे उसकी चाय से होते हुवे जमीं पे गिर जाती है और कुछ वो पि जाती है और थोड़े से पेशाब को वो अपने मुँह में भर के उठती है और सारिका के मुँह में उगलने लगती है…





किस्मत भी क्या चीज होती है जिस दो कामुक बदन को भोगने के लिए पूरा दुनिया तैयार है आज वो छोड़ना छह रही है पर कोई उसे छोड़ने वाला नहीं hai…dono बहने आपसे में एक दूसरे को संतुष्ट करने की नाकाम कोशिश कर रही थी पर ये कोशिशे इनके आग को और भड़काने का काम कर रही थी…
 
अपडेट-52



देखते hi देखते शाम हो चुकी थी और विहल एंड कारन भी कॉलेज से घर आ चुके थे दोनों घर आते hi अपनी माँ को ढूंढने लगते है पर वो उन्हें कही नहीं दिखती.. तभी कही न मिलने पे कारन और विशाल सारिका के कमरे में जाते है जहां वो नारा दीखता है जिसे देखते hi दोनों के पेंट के अंदर भूचाल आ जाता है…









दोनों देखते है की उनकी मई ीक दूसरे से चिपक के बिलकुल नंगी सोई हुई है जिसे देख के उन्हें ये अंदाज़ा लगते देर न लगी की उनके गैरमौजूदगी में यहां क्या खेल खेला गया है…

कारन और विशाल दोनों एक बार को एकदूसरे की तारा देखते है और फिर कमरे से बहार आ जाते है यानि अब वो दोनों करा के कमरे में बैठ के दोनों के जागने का इंतजार कर रहे थे..

इधर सारिका और अलका का इस तरह पूर्ण नग्न अवस्था में सोना कोई आश्चर्य चकित करने वाली बात नहीं थी आखिर अब इन चारो के बिच छुपा hi क्या था और क्या hi छुपाएँगी ये दोनों अपने बेटो से उल्टा इन्हे टी वैसे भी सुबह से लुंड की प्यास लगी थी अगर नंगा देख भी लिया तो ाचा hi है एक तगड़ी चुदाई मिल जाएगी… खैर काफी समय बीत जाने के बाद दोनों जगती है तो पाती है की अँधेरा हो गया है वो और वो दोनों वासना के नशे में नंगी hi सो गयी थी… फिर दोनों कपडे पहन के बहार आती है तो कारन के रूम से दोनों भाइयो की आवाज़ सुन के समझ जाती है की दोनों घर आ चुके है और दोनों ने जरूर उन्हें नंगा देख बी लिया होगा पर खैर अब इस बात की किसे परवाह थी दोनों बहने डिनर बनाने में लग जाती है और फिर अलका दोनों को बुलाने उसके कमरे में जाती है की तभी कारन अलका को चरते हुवे कहता है..

कारन- या बात है मासी आज कल दोनों बहने बहुत एन्जॉय कर रही हो हमे तो भूल hi गयी..

अलका- क्या करू तेरी माँ है hi इतनी गरम और कामुक की मैं उसे मौका देखते hi उसपे टूट पड़ी thi.aur तुम्हारे आने तक का वेट नहीं हो पाया मेरे से ..

कारन- अब तो आ गया हूँ न तो अब कुछ तरय करे…

अलका- uuuuuuuuuuummmm सोचेंगे पर उस से पहले चलके डिनर कर लो तुम दोनों खाओगे नहीं तो म्हणत कैसे करोगे…?









इतना कह के अलका कमरे से जाने लगती है पीछे से उसकी मटकती गांड देख दोनों के दिल की धड़कने बढ़ने लगती है मनो उनके मन में चल रहा हो की डिनर में आज इसे hi खाया जाये तो कैसा रहेगा.. आखिर कर कारन से अलका के गांड को देख के अपने आप पर काबू नहीं रह पता और वो अलका को खसिह के उसे किश करने लग जाता है…









अलका जिसकी छूट और बदन सुबह से hi आग की बत्ती की तरह जल रहा था उसपे कारन के होंठो के स्पर्श मात्रा से मनो उसे वो एहसास मिलता है जैसे सूखे बंजर जमीं पे बारिश की पहली बून्द गिरी हो.. अगर डिनर का वक़्त न हो रहा होता तो सईद वो खुद को सौंप देती और अपनी तसल्ली से चुदाई करवाती लेकिन बहार उसकी बहन खाने पे वेट कर रही थी और अंदर उसका बीटा उसे चूमते हुवे गॉड में उठा के बीएड पे लिटा देता है और उसे नंगा करने लग जाता है…







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सारिका जो काफी देर से टेबल पे खाना लगा के तीनो के आने का इंतजार कर रही थी पर आधे घंटे से ज्यादा बीत जाने पर भी तीनो के आने पर वोट क बार खुद उन्हें बुलाने के लिए कारन के कमरे की तरफ बढ़ने लगती hai..aur जैसे ह वो कमरे का दरवाजा खोलती है अंदर का नजारा देख उसके छूट में एक बार फिर चीटिया रेंगना सुरु कर देती है.. वो देखती है की उसकी बहन अलका उसके bête और भांजे के बिच फांसी हुई है और दनो मिल के उसे छोड़ने में बिजी थे…









सारिका- अलका तुम इन्हे कहने के लिए बुलाने आयी थी और यहां ये सब सुरु कर दिया बंद करो ये सब और पहले चाक इ खाना खा लो..

अलका कुछ जवाब देने की कोषसिंह तो करती है पर विशाल उसके मुँह की गहराई तक अपना लुंड पेल देता है वो बेचारी छह क भी कुछ नहीं बोल पति..

विशाल- मासी डिनर से पहले एक छोटा सा राउंड हो जाये आप भी आ जाओ..

सारिका- no विशु तुम तीनो बहार आओ और खाना खाओ पीला खाना ठंडा हो रहा है..

कारन- तेरी छूट तो गरम है न माँ आज तेरी छूट क ेरस में रोटियां डुबो कर खाएंगे..

जिस आग में अलका जल रही थी उसी आग में सारिका भी तो जल रही थी आखिर उसे भी तो सुबह से एक लुंड की तलाश थी.. और इस से पहले की वो कोई जवाब दे पति कारन उसे उठा के बीएड पे लता है और घोड़ बना के पीछे से लुंड पेल देता है..









अब दृश्य कुछ ऐसा था की कारन विशाल की माँ को छोड़ रहा था और विशाल कारन की माँ को और दोनों बहने एक दूसरे को चूमने चाटने लगती है..

देखते hi देखते चुदाई का तांडव शुरू हो चुक्का था जो सईद hi सुबह होने से पहले रुकने वाला था.. अब पेट की आग की किसी को पाहि पड़ी थी क्यूंकि उस से भी बड़ी आग तह छूट और लुंड की आग जो एक लम्बे चुदाई से hi शांत होने वाला था और जिस खेल की सुरुवात कारन ने कर दी थी…

इसी तरह दोनों अपनी अपनी माओ को बदल बदल के पूरी रात छोड़ते है….









रात भर में दोनों कामदेविया जिसके छूट सुबह से hi तड़प रही थी इतना पानी छोर चुकी थी की पूरा गद्दा चादर उनके पानी से सं चुक्का था कमरे की खुशबु अब उनके कामर्स के खुसबू में बदल चुकी और गहरी और लम्बी चुदाई के बाद चारो थक के सो जाते है सुबह जब आँख खुलती है तो विशाल और अलका के जाने का समय हो गया था ो आये तो थे कारन के बड़ी पर लेकिन चुदाई का जो खेल सुरु हो गया उस खेल खेल में ये कई दिनों तक यही रुक गए थे लेकिन जैसा की आप सभी को याद होगा अलका के ननद के bêti की शादी है जिसमे इन्हे गाओं निकलना था और शादी के लिए निकलने से पहले दोनों माँ bête को कुछ शॉपिंग भी करनी थी और इस वजह से दोनों सारिका और कारन से विदा ले के अपने घर को निकल पड़ते है…

कारन के घर पे अलका और विशाल के बिच कुछ खास बातचीत नहीं हो पाती थी क्युकी वह कोई बात hi नै करता था सिर्फ चुदाई में मशगूल रहा करते थे.. घर आने के दौरान विशाल अलका की चुटकी लेते हुवे कहता है..

विशाल- माँ तुम्हारा 3सम का प्लान पापा ने बनाया था पर तेरी छूट तेरे बहन के bête ने मार ली…

alka—aur मेरा बीटा मेरी बहन की छूट मरने के लिए अपनी माँ छुड़वा दिया…

विशाल- पर माँ विशाल तो बता रहा था की तुम पहले भी उसका लुंड ले क्युकी हो…

विशाल की बात सुन के अलका को समझ आ जाता है की कारन ने उसे सब बता दिया होगा वो अपने आप पर शर्मिंद होने लगती है उसकी नज़रे निचे झुक जाती है की तभी विशाल फिर से बोल पड़ता है

विशाल- कोई बात नहीं माँ ये आपकी लाइफ है आप जैसे चाहो एन्जॉय करो मैं जज नहीं कर रहा आपको..

अलका- विशु ये सच है की विशाल ने मुझे पहले भी छोड़ा है लेकिन वो सीटुएशन्स hi कुछ ऐसा था की bête मैं तुझे कैसे समझौ…

विशाल अलका के चेहरे पे मायूसी साफ़ देख पा रहा था इसलिए वो मज़ाकिया अंदाज़ इ बोल पड़ता है..

विशाल- वैसे भी माँ तू hi हमेसा कहती थी तेरे सामने किसी से चुद जाउंगी और तू चुद भी गयी.. मैं सिर्फ कहता था लेकन अब तू सच में रंडी बन गयी है और मैं रंडी की औलाद..

अलका- खुद के लिए रंडी की औलाद सुन के है पड़ती है…

विशाल- वैसे माँ आप चीज hi ऐसी हो की कोई भी खुद को ज्यादा रोक नहीं पता… और मुझे और आपको हम दोनोको पता है की आप के अंदर आग कितनी है…

अलका- तो क्या तुझे बुरा नै लगा मेरी च्युत में किसी और का लुंड का सुन के

विशाल- लगा तो था लेकिन ये आपकी लाइफ है और मई चाहता हु आप खुल के एन्जॉय करो…

इसी तरह बातचीत करते हुवे दोनों घर पहुंच जाते है जहां थोड़ा समय बिताने के बाद ये मॉल जाते है शॉपिंग एंड डिनर कर के वापस घर आ कर पैकिंग में लग जाते है…

ट्रैन अगले दिन सुबह किट hi इस्पे विशाल बोलता है माँ हम गाओं जा रहे है फिर इतने दिनों तक तेरी छूट नहीं मिलेगी तो आज रात एक बढ़िया सा सेक्स हो jaye…jispe अलका बोलती है..

अलका- तुझसे ये किसने खा वह तुझे छूट नहीं मिलेगी वहां छूट का पूरा भंडारा लगा होगा अब ये तेरे ऊपर है किट ु कितनो का भोग लगा पायेगा…

विशाल- क्या सह में???

अलका विशाल को आंख मार के हेंक ा इशारा करती है जिसे सुन का विशाल के लुंड अंगड़ाई लेना सुरु कर देता है…

अगले दिन सुबह होती है और दोनों को दिल्ली से देहरादून जाना था और आगे वहां से गाओं के लिए घर से कोई लेने आने वाला था ..दोनों सुबह दिल्ली स्टेशन पे पहुंच जाते है जहां इनकी ट्रैन 6:30 की थी और वो इन्हे दोपहर के 1 बजे तक देहरादून पहुंचने वाली thi…train प्लेटफार्म पे आती है और दोनों अपने ट्रैन में बैठ जाते है और गाओं जाने की सफर सुरु हो जाती है..

कोई 1 बजे के अराउंड ये लोग देहरादून जन पे पहुंच जाते है जहां पहले से hi एक लम्बा मुस्टंडा आदमी इनका वेट कर रहा था ये आदमी कोई और नहीं बल्कि कामिनी का पति अशोक का जीजा यानि विशाल का फूफा कमल था और उनके साथ में था उनका बीटा राघव…






कमल







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राघव

अलका और विशाल स्टेशन से बहार पार्किन की तरफ चल पड़ती है तभी बहार स्टैंड पे खड़े राघव की नज़र एक बेहद बाला की खूबसूरत औरत पे पड़ती है उसके चेहरे की सुंदरता की आगे मनो पूरा देहरादून फीका लगने लगा था और सूंदर होने के साथ साथ उसका शारीरिक बनावट जो किसी को भी आकर्षित कर ले गोलसुडोल चुकी उसपे सपाट लेकिन हल्का चर्बीदार पेट और उसपे उसके कर्व्स उसके गांड और जांघो के कटाव को साड़ी के ऊपर से भी महसूस किया जा सकता था राघव की नजरे उसी औरत पे टिक जाती है की तभी उसके सर पे तपली बजाते हुवे कमल बोलता ममी के पेअर छू bête खा खो गया.. जी हाँ वो औरत कोई और नहीं अलका hi थी जिसके हुस्न से देहि मेड्रिड वाले तो घायल हुवे hi थे आज उसके नन्द का बीटा राघव भी पहली नज़र में hi घायल ह चुक्का था…








अलका ने इस वक़्त लाइट ब्लू कलर की साड़ी और उसपे रेड स्लीवलेस ब्लॉउस पहन रखा था वलयसे इतना डीप था की उसकी गहरी घटिया साफ़ झलक रही थी और उन घातिओ को देख राघव के पंत में भी हलचल होने लगा था… अभी मिलना जुलना कर के सामान गाड़ी में रखता है और फिर चारो घर की तरफ निकल पड़ते है घर पहाडिओ पे कोई 2 हर के ड्राइव पर था असते भर में सफर और शादी की बातचीत होने लगती है और देखते hi देखते सभी घर पहुंच जाते है जहां उनका स्वागत करने के लिए पहले से hi विशाल की बुआ कामिनी खड़ी थी….









अगर अलका कामदेवी थी तो कामिनी भी किसी अप्सरा से काम नहीं थी जिसे देखते hi विशाल का वही हाल होता है जो थोड़ी देर पहले राघव का हुआ था.. कामिनी जो चलती फिरती एक आग थी उसका शरीर तो कामुक था hi लेकिन उसका पहनावा आग में घी पेट्रोल का काम करता था..

साड़ी वो हमेसा से इतने लौ पे पहनती है झा से उसकी छूट के हलके हलके रोवे जैसी बाल भी दिख जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी और अगर आप आगे से देख के घायल हुवे हो तो आगे आपको सावधानी बरतने की बहुत जरुरत है.. जी हाँ जहां आगे से उसकी छूट के ऊपर की लकीरे दिखती है तो वही अगर पीछे से देखो तो









उसका ब्लाउज जो हमेसा hi बैकलेस होता है और साड़ी इतने निचे की उसके चूतड़ों के बिच बानी घाटियों को देख उनमे डुबकी लगाने का जी कर जाये….

और अगर आप कामिनी के हुस्न के माजल में फास गए हो तो जरा संभल के क्युकी यह कामिनी से भी बड़ी बड़ी जदूगरनिया है जिनसे मई आप सभी को मिलवाता चालू…









ये है रीमा विशाल की चची









ये है रीमा का पति अरविन्द









ये है आलिया कमल के बड़े bête सुमित की पत्नी…









ये है आलिया का पति और कमल का बड़ा बीटा सुमित







ये है सुरभि रीमा की बेटी और विशाल की कजिन सिस्टर





ये है नम्रता जिसकी शादी है यानि कमल और कामिनी की बेटी और मुझे नहीं लगता इसका विशाल से क्या रिश्ता है ये बताने की ज़रूरत पड़ेगी..









ये है रागिनी अशोक के बड़े भाई दिनेश की बीवी और विशाल की ताई…







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ये है दिनेश अशोक का बड़ा भाई











और ये है रूचि रागिनी और दिनेश की बेटी

बाकि के चर्स्टर कहानी में जरुरत के हिसाब से जुड़ते चले जायेगे...

सब से मिलाने जुलने के बाद राघव अलका और विशाल को उसका कमरा दिखा देता है पहले तो कमल दोनों को अलग अलग कमरा देने को कहता है पर अलका hi मन करते हुवे कहत है की बाकि मेहमानो के लिए भी जरूरत पडेग सो हम दोनों माँ बेटे एक कमरे में रह लेंगे और यदि कुछ वैसा जरूरत पड़ा तब का तब देख लिया जायेगा.. अलका का ये सुझाव बाकिओ को सही लगा और कोई भी बिना जिद किये दोनों को एक कमरे में रुकने का कह देते है..

अंदर ात hi विशाल अलका को पकड़ के एक्ससिटेड होते हुवे चिल्ला पड़ता है..

विशाल- ooohhhhhhhhhhh मा ये क्या है सब एक से बढ़ के एक तुमने बिलकुल सही खा था... और ये कामिनी बुआ उफ्फफ्फ्फ़ ये तो पताका है..

अलका- धीरे बोल बेटे शादी का घर है कोई सुन लेगा

विशाल- हाँ श्री श्री वैसे माँ अब मैं समझ गया उस दिन आप पापा को कमी बुआ ा नाम ले के क्यों तैसे कर रहे the...par क्या आपने जो उस दिन खा था वो सच है???

विशाल के इस सवाल पे अलका मुस्कुरा देती है उसे पता था की जोश जोश में उसने उस दिन कुछ ऐसा कह दिया था जो उसे नहीं कहना था अगर तार कामिनी का खुलेगा तो उस तार के दूसरे चोर पे विशाल को अलका भी जरूर मिलेगी .. पर अलका बात को सँभालते हुवे कहती है..

अलका- अब यह आ hi गया है तो यहां बहुत से राज़ भी दफ़न है आगा ले पता जो लगा सके वैसे एक क्लू तो तुझे मुझसे मिल hi गया है... वैसे तेरी बुआ कामिनी बहुत चूड़ाकड है अगर तूने उसे वाश में कर लिया तो तेरी लाटरी निका जाएगी...
 
वहन ी वास् आउट ऑफ़ थे कंट्री फॉर सम रीज़न एंड अपडेट नहीं लिख पा रहा था तब मेरे बहुत से रीडर्स के कमैंट्स आ रहे थे फॉर अपडेट और ये भी कमैंट्स आ रहे थे की कहानी बंद हो गयी और जब अपने बिजी सचेडूले में से थोड़ा टाइम निकल के वापस से लिखने लगा हु तो लोग सिर्फ पढ़ के निकल जा रहे hai..aise लोगो के लिए क्या टाइम वास्ते करू इस से ाचा है अपने काम पे फोकस करू और कहानी यही रोक दू 🙏

अब से रेगुलर अपडेट बंद जब टाइम होगा लिखूंगा नहीं होगा तो नहीं... िनशॉर्टस जैसा रेस्पोंद आप सब डोज वैसा मेरे साइड से मिलेगा

थैंक यू टिल नाउ
 
Episode-53





तो क्या इसका मतलब मैं आपको माँ से ज्यादा मजा दूंगी.....???

कहानी में एंट्री हो चुकी है एक हुस्न ऐडा और कामुकता से भरपूर नायिका की जो आने वाले दिनों में कई हाडे पार कर सकती है....
 
Episode-53

घर आने के बाद सबसे मिलने जुलने और नाश्ता पाई कर के विशाल और अलका अपने कमरे में चले जाते है क्यूंकि गाओं आने के लिए उन्हें बहुत सुबह hi निकलना पड़ा था और लम्बे पहाड़ी सफर के बाद दोनों थकान से सो जाते है… अब आगे…

अलका और विशाल दोनों अपने कमरे में सोये थे की तभी अलका की नींद बहार हो रहे शोर से खुल जाती है जहां एक औरत किसी को काफी देर से दन्त रही थी और साणे से किसी लड़की की प्रतिकिर्या की आवाज़े आती है और बिच बिच में एक मर्द भी रह रह के लड़की के डिफेंड में कुछ बोलता है… अलका उठ के बहार नकलने लगती है की तभी उसे विशाल पकड़ लेट है और अपनी बहो में जकड़ने लगता है…






और अक के कोमल नाजुक पेट को मुट्ठी में भर के मरोड़ने लगता है अलका को इस नए और ठन्डे प्रदेश में अपने रिश्तेदार के घर में अपने hi bête से इस तरह से उसके शरीर के साथ खेलना ाचा लगने लगता है… वो भी विशाल के गॉड में बैठ के अपने आपके उसे सौंप देती है और विशाल एक बार फिर से अपनी माँ के कामुक बदन और उस से निकल रहे इत्र को भी पीछे चोर देने वाली मधुर खुसबू में खोने लगता है की तभी बहार शोर कुछ ज्यादा बढ़ जाती है और अलका जो की अपने bête के गॉड में बैठ के शारीरिक सुच का आनंद ले रही थी का एक बार फिर से ध्यान दूर की तरफ जाता है….









अलका का ब्लाउज उसके जिस्म से कब का अलग हो चुक्का था और वो ऊपर से इस वक़्त बिलकुल नंगी थी उसकी चुचिओ को चूस चूस के विशाल ने काफी गिला भी कर दिया था और कही कही उसके दान से बने नीसाण साफ़ साफ़ देखे जा सकते थे… अलका घबराते हुवे विशाल से छूटने लगती है और जब अपने को नंगा पति है तो विशाल के गाल पे एक छठा लगा देती है और कपडा डालना सुरु कर देती है लेकिन…. अभी के लिए हम विशाल और अलका को चोर थोड़ी देर पीछे षाले है और देखते है की बहार कौन गुस्सा कर रहा था और किसपे यानि वो औरत कौन थी और वो लड़की कौन थी….

शादी के दिन करीब आ जाने से घर पे मेहमान आने सू हो गए थे ऐसे मैं कामिनी हो रीमा हो या रागिनी माओ का परेशां होना तो बनता है और खास कर के उन माओ को जिनकी रुचे और सुरभि जैसी बेतिया हो… यही हाल इस वक़्त रागिनी का भी थाजो की अपने 22 वर्षीया बेटी रुचे पे चिल्ला रही थी क्यूंकि कॉलेज की छुट्टी 4 बजे hi हो गयी थी और रुचे अभी कोई 6-7 बजे घर आती है.. तो षाले है रुचे और रागिनी के पास जहां उनकी नोकझोक होती है…

शाम के कोई 6:30 हो रहे थे पहाड़ो पे अँधेरा भी कुछ जल्दी hi चने लगता है ऐसे में रागिनी को इस बात की चिंता सताए जा रही थी की उसकी बेटी रुचे अभी तक घर क्यों नहीं आयी… रुचे जो अभी 22 यर की हुई है याय उन कहे जवानी में कदम रखा है उसने तो ऐसे में नए दोस्त बॉयफ्रेंड और छूट की खुजली जो उसे विरासत में मिली है उनका असर तो उसपे दिखना लाजमी hi है…

रूचि अपनी माँ रागिनी की hi तरह एक बाला की खूबसूरत लड़की है जिसपे लड़के तो लड़के स्कूल इ प्रोफ एंड प्रिंसिपल भी लार टपकते है और कभी कभी तो उसका खुद का बाप भी उसके भड़काऊ पहनावे में लिपटे उसके गोर बदन को देखता रह जाता है मैं आँखों hi आँखों इ वो उसके हुस्न को पि लेना चाहता हो पर रिश्तो की डोर ने उसे बांध रखा था…

रुचे के हाइट किसी मॉडल की तरह थी और एक्सरसाइज एंड गयम ने उसके गोर शरीर को और भी ज्यादा सुडोल बना दिया था.. उसका हर एंड वह से bhara-bhara था जहां से जितना भरा होना चाइये…. बहार को निकली गोल गांड हो या ऊपर उठी पहाड़ जैसी उसकी चुचिअ एंड उसपे सपाट पेट जिसमे गहरी नाभि मनो उसमे डुबकी लगन ेके लिए सामने वाले कोईशारा कर रही हो.. गहरी भूरी आंखे उसपे हलके सुनहरे बाल और गोर गोर गलो पे बनते उसके डिंपल,,,, गांड से निचे की तरफ जाओ तो मोठे मोठे केले के चिली हुवे तने की तरह चिकनी मोती जंघे और उसपे उसकी कासी हुई pindliya….uuuuuufffffffffff कोई कैसे न दीवाना हो इस हुस्न पारी का…. और इनसब के ऊपर जो वो अपडे आज वो जो कपडे दाल के गयी थी वो तो जान लेवा hi था…






रूचि ने एक वाइट टॉप और डार्क ग्रे बिलकुल मिनी स्कर्ट पहन रखा था…. जिसमे उसके चुत्तड़ के चउरवे साफ़ साफ़ झलकियां दे रही थी और यही हाल टॉप का भी था झा से उसकी चुचिओ की घटिया देख के लोगो के पसीने छूट रहे हो जो बहार के लोगो को तो भड़काने का काम बखूबी किया था यहां अंदर उसकी माँ उनसब से ज्यादा भड़की हुई thi..ghar में रुचे के एंटर होते hi और रुचे का ये गेटउप देखते hi रागिनी चिल्लाते हुवे कहने लगती है…

रागिनी- आए गयी तू????? खन थी अभी तक कॉलेज तो तेरा 4 बजे ख़तम हो जाता है फिर खान मुँह कला करवा रही थी अभी तक???

रूचि- क्या है माँ अभी तो आयी हूँ साँस तो लेने दो..

रागिनी- तुझे साँस लेने दू और यहां लोगो का डैम निकला जा रहा था उसका क्या??? और कितनी बार कहा है ढंग के कपडे पहना कर ये क्या पहनी है जिसमे सब कुछ दिख रहा है…

रूचि- ठीक तो है खान कुछ दिख रहा hai…ye बात रागिनी चारो तरफ घूमते हुवे कहती है..

रुचे के ऐसे जवाब देने से रागिनी और भड़कने लगती है वो आगे बढ़ते हुवे स्कर्ट के अंदर हाथ डालती है या सच कहु तो स्कर्ट इतनी छोटी थी की हाथ अंदर डालने की जरूरत hi नहीं पड़ी वैसे hi रुचे के गोल मखमली मुलायम चुत्तड़ रागिनी के पंजो में आ जाट है…

रागिनी- ये क्या है जब कुछ नहीं दिखा रहा है तो??? और फर वो आगे से हाथ उसके टॉप में दाल के उसके चुचिओ को मथते हुवे कहती है ये क्या है…??? पुरे कपडे क्यों नहीं पहनती है तू???

रागिनी के ऐसे बेहवे से रुचे भी चिढ जाती है और झल्लाते हुवे बोल पड़ती है..

रुचे- क्या है माँ ऐसे कौन करता है प्लस आप अपना काम करो ज्यादा इनसब पे ध्यान न दो..

रुकी के ऐसे रिएक्शन पे रागिनी भी अपने माँ वाले अवतार में आने लगती है और वही सोफे पे बैठा दिनसह जोट व् के बिच इनकी लड़ाइओ को देख रहा था और उसे तो अब इस बहस की आदत सिब hi हो गयी थी इसलिए वो इस्पे ज्यादा ध्यान नहीं देता और टीवी पे मैच देख रहा होता है बूत रागिनी का इस तरह से दिनेश पे चिल्लाने से उसका ध्यान रागिनी और रुचे की तरफ चली जाती है जहां वो देख के उसकी आंखे भी फैट जाती है और मुँह खुला का खुला रहा जाता है…






सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था जो किसी की भी डहडकाने बढ़ा दे… उसकी अपनी सगी बेटी रुचे जो इस वक़्त दिनेश की तरफ पीठ कर के अपनी माँ रागिनी से लड़ रही थी क अगोरा बदन देख के दिनेश का लुंड उसके पायजामा में हिचकोले मरने लगता है… रुचे के पिच दिनेश की तरफ होने से रुचे की गांड और चूतड़ों के कर्व्स और क्रॉप के छोटे होने से चिकनी और चौड़ी पीठ दिनेश देख देख के अपनी आँखों की प्यास बुझा रहा था अब इतनी हॉट और बाला की खूबसूरत लड़की पे कोई गुस्सा करे भी तो कैसे …

रागिनी- अब तुम कुछ बोलोगे या ऐसे hi मुँह फाडे तकते रहोगे…?

दिनेश- ये तुम माँ बेटी की लड़ी में मुझे मत घसीटो आपस में नपट lo…ispe रुचे हस्ते हुवे रागिनी को मुँह चिढ़ा देती है जिसका मतलब वो ये कहना छह रही थी की पापा भी मेरे साइड hi है…

रागिनी- तुमसे तो कुछ कहना hi बेकार है..

इस्पे रुचे हस्ते हुवे दिनेश की तरफ बढ़ने लगती है और अपनी माँ को चिढ़ते हुवे कहती है देखा पापा भी मेरे साइड hi है एक तुम्हे hi चिक चिक की आदत hai,,…aur वो जा के दिनेश की गॉड में बैठ जाती है ये देख के रागिनी आग बबूला हो उठती है और दिनेश मनो आँखों hi आँखों में कह रहा हो इसमें मेरा की हाथ नहीं… इस्पे रागिनी बड़बड़ाते ुवे वह से चाट के लिए िकल पड़ती है क्यूंकि कपडे उतरने के लिए रुचे से कहना hi बेकार लग रहा था उसे और इस गुस्से में उसे वह से चल जाना hi सही लगा करना बेवजह मेहमानो के सामने बखेड़ा खड़ा हो jata…ab रूचि भी रागिनी को पुई तरह से इग्नोर कर के दिनेश के साथ मस्ती करने लगी थी…

काफी देर से रुचे के गोर गांड को देख देख के दिनेश के लुंड ने भी अंगड़ाई भरनी सुरु कर दी थी थी जिसका एहसास रुचे को दिनेश के गॉड में बैठते hi हो गया था …. रूचि का स्कर्ट जो पहले से hi इतना छोटा था की उसका ओने न होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला था… अशोक के लुंड और उसके छूट के बिच बस अशोक क पायजामा और उसकी पतली सफ़ेद पंतय थी….






दिनेश के तगड़े मोठे लुंड के छुवन मात्रा से रुचे के पुरे सरीर में झुरझुरी सामने लगती है और वो अनायास hi अपने कमर को दिनेश के गॉड में आगे पीछे करने लगती है..

दिनेश की मजबूरी थी की हु न कुछ न कर सकता था और न hi कुछ बोल सकता था और इसका रूचि मज़े से नाजायज़ फायदा उठा रही थी….

रुचे के गांड के नीचे दिनेश का सख्त लुंड दबा हुआ था और उसके न चाहते हुए भी हलके झटके मार रहा था. रूचि बस नादान सी बची बानी उसके गॉड में गांड हिलाते हुवे टीवी देख रही थी और मंद मंद मुस्कुराती है.

दिनेश- चेंज नहीं करना तुम्हे जाओ चेंज कर लो वर्ण फिर से तुम्हारी माँ आती hi होगी

रूचि- आने दो उनका तो काम hi शोर मचाना मैं क्यों दारू जब मेरे पापा मेरे साथ है और इतना कह के वो पूरा आगे झुक के दिनेश को गले लगा लेती है जिस से उसकी कासी हुई कुइछिअ दिनेश के छाती में धसने लगती है… और छूट और गांड से दिनेश के सख्त हो चुके लुंड के ऊपर बन रहे दबाव और उसके ऊपर ऐसे झुक के चटीओ के दबाने से अशोक के मह से आआह्ह्ह्ह निकल पड़ती है आआह बेशक बहुत छोटी और घुटी हुई टी पर रुचे उस आह को अचे से सुन और महसूस कर चुकी टी जिस से उसकी हसी उसके होंठो पी ा चुकी थी और वो उस से अपने पापा के गलो को चुम लेती है…

रुचे के इस हरकत से दिनेश के लुंड ने उसकी बेटी की गांड और छूट के बिच जो छोटी सी जगह थी वहां एक और हल्का झटका मरता है. ये रुचे और दिनेश दोनों के बिच पनप रहे अनजान रिश्ते पर उत्तेजना का एक और चोट था.

रुचे के मखमली चूतड़ों पर दिनेश के सख्त लुंड का स्पर्श अचे से हो पा रहा था. आज पहली बार रुचे को दिनेश के लुंड के अकार का सही अनुभव हो रहा था.

रूचि के बढ़ते सैतानिओ ने दिनेश का हालत बिगड़ दिया था उसे डार्ट है की कही कुछ गलत न हो जाये कही उसका लुंड का दबाव से उसके सगी बेटी के छूट के मुहाने पे न होने लगे उसपे रुचे की पंतय मात्रा जालीनुमा थी जिसमे दिनेश के लुंड का छुवन वो अचे से महसूस कर पा रही थी…

दिनेश के लुंड के लगाकर पद रहे दबाव से रुचे के छूट गीली होने लगती है और क्युकी उसकी पंतय मात्रा जालीनुमा थी इसलिए उसके छूट से निकलते पानी से दिनेश का पायजामा भी गिला होने लगता है…

दिनेश भी अब खुद को बेकाबू होने लगता है उसकी सांसे भी अब रुचे के साथ चढ़ने लगी थी की तभी उसने वो सुना जिसका उसने सपने में भी नहीं सोचा था…

रूचि- पापा आप घर में भी अंडरवियर पहनते हो??

दिनेश- ये कैसा सवाल है पागल लड़की??

रूचि- सिंपल क्वेश्चन तो है आप घर में भी चड्डी पहनते हो की नहीं?? मेरा तो बिलकुल भी मन नहीं होता पहनने का इसलिए घर में पंतय नहीं पहनती और ये कहते हुवे वो अपना पंतय अशोक के सामने hi उतरने लगती है…






और पंतय के उतारते hi अपनी गांड यानि दोनों चूतड़ों को पहले अपने दोनों पंजो में भर के मासक्ति है फिर दोनों पतों को फैला के अपने बाप को अपनी गांड के छेद का दर्शन भी करवा देती है… दिनेश के समझ में नहीं आ रहा था की वॉक अरे तो क्या करे… वो तो अपने बेटी रुचे के जादुई शरीर में खो सा गया था की तभी रुचे सामने की तरफ मुड़ती है जिसमे उसका रेशमी भूरे हलके झाटो से भरा छूट दिनेश के बिलकुल सामने होता है…





रुचे पंतय के उतारते hi सख्त को वापस से ठीक करती है और अपने छूट के पानी से सनी हुई पंतय को अपने बाप दिनेश के हाथ में सौंपते हुवे कहती है देखो मुझे कितना पसीना आता है िसिये मैं नहीं पहनती…

इस बार दिनेश को भी जाने क्या होता है की वो पंतय को उठा के रूचि के सामने hi सूंघने लगता है… ये सब बहुत जल्दी में हो गया था…






रुचे- ऐसे क्या सुंग रहे हो पापा??? अछि लगी क्या आपको अपने बेटी के पुसी की स्मेल

चलो अब आप बताओ की आप अंडरवियर पहनते हो की नहीं वर्ण मैं खुद उतर के देखने लग जाउंगी…

दिनेश रुचे के छूट के सुंगंध में इतना खो गया था की उसी रुचे का कहा कुछ सुनाई नहीं दे रह था इस्पे रुचे आगे बढ़ते हुवे दिनेश का पायजामा एक hi झटके में खींच के उतर देती hai…ruche को अचे से पता था की दिनेश ने अंडरवियर पहन रखा है फिर भी वो अनजान बनते हुवे अंडरवियर के इलास्टिक को पंत के सात पकड़ के एक hi बार में उतर देती है…






पनटके उतारते hi दिनेश का फनफनात लुंड जिसे उसके पंत ने कैद कर रखा था ो आज़ाद हो जाता है और स्प्रिंग की तरह झूलने लगता है..

Ruche-omg पापा ये किता बड़ा है

दिनेश- पागल लड़की ये क्या किया तुमने…

रुचे- पापा मैं इसे छू के देहकु???

रुचे के इस बात पर दिनेश कुछ नहीं कहता क्यूंकि मजा उसे बी कही न कही आने लगा tha…aur उसकी ख़ामोशी रुचे के लिए हाँ थी..






दिनेश जहां एक तरफ सोफे पे बैठा था तो वही रुचे जमीं पे अपनी गड टिका के घुटने के बल बैठ जाती है और दिनेश के लुंड पे उंगलिया फेरते हुवे उसे सहलाने लगती है…

बेटी के नाजुक उंगलिओ के स्पर्श मात्रा से दिनेश की नसे फूलने लगती है और उसका लुंड आज वो आकर लेने लगा था जो उसकी बीवी क छोड़ने पे नहीं ले पाया था..

रूचि- पापा ये तो बहुत गरम ै और हार्ड भी… ये इस्पे सफ़ेद सफ़ेद क्या है…? हलाकि रुचे को अचे से पता था की वो प्रेकम है फिर अपने बाप की आगे बहुत मासूमियत दिखते हुवे वो उसके लुंड के टिप पे लगे प्रेकम पे ऊँगली घूमने लगती है






दिनेश के लुंड का पानी उसके बेटी रुचे के उंगलिओ में चिपक जाता है जिसे खींचने पर वो एक तार की तरह खींचता चला जयते है जिसे देख रुचे की आंखे चमक उठती है और वो उसे चाटने लगती है …

वाओ पापा ये तो बहुत टेस्टी है…. और इतना कह के रुचे अपनी जीभ दिनेश के लुंड के छोटे से छेद के चारो तरफ घूमने लगती है…






ये अनुभव और ये मज़ा दिनेश को कभी अपने बीवी से भी नहीं िला था जो उसकी ेती से मिल रहा था ो बिलकुल पागल सा होक आहे भरने लगता है /….

दिनेश- uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffffffff सोप आईटी वर्ण गलत हो जायेगा..

रुचे- क्या गलत होगा पापा???






ये कहते हुवे रुचे दिनेश के लुंड को पहले अपने पुर चेहरे पे मल्टी है और फिर ढेर सारा थूक और प्रेकम से भरे लार वाले मुँह में पहले उसके ाँद यानि बॉल्स को भर के चुस्ती है और फिर वो डिच के लंड को अपने मुँह में पूरा अंदर तक दाल लेती है…

लुंड रुचे के मुँह में ऐसे गायब होता है जैसे वो कभी था hi नहीं… दिनेश आनद के सागर में गोते लगाने लगा था अब वो छह के भी अपने पेअर पीछे नहीं ले सकता tha…aur फिर दिनेश भी रुचे का सर अपने लुंड पे दबा लेता है जिस से लुंड एक बार फिर से रुचे के गरमा गरम मुँह में समां जाता है..






रुचे पुर शिद्दत से दिनेश का लुंड चूसने लगती है और दिनेश भी बैठे बैठे रुचे के मुँह में झटके मार रहा tha…aur जब लगता की उसका निकलने वाला है वो फ़ौरन लुंड को मुँह से निकल के उसके गलो पे थपथपाने लगता है ये करम यूँ hi चलता जा रहा था पहले लुंड मुँह में फिर गलो पे..





रुचे की छूट भी अब कुछ ज्यादा hi खुजली मकान लगती है जो उसके बाप दिनेश का लुंड hi मिटा सकता था और फिर वो दिनेश का लुंड मुँह से निअक्ल के दिनेश के आँखों में देखते हुवे कहती है…

रुचे- मुँह में बहुत दाल लिया पापा अब इसे वहां डालो जहां इसकी असली जगह है…

देश रुचे की बात का मतलब अचे से समझ रहा था लेकिन वो कुछ करे तो कैसे आखिर वोट क बाप है एक बा फ़ो के बेटी के बुर में लुंड कैसे दाल सकता है.. लेकिन आज सारा कमांड तो रुचे ने ले रकह था एक बार फिर जहां दिनेश अपने कश्मकश में खोया था रची अपनी स्कर्ट उठाते हुवे दिनेश के लुंड को अपने छूट इ मुहाने पे सेट करती है और उसपे बैठने लगती है…






रुचे का दूध जैसा गोरा बदन वासना की आग में जल के लाल ह गुलाबी ह चुकी थी.. वो कामवासना में इस क़दर जल रही थी की अपने बाप के लुंड पर बैठते hi उसपे कूदने लगती है

रुचे- ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह पापा कितना तगड़ा लुंड है आपका बहुत मजा आ रहा है हाय मैं अब से इस लुंड के लिए तरस रही हूँ आज छोड़ो अपने बेटी को पापा

दिनेश भी निचे से धीरे धीरे झटके लगाने लगता है और रुचे की चुदाई में उसका साथ देना सुरु कर देता है…

कमरे में जहां अभी मैच की कमेंट्री चल रही थी वही अब इस दोनों बाप बेटी की चुदाई की थप थप और गीली छूट में लुंड के अंदर बहार से हो रहे फच फच की ौज़ गूंजने लगी थी…

रुचे का पीठ इस वक़्त दिनेश के साइड था जिस वजह से दिनेश रुचे के चुचिओ को मसलते हुवे उसके पीठ को चुम और च रहा था तो कभी पसीने से चमक रहे उसके सुराहीदार गार्डन को चाटने लगता है… गार्डन पे जीभ फेरने से रुचे की कामवासना और भड़ने लगती है ये आग में पेट्रोल का काम कर रहा था..






रुचे पूरी बेकाबू हो के और तेज़ तेज़ दिनेश के लुंड पे कूदने लग जाती hai…aur उसके काफी देर तक इस तारा कूदने के बाद आखिरकार दिनेश जो तब से चुपचाप अपनी बेटी को फॉलो कर रहा था ो बोल पड़ता है..

दिनेश- च लैब तुझे चुदाई का असली मजा दिखता हूँ…

रुचे- दखाओ न पापा चङो जोर जर से और फाड् दो मेरी छूट…

फिर दिनेश रुचे के छूट में लुंड डेल hi उठा लेता है और उसे सोफे पे झुका के खुद खड़ा हो जाता है… सोफे को सुप्पोर्टर बना के उसपे झुकने से रुचे की गोरी गोरी गांड अब और ज्यादा बड़ी और फैली हुई मगर टाइट नज़र आने लगती है






दिनेश- तेरी गांड तो तेरे माँ से भी बड़ी और खूबसूरत है रुचे..

रुचे- तो क्या इसका मतलब मैं आपको माँ से ज्यादा मजे दूंगी डैड..

दिनेश- तुम उस से ज्यादा मजे दे रही हो मेरी गुड़िया uuuuuuuuuuufffffffffff खान थी तू इतने दिनों से

अपने बाप के मुँह से टैरिफ सुन के रुचे बहुत खुस हो जाती है और वो पहले से भी ज्यादा अपनी गांड को अपने हाथो से हॉल के फ़ैलाने लगती है..






रुचे- आपको मेरी गांड पसंद आयी न पापा फिर ये लो और फैला देती है अचे से छोड़ो अपनी बेटी को uuuuuuuuuffffffffffff पापा अब से रोज छोडूंगी मैं आपसे मुझे बहुत छोड़ना उस रागिनी से भी ज्यादा… छोड़ोगे न पापा???

रुचे अपने चुदाई में खोयी हुई थी की तभी कोई उसके कान पकड़ता है और कान को मरोड़ते हुवे कहता है..

तू अभी तक यही है कपडे नहीं बदले??? देख दिल्ली वाली अलका और विशाल आये हुवे है मिली है उसे जा के ा अपने सपनो में hi खोयी रहेगी???

भगवान जाने दिन दहाड़े किन सपने में खोयी रहती है ये गाढ़ी जा भाग यह से कपडे बदल जा कर..

ये कोई और नहीं उसकी माँ रागिनी की आवाज़ थी और जब उसका ध्यान अपनी माँ से टूटता है तो वो हॉल में खुद क अकेला पति है दिनेश तो कब का बाजार सामान लेने चला गया था//…

सपने के टूटने से रुचे को निराशा और सैलानी एक साथ होने लगती है वो जल्दी से उठ के अपने रूम में फ्रेश होने चली हटी है…

और जल्दी से फ्रेश हो के अलका के कमरे की तरफ चल देती है..

इधर आप सभी को याद hi होगा की अलका को उसका बीटा विशाल पकड़ के उसे नंगा कर चुक्का था की तभी दूर नॉक होती है और अलका जल्दी से विशाल क अलग कर के कपडे पहनने लगती है.. इतने में विशाल गेट खोलता है और सामने का नज़ारा देख के उसकी भी आंखे फटी रह जाती है…


क्यूंकि जहां एक तरफ अंदर कामदेवी अलका थी तो वही सामने एक कामुक अप्सरा रूचि थी..









ऋचा ने फिर से वही काम किया था जिसके लिए उसकी माँ रागिनी सारा दिन उसे डांटती है... ऋचा के कपडे बहुत छोटे और पारदर्शी थी जिसमे उसका अंग अंग अपनी झलक दिखने के उतावला हुवे जा रहा था... नैक इतना डीप था की बस निप्पल hi छुपा हुआ था बाकि पूरी चुचिअ साफ़ देखि जा सकती थी...

विशाल की नज़रे ऋचा के चुचिओ पे hi जैम गयी थी जब की अगर निचे नज़र डालता तो उसकी खूबसूरत चिकनी और मोती जंघे भी खुले में न्योता दे रही thi...richa अचे से समझ गयी थी विशाल क्या देख रहा है पर वो बुरा मैंने के जगह विशाल को टोकती है.. क्यूंकि ये सब उसके लिए कोई नया नहीं था अभी उसे देख के आहे बहरते है यहां लिस्ट में एक और नाम सही...

ऋचा- hello मर क्या देख रहे हो चलो साइड हटो मुझे चची से मिलना है..

विशाल- क्या दीदी सिर्फ चची से और मुझसे नहीं?

ऋचा- तू तो खा गया है जाने खान फिर कैसे मिलु और ये कहते हुवे विशाल के गले लगती है और फिर आगे बढ़ के अलका से मिलने चली जाती है...

आगे की कहानी फिर कभी तब तक के लिए आप सभी ये बताये की नेक्स्ट episode में किसका रोले देखना चाहते हो और कैसी लगी हमारी ऋचा और उसका कामुक अंदाज़ और फंतासी ..
 
अपडेट-54

अब तक आपने पढ़ा की अलका और विशाल से मिलने के लिए ऋचा अलका के कमरे में जाती है जहां उसे विशाल मिलत है और विशाल पहल नज़र में hi ऋचा के हुस्न का दीवाना हो जाता है उसकी नज़र ऋचा के चुचिओ की गोलाई और उसमे बने घाटियों में hi क़ैद हो जाती है जिसे ऋचा अचे से भांप लेती है और अभी अभी ज ऋचा अपने बाप से छुड़वाने के सपने देख के आयी थी उसके बारे में ये बाटने की जरूरत तो नहीं की उसका मन और उसकी नज़र एक अचे तगड़े लुंड की तलाश में होगी जो उसकी छूट की खुजली और प्यास मिटा सके पर यहां देखना ये है की इस खेल में शिकार कौन होता है और शिकारी कौन बनता है.. ऋचा विशाल से मिलने के बाद सीधा अलका से मिलने अंदर चली जाती है और विशाल भी वहां से बहार हॉल में और आंगन म घूमने लगता hai….jhan उसकी नज़र उसकी बुआ कामिनी पर पड़ती है…

कामिनी एक बहुत hi कामुक और गदरायी औरत उसका गोरा बदन और उसकी मखमली त्वचा इतनी पतली और परदेशी थी जैसे गुलाब की पंखुडिया…






वो रह रह के अपने बालो को सँवारने के लिए उन्हें पीछे करती और ऐसा करते वक़्त उसके बगल यानि आर्मपिट देख के विशाल का मन ललचाने लगता है.. हलाकि उसने अलका के आर्मपिट पे कभी ध्यान नहीं दिया लेकिन कामिनी जिसने उसके बाप को अपने हुश्न के जाल में फंस रखा है उसके आगे विशाल की औकात hi क्या थी.. विशाल ललचाई नज़रो से कामिनी के आर्मपिट तो कभी उसके चुचिओ में बने गहरी घातिओ को घूरे जा रहा था… उसे इस बात का डॉ भी था की कही बुआ देख न ले वर्ण लेने के देने हो जायेंगे… इसलिए वो दीवार की ओट ले के चुपके कामिनी के हुश्न को निहारने लगा था… चाट पे कड़ी कामिनी आंगन में खड़े विशाल को देख नहीं पा रही थी क्यूंकि वहां से जिस जगह विशाल था वो जगह देखा पाना मुश्किल था क्यूंकि वहां एक पेड़ भी था और अँधेरा भी हो चूका tha…vishal धीरे धीरे कामिनी के जवानी को अपनी आँखों से पि रहा था की तभी विशाल देखता है की कोई मर्द पीछे से कामिनी को दबोच लेता है…





और कामिनी कसमसाने लगती है लेकिन वो मर्द अपनी पकड़ मजबूर बनाये हुवे कामिनी के गार्डन को चूमने के साथ उसकी चुचिओ को मसलने लगता है इस तरह से कामिनी के जिस्म से खेलने से उसका पल्लू कब का जमीं पे गिर चूका था और भरी भरकम छाती अब ब्लाउज में क़ैद किसी पानी से भरे गुब्बारे की तरह थिरकने लगी थी..

वो सख्स लगातार कामिनी के गार्डन और उसके होंठो को चूमने की कोशिश कर रहा था जिसका विरोश करते करते कामिनी अंत में साथ देने लग जाती है…






इनदोनो का रोमांस देख के विशाल पंत के ऊपर से hi अपने लुंड क मसलने लगता hai..aur वो उन्दोनो के चूसै देख के इतना हॉर्नी होए लगता है की कब उसका लुंड पंत के बहार आ जाता है उसे भी पता नहीं चलता वो बस अपनी बुआ और फूफा को देख के लुंड मसलने में बिजी हो जाता है और इस से पहले की उसका लुंड अपना पानी निकल पता ऋचा उसे आवाज़ लगते हुवे आंगन में आ जाती है…

ऋचा की आवाज़ सुनते hi विशाल अपने लुंड को पंत में डालने लग जाता है लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और ऋचा की नज़र उसके गरम पत्थर जैसे सख्त लुंड पे पद जाती hai…fir भी विशाल जैसे तैसे अपने लुंड को पंत के अंदर भर लेता है लेकिन उसके पंत में बने उभर पर ऋचा की नज़र ठीक वैसे hi गड जाती है जैसे थोड़ी देर पहले विशाल की नज़र ऋचा के गोल घाटियों पे जैम गयी थी…






german characters

ऋचा- यहां क्या कर रह है तू???

ये बोलते hi ऋचा की नज़र विशाल के पंत में बने उभर पे चली जाती है जिसे देख के ये अनुमान लगाना कतई मुश्किल न था की विशाल के लुंड में कितना दम होगा अब ये सिर्फ देखने में विकराल है या सच में काम का भी है ये तो वक़्त आने पे hi पता चल पायेगा…

विशाल- कक्कुक नहीं वैसे hi बहार टहल रहा था..

ऋचा- ाचा टहल लिया हो तो चल अंदर फूफा बुला रहे hai…aur बाकि सब भी खाने के लिए इकठा हो चुके है.. अब मुझे बुआ को भी ढूँढना है ये पता नहीं खान गायब हो जाती है ..

ऋचा के मुँह से फूफा बुला रहे है सुन विशाल का माथा ठनक जाता है उसके समझ नहीं आता की यदि फूफा अंदर है तो चाट पर बुआ किसके साथ…..???

अभी विशाल को गाओं आये एक दिन भी नहीं हुआ था की उसे एक पहेली मिल गयी थी जिसे सुलझाने पे उसे रिवॉर्ड के तौर पे उसकी बुआ कामिनी की छूट मिल सकती थी…

विशाल अपने मन में चल रहे भूचालों को समेटे घर के अंदर जाने लगता है और फिर ऋचा कामिनी को आवाज़ लगते हुवे घर के बाकि कोनो में ढूंढने लगती है… लेकिन यहां माथा ऋचा का भी ठनक जाता है उसके दिमाग में भी ये चलने लगता है की आखिर विषा ऐसा क्या देख लिया था जिसे देख वो लुंड निकल के हिलने लग जाता है…

उफ्फ्फफ्फ्फ़ कितना मोटा तगड़ा लुंड है विशु का इसे तो मैं जल्दी hi निगल जाउंगी बस एक सही मौका हाथ लग जाये…

इन्ही सब विचारो में फांसी ऋचा कामिनी को ढूंढने लगती है की तभी कामिनी भी यहां चाट पे हूँ कह के ऋचा की तरफ सीढ़ियों से उतरते हुवे घर के अंदर आने लग जाती है.. और वो सख्स जो पता नै कौन था वो अब अँधेरे में गायब हो चूका था

घर के अंदर सभी लोग इक्क्ठा हो चुके थे और घर की औरते खाना परोस रही थी…






खाना परोसते हुवे रीमा का पल्लू गिर जाता है और उसके दूध से लबालब छाती कमल के आँखों के सामने चमकने लगती है अब ये तो ऊपर वाला hi जाने की पल्लू गिरी थी या गिरायी गयी थी खैर जो भी कमल इस पल का पूरा मजा ले रहा था पर उन्दोनो के करतूत क कोई और भी देख रहा था वो था राघव जो हाथ मार के विशल को भी देखने का इशारा करता है..





डिनर फिनिश करने के बाद सभी वही हॉल में बैठ के गेम खेलने या मूवी देखने का प्लान बनते है पर ऋचा का मन इन सब में खान लगने वाला था वो तो शाम से hi लुंड की तलाश में है जो उसके छूट इ बढ़ रहे खुजली को मिटा सके…

ऋचा जो विशाल के बगल में hi बैठी थी वो विशाल से पूछने लगती है..

ऋचा- विशाल तू दिल्ली से मेरे लिए कुछ भी नहीं लाया क्या??

विशाल- लाया तो है दीदी मुमा ने कपडे लिए है अभी के लिए

रिश्ता- अरे वो तो चची ने लाया है मैं तेरे बारे में पूछ रही हूँ…

वशाल- सॉरी दीदी मैं तो वैसा कुछ नहीं ला पाया पर हम कल मक्त जा के ला सकते है जो भी आपको चाइये हो..

ऋचा- रहने दे जब वहां से नहीं लाया तो यहां गाओं में क्या दिलवाएगा..

Vishal-sorry दीदी मुझे ख्याल नहीं रहा बूत मौका मिलते hi मैं आपके लिए जरूर आपका कोई फव गिफ्ट लाऊंगा

ऋचा- ाचा तुझे पता भी है मेरे फव का जो फव गिफ्ट लाएगा..

विशाल- तो आप hi बता दो मेरे लिए आसान हो जायेगा..

ऋचा विशाल को बचा समझते हुवे दोहरे मीनिंग में कहती है चल जब टाइम आएगा खुद hi ले लुंगी वैसे तेरे पास hi है उसे लेन के लिए कही जाने की जरूरत नहीं बस जब मांगू तो रोने मत लग जाना…

इसी तरह ऋचा विशाल के तंग खींच रही थी और दोहरे अर्थो में उसके लुंड को अपना फव चीज बोल के लेने की ख्वाईश भी जाहिर कर देती है की रीमा उसे डांटते हुवे कहते है क्यों तंग कर रही है बेचारे को जा तुझे कल कॉलेज जाना होगा जा के सजा..

ऋचा- क्या है माँ जब देखो डांटते रहःती हो बात hi तो कर रही हु अपने छोटे भाई se..tu चल विशु मेरे कमरे में वहां हम गप्पे मरेंगे… विशाल जाना तो चाहता था पर उसके फूफा चाचा ने उसे रोक लिया और दिल्ली की खबर लेने लग जाते है..

ऋचा चिढ़ते हुवे वहां से जाने लगती है और विशाल को फ्री हो के आने का कह जाती है…

ऋचा विशाल के नज़रो को भांप गयी थी वो जानती थी की विशाल जरूर आएगा…

विशाल भी रीमा के दोहरे अर्थ को समझ रहा था क्यूंकि आंगन में लुंड सहलाते हुवे ऋचा ने उसे देख लिया था ये वो जान गया था पर ऋचा के तरफ से कोई प्रतिकिर्या न मिलने से उसके सहस में इजाफा हो जाता है और वो एक दो बार और ऐसे hi ऋचा को अपना लुंड दिखने की योजना बनाने लगता है पर उसे जरा भी अंदाज़ा नहीं था किउसे ये मौका इतनी जल्दी मिल जायेगा…

गाओं आने के बाद विशाल को कामिनी के साथ साथ ऋचा के भी छूट के मिलने के पुरे चान्सेस दिखाई देने लगे थे और ये तो पहला hi दिन था वो सब से बचते बचते ऋचा के कमरे की और जाने लगता है…

पहले वो ऋचा के दूर को नॉक करने की सचता है फिर उसके मन में ख्याल आता है क्यों न एक बार झांक के देखा जाये अंदर क्या हो रहा है और यही सोच के विशु दरवाजे को हल्का सा खोल के ाबदेर झांकता है तो पता है उसकी बहन ऋचा कपडे बदल रही थी…

कपडे उतर देने के बाद वो सिर्फ ब्रा पंतय में थी और अपने शरीर पे बॉडी लोशन लगा रही होती है… बॉडी लोशन इतना सुगंध भरा था की उसकी महक कमरे के बहार तक आ रही thi…richa जो इस वक़्त सिर्फ ब्रा पंतय में थी और लोशन के बहाने अपने अंगो से खेल रही थी…

विशाल जब पहली बार ऋचा को देखा था तभी से उसके गोर भरे बदन का दीवाना हो गया था और ऐसे में अधनंगा देख के उसका लुंड जो अभी बड़ी मुश्किल से बैठा था एक बार फिर से खड़ा होने लगा था विशाल फिर से लुंड निकल के हिलने लग जाता है..






ऋचा की नज़र जैसे hi दरवाजे पे पड़ती है एक बार फिर से वो विशाल को अपना लुंड मसलते हुवे पति है और उसके मुँह से एक हलकी सी चीख निकल जाती है omg विशाल ये ककया है???

विशाल- सॉरी दीदी वो गलती से..

ऋचा- गलती से कैसे ये बहार आ गया और तुम क्या सोच के ये सब चीई

विशाल को लगता है कही जल्दबाजी में उसने गलती न कर डीओ हो इसलिए वो फिर से ऋचा को सॉरी बोलने लगता है और इतना कह के वो भाग के अपने कमर में चला जाता है…

इधर विशाल के विकराल लुंड को देख ऋचा के छूट लार टपकना सुरु का देता है…

विशाल के जाते hi ऋचा दूर लॉक करती है और अपने छूट जो की शाम से hi लुंड के लिए तड़प रही है में उंगलिया फेरने लगती है....






आज उसे उंगलिया भी मजे नहीं दे रही थी मनो उसके छूट ने बाग्वट कर दिया हो की उसे किसी भी हाल में लुंड चाइये..

ऋचा- शांत होजा बहनचोद खान से लौ तेरे लिए लोढ़ा अभी… शाम को hi तो बॉयफ्रेंड का लुंड निगल के आयी है अब फिर से खुजली हो रही तेरे में .. रोज रोज इतनी देर तक गायब भी नहीं हो सकती वर्ण मेरी रंडी माँ मेरी गांड मार लेगी मगर मेरे छूट की तड़प uuuuuuuuuuuufffffffffff पापा नहीं तो विशाल को hi पटना पड़ेगा उसका लुंड भी बहुत बड़ा और तगड़ा है…






हाय मेरी आग उगलती छूट को कोई छोड़ छोड़ के फाड़ दो मुझे रंडी की तरह छोड़ो ऊऊफफफफफफफफफ हाय माआआआ मई क्या करू इतनी रात को… ये विशाल गांडू भी दर के बहग गया ये नहीं की बहन ब्रा पंतय में है तो उसे नंगा कर के छोड़ दे डरपोक साला.. ऐसे डरेगा तो छूट कैसे मार पायेगा निक्क्मा…





और फिर ऋचा दोनों टंगे उठा के तेज़ तेज़ ऊँगली अंदर बहार करने लगती है और एक तेज़ सिसकारी के साथ उसका छूट अपना लावा उगलने लगता है…





उसके छूट का निकला अमृत ऋचा उंगलिओ से निकल निकल के चाटने लगती है और तब तक छत्ते रहती ै जब तक सारा रास न निकल गया हो…

भले hi ऋचा के छूट ने प्न पानी बहा दिया था लेकिन उसकी खुजली अभी नहीं मिटी थी उसमे चीटिया अब और भी ज्यादा रेंगने लगती है..

ऋचा- अगर विशाल का लुंड चाइये तो मुझे hi कुछ करना होगा वर्ण वो तो दर के भाग जायेगा.. और घर के हालत ऐसे है नहीं की ुमे मौका मिले इसके लिए मुझ उसे बहार ले जाना हॉग और बहार hi उसे इतना हिंट दूंगी की वो छोड़ने पे मजबूर हो जये..

हाँ ये सही रहेगा मुझे hi उसकी हिम्मत बढ़ानी hogi…aur ये कहते हुवे वो उठे विशाल के कमरे में जाने लगती है..

हॉल म माहौल अभी भी सजा हुआ था लोग टश खेल रहे थे और गण या डांस भी कर रहे थे ऋचा सब से बचती बचती विशाल के कमरे में जाती है जहां का दृश्य देख एक एक बा फिर से उसका गाला सूखने लगता है…






विशाल मोबाइल में पोर्न देखते हुवे लुंड हिला रहा था और तभी ऋचा कमरे में एंटर होती है…

ऋचा- ीूऊऊफफफफ विशाल ये सब क्या है

ऋचा इस वक़्त बहुत hi छोटी सी पंतय और टॉप में थी जिस से उसकी चूचिया और गांड और उसकी मोती मोती जंघे साफ़ देखि जा सकती थी…

विशाल- एक बार फिर से श्री श्री करने लगता है…

ऋचा- अरे इतस नार्मल डोंट वर्य बूत एटलीस्ट ये सब करने से पहले दूर लॉक कर लिए करो वर्ण तुम्हारे हथ्यार पे लोगो की नज़र लग सकती है…

विशाल- क्या दीदी आप भी..

ऋचा- अरे क्या दीदी क्या???? चलता तो है न तुम्हारा बन्दुक या बस इसे साफ़ hi करते रहती हो???

विशाल- अब आपको क्या बताऊ…

ऋचा- अरे क्यों नहीं ु कैन शेयर ान्यतःनग पर अभी हम दोस्त नहीं हुवे है न इसलिए तुम्हे अजीब लगेगा एक काम करो मैं सुबह जॉगिंग पे जाती हूँ तुम रेडी रहना कल से मेरे साथ चलना… ठीक है चलोगे न???

विशाल- हाँ जरूर चलूँगा

ऋचा- फसा बच्चू जाल में

विशाल- जल्दी तुझे इसकी छूट मिलेगी

ऋचा- ok तुम हिलाओ मैं चलती हूँ सुंबह कॉल करुँगी रेडी रहना….

विशाल- उउउउउफफ्फ्फ क्या गांड है इस रंडी के इसे छोड़ छोड़ के न फाड़ दिया तो मैं भी विशाल नहीं...

ऊऊफफफफ कितनी कैसा हुआ बदन है दीदी का इसे पूरी रात नंगा कर के छोड़ू तब भी मन न भरे .... उफ्फ्फ्फ़ अलका खा रह गयी रंडी साली चिनार... और ऐसे hi गरम होते हुवे विशाल झाड़ के सो जाता है...
 
अपडेट-55 ऋचा का मॉर्निंग वाक

रात यूँ hi छूट और लुंड को मसलते हुवे काट जाती है और अब दोनों को सुबह होने का इंतजार था..

सुबह को 5 बजे विशाल के फोन पे घंटी बजती है फोन देखने पे स्क्रीन पे जो नाम आ रहा था उसे देख के विशाल के चेहरे पे जीत वाली हसी आ गयी thi.. wo फोन उठा के आने का कह के फोन रख देता है और वाशरूम से फ्रेश हो के बहार आता है जहां ऋचा पहले से hi उसका वेट कर रही थी…






ऋचा का ड्रेस काफी भड़काऊ था और हो भी क्यों न उसने पहना hi इस इस मक़सद से है की वो विशाल को अपने जाल में फसा सके…

इस पर्पल टॉप एंड ग्रीन शार्ट में ऋचा का पूरा बदन दिख रहा था उसमे ढकने जैसा कुछ भी नहीं था जिसे देख विशाल का मुँह एक बार फिर से खुला का खुला रह जाता है…

ऋचा- ऐसे क्या देख रहा है कल ु ब्रा पंतय में देखा है मुझे उस से तो ज्यादा hi पहनी हूँ..

विशाल- नहीं ऐसा कुछ नहीं है..

ऋचा- हाँ हाँ सब समझती हूँ अब चल जल्दी … और फिर दोनों रनिंग के लिए निकल पड़ते है,...


घर के पास hi एक एसीए खासा पार्क था लेकिन ऋचा उसे घर से दूर सुनसान में बने एक पार्क में ले जाती है जहां अक्सर कपल चोरी चुपके चुदाई करते है अगर इस वक़्त वैसा कुछ नज़ारा मिल जाता है तो सोने पे सुहागा होगा और यही सोच के ऋचा दौड़ना सुरु कर देती है,,...

रस्ते में सरे मर्द ऋचा के कमसिन जवानी को घूरे जा रहे थे ..





इस दौरान ऐसा एक भी सख्स नहीं था जिसने उस चलती फिरती आग को न देखा हो और कुछ वही हाल विशाल का भी था उसकी नज़रे रास्तो पे काम और ऋचा के गोरी गोरी गांड पे ज्यादा तिकी हुई थी…

विशाल के न चाहते हुवे भी उसका सारा ध्यान उसकी बहन ऋचा की भरी भरकम गांड पर चला जा रहा था,,

ऋचा- पीछे पीछे क्या दौड़ता है ार्ड बन आगे अनहि तो साथ तो आ…

विशाल- आता हु दीदी आज फर्स्ट डे है न इसलिए..

ऋचा मन में (फर्स्ट डे नहीं मेरी गांड को ताड़ने के लिए पीछे पीछे है तू)- ाचा मतलब अब से तू रोज आया करेगा मेरे साथ???

विशाल- हाँ दीदी

ऋचा- और ऐसे hi पीछे से देखता रहेगा??

विशाल- क्या मैं समझा नहीं??

ऋचा - अरे मैं रोड की बात कर रा हु

विशाल रिचके दोहरे शब्दों को अचे से समझ रहा था इस बार उसने भी टपक से जवाब दिया..

विशाल- पीछे के व्यू से दिल नहीं भरता दीदी आगे का भी देख hi लूंगा फ़िलहाल पीछे के रास्तो को पहचान लूँ

ऋचा- सही है अचे से पहचान ले जल्दी hi इन रास्तो से रोज गुज़रना पड़ेगा..

विशाल- तभी तो आपके साथ आया हूँ रास्तो को पहचनने…

ऋचा- सिर्फ पीछे से hi भागेगा या आगे वर्तक भी कर पायेगा…


विशाल- आगे भी लपेट लूंगा दीदी बस ऐसे hi आप मुझे सिखाते जाओ…

पार्क के चक्कर काट लेने के बाद दोनों ऋचा वही एक्सरसाइज करने लगते है.. वो अपने साथ बैग में स्किपिंग भी ले के आयी थी …अब वो विशाल को सामने खड़ा कर के काउंट करने का कह के खुद जम्प करना शुरू जार देती है…

ऋचा- उफ्फ्फ्फ़ ये ब्रा में न बहुत डैम घुटता है फ्री फील नाह होता रुक मैं इसे उतर दू…

विशाल- यहां???

ऋचा- तो अब घर जा इ थोड़े न उतरूंगी.. कह के ऋचा अपनी ब्रा उतरने लगती है.. और उसे अपने बैग में दाल लेती hai…uske बाद ऋचा एक बार फिर से स्किपिंग सुरु कर देती है..






ऋचा जब जब स्किप्पिंग के लिए उछल रही थी उसकी चुचिअ मनो उसके टॉप से बहार hi आ जाती है बस लास्ट का part निप्पल hi था जो टॉप में क़ैद था विशाल एक तक ऋचा को उछलते हुवे देखे जा रहा था मनो वो मन hi मन ये दुआ कर रहा हो की ऋचा की चूचिया एक बार पूरा बहार आ जाये और आज सायद विशाल कुछ और मांगता तो वो भी उसे मिल जाता क्यूंकि अगले hi पल ऋचा की चूचिया उसके टॉप से बहार निकल जाती है…





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पर ऋचा रूकती नहीं है बल्कि जोर जोर से हस्ते हुवे और ज्यादा कूदने लगती है.. लगातार एक्सरसाइज से उसके शरीर पे पसीने की बुँदे चमकने लगती है…

कोई और वक़्त होता तो सईद ऋचा ये न कर पति पर इस वक़्त शर्म हाय उस से कोसो दूर थी उसे चाइये था तो बस विशाल का lund….aur उसके लिए वो कुछ भी करने का मन बना चुकी थी..

ऋचा- हफ्ते हुवे विशाल से पूछती है काउंट किया विशाल कितने हुवे???


पर विशाल तो गिनती कब का भूल चूका था उसके आँखों के सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था….

ऋचा - खान खो गए मर… जब ऋचा विशाल के नज़रो का पीछा करि है तो पति है की उसकी दोनों चुचिअ बहार को लटक रही है जिसके गोली में विशाल खो चूका था और चूचिया निकले भी क्यों न उसने टॉप hi इतना छोटा सा पहन रखा था…


ऋचा को समझते देर नहीं लगती की वो जो तीर चला रही है वो बिलकुल सही जगह अपने निशाने पे लग रहा है और इसी आग में घी डालने का वो सोचते हुवे बल्टी है..

ऋचा- uuuuuuuufffffffffffff पूरा टॉप पसीने से गिला हो गया अब इसे निचोड़ना पड़ेगा… विशाल तू देखना कोई आ तो नहीं रहा था तक में इसके पसीने को निचोड़ दू और इतना कह के एक झटके मरीचा अपना टॉप उतर देती है और टॉप के उतरते hi ऋचा ऊपर से पूरी नंगी हो गयी थी उसकी दोनों बैलन जैसी भरी भरकम चुचिअ हवा में लहराने लगती है//….






जब सामने में ऐसा दृश्य हो तो आस पास का किसे ख्याल रहता है वही हाल इस वक़्त विशालस का भी था उसे आस पास की कोई खबर नथी उसकी नज़रे ऋचा की चुचिओ पे hi जैम जाती है जिसे ऋचा भी अचे से समझ रही थी पर ऋचा कोई जल्दबाजी में काम बिगड़ना नहीं चाहती थी इसलिए वो विशाल को हल्का सा डांटते हुवे कहती है तुझे लोगो को देखने क खा था और तू इनमे खो गया गधा कही का चल जरा उन झाड़िओ में चल के सूखा लू और तू बहार लोगो का ख्याल रखना…

विशाल- ठीक ै दीदी चलो..

और फिर हवस और वासना की आग में जल रहे दोनों भाई बहन पास में बने झाड़िओ की तरफ चल देते है वहां ऋचा पहले अपनी टॉप को सूखती है और फिर सोचती है क्यों न एक बार पंतय उतर के इसे अपनी गोरी गांड के दर्शन करा दू और वो यही सोच के अपनी पंतय उतरने के लिए झुकती है और विशाल की तरफ अपनी गोल भरव्दार गांड को निकलते हुवे पंतय उतरने लगती है…





ऋचा अपना टॉप पहले hi उतर चुकी थी और अब पंतय के उतर जाने से वो पूरी तरह से नंगी खुले आसमान के निचे अपने भाई को अपनी चुचिओ और अपने गांड का भरपूर दर्शन कराए के इरादे से उसकी तरफ मुड़ने वाली hi होती है की उसे झाड़िओ में कुछ सरसराहट की आवाज़ आती है …वो हाथ में अपनी पंतय और टॉप लिए विशाल को आवाज़ देती है…





विशाल की नज़र जब ऋचा पे पड़ती है तो उसका लुंड जो रह रह के पंत के आदर ठुंकी मार रहा था वो अब बगावत पे उतर चूका था उसके पंत में अब उभर बन चूका था वो देखता है की ऋचा के गोर मखमली शरीर पे पसीने की बून्द चमक रही है और वो ऊपर से निचे मादरजात पूरी तरह से नंगी है इस से पहले विशाल कुछ बोलता ऋचा उसे उंगलिओ से चुप रहने का इशारा करती है और पास आके झाड़िओ के हलचलके बारे में बताती है और इस बिच वो चाहती तो कपडे दाल सकती थी पर उसके अंदर की बहन तो छिनरपन पे उतर आयी थी इसलिए वो विशाल का हाथ पकड़ के उस तरफ ले जाने लगती है जहाँ से आवाज़े आ रही थी..

ऋचा घनी झाड़िओ को थोड़ा सा हटा के जगह बनाते हुवे अंदर की और जैसे hi झक्ति है उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है उसे वो दिख जाता है जिसके लिए वो घर से इतनी दूर विशाल को ले के आयी थी उधर विशाल भी अपनी बहन ऋचा के पीछे पीछे जाता है और जहां ऋचा कड़ी हो के अंदर के नज़ारे का मज़ा ले रही थी वही ठीक ऋचा के पीछे उस से चिपक के खड़ा हो जाता है और जब वो उस तरफ देखत है झा ऋचा देख रही थी उसके तो होश hi उड़द गए थे.. अंदर का नज़ारा काफी कामुक और उत्तेजना भर देने वक्ला था…

ऋचा की सांसो की गति अब तेजी पकड़ने लगती है उसे अचे से पता था की जो नज़ारा वो देखने आयी है उसे उसका भाई भी ठीक उसके पीछे उसके गांड से चिपक के खड़ा हो के
देख रहा है… ऋचा जो की पहले से hi नंगी थी और उधर विशाल का लुंड ऋचा को देख देख के कब से हिलोरे मार रहा था इस तरह के दृश्य से और ऋचा के गरम और गोरी कासी हुई गांड से चपकने से उसका लुंड और ज्यादा सख्त होने लगता हैए ुर सीधे ऋचा के चूतड़ों को भेदने लगता है जिसका एहसास ऋचा को भी होने लगा था…





लुंड के गांड में टकराने से ऋचा एक बार को पलट के विशाल की तरफ देखती जरूर है पर उसमे कोई शिकायत न थी बल्कि एक आणखी सी पहेली थी जो विशाल समज्झ तो रहा था पर उसे सुलझाने का अभी सही वक़्त नहीं आया था…… देखते hi देखते दोनों की हालत पतली होने लगती है और बेचारे कर भी क्या सकते थे अंदर का नज़ारा hi कुछ ऐसा था जो की किसी के भी काम वासना को जगा दे और यह ये दोनों तो कब से एक दूसरे में समां जाने को तड़प रहे है बस एक सही मोके की तलाश है …

झाड़िओ के अंदर एक लगभग 40-42 वर्षीया महिला अपने से भी आधे उम्र के लड़के के लुंड पे ऊपर अपनी गांड पटक पटक के कूद कूद के छुड़वा रही थी जिसे देख एक बार को ऋचा को लगता है की वो उसकी बुआ कामिनी या उसकी माँ रागिनी है और कामिनी या रागिनी अपनी माँ का अपने से आधे उम्र के लड़के के साथ चुदाई के ख्याल से hi वो और ज्यादा गरम होने लगती है और न चाहते हुवे भी ऋचा अपने गांड को विशाल के लुंड की तरफ धकेलने लगती है….

अभी उसने अपनी गांड को विशाल के लुंड से सताया hi था की उसके पुरे शरीर में 440 नाह 4400 का झटका लगता है उसके गांड पे विशल के लुंड के चमड़ी का एहसास होता है यानि पीछे से उसका भाई विशाल भी कही नंगा तो नहीं हो गया था






रिश्ता वासना की आग में जल नहीं रही थी बल्कि झुलसे लगी थी और वो तेज़ तेज़ अपनी गांड को विशाल के लुंड पे रगड़ने लगती है… अंदर वो लड़का उस औरत को जितने तेज़ी से छोड़ रहा था इधर ऋचा भी अपनी गांड उतनी तेज़ी से विशाल पे रगड़ रही थी….

इधर विशाल का मज़ा भी दोगुना होने लगा था लेकिन साथ hi पार्क में उजाला भी होने लगा था उसने धिरे से ऋचा के कान में

विशाल- दी आपको कपडे पहन लेने चाइये उजाला होने लगा है किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी


ऋचा का मन तो नहीं था लेकिन विशाल की बात भी सही थी क्युकी वो पूर्णरूप से नंगी थी इसलिए वो जल्दी से अपने कपडे डालती है और आगे के नज़ारे का मज़ा लेना सुरु कर देती है…

और एक बार फिर से दोनों झाड़िओ के अंदर चल रहे कामक्रीड़ा को देखने में मशगूल हो गए इधर विशाल ऋचा के गांड में अपने लुंड की ठोकरे जारी रखता है..






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और ऋचा भी लगातार अपनी गांड के दबाव को विशाल के लुंड पे जारी रखती है…. इनदोनो का सच पूछो तो बस लुंड ार छूट का मिलान तो हो hi चुका था बस उसके अंदर प्रवेश होना बाकि रह गया था लेकिन दोनों के बिच अभी भी वो अनकही पहेली बाकि थी जिसे सुलझाए बिना चुदाई नाम का इनाम मिलने से रहा..

विशाल के लुंड का दबाव भले hi ऋचा के गांड पे पद रहा था पर उसका असर उसके चुचिओ पे छुपे धड़कने पे होने लगा था जो पुरे रफ्तरा से बढ़ रही थी ऋचा का मन हो रहा था की वो अपनी पंत उतरे और विशाल का लुंड निगल ले अपनी छूट में लेकिन अभी वो और टाइम चाइये था और कुछ यही हाल विशाल का भी था दोनों के बिच इस वक्र एक ख़ामोशी थी और उनके जगह उनके लुंड और छूट में वार्तालाप सुरु हो चूका था… ऋचा को विशाल के लुंड को दुबारा से महसूर करने का मन होने लगता है और फिर अपने वासना में विवस होक वो बड़े चालाकी से अपनी पंतय को बिना उतरे बस साइड कर देइ है जिस से विशाल का लुंड एक बार फिर से ऋचा के गीली छूट से जा टकराती है…






ऋचा के मुँह से आए विशु निकल जाता है पर से आआह्ह्ह इतनी धीमी थी जिसे सिर्फ ऋचा hi सुन सकती थी इधर लुंड पे गिला पैन महसूस होते hi विशाल जब आगे देखता है तो पता है की ऋचा ने अपनी पंतय साइड कर दी है उसका उस वक़्त खुद से काबू खोने लगता है वो एक बार को ऋचा के कमर पकड़ के उसमे लुंड उतरने को सोचता भी है लेकिन उसे खुद पे काबू करना आ गया था अलका ने उसे खिलाडी बा दिया था वो चाहता था ऋचा खुद उसके लुंड की भीख मांगे और फिर वो जैसे चाहे ऋचा को छोड़ सके…. दोनों भाई भान इन कमोबेस इ थे की कौन आगे बढ़ेगा की तभी ऋचा को अपनी गांड में कुछ बहुत hi गरम और चिप छिपा एहसास होता होता है जिसके गर्माहट से उसका छूट भी अपनी पानी बहाने लगती है…





विशाल अपने लुंड का पानी ऋचा के गांड पे चोर देता है और ऋचा की छूट भी पानी बहाने लगती है… छूट और लुंड के बह जाने से दोनों के ऊपर जो नशा स्वर था वो इस पल के लिए तो उतर गया था और ऋचा एक बार फिर से िशाल की तरफ देखती है दोनों की नज़रे आपस में मिलती है और दोनों hi सहरमिंदा भी थे और प्यासे भी शर्मिंदगी में उस पल दोनों कुछ नहीं कहते और चुपचाप झाड़िओ से निकल के घर की तरफ निकल पड़ते है…
 
अपडेट- 56 रात का असली खेल

रागिनी अपने पति दिनेश को आवाज़ लगते हुवे चाट की तरफ जा रही होती है की तभी सामने से अलका भागते हुवे आती है और वो बहुत तेज़ तेज़ हांफ रही थी…

रागिनी- तू खान इतनी रात को भगति फिर रही है??? और हांफ क्यों रही है क्या हुआ??

अलका- कुछ नहीं दीदी मैं उधर सुसु करने गयी थी तो बस अँधेरे में बिल्ली को देख के दर गयी थी…

रागिनी- बिल्ली hi देखि थीं ा सांप वैंप तो नहीं पकड़ लिया था.. और तू इतना लाल क्यों हो रही है… इधर उजाले में आना जरा देखु…

अलका न चाहते हुवे भी रागिनी की बात मानते हुवे उसके साथ उजाले में चल देती है जहां रागिनी को उसका चेहरा देख के सारा खेल समझ आ जाता है क्यूंकि आखिर वही तो है इस घर की असली मालकिन और सबसे बड़ी तो भला उस से किसी की नियत कैसे छुपी रह सकती है…






रागिनी- लगता है फिर से बड़े वाले बिल ेके पंजे में फास गयी थी तू,,, बच के रहना जब से तू आयी है छोटे बड़े सरे बिल्ले लार यापकाये तेरे पीछे फिर रहे है… और रागिनी अलका के ठुड्डी को हाथ में ले के दोनों गलो को घुमा घुमा के देखती है.. अलका सच में किसी कश्मीरी सेब की तरह लाल हो गयी थी जिसने भी मसला था बहुत कास के मसला था…

रागिनी- हाय देखो तो कैसे नोचा है फूल सी बची को इसलिए नहीं आती है तू यहां है न???

(पर अलका कोई क्या करे तू है hi इतनी खूबसूरत की बाकिओ का चोर मेरे खुद का नियत तेरे लिए खराब हो जाता है जब भी तुझे देखती hun…ye बात रागिनी मन hi मन बोलती है औरफिर अलका से कहती है.....) खैर वो सब चोर अंडरर जा के सजा रात बहुत हो गयी है विशु भी अकेला पड़ा होगा बेचारा कमरे में …

अलका- जी दीदी गढ़ नाईट

रागिनी- गुड नाईट और उसके गांड पे एक थप्पड़ लगते हुवे कहती है… इसे जरा काम मटकाया कर यही है तेरे इस हालत का कारन….






अलका- आउच क्या कर रही हो दीदी आप भी और फिर अलका अपनी गांड को मसलते हुवे वहां से तेज़ कदमो से अपने कमरे की तरफ जाने लगती है…

ये तो था अलका का हाल लेकिन उसका ये हाल किया किसने उसे जानने के लिए अभी से 1 घंटे पीछे षाले है..

जैसा की अपडेट 54 में आप सब ने पढ़ा होगा की खाना खाने के बाद ऋचा और विशाल अपने कमरे में चले जाते है मगर घर के बाकि लोग वही हॉल में बैठ के गेम खेलने लग जाते hai…pariwar के सरे सदश्य आज बहुत दिनों के बाद एक सात हुवे थे इसलिए खेल काफी लम्बा चल जाता है और खेल के ख़तम होने के बाद देर रात जब सभी अपने अपने कमरे में जाने लगते है लेकिन अलका घर के पीछे बानी वाशरूम में टॉयलेट करने चली जाती है क्यूंकि अंदर के वाशरूम में कोई और गया हुआ था तो इसलिए वो बहार वाले में जाने की सोचती hai….alka अभी पेशाब कर के बाथरूम के बहार लगे वाशबेसिन में हाथ धो hi रही थी की कोई पीछे से उसे दबोच लेता है और सीढ़ियों के पास छाए अँधेरे की तरफ उठा के ले के चला जाता है…






अलका अचानक से हुवे इस हमले से दर सी जाती है वो चिल्लाने की जैसे hi कोशिश करती है सामने से उसके होंठो को अपने होंठो में भर के बंद कर दिया जाता है उसकी आवाज़ उसके गले में घुटने लगी थी वो आंखे फाडे जब सामने उसपे हमला किये सख्स को पहचानने की कोशिश करती है तो पति है की ये सख्श की और नहीं बल्कि उसका जेठ दिनेश है…

दिनेश जो जब से अलका आयी थी तब से उसपे नजरे जमाये बैठा था की कब वो अकेले में मिले और दिनेश उसे धार दबोचे और बी जो मौका मिला तो उसने उसे गवाना उचित नहीं समझा…

दिनेश उसके दोनों हाथो को ऊपर कर दीवार से सत्ता देता है और उसके चुचिओ को अपने चेहरे से मलते हुवे मसलने लगता है और चूमने भी






अलका- ये क्या कर रहे हो जेठ जी चोरो कोई आ जायेगा

दिनेश- ऐसे कैसे चोर दू अलका तुम्हे इतने दिनों बाद तो हाथ आयी है तू आज बिना चोदे जाने नहीं दूंगा… देख मेरा लुंड कैसे तेरे छूट में घुसने के लइएफ़डफ़डा रहा है… जब से तू आयी है तब से ये तेरी छूट के लिए तड़प रहा है

अलका छूटने की हर कोशिश करती है पर दिनेश के मजबूर पकड़ से वो खुद को आज़ाद नहीं करा पति है और फिर तभी दिनेश उसे पकड़ के घुमा देता है और उसका मुँह दीवार की तरफ और गांड दिनेश की तरफ हो जाता है…






दिनेश पीछे से कभ उसके छूट को तो कभी उसके गांड के छेद को अपने मुठी में भर के भींच देता है तो कभी उसके छूट में अंगूठा दाल के उसे अंगूठे से मसल देता है…

अलका दिनेश के हर हमले से मचल जाती है.. रह रह के उसकी कामवासना जागने लगती है पर वो इस वक़्त इस भावना इ बह नहीं सकती थी उसे खुद को मजबूत करना hi होगा… उसके ऊपर दिनेश का अनूठा भी इतना मोटा था जितना किसी ावर्ग साइज का लुंड होता है और इस वाट अलका के छूट में और गांड में कोई अंगूठा नहीं वही ावर्ग साइज का लुंड अंदर बहार हो रहा था…

अलका क्या कर रहे हो जेठ जी विशाल भी यही है देर हो रही है वो ढूंढ़ता हुआ आ जायेगा तो मुसीबत हो जाएगी…

पर दिनेश इस वक़्त कुछ भी सुनने के मूड में नहीं था वो अलका के नाईट गाउन की डोरी खोल देता है जिस से अलका सामने से नंगी हो जाती है और दिनेश पीछे से अपना लुंड अलका के छूट में मथने लगता है…






अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh जेठ जी मत करो प्लस चोर दो वर्ण मैं शोर मचा दूंगी

दिनेश जनता था की अलका शोर नहीं मचाएगी इसलिए वो उसके बातो पे जरा भी ध्यान नहीं देता… उल्टा अपने लुंड को और जोर जोर से अलका के छूट में मसलने लगता है.. इधर लगातार छूट पे हो रहे हमें से अलका बेशक बचना छह रही थी लेकि उसका छूट कब का अपना हथ्यार दाल चुकी थी… जी हाँ दिनेश के लुंड रगड़ने से अलका के छूट से पानी निकलना सुरु हो चुक्का था आखिर इतनी बड़ी छुडास औरत खुद को तो रोक ले पर अपनी चुटको कैसे रोक पायेगी…






दिनेश- देख बाह ुतु नान ा कर रही है लेकि तेरी छूट ने लार टपकना सुरु कर दिया है अपने जेठ का लुंड देख की बी जल्दी से शांत कर दे इसे वर्ण जितना देर करेगी तुझे hi प्रोब होगी..

अलका जा चुकी थी की दिनेश ऐसे मैंने वाला तो नहीं था फिर वो मजबूरन में बोल पड़ती है

अलका- अभी जाने दो जेठ जी कल खेत पी ा जाउंगी खाना देने के बहाने फिर कर लेना जो करना हो…

दिनेश- न तू बहुत चालक है बस भागने की तरकीब लगा रही है..

अलका – aaaaaaaaaaahhhhhhhh नहीं जेठ जी सच कह रही हूँ विस्वास करो अभी के लिए जाने दो प्लस….

दिनेश- ठीक है मान लेता हु लेकिन एक शर्त पे…

अलका जैसे hi दिनेश के मान लेने की बात सुनती है वो फ़ौरन उसके शर्त के लिए मान जाती है बिना ये जाने की आखिर वो जाने शर्त के नाम पे कौनसा काम करवाएगा

अलका- मुझे मंजूर है आपकी शर्त बस अभी के लिए जाने दो..

दिनेश- अलका की गांड को मसलते हुवे कहता है अरे पहले सुन तो ले बहुरानी…

अलका- थी है बोलो जल्दी जो बोलना है

दिनेश जाने तभी दूंगा जब तुम एरा लुंड चूस के शांत कर देती …

अलका- ये क्या बो रहे हो फिर जाने देना खान हुआ फिर तो रोक hi रहे हो

दिनेश छोडूंगा तो सुबह तक नहीं जा पायेगी अब सोच ले

अलका दिनेश के रिकॉर्ड से अछि तरह वाक़िफ़ थी इसलिए न चाहते हुवे भी उसे मन्ना पड़ता है

अलका- ठीक है मैं निकल देती हूँ लेकिन उसके बाद आप मुझे नहीं रोकोगे

अब मुँह चलना है तो निचे चला बहु .. इतना कह के दिनेश अलका का सर दबाते हुवे निचे बिठा देता है ..

अलका जमीं पे घुटनो के बल बैठ जाती है और अपने जेठ दिनेश के लुंड को मुँह में भरना सुरु कर देती है…






दिनेश- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh साली तेरी तरह पुरे गाओं में कोई लुंड नहीं चुस्त और अन्दर तक ले चाट इसे अचे से ऊऊफफफफफ अब जब तक रहेगी रोज आना पड़ेगा अपने जेठ की सेवा करने

अलका बिना कोई जवाब दिए दिनेश के लुंड को जोर जोर से चूस रही थी और दिनेश भी अलका के गरमा गरम मुँह में अपना लुंड दाल के कमर आगे पीछे कर रहा था..

दिनेश अलका के मुँह में लुंड दाल के बिलकुल पागल सा होने लगता है छूट न सही इस वक़्त वो अपनी भाई के बीवी के मुँह को तो छोड़ hi सकता था और बस फिर क्या था वो अलका के सर को पकड़ता है और कमर हिला हिला के झटके देना सुरु कर देता है






अलका के मुँह में लुंड घुसने से गगगगग की आवाज़ उसके गले में घुटने लगती है उसके मुँह से लार की एक धार उसके छाती की तरफ बढ़ने लगती है जिसे देलख दिनेश उसके मुँह से निकल रहे लार को पोछता है और फिर खुद hi चाट जाता है …

आअह्ह्ह्ह बाह उतेरी तो लार में भीस्वद है uuuuufffffffffffffff ऐसे हुइइइइइ चूस खा जा इसे बहुत्तड़पया है तूने ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह

इस बिच अलका कुछ नहीं बोलती बस पुरे शिद्दत से दिनेश का लुंड चूस रही थी…

काफी देर मुँह में लुंड होने से अलका की सांसे भी घुटने लगती है जिस वजह से वोट क बार को लुंड बहार निकलना चाहती है पर सईद दिनेश अपने मंजिल के करीब था जिस वजह से वो लुंड वापस से अलका के मुँह में दाल देता hai…aur फिर से झटके लगाना सुरु कर देता है…

देखते hi देखते दिनेश अलका के कामुक अदाओ और उसके मुँह की गर्मी के आगे ढेर हो जाता है और उसका लुंड एक पिचकारी मरते हुवे पानी चोर्ने लगता है और वो पानी अलका के मुँह पे गिरता जरूर है पर अलका उसे पीती नहीं है बल्कि थूक देती है….






और बाकि बचे हुवे थोड़े से लुंड का पानी जो उसके मुँह में hi होता है उसे वो उठ के दिनेश के मुँह में उगल देती hai…alka का ये अंदाज़ देख के लगता है की अगर वक़्त और सही जगह रहता तो अलका आज जरूर दिनेश का लुंड निगल लेती पर खैर दनेश भी आज अलका के मुँह से अपने hi लुंड का पानी पि गया था…

दिनेश का मन अभी भरा नहीं था ो अलका को और निचोड़ना चाहता था पर तभी उसकी बीवी रागिनी की आवाज़ उन्दोनो के कानो में गुजने लगती है जिसे सुन अलका खुद को चुराते हुवे भागने लगती है और इस बार दिनेश भी उसे पकड़ने की कोसिस नहीं करता बल्कि जाने देता hai…lekin जाने से पहले अलका को याद दिलाते है की अलका को कल खेत में आना है…

आज एक रात में hi इस घर के कई किरदारों ने अपना अपना टारगेट चुन लिया था जहां ऋचा विशाल को तो वही कामिनी बुआ भी किसी साये के साथ चाट पेट hi जिसे विशाल ने पकड़ लिया और आज इधर जब उसकी माँ अपने जेठ का लुंड चूस रही थी तो उस वाट भी चाट पे कोई था जो परछाई में देख पा रहा था की कोई औरत किसी मर्द का लुंड चूस रही है…






पहले तो उस सख्स ने सोचा की जाये और देखे की वो औरत है कौन लेकिन उसने जाने की बजाये इंतजार करना मुनासिब समझा क्युकी जब वो सीधी वाले जगह से निकल के घर के लिए जाएगी तो उसका चेहरा दिख hi जाता इसलिए रिस्क लेने के बजाये उसने उसे रिकॉर्ड करना सही समझा…









और उसकी आंखे तब फटी जब उसने देखा की उस अँधेरे को चीरते हुवे जो साया उजाले की तरफ जा रही है वो कोई और नहीं बल्कि काम देवी अलका है और अब उसके मन में ये सवाल भूचाल लमचणे लगा की वो सख्स कौन है जिसका लुंड अलका चूस रही थी और उस सीक्रेट के रेवेअल होने के लिए भी उसे जयादा वेट नहीं करना पड़ा क्यूंकि अगले hi पल उसे दिनेश आप लोअर ठीक करते हुवे आंगन में आता दीखता है….

रागिनी और दिनेश से छूट के अलका सीधे अपने कमरे में आती है दिनेश ने उसके छूट की आग भड़का दी थी अंदर आ के वो विशाल से एक बार तबियत से छोड़ना चाहती थी पर विशाल तो सो चुक्का था क्युकी जैसा की आपलोगो ने पिछले episode में पढ़ा होगा विशाल तो ऋचा के साथ वाक पे जाने का प्लान बना लेता है जिसके लिए उसे जल्दी सोना था और वो सो भी जाता है…

अंदर जब अलका को विशाल सोया दीखता है तो वो झुंझला जाती है वो मन hi मन बड़बड़ने लगती है.. यह पूरा गाओं तेरी माँ को छोड़ना चाहता है और ये मादरचोद मुझ जैसी औरत को बिना चोदे सो गया है… जैसा बाप वैसा बीटा… ऊऊफफफफफफफफफ मैं मैं कैसे शांत करू अपने इस छूट के आग को ये दिनेश बहन का लोढ़ा उसे भी अभी मिलना था क्या दिन में मिलता तो तसल्ली से चुदती उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ mmmmmmmmmmmaaaaaaa

खैर आज के लिए तो बच गयी उस से भी और रागिनी दीदी से भी और यही सोच के अलका खुश हो रही थी उसे लगा था की मुसीबत ताल गया है पर उसके लाइफ से एक मुसीबत जाने के लिए नहीं बल्कि अगली बड़ी मुसीबत लेन के लिए आती है…

अलका अभी अपने मोबाइल में पोर्न दखने की सोचती है और ऊँगली कर के खुद को शांत ार सके तभी उसके व्टसप्प पे एक उनकवन नंबर से एक वीडियो और इमेज आता है जिसे अलका खोलती है तो उसकी आंख के साथ साथ उसकी मुँह और गांड भी फैट जाती है..

ये कोई साधारण वीडियो नहीं बल्कि बिलकुल ताज़ा ताज़ा बना हुआ था जिसमे वोअपने जेठ का लुंड चूस रही थी और उसे उसी के लुंड का पानी पीएलए था






वीडियो में अलका की दोनों चूचिया हवा में तैर रही थी और वो अपनी चुचिओ की परवाह किये बिना अपने जेठ के लुंड को बड़े शिद्दत से चूस रही थी उसके बाद एक फोटो और आता है इसमें वो जगह थी जहां उसने जमीं पे दिनेश के लुंड का पानी थूका था…





अलका को पहले लगता है की वो दिनेश ने भेजा है पर वीडियो जिस एंगल से शूट हुआ था ो हाइट से यानि चाट से हुआ था तो दिनेश शूट कर नहीं सकता क्युकी वो तो अलका के मुँह में लुंड डेल उसकी मुँह को चढ़ रहा था फिर आखिर किसने ये रिकॉर्ड कर लिया… अभी वो यही सब सोच में थी की उसके फोन पे एक और मश्ग आता है

उनकंवण- कैसा लगा अलका जी आपको अपनी मूवी??? क्वालिटी कैसी है?

अलका- कौन हो तुम…

ु- हम भी आपके चाहने वाले है अलका जी..

अलका मन में सोचती है की अभी अभी तो वो आयी है और इतनी जल्दी पिछ यानि हो सकता है वो सख्स वह मिल जाये और यही सोच के वोट क स्टाल ओढ़ के वापस से सीढ़ियों की तरफ चल देती है… सीढ़ियों के पास वो पहुंच के मोबाइल के लाइट से चारो तरफ देखने लगती है की कोई दुबारा से उसे जकड लेता है है और भरी आवाज़ में कहता है शोर्ण ा मचाना वर्ण तेरा वीडियो वायरल कर दूंगा और पहले ये मोबाइल बंद कर..

अलका जो उसके बातो से नहीं पर वीडियो वायरल होने के बात से दर है इसलिए वो कुछ नहीं बोलती और टोर्च बंद कर लेती है…






वो ुंवन बंदा अलका के स्टाल से अलका के आँखों को बंद कर देता है और उसका हाथ पकड़ते हुवे उसे घर के उस कोने में ले जाता है जहां कोई आता जाता नहीं है…

अलका बार बार पूछती है कौन हो तुम और वो हर बार उसे चुप होने को कह के चुप करा देता है…

ु- चिल्लाओ मत अलका जी वर्ण तुम्हारी hi बदनामी होगी अभी के लिए चुप चाप चलो मेरे साथ जहां आपको ले जाता हु…

अलका के पास भी कोई चारा नहीं था और वो उस बन्दे के साथ चल पड़ती है…

थोड़ी hi देर में वो उस जगह आ जाते है जहां अलका को एक नया लुंड मिलने वाला था… वो षाले षाले एक जगह आ के रुक जाते है और फिर वो बंड्स अलका के बिलकुल करीब जाता है और उसके होंठो में अपने होंठ रख देता है.. अलका झट से अपना मुँह हटा के दूसरी तरफ कर लेती है इस्पे वो दुबारा अलका के मुँह को पकड़ के किश करने की कोशिश करता है..

पर अलका उसका जरा भी साथ नहीं देती

अलका- देखो तुम ये जॉब hi कर रहे हो galatttttttttaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh






इस से पहले की अलका अपनी बात पूरी कर पति वो सख्श उसके चुचिओ को पकड़ के का मसलने लगता है…

सख्स- जितना साथ डौगी उतना जल्दी फ्री हो जाओगी नखरे करोगी पूरी रात यही रोके रखूँगा…

अलका- पर तुम हो कौन ???

उनकवन- आपका आशिक़ और इतना कह के उसे धकेल देता है और अलका वहां पद ीक बीएड पे गिर पड़ती है..






वो उसके गले से पकड़ के उसे बीएड पे लिटा देता है और पहले उसके होंठो को फिर गार्डन को चूमने लगता है अलका जो हर बार मुँह घुमा ली रही थी वो इसे धकेलने की भी पूरी कोशिश कर रही थी पर आंख पे पट्टी होने के कारन वो विवस भी थी… उसके होंठो का रसपान करते हुवे अब वो सख्स अलका के दूध से भरी चटीओ की तरफ आता है और उसके कासी हुई चुचिओ को मसलते हुवे उसपे सजे चेरी नुमा निप्पल को मुँह में भर लेता है…





अलका जो अभी तक उसका विरोध कर रही थी निप्पल के मुँह में जाते और चूसने से वो उसके सर को पकड़ के अपनी और खींचने लगती है और उसके बालो में हाथ फेरते हुवे अपना दूध पिलाने लग जाती है…

वो सख्स भी अलका के पुरे निप्पल को मुँह में भर के चूस रहा था जैसे मनो उसमे बहुत दूध भरा हो और आज वो सारा दूध निचोड़ लेगा

Alka-aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaa

अब चुचिओ को और उसके बाद पेट और पेट में बना वॉक ुण्ड यानि उसकी गोल गहरी नाभि इनसभी को चूमते छत्ते हुवे उसके छूट के पास पहुंच जाता है…






अलका जो पहले से hi अपने काम वासना के आग में जल रहीथी ऐसे लगातार अपने जिस्म से हो रहे खेलवाड़ और छूट पे उस जीभ के ठंडक को पते hi सिहरने लगती है वो अपनी दोनों टंगे खोल लेती है जिस से वो सख्स अलका के छूट को छे से चाट सके

Alka—aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मत करो जेठ जी को पता चला तो वो तुम्हे छोड़ेंगे nahiiiiiiiiiiiiii

पर वो उन बंदा उसे अनसुना कर अपना काम जारी रखता hai..wo अलका को और तड़पने के लिए उसके छूट में पास में पड़े मक्के के बाल को उसके छूट में दाल के मक्के से उसकी छूट को छोड़ने लगता है…






मक्के के हर डेन के अंदर जाते और बहार निकलने से अलका के छूट में वो खलबली मचा रही थी मनो पूरा छूटा की डीआर खुल गयी हो और वो डेन उसके कोने कोने को खरोच रहे हो





अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ये क्या है निकल इसे मैं मर जाउंगी चोरो मुझे निकालो तुम मेरे साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते जाने दो मुझे

उन- चुप हो जा साली एप जेठ का लुंड चूस सकती है मेरा क्यों नहीं,…

अलका- पर ये लुंड नहीं कुछ और है निकालो इसे मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ

उन- इसका मतलब लुंड चूसेगी न

अलका- मैंने ऐसा कब कहा

अलका के इस बात पे उन दुबारा से उसके छूट में मक्का घुसा देता है अलका एक बार फिर से तिलमिला जाती है…

अलका- आअह्ह्ह्हह निकल माड़ेछोड भड़वे रंडी की औलाद लुंड नहीं है क्या जो ऐसे किसी और चीज को दाल रहा है मेरे छूट में

उन- लुंड बह है साली अब तुझे लुंड दिखता हु और वो अपना अलका के मुँह के क़रीब ले जाता है

पर अलका उसके लुंड को चूसने के बजाये मुँह साइड में कर लेती है..

उन- अगर इसे नहीं चूसेगी तो फिर वही भुट्टा तेरी छूट में दाल दूंगा फिर से आखरी बार कह रहा हूँ और वोट क बार फर से लुंड अलका के मुँह के क़रीब ले जाता है..






इस बार अलका न चाहते हुवे भी उसके लुंड पे जीभ फेरने लगती है

उन- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh एरे जीभ में भी कमल है तभी पूरा गाओं तेरा दीवाना है uuuuuuuuuufffffffffff ऐसे hi मुँह में भर अब इसे

पर अलका अभी भी उसके टिप पे लगे प्रेकम को जीभ से चाट रही थी इस्पे वो सख्स अपना आप खो देता है और फिर वो अलका के सर को पकड़ के उसके मुँह में अपना लुंड पेल देता है..






आज एक hi रात में अलका के मुँह में जाने वाला ये दूसरा लुंड था ये पहले वाले से कुछ फ्रेश यानि अलका ने अपनी जिंदगी में जीतनेय लुंड खाये थे उस हिसाब से वो आंख बंद कर के भी ये गेस कर सकती थी की कौन लड़के का लुंड है और कौन मर्द का लेकिन आज अलका का ये कला भी काम नहीं कर पा रहा था ो बेबस बने उस सख्स का लुंड चूसने लग जाती है..

अलका- गगगगगगगगग ओहोहोहोहोहोह aaaaaaaaaahhhhhh

उन- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ऐसे hi चूस साली कुटिया रैंड कही की उउउउउउफफ्फ्फफ्फ्फ़ माआआआ कितनी गरम है ये चिनार…

अलका जो समझ गयी थी की आज ये सख्स अपनी मनमानी कर के hi मानेगा वैसे उसे नहीं चोर्ने वाला इस्पे वो मन hi मन सोचती है की क्यों न अब खुल के मजे hi ले लू वैसे भी मेरी भी छूट बहुत प्यासी है और विशाल तो घोडा बेचा के सो चुक्का है

अलका- देखो बहुत देर हो गया तुम्हे जो करना था ो कर लिया अब मुझे जाने दो..

उन- ऐसे कैसे जाने दू मेरी जान अभी तुम्हारी छूट मरूंगा फिर जाने दूंगा

अलका- नहीं नहीं ये मत करो मैं चूस के hi निकल दूंगी प्लस

उन- तुम hi लेट करोगी जितना इधर उधर की बाटे करोगी..

अलका थोड़ी देर सोचने के बाद- ोक्तिक है कर लो अपने मन की छोड़ लो मुझे बस जो करना है जल्दी करो

उन- ये हुई न बात मेरी रंडी अलका






इस्पे वो अलका का छूट सहलाने लगता है और अलका भी उसके मुँह से उसके लुंड को निकल क ीक सिसकारी बाहरणे लग जाती है

अलका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaa

इस्पे उन भी अब ज्यादा समय गवाना सही नहीं समझता और वो अलका के छूट में बिना समय गावए लुंड दाल देता है..






अलका- आअह्हह्ह्ह्हह म्मम्माआआआ डालने से पहले बता तो देते uuuuuuufffffffffff अब जल्दी जल्दी धक्के लगाओ और फ्री करो मुझे…

उन भी अब अलका को पुरे जोश में छोड़ना सुरु कर देता है पलग जिसपे लिटा के वो अलका को छोड़ रहा था ो काफी पुराण था जिसमे हर झटके के साथ चार मर की आवाज़ हो रही थी

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh और तेज़ डैम नहीं है क्या uufuuuuffffffffffff लुंड में डैम नहीं और चले हो मुझे छोड़ने के सपने देखने.

इस्पे उस सख्स के मर्दानगी को चोट लगती है और वो अपने पुरे डैम से अलका के छूट में लुंड उतरने लगता है…










अलका का दूधजैसा गोरा बदन इस अँधेरे में भी किसी प्रकाशपुंज की तरह चमक रहा था.. जो उन को और भी ज्यादा आकर्षित कर रहा था..

अलका- ahaaaaahhhhhhhhhhhhhhh माआआआआ

उन के हर धक्के से अलका का मादक शरीर और उसपे भी उसके चटीओ पे लड़के दो खरबूजे किसी गज्जी नुमा थाली की तरह लपक लपक कर रहे थे /…

उन- कैसा लगा मेरी जान अब आया मजा…

उन को समझ नहीं आता की वो अब और क्या करे क्यूंकि उसके हर वॉर को अलका बड़े आराम से झेल जा रही थी इस्पे उसने अलका के टैंगो से पकड़ के उठा दिया और अब उसकी कमर बीएड पे थी बाकि गांड से नीच का भाग हवा में था और इसी पोजीशन में वो अलका को जोर दर धक्को के सात पेलने लग जाता है...






उन- अब कैसा लगा मेरी जान आज तो तेरी छूट का भोसड़ा बना के hi घर भेजूंगा साली रांड बड़ी आग है तेरे इस छूट में uuuuuuuffffffffffff

अलका- तुमसे जयादा दम तो किसी बचे में होगा पर खैर तुम अपना निकल लो मुझे शांत करना तेरे बस की नही…

इस्पे चिढ़ते हुवे वो सख्स अलका को पकड़ के उठता है और घुमा के घोड़ी बना देता है अलका कोप ता चल गया था की क्या होने वाला है इसलिए वो पहले hi अपनी छूट खोल देती है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ये भी तरय ककर ले आज तू….






और इस बार उन पीछे अपना लुंड अलका के छूट में घुसा देता है अलका बिलकुल तिलमिला जाती है उसके मुँह से चीख निकल गयी थी जिसे वो एप होंठो ो काट कैद ए.बी.ए. लेती है..

उन- क्यों अब आया मजा

अलका- uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffff जोर जोर से मेरा होने वाला है

उन- मेरा भी

अलका- अंदर मत निकलना

उन- फिर खान

Alka-Yhi जमीं पे गिराओ और खान






अलका- अब बाटे बंद करो और जो काम सुरु किया है उसे ख़तम करो जल्दी से

उन- हाँ हाँ मेरी जाएं ये ले fir…..aur एक बार फिर से उन अपने शरीर का पूरा जोर लगते हुवे अलका को हचका हचका के पेलने लगता है और अलका उसके हर धक्के से तिलमिला जा रही थी फिर भी उसके अंदर की रैंड जोट hi वो उसे पागल कर रही थी अलका अब खुद अपनी गांड उन के लुंड पे पटक पटक के पपुरा लुंड खा जाना चाहती थी और अगले कुछ hi झटको में उसका पानी निकल गया और उन उस पानी को वही जमीं पे गिरा देता है..

अलका वही बीएड पे पड़े पड़े हाफने लगती है वो उस सख्स से वीडियो देल करने का भी कहती है पर साणे से कोई जवाब नै आता है वो और भी कुछ कहती ै पर जवाब उसका भी नहीं आता है इस्पे वो अपने ब्लाइंड हटा के देखती है तो वहां कोई नहीं था उसका पूरा शरीर पसीने से लथपथ था और जमीं पे बहुत hi गधा सफ़ेद रास था..






वो उसे उठा के चट्टी है जिसका सवाद बिलकुल अनजान था यानि इस गैन में जिस किसी ने भी अलका को छोड़ा था उनमे से तो किसी का नहीं था… विशाल के बाद ये पहला वो रास था जो अलका को बहुत पसंद आया था इतना पसंद तो उसे कारन का पानी भी नहीं आया था उसके सगी बहन का बीटा और यहां पता नहीं कौन अनजान सख्स छोड़ के चला गया जिसके लुंड की दीवानी तो हो hi गयी थी अलका उसके लुंड से निकले रास की भी दीवानी हो गयी थी….

अब अलका यह ज्यादा टाइम वास्ते करना सही नहीं समझती और उसके लुंड क ेरस से साणे हाथो को चाट के साफ़ करते हुवे अलका वापस से अपने कमरे में चली जाती है और अब जा के उसे चैन की नींद आती है

तो क्या लगता है अलका खेत में जाएगी????

कौन है ये बाँदा जिसने अलका का वीडियो बनाया है और उसे बिना बताये छोड़ भी दिया
 
नेक्स्ट episode में विशाल एंड ऋचा इन गयम



 
ाचा जो भी मेरे रेगुलर रीडर भाई है उनसे और जो सिर्फ कहानी पढ़ के निकल जाते है उनसब से एक सवाल है आप सब ये बताओ की ये उनकंवण फकमान वाला सन कैसा लगा ये एक डैम से मेरे मंद में आया और फिर मैंने लिख दिया ी वास् ठन्किंग की लोगो को पसंद आएगा भी की नहीं इतनी शार्ट टाइम में कोई अलका को छोड़ गया बूत ये जो भी था हादसा था जिसका फायदा उस उन ने उठा लिया...

आप सभी अपना राई जरूर देना


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