Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 28 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट 222

सूर्य .....माँ आप कल से कुछ ज्यादा हे नहीं बदल गई हो

शालिनी जी ........हेहेहे बदलाव अच्छा हो तो अपना लेना चाइये वैसे तुम्हारी बुआ जब ऐसा करती है तब तो तुम खुश होते हो आवर मेरा ऐसा करने पे नखरा कर रहे हो

सूर्य ...... सॉरी उम्मम्मम्हा ok आप भी आ जाये जल्दी से

सूर्य खुद को त्यार कर बहार निकल जाता है रेखा जी का इस तरह से सीरियस तरीके से आंजना आवर शालिनी जी का इस तरह का चंचल रूप सूर्य को काफी हद तक ुदशी से बहार निकल चूका था

सूर्य सभी के साथ थोड़ी मस्ती थोड़ी मज़ाक के साथ नास्ता कर 11 बजे के आसपास सक्तिपुर निकल गया विधि रुक्मणि जी के साथ ........

अब आगे ............

सूर्य ने रस्ते में हे विधि आवर रुक्मणि जी को समजा दिया था की विक्रम के विषय में गीता जी से कुछ भी न कहे

दोनों सहमत भी थी इस बात से की अभी कुछ भी न बताना हे बेहतर है गीता ठाकुर को

ीदार सक्तिपुर हवेली में सुबह से गायत्री सूर्य का इन्तजार कर रही थी

जैसे हे रुक्मणि जी की कार हवेली में एंटर की गायत्री किसी चंचल हिरणी सामान अपने रूम से ख़ुशी से उछलते हुए निचे दौड़ गई

गीता जी ....... संभल कर बेटी कही को चोट न लगवा बैठना खुद को

गायत्री .....मम्मी विधि आ गई है

गीता जी .......ये ख़ुशी विधि के आने से तो हो नहीं सकती जरूर सूर्य भी साथ आया है जैसा उसने कल कहा था

सूर्य ....... नमस्ते चची जी कैसे है आप

सूर्य आगे भाड़ उन्हें गले से लगा लेता है

गीता जी .....अच्छी हूँ बीटा तुम कैसे हो सुबह से तुम्हारा इन्तजार हो रहा था आवर तुम अब आ रहे हो

सूर्य ........... घर पे कुछ मेहमान आये हुआ है चाही जी hello गायत्री कैसी है आप

गायत्री .....जी मैं अच्छी हूँ आप बैठिये न मैं कॉफ़ी ले कर आती हूँ

रुक्मणि जी .....दीदी आप बात कीजिये सूर्य से मैं दोपहर का खाना त्यार करती हूँ सूर्य खाना खाने के बाद हे जाना

सूर्य ......ok चची जी जैसा आप कहे पैर जल्दी करना मुझे कही आवर भी जाना है

गीता जी ...... विदेश से कब लौटे बीटा तुम

सूर्य ........वैसे तो दो दिन हो गए चची जी पैर घर पे कल साम को हे आया हूँ कुछ टाइम दिल्ली में रुक गया था

गीता जी ........ अच्छा किया बीटा यही उम्र होती है गुमने फिरने की बाद में कहा इन सब के लिया टाइम मिलता है घर घृस्ति परिवार बल बचे इन सब में हे कब बुढ़ापा दस्तक दे देता है कुछ भी पता नहीं चलता

सूर्य ........क्या चची आप खुद को अभी से बूढी मन रही हो क्या

गीता जी ....... इसमें मन्ना क्या है बीटा अब सर पे सफेदी आणि सुरु हो गई मतलब बुढ़ापा सुरु हो गया है

सूर्य ...... चची जी बुढ़ापा अगर अपनी सोच में आ जाये तो कुछ कहा नहीं जा सकता पैर अगर मन में चंचलता हो आवर चारो तरफ ख़ुशी फिर बुढ़ापा कोई मायने नहीं रखता बस हमेशा खुश रहना चाइये इंसान को जितना हो सके उतना सभी को ख़ुशी भटनी चाइये

गायत्री ...... ये लीजिये आपकी कॉफ़ी

सूर्य .......... सॉरी वो मैं भूल गया आप आवर विधि कार से बेग निकल लाएगी मैं वही भूल आया

गायत्री है में गर्दन हिला विधि को साथ ले बहार कड़ी कार से 2 बड़े से ट्राली बैग निकलती है आवर उन्हें ले कर अंदर चल देती है

गीता जी ........ ये सब क्या है बीटा इन बैग्स में

सूर्य .....ज्यादा कुछ नहीं चची जी बस कुछ कपडे है जो आप सब के लिया ले कर आया हूँ जब पुरे परिवार के लिया लिया तो आप लोगो के लिया कैसे न ले कर आता आप भी तो मेरा परिवार हो

सूर्य एक बैग गायत्री विधि की आवर कर देता है

सूर्य ...... इसमें जो भी है आप दोनों का हसि जैसा आपको दोनों को पसंद हो उस हिसाब से देख लेना

आवर इसमें आपके आवर रुक्मणि चची जी के लिया कुछ साड़ी आवर अजय के लिया कुछ जीन्स t-shirts आवर सुइट्स है

गीता जी .....इन सब की क्या जरुरत थी बीटा

सूर्य .....जरुरत आपको नहीं थी पैर मुझे थी तुम दोनों अंदर ले जा कर देख को

गीता जी ......ठीक है बीटा ान तुम्हे मन तो कर नहीं सकती

रुक्मणि जी कोई आधे घंटे में सभी का खाना त्यार कर चुकी थी पाछो ने मिल कर खाना खाया खाने में ज्यादा वैरायटी यो नहीं थी पैर इतने समय में जो भी बना काफी स्वादिस्ट था

सूर्य .......चची जी खाना काफी अच्छा था

विधि ......आप कुछ अपने बारे में बताने वाले थे न बड़ी मम्मी आवर हम सब को

सूर्य आप दोनों तो जान चुकी हो आवर सुबह देख भी चुकी है सब

गायत्री .....क्या मतलब विधि आवर ऐसा क्या देख लिया तुमने वह

विधि .......आपको पता है दीदी आज मैंने इनकी हवेली में एक दो नहीं बल्कि 3 रियल पारी देखि वो बहुत खूबसूरत थी

गायत्री ....... तुमने खाना ज्यादा तो नहीं खा लिया है चची जी आपने इसके खाने में कही भांग तो नहीं मिला दिया है

रुक्मणि जी ....... बेटी गायत्री विधि सच कह रही है हमने सच में उन्हें देखा है आवर बात भी की है एक परीलोक की रानी थी आवर एक उनकी बेटी राजकुमारी पारिजात आवर एक सूर्य के गुरुदेव की बेटी रिद्धि पारी

गीता जी ......क्या सच में परिया होती है मुझे तो यकीं हे नहीं हो रहा मुझे तो हमेशा लगता था की ये बच्चो को बहलाने वाली कहानिया है पैर वो तुम्हारी हवेली में कैसे बीटा

रुक्मणि जी ....... दीदी जिन दो परियो से हम मिले उन दोनों की सदी सूर्य से होने वाली है वो इनसे हे मिलने यहाँ आये थे

गीता जी .....पैर तुम्हारी सदी तो किरण से हुई है अभी अभी

सूर्य ......... बहुत लम्बी लिस्ट है चची जी

10 ,12 तो होंगी हे

रुक्मणि जी ........ दीदी आपको पता है सूर्य कोई सदर्न इंसान नहीं है इसके पास बहुत सी जादुई सकतिया है जिनका इस्तेमाल ये बुराई को मिटने के लिया करता है

गीता जी ....... क्या सच में पैर तुम इंसान हो फिर तुम्हारे पास ऐसे सकतिया कैसे

सूर्य ....... चची जी हूँ तो इंसान हे पैर मेरा जनम किसी विशेष कार्य के लिया हुआ है ुशी कार्य को पूरा करने के लिया मुझे ये सकतिया मिली इन सक्तियो के साथ साथ बहुत सी जिम्मेदारिया भी मिली है इनका इस्तेमाल मैं अपने निजी जीवन में नहीं कर सकता हूँ आवर आप भी इस बात का जिक्र किसी से न कीजियेगा अजय से भी नहीं

गीता जी ....... ठीक है बीटा वैसे भी इस बारे में जितने काम लोग जाने उतना अच्छा है कभी भी अपनी सकतिया का गलत प्रयोग न करना बीटा

सूर्य जी ....... चची जी अब मैं चलता हूँ आवर है कल रात को घर पे पार्टी है आप सब को आना है

विधि ......कैसे पार्टी हमें तो किसी ने कुछ बताया हे नहीं इस बारे में

सूर्य ....... आज माँ का बर्थडे है उनके लिया सरप्राइज पार्टी राखी है इस लिया अभी किसी को भी इसके बारे में बात करते नहीं सुना ताकि माँ को पता न चले

गीता जी ........ हम जरूर आएंगे बीटा पैर बीटा अजय को हम लोग साथ में नहीं ला सकते

सूर्य ......मैं जनता हूँ चची जी सब अभी उसे इन सब से दूर रखना हे अच्छा है

रुक्मणि जी .....बीटा तुम उसकी बुरी आदत.....

सूर्य ......नहीं चची जी मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ अजय को खुद से बदलना होगा ये मेरे लिया कोई मुश्किल कार्य नहीं है पैर इस तरह से करना गलत होगा अजय को कुछ वक़्त दो वह खुद में बदलाव ला रहा है

रुक्मणि जी .......सॉरी बीटा

सूर्य .....कोई बात नहीं चची जी मैं चलता हूँ

गीता जी ...... कुछ देर बच्चियों के साथ रम काट फिर चले जाना बीटा अगर ज्यादा हे जरुरी है तो नहीं तो कुछ वक़्त आराम कर को दूप बहुत है बहार

चल रुक्मणि तू भी आराम कर ले

रुक्मणि जी ......जी दीदी विधि सूर्य को रूम में ले जाओ वह आराम भी कर लेना तुम लोग आवर बात भी कर लेना

विधि बड़े हे हक़ से सूर्य का हाथ पकड़ ऊपर ले अति है साथ में गायत्री भी चल देती है ऊपर विधि के रूम में

करीब एक घंटा दोनों के साथ बीतता है सूर्य जिस से दोनों काफी खुश थी

साथ हे सूर्य ने जो शॉपिंग की वो भी बहुत पसंद आई दोनों को हे

सूर्य करीब 01:30 को हवेली से निकला आवर सीधा फार्महाउस जा पंहुचा

सूर्य .......वयोम भाई कैसा चल रहा है सब

वयोम ....... भाई पूछो हे मत विक्रम की जो हालत इन तीनो ने की है उसे देख कर मुझे ख़ुशी तो हो रही है पैर साथ हे दुःख भी

सूर्य ........समाज सकता हूँ हर कोई विक्रम के जैसा क्रूर तो हो नहीं सकता न

वयोम सूर्य को वह उस रूम में ले कर गया जाया इस वक़्त फीमेल विक्रम अकेला हे था सूर्य को देखते हे उसने बीएड से उठने की कोशिश की पैर कल रात भर से तीनो ने जो कहर फ. विक्रम पे ढहाया था उस के कारन f.vikram उठना तो दूर हिल भी नहीं प् रहा था

f.vikram सूर्य को देखते हे हाथ जोड़ देता है

सूर्य....... देख लिया एक लड़की के साथ जब तुम बलपूर्वक अपनी हवश मिटते थे तब उसे कैसा मह्सुश होता था आज तक तुमने जो किया आज वही सब तुम्हारे साथ हो रहा है

F.vikram ...... मुझे माफ कर दो चाहे तो मुझे जान से मार दो पैर इस तरह तड़पा तड़पा कर मत मारो

सूर्य ......... बाकि सभी पापो के लिया मैं तुम्हे आसान मौत दे भी देता पैर तुमने एक मासूम बचे की बलि दी किस लिया इन कुछ काली सक्तियो के लिया

मैंने तुम्हे ुशी दिन मार देना चाइये था जिस दिन गुजर सिंह को मानसी के हाथो मरवाया था पैर उस दिन तुम्हारी सुरक्षा तुम्हारी माँ आवर बहनो के प्रेम ने की थी मैं चाहता तो ुशी दिन तुम्हारा अंत कर देता पैर उस वक़्त ऐसा करता तो एक माँ की ममता की हत्या का पाप मुझे लगता दूसरा सबसे बड़ा पाप किया तुमने ुशी माँ की ेजात पे हाथ दाल कर

f.vikram ........ मुझसे पाप हो गया मुझे माफ कर दो

सूर्य ...... नहीं तुम्हे माफी नहीं मिल सकती अगर तुम किसी स्त्री के साथ उसकी सहमति से सम्बन्ध बनाते फिर चाहे वो तुम्हारी मम्मी हे क्यों न हो या फिर रुक्मणि चची जी जिनके साथ तुम्हारे शारीरिक सम्बन्ध थे अगर उन दोनों की सहमति से सब होता तो तुम्हे इतनी कठिन सजा नहीं मिलती

ऊपर से तुमने अपनी बहन विधि पे हे बुरी नजर डाली वयोम वो तीनो कहा है

वयोम .....भाई वो तीनो दूसरे रूम में है

सूर्य ...... F.vikram अब इस सजा से तुम्हे उनकी माफी हे मुक्त कर सकती है उम्मीद करो की वो तीनो तुम्हे माफ कर दे

सूर्य वह से वयोम के साथ निकल गया

दूसरे रूम में जहा तीनो मर्दो के रूप में बैठे थे

सूर्य को देखते हे तीनो खड़े हो हाथ जोड़ लेते है

तभी वह किसी को देख सूर्य चौंक जाता है

सूर्य ....... आप लोग कोण है आवर यहाँ पे कैसे

सामने दो अदृश्य परछाईया कड़ी थी

परछाई 1 ......हम यमदूत है तुम कोण हो आवर तुम हमें कैसे देख सकते हो

वयोम .....भाई आप किस से बात कर रहे है यहाँ पे तो हम पाछो के अलावा कोई नहीं है

सूर्य ....... आप लोग यहाँ किस लिया आये है

यमदूत 1 ...... हम इस स्त्री के आत्मा को लेने आये है इसका जीवन चक्र समाप्त होने वाला है

उनका इशारा था मल्टी सास की आवर

सूर्य ......क्या आप कुछ वक़्त रुक सकते है

यमदूत 2 ......... इनकी मृत्यु योग में केवल कुछ समय शेष है

सूर्य ...... आप तीनो का क्या निर्णय है अभी f.vikram को आवर सजा देनी है हैक्या आपको

मल्टी सास ...... नहीं बीटा हमने अपने गुस्से में पहले हे बहुत गलत कर चुके है अब आवर नहीं मैं उसे माफ करती हूँ उसे उसके किये की सजा ईश्वर देंगे

सूर्य .......आप दोनों का क्या विचार है

सुमन मल्टी ......हम भी माँ जी से सहमत है

सूर्य ...... ठीक है फिर एक बार विक्रम से मिल कर उसे माफ कर दीजिये ताकि वो अपनी अगली सजा भोग सके

सूर्य तीनो को ले कर f.vikram के पास पंहुचा

जहा विक्रम तीनो के पैरो में गिर कर माफी मांगता है

तीनो के माफ करते हे f.vikram को उसका पूर्ण रूप मिल जाता है वही मल्टी सुमन .m.saas को उनका स्त्री रूप

सूर्य ....... इसकी मृत्यु योग कब का है

यमदूत 2 ........ हमें इसकी इजाजत नहीं है की किसी की मृत्यु का समय किसी आवर को बताये

सूर्य .......मल्टी जी आपकी सास का अंतिम समय आ चूका है आप को जी भी बात करनी है जल्दी कर लीजिये

सूर्य अपनी आँखे बंद कर किसी को याद करता है

कुछ देर बाद वह प्रेतराज आ पहुंचे

सूर्य .....परनाम पिता श्री

प्रेतराज ....... चिरंजीवी भाव पुत्र आज हमें याद करने की क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी पुत्र सूर्य यमदूत आप यहाँ पे

यमदूत 1 ,2 ......परनामी प्रेतराज हम इन स्त्री के प्राण हरण करने आये है

सूर्य ......पिता श्री आप विक्रम के कर्मो से तो परिचित हो चुके होंगे अब आगे का दंड आप हे इसे देंगे

प्रेतराज ...... नहीं पुत्र अभी विक्रम की कुछ सांसे बची हुई है उन साँसों की सीमा ख़तम होने पे हे हमारा दंड चक्र आरम्भ होगा

सूर्य ......जैसा आप उचित समजे पिता श्री ये अब आपकी जिम्मेदारी है

ीदार मल्टी सुमन अपनी म. सास से लिपट कर रो रही थी

कुछ हे पालो में यमदूत m.saas के प्राण हर लेते है

सुमन आवर मल्टी उस निर्जीव सरीर से लिपट कर फुट फिट कर रोने लगती है

सूर्य ..... वयोम इनकी विक्रम आवर हमसे जुडी सभी यादें मिटा दो ताकि ये अपने आगे का जीवन सुकून से जी सके

वयोम ....जी भाई

प्रेतराज ....... पुत्र मैं चलता हूँ आवर विक्रम को उसके कर्मो का उचित दंड मिल जायेगा

दोनों यमदूत प्रेतराज को परनाम कर m.saas की आत्मा ले कर वह से लौट गए विक्रम को प्रेतराज ले कर चले गए अब यहाँ वयोम सूर्य मल्टी सुमन आवर m.saas का निर्जीव सरीर बचा था

सूर्य ..... आपके पति को खबर कर दीजिये उनकी माँ की मौत की

मल्टी ......आप कोण है

सूर्य ...... जी मैं सूर्य ठाकुर हूँ सूर्यगढ़ से यहाँ विक्रम से मिलने आया था ये मेरे बड़े भैया है वयोम

सुमन रोटी हुए अपने जीजा को कॉल करती है वयोम की सहायता से सूर्य m.saas के निर्जीव सरीर को मल्टी के रूम तक पहुँचता है जो फार्महाउस के पीछे बने हुए थे

सूर्य .....भैया आप इनके साथ रुकना जब तक इनके पति न आ जाये मैं चलता हूँ

वयोम .....ठीक है भाई

सूर्य वह से घर की तरफ निकल जाता है वयोम को समजा कर

सूर्यगढ़ .........

दोपहर के भोजन के वक़्त सूर्य के नाना जी का परिवार भी सूर्यगढ़ आया हुआ था

सिवाय जोरावर जी को छोड़ कर क्यों की वो किसी राजनीतिक काम से बहार थे वैसे भी वो ज्यादातर समय बहार हे रहते है

रानी पारी वापिस परीलोक जा चुकी थी रिद्धि आवर परिधि को यही छोड़ कर

सूर्य के जाने के बाद शालिनी जी ने मेर्री जी से सदी की बात करने की कोशिश पैर मेर्री जी ने साफ साफ कह दिया की वो अभी सदी नहीं करेगी

शालिनी जी ने भी मेर्री जी पे कोई दबाब नहीं डाला

ीदार दोपहर के काने के बाद सभी लड़किया सूर्य के रूम में शालिनी जी के बर्थडे पार्टी को ले कर डिसकस कर रही थी

निचे दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय जी पाछो किसी आवर हे चर्चा में लगे हुआ थे वही बाकि महिलस्य रेखा जी शालिनी जी मेनका जी प्रिय जी सन्ति जी शालिनी जी के रूम चर्चा में लगी हुई थे

2,30 के करीब सूर्य घर लौट जब वो अपने रूम में पंहुचा तो पूरा रूम फूल था

सूर्य ...... क्या बात है आज इतने साडी खूबसूरत परिया हमारे रूम में कैसे

कोमल ........ कही इतने साडी खूबसूरत परिया देख आपका इमां तो नहीं दोल गया हेहेहे

सूर्य .......... क्या बात है कोमलांगी देवी आज कल आप कुछ ज्यादा हे मस्ती करने लगी है

कोमल ..... आप जो नहीं करते हो

सूर्य .....देख रही हो स्वीटी ये कोमल क्या जह रही है

किरण ....... आप जाने आवर कोमल दी जाने

सूर्य ........ वैसे क्या डिस्कशन चल रहा है जो इतनी गुप्त मीटिंग राखी जा रही है

किरण. ...... माँ की बर्थडे पार्टी का प्लान कर रहे है

सूर्य ...... चलो अच्छा है आप सब देख लोगी तो मुझे कोई टेंशन नहीं होगी

किरण ........ पैर माँ को पता न चले इस पार्टी का इसका ध्यान आपको रखना होगा कुंवर जी तो आप पार्टी से पहले उन्हें सहर ले जाना ताकि उनके पीछे से हम सब तयारी कर सके

सूर्य ....... Ok ये मैं कर लूंगा आवर सुबह के लिया सबको सॉरी मेरी वजह से आप सभी का मूड भी मैंने ख़राब कर दिया आप लोग बात कीजिये मैं किसी आवर रूम में आराम करता हूँ फिर साम को मैं माँ को ले कर सहर चला जाऊंगा

किरण ....... है ये ठीक रहेगा आप उन्हें वही से ब्यूटी पारलर से त्यार कर लाना

सूर्य .....वो सब तो हो जायेगा पैर कोई उन्हें पहले विश न कर दे नहीं तो पूरा प्लान ख़राब हो जायेगा

किरण ......don't वैरी कुंवर जी मैं पहले हे सभी को समजा दिया था कल हे आवर कल रात मैं बड़े पापा को भी बता दिया था वो साम को सीधा यही पे आएंगे

सूर्य ......ok मैं कुछ देर आराम करता हूँ मुझे 5 बजे उठा देना ok

पायल .....मुझे भी थकन हो रही है मैं भी चलती हम आप मेरे साथ चलिए

प्रीती ......मैं भी आती हूँ पायल दीदी मुझे भी रेस्ट करना है

राधा ....... पायल प्रीती तुम दोनों यही रुको आप जाओ इनके साथ रिद्धि दी परिधि हम तो फिर भी इनके साथ रहते है आप लोग जाइये आवर कुछ समय बिताइए

किरण के है कहने पे रिद्धि आवर परिधि दोनों छठ पे बने रूम में चल दी जो पहले स्टोररूम हुआ करता था पैर अब वो एक अच्छा खासा रूम था जिसमे किंग साइज बीएड a.c सोफा सभी सुविधा मौजूद थी

किरण ...... सॉरी पायल प्रीती दी पैर राधा ने जो किया वो सही किया हम तो इतना समय इनके साथ रहते है पैर उन दोनों को तो इतना समय भी नहीं मिलता अभी मिला है तो उन्हें साथ में बिताना चाइये

पायल ....... स्वीटी तुम सही कह रही हो आवर सॉरी मत बोलो जो किया सही किया

जैसे हे सूर्य अंदर पंहुचा दोनों को एक एक किश कर अपने साथ बीएड पे सुला लेता है

कोई कुछ नहीं बोलता बस ख़ामोशी से तीनो चिपके हुए थे

काफी देर बाद सूर्य ने हे इस ख़ामोशी को भांग किया

सूर्य ....... सॉरी सुबह जो मैंने किया उसके लिया आप दोनों इतनी दूर से हम सब से मिलने आई आवर मैंने जिस तरह ......

रिद्धि ....... आपको कुछ भी कहने की जरुरत नहीं जरूर को कारन रहा होगा हमें नहीं जानना बस आप सन्ति से लेते रहिये आवर कुछ मत बोलिये

सूर्य दोनों को अपने सीने पे लेटाया रिद्धि आवर परिधि के बदन से आती मिटटी मिटटी भीनी भीनी खुशबु से न जाने कब उसकी आँख लगी उसे भी पता नहीं चला

रिद्धि आवर परिधि दोनों बस एक तक सूर्य को देखती रही जब तक किसी ने दूर पे नॉक न किया

परिधि .....दीदी इनके उतने का समय हो गया है

रिद्धि ......है माँ के साथ इन्हें बहार भी तो जाना है न

रिद्धि जल्दी से सूर्य को किश कर रूम के दूर की आवर भद्दी सामने कोमल हे थे

कोमल .....दीदी उन्हें उठा दीजिये ताकि वो फ्रेश हो जाये

रिद्धि ....... Ok मैं उठा देती हूँ

किरण वही से लौट जाती परिधि सूर्य को उठा देती है

सूर्य .....पता हे नहीं चला कब उस मीठी मिथ सोंधी खुसबू सूंघते हुए आँख लग गई

परिधि ......उठिये मम्मी जी के साथ आपको सहर जाना है न

सूर्य .....ok पैर पहले अच्छे से मुँह मीठा तो कर लूँ

सूर्य परिधि को अपने निचे ले किश करने लगता है कुछ 3,4 मिंटू बाद सूर्य अलग हुआ आवर रिद्धि की तरफ बढ़ा रिद्धि को उठा वही बीएड पे लिटा उसे किश करता है अभी किश करते हुए हे मिनट्स हुए थी की जूलिया तीनो की कॉफ़ी ले कर आती है

रिद्धि परिधि अपनी कॉफ़ी ले निचे चल देती है

सूर्य जूलिया को गौड़ में उठा बाथरूम में गेस गया आवर शावर ों कर देता है

सूर्य ........ उम्मम्मम्हा क्या बात है आज मेरी जुली कुछ उदाश है बात क्या है

जुली ...... वो पिता श्री की याद आ रही है

सूर्य ...... ऐसे बात है तो हम उन्हें अभी बुला लेते है साथ में किंग क्वीन आवर देवसूफ़ी नियों जी को भी

जुली ....... क्या सच में ऐसा हो सकता है

सूर्य ........ तुम्हे जो चाइये वो मिलेगा जुली पैर ऐसे उदाश होना अच्छी बात नहीं है इस से बचे पे गलत प्रभाव पड़ता है मैं जनता हूँ तुम्हारे साथ में वक़्त नहीं बिता पता हूँ पैर क्या कृ मेरी भी मज़बूरी है

जुली ......उम्म्म्महा आप ऐसा कुछ भी न सोचिये बस मेरे लिया इतना हे बहुत है की आप मेरी नजरो के सामने हो

सूर्य जुली के सरीर से चिपकी हुई वो पतली t-shirts उतर देता निचे ब्लैक ब्रा में कैद उन घोष से भरे माध्यम आकर की उन्नत उभारो के ऊपर हिस्से पे अपने होंठ चिपका उस भीगे हुए उभर के ऊपर हिशे को चूमते हुए पीछे से ब्रा का हुक खोल जुली के सरीर से अलग कर देता है आवर एक निप्पल्स को मुँह में भर चूसने लगता है

जुली....... उम्म्म्मममहहह पता नहीं कब से मैं यही चाहती थी पैर कहने की हिमायत नहीं ओह्ह्ह्हह्ह आराम से काटिये मत न

सूर्य एक हाथ से जुली की इलास्टिक वाली लेगी नीची किसका कर एक पल अलग हो अपना शार्ट आवर t-shirts उतर कर खुद भी निर्वस्त्र हो गया आवर जुली को भी कर दिया





जुली सूर्य के लिंग को पकड़ अपनी योनि कुंड पे अपने दोनों जांघो के बिच रख सूर्य की किश करने लगती है

सूर्य को अपने सीने पे जुली के आकड़े हुए निप्पल्स के साथ साथ उस कोमल मात्र के गोले का भी अहसास हो रहा था जो सूर्य के सीने से लगने से जैसे गोल से सपाट हो चूका हो

डेरी डेरी जुली अपनी कमर को आगे पीछे कर उस मोठे तगड़े लिंग पे अपनी योनि हो रही रगड़ का मज़ा लेने लगती है

रह रह कर जब सूर्य का फुला हुआ सूपड़ा जुली की योनि लिप्स को फैलाया हुआ योनि द्वार को रगड़ते हुए निकलता तो जुली के मुँह से मादक सिसकारियां निकल जाती





कुछ देर बाद जुली खुद से निचे बेथ सूर्य के लिंग को चूसने लगती है

जिसपे हल्का हल्का योनि राश भी लगा हुआ था

जिसे जुलु बड़े मज़े से साफ कर लिंग को चूसने लगती है





सूर्य ...... जुली मैं ऐसे संत नहीं हो सकता अभी केवल तुम्हे संत करना है

जुली .....क्या मतलब मैं कुछ सामजी नहीं

सूर्य .......मैं पूर्ण सेक्स के बिना संत नहीं हो सकता आवर पुराण सेक्स अभी कर नहीं सकता जब तक सदी नहीं हो जाती इस लिया यहाँ म्हणत करना बेकार है

सूर्य जुली को पलट कर पीछे से उसकी जंगो के बिच फिर से अपना लिंग गुस्सा कर जुली को योनि पे तेजी से लिंग गुस्ते हुए हलकी तेजी से अपने कमर आगे पीछे करने लगता है साथ हे जुली की चूचियों को मसलने लगता है





हर देखे के साथ जुली की योनि के होंटो को खोल जब वो मोटा गरम सूपड़ा आगे निकलता तो जुली को की योनि में में मस्ती से जलपान होने लगता आवर जब वही सूफड़ा गुदा द्वार को रगड़ते तो खुद बा खुद जुली की जंगे आपस में आवर आदिक चिपक जाती

कुछ देर बाद जुली कपड़े हुए अपने दूसरे चरमसुख को प्राप्त कर जाती है





सूर्य का लिंग अभी भी वैसे हे जल रहा था

जुली ......अब इसको कैसे संत करोगे आप

सूर्य .....जरुरत नहीं है खुद संत हो जायेगा ये

अब जल्दी से नाहा लोट फिर चलते है निचे

सूर्य आवर जुली दोनों कहा कर निचे चक देते है

क्युकी सूर्य को शालिनी जी को ले कर सहर जाना था ताकि पीछे से सभी खुल कर पार्टी की त्यार कर शालिनी जी को सरप्राइज कर सके

जुली के चेहरे की रौनक देख किरण माजरा समाज जाती है

किरण .......... चलिए मेरे साथ रूम में चलिए कुंवर जी

सूर्य. ......... उसकी जरुरत नहीं है स्वीटी अभी माँ के साथ बहार जा रहा हूँ बस माँ आ जाये तब तक कॉफ़ी पीला दो बढ़िया सी

किरण है बोल कर कॉफ़ी बनाने चल देती है कुछ हे देर में शालिनी जी भी आ जाती है सूर्य कॉफ़ी फिनिश कर अपनी कार से शालिनी जी को ले कर सहर की तरफ निकल गया

पिछसे लड़किया पूरी हवेली को सजाने में लग गई

तयारी करते करते कब सूर्यास्त होने लगा पता भी नहीं चला

अब सभी लड़किया भी त्यार होने लग गयी थी बहार लोने में सकती की देख रेखाओं में बाकि तयारिया भी पूरी हो चुकी थी दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय महेंद्र जी बहार लोने में हे बे थे गैप सैप करने में लगे हुए थे कुछ हे देर बाद शिव आवर जोरावर जी भी हवेली पहुंच जाते लड़किया आवर बाकि परिवार की महिलाये भी लगभग सभी त्यार हो चुकी थी

करीब 8 बजे के गीता ठाकुर रुक्मणि जी गायत्री विधि में हवेली में पधार चुकी थी

चारो ने सूर्य द्वारा की गयी शॉपिंग ड्रेस आवर सरिया पहनी हुई थी जो की चारो पे बहुत खूबसूरत लग रही थी

तभी वह रानी पारी गुरुदेव की साथ जिनिशा जीनत j.king जुली के पिता जी नियों किंग एंड क्वीन भी आ पहुंचे

अब बस सूर्य आवर शालिनी जी का हे इन्तजार था जो सहर से कभी भी लौट सकते थे सब उनका हे इन्तजार कर रहे थे .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................
 
अपडेट. 223

अब सभी लड़किया भी त्यार होने लग गयी थी बहार लोने में सकती की देख रेखाओं में बाकि तयारिया भी पूरी हो चुकी थी दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय महेंद्र जी बहार लोने में हे बे थे गैप सैप करने में लगे हुए थे कुछ हे देर बाद शिव आवर जोरावर जी भी हवेली पहुंच जाते लड़किया आवर बाकि परिवार की महिलाये भी लगभग सभी त्यार हो चुकी थी

करीब 8 बजे के गीता ठाकुर रुक्मणि जी गायत्री विधि में हवेली में पधार चुकी थी

चारो ने सूर्य द्वारा की गयी शॉपिंग ड्रेस आवर सरिया पहनी हुई थी जो की चारो पे बहुत खूबसूरत लग रही थी

तभी वह रानी पारी गुरुदेव की साथ जिनिशा जीनत j.king जुली के पिता जी नियों किंग एंड क्वीन भी आ पहुंचे

अब बस सूर्य आवर शालिनी जी का हे इन्तजार था जो सहर से कभी भी लौट सकते थे सब उनका हे इन्तजार कर रहे थे .............

अब आगे ..........

सूर्यगढ़ ....... सूर्य को सिटी 1 से निकलते निकलते अँधेरा हो चूका था जो की गर्मिया काफी लेट हे होता है

शालिनी जी सूर्य पे गुस्सा थी क्यों की वो इतने लेट तक कभी भी बिना सखा घर से इतने समय तक बहार नहीं रही थी आवर ऊपर से सूर्य ने उनके मन करने के बावजूद ब्यूटीफुल पारलर ले जाना आवर उनकी पूरी बॉडी का मेकओवर करवाना

जहा पहले सूर्य की इस तरह की ज़िद उन्हें पसंद आ रही थी पैर जैसे जैसे समय गुजरता गया उन्हें घर लौटने की जल्दी होने लगी पैर सूर्य किसी न किसी तरह उन्हें ुलजाये रखा आवर जब वो सिटी 1 से चले तो 7,30 से ऊपर का समय हो चूका था

शालिनी जी ......सूर्य जल्दी चलो न ये कोई बैलगाड़ी नहीं है जो तुम 50 की स्पीड से ऊपर नहीं जा रहे हो

सूर्य ......क्या माँ आप भी न क्या आपको मेरे साथ बहार समय बिताना पसंद नहीं है जो आप इतनी जल्दी कर रही हो

शालिनी जी ...... सूर्य समजा कर घर पे सब हमारा इन्तजार कर रहे होंगे सोचा था जल्दी चलेंगे तो माँ सा भौजी से मिल लुंगी पैर तुमने तो जैसे मुझे दुल्हन बनना था देखा कितना टाइम हो गया है

सूर्य ...... Ok ok माँ गुस्सा न करो अगर आपको नाना जी आवर नानी जी से मिलना है तो हम सीधा वही चलते है नाना जी की हवेली

शालिनी जी ...... नहीं नहीं हम बस सीधा घर चल रहे है अब स्पीड बढ़ा सूर्य

सूर्य ......ok माँ ये लीजिये

सूर्य मानसिक सम्पर्क कर किरण को सूर्यगढ़ में इंटर करने की खबर देता है

यहाँ किरण को सूर्य का सन्देश मिलते हे सभी को एक था करती

किरण. ...... आप सभी को पता है की ये पार्टी मम्मी के जन्मदिन की राखी है पैर उन्हें इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है आवर जब तक वो हवेली में न आये उन्हें पता भी न चले इस लिया हवेली की सभी लाइट बंद होते हे सभी लोग अपने स्थान पे सन्ति से खड़े हो जायेंगे न कोई आवाज न कोई लाइट्स

शिव .....ठीक है बेटी जैसा तुम कह रही हो वैसा किया तो शालू भी बहुत खुश होगी सायद उसे भी अपने जनम दिन का कुछ याद नहीं है

किरण .....जी पापा वर्ण वो जरूर नाराज होती किसी ने भी उन्हें विश न करने पे

किरण सभी लिंग़टस ऑफ करवा देती है आवर ीदार जैसे हे सूर्य हवेली के नजदीक आया उसने कार की लाइट ऑफ करदी

शालिनी जी ....... क्या हुआ सूर्य ये लाइट क्यों ऑफ कर दी

सूर्य ...... माँ लाइट मैंने ऑफ नहीं की सायद कोई प्रॉब्लम है तभी बंद हो गई होंगी

खेर हम लोग हवेली पहुंचने हे गए है

शालिनी जी .....ये क्या बाकि सभी के घर में लाइट्स है पैर हमारी हवेली में तो बिलकुल अँधेरा है

सूर्य ......चलिए मैं देखता हूँ अंदर चल कर

सूर्य मुख्या गेट के पास कुछ अंदर कर कार रोक कर डोर खोल शालिनी जी को बहार लता है

शालिनी जी ....बीटा बहुत अँधेरा है तुम अपनी सकती से...

सूर्य .....क्या माँ छोटी छोटू बात के किया आप मेरी आदत ख़राब कर रही हो मुझे साफ दिखाई दे रहा है अपना हाथ मुझे दीजिये आवर चलिए आप

सूर्य शकुनि जी का हाथ पकड़ आगे भाड़ जाता है कुछ 70 ,80 मीटर चलने के बाद सूर्य शालिनी जी ok हवेली के बीचों के हॉल में लगते मुख्या द्वार के पास खड़ा कर अँधेरे में गायब हो जाता है

शालिनी जी ......सूर्य कहा हो बीटा सूर्य मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा

सूर्य .....अभी आया माँ बस लाइट चेक करके आता हूँ आप यही रुकना

अगले 10 सेकंड में शालिनी जी पे गुलाब की पंखुड़ियों की मनो बारिश हो उठी आवर उसे के साथ पूरी हवेली रौशनी से जगमग कर उठी





रौशनी होते हे शालिनी जी अपने सामने इतने लोगो को देख थोड़ा चौंक जाती है

सभी बस शालिनी जी को हे देख रहे थे देखे भी क्या न आखिर शालिनी जी इतनी खूबसूरत जो लग रही थी

कोमल आगे भाड़ शालिनी जी के पेअर छू उनके गले लग ढेरी से उनके कान में बोलती है

कोमल ........ विश यू वैरी वैरी हैप्पी बर्थडे मम्मी ुम्मम्हा

शिव ......जनम दिन की ढेरो सुभकामनाये शालू

सूर्य .....विश यू वैरी वैरी हैप्पी बर्थडे माय स्वीटी माँ ी लव यू माँ

शालिनी जी ......थैंक यू बीटा ुम्मम्हा तो ये कारन था मुझे तो खुद याद नहीं था की आज मेरा जनम दिन है

सूर्य .......माँ ये सब आपकी स्वीटी का प्लान था हम हमें आपका बर्थडे याद था पैर ये जो सरप्राइज है वो किरण आवर इन बाकि सभी का प्लान था

गुरुदेव ........ पुत्री शालिनी जनम दिवश के ढेरो शुभकामनाये पुत्री ईश्वर हमेशा तुम्हारा दमन खुशियों से परिपूर्ण रखे

शालिनी जी ...... आपका बहुत बहुत धन्यवाद गुरुदेव

शालिनी जी गुरुदेव दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी जोरावर जी महेंद्र जी सभी बढ़ो का आशीर्वाद लेती है रेखा जी मेनका जी प्रिय जी सन्ति जी गीता जी रुक्मणि जी रानी पारी आवर क्वीन इन सब्जी से गले मिल कर जनम दिवेश की बधाई स्वीकार करती है

शालिनी जी ........ स्वीटी ीदार आना जरा

किरण .....जी माँ

शालिनी जी .....तो ये सब तुम्हारा प्लान था आवर मुझे पता भी नहीं चलने दिया

किरण .....माँ ये मेरा अकेली का प्लान नहीं था पहले पैर आज दोपहर में हम सब ने मिल काट कुंवर जी के साथ आपको बहार भेज दिया ताकि पीछे से सब तयारी कर आपको सुरप्रीसेड कर सके

शालिनी जी ....... मुझे तुम सभी का सुरप्रीसेड बहुत पसंद आया बेटी

सूर्य .....सॉरी माँ आपको इस तरह परेशान करने के लिया इस सरप्राइज के लिया हे आपको इतना टाइम लगाया

मेनका जी ....... कुछ भी कहो भाबी सा ये बेऔति पारलर का कमल है या कुछ आवर आपको देख कर यही लग रहा है जैसे अभी अभी आपकी सदी हुई हो बस हाथ पैरो में मेहँदी की कमी है

रेखा जी ....... क्यों दीदी लग रही है न शालू अपनी राधा की बड़ी बहन

दादी जी ...... बीटा सभी बहार चलो आवर केक कट करो 9 बजने को आये है कुछ आवर मेहमान भी आये है

रेखा जी ......माँ सा आप चलिए हम आते है

दादी जी के साथ बहुत से लोग बहार चल दिए जहा अंदर से ज्यादा खूबसूरती से लोने को सजाया हुआ था

वैसे तो सभी कुश थे पैर जुली इन सब से कही ज्यादा ख़ुशी से चहक रही थी आवर चौके भी क्यों न एक तो आज इतने समय बाद सूर्य ने उसे वो प्यार दिया जो जुली चाहती थी भले हे अधूरा हे मिला पैर मिला तो सही ऊपर से अपने पिता से इतने समय बाद जी भर कर बाते करना उनसे मिलना इस ख़ुशी को आवर बढ़ा दिया था

बहार लोने के बीचों बिच एक बड़ी से मेज पे केक रखा हुआ था

रेखा जी समेंका जी प्रिय जी रुक्मणि जी शालिनी जी के साथ हवेली से बहार आई तो वह तो नजर आवर भी ज्यादा खूबसूरत था

शालिनी जी ......इतना सब आप लोगो ने इतनी जल्दी कर लिया

रेखा जी ......ये सब हमारी उन दोनों परियोजना का काम है साथ में जिनिशा बेटी आवर जीनत ने भी सहयोग किया

वैसे तो ये एक छोटी से पार्टी हे थी पैर फिर भी कुल मिला कर 50 .55 मेंबर्स पार्टी में हो चूक थे कुछ सूर्यगढ़ से भी बड़े बुजुर्ग आवर कुछ पडोशी भी शामिल हुए थे

एक तरफ खाने पिने की 7,8 टेबिल लगी हुई थी जहा से आती हुई खुसबू से खाना कितना स्वादिस्ट होगा अंदाजा लगाया जा सकता है

शालिनी जी के केक कट करते हे सभी एक सुर ताल में उन्हें बर्थडे विश करते है आवर तालिया बजा कर अपनी ख़ुशी जाहिर करते है

शालिनी जी सबसे पहले केक कट कर सूर्य को खिलने वाली थी की उस से पहले हे सूर्य केक उनके खिला देता है

जैसे हे सूर्य शालिनी जी के हाथ से केक खाने के लिया मुँह खोला किरण जल्दी से शालिनी जी का हाथ अपनी तरफ कर केक चाट कर जाती है आवर सूर्य को आँख मर देती है जिसने शालिनी जी भी देख मुस्कुरा देती है

सन्ति जी ....... ये नहीं सुधरने वाली अभी भी इसकी मस्ती करने की आदत नहीं गई सदी हो गई फिर भी बचो के जैसे

शालिनी जी .....भाबी सा वो मेरी बेटी है उसे आवर मेरी बाकि सभी बेटियों का पूरा हक़ है मस्ती करने का आवर माँ के किया हमेशा बचे बचे हे रहेंगे

दादी जी ...... बिलकुल सही बेटी भटके भी बच्चों के सर सफ़ेद हो जाये बल पाक कर पेट माता पिता के लिया वो हमेशा बचे हे रहते है इस किया बचो को मस्ती करने जा हक़ है आवर अब मस्ती नहीं करेंगे तो क्या मेरी उम्र में करेंगे

शालिनी जी सूर्य को केक खिला कर एक एक कर सभी लड़कियों को खिलाती है विधि आवर गायत्री को भी फिर अपने माता पिता जी को सास ससुर को खिला कर एक बार फिर उनका आशीर्वाद लेती है फिर शिव संजय जोरावर जी को भी महेंद्र जी खुद से हे खा लेते है भले हे वो शालिनी जी को बेटी हे मानते हो पैर एक रिस्ता जेठ का भी था

वैसे भी इस परिवार में बहु को बहु नहीं बेटी मानते है जहा वो अपनी इच्छा से आजादी से जी सकती बिना कुसी पाबन्दी के फिर चाहे वो सर पे पर्दा करने को ले जार हो या घर में ससुर जेट से बात करना हो

शिव ...... जनम दिन की एक बार फिर से बधाई हो शालू तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो आज इतने सालों बाद जैसे फिर से ुशी शालू को देख रहा हूँ मैं

शालिनी ...... थैंक यू जी वैसे ये सब आपके लादले का आवर आपकी बेटी का किया धरा है

शिव ......हाहाहा मुझसे ज्यादा वो तुम्हारे लादले है शालू आवर बचो की ख़ुशी से भाड़ कर हमें क्या चैयवाप्ने जीवन में देखो आज पूरा परिवार कितना खुश है

शालिनी जी ....जी आपने बिलकुल सही कहा घर से दूर थे तो जैसे हमारी साडी खुशियां हे दूर हो गई थी

रेखा जी ......देवर जी बाकि लोग भी है यहाँ जो प्यार भरी बाटे करनी है वो रूम में कर लेना

ढेरी डेरी सभी लोग खाना खाना सुरु कर देते है कुछ लोग अलग अलग हम उम्र लोगो में कुछ बाते हो रही थी

तभी किरण सूर्य का हाथ पकड़ साउंड सिस्टम के पास ले जाती है आवर डांस करने लगती है

अभी तक साउंड सिस्टम बस ऐसे हे चल रहा था पैर किसी ने सुरुहत नहीं की किरण सूर्य का डांस सुरु होते हे बड़े बुजुर्गो को छोड़ सभी इन्हें हे देखने लगे

किरण आवर सूर्य काफी अच्छा डांस कर रहे थे

उन्हें देखा देखि महेंद्र जी भी रेखा जी को साथ ले सूर्य किरण के साथ डांस करने लगे पैर रेखा जी सरम के कारन जल्दी हे वह से हैट गयी कुछ देर अपनी कमर हिलने के बाद महेंद्र जी भी वह से हैट गए

सूर्य शिव आवर शालिनी जी के साथ साथ मेनका जी को भी साथ ले फिर से डांस करने लगता है

शालिनी जी बहुत अच्छा डांस कर रही थी वैसे भी उन्हें डांस करने का बहुत चाव रहता है

एक बार जो शालिनी जी सुरु हुई तो शिव आवर मेनका जी दोनी पीछे हैट गए सूर्य ने रानी पारी को भी लपेटे में केते हुए खींच लिया मैदान में पैर जब उनका डांस देखा तो खुद सूर्य पीछे हैट गया

किरण .....वव परिधि दी रानी माँ इतना अच्छा नृत्य करती है

परिधि ......हम खुद पहली बार रानी माँ को नृत्य करते देख रहे है

किरण .....फिर तो आप दोनों को भी उनका साथ देना चाइये नृत्य में

रिद्धि .....किन्तु हमें नृत्य नहीं आती स्वीटी

डेरी डेरी ऐसा सखा बाँदा की जो लोग खाना खा रहे थे वो सब भो अपने खाने की प्लेट छोड़ सभी का नृत्य देखने लगे

आखिर में दादी जी ने आ कर बंद किया साउंड सिस्टम तब जा कर वो लोग रुके

दादी जी .....बचो टाइम देखो कितना हो चूका है रात के 12 से ऊपर टाइम हो चूका है चलो सब खाना खाओ चल कर नाच गण भी हो गया

दादी जी की बात सुन सभी खाना खाने लग जाते है

सभी खाना खा कर फ्री होते हे गीता ठाकुर आवर रुक्मणि जी जाने की इजाजत मांगते है तो सूर्य उन्हें सकती के साथ सक्तिपुर भेज देता है

जोरावर ......माँ सा मुझे भी जाना होगा मेरी सुबह की दिल्ली के लिया फ्लाइट है कुछ बहुत हे जरुरी मीटिंग

शिव ....... क्या आप दिल्ली जा रहे है भाई सा देखि तो मुझे भी जाना है सुबह में

जोरावर जी ....फिर साथ चलते है हसि जयपुर टस्क बी रोड आवर जयपुर से फ्लाइट से क्यों की यहाँ से तो दिल्ली की पहली फ्लाइट सुबह 9 बजे की है

शिव .......है ये ठीक रहेगा

सूर्य के नाना नानी भी जाना चाहते थे पैर दादा जी ने साफ साफ मन कर दिया गुरुदेव रानी पारी नियों किंग क्वीन ने भी रात्रि में हे विदा ले ली अभी जीनत जिनिशा जुली के पिता जी आवर नाना जी की फॅमिली हे बची थी हवेली में

एक एक कर सभी को जहा जगह मिली वही लेट गए सूर्य चाट पे कुछ देर थाल कर रूम में पंहुचा तो वह पहले से हे जीनत आवर पारिजात रिद्धि लेती हुई थी

सूर्य ......आप लोग यहाँ आराम से लेट जाये अभी रात काफी हो गई है सो गुड नाईट सुबह मिलता हूँ

सूर्य निचे पंहुचा तो सामने से शालिनी जी मिल गयी

शालिनी जी .....क्या हुआ सूर्य

सूर्य ......कुछ नहीं माँ वो सोने के लिया जगह देख रहा चाट पे सो जाता पैर मौसम ख़राब है

शालिनी जी .....मेरे रूम में भी तुम्हारी कन्या सो रही है

सूर्य .....ok मैं चाट पे जो नया रूम त्यार किया है वह लेट जाता हूँ

सूर्य वह से सीधा छठ वाले रूम में जा पंहुचा तभी विधि का कॉल आया की की वो लग घर पहुंच गए है

सूर्य को कुछ 10 ,12 मिनट्स हे हुए थे की किसी के दूर नॉक करने पे ध्यान उस तरफ गया

सूर्य .... लगता है कोई आया है मैं सुबह बात करता हूँ कोण है अंदर आ जाये दूर खुला है

शालिनी जी दूर खोल कर अंदर आती है हाथ में टॉवल आवर कुछ कपडे थे

सूर्य .....क्या हुआ माँ आप यहाँ ऊपर

शालिनी जी ......तुम्हारी दोनों मामियो के साथ प्रॉब्लम होती आवर तुम यहाँ अकेले सो रहे तो यही सोने चली आई तुम्हे पसंद नहीं तो मैं चली जाती हूँ

सूर्य ..... मैंने ऐसा कब कहा माँ की आपके साथ सोना पसंद नहीं है आइये आ कर लेट जाइये

शालिनी जी .....मैं अभी बहा कर कपडे चेंज कर आती हूँ

कुछ हे देर बाद शालिनी जी नाहा कर बहार निकली





सूर्य तो शालिनी जी को इस वक़्त ऐसे शार्ट ड्रेस में देख मह फढ़े बस उन्हें हे देख रहा था

सूर्य ...... माँ ये सब क्या है

शालिनी जी ...... क्या हुआ पसंद नहीं आई क्या ये ड्रेस पहले भी तो पहनती थी बा आज दिल किया यो पहन लिया तुम्हे पसंद नहीं तो निकल देती हूँ

शालिनी जी थोड़ा गम कर सूर्य को दिखती है जैसे हे फिर से सामने की तरफ पलटी सूर्य की आँखे उस ब्लैक पेंटी को देख उसकी नजरे वही चिपक गई





शालिनी जी अंदर हे अंदर सूर्य की ऐसे हालत देख बहुत खुश हो रही थी

शालिनी जी आगे भध सूर्य के बिलकुल चेहरे के सामने जा कड़ी हुई जो अभी भी उसे तरह उनमे खोया हुआ था कब शालिनी जी ने बड़ी लाइट बंद कर 0 वाट की लाइट ों की उसे पता तक नहीं चला

शालिनी जी .......... क्या हुआ सूर्य कहा खोये हो

सूर्य जब वास्तविकता में आया तो शालिनी जी का चेहरा बिलकुल सूर्य 5,6 इंच की दुरी पे था

सूर्य हड़बड़ा पीछे हटने को हुआ तो शालिनी जी की हंशी चुत गई

शालिनी जी ...... हेहेहे तुम ऐसे गभरा क्यों रहे हो सूर्य

सूर्य .....कुछ नहीं माँ वो आपको इतने नजदीक देख कर

शालिनी जी ...... वो सब छोड़ ये बता क्या ये ड्रेस मुझे अच्छी नहीं लगी तुम्हे

सूर्य ..... आप इस ड्रेस में बहुत हॉट ी मैं बहुत खूबसूरत लग रही है

शालिनी जी .......हेहेहे अपनी माँ को हॉट बोल रहे हो वैसे मेरा बर्थडे गिफ्ट कहा है

सूर्य ...... वो आपको कल दूंगा माँ

शालिनी जी ....... मुझे पता है मेरा गिफ्ट कैसे लेना है

शालिनी जी डेरी से आगे खिसक कर सूर्य की आँखों में देखते हुए अपने होंठ सूर्य के होंटो से लगा देती है सूर्य तो ुशी पल सब कुछ भूल कर बस उस पल में खोने लगता है

शालिनी जी कब सूर्य को किस करते हुए ुशी गौड़ में आ बैठी आवर सूर्य की गर्दन के इर्द गिर्द अपनी कोमल उंगलियों को कस्ते हुए सूर्य के होंटो को बेहताशा चूमने लगती है





सूर्य जैसे शालिनी जी के साथ किसी अदृश्य भाव में बहता हुआ चला जा रहा था

कुछ देर किश करने के बाद खुद शालिनी जी अपने कंधे को मघा करते हुए अपनी 36 की उन्नत वक्ष बेपर्दा करते हुए सूर्य के सामने करती है





सूर्य भी जैसे इसी पल के इन्तजार में था सूर्य ने देर न करते हुए शालिनी जी की नन्हे वक्ष चूचक अपने होंटो में कैद कर किसी छोटे बचे सामान उन्हें पिने लगता है

शालिनी जी ......उम्मम्मम्हा अह्हह्ह्ह्ह पे ले सूर्य ये आज भी वैसे हे है जैसे तुम्हारे जनम के समय थे बस इनसे अभी ढूढ निकलना बंद हो गया है





सूर्य कब शालिनी जी के आकड़े हुए निप्पल्स चुस्त हुए उन्हें बीएड पे लिटा कर शालिनी जी के ऊपर आ जाता है

शालिनी जी मदहोशी में कामुक आहे भरते हुए सूर्य के सर को अपनी चूचियों पे दबाने लगती है

सूर्य बिना की अतिरिक्त जोर के शालिनी जी के दोनों वक्षो को चुस्त हुए अपना एक हाथ शालिनी जी के जंगो के बिच उस कोमल स्वर्गद्वार को टटोलते हुए अपने हाथ के पंजे से दबोच लेता है

शालिनी जी .......उम्मम्मम्हा अह्हह्ह्ह्ह सूर्य बहुत तड़पाया है तुमने अपनी शालिनी को आज वह से इस्स्स्सस्स्स्स अह्ह्ह्हहजज सरीर की साडी तड़प निकल दे तुमने सभी को प्यार दिया आज अपनी इस शालिनी को अपने प्यार से नहला दे ुम्मम्हाआ

सूर्य ......मेरी शालू

शालिनी ji.......ha तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी शालू ुम्मम्हा

सूर्य दोनों चूचियों को लाल कर शालिनी जी को बीएड के किनारे कर दोनों पैरो को विपरीत दिशा में खोल उस द्वार को देखता है जहा से उसकी उतपति हुई थी

शालिनी जी सूर्य को कुछ न करता देख खुद से अपने ड्रेस कमर तक कर सूर्य का सर अपनी योनि पे लगा देती





शालिनी जी की योनि से निकल रही कामोत्तेजक गंध सूर्य जैसे अपने सम्मोहन में बंद रही थी

सूर्य शालिनी जी की योनि से अपनी नाक टच कर घरी सां अपने अंदर खींचा है

तो सूर्य के मस्तिष्क में जैसे विस्पोट होने लगते है सूर्य के मस्तिष्क में जैसे उस कस्तूरी मृग खुसबू ने एक अलग के दुनिया का निर्माण कर दिया था जहा सब खुश उजला उजला था

सूर्य शालिनी जी की फूली हुई योनि के दोनों लिप्स को मुँह में भर चूसने लगता है तो कभी कभी अपनी जुबान से शालिनी जी की योनि से बाह रहे मधु राश को चाट जाता कुछ हे देर बाद शालिनी जी की कमर बार बार सूर्य के होंटो से जा लगती ऊपर से शालिनी जी ने सूर्य का सर अपनी योनि पे दभा रखा था

देखते देखते शालिनी जी योनि से 2 हार हलकी हलकी पिसाब की धार निकली इसमें पिसाब की गंध नहीं थी ये वही गांड आवर टेस्ट था जो सूर्य को अपने सम्मोहन में बंधे हुए था

एक बार की तो शालिनी जी की भी आँखे मज़े से बंद हो गई थी

कुछ दी बाद शालिनी जी बीएड से उठ खुद हे सूर्य की पेण्ट निचे कर उस अकड़े हुए नागराज को बहार निकलती है जहा सभीको पहली बार देखने पे थोड़ा दर लगता था वही शालिनी जी एक बार देख उसे किसी छोटे बच्चे के जैसे मुँह में भर चूसने लगती है शालिनी जी को आकर से जैसे कोई मतलब हे नहीं था वो तो बस जैसे कोई अपनी फेवरिट आइसक्रीम चूस रही हो





सूर्य की आँखों के सामने वो 36 की बड़ी बड़ी ुनात नितम्ब थे जो शालिनी जी के आगे पीछे होने से अलग हे आभा बना रहे थे

उनको इस तरह तिरंगा देख सूर्य उन्हें सहलाने से खुद को रोक नहीं पता

शालिनी जी काफी देर तक सूर्य के लिंग के साथ खेलती रही पैर वो सूर्य की क्रीम का टेस्ट न कर पायी

आखिर सूर्य ने शालिनी जी को पूरी तरह निर्वस्त्र कर बीएड पे लिटाया आवर खुद भी अपने कपडे उतर फेंके

शालिनी जी एप थूक से सूर्य की लिंग को एक डैम त्यार कर दिया

योनि तो पहले हे कमरष से चिकनी थी

सूर्य ने ने अपने काम दंड को पकड़ शालिनी जी की स्वरागद्वार पे रगड़ते हुए डेरे से पुस किया तो एक आह के साथ शालिनी जी ने अपनी कमर उचका दी सूर्य को ऐसा लगा जैसे शालिनी जी उसे अपनी योनि की भीतर कीच रही हो





सूर्य. ...... आपको तक्लिप तो नहीं हो रही न

शालिनी जी ...... उम्मम्मम्हाआ इतना बड़ा अंदर जायेगा तो तक्लिप तो होगी हे इस तक्लिप में भी सुकून है तुम्हे पाने का

सूर्य शालिनी जी को गले पे लव बाईट करते हुए हलके हलके अपनी कमर हिलाते हुए आधे लिंग सी शालिनी जी की चिकनाई युक्त गरम योनि को अपने लिंग का का आकर देने लगा

शालिनी जी ....उम्मम्मम्हा अह्हह्ह्ह्ह बस ऐसे हे हमेशा अपनी शालू का ख्याल रखेगा न सूर्य

सूर्य ......... अपनी आखरी सांस तक आपकी ख़ुशी के लिया कुछ भी क्रुंगक शालू बस मुझसे दूर मत जाना





शालिनी जी सूर्य की आंखरी सांस वाली बात सुन थोड़ी सख्ती से सूर्य के होंटो को काट देती है जिस से सूर्य के होंटो से रकत बहने लगता है

जिसे शालिनी जी किश करते हुए पि लेती है सूर्य को जैसे इसका आभाष भी न हुआ वो बस वैसे हे उनकी आँखों में देख शालिनी जी की चुदाई में लगा हुआ था

शालिनी जी अपनी योनि को टाइट करते हुए खुद भी तेजी से अपनी कमर हिलाते हुए झड़ने लगती है

सूर्ये के लिंगमुण्ड पे जब श्श्लिनी जी का वो गरम लावा सूर्य के लिंगमुण्ड पे गिरता है तो

सूर्य लिंग मुंड आवर आदिक विक्रम रूप दर्जन कर लेता है

सूर्य शालिनी जी को ुशी मुद्रा में लिया हुए पलट देता है अब सूर्य की कमान शालिनी जी के हाथ में थे





जैसे हे शालिनी जी ने अपनी योनि का दबाव सूर्य के लिंग पे बांया आदिल चिकनाई के चलते सभी अवरोध हटते हुए लिंगमुण्ड सीधा बच्चेदानी के बेटर जा फशा

सूर्य ....उम्मम्मम्म. आअह्हह्ह्ह्ह शालू

शालिनी .......... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आजा चिर कर रख दिया इसने तो पूरी छूट को उम्मम्मम्म माँ हिलना नहीं

कुछ देर अपने स्तन पैन करवाने से जल्दी हे दर्द को भुला शालिनी जी डेरे डेरे सूर्य के लैंड पे अपनी छूट ऊपर निचे करने लगती बिच बिच में सूर्य भी अपने कमर हिला देता जिस से शालिनी जी की हलकी सिसकारी के साथ दर्द भरी आ भी निकल जाती





कुछ देर बाद शालिनी जी की उछाल ने की घाटी डेरी होती देख सूर्य खुद हे उनके नरम मुलायम गांड के दोनों पैट पकड़ कर तेजी से आने विकराल लैंड को शालिनी जी की गरम राश बहती छूट में सर्प ात दौड़ने लगे

शाकिनी जी .......आह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे हे छोड़ सूर्य उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग राग है रुकना नहीं मई फिर से आ रही हूँ

सूर्य ........ उम्मम्मम्हा आपकी योनि बहुत गरम हसि जैसे अंदर कोई ज्वालामुखी सुलग उठी हो अह्ह्ह्ह मेरे लिंग की नशे

सूर्य ने आज से पहले अपनी लिंग में इतना कड़ापन आवर नशो में इतनी जकड़न मह्सुश नहीं की थी ऐसे लग रहा था जैसे सरीर का सम्पूर्ण रकत सूर्य के लैंड की नशो में आ रुका हो

सूर्य शालिनी जी को बीएड पे पलट खुद जमीं पे खड़ा हो किसी बे लगा घोड़े की तरह पुरे लिंग को अंदर बहार करने लगा

बस लिंग मुंड कभी कभी हल्का बहार निकला तो शालिनी जी का मुँह भी उन की छूट के जैसे खुला का खुला रह जाता





सूर्य के प्रहार इतने तेज थे की शालिनी जी के साथ साथ पूरा बीएड भी हिलने लगा जैसे सूर्य पे कोई प्रेत स्वर हो गया हो

शालिनी जी तो किसी आवर अलग हे दुनिया में जा चुकी थी बस बस उनका मुख खुला था

सूर्य हर बार जब लिंग अंदर डालता तो योनि के भीतर कोई बहुत हे मुलायम हईशा सूर्य के लिंग मुंड को जकड़ने की कोशिश करता





शालिनी जी ......उम्मम्मम्हा अह्ह्ह्हह्ह्ब सूर्य मैं आ रही हूँ ये मैं कहा जा रही हूँ मुझे थम को सूर्य

सूर्य तो पहले हे अपने होश खो चूका था

जैसे हर शालिनी जी की योनि ने सूर्य के लैंड को जाखडा इस बार सूर्य खुद शालिनी पे धराशाई हो गया था

सूर्य के लिंग से एक के बाद एक परचंड वीर्य धार एक के बाद एक धार बच्चेदानी में भरने लगता है

सूर्य के गरम वीर्य को मह्सुश कर शालिनी जी भी भरते हुए मूर्छित हो जाती है

जैसे हे सूर्य आवर शालिनी जी के वीर्य का मिलान हुआ वैसे हे शालिनी जी के साथ साथ उनके सरीर पे लेता सूर्य भी उस वाइट ऊर्जा के घेरे में आ गया 3,4 मिनट्स रूम में चारो तरफ रौशनी हे रौशनी फैली हुई थी

कुछ देर बाद जब रौशनी हटी तो बीएड पे केवल सूर्य हे था बीएड से कुछ दुरी पे शालिनी जी कड़ी थी वो भी एक पारी के रूप में जैसे कोई 18 ,19 इयर्स की बेहद हसीं बाला की खूबसूरती लिए





सूर्य बीएड से उठ उनकी तरफ बढ़ा अब सूर्य के जिसम पे कपडे थे

सूर्य ........ माँ

शालिनी जी सूर्य को देखती है तो उनकी आँखे नाम हो जाती है

सूर्य ......माँ क्या हुआ आपको आप की आँखों में आंसू

शालिनी ......तुम नहीं संजोगे सूर्य ये ख़ुशी के आंसू है आज मेरे सभी इच्छाएं पूरी हो गई तुम्हे पाने के लिया जिस पारी रूप का त्याग कर हमने वर्षों वर्ष कठिन तप किया वही रूप तुमसे मिलान के पश्चात हमें पुनः प्राप्त हो गया

सूर्य ....... ये तो अच्छी बात है न की आपकी सभी इच्छा पूरी हो गई

शालिनी जी ......अभी एक इच्छा ादुरि है जो समय आने पे तुम्हे हे पूरी करनी होगी

शालिनी जी आँखे बंद कर फिर पहले जैसे अवतार में लौट आई पैर अब उनका सरीर जैसे ुमार का का मुखौटा उतर फेंक चूका हो

अभी ये वही शालिनी जी थी जो अपनी 18 19 इयर्स की उम्र में दिखती स्लिम हिट एंड सेक्स मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल बस इस वक़्त वो ब्रा पेंटी में थी जिन्हे देख सूर्य का नागराज फिर से अंगड़ाई लेने लगा

शालिनी जी ...... अपने इस चूहे को काबू में राखी रात के 3 बजने को आये है

सूर्य ......चूहा मतलब

शालिनी जी ......वही जो तुम्हारी अंडरवियर उछाल कुढ़ कर रहा है

सूर्य...... ओह चलिए सो जाइये सुबह जल्दी निकलना भी है मुझे

शालिनी जी...... मैं भी तुम्हारे साथ चल रही हूँ

सूर्य ......पैर आप वह

शालिनी जी ...... क्यों मैं नहीं आ सकती क्या मन की विवाह असुरनिटी से होना है पैर विवाह में शामिल तो हो हे सकती हूँ

आवर वैसे भी गुरुदेव भी आ रहे है सुबह

सूर्य के पास अब कुछ भी नहीं था कहने को शालिनी जी ने चुटकी बजाते हे सूर्य के कपडे गया अब केवल अंडरवियर में सामने काढ़ा था

ज्जिशे शालिनी जी खुद हे बीएड पे लिटा कर खुद ुशी तरह सूर्य पे लेट गई

कुछ हे देर बाद दोनों गहरी नींद में चले गए एक सुकून से परिपूर्ण प्यारभरे मिलान के बाद .......

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................

अपडेट में कुछ कमी या भूल चूक हुई तो माफ करना

एंड दोस्तों कुछ दिन अपडेट में जल्दी लेट हो सकता है या कभी अपडेट न भी आये रात से हे लाइट का बहुत प्रॉब्लम चल रहा है ऐसे में अपडेट का कोई फिक्स टाइम नहीं है ...........🙏🙏🙏🙏🙏🙏
 
अपडेट 224

सूर्य...... ओह चलिए सो जाइये सुबह जल्दी निकलना भी है मुझे

शालिनी जी...... मैं भी तुम्हारे साथ चल रही हूँ

सूर्य ......पैर आप वह

शालिनी जी ...... क्यों मैं नहीं आ सकती क्या मन की विवाह असुरनिटी से होना है पैर विवाह में शामिल तो हो हे सकती हूँ

आवर वैसे भी गुरुदेव भी आ रहे है सुबह

सूर्य के पास अब कुछ भी नहीं था कहने को शालिनी जी ने चुटकी बजाते हे सूर्य के कपडे गया अब केवल अंडरवियर में सामने काढ़ा था

ज्जिशे शालिनी जी खुद हे बीएड पे लिटा कर खुद ुशी तरह सूर्य पे लेट गई

कुछ हे देर बाद दोनों गहरी नींद में चले गए एक सुकून से परिपूर्ण प्यारभरे मिलान के बाद ..................

अब आगे ..........

सूर्यगढ़ .........

सूर्य जब सुबह उठा तो रूम में शालिनी जी नहीं थी वो अकेला हे लेता हुआ था

सूर्य उठा आवर फ्रेश जो निचे आया तो रात में लेट से सम के बावजूद घर में ज्यादातर मेंबर्स उठ चुके थे

सूर्य .......आप सब लोग इतनी जल्दी कैसे उघ गए वो भी इतने लेट सोने के बाद भी

प्रिय जी ....... क्यों जमाई सा सदी नहीं करनी क्या आपको

सूर्य ...... आप त्यार है ममी जी तो अभी कर लेता हूँ सदी हाहाहा पर पहले कॉफ़ी पीला दीजिये कोमल सबको उठा दिया ध्यान के लिया

कोमल ....जी वो जुली दीदी अभी भी सो रही है

सूर्य ....... उसे भी उठाओ वैसे भी आज जल्दी हे ध्यान ख़तम कर तुम सभी को योध शिक्षा लेनी है

कोमल है में गर्दन हिला कर जुली को उठाने निकल गयी

दादी जी ......देख तो कैसे हुकुम चला रहा है मेरी पोती पे सरम नहीं आती वो तुजसे बड़ी है

सूर्य ......आवर आप जो बाउजी पे हुकुम चलती hi माँ सा उसका क्या मैंने कभी कहा आपको

वो तो रात में बाउजी अपनी दुःख भरी कहानी मुझे सुना रहे थे तो पता चला

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाउजी माफ कर दो

दादा जी .......सुबह सुबह क्यों ठकुराइन के बैठे चढ़ा रहा मुझे बदमाश कही के

सूर्य ......मैं तो मज़ाक कर रहा था बाउजी आप तो जानते है न

दादी जी .......... सुनिए जी हे आपका लाडला कह रहा है की मैं आप पे हुकुम चलती हूँ

दादा जी ....... क्यों बे क्यों मेरा रसन पानी बंद करवाने पे तुला है तू वैसे ठकुराइन मेरा लाडला कह तो थिंक हे रहा है ठाकुर भले हे हम सूर्यगढ़ के है पैर हम पे हुकुम आपका हे चलता है हाहाहा

सूर्य .....देखा माँ सा मैंने कहा था न अब देखो सच सामने आ हे गया

दादा जी .....तू किस तरफ है पहले ये तो बता दे सुबह सुबह मिया बीबी में जगदा लगवाने पे तुला है

नाना जी ....क्या हुआ भाई कोण किस्मे जगदा लगवा रहा है सुबह सुबह

सूर्य ......कुछ नहीं नाना जी वो नानी जी बोल रही थी की आजकल आप रोज आधी बोतल खली कर देते है बोल रही थी की आपको संजो ताकि आप लिमिट में पिए

दादी जी ....... अब तू अपने नाना को हे लपेट रहा है थोड़ी देर पहले तो

प्रिय जी ......लो तुम्हारे कॉफ़ी बीटा

सूर्य ........... नाना जी ज्यादा सरब सेहत के लिया अच्छी नहीं भले हे नानी जी या बाकि कोई आपको कुछ न कहे पैर रोज पीना गलत है

एक टाइम फिक्स कीजिये दोनों कॉस्ट मिल कर पीजिये पैर लिमिट में अगर ऐसा हे रहा तो फिर मेरा बचपन आप जो जीने का सपना देख रहे है बुल जाये उसे चलता हूँ

सूर्य कॉफ़ी पिटे हुए बहार निकल गया

दादा जी ......विक्रम हे मैं क्या सुन रहा हूँ तुम रोज सरब लाक से पिने लगे हो आवर तुमने बताया तक नहीं आवर न भाबी जी ने

अब यहाँ संदी नहीं दो दोस्त बात कर रहे थे

दादी जी ...... हे गलत है भाई साहब इस उम्र में जहा भक्ति भाव होना चाइये वह आप

दादा जी ......चल बहार लोने में बात करते है आवर आप हमारी टिया वही भिजवा दीजिये ठकुराइन

ीदार सूर्य सभी को में कर जंगल चला गया वह कुछ देर ध्यान करने के बात आज से हे सभी को योध शिखा आराम होने थी

सूर्य गुरुदेव के बताये अनुसार प्राचीन पुस्तक को परनाम कर मंत्र उच्चारण कार्य है देखते हे देखते वह एक अदृश्य घेरा बन जाता है

तभी बुक से एक पिली ृष्णि निकलती है जो देखते हे देखते मानव आकर दर्जन कर लेती है

सूर्य ...... परनाम गुरु नित्यानंद

नित्यानंद ....... यशश्वी भाव पुत्र

बाकि सभी भी गुरुदेव नित्यानंद को परनाम कर उनसे आसिष लेती है

नित्यानंद ........ प्राचीन योध कला का प्रथम पड़ाव आज आवर अभी से आरम्भ होता है

किरण ....... जी गुरुदेव किन्तु आपमें किसी तरह जी जीवन ऊर्जा मह्सुश नहीं hi रही

नित्यानंद. ......क्युकी हम वास्तविक नहीं है पुत्री हम केवल इस पुस्तक से जुडी यादे है है जिनका कार्य यही है की जिसके पास हे प्राचीन दिव्या पुस्तक है उसके आह्वाहन करने पे हमें समकक्ष आ उन्हें हमारा योध कला से जुड़ा सम्पूर्ण ज्ञान देना यही हमारा दायित्व है वास्तविक नित्यानंद हजारो वर्ष पूर्व अपने जीवन चक्र से मुक्त जो चुके है हम केवल एक भरम या परछाई मात्रा है जिनका दायित्व केवल इस पुस्तक से जुड़ा है

किरण .....जी गुरुदेव

नित्यानंद. .....गुरुदेव नहीं पुत्री केवल गुरु क्युकी हमारा इस पुस्तव के आलावा कोई अस्तित्व नहीं है गुरुदेव कह कर सम्बोध्ति करने पे तुम हमें गुरुदक्षिणा दिया बिना हमारी विषय का पूर्ण प्रयोग नहीं कर पाओगे आवर हमारा कोई वास्तविक अस्तित्व है नहीं जो तुम्हारे गुरुदक्षिणा सवीकार कर सके

किरण ......जी गुरु नित्यानंद

गुरु नित्यानंद एक आवर इसरा करते है जहा अंको तलवार धाक भले तीर कमान जो प्राचीन काल में योध में प्रयोग होने वेक सस्त्र रखे हुए थे

गुरु नित्यानंद. ...... आज की मूल शिक्षा है सुरक्षा

सवाया की सुरक्षा ऐसे करनी है अपने प्रतिद्वंदी से

सूर्य एक के बाद एक करके अपने अंको क्लोन त्यार करता

जो सभी सोर्ड लिया हुए सभी के समकक्ष जा खड़े हुए

नित्यानंद जी के इसारे पे एक के बाद एक एक सोर्ड आवर ढाल सभी लड़कियों के हाथ में अपने आप आ पहुंची

कुछ हे देर में वह केवल तलवारे ढाल से टकराने की ध्वनि सुनाई दे रही थी

वही सूर्य पुरस्तक को ले उसे बहुत हे ध्यान से पढ़ने लगता है उसने निहित प्राचीन मंत्र ज्ञान ग्रहण करने लगता है

कोई 2 घंटे बाद जब गुरु नित्यानंद ने पार्षिकसगं बंद करवाया तब जा कर सूर्य का ध्यान उस आवर गया

आज की शिक्षा पूर्ण हो चुकी थी इस लिया गुरु नित्यानंद पुस्तक में वापिस लौट चुके थे

सूर्य .......हाहाहाहा ये क्या हुआ तुम लोगो को ये अपनी कैसे हालत बना राखी है आप लोगो ने

राधा ....... तुम्हारे इन क्लोन की वजह से हुआ है ये सब न ये खुद रूल आवर न हमें रुकने दिया 2 घंटे से लगातार लड़ रहे है

सूर्य का इसरा मिलते हे सभी क्लोन सूर्य में आ समाहित हुए

सूर्य ....... आज पहला दिन है अभी से ये हाल है अभी तो ठीक से योध ाब्याश सुरु भी नहीं हुआ है

रिद्धि ......भूलिए नहीं आपकी हालत कुछ अलग नहीं थी पार्टम दिवश अभी पायल प्रीति राधा अलीना मेर्री सपना मानसी को कुछ वक़्त लगेगा

सूर्य .....आपने थिंक कहा आवर आपको पता है क्या करना है इसके लिया

रिद्धि ..... है मैं जानती हूँ घर चलते हे इनका इलाज सुरु करती हु.

सूर्य .....है चलो तहत चलते है वैसे भी आज आवर भी बहुत काम है इस लिया जल्दी हे चलते है

राधा ......क्या कहा जल्दी चलते है कल जितना टाइम तो आज भी लिया है आपने

सूर्य मुस्कुराते हुए बुक को परनाम करता है तो वी अदृश्य घेरा बुक में समाहित होते हे बहती दुनिया में फॉर से लौट आये जहा अभी 06: 40 ऍम हुआ था

सूर्य ......हिज समय योध शिक्षा आराम की थी वही समय हुआ है राधा हम सब जितना समय योध शिक्षा ग्रहण करेंगे उसका असर इस समय पे नहीं होता कल से ज्यादा म्हणत सुरु होने वाली है

सूर्य सभी को में हवेली पंहुचा जहा रिद्धि ने सभी को वो विशेष काढ़ा पिलाया जो सूर्य को शिक्षस के वक़्त दिया जाता था

कुछ हे देर में सभी की थकावट छू मंतर हो गई

सूर्य ....... मानसी जा कर फ्रेश हो जाओ किरण माँ आवर तुम भी त्यार हो जाओ गुरुदेव कब्बी भी आते होंगे

किरण ....... मेरा जाना आवशयक है क्या कुंवर जी

सूर्य .....है स्वीटी ये गुरुदेव का आदेश है जो उन्होंने अभी अभी दिया है मुझे मानसिक संपर्क के माध्यम से

किरण .....जी कुंवर जी

सूर्य अपने ुवेर वाले रूम जा कर त्यार होने लगता है

शालिनी जी तो पहले हे त्यार थी जब किरण उनके रूम में पहुंची तो किरण शालिनी जी के तेज को पहचान जाती है

किरण .....माँ आपकी सकतिया जागृत हो गई

शालिनी जी ......तुमने कैसे पता ओह मैं तो भूल गयी थी की तुमसे कुछ नहीं चिपटा

अब शालिनी जी भी शर्मा रही थी जैसे किरण को रात के मिलान के विषय में पता चल गया हो

किरण ...... माँ वैसे आप का पारी रूप मुझे भी देखना है देखु तो सही माँ पारी जैसे दिखती है या उनसे खूबसूरत भी है हेहेहे

शालिनी जी ...... तुम मेरा मजाक बना रही हो न स्वीटी

किरण आगे भाड़ शालिनी जी के दोनों गाल चुम लेती है

किरण. ...... आपको ऐसा क्यों लगा माँ की मैं आपका मज़ाक बना रही हूँ मैं सच में आपका वो रूप देखना चाहती हूँ माँ प्लेसेस ुम्मम्हा

शालिनी जी .......चल ठीक है ठीक है ये देखो

जैसे हे शालिनी जी आँखे बंद कर अपने हाथ फैलाती है उनका रूप बदल कर पीठ से वाइट विंग निकल आते है आवर अबले हे पल सामने एक खूबसूरत पारी कड़ी थी






किरण. ......वाओ माँ आप तो बहुत हॉट एंड सेक्सी लग रही हो ी मैं बेहद खूबसूरत लग रही है आप पापा ने आपको इस रूप में देखा तो वो तो गए

शालिनी जी अपने नार्मल रूप में लौट आती है

शालिनी जी ......ये बात अपने तक हे रखना स्वीटी बेटी

किरण ......यही न की आप हॉट एंड सेक्सी हो don't वोर्री माँ ये हम दोनों का सीक्रेट है

शालिनी जी .... बदमाश मेरा मतलब है इस रूप के बारे में किसी को न बताना OK

किरण .....जो हुकुम मालिकाये हुसँ हुकम की तमिल होगी हेहेहे

माँ आप न सच में बहुत प्यारी लग रही थी आप रेडी हो जाये मैं भी त्यार होने कर आती हूँ

किरण के जाते हे शालिनी जी अंदर से रूम लॉक कर एक बार फिर से अपने पारी रूप में आती है आवर खुद को मिरर के सामने खड़ा कर देखती है

पहले जहा पेट पे हलकी चर्बी थी जो उम्र के हिसाब से बहुत काम थी उभारो में थोड़ा ढीलापन था पैर अब सब परफेक्ट था उभर की साइज तो अभी भी वही थी पैर अब उनका ढीलापन ख़तम हो चूका था पेट से चर्बी भी गायब थी पुत्री बॉडी दमक रही थी

शालिनी जी अपने दोनों उभारो को सहला कर देखती है तो उन्हें बड़ा हे अजीब आवर सुकून मिला अपने हे उभारो की कोमलता मह्सुश कर क्युकी उनके उभर बिलकुल मुलायम थे जैसे भीतर किसी ने रुई भर दी हो

जिह्याशा वाश अपनी योनि को चूहा तो उनके होंटो पे मुस्कान तैर गई

शालिनी जी .......... इस रूप में अभी भी हम कन्या हे है

तभी बहार से दूर नॉक की ाजव से शालिनी जी का ध्यान भांग हुआ

शालिनी जी अपने वास्तविक रूप में लौट आती है आवर रूम का दूर खोलती है

दादी जी ...... क्या हुआ बेटी इस वक़्त रूम को लॉक किया हुआ है

शालिनी जी ..........कुछ नहीं माँ सा वो बाथरूम गए थे इस लिया लॉक कर दिया था

दादी जी ....... बेटी ये बॉक्स अपने पास रखो

शालिनी जी ......इसमें क्या है माँ सा आवर ये आप हमें क्यों दे दे रही है

दादी जी ......बेटी वैसे तो ये रेखा को देना था था पैर उसने लेने से मन कर दिया इसमें हमारे खानदानी कंगन आवर पुस्तैनी हार ( नेकलेस) है हमारे खंडन की परंपरा है की घर की बड़ी बहु को खंडन की इस दारोहर को सौंपा जाता है

शालिनी जी .....तो फिर ये आपको दीदी को देना चाइये माँ सा न की मुझे

रेखा जी ...... क्यों तुमने कोई आपत्ति है क्या मैं नहीं रखने वाली ये सब

शालिनी जी ...... ये आपका हक़ है दीदी आवर ये आपको रखना योग

रेखा जी .....पैर मैं क्या करूंगी शालिनी इन सबका

शालिनी जी .....आप हवेली की बड़ी बहु है दीदी ये आपका हक़ है आवर क्या करना है उसका हल मैं बता देती हूँ आपको हमारी अगली पीढ़ी में बड़ी नहीं एक तरह से कोमल आवर किरण है आप अपनी इच्छा अनुसार दोनों को सौंप दीजिये

रेखा जी .....क्या पैर ये गलत होगा शालिनी किरण का मैं मानती हूँ पैर कोमल भले हे बेटी है मेरी आवर तुम जो कह रही हो वो भी सही है पैर इस से कोमल को वो हक़ नहीं मिलता जो किरण का है

सूर्य ......... ीदार दीजिये कब से देख रहा हूँ मैं नहीं ले सकती वो नहीं ले सकती

सूर्य बॉक्स उठा उसे खोलता है तो उसने बहुत से गहने थे

सूर्य .....दादी जी कोनसी दारोहर है खानदानी जिसके विषय में आ पता रही थी

दादी जी एक पुराण पैर बेहद खूबसूरत हार बहार निकलती है आवर चार कंगन जो पुराने थे ठोस छोड़ी साइज में

दादी जी ......यही है बीटा

सूर्य ....... बड़ी मम्मी ये हार आप हिज किसी को पहनना है पहनाइए आवर ये कंगन

सूर्य आँखे बंद कर कुछ करता है

सूर्य ......कीजिये काम हो गया है अब आप अपनी सभी बहुओ को पहनाओ चाहे पुरे सूर्यगढ़ को हाहाहा ये कंगन का सेट ख़तम नहीं होगा
ये देखो

जैसे हे सूर्य वो चार कंगन उठाया बॉक्स से उनकी जगह वैसे 4 कंगन अपने आप आ गए

जैसे हे वापिस रखा 4 गायब हो गए

सूर्य .....प्रॉब्लम सोल्वे अब चलिए माँ हमें निकलना योग

किरण ......कुंवर जी गुरुदेव आ चुके है

रेखा जी वो हार दादी जी से ले कर किरण को पहना देती है

रेखा जी ......आज से ये पुस्तैनी हार इस पीढ़ी की इस हवेली की बड़ी बहु आवर मेरी बेटी स्वीटी का हुआ

दादी जी .....बहुत अच्छा किया रेखा बेटी अब इन कंगन की जिम्मेदारी भी तुम्हारी है पैर तुम दोनों को भी कुछ देना है

दादी जी चारो कंगन में से दो दो देखा जी आवर शालिनी जी को सौंप देती है

दादी जी ....... तुम दोनों मेरे लिया एक सामान हो इस लिया ये तुम दोनों को दे रही हूँ अपनी इस माँ का आशीर्वाद समाज लेना बेटी

कुछ देर बाद सूर्य गुरुदेव किरण मानसी शालिनी जी पाछो निकल गए मानसी सूर्य के विवाह स्थल के लिया

अब


पृथ्वीलोक. पे दूर कही एक घने जंगल में पास से बहती नाड़ी से कुछ दुरी पे असुरगुरु आवर शिष्य 2 ( असवासुर ) किसी पूजा आदि की तयारी कर रहे थे

असवासुर ....... गुरुदेव आपकी आज्ञा हो तो क्या हम कुछ जब सकते है

गुरुदेव ...... पुत्र अस्व हमारे सभी शिष्य में से तुम हमारे सबसे प्रिय शिष्य hi जानते हो क्यों क्युकी तुम में सयम है तुम असुर होते हुए भी खुद पे नियंत्रण रखना जानते हो आवर उचित समय पे उचित पर्सन करते हो कहो पुत्र क्या जिज्ञाषा है तुम्हारे मन में

असवासुर ........ गुरुदेव हमसे कुछ भूल हो या हमारे सब्दो से आपको ठेश पहुंचे तो हमें माफ कर दीजियेगा

असुरगुरु ......हे तो तुम्हारे परशान पे निर्धारित है पुत्र बिना दोष जाने किसी को दंड नहीं दिया जाता ुशी तरह बिना तुम्हारे परशान जाने हमारा कुछ भी कहना उचित नहीं अब अपना पर्सन पूछो हम जानते तुम कुछ भी गलत नहीं पूछोगे पुत्र

असवासुर ........ गुरुदेव आपकी पुत्री का विवाह आप काल से करने जा रहे है वो भी असुरनिटी अनुसार किन्तु जहा तक मैं जान पाया हूँ काल किसी असुरवंश सेदूर दूर तक सम्बंद नहीं है आवर जहा टेक मुझे ज्ञात है आप भी काल के विषय में पूर्ण सत्यता नहीं जानते है ऐसे में हे विवाह ........

असुरगुरु ........ पुत्र अस्व तुमने जो कहा वो पूर्णतया सत्य है पुत्र हम न तो पुत्र काल के विषय में जानते है केवल एक संदेह है की हो न हो पुत्र काल वही है जिसकी हम प्रतीक्षा वर्षो से कर रहे है

कितना भी पुराण कितनी हे गहराही में दफ़न रहश्य हो पुत्र एक न एक दिन उसे उजागर होना हे पड़ता है

ठीक ुशी तरह असुर मनुष्य या अन्य कोई अपने पाप करम सभी से छुपा तो सकता है किन्तु उचित समय आने पे उस पाप के करम दंड से नहीं बच सकता

असवासुर .....जी गुरुदेव

गुरुदेव .......पुत्र हिज तरह पुत्र काल का रहश्य है ुशी तरह हमने भी कई रहश्य छुपाये है अपने हृद्या में जिनसे सायद आज हम देवी किरपा से मुक्त हो पाएंगे

असवासुर ....... क्या शिष्य 1 काल के हाथो वीरगति को प्राप्त हो चूका है गुरुदेव

असवासुर की बात सुन असुरगुरु के हाथ कार्य करते करते रुक हेट है

जिसे देख असवासुर के मुख मंडल पे भी चिंता की लकीर उभर आती है जैसे उसने अनुचित समय पे अपना सवाल असुरगुरु के सामने रखा हो

असुरगुरु ........ पुत्र अस्व शिष्य 1 भले हे हमारी सेवा में तुम सब से पूर्व आया था किन्तु हमारे सानिध्य में इतने वर्ष रहने के पश्चात भी न वो श्रेस्ट शिष्य बन पाया आवर न श्रेस्ट असुर उसकी मृत्यु को वीरगति जैसे बलिदानी सबद जोड़ कर असंख्य वीरगति प्राप्त आत्माओ को अपमान न करो पुत्र अस्व हमारे सानिध्य में इतने वर्ष रहने के पश्चात भी उसने अपने अंत समय से पूर्व घ्रणित कार्य कर अपने गुरु को लज्जित किया है

असवासुर ......हमें क्षमा करे गुरुदेव हमारे सब्दो के लिया

असुरगुरु ....... जानते हो पुत्र अस्व हमने सदैव नर बलि के खिलाफ रहे कोई भी इस्वर अपने हे संतान की बलि स्वीकार कर कैसे परशान ( खुश ) हो सकता जब इस सम्पूर्ण भारमंद आवर इसमें विधमान जिव जंतु देव दानव मानव गंधर्व यक्ष किनार सभी उस परमपिता की संतान है तो अपनी हे संतान की निर्मम हत्या से कैसे वो परशान हो सकते शिष्य 1 ने अपने अंत से पूर्व एक सिसु की बलि दे कर अपनी मृत्यु के पश्चात भी अनंतकाल तक नरक की आग में जलना अपनी नियति बना लिया

असवासुर ...... किस यज्ञ विधि के लिया शिष्य1 ने उस मासूम सिसु ( बालक ) की बलि दो गुरुदेव नर पिसाच तामसिक यज्ञ हेतु पुत्र जो शैतान को पूजते है वही ऐसे अनैतिक मार्गो से अपने भीतर छुपे लोभ को संतुस्ट करते है किन्तु वो ये भूल जाते है की उस करम का कर्मफल क्या होगा

असवासुर ......... जी गुरुदेव आपने उचित यौवरानी जी आप यहाँ

असवासुर की बात सुन असुरगुरु का ध्यान भी उस आवर गया जहा से वातापी
असुरगुरु की आवर भाड़ रही थी

असुरगुरु .......पुत्री वातापी आप यहाँ कैसे

वातापी ...... परनाम पिता श्री हमें आपसे भेट करनी थी पिता श्री इस लिया आपसे भेंट करने चले आये किन्तु यहाँ तो आप किसी विवाह की तयारी कर रहे है कही आप मानसी आवर काल

गुरीदेव ....... तुम्हारा कल्याण हो पुत्री वातापी है पुत्री वातपु पुत्री मानसी वे पुत्र काल का विवाह है यहाँ पे किन्तु तुमने इस समय यहाँ उपस्थित नहीं होना चाइये थे पुत्री आने से पूर्व हमें सन्देश तो दिया होता

वातापी ......हमें क्षमा करे पिता श्री हम अभी असुरलोक लौट जाते है

ठहरो पुत्री वातापी तुमने लौटने की आव्सय्कता नहीं है


असुरगुरु वातापी असवासुर तीनो की नजर आवाज की दिशा में गई तो वह सफ़ेद वस्रों में बड़े बेस सफ़ेद बाल वे लम्भी लम्भी दाढ़ी में किसी दिव्या सिद्ध पुरुष को खड़ा देख तीनो चौंक गए

तभी उनके पीछे से मानसी बहार निकलती है साथ हे किरण शालिनी जी आवर सूर्य

असुरगुरु .......... पुत्री मानसी है अथार्त बाकि

मानसी ......परनाम बाबा

असुरगुरु ......कल्याण हो पुत्री

सूर्य .......परनाम गुरुवार

असुरगुरु .......पुत्र काल कल्याण हो पुत्र तुम्हारा आखिर आज अपने वास्तविक दर्शन दे हे दिए

सूर्य ......जी गुरुवार मैं काल हे हूँ पैर पूर्ण परिचय कुछ आवर हे है मेरा ये मेरी माता शरद शालिनी शिव ठाकुर आवर ये मेरे गुरुदेव आवर ये मेरी प्रथम पत्नी किरण सूर्य ठाकुर

असुरगुरु .........सूर्य शिव ठाकुर यथार्थ आप वही दिव्या अंश है

गुरुदेव ......... आपका कथन उचित है असुरगुरु व्योमासुर ये वही है जो आप सोच रहे है

गुरुदेव के मुख से अपने गुरुदेव का नाम सुन असवासुर चौंक जाता है क्युकी असुरगुरु का नाम कोई भी नहीं लेता बस सभी उन्हें असुरगुरु या गुरुदेव कह कर हे सम्बोध्ति करते है

असुरगुरु ......... हमें लगा हे था ऐसा किन्तु हम वचनवद्ध थे इस लिया खोजबीन नहीं कर हमें ुशी समय आभाष हो चूका था जब हमने अनजाने में पुत्र वयोम को कास्ट पहुंचाया आवर पुत्र सूर्य को वह काल रूप में आना पड़ा धन्य है देवी आप जिन्होंने इस दिव्या आत्मा को सवरूप दिया

सूर्य ....... हम विवश थे गुरुदेव अपनी वास्तविकता आपसे छुपाने के लिया किन्तु आज आप के सम्मुख है अपने वास्तविक सत्य के साथ हम एक पिता आवर गुरु के साथ चल नहीं कर सकते है हमारी विवशता के चलते आपमें सम्मुख अपनी वास्तविकता छुपाने के लिया हम क्षमा प्रार्थी है गुरुवार

सूर्य जैसे हे असुरगुरु के पेअर चुने लगा तो असुरगुरु पीछे हाथ गए

सूर्य किरण वातापी असवासुर शालिनी जी मानसी सभी चौंक कए इस तरह का वयवहार देख असुरगुरु का वही गुरुदेव मुस्कुरा रहे थे


असुरगुरु . ........ नहीं पुत्र सूर्य तुमने क्षमा मांगने की आव्सय्कता नहीं आवर न हमारे उच्चारण स्पर्श करने की

सूर्य ....... मैं जनता हूँ गुरुवार आपकी जीजाक किन्तु मैं उनका अंश मात्रा हूँ

असुरगुरु ........फिर भी तुम हमारे चरण स्पर्श नहीं कर सकते पुत्र हमारे तप भक्ति से अर्जित पुण्य को निष्फल न करो पुत्र

सूर्य ......क्या मानसी के पिता के पिता के भी चरण स्पर्श कर आसिष लेने का शोभाग्य नहीं है हमें

असुरगुरु ........ हमारे पास वो अदिकार नहीं है पुत्र सूर्य हिज अदिकार की तुम बात कर रहे हो हमने बहुत से पाप किये है अपने क्रोध में वशीभूत हो कर

गुरुदेव .......... आज आप उस करम से मुक्त हो सकते है असुरगुरु व्योमासुर जिस उचित समय की आपको प्रतीक्षा थी वो समय आ चूका है प्रभु की भी यही इच्छा है की आप अपने हृद्या में छुपाये उस काली रात का रहश्य खोले जिसके आपने अपनी जीवन संगिनी को खोया था

असुरगुरु ........ अथार्त आपको ज्ञात है उस काली रात्रि के विषय में जिस रात्रि हमने अपना सब कुछ खो दिया था आवर उस सत्य के विषय में भी जो हमने सभी से छुपाया है

गुरुदेव ........ है हम सत्य जानते है पूर्ण सत्य जो आप भी नहीं जानते है जब पुत्री मानसी से हमारी प्रथम भेट हुई थी प्रभु कृपा से हम ुशी समय सत्य जान गए थे जो आपसे भी छुपा हुआ है

असुरगुरु ........ पुत्री मानसी हम तुम्हारे गुनहगार है पुत्री तुम हमारा अंश नहीं हो पुत्री तुम असुरराज नरकासुर की पुत्री हो न की हमारी हमारी पत्नी की हत्या के क्रोध में हमसे से महापाप हुआ पुत्री हमें क्षमा कर दो पुत्री मानसी

असुरगुरु की बाद सुन मानसी की आँखों में आंसू भने लगते है

पास कड़ी किरण मानसी को अपने गले से लगा लेती है

असुरगुरु ....... हम तुम्हारे दोषी है पुत्री हम हर दंड भोगने को सज है पुत्री मानसी

गुरुदेव ........ पुत्री मानसी अपने मन में कोई भी अनुचित विचार न लाना क्युकी ये सत्य नहीं है

गुरुदेव ....... यही सत्य है हमने इन्ही हाथो से वो घ्रणित पाप किया है

गुरुदेव ........ आपने कोई पाप नहीं किया है असुरगुरु व्योमासुर बल्कि अपनी पुत्री मानसी को नारकीय जीवन से बचाया है आपने

उस रात्रि आपने क्रोध में पुत्री मानसी को असुरमहारानी द्वारिका के कक्ष से न चुराया होता तो आज आपकी पुत्री का जीवन नरक बन चूका होता

पुत्री मानसी नरकासुर जैसे आदर्मी की पुत्री नहीं है बल्कि आपका अपना हे रकत है जिसे भिवष्य की योजना के तहत बदल दिया था जनम के समय किन्तु आपसे एक पाप तो हुआ है असुरगुरु

असुरगुरु के चेहरे पे जहा ये जान कर ख़ुशी हुई थी की मानसी उनकी सभी पुत्री है वही गुरुदेव की आखरी बात सुन फिर से चेहरा निस्तेज होने लगा

गुरुदेव ......... आपने हे पुत्री वातापी का विवाह कंटकासुर जैसे डस्ट पापी से करवाया था न इस सरल हृद्या असुर कन्या के साथ

आपके ुशी करम ने पुत्री वातापी के जीवन को अंधकारमयी कर दिया जिस तरह आप पुत्री मानसी के सत्य वे अनभिज्ञ थे ुशी तरह कंटकासुर के सत्य से भी अनभिज्ञ है

असुरगुरु ........... ये सत्य नहीं हो सकता हमने सवयं कंटकासुर को मूर्छित द्वारिका में सानिध्य में रखा था

गुरुदेव ........ है ये सत्य है आपकी दृस्टि में किन्तु ये अर्ध ( आधा ) सत्य है असुरगुरु व्योमासुर

असुरगुरु ....... फिर सत्य क्या है आवर गेम इस विषय में सत्य गायत क्यों नहीं हुआ आज तक आवर पूर्ण सत्य क्या है

गुरुदेव आगे भाड़ असुरगुरु के समक्ष जा पहुंचे

गुरुदेव ....... हम आपको वो स्मरतिया दे रहे है जो हमें आज हे प्रभु इच्छा वे प्राप्त हुई ानयता हम भी आज तक यही सोचते थे की कनकसुर आपका पुत्र है पुत्री मानसी नरकासुर की पुत्री किन्तु सदैव हमारे मन में एक संदेह रहा पुत्री मानसी को में कर

की कैसे डस्ट नरकासुर का रकत पुत्र सूर्य की जीवन संगिनी बन सकती है आज आपको पूर्ण सत्य वे अवगत करवाने का समय आ गया है

गुरुदेव अपने दिव्या तेज वे परिपूर्ण ललाट ( माथे) पे हाथ रख उस सत्य से जुडी सभी यादे असुरगुरु के मस्तिष्क में पंहुचा देते है जो की एक नीली किरण के माध्यम से असुरगुरु के मस्तिष्क में समाहित हो गयी

असुरगुरु के सामने ुशी रात्रि के दृश्य किसी चल चित्र के भाटी चलने लगते है

दरशल उस रात कुछ इस तरह से हुआ था

द्वारिका आवर असुरगुरु पत्नी मोहिनी दोनों गर्भ से थी दोनों को एक हे समय में पार्शव पीड़ा सुरु हूँ असुगुरु इस समय किसी कारणवश असुर महार से बहार थे

तभी मोहिनी जी एक कन्या को जनम देती जो देखने पे हे बहुत प्यारी आवर असुर वंश से बिलकुल अलग किन्तु मोहिनी जी का प्रथम पार्शव तहत जिसके चलते वर्क अचेत ( बेहोश ) अवस्था में थी

तभी वह कोई आता है जिसका चेहरा पूरा देखा हुआ था

वो उस नवजात कन्या को उठा कर पास वाले कक्ष में चला जाता है जहा मच दशिया एक स्त्री का पार्शव करवा रही थी यस स्ट्रीट कोई आवर नहीं द्वारिका थी

सकाश अपनर चेहरे से सो नकाब हटा देता है जिसे देख सभी दसिया जुख कर उसे परनाम करती

दासी 1 ......असुरराज महारानी जी के गर्भ में सिसु रन चूका है

जी है हे नरकासुर हे था जो उस नवजात कन्या को उठा कर इस कक्ष में आया था

नरकासुर द्वारिका को मूर्छित कर देता है

नरकासुर बे एक पल न लगाया आवर अगले हे पल चारो दसियो का सर जमीं पे जर्रे हुए था

नरकासुर उस नवजात बची को द्वारिका के समीप लेता देता है आवर द्वारिका के फुले हुए पेट कुछ डालता है

आवर द्वारिका योनि स्थल पे हाथ रख कुछ बड़बड़ाने लगता है

कुछ हे देर में द्वारिका की योनि से बचे का सर बहार निकलता है

नरकासुर उस बचे का सर पकड़ बेहद खींच लेता है आवर द्वारिका अंगो को कपडे से देख उस बचे को ले कर वह से चल देता है उस कक्ष में जहा मोहिनी जी की मूर्छा ( बेहोशी ) टूट चुकी थी

मोहिनी जी .......मेरा बचा कहा है

तभी वह नरकासुर उस बालक को ले कर आता है

नरकासुर ....... गुरुमाता नाम क्षमा करे बिना आज्ञा आपके बचे को ले जाने के लिया

मोहिनी जी फ़ौरन बचे को ले अपने वस्त्र से देख उसे स्तन पैन ( ढूढ पिलाने ) करवाने लगती है


अभी मच हे देर हुए थी की मोहिनी जी को अपने स्तन ( बूब्स ) में पीड़ा मह्सुश हुई

जैसे हे अपने वस्त्र हटा कर बचे का चेहरा देखा वो बड़ा हे भयानक था होंटो पे रकत लगा हुआ थे आँखे पूरी लाल जैसे कोई शैतान हो

मोहिनी जी ने जैसे बचे के अन्य वस्त्र को हटा कर देखा तो सो लड़की नहीं लड़का था

मोहिनी जी ........ मेरी पुत्री कहा है हे मेरा बचा नहीं है मेरी मुत्री कहा है नरकासुर

नरकासुर .......आपको पुत्र हुआ है गुरुमा

मोहिनी जी गुस्से में नरकासुर की आवर बढ़ी पैर नरकासुर जैसे कुछ आवर हे मनसूबे बनाये हुए बैठा था

एक बार फिर से नरकासुर की तरवाल चाक आवर इस बार मोहिनी जी का सर उनके बिस्तर पे गिरा था आवर सरीर जमीं पे

नरकासुर ....... रकत पिने की इतनी क्या आव्सय्कता थी तुम देखा तुम्हारा भेद खुल गया न तुम्हारी वजह से इसका भी अंत करना पड़ा अब तुम छह कर भी किसी के समक्ष इस रूप में कभी नहीं अस सकोगे

कहते हुए नरकासुर कुछ काली ऊर्जा उस बालक पे डालता है जिसके चलते सो बालक बेहोश हो जाता है

नरकासुर चिप चाप कक्ष से निकल जाता है

किन्तु कक्ष से रकत रंजीत तलवार के साथ उसे निकलते हुए असुगुरु देख लेते है

असुरगुरु जल्दी से अपने कक्ष में पंहुचा तो सामने मोहिनी जी का निर्जीव दो भागो में बैठा हुआ शव देख सो लड़खड़ा कर गिर पढ़े कुछ देर बाद जब बहार जोरो की आवाज हुई तब उन्हें होश आया आवर क्रोध में उस बालक को उठा सो ुशी किर्या को दोहराते है जो नरकासुर बे दोहराई थी बचे अपने अपने स्थान पे लौट आये किन्तु अब असुरगुरु की नजरो में कंटकासुर उनका पुत्र था जबकि मानसी नरकासुर की पुत्री

यही सो आधे थी जो गुरुदेव ने असुरगुरु को दो थी

असुरगुरु की आँखे एक बार फिर उस मार्मिक दृश्य को देख भर उठी थी अपनी पत्नी की निर्मम हत्या से सो घाव फॉर से हरे हाउ उठे जिन्हे भरने में बहुत समय लगा

गुरुदेव ........ यही वो पूर्ण सत्य है असुरगुरु व्योमासुर जिस से आप अनभिज्ञ थे पुत्री मणि हे आपकी वास्तविक पुत्री आवर नरकासुर आपका पुत्र भी आवर नरकासुर का पुत्र भी क्युकी नरकासुर में जो पहला आहार लिया वो आपकी पैंटी से था अथर ये के रिश्ते से वो आपका पुत्र भी आवर आपकी पत्नी आवर आपका दोषी भी

असुरगुरु ..........नरकासुर कोण है क्युकी जो हमने देखा वो कोई असुर नहीं था

गुरुदेव ........... शैतान का अंश है नरकासुर ुशी शैतान का जिसने इस पुरे सडयंत्र को रचना की वही मायावी असुरगुरु जिसने आपको कैद कर सवयं असुरगुरु बन इस सडयंत्र के महत्वपूर्ण भाग को पूर्ण कर अपने स्थान पे लौट गया

मानसी अपने पिता के गले लग फुट फुट कर रोने लगती है

गुरुदेव ..... ....असुविधि से पूर्व पुत्री मानसी का विवाह मानव विधि से होगा उसके पश्चात असुविधि से

असुरगुरु ........जैसा आप उचित समजे मुझे कोई आपत्ति नहीं ...............

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अपडेट 225

असुरगुरु ..........नरकासुर कोण है क्युकी जो हमने देखा वो कोई असुर नहीं था

गुरुदेव ........... शैतान का अंश है नरकासुर ुशी शैतान का जिसने इस पुरे सडयंत्र को रचना की वही मायावी असुरगुरु जिसने आपको कैद कर सवयं असुरगुरु बन इस सडयंत्र के महत्वपूर्ण भाग को पूर्ण कर अपने स्थान पे लौट गया

मानसी अपने पिता के गले लग फुट फुट कर रोने लगती है

गुरुदेव ..... ....असुविधि से पूर्व पुत्री मानसी का विवाह मानव विधि से होगा उसके पश्चात असुविधि से

असुरगुरु ........जैसा आप उचित समजे मुझे कोई आपत्ति नहीं ...............

अब आगे ...........

गुरुदेव ........... हम जानते है आ अभी भी बहुत कुछ जानना चाहते है किन्तु अभी पुत्री मानसी आवर पुत्र सूर्य के विवाह के शुभमुहूर्त में आदिक समय शेष नहीं है

असुगुरु ....... हम अभी सभी तयारिया पूर्ण करते है

असुरगुरु गुरुदेव से काफी प्रभावित थे इतने बड़े सडयंत्र के खुलाशे से वर्ण उन्होंने तो अभी तक के जीवन काल में सवयं को मानसी के दोषी के रूप में हे देखा था

गुरुदेव मानव रीती रिवाजो के अनुसार वही एक विवाह स्थल त्यार करते है जो असुरगुरु द्वारा त्यार विवाह स्थल की समीप हे था

कुछ 20 मिनट्स के पश्चात सभी तयारिया पूर्ण हो चुकी थी

ीदार वयोम भी आ पंहुचा गुरुदेव के समक्ष

गुरुदेव .......पुत्र वयोम तुम यहाँ

वयोम ......जी गुरुदेव क्षमा करे आपकी अनुमति के बिना यहाँ आने के लिया किन्तु मानसी को मैंने अपनी बहन मन है गुरुदेव उसका विवाह है ऐसे में मैं कैसे विवाह में सम्लित हुए रह सकता हूँ

गुरुदेव ....... उचित है पुत्र तुमने उचित किया जो अपनी बहन के विवाह में सम्लित होने चले आये

वयोम .......अनुमति के लिया धन्यवाद गुरुदेव

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी को विवाह के लिया त्यार करो पुत्र तुम पुत्र सूर्य को वर के रूप में त्यार करो पुत्री किरण पुत्री वातापी आप पुत्री मानसी को वधु के रूप में तहत करो

किरण वातापी ......जी गुरुदेव

वयोम अब तक अपने जादू से दो विसुअल कक्ष त्यार कर चूका थी सभी जरुरी वस्तुओ के साथ

वयोम सूर्य को ले एक कक्ष में चल दिया वही मानसी को किरण वातापी ले गई दूसरे कक्ष में त्यार करने

शालिनी जी ........गुरुदेव हमें आपसे कुछ विशेष चर्चा करनी है

गुरुदेव ....... पुत्री शालिनी हम जानते है आप किस विषय पे चर्चा करना चाहती है किन्तु ये स्थान आवर समय दोनों हे उचित नहीं है उस विषय पे चर्चा करने हेतु

शालिनी जी .......जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे

गुरुदेव ........ हम जानते है पुत्री तुम्हारे साथ भूतकाल में जो कुछ भी हुआ है उसके विषय में किन्तु अभी पुत्र सूर्य को सत्य बताने का समय नहीं आया है उचित समय आने पे हम सवयं पुत्र सूर्य को सब सत्य से अवगत करवाएंगे पुत्री किरण से सचेत आवर सावधान रहना पुत्री शालिनी क्युकी पुत्री किरण में अभी भी चंचलता है भूल वश या अपने चंचल सवभाव के चलते वो तुम्हारे सत्य तक पंहुचा सकती

शालिनी जी ........वो कैसे गुरुदेव

गुरुदेव ......... पुत्री तुम्हे अपने भूतकाल का ज्ञान जो चूका है आवर तुमने अपना पारी रूप आवर सकतिया भी प्राप्त हो चुकी है किन्तु पुत्री किरण अपनी इच्छा सकती से तुम्हारे मस्तिष्क में झांक सकती है जिसे तुम अभी रोक पाने में असफल हो क्यों अभी तुम्हारी सकती जागृत हुई है जो अभी तुम्हारे नियंतरण में नहीं आवर न तुम्हारी इन्द्रिय जागृति है

शालिनी जी ........फिर तो बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी गुरुदेव स्वीटी को ज्ञात हुआ तो

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य को भी ज्ञात हो जायेगा यही न पुत्री अभी हम आपने मस्तिष्क को सुरक्षा कवच से सुरक्षित कर देते जिस से कोई भी तुम्हारे मस्तिष्क के भीतर न जनकः सके जैसे हे समस्त इन्द्रिय जागृत होंगी सवयं सुरक्षा कवच से आजाद हो जाएँगी

शालिनी जी ......जी गुरुदेव

गुरुदेव .......पुत्री जा कर सिगरता करने को कहो विवाह सुबह मुहूर्त आराम हो चूका है

शालिनी जी ........जी गुरुदेव

शालिनी जी मानसी के कक्ष की आवर भाड़ जाती है जहा लगभग किरण आवर वातापी मानसी को दुल्हन रूप में त्यार कर चुके थे

शालिनी जी ........ मानसी बेटी तुम खुश तो हो न

मानसी ......जी मम्मी मैं बहुत खुश हूँ

शालिनी जी ...... स्वीटी बीटा मानसी को जल्दी त्यार का मंडप पे ले चलो में सूर्य को देख कर आती हूँ वो त्यार हुआ की नहीं

शालनी जी मानसी के माथे को चुम अपनी आँखों से काजल निकल मानसी के कान के पीछे नजर का टिका करती है

शालिनी जी मुस्कुराते हुए दूसरे कक्ष की आवर निकल जाती है

मानसी ........ दीदी आपसे कुछ पूछे हम

किरण ......... है पूछो न मानसी क्या पूछना है

मानसी ....... दीदी आज मम्मी कुछ बदली बदली नजर आ रही है उनके चेहरे का तेज कैसे अचानक से भाड़ गया हो

किरण ........ है ये ख़ुशी की चमक है तो तुम्हारी आवर कुंवर जी के विवाह की है

आज के बाद से तुम्हारी बेटी के साथ साथ बहु की भूमिका भी सुरु होने वाली है

मानसी ......... जी दीदी आप में क्यों है हम पिता श्री की आवर से आपसे क्षमा प्रार्थी है उनकी वजह से आपको जो भी पीड़ा दुःख दर्द भोगना पड़ा उसके लिया

वातापी ......... आप क्षमा न मैनेज आवर न हम पिता श्री से क्रोधित है क्या पता यही हमारे भाग्य में लिखा था

किरण .......... हम ये सब नहीं मानते इंसान अपने भाग्य को बदल सकता है अपने नेक कर्मो से आवर आपको देख हम इतना तो अवश्य जान गए है की आप असुर कन्या होने के पश्चात भी बहुत नेक स्त्री है

मानसी ....... हम भले हे आपके पति को कभी भाई का स्थान न दे पाए पैर आप हमारे लिया सदैव भाभी श्री रहेंगी असुरलोक में हम अगर पिता एग्री के बाद का सम्मान करेंगे तो वो केवल आप होंगी

किरण .......लो दुल्हन त्यार है है जार्स देखो तो कितनी प्यारी लग रही है कुंवर जी तो आज रात आपसे नजरे न हटा पाएंगे हहहहए

मानसी किरण की बात सुन मुस्कुराते हुए सरमने लगती है जिसे देख वातापी आवर किरण दोनों की हंशी चुत जाती है






बहार गुरुदेव सभी तयारी कर चुके थे

विवाह विधि त्यार थी अग्नि देव के आह्वान पे विवाह विधि में अग्नि प्रजवलित हो चुकी थी

वयोम सूर्य को विवाह मंडप पे ले आता है

गुरुदेव .......पुत्र वयोम अपनी बहन पुत्री मानसी को विवाह विधि पे ले आओ

वयोम .......जी गुरुदेव

असवासुर ......... अगर आपकी आज्ञा हो तो हम कुछ निवेदन कर सकते है आपसे गुरुदेव

असुरगुरु .......कहो पुत्र अस्व क्या निवेदन है

असवासुर ........ शिष्य गुरु के लिया पुत्र सामान होता है इस नाते हम भी आपके पुत्र हुए गुरुदेव आवर आपकी पुत्री हमारी बहन आपकी आज्ञा हो तो हम इस विवाह में एक भाई के रूप में शामिल हो सकते है

असुरगुरु ........... असुर विवाह विधि में एक भाई की कोई भूमिका नहीं होती ये सत्य तुम भी जानते हो

गुरुदेव ........ किन्तु मानव विवाह रीती में एक भाई की भूमिका होती है असुरगुरु पुत्र तुमने एक नेक कार्य के लिया आज्ञा ली है हम तुम्हे पुत्री मानसी के विवाह में उनके भाई के रूप में सम्मलित होने की इजाजत देते है

असवासुर ख़ुशी ख़ुशी गुरुदेव को परनाम कर वयोम के साथ मानसी के कक्ष की ोोुर भाड़ जाता है

कुछ डिअर बाद किरण मानसी वातापी मानसी को दुल्हन बनाये बगैर निकलती है तो आगे वयोम पीछे अस्व तीनो पे चुनार की चाव कर विवाह स्थल पे ला कर मानसी को सूर्य के समीप बैठा देते है

गुरीदेव मंत्रो उच्चारण के साथ परबु विग्नहर्ता की पूजा कर उनका आशीर्वाद ग्रहण कर विवाह विधि सुरु करते है

कुछ देर मंत्रो ूचनारं के बाद असुरगुरु को विवाह विधि के ज़मीन आने का निमंतरण दिया जाता है

गुरुदेव ......असुरगुरु मानव रीती अनुसार आपको अपनी पुत्री का हाथ वर को सौंपते हुए इस्वर को साक्षी मन कन्यादान करना होगा ये अधिकार माता पिता बेस भाई को प्राप्त है

असुरगुरु .......आगे बढ़ सूर्य आवर मानसी के समीप पहुंचे शालिनी जी उन्हें कुछ वस्तुए जैसे चावल पैन पैट्स सुपारी आदि देती है आवर एक जल आवर दुगड़ से भरा छोटा पत्र

असुरगुरु अपनी पुत्री मानसी का हाथ सवयं सूर्य के हाथ में रख पैन सुपारी चावल आदि रख दुगड़ आवर जल के साथ कन्यादान विधि पूर्ण करते है


गुरुदेव वर वधु का गठबंद किया जाये

गुरुदेव के आदेश पे असुरगुरु में ये दायित्व वातापी को सौंपा

वातापी ......किन्तु मैं कैसे पिता श्री

असुरगुरु ......ुशी हक़ से जिस हक़ से मुझे पिता श्री कह सम्बोदित करती hi पुत्री

शालिनी जी ...... जब उन्हें पिता मानती हो तो उनकी आज्ञा भी मनो बेटी पिता की िक्कगा का मान पुत्री होने के नाते तुम्हे रखना चाइये

वातापी आगे बढ़ सूर्य आवर मानसी का गटबंदान करती है

गुरुदेव मंत्रो उच्चारण के साथ सूर्य आवर मानसी से विवाह विधि में कुछ आहुति डलवाते है उसके पश्चात

फैरो के लिया खड़ा कर दिया जाता है जिसमे पहले 3 फैरो में मानसी आगे रहती है बाकि के चार फैरो में सूर्य को आगे रखा जाता है मंत्रो उच्चारण विवाह वचनो के साथ सौर्य आवर मानसी का मानव विधि से विवाह पूर्ण होरा है

गुरुदेव ......पुत्री मानसी आवर पुत्र सूर्य का विवाह पूर्ण हुआ अब दोनों पति पत्नी के रूप में अपने नाते जीवन का सुभारंभ कर सकते है

अपने बड़े बुजुर्गो का आसिष ग्रहण कर अपनी नए संसार का आराम करो पुत्र पुत्री

सूर्य मानसी सबसे पहले अपनी माँ का आशीर्वाद लेते है उसके बाद गुरुदेव का आवर फिर असुरगुरु का

मानसी किरण को सम्मान देते हुए उसका आशीर्वाद लेंस के लिया जुख़ी तो किरण हे उसे बिच में हे रोक दिया

किरण .......हम सब बहने है हम में कोई बड़ा नहीं कोई छोटा नहीं हम सब एक सामान है

आशीर्वाद लेना है तो वातापी भाबी वयोम भाई आवर असवासुर का लो उम्र आवर रिश्ते दोनों में वो बड़े है

असुरगुरु ........ आपने उचित कहा पुत्री किरण किन्तु केवल मानसी को आशीर्वाद लेना का हक़ है पुत्र सूर्य उनके सामने जुखे फॉर चाहे वो आसिष के लिया हे क्यों न हो पुत्र सूर्य इनके समक्ष आसिष के लिया जुखा तो इन सभी के पुण्य करम नस्ट हो जायेंगे

गुरुदेव ......... जैसा असुरगुरु कह रेट है वैसा हे करो

मानसी सभी से ासुरवाद लेती है

असुरगुरु ........ वैसे तो इस विवाह के पश्चात असुरविवाह की आव्सय्कता नहीं है क्युकी असुर विवाह करने की आवसयता वर वधु को तभी होती है जब दोनों हे पक्ष से परिवार इस विवाह की सहमति न दे

किन्तु एक सत्य ये भी है की पुत्री मानसी असुर अंश है

गुरुदेव .......... आप विवाह की विधि आराम करे असुरगुरु किन्तु उस विधि का आपको त्याग करना होगा जिस विधि का असुरकुल में सर्वोपरि मन जाता है

उस विधि के अलावा सभी विधि पूर्ण कीजिये

असुरगुरु गुरुदेव के बात से सहमत हो उस माण्डव से दूसरे मंडप चल देते है जहा असुविधि अनुसार सूर्य मानसी का विवाह होना था

जहा डिवाइस पटल भैरवी के समकक्ष सूर्य मानसी का असुविधि अनुसार विवाह आरंभ होता है

कुछ देर विवाह विधि यज्ञ में असुरगुरु मंत्रो उच्चारण के साथ अग्नि में कुछ सामग्री अर्पित करते है यज्ञ से उत्पन तभी अग्नि से एक विशेष मंगलसुरत्रा निकलता है

असुरगुरु के इसारे से वह मंगलसूत्र सूर्य के हाथो में आ पंहुचा

असुरगुरु .........पुत्र सूर्य ये दिव्या मंगल सूत्र असुरकुल देवी माँ का आशीर्वाद है ये सभी असुरकन्याओ को प्राप्त नहीं होता किन्तु पुत्री मानसी पे माँ की विशेष कृपा है पुत्री मानसी को पहना दो पुत्र

सूर्य ...... जी बाबा जो आपकी आज्ञा

सूर्य वे दिव्या मंगलसुरत्रा मानसी को पहना देता जैसे हे सूर्य मंगलसूत्र पहना कर अलग हुआ दोनों मंगलसूत्र एक हो गए ( जो सूर्य हे पहले पहनाया था आवर एक अभी )

असुरगुरु एक तेज धार क़तर सूर्य को देते है

जिस से सूर्य अपनी अंगूठे पे कट लगा रकत से मानसी की मांग भरता आवर असुरगुरु को लौटा देता है

असुरगुरु सूर्य आवर मानसी के बाये हाथ के हथेली पे एक गहरा कट लगा कर दोनों के हाथ मिला दोनों के रकत की कुछ बुँदे विवाह अग्नि में अर्पित करते है

देखते हे देखते दोनों के गये हाथ पे एक लाल कप्टा आज जाता है

असुरगुरु ......... पुत्र सूर्य पुत्री मानसी अब तुम दोनों पति पत्नी हो असुविधि अनुसार विवाह सम्पन हुआ जा कर असुरकुल देवी माँ पटल भैरवी का आशीर्वाद लो पुत्र पुत्री

सूर्य वही िस्थित माँ की दिव्या प्रतिमा के समक्ष उन्हें परनाम कर आशीर्वाद लेते है

सभी बड़ो का एक बाद अस आशीर्वाद लेते है

असुरगुरु ........ पुत्र काल एक पिता के रूप में मेरा पास तुम्हे आवर पुत्री मानसी को देने के लिया सिवाय आशीर्वाद के कुछ नहीं है आवर न ये रीती असुरलोक में है किन्तु तुम एक मानव भी रिक्त हाथ अपनी पुत्री को विधा नहीं कर सकता इस लिया मैं शर्त असुरकुल गुरु शुक्राचार्य तृत्य शिष्य तुम्हे आसुरी विद्या का जो ज्ञान मुझे प्राप्त है वो आशीर्वाद सवरूप तुम्हे आवर पुत्री मानसी को देता हूँ जो निरंतर तुम्हारे वंश योग्य संतान को सवयं ये सीख्शा ज्ञान गर्भ से प्राप्त होगा

सूर्य मानसी ........ हमें आपका आशीर्वाद सवीकार है बाबा हम वचन देते है आपके ज्ञान का अनुचित प्रयोग कभी नहीं करेंगे

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य पुत्री मानसी अब हमें कही आवर भी चलना है जिनका आशीर्वाद तुम्हारे नवजीवन के लिया आवशयक है

सूर्य .......जी गुरुदेव बाबा आपसे आवर आप सभी से विनती है मेरी वास्तविकता किसी भी इस्थिति में किसी आवर के सम्मुख न आ पाए

असुरगुरु .......तुम चिंतित न हो पुत्र पुत्र अस्व आवर पुत्री वातापी किसी भी इस्थिति में तुम्हारे सत्य किसी के समक्ष प्रकट नहीं करेंगे न हम

सूर्य ......आप सभी को परनाम अब आज्ञा दीजिये गुरुवार सिगरा हे आपसे भेट होगी

असुरगुरु .......रुको पुत्र सूर्य वीसा होने से पूर्व ये भेट सवीकार करो भविष्य में ये तुम्हारे लिया सहायक सिद्ध होगी

जैसे हे सूर्य उस काल कपडे में बंद बॉक्स जैसे वास्तु असुरगुरु से लेता है वो ऊर्जा पुंज में बदल सूर्य में समाहित हो जाती है

गुरुदेव ......असुरगुरु व्योमासुर जी अब इजाजत दीजिये

असुरगुरु .......आपसे हमें बहुत जरुरी विषय पे कुछ जानना है

गुरुदेव ........ हम सिगरा हे आपसे भेंट करेंगे पुत्र सूर्य के माध्यम से आपको सूचित करता हूँ

सूर्य किरण मानसी शालिनी वयोम गुरुदेव सभी से विधा ले सूर्यगढ़ निकल गए

सूर्यगढ़ .........

सूर्य किरण मानसी शालिनी जी के जाने के बाद रैंक पारी हवेली पहुँचती है

रानी पारी ........ माँ सा आपको गुरुदेव नई तो बतया हे होगा न की उनके जाने के बाद क्या करना है

दादी जी ......... है बेटी हम सब भी त्यार हे है है इन दोनों बच्चियों को लाना है

रानी पारी ....... वो कार्य पुत्री रिद्धि अभी पूर्ण कर देगी आप उसकी चिंता न करो माँ सा

दादी जी ......ठीक है बेटी मैं सभी को बोल देती हूँ

दादी जी सभी को आवाज देती है तो सभी एक एक कर हवेली के हॉल में िक्कते हो जाते है

मेनका जी ......क्या हुआ माँ सा आपने सभी को क्यों बुलाया है

दादी जी .......हम सभी को परीलोक मन है तुम बुल गयी क्या तुम्हारे लादले की आज सदी हो रही

मेनका जी .......किसके साथ आवर कब

रानी पारी .......मेनका जी आज पुर्त्र सूर्य आवर मानसी का विवाह है क्या आपको ज्ञात नहीं

मेनका जी .......... मुझे एच में याद नहीं रहा

रेखा जी .......रहेगा भी कैसे दीदी आज कल नन्दोई जी ठीक से खुराक जो नहीं देते

मेनका जी .....भाई सा तो आपको ठीक से खुराक दे रागे है न भाबी सा फिर आपने क्यों नहीं बताया

दादी जी ......सरम करो बछिया भी है यहाँ तुम दोनों नानन्द भाभी नहीं होती अकेली यहाँ

मेनका जी ...... तो क्या हुआ माँ सा इनको भी तो पता चले की सदी के बाद क्या होता है

दादी जी .......चुप कर मैना तुम सब त्यार हो जाओ आवर रिद्धि बीटा जाता तुम विधि आवर गायत्री को ले आना

रानी पारी ......पैर बाकियो को पता न चले पुत्री रिद्धि

रिद्धि .....जी रानी माँ माँ सा मैं अभी ले कर आती हूँ उन्हें

पारिजात .....हम भी चलते है

दोनों के हेट हे बाकि सभी भी त्यार होने चल दिए

दादी जी ......पारी बेटी वो शिव आवर जोरावर विजय बहार है

रानी पारी ......आप चिंता न करो माँ सा वो भी पंहुचा जायेंगे है साम की पूजा है उसके बाद चाहे तो रात में या फिर सुबह लौट आना वैसे भी अब पारिजात आवर जीनत पुत्री का विवाह हे होना है

दादी जी ......नहीं बेटी वह सब कुछ है फिर भी एक ादुरपन लगता है जैसे पीछे कुछ रह गया हो

रानी पारी .......जी माँ सा परीलोक आवर पृथ्वीलोक में सबसे बड़ा अंतर यही तो है वह इन बड़े बड़े महलो में वो चैन सुकून नहीं जो यहाँ छोटे से घर में मिलता है क्युकी वो घर अपनी म्हणत से अपने परिसराम प्रेम की बुनियाद पे खड़ा होता है जबकि परीलोक में सब बिना परिसराम के केवल अपनी इच्छा से वो ऊँची उचित दीवारे कड़ी कर उन्हें महल की संज्ञा दे दी जाती है

दादी जी ......है बेटी यही वो अधूरापन है जो वह खलता है

डेरी डिग्री सब एक एक कर त्यार हो बहार आ जाती है

कुछ देर बाद विधि आवर गायत्री भी आ पहुंची

रानी पारी ......सभी के अंश से उनका आकाश त्यार कर सभी को ले परीलोक निकल जाती है

विधि आवर गायत्री की ख़ुशी का कोई ठीकहाना नहीं था इस्त्ने खूबसूरत दुनिया सायद सपनो में भी न देखि थी

विधि ........ वाओ कितनी खूबसूरज जगह है ये तो जैसे सवरग हो

.कोमल ........ये सवरग नहीं है विधि परीलोक है परियो का लोग

गायत्री ........ ये तो किसी सीन्स फिक्शन मूवी से भी खूबसूरत है

कुछ देर बाद सभी सूर्य महल के सामने ुधयान में उतारते है जहा पहले से हे परिया उसे उसे पुष्पों से सुसज्जित कर उसकी आवर खूबसूरती बढ़ा रही थी

रानी पारी को देख सभी परिया आदाब से जुख उनका अभिनन्दन कर रही थी

दादी जी ......सब अंदर चलो आवर आवर वर वधु के स्वागत की तयारी करो

विधि दादी जी के बात सुन कोमल की आवर देखती है

कोमल ( ढेरी से ) ....... आज हमारे उनकी दूसरी सदी है विधि मानसी दीदी को जानती हो न उनके साथ वो अभी नहीं पे आदि कर रागे है स्वीटी आवर मम्मी वही गए हुए है

विधि ........ पैर आप लोग तो घर पे हे थे

कोमल ........ है क्युकी गुरुदेव का आदेश था इस लिया सब शामिल नहीं हुई अब चलो भीतर चलो

सभी को अंदर हेट देख विधि आवर कमल भी अंदर चल दिए

अंदर तो आवर भी खूबसूरत नजारा था

रेखा जी ...... बचो तुम सब आराम करो तब तक हम सब भोजन त्यार करते है

रानी पारी ......... उसकी जरुरत नहीं है सेविकाएं पहले हे त्यार कर चुकी है भोजन अब सभी आराम कीजिये हम मंदिर की तरफ जो कर आते है आप सभी के वस्त्र आभूषण आपके कक्ष में मौजूद है नहीं वधु के स्वागत के लिया खुद भी श्रीनगर कर लीजिये हेहेहे आखिर सास भी तो बहु के तकर की होने चाइये

लड़किया तो पहले हे जा चुकी थी अपनी ीचा अनुसार कक्ष का चयन करके

विधि आवर गायत्री एक हे रूम में रहना स्वीकार किया टेकिंग वो खुल कर बात कर सके वैसे भी ज्यादातर वी साथ में हे रहती थी

दादी जी वर वधु के स्वागत की तयारी खुद से कर रही थी जैसे पूजा थल सुसज्जित करना ग्रहपरवेश के लिया कुमकुम थल कलश आदि की तयारी करना ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स.............

दोस्तों अपडेट थोड़ा छोटा दे रहा हूँ ताकि नेक्स्ट अपडेट में पूजा आवर सूर्य मानसी की फर्स्ट नाईट कम्पलीट दे सकू
 
अपडेट 226

परीलोक .......... सूर्य मानसी दुल्हादुलहन के रूप में शालिनी जी वयोः किरण गुरुदेव के साथ साम को परीलोक पहुंचे

गुरुदेव की आज्ञा पे ये सभी सूर्य महल पहुंचे

शालिनी जी ........ आप लोग यही इन्तजार कीजिये कुछ देर चलो स्वीटी

शालिनी जी किरण को ले महल में प्रवेश कर जाती है

शालिनी जी को देखते हे दादी जी नानी जी समाज जाती है की ये लोग आ गए है

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य मैं संध्या वंदना पे परबु चरमो में मिलूंगा तब तक सभी रीती रिवाजो पूर्ण करलो संध्या काल में तुम दोनों को पूजा कर परबु का आशीर्वाद लेना है

सूर्य .......जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे

सामने से सभी लड़किया आवर घर की महिलाये तिलक थल के साथ मुख्या द्वार पे आ पहुंची

किरण पूजा थल लिया हुए कड़ी थी शालिनी जी मंगल गीत के साथ सूर्य आवर मानसी का तिलक कर उनका सवागत करती है

द्वार पे बैंक खूबसूरत पुष्प रंगोली की बिच चावल से भरा सवर्ण कलश रखा था जिसे शालिनी जी के कहे अनुसार मानसी अपने पेअर से भीतर गिरते हुए सूर्य का हाथ थम महल में प्रवेश करती है

रेखा जी एक बड़े से सवर्ण थल जिसमे कुमकुम आवर जल मिश्रित था वो रमने रखती है जिसमे अपने दोनों पेअर रख मानसी को अपने कुमकुम से भरे पैरो के पधचिन छोड़ते हुए आगे भड़ना था

मानसी ने ुशी तरह किया जैसे दादी जी ने निर्देश दिए थे

ग्रहपरवेश की विधि पूर्ण करने पश्चात सूर्य अपनी दादी जी दादा जी का आशीर्वाद लेता है फिर मन जी नानी जी का बड़े पापा बड़ी मम्मी बड़े मां जी बड़ी ममी छोटे मां जी ममी जी शिव शालिनी जी मेनका जी विजय जी

सभी बड़ो का आशीर्वाद लेने के बाद जैसे रीती रिवाजो पूर्ण हुए लड़किया ले ुधि मानसी को

जोरावर जी ......... हम्म्म तो भांजे श्री एक आवर शेरनी को काबू में कर लिया तुमने

शिव ......बीटा तो बाप से भी दो कदम आगे निकला भाई सा

महेंद्र जी ........ क्या चल रहा है सब बीटा तुम जाओ जा कर खाना खालो इन्हे मैं देखता हूँ

महेंद्र जी शिव जोरावर विजय जी आवर संजय को लिया एक कक्ष में निकल गए जहा इन पाछो की काफी समय तक बातचीत चलती रही

संध्याकाळ को रानी पारी साही सवारी सूर्य महल भेज देती है ताकि सभी संध्या पूजा में शामिल हो सके जो पूजा सूर्य मानसी के हाथो होने थी

एक एक कर सभी साही बग्गी में बेथ आसमान की सैर करते हुए मंदिर पहुंचे

गुरुदेव पहले हे सभी तयारी पुत्री कर चुके थे पूजा की

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य पुत्री मानसी पूजा से पूर्व पवित्र सरोवर में सनान कर सावच हो जाओ

सूर्य जी .......गुरुदेव स्वीटी तुम मानसी के साथ जाओ

गुरुदेव ...... जाओ पुत्री तुम्हे भी पूजा में शामिल होना है

सूर्य किरण मानसी के जाने के बाद

रानी पारी ......गुरुदेव किन्तु पूजा तो वर वधु द्वारा होनी है

गुरुदेव ....... है किन्तु पुत्र सूर्य किरण के बिना पूजा में अकेले मानसी के साथ शामिल नहीं होगा न आज न भिवष्य में जहा भी पुत्र सूर्य जोड़े में पूजा करेगा वह पुत्री किरण के बिना ुजा में शामिल नहीं होगा

दादी जी .......ये क्या बात हुई गुरुदेव मन की दोनों में अटूट प्रेम है पैर ऐसे पूजा में भी

गुरुदेव .....देवी वो दिखने में भले हे दो जिसम दो आत्मा है किन्तु इन दोनों के मिलने से हे उनका अस्तित्व है जैसे चढ़नी के बिना चन्द्रमा का अस्तित्व नहीं वैसे इस सूर्य का किरण के बिना अस्तित्व नहीं

कुछ हे देर में तीनो पवित्र जल से सनान कर लौट आते है गुरुदेव पूजा यज्ञ सुरु करते जहा एक तरफ किरण आवर एक तरफ मानसी बैठी थी दोनों के बिच सूर्य

करीब 1 घंटे तक गुरुदेव यज्ञ में आहुति देते थे आवर ये तीनो भी

फिर तीनो से परबु वंदना कर पूजा पूर्ण की

देवी माँ का आवर परबु का आशीर्वाद लेने के बाद

गुरुदेव रानी पारी आवर शालिनी जी को एकांत में कुछ समजते है

जिसे दोनों है में गर्दन हिला कर समर्थन देती है

मंदिर से निकलने के बाद सभी सूर्य महल लौट आते रात्रि भोज में कुछ हे समय शेष था

कुछ देर बाद भोजन के पश्चात रानी पारी ने सभी को रात्रि रानी महल में रुकने का निवेदन किया जिसे सबसे पहले शालिनी जी ने स्वीकारती दी

दादी में दृस्टि से शालिनी जी को देखती है जैसे कुछ जानना चाहती हो

शालिनी जी के इस अरे के बाद दादी जी ने भी है कहा तो सभी मान गए

कोमल ....... क्या नए दुल्हन दुल्हन भी वही रहेंगे

रेखा जी ........कोमल तुम आजकल कुछ ज्यादा हे नहीं बोलने लगी हो

शालिनी जी ....... दीदी क्यों दन्त रही हो बची है पूछ लिया तो क्या हुआ

कोमल ......सॉरी माँ मैं है इस लिया है की जाने से पहले द्वार रुके की रसम जो होती उसके लिया

शालिनी जी ......देखा दीदी आप खख्वामखा बची को दन्त दिया

रेखा जी ....सॉरी बीटा

कोमल .....it's OK माँ ुम्मम्हा मुझे बुरा नहीं लगा

दादी जी ....... तुम अपना हिस्सा ले कर जल्दी हे उन्हें फ्री कर देना आवर रानी महल लौट आना सामान गई न

लड़किया ......जी माँ सा

ढेरी देहरी सभी लोग रानी महल की आवर निकल गए अब यहाँ सिर्फ सूर्य आवर बाकि लड़किया हे बची हुई थी

किरण पारिजात मानसी को ले एक कक्ष में पहुंचे जो सूर्य मानसी के प्रथम मिलान में लिया त्यार किया हुआ था

मानसी काफी शर्मा रही थी आवर काफी खुश भी थी

किरण ........क्या बात है मानसी आज पहली बार इतना सरमते हुए देख रही हूँ तुम्हे

मानसी ........वो दीदी हमें कुछ भी पता नहीं है इस बारे में

पारिजात ......किस बारे में मानसी

किरण ......मैं समाज गयी तुम क्या कहना चाहती हो रुको मैं मच करती हूँ

कुछ सोच कर किरण हस्ते हुए मानसी के मंद में फर्स्ट नाईट रिलेटेड जानकारी मानसी को देती है

किरण .......मेरी बहन इस वे ज्यादा मैं तुम्हे कुल जार समजा नहीं सकती बाकि डेरी डेरी अब तुम भी शिख जाओगी मैं चलती हूँ आवर कुंवर जी को भेजती हूँ आल थे बेस्ट मानसी

पारिजात ......कुंवर जी तो तब आएंगे न जब उन्हें यहाँ पहुंचने दिया जायेगा देखा नहीं सभी कक्ष में बहार कड़ी है

किरण ....... हे उनका हक़ है इसमें हम या आप कुछ नहीं कर सकते है वह दीद रखा है मानसी समाज गई न

मानसी ...जी दीदी

किरण मानसी को बीएड पे बैठा उसके चेहरे पे घूंघट कर पारिजात के साथ बहार निकल गई

ीदार बहार जैसे हे सूर्य पंहुचा





सभी सूर्य के सामने आ कड़ी होती है सिवाय किरण के

कोमल .......... बिना रिस्वत दिए आप भीतर नहीं जा सकते है

सूर्य ....... आपको किध हक़ से रिस्वत चाइये पहले ये बताइये

कोमल ........ वो मैं नहीं जानती चाइये मतलब चाइये

सूर्य ......... ठीक है कहो क्या चाइये

कोमल ......... एक बार आपके साथ नागलोक जाना चाहती हूँ माँ पिता जी से मिलने आवर नागलोक देखने

सूर्य किरण को देखता है

किरण .......मुझे क्या देख रहे है कुंवर जी डिमांड आपसे है तो आप हे पूरी कीजिये

सूर्य ........ठीक है जल्दी हे हम आपको नागलोक ले जायेंगे किन्तु केवल एक दुवश के लिया आप लोगो को क्या चाइये

रिद्धि .......मुझे ज्यादा कुछ नहीं आपके साथ एकांत में मच समय

पारिजात ......मुझे भी यही चाइये

जिनिशा ........ मैं क्या मांगू मुझे तो समाज नहीं आ रहा है

सूर्य ....... ठीक है तुम सब रात में सोच कर सुबह बता देना OK तुम सभी की जायज मांग मैं पूरी करूंगा अब अंदर जा सकता हूँ आपकी इजाजत हो तो

किरण. ........ इन्हे अंदर जाने दीजिये याद है न माँ ने सभी को जल्दी आने को कहा था लेट किया तो वो खुद चाक आएँगी

रिद्धि .......स्वीटी ठीक कह रही है आवर वैसे भी इन्होने कहा है न सबकी इच्छा पूरी करने के लिया

सब सूर्य से मिल कर निकलने लगी सूर्य किरण को रोक लेता है

सूर्य .......... स्वीटी तुम रात में माँ के साथ सो जाना ठीक है

किरण .......क्या हुआ कुंवर जी

सूर्य .........कुछ नहीं बस वाइज हे बोल रहा हूँ

किरण .......जी ठीक है मैं चलती हूँ

सूर्य जल्दी से किरण को अपनी बहो में भरते हुए किश करने लगता है मच 4,5 मिनट्स के बाद किसी की आने की आहात सुन दोनों अलग होते है

किरण .......मैं चलती हूँ आवर मानसी को प्यार से हेंडल करना आप उसे कुछ भी मालूम नहीं है इस रात के बारे में

शालिनी जी .......किसी क्या मालूम नहीं है बेटी

किरण .......मच नहीं माँ मैं बस आ हे रही थी

शालिनी जी ....... तुम चलो स्वीटी बीटा मैं अभी आई

किरण वह से निकल गयी शालिनी जी आवर सूर्य के अलावा यहाँ इस महल में केवल मानसी थी

शालिनी जी ........ सूर्य ध्यान रखना मानसी का आवर खुद का

सूर्य .......क्या मतलब माँ

शालिनी जी ....... सूर्य मानसी असुर अंश है मिलान के दौरान उसका सवभाग उग्र होगा तुम्हे कुढ़ की उग्रता को संत रख मानसी का ख्याल रखना होगा इस लिया हे हम सब पारी महल में गए है

सूर्य ......समाज गया माँ

शालिनी जी .......आवर एक बात मानसी आवर तुम्हे अपने अपने ड्रैगन्स को अपने भीतर समाहित रखना होगा सुबह तक

सूर्य ........ जी मैं ये जनता हूँ इस लिया पहले हे हमारे ड्रैगन ऊर्जा रूप में हम दोनों के भीतर जा चुके है

शालिनी जी आगे बढ़ हलके से सूर्य के होंठ चुम माथे पे किस कर सूर्य महल से निकल जाती है

गुरुदेव ......... पुत्री अभी आवर तो कोई नहीं है न दोनों के अलावा

शालिनी जी ......नहीं गुरुदेव कोई आवर नहीं है दोनों के अलावा

गुरुदेव पुरे महल पे कोई जादू करते है

गुरुदेव ........सूर्यौदय से पुरवा कोई भी भीतर न प्रवेश करे आवर आप पुत्री किरण के साथ हे रुकना रात्रि में सायद पुत्री मानसी अपनी उग्रता का को नियंत्रित न कर सके ऐसे में पुत्र सूर्य को न चाहते हुए भी पुत्री मानसी सरीरक हानि पंहुचा सकती जिसका असर पुत्री किरण पे आदिक होगा

शालिनी जी .......... क्या इसका कोई आवर मार्ग नहीं है गुरुदेव

गुरुदेव ....... हम पूर्व में हे पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी को पवित्र सरोवर में सनान करवा चुके है पुत्री अब सब परबु की इच्छा

गुरुदेव परबु मंदिर जा पहुंचे वही शालिनी जी अपने कक्ष की आवर निकल गई जहा किरण पहले हे कपडे बदल कर बीएड पे लेती थी

शालिनी जी .......अच्छा किया स्वीटी तुम कुढ़ हे यहाँ चलो आयी सम के लिया वार्ना मैं भी तुम्हे बुलाने वाली हे थी अपने पास सोने के लिया

किरण .......माँ कुछ बात है क्या कुंवर जी ने भी यही कहा की मैं माँ के साथ राहु आवर अब आप भी आवर आपने हम सब को यहाँ आने के लिया क्यों कहा मैं जानती हूँ ये आपने नहीं कहा किन्तु आपने हे रानी पारी को इसरा किया फिर अपनी सहमति दी उन्हें माँ

शालिनी जी .........मच जाहि स्वीटी ये तुम्हारा वहां होगा

किरण .........प्लेसेस माँ मुझसे मच मत छुपाइये

शालिनी जी ........ठीक हेयर फॉर सुनो बेटी मानसी असुर अंश है भले हे उसने कोई पाप नहीं किया है

पैर असुर अंश उसके खून में है इस लिया जब सूर्य आवर मानसी का मिलान होगा तब वो असुर अंश मानसी पे हावी होने की कोशिश करेगा उस समय मानसी खुद अपने काबू में नहीं होगी ऐसे में वो क्या करेगी कोई कुछ भी कह नहीं सकता है बेटी

किरण ....... आपने ये मुझे पहले क्यों नहीं बताया माँ

शालिनी जी .........क्युकी गुरुदेव ऐसा नहीं चाहते थे की तुम्हे कुछ भी ज्ञात हो इस बारे में

वही पारी महल के एक कक्ष में दादा जी नाना जी को पार्टी सुरु थी वही एक कक्ष में शिव महेंद्र जी जोरावर जी संजय जी वयोम सकती विजय फूफा जी इन सभी की मदिरा पार्टी सुरु हो चुकी थी

सूर्य महल सूर्य मानसी कक्ष ....

सूर्य शालिनी जी से मिलने के बाद जैसे हे कक्ष में पंहुचा उसे किसी ऊर्जा का आभाष हुआ जब पता किया तो ये ऊर्जा गुरुदेव की थी

जैसे हे सूर्य की नजर सामने बीएड पे पड़ी सब कुछ भूल सूर्य दुल्हन के जोड़े में बड़ा सा गुणगट लिया बैठी मानसी के उस पारदर्शी गुणगट से वो खूबसूरत चेहरा नुमाया ( दिखाई ) हो रहा था ुशी पे ठहर गई





सूर्य साढ़े हुए कदमो के साथ बीएड पे पास जा पहुंचा अपने गले में डाला हुआ शेरवानी का दुपटा साइड में रख वो वो धरी से मानसी की पांव की आवर बेथ गया

खूबसूरत गहरी हिना से सुसज्जित मानसी के पैरों पे जजर पड़ी तो उत्सुकता में सूर्य उनकी तरह अपना हाथ बढ़ाया तो

मानसी बड़ी तेजी से अपने पांव समेत कर लहंगे के भीतर कर लेती है

मानसी .......कुंवर जी ये आप क्या कर रहे है

सूर्य ......अपनी मनु के खूबसूरत पांव देख रहा हूँ आवर क्या

मानसी ......पैर आप उन्हें छू नहीं सकते है

सूर्य ...... आवर ये गलत शिक्षा किसने दी आपको

मानसी ....... वो आपकी नानी जी ने बताया था हमें

सूर्य ....... हम्म्म मुझे लगा हे था ऐसा हे कुछ हुआ होगा देखो उनकी बात का कभी बुरा मत मन्ना मनु वो थोड़े पुराने ख़यालात की है दिल साफ है उनका पैर जब बात किसी रीती रिवाज या मान्यताओं की आये तो खुद को बोलने से भी नहीं रोक सकती है वो उनकी वाणी थोड़ी कर्कश है बस

मानसी .......हम जानते है स्वीटी दीदी ने भी यही कहा था उस वक़्त

सूर्य .......आवर क्या कहा था तुम्हारी स्वीटी दीदी ने

सूर्य आगे खिसक कर मानसी का घूँघट उठा देता है आवर प्यार से गलो को सहला देता है

मानसी सूर्य के इस एक स्पर्श से सरमने लगती है होंटो पे मुस्कान आँखों में सरम की लाली





सूर्य ........मनु हमसे नजरे न फैरो इस खूबसूरत प्यारे चेहरे को हमारी आवर करो ताकि हम इसका जी भर के दीदार कर सके

मानसी ......हमें सरम आ रही है

सूर्य मानसी के बगल में लेट जाता है आवर प्यार से मानसी की ओढ़नी उसके बदन से अलग कर मानसी को अपने ऊपर लिटा लेता है

सूर्य .......अपनी आँखे खोलो मनु

मानसी धरी धीरे अपनी पलके उठती है तो सामने सूर्य का चेहरा था 5.6 इंच की दुरी पे मानसी की गरम संशे आउट तेज चलती दाढ़कां दोनों हे सूर्य अच्छे से महसूस कर प् रहा था





सूर्य ........ तुम खुश तो हो न मनु

मानसी सूर्य के सीने पे सर रख आँखे बंद कर लेती है

मानसी ....... आप नहीं जानते कुंवर जी हम से इस पल का उस वक़्त से बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे जब से हमने आपको देखा उस नकाब के बिना जब

हम प्रेम तो आपसे ुशी पल करने लगे थे जब आपसे प्रथम बार उस जंगल में पिता श्री के साथ आपसे भेंट हुई थी पैर उस वक़्त हम पिता श्री की वजह से अपने हृद्या की बात जुबा पे नहीं ला पात्र फिर हमने बहरी दुनिया में पहली बार कदम रखा था उस से पूर्व तो हम न जाने कितने वर्षों से ुशी गुफा में जीवन बिताया था

सूर्य ......... जो बुरा वक़्त था या कठिन समय था वो बिट गया मनु अब उसे याद कर स्वयं को कास्ट देना उचित नहीं आवर वो भी इस समय जब हमारे लिया सबसे बड़ा ख़ुशी का अवसर है

सूर्य मानसी की पीठ को सह लेट हुए उन भरे हुए मुलायम नितम्बों पे अपने हाथ का पंजा काश लेता है

मानसी ......उम्म्म अह्हह्ह्ह्ह

सूर्य ......हमारी आवर देखो मनु

मानसी डेरी से अपनी आँखे खोल सर उठा कर सूर्य को देखती है सूर्य के चेहरे को अपने हाथो में थम पहले हलके से होंटो को चूमने के बाद दोनों आँखों पे चुम्बन करती है





सूर्य ......उम्म्म बहुत कुछ शिखा पड़ेगा तुम्हे इस मिलान के विषय में

जाओ आवर जा कर मेज पे रखा ढूढ ले कर आओ

मानसी को अभी याद आता है की किरण ने कुछ संजय था

मानसी फ़ौरन सूर्य से अलग हो ढूढ का गिलाश ले कर सूर्य के सामने आती है

सूर्य बीएड पे बे थे हुए हे ढूढ का गिलाश थम एक गुनत भरने के बाद मानसी की आवर कर देता है

ऐसे हे एक एक हंट कर दोनों ढूढ ख़तम कर देते है

सूर्य मानसी को बीएड पे लिटा उसके सरीर से सभी आभूषण उतर कर साइड में रख देता है सिवाय मंगलसूत्र के अंत में नक् में पहनी बड़ी नाथ उतर सूर्य लहंगे की दूर खींच देता है

मानसी की आँखे बंद किये हुए लेती थी रही

सूर्य अपना हाथ पीछे कर मानसी की ब्लाउज की दूर खो उन खूबसूरती भरपूर दुग्ध स्थल ( चुचायो ) को ऊपर से निर्वस्त्र कर देता है वह अब एक लाल रंग की ब्रा थी जिस में से मानसी की उभर चचाज तक हे उन्हें चुपके में सक्षम थे

जैसे हे सूर्य ने उस लाल अंग वस्त्र के ऊपर से उन माध्यम आकर से कुछ बड़े गोलों को अपने सकत हाथ में पकड़ा

मानसी ने एक गहरी साँस छोड़ hi जैसे काफी समय से उसने अपनी सांसे हे रोके राखी थी

सूर्य .......मैं जनता हूँ मनु तुम्हे इन सब का कोई ज्ञान नहीं बस मेरा साथ देना तुम

मानसी .....जी

सूर्य मानसी के ऊपर से हैट अपने वस्त्र उतर देता है अब सूर्य पूर्ण रूप से उस स्वस्थ में था जिस में बचा पहली बार दुनिया में आता है अथार्त पूरी तरह निर्वस्त्र

जैसे हे सूर्य मानसी के लहंगे को उसके पैरो के पास से पकड़ा मानसी एक बार आँखे खोल सूर्य को देखती है

इस दौरान सूर्य का ध्यान सायद मानसी पे नहीं गया वर्ण एक पल के लिया सूर्य अवश्य छिनक जाता मानसी की लाल ानगर आँखे देख

सूर्य द्वारा कहना खींचने पे मानसी अपनी कमर उठा सूर्य को समर्थन देती है

अब मानसी केवल दो वस्त्रो में उस be-misal खूबसूरत जिसम को चुपके में समर्थ थी

सूर्य मानसी पे लेट उसे किश करने लगता है

जैसे जैसे सूर्य मानसी के भरपूर कामुक उत्तेजित यौवन को सहला रहा था वैसे वैसे मानसी का असुर अंश जागृत हो रहा था

सूर्य मानसी की सुराहीदार गर्दन को चूमते हुए मानसी के वक्ष निर्वस्त्र कर देता है

मानसी की जंगली बिली के जैसे सूर्य को अपने आग़ोश में काश लेती है





मानसी के सख्त चूचक सूर्य के निर्वस्त्र छोड़े सीने में किसी तीर क्र भाटी चूब रहे थे साथ हे वो कोमल मांस के गोले सूर्य आवर मानसी के आग़ोश में दोनों गरम जिस्मो के बिच पइसस रहे थे





मानसी सूर्य के हर चुम्बन को अपने गरम जिसम पे मह्सुश कर उत्तेजित हो आहे भर रही थी

सूरा ने मानसी के बदन से वो आखरी वस्त्र भी फाड् उस अनमोल खजाने को अनावृत कर देता है जहा केवल मानसी के अलावा किसी आवर ने उसके इस अनमोल खजाने के दर्शन तक न किये थे आवर न ज्यादा देर सूर्य को करने दिया

मानसी कड़ी हो खुद हे सूर्य की गौड़ में आ बैठी आवर सूर्य के मजबूत पंजे में अपने उन सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्स को भर दिया





सूर्य ने जब मानसी की आँखों में देखा तो वो पूरी तरह लाल हो चुकी सेण्टर में पूरी तरह ब्लैक

(सूर्य ......... वक़्त आ गया है असुर अंश को संत कर उसपे नियंत्रण प्राप्त करने का)

सूर्य बड़ी निर्ममता से मानसी की दोनी चुचायो को मसलने लगता है

जहा दर्द भरी सिसकारियां निकम्मी चाइये थे वही मानसी की मां से आनंद वह उत्तेजित कामुक स्वर गूंजने लगा पुरे कक्ष में





सूर्य मानसी के एक चूचक को मुँह में भर चूसने लगता है

वही मानसी किसी घायल शेरनी के जैसे गिराने लगती है

साथ हे सूर्य के पीठ में तेजी से मानसी के अप्रतिम रूप से बढे नाखून सूर्य की पीठ के सख्त मांस को भेदते हुए पिट में जा गुस्से

जैसे जैसे सूर्य मानसी को उतेजी करता वैसे वैसे मानसी के नाख़ून सूर्य की पीठ को लहूलुहान करते

सूर्य मानसी को बीएड पे लिटाये अभी भी बूब्स चूसने में लगा हुआ था





मानसी ......ahhhhhhhhhh खा जाओ इन्हे उम्म्म्म काटो इन्हे रकत निकालो इनसे

सूर्य मानसी की मनो स्थिति समाज धीर डेरी बूब्स आवर सीने के बाकि हिशे पे अपने दांतो से लव बाईट बनते हुए निचे भढने लगा

सूर्य के ऐसा करने से मानसी सूर्य के पीठ आवर सीने को अपने नाखुनो से जोरो से कुरेधने लगी

ऐसा नहीं था की सूर्य को पीड़ा नहीं हो रही थी पैर इस वक़्त सूर्य कुढ़ को संत रखे हुए मानसी द्वारा मिल रही पीड़ा को सहन करते हुए

मानसी की लाल हो चुकी योनि पे जा पंहुचा जिसे मानसी ने हे उत्तेजना में रगड़ रगड़ कर लाल कर दिया था





सूर्यव मानसी का हाथ हटा वह अपना मुँह लगा कर योनि को चाटने लगता है

योनि से आ रही गांड सूर्य को उत्तेजित करने के साथ साथ उसकी उग्र ऊर्जा को भी जागृत कर रही थी

डेरी डेरे खुद से हे सूर्य मानसी की योनि को जगह जगह पे काटने लगता है जिस से सूर्य के मुँह में योनि राश के साथ साथ मानसी का रकत का टेस्ट भी मिल रहा था





सूर्य के ऐसा करने से मानसी बदहवाशी में सूर्य के साथ साथ खुद के बालो को भी नोचे लगती है साथ हे अपने बूब्स को दबाने लगती है जिनपे नाख़ून लगने से जगह जगह रकत बहते हुए बिस्तर पे गिरने लगता है

जैसे हे मानसी उत्तेजना की शिखर पे पहुंचने प्रथम चरम सुख प्राप्त करती है

मानसी सूर्य के बालो को इतनी जोर से पकड़ कर दबती सूर्य के चेहरे को की सूर्य के सर के वो बाल मानसी के हाथो में आ जाते है

इस घटना से सूर्य के न चाहते हुए भी उसका क्रोध जागृत हो उठा

कुछ पल बाद जब मानसी का सरीर ढीला पड़ा तो सूर्य गुस्से में मानसी को देखता है पैर जब उसकी नजर मानसी के घायल सीने पे पड़ी तो एक हे पल में पूरा गुस्सा हवा हो गया मानसी की दोनों चूचिया रकत रंजीत थी

सूर्य मानसी की रकत की खुशबु से खींचा मानसी के रकत लगे बूब्स को फिर से चाटने लगता है

कुछ देर बाद मानसी सूर्य को अपने ऊपर से हटा कर लिटा देती है आवर सूर्य के अंग को थम बिना किसी सरम संकोच के मुँह में भर चूसने लगती है





मानसी के नुकीले दांतो की चुम्बन सूर्य के लिंग मुंड पे होती तो सवथा हे सूर्य का हाथ मानसी के सर को अपने लिंग पे दबाने लगता

मानसी के अनाड़ीपन आवर दांतो की वजह से सूर्य के लिंग का आगरा भाग बड़ी तेजी से फूलने लगता है

सूर्य मानसी के मुँह से अपना लिंग निकल मानसी को बीएड पे गिरा उसकी योनि पे अपना काम दंड रखा सँभालने से पहले हे वो मोटा सूपड़ा मानसी की योनि को खोलते हुए अंदर जा गुस्सा

मानसी का बदन एक पल कंपा पैर कोई चीख नहीं निकली





जैसे हे मानसी की योनि पे सूर्य ने अपने लिंग से दूसरा प्रहार किया

मंसू की योनि से गरम रकत की धार सूर्य के लिंग को भिगोते हुए बिस्तर को लाल करने लगती

वही मानसी का वास्तविक रुक बहार आने लगता है

आँखों के पास गहरा कालापन होने लगता है साथ हे मानसी के पिशाच जैसे ठीक हे दन्त बहार निकल आते है

ऐसा हे कुछ सूर्य के साथ हो रहा था सूर्य के सरीर में कोई परिवर्तन तो नहीं हुआ किन्तु उसकी आँखे पूरी तरह लाल हो चुकी थी आवर सूर्य के ऊपरी दन्त बहार निकल आये थे

जैसे हे सूर्य ने मानसी की गर्दन पे अपने दन्त छूबए

मैंसी .......उम्मम्मम्म अह्ह्ह्हह्हह

आवर इसी के साथ सूर्य के गर्दन में मानसी के तीखे दन्त जा गोशे आवर पीठ में दोनों हठी के नाख़ून जो सूर्य के सरीर के बहरी हिस्शे को चीरते हुए अंदुरुनी कोमल मांस को चिर कर पीठ के हडियो तक जा पहुंचे

ठीक इशू वक़्त सूर्य का लिंग मानसी के कौमार्य को पूरी तरह भेदता हुआ अंतिम चोर तक जा पंहुचा

दोनों के सरीर से निकली ऊर्जा आपस में टकरा उठी कक्ष में जैसे कोई तूफान आ चूका हो

सूर्य महल के ऊपर मौसम बदल रहा था जैसे कक्ष में एक तूफान उठा था ठीक वैसे हे सूर्य महल के बहत ऊपर एक तूफान उठ रहा था जोरो से बिजलिया कड़क रही थी

अंदर तो जैसे कुछ दिखाई हे नहीं दे रहा था

कक्ष के भीतर केवल ब्लैक आवर रेड ऊर्जा के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था

जैसे जैसे सूर्य आवर मानसी का मिलान आगे भाड़ रहा था वैसे इसका असर अभ कक्ष से बहार सूर्य महल में भी हो रहा था

ऐसा करीब रात के 2 बजे तक चला जब सूर्य आवर मानसी का मिलान पूर्ण हुआ तब जा कर माहौल संत होने लगा

सूर्य की पीठ आवर सीना पूरी तरह लहूलुहान था ऐसा हे कुछ मानसी के साथ हुवा था मानसी की चूचिया पीठ गर्दन होंठ से रकत बाह रहा था दोनों के सरीर भले हे जख्मी थे किन्तु दोनों के चेहरे पे सुकून था

डेरी डेरी इनके सरीर से बहा रकत पुनः इनके सरीर में समाहित हो गया साथ हे दोनों के झखम भी भर चुके थे मानसी अपनी असुर रूप का त्याग कर सामान्य रूप में आ चुकी थी वही सूर्य का सरीर आवर भी बलिष्ठ हो चूका था

दोनों कब एक दूसरे में खोये गहरी नींद में चले गए

कुछ देर बाद सूर्य के जिसम से वो लाल कपडे में बाँदा जैसा जो असुर गुरु ने सूर्य को विदा होते समय दिया था

वो सूर्य के सरीर से बहार निकला आवर अपने आप उस पे से वो लाल कपडा हैट गया

कपडे के हटने के बाद जो सामने आया वो कोई पुस्तक थी

जिसपे असुर लिपि में कुछ लिखा हुआ था

कुछ पल बाद हवा में घूमते हुए पुस्तक अपने आप खुल जाती है कुछ पाने अपने आप पलट कर एक पे रुकते है जहा किसी पुराने योद्धा के आरमोर जैसे तस्वीर बानी हुई थी कुछ पल बाद वो आर्मर एक लाल ऊर्जा में बदल मानसी में समाहित हो गया

कुछ पल मानसी को जटके लगे फिर मानसी के सरीर से निकल वो ऊर्जा सूर्य में समाहित हो गई यहाँ तो ये दोनों चैन से सो गए पैर बहार तीन लोगो की नींद ुधि हुई थी

गुरुदेव शालिनी जी किरण

गुरुदेव जहा मंदिर में ध्यान लगाए बे थे थे

वही शालिनी जी अपने कक्ष में ीदार से उदार टहल रही थी बार बार उनकी नजर खुली खिड़की से बहार जनक रही थी

कक्ष में हे मानसी ध्यान में बैठी हुई थी कभी उसकी आँखों में आंसू होते तो कभी माथे पे चिंता की लकीर

जैसे किसी अपने दर्द दुःख से खुद को जोड़ किरण उस दर्द को उस दुःख तकलीफ को खुद महसूस कर रही थी

करीब 4घंटे बाद किरण की आँखे खुली जिसमे दर्द तो था पैर होंटो पे कुछ सुकून भी

शालिनी जी .......स्वीटी बेटी तुम ठीक तो हो न

किरण ......जी माँ मैं ठीक हूँ आप सोई नहीं अभी तक

शालिनी जी ...... कैसे सो सकती हूँ बेटी मेरी भी वही चिंता है जो तुम्हारी है

ककीरण ......अब आप सो जाइये माँ सब ठीक है वो भी सायद सो गए है

शालिनी जी किरण को अपने साथ ले बीएड से तक लगा किरण को अपने गौड़ में लिटा प्यार से उसका सर सहलाने लगती है किरण थकन की वजह से जल्दी हे सो गई शालिनी जी भी कब किरण पे ममतामयी प्यार लुटाते हुए ुशी तरह सो गई उन्हें भी पता नहीं

सुबह सबसे पहले गुरुदेव सूर्य महल पहुंच अपनी ऊर्जा से सुरक्षित सुरक्षा घेरे को हटा फिर से मंदिर लौट अपनी पूजा पथ में लग गए

डेरी डेरी पारी महल में सभी लोग उठ गए सिवाय किरण आवर शालिनी जी के रात भर दोनों जगती जो रही थी सूर्य आवर मानसी की चिंता में ...................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................
 
अपडेट. 227

शालिनी जी ...... कैसे सो सकती हूँ बेटी मेरी भी वही चिंता है जो तुम्हारी है

ककीरण ......अब आप सो जाइये माँ सब ठीक है वो भी सायद सो गए है

शालिनी जी किरण को अपने साथ ले बीएड से तक लगा किरण को अपने गौड़ में लिटा प्यार से उसका सर सहलाने लगती है किरण थकन की वजह से जल्दी हे सो गई शालिनी जी भी कब किरण पे ममतामयी प्यार लुटाते हुए ुशी तरह सो गई उन्हें भी पता नहीं

सुबह सबसे पहले गुरुदेव सूर्य महल पहुंच अपनी ऊर्जा से सुरक्षित सुरक्षा घेरे को हटा फिर से मंदिर लौट अपनी पूजा पथ में लग गए

डेरी डेरी पारी महल में सभी लोग उठ गए सिवाय किरण आवर शालिनी जी के रात भर दोनों जगती जो रही थी सूर्य आवर मानसी की चिंता में ...................

अब आगे .............

दिल्ली ...... दिल्ली के एक बहुत हे खूबसूरत महंगे इलाके में स्थिति एक बड़ा सा विला जिसकी सुरक्षा में बहुत से हथियारबंद लोग लगे हुए थे

देखने से हे लग रहा था की ये विला किसी बुसिनेस्स्में कारोबारी या फिर किसी बड़े 2 no. धंधे वाले इंसान का है

आवर सही भी था विला के बहार ब्लैक मार्वल पे बड़े बड़े सुनहरे सब्दो में लिखा था D.D.D.mansion

मर .दीनद्याल दुबे इंडिया के विकाश मंत्री इंडिया भले विकाश करे या न करे इन मंत्री महोद्य जी के ठाट बात देख कर लगता मंत्री पढ़ प्राप्त करने के बाद इन्होने बहुत विकाश किया पिछले 10 साल से इन्होने इस पढ़ पर रहते हुए बहुत विकाश किया है पैर इंडिया का नहीं खुद का आवर अपने रिस्तेदारो का

इसी विला के एक भव्य कक्ष में दुबे जी कुछ 4 गणमान्य लोगो के साथ मीटिंग में वयस्थ थे जिनमे एक इनका खाश बाँदा था चन्दन उर्फ़ चंद्रु दीनदयाल के हर 2 no. काम यही देखता था फिर चाहे वो किसी भी तरह के क्यों न हो

दूसरा बाँदा जो देखने से हे 2 no.ka लग रहा था ये महोद्य है गजेंद्र सिंह जिसने भी इसका नाम रखा बहुत सही रखा दिखने में भी ये किसी हाथी के जैसे हे लगता है भरी भरकर सरीर पैर कही से भी बेडोल नहीं था

6 फिट 3 इंच की हिघ्त चेहरे पे कट के कुछ घरे नीसाण बड़ी मुचे जो इस हे आवर भी डरावना बना रही थी

तीसरे साक्ष मर. राजीव जो दिल्ही के गिने चुने बुसिनेस्स्में में गिने जाता है

कुल मिला कर ये चार लोग इस बंद कमरे में किसी बात पे चर्चा कर रहे थे

दीनदयाल ........ देखो राजीव तुम दोनों को इस मामले को निपटना होगा

राजीव ....... इसी उम्मीद के साथ तो आपके पास आया हूँ पहली बात तो मैं वो प्रॉपर्टी बेचना हे नहीं चाहता है ऊपर से गजेंद्र भाई बहुत काम कीमत लगा रहे थे

दीनदयाल .......... गजेंद्र क्या कीमत लगाई है तुमने इनकी प्रॉपर्टी की आवर मार्किट कीमत क्या है उसकी

गजेंद्र ......मंत्री जी आपसे कुछ नहीं छुपा है इस लिया सच बोलता हूँ मार्किट वेलु 100 क्रूर है मैं इस हे 80 क्रूर दे रहा हूँ

दीनदयाल ......ये तो गलत है न गजेंद्र मार्किट वेलु 100 क्रूर है पैर बाकियो के लिया तुम्हारे लिया कुछ आवर राजीव तुम्हे कितना चाइये

राजीव ....... मंत्री जी मुझे कुछ नहीं चाइये मैं वो प्रॉपर्टी किसी आवर को दे चूका हूँ

दीनदयाल ......अभी तो तुम बोल रहे थे की प्रॉपर्टी बेचना नहीं चाहते अभी बोल रहे हो की बेच दी है

राजीव ...... जी मंत्री जी कुछ दिन पहले तक बेचना नहीं छठा था पैर कल मैंने वो प्रॉपर्टी mr.shiv ठाकुर को बेच दी उन्होंने मार्किट वेलु से 10 क्रूर ज्यादा दिए तो मैंने भी इंकार नहीं किया

गजेंद्र राजीव की गर्दन पकड़ लेता है गुस्से में

गजेंद्र .......तुम्हारी निकट कैसे हुई जिस जग्गा गजेंद्र की नजर हो वह कोई आवर अपना कदम भी नहीं रख सकता

दीनदयाल ......गजेंद्र छोड़ो उसे हम बात कर रहे है न

गजेंद्र गुस्से में बुंबुनाता हुआ राजीव की गर्दन चढ़ देता है

सामने राखी मेज पे से महंगी सरब की बोतल उठा गता गाठ उस हे आदि कर देता है एक हे साँस में

दीनदयाल ........... ये शिव ठाकुर कोण है आवर तुम कैसे जानते हो उसे जबकि हमने तो दिल्ली में ऐसा कोई नाम सुना हे नहीं

राजीव ......जी मंत्री जी वो हमारी मुलाखत u.s.a में एक मेटिंग के दौरान हुई थी पहले वो वही रहते थे पैर अब पिछले दो साल से अपना पूरा बिज़नेस यहाँ इंडिया सिफत कर लिया

अब वो दिल्ली से अपना बिज़नेस स्टार्ट करने वाले है

गजेंद्र ....... तुम्हारा ये शिव ठाकुर कहा से है बताओ मुझे अब वही मुझे ये प्रॉपर्टी देगा कोण कोण है उसकी फॅमिली में

दीनदयाल ......... गजेंद्र तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे जब तक हम पूरी जानकारी नहीं ले लेते समाज गए तुम

राजीव ....... ज्यादा कुछ तो पता नहीं पैर वो सूरतगढ़ के ठाकुर परिवार से है बस इतना पता है मैं चलता हूँ मंत्री जी

दीनदयाल ....... ठीक है राजीव जाओ हम तुमसे बाद में बात करते है

राजीव वह से निकल जाता है

अब ये तीन लोग बचे चंद्रु गजेंद्र दीनदयाल

गजेंद्र .......मंत्री जी आप जानते है न वो जग्गा मेरे लिया क्यों जरुरी है

दीनदयाल .......... गजेंद्र संत रहो इस तरह गुस्सा करने से गई हुई प्रॉपर्टी वापिस नहीं आएगी

हम जानते है हमारे धंधे के लिया वो बाघा कितनी जरुरी है

चंद्रु ....... है मंत्री जी वो जग्गा मैंने भी देखि है हमारे ड्रग्स के धंधे के लिया सबसे अछि मघा है तीन तरफ से कॉलेज लगती है जगा सभी बड़ी बड़ी हस्तियों के बिगड़ैल बचे आते है अपने माँ बाप के पैसे उड़ने

गजेंद्र ....... यही तो मैं कह रहा हूँ चंद्रु भाई एक अच्छी खशी प्रॉपर्टी हाथ से निकल गई

दीनदयाल ........ चंद्रु पता करो कोण है ये शिव ठाकुर आवर कोण इसके आगे पीछे है क्या इसकी ताकत है आवर क्या इसकी कमजोरी है

हाथ डालने से पहले सब जानकारी जरुरी है

चंद्रु ......जी मंत्री जी मैं आज हे किसी को काम पे लगता हूँ कल तक साडी जनम कुंडली आपके पास होगी

दीनदयाल ......... हमारा कारोबार कैसा चल रहा है

गजेंद्र ......बाकि सब तो ठीक है मंत्री जी पैर इस बार लड़कियों की डिमांड ज्यादा है की एडवांस भी मिल चूका है

दीनदयाल ........ ठीक है संभल कर पुलिस डिपार्टमेंट कुछ टाइम से बहुत मुस्तैद है इस मामले को ले कर

चंद्रु ....... मंत्री जी मुझे खबर मिली है की लड़कियों के गायब होने के मामले पे पुलिस डिपार्टमेंट एक स्पेशल टीम बना रहा है

दीनदयाल ........... उन्हें उनका काम करने दो हमें हमारा काम करना है बस सावधान रहना अब हमें भी निकलना है

मंत्री जी के निकलते हे चंद्रु आवर गजेंद्र भी वह से निकल गए

परीलोक ..........

सूर्य ........ माँ स्वीटी उठो कब तक सोते रहोगे

सूर्य की आवाज सुन शालिनी जी की आँखे खुली तो सामने सूर्य का मुस्कुराता चेहरा था

जिस तरह किरण ने शालिनी जी की कमर को पकडे सो रही थी उसे देख सूर्य हंस रहा था

शालिनी जी ......क्या हुआ तुम्हे सूर्य इस तरह हंस क्यों रहे हो

सूर्य ......जरा निचे देखिये आप .आपकी भी हंसी चुत जाएगी

शालिनी जी का ध्यान किरण पे गया तो उन्हें भी होंठो पे पहाड़ी से मुस्कान फ़ैल गई

शालिनी जी .......बिलकुल छोटी सी गुड़िया लग रही है सत्य हुए

सूर्य .......आप लोग इस्त्रा क्यों सोये है आवर आज इतने लेट तक आपकी आँखे भी नहीं खुली

सूर्य किरण को उठाने के लिया आगे बढ़ा तो शालिनी जी ने सूर्य को रोक लिया

शालिनी जी ........... सोने दो उसे रात को लेट तक जग्गी हुई थी

सूर्य .......आवर आप भी सायद क्यों सही कहा न माँ मेरी इतनी चिंता न किया करो आप लोग

शालिनी जी आहिस्ता से किरण की गिरप्त से निकल उसे ठीक से बीएड पे सुलाती है

शालिनी जी .......माँ हूँ तुम्हारी आवर ..आवर मुझे तो चिंता रहेगी हे तुम्हारी

सूर्य ....... ठीक है माँ पैर ज्यादा चिंता न किया करो

शालिनी जी सूर्य के चेहरे को थम सूर्य को छोटा सा किश कर बाथरूम निकल गई

जैसे दूर बंद हुआ किरण ने अपनी आँखे खोल देखती है आवर सूर्य को अपने बीएड पे खींच कर उसके सीने पे लेट जाती है

सूर्य ........क्या जरुरत थी स्वीटी इतनी रात तक जागने की

किरण .......आप ठीक है न कुंवर जी ुम्मम्हा

सूर्य ...... जिसकी तुम्हारे जैसे बीबी हो उसे कुछ हो सकता है क्या पैर इस तरह कुढ़ को परेशान करना अच्छी बात नहीं है स्वीटी

किरण ....... मैंने देखा आपकी पीठ पे वो मानसी की रकत रंजीत उँगलियाँ

सूर्य ......जनता हूँ मैंने तुम्हे मह्सुश किया था वह पैर उस वक़्त मानसी को मेरी जरुरत थी वो खुद नहीं जानती की उसने क्या किया था उस वक़्त आवर क्यों

किरण. ...... इस लिया तो हम उस से नाराज नहीं है पैर क्या ये हर बार ऐसा होगा

सूर्य .......नहीं ये पहली आवर आखरी बार था स्वीटी है वो इस पल में थोड़ा अग्ग्रेसिवे रहेगी आगे भी पैर इस हद तक नहीं ये उसके मूल अंश के कारन था जो उसके विधमान था उसका असुर अंश अब उसकी ऊर्जा मेरी ऊर्जा से जुड़ चुकी है इस लिया आगे ऐसा नहीं होगा

किरण ........ वैसे माँ के साथ ये तीस्ता कब सुरु हुआ आवर मुझे इस बारे में मालूम क्यों नहीं हुआ

सूर्य ......... मतलब तुम पहले से जग्गी हुई थी

किरण. .....नहीं वो आपकी आवाज से नींद खुल गई थी हमारी पैर हम सोने का अभिनय करते रहे आवर आप हम पे हंस रहे थे भू लिए नहीं वो हमारी भी माँ है उनके प्यार पे हमारा भी हक़ है

सूर्य ....... जब मैं हे आपका हूँ तो मेरा सब तुम्हारा फिर भला मैं माँ बेटी के इस प्यार के बिच कैसे आ सकता हूँ

आवर आप ये बात अपने तक हे रखे आवर भूल से भी माँ के सामने इस बात का जीकर न हो

किरण .......... इसका ख्याल आप रखो मेरी तरफ से बे फ़िक्र रहिये कुंवर जी अब जाइये हम त्यार हो कर आते है

सूर्य .......बिना मुँह मीठा किये हे चले जाये

किरण ........... अभी अभी माँ ने कराया न ज्यादा मीठा सेहत के लिया अच्छा नहीं कुंवर जी

किरण खिलखिलाती वह से गायब हो गई

सूर्य .......कोई बात नहीं रात को पेनल्टी के साथ वसूल करूँगा

शालिनी जी ........उठा दिया न तुमने उसे वो ठीक से सोई भी नहीं

सूर्य ........घर नहीं चलना है क्या माँ

शालिनी जी ...... चलना है न तुम सभी से मिल को दोपहर को चलते है

सूर्य ....... माँ आपसे एक बात करनी थी

शालिनी जी अपने सरीर पे कोई लोशन लगा रही थी नहाने के बाद ये इनकी आदत थी तभी तो सबसे मुलायम आवर कमल त्वचा है इनकी

शालिनी जी ........ बोलो क्या बात है सूर्य

सूर्य .......माँ वो मैंने सोचा है की विधि आवर गायत्री को कुछ दिन यही रहने दिया जाये

शालिनी जी .......पैर उन्हें यहाँ छोड़ने की वजह क्या है बिना वजह तो तुम उन्हें यहाँ छोड़ने वाले हो नहीं

सूर्य ....... है माँ वजह है मैं चाहता हूँ की गुरुदेव उन्हें शिक्षा दे ताकि वो कुछ हद तक बाकियो के सामान बन पाए कही इन सब के रहते हुए भी खुद को अकेला या इन से अलग न समजे मैं उन्हें कोई भी सकती नहीं दे सकता न किरण केवल रानी पारी या गुरुदेव हे है जिन्हे मैं कह नहीं सकता

शालिनी जी ......बात तो तुम्हारी बिलकुल ठीक है उनका गुरुदेव के सानिध्य में रहना हे उचित है क्युकी अयोग्य के हाथो में बरमास्त्र सपना मतलब सृस्टि का विनाश करने सामान

विधि गायत्री इस योग्य है या नहीं की उन्हें सकतिया प्राप्त हो या नहीं इसका निर्णय गुरुदेव को हे करने दो वो उनकी योग्यता देख उसके अनुसार उन्हें शिक्षा देंगे तो अच्छा रहेगा

सूर्य .......थैंक यू माँ मैं भी यही चाहता हूँ की उन्हें शिक्षा मिले ताकि वो भी खुद की योग्यता पहचाने खुद को हम सभी के बिच हमसे अलग न समजे .

शालिनी जी अपने कमर तक आते रेशमी केशो को खूबसूरत से बंद सूर्य की आवर पलटी एक नजर गेट पे डाला जो बंद था आवर सीधा सूर्य की गौड़ में आ जेठू इस वक़्त वो पारी के रूप में थी

सूर्य तो उनके बदन की खुशबु से हे मदहोश हो उठा

सूर्य कुछ बोलता उस से पहले हे वो पतले पतले नाजुक माखन जैसे मुलायम होंठ सूर्य के होंठ बंद कर चुके थे

सूर्य उनकी चिकनी कमर को थामे बड़े हे प्यार से उनके होंठो से अमृत पिने लगा

उस रेशमी पतले से परिधान जिसमे शालिनी के विलक्षण नितम्बों को छुपाये हुए था बार बार सूर्य का हाथ फिसल कर वही जा पहुँचता 5,6 मिनट्स चले इस चुम्बन ने सूर्य की सुबह सुबह हालत ख़राब कर के रख दी

शालिनी जी गहरी सांसे चिश्ती हुई मुस्कुरा रही थी

जिनसे उनके पालते कपडे में चले वो कठोर पहाड़ सीने से जुड़े ऊपर निचे हो रहे थे

सूर्य ......माँ ये सब क्या था

शालिनी जी ....... इस रूप में अस्तित्व भले शालिनी का है पैर ये रूप तुम्हारी माँ का नहीं है सूर्य इस रूप में केवल शालू है

सूर्य ........ मतलब मैं कुछ सामना नहीं

शालिनी जी ...... हमें माँ कहने का हक़ के ुशी रूप में है आपको

सूर्य ...... आवर इस रूप में

शालिनी जी ...... इस रूप में केवल शालू

शालिनी जी मुस्कुराते हुए अपना रूप बदल लेती है

शालिनी जी के आँखों में बड़ी हे कशिश थी जो सूर्य को अपनी आवर आकर्षित कर रही थी

शालिनी जी .....चलो सूर्य सब इन्तजार कर रहे होंगे

सूर्य .......माँ पिछले 2 दिन से देख राग हूँ आप मुझे नाम से बुलाती है पैर बीटा नहीं कहती

शालिनी जी .......... ह्म्म्मम्म

शालिनी जी ने जबाब भी ऐसा दिया जो सूर्य के ऊपर से बाउंस गया

लगभग सभी लोग सूर्य महल जा चुके थे

सूर्य मानसी सभी बड़े बुजुर्गो जोड़े से आशीर्वाद लेते है अंत में मानसी किरण के पेअर चूक कर उसके पद का मन रखती है बड़ी बहन का जो मान सम्मान होता है मानसी ने स्वीटी को वही दिया सब के सामने

मानसी के इस कदम ने सूर्य आवर स्वीटी के साथ साथ बाकियो के दिल में भी अपने लिया प्रेम आवर सम्मान बढ़ा लिया था

शालिनी जी ....... जीती रह मेरी बची वंश से भले हे असुरकन्या हो तुम बेटी किन्तु तुम्हारे विचार जिनमे बड़ो के लिया सम्मान है छोटो के लिया प्रेम ऐसे गन तो आज के वक़्त इंसानो में भी कही भी देखने को नहीं मिलते

मानसी ...... मम्मी जी जो भी शिका है आप सभी के प्यार ने शिखाया है मुझे तो माँ की ममता क्या होती है वो भी यहाँ आने पे पता चला जहा एक पहले एक माँ का प्यार भी न नसीब हुआ वह आज इतनी माओ का प्यार मिल रहा है जहा कोई किसी में भेद नहीं करता

किरण ....... आवर न कभी किसी में भेद भाव होगा मनु जैसे कुंवर जी सभी के बेटे है फिर चाहे जनम उन्हें शालिनी माँ ने दिया हो पैर वो सभी के बेटे है आवर सभी का उनपे ेल सामान हक़ है ुशी तरह तुमपे भी हर उस माँ का हक़ है जो तुम्हारे सामने कड़ी है आवर तुम्हारा उनके इस लिया फिर कभी मात सोचना की तुम्हारी माँ नहीं देखो सामने एक नहीं अनेक माये तुम्हारे सामने कड़ी अपने प्यार भरे ाचल में चाव में महफूज रखने को अपना प्यार देने को

रेखा जी आगे भाड़ किरण आवर मानसी दोनों को गले से लगा लेती है उनकी आँखे नाम थे

नाम तो बाकियो की भी थी पैर सन्ति जी आवर प्रिय जी के चेहरे पे जो गर्ग था अपने बेटी के लिया उसको सब्द या किसी भावना की जरुरत नहीं थी बया करने के लिया

सन्ति जी ....... दीदी क्या यही हमारी स्वीटी है जो दिन भर हवेली में उदम मचती फिरती रहती थी मुझे हमेशा दर था की इसकी सदी होगी तो ये अपने परिवार में कैसे टिक पायेगी

प्रिय जी ........... ये चिंता तो हर माँ बाप की होती है मेरी बहन पैर आज मैं निश्चिंत हूँ अपनी इस बेटी की आवर से

किरण ......मम्मी इतना सेंटी न हो आपकी नयी बहु की पहली राशि है आज खाने में कही नमक ज्यादा न हो जाये

रेखा जी .......चुप कर बदमाश अभी तो कितनी समझदार थी अभी से शेरनी फिर से सुरु

जोरावर जी ...... बहन जी इस हे आज तक हम समाज नहीं पाए तो आप इतनी जल्दी कैसे समाज पाएंगी

किरण ....... बड़े पापा आपको मिठाई नहीं मिलेगी

जोरावर जी ........ अरे भाई हमने क्या किया है जो हमारी मिठाई बंद करने का आर्डर पास कर दिया

किरण ...... अभी अभी आप हे हमारी बुराई कर रहे थे न

जोरावर जी ..... वो तो मैं अपनी स्वीटी गुड़िया की तारीफ कर रहा था बुराई कहा की

मानसी ......मम्मी हम जाये

रेखा जी .....जाओ बेटी आवर अपनी बाँहों को भी ले जाओ तुमसे अकेले न हो पायेगा इतना सब

सूर्य .......माँ मैं जरा बहार हो कर आता हूँ

शालिनी जी ......ठीक है पैर जल्दी आना

सूर्य जाते जाते जीनत को बहार आने का इशारा कर जाता है

कुछ देर बाद जीनत भी बहार आ जाती है

सूर्य अपने भीतर से अपने ड्रैगन को बहार आने का आदेश देता है

वाइट ड्रैगन ऊर्जा में बदल आकाश में निकल जाता है आवर आकाश में हे ऊर्जा से ड्रैगन में बदल सूर्य आवर जीनत के सामने आ खड़ा होता है

सूर्य .......चले जीनत बेगम

जीनत ........जी हुजूर पर चलना कहा है

सूर्य .......जहा आपके आग़ोश में कुछ पल चैन आवर सुकून से बिता सके

सूर्य जीनत को ले ड्रैगन पे सवार हो निकल गया महल से

जहा तक ड्रैगन की तेज नजरे जा रही थी वह तक सूर्य बहुत हे साफ साफ देख प् रहा था

जीनत ....... हम भी आपके साथ कुछ वक़्त एकांत में चाहते थे पैर जुबा से बोल नहीं पाए

सूर्य .......माफी चाहता हूँ जीनत ये मेरी जिम्मेदारी है की तुम सभी के साथ समय बितौ पैर ऐसा संभव नहीं हो प् रहा है

जीनत ......जानती हूँ आप पे बहुत से जिम्मेदारिया हज उसके आप को वक़्त नहीं मिलता आवर हमें भी ज्यादा तर समय पिता श्री के साथ हे बिताना पड़ता है एकलौते है न तो हमारा उनके पार्टी भी फ़र्ज़ बनता है भले हे उन्होंने हमें आपके पास कभी भी आने की इजाजत दी हुई है

सूर्य जीनत की कमर में हाथ डेल हुषे अपने आगे बैठा रखा था

जीनत के खुले केश ( बाल ) सूर्य के चेहरे पे हवा की वजह से बार बार आ रही थे

सूर्य ......जरा इन रेशमी जुल्फों को सम्भालिये बेगम साहिबा

जीनत .......आपको तो हमारी ये रेशमी जुल्फे आज़ाद हे पसंद है न

सूर्य ......है पैर इस वक़्त ये जुल्फे हमारी होने वाली बेगम के दीदार करने में रुकावट बन रही है

जीनत अपने उन घने काली रेशमी जुल्फों को समेत जुड़े में बंद लेती है सामने अब जीनत की खूबसूरत ढूढ जैसे गोरी गर्दन थी

सूर्य अपना मुँह जीनत की गर्दन के पास कर हलके हलके फूंख मरने लगता है

जीनत ........ ऐसा न कीजिये आप हमें अह्ह्ह्हह कुछ हो रहा है

सूर्य द्वारा अपनी गर्दन पे किये गए गीले चुम्बन से जीनत का रोम रोम खिल उठा गर्दन पे हलकी हलकी रहे थी वो कड़ी हो चुकी थी

सूर्य ........ुम्मम्हा आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या हमारा इस तरह आपको चूमना

जीनत ......उम्म्म्मः अह्हह्ह्ह्ह अच्छा बहुत अच्छा लग रहा है पैर यहाँ नहीं निचे चलिए

सूर्य के इसारे पे ड्रैगन ेल खूबसूरत करने के पास उतरता है

आप पास खूबसूरत पुष्प रंग तिरंगे पक्षी जो ड्रैगन को देख कर भी न डरे जैसे उन्हें पता हो की उन्हें कोई खतरा नहीं है इन सब से

सूर्य ...... अब इजाजत है हमें आपके इन दो खूबसूरत मधभरे प्यालो को पिने का

जीनत बोलने की बजाय अपनी आँखे बंद कर अपना खूबसूरत चेहरा आगे कर देती है

जीनत की तरफ से सूर्य के लिया ये आगे भरने की में स्वीकारती थी

सूर्य जीनत को अपनी बाँहों में लिया हुए उन दरबारी होंठो से दरबार पिटे हुए हवा में तैरते हुए उस ठन्डे पानी के झरने तक आ पंचा

जैसे हे कुछ पानी की बुँदे जीनत के खूबसूरत बदन पे पड़ी जीनत की आँखे खुल गई पैर जल्दी हे सूर्य के इरादे भाप उसने आँखे बंद कर ली

सूर्य जीनत को लिए हुए उस ठन्डे पानी में उतर गया

जीनत सूर्य को अपनी बहो में आवर ज्यादा काश लेती है

ठन्डे पानी ने जीनत को बाहरी टूर पे थो कुछ हद तक ठंडा कर दिया पैर अंदर जो आग थी वो सुलग उठी थी

सूर्य आवर जीनत दोनों पानी के भीतर गहराई में जा रहे थे दोनों को पानी में साँस लेने में कोई परेशानी न हुई

( यहाँ जी भी बाते इनके बिच होंगी वो मानसिक सम्पर्क के माध्यम से होगी )

सूर्य किश टूट कर अलग हुआ

अभी जीनत आँखे खोलने वाली थी की सूर्य ने उसे रोक दिया

सूर्य .......जब ताज मैं न कहु अपनी आँखे न खोलना बेगम साहिबा

जीनत ......जी

सूर्य वह से एक आवर निकल गया तैरते हुए

कुछ देर बाद जब सूर्य लौटा तो उसके हाथो में कुछ शिप थे

सूर्य जीनत को ले पानी के ऊपर आता है एक पत्थर पे जीनत को बैठा उसके सामने हे शिप खोने लगता है

एक के बाद एक कफ्फू शिफ्ट खोल उनके से मोती ( पर्ल ) निकल सूर्य उनकी एक माला बनता

जीनत ये सब देख मुस्कुरा रही थी

सूर्य जनता हूँ ये की बहुत ज्यादा कीमती उपहार नहीं है पैर मुझे ये पसंद आये इनकी चमक परतविलोक के मोतियों से बहुत ज्यादा है

जीनत ....... आपने जब हमारे लिया ये उपहार त्यार किया है तो हम चाहते है की आप हे अपने हाहतो से हमें पहनाओ आवर उपहार की कीमत नहीं देखि जाती वो तो देने वाले का प्रेम देखा जाता है अब सिगरता से हमें पहना दीजिये न

सूर्य जीनत के पीछे जा वो मोतियों का हार जीनत की खूबसूरत गले में पन्ना देता है





जीनत ........ हम हमेशा आपके इस उपहार को अपने सीने से लगा कर रखेंगे जब तक आप विवाह का मंगलसूत्र नहीं बांधते हमारे लिया यही मंगलसूत्र है

सूर्य .......... आपके गले में पहनाये जाने के बाद इसकी खूबसूरती आवर भाड़ गई है

सूर्य जीनत के भीगने ूए कपड़ो में उभरे हे अंग अंग को अच्छे से देख प् रहा था

जब जीनत को इसका अहसास हुआ तो आसाराम के चलते वो पानी में कूद गई

आवर किसी फिश के भांति पानी में विचरण करने लगती है

सूर्य भी उसके पीछे पीछे पानी में उतर गया

कुछ देर दोनों के बिच चोर पुलिस का खेल चलता रहा फिर सूर्य ने जीनत को दबोच हे लिया

सूर्य .......हम से बच कर कहा जाएँगी बेगम साहिबा

जीनत .......... हम तो चाहते है की हम हमेशा ुशी तरह आपकी बहो में सुकून पाए आपसे दूर तो हम वैसे भी जा नहीं सकते है कुंवर जी

सूर्य ....... यार जिसे देखो कुंवर जी कुंवर जी कहता है अच्छा भला नाम है मेरा सूर्य ठाकुर

जीनत. .....उम्मम्मम्हा अभी से आदत दाल लीजिये मर. आगे यही सुनने को मिलने वाला है सभी के मुँह से

जीनत सूर्य की कमर में अपने पांव लपेट सूर्य के पुरे चेहरे को चूमने लगती है फिर होंटो को

ीदार सूर्य के लिंग पे जीनत का जाणार द्वार जा टिका एक तो सुबह हे शालिनी जी ने सूर्य को उक्षा कर मंदार में चढ़ दिया ऊपर से इस ठन्डे पानी में एक खूबसूरत गरम जिसम जब इंसान के आग़ोश में हो तो अरमान तो जागने हे थे

डेरी डेरी सूर्य के नागबबु ने जीनत के जानत द्वार की गर्माहट से अंगड़ाई लेती हुई उस जमात के द्वार स जा मिला

जीनत को अपने नाजुक अंग पे जब उस गरम मोठे कामदण्ड को मह्सुश किया तो अपने आप हे उसकी कमर ऊपर निचे होने लगी

सूर्य की हालत बाद से बदतर होने में जयादा समय न लगा

ीदार जैसे जीनत ने रगड़े सुरु की सूर्य के दोना हाथ जीनत को भरे हुए सुडोल कूल्हों पे अपना सिकंजा कस्ते हुए उन्हें नरम मांड के गोलों को अपने हाथ की सख्ती दिखने लगा

सूर्य का तो कुछ होने वाला था नहीं पैर 7,8 मिनट्स की आवर रगडम रगड़े ने जीनत को जरूर जाणार में पहुंचा दिया था

सूर्य काँटी हुई जीनत को अपने आग़ोश में भर जब ताज खड़ा रहा तब तक जीनत फिर से वास्तविक दुनिया में न लौट आई

एक बार फिर से कहा कर दोनों बहार आये सूर्य ने दोनों के वस्त्र पहले की तरह सूखा दिए थे

जीनत .......कुआ हम महल लौट रहे है

सूर्य .......है पैर कुछ आवर समय बाद

चलिए उस तरफ जहा वो खूबसूरत पक्षी गुनगुना रहे वही चलते है

सूर्य जीनत को गौड़ में उठा एक तरफ चल दिया जा बहुत से पक्षी बिना किसी दर के मस्ती कर रहे थे

सूर्य वही एक पेड़ के निचे जीनत को उतर उस हरे भरे घास पे लेट गया

जीनत पेड़ के सहर बेट सूर्य सर अपने गौड़ में रख लाइट है

जीनत .......बोल भी तो सकते थे आप

सूर्य .......क्या हर चाहत बोल कर हे जाहिर की जा सकती है जानत

जीनत मुस्कुराते हुए सूर्य के सर को सहलाने लगती है

कुछ हे देर में बहुत से पक्षी सूर्य आवर जीनत के पास आ गए आवर लेते हुए सूर्य के सीने पे जीनत के कंधे आदि पे बेथ गए

सूर्य ......... देखो तो कैसे मस्ती कर रहे है

जीनत ........इन्हें पता है की हमसे इन्हें किसी तरह का कोई खतरा नहीं तभी ये इतने बे खौफ हो कर हमारे साथ अपनी चंचलता का प्रदर्शन कर रहे है

सूर्य ......बिलकुल सही बेसक ये बोल नहीं सकते पैर भावनाये आवर जिव की पहचान इन्हें हमसे बेहतर होती है

सूर्य जीनत की गौड़ से हैट जीनत को भी अपने पास लिटा लेता है तभी कही से एक प्यारा सा छोटा सा रेबिट का बचा है है आवर सूर्य का गाल पे अपना मुँह रगड़ ने लगता है

जीनत ......लगता है आप इसे कुछ ज्यादा हे पसंद आ गए है

सूर्य ......बहुत प्यारा है ये

जीनत .......वो देखो आवर भी आ रहे है

सूर्य ने देखा तो अलग अलग रंग के 6,7 रेबिट के बचे उनकी हे तरफ आ रहे थे पक्षी सूर्य जीनत से थोड़े दूर हो गए

सभी डेबिट सूर्य जीनत के शरीर पे धमाल चौकड़ी मचलने लगते है

जीनत. ........हेहेहे इनके इस तरह करने से बहुत गुदगुदी हो रही है हमें

सूर्य....... करने दो कुछ देर मस्ती फिर क्या पता कब इनसे मिलना हो

अरे अरे रेबिट महाशय वो आपके खेलने की जगह नहीं हमारे खेलने की है हटिये वह से

बेचारा रेबिट का बचा फ़ौरन जीनत के उभर पे से हैट गया

जीनत .......हहहहए आप कोई बचे थोड़ी है जो इनसे खेलेंगे खेलने दीजिये इन्हें

सूर्य .......एक बार सदी होने दिज्ये फिर बताऊंगा की कैसे खेला जाता है इनके साथ आवर वैसे भी ये बचो के खेलने वाले खिलोने थोड़ी है

कहते हुए सूर्य ने पहली बार जीनत के उन सुडोल उभारो का स्पर्श किया जीनत की तो अचानक से दध्कन हे रूकती हुयी मह्सुश हुई

सूर्य ......अब हमें चलना चाइये जीनत

जीनत .......इतनी सिगरा

सूर्य. ...... है क्यों की दोपहर को निकलना है आवर अभी गुरुदेव से भी जरुरी चर्चा करनी है आवर रिद्धि पारिजात को भी एकांत में कुछ समय देना है

जीनत ......है उन्हें भी समय देना चाइये आपको

सूर्य ......आवर है आपका जब दिल कर पृथ्वीलोक आ सकती है क्यों की मैं अभी आपके लोक नहीं आ सकता न

जीनत ......उम्म्म्मः हम अवश्य आएंगे आपसे मिलने

सूर्य के याद करते हे दूर से ड्रैगन दहाड़ कर संकेत देता है की वो अभी हाजिर हुआ

जीनत सूर्य दोनों कुछ प्यार भरे पल एकांत में बिता कर कुछ कहती मीठी मस्ती मजाक कर महल लौट आये

सूर्य जीनत को महल छोड़ गुरुदेव से मिलने निकल गया विधि आवर गायत्री के साथ साथ किसी आवर विषय पे चर्चा करने गुरुदेव से ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..................🙏

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................🙏
 
अपडेट 228

जीनत ......है उन्हें भी समय देना चाइये आपको

सूर्य ......आवर है आपका जब दिल कर पृथ्वीलोक आ सकती है क्यों की मैं अभी आपके लोक नहीं आ सकता न

जीनत ......उम्म्म्मः हम अवश्य आएंगे आपसे मिलने

सूर्य के याद करते हे दूर से ड्रैगन दहाड़ कर संकेत देता है की वो अभी हाजिर हुआ

जीनत सूर्य दोनों कुछ प्यार भरे पल एकांत में बिता कर कुछ कहती मीठी मस्ती मजाक कर महल लौट आये

सूर्य जीनत को महल छोड़ गुरुदेव से मिलने निकल गया विधि आवर गायत्री के साथ साथ किसी आवर विषय पे चर्चा करने गुरुदेव से ................

अब आगे ..........

असुरलोक ........... असुरगुरु सूर्य वह मानसी के विवाह उपरांत उन्हें अपने नवजीवन के लिया ढेरो आश्रीवाद सूर्य किरण मानसी गुरुदेव शाकिनी जी के विदा होने के कुछ देर पश्चात असुरगुरु असवासुर आवर वातापी को साथ ले असुरलोक लौट गए

जहा असुरगुरु मानसी के विषय में सत्य जान खुश थे वही वातापी के लिया दुखी भी थे वातापी का कंटकासुर से विवाह सम्बन्ध इन्होने हे तो कराया था

आज असुरगुरु अपने ुशी फैसले पे दुखी थे आवर ये बात असवासुर आवर वातापी से छुपी न थी मानसी के विवाह समय उन्होंने जूठी मुस्कान का मुखौटा जो ओढ़ रखा था

गुरुदेव दोनों को ले वही अपने वर्तमान निवेश स्थान पहुंचा उस गुफा में जहा मानसी के अभी तक जीवन काल वयतीत हुआ था उनकी आँखों के सामने एक बार फिर मानसी का बचपन गुजरने लगा जब वो किसी कारन वश परेशान होते तो कभी कभी मानसी पे भी क्रोधित हो जाते थे

असुरगुरु की आँखे सजल हो उठी असुरगुरु की भीगी हुई आँखे देख असवासुर की तो हुमत न हुई कुछ भी कहने या बोलने की

पैर वातापी ने इस में छुपी की भांग किया

वातापी ....... पिता श्री आज पहली बार हम आपके नेत्र सजल होते देख रहे है हम ये भी जानते है की आपके नेत्रों में जो नमी है उसकी वजह मानसी है

असुरगुरु एक स्थान पे बेथ वातापी आवर असवासुर को भी बेथुने का इशारा कर अपनी भीगी हुई आँखे साफ करते है

असुरगुरु ........ पुत्री वातापी हम आपके गुनहगार है पुत्री जाने अनजाने हमने तुम्हारे साथ अन्याय किया है पुत्री जिसे हमने अपना रकत समजा वो तो शैतान निकला हमारी मोहिनी

कहते कहते असुरगुरु की आँखे फिर से चालक पड़ी

वातापी ....... पिता श्री हम जानते है पिता श्री मयासुर के देह त्याग के पश्चात अपने अंतिम समय में माता श्री ने हमारा दायित्व आपको सौंपा था क्युकी उन्हें केवल आप पे हे यकीं था हमने ुशी दिवश आपको पिता मन लिया था भले हे हम आपकी पुत्र वधु न रही हो किन्तु क्या हम आपकी पुत्री भी नहीं है

असुरगुरु ....... नहीं नहीं पुत्री वातापी तुम सदैव हमारे लिया हमारी पुत्री हे थी आवर सदैव रहोगी भी पुत्री हे

वातापी ......फिर अपनी हे पुत्री से क्षमा याचना कर उसने स्वयं से दूर तो आप कर रहे है

हमारे साथ जो हुआ वो हमारी नियति थी पिता श्री

असुरगुरु ....... ये सब घटना करम नरकासुर के कारन हुआ है

वातापी ...... पिता श्री नरकासुर की बूढी इतनी तीव्र ( तेज ) आवर न इतना धैर्य (सयम ) कही इन सब के पीछे महामहिम तो नहीं

असवासुर ....... यौवरानी जी आप किस महामहिं की बात कर रही है

असुरगुरु ....... ुशी की जिसने कंटकासुर दृश्टिका का प्रयोग कर हमें हमारे हे निवेश पे कैद कर स्वयं हमारा बहरूपिया बन हमारे असुरगुरु पद पे आसीन ( बेथ ) हो गया

वातापी .........पिता श्री हमें आज्ञा दीजिये हम आपको रात्रि में मिलते है

असुगुरु ........रुको पुत्री अब से हम महल में नहीं आएंगे अब से तुम्हारी सुरक्षा के लिया पुत्र असवासुर रहेगा हम कुछ समय के लिया शुक्र लोक जा रहे गुरुदेव के सानिध्य में कुछ भी आवशयक सन्देश या जानकारी हो तो हमें सन्देश के माध्यम से सूचित कर देना

वातापी .......जी पिता श्री परनाम

असवासुर ........ आपके आने की प्रतीक्षा रहेगी गुरुदेव परनाम

असुरगुरु ....... कल्याण हो पुत्री वातापी कल्याण हो पुत्र अस्व

वातापी आवर असवासुर के जाने के कुछ देर बाद असुरगुरु भी सुक्रलोक के लिया निकल गए अपने गुरु से भेंट करने

वही असुरमहल में नीलसूर अग्निमुखासुर भयासुर वज्रासुर वातापी आवर नरकासुर एक बड़े से नक्श में बैठे किसी गंभीर विषय पे चर्चा कर रहे थे

वातापी ........ स्वामी हमने आपसे पहले भी कहा था आवर आज फिर से कह रहे है अभी भी समय है व्योमासुर इस पढ़ योग्य नहीं है

नीलसूर ......... ( जोर से ) माता श्री हम आज तक आपका मंतव्य नहीं समाज पाए न आपकी इस घृणा आवर क्रोध की वजह जिसके चलते आप गुरुदेव को अपमानित करने का पर्यटन करती रहती है

नरकासुर ........ में रहो नीलसूर भूलो नहीं वातापी असुरलोक महारानी भी है तुम्हारी माता होने के साथ साथ

नीलसूर ........ हमें क्षमा करे महाराज असुरराज नरकासुर किन्तु आज हम असुरलोक महारानी द्वारिका जी से जानना चाहते है की ऐसी कोनसा कारन है जिसके चलते इन्होने असुरगुरु पढ़ पे विराजमान असुरगुरु को अपमानित करना हे जैसे एक मात्रा उद्देश्य हो महारानी जी का

अग्निमुखासुर जो अपने क्रोध के लिया असुरलोक में परिसीध है नीलसूर की बात सुनते हुए क्रोधदित हो रहा था

नरकासुर ....... तुम अपनी सीमा लांग रहे हो पुत्र नीलसूर

नीलसूर ....... ये आप कह रहे है असुरराज जिन्होंने गुरुदेव की पत्नी माता श्री मोहिनी जी की हत्या की

अग्निमुखासुर क्रोध में सब कुछ भूल नीलसूर को उठा के दिवार पे दे मरता है जैसे कोई बॉल ( गेंद ) हो

कोई कुछ समझता या करता उस से पहले हे अग्निमुखासुर अपने परचंड अग्नि लावा नीलसूर की आवर छोड़ देता है

नरकासुर बड़ी तेजी से नीलसूर आवर अग्निमुखासुर की बिच आ खड़ा होता है

अपने पिता को अपने सामने देख अग्निमाखासुर लावे कज दिशा लाउड देता है

जो महल की दीवार को पिंगला कर एक आवर द्वारा त्यार कर चूका था

नरकासुर ........ ये कैसे मुर्ख ता है अग्निमुखासुर नीलसूर तुम्हारा अनुज भ्राता है अपने क्रोध को नियंत्रित करना सीखो

अग्निमुखासुर ....... हमें क्षमा करे पिता श्री किन्तु नीलसूर ने माता श्री आवर आपसे अभद्रता की जिसके ढकते हम स्वयं को रोक नहीं पाए

नीलसूर ............ हमने कोई अभद्रता नहीं की असुरराज नरकासुर आवर असुरमहारानी द्वारिका से क्या ये सत्य नहीं है महाराज असुरराज नरकासुर की आपके हे हाथो गुरुमाता की हत्या नहीं हुई हम असत्य कह रहे है तो अभी इशू वक़्त हमें मृत्यु दंड दे दिया जाये

नरकासुर ........ तुमने कुछ असत्य नहीं कहा पुत्र वो हम हे थे जिन्होंने गुरुदेव की अर्धागिनी देवी मोहिनी जी की हत्या की जब वो गर्भ से थी

नरकासुर के खुकशे से जैसे कक्षा में सनता हे पसर गया अग्निमुखासुर का क्रोध एक पल में हवा हो गया जैसे किसी ने उसकी अग्नि को फंक मार कर बुझा दिया हो

द्वारिका ........ आप सवयं को दोष क्यों दे रहे है स्वामी वो सब तो अनजाने में हुआ था इसमें आपका क्या दोष

नीलसूर ........अनजाने में हुआ हो या जान कर असुरगुरु सब जानते हुए भी सब भुला कर महाराज असुरराज नरकासुर को क्षमा कर चुके है फिर भी उनके त्याग का यहाँ ऐसा उपहार दिया जा रहा है अपमानित कर घृणा से देखना यही तो मिला है आजतक उनने इस असुरलोक के असुरमहल से हमें यहाँ गठन होती है हम जा रहे है यहाँ से

नीलसूर कक्ष के द्वार खोल बहार निकल गया उसके पीछे पीछे भयासुर वज्रासुर

अग्निमुखासुर ....... जब वो संत होगा लौट आएगा पिता श्री

नरकासुर....... पुत्र तुम सबसे ज्येष्ठ पुत्र हो तुम्हे सयम आवर विवेक से काम लेना चाइये था इस फरहा अपने अनुज के साथ वैभार करना उचित नहीं

अग्निमुखासुर .......हमें क्षमा करे पिता श्री किन्तु माता श्री के अपमान को हम सहन नहीं कर पाए क्रोधवश हमसे ये कार्य हो गया

नरकासुर ........ परतविलोक से हमारे गोचरो का कोई सन्देश प्राप्त नहीं हो रहा है न नागलोक आवर जिन लोक से

अग्निमुखासुर ......जी पिता श्री मैंने एक अन्य गोचर टुकड़ी को तीनो लोको में भी दिया है कल रात्रि hi

नरकासुर .......उचित किया पुत्र तुमने हो न हो हमारा सत्रु इन्ही किन्ही लोक में मौजूद है बस एक बार ज्ञात हो जाये आवर पुत्री विदुषी आवर नगीना का कोई सन्देश आया द्वारिका

द्वारिका ......जी स्वामी वो अपना तप आरंभ कर चुके है अब तप पूर्ण होने के पश्चात हे वो स्वयं सम्पर्क करेंगे

परीलोक ...........

सूर्य गुरुदेव से विधि आवर गायत्री के लिया बात कर सूर्य महल लौट आया था

गुरुदेव ने भी सूर्य की बात का मान रखते हुए विधि आवर गायत्री को शिक्षा देने के लिया अपना समर्थन दिया

सूर्य जब महल लौटा तो सभी खाने के न्यारी में थे सूर्य को गुरुदेव के साथ काफी समय लग गया था

शालिनी जी ....... आ गए बीटा तुम गुटगुट गुरुदेव से मिल कर

सूर्य ......जी माँ भूख लगी है माँ

शालिनी जी. .......बस बैठो बीटा सब आ हे रहे है खाने पे

कुछ हे देर में एक एक कर सब लोग वह आ गया वो बड़ा सा सही डाइनिंग टेबिल अलग अलग खुसबूदार खाने से भर उठा

शिव ......क्या बात है बचो खाने के खुशबु तो बहुत प्यारी है

किरण ........पापा खाना भी उतना हे स्वादिस्ट है हम सब ने मिल कर त्यार किया है

दादी जी ...... स्वीटी बीटा सभी को पहले खीर परोश्ना जो मानसी की पहली रसोई है

किरण ......जी माँ सा मानसी सभी को अपने हठी बानी खीर परोशो

मानसी एक एक कर सभी को खीर परोश्टी है सभी मानसी की खीर को बहुत पसंद करते है

आवर करे भी क्यों नहीं म्हणत भले हे मानसी ने की पैर खीर बनाने का तरीका दादी जी का था

दादा जी ....... ठकुराइन खीर में स्वाद के साथ साथ आपके तजुर्बे का का भी भरपूर उपयोग हुआ लगता है

सूर्य ........क्या मतलब बाउजी

दादा जी .......कुछ नहीं बीटा खीर खाओ मानसी के हाथो की

सभी नाशी मजाक के साथ खाना कहते है

सूर्य ....... विधि गायत्री आप दोनों को यही रहना है आवर जैसा गुरुदेव कहे ुशी तरह उनकी आज्ञा अनुसार करना है

दादी जी ......क्या मतलब बीटा हमें भी तो बताओ

सूर्य ......वो माँ सा मैंने गुरुदेव से विधि आवर गायत्री की शिक्षा आवर ध्यान आदि के विषय में बात की उन्होंने अपनी अनुमति दे दी है अब विधि आवर गायत्री दोनों यही रह अपनी शिक्षा पूर्ण करेंगी

पारिजात .......ये तो बहुत अच्छी बात है क्यों विधु गायत्री रहोगी न आप हमारे साथ में

विधि सूर्य को देख रही थी जैसे कुछ कहना चाहती हो

सूर्य ....... चिंता न करो मैं यहाँ आता रहूँगा आवर जब भी घरवालों से मिलने का दिल हो तो मैं ले चकूंगा पैर ये तब हे होगा जब गुरुदेव के कहे अनुसार पूरी लगन के साथ अपनी शिक्षा पे ध्यान डौगी तो

शिव ...... वैसे मुझे भी आप सब से कुछ कहना था

अभी सब लोग मौजूद है तो यही पे कहना अच्छा रहेगा

दादा जी ...... फिर बोल भी दो क्या कहना है

शिव ........ पापा जी वो मैंने दिल्ली में एक बहुत अच्छी प्रॉपर्टी ली है कल रात मैंने जोरावर भाई सा महेंद्र भाई सा से भी बात की बचो की कॉलेज भी ओपन हो रहे है एक हफ्ते में आवर सूर्य की भी ड्यूटी दिल्ली है उसका भी ज्यादा समय वही गुजरेगा

दादी जी ...... बात को गुमा क्यों रहा है साफ साफ बोल न की तुम क्या कहना चाहते हो

महेंद्र जी .......... माँ सा मैं बताता हूँ आपको शिव चाहता है की हम सब दिल्ली सिफत हो जाये बचे दिल्ली हे कल में एडमिशन ले आवर हम भी अपना बिज़नेस दिल्ली सिफत कर रहे है

दादा जी .......आवर हवेली का क्या है अपनी फुरखो के आसियाने को ऐसे हे चढ़ दे बीटा आगे भढना तराई करना गलत नहीं पर अपनी मिटटी से अपनी करम भूमि से हे दूर हो जाना अच्छी बात नहीं मैं भी चाहता हूँ बच्चियों को अच्छी शिक्षा मिले वो अपने न जरिये से दुनिया देखे समजे

दादी जी ...... बच्चों की ख़ुशी में हमें भी खुश होना चाइये जी

सूर्य ....... भौजी आप यही चाहते है न की हम सब हवेली में रहे

दादा जी ...... नहीं बीटा मैं चाहता हूँ की हवेली में जिस फरहा से हमेशा रौनक रही है वैसा आगे भी रहे आवर तुम सब की िछाये भी पूरी हो

सूर्य ......... एक तरीका है जिस से हम सब दिल्ली आवर सूर्यगढ़ एक साथ रह सकते है

दादा जी ........ऐसा कैसे हो सकता है बीटा

सूर्य ............ मैजिक दूर के जरिया ऐसा हो सकता है बाउजी

रानी पारी .......बिलकुल ऐसा हो सकता है मैजिक दूर से बस मैजिक दूर से दोनों घरो को जोड़ दो किसी को पता भी नहीं चलेगा इस से कभी की दिल्ली या सूर्यगड़ हवेली पहुंचने सकते है उस दूर की मदद से

शिव ........ अब तो आपको कोई एतराज नहीं है न पापा

दादा जी ......... ठीक है पैर दिल्ली में हम सब एक साथ रहेंगे भले हे सूरजगढ़ आवर सूर्यगढ़ में दोनों परिवार अपनी अपनी हवेली में रहे

शिव .......ऐसा हे होगा पापा जी मैं साम को हे किसी से मिल कॉन्ट्रैक्ट देता हूँ ताकि जल्द से जल्द घर बनना सुरु हो जाये

रानी पारी ....... ये काम आप परीलोक के शिल्पकारो पे छोड़ दीजिये

सूर्य .......पैर इतना भी जल्दी त्यार नहीं करना है की सभी की नजरो में आ जाये

दादा जी ........ ठीक है जैसा तुम लोगो को अच्छा लगे वो करो अब घर भी चलने की तयारी करो

दादी जी .......साम को जायेंगे अभी भोजन किया है थोड़ा आराम करो

सूर्य ...... डैड जरा वो एड्रेस बिताना जहा पे आपने वो प्रॉपर्टी खरीदी है

शिव .......क्या हुआ बीटा

सूर्य .......कुछ नहीं डैड बस जग्गा देखनी थी

शिव ......ठीक है बीटा एजघा क्सक्सक्सक्सक्स नगर दिल्ली में है बोर्ड से पता चल जायेगा तुम्हे

सूर्य ......जी डैड

सूर्य वह से निकल परिधि को साथ ले दिल्ली निकल गया

दिल्ली .............

परिधि ......... तो आप यही इस सहर में रहने वाले है

सूर्य ....... है सोचा देख लूँ कैसी जगह देखि है डैड ने वैसे तुम्हारी पसंद की बहुत खूबसूरत है

परिधि ........ कभी कभी जब हमारा मन करता है तो हम परीलोक में भी इसका इस्तेमाल करते है

सूर्य ....... वैसे तुम्हे याद है परिधि हमारी पहली मुलाकात कैसे आवर कहा हुई थी

परिधि ......उम्म्म्मः उसने कैसे भूल सकती है मैं हमारी पहली हे मुलाकात में हम सोल्लगे में जगद पड़े थे हहहहए तब आपको सताने में मुझे बहुत मज़ा आता था पैर जब आप नजर नहीं आते थे खुद पे हे गुस्सा भी आता था

सूर्य .......वो जगदा नहीं प्यार हे था पैर दोनों का समझने का नजरिया अलग अलग था मिसुन्दरस्टण्डींग के चलते हम कही न कही फिर उलझ जाते थे

सूर्य एक जगह कार रोकता है





परिधि ........क्या यही वो जगह है जो पापा ने बताई थी

सूर्य .......है वो देखो सामने पापा के नाम का बोर्ड लगा है

देखने में तो जगह अच्छी हे है चलो चल कर देखते है

परिधि .......जी ठीक मैं उन्हें बुला लेती हूँ वो उस हिसाब से सब देख लेंगे

सूर्य परिधि दोनों कार से बहार निकल आगे बढ़ उस जमीं को देखने लगते है

सूर्य .......जगह तो अच्छी है परिधि आवर पास में हे कॉलेज आवर पार्क दोनों है अगल बगल में

परिधि .....ह्म्म्मम्म ये लीजिये ये भी आ गए

सामने से एक व्यक्ति को आता हुआ दिखा जो सिखने में इंसान हे था पैर वो असल में एक परीलोक से था इनके विषय में हे रानी पारी ने सुझाव दिया था

परिधि आवर सूर्य को देख सामान में जुख कर परनाम करते है

सूर्य ......आपको ये सब करने की आव्सय्कता नहीं है जमीं आपके सामने है सब देख कर अच्छे से बचने के बाद बताइये

शिल्पकार ......जी जैसा आप कहे

शिल्पकार पूरी जमीं को देखने के बाद सूर्य के पास आता है जमीं करीब 6 बीघा के करीब थी जिसमे एक आवर बड़ा सा गोडावण जैसा बना हुआ था जो सायद पहले यहाँ किसी यथा का कारखाना रहा होगा

शिल्पकार .......सब ठीक है पैर जमीं में एक दोष है उसे हटा दिया तो सब सुबह हे सुबह है

सूर्य ....... आवर वो दोष क्या है जब आप जानते है तो बता भी दीजिये

शिल्पकार ......... बहुत समय पहले यहाँ किसी कन्या के साथ दुष्कर्म कर उसे जीवित इसी भूमि में दफ़न कर दिया था आज भी उसकी आत्मा इस भूमि से जुडी है ुशी मुक्ति दिलानी होगी बहुत से इंसान उसकी क्रोध की अग्नि में जल चुके है पैर अभी तक उसका गुस्सा संत नहीं हुआ उसने सन्ति नहीं मिली

सूर्य ........ ठीक है मैं उस से मिल कर आता हूँ आप तब तक किस तरह का घर यहाँ बनाना है उसके विषय में सोचिये

सूर्य परिधि एक आवर भाड़ गए जिस तरफ वो बड़ा सा पूर्ण गोडाउन था पास में लगते पार्क में एक बुजुर्ग सूर्य आवर परिधि को उदार जाते देख पार्क से निकल इनके सामने आ गया

बुजुर्ग .......कोण हो तुम लोग आवर यहाँ क्यों आये हो

सूर्य .....परनाम बाबा हमने ये जमीं खरीदी है बाबा पैर आप कोण हो आवर हमें क्यों रोक रहे हो

बुजुर्ग ........ चले जाओ यहाँ से वो यहाँ किसी को नहीं आने देती है

सूर्य .......आप किसकी बात कर रहे है बाबा आवर क्या पता है आपको जो आप इतना दर रहे है आवर हमें भी डरा रहे है

बुजुर्ग. ....... यहाँ भूत रहते है बीटा तुम लोग चले जाओ यहाँ से

सूर्य .......क्या बाबा आप भी इन सब बातो पे यकीं करते है भूत जैसा कुछ नहीं होता

बुजुर्ग ....... चले जाओ यहाँ से

सूर्य ........ठीक है चला जाऊंगा पैर आप जो कुछ भी जानते हो सब बताओगे तो हे नहीं तो हम दोनों अंदर जा रहे है

बुजुर्ग ........ बीटा यहाँ बहुत पहले एक बहुत हे दुखद घटना घाटी थी जिसमे बहुत से लोग जल कर मर गए थे जो यहाँ इस कारखाने में काम करते थे

सूर्य ......... तो क्या वही भूत है आवर ये सब आपको कैसे पता

बुजुर्ग ....... क्युकी मैं भी उन्ही लोगो के साथ यहाँ काम करता था जब ये घटना घाटी उस वक़्त रात का समय था आवर मैं उस टाइम रात की ड्यूटी में नहीं था इस लिया मैं बच गया

सूर्य ........ क्या यहाँ कोई लड़की भी काम करती थी

बुजुर्ग ....... नहीं बीटा लड़किया या औरते यहाँ काम नहीं करती थी है कभी कभी सेठ जी के बेटी आती थी जब सेठ जी रात में यही रुकते थे तो उनके लिया भोजन ले कर आया करती थी बहुत पहाड़ी बची थी आवर सेठ जी की लाड़ली भी थी पैर फिर अचानक से वो कही गायब हो गई सेठ जी ने बहुत डुंडा उसने पुलिस में रपट भी लिखे पैर उसका कुछ भी पता नहीं चला उसके कुछ दिन बाद हे यहाँ एक रात आग लग गई सेठ जी इस सदमे में चक बसे उसके बाद से हे ये कारखाना बंद पड़ा है अब तो यहाँ कोई आता भी नहीं कहते है यहाँ पे रात को इस कर खाने से रोने चीखने की आवाजे आती है दर से कोई इस आवर आता भी नहीं

सूर्य .......क्या आप अपने उन सेठ जी की बेटी जो गायब हो गयी थी उसका नाम जानते है बाबा

बुजुर्ग कुछ देर नाम याद करने की कोशिश करते है उनके चेहरे पे उभरी हुई हलकी जरिया कभी कभी गहरी होती तो कभी काम

बुजुर्ग .......... ठीक से याद नहीं आ रहा पैर सेठ जी उसने लक्समी बिटिया कहते थे

सूर्य ......एक आखरी सवाल बाबा क्या उन सेठ जी का पता है आपके पास

बुजुर्ग ......बीटा ये जमीं आपने सायद राजीव बाबू से खरीदी होगी वो सेठ जी के छोटे बेटे है उनसे सायद 2,3 साल बड़ी थी सेठ जी की बेटी

सूर्य. ......थैंक यू बाबा आवर यहाँ सच में भूत है बाबा पैर ज्यादा दिन नहीं रहेंगे

सूर्य ......चले परिधि पहले इस भूत से मिल ले

बुजुर्ग....... बीटा मौत के मुँह में जाना अच्छी बात नहीं चले जाओ यहाँ से

सूर्य .....आप हमारी चिंता न करे बाबा हम सब देख लेंगे

बुजुर्ग मन करता रहा पर सूर्य आवर परिधि उस गोडाउन में चल दिया

जिसकी दीवारों पे आज भी उस भयानक आग के नीसाण था अभी भी वह वो बड़ी बड़ी वो जंग खाई मशीन पड़ी साद रही थी जिसकी वजह से कभी भूतो के परिवार की रोजी रोटी चलती थी

परिधि ....... मुझे ऐसा लग रहा है की जैसे वो हमें देख रही हो

सूर्य ....... लक्समी जी मैं जनता हूँ आप हमें देख रही है सामने आइये वर्ण मुझे मजबूरन आपको सामने लाना होगा

सूर्य की बात इस भूत को सायद कुछ खाश पसंद नहीं आयी

अपेक्षा अनुसार कुछ चीज़े सूर्य आवर परिधि की तरफ बढ़ी जो सूर्य आवर परिधि के पास पहुंचने से पहले हे निचे गिर गई

सूर्य ......... आपका गुस्सा जायज है पैर मित्र आवर दुश्मन में फरक करना शोखी वर्ण जिंदगी भर यही इस गोडाउन में मुक्ति के लिया तड़पती रहोगी तुम्हारे साथ जो हुआ वो गलत हुआ पैर अब तुम्हारी मुक्ति का समय आ चूका है सामने आओ मुझे मजबूर मत करो

परिधि ....... सामने आओ लक्समी हम तुम्हारी मदद करने आये है तुम्हारी सकती हम पे कोई कार्य नहीं करेगी हम दुश्मन नहीं मददगार है

लड़की....... मुझे मुक्ति नहीं बदला चाइये उस आखरी भेड़िये से जिसने मेरा सब कुछ मुझसे चीन लिया

परिधि .......सामने आओ आवर फिर हमें पूरी घटना बताओ हम तुम्हारी मदद करेंगे

तभी वो आत्मा जमीं से बहार निकल सूर्य परिधि के सामने आ कड़ी होती है जो की पूरी नंगी थी जिसम तो था नहीं पैर जिसम जैसा आवरण जिसपे आज भी वो दरिंदगी के नीसाण साफ नजर आ रहे थे की इसने कितना कुछ भोगा होगा कितना मासूम चेहरा रहा होगा उस लड़की का जो इतने गुस्से के बाद भी उसकी खूबसूरती उसकी मासूमियत नहीं बदली

सूर्य फ़ौरन अपनी नजर गुमा लेता है

सूर्य ....... इसे वस्त्र का आवरण दो परिधि

परिधि अपनी पलके जपका उस लड़की के पारदर्शी नग्न शरीर पे वस्त्रो का आवरण दाल देती है

परिधि ......अब आप पलट सकते है

लड़की .......आप लोग कोण है आवर ये सब

परिधि ........ मैं परीलोक की राजकुमारी पारिजात हूँ आवर ये मेरे होने वाले पति है तुम्हारा नाम क्या है

लड़की .......मेरा नाम जयलक्मी है

सूर्य ....... तो आप है लक्समी जी जिनकी कभी ये जमीं हुआ करती थी आपके पिता ने हे इस कारखाने को सुरु किया था न

j.laxmi ....... है मेरे पिता जी सेठ लक्समिकान्त जी ने हे ये कारखाना सुरु किया था ताकि लोगो को रोजगार मिले पैर उन्हें क्या पता था जिन्हे वो रोजगार दे रहे है वो इंसान के रूप में हैवान निकालेंगे

सूर्य .......आप हमें विस्तार से बताओ की आखिर हुआ क्या था आपके साथ मैं वादा करता हूँ आपको मैं मुक्ति दिलाऊंगा

j.laxmi ......मुझे मुक्ति नहीं अपने साथ हुए अन्याय का प्रतिशोद चाइये मुझे मुक्ति तभी मिलेगी जब वो आखरी हैवान को अपने हाथो से मरूंगी जिसने बहन बहन बोल कर बहन की हे ेजात लूट भूखे भेड़िया के सामने दाल दिया उसने नोचे के लिए इतने से भी उस शैतान का मन नहीं भरा तो उसने मुझे जिन्दा हे इस जमीं में दफ़न कर दिया

ja.laxmi की आँखे गुस्से से दाहक उठी जैसे वो सब कुछ जला कर रख कर देना चाहती है

सूर्य ....... कोण लोग थे वो जिन्होंने आपके साथ ये सब किया

j.laxmi ........ उस साम भी मैं पिता जी का खाना ले कर घर से निकली थी जैसे हर बार निकलती थी जब भी पिताजी रात को यहाँ काम के चाकर में रुकते थे

पैर उस रात जोरो की बारिश के कारन मैं यहाँ पहुंचने में लेट हो गई आवर पिता जी किसी काम से सहर से बहार निकल गए बिना किसी को बताये ज्यादा बारिश के कारन काम तो बंद कर दिया था पैर वो 6 शैतान यही पे रुके रहे

जब मैं बारिश से बचते हुए यहाँ पहुंची तो पूरी तरह से भीग चुकी थी अगले महीने मेरी सदी होनी थी

जब मैं खाना ले कर यहाँ पहुंची तो काम बंद था आवर वो लोग सरब पि रहे थे उनके से एक था वो शैतान जिसने मुझे अपनी छोटी बहन मन था दीनदयाल दुबे

दीनदयाल ........ लक्समी बहन सेठ जी तो बहार गए है

J.laxmi ...... भैया मुझे पता नहीं था अब्बी तो बारिश भी जोरो से हो रही है

दीनदयाल ......... तुम कमरे में जा कर बैठो बारिश रुकते हे मैं घर छोड़ आऊंगा तुम्हे

j.laxmi ......जी भैया पिता जी तो है नहीं फिर ये खाना आप लोग हे खा लीजिये में कमरे में हूँ

लक्समी वह बड़ा सा टिपिन रख एक कोने की तरफ बने छोटे से कमरे में चल देती है जो यगा का ऑफिस था

निरंतर बारिश के कारन डेरी डेरी ठण्ड भी भाड़ रही थी

दीनदयाल ........ भाइयो दारू तो पूरी हो गयी आवर बारिश के कारन ठण्ड भी भाड़ गयी आग जला को थोड़ी पैर संभल कर कही आग रूही में न लग जाये चारो तरफ फैली हुई है

साथी 1 ......दिनु भाई नशा हुआ नहीं आवर दारू ख़तम भी हो गई मेरे घर में कच्ची सरब की बॉटल पड़ी है कहो तो ले आता हूँ पैर पैसे सबको बराबर देने होंगे

दीनदयान ........ ठीक है ले आ जल्दी से

साथी 1 घर से दो बोतल कच्ची सरब ले आता है

6 लोग मिल कर जल्दी हे सरब ख़तम कर देते है अब इन पे नशा हावी होने लगा था

ीदार लक्समी उस कमरे में अपने भीगे हुए कपडे निकल कर निचोड़ कर वही मेज आदि पे फैला देती है रूम को अंदर से लॉक कर

ीदार बहार दिनु सदन के नशे में उस रूम की आवर बढ़ा जब रूम के पास पहुंचा आवर खिड़की से नजर अंदर गई थो सामने लक्समी कड़ी थी कोई कपडा ओढ़े हुए जो ठीक से उसके कूल्हों को भी नहीं डाक प् रहा था 34 ,35 उम्र का दिनु ( दीनदयाल ) अपने सामने अर्धनग्न महालक्मी को देख उसके अंदर का शैतान जग उठा था

लक्समी ......वो शैतान कब उस कमरे में आया आवर कब मुझे अपनी गिरप्त में लिया मुझे पता भी नहीं चला

मैंने बहुत कोशिश की चीख ने चिल्लाने की एक तो वो अवश्य की अँधेरी रात ऊपर से वो तेज बारिश मैंने कितनी हे कोशिश की अपनी ेजात आबरू बचने की पैर उस दानव के चुंगुल से बच न सकीय मेरे जिसम पे बचे कूचे कपडे भी उस शैतान ने नोच कर फेंक दिए

मेरी ेजात को तार तर कर वो शैतान उठा तो वह उसके हे जैसे 5 आवर शैतान मुझपे भूखे भेडियो का गाल बाल टूट पड़ा मैं चुकती चुस्ती रही पैर उन को मुझे रहम न आया

मैंने उस शैतान दीनदयाल जिसमे दया नाम के चीज़ तक न थी उसके पैरों में गिर भाई बहन के रिश्ते की दुहाई तक दी पैर उसने मुझे पे जरा भी दया न आयी वो लोग तब तक मेरी आत्मा को जख्मी करते रहे जब तक मैं उनके जुलम से बेहोश न हो गई

मुझे बेहोशी में मारा हुआ समाज उन लोगो ने मुझे यही इस जगह दफ़न कर दिया ( ,एक आवर जमीं की आवर इशारा कर के ) मैं कितनी हे देर अंदर हे अंदर इस जमीं से बहार आने की नाकाम कोशिश करती रही तड़पती रही आखिर में मेरी आत्मा ने मेरे सरीर का साथ छोड़ दिया

मैंने कसम खाई की जो भी मेरी मौत का जिम्मेदार है उसने मैं अपने हठी से मरूंगी आवर मुझे कुछ दिन बाद मौका भी मिला उन्हें मरने का पैर उसके साथ हे मैंने अपने हे पिता के इस कारखाने को भी जला दिया 5 को मैंने उस रात मार दिया पैर वो शैतान दीनदयाल दुबे बच निकला मेरी सीमा इस बंद कारखाने तक की है इस लिया वो यहाँ से भाग कर बच गया

सूर्य आवर परिधि की आँखों में आंसू आवर गुस्सा दोनों हे था

सूर्य .......तुम्हारे साथ जो भी हुआ वो बहुत गलत हुआ जयलक्मी जी मैं उसने बदल तो नहीं सकता पैर आपको मुक्ति भी देनी है ताकि फिर से आप जनम ले सके

j.laxmi ......नहीं मुझे उस शैतान को मौत देनी है तभी मैं सन्ति से मुक्त हो पाऊँगी

सूर्य ...... ठीक है अपने छोटे भाई से नहीं मिलोगी क्या आप

j.laxmi .......राजू मेरा गुडू मिलना तो चाहती हूँ पैर मैं अपनी सीमा से बहार नहीं जा सकती हूँ

सूर्य ......अगर मैं मदद कृ तो तुम कही भी आ जा सकती हो जयलक्मी जी चलो मेरे साथ आज तुम अपने परिवार से मिलोगी आवर बहुत जल्द तुम्हारी इच्छा पूरी होगी दीनदयाल को अपने हाथो से मरने की अगर एक हे पल में मर दिया तो उसने तुम्हारी तड़प का अहसास कैसे होगा उसने दर दर कर तड़प तड़प कर मरना होगा

सूर्य आगे भाड़ जयलक्मी की आत्मा का हाथ थम उसे उस गोडाउन से बहार ले आता है

आज तक j.laxmi इस गोडाउन की सीमा से लाख कोशिशों के बाद भी नहीं निकल पाया थी जभी सूर्य उसे ऐसे जे आया जैसे बचे को ऊँगली पकड़ा कर बहार लेट है

परिधि ......... मैं शिल्पकार को वापिस भेज देती हूँ

सूर्य .......उनसे कहो की वो वह सभी को घर दिखा दे जो उन सभी को पसंद हो उस हिसाब से कार्य सुरु करेंगे

परिधि सूर्य शिल्पकार से मिल j.laxmi को साथ ले राजीव के घर की आवर भाड़ गए कोई 45 मिनट्स बाद एक आलिशान घर के सामने सूर्य अपनी कार रोकता है सिक्योरिटी गार्ड सूर्य से परिचय ले अंदर कॉल कर पूछता है आवर गेट खोल देता है

सूर्य कार अंदर बढ़ा देता है

सूर्य .........यही है तुम्हारे राजू उर्फ़ गुड़ी का घर जयलक्मी जी

सूर्य परिधि जयलक्मी तीनो कार से उतर उस आलिशान घर में के भीतर भाड़ गए

सामने हे राजीव आवर उनकी पत्नी बैठे हुए थे आवर साम की कॉफ़ी पे रहे थे

सूर्य ........नमस्ते अंकल जी आंटी जी

राजीव ........ नमस्ते बीटा आओ बैठो बेटी तुम भी बैठो

आंटी जी ......बीटा टिया लोगे या कॉफ़ी

सूर्य ......टाइम तो कॉफ़ी का हे है आंटी जी पैर बहार की गर्मी ने जलसा दिया है जूस चलेगा कोई भी

राजीव ......ये मेरी पत्नी है बीटा विद्या आवर विद्या ये है सूर्य ठाकुर जिन्होंने हमारी वो जमीं खरीदी थी कल

सूर्य ........ आपने पापा को नहीं बताया उस गोडाउन के बारे में अंकल इस तरह किसी को धोखे में नहीं रखना चाइये आपको

राजीव ........बीटा मैं इन सब में नहीं मंटा हूँ वो सब केवल अफवाहे है जो उस गजेंद्र की फैलाई हुई है जो इस जमीं के पीछे पता नहीं कब से पड़ा है

सूर्य ......... नहीं वो अफवाहे सच है अंकल अब जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ सुनने में थोड़ा अजीब लगे पैर सच यही है आपकी एक बड़ी बहन थी न जयलक्मी उर्फ़ लक्समी जो आपको राजू या गुडू कहा करती थी

राजीव ........तुम तुम कैसे जानते हो मेरी डीडू के बारे में बीटा वो तो बहुत पहले हे पता नहीं कहा चली गई बहुत डुंडा पिता जी ने मैंने पैर हमें वो फिर कभी नहीं मिली आवर न कभी कोई खबर आई उनकी

सूर्य .......मिलते वो है जो जिन्दा होते है अंकल फिर उनकी खबर कैसे आती उनकी तो ुशी काली रात ेजात लूट हत्या कर दी गई थी

जब आखरी बार लक्समिकान्त जी के लिया उस बारिश में खाना ले कर गई थी आपकी बहन

राजीव .......नहीं नहीं ये नहीं हो सकता मेरी दीदी के साथ तुम. तुम कैसे जानते हो इतना सब कुछ तुम जूथ बोल रहे हो

सूर्य. .......ये सच है राजीव जी जो भी मैंने बताया एक एक सबद सच है क्युकी ये सब खुद मुझे आपकी बहन जयलक्मी जी ने खुद बताया है कुछ देर पहले हे उस गोडाउन का भूत कोई आवर नहीं आपकी बहन जयलक्मी की अतृप्त आत्मा है जो वर्षों से गुस्से की आग में अपने बदले के लिया तड़प रही है

सूर्य की बात सुन राजीव की आँखों में गुस्सा था वही विद्या की आँखों में दर वो अपनी जगह से कड़ी हो कर राजीव के पास जा बैठी

सूर्य .......गभराये नहीं वो किसी आवर को कोई नुक्सान नहीं पहुचाइए राजीव जी आपको अपनी बहन का विधिवत अंतिम संस्कार कर उन्हें मुक्ति दिलानी होगी आज भी उनका सॉ ुशी कारखाने में दफ़न है

राजीव ....... पैर तुम कैसे ये सब जानते हो आवर कोण है वो लोग जिन्होंने ये सब किया मुझे बताओ मैं उसे जिन्दा नहीं छोड़ूगा जिसने मुझसे मेरी दीदी को चीन

सूर्य ........मैं आत्माओ को देख सकता हूँ उनसे बात कर सकता हूँ आवर दिखा भी सकता हूँ रही बात उन दरिंदो की तो उनके से 5 को ुशी रात उस आग में जला दिया जयलक्मी जी ने बस एक बच कर निकल गया था उस रात

राजीव .........कोण है मुझे बताओ मैं उस हे जिन्दा नहीं चोदहना

सूर्य .......नहीं ये जयलक्मी का खुद का बदला है उन्हें हे लेने दीजिये आप उसका मुकाबला नहीं कर सकते है

राजीव ....... मैं कुछ नहीं करूँगा बस मुझे उसका नाम बताओ मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूँ

सूर्य .......वचन दीजिये आप उस से पन्गा नहीं लेंगे तो हे अगर बचपन तोड़ा तो जिन भू तो को देख सकता हूँ उन्हें आपके पीछे भी लगा सकता हूँ

राजीव ........ठीक है मुझे मंजूर है मैं वचन देता हूँ

सूर्य .......... विकाश मंत्री दीनदयाल दुबे

राजीव .......क्याआ

सूर्य ......है अब मैं चलता हूँ

राजीव ........रुको बीटा क्या तुम सच में मुझे मेरी दीदी दिखा सकते हो

सूर्य .......कब से आपके सामने हे तो बे थी है

राजीव .......क्या ये मेरी दीदी (/परिधि की की आवर इशारा करते हुए )

सूर्य ....... इस सोफे पे है वो अपना हाथ दीजिये मुझे

राजीव डरते डरते सूर्य के हाथ को थम लेता है कुछ हे पल बाद वो डुंडली तस्वीर साफ होती है तो सामने सोफे में भीगे हुए चेहरे के साथ जयलक्मी अपने गुडू को देख रही थी

सूर्य .......यही है आपकी बहन जयलक्मी चाहो तो बात कर सकते हो बस छू नहीं सकते आप

राजीव .......दीदी क्या सच में ये आप हे है

J.laxmi ........है गुडू मैं तुम्हारी दीदी हूँ लक्समी तुम तो बहुत बड़े हो गए हो

राजीव .......है दीदी पैर आप तो आज भी वैसे हे है

J.laxmi ........ भूत हूँ न उम्र नहीं भढ़ती माँ कहा है गुडू

राजीव ....... कुछ साल पहले माँ भी चल बाशी दीदी मुझे अकेला करके अब बस मैं विद्या आवर आपका भतीजा आवर भतीजी हे है

j.laxmi ........ रट नहीं मेरा गुडू तो बहुत बहादुर था आवर देख जैसा इन्होने कहा है वैसा हे करना दीनदयाल को मैं हे मरूंगी अपने इन्ही हाथो से तुझे अपनी दीदी की सौगंध है राजू

राजीव .......जी दीदी विद्या यहाँ आओ

विद्या डरते डरते राजीव आवर सूर्य के पास आती है राजीव जैसे हे उसका हाथ थमता है उसे भी j.laxmi दिखाई देने लगती है दोनों हे काफी देर बात करते है जयलक्मी से अब उनके मन से दर निकल चूका था

कुछ देर बाद सूर्य इस दृश्य को बंद कर देता है

राजीव आवर विद्या ने बहुत हे प्यार से सूर्य आवर परिधि को विदा किया आवर फिर से आने को कहा

सूर्य ने जाते जाते अभी जी सभी यादें दोनों के मंद से मिटा दी

कार में बेथ तीनो निकल गए

परिधि ......आपने उनकी यादें क्यों मिटै

सूर्य ......ये जरुरी था अब उन्हें केवल इतना पता है की उन्हें जयलक्मी का विधिवत अंतिम संस्कार करना है न वो दीनदयाल के बारे में जानते है न बाकि घटना के विषय में

जयलक्ष्मी .........आपने मेरे लिया जो किया उसके लिया आपका बहुत बहुत सुक्रिया

सूर्य ......आपकी एक इच्छा पूरी करदी आपके परिवार से मीका कर उनसे बात करवा कर अब बरी है आखरी इच्छा इच्छा की जिसके लिया आप आज़ाद है दीनदयाल को इतना दर्ज़ की खुद मौत की भीख मांगे सबसे पहले उसका मंत्री पढ़ चाइनो फिर ढेरी धीरे उसकी रातो की नींद आवर दिन का चैन अब जाओ जयलक्मी जी आप आज़ाद हो अगर किसी निर्दोष को सताया तो फिर से वही वापिस पहुंचने जाएँगी ुशी गोडाउन में ुशी सीमा में बंद जाओगी जहा से आज़ाद हुई हो अब हम भी चलते है परीलोक फिर मुलाकात होगी ....................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......................
 
अपडेट. 229

परिधि ......आपने उनकी यादें क्यों मिटै

सूर्य ......ये जरुरी था अब उन्हें केवल इतना पता है की उन्हें जयलक्मी का विधिवत अंतिम संस्कार करना है न वो दीनदयाल के बारे में जानते है न बाकि घटना के विषय में

जयलक्ष्मी .........आपने मेरे लिया जो किया उसके लिया आपका बहुत बहुत सुक्रिया

सूर्य ......आपकी एक इच्छा पूरी करदी आपके परिवार से मिला कर उनसे बात करवा कर अब बरी है आखरी इच्छा की जिसके लिया आप आज़ाद है दीनदयाल को इतना डरो की खुद मौत की भीख मांगे सबसे पहले उसका मंत्री पढ़ चाइनो फिर ढेरी धीरे उसकी रातो की नींद आवर दिन का चैन अब जाओ जयलक्मी जी आप आज़ाद हो अगर किसी निर्दोष को सताया तो फिर से वही वापिस पहुंच जाएँगी ुशी गोडाउन में ुशी सीमा में बंद जाओगी जहा से आज़ाद हुई हो अब हम भी चलते है परीलोक फिर मुलाकात होगी ....................

अब आगे ...........

सूर्यगढ़ ........ साम को सभी परीलोक से सूर्यगढ़ लौट आये विधि आवर गायत्री को वही परीलोक गुरुदेव के सानिध्य में शिक्षा पूर्ण कर स्वयं की कसमताओ को जानने के लिया उन्हें निखारने के लिया

प्रिय जी ....... माँ सा क्या हम कुछ समय के लिया स्वीटी को साथ ले जाये अगर आपकी इजाजत हो तो वैसे भी अभी तक पग फेरे की रसम पूरी नहीं हुई है

दादी जी ....... प्रिय बेटी मुझसे इजाजत लेने की जरुरत नहीं है कन्यादान किया इसका मतलब ये नहीं की आपकी बेटी परायी हो गई किरण आपकी बेटी है उसपे पहले जितना हे अभी भी आपका हक़ है

प्रिय जी ...... फिर हम उसे ले जा सकते है अपने साथ

दादी जी .....नहीं

दादी जी .......मेरा मतलब है पहली बार बेटी अपने पीहर अपने पति के साथ आती है इस लिया कल सुबह खुद सूर्य स्वीटी को सूरजगढ़ ले कर आएगा आवर जब तक स्वीटी की इच्छा होगी वो ख़ुशी ख़ुशी रह सकती है

प्रिय जी ........ठीक है माँ सा जैसा आप कहो

कुछ देर बात कर सभी लोग सूरजगढ़ के लिया निकल गए

संध्याकाल का समय होने में कुछ हे वक़्त शेष था

सूर्य राधा के साथ कुछ एकांत में छठ पे समय बिता रहा था

राधा ....... हमारी सदी कब होगी सूर्य देखो उम्र में सबसे बड़ी हूँ पैर अभी तक मेरा no. नहीं आया

सूर्य .......किसने कहा आपको की आप सबसे बड़ी है उम्र में मिनिषा पारिजात जीनत रिद्धि ये भी तो आपसे कही बड़ी है उम्र में

राधा ........ देखो मजाक नहीं मई हम इंसानो की बात कर रही हूँ न की पारी आवर जिन की

सूर्य ......आप भूल रही है आप में भी वही अंश मौजूद है जो उनमे है खेर ये मेरे हाथ में नहीं है ये सब गुरुदेव के हाथ में है

राधा ........पर ये तो मेरे हाथ में है न

राधा अपना हाथ सीधा सूर्य के निकर में दाल देती है आवर सोये हुए अजगर का फैन अपने नाजुक हाथो में कैद कर लेती है

सूर्य ........सोच लो मेरा कुछ नहीं बिगड़ने है झेलना आपको पड़ेगा हाहाहाहा

राधा ........ ये तो बहुत बड़ा है आवर गरम भी

सूर्य ......इसी लिया कह रहा हूँ संभल कर खेलो

राधा सूर्य को छठ की मुंडेर से लगा उस हे किश करने लगती है

सूर्य तो सुबह से हे हे गरमाये गम रहा था एक तो सुबह सुबह शालिनी जी के हुसैन का कहर बरपा था उसपे सुपर से रही कही कसार जीनत ने पूरी कर दी

सूर्य के दोनों हाथ राधा की मटकी जैसे मगर नरम मांश से भरे कूल्हों को दबोच राधा के कोमल मधभरे प्यालो का रसपान करने लगते है

कोमल कुछ देर उन्हें देखती रही जब न रुका गया तो आ पहुंची दोनों के पास

कोमल ....... बुआ भतीजे इतने भी न खो जाओ की आस पास की खबर हे न रहे

राधा .....ुन्नन ुन्नन आ गई तुम कबाब में हदी बनने कुछ देर रुक नहीं सकती थी क्या कोमल की बच्ची

कोमल ........ हर बार चौकीदारी मैं हे क्यों कृ आपकी

सूर्य ....... एक बात समाज नहीं आती आप दोनों की जब आप दोनों प्लान बना कर ये सब करती हो तो फिर जाग्रति क्यों हो

कोमल .......ये इनसे पूछिए खुद तो मज़े कर लेती है आपके साथ

सूर्य ......अच्छा तो आपको मज़ा करना है मेरे साथ

सूर्य कोमल को अपनी आवर खींच बाओ में भर लेता है

पैर कोमल जल्दी हे सरम से अलग हो जाती है

सूर्य .......क्या हुआ अभी तो आपको मज़ा करने थे न मेरे साथ

राधा ......ठीक है मैं जा रही हूँ तुम लोग करो मज़े तुम्हे तो बाद में देखती हूँ कोमल की बची

कोमल शरमाते हुए राधा को जीब दिखा चिढ़ा देती है

सूर्य ...... आपको राधा को सताने में मज़ा आता है क्या

कोमल खुद से सूर्य को दिवार के सहारे निचे बैठा कर कुढ़ हे सूर्य की गॉड में बेथ जाती है आवर हलके से किश कर अपना सर सूर्य के सीने से लगा लेती है

कोमल ....... हम कहा उन्हें सताते है एक यही तो हमारी बुआ सखी सहेली थी जिनके साथ हम खेलते हुए बड़े हुए है वो हमारी सबसे प्यारी बुआ भी है आवर दोस्त भी बस कभी कभी उन्हें चढ़ना अच्छा लगता है

सूर्य ....... कभी कभी तो आप दोनों को देख कर समाज नहीं आता की आप दोनों जगद रही है या कुछ आवर

किरण ...... ुम्मम्हा ऐसा कुछ नहीं है हमारा नागदा उस गरम ढूढ के उबाल की जैसे है जिसमे ठन्डे पानी के छींटे पढ़ते हे सब हवा हो जाता है

सूर्य ....... मतलब ये सब सदी के बाद भी चलता रहने वाला है

कोमल ....... आखरी साँस तक बस झगड़ने का मुद्दा कुछ नया ढूंढ़ना होगा वैसे हम नागलोक कब चलेंगे

सूर्य ......जब आप कहो तब हे चल देंगे पैर जानती हो न आप ज्यादा समय हम वह रुक नहीं सकते

कोमल ....... हमें बस माँ पिता जी से मिलना है हम जल्द हे लौट आएंगे

सूर्य ......ठीक है हम लोग कल चलते है फिर

कोमल .....हेहेहे कल आपको ससुराल जाना है अपने

सूर्य .....वही तो मैं कह रहा हूँ

कोमल .......मेरा मतलब स्वीटी के साथ सूरजगढ़ जाना है न की नागलोक माँ सा अभी निचे बात कर रही थी तो मैंने सुना

सूर्य .......ठीक है फिर परषो सुबह ध्यान करने के बाद चलते साम को लौट आएंगे

कोमल ......जैसा आप ठीक संजो

सूर्य ......हम्म्म अब निचे चले हम लोग

कोमल .......कुछ देर आवर रुकिए न हमारे साथ

सूर्य कुछ देर आवर कोमल के साथ रुकने के बाद कोमल को गॉड में उठा निचे चल दिया

कोमल .....निचे उतरिये कोई देखेगा तो क्या कहेगा

सूर्य .....यही की अभी से बीबी की सेवा में लगा हुआ है

कोमल .....प्लीज निचे उतरिये माँ ने देखा तो गुस्सा होंगी आपको तो कोई कुछ कहेगा नहीं

सूर्य कोमल को अपने रूम के साथ उतर देता है आवर दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ निचे चल देते है

कुछ देर सभी के बिच सूर्य हाशि मज़ाक कर समय बीतता है शालिनी जी मेनका जी रेखा जी तीनो रसोई में रात्रि के भोजन की तयारी कर रही थी

कुछ देर बाद सूर्य के फ़ोन पे सुनिधि का कॉल आता है तो वह बात करने के लिया हवेली के पीछे की तरफ चल देता

सुनिधि से करीब 15 मिनट्स बात करने के बाद

राधिका को कॉल मिला देता है आवर टहलते हुए हवेली के पीछे के द्वार से बहार निकल गया हलकी फुलकी हसी मज़ाक करते हुए सूर्य हवेली से कुछ दुरी पे खड़े 2 लोगो के पास जा पहुंचा जिनमे से एक तो यही सूर्यगढ़ का रहने वाला था मोहन जो रिश्ते में सूर्य का चाचा लगता था उम्र के हिसाब से पैर दूसरा व्यक्ति यहाँ का नहीं था

सूर्य ...... नमस्ते मोहन चाचा जी कैसे है आप

मोहन .....नमस्ते सूर्य बीटा मैं अच्छा हूँ तुम कैसे हो आवर हवेली में सब कैसे है

सूर्य ......सब अच्छे है चाचा जी ये कोण है आपके साथ इन्हें पहले कभी नहीं देखा यहाँ आस पास

मोहन ....... बीटा मैं भी इन्हें नहीं जनता हूँ बस ठाकुर साहब के बारे में पूछ रहा था तो बस वही बता रहा था

सूर्य ........ है भाई बोलो क्या बात है आवर दादा जी के बारे में क्या जानना है

आदमी ...... जी कुछ नहीं बस इतनी बड़ी हवेली देखि तो पूछ लिया किसकी है इनसे पता चला की ये हवेली यहाँ के ठाकुर जी की है

सूर्य .....कहा से हो आप आवर यहाँ किसके यहाँ रुके हो

आदमी ......जी वो मैं यहाँ सक्तिपुर में अपने दोस्त राणा से मिलने आया हूँ

सूर्य ....... ाचा ठीक है रात होने वाली है चाचा जी आपको भी घर जाना चाइये मैं चलता हूँ

सूर्य वह से निकल गया पैर जाते जाते वयोम को कुछ इशारा दे गया

सूर्य हवेली पहुंचने सबके साथ खाना खाया अब प्रॉब्लम ये थे की दोनों बीबियो में से किसके साथ रात को रहे

ढेरी ढेरी सब एक एक कर अपने रूम में निकल गए

सूर्य भी अपने रूम में निकल आया उसके पीछे हे किरण आवर मानसी भी

किरण ....... आप यहाँ सो जाओ मानसी मैं माँ के पास सोने जा रही हूँ

मानसी ....... आप रहने दो दीदी मैं चली जाती हूँ

सूर्य ........ वैसे मैं क्या कहता हूँ

किरण.......... आप कुछ बोलिये हे मत आपने सोचा भी कैसे ऐसा

सूर्य ........हाहाहाहा ये बेस्ट तरीका है मेरे ख्याल से

किरण ....... नहीं मानसी दी आप यहाँ सो जाइये मई. ऊपर वाले रूम में सोने जा रही हूँ

किरण वह से छठ पे बने रूम में चली गई

मानसी ......... आपको वह दीदी के साथ होना चाइये

सूर्य ......है जनता हूँ मैं आवर वही जाने वाला भी हूँ मेरे आपके पास में बाद में आता हूँ

मानसी .......मुझे इन्तजार रहेगा

सूर्य मानसी को किश कर वह से सुपर चल दिया जहा किरण आराम से लेते हुए थी

किरण .......... आपको वही रुकना चाइये था न मानसी की सदी का आज दूसरा दिन है आवर आप उसने अकेला छोड़ आये

सूर्य ........ पहले अपनी पहली बीबी से प्यार तो कर लूँ फिर दूसरी के पास लौट जाऊंगा वैसे मेरा आईडिया बुरा नहीं था दोनों बिबिया एक साथ एक हे बीएड पे

किरण ....... ची ची मैं किसी आवर के सामने उस तरह से नहीं आउंगी भले हे आप किसी आवर बीबी के साथ अपनी इच्छा पूरी कर लीजिये ये वाली

सूर्य के बीएड पे लेटने के साथ हे किरण अपनी निघ्त्य उतर ब्रा पेंटी में सूर्य के ऊपर आ अपने तराशे हुए नाखुनो से सूर्य के सीने किले चूचक कुरेधने के साथ हे अपनी कमर सूर्य के लिंग पे गिष्टे हुए

डेरी डेरी अपने गुलाबी होंठ सूर्य के होंठो से मिला देती है





डेरी डेरी सूर्य की आँखे बंद हो जाती है जैसे इस मिलान की कमान सूर्य ने किरण के हाथो में सौंप दी हो

किरण के कोमल बदन को सह लेट हुए सूर्य के हाथ कोमल की पेंटी के अंदर उन मुलायम खुले पे जा पहुंचे जो उस छोटी से पेंटी में काशी हुआ थे

जैसे जैसे दोनों के सरीर गर्माने लगे दोनों के जिसम की रगड़ भी भाड़ गई सूर्य ुशी तरह किरण को लिए हुए बेथ गया





हलके गीलेपन के साथ किरण के नाजुक आगे पे सूर्य का शख्त अकड़े हुए लिंग की चमक किरण की आवर आवर उत्तेजित कर रही थी सूर्य कब किरण की ब्रा पंतय से उन खाश नाजुक अंगो को खुली हवा में साँस लेने के लिया कबका मुक्त कर चूका था





किरण ........उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्हह कुंवर जी आपका ये अंग उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह आज कुछ ज्यादा हे गरम लग रहा है

सूर्य ......िस्स्सस्स्स्स इसकी साडी गर्मी उम्म्म्म आराम से अकड़ तुम हे निकल सकती हो सुबह से परेशान कर रखा है

किरण सूर्य की गर्दन में हाथ दाल अपनी कमर को ऊपर कर सूर्य के उस कुटुंबमीनार पे अपनी ृस्टि योनि रख डेरी डेरी अपनी कमर का दबाब बनाते हुए आधे से ज्यादा लिंग थोड़ी मुश्किल से हे सही पैर अपनी गुफा में कैद कर चुकी थी





सूर्य किरण के विपरीत दिशा में फैली उन मटकी जैसे कूल्हों को थम

हलके हलके अपने लिंग को किरण की गुफ्फ़ में अंदर बार करने लगता है

साथ हे किरण के अकड़े चने के डेन सामान उन पिंकस चूचक को अपने मुँह में भर चूसने लगता है

डेरी डेरी किरण भी अपनी कमर को चलते हुए सूर्य के मोठे लैंड को अपनी छूट की अंतिम गहराई तक पहुंचने में सहयोग करने लगती है

पहले जहा किरण के मुख से हलकी सीस करियो के साथ हलकी दर्द भरी आह निकल रही थी वही अब वो दर्द भरी आहे मज़े में बदल कर रूम में किसी मधुर काम संगीत के जैसे सुनाई दे रही थी





जैसे जैसे किरण की छूट सूर्य के लैंड पे अपनी पकड़ मजबूत बना रही थी

वैसे वैसे सूर्य चुदाई की स्पीड बढ़ाते हुए किरण को चरमसुख की आवर ले जा रहा था

दोनों के जिसमे पे a.c के चलने के बावजूद पसीने की कुछ बुँदे उभर आई थी

जैसे हे किरण अपनी छूट से उस गरम लावे का बहाव खोलते हुए सूर्य को अपने बहो में कस्ते हुए बीएड पे निढाल हो गई सूर्य को साथ लिए हुए





कुछ देर बाद किरण की मजबूत पकड़ सूर्य की पीठ से काम हुई तो सूर्य किरण के माथे गले पे उभरी उन पसीने की बूंदो को अपने होंटो से चुस्त हुए

अपने को फिर से हिलना सुरु करता है

अब सूर्य किरण के अंतिम चोर तक बिना किसी परेशानी के पहुंच प् रहा था

कुछ 4,5 मिनट्स में किरण फिर से सूर्य का साथ देते हुए फिर से सूर्य के चेहरे पे अपने चुम्बन की बौछार करनी सुरु कर देती है





किरण ........ उम्म्म्म अह्ह्ह्ह कुंवर जी तोडा आवर तेज कीजिये

सूर्य अपने कण आवर गर्दन पे किरण की आराम सांसो में मिश्रित उन रकत परवाह को गति प्रदान करने वाली चरम उत्तेजित सिसकारियों से अपने भीतर

अजीब से सनसनाहट महसूसक कर रहा था जो कानो से होते हुए सिदा सूर्य के लिंग पे असर कर उसे आवर खूंखार आवर भयंकर बना रही थी अपनी कमर में बकरे किरण के दोनों पैरों के बावजूद भी सूर्य की गति आवर लिंग मुंड की फुलावट बढ़ती जा रही थी





सूर्य ....... अह्ह्ह्हह्हह स्वीटी पता नहीं हमें क्या हो रहा है

सूर्य अपने लिंग में हो रही आस्चर्यजन फुलावट को मह्सुश कर प् राग था साथ हे पहले से कही आदिक अपने सरीर के सम्पूर्ण रकत को अपनी लैंड की नशो में प्रवाहित होता हुआ मह्सुश कर प् रहा था

आज से पहले सूर्य अपने लिंग में इतना तीव्र रकत परवाह पहले कभी मह्सुश नहीं किया था





किरण .......... उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह कुंवर जी सच में आपके लिंग में कुछ परिवर्तन हो रहा है

िस्स्सस्साःह्ह्ह्ह आपके इस अंग की नशे हमारे भीतर रोमांचक बदलाव कर रही है

सूर्य .......सच कहा स्वीटी पता नहीं आज पहलु बार हम इतनी जल्दी अपने चरम की आवर उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह पे पहुंचने रहे है जैसे हमारे लिंग के नशे अभी फैट जाएगी जैसे लिंग से सुनामी निकलने वाली है





किरण आवर ज्यादा स्वयं को रोक नहीं पति है आवर सूर्य लैंड के सुफेदे को अपनी बच्चेदानी में कशते हुए उसपे अपने भीतर समाहित वो गरम चिकनाई युक्त लावे के एक के बाद एक बौछार करते हुए झड़ने लगती

सूर्य भी जंगली घोड़े की तरह हिनहिनाता हुआ अपना सारा वीर्य किरण के गर्भाशय में भरने लगता है

सूर्य के लिंग से इतना आदिक गरम वह अत्यदिक मात्रा में निकले वीर्य से जैसे किरण आवर सूर्य मदहोशी में मूर्छित हे हो उठे हो

दोनों की पलके अपने आप हे बोजिल हो गई तभी अंतरिक्ष के एक कोने से एक तेज ऊर्जा पुंज पार्थवी के सीमा कक्ष में प्रवेश करता है आवर रौशनी की स्पीड से एक आवर निकल जाता है

कुछ हे देर बाद वह ऊर्जा पुंज किरण के गर्भ में समाहित हो गया

सूर्य आवर किरण दोनों हे इस बात से अनजान किसी आवर हे लोक में विचरण कर रहे थे

करीब आधे घंटे बाद सूर्य किरण के बहो से आज़ाद हो किरण को बाथरूम ले जा कर उसे अच्छे से साफ कर वापिस बीएड पे लिटा किरण को वो पतली से निघ्त्य पहना कर अपने सीने पे सुला लेता है

किरण मीठे सपनो में खोये कब सूर्य की बहो में सुकून से सो गई

रात करीब 1 से कुछ ऊपर सूर्य ठीक से किरण को सुला कर निचे मानसी के रूम में पहुंचा जो सूर्य का इन्तजार कर रही थी अभी भी

सूर्य एक राउंड मानसी के साथ करने के बाद उसे किरण के साथ लिटा कर खुद शालिनी जी के पास जा लेता

सुबह जब शालिनी जी की आँखे खुली तो सूर्य किसी छोटे बचे के जैसे उनके आग़ोश में लेता हुआ था

सुबह सुबह सूर्य को देख शालिनी जी के चेहरे पे एक मोहक मुस्कान तैर गई

उन्होंने सूर्य को अपने बहो में लेते हुए सूर्य के सीने पे लेट फिर से अपनी आँखे बाद कर ली

सूर्य की जब अपने समय पे आँखे खुली तो शालिनी जी जी का एक उभर अपने सीने पे मह्सुश हुआ सीने पे एक हाथ जांघों के बिच शालिनी जी का पेअर ठीक उसके लिंग को दबाये हुए पड़ा था

सूर्य शालिनी जी के माथे को चुम उन्हें उठता है क्यों की आज से शालिनी जी की पारी ऊर्जा को जागृत करने के लिटा उन्हें ध्यान आराम करना था

कुछ सलाह के बाद शालिनी जी भी उठ कड़ी हुई आवर सूर्य का मुँह मीठा कर वो सीधा बाथरूम में चली गई

सूर्य सभी को उठा खुद भी फ्रेश हो जंगल पहुंच शालिनी जी की कुण्डिलीन चक्र जागृत करने में आवर ध्यान लगाने में सहायता करता है इस दौरान बाकि सब पहले ध्यान करते है फिर गुरु नित्यानंद से सस्त्र शिक्षा गठन करते है दिन पार्टी दिन गुरु नित्यानंद की शिक्षा आवर कठिन होती जा रही थी आवर लड़किया भी पुरे उत्साह से भाग ले रही थी

आज योध शिक्षा का समय दुगुना यानि की 4 हर कर दिया था

पैर आज वो पहले वाली थकावट किसी के चेहरे पे देखने को नहीं मिली

शालिनी जी इस दौरान केवल ध्यान हे करती रही अपनी कुछ ऊर्जा को नियंत्रित करने में वो भी सफल रही

सुबह करीब 9 ऍम को सूर्य सभी के साथ घर वापिस लौट आया सूर्य ने जाने से पूर्व शालिनी जी के अंश को वह छोड़ दिया था ताकि शालिनी जी का राज़ राज़ हे रहे केवल लड़किया हे जानती थी की शालिनी भी आज उनके साथ ध्यान कर रही थी

सूर्य सभी के साथ नास्ता कर त्यार हो शालिनी जी किरण अलीना को साथ ले सूरजगढ़ निकल गया

पग फेरे की रसम पूरी करने अब से कुछ समय किरण वही रहने वाली थी अपने माता पिता के साथ केवल सुबह में वो योध अभ्यास आवर ध्यान के लिया हे सीधा जंगल आने वाली थी

सूर्य किरण शालिनी जी अलीना को देख सभी बहुत खुश थे एक साथ दो दो बेतिया जो अपने पीहर आई थी

सूर्य का सत्कार भी एक बहुत अच्छे से एक जमाई के रूप में हुआ

सन्ति जी प्रिय जी ने सूर्य किरण अलीना शालिनी जी चारो का तिलक कर स्वागत किया

दिल्ली ..............

जयलक्मी सूर्य के सहायता से अपनी आज़ादी प् दीनदयाल की घर पबूची जहा दीनदयाल के अलावा सभी मौजूद थे

दीनदयाल अभी किसी राजनीतिक मीटिंग के चलते बहार था

अब जयलक्मी को एक ऐसा सीकर चाइये था जिसके शरीर को अपनी इच्छा अनुसार कण्ट्रोल कर दीनदयाल का चैन आवर सुकून चीन सके

आवर उसे वो सीकर मिला भी तो दीनदयाल की पत्नी जो संभव से हे कड़ियल आवर घमंडी थी

जयलक्मी ....... शैतान दिनु तुम्हारे उलटी बिनती सुरु मेरा बदला आज से हे सुरु होता है बस देखता जा कैसे तुम्हे तुम्हारे हे परिवार की नजरो में गिरती हम पैर उस से पहले तुम्हे तुम्हारे मंत्री पद से गिरती हूँ

जयलक्मी साम तक का इन्तजार किया साम को दीनदयाल चंद्रु के साथ घर लौट आया

लक्समी दीनदयाल को देखते हे गुस्से में आ जाती है पैर अभी के लिया संत रहना हे बेहतर समजा

सभी रात को जब खाना खा कर अपने अपने रूम में चल दिए सोने के लिया तब लक्समी ने दीनदयाल की पत्नी कमला के सरीर में प्रवेश कर उसे अपने कण्ट्रोल में कर लेती है

दीनदयाल अपने रूम में जा कर लेट जाता है है कुछ देर बाद कमला भी वह आती है आवर रूम को बंद कर लेट जाती है

आधी रात के करीब दीनदयाल की चीखते हुए आँखे कुल जाती है जब अपने गलो पे जोरदार थप्पड़ मह्सुश करता है

जल्दी से खड़ा हो लाइट ों कर देखता है तो उसकी बीबी आराम से उसके बगल में सोये हुए थी

दीनदयाल अपनी बीबी की तरफ बढ़ा उसे उठाने के लिया पैर वो अपने जगह से हिल भी नहीं प् रहा था जैसे किसी अदृश्य सकती ने उसे बंद दिया हो

दीनदयाल जोर जोर से अपनी बीबी को आवाज देता है पैर जैसे गले से सिर्फ हवा हे निकल रही थी आवाज की जग्गा से

दर आवर गब्रहत के मारे दीनदयाल पूरा पसीने से भिगोये चूका था

तभी उसके पिछवाते पे किसी ने जोर से लात मरी

दीनदयाल सीधा बीएड से जा टकराया चीखा पैर आवाज जैसे हेल में हे ातक कर रह गई हो

किसी तथा हिमत कर जब उठा आवर पलट कर देखा तो वह कमला कड़ी थी

दीनदयाल की अब जो गांड फटी टी इस कदर फटी की पाजामे में हे उसकी सुसु निकल गई

क्युकी उसकी आँखों के सामने एक नहीं बल्कि दो दो कमला थी एक जो आराम से बीएड पे लेते हुए थी दूसरी जो उस से कुछ दूर कड़ी मुस्कुरा रही थी

कमला. ....... हेहेहे दिनु अपनी मौत को देख पजामा हे गिला कर दिया अभी तो मैंने सुरु भी नहीं किया

दीनदयाल ........को कोंण हो तुममम मुझे मैंने क्या बिगाड़ा है

कमला ....... देख मुझे गौर से मैं तुम्हारा हे किया वो पाप हूँ जिसे तुमने सालों पहले अंजाम दिया था तब तू दिनु था आज दीनदयाल बन गया

ढेरी डिग्री कमला का चेहरा बदल कर डरावना किसी चुड़ैल जैसा होने लगता है दीनदयाल जैसे हरामी कड़ियल शैतान की भी टंगे कैंप उठी जब कमला किसी चुड़ैल के जैसे दिवार पे चढ़ अपने नुकीले दन्त बहार निकल दीनदयाल पे जप्ती तो दर के मरे दीनदयाल बेहोश हे हो गया

लकमी ........ आज के लिया इतना काफी है बाकि सुबह तुम्हे फिर से झटका देने वाली हूँ दीनदयाल उर्फ़ दिनु उर्फ़ शैतान ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................

कल के लिया माफी चाहता हूँ दोस्तों कप दोपहर को अचानक से तबियत ख़राब हो गई थी

तो हॉस्पिटल्स होना पड़ा वह पता चला की शरीर में पानी की कमी आने के कारन उलटी आवर चाकर आ रहे थे

2,4 दिन ग्लूकोस चढ़वानी होगी ऐसे में रोज अपडेट नहीं दे पाउँगा हाथ में सेलाइन नीदडले लगी है जिसके चलते टाइप करने में प्रॉब्लम हो रही है ...........
 
अपडेट 230

कमला. ....... हेहेहे दिनु अपनी मौत को देख पजामा हे गिला कर दिया अभी तो मैंने सुरु भी नहीं किया

दीनदयाल ........को कोंण हो तुममम मुझे मैंने क्या बिगाड़ा है

कमला ....... देख मुझे गौर से मैं तुम्हारा हे किया वो पाप हूँ जिसे तुमने सालों पहले अंजाम दिया था तब तू दिनु था आज दीनदयाल बन गया

ढेरी डेरी कमला का चेहरा बदल कर डरावना किसी चुड़ैल जैसा होने लगता है दीनदयाल जैसे हरामी कड़ियल शैतान की भी टंगे कैंप उठी जब कमला किसी चुड़ैल के जैसे दिवार पे चढ़ अपने नुकीले दन्त बहार निकल दीनदयाल पे जप्ती तो दर के मरे दीनदयाल बेहोश हे हो गया

लकमी ........ आज के लिया इतना काफी है बाकि सुबह तुम्हे फिर से झटका देने वाली हूँ दीनदयाल उर्फ़ दिनु उर्फ़ शैतान ................

अब आगे ..........

सूरजगढ़ .......... दोपहर के भोजन के बाद सूर्य स्वीटी सपना के रूम में अकेले लेता हुआ था

ससुराल में पहली बार में जमाई का स्वागत सत्कार कुछ ज्यादा हे हो गया अपनी दोनों ममी जी उर्फ़ सासु माँ ने अपना प्यार सूर्य पे कुछ ज्यादा हे लुटा दिया जिसका असर सूर्य के पेट पे हो रहा था

दोनों मामियो ने जैम कर गाला भरने तक सूर्य को अपने हठी से भोजन कराया जिसके चलते सूर्य अब इस वक़्त बीएड पे अपनी पेण्ट का हुक खोले लेता था

वो चाहता तो खुद को ठीक कर लेता पैर ऐसा करने से दोनों मामियो के प्रेम आवर सनेह का अपमान होता भले हे प्रेम कुछ ज्यादा हे दिखा दिया हो उन्होंने

अभी सूर्य लेता हुआ था तभी उसे वयोम की याद आती है की वयोम को सूर्य ने कोई काम सौंपा था

सूर्य .......वयोम भाई कहा हो सामने तो आओ

कुछ हे देर में वयोम सूर्य के सामने था

सूर्य ....... वयोम भाई पता चला कोण था आवर क्यों हवेली पे नजर रखे हुए था वो

वयोम ....... है भाई पता चला पैर ये काम तो आप भी चुटकी बजा कर कर सकते थे न फिर मुझे हे उसके पीछे क्यों लगाया आपने

सूर्य ...... स्वीटी के वादे ने मेरे हाथ बंद रखे है क्या करता फिर मैं

मैं अपनी कोई भी ऐसे सकती उसे नहीं कर सकता जिस से मैं उसके मंद में जनकः सकता या उसके विचार पद सकता

वयोम ......... मतलब वो मशहूर कहावत सच है

सूर्य ......... कोनसी भाई पहेली न बजा एक तो दोनों मामियो ने गले तक भर कर खाना खिला दिया उस से परेशान हूँ ऊपर से तुम कहावत सुना रहे हो

किरण ...... ये लीजिये निम्बू पानी आवर किसने कहा था आपको इतना खाना खाने को कुंवर जी मुम्मो को रोक भी तो सकते थे कैसे हो वयोम भाई

वयोम ......मैं ठीक हूँ आप कैसे है

किरण .....मुझे क्या होना है मैं भी ठीक हूँ आप लोग बात कीजिये मैं माँ के पास जा रही हूँ

किरण के जाते हे वयोम उस निम्बू पानी में कुछ पाउडर मीका देता है.

वयोम .....इस से खाना जल्दी पांच जायेगा भाई आवर आपका शक सही था

सूर्य ....... तो कुछ बताओ भाई किसकी समेत आई है जो मरने के लिया यहाँ तक आ पहुंचा

वयोम .......... ये बाँदा तो केवल आपकी फॅमिली की जानकारी जुटाने आया था दिल्ली से किसी ने ये काम दिया है इस हे भी नहीं पता कोण है वो

उसे दिल्ली से किसी ने कांटेक्ट कर पैसो के बदले आपकी फॅमिली जानकारी मांगी

सूर्य ...... क्या राणा उसके बारे में पहले से जनता था की वो जो उसका दोस्त है वो किस काम से यहाँ आया है

वयोम .......नहीं मैंने राणा का मंद रेड किया है उसे इस बारे में बिलकुल हे नहीं पता था की उसका जो दोस्त है वो यहाँ किस इरादे से आया था

सूर्य ....... आया था मतलब

वयोम ......हाहाहाहा जब उसने अपने यहाँ आने का असली कारन राणा को बताया तो राणा ने उसकी जो ढुलाई की पूछो मत भाई बस हड़िया तोड़ी नहीं बाकि कुछ सही सलामत छोड़ा नहीं ये देखो आप भी

वयं अपने मैजिक से कल रात का दृश्य चला देता है जिसमे राणा अपने दोस्त को ले कर निकला था

राणा .......मनोहर तुम यहाँ कैसे वो भी इतने साल बाद न कोई फ़ोन कॉल न कोई खबर अचानक से यहाँ पे

मनोहर .......यार एक काम से उदार आना हुआ था तो सोचा तुम भी तो यही आस पास रहते हो no. आवर पता तो था नहीं मेरे पास पैर तुम्हारे नाम के अलावा जिसके पास तुम काम करते हो उसका नाम याद रहा दुर्जन ठाकुर यही नाम बता कर मैंने यहाँ किसी से तुम्हारे बारे में पूछा तो उसने बताया की तुम सक्तिपुर के रहने वाले हो

राणा ....... पैर तुम छोटे ठाकुर के साथ क्या कर रहे थे

मनोहर .....कोण वो लड़का अरे यार वो तो मैं बस वह उस आदमी से बात कर रहा जिसका नाम मोहन था तभी वो वह आ पशुचा फ़ोन पे बात करते हुए बातो बातो में मैंने तुम्हारा जीकर कर दिया तो उसने तुम्हे बुक लिया आवर कुछ नहीं

राणा ......देख मैं तुम्हे अच्छे से जनता हूँ मनु कुछ भी ताकत करने का सोचना भी मत क्यों की यहाँ अब पहले जैसा कुछ भी न है

मनोहर ....... पहले जैसा नहीं रहा है मतलब क्या है मैं कुछ समजा नहीं यार

राणा ......... अब यहाँ कोई गलत डंडा नहीं होता पहले जो कुछ भी 2 no. होता था छोटे ठाकुर ने वो जेड हे ख़तम कर दी अब न वो पहले वाली दुश्मनी है आवर न दुश्मनी निभाने वाले लोग तुम यही रुको मैं खाना ले कर आता हूँ फिर खेत में चलते है वही दारू पार्टी करते है

राणा मनोहर को चढ़ घर जा वह से दोनों के लिया खाना आवर सरब के बॉटल ले कार फिर से स्टार्ट कर अपने खेत की आवर निकल गया जो सक्तिपुर से बहार की तरफ था जगा राणा ने 2 कर्मो का एक घर बना रखा था जब कभी जरुरत पड़ें पे या पार्टी करने के लिया

राणा रूम का लॉक खोल मनोहर को अंदर लेता है

मनोहर ......... यार राणा एक बात बता ये सब इतनी जल्दी बदल कैसे गया जबकि मैं जनता हूँ तुम्हारी आवर तुम्हारे ठाकुर की इस तरफ बहुत मजबूत पकड़ थी न

राणा ......है पैर गलत आदमी से पन्गा लेना भरी पद गया

मनोहर ......क्या मतलब

राणा .......दुर्जन ठाकुर आवर सकती ठाकुर दोनों की छोटे ठाकुर ने बलि चढ़ा दी

मनोहर .......क्या उस बचे ने आवर किसी ने कुछ नहीं किया

राणा ......मुँह संभल कर मनोहर दिखने में बचा है पैर है सबका बाप सक्तिपुर आवर सूर्यगढ़ की दुश्मनी तुम नहीं जानते ुशी दुश्मनी के चलते दुर्जन सिंह आवर सकती सिंह ने जिसने तुम बचा कह रहे हो बचा समाज कर भिड़ने चले थे हजारो की भीड़ के सामने एक गर्दन ुधा दी तलवार से दूसरे का दिल हे चिर दिया

मनोहर ......यार देखने में तो बचा लगता है वो इतना खतरनाक भी होगा मुझे नहीं लगा था अच्छा हुआ जो समय से बता दिया वर्ण मेरा भी हल बुरा होने वाला था

राणा ......हाहाहा वो उनने हे सजा देता है जो गलत हो आवर उसके परिवार को नुकसान पहुंचने या बुरी नजर उठा कर देखता है ले पेग पि

दोनों आराम से बात करते हुए पेग पिने लगते है दोनों रक बॉटल खली कर राणा द्वारा घर से लाया भोजन कर बहार खुले में खत बिछड़ आराम करते हुए बात करते रहे

मनोहर ......वैसे भाई ये तुम्हारे छोटे ठाकुर के परिवार में कोण कोण है हवेली देखि मैंने अच्छी पार्टी लगती है

राणा .......अबे चूतिये तेरी सुई वही क्यों अटकी वैसे बड़े ठाकुर विक्रम सिंह सूर्यगढ़ आवर उस हवेली के मुखिया है उनके दो बेटे आवर एक बेटी है बड़ा बीटा महेंद्र सिंह ठाकुर बिज़नेस देखता है खुद का छोटा बीटा शिव ठाकुर कुछ समय पहले हे विदेश से आया है यहाँ वो भी अब यही बिज़नेस करता है बेटी मेनका ठाकुर फ़िलहाल यही पे है आवर एक बेटी आवर है जो बड़े ठाकुर ने गौड़ ले हुए है दोनों बहिओ में शिव ठाकुर को हे बीटा है जिस से तुम मिले थे सूर्य शिव ठाकुर महेंद्र ठाकुर की एक बेटी है

मनोहर .......परिवार तो ज्यादा बड़ा नहीं है

राणा .....अबे चूतिये सूर्यगढ़ सूरजगढ़ दोनों का वरिष्ठ सूर्य ठाकुर है आवर सक्तिपुर में भी उसकी इतनी मजबूत पकड़ है की सक्तिपुर का ठाकुर परिवार उसे बेटे से भाड़ कर मंटा है

मनोहर .......... यहाँ के ठाकुर को मरने जे बाद भी उसको बेटे जैसा मन

राणा .....है क्यों की वो अच्छा के लिया अच्छा है ब्यूरो के लिया बुरा चल अब सो जा

मनोहर .......देख यार मैंने न तुमसे जूथ बोलै है मैं यहाँ शिव ठाकुर की फॅमिली की जानकारी लेने आया हूँ मेरे बॉस को किसी ने बड़ी रकम दी है शिव ठाकुर की कुंडली निकलने के लिया

राणा .......... मादरचोद खुद तो मरेगा हे मुझे भी मरवाएगा भाड़ में गई दोस्ती निकल यहाँ से अभी के अभी उसे भटक भी लगी की तेरे इरादे क्या है तो तेरे साथ साथ मुझे भी जिन्दा चिर देगा भाग भोस्ड़के

राणा इस बिच 2,3 लाठ मनोहर को जड़ देता है

मनोहर .....भाई मेरे बात तो सुन

राणा .....बोलै न मादरचोद निकल अभी यहाँ से मुझे पता होता की तू किस इरादे से आया है तो मैं वही तेरे गांड मर देता

मनोहर ......... 10 लाच दूंगा तुझे

बस यही गलती करदी मनोहर ने राणा को आंकने में

पास में पड़ी तक़रीबन 4 फिट की लाठी ले राणा ने जो मनोहर की सुताई की बस हड़िया टूटी नहीं बाकि कोई भी हिंसा बिना मरमत के न बचा

राणा ........ राणा का ईमान खरीदेगा तू वो भी चाँद कागजो में राणा का इमां इतना भी कमजोर नहीं आवर उस परिवार के लिया तो मौत मंजूर है पर गद्दारी नहीं

राणा मनोहर को उठा कार की डिक्की में दाल दौड़ा देता है सिटी 1 की आवर

आवर सीधा ठाणे में जा कर कार रोकता है रात करीब 12 बजे जब राणा पुलिस ठाणे पहुंचा तो कुछ हवलदार आवर ऐसी हे पुलिस स्टेशन में मौजूद थे सी पुलिस स्टेशन में मौजूद नहीं था

राणा मनोहर को ग्रसित कर ठाणे में ले कर जाता है आवर ऐसी को पूरी जानकारी देता है

सूर्यगढ़ के ठाकुर का नाम शामिल होने पे ऐसी फ़ौरन अपने सुपीरियर अफसर को इसकी जानकारी देता है

कुछ देर बाद बात कर मनोहर को लॉकअप में दाल दिया जाता

ऐसी ....... आप जा सकते है कुछ भी जरुरत हुई to.ham आपसे कांटेक्ट करेंगे

राणा ....... जी इंस्पेक्टर साहब

राणा जैसे आया वैसे हे निकल गया

सूर्य ....... हाहाहाहा राणा ने तो अच्छी खातिरदारी की मनोहर की खिला पीला कर ढुलाई की

वयोम ....... मैं चलता हूँ इसके बॉस आवर उसकी खबर निकलने

सूर्य ...... ठीक है मैं भी जल्दी हे दिल्ली आता हूँ तब ताज सब की कुंडली निकालिये आप

दिल्ली ........

सुबह कमला की जब आँखे खुली तो दिनु बीएड के एक कोने में सिमटा हुआ बैठा था

कमला. ...... आज आप जल्दी हे उठ गए पैर आप इस तरह से क्यों बे थे हुए है

दिनु के महम में अभी भी वो डरावना मंजर गम रहा था कमला उठ कर बाथरूम जा हाथ मुँह धो कर बहार आई तो अभी भी दिनु ुशी तरह रेशमी कम्बल ओढ़े हुए बैठा था

ये कमला की थोड़ा अजीब लगा जैसे हे कमला आगे बढ़ दिनु को हाथ लगाती है दिनु का बदन गरम हो कर कैंप रहा था

जैसे हे दिनु ने कमला के चेहरे को देखा फ़ौरन बीएड से कूद कर दूर हैट गया क्यों की उसे दर की वजह से अभी भी कमला के चेहरे में वही दरवाजा चेहरा नजर आ रहा था

लक्समी ...... सुबह सुबह थोड़ा पार्षद तो ले ले दिनु

लक्समी कमला के सरीर में प्रवेश कर जाती है

कमला .......हेहेहे दिनु अपनी बीबी के गले नहीं लगोगे क्या

इतनी कर्कश आवाज थी कमला (लक्समी ) की दर के मरे दिनु ने अपने कण बंद कर लिए

कमला आगे बढ़ दिनु की गर्दन पकड़ उसे उठा के बीएड पे दे मरती है

दिनु अपने हाथ जोड़े देता है

दिनु ...... मुझे छोड़ दो मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूँ

कमला ......तुमने जिन्हे मारा जिनकी ेजात कुटी क्या तुम्हारे सामने उन्होंने हाथ नहीं जोड़े थे या उन्होंने तुम्हारे सामने जान की भीख नहीं मांगी थी हर एक एक पाप की सजा भोगी होगी तुम्हे

चटक चटक दिनु को दोनों गाल कमला किसी टेबल के जैसे बजने लगती है दिनु रोने के सिवाय कुछ भी नहीं कर प् रहा था

कमला ने थापर भी ऐसे मरे की दर्द तो हो पैर नीसाण न दिखे

कुछ देर बाद लक्समी कमला के सरीर से निकल गई

पैर तब तक दिनु की अचे से बजा चुकी थी

कमला .....ाजी आपको क्या हुआ आप रो क्यों रहे है

आपको तो तेज बुखार है मैं अभी डॉक्टर को बुलाती हूँ

कमला जल्दी से डॉक्टर को कॉल कर फ़ौरन आने को कहती है

आवर बहार जा अपने बेटे बहु को दिनु की खबर देती है

कुछ देर बाद डॉक्टर आ दिनु का चेकउप करता है

डॉक्टर ......जबरन की जरुरत नहीं है सायद कोई डरावना सेना देख लिया जिस से इनका बप हीगे हो गया ुशी के चलते इन्हें बुखार हो गया

जैसे हे डॉक्टर इंजेक्शन त्यार कर दिनु को लगाने आगे बढ़ा डॉक्टर के पीछे लक्समी आ कड़ी होती है हाथ में एक तेज धार खजर लिए

डॉक्टर के पूछे से वो डरावना हस्ता हुआ चेहरा हाथ में खबर लिए अपनी आवर आता देख दिनु चीख कर कमरे में उदार से उदार भागने लगता है

दिनु ....... मुझे मत मारो बागवान के लिया छोड़ दो मुझे मैंने कुछ नहीं किया है

लक्समी ......देख मुझे मैं तुम्हारा वो पाप हूँ जो तुम्हारे सामने आ खड़ा हुआ है

इस बार लक्समी अपने वास्तविक रूप में ीनु के सामने आ खुदी हुई

डॉक्टर ....... अगर ये ऐसे हे करते रहे तो जल्दी हे पागल हो जायेंगे मेरे ख्याल से इन्हें किसी अचे दिमागी डॉक्टर को दिखाना चाइये इनके दिमाग में किसी तरह का दर बेथ चूका है उसे नहीं निकला तो इनकी हालत आवर बिगड़ती जाएगी

लक्समी ......कुछ याद आया मुझे देख कर हरामी मैंने तुम्हे अपना बड़ा भाई मन आवर तुमने क्या किया

दिनु .......... La...lax...mi तुममम

लक्समी .......लक्समी नहीं जयलक्मी तुमने तो मेरी ेजात लूट कर कर जिन्दा हे गड दिया था पैर उस उपरवाले ने तुझे सजा देना मेरे हाथो लिखा था जो उस फ़रिश्ते को मुज तक भेजा मुझे आज़ाद करने मेरे दर्द को काम करने

दिनु किसी पत्थर की तरह हाथ जोड़े खड़ा था उसके मुँह से सनद तक नहीं निकल रहे थे

डॉक्टर आगे बढ़ उसे इंजेक्शन लगा देता है

देखते हे देखते दिनु की आँखे बोजिल हो उठी

दिनु के बेटे ने उसे संभल कर बीएड पे लिया आवर बहार चला गया

कमला दिनु के पास हे बैठी थी हुए आंसू बहा रही थी

वही दिनु का बीटा बहार किसी अच्छे दिमागी डॉक्टर के बारे में पता कर रहा था

लक्समी ........ जहा ले जाना है ले जाओ पैर मुझसे इस हे बचा नहीं सकते

जहा भी जाओगे मुझे वह पाओगे

दोपहर को दिनु की जब आँखे खुली तो वह एक प्रिवेट हॉस्पिटल के रूम में था

दिनु ......लक्समी वो मुझे मार डालेगी

कमला ......क्या हुआ जी कोण लक्समी आपको कुछ नहीं होगा

दिनु .......नहीं वो आ गई है मुझे मरने मैंने उसे मारा था वो मुझे मरे बिना नहीं जाएगी

कमला ....... मैं हूँ न आपको कोई नहीं मरेगा संत रहिये आपने जरूर कोई डरावना सपना देखा है जी

डॉक्टर .....hello मंत्री जी आपकी नींद पूरी हुई अब आपको कैसा फेल हो रहा है

दिनु...... मुझे यहाँ से जाना है है डॉक्टर वो मुझे मरने यहाँ भी आ जाएगी

लक्समी .....मैं यही हूँ दिनु

लक्समी की आवाज सुन दिनु अपने पीछे देखता है जहा लक्समी कड़ी थी

दिनु .......मुझे माफ करदी मुझसे गलती हो गई

लक्समी ....... अगर एक मेरे साथ तुमने ये किया होता तो गलती मन भी लेती की तुमसे नशे में सब हुआ तुमने तो मेरी ेजात लूटी हे पैर उनने भेडियो को भी मुज पे छोड़ दिया न मैं पहली थी आवर न आखरी जिसके साथ तुमने ऐसा किया गलती नहीं पाप किया तुमने

दिनु ......... मुझे एक मौका दो मैं खुद को सुधर लूंगा फिर से कोई पाप नहीं करूँगा

लक्समी ....... तुम वो नाग हो जो ढूढ पिलाने वाले को हे दस्ते हो फिर भी एक मौका देती हम अपने सभी गुनाह मीडिया के सामने काबुल कर लो तो जान बक्श दूंगी

दिनु ........ नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता ऐसा किया तो मुझे जनता हे मार देगी

डॉक्टर ...... ी थिंक इनका मानसिक संतुलन बिगड़ चूका है जल्द से जल्दी इनका ट्रीटमेंट सुरु करना होगा हमें

दिनु सोन .......ठीक है डॉक्टर आप अपना इलाज सुरु कर सकते

डॉक्टर के इसारे पे दो वर्ड बॉय मंत्री महोद्य को साथ ले जोर जबरदस्ती एक रूम में ले जाते है जहा उनका ट्रीटमेंट सुरु होने वाला था

लक्समी मुस्कुराते हुए वह पहुंची डॉक्टर ने मंत्री जी से जो भी सवाल करता लक्समी दिनु को विवश कर उसके मुँह से गलत जवाब दिलाती कुछ 20 मिनट्स बाद डॉक्टर बहार निकला उस रूम में

दिनु सोन ...... डॉक्टर पापा को क्या हुआ कुछ पता चला

डॉक्टर ...... मुझे आपको कहते हुए अफसोश हो रहा है पैर यही सच है उनपे शॉक थेरेपी का इस्तेमाल करना होगा वो अपना दिमागी संतुलन पूरी तरह से खोते जा रहे है

कमला ...... नहीं डॉक्टर हम किसी आवर को दिखा लेते है

डॉक्टर ....... आप जहा चाहे दिखा सकती है मैं आपको रोकूंगा नहीं

दिनु सोन ......आप ट्रीटमेंट सुरु कीजिये डॉक्टर

ीदार बहार मीडिया में मंत्री जी के पागलपन की खबर लग चुकी थी ऐसी खबरे मीडिया से कहा चुप सकती है इनका नेटवर्क पुलिस से भी तेज जो होता है

साम को हे मंत्री जी की शॉक थेरेपी सुरु हो गई

दिनु को एक बीएड पे हाथ पेअर बंद मुँह में कोई चीज़ लगा दिमाग में बिजली के जटके दिए जा रहे थे

इस तरह दिनु को तड़पता देख लक्समी को बहुत सुकून मिल रहा था

डॉक्टर बार बार दुनि के मुँह से वो कपडे नुमा चीज़ निकल सवाल करता तो लक्समी हर बार गलत जवाब दिलवाती

1 हर चले इस शॉक थेरेपी ने दिनु की दुनिया हे गुमा कर रख दी उसे हर अपना किया पाप याद आ रहा था जिन्हे करके वो भुला चूका था

आखिर में जब दिनु से आवर बर्दाश्त न हुआ तो बेहोशी में चला गया

वार्डबॉय उसे एक रूम में ले जा कर बीएड से बंद कर बहार चले गए

लक्समी साम को राजीव के घर की आवर निकल गई आज उसके चेहरे पे सुकून था जैसे उसकी आत्मा के जख्मो पे किसी ने मरहम लगा उसे ठंडक पहुंचे हो

सूरजगढ़ ...........

सूरजगढ़ हवेली में रात को आज चहल पहल बढ़ चुकी थी आस पास की महिलाये भी आज हवेली में मौजूद थी

सभी क्र खाना खाने के बाद लोक गीत से हवेली गूंज उठी

जिनमे बिच बिच में सूर्य के परिवार के नाम पे मस्तीभरी खिचड़ी भी शामिल थी

रात 12 बजे के करीब सभी महिलाएं अपने अपने घर को लौट गई

किरण पहले हे सूर्य को बता चुकी थी की वो शालिनी माँ के साथ सोयेंगी आज साम को जोरावर जी भी लौट आये थे संजय तो रहते हे घर पे थे सूर्य छठ पे सोया हुआ ठगा अभी कुछ देर पहले हे आँख लगी थी उसकी

पैर अपने सीने पे वजन मह्सुश कर सूर्य की आँखे खु गई

सपना ........ क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे है आप

सूर्य ...... उम्मीद तो थी आपके आने की पैर इतनी जल्दी

सपना ........ ज्यादा इन्तजार मरवाना अच्छा नहीं लगा जीजा श्री

सूर्य ......... अच्छा तो आप साली बन कर आई है

सूर्य पेट पे बैठी सपना के कूल्हों को दबोच थोड़ा जोर से दबा देता है

सपना .......आआह्ह्ह क्या करते हो दर्द होता है

सूर्य ...... अब साली को जीजा से मज़े भी चाइये आवर दर्द भी सहन न हो ये तो गलत है न

सपना ........उम्म्म्मह साली के साथ साथ आपकी प्रेमिका भी हूँ ये मत भूलियेगा आप

सपना सूर्य पे जूख्ट हुए अपने तपते होंठ सूर्य के होंठो से जोड़ चूमने लगी

सूर्य भी प्यार से सपना के होंठो से राश पिने लगता है

कुछ देर बाद चुम्बन ख़तम कर सपना सूर्य के सीने पे लेट जाती है

सूर्य ......... सपना आज भी तुम्हारे बदन से वही जनि पहचानी खुशबु आती है

सपना ......हम्म्म

सूर्य ......... वैसे टेस्ट भी वैसा हे है क्या

सपना ......हम्म्म क्या मतलब कैसा टेस्ट

सूर्य ......अरे वही छोटी सपना का

सपना ......... ची मुझे क्या पता मुझे लगा आप होंठो की बात कर रहे है फ़िलहाल आप स्वीटी आवर मानसी का हे टेस्ट करो

सूर्य .......क्या सच में मुझे लगा साली आधी घरवाली होती पूरा न सही थो तो टेस्ट करने की मिल हे सकता है इस गरीब को

सपना मस्ती में तुनकते हुए सूर्य के चूचक को अपने दांतो में बिच कर खींच देती है

सूर्य .....ोुच्छ जंगली बिली कही की

सपना ....... आप किस जंगल से गरीब हो इतनी प्रेमिका है आपके पास बहार इतनी लम्बी लाइन लगी है

सूर्य ...... हाहाहा मतलब तुम्हारा अमृत नसीब नहीं होगा

सपना .......उम्मम्मम्हा वो भी आपका मैं भी आपकी अभी मुझे सोना है ऐसे हे

सूर्य .....हम्म्म वैसे भी 1 से ऊपर समय हो गया है सुबह जल्दी भी उठना है कल कोमल के साथ नागलोक भी जाना है

सपना ......मतलब सुबह जल्दी नहीं उठना होगा

सूर्य ......हाहाहाहा अभ्यास के बाद जाऊंगा आवर परषो सुबह जल्दी लौट आऊंगा उम्मम्मम्हा शुबरात्रि सपना

सपना .......शुबरात्रि उम्म्म्मः ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
थैंक यू माय आल बरोथेर एंड फ्रेंड्स

आप सभी के सहयोग आवर सपोर्ट से आज 1400 पेजेज कम्पलीट हो चुके है इस स्टोरी के

उम्मीद है आगे भी आप सभी का प्यार आवर सपोर्ट इसी तरह मिलता रहेगा

थैंक यू आल ऑफ यू ...........

Kalyansurya ........🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹
 
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