Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 24 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

भाई अभी अपडेट लिखना भी सुरु नहीं किया है

खाना खाने के बाद हे अपडेट लिखना सुरु करूंगा
 
अपडेट. 189

रुक्मणि ........ मुझे कोई फरक नहीं पड़ता विक्रम क्या सोचता है या क्या करता है बस तुम दोनों तयारी रहना हम कल सूर्य की सगाई में चैलेंज बस अब दोनों चुप चाप लेट जाओ आवर जब तक तुम्हारी मम्मी रुक्मणि तुम लोगो के साथ है तुम्हारे लिया हद वो कोशिश करेगी जिस से तुम लोगो को ख़ुशी मिले

विधि ......... थैंक यू माँ ी लव यू माँ आप बहुत ैवहि है

गायत्री ......... सच में चची जी आप बहुत प्यारी है थैंक यू

रुक्मणि ......बस बस ज्यादा मास्क्स लगाओ आवर सो जाओ कल तुम दोनों सबसे खूबसूरत आवर प्यारी लगनी चाइये ये उदाश चेहरे देखते तो सूर्य से मिलना कैंसिल चाक सो जाओ गुड नाईट

विधि ......सुभ्रातृ माँ सुभ्रातृ दीदी

गायत्री ......ुम्मम्हा गुड नाईट विधि गुड नाईट चची जी .................

अब आगे .................

असुरलोक ........ द्वारिका कंटकासुर असुरगुरु को गुफा में कैद कर जब महल लौटे तो वह पहले से दोनों मायावी असुर असुरमहल पहुंच चुके थे

मायावी असुर 1 ...विकटासुर

मायावी असुर 2 ...नागसूर

द्वारिका को देखते हे विकटासुर वह नागसूर अपने स्थान से उठ कर परनाम करते है

कुछ हे देर में मायावी असुरगुरु भी सभा में पहुंचते है

नरकासुर .......उचित समय आप लौट आये गुरुदेव अपना स्थान ग्रहण कीजिये गुरुदेव

M.asurguru ....... राजसिंहासन के पास में स्थित अपने सिंघासन पे विराजमान हो जाते है

द्वारिका ........ असुरराज विवाह हमारी पुत्रियों का हो रहा है हमें उनको भी सभा में आमंत्रित करना चाइये

नरकासुर ....... उसकी कोई आवशयकता नहींहै महारानी द्वारिका हमारी दोनों राजकुमारिया हमारे निर्णयों पे संदेह नहीं करती सो हमसे इतना प्रेम जो करती है उन्हें घ्यात है की उनके पिता उनके लिया सर्वश्रेठ ह चुनेगे

m.asurguru ........ क्षमा करे असुरराज नरकासुर किन्तु बात हमारी दोनों राजकुमारी के जीवन भर की ख़ुशी से जुडी है

हम जानते है जो आपका निर्णय होगा उस के विरुद्ध जाने का दोनों राजकुमारी विचार भी अपने मन मस्तिष्क में नहीं लाएंगी किन्तु ......

नरकासुर ......... किन्तु क्या गुरुदेव हम सभी के विचार सुन्ना चाहते है क्युकी हम नहीं चेंज हमारा एक गलत फैसला हमारी पुत्रियों का भविष्य ख़राब हो आप निसंकोच हो कर अपने विचार रखे गुरुदेव

M.gurudev ........ असुरराज हमारे विचार दोनों असुरवीरो के साथ दोनों राजकुमारियों को कुछ समय चर्चा के लिया एकांत में देना चाइये

ताकि चारो एक दूसरे के विचारो को समजे जिस से भविष्य में किसी तरह के मतभेद न हो

द्वारिका ......... गुरुदेव उचित कह रहे है असुरराज हे असुरलोक की राजकुमारिया के भविष्य का पर्सन है

नरकासुर ........ पुत्र कंटकासुर जाओ आवर दोनों राजकुमारियों को सभा में आने का आदेश दो

कंटकासुर ........ जैसा आपका आदेश महाराज

कंटकासुर सभा से निकल कर नगीना के कक्ष में जा पंहुचा

वह कंटकासुर कुछ साम्बा कर दोनों को सभा में ले जाता है

नरकासुर ........ आप पुत्रियों नगीना विसुद्धि हमारे पास आओ

दोनों नरकासुर के अगल बगल में राजसिंहासन पे विराजमान हो जाती है

नरकासुर ....... पुत्री हमने आप दोनों के विवाह के लिया आपको यहाँ बुलाया है

नगीना ........ पिता श्री आपका जो निर्णय होगा हमें सहर्ष स्वीकार होगा हम जानते है आप हमसे कितना प्रेम करते है फिर आपके निर्णय के विरुद्ध हम कैसे जा सकती है

नरकासुर ....... देखा गुरुदेव हमारी पुत्रियों हमसे कितना आदिक प्रेम करती है किन्तु पुत्री हम चाहते है की आप अपनी इच्छा हमारे सामने रखो हम नहीं चाहते की हमारे एक निर्णय से हमारी पुत्रियों का भिवष्य अण्डकारमयी हो जाये हम चाहते है आप दोनों असुरवीरो से एकांत में मिल कर इस विषय पे चर्चा कर अपना निर्णय हमें बताओ

नगीना विशुद्धि ....... उसकी कोई आवशयकता नहीं पिता श्री आप जिन्हे भी हमारे लिया वर के रूप में चुनेंगे हम उनसे विवाह करने को सज है

नरकासुर ......... उत्तम हमें आपके इस निर्णय से बहुत आदिक पर्शान्ता है पुत्री गुरुदेव विवाह की सुबह तिथि निकालिये हमारी दोनों पुत्रिया विवाह के लिया सज है

उदार ासरगुरु जब ध्यान से बहार निकले तो कुढ़ को गुफा में कैद प् और उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ

असुरगुरु ......... असंभव असुरलोक में इतना साहस किसका हुआ जो हमें कैद कर सके

असुरगुरु ने काफी पर्यटन किया उस कैद से मुक्त होने के लिया किन्तु उनका हर प्रयाश विफल रहा

थक हर कर क्रोधवश असुरगुरु ने अपना हाथ माँ पटल भैरवी के चरणों में राखी राखी खडग उठा कर अपने हाथ में कट लगा कर अपने रकत से माँ पटल भैरवी का अभिषेक करने लगते है

असुरगुरु का रकत निरतर माँ की प्रतिमा से होते हुए चरणों को भिगोते हुए गुफा के पथरीले फर्श पे एकता होने लगता है

असुरगुरु ......... आपको अपने पुत्र की पीड़ा का अनुभव नहीं हुआ क्या माता दर्शन दीजिये माँ पटल भैरवी आपके पुत्र को आपके मार्ग दर्शन की आवशयकता है सहायता कीजिये माँ

असुरगुरु के सब्दो का जब कोई पपरभव नहीं हुआ तो उन्होंने वही माँ पटल भैरवी के समक्ष अग्नि विधि का निर्माण करते है

देखते हे देखते अग्निवेदी से अग्नि की बड़ी बड़ी लपटे निकलने लगती है

असुरगुरु अग्निवेदी के सामने बेथ कर जोरो में मंत्र जप करने लगते साथ अग्निवेदी में अपने रकत रंजीत हाथ से आहुति देने लगते है

काफी समय बाद अग्निवेदी से एक ऊर्जा पुंज निकल कर असुरगुरु की देह में समाहित हो जाता है

अगले हे पल असुरगुरु के सरीर से उनकी आत्मा मुकत हो गुफा से बहार निकल असुरमहल पहुँचती है

जहा असुरगुरु खुद को वह पहले से मौजूद देख कर चौंक जाते है

असुरगुरु .......नहीं ये नहीं हो सकता ये अवश्य कोई बहरूपिया है जिसने हमारा भेष दर्जन किया है

असुरगुरु M.asurguru की आवर पुरे गुस्से अस भाड़े पैर जैसे हे असुरगुरु ने m.asurguru का गाला पकड़ना चाहा असुरगुरु का हाथ म असुरगुरु के आर पर हो गया

तभी असुरगुरु को एक जतका लगता है आवर वह वापिस गुफा में अपने निर्जीव देह में परवेश कर जाते है ...........

परीलोक ..........

मेनका जी सूर्य को खींचते हुए सीधा बीएड पे लेजा कर बैठा देती है आवर खुद सामने सोफे पे बेथ कर सूर्य को देखने लगती है

सूर्य ........ बस सा ये सब क्या है आप अभी तक जगी हुई है आवर फूफा जी कहा है

मेनका जी ....... पहले ये बताओ ये सब कब से चल रहा है सूर्य कल तुम्हारी सगाई है

सूर्य ....... क्या मतलब बस सा

मेनका जी ...... अभी अभी जो मेर्री के साथ कर रहे थे ये कब से चल रहा जूथ मत बोलना सूर्य

सूर्य .......आपको सब पता है फिर भी आप पूछ रही बुआ सा

मेनका जी ....... क्या मेर्री से भी सदी करोगे तुम

सूर्य ....... नहीं बुआ सा मेर्री जी विजय मां से प्यार करती है आवर सदी भी उनसे हे होगी

मेनका जी ....... अगर मेर्री विजय से प्यार करती है तो फिर तुम्हारे साथ ये सब कैसे

सूर्य ...... ये उनकी हे इच्छा थी आवर वो मुझसे प्यार भी करती है उनकी सदी तक ये सम्बंद रखने की उनकी हे इच्छा थी

मेनका जी ....... सूर्य क्या तुम आज भी इतना हे प्यार करते हो मुझसे जितने पिछले जनम में करते थे

सूर्य ......उस से भी कही ज्यादा बुआ सा क्यों आपको कोई शक है क्या

मेनका जी........ फिर साबित करो की तुम मुझे आज भी इतना हे प्यार करते हो मुझे फिर से वही प्यार चाइये सूर्य जिसमे मैं तुम्हारे लिया केवल मेनका रहूं न की तुम्हारी बुआ सा





सूर्य ........ नहीं बस सा वो सब हमारी मज़बूरी थी राधा के मिले श्राप के कारन

मेनका जी ...... मन की जिस्मानी सम्बंद बनने में राधा का श्राप वजह रहा पैर वो तो एक बार सम्बंद बनाने पे ख़तम हो गया था फिर हमने कंटिन्यू क्यों रखा

सूर्य ...... क्युकी आपसे प्यार करता था

मेनका जी सोफे से कड़ी हो कर अपने ऊपरी निघ्त्य सूर्य के सामने हे उतर फेंखती है





सूर्य की आँखों के सामने मेनका जी का खूबसूरत संगमर मर सा तराशा हुआ खूबसूरत गोरा बदन उस काली ब्रा पेंटी में कयामतख़ेज़ लेग रहा था

सूर्य ....... एक बार फिर सोच कीजिये बुआ सा ये फूफा जी के साथ देखा होगा आवर पायल प्रीती को पता चला तो क्या होगा

मेनका जी ...... इस जनम में हमारा फिर से मिलान होना लिखा था इस लिया सायद हम सब फिर से एक साथ ुशी रिश्ते में फिर से जनम लिया इन दो जन्मो के दूरिया ख़तम कर दो सूर्य बहुत तदपि हु जब से वो सब यादे मिली है तुम्हारे फूफा जी का साथ भी बिस्तर पे अब भाता नहीं है

कहते हुए मेनका जी आगे भाड़ सूर्य के सीने पे हाथ रखे बीएड पे दाखिल देती है

आवर सूर्य के कमर में दोनों तरफ पेअर कर सूर्य के चेहरे को सहलाने लगती है





मेनका जी .......अब कुछ मत कहना सूर्य जो हो रहा है होने दो

सूर्य अपनी आँखे बंद करता है तभी सूर्य के मस्तिष्क में गुरुदेव के वो सबद गूंजने लगते है जो गुरुदेव ने महाकाल मंदिर में सूर्य को आशीर्वाद देते हुए कहा था

( गुरुदेव ...... विजयी भाव पुत्र सभी की मनोकामना पूर्ण करो )

गुरुदेव की बात याद आते हे सूर्य रूम को सिक्योर कर देता है

मेनका जी अपने हाथो से अपनी काली ब्रा को निचे खिशा कर अपनी 38 की सुडोल चूचियों पे सूर्य का मच चिक्पा देती है





सूर्य अपने हाथ आगे बढ़ा कर मेनका की मखमली ठोस चूचियों को अपने हाथो में थम कर

सहलाते हुए एक निप्पल्स को मच में भर कर चुम्लाने लगता है

मेनका जी ...... Umm.mmm अह्ह्ह्हह सूर्य मेरी जान जी भर के पि अपनी मेनका की चूचिया उम्माह्ह्ह्ह

सूर्य ......वैसे एक बात है बुआ......

मेनका ......बुआ नहीं मेनका

सूर्य ....... आपकी चूचिया इतनी ठोस कैसे है क्या फूफा जी ने इनपे म्हणत काम की है या कोई आवर वजह है

मेनका जी अपने चीची सूर्य के मुँह से निकल कर दूसरी चुकी सूर्य के मुँह में देते हुए

सूर्य का अर्ध्मूर्छित लिंग सहलाने लगती है

मेनका जी ....... तुम्हारे फूफा जी में इतना डैम नहीं जो मेरे सरीर को ढीला कर सके ये तो u.s.a में देल्ली एक्सरसाइज और बॉडी मस्सगे करती थी ुशी से सरीर आज भी क्षमा हुआ है अब तुम्हे हे इस हे ढीला करना है

मेनका जी सूर्य के गॉड से कड़ी hi कर सूर्य के पेण्ट निकल फेंखती है आवर खुद भी अपनी ब्रा एंटी उतर देती है

अपनी चूचियों पे हलकी कोई चिकनाई युक्त क्रीम लगा कर सूर्य के लिंग को अपनी चूचियों के बिच रखा मस्सगे देने लगती





कुछ देर यही किर्या करने के बाद मेनका जी निचे खिसक कर सूर्य के लिंगमुण्ड को अपने गुलाबी ाड्रो के बिच से होते हुए मुँह में भर लेती है

सूर्य .......उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह िस्स्सस्स आज भी आपका अंदाज वही है बुआ जो पहले था

मेनका .......उम्म्म्म उम्म्म अह्ह्ह्ह पैर ये पहले भी बड़ा आवर टेस्टी लग रहा है ुण्णं इसमें से आती कच्ची कच्ची महक उम्म्म्म बॉडी में सनसनी पैदा कर रहे है एक नशा सा होने लगता है

सूर्य मेनका जी को उठा कर वही पास में पड़े बड़े सोफे पे जा कर मेनका जी को इसरा करता है

मेनका जी सूर्य के बगल में सोफे पे बेथ सूर्य की जंगो में जूख्ट हुए फिर से उस दहकते हुए लिंग से अपने गले की गहराई नापने लगती है





इस दौरान सूर्य का हाथ रेंगता हुआ मेनका जी के 36,37 के गद्देदार पैर ठोस खुल्हो के शेर करते हुए मेनका जी के गुदाद्वार वह योनिकुंड के मुहये बिंदु तक जा पंहुचा

ीदार सूर्य के हाथो ने कलाकारी दिखानी सुरु की उदार मेनका जी ने सूर्य लिंग पे अपने हाथ वह मुँह का जादू चलना सुरु किया

कुछ 4,5 मिनट्स बाद मेनका जी के जबड़ो में कार्ड होना सुरु hi जाता है सूर्य के मोठे वह लम्बे लिंग की वजह से

मेनका जी .......मुझसे आवर नहीं रुका जाता सूर्य अब एक बार मुझे प्यार करलो उसके बाद तुम्हे कुछ भी करने से नहीं रोकूंगी मैं

चलो बीएड पे यहाँ कॉम्पेरट नहीं है

मेनका जी बीएड पे जा कर अपनी रेंज छोड़ी कर लेट जाती है

सूर्य भी मुस्कुराते हुए उनकी टैंगो के बिच जा बैठा आवर सीधा अपना मुँह मेनका जी की पनियाई हुई योनि पे रखा कर चूसने लगता है





मेनका .....उम्म्म्म. अह्ह्ह्हहब मैंने कहा था ये सब बाद में करना उम्म्म. अह्ह्ह्हब उफ्फ्फ बहुत अच्छा लग रहा है

सूर्य .......अगर ऐसे हे डालता तो बहुत पैन होगा आपको

मेनका. ....उम्मंतुमहे जो करना है करो उम्म्म्म उफ्फफ्फ्फ़

सूर्य अपनी एक उंगलियों को योनिरस से भिगोते कर उस से डेरी डेरी मेनका के गुदाद्वार को कुरेदने लगता है

जिसका असर मेनका जी की योनि के हिंट फड़फड़ा कर दिखा रहे थे

कुछ हे पालो में मेनका जी का सरीर आकडने लगता है

ठीक ुशी पल सूर्य अपने लिंग पे वही चिकनाई यॉट क्रीम लगा कर लिंगमुण्ड मेनका की योनि पे रख कर पिछले से चिपकते हुए एक तेज प्रहार करता है





एक हे प्रहार में जहा तक विजय जी ने रास्ता बनाया था अब तक उस रस्ते से होते हे सूर्य का अग्रभाग जा फशा

और ुशी के साथ मेनका जी का मुँह खुला का खुला रह गया

यही वो पल था जब मेनका जी की योनि से कमरष बहना सुरु हुआ आवर ुशी पल सूर्य ने अपना खूंटा मेनका की हरी भरी कोमल जमीं में थोक देता है

दर्द आवर मज़े में मेनका जी के मुँह से आवाज तक नहीं निकली

कुछ देर बाद सूर्य अपनी उतने हे लिंग से मेनका जी को ससरीरक सुख देने लगता है

मेनका .......तुमने तो स्वर्ग आवर नरक एक साथ दिखा दिए सूर्य

सूर्य ......अगर ऐसा नहीं करता तो आपको बहुत टाइम लगता आवर सुबह आपकी चल भी बदल जाती





मेनका जज........ उम्म्म अह्ह्ह्हह अब डेरी डेरी डालना

सूर्य ....बिलकुल बुआ डार्लिंग उम्मंहहह

स्लो स्लो सूर्य मेनका जी की योनि में अपने घोडा दौड़ने लगता है

साथ साथ मेनका जी के चूचियों को मुलायम करने लगता है

इसी पॉश में कुछ देर छोड़ने के बाद सूर्य उन्हें उठा कर सोफे पे ले जाता है आवर गुमा कर अपने गॉड में बैठा लेता है





जैसे जैसे मेनका जी सूर्य के लिंग इ सवारी करते हुए निचे आती थिंक ुशिवाक्त सूर्य हलके से अपनी कमर उचका देता

इस तरह बहुत डेरी पैर सूर्य का लिंग निरतर मेनका जी की गुफा आवर गहरी करता जा रहा था

मेनका ......उम्म्म.. उफ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सूर्य मैं फिर से जड़ने वाली हूँ तेज से छोड़ी मुझे अह्ह्ह्हह्हह मा तुम्हारे फूफा के साथ ऐसी सकती ऐसा आनंद कभी मह्सुश नहीं हुआ





अगले कुछ हे पालो मेमेंका जी तेजी से अपनी योनि को सहलाते हुए झड़ने लगती है

मेनका जी की योनि से निकला गरम तरल सूर्य के लिंग से होते हुए अंडकोष को भिगोने लगता है

(सूर्य ......अगर ऐसा हे चलता रहा तो बहुत लम्बा वकत लगेगा आवर सुबह सगाई भी है ओह सहित कोमल प्रीती मेरे रूम में है )

सूर्य वही सोफे पे मेनका जी को लेता कर अपनी गति से मेनका की छूट की दाजिया उड़ाने लगता है





मेनका जी ......अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सूर्य अभी अभी झड़ी हूँ मैं

कुछ देर सांसे तो सँभालने दो मुझे

सूर्य .......बुआ कोमल प्रीती मेरा इन्तजार कर रही है मैं भूल गया था वो दोनों मेरे रूम में है प्लेसेस अभी जल्दी से सब फिनिश करना होगा नेक्स्ट टाइम आपको फुल टाइम दूंगा

मेनका जी ......ठीक है मेरी जान मैं जितने से भी बहुत खुश हूँ तुम जल्दी से खुद को रिलीज़ करो





सूर्य मेनका जी को किश करते हुए अपने नार्मल गति से कुछ हईशा लिंग का बहार रखते हुए रखे लगाने लगता है

सूर्य के देखो से मेनका जी की पूरी बॉडी हिलने लगती है साथ हे सोफे से हलकी हलकी छू च की आवाज आने लगती है

सूर्य ......बुआ ज्यादा तक्लिप हो तो मैं निकल लेता हूँ

मेनका ......Umm.mmm अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह नहीं निकलना नहीं जब तक पीक पे न पहुँचो





बुआ की बात सुन सूर्य आवर तेजी से लिंग को योनि के अंदर बहार करने लगता है

इस से बुआ के चेहरे पे कुछ पल पीड़ा के भाव उभरे पैर जल्दी हे खुद को संभल कर सूर्य का साथ देने लगती है

जैसे जैसे सूर्य के लिंग की ुल्ली हुए नशे मेनका जी के योनि के अंदरूनी हिज हे में रगड़ कहती उनके चेहरे पे अस I'm आनंद नजर आता

मनो सूर्य का लिंग उनकी योनि के लिया हे बना हो

मेनका जी के आँखे बंद हो चुकी थी पैर सूर्य उनकी चेहरे की ख़ुशी देख बिन्स रूल बेलगाम ठोस की तरह अपना लिंग मेनका जी की योनि में गुसाई हुए देखे मरते हुए मेनका जी के हर पल में बदलते खुश चेहरे को देख रहा था

मेनका जज......... उम्मम्मम्मम वाइज क्या देख रहे हो मेरे चेहरे को सूर्य पीला नहीं देखा था क्या

सूर्य .......उफ्फ्फफ्फ्फ़ देखा तो बहुत बार है बुआ डार्लिंग उम्म्म्म अह्ह्ह्ह पैर आज अभी जो इस खूबसूरत चेहरे पे ख़ुशी की जो चमक है वो आज पहली बार देख रहा हूँ

मेनका जी ....जब भी तुम मुझे ऐसेइस अवस्था में अपने साथ देखोगे ये चेहरा वाइज हे ख़ुशी से चमकता हुआ दिखाई देगा उम्म्म्म

सूर्य मेनका जी के ऊपर से हैट कर उन्हें सीधा लिया देता है





सूर्य .......अह्ह्ह्हह बुआ मेरा किसी भी वक़्त हो सकता है उम्म्म्म.

मेनका जी ......बस सूर्य मैं भी पास हे हूँ कुछ हे देखो में मैं झाड़ जाउंगी

सूर्य ......मेनका जज के होंटो को चूमते हुए रखे लगाने लगता

1,2 मिनट्स में हे मेनका जी की योनि में कसाव भड़ने लगता है जिसे मह्सुश कर सूर्य भी तेजी से रखे लगाने लगता है

अगले एक मिनट्स में मेंकजी की यनि से निकला गरम लावा सूर्य के लिंगमुण्ड में गिरने लगता है

जो वाकई बहुत गरम था जैसे काफी समय से संभल कर रखो हो सूर्य के लिया

सूर्य मेनका जी के योनि से अपना लिंग बहार निजलता है आवर अपने हाथ में पजड़ कर 2,4 बार आगे पीछे करते है

सूर्य के लिंग से निक्की पिचकारी मेनका जी के नंगे बदन पे गिरने लगती है कुछ बुँदे मेनका जी की चूचियों पे गिरती है वीर्य की जिन्हे वो अपनी चूचियों पे मसल लेती है





सूर्य .........उफ्फ्फ्फ़ बुआ आप तो किसी जवान लड़की को आज भी अपने सामने न टिकने दो

मेनका जी ....... जवान तो बहुत है तुम्हारे पास कभी कभी इस बूढी का ख्याल भी कर लेना

सूर्य .......एक शर्त पे बुआ जी

मेनका जी .......फिर रहने दे मुझे नहीं बुलाना तुम्हे अगर शाफ़्ट हे रखनी है तो रहने दो

सूर्य .......क्या बुआ जी पहले बात तो सुन लीजिये मेरी पूरी

मेनका जी ......कहो क्या कहना है

सूर्य ........ मैं आप जब कहोगी आपके सामने हाजिर हो जाऊंगा पैर आपको फूफा जी का भी साथ देना होगा जनता हूँ थोड़ा अजीब है पैर वो आपके पति भी है उनकी इछाओ का मान आपको रखना हे होगा ये आपका पत्नी दरम है

मेनका जी ....... ठीक है पैर हफ्ते में एक नाईट तुम मेरे साथ बिताओगे या जब तुम्हारे दिल करे

सूर्य ......फ़िलहाल तो ऐसा हो सकता है पैर सदी के बाद का कुछ कह नहीं सकता

मेनका जी सोफे से खड़े हो कर सूर्य को एक छोटा सा किश करती है

आवर वही पड़े अपने कपडे उठा लेती है

मेनका जी ......तब भी तुम थोड़ा बहुत टाइम निकल सकते हो पैर याद रहे किसी आवर का टाइम नहीं

सूर्य ......अभी उसमे काफी वक़्त है अच्छा चलता हूँ बुआ गुड नाईट

मेनका जी .....गुड नाईट ुम्म्हा गेट लॉक कर देना नहाने के बाद मैं भी सम वाली हूँ

सूर्य रूम लॉक कर अपने रूम में पंहुचा जहा कोमल आवर प्रीती दोनों ुशी तरह से सोई हुई थी जैसा सूर्य छोड़ कर गया था

सूर्य डेरी से शार्ट में हे दोनों के बिच जा कर लेट जाता है

कुछ देर बाद दोनों को अपनी तरफ कर के बहो में भर के सो जाता है ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................

सॉरी फॉर लेट अपडेट अभी अभी कम्प्लेट किया हूँ अपडेट सो पोस्ट कर रहा हूँ

सभी भाइयो को सुभ्रातृ आने वाला सूर्यौदय ढेरों खुसियो के साथ आपका स्वागत करे शुबरात्रि ..........
 
अपडेट. 190

मेनका जी ......तब भी तुम थोड़ा बहुत टाइम निकल सकते हो पैर याद रहे किसी आवर का टाइम नहीं

सूर्य ......अभी उसमे काफी वक़्त है अच्छा चलता हूँ बुआ गुड नाईट

मेनका जी .....गुड नाईट ुम्म्हा गेट लॉक कर देना नहाने के बाद मैं भी सम वाली हूँ

सूर्य रूम लॉक कर अपने रूम में पंहुचा जहा कोमल आवर प्रीती दोनों ुशी तरह से सोई हुई थी जैसा सूर्य छोड़ कर गया था

सूर्य डेरी से शार्ट में हे दोनों के बिच जा कर लेट जाता है

कुछ देर बाद दोनों को अपनी तरफ कर के बहो में भर के सो जाता है ..............

अब आगे ..........

परीलोक ......... सुबह सूर्य जब ध्यान से फारिग हो कर पारी महल लौटा तब तक सभी उठ चुके थे आवर सगाई की तयारियो में लग चुके थे

सभी तयारी पूरी हो चुकी थी ऑलमोस्ट फॉर भी एक बार खुद दादा जी दादी जी नाना जी को साथ ले कर सभी तयारिया देख रही थी

वही हिमालय से ऋषि दूर्वा के साथ उनके चार ऋषि अनुज परीलोक पहुंच चुके थे

जो सीधा महाकाल मंदिर पहुंचे क्युकी गुरुदेव ने जो टेलेपोर्टेशन द्वार बनाया था उनके लिया सो महाकाल मंदिर में से हे बनाया था

गुरुदेव महाकाल की पूजा आदि से निवृत हो पाछो ऋषियों को ले पारी महल पहुंचे जहा उद्यान में सूर्य किरण की इंगेजमेंट रिंग सेरेमनी राखी हुई थी

डेरी डेरी समय बिता आवर सो सुबह घडी भी अस पहुंची जिसका सभी को इन्तजार था

डेरी डेरी अन्य लोको से जो मेहमान आये थे उनकी भीड़ उद्यान में भड़ने लगी

ीदार रानी महल में परिया किरण को सजाने में लगी हुई थी

वही मेनका जी रेखा जी शालिनी तीनो मिल कर सूर्य को त्यार कर रही थी

सूर्य ......बड़ी मम्मी ये सब क्या है हे सगाई है न की सदी आवर नहीं मैं दुल्हन हूँ

शालिनी जी ........ तुम चुप चाप बैठे रहो हे हमारी पारम्परिक पोशाक है सदी विवाह की

सूर्य ........ वही तो मैं कह रहा हूँ इतनी भरी शेरवानी की क्या जरुरत है माँ अभी सिर्फ सगाई है न की सदी आप तो ऐसे सजाने में लगी हो जैसे ये सगाई न हो कर सदी हो रही हो

सूर्य मां करता रहा पैर रेखा जी मेनका जी आवर शालिनी जी ने सूर्य की एक न सुनी आवर उसे सो भरी भरम शेरवानी पहना दिया





मेनका जी आगे भाड़ अपनी आँखों से काजल निकल सूर्य के कान के पिचि छोटी सी बिंदिया बना देती है

मेनका जी ........ अभी किसी की तुम्हे नजर नहीं लगेगी

रेखा जी ......... मुझे तो आपका हे दर था दीदी नहीं मेरे बेटे को आपकी हे नजर न लग जाये

मेनका जी ....... लहंगे में छुपा कर रखना अपने बेटे को भाबी सा नहीं एच में मेरी नजर न पद जाये हेहेहे

मेनका जी के लहंगे में छुपाने वाली बात पे शालिनी जी की हंशी चुत जाती है वही रेखा जी सरम से पानी पानी हो जाती है

तभी वह दादी जी मेर्री के साथ पहुँचती है

दादी जी .....बीटा तुम तुम त्यार हो तो चलो मुहूर्त का समय हो गया है

सूर्य ...... जी दादी सा चलिए

मेनका जी ...... रुक सूर्य ये सफ्फा तो पगन ले शेरवानी पे

सूर्य ......उसकी जरुरत नहीं है बुआ सा इतना काफी है

सूर्य जल्दी से दादी जी के साथ बहार निकल जाता है

रेखा जी ....... दीदी काम से काम ऐसा बोलने से पहले ये तो सोचती सूर्य भी वही खड़ा है हमारे पास

मेनका जी ....... फिर सुरुहत किसने की भला एक माँ की नजर अपने बेटे को लग सकती है क्या

वैसे भी उसे समाज नहीं आया कुछ

रेखा जी ...... ये आप कह रही है वो ान बचा नहीं रहा है

मेनका जी ......जानती हूँ वो बचा नहीं रहा बचा पैदा करने वाला बन चूका है चल ये सब छोड़िये भाबी सा नाम भी बहार चलना चाइये शालिनी भी चली गई है

रेखा जी ...... चलिए दीदी चलते है वैसे दीदी एक बात बताये आज आप मच ज्यादा हे खुश है सुबह से आपका चेहरा खिला हुआ है

मेनका जी ........ मेरे बेटे की सगाई है खुश तो होउंगी हे न भाबी सा आप भी कैसी बाते करती है

रेखा जी ........ है ये एक कारन हो सकता है पैर मुझे आपकी ख़ुशी का कारन कुछ आवर हे लग रहा है

सुबह जब आपकी रूम से निकलते रेखा था तब आपकी चल में भी फरक था

मेनका जी ...... वो वो तो मैं फ्रेश हो रही थी तभी पेअर में हलकी मोच आ गई थी इस लिया हल्का दर्द था

(रेखा जी ........ ये दीदी जूथ क्यों बोल रही है आवर रात में जब कोमल के पापा को देखने बहार निकली थी तब सूर्य इनके रूम से निकल था इसका मतलब कही मेनका दीदी ने ची ची मैं भी क्या सोचती हूँ सूर्य तो बीटा है हम सबका मेरा न दिमाग ख़राब हो गया है )

उदार किरण के रूम में परियो ने किरण के साथ साथ बाकि सभी को अच्छे से सजा दिया था

सभी इंडियन पारम्परिक भेष भूषा में खूबसूरती के मामले में परियो को भी मात दे रही थी

जिनिशा ........ स्वीटी आज तो सरताज आपको देख नहीं बेहोश न हो जाये ुम्मम्हा बहुत खूबसूरत लग रही हो आप

पारिजात ......ये तुमने सच कहा जिनिशा हम सब में सबसे ज्यादा खूबसूरत जीनत है पैर आज तो सबसे खूबसूरत स्वीटी हे लग रही है

जूलिया ........ स्वीटी दीदी जितनी बहार से खूबसूरत है उस से नहीं ज्यादा खूबसूरत इनका व्यक्तिवा है पारी दीदी ऐसे हे थोड़े न स्वीटी दीदी उनकी जान है हम सब भले हे उनके दिल में रहते है पैर उनके दिल को धड़कने वाली सूरत आवर सीरत स्वीटी दीदी है

पारिजात ........ ये तुमने बिलकुल सच कहा मेरी बहन जुली वो सूर्य है तो ये उनकी किरण है दोनों का अस्तित्वा एक दूसरे के बिना ादुरा

रिद्धि .......चाक सभी मुहूर्त का समय हो चला है पिता श्री का सन्देश आया है

सपना राधा किरण का हाथ थम बहार की आवर भाड़ जाती है





दुल्हन के लाल जोड़े में सजी किरण आवर बाकि सभी को जो भी देखता इनकी खूबसूरती में खोये बिना नहीं रह पाया

सभी लड़किया एक से भाड़ कर एक लग रहे थे

जैसे आज सगाई न हो कर सवर्ग से उत्तरी अप्सराओ का मेला लगा हो परीलोक में

सामने से शालिनी जी अपनी माँ के साथ ीदार हे आती हुई नजर आती है

नानी जी .......बेटी किरण तुमने गुणगट नहीं लिया बेटी अब तो आदत दाल लो तुम्हारी सदी होने वाली है बेटी से तुम बहु बैनर वाली हो

शालिनी जी ......... कोई जरुरत नहीं है स्वीटी बीटा तुम्हे ऐसी दकियानूसी बातो पे ध्यान देने का आवर माँ सा आप भी सुन लीजिये आगे से आप अपने ये रीती रिवाज मेरी किसी भी बेटी पे नहीं थोपेगी स्वीटी पहले भी मेरे बेटी थे आज भी है आवर सदी के बाद भी बेटी बांके उस घर में आएगी न की बहु आवर तुम सब भी सुन लो जो तुम्हे पसंद हो वही तुम लोग करोगे

किरण .......थैंक यू बुआ सा

शालिनी जी ....... एक लगाउंगी अगर फिर से बुआ बोलै तो सूर्य मुझे माँ बोल्ट्स है बाकि तुम सोच लो तुम्हे माँ चाइये या एक खडुश सास चाइये हेहेहे

किरण आगे बढ़ शालिनी जी के गले जा लगती है

किरण ......मुझे तो माँ हे चाइये सास आप सपना दीदी की बन जाना क्यों दीदी सही कहा न

सपना ...... ये पागल मुझे क्यों फसवा रही है मैंने क्या किया है

नानी जी .......चलो चलो तुम सब अपनी मस्ती मजाक बाद में कर लेना अभी मुहूर्त बिता जा रहा है

शालिनी जी .......माँ सा मुझे माफ कर देना पैर आप फिर ऐसा कुछ मत कर्मा बाचीणा है ये इन हे जो पसंद है जिनसे इन हे ख़ुशी मिले अगर वो करे तो गलत नहीं होगा बचो की ख़ुशी से भाड़ कर हम बड़ो को आवर क्या चाइये बचो की खुशियों का ख्याल हम नहीं रखेंगे तो कोण रखेगा आपने रेखा नहीं जब आपकी स्वीटी को गुणगट निकलने को ले कर कहा तो जैसे उसका खिला हुआ चेहरा मुरझाने लगा आज उसके लिया इतना बड़ा ख़ुशी का मौका है ऐसे में आप रीती रिवाजो को ले कर बेथ गई बचो की ख़ुशी के बिच

नानी जी ........ माफ करना शालू बेटी मैं भी सभी बचो को खुश देखना चाहती हूँ पैर ये जो बूढी में पुराने ख़यालात है कभी कभी न जगह देखते है न मौका मुँह से निकल हे जाते है

शालिनी जी .....चलिए छोड़िये इन सब बातो को बचे भी चले गए है

जैसे हे किरण उद्यान में प्रवेश करती है रानी पारी अपनी जादुई छड़ी गुमटी है जिस से किरण के साथ साथ सभी लड़कियों पे खुसबूदार रंग बिरंगे फुल्लो की वर्षा होने लगती है

वही रिंग सेरेमनी के लिया जो ऐठन त्यार लिया गया था वह सूर्य बैठा हुआ था

जैसे हे उसकी नजर किरण पे पड़ती है वह उसकी खूबसूरती में खोये हुए खड़ा हो जाता है

शिव ........देख रहे हो भाई सा अपने साहेबजादे को अभी से बीबी जी हजूरी में खड़ा हो गया है

महेंद्र जी .......... सही कहा शिव शेर कितना भी ताकतवर हो कितना हे खुखार हो जब शामे शेरनी हो तो वे भी चूहा बन जाता है

इसकी तो एक नहीं कई शेरनिया है महाकाल हे जाने कैसे संभालेगा

तभी महेंद्र जी किसी की नजरे चुबती हुई महसूस होती है

महेंद्र जी ीदार उदार देखते है तो थिंक उनके पीछे मेनका जी आवर रेखा जी खड़े हुए पते है

मेनका जी शिव आवर महेंद्र जी की बात सुन मुस्कुरा रही थी

वही रेखा जी गुस्से भरी दृस्टि से महेंद्र जी को जला रही थी

महेंद्र जी ....... गई भेष पानी में

शिव ......क्या हुआ भाई सा आवर तुम भरखऊडर बेथ जाओ वो यही आएगे

महेंद्र जी ......शिव तू हर बार मुझे फसवा देता है

किरण को ले कर सभी लड़किया वही आ जाती है

आवर सूर्य के बगल में किरण को बैठा देती है

शिव ......मैंने क्या लिया भाई सा

महेंद्र जी ......पीछे देख मेरी शेरनी पुरे गुस्से में कड़ी है जैसे अभी खा जाएगी

शिव जब पीछे देखता है तो दोनों के साथ साथ शालिनी जी भी कड़ी थी आवर रेखा जी उनके कान में कुछ कह रही थी

शिव ......भाई सा आपकी के साथ मेरी वाली भी कड़ी है

महेंद्र जी .......फिर ठीक है मैं अकेला हे नहीं तू भी रूम से बहार है ान सन्ति मिली

गुरुदेव ......... पुत्र किरण पुत्र सूर्य दोनों यहाँ यज्ञ विधि के विराजो

सूर्य किरण दोनों उठ कर ऋषि दूर्वा आवर उनके अनुजो द्वारा त्यार यज्ञ विधि पे विराजते है

ऋषि दूर्वा मंत्रो उच्चारण के साथ यज्ञ विधि में हवन सामग्री आदि की आहुति दे रहे थे साथ हे सूर्य वे किरण से यज्ञ में आहुति देने को कह रहे थे

कोई आधे जानते के लगभग चले इस यज्ञ विधि के बाद ऋषि दूर्वा यज्ञ पूर्ण होने की घोषणा करते है

ऋषि दूर्वा ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण जानते हो ये यज्ञ किध लिया था

सूर्य .....जी ऋषिवर आपने जो मंत्र उच्चारण किये वो प्रभु वह देवी माँ के लिए थे अतार्थ इस यज्ञ के माद्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त कर नए जीवन का सुभारम्भ करना यही इस यज्ञ का उद्देश्य था

गुरुदेव .......उचित कहा पुत्र इस यज्ञ में तुम दोनी द्वारा दी जाने वाली आहुति परबु आवर देवी माँ के लिया थी ताकि तुम्हारा जो नया गरिष्ट जीवन मंगलमयी वह खुशियों से परिपूर्ण रहे

ऋषि दूर्वा ......वर वधु के लिया अंगूठी लायी जाये

ऋषि दूर्वा का आदेश मिलते हे सपना वह अलीना सूर्य वह किरण के लिया सवर्ण थाल में सजी रिंग दोनों के समक्ष पेश करती है





ऋषि दूर्वा ......पुत्री किरण पुत्र सूर्य बाये हाथ की तीसरी ऊँगली में अंगूठी पहनाओ

किरण ऋषि दूर्वा द्वारा बताये अनुसार रिंग उठा कर सूर्य के बेर हाथ की तीसरी ऊँगली में पहना देती है





ऋषि दूर्वा ......पुत्र सूर्य अबाउट यही किर्या तुम पुत्री किरण के साथ दोहराओ

सूर्य किरण का बया हाथ थम कर पहले तो चूमता है

आवर फिर रिंग उठा कर किरण की तीसरी ऊँगली में रिंग दाल देता है





तभी परीलोक के एक के बाद एक तेज दमके के साथ आतिशबाज़ी सुरु होती है

साथ हे सभी पे फुल्लो की वर्षा पुत्र परीलोक इन मन को लुभाने वाली पुष्पों की ख़ुशी से जुमने लगता है

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य पुत्री किरण देखो परबु महाकाल आवर माँ महाकाली का आसिष तुम्हारी नवजीवन को मिल चूका है

अब अपने सभी बड़ो का आशीर्वाद लो जा कर

सूर्य सबसे पहले किरण को ले कर अपनी माँ के समकक्ष जाता है

आवर निचे जुख उनके चरण स्पर्श करता है

ऐसे हे किरण भी करती है

शैलिंज जी .....सदा खुश रहो सदा सौभाग्यवती रहो बेटी सूर्य बीटा सबसे पहले अपने गुरुदेव का आसिष लेनी चाइये तुम्हे गुरु तो इस्वर से भी भध कर होता है

सूर्य ....... है गुरु इस्वर से भाड़ करकर होता है माँ पैर हर बचे के लिया सबसे पहली गुरु उसकी माँ होती है गुरुदेव मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा न

गुरुदेव ......नहीं पुत्र सूर्य है ये सत्य है की गुरु का स्थान इस्वर से ऊपर मन जाता है किन्तु ये भी इतना हे सत्य है हर संतान के लिया उसकी माता हे पार्टम गुरु होती है स्वयं इस्वर भी माँ के प्रेम में बंद कर बार बार जनम लेते है

सूर्य किरण एक एक कर सभी बढ़ो का आशीर्वाद लेते है

सभी ख़ुशी ख़ुशी ढेरो आशीर्वाद दोनों को देते है

कुछ देर बाद वह कुछ परिया नृत्य करने लगती है जिनके संग सभी लड़किया भी ख़ुशी ख़ुशी अपने नृत्य कला का पर्दर्सन करती है

तभी कोमल आगे आ कर सूर्य वह किरण को निचे ले जाती है

जहा सभी खूब नाच गण करते है कुछ 2 जानते चले इस नाच गाने के बाद रानी पारी सभी को भोजन विश्राम की अनुमति दे देती है

डेरी डेरी सभी रानी महल लौट जाते है

सूर्यगढ़ ........

वही सूरजगढ़ में आज सुबह कुछ ज्यादा हे जल्दी हो गई थी

सूर्य अभी भी सोया हुआ था तभी क्युकी काम रात पागल प्रीती कोमल अलीना राधा मेर्री मानसी ने सूर्य को ठीक से सोने हे नहीं दिया था

सूर्य जो रोज सुबह अपने समय पे ध्यान आदि करने जंगल जाता था आज वो भी मिस कर दिया था

निचे बड़े सभी तैयारी कर रहे थे सगाई सूरजगढ़ में जो होनी थी

दादी जी .......बेटी शालिनी आज सूर्य दिखा नहीं अभी तक क्या आज भी वो जंगल गया है

शालिनी जी ....... माँ सा मैंने तो उसे मन किया था आज जंगल जाने से पैर लगता है वो चला गया

दादी जी ......चल उसे फ़ोन कर आवर जल्दी आपने का बोल उसकी

मेर्री जी ......माँ सा वो अपने रूम में हे है अभी भी सोया हुआ है

दादी जी ...... बेटी शालिनी जा उसे उठा

मेर्री जी ....... माँ सा सम दीजिये उसे रात में लेट तक जगह हुआ था वैसे भी बहुत टाइम है अभी सगाई में

शालिनी जी ...... है माँ सा सोने दीजिये न उसे कुछ देर आवर वैसे भी वो कभी कभी हे तो इस तरह से सोता है नहीं तो पता भी नहीं चलता कब सोया कब उठा

दादी जी .......ठीक है बेटी तब तक मैं सब समाज कार में रखवा देती हूँ चेक करने के बाद

आवर ये शिव आवर महेंद्र कहा है बेटी

शालिनी जी ....... माँ सा वो बहार लोने में होंगे विजय जी के साथ

दादी जी बहार की तरफ निकल जाती है

शालिनी जी किचन में जा कर कॉफ़ी बना सूर्य के रूम की तरफ भाड़ जाती है

जहा कोमल अलीना राधा प्रीती चारो सूर्य के साथ लेती हुई थी

शालिनी जी जैसे हे अंदर गुस्सी दूर को खोल कर सामने का नजारा हे जबरदस्त था की शालिनी जी की आँखे खुली की खुली रह गई

शालिनी जी ......हे बागवान इन लड़कियों को कोण संजय की ये अब बड़ी हो गयी है सोने के बाद होश तक नहीं रहता की इनके कपडे किध हम में है

षालिनी जी आगे भाड़ राधा की निघ्त्य ठीक करती है क्युकी राधा ने जो शार्ट निघ्त्य डाली हुई थे वो साइट वक़्त हैट गई थी आवर राधा के रेड पेंटी उसके कूल्हों के दरार में गुशी हुई थी

शालिनी जी जब राधा को पलटी करती है सूर्य के ऊपर से तो इस बार नजर उनकी राधा के हाथ पे पड़ती है जो की सूर्य के ट्राउजर में था आवर इस वक़्त सूर्य का किंग कोबरा पुरे उफान पे था

शालिनी जी फ़ौरन कॉफ़ी मग ले कर बहार निकलती है

शालिनी जी ......ये राधा भी न जितनी बेसरम है कोमल अलीना प्रीती साथ में सोई है फिर भी उसे जरा सी भी सरम नहीं कहा हाथ गुस्सा रखना है

कुछ देर इन्हे सोच विचारो में खोये रहने के बाद शालिनी जी 3.4 बार गेट को जोर से नॉक करती है

तब अलीना की आँखे खुलती है तब वह सब पे चादर दाल कर गेट खोलती है

शालिनी जी की नजर जब बीएड पे पड़ती है तो वह चादर देख उन्हें रहत मिली

शालिनी जी .....बीटा अलीना सभी को उठा दो 8 बन चुके है

अलीना ......जी अभी उठती हूँ कॉफ़ी किश के लिया है मम्मी

शालिनी जी ......सूर्य के लिया थी पैर ये ठंडी हो चुकी है मैं आवर बनती हूँ तुम सब को उठा दो

शालिनी जी वह से निचे चली जाती है

वही अलीना गेट बंद कर चादर हटा थी है आवर राधा के कूल्हों पे थोड़ा जोर से चांटा करती है जिस से राधा की जल्दी से आँखों खुलती है

राधा ........ ये क्या बतमीज़ी है अलीना

अलीना ......अभी शालिनी मम्मी आई थी आपका हाथ कहा है जाता देखो आवर उन्होंने देख लिया होता तो

राधा जब अपने हाथ पे ध्यान देती है तो उसके हाथ में सूर्य के लिंग था जो पूरा खड़ा था

राधा जल्दी से अपना हाथ निकलती है

अलीना ......वो तो अच्छा हुआ मैंने चादर दाल दी थी वर्ण यहाँ सोना हम सब का बंद करवा देती आज हे आप

राधा .......सॉरी तुमपे गुस्सा करने के लिया एंड थैंक्स सब छुपाने के लिया

अलीना ......इन सब की जरुरत नहीं है बुआ आप सभी को उठा दीजिये आज इनकी आवर स्वीटी की सगाई है याद है न

राधा ......सगाई को कैसे भूल सकते है

कहते हुए राधा प्रीती वे कोमल को उठा देती है आवर सूर्य में बाथरूम में गेस जाती है

अलीना ....... सूर्य उठो 8 बज गए है आज तुम्हारी सगाई है

सूर्य अलीना को अपने सुपर खींच लेता है

सूर्य ......गुड मॉर्निंग प्रिय ुम्मम्हा

तीनो एक एक किश कर अपने रूम की तरफ निकल जाती है वही सूर्य बाथरूम गुस्स जाता है जहा राधा ठन्डे ठन्डे पानी के निचे कड़ी अपने खूबसूरत बदन को भिगो रही थी

सूर्य चुप चाप राधा में पीछे जा उसे बहाओ में भर गर्दन चूमने लगता है कुछ देर इनकी मस्ती चलती रहती है फॉर सूर्य आवर राधा दोनों हे नाहा कर बहार निकल जाते है

सभी लड़कियों की एक दो ड्रेस पहले से सूर्य में रूम में रहती है जिसे पहन राधा अपने रूम में त्यार होने निकल जाती है

सभी को त्यार होने वह घर से निकलने में करीबन 11 बज चुके थे सभी 4,5 कार्स से सूरजगढ़ की आवर निकल जाते है क्युकी सगाई सूरजगढ़ में हे राखी थी दोनों परिवारों की सहमति से ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................
 
अपडेट. 191

अलीना ....... सूर्य उठो 8 बज गए है आज तुम्हारी सगाई है

सूर्य अलीना को अपने सुपर खींच लेता है

सूर्य ......गुड मॉर्निंग प्रिय ुम्मम्हा

तीनो एक एक किश कर अपने रूम की तरफ निकल जाती है वही सूर्य बाथरूम गुस्स जाता है जहा राधा ठन्डे ठन्डे पानी के निचे कड़ी अपने खूबसूरत बदन को भिगो रही थी

सूर्य चुप चाप राधा में पीछे जा उसे बहाओ में भर गर्दन चूमने लगता है कुछ देर इनकी मस्ती चलती रहती है फॉर सूर्य आवर राधा दोनों हे नाहा कर बहार निकल जाते है

सभी लड़कियों की एक दो ड्रेस पहले से सूर्य में रूम में रहती है जिसे पहन राधा अपने रूम में त्यार होने निकल जाती है

सभी को त्यार होने वह घर से निकलने में करीबन 11 बज चुके थे सभी 4,5 कार्स से सूरजगढ़ की आवर निकल जाते है क्युकी सगाई सूरजगढ़ में हे राखी थी दोनों परिवारों की सहमति से ................

अब आगे ........

सक्तिपुर ............... सूर्य से मिलने के चाकर में गायत्री विधि सुबह जल्दी हे त्यार हो चुकी थी

बेसक सूर्य से मिलने की ख़ुशी थी पैर साथ हे सूर्य सगाई को ले कर जो दुःख था उसकी जलक भी दोनों के चेहरे पे नजर आ रही थी

गायत्री को ऐसे त्यार देख गीता ठाकुर से रहा नहीं जाता है आवर वह पूछ हे लेती है गायत्री से

गीता ठाकुर .......गायत्री बेटी कही जा रही हो क्या सुबह सुबह त्यार होने कर

अब गायत्री क्या जबाब देती की वो कहा जाने के लिया त्यार हुई है

गायत्री ......मम्मी वो चची जी के साथ कही जाना है

गीता ठाकुर ......पैर मुझे तो रुक्मणि ने कुछ बताया भी नहीं इस बारे में कहा है रुक्मणि

रुक्मणि किचन से बहार निकलते हुए

रुक्मणि .....दीदी मैं यही हूँ

गीता ठाकुर ....... रुक्मणि कहा जा रही हो तुम कुछ बताया भी नहीं

रुक्मणि ....... दीदी हम सूर्य की सगाई में जा रहे है

गीता ठाकुर ........ क्या कहा सूर्य की सगाई में तुम पागल तो नहीं हो गई हो रुक्मणि

रुक्मणि ...... आप जो चाहे संजो दीदी मैं दोनों बेटियों के साथ सगाई में जा रही हूँ

आप एक तरफ सूर्य को अपना बीटा मानती है दूसरी तरफ उसकी इतनी बड़ी ख़ुशी में शामिल भी नहीं हो रही है

गीता ठाकुर ....... मेरी बहन तुम समाज नहीं रही हो जाने का दिल तो मेरा भी बहुत है पैर मैं मजबूर हूँ तुम तो सब जानती हो न

रुक्मणि ......गायत्री बीटा जाओ आवर बाकि तयारी देखो तुम

गायत्री फ़ौरन वह से निकल लेती है

रुक्मणि ....... मैं नहीं जानती दीदी आप जानती है की नहीं विधि आवर गायत्री सूर्य से प्यार करती है

गीता ठाकुर ....... मैं जानती हूँ रुक्मणि दोनों के बारे में

रुक्मणि ........ फिर भी आप चुप है आप चुप रह सकती है पैर मैं नहीं कल रात मैंने अपनी बेटियों को सूर्य के लिया तड़पता रेखा है दीदी जो मुझे बिलकुल बर्दाश नहीं हुआ मैंने फैसला कर लिया है अपनी बेटियों की ख़ुशी के लिया चाहे मुझे सूर्य के पेअर हे क्यों न पकड़ना पड़े आज मैं सूर्य से बात करने हे रहूंगी

गीता ठाकुर ......तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी रुक्मणि अभी तुम खुद हे मुझे साम्बा रही थी की सूर्य की इतनी बड़ी ख़ुशी में हम शामिल नहीं हो रहे है आवर अभी तुम इस ख़ुशी के मोके पे वह ऐसी बात कर ठीक नहीं कर रही हो

रुक्मणि ....... फिर आप हे बताओ मैं क्या कृ दीदी ये सब हमारे पापी पतियों के कारन हो रहा खुद तो मर गए पैर हमें आवर हमारे बच्चो को जीते जी मार गए

दीदी मेरी बादः है उन्हें की उनके नरक में भी सन्ति नहीं मिलेगी

कहते हुए रुक्मणि के आँखों से आंसू बहने लगते है

ऐसा नहीं था की गीता ठाकुर को गुस्सा नहीं था दुर्जन सिंह पे पैर वो खुद को काबू रख सकती थी

गीता ठाकुर आगे भाड़ रुक्मणि के आंसू पोंछती है

गीता ठाकुर ........ संत हो जा मेरी बहन आंसू बहाने से हमारे पाप काम नहीं होने वाले हमने भी तो वही किया था तुम्हे सूर्य की सगाई में जाना है न तो जाओ आवर विधि गायत्री बेटी भी जाना चाहती है तो जाये पैर अजय आवर विक्रम को इस बारे में पता न चले इतनी कोशिश जरू करना तुम आवर सूर्य से मेरे लिया माफी मांग लेना

रुक्मणि ....... दीदी वह आवर लोग भी होंगे विक्रम आवर अजय को उनसे भी तो पता लग सकता है

गीता ठाकुर .......एक काम कर अजय को अपने साथ ले जा ताकि वह किसी को कुछ कहने की जरुरत न पड़े आवर फिर खुद अजय विक्रम तक इस बात को पहुंचने से रोकेगा बाकि मैं संभालती हूँ पैर अभी सूर्य से इस बारे में बात मत करना उसे कही आवर किसी दिन बात करना ठीक रहेगा

रुक्मणि .......ठीक है दीदी कल सूर्य को फार्महाउस आने का कह देती हु आप भी वही साथ में चलना

गीता ठाकुर....... ठीक है रुक्मणि अभी तू जा कर त्यार होने जा मैं अजय की भेजती हूँ तुम्हारे साथ

करीब 12 बेब के लगभग अजय रुक्मणि गायत्री विधि चारो सूर्यगढ़ के लिया रवाना हुए

वह से पता किया तो पता चला सगाई सूरजगढ़ में है

सूरजगढ़ ......... उदार ऋषि सात्विक सभी कार्य अपने देख देख में करवा चुके थे

अब बस वर वधु को रिंग पहननी बाकि थी बाकि सभी रस्मे पूर्ण होने चुकी थी

तभी बहार से एक नौकर आ कर जोरावर मां जी के कान में कुछ कहता है

j.mama जी ........ उन्हें किसने आमंत्रित किया है यहाँ पे

महेंद्र जी ...... क्या हुआ याद किसकी बात कर रहे हो

j.mama जी ...... सक्तिपुर से रुक्मणि ठाकुर आवर उसका बीटा बेटी सगाई में आये है हमने तो उन्हें इनविटेशन नहीं दिया था

सूर्य ......मां जी उन्हें मैंने इनविटेशन दिया था आप जा रहे है या मैं जाऊ उन्हें लेन

j.mama जी ....... जा रहा हूँ अभी दामाद बना नहीं आवर अभी से हुकम सुना रहे हो चल भाई महेंद्र

महेंद्र j.mama जी मुख्या द्वार की आवर निकल जाते है

वही सूर्य खड़ा मुस्कुरा रहा था

सूर्य....... दादा जी सक्तिपुर से रुक्मणि चाही आवर उनके बच्चे आये है सगाई में आप संभल लेना उन्हें मैंने हे बुलाया था

दादा जी ......ये तुमने बहुत अच्छा किया बीटा जो दुश्मनी के जगह प्यार का दमन थमा तुमने

सामने से रुक्मणि आवर अजय आते हुए नजर आते है वही उनके पीछे से हलकी हलकी जलक गायत्री आवर विधि की नजर आ रही थी





(गायत्री )





(विधि )

रुक्मणि को वह देख सक्तिपुर से जो लोग आये थे वो सभी खुसुर फुसुर डाभी आवाज में बात करने लगते है

वही सूर्य स्टेज से उतर कर सीधा रुक्मणि से गले लग कर मिलता है

सूर्य ....... मुझे यकीं था आप जरूर आएँगी चची जी कैसी है आप चची जी

रुक्मणि ....... मेरे बेटे की सगाई हो आवर मैं नहीं आती ऐसा कभी हो सकता है क्या बहुत हे प्यारे लग रहे हो बीटा किसी की नजर न लगे

कहते हुए आँखों से काजल निकल के कान के पीछे टिका लगा देती है

सूर्य अजय से हाथ मिलता है आवर फिर गायत्री से आवर विधि से

विधि की हलकी लाल आँखे देख सूर्य समाज जाता है की विधि किध हालत से गुजर रही है

विधि ......इंगेजमेंट की बहुत बहुत शुबकामनाएं आपको

सूर्य ......थैंक यू आप ठीक है न चलिए आप सभी को अपनी बाकि family's से मिलवाता हूँ

सूर्य चारो को स्टेज पे ले कर जाता है

ऋषि सात्विक .......पुत्र सूर्य मुहूर्त निकल जा रहा है पहले सगाई की विधि पूरी कर लो

सूर्य ......जी ऋषिवर

सपना उंगूठी वाला थल शामे कर देती है ऋषि सात्विक के मंत्रो उच्चारण के साथ किरण रिंग सूर्य को पहनती है

सूर्य जब रिंग किरण की ऊँगली में दाल रहा था तभी उसकी नजर विधि पे पड़ती है जो अपनी आँखों से निकले आंसू को सबसे छुपाते हुए पूछ रही थी

सूर्य का हाथ एक पल के लिया रुकता है जिस से किरण सूर्य की आवर देखती जब सूर्य की नजर का पीछा करती है तो सूर्य की नजरे विधि पे पति है

किरण ....... क्या हुआ सूर्य

सूर्य ........ कुछ नहीं सॉरी स्वीटी

सूर्य रिंग किरण को पहना देता है सभी दोनों पे गुलाब के पंखुड़ियों की वर्षा करने लगते है

सूर्य किरण जोड़े से सभी बड़ो का आशीर्वाद लेते है

सूर्य ......दादी जी आप तो जानती होंगी इनकी ये रुक्मणि चची जी है सक्तिपुर से आवर हे इनका बीटा अजय दुस्यंत ठाकुर आवर ये इनकी बेटी विधि ठाकुर आवर ये है गायत्री ठाकुर गीता चची जी आवर दुर्जन ठाकुर जी के बेटी

दादी जी ........ बेटी तुम सगाई में आई हमें बहुत ख़ुशी हुई

सूर्य ...... चची जी गीता चची जी नहीं आई

रुक्मणि ......बीटा वो हवेली पर हे है विक्रम के साथ उसका एक्सीडेंट हुआ था तो उसके पास भी किसी का रुकना जरुरी था उन्होंने सगाई में न आ पाने के लिया माफी मांगी है तुमसे

रुक्मणि अपने हेंड बैग से एक बॉक्स निकलती है जिसमे गोल्ड चैन थी जिसमे बड़ा .ॐ .बना हुआ था वो सूर्य को पहना देती है

रुक्मणि .......इस्वर हमेशा तुम्हारी रक्षा करे बीटा तुम्हे हर बुरी नजर से बचाये

वैसे मेरी बहु बहुत प्यारी है बिलकुल सवरग से उत्तरी अप्सरा

किरण ....... बेटे के लिया गोल्ड चैन आवर बहु के लिया कुछ नहीं ये तो गलत बात है चची जी





किरण ने ये बात कुछ इस तरह कही जैसे वो सच में नाराज हो सूर्य जनता था की ऐसा कुछ नहीं है

इस लिया उसकी हाशि चुत जाती है

बाकि सभी अभी भी किरण को देख रहे थे

रुक्मणि ......ऐसा कभी हो सकता है क्या बेटी

कहते हुए एक बॉक्स खोलती है जिसमे एक खूबसूरत गोल्ड हर था





जो रुक्मणि जी किरण को पहना देती है

किरण मन करती है पैर रुक्मणि जी एक नहीं सुनती है

किरण ........ चची जी ये तो बहुत महंगा है मैं नहीं ले सकती हूँ

दादा जी .......बेटी किरण आशीर्वाद की कीमत नहीं लगाई जाती शामे वाले का उसके छुपा प्यार आवर आशीर्वाद जो अनमोल वो देखा जाता है

जोरावर .....बाउजी सगाई समारोह बच्चे से हो गया है सभी भोजन कर रहे है मैं उन्हें देखता हूँ आप सब भी भोजन कर लीजिये

नाना जी .....नहीं बीटा पहले सभी मेहमान भोजन करेंगे बाद में हम सब

तुम सब मेहमानो को देखो किसी को कोई शिकायत नहीं होनी चाइये

डेरी डेरी सभी भोजन कर अपने अपने गंतव्य की आवर निकल जाते है

ीदार बाकि गर्ल्स मण्डली किरण को ले कर एक आवर निकल जाती है

सूर्य को अकेला देख गायत्री वह विधि दोनों सूर्य के पास आ जाती है

गायत्री ......सगाई की बहुत बहुत शुबकामनाएं आपको

सूर्य ....... शुबकामनाएं अगर दिल से खुश हो कर दी जाये तभी सफल होती है गायत्री

जुबान कुछ आवर कहे दिल कुछ आवर कहे तो इस्वर भी किसकी सुने क्यों विधि सही कहा न

सूर्य की बात सुन विधि की आँखों में एक बार फिर से नमी आने लगती है

सूर्य ....... जनता हूँ विधि गायत्री ये समय बहुत मुश्किल है तुम दोनों के लिया मेरी परिस्थित मैं हे जनता हूँ

विधि से आवर नहीं रुका जाता है आवर वह सूर्य के गले से लग सुबकने लगती है

दूर कड़ी रुक्मणि शालिनी जी रेखा जी प्रिय जी से बात तो कर रही थी पैर बार बार उनकी नजर इस तरफ भी पद रही थी वही शालिनी जी से भी ये सब चूका नहीं था

गायत्री ......विधि खुद को सम्भालो यहाँ हम अकेले नहीं है बाकि मेहमान आवर घर वाले भी मौजूद है

सूर्य ........ संत हो जाओ विधि देखो चची जी हमें हे देख रही

सूर्य की बात सुन विधि सूर्य से अलग हो अपनी आँखे साफ करती है

कुछ देर ऐसे हे बात करने के बाद दादा जी के कहने पे सभी भोजन के लिया चल देते है

सूर्य के इसारे पे मानसी विधि वह गायत्री को भी अपने साथ हे भोजन के लिया बैठा लेती है

रुक्मणि जी को मेनका जी अपने साथ महिलाओ की आवर ले जाती है

सभी के भोजन करने के बाद तक़रीबन 3 बजे रुक्मणि जी ने सबसे जाने की इजाजत ली

रुक्मणि ....... सूर्य बीटा कल या परषो तुम्हे जब भी फ्री टाइम मिले मुझे फ़ोन करना कुछ जरुरी बात करनी है

सूर्य .....जी चची जी जैसा आप कहे अजय संभल कर ले जाना सभी को

अजय .......ठीक है

अजय सभी कोले कर निकल जाता है सक्तिपुर की आवर

सभी के जाने के बाद किरण सूर्य को अपने रूम में ले जाती है जहा आवर कोई मौजूद नहीं था

किरण ....... ये विधि के साथ क्या चाकर है आवर आपने ये बहुत नहीं बताया के सक्तिपुर से ये लग भी आने वाले है

सूर्य ....... विधि गायत्री दोनों मुझसे प्यार करती है जब सगाई के बारे में पता चला तो उदाश हो गई

किरण ........ ऐसे आप कितनो को ऐड करोगे कही रुकने का सोचा भी है की नहीं

सूर्य ......मैंने है नहीं कहा मैंने साफ साफ दोनों को कह दिया है की जीवन भर का वडा मैं नहीं कर सकता हूँ साथ निभाने का

किरण ....... क्या ऐसा करके आपको ख़ुशी हुई

सूर्य ...... किसी का दिल दुख कर कैसे कोई खुश हो सकता है स्वीटी मुझे भी दुःख है की मेरी वजह से दोनों को दुःख हो रहा पैर कही न कही तो इन सब को विक्रम देना होगा न

किरण ........ ये सब आप मुझपे छोड़ दीजिये आज भी आप लड़कियों की भावनाये समझने में परिपक्व नहीं हुए है न जाने आगे आपका क्या होगा इतनी बीबियो संभालना है आपको

सूर्य .....ुम्मम्हा तुम हो न सैम हेंडल करने के लिया फिर मुझे किध बात की चिंता

किरण ....... ये क्या बात हुई अगर मैं नहीं रहूंगी तब क्या होगा

सूर्य ......इस्सस दुबारा ऐसी सोच भी अपने दिमाग में मत आने देना स्वीटी तुम्हारे बिना जीने का सोच भी नहीं सकता

किरण ......सॉरी बाबा मेरा वो मतलब नहीं था अच्छा मुझे विधि का no.dijiye मुझे उस से बात करनी है

सूर्य ...... ठीक है ले लेना पहले मुझे एक बड़ा वाला किश चाइये अब तो सदी में हे मुलाकात होंगी आपसे

सूर्य किरण को वही बीएड पे लेता कर किरण के सरीर पे चेंज लगता है किरण की चमकती हुई आँखों में देखते हुए सूर्य अपने ाड्रो को स्वीटी के ाड्रो से जोड़ देता है

स्वीटी अपने दोनों हाथो को सूर्य के गर्दन के इर्द गिर्द लपेट कर सूर्य का किस स में साथ देने लगती है

दोनों एक दूसरे में खो जाते है काफी देर तक इनका किश चलता है किसी के दूर नॉक करने पे दोनों किश you'd कर अलग नोट है

किरण ....ुन्नन ुह्ह्ह्ह देखो गेट पे कोण है मैं बाथरूम में जाती हूँ

सूर्य जब दूर ओपन करता है तो सामने सन्ति ममी जी थी

सन्ति जी .....जमाई सा आप यहाँ क्या कर रहे है

सूर्य ......वो वो ममी सा

सन्ति जी ......पहले अपना चेहरा साफ कर लीजिये आवर स्वीटी को ले कर निचे आये

सन्ति ममी जी सूर्य के होंटो पे लगे लिपस्टिक को देख मुस्कुराते हुए निचे चली जाती है

सूर्य गेट बंद करता है

किरण ......कोण था जो नॉक कर रहा था

सूर्य ......सन्ति मां जी

किरण ......क्या मम्मी थी ओह्ह उन्होंने आपको यहाँ देखता आवर ये क्या आपने लिपस्टिक भी साफ नहीं की गेट खोलने से पहले

पका उन्होंने देख लिया होगा आप सच में गधे है पुरे जा कर चेहरा साफ कर लीजिये

कुछ देर बाद सूर्य अपने परिवार के साथ सूरजगढ़ निकल जाता है क्युकी सदी में केवल 3 हे दिन शेष थे 4 डे सदी थी आवर तयारिया बहुत थी करने को

U.S.A फबि हेडक्वार्टर्स ....... मफ्फिए बॉस दद के केस को इन्वेस्टीगेट कर टीम के हाथ अभी तक कोई भी साबुत हाथ नहीं लगा था जिस से केस में किसी तरह की हेल्प मिल सके

फबि पे ऊपर से बहुत प्रेशर आ रहा था इस केस को जल्दी से जल्दी सोल्वे करने क्युकी इसमें 100 से ऊपर क्रिमिनल मरे गए थे एक साथ इतने क्रिमिनल मारे जाने से बाकि जहा आम लोग जो इनके सताए हुए थे वो तो खुश थे पैर जो इन गुंडों के जरिया अपना बिज़नेस चलने वाले सफेदपोश थे वो फबि के नाक में डैम कर रखा था

फबि हेड ने इस केस को सोल्वे करने के लिया एक अपने डिपार्टमेंट के खाश अफसर की एक टीम का घट्न किया आवर इस टीम का जो इंचार्ज था वो था फबि का सबसे खतरनाक ऑफिसर्स केविन नेल्सन को चुना गया था

केविन ........ अफसर मुझे दद केस से जुडी हर रिपोर्ट 30 मिनट्स में मेरी टेबिल पे चाइये

हर एक साबुत एक एक रिपोर्ट के साथ आपका टाइम स्टार्ट होता है ान हेर्री उप

सभी अफसर किसी सवचलित मशीन के जैसे लग गए अपने काम

कुछ हे देर बाद केविन के टेबुल पूरी रिपोर्ट आवर सबूतों से भर चुकी थी

2 हर लगातार सभी रिपोर्ट चेक करने के बाद केविन ने पहली बार नजर उठा कर अपने सामने खड़े अफसर को देखा

केविन ...... ये सभी तो क्रिमिनल से जुडी रिपोर्ट है मुझे वो रिपोर्ट्स चाइये जिनका उस वक़्त वह पे किडनैप कर रक्षा हुआ था आवर उस no. की डिटेल्स चाइये जिस से कॉल आया था

अफसर 1. ...... सॉरी सर हमने उस no. की डिटेल्स निकालनी की बहुत कोशिश की पैर हम उस से रिलेटेड कोई जानकारी नहीं जूता पाए क्युकी ऐसा कोई no. किसी भी कंपनी से इशू हे नहीं हुआ है

केविन ...... तुम्हारे कहने का मतलब है की जिस no. से कॉल आया उसका कोई अस्तित्व हे नहीं है तो फिर कॉल कैसे आया यू फुल

अफसर 1 ..... सर यही सच है हमने एक बार नहीं बहुत बार अरे चेक किया है

केविन ..... दद के विला से जो कोई भी जीवित मिला उसका बयां कहा है

अफसर 2 .......सॉरी सर वह जितने भी मौजूद थे सब मरे गए थे हमारे पहुंचने से पहले हे

केविन ..... फॉरेंसिक टर्म को त्यार करो क्राइम स्पॉट पे फिर से फॉरेंसिक जाँच के लिया आवर जिस दिन ये घटना हुई उस से 10 डेज पहले तक की सभी मिसिंग किडनैपिंग रिपोर्ट्स मुझे चाइये

ऑफिसर्स 1 ......यस सर

केविन फॉरेंसिक टीम के साथ एक बार फिर से दद के अड्डे की बारीकी से जाँच करने निकल जाता है

काफी मसकत के बाद केविन को वह से छोटे मोठे साबुत मिले जिन्हे फॉरेंसिक टीम जाँच करने के लिया सौंप देता है

मिसिंग रिपोर्ट के आदर पे केविन कुछ लोगो पे नजर रखने को अफसर 1 को बोलता है

वही फॉरेंसिक टीम नए सबूतों की जाँच में जुट जाती है जिनसे उन्हें कुछ लीड मिलने की उम्मीद केविन को भी मुलती है

केविन एक बार फिर से सभी रिपोर्ट आवर सबूतों की बारीकी से जाँच सुरु कर देता है ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
 
अपडेट. 192

केविन ..... फॉरेंसिक टर्म को त्यार करो क्राइम स्पॉट पे फिर से फॉरेंसिक जाँच के लिया आवर जिस दिन ये घटना हुई उस से 10 डेज पहले तक की सभी मिसिंग किडनैपिंग रिपोर्ट्स मुझे चाइये

ऑफिसर्स 1 ......यस सर

केविन फॉरेंसिक टीम के साथ एक बार फिर से दद के अड्डे की बारीकी से जाँच करने निकल जाता है

काफी मसकत के बाद केविन को वह से छोटे मोठे साबुत मिले जिन्हे फॉरेंसिक टीम जाँच करने के लिया सौंप देता है

मिसिंग रिपोर्ट के आदर पे केविन कुछ लोगो पे नजर रखने को अफसर 1 को बोलता है

वही फॉरेंसिक टीम नए सबूतों की जाँच में जुट जाती है जिनसे उन्हें कुछ लीड मिलने की उम्मीद केविन को भी मुलती है

केविन एक बार फिर से सभी रिपोर्ट आवर सबूतों की बारीकी से जाँच सुरु कर देता है ................

अब आगे ............


2 दिन बाद ....... सक्तिपुर ....... इस वक़्त गीता ठाकुर विक्रम को खाना खिला कर अपने रूम में लौटी हे थी की कोई उनके रूम का दूर निक करता है जिस से गीता ठाकुर थोड़ी गबरा जाती है

गीता ठाकुर .......ko...kon है

रुक्मणि .......अरे दीदी मैं गन रुक्मणि गेट खोलिये आपसे जरुरी काम है

गीता ठाकुर अपने माथे पे आये हुए पसीने को अपनी सर्रे में पलु से पिंच कर दूर खोलती है

रुक्मणि .......क्या बात है दीदी आप मच गाब्री हुए आवर परेशान लग रही है मच हुआ है क्या या कोई बात आपको परेशान कर रही है

गीता .......मच नहीं रुक्मणि बस वाइज हे थोड़ी गब्रहत हो रही है गठन सी हो रही थी सायद इसी वजह से सब हो रहा है

रुक्मणि .......दीदी अगर मच ज्यादा प्रॉब्लम है तो मैं अभी कार निकलती हूँ हम हॉस्पिटल चलते हेयर या मैं डॉक्टर को कॉल कर यही बुला लेती हूँ

गीता .......वो सब छोड़ अब उम्र होने लगी है तो ये सब होता रहता है

तुम कुछ जरुरी काम में बारे में बात करने आयी थी न बोलो क्या जरुरी काम अस गया

रुक्मणि ........ अभी नहीं दीदी अभी आप आराम कीजिये मैं सुबह बात करती हूँ कुछ भी प्रॉब्लम हो तो आप मुझे कॉल कर देना या विधि गायत्री के रूम में मैं सो रही हूँ वह खबर कर देना

गीता ...... ठीक है रुक्मणि आवर ये अजय कहा पे है

रुक्मणि .......आवर कहा दीदी गया होगा फार्महाउस पे अपने आवारा दोस्तों को ले कर

गीता ठाकुर .......ठीक है तुम जा कर सो जाओ आवर गेट अंदर से लॉक कर लेना ठीक से

रुक्मणि ........क्या हुआ दीदी आप गेट अंदर से लॉक करने को क्यों बोल रही है

गीता ....... आजकल चोरी चाकरी बहुत हो रही है इस लिया कह रही हूँ तुम्हे अब हवेली का वो रसूक नहीं है जिस से ऐसे लोग दूर रहते थे

रुक्मणि ......ठीक है दीदी जैसा आप कहो पैर आप को भी याद है न कुछ भी प्रॉब्लम हो तो मुझे उठा देना

गीता ......ठीक है अब तू भी सो जा जाकर

रुक्मणि गुड नाईट बोल कर गीता ठाकुर के रूम से निकल जाती है

रुक्मणि के जाते हे गीता ठाकुर फिर से रूम को लॉक कर लेती है

गीता ....... अब तुम्हे क्या बताऊ मेरी बहन हमने घर में हे शैतान पल रखा है जो अपनी हे माँ की इज्जत को तार तार करने की कोशिश कर चूका है

आइये थोड़ा पीछे चलते है ऐसा क्या हुआ की गीता ठाकुर इतना घबरा गई है अपनी हे हवेली में

कोण है वो सकाश जिसे शैतान कह कर सम्बोधित कर रही है गीता ठाकुर

रात का डिनर करने के बाद जब रुक्मणि किचन में चली गई विधि आवर गायत्री अपने रूम में ( दोनों एक रूम में रहती है ) अजय हवेली से बहार था

गीता ठाकुर विक्रम का खाना ले कर जब उसके रूम में पहुँचती है तो विक्रम आँखे बंद किये हुए ऐसे हे लेता हुआ था

गीता .......बीटा विक्रम चलो उठो खाना खालो बीटा

विक्रम अपनी आँखे खोल गीता ठाकुर को देखता है जो बीएड के सामने खाने का प्लेट लिए कड़ी थी

विक्रम .....मम्मी आप हे खिला दीजिये न अपने हाथो से

विक्रम ने ये इतने प्यार से कहा था की गीता ने भी है कह दिया

गीता ठाकुर जैसे हे खाने का प्लेट बीएड पे रखने के लिए निचे जुख़ी ुशी दौरान गलती से गीता ठाकुर की साड़ी का पलु खिसक कर निचे घिर जाता है

गीता ठाकुर प्लेट रख कर अपनी साड़ी का पलु ठीक करती है

पैर तब तक विक्रम की हवश से भरी भूखी नजरे गीता ठाकुर की ब्लाउज में कस्सी हुए 38 की दूडिया चूचिये पे वह ुश्कि गहरी घाटी में पद चुकी थी

गीता ठाकुर ने विक्रम की नजरो को अपने सीने को गुरते हुए देख लिया था

गीता ठाकुर को जरा भी देर नहीं लगी विक्रम की नजरो में अपने लिया छुपी हुए हवश को पहचानने में गीता ठाकुर इस मामले में बहुत अनुभवी थी की कोण किस नजर से देख रहा है

पहले वाली गीता ठाकुर होती तो सायद इतना फरक नहीं पड़ता गीता ठाकुर को किन्तु अब वो पूरी बदल चुकी थी बहार से भी आवर अंदर से भी उसका मन निर्मल हो चूका था

विक्रम के इस कुकरम से गीता ठाकुर को बहुत गुस्सा आता है पैर वो विक्रम को गर्ने की सिवाय कुछ करती नहीं है

विक्रम ......मम्मी मुझे ढूढ पीना है प्लेसेस

विक्रम ने गीता ठाकुर की चूचियों को भूखे भेड़िया की तरह फिरते हुए ये कहा था

गीता ठाकुर ......तुम्हे तो ढूढ पसंद नहीं था न विक्रम

विक्रम .....मम्मी पैर मुझे अभी ढूढ पीना है तभी तो मैं जल्दी ठीक होऊंगा आवर मुजमे ताकत आएगी

गीता ठाकुर ...... ठीक है मैं अभी गरम करके लती हूँ ढूढ

विक्रम .....जल्दी आना मम्मी

गीता ठाकुर जब गेट के पास पहुंची तो पलट कर विक्रम को देखा जो अपनी माँ के हिलते हुए खुले को देख अपने लिंग को अपने हाथ में दबा रहा था

गीता ठाकुर ......ची कैसे नालायक बीटा है जो अपनी हे माँ को इस नजर से देख रहा है ( गीता ठाकुर ने ये डेरी से पैर गुस्से में बहार जाते हुए बड़बड़ाते हुए बोलै था ) विक्रम को सुनाई तो दिया पैर साफ साफ नहीं

गीता ठाकुर के जाने के बाद विक्रम अपने शार्ट से अपना लिंग निकल कर सहलाने लगता है

उसे ये भी ख्याल नहीं रहा की गेट अदा खुला हुआ है

विक्रम आँखे बांड कर गीता ठाकुर का नाम लेते हुए मुठ मरने लगता है उसने लगा की मम्मी को वक़्त लगेगा आवर वक़्त लगता भी पैर जब गीता ठाकुर किचन में पहुंची ुशी वक़्त रुक्मणि विधि आवर गायत्री के लिया ढूढ गिलाश में दाल रही थी

रुक्मणि ...... अरे दीदी आप इतनी जल्दी खाना खिला भी आई विक्रम को

गीता ठाकुर ......नहीं रुक्मणि वो विक्रम के लिया ढूढ लेने आये थी अभी खाना नहीं खाया है उसने

रुक्मणि ......क्या कहा विक्रम के लिया ढूढ पैर वो तो ढूढ पिता हे नहीं दीदी

गीता ठाकुर .......है पैर पता नहीं आज पिने को बोल रहा है

रुक्मणि .....आप ये ढूढ ले जाइये मैं आवर गरम कर लेती हूँ बच्ची के लिया ढूढ दीदी

गीता ठाकुर ......ठीक है रुक्मणि

गीता ठाकुर वह से ढूढ का गिलाश ले कर निकल जाती है विक्रम के रूम की तरफ जब गीता ठाकुर गेट को पूरा खोलने के लिया हाथ बढ़ाया तभी रूम के अंदर आती सिसकियाँ सुनादि दी जिसमे गीता ठाकुर का नाम लेते हुए विक्रम अपने लिंग को हिलने में वयस्थ था आँखे बंद किये

गीता ठाकुर ने जब गौर से सब सुना आवर आड़े खुले गेट से अंदर देखा तो गीता ठाकुर के पैरो के निचे से जमीं खिसक गयी

सामने का दृश्य हे ऐसा था गीता ठाकुर की आँखे गुस्से में लाल हो गई पैर पता नहीं क्या सोच कर वो गेट से थोड़ा पीछे आ गई

आवर किसी चीज़ को घिरा कर आवाज की जिस की आवाज सुन किचन से रुक्मणि ने आवाज लगाई

रुक्मणि .......क्या हुआ दीदी ये आवाज कैसे थी

गीता ठाकुर ......( थोड़ा जोर से ) कुछ नहीं रुक्मणि गलती से हाथ फूलदान पे लग गया वही गिर गया था मुझसे

रुक्मणि .....ठीक है दीदी

गीता ठाकुर की आवाज सुन विक्रम बिच में हे रुक जाता है आवर अपना शार्ट ऊपर कर लेता है जिसमे उसका उभर साफ साफ नजर आ रहा था

विक्रम .....मम्मी आप तो जल्दी हे आ गई ढूढ ले कर मुझे तो लगा आपको टाइम लगेगा मैं तो आपको हे याद कर रहा था

गीता ठाकुर ......... पहले ढूढ पियेगा या खाना खायेगा

विक्रम फिर एक बार वही नजर गाड़ते हुए

विक्रम .... ...पहले ढूढ हे पीला दीजिये अपना..

गीता ठाकुर ......क्या कहा तूने

विक्रम .....यही की अपना लाया हुआ ढूढ पीला दीजिये आपने पूरा बोलने हे नहीं दिया वैसे आपने क्या समजा

गीता ठाकुर .......कुछ नहीं ये को ढूढ पियो फिर खाना खिला कर तुम्हे दवाई खिला देती हूँ

विक्रम आँखे बांड कर एक हे साँस में न चाहते हुए भी ढूढ ख़तम कर देता है

गीता ठाकुर चुप चाप विक्रम की हरकते देखते हुए उसने खाना खिलाती है

इस दौरान पूरा टाइम विक्रम गीता ठाकुर की दूडिया चूचियों को ताड़ने में लगा हुआ था

खाने की प्लेट रख गीता ठाकुर विक्रम को उसकी दवाई देती है जिसमे नींद की गोली भी थी

गीता ठाकुर ....... लो विक्रम बीटा अपनी दवाई खा कर आराम करो

विक्रम दवाई आराम से खा लेता है

गीता ठाकुर .....अब मैं भी थक गई हूँ इस लिया सोने जा रही हूँ

विक्रम ....... मम्मी आज मेरे साथ सो जाइये न

गीता ठाकुर .....नहीं बीटा मैं बहुत थकी हुई हूँ आवर तुम्हे भी छोटू लगी है

बहाना बना कर गीता ठाकुर बीएड से उठ कर बहार जाने को पलटी तो विक्रम ने गीता ठाकुर का हाथ पकड़ कर अपनी आवर खींचा

गीता ठाकुर को विक्रम के ऐसा करनी की उम्मीद बिलकुल भी नहीं थी

गीता ठाकुर सीधा लेते हुए विक्रम पे जा गिरी

अब ये विक्रम ने जानबुज कर किया था या अनजाने में हुआ पैर विक्रम का एक हाथ गीता ठाकुर की लेफ्ट साइड 38 की चुकी पे था वही दूसरा हाथ राइट साइड के गद्देदार बड़े कूल्हे पे था इस ददन विक्रम ने मोके का फायदा उठा कर 2,3 बार जोर से गीता की चीची आवर कूल्हे को दभा देता है

जिस से गीता ठाकुर को दर्द होता है आवर उसकी आँख से दो बून्द ासु लुढ़क कर गालो पे आ जाते है

विक्रम ......सॉरी मां......

विक्रम आगे कुछ बोलता उस से पहले हे चायताक चायताक कर के दो थपड विक्रम के गालो पे गीता ठाकुर रशीद कर देती है

गीता ठाकुर ........ची तू ऐसा निकलेगा पता होता तो तुज जैसे हवशी को मैं जनम के वक़्त हे मर देती तुम आज मेरी ममता का खून कर दिया अपनी हे माँ की ेजात पे हाथ दाल दिया तुझे जरा भी आराम नहीं आई ऐसा करते हुए एक बार भी नहीं सोचा

गीता ठाकुर फिर से विक्रम को थप्पड़ मरने हे वाली थी की विक्रम ने गीता ठाकुर का गाला पकड़ लिया

विक्रम .......चुप कर साली कुटिया ज्यादा छू चपड़ की तो यही नंगी कर दूंगा

विक्रम की गुस्से में जलती हुए आँखे वह उसके ऐसे सबद अपने लिया सुन कर गीता ठाकुर का वजूद तक हिल चूका था

विक्रम फिर से गीता ठाकुर की चुकी को अपने पंजे में भर लेता है

गीता ठाकुर खुद को चुरा कर विक्रम को रूम में बंद कर अपने रूम में आ जाती है

अभी रूम में आये हुए कुछ हे पल हुए थे की रुक्मणि दूर पे नॉक करती है जिसने विक्रम समाज कर गीता ठाकुर घबरा जाती है

प्रेजेंट टाइम .....

गीता ठाकुर ...... जैसे बाप दादा थे उनका खून भी वैसा हे निकला पहले तो ये सब बहार करता था अब घर की ेजात पे भी हाथ डालने लगा है

मेरी हे गलती है मर जाने दिया होता वही उसने काम से काम ये दिन तो नहीं देखना पड़ता मुझे मेरे हे पिलाये ढूढ में कुछ कमी रह गई जो ऐसा चरित्रहीन बीटा मिला

गीता ठाकुर रात भर ऐसे हे उल्जन में पड़े हुए रात बिता देती है

अब उनका विक्रम पे से विश्वाश उठ चूका था अब उसने विधि आवर गायत्री के साथ साथ अपनी आवर रुक्मणि की भी चिंता होने लगी थी

असुरलोक ..........

असुरमहल में जब से विकटासुर का विसुद्धि के साथ नगीना का नागौर के साथ विवाह सम्बन्ध को सहमति मिली है

तभी से असुरलोक में भी जासं का माहौल बना हुआ था जहा देखा वह मांस मदिरा भोग विलाश में असुर लिप्त नजर आते

हर रात कंटकासुर विसुद्धि आवर नगीना को ले कही अज्ञान्त स्थान के लिया गायब हो जाता जहा कंटकादुर विसुद्धि नगीना रात भर भोग विलाश में डुभे रहते

वही वातापी के पार्टी कंटकासुर का दिन प्रतिदिन मोह भांग हो रहा था

जब भी कंटकासुर वातापी से सम्बन्ध बनता उस वक़्त जहा पहले वातापी को अपने लिया प्यार नजर आता था वही अब केवल हवश क्रूरता नजर आती थी

जैसे कंटकासुर न हो कर किसी वहशी जानवर ने उसका चोला ओढ़ लिया हो

वातापी को ये बात बहुत खटक रही थी क्युकी कंटकासुर मध्यरात्रि को गायब हो जाता आवर सुबह को महल लौट आता आवर दिन भर मदिरा के नशे में दुभा रहता

आज वातापी ने निर्णय कर लिया था की वो कंटकासुर से इस विषय में अवश्य चर्चा करेगी

रात भर वातापी अपनी मायावी विद्या का प्रयोग कर कंटकासुर को खोजी रही किन्तु वातापी को कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई वातापी को ये समाज नहीं आ रहा था क्युकी वातापी मयासुर की पुत्री थी महावीर विद्या उसने अपने पिता से विरासत में जनम से प्राप्त हुई थी

जिसका प्रयोग कभी विफल नहीं होता था आवर वातापी अपनी महावीर विद्या में परिपूर्ण पारंगत थी असुरलोक में गठित हर घटना को वो जान सकती थी अपनी माया से

सुबह जब कंटकासुर असुरमहल में स्थित अपने कक्षा में पहुंचा तो वातापी ुशी की प्रतीक्षा कर रही थी

वातापी ........ आ गए स्वामी आप कहा थे आप जब से नगीना विषिधि का विवाह निर्धारित हुआ है आप हर मध्य रात्रि महल से पृष्ठं ( चले जाते है ) कर लेते है

कंटकासुर ....... मून रहो वातापी हमें विश्राम करना है तुम्हारे अनर्गल ( अनुचित ) वार्ता सुनने की इच्छा नहीं है हमारी आवशयक नहीं की हर कार्य हम तुम्हारी आज्ञा में कर करे

वातापी ........ स्वामी ये आप कैसे सब्दो का प्रयोग कर रहे है
हम आपकी अर्धागिनी क्या हमारा इतना भी अधिकार नहीं की हम जान पाए की आप हर मध्य रात्रि को कहा जाते है हमें आपको ले कर चिंता होती है

कंटकासुर ......... अपनी सीमा में रहो वातापी हमें समजने की आवस्यकता नहीं है न तुम्हे हमारी चिंता करने की आवशयकता है

कंटकासुर गुस्से में बिस्तर पे जा लेता

वातापी को कंटकासुर में सब्दो से बहुत दुःख हुआ था किन्तु

अपना पत्नी दरम में चलते अपनी साडी पीड़ा वातापी छुपा जाती है

आवर कंटकासुर की सेवा में लग जाती है कुछ हे देर में कंटकासुर को नीड आ जाती है

वातापी अपनी मायावी विद्या का प्रयोग सोये हुए कंटकासुर पे करती है

किन्तु जो दृश्य सामने आये उन्हें देख वातापी को चिंता होने लगती है

दरअशल कंटकासुर पे जब सचाई पता करने में लिया वातापी अपनी मायावी का प्रयोग करती है तो उश्के आँखों में सामने कुछ पालो में लिया बेहद हे डरावना चेहरा आ जाता कंटकासुर में स्थान पे जिसे देख वातापी भी दर जाती है

वातापी अपने कक्ष में बनाये गुप्त मायावी कक्ष की आवर भाड़ जाती है

जहा सो असुरगुरु को रकत सन्देश में माध्यम वे इस विषय में जानकारी देती है

किन्तु सुबह वे दोपहर का समय हो गया पैर असुरगुरु की आवर से किसी तरह का कोई सन्देश प्राप्त न होने पे वातापी आवर आदिक चिंतित हो जाती है

अब वातापी को तो ज्ञात तहत नहीं की जिनसे सो सहायता की उम्मीद लगाए हुए है

वो खुद इस वक़्त किसी आवर की कैद में है

उदार असुरगुरु को जब से असुरमहल में अपने स्थान पे किसी अन्य मायावी को असुरगुरु का मुखौटा पहने देखा तभी से सो भी बहुत परेशान थे

असुरगुरु वही से बहुत पर्यटन करते है किन्तु हर पर्यटन में वाइटल hi जाने पे उन्हें केवल एक हे मार्ग नजर आया आवर वो था माँ पटल भैरवी को परशान कर उनकी सहायता प्राप्त कर इस सडयंत्र में मुख्या स्टोरठ टेक पहुंचना

ुशी पल से असुरगुरु माँ पटल भैरवी को परशान करने हेतु कठोर तप में लीं हो चुके थे

दिन प्रतिदिन उनका तप कठोर होता जा रहा था

दिल्ली ......... सूर्य अपने विवाह का निमंतरण वयोम की सहायता वे दिल्ली सूर्यकांत सर टेक पंहुचा चूका था

वही सकती की सहायता से एक निमंतरण पुणे सोहेल की फॅमिली टेक पंहुचा चूका था

सोहेल इस वक़्त ड्यूटी पे होने से सो विवाह में शामिल नहीं हो रहा था

वही जब सूर्य की सदी की न्यूज़ राधिका दीप्ती को लगी तो राधिका में साथ साथ दीप्ती को भी चिंता होने लगी

राधिका .......दीप्ती दीदी अब क्या करे हम ( राधिका रिश्ते में दीप्ती की भाबी है किन्तु दीप्ती से उम्र में छोटी होने की वजह से दीप्ती को दीदी कहती हेयर राधिका ) हमने जैसा सोचा तहत वो प्लान तो अब काम करने से रहा

दीप्ती ....... नहीं राधिका ये प्लान फ़ैल हुआ तो क्या हुआ एक दूसरा तरीका भी हेयर है आप भाई को सेकंड हनीमून के लिया त्यार कीजिये क्युकी सूर्य में साथ आप आवर भाई भी हनीमून पीरियड जाने वाली है बाकि वैसे आपने भाई से इस बारे में बात की क्या

राधिका .......है मैंने उन्हें सूर्य में बारे में सब बता दिया है अगर जरुरत पड़ी तो वो खुद इस बारे में सूर्य से बात कर लेंगे

दीप्ती ......हम्म्म वैसे तो हे हर पति में लिया मुश्किल भरा फैसला होता है अपनी पत्नी को किसी आवर के साथ सुलाना जब की आप एक दूसरे से बहुत प्यार करते है तब तो आवर भी मुश्किल हो जाता है

राधिका .......दीदी एक बात बताएंगी सच सच

दीप्ती ......यही न की मैं सूर्य को पसंद करती हु की नहीं

है हे सच है राधिका की मैं सूर्य को चेंज लगी हूँ पैर ईयर भी सच है की उस से मेरा रिस्ता नहीं हो सकता

राधिका ....... आपकी भी किस्मत बड़ी अजीब है दीदी मेरी तरह पहले तो कोई पसंद नहीं आया आवर जब आया तो सो किसी आवर का पहले हे हो चूका है

जहा माँ बाप प्यार के खिलाफ नोट है वही हमारे मम्मी पापा में हम दोनों के प्यार को स्वीकार किया तो उस मनहूष दिन ने एक हे पल में साडी खुशिया चीन ले

दीप्ती ....... राधिका किस्मत में लिखा कोई बदल नहीं सांता हमारे हाथ में सिर्फ करम करना है तो अच्छे करम करते रहो बाकि सब उस ऊपर वेक पे छोड़ दो जिसके हाथ में हम सभी की दूर है

राधिका ....... थैंक यू दीदी आपने मेरे लिया जो मच भी किया

दीप्ती ...... बस बस बड़ी आई थैंक यू कहने वाली भूलना नहीं भाबी बाद में पहले है बहने आवर अच्छी फ्रेंड्स है सामजी

राधिका ......... फ्रेंड्स नहीं बेस्ट फ्रेंड्स है हम ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............🌹🌹🌹

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................🌹🌹🌹
 
अपडेट. 193

राधिका ....... आपकी भी किस्मत बड़ी अजीब है दीदी मेरी तरह पहले तो कोई पसंद नहीं आया आवर जब आया तो सो किसी आवर का पहले हे हो चूका है

जहा माँ बाप प्यार के खिलाफ नोट है वही हमारे मम्मी पापा में हम दोनों के प्यार को स्वीकार किया तो उस मनहूष दिन ने एक हे पल में साडी खुशिया चीन ले

दीप्ती ....... राधिका किस्मत में लिखा कोई बदल नहीं सांता हमारे हाथ में सिर्फ करम करना है तो अच्छे करम करते रहो बाकि सब उस ऊपर वेक पे छोड़ दो जिसके हाथ में हम सभी की दूर है

राधिका ....... थैंक यू दीदी आपने मेरे लिया जो मच भी किया

दीप्ती ...... बस बस बड़ी आई थैंक यू कहने वाली भूलना नहीं भाबी बाद में पहले है बहने आवर अच्छी फ्रेंड्स है सामजी

राधिका ......... फ्रेंड्स नहीं बेस्ट फ्रेंड्स है हम ............

अब आगे .......... ..........

उसे ..फबि हेडक्वार्टर्स .......

फबि चीफ .......... अफसर केविन अभी तक दद केस से रिलेटेड हमें कोई भी लीड नहीं मिली है

आखिर इसमें इतना वक़्त क्यों लग रहा है

केविन ....... सॉरी सर पैर मेरी टीम अपनी पूरी कोशिश कर रही है इस केस पे ी क्नोव आप पे प्रेशर बहुत है मैंने अपनी लाइफ में ऐसा केस पहली बार देखा सर जहा इतने मास्स मर्डर के बात भी कातिल ने एक छोटा सा साबुत तक क्राइम स्पॉट पे नहीं छोड़ा है

फबि. चीफ ........केस को दूसरे एंगेल से स्टडी करो क्रिमिनल कितना भी शातिर हो अपने क्राइम के नीसाण जरूर छोड़ता है

केविन ........ सर मैं आपको सूरे करता हूँ बहुत जल्द हमारे पास इस केस से जुड़े साबुत होंगे

फबि चीफ ........ केविन तुम्हारी हेल्प के लिया एक अफसर को अपॉइंट किया है तुम्हारी टीम में

केविन ....... सर मैं हेंडल कर सकता हूँ

फबि चीफ ......... ी क्नोव यू अरे ब्रिलियंट क्राइम अफसर बूत उसे हायर अथॉरिटी ने अपॉइंट किया है खाश टूर पे इस दद गैंग मास्स मर्डर केस पे मर .मार्क के हेरे

फबि चीफ के बुलाने पे बहार से तक़रीबन 38 39 की आगे का एक हटा कटा 6 फिट से भी ऊपर हिघ्त का बंद चीफ के केबिन में एंट्री करता है

फबि चीफ .......hello mr.mark ये है mr.kevin नेल्सन जिस केस के लिया तुम्हे अपॉइंट किया है उसने यही देख रहे है mr.kevin ये मर .मार्क आज से अभी से उस केस पे ये तुम्हारी हेल्प करेंगे

mr.mark ....... Hello मर केविन आपसे मिल कर ख़ुशी हुई आपके बारे में बहुत सुना यू अरे बेस्ट अफसर फॉर फबि क्राइम इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट

केविन .....नीस तो मीट यू मर .मार्क

मर. मार्क ........ ओनली मार्क नॉट मर .मार्क अगर आपको प्रॉब्लम न हो तो क्या मुझे केस से जुडी सभी रिपोर्ट मिल सकती है

फबि चीफ ........अभी केविन की ड्यूटी ऑफ होने वाली कल सभी रिपोर्ट मिल जाएगी मर मार्क

मार्क ......सॉरी सर मेरी एक बुरी आदत है जो भी केस मैं लेता हु उस हे कम्पलीट करने के बाद हे मेरी ड्यूटी ऑफ होती है हर केस मेरे लिया पर्सनल है िफ़ यू don't मंद मर. केविन

केविन ......it's ok मार्क सभी रिपोर्ट्स 10 मिनट्स में तुम्हारे केबिन में होगी

मार्क वह से बहार निकल जाता है वही केविन भी उसके पीछे पीछे निकलता

कुछ हे देर में केविन के ऑर्डर्स पे सभी रिपोर्ट आवर अब तक की जाँच में जो कुछ मिला या सामने आया केविन उस हे मार्क के केबिन में भेज देता है

केविन ऑफिस से अपनी घर की तरफ निकल जाता है

पैर रह रह कर उसे मार्क से हाथ मिलते वक़्त जो अहसास हुआ तो वो बार बार उसके दिमाग में खतरे की चेतावनी दे रहा था

केविन घर पहुंचने हे अपने फबि बेच में लगा कैमरा लेपटॉप से कनेक्ट कर फबि चीफ वह मार्क से हुई बात को फिर से देखता है आवर सुनता है

बार बार केविन की नजर वही रुक जाती जब मार्क केविन से हाथ मिला रहा था आवर कुछ पल के लिया मार्क की आँखे चमकी थी ठीक ुशी पल केविन को हल्का सा शॉक लगता हुआ मह्सुश हुआ था अपनी बॉडी में

केविन ......... मुझे ऐसा क्यों अहसास हो रहा है जैसे की मार्क जो है वो दिखा नहीं रहा आवर जो दिख रहा है वो है नहीं समथिंग फिस्सी कुछ तो है मार्क को ले कर जो सही नहीं है मेरा मंद बार बार मुझे मार्क से डेंजर का संकेत दे रहा है

अभी केविन आवर कुछ करता तभी उसके लेपटॉप में ब्लास्ट हो जाता है

केविन आदिल नजदीक होने के कारन उस ब्लास्ट के चपेट में आये बिना नहीं रह पाया

केविन के चेहरे वह सीने पे इसका ज्यादा असर हुआ

केविन किसी तरह पास के हॉस्पिटल में कॉल कर एम्बुलेंस के लिया बोलता

कुछ हे देर में केविन वही बेहोश हो जाता है अपने घर के हॉल में

कुछ देर बाद एक एम्बुलेंस आ कर केविन को हॉस्पिटल ले कर जाती है जहा उसका इलाज सुरु किया जाता है

वही एम्बुलेंस के आने से कुछ पल पहले जब केविन बेहोश हुआ था तभी वह काले दुन्वा होने लगता है जिसमे से एक परछाई जैसा कुछ निकलता है

वही मार्क सभी रिपोर्ट की जाँच करने के बाद अकेला हे क्राइम स्पॉट की तरफ निकल जाता है रात के अँधेरे में मार्क की आँखे रेड लाइट सामान चमक रही थी

मार्क दद के आड़े पे पाहुवह कर वह की पूरी तलाशी लेता है

मार्क ....... कोण हो तुम मैं नहीं जनता क्यों तुमने इतने लोगो को मारा पैर बहुत जल्द मैं तुम तक पाहुवह जाऊंगा अभी तक तुम इस लिया छुपे हुए थे क्युकी अभी तक तुम्हारा सामना ससरन इंसानो से हुआ है

पैर मार्क सदर्न नहीं है आवर नहीं इंसान

मार्क वह कुछ सफ़ेद पाउडर जैसा कुछ एक पाउच से निकल कर फेंकता है

जिस से कुछ हे देर में वह उस दिन जो कुछ भी घटना घाटी थी वह मार्क के सामने सफ़ेद परछाइयों के रूप में दिखाई देने लगती है

केवल सूर्य पायल आवर ब्लैक ड्रैगन को छोड़ कर सब मार्क के सामने फिर से मनो ुशी घटना को बताया रूपांतरण वह हो रहा हो

मार्क ........ बहुत चालक हो तुम मगर जिसकी मुझे तलाश है तुम वही हो तो बहुत जल्द तुम तक पहुंच जाऊंगा अगर तुम वो नहीं हुए तो भी तुमसे मुलाकात तो जरूर होगी

कुछ देर मार्क वही मौजूद बार बार उन दृश्यों को देखता रहा तभी किसी को देख कर मार्क के होंटो पे विजयी मुस्कान आ जाती है

मार्क ....... यही है वो खूबसूरत मोहरा जो मुझे तुम तक पहुचायेगा मुस्कुराते हुए वह से लौट जाता है

सूरजगढ़ .........

परषो किरण आवर सूर्य की सदी थी रेखा जी आवर सन्ति जी के पीहर से मेहमान परषो आने वाले थे

पैर रेखा जी का छोटो भाई इंदरजीत ठाकुर (>जिसके रिश्ते की बात एक बार विक्रम सिंह राणा ( नाना जी ) ने परताप सिंह ठाकुर जी से चलाई थी ) वो यहाँ पहले हे पहुंच चुके थे साथ हे पाण्ड्य जी भी अपने परिवार सहित सूरजगढ़ पहुंचने चुके थे पैर वो थोड़े परेशानी में थे

पाण्ड्य जी ....... बाउजी ( विक्रम सिंह जी ) मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है मैं क्या कृ आप हे मेरी मदद कीजिये

नाना जी ........ बीटा मैं क्या मदद कृ मुझे तो खुद समाज नहीं आ रहा है तुमसे ज्यादा मुझे मदद की जरुरत है इस वक़्त यहाँ पोती की सदी है वह नाती की सदी है अब बोलो मैं किश से मदद मांगू इस मामले में

पाण्ड्य जी ....... मंत्री जी आप हे कुछ मदद कीजिये

j.mama जी ......भाई सा इसमें मुझे बिलकुल मत भी मत ुलजाये जिसने ये समस्या कड़ी की है वही उसे हे पकड़ो वही कोई रास्ता निकलेगा

नाना जी ......मैं अभी परताप को फ़ोन करता हूँ

नानी जी ....... फ़ोन करने से अच्छा है आप एक बार उनके सामने बेथ कर बात करो तो ज्यादा बेहतर है

संजय .......भाई सा माँ सा जो कह रही है मुझे भी लगता है वही करना अच्छा रहेगा

हमने पहले इस बात पे ध्यान नहीं दिया आवर न कोई हमने इसकी तयारी की है

j.mama जी .......संजय तयारी करना बड़ी बात नहीं है बात है वो तो एक फ़ोन पे रातो रात हो जाएगी

नाना जी ........ ऐसे इस समस्या का कोई हल नहीं निकलने वाला है जोरावर बेटे तुम कार निकालो हम तीनो चलते है सूर्यगढ़ चलो पाण्ड्य बीटा

नानी जी ...... मैं भी चलती हूँ आपके साथ

J.mama जी ......ठीक है माँ सा संजय घर का ख्याल रखना आवर बाकि तयारी देखो जरुरत पड़े तो बहार के कर्मो के लिया इंदरजीत आवर विजय को काम सामना देना ठीक हम जल्दी हे लौट आएंगे

j.mama जी पाण्ड्य जी नाना जी नानी जी सूरतगढ़ की आवर निकल जाते है

उनके बहार निकलते हे प्रिय जी किसी काम के लिया जोरावर जी को बुलाने किसी को भेजती है

लड़का .....चची जी बड़े चची जी कहा बड़ी चची बुला रही है उन्हें

संजय ......तुम जाओ मैं भाबी सा से बात करता हूँ

कहते हुए संजय हवेली के अंदर चला जाता है सामने हे उनकी भेज प्रिय जी से हो जाती है

संजय .....भाबी सा भाई सा से कुछ काम था क्या वो अभी अभी माँ सा आवर भौजी के साथ सूर्यगढ़ निकल गए है

प्रिय जी ....... क्या हुआ देवर सा सब लोग इस वक़्त अचानक से सूर्यगढ़ क्यों गए है सब ठीक तो है न

संजय .......भाबी सा सदी के चाकर में हमने एक बात पे ध्यान नहीं दिया अब जब ध्यान उस तरफ गया तो बहुत देर हो गई

प्रिय जी ....... ऐसा क्या हो गया देवर सा साफ साफ बताये न

सन्ति जी दोनों को इस तरह खुसर फुसर करते देख वो भी इनके समीप आ कड़ी हुई

सन्ति जी ........ क्या हुआ जीजा आप कुछ परेशान है

प्रिय जी .......कुछ नहीं सन्ति आप बताइये न क्या हुआ

संजय ........ भाबी सा परसो सदी है पैर हमने भात के बारे में तो सोचा हे नहीं सदी के चाकर में

वो तो कुछ देर पहले पाण्ड्य भाई सा ने इस बात की आवर हम सब का ध्यान कराया हमने भात की कोई भी तयारी नहीं की है भाबी सा शालू दीदी को पता चलेगा तो वो भी नाराज होंगी

प्रिय जी ...... हमने भी इस बारे में कुछ भी नहीं सोचा आवर अब तो बहुत देर हो चुकी तयारी भी नहीं की है

सन्ति जी ........ जीजा अभी भी हम अपनी तरफ से तयारी कर सकते क्युकी हमारे यहाँ तो भात परषो सदी के दिन हे आएगा क्युकी लड़की हम लड़की की सदी कर रहे है न की लड़के की

प्रिय जी .......सन्ति तुम्हारी बात सही है पैर इतनी तयारिया करनी होती है वो भी तो 0 से सुरु करनी होगी

संजय ....... भाबी सा भाई सा के आने के बाद हे देखते है तयारी तो किसी भी तरह कल दोपहर तक हो सकती है आवर साम को भात ले कर जा सकते है

सूर्यगढ़ ..........

नाना जी मां जी नानी जी पाण्ड्य जी को अचानक इस वक़्त हवेली में आया देख नानी जी को किसी अनहोनी असंका सारणी लगती है

नानी जी ....... क्या हुआ बहन जी आप लोग इस वक़्त यहाँ पे

J.mama जी आगे भाड़ दादी जी के पेअर छू थे है वैसे हे पाण्ड्य जी करते है

j.mama जी ...... माँ सा कुछ जरुरी बात करनी थी बैजू कहा है

दादी जी ...... आप लोगो ने तो इस तरह आ कर मुझे हे डरा दिया आइये महेंद्र आवर तुम्हारे भौजी बैठक में हे है

चारो दादी जी के पीछे पीछे बैठक में पहुंचने जाते है

दादी जी ...... आप सब लोग सदी की तयारी छोड़ यहाँ पे कैसे

नाना जी .......एक बहुत बड़ी समस्या आ गयी है मेरे दोस्त मुझे तो कुछ समाज आया नहीं तो यहाँ चला आया

दादा जी ......बात क्या है साफ साफ कहो यार डरा क्यों रहे हो कही उसने सुन लिया तो बवाल मचा देगा

तभी बहार एक के बाद एक करके 5,6 कार्स हवेली में एंटर करती है

दादा जी .....बीटा महेंद्र देखो कोण मेहमान आये है

आवर आप बताओ क्या समस्या है

नाना जी ....... सूर्य की सदी का भात समस्या बन गया है एक तरफ पोती का भात आने वाला है पुर दूसरी तरफ नाती का भात जाना चाइये पैर मैंने इन सब की कोई तयारी हे नहीं की

दादी जी ....... इतनी से बात थी क्या आपने तो हमें डरा हे दिया भाई सा

j.mama जी ...... माँ सा शालू हमारी एकलौती बहन है आवर हमने अपनी तरफ से कोई भी तयारी नहीं की है

दादी जी ...... सब चिंता छोड़ दे तू बीटा पाण्ड्य बीटा तुम किस तरफ से आ रहे हो

पाण्ड्य जी ....... माँ सा आप हे हुकुम कर दीजिये

दादा जी ....... देखो पाण्ड्य बीटा अब तुम सूरजगढ़ आ चुके हो तो सूरजगढ़ से हाट तुम भरने आओगे वो भी कल हे आवर जोरावर बेटे तुम भी साथ आओगे पाण्ड्य बीटा के भले हे सूर्य का भट महेंद्र के ससुराल से आ रहा है पैर वो नहं है तुम्हारी पहली चुनार तुम्हे हे उधानी है शालिनी बेटी को बेसक

बाकि कोई भी तयारी करने की कोई जरुरत नहीं है जनता हूँ उदार भी सदी है तो कुछ देर के लिया हे आ जाना आवर अपनी बहन को ओढ़नी ोुधा कर फिर चले जाना

j.mama जी ........ जी बैजू जैसा आप कहा

तभी महेंद्र जी बैठक के अंदर आते है

उनके पीछे पीछे सूर्यकांत सर उनकी वाइफ उनका बीटा रोहन आवर साथ में सोहेल के अम्मी अब्बू थे

दादा जी ........ आइये सूर्यकांत जी आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई न आप लोगो को

आओ कासिम बीटा आप लोग भी साथ में हे आये है

1..कासिम खान ( सोहेल अबू )

2...फातिमा खान ( सोहेल अम्मी )

कासिम ....... सलाम ठाकुर साहब

दादा जी ........ बीटा आप चाचा जी कह कर बू लाएंगे तो बहुत अच्छा लगेगा ठकुराइन बेटी आवर बहुओ को अंदर ले जाओ

दादा जी .....आप लोग मेरे साथ में आइये

फमिता जी आवर दीप्ती की माँ दोनों हे हवेली के अंदर चली गई बाकि दीप्ती राधिका सानिया सोफिया माया सिंधी पहले हे अंदर जा चुकी थी

कुछ देर बाद रोहन भी बैठक में एंट्री करता है

सूर्यकांत सर ......ठाकुर साहब ये है मेरा बीटा रोहन आर्मी में है डॉक्टर है आर्मी में

दादा जी ...... आओ बीटा रोहन बैठो आप सभी का इनसे परिचय करवाता हूँ महेंद्र बीटा जा कर मेहमान के लिया चाय कॉफिन का इंतजाम करो

महेंद्र जी .....जी बाउजी

दादा जी ...... महेंद्र से तो आप मिल हे चुके है कासिम बीटा ये है विक्रम सिंह राणा मेरे दोस्त आवर संदी इनकी पोती किरण से सूर्य की सदी हो रही है वैसे ये सूर्य के नाना जी भी लगते है

आवर ये जोरावर सिंह सूर्य के बड़े मां आवर इनको आप जानते है सूर्यकांत जी ये पाण्ड्य जी है

सूर्यकांत जी ....... पाण्ड्य जी को भी जानते है आवर जोरावर सिंह जी से कभी मुलाकात तो नहीं हुई पैर पहचानते है इनको भी

दादा जी .....कासिम बीटा आपका बीटा नहीं आया

कासिम ......चाचा जी उसे चुटी नहीं मिली ड्यूटी से अभी कुछ दीं पहले हे ड्यूटी पे गया है

दादा जी ....... ये क्या बात हुए सूर्यकांत जी हमारे पोते का एक हे तो दोस्त है आवर वो भी सदी में सरिक नहीं हो रहा है

सूर्यकांत जी ....... आप चिंता न कीजिये मैंने उसका ट्रांसफर यही जैसलमेर कर दिया है कल सुबह तक वो भी पहुंच जायेगा

ीदार इनकी चर्चा चलती रही

उदार हवेली में खूबसूरती का रामघाट लगा हुआ था

राधिका आवर सोफिया की नजरे बस सूर्य को हे खोज रही थी पैर सूर्य तो छठ पे ध्यान में बैठा किरण से इश्क़ फार्मा रहा था

शालिनी जी ........ कोमल बीटा देख सूर्य कहा है उस से कहो उसके नाना जी आये है

कोमल ...... जी मम्मी अभी बोलती हूँ

कोमल सीधा ऊपर की मंजिल की तरफ दौड़ गई

रेखा जी .......बेटी संभल कर चौथ न लगवाने बैठना कही

कोमल .......ok मम्मी

फातिमा जी .......ये आपकी बेटी है क्या बहन जी

शालिनी जी ..... है बहन जी जनम दीदी ने दिया पैर मेरे लिए मेरी बेटी है

तभी वह सोफिया आती है

फातिमा जी .....इस से तो आप मिली है पुणे में ये मेरी छोटी बेटी सोफिया है

सोफिया कुछ देर वही कड़ी रहती है सोफिया कुछ असहज लगी तो फातिमा जज ने भी कुछ देर बाद पूछ हे लिया

फातिमा जी ...... क्या हुआ सोफी बीटा कुछ प्रॉब्लम है क्या

सोफिया ...... वो वो अम्मी वो मुझे वाशरूम जाना था

शालिनी जी .....बेटी इसमें सर्मना कैसे निचे या ऊपर किसी भी रूम में जा सकती हो इसे अपना हे घर समझो वैसे पहले से बहुत प्यारी आवर खूबसूरत हो चुकी हो सोफिया बेटी

सोफिया...... थैंक्स आंटी जी

कह कर मुस्कुराते हुए अपने सर पे दुपट्टा करती सोफिया वह से ऊपर की आवर चल देती है

शालिनी जी .......बहुत प्यारी बची है किसी के भी रोटी हुए चेहरे पे इसकी एक मुस्कान काफी है हँसाने के लिया

ऊपर वाला सभी बुरी नजरो से बचाये आपकी बेटी को

ऊपर कोमल सूर्य को शालिनी जी का सन्देश देती है तो सूर्य भी किरण को bye बोल सम्पर्क तोड़ देता है

सूर्य ......क्या हुआ कोमल

कोमल ......मम्मी ने आपको निचे बुलाया है घर पे नाना जी आवर आपके सूर्यकांत सर की फॅमिली आवर आपके दोस्त सोहेल का परिवार भी आया हुआ है

सूर्य .......क्या बस इतना हे कहने आप ऊपर आई थी

कोमल अपने दुपटे में ऊँगली फशा कर घूमने लगती है

सूर्य कोमल को अपनी आवर खींच कर अपने सीने से लगा लेता है

कोमल बस प्यार से सूर्य की आँखों में खोये हुए थी

सूर्य डेरी से जूख्ट हुए अपने होंठ कोमल के लाल होंटो पे चिपका जे प्यार से ुनकादुररश पिने लगता है 2 ,3 मिनट्स के बाद खुद सूर्य हे कोमल से अलग होता है

कोमल की आँखे बंद थी उसके होंठ अभी भी फड़फड़ा रहे थे

सूर्य एक बार फिर से जुखा आवर एक छोटा सा किश पहले होंटो पे फिर कोमल के माथे करता है

जिस से कोमल अपनी आँखे खोलती है

सूर्ये के होंटो पे लगे अपने होंटो की लिपस्टिक कोमल अपने दुपटे से साफ करती है

सूर्य कोमल के कंधे पे हाथ दाल निचे चल देता है

ीदार सोफिया 2 रूम को लॉक देख तीसरे रूम को खोलने के लिया हाथ बाध्य हे था की

तभी उसके कानो में सूर्य की आवाज पादरी है जिसने सुन सोफी के चेहरे पे आसाराम हाय के साथ बहुत हे प्यारी मुस्कान उभर आती है

सूर्य ....... सोफी ये तुम हे हो न

सोफी जो ऊपर आते हुए अपना दुपट्टा कंधे पे ले लिया था एक बार फिर से सर पे करते हुए सूर्य आवर कोमल की तरफ पलट जाती है





सूर्य के साथ साथ कोमल भी सोफिया की खूबसूरत मुस्कान में खो सी जाती है

कोमल ......वाओ सोफी यू अरे रियली वैरी क्यूट है न सूर्य

सूर्य ....... ये तुमने बिलकुल सच कहा कोमल सोफी तुम वाकई में पहले से बहुत क्यूट हो गई हो

यहाँ सोफिया को जल्दी वाशरूम जाना था

सोफिया ......माफ कीजियेगा हमें पैर हमें अभी जल्दी है थोड़ी

सूर्य ........ क्या मतलब जल्दी है

सोफिया को आवर कुछ सुजा नहीं तो वह कोमल का हाथ पकड़ कर एक आवर ले जा कर कान में कुछ बोलती है

जिसे सुन कोमल की भी हंसी चुत जाती है

सोफिया .....कोमल बजी प्लेसेस

कोमल ........ok बाबा सॉरी तुम मेरे साथ चलो आवर मर. आप निचे जाइये आपकी सोफी आपसे बाद में मिलेगी

कोमल सोफिया को लिया सूर्य के रूम में गेस जाती है

बेचारे सूर्य का तो आते हे सोफिया ने पोपट कर दिया

सूर्य भी वह से निचे की आवर चल देता है जहा बाकि सभी पुरुष बे थे थे बैठक में ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................

कल सायद कोई अपडेट नहीं आएगा इस लिया अभी एक अपडेट पोस्ट कर दिया हूँ टाइम मीका तो जरूर पोस्ट करूँगा ...............

सभी को शुबरात्रि .................🙏🙏🙏
 
अपडेट. 194

यहाँ सोफिया को जल्दी वाशरूम जाना था

सोफिया ......माफ कीजियेगा हमें पैर हमें अभी जल्दी है थोड़ी

सूर्य ........ क्या मतलब जल्दी है

सोफिया को आवर कुछ सुजा नहीं तो वह कोमल का हाथ पकड़ कर एक आवर ले जा कर कान में कुछ बोलती है

जिसे सुन कोमल की भी हंसी चुत जाती है

सोफिया .....कोमल बजी प्लेसेस

कोमल ........ok बाबा सॉरी तुम मेरे साथ चलो आवर मर. आप निचे जाइये आपकी सोफी आपसे बाद में मिलेगी

कोमल सोफिया को लिया सूर्य के रूम में गेस जाती है

बेचारे सूर्य का तो आते हे सोफिया ने पोपट कर दिया

सूर्य भी वह से निचे की आवर चल देता है जहा बाकि सभी पुरुष बे थे थे बैठक में ..................

अब आगे .........

शिव ....... क्या बात है बीटा सूर्य तुम यहाँ पे कैसे वो भी इस वक़्त रात 11 बजे

शालिनी जी ....... क्या हुआ बीटा सूर्य तुम अभी तक सोये नहीं

सूर्य ....... वो माँ मेरा रूम पूरा बुक हो चूका है वह कोमल ने कब्ज़ा कर लिया है

शिव ........ अभी सदी हुई नहीं आवर तुम दोनों की आवर कोमल ने रूम से भी निकल दिया

शालिनी जी ....... लगता है शिव आज आपका बहार सोने का मन है

तुम ीदार आओ मेरे पास बैठो आवर बताओ बात क्या है

सूर्य ....... ऐसा कुछ नहीं है माँ वो सुनिधि कोमल आवर सोफिया मेरे रूम में सोने चली आई तो मैं आपके पास आ गया सोने के लिया

शिव ....... तू पक्का मुझे आज बहार सुलाएगा बीटा

सूर्य ....... ऐसा कुछ नहीं है पापा मैं छठ पे चला जाता हूँ

शिव .....उसकी कोई जरुरत नहीं है बीटा वैसे भी बहुत कमरे है हवेली में मैं उनके से किसी एक में सो जाता हूँ तुम अपनी माँ के पास सो जाओ

शिव जो कुछ लिख रहे थे सब कुछ समेत कर अलमारी में रख कर सूर्य के माथे पे किश कर नाईट के लिया अपने कपडे ले कर रूम से निकल जाते है

सूर्य उनने रोकता भी है पैर वो गुड नाईट बोल कर निकल गए

शालिनी जी ....... जानने दो उनने सूर्य वो चाहते है की तुम सुकून से सो सको मेरे साथ

शालिनी जी अपनी अलमारी से निघटजोन निकल कर बाथरूम में चेंज कर रूम को लॉक कर सूर्य के बगल में आ कर लेट जाती है

सूर्य शालिनी जी की आवर करवट ले कर लेट जाता है

आवर शालिनी जी के सीने के निचे से हाथ दाल उनसे चिपक जाता है

सूर्य को ऐसा किसी छोटे बचे जैसा भारतव करते देख शालिनी जी को सूर्य का बचपन जो दोनों ने साथ में बिताया था वो बचपन की यादें फिर से शालिनी जी मंद में आँखों के सामने से गुजर जाती जिनसे शालिनी जी के चेहरे पे भी ख़ुशी बिखेर जाती है

शालिनी जी ........ तुमने अभी तक अपने बचपन की आदते बदली नहीं सूर्य

सूर्य ....... माँ वो बचपन की आदते है जिनमे आपका प्यार आपकी यादें समायी है उन्हें कैसे बदल सकता हूँ

जब कभी बिज़नेस के चलचलते पापा घर नहीं आते रात को तब आप हे तो थी जिनसे लिपट कर मैं चैन से सो पता था

शालिनी जी ........ पैर अब तुम बड़े हो गए हो परषो तुम्हारी सदी है कुछ महीनो बाद तुम भी पापा बन जाओगे

सूर्य ....... Hello माँ आप कहा से कहा पहुंचने गई

आप तो अभी से पोते पोती के सपने देख रहे हो

शालिनी जी ....... फिर उस दिन क्या हो रहा था मुझे तो क्यूट से स्वीटी चाइये ये तुमने हे कहा था न स्वीटी से

सूर्य ....... माँ वो सब मजाक था वैसे सॉरी माँ

शालिनी जी ........ सॉरी किस लिया बोल रहे हो बीटा

सूर्य ......वो मैंने आवर स्वीटी ने आपसे एक बात चौपाई है

शालिनी जी ...... कोई बात नहीं बीटा तुम्हे आवर स्वीटी ने चौपाई है तो बात को छिपाने की बझा भी रही होगी

सूर्य ....... माँ हम नहीं चाहते थे की किसी को ये बात पता चले पैर आप ये बात अपने तक हे रखना

शालिनी जी ...... अगर ऐसी बात है तो रहने दे बीटा क्युकी जाने अनजाने ऐसी बाते मुँह से निकल हे जाती है चल अब सो जा चुपचाप सुबह बहुत से काम है

सूर्य शालिनी जी को अपनी आवर करवट करवा कर अपना सर उनकी छाती से लगा कर लेट जाता है

शालिनी जी के निरंतर सूर्य के सर में चलते हाथो से सूर्य जल्दी हे गहरी नींद में चला जाता है

शालिनी जी ने जो निघटजोन डाला था वो फुल साइज था जिस से उनने परेशानी हो रही थी क्यों की नाईट में सॉर्ट निघ्त्य दाल कर सोने की आदत जो थी शालिनी जी को

कुछ 1 घंटे बाद शालिनी जी उठी आवर दूसरी जो आरामदायक निघ्त्य थी वो दाल कर वैसे हे लेट गई

काफी लेट तक शालिनी जी सूर्य को निहारती रही

फिर न जाने कब ुंखी आँख लगी जिस कारन सुबह शालिनी जी की आँखे रोज के समय से थोड़ी लेट खुली

उन्हें भी अपने बेटे के साथ सोने में सुकून मिला था

सूर्य अभी ुशी फरहा लेता था बस हाथ कमर के पे न हो कर शालिनी जी ब्लैक पेंटी में काशी मुलायम नितम्ब पे थे जिनका आभाष शालिनी जी को जागने पे हुआ

शालिनी जी ...... अच्छा हुआ सूर्य अपने टाइम पे नहीं उठा वर्ण वो खुद शर्मिंदा हो जाता नींद में हुए इस गलती की वजह से

सूर्य का एक पेअर शालिनी जी के दोनों पैरो के बिच निघ्त्य के ऊपर से उनकी योनि को छू रहा था

जिसे अपने पैरों के बिच से हटाने के लिया शालिनी जी अपना हाथ बढ़ा कर सूर्य का पेअर जांघों के पास से पकड़ा तो उनका के पुरे सरीर में जुरजूरी से दौड़ जाती है

शालिनी जी को जैसी किसी ने पत्थर की मूरत में बदल दिया हो

उनकी सांसे तेज हो जाती है जिस से उनका सीना ऊपर निचे होने लगता कुछ पल वैसे रुकने के बाद शालिनी जी निकट जूता कर अपनी गर्दन उठा कर देखती है तो सामने शार्ट सहित सूर्य का कामदण्ड शालिनी की योनि से चिपका हुआ था आवर उसका लिंगमुण्ड शालिनी जी के नाभि से थोड़ा निचे अपने रुद्ररूप में होने का आभाष शालिनी जी के नाभि के निचे वह योनि के ऊपर हिस्शे पे थपकी दे रहा था

दरशल पहले ऐसा नहीं था शालिनी जी ने जब सूर्य का पेअर नहीं खुष्काया था उस से पहले सूर्य के पेअर के जैसे हे सूर्य का कामदण्ड भी उनकी योनि से लगा हुआ था पैर जब पेअर थोड़ा पीछे हुआ को कोबरा उछलते हुए शालिनी जी की योनि को रगड़ते हुए उनकी योनि के पूरी भाग जिसने आम भाषा में पेडू भी कहा जाता जो भाग योनि के ऊपर शीशे में उभरा हुआ होता है

किसी तरह खुद को थोड़ा पूछ कर सूर्य को सीधा कर शालिनी जी बीएड से निचे उतर जाती है

अपनी नाईट ठीक कर सूर्य को देखती है जो अभी भी आराम से सोया हुआ था

सूर्य को देखते हुए उसके नंगे ऊपरी भाग से होते हुए शालिनी जी की नजर वही पे आतम जाती है

शालिनी जी को सुबह सुबह अपनी योनि में रिसाव सा महसूस होने लगता है उनके सामने सूर्य के साथ जो बाथरूम में इंसिडेंट हुआ था वो याद आते हे शालिनी जी फ़ौरन बाथरूम घुसा जाती

नहाने वह फ्रेश होने में कोई अदा घटा लगा शालिनी जी को

खुद को मिरर के सामने त्यार कर जब गेट खोलने के लिया जाने लगी क्यों की बहार से काफी आवाजे जो आ रही थी

तभी शालिनी पता नहीं क्या सोच कर सूर्य के पास पहुंची आवर उसके माथे पे किश करती है आवर निचे की आवर जूख्ट हुए हलके से शालिनी जी अपने होंठ सोये हुए सूर्य के होंटो पे रख 2 ,3 बार चुम लेती है

फिर पलट कर तेजी से गेट के पास जा कर लम्बी लम्बी सांसे लेती है आवर गेट खोल कर बहार निकल जाती है

शालिनी जी के बहार जाते हे सूर्य अपनी आँखे खोल देता आवर सीधा उठ कर मिरर के सामने जाता है

अपने हों तो पे लगी हाली रेड लिपस्टिक के नीसाण को देख कर

सूर्य ...... मतलब माँ ने सच में मेरे हों तो पे किश किया है ये कोई सपना नहीं था पैर ऐसा उन्होंने पहले तो कभी नहीं किया

सूर्य गौर से फिर से मिरर में खुद को देखता है

तभी उसकी नजर अपने शार्ट में बने तम्बू पे पड़ती है

सूर्य ....... हो सहित इसका मतलब माँ ने इस हे भी नोटिस किया होगा कही माँ के ऐसे किश करने की वजह से तो ये ऐसा नहीं हुआ होगा

मैं भी न सुबह सुबह कैसी बेहूदा बाते सोचने लगा

वो mom.hai मेरी क्या अपने बेटे को किश भी नहीं कर सकती

पैर आज से पहले तो उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया

तभी रूम में शालिनी जी को खोजते हुए फातिमा जी आती है

सूर्य अभी भी ऊपर से नंगा हे मिरर के सामने खड़ा था

फातिमा जी ..... बीटा सूर्य आपकी अम्मी कहा है

फातिमा जी की आवाज सुन सूर्य पीछे पलट कर देखता है

फातिमा जी की नजर सूर्य के चोदे सीने से होते हुए

जब शार्ट में बने तम्बू पे पड़ती है तो उनकी आँखे बस वही आतम जाती है

सूर्य ......आंटी जी माँ तो कुछ देर पहले हे बहार गई है रूम से आपको बहार मिल जाएँगी

सूर्य के जबाब देने के बाद भी जब फातिमा जी का कोई रिएक्शन नहीं आया तो सूर्य ने उनकी निगाहों का पीछा किया जो उसके शार्ट में बने उभर पे अटकी हुई थी

सूर्य वही अलमारी से अपने डैड का टॉवल ले कर सीने पे दाल लिया जिस से कुछ हद तक सीना आवर उभर दोनों चुप जाते है तब जा कर फातिमा जी की तन्द्रा भांग होती है

सूर्य ...... क्या हुआ आंटी जी माँ से कुछ जरुरी काम था क्या

तभी मेनका जी रूम में आती है

मेनका जी ....... भाबी जी आप यहाँ पे है कुछ काम था क्या

सूर्य .....बुआ सा आंटी जी माँ को खोज रही है

मेनका जी ....... शालिनी भाबी को क्यों कुछ काम था तो मुझे बताइये वो माँ सा के साथ बहार कुछ काम देख रही है आवर तुम जल्दी से फ्रेश हो जाओ पैर नहाना नहीं ठीक है

सूर्य ...... क्या हुआ आप नहाने से मन क्यों कर रही है बुआ सा मैं तो अभी नहाने हे जा रहा था

मेनका जी सूर्य के गालो को हलके से खींचते हुए हस्ते हुए सूर्य को जबाब देती है

मेनका ji.....Kal तेरी सदी है आज तेरी हल्दी की रसम है आज सुबह साम आवर कल सुबह तीनो वक़्त हल्दी लगेगी तुझे

सूर्य ...... ठीक है बुआ सा

कह कर सूर्य मुस्कुराते हुए चल दिया बाथरूम में बाकि के करते निपटने

उदार बहार हल्दी की सभी तयारिया हो चुकी थी

सूर्य के बहार निकलते हे कोमल सामने हे कमर पे हाथ रखे कड़ी थी

कोमल ....... चलिए आपको सब बहार बुला रहे है

सूर्य .....पहले कुछ चाय कॉफ़ी तो पीला दो

कोमल ........ वो सब बाद में पहले हल्दी का उप्टन लगेगा आपको फिर हे कोई चाय कॉफ़ी मिलेगी

सूर्य ...... ये नैनीनसाफ़ी है कोमल

सूर्य बात करते हुए कोमल के पास पहुँचता है आवर उसकी कमर में हाथ दाल अपनी आवर खिवहता है जिस से कोमल के होंटो पे मुस्कान आ जाती है

सूर्य कोमल को डोर से थोड़ा साइड में दिवार से चिपका ते हुए कोमल कोमल होंटो को चूमने लगता है

सूर्य कुछ देर किश करने के बाद मोके की नजाकत को समझते हुए अलग हो जाता है

कोमल खुद से हलके से सूर्य के होंटो को हलके से चुम कर सूर्य को बहार लोने में ले जाती है जहा बाकि सभी लड़कियों के साथ साथ हवेली में मौजूद आवर आस प्रदोष की भैया आवर महिलाएं भी मौजूद थी जो हल्दी रसम के दौरान गए जाने वाले लोक गीत गए रही थी

सूर्य को कोमल सभी के बिच से ले जा कर चौकी पे बैठा देती है

मेनका जी आगे भाड़ हल्दी रसम की सुरुहत करती है मेनका जी सूर्य का उप्टन लगा कर दूर्वा ( दुब से ) सूर्य के सर कंधे पेअर आदि पे तेल ( आयल ) लगती है

सूर्य अपने गालो पे लगी हल्दी अपने हाथो में ले कर पास कड़ी कोमल के गालो से लगा देता है

मेनका जी ...... सुधर जा अब तो तेरी सदी होने वाली है अपनी आदतों से बाज आ जा

सूर्य ....... मैं तो ऐसा हे रहूँगा भू फिर चाहे सदी एक हो या 10 मैं नहीं सुधरने वाला है अगर आप सुधर सकती हो तो सुधर देना

मेनका जी ...... राधा चल हल्दी की रसम पूरी कर तू भी बुआ है सूर्य की

अब राधा पीछे खिसकने लगती है

आस पदोष की महिलाएं राधा को रसम पूरी करने को कहती है पैर राधा दादी जी आवर शालिनी जी को देखने लगती है

दादी जी के गर्दन है में हिलने से राधा उदाश मन से आगे बढ़ती है आवर उप्टन ले सूर्य को लगाने के लिया हाथ बढाती है

राधा का बिलकुल भी मन नहीं था की राधा बुआ के हक़ से सूर्य को उप्टन लगाए

सूर्य राधा का हाथ अपने गालो तक पहुंचने से पहले हे पकड़ लेता है आवर खुद हे राधा के हाथो में लगे उप्टन को राधा के गालो से लगा कर राधा का हाथ अपने गाल पे रख देता है

इस तरह करने से कुछ महिला या जहा बुआ भतीजे का प्यार समाज खुश हो रही थी तो कुछ रूढ़िवादी रीती रिवाजो को सब कुछ मैंने वाली महिलाओ की खुसुर फुसर चालू हो जाती है

सूर्य को इस से कोई फरक नहीं पड़ें वाला था उसे तो बस राधा का मुस्कुराता हुआ ख़ुशी से दमकता चेहरा नजर आ रहा था

जैसे जैसे सभी बड़ी महिलाएं इस रसम को पूरी कर अलग हो गई अब वह केवल लड़किया ौरभभी आ बची थी जो असली हल्दी रसम सूर्य के साथ करने लगी

सूर्य शार्ट के भीतर का छोड़ कर ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा जहा लड़कियों आवर भाबियों ने उप्टन न लगाई हो राधिका सानिया माया तीनो ने जरुरत से ज्यादा हे सूर्य के सीने वह पीठ को सहलाया था

करीब एक जानते चली इस रसम में सूर्य को सबने मिल कर पीला बन्दर बना दिया था

असुरलोक ..........

द्वारिका इस वक़्त असुर महल से बहुत दूर एक निर्जन वन में था जहा कोई तम्सिन तांत्रिक पूजा कर रही थी

वह कुछ आवर भी लोग मौजूद थे जो की पूरी तरह काळा कपड़ो से सखे हुए थे उनके चेहरे के स्थान पे केवल कंकाल थे आवर उन कंकालों से कला दुन्वा निकल रहा था

कुछ देर बाद द्वारिका के सामने काले दुंवे में एक साया प्रकार होता है जिसने देख द्वारिका आवर वह मौजूद कंकाल साये सभी अपने गूथ no पे आ जाते है

द्वारिका ........ महामहिम को उनकी गुलाम दरसतिका ( मायावी द्वारिका रियल नाम )का परनाम स्वीकार हो

महामहिम ....... उठो दृश्टिका हम तुमसे बहुत परशान है तुमने हमारे उद्देश्य को बिना किसी विज्ञानं के अंतिम चरण तक पहुंचा दिया है

दृश्टिका ...... गुलाम आपकी सेवा में हाजिर है महामहिम आज्ञा दीजिये

महामहिम ....... असुरगुरु देवी की उपासना में लगा हुआ है डोगरा हे वह तुम्हारी कैद से मस्ट हो जायेगा उसके मुक्त होने से पूर्व तुम्हे किसी भी तरह दोनों का विवाह कंटकासुर वह नागसूर से करवाना होगा आवर उन्हें किसी अव्यक्त स्थान पे भेजना होगा जहा असुरगुरु की दृस्टि भी न पहुंच सके उन तक

दृश्टिका ...... गुलाम की गुस्ताखी माफ हो तो कुछ कह सकती हूँ महामहिम

महामहिम ..... कहो दृश्टिका

दृश्टिका ....... महामहिम आप असुरगुरु को समाप्त क्यों नहीं कर देते है उसे कैद में रखने के स्थान पे समाप्त बेहतर हल नहीं

महामहिम ...... नहीं दृश्टिका का ये सत्य है की असुरगुरु एक असुर है किन्तु एक सत्य ये भी है की उनका करम दिव्या है केवल असुर होते तो उन्हें आसानी से मृत्यु दी जा सकती थी वो देवी पटल भैरवी के पदम् भक्त है इस वक़्त उन्हें अपने मार्ग से दूर रखने का केवल एक हे मार्ग है उन्हें जितना ज्यादा कैद में रखा जाये उतना हमारे उद्देश्य के लिया उचित है वैसे भी असुरगुरु के साथ साथ वो भविष्य में होने वाला पितामाह है मेरे उनकी हत्या मैं नहीं कर सकता

दृश्टिका ......... असली द्वारिका उसका क्या महामहिम

महामहिम .... वो हमारी कैद से मस्ट नहीं हो सकती है हमारी इच्छा के बिना तुम सिगरा हमारी योजना को पूर्ण करो

दृश्टिका ....... जो आज्ञा महामहिम

महामहिम ....... ये तरल तुम नगीना आवर विसुद्धि को समय समय पे पिलाती रहना

आवर ये लाल तरल कंटकासुर को जिस से वो इस योग्य हो जाये की मेरी आत्मा के लिया जो सरीर उनके घरब से जनम लेगा वो मुझे ददन करने योग्य बन सके

दृटिका....... किन्तु कंटकासुर को क्यों महामहिम

महामहिम ....... कंटकासुर का सरीर इतना सशक्त नहीं की वो हमारी पूरी काली ऊर्जा को दर्जन कर सके ये उसके लिया है

इतना बोल महामहिम नाम का वो साया वह से लुप्त हो जाता है

दृश्टिका ....... तुम सभी पुरे असुरलोक में फ़ैल जाओ आवर हर छोटी से छोटी घटना का विवरण मुझे दो

तुम लोगो की किसी भी अव्यक्त के चलते इस कार्य में असफलता मिली तो महामहिम तुम सभी का अस्तित्वा हे मिटा देंगे भारमंद से

सभी साये ........ नहीं नहीं हम अपने कार्य में सतर्क रहेंगे

दृश्टिका ....... अब जाओ आवर अपने कार्य में लग जाओ

सभी एक एक कर वह से गायब हो जाते है

कुछ देर बाद द्वारिका भी वह से गायब हो अपने महल के कक्ष में प्रकट होती है

द्वारिका सैनिक द्वारा कंटकासुर को कक्ष में आने का आदेश देती है

असुर सैनिक सन्देश कंटकासुर को जा कर देता है

कुछ हे देर बाद कंटकासुर अपने कक्ष से द्वारिका के कक्ष की आवर निकल जाता है

वातापी ....... आज कल स्वामी ज्यादातर समय नगीना विशुद्धि के साथ साथ द्वारिका के साथ में समय बिता रहे है जभी स्वामी जानते है की द्वारिका उनकी माता नहीं है फिर ऐसा क्या है जिसके चलते इनकी नजदीकियां इतनी भाड़ गई है मुझे पता करना होगा

कंटकासुर के अपने कक्ष से निकलते हे वातापी खुद को अदृश्य कर अपनी माया का प्रयोग बहुत हे सूक्षम जिव का अदृश्य रूप धार कंटकासुर के साथ द्वारिका के कक्ष में पहुँचती है

द्वारिका ....... हमारे साथ आओ हमारे पीछे पीछे

बोल कर द्वारिका अपने कक्ष की दिवार पे कोई मंत्र उच्चारण कर पुंक मरती है जिस से कुछ हे देर में वह एक मायावी द्वार बन जाता है

द्वारिका उस गुप्त द्वार में प्रवेश कर जाती है पीछे पीछे कंटकासुर भी ( उसके साथ में व तपी भी थी जो अदृश्य रूप में थी )

कंटकासुर ....... ये कोनसा स्थान है आवर हम यहाँ क्यों आये है

द्वारिका के इसारे पे वो महावीर द्वार फिर से बंद हो जाता है पैर वह उसके द्वार के स्थान पे द्वारिका का मुख्या कक्ष साफ साफ नजर आ रहा था ( जैसे वो द्वार न हो कर कोई बड़ा टीवी हो जिसपे द्वारिका के के रूम से सब लाइव दिख रहा हो )

द्वारिका ....... मेरा वास्तविक परिचय से तुम अनजान हो कंटकासुर मेरा वास्तविक परिचय है महामहिम की गुलाम दृश्टिका हूँ

कहते हुए दृश्टिका अपने वास्तविक रूप में आ जाती है जो की बहुत हे ज्यादा मसल गदराया हुआ था

दृश्टिका ...... महामहिम ने तुम्हारे लिया उभर भेजा है जिस से तुम ग्रहण कर उनकी समस्त सक्तियो को दर्जन करने योग्य हो जाओगे

कहते हुए दृश्टिका वो लाल तरल की सीसी कंटकासुर के सामने रख देती है

कंटकासुर ...... ये तो बहुत हे हर्ष का अवसर है मेरे लिया किन्तु ये जो दूसरी सीसी है ये किस लिया है

दृश्टिका ....... इसमें जो तरल है वो द्वारिका आवर नगीना के लिया है तुम्हारे जरिया जो महामहिम के अंश को नगीना आवर विशुद्धि दर्जन करेगी उसके योग्य बनने के लिया महामहिम ने ये उपहार भेजा है

कनकसुर बात दृश्टिका से कर रहा था पैर साथ हे उसके भरी भरकर गदराये हुए सरीर को अपने आँखों से हे भोग रहा था

दृश्टिका की दृस्टि से कंटकासुर की अपने सरीर के पार्टी हवश देख दृश्टिका के चेहरे पे कुटिल मुस्कान आ जाती है

दृटिका ....... तुम बस मागमाहिं की आज्ञा का पालन करते रहो तो सब कुछ तुम्हारे कदमो में होगा ये असुरलोक हे नहीं बाकि सभी लोक तुम्हारे सामने गुलामो की तरह जुखे होंगे तुम जिसे चाहो जब चाहो भोग सकोगे

कहते हुए दृश्टिका कंटकासुर का हाथ अपनी भरी भरकम 40, 42 की चूचियों पे रख देती है

कंटकासुर तो कब से इसी पल की तलाश में था जैसे हे दृश्टिका ने कंटकासुर को में स्वीकृति दी कंटकासुर अगले हे पल में खुद वह दृश्टिका को निर्वस्त्र कर उसके अंगो पे वहशी जानवर की तरह टूट पड़ा

जैसे दृश्टिका कंटकासुर का भोजन हो

कंटकासुर अपना मुख में दृश्टिका के चूचक भर के चूसने लगता है आउट दूसरे हाथ से दृश्टिका को बालो से भरी योनि में अपने हाथ की उँगलियाँ चलने लगता है

वही ुशी कक्ष में मौजूद वातापी इस दृश्य को देख अंदर हे अंदर कंटकासुर पे क्रेडिट थी

साथ हे उसकी आँखों से अश्रु धरा भी बाह रही थी

ीदार कंटकासुर दृश्टिका के अंगो कके साथ खेल रहा था





कुछ देर बाद दृश्टिका कंटकासुर के सामने गुथनो पे बेथ उसके जुलते हुए एक फिट लम्बे लिंग को अपने मुँह में भर चूसने लगती है





कुछ देर बाद कंटकासुर दृश्टिका को उठा कर वही िस्थित बिस्तर पे लिटा कर दृश्टिका की योनि राशि को चूसता है

दृश्टिका को इस सब में बहुत मज़ा आ राग था

वह अपने पैरो खो खोले कंटकासुर के साथ इस सम्भोग किरिया का आनद ले रही थी

जब एक बार दृश्टिका अपना चरम सुख प्राप्त कर लिया तो कंटकासुर ने अपना मुख हटा कर अपना लिंग दृश्टिका की योनि पर रख एक तेज जानकारी प्रहार दृश्टिका की योनि पे करता है





कंटकासुर द्वारा ऐसे तीव्र प्रहार से जैसे दृश्टिका को आनंद प्राप्त हुआ हो न की दर्द या कोई पीड़ा

कैकट्सुर निरंतर बिना रुके दृश्टिका कज योनि में अपने लिंग से पत्थर करता था रहा





ीदार डेरे डेरी इस सम्भोग के कारन वातापी का गुस्सा भी भाड़ रहा था अपने पति को अपनी आँखों के सामने किसी आवर स्त्री को भोगते देख

वातापी गुस्से में थी उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था की क्या करे

तभी वातापी की नजर वह राखी उन दो सीसियो पे पड़ती है

वातापी अपनी माया का प्रयोग कर उनके से हारे तरल वाली ( जो नगीना आवर विसुद्धि के लिया थी ) थी उसे वह से उठा कर उसके स्थान पे ुशी तरह की दूसरी सीसी रख देती है

इन सब से अनजान कंटकासुर दृश्टिका को ास्वा स्वस्थ में लिटा कर पीछे से दृश्टिका की योनि भेदन में संलिप्त था





कंटकासुर दृश्टिका की बड़े बड़े नितम्बों को थामे आँखे बंद किये हुए किसी वहशी जानवर के जैसे दृत्का की योनि में लगा हुआ था





ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कंटकासुर ने अपने लावे से दृश्टिका के योनि कुंड को अपने वीर्य से लाभालाभ भर नहीं दिया

इनका ये सम्भोग 1 हर से भी ऊपर चला

थोड़ो कुछ देर वही आराम कर अपने अपने वस्त्र दाल बहार जाने को त्यार थे

दृश्टिका ....... कंटकासुर अभी तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो चुकी है अब तुजे प्रतिदिन इस तरल का सेवन करना है आवर साथ हे नगीना वह विसुद्धि को इसका प्रतिदिन देवन करवाना है

कंटकासुर ....... उचित है आप चिंता न करे किन्तु अगर उचित हो तो आप हे नगीना आवर विशुद्धि को इस तरल का देवन करवाए

आप द्वारिका बन ये कार्य बहुत हे सरलता से कर सकती है

दृटिका ...... उचित है फिर नगीना आवर विसुद्धि को मुज पे छोड़ दो सिगरा हे दोनों का विवाह मायावी असुरो से हो जायेगा जो की सबकी नजरो में दल झोखने के लिया है वास्तविकता तो ये है की दोनों को तुम्हे हे भोगा है

कंटकासुर ...... क्या पिता श्री गुफा की कैद से मुक्त हो गए

दृटिका ...... अभी नहीं पैर महामहिम का कहना है की वो कैद में हे देवी पटल भैरवी की साधना में लीं है सिगरा हे वो मुक्त हो जायेंगे इस लिया हमें ये विवाह सिगरा हे करवाना होगा आवर फिर तुम 5 को किसी अज्ञान्त स्थान पे जाना होगा जहा तुम्हारे पिता की दृस्टि bhi.Tum पे न पड़े

दृटिका आवर कंटकासुर की बात सुन कर वातापी की सांसे भरी होने लगती है

उसे यकीं हे नहीं हो रहा था की कंटकासुर अपने हे पिता को कैद में रखा हुआ है

वाटीपी ......पिता श्री कैद में है तो फिर यहाँ जो असुरगुरु है वो कोण है

मुझे जल्दी हे उन्हें कैद से मुक्त करवाने के लिया कुछ करना होगा ये कोई बहुत हे बड़ा षड़यंत्र रचा जा राग है जिसमे खुद स्वामी भी शामिल है केवल पिता श्री हे कुछ कर सकते है मुझे कुछ करना हे होगा .............

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दृटिका ...... अभी नहीं पैर महामहिम का कहना है की वो कैद में हे देवी पटल भैरवी की साधना में लीं है सिगरा हे वो मुक्त हो जायेंगे इस लिया हमें ये विवाह सिगरा हे करवाना होगा आवर फिर तुम 5 को किसी अज्ञान्त स्थान पे जाना होगा जहा तुम्हारे पिता की दृस्टि bhi.Tum पे न पड़े

दृटिका आवर कंटकासुर की बात सुन कर वातापी की सांसे भरी होने लगती है

उसे यकीं हे नहीं हो रहा था की कंटकासुर अपने हे पिता को कैद में रखा हुआ है

वाटीपी ......पिता श्री कैद में है तो फिर यहाँ जो असुरगुरु है वो कोण है

मुझे जल्दी हे उन्हें कैद से मुक्त करवाने के लिया कुछ करना होगा ये कोई बहुत हे बड़ा षड़यंत्र रचा जा राग है जिसमे खुद स्वामी भी शामिल है केवल पिता श्री हे कुछ कर सकते है मुझे कुछ करना हे होगा .............


अब आगे ........

सूर्यगढ़ ......... साम को यही को 5 बजे का समय हुआ होगा

हविले में चारो तरफ लोगो की चहल पहल थी हवेली के पीछे की तरफ जहा काफी खुली मघा थी वह पुरुष लोग बैठे थे वह राजस्थानी बाध्य यन्त्र की दूँ में चर्चा में लगे हुए थे तो कुछ बुजुर्ग लोग रंग बिरंगे साफ बन्दे बैठे गैप सैप में लगे हुए हुक्का गुदगुदा रहे थे

किसी बाहरी पुरुष का हवेली के भीतर जाना वर्जित था क्युकी वह केवल महिलाएं आवर लड़किया हे थी जो हवेली में या बहार लोने में लगे फ्लोरे साउंड सिस्टम पे अपनी हम उम्र महिलाओ वह लड़कियों के साथ निर्त्य कर रही थी

तभी हवेली के बहार एक के बाद एक 7,8 कार्स आ कर रूकती है जिनमे से कुछ महिलाएं कुछ पुरुषो के साथ पाण्ड्य जी विजय ज. मां जी संजय जी नाना जी नानी जी पाण्ड्य जी की वाइफ आवर उनके बचे उतारते है

इस बिच कुछ देर के लिया साउंड सिस्टम को बंद कर दिया

जो सूरजगढ़ से महिलाएं आई थी ेओ सभी राजस्थानी लोक गीत गाने लगती है

ीदार हवेली के भीतर सभी महिलाएं भात की तयारी करने लग जाती है क्युकी सभी को जल्दी लौटना भी था

दादी जी कुछ महिलाओ के साथ जल्दी हे सभी तयारिया पूरी कर लेती है

नाना जी मुख्या द्वार पे राखी सुसज्जित चौकी पे आ खड़े होते है

सामने शालिनी जी तिलक थल लिए कड़ी थी अपने पिता को तिलक कर उनका स्वागत करती है

नाना जी शालिनी जी को चुनार ुधा कर भात का आराम करते है

उनके बाद यही क्रिया j.mama जी संजय जी पंड्या जी विजय मां जी दोहराते है परिवार से आये सभी प्रमुख लोग शालिनी को चुनार उड़ाने के बाद जो सूरजगढ़ से बाकि महिलाएं वह पुरुष आये थे उन सभी का तिलक कर उन्हें चाय नास्ता कर वाया जाता है

इतने में रेखा जी के माता पिता वह उनके भाई भाबी आवर बचे भी आ पहुंचने है

दादी जी .......रेखा शालिनी बीटा तुम दोनों भात की रसम पूरी करो तब तक जोरावर संजय संदी जी हल्दी की रसम पूरी कर लेते है

ीदार भात की रसम पूरी होती हे सूर्य की हल्दी की रसम सुरु हो जाती है
क्युकी हलिंदी की रसम में लड़के के मां आदि को भी शामिल होना था

रेखा जी मायके फॅमिली ......

1 .... भवर सिंह शेखावत ( कोमल नाना जी )

2 ...... कमला शेखावत ( कोमल नानी जी )

3 ..... राजेंद्र शेखावत . ( कोमल बड़े मां जी

4....... पूनम शेखावत (कोमल बड़ी ममी जी )

5.6.... मनु मानवी राजेंद्र जी के बीटा आवर बेटी

7..... गोविन्द शेखावत (कोमल छोटे मां ज

8 ...... सुमन शेखावत ( कोमल छोटी ममी जी )

9 ....... ख़ुशी शेखावत (सुमन की 5 साल की बेटी )

भात की रसम पूरी हो जाने वह हल्दी की रसम पूरी होते हे ज्यादातर लोग चाय नास्ता कर सूरजगढ़ लौट जाते है

बाकि सभी अपने के साथ मेल मिलाप करने लगते है

भवर सिंह शेखावत ( क. नाना जी )

क. नाना जी ....... संदी सा आपने तो बड़ी जल्दी कर दी पोते की सदी की अभी तो राधा बिटिया की उम्र थी सदी की

दादी जी ...... ... संदी सा अब आपको क्या बताऊ ये समाज लीजिये ऊपर से हे जोड़ी वह समय लिखा कर आया था मेरा पोता अब किस्मत में लिखा कोई बदल तो सकता नहीं

k.nana जी ...... ये तो आपने सही कहा संदी जी किस्मत का लिखा बदला नहीं जा सकता पैर लड़की तो रिश्ते में बहन लगती है फिर ये सब

k.nana जी की बात दादा जी को अच्छी तो नहीं लगी पैर उन्होंने कुछ गलत भी नहीं कहा था आवर न हे दादा जी उन्हें इस सच से अवगत करवा सकते थे की इस सदी की वजह क्या है

दादा जी .....अब आपसे क्या छुपाना संदी जी दोनों बचे एक दूसरे को पसंद करते थे तो दोनों बचो की ख़ुशी के लिया हम सबने रिश्ते को मान देते हुए दोनों की सदी फिक्स कर दी

बच्चे भी खुश हम भी खुश

क. नाना जी ...... संदी जी अगर आपको ठीक लगे तो राधा बिटिया के लिया एक लायक लड़का है मेरी नजर रिश्ते के लिया

दादा जी ....... माफ कीजियेगा संदी जी राधा आवर कोमल बेटी के लिया हमने पहले से लड़का देख रखा है बीएस सुबह घडी देख दोनों का विवाह भी कर देंगे

कुछ देर बाद कुछ आवर लोगो के साथ कासिम खान आवर सूर्यकांत सर भी इनकी चर्चा में ज्वाइन हो जाते है

उदार सूर्य अपने रूम में बैठा हुआ किसी से फ़ोन पे बात कर रहा था

सूर्य ........ देखो चची जी आप क्या करती हो कैसे करती हो मुझे नहीं मालूम कल आप अगर सदी में नहीं आई तो समाज लेना मैंने कभी आपकी हवेली में पेअर नहीं रखना

गीता ठाकुर ....... समजा कर बीटा विक्रम को यहाँ अकेले नहीं छोड़ सकती हम मई

सूर्य ...... उसकी आप चिंता न करो चची जी मैंने डॉक्टर से बात कर ली है कल डॉक्टर उसके साथ रुकेगा जब तक आप सदी में रहोगी

रुक्मणि ....... तुम चिंता नहीं करो बीटा अजय यही विक्रम के साथ रहेगा हम लोग सदी में शामिल भी होंगे आवर बारात में भी अब तो खुश है न

सूर्य ...... बहुत खुश हूँ रुकू चची जी

रुक्मणि ..... ठीक है हम चारो लोग कल समय से पहुंचने जायेंगे बीटा वैसे कब का मुहूर्त है बारात का

सूर्य ....... आपको कार्ड भेजा था आपने पढ़ा नहीं क्या

खेर रात 9 बजे का मुहूर्त है फैरो का तो 6 बजे तक यहाँ से बारात निकलेगी

रुक्मणि ......ठीक है हम लोग 5बजे तक पहुंचने जायेंगे

सूर्य ......मैं सुबह कार भेजता हूँ विधि आवर गायत्री को लेने के लिया ठीक है चची जी

गीता ठाकुर ....... ठीक है बीटा जैसा तुम्हे ठीक लगे

कुछ देर बाद सूर्य कॉल कट कर देता है

अलीना जो काफी देर से सूर्य की फ़ोन कॉल पे हो रही बाते सुन रही थी वो सूर्य की गॉड में आ बैठी

सूर्य ........ प्रिय कुछ तो ख्याल रखो कितने मेहमान है घर में ऐसे में अगर उन्होंने तुम्हे ऐसे देखा तो क्या सोचेगा

अलीना ......प्रिय मैं उस जनम में थी समजे आवर जिसने जो समझना है समझने दो वैसे ये विधि आवर गायत्री का चाकर क्या है

सूर्य ......कैसा चाकर मैं कुछ समजा नहीं

अलीना .....ज्यादा भोले न बनो मैं जानती हूँ दोनों तुमसे प्यार करती है बस ये पता नहीं की तुम भी करते हो या नहीं

मैंने उनकी आँखों में देखा वो दोनों तुमसे प्यार करती है

सूर्य ....... ये जरुरी तो नहीं अलीना जो तुमने देखा वो सच हो

अलीना सूर्य का हाथ अपने सर पे रख देती है

सूर्य की इसकी उम्मीद बिलकुल नहीं थी

अलीना ......अब बोलो सच क्या है

सूर्य ........ इसकी कोई जरुरत नहीं है अलीना तुम अगर ऐसे भी पूछती तो मैं बता देता दुबारा ऐसा कभी मत करना अलीना क्युकी कुछ बाते है जो मैं तुम सब से छुपता हूँ जो की जरुरी होती है तभी छुपता हूँ

अभी तो मैं केवल मजाक कर रहा था पैर कभी ऐसा भी हो सकता है की सच में मुझे तुम सभी से कुछ छुपाना पड़े ऐसे में फिर कभी मुझे मजबूर मत करना ुम्मम्हा अब इस फरहा उदाश नहीं होते समाजी

अलीना .....मुझे माफ कर देना दुबारा ऐसा कभी नहीं होगा

सूर्य ......कोई बात नहीं माफी मत मानगो मेरी बिबिया ऐसे उदाश अच्छी नहीं लगती है वो तो हाशि ख़ुशी मस्ती मजाक करते हुए हे अच्छी लगती है

अलीना ....... उम्म्म्मः ी लव यू सूर्य

सूर्य ....... ी लव यू तवो अलीना उम्म्म्मः

अलीना ......एक बात बताइये क्या मेर्री दीदी भी आपसे प्रेम करती है

सूर्य ....... है पैर उनकी सदी विजय मां जी से होगी

अलीना ......फिर वो पूजा में कैसे आपके साथ जेठी थी जिसमे केवल आपकी होने वाली बिबिया हे बेथ सकती थी

सूर्य ........ इसकी एक वजह है अलीना

अलीना ......वही तो मैं जानना चाहती हूँ

सूर्य ....... जानना जरुरी है क्या अलीना

अलीना .....अगर आपको ये भी छुपाना है तो छुपा सकते हो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं

सूर्य ...... तो सुनो फिर मेर्री जी वो पहली लड़की है जिनसे मुझे स्त्री पुरुष के मिलान का ज्ञान मिला

अलीना .....मतलब क्या है

सूर्य ......मेर्री जी वो पहली लड़की है जिनके साथ मैंने अपनी विर्जिनिटी खोयी थी आवर उन्होंने मेरे साथ में

सूर्य की बात का अलीना पे कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ा जैसे उसके लिया ये कोई बड़ी बात नहीं थी

सूर्य ...... क्या हुआ तुमने कोई रिएक्शन नहीं दिया

अलीना ..... मुझे पहले से अंदाजा था इस बात का पैर ये पता नहीं था की उनके पूजा में बेथुने की बझा ये है

वैसे दीदी अभी तक वर्जिन थी इसका मुझे पता नहीं था

सूर्य ..... वो सिखने में भले हे खुले वुचरो की लगती है पैर वो अंदर से ऐसे नहीं है

अलीना ......बहुत बारीकी से जान गए हो दीदी को

चलो निचे चलते है आपकी सभी गोपिया तो निचे है आप यहाँ बैठे है

सूर्य अलीना के साथ निचे चला जाता है

u.s.a .....

केविन के विषय में जब फबि चीफ को पता चला तो वो उनसे मिलने हॉस्पिटल पहुंचे जहा केविन की हालत पहले से काफी बेहतर थी

fbi.chif ........ केविन ये सब कैसे हुआ

केविन ....... कुछ नहीं सर लैपटॉप ओवरहैत हो कर ब्लास्ट हो गया ुशी की वजह से ये सब हो गया

फबि .चीफ ....... तुम सच कह रहे हो केविन या कुछ आवर बात है

क्युकी लैपटॉप ओवरहैत से इतना बड़ा ब्लास्ट नहीं हो सकता है

खेर मैंने तुम्हारे होम पे फॉरेंसिक टीम को जाँच करने भेज दिया है

केविन ........ उसकी कोई जरुरत नहीं है सर मैं कह रहा हूँ वही सच है

कुछ देर बाद फबि .चीफ हॉस्पिटल से निकल जाते है

फबि चीफ अपनी कार में बैठते हे मार्क में बदल जाते है

मार्क ........ केविन तुमने अच्छा किया जो सच नहीं बोलै वर्ण वो सच तुम्हारी जिंदगी का आखरी सच होता

जब तक मेरे रस्ते में नहीं आओगे जिन्दा रहोगे जिस पल तुमने अपना दिमाग मेरे खिलाफ उसे किया ुशी पल तुम फिनिश

मार्क के बहार निकलते हे केविन अपने सीने पे लगी सभी वैर हटा देता है आवर किसी को कॉल करता है

केविन ....... Hello फ़ौरन क्सक्सक्स हॉस्पिटल पहुँचो मुझे यहाँ से फ़ौरन निकलना है

इतना बोल कर केविन कॉल कट कर किसी तरह लिफ्ट तक पहुँचता है

आवर सीधा ग्राउंड फ्लोर के लिया बटन दबाता है

वह पेमेंट करने के कुछ हे देर बाद वह एक बाँदा आता है जो केविन को ले कर वह से चला जाता है

आदमी ...... सर आप अभी पूरी फरहा से ठीक नहीं है फिर आपने पहले हे हॉस्पिटल्स से इस फरहा डिस्चार्ज क्यों हो गए

केविन ....... तुम नहीं संजोगे फोरों कार फादर के ओल्ड चर्च में ले चलो

आदमी ....... जी सर जैसा आप कहो

आदमी कार को पूरी रफ़्तार में चलते हुए केविन को सहर से काफी दूर िस्थित बहुत पुराने चर्च में ले जाता है

वह पहुंचने में दोनों को एक हर से कुछ ऊपर का समय लगता है

केविन ....... जब तक मैं कॉल न कृ मुझे कोई कांटेक्ट मत करना हो सके तो कुछ समय के लिया अंडरग्राउंड हो जाओ

आदमी ....... जी सर जैसा आप कहो

आदमी केविन को चर्च के बहार मुख्या गेट पे चढ़ कर चला जाता है

कुछ देर बाद वह एक ब्लैक कार आ कर रूकती है जिसमे एक प्रीस्ट जैसे लवासा पहने सर पे टोपी लगाए एक आदमी बहार निकलता है

केविन ....... जोसेफ फादर कहा पे है मुझे उनके पास ले चलो

जोसेफ ....... जी उन्होंने हे मुझे आपको लेने के लिया भेजा है

जोसेफ केविन को कार की पीछे की सीट पे सुला देता है आवर वह से निकल जाते है

जोसेफ ........ आप भी तो वह आ सकते थे फिर आपने फादर को यहाँ क्यों आने को कहा

केविन. ...... क्युकी मैं सीधा वह नहीं आना चाहता था मैं नहीं चाहता था की किसी को मेरे बारे में कुछ भी पता चले

उदार मार्क फबि हेडक्वार्टर्स में जिस दिन सूर्य ने दद गैंग का खत्म किया उस दिन आवर उस से कुछ दिन पहले की उस एरिया की हर कक्तव रिकॉर्डिंग को चेक कर राग था

तभी एक स्क्रीन पे मार्क की नजर पड़ती है

मार्क ....... ऑपरेटर स्टॉप 5 no. स्क्रीन अफसर 1 क्या तुम मुझे इस कार आवर इसमें बे थे लोगो की जानकारी डोज

.अफसर 1 ...... यस सर वेट फॉर 10 मिनट्स

मार्क ....... 5 मिनट्स अफसर

अफसर 1 बेचारा तेजी से कंप्यूटर पे उँगलियाँ चलने लगता है

कुछ हे देर में कार आवर उनके मौजूद लोगो की जानकारी मार्क को देता है

मार्क ....... इनमे से जो मर चुके है उसके अलावा जो भी लोग है सभी के पिछले 10 डेज की रिपोर्ट मुझे कल सुबह मुझे अपनी टेबिल पे चाइये that's माय आर्डर

अफसर. 1 उन तीनो लोगो की लिस्ट ले कर वह से निकल जाता है

जिनको सूर्य ने जेनी के साथ में बचाया था जिनको दद ने किडनैप कर रखा था

ीदार जेनी सूर्य के सुझाव को मानते हुए अपने कॉलेज से लेडी प्रोफेसर से बात कर उन्हें कंपनी में काम करने के लिया मन लेती है

अब अच्छी सेल्लेरी मिलेगी तो कोई भी त्यार हो जायेगा

डेरी डेरी जेनी अपनी स्टडी के साथ साथ कंपनी में भी टाइम देने लगी थी

लेडी प्रोफेसर के साथ होने से जेनी को बहुत मदद मिल रही थी कंपनी की देख देख में

जेनी ....... दीपिका मेम आप भी तो इंडिया से है न आप इंडिया से किस स्टेट से बिलोंग करती है

दीपिका ....... तुम अचानक ये सब क्यों पूछ रही हो जेनी कही इंडिया हमने का इरादा है क्या

जेनी ....... अभी तो ऐसा कुछ भी इरादा नहीं है मेम बूत इंडिया जाना जरूर चाहूंगी

दीपिका....... मैं दिल्ली से हूँ जेनी मेरी फॅमिली दिल्ली से है वैसे तो हम मूल निवासी राजस्था जयपुर से है पैर बहुत पहले हे पापा के बिज़नेस के चलते दिल्ली सिफत हो गए थे

जेनी ....... आप जानती है ये जो कंपनी है इसका असली ओनर्स इंडियन है वो भी राजस्थान से हे

दीपिका ...... मुझे तो लगा की तुम इस कंपनी की ओनर हो

जेनी ....... नहीं वो मेरी फ्रेंड्स पायल के डैड इस कंपनी के ओनर है उन्होंने इंडिया सिफत करने से पहले मुझे इस कंपनी की केयर टेकेर बना दिया पार्टनरशिप दे कर

दीपिका ........ लगता है अच्छे लोग है वो लोग

जेनी ....... है तभी तो उन्होंने कंपनी में पार्टनरशिप दे दे साथ हे अपना मेंशन भी जहा मैं अपनी एक कॉलेज फ्रेंड्स के साथ रहती हूँउनहोने जाते वक़्त इंडिया आने का कहा था

दीपिका ......वैसे इंडिया में कहा से है वो लोग

जेनी .......सूर्यगढ़ राजस्थान से आप तो जानती होगी की की ये कहा पे है

दीपिका ..... क्या सच में ये तो मेरे ननिहाल के पास में हे है

जेनी .....ननिहाल मीन्स

दीपिका .....हेहेहे ननिहाल मीन्स माय मदर बोर्न टाउन तुम जब भी वह जाओ मुझसे कांटेक्ट जरू करना क्या पता मैं भी साथ चालू तुम्हारे

जेनी ....... सूरे मेम अब मैं निकलती हम आप भी निकालिये कल कॉलेज के बाद मुक्ति हूँ आपसे

दीपिका ......ok गुड नाईट जेनी

जेनी .....गुड नाईट मेम

दोनों अपनी अपनी कार से अपने अपने रस्ते निकल जाती है

वही इंडिया के किसी स्थान पे एक गुफा में असुरगुरु के 5 शिष्य काफी समय से असुरगुरु की प्रतीक्षा कर रहे थे

किन्तु असुरगुरु तो खुद कैद में थे वो भला कैसे इनसे संपर्क कर पते

शिष्य 2 ...... शिष्य 1 आपको असुरलोक जा कर पता करना चाइये की गुरुदेव अभी तक परतविलोक लौटे क्यों नहीं

न उन्होंने कोई सन्देश भेजा न आने को ले कर न हमें कोई आगे के लिया उनकी तरफ से आदेश प्राप्त है

शिष्य 1...... उनसे सम्पर्क भी नहीं हो प् रहा है ऐसे में हमें असुरलोक जाना हे पड़ेगा

शिष्य 2...... एक बात अभी भी समाज में नहीं आ रही की गुरुदेव इतने समय तक बिना किसी सम्पर्क के पहले तो ऐसा कभी नहीं हुआ

शिष्य 1 ...... एक कार्य करो तुम असुरलोक जाओ मैं यहाँ पे रह कर काल के विषय में पता करता हूँ कही गुरुदेव के सम्पर्क न करने की वजह काल तो नहीं

शिष्य 2 ...... ठीक है पैर ज्ञात रहे काल ऐसा कुछ नहीं करेगा जिस से गुरुदेव को कास्ट पहुंचे तुम भी ऐसा कुछ मत करना जिस से काल तुमपे क्रोधित हो जाये क्युकी गुरुदेव उसने अपना पुत्र मानते है

शिष्य 1 ........ जनता हूँ तुम चिंता न करो मैं ऐसा कोई भी कार्य नहीं करूँगा जिस से गुरुदेव या काल क्रोधित हो आवर आप तीनो भी असुरलोक जाओ क्युकी यहाँ अभी तुम लोगो की कोई आवशयकता नहीं है

शिष्य 1 वह से गायब हो जाता है

शिष्य 5 ......आपने उसे यहाँ रुकने की आज्ञा क्यों दी आप जानते है न उसके विषय में

शिष्य 2 ...... जनता हूँ आवर ये भी की दुबारा उस से हमारी भेंट नहीं होगी

शिष्य 4 ...... क्या मतलब है इस से आपका

शिष्य 2 ......शिष्य 1 जिसके विषय में जानने गया है उसके लिया गुरुदेव ने स्पष्ट निर्देश दिए थे की कोई भी काल के सामने न आये ऐसा कोई भी करम न करना जिस से काल क्रोधित हो क्युकी गुरुदेव की पुत्री मानसी का विवाह काल से होना तय है

शिष्य 5 ......क्या गुरुदेव की पुत्री भी है

शुष्य 2 .....है जो उस दिन जब हम उस जिन का वध करने वाले थे तब जो ब्लैक ड्रैगन पे स्वर हो वह पाहुवहि थी वो गुरुदेव की पुत्री मानसी ये बात गुरुदेव ने संपरा कर मुझे बताई थी जब मैंने गुरुदेव को शिष्य 1 के विषय में उन्हें सूचित किया की शिष्य 1 काल के विषय में पता करना चाहता है

शिष्य 5 .....फिर गुरुदेव ने क्या कहा इस विषय में

शिष्य 2 ....गुरुदेव ने कहा की मेरे आदेश के बाद भी अगर शिष्य 1 अपने विचार नहीं बदलता है तो जो वो करना चाहे करने के लिया मुक्त है क्युकी काल दूसरा मौका नहीं देता है

शिष्य 4 .....अब तो मुझे भी काल के विषय में जानने की प्रबल इच्छा हो रही है

शिष्य 2 ......कही ये तुम्हारी अंतिम इच्छा न हो जाये

क्युकी काल से भेंट करने के बाद तुम यमलोक पहुंचने चुके होंगे अब असुरलोक चले गुरुदेव का पता करने

बाकि बचे चारो शिष्य अंदर में वह से असुरलोक के लिया गायब हो जाते है ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
 
Hello एवरीवन

आप सभी से निवेदन है की किसी को किसी भी स्थान. वास्तु . या किसी से भी जुड़े वाक्य से आप आहात होते है तो एक बार मुझे कह सकते है

अगर यहाँ कहने में आपको कोई प्रॉब्लम हो तो आप मुझे मैसेज बॉक्स में मैसेज कर हटाने या चेंज करने को कह सकते है

यहाँ हम सभी मनोरंजन के लिया आते है तो किसी को ठेश पहुंचे या या कोई आहात हो ऐसे वर्ड कोई भी उसे न करे अगर मैं खुद भी करता हूँ तो आप उसपे मुझे भी रोकिये

थैंक यू एवरीवन ......
 
अपडेट. 196

सूर्य किरण विवाह समारोह ....

शिष्य 2 ....गुरुदेव ने कहा की मेरे आदेश के बाद भी अगर शिष्य 1 अपने विचार नहीं बदलता है तो जो वो करना चाहे करने के लिया मुक्त है क्युकी काल दूसरा मौका नहीं देता है

शिष्य 4 .....अब तो मुझे भी काल के विषय में जानने की प्रबल इच्छा हो रही है

शिष्य 2 ......कही ये तुम्हारी अंतिम इच्छा न हो जाये

क्युकी काल से भेंट करने के बाद तुम यमलोक पहुंचने चुके होंगे अब असुरलोक चले गुरुदेव का पता करने

बाकि बचे चारो शिष्य अंदर में वह से असुरलोक के लिया गायब हो जाते है ..........

अब आगे ........

सूर्यगढ़ ....... एक तरफ जहा सूर्य की आज सदी होने वाली थी

वही ुशी हवेली में मौजूद राधिका रोहन को दीप्ती द्वारा त्यार प्लान अपने पति रोहन को समजा रही थिस

रोहन ....... सॉरी राधिका तुम्हे मेरी कमी की वजह से क्या कुछ नहीं करना पद रहा है

राधिका ....... सायद यही हमारी किस्मत में लिखा था

रोहन ....... तुमने बात की सूर्य से इस बारे में वैसे सूर्य अच्छा लड़का है पैर थोड़ा अजीब भी है

राधिका ........ ऐसा आपने क्या देख लिया सूर्य में जो आपको अजीब सा लगा आपको 2 दिन हुए है उस से मिले कही आपको जलन तो नहीं हो रही है

रोहन ....... है ये सच है की जब तुमने मुझे सूर्य के बारे में बताया था तब मुझे बहुत अजीब लगा

फिर पापा मम्मी से सूर्य के बारे में जानकारी मिली तब पता चला की सूर्य को चुन कर तुमने कुछ भी गलत नहीं किया है ये जलन जरूर है की मेरी इतनी खूबसूरत बीबी सूर्य के बचे की माँ बनेगी

राधिका रोहन के समीप जा कर उसकी आँखों में देखती है तो रोहन अपनी नजरे चुराने लगता है

राधिका ....... रोहन हम अभी भी रुक सकते है आपका साथ हे काफी है मेरे लिया भले हे मैं माँ न बन पाव पैर आपकी आँखों में छुपे दर्द को मैं मह्सुश कर सकती हूँ

रोहन राधिका को अपने सीने लगा लेता है

रोहन ...... नहीं रइधू ( निक नेमे फॉर लव ) तुम नहीं जानती एक औरत जब टेक माँ नहीं बन जाती सो अधूरी रहती है समाज उसे बांज के तने दे दे कर जीते जी मर देता है

भले तुम्हारे माँ न बन पाने की वजह मैं हूँ पैर मुझपे कोई ऊँगली नहीं उठाएगा सभी तुझे बांज कह कह कर तने देंगे जो मुझे मंजूर नहीं तुमने सूर्य को चुना है ुशी से हमारा बीटा या बेटी का जनम होगा भले हे सो अंश सूर्य को होगा पैर पापा तो मुझे हे कहेगा न

राधिका रोहन के आँखों से बहते हुए आंसू साफ करती है

राधिका ....... आपको एक बात आवर बतानी थी

रोहन ...... है कहो रइधू क्या बात है

राधिका .......वो माँ सूर्य के बारे में जानती है मैंने उन्हें सब बता दिया था

रोहन ....... कोनसी माँ मेरी या तुम्हारी

राधिका .....अरे बुद्धू आपकी सास आवर मेरी माँ

रोहन ......ओह्ह तभी कुछ दिन पहले मम्मी सूर्य को ले कर मुझसे बात कर रही थी वैसे उन्होंने क्या कहा इस बारे में

राधिका ....... जब वो सूर्य से मिली उस से पहले तक तो वो इन सब मामले के खिलाफ थी फॉर जब सूर्य से मिली आवर मुझसे बात की उसके बाद से वो भी सहमत है

रोहन ......ठीक है मैं सूर्य से बात करता हूँ

राधिका ...... आप रहने दीजिये आपसे ये नहीं हो पायेगा मैं अपने तरीके से बात करती हूँ आप बस आगे के प्लान के हिसाब से तयारी कीजिये

रोहन ......ठीक है मैं सेकंड हनीमून की तयारी करता हूँ

राधिका ....... पैर आपकी पता है न प्लान के हिसाब से सब हुआ तो आपको क्या करना है वह जा कर

रोहन ....... मैं एक रात रन कर तुम तीनो को वह अकेला छोड़ कर चला जाऊंगा यहाँ सभी को यही लगेगा की हम दोनों साथ में है

वैसे ये प्लान तुम्हारा तो नहीं हो सांता किसका है

राधिका ....... आपको क्या करना है जान कर अब आप जाइये मुझे त्यार होना है

रोहन अभी तो दोपहर हुई है बारात साम को जाएगी

राधिका रोहन को कुछ समजा कर रूम से बहार निकलती है

राधिका ........ दीप्ती दीदी अब आप बहार अस सकती है आपके भाई चले गेट

राधिका की बात सुन दीप्ती जो रूम के अंदर बने बाथरूम में से इतने टाइम से रोहन राधिका की बात सुन रही थी वो बहार अस जाती है

दीप्ती ........ चलो ये आपने अच्छा किया रोहन भाई को सब समजा दिया आवर मेरा नाम भी नहीं लिया

राधिका ........ अब आगे क्या प्लान है

दीप्ती ...... क्या मतलब

राधिका ....... मतलब ये की आप वह लैब आओगी

दीप्ती ...... मैं वह क्या करूंगी आ कर के तुम लोगो की बिच कबाब में हड्डी बनने

राधिका ...... सोच लीजिये अच्छा मौका है आप हड्डी नहीं उनके लिया सबब बन सकती है जिनकी तस्वीर अपने दिल में छुपाये हुए है

दीप्ती ...... सूर्य की बचे की माँ आपको बनना है न की मुझे वैसे भी आपके बचे में मुझे तो बुआ बना हे देना है एक तरह से देखा जाये तो सूर्य की बहन

रेडिका ...... क्यों सीक्रेट मास्सी नहीं बन सकती क्या वैसे भी पापा जी में सूर्य को बीटा मन है उस रिश्ते से भी आप बहन हे बनोगी सोच लो मस्सी बैनर का अच्छा मौका है

बहार कोई आवर भी था जो इनकी बारे सुन कर उसका मच खुला हुआ था आवर कान गेट से सटे हुए थे

उसे राधिका आवर दीप्ती की बातो से बूत हद टेक मामला समाज आ गया था की आखिर पूरा मामला क्या है

वही बहार कुछ डिअर पहले सक्तिपुर से मानसी वह वयोम विधि आवर गायत्री को ले कर हवेली पहुंचे थे

विधि आवर गायत्री दोनों हे वह से त्यार हो कर आयी थी पैर

शालिनी जी में आते हे उन दोनों के हाथो में एक एक बजे थमा दिया

विधि .....आंटी जी ये किध लिया ीोुर इसमें है क्या

शालिनी जी ..... बेटी विधि इसमें तुम दोनों को कपडे आवर गहने है आवर मां बिलकुल भी मत करना क्युकी ये सब सूर्य हे पसंद किये है ये उसकी हे इच्छा थी (यहाँ शालिनी जी में झूट कहा इच्छा वाली बात को ले कर )

पैर कपडे वह गहने सूर्य की पसंद के थे

सूर्य का नाम सुनते हे विधि आवर गायत्री दोनों की आँखों में चमक वह होंटो पे मुस्कान आ है थी

(शालिनी जी ..... मतलब मेरा शक सही है कुछ तो है इनके आवर सूर्य के बिच बहुत मुश्किल से तो दुश्मनी ख़तम हुई है नहीं कुछ गलत न हो जाये )

विधि ....... ठीक है आंटी जी जैसा आप कहे

शालिनी जी ........बेटी अलीना विधि आवर गायत्री बेटी को अपने साथ ले जाओ कोमल के रूम में

अलीना ...... जी माँ आप दोनों मेरे साथ आइये

शालिनी जी ...... जाओ बेटी आवर इस हे अपना हे घर संजो कोई भी परेशानी हो कोई भी चीज़ चाइये बेझिजक किसी को भी बोल देना

विधि ..... जी आंटी जी

अलीना .विधि गायत्री को अपने साथ ले जाती है जहा बाकि लड़किया भी त्यार हो रही थी कोमल सोफिया अलीना विधि गायत्री मानसी मानवी पायल प्रीती

वही पास वाले रूम में मेर्री जी राधा सानिया माया संधि आवर कुछ महिलाये त्यार हो रही थी

सूर्य .......वयोम जी आपको यकीं है न जो आप कह रहे है वह सच है

वयोम ......मैं जो कह रहा हूँ वो पूर्ण सत्य है भाई मैंने पूरी जानकारी के बाद हे आपको बताना ठीक समजा

सूर्य ....... ठीक है किसी को उसपे नजर रखने को कहो कुछ भी गड़बड़ नहीं होने चाइये

सदी के बाद मैं खुद देखता हूँ उसको तो अब तुम भी त्यार हो जाओ

वयोम .......ठीक है भाई मुझे कोनसा वक़्त लगेगा

सूर्य .......कभी कभी इंसानो के जैसे भी काम करके देखो इसका भी अलग हे मजा है

सूर्य वह से निकल जाता है क्युकी अब समय हो चूका था दूल्हे को उसके दोस्तों के हाथो त्यार होने का

रोहन सोहेल मानव तीनो सूर्य को दूल्हे के रूप में त्यार करने लगते है सदी के लिया ........

परीलोक ..........

रानी महल आवर सूर्य महल दोनों हे बहुत खूबसूरत तरीके से सजाये हुए था

राण बिरंगे खूबसूरत वस्त्रो में सभी एंजेल आवर परिया दोनों महल में घूमते हुए नजर आ रहे थे

वही गुरुदेव आवर ऋषि विवाह विधि त्यार करने वह बाकि महत्वपूर्ण कार्यो को अपनी देख रेख में सुनियोजित तरिके से कार्य करवा रहे थे

दादा जी .......देख रही हो ठकुराइन चारो तरफ ख़ुशी हे ख़ुशी है

हमने सायद पिछले जनम में कुछ अच्छे करम किये थे जो हमें ऐसा पॉट्स मिला मुझे बहुत बड़ी गलती हुई मेरी बूढी बरिष्ठ हो है थी जो मैंने अपने बेटे आवर बहु को अपमानित कर घर से निकला था

दादी जी ...... ऐसे ख़ुशी के मोके पे आप उन भरे हुए घावों को क्यों कुरेद रहे है जी

जो समय हाथ से जो बात मुँह से निकल गया उसको ऐसे समय में याद कर दुखी होने से क्या वो समय लौट आएगा

आप हे तो कहते है हमें हमेशा अनुभव बुरे आवर यादे अछि हे याद रखना चाइये

दादा जी ........ तुम ठीक कहती हो पैर जब उस समय के बारे में सोचता हूँ तो मन खुद को दीकरणे लगता है

मैंने अपने बचो की बात टेक नहीं सुनी आवर उन्हें घर से अपनी जिंदगी से निकल फेंका

शिव .......बाउजी आप ऐसा क्यों सोचते है उसमे आपकी क्या गलती थी

आपने हमें हर वो ख़ुशी हमारे मांगने से पहले हमें दी तो क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता की कोई भी फैसला करने से पहले अपने माता पिता से विचार विमर्श करे

मैंने आपसे बिना सलाह के शालिनी से विवाह किया आपको अपने हे डिस्ट आवर बाकि सेबल सामने लज्जित किया सर्मिन्दा तो हमें होना चाइये न की आपको

हमने आपकी इजाजत नहीं ली ये हमने गलत किया

आपने बस एक अच्छे पिता के नाते हमें हमारी गलती का दंड दिया अब आप सब पुराणी बातो को भूल जाये

दादी जी .........सच कहा बीटा आवर अब आप भी त्यार हो जाइये अपने कॉस्ट के साथ साथ अपने संदी से मिलने के लिया ठाकुरो की तरह हम लड़के वाले है

दादा जी ......... जो हुकुम ठकुराइन हाहाहा

शिव ........ माँ सा गुरुदेव का आदेश है सूर्य को उप्टन लगाने के बाद त्यार भी करना है तो आप......

दादी जी ...... ठीक है बीटा रेखा मेनका शालिनी आवर रैंक पारी जी को बोल दो मैं भी आपके रही हूँ आवर बच्चियों को त्यार होने दो

शिव .....जी माँ सा

शिव वह से लौट जाता है आवर सभी को गुरुदेव का आदेश देता है

उदार परिमहल में किरण भी यही तयारी हो रही थी बस प्रतीक्षा थी थी तो सूर्य की तरफ से उप्टन आने का ( मतलब की सूर्य द्वारा छुई हुए उप्टन )

पिरया ममी जी ...... देखो सन्ति हमारी बेटी कल तक जो हमारी हवेली की रौनक थी जो दिनभर ीदार से उधर दौड़ती रहती थी गुड़िया के जैसे आज वो दुल्हन बनने वाली है

प्रिय जी बे जो कुछ कहा उसे सुन सन्ति जी को अपनी बेटी की वो बचपन की चुलबुली यदि उसकी मस्ती उसकी शैतानिया याद आने लगती है

सन्ति जी की आँखे डेरी डेरी नाम हो जाती है

पैर उनके होंटो पे मुस्कान थी ये आंसू भी बेस अजीब होते है ख़ुशी hi या गाम दोनों में बर्बश निकल हे आते है

सन्ति जी .......आपने सही कहा दीदी कल टेक जो हमारे घर संसार की जान थी आज वो किसी आवर के घर संसार बसने वाली है न जाने जब दोनों इतनी बड़ी हो है देखते हे देखते

पता नहीं वो लोग कैसे होते है जो अपनी अजन्मी बची को संसार में आने से पहले हे उसका जीवन ख़तम कर देते है आवर अगर बीच जाये तो जीते जी उसकी जिंदगी नरक बना देते है क्या लड़की के रूप में जनम लेना उसका गुनाह है

प्रिय जी ....... संत हो जा मेरी बहन जो ऐसे कुकरम करते है इस्वर भी उन्हें माफ नहीं करता जो बेटियों को घरब में हे मार देते है आज भी बेटे आवर बेटी में भेद करते है उनका अंत भी उतना हे दुखदायी होता है

देख उप्टन आने गया है चल अपनी स्वीटी को उप्टन लगा वो हमारी बेतिया है बस घर बदल जायेगा रिस्ता नहीं सदी के बाद तो उसे आवर 2 माँ मिल जाएगी तुम्हे तो ख़ुशी होना चाइये इतना प्यार करने वाला ऐसा दामाद ऐसा बीटा प् कर

सन्ति जी अपनी आँखों की नमी साफ कर उप्टन उंगलियों पे लगा कर किरण के दोनों गालो पे लगाती है

किरण ......माँ मैं आपकी बेटी थी हूँ आवर हमेशा रहूंगी आपकी वही छोटी से गुड़िया बन कर भले हे सदी हो रही है मेरी पैर क्या इस से मैं आपकी बेटी नहीं रहूंगी फॉर कभी मुझे ले कर उदाश मत होना जानती है न आप दोनों को उदाश नहीं देख सकती हम दोनों

सन्ति जी किरण के माथे को चुम कर दोनों गालो को सहला देती है

सन्ति जी ...... एक बात सदी होने जाने दे फिर तो हम नहीं वही याद आएगा जिसके सपने देखते हुए बड़ी हुई है मैं भी तुम्हारी उम्र से गुजरी हूँ बेटी

डेरी डेरी वह मौजूद उम्रदराज महिलाये ( घर की ) ने किरण को उप्टन आदि लगाने के बाद किरण को बाकि लड़कियों के हवाले कर दिया

थोड़ी बहुत मस्ती मजाक के बाद किरण को परिमहल में बंद विशेष बाथरूम में ले जाया गया जहा सभी लड़किया( जिनिशा सपना जीनत रिद्धि पारिजात मानसी जूलिया आदि में किरण को सनान करवाने के बाद किरण को एक कक्ष में ले जाया जाता है जहा सभी मिल कर किरण को दुल्हन के रूप में त्यार करने लगती है

ऐसा हे सूर्य के साथ हो रहा था क्युकी यहाँ कोई सूर्य का दोस्त मौजूद नहीं था इस लिया उसकी जिम्मेदार राधा कोमल के साथ पायल प्रीती में संभाली हुई थी

सभी के त्यार होते होते विवाह मुहूर्त भी निकट आ गया गुरुदेव सूर्य को सन्देश दे देते है

सूर्य ....... दादी सा गुरुदेव का सन्देश है की मुहूर्त का समय निकट है

दादी जी ....... पैर बीटा घोड़ी....

तभी वह सकती प्रकट होरा है

सकती ...... भाई ये सौभग्य मुझे दीजिये

सूर्य ...... क्या मतलब

सकती ........ भाई मैं घोडा बन जाता हूँ आप मुझपे स्वर हो विवाह मंडप चलो

दादा जी ......हाहाहा बीटा ऐसा नहीं होता दूल्हा विवाह में घोड़े पे नहीं घोड़ी पे स्वर हो कर विवाह माण्डव पहुँचता है अब सोच लो

दादी जी की बात समझते हे सकती झेप जाता है आवर सूर्य आवर बाकू सभी की सभी हुई हंसी चुत जाती है

तभी वह बदलो को चोरते हुए एक वाइट यूनिकॉर्न आता है





उसकी आवाज सुन सकती महल से बहार निकलता है

कुछ डिअर बाद सकती वाइट यूनिकॉर्न के साथ अंदर आता है

सकती ...... लीजिये भाई आपकी सवारी आ गई है

सूर्य ......वाइट यूनिकॉर्न तुम्हे किसने भेजा है तुम तो राजकुमारी पारिजात के यूनिकॉर्न लगते हो

यूनिकॉर्न .......जी यूवराज हमें राजकुमारी जी ने आपकी सेवा के लिया आदेश दिया है हमारे लिया क्या आज्ञा है

सूर्य .....सकती आप देख लीजिये

सकती ......भाई मैंने देख लिया है ये फीमेल यूनिकॉर्न है

सूर्य ......अरे मेरा मतलब था उसे सजाने का देख लीजिये आप भी न

ुनिकर ...... उसकी जरुरत नहीं आप जैसे हे मुझपे स्वर होंगे सब आपकी इच्छा अनुसार हो जायेगा

दादी जी .....बीटा सूर्य तुम्हारी यहाँ कोई भाबी तो है नहीं इस लिया मेनका बेटी सूर्य को काजल लगाओ

सूर्य ......उसकी जरुरत नहीं है दादी जी क्युकी सूर्यगढ़ में राधिका भाबी ने काजल लगा दी है

अगले हे पल सूर्य की आँखों में काजल लग चूका था

दादी जी ...... मैं तो भूल हे गयी थी मेनका बेटी सूर्य को तिलक कर विवाह मंडप के लिया विधा करो

मेनका जी आगे भाड़ सूर्य को तिलक आदि रसम पूरी कर अपनी आँखों से काजल निकल सूर्य को कान के पीछे नजर का टिका करती है





सूर्य सकती की सहायता से यूनिकॉर्न पे स्वर हो विवाह मंडप की आवर निकल जाता है सभी के साथ मधुर संगीत वह परियो के नृत्य ने सभी को जुमने के लिया विवश कर दिया था कोमल राधा पायल प्रीती के साथ साथ रेखा मेनका जी शालिनी जी शिव आदि भी तुमने लगते हुए विवाह स्टाल की आवर भाड़ गए

वही किरण के दुल्हन रूप में त्यार होने के पश्चात ऋषि वर सवयं वह पहुंचे आवर रही पारी को कुछ समजने के पश्चात शीघ्र विवाह स्थल पे आने का कह वह से विवाह स्टाल की आवर निकल जाते है

रानी पारी के आदेश पे रैंक महल के मुख्या डिअर तब विशेष पुष्पों को कालीन से मुख्या डिअर तक बिछा थी सामने सवर्ण निर्मित पालकी राखी हुई थी जो पूर्ण रूप से सजाई हुई थी

रानी पारी ........ बच्चो विवाह का सब्ज मुहूर्त निकट है हमें विवाह स्टाल के लिया निजालना चाइये

रानी पारी के आदेश पे सपना पारिजात जीनत जिनिशा आवर बाकि सभी किरण को ले कर बहार की तरफ चल देते है उन खूबसूरत पुसो के ऊपर से होते हुए किरण को सवर्ण पालकी में बैठाया जाता है





पालकी के उठाते हे गीत संगीत नृत्य के साथ विवाह स्टाल की आवर निकल जाते है नाचते गेट

सूर्यगढ़ .........

सूर्यगढ़ हवेली में बारात रवाना होने का समय हो चूका था

सूर्य घोड़ी पे बैठा हुआ सूर्यगढ़ की मुख्या चौंक की तरफ भध रहा था

सामने d.j की दूँ पे बहुत से लड़के लड़किया नाच गए रहे थे महेंद्र जी भी यहाँ ख़ुशी ख़ुशी अपनी बहन मेनका आवर बीबी रेखा को संग लिया तुमने लगा रहे थे

सोहेल ...... भाई एक बात तो माननी पड़ेगी तू है बड़ा किस्मत वाला

सूर्य ......क्यों भाई ऐसा क्या है जो तुझे ऐसा लगा

सोहेल ......देख सभी लड़कियों को नजर तुम पे अटकी हुई है जैसे हम तो यहाँ मौजूद हे नहीं है क्यों रोहन भाई सही कहा न मैंने

रोहन ......भाई ये पहले से हे हैंडसम है आज तो दूल्हा बना हुआ है आज तो सभी की नजरो का मुख्या केंद्र यही है

सूर्य ....... लगता है भाबी जी से आपकी शिकायत करनी पड़ेगी आवर तुम्हारी सलमा से बीबी है गफ है फिर भी

सोहेल ....... भाई सब है अब किन्दा है तो अरमान भी होंगे न क्यों रोहन भाई

रोहन ....... भाई क्यों जुटे पढ़वाने वाली बात करते हो तेरी भाबी ने सुना तो मेरे साथ साथ तेरा भी पिछवाड़ा लाल कर देगी

मनु जो अभी अभी नाच कर आया था वो इन दोनों की बात सुन हसने लगता है

सोहेल .....भाई हंस क्यों रहे हो एक बार सदी होने जाने दे या गफ बना ले फिर देखना तुम भी हमारी लिस्ट में सैम हो जाओगे

बाते करते हुए डेरी डेरी चौंक भी आ गया जो की सूर्यगढ़ के बीचो बिच में था यहाँ पहले से बहुत से कार्स कड़ी थी जिनमे बेथ कर बारात सूरजगढ़ जनि थी

सूर्य घोड़ी से उतरा तो कमल आवर सोफिया ने उसका हाथ थम अपने साथ ले गई डांस करवाने सूर्य मुस्कुराते हुए दोनों के साथ निकल नाचने लगता देखते हे देखते पायल प्रीती माया सुनिधि सोनिया शालिनी जी मेनका जी भी डांस करने लगते है राधिका जो पसीने से भीगी हुई अपनी सांसो को संभाली रही थी सूर्य उनका हाथ पकड़ कर डांस की लिया अपनी आवर खींचता तो राधिका सीधा सूर्य के चोसे सीने से आ टकराती है हिज से उनके चूचिया सूर्य के ठोस सीने से सब जाती है उनके मुँह से एक आआह्ह्ह्ह सो निकलती है

सूर्य ....... क्या हुआ भाबी जी

राधिका अपनी सीने पे हाथ रख

राधिका ......कोई ऐसे भी उन्हें दबाता है क्या देवर जी ये प्यार से दवाने की चीज़ है

कहते हुए आँखों मर कर सूर्य से अलग हो जाती है

कुछ डिअर बाद सभी सूरजगढ़ के लिया रवाना होने जाते है जो की कार्स से 20,25 मिनट्स का रास्ता था

सूरजगढ़ ......

किरण के विवाह के लिया सूरजगढ़ की पुराणी हवेली को चुना गया था कभी इस हवेली में जोरावर जी के दादा परदादा रहा करते थे

काफी बड़ी होने के कारन विक्रम सिंह जी ने हे अलग से छोटी हविले बनवारी थी

जोरावर जी के पार्टी के लोगो के साथ यहाँ बहुत से उनके पार्टी के कार्यकर्ता वह पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे

आखिर मंत्री की बेटी की सदी हो आवर पुलिस आदि न हो ये हो नहीं सकता

जहा देखो खाने पिने के बड़े बड़े स्टाल लगे हुए थे जहा कुछ तो अभी से सुरु हो चुके थे

एक तरफ कोने में अस्थायी बार बना हुआ था जहा सबसे ज्यादा भीड़ थी सदी विवाह में आजकल ये आम बात हो गई थी

नाना जी .......बीटा संजय सूर्यगढ़ से क्या खबर है

संजय .जी ....बाउजी मेरी अभी जीजा सा से बात हुई थी उन्होंने कहा की बारात हवेली से निकल गई है बस चौंक तक थोड़ा बहुत समय लगेगा बाकि ज्यादा समय नहीं लगेगा बारात को आने में

जोरावर ......भौजी इनसे मिलिए ये है हमारी पार्टी के मुख्या अध्यक्ष श्री चंद्रभान जी

नाना जी ....... विवाह में आपका स्वागत है चंद्रभान जी

चंद्रभान जी ..... .. हमारे लिया कोई सेवा का अवसर हो तो जरूर याद कीजियेगा हम यहाँ किसी अध्यक्ष के हैसियत से नहीं आये है हमने जोरावर को अपनी राजनीतिक गाढ़ी का वरिष्ठ चुना है इस नाते जिसका विवाह हो रहा वो हमारी भी पोती है भाई साहब

नाना जी ........ जी बिलकुल जैसा आपको उचित लगे भाई साहब अब आपकी पोती का विवाह है तो आपको वैसे भी कोई रोकने वाला है नहीं हाहाहा

जोरावर .....बाउजी किसी चीज़ की कोई कमी तो नहीं लग रही है न

नाना जी .......बीटा बाकि सब तो ठीक है पैर एक बात का ध्यान रखना बारात कुछ देर में आ जाएगी बछिया भी साथ में आ रही है सब किसी ने कुछ गलत हरकत की तो तुम्हे तो पता हे है सूर्य का बस इस बात का ध्यान रखा जहा महिलाएं हो बछिया हो उस तरफ किसी बहरी व्यक्ति का जाना उचित नहीं उस तरफ का ध्यान रखने के लिया पाण्ड्य आवर विजय बीटा को कहो

च्चन्द्रभान जी ......ये सूर्य कही आपका दामाद तो नहीं है

जोरावर जी ...... जी अंकल जी उसको गुस्सा थोड़ा जल्दी आता है कोई अगर उसके करीबी को परेशान करे तो उसके बाद तो सामने वाला जिंदगी की भीख हे मांगता नजर आता है

चंद्रभान जी .... फिर ऐसे लड़के से रिस्ता

नाना जी ....... आप गलत सोच रहे है वो मेरा नाती भी है गुस्सा तभी आता है जब कोई गलत करता है वैसे दिल का बहुत अच्छा है

कभी फुर्सत में मिलवाता हूँ आपको उस से

एक रूम में जहा किरण को सजाया जा रहा था वह किरण आवर सपना की कुछ आस प्रदोष की भैया आवर हम उम्र शी लिया

किरण को अपने अपने अनुभव बया कर रही थी मस्ती मजाक के साथ

वही बहार विजय आवर पाण्ड्य जी अपने काम पे लग चुके थे

ताकि किसी को कोई परेशानी न हो बारात सूरजगढ़ पहुंच चुकी थी आवर उसका संकेत शिव ने जोरदार आतिश बजी कर सभी को दे दिया था अभी बारात हवेली ी पहुंचे 1 हर से भी ऊपर का समय लेने वाली थी ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................

नेक्स्ट भाग कल आएगा दोस्तों .....
 
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