Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 22 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 173

सूर्य .....किरण कुढ़ को संत कर अपनी बूढी से काम लो

किरण को सूर्य बोलता हुआ तो दिखाई दे रहा था पैर उसे सुनाई कुछ नहीं दे रहा था

किरण .....क्या कह रहे है आप मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है

सूर्य भी किरण के हिलते हुए होंठ देख प् रहा था पैर उसे सुनाई कुछ भी नहीं दिया

सूर्य .....जरूर कोई सकती है जो स्वीटी की आवाज मुज तक पहुंचे नहीं दे रही है आवर मेरी स्वीटी तक

मुझे कोई तो मार्ग निकलना होगा ताकि स्वीटी तक अपनी बात पंहुचा सकू

मानसी ......क्या हुआ आप किस बारे में बोल रहे है

तभी सूर्य की नजर किरण पे पड़ती है

सामने का दृश्य देख सूर्य के मुख से चीख निकल जाती है

surya........sweeeeeetyyy..........

अब आगे .......


सूर्य के मुँह से निकली चीख से मानसी का ध्यान किरण की आवर गया तो


मानसी की भी रूह कैंप उठी

सामना लावा दानव आने लावा उगलते हाथो में किरण को जकड़े हुए ऊपर उठा रखा था

मानसी ......आप कुछ कीजिये ऐसे तो वह दानव दीदी को मर डालेगा

सूर्य ......मनसीई........ख़बरदार मानसी अपनी जुबान बंद रखो मेरी स्वीटी को कुछ भी हुआ तो मई इस पुरे ड्रैगन लोक ले साथ साथ बाकि सब कुछ नस्ट कर दूंगा

पिछले बार नरकासुर की वजह से मैंने अपना सबकुछ खो दिया उस वक़्त मेरी गलती थी पैर इस बार नहीं

सूर्य की गुस्से में जलती आँखे आवर उसकी दहाड़ सुन मानसी का सरीर कपङे लगता है

मानसी को ऐसा कांपता देख सूर्य को अपने गलती का अहसास होता है

सूर्य ......सॉरी मानसी

सूर्य वही ध्यान में बेथ जाता है आवर अपनी कुंडलिनी सकती जागृत करने लगता

साथ अपने पांच तत्वों की सकती को अंनियंत्री छोड़ देता है

जैसे जैसे सूर्य के सरीर से साल्ट रैंगिंग ऊर्जा निकलती है वैसे वैसे मानसी को उस ऊर्जा से पीड़ा होने लगती है

साथ हे वह अदृश्य घेरा भी सामने आ जाता है

वही किरण अपनी पूरी ताकद लगा कर उस लावा दानव के जकड़न से आजाद हो जाती है

लावा दानव अपने हाथो से सीकर को निकलता देख गुस्से में अपना भरी भरकम पेअर किरण को करता है जिस से किरण काफी दूर जा गिरती है

आवर किरण. के मुँह से खून निकलने लगता है

तभी किरण के मस्तिक्ष में सूर्य की आवाज सुनाई देती है

सूर्य .....स्वीटी मैं जनता हूँ तुम्हे बहुत आदिक पीड़ा हो रही है पैर तुम्हे अपने क्रोध पे नियंतरण करना होगा

अपनी बूढी का प्रयोग करो तुम उसे हटा सकती हो बस अपना वॉर आवर ध्यान उचित स्थान पे केंद्रित करो

किरण ......मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है भाई

ीदार सूर्य की हालत देख मानसी को सूर्य की चिंता होने लगती है

क्युकी सूर्य उस कवच में से स्वीटी को सम्पर्क जाने के लिया अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा का प्रयोग कर रहा था जिस के कारन सूर्य के नाक से रकत बहने लगता है

सूर्य .......खुद को संत कर उसकी आँखों में ध्या से देखो स्वीटी तुम्हे इसके अंत का रास्ता मिल जायेगा

इतना कहते हे सूर्य उस कवच में हे मूर्छित हो जाता है

किरण की जब नजर सूर्य के मुचित लशु लुहान चेहरे पड़ती है तो उसे लावा दानव पे बहुत गुस्सा आता है

आवर किरण अपनी पूरी ताकत के साथ लावा दानव पे वॉर करने लगती है

.किसी ने सच कहा क्रोध में इंसान अपनी बूढी का प्रयोग करना हे भूल जाता है ....

यही किरण के साथ जो रहा था सूर्य को इस हल में देख उसका क्रोध जागृत होती उठा आवर वह क्रोधवश लावा दानव पे अपनी ऊर्जा वायरत कर रही थी

मानसी ......ये दीदी को क्या होगा गया वो इतने क्रोध में है जबकि उन्हें संत आवर बूढी से इसका सामना करना चाइये क्या कृ ये भी मूर्छित है

मानसी को कुछ भी समाज नहीं आ रहा था की वो कैसे सूर्य आवर किरण की सहायता करे

किरण अभी भी ुशी रफ़्तार से लावा दानव से योध कर रही थी

मानसी को आवर कोई विचार नहीं सुजा तो वह भी वही सुरक्षा कवच में ध्यान लगा कर बेथ जाती है

करीबन 30 मिनट्स से भी ऊपर समय हो चूका था किरण को लावा दानव सड़ योध करते हुए किन्तु न किरण थकने का नाम ले रही थी आवर न hi लावा दानव पे किसी तरह की थकन नजर आ रही थी

किरण .....इसे कैसे ख़तम करू इस्पे तो मेरे ऊर्जा सकती का कोई प्रभाव हे नहीं हो रहा है

न हे सोर्ड के प्रहार से उसे कोई हानि पहुंच रही है

किरण ये सब लावा दानव से लड़ते हुए बोल रही थी

तभी किरण की नजर एक बार फिर सूर्य पे पड़ती है जो अभी भी मूर्छित था

किरण का गेस एक बार फिर भढने लगता है

तबजि सूर्य के बगल में ध्यान में लीं मानसी को देख किरण को सूर्य दवारा कही बात का स्मरण होता है

( संत आवर बूढी से कार्य लो उसकी आँखों में देखे स्वीटी उसकी आँखे)

जैसे ये सबद बार बार किरण के मंद में गूंजने लगते इस दौरान एक बार फिर लावा दानव को किरण पे वॉर करने का मौका मिलता है

जिसका पूरा लाभ लावा दानव उठाया है आवर किरण इस वक़्त सूर्य के सब्दो में खोई हुई थी इस लिया वह सवयं का बचाव भी नहीं कर पारी है आवर लावा दानव के वॉर को विफल न कर पाने के कारन किरण काफी दूर जा गिरती है

किन्तु इस बार जैसे किरण ने कुछ द्रिसड निस्चय कर लिया हो पथरो पे गिरते हे किरण बड़ी फुर्ती के साथ उठ कड़ी होती है

लावा दानव किरण की आवर भाड़ रहा था

किरण बहुत हे ध्यान से उसकी उस सुहारी आँख को देख रही थी जो उसे अपनी आवर आकर्षित कर रही थी

जैसे हे लॉज़ दानव किरण के सामने पहुंच कर फिर से अपने हाथो में जकड़ने के लिया हाथ बढ़ता है

किरण जैसे ुशी पल का इन्तजार कर रही थी वह जम्प करते हुए लावा दानव के उस पथरीले हाथ पे जम्प करते हुए डॉट हुए बड़ी तेजी से उसके मंडे तक जा पहुँचती है

आवर अपनी सोर्ड उस सुनहरी आँख में दे गुस्सा देती है

सोर्ड से जैसे हे सुनहरी आँख नस्ट होती है उसके से गोल्डन स्टोन निकल कर किरण के सीने में समाहित हो जाता है

ुशी के साथ हे लावा दानव पूरी तरह पत्थर में तब्दील हो कर खंड खंड हो जाता है

लावा दानव के ख़तम होते हे किरण तेजी से सूर्य के पास पहुँचती है

लावा दानव के मरते हे सूर्य मानसी उस कवच से मुक्त होने जाते है आवर सूर्य की जो ऊर्जा उसके सरीर से बहार थी वह वापिस अपने उचित स्थान पे चली जाती है

किरण सूर्य का सर अपनी गॉड में रख सुबकने लगती है

मानसी भी अपने ध्यान से बहार निकल आई थी कवच से मुक्त होते हे

किरण .....उठो न भाई देखो मैंने उस दानव को ख़तम कर दिया है

प्लेसेस भाई अब तो उठो न

सूर्य को अपने ग्लैड में लेताये किरण आंसू बहार रही थी वही सूर्य के नाक से जो रकत जहा था

वह डेरी डेरी गायब होने लगता है आवर सूर्य अपनी आँखे खोल देता है

सूर्य की आँखे खुलते हे उसकी आँखों के सामने आंसुओ से भिगान स्वीटी का चेहरा था

सूर्य ......स्वीटी तुम ठीक तो हो न

सूर्य की आवाज सुन किरण आवर मानसी की जान में जान आती है

दोनों को जहा जगह मिली वही सूर्य के चेहरे पे चुम्बनों की बौछार कर देती है

सूर्य भी उन दोनों के प्यार से विभोर हो उन्हें रोकने कोशिश नहीं करता है

जब दोनों के दिल को सन्ति मिलती है तब दोनों संत होती है आवर सूर्य को एक तक निहारने लगती है

सूर्य ......तुम दोनों ऐसे क्यों देख रही हो मुझे

किरण ......आपको प्यार करने का दिल कर रहा है

सूर्य ....अभी अभी तो किया है अगर मन नहीं भरा है तो आवर करलो

मानसी .....वो ादुरा प्यार नहीं दीदी का मतलब है पूर्ण प्रेम मिलान

सूर्य .....क्या पागल हो गई जो क्या विवाह से पहले ऐसा कुछ सोचना भी नहीं

किरण .......तो कर लीजिये न विवाह

सूर्य .......वो करूँगा हे पैर आज मेरी स्वीटी की सही अच्चानक विवाह पे क्यों ातक गई है

किरण ......आपका क्या आप तो किसी न किसी संग प्रेम संसर्ग बना लेते है पैर हम लड़कियों का क्या जो आपको देख खुद को रोकती है है

मानसी .....है दीदी आपने सच कहा इन्हे देखने के बाद बहुत मुश्किल होता है कुढ़ को सँभालने में

सूर्य ......ठीक है फिर हम यहाँ से चलते हे गुरुदेव से इस विषय में बात करूंगा

अब हमें आगे भढना चाइये क्युकी अभी तक हमने गोल्डन ड्रैगन सोर्ड प्राप्त नहीं की है

आवर उसके बिना हम अपनी इस सफर को पूरा नहीं कर सकते है

सूर्य किरण वह मानसी का हाथ थम उस जलती हुए जवालामुखी की ुर निकल पड़े

सूर्य को थोड़ा अजीब लग रहा था

क्युकी किरण वह मानसी ने अपनी चुनौती पूर्ण कर ली थी अब उसकी बारी थी थी पैर अभी तक उसे कोई भी चुनौती नहीं मिली थी

तीनो लावा को पर कद थे हुए गुफा में प्रवेश कर जाते है

सामने हे गोल्डन ड्रैगन सोर्ड थी






सूर्य ......मुझे लगता है यही गोल्डन ड्रैगन सोर्ड है क्यों स्वीटी

सूर्य की आवाज पे किरण ने कोई जबाब नहीं दिया

सूर्य ......क्या हुआ स्वीटी तुम जबाब क्यों नहीं दे रही हो

देखो मैं परीलोक पहुंचते हे गुरुदेव से बात करता हूँ न हमारे विवाह को ले कर के

इस बार भी जब किरण ने कोई जबाब नहीं दिया तो

सूर्य पलट कर किरण को देखता है तो सामने किरण कड़ी थी पैर कुछ अजीब था उसकी नजरे ड्रैगन सोर्ड पे तिकी हुई थी पैर जैसे वो किरण न हो कर उसका जीता जगह पुतला हो


सूर्य मानसी को देखता है तो उसका भी यही हाल था

सूर्य .....मतलब की अब जो भी चुनौती है वह मुझे अकेले हे पर करनी होगी

पैर चुनौती क्या है अभी तक तो ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा जैसे स्वीटी आवर मानसी की चुनौती में था

सूर्य किरण वह मानसी को टच करने की कोशिश करता है पैर कोई अदृश्य सकती सूर्य को दोनों को हे टच नहीं करने दे रही थी

सूर्य .....मतलब की दोनों किसी अदृश्य सकती से बने कवच में लाईड है आवर ये तभी मुक्त होंगी जब मेरी चुनौती पूर्ण होगी

सूर्य काफी समय तक ीदार से उदार देखता

जैसे कोई पहेली हो कुछ आवर जब उसे ऐसा कुछ भी नजर नहीं आता है तो वह वही बेथ जाता है आवर गौर से गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को देखने लगता है

सूर्य को अपने अंदर गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को ले कर खिचाव सा महसूस होता है

सूर्य वह उठ कर गोल्डन ड्रैगन सोर्ड की तरफ भाड़ जाता है

सूर्य जैसे जैसे आगे भाड़ रहा था गोल्डन ड्रैगन सोर्ड का सुनहरा प्रकाश आवर तेज होने लगता है

साथ वह के लीव में भी हलचल सुरु हो जाती है

जैसे हे सूर्य ड्रैगन सोर्ड से कुछ दुरी पे पहुँचती है तो

उसे आभाष होता है की गोल्डन ड्रैगन सोर्ड किसी तरह के सुरक्षा चक्र में सुरक्षित है

सूर्य अपने दोनों हाथ आगे कर उस सुरक्षा कवच को छूटा है

उसके एक बार तो हल्का जतका मह्सुश होता है

इस लिया सूर्य अपने हाथ पीछे कर लेता है

पैर इस किर्या से गोल्डन ड्रैगन सोर्ड आवर आदिक चमकाने लगती है

जिसकी चमक से आकर्षित हो सूर्य एक बार फिर से

उस सुरक्षा कवच को टच करता है इस बार उसे कोई जतका नहीं लगता है

सूर्य अपने हाथ पीछे लेने की कोशिश करता है

पैर तब तक देर हो चुकी थी सूर्य के दोनों हाथ उस अदृश्य कवच से चिपक चुके थे

गुफा िस्थित लावे में हलचल तेज होने लगती है

देखते देखते वह मौजूद आवर जो लावा पहाड़ के ऊपर से बाह कर बहार जा रहा था उस में गोल्डन ऊर्जा निकल कर सूर्य की आवर भढ़ती है

आवर सीधा सूर्य के पीठ पे बने वाइट ड्रैगन टैटू से जा टकराती है इसके साथ हे सूर्य के मुँह से दर्दनाक कारणभेदी चीख से पूरी गुफा गूंज उठी

साथ हे सूर्य के सरीर पे जो वस्त्र थे वह भी जल कर नस्ट होती जाते है

इस वक़्त सूर्य पुराण नग्न जो कर मनो किसी अदृश्य दिवार पे हाथ टिकाये खड़ा हो

लावे से निकलती गोल्डन ऊर्जा जैसे जैसे सूर्य के सरीर में प्रवेश कर रही थी वैसे वैसे सूर्य का पूरा सरीर अदृश्य होने लगता है

आवर उसके स्थान पे सूर्य किसी आवर हे रूप में नजर आने लगता है

डेरी डेरी सूर्य की पीड़ा इस कदर भाड़ जाती है की सूर्य का सरीर उस पीड़ा के चलते अपने सरीर का भर तक नहीं उठा प् रहा था

आवर सूर्य अपने गुथनो पे आ जाता है अभी भी सूर्य के हाथ उसे तरह चिपके हुए थे

डेरी डेरी जवालामुख का लावा ठंडा पड़ने लगता है

आवर गोल्डन ऊर्जा भी बहुत काम मात्रा में अब वह पे मौजूद थी

जब लावा से निकली पूरी ऊर्जा सूर्य में समाहित होने जाती है तब एक विश्पोट होता है आवर सूर्य उस विस्पोट की वजह से पीछे की तरफ लुढ़क जाता है

सूर्यक का सरीर अभी भी पारदर्शी गोल्डन ऊर्जा जैसे हे part आईटी हो रहा था

इस विस्पोस्ट के साथ हे किरण वह मानसी दोनों आजाद हो जाती है

दोनों की आँखों से be-thasha आंसू बाह रहे थे

दोनों डॉट हुए सूर्य के पास आती है

आवर सूर्य को पकड़ कर खड़ा करती है

किरण मानसी .........आप ठीक तो है न

सूर्य .....अह्ह्ह्हह है मैं अह्ह्ह ठीक हूँ मुझे गोल्डन ड्रैगन सोर्ड के पास ले चलो

किरण मानसी सूर्य को पकड़ कर 7,8 फिट दूर हवा में स्थित गोल्डन ड्रैगन सोर्ड के सामने ले आती है

सूर्य ......मानसी जाओ जा कर गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को पकड़ो वो तुम्हे ब्लैक ड्रैगन तक पंहुचा देगी तुम्हे वह ब्लैक ड्रैगन से जुड़ना है कितने संत आवर पवित्र मन से उसके सामने जाओगी वो तुमसे उतनी हे जल्दी जुड़ पायेगा

सूर्य की बात सुन मानसी अपनी आँखे बंद कर लम्बी लम्बी सांसे लेती है आवर 2 मिनट्स बाद आँखे खो सूर्य को देखती है

सूर्य आगे भाड़ मानसी के होंठ वह माथे पे चुम कर उसे हौसला देता है

की उसे उम्मीद है तुम जरूर सफल होगी

मानसी किरण से मिल कर गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को पकड़ती है

मानसी के गोल्डन ड्रैगन सोर्ड पकड़ते हे वह वह से गायब हो कर ब्लैक ड्रैगन के सामने जा पहुंची

सूर्य ......स्वीटी अब तुम्हारी बरी है

किरण .......जानती हूँ जान हम जल्द हे अपने अपने ड्रैगन के साथ मिलते है उम्मम्मम्मम्हा लव यू जान

सूर्य ........ी लव यू तू स्वीटी ुम्मम्हा अपना ख्याल रखना

किरण .....जी भाई

किरण आगे भाड़ गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को टच करती है तो एक गोल्डन ऊर्जा उसे घर लेती है आवर अगले पल किरण एक गोल्डन ड्रैगन बचे के सामने थी जो दिकने में बहुत प्यार था






किरण अपने सामने इतने खूबसूरत प्यारी क्यूट से सुनहरे ड्रैगन बचे को देख कर बहुत खुश होती

किरण ......वाओ ये जितना प्यारा है खूबसूरत है
पैर ये इतना छोटा क्यों है

क्या यही मेरा गोल्डन ड्रैगन है या फिर कोई आवर है

गोल्डन ड्रैगन .....मैं हे हूँ आपकी सुनहरी ड्रैगन (फीमेल ) आप मेरे आकर पे मत जाइये आपसे जुड़ने के बाद मेरा वास्तविक आकर का विकाश होगा

किरण आगे भाड़ प्यार से सुनहरी ड्रैगन के माथे पे अपना हाथ रख सहला देती है

किरण ......तुम लड़की हो ी मैं मज़ा ड्रैगन

सुनहरी ड्रैगन .....है क्युकी आप मादा हो इस लिया मेरा जनम भी मज़ा रूप में हुआ है

आवर आपकी कठिन परीक्षा लेने के लिया मुझे क्षमा करे आपको पीड़ा हुई उसके लिया मैं आपसे क्षमा चाहती हूँ

किरण .....मैंने तुम्हे क्षमा किया ुम्मम्हा

किरण द्वारा सुनहरी ड्रैगन को किश किये जाने पे सुनहरी ड्रैगन एक सुनहरे ऊर्जा पुंज में में बदल कर किरण में समाहित होने जाता है है


ुशी के साथ किरण का रूप परिवर्तित होने लगता है





किरण के सरीर में सुनहरी ड्रैगन की ऊर्जा ने जैसे हे किरण के सरीर में प्रवेश किया उसके साथ हे किरण वह सुनहरी ड्रैगन की ऊर्जा सकती आपस में जुड़ जाती है आवर दोनों का मन मस्तिष्क आवर सकती एक हो जाती है

किरण का पुरे सरीर पे गोल्डन कवच आ चूका था आवर उसकी पीठ पे सुनहरी पंख जो की सुनहरी ड्रैगन के सकती का प्रतीक था

मनो हजारो धारदार गोल्डन सोर्ड से इन पंखो का निर्माण खाश टूर पे किरण के लिया हे किया होगा

कुछ देर बाद सुनहरी ऊर्जा पुंज किरण से सरीर से निकल कर गुफा को तोड़ते हुए आकाश में चली जाती है

किरण भी उसे जगह स अपने पंख फैलाये हुए ाखश की आवर छलांग लगा देती है

सुनहरी ऊर्जा पुंज आकाश में अपना आकर लेने लगता है

देखते हे देखते एक विशालकाय सुनहरी ड्रैगन के रूप में सुनहरी ऊर्जा पुंज किरण के सामने थी

सुनहरी ड्रैगन कुछ देर आकाश में अपनी उड़न भरने के बाद किरण के सामने जमीं पे उतर आता है






किरण चलन लगा कर सुनहरी ड्रैगन के पीठ पे स्वर हो जाती है

किरण को अपनी पीठ पे स्वर होते हे सुनहरी ड्रैगन ख़ुशी का इजहार करते हुए आकाश में एक लम्भी चालान लगा देती है

वही मानसी जब गुफा में पहुंची तो वह ब्लैक ड्रैगन ुशी का इंतजार कर रहा था

मानसी ब्लैक ड्रैगन के सामने जा कड़ी होती है

ब्लैक ड्रैगन ...... आप वही क्यों रुक गई आगे भेड़िये आवर मुझे सवीकार कीजिये

मानसी ......पहले मैं कुछ जानना चाहती हूँ

ब्लैक ड्रैगन ......क्या जानना है आपको मुझसे

मानसी ......मुझे चुनौती किसने दी थी थी यहाँ पहुंचे पे वो सकती किसकी थी लावा ड्रैगन के रूप में

ब्लैक ड्रैगन .......वो आपकी परीक्षा थी वह लावा ड्रैगन के रूप में मेरी ऊर्जा का अंश था जो आपको मिला अपनी चुनौती पूर्ण करने पे

मानसी ......... तुम्हारी उस चुनौती मुझे अब तक की सबसे बड़ी पीड़ा दी तुम्हे ज्ञात भी है तुम्हारी उस चुनौती ने जिसे पीड़ा दी

ब्लैक ड्रैगन ........आप भूल रही है वो सब केवल चुनौती थी

मानसी ......भले वो सब केवल एक परीक्षा थी पैर तुम्हारी वजह से उन्हें कितनी पीड़ा उठानी पड़ी

ब्लैक ड्रैगन .......तो आप क्या चाहती है मैं इनसे क्षम्य मांगती फिरू आप भूल रही है की मैं कोण हूँ

मानसी को ब्लैक ड्रैगन का ऐसा रवैया सूर्य के पार्टी बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था पैर उसने कुछ न कहा आवर खुद को संत किया

मानसी ....मुझे आपके साथ जुड़ने के लिया क्या करना होगा

ब्लैक ड्रैगन .......आपको मेरे मस्तिक्ष से अपने मस्तिष्क जोड़ना होगा

मानसी आगे भाड़ ब्लैक ड्रैगन ( मादा ) के चेहरे को थम कर अपना सर आगे करती है






ब्लैक ड्रैगन ख़ुशी ख़ुशी अपना सर मानसी के सर से जोड़ देता है अगले हे पल ब्लैक ड्रैगन की चीखे निकलने लगती हो

पैर ब्लैक ड्रैगन छह कर भी मानसी की पकड़ से आजाद नहीं हो प् रहा था

डेरी डेरी ब्लैक ड्रैगन ब्लैक ऊर्जा पुंज में तब्दील हो जाता है आवर मानसी के भीतर समहति हो जाता है

मानसी से जज हे ब्लैक ड्रैगन को तकलीफ होने लगती है

बहार मानसी का रूप परिवर्ती हो चूका था आवर उसके पीठ में ब्लैक एंड रेड मिक्स कलर के पंख निकल आये थे

ब्लैक ड्रैगन ..........मुझे मुक्त करो

मानसी ......तुमने मेरे प्रेम आवर अपने स्वामी का अपमान किया उन्हें पीड़ा पहुंचे अब तुम मेरी ुशी सरीर में लाईड रहोगे जब तक मैं तुम्हे मुक्त नहीं करती हूँ

ब्लैक ड्रैगन अंदर हे अंदर चिलता रहा पैर मानसी ने उसकी एक न सुनी आवर वह से उड़ते हे ेल दिशा की आवर भाड़ गई

वही किरण के गायब होने जाने के पश्चात सूर्य गोल्डन ड्रैगन सोर्ड के सामने पंहुचा

सूर्यक गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को परनाम करता है

सूर्य ....ही दिव्या तेजस्वी सोर्ड आपका निर्माण गुरुदेव के प्रायश्चित तप आवर परबु महाकाल की इच्छा से हुआ है

क्या मुझे आपको दर्जन करने की इजाजत है

गोल्डन सोर्ड .....मेरा निर्माण हे परबु महाकाल की इच्छा से आपके लिया हुआ है

केवल आप आवर आपका अर्ध भाग हे मुझे धारण कर सकता है आपको इजाजत है मुझे धारण करने की

जैस सूर्य सोर्ड को टच करता है उसका पूरा सरीर सोर्ड से निकली सुनहरी ऊर्जा से चमकने लगता है






कुछ पल बाद सब नार्मल हो जाता है

सूर्य गोल्डन ड्रैगन सोर्ड के साथ वह से गायब हो जाता है






सूर्य जब अपनी आँखे खोलता है तो उसके सामने स्वेत ( वाइट ) ड्रैगन अपने दोनों हाथ मोड पैरो पे खड़ा था

वाइट ड्रैगन .........महाकाल अंश काल का स्वागत है

सूर्य .......हाहाहाहा हम महाकाल अंश अवश्य है पैर आपके लिया काल नहीं सूर्य शिव ठाकुर है

वाइट ड्रैगन ......... हम जानते है जिनके लिया आप काल है उनकी क्या दुर्दशा होती है पैर हमें अभी तक समाज नहीं आया की आपने ये अंतिम चुनौती क्यों राखी जबकि आप यहाँ जब चाहते हम तक पहुंच सकते थे फिर क्यों आपने खुद को इतनी पीड़ा दी क्यों इस मायाजाल को रचा

जबकि आपको इस से पीड़ा के सिवाय कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ

सूर्य ......किसने कहा मुझे कुछ प्राप्त नहीं हुआ

मुझे जो पीड़ा मिली उसका असर कुछ हे देर बाद आप जान जायेंगे

वाइट ड्रैगन ......अब मेरे लिया क्या आदेश है

सूर्य .......अब आप अपना कार्य पुराण कीजिये

वाइट ड्रैगन .......जैसा आप कहे

वाइट ड्रैगन ऊर्जा रूप में बदल कर सूर्य के भीतर समाहित हो जाता है

थड़ा पीछे चलते है जब सूर्य मानसी किरण तीनो दरोगों लोक में पहुंचे उस पहले रात को वाइट ड्रैगन ने सूर्य से सम्पर्क किया था तो आइये जानते है उस सम्पर्क में ऐसी क्या चर्चा हुई

सूर्य किरण मानसी के साथ मस्ती करने के बाद सो जाता है

कुछ 2 हर बाद सूर्य को नींद में किसी की आवाज सुनाई देती है अपने मस्तिक्ष में जिस से सूर्य की आँख खुल जाती है

सूर्य अपने साथ लेती किरण वह मानसी को देखता है

तो दोनों आर्च नग्न ( ब्रा पंतय में ) सूर्य के सीने पे चैन से सोये हुए थी

( यहाँ जो भी चर्चा होगी वह मंद तो मंद होगी )

सूर्य ......कोण हो तुम

आवाज ......महाकाल अंश काल को मेरा परनाम मालिक मैं वाइट ड्रैगन हूँ आपका वहां

सूर्य ......तो अब पता चला तुम्हे हमारे यहाँ होने का

वाइट ड्रैगन ........पता तो उसे वक़्त चल गया था जब आपने खुद से आवर बाकि मानसी आवर किरण.....

सूर्य ......भूलो मत भविष्य में वो दोनों कोण होने वाली है

वाइट ड्रैगन .......क्षमा चाहता हूँ जब आपने सवयं की आवर दोनों मलकिनी की हमसे जुडी ऊर्जा को मुक्त किया आवर वह ऊर्जा हम से आ कर मिली ुशी समय हमें आपके शिष्य में ज्ञात हो गया था

सूर्य ......फिर अभी सम्पर्क क्यों किया आपने

वाइट ड्रैगन .....आपको यहाँ के एक श्राप के विषय में सचेत करने के लिया

सूर्य ......कैसा श्राप आवर क्या वह हम में से किसी से जुड़ा है

वाइट ड्रैगन .........है उस श्राप से आप हे इस लोक को मुक्त कर सकते है

वाइट ड्रैगन जुम्बा समुदाय से जुड़े उस श्रापवके विषय में सब कुछ बता देता है

सूर्य .....अथार्त जूलिया वो लड़की है जो इस समादाय को श्रापित जीवन से मुक्त कर सकती है

वाइट ड्रैगन ......उसके आवर आपके प्रेम मिलान से हे इस श्राप को खंडित किया जा सकता है

सूर्य .....किन्तु वह तो मुझसे प्रेम नहीं करती है न आवर न मैं उसके मंडे मस्तिष्क को पढ़ सकता हूँ

वाइट ड्रैगन .......क्या आप बाकि मालकिनों के मन के भाव पढ़ सकते है

सूर्य .........नहीं क्युकी मैंने सपाट ली है की अपनी सकती का दुरूपयोग नहीं करूंगा आवर मुझसे जुड़े किसी के ऊपर अपनी इस सकती का प्रयोग नहीं करूंगा जिनसे उनके मन में छुपे भाव मुझे पता चले

वाइट ड्रैगन .......इस श्राप के कारन जूलिया भी आप से जुड़ चुकी है

सूर्य .........ठीक है फिर पहले इस सफर की सुरहट इस जुमा समुदाय को श्रापित जीवन से हे मुक्त कर के करता हूँ

वाइट ड्रैगन ......आप इस श्राप से इस लोक को मुक्त करने के बाद अपनी अनुसार जब चाहते हम तक पहुंच सकते है आवर हमसे जुड़ सकते है

सूर्य ......नहीं वाइट ड्रैगन तुम्हे अभी मानसी वह स्वीटी इस सफर को बहुत आसान समाज कर इसके पार्टी सावधान नहीं है

मैं नहीं चाहता की तुम तक हम तीनो आसानी से पहुंचे इस लिया तुम तीनो अपनी इच्छा अनुसार हमें इस सफर में चुनौती दो

जब हम चुनौती का सामना करते हुए तुम तक पहुंचेंगे तब हमें इस बात का अहसास होगा की तुम तीनो को पाने में हमने क्या क्या कठिनाइयों का सामना किया है

जब हम तीनो तुम्हारी सिम्स में प्रवेश करे तो केवल ुशी की सकती कार्य करे जिसके लिया चुनौती हो बाकि 2 की सकती वह कार्य न करे किन्तु ध्यान रहे किसी के जीवन पे संकट आया तो ुस्कुनोति के अंत के साथ चुनौती देने वाले का अंत मैं सवयं करूंगा

वाइट ड्रैगन .......है ये सत्य है की बिना परिश्रम के प्राप्त वास्तु का हमेशा अनुचित हे प्रयोग होता है

सूर्य ......इस लिया आपको चुनौती रखने के लिया कह रहा हूँ

वाइट ड्रैगन ......पैर आपको तो इस विषय में ज्ञात हो चूका

सूर्य .......उसकी आप चिंता न करे हमारी इस चर्चा से जुडी सभी यादे ड्रैगन सोर्ड में कैद हो जायेगे सूर्य की पार्टम किरण के साथ हे मैं या आवर आप इस सम्पर्क के विषय सब भूल जायेंगे केवल याद रहेगा तो ये की आपको हमारे सामने कठिन चुनौती रखनी है


वैसे ब्लैक ड्रैगन का सवभाव कैसा है

वाइट ड्रैगन ..........अपने रूप अनुसार हे उसके उसके विचार है

सूर्य .......सिगरा हे उसे अपने विचार बदलने होंगे


वाइट ड्रैगन ............उचित है मैं उस पल की प्रतीक्षा करूंगा आवर आपके आने का इंतजार जब आप मुझे दर्जन करेंगे

सम्पर्क विछेद ...

परसेंट टाइम

सूर्य के भीतर वाइट ड्रैगन की ऊर्जा समाहित होने के कुछ समय पश्चात हे सूर्य का रूप परिवर्तित होता है सूर्य के पीठ पे वाइट ब्लैक गोल्डन मिक्स पंखो के साथ गोल्डन सोर्ड वह गोल्डन आरमोर के साथ किसी दिव्या प्राचीन योद्धा के जैसे लग रहा था






कुछ हे पल बाद सूर्य के सरीर से वाइट ड्रैगन की ऊर्जा बहार निकलती है आवर वाइट ड्रैगन अपने वास्तविक रूप में

सूर्य के सामने खड़ा था था

वाइट ड्रैगन ........स्वामी अंतरिक्ष के सफर के लिया त्यार हूँ

सूर्य .......उचित है फिर चलो तुम्हारी गति का परिक्षण किया जाये

सूर्य वाइट ड्रैगन पे स्वर हो जैसे हे आगे भड़ने का इसरा करता है अगले हे सं वाइट ड्रैगन आंतरिक में था उसकी उड़ने की गति बहुत आदिक थी






सूर्य .......तुम्हारी गति तो विलक्षण है वाइट ड्रैगन

वाइट ड्रैगन ..........हम तीनो की गति एक सामान है है किन्तु आपसे जुड़ने के बाद मेरी गति आवर आदिक हो गई है

सूर्य ......चलो स्वीटी आवर मानसी के पास चलते है वो हमारी प्रतीक्षा कर रहे है

वाइट ड्रैगन ...........अब तो ब्लैक ड्रैगन को उसके किये की सजा मिल चुकी है आप मालिक से कह कर उसे मुक्त करवा दीजिये

सूर्य ......देखते है अभी भी उसके विचार बदले है की वैसे है है

वही किरण अपने सुनहरी ड्रैगन के साथ लिटेनिंग ड्रैगन के पास सूर्य आवर मानसी का का इन्तजार कर रहे थी

तभी एक तरफ से उसे मानसी आते हुए दिखाई देती है

तभी वह सूर्य अपने वाइट ड्रैगन को लेंड करवाता है

सूर्य .......क्या हुआ स्वीटी ऐसे क्यों देख रही हो

किरण ......वो देखो मानसी अकेले हे आ रही है उसका ड्रैगन नहीं दिख रहा है

कुछ हे पालो में मानसी भी वह आ जाती है

किरण ......मनु तुम्हारा ब्लैक ड्रैगन कहा है

सूर्य ......हाहाहाहा बताओ मनु कहा है ब्लैक ड्रैगन

ब्लैक ड्रैगन ..........मालिक मुझे माफ कर दीजिये आवर मालकिन को मुझे मुक्त करने को कहिये

किरण .......इसका क्या मतलब है मानसी

मानसी ......दीदी इसमें कुछ ज्यादा हे आकद थी इस लिया मैंने उसे अभी तक आजाद नहीं किया है

सूर्य .........अब क्या कहते हो ब्लैक ड्रैगन

ब्लैक ड्रैगन .......मुझे क्षमा करे अपने वैभार के लिया मालकिन आप भी मुझे क्षमा कर दे मालिक

सूर्य ........ठीक है पैर आगे से ध्यान रखना ये तुम्हारी पहली गलती थी इस लिया तुम्हे आजाद करने को कह रहा हूँ आगे अगर ऐसा दुबारा हुआ तो मैं कोई सहायता नहीं करने वाला हूँ

ब्लैक ड्रैगन ......आगे से ऐसा कभी नहीं होगा मालिक

सूर्य के है में गर्दन हिलने पे मानसी ब्लैक ड्रैगन को ाजत कर देती है

ब्लैक ड्रैगन ऊर्जा पुंज में ाजत होता है कुछ पालो में अपना आकर ले कर मानसी वह सूर्य के साथ साथ किरण से भी माफी मांगता है

लिटेनिंग ड्रैगन .......आप तीनो को एक साथ देख कर मुझे इतनी ख़ुशी हो रही है की मैं बया नहीं कर सकता हूँ

वाइट ड्रैगन ब्लैक ड्रैगन आवर सुनहरी ड्रैगन के सामने अपना सर निचे कर लिटेनिंग ड्रैगन उन्हें परनाम करता है

तीनो ड्रैगन उसे आशीर्वाद देते है

किरण ......अब हमें निकलना चाइये आवर आपसे मुझे कुछ पूछना है जो मैं बाद में पूछूँगी

सूर्य ........जनता हूँ स्वीटी क्या पूछना है अभी चलते है सुबह हमें परीलोक के लिया निकलना है

किरण सूर्य मानसी अपने अपने ड्रैगन पे स्वर हो ड्रैगन सिटी की तरफ निकल जाते है ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............

ये लास्ट part था ड्रैगन लोक का बूत उम्मीद से कुछ ज्यादा हे बड़ा हो गया है

इस लिया नेक्स्ट अपडेट में कुछ part ड्रैगन लोक से होगा आवर बाकि परीलोक वह अन्य लुक से ............
 
इस स्टोरी से जुड़े मेरे सभी भाई आवर दोस्तों का बहुत बहुत धन्यवाद जिनके सहयोग से इस स्टोरी का सफर 1000 पेजेज तक पंहुचा आप सभी का दिल से धन्यवाद दोस्तों

Nevil singh Naughtyrishabh Killerpanditji(pandit) SS Hans Landa Ajay mashish Jaguaar ragish7357 Raj Asif khan tabishqureshi Vik1006 Vk248517 Vickey1211 Vicky11 B. S Montu gurnani Battu divyaa जी Ringsongking Forward Naik Mast fakir Ashutosh Mishra Raja thakur Raja maurya Romi Ron10 bd sharkar Akil The king Scorpionking Veer62 Shanu Lonetiger tpk ANUJ KUMAR SameerK The King of Devil diljale max Joy Gupta ABHISHEK TRIPATHI Black water Veer Awan baba Baba__Bhai aman rathore Janu002 Xabhi janu khan Arjun Singh 72 Billi420 spritemathews Carry Minati

आप सभी दोस्तों का बहुत बहुत शुक्रिया आप सभी मेरी स्टोरी से जुड़े आवर यहाँ तक पहुंचाया किसी भाई का नाम चुत गया तो बुरा नहीं मन्ना

थैंक यू एवरीवन 🙏🙏🙏
 
अपडेट. 174

लिटेनिंग ड्रैगन .......आप तीनो को एक साथ देख कर मुझे इतनी ख़ुशी हो रही है की मैं बया नहीं कर सकता हूँ

वाइट ड्रैगन ब्लैक ड्रैगन आवर सुनहरी ड्रैगन के सामने अपना सर निचे कर लिटेनिंग ड्रैगन उन्हें परनाम करता है

तीनो ड्रैगन उसे आशीर्वाद देते है

किरण ......अब हमें निकलना चाइये आवर आपसे मुझे कुछ पूछना है जो मैं बाद में पूछूँगी

सूर्य ........जनता हूँ स्वीटी क्या पूछना है अभी चलते है सुबह हमें परीलोक के लिया निकलना है

किरण सूर्य मानसी अपने अपने ड्रैगन पे स्वर हो ड्रैगन सिटी की तरफ निकल जाते है ...............

अब आगे ..........


असुर कबीला........ साम का समय था विक्रम बिखु असुर कबीले के पास से गुजरती नदी किनारे बैठे दोनों मदिरा का सेवन करते हुए वह उपस्थित नदी से जल भरते हुए सबन आदि करते हुए

अर्ध नग्न कन्याओ वह महिलाओ के उन्नत वक्ष स्तन को देख कर मदिरा के मज़े ले रहे थे

बिखु .......भाई आपके परिवार में कोण कोण है मेरा मतलब है की आपको यहाँ आये इतना समय हो चूका है आपने कभी अपने परिवार का जीकर नहीं किया

विक्रम .... .... बिखु भाई मेरा परिवार पहले काफी बड़ा था पैर एक इंसान के परिवार के वजह से मैंने अपने पिता आवर 2 चाचा को खो दिया

बिखु ......क्या मतलब मैं कुछ समजा नहीं

विक्रम ...... जैसे मैं सक्तिपुर का ठाकुर उसे तरह सूर्यगढ़ के ठाकुर है ठाकुर परताप सिंह उनके एक बेटे की वजह से वर्षो पहले मैंने अपने चाचा को खो दिया

जिसकी वजह से सक्तिपुर आवर सूर्यगढ़ में दुश्मनी हो गई

इसी दुश्मनी के चलते एक साल से कुछ पहले मैंने आने पिता आवर चाचा को अपनी आँखों के सामने मरते हुए देखा

जिसने मेरे चाचा को मारा ुशी के बेटे के हाथो मेरे पिता आवर चाचा की हजारो लोगो के सामने उस सूर्य ठाकुर ने बलि चढ़ा दी

बिखु ......ये तो बहुत हे गलत हुआ तुम्हारे परिवार के साथ तुम भी तो ठाकुर हो फिर तुमने कुछ क्यों नहीं किया

विक्रम ......मैं बहुत कोशिश की पैर मेरे हर वॉर की काट उसके पास थी आखिर में मुझे मजबूर हो कर यहाँ आना पड़ा

बिखु ....... मुझे उम्मीद है गुरु जी तुम्हारे इस बदले में जरूर तुम्हारी सहायता करेंगे वैसे अभी तुम यहाँ हो तो पीछे से उसने अगर तुम्हारे परिवार को कोई नुकशान पहुंचाया तो

विक्रम ......मुझे यकीं है वो या उसका परिवार ऐसा कुछ नहीं करेगा आवर न हे किसी आवर को कुछ करने देगा

बिखु ......बड़ी अजीब दुश्मनी है तुम्हारी उसने तुम्हारे चाचा आवर पिता को हजारो लोगो के सामने काट दिया उनकी बलि चढ़ा दी फिर भी तुम्हे इतना यकीं कैसे है उनपे

विक्रम ......भले हे दुसमन है वो परिवार मेरा पैर दुश्मनी में भी उनके अपने नियम है न तो बचो वह महिलाओ पे वॉर करता है आवर न किसी को करने देगा

शेर की तरह सामने से सीकर करता है वो देखने में बचा है पैर जब उसके अंदर का जानवर जगता है तो बड़े बड़े भीमकाय सरीर चुटकियो में धूल में मिला देता है

बिखु ......तुम्हारा दुसमन तो बड़ा अजीब आवर रहस्यमयी प्रतीत होता है भाई

विक्रम .......पता नहीं पैर कुछ तो अजीब लगता है जब भी वह सामने आता है तो दिल में दर बेथ जाता है

बिखु .....चलो भाई मदिरा भी ख़तम हो गई आवर संध्या ( साम ) भी हो गई घर चलते है जुमकी इंतजार में होगी

विक्रम ......आज तो तुम्हारी बेटी घर आ गई है आज भी जुमकी के पास जाओगे क्या

बिखु ......बेटी का कौमार्य गुरु जी हे भोगेंगे तब न मैं भोग पाउँगा

विक्रम .....ये भी सही है फिर आज तुम हे जाओ जुमकी के पास मैं चला तुम्हारी बीबी के पास क्युकी कल मैं अपने सहर जा रहा हूँ

बिखु .....थीम है फिर चल खाना खा कर मैं चला जुमकी के पास तू घर पे हे रुकियो

बिखु आवर विक्रम बात करते हुए घर आ जाते है

जहा बिखु की बीबी खाना बना रही थी

आवर उसकी बेटी चंपा अपनी माँ की मदद कर रही थी

विक्रम आवर बिखु को देख बिखु की बीबी की आँखों में चमक आ जाती है क्युकी पिछले कुछ दिनों से बिखु की बीबी विक्रम आवर बिखु का एक साथ ले रही थी आगे वह पीछे से

बिंदु ( बिखु वाइफ )

चंपा ( बिखु डॉटर 18 +)

बिंदु ......चंपा तेरे बाबा आ गए है साथ में तेरे सहर वाले विक्रम भैया भी आये जा उनके लिया जमीं पे बिस्तर लगा दे आवर उन्हें मदिरा दे आ तब तक रोटी बी त्यार हो जाएगी

चम्पा ......जी माँ

चंपा वह से उठ कर एक जोफडी में चली जाती है

बिखु ......बिंदु कल सुबह विक्रम अपने घर जा राग है आज रात ये तुम्हारे साथ है खुल कर मज़े देना मेरे यार को

बिंदु ......क्या हुआ विक्रम इतनी जल्दी क्यों जा रहे हो

विक्रम ......घर परिवार को भी तो संभालना है न

काफी समय से उनकी कोई खोज खबर नहीं ली है उन्हें भी तो देखना है

बिंदु ....... है ये भी ठीक है वैसे भी तुम वह ज्यादा दी रुक नहीं पाओगे जल्दी हे यहाँ लौट आओगे

बिंदु हाथ दो कर वही दोनों के पास आ जाती है आवर दोनों के बिच में बेथ जाती है

विक्रम ......आपको ऐसा क्यों लगता है की मैं वह रुक नहीं पाउँगा

बिंदु विक्रम के पेण्ट में हाथ दाल कर उसका लिंग बहार निकल लेती है

जो की अर्ध मूर्छित था जो बिंदु के हाथ में किसी मरे हुए हुए नाग की तरह था जो देखते हे देखते अपना फैन उठाने लगता है

चंपा एक बड़ी सी मटकी मदिरा की ले आती है आवर 3,4 मिटटी के बने गिलान वह रख देती है

बिंदु ......इसको जितनी गुफा यहाँ मिलती है उतनी सहा नहीं मिलने वाली

विक्रम एक बार चंपा को देखता है जो विक्रम के लिंग को देख कर अपनी जुबान अपने रसीले होंटो पे फिर रही थी

उसका गडराय हुआ जिसम को देख विक्रम का नाग अपने ोखत में आने लगता है

बिंदु विक्रम की आवर चंपा दोनों के नजरे भाग लेती है

बिखु वह रखे मदिरा को 4 गीला में दाल देता है मतलब की चंपा भी उन्हें ज्वाइन कर रही थी

विक्रम ....... है आपने ये तो सच कहा पैर हम भी सक्तिपुर के ठाकुर विक्रम सिंह है जिसपे हमारी नजर पद जाती है हम उसे भोगे बिना नहीं रहते है

बिंदु ...... इसको अपनी बुर में लेना हर किसी के बस का नहीं है

बिखु ......लो भाई विक्रम मदिरा पियो

बिंदु एक गीला चंपा की देती है आवर एक खुद अपने होंटो से लगा देती है

चंपा फाटक कर के अपना गीला एक हे साँस में खखतम कर रख देती है

बिंदु सबके लिया खाना लगती है मांस आवर मदिरा का लुफ्त उठाते हुए चारो जल्दी हे नशे में जुम्मे लगते है

बिखु कुछ देर बाद वह से जुमकी के के घर ी तरफ निकल जाता है

अब यहाँ तीन लोग हे बचे थे चंपा विक्रम बिंदु

बिंदु विक्रम को अपने साथ ले जोड़े में गुस्स जाती है

आवर खुद को वह विक्रम को नंगा कर अपनी कामक्रीड़ा सुरु कर देती है

वही चंपा विक्रम आवर बिंदु की काम क्रीड़ा देख कर अपनी बुर में ऊँगली करने लगती है

कुछ देर बाद विक्रम आवर बिंदु 3 राउंड मर कर वही जमीं पे लेट जाते है

चंपा अपने जोफडी से निकल कर विक्रम के पास आती है आवर अपने सरीर पे पहने नाम मात्रा वस्त्र उतर कर विक्रम की जंगो के बिच जुख जाती है

विक्रम की जब अपने लिंग पे कुछ गिला गिला मह्सुश होता है तब उसके आँखे खुलती है तो सामने चंपा विक्रम के लैंड को अपने छोटे से मुँह में भरे हुए चूसने में लगी हुए थी आवर एक हाथ से अपनी बुर को सहला रही थी

विक्रम ......ये क्या है चंपा मुझे सोने दो

चंपा .......भैया आप सो जाओ मुझे जो करना है वह करने दीजिये

विकरण ......तुम्हारी माँ जग जाएगी तो उन्हें क्या जबाब दूंगा

चंपा ......इतने देर से उन्हें आगे आवर पीछे से पेल रहे हो अब वह सुबह हे उठेंगे

विक्रम एक नजर बिंदु पे दाल अपना हाथ चंपा के सर पे रख अपनी कमर हिला कर लैंड को चंपा के मुँह में अंदर बहार करने लगता है

कुछ देर की चूसै के बाद चंपा अपने दोनों टंगे फैला कर विक्रम के लिंग की अपनी योनि द्वार से सत्ता देती है

विक्रम .....तुम कुँवारी हो चंपा

चंपा .....इस्स्स्सस्स मैं कुवारी नहीं हूँ भैया माँ को मत बताना

कहते हे अपने जबड़े काश कर चंपा जोर से अपने कमर विक्रम के लैंड पे पटकती है जो सरसरात
ा हुआ

5 इंच चंपा की योनि में जा गुस्सा

चंपा .......ाआईई माँ बहुत मोटा है आपका लौड़ा उम्म्म्म मेरी मुनिया फुरि फ़ैल गई है भैया

विक्रम .......लगता है अपनी मुनिया को बहुत गाने खिलाया है तुमने चंपा रानी

चंपा .....हेहेहे मेरे मां ने बहुत पहले हे अपना गणना खिला दिया था मेरी मुनिया को जब मैंने अपनी जुवारी मुनिया उन्हें दिखाई तो उन्होंने अपना गणना पेल दिया मेरी मुनिया में

विक्रम चंपा को अपने ऊपर खिंच कर पलट देता है आवर उसके नाजुक होंटो को लगभग चबाते हुए 2 देखो में अपने अंडकोष चंपा के गांड के छेद से चिपका देता है

2,3 मिनट्स तो चंपा विक्रम के निचे किसी कटी हुई मुर्गी की तरह फड़फड़ाती रही उसके आँखों से निरंतर आंसू बाह रहे थे

जब चंपा थो संत हुए तो विक्रम डेरी डेरी अपना लैंड चंपा की कशी हुई बुर में पेलने लगा भले हे चंपा चूड़ी हुई थी पैर विक्रम के लैंड के सामने कुँवारी हे थे

करीब 40 मिनट्स ( 3 राउंड बिंदु के साथ ) तक विक्रम किसी हबशी जानवर की तरह चम्पा के अंगो को नोचता रहा

इसे सम्भोग तो कहना कटाई उचित न रहेगा क्युकी विक्रम ने चंपा पे अपना पूरा वहसि पैन दिखाया था

जब विक्रम ने अपना वीर्य चंपा की बुर में डाला तब इसके सर स हवश उत्तरी तब उसे अपने किये कांड का पांचवा हुआ

क्युकी चंपा के सीने पे चूचियों पे जगह जगह हलके काटने के नीसाण बन चुके थे

आवर चंपा की बुर से हल्का हाला वीर्य मिक्स रकत बाह रहा था

चंपा किसी तरह खुद को संभल कर उठी आवर अपने कपट उठा कर जाने लगती है

पैर तभी पलट कर एक चंगा कोंच कर विक्रम के फलो पे मरती है

चंपा .....अगर यहाँ मेरी जगह आपकी सगी बहन होती तब भी आप ऐसा करते

क्या अपनी बहन को भी ऐसे हे रंडी वैश्य की तरह भोगते आप मैंने आपको भाई मन था

चंपा वह से चली जाती है विक्रम कुछ देर वैसे खड़ा अपना गाल सहलाते रहा फिर अपने कपडे दाल कर वह से निकल जाता है

ड्रैगन लोक........

मध्य रात्रि को सूर्य मानसी किरण अपने अपने ड्रैगन्स के साथ गोल्डन ड्रैगन प्लेस पहुंचे जहा पूरा प्लेस सजता हुआ था सभी उनके स्वागत के लिया त्यार खड़े थे

दूर से हे सभी की नजर चारो ड्रैगन्स पे पद रहे थे जिन्हे देख सभी उन्हें परनाम करते है

ये परनाम सुनहरी ड्रैगन के लिया था क्युकी ब्लैक एंड वाइट ड्रैगन के विषय में ज्यादा कोई कुछ जनता नहीं था

सूर्य मानसी किरण अपने अपने ड्रैगन के साथ गोल्डन ड्रैगन प्लेस के सामने उतारते है

जूलिया दौड़ती हुई आगे भाड़ किरण से गले मिलती है

जूलिया .....दीदी आपका ये सुनेहरा कवच आवर सुनेहरा ड्रैगन बहुत प्यारा है

किरण ......तुम सभी लोग अभी तक जगहे हुए क्यों हो सोये नहीं अभी तक

जूलिया .....वो हम सब आपके स्वागत के लिए हे जगहे हुए थे

जैसे हे हमें पता चला की आपके ड्रैगन्स आपसे जुड़ चुके है हमने यहाँ आपके स्वागत की तयारी सुरु कर दी ये आप सब के लिया था यहाँ के लोगो के लिया आपने जो कुछ भी किया उसके लिया था

सूर्य ......ये सब इस लिटेनिंग ड्रैगन ने बताया होगा तुम्हे

जूलिया .......जब आप इसके पास पहुंचे तभी मुझे पता चल गया था

सूर्य ......कोई बात नहीं अब सभी जा कर विश्राम करे आप लोग

किरण ......जूलिया हम लोग सुबह यहाँ से अपने लोक के लिया निकल जायेंगे

किरण की बात सुन जूलिया उदाश हो जाती है

जिसे देख सूर्य किरण को देखता है किरण अपनी पलके जपका कर है का इसरा करती है

सूर्य ......तुम क्यों उदाश हो गई जुली

जूलिया सूर्य का हाथ थम कर उसकी आँखों में देखती है

जूलिया ......क्या कुछ वक़्त आवर आप हमारे साथ नहीं रह सकते है इस से तो अच्छा हम उस तिलिस्म में हे किध रहते काम से काम जीवन भर आपका साथ तो मिलता हमें

ये सब कहते हुए जूलिया की आँखों से तप तप करके आंसू उसके खूबसूरत गलो को भिगोते हुए निचे गिरने लगते है

किरण ......मेरी छोटी बहन को क्यों सत्ता रहे है आप

आगे भाड़ किरण जूलिया के आंसू पोंछती है

किरण ........तुम भी हमारे साथ चल रही होगी जुली आवर जब तक तेरा दिल करे तब तक हमारे साथ रहना तुम

जूलिया ......क्या सच में दीदी मैं आपके साथ चलूंगी

मानसी .....बिलकुल इन्होने तो पहले हे सोच रखा था इस लिया हे तो तुम्हे कह रही थी की पिता जी के साथ वक़्त बिताओ ताकि बाद में तुम हमारे साथ चलो तो ये न लगे की तुम पिता जी के साथ समय नहीं बिता पाई

जूलिया ख़ुशी स्व उछलते हुए किरण वह मानसी को गले लगा लेती है

नियों ......आप सब लोग जा कर विश्राम करो कल सुबह हमारी तीनो प्रिंसेस जा रहे है तो इन्हे अभी विश्राम करने दो

निओयं के कहने पे कुछ लोगो को छोड़ बाकि सभी वह से लौट गए .

सूर्य डेवलिन के सामने जा कर खड़ा हो जाता है

सूर्य .....हमने जूलिया को अपने साथ ले जाने का फैसला आपसे पीछे बगैर हे ले लिया अगर आपको कोई आपत्ति है तो......

डेवलिन .......नहीं नहीं हमें कोई आपत्ति नहीं है वो आपसे प्रेम करती है बस इतना हे चाहता हूँ की जहा भी वो रहे खुश रहे

नियों .....डेवलिन वो विवाह करके नाहिबजा रही है आवर ये फिट परतविलोक पे है न की यहाँ अपनी बाकि बहनो के साथ उसे भी समय बिताना चाइये

डेवलिन .....जी देवसफ्फी जैसा आप कहे

किरण .......जाओ जुली अब तुम भी आज रात्रि अपने पिता के साथ वक़्त बिताओ कल से तो इनके साथ हे वक़्त बिताना है

जूलिया ......जी दीदी

जूलिया जाते जाते सूर्य के गलो पे किश कर जाती है

किसी देख किरण मानसी सूर्य तीनो को हंसी चुत जाती है

सूर्य किरण मानसी को ले कर अपने कक्ष में जाता है

( जो सुरु में किंग आवर क्वीन ने इन लोगो को विश्राम के लिया दिया था )

सनान आदि कर तीनो एक दूसरे को किश कर लेट जाते है

सूर्य सुबह अपने समय पे उठ जाता है किरण आवर मानसी भी तीनो फ्रेश हो वही कक्ष में ध्यान लगाने लगते है

वही गोल्डन प्लेस में आज सुबह कुछ समय से पूर्व हे हो गई थी

लगभग 3 हर के ध्यान के बाद सूर्य किरण मानसी जब अपनी आँखे खोलती है तो सामने जूलिया का खूबसूरत चेहरा था जो इन तीनो को हे देख रही थी

किरण ......क्या बात है आप सब यहाँ

जूलिया ......वो दीदी आप लोग कक्ष से बहार नहीं आये थे तो हम ीदार हे चले आये

सूर्य ......चलो हमें चलने की तयारी भी करनी है

किरण .......आपने सोचा है की इतना लम्बा सफर हम कैसे पूरा करेंगे

सूर्य .......इसमें सोचना क्या है हम सभी टेलीपोर्ट करेंगे परीलोक

किरण ......पैर इसमें हमारे ड्रैगन्स

सूर्य .......उन्हें हम ऊर्जा रूप में अपने भीतर स्तन दे देंगे

किरण .......कभी कभी आप ऐसे पागलो जैसे सवाल क्यों करते है

मेरा मतलब था अगर हम उन्हें ऊर्जा रूप में ले कर जायेंगे तो जूलिया अपने ड्रैगन को ऊर्जा रूप में बदल नहीं सकती है

सूर्य .......ठीक है समाज गया हम लोग मैजिक द्वार से परीलोक चलते है जिस से न ड्रैगन्स को ऊर्जा रूप में बदलना होगा न कोई आवर प्रॉब्लम होगी

किरण ........पहले भी तो बता सकते थे न आप

( सूर्य .....लगता है आज सुबह सुबह अपने माँ महाकाली अंश में आ गई है स्वीटी बीटा सूर्य बीच कर )

किरण .........क्या सोच रहे है आजकल आपका दीमक कुछ ज्यादा हे चल रहा है

सूर्य ......कुछ नहीं स्वीटी वो बस ऐसे हे

मानसी ......हहहह दीदी सुबह सुबह क्यों क्लास लगा रही होगी इनकी

किरण ......हहहहए मानसी तुम भी न थोड़ा आवर मज़े लेने थे इनके

नियों .....चलिए सब भोजन करते है फिर आपको अपने लोक भी लौटना है

सूर्य किरण मानसी जूलिया नियों डेवलिन किंग सभी भोजन कक्ष की आवर भध चले

जहा सबने हाशि ख़ुशी भोजन किया

अब समय था सभी से विदा लेने का अब तक जो जूलिया के आंसू रुके हुए थे उसका सहर टूट जाता है आवर वह अपने पिता से लिपट कर रोने लगती है

सूर्य डेरी स किरण के मन में बोलता है

सूर्य .....ये जुली क्या अपने ससुराल जा रही जो ऐसे रो रही है

किरण. ......आप चुप करिये आपको कुछ नहीं पता हम लड़कियों के बारे में

सूर्य .......फिर तो ऐसे हे इतने लम्बी लिस्ट बानी हुई है न

किरण घर के सूर्य को देखती है सूर्य सॉरी बोल कर यही बात कहं कर देता है

कुछ देर बाद ड्रैगन सिटी के लोग सभी से विदा वह उपहार ले सूर्य किरण मानसी जूलिया अपने अपने ड्रैगन्स पे स्वर होते जाते है

डेवलिन ......पुत्री किरण मानसी अपनी छोटी बहन का ख्याल रखा आवर अपना भी

किरण ......आप चिंता न करे जुली का पूरा ख्याल रखा जायेगा जल्दी हे आपको भी देवसफ्फी के साथ हमसे भेट करने आना होगा

नियों .......हम अवश्य आएंगे

सूर्य .....अब हमें आज्ञा दे परनाम

नियों किंग क्वीन डेवलिन ........आपका सफर मंगलमयी हो

सूर्य किसी मंत्र का ुरचरना करता है जिस से आकाश में ब्लैक हॉल जैसे हॉल का निर्माण होने लगता है

सूर्य .......स्वीटी मनु जुली तुम तीनो मेरे पीछे पीछे इस मैजिक द्वार में प्रवेश करना ये परीलोक में खुलेगा

किरण ......हम आपके साथ हे है

सूर्य अपने वाइट ड्रैगन को मन में हे आगे भड़ने का आदेश देता है वाइट ड्रैगन अपनी उड़न भरते हुए ब्लैक हॉल में प्रवेश कर जाता है उसके पीछे पीछे जूलिया किरण मानसी भी

कुछ हे पालो बाद चारो परीलोक में बहार निकलते है

जैसे हे चारो परीलोक में पहुंचते है गुरुदेव आवर रानी पारी को चारो के विषय में जानकारी हो जाती है

रानी पारी ......शालिनी जी हमारा पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण वह मानसी अपनी यात्रा पूर्ण कर लौट आये है

रानी पारी की बात सुन शालिनी जी बहार की तरफ निकलती है

रानी पारी बाकि सभी को मानसिक सन्देश के जरिया सम्पर्क करती है

शालिनी जी जैसे हे महल से बहार मुख्या द्वार पे पहुँचती है तो सामने से सूर्य किरण मानसी जूलिया को आते हुए देखती है

जैसे हे सूर्य की नजर अपनी माँ पे पड़ती है

सूर्य तेजी से आगे की तरफ भड़ते हुए तेजी से निचे जाने लगता है

जूलिया .....इन्हे क्या हुआ ये इतनी सिगरता क्यों कर रहे है

किरण जब सामने देखती है तो शालिनी जी को देख उसके चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान फ़ैल जाती है

किरण ......वो जो सामने कड़ी है उनके लिया वो इतनी जल्दी जा रहे है

जूलिया .....कोण है वह खूबसूरत महिला

किरण ......वो तुम्हारे उनकी माँ है

जूलिया ......माँ मतलब

किरण ......माँ मतलब उनकी माँ

सूर्य जैसे हे जमीं के नजदीक पंहुचा है सूर्य अपने ड्रैगन से पे छलांग लगा अपनी माँ के सामने जा खड़ा होता है

जाते हे सूर्य शालिनी जी को अपने गले से लगा लेता है

शालिनी जी ......बीटा तुम ठीक जो न

सूर्य ......जी माँ मैं ठीक हूँ ी मिस यू माँ वैरी बदली

शैलिंज जी .....हहहहए आते हे अपनी नौटंकी सुरु कर दी तूने

सूर्य .....सच में माँ मैंने आपको बहुत मिस किया माँ ी लव यू माँ

शालिनी जी ........मैंने भी तुम्हे बहुत मिस किया बीटा एंड ी लव यू मोरे थें ुम्मम्हा मेरे प्यारा बीटा

दोनों माँ बेटे मिलान में इतने खोये थे की उन्हें ये तक अहसास नहीं हुआ की बाकि सभी ने इन्हे घेर रखा है

दादा जी ......मेरा शेर बीटा आ गया तू आ अब अपने दादा के गले से लग जा

सूर्य अपनी माँ स अलग हो अपने दादा जी को बहो में भर के उठा लेता है

दादा जी .....अरे बस बस बुढ़ापे में हड़िया नहीं जुड़नी मेरी आराम से

सूर्य .....ऐसे कैसे बढ़िया चटक जायेंगे आपकी मेरे होते हुए

दादी जी .....बस भी कीजिये हम भी अपने बेटे से मिलने के किये खड़े है

किरण .......ये क्या बात हुए दादी सा हम भी तो यहाँ पे है

शालिनी जी .....तू ीदार आ मेरी बच्ची इनको मिलने दे अपने बेटे से मैं तो मेरी बेटी से मिलूंगी

किरण ......बुआ सा यहाँ एक नहीं आपकी तीन तीन बेतिया है पहले किश से मिलोगी

शालिनी जी . .....जब बेतिया तीन है तो तीनो से हे मुलुंगी न

शालिनी जी अपनी बहे खोल कर किरण मनीसी आवर जूलिया को आने का इसरा करती है किरण आवर जुली तो बेझिजक शालिनी जी से गले मिलती है

जूलिया अभी भी वही कड़ी थी संकोच वश

शालिनी जी ......बेटी तुम क्यों वह कड़ी ीदार आओ

जूलिया डेरे डेरी शालिनी जी के पास जाती है

किरण जूलिया का हाथ पकड़ अपना साथ साथ शालिनी जी के बहो के घेरे में ले लेती है

शालिनी जी ......ये हुई न बात वैसे मेरी ये बेटी है बहुत प्यारी पैर साथ हे बहुत शर्मीली भी

शालिनी जी की बात सुन किरण वह मानसी को जूलिया की वो बाटे याद आ जाती है जो सूर्य आवर जूलिया के मिलान से पहले हुई थी

जिस से दोनों की हंसी चुत जाती है

उदार सूर्य सभी बड़ो से सनेह पूर्वक मिलने के बाद जैसे हे अपनी प्रेमिकाओ के बिच पंहुचा सभी लड़किया सूर्य को ले एक कक्ष में आ पहुंची

सपना ......राधा ये सब क्या है सूर्य

सूर्य ......क्या हुआ राधा

राधा .......ये लड़की कोण है जो आपके साथ आई है .

सूर्य ......कोण जुली क्या अरे वो हमारी मेहमान है

पारिजात .......उसे देख कर तो लगता है की वो हम में से हे एक है

सूर्य ......वो सब तुम लोग जानो आवर स्वीटी जाने

सपना ......तो ऐसा कहो न की वो भी हमारी बहन है

आप जहा भी जाते है हमारे लिया भले हे कुछ न ले कर आओ पैर अपने लिया एक बीबी जरूर ले आते hi

सूर्य ......किसने कहा तुम्हारे लिया कुछ नहीं लता हूँ

लाया हूँ न तुम्हारे लिया तुम सभी की नयी बहन जूलिया

पारिजात ......वैसे हम जानते है उसे बस नाम पता नहीं था हमने आपके सफर का कुछ भाग देखा था मैजिक मेर्रोर में

पारिजात सूर्य को मिरर में जो देख सब बता देती है

(सूर्य ......सीकर है महाकाल का इन्होने वो मिलान नहीं देखा )

पायल .....क्या सोच रहे हो कुछ आवर भी है क्या

वैसे आपके लिया आवर हम सब के लिया एक ख़ुशी की खबर है

सूर्य .......ऐसी क्या ख़ुशी की खबर है आवर गुरुदेव का है वो नजर नहीं आ रहे है

जिनिशा ......आपकी आवर स्वीटी की सदी की खबर है बहुत जल्द आपका विवाह होने वाला है रानी माँ बता रही थी बस हम सब आपके आने का इन्तजार कर रहे थे

सूर्य. .......हाहाहाहा तो ये बात मतलब की अब सबका no. लग्न सुरु हो जायेगा

पायल .......आपको पापा से बात करनी होगी हम सब यहाँ है जबकि वो परतविलोक में है

सूर्य ......मैं कल हे परतविलोक जा रहा हूँ इनसे भी मिल लूंगा

पायल .......मैं भी चलूंगी आपके साथ

सूर्य ......ठीक है तुम सब बैठो मैं गुरुदेव से मिल कर आता हूँ .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
अपडेट. 175

जिनिशा ......आपकी आवर स्वीटी की सदी की खबर है बहुत जल्द आपका विवाह होने वाला है रानी माँ बता रही थी बस हम सब आपके आने का इन्तजार कर रहे थे

सूर्य. .......हाहाहाहा तो ये बात मतलब की अब सबका no. लग्न सुरु हो जायेगा

पायल .......आपको पापा से बात करनी होगी हम सब यहाँ है जबकि वो परतविलोक में है

सूर्य ......मैं कल हे परतविलोक जा रहा हूँ इनसे भी मिल लूंगा

पायल .......मैं भी चलूंगी आपके साथ

सूर्य ......ठीक है तुम सब बैठो मैं गुरुदेव से मिल कर आता हूँ .........

अब आगे ........


सूर्य पारी महल से निकल कर म

परबु मंदिर गुरुदेव से भेट करने निकल पड़ता है

वही सूर्य के जाने के बाद किरण मानसी के साथ साथ सभी जूलिया को भी घेर लेते है

आवर ड्रैगन लोक के विषय में उनके इस सफर जुडी बातो पे चर्चा होने लगती है

किरण द्वारा ड्रैगन लोक के सफर की विस्तृत जानकारी होने के बाद सभी जूलिया को घेर लेती है

राधा ......स्वीटी ये क्या हम सब यहाँ कब से लाइन में लगे है आवर ये तुम्हारी बहन ने उद्घाटन भी करवा लिया

किरण .....हहहहए बुआ इसमें मैं क्या करती उनका मिलान होना लिखा था सो हो गया

आवर वैसे भी जुली सूर्य से प्रेम करती है आवर सूर्य भी प्रेम करता है भले हे वह इस बारे में कुछ कहता नहीं हो

राधा .........देख स्वीटी इस वक़्त हम सब यहाँ है जो भी उनके जीवन से जुडी है सभी यही पे मौजूद है

तुम्हे जो कहना है साफ साफ कहो

किरण एक बार सभी को देखती है उन सबकी नजरो का मुख्या केंद्र किरण हे थी

किरण ......आप सब मुझे ऐसे क्यों देख रही हो अजीब लगता है

पारिजात ......तुम्हारा क्या फैसला है पहले ये बताओ स्वीटी जो तुम्हारा फैसला है वही मेरा फैसला है

किरण .......दीदी मैं कोई रानी महारानी नहीं हूँ जो आप सबको अपना फैसला सुनौ जितना हक़ मेरा उनपे है इतना हे यहाँ मौजूद आप सब का है फिर मैं इतना बड़ा फैसला अकेले कैसे ले सकती हूँ

जीनत ........मेरी तरफ से जुली के लिया है है

सभी के सभी जीनत को देखने लगते है

जीनत ......मैंने कुछ गलत कहा क्या जो आप लोग मुझे ऐसे देख रहे है

सपना ......आप को इस से कोई आपत्ति नहीं है

जीनत ......नहीं मुझे कोई आपत्ति नहीं है हमारे साथ साथ जुली अगर उनकी जीवनसंगीली बनती है तो मुझे ख़ुशी होगी

क्युकी जुली भी इनसे हमारी तरह सच्चा प्रेम करती है आवर अपने प्रेमी से बिछड़ने का दर्द क्या होता है मैं अच्छे से जानती है

मैं नहीं चाहती जुली भी उस दर्द से गुजरे

किरण ......मैं भी यही चाहती हूँ पैर आप सब की इच्छा से

कोमल .......मुझे कोई आपत्ति नहीं है जुली को ले कर

सपना राधा अलीना पायल प्रीती जीनत जिनिशा पारिजात रिद्धि सभी एक एक कर अपना मत जुली आवर सूर्य के विवावह के रूप में स्वीकारती दे देती है

कोमल ......तुम्हे क्या हुआ जुली तुम्हारे आँखे नाम क्यों है तुम्हे तो खुश होना चाइये तुम्हे तुम्हारा प्यार जो मिल रहा है

किरण ......क्या हुआ जुली तुम्हारी आँखों में आंसू क्यों है

जुली ......दीदी ये तो ख़ुशी के आंसू है मैंने कभी नहीं सोचा था की मुझे आप सब लोग इतनी जल्दी सवीकार कर लेंगे

मुझे तो अभी भी यकीं नहीं है की मैंने जिन्हे प्रेम किया उनसे मेरा विवाह भी होगा

आप सब लोगो ने एक बार भी ये नहीं सोचा की मैं उनके लायक हूँ भी या नहीं आप सबने हस्ते हस्ते अपने हिस्से के प्रेम से मेरा दमन खुशियों से भर दिया

किरण जुली को अपने सीने से लगाए हुए

kiran.......ham सब एक परिवार है जुली आवर परिवार जहा हर एक की ख़ुशी मय्बे रखती है

ुशी परिवार का तुम भी हिस्सा जो फिर तुम्हे जीवन भर के लिया कैसे दुखी कर सकते है

अगर प्रेम सच्चा आवर पवित्र हो तो इस्वर भी उसे उसकी मंजिल तक पंहुचा हे देता है

पारिजात .......इस प्यार भरे परिवार में तुम्हारा स्वागत है जुली

जुली ......शुक्रिया दीदी

राधा .....शुक्रिया की बच्ची दीदी भी बोलती है आवर शुक्रिया भी कहती है

परिधि जरा अपनी जादू की चढ़ी तो गुमाना इस्पे

किरण .....हहहहए है दीदी अपनी जादू की चढ़ी गुमा हे दीजिये थोड़ा मॉडर्न हो जाएगी ये भी

पारिजात अपनी जादुई चढ़ी निकल कर जूलिया पे गुमा देती है जिस से उसे परतविलोक परीलोक से जुड़ा ज्ञान वह रहम सहन नियम परतविलोक आवर परीलोक से जुड़ा सभी तरह का ज्ञान उसे मिल जाता है

किरण .....अब ठीक है न

जुली .....जी दीदी

सूर्य परिमहल से निकल कर महाकाल मंदिर की आवर निकल जाता है गुरुदेव से भेट करने के लिया

सूर्य जब परबु मंदिर पंहुचा तो गुरुदेव ध्यान में बैठे हुए थे

सूर्य वही उनके सामने जा कर बेथ जाता है

कुछ समय की प्रतीक्षा करने के बाद गुरुदेव ध्यान से बहार आते है

सूर्य ........परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......यसस्वी भाव पुत्र सूर्य कैसा रहा तुम्हारा ड्रैगन लोक का सफर

सूर्य ......आपके आवर परबु के आशीर्वाद से सभी मुस्किले आसान होती गई गुरुदेव आवर ड्रैगन लोक का सफर आसानी से पूर्ण हुआ

गुरुदेव ........ पुत्री जूलिया के विषय में क्या सच्चा है पुत्र तुमने

सूर्य ......... गुरुदेव मैं अकेला कोई फैसला नहीं कर सकता हूँ इस विषय में इस लिया इस मामले से जुड़ा हर फैसला मैंने उनपे आवर आप पे छोड़ दिया है

गुरुदेव ....... तुम्हारा मत क्या है इस विषय पे पुत्र

सूर्य ......जो आपका आवर उनका मत है वही मुझे सवीकार होगा

गुरुदेव ........ उचित है पुत्र किन्तु इसमें एक संशय भी है

सूर्य ......कैसे संशय गुरुदेव मैं कुछ समजा नहीं

गुरुदेव ......पुत्री जूलिया ने अपनी जो इच्छा जताई थी तुम्हारे अंश को दर्जन करने की वही समस्या है पुत्र

सूर्य ....... हम अभी भी नहीं समजे गुरुदेव

गुरुदेव .......पुत्र सूर्य पुत्री जूलिया अभी अविवाहित है आवर उसकी इच्छा इतनी प्रबल थी की गोल्डन सरोवर में तुम्हारे साथ किये मिलान से उसने तुम्हारे अंश को दर्जन कर लिया है जिसका जनम समय से पूर्व हे हो जायेगा जो उचित नहीं है

सूर्य ......ये तो सच में बड़ी विकत समस्या है गुरुदेव कोई तो मार्ग होगा इसका गुरुदेव

अभी सूर्य आवर गुरुदेव आपस में इस विषय पे चर्चा कर रहे थे कज तभी वह अच्चानक से वाइट रौशनी होने लगती है

कुछ पल बाद जब रौशनी काम होती है तो वह देवसफ्फी नियों खड़े थे

सूर्य .......नियों आप यहाँ पे

नियों ......है वाइट ड्रैगन प्रिंस सूर्य हम यहाँ पे परनाम देवसफ्फी

गुरुदेव ......कल्याणम अस्तु नियों

नियों ......क्षमा चाहता हूँ आपके बिच इस तरह से आने के लिया पैर जिस समस्या को ले कर आप चिंतित है उस समस्या का ज्ञान मुझे भी है

गुरुदेव ........फिर तो आप इस विषय में किसी नतीजे पे पहुंचे

नियों .....कहतीं अवश्य है पैर एक मार्ग अवश्य है

गुरुदेव ......जिस मार्ग का आप सुझाव दे रहे है वो अनुचित मार्ग है देवसफ्फी नियों

सूर्य .....गुरुदेव आप किस मार्ग के विषय में चर्चा कर रहे है

नियों.. .... घरब स्थानांतरण कर तुम्हारे अंश को किसी आवर के घरब में स्थापित करना

सूर्य ......नहीं बिलकुल नहीं ये जुली के साथ अन्याय होगा गुरुदेव एक संतान को इसकी माँ से विलख कर उसे मातृत्व सुख से वंचित कर देना महापाप होगा गुरुदेव

नियों .....यही एक मार्ग है सूर्य प्रिंसेस जूलिया के घरब में जो तुम्हारा अंश है वो दिव्या अंश है क्युकी उसमे तुम्हारे आवर जूलिया के साथ साथ गोल्डन ड्रैगन का अंश भी निहित है उसे केवल गोल्डन ड्रैगन हे दर्जन कर सकती है

सूर्य .......नहीं नियों हर संशय का एक से अनेक मार्ग अवश्य होता है बस हमें उचित दिशा में प्रयाश करना चाइये

गुरुदेव .......मुझे भी जब इस विषय में ज्ञात हुआ तो मैं चिंतित हो उठा था पुत्र क्युकी पुत्री जूलिया आवर तुम्हारे विवाह में अभी समय शेष

तुम दोनों के विवाह से पूर्व हे तुम्हारा अंश जनम ले चूका होगा

गुरुदेव के बात सुन सूर्य परेशां हो उठा

उसे कुछ भी समाज नहीं आ रहा था की वह क्या करे

सूर्य के परेशान होने का पता महल में बैठी किरण को भी पता चल गया था की सूर्य किसी बात को ले कर बहुत परेशान है

किरण वह से मंदिर की आवर निकल गई

सूर्य .....क्षमा करे गुरुदेव किन्तु इस विषय पे मैं सहमत नहीं हूँ

नियों .....फिर क्या प्रिंसेस जूलिया अविवाहित हे आपके अंश को जनम देगी

किरण ......क्याआ जूलिया माँ बैनर वाली है

किरण की आवाज सुन सूर्य पे मनो किसी ने वज्रपात कर दिया हो

सूर्य की गर्दन सवयं हे जुख जाती है

उसकी आँखों से अश्रुधारा बहने लगती है

गुरुदेव .....है पुत्री किरण पुत्री जूलिया गर्वती है सूर्य आवर जूलिया के मिलान से जूलिया ने सूर्य का अंश दर्जन किया है

किरण गुरुदेव को परनाम कर सूर्य के सामने आ कड़ी होती है जिसको गर्दन किसी अपराधी के भरी जुख़ी हुई थी

किरण जब सूर्य का चेहरा अपने दोनों हाथो में थम कर ऊपर करती है तो सूर्य के आंसुओ से भीगा हुआ चेहरा देख किरण की भी आँखे नाम हो जाती है

किरण सूर्य को अपने गले से लगा कर उसे सांत्वना देने लगती है

किरण ......ये तो ख़ुशी की बात है आप रो क्यों रहे है

आपको तो खुश होना चाइये की आप पापा बनने वाले है

गुरुदेव .......पुत्री किरण इसमें एक संशय है जिसके कारन पुत्र सूर्य दुखी है

किरण सूर्य को खुद से अलग कर ुशी भीगी हुई आँखे वह गालो को अपने हाथो से साफ कर गुरुदेव की आवर पलट जाती है

किरण ......कैसे संशय गुरुदेव

गुरुदेव .......पुत्री जूलिया का अभी विवाह योग नहीं बन रहा है आवर जब तक उसका विवाह योग बनेगा तब तक पुत्री जूलिया की संतान का जनम हो भी चूका होगा

किरण ......ये तो सच में एक बड़ी समस्या है गुरुदेव

नियों ......इसका एक मार्ग है पैर ड्रैगन प्रिंस सूर्य उस मार्ग को अपनाने से इंकार कर रहे है

किरण .......ऐसा कोनसा मार्ग आवर आप क्यों इंकार कर रहे है जब सब सही हो सकता है तो

सूर्य ......क्युकी इनके सुजय हुए मार्ग से जुली आवर उसकी होने वाली संतान दोनों के साथ अन्याय होगा जो मुझे मंजूर नहीं है

किरण ......गुरुदेव ऐसा कोनसा मार्ग है जिस से मेरी बहन जुली आवर उसके बचे के साथ अन्याय हो

गुरुदेव .......पुत्री देवसफ्फी नियों का मत है की पुत्री जूलिया के घराब में िस्थित पुत्री जूलिया आवर पुत्र सूर्य के अंश को किसी अन्य के घरब में स्थान्तरित करना

किरण ........ये कैसा मार्ग है गुरुदेव एक माँ को उसके बचे से अलग कर देना इस महापाप से तो अच्छा है की जूलिया अविवाहित हे उस संतान को जनम दे आवर आप किसकी घरब में जुली के आवर इनके अंश को स्थान पर्वरित करने वाले है

नियों .......आपकी सुनहरी ड्रैगन के घरब में

किरण ........आपको देवसफ्फी किसने बनाया आप जानते भी है क्या कह रहे है पहले तो आपका मार्ग हे अनुचित है ऊपर से आप......

गुरुदेव ......संत हो जाओ पुत्री किरण उनका कहना गलत नहीं है क्युकी एक वही है जो पुत्री जूलिया आवर पुत्र सूर्य के अंश को दर्जन कर सकती है क्युकी पुत्री जूलिया आवर पुत्र सूर्य के अंश के साथ साथ सुनहरी ड्रैगन का अंश भी उस अंश से जुड़ चूका है

गोल्डन ड्रैगन के रकत का सेवन इन दोनों ने किया था साथ ड्रैगन दाल का जिस से सुनहरी ड्रैगन का अंश भी इन दोनों के अंश से जुड़ चूका है यही वजह है की देवसफ्फी नियों ने ऐसा मार्ग सुजय है

किरण .....देवसफ्फी नियों मुझे क्षमा करे अपनी अभद्र भाषा के लिया

नियों .......मुझे ख़ुशी है की प्रिंसेस जूलिया के लिया आपके दिल में इतना प्रेम है

किरण ......गुरुदेव देवसफ्फी अगर आप दोनों को आपत्ति न हो तो मेरे पास इसका उत्तम मार्ग है जिस से किसी को कोई परेशानी नहीं होगी

गुरुदेव नियों ......कैसा मार्ग पुत्री किरण .

किरण पलट कर सूर्य को देखती है

सूर्य अपलक किरण की आँखों में देखता है

सूर्य .......नहीं नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकती हो स्वीटी

मैं तुम्हे ऐसा करने की बिलकुल भी इजाजत नहीं दूंगा

किरण .......इस से अच्छा कोई मार्ग नहीं है बस आप इजाजत दे दीजिये जूलिया से मैं बात कर लुंगी

सूर्य आगे भाड़ किरण को अपनी बहो में काश लेता है

सूर्य .......तुम नहीं जानती स्वीटी इस से भी तुम अपनी बहन जुली के साथ अन्याय हे करोगी तुम्हारा मंतव्य उचित है पैर इस से जुली के साथ तुम अन्याय करोगी

गुरुदेव .......तुम किश विषय में कह रहे हो पुत्र

सूर्य .......गुरुदेव स्वीटी जुली के आवर मेरे अंश को सवयं दर्जन करना चाहती है

गुरुदेव .........क्याआ

सूर्य .......है गुरुदेव

किरण .......इस से किसी को भी कोई आपत्ति भी नहीं होगी आवर होने वाली संतान के साथ भी कोई एनीवे नहीं होगा गुरुदेव

सूर्य .....परन्तु स्वीटी इस से जुली के साथ एनीवे होगा भले हे तुम मेरी आवर जुली की संतान को जनम दे उसे मातृत्व का सुख दे पाओगे पैर क्या उस से जुली आवर आने संतान के बिच वो अदृश्य प्रेम सम्बंद पनप पायेगा जो तुम्हारे आवर उस संतान के बिच होगा कभी नहीं

वह संतान भले हे जुली को माँ कह कर पुकारे पैर माँ पुत्र की जो अदृश्य पैर भावना तुम से जुडी होगी वह प्रेम वह भावना वो या जुली कभी एक दूसरे के पार्टी जागृत नहीं कर पाएंगे

गुरुदेव ......तुम्हे ऐसा क्यो लगता है पुत्र सूर्य

सूर्य ......क्षमा करे गुरुदेव किन्तु एक सत्य ये भी है आवर उसे कोई झुटला नहीं सकता है की जब एक माँ अपने घराब में सिसु को दर्जन करती है वह अपने घराब में पल पल भड़ते सिसु को मह्सुश कर जो मर्तृत्व सुख की अनुभूति के साथ अपने सिसु से जुड़ती है वह पल हर माँ के लिया सवरग से सुखदाई पल होता है

यही वो समय होता है जब संतान वह मैट्स के बिच अदृश्य प्रेम भाव का जनम होता है

क्या उस प्रेम को जुली मह्सुश कर पायेगी जब उसकी संतान स्वीटी के घराब में पल रही होगी क्या उन दोनों की बिच स्वीटी आवर उस संतान के सामान प्रेम जुली के लिया होगा या जुली का प्रेम उस संतान के पार्टी इतना निकाल आवर पवित्र होगा जितना स्वीटी का होगा

गुरुदेव ......उत्तम अतिउत्तम विचार है पुत्र तुम्हारे एक माता आवर सनातन के बिच जो सम्बंद जो प्रेम होता उसकी नीव माता के घराब में सिसु के विकाश के साथ पल पार्टी पल भढ़ती जाती है तभी तो माता वह संतान के बिच का सम्बंद आत्मा से जुड़ा होता

तभी तो माता बिन कहे अपनी संतान की दुःख वह ख़ुशी को पहचान लेती है

इस्वर भी इस प्रेम सम्बंद के मोहजाल में बंद बार बार सृस्टि में जनम लेते है

गुरुदेव आगे भाड़ सूर्य के सर पे प्यार से हाथ फिर देते है

किरण ......गुरुदेव फिर इस समस्या का क्या समादन होगा

गुरुदेव ........समादन तो पहले हे परबु ने कर दिया है पुत्री

किरण सूर्य .......क्या मतलब गुरुदेव

नियों ......देवसफ्फी आपके कहने का मतलब है की आपके पास पहले से हे इस समस्या का समादन था

गुरुदेव ......है देवसफ्फी नियों जब हमें ज्ञात हुआ की पुत्री जूलिया ने पुत्र सूर्य से मिलान के वक़्त जो इच्छा जाहिर की थी उसके लिया परबु ने पुत्री जूलिया की विनती सवीकार कर ली है

तब हमने पुत्री जूलिया आवर पुत्र सूर्य के विवाह का योग देखा जिसमे अभी समय था

तब हम भी चिंतित जो उठे थे तब परबु से हमने गुहार लगाओ तो उन्होंने हमें इसका मर भी दिखाया था जिस से किसी को पुत्री जूलिया के अंश को दर्जन करने की आवशयकता भी नहीं होगी

किरण .....गुरुदेव जब आप इस विषय में पहले से मार्ग पर्सस्त कर चुके थे तो फिर ये सब क्या था

गुरुदेव ........तुम दोनों की परीक्षा पुत्री

सूर्य ......परीक्षा से क्या मतलब आवर किश लिया ये परीक्षा

गुरुदेव ...... परीक्षा इस लिया पुत्र सूर्य की आने वाली संतान के पार्टी तुम सोच वह विचार क्या है

आवर पुत्री किरण तुम्हारी परीक्षा इस लिया की तुम्हे जो बड़ी महारानी या बड़ी बहन का दायित्व मिलने जा रहा है उसको ले कर तुम्हारी विचारदारा क्या है

तुम्हारी सोच में भेद भाव तो नहीं है अपनी बाकि सौतनों को ले कर उनके पार्टी तुम्हारे मन को परखना के लिया हे इस पूरी घटना का जनम हुआ था

आवर मुझे ख़ुशी है की एक गुरु के रूप में मैं सफल रहा तुम दोनों ने हे मुझे गौरवान्वित किया पुत्र सूर्य पुत्री किरण

सूर्य ........ आप को इस परीक्षा ने तो मुझे दरम संकट में दाल दिया था गुरुदेव

अगर मैं इसमें स्वीटी का साथ देता तो जुली के साथ अन्याय कर देता

आवर स्वीटी को साफ इंकार करता तो स्वीटी के विश्वाश को खंडित कर देता

किरण .......आपके पार्टी मेरा विश्वाश इतना कमजोर नहीं जो खंडित हो जाये

गुरुदेव .......इस्वर तुम सब पे सदैव अपनी कृपा दृस्टि बनाये रखे

गुरुदेव परबु
( प्रतिमा ) के सामने जा कर मंत्रो उच्चारण करने लगते है

कुछ हे समय बाद महाकाल प्रतिमा से एक दिव्या पुंज बहार निकलता है

आवर गुरुदेव के हाथो में आ जाता है

गुरुदेव ........ पुत्री किरण इस दिव्या पुंज को को दर्जन करो आवर उसे अपने हाथो से पुत्री जुली के घराब पे रख देना बाकि का कार्य ये सवयं कर लेगा

सूर्य ......क्या यही वो मार्ग है गुरुदेव

गुरुदेव ........है पुत्र सूर्य इस से जुली के घरब में पल रहे सिसु का विकाश अपने समय से डेरी होगा

सूर्य ......इस से कुछ गलत प्रभाव......

गुरुदेव ......नहीं पुत्र सूर्य ये परबु का आशीर्वाद है उस से सब अच्छा हे होगा गलत या दुस्प्रभाव नहीं

सूर्य ....... मेरी अगयनता के लिया क्षमा करे गुरुदेव

गुरुदेव ......एक पिता के नाते तुम्हारा अपनी संतान के लिया चिंतित होना लाज़मी है पुत्र सूर्य
अब तुम लोग जाओ

सूर्य किरण ......जी गुरुदेव आज्ञा इ परनाम गुरुदेव परनाम देवसफ्फी नियों

गुरुदेव नियों .......कल्याणम अस्तु यसस्वी भाव पुत्र पुत्री

सूर्य किरण उस दिव्या ऊर्जा पुंज को ले कर पारी महल की तरफ निकल पड़ते है

वही गुरुदेव से कुछ देर चर्चा करने के बाद नियों भी ड्रैगन लोक के लिया निकल जाते है


परतविलोक सूर्यगढ़ .......

सूर्य अभी साम के वक़्त अपने रूम में सोया हुआ था तभी उसके फ़ोन पे रिंग होने लगती है

एक बार रिंग पूरी होने के बाद कॉल कट हो जाता है

दूसरी बार जब रिंग होती है तो रूम के अंदर आती हुई मानसी कॉल उठती है

मानसी ......hello कोण

सामने से ......मैं गीता ठाकुर बोल रही हूँ सक्तिपुर से

मानसी ......जी चची जी कहिये कैसे याद किया

गीता ठाकुर ......बेटी आप कोण बोल रही है

मानसी ......चची जी मैं मानसी बोल रही हूँ उस दिन उनके साथ आपके घर आई थी न

गीता ठाकुर ......बेटी मानसी मुझे सूर्य से बात करनी है बात जरुरी है

मानसी ......ठीक है चची जी मैं अभी उन्हें उठा देती हूँ

मानसी .......सूर्य उठो सक्तिपुर से आपके लिया अर्जेंट कॉल है

सूर्य जग तो दूसरी रिंग होने हे गया था पैर उस से पहले हे मानसी सूर्य का कॉल अटेंड कर लेती है इस लिया चुपचाप सोया रहा

सूर्य मानसी से फ़ोन ले कर गीता ठाकुर से बात करता है

गीता ठाकुर ........बीटा तुम अभी हवेली आ सकते हो क्या जरुरी है

सूर्य .......सब ठीक तो है न चची जी

गीता ठाकुर .......बीटा तुम जल्दी से हवेली आ जाओ प्लेसेस

सूर्य ......OK चची जी मैं अभी निकलता हूँ आप तब तक कॉफी बनाओ मैं पहुँचता हूँ

सूर्य फटाफट अपना फ़ोन ले कपडे चेंज कर बहार निकलता है

सामने हे मेर्री जी कॉफ़ी लिया कड़ी थी

सूर्य .......सॉरी ममी जी अभी कॉफ़ी नहीं पि सकता जरुरी काम से जा रहा हूँ

मेर्री जी ......फिर इसका क्या कृ मैं

सूर्य एक शिप कॉफ़ी की ले कर आँख मरते हुए निकल जाता है

मेर्री जी मुस्कुराते हुए सूर्य की जूठी कॉफ़ी पिटे हुए निचे चली जाती है

वही सूर्य अपनी मोटरसाइकिल ले निकल गया सक्तिपुर

कुछ 10 मिनट्स बाद दुर्जन सिंह की हवेली पे पहुंच गया

सामने हे गीता ठाकुर हवेली के गेट पे कॉफ़ी लिया सूर्य का इन्तजार कर रही थी

सूर्य अपनी
बाइक स्टेण्ड पे लगा कर गीता ठाकुर की तरफ भाड़ जाता है

सूर्य ........क्या बात है चची जी आप इतनी परेशान क्यों है

कोई प्रॉब्लम हुई है क्या

गीता ठाकुर ..........ये लो कॉफ़ी आवर अंदर चलो सब बताती हूँ

सूर्य कॉफ़ी की चुस्की लेते हुए भीतर चल देता है जहा

आज अजय भी मौजूद था गायत्री आवर विधि के साथ

सूर्य को देखते हे विधि दौड़ते हुए आ कर सूर्य से लिपट जाती है

उसके पीछे पीछे गायत्री भी

सूर्य ......अरे आराम से कही गरम कॉफ़ी न गिर जाये तुम लोगो पे

अपनी दोनों बहनो को सूर्य से इस तरह सीने से चिपके देख विक्रम के सीने पे सांप लौटने लगते है

आवर उसके इजाफा जब आवर हाउस जाता है जब मुस्कुराते हुए सूर्य रुक्मणि को कक्ष कर गले से लगता है

( ये सब सूर्य ने जान बुज कर किया था )

सूर्य .......क्या बात है रुकू चची जी आप आजकल जिम बगेरा ज्वाइन किया है क्या

रुक्मणि ....इस नाम से तो मुझे तुम्हारे चाचा जी बुलाते थे जब उन्हें.....

सूर्य ......जब उन्हें आप पे ज्यादा प्यार आता था हाहाहाहा

रुक्मणि .......चल बदमाश

सूर्य ......सच में चची जी आप पे ये नाम बहुत जंचता है आवर आज आप कुछ ज्यादा हे प्यारी लग रही हो

आवर भाई अजय कैसे है आप

अजय .....मैं ठीक हूँ आवर तुम ( थोड़े रुकने स्वर में )

रुक्मणि .......ये किस तरह बात कर रहे हो अजय सूर्य तुम्हे इतनी इजाजत से आप कह कर पूछ रहे है

गीता ठाकुर ........बीटा सूर्य वो कुछ दिनों से विक्रम से कोई सम्पर्क नहीं हो रहा है

मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है बीटा

सूर्य ........आपकी इनसे लास्ट टाइम कब बात हुई थी

गीता ठाकुर .......यही कोई 15 ,16 दिन पहले

सूर्य ......इतने दिन से कोई कांटेक्ट नहीं हुआ आपने पुलिस कम्प्लेन की इस बारे में

गीता ठाकुर ......वो विक्रम पहले काफी बार ऐसे हे गायब होने जाता था पैर इस बार उसने कोई भी सम्पर्क नहीं हुआ है

सूर्य .......कोई बात नहीं हम अभी चलते है सिटी पुलिस को इस बारे में कम्प्लेन करते है

गीता ठाकुर .......पैर वो पुलिस भी उसे खोज रही है न

सूर्य .......उन्हें मैं देख लूंगा इस बार पैर ये उनके लिया पहली आवर आखरी बार होगा अगर फिर भी वो ऐसा दुबारा करते है तो मुझे माफ करना मैं कोई मदद नहीं करूंगा

गीता ठाकुर ..........एक बार उसे घर आने दो फिर मैं देखती हु उसे

सूर्य .....ठीक है चलिए फिर सिटी 1 चलते है मैं सो को कॉल कर देता हूँ वह जैसलमेर से आ जायेंगे अजय तुम भी चलो साथ सायद कुछ जानकारी की जरुरत पद सकती है

अजय ......नहीं मैं नहीं जाऊंगा पुलिस ठाणे

सूर्य .......क्यों कुछ गलत किया है क्या आपने

अजय ......मैंने कहा न मैं नहीं जाऊंगा

रुख्मणि ......अगर नहीं गए तो तुम्हारी पोकर मनी आज आवर अभी स बंद समजे तुम

विधि ......मैं भी चली क्या आपके साथ

गीता ठाकुर ......ठीक है चलो बेटी तुम भी रुक्मणि हमें आने में देर हो सकती है तो तुम आवर गायत्री अपना ख्याल रखना

रुक्मणि ......आ आओगे तब तक मैं खाना बना कर रखती हूँ सूर्य घर पे बोल देना आज तुम यही से खाना खा कर जाओगे

सूर्य ......अगर आप अपने हाथो से खिलाएंगी तो जरूर खा कर जाऊंगा

गीता .....अजय कार निकालो हम आते है आवर रुक्मणि तुम खाना बना लेना

गीता ठाकुर सूर्य विधि तीनो वह से अजय के साथ कार से सिटी 1 की आवर निकल जाते है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एंजोये फ्रेंड्स .................


 
अपडेट 176

रुख्मणि ......अगर नहीं गए तो तुम्हारी पोकर मनी आज आवर अभी स बंद समजे तुम

विधि ......मैं भी चली क्या आपके साथ

गीता ठाकुर ......ठीक है चलो बेटी तुम भी रुक्मणि हमें आने में देर हो सकती है तो तुम आवर गायत्री अपना ख्याल रखना

रुक्मणि ......आ आओगे तब तक मैं खाना बना कर रखती हूँ सूर्य घर पे बोल देना आज तुम यही से खाना खा कर जाओगे

सूर्य ......अगर आप अपने हाथो से खिलाएंगी तो जरूर खा कर जाऊंगा

गीता .....अजय कार निकालो हम आते है आवर रुक्मणि तुम खाना बना लेना

गीता ठाकुर सूर्य विधि तीनो वह से अजय के साथ कार से सिटी 1 की आवर निकल जाते है ............

अब आगे ..........


अजय कार ड्राइव कर रहा था पैर उसका ध्यान अभी भी हवेली में जो सूर्य ने ड्रामा किया था रुक्मणि के साथ अजय का ध्यान वही पे था

गीता ठाकुर .......बीटा सूर्य तुमने सप को फ़ोन तो किया हे नहीं

सूर्य. ....... चची जी मैंने मैसेज कर दिया है वो हमें वही पुलिस स्टेशन में मिल जायेंगे आप चिंता न करो

विधि .......आपके बड़े पापा का शॉपिंग मॉल भी तो इसी सिटी में है न

सूर्य ......है आपको शॉपिंग करनी है क्या

विधि ......नहीं नहीं मैंने बस पूछा है आपसे वो क्या है की मैं एक बार शॉपिंग को गई थी गायत्री दीदी के साथ उस मॉल में तब मैंने देखा था वह पे उनको

सूर्य .......अजय आप कार पहले पुलिस स्टेशन ले लीजिये बाद में विधि को शॉपिंग करवाना है वापिस आते हुए

अजय चुपचाप कार को पुलिस स्टेशन की तरफ गुमा देता है अगले 10 मिनट्स में हे कार पुलिस स्टेशन के सामने कड़ी थी

बहार हे सप साहब खड़े जैसे वो सूर्य का हे इन्तजार कर रहे थे

सूर्य .......सॉरी सप साहब आपको तकलीफ दी यहाँ इस तरह बुलाने के लिया

सप .....कोई बात नहीं मेजर साहब ये तो ड्यूटी है मेरी

सूर्य आगे बढ़ सप से हाथ मिला कर अपने साथ आये गीता ठाकुर विधि अजय का यंत्र सप से कराता है

सप .....चलिए अंदर चल कर बात करते है

सप साहब सूर्य विधि अजय गीता ठाकुर चारो को ले कर सप अपने साथ अंदर आता है

जहा ठाणे में कुछ मनचलो की धुलाई बड़े जोर शोर से हो रही थी

जिसे देख अजय दूसरी तरफ आ जाता है

सप इंस्पेक्टर की सीट पे बेथ चारो को बैठने का इसरा करता है

सप .....आप कुछ लेंगे टिया कॉफ़ी

सूर्य .......कॉफ़ी

सप एक हवलदार को कॉफ़ी लेन का बोल देता है

सप ....अब बताये मेजर सूर्य ठाकुर क्या समस्या आ गई जो आप को यहाँ आने का लास्ट करना पड़ा

सूर्य ......सप साहब ये है गीता ठाकुर दिवंगत दुर्जन सिंह ठाकुर की पत्नी आवर ये है दिवंगत दुष्यंत सिंह ठाकुर का बीटा अजय आवर बेटी विधि

कुछ समय से इनके बेटे विक्रम सिंह ठाकुर का कुछ भी पता नहीं चल रहा है

ुशी को ले कर के ये चिंतित है इस लिया आपको थोड़ा कास्ट देने चले आये

अब आप हे जान पहचाना के है तो आपको हे मुश्किल समय में याद किया

सप ......कही आप उन्ही विक्रम की बात तो नहीं कर रहे है न जिसकी मदत से क्ष m.l.a दुर्जन सिंह को जेल से फरार करवाया था

सूर्य ......जी है मैं उन्ही विक्रम सिंह की बात कर रहा हूँ

गीता थरूर .....सूर्य ये सप साहब क्या कह रहे

सूर्य .......चची जी सप साहब सच कह रहे है गुजर सिंह की दुश्मनी मुझसे थी इस लिया विक्रम ने उसे अपने साथ मिलने का प्रस्ताव रखा ताकि दोनी मिल कर मुझसे बदला ले सकीय इसी के चलते पहले जो यहाँ पे इंस्पेक्टर था उसे पैसे खिला कर उसकी मदद से विक्रम ने गुजर सिंह को जेल से बहार निकल था

गीता ठाकुर .......सप साहब हमें इस बारे में कुछ भी मालूमात नहीं है की विक्रम ये सब किया था

आवर बीटा सूर्य तुमसे भी मैं माफी मांगती हूँ

सूर्य ......उसकी कोई जरुरत नहीं है चची जी मैंने वो सब कबका भुला दिया

सप ......देखिये हमने उस इंस्पेक्टर को तो ससपेंड कर जेल में दाल दिया है विक्रम की हमें भी तलाश है पैर आपके कहने पे हम आवर तेजी से विक्रम को सर्च करेंगे

सप की बात सुन गीता ठाकुर की धड़कन भढने लगती है

सूर्य ......चची पानी पीजिये आप विक्रम को ये कुछ नहीं करेंगे आवर आप से भी दरखास्त है सप साहब की विक्रम को एक मौका दीजिये ताकि वो अपनी गलतिया सुधर सके

बदले में जब भी आपको मेरी किसी भी तरह की जरुरत हो मैं आपको त्यार मिलूंगा

सप .....ऐसा नहीं हो सकता mr.surya ठाकुर क्युकी इंस्पेक्टर भी इस केस स जुड़ा है

सूर्य .......वो सब मैं देख लूंगा बस एस्प किसी तरह इस केस से विक्रम को बहार निकालिये

सप ......बहुत मुश्किल काम है ये

सूर्य .......कोशिश तो कीजिये आप अपनी तरफ से बस एक मौका हे मांग रहा हूँ

गीता ठाकुर .......सप साहब बस एक मौका दे दीजिये दुबारा विक्रम आपको किसी भी गलत काम में नजर नहीं आएगा

सप ......ठीक है मैं अपनी तरफ से विक्रम को उस केस से बहार निकल में की कोशिश करता हूँ

पैर दूसरे किसी आपराधिक मामले में विक्रम का नाम आया आवर उसमे वह संलिप्त पाया गया तो भूल जाना आपका कोई विक्रम नाम का बीटा भी था क्युकी मैंने पहली बार अपने उसूलो के खिलाफ काम कर रहा हूँ वो भी सूर्य ठाकुर की बझा से

गीता ठाकुर .......अगर दुबारा उसने किसी तरह का को गलत काम किया तो मैं खुद उसे आपके हवाले करुँगी सप साहब बस एक बार .......

सप ......आप सब बहार कम्प्लेन कीजिये मैं इनसे अकेले में बात करता हूँ

गीता ठाकुर अजय विधि केबिन से बहार चले जाते है आवर विक्रम के गुमशुदगी की कम्प्लेन लिखाने लगते है

सप ......ये सब क्या है सूर्य ठाकुर

सूर्य .......सप साहब आप नहीं समझेंगे विक्रम कभी सुधरने वालो में से नहीं है

सप ......फिर उसे आप इस केस से बहार क्यों निकल रहे है

सूर्य ......क्युकी एक माँ अपने बचे के लिया आखरी मौका चाहती थी कल तक खुद गीता ठाकुर मेरी पीठ पीछे दुसमन थी पैर जब समाज आया तो खुद बा खुद खुद को बदल लिया बस वही उम्मीद वही मौका अपने बेटे विक्रम के लिया चाहती है

सप ......मतलब विक्रम फिर कुछ गलत जरूर करेगा

सूर्य ......गलत करेगा तो अनजान भी भुगतेगा पैर उसकी माँ को ये दुःख तो नहीं होगा की उसने कोशिश नहीं की सुधर गया तो बहुत अच्छी बात है

वैसे भी आपकी भी तो यही सोच है क्रिमनल को नहीं ब्लकि क्राइम को ख़तम करो तो क्रिमिनल खुद बा खुद ख़तम

सप .....ठीक है मैं जल्दी हे आपको कांटेक्ट करता हूँ कुछ भी अपडेट मिलती है तो

सूर्य .....जी अच्छा अब चलता हूँ कुछ भी जरुरत हो कोई भी काम मेरे लेयक तो याद जरूर लीजियेगा

गीता ठाकुर अजय विधि सूर्य कप्लीने लिखवा कर वह से निकल जाते है

अजय ......कहा चलना है अब हमें

सूर्य .....शॉपिंग मॉल चलो आवर आप चची जी ऐसे उदाश न हो विक्रम को कुछ नहीं होगा पैर ये आप पे है की इसे सुधारना है या

क्युकी दुसरा मौका न तो सप साहब देंगे आवर न मैं देने वाला हूँ यही पहला आवर आखरी मौका है अपनी जिंदगी सुधरने का

सूर्य तीनो को ले कर शॉपिंग करवाने लगता है

कुछ कुढ़ भी घर के लिया करता 2 हर बाद सूर्य तीनो के साथ घर सक्तिपुर के लिया निकल गया

विधि को इस बिच शॉपिंग मॉल में कुछ पल सूर्य के साथ एकांत में बॉटने को मिले जिस से विधि भी खुश हो गई


असुर कबीला छत्तीसगढ़ .......

विक्रम रात के मदिरा के नशे में आवर शैम्पेन के थपड की वजह से गुस्से में ज्यादा कुछ न सोच कर असुर कबीले से चुपचाप निकल गया

नशे की वजह स उसे इस बियावान जंगल का भी कोई दर नहीं था कब तक चलता रहा ये विक्रम को भी नहीं पता

विक्रम को तब होश आया जब उसे पीछे से किसी टेम्पो ने विक्रम को पीछे से थोक दिया

जिस से विक्रम उस कच्ची सड़क पे जा गिरा जिस से उसके सर पे चेहरे पे आवर चाहती के साथ पैरो पे कुछ ज्यादा हे चोट आई थी

टेम्पो वाला सायद कोई अच्छा आदमी था जिसने विक्रम को ताकद मरने के बाद छोड़ कर गया नहीं बल्कि टेम्पो रोक कर उसे देखने उसके पास पंहुचा

टेम्पो ड्राइवर ने जब विक्रम को पलट कर देखा तो उसके सर से आवर माथे स खून बाह रहा था

तभी पीछे स उस टेम्पो से एक लड़का आवर उतर कर वह आता है

लड़का .....रमन चाचा जी जिन्दा है या मर गया .

रमन ......नहीं बीजू बीटा जिन्दा है चल मेरी मदद कर उसे सहर ले कर चलते है

बीजू .....चाचा जी क्यों लफड़े में पड़ते हो छोड़ो उसे यहाँ हम निकलते है

रमन .....नहीं बीटा हमने गलती से उसे टक्कर मर दी पैर अब उसे यहाँ ऐसी हालत में छोड़ कर जाना मतलब जान बुज कर उसे लौट के मुँह में धख़लना

चल उठाने में मेरी मदद कर

बीजू नाम का वह 18 ,19 साल का लड़का अपने चाचा रमन जो की 35,40 के होंगे उनकी मदद करतेऊए उसे पीछे राखी सब्जियों की तो क्रिया हटा कर ऊहे लेता देता है

रमन इसके सर को अपने गमछे से अच्छे से बांड दे मई इसे जल्दी हे पंहुचा देता हूँ हॉस्पिटल

बीजू .....देखो चाचा जी इसे हम हॉस्पिटल छोड़ कर वह से निकल जायेंगे समाज गए आप कोई पूछे तो बोलना की सड़क पे ऐसी हालत में मिला था हमें

रमन ......ठीक है बीटा बीजू

रमन टेम्पो स्टार्ट कर आगे बढ़ा देता है

कुछ 20 ,25 मिनट्स के तेज सफर के बाद रमन टेम्पो को हॉस्पिटल में परिवेश करवा देता है

बीजू आवर रमन किसी तरह गलत पता दे कर वह विक्रम को एडमिट करवा कर निकल जाते है

जाते वक़्त रमन कुछ पैसे चुपके से विक्रम की जेब में दाल देता है

डॉक्टर्स विक्रम के जख्मो को साफ कर उसे मलहम पति करते है विक्रम के एक पेअर की में कुछ ज्यादा हे चोट थी सायद उसका एक पेअर
फिस्टुरे हो चूका था

डॉक्टर विक्रम का इलाज कर उसे नींद का इंजेक्शन दे देते है


कुछ देर बाद विक्रम की इंजेक्शन के नशे में वह थकावट के वजह से आँखे बंद हो जाती है

दोपहर बाद जब विक्रम की आँखे खुलती है तो वह खुद को हॉस्पिटल में पता है

अब तक विक्रम का सारा नशा उतर चूका था

उसे कल रात चंपा के साथ किया अपना वहसि पैन याद आता है साथ हे चंपा का चंगा आवर उसके वो सबद जिस से विक्रम का चोट लगे चेहरे पे भी एक बार गुस्सा दिख हे जाता है ......


पारी लोक ......

शिव ......क्या बात है बीटा सूर्य आते हे तुम तो गायब हो गए कभी अपने डैड के साथ भी समय बिताया कर

सूर्य .......सॉरी डैड वो गुरुदेव से मिल कर आ रहा हम महाकाल मंदिर से

जोरावर जी ....... शिव अब ये भला क्यों हमारे साथ समय बिताएगा अब चारो तरफ ये राजकुमारियों से जो घिरा रहता है

सूर्य .......डैड मां जी बस 2 मिनट्स दीजिये अभी एक छोटा सा काम कर के आता हूँ बस 2 मिनट्स प्लीज

शिव ......ठीक है जा आवर उद्यान में हे आ जाना वही हम लोग मिलेंगे

सूर्य वह से जल्दी से निकलता है आवर किरण के पास पहुँचता है

किरण....... कहा रह गए थे आप

सूर्य ......सॉरी वो डैड आवर बड़े मां जी ने रोक लिया था

किरण ......ठीक है आप जुली को बुला कर लाओ

सूर्य .........ठीक है मैं अभी बुलाता हूँ जुली को

सूर्य जुली को मानसिक सन्देश भेजता है जिसके मिलते हे जुली बाकि सभी को एक्सक्यूज़ में बोल कर वह से निकल आती है आवर सीधा ुशी कर्कश में पहुँचती है जहा सूर्य आवर किरण उसका वेट कर रहे थे

जुली ......आपने बुलाया हमें कुछ काम था क्या

सूर्य .....है जुली यहाँ लेट जाओ

जुली .......क्या कहा यहाँ लेट जाओ

किरण ......उन्होंने ठीक कहा यहाँ लेट जाओ

जुली को लगा सूर्य सायद ऐसे हे मजाक कर रहा है

जुली वही बीएड पे लेट जाती जय

किरण आगे भाड़ अपने हाथो में जो ऊर्जा पुंज था उसे जुली के नाभि पे रख देती है

तभी किरण के हाथो से पुरपुल रौशनी निकल कर उस ऊर्जा पुंज में मिल जाती है

डेरी डेरी ऊर्जा पुंज जुली के नाभि से होते हुए उसके घरब में समाहित हो जाता है

जुली ......ये क्या था दीदी आपने अपना हाथ यहाँ रखा फिर बड़ी घोर से देख रहे थे

सूर्य .....कुछ नहीं जुली

किरण .........जब वक़्त आएगा तब बताऊंगा ुम्मम्हा

किरण प्यार से जुली का माथा चुम लेती है

जुली .....दी आप भी न कभी कभी बहुत अजीब सा करती हो पैर मुझे ये अच्छा लगा ुम्मम्हा

जुली .......आवर आप भी ुम्मम्हा

जुली सूर्य किरण के गालो को चुम कर बहार भाग जाती है

किरण .......लगता है इस्पे भी मेरी सांगत का असर हो रहा है

सूर्य ......तुम्हारी छोटी बहन है क्या कर सकते है

किरण सूर्य को होंटो को अपने होंटो में भर कर चूसने लगती है

किरण .......ये कर सकते है वैसे मुझे भी सदी के बाद जल्दी हे एक प्यारा सा बेबी चाइये

सूर्य ......मुझे तो तुम्हारे जैसे प्यारी सी क्यूट से डॉल चाइये बिलकुल तुम्हारे जैसे

किरण ......नहीं बेबी होगा आपकी तरह आपकी कार्बन कॉफी

सूर्य .......नहीं पहले क्यूट से एंजेल हे होगी देख लेना

गेट पे कड़ी शालिनी जी ये सब सुन अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी पैर वो सूर्य आवर किरण को बच्चो जैसा झाड़ते देख खुद की हंसी नहीं रोक पति है

शालिनी जी .......हहहहए मुझे तो दोनों हे चाइये बेबी आवर डॉल

सूर्य .......माँ आप

शालिनी जी ......है मैं अभी से प्लानिंग कर रहे हो पहले सदी तो करलो दोनों

आवर तुम यहाँ लगे हुए हो स्वीटी के साथ वह बड़े भाई सा पुर तुम्हारे डैड तुम्हारा वेट कर रहे है

सूर्य .......ओह्ह सॉरी माँ मैं तो भूल हे गया था उम्मम्मम्हा लव यू माँ मैं चलता हूँ

शालिनी जी ......लव यू तू बीटा जा अब तू मैं जरा इसकी खबर लेती हूँ बेबी की

सूर्य वह से फ़ौरन खिसक लेता है जभी किरण शालिनी जी के हाथे चढ़ जाती है

शिव ......क्यों बरखुरदार भूल गए थे क्या

सूर्य .......सॉरी डैड वो

महेंद्र जी ......ीदार आ सूर्य बेथ मेरे पास

सूर्य .......जी बड़े पापा

महेंद्र जी ......तुम्हारा सफर कैसा रहा ड्रैगन लोक का

सूर्य .....जी पापा अच्छा रहा आप मिले ड्रैगन से

महेंद्र जी .......है दूर से देखा था

सूर्य .......रुकिए अभी बुलाता हूँ वाइट ड्रैगन ब्लैक ड्रैगन सुनहरी ड्रैगन यहाँ आओ

महेंद्र जी ......अरे बीटा रहने दे उन्हें यहाँ मत बुला

सूर्य ......पापा don't वोर्री मैं जनता हु आपको दर लग रहा होगा पैर मैं हूँ न

तभी आसमान में दहाड़ते हुए चारो ड्रैगन उद्यम में एक के बाद एक उतारते है

सूर्य .......ये लीजिये बड़े पापा आपके सामने है मिल लीजिये इनसे डरने की बिलकुल भी जरुरत नहीं है

वाइट ड्रैगन ......गौरैये नहीं हम आप में से किसी को भी किसी तरह ी हानि नहीं पहुचायेंगे

शिव ......ये तो हमारी तरह बोलते भी है

सूर्य ......है डैड क्युकी ये जादुई ड्रैगन है हर भाषा का ज्ञान है इन्हे हर भाषा बोल सकते है

महेंद्र जी .....ये तो बहुत हे अच्छी खूबी है इनकी

जोरावर .......वैसे सूर्य तुम्हे इनपे सवारी करने से दर नहीं लगता है क्या

सूर्य .....दर कैसा मां जी अब ये हमारा हे एक हईशा है इनकी आत्मा हरी आत्मा से जुड़ चुकी है

जोरावर ........क्या मैं भी इनपे बेथ सकता हूँ

सूर्य ......जिसपे बैठने की इच्छा है ुशी से पूछ लीजिये

जोरावर .....क्या सच में

सूर्य ......बिलकुल मां जी वैसे मैं बता देता हूँ की इनमे से कोनसा ड्रैगन किसका है ये जो सुनहरी ड्रैगन है वो स्वीटी की है ब्लैक ड्रैगन जो है वह मानसी की है आवर ये वाइट ड्रैगन मेरा है आवर ये हाइब्रिड कॉस्मिक लिटेनिंग ड्रैगन जूलिया का है

शिव .......मतलब जूलिया बेटी भी .....

महेंद्र जी .....जूलिया बेटी से क्या मतलब है शिव

शिव ......अपने लादले से हे पूछ लीजिये भाई सा

सूर्य ......मां जी आप चलिए मेरे साथ हम सवारी करके आते है

मशेन्द्र जी ......जरा रुकना सूर्य

सूर्य ....बड़े पापा डैड से पूछ लीजिये मैं तो चला

सूर्य जोरावर जी को साथ ले सुनहरी ड्रैगन पे स्वर हो ुध चला

महेंद्र जी ......तुम बताओ शिव क्या है ये सब

शिव .......भाई सा पहले तो मुझे लगा था पैर अब यकीं हो गया है की जूलिया बेटी से भी इसकी सदी होगी

महेंद्र जी ......क्या एक आवर यहाँ एक नहीं संभाली जाती है उसके हे नखरे नहीं उठाये जाते है आवर इसकी लिस्ट भढ़ती जा रही है

कैसे संभालेगा ये सभी को मुझे तो इसकी चिंता हो रही है

रेखा जी .......क्या कहा आपने आपसे एक नहीं संभाली जाती आवर मेरे नकरे आप मेरे बेटे की चिंता न करो वो आपकी तरह फुसकी नहीं है आना रात को कमरे तब बिताती हूँ आपको

आवर शिव देवर जी आपकी खबर भी शालू हे लेगी बड़े आये मेरे बेटे की चिंता करने वाले

उसकी जिंदगी में इतनी आवर भी आ गई तो वह संभल लेगा आपको उसकी चिंता करने की जरुरत नहीं है चिंता कृ रात को सोना कहा उसकी

शिव .....भाबी सा मैंने क्या किया है है मैंने तो आपके बेटे को ले कर कुछ कहा भी नहीं है

रेखा जी ......अपने भाई सा को रोका भी तो नहीं आपने सजा तो आपको भी भुगतनी होगी इनके साथ साथ

रेखा जी तो अपना फैसला सुना कर चली गई

शिव ......मरवा दिया भाई सा आपने अपने साथ साथ मुझे भी

महेंद्र जी .....तेरी वाली तो फिर भी मान जाएगी पैर मेरी वाली आज न फटकने दे आस पास भी

शिव ........मेरा भी वही होगा जो आपका होने वाला है दोनों ने अब तक तो फैसला भी कर लिया होगा

महेंद्र जी .....सही कहा शिव तूने

शिव .......वैसे भाई सा सच में आप फुसकी है क्या

महेंद्र जी .......रुक तुझे मैं बताता हूँ की मैं फुसकी हूँ की कुछ आवर तहर तू जरा

शिव वह से फ़ौरन महल की आवर निकल लेता है महेंद्र जी वही जमीं पे बेथ जाते है

महेंद्र जी .......करे कोई आवर भरे कोई आवर क्या जमाना आ गया

अब बेटे की चिंता भी नहीं कर सकता क्या मैं

इन आवर तो को कोण संजय इनके नकरे कितने होते है .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............

शुबरात्रि दोस्तों.... खुश रहो हस्ते आवर हसते रहो .........
 
अपडेट. 177

शिव ........मेरा भी वही होगा जो आपका होने वाला है दोनों ने अब तक तो फैसला भी कर लिया होगा

महेंद्र जी .....सही कहा शिव तूने

शिव .......वैसे भाई सा सच में आप फुसकी है क्या

महेंद्र जी .......रुक तुझे मैं बताता हूँ की मैं फुसकी हूँ की कुछ आवर तहर तू जरा

शिव वह से फ़ौरन महल की आवर निकल लेता है महेंद्र जी वही जमीं पे बेथ जाते है

महेंद्र जी .......करे कोई आवर भरे कोई आवर क्या जमाना आ गया

अब बेटे की चिंता भी नहीं कर सकता क्या मैं

इन आवर तो को कोण संजय इनके नकरे कितने होते है .............

अब आगे ........


सक्तिपुर...... अजय विधि गीता ठाकुर सूर्य विक्रम की गुमसुदगी की कम्प्लेन कर शॉपिंग कर सक्तिपुर हवेली लौट आये थे

सूर्य नेरुक्मणी वह गायत्री के लिया भी बढ़िया कपड़ो की शॉपिंग की थी जिस से गायत्री वह रुक्मणि दोनी खुश हो गयी

रुख्मणि आप सब हाथ मुँह धो लीजिये मैं तब ताज खाना लगाती है

गीता ठाकुर ......मुझे भूख नहीं है आप सब खाना खा लीजिये

सूर्य .......अगर आप खाना नहीं खाओगी तो मैं भी नहीं खाऊंगा चची जी

गीता ठाकुर ......सूर्य बीटा सच में मुझे भूख नहीं है

सूर्य ......चची जी मैं जनता हूँ आपको भूख क्यों नहीं है पैर आप चिंता मत कीजिये जल्दी हे विक्रम कहा हमें पता चल जायेगा

गीता ठाकुर ........ तुम वाकई में बहुत अच्छे हो बीटा इतना सब कुछ होने के बात भी एक फ़ोन कॉल पे तुम दौड़े चले आये हो सके तो विक्रम को माफ कर देना बीटा

सूर्य ......मैंने तो कब का माफ कर दिया चची जी बस आप स बात का ख्याल रखना की फिर विक्रम किसी के साथ गलत न करे

गीता ठाकुर ....... इस बात का मैं खुद ख्याल रखूँगी बीटा अब चलो चल कर खाना कहते है

सूर्य अजय विधि गायत्री चारो खाने के लिया बेथ जाते है

गीता वह गायत्री चारो को खाना परोसती है वह खुद के लिया प्लेट लगा कर खाना खाने बेथ जाती है

सूर्य को खाना न कहते देख गीता सूर्य से पूछ हे लेती है

गीता .....क्या हुआ बीटा तुम खाना क्यों नहीं खा रहे हो

सूर्य ......क्युकी रुकू चची जी ने कहा था की वह खुद अपने हाथो से मुझे खाना खिलाएंगे

रुक्मणि ......सॉरी बीटा मैं भूल गयी थी रुक्मणि अपने हाथो से निबला बना कर सूर्य को खिलाती है

अजय एक बार सूर्य आवर अपनी माँ को देखता है फिर चुप चाप निचे गर्दन कर खाना खाने लगता है

सूर्य .......चची जी खाना बहुत हे स्वादिस्ट बनाया है आपने मन करता है आपके हाथ हे चुम लूँ हाहाहा

विधि ......है मम्मी खाना वाकई बहुत अच्छा बाबा है

रुक्मणि ......ठीक है तो चुम लो पैर उसके जिसने ये स्वादिस्ट खाना बनाया है

गीता .......क्या तुमने खाना नहीं बनाया है

रुक्मणि .....नहीं दीदी खाना गायत्री बिटिया ने बनाया है मैंने तो केवल उसे समझाया था की किस तरह क्या बनाना है

विधि .....सच में दीदी आपने बहुत हे स्वादिस्ट खाना बनाया है

गायत्री ......ठीक है फिर अब से मैं किट्चेंस माँ आवर चची की हेल्प किया करुँगी

विधि .....मैं भी

रुक्मणि .....लगता है जल्दी हे तुम दोनों की सदी करानी होगी

सदी का नाम सुनते हे दोनों सूर्य की आवर देखने लगती

जिस से सूर्य का खाना गले में हे अटक जाता है

गीता ......आराम से खाओ बीटा लो पानी पीओ

रुक्मणि .....वैसे सूर्य तुम्हारी सदी भी तो जल्दी हे होने वाली है

सूर्य ......पता नहीं

रुक्मणि .....क्यों तुम्हारी गफ है न मानसी बड़ी प्यारी बची है

सूर्य ......है पैर सब माँ डैड दादा जी दादी जी पे है

कुछ हसी मजाक आवर कुछ जरुरी टॉपिक पे बाते करते हुए सभी ने खाना खाया

सूर्य ......चची जी अब इजाजत चाहता हूँ

गीता ......ठीक है बीटा आते रहा करो ये भी तुम्हारा अपना घर है

सूर्य .....जरूर चची बस आप ऐसे हे स्वादिस्ट खाना खिलते रहना अपने हाथो से हाहाहाहा

रुक्मणि .......है क्यों नहीं बीटा जाओ बेटी सूर्य को बहार तक छोड़ आओ

गायत्री आवर विधि. को जैसे मुँह माँगा अवसर मिल गया हो

अजय अपने कमरे में निकल गया गीता वह रुक्मणि खाने को प्लेट वगेरा उठा कर किचन की आवर निकल जाती है

सूर्य ......क्या बात है गायत्री तुम तो बहुत अच्छा खाना बना लेती हो

गायत्री .......आपको पसंद आया

सूर्य .....बहुत ज्यादा

विधि .......अगर आप आगे भी ऐसे हे डीडू के हाथ का बना खाना खाना चाहते है तो इनसे सदी कर लीजिये

सूर्य ......तुम जानती हो विधि ये सब संभव नहीं है

विधि .......आप तो ठाकुर है न फिर

सूर्य .......ठाकुर हूँ फिर भी संभव नहीं है विधि ये मैं इस लिया नहीं कह रहा हूँ की कभी हमारे परिवारों में दुश्मनी थी इसकी वजह कुछ आवर है

वक़्त आने पे तुम्हे जरूर बताऊंगा

विधि आगे भाड़ हलके से सूर्य के होंटो को चुम कर पीछे हैट जाती है

सूर्य प्यार से उसके गमो पे हाथ फिर देता है

ऐसा हे गायत्री के साथ कर सूर्य अपनी बिक ले कर सूर्यगढ़ की आवर निकल जाता है

गायत्री वह विधि वही कड़ी उसे देखती रहती है जब तक दोनों की आँखों से सूर्य ओझल नहीं हो जाता है

विधि ...... दीदी ऐसा कब तक चलेगा

गायत्री ......हमारे बैश में कुछ नहीं है विधि

हम खुद से लड़ सकते है पैर अपनी किस्मत से नहीं

विधि ......पता नहीं दीदी किस्मत में क्या लिखा है पैर हर रोज सुबह उठने पे आवर सोने पे बस इनका हे चेहरा देखना चाहती हूँ

गायत्री ......चल अंदर चलते है कमरे में वही बात करेंगे

दोनों वह से निकल जाती है पैर कोई था जो इनकी बाते सुन रहा था गायत्री आवर विधि के जाते हे वह साक्ष भी चुप चाप अपने रूम की तरफ निकल गया


असुर लोक .......

सुबह के वक़्त जब विसुद्धि आवर नगीना की आँखे खुली तो वह दोनों एक दूसरे से निर्वस्त्र ा चिपक कर सोये हुए थी

रात में जो कंटकासुर के साथ नंगा नाच हुआ उसका असर अभी भी दोनों दिखा दे रहा था

दोनों की बड़ी बड़ी चूचिया कंटकासुर के वहशीपन की दस्ता बया कर रही थी

दोनों के अंगो पे अभी भी दांतो वह नाखुनो के नीसाण नजर आ रहे थे

नगीना जैसे हे अपनी निर्वत्र स्तनों को सहलाती है उसकी मुँह से मादक दर्दभरी सिसकी निकल जाती है

विसुद्धि ......तुम्हारे वक्षो की स्थिति तो बहुत ख़राब है नगीना

नगीना .....विसुद्धि पुरे सरीर में पीड़ा हो रही है

विसुद्धि ......यहाँ भी ऐसा हे हल है नगीना आवर ये भाई कहा चले गए

नगीना .....लगता है रात्रि में हे वो वातापी के पास लौट गए है

विसुद्धि .......इतना सम्भोग करने के पश्चात भी वो उसके पास गए

नगीना ........मर्द जाट होती हे ऐसी है एक स्त्री से कभी संतुस्ट नहीं होते ये मर्द फिर अब भूल रही है असुर कबीला में कितनी स्त्रियों के साथ सम्बन्ध है उनके

विसुद्धि ......चलो हमें भी अपने कक्ष में जाना चाइये मुझे विश्राम की आवर आवस्यकता है

नगीना .....चलिए हम कक्ष में चल कर विश्राम करते है

वही सुबह सुबह के अंदर में द्वारिका अपने कक्ष में लौट आती है किसी को भनक तक नहीं लगने की की वह आदि रात से महल से गायब थी

द्वारिका अपने कक्ष में पहुंच कर अपने विस्तार पे लेट जाती है

थोड़ा पीछे चलते है जहा द्वारिका कंटकासुर को ले कर महल से निकलती है

द्वारिका जब महल से अदृश्य रूप में कंटकासुर को अपने साथ ले कर निकलती है

असुर महल से काफी दूर निकलने के बाद द्वारिका अपना वास्तविक रूप दर्जन करती है

उसके ठीक पीछे कंटकासुर किसी निर्जीव पुतले के सामान खड़ा था जैसे उसे द्वारिका ने अपने सम्मोहन में बंद रखा हो

दादिरा एक पुराणी जंगल में परिवेश कर जाती उसके पीछे पीछे कंटकासुर भी परिवेश कर जाता है

कुछ पालो के लिया द्वारिका वह कंटकासुर अदृश्य हो जाते है क्युकी यहाँ मायावी कवच निर्मित किया हुआ था

अंदर का नजर तो कुछ आवर हे था चारो तरफ विशाल काय दानव हे दानव थे

द्वारिका को देख सभी अपना सर जुखा कर द्वारिका का अभिवादन करते है

द्वारिका ......खड़े हो जाओ सब

वह मौजूद करीबन 100 स ज्यादा दानव पुरुष वह हे दानव महिलाये थी जो द्वारिका के एक आदेश पे खड़े हो जाते है

द्वारिका ......ये मेरा अनुज पुत्र है कंटकासुर कुछ समय के लिया इसका ख्याल तुम्हे रखना है इसे यहाँ किसी भी तरह की कोई भी परेशानी न होने पाए

उनमे से एक दानव द्वारिका के सामने आ खड़ा होता hi

जो दिखने में कुछ बुजुर्ग पैर सरीर से बलिस्त नजर आ रहा था

द्वारिका ....... दानव नरबलि पुत्र कंटकासुर का सम्पूर्ण दायित्व आपका है अभी ये सम्मोहन में है हमारे जाने के बाद ये हमारे सम्मोहन से मुक्त हो जायेगा इसे इसके कक्ष तक पंहुचा दीजिये

दानव नरबलि ......जो आज्ञा महारानी जी

नरबलि के इसारे पे दो दानव आगे भाड़ कंटकासुर को प्रकट के एक दिशा में भाड़ जाते है जहा किसी तरह का पूतना महल था

द्वारिका के आदेश पे सभी दानव वह स लौट जाते केवल दानव नरबलि हे वह रुकता है

द्वारिका ......कहो नरबलि क्या कहना चाहते हो

नरबलि .....क्षमा करे महारानी जी पैर आप अपने हे पुत्र को यहाँ इस कैद में क्यों ले कर आयी है

द्वारिका ...... उसकी कुछ वजह है उसे यहाँ किसी तरह की समस्या नहीं होनी चाइये वो यहाँ जो कुछ भी करे करने दे

जब तक हम कोई आदेश न दे समाज गए

नरबलि ......जी महारानी जी

द्वारिका वह से ुशी दिशा में भाड़ जाती है जहा कंटकासुर को ले कर गए थे

कनकसुर एक कक्ष में बेसुध सोया हुआ था

द्वारिका ........तुमने ऐसा क्यों किया हम नहीं जानते है पैर हम बहुत जल्द इसका पता कर लेंगे तब तक तुम हमारी इस मायावी कैद में रहोगे

द्वारिका आगे भाड़ कंटकासुर के माथे पे अपना हाथ रख कुछ तामसिक मंत्रो का जाप करने लगती है डेरी डेरी द्वारिका के हाथ से निकली रेड ऊर्जा कंटकासुर के सर में सामने लगती है

जिस स कंटकासुर का सरीर तड़पने लगता है जैसे कोई कंटकासुर के सरीर को बिजली के जटके दे रहा हो

कुछ डेफ बाद द्वारिका की आँखों के सामने कुछ दृश्य आने लगते है जो की बहुत धुंदले धुंदले से थे

तभी अचानक कंटकासुर की आँखे खुल जाती है

आवर कंटकासुर तेजी से बिस्तर से खड़ा हो द्वारिका की गर्दन अपने पंजो में कसने लगता है

कनकसुर की आजके पूरी तरह से काली पद चुके थी उसके आँखों के साथ साथ उसकी पलके भी पूर्ण रूप से काली हो चुकी थी

द्वारिका .......ये क्या कर रहे हो पुत्र कंटकासुर हम तुम्हारी माता है हमें मुक्ति करो

कनकसुर .......हमें अपनी इस मायावी कैद से मुक्त करो अन्यथा हम अभी तुम्हारी ाँसे चीन लेंगे

द्वारिका ......कोण हो तुम तुम मेरे पुत्र कंटकासु नहीं हो सकते हो

कंटकासुर ........तुम्हारा पुत्र तुम्हारी तरह मूरख है मूरख द्वारिका

द्वारिका के गर्दन पे कंटकासुर के हाथो की पकड़ आवर मजबूत होने लगती है

द्वारिका ......हमें पीड़ा हो रही है पुत्र कंटकासुर

कनकसुर ......हमें इस मायावी कैद से मुक्त करो अन्यथा हम तुम्हारे प्राण हर लेंगे

अच्चानक से कंटकासुर की पकड़ स्वाट हे कुछ ढीली पद जाती है आवर कंटकासुर के मुँह से अपने आप विचित्र मंटा गूंजने लगते है

जिसका असर द्वारिका पे होता है आवर डेरी डेरी द्वारिका कंटकासुर के उन मंत्रो के प्रभाव से सम्मोहन में बाँड्ने लगती है

जब मंत्र उच्चारण पूर्ण हुआ तो देरिदा के गर्दन स कंटकासुर अपना हाथ हटा लेता है

अब द्वारिका की आँखे भी पूरी तरह से काली पद चुकी थी

कंटकासुर हमें यहाँ से बहार ले कर चलो

कनकसुर का आदेश द्वारिका मानते हुए कक्ष से बहार निकल आती है कंटकासुर उसके पीछे पीछे बहार निकल आता है .

द्वारिका को ऐसा किसी पुतले के जैसा चलता देख नरबलि सामने आता है पैर कंटकासुर अपने पेअर के एक प्रहार से नरबलि को दूर फेंक देता है

आवर द्वारिका के साथ साथ बहार निकल आता है

जहा कंटकासुर अपनी मायावी सकती का प्रयोग द्वारिका पे करता है

कुछ हे पालो में द्वारिका वह मूर्छित हो जाती है

उसके कुछ पल बाद हे कंटकासुर भी वही मूर्छित हो जाता है

उसके भीतर से कुछ काले रंग की ऊर्जा निकलती है जो द्वारिका को कुछ देर कवर करती है

उसके कुछ देर बाद वह ऊर्जा वह से गायब हो जाती है आवर द्वारिका वह से उठ कर असुर महल की तरफ चलने लगती है

कनकसुर अभी भी वही ुशी अवस्था में मूर्छित पड़ा हुआ था

द्वारिका सूर्यौदय से कुछ समय पूर्व हे असुर महल पहुँचती है आवर चुप चाप अपने बिस्तर पे लेट जाती है

दोपहर के समय नरकासुर अपने कक्ष में बैठा हुआ था तभी वह अग्निमुखासुर आता है

अग्निमुखासुर. ......परनाम पिता श्री

नरकासुर ......आओ पुत्र अग्निमुखासुर कहो पुत्र क्या बात है

a.asur .......पिता श्री अभी आप पूर्ण रूप से स्वस्थ है अब हमें अपने सत्तू की खोज सुरु कर देनी चाइये

अभी तक हम उस अनजान सत्रु तक नहीं पहुंच पाए है या उसके विषय में कोई भी जानकारी नहीं जूता पाए है

नरकासुर ...... तुम उचित कह रहे हो पुत्र हमें महाकाल के अंश का पता करना हे होगा पिचकी बार वो इन सब से अनजान था कही उसे सब ज्ञात न हो गया हो

a.asur .......पिता श्री मैं आज हे सभी लोको में अपने विशेष गुप्तचर को भेजता हूँ

नरकासुर .....उसकी कोई आव्सय्कता नहीं है पुत्र जिनलोक परीलोक परतविलोक वह नागलोक इन लोको पे अपने गुप्तचरी को नजर रखने को कहो

a.asur ......आप इतने विश्वाश से कैसे कह सकते है पिता श्री की महाकाल का अंश इन्ही लोको में हो सकता है आवर परीलोक में हमारा कोई भी गुप्तचर परिवेश नहीं कर सकता है

नरकासुर ......क्युकी महाकाल अंश का परीलोक जिनलोक परतविलोक से कुछ न कुछ सम्बन्ध अवश्य जब हमने महाकाल अंश मानव सूर्य को चाल से सडयंत्र के तहत मारा तहत अब इन लोको से जुड़े मुख्या लोग वह मौजूद थे जब महाकाल ने क्रोधवश हमें कैद किया था

a.asur ......जैसा आपका आदेश पिता श्री हम अभी से इस कार्यलग जाते है

नरकासुर ........असुरगुरु परतविलोक पे है इस लिया उनसे हम संकरक करते है

बाकि लोको में अपने अपने गुप्तचर भेजो

किन्तु याद रहा उन्हें केवल गुप्तचरी करनी है वह किसी भी कारन उनका भेद नहीं खुलना चाइये

a.asur ......जो आज्ञा पिता श्री

अग्निमुखासुर नरकासुर को परनाम कर वह से निकल जाता है


परीलोक .......

सूर्य जोरावर जी के साथ सुनहरी ड्रैगन पे स्वर पारी महल से काफी दूर निकल जाता है

सुरुहत में जोरावर को कुछ भय लगा पैर डेरी डेरे उन्हें भी इस आसमानी सफर में मज़ा आना लगता है

सूर्य .....मां जी अभी मज़ा आ रहा है की नहीं

मां जी ......सुरु में तो दर लगा था पैर अभी बहुत मज़ा आ रहा सूर्य बीटा

सूर्य ........मुझसे कुछ कहना है क्या मां जी

मां जी ......है पैर यहाँ नहीं चलो वो सामने खूबसूरत पहाड़ी है ुशी पे चलते है

सुनहरी ड्रैगन ुशी खूबसूरत रंग बिरंगे खुशबूदार फुल्लो से भरी पहाड़ी पे उतर जाती है

सूर्य आवर जोरावर ड्रैगन से निचे उतर वही हरी हरी घास में बेथ जाते है

मां ji......beta तुम्हारे जाने के बाद हमने तुम्हारी आवर स्वीटी की विवाह के बारे में आपस में चर्चा की आवर सब तुम्हारी आवर स्वीटी की सदी को ले कर त्यार है पैर ......

सूर्य ...... मां जी मैं जनता हूँ आप चाहते है की स्वीटी आवर मेरा विवाह सूरजगढ़ में हो

पैर ये संभव नहीं है क्युकी रिश्ते में स्वीटी मेरी बहन लगती है

मां जी ......तुम कुछ नहीं कर सकते हो क्या

सूर्य ......आप क्या चाहते है वह बताइये मां जी

मां जी ......मैं चाहता हूँ की स्वीटी आवर सपना की डॉली सूरजगढ़ हवेली से उठे

हर माता पिता का यही तो एक सपना होता है की वह अपने बच्चो को हाशि ख़ुशी ढेरो आशीर्वाद के साथ विदा करे

मेरी भी यही ख्वाइश है बीटा

सूर्य ......ठीक है मां जी मैं अभी तो आपको कोई अस्वासन नहीं दे सकता हूँ पैर गुरुदेव स्व इस विषय पे बात जरूर करूंगा मैं

मां जी .......वैसे ये जूलिया बेटी का क्या चाकर है जो शिव बोल रहा था मुझे तो बता हे सकता है तेरा मां बाद में हूँ पहले हम दोस्त है

सूर्य ......ये कब हुआ मां जी

मां जी ........अब बता भी दे बीटा

सूर्य ......मां जी वो भी मेरी बीबी बनेगी आगे जा कर के

मां जी ......कही पे रुकने का सोचा भी है की नहीं

सूर्य ......पता नहीं मां जी किस्मत में क्या क्या लिखा है या कोण कोण

चलिए अब चलते है वैसे भी आज फूफा जी को लेन जाना था पैर अब लगता है सुबह हे जा पाउँगा

सूर्य जोरावर दोनों ड्रैगन पे स्वर पारी महल की तरफ निकल गए ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........

सॉरी दोस्तों ये अपडेट थोड़ा छोटा हे पोस्ट कर रहा हूँ

कुछ काम आ जाने से आज इतना हे पोस्ट कर रहा हूँ .........
 
आज तो बिना अपडेट दिए हे कमैंट्स रिप्लाई करते करते हे नानी याद आ गई हाहाहाहा

ऐसा लग रहा जैसे हाफ से ज्यादा अपडेट लिख चूका हूँ

5 पं तक अपडेट पोस्ट करता हु फ्रेंड्स .........
 
अपडेट. 178

मां जी .......वैसे ये जूलिया बेटी का क्या चाकर है जो शिव बोल रहा था मुझे तो बता हे सकता है तेरा मां बाद में हूँ पहले हम दोस्त है

सूर्य ......ये कब हुआ मां जी

मां जी ........अब बता भी दे बीटा

सूर्य ......मां जी वो भी मेरी बीबी बनेगी आगे जा कर के

मां जी ......कही पे रुकने का सोचा भी है की नहीं

सूर्य ......पता नहीं मां जी किस्मत में क्या क्या लिखा है या कोण कोण

चलिए अब चलते है वैसे भी आज फूफा जी को लेन जाना था पैर अब लगता है सुबह हे जा पाउँगा

सूर्य जोरावर दोनों ड्रैगन पे स्वर पारी महल की तरफ निकल गए ........

अब आगे .......


परतविलोक ...... कुछ दिन पूर्व हिंदुस्तान की सीमा से लगते बॉर्डर के समीप जहा कुछ समय पहले सूर्य आवर मेर्री जी ने तांडव मचाया था उन कैंपो में जहा आतंकवादियों का सफाया किया था

वह कुछ लोग रात के अंदर कुछ खोजबीन कर रहे थे

पैर सबसे विचित्र बात ये थी की इन सभी की वस्त्र काळा थे आवर न इनके पास किसी तरह का कोई हतियार मौजूद था अगर ये आतंकी नहीं थे तो कोण थे

चलिए देखते है ये लोग कोण है आवर आखिर इतनी रात को ये लोग क्या खोज भीं कर रहे है यहाँ पे

इन्हे जो लीड कर रहे थे दिखने में किसी तेजस्वी साधु सामान उनका तेज था बड़ी बड़ी सफ़ेद बाल बड़ी हुए दाढ़ी ( बर्ड्स) हाथो में को मैजिकल स्टिक जैसा कुछ था

इनके पीछे हे 5,से 6 लोग आवर भी थे सरीर से सभी बलिस्त आवर मजबूत थे

बुजरुग .....हम यहाँ जिस सकती जिस ऊर्जा का पीछा करते हुए पहुंचे है उसके विषय में कुछ आवर ज्ञात हुआ

आदमी 1. .....असुरगुरु ( जी है दोस्तों ये असुरगुरु हे है ) हमने पूरा जंगल छान मारा पैर एक दो स्थान के आलावा हमें कही भी कुछ नहीं मिला यहाँ

असुरगुरु ........ यहाँ मौजूद पांच तत्वा ऊर्जा में से अग्नि तत्वा की ऊर्जा प्रयोग हुई है किन्तु उसके साथ साथ यहाँ किन्ही दो ऊर्जा का प्रयोग किये जाने के साक्ष्य भी यहाँ मौजूद है तुम सभी फिर इस इस स्थान की बरी की स जाँच करो

आदमी 1 .....गुरुदेव यहाँ अत्यधिक मात्रा में रक्तपात हुआ है जैसे यहाँ आसुरी सकती के अनुयायी मौजूद रहे हो

असुरगुरु ...... है क्युकी यहाँ जिनका संघार हुआ था वो आत्मिक रूप से असुर हे थे

आदमी 2.... गुरुदेव यहाँ अभी भी बहुत आदिक मात्रा में भटकती हुई आत्माये मौजूद है उनका क्या आवर किसने इनका संघर्ष किया होगा

असुरगुरु ...... इनके करम हे भटकने वाले है जब मनुष्य योनि में थे थे भी अपने मार्ग से भटके हुए थे मृत्यु के पश्चात भी भटक रहे है

यही इनके करम है हमें अपना कार्य कर यहाँ से निकलना है तुम सब खोजबीन करो मैं ध्यान के माद्यम स यहाँ जो घटित हुआ उसका पता करता हूँ

असुरगुरु की बात मन सभी व्यक्ति वह खोजबीन फिर स सुरु कर देते है

वही असुरगुरु ुशी स्थान पे ध्यान लगा कर बेथ जाते है

कुछ हे समय पश्चात असुरगुरु के आँखों के सामने वह जो भी घटना घटित हुए थी ( काल आवर आतंकियों के मध्य का योध ) वह का सीन्स डुंडला डुंडला असुर गुरु के आँखों के सामने चलने लगता है

कुछ समय बाद गुरुदेव कैंप 3एंड 1 के सीन दिखने लगते है ( काल की ऊर्जा सकती आदिक होने के कारन

( असुरगुरु काल के उस रूप को देख नहीं पते है )

तभी गुरुदेव को उस दूसरी ऊर्जा का पता चलता है जो की सकती की थी

सकती के वास्तविक ऊर्जा को पहचानते हे असुरगुरु की आँखे खुल जाती है

असुरगुरु .......ये मानव कोण है जिसकी ऊर्जा सकती इतनी आदिक है जिसने इन सभी पापी या का अंत किया आवर मैं अपने पाठक प्रयाश के बाद भी उसका आकाश स्पष्ट क्यों नहीं देख पाया

आवर ये दूसरी ऊर्जा सकती तो परीलोक से ऐसी ऊर्जा सकती परीलोक से जुडी हो कोण है आवर इन दोनों ऊर्जा सकती का आपस में सम्बन्ध क्या है

ऐसी हे ऊर्जा सकती तो मुझे पुत्र काल से मह्सुश हुई थी मुझे इस विषय में पुत्र काल से चच्चा करनी चाइये सायद इस विषय में पुत्र काल को कुछ ज्ञात हो

काफी समय अपने हे विचोरोए असुरगुरु खोये रहते है

तभी वह एक एक कर वो सभी लोग असुरगुरु के सामने आ जाते है

आदमी 1 .....असुरगुरु हमें एक बार फिर से पुरे जंगल को सन किया हमें यहाँ कुछ भी नहीं मिला अब आगे क्या आदेश है आपका

असुर गुरु तुम सभी यही मौजूद रह कर आस पास की के लोगो से इस घटना के विषय में पता करो हमें कुछ आवर ऊर्जा के वृष्य में ज्ञात हुआ है

मैं उस ऊर्जा स्त्रोत का पता करता हूँ

असुरगुरु उन्हें वह क्या कर न वो सब समजा कर वह से गायब हो जाते है

वही बाकि बचे 6 लोग अपना भेष बदल 2 ,2 के ग्रुप में वह से निकल जाते है

कुछ आवर जानकारी जुटाने के लिया

वही असुरगुरु किसी गुफा में प्रकट होते है

आवर जमीं पे कुछ करने लगते है देखने पे लग रहा था जैसे वो किसी यज्ञ या किसी तरह की तांत्रिक पूजा की तयारी में लग जाते है


परीलोक ...... रात्रि भोजन के बाद सूर्य कुछ समय शालिनी जी आवर रेखा जी के साथ बिताने के बाद जब अपने कक्ष की आवर रहा था

तभी एक कक्ष का दूर खुलता है आवर उसमे से एक हाथ बहार निकलता है जो सूर्य का हाथ ताम कर उसे उस कक्ष के भीतर खींच लेता है

जैसे हे सामने सूर्य की नजर पड़ती है तो उसके होंटो पे कमुख मुस्कान फ़ैल जाती है






क्युकी सामने मेर्री जी ऐसे हॉट अवतार में कड़ी

सूर्य के अपने खूबसूरत उड़न का जैम पीला रही थी

सूर्य ......क्या बात है ममी जी आज तो आप क़यामत लग रही है

मेर्री जी .....कितनी बार कहा है सूर्य ममी जी सदी के बाद कहना अभी केवल मेर्री है अगर तुम चाहो तो तब तक मेरी मेर्री कह सकते हो हेहेहे

सूर्य ......लगता है आज आपके इरादे कुछ आवर हे है

मेरी जी सूर्य के सामने आ उसकी आँखों में आँखे दाल अपने लरजते हुए कोमल होंठ सूर्य के होंटो से लगा देती है

सूर्य भी मेर्री जी की तड़प को मह्सुश कर बड़े प्यार से मेर्री जी के तपते हुए मधुरेश से भरे कोमल होंटो को प्यार से चुम्लाने लगता है

सूर्य जादू से उस कक्ष को सिक्योर कर कुढ़ के कपडे गायब कर अपने दोनों हाथ मेर्री जी की मखमली कमर में दाल सूर्य मर्री जो को कुढ़ से सत्ता लेता है

आवर उसकी ब्रा खोल कर अलग कर देता है






मेर्री जी किश करते हुए सूर्य के सीने पे अपनी नुकीले निप्पल्स रगड़ने लगती है

कुछ देर बाद सूर्य अपना एक हाथ कमर से से खिसकते हुए मेरी जी के उन्नत सुडोल स्पंच जैसे कोमल चूचियों पे रख सहलाना सुरु कर देता है

5से 7 मिनट्स चले इस किश से मेर्री जी की सांसे बहुत तेज चलने लगी जिस से मेरी जज की उन्नत उभर भी सांसो के साथ ऊपर निचे होने लगे जिनपे सूर्य की नजर टिक गई जिसे देख आसाराम से मेर्री जी अपने पीठ सूर्य की आवर कर अपनी चूचियों पे सूर्य की नजरो में केंद्र बनने से हटाना चाहती थी

सूर्य मेर्री जी की बगल से हाथ दाल कर मेर्री जी की पीठ अपने सीने से चिपका लेता है आवर एक बार फिर अपने मजबूत हाथ उन प्यार चूचियों पे रख कर उनकी कठोरता काम करने लगता है

मेर्री जी सूर्य का चाहता अपनी तरफ कर अपनी चूचिया मसलवटे हुए अपने होंटो का राश पिलाने लगती है






कुछ देर किश करने वह दोनों चूचिया के संग प्यार करने के पश्चात सूर्य मेर्री जी को उठा कर बाथरूम की आवर भाड़ गया

मेर्री जी .......उम्म्म्मः वह कहा जा रहे हो बीएड उदार है

सूर्य ......ुम्मम्हा आपके साथ नहाते हुए प्यार करना है कोई प्रॉब्लम है

मेर्री जी ....कोई प्रॉब्लम नहीं है मेरी जान जहा चाहो वह प्यार करो उम्म्म उम्म्म

सूर्य मेर्री जी को बाथरूम में ला कर खड़ा कर देता है दोनों के सरीर पे केवल अंडरवियर आवर पंतय बची हुई थी

सूर्य शावर ों कर मेर्री जी को अपने साथ लगते हुए उनके निप्पल्स को मुँह में भर चूसने लगता है

ऊपर से गिरते ठन्डे ठन्डे गालब की खुसबू से युक्त पानी दोनी के सरीर में एक नयी जान भर रहा था

मेर्री जी ......उम्म्म्म. अह्ह्ह्हह्हह सूर्य बहुत तड़पा है मेरा ये सरीर तुम्हारे इस प्यार भरे स्पर्श के लिया

सूर्य .....उम्मम्मम्माह्ह्ह फिर आपने कहा क्यों नहीं जब इतनी हे तड़प रही थी

मेर्री जी सूर्य के भोगे हुए अंडरवियर के ऊपर से हे उसके लिंग को सहलाते हुए

मेर्री जी .......क्युकी मैं नहीं चाहती थी की मेरी ख़ुशी के लिया तुम किसी आवर का समय मुझे दो अब तुम सभी से मिल लिए अच्छे से तो अभी मैंने भी सोचा यही मौका है मेरे पास

सूर्य ......क्या बात सभी का ख्याल रखा जा रहा है

मीरी जी निचे बैठते हुए

मेर्री जी ......ये मेरा भी परिवार है मर .मैं अपने परिवार का ख्याल नहीं रखूँगी तो कोण रखेगा

वैसे तुम्हारी इतनी बिबिया है कैसे संभालोगे

वैसे ये कुछ ज्यादा हे बड़ा लग रहा है

जैसे जैसे बिबिया भाड़ रही है वैसे वैसे ये भी भाड़ रहा है






मेर्री जी प्यार से सूर्य की भीगी हुई अंडरवियर के ऊपर से हे सूर्य के किंग कोबरा को चूमने लगती है

सूर्य .....ये आपने सही कहा मेर्री जी की ये आपका अपना परिवार है इसका ख्याल रखने का पूरा हक़ है आपको

आपको अलीना आवर मेरे रिश्ते के लिया बुरा नहीं लगता क्या

मेर्री जी का हाथ अचानक से सूर्य के अंडरवियर में गुस्ते गुस्ते रुक जाता है

मेर्री जी की आँखों से 2 बून्द आंसू निकल कर शावर के पानी में मिक्स हो जाते है

पैर सूर्य से ये सब चुप न सका सूर्य को भी अपनी गलती का अहसास हुआ पैर तीर तो कमान से निकल चूका था

सूर्य मेर्री जी को उठा कर किश करने लगता है

जिस से मेर्री जी कुछ हे पालो में नार्मल हो जाती है


सूर्य .....सॉरी मेर्री जी मेरा मकसद आपका दिल दुखाना नहीं था

मीरी जी सूर्य के सीने से चिपके हुए अपनी आँखे बंद कुछ देर खामोशी रहती है






मीरी जी ........ मैं हमेश का लिया आपकी नहीं हो सकती हूँ

इसके पीछे जरूर कोई बझा रही होगी तभी तो मैं आपकी वाइफ नहीं बन सकती हूँ

सायद मेरी किस्मत आपके मां जी के साथ जुडी है

सूर्य ......मैं ये सब तो नहीं जनता हूँ पैर ये जरूर है की आप वो पहली है जिस से मुझे स्त्री पुरुष के मिलान का गायन वह सुख मिला भले हे मेरी पत्नी नहीं बन पाओगी पैर पति पत्नी के मिलान का ज्ञान आपसे मिला इस लिया आपसे मैं हमेशा प्रेम करता रहूँगा

मेर्री जी ......हहहहए हमेशा मुझसे प्यार करोगे तो मेरी पुसी का क्या होगा ये मुझे अच्छे से पता है

आवर मेरी बहन अलीना आवर बाकि बहनो का क्या हम्म्म

सूर्य .....उन्हें भी उनका हक़ वह प्यार मिलेगा पैर आपला जब भी दिल हो बेझिजक अपना हक़ जाताना वैसे भी आपसे प्यार करने का एक आवर रिस्ता भी तो बन गया है

आप मेरी बड़ी साली जो लगती है हाहाहा

मेर्री जी बड़े हे कामुक तरीके से सूर्य के सामने अपनी पंतय निकल फेंकती है






मेर्री जी बड़े हे कमुख अंदाज में अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को सूर्य के बदन से रगड़ते हुए हुए

घुटनो पे बेथ जाती है आवर सूर्य की अंडरवियर निकलने लगती है

जैसे हे अंडरवियर थोड़ा निचे खिसक ता है सूर्य का लिंग किसी कोबरा के जैसे फुफकारता हुआ सीधा मेर्री के गुलाबी होंटो पे जा लगता है

मेर्री जी एक पल के लिया तो पीछे हुई पैर जैसे सूर्य का लैंड किसी पेंडुलम के जैसे अपने होंटो के आसपास मूल्य हुआ देखा उसकी हंसी छूट जाती है

मीरी जी .....उम्मम्मम्हा सूर्य से पहले से बड़ा लग रहा है या मेरा कोई वहां है

मेर्री जी सूर्य के लिंग के लिंगमुण्ड को चुम लेती है






आवर उसे बड़े गौर से देखने लगती है

सूर्य .....ये आपका वहां नहीं है जैसे जैसे मेरी सक्रिय भाड़ रही है वैसे वाइज इसका भी आकर भाड़ रहा है

मेर्री जी सूर्य के लिंगमुण्ड को अपने मुँह में भर अपनी लपलपाती जुबान उस मोठे आगरा भाग पे फिरने लगती है आवर चूसने लगती है






डेरी डेरी सूर्य के मुँह से कमुख सिसकारियां निकलने लगती है

वह स्वतः हे सूर्य का एक हाथ मेर्री जी केभीगे बालो पे चला जाता है

आवर हलके हलके सूर्य की कमर चलने लगती हाउ

सूर्य ......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह मेर्री जी आज कुछ नया नया लग रहा आपके साथ जो पहला अनुभव था उस से विपरीत उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है

मेर्री जी सूर्य को एक नजर देख फिर से ुशी तन्मयता के साथ सूर्य की लिंग को पूरा अपनी मुख के भीतर लेने की कोशिश करती है जो की संभव नहीं था

कुछ देर की चूसै के बाद मेर्री जी के जबसे आदिक खुलने को बझा से दर्द करने लगते है तो मेर्री जी सूर्य को लिंग को अपने मुँह से निक देती है

सूर्य ......अब मेर्री बारी ुम्मम्हा

कह कर सूर्य मेर्री जी की पीठ दिवार से लगते हुए शावर के निचे खड़ा कर देता है

आवर खुद निचे बैठा अपने दोनी उँगलियाँ मेर्री जी की योनि में दाल कर अंदर बहार करते हुए अपना मुँह योनि से चिपका कर योनि को चाटने लगता है






मेर्री जी की योनि पे ुघे हुए हलके बालो में पानी की बुँदे ोष के बूंदो के सनान प्रतीत हो रही थी

सूर्य की मुख की गर्मी को अपनी योनि पे मह्सुश करने भर से मेर्री जी की योनि में स्पंदन होने लगता

मेर्री जी की योनि को दोनों होंठ फड़फड़ाने लगती है

मेर्री जी .......उम्म्म्म अह्ह्ह्हह्हह उफ्फ्फफ्फ्फ़ सूर्य बहुत अच्छा लग रहा ऐसे हे उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह प्यार करो






सूर्य निरंतर अपनी जइब वह उँगलियों के प्रहार के सामने मेर्री जी ज्यादा समय टिक नहीं पति है

चरम सुख के प्रभाव से मेर्री जी का बदन सूखे पते की तरह कपङे लगता है

कुछ हे पालो में मेर्री जी की योनिकुंड में रुका हुआ अमृतराश सूर्य के मुँह में जाने लगता है

जिसे सूर्य बिना किसी हिचक या जीजाक के चाट लेता है

कुछ समय के अंतराल के बाद जब मेर्री जी सयंत हुई

सूर्य मेर्री जी वही बाथरूम के फर्श पे लेता देता है

आवर मापनी अकड़े हुए लिंग को कमरष से चिकनी योनि पे अपने ढकते हुए लिंगमुण्ड को फिरने लगता है

मेर्री जी ......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह सूर्य अब आवर न तड़पाओ मेरी पुसी में खुजली हो रही है प्लेसेस अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

सूर्य मेर्री जी के भटके हुए ध्यान का फायदा उठा कर अपने लिंगमुं को मेर्री जी की योनि में प्रवेश करा देता है

जिस से मेर्री जी की एक दर्द भरी कराह निकल जाती है






सूर्य .......बस बस मेररयजी जी अभी दर्द नहीं होगा

मेर्री जी .....आआह्ह्ह्ह मेरी छूट चिर गयी है तुम्हारे इस मोठे लैंड से

सूर्य डेरी डेरी मेर्री जी की छूट में अपने उतने हे लिंग को अंदर बहार करते हुए हेल हेल अंदर डालने लगता है

जिस से जल्दी हे मेर्री जी को मज़ा आने लगता है आवर उनके बदन में एक बार फिर से गर्मी भढने लती है

सूर्य मेर्री के चूचियों आवर योनि के साथ खेलने लगता है

वही मेर्री जी के मुँह से निरंतर ाः ुह्ह्हह्ज हम्म्म की कमुख सिसकारियां बाथरूम में गूंजने लगती है






सूर्य अपने लिंग पे मेर्री जी की योनि के एंड ऋणी हिशे में खिचाव मह्सुश कर समाज जाता है की मेर्री जी फिर से वक बार अपने चरम सुख की आवर अग्रसर है

ये जान कर सूर्य तेजी स मेर्री जी की योनि में अपनी लिंग की इन आउट करने लगता है

मेर्री जी का पेट ऐसे कम्पन करने लगता है जैसे किसी ने वाइब्रेटर ों कर दिया हो

कुछ हे पालो में सूर्य कक अपने मोठे सुपाड़ी के अगर भाग पे एक के बाद एक गरम तरल की पिचकारी मह्सुश होती है

सूर्य एक तेज प्रहार के साथ अपना बचा हुआ लिंग भी मेर्री जी की गर्भशय तक पंहुचा देता है

मेर्री जी .......ummmm.Ahhhhhhh तुम ठीक से मुझे झड़ने का मज़ा भी नहीं लेने दिया

सूर्य ......उम्मम्मम्हा अगर ऐसा नहीं करता तो बाद में फिर से आपको दर होता जो मुझे अच्छा नहीं लगता

मेर्री जी. ......फिर बार बार दर्द क्यों देते हो एक हे बार इसे अपने लायक बना दो ताकि हर बार इस दर से गुजरा न पड़े उम्मम्माह

सूर्य मेर्री जी को ुशी तरह लेते हुए अपने लिंग को निकले बिना अपने ऊपर ले लेता है






आवर डेरी डेरी मेर्री जी की छूट में अपना लैंड दाल चुदाई करने लगता है

जैस जैसे सूर्य आवर मेर्री की चुदाई आगे भाड़ रही थी

वैसे वैसे सूर्य का लैंड आवर आमद रहा था

उसकी नशे उभर कर फुल रही थी जिस स मेर्री जी को इस पोज़ में पहले से ज्यादा मज़ा आ रहा था






इस प्यार भरी माध्यम गति के सम्भोग शुक से दोनों खुश थे

हर जटके साथ मेर्री जी के खूबसूरत चूचिया ऊपर निचे हो रही थी जिन्हे सूर्य बड़े गौर स देख रहा था

मेर्री जी जब सूर्य की नजरो का पीछा करती है तो अपनी हिलती हुई चुचिपे पे प् कर मेर्री जी खुद से सूर्य का हाथ थम कर अपनी हिलती हुए चूचियों पे रख देती है






वही सूर्य के कक्ष में किरण काफी समय से जीनत के साथ सूर्य का इंतजार कर रही थी

जब सूर्य नहीं आया तो जीनत ने सोना हे बेहतर समजा

पैर किरण उसका वही जागते हुए इन्तजार करने लगी

किरण .....अब तो उन्हें आ जाना चाइये था है कहा वो

किरण अपने आँखे बंद कद पुरे महल को सन करती है तो सूर्य उसे कही नजर नहीं आता

किरण ......ये महँ में नहीं है तो फिर है कहा आवर मेर्री जी भी नहीं है


एक मिनट्स मेर्री जी के रूम मैं जनक क्यों नहीं पायी इसका मतलब वो दोनों

वहज पे है आवर इन्होने अपनी सकती से किसी कवच से उस रूम को सिक्योर किया है बाकि सभी की नजरो से हम्म्म

पैर ये भूल गए की मैं कोण हूँ हहहहए

किरण एक बार फिर से फिर से मेर्री जी के रूम में झांकती है कुछ पालो की परेशानी के बाद जैसे हे स्वीटी की नजर मेर्री के बाथरूम में जाती है जहा सूर्य मेर्री जी को बाथ टब के सहारे घोड़ी बनाये हुए पेलने में लगा हुआ था






किरण ......हम्म्म तो ये कांड कर रहे हो आप दोनों

पैर आप भूल गए आपकी रासलीला मुझसे नहीं चुप सकती मेरे बुद्धू
कृष्णा कन्हैया क्या मुझे देखना चाइये

या फिर रहने दूँ

उदार सूर्य अब ुर मेर्री दोनों हे अपने चरम पे पहुंच चुके थे मेर्री की झड़ते हे सूर्य अपना लैंड योनि से निकल मेर्री जी के मुँह में दे देता है दोनों के मिश्रित कमरष से लिथड़ा हुआ






जिसे मेर्री जी अच्छी तरह से स्वाद लेते हुए चाट पूछ कर साफा चाट कर देती है

किरण की जब फिर से नजर पड़ती है तो सूर्य का लिंग मेर्री जज के मुँह में था






किरण ........ये लो यहाँ तो शो ख़तम हो गया अब क्या फायदा देखने का हेहेहे

जीनत .......क्या हुआ स्वीटी

किरण ........कुछ नहीं आप सो जाओ आराम से

जीनत .......वो अभी तक नहीं आये

किरण .......हेहेहे उनका काम अभी ख़तम हुआ है आते हे होंगे कुछ मिनट्स में

जीनत .......क्या सच में

किरण .....हम्म्म बड़ी जल्दी है उनसे मिलने की इतना तो कोई हमारा भी इन्तजार नहीं करता है हहहहए

जीनत ......कुछ भी है आपको जितना वो चाहते है उतना तो सायद हे किसी को वो चाहते होंगे

किरण ......है ये सच है की वो हमें बहुत चाहते है पैर कोई आवर भी है जिसे वो उतना हे प्यार करते है जितना की हमसे

अगर हम दोनों में से किसी एक को चूमना पड़े तो नहीं नहीं हे महाकाल ऐसा दिन कभी न आये

जीनत .....कोण है वो जिन्हे सूर्य इतना प्यार करते है

किरण ......उनके लिया इनका प्यार दूसरी टाइप का है जब आप सूर्य को अच्छे से समाज जाओगी तो उन्हें खुद बा खुद समाज जाओगे अब कोई बात नहीं इस बारे आपके वो आ गए है

ुशी वक़्त सूर्य अपने कक्ष में अन्तर करता है सामने किरण वह जीनत को देख सूर्य के हाव भाव बदलने लगते है जिन्हे देख किरण अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थे पैर चेहरे पे नकली बनावटी गुस्से से सूर्य को गुरति है

सूर्य ...... सॉरी स्वीटी सॉरी जीनत मेरी वजह से आपको इतना ीतजए करना पड़ा

किरण .......सब जानती हूँ मैं आपकी आवर मेर्री की वजह से

जीनत .......ये आप क्या कह रही है

किरण ......कुछ नहीं ीदार आ कर लेट जाओ वैसे नाहा कर तो आये हे होंगे आप

किरण की बात सुन आवर उसके गुस्से भरे चेहरे को देख सूर्य की पूरी मस्ती फर हो जाती है

सूर्य चुप चाप आ कर दोनों के बिच लेट जाता है

सूर्य के ऐसे मुरझाये हुए चेहरे को देख स्वीटी अंदर हे अंदर हैश रही थी

जीनत .......कहा थे आप हम आपका कब से वेट कर रहे है

सूर्य ......सॉरी जीनत वो कुछ काम था

जीनत सूर्य के नंगे सीने पैर सर रख सहलाने लगती है

वही किरण सूर्य को तड़पने के चाकर में दूसरी तरफ करवार ले कर लेट जाती है

सूर्य को स्वीटी से इस तरह के रवैये की उम्मीद बिलकुल नहीं थी

कुछ हे देर में जीनत की फिर से आँख लग जाती है

वही सूर्य की आँखों से तप तप कर आंसू पिलो पे गिरने लगते है

जिसका अहसास किरण को हो जाता है

जैसे हे किरण को सूर्य के दुःख का अहसास होता है तो किरण जल्दी से पलट कर सूर्य को देखती है जिसकी बंद आँखों के किनारे से अश्रु धरा बाह रही थे

जिसे देख खुद बा खुद किरण के भी आंसू निकलने लगते है

( किरण ......ये मैंने क्या किया जब की मुझे सब पता है मैंने हे इन्हे परमिशन दी थी )

किरण सूर्य पे जूख्ट हुए आँखे से बहते आंसू चुम लेती है

कैसे हे सूर्य को अपने गलो पे चूमने का अहसास होता है

सूर्य अपनी आँखे खोलता है तो सामने आंसूहो से भीगा हुआ स्वीटी का चेहरा देख

सूर्य को लगता है की स्वीटी ुशी के बझा से रो रही है तो सूर्य की आँखों से आवर ज्यादा आंसू बहने लगते है

किरण सूर्य की मनोदशा देख बिना कुछ कहे सूर्य की आहे पूछ अपने लरजते होंठ सूर्य के होंटो पे पे रख देती है है

सूर्य आवर किरण के होंठ मिलते हे दोनों के दिल में जो दर्द था एक दूसरे को तक्लिप पहुंचने का वह डेरी डेरी ख़तम हो जाता है

सूर्य ......सोरर....

किरण ......िस्स्सस्स कुछ मत बोलिये मैं सब जानती हूँ मुझे नहीं पता था मेरा मजाक आपको इतनी तक्लिप देगा मुझे माफ......

सूर्य ........उम्म्म्मममः फिर कभी माफी मत माँगा स्वीटी आवर मुझसे कभी मजाक में भी मुँह मत फेरना नहीं जी पाउँगा तुम सब के बिना

किरण .......अब आप ऐसी बाते कर मुझे रुलाना चाहते हो क्या आपके बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं

..सूर्य के बिना किरण का क्या अस्तित्व भला ..

जब सूर्य हे नहीं तो उसकी किरण कैसे उसके बिना अस्तित्व में रह सकती है

उम्मम्मम्हा ी लव यू भाई

सूर्य .......उम्मम्ममाहहह ी लव यू मोरे थें स्वीटी

किरण ......अब मुझे आपके सीने पे सोना है सुबह जब तक मैं न उठु आप नहीं उठोगे समजे

सूर्य .......पैर मेरा ध्यान

किरण ........स्स्स्सस्ठ्ठ कहा न नहीं तो नहीं

सूर्य .......ok माय लव स्वीटी उम्म्म्मः सुभ्रातृ स्वीटी

किरण .......सुभ्रातृ भाई .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............
 
अपडेट. 179

किरण .......अब आप ऐसी बाते कर मुझे रुलाना चाहते हो क्या आपके बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं

..सूर्य के बिना किरण का क्या अस्तित्व भला ..

जब सूर्य हे नहीं तो उसकी किरण कैसे उसके बिना अस्तित्व में रह सकती है

उम्मम्मम्हा ी लव यू भाई

सूर्य .......उम्मम्ममाहहह ी लव यू मोरे थें स्वीटी

किरण ......अब मुझे आपके सीने पे सोना है सुबह जब तक मैं न उठु आप नहीं उठोगे समजे

सूर्य .......पैर मेरा ध्यान

किरण ........स्स्स्सस्ठ्ठ कहा न नहीं तो नहीं

सूर्य .......ok माय लव स्वीटी उम्म्म्मः सुभ्रातृ स्वीटी

किरण .......सुभ्रातृ भाई .........


अब आगे ......

असुरलोक .........


कंटकासुर की जब मूर्छा ( बेहोशी ) ख़तम होती है

तब खुद को किसी अनजान निर्जन स्थान पे पड़े देख चौंक जाता है

कंटकासुर ने रात में जो कुछ भी नगीना आवर विसुद्धि के साथ किया था वह उसे डेरी डेरी याद आने लगता है

की कैसे नगीना आवर विसुद्धि दोनों ने मिल कर उसे मदिरा पिलाने के बाद नशे में सम्भोग के लिया उकसाया आवर कैसे उसने नशे में अपने पिता की बात को न मान कर नगीना आवर विसुद्धि के साथ अनगिनत बार सम्भोग किया

कंटकासुर ......ये मैंने क्या किया अगर इसके विषय में किसी को ज्ञात हुआ तो क्या होगा

आवर पिता श्री की आज्ञा की अवहेलना भी कर दी

उन्हें ज्ञात हुआ तो उनका विश्वाश टूट जायेगा

कंटकासुर कुछ देर वही बैठा रहा तभी उसके दिमाग में किसी की कर्कश आवाज सुनाई पड़ती है

कंटकासुर चारो तरफ देखता है पैर उसे कुछ भी नजर नहीं आता है

तभी एक बार फिर वही आवाज उसके दिमाग में गूंजती है

आवाज .......ीदार उदार क्या देख रहे हो कंटकासुर

कंटकासुर ....... कोण हो तुम जो मुझे पुकार रहे हो मेरे सामने आओ

आवाज ........वक़्त आने पे तुम्हारे सामने भी आऊंगा अभी जो तुम्हे दिखा रहा हूँ वो ध्यान से देखो

तभी कल रात जब कंटकासुर नशे की आदिकता आवर नगीना विसुद्धि के साथ सम्भोग की थकन से चूर हो कर सो जाता है उसके बाद की घटना उसकी आँखों के सामने चलने लगती है

हर पल के साथ कंटकासुर के दिल की धड़कन तेज होने लगती है

उसके पेअर कंपनी लगते है जब वो देखता है की उसके सोने के बात वह द्वारिका प्रकट होती है आवर उसके साथ कुछ करती आवर उसे वह से ले कर गायब हो जाती है

कैसे वह किसी अन्य जगह पंहुचा कैसे उसने द्वारिका का गाला दबाया सभी घटना देखने के बाद कंटकासुर की हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी

कंटकासुर ......नहीं ये मैं नहीं हो सकता हम मैंने द्वारिका ऐसा नहीं किया

आवाज ......जनता हूँ वो तुम नहीं थे किन्तु सरीर तो तुम्हारा हे था न जो की मेरे ादिन था

कंटकासुर ........कोण हो तुम मेरे सामने आओ अन्यथा तुम्हारा वध कर दूंगा

आवाज ......हाहाहाहा मूरख कंटकासुर जिसका जनम हे नहीं हुआ जिसका कोई जीवित अस्तित्व हे नहीं तुम उसका वध करोगे

अब मेरी बात ध्यान से सुनो तुम सर्व सकती साली बनना चाहते हो न ताकि अपने माता की हत्या का प्रतिशोध ले सको नरकासुर से आवर अपने पिता असुरगुरु के अपमान का बदला द्वारिका से

तुम्हे सब मिलेगा किन्तु इसके लिया तुम्हे मन से मुझे अपनाना होगा तुम्हे असुरराज कंटकासुर बनना होगा आवर ये तभी संभव है जब मेरी इच्छा अनुसार कार्य करोगे

कंटकासुर ......क्या ये संभव है क्या मैं असुरराज कंटकासुर बन सकता हु असुर लोक के सिंघासन मेरा होगा

आवाज ......है किन्तु उसके लिया तुम्हे मेरी आत्मा को दर्जन करना होगा क्युकी मेरा कोई सरीर नहीं

कंटकासुर .....क्याआ पैर कैसे आवर मैं हे क्यों मुझसे भी सर्वसक्तिसाली असुर है असुर लोक में

आवाज .......क्युकी तुम मुझे दर्जन करने में सक्षम हो पहले भी तुम मुझे दर्जन कर चुके हो

कंटकासुर ...... मैंने कब किया ऐसा

आवाज ......जब तुम्हे आसुरी किर्या को पूर्ण का अपनी दोनों बहने नगीना आवर विसुद्धि का कौमार्य मुझे सौंपा था

कंटकासुर ..... ातरत आप ....

आवाज .....है मैं वही हूँ जो तुम्हारी मस्तिष्क में चल रहा है तुम्हारे भीतर मेरा अंश है इस लिया तुम मुझे दर्जन कर सकते हो

कंटकासुर ......मुझे क्या करना होगा

कनकसुर अभी बोल हे रहा था की वह अचानक से 2 विशालकाय असुर प्रकट होते है जो दिखने में हे बहुत सक्तिसाली लग रहे थे जिन्हे देख कंटकासुर भी दर जाता है

आवाज .....गैब्रो नहीं ये मेरे हे मायावी शिष्य है इनका विवाह तुम्हे नगीना आवर विसुद्धि के साथ करवाना है

कंटकासुर ......आप सब जानते है उसके पश्चात भी

आवाज ......हाहाहा तुम्हारी चिंता वायरत है क्युकी विवाह भले हे इनके साथ होगा नगीना आवर विसुद्धि का पैर भोग उनका तुम हे करोगे मुझे दर्जन करके ये केवल माया है जिसके अन्य किसी की नजर में आये तुम दोनों को भोग सको

कंटकासुर ...... क्या मुझे कुछ पूछने की इजाजत है

आवाज ......पूछो क्या पूछना चाहते हो

कंटकासुर ......इस विवाह के पीछे की वजह क्या है

आवाज ......इस विवाह के पीछे का उद्देश्य है बगीना आवर विसुद्धि के घरब से तुम्हारे जरिया मेरे वास्तविक अंश को जनम देना है

( आवाज ......पूर्ण सत्य का तुम्हे कभी ज्ञान नहीं होगा कंटकासुर )

कंटकासुर .......किन्तु द्वारिका तो नगीना आवर विसुद्धि से बने मरे सम्बन्ध जानती है

आवाज .......द्वारिका मेरी कैद में है उसे ले कर तुम्हे चिंतित होने की आव्सय्कता नहीं है नगीना आवर विसुद्धि से जब भी रात्रि में सम्भोग करोगे तो मैं तुम्हारी भीतर प्रवेश कर उनके घरब में अपना अंश पैर वेश करूँगा

उन्हें इन दोनों से विवाह के लिया त्यार तुम्हे करना है किन्तु मेरे विषय में किसी को ज्ञात न हो न उन दोनों को आवर न तुम्हारे पिता असुरगुरु को समय के साथ तुम जैसे जैसे सम्बंद बनाओगे वैसे वैसे मेरी सकतिया तुम्हे प्राप्त होती रहेंगी अब तुम असुर महल लौट जाओ जगा द्वारिका के रूप में मेरी मायावी द्वारिका तुम्हारी पूरी सहायता करेगी

कंटकासुर ......जैसा आपका आदेश

कंटकासुर दोनों असुरो को कुछ समजा कर वह से निकल जाता है

उसके जाते हे दोनों मायावी असुर वह से गायब हो जाते है

वही असुर महल में वातापी चिन्ताग्रस्त हो ीदार से उदार टहल रही थी कंटकासुर की प्रतीक्षा में

तभी वातापी के कक्ष में नगीना आवर विसुद्धि अपनी भरी भरी वक्षो ( बूब्स) को हिलाते हुए चकते हुए प्रवेश करती है

कल रात्रि हुए दुहदार सम्भोग से दोनों के चेहरों पे चंचलता वह निखार आ गया था

नगीना ......भाभी श्री भ्राता कंटकासुर नहीं दिखाई दे रहे है सुबह से किसी कार्यवश महल से बहार है क्या भ्राता श्री

( वातापी ........ इनके स्वर में इतनी मदुरता क्यों है आज हमारे पार्टी )

वातापी ऊपर से निचे दोनों को निहारती है

वातापी की अनुभवी आँखों ने पहचान लिया था की कंटकासुर ने दोनों के अंगो पे बहुत म्हणत की है

वातापी ........नगीना आपके भ्राता श्री कल रात्रि से बहार है कल संध्या काल में आने का कह कर गए थे किन्तु अभी तक वह लौट का महल नहीं आये है


हम भी उन्ही की प्रतीक्षा कर रहे है

विसुद्धि .......हेहेहे क्या बात है भाभी श्री भ्राता श्री एक रात्रि आपके समीप नहीं आये तो आप इतनी वयाकुल हो उठी उनके लिया

वातापी ...... हमारे तो स्वामी है वह किन्तु आप दोनों क्यों वयाकुल है उनके लिया

नगीना ...... हमारे भी तो भ्राता श्री है वो भाभी श्री फिर हम उनके लिया वयाकुल क्यों नहीं होंगे

विसुद्धि ......हमारा तो उनके साथ जनमो जनम का सम्बन्ध है

वातापी .......क्या कहा आपने

नगीना ......इनके कहने का तत्पर या है की भ्राता श्री से सम्बन्ध तो हमारा आपसे भी पूर्ण है आपका सम्बन्ध तो विवाह के पश्चात हुआ किन्तु हमारा तो जनम के साथ हे सम्बन्ध जुड़ गया था

( वातापी ....... कैसी निर्लज स्त्री है अपनी भाबी श्री के सामने हे खुल कर अपने सम्बन्धो का उल्लेख कर रही है )

वातापी ......उचित कहा नगीना आपने मेरी तो वो स्वामी विवाह के बाद बने पैर आपके तो भ्राता श्री आपके जनम से हे है

ीदार कनकसुर महल में आ चूका था वह सीधा अपने कक्ष की आवर हे भाड़ रहा था

तभी उसकी नजर किसी पे पड़ती है तो एक पल के लिया कंटकासुर भीतर तक कैंप उठा पैर जब उसे उसकी वास्तविकता का अहसास हुआ तब जा कर कुछ रहत मिली कनकसुर के असंत भय से भरे मन को

कनकसुर उसे इग्नोर कर अपने कक्ष की आवर भाड़ गया जहा पहले से नगीना विसुद्धि आवर वातापी अपनी चर्चा में लगे हुए थे

वातापी ......वैसे तुम दोनों का विवाह करवाने का समय हो गया है

नगीना ......हमें अभी विवाह नहीं करना है भाभी श्री

जब उचित समय आएगा तो हम भी विवाह कर लेंगी

वातापी मजाक मजाक में नगीना की बड़े बड़े वक्षो को सहला देती है

जिस से नगीना के मुँह से कमुख सिसकारी निकल जाती है

वातापी ......हमें नहीं लगता की इस से उचित समय कोई आवर होगा

आप दोनों के सरीर को देख कर तो लगता है किसी विशेष सम्भोग अस्त्र वाले बलिस्त असुर योद्धा को आपके वर के रूप में चयन करना होगा

नगीना ......लगता है आपको बहुत ज्ञान है विशेष सम्भोग अस्त्र के विषय में भाबी श्री हहहहए

विसुद्धि .....उचित कहा नगीना

वातापी ......हमें उसकी आव्सय्कता नहीं नगीना विसुद्धि क्युकी तुम्हारे भ्राता श्री उस अंग से बहुत हे खाश है ( तुम दोनों ने भी तो उस कामास्त्र का भोग किया है )

नगीना आवर विसुद्धि दोनों की आँखों के सामने कंटकासुर का कामास्त्र गुमने लगता है

जिस दोनों की योनि में फिर से खराश होने लगती है

नगीना ...... ये तो बहुत हे हर्ष की बात है आपके लिया भाभी श्री तभी आपके दोनों अंग बहुत खाश है बाकि भाभी श्रीयो से

नगीना कहने के साथ हे वातापी की योनिकुंड पे अपना हाथ रख कमुखता से वातापी को देखती है जहा वातापी को नगीना की आँखों में हवश के लाल डोरे तैरते हुए नजर आते है

नगीना को भी वातापी की फुल्ली हुई योनि ने अहसास करा दिया था की कंटकासुर ने यहाँ बहुत आदिक म्हणत की है

तभी कक्ष में कंटकासुर प्रवेश करता है

जिसको नजर वातापी से टकरा जाती है वही नगीना आवर बिसुधि की पीठ कंटकासुर की तरफ थी किन्तु कंटकासुर दोनों को पहचान लेता है एक बार तो कंटकासुर को बहुत क्रोध आता पैर अगले हे पल गायब होने जाता है

वातापी दौड़ कर कनकसुर के सीने से आ लगती है

वही नगीना आवर विसुद्धि इस दृश्य से जल भून जाती है आवर दोनों वह से अपने कक्ष की आवर निकल जाती है.......


परीलोक...... सूर्य सुबह अपने समय से उठ जाता है किन्तु किरण को अपने सीनो पे सोया देख सुबह सुबह इस खूबसूरत नज़ारे में खोने लगता है






काफी समय तक सूर्य किरण के खूबसूरत चेहरे में खोया रहता है

किरण जो पिछले कुछ समय से नियमित ध्यान कर रही थी जिस से उसका भी एक रूटीन बन चूका था समय से इतने वह ध्यान करने का

किरण काफी देर तक जागने के बाद भी सोने का नाटक किये हुए सूर्य की दिल की धड़कन सुनती रहती है

तभी जीनत प्यार से किरण के गालो को सहलाती है

जीनत .....गुड मॉर्निंग सूर्य

सूर्य प्यार से जीनत को देखता है आवर रिप्लाई में डेरी से गुड मॉर्निंग बोलता है

जीनत ....... ऐसे क्या देख रहे है स्वीटी के चेहरे में

सूर्य ......मेरी पूरी दुनिया इस खूबसूरत चेहरे की मुस्कान में बाशी है जीनत उसे हे देख रहा हूँ

जीनत ......जितनी प्यारी स्वीटी है उतनी हे प्यारी मुस्कान है स्वीटी की देखो तो नींद में भी कैसे मुस्कुरा रही है

सूर्य .......अब उठ भी जाओ स्वीटी ुम्मम्हा देखो ध्यान का समय निकल रहा है

किरण .....ुम्मम्हा गुड मॉर्निंग जान ुम्मम्हा ुम्मम्हा आपको पता था न की मैं उठ चुकी हूँ

सूर्य ......तो क्या तुम हे मेरी धड़कन को मह्सुश कर रही थी हाहाहाहा चलो अब उठो फटाफट फ्रेश होने जाओ आवर ध्यान करो

किरण अंगड़ाई लेते हुए उठी आवर सीधा बाथरूम में गेस गई

जीनत. .....आप जानते थे क्या की वो उठ चुकी है

सूर्य ....... है मुझे पता था की स्वीटी केवल नाटक कर रही है सोने का मेरा भी दिल नहीं था उसे उठाने का तो सोने दिया उसे

ुम्मम्हा अब आप भी फ्रेश होने कर ध्यान कीजिये

जीनत ......ुम्मम्हा ी लव यू

सूर्य ......ुम्मम्हा ी लव यू तू मेरी स्वीट सी जानत

जीनत वह से अपने रूम की आवर निकल जाती है

सूर्य वही किरण के साथ बाथरूम में गेस जाता है जहा कुछ हलकी फुलकी खट्टी मीठी मस्ती के बाद दोनों बहार निकलते है आवर कपडे पहन उद्यान में चले जाते है जहा बाकि सभी लड़किया भी ध्यान कर रही थी

कुछ 2 हर के ध्यान के बाद सूर्य महाकाल मंदिर चला जाता है जहा उसे गुरुदेव से भेट करनी थी

गुरुदेव का ज्यादातर समय अभी महाकाल मंदिर में वयतीत होता था

सूर्य .......परनाम गुरुवार

गुरुदेव. ......कल्याण हो पुत्र सूर्य आओ बैठो

सूर्य वही गुरुदेव के सामने बेथ जाता है

गुरुदेव ......कहो पुत्र कैसे आना हुआ

सूर्य ......गुरुदेव आपसे कुछ जरुरी चर्चा करनी थी

गुरुदेव ......कहो पुत्र किस विषय पे चर्चा करनी है तुम्हे

सूर्य ....गुरुदेव आप तो जानते है जल्द हे मेरा आवर स्वीटी का विवाह होने वाला है

गुरुदेव .....हाहाहाहा हम जानते है पुत्र आवर सभी इस विवाह से सहमत भी है फिर क्या चर्चा करनी है पुत्र सूर्य

सूर्य ......गुरुदेव बड़े मां जी चाहते है की ये विवाह सूरजगढ़ में हो वो चाहते है की स्वीटी आवर सपना की डॉली उनके ( हवेली ) घर से निकले

गुरुदेव ........ एक पिता के रूप में उनका इस तरह सोचना उचित भी है

पुत्र किन्तु ये भी सत्य है की वह का समाज वह नियमो इस सोच को कभी सवीकार नहीं करेंगे क्युकी समाज की नजरो में तुम तीनो नहीं बहन हो

सूर्य ......यहाँ तो समस्या है गुरुदेव आप हे कोई मार्ग निकल सकते है गुरुदेव.

गुरुदेव. ....... हम इस समस्या का कोई मार्ग निकलते है पुत्र फिर सभी से इस विषय पे चर्चा करते है

सूर्य .....जैसा आप उचित समजे गुरुदेव

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य तुम्हे एक बार परतविलोक जाना चाइये

सूर्य ......क्या हुआ गुरुदेव कोई संकट आने वाला है क्या परतविलोक पे

गुरुदेव ......परतविलोक पे तो नहीं किन्तु किसी आवर पे संकट आने वाला है जो तुम्हारा अपना है

सूर्य ......जैसा आपका आदेश गुरुदेव वैसे भी मैं कुछ समय बात पायल के साथ परतविलोक जाने की आज्ञा लेने आने वाला था फूफा जी से सदी के विषय में बात जो करनी थी

गुरुदेव ......पुत्री पायल के साथ साथ तुम पुत्री प्रीती वह पुत्री मेनका को भी ले कर जाना अपने साथ आवर वह जब पहुंची तो ये ऊर्जा ( अपने हाथो में एक छोटा सा बॉक्स प्रकट करते हुए ) विजर को सौंप देना क्युकी विजय अभी तक तुम्हारे पूर्व जनम से आवर अपनी उन यादो से महरूम है

सूर्य गुरुदेव से बॉक्स ले लेता है

सूर्य .....जैसा आपका आदेश गुरुदेव आज्ञा दीजिये गुरुदेव.

गुरुदेव .......विजयी भाव पुत्र

सूर्य गुरुदेव से आज्ञा ले कर प्रभु महाकाल को परनाम कर पारी महल लौट जाता है

जहा जोरावर मां जी को गुरुदेव से जो भी बात हुई उन्हें बताता है

मां जी ......कोई बात नहीं बीटा अगर कोई हल नहीं भी निकलता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं आवर रही बात समाज में तुम्हारे रिश्ते की उन्हें संजना मुझे आता है

तुम चिंता न करो सदी कही भी हो बस मेरी सभी बेतिया खुश रहे पहले मैंने केवल स्वीटी आवर सपना का हे सोचा था बीटा सायद में अपनी ीचा के ादिन हो स्वार्थी hi गया था भूल जाता था उनके जैसे अलीना कोमल पायल प्रीती के साथ साथ मेरी आवर भी 5,6 बेतिया है

सूर्य ......थैंक यू मां जी

जोरावर .....अब ससुर जी या पापा जी बोलने की आदत दाल ले हाहाहाहा

सूर्य .....हाहाहाहा मां जी तो आप इस रिश्ते के बाद भी रहेंगे

नए रिश्ते जुड़ जाने का ये मतलब तो नहीं की पुराने रिश्ते ख़तम हो जायेंगे

पुराने सम्बन्दो की कीमत पे नए रिश्ते नहीं जुड़ते मां जी

मां जी .....सही कहा तुमने बीटा अब जा जो भी गुरुदेव का फैसला होगा वही मेरा होगा फिर चाहे जो भी फैसला हो उनका

सूर्य वह से निकल कर मेनका बुआ के पास पहुँचता है

जहा सन्ति ममी जी आवर मेर्री जी भी मौजूद थी

सूर्य .......कैसे हो बुआ सा ममी जी

मेनका .......आज टाइम मिला है अपनी बुआ सा से मिलने का

सूर्य मेर्री जी को खिसका कर दोनों के बिच बुआ सा के गॉड में सर रख लेट जाता है

सन्ति जी .....सदी होने वाली है पैर बचपना अभी भी नहीं गया बना सा

सूर्य ......हाहाहाहा क्या कहा ममी जी आपने बना सा

मेनका जी .....इसमें हसने वाली क्या बात है माँ आवर सास बेटे आवर दामाद को ुशी तरह बुलाते है हम ठाकुरो में

सूर्य ......सॉरी मेरा वो मतलब नहीं था बुआ सा मुझे तो सबसे बीटा सुन्ना ज्यादा पसंद है बना सा से हाहाहाहा

सन्ति जी .....मैं तो यही कहूँगी बना सा जमाई सा

मेर्री जी ......वैसे ये नाम भी अच्छा है संबोदन करने के लिया

सूर्य ......अच्छा तो है पैर जो मिठास माँ के बीटा कहने पे मह्सुश होती है वो किसी आवर सबद के संबोदन में नहीं होती है

फिर चाहे अपनी सहूलियत के हिसाब से रिश्ते को किसी भी नाम से पुकारे

सन्ति जी ......फिर तुम अपनी माँ को माँ क्यों कहते हो

सूर्य .......ताकि आप सब को माँ कह सकू आवर आप सभी से माँ का प्यार प् सकू

क्यों मेनका माँ सही कहा न मैंने


मेनका जी सूर्य के माथे को प्यार से चुम कर अपनी आँखों का काजल निकल कर सूर्य के कण के पीछे लगा देती

मेनका जी .....मेरा बीटा है तू कभी गलत हो सकता है क्या

हमारा रिस्ता कोई भी हो पैर तू रहेगा तो मेरा प्यार बीटा हे

सूर्य मेनका जी के दोनों गालो को प्यार से चुम लेता है

जिस से मेनका जी सन्ति जी वह मेर्री जी के चेहरे पे मुस्कान आ जाती है

सूर्य ......देखा ममी जी यही प्यार होता है एक माँ आवर बेटे के बिच के सम्बन्दो में

अब आप त्यार होने जाइये बुआ सा हमें फूफा जी से मिलने जाना है पायल आवर प्रीती के साथ

मेर्री जी .....क्या हुआ यूँ अच्चानक

सूर्य .......अच्चानक नहीं कल जाना था पैर कल जा नहीं पाया तो अभी जा रहे है उन्हें सत्य बताने के लिया

मेनका जी .......क्या उनसे रिश्ते की बात भी करेगा तू

सूर्य .....पहले मैंने भी सोचा था बुआ सा पैर अभी माँ डैड दादा जी आवर दादी जी हे रिश्ते की बात करे तो ज्यादा अच्छा है

मेनका जी ......है वैसे भी खुद हे खुद की सदी के बात अपने ससुर से करता अच्छा नहीं लगता

सूर्य ......वही तो अब आप त्यार होने जाये मैं पायल प्रीती को बोलता हूँ त्यार होने के लिया

सूर्य वह से निकल पायल प्रीती को त्यार होने का बोल देता है

परतविलोक .....

दोपहर का समय हुआ होगा की सूर्यगढ़ की सीमा में लगते जंगल

( जहा सूर्य रिद्धि वयोम सकती के साथ अभ्यास करता था )


में असुरगुरु हाथो में कोई वास्तु लिया उस जंगल का निरक्षण कर रहे थे

उनके साथ वही उनके 6 शिष्य भी मौजूद थे

जो असुरगुरु के पीछे पीछे चल रहे थे

आदमी 1 ......गुरुदेव यहाँ उस ऊर्जा के साथ साथ अन्य ऊर्जा के अंश भी मौजूद है

असुरगुरु .......यही तो समाज नहीं प् रहे है की यहाँ मौजूद ऊर्जा किसी एक की नहीं है 5.6 लोगो की है जो परतविलोक से तो हो नहीं सकती है

आदमी 2 ......गुरुदेव कही किसी अन्य लोक से तो नहीं है ये ऊर्जा

असुरगुरु ......संभव है पैर इसी स्थान पे हे क्यों

कुसग तो खाश वजह है यहाँ इन ऊर्जा अंश के होने के पीछे

वही सूर्यगढ़ हवेली में सकती को असुरगुरु के साथ साथ बाकि शिष्य की आसुरी ऊर्जा का अहसास हो जाता है

सकती .....वयोम से सम्पर्क कर उसे मिलने को बुलाता है

कुछ हे देर में वयोम सकती के सामने खड़ा था

वयोम ......क्या बात है सकती तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया आवर तुम इतने चिंतित क्यों हो

सकती ......वयोम यहाँ सूर्यगढ़ के जंगल में कुछ असुर आ चुके है मुझे संदेह है की वो बहुत जल्द हम तक भी पहुंच जायेंगे

वयोम .......ये तो वाकई में चिंता का विषय है सूर्य भी यहाँ नहीं है यहाँ केवल उनके अंश हे मौजूद है

वो भी सकती विहीन है बाकि परिवार की तरह

( वयोम जिस सूर्य अंश की बात कर रहा है वो दरशल जब गुरुदेव सभी को ले कर परीलोक जा रहे थे उस वक़्त सभी से जो बाल ( हेयर ) लिए थे गुरुदेव ने ुशी से गुरुदेव ने सूर्य आवर उसके बाकि परिवार के अंश त्यार कर यहाँ छोड़ रखा था ताकि लम्बे समय तक यहाँ पे सूर्य का परिवार मौजूद न होने तब भी किसी को कुछ ज्ञात न हो ( जो लोक परीलोक में है सभी के क्लोन + अंश यहाँ मौजूद है ) इस लिया गुरुदेव ने ऐसा किया था )

सकती .....हमें वह चल कर देखना होगा की इन असुरो का उद्देश्य क्या है यहाँ आने का

वयोम ......नहीं सकती तुम यही रुको मैं जा कर देखता हूँ कुछ प्रॉब्लम हुई तो आप गुरुदेव से या सूर्य से सम्पर्क करना

अकेले कुछ भी करना खतरनाक हो सकता है

सकती .......तुम ठीक कह रहे हो वयोम इस तरह बिना सोचे समजे हमें कोई कार्य नहीं करना चाइये

वयोम ......ठीक है में जा रहा हूँ कुछ भी गलत लगा मैं आपको सेंकेड दूंगा

सकती ......ठीक है सावधान रहना

वयोम वह से निकल जाता है ज

जंगल की आवर खुद पे आने वाले खतरे से अनजान ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
hello दोस्तों आप आवर आपके परिवार सभी भाई बन्दुओ को होली के पावन रंगो भरे त्यौहार की बहुत बहुत हार्दिक शुब्कम्नाय 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

🌹प्यार के रंगो से भरो पिचकारी ....🌹

🌹सनेह के रंगो से रंग दो दुनिया साडी....🌹

🌹ये रंग न जाने कोई जाट न बोली ....🌹

🌹🌹🌹सबको मुबारक हो हैप्पी होली....🌹🌹🌹

विश यू वैरी वैरी हैप्पी हॉल🌹

दोस्तों अपडेट 30 को आएगा हैप्पी होली एन्जॉय विथ योर फॅमिली .फ्रेंड्स .....
 
Back
Top