Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 16 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 123

सूर्य .......अब आप काम्य काव्य के पास सो जाइये मैं सुबह मिलता हूँ

कामिनी अपनी निघ्त्य दाल सूर्य को छोटा सा किश कर दूसरे बीएड जिसपे काम्य काव्य सोई हुई थी उसपे जा कर लेट जाती है

सूर्य वह से निकल कर टहलते हुए अपने रूम में आ जाता है

जहा सपना आवर निमिषा दोनों सोये हुए थे एक दूसरे को बहो में भरे हुए

सूर्य निमिषा के पीछा जा कर निमिषा सही सपना को बहो में भर का सो जाता है ...........

अब आगे ........

जिनिशा की जब आँख खुली तो वह सपना आवर सूर्य के बिच फाशी हुई थी

सुबह सुबह मॉर्निंग एरेक्शंस की वजह से सूर्य का घोडा अपने पुरे सबब पे था

जिसका चुंबन जिनिशा को अपनी योनि पे मह्सुश हो रहे थी

जिनिशा अपने जादू का प्रयोग कर सूर्य आवर सपना के बिच से गायब हो जाती है

सूर्य को जब अपनी नहो में खालीपन महसूस होता है तो वह उठ जाता है

सुबह सुबह सपना के खिले हुए चेहरे पे नजर पड़ते हे सूर्य सपना को कीच कर किश करने लगता है

किस करते हुए सूर्य सपना की योनि को सहलाने लगता है





कुछ देर किश करने के बाद सपना किश तोड़ कर सूर्य को देखती है

सपना ......रात में क्या हुआ था आपको आवर किस के पास गए थे आप

सूर्य ......कुछ नहीं तुम सो रही थी आवर मुझे सेक्स करने का दिल कर रहा था तो कामिनी चची के पास गया था

सपना .......उम्म्म्महहह मुझे उठा देते न

सूर्य .......कोई नै अभी रात की इच्छा पूरी कर देता हूँ

सपना .....वो तो मैं पूरी करुँगी हे

कहते हुए सपना निचे किशक कर सूर्य के कामदण्ड को चूमने लगती है





surya......ummmm मुझे यही अड्डा तो पसंद है तुम्हारी

सपना सूर्य के लैंड को थम कर चूसने लगती है

सूर्य के मुँह से सिसकारियां फूटने लगती है

सपना अपनी छूट को सहलाते हुए सूर्य के लैंड को ऊपर निचे कर चूसने चाटने लगती है





सूर्य ......उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सपना. तुम नहीं होती तो न जाने मेरा क्या होता उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सुबह सुबह हे मॉर्निंग की शुरुआत इतनी अच्छी है दिन का पता नहीं कैसा जायेगा

सपना ......उम् हम्म्म अह्ह्ह वो भी अच्छा हे जायेगा उम्म्म्म आप क्यों चिंता करते है मैं हूँ बुआ है चची है





सूर्य सपना को अपनी बगल में लिटा कर किश करते हुए सपना की सॉफ्ट सॉफ्ट चूचियों को मसलने लगता है

सपना जो अब तक काफी गरम हो चुकी थी

वह अपनी छूट को सहलाने लगती है

सपना .....उम्म्म्म. जान अब कुछ कीजिये ऐसा न कोई सुबह सुबह डिस्टर्ब करने आ जाये बिच में

सूर्य .....उम्म्म्म. अह्ह्ह्हह तुम ठीक कह रही हो जान

सूर्य सपना को सिदा लिटा कर सपना की छूट पे अपना लैंड सेट कर्त है





सपना .....अह्ह्ह्हह जान दिन पार्टी दिन आपका ये घोडा आवर तगड़ा हो रहा है

हर बार जब हे अंदर जाता है तो मीठा मीठा दर्द दे जाता है

सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह्हह क्यों केवल दर्द हे देता है मजा नहीं देता क्या

सूर्य डेरी डेरी सपना की छूट मरने लगता है

कुछ हे देर में सपना भी सूर्य का पूरा सहयोग करते हुए अपने छूट को सूर्य के लैंड पे मरने लगती है





सपना .....अह्हह्ह्ह्ह जान ऐसे हे छोड़ो अपनी सपना को अह्ह्ह्हह उम्म्म्म बहुत मज़ा आ रहा है सुबह सुबह उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह जान मैं आने वाली हूँ.

सूर्य इसी रफ़्तार में सपना की छूट पे प्रहार जारी रखता है

सूर्य ........उफ्फ्फ्फ़ ये तुम्हारी छूट ाजकुछ जल्दी नहीं बहने लगी

सपना सूर्य को अपने बहो में काश लेती है आवर सूर्य की कमर पे अपने पैरो का सिकंजा बना कर झाड़ने लगती है





सूर्य हलके हलके सखे मरते हुए सपना की माध्यम गति से चुदाई करने लगा

सपना .....hmmm.ahhhb जान अभी मुझे आपके घोड़े की सवारी करनी है

मुझे ऊपर आने दीजिये

सूर्य .....उम्मम्ममेहः क्यों नहीं जान ये लो

सूर्य सपना को लिए हुए पलट जाता है

अब सपना सूर्य की जगह ऊपर थे आवर सूर्य सपना की जगह निचे

सपना डेरी डेरी अपनी छूट को घिसते हुए सूर्य के लैंड की द्वारी करने लगी





सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह ऐसे क्या देख रही हो जान

सपना .....देख रही हूँ आजकल आप कुछ ज्यादा हे सेक्स करने के लिए उतावले रहने लगे है

सूर्य ......क्यों तुम्हे पसंद नहीं है क्या

सपना ....हम्म्म अह्ह्ह्हह हर पत्नी को ये पसंद होगा हे की उसका पीटीआई उसे प्यार करे फिर भला मुझे क्यों पसंद नहीं आएगा आपका प्यार करना





सूर्य सपना की कमर थम निचे से हौले हौले

सपना की छूट की घरहि को अपने लैंड से नापने लगता है

सूर्या ....उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह तुम्हे बस यही जिंदगी भर अपनी बहो में भर प्यार अह्ह्ह्हह करता राहु

सपना .....इस्स्स्सस्ठ्ठ्हब तो कीजिये न हम्म्म. अह्ह्ह्हह आपको किसने रोका है

एक बार फिर से सपना की छूट सूर्य के लैंड पे अपना माधव बने लगती है





सूर्य सपना के दोनों खुल्हो को थम मसलते हुए सपने गांड को अपने लैंड के ऊपर दबाने लगता है

सपना ......इससे अह्ह्ह्हह जवान थोड़ा तेज मैं फिर से चढ़ने वाली हूँ

अह्ह्ह्हह्हह माँ आपके साथ हर बार एक अलग हे अहसास आवर मज़ा मिलता है

कहते हुए sa0na सूर्य को किश करते हुए तेजी से अपनी छूट सूर्य के लैंड पे मरने लगती है

देखते हे देखते सपना का सरीर आनद जाता है आवर वह काप्टर हुए झाड़ने लगती है

सूर्य सपना को करवट के बल कर पीछे सपना की छूट की दनिया उधड़ने लगता है जब तक सूर्य अपना वीर्य सपना के योनिकुंड में भर नहीं देता है

फिर दोनों एक साथ फ्रेश हो बहार निकल जाते है

वही जिनलोक उद्यान में .....

पारिजात .......ये हमें उनसे मिलने की उन्हें देखने की इतनी इच्छा क्यों हो रही है

पता नहीं कहा है अब तो सुबह हुए भी काफी समय हो गया है

तभी एक पारी वह आती है

पारी .....राजकुमारी वो अभी अभी अपने कक्ष से निकले है आवर वो अभी उद्यान की तरफ हे आ रहे है

तभी पारिजात की नजर सूर्य आवर किरण पे पड़ती है जो दोनों उद्यान की आवर हे आ रहे थे

पारिजात ......तुम सब लोग जाओ यहाँ से

पारी ....जो आज्ञा राजकुमारी जी

सभी परिया पारिजात को वह छोड़ कर उद्यम से निकल जाती है

ीदार किरण उद्यम में सूर्य को रोक कर उसके किश करने लगती है

जिसे दूर से पारिजात देख रही थी





किरण द्वारा सूर्य को किश करने से पारिजात के दिल में चुंबन सी मह्सुश हुई

पारिजात .....इनको किसी आवर के साथ देख हमें क्यों बुरा लग रहा जैसे कोई हमसे हमारा सब कुछ चीन रहा है

सूर्य किरण को ले कर के वही एक बेंच पे बेथ जाता है





सूर्य को किरण दोनों मस्ती मजाक करते हुए बात कर रहे थे बिच बिच में कभी सूर्य तो कभी किरण सूर्य को चढ़ रही थी

पारिजात .......क्या हमें इनके पास जाना चाइये क्या हमें इनके एकांत के पालो में हस्तक्षेप कारनामे उचित होगा

कुछ देर पारिजात ऐसे हे अपने आपसे बाते करती रहती है फिर कुछ सोच कर वह सूर्य आवर किरण की आवर बढ़ जाती है

पारिजात .....शुभप्रभात सूर्य शुभप्रभात किरण

पारिजात की आवाज सुन दोनों का ध्यान उस आवर गया जहा पारिजात कड़ी दोनों को देख रही थी

सूर्य किरण .....शुभप्रभात राजकुमारी पारिजात

सूर्य थोड़ा साइड में हो परिणत के लिया भी जगह देता है

किरण ......कैसे है दीदी आप

पारिजात ........मैं अच्छी हूँ स्वीटी यही नाम रखा है न आपका इन्होने

किरण .....हेहेहे इनका नाम सूर्य है आप इन्हे नाम से पुकार सकती है

तभी वह एक जिनि सेविका आ जाती है

जिनि सेविका ......राजकुमारी किरण आपको राजकुमारी जिनिशा ने याद किया है

किरण .....ok चलिए आवर आप लोग बात कीजिये तब तक हम आते है

किरण वह से जिनि सेविका के साथ निकल जाती है

सूर्य .....अगर आपको एतराज न हो तो क्या आप कुछ वक़्त हमारे साथ बिताना चाहोगी

पारिजात को आवर क्या चाइये थे

पारिजात ......क्यों नहीं हमें ख़ुशी होगी आपके साथ वक़्त बोटा कर ( पारिजात .....हम मर्दो से नफरत करते है किन्तु इनका साथ हमें अच्छा लग रहा है इनके साथ हमें एक अलग हे ख़ुशी का अहसास हो रहा )

सूर्य ........आप जिनिशा की सखी है न इस नाते हम भी दोस्त बन सकते है अगर आपको कोई एतराज न हो तो

पारिजात .....हमें कोई एतराज नहीं हमें भी आपसे दोस्ती कर ख़ुशी होगी

सूर्य अपना हाथ आगे बढ़ता है

जिनिशा .........ये क्या है

सूर्य .......क्या आपको पता नहीं है

सूर्य परिणत का हाथ पकड़ कर हैंडशेक करता है

सूर्य .....हमारे यहाँ परतवि पे दोस्ती की सुरुहत हाथ मिला कर या गले मिल कर की जाती है

अब आप तो हमारे गले लगने से रही तो सोचा हाथ मिला कर हे दोस्ती की जाये हाहाहाहा

पारिजात ........हम क्यों नहीं गले मिलेंगे आपसे

पारिजात ने कहने को कह तो दिया पैर फिर खुद हे सरमने लगी

सूर्य कहा मौका गवाने वाला था सूर्य ने फ़ौरन पारिजात को खड़ा कर





खड़ा कर उसकी आँखों में देखने लगता है

पारिजात की जब नजरे सूर्य से टकराई तो सूर्य को वो आकर्षित सकती जो जिनिशा ने सूर्य को दी थी वो एक्टिव हो जाती है

पारिजात सूर्य की आँखों में खोने लगती है आवर अचानक से पारिजात की धड़कन तेज हो जाती है

सूर्य अगले हे पल पारिजात को अपनी बहो में कैद कर लेता है





पारिजात को अपनी बहो में भर सूर्य को बहुत सुकून मिलता है

ऐसा हे कुछ पारिजात के साथ भी होता है

( पारिजात ......वो आप हे है जिनका आकाश हमारे ख़्वाबों में आता है हम

आप हे है जिनके लिया हमारा दिल भेचेन रहता है

आपकी बहो में कैद हमें वो सुखुन मिला जिसके लिया हमने कितना इंतजार किया है अब हमसे दूर न होना हम आपके बिना रह नहीं पाएंगे )

कुछ देर बाद सूर्य पारिजात को अलग करता है

वही ये नजारा चुप करके जिनिशा आवर किरण भी देख रही थी सूर्य आवर पारिजात इस बात से अनजान एक दूसरे की आँखों में खोये हुए थे

किरण ........ये सब क्या है भाबी भाई पारिजात का क्या चाकर है

जिनिशा ......पारिजात भी सर्तक पे मोहित हो गई है वो उनसे प्यार करने लगी है स्वीटी पेट अभी तक उस प्यार से अनजान है जो मर्द जाट से हे नफरत करती है

वो देखो सरताज की आँखों में कैसे खोये हुए है

किरण ......मुझे लगता है मेरा no. तो ऐसे में आने से रहा अगर ऐसे हे भाई की लिस्ट भदरी रही तो हो गया कल्याण मेरा

जिनिशा ......नहीं स्वीटी सरताज की लाइफ में कोई भी आये वो तुम्हारा स्थान कभी नहीं ले सकती है

किरण .....जानती हूँ भाबी आवर मुझे इस बात की ख़ुशी भी है की भाई से जो भी प्रेम करती है भाई उन्हें निराश नहीं करता है

वो उनके प्रेम को स्वीकार करते है भले हे वो सभी को समय नहीं दे पते है

जिनिशा .....सही कहा स्वीटी अब हमें इन्हे अकेला छोड़ देना चाइये ताकि ये कुछ समय साथ में बिताये

जिनिशा किरण को ले कर महल लौट जाती है सूर्य आवर पारिजात को वही उद्यम में छोड़ कर ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
 
अपडेट. 124

इनिशा ......नहीं स्वीटी सरताज की लाइफ में कोई भी आये वो तुम्हारा स्थान कभी नहीं ले सकती है

किरण .....जानती हूँ भाबी आवर मुझे इस बात की ख़ुशी भी है की भाई से जो भी प्रेम करती है भाई उन्हें निराश नहीं करता है

वो उनके प्रेम को स्वीकार करते है भले हे वो सभी को समय नहीं दे पते है

जिनिशा .....सही कहा स्वीटी अब हमें इन्हे अकेला छोड़ देना चाइये ताकि ये कुछ समय साथ में बिताये

जिनिशा किरण को ले कर महल लौट जाती है सूर्य आवर पारिजात को वही उद्यान में छोड़ कर ............

अब आगे ......

रानी पारी ने गुरुदेव के चिर ध्यान योग में लीं होने की खबर सार्वजनिक कर दी थी जिस से सभी को पता चल चूका था की राजगुरु लम्बे समय के लिया ध्यान स्थिति में रहेंगे

एक कक्ष में j.king .रानी पारी .प्रेतराज इसी विषय की चर्चा कर रहे थे

J.king ......अब क्या होगा रानी पारी गुरुदेव तो ध्यान अवस्था में जा चुके है

रानी पारी ......कुछ समाज नहीं आ रहा है j.king आगे क्या करना

है

प्रेतराज ........ऐसे में तो जिनिशा के विवाह के समय भी पता नहीं राजगुरु ध्यान से बहार भी आएंगे की नहीं

रानी पारी .......अभी हम इस विषय में कुछ भी नहीं कह सकते है प्रेतराज आवर j.king आपको अपना राजगिरि नियुक्त कारनामे होगा राजगुरु का यही आदेश है आपके लिया आवर सूर्य आवर उनके परिवार को यही जिनलोक में रोके रखना है कब तक हम आपसे न कहे उन्हें जिनलोक या पारी लोक के अलावा किसी अन्य लोक में न जाने दे

j.king ......क्या ये भी गुरुदेव का हे आदेश है

रानी पारी ......है ये उनका हे आदेश है

प्रेतराज .....किन्तु इसकी आवशयकता क्यों ाँ पड़ी की सूर्य आवर उनके परिवार को यहाँ रखा जाये आवर दूसरी बात सूर्य अगर यहाँ से परीलोक जाता है तो भी उसे अंतरिक्ष का मार्ग हे चुनना पड़ेगा

j.king ......हम आज हे जिनलोक के राजगुरु के चुनाव के लिया पुरे जिनलोक में गोशोना करवा देते है

रानी पारी ......है यही उचित होगा j.king आवर रही बात सूर्य को परीलोक जाने के लिया अंतरिक्ष से हो कर जाना नहीं पड़ेगा उसका मार्ग हम जानते है

प्रेतराज .....ऐसा कोनसा मार्ग है जिस से जिनलोक से परीलोक बिना अंतरिक्ष से हो कर भी जाया जा सकता है

रानी पारी ......आप भूल रहे है हर लोक में एक जादुई द्वार होता है जिस से कभी भी किसी भी लोक में पंहुचा जा सकता है उस द्वार से हो कर के

j.king .....उचित कहा आपने रानी पारी हम सूर्य को आवर के परिवार को उस विषय में बता देंगे

कुछ देर आवर इनकी चर्चा चलती रहती है

फिर रानी पारी जिनलोक से परीलोक लौट जाती है प्रेतराज भी अपनी पुत्री जीनत के साथ प्रेतलोक लौट गए

पारिजात कुछ समय अपनी सखी जिनिशा के पास हे रुख गई जिसमे रानी पारी को या अन्य किसी आवर को कोई एतराज नहीं था

डेरी डेरी समय अपनी गति से बीतने लगा इस बिच सूर्य आवर जिनिशा के बिच नजदीकियां काफी भध चुकी थी बस प्रेम का इजहार करना बाकि था

कुछ दिन बाद पारिजात अपने महल परीलोक लौट गई किरण छोटी बुआ के पुरे परिवार को साथ ले कर

श्री लंका .......

चांडाल ने बहुत प्रयाश किये असुर लोक के द्वार को खोलने का किन्तु वो विफल रहा अंत में उसे मोहिनी द्वारा सुजय हुआ मार्ग हे उचित लगा

चांडाल दिन रत बस माँ पटल भैरवी के पूजा उपासना में लगा रहने लगा डेरी डेरी समय के साथ चांडाल की पूजा ने भी अपना असर दिखाना सुरु कर दिया था

आवर माँ पटल भैरवी चांडाल से प्रश्न हो चांडाल को दर्शन दे देती है

माँ भैरवी ........आँखे खोले चांडाल चंद्रेश हम तुम्हारी भक्ति से परशान है

चांडाल .....परनाम माँ पटल भैरवी

माँ bhervi......kaho चांडाल क्या इच्छा है तुम्हारी क्या वर चाइये तुम्हे

चांडाल ......माँ पटल भैरवी मुझे इस महल में बने असुर लोक के द्वार को खोलने मेरी सहायता कीजिये

माँ भैरवी ........ये संभव नहीं है चांडाल क्युकी वो द्वार हमारे हे वरदान स्वरुप असुरो को मिला था केवल उसे असुर राज के परिवार से या उसके रक्त से जुड़ा कोई असुर हे खोल सकता है

चांडाल .....फिर मुझे ये वर दीजिये की मैं अपनी इच्छा से किसी भी लोक में आ जा सकता हूँ अपनी इच्छा अनुसार

माँ भैरवी .......हम तुम्हे तुम्हारा इच्छित वर देने को साज़ है किन्तु वर से तुम केवल उन्ही लोक में जा सकते हो जिम्मे बुराई आवर पाप का स्थान अच्छे से ुचा हो

चांडाल ......जी माँ पटल भैरवी मुझे स्वीकार है

माँ भैरवी ......तथास्तु पुत्र

माँ पटल भैरवी चांडाल को वर दे कर अंतर्ध्यान हो गई

वही चांडाल ख़ुशी से जुम्मे लगता है कहा वो एक लोक का द्वार खोलना चाहता था अब वो किसी भी लोक में कभी भी आ जा सकता था जिस में बुराई का स्थान अच्छे से ऊपर हो

मोहिनी ......मालिक चांडाल आपको अब अपना इच्छित वर मिल गया है अब तो मुझे मुक्त कर दो

चांडाल ......अभी नहीं मोहिनी तुम्हे कुछ समय आवर मेरी कैद में रहना होगा फिर मैं तुम्हे मुक्त कर दूंगा

चांडाल माँ पटल भैरवी से मिले वर का प्रयोग कर असुरलोक के लिया अंतर्ध्यान हो गया

कुछ हे पालो बाद चांडाल असुर लोक में था जहा चारो तरफ घोर अंदर व्याप्त था

चांडाल ......मोहिनी क्या यही असुर लोक है

मोहिनी ....जी मालिक यही असुर लोक है

चांडाल चलो फिर पहले यहाँ कोई उपयुक्त स्थान का चुनाव किया जाये जहा मैं आगे सन्ति से अपना कार्य कर सकू

वही असुर लोक पहाड़ी को पता चल जाता है की किसी ने असुर लोक में परिवेश किया

जिसकी खबर वह सभी गुप्तचरी आवर असुरलोक राजा नरकासुर को पंहुचा देता है

नरकासुर अपनी मायावी विद्या से चांडाल का पता कर लेता है आवर

उसे बंदी बनाने का आदेश दे देता है

मोहिनी ......मालिक असुर राज नरकासुर को आपके यहाँ होने का पता चल गया है आवर उन्होंने अपनी सेना को आपको बंदी बनाने का आदेश दिया है

चांडाल ......आने दो उन्हें अब यही मौका है अपनी सकती का प्रयोग कर असुर महल में परिवेश करने का

कुछ हे देर में एक टुकड़ी असुर सेना की आ कर चांडाल को घेर लेती है

चांडाल अपने असुर आत्माओ को मुक्त कर देता है जो देखते हे देखते पूरी सेना को निगल जाती है

नरकासुर को जब ये खबर लगती है तो उसे क्रोध भी आता है आवर आश्चर्य भी होता है की ये कोण है जिसने कुछ हे पाली में उसके वीर असुरो की टुकड़ी को ख़तम कर दिया

असुरराज .....सेनापति उसे सामान सहित महल ले कर आओ हम उस से मिलना चाहते है

सेनापति कुछ हे देर में चांडाल को ले कर महल पहुंच जाता है

जहा नरकासुर चांडाल के भीतर असुरो की आत्माओ को कैद देख समाज जाता है की ये कोई सदर्न व्यक्ति नहीं है

नरकासुर चांडाल से भेट कर बहुत कुछ जान चूका था उसके बारे में चांडाल ने विस्तार से अपने बारे में सब कुछ बरका सुर को बताया आवर उसका यहाँ आने का उद्देश्य भी किन्तु अर्ध सत्य

असुरगुरु ..........क्या सच में ऐसा मानव परतविलोक में है किन्तु हमें उसके विषय में ज्ञात कैसे नहीं हुआ

चांडाल .....क्युकी वो कोई सदर्न मानव नहीं है उसका जनम उत्तम नक्षत्रो में हुआ है जनम के साथ हे उसे दिव्या अंश प्राप्त है

असुरगुरु ......ये आपको कैसे ज्ञात की वह दिव्या अंश है

चांडाल .........ये देखो ये है उसकी कुंडली





असुरुरु उस कुंडली को ध्यान से देखते है

हर बदलते पल के साथ असुर गुरु के चेहरे पे चिंता की ाकिरे उभरने लगती है

असुरगुरु हवा में हे एक आवर कुंडली का निर्माण करते है

जो की असुरलोक के असुर राज नरकासुर की थी

दोनी कुंडली का मिलान करते हे असुरगुरु अपने सिंघासन से निचे गिर पड़ते है

असुरगुरु .......काल है ये यही है वो काल

नरकासुर ......कैसा काल किसका काल असुरगुरु ये आप कैसे बाते कर रहे है

असुरगुरु ......असुर राज आपका कल है ये कुंडली वाला मनुष्य

आपको जो वरदान परबु से मिला है उसकी ये काट है

आपको मरने वाला जनम ले चूका है

असुरगुरु की बात सुन नरकासुर के भी माथे से पसीना बहने लगता है

नरकासुर ......नहीं ये नहीं हो सकता है असुरगुरु परबु मेरे साथ चाल नहीं कर सकते है

आप भूल रहे है असुरगुरु मुझे केवल परबु से हे नहीं देवी से भी वरदान प्राप्त है

असुरगुरु .......आप अपने वरदान को हे भूल गए है क्या असुरराज

असुरराज .....क्या मतलब असुरगुरु

असुरगुरु .....जब परबु के अंश ने जनम ले लिया है तो फिर देवी की सकती ने भी कही न कही जनम ले हे लिया होगा आपके वध के लिया

चांडाल .....इसके साथ में कोई आवर भी दिव्या सकती है अगर ये परबु का अंश है तो फिर वो अवश्य म

देवी की सकती दरक होगी ( चांडाल ......यहाँ तो बिना किसी सडयंत्र के हे उसकी मृत्यु की तयारी हो चुकी है अब बस कुछ चल चलने है आवर सूर्य की मौत निश्चित )

चांडाल ......अगर आप मेरी सलाह मने तो मेरे पास एक मार्ग है

नरकासुर .....क्या मार्ग है मित्र चांडाल

( चांडाल ....मुर्ख समजा है क्या मुझे जो अपनी मौत आती देख मुझे मित्र बोल अपनी मौत ताकना चाहता है )

चांडाल .....इसका नाम सूर्य है आवर ये परतविलोक वाशी है किन्तु इस वक़्त ये जिनलोक या परीलोक में हो सकता है जहा मैं तो पहुंच नहीं सकता हूँ

असुरगुरु .....इन दोनों लोको में तो हम में से भी कोई नहीं जा सकता क्युकी ये दोनों हे लोक परबु के ादिन है इन लोको की सुरक्षा खुद परबु करते है

नरकासुर ....कोई तो मार्ग होगा हे उस तक पहुंचने का

चांडाल ......मेरे पास है किन्तु ....

नरकासुर .....किन्तु क्या मित्र चांडाल

चांडाल. .........मुझे कोई रूपवती पवित्र कन्या की आव्सय्कता होगी जो की असुरलोक या परतवि लोक में तो मिलने से रही

असुरगुरु .....असुरलोक आवर परतवि लोक में मिल भी सकती है किन्तु समय का पता नहीं कितना समय लग सकता है

नरकासुर ........हम अभी कंटकासुर को परतविलोक भेजते है किसी ऐसी हे कन्या की तलाश में

असुरगुरु ......किन्तु हमें केवल पुत्र कंटकासुर पे हे आश्रित नहीं रहना चाइये असुरराज हमें किसी अन्य लोक में भी खोजबीन सुरु करनी चाइये

असुरगुरु ......किस लोक में असुरगुरु

असुरगुरु .......ऐसे हे कन्या एक मेरी नजर में भी है किन्तु उसे हम नहीं ला सकते है उसके लिया चांडाल आपको हे जाना होगा

चांडाल .......मैं ुशी लोक में जा सकता हु जहा पाप अच्छे से आदिक हो

असुरगुरु ......आपको नागलोक जाना होगा वह आपको कोई परेशानी नहीं होगी पहुंचने में

चांडाल ......क्या नागलोक में कोई ऐसे कन्या है जो पवित्र हो कुँवारी हो आवर साथ दिव्या भी हो

असुरगुरु ........है है एक ऐसी कन्या नागराज वासुकि की पड़पोत्री राजुकमारी कोमलांगी ( कोमल ) जो दिव्या सौन्दर्य से परिपूर्ण

चांडाल किनतु उस तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा

नरकासुर ......मित्र चांडाल उसमे तुम्हारी सहायता तक्षक नाग करेंगे जो हमारे मित्र भी है

चांडाल .....तब तो ये संभव हो सकता है

नरकासुर कंटकासुर को परतविलोक किसी ऐसी कन्या की तलाश में निकल गया

वही नरकासुर आवर चांडाल आगे की योजना बनाने लगते है .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
 
सॉरी फ्रेंड्स आज का अपडेट.

अभी लिखा नहीं है

लिखने अभी स्टार्ट करूँगा अपडेट पूरा होते हे पोस्ट करता हूँ

सॉरी फॉर लेट अपडेट फ्रेंड्स .........
 
अपडेट 125

असुरगुरु ........है है एक ऐसी कन्या नागराज वासुकि की पड़पोत्री राजुकमारी कोमलांगी ( कोमल ) जो दिव्या सौन्दर्य से परिपूर्ण

चांडाल किनतु उस तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा

नरकासुर ......मित्र चांडाल उसमे तुम्हारी सहायता तक्षक नाग करेंगे जो हमारे मित्र भी है

चांडाल .....तब तो ये संभव हो सकता है

नरकासुर कंटकासुर को परतविलोक किसी ऐसी कन्या की तलाश में निकल गया

वही नरकासुर आवर चांडाल आगे की योजना बनाने लगते है .............

अब आगे .......

पारिजात अपने लोक लौट चुकी थी किन्तु उसे वह भी सूर्य के साथ बिताये हुए पल याद आते जिसकी वजह से डेरी डेरी पारिजात का मन परीलोक से उखाड़ने लगा

रानी पारी से बात छुपी नहीं थी की पारिजात फिर से पहले के जैसे उधास रहने लगी है

जब तक किरण साथ होती परिणत कुछ खुश नजर आती पैर फिर एकांत में पहले जैसे हालत हो जाती

रानी पारी ......क्या बात है पुत्री मैं देख रही हूँ जब से आप जिनलोक से लौटी है

फिर से पहले की तरह उद्देश रहती है

पारिजात ......ऐसा कुछ नहीं है रानी माँ हमारा यहाँ मन नहीं लग रहा है

रानी पारी ......क्या सच में यही बात है पुत्री पारिजात

पारिजात.....?????

रानी पारी ......आपके में को हम भली भाटी समाज रहे है पुत्री आप कुछ समय बाद उनसे मिलने जा सकती हो

पारिजात .......हमें किश से मिलना है हमने कब कहा रानी माँ

रानी पारी ......ये मत भूलो पुत्री रानी होने से पूर्व हम आपकी माँ है हमें पता है आप सूर्य से प्रेम करती है आवर उनसे जुदाई आप बर्दास्त नहीं कर प् रही है इस लिया हे आपका यहाँ मन नहीं लग रहा है

पारिजात .......पता नहीं कैसे रानी माँ पैर ये सच है हम उनको अपना सबकुछ मन चुके है हमें उनसे प्रेम है

रानी पारी ......आप निश्चिन्त रहो पुत्री समय आने पे हम सवयं आपका विवाह सूर्य से करेंगे ये हम आपको वचन देते है

रानी पारी की बात सुन पारिजात बहुत खुश होती है

वही जिनलोक में .......

किरण के परीलोक चले जाने के बाद ज्यादातर समय सूर्य सपना के साथ हे लगा रहता इस बिच सूर्य ने माया बुआ कामिनी चची आवर सपना की बहुत बार अच्छे से बजे तीनो का सरीर निखार दिया था

पिछले कुछ समय से मनीषा आवर मोनिका भी सूर्य से काफी खुल गई थी जैसे एक दूसरे को किश कारनामे एक दूसरे के part के साथ मस्ती करना

manisha......didi कब तक हम एक दूसरे को ऐसे हे संत करते रहेंगे सूर्य से हम प्यार करती है आवर बात अब तो माँ भी जानती है

मोनिका .......सही कहा तुमने मनीषा आज रात सूर्य के साथ आगे भढना हे होगा

मनीषा .....किन्तु कैसे दी

मोनिका .........हम यहाँ जिनलोक में है यहाँ मैंने राजवेद की पुत्री से दोस्ती कर ली है

मनीषा .....इस बात का सूर्य से क्या लेना देना है

मोनिका ........तुम्हे ये तो पता है आजकल सूर्य यहाँ जिनलोक की सरब (मदिरा ) का सेवन कर माँ की चुदाई करता है आवर अब तो कामिनी ममी की भी सूर्य नाईट में चुदाई करता है

मनीषा .....तो क्या हुआ दी

मोनिका ......तू दुफेर की दुफेर हे रहो

आज रात सूर्य हमारे साथ सोये उसे मानाने की जिम्मेदारी तुम्हारी है बाकि कैसे सुरु करना है वो सब मैं देख लुंगी

मनीषा ......ठीक है दी सूर्य को मैं मना लुंगी

आप अपना कार्य कीजिये आज कुछ भी हो जाये मुझे सूर्य को अपने अंदर फील कर्जा है बाकि जो होगा देखा जायेगा

मोनिका आवर मनीषा अपने अपने कार्य में लग जाती है

वही जिनिशा इन दोनों के प्लान के बारे में सपना को बिताती है

सपना ......ठीक है उन्हें जो कर्जा करने दीजिये एक न एक दिन तो ये होना हे है

फिर आज क्यों नहीं आवर वैसे भी वो इनसे काफी बड़ी है विवाह तो अभी हो नहीं सकता है

जिनिशा .....किन्तु क्या ये सही रहेगा

दीदी सदी से पहले

सपना ......परतविलोक में तो ये सब सदी से पहले हे हो जाता है खेर चिंता न करो सूर्य इनसे बाद में विवाह कर लेगा

तब तक इनको भी अपनी लाइफ एन्जॉय करने दो

जिनिशा .....ठीक है दी फिर आप हे उनकी हेल्प कर दीजिये

सपना ......पैर मैं कैसे जिनिशा

जिनिशा .....अरे दीदी सरताज को आप आज उनके साथ हे सोने को कह दीजिये बाकि का काम वो आवर उनकी स्पेशल मदिरा कर लेगी हेहेहे

सपना ....समाज गई जीनु की बची

असुर लोक ........

असुरगुरु आवर चांडाल नागलोक के लिया असुर लोक से निकल चुके थे

चांडाल के टेलेपोर्टेसन की मदद से असुरगुरु आवर चांडाल सिगरा हे नागलोक पहुंच गए







देखने में नागलोक काफी खूबसूरत आवर हराभरा था बड़े बड़े विसहकाय पेड चारो तरफ हरियाली हे हरियाली थी

चांडाल ........ नागलोक तो बहुत हे खूबसूरत है असुरगुरु

असुरगुरु .......है किन्तु जिस स्थान पे हम है ये स्थान वासुकि वंश का है जो की सन्ति प्रिय नाग होते है

हमें जिन तक्षक नागो से मिलना है वो हमारे जैसे हे है

असुरगुर वह से एक दिशा की आवर भाड़ गए कुछ 1 हर के बाद चांडाल आवर असुरगुरु तक्षक नागो को इलाके में आ पहुंचे

अभी दोनों कुछ हे आगे भाड़े थे की दोनों को छतो तरफ से तक्षक नागो ने घेर लिया

चांडाल नागो पे प्रहार करने हे वाला था की तभी असुरगुरु ने उसे रोक दिया

असुरगुरु ......हमें तुम्हारे महाराज नागराज तक्षक से मिलना है

नाग ......तुम लोग कोण हो तुम नाग तो नहीं हो नहीं मानव हो फिर यहाँ क्यों आये हो

असुरगुरु .........नागराज तक्षक को सन्देश दो की असुरलोक से असुरगुरु आये है

नाग .......बिना कोई चालाकी के हमारे साथ चलो अगर तुम दोनों ने भागने का या फिर अन्य कोई चालाकी की तो हमें मजबूरन तुम्हे बंदी बना नागराज के सामने ले जाना होगा

बिना किसी विरोध के चांडाल आवर असुरगुरु नागो के साथ तक्षक नागवंश के समुदाय में पहुंचे जहा

ये तक्षक नाग वंश के नाग रहते है

असुरगुरु को देखते हे तक्षक नागराज ने उन्हें पहचाना लिया

t.nagraj .......क्या ये सत्य है असुर लोक के असुरगुरु नागलोक में

असुरगुरु .....ये सत्य है t.nagraj ये हम हे है असुरगुरु

t.nagraj असुरगुरु आवर चांडाल को अपने भवन में ले गया

T.nagraj. .....अब बताइये असुरगुरु इतने समय बाद यहाँ नागलोक में आये हो तो जरूर कोई विशेष कार्य सिद्ध करने आये होंगे

असुरगुरु ......तुम्हारी मित्र असुरराज नरकासुर को तुम्हारी सहायता चाइये t.nagraj

इतना बोल असुरगुरु एक पत्र t.nagraj को दे देता है

T.nagraj पत्र पढ़ कर

T.nagraj .......हम अपने मित्र की सहायता तो करेंगे किन्तु इसमें कार्य में कुछ वक़्त लग सकता है

असुरगुरु ......हमें आपसे यही उम्मीद थी t.nagraj

T.nagraj .......बदले में हमें वो वासुकि वंश की नागमणि चाइये

असुरगुरु कार्य होने के बाद तुम नागमणि रख सकते हो हमें कोई आपत्ति नहीं है t.nagraj

T.nagraj .......आप सब विश्राम करे हम अपने गुप्तचरों इस कार्य में लगा देते है जैसे हे हमें मौका मिला हम उसे आपको सौंप देंगे

असुरगुरु जी .....धन्यवाद t.nagraj

चांडाल .....क्या हम एक बार उस राजकुमारी कोमलांगी को देख सकते है

t.nagraj ........है किन्तु अभी नहीं हर सुबह वो माँ दुर्गा की आराधना करने मंदिर जाती है वही उसे देख सकते हो

वुसुकि नागवंश महल .......

1 ......नागराज महावीर (वीर ) वासुकि

2 .......नाग महारानी पूर्वी

3 .......नाग राजकुमारी कोमलांगी

नागराज वीर .........महारानी पूर्वी आने वाले समय में हमें राजकुमारी को नागलोक का वरिष्ठ घोषित करने वाले है किन्तु .....

नागरानी पूर्वी .......किन्तु क्या महाराज

नागराज वीर ......हमारी परजा हमारी पुत्री कोमलांगी को सिंघासन पे बैठना स्वीकार करेगी भी या नहीं यही हमारी चिंता का विषय है

नागरानी पूर्वी .......किन्तु हमारी को आवर संतान भी तो नहीं है जिसे हम नाग लोग का ुत्रादिकारी घोषित कर सके

नागराज वीर ......हमें चिंता है हो रही है हमारी पुत्री की क्युकी नागराज तक्षक नागमणि के पीछे है आवर राजकुमारी अभी इस योग्य नहीं है की वह नागराज तक्षक का सामना कर सके

नागरानी पूर्वी ......हमारे पूर्वजो के बारे में जो कहा वो सत्य है तो राजकुमारी को हमारे उस प्राचीन मंदिर में रह कर पूजा कर परबु से वरदान प्राप्त कर राजकुमारी इस योग्य हो सकती है की वह नागलोक आवर नागराज दोनों को संभल सके

नागराज वीर ......किन्तु वह हमारी पुत्री अकेले कैसे रहेगी इतने लम्बे समय जबकि वह से तक्षक वन भी बहुत पास है

नागरानी पूर्वी .....हम आपकी चिंता को समाज रहे है महाराज किन्तु यही एक मार्ग है जिस से नागमणि को बचाया जा सकता है नागराज तक्षक से आवर राजकुमारी की पूजा सम्पन हुई तो किसी बात की चिंता नहीं रहेगी

नागराज वीर .........हम राजकुमारी को भेजना तो नहीं चाहते थे किन्तु हमारे पास अन्य कोई मार्ग भी तो नहीं है

नागरानी पूर्वी .....हम राजकुमारी से बात करते है इस विषय पे महाराज

नागराज वीर ......हमें अभी बात करनी होगी राजकुमारी से आवर उनसे नागमणि परबु को अर्पित करवानी होगी जो की पूजा पूर्ण होने के बाद बहुत आदिक सकती साली हो जाएगी

नागराज वीर राजकुमारी कोमलांगी को इस विषय में बताते है

राजकुमारी कोमलांगी भी मन जाती है

नागराज वीर ......पुत्री नागमणि का आह्वान कर उसे परबु को अर्पित कर दो

राजकुमारी नागमणि का आह्वान करती है जो की कुछ हे पालो में राजकुमारी कोमलांगी के हाथो में आ जाती है





अपने पिता नागराज वीर के आज्ञा अनुसार राजकुमारी नागमणि को परबु को अर्पित कर देती है

नागराज वीर पुत्री कल तुम्हे अकेले परबु के प्राचीन दिव्या लिंग की पूजा कर उन्हें प्रश्न करना होगा तभी तुम फिर से नागमणि प्राप्त कर पाओगी

राजकुमारी .....जो आज्ञा पिता श्री हम आपकी इच्छाओ का मन रखते हुए परबु को अवश्य प्रश्न करेंगे पिता श्री

वीर .पूर्वी .....हमें आपसे यही अपेक्षा थी पुत्री कोमलांगी

तक्षक वन ( नागलोक )

चांडाल रात के ांदेरे में तक्षक महल से निकल पास में हे खोखर जंगल तक्षक वन में जा पंहुचा

मोहिनी .....मालिक चांडाल हम यहाँ क्यों आये है

चांडाल .....में रहो जब तक मैं न कहु

चांडाल वही एक स्थान देख वो रक्ष किताब निकलता है





चांडाल किताब खोल उसे पढ़ने लगता है

डेरी डेरी उस किताब से नीली रौशनी निकलने लगती है

आवर एक जगह पे एकति होने लगती है

2 हर तक चले इस कार्य में मोहिनी ने एक भी सबद नहीं कहा

कुछ देर बाद नीली रौशनी का वो होला चांडाल के इसारे पे पास में कड़ी मोहिनी की आत्मा से जा टकराता है जिस से मोहिनी की चीखे निकलने लगती है जिन्हे केवल चांडाल हे सुन सकता था

काफी वक़्त तक मोहिनी तड़पती रही उसके बाद डेरी डेरी मोहिनी संत हो गई

चांडाल ......अब तुम पहले से सक्तिसाली हो मोहिनी आवर अब तुम किसी भी पवित्र आत्मा को अपने सम्मोहन में सम्मोहित कर कुछ भी करवा सकती हो

मोहिनी .....मुझे इतना अजीब क्यों लग रहा मालिक चांडाल

चांडाल .......क्युकी अभी अभी जो ऊर्जा तुमसे टकराई है वो तुम्हारी आत्मा से जुड़ चुकी है

कुछ देर आवर इसी बुक को पढ़ने के बाद चांडाल जोर जोर से मंत्रो का उच्चारण करने लगता है

चांडाल के सीने से रेक रेड आवर ब्लैक ऊर्जा निकल हवा में आकर लेने लगती है

देखते हे देखते उस ऊर्जा से एक खंजर का निर्माण होता है

जो दिखने में बिलकुल डेविल खंजर जैसा था

चांडाल .......हाहाहा सूर्य तुम्हारी मौत का अस्त्र त्यार है इसे शैतानी खबर से तुम्हारा आंत होगा

मोहिनी वह से गायब हो जाती है आवर चांडाल फिर से नागराज तक्षक के महल लौट आता है ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............

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अपडेट. 126

चांडाल के सीने से एक रेड आवर ब्लैक ऊर्जा निकल हवा में आकर लेने लगती है

देखते हे देखते उस ऊर्जा से एक खंजर का निर्माण होता है

जो दिखने में बिलकुल डेविल खंजर जैसा था

चांडाल .......हाहाहा सूर्य तुम्हारी मौत का अस्त्र त्यार है इसे शैतानी खंजर से तुम्हारा आंत होगा

मोहिनी वह से गायब हो जाती है आवर चांडाल फिर से नागराज तक्षक के महल लौट आता है ...........

अब आगे ......

जिनलोक .....

रात में सूर्य जब अपने रूम में पंहुचा तो सपना आवर जिनिशा दोनों हे किरण को ले कर चर्चा कर रही थी

सूर्य ......क्या बाते हो रही है दोनों बहनो में

जिनिशा .....कुछ नहीं सरताज हम स्वीटी के बारे में बात कर रहे थे

सूर्य ......हम्म्म तो कब लौट रही है स्वीटी परीलोक से

सपना .......आप हे क्यों नहीं हो कर आ जाते परीलोक अपनी पारिजात से भी मिल लेना

सूर्य ......उम्म्माः क्या बात मेरी जान सपना को बड़ी पारी की याद आ रही है

जिनिशा ......दीदी का तो पता नहीं पैर आप जरूर याद करते होंगे पारिजात को

सूर्य .....ऐसा कुछ नहीं है तुम दोनों से फुर्सत मिले तो याद करूँगा न

सपना ....इसी लिया आज आप मोनिका आवर मनीषा के पास जाइये

सूर्य .....है मैं भी यही बताने आया था तुम दोनों को की आज रात मैं मोनिका दी आवर मनीषा दी के साथ रुकने वाला हूँ

सूर्य कुछ देर आवर बोटा कर दोनों को प्यार से गुड नाईट किश कर मोनिशा के रूम की तरफ भध जाता है

मनीषा ......दीदी आपने सब सोच लिया है न कही भाई नाराज हो जाये

मोनिका .....ऐसा कुछ नहीं होगा तुम चिंता न कर बस जो मैं कृ उसमे मेरा साथ देना बाकि मैंने सब इंतजाम कर लिया है

सूर्य रूम में एंटर करते हुए

सूर्य ....कैसा इंतजाम कर लिया है दीदी आपने

मनीषा .....कुछ नहीं सूर्य वो दीदी ने तुम्हारे लिया यहाँ की तुम्हारी फवोरिट चीज़ का इंतजाम किया है उसके लिया हे दीदी बोल रही है .

है न दीदी

मोनिका .....है यही बात है सूर्य

सूर्य मोनिका आवर मनीषा के बिच जा कर लेट जाता है

मोनिका बीएड के निचे से वो सुरभि निकलती है जिसमे मदिरा थी

सूर्य ......क्या बात है दीदी आप भी इसका सेवन करने लगी

मोनिका .....क्यों हम नहीं पि सकती है क्या

सूर्य ......चलो फिर आज तीनो हे मिल कर पिटे है

मनीषा मोनिका को इसरा करती है की क्या कर न है तो मोनिका है में इसरा करती है

खुद मोनिका हे पग बनती है जिसमे खुद दोनों के लिए छोटे छोटे आवर सूर्य के लिया लग पग

कुछ हे देर में देखते हे देख पूरी मदिरा की सुराही सूर्य मोनिका मनीषा तीनो मिल कर खली कर देते है

तीनो को सुरूर चने लगता है

सूर्य ......आपके हाथो की मदिरा का सवाद हे अलग है दीदी

मोनिका आवर मनीषा अपने अपने कपडे निकलने लगती है

मोनिका सूर्य को किश करने लगती है

वही मनीषा सूर्य को निचे नंगा कर सूर्य लैंड मुँह में भर चूसने लगती है

सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह्हह दीदी बहुत अच्छा लग रहा

सूर्य अपने हाथो से मोनिका की गांड को सहलाते हुए लैंड चूसै आवर किश का मज़ा लेने लगता है

कुछ देर बाद मोनिका भी मनीषा का साथ देने के लिया

सूर्य का लैंड चूसने लगती है

दोनों बहने बरी बरी से सूर्य के लैंड क बड़े हे मज़े से चूषण रही थी

डेरी डेरी सूर्य के मुँह से निकलती सिसकारियां कक्ष में गूंजने लगी

मनीषा ने एक कदम आवर आगे बढ़ाते हुए सूर्य के बड़े बड़े अंध कोष मुँह में भर कर मिच्ने लगी सूर्य को इसमें भी मज़ा आ रहा था डेरी डेरे सूर्य की कमर उठने लगती है

सूर्य मोनिका को अपने ऊपर खींच कर उसके सरीर से आखरी कपडा भी निकल देता है

आवर अपना मुँह मोनिका की मुनिया पे लगा देता है

मोनिका की छूट से बाह रहे कमरष की खुसबू सूर्य के सरीर में ताकत का परवाह तेज करने लगती है

सूर्य .....हम्म्म हम्म्म. दी आपकी छूट का टेस्ट से तो इस मदिरा से भी मस्त है हम्म्म सुरर्र्प सुरर्रूप

मनीषा सूर्य को अंडो को चूसते हुए अपनी छूट में ऊँगली करने लगती है

कुछ देर में मोनिका अकड़े हुए अपनी छूट का कमरष सूर्य को पीला कर संत हो जाती है

मोनिका मनीषा को इसरा करती है की वो त्यार रहे

मनीषा अपनी पोजीशन ले कर अपने पैरो को छोड़ा कर लेट जाती है

मोनिका आवर सूर्य दोनों हे मनीषा की छूट चूसने लगते है

मनीषा की गुदाद्वार आवर छूट पे हुए एक साथ हमले से मनीषा की छूट में चीटिया रेंगने लती है

आवर उसकी छूट में संकुचन तेजी से होने लगता है

जैसे हे मनीषा झड़ने से के पास पहुंची उसका सरीर कलने लगा सूर्य ने अपने मुँह हटा वह अपना लाल दहकता सुलाता लगा दिया

आवर मनीषा की छूट पे घिसने लगा

एक बार तो मनीषा की गुस्सा आया सूर्य के ऐसा करने पे पैर जब पहली बार छूट पे किसी गरम नरम चीज़ को मह्सुश किया तो मनीषा के पूरी बदन में सनसनी से होने लगी

मनीषा अपने पैरो को छोड़ा कर अपनी छूट के होंठ अपने हाथो से खोल सूर्य को ामान्तरण देने लगी

सूर्य इस वक़्त सेक्स आवर नशे में चूर था

अगर आवर वक़्त होता तो सूर्य सायद ऐसा अभी तो न करता पैर

अभी वक़्त आवर हालत अलग थे

सूर्य के लैंड पे मोनिका ने अच्छे से कोई क्रीम लगा कर चिकना कर मनीषा की छूट पे सेट कर सूर्य के खुली पे हलके से चपेट लगा दी

सूर्य ने भी बिना देर किया पहला वॉर मनीषा की छूट पे कर दिया

मनीषा की छूट को चिढ़ते हुए करीब 3 इंच के आसपास सूर्य ने अपना घोडा उस संकरी कुँवारी गुफा में जातर दिया

कुछ समय डेरी डेरी सूर्य ढकने मरता रहा आवर बिच में रुक कर मनीषा को संत करता रहा 10 मिनट्स के करीब डेरी डेरी सूर्य ने अपना घोडा मनीषा की छूट में पूरा उतर दिया निचे से बेडशीट पूरी लाल हो चुकी थी

मनीषा ......हम्म्म. अह्ह्ह्हह मेरी जान अह्हह्ह्ह्ह ऐसे प्यार से अह्ह्ह्हह छोड़ो बहुत मज़ा आ रहा है

मोनिका जो कब से गरम थी वह अपनी छूट मनीषा के मुँह पे रख चटाने लगती है आवर साथ सूर्य को किश करने लगती है

अब केवल कर्कश में सूर्य के देखो की हे आवाज हो रही थी बाकि पुच्छ पूछ की छूट चूसै आवर किश की आवाज गूंज रही थी

सूर्य .....हम्म्म अह्ह्ह्हह दी आपकी चूचियों उम्. देखो तो कैसे जल रही है

ममोनिका अपनी चूचियों थम सूर्य के मुँह से लगा देती है

मनीषा सूर्य के जातको को ज्यादा देर झेल नहीं पति आवर. भभका कर झड़ने लगती है

मनीषा के झाड़ते हे सूर्य मोनिका को वही बीएड इ पदक उसकी छूट पे क्रीम लगा कर अपना लैंड मोनिका की छूट पे जिश्ने लगता है

मोनिका .....अह्हह्ह्ह्ह भाई अब दाल दो अपनी मोनिका दीदी की छूट में अपना लैंड आवर मेरी वर्ग इन छूट आवर मुझे हमेशा के लिया अपनी बना को

सूर्य .....बस ये लीजिये दीदी आज से आप दोनों आवर आपकी ये प्यारी छूट मेरी हुई

मोनिका ....भाई जब तक पूरा अंदर न चला जाये रुकना नहीं मर दर्द बर्दास्त कर लुंगी

मोनिका ने ये कह कर खुश के पैरो पे खेल्दै मर ली

सूर्य बिना रूखे मोनिका की छूट पे एक के बाद एक जतका मरता है जिस को न झेल पाने से मोनिका बेहोश हो जाती है

मनीषा जल्दी से उठ कर मोनिका के मुँह पे पानी डालती है

आवर मोनिका के ऊपर आ कर उसका मुँह बंद करती है ताकि कोई सुने न

सूर्य मनीषा की कमर थम मोनिका को चिढ़ने लगता है डेरे डेरी मोनिका का दर्दे में बदलने लगता है

सूर्य .....उम्. अह्ह्ह्हह डीडू अमज़द आ रहा है आपकी टाइट छूट मारने में

अह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ आपकी छूट बहुत गरम है दीदी उफ्फ्फ्फ़ लगता है जैसे अंदर कोई कल्टी हुई सुरंग में अपना लैंड डाला दिया हो मैंने

मोनिका .....अह्हह्ह्ह्ह भाई आवर जोर से छोड़ो बहुत मज़ा आ रहा है मुझे पता होता लैंड छूट में जाने पे इतना मज़ा आता है अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम मम्मी तो मैं मम्मी से पहले आपसे छुड़वाती

मनीषा .....भाई आपने तो हमें कहा था की माँ की अब आप चूसै नहीं करोगे

फिर आप माँ की चुदाई क्यों करते है

सूर्य मोनिका को उठा कर सोफे पे लिटा कर चुदाई करने लगता है

डेरी डेरी सूर्य की चुदाई अपनी रफ़्तार पकड़ने लगती है

वही मोनिका की छूट मढ़ने लगती है

फिर भी सूर्य मोनिका की चुदाई करता रहता है

जब तक मोनिका 3 बार नहीं झड़जाति है

सूर्य मोनिका को छोड़ मनीषा को पकड़ बीएड पे लेता चुदाई करने लगता है

मोनिका चुदाई के थकान की वजह से वही लेट जाती है

सोफे पे आवर सूर्य मनीषा की चुदाई जारी रखता तब तक जब तक सूर्य मनीषा की छूट में भध नहीं जाता है

सूर्य मोनिका को मनीषा को अपने साथ ले कर सो जाता है पैर जल्दी हे सुबह को फिर से एक बार नजर बदल जाता है जब मोनिका सोये हुए सूर्य के लैंड की साड़ी करती है

सूर्य को संत कर्जा मोनिका के अकेली की बस की नहीं थी बेचारी मनीषा भी 2 बार डिस्चार्ज हो गई

सूर्य ने अपना वीर्य बरी बरी से दोनों की छूट में डाला आवर सो जाया

सूर्य मोनिका मनीषा तो सो गए किन्तु इन तीनो के सो काने के बाद तीनो सूर्य के सरीर से रौशनी निकलती है जिसने से तीनो के सरीर कवर हो जाते है

नागलोक .....

नागराज वीर के महल में आज सुबह की सुरुवात कुछ जल्दी हे हो गई थी

नागसेनिको की एक बड़ी टुकड़ी एक बड़े से रथ को घेरे कड़ी किसी का आने का इन्तजार कर रही थी

कुछ समय बीतने के बाद नागराज महावीर नाग महारानी पूर्वी राजकुमारी कोमलांगी तीनो महल से निकल उस रथ में सवार हो गए

नागराज वीर ......सारथी रथ को पुराने मंदिर की आवर ले चलो

नागराज का आदेश मिलते हे सत्ती रथ को आगे की आवर बढ़ा देता है

नगर को पार कर एक कच्चे रस्ते से होते हुए नागराज का रथ एक जंगल के अंदर चला जाता है

नागराज ......पुत्री कोमलांगी आगे का सफर आपको अकेले हे तय कारनामे होगा

वो रहा मंदिर

राजकुमारी ......जी पिता श्री हमें आशीर्वाद दीजिये की हम परबु को प्रश्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सके

नागराज वीर .....हमारा आशीर्वाद तो सदैव आपके साथ है पुत्री परबु आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे

पुत्री समय हो गया है अब आपको आगे का सफर तय कर आज से हे पूजा आरम्भ कर देने चाइये

राजकुमारी .....जी पिता श्री आघ्या दीजिये

नागराज वीर ......पुत्री याद रहे पूजा खंडित नहीं होने चाइये कुछ भी हो जाये आप अपनी पूजा पूर्ण किया बिना मंदिर से बहार मत आता

राजकुमारी .....जी पिताजी जैसे आपने बताया है वैसा हे करेंगे अब आज्ञा दीजिये

राजकुमारी अपने माता पिता से मिल उनका आशीर्वाद ले मंदिर की आवर चल दी

नागराज नागरानी अपनी पुत्री को जाते हुए कुछ देर देखते रहे फिर कुछ सेनिको को वही से नजर रखने का आदेश दे महल लौट गए

राजकुमारी मंदिर पहुंच चुकी थी

उन्होंने पहले वह साफ सफाई की फिर प्रतिमा को स्वच्छ जल से स्वच्छ कर पुष्प माला अर्पित कर अपनी पूजा के लिया बेथ गई

नागराज तक्षक को खबर मिल चुकी थी की राजकुमारी शिव मंदिर पूजा करने जा चुकी है

नागराज अपने गुप्तचरों को राजकुमारी पे नजर रखने के लिया भेज देता है

चांडाल ......ऐसी कोनसी पूजा कर रही है राजकुमारी वह

t..nagraj ......अनिरुद्ध पूजा करने गई है राजकुमारी मंदिर में

चांडाल .....क्या अनिरुद्ध पूजा कही ये वही पूजा तो नहीं है जिसमे जब तक पूजा पूर्ण न हो जान वह ाँ गठन नहीं कर सकते है

असुरगुरु ......है ये वही पूजा है अगर ये पूजा सम्पान हुई तो वो बहुत सक्तिसाली हो जाएगी

t.nagraj .....किन्तु ये पूजा इतनी भी आसान नहीं है असुरगुरु

असुरगुरु ......है ये सत्य है किन्तु अगर राजकुमारी सफल हुई तो नागराज तक्षक आप भी उसका सना नहीं कर पाओगे आप क्या को भी नाग उसका सामने ठीक नहीं पायेगा ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
अपडेट 127

चांडाल .....क्या अनिरुद्ध पूजा कही ये वही पूजा तो नहीं है जिसमे जब तक पूजा पूर्ण न हो जान वह ाँ गठन नहीं कर सकते है

असुरगुरु ......है ये वही पूजा है अगर ये पूजा सम्पान हुई तो वो बहुत सक्तिसाली हो जाएगी

t.nagraj .....किन्तु ये पूजा इतनी भी आसान नहीं है असुरगुरु

असुरगुरु ......है ये सत्य है किन्तु अगर राजकुमारी सफल हुई तो नागराज तक्षक आप भी उसका सामना नहीं कर पाओगे आप क्या कोई भी नाग उसके सामने ठीक नहीं पायेगा ...............

अब आगे ........

सूर्य सुबह जब उठा तो उसका सर भरी भरी हो रहा था

सूर्य .....लगता है मदिरा में मोनिका आवर मनीषा ने कुछ मिलाया था

सूर्य फ्रेश हो कर महल से बहार चला जाता है

वही सुबह जब दोनों बहने उठी तो दोनों काफी तरोताजा थी दोनों का हे चेहरा एक हे रात में निखार उठा था

जो सपना की नजरो से बच नहीं पाया

सपना .......तो आखिर तुम दोनों ने मैदान मार हे लिया

मोनिका .........क्या मतलब है भाबी आपका

सपना .........तुम दोनों ने जो रात में किया वो सब हम दोनों को पता है क्यों जिनिशा

जिनिशा .....अब जिनि सक्तियो का कुछ तो फायदा होगा हे न दीदी वैसे भी मैं खुश हूँ दोनों के लिया

बस वो मदिरा में ॉधी मिला कर सरताज को नहीं देना चाइये था आप दोनों

सपना .....क्या मतलब इन्होने कुछ मिलाया था क्या मदिरा में

मोनिका .....सॉरी भाबी वो हमने मदिरा में एक दवाई मिले थी जिस से सूर्य हमारे साथ आगे बढ़ वो सब कर सके

सपना .......ये तुम दोनों ने ठीक नहीं किया मोनिका मनीषा उनको पता चल गया होगा

मोनिका .....सूर्य से हम बात कर लेने पैर आप हमें माफ कर दो भाबी

जिनिशा ......दीदी अब इन्हे माफ कर भी दीजिये वैसे भी ये हमारी बहने है आवर सौतन भी हेहेहे

आज नहीं तो कल रिबन काटना हे था इनका भी

सपना ......फिर से ऐसा नहीं कर न दोनों तभी तुम दोनों को माफ करुँगी आवर सूर्य को भी सॉरी बोल अपनी गलती मन्ना होगा

दोनों बहने अपने कान पकड़ सॉरी बोलती है आवर सूर्य को भी सच बता कर माफी मांगने का कहती है

सपना आवर जिनिशा ने दोनों को माफ कर अपने गले से लगा लेती है

वही सूर्य सुबह सुबह महाकाल मंदिर जा पहुंच जहा गुरुदेव ध्यान में लीं थे

सूर्य ......गुरुदेव पता नहीं आप सुन भी रहे है या नहीं पैर फिर भी मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ

कल रात जो कुछ भी हुआ सूर्य उन्हें बता देता है

तभी गुरुदेव की आवाज सूर्य को अपने दिमाग में सुनाई देती है

गुरुदेव .......पुत्र जो समय बिट चूका है उसे बदला नहीं जा सकता है कल जो कुछ भी हुआ उसे अब बदल नहीं सकते तुम उन दोनों को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार करो समय की घरब में हमारे लिया क्या छुपा हुआ है कोई नहीं जनता

सूर्य .....जी गुरुदेव जैसा आप कहे आपका आदेश मान मोनिका आवर मनीषा को अपने जीवन साथी के रूप में स्वीकार करता हूँ

सूर्य गुरुदेव से कुछ समय आवर बात कर महल लौट जाता है

कुछ समय बाद पारिजात आवर किरण जिनलोक लौट आते है रुपाली आवर दीपाली के साथ

एक बार फिर से सूर्य का साथ प् कर पारिजात काफी खुश होती है

नागलोक ......

चांडाल ......t.nagraj हमारे पास समय नहीं है हमें सिगरा हे ये कार्य सम्पन करना होगा

असुरगुरु .......है t.nagraj राजकुमारी की जैसे जैसे पूजा आगे बढ़ेगी वह वैसे वैसे सक्तिसाली होती जाएगी

t.nagraj .......ये हम भी जानते है असुरगुरु किन्तु उस मंदिर में तक्षक वंश का परिवेश कर वर्जित है

असुरगुरु ......कोई तो मार्ग होगा जिस से राजकुमारी को बहार लाया जा सके

चांडाल .......हमें एक बार प्रयाश तो अवश्य करना चाइये t.nagraj अगर विफल होते है तो कोई अन्य विकल्प देखते है

असुरगुरु .....मुझे असुरराज को भी यहाँ की जानकारी देनी होगी

चांडाल .......t.nagraj आप हमें उस द्वार के विषय में बताइये जिस से किसी भी लोक में जाया जा सकता है

t.nagraj ......तुम्हे उसकी क्या आव्सय्कता है चांडाल

चांडाल ........राजकुमारी के अपहरण क्र बाद अगली योजना उस द्वार के जरिये हे पूर्ण होगी

t.nagraj असुरगुरु आवर चांडाल को ले कर एक बहुत बड़े खंडहर में पंहुचा जहा एक आवर एक विशाल द्वार था जिसपे नागो के निशान बने हुए थे

t.nagraj ......यही है वो स्थान असुरगुरु किन्तु इसका लम्बे समय से प्रयोग नहीं किया है किसी ने भी

चांडाल आगे बढ़ उसे खोलता है किन्तु वह खुलता नहीं

t.nagraj .......मित्र चांडाल इसे केवल नाग खोल सकते है

t.nagraj आगे भाड़ उस द्वार को खोल देता है

असुरगुरु ......मैं इस द्वार का प्रयोग कर असुरलोक पहुँचता हूँ आवर असुरराज को यहाँ की विस्तृत जानकारी देता हूँ

असुरगुरु असुर लोक के लिया द्वार में परिवेश कर वह से गायब हो गए

साम के वक़्त t.nagraj चांडाल की बात मान अपने कुछ विशेष नाग योद्धा को राजकुमारी की आज की पूजा समाप्ति के बाद उसका अपहरण कर यहाँ लेन का आदेश दे दिया

4.नाग योद्धा t.nagraj का आदेश मान मंदिर जा पहुंचे

अब राजकुमारी की आज की पूजा सम्पन होने में कुछ हे समय की प्रतीक्षा थी

जैसे हे सूर्यास्त हुआ राजकुमारी आज की पूजा पूर्ण कर पूजा से उठ गई

t.nagraj के चारो योद्धा बिना किसी आहात के चुप कर राजकुमारी की प्रतीक्षा करने लगे कुछ समय बाद राजकुमारी मंदिर से निकल अपने विश्राम स्थल पे पहुंची जहा चारो नागयोद्धाओ ने राजकुमारी को घेर लिया

राजकुमारी ........तुम कोण हो आवर यहाँ क्या कर रहे हो

घोर से देखने पे राजकुमारी को उनका वास्तविक तक्षक रूप दिखाई दिया

आधा 1.......हम तक्षक योद्धा है नागराज तक्षक का आदेश है आपका अपहरण कर उन्हें सौंप दे

चारो नाग योद्धा राजकुमारी को चारो तरफ से घेर लेते है

राजकुमारी ......तुम तक्षक नाग वंश का यहाँ आना वर्जित है हम कह रहे है अभी भी वक़्त है लौट जाओ यहाँ से

राजकुमारी की बात सुन चारो हसने लगते है

राजकुमारी को उनकी हाशि से गुस्सा आने लगता है आवर उनका रूप परिवर्ती होने लगता है

राजकुमारी का पंचमुखी रूप देख 4 नाग योद्धाओ को अपनी मौत राजकुमारी के रूप में नजर आने लगती है

चारो नाग योद्धा अपने नाग रूप में राजकुमारी पे हमला करने लगते है

राजकुमारी उनसे योध करने लगती है डेरी डेरी राजकुमारी उन्हें घायल कर देती है

अंत में 3 नाग योद्धा मरे जाते है

अंत में एक नाग योद्धा नाचता है

राजकुमारी .....जाओ आवर जा कर अपने तक्षक नागराज से कह दो की हमारी पूजा सम्पन होने तक का जीवन शेष है उसका उसके पश्चात हम उन्हें उनके पापी जीवन से मुक्त करने खुद आएँगी

नागयोद्धा वह भाग कर पूरी जानकारी t.nag तक्षक को देता है

असुरलोक .....

असुरगुरु असुरराज को नाग लोक की जानकारी देता है

असुरराज ......असुर गुरु हम चाहते की आप यही असुर लोक में रह कर असुरलोक की जिम्मेदारी संभालो नागलोक अब हम स्वयं जायेंगे

असुरगुरु ......हम भी यही चाहते है असुरराज ताकि समय रहते उस मानव को मारा जा सके जो आपके जीवन को ग्रहण लगाने जनम लिया है

असुरराज .....जी असुरगुरु हम आज हे अपने कुछ विशेष योद्धाओ को ले कर नागलोक रवाना होते है

नागलोक ........

चांडाल हर रात अपने शैतानी खंजर को आवर सक्तिसाली बनाने के लिया परतविलोक से कैद की सभी आत्माओ को उस शैतानी खंजर में कैद करने लगता है जिस से उसकी मारक क्षमता आवर भध जाती है

असुरराज नागलोक पहुंच चूका था

उसे t.nagraj से पता चला की उसके प्रयाश को कैसे राजकुमारी ने विफल कर दिया

जब से t.nagraj के योद्धा ने उसे बताया की कैसे राजकुमारी ने उनके योद्धाओ को मारा आवर अंत में मिली धमकी की वजह से t.nagraj राजकुमारी पे कुछ ज्यादा हे गुस्से में था

असुरराज ......हम उसका मंदिर में कुछ नहीं कर सकते है उसे किसी तरह बहार निकलना होगा

चांडाल ......किन्तु कैसे असुरराज

असुरराज .......जहा तक मुझे पता चला है राजकुमारी कार्मिक परवर्ती की है तो किसी को पीड़ा में देख उसकी सहायता करने के लिया मंदिर से बहार भी आ सकती

t.nagraj ......आपने उचित कहा मित्र हमने इस विषय में तो सोचा हे नहीं हमने बल का प्रयोग किया किन्तु बूढी का नहीं

असुरराज ........मित्र चांडाल तुम त्यार रहो आज हे राजकुमारी तुम्हारे सामने होगी क्या आवर कैसे उस मानव को यहाँ लाना है ये तुमपे है

चांडाल .......आप केवल बंदी अवस्था में राजकुमारी मुझे सौंप दीजिये बाकि का कार्य मुझपे छोड़ दीजिये

असुर राज t.nagraj आवर अपने कुछ असुर साथी को ले कर वह से मंदिर की आवर चल दिया

वही उनके जाते हे चांडाल अपने कार्य में लग गया ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
 
अपडेट 128

असुरराज ........मित्र चांडाल तुम त्यार रहो आज हे राजकुमारी तुम्हारे सामने होगी क्या आवर कैसे उस मानव को यहाँ लाना है ये तुमपे है

चांडाल .......आप केवल बंदी अवस्था में राजकुमारी मुझे सौंप दीजिये बाकि का कार्य मुझपे छोड़ दीजिये

असुर राज t.nagraj आवर अपने कुछ असुर साथी को ले कर वह से मंदिर की आवर चल दिया

वही उनके जाते हे चांडाल अपने कार्य में लग गया ...........

अब आगे.......

जिनलोक .........

जिनलोक में इस वक़्त मध्य रात्रि का समय हो रहा था

सभी अपने अपने कक्ष में विश्राम कर रहे थे किन्तु कोई था जो अभी भी जग रहा था

सूर्य इस वक़्त कामिनी के साथ सोया हुआ था अभी अभी सूर्य ने कामिनी के योनिकुंड को अपने वीर्य से लबालब कर के उसकी बगल में लेता हे था तभी उसे बेचैनी होने लगी

कामिनी ......क्या हुआ सूर्य तुम्हे

सूर्य .....पता नहीं कामिनी बहुत अजीब सा लग रहा है आप आराम कीजिये मैं बहार टहल कर आता हूँ

कामिनी ......मैं भी चलती हम तुम्हारे साथ में बहार

सूर्य ........नहीं आप यही रहो काम्य काव्य का ख्याल रखो मैं कुछ देर टहल कर स्वीटी के पास चला जाऊंगा

कामिनी .......ठीक है अपना ख्याल रखना तुम

सूर्य .....जी चची गुड नाईट

सूर्य वह से निकल कर उद्यम में चला जाता है ताकि फ्रेश हवा से उसकी भेचेनि कुछ काम हो

अभी सूर्य को उद्यान में टहलते हुए कुछ हे समय हुआ था की उसके कानो में किसी की पायल की आवाज पढ़ती है

सूर्य चारो तरफ ध्यान से देखता है पैर उसे कुछ नहीं दिखाई देता है

सूर्य .....इस समय कोण हो सकता है यहाँ मेरे अलावा कही पारिजात तो नहीं हो सकता है वही हो

सूर्य पायल की आवाज का पीछा करते हुए उस आवर भेदने लगा जिस दिशा से पायल की आवाज आ रही थी

सूर्य पीछा करते हुए महल से दूर आ गया

उसे ये भी नहीं ज्ञात रहा की एक बार अपनी सकती का प्रयोग कर वह पारिजात से संपर्क कर उस से पूछ ले

कुछ आवर आगे चलने के बाद सूर्य एक खली मैदान में खड़ा था वही सूर्य से कुछ दुरी पे कोई साया आवर भी खड़ा था

सूर्य जैसे आगे बढ़ा वो साया भी सूर्य से दूर भढ़ता गया

सूर्य ......परिणत रुको न क्यों तड़पा रही हो मुझे

साया हाथ के इसारे से पीछे आने को कहता है

सूर्य तेजी से उसके पीछे दौड़ने लगता है

साया वही मैदान में खड़े 2 पिलर के बिच जा कर खड़ा हो जाता है सूर्य से अपोजिट अपना चेहरा करके

जैसे हे सूर्य वह पंहुचा साया आगे बढ़ गायब हो गया





सूर्य ......कहा गई अभी तो यही थी

ओह्ह लगता है आज रात पारिजात खेलने के मूड में है

सूर्य बिना सोचे समजे दोनी पिलर के बिच से आगे बढ़ जाता है

सूर्य को ये भी ज्ञात नहीं रहा की वो जिस स्थान से गुजरा है वो जिनलोक का टेलेपोर्टेसन द्वार था अन्य लोक के लिया

परबु मंदिर ......

गुरुदेव ...........ये तुमने क्या किया पुत्र सूर्य जिस समय जिस घडी को फैलने के लिया तुम्हे आवर तुम्हारे परिवार को परतविलोक से दूर रखा था आज वही होने जा रहा है

तुम मोहिनी आवर चांडाल के माया जाल में फाश कर अपने अंत की आवर भध रहे हो रुक जाओ पुत्र अभी भी समय है

गॉड .......पुत्र नियति ने जो सूर्य के भाग्य में लिखा है उस से सूर्य बच नहीं सकता फिर चाहे वो मेरा हे अंश क्यों न हो नियति से तो स्वयं त्रिदेव भी नहीं बच सकते है

नियति के हाथो विवश हो महादेव सब कुछ जानते हुए भी अपनी प्रिय अर्धांगिनी देवी साती को उनके हे पिता प्रजापति से अपमानित हो अग्निदाह करने से रोक नहीं पाए

गुरुदेव ......किन्तु परबु जो करम सूर्य करने जा रहा है उस से तो उसका उद्देश्य हे ख़तम हो जायेगा जिस उद्देश्य के लिया आपके अंश का परतविलोक में जनम हुआ

गॉड ......पुत्र जो होने जा रहा है वो नियति की मांग है उस में किसी प्रकार का हस्तक्षेप काटना उचित नहीं नियति अपना कार्य कर दिया है

गुरुदेव ........ये कैसा खेल है परबु नियति का जो अनजाने में की गलती ी इतनी बड़ी सजा मिल रही है

God......nahi पुत्र सूर्य के साथ जो भी हो रहा वो इस लिया नहीं की उसने प्रिय पुत्री के साथ जो किया उसका दंड मिल रहा है

अपितु सूर्य को जो सक्रिय मिली है उसका गलत उपयोग करने के कारन दंड मिल रहा है तुम्हारा अनुज चांडाल आवर मोहिनी केवल नियति द्वारा रची माया का केवल माध्यम भर है

बड़ी सक्तियो के साथ बड़ा दायित्व भी मिलता है जिसमे अभी तक सूर्य पूर्ण रूप से विफल रहा है

गुरुदेव .......कोई तो मार्ग होगा परबु इस घटना करम को रोकने का

God.......niyati सभी को एक अवसर अवश्य देती है अपनी गलतियों को सुधरने का अब सूर्य अपनी गलतियों से सुख ले उन्हें सुधरता है या फिर एक आवर गलती कर इस घटनाक्रम को होने देता है

गुरुदेव .....क्या मतलब परबु अपने भक्त पे दया करे परबु

गॉड ......अगर सूर्य अपनी सकती का उचित प्रयोग कर मोहिनी आवर चांडाल के मायाजाल को खंडित कर बहार निकल आता है बिना किसी की सहायता के तो ये घटनाक्रम रुक सकता है

गुरुदेव .........धन्यवाद परबु आपको कोटि कोटि नमन

गॉड ......नहीं पुत्र तुम जो सूर्य की सहायता करने की सोच रहे हो वो संभव नहीं है ये सूर्य की परीक्षा है उसे हे पूर्ण करनी होगी बिना किसी के सहयोग के

नागलोक ........

कुछ समय पहले .......

असुरराज ......मित्र मुझे क्षमा काटना किन्तु तुम्हे ये पीड़ा भोगनी होगी

t.nagraj .....जनता हूँ मित्र असुराज मुझे कोई परवाह नहीं किन्तु इस पीड़ा के बाद तो कार्य सम्पन हो जायेगा न

असुरराज ......अवश्य मित्र उसके बाद तुम्हे नागमणि मिल जाएगी आवर मुझे मिलेगा अमरत्व

t.nagraj एक बुजुर्ग कमजोर नाग का रूप धार मंदिर के बहार जा खड़ा हुआ

असुर राज अपने माया का प्रयोग कर अपना आवर अपने साथी योद्धाओ का रूप बदल उन्हें वासुकि नाग का रूप प्रदान कर

मंदिर के बहार योजना अनुसार बुजुर्ग नाग ( t.nagraj ) पे वास्तविक हमला कर देते है

राजकुमारी बहार हो रहे सोर सराबा सुन मंदिर के चौखट पे पहुंचे वो बहार निकलने हे वाली थी की तभी उसे अपने पिता की बात याद आती है की जब तक पूजा पूर्ण न हो मंदिर की सीमा से बहार न निकले

राजकुमारी वही रुक जाती है

राजकुमारी .....कोण हो तुम आवर बाबा को क्यों प्रताड़ित कर रहे हो हम तुम्हारी राजकुमारी तुम्हे आदेश देते है इन्हे मुक्त कर दिया जाये

सैनिक 1 ( असुरराज ) .....राजकुमारी ये डस्ट तक्षक वंश का इसने आपको हानि पहुंचने के उद्देश्य से वर्जित मंदिर में परिवेश किया हम इसे जिन्दा नहीं छोड़ सकते है

बुजुर्ग ......राजकुमारी जी मेरी रक्षा करे मुझे अपने सेनिको से बचाइए

राजकुमारी काफी कोशिश करती है किन्तु वो वासुकि सैनिक तक्षक बुजुर्ग को मरते रहते है

( राजकुमारी .....हम क्या करे अगर हम बहार जाते है तो पूजा खंडित हो जाएगी आवर अगर यही रुकते है तो इन बाबा को सैनिक मर देंगे क्या करे हम

राजकुमारी .....पिता श्री हमें क्षमा कर देना आपने हे कहा था एक बार की किसी जिव की जान बचने से बढ़ कर कोई पुण्य नहीं हे परबु हम इन बुजुर्ग बाबा की रक्षा करने हेतु आपकी पूजा खंडित कर बहार जा रहे है परबु अपने बक्त को कहना कर देना )

राजकुमारी मंदिर के सीमा से बहार निकल उस बुजुर्ग के पास आ पहुंची मंदिर की सीमा से बहार निकलते हे राजकुमारी को अपनी कमजोरी का अहसास हुआ जो अभी तक मंदिर में होने से उसे पता नहीं चला था

राजकुमारी किसी तरह से उस बुजुर्ग को उन सेनिको से चुदती है

बुजुर्ग मौका देख राजकुमारी को कोई ॉधी सिन्हा देता है जिसने सूंघते हे राजकुमारी मूर्छित हो जाती है

मूर्छित होते हे सभी अपने अपने वास्तविक रूप में आ जाते है

असुराज राजकुमारी को किसी ऊर्जा में बंद उसे बंदी बना लेता है

असुरराज ......सेनिको राजकुमारी की मूर्छा भाग हो उस से पहले मित्र चांडाल के पास पंहुचा दो हम कुछ समय पश्चात आते है मित्र t.nagraj को महल छोड़ कर

सैनिक राजकुमारी को ले कर चांडाल की तरफ निकल जाते है वही असुरराज t.nagraj को गायक अवस्ता में तक्षक महल ले जा कर उसका उपचार कर उसे आराम करने देता है

वही चांडाल राजकुमारी के पहुंचते हे अपने पूजा सुरु कर देता है

जैसे जैसे चांडाल की पूजा आगे बढ़ रहे थे ठीक वैसे वैसे हसन कुंड से निकली ऊर्जा राजकुमारी आवर मोहिनी को एक कर रहे थी लगभग 3 हर तक चली पूजा के बाद राजकुमारी के सरीर पे पूर्ण रूप से मोहिनी ने अपने वश में ले लिया था

चांडाल .....असुर राज मेरा कार्य पूर्ण हुआ अब राजकुमारी पूरी तरह मोहिनी के वश में है अब समय है सूर्य को यहाँ लेन का

असुरराज ........बहुत खूब मित्र चांडाल अब मोहिनी को आदेश दो की वह उस मानव सूर्य को यहाँ ले कर आये ताकि मैं अपने हठी उसका वध कर सकू

चांडाल .....नहीं असुरराज जब तक मोहिनी इस शैतानी खंजर सूर्य के सीने में नहीं उतर देती तब तक हमें दूर रहना होगा अनन्यता कही वो हम पे हे भरी न पढ़ जाये

असुर राज .....उचित है मित्र चांडाल हम तुम्हारे इस अरे के बाद हे सूर्य पे प्रहार करेंगे

चांडाल राजकुमारी ( मोहिनी ) को नागलोक के द्वार से जिनलोक भेज देता है

प्रेजेंट टाइम इन नागलोक .....

सूर्य जिनलोक से सीधा उस द्वार से होते हुए नागलोक के उन खंडहरों में पंहुचा उस द्वार से जहा पहले से हे चांडाल आवर असुरराज अपने विशेष योद्धाओ के साथ चुप कर सूर्य का इंतजार कर रहे थे

सूर्य मोहिनी के सम्मोहन से बंद राजकुमारी के साथ प्रेम में बहने लगता है

सूर्य ......बहुत तड़पाया है पारिजात आपने मुझे अब नहीं चिढ़ने वाला तुम्हे

राजकुमारी .....ये पारिजात भी आपकी आवर पारिजात का सौन्दर्य भी आपका हे है सूर्य

सूर्य परिणत समाज राजकुमारी को अपनी बहो में भर किश करने लगता है

राजकुमारी ( मोहिनी ) पूरा सहयोग करते हुए सूर्य के किश में सहयोग करती है डेरी डेरी सूर्य राजकुमारी के उभारो आवर खुल्हो को सहलाने लगता है

राजकुमारी सूर्य के कामदण्ड को कपड़ो के ऊपर से सहलाते हुए सूर्य को मदहोश करने लगती है

तभी पास में छुपे चांडाल खंजर को हाथ में ले कर कुछ मंत्र बुदबुदाने लगता है जिस से खंजर तेज लाल रौशनी में चमकने लगता है फिर अचानक से चांडाल के हाथ से गायब हो राजकुमारी के हाथो में पहुंच जाता है

जिनलोक ......

किरण पारिजात अभी सोये हुए थे की तभी एक जोरदार चीख के साथ किरण आवर पारिजात दोनों सूर्या का नाम छीलते हुए उठ जाती है

kiran.......didi भाई की जान खतरे में है मुझे उनके पास जाना होगा

पारिजात ......है मुझे भी लग रहा जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है उनके साथ चलो उनके कक्ष में चलते है

दोनों पुरे महल को छान मरती है किन्तु सूर्य वह हो तो मिले न

सूर्य का पूरा परिवार चिंतित हो उठा अचानक सूर्य का ऐसे गायब हो जाने से

j.king इस वक़्त जिनलोक में थे नहीं जैसे हे रानी पारी को पारिजात द्वारा पता चला सूर्य का जिनलोक से गायब हो जाने के बारी तो रानी पारी प्रेतराज से सम्पर्क कर उन्हें जिनलोक आने को कहा आवर खुद सीधा जिनलोक मंदिर जा पहुंची

रानी पारी .....गुरुदेव अनर्थ हो गया मेरा पुत्र सूर्य जिनलोक से गायब हो पता नहीं कहा चला गया है

गुरुदेव .....रानी पारी जिसका दर था वही हो रहा है सूर्य जिनलोक में नहीं है वो चांडाल के मायाजाल में उलझ नागलोक जा पंहुचा जहा उस घटना करम को होना है जो सूर्य के जीवन का अंत कर देगी

रानी पारी .....नहीं गुरुदेव ऐसा नहीं हो सकता मैं अभी नागलोक जा रही हूँ

गुरुदेव .......समय से पुरवा आप वह नहीं पहुंच सकती है पुत्री किरण को अपने साथ ले जाइये रानी पारी

रानी पारी फ़ौरन गायब हो महल पहुंची जहा पे उन्होंने सूर्य का नागलोक में होने के बारे में बताया

सूर्य के बारे में सबको पता चलते हे जिनिशा वह से निकल जिनलोक टेलेपोर्टेसन द्वार पहुंची सूर्य का बाकि परिवार भी उसके पीछे पीछे आ पंहुचा

रानी पारी रिक्ति उस से पहले हे जिनिशा सपना को अपने साथ ले द्वार में परिवेश कर गई

जैसे जिनिशा आवर सपना दूसरी तरफ निकली थी उनके सामने राजकुमारी ( मोहिनी ) ने वो खंजर सूर्य के दिल में उतर दिया

सूर्य के सीने से खून की फुहार निकल राजकुमारी के माथे पे पड़ी

सूर्य के सीने में खंजर उतारते हे सूर्य के मुँह से दर्दनाक चीख निकली

जिसने सुन जिनिशा आवर सपना सूर्य की तरफ दौड़ पड़ी

चांडाल का इसरा मिलते हे छुपे हुए असुरराज ने वही से अपनी आसुरी सकती का प्रयोग किया जो सूर्य आवर राजकुमारी दोनों के पेट को चिढ़ते हुए निकल गई

तभी सूर्य का बाकि परिवार किरण परिणत रानी पारी आवर बाकि सब भी द्वार से नागलोक आ पहुंचे

सूर्य को खून में लटपट देखते हे दोनों बुआ आवर दादी आवर कामिनी बेहोश हो गई वही किरण आवर पारिजात का रो रो कर बुरा हल हो गया

सपना आगे बढ़ सूर्य को थम लेती है

सपना .......आपको कुछ नहीं होगा सूर्य मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगी

सूर्य ......सपना आप आ गई देखो न क्या हो गया मुझसे कितनी बड़ी गलती हो गई

जिनिशा अपने जादू का प्रयोग करती है सूर्य का खून रोक उसके घावों को भरने के लिया किन्तु जिनिशा का जादू बे असर रहा

चांडाल आवर असुरराज अपने असुरसेनिको आवर तक्षक नाग सेनिको के साथ बहार आ सबको घेर लेते है

चांडाल .....ओह्ह देखो तो यहाँ पे परीलोक की महारानी रानी पारी आवर राजकुमारी पारिजात भी आई है साथ में प्रेतराज आवर जिनलोक की राजकुमारी भी हहहह आज मेरा बदला पूरा होगा सूर्य को मार कर

इतने देर से अपने अंदर छुपे गुस्से को किरण आवर नहीं संभल पाई आवर सूर्य के सीने में गुस्सा खंजर निकल कर कोई कुछ समानता उस से पहले हे चांडाल की गर्दन उसके धढ़ से दूर जा गिरा

चांडाल के मरते हे मोहिनी आज़ाद हो जाती है राजकुमारी अपने होश में आ चुकी थी

पारिजात गुस्से में राजकुमारी को मरने बढ़ी हे थी की तभी मोहिनी की आत्मा परिणत को रिक्ति है

मोहिनी ......राजकुमारी की गलती नहीं है उन्हें दण्डित कर आप पाप की भागी न बनो राजकुमारी ये सब मेरे कारन हो रहा है

मोहिनी प्रिय से ले कर के अब तक की पूरी घरना बता देती है जिसने सुन सूर्य आवर प्रिय को बड़ा जतका लगता है

किरण अपने रूद्र रूप में आ चिकि थी

उसने असुरो को मरना सुरु कर दिया आवर उसका साथ दे रहे थे रानी पारी आवर प्रेतराज

असुरो के रकत से आती खुसबू से किरण अपने वास्तविक रूप गॉडेस अंश रूप में आने लगती है जिस से पुरे नागलोक में रह रह कर कम्पन होने लगता है

नागराज वीर आवर जाफरानी पूर्वी भी अपनी सेना के साथ वह आ पहुंचे अपनी पुत्री को गायक देख नागराज वीर किसी गायक शेर के भाटी असुरो आवर तक्षक नागो पे टूट पड़ते है

वही पूर्वी अपनी गायक पुत्री को गॉड में ले कर फिट कट कर रोने लगती है

सपना ......आपको कुछ नहीं होगा रानी पारी कुछ कीजिये

रानी पारी ......पुत्री सपना अब कोई कुछ नहीं कर सकता है इस घटना को होने से रोकने के लिया हे तुम सबको परतविलोक जाने से रोका था मैंने मुझे पहले हे पता था की कुछ ऐसा होने वाला है

किरण प्रेतराज आवर नागराज वीर सभी असुर आवर नाग सेनिको को ख़तम कर तीनो हे असुरराज नरकासुर को घेर लेते है

किरण बहुत बार प्रहार करती है किन्तु असुरराज नरकासुर को ज्यादा हानि नहीं पहुँचती है जिस कारन किरण गुस्से में आ पूर्ण रूप से गॉडेस का रूप धार उसपे वॉर करती है

किरण के क्रोध से नागलोक में जगह जगह ज्वालामुखी फूटने लगती है नागलोक गाढ़ा में भीषण तबै सुरु हो जाती है

नागराज वीर आवर प्रेतराज किरण को रोकने की कोशिश करते है पैर वो रुकने के स्थान पे आवर उगता हो जाती है

किरण दिव्यास्त्र का आह्वान कर नरकासुर पे वॉर करती है

तभी भयंकर गर्जना के साथ गॉड के साथ गुरुदेव नरकासुर आवर किरण की अस्त्र के बिच प्रकार होते है

गॉड ......रुक जाओ पुत्री किरण अपने क्रोध को संत करो पुत्री अनन्यता नागलोक नस्ट हो जायेगा

किरण द्वारा छोड़ा अस्त्र गॉड में समाहित हो जाता है

गॉड को देखते हे नरकासुर का भय के मरे बुरा हल हो जाता है वह भागने की कोशिश करता है किन्तु भाग नहीं सकता है

किरण एक बार फिर गुस्से में अन्य दिव्यास्त्र का आह्वान करती है

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण को रोको वो परबु पे हे प्रहार करने जा रही है उसके प्रभु का अनादर करने से रोको पुत्र

प्रेतराज की सहायता से सूर्य उठ कर किरण के पास आता है आवर उसे दिव्यास्त्र का प्रयोग करने से रोकता है

परबु ......पुत्री किरण संत हो जाओ किसी अन्य के किये पाप का दंड तुम समस्त नागलोक को दे रही हो पुत्री

किरण ........तो क्या स्वामी पे प्रहार करने वाले पापी को जीने का अवसर प्रदान कृ परबु

परबु ......पुत्री तुम क्या चाहती हो गॉड द्वारा बनाये नियम भांग कर तुम मेरे दिए वरदान को खंडित करना चाहती हो

नरकासुर को मेरा वरदान प्राप्त है नरकासुर की मृत्यु तुम्हारे हाथो नहीं सूर्य के हाथो होना लिखा है फिर तुम कैसे नरकासुर का वध कर सकती हो पुत्री

सूर्य .......मुझे क्षमा कर दीजिये परबु मैं अपनी अज्ञानता में अँधा हो आपसे मिली शक्तियों का हमेशा दुरूपयोग हे किया जिसका दंड यही होना चाइये था

परबु ......पुत्र अगर समय रहते तुम अपने दायित्व को समाज पते तो इस घटना करम का निर्माण हे नहीं कर न पड़ता नियति को

सूर्य गुटों पे बेथ अपने हाथ जोड़ देता है

परबु .....नरकासुर तुमने सडयंत्र के तहत एक कन्या का प्रयोग कर घोर पाप किया है जिसका दंड तुम्हे आवस्य मिलेगा

तुम तब तक हमारी कैद में रहोगे जब तक सूर्य फिर से जनम ले तुम्हारा सामना करने योग्य नहीं हो जाता

इसके साथ हे परबु के दिव्या अस्त्र से एक ऊर्जा निकलती है जो नरकासुर को कैद कर किसी अन्य स्थ ने पंहुचा देती है

किरण ......आपने ये उचित नहीं किया परबु उस शैतान को जीवन दान दिला कर

परबु ......पुत्री तुम सूर्य को सकती हो इस घटना करम की तुम भी उतनी हे जिम्मेदार हो जितना पुत्र सूर्य

इस लिया तुम दोनों के जीवन चक्र से जुड़े सभी को एक बार पुनः अपनी यात्रा प्रारम्भ करनी होगी

तुम सभी को एक बार फिर जनम ले अपने जीवन के उद्देश्य को पूर्ण काटना होगा

परबु के इसरा करते हे पारिजात जिनिशा प्रेतराज रानी पारी पूर्वी नागराज वीर को छोड़ सभी के सरीर हवा में विलीन हो जाते है आवर आत्मा रूप में सबके सामने थे

नागराज वीर .....परबु किन्तु इन सब घटना करम में मेरी पुत्री .....

परबु ......तुम्हारी पुत्री का जीवन चक्र भी सूर्य से जुड़ चूका है जब सूर्य के रक्त से तुम्हारी पुत्री की मांग भरी इसी समय वो सूर्य की जीवनसंगिनी बन चुकी थी उसका जीवन चक्र सूर्य से जुड़ चूका था

सन्ति ठाकुर ....परबु क्या हमारा कोई स्थान नहीं है सूर्य के जीवन में

Parbu......putri समय आने पे तुम सबका जनम फिर से होगा राधा पुत्री से मिले श्राप से तुम सब उस जीवन में मुक्त हो जाओगे किन्तु इस जीवन से जुड़ा तुम्हे कुछ भी याद नहीं होगा

गुरुदेव ........परबु जब तक सूर्य इस योग्य नहीं हो जाता है आपको हे जिनलोक परीलोक आवर नागलोक की सुरक्षा करनी होगी

परबु अपनी दिव्या अस्त्र को ऊपर आसमान की आवर करते है जिस से तीन रोहनिया निकल जिनलोक नागलोक परीलोक को घेर कर सुरक्षा कवच का निर्माण करती है

परबु .........तीनो लोक सुरक्षित है जब तक सूर्य आवर पुत्री किरण का जनम नहीं होता कोई अन्य हमारी इच्छा के विरुद्ध इन लोको में परिवेश नहीं कर पायेगा

उचित समय आने पे राजगुरु के माद्यम से सूर्य परीलोक आएगा अपने इस जीवन के उद्देश्य को पूर्ण करने

एक एक कर सभी आत्मा परबु के भीतर समाहित हो जाती है सभी के समाहित होते हे जिनिशा आवर पारिजात की सूर्य आवर बाकि परिवार से जुडी यादे भूल जाती है

जैसे कुछ हुआ हे न हो जिनिशा महाकाल के इसारे से गायब हो जिनलोक .रानी पारी परिणत अपने अपने लोक पहुंच जाते है

परबु चांडाल द्वारा निर्मित खंजर प्रेत राज को सौंप देते है

गिरुदेव .....उचित समय आने पे ये खंजर सूर्य तक पंहुचा दीजियेगा प्रेतराज

प्रेतराज ......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

प्रेतराज भी वह से गायब हो प्रेतलोक पहुंच गए

परबु आवर गुरुदेव नागराज वीर आवर पूर्वी को आशीर्वाद दे अंतर्ध्यान हो गए.............

फ्लैशबैक एंड फ्रेंड्स ......

नेक्स्ट अपडेट ात प्रेजेंट टाइम इन परीलोक ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............

कुछ समय थोड़ा बिजी हूँ तो आपके कमैंट्स का रिप्लाई नहीं कर पाउँगा सॉरी
 
अपडेट. 129

सूर्यगढ़ ........

सूर्य के जाने के बाद हे कोमल काफी दुखी हो गई थी

उसे बार बार यही ख्याल आ रहा था की सूर्य उसकी वजह से तो नहीं गया आवर ये बात शालिनी जी से छुपी नहीं थी की कोमल अभी भी परेशान है

शालिनी ji......komal बेटी क्या आज तुम मेरे साथ सो सकती हो

कोमल ......ok मम्मी मैं आपके साथ हे सो जाउंगी मैं बुआ को बता कर आती हूँ

शालिनी ......ठीक है बेटी तब तक मैं बाकि काम फिनिश कर लेती हूँ

कोमल के वह से निकलते हे शालिनी जी अपने रूम में पहुंची

शालिनी जी .....शिव आज आप यहाँ नहीं सो सकते है दूसरे रूम में जाइये

शिव शालिनी जी को बहो में भर कर

शिव ..........क्या बात है आज मेरी शालू मुझे हे रूम से बहार निकल रही है कही रेड सिग्नल्स तो नहीं है

शालिनी जी ......चुप कीजिये जब देखो तब मस्ती करते रहते हो

शिव ......क्या बात है शालू आज तुम कुछ उखड़ी उखड़ी सी लग रही हो

शालिनी जी ......शिव मुझे लगता है कोमल बेटी अभी भी मंदिर वाले हादसे को ले कर परेशान है

शिव ........है मैंने भी देखा है जब से सूर्य गया है कोमल आवर ज्यादा उदाश हो गई है

शालिनी जी .....इस लिया हे मैंने माँ सा के मन करने के बाद भी कोमल से बात करने की सोची है

शिव .........तुम सही हो शालू वो भी हमारी बेटी है जैसे सूर्य है मैं भी चाहता हूँ वह पहले की तरह खुश रहे तुम जो भी करो बस कोमल पहले जैसी चाइये मुझे बाकि सब को मैं देख लूंगा

शिव .......तभी तो मैंने आज कोमल को अपने साथ सोने को बुलाया है ताकि वो आज की घटना को भूल सके

शिव .....ठीक है मैं दूसरे रूम में जा रहा हूँ आज तो अकेले हे सोना पड़ेगा

शिव शालिनी को एक छोटा सा गुड नाईट किश कर निघ्त्य के ऊपर से सहलाते हुए दूसरे रूम में सोने के लिया चला जाता है

कुछ देर बाद कोमल अपनी नाईट ड्रेस ले शालिनी जी के रूम में आ पहुंची

शालिनी जी ......चलो तुम लेट जाओ मैं अभी आती हूँ फ्रेश हो कर

शालिनी जी की आदत थी की सोने से पहले नहाना

कोमल .....ok मम्मी आप नाहा कर आओ तब तक मैं नाईट ड्रेस चेंज कर लेती हूँ

शालिनी जी अपने कपडे ले कर नहाने चली जाती है पीछे से कोमल अपनी ड्रेस चेंज कर शालिनी जी का वेट करती है कुछ 15 मिनट्स के बाद शालिनी जी बे कोमल के बगल में हे लेट जाती है आ कर के

कुछ देर शालिनी जी के रूम में ख़ामोशी रहती है फिर शालिनी जी हे इस खामोशी को भांग करती है

शालिनी जी .....कोमल बेटी मैं देख रही हूँ सूर्य के जाने के बाद से तुम उदाश हो क्या बात है बेटी

कोमल ......ऐसा कुछ नहीं है मम्मी बस ऐसे हे

शालिनी जी ......कोमल तुम भी मेरी लिया सूर्य जितनी हे मायने रखती हो भले हे मैंने तुम्हे जनम नहीं दिया पैर अपनी सगी बेटी जितना हे प्यार मैं तुमसे करती हूँ

कोमल शालिनी जी की बात सुन भावुक हो जाती है आवर अपना सर शालिनी जी के सीने में छुपा कर सुबकने लगती है

शालिनी जी .......क्या बात है बेटी अपनी मम्मी को नहीं बताओगी क्या

अगर कोई परेशानी है या तुम्हे कोई परेशान कर रहा तो मुझे बताओ बेटी

शालिनी जी कोमल के सर पे प्यार से हाथ फिरते हुए उसे चुप करवाने लगती है

कोमल .......मम्मी भाई मेरी वजह से घर छोड़ कर गए है मैं इसी वजह से परेशान हूँ

शालिनी जी .......पागल लड़की वो तुम्हारी वजह से नहीं गया है उसका कोई जरुरी काम था साध्वी जी के साथ में उसने हमें बताया नहीं था साध्वी जी ने तो उसे ट्रैंनिंग से लूटने के बाद हे बोल दिया था

कोमल ......नहीं आप जूथ बोल रही है अगर ऐसा होता तो भाई किसी को तो बताते न जाने के बारे में

शालिनी जी .....नहीं कोमल मैं सच कह रही हूँ सूर्य की सोगन्द.....

शालिनी जी आवर कुछ बोलती की कोमल ने अपना हाथ शालिनी जी के मुँह पे रख दिया

शालिनी जी को कोमल की आँखों में कुछ अजीब सी तड़फ अजीब सा दर दिखा सूर्य को ले कर

( शालिनी जी .....नहीं ऐसा नहीं हो सकता है प्लेसेस गॉड जो मैं सोच रही हूँ वैसा न हो मुझे किसी भी तरह कोमल से पता करना होगा की क्या वो सूर्य से प्यार करती है पैर कैसे

अभी भी पूछना ठीक होगा या मुझे कुछ इंतजार करना चाइये )

कोमल ......क्या हुआ मम्मी आप क्या सोचने लगी सॉरी वो मुझे आपको ऐसा नहीं बोलना चाइये था की आप जूथ बोल रही है आवर प्लेसेस मम्मी आगे से आप सूर्य की सोगन्द नहीं उठाएंगी फिर कभी

शालिनी जी .....अपने भाई से इतना प्यार करती है की उसकी सोगन्द उठाने से भी दर गई

कोमल .......मम्मी एक हे तो भाई है मेरा उसे प्यार नहीं करुँगी तो किस्से करुँगी

कोमल ने जो जबाब दिया वो अपने नजरिये से ठीक था किन्तु शालिनी जी के नजरिये से शालिनी जी को लगा जैसे कोमल सूर्य के लिया अपना प्यार काबुल किया हो

शालिनी ji......thik है बेटी चलो अब सो जाओ

कोमल...... गुड नाईट मम्मी

शालिनी जी .....गुड नाईट बीटा

परीलोक .......

सूर्य के ध्यान में लीं होते हे गुरुदेव अपने प्रायश्चित से मुक्त हो चुके थे

सूर्य ध्यान में लीं हो चूका था

गुरुदेव .....अब समय आ गया है उन सभी को यहाँ लेन का जो सूर्य से पुरवा जनम में जुड़ चुकी है

गुरुदेव वह से गायब हो परतविलोक आ पहुंचे जहा सबसे पहले सपना आवर किरण के रूम में प्रकट हुए

किरण सपना आराम से सोये हुए थे





गुरुदेव दोनों के पास जा कर उनके माथे पे हाथ रख उन्हें गाह्रो नींद में सुला देते है

कुछ देर गुरुदेव किसी मंत्र का जप करते है

देखते हे देखते गुरुदेव के हाथो से रौशनी की किरण निकल कर सपना आवर किरण पे गिरती है

अगले हे पल रूम में 2 किरण 2 सपना था

गिरुदेव ......जब तक दोनों लौट कर नहीं आती तब तक तुम्हे इनका स्थान लेना है

सपना 2 किरण 2 ......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

गुरुदेव सपना आवर किरण को हवा में उठा टेलिपोर्ट हो गए

ऐसा हे गुरुदेव ने सूर्यगढ़ आवर u.s.a में किया

जिनलोक ........

मंदिर में सूर्य के सामना सपना किरण के साथ कोमल अलीना पायल प्रीती भी लेती हुई थी

डेरी डेरी समय बिट रहा था वैसे वैसे सूर्य के सरीर से निकल रहे तेज प्रकाश को देख गुरुदेव काफी खुश हो रहे थे





सूर्य के ध्यान में लीं होने के बाद रिद्धि पारी कुछ समय पारी लोक में पारिजात आवर रानी पारी के साथ समय बिता कर परतविलोक लौट गई

वही अंतरिक्ष में एक विशाल उल्का पिंड में बहुत जोरो से हलचल हो रहे थी जो समय के साथ भाड़ रही थी

गुरुदेव .......पुत्र सूर्य तुम्हे ध्यान में लीं आज 7 रोहनिया हो चुकी है अब सिगरा हे तुम अपने जीवन से जुड़े उद्देश्य की प्राप्ति करने वाले हो अब तुम पूर्ण रूप से अपने पूर्व जनम से वाकिफ हो चुके हो जो गलतियां तुमने पूर्व जनम में की थी फिर से न दोहराना पुत्र

मध्य रात्रि के वक़्त सूर्य का तेज डेरी डेरी काम होने लगता है जिसने देख गुरुदेव किरण सपना अलीना कोमल पायल प्रीती को गायब कर उन्हें उनके स्थान पे पंहुचा देते है

सूर्य के सरीर से निकला तेज पूर्ण रूप से सूर्य में समाहित होते हे सूर्य की पीठ पे प्रभ का दिव्या अस्त्र कुछ समय तक सूर्य की पीठ पे बन जाता है





गुरुदेव .....पुत्र तुम अब पूरी तरह से अपने जनम से मिली दिव्या शक्तियों को जागृत कर परबु का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया है

सूर्य अभी ध्यान से निकलने हे जा रहा था की तभी उसकी आँखों के सामने किसी का चेहरा आ जाता है

चेहरा ........मैं आ रहा हूँ बच्चे बहुत जल्द तुम्हे एक बार फिर मेरा सामना करना होगा

सूर्य ........मैं इन्तजार कर रहा हूँ नरकासुर तुम्हे नरक की आग में जलने के लिया

नरकासुर ......हाहाहाहा नरक भी नरकासुर के ादिन है इन्तजार करना बहुत जल्द मुलाकात होगी

सूर्य ......मुझे भी ुशी पल का इन्तजार है नरकासुर तुम्हारा काल तुम्हारा इन्तजार करेगा

सूर्य की आँखे खुलते हे दूर अंतरिक्ष में एक विशाल उल्कापिंड





जिसमे कुछ समय से बहुत आदिक हलचल हो रही थी उसमे एक विस्फोट होता है





उल्कापिंड में विस्फोट होने के साथ हे उसमे से एक परछाई जैसा तेजी से निकल केर एक दिशा की आवर निकल गया ये कोई आवर नहीं नरकासुर था जो महाकाल की कैद से मुक्त हो दुर्बल अवस्था में हे असुर लोक की आवर भध रहा था

सूर्य की आँखे खुलते हे महाकाल मंदिर पे बना सुरक्षा कवच खंडित हो जाता है जो पहरेदारी कर रहे थे

वह सकती भी गायब हो जाती है

सूर्य आगे भध गुरुदेव के चरण छू उन्हें परनाम करता है

सूर्य ......परनाम गुरुदेव मुझे क्षमा कर दीजिये मैंने जो गलतिया जो पाप किया है उसका दंड आपको भोगना पड़ा

गुरुदेव सूर्य को उठा कर अपने सीने से लगा लेते है

गुरुदेव .......नहीं पुत्र सूर्य जो समय बिट चूका है हमें उस से शिख ले आगे भढना चाइये न की वर्तमान में गठित गठनो पे शोक मन फिर से वही गलतियां दोहरानी चाइये

गुरुदेव .......पुत्र मुझे वो खंजर दो जो तुम्हारे पास है

सूर्य खंजर को बहार आने का आदेश देता है अगले हे पल खंजर गुरुदेव के सामने था

सूर्य .....ये लीजिये गुरुदेव





गुरुदेव उस खंजर को सूर्य से ले कर ुशी लाल कपडे के निचे रख देते है जहा उन्होंने वो सुनहरी परत अपने सरीर से अलग होने के बाद राखी थी

गुरुदेव .......पुत्र अब हमें बहार चलना चाइये

surya........ji गुरुदेव मुझे परीलोक आये कितना समय हो गया है गुरुदेव

गुरुदेव ......पुत्र आज तुम्हे परीलोक आये हुए 7 रोसनीय हो चुकी है

गुरुदेव आवर सूर्य जब बहार निकले तो सामने रानी पारी .पारिजात के साथ पूरा पारी लोक वही खड़ा था

गुरुदेव को देखते हे सभी उन्हें परनाम करते है

सूर्य आगे बढ़ रानी पारी को परनाम करता है

सूर्य ......परनाम रानी माँ

रानी पारी .....कल्याण हो पुत्र सूर्य

रानी पारी सूर्य को उठा कर अपने गले से लगा लेती है

रानी पारी ......इतने लम्बे इन्तजार के बाद पुत्र तुम्हे फिर से मिल कर हम आज बहुत खुश है

सूर्य ......मुझे माफ......

रानी पारी ......नहीं पुत्र जाओ अपनी पारी से मिल ले देखो बस तुम्हे हे देखे जा रही है

सूर्य आगे बढ़ पारिजात का हाथ थम लेता है आवर प्यार से उसकी आँखों में देखने लगता है





पारिजात की दिल की धड़कन भादू हुई थी

पारिजात से जब आवर बर्दास्त नहीं हुआ तो वह सूर्य की बहो में समां जाती है





सूर्य आवर पारिजात काफी समय तक एक दूसरे की बहो में सुकून के पल बिता रहे थे तभी गुरुदेव ने सूर्य को वास्तविकता का ज्ञान करवाया

गुरुदेव .....पुत्र बाकि का मिलान महल में कर लेना चलो महल चलते है

सूर्य ......जी गुरुदेव

सूर्य सब से विदा ले पारिजात के साथ आकाश मार्ग से होते हुए पारी महल की तरफ भध गया

रानी पारी ......तुम सब भी लौट जाओ कल महाकाल की पूजा के बाद से आप सभी दर्शन कर सकते है

गुरुदेव आवर रानी पारी महल लौट गए ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .......

सॉरी फॉर लेट अपडेट फ्रेंड्स ........
 
अपडेट 130

सूर्य आवर पारिजात काफी समय तक एक दूसरे की बहो में सुकून के पल बिता रहे थे तभी गुरुदेव ने सूर्य को वास्तविकता का ज्ञान करवाया

गुरुदेव .....पुत्र बाकि का मिलान महल में कर लेना चलो महल चलते है

सूर्य ......जी गुरुदेव

सूर्य सब से विदा ले पारिजात के साथ आकाश मार्ग से होते हुए पारी महल की तरफ भध गया

रानी पारी ......तुम सब भी लौट जाओ कल महाकाल की पूजा के बाद से आप सभी दर्शन कर सकते है

गुरुदेव आवर रानी पारी महल लौट गए ...........

अब आगे .........

असुर कबीला .....

कंटकासुर जब से असुर कबीले लौटा था तब से असुरगुरु द्वारा दी मदिरा का दोनों बहने नगीना आवर विसुद्धि के साथ खुद भी हर रात उस मदिरा का सेवन करता था

कनकसुर की दिन प्रतिदिन हवश भध रही थी

यही हाल दोनों बहने नगीना आवर विसुद्धि का भी था

कंटकासुर अपनी हवश असुर कबीले की लड़कियों पैर निकल लेता था

किन्तु नगीना आवर विसुद्धि से सभी दूर रहते थे आखिर ये दोनों उनके गुरु की बहन जो ठहरी भले हे कंटकासुर उन्हें पेलने की फ़िराक में था

नगीना आवर विसुद्धि हर रात मदिरा के प्रभाव से अपनी कामाग्नि में जलती कंटकासुर का लिंग कुश कर आपसब में हे दोनों बहने एक दूसरे के अंगो से खेल कर संत कर लेती थी

किन्तु इस बिच असुर कबीले के रहन सहन को देख वो भी गुफा में अर्दनग्न हे रहती थी कंटकासुर के सामने

नगीना आवर विसुद्धि अब कंटकासुर के हाथो हे नंगी हो कर उस से चिपक कर सोती थी

आज काली अमावस्या थी कंटकासुर इसी रात का इन्तजार कर रहा था इतने टाइम से

नगीना .......विसुद्धि आज कुछ भी हो जाये मुझे सम्भोग सुख प्राप्त करना है

विसुद्धि .....है आज काली अमावस्या

है अगर आज हम जिस किसी को अपनी इच्छा से कौमार्य सौंपेंगी उसकी भी सकतिया भाड़ जाएगी हमारे साथ

नगीना .....किन्तु भाई को कैसे मनाये हम जबकि वो सब कुछ जानते है

विसुद्धि .......मुझे लगता है वो भी आज की रात्रि का इन्तजार कर रहे थे

रात में कंटकासुर दोनों बहनो के साथ खाना खता है साथ में मदिरा भी पेट

k.asur ......मैं जनता हूँ तुम दोनों इतने समय से जो चाहती हो आज रात पूजा के बाद तुम वो सब सुख प्राप्त कर सकती हो

k.asur की बात सुन दोनों बहने आने वस्त्र उतर k.asur की दोनों जंगो पे बेथ अपने उन्नत उभारो को k.asur के बाजु आवर सीने पे रगड़ने लगती है

k.asur .....अभी नहीं पूजा के बाद तब तक जा कर सुध हो जाओ मैं भी सनान आदि कर पूजा की तयारी करता हूँ

k.asur नगीना विसुद्धि तीनो सुध होने चले गए इस बिच बिखु पूजा आदि का पूरा सामान गुफा में रख कर जा चूका था

कुछ देर बात तीनो त्यार थे पूजा के लिए

K.asur नगीना विसुद्धि तीनो तांत्रिक पूजा में बेथ गए थे





k.asur मंत्रो का जप करते हुए अपनी पूजा करनी सुरु कर देता है

जिसमे नगीना आवर विसुद्धि भी शामिल हो k.asur के कहे अनुसार उन नरकंकालों पे सिंदूर वह अन्य सामग्री दाल रही थी





जैसे जैसे k.asur की पूजा आगे बढ़ रही थे वैसे वैसे नगीना आवर विसुद्धि का बदन हवश से भर रहा था k.asur का भी हल कुछ ऐसा हे था किन्तु वह कुढ़ को काबू किये था

कुछ समय बाद उनकी पूजा पूर्ण हुई

K.asur आगे बढ़ अपना अंगूठा काट का नगीना आवर विसुद्धि को अपना ताकत पिलाता है वही किर्या विसुद्धि आवर नगीना भी दोहराती है

इस किर्या के पूर्ण होते हे तीनो एक दूसरे को पूर्ण नंगा कर एक दूसरे के ाँगो को नोचने लगते तीनो की आँखे. किसी शैतान के जैसे पूरी लाल हो चुकी थी

कुछ देर बाद k.asur नागि न को वही पूजा वाले स्थान पे लिटा कर अपना कामदण्ड नगीना की फुल्ली हुई छूट पे सेट कर होकर भरते हुए जोरदार जतका मरता है

नगीना की चीख पूरी गुफा में गूंज उठी किन्तु न हे नगीना ने k.asur को रोका आवर न k.asur रुका

k.asur में मनो किसी शीतन ने परिवेश कर लिया हो नगीना की छूट से बेहतहासा खून बाह रहा था जो की सूखने की बजाय एक स्थ पे एकता हो रहा था

K.asur कभी गॉड में उठा कर तो कभी घोड़ी बना कर नगीना को तब तक छोड़ता रहा जब तक नगीना चीख ते हुए k.asur के साथ झाड़ नहीं गई

K.asur नगीना को छोड़ विसुद्धि को वही लिटा कर वही करम विसुद्धि के साथ दोहराता है

k.asur दोनों की छूट में अपना वीर्यदान करने के बाद दोनों की छूट से निकला रकत एक प्याले में भर कर सामने राखी शैतानी मूर्ति को अर्पित करता है

कुछ हे पल में वह रकत गायब हो जाता है आवर उस मूरत से 3 लाल रंग की किरण निकल कर k.asur नगीना आवर विसुद्धि में समाहित हो जाती है

k.asur पूरी रात नगीना आवर विसुद्धि को आगे आवर पीछे से बजने के बाद सुबह के वक़्त जा कर तीनो वही ुशी अवस्था में सो जाते है

अब k.asur नगीना विसुद्धि तीनो जब चाहे तब एक दूसरे की वासना को संत करने लगते

k.asur अपनी बहनो को संत करने के बाद भी असुर कबीले की लड़कियों को भोगना बंद नहीं किया ......

सूर्यगढ़ ........

7 डेज आफ्टर ....

सुबह सुबह हे रिद्धि पारी को रानी पारी से खबर मिल चुकी थी की सूर्य आवर उनके पिता जी ध्यान से बहार आ चुके है

रिद्धि पारी सूर्यगढ़ से विदा ले परीलोक पहुंच जाती है

रिद्धि पारी अपने पिता को इतने सालो बाद देख भावुक हो जाती है

gurudev.....aao पुत्री रिद्धि हम जानते थे आप मजे निराश नहीं करोगी

रिद्धि पारी अपने पिता के गले लग जाती है

सूर्य ......गुरुदेव क्षमा चाहता हूँ बिच में पिता पुत्री के मिलान के बिच बाधा बनने के लिया किन्तु मुझे सूर्यगढ़ लौटा होगा

गुरुदेव ...... है पुत्र आज जो पूजा रखनी थी उसका सुबह मुहूर्त नहीं है आवर फिर तुम्हारे साथ बलियो का होना भी जरुरी है

सूर्य .....जी गुरुदेव तब तक आप अपनी पुत्री रिद्धि पारी जी से भी मिल लीजिये मुझे भी वह उन्हें संभालना होगा

रिद्धि पारी ......क्या मैं कुछ समय यही रुक सकती हूँ सूर्य

सूर्य .....जी जरूर आपको मुझसे से किसी आवर से इजाजत लेने की आव्सय्कता नहीं है ये आपका अदिकार है

रानी पारी .....उचित कहा पुत्र सूर्य एक पुत्री को अपने पिता के साथ समय बॉटने के लिया किसी की इजाजत लेने की जरुरत नहीं ये उसका अदिकार होता है

पारिजात ......रानी माँ क्या मैं ....

रानी पारी .......अभी नहीं पुत्री कुछ समय अपनी बहन के साथ वयतीत करना चाइये तुम्हे

पारिजात .......जी रानी माँ

सूर्य .......आज्ञा दे गुरुदेव .रानी माँ

गुरुदेव ......त्रिकालदर्शी बनो पुत्र

रानी माँ .......यसस्वी भाव पुत्र सूर्य

सूर्य ......गुरुदेव आपसे विनती है की आप भी रिद्धि जी के साथ सूर्यगढ़ पधारे

गुरुदेव ......अवश्य पुत्र हम अवश्य सूर्यगढ़ आएंगे पूजा से पूर्व

सूर्य सबसे से विदा ले परतविलोक के लिया निकल गया

ीदार सूर्य परीलोक से विदा ली वही जिनिशा j.king आवर प्रेतराज जीनत के साथ परीलोक पहुंचते है

सूर्य ुशी जंगल में पंहुचा जहा उसने कार छोड़ी थी

सूर्य ..........चल बीटा सूर्य सबका सामना करने का वक़्त आ गया है

सूर्य अपनी अदृश्य कार को अप्पेअर करता है आवर उसमे बेथ सूर्यगढ़ के लिया निकल जाता है

सूर्यगढ़ सुबह के वक़्त .....

कोमल सुबह जब उठी तो उसे अपना पूर्व जनम याद आ चूका था उसे रह रह कर अपने माता पिता की याद आ रही थी आवर साथ हे सूर्य की मृत्यु की वजह खुद को मान कर ग्लानि भाव से भर उठी

रेखा जी .....ये आज कोमल को क्या हुआ है जो अभी तक बहार नहीं आई है कही उसकी तबियत तो ख़राब नहीं हो गई है

शालिनी जी .......आप रुको दीदी मैं देखती हूँ कोमल को

शालिनी जी कोमल आवर राधा के रूम की तरफ भध जाती है

शालिनी जी जब रूम में पहुंची तो

कोमल उठ चुकी थी आवर वह खिड़की के से बहार देख रही थी

शालिनी जी आगे हो कोमल को अपनी तरफ करती है तो कोमल की आँखे कुछ बदली हुई आवर भीगी हुई थी





शालिनी जी ......क्या हुआ कोमल आप रो क्यों रही हो बेटी कुछ हुआ है क्या

कोमल बस एक तक शालिनी जी को देखती रहती है

शालिनी जी .......क्या हुआ कोमल देख बेटी मेरा दिल घबरा रहा है बोल न क्या बात है किसी ने कुछ कहा क्या या तुम्हारी तबियत ख़राब है क्या

शालिनी जी कोमल का माथा छू कर देखती है जो की मामूली गरम था

शालिनी जी ......तुम आराम करो तुम्हे फीवर है बेटी

शालिनी जी कोमल उसके बीएड पे लिटा कर बहार जाने लगती है

तो कमल उनका हाथ पकड़ लेती है

शालिनी जी .....क्या हुआ बेटी तुम रेस्ट करो मैं अभी तुम्हारी माँ को भेजती हूँ

कोमल ......मम्मी आप मेरे साथ रुक जाइये न

शालिनी जी ......ठीक है कोमल मैं तुम्हारे साथ हे हूँ

शालिनी जी वही बीएड पे बेथ जाती है

कोमल अपना सर उनकी गॉड में रख आँखे बांड कर लेती है

कोमल ..........मम्मी अगर किसी से अनजाने में गलती हो जाये तो क्या उसे माफ किया जा सकता है

शालिनी जी .....बेटी अगर गलती अनजाने में हुई है तो गलती करने वाले को माफी मिलने चाइये है अगर गलती जानबुज कर की जाये तो उसकी कोई माफी नहीं होती है क्या तुमसे कोई गलती हुई है कोमल जो तुम ऐसी बात कर रही हो

कोमल कुछ नहीं बोलती है शालिनी जी के सर सहलाने से कोमल को रहत मिलती है जिस से वह फिर से सो जाती है

सूर्यगढ़ .......

सुबह जब किरण आवर सपना उठी तो दोनों एक दूसरे को देखते हे गले लग रोने लगती है काफी देर तक दोनों एक दूसरे को दिलशाद देती है

सपना .....देख स्वीटी वो हमारा पिचका जनम था उसके बारे में किसी को पता नहीं चलना चाइये नहीं तो सब घरवाले परेशान हो जायेंगे

किरण ......ठीक है माँ पैर मुझे भाई से मिलना है

सपना ......माँ नहीं दीदी हूँ तुम्हारी सूर्य से तो मुझे भी मिलना है पैर वो तो यहाँ है हे नहीं पता नहीं कहा है कैसा है

किरण आँखे बंद कर सूर्य को ढूंढने की कोशिश करती है तो उसे पता चलता है की सूर्य परतवि पे कही है हे नहीं

किरण .....दी सूर्य परतवि पे नहीं है

सपना .....तुम्हे कैसे पता चला

किरण ......आप भूल गई क्या हमारे पास सकतिया है

सपना ....है मैं तो भूल हे गई थी

प्रिय जी ......क्या हो रहा है आज तुम दोनों अभी तक बिस्तर से नहीं निकली हो

सपना ......वो मम्मी हम अभी उठे है आप चलिए हम आते है

प्रिय जी ......तुम्हारे पापा आये है तुम दोनों को याद कर रहे है चलो जल्दी फिर वो सूर्यगढ़ भी जायेंगे

सूर्यगढ़ का नाम सुनते हे किरण के कान खड़े हो जाते है

किरण .....मम्मी मुझे भी जाना है कोमल से मिलने सूर्यगढ़

प्रिय जी .....ठीक है फिर त्यार हो निचे आओ तुम्हारे पापा जल्दी में है

किरण फटाफट त्यार हो जाती है सपना भी जल्दी हे रेडी हो दोनों 20 मिनट्स में निचे आ पहुंचे

नास्ता वगेरा कर दोनों 9 बजे के लगभग जोरावर मां जी के साथ सूर्यगढ़ निकल गई एक नयी उमंग नयी छह के साथ अपने भाई अपने प्रेमी से मिलने ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......
 
अपडेट. 131

प्रिय जी ......तुम्हारे पापा आये है तुम दोनों को याद कर रहे है चलो जल्दी फिर वो सूर्यगढ़ भी जायेंगे

सूर्यगढ़ का नाम सुनते हे किरण के कान खड़े हो जाते है

किरण .....मम्मी मुझे भी जाना है कोमल से मिलने सूर्यगढ़

प्रिय जी .....ठीक है फिर त्यार हो निचे आओ तुम्हारे पापा जल्दी में है

किरण फटाफट त्यार हो जाती है सपना भी जल्दी हे रेडी हो दोनों 20 मिनट्स में निचे आ पहुंचे

नास्ता वगेरा कर दोनों 9 बजे के लगभग जोरावर मां जी के साथ सूर्यगढ़ निकल गई एक नयी उमंग नयी छह के साथ अपने भाई अपने प्रेमी से मिलने ........

अब आगे ........

असुरलोक ......

वैसे तो असुरलोक में ज्यादातर समय अंदर हे होता है जहा रात आवर दिन का पता माहि चलता

मध्यरात्रि के समय अचानक से असुरको असुर लोक की तरफ बहुत तेजी से कुछ आता हुआ नजर आया सेनिको ने असुरलोक पे आकर्मण हो गया है ऐसा समाज चरण इसकी खबर असुरमहल में पहुंचे

द्वारिका असुरगुरु नीलसूर सब बहार आ ुशी चीज़ को देखने लगी अगले दो मिनट्स में हे एक समजे के साथ कोई असुरलोक की जमीं से टकराता है

असुरगुरु द्वारिका नीलसूर सब तेजी से उस आवर बढे जहा वो विस्फोट हुआ था

सिगरा हे सब वह पहुंचे तो वह एक बहुत बड़ा गधा बना हुआ था

असुरगुरु की नजर पड़ते हे अननयष हे उनके मुँह से निकल गया

असुरगुरु ......असुरराज महाराज नरकासुर

नीलसूर जल्दी से आगे भाड़ अपने पिता नरकासुर के कमजोर सरीर को पथरो के बिच से निकल गधे से बहार ले कर आता है

असुरराज आगे बढ़ नरकासुर का निरक्षण करते है

असुरगुरु .......इन्हे सिगरा एटीसी ग्रा महल ले चलो फ़ौरन राजवैद्य को सूचित किया जाये

असुरराज नरकासुर इस वक़्त सक्तीवमहीन आवर कमजोर है इन्हे तुरंत पिचर की आव्सय्कता है

नीलसूर अपने पिता नरकासुर को असुर महल ले आता है राजवैद्य नरकासुर का निरिक्षण कर उन्हें ॉधी दे देता है

राजवैद्य .......असुरराज को विश्राम की आव्सय्कता है उनकी विश्राम में कोई विघ्न न आने पाए

द्वारिका ......राजवैद्य असुरराज महाराज नरकासुर ठीक तो है न

राजवैद्य .....चिंता की बात नहीं है वो कुछ समय में ठीक हो जायेंगे अभी वो कमजोरी की वजह से मूर्छित है मैंने ॉधी उन्हें दे दी है किन्तु असुरराज को कुछ समय लगेगा उनका सरीर घायल उन्हें देख यही लगता है जैसे वर्षो से जाल आवर भोजन न किया हो

राजवैद्य को वही एक कक्ष में ठहराया जाता है आवर द्वारिका नीलसूर नरकासुर के पास चले जाते है

असुरगुरु फिर से अपनी गुफा में लौट जाता है

असुरगुरु असुर महल में ज्यादा समय नहीं रुकते है

असुरगुरु ......असुरराज नरकासुर लौट आये है मुझे मानसी के विषय में सतर्क रहना होगा कही ऐसा न हो किसी को इसके विषय में पता चल जाये

मुझे मानसी को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पे पहुंचना होगा

सूर्यगढ़ .......

किरण जोरावर सपना सूर्यगढ़ पहुंच चुके थे

किरण आवर सपना को देख सभी खुश थे

शालिनी जी दोनों को बहुत प्यार से सनेह से अपने गले लगती है

शालिनी जी ......कैसी है मेरी दोनों बेतिया

किरण ......बुआ सा मैं तो ठीक हूँ दीदी का पता नहीं हेहेहे

सपना ......क्यों मुझे क्या हुआ है स्वीटी मैं भी ठीक हूँ बुआ सा

शालिनी जी ......ये तो अच्छी बात है चलो तुम दोनों कोमल के पास चलो मैं तुम दोनों की कॉफ़ी ले कर आती हूँ वही

किरण सपना अलीना के साथ कोमल के रूम की आवर चल देती है

वही मेर्री जी शालिनी जी के साथ किचन की आवर निकल गई

किरण सपना अलीना जब रूम में पहुंची तो कोमल बीएड पे लेती ऊपर चल रहे फें को एक तक घोर से देख रही थी

किरण .....क्या बात है कोमल रानी तुम अभी भी लेती हुई हो

किरण आगे कोमल को हिलाती है तब उसकी नजर कोमल पे पड़ती है

कोमल किरण को देखते हे भावुक हो गई

कोमल .......दीदी आप यहाँ

किरण .......क्यों मैं नहीं आ सकती क्या तुम्हारे रूम में आवर ये मैं दीदी कब से हो गई हम तो फ्रेंड्स है न

कोमल बीएड से तक लगा कर बेथ जाती है

कोमल ......सॉरी मेरा वो मतलब नहीं था आवर आपकी वास्तविकता में जान गई हूँ मुझे माफ कर दीजिये उस वक़्त मुझे पता नहीं था

सपना ....... कोमल इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी तुम तो खुद किसी आवर के सडयंत्र का सीकर थी

सपना .......प्रिय तुम क्यों चुप चुप कड़ी हो

अभी तक प्रिय जो चुप चाप कड़ी तीनो को देख रही थी अपने आप हे उसके आँखों उसकी आँखे नाम होने लगती है

सपना अलीना ( प्रिय ) को अपने गले लगा लेती है

सपना .......जानती हूँ प्रिय तुम्हे भी सबकुछ याद आ गया है पैर देख अभी हम किसी को कुछ भी नहीं बता सकते है जब तक गुरुदेव से बात नहीं हो जाती है हमने पहले भी गलतिया की है इस लिया जब तक खुद गुरुदेव हमें इस बारे में बताने को नहीं कहते है हमें चुप रहना होगा

अलीना .......भाबी वो माँ डैड आवर बाकि सब

सपना .......वो भी कही न कही होंगे हे जैसे हम मिले है

वो भी मिल जायेंगे अभी हम बहने है अगर किसी ने तुम्हारे मुँह से भाबी सुना तो क्या जबाब डौगी

मेर्री ......ये लो तुम सब कॉफ़ी पियो

ीदार बहार सूर्य भी हवेली पहुंच गया जिसने देख सभी खुश थे

सूर्य को सपना किरण की यही हवेली में मौजूद होने का अहसास हो गया था

दादा जी .......आ गया मेरा शेर

सूर्य ......परनाम दादा जी परनाम मां जी

दादा जी मां जी .......जीतने रहो बीटा

मां जी ......कैसे हो बीटा कभी हमारे साथ भी वक़्त बिताया करो हाहाहाहा

सूर्य ......जरूर मां जी

दादा जी ......तो कैसे रहा तुम्हारा सफर

सूर्य .......सोचा था उस से भी अच्छा बाउजी

मां जी ......जाओ अंदर तुम्हारी बहने तुम्हारा इन्तजार कर रही है सायद उन्हें पता था की तुम आज लौट रहे हो

सूर्य वह से अंदर चल दिया अपनी दादा जी आवर मां जी को बहार लोने में छोड़

सूर्य जब अंदर पंहुचा तो सबसे पहले सूर्य पे राधा की नजर पढ़ी

राधा .......सूर्याअ तुम आ गए

राधा की आवाज सुन रेखा जी शालिनी जी आवर दादी जी किचन से बहार निकलती है

राधा सीधा आ कर सूर्य चिपक जाती है

दादी जी ........सदी अभी हुई नहीं आवर ये अभी सबके सामने हे मेरे पोते से चिपक रही है

रेखा जी ......बेटी भी तो आपकी है माँ सा

दादी जी .....क्या मतलब है बहु

रेखा जी ......कुछ नहीं माँ सा

शालिनी जी आवर दादी जी की हंशी चुत गई रेखा जी को हड़बड़ाते देख

सूर्य ......क्या बात है राधा रानी बड़ी चहक रही हो

राधा .......क्यों नहीं चहकना चाइये क्या

दादी जी .....आते हे सुरु हो गई तू हमें भी तो मिलने दे मेरे बेटे से

सूर्य दादी जी रेखा जी आवर शालिनी जी के पेअर छू कर उन्हें गले मिलता है

जैसे हे सूर्य शालिनी जी से गले मिलता उनके दिमाग में कुछ दृश्य चलने लगते है

जिन्हे देख शालिनी जी की आँखे नाम हो गई

शालिनी जी ......मेरा बीटा सूर्य

सूर्य .......ी मिस यू लोट माँ मैंने आपको बहुत मिस किया

शालिनी जी सूर्य के पुरे चेहरे को चूमने लगती है

दादी जी ........क्या हुआ बेटी शालिनी

शालिनी जी सूर्य को देखती तो सूर्य न में गर्दन हिला देता है

शालिनी जी .....कुछ नहीं माँ सा इतने समय बाद अपने बेटे को देखा तो भावुक हो गई

सूर्य आगे बढ़ अपनी दादी जी आवर रेखा जी को एक साथ अपने गले लगता है

सूर्य .....कैसे हो मम्मी दादी आप

रेखा .....हम सब ठीक है बीटा

सूर्य .....बाकि सब कहा है कोमल अलीना मेरी कोई दिखाई नहीं दे रहा है

रेखा जी .....वो कोमल के रूम में है उसकी तबियत ठीक नहीं है

सूर्य ......माँ एक कॉफ़ी मिलेगी आपके हाथो की मैं कोमल के पास जा रहा हूँ

शालिनी जी रेखा जी दादी जी को सूर्य के मुँह से कोमल कुछ अजीब सा लगा जहा पहले वो कोमल को दीदी कहता था वही आज कोमल

शालिनी जी ........तुम्हारी तबियत तो ठीक है न सूर्य

सूर्य .....माँ मुझे क्या हुआ है मैं बिलकुल ठीक हूँ

शालिनी जी .....फिर तू अपने दीदी को उसके नाम से क्यों बोल रहा है

सूर्य .....ओह्ह सॉरी माँ

दादी जी ......जा मिल ले कोमल से बाकि सभी वही है

सूर्य वह से राधा के साथ कोमल के रूम की आवर निकल गया

राधा ......तो आखिर आपको अपनी यादे मिल हे गई

सूर्य .......आपको कैसे पता चला

राधा .......भूलिए मत मैं आपकी बीबी हूँ भले हे हमारा साथ कुछ हे वक़्त का क्यों न रहा हो

सूर्य राधा के साथ जैसे रूम में इंटर करता है कोइस अचानक से सूर्य पे छलांग लगा देती है

ये कोई आवर नहीं किरण हे थी जिसको सूर्य के रूम में आने से पहले हे अहसास हो गया था





सूर्य किरण को हवा में हे थम उसे सीने लगा लेता है

किरण be-thasha सूर्य के चेहरे को हर जगह चूमे जा रही थी किरण की आँखों से इतने समय से रुके आंसुओ का बांड अब टूट चूका था

अंत में किरण सूर्य के होंटो से अपने होंठ चिपका उसे किश कर अपने तड़प मिटने लगती है

सूर्य किरण की स्थिति समाज उसके किश में साथ देने लगता है सूर्य के मुँह में किरण होंटो की लिपस्टिक के साथ साथ आंसुओ का नमकीन टेस्ट भी आ रहा था

मेर्री जी के खखारने से सूर्य का ध्यान उनपे जाता है सूर्य किरण को गॉड से उतर अपने बहो में भर लेता है





सूर्य किरण को काफी देर अपने सीने से लगाए रखा

surya....merry जी मेरे लिया कॉफ़ी ले आएँगी

मेर्री जी .......ठीक है तुम बैठो मैं ले कर आती हूँ

मेर्री जी के रूम से निकलते हे

सूर्य ......स्वीटी तुम ठीक हो न

किरण सिर्फ है में गर्दन हिला देती है

सपना ....स्वीटी हमें भी इनसे मिलना है

किरण .......मैं क्या कृ जिसको मिलना मिले मैंने थोड़े मना किया है मैं नहीं हटने वाली

किरण की बात सुन सपना समाज जाती है की ये अभी अलग नहीं होने वाली है

दूसरी तरफ से सपना भी सूर्य से गले लग मिलती है है इतने लम्बे समय बाद सूर्य से सपना मिल कर भावुक जरूर हो जाती है पैर खुद के जज्बातो को कण्ट्रोल कर सूर्य से अलग हो जाती है

सूर्य ......दीदी आप नहीं मिलोगी क्या मुझसे

अलीना को लगा सूर्य कोमल के लिया कह रहा है

अलीना को ऐसे खड़ा देख सूर्य किरण को खुद से अलग कर अलीना के सामने जा खड़ा होता है

सूर्य .....क्या हुआ प्रिय दीदी अपने भाई से गले नहीं मिलोगी क्या

सूर्य अलीना (प्रिय ) को खींच कर अपनी बहो में भर लेता है





सूर्य ......क्या हुआ दीदी आपको ख़ुशी नहीं हुई क्या फिर से मिल कर

अलीना ......मैं बहुत खुश हूँ सूर्य

सूर्य ......फिर आपकी आँखों में आंसू क्यों है दीदी

अलीना .......दीदी नहीं अलीना सूर्य

सूर्य .....ठीक है अलीना

तभी अलीना सूर्य से अलग हो एक चांटा सूर्य को जाड देती

मेर्री जी .....ालीनाआ

मेर्री जो सूर्य के लिया कॉफ़ी ले कर रूम आई थी उसने अलीना को चांटा मरते देख लिया था

सूर्य अभी भी मुस्कुरा रहा था साथ हे सपना आवर किरण भी

राधा कोमल शोक में कभी सूर्य को तो कभी अलीना को देख रही थी

मेर्री आगे बढ़ अलीना पे हाथ उठती है पैर सूर्य बिच में हे मेर्री जी का हाथ पकड़ लेता है

सूर्य ......नहीं मेर्री जी ये उसका हक़ है

मेर्री जी ......ये कैसा हक़ सूर्य जो इसने तुमपे हाथ हे उठा दिया

सूर्य .......आप नहीं समझोगी मेर्री जी

किरण ......बिल कुल ठीक किया आपने अलीना दीदी मेरी तरफ से भी एक लगाना चाइये इनको

मेर्री जी .....ये तुम सबको हो क्या गया है अलीना पे गुस्सा करने की बजाय उसे फिर से मरने के लिया कह रही हो

सूर्य अलीना के माथे पे कर





उसे अपने गले से लगा लेता है जो मेर्री जी के लिया किसी शोक से काम नहीं था

सूर्य .....आप ऐसे क्या देख रही हो ममी जी लगता है आपने कोई बहुत देख लिया है

मेर्री जी ....हम्म्म नहीं पता नहीं तुम लोगो के बिच क्या चल रहा है

मेर्री जी गुस्से से अलीना को देख वह से निकल जाती है

सूर्य ......सॉरी दीदी ी मैं अलीना उसमे मेरी गलती नहीं थी

सपना .......है प्रिय वो सब मोहिनी आवर चांडाल का किया हुआ था

सूर्य ........क्या बात है हमारी राजकुमारी उदाश क्यों है

सूर्य राजकुमारी कोमल को देख कर बोलै तो

कोमल बीएड से उठ सूर्य के सामने आ उसके पैरो में गिरने लगती तो सूर्य ने उठा कर उसे अपने गले से लगा लिया

कोमल ......मुझे माफ कर दीजिये वो सब मेरी वजह से हुआ था





सूर्य ......नहीं कोमल वो सब मेरी नादानियों का दंड था जो मेरे साथ साथ तुम सबको भोगना पड़ा हो सके तो तुम सब भी मुझे माफ कर देना

सपना किरण अलीना तीनो सूर्य को चारो तरफ से घेर लेती है

सूर्य .....आप क्यों कड़ी है वह

राधा भी वह आ उन सबके साथ सूर्य से चिपक जाती है

सूर्य ......कोमल आप चिंता न करो बहुत जल्द हम सब नागलोक आपके माता पिता से मिलने चलेंगे

कोमल ......क्या सच में

सूर्य ......बिलकुल आवर है कुछ समय बाद हम सबको परीलोक चलना है पूजा में

किरण .....मुझे पारिजात से मिलना है भाई

सूर्य ......रात को मिल लेना

शालिनी जी ......क्या बात है बड़ा प्यार जताया जा रहा सभी बहने मिल कर

सूर्य ......कुछ नहीं माँ बस ऐसे हे

शालिनी जी ......सब समझती हूँ माँ हु तुम्हारी

सूर्य .......माँ आपको कुछ बताना था

शालिनी जी ......बाद में पहले जा कर फ्रेश हो जाओ खाना लग गया है फिर तुम्हे एयरपोर्ट जाना है

सूर्य ....क्या हुआ माँ एयरपोर्ट क्यों

शालिनी जी .....क्युकी तुम्हारी दोनों बहने आवर बुआ सा आ रहे है अभी उनका कॉल आया था दिल्ली से वो फ्लाइट पकड़ चुके है

सूर्य .......ठीक है माँ मैं चला जाऊंगा

किरण सपना .....हम भी जायेंगे

शालिनी जी ......ठीक है अब तो छोड़ो इसको

सूर्य वह से अपने रूम में फ्रेश होने चल दिया ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........
 
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