Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 7 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 46

गुरुदेव गौर अनर्थ हो गया है

उसको पता चल चूका है की जिनलोक आवर प्रेतलोक की सकतिया सूर्य के पास है

आवर इस वक़्त सूर्य के पास न जिनलोक आवर न प्रेतलोक की पूर्ण सकती है

मुझे शीघ्र हे उनको यहाँ लाना होगा

नहीं तो सब कुछ तबाह जो जायेगा

मुझे राजन से बात करनी होंगी तीनो लुक के

कुछ देर बाद एक बंद ककस में जिनलोक के राजा. प्रेतलोक के राजा आवर पार्क लुक की महारानी तीनो एक कसक में मौजूद थे....

अब आगे ..........

गुरुदेव .........आप तीनो का बहुत बहुत शुक्रिया जो आप तीनो हे समय की गंभीरता को समाज कर इस गुप्त सभा में शामिल हुए

रानी pari.......guruvar हमें आपने यहाँ आने का सन्देश दिया है तो कुछ जरूरी हे विषय होगा

प्रेतराज .....है गुरुवार आप इस विषय पे कुछ बताने का लास्ट करे

gurudev......chandal को सूर्य का पता चल चूका है

तीनो हे गुरुदेव की बात सुन कर मुद्दे की गंभीरता को समाज चुके थे

प्रेतराज ऐसा कैसे जो सकता है गुरुवार

गुरुदेव ......हम भी इस विषय कुछ भी ज्ञात नहीं कर प् रहे है

हमने बहुत कोसिस की किन्तु असफल रहे कुछ भी पता करने में

रानी पारी .....अब क्या सोचा है गुरुवार हमें कुछ तो करना होगा इतने वर्षो की प्रतीक्षा के बाद ये शुभ समय आने वाला था

गुरुदेव ......एक बुरी खबर आवर है हम सब के लिया

प्रेतराज ......अब इस से बुरी खबर क्या जो सकती है गुरुवार

गुरुदेव ......कल रात चांडाल ने मायाजाल रचा है जिसमे वो कामयाब भी हो चूका

उसने सूर्य को किसी के माद्यम से सम्मोहन विद्या से सम्मोहन कर बिन्स उसकी ीचा के पाप कर्म करवाया है जिसका प्रभाव सूर्य के कर्मो को प्रभावित करेंगे

सूर्य की कुंडली में मरतु योग ने जनम लिया है इस पाप कर्म के चलते

सभी गुरुदेव के बात सुन कर सदमे जैसे हालत में चले गए थे

जिनलोक के राजा .( j.King).

ज .किंग .......ऐसा कैसे हो सकता है गुरुवार सूर्य के पास इतनी सकती होने के बाद भी

गुरुदेव .......इसमें हमारी हे गलती है राजन हमने सूर्य को सकतिया तो प्रदान की किन्तु सूर्य को उस सकती की अहमियत नहीं समजा पाए

वो सबसे प्रेम करता है साफ दिल से सबकी मदद भी करता है किन्तु जो सकतिया प्राप्त हुई वो बिन्स किसी कठिन परिसराम के प्राप्त होने से वो इन सक्तियो के साथ मिले उत्तरदायित्व को ठीक से समाज नहीं पाए

रानी पारी ......अब आगे क्या करना है इसका मार्ग भी आपको हे सुजाना होगा गुरुदेव

गुरुदेव ......हम आज हे परतवि लोक जा कर सूर्य से ओस विषय पे बात करते है

सूर्य अभी अपनी सुरक्षा तो कर सकता है किन्तु अपने परिवार जान की नहीं कर सकता है

आवर वही हमें सुरक्षित करना होगा

ानयता सूर्य की वो गुप्त सकती जिसने परतविलोक पे अपने प्रेम को पाने के लिया जनम लिया है वो कही कोई अनर्थ न कर दे

रानी पारी .......ये आप क्या कह रहे है तीनो लोक की सकतिया तो हमारी पुत्रियों के पास है फिर परतवि लोक पे किसने जनम लिया है गुरुदेव

गुरुदेव ......समय आने पे ज्ञात हो जायेगा महारानी जी

ज किंग .......क्यों न हम उनके परिवार को यही पे ले आये क्युकी कुछ समय पश्चात तो राजकुमारी आवर सूर्य के सगाई समाहरोह में आने वाले हे है

प्रेतराज कुछ आवर सोच में डुभे हुए नज़र आये

गुरुदेव ......प्रेतराज आप किस गहन विचार में डुभे हुए है

प्रेतराज ......गुरुवार आज सुबह पर्विलोक में कुछ समय के लिया मुझे अपनी पुत्री का किसी पे अंनियंत्रित करोड़ महसूस किया था

बस वहीँ सोच रहा हूँ

क्युकी समय के लिया उसकी मार्क सकती जागृत हुए थी जो किसी पे अपने क्रोध को ले कर हे संभव है

गुरुदेव ......आने समय हम सब के लिया किसी कठिन प्रतियोगिता से काम नहीं है

मैं परतवि लोक के लिया निकल रहा हूँ

प्रेतराज आप अपनी सेना के मुख्या योद्धाओ की एक सेना जिनलोक के सुरक्षा में लगाओ बिना किसी को नज़र आये वो जिनलोक की सुरक्षा करेंगे

रानी पारी आपको जिनलोक के महल की सुरक्षा का इंतजाम करना है

प्रेतराज .....जी गुरुवार

रानी पारी .....ऐसा हे होगा गुरुवार

j.king .....मेरा लिया क्या आदेश है गुरुवार

गुरुदेव .....आप अपनी पुत्री के सगाई सम्हारोह को सम्भालिया राजन ....

सूर्य जब घर पंहुचा तो आज तीनो हे इस वक़्त तक घर पे थे

सूर्य ......क्या बात है आज आप सब घर पे हे हो न कॉलेज न ऑफिस क्या हुआ सब ठीक तो है न

जिनिशा .....है सरताज सब ठीक है आप बताओ कैसा रहा बड़ी मम्मी के घर कल

सूर्य तीनो से गले मिल कर उनके पास हे बेथ जाता है

सूर्य .....कल बहनो के साथ मूवी देखि शॉपिंग की आवर उनकी मन पसंद जगह उनको घुमाया

किरण ....फिर आप मुझे क्यों नहीं ले कर गए अपने साथ में

सूर्य .....सॉरी स्वीटी आप कहो तो अभी चले जहा आपको गुमना है

किरण ....उम्म्म्मः नहीं जान बस अब हम सब जिनलोक में हे शॉपिंग करेंगे आवर वही गुमना भी हो जायेगा आपके साथ में

सपना .....आप सब बात करो मैं आप सब के लिया कफ ले कर आती हूँ

जिनिशा .....जी दीदी

सूर्य .....जीनु डार्लिंग कुछ हुआ है क्या आज घर पे

जिनिशा .....है आज जीनत आई थी घर पे फिर वो सब कुछ सूर्य आवर किरण दोनों को बताया जो जीनत ने जिनिशा आवर सपना से कहा था

सूर्य तो शांत हे रहा किन्तु किरण बहुत गुस्से में नज़र आ रहे थे

जिनिशा ने जैसे हे किरण की आँखे देखि एक अजीब सा दर उसके पूरी बॉडी में एक कपकपी से छूट गई

सूर्य .....( जोर से) जिनिषा क्या हुआ तुम्हे तुम ऐसे क्यों कैंप रहे हो

सूर्य की तेज आवाज सुन सपना भी दौड़ी चली आई आवर किरण भी इस आवाज से अपने गुस्से को भुला कर जल्दी से जिनिशा का हाथ थम लिया

किरण के हाथ थमते हे जिनिशा नार्मल हो गई

सूर्य जिनिशा को अपने गले स लगा लेता है

उसकी पीठ को सहलाते हुए

सूर्य .....क्या हुआ जिनिशा तुम ठीक तो हो न तुम ऐसे कैंप क्यों रहे थी

सपना .....है छोटी बोलो न बात क्या है सुबह भी तुम कुछ गम शूम सी देखि

आवर अभी तो तुम कैंप भी रहे थे लगता है तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है

तभी वह गुरुदे प्रकट होते है

गुरुदेव .....शांत हो जाओ सपना पुत्री जिनिशा ठीक है

गुरुदेव आगे बढ़ कर जिनिशा के माथे पे हाथ रखते है

देखते हे देखते जिनिशा सोने लगी

गुरुदेव .....सूर्य पुत्र जिनिशा को उसके कसक में सुला दो इसको आराम करने दो

सपना .....मैं भी चलती हूँ जिनिशा के साथ में

सूर्य ....ठीक है सपना

गुरुदेव ......पुटीरी किरण आप भी जाओ मुझे सूर्य से एकांत में बात करनी है

किरण ....जी बाबा

सूर्य जिनिशा को उसके रूम में सुला देता है फिर बहार आ कर गुरुदेव के साथ निकल जाता है

सूर्य गुरदेव से बात करने के बाद रात के खाने के वक़्त वापिस लौटा

अब तक जिनिशा भी पूरी तरह से उस दर स्व बहार निकल चुकी थी

क्युकी गुरुदेव ने वो दृश्य हे जिनिशा के दीमक में मंत्र सकती से बंद दिया था

सूर्य ....अब कैसे हो जीनु तुम

जिनिशा ....मैं ठीक हूँ आप कहा थे इतने वकत तक

सपना .....है मैंने भी आपको कितने बार अपनी सकती से देखने की कोसिस की जब आपका फ़ोन नहीं लगा तब

किन्तु आप मुझे दिखे हे नहीं

सूर्य .....है वो मैं गुरुदेव के साथ था किसी जरूरी विषय पे बात कर रहे थे

किरण .....क्या कहा बाबा ने

सूर्य ......गुरुदेव का कहना है की जिनिशा आवर मेरी इंगेजमेंट में अब हमारे पुरे परिवार को शामिल होना है

सपना .....ऐसा क्यों पहले तो नहीं कहा था ग्रुरुदेव ने पुरे परिवार के लिया

सूर्य .......पता नहीं मुझे भी पूरी बात नहीं बताई उन्होंने

जिनिशा ......तो अब क्या सोचा है आपने अब

क्या आप अपनी सचाई बताने वाले है सब को

सूर्य ......उनको धोखे में रख कर हम कब तक अपने रिश्ते को अपमानित करते रहेंगे

सभी को सच बता कर हे जिनलोक ले जाना उचित होगा या फिर उनको वही पे सचाई बताई जाये

सपना .....पहले सब खाना खा लो फिर कल बात करते है इस बारे में

सबने खाना खा कर अपने अपने रूम की आवर चल दिए

किन्तु सूर्य ने आज कुछ आवर हे सोचा था

सूर्य सपना को ले कर जिनिशा के रूम गुस्स गया

जिनिशा .....क्या हुआ आज हमारे रूम में सोना है क्या हेहेहे

सूर्य .... है आज हम चारो साथ में सोयेंगे क्यों आपको प्रॉब्लम है क्या

जिनिशा . बिलकुल नहीं मेरी जान मुझे तो खुसी होगी आपके साथ सोने में

सपना .....हेहेहे छोटी बस सोना है कुछ करने की परमिशन नहीं है अभी

किरण ...मैं भाई के ऊपर सोऊंगी वो जगह मेरी बाकि आप दोनों भाबिया देख लो

जिनिशा ....लो दीदी स्वीटी ने तो अपनी जगह बुक कर ली है

सपना .......तो अब हमें भी कर लेनी चाइये

दोनों हे सूर्य के अगल बगल सूर्य के हाथो का तकिया बना कर लेट गयी सूर्य ने भी दोनों को बाँहों में भर का दोनों के होंठ पे गूडनिघत किश किया आवर लेट गया

किरण .....ये क्या है मेरा किश कहा है

सूर्य .....वो तुम जानो स्वीटी मई तो चला सोने

किरण ने एक बार सपना आवर जिनिशा को देखा फॉर सूर्य के होंटो को बड़े हद प्यार से अपने होंटो में दबा कर चूसने लगे





3,4 मिंट किस करने के बाद किरण ने सूर्य के होंटो को छोड़ा आवर जिनिशा आवर सपना पे अपनी बहन फैला कर सूर्य के सीने पे सर रख कर उसके दिल की धड़कन सुनते हुए कब सोये उसको भी पता नहीं चला

आज सूर्य को फिर वही सपना आया

जैसे सूर्य ने अपनी ाँघे खो सामने किरण का चेहरा देख

किरण ने जब आँखे खोली तो सूर्य को देखते हुए फिर से सो गई





सूर्य सुबह जल्दी उठ कर बहार निकल गया कुछ देर गुमने फिरने के बाद वापिस घर लौट आया

सपना ........आप फ्रेश हो आओ मैं कफ लती हूँ

आवर अपनी स्वीटी को भी उठा देना वो महारानी अभी भी सो रही है

सूर्य .....अच्छा पहले जरा ीदार आना आवर मुझे मेरी बीबी से प्यारी सी किश चाइये गुड मॉर्निंग की गुड स्वीट किसी

सपना ......आज कल आपकी डिमांड दिन बा दिन बढ़ती जा रहे है ज्यादा स्वीट सेहत के लिया ख़राब होती है

उम्मम्मम्मम्म .उम्म्म्मः

सूर्य .....उम्मम्मम्मम्मः अब जा कर मॉर्निंग गुड हुए है

ी लव यू जान ुम्मम्हा

सपना .....ी लव यू तू जान ुम्मम्हा अब जाओ पसिनी की बदबू आ रहे है आपसे

सूर्य जल्दी हे वह से निकला आवर किरण को उठाने के लिया बढ़ा

पैर पास जा कर बड़े प्यार से उसको देखने लगा

जिनिशा बाथरूम से नाहा कर निकली सामने सूर्य को ऐसे खोया देख मुस्कुरानी लगी

जिनिशा ....जान आगे बढ़ो आवर उसे किश करलो आपके दिल को सुकून मिलेगा वो सिर्फ आपकी है जब इतना प्यार करते हो तो क्यों स्टेट हो स्वीटी को

सूर्य ......जानती हो जिनिशा जब स्वीटी पैदा हुए थे तब मुझे ऐसे लगा था मनो मैंने दुनिया को अपने कदमो में जखने की ताकत प् ली है

प्यार तो इसके जनम के साथ हे करने लगा था किन्तु वो प्यार एक भाई बहन का पवित्र प्रेम था

इसका नाम भी मैंने हे रखा था किरण .सूर्य की जान उसकी किरण ..किरण का सूर्य के बिना कोई वजूद नहीं है

आवर नहीं किरण के बिना सूर्य का कोई अस्तित्वा है

जिस दिन मुझे कुछ हुवा उस दिन इसका बी दिल धड़कना बंद हो जायेगा

आवर इसको कुछ हुआ तो मैं पता नहीं क्या करुगा सायद इस दुनिया को मिटा दूंगा

ये सब बोलते हुए सूर्य की आँखे पता नहीं क्यों नाम हो गई थी

किरण जो अब तक सोई हुए सब कुछ चुपचाप सुन रहे थे

( अपने मन में किरण .....भाई मेरा तो जनम हे आपके लिया हुआ है आपको कुछ भी हुआ तो ये पूरा भारमंद मेरा वो रूप देखेगा जिसको अभी तक किसी ने नहीं देखा है सब कुछ मिटा दूंगी आपके लिया )

किरण दौड़ कर सूर्य के गले लग गई

आवर सुबकने लगी

जिनिशा जो अभी तक खुद को सुबकने से रोके हुए थे वो भी सूर्य से जा चिकपी आवर सुबकने लगी

किरण .......आपको कुछ नहीं होगा भाई मैं हूँ न आपके पास आपकी किरण

सपना ......ये सब क्या हो रहा है यहाँ

किरण .....देखो न माँ आपके हस्बैंड कैसे बाते कर रहे है यहाँ पे

सपना .....क्या हुवा मेरी बच्ची आवर आप तीनो की आँखों में आंसू क्यों है

सूर्य .....कुछ नहीं जान बस ऐसे हे

लाओ मेरी कफ दो मुझे आवर स्वीटी आप जाओ फ्रेश हो आवो

किरण .....उम्मम्मम्हा गुड मॉर्निंग जान

कहते हुए बाथ्रोईं में बैग गई

सपना ......हेहेहे कहा था न स्वीट थोड़ा काम खाओ

सूर्य .....अभी तो एक आवर बाकि है मेरी जीनु डार्लिंग भी तो है

जिनलोक की रसमलाई उम्म्म्मममः

जिनिशा .......क्या जान कुछ तो सरम करो

सपना ......आवर वो क्यों भला

जिनिशा .....कुछ नहीं दीदी चलो मैं भी चलती हूँ आपकी हेल्प के लिया

सूर्य को जइब निकल कर चिढ़ाते हुए जिनिशा निकल गई बहार

सूर्य ने सबसे पहले दादी को ालल लगाया

कुछ देर बात करने के बाद सूर्य ने बुआ के पुरे परिवार के साथ घर आने को कहा साथ में मानवी बुआ आवर उनके बचो को भी लेन को कहा

दादी से बात की इतने में किरण भी फ्रेश हो कर आ गई

सूर्य .....स्वीटी बड़ी मम्मी के यहाँ जा रहा हम उनको लेन के लिया चलोगी क्या आप मेरे साथ

किरण ....बस 2 मिंट दीजिये अभी त्यार हो कर आई

सूर्य सपना को बताने चला गया

सूर्य ......सपना मैं पुरे परिवार को अपनी सचाई बताना चाहता हूँ सो मैं उन सभी को यहाँ लेन जा रहा हूँ

सपना .....ठीक है जैसा आप ठीक समजे वैसे हम जिनलोक कब जा रहे है

सूर्य ......यहाँ के अनुसरा कल मेरी सगाई है किन्तु जिनलोक के टाइम अनुसार 4 दिन बाद है

तो हम आज रात हे जिनलूक के लिया निकल रहे है

जिनिशा ... क्या सच में हम आज हे वह जायेंगे जान

सूर्य ....है जान तुम लोग भी त्यार हो जाओ मैं अभी सभी को ले कर आया

किरण .....मैं त्यार हूँ भाई

सूर्य किरण को ले कर निकल गया बड़े पापा के यहाँ ..........

अपडेट पोस्ट फ्रेंड्स ......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........
 
अपडेट. 47

सूर्य ......यहाँ के अनुसार कल मेरी सगाई है किन्तु जिनलोक के टाइम अनुसार 4 दिन बाद है

तो हम आज रात हे जिनलूक के लिया निकल रहे है

जिनिशा ... क्या सच में हम आज हे वह जायेंगे जान

सूर्य ....है जान तुम लोग भी त्यार हो जाओ मैं अभी सभी को ले कर आया

किरण .....मैं त्यार हूँ भाई

सूर्य किरण को ले कर निकल गया बड़े पापा के यहाँ ..........

अब आगे ........

सूर्य जब किरण को ले कर वह पंहुचा तो सभी इस वक़्त हॉल में नास्ता कर रहे थे

सूर्य ......गुड मॉर्निंग एवरीवन

सूर्य को सब इतने सुबह सुबह देख कर चौंक गए आवर साथ में एक खूबसूरत लड़की को भी

मधु ......गुड मॉर्निंग सूर्य बीटा तुम इतनी सुबह सुबह यहाँ कैसे

सूर्य आगे बढ़ कर रणजीत सिंह के पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है

आवर अपनी बड़ी मम्मी आवर प्रिय से गले लग कर मिलता है

प्रिय .....गुड मॉर्निंग सूर्य ये लड़की कोण है तुम्हारे साथ में

किरण .....hi प्रिय दीदी मैं हूँ किरण सपना शिव ठाकुर

किसी को कुछ समाज नहीं आया की किरण ने क्या बोलै है

सूर्य भी किरण को देख रहा था की इसने ऐसा क्यों बोलै

रणजीत ......क्या मतलब बेटी कुछ समाज नहीं आया

किरण ......बड़े पापा मैं सूर्य भाई की छोटी बहन हूँ किरण सपना माँ की बेटी

इस बार सबको बड़ा जतका लगा क्युकी उनके लिया तो सपना कब की मार चुकी थी

आवर दूसरी बात की सपना अगर जिन्दा भी है तो उसकी इतनी बदु बेटी कैसे हो गई

तीनो सूर्य की आवर हे देख रहे थे

सूर्य ......है बड़े पापा ये सच है किरण मेरी बहन है

आवर सपना भी जिन्दा है हम सब साथ में रहते है

बाकि आपको घर पे बताऊंगा अभी आप सब घर चलिए

मधु .......पैर बीटा ये कैसे संभव हो सकता है सपना की लॉस तो हमने खुद देखि थी

आवर एक पल के लिया मान भी ले की सपना जिन्दा है फिर भी उसकी इतनी बड़ी बेटी कैसे हो सकती है

किरण .....बड़ी माँ आपको सब कुछ पता चल जायेगा दादी आपको सब कुछ बता देगी आप बस सब चलने की तयारी करो

प्रिय ......ठीक है मैं पैकिंग करती हूँ

सूर्य ....उसकी कोई जरूरत नहीं है प्रिय

बहार बोल दीजिये कुछ समय के लिया आप सब यहाँ नहीं रहने वाले हो ताकि घर का ख्याल रखा जाये

सूर्य कुछ देर बाद सब को ले कर के

कामिनी के घर पंहुचा

सबको एक साथ देख कर कामिनी को बहुत खुसी हुए

कामिनी .......क्या बात है सुबह सुबह आप सब यहाँ पे कैसे दीदी

मधु ... ....अपने लादले से पूछ वही ले कर आया है हमें

सूर्य .....कामिनी चची मेरी दोनों गुड़िया कहा उनको भी बुलाओ आप

कुछ देर बाद काम्य आवर काव्य भी वह आ गई

सूर्य को देख दोनों बहने दौड़ कर सूर्य के गले लग गई

सूर्य ......कैसे है मेरी दोनों गुडिअ

काम्य .....हम ठीक है भैया आप कैसे है

सूर्य .....बिलकुल ठीक मुझे क्या होगा

kavya......bhaiya ये कोण है जो आपके पीछे है

सूर्य .....तुम खुद हे पूछ लो गुड़िया की ये कोण है

काव्य .....hello दीदी आप कोण है

किरण .....hi स्वीटी मैं तुम दोनों की बहन किरण हूँ

काव्य आवर काम्य सूर्य को देखती है

सूर्य अपनी गर्दन है में हिलता है

काम्य काव्य दोनों हे किरण से बड़े प्यार से मिली किरण ने भी उतने हे प्यार से उन दोनों को खुद से गले लगा लिया

कामिनी का भी हल कुछ किरण को ले कर मधु रणजीत आवर प्रिय के जैसा हे था

कुछ देर बाद सब घर से निकले सब के सब अपनी अपनी सोच में गम थे

कुछ देर बाद सूर्य ने मौका देख सबको गायब कर अपने सहर के बहार प्रकट हुआ

कुछ देर में कार घर के बहार थी

रणजीत ......ये हम किसकी घर में आ गए सूर्य

सूर्य .....बड़े पापा ये मेरा हे घर है हम यही रहते है

.रणजीत .....ये केस हो सकता है तुम तो क्सक्सक्स सहर में रहते हो न

किरण .....बड़े पापा हम क्सक्सक्स सहर में हे तो है

मधु रणजीत कामिनी ......क्या पर इतनी जल्दी कैसे

अभी कुछ देर हे तो हुए है हमें घर से चले हुए

सूर्य कार गर्ग में कड़ी करता है जहा बहुत सी

कार्स कड़ी थी जिनको देख कर प्रिय बड़ी खुश हुए

प्रिय ..... ये इतनी कार्स किसकी है सूर्य

सूर्य .......अब से सब आपकी हे है चल अंदर चलो आवर नास्ता करो मैं अभी आया

सब अंदर चल दिए

सूर्य वह से गायब हो कर पार्थवी के के पास पंहुचा जो अभी आश्रम में था उसका वह इलाज चल रहा था

सूर्य सबकी पार्थवी से जुडी यादे मिटता कर पार्थवी को ले कर अपने रूम में पंहुचा जहा उसको सुला कर गेराज से घर के अंदर आ गया

इस वक़्त सपना सबसे ज्यादा गभरै हुए थी

दादी भी आ चुकी थी बुआ आवर फूफा जी मोनिका मनीषा के साथ बस अब बची थी मानवी बुआ

सूर्य ......क्या बात है आप सब बैठे क्यों है पहले नास्ता कीजिये इतने में छोटी बुआ भी आ जाएगी फिर बात करते है

सब बहुत कुछ पूछना चाहते थी किन्तु पहल अभी तक किसी ने नहीं की

कुछ देर बाद सपना आवर जिनिशा ने नास्ता लगा दिया

सब बेथ कर नास्ता करने लगे

जल्दी हे फारिग हो गए

रणजीत .......सूर्य अब तो बताओ की आखिर बात क्या है जो हम सब को यहाँ इक्कठा किया जा रहा है

दादी .......कुछ देर आवर नहीं रुक सकता क्या तू

हमेशा जल्दी में रहता है कभी तो फुर्सत से साँस ले लिया कर

.रणजीत ........मैं कहा कुछ कह रहा हूँ मा मैं तो बस..

दादी ....पता है मुझे माँ को मत सीखा

प्रिय ......हेहेहे दादी पापा को आज पहले बार ऐसे देखा है बिजी बिली के जैसे

प्रिय की बात सुन कर सबकी हंसी छूट गई

दादी ......ऐसा कुछ नहीं है बेटी ये जो तेरा पापा है न दिल से सोचने वाला है तो कुछ ज्यादा हे जल्दी रहती है इसको सब कुछ जानने का

ऐसे हे बात करते करते 12 बज गए तभी बहार मानवी की कार रुकी

सूर्य को पता चक गया की बुआ आ चुकी है

सूर्य बहार गया आवर अपनी बुआ मानवी फूफा सुजीत ठाकुर बहने रुपाली दीपाली को ले कर अंदर आया

मानवी आते हे अपनी माँ आवर बहन से गले लग कर मिली फिर अपनी दोनों भाबियों से भी मिली

सब बच्चो ने एक एक करके अपने मसि आवर बुआ के पेअर छू कर आशीर्वाद लिया

मानवी ......माँ आपने हमें यहाँ क्यों बुलाया है

आवर ये किसका घर है

सूर्य अभी कुछ बोलने हे वाला था की दादी आवर बुआ ने उसे न में इसरा किया

माया बुआ ......छोटी तुझे कुछ बताना है पैर तू गुस्सा नहीं करेगी तब हे तुम्हे हम सब कुछ सच सच बताएंगी

मानवी बुआ .......दीदी मैं क्यों गुस्सा करूंगी आप पर

दादी .....देख बेटी हमने तुमसे कुछ बाते छुपाई है जिसे सुन कर तू हम पे गुस्सा नहीं होगी हमें भी कुछ दिन पहले हे पता चला है

अगर तू गुस्सा करेगी तो हम तुम्हे कुछ भी नहीं बताने वाले है

सुजीत फूफा ......माँ जी आप चिंता न करो मानवी गुस्सा नहीं करेगी

बुआ ....मानवी तुम्हे जो कुछ भी बताये आवर आप भी भैया भाबी पूरी बात सुने बिना बिच में न बोलना

दादी .....रणजीत मधु कामिनी तुम सब तो सूर्य से मिल हे चुके हो

मानवी सुजीत ये है सूर्य शिव ठाकुर तुम्हारे भाई शिव ठाकुर आवर तुम्हारी भाई शालिनी ठाकुर का बीटा

मानवी बुआ आवर उसका परिवार मुँह फाडे कभी सूर्य को देखता तो कभी अपनी माँ आवर बहन को

मानवी बुआ के आँखों से आसूं बहने लगे थे

सूर्य आगे बढ़ कर अपनी बुआ आवर बहनो को गले लगा लेता है

सूर्य .....मनु बुआ शांत हो जाये

मानवी बुआ ......तू मेरा बीटा सूर्य हे है न ( मानवी बुआ के कोई लड़का न होने के कारन सूर्य को हे सब कुछ मानती है वो )

सूर्य .. ...है बुआ वही सूर्य जिसको आप हमेशा अपने पास रखना चाहती थी अब तो मैं आ गया हूँ न आपके पास तो अब रोना नहीं प्लेसेस

आप तो मेरी प्यारी मनु बुआ है न

कुछ दी बाद बड़ी मुश्किल से मानवी बुआ को शांत किया

मानवी बुआ सूर्य को अपने साथ हे बैठा लिया आवर उसका सर अपने गौड़ में रख कर अपनी भीगी आँखों से प्यार से सूर्य को देखते हुए उसके सर को सहलाने लगी

किरण जो अब तक खामोश कड़ी थी वो जा कर बड़ी बुआ के गौड़ में सर रख दिया

किरण को ऐसा करता देख सबके चेहरे पे ख़ुशी फिर से लौट आई

माया बुआ .....मानवी अपनी बेटी से नहीं मिलोगी क्या

मानवी बुआ .....क्या मतलब दीदी

दादी ......वो जो माया की गॉड में लेती है वो है तेरी सपना आवर शिव की बेटी किरण

इस बार कामिनी मानवी सुजीत रुपाली डिंपल को जतका लगा था

रणजीत .....माँ यही मैं भी जानना चाहता हूँ की ये कैसे संभव है

जबकि हम सबने सपना बहु का अंतिमसंस्कार किया था

दीदी ( गुस्से में ) .......ये सब तुम्हारे उस कमीने भाई का किया दरहा है मेरी बेटी सपना जिन्दा है तुमने जिस लॉस को सपना समाज कर अंतिमसंस्कार किया था वो कोई आवर नहीं तुम्हारे छोटी बहन राधा ठाकुर थी

इस बार लगा सबको बड़ा जतका सब बस एक दूसरे को हे देख रहे थे

रणजीत ......ये आप क्या बोल रही हो माँ हमारी कोनसी बहन है जो हम हे नहीं जानते थे

आवर आप किस भाई की बात कर रही हो जिसने ये सब कुछ किया

सूर्य ......मैं बताता हूँ बड़े पापा आपको सब कुछ विस्तार से

दरशल हम जब गांव में थे तो दुर्जन ठाकुर ने सपना का बलात्कार किया

जब दूसरी बार उसने सपना के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की तब मैंने किसी तरह उनको वह से छुड़वा कर जब हवेली से बहार निकला तो उसके आदमी हमें मरने के लिया पीछे पद गए

तब जान बचने के लिए हम लोगो को जंगल में बग्न पड़ा पता नहीं हम कितने देर तक उनसे जान बच्चा कर भागते रहे फिर जब हमें प्यास लगी तब जंगल में नदी पे पानी पिया आवर वही सरीर पे लगी छूट के कारन दर्द से हम दोनों हे बेहोश हो गए

जब हम बेहोश जंगल में पड़े थे तब उसके आदमियों ने हे उस दिन राधा बुआ की मौत हुए थी उसके मृत सरीर के साथ बलात्कार किया फिर वो दुरजां सिंह को सोंफ दिया सपना का सरीर बता कर आवर मेरे लिया बोल दिया की मुंहे जंगल में शेर खा गया

सूर्य की बात सुन कर रणजीत सिंह गुस्से में किसी घायल शेर के जैसा धड़ा एक बार तो सब घरवाले दर गए क्युकी ऐसा पहली बार देखा था किसी ने रणजीत सिंह के गुस्से में

रन्जीन ......जिन्दा जमीं में गाड़ दूंगा मई दुरजां को जिसने इतना बड़ा पाप की वो भी अपनी हे बड़ी भाबी के साथ

गुस्से में रणजीत सिंगब बहार जाने लगा

सूर्य ने जल्दी से उनको रोका

किसी तरह समजा बजा कर फिर से उनको बिताया

सूर्य ......बड़े पापा अगर दुरजां को इतना आसान मौत देना होता तो मैं कब का उसको मार चूका होता

मैं उसको तड़प तड़प कर मरते हुए देखना चाहता हूँ

इन सब में किसी ने भी कामिनी काव्य काम्य पे कोई ध्यान नहीं दिया जो मुँह बंद किये रो रहे थे

जैसे सूर्य की नजर अपनी दोनों बहनो पे पड़ी सूर्य ने जल्दी से उनको अपने सीने से लगा लिया

सूर्य ....िस्स्सस्स नहीं रोटी नहीं गुडिअ चुप हो जाओ आप दोनों

बड़ी मम्मी ने कमीने को अपने गले से लगा लिया

कामिनी ......मुझे माफ कर दे सूर्य मैं तेरी गुन्हेगार हूँ

सूर्य ......आपको या किसी आवर को माफी मांगने की जरूरत नहीं है चची जो गुनाह किसी आवर ने किया उसकी माफी आप क्यों मांग रही है

अगर मैं आपको गुनहगार मंटा तो कभी भी आपके सामने नहीं आता

काम्य .....भैया पापा बहुत गंदे है उन्होंने आपको मरने की कोशिश की

काव्य .....हम कभी उनसे बात नहीं करेंगे वो माँ को भी बहुत मरते थे

सूर्य ....स्स्स्सह्ह्ह मेरी गुडिअ आप दोनों शांत हो जाओ

कुछ देर बाद जब दोनों संत हुए तो

सूर्य ......आपको पता है बड़े पापा दुरजां ने हे मेरे पापा को मारा थस उनका कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ था उनका मर्डर हुआ था जिसको एक्सीडेंट दिखाया था

सपना को पाने के लिया दुरजां ने हे पापा का मर्डर किया था

रणजीत सिंह ......फिर भी तुम उस कमीने को जिन्दा छोड़ रखा है मैं आवर बर्दास्त नहीं कर सकता मैं उसको मरने जा रहा हु

सूर्य .....आपको कही जाने की जरूरत नहीं है उसको मैं यही ले आता हूँ आप जो चाहे सजा देना उसको

सूर्य ने पालक जपकाइ दुर्जन सिंह उन सबके सामने आ खड़ा हुआ

दुरजां सिंह खुद को यहाँ देख कर चौंक गया

जैसे हे दुरजां की नजर सब पे पड़ी वो आगे बढ़ा आवर कामिनी के पास पंहुचा इतने में एक जोरदार आवाज गुंजी जो काफी था ये बताने के लिया की कामिनी को किस कदर नफरत हो गई है दुरजां सिंह से

तपाद पड़ते हे दुरजां गुस्से में कामिनी पे हाथ उठाया हे था की रणजीत सिंह आवर मानवी बुआ ने

दुरजां सिंह के की ढुलाई सुरु कर दी

दुरजां ......अह्ह्ह्हहब भाई सा मुझे क्यों मार रहे हो प्लेसेस मनु दी मुझे मत मारो

दुरजां सिंह चीखता रहा चिलता रहा पैर किसी ने उसकी मदद नहीं की सबको दुरजां सिंह का चिकना सुन कर एक सुकून सा मिल रहा था

तभी सपना आगे आई दुर्जन सिंह को खड़ा किया

सपना .....पहचाना मुझे कमीने तुमने

दुर्जन अपने पैरो पे ठीक से खड़ा भी नहीं हो प् रहा था

दुर्जन .....( लदखती आवाज में ) कोण हो तुम

सपना .....इतनी जल्दी भूल गए कमीने मैं वहीँ सपना ठाकुर हूँ जिसके पति का तुमने खून किया था जिसकी ेजात तुमने लूटी थी

सपना ने अपना फेस जैसे हे बदला माया .dadi.monika मनीषा .को छोड़ कर सब बड़े हैरान हुए

दुर्जन सिंह ने जइसे हे सपना का पुराण चेहरा देखा

उसके साथ किया हुआ कांड आ गया

दुर्जन सिंह के टंगे कपङे लगी

उसकी आँखों के सामने अंदर चने लगा

सपना ........देख कमीने मैं तेरे सामने कड़ी हूँ अब नहीं लूटेगा मेरी ेजात

उस दिन तो बड़ा शेर बन रहा था

बड़ा मर्द बन रहा था

अब कैसे मर्द बनेगा तेरे किये कर्मो ने तुझे 12 साल पहले हे उस देवी के सराफ ने नामर्द बना दिया साला हिंजड़ा कही का .......

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अपडेट 48

सपना ........देख कमीने मैं तेरे सामने कड़ी हूँ अब नहीं लूटेगा मेरी ेजात

उस दिन तो बड़ा शेर बन रहा था

बड़ा मर्द बन रहा था

अब कैसे मर्द बनेगा तेरे किये कर्मो ने तुझे 12 साल पहले हे उस देवी के सराफ ने नामर्द बना दिया साला हिंजड़ा कही का .......

अब आगे ........

सपना की बात आवर उसका रियल फेस देख कर बहुत से लोग चौंक गए थे

मधु ........तुम तुम सपना ये कैसे किया तुमने

सपना सब को इग्नोर कर अभी भी दुर्जन सिंह की कर पकडे उसको गुस्से में गालिया दे जा रही थी

सूर्य के पीछे कड़ी जिनिशा के नजर किरण पे पड़ी जो गुस्से से दुरजां की आवर हे देख रहे थे

जिनिशा ने डेरी से सूर्य को किरण की आवर इसरा किया

जिसकी आँखे पूरी तरह लाल हो गई

थी





किरण एक तक दुर्जन को गुरे जा रही थी

जैसे सूर्य ने किरण की आँखे देखि

सूर्य ने जल्दी से किरण को अपने सीने से लगा लिया

सूर्य के सीने लगते है किरण शांत होने लगी

सूर्य .....स्वीटी शांत हो जाओ





सूर्य किरण को संत करता है फिर आगे बढ़ कर सपना को भी खुद के लगा लेता है

सपना फुट फुट कर रोने लगती है

दुर्जन एक जिन्दा लॉस की तरह फर्श पे पड़ा था

अभी सब उसको गुस्से से देख रहे थे

सबका दिल जो टुटा था आज जब दुर्जन के पाप उन सब के सामने आये थे

रणजीत ......सूर्य इसको पुलिस के हवाले कर जिंदगी भर इसको जेल में सड़ने दो

सूर्य ....नहीं बड़े पापा ये सजा बहुत छोटी है इसके लिया इसने बहुत से लड़कियों की ेजात लूटी है बहुत से बच्चो से उनके सर पे से माँ बाप का साया चीन है

बहुत से माओ की खोख उजड़ी है

इसने सलीम खान के साथ मिल कर पुरे सहर में ड्रग्स आवर हथ्यारो के बल पे बहुत से लोग का घर बर्बाद किया है

इसने हे रघुपति दादा के साथ मिल कर दादा के छोटी दादी की हत्या की थी इसने हे राधा बुआ को मरने की कोशिश की जिसके चलते वो पागल हो गई थी जिसको गाँव के पुजारी जी ने पला था

सूर्य के मुँह से इस खुलने ने दुर्जन के लिया सबके दिलो में नफरत घिरना भर दी थी

दादी .......मुझे दुःख है बीटा इस जैसे पापी को मैंने जनम दिया

मानवी ........इस जैसा हतियार नीच मेरा भाई कभी नहीं हो सकता है जिसने अपने हे पिता सामान भाई का खून किया है

इसने ठाकुर खंडन को कलंकित किया है इसे तो तड़प तड़प कर मरना होगा

कामिनी आगे बाद कर अपने गले में बाँदा मंगलसूत्र उतर के दुर्जन के मुँह पे फेंका आवर उसके मुँह पे थूक दिया

दुर्जन ने अपनी दोनों बेटियों की आवर देखा जिनके आँखों में दुर्जन के लिया बहिनथा नफरत थी घिरना थी

आज अपनी बेटियों की नज़रो का सामना करनी की हिमत नहीं थी दुर्जन सिंह के आँखों में

सुजीत फूफा ......बीटा इसको यहाँ से ले जाओ इस जैसे पापी का यहाँ कोई काम नहीं इसको जो सजा देनी है तुम्हे वो इसको दो कोई तुम्हे नहीं रोकेगा

सूर्य ने जिनिशा को इसरा किया की अब वक़्त आ चूका है सबके सामने अपने हसली रूप में आने का

आवर दुर्जन को उसके अंजाम तक पहुंचने का

जिनिशा सबके शामे आती है आवर देखते हे देखते अपने वास्तविक रूप जिनलोक की राजकुमारी का रूप जो की वास्तविक रूप था वो दर्जन करती है

जो कुछ देर पहले सपना द्वारा अपना रूप बदलने वाली बात सूर्य के दुर्जन को ले कर किये गए खुलाशे से भुला दिया था

जिनिशा को रूप परिवर्तित करते देख उनको फिर से सपना का रूप परिवर्तित करना याद आ गया

रुपाली दीपाली प्रिय काव्य काम्य दर के मारे अपने माता पिता के पीछे चुप गए

सूर्य .....आप सबको जबरन की जरूरत नहीं है

काव्य काम्य ....भैया ये बहुत है

सूर्य .....नहीं गुड़िया ये तुम दोनों की होने वाली भाबी है जिनलोक की राजकुमारी जिनिशा

मधु .......मुझे मेरी बहु पसंद है

सब मधु की बात सुन कर उसकी तरफ देखने लगे

मधु .....ऐसे क्या देख रहे हो मुझे सूर्य ने बताया था की वो जिनिशा से प्यार करता है मुझे तो पहले हे पसंद है मेरे बहु

सूर्य ......दादी अब आगे आपको हे बताना होगा जो हमारे खंडन को राधा बुआ से जो सराफ मिला है उसके बारी में

दादी ......नहीं बीटा मुझसे नहीं होगा तुम खुद हे बताओ

सपना .....नहीं माँ ये सब आप हे बताओ तो ज्यादा अच्छा रहेगा

माया बुआ अपने माँ का हाथ पकड़ कर उनको हिमायत देती है

रणजीत .....सूर्य तुम किस सराफ के बात कर रहे हो आवर राधा मेरी बहन किस आदर पे हुए ये भी नहीं बताया आवर जिनलोक की राजकुमारी तुमसे प्रेम करती है ये सब हो क्या रहा है मुझे कुछ भी समाज नहीं आ रहा है

बाकि सब जिनको सचाई मालून नहीं है

....हमें भी समाज नहीं आ रहा है

सूर्य आप रुको मैं पार्थवी को ले कर आता हूँ

सूर्य रूम में गया जहा पार्थवी अभी भी सोया हुआ था

सूर्य ने पार्थवी को अपनी सकती से ठीक करने लगा

बहार हॉल में

मधु .....सूर्य पार्थवी को लेन का बोल कर अंदर क्यों गया है माँ जी

जिनिशा .......बड़ी मम्मी क्युकी आपका बीटा पार्थवी सरताज के रूम में हे लेता हुआ है

जिनिशा की पूरी बात सुने बिना हे मधु रूम की आवर दौड़ पड़ी प्रिय भी उनके पीछे पीछे दौड़ पड़ी

जिनिशा .........बड़ी मम्मी पूरी बात तो सुन लीजिये

वह मत जाएये वो पार्थवी को ठीक कर रहा है

दादी ......उनको जाने दे बेटी वो एक माँ है अपने बच्चे को मिलने से खुद को रोक नहीं सकती

जब मधु ोिर प्रिय अंदर पहुंची तो पार्थवी के बॉडी नीली रौशनी से चमक रही थी

सूर्य ......चलो आप लोग बहार चलिए पार्थवी अभी ठीक हो जायेगा

मधु .....नहीं बीटा मैं यही रुकूंगी

सूर्य प्रिय आवर मधु को रूम में छोड़ कर बहार आ गया

रणजीत .......सूर्य क्या हुआ पार्थवी कहा है

सूर्य .....बड़े पापा वो कुछ देर में ठीक हो कर आ जायेगा

रणजीत .....पैर तुम कैसे उसको ठीक किया

दादी ......क्युकी मेरा बीटा जिनलोक का होने राजा है इसके पास भी सकतिया है इतना हे नहीं सपना के पास पुर किरण के पास भी है

राजेश फूफा जी ......सूर्य ने हे मुझे ठीक किया था रणजीत उसके लिया कुछ भी असंभव नहीं

सब खुश थे ये राज़ जान कर के

तभी दादी ने वो दमका किया जिसको सुन कर सभी चौंक गए माया बुआ को छोड़ कर के

दादी ......सपना अब सूर्य की पत्नी है क्युकी सूर्य के सपना से सदी हुए है आवर किरण सपना आवर शिव की बेटी है जिसकी सदी भी सूर्य के साथ हे होगी

आवर तुम सब की बेटियों की सदी भी सूर्य से हे होगी

इस बार सबको बड़ा जोरदार जतका लगा मनो किसी ने उनको बर्फ का बना दिया हो बैठे बैठे हे

माया बुआ .....है ये सच है क्युकी राधा का यही सराफ था जो इस पापी ( दुर्जन की आवर इसरा करके ) के कारन हमर पुरे ठाकुर खंडन को मिला है

जिसके चलते न चाहते हुए भी हम सबको सूर्य से न चाहते हुए भी सम्बंद बनाने होंगे

अब पार्थवी के ठीक होने पे उसपे भी ये सराफ लागु हो जायेगा

रणजीत सिंह ..गुस्से में ....नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं ऐसा नहीं होने दूंगा आवर गुस्से में सूर्य की आवर बढ़ा हे था की किरण अच्चानक सूर्य आवर रणजीत के बिच में आ गई

किरण की गुस्से भरी लाल आँखे देख रणजीत के पुरे सरीर में मनो किसी ने दर भर दिया हो

किरण .......गुस्से में ....ऐसा सोचना भी मत उनकी तरफ किसी गलत नज़र से देखा तो यही पे चिर डालूंगी

किरण की गुस्से से भरी दहाड़ काफी थी सबकी फाड़ने की

सूर्य ने किरण को आउट ऑफ कण्ट्रोल होता देख रोकना हे बेहतर समजा

सूर्य ने किसी तरह किरण को शांत किया हे था की तभी मधु प्रिय आवर पार्थवी तीनो बहार आये

मधु .....सुनिए जी हमारा बीटा ठीक हो गया है देखो पूरी तरह से

लईकिन किसी को कुछ सुनाई दे तब न कुछ बोले सबकी फटी पड़ी थी

सूर्य ने सबको उस दर से बहार निकला जो किरण के गुस्से ने उनके दीमक में दर भर दिया था

डेरी डेरी सूर्य ने अपनी पूरी सचाई बताई आवर ये भी की आज रात उन सबको जिनलोक जाना है उसके साथ में

रणजीत अभी भी पुरे मन से है नै किया प्रान्त वो भी मन गया था

सूर्य ने दुरजां को प्रेतलोक पंहुचा दिया जहा उसके किये कर्मो का दंड मिलने वाला था ....
 
अपडेट 49

डेरी डेरी सूर्य ने अपनी पूरी सचाई बताई आवर ये भी की आज रात उन सबको जिनलोक जाना है उसके साथ में

रणजीत अभी भी पुरे मन से है नै किया प्रान्त वो भी मन गया था

सूर्य ने दुरजां को प्रेतलोक पंहुचा दिया जहा उसके किये कर्मो का दंड मिलने वाला था ....

अब आगे ..........

परीलोक महल.....

रानी पारी .......गुरुदेव मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है

गुरुदेव ..........रानी पारी हम कभावस्य में होने वाले किसी भी घटना करम को नहीं बदल सकते है

जो नियति ने हम सब के भाग्य में लिखा है उस से हम कभी भी भाग नहीं सकते है

गुरुदेव ......वो विध्वंशक ऊर्जा खुद पे नियंतरण खो रहे

हम खुद उस ऊर्जा को महसूस कर चुके है उस ऊर्जा सकती का उसके रचेयता ( बनाने वाला ) के अलावा कोई शांत नहीं कर पायेगा अगर उसके परिवार पुर प्रेम पे आघात पंहुचा तो

रानी पारी ......ऐसे कोनसी सकती है गुरुदेव जो आपको विचलित कर रही है

ऐसा तो पहले हमने आपको इतना विचलित होते हुए नहीं देखा जब जिनलोक आवर प्रेतलोक पे चल से चांडाल ने अदिकार कर हमारी पुत्री को पाना चाहा हमारे लोक पे आदिपत्य स्थापित करना चाहा तब भी आप इतने परेशान न हुए थे

गुरुदेव .......उस घटना करम का संकेत हमें पहले मिल चुके थे इस लिया हम शांत रहे किन्तु कुछ भूल हमसे हुए आवर खुश जिसको नियति ने चुना उस से हुए

हमें तभी समाज जाना चाइये था जब सूर्य ने जिनलोक आवर प्रेतलोक की सकती दर्जन की आवर उनको सहन न कर पाने के कारन सूर्य मूर्छित हुआ था

रानी पारी ......अब जो वक़्त गुजर चूका है उसको बदला नहीं जा सकता है गुरुदेव

किन्तु उस बैठे समाया के दुस्प्रभाव से बचने के लिया किसी मार्ग का चुनाव अवश्य करना चाइये

गुरुदेव .. ....आप उचित कह रहे है महारानी हमें यू निराश हो कर बेथ जाना नहीं चाइये बल्कि चांडाल के रचे सडयंत्र के मूल स्टॉर्ट तक पहुंच कर उसको नस्ट करना चाइये

रानी पारी .....उचित कहा गुरुदेव

गुरुदेव ........आप राजकुमारी पारिजात को पार्थवी लोक से पारी लोक आने का आदेश दे दीजिये मुझे नहीं लगता की अब उनका वह रुकना उचित होगा वैसे भी जिनिशा पारिजात की मित्र होने के साथ गुरु बहने भी जिन्होंने एक साथ बहनो की तरह हमसे शिक्षा ली है

रानी पारी ......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

गुरुदेव कुछ देर आवर बाते की आवर फिर वह से गायब हो गए

कुछ देर बाद एक गुप्त स्थान पे प्रकट हुए जो देखने में बड़ा अजीब सा था चारो तरफ अंदर हे अंदर था

कुछ देर बाद वह प्रेतराज प्रकट हुए

प्रेतराज ....गुरुदेव आपने हमें किस लिया याद किया है

गुरुदेव .....प्रेतराज हमें आपकी सहायता की आव्सय्कता है

प्रेताज .......गुरुदेव हम आपकी हर प्रकार से सहायता करने हेतु त्यार है आप बस आज्ञा करे

गुरुदेव ......आप अपने कुछ विशेष प्रेतों को आदेश दे की वो पार्थवी लोक जाये आवर वह चांडाल के ठिकाने की खोज करे किन्तु याद रहे चांडाल को पता नहीं चलना चाइये अनयथा वो सब को बंदी बना लेगा क्युकी अब वो पहले से बहुत सकती साली है

प्रेतराज ......ऐसा कैसे संभव है गुरुदेव की वो प्रेतों को बंदी बना पाए

गुरुदेव ......पार्थवी लोक वो जगह है जहा खुद बागवान अनेको अवतार ले चुके है

पार्थवी लोक में आज भी बर्मनद का सर्वनाश करनी योग्य सकतिया मौजूद है जिनका समय समय पे उदय भी हुआ है दोस्तो का नस करके के लिया बागवान नारायण के अनेको दिव्यास्त्र आज भी पार्थवी लोक पे मौजूद है जो समय आने पे बागवान नारायण के इच्छा पे किसी मनुष्य माद्यम से पापियों का नाश करते है

प्रेतराज गुरुदेव के बाते बड़े गौर से सुन रहे थे उनको ये तो मालूम था की देवो को पार्थवी लोक अति पिरया है खाशकर कांशी आवर हिमालय जहा आज भी गॉड को अपने मन मंदिर में बसा कर हजारो लाखो मनुष्य कांशी में स्तिथ गॉड के दर्शन को आते है

प्रेतराज ..... जी गुरुदेव मैं इस बात का ध्यान रखूँगा कोई भी उसके नजदीक न जाये आवर सर्वपार्ट्म हमें सूचित करे

गुरुदेव .... धन्यवाद् प्रेतराज आप अपनी पुर्त्री को भी पार्थवी लोक से बुला लीजिये

प्रेतराज .....जी गुरुदेव जैसा आप कहे आज्ञा दीजिये

प्रेतराज वह से निकल गए गुरुदेव जिनलोक की आवर निकल गए

जहा पुरे जिनलोक को सजाया गया था

j.king ....परनाम गुरुदेव आप इस वक़्त यहाँ गुरुदेव

गुरुदेव .....राजन चिंतित होने की कोई आव्सय्कता नहीं है हम

बस यहाँ की तयारी देखने चले आये आवर आपसे कुछ बात चित भी करनी है

j.king .....उचित है गुरुदेव आये महल में चलते है

गुरुदेव .....चलिए राजन

गुरुदेव आवर ज .किंग के महल में पहुंचते हे

j.kingh .....कहिये गुरुदेव आप किस विषय पे चर्चा करना चाहते है

गुरुदेव ......आज से 4 दिन बाद आपकी पुत्री का सगाई समारोह है आवर हम आज पार्थवी लोक जा कर सूर्य आवर उसके परिवार को यहाँ लेन जा रहे है

क्या आपने उनके विश्राम की उचित वय्वस्ता देख ली है

कुछ कमी तो नहीं है न

j.king .......आप ऐसा क्यों कह रहे है गुरुदेव भले हे. सूर्य अभी जिनलोक का राजा नहीं बने है किन्तु हमारे लिया उस से पहले वो हमारी पुत्री के सरताज है हम उनके सामान में कैसे कोई कमी रहने दे सकते है

हमने उनके लिया जिनलोक में एक नया महल त्यार कर दिया है जो हमारे महल से भी भव्य है जिसकी सुंदरता अतुलनीय है गुरुदेव

गुरुदेव .......ये आपने बहुत अच्छा किया ( अगर कुछ भी गड़बड़ हुए तो हम सोच भी नहीं सकते यहाँ कितनी तबै फैलेगी )

j.king ......गुरुदेव आप कब निकल रहे है पार्थवी लोक के लिया

हम चाहते है आप हमारी सही सवारी ले जाये उनको जिनलोक लेन के लिया

गुरुदेव ......हाहाहा राजन यही बात रानी पारी ने कही है की हम पारी लोक की सही सवारी में उनको जिनलोक ले कर आये

ज ...किंग ......फिर तो हम आप पर निर्णय छोड़ रहे है आपको जो उचित लगे आप वही करे गुरुदेव

पृथ्वीलोक सूर्य हाउस .....

साम को इस वक़्त सब हॉल में मौजूद थे ये कहना तो गलत होगा क सब खुश है बच्चो को छोड़ कर

आज इतना कुछ गठित हो चूका था ऐसे में भला कैसे कोई खुश होगा

पैर यहाँ एक जादुई ख़ुशी है जिसके रहते ज्यादा देर कोई भी उदाश नहीं रह सकता है

किरण ......क्या बात है आप सब ऐसे क्यों बैठे है जैसे आपका सब कुछ चीन लिया हो

बड़े पापा आप खुश नहीं है क्या

क्या आपको पार्थवी भाई के ठीक होने पे ख़ुशी नहीं है

जो बाटशो पहले बिट चूका है उसका मातम आज मना रहे है

या फिर आप भाई आवर जिनिशा भाबी की सगाई से खुश नहीं है

आपको सब को क्या लगता है हमने तकलीफे नहीं झेली है पिता तो मैंने भी खोया था

फिर मुझे भाई के रूप में पिता मिले जिन्होंने मुझे कभी महसूस नहीं होने दिया की मेरे पिता नहीं है दादा जी के कमी जब हुए तो दादा आवर नाना का यार मुझे बाबा से मिला

मैं ये नहीं कहती हूँ की मुझे दुख नहीं हुआ किन्तु मैंने कल के दुखो को भुला कर आज की ख़ुशी के लिया जीना सीखा तो

आप क्यों नहीं कल के दुखो को भुला कर आज की खुसियो में शामिल होते है

दादी ......सच कहा मेरी बेटी ने हम क्यों उस दुःख में दुखी हो जिसको हम बरसो पहले हे भुगत चुके है

किरण .....दादी डार्लिंग आप भूल रहे है मैं बहु भी हूँ होने वाली वो भी सेकंड लास्ट छोटी बहु हेहेहे

किरण ने कुछ ऐसा फेस बना कर बोलै की जो अब तक सब मौश नजर आ रहे थे सबके चेहरे खिल उठे कुछ उसके चुलबुले फेस स्टाइल को देख कर तो कुछ उसकी बात सुन कर

मानवी बुआ .....सेकंड लास्ट कैसे किरण सेकंड लास्ट तो काम्य आवर काव्य है

किरण ....मनु बुआ डार्लिंग आप न बादाम खाया करो

फूफा जी आप न बुआ डार्लिंग को बादाम खिलाया करो भिगो कर ताकि ये थोड़ी हॉट भी दिखे आवर इनका दीमक भी तेज होगा

मानवी बुआ .....रुक बुआ डार्लिंग की बच्ची बड़ी आई मुझे हॉट बनाने वाली

अब सीन ये था की किरण आगे आगे बुआ उसके पीछे पीछे

कुछ देर ये टॉम एंड जेरी का खेल चलता रहा सब आपमें पेट पकड़ कर हंस रहे थे

सपना ....बुआ जी आप रुक जाये वो आपके हाथ नहीं आने वाली है आप तक जाओगी

किरण अपने मुँह पे हाथ रख कर

किरण ...ओह्ह्ह ओह्ह्ह बुआ डार्लिंग देखो बड़ी भाबी आपको बूढी बोल रहे है हहहहए

सपना .....रुक तू तुझे मैं बताती हूँ बड़ी आयी भाबी की ननद

किरण जल्दी से सूर्य की गौड़ में चढ़ गई सबके लिए ये एक जतका था जो नहीं जनता था की ये इनके बिच बहुत नार्मल है

मानवी .......हफ्ते हुए .....वैसे बोल तो ये ठीक रही है लगता है मैं सच में बूढी हो रहे हूँ

वैसे तुमने बताया नहीं सेकंड लास्ट बीबी कैसे

माया बुआ .....मनु किरण काम्य से छोटी है आवर काव्य से बड़ी है तो हुई न सेकंड लास्ट

अब सब मस्ती मज़ाक कर रहे थे

कामिनी जिनिशा आवर सपना किचन की आवर चल दी रात का डिनर त्यार करने के लिया

मानवी बुआ भी जाना चाहती थी किन्तु उन्होंने बुआ को मना कर दिया

प्रेतलोक में पहुंचते हे दुर्जन का सरीर नस्ट हो गया

अब उसके किये पाप करमो का दंड उसकी आत्मा को मिल रहा था

प्रेतराज ......इसको इतना दण्डित किया जाये की अपने हर पाप करम के लिया खुद को कोशे

इसकी आत्मा को नरक के आग में दाल दो इसने बहुत गहन किया हर एक गुनाह की गईं गईं कर सजा मिलनी चाइये इसको

देखते हे देखते दुर्जन सिंह के किये पापो का दंड आरम्भ हुआ पुर उसकी के साथ हज़ारो लाखो पापियों की चिक पूरक में दुरजां सिंह की चीखे भी शामिल हो गयी

प्रेतराज आदेश दे कर वह से निकल गए

जा पहिचे पार्थवी लोक जीनत के सामने

जीनत अभी अपनी सामने खड़े साक्ष को देख रहे थी की प्रेतराज ने आगे बढ़ कर जीनत के सर पे हाथ रखा

जीनत की आँखे बोजिल होने लगी देखते हे देखते जीनत का सरीर हवा में जल गया

कुछ हे देर में वजा सना आवर उसकी अम्मी भी आ गई जैसे हे प्रेतराज को अपने सामने देखा दोनों घुटनो पे आ गई प्रेतराज ने दोनों के सर पे हाथ रखा

दोनों का सरीर हवा में विलीन हो गया

अब वह उनकी आत्मा मौजूद थी

प्रेतराज ....कुछ वक़्त के लिया तुम दोनों को फिर से हमारे साथ प्रेतलोक लौटना होगा जब जीनत फिर से पार्थवी लोक आये तब तुम्हे पुनः तुम्हारा सरीर मिल जायेगा

सना .स .अम्मी ......जी जैसा आप कहे महाराज

प्रेतराज .....जीनत को ले कर गायब हो गया सना एंड स अम्मी के आत्मा भी वह से गायब हो चुकी थी

ऐसा हे कुछ पारिजात के साथ भी हुआ जब वो अपने कक्ष में पहुंची तो खुद को परीलोक के महल में अपने कक्ष में खुद को पाया

पारिजात को पार्थवी लोक की कोई भी यादे याद नहीं थी बस एक चेहरे के सिवाय जो रह रह कर उसके दिलो दिमाग में उभर रहा था

रात का डिनर सबने मिल कर किया हसनी मज़ाक साथ

सूर्य .....आप सब त्यार हो जाओ हमें एक हर बाद निकलना है गुरुदेव कभी भी यहाँ पहुंच सकते है हमें जिनलोक ले जाने के लिया

दादी .....क्या हम गायब हो कर नहीं जा सकते जो तू उनको तकलीफ दे रहा है

सूर्य .... दादी ऐसे में आप सबको मज़ा नहीं आएगा

हम सही सवारी से जिनलोक जायेंगे अदृश्य हो कर जिस से आप उस सही सवारी ( यान विमान ) यान से पुरे रस्ते भरमाड़ के अनेको गाढ़ा आकाश गंगा अंतरिक्ष में बहुत कुछ आपको देखने को मिलेगा

कुछ 1 हर के बाद सब त्यार थे

तभी गुरुदेव ने सूर्य को मानसिक संपर्क किया आवर अपने आने की सोचा पहुंचे

गुरुदेव यान को जादुई विला पे उतर चुके थे जल्दी सब एक एक करके यान में अपने ीचा अनुसार जा बैठे

गिरुदेव .......अब हमें जिनलोक के लिया निकलना चाइये

सूर्य .....जी गुरुदेव

कुछ हे पालो में यान पैरवी लोक से बहार था .........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........
 
सॉरी अपडेट दुबारा से लिख रहा हूँ

इस लिया एडिट कर डिलीट किया हूँ

आप सभी से भी अनुरोध है

अपने कमैंट्स रिप्लाई में क्लिक तो एक्सपैंड से अपडेट को डिलीट कर दे प्लीज
 
माफी चाहता हूँ सभी से लास्ट अपडेट जैसा सोचा था वैसा नहीं दे पाया बार बार इस अपडेट के बारे में सोचने पे बहुत घुठि आवर जयादा ुलाज गई जिसके चलते बहुत कुछ मिस हुआ है

एक बार फिर से आप सभी को निराश करने के लिया माफी मांगता हूँ दोस्तों
 
अपडेट. 50

कुछ 1 हर के बाद सब त्यार थे

तभी गुरुदेव ने सूर्य को मानसिक संपर्क किया आवर अपने आने की सोचा पहुंचे

गुरुदेव यान को जादुई विला पे उतर चुके थे जल्दी सब एक एक करके यान में अपने ीचा अनुसार जा बैठे

गिरुदेव .......अब हमें जिनलोक के लिया निकलना चाइये

सूर्य .....जी गुरुदेव

कुछ हे पालो में यान पैरवी लोक से बहार था .........

अब आगे .........

पूरी फॅमिली यान से पार्थवी से दूर जा रहे थी

सबसे ज्यादा कोई खुश था तो वो थी मधु जो अपने बेटे पार्थवी को इतना खुश देख कर खुश थी

वही बच्चे बड़े सब मस्ती करते हुए

पार्थवी लोक से दूर होते होते एक नए सफर पे निकल चले थे अंतरिक्ष में

यान लाइट स्पीड से भी तेजी से जिनलूक की आवर बढ़ रहा था वही सूर्य गुरुदेव को चिंतित देख

अकेले में बात करने की सोचता है

कुछ देर बाद सूर्य को मौका मिल जाता है

सूर्य .......गुरुदेव क्या बात है आपके मुख मंडल पे चिंता क्यों है

गुरुदेव ........अब कोई चिंता का विषय नहीं है पुत्र

सूर्य ....मतलब गुरुदेव इस से पहले किस बात की चिंता थे

गुरुदेव ......पुत्र चांडाल जो की मेरा हे छोटा भाई है किन्तु बुराई के ादिन हो कर उसने परीलोक की राजकुमारी पारिजात आवर परीलोक पे अपना अदिकार करना चाहा

तब रानी पारी आवर प्रेतराज की सहायता से उसकी समेत सकतिया चीन कर पारी लोक से उसको निकल दिया

बरसो बाद जब वो फिर से काली शक्तियों से सकती प्राप्त कर परीलोक में घुसना चाहा परीलोक पे अपना अदिकार प्राप्त करने के लिया किन्तु इस बार वो पूरी तरह से शीतनिद्रा बन चूका था

उसने पारी लोक में कत्ले आम मचा दिया

हम उस वक़्त गहन सदमा में लीं थे

उसने इसी बात का फायदा उठा कर चाल से प्रेतलोक से प्रेतराज की अंगूठी चुराई आवर फिर जिनलोक पे रात्रि में हमला कर जिनिशा की माँ महारानी जी की हत्या कर जिनलोक से अगले राजा को निर्धारित करने वाली पुरे जिनलोक की आदि सकती जिस अंगूठी में थी उस अंगूठी को चुरा कर भाग गया

बर्षो बाद हमें उसका पता चला जब वो पार्थवी लोक पंहुचा

उस हे समय हमारी तुमसे शिव मंदिर में राधा के वंहा से मुलाकात हुए

जब हमने तुम्हारे मस्तक का तेज देखा तो हमें बहुत कुछ पता चला आपके हाथो पे बने रूद्र त्रिशूल से हमें आपके विषय में संकेत मिला की आप हे हो जो जिनलोक आवर प्रेतलोक को चांडाल से आजाद करवा सकते हो

ऐसे हे बात करते हुए सूर्य फॅमिली सुबह के समय जिनलोक पहुंचे

सब जिनलोक के भव्यता देख अचंभित थे

जल्दी हे एक के बाद एक बड़ी बड़ी सोने से बानी कालीन हवा में उड़ते हुए यान के पास आ गई जिनके जिनलोक के सही सैनिक थे

उनके बिच एक खूबसूरत कालीन पे जिनलोक के राजा j.king .थे उनके बगल में हवा में अपने पंख फैलाये रानी पारी अपने हाथो में जादुई छड़ी लिए कड़ी थी

दूसरी तरफ प्रेतराज अपने वहां पे खड़े थे यान के मुख्या द्वार पे एक विशेष सोने से बानी खूबसूरत कालीन जिसपे बैठने के लिया बहुत हे खूबसूरत सोफे थे जिनिशा आगे बढ़ कर अपने पिता के गले लगती है

फिर रानी पारी से मिलती है फिर प्रेतराज से

सूर्य भी तीनो के पांव छू कर सपना के साथ आशीर्वाद लेता है

रानी पारी .....जिनलोक के दामाद आवर उनके पुरे परिवार का मैं रानी पारी जिनलोक में स्वागत करती हूँ ये अदिकार जिनिशा की माता का है किन्तु उनके न रहने पे ये अदिकार जिनिशा को अपनी बेटी मन कर मैं पूरा करुँगी

सबने हाथ जोड़ कर परनाम किया

कुछ देर में आकाश मार्ग से होते हुए सब राजमहल पहुंचे

जहा जिनियो ने आवर परियो ने सबका वेलकम फुल्लो की वर्षा आवर ेत्र के साथ किया

सूर्य आवर पूरी फॅमिली गुरुदेव j.king रानी पारी प्रेतराज के साथ महल में पहुंचे जहा जिनिशा अपनी होने वाली नन्दो को अपने साथ ले कर अपने कक्ष की आवर निकल गई

सपना ने अभी यही रुकना ठीक समजा

j.king ......सूर्य बीटा आप आवर आपकी फॅमिली के लिया कोई समस्या न हो इस लिया इस महल का निर्माण किया गया है

सूर्य ......पिता जी महाराज इसकी कोई आव्सय्कता नहीं थी हमें वैसे भी इतने बड़े महल में रहने की आदत नहीं

रानी पारी ......आदत नहीं दामाद जी ये आपका अदिकार है

गुरुदेव ......उचित कहा रानी पारी ने

सूर्य .....जैसा आप कहे रानी माँ

मैं आप सबको अपने परिवार से मिलता हूँ

ये है मेरी दादी माँ सन्ति ठाकुर

आवर ये मेरे बड़े फूफा जी ये छोटे फूफा जी आवर ये दोनों मेरी बुआ जी है

ये बड़े पापा आवर ये इनकी पत्नी यानि मेरी बड़ी मम्मी आवर ये है मेरी स्वीट से चची कामिनी देवी

आवर ये मेरा छोटा भाई पार्थवी

आवर जो मेरी बगल में बैठी है

सपना .....मैं हूँ इनकी पत्नी सपना सूर्य ठाकुर

रानी पारी आगे बढ़ कर सपना को गले लगाती है

रानी पारी .....तो आप हो मेरी बड़ी बेटी सपना जिनिशा बेटी के साथ एक बार पहले भी आप आ चुकी हो पैर हमारा मिलना नहीं हुआ उस वक़्त

सपना ....हम जानते है रानी माँ छोटी के मुँह से आपके बारे में सुना था हमने

कुछ देर बाद सबने मिल कर कुछ बाटे की फिर नास्ता वगेरा करके अपने अपने रूम में चल दिया ( जो उनके लिया महल में त्यार किये गए थे )

रात भर के सफर की तनन को मिटने के लिया सूर्य ने सोना हे बेहतर समजा

कुछ जानते बाद सपना हे सूर्य को उठाने आयी

सपना .....जान उठ भी जाये फिर रात को सो जाना साम हो चुकी है चलिए आपकी बहने सब आपका इंतजार कर रहे है

तभी जिनिशा आती है दीदी आप यहाँ क्या कर रहे है अभी तो आप बहार थी

सपना ......वहीँ जो तुम करने आयी हो अपने पति को थोड़ा प्यार

जिनिशा .....ठीक है आप करिये इनको प्यार मैं चली जिनिशा जैसे हे पलटी सूर्य ने लपक कर अपने निचे ले लिया जिनिशा को आवर साथ में हे सपना को

सूर्य ......जब प्यार करने आये हो तो बिना प्यार किये कैसे जाने दे सकता हूँ आप दोनों को

बरी बरी से दोनों के साथ किश करने के बाद सूर्य ने दोनों को अपने निचे से निकलने दिया

जिनिशा .....दीदी आपके चाकर में मुझे भी लपेट लिया इन्होने

सपना ......अच्छा तो फिर ये बताओ यहाँ क्यों आई थी मेरी बहन

जिनिशा .....वो वो हम इनको उठाने आये थे हम लोग आज रात परीलोक जा रहे है

सूर्य ......क्यों क्या हुआ जिनिशा जो परीलोक जा रही हो तुम

जिनिशा ......आपकी स्वीटी ने ज़िद पकड़ ली है की उसको रानी पारी के साथ जाना है परीलोक

वो वहीँ से सगाई के लिया शॉपिंग करना चाहती है आवर रानी माँ भी त्यार है उनको ले जाने के लिया

सूर्य ......फिर एक काम करो जिनिशा तुम सबको ले जाओ जिसको भी जाना है

शॉपिंग भी जाएगी उनकी आवर वो परीलोक भी गम लेंगी

जिनिशा .......मैं क्या कहती हूँ क्या आप भी चलोगे साथ में

सूर्य .....नहीं जिनिशा मेरा मन नहीं है वैसे तुम सब कब तक आओगे वह से

जिनिशा ......कल सुबह को हे आएंगे हम

सूर्य ......सपना तुम भी जाओ इनके साथ आवर जो भी जाना चबे उनको ले जाओ वह

सपना आवर जिनिशा निकल गए वह से

सब लड़किया तहत थी जाने के लिया दोनों बुआ को भी जाना था बच्चे फूफा जी आवर बड़े पापा कामिनी चची दादी

सब निकल गए सूर्य भी बहार गुमने लगा टाइम बॉटने के लिया

रात को सबने खाना खाया आवर चल दिए रूम में

सूर्य ने सबसे मानसिक संपर्क करके बात की

सूर्य दिन में सो जाने की वजह से नींद नहीं आ रही थी

तो ऐसे हे आँखे बंद किये लेता था

तभी दादी आवर कामिनी सूर्य के रूम आती है

दादी .....क्या हुआ नींद नहीं आ रहे है क्या मेरे बेटे को

सूर्य .....अरे दादी आप आइये बेठए वो दिन में आज कुछ ज्यादा हे सो गया था

तभी बहार से किसी ने गेट नॉक किया

सूर्य..... अंदर आ जाओ

तभी दो जिन कुछ सरबत सा ले कर अंदर आये

जिन ......महाराज ने आपके लिया विशेष सरबत भिजवाई है राजकुमार

सूर्य ......आप यहाँ रख दीजिये हम बाद में पि लेंगे

दोनों जिन वो सरबत ( सोमरस जिनि मदिरा )वह रख कर चले गए

कुछ देर बात करके दादी वह से चली गई

कामिनी .....क्या हुआ तुम क्यों नहीं गए उनके साथ परीलोक

सूर्य ......आप क्यों नहीं गई ये बताये फिर मैं बताता हूँ

कामिनी गिलाश में सरबत ( सोमरस )भर के पिटे हुए सूर्य को देख रहे थी

सूर्य .....क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहे हो आप

कामिनी ....हम्म्म कुछ नहीं वैसे सरबत बहुत अच्छी है मुझे तो आवर पिणि है

कामिनी फिर से एक गिलान भर कर अपने गले को तर कर लिया

सूर्य .....जरा हमें बी तो देखने दो ऐसा क्या खाश है सरबत

जैसे हे सूर्य ने वो सरबत का बड़ा सा गुनत अपने गले से उतरा

उसको पता चल गया की ये सरबत नहीं. सोमरस है

अब एक बार जब जुबान से लग जाये तो जब तक पेट नहीं भरता रुका नहीं जाता ऐसा इन दोनों के साथ हुआ

दोनों हे पत्र खली हो चुके थे कामिनी आवर सूर्य भी पुरे नशे में थे

कब एक दूसरे के होंठ मिले कब इनके सरीर से वस्त्र अलग हुए दोनों में से किसी को होश न था पूरी रात पता नहीं सूर्य ने कितनी बार कामिनी की आग ठंडी की होगी कितनी बार कामिनी ने सूर्य के कर्कश को पिया

सुबह में जब दोनों थक कर चूर हो गए था नंगे हे सो गए

नास्ते के वक़्त जब परीलोक से सब लौट आये तब सपना कामिनी आवर सूर्य को न देख कर सूर्य के रूम को नॉक किया

सूर्य नींद में हे

सूर्य .....कोण है बहार

सपना .....मैं हूँ जान गेट खोलो

सूर्य लेते लेते हे हाथ के इस अरे से गेट खोल दिया

जैसे हे सपना ने अंदर का नजारा देखा उसकी आँखे छोड़ी हो गई

क्युकी कामिनी अभी भी सूर्य का घोडा अपनी छूट में लिया हुए सूर्य पे सोये हुए थी

सपना ने गेट बंद किया आवर आगे बाद कर सूर्य के ऊपर से कामिनी को अलग किया सपना ने जादू से कामिनी आवर सूर्य को कपडे पहना ये आवर सबसे बचा कर कामिनी को उसके रूम में पहुंचाया

सपना सोमरस के खली पत्र देख समाज गई की ये कांड नशे में कर दिया सूर्य ने

कुछ सोच कर मुस्कुराती हुए बहार निकल गई ...........
 
अपडेट 51

सपना ने गेट बंद किया आवर आगे बढ़ कर सूर्य के ऊपर से कामिनी को अलग किया सपना ने जादू से कामिनी आवर सूर्य को कपडे पहना ये आवर सबसे बचा कर कामिनी को उसके रूम में पहुंचाया

सपना सोमरस के खली पत्र देख समाज गई की ये कांड नशे में कर दिया सूर्य ने

कुछ सोच कर मुस्कुराती हुए बहार निकल गई ...........

अब आगे ..........

आज सूर्य आवर जिनिशा की सगाई का दिन था

सुबह से सब तरफ बहुत चहल पहल हो रहे थी

चारो तरफ से महल को सजाया हुआ था

सूर्य अपने परिवार के साथ बैठा था लड़किया खुद को त्यार करने में लगे हुए थी

सूर्य ......दादी आप वो बहने ले कर आई है क्या जो माँ के थे

दादी .....वो मैं कैसे भूल सकती हूँ मेरे बेटे की सगाई हो आवर उसकी माँ का आशीर्वाद न मिले ऐसा कैसे होने देती मैं

दादी कुछ गगने सूर्य के सामने रख देती है

माया bua.....surya देख लो भाबी की चॉइस कितनी अच्छी है

सूर्य .....है बुआ ये आपने ठीक बोलै वैसे चॉइस मेरी बड़ी मम्मी की भी बहुत अच्छी है

गहनों को ले कर क्यों मम्मी ठीक कहा न मैंने

कुछ देर बार गुरुदेव सूर्य से मिलने आते है

गुरुदेव .....बीटा अब तुम्हे भी त्यार हो जाना चाइये दुल्हन की आवर से सगुन में मिले वस्त्र को दर्जन करना है

दादी .....जैसा आप कहे गुरुदेव

सूर्य .....अच्छा आप सब भी त्यार हो जाये

गुरुदेव ....रुको पुत्र ये तुम्हे खुद से स्नान आदि नहीं करना है

माया बुआ .......गुरुदेव आपके कहने का क्या मतलब है फिर सूर्य त्यार कैसे होगा

गुरुदेव ........जिनलोक की पार्था अनुसार लड़की की माँ या बहन हे दूल्हे को त्यार करती है

दादी ......क्या ये कैसे पार्था है गुरुदेव

गुरुदेव .....यही सत्य है देवी

माया बुआ .....तो अब कोण सूर्य को त्यार करेगा गुरुदेव

तभी रानी पारी वह आती है

रानी पारी .....जब जिनिशा की माँ का दायित्वा हमने निभाया है तो ये रिवाज भी हम हे निभाएंगे

गुरुदेव ......सूर्य महारानी के साथ जाओ आवर त्यार हो कर सगाई स्थल पे महारानी के साथ हे आना

सूर्य रानी पारी के साथ निकल जाता है त्यार होने

मधु ....ये कैसा रिवाज है माँ

दादी ......पता नहीं बहु चलो चल कर त्यार हो जाओ

सूर्य जल्दी हे स्नान आदि से निपट कर रानी पारी द्वारा त्यार हो कर उनके साथ में हे जहा सगाई समारोह रखा था फुल्लो के ऊपर से चलता हुआ रानी पारी के साथ आ पंहुचा

एक एक करके सूर्य के परिवार से 9सभी खूबसूरत बलाये

पहुंचने लगी कुछ देर बाद जब किरण ने एंट्री ली तो सब बस मूह खोले उसे देख रहे थे

किरण सपना मोनिका मनीषा रुपाली दीपाली काम्य काव्य प्रिय सब एक से बढ़ कर एक लग रहे थी सबसे खास थी किरण





किरण सूर्य को अपनी आवर ऐसे देखता देख खुद हे उसके पास चली जाती है

सूर्य .....मेरी स्वीटी बहुत खूबसूरत लग रहे है किसी सौरागलोक से उत्तरी अफसर के जैसे

किरण ........उम्म्म्मः थैंक यू भाई वैसे भाबी को देखो उस तरफ जरा कितनी खूबसूरत लग रहे है आज





सूर्य .....वाओ जिनिशा तो बहुत खूबसूरत लग रहे है

सपना .......ऐसे क्या देखते हो वो तुम्हारी हे है जान वैसे कोई आवर भी है साथ जरा उनपे भी नज़र दाल लो

जैसे सूर्य की नज़र अगल बगल चल रहे दो खूबसूरत परिये पे पड़ी तो दिल की धड़कन कुछ तेज हो गई

किरण .....ये भाबी की दोस्त है पारिजात आवर जीनत है न बहुत खूबसूरत





राजकुमारी जीनत





राजकुमारी पारिजात ...

कुछ हे देर में गुरुदेव के कहने पे सूर्य आवर जिनिशा ने एक दूसरे को इंगेजमेंट रिंग पहनाई

तालियों की गड़गड़ाहट के साथ फुल्लो की बारिश

जिनलोक में चारो तरफ आतिश बनिया होने लगी

सब सूर्य आवर जिनिशा को इंगेजमेंट की शुब्कम्ना दे रहे थे बड़े जो थे सूर्य आवर जिनिशा उनके पांव छू कर आशीर्वाद ले रहे थे

जिनिशा ......सरताज ये है मेरी सहेलिया राजकुमारी पारिजात आवर ये है राजकुमारी जीनत

सूर्य .....जी आप दोनों राजकुमारियों से मिल कर खुसी हुए

जिनिशा की दोस्त हो तो क्या अब हम भी दोस्त बन सकते है

पारिजात .....माफ कीजिये जीजा जी मैं किसी मर्द से दोस्ती नहीं करती हूँ मुझे नफरत है मर्द जाट से

सूर्य ......राजकुमारी जीनत क्या आप भी मर्दो से नफरत करती है क्या

जीनत .....जीजा श्री हमने अभी सोचा नहीं है इस बारी में हेहेहे

सूर्य ......जीनु डार्लिंग यार आपकी सहेलियां तो बड़ी तेज है

जिनिशा .....वो आप देखो जीजा साली के बिच मैं नहीं आती क्यों दीदी सही कहा न मैंने

सपना ....बिलकुल ठीक कहा छोटी इन जीजा साली को खुद हे निपटे दो

पारिजात .....सपना दीदी आप भी ऐसा बोल रहे है ये तो आपके स्वामी है न

सपना ......है वो तो है पर जीजा साली के बिच तो बीबी भी नहीं बोलते ये उनका हक़ है या तो आप दोनों दोस्ती करो या फिर जीजा साली का तीस्ता रखो दोनों में हे इनका हक़ बनता है आपको सताने का हेहेहे

जिनिशा आवर सूर्य के साथ साथ बाकि सकीय भी हंसी छोट गई सपना की बात सुन कर





कुछ देर बाद गुरुदेव ने सबको बोमन करने को कहा

सबने भोजन कर महल की आवर चल दिए

इन सब में साम का वक़्त हो चूका था

सूर्य कुछ वक़्त सबके सात टाइम बिताता है

साम को गुरुदेव रानी पारी प्रेतराज j.king

सब एक सात सूर्य से मिलने आते है

गुरुदेव .....सूर्य आपको अपने परिवार के साथ ले परबु का आशीर्वाद लेने जाना चाइये

सूर्य ......ठीक है गुरुदेव हम सब चलते है

कुछ देर बाद गुरुदेव रानी पारी पारिजात प्रेतराज जीनत j.king जिनिशा

सपना किरण प्रिय काम्य काव्य दादी दोनों बुआ कामिनी मधु रणजीत सुजीत रुपाली दीपाली पार्थवी

सब जिनलोक में बने परबु के मंदिर के आवर चल दिए

सब आकाश में स्थित पहाड़ पे बने

मंदिर पहुंचे सबने पूजा आदि की

तभी सूर्य के कानो में किसी की आवाज पड़ी सूर्य ने चारो तरफ नज़र गुमाई

तो सूर्य की आँखे फटी की फटी रह गई

क्युकी समय रुक चूका था सब के सब पत्थर के जैसे स्तबध खड़े थे आकाश में उड़ते हुए पंछी आकाश में रुक गए थे

तभी वो विशालकाय प्रतिमा जाग्रित हो जाती है

सूर्य ये सब देख कर गुटों पे आ जाता है है

सूर्य .....परनाम प्रभु

गॉड .....कल्याण हो पुत्र यसस्वी भाव

सूर्य अभी भी नज़रे झुकाये हाथ जोड़े अपने गुटों पे था

गॉड .....खड़े हो जाओ पुत्र अब समय आ चूका है तुम्हे फिर से एक बार अपनी यात्रा का आरम्भ करना होगा

तुमने अपने पुरवा जनम में जो गलतियां की है उनका कर्मफल पाने का समय आ चूका है

सूर्य ......मैं कुछ समजा नहीं प्रभु मेरा पुरवा जनम आवर किस गलती की बात कर रहे है आप प्रभु

God........ab तक जो तुमने देखा वो वो तुम्हारा पुरवा जनम के दृश्य है

देखो अपनी मूर्खता अपनी सकती का दुरूपयोग करने का परिणाम

सूर्य ने जैसे हे अपने नज़र अपने परिवार पे डाली तो उसकी आँखों से आंसू बहने लगे

उसका पूरा परिवार एक एक करके उसके आँखों के सामने पत्थर में तब्दील हो कर मिटटी बन कर हवा में गायब होने लगा

सूर्य छह कर भी कुछ नहीं कर प् रहा था

दादी दोनों बुआ फूफा चची मधु काम्य काव्य दीपाली मनीषा मोनिका प्रिय रुपाली सब देखते हे देखते हवा में गायब हो गए

सूर्य .....नहीं ये नहीं हो सकता है प्रभु मेरी किये की सजा इनको न दे प्रभु

God.....ye एक भरमजाल है जो बिट चूका है ये तुम्हारे पुरवा जनम के वो यादे है जो तुम मर्त्यु आवर जिंदगी के बिच देख रहे हो

उसके बाद गुरुदेव रानी पारी

ज. किंग प्रेतराज उनके सरीर भी हवा में नस्ट हो गए

तभी सूर्य को अपने अंदर कुछ हलचल से महसूस हुए

God.....putra सूर्य तुम्हारे लौटने का समय हो चूका है

सूर्य ने जब अपने सरीर को देखा तो वो केवल आत्मा के रूप में था वही हल जिनिशा किरण सपना पारिजात आवर जीनत का था

सूर्य .....परबु .....

अभी सूर्य कुछ आवर बोलता उस से पहले हे सूर्य गाने अंदर में गिरने लगा देकते हे देखते अनंत गहराई में गिरने लगा ........

उस के एक हॉस्पिटल में एक महिला आवर एक आदमी एक क्सक्सक्स साल के बचे के पास बैठे थे

महिला ......शिव हमारे बेटे को कब होश आएगा पिछले एक साल से ये कोमा में है

शिव ......शालिनी मैं नहीं जनता की हमारे बेटे को कैसे ठीक कृ

जहा कही उम्मीद नज़र आती है वह वह पिछले एक साल से दिखा चूका हूँ मैं

शालिनी ......मुझे नहीं पता आप क्या करोगे मुझे मेरा बीटा सूर्य वापिस चाइये

अभी बात कर हे रहे थे की सूर्य के बॉडी से जुडी मसिनो में जोरो से बीप बीप की आवाज होने लगी सूर्य की बॉडी पूरी हिलने लगी

शालिनी .......शिव सूर्य को क्या हो रहा डॉक्टर डॉक्टर

तबकी कुछ डॉक्टर आ कर चेक करते है

डॉक्टर .....मर शिव ठाकुर आपके बेटे की हार्टबीट गिरती जा रही है

शालिनी .....डॉक्टर मेरे सूर्य को भलो कुछ भी करके

डॉक्टर ....शालिनी जी हम पूरी कोशिश कर रहे है

नर्स फ़ौरन इंजेक्शन तैयार करो

डॉक्टर इंजेक्शन सूर्य के हार्ट में लगता है

कुछ हे देर बाद सब नार्मल होने लगता है

तभी कुछ ऐसा हुवा जिसने सबको चौंका दिया

सूर्य के बॉडी से जुडी सभी मशीने एक एक कर के जलने लगी

तभी एक जोरदार चीख के साथ

सूर्य उठ खड़ा होता है

सूर्य......... स्वेइतीयययय..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स............
 
अपडेट ...... 52

कुछ हे देर बाद सब नार्मल होने लगता है

तभी कुछ ऐसा हुवा जिसने सबको चौंका दिया

सूर्य के बॉडी से जुडी सभी मशीने एक एक कर के जलने लगी

तभी एक जोरदार चीख के साथ

सूर्य उठ खड़ा होता है

सूर्य......... स्वेइतीयययय..........

अब आगे .......

शिव ठाकुर फॅमिली....( सूर्यगढ़ )

1 ......परताप ठाकुर दादा जी 60 ईयर

2 ......जानवी ठाकुर दादी जी 58 ईयर

3 ......मेनका ठाकुर. बुआ जी 36 एड्स

4 ......विजय ठाकुर फूफा जी 40 ईयर

5........पायल ठाकुर क्सक्सक्स आगे दीदी

6. ......प्रीती ठाकुर क्सक्सक्स आगे. दीदी

7 ......महेंद्र ठाकुर. बड़े पापा 36 ईयर ( मेनका ट्विन्स )

8 .......रेखा ठाकुर बड़ी मम्मी 34 ईयर

9 .....कोमल ठाकुर. क्सक्सक्स आगे दीदी

10 ........शिव ठाकुर. पापा जी 35 ईयर

11 .......शालिनी राणा ठाकुर मम्मी जी 33 ईयर

12 ......सूर्य ठाकुर ( मैं )

13 ....... राधा ठाकुर छोटी बुआ जी. ( गॉड ली हुए ) 19 ईयर

शालिनी फॅमिली ( सूरजगढ़)

1 ....विक्रम सींग राणा नाना जी 62 ईयर

2 .....रूपा देवी. नानी जी 58 ईयर

3 ....जोरावर सिंह राणा मां जी 39 ईयर

4 .....प्रिय सिंह राणा ममी जी

आगे 36 ईयर

5 .....सपना राणा क्सक्सक्स आगे दीदी

6 .......संजय राणा 34 ईयर मां जी

7 ......सन्ति राणा ममी जी 32 ईयर

9 .......किरण राणा क्सक्सक्स दीदी

( शालिनी आवर शिव ने भाग कर सदी की थी फ़िलहाल दोनों परिवारों में दुश्मनी है )

( बाकि के करदार मुलाकात होने पे )/

सूर्यग्रह ......

जानवी ठाकुर ......सुनते हो जी क्या आप अभी तक शिव से नाराज हो

पड़ताल ठाकुर ......नहीं ठकुरानी हम अपने जिगर के टुकड़े से कैसे नाराज रह सकते है

हमारा भी दिल करता है अपने पोते से मिलने का परतु हम इतने जल्दी माफ भी नहीं कर सकते आज हम दोनों दोस्त

( विक्रम आवर परताप ) एक दूसरे के दुसमन बन चुके है हमारे बेटे आवर बहु के चलते गुस्सा हम आज भी दोनों पे

जानवी ठाकुर .......मुझे कुछ नहीं पता जी आप कुछ भी करो पैर उनको लौटना लाओ 13 साल गुजर गए उस बात को

परताप सिंह बिना कुछ बोले हवेली से निकल जाते है

जानवी पीछे से अपनी भीगी आँखे पांच कर अपने पूजा रूम की आवर निकल गई

महेंद्र ठाकुर अपनी माँ की भीगी आँखे देख चूका था

वो किसी को कॉल करता है

महेंद्र ......क्या शिव का कुछ पता चला की कहा है वो

सामने से ......नहीं मेरे दोस्त मैं खुद पिछले दो साल से उनको दंड रहा हूँ मुझे भी उनकी बड़ी याद आती है

जब से उनको घर से निकला है मैंने कहा कहा नहीं डुंडा उनको

महेंद्र ......पता नहीं मेरा भाई कैसा होगा कहा होगा उसने तो पलट कर भी एक बार नहीं देखा अब आवर माँ सा को रोरी हुए नहीं देख सकता भाई

सामने से .....हेमत से काम ले मेरे दोस्त इस्वर ने चाहा तो सब ठीक होगा

कुछ देर आवर बात करके महेंद्र कॉल कट कर कार ले कर बहार निकलता है जैसे हे महेंद्र घर से बहार निकलता है उसके सामने एक साध्वी मिलती है जिसके पुरे सरीर पे रुद्राक्ष माला दर्जन की हुए थे हाथो में चिलम माथे पे ताकत चन्दन तिलक

महेंद्र एक पल के लिया उस साध्वी को देख रुकता है

फिर कार आगे बढ़ता है

साध्वी .....वो आ रहा है इस सूर्यगढ़ का वरिष्ठ

जैसे हे महेंद्र ने साध्वी की बात सुनी जल्दी से ब्रेक मरे

कार से बहार निकल कर

महेंद्र ......आप किसकी बात कर रही है

सधिव मुस्कुराते हुए चिलम महेंद्र की आवर बढाती है

महेंद्र हाथ जोड़ मन करता है

साध्वी ......जिसकी तलाश तुम बरसो से कर रहे हो वही इस सूर्यग्रहण का इस हवेली का वरिष्ठ आ रहा है बहुत जल्द

महेंद्र कुछ बोलता उस से पहले हे चिलम का दुनि महेंद्र के मुँह पे छोड़ साध्वी वह उठ कर सूर्यगढ़ के बहार की तरफ चल दी जो मार्ग सूरजगढ़ की आवर निकलता है

महेंद्र ठाकुर कुछ देर उसको देखता रहा फिर अपने कार में बेथ कर निकल गया साध्वी से विपरीत दिशा में .....

कुछ दिन बाद सूर्य को भी छूट मिल चुकी थी वो अपने घर लौट आया था

शालिनी .....शिव सूर्य जब से घर लौटा है तब से बहुत उदाश रहने लगा है

शिव ......है शालू मैंने भी देखा है सूर्य को वो बस अपने रूम में गम शूम रहता है उसके चेहरे की मुस्कान उसकी वो जिद मनो सब कुछ भूल कर कही कोय रहता है

शालिनी .....मैं सूर्य को ऐसे हालत में नहीं देख सकती कुछ करो शिव मेरे बच्चे को ऐसे गट गट कर जीते हुए आवर नहीं देखा जाता पहले कबि कबर गुस्सा तो कर लेता था अब तो मनो बस इसके सांसे हे चल रहे जैसे जीना हे छोड़ दिया हो

शालिनी कहते कहते हे रोने लगी आँखों से आंसू तो शिव के भी निकल रहे थे किन्तु वो एक मर्द था उसको तो अपनी बेटे के लिया पीड़ा दिखने का मौका भी नहीं मिलता

शिव .....शालू तुम अगर ऐसे करोगी तो सूर्य को कोण संभालेगा हमें सूर्य को कहीं घूमने ले चलना चाइये तुम बात करो सूर्य से कुछ टाइम हम उसके पसंद से गुमने चलते है

शालिनी ......ठीक है मैं आज हे बात करती हूँ

शिव शालिनी कुछ देर बात करते है फिर सब मिल कर डिनर करते है

शालिनी सूर्य के साथ हे सोती है शिव दूसरे रूम में जा कर सो जाता है

सूर्य आवर शालिनी जल्दी हे सो जाते है

सुबह भएमा मुहरत के समय अचानक से सूर्य जोर जोर से बड़बड़ाने लगता है जिसकी आवाज सुन शालिनी की नींद टूट जाती है

शालिनी की नजर जब सूर्य पे पड़ती है तो वो एक में भी पूरी तरह से पसीने से भीग चूका था

बस एक हे बात बार डोगरा रहा था ...मेरी स्वीटी मैं आ रहा हूँ मैं आ रहा हूँ स्वीटी ....कभी स्वीटी कभी किरण तो कभी सपना ...शालिनी घबरा कर

जल्दी से सूर्य को अपने सीने से लगा लेती है अपनी बाँहों में कास लेती है सूर्य को

कुछ देर बाद सूर्य शांत हो कर अपनी माँ के ममता भरे बाँहों में चैन से सो जाता है

शालिनी भी कुछ देर बाद उठ जाती है सूर्य को सोया हुआ छोड़ कर फ्रेश हो अपने पति को उठती है

सूर्य काफी देर तक सोया हुआ रहता शालिनी ने रात की पूरी घटना शिव को बताई

Shiv.....lagta है हमारे बेटे ने हमारे लिया बहु दंड ली है

शालिनी .....है वो भी एक नहीं तीन तीन .स्वीटी सपना किरण ...

शिव .....ये तो अच्छी बात है न तुम्हे तो फिर कोई काम करना नहीं होगा अपने बाँहों पे हुकुम चलना ठकुराइन बन कर हाहाहा

शालिनी ....आपको मज़ाक सूज रहा है मुझे पता है कैसे हालत में था मेरा बच्चा

shiv.....sorry शालू

सूर्य ....गुड मॉर्निंग माँ डैड

शिव शालू ...गुड मॉर्निंग माय सोन तबियत कैसे है तुम्हारी

सूर्य .....अच्छा हूँ माँ डैड मुझे आपसे कुछ बात करनी है

शिव ....है बीटा कहो क्या कहना चाहते हो

सूर्य दोनों को एक बार देखता है फिर

सूर्य .....मुझे इंडिया जाना है माँ डैड

शालिनी आवर शिव एक दूसरे को देख कर इसरत करते है

शालिनी .....बीटा अगर गुमना हे चाहते हो तो किसी आवर कंट्री गम आओ इंडिया हे क्यों अभी वह बहुत गर्मी होगी

सूर्य .....माँ डैड मुझे बस इंडिया हे जाना है that's आल

शिव .....थीम है बीटा मैं हम तीनो के लिया टिकट बुक करता हूँ आवर इंडिया कितने दिन रुकना है वो भी बता दो

सूर्य ......डैड मैं हमेशा के लिया इंडिया जाना चाहता हूँ

शालिनी शिव .....क्याआ ये तुम क्या कह रहे हो बीटा

सूर्य .....प्लीज डैड माँ मन जाये मेरा यहाँ बिलकुल भी दिल नहीं लग रहा है

शालिनी ....बूत बीटा हम वह क्या करेंगे हमेशा के लिया जा कर

सूर्य ....क्यों आपके माँ डैड नहीं है क्या वह

जैसे हे सूर्य के मुँह से ये बात सुनी दोनों की गर्दन झुक गई

सूर्य .....सॉरी माँ सॉरी डैड मैं आपको तकलीफ देने के लिया ऐसा नहीं बोलै है माँ मैंने आपकी डेरी पढ़ी है

मुझे भी अपने ननु दादू से मिलना है

शिव ....पर बीटा वो हमें कभी एक्सेप्ट नहीं करेंगे

सूर्य .....डैड क्या दादू गलत है क्या आपने माँ आवर आपके लव के बारे में दादू दादी या ननु नानी से बात की

मैं ये नहीं कह रहा की आपने गलत किया पर है आपने बहुत जल्द हार मन ली

डैड वो इंडिया आवर ऊपर से एक राणा जी तो दूसरे ठाकुर क्या आपका ऐसा करने से उनको देश नहीं पहुंची आपने एक बार माफी मांगी क्या उसके बाद आपने फिर कभी कोशिश की नहीं न

शालिनी .....सॉरी बीटा हम आज हे इंडिया चलेंगे किन्तु हमेशा के लिया तब जब तुम्हारे दादू आवर ननु हमें एक्सेप्ट करेंगे तब ok

आप आज के हे 3 टिकट बुक कीजिए हम आज हे जा रहे है जो भी होगा देखा जायेगा

सूर्य ....लव यू माँ ुम्मम्हा माय स्वीट सेक्सी माँ

शिव .....रुक तू मेरे शालू को सेक्सी बोलता है

सूर्य ....डैड आप बूढ़े हो गए है माँ अभी भी सेक्सी लगती है क्यों माँ हाहाहा

शालिनी को तो कुछ सुनाई हे नहीं दे रहा था वो तो बस अपने बच्चे को आज एक बरस बाद इतना खुश खेलते मुस्कुराते देख रहे थे

शिव ने जब शालिनी को देखा तो वो भी उसके दिल का हल समाज गया

सूर्य आ कर अपने माँ के गले से लग गया

शालिनी सूर्य के पुरे चेहरे को चूमने लगे

शालिनी .....मेरे बच्चे आज कितने दिन बाद तुम्हारे चेहरे पे फिर से मुस्कान लूटी है तू हमेशा ऐसे हे मुस्कुराना बस तेरे माँ तेरी मुस्कुराते चेहरे को देख कर हे तो जीती है

सूर्य ......हाहाहा डैड आपका पता कट हो गया है देखो माँ क्या बोल रहे है

शिव आगे बढ़ कर सूर्य के माथे को चुम कर मेरे बच्चे तुम हे हम दोनों की जिंदगी हो तुम्हारे ख़ुशी के लिया ये शिव ठाकुर अपनी गर्दन कटवा सकता है आवर जरूरत पड़ी तो काट भी सकता है बस तुम कभी उदाश मत होना इतने बरसो से अपने माता पिता भाई बहन से दूर जी रहे है तो केवल तुम्हारे लिया

सूर्य ......डैड ऐसा वक़्त कभी नहीं आएगा जब आपको गर्दन कटवाने की नौबत आये गर्दन कटवाना तो दूर हमारे परिवार की आवर गलत नज़र उठाने वाले का सरीर तो होगा पैर उसका सर नहीं फिर कभी ऐसे बात न करना माँ डैड

शालिनी को आज इस सूर्य में कुछ अलग नज़र आया गुस्सा तो वो पहले भी बात बात पे होता था किन्तु आज इस गुस्से में जो गुर्राहट थी वो बहुत कुछ कह रहे थी शालिनी ने कास कर सूर्य को अपने गले से लगाया कुछ पल में सूर्य शांत हो गया

शिव .....चलो नास्ता करो जल्दी से फिर

पैकिंग भी करनी है शालू तुम्हे मैं इंटनेट हिंदी के लिया टिकट कन्फर्म कर लेता हूँ

शालिनी सबका नास्ता लगाती है कुछ देर बाद सब नास्ता फिनिश कर अपने अपनी पैकिंग कर के 11 बजे तक घर से निकल जाते है एयरपोर्ट के लिया

वह से दिल्ली के लिया निकल गए

इनको आने में वक़्त है हम चलते है

सुराजग्रह की आवर जहा एक खूबसूरत हवेली में ऊपरी मंजिल पे बने एक रूम मेबेहड़ खूबसूरत लड़की किसी की पेंटिंग बना रहे थी

वही पास में एक आवर लड़की भी बैठी थी जो

कुछ पेंटिंग को देख रहे थी

जो की एक हे लड़के की पिच थी जिसमे बहुत कुछ था

तभी वह कोई महिला आती है दिखने में ये भी खूबसूरत है

महिला .....तो तुम दोनों यहाँ हो मैं तुम दोनों को कब से दूँ रही हूँ

सपना तुम भी किरण के साथ लगी हो

सपना .....माँ मैं तो स्वीटी की पेंटिंग देख रहे हूँ

किरण ....प्रिय मम्मी मैंने दीदी को बोलै भी था की आप उनको दंड रहे है पर इन्होने कहा की ढूंढ़ने दो बुढ़िया को

सपना ....स्वीटी तूने कब बोलै माँ मुझे दंड रहे है माँ स्वीटी झूट बोल रहे है माइन आपको बुढ़िया नहीं बोलै

किरण ....ोह्हब ओह्ह देखा मम्मी अभी अभी दीदी ने आपको फिर से बुढ़िया बोलै है

प्रिय एक पेंटिंग को उठती है

किरण .....सॉरी सॉरी मम्मी मैं मज़ाक कर रहे थी आप तो अभी भी हॉट लगती हो प्लेसेस पेंटिंग को कुछ मत करना

प्रिय ....हेहेहे ीदार आ मेरी शैतान गुड़िया मुझे पता है तुम दोनों बहने बहुत शैतानी करती हो मेरे पीठ पीछे पैर मुझे तुम दोनों की यही सररते पसंद है

वैसे आज कोनसी पेंटिंग बना रहे हो मुझे भी तो दिखाओ

वैसे मैं सोच रहे हूँ तुम दोनों इतना टाइम एक साथ रहती हो क्यों न तुम दोनों के लिया लड़का भी एक हे देख लूँ दोनों की एक से हे सदी करवा देते है सदी का खर्चा भी बच जायेगा

सपना .....क्या मम्मी आप भी अभी तो हम बच्ची है

प्रिय ....है वो तो दिख रहा है दोनों एक हे लड़के के सपने देखती हो आवर मुझे बोलते हो अभी तो हम बच्ची है

किरण ....मम्मी ये है वो पेंटिंग जो कुछ दिनों से बना रहे हूँ

प्रिय .....बहुत खूबसूरत है पहले वाली में तो लड़का लेता हुआ था अब ऐसे क्यों

किरण ......मुझे पता नहीं मम्मी मैंने बस बना दिया

प्रिय ....ये लो ये तो अभी से राजकुमार के सपनो में खो गयी चलो जल्दी चलो खाना नहीं खाना है क्या रात होने को आई

तीनो जल्दी हे पेंटिंग को समेत कर रखती है आवर निचे चल देती है खाना खाने

रूपा देवी .....मिल गयी फुर्सत चित्रकारी से मुझे तो लगा महारानियाँ खाना नहीं खाएंगी पीट भर गया होगा

जोरावर ......माँ सा बच्चिया है वो क्यों गुस्सा होती हो इनपे आप

रूपा देवी .....कल को ये भी उसके जैसे भाग गई तो फिर ढूंढ़ते रहना इनको भी जैसे आज तू दंड रहा है

जोरावर .....मैं क्यों ढूंढ़ने लगा भला उसको

रूपा देवी ......कुछ दिन पहले किस से बोल रहा था फिर तू फ़ोन पे वही था न तेरा दोस्त महेंद्र ठाकुर

विक्रम सिंह ......रूपा चुप कर के खाना खा आवर अगर दुबारा बचिए पे गुस्सा किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा कह देता हूँ

खाना खाओ आवर जाओ अपने अपने रूम में

सब खाना खा कर अपने अपने रूम की आवर निकल जाते है ......

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
 
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