Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 18 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

उपदटेस विल रिज्यूमे फ्रॉम 25तह अक्टूबर.
 
आप सभी को दिवाली पर्व की शुभकामनाये! ✨🎇🎆
 
अपडेट - 115 ~ टर्न थे तिदेस (1)

अब तक...

पूर्वी ने वीर के माथे को प्यार से चूम लिया.

वीर का मोबाइल अगले hi पल विबरते हुआ और स्क्रीन पर मैसेज साफ़ साफ़ उससे दिखाई दे रहा था.

'10 मिनट्स अरे लेफ्ट फॉर 7.'

मैसेज था...

करा का!


'Shitttttttttt!!!!'

अब आगे...

डर! एक ऐसी अनुभूति है जिस से इंसान अक्सर बचने की कोशिश करता है. खुद को विपरीत परिस्थितियों में भी निडर दिखाने का प्रयास करता है.

पर वीर फिलहाल चाह के भी अपने ऊपर मंडरा रहे भय से खुद को निकाल नहीं पा रहा था.

क्यों? क्युकी वह 20 मिनट लेट हो चूका था. शाम के 7 बजे करा ने मिलने के लिए उससे बुलाया था. और यहाँ 7:20 हो रहे थे पर वीर ट्रैफिक को हारने में नाकाम था. मुंबई के ट्रैफिक के आगे तोह ऑलमाइटी सिस्टम और पारी ने भी हाथ खड़े कर दिए थे अपने. और ये होने वाली मीटिंग का समय और लम्बा खींचता जा रहा था.

कौन थी करा? एक multi-talented बिज़नेस लेडी जिसने न केवल अपने अकेले की दम पे पूरी कंपनी की kaaya-palat कर के रख दी बल्कि, अन्य बुसिनेस्सेस को ऊपर उठाने में भी उससे महारत हासिल थी.

वह लड़की, जिसका बाप किशोर पूरे भारत और बाहरी देशो में एक जानी मानी शख्सियत था. उसका रुतबा, उठना बैठना, पैसा, पहचान, सब कुछ hi अलग स्टारर पे था. एक आम आदमी जो जीवन में सपने देखता था, किशोर जैसा व्यक्ति उससे roz-marra की ज़िन्दगी में जी रहा था. कोई तुलना hi नहीं!

फिर ऐसी हस्ती की बेटी करा को कैसे इग्नोर कर सकता था वीर? साथ hi आखिर वह उसकी पहली इंटिमेट पार्टनर भी तोह थी. वीर के अंदर नैचुरली hi करा को प्रोटेक्ट करने की भावनाये आ जाती थी. फिर उसकी बात नकारना तोह दूर की बात थी.

जैसे तैसे 7 बज के 23 मिनट पर वह करा के घर पहुचा और पॅहुचते hi उसकी आँखें सरप्राइज के मारे फेल गयी.

[Itna bada bunglow?? Ab isse bunglow kahe ya building Master? There are more than 6 floors! Let me count...! E-Ehhh!? Freaking 8 floors!? What the hell? What is going on? :rangery: ]

पारी अकेली नहीं थी. वीर भी सहमत था. 8 फ्लोर का घर? 8 फ्लोर का घर कौन बनवाता है bhai?Ghar था या बिल्डिंग? भला कितने लोग रह रहे थे इसमें?

वह अभी कार से उतरा hi था की इतने में उससे सामने hi एक ख़ूबसूरत ब्लोंड लेडी दिखाई दी.

'चेक!'

*डिंग*

[Name : Julia

Age : 31

Bio : Julia! Ek Russian maid! Pichle 5 saalo se Kaera ke liye kaam karti aa rahi hai. Pehle se hi Julia ke purvaj bade gharano ke servants rahe hai. Aur ye kaam unke khoon me hai. Kaera jab Moscow gayi thi Kishor ke sang toh Kishor ne khud Julia ko Kaera ke liye hire kiya tha. Ek beautiful, well-behaved, meticulous, aur amicable personality waali lady hai. Kaera ke prati poori tarah se loyal hai. Aur khud ki zyada koi icchaaye nahi rakhti.

Favourability : 39

Relationship : Familiar.]

स्टेटस पढ़ते hi वीर ताजुब में रह गया. इसलिए नहीं की स्टेटस कोई होश उड़ा देने वाला था. बल्कि इसलिए क्युकी फवौराबिलिटी और रिलेशनशिप उससे चक्कर में दाल रहे थे.

'वेट! ये फवौराबिलिटी 39? और पारी? ये रिलेशनशिप फेमिलिअर क्यों शो कर रहा है? में तोह इस से मिला तक नहीं हु. ये पहली hi बार-'

[Master~ Shayad Kaera ne aapki baatein Julia se share kii hai. Aur isliye uske mann me kuch favourable impression hai aapke prati. Yahi conclusion ho sakta hai.]

'ी सी! सो शी है हर्ड अबाउट में!'

[Seems like it!]

वीर आगे बढ़ा और जैसे hi जूलिया की निगाहें उस पर गयी, उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी.

जूलिया (स्माइल्स) : यंग मास्टर वीर?

उसने कन्फर्म करते हुए पूछा. पर वीर स्तब्ध होते हुए उससे देखा.

'E-Ehhhh!??? Y-Young मास्टर? यंग मास्टर हु??? वेट! उसने मुझे hi बुलाया न पारी?'

[Hehehe~ Yes! Young Master Veer! 😆 ]

जूलिया के होंठो पर पूरे समय स्माइल सजी हुई थी. और वीर का रिएक्शन देख वह न केवल ये समझ गयी की यही वीर था बल्कि उसका रिएक्शन देख वह मैं hi मैं मुस्कुरा भी उठी.

वीर : तहत...! अबाउट पार्किंग!?

जूलिया : Don't वोर्री यंग मास्टर! प्लीज! पास थे कीस तो में. सर्वेन्ट्स विल दो थेइर जॉब.

उसने आहिस्ता से कहा तोह वीर ने गाडी की छवि उससे सौप दी. और अगले hi पल वही कुछ दुरी पे खड़ा एक लड़का दौड़ते हुए यूनिफार्म पहने आया और जूलिया के हाथो से कार की के लेकर कार पार्क करने चला गया.

[The life of debauchery, Master! The life of debauchery! :heh: ]

'येह! येह!'

जूलिया (स्माइल्स) : प्लीज! फॉलो में! यंग मिस इस वेटिंग फॉर यू फॉर किते ा लॉन्ग टाइम!

उसने वीर को जताते हुए कहा. बात सच थी. करा वीर के लिए 20 मिनट के ऊपर से बैठ के इंतज़ार कर रही थी. कहा उसके लिए लोग घंटो तक इंतज़ार कर लेते थे पर यहाँ वह वीर के लिए इंतज़ार कर रही थी.

वीर जैसे hi जूलिया के संग अंदर एंटर किया उससे न जाने क्या क्या देखने को मिला. एंट्रेंस पे hi 4 गार्ड्स थे. और वह भी ऐसे वैसे नहीं. लड़ने में सक्षम गार्ड्स. वीर ने उनके स्टैट्स देख ये पता किया था.

ग्राउंड फ्लोर पे जो हॉल था उससे देखते hi उसके होश उड़द गए. इतना विशाल झूमर सीलिंग से लटक रहा था की उसकी कीमत का अनुमान भी करोडो में hi लगाया जा सकता था.

लिफ्ट में घुसते hi वीर की नज़र बटन्स पर गयी,

वीर : There's इवन बेसमेंट?

जूलिया : यस यंग मास्टर! It's फॉर पार्किंग एंड इमरजेंसी गेनेटर्स.

वीर : उम्! Y-You कैन ड्राप थे होनोरिफिक्स! जस्ट कॉल में वीर!

वीर ने कहा. बार बार यंग मास्टर sunn'ne में उससे थोड़ा अजीब लग रहा था इसलिए उसने जूलिया को अपने नाम से hi पुकारने के लिए कहा.

जूलिया : It's माय ओन विश तो कॉल यू लिखे तहत यंग मास्टर. प्लीज! अल्लोव में तो दो सो!

वीर : Th-That's...!
*सिघ* फाइन!

हार मानते हुए वीर को maan'na पड़ा. जूलिया की ख्वाइश hi यही थी. तोह अब भला वह कैसे इंकार कर सकता था?

लिफ्ट में एक मधुर संगीत बजता रहा और उनकी लिफ्ट जल्द hi 1सत फ्लोर पर आके रुकी.

वीर : I-Is शी माध?

जूलिया (स्माइल्स) : यंग मास्टर शुड सी फॉर हिमसेल्फ!

'फुककककककक!!!'

[Lagta hai Kaera waqai gussa hai. Wait! Iska matlab woh emotions feel kar paa rahi hai? Hahaha! That's good master~]

जूलिया के रिस्पांस पर वीर कुछ न कहा.

चलते चलते उससे बस महंगी से महंगी चीज़े hi नज़र आती रही. और जूलिया उससे बाकी डिटेल्स से फइलल कर रही थी.

जूलिया : थिस व्होले फ्लोर बेलोंगस तो मिस. यंग मास्टर! शी don't लिखे तो ट्रेवल इन लिफ्ट्स. That's व्हाई, हेर फ्लोर इस राइट अबोवे थे ग्राउंड फ्लोर.

वीर : ी सी!

जूलिया : सेकंड फ्लोर बेलोंगस तो हेर फादर! थे ओनर ऑफ़ थिस हाउस. ा वैरी रेस्पेक्टेबले पर्सन.

वीर : एंड लेट में गेस, थर्ड ओने बेलोंगस तो कारन, राइट?

जूलिया (स्माइल्स) : तहत इस करेक्ट!

वीर : व्हाट अबाउट थे फोर्थ ओने?

जूलिया : आईटी है ा हूजे गयम!

वीर : फिफ्थ?

जूलिया : फिफ्थ इन्क्लुडेस थे हूजे किचन. थिस इस वेयर रेनोनेड चीफ्स मैक्स डिलीशियस एंड टेम्पटिंग डिशेस फॉर मिस एंड थे ओठेर्स.

जूलिया के जवाब पर वीर की बोलती hi बंद हो गयी.

वीर : S-Sixth?

जूलिया (स्माइल्स) : सिक्स्थ फ्लोर कंटैन्स थे मार्ट. शॉपिंग मार्ट. आईटी है एवरीथिंग तेरे. फ्रॉम फ्रेश वेजटेबल्स तो स्टेपल्स, ग्रेन्स एंड इतर डेली नीड्स.

'होलियीय फुककककक!!!'

[Y-Ye ghar hai ya society Master?]

बेचारी पारी भी बौखला गयी थी अब तोह.

वीर : सेवंथ?

जूलिया : सेवंथ इस वेयर सर्वेन्ट्स लिखे उस रेसिडेंस यंग मास्टर.

वीर : एंड एइथ?

जूलिया : आईटी है ा टेबल टेनिस, ा मूवी थिएटर, ा मिनी हॉल फॉर पार्टी एंड सम इतर गेम्स.

वीर : Don't तेल्ल में there's समथिंग ों थे टेरेस तू!

जूलिया (स्माइल्स) : ओह्ह ऑफ़ कोर्स! ा स्विमिंग पूल फॉर थे व्यू. Isn't आईटी अमेजिंग?

वह वीर को मज़ाकिया ढंग में चिढ़ाते हुए बोली तोह वीर बस हामी hi भर सका.

घर था की क्या था बहनचोद? पहली फ्लोर करा के नाम, दूसरी उसके बाप के और तीसरी उस कारन चूतिये के. चौथी में पूरा का पूरा गयम hi घुसेड़ दिया था. पांचवी में लंगर था की क्या? स्किल्ड से स्किल्ड शेफ खाना बनाते थे उधर.

छटवी? छटवी में तोह मार्ट hi खुला हुआ था. चीफ्स छटवी फ्लोर से सामान लेते और नीचे पांचवी फ्लोर पर खाना बनाते और वापस जाके सो जाते जहा उनके रूम सातवीं फ्लोर्स पर थे.

और लास्ट फ्लोर? साला सिनेमा लगा दिए थे. टेबल टेनिस? गेम्स? और कुछ बचा हो तोह वह भी ऐड कर देते. टेरेस पे स्विमिंग पूल अलग.

ये सारे विचार वीर के मैं में hi चल रहे थे.

ऐसा नहीं था की उससे ये अय्याशी और पैसा पसंद नहीं था. बात सिर्फ ये थी की वह एक आम छोटी थोड़ी रिच फॅमिली से बिलोंग करता था. और इतनी अय्याशी के लिए इतने पैसे बेफालतू लगाना? ये थोड़ा उससे अजीब लगता था. करना तोह वह भी चाहता था जस्ट तो एक्सपीरियंस. लेकिन अंततः उसका अंतर मैं यही कहता था की ये पैसो की बर्बादी थी. सदुपयोग नहीं!

पर वह नहीं जानता था की जल्द hi अल्फा इंस्टिंक्टस उसकी सोच को किस तरह से बदलने वाले थे.

जूलिया : ओह्ह! वे अरे हेरे!

जूलिया की आवाज़ उससे पुनः होश में लायी.

और अंदर आते hi उससे एक जाना माना चेहरा नज़र आया. वही पुरानी सूरत, वही पुराना अंदाज़, वही मिजाज़, और वही भाव.

"यू अरे 26 मिनट्स लेट!"

वही परिचित आवाज़ उसके कानो में पड़ी. कितने समय बाद वह आज करा से मिल रहा था. वीर ने फ़ौरन hi अपनी देररि के लिए माफ़ी मांगी,

वीर : रियली सॉरी! में-

पर उसकी आवाज़ हलक में hi अटक के रह गयी जब उससे आगे आते हुए करा की हालत नज़र आयी,






करा ने एक चेक्ड पैटर्न की ब्लैक न वाइट तुबे टॉप और पंतय पहनी हुई थी. और तुबे टॉप के ऊपर hi बेहद छोटा एक वाइट क्रॉप टॉप था.

उसका मखमल पेट और नंगी त्वचा साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी. वीर एक नौजवान था. ज़ाहिर है करा जैसी हसीना को इस हालत में देख उसके अंदर का जोश उबाल लेना शुरू हो गया था.

जूलिया : अह्ह्ह!! M-Miss!? यू अरे स्टिल लिखे तहत? प्लीज! गेट चेंज्ड! हाउ मान्य टाइम्स I've टोल्ड यू तो~

करा : हँ? व्हाट?

जूलिया : यंग मास्टर है के! हाउ कैन यू!?

करा : सो? व्हाट इस आईटी?

करा की समझ में नहीं आया की जूलिया उसके ऐसे कपड़ो पर इतना क्यों भड़क रही थी भला? वीर hi तोह आया था. तोह कपड़ो में क्या दिक्कत थी?

वह ये नहीं समझ पा रही थी की वीर एक मर्द होते हुए उससे उस हालत में देख रहा था. जो की नार्मल बेहेवियर नहीं था. और यही जूलिया बतलाने की कोशिश कर रही थी.

पर बेचारी करा!! कैसे समझती इतनी सी बात भला? इमोशंस जो नहीं फील कर पाती थी. वीर के सामने शर्म क्या थी उससे पता नहीं था. और ये बात वीर ने जैसे hi रीलीज़ की. उसका दिल रो उठा.

'क्या कुछ भी नहीं कर सकता में करा के लिए!? क्या कुछ नहीं कर सकता? कब तक इस बेचारी को इस क़दर देखता रहूँगा में पारी? कब तक? अब मुझसे और देखा नहीं जाता. ी वांट तो दो समथिंग फॉर हेर! कोई तोह ऐसा तरीक़ा होगा जिस से-'

और जैसे सिस्टम ने भी वीर के मैं की बात सुन्न ली, क्युकी अगले hi शान,

*डिंग*

[Mission : Reawaken Kaera.

Time limit : 1 month.

Rewards : ??? Points.

Mission failure penalty :

1) Kaera will never get her emotions back.

2) Losing Kaera.]

मिशन पढ़ते hi वीर की मुट्ठी दृढ़ता में कस गयी. पेनल्टी क्या थी? करा कभी भी अपने इमोशंस को वापस पा नहीं सकेगी अगर मिशन फ़ैल हुआ तोह?

हरगिज़ नहीं! वीर ने खुद के मैं में थाना. वह ऐसा हरगिज़ नहीं होने देगा. 1 महीने के अंदर उससे करा को वापस से पहले जैसा करना था. पर सवाल था.

कैसे?

जूलिया : यंग मिस प्लीज! के विथ में एंड गेट चेंज्ड.

जूलिया जबरदस्ती उससे घसीट के अंदर लेके गयी और उससे तैयार कर के बाहर लायी.

करा : हैवे ा सीट! वीर!

इस बार वह काली ड्रेस में थी. उसने वीर को देखा और एक तंज कैसा,






करा : तुम लॉस वेगास गए थे!

वीर : वेल! यस!

करा : क्यों?

वीर : कुछ काम तह-

करा : सुहाना के साथ गए थे जहा तुम्हारी मुलाक़ात अवा से हुई.

उसके तपाक से बोलने पर वीर हैरत में रह गया. भला करा को इसकी खबर कैसे लगी?

वीर : हम्म!

करा : बिज़नेस रिलेटेड वर्क था. राइट?






वीर : राइट!

करा : क्या सीखा वह? ओने वीक से भी ज़्यादा देरर तक रुके थे तुम वह. सो? व्हाट हैवे यू लर्न्ट?

वीर : बिज़नेस को आगे कैसे बढ़ाया जाए. I'm थिंकिंग ऑफ़ इन्वेस्टिंग.

करा : इतने दिनों तक बस यही सीखा?

वीर : Y-Yeah! किन्दा...!

करा : तोह सुहाना हॉस्पिटल में क्यों है?

ये सवाल सुनते hi वीर समझ गया था की करा का इनफार्मेशन कलेक्ट करने का कनेक्शन कितना स्ट्रांग था. और वह बस जान बूझ के उस से ये सवाल कर रही थी. पता तोह उससे पहले से hi सब था.

वीर : व्हाई वास्ते टाइम? व्हेन यू क्नोव एवरीथिंग!

करा (फ्रोंस) : यू शुड लेट में क्नोव वेयर यू अरे गोइंग!

वीर : एंड व्हाई?

करा : बिकॉज़...!

और इस बार वह मौन रह गयी. वीर उससे ये सब क्यों बताये की वह कहा जा रहा है, क्या कर रहा है, किस से मिल रहा है!?

करा होती कौन थी उस से ये सब jaan'ne वाली? यही बात वह करा के मुँह से sunn'na चाहता था. पर करा मौन रह गयी. कैसे बताती? वीर के प्रति उसकी फीलिंग्स अंदर तोह थी पर जुबां पर समझाने के लिए शब्द नहीं आ रहे थे.

जूलिया : यंग मिस! यंग मास्टर! टिया इस हेरे!

जूलिया इतने में एक सर्विंग ट्राली में चाय के कप्स लेते हुए आयी और उन् दोनों को दी.

करा की जहा ग्रीन टिया थी तोह वही वीर की नार्मल मिल्क टिया.

और चाय की चुस्की लेते लेते करा फिर एक बार उससे देखि,

करा : कारन ने बताया तुम इन्वेस्ट करना चाहते हो. यू अरे थिंकिंग ऑफ़ ा होटल?

वीर : हम्म!

करा : दो यू वांट में तो इन्वेस्ट?

वीर : क्या ये पॉसिबल है?

करा (स्माइल्स) : ऑफ़ कोर्स! No ओने कैन रेस्ट्रिक्ट में.






वीर : तोह? कंडीशंस क्या रहेंगी?

करा : में एक शेयरहोल्डर रहूंगी. ी विल इन्वेस्ट. इन रेतुर्न, मुझे अणुअल्ली 10% चाहिए फ्रॉम व्हाटएवर विल बे थे मैक्सिमम एअर्निंग. और दूसरी कंडीशन...!

वीर : !!??

करा : यू विल टीच में डिफरेंट थिंग्स. लेकिन इस बार ये एग्रीमेंट ऑफिसियल होगा. ा साइंड कॉन्ट्रैक्ट. दो यू एग्री?

वीर : ी एग्री!

वीर ने बिना कुछ कहे hi हाँ कह दी. क्युकी खोने लायक उसमे ऐसा कुछ भी नहीं था.

करा : ऑलराइट! पहले डीडे करो की क्या करना है. अगर स्क्रैच से होटल बनाना चाहते हो, थें लुक फॉर ा प्लेस. वर्ण किसी फोरफेटेड होटल को खरीद को चंगेस कर सकते हो. डीडे ों तहत फर्स्ट. एंड थें we'll सिग्न थे कॉन्ट्रैक्ट.

वीर ने फिरसे हामी भरी और कुछ इधर उधर की बातें कर वह वह से निकल गया. नीचे तक उससे जूलिया hi चौररने आयी.

जब वह वापस करा के फ्लोर पर गयी तोह उसने देखा की उसकी मिस हाथ में एक किताब पकडे बड़े ध्यान से उससे पढ़ने में लगी हुई थी.

पर किताब का नाम पढ़ जूलिया का का मान फिरसे मायूस हो उठा.

किताब का नाम था~

वह
ात इस फ्रेंडशिप?

***

वीर उधर से निकल घर की ऑर्डर जा रहा था जब रागिनी का कॉल आया और उसने वीर को कुछ सामान लाने की ज़िम्मेदारी सौप दी.

मार्किट में जा कर जब वीर सामान खरीद के लौटा तोह एक ख़ूबसूरत सी लड़की उसकी ऑर्डर अचानक hi आ धमकी.

लड़की : सर! क्या आपके पास 2 मिनट का समय है.

वीर : हम्म!

लड़की : ये आपके लिए.

अचानक hi उस लड़की ने वीर को एक कार्ड थमाया,

लड़की : वह वह पैराडाइस होटल की तरफ से आपको ये लकी पास मिला है.

वीर : हम्म?

लड़की : एक्चुअली, होटल हर्र साल 3 पास बनाती है. फॉर लकी कस्टमर्स. इन्हे रैंडम्ली hi किसी को भी दिया जाता है. जिससे मिल जाए. आप तीसरे और आखिरी कस्टमर है. प्लीज! इससे एक्सेप्ट करिये और होटल में जाके दिखायेगा. वह आपको एंट्री तुरंत दे देंगे.

वीर : ओह्ह्ह! और फिर?

लड़की : एक कमाल का नाईट स्टे सर! साथ hi लज़ीज़ खाना. एंटरटेनमेंट और फुल ों ड्रिंक्स. कोई लिमिट नहीं. सिर्फ एक नाईट के लिए.

वीर : सो no चार्ज?

लड़की : Y-Yes! फ्री ऑफ़ कॉस्ट है सब सर!

वीर (स्माइल्स) : ऑलराइट थैंक यू!

लड़की (स्माइल्स) : यू अरे वेलकम!

वह लड़की पलटी और फुदकते हुए वह से जाने लगी पर उसकी मुस्कान तुरंत hi हट के एक शैतानी मुस्कराहट में तब्दील हो गयी.

'मेरा काम हो गया! सॉरी बॉय! मुझे नहीं पता तुम्हारे साथ क्या होगा. बूत that's नॉट माय प्रॉब्लम!'

वह सोचते हुए निकल गयी.

इधर उसके जाते hi वीर के चेहरे पर जो स्माइल थी वह गायब हो गयी.

वह तोह पहले hi चेक कर के बैठा हुआ था उससे. और ऊपर से,

*डिंग*

[Mission : Turn the tides.

Time Limit : 2 hours.

Rewards : ??? Points.

Mission failure penalty :

1) Losing Nidhi and Juhi

2) 10,000 Points deduction.

Location : Paradise Hotel.]

मिशन पढ़ते hi उसके दांत गुस्से के मारे आपस में पीसने लगे.

लोसिंग निधि एंड जूही? नेवर!

और वह तेज़्ज़ क़दमों के साथ पैराडाइस होटल की ऑर्डर चल दिया. अंदर घुसते hi जैसे hi उसने पास दिखाया, उसका फ़ौरन hi आदर सत्कार के साथ स्वागत किया गया.

ये सब कुछ, एक ढोंग था.

वीर को खाना पीना खिलवा के एक आलिशान रूम में एंटर करवाया गया. अगर वीर पहले की तरह बिना सिस्टम के होता तोह आज पक्के से अपना मुँह काला करवा के यहाँ से जाता.

पर अब? सवाल hi पैदा नहीं होता.

जल्द hi उसके रूम में तीन ख़ूबसूरत लड़किया भिजवाई गयी. और रूम की लैंडलाइन पर उससे कॉल आया जिसमे उससे एन्जॉय करने के लिए कहा गया.

और देखते hi देखते,


वीर के इर्द गिर्द लड़किया उससे रुझान में लगी हुई थी. ऐसे हैंडसम नौजवान बहुत hi काम उनके हाथ लगते थे. आज तोह जैसे उन् तीनो लड़कियों की चांदी हो चुकी थी. पैसे तोह पहले hi उन्हें दे दिए गए थे. वह तीनो hi वीर के संग राते रंगीन करने के लिए तैयार थी.

यहाँ तक की वीर की शर्ट भी अब तक उतर चुकी थी. और उन् तीन में से दो तोह उसके सीने को चूमने भी लगी. जगह जगह उसकी छथि पर लिपस्टिक भरी किस्सेस के निशाँ देने पर आतुर हो गयी.

*मुआअआआह्ह्ह्हह्ह*

*मुआअआआह्ह्ह्हह्ह*

*सलूरररपपपपप*

"ममममम~"

"फुफु~ तुम कितने हैंडसम हो~ मेरी सासें तेज़्ज़ हो रही है जानू! महसूस करके देखो न!"

कहते हुए एक लड़की ने वीर का हाथ पकड़ अपनी मस्त सुडोल छुच्छी पर दबवाया.

"आज की रात हम तीनो तुम्हे वह मज़ा देंगी जिससे तुम साड़ी ज़िन्दगी भुला नहीं पाओगे बेबी~"

*पूछ*

दूसरी उसके गाल को चूमते हुए बोली.

पर वीर खामोश था. उसके मैं में कुछ और hi चल रहा था.

वीर : तुम तीनो! ज़रा इधर hi रुको!

कहते हुए जब वह उठ के जाने लगा तोह लड़किया नाराज़ होते हुए उसका हाथ पकड़ उससे मनाने की कोशिश करने लगी.

"मत जाओ न राजा~"

"किधर जा रहे हो हमे चोरर कर? हम तीन हसीनाएं तुम्हारे लिए hi है यहाँ बाबू~"

"इतना क्या शर्माना बेबी~!? आओ न डार्लिंग! हहै~"

वीर : नथिंग मच! बस एक गहरी सास लेने बालकनी में जा रहा हु. अभी आता हु.

"P-Par~"

"अच्छा ठीक है! जल्दी जाओ! पर अब और न तड़पाओ!"

"अभी साड़ी शर्म उतार देंगे तुम्हारी फुफुफु~"

वह तीनो आपस में वीर के शर्माने पर khil-khila कर हस्सी. वीर मुस्कुराते हुए अपने कमरे की बालकनी के गेट को खोला और बाहर गया.

उसने बाहर आते हुए बालकनी के गेट को आहिस्ता से बंद किया और,

*वहुवूसस्शह्ह्ह्ह*

उसका हाथ अगले hi पल तेज़्ज़ रफ़्तार से बढ़ बगल में लटके परदे की ऑर्डर गया,

"H-Haaahhh!!?"

पर्दा hatt'te hi उसके अंदर से एक आदमी सामने दिखाई पड़ा. वीर के अचानक हमले से उस आदमी की गांड पहात गयी. ये लड़का तोह अंदर था. अचानक से बाहर बालकनी में कैसे आ गया?

"ग्वाखहहहह~"

एक मज़बूत हाथ अपने पंजे फैलाते हुए फिर तुरंत hi उसके गले पर आके झपटा. उस आदमी का सास लेना hi मुश्किल हो गया. ऐसा लगा जैसे एक पिंचिस ने छोटे से स्क्रू को जकड लिया हो.

और कभी भी घूम के तोड़ मरोड़ के अलग कर दे. वह आदमी अपने कांपते हुए पेर्रो को रोका पर कोई फायदा नहीं.

अँधेरे में उसके सामने दो लालम लाल आँखें उसकी रूह में झांकते हुए देख रही थी.

"तू खुद बताएगा या में दूसरे ढंग से पुछु?"

वीर की शांत पर झकझोर कर रख देने वाली भयानक आवाज़ सुन्न उस आदमी के परर और लड़खड़ा गए. वह खाली वीर की पकड़ से जान गया था की इस लड़के के सामने उसका कोई मैच hi नहीं था.

"B-Bataata हु!", उसने कापते हुए जवाब दिया.

इधर वीर के मैं में अलग अलग नोटिफिकेशन्स की धुन लग गयी,

*डिंग*

[Basic Enemy Tracker was able to locate the enemy.]

*डिंग*

[Basic Enemy Tracker is now deactivated. No more enemies were detected.]

*डिंग*

[Map path will close now.]

परन्तु, वीर का ध्यान इन् मामूली नोटिफिकेशन्स पर था hi नहीं. उसका पूरा ध्यान तोह सामने खड़े इस चूतिये पर था.

"जल्दी बोल!!!!" उसने पुनः गुर्राते हुए कहा तोह वह व्यक्ति और डर गया.

"हूउउ~ M-Mujhe माफ़ कर दो! M-Mujhe पैसे दिए गए है. M-Mujhe नहीं पता वह कौन है. उसने अपना नाम गलत बताया था. P-Par मेने चुपके से उसका असली नाम पता कर लिया."

*चटाककककककक*

"तोह बता जल्दी!!!!" वीर ने एक लाफा उससे रसीद के दिया तोह उस आदमी का कान hi झन्ना गया.

"U-Uska नाम रजत है. M-Mene खुद उसके पर्स में राखी ईद में देखा था. हूउउउउ~ M-Mujhe जाने दो! में हाथ जोड़ता हु. परर पड़ता हु."

नाम सुनते hi वीर की आँखों में गुस्सा साफ़ झलका. बेचारे आदमी की गांड और भी ज़्यादा पहात गयी. वह मैं hi मैं रजत को गालिया देने लगा. की आखिर किस चूतिये के काम में फस्स गया भला वह? इस से अच्छा तोह अंडे बेच के पैसे कमा लेता रोज़ की तरह.

"पूरी बात बता!!!" वीर फिर गुर्राया.

और मजबूरन, सहमे हुए व्यक्ति ने फ़ौरन hi पूरा गुड़ गोबर कर दिया. साड़ी बात उगल के रख दी.

"W-Woh आदमी! W-Woh आदमी तुम्हे फ़साना चाहता है. कमरे में एक कैमरा लगा है. वह...! वह इसी होटल में किसी कमरे में बैठ के सब कुछ देख रहा है. A-Abhi तुम यहाँ आये हो तोह ज़रूर वह परेशां हो रहा होगा. A-Abhi उसका फ़ोन आएगा जैसे hi तुम वापस कमरे में जाओगे तोह."

अपनी आँखों को बंद कर वीर ने अपना गुस्सा शांत करना चाहा! क्या hi प्लान बनाया था इस रजत के बच्चे ने.

"हम्म! और फिर? फिर क्या करेगा?"

"F-Fir? M-Mujhe नहीं पता! पर... पर कैमरा लगाया है तोह ज़रूर रिकॉर्डिंग...! M-Mera कोई दोष नहीं है. M-Mujhe माफ़ करदुआओ~"

वीर का माथा और भी ज़्यादा ठनक गया, गुस्से में उसने अपनी आँखें फिर बंद करि,

[Master~ Be calm! Focus on Sigma instincts. Please~]

पारी की बात मान अंततः उसने वही किया. जिस नाम की उससे उम्मीद थी वही नाम सामने आया. रजत! चलो! अच्छा hi था. वैसे भी वीर उसके hi पीछे लगा हुआ था. और यहाँ रजत ने खुद को थाल में परोस के वीर के सामने अपने आप को रख दिया था.

अब वीर अनन्य का अपमान करे? ऐसा तोह हो नहीं सकता था? वह अच्छी तरह से रजत को कच्चा चबाने वाला था.

लॉस वेगास में निघतवलकेर, पिचर जेसो से वह भीड़ के अभी हाल hi में आया था. और ये एक चुटिया रजत उससे दम देने पर तुला हुआ था. अब जब शांत मैं से उसने ऐसा सोचा तोह उससे खुद पर hi हस्सी आ गयी.

एक जहातु! एक जहातु उससे हिलाने के सपने देख रहा था और षडियंत्र रच रहा था.

तेरे wasn't अन्य नीड तो रेस्त्रां हिमसेल्फ!

वीर ने अपने आप से कहा. और उसकी आँखें फिरसे खुली, पर इस बार वह लाल नहीं थी. उनमे इतनी गहराई थी की वह आदमी ज़्यादा देरर वीर की आँखों में न झांक सका.

*स्वीीररररलललललललल*

परदे की रोड से पर्दा फड़फड़ करके निकला और वीर ने उस आदमी को परदे से पूरा बाँध डाला.

"ोूमंफहह~!!????"

उसके मुँह में भी पर्दा लिप्त दिया वीर ने. और अगले hi शान,

"उउउऊँणरररररंममपहह्ह्ह्ह!!!???"

उस आदमी को एक सेकंड में अपने सामने जैसे स्वर्ग दिखाई दे गया. क्युकी वीर ने उससे रेलिंग से जो पलटा दिया,

कमर से बंधा वह बाँदा, रेलिंग पर परदे के ज़रिये लटक रहा था. फ्लोर फर्स्ट थी, और नीचे बस कबाड़ का धेरर.

हाथ परर और मुँह भी बंधे हुए थे. अगर यहाँ से गिरा तोह हाथ परर में से कुछ न कुछ तोह टूटना hi था.

और अब वह पछ्ता रहा था. पर अब पछताए क्या हॉट जब चिड़िया चुग गयी खेत?

वीर ने सिग्मा पर फोकस कर अपने गुस्से को शांत ज़रूर किया था. पर एक चीज़ उसके अंदर अब भी बरकरार थी. और वह थी,

रउथलेसस्नेस!

जो स्ट्रांगर अल्फा इंस्टिंक्टस का नतीजा था. पर उसी के संग अब एक और चीज़ जुड़ गयी थी. और वह थी, सिग्मा इंस्टिंक्टस की,

कॉमनेस!

[That's it Master~ Aapko aise hi karna hai. You don't have to become a hot-headed bull. But a calculated beast!]

*क्लिक*

बालकनी का दरवाज़ा खुला और वीर अपनी वही सौम्य मुस्कान लिए अंदर आया.

तीनो लड़किया उससे देख फिरसे खुश हो गयी. पर उन्हें क्या पता था की अभी अभी बालकनी के बाहर क्या हुआ था. अगर तीनो ने वीर का वह रूप देखा होता तोह तीनो की रूह काँप उठती.

'इसका मतलब वह यही कही होटल में है. पारी?'

*डिंग*

[Beowulf's blessings has been activated.]

"R-Raja कहा जा रहे हो?"

वीर मुस्कुराया और धीरे से बोलै, "ात ा फ्यूनरल!"

*स्लैम*

दरवाज़ा खुला और वह बाहर निकल गया.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

काफी समय बाद लौटा हु. जानता हु. पर हालात hi ऐसे थे. वापस से ले में आने के लिए समय लगेगा. तोह साथ बने रहिएगा. इस अपडेट से हर्र एक अपडेट इंटरेस्टिंग है. तोह हर्र बार की तरह लाइक्स ठोकने का और अपने रेवोस रखने का गाइस. Btw, इस अपडेट की लेंथ अराउंड 4.2क वर्ड्स है.


धन्यवाद! ✨
 
इंडेक्स है बीन अपडेटेड!

कमैंट्स के रिलीज बचे है. ी क्नोव. वह शाम के समय से रात्रि में दिए जायेंगे जल्द hi. :डिक्लेअर:

अर्च पेस पकड़ लेगा क्युकी अब में वापस आ गया हु तोह. थोड़ा इंतज़ार हुआ है. लेकिन हम स्पीड से आगे बढ़ेंगे. ये अर्च बोहोत रोचक है. सफर में साथ ज़रूर रहिएगा. :डी
 
काम चल रहा है मित्रो! जल्द hi हाज़िर हो जायेगा! और वैसे भी कल संडे है. जागो थोड़ी देरर और...!
 
अपडेट - 116 ~ टर्न थे तिदेस (2)

अब तक...

तीनो लड़किया उससे देख फिरसे खुश हो गयी. पर उन्हें क्या पता था की अभी अभी बालकनी के बाहर क्या हुआ था. अगर तीनो ने वीर का वह रूप देखा होता तोह तीनो की रूह काँप उठती.

'इसका मतलब वह यही कही होटल में है. पारी?'

*डिंग*

[Beowulf's blessings has been activated.]

"R-Raja कहा जा रहे हो?"

वीर मुस्कुराया और धीरे से बोलै, "ों ा फ्यूनरल!"

*स्लैम*

दरवाज़ा खुला और वह बाहर निकल गया.


अब आगे...

"ओह्ह! में तुम लोगो को बता भी नहीं सकती की मेरे साथ वह क्या हुआ."

चेहेक्ति हुई एक आवाज़ एक कमरे में गूंजी.

आवाज़ किसी और की नहीं, बल्कि पूर्वी की थी. वीर से मिलान के बाद वह जब घर वापस आयी तोह तेजल और भावना ने उस पर सवालों से हमला शुरू कर दिया था.

तेजल : क्या हुआ मासी?

भावना : पूर्वी! अब किस बात का इन्तिक़ाम ले रही हो मुझसे? बता भी दो न अब! में sunn'na चाहती हु.

पूर्वी : तुम्हारा बीटा भावना! तुम्हारा बीटा!! N-Nahi! हमारा बीटा! तेज ने जो मुझे फोटो में दिखाया था. उस से कही ज़्यादा सोना है मेरा लाडला. हाय~ काली आँखें, लम्बा kadd-kaathi, इतना प्यारा होगा मेरा लाल मेने सोचा भी नहीं था.

ये सुन्न के तेज के होंठो पर अपने आप एक हलकी मुस्कान सज्ज गयी. जैसे वह बताना चाह रही थी की आखिर भाई किसका है.

भावना : K-Kya कहा उसने? मेरे बारे में?

भावना के ये पूछते hi, पूर्वी को वीर का वह मायूस चेहरा याद आ गया. और फौरन hi वह नाराज़ होते हुए बैठ गयी. पूर्वी को इस क़दर देख भावना की चिंता मैं hi मैं और बढ़ गयी. वह jhatt-patt तेज़्ज़ क़दमों के साथ उसके बगल से आके सोफे पर बैठी,

भावना : K-Kya हुआ? कुछ कहती क्यों नहीं? क्या कहा मेरे बेटे ने? वह ठीक तोह है न?

पूर्वी : W-Woh ठीक है भावना!

भावना : T-Toh? फिर? क्या हुआ? क्या दिक्कत है? देखो! देखो पूर्वी! मुझे दर्रो मत. M-Mein जानती हु तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो.

जब पूर्वी और बेचैन हुई तोह भावना का डर और ज़्यादा बढ़ गया. वह अपनी सहेली की rag-rag से वाक़िफ़ थी. एक पल नहीं लगा भावना को ये समझने में की पूर्वी उस से कुछ छुपा रही थी.

और यहाँ बेचारी पूर्वी. अब एक दुविधा में फस्स चुकी थी. कैसे बताये की उसका बीटा अपनी माँ के चोरर जाने से बेहद दुःख में था!?

भावना : तुम्हे मेरी कसम! बताओ पूर्वी!

भावना ने सीधे कसम देदी. कसम के आगे, पूर्वी भी हार मान गयी. और वह असमंजस में palat'te हुए उससे देखि.

पूर्वी : भावना तुम...!

भावना : अब मेरी कसम भी तोड़ेगी पूर्वी? क्या तुम ये बात भूल गयी की तुम्हे वह पहले क्यों भेजा था?

पूर्वी : M-Mein...!

भावना : कहो भी अब!

पूर्वी (शिघ्स) : तुम्हारा ज़िक्र आते hi...!

भावना : !!??

पूर्वी (मायूस होते हुए) : तुम्हारा ज़िक्र आते hi वीर एकदम उदास हो उठा. ओह्ह! भावना! मुझ से उससे उस क़दर देखा तक नहीं गया. उसके चेहरे पर जो मायूसी थी. L-Lag रहा था की वही उससे अपनी बाहो में भर लू और उससे पुचकार के धेरर सारा प्यार दू. मैं कर रहा था की उसके सोने से मुँह को चूम चूम के पूरा प्यार लुटा दू उस पर. L-Lag रहा था की... की उससे अपने सीने में समां लू भावना! ऐसा लगा की में उससे कुछ भी होने न दू, ज़रा सी भी आंच न आने दू उस पर. मेरा बच्चा...!

पूर्वी कुछ देरर पहले के पल याद करते hi उनमे खो गयी. पर उसके ऐसा करने से न केवल भावना की बेचैनी बढ़ी बल्कि इस बार तेजल की बॉहे भी चिंता में सिकुड़ गयी,

भावना : ऐसा क्या कह दिया उसने? B-Bolo भी!!

पूर्वी : वह मुझसे पूछ रहा था. की इतने सालो तक, आप कहा थी मासी? माँ कहा थी? कहा थी मेरी सगी बहिन? ये सब इतने सालो में तब मुझसे मिलने क्यों नहीं आये?

बोलते बोलते उसकी खुद की आँखें नम्म हो गयी. तोह वही भावना और तेजल का बदन भी ठिठुर उठा. खासकर, तेजल का. क्युकी वह जानती थी वीर ने ऐसा क्यों कहा था. वह उसके सच से पूरी तरह वाक़िफ़ जो थी. न जाने कितना दर्द उसने उस परिवार में सहा था. न जाने कितनी रातें वह इंतज़ार करता होगा की कभी न कभी उसकी असली माँ और बेहेन आएँगी और उससे इस dal-dal से चुर्रा के ले जाएँगी.

पर ऐसा न हुआ.

और इस बात का बोध होते हुए hi, तेजल खुद को रोक न पायी. वह तुरंत hi पलट के घूम गयी. उसकी आँखों से ासु अपने आप बहने लगे. अपने चेहरे को छिपाने के लिए वह मुद गयी.

पूर्वी : मेने उससे समझाया भावना! की ये सब बातें बड़ो के बीच होंगी. तुम कई साड़ी बातो से अनिभिज्ञ हो वीर. तुम कई साड़ी बातें नहीं जानते हो. तुम्हारी माँ तुमसे बेहद प्यार करती है मेरे बच्चे. B-Behad प्यार!

भावना : F-Fir?

पूर्वी : *स्निफ्फ* फिर मेने उससे बताया. की तुम्हारी माँ तुमसे मिलना चाहती है.

भावना : T-Toh?

पूर्वी : तोह उसने कहा... *स्निफ्फ* उन्हें देख के लगता नहीं की वह मुझसे मिलने के लिए बेताब है.

भावना : ैसाआ नाहीई हैईईई!!!!

अचानक hi वह चिल्लाते हुए उठ कड़ी हुई. उसके नैन भी भीग गए.

भावना : W-Woh ऐसा कैसे...!? कैसे वह ये सोच सकता है? माँ हु उसकी!! *स्निफ्फ* माँ हु में उसकी पूर्वी!!! जन्म दिया है मेने उससे!! मेने पैदा किया है उससे! W-Woh कैसे...!?

पूर्वी : शठ!! शांत! शांत भावना! अरे उस बेचारे को नहीं पता है कुछ. तुम कैसे उस पर इस बात के लिए गुस्सा हो सकती हो? उसकी नज़रो में तुम एक ऐसी माँ हो जो बचपन में अपने बेटे को चोरर के भाग गयी.

पूर्वी के आखिरी शब्द किसी खंजर की तरह भावना के दिल में जाके घुप गए. और वह रट हुए अपनी साड़ी के चोरर को अपने दातो टेल दबाये बस सिसक सिसक के ासु बहाती रही.

भावना : A-Aur? और क्या कहा उसने?

पूर्वी : बस! बस अब और न बुलवाओ मुझसे भावना. कष्ट तुम्हे hi होगा वर्ण.

भावना : N-Nahi!! कहो!

पूर्वी फिर भावना की ज़िद्द के आगे हार गयी,

पूर्वी : मेने उससे बताया. की तुम्हारी माँ वाक़ई तुमसे मिलने के लिए आतुर है. तुम जैसा सोच रहे हो वैसा कुछ भी नहीं है. पर उसका जवाब पता क्या था? बोलै...! की रहने दीजिये मासी. ये सांत्वना के बोल मत कहिये. आखिर हु तोह में अकेला hi न? वर्ण माँ को आना होता. तोह कब का आ जाती!

और बस! ये सुनते hi भावना उठ के वह से भाग गयी. खिड़की के पास वह कड़ी होक बस रोटी रही. पूर्वी का भी यही हाल था. और तेजल का भी.

भावना : *स्निफ्फ* वह केसा है? घर में सब-

पूर्वी : पूछा था मेने. *स्निफ्फ* की घर में सब कैसे है? बताया उसने की सब बेहद अच्छे है. धेरर सारा प्यार मिला उससे इन् बीते सालो में. घर के सदस्यों ने कोई कमी नहीं होने दी उससे. कह रहा था की घरवाले बोहोत प्यार लुटाते है. अच्छे खासे कॉलेज में उसका और उसकी बहनो का एडमिशन है. सब साथ जाते है.

भावना (ासु पोछते हुए) : काम से काम घर में तोह उससे प्यार मिला. उसके दादा जी ने ज़रूर कोई कमी नहीं छोर्री होगी. ये तोह मुझे विशवास है. *स्निफ्फ*

दोनों अपने ासु पॉच मुस्कुरायी. पर तेज...!

जो वही कड़ी हुई थी. उस से अब और बर्दाश्त न हुआ. उस से अब और सहा न गया. वह सिसकते हुए भागते हुए अपने कमरे में घुस गयी.

भावना : T-Tej???

पूर्वी : जज़्बात है! जाने दो भावना! थोड़ी देरर उससे अकेले रहने दो.

भावना : H-Hmm!

*थुड़*

दरवाज़ा बंद करते hi तेज के ासु मोती मोती बूंदे बन्न के ज़मीन पर गिरने लगे. वह दरवाज़े से सत् के कड़ी फफक फफक कर रोटी रही.

क्युकी पूर्वी की बातें उसके दिल को चीयर के रख रही थी. क्या कहा था वीर ने उसकी मासी से? घर वालो ने बोहोत प्यार दिया? बोहोत ख़याल रखा?

थू!!!

क्या तेज जानती नहीं थी? जानती नहीं थी की किस किस्म का व्यवहार किया गया था उसके चहीते भाई के साथ? कैसे उससे धक्के मार के बाहर निकला गया था? कैसे उसका एक्सीडेंट हुआ था? कैसे उसका सांप भाई प्रांजल उसको नीचे दिखाने के लिए मौके ढूंढता रहता था? सब जानती थी.

निधि ने उससे सब कुछ जो बताया हुआ था. वह सब जानती थी. उसके बावजूद उसके भाई वीर ने पूर्वी को एक शिकायत तक नहीं की.

*स्निफ्फ*

उसके ासु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.

'हाउ कैन यू बे लिखे थिस???? स्टुपिड!!!!'

वह जोरर से मैं में hi चिल्लाई! लेकिन फिर कुछ सोच उसने अपने ासु पोछे और अगले hi शान उसकी आँखों में उसके नाम के भाति एक तेज दिखाई पड़ा.

*क्लिक*

दरवाज़ा खोल वह वापस बाहर आयी. पूर्वी और भावना अभी भी बातो में लगी हुई थी.

भावना : तुम्हे पक्का यकीन है की वह कुछ भी नहीं हुआ!?

पूर्वी : हां बाबा! अरे हम लगभग आधे घंटे के भी ऊपर एक साथ बैठे हुए थे. तेरे वास् नथिंग ओड तेरे भावना! सब कुछ नार्मल hi था. में दावे के साथ कह सकती हु की वह सब जा चुके है. A-Aur यही सही समय है वीर को अपने पास बुलाने का. हम कल hi उससे यहाँ बुलाएँगे. और तुम आखिर कार अपने बेटे से मिल पाओगी भावना!

भावना : K-Kal?

पूर्वी : तोह कभी? अब एक पल की भी देररि नहीं होएगी. एक बिछड़े हुए माँ और बीटा, एक दूसरे के सामने होंगे. और एक भाई बहिन भी!

वह तेज को बाहर आते हुए उससे देख बोली,

तेजल : कल?

पूर्वी : हाँ!? क्यों? कल कोई दिक्कत है क्या?

तेजल : कल नहीं मासी!

पूर्वी : हँ??

तेजल : मासी! आप आज hi उस से मिलके आयी हो. आज hi उससे इतना सब कुछ पता चला है. T-Toh फिर अचानक से कल ऐसे में. मेरे कहने का मतलब है. हमे उससे एक दिन का वक़्त देना चाहिए. बात को पचाने का. कही ये मीटिंग गड़बड़ न चली जाए. जितना बेताब माँ है. उतना hi बेताब में भी हु. ी जस्ट... ी जस्ट don't वांट हिम तो हेट में!

तेजल की बात सुन्न भावना ने भी कुछ सोच के हामी भरी,

भावना : M-Mera ख़याल से, तेज सही कह रही है. कही जल्दबाज़ी के चक्कर में ऐसा न हो की वह मुझसे और रूठ जाए पूर्वी!

पूर्वी : अब में इसमें क्या बोलू भला? जब तुम दोनों ने hi डीडे कर लिया है. तोह यही सही. कल नहीं! परसो hi बुलाएँगे हम उससे.

और इस चर्चा को यही विराम लग गया. परन्तु तेज की आँखें कही और hi केंद्रित थी. कल तोह वह अपना मास्टरप्लान अमल करने जा रही थी.

कल भला कैसे वह वीर को बुला सकते थे.

'वेट फॉर में...! बरोथेर!'

वह सोचते हुए पुनः अपने कमरे में चली गयी.

***

मुंबई.

होटल पैराडाइस.

नाईट ~ 10:34 पं

*टक* *टक* *टक*

दो परर चलते हुए आगे बढ़ एक कमरे से बाहर निकले.

"B-Babyyy? K-Kaha जा रहे हो? बीएड तोह इधर है!!"

"अब इतना भी क्या शर्माना राजा? आ भी जाओ न!?"

"हाँ! घबराओ नहीं! हम तुम्हे खा थोड़ी जायेंगे फुफुफु~"

तीन लड़कियों की cheh-chahaane की आवाज़ उसी कमरे के अंदर से आयी. पर वो परर नहीं थामे.

और रूम से बाहर निकल वह शख्स ृक्क के खड़ा हो गया.

तोह वही इसी होटल के एक अन्य कमरे में एक आदमी दो ख़ूबसूरत लड़कियों के बीच बैठे लैपटॉप में कुछ देख रहा था जब अचानक hi वह उठ के खड़ा हो गया.

"K-Kya हुआ?? Y-Ye हराम खोर लड़कियों को चोरर के रूम से बाहर क्यों जा रहा है? और वह मादरचोद लड़का फ़ोन भी नहीं उठा रहा."

जी हाँ! ये कोई और नहीं, रजत hi था.

"K-Kya हुआ मिस्टर? आइये न! अभी तोह पूरी रात बाकी है."

एक लड़की रजत के सीने में अपना हाथ फिराते हुए बोली.

तोह उसी वक़्त,

*चाताआआअक*

एक ज़ोरदार छाता उसके गाल पर आके पड़ा.

"आअह्हह्ह्ह्हहननननन~"

और वह धड़ाम से वही गिर पड़ी.

रजत : चुप कर रंडी!!! मुझे डिस्टर्ब मत कर!

उसकी इस भद्दी हरकत को देख दूसरी लड़की उससे गुस्से में देखि और बोली,

लड़की : ू मिस्टर! देखो! तुमने पैसे दिए है. हमे खरीदा नहीं है. समझे? तुम इस तरह से-

पर अभी उसकी बात पूरी होती की तभी उस से पहले,

*चटाककककककक*

"नननंग्ग्ग्ग्हःहःहः~"

रजत ने उस दूसरी लड़की को भी थप्पड़ जड़ दिया.

रजत : कुटिया! अगर अब एक शब्द भी निकला न तोह तेरी गांड में रोड घुसेड़ दूंगा रंडी की बच्ची!!

वह दोनों hi लड़किया थोड़ा सेहमते हुए उस से पीछे होक बैठ गयी. जब तक टाइम लिमिट ख़तम नहीं हो जाती, तब तक वह यहाँ से जा नहीं सकती थी. पैसा उन्होंने एडवांस में जो ले लिया था.

"आज से... *स्निफ्फ* आज से में कभी भी पैसे एडवांस में नहीं लुंगी."

पहली लड़की अपनी सहेली से बोली. और दोनों hi चुप चाप वह से जल्द से जल्द निकलने का इंतज़ार करने लगी.

"दमन आईटी!!!!! वह गांडू फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा है!!? और ये रंडवा कहा चला गया अब? तीन तीन छोकरिया लाके दी पर गांडू पता नहीं कहा निकल गया. बेहेन की छूट अब में रिकॉर्ड कैसे करू? K-Kahi? कही इस मादरचोद को पता तोह नहीं चल गया? N-Nahi!! इतना दिमाग इस लवडे में होगा क्या!? शायद कुछ काम से गया हो?"

रजत पूरी तरह से पैनिक कर चूका था. वह खुद hi अपने आप से सवाल पूछ रहा था और खुद hi उनके उत्तर भी दे रहा था.

उसने कुछ देरर इंतज़ार करने की कोशिश की. पर हर्र बढ़ते सेकंड उसकी गांड उतनी hi phat'ti जा रही थी.

ये वीर का बच्चा आखिर कहा निकल गया था? अगर आज उसने वीर को लड़कियों के संग रंग रेलिया मनाते हुए रिकॉर्ड नहीं किया तोह उसका सारा का सारा प्लान चौपट हो जाने वाला था. अब ऐसे में वह शांत कैसे बैठ सकता था?

उधर वही बाहर एक कॉरिडोर में खड़े वीर की आँखें पुनः लाल थी.

हियरिंग सेंस कई गुना बढ़ चुकी थी. वह आहिस्ता आहिस्ता अपने जेब में हाथ डाले आगे बढ़ा.

"बेबी दाल भी दो अब!!! मुआअआआह्ह्ह्ह~"

"हाहाहा~ अरे क्या hi मैच था! बैठो हाइलाइट्स आ रही होंगी!"

"खाने का केसा क्या करना है मम्मी?"

वीर जैसे hi कुछ रूम्स के बाहर से निकला. अंदर हो रही बातें उससे साफ़ साफ़ सुनाई दे गयी. पर उससे इन् सब से मतलब नहीं था.

बोवुल्फ़ की खासियत थी ये. सेंसेस को बढ़ाना!

हे कुड ैसिलय पिक थे सलइतेस्ट ऑफ़ थे साउंड्स मेड नियर हिम.

[Master~ Agar woh yaha nahi mila. Then definitely upper floor pe usse hona chahiye.]

पर उसकी कोई ज़रुरत hi नहीं थी. क्युकी जैसे hi वीर कॉरिडोर के आखिरी रूम के बाहर पहुचा, उससे एक आवाज़ धीमे से सुनाई पड़ी,

"मादरचोद!!! वीर!! कहा है तू? मेरे सामने आया न तोह लवडे तेरी खर्र नहीं!!"

वीर सक्षम था अपने इर्द गिर्द काम से काम 8 से 10 मीटर तक किसी की भी खुसपुसाहट sunn'ne के लिए.

ये वही आवाज़ थी जिसकी वीर को तलाश थी.

*डिंग डाँग*

"हहहह??"

रजत के रूम की घंटी बजी और वह अपने होश में आया.

'इस वक़्त? कौन?'

उसने दरवाज़े के पीप होल में से झांकते हुए देखा पर उससे बाहर कोई भी नज़र नहीं आया.

और रजत बच्चो का मज़ाक समझ उन्हें गालिया बकते हुए वापस लैपटॉप की स्क्रीन के सामने आके बैठ गया.

*डिंग डाँग*

पर एक बार फिर वही घंटी बजी और फिरसे रजत उठ बाहर झांकते हुए देखा. लेकिन नतीजा वही. बाहर उससे कोई भी दिखाई न दिया.

अंदर hi अंदर वह बहुत ज़्यादा घबरा गया था अब.

उसने दरवाज़ा खोला पर एकदम से नहीं. वह दरवाज़े के ठीक पीछे खड़े होते हुए धीरे धीरे अपना सर्र निकाल के खोलता गया.

और अभी उसने थोड़ा सा hi खोला था की,

*Baaaaaangggggggggg*

दरवाज़े पर एक तेज़्ज़ लात आके पड़ी तोह पूरा का पूरा वह दूर hi दीवार से भिड़ते हुए खुल गया और साथ hi,

"आआआर्गग्घहहहहहह!!!!"

ऐसा लगा जैसे एक सूअर ghur-ghuraya! और जब नज़र सामने पड़ी.

"ओह्ह्ह्ह! ये तोह वाक़ई एक सूअर निकला पारी!"

[Right Master!]

अंदर मौजूद लड़किया वीर को ऐसे रजत को लताड़ते देख और सेहम गयी. ये सब कुछ चल क्या रहा था? उनकी होटल का मैनेजमेंट सो रहा था क्या?

और उन् दोनों लड़कियों को फिर राहत के बोल सुनाई पड़े,

"तुम दोनों! अगर जाना चाहती हो तोह अभी के अभी निकलो!"

[Wait Master! Let's use them!!!]

'हँ?'

[I have a plan Master!]

'ओह्ह्ह!!! ी सी!'

वीर मैं hi मैं मुस्कुराया. और उसने अपनी बात पलटी,

"रुको!!! मेने अपना इरादा बदल दिया है. तुम दोनों यही रुकोगी!!! और जब तक में न कहु. यहाँ से निकलना मत."

दोनों लड़किया जो खुश होते हुए यहाँ से निकलने hi वाली थी, उनकी वीर की बात सुन्न सिटी पित्ती गम हो गयी.

रजत ने जैसे hi वीर को देखा उसकी गांड सूख गयी.

रजत : T-Tu??? यहाँ???

वीर (स्माइल्स) : क्यों? क्या में यहाँ नहीं आ सकता?

रजत : T-Tum...!

वीर : तोह इस सब के पीछे तेरा हाथ है हाँ??

वीर की आँखें अधखुली थी. वह बड़ी hi आसानी से रजत की ऑर्डर बढ़ा. सिस्टम मिलने के बाद से वीर ने कभी भी अपने आप को एक दयावान व्यक्ति नहीं माना था. अल्फा इंस्टिंक्टस स्ट्रांग होने के बाद वह जानता था की वह एक निर्दयी इंसान भी बन्न चूका है.

अगर कोई भी अब उसके खिलाफ जाने की कोशिश करता, या उसके साथ वालो को नुक्सान पहुचाने की ज़रा भी चूक करता, तोह वीर को पता था उस के साथ क्या करना था. इन् हराम खोरो को घुटने पर टिका के माफ़ी मंगवाना अच्छे से आता था उससे.

अचानक hi वीर के अंदर से एक खौफनाक और उत्पन्न हुआ और रजत का बदन उससे देखते hi thar-thara उठा.

आज उससे एहसास हुआ. की ये सामने खड़ा लड़का कोई आम लड़का नहीं था. एक दैत्य था...! दैत्य! आखिर बार तोह वीर ने बस कल्लोर पकड़ के उससे फेका hi था. पर अब? अब शायद कुछ और भी बत्तर होने वाला था.

पर वह कहते है न, घमंड में चूर होना. इतने सब के बाद भी रजत का अभिमान नहीं गया,

रजत : हाहाहाहाहा~ T-Toh क्या? हाँ मेने hi ये सब करवाया है. में hi इस सब के पीछे हु. क्या उखाड़ लेगा बे तू मेरा? मादरचोद! में लॉयर हु. समझा न? मेरा एक सेंटेंस तुझे सलाखों के पीछे सालो तक सड़ने पर मजबूर कर सकता है. समझा गांडू?

वीर : ओह्ह्ह?

वीर फिरसे उसके पास आने लगा,

रजत : M-Mujhe हलके में मत ले साले. तुझे तोह में अभी बताता हु.

रजत ने वह रखा एक टीपॉट उठाया और,

*वहुवूसस्शह्ह्ह्ह*

जोरर से उससे वीर के चेहरे पर फेका. परन्तु, वीर ने अपना सर्र हल्का सा साइड करके डॉज कर लिया.

और अभी रजत कुछ और फेकने के लिए ढूंढता पर देररि हो गयी.

*Bammmmmmmmmm*

वीर का घुटना ऊपर तेज़्ज़ रफ़्तार से उठाते हुए आया और रजत के पेट पर इतनी जोरर से पड़ा की उसके मुँह से अंदर का पूरा खाना निकल आया.

"ऊऊआखखह्ह्ह्ह!!!"

मुँह से साड़ी उलटी निकल आयी उसकी.

वीर : तुम!! इसके कपडे उतारो!

लड़की : E-Ehhh??

वीर ने एक लड़की से कहा तोह वह लड़की हैरान रह गयी. लेकिन उसने वीर को मन करने की हिम्मत भी नहीं की.

कुछ hi पल में रजत सिर्फ एक कच्चे पर आ चूका था.

वीर : और तुम!! कैंडल्स लेके आओ!

लड़की : H-Haan!!

वह लड़की भागी और रूम में hi जल रही दो कैंडल्स लेके आयी.

रजत ने जब अपनी आँखें खोल खुद को संभाल के अपना हाल देखा और वीर के हाथो में कैंडल तोह उसकी रूह काँप गयी.

रजत : K-Kya कर रहा है तू?

वीर : तुम! रस्सी लेके आओ!

लड़की : R-Rassi??

वीर : हम्म!

वह लड़की भागते हुए गयी और कही से रस्सी धुंध के लायी.

रजत उठ के अपने हाथ परर चलाता रहा पर हर्र बार उससे एक ज़ोरदार थप्पड़ मुँह पे जड़ दिया जाता.

और शान भर बाद hi वह सोफे पर रस्सियों से पूरी तरह बांध चूका था.

रजत : मादरचोद!!! चोरर मुझे!!! मेने कहा चोरर!! तू जानता नहीं है मुझे!!! में एक सेकंड में तेरी-

*चटाककककककक*

एक और झापड़ और रजत शांत पद गया.

वह आगे बढ़ा और उसने कैंडल से गरम गरम मॉम रजत के बदन पर गिरायी.

"Aaaaaaaaaaarrrrrggghhhhh!!!"

वीर : बड़ा शौक है न तुझे? हम्म? इस फेटिश का? ज़रा खुद भी तोह एक्सपीरियंस कर भोस्डिके!!!

रजत की दर्द भरी चींखे उस कमरे में गूंजती रह गयी.

वह मॉम कही उसके पेट पर गिरती तोह कही गाल पे तोह कही कान पे. वीर पूरे मज़े में साथ कैंडल को पिघला रहा था.

वीर : इसी तरह निधि ma'am को तड़पाया था न तूने? हराम खोर!!!!

"Aaaaaaaaaaarrrrrggghhhhh!!!"

रजत : *हफ़* *हफ़* ः~ हाहाहाहाहा~ हाँ बहनचोद!!! निधि मेरी रंडी है हाहाहाहा~ क्या में जानता नहीं तू उसके पीछे क्यों पड़ा है? मादरचोद!!! शाना बनता है!? तुझे भी तोह उसका गरम बदन चाहिए है. है न???

रजत की बात सुन्न वीर का माथा ठनक गया. रजत उससे गालिया दे तोह भी वीर सेह लेता. पर निधि को रंडी कहना? वीर की आँखें गुस्से से लाल हो गयी.

और उसने थप्पड़ो की बरसात कर रजत का पूरा मुँह सुजा दिया.

पर उसके बावजूद रजत की हेकड़ी नहीं गयी.

रजत : हहहहह~ लवडे में सही था. M-Mein सही था मतलब!! हाहाहाहा!! S-Sunn ले साले! मेने...! मेने छोड़ा है उससे हाहाहा!! फटीचर की औलाद!!! तू भिकारी की तरह दुसरो का बचा hi खा हाहाहाहाहा!!! स्वाद तोह चख hi लिया होगा तूने अब तक. है न? और अगर नहीं चखा. तोह जहातु है तू एक नंबर का. हाहाहाहा! गांड घिसने में लगा है...!!

वीर का गुस्सा इतना बढ़ गया था की रजत की क़ब्र शायद आज इधर hi बन्न जाती. पर पारी ने उससे शांत किया.

वीर (स्माइल्स) : चूतिये! Don't यू अंडरस्टैंड!?

रजत : हहह?

वीर : I'm स्नैचिंग एवरीथिंग फ्रॉम यू! पहले निधि ma'am और जूही. अब ध्रुव! फिर तेरा घर, जायदात, संपत्ति...! सब कुछ!

रजत : T-Tu!!!?

वीर ने उससे बोलने का कोई मौका नहीं दिया. वह वापस से उस पर मॉम गिराना शुरू कर दिया और रजत की चींखे फिर गूंजने लगी.

*रिंग* *रिंग*

इसी के बीच वीर का फ़ोन बज उठा. कॉलर रागिनी थी!

वीर : Hello?

रागिनी : हाँ वीर!? कहा हो? कब के गए हो तुम? तुम्हे पता भी है टाइम क्या हो रहा है? अभी तक किसी ने भी डिनर नहीं किया है तुम्हारे कारण.

"आआआर्गग्घहहहहहह!!!!"

रागिनी : Y-Ye आवाज़ किसी?

वीर : कुछ नहीं भाभी! में मूवी देखने आया था.

रागिनी : M-Movie??

वीर : येह! कारन मुझे घसीट के ले आया. इसलिए वही पे हु. बस निकल रहे है हम.

"आआआर्गग्घहहहहहह!!!"

रागिनी : T-Tum मूवी hi देख रहे हो न? ये इतनी जोरर से कौन चिल्ला रहा है?

वीर : एहम! कुछ नहीं! हीरो गुंडे को बुरी तरह पीट रहा है. बस वही सन चल रहा है.

रागिनी : O-Ohhh! पर तुम जल्दी वह से निकलो. तुम्हे याद है न मेने क्या मंगाया था?

वीर : क्या मंगाया था?

रागिनी : अरे दही मंगाया था न तुमसे!?

वीर : ओह्ह! राइट राइट! कौन सा दही?

रागिनी : अरे मीठा वाला!

वीर : ओह्ह!! हम्म! फिर तोह ये लेना hi पड़ेगा. क्युकी मेरे पास तोह सिर्फ खट्टा वाला है.

रागिनी कुछ देरर तक वीर की बात समझी नहीं. पर जैसे hi उससे समझ आया की वीर क्या कहना चाह रहा था उसके गाल एकदम सुर्ख लाल पद गए.

रागिनी (ब्लशेस) : B-Badmaash!!! अभी के अभी घर आओ!

*कॉल एंड्स*

और रागिनी ने शर्म के मारे कॉल एन्ड कर दिया. वीर ऐसी बाते करता नहीं था. पर उससे करना पड़ा. ताकि रागिनी कॉल कट कर सके जल्दी.

और हुआ भी वही.

*डिंग डाँग*

कमरे की घंटी बजी और उन् दोनों में से एक लड़की ने जैसे hi गेट खोला, बाहर इतने सारे आदमियों को देख बेचारी के चेहरे से उसका रंग उड़द गया.

बाहर बलहार और उसके आदमी खड़े हुए थे. वह सब के सब अंदर आये और वीर के बगल से आके खड़े हो गए.

वीर : तुम्हे पता है न क्या करना है?

बलहार : जी बॉस!

वीर मुदा पर जाने से पहले उसने बलहार के कान में एक और बात कही. बसीकली, ये वही प्लान था जो पारी ने उससे बताया था.

और बस, बिना मुड़े वह आहिस्ता आहिस्ता वह से निकल गया.

बलहार : लड़को! मेहमान की खातिर दारी तोह करो ज़रा.

लड़के : जी बॉस!

बलहार : और तुम दोनों!

लड़की : अठ्न्न!!??

बलहार : तुमसे एक ज़रूरी काम है. जैसा जैसा में कहु. बस वैसा वैसा hi करना है तुम्हे. अगर करोगी तोह अच्छी खासी रकम मिलेगी.

लड़किया : Th-Theek है!

बलहार (स्माइल्स) : बढ़िया!!

***

इधर होटल से नीचे उतारते hi वीर के मैं में नोटिफिकेशन्स की बरसात शुरू हो चुकी थी.

*डिंग*

[Mission : Turn the tides has been completed.]

*डिंग*

[You have been rewarded 3000 points.]

*डिंग*

[System has reached level 8]

*डिंग*

[Translator has been upgraded.]

[Host now holds the knowledge of all the languages. Host can speak any language now.]

*डिंग*

[System know holds the world's knowledge.]

[As long as the information is present in the world. System will be able to grasp it. In other words, host doesn't need any internet to search for information. System can do it.]

*डिंग*

[24 hour limit from Quest Hunt Card Slot has been eradicated.]

[Host can switch cards now however he wants.]

और उसके बाद वीर के मैं में एक नयी आवाज़ सुनाई दी,

[Allow me to serve you...! Master!!!]

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

अपडेट सैटरडे का hi कंसीडर करेंगे हम! अपडेट साइज इस अराउंड 4क वर्ड्स.

लाइक्स ठोकना न भूलना और रेवोस रखने का.


धन्यवाद! ✨
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 117 ~ It's बीन ा व्हिले, सीस!


अब तक...

*डिंग*

[24 hour limit from Quest Hunt Card Slot has been eradicated.]

[Host can switch cards now however he wants.]

और उसके बाद वीर के मैं में एक नयी आवाज़ सुनाई दी,

[Allow me to service you...! Master!!!]


अब आगे...

क्या कुछ नहीं हुआ था कल? कल रात की घटना चार दीवारों के अंदर घटित हुई और उसकी खबर भी किसी को नहीं लगी.

क्युकी धमाका तोह अगली सुबह होने वाला था. जो की हुआ भी,

"Y-Ye में क्या पढ़ रही हु??"

रागिनी सुबह सुबह हाथो में अखबार लिए अपनी फटी आँखों से हैडलाइन पढ़ रही थी. और उसमे साफ़ साफ़ लिखा हुआ था,


मुंबई स्थित हाई कोर्ट में काम कर रहे जाने माने वकील रजत तिवारी पैराडाइस होटल में दो लड़कियों के साथ दुष्कर्म करते हुए पकडे गए.

रागिनी : Y-Ye तोह तुम्हारी Ma'am के वह, हस्बैंड है न? वीर?

वीर जो चाय की चुस्की का आनंद ले रहा था उसने हामी भरते हुए जवाब दिया,

वीर : हम्म!

श्वेता : क्या आया है?

रागिनी : ये देखिये न! दो लड़कियों के साथ दुष्कर्म करता हुआ पकड़ा गया है पैराडाइस होटल में.

रागिनी ने अखबार थमाते हुए श्वेता को दिया. पूरा का पूरा लम्बा पैराग्राफ छपा हुआ था उसमे. साथ hi कुछ पिक्टुरेस भी डाली हुई थी. जिसमे चेहरे ब्लर्रेड कर दिए गए थे.

श्वेता : छियई!! पत्नी से तलाक लिया तोह ये सब करेगा?

रागिनी : वही तोह! मुझे तोह पहले से hi पता था की वह आदमी ठीक नहीं है. अच्छा हुआ तुम्हारी निधि ma'am ने तलाक ले लिया वीर उस आदमी के साथ. वर्ण वह कभी सुखी नहीं रह पाती.

आभा (खुसपुसाते हुए) : क्या सारे पति ऐसे hi होते है?

उसकी धीमी सी आवाज़ सुन्न, श्वेता, रागिनी और सुमन तीनो की नज़रे उस पर टिक गयी. और तीनो hi शांत रह गयी. ज़ाहिर है तीनो यहाँ अपने अपने पतियों से दूर थी. एक प्रकार से उनसे रिश्ता ख़तम कर के बैठी हुई थी. आभा का भी यही हाल था.

वीर : नहीं! ऐसा नहीं है! सारे लड़के ऐसे नहीं होते.

सोनाली : हाँ हाँ! बड़े आये!! हम्फ!

सोनाली ने चिढ़ाते हुए जीभ दिखाई और वापस से अपनी चाय पीने लगी.

भूमिका : पर कितनी अजीब बात है.

श्वेता : क्या अजीब बात है?

भूमिका : माँ, ये निधि ma'am के हस्बैंड जो है वह बोहत फेमस लॉयर है. तोह ऑब्वियस्ली इनके कितने कनेक्शंस होंगे. उसके बाद भी कोई इनके होटल रूम में घुस गया और मतलब पकड़ hi लिया. इन फैक्ट पुलिस भी डायरेक्ट पकड़ती तोह I'm सूरे ये रजत पुलिस को भी मन लेता. लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाया.

श्वेता : तोह?

भूमिका : तोह ये की, किसी स्ट्रांग पार्टी ने उससे पकड़ा है. मय्बे कोई कांस्पीरेसी? कोई षडियंत्र? पॉलिटिक्स? आपको क्या लगता है?

श्वेता : M-Mujhe कैसे पता होगा भला?

सुमन : ये सब उसके कर्मो का नतीजा है. क्यों? है न मालिक?

सुमन वीर को देख आँख मारते हुए बोली. क्या वह जानती नहीं थी की रजत का ये हाल किसने करवाया था? क्यों वीर कल देरर से घर आया था? वीर के दिल में निधि की क्या जगह थी? सब जानती थी वह!

वीर : एहम! बिलकुल!

वीर ने पुनः हामी भरी और वह उठ के खड़ा हो गया.

रागिनी : अरे? अभी नाश्ता रेडी हो रहा है. अभी से क्यों उठ गए?

वीर (स्माइल्स) : मुझे ये देने जाना है. इसलिए निकल रहा हु.

रागिनी : अरे पर नाश्ता?

वीर : वही खा लूंगा. आप चिंता मत करिये.

रागिनी : P-Par-

वीर : दिन में आऊंगा न भाभी! तब खाना परोसियेगा! चलता हु!

और वीर वह से निकल गया. रागिनी उदास मैं से अपने कामो में लग गयी. वह ज़्यादा से ज़्यादा समय वीर के साथ बिताना चाहती थी. पर ऐसा हो नहीं पा रहा था.


'मेरे दिल की बातें ये लड़का समझता क्यों नहीं है? जानती हु की इससे बिज़नेस में ध्यान देना है. जल्दी आगे बढ़ना है. पर! पर अपनी भाभी को क्यों भूल जाता है ये?'

वह खुद के विचारो में लीं हो गयी,

'एक मिनट! M-Mein भी तोह वीर की मदद कर सकती हु न? वीर ज़्यादातर बाहर रहता है. ऐसे में अगर में उसके कामो में मदद करू तोह...! हमे ज़्यादा से ज़्यादा समय एक दूसरे के लिए मिल पायेगा. R-Right! मुझे वीर से बात करनी होगी.'

"क्या सोच रही हो?"

वह मैं hi मैं मुस्कुरा रही थी जब पीछे से एक अचानक आवाज़ आयी तोह वह डर के मारे उछाल गयी,

रागिनी : आह्हः!!!??? ओह्ह्ह! A-Aap हो!

श्वेता : हम्म! क्या सोच रही थी?

रागिनी : K-Kuch भी नहीं! बस ये वीर अपना नाश्ता किये बजर्र hi चला गया. वही सोच रही थी.

श्वेता : हम्म! अपनी सेहत पर बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा है. T-Tum चिंता मत करो. R-Raat को में उससे गर्म दूध का गिलास जाके दे आउंगी और उससे पिलवा दूंगी.

रागिनी : O-Ohhh!

श्वेता : तुम मेरे बेटे के लिए न, वह चने और बादाम भिगो के रखा करो. और सुबह दिया करो इससे. अगर ये ध्यान नहीं दे रहा तोह हमे hi इसकी सेहत पर ध्यान देना पड़ेगा.

रागिनी (स्माइल्स) : J-Jii! वैसे, है तोह वह हर्र तरफ से फिट. फुफु~

श्वेता : सिर्फ बाहरी फिटनेस कोई फिटनेस नहीं होती रागिनी. अंदर से भी इंसान को फिट होना चाहिए. नुट्रिएंट्स, विटामिन्स, तोह शरीर में जाने hi चाहिए. में उसके लिए अच्छी डाइट प्रेपर करुँगी. अपने हाथो से.

रागिनी (स्माइल्स) : जैसा आपको ठीक लगे.

और दोनों hi महिलाये अपने कामो में व्यस्त हो गयी.

***

पर अखबार तोह सभी के घर आता था. और सभी खबरे पड़ते थे. जहा कुछ लोग इस खबर से खुश थे तोह वही कुछ नाराज़ भी.

"इसकी माँ की छूट बहनचोद!!!!"

*थक*

नेवसपपेर को जोरर से ज़मीन पर पटकते हुए एक लड़का चिल्लाया. सुबह सुबह उसको अखबार में कुछ और देखने की गुंजाइश थी. लगा था की जो वह बरसो से चाह रहा था वह आज सुबह देखने को मिलेगा.

पर ऐसा न हुआ. उल्टा उसका सारे भांडा फूट गया.

"मादरचोद! एक काम नहीं होता इन् लावड़ो से!!!"

वह फिर से गरजा. ये कोई और नहीं प्रांजल hi तोह था. उससे लगा था की आज नेवसपपेर के फ्रंट पेज पर वीर की खबर छपी होगी. पर उसका पास पलट चूका था.


'कहा गलत रह गया में? N-Nahi!! सब कुछ तोह सही था. Y-Ye ज़रूर! ये ज़रूर उस चूतिये वकील के कारण hi हुआ होगा. भड़वे ने मेरा नाम भी उगल hi दिया होगा. बहनचोद! इसकी माँ की...!! सहित!!! क्या करू?? डैड को फ़ोन!? नहीं! वह और भड़केंगे.'

सोचते सोचते वह इधर से उधर टहलने लगा.

'उन्होंने तोह पहले hi मन किया था. उन्हें कॉल नहीं कर सकता. फिर भी उन्हें पता तोह चल hi जायेगा. वीर!!! वीएररर!!! वीएररर!!! Maan'na पड़ेगा गांडू तुझे! Maan'na पड़ेगा. तू बहनचोद हर्र बार मेरे बिछाये गए जाल से बच के निकल जाता है.'

'पक्के से पिछले जनम में चूहा रहा होगा तू. M-Mujhe कुछ तोह करना hi होगा. राइट! रात को यहाँ से निकल जाता हु. शहर चोरर के कुछ दिन बाहर रहता हु. जब यहाँ सब शांत हो जायेगा तब hi रेतुर्न करूँगा. हम्म! ये ठीक है!'


और तभी उससे करुणेश का भी कॉल आ गया. करुणेश ने बुरी तरह उससे लताड़ा और अंततः उसकी बात मान उसके लिए रिजर्वेशन करवा के पुणे की टिकट रात की करवा दी. काम से काम थोड़े दिन वही रहेगा तोह यहाँ की मुसीबत से बचा रहेगा.

***

Nidhi's अपार्टमेंट.

मॉर्निंग ~ 8:16 ऍम

"देख ली उसकी करतूते? हैवान है वह आदमी. हैवान! में कब से आपको कहती थी. पर तब आप मेरी बात सुनती नहीं थी. अब देख लिया न आपने?"

इधर से उधर गुस्से में चलते हुए श्रेया की आवाज़ निधि के कानो में पड़ी.

और निधि बेचारी!? वह तोह बस आँखें फाड़े नेवसपपेर को देख रही थी. वह जानती थी की रजत एक बेहद बुरा इंसान था. पर रजत दूसरी लड़कियों के साथ ये सब करेगा? इस बात का अंदाजा उससे बिलकुल भी नहीं था.

*डिंग डाँग*

दूर बैल बजी और निधि अपने खयालातों से बाहर आयी.

"में देखती हु!"

कहते हुए श्रेया ने दरवाज़ा खोला. और सामने खड़े व्यक्ति को देख उसकी आँखों में चमक और होंठो पर मुस्कान सज्ज गयी,

श्रेया : वीइररररर???

वीर (स्माइल्स) : अंदर आने नहीं कहोगी?

श्रेया : अरे! आओ न! ये भी कोई पूछने वाली बात है!?

वीर के आते hi निधि अपनी जगह से उठ दरवाज़े के नज़दीक आयी. वीर और उसकी निगाहें एक दूसरे से मिली. हर्र बार यही होता था. इतने परिचित होने के बाद भी, जब भी दोनों एक दूसरे से मिलते थे. दोनों के बीच एक ख़ामोशी सी छ जाती थी.

श्रेया ने वीर को गले से लगाया और उसका हाथ पकड़ उससे अंदर लायी.

श्रेया : ये इतना सारा सामान? और सुबह सुबह आज?

वीर : में वेगास गया था न तोह-

श्रेया : ये मत कहना की इसमें हम सब के लिए गिफ्ट्स है.

वीर : वेल! यस!

श्रेया : ओह्ह गॉड! थैंक यू सो मच!!!

वह उछालते हुए एक बार फिर कस के वीर के गले लग गयी और जज़्बाती होते हुए उसने,

*मुऊआआअह्हह्ह्ह्हह*

जोरर से वीर का गाल चूम लिया.

निधि (हैरत में) : Sh-Shreyaaaa!?

श्रेया (ब्लशेस) : W-Woh! ी वास् जस्ट एक्ससिटेड.

शर्माते हुए उसने फौरन hi अपना चेहरा छुपाया. खुद पर इतनी शर्मिंदगी हो रही थी अभी उससे. भावनाओ में बहके उसने

वीर को चूम लिया था. वह ये कैसे भूल गयी की निधि ठीक पीछे hi कड़ी थी उसके!?

श्रेया : ओह्ह! तुमने न्यूज़ पढ़ी?

वीर : Ma'am के ex-husband वाली? सूरे! सूरे! बिलकुल पढ़ी.

श्रेया : देखा न? केसा दरिंदा निकला वह. ठीक हुआ उसके साथ. एकदम सही हुआ. अब सड़ता रहेगा जेल में ज़िन्दगी भर. हम्फ!

वह तुरंत hi अपना गिफ्ट खोलने में लग गयी. और वीर चुप चाप सोफे पर बैठ गया.

वीर : जूही कहा है?

श्रेया : सो रही है वह अभी तक.

वीर : स्कूल नहीं गयी?

श्रेया : कल उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी. इसलिए आज उससे नहीं भेजा.

वीर (फ्रोंस) : क्या हुआ?

श्रेया : कुछ नहीं! सीजनल चेंज. और बस हलकी फुलकी खासी, सर्दी बुखार.

वीर : ओह्ह्ह!

श्रेया : रुको में जगाती हु अभी.

वीर : अरे नहीं! रहने दीजिये! सोने दीजिये उससे.

श्रेया : अरे रात 8 बजे hi सो गयी थी. तब से सो रही है. उठाने hi वाले थे हम उससे. गिफ्ट्स देख के खुश हो जाएगी. ओह माय गुड्ड़!!!?? ये मेरे लिए? दी लुक!!! हाई हील्स!!! तुम्हे साइज कैसे पता चला?

वीर (स्माइल्स) : जब यहाँ रुकता था तब देखा था. तब से याद था.

श्रेया (ब्लशेस) : T-Tumhe याद था?

वीर : Mm-Hmm!

श्रेया : बरबरी?? ओह्ह्ह मय्यै गूदड़ड्ढ!!! पागल हो क्या तुम? इतनी महंगी हाई हील्स? वेट!!!! दी का क्या है फिर? ओह्ह्ह फुक्ककककक!!!

निधि : श्रेयआआअ!!! ये क्या तरीक़ा है बात करने का?

श्रेया : ऊप्स! S-Sorry!!! पर दी देखो न!! वर्सस!!!? आपका हैंडबैग वर्सस का है. हौली शीट्ट्ट्ट!!!! तुम्हारी लाटरी लग गयी क्या? वीर?

वीर (स्माइल्स) : गिफ्ट्स लेते टाइम मेने प्रिंसेस चेक नहीं किये थे. जो पसंद आये उन्हें चूसे कर लिया. सुहाना ma'am साथ में थी. सो, उन्होंने काम आसान करवा दिया था. वर्ण में वेरायटीज देख के hi कन्फ्यूज्ड था.

सुहाना का ज़िक्र आते hi वीर का ध्यान पल भर के लिए उस ख़ूबसूरत औरत की ऑर्डर चला गया.

निधि : ये सब क्या है वीर?

वीर : !!?

निधि : तुम्हे पता है तुमने कितना खर्चा किया है?

श्रेया : उम्! दी! वह इतने प्यार से लाया है. हाउ कैन यू-? आप उसके सेंटीमेंट्स को ठेस पहुचा रही हो. मुझे देखने दो कितने के है ये. आपको ऐसा नहीं बोलना चाहिए. ये तोह सिर्फ-!!!???????? हैं??? व्हाट थे फुसक्कककककक??? 30 हज़ार का बैग???? वीरररर??

श्रेया जो अब तक वीर के सपोर्ट में थी. प्राइस देखते hi उसकी हालत खराब हो गयी.

श्रेया : V-Veer?? थिस इस तू मच! ऊपर से मेरी सैंडल्स?? ओह्ह्ह गोड्ढ!!! 28 थाउजेंड??? क्या कर रहे हो तुम??? दी सही है. इतने महंगे गिफ्ट्स की क्या ज़रुरत थी? मेरी मंथली पाय भी इतनी नहीं है.

वीर ने कोई जवाब नहीं दिया बस हलके से मुस्कुराया तोह श्रेया कुछ भांप गयी.

श्रेया : I'm- I'm सॉरी! रियली! मुझे पहले कभी किसी ने इतनी महंगी गिफ्ट नहीं दी. इसलिए में...! पर अब तुम इतने प्यार से लाये हो तोह में कैसे मन कर सकती हु!? हहै~

निधि : श्रेया तुम-!!?

श्रेया : अगर में नहीं लुंगी तोह उससे बुरा लगेगा! इसलिए में तोह ये ले रही हु. एंड थैंक यू सो मच वीर!

वीर (स्माइल्स) : वेलकम!

श्रेया जानती थी की वीर को असली ख़ुशी तब hi मिलेगी जब वह गिफ्ट को एक्सेप्ट करेगी और वही हुआ भी. वीर सबके लिए ये प्रेम से लाया था. इससे दुत्कारना केवल वीर के दिल को आहात पहुचाने जैसा था.

वह गिफ्ट को ख़ुशी ख़ुशी लेते हुए अंदर गयी और जूही को जगाने लगी. तोह इधर सोफे पर hi निधि और वीर अगल बगल बैठे गए.

वीर : खबर पढ़ी न आपने?

निधि : ममम~

वीर : ....

निधि : उस व्यक्ति से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है?

वीर : तोह...

निधि : वह व्यक्ति मेरे जीवन में कोई स्थान नहीं रखता. जो भी होये उसके साथ. मुझे क्या फ़र्क़ पड़ता है.

वीर : और अब आप...

निधि : ??

वीर (स्माइल्स) : निश्चिन्त हो. न hi वह अब आपको तकलीफ दे सकता है और न hi आपके खिलाफ कोई क़दम उठा सकता है.

निधि : हम्म!

वीर : ध्रुव कहा है?

निधि : अंदर है! सो रहा है.

वीर : ओह्ह!

निधि : क्या ज़रुरत थी?

वीर : किसकी?

निधि : इतने महंगे गिफ्ट्स लाने की?

वीर : कभी तोह कुछ दिया नहीं. काम से काम इन्हे तोह एक्सेप्ट करिये.

निधि : बैग और सैंडल्स काम दाम की भी तोह ले सकते थे न? या कुछ छोटा मोटा भी तोह ला सकते थे न?

वीर निधि की दांत सुन्न बस मुँह फेरर लिया. और इस बार, निधि को एक तकलीफ हुई. ऐसा लगा जैसे दिल में किसी ने सुई चुभोई हो. एक तोह वीर इतने प्यार से लाया था गिफ्ट्स, और ऊपर से वह उससे hi सुना रही थी. ये ध्यान में आते hi वह अंदर ग्लानि से भर गयी.

निधि : M-Mein...! माफ़ करना! में कुछ ज़्यादा कह गयी.

वीर (स्माइल्स) : कोई बात नहीं! आपका हक़ है!

सुनते hi निधि के गालो का तापमान बढ़ गया.

निधि (ब्लशेस) : O-Ok!

निधि को तभी बैठे बैठे एक बात याद आयी. हे भगवान्! वह ये कैसे भूल सकती थी? वीर की सगी बहिन उसके घर आयी थी कल hi. क्या करे वह? क्या वीर को बता दे? पर तेजल ने तोह मन किया था. तोह अब?

ये कहा फस्स गयी थी वह!?

"माहामुउउउ!!!"

और जूही की cheh-chahaati आवाज़ ने उसकी सोच को भांग कर दिया. वह कूदती फांदती दौड़ते हुए आयी और वीर की गॉड में बैठ गयी.

वीर (स्माइल्स) : किसी है जूही?

जूही : जूही एकदम मस्त है!!! *स्निफ्फ*

निधि : ये देखो! नाक बह रही है. और खुद को मोहतरमा मस्त बता रही है.

वीर : में तुम्हारे लिए चॉकलेट्स लाया हु जूही!

जूही : सच्ची???

वीर : मुच्ची!

जूही : याआयीयी!!! दो जल्दी!! जल्दी दोऊ!!!

और वीर ने जब एक बेहद बड़ा पैकेट थमाया तोह जूही तोह क्या निधि भी हैरान रह गयी.

निधि : I-Itni साड़ी चॉकलेट्स? वीर ये तुम-

वीर (स्माइल्स) : रोज़ एक hi दिया करिये. उस से ज़्यादा नहीं!

निधि : जैसे की वह मेरी बात मानेगी.

वीर : में समझा दूंगा.

वीर जूही को समझाने लगा तोह दोनों को इस तरह देख निधि कही खो सी गयी. वीर बिलकुल ऐसा था जैसे एक पिता को होना चाहिए अपने बच्चो के प्रति.

श्रेया अंदर के अंदर hi वाशरूम में घुस गयी थी तोह बाहर अब सिर्फ वही तीनो थे.

जब जाने का समय हुआ तोह वीर ने निधि को देखा,

निधि : क्या हुआ?

वीर (स्माइल्स) : आप बोहत सुन्दर लग रही हो.

निधि : ओह्ह अच्छा? सुबह सुबह उठ के कौन सा इंसान सुन्दर दीखता है भला?

वीर : आप!

उसके एक तक जवाब से निधि बेचारी झेप सी गयी,

निधि (ब्लशेस) : H-Huhhh?? M-Makkhan लगाने की ज़रुरत नहीं है. B-Bolo? क्या चाहिए? सेशनल्स में ा+ चाहिए? या कुछ और?

वीर (स्माइल्स) : मेने गेनुइनेली कहा है. किसी फवौर के लिए नहीं!

निधि (ब्लशेस) : तुम-!!!

वीर (शिघ्स) : अन्य्वयस! चलता हु! फिर मिलेंगे!

वीर उठ के वह से जैसे hi जाने लगा तोह निधि भी उठ के आयी,

निधि : R-Ruko!!

वीर : हम्म?

निधि : बिना खाये पिए कैसे जा रहे हो? इधर आओ! चुप चाप बैठो इधर. में फटाफट कुछ प्रेपर करती हु. खा के जाना!

वीर : पर इसकी कोई-

निधि : शट उप! एंड सीट डाउन!

वह आर्डर देके अंदर किचन में चली गयी. पर इसके बाद, दोनों hi वीर और निधि के होंठो पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी.

***

सिस्टम लेवल उप हो चूका था. पारी का लेवल बढ़ चूका था. जहा एक तरफ पारी की नयी पर्सनालिटी आयी थी तोह वही दूसरी तरफ पारी की पुराणी सुतस्य वाली पर्सनालिटी जा चुकी थी.

पर जो ख़ास बात थी अभी, वह थी लेवल उप होने के बाद आने वाले फायदे.

सबसे पहला फायदा जो मिला था वीर को वह था ट्रांसलेटर फंक्शन के अपग्रेड होने का. वीर अब कोई भी भाषा समझ सकता था और बोल भी सकता था. उसके लिए अब लैंग्वेज बैरियर जैसी चीज़ ख़तम हो चुकी थी.

दूसरा फायदा मिला था सिस्टम के पास वर्ल्ड नॉलेज आने का. ज़ाहिर है की अगर हमे आज कुछ भी चीज़ की जानकारी प्राप्त करनी होती है तोह हम गूगल, इंटरनेट, इनका hi सहारा लेते है. इनके hi पास पूरे विश्व का नॉलेज होता है.

परन्तु अब, वीर को ये करने की भी ज़रुरत नहीं थी. वही नॉलेज सिस्टम के पास था अब. अगर वीर को कुछ इंटरनेट पे ढूँढना है तोह वह सीधे सिस्टम से hi पूछ सकता है.

यदि इसका उत्तर हमारी पृथ्वी में कही भी पाया जाता है. तोह सिस्टम वीर को जवाब देने में सक्षम रहेगा.

और आखिरी और सबसे बड़ा फायदा. इससे पाके तोह वीर जैसे जन्नत में था.

लिमिट ेरादिसते हो चुकी थी. वीर जो अपने कार्ड्स को स्लॉट में लगाने के बाद 24 घंटे इंतज़ार करता था, वह इंतज़ार अब ख़तम हो चूका था.

वह अब आसानी से अलग अलग कार्ड्स को जब चाहे तब स्विच कर सकता था. एक डेडली बेनिफिट था ये.

और इसलिए वह अब थोड़ा कलम था. बिलकुल पारी की नई पर्सनालिटी की तरह.

***

इवनिंग ~ 7:27 पं

शाम का समय हो रहा था और हल्का हल्का अँधेरा भी छा चूका था. वीर के पुराने घर में सभी अपने अपने कामो में व्यस्त थे.

जब बाहर हो रहे एक शोर ने उनका ध्यान खींचा.

"बाहर निकलो!!! कहा रह गए सब के सब? कायरो की तरह छुपके बैठ गए क्या? निकलो बाहर!!!"

बाहर खड़े जो गार्ड्स थे वह दोनों भी स्तब्ध रह गए.

एक अनजान लड़की आके न जाने क्या क्या बाके जा रही थी.

गार्ड : आइये लड़की! पागल है क्या? चल जा यहाँ से.

"अरे जाओ जाओ! मेरे रास्ते में मत आना वर्ण अंजाम अच्छा नहीं होयेगा."

गार्ड : तेरी तोह-! धमकाती है? कौन है तू? क्या काम है तुझे?

"हम्फ~ ोये कायरो! हाथ में चूडिया पेहेन राखी है क्या? बाहर निकलो!"

जब लड़की ने फिर भी न सुनी, तोह दोनों hi गार्ड्स उठ के उसके पास आये पर इस से पहले की वह उससे पकड़ पाते, घर का दरवाज़ा खुला और अंदर से घर के कई सारे सदस्य बाहर निकल के आ गए.

"Y-Ye क्या शोर है?"

मनोरथ जो अपनी व्हीलचेयर पर बैठे आराम कर रहे थे, उन्हें काव्य लेते हुए बाहर आयी.

सुमित्रा आरोही भी बाहर आ चुकी थी. साथ hi बृजेश और करुणेश भी. विवेक घर पर था नहीं. वह अपनी कंपनी में hi लगा हुआ था अभी.

मनोरथ : कौन है ये लड़की?

गार्ड : सरकार! कब से इसको समझा रहे है पर समझने का नाम नहीं ले रही. बदतमीज़ी करते जा रही है. आप कहे तोह-

मनोरथ : मुझे बात करने दो! क्या हुआ बीटा? क्यों घर के सामने चिल्ला रही हो? और कौन हो तुम?

लड़की मुस्कुरायी और फिर हस्ते हुए बोली,

"कमाल है. आप अपनी पोती को hi नहीं पहचाने? हाहाहाहा!"

बेशक, ये लड़की कोई और नहीं तेजल hi थी.

मनोरथ : मेरी पोती?

तेजल : हाँ आपकी पोती! में तेजल सिंह! भावना सिंह की एकलौती बेटी! और वीर की बड़ी बहिन!

*बूम*

एक बड़ा सा बम उन् सब के सर्र जैसे आके फटा. ये लड़की क्या बड़बड़ाये जा रही थी?

बृजेश की आँखें फटी हुई थी. तोह वही करुणेश हैरान था. सुमित्रा चकित और आरोही, काव्य दोनों hi कन्फ्यूज्ड.

मनोरथ : भावना की बेटी?

'भावना? ये तुम्हारी बेटी है? कैसे?' मनोरथ एक चिंता में डूब गए.

तेजल ने ऊँगली दिखाते हुए उन् सभी को गुस्से से देखा और वह फिर चिल्लाई,

तेजल : शर्म नहीं आयी तुम लोगो को? इतनी घटिया और घिनौनी हरकत करते हुए?

बृजेश : ये क्या बड़बड़ाये जा रही है लड़की?

तेजल : मेरे भाई वीर को इसी घर से धक्के मार के निकाला गया था न? बोलो? है न?

*साइलेंस*

मनोरथ : मुझे एक बात बताओ बीटा. क्या तुम्हारी माँ, भावना? क्या उन्होंने दूसरी शादी की थी?

तेजल : हम्फ! काश की होती. तोह काम से काम एक अच्छा बाप तोह मिल जाता.

तेजल के इस हमले से वह खड़े सब के होश उड़द गए. स्वयं बृजेश के भी. क्युकी ये बात तेजल ने उससे hi देख के कही थी. वह जैसे जान गयी थी की यही उसका बाप है.

पर यहाँ अब सब उल्टा समझ रहे थे.


'हँ? भावना ने दूसरी शादी नहीं की? तोह ये लड़की? ओह्ह्ह! अच्छा! हम्म! तोह ये बात है! ये गॉड ली हुई बच्ची है. और इससे भी ये बात शायद नहीं पता है.'

मनोरथ ने मैं में सोच धीरे से बृजेश और करुणेश के कानो में ये बात डाली. और उन्हें भी माजरा समझ आया.

मनोरथ : तुम्हारा मक़सद क्या है बीटा?

तेजल : मेरा मक़सद!? ः! वह jaan'ne के लिए आप क्वालिफाइड नहीं हो.

करुणेश : तमीज से बात कर लड़की!!! क्या तू जानती नहीं की बड़ो से कैसे बात की जाती है? क्या यही संस्कार दिए है तुम्हारी माँ ने?

तेजल : हम्फ! वह संस्कार में उन्हें hi दिखती हु जो उसके योग्य होता है. पर तुम सब...! हम्फ!

वह उन्हें नीचे दिखाते हुए मुस्कुरायी,

करुणेश (चिल्लाते हुए) : बद्तमीज़!!!!!

काव्य : ऐसा नहीं है....!!!!

काव्य की आवाज़ सुनके तेजल शांत हो गयी. उससे ध्यान आया की निधि ने आरोही और काव्य. ये दो नाम लिए थे.

तेजल : क्या नाम है तुम्हारा?

काव्य : काव्य! और आप जैसा सोच रही है वैसा नहीं है. हाँ पास्ट में मेने भी उनके साथ अच्छा बेहवे नहीं किया. बूत मेने ये हमेशा रिग्रेट किया है. और में और आरोही दी हम दोनों hi वीर भैया को दिल से प्यार करते है. हम उनका बुरा कभी नहीं चाहेंगे.

काव्य के डेस्पेरेट एटेम्पट में आरोही भी शामिल हो गयी.

आरोही : काव्य सही कह रही है. दीदी! A-Aap हमे गलत समझ रही है.

तेजल ने एक स्माइल दी और वह आगे बढ़ी और अचानक hi उसने काव्य को अपने गले से लगा लिया,

काव्य : हहहह??

तेजल (स्माइल्स) : थैंक यू! थैंक यू फॉर बीइंग तेरे विथ हिम. में तुम्हारी बड़ी बहिन हु. यू क्नोव? आज मुझे दो दो छोटी बहने मिल गयी.

काव्य : M-Mein-

तेजल : अब ये बताओ! वह प्रांजल तुम्हारा भाई है न?

काव्य : हम्म!

तेजल : कहा है वह?

काव्य : U-Unhe...!

करुणेश : काव्याआ!!!!

और अपने पिता की आवाज़ सुन्न, काव्य डर के मारे चुप हो गयी.

आरोही : उससे घर से बाहर निकाल दिया गया है.

करुणेश : आरोहीय!??

तेजल (सुरप्रीसेड) : हम्म? क्यों भला?

आरोही : क्युकी दादा जी को उसने मंदिर की सीढ़ियों से गिरवाया था. जायदाद के लिए. वीर का नाम हटाने के लिए.

आरोही के बोल न सिर्फ तेजल को स्तब्ध किये बल्कि करुणेश समेत उसका खुद का परिवार भी आरोही के be-jhijak हाज़िर जवाबी सुन्न के बौखलाया हुआ था. साड़ी अंदर की पोल वह यु खोलती जा रही थी. जानते तोह सभी थे ये बात पर कोई इस बात पर बात नहीं उठता था. पर आरोही ने आज निडर होक सब बेबाक बोल दिया.

तेजल : ओह्ह? तोह अब कहा है वह?

आरोही : अमृत निवास!

उसके मुँह से अभी निकला hi था की पीछे खड़े करुणेश के होश उड़द गए. ये इनफार्मेशन तोह सिर्फ वह जानता था. वह hi अपने बेटे को अब तक बचाया हुआ था. फिर उसकी बड़ी लड़की को ये बात कैसे पता लग गयी?

वह चाह के भी आरोही को इस समय कुछ नहीं कह सकता था.

मनोरथ : अमृत निवास? प्रांजल वह क्या कर रहा है? करुणेश? मुझे जवाब चाहिए!

करुणेश : मुझे खुद नहीं पता पापा जी! Sh-Shayad उसने उस घर की छवि जाने से पहले लेली. वर्ण-

मनोरथ ने बस एक बार उससे घूर के देखा और फिर तेजल की ऑर्डर उसने निगाह करि,

मनोरथ : बीटा तुम-

तेजल : मुझे जो jaan'na था वह पता लग गया. अब मेरा यहाँ कोई काम नहीं! सॉरी दादा जी! पर अभी आपकी बातें sunn'ne के लिए मेरे पास वक़्त नहीं!

और जिस हवा के झोके की तरह वह यहाँ आयी थी उतनी hi तेज़्ज़ी में वह यहाँ से निकल भी गयी.

वह मौजूद सभी लोगो को कन्फूसिओं में दाल के. सब बस सोच में पद गए. ये अभी अभी हुआ क्या था? वह लड़की यहाँ आयी क्यों थी? और इतने साल कहा थी? भावना की बेटी? तोह क्या भावना भी इधर है?

बृजेश जो अब तक मौन था, उसके अंदर न जाने क्या क्या बातें चल रही थी. पर एक बात स्पष्ट थी. वह ये की उसका जी भी अंदर से मिचला रहा था.

***

नाईट ~ 8:16 पं

"साला जल्द से जल्द यहाँ से निकलना होगा वर्ण दिक्कत हो जाएगी."

प्रांजल, जो पुणे जाने के पूरे बंदोबस्त में था. अपने सूटकेस में वह साड़ी ज़रूरी सामग्री रखने में लगा हुआ था. लगभग सारा सब कुछ उसका पैक हो चूका था.

"मादरचोद है साले सब के सब. बहनचोद वीर!! साले जिस दिन तू मेरे हाथो में आया न, कसम से ऐसा मसलूंगा न तुझे. Gid-gidayega साले तू मेरे पेर्रो पर."

"पर उसके लिए, मुझे थोड़े दिन अंडरग्राउंड होना होगा. लक इस ों योर साइड वीर. ी एडमिट! तुमने ये पारी जीती है. लेकिन जुंग में hi जीतूंगा."

*क्लिक* *क्लिक*

सूटकेस बंद कर उसने मिरर में एक अंतिम बार खुद को देखा, अपने बाल सवार और बस वह अभी जाने hi वाला था की,

*रिंग* *रिंग*

उसका फ़ोन बज उठा.

"किसका फ़ोन आ गया बहनचोद अब?"

कॉलर था करुणेश.

"सहित!! डैड का है-!!"

प्रांजल : Hello? डैड!??

करुणेश : में जो जो कह रहा हु उससे ध्यान से सुनो. वीर की कोई मुँहबोली बहिन है शायद! मुझे नहीं पता वह इतने सालो से कहा थी पर वीर की असल माँ, यानी तुम्हारी तै जी ने एक बेटी गॉड ली है शायद.

प्रांजल : हँ? ये सब आप मुझे क्या बता रहे हो? डैड में लेट हो रहा हु! ये फ़ालतू का फॅमिली चार्ट आप बाद में भी बता सकते हो मुझ-

करुणेश : निकम्मे चूतिये!!! मेरी बात ध्यान से सुन्न!!!

प्रांजल : H-Huhh? D-Dad? चिल!

करुणेश (स्क्रीम्स) : एक बार की बात तेरे भेजे में नहीं घुसती क्या? बोलै न मेने की जो कुछ भी कह रहा हु उससे ध्यान से सुन्न!

प्रांजल : O-Okay! कहिये! भड़क क्यों रहे हो? बात क्या है?

करुणेश (लम्बी सास लेते हुए) : वीर की एक बहिन है जो अभी अभी कुछ देरर पहले घर आयी थी. गुस्से में थी और उससे सब कुछ पता है वीर के साथ हमारे घर का क्या रवैय्या था.

प्रांजल : तोह?

करुणेश : उसने यहाँ आके काफी बदतमीज़ी से बात की और उसने तुम्हारे बारे में पूछा.

प्रांजल : मेरे बारे में?

करुणेश : हम्म! पूछा की तुम कहा पर हो.

प्रांजल : ः! तोह सुरेली आपने बताया थोड़ी होगा.

करुणेश : पर आरोही ने बता दिया है.

प्रांजल : हहहह??

करुणेश : मुझे नहीं पता उससे ये बात कैसे पता चली, पर उसने अमृत निवास की जानकारी देदी है.

प्रांजल : व्हाट थे हेलल?? Y-Ye आरोही दी को आप लोग कण्ट्रोल में नहीं रखते हो न उसी का नतीजा है. पता नहीं मेरी दोनों बहनो को उस चूतिये वीर में ऐसा क्या नज़र आता है जो पागलो की तरह उसके पीछे पीछे लगी रहती है.

करुणेश : तुम्हारी माँ पे जो गयी है दोनों! खर्र! उन्हें जो करना है करने दो. बल्कि अच्छा hi है वह इन् चीज़ो से दूर रहे. देखो! तुम्हारे दादा जी को मेरे ऊपर शक है की मेने तुम्हे वह रहने को जगह दी है. मुझे पापा जी से मिलना है अभी. तुम्हारे ताऊ जी भी होंगे वह. उन् सब को जवाब देना होगा मुझे. तुम अभी के अभी वह से निकल जाओ. कही ऐसा न हो वह लड़की तुम्हे ढूंढते हुए वह तक पहुँच जाए. क्युकी में अभी कुछ देरर के लिए तुम्हारा कोई भी फ़ोन नहीं उठा पाउँगा. समझे?

प्रांजल : हम्म! तोह ये वीर की बहिन? कोई बिगशॉट है क्या? वज़नदार?

करुणेश : देख के तुम्हारे जितनी hi लगी. एक आम लड़की hi मालुम होती है. पर गुस्से से भरपूर है. जितना जल्दी हो सके निकल जाओ. और में रख रहा हु अब.

प्रांजल : Okay! ठीक है डैड!

करुणेश : संभल कर जाना! में थोड़ी देरर से फ़ोन करता हु.

प्रांजल : हम्म!

और कॉल कट हो गया.

'वीर की बहिन? हम्फ~'

प्रांजल फटाफट अपना सूटकेस उठा के वह से दरवाज़े की ऑर्डर आया और उसने जैसे hi दरवाज़ा खोला,

"हहह??"

"तोह यहाँ हो तुम!!!" एक मधुर आवाज़ उससे सामने से आयी. देखा तोह पाया की एक सुन्दर सी लड़की सीढिया चढ़ते हुए उसके hi क़रीब आ रही थी.

और प्रांजल को अगले hi शान अभी अभी अपने बाप से हुई बात याद आ गयी.


कही ऐसा न हो वह लड़की तुम्हे ढूंढते हुए वह तक पहुँच जाए.

और वही हुआ.

ये तेजल hi तोह थी. ऑफ़ कोर्स, और कौन हो सकता था भला?

तेजल : तोह तुम हो वह गन्दी नाली के कीड़े? हम्म?

प्रांजल : हँ?? तुम कौन हो?

तेजल : तुम नहीं बच्चे! आप कहके बुलाओ. और अभी कुछ देरर में जान जाओगे में कौन हु.

*क्रैक* *क्रैक*

अपनी हाथो की उंगलियों को आपस में चटकाते हुए तेज ने अपनी शर्ट की स्लीव्स ऊपर चढ़ाई और अंदर आने लगी.

प्रांजल के परर अपने आप पीछे चले गए. जब तेज दरवाज़े के अंदर आयी तोह उसने दरवाज़ा अटका दिया.

प्रांजल : क्या चाहिए तुमको? साफ़ साफ़ कहो!

तेजल (स्क्रीम्स) : हराम खोर!!! बेशरम की औलाद कही के. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे छोटे भाई के साथ ऐसा करने की? हाँ?

ऐसा पहली बार हुआ था जब प्रांजल किसी सुन्दर सी लड़की के मुँह से अपने लिए ऐसी बातें सुन्न रहा था. साफ़ था की वह थोड़ा झेप गया था.

तेजल : चमन चूतिये!! जिस थाली में खाता है, उसी में छेड़ करता है? अपने hi परिवार वालो को धोका देता है? उनके खिलाफ षडियंत्र रचता है? आज अगर तेरी हड्डी पसली नहीं तोड़ी न, तोह मेरा नाम भी तेज नहीं!

प्रांजल (स्माइल्स) : हैः! विथ जस्ट यू? आंटी जी! बड़ी हो इसलिए लास्ट बार समझा रहा हु. जहा से आयी हो सीधे तरीके से वही से निकल जाओ. वर्ण अंजाम-

तेजल : तोह अब ये आंटी hi तुझे पाठ पढ़ाएगी मेरे बच्चे! आफ्टर आल, होर्रिड किड्स लिखे यू, मस्ट बे तौह्त ा लेसन.

"Haaaaaaaaaa~"

और तेज जोश के साथ अचानक hi फुर्ती में आगे बढ़ी. प्रांजल ने जैसे hi उससे इतनी स्पीड में आते देखा तोह उसने एक पल न गवाते हुए अपना सूटकेस साइड में फेक दिया. उससे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था की एक अकेली लड़की उस से भिड़ने की भूल करेगी.

क्युकी ज़ाहिर है की आम तौर पर एक लड़का और लड़की अगर लड़ते है तोह जीत किसकी होगी, ये स्वाभाविक hi रहता है. सिवाए कुछ केसेस के.

*वहूउसस्शह्ह्हह्ह*

एक लात जोरर से हवा में उड़ते हुए प्रांजल के सीधे मुँह की ऑर्डर आयी और वह फ़ौरन झुका.

पर इसके पहले की वह नीचे झुक के हमला कर पाटा, तेज अगले hi पल पीछे हो गयी.

एक बार फिर वह दौड़ते हुए आयी. प्रांजल ने खुद को दूसरी किक के लिए प्रेपर किया पर,

तेजल ने न hi कोई घुसा चलाया और न hi कोई लात, वह सीधा आके प्रांजल पर झपट पड़ी.

दोनों एक दूसरे के ऊपर हावी होने का प्रयास करने लगे,

"Y-Youuu बितछछःह!!!"

"फ़क ओफ़्फ़्फ़! चूतिये!!! आज तोह तेरी खर्र नहीं...! ुररगघ!"

"कुटिया! रुकक्क! अभी बताता हु तुझे!"

वह तेजल के गले की ऑर्डर लपका और हावी होना शुरू हुआ तोह तेजल ने भी प्रांजल के बाल पकडे और जैसे एक पौधे हो जड़ से उखाड़ते है, उतनी hi ताक़त से उखाड़ना शुरू किया,

"अअअअअअअरररग्घहहहह!!! कुटियाआआआ!!!!"

एक दर्द भरी चींख कमरे में फेल गयी.

"Ch-Chorrr बाल!!!! माआदरछोड़ड़ड़!!! R-Randiii की बच्चीय!!! चोररररर!!!!"

"सूअर की औलाद साले! मुझे आम लड़की समझ रहा था न चूतिये!! यू फुकेररर!! I'm ा ग्रीन बेल्ट इन करते!!! किस्मत तेरी जो अभी ब्राउन और ब्लैक बेल्ट हासिल नहीं किया. वर्ण तू तोह-!! हम्फ~"

"ाआर्गग्घहहहह!!"

अब पास पलट रहा था. तेजल हावी हो रही थी.

*क्लायंगगगगग*

*क्राआष्ठहहह*

*ठुड्ढ*

इस छीना झपटी में, आस पास की चीज़ें बिखरती जा रही थी. पर तेजल ने प्रांजल को एक डेडलॉक में फसाया हुआ था. और साथ hi वह उसके बाल को खींचते जा रही थी.

"मेरे मासूम से भाई पे अत्याचार करता है तू? तेरी हिम्मत कैसे हुई? हाँ!!? शुक्र मन जो में यहाँ नहीं थी. वर्ण मेरी आँखों के सामने अगर तूने ये सब किया होता न तोह कसम से... तेरे हाथ परर तोड़ देती में...! आँखें नोच लेती!"

"कुतिययाआ!!! Ch-Chorrr!!!!!!!"

"बक ले जितनी गालिया बकनी है!! तुझे जब तक बेसुध न चोरर दू तब तक रुकूंगी नहीं में. एक hi भाई मिला बड़ी मुश्किल से. लगा था उसने मुझसे बेहतर ज़िन्दगी गुज़ारी है. एक में hi अभागन थी. पर नहीं!!! तुम चुतियो ने तोह उसकी ज़िन्दगी नर्क बना के राखी हुई थी. परिवार और भाई के नाम पे कलंक है तू हराम खोर्रर!!!!!"

"अअअअअरररग्घहहहहह!!! चोरर दिए!! चोरर दे नहीं तोह मार डालूंगा तुझे आज रनडीई!!"

पर तेजल ने अपनी पकड़ बिलकुल नहीं छोर्री!

न जाने कितने बाल तोह तेजल ने उखाड़ hi लिए थे प्रांजल के.

जब वह दोनों एक टेबल से टकराये तोह प्रांजल का हाथ टेबल पर फिरना शुरू हुआ और किस्मत से उसके एक छोटी वाली सकिसोर हाथ लग गयी.

न देखा न सुना और बस उसने वह कैची उठा के सीधे तेजल की ब्याह में दे मारी,

"आआआहहहहहहह!!!!!"

दर्द में तेजल चिल्लाई और पकड़ ढीली हो गयी,

"चल निकल कुटिया!!!!"

*बाजआनंनंगगगगग*

और एक ज़ोरदार लात तेजल को सीधे पेट में ाले लगी, जिस कारण से उसका शरीर पीछे धकिल गया,

चुकी पीछे दरवाज़ा था जो अटका हुआ था और उसके नीचे सीढिया,

*क्राआष्ठहहह*

तेजल दरवाज़े से भीड़ के सीधे सीढ़ियों से नीचे हवा में गिरी जब,

*क्लास्प*

"हहहहहह!!??"

एक जानी मानी सुगंध! ये फेमिलिअर सी फीलिंग, ये अनुभूति...! दो मज़बूत भुजाओ ने उससे जकड रखा था. इन्ही हाथो ने उससे गिरने से भी बचा लिया. ये स्पर्श...!

क्कुह शान के लिए जैसे वक़्त थम गया तेजल के लिए.

और जैसे hi उसने अपना सर्र ऊपर कर देखा तोह,

वह चेहरा! जिससे देखने के लिए वह कबसे इतना तड़प रही थी. वह सामने था. उसके होंठो पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी.

और फिर उसके मुँह से कुछ शब्द निकले, जिससे सुन्न, तेजल की आँखें अपने आप पानी पानी हो गयी,

"It's बीन ा व्हिले...! सीस!!"

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ 5.8क वर्ड्स. कितना कुछ दिखाया है इस अपडेट ने हमे. पूरे घटनाक्रम को दर्शा दिया है. अगला अपडेट हमे एक छोटा सा पास्ट दिखायेगा. तोह बने रहिएगा. और लाइक्स ठोकना नहीं भूलना, साथ hi रेवोस देना भी.


धन्यवाद! ✨
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 117 ~ It's बीन ा व्हिले, सीस!


अब तक...

*डिंग*

[24 hour limit from Quest Hunt Card Slot has been eradicated.]

[Host can switch cards now however he wants.]

और उसके बाद वीर के मैं में एक नयी आवाज़ सुनाई दी,

[Allow me to service you...! Master!!!]


अब आगे...

क्या कुछ नहीं हुआ था कल? कल रात की घटना चार दीवारों के अंदर घटित हुई और उसकी खबर भी किसी को नहीं लगी.

क्युकी धमाका तोह अगली सुबह होने वाला था. जो की हुआ भी,

"Y-Ye में क्या पढ़ रही हु??"

रागिनी सुबह सुबह हाथो में अखबार लिए अपनी फटी आँखों से हैडलाइन पढ़ रही थी. और उसमे साफ़ साफ़ लिखा हुआ था,


मुंबई स्थित हाई कोर्ट में काम कर रहे जाने माने वकील रजत तिवारी पैराडाइस होटल में दो लड़कियों के साथ दुष्कर्म करते हुए पकडे गए.

रागिनी : Y-Ye तोह तुम्हारी Ma'am के वह, हस्बैंड है न? वीर?

वीर जो चाय की चुस्की का आनंद ले रहा था उसने हामी भरते हुए जवाब दिया,

वीर : हम्म!

श्वेता : क्या आया है?

रागिनी : ये देखिये न! दो लड़कियों के साथ दुष्कर्म करता हुआ पकड़ा गया है पैराडाइस होटल में.

रागिनी ने अखबार थमाते हुए श्वेता को दिया. पूरा का पूरा लम्बा पैराग्राफ छपा हुआ था उसमे. साथ hi कुछ पिक्टुरेस भी डाली हुई थी. जिसमे चेहरे ब्लर्रेड कर दिए गए थे.

श्वेता : छियई!! पत्नी से तलाक लिया तोह ये सब करेगा?

रागिनी : वही तोह! मुझे तोह पहले से hi पता था की वह आदमी ठीक नहीं है. अच्छा हुआ तुम्हारी निधि ma'am ने तलाक ले लिया वीर उस आदमी के साथ. वर्ण वह कभी सुखी नहीं रह पाती.

आभा (खुसपुसाते हुए) : क्या सारे पति ऐसे hi होते है?

उसकी धीमी सी आवाज़ सुन्न, श्वेता, रागिनी और सुमन तीनो की नज़रे उस पर टिक गयी. और तीनो hi शांत रह गयी. ज़ाहिर है तीनो यहाँ अपने अपने पतियों से दूर थी. एक प्रकार से उनसे रिश्ता ख़तम कर के बैठी हुई थी. आभा का भी यही हाल था.

वीर : नहीं! ऐसा नहीं है! सारे लड़के ऐसे नहीं होते.

सोनाली : हाँ हाँ! बड़े आये!! हम्फ!

सोनाली ने चिढ़ाते हुए जीभ दिखाई और वापस से अपनी चाय पीने लगी.

भूमिका : पर कितनी अजीब बात है.

श्वेता : क्या अजीब बात है?

भूमिका : माँ, ये निधि ma'am के हस्बैंड जो है वह बोहत फेमस लॉयर है. तोह ऑब्वियस्ली इनके कितने कनेक्शंस होंगे. उसके बाद भी कोई इनके होटल रूम में घुस गया और मतलब पकड़ hi लिया. इन फैक्ट पुलिस भी डायरेक्ट पकड़ती तोह I'm सूरे ये रजत पुलिस को भी मन लेता. लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाया.

श्वेता : तोह?

भूमिका : तोह ये की, किसी स्ट्रांग पार्टी ने उससे पकड़ा है. मय्बे कोई कांस्पीरेसी? कोई षडियंत्र? पॉलिटिक्स? आपको क्या लगता है?

श्वेता : M-Mujhe कैसे पता होगा भला?

सुमन : ये सब उसके कर्मो का नतीजा है. क्यों? है न मालिक?

सुमन वीर को देख आँख मारते हुए बोली. क्या वह जानती नहीं थी की रजत का ये हाल किसने करवाया था? क्यों वीर कल देरर से घर आया था? वीर के दिल में निधि की क्या जगह थी? सब जानती थी वह!

वीर : एहम! बिलकुल!

वीर ने पुनः हामी भरी और वह उठ के खड़ा हो गया.

रागिनी : अरे? अभी नाश्ता रेडी हो रहा है. अभी से क्यों उठ गए?

वीर (स्माइल्स) : मुझे ये देने जाना है. इसलिए निकल रहा हु.

रागिनी : अरे पर नाश्ता?

वीर : वही खा लूंगा. आप चिंता मत करिये.

रागिनी : P-Par-

वीर : दिन में आऊंगा न भाभी! तब खाना परोसियेगा! चलता हु!

और वीर वह से निकल गया. रागिनी उदास मैं से अपने कामो में लग गयी. वह ज़्यादा से ज़्यादा समय वीर के साथ बिताना चाहती थी. पर ऐसा हो नहीं पा रहा था.


'मेरे दिल की बातें ये लड़का समझता क्यों नहीं है? जानती हु की इससे बिज़नेस में ध्यान देना है. जल्दी आगे बढ़ना है. पर! पर अपनी भाभी को क्यों भूल जाता है ये?'

वह खुद के विचारो में लीं हो गयी,

'एक मिनट! M-Mein भी तोह वीर की मदद कर सकती हु न? वीर ज़्यादातर बाहर रहता है. ऐसे में अगर में उसके कामो में मदद करू तोह...! हमे ज़्यादा से ज़्यादा समय एक दूसरे के लिए मिल पायेगा. R-Right! मुझे वीर से बात करनी होगी.'

"क्या सोच रही हो?"

वह मैं hi मैं मुस्कुरा रही थी जब पीछे से एक अचानक आवाज़ आयी तोह वह डर के मारे उछाल गयी,

रागिनी : आह्हः!!!??? ओह्ह्ह! A-Aap हो!

श्वेता : हम्म! क्या सोच रही थी?

रागिनी : K-Kuch भी नहीं! बस ये वीर अपना नाश्ता किये बजर्र hi चला गया. वही सोच रही थी.

श्वेता : हम्म! अपनी सेहत पर बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा है. T-Tum चिंता मत करो. R-Raat को में उससे गर्म दूध का गिलास जाके दे आउंगी और उससे पिलवा दूंगी.

रागिनी : O-Ohhh!

श्वेता : तुम मेरे बेटे के लिए न, वह चने और बादाम भिगो के रखा करो. और सुबह दिया करो इससे. अगर ये ध्यान नहीं दे रहा तोह हमे hi इसकी सेहत पर ध्यान देना पड़ेगा.

रागिनी (स्माइल्स) : J-Jii! वैसे, है तोह वह हर्र तरफ से फिट. फुफु~

श्वेता : सिर्फ बाहरी फिटनेस कोई फिटनेस नहीं होती रागिनी. अंदर से भी इंसान को फिट होना चाहिए. नुट्रिएंट्स, विटामिन्स, तोह शरीर में जाने hi चाहिए. में उसके लिए अच्छी डाइट प्रेपर करुँगी. अपने हाथो से.

रागिनी (स्माइल्स) : जैसा आपको ठीक लगे.

और दोनों hi महिलाये अपने कामो में व्यस्त हो गयी.

***

पर अखबार तोह सभी के घर आता था. और सभी खबरे पड़ते थे. जहा कुछ लोग इस खबर से खुश थे तोह वही कुछ नाराज़ भी.

"इसकी माँ की छूट बहनचोद!!!!"

*थक*

नेवसपपेर को जोरर से ज़मीन पर पटकते हुए एक लड़का चिल्लाया. सुबह सुबह उसको अखबार में कुछ और देखने की गुंजाइश थी. लगा था की जो वह बरसो से चाह रहा था वह आज सुबह देखने को मिलेगा.

पर ऐसा न हुआ. उल्टा उसका सारे भांडा फूट गया.

"मादरचोद! एक काम नहीं होता इन् लावड़ो से!!!"

वह फिर से गरजा. ये कोई और नहीं प्रांजल hi तोह था. उससे लगा था की आज नेवसपपेर के फ्रंट पेज पर वीर की खबर छपी होगी. पर उसका पास पलट चूका था.


'कहा गलत रह गया में? N-Nahi!! सब कुछ तोह सही था. Y-Ye ज़रूर! ये ज़रूर उस चूतिये वकील के कारण hi हुआ होगा. भड़वे ने मेरा नाम भी उगल hi दिया होगा. बहनचोद! इसकी माँ की...!! सहित!!! क्या करू?? डैड को फ़ोन!? नहीं! वह और भड़केंगे.'

सोचते सोचते वह इधर से उधर टहलने लगा.

'उन्होंने तोह पहले hi मन किया था. उन्हें कॉल नहीं कर सकता. फिर भी उन्हें पता तोह चल hi जायेगा. वीर!!! वीएररर!!! वीएररर!!! Maan'na पड़ेगा गांडू तुझे! Maan'na पड़ेगा. तू बहनचोद हर्र बार मेरे बिछाये गए जाल से बच के निकल जाता है.'

'पक्के से पिछले जनम में चूहा रहा होगा तू. M-Mujhe कुछ तोह करना hi होगा. राइट! रात को यहाँ से निकल जाता हु. शहर चोरर के कुछ दिन बाहर रहता हु. जब यहाँ सब शांत हो जायेगा तब hi रेतुर्न करूँगा. हम्म! ये ठीक है!'


और तभी उससे करुणेश का भी कॉल आ गया. करुणेश ने बुरी तरह उससे लताड़ा और अंततः उसकी बात मान उसके लिए रिजर्वेशन करवा के पुणे की टिकट रात की करवा दी. काम से काम थोड़े दिन वही रहेगा तोह यहाँ की मुसीबत से बचा रहेगा.

***

Nidhi's अपार्टमेंट.

मॉर्निंग ~ 8:16 ऍम

"देख ली उसकी करतूते? हैवान है वह आदमी. हैवान! में कब से आपको कहती थी. पर तब आप मेरी बात सुनती नहीं थी. अब देख लिया न आपने?"

इधर से उधर गुस्से में चलते हुए श्रेया की आवाज़ निधि के कानो में पड़ी.

और निधि बेचारी!? वह तोह बस आँखें फाड़े नेवसपपेर को देख रही थी. वह जानती थी की रजत एक बेहद बुरा इंसान था. पर रजत दूसरी लड़कियों के साथ ये सब करेगा? इस बात का अंदाजा उससे बिलकुल भी नहीं था.

*डिंग डाँग*

दूर बैल बजी और निधि अपने खयालातों से बाहर आयी.

"में देखती हु!"

कहते हुए श्रेया ने दरवाज़ा खोला. और सामने खड़े व्यक्ति को देख उसकी आँखों में चमक और होंठो पर मुस्कान सज्ज गयी,

श्रेया : वीइररररर???

वीर (स्माइल्स) : अंदर आने नहीं कहोगी?

श्रेया : अरे! आओ न! ये भी कोई पूछने वाली बात है!?

वीर के आते hi निधि अपनी जगह से उठ दरवाज़े के नज़दीक आयी. वीर और उसकी निगाहें एक दूसरे से मिली. हर्र बार यही होता था. इतने परिचित होने के बाद भी, जब भी दोनों एक दूसरे से मिलते थे. दोनों के बीच एक ख़ामोशी सी छ जाती थी.

श्रेया ने वीर को गले से लगाया और उसका हाथ पकड़ उससे अंदर लायी.

श्रेया : ये इतना सारा सामान? और सुबह सुबह आज?

वीर : में वेगास गया था न तोह-

श्रेया : ये मत कहना की इसमें हम सब के लिए गिफ्ट्स है.

वीर : वेल! यस!

श्रेया : ओह्ह गॉड! थैंक यू सो मच!!!

वह उछालते हुए एक बार फिर कस के वीर के गले लग गयी और जज़्बाती होते हुए उसने,

*मुऊआआअह्हह्ह्ह्हह*

जोरर से वीर का गाल चूम लिया.

निधि (हैरत में) : Sh-Shreyaaaa!?

श्रेया (ब्लशेस) : W-Woh! ी वास् जस्ट एक्ससिटेड.

शर्माते हुए उसने फौरन hi अपना चेहरा छुपाया. खुद पर इतनी शर्मिंदगी हो रही थी अभी उससे. भावनाओ में बहके उसने

वीर को चूम लिया था. वह ये कैसे भूल गयी की निधि ठीक पीछे hi कड़ी थी उसके!?

श्रेया : ओह्ह! तुमने न्यूज़ पढ़ी?

वीर : Ma'am के ex-husband वाली? सूरे! सूरे! बिलकुल पढ़ी.

श्रेया : देखा न? केसा दरिंदा निकला वह. ठीक हुआ उसके साथ. एकदम सही हुआ. अब सड़ता रहेगा जेल में ज़िन्दगी भर. हम्फ!

वह तुरंत hi अपना गिफ्ट खोलने में लग गयी. और वीर चुप चाप सोफे पर बैठ गया.

वीर : जूही कहा है?

श्रेया : सो रही है वह अभी तक.

वीर : स्कूल नहीं गयी?

श्रेया : कल उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी. इसलिए आज उससे नहीं भेजा.

वीर (फ्रोंस) : क्या हुआ?

श्रेया : कुछ नहीं! सीजनल चेंज. और बस हलकी फुलकी खासी, सर्दी बुखार.

वीर : ओह्ह्ह!

श्रेया : रुको में जगाती हु अभी.

वीर : अरे नहीं! रहने दीजिये! सोने दीजिये उससे.

श्रेया : अरे रात 8 बजे hi सो गयी थी. तब से सो रही है. उठाने hi वाले थे हम उससे. गिफ्ट्स देख के खुश हो जाएगी. ओह माय गुड्ड़!!!?? ये मेरे लिए? दी लुक!!! हाई हील्स!!! तुम्हे साइज कैसे पता चला?

वीर (स्माइल्स) : जब यहाँ रुकता था तब देखा था. तब से याद था.

श्रेया (ब्लशेस) : T-Tumhe याद था?

वीर : Mm-Hmm!

श्रेया : बरबरी?? ओह्ह्ह मय्यै गूदड़ड्ढ!!! पागल हो क्या तुम? इतनी महंगी हाई हील्स? वेट!!!! दी का क्या है फिर? ओह्ह्ह फुक्ककककक!!!

निधि : श्रेयआआअ!!! ये क्या तरीक़ा है बात करने का?

श्रेया : ऊप्स! S-Sorry!!! पर दी देखो न!! वर्सस!!!? आपका हैंडबैग वर्सस का है. हौली शीट्ट्ट्ट!!!! तुम्हारी लाटरी लग गयी क्या? वीर?

वीर (स्माइल्स) : गिफ्ट्स लेते टाइम मेने प्रिंसेस चेक नहीं किये थे. जो पसंद आये उन्हें चूसे कर लिया. सुहाना ma'am साथ में थी. सो, उन्होंने काम आसान करवा दिया था. वर्ण में वेरायटीज देख के hi कन्फ्यूज्ड था.

सुहाना का ज़िक्र आते hi वीर का ध्यान पल भर के लिए उस ख़ूबसूरत औरत की ऑर्डर चला गया.

निधि : ये सब क्या है वीर?

वीर : !!?

निधि : तुम्हे पता है तुमने कितना खर्चा किया है?

श्रेया : उम्! दी! वह इतने प्यार से लाया है. हाउ कैन यू-? आप उसके सेंटीमेंट्स को ठेस पहुचा रही हो. मुझे देखने दो कितने के है ये. आपको ऐसा नहीं बोलना चाहिए. ये तोह सिर्फ-!!!???????? हैं??? व्हाट थे फुसक्कककककक??? 30 हज़ार का बैग???? वीरररर??

श्रेया जो अब तक वीर के सपोर्ट में थी. प्राइस देखते hi उसकी हालत खराब हो गयी.

श्रेया : V-Veer?? थिस इस तू मच! ऊपर से मेरी सैंडल्स?? ओह्ह्ह गोड्ढ!!! 28 थाउजेंड??? क्या कर रहे हो तुम??? दी सही है. इतने महंगे गिफ्ट्स की क्या ज़रुरत थी? मेरी मंथली पाय भी इतनी नहीं है.

वीर ने कोई जवाब नहीं दिया बस हलके से मुस्कुराया तोह श्रेया कुछ भांप गयी.

श्रेया : I'm- I'm सॉरी! रियली! मुझे पहले कभी किसी ने इतनी महंगी गिफ्ट नहीं दी. इसलिए में...! पर अब तुम इतने प्यार से लाये हो तोह में कैसे मन कर सकती हु!? हहै~

निधि : श्रेया तुम-!!?

श्रेया : अगर में नहीं लुंगी तोह उससे बुरा लगेगा! इसलिए में तोह ये ले रही हु. एंड थैंक यू सो मच वीर!

वीर (स्माइल्स) : वेलकम!

श्रेया जानती थी की वीर को असली ख़ुशी तब hi मिलेगी जब वह गिफ्ट को एक्सेप्ट करेगी और वही हुआ भी. वीर सबके लिए ये प्रेम से लाया था. इससे दुत्कारना केवल वीर के दिल को आहात पहुचाने जैसा था.

वह गिफ्ट को ख़ुशी ख़ुशी लेते हुए अंदर गयी और जूही को जगाने लगी. तोह इधर सोफे पर hi निधि और वीर अगल बगल बैठे गए.

वीर : खबर पढ़ी न आपने?

निधि : ममम~

वीर : ....

निधि : उस व्यक्ति से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है?

वीर : तोह...

निधि : वह व्यक्ति मेरे जीवन में कोई स्थान नहीं रखता. जो भी होये उसके साथ. मुझे क्या फ़र्क़ पड़ता है.

वीर : और अब आप...

निधि : ??

वीर (स्माइल्स) : निश्चिन्त हो. न hi वह अब आपको तकलीफ दे सकता है और न hi आपके खिलाफ कोई क़दम उठा सकता है.

निधि : हम्म!

वीर : ध्रुव कहा है?

निधि : अंदर है! सो रहा है.

वीर : ओह्ह!

निधि : क्या ज़रुरत थी?

वीर : किसकी?

निधि : इतने महंगे गिफ्ट्स लाने की?

वीर : कभी तोह कुछ दिया नहीं. काम से काम इन्हे तोह एक्सेप्ट करिये.

निधि : बैग और सैंडल्स काम दाम की भी तोह ले सकते थे न? या कुछ छोटा मोटा भी तोह ला सकते थे न?

वीर निधि की दांत सुन्न बस मुँह फेरर लिया. और इस बार, निधि को एक तकलीफ हुई. ऐसा लगा जैसे दिल में किसी ने सुई चुभोई हो. एक तोह वीर इतने प्यार से लाया था गिफ्ट्स, और ऊपर से वह उससे hi सुना रही थी. ये ध्यान में आते hi वह अंदर ग्लानि से भर गयी.

निधि : M-Mein...! माफ़ करना! में कुछ ज़्यादा कह गयी.

वीर (स्माइल्स) : कोई बात नहीं! आपका हक़ है!

सुनते hi निधि के गालो का तापमान बढ़ गया.

निधि (ब्लशेस) : O-Ok!

निधि को तभी बैठे बैठे एक बात याद आयी. हे भगवान्! वह ये कैसे भूल सकती थी? वीर की सगी बहिन उसके घर आयी थी कल hi. क्या करे वह? क्या वीर को बता दे? पर तेजल ने तोह मन किया था. तोह अब?

ये कहा फस्स गयी थी वह!?

"माहामुउउउ!!!"

और जूही की cheh-chahaati आवाज़ ने उसकी सोच को भांग कर दिया. वह कूदती फांदती दौड़ते हुए आयी और वीर की गॉड में बैठ गयी.

वीर (स्माइल्स) : किसी है जूही?

जूही : जूही एकदम मस्त है!!! *स्निफ्फ*

निधि : ये देखो! नाक बह रही है. और खुद को मोहतरमा मस्त बता रही है.

वीर : में तुम्हारे लिए चॉकलेट्स लाया हु जूही!

जूही : सच्ची???

वीर : मुच्ची!

जूही : याआयीयी!!! दो जल्दी!! जल्दी दोऊ!!!

और वीर ने जब एक बेहद बड़ा पैकेट थमाया तोह जूही तोह क्या निधि भी हैरान रह गयी.

निधि : I-Itni साड़ी चॉकलेट्स? वीर ये तुम-

वीर (स्माइल्स) : रोज़ एक hi दिया करिये. उस से ज़्यादा नहीं!

निधि : जैसे की वह मेरी बात मानेगी.

वीर : में समझा दूंगा.

वीर जूही को समझाने लगा तोह दोनों को इस तरह देख निधि कही खो सी गयी. वीर बिलकुल ऐसा था जैसे एक पिता को होना चाहिए अपने बच्चो के प्रति.

श्रेया अंदर के अंदर hi वाशरूम में घुस गयी थी तोह बाहर अब सिर्फ वही तीनो थे.

जब जाने का समय हुआ तोह वीर ने निधि को देखा,

निधि : क्या हुआ?

वीर (स्माइल्स) : आप बोहत सुन्दर लग रही हो.

निधि : ओह्ह अच्छा? सुबह सुबह उठ के कौन सा इंसान सुन्दर दीखता है भला?

वीर : आप!

उसके एक तक जवाब से निधि बेचारी झेप सी गयी,

निधि (ब्लशेस) : H-Huhhh?? M-Makkhan लगाने की ज़रुरत नहीं है. B-Bolo? क्या चाहिए? सेशनल्स में ा+ चाहिए? या कुछ और?

वीर (स्माइल्स) : मेने गेनुइनेली कहा है. किसी फवौर के लिए नहीं!

निधि (ब्लशेस) : तुम-!!!

वीर (शिघ्स) : अन्य्वयस! चलता हु! फिर मिलेंगे!

वीर उठ के वह से जैसे hi जाने लगा तोह निधि भी उठ के आयी,

निधि : R-Ruko!!

वीर : हम्म?

निधि : बिना खाये पिए कैसे जा रहे हो? इधर आओ! चुप चाप बैठो इधर. में फटाफट कुछ प्रेपर करती हु. खा के जाना!

वीर : पर इसकी कोई-

निधि : शट उप! एंड सीट डाउन!

वह आर्डर देके अंदर किचन में चली गयी. पर इसके बाद, दोनों hi वीर और निधि के होंठो पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी.

***

सिस्टम लेवल उप हो चूका था. पारी का लेवल बढ़ चूका था. जहा एक तरफ पारी की नयी पर्सनालिटी आयी थी तोह वही दूसरी तरफ पारी की पुराणी सुतस्य वाली पर्सनालिटी जा चुकी थी.

पर जो ख़ास बात थी अभी, वह थी लेवल उप होने के बाद आने वाले फायदे.

सबसे पहला फायदा जो मिला था वीर को वह था ट्रांसलेटर फंक्शन के अपग्रेड होने का. वीर अब कोई भी भाषा समझ सकता था और बोल भी सकता था. उसके लिए अब लैंग्वेज बैरियर जैसी चीज़ ख़तम हो चुकी थी.

दूसरा फायदा मिला था सिस्टम के पास वर्ल्ड नॉलेज आने का. ज़ाहिर है की अगर हमे आज कुछ भी चीज़ की जानकारी प्राप्त करनी होती है तोह हम गूगल, इंटरनेट, इनका hi सहारा लेते है. इनके hi पास पूरे विश्व का नॉलेज होता है.

परन्तु अब, वीर को ये करने की भी ज़रुरत नहीं थी. वही नॉलेज सिस्टम के पास था अब. अगर वीर को कुछ इंटरनेट पे ढूँढना है तोह वह सीधे सिस्टम से hi पूछ सकता है.

यदि इसका उत्तर हमारी पृथ्वी में कही भी पाया जाता है. तोह सिस्टम वीर को जवाब देने में सक्षम रहेगा.

और आखिरी और सबसे बड़ा फायदा. इससे पाके तोह वीर जैसे जन्नत में था.

लिमिट ेरादिसते हो चुकी थी. वीर जो अपने कार्ड्स को स्लॉट में लगाने के बाद 24 घंटे इंतज़ार करता था, वह इंतज़ार अब ख़तम हो चूका था.

वह अब आसानी से अलग अलग कार्ड्स को जब चाहे तब स्विच कर सकता था. एक डेडली बेनिफिट था ये.

और इसलिए वह अब थोड़ा कलम था. बिलकुल पारी की नई पर्सनालिटी की तरह.

***

इवनिंग ~ 7:27 पं

शाम का समय हो रहा था और हल्का हल्का अँधेरा भी छा चूका था. वीर के पुराने घर में सभी अपने अपने कामो में व्यस्त थे.

जब बाहर हो रहे एक शोर ने उनका ध्यान खींचा.

"बाहर निकलो!!! कहा रह गए सब के सब? कायरो की तरह छुपके बैठ गए क्या? निकलो बाहर!!!"

बाहर खड़े जो गार्ड्स थे वह दोनों भी स्तब्ध रह गए.

एक अनजान लड़की आके न जाने क्या क्या बाके जा रही थी.

गार्ड : आइये लड़की! पागल है क्या? चल जा यहाँ से.

"अरे जाओ जाओ! मेरे रास्ते में मत आना वर्ण अंजाम अच्छा नहीं होयेगा."

गार्ड : तेरी तोह-! धमकाती है? कौन है तू? क्या काम है तुझे?

"हम्फ~ ोये कायरो! हाथ में चूडिया पेहेन राखी है क्या? बाहर निकलो!"

जब लड़की ने फिर भी न सुनी, तोह दोनों hi गार्ड्स उठ के उसके पास आये पर इस से पहले की वह उससे पकड़ पाते, घर का दरवाज़ा खुला और अंदर से घर के कई सारे सदस्य बाहर निकल के आ गए.

"Y-Ye क्या शोर है?"

मनोरथ जो अपनी व्हीलचेयर पर बैठे आराम कर रहे थे, उन्हें काव्य लेते हुए बाहर आयी.

सुमित्रा आरोही भी बाहर आ चुकी थी. साथ hi बृजेश और करुणेश भी. विवेक घर पर था नहीं. वह अपनी कंपनी में hi लगा हुआ था अभी.

मनोरथ : कौन है ये लड़की?

गार्ड : सरकार! कब से इसको समझा रहे है पर समझने का नाम नहीं ले रही. बदतमीज़ी करते जा रही है. आप कहे तोह-

मनोरथ : मुझे बात करने दो! क्या हुआ बीटा? क्यों घर के सामने चिल्ला रही हो? और कौन हो तुम?

लड़की मुस्कुरायी और फिर हस्ते हुए बोली,

"कमाल है. आप अपनी पोती को hi नहीं पहचाने? हाहाहाहा!"

बेशक, ये लड़की कोई और नहीं तेजल hi थी.

मनोरथ : मेरी पोती?

तेजल : हाँ आपकी पोती! में तेजल सिंह! भावना सिंह की एकलौती बेटी! और वीर की बड़ी बहिन!

*बूम*

एक बड़ा सा बम उन् सब के सर्र जैसे आके फटा. ये लड़की क्या बड़बड़ाये जा रही थी?

बृजेश की आँखें फटी हुई थी. तोह वही करुणेश हैरान था. सुमित्रा चकित और आरोही, काव्य दोनों hi कन्फ्यूज्ड.

मनोरथ : भावना की बेटी?

'भावना? ये तुम्हारी बेटी है? कैसे?' मनोरथ एक चिंता में डूब गए.

तेजल ने ऊँगली दिखाते हुए उन् सभी को गुस्से से देखा और वह फिर चिल्लाई,

तेजल : शर्म नहीं आयी तुम लोगो को? इतनी घटिया और घिनौनी हरकत करते हुए?

बृजेश : ये क्या बड़बड़ाये जा रही है लड़की?

तेजल : मेरे भाई वीर को इसी घर से धक्के मार के निकाला गया था न? बोलो? है न?

*साइलेंस*

मनोरथ : मुझे एक बात बताओ बीटा. क्या तुम्हारी माँ, भावना? क्या उन्होंने दूसरी शादी की थी?

तेजल : हम्फ! काश की होती. तोह काम से काम एक अच्छा बाप तोह मिल जाता.

तेजल के इस हमले से वह खड़े सब के होश उड़द गए. स्वयं बृजेश के भी. क्युकी ये बात तेजल ने उससे hi देख के कही थी. वह जैसे जान गयी थी की यही उसका बाप है.

पर यहाँ अब सब उल्टा समझ रहे थे.


'हँ? भावना ने दूसरी शादी नहीं की? तोह ये लड़की? ओह्ह्ह! अच्छा! हम्म! तोह ये बात है! ये गॉड ली हुई बच्ची है. और इससे भी ये बात शायद नहीं पता है.'

मनोरथ ने मैं में सोच धीरे से बृजेश और करुणेश के कानो में ये बात डाली. और उन्हें भी माजरा समझ आया.

मनोरथ : तुम्हारा मक़सद क्या है बीटा?

तेजल : मेरा मक़सद!? ः! वह jaan'ne के लिए आप क्वालिफाइड नहीं हो.

करुणेश : तमीज से बात कर लड़की!!! क्या तू जानती नहीं की बड़ो से कैसे बात की जाती है? क्या यही संस्कार दिए है तुम्हारी माँ ने?

तेजल : हम्फ! वह संस्कार में उन्हें hi दिखती हु जो उसके योग्य होता है. पर तुम सब...! हम्फ!

वह उन्हें नीचे दिखाते हुए मुस्कुरायी,

करुणेश (चिल्लाते हुए) : बद्तमीज़!!!!!

काव्य : ऐसा नहीं है....!!!!

काव्य की आवाज़ सुनके तेजल शांत हो गयी. उससे ध्यान आया की निधि ने आरोही और काव्य. ये दो नाम लिए थे.

तेजल : क्या नाम है तुम्हारा?

काव्य : काव्य! और आप जैसा सोच रही है वैसा नहीं है. हाँ पास्ट में मेने भी उनके साथ अच्छा बेहवे नहीं किया. बूत मेने ये हमेशा रिग्रेट किया है. और में और आरोही दी हम दोनों hi वीर भैया को दिल से प्यार करते है. हम उनका बुरा कभी नहीं चाहेंगे.

काव्य के डेस्पेरेट एटेम्पट में आरोही भी शामिल हो गयी.

आरोही : काव्य सही कह रही है. दीदी! A-Aap हमे गलत समझ रही है.

तेजल ने एक स्माइल दी और वह आगे बढ़ी और अचानक hi उसने काव्य को अपने गले से लगा लिया,

काव्य : हहहह??

तेजल (स्माइल्स) : थैंक यू! थैंक यू फॉर बीइंग तेरे विथ हिम. में तुम्हारी बड़ी बहिन हु. यू क्नोव? आज मुझे दो दो छोटी बहने मिल गयी.

काव्य : M-Mein-

तेजल : अब ये बताओ! वह प्रांजल तुम्हारा भाई है न?

काव्य : हम्म!

तेजल : कहा है वह?

काव्य : U-Unhe...!

करुणेश : काव्याआ!!!!

और अपने पिता की आवाज़ सुन्न, काव्य डर के मारे चुप हो गयी.

आरोही : उससे घर से बाहर निकाल दिया गया है.

करुणेश : आरोहीय!??

तेजल (सुरप्रीसेड) : हम्म? क्यों भला?

आरोही : क्युकी दादा जी को उसने मंदिर की सीढ़ियों से गिरवाया था. जायदाद के लिए. वीर का नाम हटाने के लिए.

आरोही के बोल न सिर्फ तेजल को स्तब्ध किये बल्कि करुणेश समेत उसका खुद का परिवार भी आरोही के be-jhijak हाज़िर जवाबी सुन्न के बौखलाया हुआ था. साड़ी अंदर की पोल वह यु खोलती जा रही थी. जानते तोह सभी थे ये बात पर कोई इस बात पर बात नहीं उठता था. पर आरोही ने आज निडर होक सब बेबाक बोल दिया.

तेजल : ओह्ह? तोह अब कहा है वह?

आरोही : अमृत निवास!

उसके मुँह से अभी निकला hi था की पीछे खड़े करुणेश के होश उड़द गए. ये इनफार्मेशन तोह सिर्फ वह जानता था. वह hi अपने बेटे को अब तक बचाया हुआ था. फिर उसकी बड़ी लड़की को ये बात कैसे पता लग गयी?

वह चाह के भी आरोही को इस समय कुछ नहीं कह सकता था.

मनोरथ : अमृत निवास? प्रांजल वह क्या कर रहा है? करुणेश? मुझे जवाब चाहिए!

करुणेश : मुझे खुद नहीं पता पापा जी! Sh-Shayad उसने उस घर की छवि जाने से पहले लेली. वर्ण-

मनोरथ ने बस एक बार उससे घूर के देखा और फिर तेजल की ऑर्डर उसने निगाह करि,

मनोरथ : बीटा तुम-

तेजल : मुझे जो jaan'na था वह पता लग गया. अब मेरा यहाँ कोई काम नहीं! सॉरी दादा जी! पर अभी आपकी बातें sunn'ne के लिए मेरे पास वक़्त नहीं!

और जिस हवा के झोके की तरह वह यहाँ आयी थी उतनी hi तेज़्ज़ी में वह यहाँ से निकल भी गयी.

वह मौजूद सभी लोगो को कन्फूसिओं में दाल के. सब बस सोच में पद गए. ये अभी अभी हुआ क्या था? वह लड़की यहाँ आयी क्यों थी? और इतने साल कहा थी? भावना की बेटी? तोह क्या भावना भी इधर है?

बृजेश जो अब तक मौन था, उसके अंदर न जाने क्या क्या बातें चल रही थी. पर एक बात स्पष्ट थी. वह ये की उसका जी भी अंदर से मिचला रहा था.

***

नाईट ~ 8:16 पं

"साला जल्द से जल्द यहाँ से निकलना होगा वर्ण दिक्कत हो जाएगी."

प्रांजल, जो पुणे जाने के पूरे बंदोबस्त में था. अपने सूटकेस में वह साड़ी ज़रूरी सामग्री रखने में लगा हुआ था. लगभग सारा सब कुछ उसका पैक हो चूका था.

"मादरचोद है साले सब के सब. बहनचोद वीर!! साले जिस दिन तू मेरे हाथो में आया न, कसम से ऐसा मसलूंगा न तुझे. Gid-gidayega साले तू मेरे पेर्रो पर."

"पर उसके लिए, मुझे थोड़े दिन अंडरग्राउंड होना होगा. लक इस ों योर साइड वीर. ी एडमिट! तुमने ये पारी जीती है. लेकिन जुंग में hi जीतूंगा."

*क्लिक* *क्लिक*

सूटकेस बंद कर उसने मिरर में एक अंतिम बार खुद को देखा, अपने बाल सवार और बस वह अभी जाने hi वाला था की,

*रिंग* *रिंग*

उसका फ़ोन बज उठा.

"किसका फ़ोन आ गया बहनचोद अब?"

कॉलर था करुणेश.

"सहित!! डैड का है-!!"

प्रांजल : Hello? डैड!??

करुणेश : में जो जो कह रहा हु उससे ध्यान से सुनो. वीर की कोई मुँहबोली बहिन है शायद! मुझे नहीं पता वह इतने सालो से कहा थी पर वीर की असल माँ, यानी तुम्हारी तै जी ने एक बेटी गॉड ली है शायद.

प्रांजल : हँ? ये सब आप मुझे क्या बता रहे हो? डैड में लेट हो रहा हु! ये फ़ालतू का फॅमिली चार्ट आप बाद में भी बता सकते हो मुझ-

करुणेश : निकम्मे चूतिये!!! मेरी बात ध्यान से सुन्न!!!

प्रांजल : H-Huhh? D-Dad? चिल!

करुणेश (स्क्रीम्स) : एक बार की बात तेरे भेजे में नहीं घुसती क्या? बोलै न मेने की जो कुछ भी कह रहा हु उससे ध्यान से सुन्न!

प्रांजल : O-Okay! कहिये! भड़क क्यों रहे हो? बात क्या है?

करुणेश (लम्बी सास लेते हुए) : वीर की एक बहिन है जो अभी अभी कुछ देरर पहले घर आयी थी. गुस्से में थी और उससे सब कुछ पता है वीर के साथ हमारे घर का क्या रवैय्या था.

प्रांजल : तोह?

करुणेश : उसने यहाँ आके काफी बदतमीज़ी से बात की और उसने तुम्हारे बारे में पूछा.

प्रांजल : मेरे बारे में?

करुणेश : हम्म! पूछा की तुम कहा पर हो.

प्रांजल : ः! तोह सुरेली आपने बताया थोड़ी होगा.

करुणेश : पर आरोही ने बता दिया है.

प्रांजल : हहहह??

करुणेश : मुझे नहीं पता उससे ये बात कैसे पता चली, पर उसने अमृत निवास की जानकारी देदी है.

प्रांजल : व्हाट थे हेलल?? Y-Ye आरोही दी को आप लोग कण्ट्रोल में नहीं रखते हो न उसी का नतीजा है. पता नहीं मेरी दोनों बहनो को उस चूतिये वीर में ऐसा क्या नज़र आता है जो पागलो की तरह उसके पीछे पीछे लगी रहती है.

करुणेश : तुम्हारी माँ पे जो गयी है दोनों! खर्र! उन्हें जो करना है करने दो. बल्कि अच्छा hi है वह इन् चीज़ो से दूर रहे. देखो! तुम्हारे दादा जी को मेरे ऊपर शक है की मेने तुम्हे वह रहने को जगह दी है. मुझे पापा जी से मिलना है अभी. तुम्हारे ताऊ जी भी होंगे वह. उन् सब को जवाब देना होगा मुझे. तुम अभी के अभी वह से निकल जाओ. कही ऐसा न हो वह लड़की तुम्हे ढूंढते हुए वह तक पहुँच जाए. क्युकी में अभी कुछ देरर के लिए तुम्हारा कोई भी फ़ोन नहीं उठा पाउँगा. समझे?

प्रांजल : हम्म! तोह ये वीर की बहिन? कोई बिगशॉट है क्या? वज़नदार?

करुणेश : देख के तुम्हारे जितनी hi लगी. एक आम लड़की hi मालुम होती है. पर गुस्से से भरपूर है. जितना जल्दी हो सके निकल जाओ. और में रख रहा हु अब.

प्रांजल : Okay! ठीक है डैड!

करुणेश : संभल कर जाना! में थोड़ी देरर से फ़ोन करता हु.

प्रांजल : हम्म!

और कॉल कट हो गया.

'वीर की बहिन? हम्फ~'

प्रांजल फटाफट अपना सूटकेस उठा के वह से दरवाज़े की ऑर्डर आया और उसने जैसे hi दरवाज़ा खोला,

"हहह??"

"तोह यहाँ हो तुम!!!" एक मधुर आवाज़ उससे सामने से आयी. देखा तोह पाया की एक सुन्दर सी लड़की सीढिया चढ़ते हुए उसके hi क़रीब आ रही थी.

और प्रांजल को अगले hi शान अभी अभी अपने बाप से हुई बात याद आ गयी.


कही ऐसा न हो वह लड़की तुम्हे ढूंढते हुए वह तक पहुँच जाए.

और वही हुआ.

ये तेजल hi तोह थी. ऑफ़ कोर्स, और कौन हो सकता था भला?

तेजल : तोह तुम हो वह गन्दी नाली के कीड़े? हम्म?

प्रांजल : हँ?? तुम कौन हो?

तेजल : तुम नहीं बच्चे! आप कहके बुलाओ. और अभी कुछ देरर में जान जाओगे में कौन हु.

*क्रैक* *क्रैक*

अपनी हाथो की उंगलियों को आपस में चटकाते हुए तेज ने अपनी शर्ट की स्लीव्स ऊपर चढ़ाई और अंदर आने लगी.

प्रांजल के परर अपने आप पीछे चले गए. जब तेज दरवाज़े के अंदर आयी तोह उसने दरवाज़ा अटका दिया.

प्रांजल : क्या चाहिए तुमको? साफ़ साफ़ कहो!

तेजल (स्क्रीम्स) : हराम खोर!!! बेशरम की औलाद कही के. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे छोटे भाई के साथ ऐसा करने की? हाँ?

ऐसा पहली बार हुआ था जब प्रांजल किसी सुन्दर सी लड़की के मुँह से अपने लिए ऐसी बातें सुन्न रहा था. साफ़ था की वह थोड़ा झेप गया था.

तेजल : चमन चूतिये!! जिस थाली में खाता है, उसी में छेड़ करता है? अपने hi परिवार वालो को धोका देता है? उनके खिलाफ षडियंत्र रचता है? आज अगर तेरी हड्डी पसली नहीं तोड़ी न, तोह मेरा नाम भी तेज नहीं!

प्रांजल (स्माइल्स) : हैः! विथ जस्ट यू? आंटी जी! बड़ी हो इसलिए लास्ट बार समझा रहा हु. जहा से आयी हो सीधे तरीके से वही से निकल जाओ. वर्ण अंजाम-

तेजल : तोह अब ये आंटी hi तुझे पाठ पढ़ाएगी मेरे बच्चे! आफ्टर आल, होर्रिड किड्स लिखे यू, मस्ट बे तौह्त ा लेसन.

"Haaaaaaaaaa~"

और तेज जोश के साथ अचानक hi फुर्ती में आगे बढ़ी. प्रांजल ने जैसे hi उससे इतनी स्पीड में आते देखा तोह उसने एक पल न गवाते हुए अपना सूटकेस साइड में फेक दिया. उससे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था की एक अकेली लड़की उस से भिड़ने की भूल करेगी.

क्युकी ज़ाहिर है की आम तौर पर एक लड़का और लड़की अगर लड़ते है तोह जीत किसकी होगी, ये स्वाभाविक hi रहता है. सिवाए कुछ केसेस के.

*वहूउसस्शह्ह्हह्ह*

एक लात जोरर से हवा में उड़ते हुए प्रांजल के सीधे मुँह की ऑर्डर आयी और वह फ़ौरन झुका.

पर इसके पहले की वह नीचे झुक के हमला कर पाटा, तेज अगले hi पल पीछे हो गयी.

एक बार फिर वह दौड़ते हुए आयी. प्रांजल ने खुद को दूसरी किक के लिए प्रेपर किया पर,

तेजल ने न hi कोई घुसा चलाया और न hi कोई लात, वह सीधा आके प्रांजल पर झपट पड़ी.

दोनों एक दूसरे के ऊपर हावी होने का प्रयास करने लगे,

"Y-Youuu बितछछःह!!!"

"फ़क ओफ़्फ़्फ़! चूतिये!!! आज तोह तेरी खर्र नहीं...! ुररगघ!"

"कुटिया! रुकक्क! अभी बताता हु तुझे!"

वह तेजल के गले की ऑर्डर लपका और हावी होना शुरू हुआ तोह तेजल ने भी प्रांजल के बाल पकडे और जैसे एक पौधे हो जड़ से उखाड़ते है, उतनी hi ताक़त से उखाड़ना शुरू किया,

"अअअअअअअरररग्घहहहह!!! कुटियाआआआ!!!!"

एक दर्द भरी चींख कमरे में फेल गयी.

"Ch-Chorrr बाल!!!! माआदरछोड़ड़ड़!!! R-Randiii की बच्चीय!!! चोररररर!!!!"

"सूअर की औलाद साले! मुझे आम लड़की समझ रहा था न चूतिये!! यू फुकेररर!! I'm ा ग्रीन बेल्ट इन करते!!! किस्मत तेरी जो अभी ब्राउन और ब्लैक बेल्ट हासिल नहीं किया. वर्ण तू तोह-!! हम्फ~"

"ाआर्गग्घहहहह!!"

अब पास पलट रहा था. तेजल हावी हो रही थी.

*क्लायंगगगगग*

*क्राआष्ठहहह*

*ठुड्ढ*

इस छीना झपटी में, आस पास की चीज़ें बिखरती जा रही थी. पर तेजल ने प्रांजल को एक डेडलॉक में फसाया हुआ था. और साथ hi वह उसके बाल को खींचते जा रही थी.

"मेरे मासूम से भाई पे अत्याचार करता है तू? तेरी हिम्मत कैसे हुई? हाँ!!? शुक्र मन जो में यहाँ नहीं थी. वर्ण मेरी आँखों के सामने अगर तूने ये सब किया होता न तोह कसम से... तेरे हाथ परर तोड़ देती में...! आँखें नोच लेती!"

"कुतिययाआ!!! Ch-Chorrr!!!!!!!"

"बक ले जितनी गालिया बकनी है!! तुझे जब तक बेसुध न चोरर दू तब तक रुकूंगी नहीं में. एक hi भाई मिला बड़ी मुश्किल से. लगा था उसने मुझसे बेहतर ज़िन्दगी गुज़ारी है. एक में hi अभागन थी. पर नहीं!!! तुम चुतियो ने तोह उसकी ज़िन्दगी नर्क बना के राखी हुई थी. परिवार और भाई के नाम पे कलंक है तू हराम खोर्रर!!!!!"

"अअअअअरररग्घहहहहह!!! चोरर दिए!! चोरर दे नहीं तोह मार डालूंगा तुझे आज रनडीई!!"

पर तेजल ने अपनी पकड़ बिलकुल नहीं छोर्री!

न जाने कितने बाल तोह तेजल ने उखाड़ hi लिए थे प्रांजल के.

जब वह दोनों एक टेबल से टकराये तोह प्रांजल का हाथ टेबल पर फिरना शुरू हुआ और किस्मत से उसके एक छोटी वाली सकिसोर हाथ लग गयी.

न देखा न सुना और बस उसने वह कैची उठा के सीधे तेजल की ब्याह में दे मारी,

"आआआहहहहहहह!!!!!"

दर्द में तेजल चिल्लाई और पकड़ ढीली हो गयी,

"चल निकल कुटिया!!!!"

*बाजआनंनंगगगगग*

और एक ज़ोरदार लात तेजल को सीधे पेट में ाले लगी, जिस कारण से उसका शरीर पीछे धकिल गया,

चुकी पीछे दरवाज़ा था जो अटका हुआ था और उसके नीचे सीढिया,

*क्राआष्ठहहह*

तेजल दरवाज़े से भीड़ के सीधे सीढ़ियों से नीचे हवा में गिरी जब,

*क्लास्प*

"हहहहहह!!??"

एक जानी मानी सुगंध! ये फेमिलिअर सी फीलिंग, ये अनुभूति...! दो मज़बूत भुजाओ ने उससे जकड रखा था. इन्ही हाथो ने उससे गिरने से भी बचा लिया. ये स्पर्श...!

क्कुह शान के लिए जैसे वक़्त थम गया तेजल के लिए.

और जैसे hi उसने अपना सर्र ऊपर कर देखा तोह,

वह चेहरा! जिससे देखने के लिए वह कबसे इतना तड़प रही थी. वह सामने था. उसके होंठो पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी.

और फिर उसके मुँह से कुछ शब्द निकले, जिससे सुन्न, तेजल की आँखें अपने आप पानी पानी हो गयी,

"It's बीन ा व्हिले...! सीस!!"

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ 5.8क वर्ड्स. कितना कुछ दिखाया है इस अपडेट ने हमे. पूरे घटनाक्रम को दर्शा दिया है. अगला अपडेट हमे एक छोटा सा पास्ट दिखायेगा. तोह बने रहिएगा. और लाइक्स ठोकना नहीं भूलना, साथ hi रेवोस देना भी.


धन्यवाद! ✨
 
ये एक आड़ जनन काम क्यों नज़र आ रहे है? अबे Death Kiñg कहा है? :व्हाट1:
 
Back
Top