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- Dec 5, 2013
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अपडेट - 107 ~ थे सीक्रेट प्रैक्टिस
अब तक...
कार में घुसते hi उससे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसने कुछ खो दिया था. ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल में कोई सुई चुभो रहा था. पीड़ा!!!
जैसे वह हिम्मत hi हार चुकी थी.
'N-Nooooo!!!!'
एक्सेलरेटर पर परर रख उसने एक झटके में गाडी आगे भगा दी,
*वरररररओओओओओओमममम*
अभी अभी...
ये क्या हो गया था?
अब आगे...
"हाह! हाह! हाहहहह! ुररगग्गहह!!"
*थुड़*
लड़खड़ा के एक शरीर अचानक नीचे ज़मीन पर गिरा. सासें तेज़्ज़, धड़कने तेज़्ज़, आँखें एकदम लाल, पूरा बदन पसीने से लथपत, आँखों में धुँधलापन्न और निरंतर खासे जा रहा था वह शख्स.
*कुघ* *कुघ*
*कुघ* *कुघ*
*ग्वाखहहहहहहहह!!*
खून!! मुँह से उसके धेरर सारा खून निकला.
[Nooooooooooo~ Masterrrrrrr!!!!!!!]
पारी जोरर से चींखी. बेशक, ये वीर hi था. वाइन पीने के कुछ देरर बाद hi वीर के शरीर के अंदर न जाने क्या कुछ होने लगा था.
वह जैसे hi गिरा, पारी की चींखे भी धीरे धीरे धीमी सुनाई पड़ने लगी उससे.
उसने अपने होंठ खोले कुछ कहने के लिए पर thar-tharaate हुए वह वापस बंद हो गए.
[Maaaaassssttttteeeerrrrrrrrr~]
एक दर्द भरी आखिरी आवाज़ hi पारी की सुन्न पाया वह. और अगले शान hi,
उसकी आँखें बंद हो गयी.
[Nooooooooooooooooooo!!!!!!]
***
"Aaaaaahhhhhhhhhhnnnnnnnn~"
अचानक झटके के साथ एक लड़की अपने बिस्तर से उठ गयी. दिन का समय था. लगभग 1 बज रहे थे. वह अपने कमरे में hi थोड़ा आराम फरमाने के लिए लेती हुई थी जब उसकी हलकी नींद लग गयी थी. और नींद में उसने न जाने ऐसा क्या देखा जिसके चलते वह हड़बड़ाते हुए उठ के बैठ गयी.
शायद, एक बुरा सपना था.
उसके कपडे पसीने से भीगे हुए थे. ख़ूबसूरत से चेहरे पर भी पसीने की बूंदे सजी हुई थी. हफ्ते हुए उसने अपने चेहरे पर से एक टॉवल से पसीना पोछा. और एक गहरी सांस लेते हुए वह किचन की ऑर्डर चल पड़ी.
एक गिलास ठंडा पानी पीने के बाद वह वापस आयी, कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बिस्तर पर बैठ गयी.
'ये बेचैनी...!'
उससे कुछ ठीक नहीं लग रहा था. उसने फ़ौरन hi अपना फ़ोन उठाया, उसमे गैलरी खोली और उसकी नज़रे एक तस्वीर पर जाके ठहर गयी.
'थोड़े दिन और... थोड़े दिन में hi... तुम मेरी आँखों के सामने होंगे. और फिर उसके बाद... तुम्हे कही नहीं जाने दूंगी में!'
'हम फिरसे एक साथ रहेंगे. माँ से सारे राज़ खुलवा के रहूंगी में. जस्ट वेट ा बिट मोरे. ी विल के तो यू. वैरी सून! माय यंगर ओने!!'
और खुद मैं में एक लक्ष्य ठान, वह वापस से बिस्तर पर लेत गयी.
***
लॉस वेगास ~ 1:47 ऍम
*वरररररओओओओओओमममम*
एक गाडी sann-sanaati हुई रास्ते पर तेज़्ज़ रफ़्तार में भागती जा रही थी. देरर रात का समय था. लेकिन, रोड्स पर अभी भी कुछ गाड़िया आती जाती मालुम पद रही थी. ये वेगास था, जो जाना hi अपनी नाईट लाइफ के लिए जाता था.
दिव्या का परर एक्सेलरेटर पर था और वह saaye-saaye गाडी भगा रही थी. आँखों में एक नमी छायी हुई थी,
'व्हाई?? व्हाई वीर?? क्यों किया तुमने ऐसा? तुम बेवक़ूफ़ नहीं हो. यू साल्व्ड थे Nightwalker's केस. Th-Then हाउ कैन यू जस्ट...!? गॉड दमन आईटी!!! तुम ऐसा क़दम कैसे उठा सकते हो? J-Just व्हाई?? जस्ट तेल्ल में यू वेरे एक्टिंग. जस्ट तेल्ल में!! ी जस्ट can't...!!!'
अपने hi मैं में उठ रहे सवालों के वह खुद hi उत्तर देते जा रही थी. ये अचानक से क्या हो गया था? सब कुछ ठीक चल रहा था. फिर eka-ek फ्रेड की मौत और अब वीर की हालत ने उन्हें चिंता में दाल दिया था.
किसी ने भी वीर को गिलास से वाइन पीते नहीं देखा था. लेकिन सभी जानते थे की उसने क्या किया था. कैमरा उसकी चेस्ट की पॉकेट में लगा था. और जब उसने वाइन का गिलास नीचे रखा था. वह खाली हो चूका था. ज़ाहिर है की उसने वाइन पी थी. और फिर वह खून...!!
इतने लोगो के बीच भला कैसे किसी को मुर्ख बना सकता था वह?
और यही बात दिव्या को बेचैन करे जा रही थी.
जो दिव्या वीर की फिरकी लेने के लिए आतुर रहती थी, उससे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं चोररटी थी, उसके साथ नकली फ्लिर्टिंग करते हुए ज़रा भी पीछे नहीं हटती थी, आज वही दिव्या उसके लिए ासु बहा रही थी. ये नैना रोये जा रहे थे उसके.
क्यों भला? दिव्या की खुद नहीं समझ आ रहा था. वह कबसे इतनी इमोशनल बन्न गयी? लेकिन फिर क्यों ये नैन बार बार आसुओ को पोछने के बाद भी भीग रहे थे?
एक जो कारण था वह था सुबह का उनका मिलान. भले hi बाहर से दिव्या कितना hi क्यों न कह दे की उसके और वीर के बीच ये सब नहीं होना चाहिए था. पर अंदर hi अंदर कही न कही जैसे वह खुद चाहती थी ये और खुश भी थी.
और संगम होने के बाद, थोड़ा सा भी प्रेम न जागे, ऐसा भला कैसे हो सकता था? उसके दिल में अब वीर के लिए एक अलग जगह बन्न चुकी थी. जिसकी जगह अब कोई दूसरा नहीं ले सकता था.
उसने तुरंत गियर नीचे कर गाडी चौथे गियर में डाली और स्पीड और बढ़ा दी.
और कुछ hi मिनट्स के अंदर वह दूरी भी तय कर ली.
*स्क्रीईएक्सक्कछहः*
ब्रेक्स मारते हुए जोरर से उसने गाडी रोकी.
*थुड़*
और दरवाज़ा बंद कर वह सीधा दौड़ी अंदर की ऑर्डर.
बाहर सिक्योरिटी गार्ड्स नहीं खड़े थे, और तोह और अंदर से कई लोग भागते हुए बाहर निकल रहे थे.
माइक टीम और पुलिस के संग शायद पहले hi अंदर घुस चूका था.
अंदर से बाहर निकलते लोगो को इग्नोर कर वह दौड़ते भागते हुए सीधा होटल में अंदर घुस गयी.
सामने का नज़ारा शांत पड़ा हुआ था.

नीचे तोह कोई चहल पहल hi समझ नहीं आ रही थी. बस ऊपर से नीचे आ रहे लोग hi दिखाई दे रहे थे उससे.
जो की स्वाभाविक था. वीर भी तोह सेकंड फ्लोर में hi गया था. ये ध्यान में आते hi दिव्या तेज़्ज़ क़दमों के साथ सीधा स्टैर्स की ऑर्डर भागी.
लिफ्ट लेने के लिए समय नहीं था. और वैसे भी, सेकंड फ्लोर पर जल्दी पहुचने के लिए खुद के परर hi सबसे अच्छा विकल्प थे.
अंदर घुसते hi दिव्या की आँखों के सामने chaka-chaundh कर देने वाला दृश्य था.
डिटेक्टिव्स और पुलिस की टीम सभी मौजूदा लोगो को रोक के उन्हें बैठने की कोशिश में लगी थी. सब के सब अंडर अरेस्ट में थे. नोलन के निर्देश के बाद hi माइक समेत सभी ने अंदर धावा बोल दिया था.
एक भी बच के जाने न पाए, जितने मास्क्स लगाए थे वह सभी इस पार्टी का हिस्सा थे. पुलिस की मदद से इन् सभी लोगो को गिरफ्त में ले लिया गया था.
दिव्या की नज़रे इधर से उधर दुविधा में दौड़ रही थी. और तभी उससे ध्यान आया,
'थे वाशरूम!!! राइट!!!!'
और वह फ़ौरन भागी...
आगे बढ़ते hi उससे माइक नज़र आया. तोह दिव्या ने एक तेज़्ज़ आवाज़ लगाई,
"मिइइइइइइकककके!!!!!"
माइक : वे गोत थिस!!!! जो एंड सर्च फॉर हिम इंस्टेड!!!
उसने चिल्लाते हुए बताया.
पुलिस और उसके सेह कर्मियों ने यहाँ की परिस्थिति संभाल ली थी. माइक ने फ़ौरन hi दिव्या को वीर को ढूंढने के लिए कहा.
और दिव्या तुरंत हां में सर्र हिलाते हुए सरपट दौड़ लगा दी,
समय बढ़ता जा रहा था. कही ऐसा न हो की वक़्त रेट की तरह उसकी मुट्ठी से फिसल जाए और वीर....!
'नाहीईई!!!! नहीं!!!! वीइरररर!!!'
वह मैं में चिल्लाई,
उसके दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो राखी थी.
*थुड़*
पॅहुचते hi उसने वाशरूम का एक दरवाज़ा खोला. जिधर उससे कोई दिखाई न दिया.
'ये वाला नहीं...! दमन आईटी!!!'
और उसकी घबराहट और बढ़ गयी.
बेशक उसने स्क्रीन पर वीर को वाशरूम जाते देखा था. पर उससे ये याद नहीं था की वाशरूम कौन सा था. क्युकी यहाँ लाइन से 8 से 10 वाशरूम्स थे. और सभी के सभी बेहद बड़े.
"Veeeeeeeerrrrrrrrrr!!!!!"
वह उससे पुकारी!!! वीर का नाम ले ले कर वह दरवाज़े खोलती रही. एक न एक में तोह मिलेगा hi वीर.
*थुड़*
'गॉड दमन आईटी!!! वेयर अरे यू....!!???'
4 दरवाज़े खोल के उसने चारो वाशरूम्स चेक कर लिए थे, पर वीर कही भी नज़र नहीं आ रहा था.
*धक्* *धक्*
और न hi वह जवाब दे रहा था. उसकी बेचैनी और बढ़ गयी.
अगर उससे कुछ हो गया तोह? तोह क्या जवाब देगी वह सुहाना को? खुद दिव्या इस बुरी खबर के लिए तैयार नहीं थी.
"Veeeeeeeerrrrrrrrrr!!!!!???"
उसने पुनः पुकारा और जैसे hi उसने पांचवे दरवाज़े को खोलना चाहा,
*क्लिक*
दरवाज़ा अपने आप खुल गया.
दिव्या : हहहह??
और दिव्या की आँखों के सामने था, वीर!!
जीता जागता वीर. अपने जो के त्यों हाल में.
लेकिन बाल थोड़े बिखरे हुए थे उसके. साथ hi ऐसा लग रहा था जैसे कही भाग दौड़ करके आया था वह. आँखें भी हलकी हलकी लाल मालुम पद रही थी.
"ओह्ह्ह गॉड!!!"
जो बेचैनी, जो घबराहट, जो डर दिव्या को अभी इन् चाँद पल पहले परेशान कर रहा था. वह वीर को अपनी नज़रो के सामने देखते hi जैसे छूमंतर हो गया.
और अगले hi शान,
वह आगे बढ़ वीर से कस के लिपट गयी. अपने हाथ उसके बालो के पीछे ले जाते हुए उसने वीर के सर्र को जोरर से पकड़ अपने कंधे पर टिका लिया.
इस वक़्त ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे ये एक बड़ी बहिन का छोटे भाई के प्रति प्रेम था. दिव्या इस समय वीर की बड़ी बहिन की तरह hi लग रही थी.
दिव्या : ओह्ह्ह्ह थैंक गॉड!!! थैंक गॉड! You're okay!!!
और कुछ पल बस ख़ामोशी छायी रही. दिव्या और वीर एक दूसरे के आलिंगन में बने रहे.
कुछ देरर बाद आखिर कार उसने वीर को चोर्रा और उससे देखते हुए अपने सवालों की झड़ी लगा दी.
दिव्या : क्या था ये सब हाँ? वीररर??? बोलो कुछ? व्हाई दीद यू दो तहत?? क्यों किया ऐसा वीर??? कहो? व्हाट रियली हप्पेनेड? तेल्ल में!!!
वीर की आँखें अध् खुली थी. वह दिव्या को देख ज़रूर रहा था. पर जैसे उसके बोल पर उसका ध्यान hi नहीं था. उसका ध्यान तोह कही ऑर्डर hi था.
*डिंग*
[Mission : 'Assassinate the Pitcher' has been completed.]
*डिंग*
[4000 Points have been rewarded.]
*डिंग*
[500 Fame points have been rewarded.]
*डिंग*
[Scroll ~ Profit Path has been rewarded.]
[Maaaaaaaassssttttteeerrrrr~]
पारी की एक चिंताजनक पुकार उसके मैं में गूंजी.
[Why did you do that???? I told you not to-- ]
'पारी! I'm okay!' वीर ने आहिस्ता से जवाब दिया उससे.
न चाहते हुए भी पारी को शांत होना पड़ा. ऐसा लगा जैसे वह रो रही थी. वाक़ई में. उसकी उदासी और निराशा साफ़ उसकी आवाज़ में झलक रही थी.
और तभी,
"कहा खो गए??? वीरररर!???"
सामने से दिव्या की आवाज़ सुन्न वीर को होश आया. वह अपने खयालातों से बाहर आया.
दिव्या उस से जवाब मांग रही थी.
दिव्या : बोलो? क्या था ये सब वीर? क्यों पी तुमने वह वाइन??
वीर : क्या आपने मुझे वाइन पीते हुए देखा?
दिव्या (झेपते हुए) : हँ?
वीर : मेने पूछा की क्या आपने मुझे वाइन पीते हुए देखा?
दिव्या : ??? T-Tumne वाइन नहीं पी तोह क्या पिया था? बेवक़ूफ़ मत समझो वीर! वे आल सॉ आईटी. भले hi तुम्हे डायरेक्टली नहीं देख पाए हम क्युकी कैमरा तुम्हारी चेस्ट पॉकेट में था पर हमने देखा था कैसे तुमने गिलास हवा में ऊपर उठाया और वापस रखा तोह वाइन नहीं थी उसमे. वेयर दीद आईटी वेंट?
वीर : आईटी वेंट राइट हेरे!
वीर ने अपनी कोट की इनर चेस्ट पॉकेट के अंदर से कुछ निकालते हुए उससे दिखाया.
और उससे देखते hi दिव्या के होश उड़द गए.
दिव्या : T-This...!
वीर : यस!!!
दिव्या : Y-You--
उसके हाथो में एक छोटा सा कंटेनर था.
दिव्या : N-No!!!! तुम्हारा मतलब है...!?
वीर : हम्म!
किसने कहा वीर वाइन को पी रहा था? वीर मुँह में ज़रूर भर रहा था वाइन को लेकिन भरने के बाद वह ऐसे दिखाता जैसे वह वाइन को गुटक चूका है. पर मौका देखते hi वह अपनी इनर कोट की पॉकेट में उससे थूक के उस कंटेनर में दाल रहा था.
दिव्या उससे भूत बन्न के देखे जा रही थी. उससे विशवास hi नहीं हो रहा था.
दिव्या : T-Tumne ये किया था असल में!?
वीर : में पागल हु क्या जो वह वाइन पियूँगा? हम्म?
दिव्या : R-Right! T-That वास् रियली स्मार्ट! पर... पर इतने लोगो के बीच तुमने कैसे...!?
वीर : ी जस्ट गोत लकी!!!
दिव्या : I-I सी~ ये बोहत hi अच्छी बात है. किसी को कुछ पता नहीं चला तुम्हारे इस कंटेनर के बारे में. Y-You दीद ग्रेट वीर. जब स्क्रीन में तुम्हे वाइन पीते देखा तोह हम लोगो की जान हलक में अटक गयी थी. ी स्वेअर. सुहाना बेचारी तोह... ी होप she's ऑलराइट! It's... It's रियली गुड तहत you're फाइन.
उसने वीर के कंधे पर हाथ रख थोड़ी भीगी आँखों से जताया.

वीर ने हामी भरी.
दिव्या : बूत वेट!!!! Y-Your ब्लड!!! खून कैसे आया तुम्हे?? अगर तुमने नहीं पी तोह...
वीर : तहत वास् ा फसाड!!
दिव्या : Wh-What?
वीर : वह खून नहीं था!
दिव्या : तोह क्या था?
वीर : जस्ट सम कलर!
दिव्या : कलर???
वीर (नॉड्स) : राइट!!!
दिव्या : पर...
वीर : ी प्रेपरेड़ आईटी बेफोरेहंद.
दिव्या : K-Kya मतलब!?
वीर : वह इमरजेंसी के लिए था. ी नीडेड हेल्प. लेकिन ैंन वक़्त पे कम्युनिकेशन डिवाइस काम करना बंद कर दिया था. मेरी आवाज़ आप तक नहीं पहुँच रही थी. उसके लिए ये सब करना पड़ा ताकि डिपार्टमेंट फ़ौरन hi हेल्प भेज सके.
दिव्या : अह्ह्ह!!! I-I सी!!! T-Toh ये बात थी. थैंक गॉड!!! एवरीथिंग इस फाइन!
दिव्या ने कहते हुए उसके कोट से वह कम्युनिकेशन डिवाइस निकाल लिया और उससे हलकी मुस्कान देते हुए बोली,
दिव्या : यू don't नीड थिस नाउ.
वीर हाँ में सर्र हिलाते हुए आगे बढ़ गया.
वीर : के! और भी कुछ बातें jaan'ni है अभी.
दिव्या : राइट!!!
दिव्या उससे जाते हुए देखती रही. पर अकस्मात् hi उसका ध्यान वीर से लिए गए कम्युनिकेशन डिवाइस पर गया. और,
दिव्या : H-Hello? दिव्या स्पीकिंग!! कैन एनीवन हेरे में??
और उसके इतना बोलते hi,
"यस!!! वे कैन हेअर यू! लाउड एंड क्लियर!!!"
दूसरी ऑर्डर से डिपार्टमेंट के सेह कर्मी की स्पष्ट आवाज़ सुनाई दी. दिव्या हैरत में अपने हाथो में उस डिवाइस को देखती रह गयी.
'थिस... थिस इस वर्किंग फाइन!!!'
कभी वह वीर की पीठ को देखती जहा वीर धीरे धीरे अपनी जेबो में हाथ डाले आराम से कॉरिडोर में जा रहा था. तोह कभी उस डिवाइस को देखती.
अंततः उसने एक बार फिर दौड़ लगाई,
दिव्या : वीइरररररररर!!!!!
वह चिल्लाई,
वीर (palat'te हुए) : हम्म?
दिव्या : ये... ये तोह चल रहा है. It's वर्किंग फाइन!!!
वीर : ओह्ह!? इस आईटी? वेल that's गुड! कुछ देरर पहले नहीं चल रहा था.
कहते हुए वह एक बार फिर आगे बढ़ गया. मशीन थी. कभी चलती तोह कभी नहीं.
परन्तु, दिव्या उससे बस जाता हुआ देखती रही. उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. व्हाट जस्ट हप्पेनेड?
भागते हुए वह भी वीर की चाल से चाल मिलाई और कॉरिडोर के बाहर निकल गयी.
***
बाहर आते hi नज़ारा कुछ ऐसा था की पुलिस ने सब अपने कण्ट्रोल में ले लिया था. और तोह और माइक ने उनके साथ मिलके कई राज़ भी खोल के रख दिए थे.
माइक फ़ौरन hi दिव्या के पास आया और उससे सब कुछ बताया.
जो लोग यहाँ मास्क्स पेहेन के पार्टी मनाने आते थे. ये दरअसल कोई और नहीं वही लोग थे जो निघतवलकेर के मेन्शन में हो रहे खून के खेल को लाइव देख उसका लुत्फ़ उठाते थे.
उधर निघतवलकेर का पूरा लाइव सेशन डार्क वेब पर डाला जाता था और इधर लोग आँखों देखि हत्या का मज़ा लेते थे. यही इनकी फेटिश थी. न केवल वह ये सब देखते थे बल्कि इस पर काफी पैसा भी फेकते थे. बेटस भी लगती थी. जिसका पूरा फायदा निघतवलकेर और पिचर को होता था.
पिचर की भी फेटिश थी जो उन् से और हटके थी. उससे सुन्दर से सुन्दर एक्ट्रेसेस, मॉडल्स और सेलिब्रिटीज को मारने का शौक था.
उधर निघतवलकेर का मौत का नंगा नाच जब ख़तम होता तोह इधर उसकी ख़ुशी में पिचर पार्टी रखता, जिसमे वह फिर किसी को मौत के घात उतारता.
यहाँ दो तरफी हत्या का काण्ड चालु था.
उधर से निघतवलकेर तोह इधर से पिचर.
दोनों hi एक दूसरे के संग बिज़नेस में भी थे. वह जो कामर्स मेन्शन में थे. वह इसलिए थे. उनके ज़रिये hi ये लोग मास्क्स पेहेन के यहाँ मासूम की बलि का मज़ा उठाते थे.
चुकी ऐसी फूटगेस किसी प्लेटफार्म पर नहीं डाली जा सकती थी इसलिए डार्क वेब का सहारा लिया जाता था.
और इन्ही कामर्स में से उन्हें वीर के बारे में पहले hi पता लग चूका था.
पर एक सत्य और था. जिसकी वजह से पूरा डिपार्टमेंट मात खा गया था.
वह ये की...
नट ने जो इनविटेशन कार्ड दिया था. उस पर एक सीरियल नंबर भी था. ये सीरियल नंबर कार्ड पर भी रहता था और...
और उनके पास डाटा शीट में भी फीड रहता था. जब फ्रेड उस कार्ड को लेके एंट्री किया था.
तोह सीरियल नंबर मैच करते hi उन्हें पता लग चूका था की फ्रेड के पास जो कार्ड था वह दरअसल नतालया को भेजा गया था.
पूरी चोरी यही पकड़ गयी थी उनकी. सिक्योरिटी ने पिचर को सचेत कर दिया था. लेकिन उसके बावजूद पिचर ने उससे बुलाया. अब कोई दरवाज़े तक आया हो तोह भला उसकी खातिर दारी कैसे भूल सकता था वह?
और फ्रेड भी...
मौत के घात उतार दिया गया. खेल ख़तम.
यही हाल वीर के संग भी हुआ. कार्ड तोह उसके पास भी वही था. नट का.
और उससे देखते hi उन्हें फिर आभास हो चूका था. साथ hi वीर की फोटो भी उनके पास थी.
लेकिन वीर के मैं में जो बात अभी भी खटक रही थी वह ये थी की उनको खबर किसने दी थी की वह यहाँ आने वाला है? और मास्क pehen'ne के बावजूद भला कैसे पहचान लिए वह उससे? इसका जवाब वह धुंध रहा था. और कुछ कुछ उससे समझ आ चूका था.
माइक ने ये साड़ी जानकारी जैसे hi बतायी तोह दिव्या एकदम गुस्से से लाल हो गयी. अब इनकी चोरी पकड़ी गयी थी तोह ज़ाहिर है किसी न किसी आदमी ने सारा सच उगल hi दिया था माइक को.
पर इस खेल में जिन मासूमो की जान गयी उनका क्या? डेनियल, चेस्टर, जैकब, फ्रेड जैसे कितने hi मारे गए. वह तोह अब वापस नहीं आ सकते थे न.
माइक : ी हैवे समथिंग तो शो यू! हुर्री!
माइक ने कहते हुए उन् दोनों को hi कही ले जाने के लिए कहा.
जल्दबाज़ी में वह उस डाइनिंग टेबल पर पहुचे जहा वीर पहले बैठा हुआ था.
पर जैसे hi वह वह आये,
दिव्या को एक बड़ा सा झटका लगा,
दिव्या : Y-Ye तोह...!!!
नीचे एक डेड बॉडी पड़ी थी. और ये कोई और नहीं था. वही था...
पिचर!!!!
मुँह से उसके धेरर सारा झाग निकला हुआ था. साफ़ था की वह ज़हर से मर्रा था.
दिव्या : Isn't हे थे...!?
माइक (नॉड्स) : यस!!! थे शामे गाए हु सेर्वेद थे वाइन.
दिव्या : थिस...!!
माइक : हे ुसेड पाइजन तो किल ओठेर्स. तहत वाइन बोतल कंटैन्स पाइजन.
माइक ने वही राखी वाइन बोतल की ऑर्डर इशारा करते हुए बताया जो पिचर ने वीर के लिए खोली थी.
दिव्या (बॉहे सिकोड़ते हुए) : वे अरे स्टिल मिसिंग समथिंग. हाउ दीद हे दिए?
वीर : ी क्नोव आईटी.
वीर के कहते hi सभी की नज़रे उस पर फोकस्ड हो गयी. हैरानी में वह सभी उससे देखे,
दिव्या : व्हाटट???
वीर : थे सीक्रेट प्रैक्टिस...!!!
माइक : सीक्रेट प्रैक्टिस?
दिव्या : वीर साफ़ साफ़ शब्दों में कहो!!! प्लीज बे क्विक!!!
वीर : वांनै क्नोव थे नाम?
दिव्या : *गुलप्स*
माइक : !!!???
और फिर वीर के मुँह से सिर्फ एक शब्द निकला,
"मिथ्रीडॉटिज़्म"
जिससे सुनते hi दिव्या के पूरे बदन के रौंगटे खड़े हो गए.
और उसके कांपते हाथो से वीर का वह डिवाइस गिर गया. क्युकी वह जानती थी. वह भली भाति जानती थी इस एक शब्द का मतलब क्या था.
माइक की समझ में न आया. उसने अपना फ़ोन निकाल गूगल कर उस एक शब्द का मतलब सर्च किया और जैसे hi उसने उसके बारे में जाना. उसका बदन खुद काँप उठा.
मिथ्रीडॉटिज़्म, एक ऐसी प्रैक्टिस जिसमे इंसान काम मात्रा में खुद ज़हर लेता है. मात्रा इतनी की जान के लिए घातक न बने.
मिथ्रीडेट्स वि जो पोंतुस के राजा थे. माना जाता है की वह अपनी मौत को लेकर इतने दर्रे हुए रहते थे की उन्हें हर्र समय यही लगता था की कोई उन्हें चालाकी से ज़हर देके मार देगा. ये पुरातन काल में एक आम बात थी. राजा महाराजाओ को ये भय अक्सर बना रहता था की कही कोई उनका अपना hi उनके साथ vishvaas-ghaat न कर दे.
तोह ज़हर उनका कुछ बिगाड़ hi न पाए इसलिए राजा मिथ्रीडेट्स वि ने काम मात्रा में खुद hi ज़हर लेना शुरू कर दिया था. इस उम्मीद में की ये काम ज़हर लेते लेते एक न एक दिन उनका शरीर इस ज़हर के खिलाफ रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा कर hi देगा. यानी की इम्युनिटी बना hi लेगा.
जैसे अक्सर हम नवजात शिशु को इंजेक्शंस लगवाते है, फिर चाहे वह पोलियो के हो या टिटनेस के या अन्य कोई. इनका उद्देश्य hi यही रहता है की शरीर इन् रोगो के खिलाफ एक इम्युनिटी बना ले. राजा मिथ्रीडेट्स ने भी यही करने का सोचा था.
ज़हर ले ले के उसके खिलाफ लड़ने की शक्ति बनाना. परन्तु ये डाव उल्टा पद गया था. ज़हर बार बार निरंतर लेने के बाद वही ज़हर उनके शरीर में इखट्टा होने लगा था, जो बाद में आगे चलके उनकी मौत का कारण बन्न गया.
पिचर का भी उद्देश्य वही था.
और पिचर...
ये करने में कामयाब हो गया था.

ऐसा नहीं था की आप यदि इस प्रैक्टिस को अपनाते हो तोह आपकी मौत निश्चित है.
हरगिज़ नहीं! यदि non-biological पोइसंस को लिया जाए तोह ये संभव है की आप कुछ पोइसंस के खिलाफ इम्युनिटी निर्मित कर सकते हो.
जो विष का प्याला हम दुसरो को देते है वह एक न एक दिन हमे खुद भी पीना पड़ता है. अब तक ये बात पिचर पर सही से लागू नहीं हो रही थी. पर वीर के आते hi...
काम तमाम हो चूका था.
दिव्या : क्विक!!! वे हैवे तो गेट बैक तो थे डिपार्टमेंट. तेरे अरे स्टिल मान्य क़ुएस्तिओन्स तहत अरे लेफ्ट ुनंस्वेरेद.
वह कहती हुए आगे बढ़ी, माइक भी हामी भरते हुए पीछे पीछे गया. परन्तु इधर वीर की आँखें पिचर की लाश पर hi तिकी हुई थी.
उन् आँखों में भयानक गुस्सा था. एकदम लाल हो राखी थी वह. ऐसा लग रहा था वीर अभी उसकी लाश पे भी टूट पड़ेगा और चीयर पहाड़ देगा.
'ी ऑलमोस्ट डीएड, यू बास्टर्ड!!!'
वह मैं में hi गुर्राया.
उसका हार्ट रेट भयंकर ज़्यादा हो रखा था. कंटेनर?? काहे का कंटेनर??
वीर दिव्या के जाते हुए फिगर को पीछे से देख रहा था. सिवाए मिथ्रीडॉटिज़्म के, जो कुछ भी उसने दिव्या को बताया था.
वह सब झूठ था.
उसका असल सच तोह उसके खुद के अंतर मैं की गहराइयो और उसके ज़हन में hi दफन होक रहने वाला था.
असली सच्चाई तोह कुछ और hi थी...
जब वीर होटल में घुस नीचे बोवुल्फ़ से चेक कर रहा था. तब उससे नहीं पता था की ऊपर बालकनी में उसकी फोटो को इधर से उधर किया जा रहा था.
परन्तु...
एक उस से भी बड़ी सनसनी मचा देने वाली खोज कर ली थी उसने.
नीचे उसकी नज़र दूर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी थी जो एक वाइन की बोतल में पाउडर जैसा कुछ मिला रहा था.
और ये क्या था ये बताने की ज़रुरत hi नहीं थी.
बेशक, ज़हर!!!!
वीर का मक़सद साफ़ था. न केवल उसने जा के इस बात का पता किया बल्कि, उसने उस व्यक्ति के जाते hi वही पौदेरेद सब्सटांस की मात्रा और बढ़ा के उस वाइन में दाल दी.
ये सब उसने तब किया था जब वह व्यक्ति अंदर कुछ लेने गया था.
भीड़ इतनी थी की किसी को कुछ नहीं पता था की क्या हो रहा है. सिर्फ पिचर hi वीर के बारे में जानता था और चाँद और लोग जिन्होंने वीर की लाइव फुटेज देखि थी. पर कुछ ऐसे भी थे जो वीर के पहले के मर्डर फूटगेस देखे हुए थे. वह भी पार्टी का हिस्सा थे.
[Maaastttteeerrrrr!!! Wh-Whaattt are you doing??? Aap usme kyu mila rahe ho?]
'अगर में सही हु, तोह आज पिचर नहीं बचेगा!!!'
[N-Noooo!!! Don't tell me you...!!]
'यस!! ी विल दो आईटी!!!'
वह वापस से अपनी जगह पर आया. और वीर ने देखा की कैसे वह व्यक्ति दुबारा से उस वाइन की बोतल में पैकिंग चढ़ा रहा था ताकि ऐसा लगे वाइन की बोतल एकदम नयी है.
'थिस मोथेरफुकेर...!!'
और इन् चाँद लम्हो में, वीर ने ये सारा काम इस प्रकार से किया था की उसके जेब का कैमरा सामने की ऑर्डर फोकस्ड था. डिपार्टमेंट वालो को स्क्रीन में देख ये कतई पता नहीं लग पाया था की वीर ने ऐसा भी कुछ किया था.
फिर आया वह वक़्त, जब पिचर ने वीर को बुलाया.
उसके साथ बैठ के जब उसने वीर को वह वाइन ऑफर की, पिचर के चेहरे पर हैवानो वाली कपटी मुस्कान थी. क्युकी वह जानता था ये वीर आज मररेगा hi उसके हाथो से.
पर वह ये नहीं जानता था... की वीर एक आम इंसान नहीं था.
वीर ने जैसे hi वाइन से भरे गिलास को चेक किया,
*डिंग*
[A glass full of poisoned wine. Don't drink it.]
सब कुछ सामने था. ये वही वाइन थी. जिसमे फेरर बदल किया गया था.
और इसलिए पिचर अब तक पकड़ा नहीं गया था. क्युकी वह भी शामे वाइन पीटा था.
परन्तु वह इस ज़हर से लड़ने में सक्षम था. लेकिन आम व्यक्ति नहीं.
और ऐसे hi सभी मौत के घात उतर रहे थे.
व्हाट ा होर्रिफ्यिंग वे तो किल.
वह अभी भी शैतानो की तरह मुस्कुरा के वीर को देख रहा था.
'थिस श्लय बास्टर्ड!!!'
लेकिन आज खेल कुछ अलग होने वाला था.
'पारी!!! ओपन थे शॉप!!'
[Yes Master!!!]
'फंड में ा स्किल व्हिच कैन क्योर थिस पाइजन.'
[Whaaaatttttt??? Nooooooooo!!! Maaassttteeerrrr!!! Aap aisa nahi kar sakte. I'm telling you please stop!!! Please!!! I'm begging you~]
'पारी...!!!'
[Nooo noooo nooooooo!!!!? How can I??? Mat kariye.... Please!!!! I...]
'दो आईटी!!!!!!'
जब वीर मैं में जोरर से चीखा तोह पारी एक बार फिर अपने मास्टर के सामने हार गयी.
[Master! This is the one but...]
'कितने पॉइंट्स? ओह्ह्ह! 5000 पॉइंट्स? ओने टाइम उसे ओनली? फाइन थें! परचेस थिस.'
[O-Okay but...]
'दो आईटी!!!!'
*डिंग*
['Sylvia's वेनोम क्योर' इस नाउ अवेलेबल.]
*डिंग*
[Host can only use this skill for one time only.
Warning : Beware of extreme pain, vomit and increased heart rate.]
*डिंग*
[Sylvia's Venom cure has been activated.]
और अगले hi पल, वीर के अंदर भारी मात्रा में वाइट ब्लड सेल्स bann'na शुरू हो गए. बन्न तोह पहले भी रहे थे पर उनकी प्रोसेस कई गुना बढ़ चुकी थी.
वीर ने फिर वह किया जो सबको हैरान कर दिया था.
उसने वाइन पी ली थी. पर वाइन तोह कंटेनर में गयी थी?
लौड़े का कंटेनर! वह कंटेनर तोह वाशरूम के सोप डिस्पेंसर का एक टूटा हुआ भाग था जो वीर ने वाशरूम से निकलने से पहले हथ्याया था.
वह कलर? घंटा कलर! वह तोह उसका खून था जो वाइट ब्लड सेल्स ने पाइजन के रूप में उससे बाहर फिकवाया था.
वाइट ब्लड सेल्स hi तोह इम्युनिटी का कारण है हमारे शरीर में.
और उसके बाद उठा था वीर को अत्यंत दर्द, उसका नर्वस सिस्टम इतने खतरनाक स्थिति से गुज़र रहा था की उसका अंधरुनि दर्द असीम होता जा रहा था.
ऐसा लगा था की वह अब नहीं बचेगा. और बेहोश होने से पहले उससे बस पारी के बोल याद थे.
"वीइरररररररर!!!???"
दिव्या की आवाज़ उससे फिरसे होश में लायी.
वीर : किंग!!!
वीर एक आखिरी नज़र पिचर पर दाल आगे बढ़ गया.
और बाहर आते hi,
*स्क्रीईएक्सक्कछहः*
गाडी रुकी और सुहाना और निक उसमे से बाहर निकले.
सुहाना की निगाहें जैसे hi वीर पर जा कर तिकी उसकी आँखें फैलती चली गयी,
"वीइररररररर!!!"
वह दौड़ते हुए आयी और जोरर से कूद के उसकी बाहो में उछाल गयी.
उसके बाद वही हुआ. सवाल पे सवाल. वीर ने जैसे तैसे मामला शांत किया.
पर...
वीर : हँ!!??
वह आश्चर्य चकित रह गया जब उसने अपने बगल में सुहाना को देखा तोह...

वह रो रही थी. उन् आँखों में पहली बार वीर ने कभी अपने लिए इतने स्ट्रांग इमोशंस देखे थे.
'मिस सुहाना...!?'
वीर : आप रो रही हो?
सुहाना (मुँह फरते हुए) : Who's क्राइंग? गेट लॉस्ट!
वीर : *स्माइल्स*
दिव्या : तुम दोनों! टेक माय कीस! मुझे आने में लेट हो जाएगा.
दिव्या ने कार की कीस फेकते हुए कहा.
और कुछ देरर में hi वीर और सुहाना दोनों दिव्या की कार में सवार होते हुए वह से रवाना हो गए. उधर की तहक़ीक़ात लम्बी चलने वाली थी.
इधर कार में,
सुहाना (स्माइल्स) : I'm हैप्पी!
वीर : व्हाई सो?
सुहाना : दुह!!! यू डम्ब! क्युकी तुम सही सलामत हो.
वीर : पर जब में वह से जा रहा था तब तोह आप गुस्सा होक भाग गयी थी बच्ची की तरह परर पटक के.
सुहाना (ब्लशेस) : Wh-What दो यू मैं बी बच्ची की तरह??? ी वास् लुकिंग आउट फॉर यू!! पर तुम हो की... खर्र! चोर्रो!!! वेट!!
वीर : क्या हुआ?
सुहाना : उधर पार्क है!
वीर : सो!?
सुहाना : स्टुपिड! स्टॉप थे कार! मुझे थोड़ी फ्रेश एयर चाहिए.
सुहाना की बात मान वीर ने गाडी पार्क के पास रोक दी.
ये एक ओपन पार्क था.
और दोनों hi उतर के कुछ देरर उस ख़ामोशी में टहलने लगे. कोई बातें नहीं.
जब अचानक hi,
सुहाना पलटी और वीर से जोरर से चिपक गयी.

'हँ?'
सुहाना : ी थॉट समथिंग विल हैपन तो यू!!!
उसने उससे देख के बोलै!!

वीर : बूत I'm राइट हेरे! है न?
सुहाना : हम्म! एंड that's व्हाट मैटर्स.
कहते हुए वह उसके कंधे पर सर्र रख उस से चिपकी रही.

जब अचानक hi उससे ध्यान आया...
की वीर उसका पति नहीं था.
सुहाना : अह्ह्ह!!! S-Sorry अबाउट तहत...!!
कहते हुए वह दूर हट गयी और मुद गयी.
वीर को यु अकेला चोरर वह वापस से कार की ऑर्डर चल दी.
इधर शीतल लेहेर में, हलकी हवाओ में वीर की लहराती ज़ुल्फ़ें उसकी आँखों के सामने फिर रही थी और नज़रे तिकी हुई थी सुहाना के जाते हुए फिगर पर.
'यू अरे हिडिंग समथिंग. Aren't यू? मिस सुहाना?'
.
.
.
.
.
.
.
.
आज के लिए इतना hi गाइस.
अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ ऑलमोस्ट 5क वर्ड्स. अगेन, नार्मल लेंथ से कही ज़्यादा बड़ा अपडेट.
लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का यारा.
कीप सपोर्टिंग!
धन्यवाद!
अब तक...
कार में घुसते hi उससे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसने कुछ खो दिया था. ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल में कोई सुई चुभो रहा था. पीड़ा!!!
जैसे वह हिम्मत hi हार चुकी थी.
'N-Nooooo!!!!'
एक्सेलरेटर पर परर रख उसने एक झटके में गाडी आगे भगा दी,
*वरररररओओओओओओमममम*
अभी अभी...
ये क्या हो गया था?
अब आगे...
"हाह! हाह! हाहहहह! ुररगग्गहह!!"
*थुड़*
लड़खड़ा के एक शरीर अचानक नीचे ज़मीन पर गिरा. सासें तेज़्ज़, धड़कने तेज़्ज़, आँखें एकदम लाल, पूरा बदन पसीने से लथपत, आँखों में धुँधलापन्न और निरंतर खासे जा रहा था वह शख्स.
*कुघ* *कुघ*
*कुघ* *कुघ*
*ग्वाखहहहहहहहह!!*
खून!! मुँह से उसके धेरर सारा खून निकला.
[Nooooooooooo~ Masterrrrrrr!!!!!!!]
पारी जोरर से चींखी. बेशक, ये वीर hi था. वाइन पीने के कुछ देरर बाद hi वीर के शरीर के अंदर न जाने क्या कुछ होने लगा था.
वह जैसे hi गिरा, पारी की चींखे भी धीरे धीरे धीमी सुनाई पड़ने लगी उससे.
उसने अपने होंठ खोले कुछ कहने के लिए पर thar-tharaate हुए वह वापस बंद हो गए.
[Maaaaassssttttteeeerrrrrrrrr~]
एक दर्द भरी आखिरी आवाज़ hi पारी की सुन्न पाया वह. और अगले शान hi,
उसकी आँखें बंद हो गयी.
[Nooooooooooooooooooo!!!!!!]
***
"Aaaaaahhhhhhhhhhnnnnnnnn~"
अचानक झटके के साथ एक लड़की अपने बिस्तर से उठ गयी. दिन का समय था. लगभग 1 बज रहे थे. वह अपने कमरे में hi थोड़ा आराम फरमाने के लिए लेती हुई थी जब उसकी हलकी नींद लग गयी थी. और नींद में उसने न जाने ऐसा क्या देखा जिसके चलते वह हड़बड़ाते हुए उठ के बैठ गयी.
शायद, एक बुरा सपना था.
उसके कपडे पसीने से भीगे हुए थे. ख़ूबसूरत से चेहरे पर भी पसीने की बूंदे सजी हुई थी. हफ्ते हुए उसने अपने चेहरे पर से एक टॉवल से पसीना पोछा. और एक गहरी सांस लेते हुए वह किचन की ऑर्डर चल पड़ी.
एक गिलास ठंडा पानी पीने के बाद वह वापस आयी, कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बिस्तर पर बैठ गयी.
'ये बेचैनी...!'
उससे कुछ ठीक नहीं लग रहा था. उसने फ़ौरन hi अपना फ़ोन उठाया, उसमे गैलरी खोली और उसकी नज़रे एक तस्वीर पर जाके ठहर गयी.
'थोड़े दिन और... थोड़े दिन में hi... तुम मेरी आँखों के सामने होंगे. और फिर उसके बाद... तुम्हे कही नहीं जाने दूंगी में!'
'हम फिरसे एक साथ रहेंगे. माँ से सारे राज़ खुलवा के रहूंगी में. जस्ट वेट ा बिट मोरे. ी विल के तो यू. वैरी सून! माय यंगर ओने!!'
और खुद मैं में एक लक्ष्य ठान, वह वापस से बिस्तर पर लेत गयी.
***
लॉस वेगास ~ 1:47 ऍम
*वरररररओओओओओओमममम*
एक गाडी sann-sanaati हुई रास्ते पर तेज़्ज़ रफ़्तार में भागती जा रही थी. देरर रात का समय था. लेकिन, रोड्स पर अभी भी कुछ गाड़िया आती जाती मालुम पद रही थी. ये वेगास था, जो जाना hi अपनी नाईट लाइफ के लिए जाता था.
दिव्या का परर एक्सेलरेटर पर था और वह saaye-saaye गाडी भगा रही थी. आँखों में एक नमी छायी हुई थी,
'व्हाई?? व्हाई वीर?? क्यों किया तुमने ऐसा? तुम बेवक़ूफ़ नहीं हो. यू साल्व्ड थे Nightwalker's केस. Th-Then हाउ कैन यू जस्ट...!? गॉड दमन आईटी!!! तुम ऐसा क़दम कैसे उठा सकते हो? J-Just व्हाई?? जस्ट तेल्ल में यू वेरे एक्टिंग. जस्ट तेल्ल में!! ी जस्ट can't...!!!'
अपने hi मैं में उठ रहे सवालों के वह खुद hi उत्तर देते जा रही थी. ये अचानक से क्या हो गया था? सब कुछ ठीक चल रहा था. फिर eka-ek फ्रेड की मौत और अब वीर की हालत ने उन्हें चिंता में दाल दिया था.
किसी ने भी वीर को गिलास से वाइन पीते नहीं देखा था. लेकिन सभी जानते थे की उसने क्या किया था. कैमरा उसकी चेस्ट की पॉकेट में लगा था. और जब उसने वाइन का गिलास नीचे रखा था. वह खाली हो चूका था. ज़ाहिर है की उसने वाइन पी थी. और फिर वह खून...!!
इतने लोगो के बीच भला कैसे किसी को मुर्ख बना सकता था वह?
और यही बात दिव्या को बेचैन करे जा रही थी.
जो दिव्या वीर की फिरकी लेने के लिए आतुर रहती थी, उससे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं चोररटी थी, उसके साथ नकली फ्लिर्टिंग करते हुए ज़रा भी पीछे नहीं हटती थी, आज वही दिव्या उसके लिए ासु बहा रही थी. ये नैना रोये जा रहे थे उसके.
क्यों भला? दिव्या की खुद नहीं समझ आ रहा था. वह कबसे इतनी इमोशनल बन्न गयी? लेकिन फिर क्यों ये नैन बार बार आसुओ को पोछने के बाद भी भीग रहे थे?
एक जो कारण था वह था सुबह का उनका मिलान. भले hi बाहर से दिव्या कितना hi क्यों न कह दे की उसके और वीर के बीच ये सब नहीं होना चाहिए था. पर अंदर hi अंदर कही न कही जैसे वह खुद चाहती थी ये और खुश भी थी.
और संगम होने के बाद, थोड़ा सा भी प्रेम न जागे, ऐसा भला कैसे हो सकता था? उसके दिल में अब वीर के लिए एक अलग जगह बन्न चुकी थी. जिसकी जगह अब कोई दूसरा नहीं ले सकता था.
उसने तुरंत गियर नीचे कर गाडी चौथे गियर में डाली और स्पीड और बढ़ा दी.
और कुछ hi मिनट्स के अंदर वह दूरी भी तय कर ली.
*स्क्रीईएक्सक्कछहः*
ब्रेक्स मारते हुए जोरर से उसने गाडी रोकी.
*थुड़*
और दरवाज़ा बंद कर वह सीधा दौड़ी अंदर की ऑर्डर.
बाहर सिक्योरिटी गार्ड्स नहीं खड़े थे, और तोह और अंदर से कई लोग भागते हुए बाहर निकल रहे थे.
माइक टीम और पुलिस के संग शायद पहले hi अंदर घुस चूका था.
अंदर से बाहर निकलते लोगो को इग्नोर कर वह दौड़ते भागते हुए सीधा होटल में अंदर घुस गयी.
सामने का नज़ारा शांत पड़ा हुआ था.

नीचे तोह कोई चहल पहल hi समझ नहीं आ रही थी. बस ऊपर से नीचे आ रहे लोग hi दिखाई दे रहे थे उससे.
जो की स्वाभाविक था. वीर भी तोह सेकंड फ्लोर में hi गया था. ये ध्यान में आते hi दिव्या तेज़्ज़ क़दमों के साथ सीधा स्टैर्स की ऑर्डर भागी.
लिफ्ट लेने के लिए समय नहीं था. और वैसे भी, सेकंड फ्लोर पर जल्दी पहुचने के लिए खुद के परर hi सबसे अच्छा विकल्प थे.
अंदर घुसते hi दिव्या की आँखों के सामने chaka-chaundh कर देने वाला दृश्य था.
डिटेक्टिव्स और पुलिस की टीम सभी मौजूदा लोगो को रोक के उन्हें बैठने की कोशिश में लगी थी. सब के सब अंडर अरेस्ट में थे. नोलन के निर्देश के बाद hi माइक समेत सभी ने अंदर धावा बोल दिया था.
एक भी बच के जाने न पाए, जितने मास्क्स लगाए थे वह सभी इस पार्टी का हिस्सा थे. पुलिस की मदद से इन् सभी लोगो को गिरफ्त में ले लिया गया था.
दिव्या की नज़रे इधर से उधर दुविधा में दौड़ रही थी. और तभी उससे ध्यान आया,
'थे वाशरूम!!! राइट!!!!'
और वह फ़ौरन भागी...
आगे बढ़ते hi उससे माइक नज़र आया. तोह दिव्या ने एक तेज़्ज़ आवाज़ लगाई,
"मिइइइइइइकककके!!!!!"
माइक : वे गोत थिस!!!! जो एंड सर्च फॉर हिम इंस्टेड!!!
उसने चिल्लाते हुए बताया.
पुलिस और उसके सेह कर्मियों ने यहाँ की परिस्थिति संभाल ली थी. माइक ने फ़ौरन hi दिव्या को वीर को ढूंढने के लिए कहा.
और दिव्या तुरंत हां में सर्र हिलाते हुए सरपट दौड़ लगा दी,
समय बढ़ता जा रहा था. कही ऐसा न हो की वक़्त रेट की तरह उसकी मुट्ठी से फिसल जाए और वीर....!
'नाहीईई!!!! नहीं!!!! वीइरररर!!!'
वह मैं में चिल्लाई,
उसके दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो राखी थी.
*थुड़*
पॅहुचते hi उसने वाशरूम का एक दरवाज़ा खोला. जिधर उससे कोई दिखाई न दिया.
'ये वाला नहीं...! दमन आईटी!!!'
और उसकी घबराहट और बढ़ गयी.
बेशक उसने स्क्रीन पर वीर को वाशरूम जाते देखा था. पर उससे ये याद नहीं था की वाशरूम कौन सा था. क्युकी यहाँ लाइन से 8 से 10 वाशरूम्स थे. और सभी के सभी बेहद बड़े.
"Veeeeeeeerrrrrrrrrr!!!!!"
वह उससे पुकारी!!! वीर का नाम ले ले कर वह दरवाज़े खोलती रही. एक न एक में तोह मिलेगा hi वीर.
*थुड़*
'गॉड दमन आईटी!!! वेयर अरे यू....!!???'
4 दरवाज़े खोल के उसने चारो वाशरूम्स चेक कर लिए थे, पर वीर कही भी नज़र नहीं आ रहा था.
*धक्* *धक्*
और न hi वह जवाब दे रहा था. उसकी बेचैनी और बढ़ गयी.
अगर उससे कुछ हो गया तोह? तोह क्या जवाब देगी वह सुहाना को? खुद दिव्या इस बुरी खबर के लिए तैयार नहीं थी.
"Veeeeeeeerrrrrrrrrr!!!!!???"
उसने पुनः पुकारा और जैसे hi उसने पांचवे दरवाज़े को खोलना चाहा,
*क्लिक*
दरवाज़ा अपने आप खुल गया.
दिव्या : हहहह??
और दिव्या की आँखों के सामने था, वीर!!
जीता जागता वीर. अपने जो के त्यों हाल में.
लेकिन बाल थोड़े बिखरे हुए थे उसके. साथ hi ऐसा लग रहा था जैसे कही भाग दौड़ करके आया था वह. आँखें भी हलकी हलकी लाल मालुम पद रही थी.
"ओह्ह्ह गॉड!!!"
जो बेचैनी, जो घबराहट, जो डर दिव्या को अभी इन् चाँद पल पहले परेशान कर रहा था. वह वीर को अपनी नज़रो के सामने देखते hi जैसे छूमंतर हो गया.
और अगले hi शान,
वह आगे बढ़ वीर से कस के लिपट गयी. अपने हाथ उसके बालो के पीछे ले जाते हुए उसने वीर के सर्र को जोरर से पकड़ अपने कंधे पर टिका लिया.
इस वक़्त ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे ये एक बड़ी बहिन का छोटे भाई के प्रति प्रेम था. दिव्या इस समय वीर की बड़ी बहिन की तरह hi लग रही थी.
दिव्या : ओह्ह्ह्ह थैंक गॉड!!! थैंक गॉड! You're okay!!!
और कुछ पल बस ख़ामोशी छायी रही. दिव्या और वीर एक दूसरे के आलिंगन में बने रहे.
कुछ देरर बाद आखिर कार उसने वीर को चोर्रा और उससे देखते हुए अपने सवालों की झड़ी लगा दी.
दिव्या : क्या था ये सब हाँ? वीररर??? बोलो कुछ? व्हाई दीद यू दो तहत?? क्यों किया ऐसा वीर??? कहो? व्हाट रियली हप्पेनेड? तेल्ल में!!!
वीर की आँखें अध् खुली थी. वह दिव्या को देख ज़रूर रहा था. पर जैसे उसके बोल पर उसका ध्यान hi नहीं था. उसका ध्यान तोह कही ऑर्डर hi था.
*डिंग*
[Mission : 'Assassinate the Pitcher' has been completed.]
*डिंग*
[4000 Points have been rewarded.]
*डिंग*
[500 Fame points have been rewarded.]
*डिंग*
[Scroll ~ Profit Path has been rewarded.]
[Maaaaaaaassssttttteeerrrrr~]
पारी की एक चिंताजनक पुकार उसके मैं में गूंजी.
[Why did you do that???? I told you not to-- ]
'पारी! I'm okay!' वीर ने आहिस्ता से जवाब दिया उससे.
न चाहते हुए भी पारी को शांत होना पड़ा. ऐसा लगा जैसे वह रो रही थी. वाक़ई में. उसकी उदासी और निराशा साफ़ उसकी आवाज़ में झलक रही थी.
और तभी,
"कहा खो गए??? वीरररर!???"
सामने से दिव्या की आवाज़ सुन्न वीर को होश आया. वह अपने खयालातों से बाहर आया.
दिव्या उस से जवाब मांग रही थी.
दिव्या : बोलो? क्या था ये सब वीर? क्यों पी तुमने वह वाइन??
वीर : क्या आपने मुझे वाइन पीते हुए देखा?
दिव्या (झेपते हुए) : हँ?
वीर : मेने पूछा की क्या आपने मुझे वाइन पीते हुए देखा?
दिव्या : ??? T-Tumne वाइन नहीं पी तोह क्या पिया था? बेवक़ूफ़ मत समझो वीर! वे आल सॉ आईटी. भले hi तुम्हे डायरेक्टली नहीं देख पाए हम क्युकी कैमरा तुम्हारी चेस्ट पॉकेट में था पर हमने देखा था कैसे तुमने गिलास हवा में ऊपर उठाया और वापस रखा तोह वाइन नहीं थी उसमे. वेयर दीद आईटी वेंट?
वीर : आईटी वेंट राइट हेरे!
वीर ने अपनी कोट की इनर चेस्ट पॉकेट के अंदर से कुछ निकालते हुए उससे दिखाया.
और उससे देखते hi दिव्या के होश उड़द गए.
दिव्या : T-This...!
वीर : यस!!!
दिव्या : Y-You--
उसके हाथो में एक छोटा सा कंटेनर था.
दिव्या : N-No!!!! तुम्हारा मतलब है...!?
वीर : हम्म!
किसने कहा वीर वाइन को पी रहा था? वीर मुँह में ज़रूर भर रहा था वाइन को लेकिन भरने के बाद वह ऐसे दिखाता जैसे वह वाइन को गुटक चूका है. पर मौका देखते hi वह अपनी इनर कोट की पॉकेट में उससे थूक के उस कंटेनर में दाल रहा था.
दिव्या उससे भूत बन्न के देखे जा रही थी. उससे विशवास hi नहीं हो रहा था.
दिव्या : T-Tumne ये किया था असल में!?
वीर : में पागल हु क्या जो वह वाइन पियूँगा? हम्म?
दिव्या : R-Right! T-That वास् रियली स्मार्ट! पर... पर इतने लोगो के बीच तुमने कैसे...!?
वीर : ी जस्ट गोत लकी!!!
दिव्या : I-I सी~ ये बोहत hi अच्छी बात है. किसी को कुछ पता नहीं चला तुम्हारे इस कंटेनर के बारे में. Y-You दीद ग्रेट वीर. जब स्क्रीन में तुम्हे वाइन पीते देखा तोह हम लोगो की जान हलक में अटक गयी थी. ी स्वेअर. सुहाना बेचारी तोह... ी होप she's ऑलराइट! It's... It's रियली गुड तहत you're फाइन.
उसने वीर के कंधे पर हाथ रख थोड़ी भीगी आँखों से जताया.

वीर ने हामी भरी.
दिव्या : बूत वेट!!!! Y-Your ब्लड!!! खून कैसे आया तुम्हे?? अगर तुमने नहीं पी तोह...
वीर : तहत वास् ा फसाड!!
दिव्या : Wh-What?
वीर : वह खून नहीं था!
दिव्या : तोह क्या था?
वीर : जस्ट सम कलर!
दिव्या : कलर???
वीर (नॉड्स) : राइट!!!
दिव्या : पर...
वीर : ी प्रेपरेड़ आईटी बेफोरेहंद.
दिव्या : K-Kya मतलब!?
वीर : वह इमरजेंसी के लिए था. ी नीडेड हेल्प. लेकिन ैंन वक़्त पे कम्युनिकेशन डिवाइस काम करना बंद कर दिया था. मेरी आवाज़ आप तक नहीं पहुँच रही थी. उसके लिए ये सब करना पड़ा ताकि डिपार्टमेंट फ़ौरन hi हेल्प भेज सके.
दिव्या : अह्ह्ह!!! I-I सी!!! T-Toh ये बात थी. थैंक गॉड!!! एवरीथिंग इस फाइन!
दिव्या ने कहते हुए उसके कोट से वह कम्युनिकेशन डिवाइस निकाल लिया और उससे हलकी मुस्कान देते हुए बोली,
दिव्या : यू don't नीड थिस नाउ.
वीर हाँ में सर्र हिलाते हुए आगे बढ़ गया.
वीर : के! और भी कुछ बातें jaan'ni है अभी.
दिव्या : राइट!!!
दिव्या उससे जाते हुए देखती रही. पर अकस्मात् hi उसका ध्यान वीर से लिए गए कम्युनिकेशन डिवाइस पर गया. और,
दिव्या : H-Hello? दिव्या स्पीकिंग!! कैन एनीवन हेरे में??
और उसके इतना बोलते hi,
"यस!!! वे कैन हेअर यू! लाउड एंड क्लियर!!!"
दूसरी ऑर्डर से डिपार्टमेंट के सेह कर्मी की स्पष्ट आवाज़ सुनाई दी. दिव्या हैरत में अपने हाथो में उस डिवाइस को देखती रह गयी.
'थिस... थिस इस वर्किंग फाइन!!!'
कभी वह वीर की पीठ को देखती जहा वीर धीरे धीरे अपनी जेबो में हाथ डाले आराम से कॉरिडोर में जा रहा था. तोह कभी उस डिवाइस को देखती.
अंततः उसने एक बार फिर दौड़ लगाई,
दिव्या : वीइरररररररर!!!!!
वह चिल्लाई,
वीर (palat'te हुए) : हम्म?
दिव्या : ये... ये तोह चल रहा है. It's वर्किंग फाइन!!!
वीर : ओह्ह!? इस आईटी? वेल that's गुड! कुछ देरर पहले नहीं चल रहा था.
कहते हुए वह एक बार फिर आगे बढ़ गया. मशीन थी. कभी चलती तोह कभी नहीं.
परन्तु, दिव्या उससे बस जाता हुआ देखती रही. उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. व्हाट जस्ट हप्पेनेड?
भागते हुए वह भी वीर की चाल से चाल मिलाई और कॉरिडोर के बाहर निकल गयी.
***
बाहर आते hi नज़ारा कुछ ऐसा था की पुलिस ने सब अपने कण्ट्रोल में ले लिया था. और तोह और माइक ने उनके साथ मिलके कई राज़ भी खोल के रख दिए थे.
माइक फ़ौरन hi दिव्या के पास आया और उससे सब कुछ बताया.
जो लोग यहाँ मास्क्स पेहेन के पार्टी मनाने आते थे. ये दरअसल कोई और नहीं वही लोग थे जो निघतवलकेर के मेन्शन में हो रहे खून के खेल को लाइव देख उसका लुत्फ़ उठाते थे.
उधर निघतवलकेर का पूरा लाइव सेशन डार्क वेब पर डाला जाता था और इधर लोग आँखों देखि हत्या का मज़ा लेते थे. यही इनकी फेटिश थी. न केवल वह ये सब देखते थे बल्कि इस पर काफी पैसा भी फेकते थे. बेटस भी लगती थी. जिसका पूरा फायदा निघतवलकेर और पिचर को होता था.
पिचर की भी फेटिश थी जो उन् से और हटके थी. उससे सुन्दर से सुन्दर एक्ट्रेसेस, मॉडल्स और सेलिब्रिटीज को मारने का शौक था.
उधर निघतवलकेर का मौत का नंगा नाच जब ख़तम होता तोह इधर उसकी ख़ुशी में पिचर पार्टी रखता, जिसमे वह फिर किसी को मौत के घात उतारता.
यहाँ दो तरफी हत्या का काण्ड चालु था.
उधर से निघतवलकेर तोह इधर से पिचर.
दोनों hi एक दूसरे के संग बिज़नेस में भी थे. वह जो कामर्स मेन्शन में थे. वह इसलिए थे. उनके ज़रिये hi ये लोग मास्क्स पेहेन के यहाँ मासूम की बलि का मज़ा उठाते थे.
चुकी ऐसी फूटगेस किसी प्लेटफार्म पर नहीं डाली जा सकती थी इसलिए डार्क वेब का सहारा लिया जाता था.
और इन्ही कामर्स में से उन्हें वीर के बारे में पहले hi पता लग चूका था.
पर एक सत्य और था. जिसकी वजह से पूरा डिपार्टमेंट मात खा गया था.
वह ये की...
नट ने जो इनविटेशन कार्ड दिया था. उस पर एक सीरियल नंबर भी था. ये सीरियल नंबर कार्ड पर भी रहता था और...
और उनके पास डाटा शीट में भी फीड रहता था. जब फ्रेड उस कार्ड को लेके एंट्री किया था.
तोह सीरियल नंबर मैच करते hi उन्हें पता लग चूका था की फ्रेड के पास जो कार्ड था वह दरअसल नतालया को भेजा गया था.
पूरी चोरी यही पकड़ गयी थी उनकी. सिक्योरिटी ने पिचर को सचेत कर दिया था. लेकिन उसके बावजूद पिचर ने उससे बुलाया. अब कोई दरवाज़े तक आया हो तोह भला उसकी खातिर दारी कैसे भूल सकता था वह?
और फ्रेड भी...
मौत के घात उतार दिया गया. खेल ख़तम.
यही हाल वीर के संग भी हुआ. कार्ड तोह उसके पास भी वही था. नट का.
और उससे देखते hi उन्हें फिर आभास हो चूका था. साथ hi वीर की फोटो भी उनके पास थी.
लेकिन वीर के मैं में जो बात अभी भी खटक रही थी वह ये थी की उनको खबर किसने दी थी की वह यहाँ आने वाला है? और मास्क pehen'ne के बावजूद भला कैसे पहचान लिए वह उससे? इसका जवाब वह धुंध रहा था. और कुछ कुछ उससे समझ आ चूका था.
माइक ने ये साड़ी जानकारी जैसे hi बतायी तोह दिव्या एकदम गुस्से से लाल हो गयी. अब इनकी चोरी पकड़ी गयी थी तोह ज़ाहिर है किसी न किसी आदमी ने सारा सच उगल hi दिया था माइक को.
पर इस खेल में जिन मासूमो की जान गयी उनका क्या? डेनियल, चेस्टर, जैकब, फ्रेड जैसे कितने hi मारे गए. वह तोह अब वापस नहीं आ सकते थे न.
माइक : ी हैवे समथिंग तो शो यू! हुर्री!
माइक ने कहते हुए उन् दोनों को hi कही ले जाने के लिए कहा.
जल्दबाज़ी में वह उस डाइनिंग टेबल पर पहुचे जहा वीर पहले बैठा हुआ था.
पर जैसे hi वह वह आये,
दिव्या को एक बड़ा सा झटका लगा,
दिव्या : Y-Ye तोह...!!!
नीचे एक डेड बॉडी पड़ी थी. और ये कोई और नहीं था. वही था...
पिचर!!!!
मुँह से उसके धेरर सारा झाग निकला हुआ था. साफ़ था की वह ज़हर से मर्रा था.
दिव्या : Isn't हे थे...!?
माइक (नॉड्स) : यस!!! थे शामे गाए हु सेर्वेद थे वाइन.
दिव्या : थिस...!!
माइक : हे ुसेड पाइजन तो किल ओठेर्स. तहत वाइन बोतल कंटैन्स पाइजन.
माइक ने वही राखी वाइन बोतल की ऑर्डर इशारा करते हुए बताया जो पिचर ने वीर के लिए खोली थी.
दिव्या (बॉहे सिकोड़ते हुए) : वे अरे स्टिल मिसिंग समथिंग. हाउ दीद हे दिए?
वीर : ी क्नोव आईटी.
वीर के कहते hi सभी की नज़रे उस पर फोकस्ड हो गयी. हैरानी में वह सभी उससे देखे,
दिव्या : व्हाटट???
वीर : थे सीक्रेट प्रैक्टिस...!!!
माइक : सीक्रेट प्रैक्टिस?
दिव्या : वीर साफ़ साफ़ शब्दों में कहो!!! प्लीज बे क्विक!!!
वीर : वांनै क्नोव थे नाम?
दिव्या : *गुलप्स*
माइक : !!!???
और फिर वीर के मुँह से सिर्फ एक शब्द निकला,
"मिथ्रीडॉटिज़्म"
जिससे सुनते hi दिव्या के पूरे बदन के रौंगटे खड़े हो गए.
और उसके कांपते हाथो से वीर का वह डिवाइस गिर गया. क्युकी वह जानती थी. वह भली भाति जानती थी इस एक शब्द का मतलब क्या था.
माइक की समझ में न आया. उसने अपना फ़ोन निकाल गूगल कर उस एक शब्द का मतलब सर्च किया और जैसे hi उसने उसके बारे में जाना. उसका बदन खुद काँप उठा.
मिथ्रीडॉटिज़्म, एक ऐसी प्रैक्टिस जिसमे इंसान काम मात्रा में खुद ज़हर लेता है. मात्रा इतनी की जान के लिए घातक न बने.
मिथ्रीडेट्स वि जो पोंतुस के राजा थे. माना जाता है की वह अपनी मौत को लेकर इतने दर्रे हुए रहते थे की उन्हें हर्र समय यही लगता था की कोई उन्हें चालाकी से ज़हर देके मार देगा. ये पुरातन काल में एक आम बात थी. राजा महाराजाओ को ये भय अक्सर बना रहता था की कही कोई उनका अपना hi उनके साथ vishvaas-ghaat न कर दे.
तोह ज़हर उनका कुछ बिगाड़ hi न पाए इसलिए राजा मिथ्रीडेट्स वि ने काम मात्रा में खुद hi ज़हर लेना शुरू कर दिया था. इस उम्मीद में की ये काम ज़हर लेते लेते एक न एक दिन उनका शरीर इस ज़हर के खिलाफ रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा कर hi देगा. यानी की इम्युनिटी बना hi लेगा.
जैसे अक्सर हम नवजात शिशु को इंजेक्शंस लगवाते है, फिर चाहे वह पोलियो के हो या टिटनेस के या अन्य कोई. इनका उद्देश्य hi यही रहता है की शरीर इन् रोगो के खिलाफ एक इम्युनिटी बना ले. राजा मिथ्रीडेट्स ने भी यही करने का सोचा था.
ज़हर ले ले के उसके खिलाफ लड़ने की शक्ति बनाना. परन्तु ये डाव उल्टा पद गया था. ज़हर बार बार निरंतर लेने के बाद वही ज़हर उनके शरीर में इखट्टा होने लगा था, जो बाद में आगे चलके उनकी मौत का कारण बन्न गया.
पिचर का भी उद्देश्य वही था.
और पिचर...
ये करने में कामयाब हो गया था.

ऐसा नहीं था की आप यदि इस प्रैक्टिस को अपनाते हो तोह आपकी मौत निश्चित है.
हरगिज़ नहीं! यदि non-biological पोइसंस को लिया जाए तोह ये संभव है की आप कुछ पोइसंस के खिलाफ इम्युनिटी निर्मित कर सकते हो.
जो विष का प्याला हम दुसरो को देते है वह एक न एक दिन हमे खुद भी पीना पड़ता है. अब तक ये बात पिचर पर सही से लागू नहीं हो रही थी. पर वीर के आते hi...
काम तमाम हो चूका था.
दिव्या : क्विक!!! वे हैवे तो गेट बैक तो थे डिपार्टमेंट. तेरे अरे स्टिल मान्य क़ुएस्तिओन्स तहत अरे लेफ्ट ुनंस्वेरेद.
वह कहती हुए आगे बढ़ी, माइक भी हामी भरते हुए पीछे पीछे गया. परन्तु इधर वीर की आँखें पिचर की लाश पर hi तिकी हुई थी.
उन् आँखों में भयानक गुस्सा था. एकदम लाल हो राखी थी वह. ऐसा लग रहा था वीर अभी उसकी लाश पे भी टूट पड़ेगा और चीयर पहाड़ देगा.
'ी ऑलमोस्ट डीएड, यू बास्टर्ड!!!'
वह मैं में hi गुर्राया.
उसका हार्ट रेट भयंकर ज़्यादा हो रखा था. कंटेनर?? काहे का कंटेनर??
वीर दिव्या के जाते हुए फिगर को पीछे से देख रहा था. सिवाए मिथ्रीडॉटिज़्म के, जो कुछ भी उसने दिव्या को बताया था.
वह सब झूठ था.
उसका असल सच तोह उसके खुद के अंतर मैं की गहराइयो और उसके ज़हन में hi दफन होक रहने वाला था.
असली सच्चाई तोह कुछ और hi थी...
जब वीर होटल में घुस नीचे बोवुल्फ़ से चेक कर रहा था. तब उससे नहीं पता था की ऊपर बालकनी में उसकी फोटो को इधर से उधर किया जा रहा था.
परन्तु...
एक उस से भी बड़ी सनसनी मचा देने वाली खोज कर ली थी उसने.
नीचे उसकी नज़र दूर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी थी जो एक वाइन की बोतल में पाउडर जैसा कुछ मिला रहा था.
और ये क्या था ये बताने की ज़रुरत hi नहीं थी.
बेशक, ज़हर!!!!
वीर का मक़सद साफ़ था. न केवल उसने जा के इस बात का पता किया बल्कि, उसने उस व्यक्ति के जाते hi वही पौदेरेद सब्सटांस की मात्रा और बढ़ा के उस वाइन में दाल दी.
ये सब उसने तब किया था जब वह व्यक्ति अंदर कुछ लेने गया था.
भीड़ इतनी थी की किसी को कुछ नहीं पता था की क्या हो रहा है. सिर्फ पिचर hi वीर के बारे में जानता था और चाँद और लोग जिन्होंने वीर की लाइव फुटेज देखि थी. पर कुछ ऐसे भी थे जो वीर के पहले के मर्डर फूटगेस देखे हुए थे. वह भी पार्टी का हिस्सा थे.
[Maaastttteeerrrrr!!! Wh-Whaattt are you doing??? Aap usme kyu mila rahe ho?]
'अगर में सही हु, तोह आज पिचर नहीं बचेगा!!!'
[N-Noooo!!! Don't tell me you...!!]
'यस!! ी विल दो आईटी!!!'
वह वापस से अपनी जगह पर आया. और वीर ने देखा की कैसे वह व्यक्ति दुबारा से उस वाइन की बोतल में पैकिंग चढ़ा रहा था ताकि ऐसा लगे वाइन की बोतल एकदम नयी है.
'थिस मोथेरफुकेर...!!'
और इन् चाँद लम्हो में, वीर ने ये सारा काम इस प्रकार से किया था की उसके जेब का कैमरा सामने की ऑर्डर फोकस्ड था. डिपार्टमेंट वालो को स्क्रीन में देख ये कतई पता नहीं लग पाया था की वीर ने ऐसा भी कुछ किया था.
फिर आया वह वक़्त, जब पिचर ने वीर को बुलाया.
उसके साथ बैठ के जब उसने वीर को वह वाइन ऑफर की, पिचर के चेहरे पर हैवानो वाली कपटी मुस्कान थी. क्युकी वह जानता था ये वीर आज मररेगा hi उसके हाथो से.
पर वह ये नहीं जानता था... की वीर एक आम इंसान नहीं था.
वीर ने जैसे hi वाइन से भरे गिलास को चेक किया,
*डिंग*
[A glass full of poisoned wine. Don't drink it.]
सब कुछ सामने था. ये वही वाइन थी. जिसमे फेरर बदल किया गया था.
और इसलिए पिचर अब तक पकड़ा नहीं गया था. क्युकी वह भी शामे वाइन पीटा था.
परन्तु वह इस ज़हर से लड़ने में सक्षम था. लेकिन आम व्यक्ति नहीं.
और ऐसे hi सभी मौत के घात उतर रहे थे.
व्हाट ा होर्रिफ्यिंग वे तो किल.
वह अभी भी शैतानो की तरह मुस्कुरा के वीर को देख रहा था.
'थिस श्लय बास्टर्ड!!!'
लेकिन आज खेल कुछ अलग होने वाला था.
'पारी!!! ओपन थे शॉप!!'
[Yes Master!!!]
'फंड में ा स्किल व्हिच कैन क्योर थिस पाइजन.'
[Whaaaatttttt??? Nooooooooo!!! Maaassttteeerrrr!!! Aap aisa nahi kar sakte. I'm telling you please stop!!! Please!!! I'm begging you~]
'पारी...!!!'
[Nooo noooo nooooooo!!!!? How can I??? Mat kariye.... Please!!!! I...]
'दो आईटी!!!!!!'
जब वीर मैं में जोरर से चीखा तोह पारी एक बार फिर अपने मास्टर के सामने हार गयी.
[Master! This is the one but...]
'कितने पॉइंट्स? ओह्ह्ह! 5000 पॉइंट्स? ओने टाइम उसे ओनली? फाइन थें! परचेस थिस.'
[O-Okay but...]
'दो आईटी!!!!'
*डिंग*
['Sylvia's वेनोम क्योर' इस नाउ अवेलेबल.]
*डिंग*
[Host can only use this skill for one time only.
Warning : Beware of extreme pain, vomit and increased heart rate.]
*डिंग*
[Sylvia's Venom cure has been activated.]
और अगले hi पल, वीर के अंदर भारी मात्रा में वाइट ब्लड सेल्स bann'na शुरू हो गए. बन्न तोह पहले भी रहे थे पर उनकी प्रोसेस कई गुना बढ़ चुकी थी.
वीर ने फिर वह किया जो सबको हैरान कर दिया था.
उसने वाइन पी ली थी. पर वाइन तोह कंटेनर में गयी थी?
लौड़े का कंटेनर! वह कंटेनर तोह वाशरूम के सोप डिस्पेंसर का एक टूटा हुआ भाग था जो वीर ने वाशरूम से निकलने से पहले हथ्याया था.
वह कलर? घंटा कलर! वह तोह उसका खून था जो वाइट ब्लड सेल्स ने पाइजन के रूप में उससे बाहर फिकवाया था.
वाइट ब्लड सेल्स hi तोह इम्युनिटी का कारण है हमारे शरीर में.
और उसके बाद उठा था वीर को अत्यंत दर्द, उसका नर्वस सिस्टम इतने खतरनाक स्थिति से गुज़र रहा था की उसका अंधरुनि दर्द असीम होता जा रहा था.
ऐसा लगा था की वह अब नहीं बचेगा. और बेहोश होने से पहले उससे बस पारी के बोल याद थे.
"वीइरररररररर!!!???"
दिव्या की आवाज़ उससे फिरसे होश में लायी.
वीर : किंग!!!
वीर एक आखिरी नज़र पिचर पर दाल आगे बढ़ गया.
और बाहर आते hi,
*स्क्रीईएक्सक्कछहः*
गाडी रुकी और सुहाना और निक उसमे से बाहर निकले.
सुहाना की निगाहें जैसे hi वीर पर जा कर तिकी उसकी आँखें फैलती चली गयी,
"वीइररररररर!!!"
वह दौड़ते हुए आयी और जोरर से कूद के उसकी बाहो में उछाल गयी.
उसके बाद वही हुआ. सवाल पे सवाल. वीर ने जैसे तैसे मामला शांत किया.
पर...
वीर : हँ!!??
वह आश्चर्य चकित रह गया जब उसने अपने बगल में सुहाना को देखा तोह...

वह रो रही थी. उन् आँखों में पहली बार वीर ने कभी अपने लिए इतने स्ट्रांग इमोशंस देखे थे.
'मिस सुहाना...!?'
वीर : आप रो रही हो?
सुहाना (मुँह फरते हुए) : Who's क्राइंग? गेट लॉस्ट!
वीर : *स्माइल्स*
दिव्या : तुम दोनों! टेक माय कीस! मुझे आने में लेट हो जाएगा.
दिव्या ने कार की कीस फेकते हुए कहा.
और कुछ देरर में hi वीर और सुहाना दोनों दिव्या की कार में सवार होते हुए वह से रवाना हो गए. उधर की तहक़ीक़ात लम्बी चलने वाली थी.
इधर कार में,
सुहाना (स्माइल्स) : I'm हैप्पी!
वीर : व्हाई सो?
सुहाना : दुह!!! यू डम्ब! क्युकी तुम सही सलामत हो.
वीर : पर जब में वह से जा रहा था तब तोह आप गुस्सा होक भाग गयी थी बच्ची की तरह परर पटक के.
सुहाना (ब्लशेस) : Wh-What दो यू मैं बी बच्ची की तरह??? ी वास् लुकिंग आउट फॉर यू!! पर तुम हो की... खर्र! चोर्रो!!! वेट!!
वीर : क्या हुआ?
सुहाना : उधर पार्क है!
वीर : सो!?
सुहाना : स्टुपिड! स्टॉप थे कार! मुझे थोड़ी फ्रेश एयर चाहिए.
सुहाना की बात मान वीर ने गाडी पार्क के पास रोक दी.
ये एक ओपन पार्क था.
और दोनों hi उतर के कुछ देरर उस ख़ामोशी में टहलने लगे. कोई बातें नहीं.
जब अचानक hi,
सुहाना पलटी और वीर से जोरर से चिपक गयी.

'हँ?'
सुहाना : ी थॉट समथिंग विल हैपन तो यू!!!
उसने उससे देख के बोलै!!

वीर : बूत I'm राइट हेरे! है न?
सुहाना : हम्म! एंड that's व्हाट मैटर्स.
कहते हुए वह उसके कंधे पर सर्र रख उस से चिपकी रही.

जब अचानक hi उससे ध्यान आया...
की वीर उसका पति नहीं था.
सुहाना : अह्ह्ह!!! S-Sorry अबाउट तहत...!!
कहते हुए वह दूर हट गयी और मुद गयी.
वीर को यु अकेला चोरर वह वापस से कार की ऑर्डर चल दी.
इधर शीतल लेहेर में, हलकी हवाओ में वीर की लहराती ज़ुल्फ़ें उसकी आँखों के सामने फिर रही थी और नज़रे तिकी हुई थी सुहाना के जाते हुए फिगर पर.
'यू अरे हिडिंग समथिंग. Aren't यू? मिस सुहाना?'
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आज के लिए इतना hi गाइस.
अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ ऑलमोस्ट 5क वर्ड्स. अगेन, नार्मल लेंथ से कही ज़्यादा बड़ा अपडेट.
लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का यारा.
कीप सपोर्टिंग!
धन्यवाद!





















