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- Dec 5, 2013
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अपडेट - 40 ~ गेटिंग ा जॉब
अब तक...
ये सब कुछ पारी के लिए प्रश्न जनक था.
पर...
पारी के सवाल पर...
वीर के मुँह से एक hi उत्तर निकला...
"माँ... तोह आखिर माँ होती है... पारी!!!"
अब आगे...
आतिश की डेथ के बाद, वीर उस रात थोड़ा बुरी हालत में घर पहुचा था. पर घर पहुचने से पहले उसने क्लिनिक में अपनी फर्स्ट अिध करवा ली थी.
घर में उसने बिलकुल भी ऐसा नहीं दिखाया की वो लड़खड़ा रहा है या उसके परर में कुछ गड़बड़ है, वर्ण सभी उसकी जान खा जाते. वो सीधा डिनर करके अपने रूम में जा के लेत चूका था. जो भी मेडिकेशन्स डॉक्टर ने प्रोवाइड किये थे, उससे टाइम तो टाइम उसने लिया और बस आराम फरमाने लगा.
पर भला वीर किसी का खून करने के बाद इतनी आसानी से कैसे आराम फार्मा रहा था?? और ऐसे hi कैसे उसने आतिश जैसे आदमी को ठिकाने लगा दिया?
इस सवाल का जवाब एक hi था.
~सुहाना!
जिस दिन वीर सुहाना से मिलने गया था. तोह भूमिका की होटल से सुहाना उससे अपनी गाडी में बैठा के अपने घर ले गयी थी. और उन् दोनों के बीच जो भी कंवर्सशन्स हुई थी, उसमे hi इस बात का उत्तर छिपा था.
वीर : वेट! आप मुझे अपने घर क्यों ले जा रही हो!?
सुहाना : शट उप okay! एक तोह मुझ से कहते हो की मुझसे आके मिलो. वाह! देख रहे हो? सुहाना यानी की में तुमसे मिलने आ रही हु. अपने सारे काम चोरर के. और फिर मिलते से hi एक बम पटकते हो की तुम उस आतिश को मारोगे... मज़ाक चल रहा है क्या!?
वीर : में झूठ नहीं बोल रहा. I'll डेफिनिटेली...
सुहाना : वही! इडियट! It's नॉट ा स्माल मटर. घर पे चल के डिसकस करना पड़ेगा.
वीर : फाइन!
जब दोनों hi घर पहुचे, तोह घर में सभी सर्वेन्ट्स उन् दोनों को hi देखे जा रहे थे.
सुहाना : इग्नोर थे मैड्स एंड सर्वेन्ट्स. आओ! मेरे रूम में hi डिसकस करते है.
और सुहाना वीर को अपने रूम में ले गयी. पर उसके ऐसा करने से सर्वेन्ट्स की बीच बातें न बने, भला ऐसा कैसे हो सकता था?
सर्वेंट 1 : सुहाना Ma'am एक लड़के के साथ!? वो भी अपने रूम में ले गयी उससे!?
माइड 1 : सोनिआ मैडम को पता है ये बात? कौन है ये लड़का भला? आज के पहले कभी किसी लड़के को सुहाना मैडम अपने कमरे में नहीं ले गयी. फिर आज कैसे? उस दिन भी आया था ये... पर है कौन!?
सर्वेंट 2 : हम्म! कुछ गड़बड़ तोह नहीं!?
माइड 2 : तुम लोग अपना काम करो और फ़ालतू की बातें न बनाओ. यदि सुहाना मैडम को पता चला तोह पता है न क्या होगा!?
उस दूसरी माइड के इतना कहते hi वह मौजूद बाकी सभी सर्वेन्ट्स की बोलती बंद हो गयी और वो कुछ अतीत के बारे में सोच के फौरन hi अपने कामो में लग गए.
इधर अंदर वीर सुहाना के कमरे में दाखिल हुआ तोह वह चकित रह गया. कमरा वाक़ई नेट एंड क्लीन था और एक लेडी का hi कमरा प्रतीत हो रहा था.
पर इस वक़्त उसकी नज़रे जैसे किसी चीज़ को ढूंढ रही थी.
सुहाना : हम्म? क्या हुआ? क्या देख रहे हो ऐसे?
उसके सवाल पर अगले hi पल वीर को सुहाना की वही इमेज याद आ गयी.
"वाहहहहहहह फ़क यू चोरररर..."
जब वो टेडी की धुलाई बड़ी hi बेरहमी से कर रही थी. और ये याद आते hi वीर के पसीने छूटने लगे.
सुहाना : ओह hello? कहा खो गए?
वीर : हँ!? No... ी... जस्ट...
सुहाना : बोलो? क्या देख रहे हो ऐसे!?
वीर एक बार फिर इधर उधर देखा और जैसे hi उसकी नज़र बीएड के नीचे पड़ी उसकी आँखों में जैसे एक चमक आ गयी.
वो टेडी वही ठूसा हुआ पड़ा था. जब सुहाना ने उसकी नज़रो को फॉलो किया और उससे ये एहसास हुआ की वीर क्या देख रहा है. उसकी आँखें हैरानी और फिर गुस्से के मारे फेल गयी.
अगले hi पल उसने टेडी को लात से और अंदर ठूस दिया और वीर के पास अपनी गांड मटकाते हुए वो आयी और धीरे से बोली,
"तुमने कुछ नहीं देखा. राइट!?"
'फुसक्कक्कककककक! She's स्केरी!'
वीर : Y-Yeah!!
सुहाना (स्माइल्स) गुड! थें... बैठो!
और दोनों hi आमने सामने बैठ गए.
सुहाना : अब बोलो!
वीर : में पहले hi बता चूका हु. और कितनी बार बताऊ?
सुहाना (शिघ्स) : तुम्हे पता है न तुम क्या बात कर रहे हो? यदि मेरी नज़रो से देखोगे तोह तुम्हे पता चलेगा की तुम कितना बड़ा जोके मार रहे हो.
वीर : I'm नॉट जोकिंग.
सुहाना : देखो! अभी तुम्हारी बोहत लाइफ है यार. तुम इन् सब के चक्करो में कहा पद गए!? तुम तोह एक कॉलेज स्टूडेंट हो. और वो आतिश मुंबई का डॉन आदमी जैसा है. अरे वो एक फूक में hi तुम्हे उदा सकता है. फिर क्यों मौत के मुँह में जा रहे हो? में खुद उसके खिलाफ कुछ करने से डर रही हु. वर्ण तुम्हे लगता है में शांत बैठी रहती? ये जान के की मेरी बहिन की जान के पीछे कोई पड़ा है? डेफिनिटेली नॉट!
और वो बोलते बोलते उठ कड़ी हुई और पलट के विंडो के पास जा पहुची.
सुहाना : जस्ट लाइव ा नार्मल लाइफ मन. इन् सब में कुछ नहीं रखा...
वीर : उसने मेरे दोस्त को मारा है...
*साइलेंस*
सुहाना : ???
वीर : हे प्लांड आईटी. That's व्हाई... चाहे कुछ भी हो जाए... ी हैवे तो टेक हिम डाउन.
सुहाना : ...
वीर : और इसलिए... मुझे आप से हेल्प चाहिए!
सुहाना : ??
वीर : ी वांट यू तो हैंडल थे पुलिस एंड इन्वेस्टीगेशन.
सुहाना : हम्म! तोह तुम चाहते हो की में तुम्हारी करतूत के बाद सारा कुछ हैंडल करू?
वीर : कुछ ऐसा hi...
सुहाना : और मुझे क्या मिलेगा? No वेट! तुम इतना यकीन के साथ कैसे कह सकते हो की तुम उस आदमी को मारने में कामयाब हो जाओगे? हँ?
वीर : ट्रस्ट में! ी विल ब्रिंग हिम डाउन.
सुहाना (शिघ्स) : मुझे अभी भी ये एक जोके hi लग रहा है चाहे किसी भी एंगल से क्यों न देखु. ऑलराइट! मान लो में एग्री कर गयी और पुलिस को हैंडल कर लिया... बूत... मुझे क्या!? मुझे क्या मिलेगा? एक्सचेंज इक्वल होता है यू क्नोव राइट? में तुम्हारी इतनी हेल्प कर रही हु तोह... यू क्नोव...
वीर : में आतिश को आपकी बहिन के रास्ते से अलग कर रहा हु क्या वो काम नहीं!?
सुहाना : ओह c'mon! वो आतिश अभी तक मेरी बहिन का कुछ नहीं कर पाया है. तोह उसका होना ऑब्वियस्ली थ्रेट है पर ऐसा भी नहीं है की उसके होने से मेरी बहिन जी hi नहीं पा रही है. तोह इतने से कुछ नहीं होने वाला. गिव में समथिंग इक्वल तो माय फवौर...
वीर : थें... मेरे पास और कुछ नहीं है देने को... आप वैसे hi क्रोरेपति लोग हो. ऊपर से आपने hi मुझे वो डेबिट कार्ड दिया था. तोह पैसे देना तोह मूर्खता होगी.
सुहाना : हम्म! थें प्रॉमिस में...
वीर : ???
सुहाना : यू विल दो तवो फवोर्स.
वीर : कैसे फवौर?
सुहाना (स्माइल्स) : पहला ये की... मुझे जाना है नेक्स्ट वीक दिल्ली. सोनू भी साथ में रहे इसलिए वो अभी ज़्यादा बिजी है और सारे यहाँ के काम सचेडूले से आगे hi कर रही है. ताकि वो मेरे साथ चल सके. मेरे हस्बैंड की तरफ से मुझे वह जाना है. बसीकली, बोहत बड़ा फंक्शन है जहा धेरर सारे अलग अलग कम्पनीज के लोग आएँगे... कुछ आगे की टेक्नोलॉजीज से रिलेटेड इनोवेटिव फंक्शन रखा गया है.
वीर : हम्म! तोह!?
सुहाना (स्माइल्स) : You'll के विथ उस.
वीर : ???
"Kyaaaaaaaaaaaaaa????"
और वीर झटके से खड़ा हो गया.
सुहाना : येह! देखो में तोह बिजी हो जाउंगी वह पहुँच के. तोह सोनू को कंपनी देने वाला कोई होना चाहिए न? और तुम दोनों वैसे hi एक दूसरे से फेमिलिअर हो.
वीर : वह...!? No... वेट!!! में क्यों??? ी मैं... आपके इतने सारे कॉन्टेक्ट्स...
सुहाना : यू don't अंडरस्टैंड.
वीर : हँ?
सुहाना (शिघ्स) : आये दिन इन् अमीर घरानो से रिश्ते आते है सोनू के लिए तुम्हे पता है? बूत शी नेवर पायस अन्य अटेंशन तो थम. क्युकी, वो सभी की पर्सनालिटीज एक झटके में देख के hi पहचान जाती है. ी मैं... एहम... एक्सक्लूडिंग माइन.
वीर : ??
सुहाना : इसलिए... कोई ऐसा होना चाहिए उसके साथ जिसके संग वो उनकंफर्टबले न फील करे, इजी तो टॉक हो बाँदा... और तुम से बेहतर कौन है?
वीर : No... ी मैं... उनकी फ्रेंड्स भी तोह होंगी न... जो...
सुहाना : उसकी सिर्फ 2 hi फ्रेंड्स है. एक और था पुष्कर... बूत वो अब इस दुनिया में नहीं है. बाकी 2 फ्रेंड्स... वेल... It's कॉम्प्लिकेटेड. इसलिए... अब तुम hi बचते हो... सो? में हां समझू या...!?
वीर कुछ देरर सोचा... पर आखिर उससे ये शर्त तोह maan'ni hi थी. क्युकी तभी सुहाना उसकी हेल्प करने राज़ी होती...
वीर (सिघ) : फाइन!
सुहाना (स्माइल्स) : That's गुड तो हेअर. पासपोर्ट वगैरह तोह होगा hi तुंहरे पास है न?
'दमन! पासपोर्ट तोह मेरा उस घर में है. अब में वह नहीं जा सकता...'
[Aap Ragini se keh ke passport mangwa sakte ho Master.]
'अहह! राइट! थैंक्स पारी!'
[You are welcome Master!]
वीर : जी! पासपोर्ट है.
सुहाना : गुड! थें ी एग्री...
वीर : वेट ा मिनट! दूसरा फवौर!?
सुहाना (स्माइल्स) : समय आने पर... उसकी भी मांग करुँगी. फिलहाल तोह यही है... Okay नाउ... यू कैन लीव. पुलिस एंड इन्वेस्टीगेशन में देख लुंगी. आल्सो, कुछ आदमी भी भिजवा दूंगी... पर ध्यान रहे... वो तुम्हारे साथ एकदम अंदर नहीं जाएंगे.
वीर : चलेगा... एंड थैंक्स! आल्सो...
सुहाना : हम्म??
वीर : 2 फवौर और जोड़ लीजिये...
सुहाना : हँ??
वीर : मुझे पुलिस स्टेशन जाना है और वह से कुछ बरामद करना है. मेरे फ्रेंड की साइकिल. उसकी आखिरी निशानी... थाने में hi है. आपको मेरी हेल्प करनी होगी.
सुहाना : ओह्ह्ह्ह! हो जाएगा. और दूसरा क्या!?
वीर : दूसरा ये की... हेल्प में फंड समवन!
सुहाना : ???
वीर तभी धीरे से आगे आया, उसने टेबल पर रखे पेन और एक डेरी से पेपर फाड़ सुहाना को कुछ लिख के उससे थमा दिया.
सुहाना : क्या है ये? हम्म? भावना सिंह!? अलियास नाम गीता!? जॉब... अर्चेओलॉजिस्ट!?
वीर : मेरी माँ... रियल माँ... उनकी डिटेल्स... ी क्नोव आपके कनेक्शंस काफी है. हेल्प में फंड हेर लोकेशन. मुझे विश्वाश है आप करवा लोगी ये...
सुहाना (स्माइल्स) : ओह्ह्ह्ह! ी सी!
[Damn master! What a perfect plan. Suhana can really help you. Uski madad se jald hi location mil jaegi aapko apni mom ki...]
'येअहहह!'
सुहाना : तोह तुम्हारे अब तीन फवौर हो गए. चौथा तोह यही है की... यू अरे किंग विथ उस. रेमेम्बेर थिस.
वीर : हम्म! चलता हु...
सुहाना : Okay!... एंड....
वीर : ???
सुहाना : गुड लक! आल्सो... Don't दिए...
वीर जाने के लिए जैसे hi मुदा... तोह सुहाना के बोल के चलते एक बार फिर वो रुक गया.
सुहाना : वैसे... तुम्हे कैसे पता चला की मेरे इतने कॉन्टेक्ट्स है!? इतने यकीन के साथ कैसे आ गए तुम मेरे पास? कुछ तोह पता चला होगा कही से!?
उसकी बात सुन्न, वीर धीरे धीरे उसके करीब आया और ठीक उसके पीछे खड़ा हो गया. सुहाना अभी भी विंडो से बाहर hi देख रही थी. उसकी पीठ अभी भी वीर की तरफ थी. वो महसूस कर पा रही थी की वीर उसके ठीक पीछे खड़ा हुआ है.
पर अगले hi पल वीर ने कुछ ऐसा कहा, जिसके चलते उसकी आँखें हैरानी और शॉक के मारे फटती चली गयी...
वीर : आपका रिएक्शन कुछ ओड सा था. होटल में मेने किसी को मारने की बात आपके सामने राखी, और आप ऑफ़ कोर्स थोड़ा शॉक हुई बूत आफ्टर तहत... आपके लिए जैसे ये उतना शॉकिंग भी नहीं था. ये मेरी गेस्सिंग है... बूत ी फील आईटी... यू हैवे किल्ड समवन before...Right?
वो धीरे से कहे गए शब्द, जैसे सुहाना के कानो में घंटी को तरह बज रहे थे. वो लास्ट सेंटेंस जैसे किसी बम की तरह आके गिरा था सुहाना के ऊपर. पल भर के लिए तोह उसका शरीर भी सिहर उठा.
फिर तोह उसने न आव देखा न ताव, वो तेज़्ज़ी से यु पलटी और वीर की कल्लोर को भींच उसने उससे पीछे धकेला जहा एक काउच रखा था. और दोनों hi उस काउच पर गिर पड़े.
सुहाना वीर के ठीक ऊपर थी. उसके ज़ुल्फ़े वीर के गाल के बगल से होते हुए लटक रही थी.
वीर की कल्लोर उसकी गिरफ्त में थी और वो एकदम गुस्से से वीर को देख रही थी.
सुहाना : हाउ दीद यू क्नोव?
वीर : ी... ी जस्ट गेस्सेड.
सुहाना (गल्र्स) : वाक़ई!? क्युकी मुझे अब तुमपे डाउट हो रहा है.
वीर : वाक़ई!
सुहाना हल्का सा आगे झुकी, उसका बदन पूरा वीर के सीने पर टिका हुआ था. वो उसके कानो के समीप आयी और बड़ी hi धीमी पर थोड़ी भयानक सी आवाज़ में बोली,
"तुम्हारी गेस्सिंग कुछ ज़्यादा hi सटीक जा रही है. आगे से... इस बात का ज़िक्र कभी तुम्हारे मुँह से नहीं निकलना चाहिए. किसी को पता नहीं चलना चाहिए. सोनू को तोह बिलकुल भी नहीं. जिस दिन ऐसा हुआ... वो तुम्हारा प्रॉबब्ली लास्ट दिन होगा."
सुहाना ने डराते हुए उस से कहा. यदि कोई और होता तोह वाक़ई थोड़ा घबरा जाता. पर वीर तोह वीर था... और वो भी पहले वाला नहीं. उसके अंदर पारी जो थी अब.
अपने हाथ को उठाते हुए उसने सुहाना की नरम गर्दन को थामा और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,
"Don't टेम्प्ट ा यंग मन लिखे तहत सुहाना जी... दुसरो के सीक्रेट्स को फैलाना... मेरी आदत नहीं! और हो सके तोह... उठिये प्लीज!"
ऐसा रिस्पांस सुहाना ने बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था. उससे लगा था वो वीर को थोड़ा दर्रा देगी पर यहाँ तोह सिचुएशन hi अलग बन्न गयी थी. और जब उससे अपनी हालत का ध्यान आया तोह अचानक hi उसके गालो पर हलकी लाली सी छाने लगी और वो एकदम झटके से उठ के दो कदम पीछे हो गयी.
वीर (स्माइल्स) : चलता हु... थैंक्स अगेन!
और वीर सुहाना को अकेला चोरर वह से निकल गया. सुहाना केवल उससे जाते हुए देखती रही.
सुहाना वीर की मदद करने के लिए केवल एक hi कारण से राज़ी हुई थी. और वो ये की वीर आतिश से भीड़ चूका था और अभी तक ज़िंदा था. साथ hi साथ वीर की दुश्मनी भी आतिश से थी.
ये कहना गलत नहीं होगा की वो वीर को अस ा पवन उसे कर रही थी. और साथ hi साथ उससे एक्स्ट्रा फवोर्स भी मिल चुके थे. पर उससे डाउट था की क्या वीर वाक़ई एक मामूली सा लड़का कुछ कर पाएगा?
सुहाना शातिर थी. उससे पता था यदि वीर फ़ैल हुआ तोह क्या करना है. वो सोनिआ को कुछ भी पता नहीं चलने देती की इसमें उसका हाथ था. पर यदि वीर पास हुआ, तोह सबसे पहला सवाल उसके मैं में यही आने वाला था की आखिर ऐसा कैसे कर लिया उसने? आतिश जैसे आदमी को ख़तम करना?
यदि ऐसा हुआ तोह इसका मतलब साफ़ होने वाला था की वीर कुछ छिपा रहा है उस से. और इसलिए सुहाना ने पहले hi दूर की सोच ली.
वो वीर से दो कदम आगे चल रही थी.
यदि वीर पास हुआ, तोह उससे अपना फवौर निभाना पड़ेगा. और ऐसा करने के लिए उससे उसके साथ जाना पड़ेगा दिल्ली.
और इसी ट्रिप में... वो वीर के सीक्रेट्स ढूंढ़ने का प्रयत्न करेगी. की आखिर कैसे... एक मामूली सा इंसान कैसे आतिश को मार दिया? पर उससे क्या पता था...
की वीर कोई मामूली इंसान नहीं था.
जब वीर घर आया तोह वो रागिनी से मिला.
रागिनी : क्या हुआ वीर?
वीर : भाभी वो... अब कैसे कहु... मेरा पासपोर्ट रखा है घर में... पुराने वाले...
रागिनी : पासपोर्ट? नाहीइ! अरे मेने तुम्हारे सारे डाक्यूमेंट्स और िदश पहले hi सर्वेंट से मंगवा ली थी वीर. मेरे रूम के कप्बोर्ड में राखी है. तुम लेलो जाके.
वीर : हँ? रियली?
रागिनी : हाँ!
और नेक्स्ट सेकंड hi वीर ने वो किया जिसके चलते रागिनी हक्की बक्की सी मूर्ति बानी कड़ी रही.
वीर ने रागिनी को अपनी बाहो में जोरर से खींचा और उससे दबोच लिए,
"ओह्ह थैंक यू भाभी! आपने मेरी समस्या hi हल करदी! थैंक्स ा लोट!"
और वो रागिनी के कमरे में चला गया. पर इधर बेचारी रागिनी, भौचक्की सी अपने सुर्ख लाल गाल लिए कड़ी रही. उससे समझ में नहीं आया की ये अचानक से क्या हो गया.
वही दूसरी ऑर्डर,
इधर सुहाना खायलो में घूम थी जब कुछ देरर बाद उससे वीर की तरफ से एक मैसेज आया,
"शाम को थाने में मिलिएगा. मुझे फ्रेंड की साइकिल बरामद करवानी है. नीड यू हेल्प!"
सुहाना : ुघ्घ! रियली... एक साइकिल भी नहीं ली जाएगी इस से...
और उसने "फाइन" रिप्लाई कर मोबाइल साइड में फेक दिया.
***
और ये थी आतिश की डेथ की पहले की पूरी प्लानिंग. वीर ने सुहाना के आदमियों की मदद से जलसा में उन् गुंडों की ठिकाने लगाया था. बाकी तोह उसने अपने hi बल बूते पर किया था.
अब सवाल था की वो 110 पॉइंट्स कहा इन्वेस्ट करने वाला था? और उसकी नयी स्किल हव्कये क्या थी?
'पारी! शो में माय स्टैट्स'
[Yes master!]
[ स्टैट्स :
स्ट्रेंथ - 50/100
इंटेलिजेंस - 35/100
अगिलिटी - 30/100
ेंदुराने - 45/100
अपीयरेंस - 22/100]
'ऑलराइट! इंटेलिजेंस में 15 दाल दो. अगिलिटी में 20. ेंदुराने में 5.'
*डिंग*
[15 points have been added to Intelligence.]
[20 points have been added to Agility.]
[5 points have been added to Endurance.]
[70 points remaining.]
[Kisi aur me Master?]
'हम्म! अपीयरेंस में भी 18 ऐड कर दो.'
*डिंग*
[18 points have been added to Appearance.]
[Stats :
Strength - 50/100
Intelligence - 50/100
Agility - 50/100
Endurance - 50/100
Appearance - 40/100]
'गुड'
[52 points remaining hai. Kuch karna hai? Wese mujhe kuch baatein bataani hai aapko.]
'किसी बातें?'
[50 points se ab upar jaane ke liye. Aapke 2 points keval 1 hi point consider kiye jaenge.]
'हँ? No... एक मिनट!'
[Yes! That's right! Ab yadi aapko 50 se 52 par kisi stat ko badhaana hai toh aapko 2 nahi balki 4 points invest karne honge tab jaake wo 52 par aaega.]
'Wtf????? ये तोह पागलपन है. ऐसे तोह मेरे...'
[Yes! Aapko kya laga? Stats badhaana itna asaan hai? It will take time. And a lot of hard work.]
'फुक्कक्कक्ककककक!'
[Toh? Kisi me invest karna hai?]
'अभी नहीं! यदि कोई स्किल है काम की तोह वो दिखाओ. बी थे वे, ये हव्कये क्या है.'
*डिंग*
[Skill : Hawkeye.
डिस्क्रिप्शन : ा डायमंड टियर स्किल. ग्रांट्स थे यूजर ा परफेक्ट एआईएम फॉर एनीथिंग. No टारगेट कैन स्लिप अवे फ्रॉम Hawk's ऑय.]
'होलियीय शीट्ट्ट्ट!!!!'
स्किल पढ़ते hi वीर को पता चल चूका था की ये क्या थी. एक डायमंड टियर स्किल. सिस्टम की सबसे हाईएस्ट स्किल्स होती है डायमंड टियर स्किल्स. उसके नीचे आते है गोल्ड, फिर सिल्वर और ब्रोंज.
वीर के पास जो बेसिक मार्टिकल आर्ट्स स्किल थी वो एक ब्रोंज स्किल थी. साथ hi साथ सेक्स प्रोटेक्शन जो उसने परचेस की थी वो एक सिल्वर टियर स्किल.
और ये थी... एक डायमंड टियर स्किल.
जिसे अपग्रेड करने की कोई ज़रुरत नहीं थी. परफेक्ट एआईएम मतलब परफेक्ट एआईएम. परमानेंट ों hi रहने वाली थी ये.
'फुक्कखकक! थिस इस इंसाने. वेट! तोह में शॉप से डायमंड टियर स्किल्स एक्सेस कर सकता हु?'
[No way! Ye toh aapka reward tha. Aur... Reward randomly select hoke aaya. Isliye aapko jhatke me mil gayi. Warna iski probability boht kam rehti hai. You are lucky.]
वीर अभी और फंक्शन्स के बारे में जानता की अचानक hi उसका फ़ोन बजने लगा.
देखा तोह पाया की श्रेया का फ़ोन था.
वीर : Hello?
श्रेया : गेस व्हाट?
वीर : गेस व्हाट क्या?
श्रेया : ाररीी बुद्धू मेरी जॉब लग गयी... तुमने जो भेजा था न मुझे एड्रेस कंपनी का. ी वेंट तेरे... मेरा इंटरव्यू हुआ एंड Omg... लिखे... थे हिरद में... I'm सो हैप्पी राइट नाउ...
वीर (स्माइल्स) : कोंग्रटुलतिओन्स!
श्रेया : आल थैंक्स तो यू... मुझे तोह पता hi नहीं था तुम्हारा इतनी बड़ी कंपनी में कनेक्शन है. लिखे मेरा बस इंटरव्यू हुआ और कुछ नहीं... और सुनो... अभी के अभी मुझे क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स मॉल में मिलो. में शॉपिंग करने जा रही हु. तुम साथ में चलोगे.
वीर : हम्म! आता हु.
और बताये गए समय पे वीर पहुँच चूका था, क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स मॉल में.
कुछ hi देरर में श्रेया भी आ गयी.
श्रेया : किसी लग रही हु?
वीर : हम्म? ग्रेट!!
श्रेया (ब्लशेस) : थैंक्स! तोह चले?
वीर : सूरे!
और दोनों hi शॉपिंग करने निकल गए.
श्रेया : वैसे... अब केसा फील कर रहे हो तुम? दी बतायी थी तुम काफी परेशान थे कुछ दिनों से...
वीर (स्माइल्स) : I'm फाइन नाउ. निधि ma'am और जूही किसी है?
श्रेया (स्माइल्स) : जूही तोह रोज़ तुम्हारे बारे में पूछती है. और... दी भी तुम्हे याद करती है. दोनों अच्छे है... बस... तुम थे तोह घर का माहौल और खुशनुमा सा था.
वीर : ी... ी सी!
श्रेया : अन्य्वयस! आज मेरी जॉब लगी है. तोह आज में अपनी सेविंग्स से साड़ी शॉपिंग करुँगी. और तुम्हे भी मेरे साथ चल के एक शर्ट लेनी पड़ेगी.
वीर : नाह! It's okay! बल्कि, आप चलो... आज में आपको आपकी पसंद की चीज़ दिलवाऊंगा.
श्रेया : व्हाट थे हेलल? जोके मार रहे हो? हाहाहा~ ज़्यादा नहीं फेकते... चलो अब.
और वो वीर को खींच के ले गयी. पर उससे नहीं पता था, की वीर के पास सुहाना का दिया हुआ डेबिट कार्ड था. और इस अकाउंट में 5 से 6 लाख अमाउंट भरा हुआ था.
[Master! Aap Nidhi ko kyu nahi de dete ye paise? After all, she needs money.]
'No! इतने में उनका कुछ नहीं होने वाला पारी. काम से काम... 45 लक्ष होने चाहिए. तब जाके कुछ हो सकता है. यदि अभी में उन्हें दूंगा... शी विल क्वेश्चन में. की इतने पैसे कहा से आये? कोई गलत काम तोह नहीं कर रहा में? वो वैसे hi टेंशन में है. उन्हें और टेंशन नहीं देनी है.'
वो निधि के खयालो में खोया हुआ था जब श्रेया की आवाज़ उससे वापस से होश में लायी.
"ोये!? कहा खो गए? लुक! हाउ दो ी लुक? इस आईटी गुड?"
और वो एक फुल स्लीव टॉप पेहेन के बाहर आयी जिसमे वो अलग hi क़यामत लग रही थी.

वीर (स्माइल्स) : आपके ऊपर सब कुछ अच्छा लगता है. आफ्टर आल, यू अरे ब्यूटीफुल.
श्रेया (झेपते हुए) : हँ?? W-Wh-What??? Y-Ye अचानक से, तुम्हे...!?
और उसके गोर से गालो पर हलकी सी लाल परत चढ़ गयी.
वो भाग के गयी और फिर कुछ और कपडे पेहेन के उसने वीर को दिखाए.
वीर ने फिर उससे अपनी तरफ से भी एक टॉप खरीदवाया और अपनी निधि Ma'am के लिए एक सूट भी और जूही के लिए प्यारी सी फ्रॉक भी.
जब श्रेया ने ये प्रश्न किया की इतने पैसे कहा से आये तोह उसने यही कहा की म्हणत की कमाई है.
श्रेया आज बेहद खुश थी. नौकरी लगने से उसके अंदर का कॉन्फिडेंस बढ़ चूका था.
श्रेया को घर पे ड्राप कर वीर अपने घर के लिए जाने hi वाला था जब वो उसके पास आयी और एक बार फिर से उससे थैंक्स बोली,
श्रेया : H-Hey!!
वीर : हम्म?
श्रेया : Th-Thanks... वन्स अगेन!
वीर : बार बार थैंक्स नहीं कहा जाता...
श्रेया (ब्लशेस) : R-Right!
वीर : यू शुड जो नाउ! Ma'am और जूही वेट कर रही होंगी आपका.
श्रेया : हम्म! T-Tum नहीं आओगे अंदर?
वीर : No! में दो दिन बाद दिल्ली जा रहा हु. वह से आके hi मिलूंगा...
श्रेया : हँ??? दिल्ली?? क्यों??
वीर : काम है...
श्रेया : O-Okay...
वीर : जाइये अब...
श्रेया (ब्लशेस) : हम्म!
वो जाने के लिए हुई तोह वीर अपनी गाडी में के लगाने लगा.
पर अचानक hi वो पलटी और अगले hi पल, वीर को अपने गालो पर कुछ गीलापन सा महसूस हुआ.
इसके पहले की वो कुछ समझ पाटा, श्रेया शर्माते हुए jhat-pat तेज़्ज़ कदमो के साथ लिफ्ट की ऑर्डर भाग गयी.
और बेचारा वीर अपनी आँखें फाड़े, हैरानी में उससे केवल जाता हुआ hi देखता रहा.
'हहहहहह!?'
.
.
.
.
.
.
आज के लिए इतना hi गाइस!
बाकी जो लोगो को तोह पता hi है की क्या करना है?
धन्यवाद!
अब तक...
ये सब कुछ पारी के लिए प्रश्न जनक था.
पर...
पारी के सवाल पर...
वीर के मुँह से एक hi उत्तर निकला...
"माँ... तोह आखिर माँ होती है... पारी!!!"
अब आगे...
आतिश की डेथ के बाद, वीर उस रात थोड़ा बुरी हालत में घर पहुचा था. पर घर पहुचने से पहले उसने क्लिनिक में अपनी फर्स्ट अिध करवा ली थी.
घर में उसने बिलकुल भी ऐसा नहीं दिखाया की वो लड़खड़ा रहा है या उसके परर में कुछ गड़बड़ है, वर्ण सभी उसकी जान खा जाते. वो सीधा डिनर करके अपने रूम में जा के लेत चूका था. जो भी मेडिकेशन्स डॉक्टर ने प्रोवाइड किये थे, उससे टाइम तो टाइम उसने लिया और बस आराम फरमाने लगा.
पर भला वीर किसी का खून करने के बाद इतनी आसानी से कैसे आराम फार्मा रहा था?? और ऐसे hi कैसे उसने आतिश जैसे आदमी को ठिकाने लगा दिया?
इस सवाल का जवाब एक hi था.
~सुहाना!
जिस दिन वीर सुहाना से मिलने गया था. तोह भूमिका की होटल से सुहाना उससे अपनी गाडी में बैठा के अपने घर ले गयी थी. और उन् दोनों के बीच जो भी कंवर्सशन्स हुई थी, उसमे hi इस बात का उत्तर छिपा था.
वीर : वेट! आप मुझे अपने घर क्यों ले जा रही हो!?
सुहाना : शट उप okay! एक तोह मुझ से कहते हो की मुझसे आके मिलो. वाह! देख रहे हो? सुहाना यानी की में तुमसे मिलने आ रही हु. अपने सारे काम चोरर के. और फिर मिलते से hi एक बम पटकते हो की तुम उस आतिश को मारोगे... मज़ाक चल रहा है क्या!?
वीर : में झूठ नहीं बोल रहा. I'll डेफिनिटेली...
सुहाना : वही! इडियट! It's नॉट ा स्माल मटर. घर पे चल के डिसकस करना पड़ेगा.
वीर : फाइन!
जब दोनों hi घर पहुचे, तोह घर में सभी सर्वेन्ट्स उन् दोनों को hi देखे जा रहे थे.
सुहाना : इग्नोर थे मैड्स एंड सर्वेन्ट्स. आओ! मेरे रूम में hi डिसकस करते है.
और सुहाना वीर को अपने रूम में ले गयी. पर उसके ऐसा करने से सर्वेन्ट्स की बीच बातें न बने, भला ऐसा कैसे हो सकता था?
सर्वेंट 1 : सुहाना Ma'am एक लड़के के साथ!? वो भी अपने रूम में ले गयी उससे!?
माइड 1 : सोनिआ मैडम को पता है ये बात? कौन है ये लड़का भला? आज के पहले कभी किसी लड़के को सुहाना मैडम अपने कमरे में नहीं ले गयी. फिर आज कैसे? उस दिन भी आया था ये... पर है कौन!?
सर्वेंट 2 : हम्म! कुछ गड़बड़ तोह नहीं!?
माइड 2 : तुम लोग अपना काम करो और फ़ालतू की बातें न बनाओ. यदि सुहाना मैडम को पता चला तोह पता है न क्या होगा!?
उस दूसरी माइड के इतना कहते hi वह मौजूद बाकी सभी सर्वेन्ट्स की बोलती बंद हो गयी और वो कुछ अतीत के बारे में सोच के फौरन hi अपने कामो में लग गए.
इधर अंदर वीर सुहाना के कमरे में दाखिल हुआ तोह वह चकित रह गया. कमरा वाक़ई नेट एंड क्लीन था और एक लेडी का hi कमरा प्रतीत हो रहा था.
पर इस वक़्त उसकी नज़रे जैसे किसी चीज़ को ढूंढ रही थी.
सुहाना : हम्म? क्या हुआ? क्या देख रहे हो ऐसे?
उसके सवाल पर अगले hi पल वीर को सुहाना की वही इमेज याद आ गयी.
"वाहहहहहहह फ़क यू चोरररर..."
जब वो टेडी की धुलाई बड़ी hi बेरहमी से कर रही थी. और ये याद आते hi वीर के पसीने छूटने लगे.
सुहाना : ओह hello? कहा खो गए?
वीर : हँ!? No... ी... जस्ट...
सुहाना : बोलो? क्या देख रहे हो ऐसे!?
वीर एक बार फिर इधर उधर देखा और जैसे hi उसकी नज़र बीएड के नीचे पड़ी उसकी आँखों में जैसे एक चमक आ गयी.
वो टेडी वही ठूसा हुआ पड़ा था. जब सुहाना ने उसकी नज़रो को फॉलो किया और उससे ये एहसास हुआ की वीर क्या देख रहा है. उसकी आँखें हैरानी और फिर गुस्से के मारे फेल गयी.
अगले hi पल उसने टेडी को लात से और अंदर ठूस दिया और वीर के पास अपनी गांड मटकाते हुए वो आयी और धीरे से बोली,
"तुमने कुछ नहीं देखा. राइट!?"
'फुसक्कक्कककककक! She's स्केरी!'
वीर : Y-Yeah!!
सुहाना (स्माइल्स) गुड! थें... बैठो!
और दोनों hi आमने सामने बैठ गए.
सुहाना : अब बोलो!
वीर : में पहले hi बता चूका हु. और कितनी बार बताऊ?
सुहाना (शिघ्स) : तुम्हे पता है न तुम क्या बात कर रहे हो? यदि मेरी नज़रो से देखोगे तोह तुम्हे पता चलेगा की तुम कितना बड़ा जोके मार रहे हो.
वीर : I'm नॉट जोकिंग.
सुहाना : देखो! अभी तुम्हारी बोहत लाइफ है यार. तुम इन् सब के चक्करो में कहा पद गए!? तुम तोह एक कॉलेज स्टूडेंट हो. और वो आतिश मुंबई का डॉन आदमी जैसा है. अरे वो एक फूक में hi तुम्हे उदा सकता है. फिर क्यों मौत के मुँह में जा रहे हो? में खुद उसके खिलाफ कुछ करने से डर रही हु. वर्ण तुम्हे लगता है में शांत बैठी रहती? ये जान के की मेरी बहिन की जान के पीछे कोई पड़ा है? डेफिनिटेली नॉट!
और वो बोलते बोलते उठ कड़ी हुई और पलट के विंडो के पास जा पहुची.
सुहाना : जस्ट लाइव ा नार्मल लाइफ मन. इन् सब में कुछ नहीं रखा...
वीर : उसने मेरे दोस्त को मारा है...
*साइलेंस*
सुहाना : ???
वीर : हे प्लांड आईटी. That's व्हाई... चाहे कुछ भी हो जाए... ी हैवे तो टेक हिम डाउन.
सुहाना : ...
वीर : और इसलिए... मुझे आप से हेल्प चाहिए!
सुहाना : ??
वीर : ी वांट यू तो हैंडल थे पुलिस एंड इन्वेस्टीगेशन.
सुहाना : हम्म! तोह तुम चाहते हो की में तुम्हारी करतूत के बाद सारा कुछ हैंडल करू?
वीर : कुछ ऐसा hi...
सुहाना : और मुझे क्या मिलेगा? No वेट! तुम इतना यकीन के साथ कैसे कह सकते हो की तुम उस आदमी को मारने में कामयाब हो जाओगे? हँ?
वीर : ट्रस्ट में! ी विल ब्रिंग हिम डाउन.
सुहाना (शिघ्स) : मुझे अभी भी ये एक जोके hi लग रहा है चाहे किसी भी एंगल से क्यों न देखु. ऑलराइट! मान लो में एग्री कर गयी और पुलिस को हैंडल कर लिया... बूत... मुझे क्या!? मुझे क्या मिलेगा? एक्सचेंज इक्वल होता है यू क्नोव राइट? में तुम्हारी इतनी हेल्प कर रही हु तोह... यू क्नोव...
वीर : में आतिश को आपकी बहिन के रास्ते से अलग कर रहा हु क्या वो काम नहीं!?
सुहाना : ओह c'mon! वो आतिश अभी तक मेरी बहिन का कुछ नहीं कर पाया है. तोह उसका होना ऑब्वियस्ली थ्रेट है पर ऐसा भी नहीं है की उसके होने से मेरी बहिन जी hi नहीं पा रही है. तोह इतने से कुछ नहीं होने वाला. गिव में समथिंग इक्वल तो माय फवौर...
वीर : थें... मेरे पास और कुछ नहीं है देने को... आप वैसे hi क्रोरेपति लोग हो. ऊपर से आपने hi मुझे वो डेबिट कार्ड दिया था. तोह पैसे देना तोह मूर्खता होगी.
सुहाना : हम्म! थें प्रॉमिस में...
वीर : ???
सुहाना : यू विल दो तवो फवोर्स.
वीर : कैसे फवौर?
सुहाना (स्माइल्स) : पहला ये की... मुझे जाना है नेक्स्ट वीक दिल्ली. सोनू भी साथ में रहे इसलिए वो अभी ज़्यादा बिजी है और सारे यहाँ के काम सचेडूले से आगे hi कर रही है. ताकि वो मेरे साथ चल सके. मेरे हस्बैंड की तरफ से मुझे वह जाना है. बसीकली, बोहत बड़ा फंक्शन है जहा धेरर सारे अलग अलग कम्पनीज के लोग आएँगे... कुछ आगे की टेक्नोलॉजीज से रिलेटेड इनोवेटिव फंक्शन रखा गया है.
वीर : हम्म! तोह!?
सुहाना (स्माइल्स) : You'll के विथ उस.
वीर : ???
"Kyaaaaaaaaaaaaaa????"
और वीर झटके से खड़ा हो गया.
सुहाना : येह! देखो में तोह बिजी हो जाउंगी वह पहुँच के. तोह सोनू को कंपनी देने वाला कोई होना चाहिए न? और तुम दोनों वैसे hi एक दूसरे से फेमिलिअर हो.
वीर : वह...!? No... वेट!!! में क्यों??? ी मैं... आपके इतने सारे कॉन्टेक्ट्स...
सुहाना : यू don't अंडरस्टैंड.
वीर : हँ?
सुहाना (शिघ्स) : आये दिन इन् अमीर घरानो से रिश्ते आते है सोनू के लिए तुम्हे पता है? बूत शी नेवर पायस अन्य अटेंशन तो थम. क्युकी, वो सभी की पर्सनालिटीज एक झटके में देख के hi पहचान जाती है. ी मैं... एहम... एक्सक्लूडिंग माइन.
वीर : ??
सुहाना : इसलिए... कोई ऐसा होना चाहिए उसके साथ जिसके संग वो उनकंफर्टबले न फील करे, इजी तो टॉक हो बाँदा... और तुम से बेहतर कौन है?
वीर : No... ी मैं... उनकी फ्रेंड्स भी तोह होंगी न... जो...
सुहाना : उसकी सिर्फ 2 hi फ्रेंड्स है. एक और था पुष्कर... बूत वो अब इस दुनिया में नहीं है. बाकी 2 फ्रेंड्स... वेल... It's कॉम्प्लिकेटेड. इसलिए... अब तुम hi बचते हो... सो? में हां समझू या...!?
वीर कुछ देरर सोचा... पर आखिर उससे ये शर्त तोह maan'ni hi थी. क्युकी तभी सुहाना उसकी हेल्प करने राज़ी होती...
वीर (सिघ) : फाइन!
सुहाना (स्माइल्स) : That's गुड तो हेअर. पासपोर्ट वगैरह तोह होगा hi तुंहरे पास है न?
'दमन! पासपोर्ट तोह मेरा उस घर में है. अब में वह नहीं जा सकता...'
[Aap Ragini se keh ke passport mangwa sakte ho Master.]
'अहह! राइट! थैंक्स पारी!'
[You are welcome Master!]
वीर : जी! पासपोर्ट है.
सुहाना : गुड! थें ी एग्री...
वीर : वेट ा मिनट! दूसरा फवौर!?
सुहाना (स्माइल्स) : समय आने पर... उसकी भी मांग करुँगी. फिलहाल तोह यही है... Okay नाउ... यू कैन लीव. पुलिस एंड इन्वेस्टीगेशन में देख लुंगी. आल्सो, कुछ आदमी भी भिजवा दूंगी... पर ध्यान रहे... वो तुम्हारे साथ एकदम अंदर नहीं जाएंगे.
वीर : चलेगा... एंड थैंक्स! आल्सो...
सुहाना : हम्म??
वीर : 2 फवौर और जोड़ लीजिये...
सुहाना : हँ??
वीर : मुझे पुलिस स्टेशन जाना है और वह से कुछ बरामद करना है. मेरे फ्रेंड की साइकिल. उसकी आखिरी निशानी... थाने में hi है. आपको मेरी हेल्प करनी होगी.
सुहाना : ओह्ह्ह्ह! हो जाएगा. और दूसरा क्या!?
वीर : दूसरा ये की... हेल्प में फंड समवन!
सुहाना : ???
वीर तभी धीरे से आगे आया, उसने टेबल पर रखे पेन और एक डेरी से पेपर फाड़ सुहाना को कुछ लिख के उससे थमा दिया.
सुहाना : क्या है ये? हम्म? भावना सिंह!? अलियास नाम गीता!? जॉब... अर्चेओलॉजिस्ट!?
वीर : मेरी माँ... रियल माँ... उनकी डिटेल्स... ी क्नोव आपके कनेक्शंस काफी है. हेल्प में फंड हेर लोकेशन. मुझे विश्वाश है आप करवा लोगी ये...
सुहाना (स्माइल्स) : ओह्ह्ह्ह! ी सी!
[Damn master! What a perfect plan. Suhana can really help you. Uski madad se jald hi location mil jaegi aapko apni mom ki...]
'येअहहह!'
सुहाना : तोह तुम्हारे अब तीन फवौर हो गए. चौथा तोह यही है की... यू अरे किंग विथ उस. रेमेम्बेर थिस.
वीर : हम्म! चलता हु...
सुहाना : Okay!... एंड....
वीर : ???
सुहाना : गुड लक! आल्सो... Don't दिए...
वीर जाने के लिए जैसे hi मुदा... तोह सुहाना के बोल के चलते एक बार फिर वो रुक गया.
सुहाना : वैसे... तुम्हे कैसे पता चला की मेरे इतने कॉन्टेक्ट्स है!? इतने यकीन के साथ कैसे आ गए तुम मेरे पास? कुछ तोह पता चला होगा कही से!?
उसकी बात सुन्न, वीर धीरे धीरे उसके करीब आया और ठीक उसके पीछे खड़ा हो गया. सुहाना अभी भी विंडो से बाहर hi देख रही थी. उसकी पीठ अभी भी वीर की तरफ थी. वो महसूस कर पा रही थी की वीर उसके ठीक पीछे खड़ा हुआ है.
पर अगले hi पल वीर ने कुछ ऐसा कहा, जिसके चलते उसकी आँखें हैरानी और शॉक के मारे फटती चली गयी...
वीर : आपका रिएक्शन कुछ ओड सा था. होटल में मेने किसी को मारने की बात आपके सामने राखी, और आप ऑफ़ कोर्स थोड़ा शॉक हुई बूत आफ्टर तहत... आपके लिए जैसे ये उतना शॉकिंग भी नहीं था. ये मेरी गेस्सिंग है... बूत ी फील आईटी... यू हैवे किल्ड समवन before...Right?
वो धीरे से कहे गए शब्द, जैसे सुहाना के कानो में घंटी को तरह बज रहे थे. वो लास्ट सेंटेंस जैसे किसी बम की तरह आके गिरा था सुहाना के ऊपर. पल भर के लिए तोह उसका शरीर भी सिहर उठा.
फिर तोह उसने न आव देखा न ताव, वो तेज़्ज़ी से यु पलटी और वीर की कल्लोर को भींच उसने उससे पीछे धकेला जहा एक काउच रखा था. और दोनों hi उस काउच पर गिर पड़े.
सुहाना वीर के ठीक ऊपर थी. उसके ज़ुल्फ़े वीर के गाल के बगल से होते हुए लटक रही थी.
वीर की कल्लोर उसकी गिरफ्त में थी और वो एकदम गुस्से से वीर को देख रही थी.
सुहाना : हाउ दीद यू क्नोव?
वीर : ी... ी जस्ट गेस्सेड.
सुहाना (गल्र्स) : वाक़ई!? क्युकी मुझे अब तुमपे डाउट हो रहा है.
वीर : वाक़ई!
सुहाना हल्का सा आगे झुकी, उसका बदन पूरा वीर के सीने पर टिका हुआ था. वो उसके कानो के समीप आयी और बड़ी hi धीमी पर थोड़ी भयानक सी आवाज़ में बोली,
"तुम्हारी गेस्सिंग कुछ ज़्यादा hi सटीक जा रही है. आगे से... इस बात का ज़िक्र कभी तुम्हारे मुँह से नहीं निकलना चाहिए. किसी को पता नहीं चलना चाहिए. सोनू को तोह बिलकुल भी नहीं. जिस दिन ऐसा हुआ... वो तुम्हारा प्रॉबब्ली लास्ट दिन होगा."
सुहाना ने डराते हुए उस से कहा. यदि कोई और होता तोह वाक़ई थोड़ा घबरा जाता. पर वीर तोह वीर था... और वो भी पहले वाला नहीं. उसके अंदर पारी जो थी अब.
अपने हाथ को उठाते हुए उसने सुहाना की नरम गर्दन को थामा और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,
"Don't टेम्प्ट ा यंग मन लिखे तहत सुहाना जी... दुसरो के सीक्रेट्स को फैलाना... मेरी आदत नहीं! और हो सके तोह... उठिये प्लीज!"
ऐसा रिस्पांस सुहाना ने बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था. उससे लगा था वो वीर को थोड़ा दर्रा देगी पर यहाँ तोह सिचुएशन hi अलग बन्न गयी थी. और जब उससे अपनी हालत का ध्यान आया तोह अचानक hi उसके गालो पर हलकी लाली सी छाने लगी और वो एकदम झटके से उठ के दो कदम पीछे हो गयी.
वीर (स्माइल्स) : चलता हु... थैंक्स अगेन!
और वीर सुहाना को अकेला चोरर वह से निकल गया. सुहाना केवल उससे जाते हुए देखती रही.
सुहाना वीर की मदद करने के लिए केवल एक hi कारण से राज़ी हुई थी. और वो ये की वीर आतिश से भीड़ चूका था और अभी तक ज़िंदा था. साथ hi साथ वीर की दुश्मनी भी आतिश से थी.
ये कहना गलत नहीं होगा की वो वीर को अस ा पवन उसे कर रही थी. और साथ hi साथ उससे एक्स्ट्रा फवोर्स भी मिल चुके थे. पर उससे डाउट था की क्या वीर वाक़ई एक मामूली सा लड़का कुछ कर पाएगा?
सुहाना शातिर थी. उससे पता था यदि वीर फ़ैल हुआ तोह क्या करना है. वो सोनिआ को कुछ भी पता नहीं चलने देती की इसमें उसका हाथ था. पर यदि वीर पास हुआ, तोह सबसे पहला सवाल उसके मैं में यही आने वाला था की आखिर ऐसा कैसे कर लिया उसने? आतिश जैसे आदमी को ख़तम करना?
यदि ऐसा हुआ तोह इसका मतलब साफ़ होने वाला था की वीर कुछ छिपा रहा है उस से. और इसलिए सुहाना ने पहले hi दूर की सोच ली.
वो वीर से दो कदम आगे चल रही थी.
यदि वीर पास हुआ, तोह उससे अपना फवौर निभाना पड़ेगा. और ऐसा करने के लिए उससे उसके साथ जाना पड़ेगा दिल्ली.
और इसी ट्रिप में... वो वीर के सीक्रेट्स ढूंढ़ने का प्रयत्न करेगी. की आखिर कैसे... एक मामूली सा इंसान कैसे आतिश को मार दिया? पर उससे क्या पता था...
की वीर कोई मामूली इंसान नहीं था.
जब वीर घर आया तोह वो रागिनी से मिला.
रागिनी : क्या हुआ वीर?
वीर : भाभी वो... अब कैसे कहु... मेरा पासपोर्ट रखा है घर में... पुराने वाले...
रागिनी : पासपोर्ट? नाहीइ! अरे मेने तुम्हारे सारे डाक्यूमेंट्स और िदश पहले hi सर्वेंट से मंगवा ली थी वीर. मेरे रूम के कप्बोर्ड में राखी है. तुम लेलो जाके.
वीर : हँ? रियली?
रागिनी : हाँ!
और नेक्स्ट सेकंड hi वीर ने वो किया जिसके चलते रागिनी हक्की बक्की सी मूर्ति बानी कड़ी रही.
वीर ने रागिनी को अपनी बाहो में जोरर से खींचा और उससे दबोच लिए,
"ओह्ह थैंक यू भाभी! आपने मेरी समस्या hi हल करदी! थैंक्स ा लोट!"
और वो रागिनी के कमरे में चला गया. पर इधर बेचारी रागिनी, भौचक्की सी अपने सुर्ख लाल गाल लिए कड़ी रही. उससे समझ में नहीं आया की ये अचानक से क्या हो गया.
वही दूसरी ऑर्डर,
इधर सुहाना खायलो में घूम थी जब कुछ देरर बाद उससे वीर की तरफ से एक मैसेज आया,
"शाम को थाने में मिलिएगा. मुझे फ्रेंड की साइकिल बरामद करवानी है. नीड यू हेल्प!"
सुहाना : ुघ्घ! रियली... एक साइकिल भी नहीं ली जाएगी इस से...
और उसने "फाइन" रिप्लाई कर मोबाइल साइड में फेक दिया.
***
और ये थी आतिश की डेथ की पहले की पूरी प्लानिंग. वीर ने सुहाना के आदमियों की मदद से जलसा में उन् गुंडों की ठिकाने लगाया था. बाकी तोह उसने अपने hi बल बूते पर किया था.
अब सवाल था की वो 110 पॉइंट्स कहा इन्वेस्ट करने वाला था? और उसकी नयी स्किल हव्कये क्या थी?
'पारी! शो में माय स्टैट्स'
[Yes master!]
[ स्टैट्स :
स्ट्रेंथ - 50/100
इंटेलिजेंस - 35/100
अगिलिटी - 30/100
ेंदुराने - 45/100
अपीयरेंस - 22/100]
'ऑलराइट! इंटेलिजेंस में 15 दाल दो. अगिलिटी में 20. ेंदुराने में 5.'
*डिंग*
[15 points have been added to Intelligence.]
[20 points have been added to Agility.]
[5 points have been added to Endurance.]
[70 points remaining.]
[Kisi aur me Master?]
'हम्म! अपीयरेंस में भी 18 ऐड कर दो.'
*डिंग*
[18 points have been added to Appearance.]
[Stats :
Strength - 50/100
Intelligence - 50/100
Agility - 50/100
Endurance - 50/100
Appearance - 40/100]
'गुड'
[52 points remaining hai. Kuch karna hai? Wese mujhe kuch baatein bataani hai aapko.]
'किसी बातें?'
[50 points se ab upar jaane ke liye. Aapke 2 points keval 1 hi point consider kiye jaenge.]
'हँ? No... एक मिनट!'
[Yes! That's right! Ab yadi aapko 50 se 52 par kisi stat ko badhaana hai toh aapko 2 nahi balki 4 points invest karne honge tab jaake wo 52 par aaega.]
'Wtf????? ये तोह पागलपन है. ऐसे तोह मेरे...'
[Yes! Aapko kya laga? Stats badhaana itna asaan hai? It will take time. And a lot of hard work.]
'फुक्कक्कक्ककककक!'
[Toh? Kisi me invest karna hai?]
'अभी नहीं! यदि कोई स्किल है काम की तोह वो दिखाओ. बी थे वे, ये हव्कये क्या है.'
*डिंग*
[Skill : Hawkeye.
डिस्क्रिप्शन : ा डायमंड टियर स्किल. ग्रांट्स थे यूजर ा परफेक्ट एआईएम फॉर एनीथिंग. No टारगेट कैन स्लिप अवे फ्रॉम Hawk's ऑय.]
'होलियीय शीट्ट्ट्ट!!!!'
स्किल पढ़ते hi वीर को पता चल चूका था की ये क्या थी. एक डायमंड टियर स्किल. सिस्टम की सबसे हाईएस्ट स्किल्स होती है डायमंड टियर स्किल्स. उसके नीचे आते है गोल्ड, फिर सिल्वर और ब्रोंज.
वीर के पास जो बेसिक मार्टिकल आर्ट्स स्किल थी वो एक ब्रोंज स्किल थी. साथ hi साथ सेक्स प्रोटेक्शन जो उसने परचेस की थी वो एक सिल्वर टियर स्किल.
और ये थी... एक डायमंड टियर स्किल.
जिसे अपग्रेड करने की कोई ज़रुरत नहीं थी. परफेक्ट एआईएम मतलब परफेक्ट एआईएम. परमानेंट ों hi रहने वाली थी ये.
'फुक्कखकक! थिस इस इंसाने. वेट! तोह में शॉप से डायमंड टियर स्किल्स एक्सेस कर सकता हु?'
[No way! Ye toh aapka reward tha. Aur... Reward randomly select hoke aaya. Isliye aapko jhatke me mil gayi. Warna iski probability boht kam rehti hai. You are lucky.]
वीर अभी और फंक्शन्स के बारे में जानता की अचानक hi उसका फ़ोन बजने लगा.
देखा तोह पाया की श्रेया का फ़ोन था.
वीर : Hello?
श्रेया : गेस व्हाट?
वीर : गेस व्हाट क्या?
श्रेया : ाररीी बुद्धू मेरी जॉब लग गयी... तुमने जो भेजा था न मुझे एड्रेस कंपनी का. ी वेंट तेरे... मेरा इंटरव्यू हुआ एंड Omg... लिखे... थे हिरद में... I'm सो हैप्पी राइट नाउ...
वीर (स्माइल्स) : कोंग्रटुलतिओन्स!
श्रेया : आल थैंक्स तो यू... मुझे तोह पता hi नहीं था तुम्हारा इतनी बड़ी कंपनी में कनेक्शन है. लिखे मेरा बस इंटरव्यू हुआ और कुछ नहीं... और सुनो... अभी के अभी मुझे क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स मॉल में मिलो. में शॉपिंग करने जा रही हु. तुम साथ में चलोगे.
वीर : हम्म! आता हु.
और बताये गए समय पे वीर पहुँच चूका था, क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स मॉल में.
कुछ hi देरर में श्रेया भी आ गयी.
श्रेया : किसी लग रही हु?
वीर : हम्म? ग्रेट!!
श्रेया (ब्लशेस) : थैंक्स! तोह चले?
वीर : सूरे!
और दोनों hi शॉपिंग करने निकल गए.
श्रेया : वैसे... अब केसा फील कर रहे हो तुम? दी बतायी थी तुम काफी परेशान थे कुछ दिनों से...
वीर (स्माइल्स) : I'm फाइन नाउ. निधि ma'am और जूही किसी है?
श्रेया (स्माइल्स) : जूही तोह रोज़ तुम्हारे बारे में पूछती है. और... दी भी तुम्हे याद करती है. दोनों अच्छे है... बस... तुम थे तोह घर का माहौल और खुशनुमा सा था.
वीर : ी... ी सी!
श्रेया : अन्य्वयस! आज मेरी जॉब लगी है. तोह आज में अपनी सेविंग्स से साड़ी शॉपिंग करुँगी. और तुम्हे भी मेरे साथ चल के एक शर्ट लेनी पड़ेगी.
वीर : नाह! It's okay! बल्कि, आप चलो... आज में आपको आपकी पसंद की चीज़ दिलवाऊंगा.
श्रेया : व्हाट थे हेलल? जोके मार रहे हो? हाहाहा~ ज़्यादा नहीं फेकते... चलो अब.
और वो वीर को खींच के ले गयी. पर उससे नहीं पता था, की वीर के पास सुहाना का दिया हुआ डेबिट कार्ड था. और इस अकाउंट में 5 से 6 लाख अमाउंट भरा हुआ था.
[Master! Aap Nidhi ko kyu nahi de dete ye paise? After all, she needs money.]
'No! इतने में उनका कुछ नहीं होने वाला पारी. काम से काम... 45 लक्ष होने चाहिए. तब जाके कुछ हो सकता है. यदि अभी में उन्हें दूंगा... शी विल क्वेश्चन में. की इतने पैसे कहा से आये? कोई गलत काम तोह नहीं कर रहा में? वो वैसे hi टेंशन में है. उन्हें और टेंशन नहीं देनी है.'
वो निधि के खयालो में खोया हुआ था जब श्रेया की आवाज़ उससे वापस से होश में लायी.
"ोये!? कहा खो गए? लुक! हाउ दो ी लुक? इस आईटी गुड?"
और वो एक फुल स्लीव टॉप पेहेन के बाहर आयी जिसमे वो अलग hi क़यामत लग रही थी.

वीर (स्माइल्स) : आपके ऊपर सब कुछ अच्छा लगता है. आफ्टर आल, यू अरे ब्यूटीफुल.
श्रेया (झेपते हुए) : हँ?? W-Wh-What??? Y-Ye अचानक से, तुम्हे...!?
और उसके गोर से गालो पर हलकी सी लाल परत चढ़ गयी.
वो भाग के गयी और फिर कुछ और कपडे पेहेन के उसने वीर को दिखाए.
वीर ने फिर उससे अपनी तरफ से भी एक टॉप खरीदवाया और अपनी निधि Ma'am के लिए एक सूट भी और जूही के लिए प्यारी सी फ्रॉक भी.
जब श्रेया ने ये प्रश्न किया की इतने पैसे कहा से आये तोह उसने यही कहा की म्हणत की कमाई है.
श्रेया आज बेहद खुश थी. नौकरी लगने से उसके अंदर का कॉन्फिडेंस बढ़ चूका था.
श्रेया को घर पे ड्राप कर वीर अपने घर के लिए जाने hi वाला था जब वो उसके पास आयी और एक बार फिर से उससे थैंक्स बोली,
श्रेया : H-Hey!!
वीर : हम्म?
श्रेया : Th-Thanks... वन्स अगेन!
वीर : बार बार थैंक्स नहीं कहा जाता...
श्रेया (ब्लशेस) : R-Right!
वीर : यू शुड जो नाउ! Ma'am और जूही वेट कर रही होंगी आपका.
श्रेया : हम्म! T-Tum नहीं आओगे अंदर?
वीर : No! में दो दिन बाद दिल्ली जा रहा हु. वह से आके hi मिलूंगा...
श्रेया : हँ??? दिल्ली?? क्यों??
वीर : काम है...
श्रेया : O-Okay...
वीर : जाइये अब...
श्रेया (ब्लशेस) : हम्म!
वो जाने के लिए हुई तोह वीर अपनी गाडी में के लगाने लगा.
पर अचानक hi वो पलटी और अगले hi पल, वीर को अपने गालो पर कुछ गीलापन सा महसूस हुआ.
इसके पहले की वो कुछ समझ पाटा, श्रेया शर्माते हुए jhat-pat तेज़्ज़ कदमो के साथ लिफ्ट की ऑर्डर भाग गयी.
और बेचारा वीर अपनी आँखें फाड़े, हैरानी में उससे केवल जाता हुआ hi देखता रहा.
'हहहहहह!?'
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आज के लिए इतना hi गाइस!
बाकी जो लोगो को तोह पता hi है की क्या करना है?
धन्यवाद!





