Incest मटकनी गांड का कमाल - Page 7 - SexBaba
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Incest मटकनी गांड का कमाल

सुगंधा नूपुर और उसके बेटे के बीच के नाजायज संबंध के बारे में अंदाजा लगा रही थी लेकिन जो हकीकत ही था,,,, क्योंकि वह जानती थी मां बेटे के बीच इतना खुलापन तभी आता है जब दोनों के बीच कुछ चल रहा हो वरना एक बेटे की हिम्मत कहां होती है जो अपनी मां की गांड पर हाथ रखकर उसे सहलाए और उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज ना करें,,,। और दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता किस तरह से पनपा होगा इस बारे में भी वह अंदाजा लगा रही थी क्योंकि वहां उसके पति से मिल चुकी थी जो की काफी मोटा था जिसकी तोंद बहुत ज्यादा निकली हुई थी और उसकी उम्र भी नूपुर की उम्र से बहुत ज्यादा थी ऐसे में वहां अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका पति उसे बिल्कुल भी शारीरिक सुख नहीं दे पा रहा होगा और जिसके चलते,, नूपुर को अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ा जिसमें कोई एतराज भी नहीं था नूपुर के हालात को देखकर वह खुद अपने हालात के बारे में सोचने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि नूपुर का तो पति भी थे लेकिन फिर भी उसके जीवित होने के बावजूद भी वह शारीरिक सुख उसे नहीं दे पा रहा है जिसके चलते नूपुर को अपने ही घर में अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाना पड़ रहा है और वह बहुत खुश भी हैं,,, लेकिन उसका क्या उसके पति के देहांत हुए 5 साल गुजर चुके थे इस बीच में अपनी सारीरीक जरूरत को दबा कर रखी हुई थी,,, ऐसे में अपनी शरीर की जरूरत को पूरा करने में अपने बेटे का सहारा लेने में कोई दिक्कत नहीं है इस बात का ख्याल उसके मन में आते हैं उसके बदन में झुनझुनी सी फैल गई,,,, और उसके चेहरे पर मादक मुस्कान तैरने लगी

अब उसका इरादा पक्का हो रहा था अब वह अपने मन को मजबूत कर चुकी थी वह किसी भी तरह से अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी प्यास बुझाने चाहती थी आगे बढ़ाने के लिए उसे नूपुर का उदाहरण तो मिल गया था लेकिन कैसे आगे बढ़ाना है इस बारे में नहीं मालूम था लेकिन फिर भी वह एक औरत थी वह जानती थी की मर्द को किस तरह से काबू में किया जाता है किस तरह से उसे घुटनों पर लाया जाता है,,

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नूपुर और उसके बेटे के बीच अनैतिक संबंध को लेकर सुगंधा बहुत सोच विचार कर रही थी,,, अगर वह मार्केट में नूपुर के साथ उसके बेटे को असली हरकत करते हुए ना देखी तो शायद उन दोनों के बीच मां बेटे के रिश्ते को वह पवित्र ही समझती लेकिन मार्केट की हरकत ने उसे पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। उसे पूरा शक हो चुका था,, की दोनों मां बेटे के बीच कुछ तो जरूर चल रहा है वरना एक बेटा अपनी मां की गांड पर इस तरह से हाथ ना फिराता,,,।

वह अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे नूपुर और उसके बेटे के बारे में ही सोच रही थी रात के 12:00 बज चुके थे लेकिन उसकी आंखों से नींद दूर जा चुकी थी,,, उसके बदन पर साड़ी नहीं थी साड़ी उसके बिस्तर से नीचे बिक्री पड़ी थी वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज में थी और पेटीकोट भी उसकी जांघों तक चढी हुई थी,,, उसकी मोटी मोटी केले के तने की तरह चिकनी जांघें डिम लाइट की लाल रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, उसकी हथेली पेंटी के ऊपर उसकी बुर के अस्तित्व को छुपाए हुए थी,,, रह रह कर नूपुर के बारे में सोचते हुए वह अपनी बुर को हथेली में दबोच ले रही थी,,, जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,।

पंखा बड़ी तेजी से चल रहा था और उससे भी ज्यादा तेज सुगंधा के विचार चल रहे थे वह नूपुर के बारे में सोच रही थी,, जब वह नुपुर से मिली थी तब वह खोई खोई रहती थी,,, उदास रहती थी और उसके पति से मिलने के बाद सुगंधा अपने मन में समझ गई थी कि वह किस लिए उदास है लेकिन कुछ दिनों से उसके चेहरे की लालिमा बढ़ती जा रही थी वह काफी खुश मिजाज नजर आती थी और इसका प्रमुख कारण था उसका बेटा जो की छुट्टी के कारण घर आया हुआ था,,,, इस बारे में सोचकर सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी कि वाकई में नूपुर और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है और अपने मन में कल्पना कर रही थी कि नूपुर कैसे अपने बेटे से चुदवाती होगी,,,। किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता नूपुर में थी,,, एक औरत होने के नाते सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि,,, औरत की खूबसूरती क्या होती है,,, नूपुर भी उसकी ही उम्र की थी,,, लंबी कद काठी गोरा बदन,, खूबसूरत चेहरा लाल लाल भरे हुए होंठ बड़ी-बड़ी चूचियां नितम्बो का आकार भी एकदम गठीला,,, चलने पर गांड की दोनों फाके बड़े-बड़े तरबूज की तरह आपस में टकराती थी,,, और देखने वालों की हालत खराब हो जाती थी सब कुछ तो था नूपुर में और भला एक जवान लड़का कैसे इतनी रसमलाई जवान औरत के पीछे लट्टू ना हो जाए भले ही वह उसका बेटा क्यों ना हो,,,,,,, राहुल भी तू उसके बेटे की तरह एकदम जवान था लंबी कद काठी और चौड़ी छाती ,,,,, नूपुर अपने बेटे की चोडी छाती में पूरी तरह से अपनी अस्तित्व को छुपा लेती होगी,,,।

कैसा लगता होगा जब राहुल खुद अपनी मां के बदन से उसके कपड़ों को अलग करता होगा,,, पहले साड़ी उतारता होगा,,, पीछे से उसे अपनी बाहों में भर कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाते हुए मसलते होगा उसकी हरकत पर उसकी मां मजबूत हो जाती होगी उसका खड़ा लंड पीछे से उसकी गांड में चुभता होगा,,,, नूपुर की मदहोशी और ज्यादा बढ़ जाती होगी और उसका बेटा अपने हाथ को उसकी कमर पर रखकर उत्तेजना से उसे दबाते हुए अपनी हथेली को उसकी पेटिकोट के अंदर सरका देता होगा जहां पर उसकी गीली बुर पहले से ही उसका इंतजार कर रही होगी,,,, गीली बुर पर हथेली पहुंचते ही उसका बेटा मदहोश हो जाता होगा और तुरंत अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी नंगी चूचियों को हाथों में भरकर उसके मुंह से लगा लेता होगा उसे बड़ी-बड़ी से दबा दबा कर पीता होगा,,,, अपने पति से असंतुष्ट नूपुर अपने बेटे की हरकत से पानी पानी हो जाती होगी,,,, उसका बेटा उसे अपनी गोद में उठाकर नर्म नर्म बिस्तर पर ले जाकर पटक देता होगा उसकी पेटीकोट को उसकी डोरी को खोलकर खींचता होगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा देती होगी और उसका बेटा अगले ही पल उसका पेटिकोट उतार कर उसे पूरा नंगी कर देता होगा और फिर अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो जाता होगा,,,, और फिर राहुल अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदता होगा,,,,

उफफफ,,, कितना मजा आ जाता होगा दोनों मां बेटे को,,,, अपने मन में ही यह सब सो कर सुगंधा पानी पानी हो रही थी और अपनी किस्मत पर रो रही थी कि जहां एक तरफ पति होने के बावजूद भी एक मां अपने बेटे के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर रही थी वहीं दूसरी तरफ वह खुद थी जो पति के न होने के बावजूद भी और घर में एक जवान बेटा होने के बाद भी अपनी जवानी की प्यास बुझाने में असमर्थ साबित हो रही थी,,,। वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसे अच्छी किस्मत तो नूपुर की थी जो अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी,,, काश उसका बेटा भी उसकी हालत को समझ पाता तो आज वह भी नूपुर की तरह मजे लुटती,,,।

लेकिन इन सब बातों को सोचकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस बह रहा था और वह अपने दोनों हाथों से अपनी चड्डी को पकड़ कर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाई और एक झटके से उसे नीचे की तरफ खींचकर पैरों का सहारा लेकर अपनी चड्डी को अपने बदन से अलग कर दी,,, और टेबल पर रखे हुए मोटे बैगन को अपने हाथ में ले ली और उसे मुंह में लेकर थोड़ा सा उसे पर थूक लगना शुरू कर दी जब पूरी तरह से गिला हो गया तो वह अपने दोनों टांगों को खोलकर अपनी गुलाबी छेद पर उसे बैगन को रखकर उसे हल्का-हल्का दबाने लगी,,, बुर की चिकनाहट पाकर मोटा तगड़ा बैंगन बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर घुसने लगा और देखते ही देखते हुआ उसकी गहराई नापने लगा जिसे सुगंधा अपने हाथों से पकड़ कर अंदर बाहर करते हुए चुदाई का सुख भोगने लगी,,,, लेकिन वह जानती थी जिस तरह की प्यास उसके बदन में उठ रही थी वह प्यास बैगन से नहीं बल्कि मर्द के मोटे लंड से बुझने वाली थी,,,, इसलिए थोड़ी ही देर में तृप्त होकर वह उसी हालत में सो गई,,,

सुबह में अंकित की नींद जल्दी खुल गई और सुबह औपचारिक रूप से उसके लंड का तनाव पूरी तरह से चरम सीमा पर था,,, वह केवल चड्डी मे ही सो रहा था,,, और उसकी नजर जैसे ही अपनी चड्डी की तरफ गई तो उसके खुद के होश उड़ गए उसमें अच्छा खासा तुमको बना हुआ था जो कि बडा ही मनभावन लग रहा था,,,। वह चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा,,, लेकिन कभी उसे एहसास हुआ कि घर में किसी भी तरह की आवाज नहीं आ रही थी,,,। और वह समझ गया कि आज उसकी मां को उठने में देर हो गई है,,, अपनी उत्तेजना को देखकर उसका मन मुठ मारने को कर रहा था,,,, और इसीलिए वह अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके आगे वाले भाग को ऊपर की तरफ खींचा और अपने लंड को देखने लगा जो की काफी मोटा और लंबा नजर आ रहा था वह धीरे से उसे पीछे की तरफ खींचकर अपने लंड के दूसरी तरफ ले गया और अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर ऊपर नीचे करके हिलने लगा,,,, मुठ मारने में वह कल्पना का सहारा लेता था और उसकी कल्पना की राजकुमारी नहीं बल्कि महारानी होती थी उसकी मां अपनी मां के बारे में सोचकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाता था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करता था,,,,,।

वह मूठ मारना शुरू कर दिया था और ख्यालों में उसकी मां थी जो कल्पना में अपने हाथों से अपने कपड़ों को उतार कर एकदम नंगी हो गई थी,,, और अपनी होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए खुद घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गई थी और अपने बेटे की कमर के ईर्द गिर्द जगह बनाते हुए अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को ,, उसके लंड पर रखकर धीरे-धीरे नीचे की तरफ बैठ रही थी और देखते ही देखते उसकी गुलाबी छेद में अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से छुप गया,,, और अंकित कल्पना में अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ कर अपनी कमर को नीचे से ऊपर की तरफ मारने लगा,,,।
 
अंकित की कल्पना काफी हद तक,,, वास्तविक ही महसूस होती थी इसलिए अंकित पूरी तरह से मदहोश होकर मूठ मार रहा था,,,, वैसे भी उसकी मां अपनी मां को चोदने के लिए बहुत करता था लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा करने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी और देखते ही चरम सुख की तरफ आगे बढ़ने लगा और जैसे ही उसे एहसास हुआ की उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली है,,, वह तुरंत वापस अपनी चड्डी को ऊपर की तरफ ले लिया और चड्डी के अंदर अपने लंड को जोर से दबा दिया और उसकी पिचकारी निकल गई जो की चड्डी में ही ठहर गई,,,,, वह नहीं चाहता था कि उसकी पिचकारी बिस्तर पर करें और उसकी मां को उस पर शक होने लगे,,,,।

10 मिनट के अंतराल में सुबह अपनी जवानी की प्यास को अपनी मां की बदन की गर्मी से बुझा लिया था भले ही कल्पना में ही सही आनंद उसे बहुत आया था,,,, लेकिन उसे एहसास हुआ कि अभी तक उसकी मां कमरे में सो रही थी और उसकी बहन भी उठी नहीं थी इसलिए वह उठकर कपड़े पहनकर सीधे अपनी मां के कमरे की तरफ गया और दरवाजे पर पहुंचकर जैसे ही दस्तक देने के लिए वह दरवाजे पर हाथ रखा दरवाजा खुद बा खुद खुल गया,,, और वह आवाज देने के पहले अपने हाथ के सहारे से दरवाजे को हल्के से खोल दिया और जैसे ही उसकी नजर सामने बिस्तर पर गई उसके होश उड़ गए सामने बिस्तर पर उसकी मां पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी दोनों टांगें एकदम खुली हुई थी उसकी साड़ी कमर तक चढी हुई थी यह नजारा देखकर,,, उसकी हालत खराब होने लगी,,,। पहली बार अंकित अपनी मां को अस्त व्यस्त हालत में सोते हुए देख रहा था,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ा रहकर अंदर की तरफ देखता रह गया उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत उन्मादक भरा दृश्य नजर आ रहा था,,,, दरवाजे पर खड़े होकर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां साड़ी नहीं पहनी थी उसके बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट था और पेटीकोट भी एकदम कमर तक चढ़ा हुआ था जहां से उसे मोटी -मोटी चिकनी जांघें दिख रही थी,,,,।

अंकित का दिमाग काम करना बंद कर दिया था पहली बार वह अपनी मां को घर के पीछे पेशाब करते हुए देखा था तब से लेकर आज तक उसकी दुनिया ही बदल गई थी लेकिन आज वह अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था,,,, और वैसे भी जिस उम्र के दौर में अंकित था इस उम्र में औरतों के अंग का झलक ही काफी होता है और यहां तो सब कुछ खुला नजर उसकी आंखों के सामने था इसके लिए उसके बदन में मदहोशी नशा की तरह घुल रही थी,,, इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह बार-बार इधर-उधर देख ले रहा था कहीं उसकी बहन तो नहीं आ रही है लेकिन वह भी आज घोड़े बेचकर सो रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज यह मौका बड़ी मुश्किल से उसके लिए ही मिला है कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद जब किसी भी प्रकार की हलचल उसकी मां के बदन में नहीं हुई तो वह समझ गया कि वह अभी भी गहरी नींद में सो रही है इसलिए बात फिर से कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे को हल्के से बंद कर दिया और दबे कदमों से वह अपनी मां के पलंग तक पहुंच गया और उसके करीब पहुंचने पर उसे जब उसकी आंखें उसकी मां की दोनों टांगों के बीच गई तो उसके होश उड़ गए दरवाजे से तो नहीं पता चल रहा था लेकिन इतने करीब आकर उसे सब को साथ दिखाई दे रहा था और उसके होश और ज्यादा उड़े हुए नजर आने लगे क्योंकि उसकी मां पेंटिंग नहीं पहनी थी कमर के नीचे वही समय पूरी तरह से नंगी थी,,,,।

अपनी मां की नंगी बुर देखते ही उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, अपनी मां को पेशाब करते हुए तो वह देख चुका था लेकिन उसकी बुर पर उसकी नजर नहीं गई थी केवल वह अपनी मां की नंगी गांड को ही देखा था लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां की बुर को देख रहा था अपनी मां की बुर क्या और पहली बार औरतों की बुर को खुली आंखों से देख रहा था अब तक उसने केवल किताबों में ही देखा था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने वास्तविक में एक खूबसूरत औरत की नंगी बुर देखकर उसकी आंखों में चमक आने लगी,,,,,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह अपनी मां के बेहद करीब खड़ा था उसकी नजर अपनी मां की कमर के दोनों त्रिकोण पर पड़ी हुई थी और जब ऊपर की तरफ नजर गई तो अपनी मां का खूबसूरत चेहरा देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी वह बेसुध होकर सो रही थी,,,, नीचे देखा तो साड़ी गिरी पड़ी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपनी मां की हालत देखकर,,,, हालात तो ऐसे ही नजर आ रहे थे कि अगर उसके सिवा घर में कोई और मर्द होता तो उसे ऐसा ही लगता है कि उसकी मां रात भर चुदवाई है,,, लेकिन इस तरह का शंका करने का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखों के सामने था उसे देखकर उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठा रही थी उसके पजामे में एक बार झड़ने के बावजूद भी तुरंत तंबू बन गया था,,,।

अभी तक सुगंधा के बदन में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं हो रही थी और इसीलिए अंकित का मन बहक रहा था वह अपनी मां की बुर को अपने हाथ से स्पर्श करना चाहता था उसे छूना चाहता था उसकी गरमाहट को देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि एक औरत की बुर स्पर्श करने में कैसी महसूस होती है,,,,, इस तरह का खूबसूरत नजारा देखकर उसकी मां पूरी तरह से बैठ चुका था और अभी तक उसकी मां के बदन में किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई थी इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह धीरे से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच झुकने लगा,,,, जैसे-जैसे वह अपनी मां की बुर के करीब बढ़ रहा था वैसे-वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही है,,,,।

उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर की हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी बुर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी बाल ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन पहली बार अंकित औरत की बुर और औरत की बुर के ऊपर बाल देख रहा था,,, यह नजारा उसके लिए आश्चर्यचकित कर देने वाला था,,,,, उसे नहीं मालूम था कि जिस तरह से उसके लंड के इर्द-गिर्द बाल उगे हुए हैं इस तरह से औरतों की बुर के ईर्द गिर्द बाल होते हैं,,,, यह नजारा वास्तव में अंकित के लिए उन्मादकता भरा हुआ था,,,।

देखते ही देखते वह अपनी मां की बुर के बेहद करीब पहुंच गया था इतनी करीब कि उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसके नथुनिया में आराम से पहुंच रही थी और इस तरह की खुशबू को वह पहली बार महसूस कर रहा था उसके बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का संचार होने लगा था,,,,,,, इतने करीब आकर अंकित पीछे लौटना नहीं चाहता था वह एक बार अपनी मां की बुर को छू लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपना हाथ अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा लेकिन इस तरह की हरकत करने का डर उसके हाथों की कंपन बयां कर रही थी उसकी उंगलियां कांप रही थी,,,, लेकिन हिम्मत जताकर उसने आखिरकार एक अद्भुत कार्य को अंजाम दे ही दिया वह अपनी मां की बुर को हल्के से अपनी उंगली से स्पर्श कर ही लिया लेकिन जैसे ही उसकी उंगली सुगंधा की बुर पर स्पर्श हुई सुगंधा के बदन में हल्की सी कसमाशाहट हुई और अंकित एकदम से घबरा गया और तुरंत वहां पर एक पल भी रुक अपने कदमों को पीछे लिया और अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया वह पीछे मुड़कर देखा भी नहीं लेकिन अपनी बुर पर अचानक स्पर्श का अहसास होते ही सुगंधा की आंख खुल गई थी और वह सिर्फ इतना ही देख पाई कि उसका बेटा दरवाजे से बाहर निकल कर जा रहा था,,, और जैसे ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ उसके होश उड़ गए,,,।

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अपनी स्थिति को देखकर सुगंधा की हालत खराब हो गई थी वह अपने बेटे को केवल दरवाजे से बाहर निकलता हुआ देखी थी और कुछ पल के लिए तो उसे कुछ भी एहसास नहीं हुआ था लेकिन जैसे ही उसने अपने ऊपर नजर डाली तो उसके होश उड़ गए थे वह आज तक में थी और उसकी साड़ी जांघों तक उठी हुई थी उसकी पेंटि बिस्तर से नीचे गिरी हुई थी और कमर के नीचे वह संपूर्ण रूप से नंगी थी,,,, यह सब देखकर उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी और अपनी दोनों टांगों के बीच देख रही थी जहां पर उसकी फुली हुई बुर एकदम साफ नजर आ रही थी उस पर हल्के हल्के बाल थे,,,, यह सब देख कर सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी और वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा उसे दरवाजे से बाहर निकलता हुआ दिखता है इसका मतलब कि वह कमरे में अंतर आया था और जरूर उसकी तरफ देखा होगा,,,, यह सब सोते हुए उसकी नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर गई तो वह एकदम हैरान हो गई क्योंकि उसके उठने में आज 20 मिनट की देर हो चुकी थी जिसका मतलब साथ है कि उसका बेटा कमरे में उसे जगाने के लिए और उसकी हालत को देखकर वहां से सीधा चला गया,,,,।

इन सब बातों को सोचकर वह अपने मन में सोचने लगी कि अगर उसका बेटा वाकई में उसके कमरे में आया होगा तो जरूर बिस्तर तक आया होगा और जरूर उसकी हालत को देखा होगा और उसकी नजर जरूर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर पर गई होगी यह ख्याल उसके मन में आती है उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी वह अपने मन में कल्पना करने लगी कि कैसे उसका बेटा उसके कमरे में उसे जगाने के उद्देश्य से आया होगा कमरे का दरवाजा वैसे भी खुल ही था उसने रात को बंद नहीं की थी वह,,, दरवाजे को अपने हाथ से खोलकर उसे जगाने के लिए कमरे में दाखिल हुआ होगा और चलते हुए बिस्तर के करीब आया होगा और उसकी नजर उसके ऊपर पड़ी होगी,,,,।

हाय दइया उसने तो सब कुछ देख लिया होगा उसकी बुर पूरी तरह से उसकी आंखों के सामने ही तो थी यह सब सोते हुए उसे याद आने लगा की रात को वह अपने हाथों से ही अपनी चड्डी उतार कर बिस्तर से नीचे फेरती थी और फिर एक मोटी बैगन को अपनी बर के अंदर बाहर करके अपनी जवानी की प्यास को बुझाई थी और उसी हालत में ही सो गई थी,,, बैगन और चड्डी का ख्याल मन में आते ही वह इधर-उधर देखने लगे और जब वह बिस्तर के दूसरी तरफ नीचे देखी तो वहां पर उसकी चड्डी और बैगन दोनों पड़े हुए थे उसे यह समझ में नहीं आ रहा था और वह हैरान भी हो रही थी कि कहीं उसका बेटा उसकी चड्डी और बैगन को तो नहीं देख लिया यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके मन में घबराहट होने लगी थी लेकिन उसके बदन में उत्तेजना की लहर अत्यधिक उठ रही थी,,, और भला क्यों ऐसा ना हो यही सब तो वह खुद से अपने बेटे को दिखाना चाहती थी लेकिन अनजाने में ही आज उसका बेटा उसके जवानी के केंद्र बिंदु को अपनी आंखों से देख लिया था,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर को देखकर क्या सोच रहा होगा अकेले जैसी मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर उसके तन बदन में हलचल तो जरूर हुई होगी,,, आखिरकार हुआ भी तो एक मर्द है एकदम जवान और ऐसे में एक जवान मर्द के सामने कोई औरत अर्धनग्न अवस्था में भी नजर आ जाए तो ऐसे हालात में उसे मर्द का लंड खड़ा होना जायज है,,, और अगर ऐसा ना हो तो उसे मर्द की मर्दानगी नाजायज है,,,,,।

सुगंधा अपने मन में सोचने लगे कि जरूर उसके बेटे ने आज सुबह-सुबह उसकी बुर के दर्शन किए हैं तभी तो दबे पांव वह कमरे से चला गया था वरना उसे जरूर जगाता क्योंकि आज उठने मे उसे देर हो गई थी,,,,। पता नहीं अपने मन में क्या सोच रहा होगा अपनी ही मन की बुर को देखकर जरूर उसका लंड खड़ा हो गया होगा क्या कमी है मेरे बेटे में पूरी तरह से जवान है और अब तो चोर नजरों से मेरे बदन को देखता रहता है,,,,,,आहहहहह कितना मजा आया होगा मेरे बेटे को मेरी बुर देखकर उसके मन में भी अरमान मचल गए होंगे बुर के अंदर लंड डालने के लिए,,,, क्या वह जानता होगा की औरत की बुर में लंड डाला जाता है तब चुदाई होती है,,,(सुगंधा अपने आप से ही इस तरह की बातें कर रही थी और अपने सवाल का जवाब अपने आप से ही दे रही थी अपनी बात को आगे बढ़ते हुए अपने मन में बोली)..

क्यों नहीं जानता होगा आखिरकार वह भी तो मर्द है और एक मर्द को भले कुछ पता हो ना हो लेकिन औरत की चुदाई करना जरूर जानते हैं,,,, (सुगंधा अपने मन में ही अपने आप से बात करते हुए बोली) जरूर मेरा बेटा मेरी बुर देखकर मुझे चोदने का ख्याल मन में लाया होगा,,,,,,(यह सब सोचकर सुगंधा की बर पानी चोदने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,, वह तो सिर्फ इतना अनुमान ही लग रही थी कि उसका बेटा कमरे में आकर उसकी बुर के दर्शन किया होगा जबकि उसके बेटे ने तो इससे भी ज्यादा उसकी बुर को छू कर देखा था उसकी गर्माहट को अपने अंदर महसूस करके देखा था,,,और अपनी मां की बुर स्पर्श करने के बाद उसे अपने अंदर अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हुआ था उसका लंड खड़ा हो गया था,,,, और अपनी मां को उसे अस्त्-व्यस्त अवस्था मैं उठा बिना ही वह कमरे से बाहर निकल गया था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने के लिए जो कि कुछ देर पहले अपने कमरे में लंड हिला कर वह अपना पानी निकाल चुका था,, लेकिन जिस तरह का नजारा हुआ अपनी मां के कमरे में देखा था अपनी मां को आशीर्वाद अवस्था में देखा था अपनी मां की कचोरी जैसी खुली हुई बुर को देखा था वैसे तो जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत की बुर को देख रहा था और वह भी अपनी ही मन की इसलिए वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जिसके चलते उसके पेट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था और वह अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए अपनी मां के कमरे से निकाल कर सीधा बाथरूम में घुस गया था और फिर वहां पर अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी मां के बारे में सोचते हुए अपना लंड हिला कर पानी निकाल रहा था,,,,,।

सुगंधा अपने कमरे से बाहर निकल जाना चाहती थी लेकिन कुछ देर वह अपने कमरे में यूं ही लेटी रही क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा अभी-अभी कमरे से बाहर निकाल कर गया है और यही सोचकर बाहर निकाल कर गया है कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही हो और ऐसे हालात में वह तुरंत कमरे से बाहर निकाल कर जाएगी तो उसके बेटे को भी शक हो जाएगा कि उसकी मां जग रही थी इसीलिए वह कुछ देर लेटे रहने के बाद धीरे से ऊपर कोई और नीचे पड़ी अपनी चड्डी को वापस पहन ली और बैगन को ले जाकर कूड़ेदान में डाल दी,,,,।

अंकित नहा कर तैयार हो चुका था वह अपनी मां से नजर मिलाने से कतरा रहा था क्योंकि जब जब वह अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर ही नजर आ रही थी,,,, जिंदगी में पहली बार अंकित एक औरत की खूबसूरत बुर को देखा था और वह भी अपनी मां की इसलिए आज उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से उसकी मां की बुर छाई हुई थी,,,, वह कर नजरों से अपनी मां की तरफ देखकर अपने मन में कह रहा था कि उसकी मां जितना ऊपर से खूबसूरत है उतना अंदर से भी बहुत खूबसूरत है अंकित अपने मन में सोच रहा था कि औरत भी कितनी खूबसूरत चीज होती है उसका अंग अंग देखने लायक होता है प्यार करने लायक होता है खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार तो एकदम जान लेवा होती है। अपनी मां की पतली दरार के बारे में सोचकर वह हैरान ईस बात से हो गया था कि,,, पतली सी दरार में मोटा लंड प्रवेश कैसे करता होगा,,, क्योंकि वह अपने मन ही मन में अपनी मां की पतली सी छोटी सी दरार और अपने मोटे तगड़े लंड के बारे में सोच रहा था,,, पर वह अपनी मन में सोच कर और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था कि जब कभी भी उसे मौका मिलेगा अपनी मां की बुर में लंड डालने को तो वह अपनी मां की छोटे से छेंद में अपना मोटा लंड कैसे डाल पाएगा,,,। यह ख्याल उसके मन में अचानक ही आया था और इसी तरह के ख्याल से उसके बदन में झुरझुर्री सी होने लगी थी,,,,, यह सब सोते हुए अंकित की नजर अपनी मां की उभरी हुई नितंबों पर ही थी और जिस तरह से वह कर नजरों से देख रहा था उसी तरह से सुगंध भी कर नजरों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी और इस बात से काफी उत्साहित और उत्तेजित की थी कि इस समय उसका बेटा उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था इसलिए वह कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को उभर कर रोटी पका रही थी और अपने बेटे की नजरों को सेंक रही थी,,,। एकाएक रोटी पकाते हुए अपने बेटे के नजरों को अपने नितंबों पर स्थित देखकर वह एकदम से पूछ बैठी,,,।

ऐसे क्या देख रहा है अंकित,,,,?

(इतना सुनते ही अंकित को तो जैसे सांप सूंघ गया हो वह एकदम से हक्का-बक्का रह गया उसे अपनी मां से इस तरह के सवाल की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी और इस समय उसकी गलती भी थी क्योंकि वह अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ ही देख रहा था और अपने मन में उसकी बुर को लेकर कल्पना कर रहा था इसलिए वह एकदम से हडबडाते हुए बोला,,,।)

कककककक,,,, कुछ नहीं मम्मी,,,,वो ,,,वो मै,,, राहुल के बारे में सोच रहा था,,,,।

(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था और मन ही मन उत्तेजित हो रहा था लेकिन उसके बेटे ने बड़ी सफाई से बात को बदल दिया था लेकिन सिग्मा होने के नाते और एक औरत होने के नाते वह मर्दों के मन की बातों को अच्छी तरह से जानती इसलिए वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उससे झूठ बोल रहा है और वह बोली,,,)

कौन राहुल,,,?

अरे मम्मी वह तुम्हारे साथ पढ़ती है ना नूपुर आंटी उनका लड़का अभी कल ही तो मार्केट में मिले थे,,,

अरे हां याद आया नूपुर का लड़का राहुल,,,(नूपुर का जिक्र आते ही सुगंध की आंखों के सामने उसके बेटे की हरकत याद आ गई और वह अपने मन में सोचने लगी की खास उसका बेटा भी उसी तरह की हरकत उसके साथ करता तो कितना मजा आता लेकिन मन मसोस सोचकर वह बोली)।

अच्छा हां राहुल,,,,, क्या हुआ,,,?(सहज होते हुए सुगंधा उसी तरह से रोटी को तवे पर रखने लगी,,)

अरे हुआ कुछ नहीं मम्मी उसने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया है,,,, मैं यह सोच रहा हूं जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए,,,, तुम ही बताओ ना,,,,

(अंकित की बात सुनकर वैसे तो सुगंधा उसे कोई और समय होता तो नहीं जाने देती लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि लड़के को संगत में ही बिगड़ते हैं और राहुल अपनी मां के साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहा था सुगंधा को पूरा विश्वास था कि दोनों मां बेटे के बीच नाजायज संबंध थे,,, और इसीलिए राहुल की संगत उसके विचार आमतौर पर बिल्कुल भी अच्छे नहीं होंगे औरत के मामले में वह एकदम बिगड़ा हुआ होगा तभी तो अपनी मां के साथ जिस्मानी संबंध बनाता है,,,, ऐसा सुगंधा सिर्फ अनुमान लगा रही थी उसकी हरकत को देखकर जिस तरह से अपनी मां के नितंबों पर हाथ रखकर उसे चल रहा था उसे देखकर वह अंदाजा लगा ली थी कि उसके और उसकी मां के बीच जिस्मानी ताल्लुकात जरूर होंगे,,, और इस समय राहुल के अनुभव का अंकित को बेहद जरूरत थी और सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कोई भी लड़का संगत में ही बिगड़ा है अगर वह राहुल की संगत में आ गया तो राहुल उसे भी अपनी तरह बना देगा और फिर सुगंधा का काम बन जाएगा इसलिए कुछ देर सोचने के बाद वह बोली,,,।)

अगर वह तुम्हें खेलने के लिए बुलाया है तो तुम्हें जाना चाहिए उसके साथ संबंध आगे बढ़ाना चाहिए वैसे भी लड़कों को समय-समय पर दोस्त बदलते रहना चाहिए क्योंकि उनसे कुछ सीखने को मिलता है और वैसे भी वह मेरी सहेली का दोस्त है तो उसके साथ मिलने झूले में कोई बुराई नहीं है,,,, जाना कब है,,,

रविवार को,,,,

चलो कोई बात नहीं ठीक है यही पास में ही तो रहता है चले जाना,,,,।(अपने बेटे को राहुल के पास उसके साथ क्रिकेट खेलेंगे जाने के लिए इजाजत देने से उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने मन में ही सोच रही थी कि उसका बेटा भी राहुल की तरह बन जाएगा अगर राहुल की संगत में आ गया तो और अगर ऐसा हो गया तो जिस तरह की हरकत राहुल अपनी मां के साथ करता है इस तरह की हरकत हुआ भी उसके साथ करेगा यह सोचकर ही उसके बदन में उत्तेजना के लहर दौड़ने लगी,,,,।

आखिरकार रविवार का दिन आ ही गया ,, और अंकित राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया जो कि कुछ ही दूरी पर था,,,।

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सुगंधा अपने बेटे को राहुल के पास उसके संगत का असर देखने के लिए भेज रही थी क्योंकि वह जानती थी की संगत में ही लड़के अक्सर बिगड़ जाते हैं और जिस तरह का राहुल था सुगंधा अंकित को भी उसी की तरह बनना चाहती थी ताकि वह उसके सहयोग से अपनी जवानी की प्यास बुझा सके,,,, सुगंधा तो राहुल की संगत में आने के बाद अंकित को लेकर कल्पना भी करने लगी थी,,, पर उसकी कल्पना में वही दृश्य सामने उभर कर आता था वही मार्केट वाला जहां पर वह अब खुद नूपुर की जगह सब्जी के ठेले पर खड़ी होकर सब्जी खरीद रही होती है और उसका लड़का उसके अंगों से छेड़खानी कर रहा होता है उसके लिए तंबू पर हाथ रख दे रहा होता है और अपने हाथों को नीचे की तरफ से ही उसकी बुर वाली जगह पर दबा दे रहा होता है इस तरह की कल्पना करके उसकी बर पानी छोड़ देती थी,,,, और अपनी कल्पना को हकीकत में बदलने के लिए वह बेहद उत्सुक और बेताब नजर आ रहीथी,,,।

देखते ही देखते रविवार का दिन आ गया था और अपनी मां से इजाजत लेने के बाद दोबारा है राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया था जो कि कुछ ही दूरी पर था,,,, थोड़ी ही देर में अंकित उसे जगह पर पहुंच गया था जहां पर राहुल ने उसे बुलाया था यह भी एक मैदान था जहां पर लोग क्रिकेट खेल रहे थे पहले तो अंकित वहीं बड़े से पेड़ के नीचे खड़ा होकर ईधर उधर राहुल को ढूंढने लगा,,,, लेकिन राहुल उसे कहीं नजर नहीं आ रहा था उसे लग रहा था कि शायद राहुल उसे बुलाकर ना आया हो उसे कोई काम पड़ गया हो लेकिन तभी उसके कंधे पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ और वह पीछे मुड़कर देखा तो राहुल खड़ा था उसे देखते ही अंकित मुस्कुरा दिया जवाब में राहुल भी मुस्कुराने लगा और बोला,,,।

तेरा ही इंतजार कर रहे थे,,, चल आजा क्रिकेट खेलते हैं,,,।

(दो टीम खेलने के लिए तैयार हो चुकी थी उनमें से अंकित राहुल की टीम में था और वाकई में राहुल का इंतजार हो रहा था उसके आते हैं क्रिकेट का खेल शुरू हो गया था पहले बल्लेबाजी विरोधी टीम की थी और उन लोगों ने 10 ओवर में 80 रन बना चुके थे,,, अब बारी राहुल की टीम की थी,,,,)

यार राहुल सामने वालों ने तो जबरदस्त खेल है 10 ओवर में 80 रन,,,,

हां तु ठीक कह रहा है अंकित,,,रन कुछ ज्यादा ही लग गया है,,,, अपनी बोलींग भी ठीक नहीं थी,,,।,, पता नहीं कैसे बन पाएगा,,,,

कुछ चिंता मत कर बन जाएगा बस आराम से और ध्यान से खेलना है,,,(इतना कहने के साथ यही दोनों एक जगह पर बैठ गए थे क्योंकि ओपनिंग जोड़ी किसी और किसी और दोनों 15 रन बनाने के बाद ही आउट हो गए और उसके बाद तो लगातार तीन विकेट और गई मतलब पांच ओवर में 35 रन और 5 विकेट इसके बाद,,,, राहुल और अंकित दोनों की जोड़ी मैदान में जम चुकी थी दोनों तरफ से रन बनाए जा रहे थे हर एक रन पर हर एक चोके पर राहुल की टीम जोरों से शोर मचा रही थी,, राहुल और अंकित की जोड़ी में हारी हुई बाजी को जीत में बदलने जा रहे थे और आखरी बोलकर तीन रन चाहिए था और बेटिंग में था अंकित,,,, राहुल उसके पास आया और बोला,,,।)

यार टीम की इज्जत तेरे हाथ में है तुझे ही टीम को जिताना है,,,,,।

देख राहुल में पूरी कोशिश करूंगा,,,,,।

(इतना कहने के साथ ही ,,, अंकित क्रीज पर खड़ा हो गया और चारों तरफ देखकर मुआयना करने लगा कि कौन सा खिलाड़ी कहां खड़ा है,,,, और फिर तैयार हो गया बल्लेबाजी के लिए और जैसे ही अगली गेंद उसके करीब आई वह आगे बढ़कर ऐसा जोरदार शॉट मारा की गेंद हवा में बाउंड्री पर हो गई अंकित छक्का जड़ दिया था और इसी के साथ उसकी पूरी टीम एकदम से उत्साहित होकर दौड़ते हुए उसके पास आई और उसे उठा ली,,,, राहुल बहुत खुश था क्योंकि उसने भरोसा करके अंकित को अपनी टीम में शामिल किया था और अंकित ने विजय दिलाया था,,,।

जीतने के बाद राहुल की टीम नाश्ता पानी करने के लिए चाय की दुकान पर गई और वहां पर बैठकर सभी लोग समोसे खा रहे थे तभी राहुल अपने ही साथी खिलाड़ी को बोला,,,,)

मैं तुझे हमेशा कहता हूं कि चौथे नंबर पर मर जाया कर चौथे नंबर पर मुझे आने दिया कर तु हमेशा अपनी मां चुदवा लेता है,,,,।

चल रहने दे पिछली मैच में तुझे ही चौथे नंबर पर भेजा गया था वहां क्या किया अपनी मां की तरह टांग खोल दिया और बोल जैसे लंड बुर में घुसती है इस तरह स्टंप में घुस गई याद है की याद दिलाऊं,,,।

चल रहने दे पीच भी तो तेरी मां की भोसड़े की तरह एकदम चिकनी थी समझ में नहीं आया,,,(चाय की चुस्की लेते हुए बेहद सहज भाव से राहुल बोला राहुल के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर अंकित एकदम हैरान हो गया था क्योंकि राहुल एक शिक्षिका का लड़का था और एक शिक्षिका का लड़का होने के बावजूद भी उसकी बोली भाषा एकदम निम्न स्तर की थी और वह एक दूसरे की मां के बारे में गंदे गंदे शब्द का प्रयोग कर रहे थे हालांकि अंकित को थोड़ा अजीब तो लग रहा था लेकिन उसके बदन में अजीब से सियाराम सी दौड़ने लग रही थी क्योंकि जिस तरह से राहुल का दोस्त राहुल की मां के बारे में बातें कर रहा था यह सुनकर अंकित की आंखों के सामने राहुल की मां का खूबसूरत चेहरा और उसका गदराया बदन नजर आने लगा और अभी कुछ दिन ही हुए थे उसे अपनी मां की बुर का दीदार किए हुए इसलिए अंकित तुरंत राहुल की मां की बुर के बारे में कल्पना करने लगा और यह सब करते हुए वह बेहद उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,।)

अब चल रहने दे तेरी मां की बुर की तरह तो चिकनी बिल्कुल भी नहीं थी जो संभाल नहीं पाया और फिसल गया,,,,, जितने नंबर पर तु उतरता है उतने ही नंबर पर उतरेगा,,,,।

देख ऐसा नहीं है कभी-कभी हो जाता है चौथे नंबर पर उतरता हूं तो मुझे गेंद तेरी मां की चूची की तरह बड़ी-बड़ी दिखती है,,,,

मुझे भी चौथे नंबर पर गेंद तेरी मां की चुची की तरह नजर आती है,,,,

और चुची नजर आती है तभी तो खेल नहीं पता है ना,,,।

यार राहुल क्या बताऊं तेरी मां की चूची के बारे में सोच कर ही दिमाग फेल हो जाता है,,,।

चल अब रहने दे,,, तेरी मां इतनी कसी हुई साड़ी पहनती है कि उसकी गांड ऐसा लगता है कि बाहर निकल जाएगी और जब भी मैं देखता हूं उसी समय मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,।

बस देख कर ही मन बहला लेना अगर कभी उल्टा सीधा करने की सोच भी तो मेरी मां तेरा लंड काट देंगी,,, बहुत गुस्से वाली है,,,।

तेरी मां का गुस्सा शांत करना मुझे आता है देखना किसी दिन मौका मिलेगा ना उसे अपना लंड दिखा दूंगा फिर देखना तेरी मां को उसके ही कमरे में पटक कर चोदुंगा और तू देखते ही रह जाएगा,,,,।

(दोनों जिस तरह से आपस में बातें कर रहे थे बाकी के लोग सुनकर मजा ले रहे थे और वह लोग भी आपस में मां बहन की गाली देते हुए ही बात कर रहे थे आज पहली बार अंकित ऐसे लोगों से मिल रहा था जो भेज दीजिए एक दूसरे को मां बहन की गाली देकर बात कर रहे थे और किसी को भी बुरा नहीं लग रहा था,,,, अंकित चाय की चुस्की लेते हुए सब लोगों के बारे में सोच रहा था खास करके राहुल के बारे में राहुल अपनी मां के बारे में इतनी गंदी बातें बडे आराम से सुन ले रहा था,,, और अगर इस तरह की बातें कोई उससे करता तो शायद वह झगड़ा कर लेता ,, अभी अंकित यह सब बातें सोच ही रहा था कि तभी उनकी टीम का कप्तान उसके पास आया और हाथ मिलाने के लिए अपने हाथ को आगे बढ़ा दिया अंकित भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर मुस्कुरा कर हाथ मिलाने लगा और वह बोला,,,)

यार तूने तो सभी बोलरो की मां चोद दिया,,, क्या छक्का चौका लगाया है,,,, वैसे नाम क्या है तेरा,,,,।

अंकित नाम है इसका,,,,(अंकित से पहले राहुल उसका परिचय देते हुए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) इसकी मां भी स्कूल में पढाती है मेरी मां के साथ,,,

अरे वाह,,, उसकी मां भी तेरी मां की तरह एकदम चिकनी होगी,,,,

बहुत जोरदार मेरी मां से भी जबरदस्त है,,,,।

(उसकी बात सुनकर अंकित तो दोनों को देखा ही रह गया अंकित को यकीन नहीं हो रहा था कि यह दोनों इतने सहज रूप से पहली मुलाकात में ही उससे इस तरह की बातें करेंगे,,, अंकित कुछ बोल नहीं पाया और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

चल कोई बात नहीं आते रहना अगली बार तुझसे ओपनिंग करवाएंगे,,,,

(इतना कहकर वह और उसके साथी धीरे-धीरे वहां से जाने लगे राहुल अभी भी उसके साथ बैठा हुआ था,,,, सबके चले जाने के बाद अंकित बोला,,)

यार तुम लोग आपस में इतनी गंदी गंदी बातें करते हुए दूसरे की मां के बारे में तुम लोगों को बुरा नहीं लगता,,,।

नहीं तो इसमें क्या हो गया भले एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करते हैं लेकिन इससे पता तो चलता है कि किसकी मां सबसे ज्यादा सेक्सी और गर्म है,,,।

क्या,,,,!(अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,)

देख जिसे मैं चौथे नंबर पर खेलने के लिए बोल रहा था उसकी मां की गांड के लिए जबरदस्त है कि जब भी वह साड़ी पहनती है तो ऐसा लगता है कि उसकी बड़ी-बड़ी गांड बाहर निकल आएगी और उसकी गांड देखकर लंड खड़ा हो जाता है,,,, और जो हमारी टीम का कप्तान है उसकी मां एकदम लंबी चौड़ी कद काठी की है उसकी चूचियां बहुत ज्यादा बड़ी है उसकी गांड भी इतनी ज्यादा बड़ी है कि पूछो मत इतना समझ लो कि अगर उसे चोदने का मौका मिले,,, तो तुम पीछे से उसकी ले ही नहीं पाओगे,,,।

मतलब ,,,,!(एक बार फिर से अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

मतलब किसकी गांड इतनी बड़ी-बड़ी है कि पीछे से तुम्हारा लंड उसकी बुर तक पहुंच ही नहीं पाएगा अगर उसकी लेना है तो उसे बिस्तर पर लेटा कर उसकी टांगें खोल कर लेना होगा,,, यह बात मैंने कई बार अपने कप्तान से कह चुका हूं,,,

क्या कह रहे हो यार और वह कुछ बोला नहीं,,,।

वह क्या बोलेगा वह तो हंसते रहता है पर मेरी बात सुनकर वह भी यही बोलता है कि तू सच कह रहा है,,,

बाप रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,,,

अच्छा एक बात बात कभी किसी को चोदने का मौका मिला है,,,

नहीं,,,,(शब्दों के साथ-साथ इशारे से सर को भी ना है हिलाते हुए अंकित बोला ,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तू,,,,

मुझे तो कई बार मौका मिल चुका है,,,, और हां जिससे मैं चौथे नंबर पर खेलने के लिए बोल रहा था ना उसकी मां की चुदाई में कर चुका हूं लेकिन यह बात उसे मालूम नहीं है,,,,

क्या कह रहे हो यार,,,,

हां तभी तो मैं जानता हूं उसकी मां के बारे में इतना कुछ यह खुद अपनी मां को अभी तक साड़ी में देखा होगा लेकिन मैं उसकी मां की साड़ी को अपने हाथों से उतार कर नंगी कर चुका हूं,,,,।

(राहुल की बातों को सुनकर अंकित का दिल जोरो से धडक रहा था,,,। भले ही टीम का कप्तान उसकी मां के बारे में गंदी बात कह कर गया था लेकिन न जाने क्यों पहली बार उसे दूसरे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर बहुत अच्छा लग रहा था और से इस बात का एहसास भी हो रहा था कि वाकई में उसकी मां बहुत खूबसूरत है क्योंकि राहुल ने भी यही कहा था कि उसकी मां से भी ज्यादा चिकनी उसकी मां है,,,,और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

यार अंकित सच में वैसे तो सब कुछ ठीक है लेकिन उसकी मा बुर एकदम साफ रखती है एकदम चिकनी और मुझे बालों वाली बुर ज्यादा पसंद है,,,,( राहुल की यह बात सुनते ही अंकित के मन में उभरने लगा जब वह अपनी मां के कमरे में उसे जगाने के लिए गया था और पहली बार जिंदगी में अपनी मां की बुर के दर्शन किया था और उसे समय उसकी मां की पूरी एकदम चिकनी थी लेकिन चिकनी बुर अंकित को बहुत अच्छी लग रही थी खूबसूरत लग रही थी,,,)

तुझे कैसी बुर पसंद है,,,?(एकदम से राहुल ने अंकित से पूछ लिया और उसका यह सवाल सुनकर अंकित एकदम से हड़बड़ा गया,,,,, और कुछ बोल नहीं पाया तो राहुल फिर बोला,,,)

अरे बोलना शरमाता क्यों है,,,.

(उसके इतना कहने पर अंकित धीरे से शरमाते हुए बोला)

अब मैं क्या बताऊं मैं तो कभी देखा ही नहीं हूं,,,,।

(इतना सुनते ही राहुल हंसने लगा और हंसते हुए बोला)

यार सच में तू कमाल का लड़का है,,,, मेरी और तेरी उम्र में कोई फर्क नहीं है,,, लेकिन फिर भी तो इस उम्र में भी बहुत पीछे है मुझको ही देखले ना जाने कितनी औरतें की बुर देख चुका हूं और चोद भी चुका हूं,,, यहां पर नहीं जहां रहकर पढ़ाई करता हूं वहां पर यहां पर तो सिर्फ एक ही औरत की चुदाई किया हूं जो मैं तुझे बता रहा था और वहां तो इसके घर में किराए पर रहता हूं उसे और उसकी लड़की दोनों के साथ मेरा चक्कर है,,,,।

(यह सब सुनकर अंकित को अपने ऊपर गुस्सा आने लगा क्योंकि उसके उम्र का ही राहुल जवानी का मजा लूट रहा था और वह भी बहुत सी औरतों को लड़कियों के साथ और वह था कि अभी तक सिर्फ ताका झांकी में लगा हुआ था,,,,)

तू भी कोई चक्कर चला ले और जवानी का मजा लूट और तो इतना मजा देती है कि पूछो मत स्वर्ग का सुख मिलेगा अगर बाहर कहीं जुगाड़ नहीं हो पा रहा है तो घर में ही जुगाड़ बना ले मजा ही मजा लूटेगा,,,।

(इतना कहने के साथ ही राहुल अपनी जगह से खड़ा हो गया और अंकित से बोला)

चल मेरे घर,,,, थोड़ी बातें करेंगे और तू मेरा घर भी देख लेगा,,,,(उसकी बात सुनकर अंकित अपनी जगह से खड़ा हो गया वैसे तो अपने घर जाने की सोच रहा था लेकिन जिस तरह की बातें राहुल कर रहा था उसे सुनकर उसका मन नहीं कर रहा था घर जाने को वह इस तरह की बातें सुनने में आनंदित हो रहा था और खड़े होकर उसके साथ उसके घर की तरफ जाने लगा लेकिन उसके मन में असमंजस बढ़ रहा था क्योंकि अभी-अभी राहुल ने घर में ही जुगाड़ वाली बात कहा था जो कि उसे समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह चलते-चलते ही राहुल से बोला,,,)

तो घर में ही जुगाड़ वाली बात कर रहा था मैं तेरी बात नहीं समझा,,,,

अरे यार तू सच में बहुत भोला है घर में जुगाड़ का मतलब है कि घर में ही किसी स्त्री से संबंध बना ले जो कि बिलकुल सेफ रहता है जिसमें पकड़े जाने का डर भी नहीं रहता,,,,

घर की स्त्री से संबंध मतलब,,,

यार तुझे तो सब कुछ समझाना पड़ता है,,,, देख मेरी बात ध्यान से सन और गुस्सा मत होना बस मेरी बात पर गौर करना जिन लड़कों का बाहर जुगाड़ नहीं होता चोदने का वह लड़के घर में ही संबंध बना लेते हैं,,,,

लेकिन किससे,,,(अंकित को भी थोड़ा-थोड़ा समझ में आ रहा था लेकिन फिर भी वह बोला)

किसी से भी घर में कोई भी स्त्री हो जो एकदम गजब की लगती हो जैसे की चाची हो भाभी हो मामी हो या फिर अपनी खुद की बहन या मां हो,,,,।

(राहुल की बातें सुनकर अंकित एकदम हैरान हुआ जा रहा था क्योंकि राहुल घर के ही औरतों के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रहा था जिनमे मां और बहन दोनों शामिल थी ,, इसलिए वह हैरान होते हुए बोला,,,)

की औरतें मां और बहन के साथ भी,,, पागल हो गया है क्या,,,!

अरे बुद्धू मैं जानता था तू ऐसा ही बोला क्योंकि तू इन सब के बारे में भी कुछ नहीं जानता,,,, जैसा लड़कों को हमेशा बुर की जरूरत पड़ती रहती है उस तरह से औरतों को भी हमेशा लंड की जरूरत पड़ती रहती है मोटा तगड़ा लंड जो उनके बुर में जाकर उनकी प्यास बुझा सके,,,, और तू नहीं जानता घर में अक्सर इस तरह के संबंध स्थापित हो ही जाते हैं क्योंकि घर की औरतों को ज्यादातर घर के लड़के ही हर हालत में देख लेते हैं कपड़े बदलते हुए नहाते हुए नंगी या फिर घर में चुदवाते हुए,,, अच्छा एक बात बात सच-सच बताना लंड खड़ा होता है कि नहीं,,,,

यार अब यह कैसा सवाल है,,,,

अरे जैसा भी है लेकिन सच-सच बताना खड़ा होता है कि नहीं,,,,

हां जरूर होता है,,,,

लड़की और औरतों के बारे में ख्याल आता है कि नहीं उनकी गांड देखकर उनकी चूची में देखकर मन में कल्पना होती है कि बिना कपड़ों की यह कैसी दिखती होगी,,,,

हां जरूर,,,,(अंकित भी धीरे-धीरे खुल के जवाब देने लगा,,,)

और फिर जब बिना कपड़ों की औरतों के बारे में सोचता है तो उनके अंगों के बारे में भी सोचता होगा उनकी बुर के बारे में उनकी चुची के बारे में,,,,

हां,,,,(कुछ देर सोचने के बाद चलते-चलते जवाब दिया,,,)

और फिर जब इतना कुछ खाया जाता है तो फिर बच्चे ख्याल आता होगा कि अगर मैं बुर में लंड डालकर चुदाई करूंगा तो कितना मजा आएगा और यही सोचकर हिलाता भी होगा आप सच सच बताना तुझे तेरी मां की कसम मुठ मारता है कि नहीं,,,।
 
(अंकित एकदम फस चुका था राहुल बहुत ही चालक लड़का था और वह अपनी चालाकी से अंकित के मुंह से सच बुलवाना चाहता था और अंकित को भी इन सब में मजा आ रहा था इसलिए वह कुछ देर खामोश रहने के बाद बोला)

यह तो सब करते हैं यार,,,,

सब तो करते हैं मुझे पता है मैं भी करता हूं लेकिन तू करता है कि नहीं,,,,

(अब अंकित को जवाब देने में कोई हर्ज नहीं था क्योंकि राहुल ने भी हम ही भर दिया था कि वह भी मुठ मारता है,,, इसलिए वह भी बोला।)

करता हूं,,,,

यह हुई ना बात,,,, देख दोस्त शर्माने का नहीं डरने का नहीं यह उम्र ही होती है मजा लेने के लिए अगर यह सब नहीं किया तो जिंदगी बेकार है,,,, अच्छा जब तुम मुठ मारता है तो तेरे मन में किसका ख्याल आता है,,,,(यह सवाल पूछ कर जवाब भी खुद देते हुए वह बोला) अपनी मां का या अपनी बहन का,,,

(इस बार राहुल का सवाल सुनकर वह थोड़ा झेंप गया ,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्या करें वैसे तो बात सच ही थी कि जब से हुआ मूठ मारना शुरू किया था उसके मन में उसकी कल्पना में केवल उसकी मां ही रहती थी हालांकि अभी तक वह अपनी बहन के बारे में गंदी विचार नहीं रखता था लेकिन अपनी मां को चोदने का उसके मन में ख्याल जरूर आता था,,,। लेकिन अब यह अपने मुंह से कैसे कह दे,,,, फिर भी वह अपने मन को मजबूत करके बोला,,,)

पागल हो गया क्या इस तरह के ख्याल मेरे मन में नहीं आते हां कल्पना करता हूं लेकिन मेरी पड़ोस की आंटी है उनके बारे में सोचकर,,,,(अंकित झूठ बोल रहा था और उसकी बात सुनकर राहुल बोला)

कोई बात नहीं जैसे बिस्तर पर चुदाई के लिए किसी स्त्री का होना जरूरी होता है इस तरह से मुथ मरने के लिए भी ख्यालों में किसी स्त्री की जरूरत पड़ती ही है,,,, और तुझे सच बताऊं,,, मुठ मारते समय मेरे मन में किसका ख्याल आता है,,,,।

किसका,,,,?(एकदम से अंकित बोल पड़ा)

मेरी मम्मी का,,,,(बड़े आराम से राहुल बोला,,, लेकिन जितना सहज होकर वह जवाब दिया उतना असहजता अंकित महसूस कर रहा था एकदम हैरान था और से भी ज्यादा हिरण करने वाली बात यह थी कि राहुल बेझिझक बता रहा था उसके चेहरे पर उसकी बातों में बिल्कुल भी शर्म का एहसास नहीं हो रहा था,,,,)

क्या बात कर रहा है राहुल तु तो एकदम बेशर्म है,,,

देख अंकित,,,, इस तरह के खेल में बेशर्म बनना पड़ता है बिस्तर में या बाथरूम में बेशर्म बनने के बाद ही ज्यादा मजा आता है और मैं सच कह रहा हूं तो भी अपनी मां और बहन के बारे में सोचकर कल्पना करना इतना मजा आएगा कि तू हिलता रह जाएगा और तेरे मुठ की धार बहुत दूर तक जाएगी,,,,

ना बाबा ना मुझे तो यह ना हो पाएगा,,,,

चल कोई बात नहीं लेकिन मेरी बात पर गौर जरूर करना ज्यादा नहीं तो एक बार जरूर अपनी मां का ख्याल अपने मन में लाकर हिलाना चोदने से भी ज्यादा मजा आएगा,,,,, ।

(अंकित हैरान था एक लड़का अपना अपनी मां के बारे में इतना खुलकर कैसे बोल सकता है लेकिन जो कुछ भी वह बोल रहा था उसमें अंकित को बहुत मजा आ रहा था और वह अपने मन में सोचने लगा कि राहुल भी अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारता है इसका मतलब है कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो घर में ही अपनी मां के बारे में सोच कर उत्तेजित होते हैं और मुठ मारते हैं,,,, अंकित यही सब सो रहा था कि राहुल का घर आ गया और राहुल ने दरवाजे पर पहुंचकर बेल बज दिया,,,, और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला तो सामने के दिल से कोई देख कर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई,,,,,

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राहुल अंकित को अपने घर ले गया था लेकिन घर पहुंचने से पहले उसने अंकित से बहुत सारी बातें की थी और वह सब बातें बेहद गंदी और अश्लील थी दूसरे लोगों के बारे में और घर की औरतों के बारे में राहुल की बातों को सुनकर वह भी घर की औरतों के ही बारे में अंकित का दिमाग चकराने लगा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसे राहुल की बातें बड़ी अच्छी लग रही थी क्योंकि राहुल की बातों में मां बहन चाची भाभी सबका जिक्र था लेकिन अंकित का आकर्षण किसी और रिश्ते से नहीं बल्कि अपनी मां से था वह अपनी मां के प्रति कुछ ज्यादा ही आकर्षित था क्योंकि अपनी मां को जाने अनजाने में अर्धनग्न अवस्था में नग्न अवस्था में देख चुका था और कुछ दिन पहले तो वह अपनी मां की कचोरी जैसे खुली हुई बुर को देखकर पागल हो गया था,,, इसलिए राहुल किस तरह की बातें उसे देखा अच्छी लग रही थी,,.

राहुल के द्वारा डोर बेल बजाने के बाद थोड़ी ही देर में दरवाजा खुल गया लेकिन दरवाजे के अंदर का नजारा देख कर तो अंकित के होश उड़ गए थे अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई थी क्योंकि दरवाजा राहुल की मां ने खोली थी और जिस अवस्था में वह इस समय थी इस अवस्था के बारे में अंकित कभी सोच भी नहीं सकता था,,,, क्योंकि दरवाजा खोलने वाली राहुल की मां थी और इस समय वह केवल साड़ी पहनी हुई थी लेकिन ब्लाउज उनके बदन पर नहीं था और ना ही ब्रा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी वह नहा कर बाहर आई हूं क्योंकि साड़ी भी उनके बदन से चिपक सी गई थी,,, और साड़ी से चिपक जाने से उसकी दोनों गोलाईया एकदम उभर कर सामने नजर आ रही थी,,, अंकित देखा तो देखता ही रह गया,,, नूपुर की चूचियां गीली साड़ी में एकदम साफ नजर आ रही थी और चूचियों के बीच की उसकी कसी हुई कड़ी निप्पल कैडबरी चॉकलेट की तरह एकदम साड़ी से चीपके हुई नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई भाले की नोक हो,,,,,।

राहुल की मां का यह रूप देखकर अंकित तो एकदम मंत्र मुग्ध हो गया था कुछ देर के लिए वह अपनी मां को भूल गया था,,,, और भूल कैसे नहीं जाता उसकी आंखों के सामने बाथरूम से अभी-अभी नहा करने के लिए भी खूबसूरत जवान औरत जो थी और वैसे भी नहाने के बाद जवान औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है औरतें और भी ज्यादा जवान नजर आने लगती है और उनके खूबसूरत अंगों का निखार और उभार और ज्यादा बढ़ जाता है,,,। और इस समय जवानी से भरी हुई नूपुर स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा नजर आ रही थी अंकित को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां जानबूझकर ब्लाउज नहीं पहनी किया अनजाने में ही वजह दरवाजे में बिना ब्लाउज के दरवाजा खोलने आ गई थी,,,, पल भर में ही उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे,,,,।

राहुल भी कुछ देर के लिए हक्का-बक्का रह गया था क्योंकि इस तरह से पहले भी उसकी मां दरवाजा खोल चुकी थी लेकिन उसकी मां जानती थी कि दरवाजे पर राहुल है इसलिए वह इस हालत में दरवाजा खोल देती थी लेकिन आज राहुल खुद भूल गया था कि उसके साथ अंकित है और शायद उसकी मां भी इस बात से अनजान थी इसीलिए वह इस वेशभूषा में दरवाजा खोल दी थी,,,, और वैसे भी पल भर के लिए राहुल भी अपनी मां के ऐसे रूप यौवन को देखकर मदहोश हो गया था,,,,,, लेकिन बात को संभालते हुए वह बोला,,,।

क्या हुआ मम्मी नहा रही थी क्या,,,?

(जिस तरह की हालत इस समय अंकित की थी ठीक उस विपरीत हालत नूपुर की थी जहां एक तरफ नूपुर की जवानी को देखकर अंकित उत्तेजित हो रहा था मदहोश हो रहा था वहीं दूसरी तरफ नूपुर एकदम घबरा गई थी उसे ऐसा ही था कि रोज की तरह उसका बेटा ही दरवाजे पर होगा और वह जानबूझकर इस अवस्था में दरवाजा खोलने चली गई थी,,, क्योंकि वह वाकई में नहा रही थी नहाने के बाद वह अपना ब्लाउज पहन चुकी थी लेकिन दरवाजे की बेल की आवाज सुनकर उसके चेहरे पर उत्तेजना के भाव नजर आने लगे और वह ब्लाउज और ब्रा दोनों को उतार कर केवल साड़ी को कंधे पर डालकर दरवाजा खोलना चली गई थी क्योंकि उसका मन बहुत कर रहा था सारी संबंध बनाने के लिए और वह राहुल को जानकर ही इस अवस्था में दरवाजा खोली थी लेकिन दरवाजे पर राहुल के साथ अंकित भी था उसकी अध्यापिका का बेटा इसीलिए वह एकदम से चौंक गई थी और अपनी दोनों जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे क्योंकि साड़ी से छुपाने का कोई मौका उसके पास नहीं था सारी गीली थी और उसकी दोनों चूचियों से चिपक गई थी और अगल-बगल का चूची वाला हिस्सा हल्का सा नजर आ रहा था और साथ ही सूची के बीच की निप्पल एकदम तनी हुई थी जो की साड़ी से एकदम बाहर निकलने को आतुर नजर आ रही थी इन सब पर अंकित की नजर बराबर जमी हुई थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर अपने आप को संभालते हुए वह बोली,,,,)

हा रे में नहा रही थी मुझे लगा तू होगा,,,,

नमस्ते आंटी,,,,(औपचारिकता निभाते हुए अंकित बोल)

खुश रहो बेटा आओ अंदर आओ,,,(अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की नाकाम कोशिश करते हुए वह बोली और इसी के साथ राहुल और अंकित दोनों घर में प्रवेश कर गए और वह दरवाजा बंद कर दी)

तुम दोनों बैठो मैं तब तक कपड़े चेंज करके आती हूं,,,,(इतना कहकर नूपुर वापस बाथरूम में चली गई और जल्दी-जल्दी अपनी के लिए साड़ी को वापस उतार दी और कपड़े पहन कर अपने आप को ठीक करने लगी और आईने में अपने आप को देखकर वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली)

बाप रे यह मैंने क्या कर दी यह तो अंकित है सुगंधा का बेटा,,, मुझे उसके सामने इस तरह के हालात में नहीं आना चाहिए था,,, उसने तो मेरा (अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए) सब कुछ देख लिया गली साड़ी में बिना ब्लाउज और ब्रा के मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों से साफ नजर आ रही थी और उसकी नजर भी तो मेरी छाती पर गड़ी हुई थी,,,,,(यह सब सोचते हुए जहां एक तरफ उसे डर का एहसास हो रहा था घबराहट हो रही थी वहीं दूसरी तरफ एक अनजान लड़के को अपना जिस्म दिखाने पर उसपर मदहोशी भी छा रही थी उसके लिए यह पहला मौका था जब वह किसी अनजान लड़की के सामने इस अवस्था में हाजिर हुई थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अभी भी उसके टांगों में कंपन महसूस हो रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपनी मां को इस बारे में बोल दे तो क्या होगा वह क्या सोचेगी कि दरवाजे पर कौन खड़ा है कौन नहीं है यह सब जाने बिना ही वह अवस्था में कैसे दरवाजा खोल सकती हैं,,, यही सब सो कर हैरान हो रही थी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी नूपुर मर्दों की नजरों को अच्छी तरह से समझती थी उसके ही बेटे का हम उम्र था अंकित और जिस तरह से वह उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था जरूर वह उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था,,,, नूपुर इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि साड़ी के अंदर उसकी नज़रें उसकी चूचियों की गोलाई को नाप रही थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी नजरों से ही उसकी साड़ी को हटाकर उसकी नंगी चूचियों के दर्शन करना चाहता है,,,, यह सब सोचते हुए नूपुर के बदन में दोस्त भेजने की लहर उठ रही थी और नतीजा उसकी बुर गीली हो रही थी,,,, कुछ देर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपनी सांसों को और अपने आप को दुरुस्त करने के बाद वह धीरे से बाहर निकली और एक बार फिर से दोनों के पास गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

तुम दोनों बैठकर बातें करो मैं चाय बना कर लाती हूं,,,

नहीं रहने दीजिए आंटी इसकी क्या जरूरत है हम दोनों अभी-अभी चाय पी कर आ रहे हैं,,,(अंकित औपचारिकता दिखाते हुए बोला)

अरे कोई बात नहीं फिर से पी लेना वैसे भी तुम मेरे घर पर पहली बार आए हो इसलिए मेरा फर्ज बनता है बस 10 मिनट में आती हुं,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर किचन की तरफ जाने लगी और जाते हुए अंकित उसके पिछवाड़े को ही देख रहा था जो कि कुछ ज्यादा ही खीला हुआ और उभरा हुआ नजर आ रहा था,,,, नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसे मटकता हुआ देखकर,,, अंकित की हालत खराब होने लगी वाकई में कुछ देर के लिए वह अपनी मां की खूबसूरती अपनी मां गदराया बदन,,, उसकी मदहोश करने वाली जवानी को भूल चुका था नूपुर के मदमस्त से यौवन में डूबता चला जा रहा था,,,, अंकित तब तक देखता रहा जब तक की राहुल की मां किचन के अंदर चली नहीं गई,,, और यह सब राहुल तिरछी नजर से देख रहा था अपनी मां के किचन के अंदर जाते ही राहुल बोला,,,,,।

क्या देख रहा हैअंकित,,,?

(राहुल की बात सुनते ही अंकित एकदम से घबरा गया उसकी चोरी पकड़ी गई थी लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए बोला)

कककककक,,, कुछ तो नहीं बस ऐसे ही,,,

बस ऐसे ही नहीं मैं जानता हूं तु क्या देख रहा था,,,

नहीं यार कुछ भी तो नहीं,,,,(अंकित घबराते हुए बोला)

देख हम दोनों एक ही उम्र के हैं और इस हिसाब से मुझे पता है कि तु क्या देख रहा था,,,

(अंकित तो राहुल की बातें सुनकर एकदम से हक्का-बक्का रह गया था,,,, अंकित समझ गया था कि राहुल उसकी नजरों को पहचान गया है,,,, वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

तु मम्मी की गांड देख रहा था ना,,,(इतना सुनते ही अंकित के तो माथे से पसीना छूटने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला) मैं सही कह रहा हूं ना मैं जानता हूं मैं तेरी नजरों को देख लिया था बड़ी-बड़ी है ना मेरी मां की गांड,,,,,

(राहुल की बात सुनकर अंकित एकदम से चौंक गया था उसे यह चिंता लगी हुई थी कि राहुल ने उसकी नजरों को देख लिया था जो कि वाकई में वह उसकी मां की गांड कोई देख रहा था लेकिन वह इस बात से कुछ ज्यादा ही हैरान था क्योंकि राहुल अपनी मां की गांड के बारे में एकदम सहज होकर बोल रहा था उसके चेहरे पर बिल्कुल भी शर्म के भाव नजर नहीं आ रहे थे इसीलिए तो अंकित एकदम हैरान था और हैरान होते हुए बोला,,,)

यह तु क्या कह रहा है राहुल,,,?

मैं एकदम ठीक कह रहा हूं मैं तेरी नजरों के गौर किया था तू लगातार मेरी मां को ही देख रहा था खास करके उनकी गांड को और जब दरवाजे पर खड़ा था तो तू मेरी मां की चूचियों की तरफ देख रहा था ना जो कि वह भी खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी है,,,,

यह तो कैसी बातें कर रहा है अंकित वह भी अपनी मां के बारे में ही,,,

तो इसमें क्या हो गया,,,, खूबसूरत चीज को तो देखी जाती है ना और उनकी तारीफ भी की जाती है तो भी तो पागलों की तरह देख रहा था मेरी मां की चूची और गांड को दरवाजे पर तो सबकुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था मेरी मां की चूची और तनी हुई निप्पल जिस पर तेरी नजर गई थी,,,,।

(अंकित एकदम हैरान हो गया था,,, आपस में मां बहन की गाली देते हुए तो वह देखा था और सुना था लेकिन आज पहली बार एक बेटे को अपनी मां के बारे में गंदी बात करते हुए देख रहा था सुन रहा था इसलिए वह बेहद अंचभित था,,, और वह बोला)

यह कैसी बातें कर रहा है तू राहुल अपनी ही मां के बारे में,,,

यार अभी रास्ते में मैं तुझे क्या समझाया था,,, मैं तुझे बताया था ना कि घर में ही जुगाड़ कर लेने का,,,

तो तेरा,,,,(एकदम आश्चर्य चकित होते हुए अंकित बोला,,)

हां मेरा आकर्षण मेरी मां की तरफ है,,,, देखा नहीं तूने मेरी मां कितनी खूबसूरत और सेक्सी है उसकी बड़ी चूची है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर जो तेरी हालत खराब हो गई तब तुम्हें दिन-रात अपनी मां के साथ रहता हूं तो मेरी क्या हालत होती होगी,,,,

क्या यह सब तेरी मां को मालूम है,,,,

पहले नहीं मालूम था लेकिन धीरे-धीरे मेरी मां को भी समझ में आने लगा कि मैं उनको देखता रहता हूं,,,

फिर तेरी मां ने क्या कहा,,,

कुछ नहीं लेकिन जिस दिन से उसे ऐसा एहसास हुआ कि मैं उन्हें घूरता रहता हूं उसे दिन से उनका सजना सजना शुरू हो गया वैसे एकदम साधारण रहती थी लेकिन धीरे-धीरे उन्हें बदलाव आने लगा जानता है क्यों,,,?

क्यों,,,?

क्योंकि औरतों को भी यही पसंद है मर्द उनकी खूबसूरती खून के खूबसूरत अंगों को जब घुरते हैं तो उन्हें भी अंदर से अच्छा लगता है,,,, और उनकी खूबसूरती और ज्यादा खिलने लगती है,,,, इसलिए तो कहता हूं कि तू भी घर में जुगाड़ बना ले और वैसे भी मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत तेरी मां है बहुत सेक्सी,,,

(राहु के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राहुल इस तरह से बात करेगा लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

पहली मुलाकात में ही मैं तेरी मां को देखा ही रह गया तेरी मां की छाती कितनी खूबसूरत है ऐसा लगता था कि तेरी मां की चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी,,,, तू भी मेरी मां की चूची देख रहा था ना कैसी थी गोल-गोल बड़ी-बड़ी तेरा भी मन कर रहा होगा अपने हाथों में लेकर दबाने के लिए,,, मेरा भी मन कर रहा था तेरी मां की चूची को पकड़ने के लिए और तोड़ तेरी मां का पिछवाड़ा कितना कसा हुआ है मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत और जवान तेरी मां है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां का हर एक अंग एकदम जवान लड़कियों की तरह कसा हुआ होगा और उनमे जरा भी ढीलापन नहीं होगा,,,,।

(राहुल की बातें अंकित के होश उड़ा रही थी और साथ ही उत्तेजना के मारे अंकित का लंड खड़ा हो गया था अपने दोस्त के मुंह से अपनी मां के लिए स्टार की गंदी बात सुनकर जहां एक तरफ अंकित को गुस्सा आता था वही आज न जाने क्यों उसे अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ सुनने में मजा आ रहा था उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा है कि वाकई में उसकी मां कितनी ज्यादा खूबसूरत है की आते जाते जवान लड़के उसकी मां को देखते रहते और न जाने कैसी कैसी कल्पनाएं करते रहते हैं जैसा कि राहुल कर रहा था,,,,)

मैं तो कहता हूं तू भी मेरी तरह नजरिया रखा कर,,,

ना बाबा ना मुझे तो डर लगता है,,,।

(दोनों की बातचीत परवान चढता ईससे पहले नूपुर हाथ में चाय का ट्राय लेकर आ गई और फिर दोनों को चाय नाश्ता देकर खुद भी चाय पीने के लिए बैठ गई,,,, इधर-उधर की बातें करते हुए तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे लेकिन इस बीच लगातार अंकित की नजर राहुल की मां के ऊपर से उसकी बदमाशी कर देने वाली चूचियां उसका खूबसूरत गदराया बदन उसका गोरा रंग,,, और उसका पिछवाड़ा,,,, इन सब के बारे में सोचते हुए अंकित का लंड खड़ा हो गया था,,, बातों ही बातों में नुपुर बोली,,,)

बेटा तुम भी आया करो तुम भी तो मेरे बेटे जैसे हो,,,

जी आंटी में जरूर आता रहूंगा,,,,

और हां राहुल के जन्मदिन पर जरूर आना,,,

जरूर आऊंगा आंटी,, वैसे जन्मदिन कब है,,,

अभी तो काफी दिन है यार मैं बता दूंगा तुझे,,,(चाय का कप टेबल पर रखते हुए राहुल बोला,,, और फिर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और जाने के लिए इजाजत मांगने लगा,, राहुल उसे छोड़ने के लिए बात कर रहा था लेकिन वह बोला कि वह चला जाएगा इसलिए वह घर से बाहर निकल गया और पैदल अपने घर की तरफ निकल गया अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर,,,

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अंकित राहुल के घर से निकल गया था अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर राहुल के घर पर जो कुछ भी हुआ था वह अंकित के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,, पहली बार उसकी नजर किसी दूसरी औरत पर गई थी और वह भी राहुल की मां पर जो कि उसकी मां खुद उसकी मां के साथ सहअध्यापिका थी,,,। राहुल की मां के बारे में सोचते हुए वह अपने घर की तरफ चला जा रहा था और राहुल के घर के बाहर जाते ही नूपुर गुस्सा दिखाते हुए राहुल से बोली,,,।

तुझे बताना चाहिए था ना कि घर पर तो अंकित को लेकर आएगा,,,,

तो क्या हो गया मम्मी इसमें नाराज होने वाली कौन सी बात है,,,

तू नहीं जानता क्या बुद्धू बनने का नाटक मत कर देखा था ना उसकी आंखों के सामने में किस हालत में दरवाजा खोली थी,,,,

अरे लेकिन मुझे क्या मालूम था कि तुम नहा कर सीधा दरवाजा खोलना चली जाओगी और वह भी बिना ब्लाउज पहने,,,

मैं तो यही समझी थी कि तू है और मेरा मन भी बहुत कर रहा था इसलिए पहना हुआ ब्लाउज उतार कर गली साड़ी में चली गई थी ताकि तो मेरी चूची देखकर उत्तेजित हो जाए,,,,(सामने की टेबल से उठकर राहुल के बगल में बैठते हुए नूपुर बोली और उसकी बात सुनकर राहुल मुस्कुराने लगा और बड़े प्यार से उसके उलझे हुए बालों को संवारते हुए बोला,,,)

मैं तो तुम्हें देखते ही चुदवासा हो जाता हूं,,,,

लेकिन मैं चुदवासी हो गई थी उसका क्या,,, वैसे तो अंकित देखने में सीधा-साधा ही लगता है लेकिन देखा नहीं दरवाजे पर कैसे मेरी चुचीया देख रहा था,,,

तो क्या हो गया तुम्हें तो खुश होना चाहिए तुम्हारी खूबसूरत चूचियों को देखकर उसकी हालत खराब हो रही थी एक जवान लड़के की मां होने के बावजूद भी तुम्हारी जवानी बरकरार है तुम्हारा बदन अभी भी कसा हुआ है इस बात पर तुम्हें गर्व होना चाहिए,,, अभी भी तुम किसी का भी लंड खड़ा कर सकती हो,,,(अपनी मां की एक चूची दबाते हुए बोला)

अरे वह सब तो ठीक है मुझे भी उसका घूरना अच्छा लग रहा था लेकिन तू नहीं जानता वह किसका लड़का है,,, मुझे तो इस बात का डर है कि कहीं अपनी मां से सब कुछ बता दिया तो कि मैं घर में ऐसे ही घूमती रहती हूं,,,

उसे देखकर लगता है कि वह अपनी मां से इस तरह की बातें करता होगा,,,! बिल्कुल भी नहीं बहुत सीधा-साधा है हां भले ही तुम्हें देखकर उसका लंड खड़ा हो गया था लेकिन फिर भी अपनी मां से तो इस तरह की बात नहीं करता होगा,,,

तुझे कैसे मालूम तू तो मुझसे इसी तरह की बातें करता है,,,,।

मेरी बात कुछ और है मेरी जगह अंकित नहीं ले सकता बहुत भला भला है मेरी तरह बनने में उसे बहुत समय लगेगा,,,, वैसे उसकी मां बहुत ज्यादा चिकनी है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था अगर मौका मिले तो उसकी मां की बुर में लंड डाल दु,,, हाय मेरी रानी,,(एकदम से उत्तेजित होते हुए अपने लंड को दबाते हुए वह बोला तो एक औरत होने के नाते नूपुर अपने बेटे की हरकत से औरअपने सामने किसी दूसरी औरत की तारीफ अपने बेटे के मुंह से सुनकर वह गुस्सा हो गई और गुस्से में एकदम से उठते हुए बोली,,,)

यह बात है तो आप जब भी तेरा लंड खड़ा हो तो उसी के पास चले जाना मेरे पास मत आना,,,,(गुस्से में ऐसा कहकर वह चलने को हुई की राहुल भी मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत अपनी मां की कलाई पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला)

अरे जाती कहां हो मेरी रानी,,,(अपनी तरफ खींचते ही वह एकदम से अपने बेटे की तरफ झुकी और उसकी गोद में जाकर गिर गई,,,) तुम्हारे से भला खूबसूरत कोई औरत मुझे मिलेगी क्या दुनिया में तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,(राहुल अच्छी तरह से जानता था की दूसरी औरत की बात करने की वजह से उसकी मां गुस्सा गई है और अगर ऐसा हुआ तो वह उसे चोदने नहीं देंगी और फिर उसे खड़ा लंड हाथ से हिला कर शांत करना पड़ेगा जैसा कि वह करना नहीं चाहता था,,,)

नहीं नहीं जा उसके पास तुझे तो वह ज्यादा चिकनी लगती है ना,,,

अरे मम्मी अब तुम्हारी बुर से ज्यादा चिकनी बुर किसकी होगी,,, देखो तो सही तुम्हारी गांड की गर्मी पाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,।

(इस बात को सुनकर नूपुर मुस्कुराने लगी क्योंकि वाकई में वह अपने बेटे की गोद में बैठी हुई थी और इसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांव उसके लंड के ऊपर टिकी हुई थी और धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होकर उसकी गांड के बीचों बीच चुभने लगा था,,, जिसका एहसास होते ही नूपुर की बुर से मदन रस बहने लगा था,,,, अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर राहुल बोला,,,)

अब एक राउंड तो बनता ही है,,,,(और इतना कहने के साथ ही राहुल अपनी बलिष्ठ भुजाओं में अपनी मां को गोद में उठा लिया और उसे गोद में उठाए हुए हैं अपनी उनके कमरे में ले जाने लगा क्योंकि ऐसा वक्त उसके पापा घर पर नहीं थे और वैसे भी ज्यादातर उसके पापा घर पर रहते नहीं थे बाहर ही काम के सिलसिले में रहते थे,,,, इसलिए वह दोनों पूरी तरह से निश्चित था थे राहुल अपनी गोद में उठाकर अपनी मां को अपने मां के कमरे में लेकर आया और नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,, गद्दे पर गिरते ही उसकी मां का भारी भरकम शरीर हल्के से उछल कर वापस गद्दे में धंस गया,,, और उसकी साड़ी एकदम से उसकी जांघों तक चढ गई,,, अपनी मां की मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघों को देखकर,,,, राहुल एकदम पर काबू हो गया और उत्तेजना के मारे अपनी मां के कपड़े उतारने से पहले खुद अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,,,।

अपने बेटे को कपड़े उतारकर नंगा होता हुआ देख कर नूपुर से रहने की और वह खुद अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने लगी और देखते ही देखते वह भी अपने बेटे की तरह कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,,, राहुल का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था अपनी मां की नंगी जवानी देखकर वह बेकाबू हो गया था और बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी मां की दोनों टांगें फैला कर अपने प्यासे होठों को अपनी मां की बुर पर लगाने हीं वाला था कि,,, उसकी मां अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपने बेटे की बांह थाम ली और उसे अपनी तरफ खींचने लगी ,,,, राहुल अपनी मां के इशारे को समझ गया था और समझ गया था कि उसकी मां कुछ ज्यादा ही चुदवासी हो गई है इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह अपने चेहरे को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच से ऊपर उठाया और अपनी मां की दोनों टांगों को फैला कर उसे अपनी कमर में लपेट लिया और फिर अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया और तब तक चोदता रहा जब तक की उसकी मां झड़ नहीं गई और उसके बाद वह भाभी अपना गरम लव अपनी मां की बुर में डाल दिया,,,,।

दूसरी तरफ घर पहुंच कर भी अंकित हैरान था जिस तरह से दरवाजा खुला था और दरवाजे पर उसकी मां अर्धनग्नवस्था में दरवाजा खोली थी यह सब अंकित को हैरान कर दे रहा था अंकित को सोचने पर मजबूर कर दे रहा था कि दोनों मां बेटे के बीच क्या चल रहा है क्योंकि ऐसी औरत और वह भी मा क्यों बिना ब्लाउज के साड़ी पहन कर दरवाजा खोलने आएगी और जबकि उसे मालूम हो कि दरवाजे पर उसका बेटा होगा,,,, अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे राहुल की मां को लेकर स्कूल में जब अपनी मां के साथ राहुल की मां से मिला था तब वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि स्कूल में पढ़ाने वाली औरत का ऐसा रूप उसे देखने को मिलेगा,,, जहां एक तरफ राहुल की मां की हरकत से अंकित हैरान सभा की दूसरी तरफ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों के दर्शन करके वह धन्य हो गया था,, पर तुरंत उसके जीवन में बाथरूम के अंदर अपनी मां को नंगी देखने वाला दृश्य घूमने लगा और वह अपनी मां की चूची से राहुल की मां की चूची की तुलना करने लगा कुछ ज्यादा खास फर्क नहीं था दोनों की चुचियों में बस इतना फर्क था कि अंकित की मां की चुची बड़ी होने के साथ-साथ एकदम कसी हुई थी,,, और राहुल की मां की चूची में हल्का सा ढीलापन था लेकिन फिर भी अकेली साड़ी में लिपटकर उसकी चूची चार चांद लग रही थी,,,।

अंकित राहुल की मां के बारे में सोच रहा था कि तभी उसे राहुल की बात याद आ गई कि वह अपनी मां को घूरता रहता है अपनी मां की चूची और गांड के बारे में वहां भेजी जब बातें कर रहा था और बात वही बातों में उसने बताया भी था कि उसकी मां को भी यह सब पता है और उसे भी यह सब अच्छा लगता है राहुल से ही पता चला था की औरतों की तारीफ करने से औरतें बहुत खुश होती है खास करके उनके खूबसूरत बदन की तारीफ करने की वजह से तो,,, वह और ज्यादा खुश नजर आती है और अंकित इस बात से भी हैरान था कि उसकी मां को सब कुछ पता था कि उसका बेटा उसे घूरता रहता है लेकिन फिर भी वह कुछ नहीं बोलते बल्कि अंदर ही अंदर खुश होती है और यह बात राहुल ने ही उसे बताया था,,, और बात ही बात में राहुल ने उसकी मां के बारे में भी जिक्र छेड़ दिया था,,, उसकी मां की गांड के बारे में चुची के बारे में सब कुछ बोलकर उत्तेजित हो रहा था अगर कोई और समय होता तो शायद अंकित राहुल के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह के गंदे शब्द नहीं सुन पाता लेकिन न जाने क्या हुआ था कि वह कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था और राहुल खुद अपनी मां के बारे में भी गंदी बात कर रहा था इसलिए अंकित ने भी अपनी मां के बारे में भी गंदी बात सुन लिया था लेकिन उसे इस बात का पता चला था कि जैसा कि राहुल उसकी मां के बारे में उसकी मां की खूबसूरती के बारे में उसकी मां की चूची और गांड के बारे में गंदी बातें कर रहा था उसी तरह से दूसरे लड़के भी उसकी मां को देखकर मन ही मन में या एक दूसरे से गंदी बातें करते रहते हैं और यह सब अपनी मां की खूबसूरती के बारे में लेकर गर्व की बात भी थी ऐसा खुद अंकित ने भी बताया था लेकिन इस बात का निष्कर्ष अभी तक नहीं निकल पाया था कि वाकई में दोनों मां बेटे के बीच क्या चल रहा है अंकित को तो राहुल उसकी मां पर शक होने लगा था कि दोनों के बीच जरूर कुछ चल रहा है लेकिन अपनी आंखों से देखे बिना भला कैसे यकीन कर सकता था,,,।

जहां एक तरफ अंकित राहुल और उसकी मां को लेकर सोच में डूबा हुआ था वहीं दूसरी तरफ सुगंधा अपने बेटे को देखकर खुश हो रही थी वह जानना चाहती थी कि राहुल से मिलकर अंकित ने क्या-क्या किया,,, इसलिए वह खाना बनाने की तैयारी करते हुए अंकित से बोली,,,।

क्यों बेटा कैसा रहा आज का दिन राहुल से मिले थे ना,,,

हां मम्मी मिला था उसके साथ क्रिकेट खेला था और उसने मुझे अपने घर पर भी लेकर गया था,,,।

क्या बात है तुम्हें अपने घर पर भी ले गया,,,,(हरी सब्जी थेले में से निकालकर उसे काटने की तैयारी करते हुए,,,)

हां मम्मी उसके साथ मुझे बहुत मजा आया और उसके घर पर मैं उसकी मां से भी मिला,,,

नूपुर से,,,

हां मम्मी,,,,

कैसी है वह,,,

ठीक है तुम्हारे बारे में पूछ रही थी,,,

मेरा मतलब है कि दोनों मां बेटे खुश तो रहते हैं ना,,,,(दोनों मां बेटे के बारे में पूछ कर उन दोनों के बीच क्या चल रहा है सुगंधा यह जानना चाहती थी लेकिन खुले शब्दों में बोल नहीं पा रही थी,,,, और अंकित राहुल की मां का जिक्र आते ही उसकी आंखों के सामने उसके द्वारा दरवाजा खोलने के बाद जो नजारा दिखाई दिया था वह सब कुछ उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म की तरह घूमने लगा वह अपनी मां को नूपुर के बारे में बता देना चाहता था कि कैसे वह उसकी आंखों के सामने आई थी क्या पहनी थी किस हालत में थी क्योंकि अपनी मां से इस तरह की बात शुरुआत करने पर वह धीरे-धीरे अपनी मां से खोलना चाहता था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थीकी नूपुर के बारे में कुछ भी बोले )

हां मम्मी दोनों खुश थे उसकी मन चाय नाश्ता कर करा ही मुझे जाने दे,,,,

और राहुल,,,, राहुल कैसा लड़का है,,,?

(एक पल के लिए अंकित के मन में आया कि अपनी मां से बता दे कि राहुल कैसा लड़का है वह औरतों को किसी नजर से देखा है यहां तक की अपनी मां को कितनी गंदी नजर से देखा है और साथ ही तुम्हारे बारे में भी गंदे विचार रखता है लेकिन पता नहीं पाया और बात को घुमाते हुए बोला)

बहुत अच्छा लड़का है मम्मी हम दोनों साथ में क्रिकेट खेले थे और टीम को जीत भी दिलाए थे,,,

क्या बात है बेटा इसी तरह से मिलकर खेला करो और टीम को जीत दिलाया करो,,,(सुगंधा आगे भी इसी तरह से आपस में मेल जोड़ बढ़ाने के लिए बोल रही थी,,, क्योंकि सुगंध को पक्का विश्वास था कि दोनों मां बेटे की शारीरिक संबंध है दोनों मां बेटे एक दूसरे को मां बेटे की तरह नहीं बल्कि औरत और मर्द की तरह देखकर ही व्यवहार करते हैं और सुगंध यही चाहती थी कि उसका बेटा भी यही सीखे अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)

ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर वह वापस घूमने वाला था कि तभी उसे राहुल की बात याद आ गई और वह बड़ी हिम्मत जुटाकर डरते हुए बोला,,,)

मम्मी एक बात कहूं,,,

एक क्या 10 बातें बोल तुझे रोका किसने है,,,।( किचन पर सब्जी काटते हुए सुगंधा बोली और उसकी बात सुनकर अंकित घबराते हुए हिम्मत जुटाकर बोला,,,)

तततत,,, तुम,,,, बहुत खूबसूरत लगती हो,,,।

(इतना सुनते ही सब्जी काटते हुए सुगंधा के हाथ एकदम से रुक गए उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, वह एकदम से हैरान होते हुए अंकित की तरफ देखी और बोली,,,,,)

क्या कहा,,,,,?

ककक,,, कुछ नहीं,,,,(और एकदम से जाने को हुआ लेकिन सुगंध तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचने लगी अपनी मां की ईस हरकत से अंकित एकदम से घबरा गया उसे इस बात का डर था कि उसकी मां उसे डाटेंगी,,,, और उसके माथे से पसीना टपकने लगा)

बता क्या बोला तू,,,

कककक,, कुछ नहीं मम्मी,,,,

नहीं नहीं मेरे बारे में कुछ तो बोला तु,,,

सच में कुछ नहीं बोला,,,

देख डर मत मैं तुझे कुछ नहीं बोलूंगी,,,। बता दे क्या बोला तु,,,।

(जिस तरह से सुगंध अंकित का हाथ पकड़ी हुई थी अंकित एकदम से घबरा गया था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां उसे डांटे नहीं लेकिन फिर भी जब उसकी मां बोली कि कुछ नहीं बोलुगी तो उसमें थोड़ी हिम्मत आई और करते हुए बोला,,)

ककक,, कुछ नहीं,,,मे बस कह रहा ताकि तुम बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,

(इतना सुनते ही सुगंधा के चेहरे का भाव एकदम से बदलने लगा पल भर में उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा,,, क्योंकि उसके बेटे ने उसकी खूबसूरती की तारीफ जो कर दिया था सुगंधा अपने चेहरे के भाव को,,, चाहकर भी नहीं छुपा पा रही थी लेकिन औरतों के चेहरे के भाव को पढ़ने में अंकित अभी माहिर नहीं था इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए सुगंधा बोली,,,)

हाय दइया यह तुझसे किसने कह दिया,,,

किसने किया मुझे पता है दिखाई भी देता है की खूबसूरती क्या होती है,,,

क्या होती है खूबसूरती बात तो जरा,,,,
 
तुम्हारी खूबसूरत घने बाल जब तुम्हारे चेहरे पर इसकी लट आती है तो बहुत अच्छा लगता है और तुम जब किचन में काम करते हुए अपनी साड़ी को कमर से खोंसती हो तब तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगती हो,,,(साड़ी को कमर से खोंसने पर साड़ी का का कसाव नितंबों पर अत्यधिक बढ़ जाता था जिसकी वजह से सुगंधा की गांड और ज्यादा बड़ी और उभरी हुई नजर आती थी और यही अंकित बताना भी चाहता था कि इस तरह से तुम्हारी गांड बहुत मस्त लगती है लेकिन वह खुले शब्दों में बोल नहीं पा रहा था,,, लेकिन सुगंध अपने बेटे के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि जब वह साड़ी कमर से खोंसने वाली बात किया था तब औपचारिक रूप से सुगंधा की नजर अपने पिछवाड़े पर चली गई थी जो की काफी बड़ी और कसी हुई नजर आ रही थी,,, पर वह समझ गई थी कि अंकित किस बारे में बात कर रहा था अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) बस यही कह रहा था,,,,।

ओहहह ,,, तो मेरे बेटे को मे खूबसूरत लगती हुं,,,

लगती नहीं हो तुम हो खूबसूरत मम्मी,,,

चल रहने दे किसी और के सामने मत कहनानहीं तो तुझे बेवकूफी समझेंगे दो-दो बच्चों की मां कभी खूबसूरत हो सकती है क्या,,,

क्या मम्मी तुम तो मजाक समझती हो,,,

रहने दे जाकर पढ़ाई कर और मुझे अपना काम करने दे,,,,(इतना कहकर सुगंधा वापस सब्जी काटने लगी और अंकित वहां से चला गया,,, अंकित के वहां से जाते हैं सुगंधा राहत की सांस लेने लगी क्योंकि ना जाने क्यों इस तरह की बात अपने बेटे के मुंह से उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठने लगी थी और वह बदहवास होते जा रही थी,,, मदहोशी उसकी नसों में घूमने लगी थी बरसों के बाद कोई मर्द उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और इशारों ही इशारों में उसकी गांड की तारीफ कर रहा था इसलिए सुगंधा के तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी,,,, उसकी बर पानी छोड़ रही थी और मन ही मन वह प्रसन्न हो रही थी इस बात पर की राहुल के पास भेजने का उसका मकसद सफल हो रहा था,,, क्योंकि आज ही वह राहुल से मिला था और आज ही वहां उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था यही बदलाव उसमें एकाएक आया था,,,,।

दूसरी तरफ अंकित का वीडियो जोरों से धड़क रहा था पहली बार अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और ऐसा करते समय उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था लेकिन अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करने में उसे आज बहुत अच्छा लग रहा था,,, ऐसे ही दो-तीन में तीन गुजर गए और सुगंधा एक दिन शाम को मार्केट जाने के लिए तैयार होने लगी,,,,।।।।

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अपने बेटे में आए बदलाव से सुगंध बेहद खुश थी राहुल की संगत में कुछ तो असर हुआ था जिसके चलते उसके बेटे ने उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था यह इशारा था कि अब वह पूरी तरह से बड़ा हो चुका है औरतों के प्रति आकर्षण उसके में भी स्वाभाविक रूप से आ चुका है वह भी समझ चुका है की औरतों का कौन सा अंग बेहद आकर्षक होता है,,, क्योंकि सुगंध अपने बेटे की नजर को अच्छी तरह से पहचानती थी काम करते वक्त वह काम में जरूर मन लगाती थी लेकिन उसकी नजर हमेशा अंकित के ऊपर ही रहती थी और उसकी तिरछी नजरों के बाण को अपने बदन पर चलता हुआ वह देखकर अंदर ही अंदर बहुत खुश होती थी,,,।

एक दिन बाहर मार्केट जाने के लिए तैयार हो रही थी और अपने साथ अंकित को भी ले जा रही थी वह अपने कमरे में तैयार हो रही थी,,, और अंकित तैयार होकर कमरे से बाहर कुर्सी पर बैठकर इंतजार कर रहा था,,, और अपनी मां के बारे में ही सोच रहा था,,, अब वह अपने मन में यही सोचता था कि काश उसकी मां राहुल की मां की तरह होती तो कितना मजा आ जाता घर में ही खुला वातावरण देखने को मिलता ,,, क्योंकि राहुल की मां को देखकर मन ही मन वह भी यही चाहता था कि उसकी मां भी राहुल की मां की तरह ही घर में रहे मां बेटे के बीच में किसी प्रकार का पर्दा ना हो सब कुछ देखने को मिले जैसा कि वह खुद अचानक उसके घर पर पहुंच कर देख चुका था उसकी मां का कामुक रूप बड़ी-बड़ी चूचियां उस पर गीली साड़ी,,,उफ्फ,,,, उस दृश्य को याद करके अभी भी अंकित का लंड खड़ा हो जाता था। और इस समय भी उसका यही हाल था,,, राहुल की मां के बारे में सोचकर ही उसका लंड ठुनकी मारता हुआ अपनी औकात में आ चुका था,,,।

बाहर बैठा हुआ अंकित बार-बार अपनी घड़ी की तरफ देख रहा था क्योंकि मार्केट जाने का समय कुछ ज्यादा ही होता जा रहा था,,, वह बाहर से ही आवाज लगाता हुआ बोला,,,।

मम्मी तैयार हुई कि नहीं देर हो रही है,,,

अरे हां तैयार हो गई हूं बस थोड़ा सा रह गया है यह ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है,,,।

(उसकी मां का इतना कहना था कि अंकित की कल्पनाओं का घोड़ा पल भर में ही गति पकड़ लिया वह अपनी मां के बारे में कल्पना करने लगा अपनी मां के डोरी वाले ब्लाउज के बारे में कल्पना करने लगा वह अपने मन में सोच रहा था कि उसकी मां डोरी वाले ब्लाउज में कितनी खूबसूरत लगती होगी हालांकि वह पहले भी अपनी मां को डोरी वाले ब्लाउज में देख चुका था लेकिन इतना ध्यान नहीं दिया था लेकिन जब से उसका आकर्षण अपनी मां की तरफ बढ़ा था तब सेवा अपनी मां की हर एक हरकत और उसके रूप को देखकर उसके बारे में गंदी-गंदी कल्पना किया करता था और इस समय भी उसके मन में यही हो रहा था अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां कैसे छोटे से ब्लाउज में समा जाती होगी,,, वह अपने मन में यह सोच रहा था कि पता नहीं उसकी मां कौन से रंग का ब्रा पहनी होगी,,, और अपने ब्लाउज की डोरी को कैसे बांधती होगी,,,,उफ्फ,,, कितना गजब का नजारा होगा अपने मन में इस तरह की कल्पना करके अंकित अपनी मां को इस रूप में देखना चाहता था अपनी मां को कपड़े पहनते हुए देखना चाहता था ब्लाउज पहना हुए देखना चाहता था उसे अंतर्वस्त्र पहनते हुए देखना चाहता था लेकिन वह जानता था ऐसी हालत में अपनी मां को देख पाना नामुमकिन सा है,, क्योंकि जब भी कपड़े पहनना होता था तो उसकी मां अपने कमरे में चली जाती थी और दरवाजा बंद कर लेती थी हां यह बात और ठीक ही वह अपनी मां को अस्त-व्यस्त हालत में धीरे-धीरे कई बार देख चुका था, ।

घर के पीछे रात को पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड के दर्शन करके वह अपने आप को धन्य समझने लगा था और उस समय का पल उसके लिए बेहद उत्तेजनात्मक था,,, और वह बाथरूम में भी अपनी मां को पूरी तरह से नंगी होकर नहाते हुए देख चुका था उसके हर एक अंग को देख चुका था और उसे दृश्य को देखकर वह इस समय अपने लंड को हिला कर अपनी घर में शांत करने की लालच को रोक नहीं पाया था और हस्तमैथुन करके अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश किया था और फिर उसके बाद सुबह-सुबह जब वह अपनी मां के कमरे में उसे जगाने के लिए गया था तब का दृश्य देखकर तो उसके लंड की नसे फटने को हो गई थी क्योंकि कमर के नीचे उसकी मां पूरी तरह से नंगी थी और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर को देखकर अंकित अपनी लालच को रोक नहीं पाया था और हल्के से अपनी मां की बुर को छूने का सुख प्राप्त कर लिया था,,,। अंकित यही सब अपनी मां के बारे में सोच ही रहा था कि तभी फिर से कमरे के अंदर से आवाज आई,,,।

अरे अंकित देखा तो ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है जरा आकर बंद कर देना तो,,,।

(इतना सुनते ही अंकित की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था और यह फैसला भी सोच समझ कर सुगंधा ने ली थी ऐसा नहीं था कि वह अपने हाथ से ब्लाउज की डोरी बंद नहीं कर पा रही थी बल्कि वह अपने बेटे के हाथ से अपनी डोरी को बंद करवाना चाहती थी और उसे उत्तेजित कर देना चाहती थी वह आदम कद आईने के सामने खड़ी थी,,,। और ऐसे हालात में,,, आईने में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में कैद नजर आ रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कैसे हालात में डोरी बातें जैसे मैं उसकी नजर आई नहीं पर जरूर पड़ेगी और वह उसे समय अपने बेटे के चेहरे पर बदलने वाले भाव को देखना चाहती थी उसके दोनों टांगों के बीच की स्थिति को महसूस करना चाहती थी देखना चाहती थी,,,,। अंकित अभी इसी कसमकस था कि उसकी मा सच में उसे अंदर बुलाई है या ऐसे ही उसके कान बज रहे हैं,,, और फिर कुछ देर तक अंकित की तरफ से कोई भी हरकत ना होता हुआ देख कर उसकी मां फिर से बोली,,,,।)

अंकित बेटा जरा अंदर आना तो मेरे ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है जरा बंद कर दे तो,,,,।

(इतना सुनते ही उसकी मां प्रसन्नता से भर गया उसकी मन भंवरा बनकर उड़ने लगा कि उसके कान नहीं बज रहे थे बल्कि सच में उसकी मां यही बोल रही थी जैसा कि वह सुन रहा था वह तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के कमरे के पास जाने लगा दरवाजा अंदर से बंद जरूर था लेकिन सिटकिनी नहीं लगाई हुई थी,,, और हल्के से दरवाजे पर हाथ रखते ही दरवाजा एकदम से खुल गया,,, आंखों के सामने जो दृश्य नजर आया उसे देखकर अंकित के पेट के अंदर हलचल बढने लगी,,,, दरवाजा खुलते ही पीछे ब्लाउज की डोरी को दोनों हाथों से पकड़े हुए उसकी मां दरवाजे की तरफ देखने लगी ऐसी हालत में अंकित की नजर एकदम साफ तौर पर देख पा रहे थे कि उसकी मां आसमानी रंग का ब्रा पहनी हुई थी क्योंकि पीछे के साइड से ही दिख रही थी आगे से तो ब्लाउज का कपड़ा होने की वजह से सिर्फ चुचियों का उभार ही दिख रहा था,,,। अपनी मां की तरफ कामुक नजर से देखते हुए अंकित औपचारिकता निभाते हुए बोला,,,)

क्या हुआ मम्मी,,,?

अरे देख नहीं रहा है ब्लाउज की डोरी बंद नहीं हो रही है,,,,।

अरे कैसे बंद नहीं हो रही मम्मी,,,,

बहुत दिनों बाद यह ब्लाउज पहन रही हुं,,,,

रोज ही तो पहनती हो,,,(अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए अंकित बोला)

अरे पागल हो गया है क्या कहां रोज पहनती हूं,,,।

क्या मम्मी तुम भी बिना ब्लाउज के रहती हो क्या रोज,,,,(अपनी मां के एकदम करीब पहुंचते हुए बोला,,,,, अपनी मां के साथ बात करते हुए ब्लाउज जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए उसके बदन की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी और सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,)

अरे बुद्धू डोरी वाला बहुत दिन बाद पहन रही हूं तो हाउस तुम्हें रोज पहनती हूं लेकिन कभी उसकी डिजाइन तूने देखने की कोशिश किया है तुझे क्या मालूम मैं क्या पहनती हूं क्या नहीं पहनती हूं,,, पहले जो ब्लाउज पहनती थी उसका बटन आगे से,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा तुरंत अपने बेटे की तरफ घूम गई और अपनी छाती दिखाते हुए बोली) बंद होता है लेकिन इस ब्लाउज में बटन भी आगे से बंद होता है और पीछे से डोरी को भी बांधी जाती है समझ में आया तुझे कुछ,,,(ऐसा कहते हुए जिस तरह से सुगंध अपने बेटे की तरफ घूम कर अपनी छाती दिख रही थी हालांकि वह अपने ब्लाउज का बटन दिखाना चाहती थी लेकिन उसका उद्देश्य अपनी चूचियों को दिखाना ही था और वाकई में सूरज की नजर बटन पर तो बाद में लेकिन उसकी भरी हुई छाती पर पहले गई थी जिसे इतने करीब से देख कर पेंट में हलचल सी मचने लगी थी,,,। अंकित क्या कहता है कुछ समझ में नहीं आया उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और यह बदलाव सुगंधा की नजर में आ चुका था वह अंदर के अंदर खुश हो रही थी,,,,, कुछ देर तक वह इस स्थिति में खड़ी रही पीछे से ब्लाउज खुला हुआ था उसकी ब्रा की पिछली पट्टी साफ दिखाई दे रही थी,,, यह किसी भी जवान लड़के की तरह मदहोश कर देने वाला दृश्य था इस तरह के दृश्य देख कर कोई भी मर्द उत्तेजित होकर जुगाड़ ना होने की स्थिति में हस्तमैथुन करके अपने घर में शांत करने की कोशिश जरूर करता और इसमें अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह कुछ सेकेंड तक अपनी मां की भारी भरकम चूचियों की तरफ देखते हुए औपचारिकता वश बोला,,,।)

तो यह बात है मुझे क्या करना है,,,,,।

तुझे ज्यादा कुछ करना नहीं है बस इस ब्लाउज की डोरी को बांधना है,,, इतना तो तुझे आता ही है ना,,,,

ठीक है मम्मी,,,,।

( अंकित की मां इतना सुनते ही वापस आईने की तरफ घूम गई और अपनी चिकनी पीठ को अपने बेटे की तरफ कर दी,,, अंकित तो यह दृश्य देख कर मदहोश हुआ जा रहा था,,, अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांधने के नाम से उसके बदन में उत्तेजना भारी कंपन हो रही थी,,,, वह नजर उठा कर आईने की तरफ देखा उसकी मां सीधे-सीधे आईने में नहीं देख रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा आईने की तरफ देखेगी और उस नजर मिलते ही वह अपनी नजर को घुमा लगा और ऐसा हुआ नहीं चाहती थी वह चाहती थी कि उसका बेटा खुली नजरों से ब्लाउज में कैद उसकी चूचियों को देखें चूचियों के बीच से गुजरती हुई पतली दरार को देखें और ऐसा ही हुआ,,, सूरज नजर उठा कर आईने में देखने लगा जिसमें उसकी मां का खूबसूरत चेहरा और उसकी मां की मदद कर देने वाली ऊभरी हुई उन्नत छाती नजर आ रही थी जिस पर साड़ी का पल्लू नहीं था और साड़ी कमर तक भरी हुई थी और साड़ी का पल्लू नीचे जमीन पर लहरा रहा था एक तरह से यह दृश्य कामोतेजना से भर देने वाला था,,,। अगर इस समय स्त्री से पर किसी और की नजर पड़ जाती तो औपचारिक रूप से इस दृश्य के चलते मां बेटे के बीच गलत संबंध के रिश्ते का ठप्पा लग जाता और वैसे भी इस तरह के दिल से अक्षर प्रेमी प्रेमिका और पति पत्नी के बीच ही देखने को मिलता है और अगर इस समय यहदृश्य तृप्ति देख लेती तो शायद उसकी मां और उसका भाई दोनों उसके नजर से गिर जाते लेकिन इस समय दोनों निश्चिंत्य थे क्योंकि तृप्ति कोचिंग के लिए गई हुई थी,,,,,।
 
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