Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट) - Page 3 - SexBaba
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Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट)

दोनों बहनों से बातें करना सूरज को अच्छा लग रहा था दोनों से बातें करते हुए सूरज कैसा लगने लगा था कि यहां कुछ बात बन सकती है लेकिन सूरज दूसरे लड़कों की तरह आवारा नहीं था वरना जिस तरह से दोनों से बातें हो रही थी अगर सूरज की जगह कोई दूसरा लड़का होता तो अब तक वह अपने मन की बात दोनों से कह दिया होता,,,, कुछ देर तक तीनों में इसी तरह से इधर-उधर की बातें होती रही लेकिन जब थोड़ा समय ज्यादा होने लगा तो शालू बोली,,,)

अब हमें चलना चाहिए काफी समय हो गया है,,,,

हां सही कह रही हो शालू नहीं तो तुम्हारे मां बाबूजी चिंता करेंगे,,,, लेकिन इतने सारे बैर,,(शालू की कुर्ती में ढेर सारे बर देखकर )घर ले कैसे जाओगी,,,,

हां यह तो मैंने सोचा ही नहीं कुछ रखने का थैला भी नहीं है,,,,

तुम्हारा दुपट्टा है ना उसमें रख लो,,,,

नहीं नहीं ऐसा करूंगी तो मा बहुत बिगड़ेगी,,,,

ऊमम,,,(सोतते हुए) तो कैसे ले जाओगी,,, अच्छा रुको,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपना कुर्ता निकालने लगा यह देखकर नीलू बोली,,, )

अरे अरे यह क्या कर रहे हो,,,,?

अरे इसी में ढेर सारे बर रख लो मैं बांध देता हूं फिर कल मेरा कुर्ता लेते आना,,,( सूरज जानबूझकर अपना कुर्ता देकर फिर से मिलने का जुगाड़ बना रहा था और देखते ही देखते सूरज अपना कुर्ता निकाल दिया और उसमें ढेर सारे बेर शालू की कुर्ती से गिराकर उसे कस के बांधकर एक पोटली बना दिया,,,, और जब उस पोटली को शालू को थमाने लगा तो शालू की नजर उसके नंगे बदन पर गई तो वह देखते ही रह गई एकदम चौड़ी छाती एकदम चिकनी एकदम गठीला बदन सूरज का मोहक स्वरूप देख कर एकदम से आकर्षित होने लगी और यही हाल नीलू का भी होने लगा हुआ अभी एक टक सूरज की नंगी छाती को देखने लगी और दोनों को इस तरह से देखकर सूरज मैन ही मन प्रसन्न हो रहा था शालू सूरज के हाथों से बेर की पोटली को ले ली,,,, और जैसे ही चलने को हुए वैसे ही नीलू की चीख निकल गई,,,)

हाय दइया मर गई रे,,,,,आहहहहह,,,,

क्या हुआ,,,?(एकदम से सूरज और शालू नीलू की तरफ देखते हुए बोले,,)

पैर में कांटा लग गया मैं तो मर गई बहुत बड़ा कांटा लगता है,,,,(वह एकदम दर्द से बिलबिलाते हुए बोली,,, वह एक पर को ऊपर उठा दी थी और एक पैर से लंगड़ा रही थी कि तभी सूरज को लगा कि वह गिरने वाली है और वह तुरंत आगे बढ़ाकर उसे थाम लिया और एक पत्थर पर बैठा दिया,,,,)

हाय दइया बड़ा दर्द कर रहा है,,,,(नीलू एकदम से दर्द भरे स्वर में बोली शालू उसके पास पहुंचकर,, बोली,,,)

तू चिल्लाना बंद कर,,, छोटा सा कांटा लगा है,,,

दिखाओ कहां लगा है,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज घुटनों के बल बैठकर नीलू की टांग को पड़कर उसे थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर उसके पैर के तलवे की तरफ देखने लगा जिसमें वाकई में बड़ा सा कांटा छुपा हुआ था वह थोड़ा पैर उठाने की वजह से पीछे की तरफ झुक गई थी जिसे खुद शालू ने सहारा देकर संभाली हुई थी,,,,)

अरे अभी निकाल देता हूं तुम तो खामखा इतना चिल्ला रही हो,,,

अरे सच में मुझे बहुत दर्द कर रहा है जल्दी से निकालो,,

अरे हां अभी निकाल देता हूं,,,,, बस थोड़ा सा सब्र रखना कांटा कुछ ज्यादा ही अंदर घुस गया है,,,,(इतना कहते हुए सूरज थोड़ा सा टांग को और ऊपर की तरफ ले गया और कांटा को अपने हाथों की उंगलियों में पकड़ कर उसे खींचने वाला था कि उसकी नजर नीलू की दोनों टांगों के बीच चली गई जो की फ्रॉक पहने होने की वजह से फ्रॉक कुछ ज्यादा ही जनों के ऊपर चढ़ गई थी जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार एकदम साफ नजर आ रही थी यह सूरज के लिए पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की की बुर को देख रहा था एकदम खूबसूरत बुर जिसकी आज तक सूरज ने केवल कल्पना ही किया था,,, ।
 
कुछ पल के लिए तो सूरज को समझ में ही नहीं आया कि नीलू की दोनों टांगों के बीच वह पतली दरार एक पतली सी रेखा आखिर है क्या लेकिन थोड़ी देर में उसके दिमाग में जैसे घंटी बजी हो और वह तुरंत समझ गया कि वह पतली सी दरार से दिखने वाली चीज कुछ और नहीं बल्कि नीलू की बुर हैं और इतना समझ में आते ही तो उसके होश उड़ गए,,,, पल भर में ही सोया हुआ लंड एकदम से फिर से खड़ा हो गया,,, सूरज उसे मनमोहिनी प्यारी सी गुलाबी से अंग पर एकदम से मोहित हो गया इतना खूबसूरत नजारा सूरज ने आज तक नहीं देखा था फ्रॉक के अंदर झांकती हुई नीलू की बुर एकदम साफ नजर आ रही थी लेकिन उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि नीलू की बुर पर उसकी मां की बुर की तरह उगे हुए बाल ज्यादा घने नहीं थे बस हल्के-हल्के रेशमी से दिख रहे थे,,,,,,, जो की कचोरी की तरह दरार के इर्द-गिर्द वाली जगह फूली हुई थी जिसे देखकर दुनिया का कोई भी मर्द नीलू की जवानी पर मोहित हो सकता था आज सूरज अपने आप को बेहद खुश नसीब इंसान समझ रहा था क्योंकि कल्पना में मदहोश कर देने वाला अंग उसे एकदम साफ नजर आ रहा था कुछ देर के लिए सूरज सब कुछ भूल गया वह यह भी भूल गया कि नीलू के पैर में से छुपा हुआ कांटा बाहर निकलना है वह पागलों की तरह मदहोश होकर एक तक नीलू की दोनों टांगों के बीच की उसे पतली दरार की तरफ देखे जा रहा था,,,,,।

नीलू तो पूरी तरह से बदहवास थी वह दर्द से पीड़ित थी उसे कुछ सोच नहीं रहा था उसे क्या मालूम था कि जिस तरह से वह बैठी हुई है जिस तरह से सूरज उसकी टांग को ऊपर उसके कंधों तक उठाया हुआ है ऐसे हालात में उसकी चिकनी बुर एकदम साफ नजर आती होगी,,, लेकिन शालू को जल्द ही पता चल गया कि माजरा क्या है वह जल्द ही सूरज की नजरों को पहचान गई कि उसका निशाना कहां लगा हुआ है और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो उसके बदन में भी उत्तेजना की सुरसुरी द१ड़ने लगी वह एकदम से सिहर उठी,,,, पल भर में ही उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह समझ गई की नीलू की बुर सूरज देख रहा है सूरज को नीलू की बुर एकदम साफ नजर आ रही है यह एहसास होते ही वह अपने मन में ही बोली,,,।

हाय दइया यह सूरज क्या देख रहा है इसे बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही है,,,, अब क्या करूं कैसे उसे रोकु आखिरकार उसने जानबूझकर तो ऐसा किया नहीं है,,, उसकी जगह कोई भी होगा तो अगर इस नजारे को देखेगा तो वह देखता ही रह जाएगा,,,, जब शालू को लगने लगा कि सूरज पूरी तरह से मंत्र मुग्ध हो गया है उसकी बहन की बुर देखकर तो वह खुद ही बोली,,,।

अरे सूरज क्या कर रहे हो जल्दी से कांटा निकालो,,,

आं,,,,(शालू की है बात सुनकर ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज को कोई गहरी नींद से जगाया हो वह एकदम से शक पका गया और अपनी चोरी पकड़ी ना जाए इसलिए एकदम से होश में आते हुए बोला,,,)

हा,,,हा,,, निकल रहा हूं कांटा कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,,,(सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी ईस आंखों की चोरी को कोई देख नहीं पाया है लेकिन शालू समझ गई थी और वह धीरे-धीरे कांटे को निकलना शुरू कर दिया लेकिन उसकी नज़रें लगातार नीलू की फ्रॉक के अंदर टिकी हुई थी सूरज को नीलू की बुर पर उपसी हुई पानी की बूंद जो की मोती के दाने की तरह चमक रही थी एकदम साफ नजर आ रही थी जिसे देखकर उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी थी,,,। सूरज का मन उसे पतली दरार से अपनी नजर को हटाने को नहीं हो रहा था,,, वह अपने मन में सोच रहा था कि काश यह वक्त यही रुक जाए और वह उस खूबसूरत बुर को बस देखता ही रहे,,,, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं था वह जोर से खींच कर कांटे को निकाल दिया कुछ देर के लिए उसमें से खून निकला और उसे जगह पर सूरज ने तुरंत अपना अंगूठा लगाकर उसे खून को बंद करने के बहाने कुछ देर तक इस तरह से फिर से टांग उठाए रखा,,,।

इसमें तो होश कर देने वाले नजारे को देखकर सूरज की हालत एकदम खराब होती जा रही थी उसकी सांसे उत्तेजना के मारे गहरी चलने लगी थी,,, वह किसी भी बहाने से नीलू की बुर को नजर भर कर देख लेना चाहता था इतने करीब से वह पहली बार किसी खूबसूरत लड़की की बुर को देख रहा था उसकी मखमली नरमाहट को वह अपनी आंखों से ही टटोलने की कोशिश कर रहा था,,,, और सूरज की हरकत को देखकर खुद शालू की हालत खराब होती जा रही थी साल उसकी निगाहों को देखकर शर्म से भरी जा रही थी,,,, यहां तक की सूरज की हरकत की वजह से उसकी खुद की बुर गीली होती जा रही थी और पानी छोड़ रही थी उसे अपने बदन में अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी,,,,।

आखिरकार इस नजारे पर पर्दा तो पडना ही था,, हालांकि सूरज का मन तो बिल्कुल भी इससे खूबसूरत नजारे पर परदा गिरने को नहीं भरा था लेकिन नीलू ही बोल पड़ी,,,।

बस बस अब मुझे सही लग रहा है,,,,(वह तो पूरी तरह से सहज थी उसे बिल्कुल भी एहसास तक नहीं था कि उसकी टांग ऊपर उठने की वजह से उसकी बुर सूरज के एकदम साफ दिखाई दे रही थी वरना वह इस तरह से टांग ऊपर उठाई ना रहती,,,, नीलू की बात सुनकर वहां मन महसूस कर उसकी टांग को नीचे रख दिया और फिर वह धीरे से खड़ा हो गया लेकिन इस बार चालू एकदम चौंक गई और नीलू की भी नजर उसके पजामे में बने तंबू पर गई तो वह भी हल्के से मुस्कुरा दी सूरज इस बात से बेखबर था की उत्तेजना के मारे उसका लंड पजामे में तंबू बनाया हुआ है क्योंकि उसके उठने की वजह से उसका तंबू उन दोनों जवान लड़कियों को एकदम साफ नजर आने लगा था नीलू को तो उतना फर्क नहीं पड़ा था लेकिन शालू की बुर उत्तेजना के मारे फुल ने पिचकने लगी थी क्योंकि दोनों जवान थी और दोनों को इस बात का एहसास था कि जिस तरह से औरतों की टांगों के बीच मर्दों को लुखाने वाली छोटी सी चीज होती है इस तरह से मर्दों की टांगों के बीच भी औरतों को लुभाने वाला उनका कड़क अंग होता है जिसे लंड कहा जाता है,,,,।
 
सूरज को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसके पजामे में तंबू बना हुआ है वह तो नीलू की खूबसूरत बुर की याद में ही खोया हुआ था और वह तुरंत उठकर खड़ा हो गया और आगे आगे चलने लगा,,,,, सूरज खोया था नीलू की मध भरी बुर के ख्यालों में और दोनों बहने सूरज के तंबू के ख्यालों में पूरी तरह से खो गई थी,,,,, थोड़ी ही देर में तीनों मुखिया के और मुखिया की बीवी के पास पहुंच चुके थे अपनी दोनों बेटियों को देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,।

मन भर गया बैर खाकर,,, न जाने कब अक्कल आएगी,,,(इतना कहते हुए तभी उसकी नजर सूरज की खुली छाती पर गई तो वह उसे देखते ही रह गई उन दोनों बहनों के साथ-साथ मुखिया की बीवी की भी नजर सूरज की नंगी छाती पर पडते ही वह पूरी तरह से सूरज क्या आकर्षण में खो गई,,,, और अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

अरे सूरज तेरा कुर्ता कहां गया,,,,?

शालू के हाथों में,,,,(शालू के हाथों में ली हुई पोटली की तरफ इशारा करते हुए सूरज ने बोला तो,,,, शालू के हाथों में कुर्ते की बनी हुई पोटली देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,)

तुम दोनों नहीं सुधरोगी,,,,

कोई बात नहीं मालकिन मैं बाद में ले लूंगा,,,,

(और इतना कहकर वहां से चला गया)

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सूरज का मन अब किसी काम में नहीं लगता था उसके जीवन में जबरदस्त बदलाव आना शुरू हो गया था ,,या यूं कह लो कि अब वह पूरी तरह से जवान हो चुका था जो किसी भी औरत और खूबसूरत लड़कियों की तरफ आकर्षित होने के लिए तैयार हो चुका था और उसके साथ ऐसा हो भी रहा था,,,, घर लौटते समय रास्ते भर वह बगीचे वाली घटना के बारे में सोचता रहा,,, उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया है उसे कुछ सुझ ही नहीं रहा था,,, उसके लिए तो हालत बाद से बदतर होते जा रहे थे जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार नहीं था बल्कि उसकी इस हालात के पीछे दूसरे ही जिम्मेदार थे एक तो उसका सबसे जिगरी दोस्त सोनू और फिर मुखिया की बीवी,,,, लेकिन मन ही मन उसे अच्छा भी लग रहा था वह इस बात से खुश था कि वह अपने आप को पूरी तरह से जवान महसूस कर रहा था,,,।,,

अब उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था लगता भी कैसे जवानी के केंद्र बिंदु के दर्शन जो उसे हो चुके थे यूं तो वह गया था मुखिया की बीवी के अंग के दर्शन करने लेकिन अनजाने में ही उसने मुखिया की बीवी की खूबसूरत लड़की के खूबसूरत अंग के दर्शन कर लिए जिसके बारे में उसने कल्पना भर किया था और कल्पना में भी उसका सही रूप जान नहीं पाया था लेकिन आज अपनी आंखों से वह उसे अंग को देख चुका था इसलिए तो उसकी आंखों की नींद दिल का करार पूरी तरह से गायब हो चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, वह मन ही मन बहुत खुश भी था,,, की अच्छा हुआ वह ठीक समय पर मुखिया की बीवी से मिलने के लिए सही जगह पर पहुंच गया था,,, और यह भी अच्छा हुआ कि वहां पर उसकी दोनों जिद्दी लड़किया बेर खाने के लिए आ गई,,, जिसके चलते वह उन दोनों को बैर के बगीचे में ले गया और वहां पर,,, नीलू के पैर में कांटा लग गया और इस बात पर वह उसे कांटे को भी मन ही मन धन्यवाद दे रहा था जो नीलू के पैर में चुभ गया था जिसे निकालते समय सूरज को दुनिया की सबसे खूबसूरत और हसीन चीज देखने को मिली थी वह थी एक खूबसूरत लड़की की खूबसूरत बुर जिसे देखते हैं उसके बदन में सनसनी सी दौड़ने लगी थी,,, जिस पर नजर पडते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था पल भर में ही उसकी दोनों टांगों के बीच की स्थिति बे लगाम हो चुकी थी,,,, उस पल को याद करके सूरज की हालत और खराब हो जाती थी,,,,।

खाना खाकर सूरज अपने बिस्तर पर लेट कर शालू और नीलू के बारे में ही सोच रहा था और जिस तरह से दोनों बेझिझक उससे बातें कर रही थी उन दोनों के व्यवहार को देखते हुए सूरज को ऐसा लग रहा था कि उन दोनों के साथ ही कुछ काम बन पाएगा,,, और उसे इस बात की खुशी थी कि अच्छा हुआ कि अपनी कमीज में बैर बांधकर उन दोनों को दे दिया था क्योंकि कमीज के बहाने वह दोनों से फिर से मिल सकता था और इसी मुलाकात को लेकर वह बेसब्र हुआ जा रहा था,,,, नीलू की खूबसूरत गुलाबी बुर के बारे में सोच कर ही उसका लंड खड़ा हो गया था और वह अपने लंड को पजामे के ऊपर से ही धीरे-धीरे दबा रहा था,,, और ऐसा करने में सूरज को बहुत मजा आ रहा था,,,,।
 
दूसरी तरफ शालू और नीलू दोनों एक ही कमरे में सोती थी,,, नीलू तो पूरी तरह से साहस थी लेकिन शालू असहज थी क्योंकि उसने सूरज की नजरों को देखी थी शालू भी पूरी तरह से जवान थी इसलिए लड़कों की नजरों को वह भी पहचानती थी भले ही थोड़ी स्वच्छंद किस्म की थी लेकिन फिर भी जवानी की दहलीज पर वह कदम रख चुकी थी इसलिए अपने बदन में होने वाले बदलाव को और दूसरों की नजरों को अच्छी तरह से जानती थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज नीलू की फ्रॉक में से उसकी बुर को देख रहा था जो कि एकदम साफ नजर आ रही थी और उसी के बारे में सोचकर उसके तन-बदन में भी अजीब सी उलझन होने लगती थी,,,, वह नीलू से इस बारे में बात करते हुए बोली,,,।

तू एकदम पागल है नीलू,,,

क्यों क्या हो गया,,,?

तुझे नहीं मालूम है क्या,,,!

मुझे मालूम होता तो पूछती,,,

अरे जब तेरे पैर में कांटा चुभा था,,

हां वह तो मालूम है,,,,

और वह सूरज तेरे पैर से कांटा निकालने के लिए तेरे पर को ऊपर उठाकर अपने कंधे तक ले गया था पता है तुझे,,,

हां मुझे मालूम है कि उसने मेरे पैर में से कांटा निकाला,,,

और भी कुछ मालूम है,,,(लालटेन की रोशनी में एक ही बिस्तर पर दोनों बहने लेट कर बातें कर रही थी और शालू हर एक सवाल को मुस्कुरा कर पूछ रही थी नीलू को तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार शालू इस तरह के सवाल क्यों कर रही है,,,)

नहीं तो मुझे और कुछ नहीं मालूम है क्योंकि मुझे उसे समय बहुत दर्द कर रहा था,,, और इस समय भी मुझे दर्द कर रहा है,,,

वह तो ठीक हो जाएगा लेकिन तूने सूरज की नजरों को देखी थी,,,

क्या चालू तू भी पहेलियां बुझा रही है ठीक-ठीक क्यों नहीं बताती,,,,

अरे बुद्धू जब वह तेरे पैर से कांटा निकालने के लिए पर को अपने कंधों तक उठाया था तब उसकी नजर तेरी फ्रॉक के अंदर थी,,,

क्या,,,,,,(एकदम से आश्चर्य में)

हां वह तेरी फ्रॉक के अंदर देख रहा था और तुझे पता है उसे तेरी बुर दिख रही थी,,,।

हाय दइया यह क्या कह रही है तू,,,,

एकदम सही कह रही हूं वह तेरी बुर देख रहा था और एकदम पागल हो गया था,,,, तुझे दर्द हो रहा था तुझे नहीं मानोगे लेकिन मैं उसके चेहरे को देखी थी एकदम लाल हो गया था वह एक टक तेरी बुर को देख रहा था जो कि एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,,

बाप रे मुझे तो पता ही नहीं है,,,,

तुझे कैसे पता होगा तू तो अपनी बुर दिखाने में लगी हुई थी,,,,

धत्,,,,शालु,,,,,, तू कैसी बातें कर रही है भला मैं जानबूझकर उसे क्यों दिखाऊंगी,,,

जवान हो गई है खूबसूरत है इसीलिए दिखाएगी,,,(शालू एकदम इतराते हुए बोली हालांकि नीलू इस समय सर में से पानी पानी हुए जा रही थी उसे समय तो उसे नहीं मालूम था कि सूरज उसकी फ्रॉक में क्या देख रहा है क्योंकि वह तो अपने दर्द है से ही तड़प रही थी लेकिन शालू के बताने पर उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था एक तरफ उसे गुस्सा आ रहा था लेकिन एक तरफ उसके मन में उत्सुकता थी और वह भी इस बात की की पहली बार कोई लड़का उसकी बुर को देखा था,,,,)

चल तू झूठ बोल रही है ऐसा नहीं हो सकता और वैसे भी टांग उठाने से बुर थोड़ी दिखाई देगी,,,

अच्छा यह बात है कि तुझे बताती हूं अच्छा हुआ कि तू अभी भी फ्रॉक पहनी है,,,, चल तू जैसा दोपहर में दर्द से दिल मिल रही है ठीक उसी तरह से बैठ जा,,,(शालू अपनी जगह पर उठकर बैठते हुए बोली)

अच्छा रुक जा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह भी उठकर बैठ गई और दो तकिया को बिस्तर पर रखकर उसे पर अपनी गांड रखकर बैठ गई क्योंकि वह दोपहर में बड़े से पत्थर पर बैठी थी,,,,) अब ठीक है,,,

हा रुक में अभी बताती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही शालू खुद सूरज की अवस्था में बैठ गई और उसकी टांग को धीरे से ऊपर की तरफ उठाने लगी और बोली,, ) तू थोड़ा सा पीछे की तरफ झुक जा जैसे दोपहर में झुकी हुई थी,,,

अब ठीक है,,,(शालू अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर पीछे की तरफ झुकते हुए बोली,)

हां अब ठीक है,,,, सूरज तेरी टांग को धीरे-धीरे उठाकर अपने कंधों तक ले गया था,,,(शालू भी नीलू की टांग को धीरे-धीरे उठाकर अपने कंधे तक ले गई थी और लगातार उसकी फ्रॉक के अंदर झांक रही थी जो की कंधों तक टांग उठने की वजह से उसकी प्रमुख जनों से ऊपर की तरफ सरकना शुरू हो गई, जिसका आभास नीलू को भी हो रहा था,,,, लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था और देखते ही देखते शालू की नजर जैसे ही,,,, नीलू की बुर पर गई वह एकदम से चहकते हुए बोली,, )

हाय हाय क्या नजारा है हाय दइया मैं तो मर गई सच में तेरी बर एकदम साफ दिख रही है जब मेरी यह हालत है तो सोच सूरज की क्या हालत होती होगी उसका तो लंड खड़ा हो गया था मैं एकदम साफ देखी थी जब वह अपनी जगह से उठकर खड़ा होकर जा रहा था,,,,। उसके पजामे में तंबू बना हुआ था,,,,।,,,
 
क्या कह रही है शालू तु,,,(अपनी बड़ी बहन के मुंह से लंड शब्द सुनकर नीलु मस्त होते हुए बोली,,,,,)

हां रे नीलू सूरज का लंड एकदम खड़ा हो गया था और वह भी तेरी बुर की वजह से,,,(इतना कहने के साथ ही शालू अपना हाथ उसकी फ्रॉक में डालकर उसकी बुर को अपनी उंगली से कुरेद दी जिसकी वजह से नीलू एकदम से चौंक गई,,,)

हाय दैया यह क्या कर रही है,,,,,(उत्तेजना के मारे एकदम गहरी सांस लेते हुए बोली)

कुछ नहीं रे देख रही हूं,,, तेरी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,

ऐसी बातें करेगी तो पानी तो छोड़ेगी ही,,,, क्या सच में सूरज को मेरी बुर दिख रही थी,,,

हा,रे में सच कह रही हूं,,,(अभी भी नीलू की टांग शालू के कंधे पर थे और वह नीलू की बुर को नजर भर कर देख रही थी) सूरज एकदम साफ-साफ तेरी बुर देख रहा था कसम से वह तो,,, न जाने कैसे सूरज अपने आप पर काबू कर गया वरना उसकी जगह कोई और होता है तो सच में तेरी बुर में अपना लंड डाल दिया होता,,,।

धत्,,, दीदी तुम बहुत हारामी हो गई हो इस तरह से कोई बात करता है क्या,,,?

अच्छा ऊपर से तो ऐसा कह रही है और अपने मन में यही सोच रही थी कि सच में वह डाल दिया होता तो मजा आता,,,,,,

ना बाबा ना मै ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोच रही हूं,,,

अच्छा यह बात है तो फिर यह तेरी,,,(एक बार फिर से अपने हाथ को उसकी फ्रॉक में डालकर पूरी तरह से उसकी बुर को अपनी हथेली में दबोच कर) बुर क्यों पानी छोड़ रही है,,,

आहहहह दीदी,,,,(एकदम मस्ती से आहे भरते हुए अपनी गोल गोल गांज को ऊपर की तरफ उठाते हुए) क्या कर रही हो,,,,

क्यों बहुत मजा आ रहा है क्या,,,?

पता नहीं दीदी लेकिन न जाने क्या हो रहा है,,,,(नीलू इस तरह से गरम आहे भरते हुए और शालू भी पूरी उत्तेजना से अपनी हथेली में उसकी छोटी सी बुर को दबाते हुए मचल रही थी, , शालू इस तरह की हरकत को पहली बार कर रही थी दोनों ही इस तरह से पहली बार बातें करते हुए आनंद ले रहे थे वैसे तो इधर-उधर की वह दोनों बातें बहुत करती थी और इनमें इस तरह की भी बातें होती थी लेकिन आज पहली बार दोनों इस तरह की बातों को अपने बदन पर आजमा रहे थे और इसमें दोनों को ही धीरे-धीरे मजा आ रहा था,,,, शालू इस तरह से अपनी हथेली में नीलू की बुर को जोर-जोर से दबाते हुए बोली,,,)

क्या हो रहा है बताना,,,,

पता नहीं दीदी क्या हो रहा है मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है,,,(उत्तेजना के मारे नीलू अपनी हर एक बात को अटक-अटक कर ऐर गहरी सांस लेते हुए बोल रही थी,,,,)

तू एकदम जवान हो गई है,,,

तुम मुझसे बड़ी हो तुम भी तो जवान हो गई हो,,,

लेकिन तेरी बुर ज्यादा खूबसूरत है तभी तो सूरज देख रहा था अगर उसका बस चलता तो अपना खड़ा लंड तेरी बुर में डाल देता,,,

ओहहहह शालू ऐसी बातें मत कर तू अपनी आंखों से देखी है क्या लंड को,,,

नहीं रे अभी तक तो नहीं देखी लेकिन सूरज के पजामे में जिस तरह से आगे वाला भाग उठा हुआ था उसे देखकर तो मैं भी अचंभित हो गई थी कुछ ज्यादा ही बड़ा था पता नहीं कैसा होगा उसका,,,,

देख लेना चाहिए था ना दीदी,,,

तू अगर तैयार होती तो शायद देखा भी लेती,,,

मतलब मैं समझी नहीं,,,

मतलब कि अगर तू सूरज के लिए अपनी दोनों टांगें खोल देती तो शायद वह अपने लंड को अपने पजामे में से बाहर निकालता और मैं देख लेती,,,।

धत्,,, दीदी ऐसा कभी नहीं होगा,,,,(नीलू का इतना कहना था कि तभी शालू अपनी हरकत को आगे बढ़ते हुए अपनी एक उंगली को शालु की बुर में डाल दी और यह पहली बार था जब नीलू अपनी बुर में पतली सी उंगली का प्रवेश महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और अगले ही पल उसकी बुर से बदन रस का फवारा फूट पड़ा वह शालु की हरकत से और उसकी बातों से झड़ रही थी,,,,)
 
आहहहह आहहहहहह शालु,,,(अपनी उत्तेजना पर काबु ना कर सकने की स्थिति में वह शालू के हाथ को कस के पकड़ ली और अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाकर झड़ना शुरू कर दी शालू की यह देखकर हैरान हो गई उसकी हथेली पल भर में ही उसकी मदन रस के फव्वारे से भीग गई,,,,)

हाय दइया नीलू यह तूने क्या करी तूने तो मेरे ऊपर ही मुत दी,,,,

आहहहहह आहहहहहह,,, मुझे नहीं मालूम कि मैं क्या की लेकिन सब कुछ अपने आप ही हो गया लेकिन अभी तो मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,

चल रुक जा अभी मत करना तु सारा बिस्तर खराब कर देगी,,,, चल घर के पीछे चलते हैं वही में अपना हाथ भी धो लुंगी,,,

चल,,,(थोड़ी देर में अपने आप को दुरुस्त करके नीलू बिस्तर पर से नीचे उतरी और शालू भी बिस्तर से नीचे उतर गई और दोनों पेशाब करने के लिए अपने कमरे से बाहर निकल गए)

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शालू अनजाने में ही अपनी उंगली से नीलू को झाड दी थी,,, नीलू को समझ में नहीं आ रहा था उसके बदन में यह सब क्या हो रहा है लेकिन उसे इतना आनंद आया था कि पूछो मत जिंदगी में ऐसा सुख उसने पहली बार प्राप्त की थी,, और इस पल का उसने पूरी तरह से फायदा उठाई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, जवानी से भरी हुई नीलु का यह पहला स्खलन था,,, जिसमें वह पूरी तरह से डूब चुकी थी,,,।

झड़ने के बाद उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी जिसके चलते दोनों बहने अपने कमरे में से निकल कर बाहर आ गई थी,,, वैसे तो दोनों बहनें इस तरह से रात के समय अपने कमरे से बाहर निकलते नहीं थी लेकिन कभी-कभार इसी तरह से तेज पेशाब लगने की वजह से दोनों साथ में ही निकलती थी और अकेले निकलने में उन दोनों को डर लगता था,,, अपने कमरे में से बाहर निकालने के बाद दोनों बहने धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थी,,, क्योंकि वह दोनों नहीं चाहती थी कि उनकी वजह से उनके मां और बाबूजी की नींद खराब हो,,,।

धीरे-धीरे कदम बढ़ाना बिल्कुल भी शोर मत मचाना वरना मा जाग जाएगी,,,(शालू दबे श्वर में नीलू को समझाते हुए बोली,,,)

ठीक है मुझे मत समझा लेकिन तेरी पायल शोर मचा रही है उसका क्या,,,,

हां तु सच कह रही है,,,(अपने पैरों की तरफ देखते हुए शालु बोली और धीरे से नीचे छप गई और अपने पैरों में से पायल को निकलने लगी,,,)

अरे तू यह क्या कर रही है,,,?

रुक तो सही,,,(और इतना कहने के साथ ही चालू अपने दोनों पैरों में से घुंघरू वाले पायल को निकाल कर अपने हाथ में ले ली और मुस्कुराते हुए बोली,,)

ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी,,, अब चल,,,

अरे अरे क्या कर रही है,,,(नीलू उसे रोकते हुए बोली,,)

क्यों क्या हुआ,,,?

अभी तो कुछ नहीं हुआ लेकिन अगर अंधेरे में या पायल कहीं खो गई तो बहुत कुछ हो जाएगा मां तुझे मार डालेगी,,,

हां यह तो तु ठीक कह रही है,,,

जा उधर रख दे,,,(नीलू उसे छोटे से रोशनदान की तरफ हाथ दिखाते हुए पूरी और चालू भी उसकी बात बातें भी तुरंत दोनों पायल को उसी में रख दी और फिर दोनों आगे बढ़ने लगे,,, दो कमरे को छोड़कर तीसरा कैमरा मुखिया और मुखिया की बीवी का था,,, वहां पर पहुंचते ही दोनों लड़कियों के कानों में अपनी मां के कमरे से खूसर फुसर और हंसने की आवाज आने लगी,,, जिसे सुनकर नीलू बोली,,,)

मां बाबु जी अभी भी जाग रहे हैं,,,

हा रे दोनो तो इतनी रात को भी जाग रहे हैं,,, पता नहीं दोनों क्या बातें कर रहे हैं और इतनी रात को हंस भी रहे हैं,,,,(इतना कहते हुए शालू दरवाजे और खिड़की की तरफ देखने लगी कहीं से भी अंदर देखने की जगह बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन अंदर लालटेन जल रही थी इसका पूरा आभास हो रहा था,,,,, शालू को इस तरह से टुकुर-टुकुर दरवाजे और खिड़कियों की तरफ देखते हुए पाकर नीलू बोली,,)

क्या देख रही है,,,?

अरे मैं देख रही हूं कि अंदर देखने की कहीं जगह दिख रही है मैं भी तो देखूं अंदर क्या हो रहा है,,,

पागल हो गई है क्या इस तरह से आधी रात को किसी के कमरे में झांका नहीं जाता,,,(नीलु उसे समझाते हुए बोली,,,)

अरे दूसरे के कमरे में कहां देखने की कोशिश कर रही हूं मैं तो मा बाबुजी के कमरे में देखने की कोशिश कर रही हूं,,,

चल रहने दे जल्दी से मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है कहीं ऐसा ना हो कि यही छूट जाए,,,,

नाना ऐसा गजब मत करना,,, वरना सबको पता चल जाएगा कि नीतू आधी रात को कमरे के बाहर ही मुत देती है,,,,।

आहहहहह,,,,,(उन दोनों बातें कर रही थी कि तभी उसकी मां के हल्की सी चीख की आवाज सुनाई दी लेकिन साथ में हंसने की भी आवाज थी उन दोनों को ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था कि वह क्या बोल रही थी लेकिन अभी तक केवल उसकी मां की ही आवाज आ रही थी उसके बाबूजी की आवाज बिल्कुल भी नहीं आ रही थी,,,, उस आवाज को सुनकर शालू बोली,,,)

मुखिया की बीवी की चुचिया पिता हुआ

पता नहीं अंदर क्या हो रहा है,,,!(शालू को इस बात का आभास था कि उसकी मां कमरे के अंदर चुदाई का खेल खेल रही है चुदवा रही है लेकिन वह खुले शब्दों में बोल नहीं पा रही थी इसीलिए वह देखने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उसने भी आज तक चुदाई होते हुए अपनी आंख से कभी नहीं देखी थी लेकिन उसे देखने की उसके मन में जिज्ञासा बराबर बनी हुई थी लेकिन इस समय अपनी मां के कमरे में देख पाना उसके लिए नामुमकिन सा था क्योंकि ना तो दरवाजे में और ना ही खिड़की में कहीं भी थोड़ी सी जगह नजर नहीं आ रही थी जिससे वह कमरे के अंदर की दृश्य को देख सके उसे इस तरह से कड़ी देखकर नीलु फिर से बोली,,,)

तू चाल चालू वरना कहीं मां को पता चल गया कि हम दोनों कमरे के बाहर खड़े हैं तो गजब हो जाएगा,,,

चल अच्छा मुझे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,(अपना मन मसोस कर शालू बोली फिर दोनों पेशाब करने के लिए आगे बढ़ गए,,,,।

दूसरी तरफ मुखिया के कमरे का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चुका था क्योंकि मुखिया की बीवी अपने बिस्तर पर नरम नरम गद्दे पर संपूर्ण नग्न अवस्था में अंगड़ाई ले रही थी और उसके साथ उसका पति नहीं बल्कि भोला था जो कि उसकी बड़ी-बड़ी चूची को पपाया की तरह दोनों हाथों से पकड़कर मुंह में डालकर पी रहा था और मुखिया की बीवी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,)

सहहहहह आहहहहहह मेरे राजा तू कितना अच्छा प्यार करता है रे,,,,।

ओहहहह मालकिन तुम्हारी चूचियां है बेइंतहा प्यार करने के लायक तभी तो मैं तुम्हारी चूचियों पर मर मिटा हूं। ,,(भोला तकरीबन 1 घंटे से मुखिया की बीवी के कमरे में उसके बिस्तर पर उसकी बीवी के साथ था लेकिन एक घंटे में यह पहला शब्द उसके मुंह से निकला था जिसे सुनकर मदहोश होते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,)

ओहहहह भोले तुझे कितनी बार समझाऊं कि मैं दुनिया के सामने तेरे लिए मालकिन होने की अकेले में तो मुझे मेरा नाम लेकर ही बोल कर शोभा,,,

ओहहहह शोभा रानी,,,, तुम बहुत अच्छी हो तुमने तो मुझे पागल कर दिया है तुम्हारी चूचियां पीने में मुझे बहुत मजा आता है बस इसी तरह से तुम मुझे अपना दूध पिलाया करो,,,

तेरे लिए ही तो है रै,,,,सहहहह आहहहहह आहहहहह बहुत मजा आ रहा है भोला जोर जोर से दबा आहहहहहह,,,(मुखिया की बीवी की बात सुनते ही भोला और जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया,,,,,, तकरीबन 10 मिनट तक शालू और नीलू अपनी मां के कमरे के बाहर खड़ी थी लेकिन इस बीच उसे केवल अपनी मां की ही आवाज सुनाई दे रही थी अगर अंदर से आ रही मर्द की आवाज भी उन दोनों के कान में पड़ जाती तो शायद आज उन दोनों के हाथों अपनी ही मा का भांडा फूट जाता,,, इसीलिए तो मुखिया की बीवी किस्मत की भी बड़ी तेज थी,,,,।

भोला भी पूरी तरह से नग्न अवस्था में बिस्तर पर लेटा हुआ था और मुखिया की बीवी के हाथ में भोला का मोटा तगड़ा काला लंड था जिसे वह जोर-जोर से हिला रही थी,,, और भोला पर प्यार बरसाते हुए बोली,,,।

मुखिया की बीवी और भोला

शालू के पिताजी के आंख में धूल झोंक कर तु कैसे आ गया रे मुझे तो लग रहा था कि तू आज नहीं आ पाएगा,,,

तुम बुलाओ और मैं ना आऊं मेरी रानी कभी ऐसा हो सकता है क्या,,,,

लेकिन तू आया कैसे वह तो खाना खाकर कमरे में ही आ रहे थे,,,

बात तो सही है शोभा लेकिन तुम्हारा पति खाना खाने के बाद थोड़ा पीने का भी शौकीन हो गया है जो कि मेरी ही बदलती और इसीलिए तुम्हें तुम्हारे पति को पिलाने के लिए मेहमान घर में ले गया और वहां पर कुछ ज्यादा ही शराब पिला कर सुला दिया और उसके बाद में तुम्हारे कमरे में आ गया,,,।

ओहहहह मेरे राजा बहुत चालाक हो गया है तु,,,(भोला के खड़े लंड को अपनी मुट्ठी में जोर से भींचते हुए वह बोली। ,)

यह सब तुमसे ही सीखा हूं मेरी,,, अब जल्दी करो मुझे रहा नहीं जा रहा है अपनी बुर की मलाई मुझे खिला दो,,,,।
 
ओहह राजा इतना कहके तूने तो मुझे पागल कर दिया है,,, रुक अभी तुझे मलाई खिलाती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी जगह से उठकर बिस्तर पर बैठ गई और फिर एक टक भोला के मोटे तगड़े लंड की तरफ देखते हुए उसे एक हाथ से पकड़े हुए ही अपने लिए जगह बनाने लगी और थोड़ी देर में वह भोला के ऊपर चढ़ गई वह अपनी गोल-गोल भारी पर काम गांड को भोले के चेहरे पर रख दी और खुद आगे की तरफ झुक गई देखते ही देखते भोला मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पड़कर उसे लगभग फैलाते हुए अपनी जीभ को बाहर निकाला और फिर अपनी जीभ को मुखिया की बीवी की बुर में डाल दिया और से चाटना शुरू कर दिया और मुखिया की बीवी एकदम मस्त होकर अपनी भारी भरकम गांड को गोल-गोल भोला के चेहरे पर घूमाते हुए खुद उसके मोटे तगड़े लंड को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दी,,, अपनी मालकिन की कामुक हरकत को देखकर भोला एकदम से मदहोश हो गया और अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दिया यह उसकी उत्तेजना की निशानी थी कि वह अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था दूसरी तरफ वह अपनी मालकिन की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हथेली में दबोच कर लप लप करके उसकी बुर का रस चाटना शुरू कर दिया देखते ही देखते दोनों पूरी तरह से मदहोश होने लगे,,,,,।

मुखिया की बीवी तो जैसे एकदम से पागल हो गई वह अपनी गोल गोल भारी भरकम गांड को बड़ी तेजी से भोला के चेहरे पर पटकने शुरू कर दी भोला को भी अपनी मालकिन का यह अंदाज बहुत अच्छा लगता था भोला भी अपनी हरकत को बढ़ाते हुए अपनी दो उंगली को एक साथ उसकी गुलाबी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके उसे और मजा देता था,,,। भोला को अच्छी तरह से मालूम था कि मुखिया की बीवी कब चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाती है,,, लोहा गरम होने के बाद ही भोला हथोड़ा मारता था,, और मुखिया के बीवी का इस तरह से मदहोश होकर भोला के चेहरे पर अपनी गांड पटकन इस बात का इशारा करता था कि लोहा गरम हो चुका है,,, और इसी मौके की ताक में,,, जल्दबाजी दिखाते हुए भोला,,, तुरंत मुखिया की बीवी की मांसल कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसे पलट दिया और खूब जग बदलते हुए उसके ऊपर आ गया उसकी दोनों टांगों को खोलकर उसकी कमर को पड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसकी भारी भरकम गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया और फिर अपने आलू बुखारा जैसे मोटे सुपाड़े को मुखिया की बीवी की गुलाबी बुर पर रखकर जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मुखिया की बीवी की बुर में समा गया,,,, और एक जोरदार चीख मुखिया की बीवी के मुंह से निकली और फिर भोला चुदाई शुरू कर दिया,,,।

दूसरी तरफ दोनों बहने धीरे-धीरे घर के पीछे पहुंच चुकी थी और उन दोनों की सोच के मुताबिक बाहर अंधेरा नहीं बल्कि चांदनी रात थी जिसकी वजह से चांदनी पूरे वातावरण में छींटकी हुई थी और सब कुछ एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,, वह दोनों घर के पीछे घनी झाड़ियां के पास पहुंच चुकी थी यहां पर किसी के द्वारा देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि घर के पीछे चारों तरफ दूर-दूर तक खेती ही खेत थे घर एक भी नहीं थे इसलिए दोनों निश्चिंत थे नीलू को तो बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह तुरंत अपने फ्रॉक को उठाकर वहीं पर बैठ गई और पेशाब करना शुरू कर दी चांदनी रात में उसकी गोरी गोरी गांड एकदम चमक रही थी जिसे देख कर खुद शालू के मुंह में पानी आ रहा था उसकी गोल-गोल गांड को देखकर शालू बोली,,,।)

चांदनी रात में तो तेरी गांड कितनी चमक रही है रे,,,

तेरी भी तो चमकती है जरा अपनी सलवार उतार तो सही,,,

लेकिन तेरी कुछ ज्यादा ही चमकता है और तेरी बुर में से देख कितनी सीट की आवाज आ रही है चारों तरफ गूंज रही है,,,।

धत् कैसी बातें करती है तू,,,(शालू की बात सुनकर नीलू शर्मा गई थी और उसकी तरह शालु भी अपनी सलवार की डोरी खोल कर पेशाब करने के लिए बैठ गई थी दोनों बहने एकदम पास में बैठी हुई थी सालों से रहने गया तो अपना हाथ नीलू की गांड पर रख दी और बोली,,,)

आहहहहह,,,, कितनी मुलायम है रे तेरी गांड एकदम मखमल का कपड़ा,,,,

हाए दीदी हाथ हटाओ ना गुदगुदी हो रही है,,,,

उंगली डाली थी तब गुदगुदी नहीं हो रही थी,,,

बहुत जरूरी हो रही थी तभी तो जोरों की पेशाब लग गई,,,।

(दोनों बहने अपनी गांड खोलकर पेशाब करने बैठी हुई थी और इस खूबसूरत मादकता भरे नजारे को देखने वाला इस समय वहां पर मर्द जात का नामोनिशान नहीं था उसकी खूबसूरत गांड को केवल प्रकृति देख रही थी पेड़ पौधे देख रहे थे आसमान में निकला हुआ चांद सितारे देख रहे थे अगर ऐसी हालत में किसी मर्द की नजर दोनों बहनों पर पड़ जाती तो बे कहें दोनों की बुर में उस मर्द का लंड घुसा हुआ होता,,, थोड़ी ही देर में पेशाब करने के बाद दोनों बहने अपने कपड़ों को दुरुस्त करके घर के आगे वाले भाग में आ गए और दोनों बड़ी-बड़ी से हेड पंप चला कर अपना हाथ मुंह धो कर वापस अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगे,,, अपनी मां के कमरे के पास से गुजरते हुए दोनों को किसी भी तरह की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी तो वह दोनों समझ गए की उसकी मां और बाबूजी सो गए हैं लेकिन उन दोनों को कहां मालूम था कि अंदर चुदाई का खेल चालू था और इस समय उसकी मां की बुर में उसके बाबूजी का नहीं बल्कि उनके नौकर भोला का लंड घुसा हुआ था,,, दोनों बहने अपने कमरे में जा चुकी थी,,,, और इस समय उन दोनों की मां भोला के ऊपर चढ़ी हुई थी और भोले का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में अंदर तक घुसा हुआ था और वह खुद अपनी गांड को उसके लंड पर पटक रही थी,,,।

एक तरफ भोला मुखिया की बीवी की जवानी में पूरी तरह से डूबा हुआ था और दूसरी तरफ उसकी जवानी से लदी हुई बीवी बिस्तर पर करवटें बदल रही थी,,, सुनैना वैसे तो बेहद संस्कारी औरत थी और मर्यादा में रहने वाली औरत थी लेकिन जिस तरह से सभी औरतों को पेट की भूख के साथ-साथ बदन की भी भूख सताती है इस तरह से सुनैना की भी हालत थी सुनैना को भी अपने मर्द की जरूरत थी उसके मोटे तगड़े लंड को सुनना भी अपनी बुर के अंदर महसूस करना चाहती थी चुदवाना चाहती थी,,,,, लेकिन वह मजबूर हो चुकी थी अपने पति की आदत से खाना खाने के बाद से ही वह मुखिया के खेत पर काम करने का बहाना बनाकर घर से निकल गया था सुनैना को तो ऐसा ही लग रहा था कि उसका पति वाकई में मुखिया के खेत में काम कर रहा होगा लेकिन उसे क्या मालूम था कि इस समय उसका पति किसी और के खेत को जोत रहा था जो कि उसके खुद का खेत सूख रहा था,,,।

अपने पति की राह देखती हुई सुनैना

सुनैना सोने से पहले अपनी साड़ी को उतार कर रख दी थी और इस समय केवल पेटिकोट और ब्लाउज में ही थी और इस अवस्था में वह पूरी तरह से जवानी से गदराई हुई दिखाई दे रही थी,,, लालटेन की पीली रोशनी में उसका खूबसूरत गोरा बदन सोने की तरह चमक रहा था उसके छाती की शोभा बढ़ा रहे हैं उसके दोनों चूचियां दशहरे आम की तरह एकदम खेल रहे थे मांसल चिकनी कमर और पेट के बीच में उसकी नाभि एकदम गहरी थी जो कि उसकी छोटी सी बुर की तरह नजर आती थी,,,, सुनैना से रहा नहीं जा रहा था बार-बार वह अपने पति का रास्ता देखते हुए वह कमरे के दरवाजे पर खड़ी होकर उसकी राह देखती रहती थी लेकिन अफसोस दूर-दूर तक उसका पति कहीं नजर नहीं आ रहा था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था और कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी वह कुछ देर तक दरवाजे पर इस तरह से बैठकर अपने पति का इंतजार करती रही लेकिन तक हर करूंगा वापस अपने कमरे में आ गई और बिस्तर पर करवट बदलते हुए कब उसे नींद आ गई उसे भी पता नहीं चला,,,।

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एक तरफ जहां जवान हो चुके सूरज की हालत पहली बार नीलू की या युं कहलो की पहली बार किसी औरत की नंगी बुर के दर्शन करके उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वहीं दूसरी तरफ यह जानकर कि सूरज नीलू की बुर को नजर भर कर देख रहा था इस बात को जानते ही नीलू पूरी तरह से उत्तेजना से सिहर उठी थी,,, उसकी जानकारी में पहली बार किसी जवान लड़के ने उसकी बुर के दर्शन किए थे इस बात को जानते ही नीलू पूरी तरह से मचल उठी थी और इसका पूरा फायदा उठाते हुए पूरी तरह से जवान हो उठी शालू अपनी बहन नीलू की बुर को अपनी मुट्ठी में पूरी तरह से भींच ली थी,,, और फिर अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर उसे झड़ने पर मजबूर कर दी थी,,, और फिर दोनों बहने पेशाब करने के लिए घर के पीछे की तरफ निकल गई थी घर से निकलते समय उन्हें अपनी मां के कमरे में से खुसर फुसर की आवाज सुनाई दे रही थी उन दोनों को ऐसा ही लग रहा था कि उनकी मां और बाबूजी होंगे लेकिन उन्हें कहा मालूम था कि उनके पीठ पीछे उनकी मां कितना रंगरेलियां मनाती है और वह भी अपने ही नौकर भोले के साथ जो की इत्तेफाक से सूरज का ही बाप था ,, इस बात से अनजान दोनों बहने पेशाब करके अपने कमरे में वापस लौट आई थी लेकिन भोला रात भर नीलू और शालू दोनों की मां की जमकर चुदाई करता रहा,,,।

दूसरी तरफ सूरज की भी हालत खराब हो चुकी थी क्योंकि मर्दों की उत्तेजना बढ़ाने वाली औरतों की उत्तेजना के केंद्र बिंदु को जो उसने अपनी आंखों से देख लिया था,,। और उसी को देखने के बाद में पूरी तरह से पागल हो चुका था मदहोश हो चुका था सोते जागते उठते बैठते उसकी आंखों के सामने केवल नीलू की कचोरी जैसी फुली हुई कोरी बुर दिखाई देती थी,,, जिसे याद करते ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जाता था उसे हमेशा लगने लगा था कि जैसे वह पहले वाला सूरज नहीं रह गया था क्योंकि उसके दिलों दिमाग पर अब हमेशा औरतों की ही यादें उनके अंग उनका चलना उनका बोलना उनका हंसना उनके अंगों का मरोड़ उठाव बस यही घूमता रहता था,,,। और वैसे भी इसमें उसका कोई दोष नहीं था क्योंकि वह उम्र के ऐसे दौर से गुजर रहा था जहां पर औरतों के प्रति जवान खूबसूरत लड़कियों के प्रति आकर्षण होना लाजिमी था और इससे दुनिया का कोई भी मर्द नहीं बच पाया था और उसे अच्छा भी लग रहा था,,,।

एक तरफ भोला जहां मुखिया की बीवी के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझा रहा था वहीं दूसरी तरफ अपनी बीवी के साथ नाइंसाफी कर रहा था,, जहां बोला कि हर एक रात मुखिया की बीवी के बिस्तर पर गुजरती थी वहीं दूसरी तरफ उसकी बीवी बिस्तर पर केवल करवट बदलकर अंगड़ाई लेकर अपनी रात गुजार रही थी,, कभी-कभी तो उसे अपने पति पर बहुत गुस्सा आता था क्योंकि वह रात भर प्यासी रह जाती थी,,, इसलिए एक दिन जब दोपहर में भोला खाना खा रहा था,,, उसकी बीवी सुनैना उसे गुस्से में खाना परोस रही थी,,, यह देख कर भोला बोला,,।

यह तुझे हो क्या गया है रे सुनैना इस तरह से कोई खाना परोसता है क्या और वह भी अपने ही पति को,,,

कोई परोसता हो कि ना परोसता हो लेकिन मैं तो तुम्हें इसी तरह से खाना परोसूंगी,,,

अरे वह क्यों भला,,,,(खाने की थाली को अपने हाथों से अपनी तरफ खींचते हुए)

मैं कौन हूं तुम्हारी,,,, क्या लगती हूं तुम्हारी,,,(गुस्से से थाली में रोटी रखते हुए)

अरे आज तुझे हो क्या गया है,,,

मुझे पूछने की जगह अपने आप से पूछो जो दिन रात मुखिया के खेत में रहते हो मुखिया की बीवी जो कहती है वह करते हो,,,(मुखिया की बीवी का जिक्र आते ही भोले के माथे पर पसीना उपसने लगा,,,)

यह क्या कह रही है तू,,,, वह लोग तो हमारे मालिक है उनका काम करते हैं तभी तो पैसा मिलता है,,,

अरे और भी तो मजदूर है जो शाम होते ही अपने घर चले आते हैं लेकिन तुम क्यों नहीं आते मुझे तो लगता है की मुखिया की बीवी के साथ जरूर तुम्हारा कुछ चल रहा है,,,(गुस्से में अपनी जगह से उठकर लोटा में पानी भरने लगी और भोले अपनी बीवी के मुंह से मुखिया की बीवी के साथ चक्कर वाली बात को सुनकर एकदम हैरान हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी बीवी को पता तो नहीं चल गया है लेकिन फिर भी बात को बदलते हुए वह बोला,,,)

अरे भाग्यवान जरा अकल से काम ले कहां मैं और कहां वह जमीदार की बीवी वह तो अपने पास भटकने भी ना दे,,,,

तो रात को वहां क्या करते रहते हो,,,?

खेतों में पानी देते रहता हूं और क्या करते रहता हूं,,,, आखिरकार में मजदूर हूं मजदूरी करने पर ही पैसे मिलेंगे ना कि बेवजह कोई पैसे दे देगा वह तो अच्छे हैं,,, मुखिया की मुझे ही सबसे पहले बुलाते हैं वरना तू जो कह रही है वह सच है कि और भी मजदूर हैं गांव में लेकिन मेरा काम मलिक को पसंद है और इसी से अपना घर भी चलता है,,,,(भोला बड़े चालाकी से अपनी मजबूरी की दुहाई देकर सफाई दे रहा था जिसका प्रभाव सुनैना पर भी पड़ रहा था लेकिन फिर भी वह गुस्से में बोली,,,)

पति का फर्ज होता है घर चलाना लेकिन पति का और भी कोई फर्ज होता है कि नहीं अपनी बीवी के साथ रात को मैं हमेशा करवट बदलते हुए तुम्हारा इंतजार में कब सो जाती हो मुझे पता ही नहीं चलता जब तक जागती हूं तब तक रास्ता देखती रहती हूं कि अब आओगे अब आओगे,,,, लेकिन नतीजा कोई नहीं निकलता मुझे तो शक होता है कि कहीं दूसरी औरतों के साथ चक्कर तो नहीं है तुम्हारा,,,।

फिर वही बकवास करने लगी,,,,(निवाला मुंह में डालते हुए बोला लेकिन केला खाया भोला पूरी तरह से अनुभव से भरा हुआ था औरतों के मामले में वह सब कुछ जानता था और उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी बीवी किस लिए इतनी गुस्से में है क्योंकि वाकई में बहुत दिन हो गए थे वह अपनी बीवी को शरीर सुख नहीं दिया था उसकी जमकर चुदाई नहीं किया था और इसी का दुख उसकी बीवी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,,,, उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था की मुखिया की बीवी के मुंह में वह अपनी बीवी को सुख देना भूल गया था जो की जरूरी भी था अगर उसे अपने मुखिया की बीवी के चक्कर को एक राज की तरह रखना है तो उसे अपनी बीवी के साथ भी संबंध पहले की तरह रखना होगा ताकि उसकी बीवी को किसी भी प्रकार का शक ना हो वर्ना सारा मामला बिगड सकता था,,,। इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

मैं जानता हूं तू किस लिए नाराज है चुदवाने के लिए,,,

(भोला एकदम खुले शब्दों में बोला तो सुनैना एकदम से शर्मा गई,,, और गुस्से में बोली,,,)

पागल हो गए हो क्या मैं ऐसा कब कही,,,,(सुनैना जानबूझकर अपना बचाव करते हुए बोल रही थी क्योंकि भले ही वह अपने पति से चुदवाने के लिए नाराज थी लेकिन सुनैना भी एकदम संस्कारी औरत थी और इस तरह के खुले शब्दों उसे सिर्फ रात को हम बिस्तर होते समय ही अच्छे लगते थे ईस तरह दोपहर में नहीं,,,)

अरे तुम्हारे कहने का मतलब तो यही था,,,

मेरे कहने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं था मैं यह चाहती हु कि तुम रात को मेरे साथ रहो बस,,,

अरे मेरी रानी ऐसा ही होगा बस कुछ दिन की बात और है लेकिन मैं सारी कसर दिन में ही निकाल दूंगा,,,

रहने दो कोई जरूरत नहीं है,,,,(झूठ-मूठ का मुंह बनाते हुए सुनैना बोली,,,)

नहीं नहीं मैं सच कह रहा हूं मैं जानता हूं कि मैं तुम्हारा कसूरवार हूं लेकिन क्या कर सकता हूं,,, घर चलाने के लिए घर से बाहर निकलना ही पड़ता है,,,,।

(भोला अपनी चालकी भरी बातों में अपनी बीवी को पूरी तरह से बहला लिया था,,, और उसकी बीवी को पूरा विश्वास भी हो गया था कि उसका पति झूठ नहीं बोल रहा था कामकाज में ही उलझने के कारण वह उसके साथ समय नहीं बिता पा रहा था इसलिए उसके मन से गिला शिकवा दूर हो चुका था भोला खाना भी खा चुका था और इस समय वह अपनी बीवी की प्यास बुझाने के बारे में सोच रहा था क्योंकि रात को उसका रुकना संभव नहीं था क्योंकि रात को उसे फिर से मुखिया की बीवी के पास जाना था,,,, सुनैना झूठे बर्तन लेकर घर के कोने में धोने के लिए रखने लगी और उसके झुकने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उभर आई जो कि कई हुई साड़ी में और ज्यादा बड़ी लग रही थी जिस पर नजर पडते ही भोला की धोती में हलचल होने लगी और यही मौका उसे ठीक भी लग रहा था वह तुरंत अपनी बीवी के पास पहुंचकर उसे पीछे से अपनी बाहों में जाकर उसे उठा दिया,,,)

अरे अरे छोड़ो यह क्या कर रहे हो,,,, कोई देख लेगा,,,(वह समझ गई थी कि उसका पति चुदवासा हो गया है)

कोई नहीं देखेगा मेरी रानी बच्चे तो बाहर है,,,

(इतना कहते हुए वह अपनी बीवी को गोद में उठाए हुए ही अपने कमरे में नहीं बल्कि जहां आलू प्याज राशन रखा रहता है उसे कमरे में ले जाने लगा,,, यह देखकर वह बोली)

अरे यहां कहां ले जा रहे हो,,,?

जहां पर ठीक रहेगा अपने कमरे में ले जाऊंगा तो अगर कोई आ गया तो सिद्ध कमरे की तरफ ही आएगा और यहां पर किसी को शक भी नहीं होगा,,,

हाय दैया तुम तो एकदम उतावले हो गए हो,,,,

क्या करूं मेरी रानी,, तूने मेरी धोती में सोए हुए शेर को जगा दी है,,, उसका भुगतान तो तुझे करना ही होगा,,,(और ऐसा कहते हुए अपनी बीवी को उठाए हुए ही वह दरवाजे के पास पहुंच गया और खुद अपनी बीवी से दरवाजा खोलने के लिए बोला जो की सुनैना भी अपने पति की हालत को देखकर चुदवासी हो चुकी थी उसकी भी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, वह भी जल्दबाजी दिखाते हुए खुद अपने हाथों से दरवाजा खोल दी,,,, और भोला अपनी बीवी को अनाज वाले कमरे में लेकर घुस गया यहां पर वह अपनी बीवी को जमीन पर लेट नहीं सकता था क्योंकि चारों तरफ आलू प्याज और सब्जियां रखी हुई थी गेहूं रखे हुए थे चावल रखे हुए थे,,,, सरसों रखा हुआ था नीचे बिल्कुल भी जगह नहीं थी,,,, इसलिए वह अपनी बीवी को गोद में से नीचे उतरते ही तुरंत उसे अपनी बाहों में भरकर उसके गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया,,,)

सहहहहह आहहहहहह,,,(जो भी करना मेरे राजा जल्दी करना,,, अपने पति की हरकत से उत्तेजित स्वर में सुनैना बोली)

मैं बिल्कुल भी देर नहीं करूंगा मेरी रानी,,,(और इतना कहने के साथ ही अपनी बीवी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबोचते हुए वह जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,, भोला का हाथ खेतों में काम कर करके बहुत ज्यादा मजबूत हो गया था इसलिए उसका इस तरह से ब्लाउज के ऊपर से चूचियों को दबाना सुनैना के लिए असहनीय तो था ही लेकिन उसे मजा भी बहुत आ रहा था,,,, और पल भर में उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकालना शुरू हो गई थी,,,, बिल्कुल भी देर ना करते हुए भोला अपनी औरत के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया और देखते-देखते वह एक झटके में ही अपने बीवी के ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर उसकी खरबूजे जैसी चूचियों को बाहर निकाल दिया और उसे जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,)

ओहहहह ऐसा लग रहा है कि जैसे बहुत दिनों बाद मैं तुम्हारी चूचियों को देख रहा हूं,,,,

काम के ही चक्कर में पड़े रहोगे तो ऐसा ही लगेगा,,,

अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मेरी रानी अगर मुझे रात को खेतों में जाना पड़ा तो दिन में ही तुम्हारी चुदाई कर दूंगा,,, ताकि रात को बिस्तर पर तुम्हें करवट ना बदलना पड़े,,,

ओहहहह मेरे राजा,,,,आहहहह,,,(एकदम से सुनैना के मुंह से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी जब भोला उसकी चूची को मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,, दोनों को बहुत मजा आ रहा था वैसे तो बोला अक्सर इस तरह का आनंद मुखिया की बीवी से लेट ही रहता था लेकिन सुनैना के लिए तो बहुत दिन गुजर गए थे इस तरह के सुख की कल्पना किए हुए इसलिए वह मदहोश हुए जा रही थी मस्त हुए जा रही थी,,,, जहां एक तरफ भोला,,, अपनी बीवी की चूची को मुंह में लेकर जी भर कर पी रहा था वहीं दूसरी तरफ दूसरे हाथ से उसकी साड़ी को खोल रहा था दोपहर में ही भला उसे नंगी करके चोदने का मन बना दिया था वैसे भी औरतों को छोड़ने का मजा तभी आता है जब उनके बदन पर एक भी वस्त्र नहीं होता और इस बात को भोला भली भांति जानता था,,,।
 
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