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- Dec 5, 2013
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आख़िर में हम तीनो हाँफते हुए एक दूसरे के नंगे जिस्मों से लिपटकर काफ़ी देर तक लेटे रहे, नंगी लड़कियों को देखकर उसके लॅंड ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी यानी अब वो चुदाई के लिए तैयार था,
पर मैं नही
एक तो मैं अभी अपनी फर्स्ट चुदाई के लिए तैयार नही थी, उपर से टाइम भी काफ़ी हो चूका था, मैं पापा को बिना किसी बात के नाराज़ भी नही करना चाहती थी, इसलिए उन दोनो को एंजाय करने के लिए छोड़कर मैं वहां से निकल आई, पर आज एक नया जोश भर चूका था मुझमें , सैक्स के पहले एनकाउंटर को महसूस करके मेरा शरीर फूला नही समा रहा था, जगह - 2 से रिस रहा था वो, उसे कुछ और भी चाहिए था
और मुझे पता था की वो कहाँ और कैसे मिलेगा
***********
अब आगे
************
जब मैं घर पहुँची तो रात के 9.30 बज रहे थे
ये तो अच्छा हुआ की मैने पापा से पहले ही परमिशन ले ली थी वरना इस वक़्त बिना बताए मैं घर से बाहर रहती तो अंदर जाने से पहले मेरी फट्ट कर हाथ में आ रही होती
माँ ने दरवाजा खोला और मुझे सवालिया नज़रों से देखा की आज एकदम से कैसे प्रोग्राम बन गया
पर उन्होने कुछ कहा नही क्योंकि माँ को पापा आने के बाद बता ही चुके थे की मैं आज देर से आने वाली हूँ
पापा रोज की तरह ड्रॉयिंग रूम में बैठकर पेग मार रहे थे
मैने उन्हे हाय हेलो किया और अपने रूम की तरफ चल दी
अंदर जाते हुए मैं उनकी नज़रें अपने कुल्हो पर महसूस कर पा रही थी
इसलिए मेरी चाल भी अपने आप थोड़ी नशीली हो गयी
रूम में जाकर मैने कमरा बंद किया और अपने सारे कपड़े निकाल डाले
माँ घर पर ना होती तो शायद दरवाजा अंदर से बंद भी ना करती
पापा को तो मैं दिखाना चाहती थी अपने जिस्म का हर हिस्सा
ताकि वो समझ सके की उनकी लड़की अब पूरी तरह से जवान हो गयी है
पर अपने रूम में नंगी होकर रहने में मुझे रोमांच बहुत मिलता है
अपने जिस्म पर ठंडी हवा का एहसास मुझमें एक गुदगुदी सी भर देता है
मैं बेड पर लेट गयी और अपने अंगो को सहलाते हुए आज शाम को श्रुति के घर पर हुई सारी बाते याद करके मज़े लेने लगी

उन लम्हो को याद करते-2 मैं फिर से उत्तेजित होने लगी
मेरी चूत से फिर से वही गाड़े रस की बूंदे रिसने लगी
मैने आज तक अपनी चूत का रस चखा नही था
और वो मैं आज करने वाली थी
ताकि जान सकूँ की मेरी दुकान की मिठाई कितनी मीठी है
और सामने वाले को कितनी पसंद आएगी वो
मैने अपनी दो उंगलियाँ चूत में डुबोई और उसमें ढेर सारा शहद इकट्ठा करके उन्हे धीरे से चूस लिया
उम्म्म्मममममममम….
ये तो सच में काफ़ी मजेदार है
एकदम फ्रेशनेस के साथ
अन्नानास के जूस जैसा
जिसमें मीठापन और खट्टापन एकसाथ होता है
शायद इसलिए ऐसा स्वाद था क्योंकि मुझे फ्रूट्स बहुत पसंद थे
ख़ासकर संतरा , अमरूद और सेब
इन सबका स्वाद मैं महसूस कर पा रही थी अपनी चूत के रस में
शून्य से दस के पैमाने पर मैं इसे 9.5 अंक दूँगी

तभी माँ ने दरवाजा खटकाया
“सलोनी…..ओ बेटा…..चल खाना खा ले, फिर मुझे सोना भी है, इस वक़्त तक तो मुझे नींद के झोंके आने लगते है….जल्दी आजा मेरी बच्ची ”
माँ भी अपनी जगह सही थी
बेचारी सुबह 7 बजे से जाग कर सारा खाना बनाती है और फिर पूरा दिन साफ़ सफाई, धुलाई और खाना बनाने में निकल जाता है
ऐसे में तो 10 बजने तक नींद आना स्वाभाविक है
मैं नमने मन से उठी और बाथरूम में जाकर शावर ऑन करके खड़ी हो गयी और रगड़ -2 कर नहाने लगी
और नहाते हुए मुझे अपनी पुस्सी को साबुन लगाकर रगड़ने का बहुत शौंक है

घर आकर ये मेरा रोज का नीयम था
इसी बहाने मास्टरबेट भी कर लिया करती थी
पर आज उसका टाइम नही था
आज लेट भी तो आई थी घर पर
मैने जल्दी-2 नहाकर एक टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन ली और रोज की तरह अंदर कुछ भी नही
शीशे में मैं अपनी टी शर्ट के अंदर खड़े निप्पल्स सॉफ देख पा रही थी
माँ हमेशा मुझे डाँट्ती थी ऐसे घर पर बिना ब्रा के रहने के
पर अभी वो शायद देख नही पाएगी
मैं सीधा जाकर बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी
सामने पापा बैठे थे
जो मुझे अपने नन्हे स्तनो को हिलाकर चलते देखकर लार टपका रहे थे
उनकी पुलिसिआ नज़रों ने मेरे बिन ब्रा के निप्पलों को दूर से ही ताड़ लिया था
इसलिए उन्हे देखकर वो एक ही बार में मोटा घूंठ पीकर अपने होंठो को दांतो तले रगड़ने लगे
माँ जब खाना लेकर आई तो मैं नीचे झुक गयी ताकि वो मेरी छाती की तरफ ना देख सके
थाली रखकर वो हम दोनो बाप बेटी को गुड नाइट बोलकर सोने चली गयी
और मुझे हिदायत देकर गयी की पापा को खाना गर्म करके देने के लिए
मैने हां में सिर हिला दिया और पापा को देखने लगी
उनके चेहरे पर भी मेरी तरह एक स्माइल थी
दोनो माँ के जाने से खुश थे
उनके जाते ही मैं छाती चौड़ी करके बैठ गयी
अपनी छातियाँ निकालकर
अब मुझे कोई डर नही था
बल्कि उन्हे तो मैं दिखाना चाहती थी

पापा भी मेरी रस भरी थैलियों को देखकर अपनी लार टपकाने लगे
मैं मंद-2 मुस्कुरा रही थी और आराम से खाना खा रही थी
बीच-2 में पापा मुझसे इधर उधर की बाते करते जा रहे थे
पर उनका ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी छातियों पर ही था
इन मर्दों को सिर्फ़ अपनी छातियाँ दिखाकर अपने इशारों पर नचाया जा सकता है इतना तो मैं जान ही चुकी थी
कल रात की ही तो बात है
कैसे मैने अपनी इन ब्रेस्ट्स को पापा की सख़्त छातियों से रगड़ाई करवाई थी
उम्म्म्मम
उन पलों को याद करके मेरे निप्पल्स फिर से सख़्त हो चुके थे
और पापा उन्हे आराम से देख पा रहे थे
आज पापा के पेग थोड़े मोटे बन रहे थे
शायद मेरे हुस्न का असर था
वो अपनी तरफ से पहल करना नही चाहते थे, बाप बेटी का जो रिश्ता था
और मैं चाहे पापा से ना डरने की लाख बाते कर लूँ , पर उनका पुराना डर अंदर से मुझे कुछ भी ग़लत करने से रोक रहा था
इसलिए मैने सब वक़्त पे छोड़ दिया था
और ये भी सोच लिया था की पापा ने अगर पहल की तो मैं भी पीछे नही रहूंगी
ये सोचकर ही मैं मुस्कुरा दी
पर मैं नही
एक तो मैं अभी अपनी फर्स्ट चुदाई के लिए तैयार नही थी, उपर से टाइम भी काफ़ी हो चूका था, मैं पापा को बिना किसी बात के नाराज़ भी नही करना चाहती थी, इसलिए उन दोनो को एंजाय करने के लिए छोड़कर मैं वहां से निकल आई, पर आज एक नया जोश भर चूका था मुझमें , सैक्स के पहले एनकाउंटर को महसूस करके मेरा शरीर फूला नही समा रहा था, जगह - 2 से रिस रहा था वो, उसे कुछ और भी चाहिए था
और मुझे पता था की वो कहाँ और कैसे मिलेगा
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अब आगे
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जब मैं घर पहुँची तो रात के 9.30 बज रहे थे
ये तो अच्छा हुआ की मैने पापा से पहले ही परमिशन ले ली थी वरना इस वक़्त बिना बताए मैं घर से बाहर रहती तो अंदर जाने से पहले मेरी फट्ट कर हाथ में आ रही होती
माँ ने दरवाजा खोला और मुझे सवालिया नज़रों से देखा की आज एकदम से कैसे प्रोग्राम बन गया
पर उन्होने कुछ कहा नही क्योंकि माँ को पापा आने के बाद बता ही चुके थे की मैं आज देर से आने वाली हूँ
पापा रोज की तरह ड्रॉयिंग रूम में बैठकर पेग मार रहे थे
मैने उन्हे हाय हेलो किया और अपने रूम की तरफ चल दी
अंदर जाते हुए मैं उनकी नज़रें अपने कुल्हो पर महसूस कर पा रही थी
इसलिए मेरी चाल भी अपने आप थोड़ी नशीली हो गयी
रूम में जाकर मैने कमरा बंद किया और अपने सारे कपड़े निकाल डाले
माँ घर पर ना होती तो शायद दरवाजा अंदर से बंद भी ना करती
पापा को तो मैं दिखाना चाहती थी अपने जिस्म का हर हिस्सा
ताकि वो समझ सके की उनकी लड़की अब पूरी तरह से जवान हो गयी है
पर अपने रूम में नंगी होकर रहने में मुझे रोमांच बहुत मिलता है
अपने जिस्म पर ठंडी हवा का एहसास मुझमें एक गुदगुदी सी भर देता है
मैं बेड पर लेट गयी और अपने अंगो को सहलाते हुए आज शाम को श्रुति के घर पर हुई सारी बाते याद करके मज़े लेने लगी

उन लम्हो को याद करते-2 मैं फिर से उत्तेजित होने लगी
मेरी चूत से फिर से वही गाड़े रस की बूंदे रिसने लगी
मैने आज तक अपनी चूत का रस चखा नही था
और वो मैं आज करने वाली थी
ताकि जान सकूँ की मेरी दुकान की मिठाई कितनी मीठी है
और सामने वाले को कितनी पसंद आएगी वो
मैने अपनी दो उंगलियाँ चूत में डुबोई और उसमें ढेर सारा शहद इकट्ठा करके उन्हे धीरे से चूस लिया
उम्म्म्मममममममम….
ये तो सच में काफ़ी मजेदार है
एकदम फ्रेशनेस के साथ
अन्नानास के जूस जैसा
जिसमें मीठापन और खट्टापन एकसाथ होता है
शायद इसलिए ऐसा स्वाद था क्योंकि मुझे फ्रूट्स बहुत पसंद थे
ख़ासकर संतरा , अमरूद और सेब
इन सबका स्वाद मैं महसूस कर पा रही थी अपनी चूत के रस में
शून्य से दस के पैमाने पर मैं इसे 9.5 अंक दूँगी

तभी माँ ने दरवाजा खटकाया
“सलोनी…..ओ बेटा…..चल खाना खा ले, फिर मुझे सोना भी है, इस वक़्त तक तो मुझे नींद के झोंके आने लगते है….जल्दी आजा मेरी बच्ची ”
माँ भी अपनी जगह सही थी
बेचारी सुबह 7 बजे से जाग कर सारा खाना बनाती है और फिर पूरा दिन साफ़ सफाई, धुलाई और खाना बनाने में निकल जाता है
ऐसे में तो 10 बजने तक नींद आना स्वाभाविक है
मैं नमने मन से उठी और बाथरूम में जाकर शावर ऑन करके खड़ी हो गयी और रगड़ -2 कर नहाने लगी
और नहाते हुए मुझे अपनी पुस्सी को साबुन लगाकर रगड़ने का बहुत शौंक है

घर आकर ये मेरा रोज का नीयम था
इसी बहाने मास्टरबेट भी कर लिया करती थी
पर आज उसका टाइम नही था
आज लेट भी तो आई थी घर पर
मैने जल्दी-2 नहाकर एक टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन ली और रोज की तरह अंदर कुछ भी नही
शीशे में मैं अपनी टी शर्ट के अंदर खड़े निप्पल्स सॉफ देख पा रही थी
माँ हमेशा मुझे डाँट्ती थी ऐसे घर पर बिना ब्रा के रहने के
पर अभी वो शायद देख नही पाएगी
मैं सीधा जाकर बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी
सामने पापा बैठे थे
जो मुझे अपने नन्हे स्तनो को हिलाकर चलते देखकर लार टपका रहे थे
उनकी पुलिसिआ नज़रों ने मेरे बिन ब्रा के निप्पलों को दूर से ही ताड़ लिया था
इसलिए उन्हे देखकर वो एक ही बार में मोटा घूंठ पीकर अपने होंठो को दांतो तले रगड़ने लगे
माँ जब खाना लेकर आई तो मैं नीचे झुक गयी ताकि वो मेरी छाती की तरफ ना देख सके
थाली रखकर वो हम दोनो बाप बेटी को गुड नाइट बोलकर सोने चली गयी
और मुझे हिदायत देकर गयी की पापा को खाना गर्म करके देने के लिए
मैने हां में सिर हिला दिया और पापा को देखने लगी
उनके चेहरे पर भी मेरी तरह एक स्माइल थी
दोनो माँ के जाने से खुश थे
उनके जाते ही मैं छाती चौड़ी करके बैठ गयी
अपनी छातियाँ निकालकर
अब मुझे कोई डर नही था
बल्कि उन्हे तो मैं दिखाना चाहती थी

पापा भी मेरी रस भरी थैलियों को देखकर अपनी लार टपकाने लगे
मैं मंद-2 मुस्कुरा रही थी और आराम से खाना खा रही थी
बीच-2 में पापा मुझसे इधर उधर की बाते करते जा रहे थे
पर उनका ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी छातियों पर ही था
इन मर्दों को सिर्फ़ अपनी छातियाँ दिखाकर अपने इशारों पर नचाया जा सकता है इतना तो मैं जान ही चुकी थी
कल रात की ही तो बात है
कैसे मैने अपनी इन ब्रेस्ट्स को पापा की सख़्त छातियों से रगड़ाई करवाई थी
उम्म्म्मम
उन पलों को याद करके मेरे निप्पल्स फिर से सख़्त हो चुके थे
और पापा उन्हे आराम से देख पा रहे थे
आज पापा के पेग थोड़े मोटे बन रहे थे
शायद मेरे हुस्न का असर था
वो अपनी तरफ से पहल करना नही चाहते थे, बाप बेटी का जो रिश्ता था
और मैं चाहे पापा से ना डरने की लाख बाते कर लूँ , पर उनका पुराना डर अंदर से मुझे कुछ भी ग़लत करने से रोक रहा था
इसलिए मैने सब वक़्त पे छोड़ दिया था
और ये भी सोच लिया था की पापा ने अगर पहल की तो मैं भी पीछे नही रहूंगी
ये सोचकर ही मैं मुस्कुरा दी




















