अपडेट ::: 131
**************
नेक्स्ट डे
**********
दन्न को होश आया तो उसने खुद को एक चेयर पर बंधे हुए पाया, दन्न के बदन पर एक भी कपडा नहीं था.. दन्न की आँखों अपने लुंड को घूरते हुए खुली थी.. उसका सर्र झुका हुआ था...
जब्ब उसे होश आया तो सबसे पहले उसे अपना नंगा लुंड hi दिखा, अपने लुंड को देख वो बोखला गया और उठने की कोशिश करने लगा, लेकिन बंधा हुआ होने की वजा से वो महज़ हिल hi सका.. उठने की नाकाम कोशिश के बाद दन्न ने अपना सर्र उठाया और चरों तरफ देखने लगा..
एक बार फिरसे दन्न उछाल पड़ा, पारर वो भूल गया था क वो उछाल कूद की हालत में नहीं रहा है.. दन्न ने सामने देखा तो अपने सामने कई लोगों को पाया, औरतों की तादाद ज़यादा थी, और सबसे आगे दन्न को श्वेता hi दिखी.. दन्न किसी और को न देख कर श्वेता को देखने लगा... दन्न के चेहरे पर हवाइयां उजड़ने लगी थीई..
दन्न इस समय पैलेस के बेसमेंट में था.. और सब इस समय उसके सामने मौजूद थे, दन्न को पूरा दिन और पूरी रात बेहोश रखा गया था.. अगले दिन ब्रेकफास्ट के बाद उसे होश में लाया गया था..
दन्न श्वेता को देख कर दांग रह गया था, वो सबब समझ गया क अब्ब वो एक ऐसे शिकंजे में पहनास चूका है, जिससे बच पाना उसके लिए मुमकिन नहीं है..
गुफा में hi वो सबब समझ गया था क उसका खेल अब्ब ख़तम हो चूका है, जिस इंसान की बेटी hi उसे बर्बाद कर देने पर तुली हुई हो. वो इंसान कैसे किसी के चुंगल से बच सकता है.. और फिर जैसी लाइफ दन्न ने जी थी.. ऐसा सबब उसके साथ तो होना हो था.... पारर दन्न शायद ये नहीं जानता था क उसके साथ होने क्या वाला है..
मैं भी माँ के पास hi खड़ा था.. पूजा मेरे दूसरी साइड थी, तो मेरी तितलियाँ माँ के दूसरी साइड में कड़ी थीईईई...
माँ दन्न को ग़ुस्से से देखने की बजाये शांत नज़रों से देख रही थी, कल से hi कई बार सब hi आ आ कर दन्न को देख चुके थे... कल जब दन्न को यहाँ लाया गया था तो माँ शदीद ग़ुस्से में आ गई थी..
माँ पहले तो बहुत ग़ुस्से में आई थी, पारर फिररर माँ ने जल्द hi खुद पर काबू भी पा लिया था.. वो अब्ब अंदर से बहुत स्ट्रांग बन्न चुकी थी, मुझसे हुई शादी ने माँ को पूरी तरह से अंदर से और बहार से बदल कर रख दिए था..
और फिर अपने दुश्मन के सामने खुद को शांत hi रखना चाहिए.. ग़ुस्सा तो दिखना hi पड़ता है, लेकिन हिसाब से... दुश्मन को पहले अपने कॉन्फिडेंस से मारो, फिर उनकी आँखों में ऑंखें दाल कर उसे अंदर से तोड़ो.. दुश्मन को दिखाना चाहिए क सामने वाला उससे कहीं बढ़ कर है.. उसकी विल पावर उसकी सहन शक्ति कही आगे तक है............ माँ जब तक्क कोठे पर रही, दन्न के सामने हमेशा hi टूटी रही थी, हमेशा hi डब्ब कर रही थी..... पारर अब्ब नहीं..
अब्ब माँ सिर्फ माँ नहीं थी, मेरी पत्नी भी थी, माँ की लाइफ से एक एक करके अब्ब सारे दर्द जा रहे थे. एक औरत जब माँ भी हो, उसकी सूनी मांग भी भर जाए तो उससे बढ़ कर स्ट्रांग फिर कौन हो सकता था.. उसका जवान बीटा, और उसका पति उसकी रक्षा करने क लिए, उसे हमेशा सपोर्ट करने क लिए मौजूद था, तो फिर माँ क्यों कमज़ोर रहती.........
माँ को अब्ब रोज़ hi कोई न कोई नयी ख़ुशी मिल रही थी.. माँ के अंदर के दुःख और दर्द को मेरे प्यार ने, एक आज़ाद लाइफ में पूरी तरह से ख़तम कर दिए था.. बास अब्ब कुछ थोड़ा सा बाकी रह गया था, वो भी अब्ब जल्द hi पूरा होने वाला था..
माँ दन्न को पालक झपकाए बिना देख रही thi..DNN ने पहले तो माँ को घूरना जारी रखा, पारर माँ की आँखों की निकलने वाली आग दन्न सहन नहीं कर पाया.. दन्न को हार माननी hi पड़ी..
मैं अपनी जगा से हिली और दन्न की और बढ़ने lagi..main भी माँ के साथ आगे बढ़ने लगा... पूजा और तितलियाँ कुछ पीछे हमारे साथ थी.. इस वक़्त भी पापा यहाँ पर मौजूद नहीं थे.. कल वाले काण्ड के चलते बहुत बिजी थे वो.. कल आधे घंटे क लिए वो आये थे.. उसके बाद वो नहीं आये...
पापा के शिव इस टाइम सबब hi मौजूद थे, बेसमेंट का हाल बहुत बड़ा था, मुझसे रिलेटेड और कोठे से रिलेटेड सब hi यहाँ बेसमेंट में थे..
मई और माँ दन्न के पास पोहंच गए.. दन्न ने एक बार फिरसे माँ की आँखों में देखा और फिरसे नज़रें फेर लीं....
maa:-(maa बोली तो माँ का लहजा सामने वाले को ठिठरा देने वाला था.. इतनी सख्ती इतनी आग थी माँ की आवाज़ में) क्यों क्या हुआ, ऐसे नज़रें क्यों चुरा रहे हो, मेरी आँखों में देखने की शक्ति खो बैठे हो क्या.??? अब्ब मुझे डी न न बन्न कर नहीं दिखाओगे, अब्ब मुझे वैसी hi नज़रों से नहीं देखोगे.. सालों तक तुम मुझे छोड़ते रहे हो, कभी भी मई तुम्हारी आँखों में नहीं देख सकीय थी, अब्ब तुम मेरी आँखों में नहीं देख पा रहे ho.waqt बदल गया है. इस लिए ऑंखें चुरा रहे हो.. नहीं डी न न ऐसे में मुझे मज़ा नहीं आएगा, मुझे वैसे hi देखो, जैसे कोठे पर रहते हुए मुझे देखा करते थे.. किसी कायर इंसान के जैसे मुझसे नज़रें मैट चुराओ.......... sunaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
tumneeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
'माँ ने दन्न के सर्र के बालों को कस के पकड़ते हुए उसका सर्र ऊपर उठाया, माँ अचानक से hi ऊंची आवाज़ में बोलने लगी थी'
माँ आज मुझे माँ hi दिख रही थी, वो माँ जिसकी आबरू एक कोठे की नज़र कर दी गई थी.. वो माँ जिसकी औलाद के सामने hi उसकी इज़्ज़त उतार दी गई थी.. माँ की आवाज़ में ghussa,dard, आग, नफरत, इन्तेक़ाम, और na-jaane क्या कुछ था.. हर तरफ सन्नाटा सा छ गया... ख़ामोशी तो पहले से hi थी.. पारर अब्ब तो जैसे सबकी साँसे hi थम गई थीई... मैंने पूजा और अपनी तितलियों को देखा वो सबब माँ को देख रही थी.. वो चरों किसी मुजसमे के जैसी कड़ी थी..
" मैंने कहा मेरी आँखों में देख के मेरी बात सुनो.. मैं भी तो सालों ऐसे hi तुम्हारी कैद में रही थी, तुम मुझपर ज़ुल्म पर ज़ुल्म करते रहे.. पल पल मुझे खुद भी रोंदते रहे और अपने कुत्तों को भी मुझपर चढ़ाये रख, किसी जानवर की ातरः.............. तुम एक कायर दुश्मन निकले थे डी न न, तुमने छुप कर, छल से सबब किया था, किसी की भी आँखों में ऑंखें दाल कर तुमने कुछ नहीं किया था.. मेरे घरवळून की आँखों में धुल झोंक कर मुझे उनसे दूर कर दिए था..
तुम्हारी hi तरह से वो सबब भी मेरे गुनेहगार हाँ... पर फिर भी वो ऐसे थे क तुम उनमे से किसी की भी आँखों में ऑंखें दाल कर मुझे यौन बर्बाद नहीं कर सकते थे... मुझे वहां से ले गए.. उसके बाद तुमने मेरे लिए ज़िन्दगी दलदल बना दी.
तुम इतने बड़े सूरमा हो क मुझे मेरे घर से लेजाने के बाद भी मेरे बारे में मेरे घरवळुङ्न को बताने की हिम्मत खुद में नहीं पा सके...
अगर वो सबब जान जाते तो वो सबब तुम्हारी बादशाहत कबकी ख़तम कर चुके होते..
उन सबब ने भी मिलकर मुझपर बहुत ज़ुल्म किया था, उन सबब को भी मई देख लुंगी..
किसी के लिए भी मांगी की कही कोई गुंजाइश नहीं है... खून माफ़ किया जा सकता है दन्न.......... एक माँ की ममता और माँ की इज़्ज़त को लूटने वळून को. और लौट का सामान बनाने वळून को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता... उन सबब का भी बहुत बुरा हाल होगा दन्न..
पारर तुम उन सबब की आँखों में ऑंखें दाल कर दुश्मनी नहीं निभा सके..
तुम एक कायर दुश्मन निकले दन्न.. thuuuuuuuuuuu हीी तुझपरररररररर
सालों से मई ये सबब तुमसे कह देना चाहती थी, पारर वहां मई मजबूर थी, वहां तुम एक दरिंदे थे, अगर मई वहां अकेली होती, तो तुम कभी भी मुझे वहां ज़यादा देर नहीं रख सकते थे, मैं अपने बच्चों की वजा से मजबूर हो गई थी.. वर्ण कबकी वहां से निकल चुकी होती..
वज्जू बीटा मुझे इसे इस हाल में देख कर मज़ा नहीं आ रहा, साला कुत्ता कितनी जल्दी ढीला पद गया है, इतनी जल्दी इसकी अकड़ ख़तम तो नहीं होनी चाहिए थी.
देखो कैसी किसी ख़ौफ़ज़दा कुत्ते के जैसे बैठा हुआ है.. मुझे इसे ऐसे टार्चर करके मज़ा नहीं आएगा.. कुछ सोचो इसका....
विजय:- माँ इसकी अकड़ इसके आदमियों की वजा से थी, वो सबब मारे तो अब्ब ये किसी काम का नहीं रह गया.. इसकी अकड़ इसकी बेटी के हमारे साथ मिल जाने से भी ख़तम हो कर रह गई है..
माँ ने जूही माँ को देखा. माँ ने उन्हें पास आने को बोलै. वो पास आएं..
माँ:- दन्न देख और पहचान इस औरत को, बता सकता है क ये कौन है, दन्न ने जूही माँ को देखा, तो दन्न ने जूही माँ को देखा, एक नज़र दन्न ने बेसमेंट में मौजूद सभी को hi देखा था, पारर माँ को देखकर वो किसी और को धयान से देख hi नहीं पाया था.. अब्ब जब उनसे धयान से देखा तो, तो जूही माँ को देख के मारे हैरत के फिरर से उछाल पड़ा..
दन्न:- तुम यहाँ, तुम तो मर्डर गई थी, तुम्हारे खंडन में से कोई भी तो ज़िंदा नहीं बचा था..... दन्न की बात सुनकर मुझ समेत सब hi हैरान रह गए थे, हम में से किसी ने भी कभी कुछ नहीं जाना था.. जूही माँ ने दन्न को घोरसे देखा, फिर कारन और जूही को पास आने का इशारा किआ. वो भी पास आये तो दन्न इस बार और भी हैरान रह गया.... दन्न फटी फटी आँखों से कारन और जूही को देखने लगा..
जूही माँ:- क्यों पद गए न हैरत में. तुम क्या समझते थे, क तुम सबब को ख़तम कर चुके हो.. नहीं तुम सबब को ख़तम नहीं कर सके थे, हम तीनो वहां से बच निकले थे.. उस दिन से मई इंतज़ार में थी, क कब्ब मुझे मौका मिला और मई तुझसे अपना बदला ले सकूँ.. पारर फिर बाद में पता चला क तू तो बहुत बड़ा हरामी है, मेरी hi तरह और भी कइयों को बर्बाद किया है तुमने... अब्ब समय शुरू हो चूका है दन्न तुम्हारा हिसाब हो गया है, अब्ब से तुम एक एक सांस के साथ मौत की भीक मांगोगे.. एक एक पल तुम सिसक सिसक कर बिताओगे.. तुम्हे जानो को ख़तम करने में और इज़्ज़तों को लूटने में बहुत मज़ा आता रहा है ना.. अब्ब ये सबब तुम्हारे और तुम्हारे खंडन के साथ भी होने वाला है.. अब्ब से तुम्हारा, तुम्हारे साम्राज्य का और तुम्हारा खंडन की बर्बादी का काउंटडाउन शुरू हुआ चाहता है..
विजय बीटा इसके साथ कुछ ऐसा करना क इसे एक एक पल का दर्द महसूस हो, इसे वो सबब याद आने लगे, जो ये अपने गुज़रे समय में कर चूका है.. इसका भी सब कुछ वैसे hi उजाड़ दो, जैसे ये दुसरो का उजड़ता रहा है.. इसे दूसरों की इज़्ज़त उतारने का बहुत शोक रहा है, इसके सामने इसकी भी इज़्ज़त उतारो.. तभी मुझे चैन मिलेगा...
माँ:- बेहेन तुम इस कुत्ते को पीट कर खुद को अंदर से हल्का कर सकती हो.. जूही बेटी तुम भी, और कारन बीटा तुम भी अपने अंदर का ग़ुस्सा उतार सकते हो..
जूही माँ:- नहीं श्वेता बेहेन, ऐसे हमारे अंदर का सबब दर्द ख़तम नहीं होगा, इसे भी वैसे भी सिसक सिसक कर तड़पते हुए जीते देख कर हमारा अंदर के ज़ख्म खुद से hi भरने लगेंगे..
कारन:- माँ आपने सही कहा, इसे पीट कर खुद का ग़ुस्सा क्या कम् होना है, इसकी हालत hi ख़राब हो जाएगी.. इसे मार की नहीं, मेंटली टार्चर की ज़रूरत है..
जूही:- हाँ भाई आपने सही कहा, जितना दर्द इस कुत्ते ने हमें दिए है, उससे कही बढ़कर दर्द मिलना चाहिए.. तभी हमें चैन मिलेगा..
माँ:- तो फिर इसको आज एक छोटी सी सजा देते हाँ, विज्जू बीटा किसी से कह कर ढेर सारा दूध मंगवाओ, आज इसे इतना दूध पिलाओ क ये याद रखे..
जूली भी बेसमेंट में hi थी, उसने किसी को कॉल मिला दी.. कुछ hi देर में एक बड़े बर्तन में दूध लाया गया..
एक टेबल पास में रखकर उसपर वो बर्तन रख दिए गया..
माँ:- विजजू बीटा तुम ज़रा साइड में होना, हम औरतों को इस कुत्ते की कुछ सेवा करने दो.............. दन्न दूध को देखकर कुछ हैरान तो हुआ था, लेकिन खुदके अंजाम का सोच कर उसकी हालत पतली होने लगी थी..... मुझे दन्न को ऐसे हारते देख कर मज़ा नहीं आ रहा था.. साले हमारे शिकंजे में क्या आया था, खुद का सारा घमंड, खुद का सारा ात्तिट्ठूड भूल गया था..
मई साइड हुआ, पूजा और अपनी तितलियों के साथ जा खड़ा हुआ... प्रिय ने मुझे बाज़ो से थाम लिया था. प्रिय दन्न को देख कर बहुत ग़ुस्से में थी.... उसका बास नहीं चल रहा क वो दन्न के टुकड़े टुकड़े करदे.. मेरी hi तरह से मेरी प्रिय भी माँ के लिए बहुत रोइ थी.. मुझसे ज़यादा तो मेरी प्रिय ने माँ का दर्द देखा था..
माँ ने जूही माँ और जूही की मदद से दन्न का मोहन खोला और थोड़ा थोड़ा कर दन्न को दूध पिलाना लगीं, दन्न खुद पियासा था, तो दूध मज़े ले ले कर पीने लगा.. 2 गिलास दूध दन्न के पेट में गया तो दन्न ने अपना मोहन हटा कर माँ को देखा और कुछ ऐसे रियेक्ट करने लगा क बास अब्ब और की गुंजाइश नहीं है..
माँ हस्ती हुई बोली:- क्या हुआ तुमने मोहन क्यों साइड में कर लिया, यहाँ तुम्हारी नहीं हमारी मर्ज़ी चले गई, अब्ब से पहले जो भी तुम्हारे तसर्रुफ़ में आया है, तुमने उसपर खुद की मर्ज़ी चलाई है, अब्ब तुम हमारे तसर्रुफ़ में आये हो, तुम हमसे खुद की सेवा करवाओ, आखिर तुम हमारे मेहमान हो, क्यों बेहेन मैंने सही कहा ना.
जूही माँ:- हाँ श्वेता बेहेन एक मेहमान को हम भूका पियासा तो नहीं रहने दे सकते ना.......... जूही माँ भी अब्ब मज़ा लेने लगी थी.. दुश्मन को हस्ते खेलते टार्चर करने में अपना hi एक मज़ा है..
जूही:- माँ कुछ मुझे भी इस कुत्ते को दूध पिलाने दो, माँ की आँखों में जूही की बात सुनकर कुछ चमक सी आ गई थी, माँ मुझे देख के मुस्कुराने लगी, बात सिंपल सी थी, लेकिन जूही की बात का मतलब कुछ और भी बन्नता था, जूही को जैसी hi माँ की आँखों का एहसास हुआ तो वो बुरी तरह से झींप गई... जूही अपनी माँ के पीछे मोहन छुपाने लगी.. कारन और जूही माँ पास में hi थी, वो भी समझ गए थे, मैंने और माँ ने खुद के फेस एक्प्रेशन कण्ट्रोल किये, और अपना चेहरा भी साइड में कर लिया..
माहौल को सझते हुए जूही ने भी खुद पर काबू पाया और लगी दन्न को दूध पिलाने, दन्न को अब्ब ज़बरदस्ती दूध पिलाया जा रहा था, धीरे धीरे दन्न के चेहरे के रंग बदलने लगा था.. दन्न के मोहन से नीचे इतना दूध उतार दिए गया था क दन्न के मोहन के अंदर से और नीचे जाने की गुंजाइश hi ख़तम हो गई थी, दन्न के चेहरा नीचे नहीं होने दिए गया..
पानी जितना माज़री किसी को पीला दिए जाए, एक्स्ट्रा होने पर पानी की वजा से परेशानी तो होती hi है, लेकिन दूध के जितनी नहीं होती..
इतना दूध दन्न के अंदर जा चूका था क दन्न के नाक आंख और कान से भी दूध टपकने लगा था. दूध की ओवर दोसे अक्सर hi कुछ कारनामा कर दिखती थी..
दन्न की बहुत बुरी हालत हो चुकी थी.. कुछ देर दन्न को ऐसे hi रखा गया, फिर दन्न के सर्र को छोड़ दिए गया.. दन्न का पेट बुरी तरह से फूल चूका था..
दन्न का सर्र नीचे हुआ पारर उसे वोमिटिंग नहीं हुई.. जैसे hi दन्न कुछ बहाल हुआ तो सबब को लाचार नज़रों से देखने लगा.. फिर दन्न की जैसे hi नज़र दूध के बर्तन पर पड़ी तो दन्न का जी ख़राब होने लगा, दन्न को मतली होने लगी, अचानक से hi दन्न के अंदर का सारा दूध वोमिटिंग की सूरत में बहार आने लगा..
अब्ब अगर दन्न को छोड़ भी दिए जाता तो दन्न साड़ी उम्र के लिए दूध से बाघी हो चूका था, दूध को देखते hi दन्न को वोमिटिंग शुरू हो जाय करती..
मुझे बाद में इस सबब का पता चला था, माँ ने hi मुझे इस सबब के बारे में बताया था, माँ ने शायद अपनी जवानी में कभी कोई एक्सपीरियंस किया हो, या किसी को कुछ करते हुए देखा जो....
दन्न को अब्ब मिल्क फोबिया हो गया था.. कुछ देर दन्न मोहन खोल कर अंदर का सारा दूध निकालता रहा.. दन्न को अच्छी खासी वीकनेस हो गई थी..
माँ:- दन्न अभी तो तुम्हे और भी दूध पिलाया जाने वाला है.
दन्न:- (चीखता हुआ) ननननननननन. नाहीईई nahiiiiiii..mmmmmmmmm मई और दूध नहीं पिऊँगा, चाहे तुम मेरी जान ले लो, पर मई और दूध नहीं पिऊँगा.. दन्न दूध की तरफ देखना hi नहीं चाहता था.. माँ ने दूध का भरा हुआ गिलास दन्न के चेहरे के पास किया, जैसे hi दूध की स्मेल दन्न के नाक से टकराई तो
दन्न ोुघ्घ्घ करता हुआ फिरसे वोमिटिंग करने लगा... दन्न पूरा ज़ोर लगा कर अंदर का सबब बहार निकलने की कोशिश में था..
ऐसे hi वक्फे वक़्फ़े से दन्न के साथ खेल खेला जाता रहा, फिर ख़ास को छोड़ कर बाकी सबब जाने लगीं...
अब्ब बेसमेंट में मई, मेरी माँ बहने, सोना फॅमिली, जूही फॅमिली, महक और दिल्ली वाली फॅमिली रह गई...
महक जूली और शुष्मा दीदी के साथ कड़ी थी. महक ने अभी के लिए दन्न को छोड़ दिए था.. पहले दूसरों को अपना ग़ुस्सा उतरने का मौका देना चाहती थी..
शुष्मा दीदी का भी कुछ ऐसा hi सन था..
दन्न को चेयर पर से खोल दिए गया था.. वोमिटिंग की वजा से अंदर का माहौल ख़राब हो चूका था, तो जूली को कह कर सबब बेसमेंट के दूसरे हिस्से की और बढ़ गए.
दन्न को भी वही घसीट कर लाया जाने लगा..
वहां पोहंचे तो दन्न फर्श पर पड़ा था, उसकी हालत बहुत ख़राब थी.. ज़यादा दूध पिने की वजा से, और फिर पिया हुआ दूध बार बार निकल जाने की वजा से दन्न
का बहुत बुरा हाल हो चूका था.. वो किसी कुत्ते की तरह से फर्श कर पड़ा हुआ हम्प रहा था............ अभी तो दन्न की सजा शुरू hi नहीं हुई थी, और ये हाल था.. अभी तो इसके लिए आगे बहुत कुछ था...
विजय:- सबसे...) मा.. दीदी.. और बाकी सबब... देखो दन्न अब्ब तुम सबब के पैरों में पड़ा हुआ किसी कुत्ते के जैसे हम्प रहा था.. आप सबब ने मुझसे जैसा चाहा था, वो सबब मैंने कर दिखाया... मेरे बात सुनकर माँ और पूजा दीदी मेरी पास आएं और मुझे गले से लगा कर मुझे चूमने लगी.. कभी गालों पर, कभी माथे पर, तो कभी होंटो पारर.. सब hi मौजूद थे, और सब hi जानते थे.. पारर अब्ब माँ और दीदी शर्म नहीं कर रही थीई.. सबके सामने hi मुझे किश करने लगी..
मेरी तिलतियाँ भी मेरे पास आएं और मुझे प्यार देने लगी.. rani,natasha दीदी भी ाएँ और मुझे गले से लगा कर किश करने लगी गालों पर.. हर्ष अंकल और अजित भाई मौजूद थे तो उनके सामने दोनों ने खुद पर काबू पाए रखा था..
rupa,shikha,sheetal,keerti, aparna,raj और अनिल भी मुझसे मिले.. सोना मालिकान और भाभी और पद्मा आंटी का एक ग्रुप बन्न गया था, वो भी एक साथ आगे बढे और मुझे चूमते हुए बधाई देने लगी..
शुष्मा दीदी और जूली ने वो कल hi मुझे बधाई देने की बजाने मुझसे बधाई ले ली थी... जूली की छूट से एक बार फिरसे पानी निकला था, तो शुष्मा दीदी भी मुझसे प्यार पा कर छूट को ठंडा कर चुकी थी... महक तो मेरे साथ hi थी..
जूही माँ भी मुझसे स्पेशल मिली.. जूही कारन भी फिर कैसे पीछे रहते...
हर्ष अंकल और अजित भाई सबसे आखिर में आगे बढे और मुझसे बड़े जोश से मिले.
हर्ष:- मैं बहुत खुश हों विजय बीटा, तुमने अपना दूसरा मिशन भी पूरा कर लिए... श्वेता बेहेन को नयी ज़िन्दगी भी मिल गई और उसका दुश्मन भी तुमने उसके पैरों में ला फेंका..
अजित bhai:-(mere कंधे पर धप्प मारते हुए) मैं बाजार वाले उस विजय को देख रहा हों, जो आज एक बहुत बड़ा आदमी बन्न चूका है.. मई तब्ब hi समझ गया था क तुम एक दिन ज़रूर कुछ कर के दिखाओगे.. और आज वो दिन आ भी गया.. तुमने न सिर्फ अपनी माँ और बहने के साथ बाकी सब को भी बचाया है.. बल्कि इस हरामी कुत्ते को भो श्वेता बेहेन के क़दमों में ला फेंका है... खुश रहो मेरे यार.. दिल खुश कर दिए तुमने.. अब्ब से हम सबब एक खुशहाल ज़िन्दगी जियेंगे.. सब मिलकर रहेंगे.. अब्ब कभी कोई ग़म नहीं रहेगा..
पूजा दीदी और माँ मुझे निहार रही थी.. तो बाकी सबब भी कुछ ऐसी hi नज़रों से मुझे देख रहे थे.. julie,mehak और शुष्मा दीदी कुछ फासले पर कड़ी हुई मुझे देख मुस्कुरा रही थी.. उन तीनो का भी एक पेअर बन्न गया था.. शेखर अभी यहाँ मौजूद नहीं था.. उसे अभी इस सबब से दूर रखा हुआ था.. उसकी पूरी फॅमिली को जब यहाँ इन्विते किया जाता, तब्ब शेखर भी पूरी तरह से हम में शामिल हो जाता...
पूजा दीदी और माँ ने मुझे मेरे मिशन की बधाई दी.. मैं दन्न को उनके क़दमों में ला फेंका था, तो दोनों ने भी अपनी ख़ुशी कर भरपूर इज़हार किया था..
कुछ देर में सबब बहार जाने लगे तो प्रिय आगे बढ़ी और दन्न के मोहन पर ठऊक दिया.. प्रिय को देख के जहान्वी और श्रुति भी आगे बड़ी और दन्न के मोहन पर थूऊकक्क दिए.......... दन्न जो हकहत की हालत में था.. थूके जाने पर एकदुम्म से hi होश में आ गया था.. वो priya,jhanvi और श्रुति को ग़ुस्से से देखने लगा.
प्रिय:- क्या देखा है बे कुत्ते.. अब्ब तू सिर्फ एक कुत्ता है, और किसी कुत्ते को ग़ुस्से से देखने की इजाज़त नहीं है... वर्ण दूध अभी भी यहाँ लाया जा सकता है.... अंत में बोलते हुए प्रिय हस्सन लगी.. प्रिय के साथ सबब हस्सन लगे.. और दूध का नाम सुन्नते hi दन्न का ग़ुस्से झाग की तरह से बैठ गया.. वो प्रिय को और सबको ऐसे देखने लगा, जैसे बोल रहा हो...........
प्लस और दूध नाहीइइइइइइइ.. मार दो पररर अब्ब दूध nahiiiiiiiiiiii..
सब दन्न की हालत को देख कर हस्स रहे थे.. फिर सबब hi आगे बढे और दन्न के मोहन पर थूकने लगे.......... दन्न का मोहन थूक से भरने लगा.....
औरतें ऐसे अपन ग़ुस्सा उतारती है.............. जूही ने तो कसार नहीं छोड़ी.. कुछ देर अच्छे से अपने मोहन में थुउउउउउउउक को इकठा करती रही और फिर एकदुम्म से hi दन्न को नेहला दिए..........
प्रिय, jhanvi,shruti और अपर्णा ने दन्न के पैरों पर अपने पेअर जोरसे मारे थे, जिस वजा से दन्न के पैरों की उँगलियों से खून निकलने लगा था. सब अपने अपने अंदाज़ से दन्न से नफरत का इज़हार कर रहे थे.. इस बार अपर्णा भी पीछे नहीं रही thiiiiiiiiiiiiiii
जूली ने दन्न की ट्रीटमेंट शुरू करवा दी थी.. अभी असल मक़सद बाकी था, अभी दन्न का तंदरुस्त रहना बहुत ज़रूरी था, अभी दन्न को बहुत सी दोसे मिलने वाली थीई..
दन्न को थोड़ा थोड़ा करके टार्चर किया जाता, फिर उसे ट्रीट किया जाता.. जल्द hi मुझे अगले मिशन पर भी निकलना था...