अपडेट ::: 120
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लड़की की ट्रीटमेंट के बाद उसे उसके घर भेज दिया गया था..
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शाम के कुछ पहले मई दीदी के पास जा पोहंचा, दीदी जूली के साथ hi थी..
मुझे देख के दोनों ने स्माइल दी, और फिरसे अपने काम में लग गईं..
विजय:- क्या बात है आज तो कुछ भाव hi नहीं दिए जा रहे..
जूली मुस्कुराने लगी.. और दीदी भी सर्र उठाये बिना मुस्कान देती हुई..
दीदी:- तुमने परेसुरे कम् डाला हुआ है हमपर.. रातों रात बिज़नेस भी खड़ा करना है तुम्हे और गैंग भी बनानी है... सारे hi काम तुम फटाफट करते जा रहे ho,humen रेस्ट का टाइम कहाँ मिलेगा.. जितना काम का बोझ लाड दिया है सभी पर, वो किसी को क्या टाइम देंगे....
मैं भी चेयर घसीट कर उनके पास hi बैठ गया.. पीछे से हाथ घुमा कर जूली के चुत्तड़ को सेहला दिया..
दीदी:- बुरी बात है भाई, मेरे सामने hi शुरू हो गए..
जूली ने मुझे घूर कर देखा.. फिर दीदी को देखकर मुस्कान देने लगी..
विजय:- दीदी बड़ी तेज़ नज़र है आपकी..
didi:-(mujhe देखे बिना hi) औरत की आँखों के बारे में सुना है, कितनी होती हाँ...
विजय:- हाँ सुना भी है और देखा भी hai.....(maza लेते हुए) दो आपकी हाँ और दो hi जूली की हाँ..
जूली हस्सन लगी.. और दीदी ने मुझे पेंसिल चुभा दी...
दीदी:- फिर तो तुम्हारी भी 2 hi होंगी और पीछे से पड़ने वाला थप्पड़ भी तुम्हे नहीं दिखने वाला.. शेखर लगा दो एक विज्जू को जोरसे..
मैं अचानक से hi पलट गया, पीछे कोई नहीं था... जूली और दीदी जोरसे हस्सन लगी
दीदी:- फीमेल से पन्गा लेने की कभी सोचना भी मैट.. अगर वो अपनी पे उतर आएं ना तो पानी भी नहीं मांग सकोगे..
vijay:-(hassta हुआ) हाँ वो तो मई hi जानता हों... मुझे पानी मांगने की क्या ज़रूरत है, जब मुझे चाहिए होगा तो खुद hi निकाल लूंगा..... दीदी ने paper-weight उठा कर मेरे बाज़ो पर दे मारा और जूली चेयर्स से उठ कर पेट पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगी..
जूली:- शुष्मा विज्जू से जीतना मुमकिन नहीं है, भले hi हम नारी हाँ. विज्जउ से बच के रहिये, वर्ण किसी दिन ऐसा सबक सीखा देगा, जो कभी भूलेगा नहीं...
दीदी बाबड़ादाने लगी... कमीना वो तो मुझे सीखा hi चूका है..
जूली:- कुछ कहा आपने ने........
दीदी:- nnnnnn..nahi कुछ नहीं चलो काम करते हाँ, ये तो है hi ऐसा, बेशरम इंसान... तौबा इतना बेसहराम भी कोई होगा दुन्या में..
जूली:- ना कोई नहीं है इस दुन्या में विज्जू के जैसा.. अच्छा भी और बेसहराम भी... जूली फिरसे हस्सन लगी..
विजय:- चलें अब्ब सीरियस होक काम की कुछ बातें करलें..
दीदी:- सीरियस और तुम..
विजय:- हाँ पक्का अब्ब सीरियस होक काम की बातें करते हाँ.. दीदी भी इस बार हस्ते हुए बैठ गईं..
और फिर मुझे सबब बताने लगीं जो जो उन्हों ने किया था....
अपने काम से रिलेटेड जैसी हमारी डिस्कशन हुई थी, उसी हिसाब से एप्म्लोईस को ढूंढ़ने का काम जारी था.. पहले वो सभी जिनको जानती thee,unki लिस्ट बना रही थें..
कल का दिन हर्ष अंकल की एक कोठी में िनेटर्विएव के लिए चूँ लिया गया था, अख़बार में ऐड दे दी गई थी...
चलो एक और काम तो हुआ.. अब्ब ये सबब दीदी ने hi करना था.. ये मेरी फील्ड तो थी नहीं.. जो मई उनसे मग़ज़ मारी करता फिरता...
कुछ देर और उनके साथ बैठ कर मैं उठ गया था... जाने से पहले जूली का धयान साइड हुआ तो मैंने दीदी को एक किश करदी थी.. दीदी की छूट से भी धुवां निकलने लगा था.. जो सोच भी नहीं सकती थी क मैं उन्हें जूली के साँमे भी किश कर सकता हों.. दीदी का चेहरा लाल टमाटर के जैसा हो गया था.. कुछ देर बाद उनके होंठों पर एक बहुत hi पायरी मुस्कान भी आ गई थी...
दीदी को मेरी ये डेरिंग बहुत पसंद आई थी..
जूली की आँखों में भी मुझे बेचैनी दिख गई थी, जूली को भी मेरा पूरा प्यार चाहिए था, उस दिन जूली की छूट से स्पीड से काम लेते हुए पानी निकल दिए था, पारर जूली पूरी तरह से शांत नहीं हुई थी, मैंने सोच लिया क जूली को भी उसके हिस्से का प्यार दे दिए जाए.
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ज्योति ने महक को सबब बता दिया था, दन्न ने जो भी अपने दोस्तों से कहा था.. दन्न अब्ब दिल्ली में आ रहा है तो महक ने दन्न के निकलने के बाक उसे भी हवेली छोड़ देने का कह दिया था. ज्योति का एक तो वाहन कोई काम नहीं था, दूसरा ज्योति
के लिए खतरा और भी बढ़ गया था, इस बार दन्न को पक्का hi पता चल जाना था क कोई उनकी इन्फो किसी को दे रहा है...
महक ने ये सबब मुझे शाम के टाइम बता दिया था.. महक जूली के साथ मिलकर सबब तैयारी में लग गई थी.. अब्ब पैलेस पूरी तरह से HI-Tech था.. जदीद टेक्नोलॉजी से लेस ये पैलेस दन्न के लिए एक ऐसा पहाड़ बन्न चूका था, जिसे वो कभी सर्र नहीं कर सकता था....
जूली और महक के रहते मुझे कुछ ज़यादा करने की ज़रूरत नहीं थी.... दन्न के आते hi उसे नज़र में रख लिया जाना था, अगर वो एयरपोर्ट के रस्ते आया तो, अगर वो अपना hi कोई हेलीकाप्टर लेकर आया तो फिर उस तक्क पोहंचना आसान नहीं होगा..
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सूबा मेरी आँख खुली तो प्रिय मेरे ऊपर hi सो रही थी, बीएड बहुत बड़ा था तो पूजा दीदी के आ जाने से कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाली थी...
मई इस सभी के बिना नहीं सोने वाला था, अगर दीदी अलग रूम में रहती तो माँ और बहनो से दूर रहना पड़ता.. माँ और बहनो के पास रहता तो दीदी जो क अब्ब मेरी पत्नी भी थीं उन्हें कम् टाइम मिलता...
एक hi रूम में रहने से अगर किसी एक की चुदाई होगी तो सभी की hi साथ में हो जाती.. इस लिए मैंने दीदी को भी अपने साथ hi शिफ्ट कर लिया था..
पहली रात दीदी को एकेले hi दी थी.. दीदी अब्ब मेरी वाइफ थी तो जब्ब भी हमें टाइम मिला एक बार फिरसे किसी अलग रूम में घुस कर चुदाई कर लिया करेंगे.. कभी एक साथ तो कभी काळा में ...
सभी को किश करके मैं फ्रेश हुआ और बहार आ गया..
किचन में कोई नहीं था, अभी भाभी नहीं उठी थीं तो मैं अपने रूटीन वर्क में लगा गया..
एक घंटे बाद मैं पैलेस में गया तो मुझे भाभी दिखें साथ में पद्मा आंटी और मालिकान भी थी. सोना आंटी तो अब्ब हर रोज़ hi भाभी के साथ hi रहने लगी थी.. कल मुझसे चुद के सोना आंटी भी खिल उठी थीं....
वो भी आज बहुत चहक रही थी.. एक बात जो मैंने नोट की वो ये क किसी ने भी ब्रा नहीं पहना हुआ था, सभी ने ट्रॉउज़र और लूसे शर्ट पहनी हुई थी..
मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.
विजय:- क्या बात है, सूबा सूबा पैलेस को आग लगाने का इरादा है क्या सभी का.
मैंने सभी के मटकों को ताड़ते हुए कहा... तो मेरी नज़रों को समझते उहे सभी हस्सन लगी
bhabhi:-(bhabhi अपने दोनों दूध को नीचे से पकड़ कर उछालते हुए बोली)
तो निकल दो न इनके अंदर से आग. और कार्डो इन्हे हमेशा के लिए फायर फ्री.
sona:-(hasste हुए) मालती ये तो टैंक हाँ जिनके अंदर की आग कभी कम् नहीं
होती, जितनी बार इन्हे खली कराओगी, उतनी hi आग इनमे भर्ती जाएँगी..
मालिकान:- और विज्जू के लुंड तो हमारे बूब्स को वैसे भी कभी ढीला नहीं होने देगा, हर वक़्त छूट में लेने की तमन्ना हमारे बूब्स को ाहर दुम्म hi टाइट रखेगी..
पद्मा:- बूब्स की आग का तो कुछ हो सकता है, पारर छूट की आग का तो क्या hi कहना.. साली ने विज्जू का लुंड क्या लिया है हर्र दुम्म hi गीले रहने लगी है, अभी फिरसे टपकने लगी है..
विजय:- इतनी आग भी सही नहीं है, कही जल कर भसम hi न्न हो जाओ.. मैं हस्ते हुए बोलै....
साला पूरा पैलेस hi छूट की आग में जलने लगा था.. एक दूसरे को देख कर सभी बेसहराम बनने लगी थी.. मैं हस्ता हुआ आगे बढ़ गया..
भाभी:- अब कहाँ जा रहे हो... बैठो कुछ देर हमारे पास..
विजय:- नहीं आज मुझे लाली से मिलना है.. कल भी उससे मिल नहीं सका था..
मालिकान;- हैं जाओ मिल आओ, अब्ब तो वो भी ठीक हो गई है.. (फिर हस्ते हुए बोली) अब्ब वो भी छोड़ने लायक हो गई है.. सबब मालिकान की बात पर हस्सन लगीं..
मैं भी हस्ते हुए लाली के रूम की तरफ बढ़ गया.. लाली भी मेरे प्यार की हक़दार थी.
कभी कभी मई सोचता था क अगर मुझे पहलवान न मिलता तो क्या मैं इतनी छूट मार पाने की हालत में रहता.. मेरा अंदर एंटी पावर होती क्या क मैं इतनी छूट मार कर भी सुकून से रहता..
पहलवान जी ने मुझे अंदर और बहार से बहुत स्ट्रांग बना दिया था.. मेरी सेक्स पावर भी बहुत बढ़ चुकी थी, लुंड के पानी निकलने के बाद सांस तो फूलती थी, पारर कभी मुझे थकन नै हुई थी.. और न hi ज़यादा सेक्स करने से मुझे कभी कोई उलझन हुई थी..
सेक्स का नशा तो मुझे हर दुम्म hi रहता था.. जैसे hi मैं बना लुंड पूरी तरह से तैयार हो जाता था, नयी छूट में घुसने क लिए.. और हर बार hi मुझे छोड़ने में पूरा पूरा आनंद मिलता था..
मैं लाली के रूम में पोहंचा तो लाली रूम में नै थी, लाली बाथरूम में नाहा रही थी.. पानी के गिरने की आवाज़ से मैं समझ गया था... बाथरूम का दूर खुला हुआ था..
पैलेस में बाथरूम का दूर लॉक करने की ज़रूरत कम् hi किसी को पड़ती थी, यहाँ ज़यादा टर्र महिलाएं थी.. अनिल भी सभी का सबब कुछ देख चूका था, और राज सब के रूम में कम् hi जाता था..
और मुझसे किसी को अपना कुछ छुपाने की कोई ज़रूरत नहीं थी... रूम का दूर लॉक किये बिना hi मैं बाथ्ररोम के दूर तक्क जा पोहंचा..
अंदर नज़र डाली तो लाली झुक कर अपने पैरों पर साबुन लगा रही थी, मेरी नज़र लाली के चुत्तड़ पर पड़ी तो मुझे लाली के चुत्तड़ का ज़ख़्म ठीक नज़र आया.. लाली जल्दी hi ठीक हो गई थी..
मैंने खुद को भी नंगा किया और बाथरूम में घुस कर लाली से बोलै..
विजय:- हाय क्या गांड दिख रही है, आज तो सूबा सूबा hi मेरे लुंड को मार डालने का पूरा सामान किया हुआ है..
लाली सीढ़ी कड़ी हुई मुझे देख कर खुश हो गई.. शावर चल रहा था, साबुन लगते हुए वो साइड में हो गई थी.. मुझे देखते hi वो शावर के नीचे गई.. पानी उसके ऊपर गिरने लगा....
लाली की ऑंखें चमकने लगी थीं.. लाली मुझे कुछ कहने की बजाये अपनी बहन खोल कर मुझे अपने सीने से लगने का सिग्नल देने लगी...
मैं आगे बढ़ा और लाली के सीने से जा लगा.. लाली का फिगर 38.29.39 था.
लाली के बड़े बड़े बूब्स मेरे सीने में डब्ब गए, तो मुझे लाली के गरम बूब्स से hi पता चल गया क लाली अंदर से कितनी देहक रही है.... लाली ने एक हाथ से शावर को कुछ स्लो किया.. फिर मुझे किश करने लगी. मेरा लुंड तो लाली को देख कर जागने लगा था... मैंने लाली को देख कर hi मन बना लिया था, छोड़ने का तो लुंड भी सबब समझते उहे स्पीड से जागने लगा...
लाली अपनी छूट को चमका चुकी थी.. वो भी पूरी तरह से तैयार थी मेरा प्यार पाने क लिए... पानी से गीले लाली के चूतड़ों को मसलते हुए मैं भी लाली को किश करने लगा..
लाली के चुत्तड़ो पर हाथ रखकर मैं उन्हें कस के दबाने लगा, अब लाली ठीक थी, किश के दौरान लाली के चुत्तड़ भी डब्ब रहे थे, मुझे बहुत मज़ा मिलने लगा था, मेरा लुंड खड़ा हो कर लाली की छूट पर चुभने लगा, लाली ने एक हाथ से मेरे लुंड को पकड़ और अपनी छूट पर रगड़ते हुए किश करने लगी..
मेरे लुंड का सुआपद लाली की छूट के लिप्स के अंदर घुस कर लाली की छूट के छेड़ को चूमने लगा, लाली मुझे किश करते हुए इस सबब का मज़ा भी ले रही थी, और मैं लाली के चुत्तड़ और लाली की गांड की दरार से खेलता हुआ लाली को किश कर रहा था, लाली और मैं कुछ देर ऐसे hi मस्ती करते रहे, जब्ब तक हमारी सांस नहीं फूल गई, हम लगे रहे थे..
हम अलग हुए तो लाली तेज़ तेज़ सांस लेते हुए मुझे देखने लगी, मैं लाली की आँखों में ख़ुशी की इन्तहा देख रहा था, लाली ने जो ख़ुशी कभी नहीं चाहि थी, वो उसे मिल रही थी, लाली बहुत खुश थी.
मैं ऐसे hi नीचे झुका और लाली के बूब्स को मोहन में लेकर चूसने लगा, लाली मेरे सर के बालों में उँगलियाँ चलने लगी, मैं लाली के निप्पल को मोहन में लेकर चूसने लगा, दूसरे दूध को अपने हाथ से दबाने लगा, मुझे मज़ा मिल रहा था, लाली का मज़ा मुझसे कई गुना बढ़ कर था..
लाली:- थैंक यू विज्जू, तुमने मुझे अपना प्यार डीएम, वर्ण मई कहाँ इस सबब क लायक थी, तुमने मुझे भी अपणु में शामिल कर लिया, अब्ब तुम मुझे भी वही प्यार दे रहे हो, जो तुम बाकी सबब को भी दे रहे हो, मुझे सब पता है, विज्जू तुम यहाँ पैलेस में क्या कुछ कर रहे हो, मुझे श्वेता ने सबब बता दिया हुआ है, मई बहुत खुश हों विज्जू, मैंने ऐसी खूबसूरत लाइफ के बारे में कभी नहीं सोचा था, मुझे ऐसी लाइफ भी मिलेगी मैं सोच भी नहीं सकती थी, ी लव यू तुमने मुझे बहुत बड़ी ख़ुशी दी है.. वर्ण..... अह्हह्ह्ह्ह विजजूउउ अब्ब दूसरे दूध को भी अपने मोहन में ले लो ना, तुम बहुत अच्छे से दूध पीते हो, मेरा निप्पल हार्ड हो चूका है, और मेरी छूट भी अब्ब पानी छोड़ने लगी है.. हाय कितना मज़ा आ रहा है, प्यार से छोड़ने की भी एक तमन्ना थी मेरे दिल को, आज वो भी पूरी हो रही है................... मैं लाली के दूसरे दूध को भी खली करने लगा...
कुछ देर में मैंने लाली के दूध को छोड़ दिए.. और खड़ा हो गया.. लाली मेरी आँखों में देखने लगी, फिर लाली नीचे झुकी और मेरे लुंड के बराबर आ गई..
मेरे लुंड को पकड़ कर दबाने लगी...
लाली:- विजजू तुम्हरा लुंड बहुत बड़ा है, तुमसे चुद के तो मैं मज़े में हो जाऊँगी.. आज मुझे छोड़ोगे ना विज्जू.. लाली मेरी आँखों में देखते हुए बोली..
विजजू:- हैं लाली आज मई तुम्हे तुम्हारे हिस्से का प्यार देने आया हों.. आज जो तुम्हारा मैं करता है वो तुम करो, मैं भी तुम्हारा पूरा साथ डोंगा...
लाली खुश हो गई और मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर चूसने लगी, लाली भी पूरी एक्सपर्ट थी, वो मेरे लुंड को बहुत hi अच्छे से चूसने लगी, आधा लुंड अपने मोहन में लेकर वो बाकी बढे लुंड को मसलती हुए अंडो से भी खेलने अलगी, मेरे अंदर करंट सा दौड़ने लगा, मेरा लुंड कुछ और भी फूलने लगा था..
5 मिंट बाद लाली ने मेरे लुंड को मोहन से निकला..........
विज्जू;- लाली कहाँ छोड़ना चाहती हो, यही या बीएड पर
लाली:- बीएड पर पूरा मज़ा आएगा विज्जउ, मज़ा तो यहाँ भी चुद कर आएगा, लेकिन मुझे पूरा मज़ा लेना है, तो मैं बीएड पर hi सबब करना छाती हों..
कुछ देर में हम बीएड पर थे, लाली घोड़ी बानी हुई थी, और मैं लाली के पीछे अपने लुंड को पकड़ कर लाली की छूट पर सेट किये हुए था.. लाली मॉनिंग कर रही थी. मैं काफी देर से अपने लुंड को लाली की छूट पर रगड़ रहा था.. लाली बहुत बेचैन हो गई थी..
जब मेरा लुंड लाली की छूट के छेड़ से टकराया, तो लाली एकदुम्म से hi पीछे हुई, तो मेरा लुंड लाली की छूट में घुसता चला गया..
लाली:- विज्जू अब्ब और न तड़पाओ, बाकी का भी लुंड एक hi बार में दाल दो, और पूरी स्पीड से मुझे छोड़ो, साली मेरी छूट बहुत खुली हुई है, मुझे दर्द नहीं होगा, तुम मुझे दुमदार तरीके से छोड़ो, तब्ब hi मुझे मज़ा आएगा..
मई आया hi लाली क लिए था, और कोठे पर रहते सबब hi वाइल्ड चुदाई की आदि हो चुकी थी.. मैंने भी लाली के चुत्तड़ो को पकड़ कर एक कस के धक्का मारा तो मेरा पूरा hi लुंड लाली की छूट में घुसता चला गया, इतने दिन से लाली की छूट में लुंड नहीं गया था, तो वो कुछ टाइट हो गई थी.. लाली की हलकी सी चीख निकल गई, पर मैं नहीं रुका और लाली को पूरी स्पीड से छोड़ने लगा, लाली सिसकियाँ लेने लगी, लाली की छूट तो पहले से hi पानी छोड़ देने क लिए बेचैन थी..
कुछ hi देर में लाली की छूट में चिकनाहट बढ़ गई, लाली का बदन भी अकड़ने लगा, मैंने अपने धक्कों की स्पीड और भी बढ़ा दी..
जल्द hi लाली सिसकियाँ लेते हुए झाड़ गई, मैंने लाली की छूट से लुंड निकला और लाली की गांड के छड़ कर मारने लगा, मेरा लुंड मेरे हाथ में था.. और मैं उसे लाली की गांड के ऊपर बार बार मार रहा था..
कुछ देर में hi मैंने अपने लुंड को लाली की गांड के छेड़ पर सेट कर दिए, लाली की गांड भी लाली की छूट की तरह से खुली थी, मैंने अपने लुंड को लाली की गांड के छेड़ कर सेट करते हुए एक धक्का मार दिया, मेरा लुंड 3" तक लाली की गांड के छेड़ में घुस गया, लाली की फिरसे चीख निकल गई, मैंने लाली की कमर को कस के पकड़ते हुए एक और धक्का मार दिए, मेरा लुंड पूरा hi लाली की गांड में घुसता चला गया... इस बार लाली की चीख और भी भयानक थी..
मैं कुछ देर क लिए रुक गया.. लाली खुद को रिलैक्स करने लगी..
लाली:- विज्जू हैरत है इतना चुद के भी मुझे दर्द हो रहा है, मैं गांड में भी कई बड़े बड़े लुंड लिए हाँ, पारर इतना दर्द नहीं हुआ मुझे कभी.. अब्ब तुम मुझे कुछ देर धीरे से छोड़ो फिर स्पीड बढ़ा देना, दर्द के साथ मुझे मज़ा भी बहुत मिल रहा है.. थैंक विज्जू मुझे दर्द और मज़ा देने क लये.. अपना प्यार देने क लिए..
मैं लाली को धीरे से छोड़ने लगा, 5 मिंट बाद hi मैंने स्पीड बढ़ा दी, लाली इस बार फिरसे मचलने लगी, लाली अपने चुत्तड़ हिला हिला कर मेरे लुंड को अपनी गांड की गहराई ताल लेने लगी, लाली का गांड मरवाने का स्टैमिना सबसे बढ़ कर था, लाली पुरे जोश से मेरा लुंड अपनी गांड में लिए मज़ा ले रही थी...
मैं भी पूरी स्पीड से लाली की गांड मारने लगी, इतनी स्पीड में छोड़ने से लाली का मज़ा डॉवले हुआ तो लाली की छूट फिरसे पानी बरसाने लगी, लाली झाड़ गई.. तो मैंने अपने लुंड को लाली की गांड से निकाल लिया.. मैं बे पर लेट गया.
कुछ देर में लाली की सांस बहाल हुई तो लाली मेरे ऊपर आ कर मुझे किश करने लगी.. लाली बहुत प्यार से मुझे किश कर रही थी, लाली अंदर तक्क खुश जो गई थी.. लाली भी सालों बाद प्यार से चूड़ी थी, लाली मुझे चूमते हुए आंसू बहाने लगी... लाली के आंसू मेरे चेहरे पर गिरने लगे.. लाली से भी ख़ुशी सहन नहीं हो पा रही थी..
कुछ देर लाली मेरे चेहरे को चूमती रही, मैंने लाली को बीएड पर पलटा और लाली के आंसू पीने लगा, मेरा लुंड खुद hi लाली की छूट में घुस गया था, मैं लाली को चुड़ते हुए लाली के आंसू पीने लगा, लाली के आंसू पीते पीते मेरे लुंड का जोश भी बढ़ने लगा... मैं लाली को किश करने लगा, किश करते हुए लाली को छोड़ने में मज़ा आ रहा था, लाली के आंसू रुक गए थे, लाली की छूट ने लाली को फिरसे मज़ा देना शुरू कर दिया था, लाली का रोना बंद हो गया था..
मैं तब्ब तक्क लाली को छोड़ता रहा जब्ब तक्क मेरे लुंड ने लाली की छूट में बारिश नहीं कर दी...
मेरे लुंड का पानी लाली ने अपनी बच्चेदानी पर महसूस किया तो लाली भी फिरसे झाड़ गई...
लाली:- विज्जू अभी अभी एक खवाहिश दिल में मचलने लगी है, विज्जू कोठे पर रहते कभी खवाब नहीं देखे जा सकते, अब्ब जब्ब हम सबब को एक आज़ाद लाइफ मिल चुकी है तो मुझे एक बाद माँ बनने की खवाहिश होने लगी है, विज्जू क्या तुम मुझे एक बच्चा दे सकते हो.. सिर्फ एक बच्चा, एक औरत तब्ब तक्क मुकम्मल नहीं हो saktim,jabb तक्क वो माँ नहीं बन जाती, विजजू मैं भी मुकम्मल होना चाहती हों, मुझे एक माँ होने का एहसास करा दो, मई साड़ी ज़िन्दगी तुम्हारे पैरों में रह कर गुज़ार डोंगी, मुझे बस एक बार माँ होने का एहसास करा दो..
लाली एक बार फिरसे रोने लगी.. लाली भी बाकी सबब की तरह दुखी थी, लाली को एक आज़ाद लाइफ मिली थी, तो उसके मैं में दबी हुई आरज़ू लफ़्ज़ों की सूरत में उसकी जुबां पर आ गई थी..
विज्जू:- लाली तुम कुछ भी मुझसे मांग सकती हो, मैं तुम्हारी हर खवाहिश पूरी करूंगा, ये मेरा तुमसे वडा है, एक क्या जब्ब तक्क तुम माँ बन सकती हो, तुम मेरे बच्चो को जनम दे सकती हो, और भी तो कई मेरे बच्चो को जनम को फ्यूचर में जनम देने वाली हाँ, तुम भी मेरे बच्चो को जनम दे सकती हो, मुझे तो बास अपणु को ख़ुशी देनी है, वो सबब जैसे मुझसे चाहेंगे मैं उन्हें वैसे hi खुश रखूंगा..
लाली मेरी बात से खुश हो गई और मुझे इस बार और भी जोश से चूमने लगी, और मई लाली को खुश देख कर खुश हो रहा था...
यही तो मेरा काम था, सबब में खुशियां बांटना.. अगर भगवन ने मुझे इस लायक बना दिया था, तो मैं खुशियां क्यों ना बांटों......
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