Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 28 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

दन्न के लिए बहुत कुछ सोचा हुआ है विजय ने.. दन्न का अंजाम बहुत hi भयानक होने वाला है... अब्ब फ्लैशबैक भी स्टार्ट होने वाला है, लेकिन मई उसे शार्ट डिटेल में पोस्ट करने की कोशिश करूँगा.. फ्लैशबैक में अक्सर मज़ा नहीं मिलता. हीरो ज़यादा देर मंज़र से ग़ायब रहे तो स्टोरी का मज़ा जारा रहता है.. आपके सुग्गेस्टिव पर घोर किया जायेगा..

बहुत अच्छा सुग्गेस्टिव दिए है आपने .... थैंक यू सो मच
 
थैंक्स.!!

शुष्मा के लिए पैलेस के माहौल में रंगना मज़बूरी है.. खुशियां सब में मिल बैठने से मिलते हाँ और फिर सरे जैसे होंगे उसके जैसा बनना तो पड़ता hi hai..sona और लाली को भी विज्जू नेख़ुश करदिअ.. सोना भी नए रंग में रंगने लगी.. लाली ने अपने दिल की खवाहिश विज्जू को बता दी.. विज्जउ ने भी लाली की डिजायर को दिल से क़ुबूल किया
 
थैंक्स डिअर..!!

सही कहा आपने भाई, फ़ौरन hi अपडेट पोस्ट करने वाला था तो लिख बैठा... और हिम्मत वाला-2 की बात करें तो मैंने पहले से hi इसका प्लाट सोच रखा है.. ये जल्द hi एन्ड होने वाली है तो . उसके बाद part भी जल्द शुरू किया जायेगा.. लेकिन पहले अपनी दूसरी स्टोरीज को टाइम दिए जायेगा....

थैंक्स फॉर थे सुग्गेस्टिव डिअर
 


अपडेट :::130


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मैं और महक दन्न के ठिकाने से कुछ देर खड़े रह कर गुंडों को तड़पते हुए देख रहे थे. लाइट गन की हलाकत का अंदाज़ा हम खूब जानते थे.. इसका रिजल्ट हम उस वेरने में भी देख चुके थे. जब महक को मैं लेने एयरपोर्ट गया था.

कुछ देर बाद मई और महक आगे बढ़ने लगे.. इस बार सबब जगा दन्न ने खुद से hi अँधेरा किया हुआ था, जहाँ वो मौजूद था, वो जगा रोशन थी... रास्ते में हमें दन्न के कई गुंडे दर्द से तड़पते हुए मिले, कई तो दर्द को सहन न करते हुए बेहोश हो चुके थे, अंधे तो सबब hi हो चुके थे..

जहाँ रौशनी थी, वहां से कुछ पर अँधेरे में हम रुक गए.. हमने नाईट विज़न उतार लिए थे.. हम दोनों धीमी धीमी आवाज़ में बात कर रहे थे.. क हमें दन्न और उसके दोस्त भागते हुए नज़र आये, वो जिस दिशा में भाग रहे थे. हम जानते थे, वो रास्ता आगे कहाँ जाता है.. दन्न या उसके दोस्त इस बेस को कहाँ इतना जानते होंगे जितना हम जानते थे.. महक ने मुझे देखा और मुस्कुरने लगी.. जब दन्न और उसके दोस्त हमारी नज़रों से दूर हो गए तो..

महक:- भाग कर जान बचने की फ़िराक में हाँ.. महक हस्ते हुए बोली.. मैं भी महक की बात पर हस्सन लगा, अचानक से hi मुझे कुछ याद तो मेरी हसनी को ब्रेक लग गई, महक मुझे हैरत से देखने लगी.. "क्या हुआ" महक ने मुझसे पुछा..

विजय:- शीट्ट्ट्ट. लाइट फायर करते हुए हमने यहाँ पर मौजूद लड़कियों का तो सोचा hi नहीं, कहीं वो भी लाइट गन की रौशनी से अंधी न हो गई हों... मेरी बात सुनकर महक का चेहरा भी उतर गया.......

महक:- नहीं, मेरा ख्याल है, क वो सेफ होंगी, अगर वो भी लाइट से अफेक्टेड हुई होती, तो उनकी भी चीखें हमें ज़रूर सुनाई देती..

विजय:- ोू हाँ, इस बात पर तो मैंने ग़ौर hi नहीं किया.. चलो शुक्र है, एक उम्मीद तो है हमारे पास.. चलो पहले दन्न और उसके दोस्तों को कही दूर जाने से रोकते हाँ. वो आगे जा कर कही गम hi न हो जाएँ, और दन्न हमारे हाथ आने की बजाये इन्ही गुफाओं में भटकता हुआ कही फँस कर मर्डर जाए.........

"सही कह तुमने विजय ये गुफाएं हाँ भी तो बहुत खतरनाकक, और भाई हमने कौनसा सारा पहाड़ देख डाला है, दन्न और दूसरे कही भी किसी भी मुसीबत में फँस सकते है" महक मेरी बात के जवाब में बोलती हुई मेरे साथ चलने लगी... मैंने फोन करके पापा और कम को मिशन के पूरा होने की खबर सुना दी थी.. वहां से पता चला क कम और मीडिया भी पोहचने वाली है.. स्पेशल न्यूज़ थी, तो बहुत से हेलीकाप्टर भी यहाँ आने वाले थे.. कुछ ऐसी hi खबर मुझे पता चली थी..

पहाड़ी इलाका था, तो यहाँ सबका फ़ौरन पोहंच पाना आसान नै था, सबको hi देर हो जाती..

मैं और महक तेज़ तेज़ क़दमों से चलते हुए दन्न भगोड़े को पकड़के क लिए वही जाने लगे, जहाँ दन्न और उसके दोस्त दूसरे रास्ते से जा रहे थे..

तेज़ चलते हुए हम वही जा पोहंचे, ये रास्ता शॉर्टकट था, दन्न साला कहा ये सबब जानता होगा.. वो सबब अभी भी नहीं पोहंचे थे.. जल्द hi हमें उनके भागने की आवाज़ें सुनाई देने लगी.. महक ने मुझे साइड में छुपे रहने क लिए कह दिए.. मई समझ गया क महक अब्ब दन्न के साथ चूहे बिल्ली का खेल खेलना चाहती है...

चलो आज दन्न को एक नया hi खेल खिलते हाँ, इंसानो से दन्न बहुत खेल लिया, अब्ब उसे एक नया खेल सीखने का समय आ गया था.. मेरी आँखों में देखकर महक मुस्कुराने लगी, मेरी आँखों से महक ने सबब जान लिया था.. महक हर हिसाब से मेरी टक्कर की लड़की थी, बहुत मस्त लाइफ गुजरने वाली थी मेरी महक के साथ..

बहार की लिए जूली के इलावा मेरे हिसाब से कोई नहीं था, जूली और महक दोनों hi मेरे मतलब की थीं, दोनों के साथ ज़िन्दगी मज़े में आने वाली थी, बास दन्न का ताँता ख़तम हो जाए.. फिर लाइफ में रंग hi रंग देखने को मिलने वाले थे.....

जल्द hi दन्न और उसके दोस्त वहां पोहंच गए.. हम साइड में कुहपे रहे, सब चरों किसी और तरफ धयान दिए बिना hi आगे बढ़ते चले गए.. कुछ फैसला रख कर हम भी उनके चल पड़े.. वो भाग रहे थे, तो हम तेज़ चल रहे थे.. वो जिस मोड़ पर मुड़ते हम उसी से रिलेटेड शॉर्टकट रास्ता मुंतखिब कर लेते.. भागते भागते दन्न और दूसरे बेस वाले एरिया से निकल कर उस तरफ पोहंच गए, जहाँ पवन के एक दोस्त को महक ने काट दिया था..

महक:- धीरे से) वहां लाश देखकर वो और भी डर जायेंगे.. मेरी दरिंदगी वो बहुत अच्छे से जानते हाँ..

विजय:- हाँ अब्ब वो भी समझ जायेंगे क उनके साथ भी कुछ ऐसा hi होने का समय आ गया है..

वही हुआ जैसा हम सोच रहे थे, लाश के पास पोहंच कर वो सबब रुक गए.. वो नहीं जानते थे. क हम भी उनके पीछे हाँ.. वो सबब टोर्च की रौशनी में भाग रहे थे.. नाईट विज़न चश्मे उनमे से किसी के पास भी नहीं थे.. इस सब का उन्हें टाइम hi नहीं मिला था.. वो टोर्च लेकर भाग खड़े हुए थे, या उनके पास उनके अपने मोबाइल में टोर्च लाइट मौजूद थी..

हम बिना आवाज़ के सबसे 30 फ़ीट के फासले पर पोहसंह गए..

DNN:-(tez सांस लेते हुए) ये सबब ज़रूर हरामज़ादी महक ने किया होगा, वो भी उस साले के साथ मिल गई है....... सबब तेज़ भागे थे तो सांस चढ़ गई थी, फिर लाश देखकर भी वो कुछ परेशां हुए थे..

मार्टिन:- अब्ब आगे और कहाँ तक भागना है..

दन्न:- अब्ब कुछ देर आराम करते हाँ, फिर आगे का कुछ सोचते हाँ, ऐसे भागे तो कही हम किसी और नयी मुसीबत में न फँस जाएँ.. हम नहीं जानते आगे हमारे लिए कहाँ कोई रास्ता मौजूद है, अब्ब उन दोनों से बचे हाँ तो सोच समझ कर hi आगे बढ़ेंगे......... महक ने सीटी बजानी शुरू कर दी..

" कैसे बछ कर जाओगे हमसे दन्न, भागो जितना भाग सकते हो, भागो, मई तीन तक्क गिनोगी, फिर मई लाइट गन से फायर करदूंगी, और तुम सबब एक सेकंड से भी काम समय में देखने से जाएगी"

दन्न:- तुमने मुझसे बग़ावत करके खुद के लिए बहुत बुरा किया है महक, बहुत बर्दाश्त कर लिया मैंने तुम को, अब्ब मई तुम्हे नहीं छोडूंगा..

महक:--1...................... महक ने दन्न की बात सुने बिना hi काउंटिंग शुरू करदी.....

दन्न:- किसी कुत्तिया से भी बदतर हालत करूँगा मैं तेरी हरामज़ादी, बहुत रोयेगी tu.mujhse बढ़ावत करने वाले को कभी माफ़ नहीं किया है मैंने.... दन्न भी महक की सुने बिना भूँकना शुरू हो गया.. दन्न के दोस्त उसे खेंचने लगे..

महक:--2....................... दन्न ने रुका वो फिरसे कुछ न कुछ बोलने लगा.. महक ने दन्न के पैरों में फायर कर दिए.. लाइट गन से नहीं, आम पिस्तौल से...

महक को फायर करते देखकर दन्न चुप हो गया, उसके दोस्त उसे खेंचते हुए आगे लेजाने लगे, दन्न का ग़ुस्सा कम् नहीं हुआ, पर वो खुद को सेफ भी रखना चाहता था... इस लिए अपने दसौतों के साथ मिलकर भागने लगा..

वो सबब अभी 20 फ़ीट hi आगे बढे थे क

महक:- 3......................... महक ने तीन कहा..." अब्ब तुम सबब अंधे होने क लिए रेडी हो जाओ, 5 सेकंड हाँ तुम सबके पास.. भागो और खुद को बचाओ"

इस बार दन्न भी सबके साथ मिलकर स्पीड से भागने लगा, महक कितनी सिरफिरी है, दन्न से बेहतर और कौन जान सकता था... महक ने सेकण्ड्स काउंट करने शुरू कर दिए..

सब मोड़ मुद गए थे. हम भी उनके पीछे हो लिए, वो मोड़ के दूसरी और घात न लगाए हुए हों, इसका धयान रखते हुए हम भी मोड़ मुद गए.. लेकिन वो सबब तेज़ी से हमसे दूर होने क लिए भाग रहे थे.. वो जिस तरफ भी जाते हम पता चल जाना था.. हम उनके हर मोड़ को धयान में रख रहे थे..

एक और मोड़ पर हम सबब एक दूसरे के आमने सामने हो गए... वो हमें अपने सामने पाते हुए रुक गए और किसी कुत्ते के जैसे हांपने लगे.. सबकी बुरी हालत थी..

इस बार मैं बोलै.

मज़ा उसमे है क दुश्मन को भी खबर दे में मारो...

अगर be-hunar है तो उसको हुनर दे के मारो..

दन्न:- तुम भी मरोगे मेरे हाथों हरामज़ादे, बहुत बुरी मौत मरोगे तुम, समझे.. तुम्हारा भी वैसा hi हाल करूँगा, जैसे तुम्हारी माँ का किया था. बहुत दर्द दे दे कर मैंने श्वेता को छोड़ा है सालों तक्क.. मुझसे बड़ा दरिंदे कौन हो सकता है.. दन्न हम्पते हुए बोलै.... वो बोल तो रहा था, पारर उसे खुद भी अपने बोलों में वो कॉन्फिडेंस नहीं दिख पा रहा था जो दन्न की पहचान थी..

दन्न की बात सुनकर महक मुझे देखने लगी, महक मेरे चेहरे को देख कर जज करने लगी क मई कितना सहन कर सकता हों दन्न की बातों को.. मैं महक को देख कर स्माइल देने लगा.... मैंने महक को अपनी बहन में भर लिया और एक हल्का सा किश कर दिए.. और दन्न को देखने लगा.... महक भी मेरी बहन में समाई रही, वो भी ऐसे दन्न को तड़पना चाहती थी..

दन्न खुद एक चुटिया इंसान था, हवस का पुजारी था, खुद की औरतों को किसी और से ढूढ़ते देख कर भी अनखन बंद कर लेता था.. अपनी बेटी को छोड़ने की बात भी कर चूका था.. उसे इस सबब से

vijay:-DNN तुम्हारा हाल तो बहुत hi भयंकर होने वाला है, और तुम ये भूल जाओ क अब्ब तुम मुझे ग़ुस्से दिला कर कोई गेम खेल जाओगे.. मुझे ऐसा बनने में भी तो तुम्हारा hi हाथ है ना.. अब्ब तुम और तुम्हारे ये दोस्त बास कुछ hi पल के मेहमान हाँ.. मौत के लिए नहीं, सुकून क ज़िन्दगी से कुछ पल hi डोर हाँ, फिर तुम सबब का एक और जनम हो जायेगा, तुम सबब की एक नई लाइफ शुरू हो जाएगी.. तुम सबब की आगे आने वाली लाइफ बहुत hi खुशहाल होने वाली है, इसकी तो मैं पूरी पूरी गारंटी देता हों.. अगर कोई शक है तो महक मेरी ज़मानत दे सकती है. क्यों महक डार्लिंग जानू......... मैंने महक को एक हल्का सा किश कर दिए....

पिस्तौल तो उनके पास भी थे जो पहले वो इस्तेमाल नहीं कर सके थे, इस बार वो हमें ग़ाफ़िल जान कर शूट करने की सोचने लगे.... मई और महक इस सबब का खास धयान रखे हुए थे.. मई और महक हस्सन लगे..

महक:- हम पर गोली चलाओगे, चलो शाबाश जल्दी करो, देर मैट करो, दन्न बोलो अपने दोस्तों को हमें शूट करें.. इतना बोल महक हस्सन लगी.... तुम जानते हो दन्न विजय अब्ब मेरा हस्बैंड भी है, हम दोनों ने शादी कर ली है.. जल्द hi तुम नाना भी बनने वाले हो, नाना बनने से पहले तो तुम्हे नहीं मरने डोंगी... चल अब्ब भागो यहाँ से और खुद को सेफ करो.. महक ने विलियम के हाथ पर गोली मार दी, वो चालाकी करने वाला था, पिस्तौल भी इसके हाथ से गिर गया और एक हाथ भी वो ज़ख़्मी करवा बैठा..

विजय:- कहा था न क कोई हुशियारी मैट करना.. चलो अब्ब सबब अपनी पॉकेट खली करके जो कुछ है अंदर बहार फ़ेंक दो.. वर्ण ........... महक फिरसे काउंटिंग तो शुरू करना, तुम्हारी काउंटिंग का अच्छा रिजल्ट निकलता है...... महक हस्ते हुए फिरसे काउंटिंग करने लगी.. चारो नचार सबने अपने पिस्तौल फ़ेंक दिए.. दन्न साला बिना गन के hi था.. मैंने अच्छे से चेक कर लिया था...

जहाँ पे तेरी बदमाशी ख़तम होती है.

वहां से हमारी नवाबी शुरू होती है..

हमें ग़र्ज़ नहीं तेरी बदमाशी से..

हमारा नाम तो तुमने सुना होगा..

दो शेर और मैंने दन्न को सूना डाले.. दन्न अब्ब ग़ुस्से कम् और लाचारी से ज़यादा हमें देख रहा था, हमारा स्टैमिना देख कर दन्न की हालत बदलने लगी थी..

हमारे कॉन्फिडेंस के आगे दन्न डगमगाने लगा था.. महक उसे जलने की कोशिश कर रही थी.. पारर वो साला खुद को खतरे में देख कर सुध बुध खोने लगा था.. गुफा कर माहौल भी उसपर कुछ ज़यादा hi असर अंदाज़ हो रहा था.. इतना दररना तो नहीं चाहिए था दन्न को.. शायद वो दररने की एक्टिंग करके हमसे कोई गेम खेलना चाहता था.. दन्न सब्ब ज़यादा खेलना खतरनाक हो सकता था.. साला इंडिया का सबसे बड़ा हरमदाजा था.. बेस्ट ब्रेन भी था.. अभी कुछ घबराया हुआ था, कही इसका दमाग चला तो कही भी बाज़ी पलट सकता था..

विजय:- महक इन सबब उसी सांपो वाले कुँए में न दाल दें.. वैसे भी ये सबब उसी दिशा में hi तो जा रहे थे... मेरी बात सुनकर दन्न और उसके दोस्त को घबरा से गए.... सबब कभी मुझे तो कभी महक को देख रहे थे.. सबके सबब हट्टे काटते थे.. पर इस टाइम हमारे आगे वो भेजी बिल्ली बने हुए थे... कुत्ते साले खुद से लड़ना नहीं जानते थे.. गन और दमाग चला कर डॉन बने हुए थे..

महक:- मतलब इंसबब को यही मार दें..

विजय:- हाँ क्या पता वहां जा कर ये अपने रिलेशन्स और पावर को काम में लाते हुए हमें कही का ना छोड़ें. और ये भी हो सकता है क अपनी पावर के बलबूते पर ये हम सब को hi मरवा दे... अगर तुम दन्न को सांपो से नहीं दसवाना चाहती तो फिर वो तालाब भी सही है, जहाँ मगरमच्छ हमने देखे थे..

महक:- अरे हाँ, मई भी कुछ ऐसा hi सोच रही थी... अब्ब इन सबब को पैलेस में ले कर जाना सेफ नहीं है, इन सबब को यही मार देते हाँ.. चलो आईएनएस अब्ब को मारने का इंतेज़ाम करते हाँ.... महक भी सब समझते हुए मेरे साथ देने लगी थी.. मज़ा तो बहुत आ रहा था, दन्न और बाकी सबसे चूहे बिल्ली का खेल खलेते हुए.. पर ज़यादा देर खेल नहीं सकते थे..

बहुत बुरी हालत हो चुकी थी सबब की.. एक तो कई घंटों से हमने सब को अपनी दहशत की लपेट में ले रखा था... दूसरा उनके पास कोई ऑप्शन hi नहीं बचा था, वो कैसे भी करके हमसे नहीं बच सकते थे... तीसरा वो अच्छे से जानते थे क किसी भी मामले में वो हमसे बेटर नहीं हाँ,.. एक दमाग था दन्न के पास वो भी कई धमाकों की वजा से काम करने लायक नहीं रहा था, और अब्ब मई नहीं चाहता था क दन्न कुछ ऐसा सोच जाए जो उसे बचा जाए.. अब्ब इन गुफाओं में दन्न से खेलना सही नहीं था, एक hi मिस्टेक हमें दन्न को हमारी नज़रों से हमेशा क लिए ओझल कर सकती थी.. या तो दन्न यही कही मारा जाता, अगर वो बच जाता तो इतना खतरनाक बन्न कर सामने आता क मई क्या कोई भी उस काबू में नहीं कर सकता था.. दन्न हरामी पुरे महाराष्ट्र का बाप था, दन्न छुपे रह कर मुझसे जुंग लड़ता और मई बहुत कुछ इस जुंग में खो सकता था.. दन्न दरिंदा सिफत था, वो ये जुंग जीतने क लिए बड़े से बड़ा आतंकी हमका करवा सकता था.. आम लोगन को मार सकता था, और आम लोगों को बचने क लिए मुझे खुद की बलि भी देनी पद सकती थी..

महक भी अब्ब ये सबब समझ गई थी, इसलिए हमने अपनी गेम बदल कर दन्न को और उसके दोस्तों को और भी ज़यादा डरना शुरू कर दिए था, ता क वो अपना बचा हुआ दमाग इस्तेमाल न कर सकें... बहुत बड़े गैंगस्टर थे, और किसी भी समय वो बाज़ी पलट भी सकते थे...

कोई भी बहुत बड़ा गैंगस्टर हो, जब उसका सामना अपने से बड़े गैंगस्टर से होता है तो, वो दहशत में आ जाता है... मेरा और महक का कॉन्फिडेंस, ठंडा लहजा, आँखों में दरिंदगी और सफ्फाकि देखकर वो सबब जान गए थे, क अब्ब उनका बुरा वक़्त शुरू हुआ चाहता है..

सबसे चेहरे पीले पद गए थे..

महक:- दन्न क्या तुम जानते हो क अब्ब पुलिस के साथ हमारे आदमी भी इस बेस में घुस चुके हाँ, तुम जब्ब वहां से भागे थे, तो हमने एक कॉल करके सबब को अंदर आने को कह दिए था.. तुमने दिल्ली आ कर एक गलती करदी थी, फिर बेस को अपना ठिकाना बना कर दूसरी गलती कर दी थी.. फिर अपने बहार मौजूद सब गुंडों को अंदर बुला कर तीसरी गलती करदी... जिस धंदे में तुम सबब हो, जितने दुश्मन तुम्हारे हाँ, क्या तुम्हारे पास गलती करने की कोई गुंजाइश है...

दन्न महक के सामने क्या बोलता.. महक ने मुझे देखा और फिर एक इशारा कर दिए, दन्न और बाकी सब को बातों में उलझा कर हमने सबब पर hi टूट पड़े.. सबके hi सरों पर थक्क थक्क करके पिस्तौल के दस्ते बरसने लगे... पल भर में hi सबब ढेर हो गए...

दन्न से हमने झूट बोलै था, वो कुँए वाली साइड में नहीं आये थे, वो सबब इस जगा आ गए थे, जहाँ से गुफा से बहार जाने का रास्ता था... कुछ आगे जाए कर गुफा घूम जाती थी, और थोड़ा सा चलने के बाद गिरसे लेफ्ट और कुछ आगे फिरसे लेफ्ट और हम गुफा से बहार.....

महक ने मुझे देखा और मई महक को देखने लगा..

महक:- कॉंग्रट्स विजय हमारा मिशन पूरा हुआ... महक ख़ुशी भरे अंदाज़ में मुझे बधाई देने लगी

विजय:- (मोहन लटकाये हुए) नहीं महक अभी हमारा मिशन पूरा नहीं हुआ...

mehak:-(shocked) क्या मतलब अभी मिशन पूरा नहीं हुआ.......... लड़कियों के पास एक मर्द हो तो ऑस्कर वो बुद्धू बन जाय करती हाँ, ज़यादा सोचने समझने वाला काम छोड़ देती हाँ.. महक का भी कुछ ऐसा hi हाल हुआ पड़ा था.. महक की मांग क्या भरी थी मैंने, महक मेरे मामले में कुछ ढीली पद गई थी. महक मेरे एक एक अंदाज़ पर घोर नहीं कर पा रही थी, कभी मुझपर पूरा पूरा धयान देती तो कभी बिलकुल भी नहीं.....

महक को शॉकेड छोड़ते हुए मैंने महक को एक झटके में hi अपनी बहन में भर लिया, और इस बार महक बुरी तरह से खुद को मेरी बहन से छुड़ाने लगी, अब्ब महक ने मेरी आँखों में बहुत कुछ देख लिया था, और महक ने बहुत कुछ जान भी लिया था.. मैंने महक को खुद की बहन में बहुत सख्ती से जकड लिया था, महक कोई दूध पति बच्ची नहीं थी, महक एक शेरनी थी, और शेरनी को दाम में लाना आसान काम नहीं है..

महक मेरी बहन में बुरी तरह से फड़फड़ाने लगी.. महक मेरी पकड़ से निकल जाना चाहती थी, लेकिन अब्ब जब्ब मिशन पूरा हो चूका था, तो महक से अब्ब कुछ और भी कर लेना चाहिए था.. महक से छेड़ छड़ मुझे बहुत मज़ा दे जाती थी.. मेरे होंठ झुके और महक की गर्दन को बोसा देने लगे.. महक की एकदुम्म से hi हवा निकल गई. महक ने एक झुरझारी सी ली थी..

मैं धीरे धीरे महक की गर्दन को चूमने लगा, महक भी धीरे धीरे करके ढीली पड़ने लगी.. महक के हाथ मुझ पार्स ढीले पर गए थे.. मैंने भी महक को अपनी बहन में ढीला कर लिया, इस बार महक मेरी बहन से नहीं निकली.. मई बार बार महक को एक नया hi माहौल दे था, महक भी बदलती जा रही थी, वो भी पूरी तरह से एक लड़की hi थी, बास दन्न के और अपने घर के चलते वो इस सबब से दूरथी, सबके सब hi हवस के पुजारी थे, इसलिए महा इस सबब से बचके रहती थी, अब्ब महक मेरी पत्नी थी, और महक को भी अगर मुझसे परेशानी होती तो महक यौन मेरी बहन में सुस्त न पड़ती..

महक मेरे होंटो को खुद की गर्दन पर महसूस करते हुए मज़े में होने लगी थी.. महक के हाथ मेरी पीठ कर आये और महक ने मेरी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया. मैंने महक की गर्दन से अपने होंठ अलग किया और महक की आँखों में देखा तो महक मुझे मज़े में दिखी.... महक के चेहरे पर मुझे एक सुकून दिखा.. जैसे महक को मेरा ऐसा सबब करना और वो भी थोड़ी सी ज़बरदस्ती के साथ महक को ये सबब अच्छा लगा था.. मैंने अपने होंठ महक के होंटो के पास किये, इस बीच हम दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे.. महक ने मेरे होंटो को अपने होंटो से मास्स होने दिया.. जैसे hi हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मास्स हुए तो हम दोनों के hi बदन में सनसनी सी दौड़ गई थी, ये हमारा पहला ऐसा किश था, जो हम दोनों hi पूरी तरह से एक दूसरे की मंशा से कर रहे थे.. मैंने महक के निचले होंठ को अपने होंटो में लिया और किश करने लगा, महक के बेस में घूमने फिरने की वजा से होंटो पर आई हुई गार्ड मेरे होंटो में सामने लगी, टास्ते कुछ बदला हुआ सा ज़रूर था, लेकिन असल मज़ा तो किश का था.. असल मज़ा तो हम दोनों की मैं मर्ज़ी से hi होने वाली किश का था, असल मज़ा तो हम दोनों के hi एक दूसरे के करीब हो जाने का था..

मेरे हाथ महक की पीठ पार्स नीचे सरकने लगे, औरत सरकते हुए महक की कमर और फिर महक की कमर से भी नीचे महक के चुत्तड़ो पर आ ठीके.. महक ने इस बार भी मुझे नहीं रोका.. महक के बदन में सनसनी सी हुई ज़रूर थी, पारर वो नशे वाली नहीं थी, ये पहली बार मैं मर्ज़ी से होने वाले किश के कारन थी..

महक ने मेरे ऊपर वाले होंठ को पीने लगी, थोड़ी hi देर में हमने कुछ स्पीड पकड़ ली, मेरे हाथो ने महक के चुत्तड़ो को हल्का हल्का दबाना शुरू कर दिए..

ऐसा hi 5 मिंट और गुज़रे हमने दोनों ने जी भर कर एक दूसरे के होंटो को प्यार दिया, उसका रस पिया, फिर मैंने hi महक के होंटो को छोड़ दिए, अपने हाथ भी महक के चुत्तड़ो पार्स हटा दिए..

महक मेरी आँखों में देखने लगी, मुझे महक की आँखों में ख़ुशी और सुकून तो दिखा.. पर मुझे महक की आँखों में नशा या बेचैनी नहीं दिखी.. महक अंदर से बहुत स्ट्रांग लड़की थी.. इतनी जल्दी पिघलने वाली नहीं थी..

महक:- तो अब्ब तुम्हारा मिशन पूरा हो गया है ना.. महक स्माइल देते हुए बोली..

विजय:- नहीं, यहाँ का पूरा हुआ है, लेकिन अभी मेरा मिशन अधूरा है....... मैं महक के फिगर को घूरते हुए बोलै.......

महक:- बड़े न शुक्र हो तुम, नेक्स्ट टाइम धयान रखना, जितना अब्ब मिला है, कही इससे भी न हाथ धोने पड़ें.. महक मसखरी करती हुई बोली.. चलो अब्ब इनको लेकर चलते हाँ..

कहीं बीचे रास्ते में hi न होश में आ जाएँ.. अब्ब हमें सबब से बच कर भी निकलना है..

हम दोनों ने hi दो दो को अपने कंधे पर उठा लिया, महक भी इस मामले में बहुत ताक़तवर थी... पर यहाँ ताक़त से ज़यादा तकनीक की ज़रूरत होती है...

महक ने भी दो को अपने कंधो पर उठा लिया, और मुझे स्माइल देती हुई मेरे साथ hi गुफा से बहार निकलने लगी..




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अपडेट ::: 131


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नेक्स्ट डे


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दन्न को होश आया तो उसने खुद को एक चेयर पर बंधे हुए पाया, दन्न के बदन पर एक भी कपडा नहीं था.. दन्न की आँखों अपने लुंड को घूरते हुए खुली थी.. उसका सर्र झुका हुआ था...

जब्ब उसे होश आया तो सबसे पहले उसे अपना नंगा लुंड hi दिखा, अपने लुंड को देख वो बोखला गया और उठने की कोशिश करने लगा, लेकिन बंधा हुआ होने की वजा से वो महज़ हिल hi सका.. उठने की नाकाम कोशिश के बाद दन्न ने अपना सर्र उठाया और चरों तरफ देखने लगा..

एक बार फिरसे दन्न उछाल पड़ा, पारर वो भूल गया था क वो उछाल कूद की हालत में नहीं रहा है.. दन्न ने सामने देखा तो अपने सामने कई लोगों को पाया, औरतों की तादाद ज़यादा थी, और सबसे आगे दन्न को श्वेता hi दिखी.. दन्न किसी और को न देख कर श्वेता को देखने लगा... दन्न के चेहरे पर हवाइयां उजड़ने लगी थीई..

दन्न इस समय पैलेस के बेसमेंट में था.. और सब इस समय उसके सामने मौजूद थे, दन्न को पूरा दिन और पूरी रात बेहोश रखा गया था.. अगले दिन ब्रेकफास्ट के बाद उसे होश में लाया गया था..

दन्न श्वेता को देख कर दांग रह गया था, वो सबब समझ गया क अब्ब वो एक ऐसे शिकंजे में पहनास चूका है, जिससे बच पाना उसके लिए मुमकिन नहीं है..

गुफा में hi वो सबब समझ गया था क उसका खेल अब्ब ख़तम हो चूका है, जिस इंसान की बेटी hi उसे बर्बाद कर देने पर तुली हुई हो. वो इंसान कैसे किसी के चुंगल से बच सकता है.. और फिर जैसी लाइफ दन्न ने जी थी.. ऐसा सबब उसके साथ तो होना हो था.... पारर दन्न शायद ये नहीं जानता था क उसके साथ होने क्या वाला है..

मैं भी माँ के पास hi खड़ा था.. पूजा मेरे दूसरी साइड थी, तो मेरी तितलियाँ माँ के दूसरी साइड में कड़ी थीईईई...

माँ दन्न को ग़ुस्से से देखने की बजाये शांत नज़रों से देख रही थी, कल से hi कई बार सब hi आ आ कर दन्न को देख चुके थे... कल जब दन्न को यहाँ लाया गया था तो माँ शदीद ग़ुस्से में आ गई थी..

माँ पहले तो बहुत ग़ुस्से में आई थी, पारर फिररर माँ ने जल्द hi खुद पर काबू भी पा लिया था.. वो अब्ब अंदर से बहुत स्ट्रांग बन्न चुकी थी, मुझसे हुई शादी ने माँ को पूरी तरह से अंदर से और बहार से बदल कर रख दिए था..

और फिर अपने दुश्मन के सामने खुद को शांत hi रखना चाहिए.. ग़ुस्सा तो दिखना hi पड़ता है, लेकिन हिसाब से... दुश्मन को पहले अपने कॉन्फिडेंस से मारो, फिर उनकी आँखों में ऑंखें दाल कर उसे अंदर से तोड़ो.. दुश्मन को दिखाना चाहिए क सामने वाला उससे कहीं बढ़ कर है.. उसकी विल पावर उसकी सहन शक्ति कही आगे तक है............ माँ जब तक्क कोठे पर रही, दन्न के सामने हमेशा hi टूटी रही थी, हमेशा hi डब्ब कर रही थी..... पारर अब्ब नहीं..

अब्ब माँ सिर्फ माँ नहीं थी, मेरी पत्नी भी थी, माँ की लाइफ से एक एक करके अब्ब सारे दर्द जा रहे थे. एक औरत जब माँ भी हो, उसकी सूनी मांग भी भर जाए तो उससे बढ़ कर स्ट्रांग फिर कौन हो सकता था.. उसका जवान बीटा, और उसका पति उसकी रक्षा करने क लिए, उसे हमेशा सपोर्ट करने क लिए मौजूद था, तो फिर माँ क्यों कमज़ोर रहती.........

माँ को अब्ब रोज़ hi कोई न कोई नयी ख़ुशी मिल रही थी.. माँ के अंदर के दुःख और दर्द को मेरे प्यार ने, एक आज़ाद लाइफ में पूरी तरह से ख़तम कर दिए था.. बास अब्ब कुछ थोड़ा सा बाकी रह गया था, वो भी अब्ब जल्द hi पूरा होने वाला था..

माँ दन्न को पालक झपकाए बिना देख रही thi..DNN ने पहले तो माँ को घूरना जारी रखा, पारर माँ की आँखों की निकलने वाली आग दन्न सहन नहीं कर पाया.. दन्न को हार माननी hi पड़ी..

मैं अपनी जगा से हिली और दन्न की और बढ़ने lagi..main भी माँ के साथ आगे बढ़ने लगा... पूजा और तितलियाँ कुछ पीछे हमारे साथ थी.. इस वक़्त भी पापा यहाँ पर मौजूद नहीं थे.. कल वाले काण्ड के चलते बहुत बिजी थे वो.. कल आधे घंटे क लिए वो आये थे.. उसके बाद वो नहीं आये...

पापा के शिव इस टाइम सबब hi मौजूद थे, बेसमेंट का हाल बहुत बड़ा था, मुझसे रिलेटेड और कोठे से रिलेटेड सब hi यहाँ बेसमेंट में थे..

मई और माँ दन्न के पास पोहंच गए.. दन्न ने एक बार फिरसे माँ की आँखों में देखा और फिरसे नज़रें फेर लीं....

maa:-(maa बोली तो माँ का लहजा सामने वाले को ठिठरा देने वाला था.. इतनी सख्ती इतनी आग थी माँ की आवाज़ में) क्यों क्या हुआ, ऐसे नज़रें क्यों चुरा रहे हो, मेरी आँखों में देखने की शक्ति खो बैठे हो क्या.??? अब्ब मुझे डी न न बन्न कर नहीं दिखाओगे, अब्ब मुझे वैसी hi नज़रों से नहीं देखोगे.. सालों तक तुम मुझे छोड़ते रहे हो, कभी भी मई तुम्हारी आँखों में नहीं देख सकीय थी, अब्ब तुम मेरी आँखों में नहीं देख पा रहे ho.waqt बदल गया है. इस लिए ऑंखें चुरा रहे हो.. नहीं डी न न ऐसे में मुझे मज़ा नहीं आएगा, मुझे वैसे hi देखो, जैसे कोठे पर रहते हुए मुझे देखा करते थे.. किसी कायर इंसान के जैसे मुझसे नज़रें मैट चुराओ.......... sunaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

tumneeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

'माँ ने दन्न के सर्र के बालों को कस के पकड़ते हुए उसका सर्र ऊपर उठाया, माँ अचानक से hi ऊंची आवाज़ में बोलने लगी थी'

माँ आज मुझे माँ hi दिख रही थी, वो माँ जिसकी आबरू एक कोठे की नज़र कर दी गई थी.. वो माँ जिसकी औलाद के सामने hi उसकी इज़्ज़त उतार दी गई थी.. माँ की आवाज़ में ghussa,dard, आग, नफरत, इन्तेक़ाम, और na-jaane क्या कुछ था.. हर तरफ सन्नाटा सा छ गया... ख़ामोशी तो पहले से hi थी.. पारर अब्ब तो जैसे सबकी साँसे hi थम गई थीई... मैंने पूजा और अपनी तितलियों को देखा वो सबब माँ को देख रही थी.. वो चरों किसी मुजसमे के जैसी कड़ी थी..

" मैंने कहा मेरी आँखों में देख के मेरी बात सुनो.. मैं भी तो सालों ऐसे hi तुम्हारी कैद में रही थी, तुम मुझपर ज़ुल्म पर ज़ुल्म करते रहे.. पल पल मुझे खुद भी रोंदते रहे और अपने कुत्तों को भी मुझपर चढ़ाये रख, किसी जानवर की ातरः.............. तुम एक कायर दुश्मन निकले थे डी न न, तुमने छुप कर, छल से सबब किया था, किसी की भी आँखों में ऑंखें दाल कर तुमने कुछ नहीं किया था.. मेरे घरवळून की आँखों में धुल झोंक कर मुझे उनसे दूर कर दिए था..

तुम्हारी hi तरह से वो सबब भी मेरे गुनेहगार हाँ... पर फिर भी वो ऐसे थे क तुम उनमे से किसी की भी आँखों में ऑंखें दाल कर मुझे यौन बर्बाद नहीं कर सकते थे... मुझे वहां से ले गए.. उसके बाद तुमने मेरे लिए ज़िन्दगी दलदल बना दी.

तुम इतने बड़े सूरमा हो क मुझे मेरे घर से लेजाने के बाद भी मेरे बारे में मेरे घरवळुङ्न को बताने की हिम्मत खुद में नहीं पा सके...

अगर वो सबब जान जाते तो वो सबब तुम्हारी बादशाहत कबकी ख़तम कर चुके होते..

उन सबब ने भी मिलकर मुझपर बहुत ज़ुल्म किया था, उन सबब को भी मई देख लुंगी..

किसी के लिए भी मांगी की कही कोई गुंजाइश नहीं है... खून माफ़ किया जा सकता है दन्न.......... एक माँ की ममता और माँ की इज़्ज़त को लूटने वळून को. और लौट का सामान बनाने वळून को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता... उन सबब का भी बहुत बुरा हाल होगा दन्न..

पारर तुम उन सबब की आँखों में ऑंखें दाल कर दुश्मनी नहीं निभा सके..

तुम एक कायर दुश्मन निकले दन्न.. thuuuuuuuuuuu हीी तुझपरररररररर

सालों से मई ये सबब तुमसे कह देना चाहती थी, पारर वहां मई मजबूर थी, वहां तुम एक दरिंदे थे, अगर मई वहां अकेली होती, तो तुम कभी भी मुझे वहां ज़यादा देर नहीं रख सकते थे, मैं अपने बच्चों की वजा से मजबूर हो गई थी.. वर्ण कबकी वहां से निकल चुकी होती..

वज्जू बीटा मुझे इसे इस हाल में देख कर मज़ा नहीं आ रहा, साला कुत्ता कितनी जल्दी ढीला पद गया है, इतनी जल्दी इसकी अकड़ ख़तम तो नहीं होनी चाहिए थी.

देखो कैसी किसी ख़ौफ़ज़दा कुत्ते के जैसे बैठा हुआ है.. मुझे इसे ऐसे टार्चर करके मज़ा नहीं आएगा.. कुछ सोचो इसका....

विजय:- माँ इसकी अकड़ इसके आदमियों की वजा से थी, वो सबब मारे तो अब्ब ये किसी काम का नहीं रह गया.. इसकी अकड़ इसकी बेटी के हमारे साथ मिल जाने से भी ख़तम हो कर रह गई है..

माँ ने जूही माँ को देखा. माँ ने उन्हें पास आने को बोलै. वो पास आएं..

माँ:- दन्न देख और पहचान इस औरत को, बता सकता है क ये कौन है, दन्न ने जूही माँ को देखा, तो दन्न ने जूही माँ को देखा, एक नज़र दन्न ने बेसमेंट में मौजूद सभी को hi देखा था, पारर माँ को देखकर वो किसी और को धयान से देख hi नहीं पाया था.. अब्ब जब उनसे धयान से देखा तो, तो जूही माँ को देख के मारे हैरत के फिरर से उछाल पड़ा..

दन्न:- तुम यहाँ, तुम तो मर्डर गई थी, तुम्हारे खंडन में से कोई भी तो ज़िंदा नहीं बचा था..... दन्न की बात सुनकर मुझ समेत सब hi हैरान रह गए थे, हम में से किसी ने भी कभी कुछ नहीं जाना था.. जूही माँ ने दन्न को घोरसे देखा, फिर कारन और जूही को पास आने का इशारा किआ. वो भी पास आये तो दन्न इस बार और भी हैरान रह गया.... दन्न फटी फटी आँखों से कारन और जूही को देखने लगा..

जूही माँ:- क्यों पद गए न हैरत में. तुम क्या समझते थे, क तुम सबब को ख़तम कर चुके हो.. नहीं तुम सबब को ख़तम नहीं कर सके थे, हम तीनो वहां से बच निकले थे.. उस दिन से मई इंतज़ार में थी, क कब्ब मुझे मौका मिला और मई तुझसे अपना बदला ले सकूँ.. पारर फिर बाद में पता चला क तू तो बहुत बड़ा हरामी है, मेरी hi तरह और भी कइयों को बर्बाद किया है तुमने... अब्ब समय शुरू हो चूका है दन्न तुम्हारा हिसाब हो गया है, अब्ब से तुम एक एक सांस के साथ मौत की भीक मांगोगे.. एक एक पल तुम सिसक सिसक कर बिताओगे.. तुम्हे जानो को ख़तम करने में और इज़्ज़तों को लूटने में बहुत मज़ा आता रहा है ना.. अब्ब ये सबब तुम्हारे और तुम्हारे खंडन के साथ भी होने वाला है.. अब्ब से तुम्हारा, तुम्हारे साम्राज्य का और तुम्हारा खंडन की बर्बादी का काउंटडाउन शुरू हुआ चाहता है..

विजय बीटा इसके साथ कुछ ऐसा करना क इसे एक एक पल का दर्द महसूस हो, इसे वो सबब याद आने लगे, जो ये अपने गुज़रे समय में कर चूका है.. इसका भी सब कुछ वैसे hi उजाड़ दो, जैसे ये दुसरो का उजड़ता रहा है.. इसे दूसरों की इज़्ज़त उतारने का बहुत शोक रहा है, इसके सामने इसकी भी इज़्ज़त उतारो.. तभी मुझे चैन मिलेगा...

माँ:- बेहेन तुम इस कुत्ते को पीट कर खुद को अंदर से हल्का कर सकती हो.. जूही बेटी तुम भी, और कारन बीटा तुम भी अपने अंदर का ग़ुस्सा उतार सकते हो..

जूही माँ:- नहीं श्वेता बेहेन, ऐसे हमारे अंदर का सबब दर्द ख़तम नहीं होगा, इसे भी वैसे भी सिसक सिसक कर तड़पते हुए जीते देख कर हमारा अंदर के ज़ख्म खुद से hi भरने लगेंगे..

कारन:- माँ आपने सही कहा, इसे पीट कर खुद का ग़ुस्सा क्या कम् होना है, इसकी हालत hi ख़राब हो जाएगी.. इसे मार की नहीं, मेंटली टार्चर की ज़रूरत है..

जूही:- हाँ भाई आपने सही कहा, जितना दर्द इस कुत्ते ने हमें दिए है, उससे कही बढ़कर दर्द मिलना चाहिए.. तभी हमें चैन मिलेगा..

माँ:- तो फिर इसको आज एक छोटी सी सजा देते हाँ, विज्जू बीटा किसी से कह कर ढेर सारा दूध मंगवाओ, आज इसे इतना दूध पिलाओ क ये याद रखे..

जूली भी बेसमेंट में hi थी, उसने किसी को कॉल मिला दी.. कुछ hi देर में एक बड़े बर्तन में दूध लाया गया..

एक टेबल पास में रखकर उसपर वो बर्तन रख दिए गया..

माँ:- विजजू बीटा तुम ज़रा साइड में होना, हम औरतों को इस कुत्ते की कुछ सेवा करने दो.............. दन्न दूध को देखकर कुछ हैरान तो हुआ था, लेकिन खुदके अंजाम का सोच कर उसकी हालत पतली होने लगी थी..... मुझे दन्न को ऐसे हारते देख कर मज़ा नहीं आ रहा था.. साले हमारे शिकंजे में क्या आया था, खुद का सारा घमंड, खुद का सारा ात्तिट्ठूड भूल गया था..

मई साइड हुआ, पूजा और अपनी तितलियों के साथ जा खड़ा हुआ... प्रिय ने मुझे बाज़ो से थाम लिया था. प्रिय दन्न को देख कर बहुत ग़ुस्से में थी.... उसका बास नहीं चल रहा क वो दन्न के टुकड़े टुकड़े करदे.. मेरी hi तरह से मेरी प्रिय भी माँ के लिए बहुत रोइ थी.. मुझसे ज़यादा तो मेरी प्रिय ने माँ का दर्द देखा था..

माँ ने जूही माँ और जूही की मदद से दन्न का मोहन खोला और थोड़ा थोड़ा कर दन्न को दूध पिलाना लगीं, दन्न खुद पियासा था, तो दूध मज़े ले ले कर पीने लगा.. 2 गिलास दूध दन्न के पेट में गया तो दन्न ने अपना मोहन हटा कर माँ को देखा और कुछ ऐसे रियेक्ट करने लगा क बास अब्ब और की गुंजाइश नहीं है..

माँ हस्ती हुई बोली:- क्या हुआ तुमने मोहन क्यों साइड में कर लिया, यहाँ तुम्हारी नहीं हमारी मर्ज़ी चले गई, अब्ब से पहले जो भी तुम्हारे तसर्रुफ़ में आया है, तुमने उसपर खुद की मर्ज़ी चलाई है, अब्ब तुम हमारे तसर्रुफ़ में आये हो, तुम हमसे खुद की सेवा करवाओ, आखिर तुम हमारे मेहमान हो, क्यों बेहेन मैंने सही कहा ना.

जूही माँ:- हाँ श्वेता बेहेन एक मेहमान को हम भूका पियासा तो नहीं रहने दे सकते ना.......... जूही माँ भी अब्ब मज़ा लेने लगी थी.. दुश्मन को हस्ते खेलते टार्चर करने में अपना hi एक मज़ा है..

जूही:- माँ कुछ मुझे भी इस कुत्ते को दूध पिलाने दो, माँ की आँखों में जूही की बात सुनकर कुछ चमक सी आ गई थी, माँ मुझे देख के मुस्कुराने लगी, बात सिंपल सी थी, लेकिन जूही की बात का मतलब कुछ और भी बन्नता था, जूही को जैसी hi माँ की आँखों का एहसास हुआ तो वो बुरी तरह से झींप गई... जूही अपनी माँ के पीछे मोहन छुपाने लगी.. कारन और जूही माँ पास में hi थी, वो भी समझ गए थे, मैंने और माँ ने खुद के फेस एक्प्रेशन कण्ट्रोल किये, और अपना चेहरा भी साइड में कर लिया..

माहौल को सझते हुए जूही ने भी खुद पर काबू पाया और लगी दन्न को दूध पिलाने, दन्न को अब्ब ज़बरदस्ती दूध पिलाया जा रहा था, धीरे धीरे दन्न के चेहरे के रंग बदलने लगा था.. दन्न के मोहन से नीचे इतना दूध उतार दिए गया था क दन्न के मोहन के अंदर से और नीचे जाने की गुंजाइश hi ख़तम हो गई थी, दन्न के चेहरा नीचे नहीं होने दिए गया..

पानी जितना माज़री किसी को पीला दिए जाए, एक्स्ट्रा होने पर पानी की वजा से परेशानी तो होती hi है, लेकिन दूध के जितनी नहीं होती..

इतना दूध दन्न के अंदर जा चूका था क दन्न के नाक आंख और कान से भी दूध टपकने लगा था. दूध की ओवर दोसे अक्सर hi कुछ कारनामा कर दिखती थी..

दन्न की बहुत बुरी हालत हो चुकी थी.. कुछ देर दन्न को ऐसे hi रखा गया, फिर दन्न के सर्र को छोड़ दिए गया.. दन्न का पेट बुरी तरह से फूल चूका था..

दन्न का सर्र नीचे हुआ पारर उसे वोमिटिंग नहीं हुई.. जैसे hi दन्न कुछ बहाल हुआ तो सबब को लाचार नज़रों से देखने लगा.. फिर दन्न की जैसे hi नज़र दूध के बर्तन पर पड़ी तो दन्न का जी ख़राब होने लगा, दन्न को मतली होने लगी, अचानक से hi दन्न के अंदर का सारा दूध वोमिटिंग की सूरत में बहार आने लगा..

अब्ब अगर दन्न को छोड़ भी दिए जाता तो दन्न साड़ी उम्र के लिए दूध से बाघी हो चूका था, दूध को देखते hi दन्न को वोमिटिंग शुरू हो जाय करती..

मुझे बाद में इस सबब का पता चला था, माँ ने hi मुझे इस सबब के बारे में बताया था, माँ ने शायद अपनी जवानी में कभी कोई एक्सपीरियंस किया हो, या किसी को कुछ करते हुए देखा जो....

दन्न को अब्ब मिल्क फोबिया हो गया था.. कुछ देर दन्न मोहन खोल कर अंदर का सारा दूध निकालता रहा.. दन्न को अच्छी खासी वीकनेस हो गई थी..

माँ:- दन्न अभी तो तुम्हे और भी दूध पिलाया जाने वाला है.

दन्न:- (चीखता हुआ) ननननननननन. नाहीईई nahiiiiiii..mmmmmmmmm मई और दूध नहीं पिऊँगा, चाहे तुम मेरी जान ले लो, पर मई और दूध नहीं पिऊँगा.. दन्न दूध की तरफ देखना hi नहीं चाहता था.. माँ ने दूध का भरा हुआ गिलास दन्न के चेहरे के पास किया, जैसे hi दूध की स्मेल दन्न के नाक से टकराई तो

दन्न ोुघ्घ्घ करता हुआ फिरसे वोमिटिंग करने लगा... दन्न पूरा ज़ोर लगा कर अंदर का सबब बहार निकलने की कोशिश में था..

ऐसे hi वक्फे वक़्फ़े से दन्न के साथ खेल खेला जाता रहा, फिर ख़ास को छोड़ कर बाकी सबब जाने लगीं...

अब्ब बेसमेंट में मई, मेरी माँ बहने, सोना फॅमिली, जूही फॅमिली, महक और दिल्ली वाली फॅमिली रह गई...

महक जूली और शुष्मा दीदी के साथ कड़ी थी. महक ने अभी के लिए दन्न को छोड़ दिए था.. पहले दूसरों को अपना ग़ुस्सा उतरने का मौका देना चाहती थी..

शुष्मा दीदी का भी कुछ ऐसा hi सन था..

दन्न को चेयर पर से खोल दिए गया था.. वोमिटिंग की वजा से अंदर का माहौल ख़राब हो चूका था, तो जूली को कह कर सबब बेसमेंट के दूसरे हिस्से की और बढ़ गए.

दन्न को भी वही घसीट कर लाया जाने लगा..

वहां पोहंचे तो दन्न फर्श पर पड़ा था, उसकी हालत बहुत ख़राब थी.. ज़यादा दूध पिने की वजा से, और फिर पिया हुआ दूध बार बार निकल जाने की वजा से दन्न

का बहुत बुरा हाल हो चूका था.. वो किसी कुत्ते की तरह से फर्श कर पड़ा हुआ हम्प रहा था............ अभी तो दन्न की सजा शुरू hi नहीं हुई थी, और ये हाल था.. अभी तो इसके लिए आगे बहुत कुछ था...

विजय:- सबसे...) मा.. दीदी.. और बाकी सबब... देखो दन्न अब्ब तुम सबब के पैरों में पड़ा हुआ किसी कुत्ते के जैसे हम्प रहा था.. आप सबब ने मुझसे जैसा चाहा था, वो सबब मैंने कर दिखाया... मेरे बात सुनकर माँ और पूजा दीदी मेरी पास आएं और मुझे गले से लगा कर मुझे चूमने लगी.. कभी गालों पर, कभी माथे पर, तो कभी होंटो पारर.. सब hi मौजूद थे, और सब hi जानते थे.. पारर अब्ब माँ और दीदी शर्म नहीं कर रही थीई.. सबके सामने hi मुझे किश करने लगी..

मेरी तिलतियाँ भी मेरे पास आएं और मुझे प्यार देने लगी.. rani,natasha दीदी भी ाएँ और मुझे गले से लगा कर किश करने लगी गालों पर.. हर्ष अंकल और अजित भाई मौजूद थे तो उनके सामने दोनों ने खुद पर काबू पाए रखा था..

rupa,shikha,sheetal,keerti, aparna,raj और अनिल भी मुझसे मिले.. सोना मालिकान और भाभी और पद्मा आंटी का एक ग्रुप बन्न गया था, वो भी एक साथ आगे बढे और मुझे चूमते हुए बधाई देने लगी..

शुष्मा दीदी और जूली ने वो कल hi मुझे बधाई देने की बजाने मुझसे बधाई ले ली थी... जूली की छूट से एक बार फिरसे पानी निकला था, तो शुष्मा दीदी भी मुझसे प्यार पा कर छूट को ठंडा कर चुकी थी... महक तो मेरे साथ hi थी..

जूही माँ भी मुझसे स्पेशल मिली.. जूही कारन भी फिर कैसे पीछे रहते...

हर्ष अंकल और अजित भाई सबसे आखिर में आगे बढे और मुझसे बड़े जोश से मिले.

हर्ष:- मैं बहुत खुश हों विजय बीटा, तुमने अपना दूसरा मिशन भी पूरा कर लिए... श्वेता बेहेन को नयी ज़िन्दगी भी मिल गई और उसका दुश्मन भी तुमने उसके पैरों में ला फेंका..

अजित bhai:-(mere कंधे पर धप्प मारते हुए) मैं बाजार वाले उस विजय को देख रहा हों, जो आज एक बहुत बड़ा आदमी बन्न चूका है.. मई तब्ब hi समझ गया था क तुम एक दिन ज़रूर कुछ कर के दिखाओगे.. और आज वो दिन आ भी गया.. तुमने न सिर्फ अपनी माँ और बहने के साथ बाकी सब को भी बचाया है.. बल्कि इस हरामी कुत्ते को भो श्वेता बेहेन के क़दमों में ला फेंका है... खुश रहो मेरे यार.. दिल खुश कर दिए तुमने.. अब्ब से हम सबब एक खुशहाल ज़िन्दगी जियेंगे.. सब मिलकर रहेंगे.. अब्ब कभी कोई ग़म नहीं रहेगा..

पूजा दीदी और माँ मुझे निहार रही थी.. तो बाकी सबब भी कुछ ऐसी hi नज़रों से मुझे देख रहे थे.. julie,mehak और शुष्मा दीदी कुछ फासले पर कड़ी हुई मुझे देख मुस्कुरा रही थी.. उन तीनो का भी एक पेअर बन्न गया था.. शेखर अभी यहाँ मौजूद नहीं था.. उसे अभी इस सबब से दूर रखा हुआ था.. उसकी पूरी फॅमिली को जब यहाँ इन्विते किया जाता, तब्ब शेखर भी पूरी तरह से हम में शामिल हो जाता...

पूजा दीदी और माँ ने मुझे मेरे मिशन की बधाई दी.. मैं दन्न को उनके क़दमों में ला फेंका था, तो दोनों ने भी अपनी ख़ुशी कर भरपूर इज़हार किया था..

कुछ देर में सबब बहार जाने लगे तो प्रिय आगे बढ़ी और दन्न के मोहन पर ठऊक दिया.. प्रिय को देख के जहान्वी और श्रुति भी आगे बड़ी और दन्न के मोहन पर थूऊकक्क दिए.......... दन्न जो हकहत की हालत में था.. थूके जाने पर एकदुम्म से hi होश में आ गया था.. वो priya,jhanvi और श्रुति को ग़ुस्से से देखने लगा.

प्रिय:- क्या देखा है बे कुत्ते.. अब्ब तू सिर्फ एक कुत्ता है, और किसी कुत्ते को ग़ुस्से से देखने की इजाज़त नहीं है... वर्ण दूध अभी भी यहाँ लाया जा सकता है.... अंत में बोलते हुए प्रिय हस्सन लगी.. प्रिय के साथ सबब हस्सन लगे.. और दूध का नाम सुन्नते hi दन्न का ग़ुस्से झाग की तरह से बैठ गया.. वो प्रिय को और सबको ऐसे देखने लगा, जैसे बोल रहा हो...........

प्लस और दूध नाहीइइइइइइइ.. मार दो पररर अब्ब दूध nahiiiiiiiiiiii..

सब दन्न की हालत को देख कर हस्स रहे थे.. फिर सबब hi आगे बढे और दन्न के मोहन पर थूकने लगे.......... दन्न का मोहन थूक से भरने लगा.....

औरतें ऐसे अपन ग़ुस्सा उतारती है.............. जूही ने तो कसार नहीं छोड़ी.. कुछ देर अच्छे से अपने मोहन में थुउउउउउउउक को इकठा करती रही और फिर एकदुम्म से hi दन्न को नेहला दिए..........

प्रिय, jhanvi,shruti और अपर्णा ने दन्न के पैरों पर अपने पेअर जोरसे मारे थे, जिस वजा से दन्न के पैरों की उँगलियों से खून निकलने लगा था. सब अपने अपने अंदाज़ से दन्न से नफरत का इज़हार कर रहे थे.. इस बार अपर्णा भी पीछे नहीं रही thiiiiiiiiiiiiiii

जूली ने दन्न की ट्रीटमेंट शुरू करवा दी थी.. अभी असल मक़सद बाकी था, अभी दन्न का तंदरुस्त रहना बहुत ज़रूरी था, अभी दन्न को बहुत सी दोसे मिलने वाली थीई..

दन्न को थोड़ा थोड़ा करके टार्चर किया जाता, फिर उसे ट्रीट किया जाता.. जल्द hi मुझे अगले मिशन पर भी निकलना था...

 
अपडेट ::: 132

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विजजू मैंने कभी सोचा भी नहीं था क मेरी बे रंग लाइफ में कभी ऐसा खूबसूरत रंग भी आएंगे.. तुम ए मेरी ज़िन्दगी में ए तो मैं नहीं जानती थी क मेरे दिल में तुम उस स्थान तक जा पोहंचेगे, जहाँ तक किसी की रसाई नहीं हो पाई थी..

मुझे कभी भी लड़कों में इंटरेस्ट नहीं रहा है.. कभी किसी से दिल लगाने का सोचा भी नहीं था. बास माँ थी और घर को चलने क लिए पैसों की जौरात पूरी करने क लिए एक नौकरी.. उसी पैसों के चलते जॉब कर रही थी..

पारर तुम मेरी लाइफ में आये तो एकदुम्म से hi मेरे ाडणार का सबब बदलना शुरू हो गया.. देखते hi देखते तुम मेरे दिल में उस स्थान तक जा पोहंचे जहाँ किसी के पोहंच पाने क बारे में मैंने सोचा भी नहीं था..

माँ के रहने से मई खुश थी. एक सुकून भी था, पारर फिर भी सबब सूना सूना था.. तुम मेरे दिल में समाये तो बास फिर मेरे अंदर का सबब सूना पैन खतम होता चला गया... मेरे लिए ये दुन्या हसीं से हसीं तरीन होती चली गई.. तुम बच्चे थे, पर फिर भी कुछ तो ऐसा था तुममे क मैं तुम्हे अपने दिल में उतारते से नहीं रोक पायी, तुमसे प्यार बढ़ा, बढ़ते बढ़ते इन्तहा तक्क जा पोहंचा, तुम्हरी नीली आँखों में मुझे अपनी पूरी दुन्या दिखने लगी.. मैंने भी तुम्हारी इन नीली आँखों में अपना एक ाष्यना बना लिया..

तुम एक मिशन पर थे, तुमने खुद को उस मिशन के लायक banaya..sabse प्यार किया और आज तुम वो मिशन बहुत हद्द तक्क पूरा कर चुके हो..

तुम ऐसे मेरे दिल में समाये क तुम्हारे दुश्मन मेरे दुश्मन बन्न गए, तुम्हरा सबब कुछ मेरा हो गया.. तुम्हारी ख़ुशी से मई खुश होती हों तो तुम्हारी दर्द से मई तड़प उठती हों.

पर भगवन का लाख लाख शुक्र है क उसने हमारे सारे दुःख ख़तम कर दिए.. खुशियां मिलें एक दुश्मन ख़तम हुआ.. मैं आज बहुत खुश हों .. तुमने उस कुत्ते दन्न को मेरे, हम सबब के पैरों में ला फेंका.. सबब तुम से कितने खुश हाँ, तुम कितने महँ बन गए हो विज्जउ.. मेरा, हम सबब का सर्र गर्व से तुमने बहुत ऊँचा कर दिए है.. सबको ढेरों खुशियां दे दी है तुमने.. हम सब ने कब्ब इतना सबब कुछ चाहा था.. कितना प्यार कितनी खुशियां दे दी हाँ तो मुझे और सबको..

पैलेस में hi एक रूम था.. उस रूम में एक बीएड था.. ये वही बीएड था.. जो कभी टाउन वाले हाउस में हुआ करता था.. जिसपर मई, पूजा दीदी और रानी सोया करते थे..

इस समय भी उसी बीएड पर मई पूजा और रानी मौजूद थे.. दोनों मेरी बाहुन में थी, और दीदी मुझसे अपने दिल का हाल बयां कर रही थी.. फिरसे वही दौर लौट आया था, जो हम तीनो मिलकर कर लड़कपन से जवानी तक्क जिए थे.. हम तीनो की हालत अजीब थी.. तीनो hi उस समय को याद कर रहे थे.. रानी फिरसे पुराणी रानी बन्न कर मुझे वक्फे वक्फे से चूम रही थी.. दीदी की बात सुनकर रानी भी दीदी को देखने लगी थी, पुराणी यादों में जाते हुए रानी की आँखों में आंसू आ गए थे..

गुज़रा समय अगर दर्द भरा भी हो तो मज़ा भी बहुत देता है, और दर्द भी.. उस दौर में दर्द भी अगर बेहिसाब थे तो मज़े और सुकून की भी एक इन्तहा थी, चाहत के रंग भी बेशुमार थे... सबने वहां रहते हुए एक दूसरे को दिल में बसाया था, सब मिलकर कर एक दूसरे की लाइफ बन्न गए थे..

दीदी भी नम्म आँखों से मुझे देख और चूम रही थी.. दीदी को मुझसे कितना प्यार था, दीदी मुझे पा कर कितनी खुश हो गई थी. मई भी तो दीदी को पा कर बहुत सुकून में हो गया था.. दीदी माँ और बहनो के जैसे आत्मा बन्न मेरे खून के साथ गर्दिश कर रही थी......

माँ और बहनो के बाद दीदी hi तो मेरे लिए सबब कुछ थी.. जहाँ दीदी थी वहां और कौन हो सकता था... यहाँ अगर पैलेस में खुशियां थी, तो दीदी का भी इस सबब में बहुत कमाल था.. मैंने दीदी को अपने ऊपर खेंच लिया, दीदी भी मेरे ऊपर आ गयी, मैंने रानी को देखा तो रानी भी सब समझते हुए दीदी के ऊपर आ गईं, वज़न ज़यादा नहीं डाला था, ये भी हमारा एक अंदाज़ था, रानी ने दोनों हाथों में साइड से दीदी क दोनों बूब्स पकड़ लिए और दबाने लगी.. दीदी के आंसू और भी बहने लगे, दीदी अपने घर को, उस घर में गुज़रे समय को याद करने लगी थी, यादें फुट फूट कर आने लगी थी..

कहा था न मैंने क यादें दर्द और मज़ा साथ में देती हाँ, दीदी की पूरी लाइफ hi उसी मकान में गुज़र गई थी, तो दीदी कैसे न अपने उस आशियाने को याद करती..

वहां दर्द भी था तो एक एक लम्हा सुकून से भी भरा हुआ था..

मैंने दीदी के चेहरे को थाम कर नीचे किया और उनकी आँखों से बह रहे आंसुओं को पीने लगा.. दीदी के साथ मई और रानी भी मज़े में होने लगे.. कितना खूबसूरत और ख़ुशी से भरपूर समय होता है, जब प्यार बेशुमार हो और मन पसंद कोई अपना आपके साथ हो.. यादों में खोये हुए हो, और एक दूसरे से अपना प्यार बाँट रहे हो....

surur,sukun और प्यार की इंतेहा का यही तो पता चलता है..

ऐसे hi हम मिलकर यादों में खोये हुए प्यार बांटने लगे.. रानी दीदी के बूब्स को धीरे धीरे दबाते हुए दीदी की गर्दन पर किश करने लगी... मई होंठ दीदी की आँखों से हट क्र दीदी के होंटो से जा मिले.. दीदी और मई मज़े में होने लगे, हम एक दूसरे के होंटो का रस पीने लगे तो रानी ने दीदी की स्पीड बढ़ने के लिए दीदी के बूब्स को दबाना फ़ास्ट और पावर में कर दिए, दीदी यादों से निकल कर प्रेसेंट में आने लगी, उनकी मस्ती बढ़ी तो वो मुझे जोश के साथ किश करने लगीं

रानी कमीनी थी, मुझसे चुद चुकी थी, और एक लम्बे के बाद उसे फिर से दीदी के सामने मुझसे प्यार करने का मौका मिला तो वो खुलने लगी, दीदी के ऊपर से उठी और साइड में कड़ी होकर मुझे एक कमीनी स्माइल देती हुई अपने कपडे उतरने लगी............

रानी:- ऐसे क्या देख रहे हो, कौनसा मई पहले बार तुम्हरे सामने नंगी हो रही हों.. रानी के उठते hi दीदी और मेरी किश टूट गई थी.. दीदी रानी को देख कर मुस्कुराने लगी, रानी का रंग देख के दीदी फिरसे वैसी hi बन गई थी, जैसे हम तीनो एक साथ होते थे तो हुआ करती थी..

रानी नंगी हुई तो दीदी से कहने lagi.."helloo महारानी साहिबा अब्ब आप भी नंगी जो जाएँ, इतने समय बाद मौका मिला है तो मुझे पूरा मज़े लेने दो, फिर पता नहीं कब्ब ऐसा मौका दोबारा बने, हाय दीदी अब्ब तो विज्जू का लुंड हम दोनों hi ले चुकी हाँ, और हम दोनों ने hi अभी तक एक साथ मिलकर विजू का लुंड नहीं liya,(apni छूट में ऊँगली घुसाते हुए) अब्ब तो ये खुल गई तो साथ मिलके विज्जू का लुंड लेंगी तो कितना मज़ा आएगा........ हाई मैं तो पहले से hi सोच कर एक्ससिटेड हो रही.. चलो अब्ब उठ कर नंगी है जाओ.. कही मेरी छूट बिना विजजू के लुंड को लिए hi न पानी छोड़ दे....... रानी कमीनी, कमीनी स्माइल देने लगी

रानी की बात हम दोनों hi हस्सन लगी, रानी अपने रंग में आई तो मुझे और दीदी को बहुत अच्छा लगा... दीदी उठी और खुद को नंगा करने लगी.. रानी ने मुझे देखा..

रानी:- मुझे पता है, मुझे hi तुम्हे नंगा करना पड़ेगा.. चलो उठ कर बैठो, वर्ण मई तुम्हारे कपडे पहाड़ दूंगी..

दीदी:- विज्जू उठ जाओ, इस पागल बिल्ली का कोई भरोसा नहीं है, ये कुछ भी कर सकती है.. दीदी हस्ते हुए बोली

rani:-(panje बनाते हुए) हाँ और मई अपने इन नुकीले नाखुनो से कपडे के साथ विज्जू के जिस्म को भी छील दूंगी, मैं पागल hi नहीं, एक खूंखार बिल्ली भी हों, खूंखार बिल्ली से डरते रहने चाहिए.. रानी नौटंकी करने लगी..

यही तो थी हमारी रानी... जो मेरे बदले के चक्कर में कही छुप गई थी..

कुछ देर तीनो नंगे बीएड पर थे, दीदी क मोहन में पर लुंड था तो रानी अपनी छूट मेरे मोहन पर रखे हुए चटवा रही थी....

रानी:- ahhhhhhhhhh vijjjjjjjjjuuuuuuuuuu मज़ा आआआ gayaaaaaaaaaa.. आज फिरसे वही फीलिंग जाग उठी हाँ.. आह दीदी आज विज्जू का लुंड पूरा hi मोहन में ले लो.. पूरा ले के चूसो... दीदी ने लुंड मोहन से निकला और

दीदी;- मेरा मरने का कोई इरादा नहीं है, विज्जु का लुंड, लुंड नहीं मूसल है, मेरा मोहन hi नहीं अंदर का सब कुछ फट जायेगा..

रानी:- तो फिर आप यहाँ आ क्र विज्जू से छूट चटवायें और मई विज्जू का सारा लुंड अपने मोहन में लेती हों, ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh विजजूउउउ काट क्यों रहे हो........ दीदी हस्सन लगी..

दीदी:- विज्जउ ने सिग्नल दिए है क उसका लुंड सिर्फ छूट या गांड में hi जा सकता है, किसी के मोहन में पूरा नहीं समां पायेगा..

रानी:- ावें इ मैं तो पूरा ले सकती हों..

दीदी जानती थी क रानी की नौटंकी बंद नहीं होगी, इसलिए रानी को जवाब दिए बिना hi वो सीढ़ी और मेरे लुंड क ऊपर जा बैठी.. रानी कमीनी बड़े ग़ौर से दीदी की छूट में मेरे लुंड को जाते हुए देख रही thiiiiiiiiiiiii... रानी कमीनी कोई मौका कैसे छोड़ सकती थी, रानी ने दीदी को कंधे से पकड़ा और ज़ोर से मेरे लुंड पर बिठा दिए.... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

marrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

रानी किट्टिया मुझे मारना चाहती है क्या.............. एक hi झटके में पूरा लुंड दीदी की छूट में था.. रानी हस्ते हुए

रानी:- यही तो देखना था मुझे दीदी क विज्जू ने सही से आपकी छूट खोली है या नहीं.. दर्द का क्या है वो तो होना hi था, लुंड पूरा आपकी छूट में जा घुसा है, विज्जू ने जम्म्म के आपको छुड़ा है.. एन्ड तक्क आपकी छूट में अपने लुंड को दाल है विज्जू ने.. चलो अब्ब जल्दी से ऊपर नीचे होकर विज्जू के लुंड से खेलो.. आज इस खेल को देखकर मई मस्त होने के मूड में हों.. ahhhhhhhhhhhhhhhhh

अब तो मेरी छूट भी बौह्त गरम हो गई है....... मा दीदी जल्दी से छूट का पानी निकालो फिर मुझे भी विज्जउ का लुंड लेना है......

मैं मज़े से रानी की छूट चाट रहा था, साली रानी कमीनी की मस्ती थी क बढ़ती hi जा रही थी.. रानी थमने का नाम hi नहीं ले रही थी..

पूजा भी मज़े में आने लगी, रानी को देख कर वो भी एक्ससिटेड हो गई थी, श्रम अब्ब उसके अंदर भी नहीं रही थी. जो थी वो उस दिन पार्क में ख़तम हो गई थी, और फिर शर्म करे भी तो किसके सामने, रानी की सामने तो शर्म करने का कोई चांस hi नहीं था, मुझसे कैसे करती वो तो थी hi मेरी पत्नी, उसका पूरा हक़ था मुझसे छोड़ने का, हर अंदाज़ में हर रंग में..

वो भी मेरे लुंड पर उछलने लगी.. रानी पूजा को देख के खुश हो गई.. और अपनी छूट को मेरे मोहन पर अच्छे से रगड़ने लगी..

तीनो ऐसे hi मस्ती में और पूरा मज़ा लेते हुए चुदाई और प्यार माँ मज़ा लेने लगे..

पोजीशन बदल बदल कर कभी पूजा को तो कभी रानी को छोड़ रहा होता..

कभी रानी की छूट में मेरा लुंड होता तो कभी पूजा की छूट में ..

तो कभी पूजा की गांड में.. कभी रानी मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर चतवती तो कभी पूजा..

ऐसी hi जब तक मेरे लुंड के अंदर का पानी नहीं निकल गया हम तीनो एक एक लम्हे को एन्जॉय करते रहे, एक एक लम्हे का मज़ा लेते रहे..

जब बीएड दोनों की छूट के पानी से और मेरे लुंड के पानी से भीग गया तो तीनो हम्पते हुए बीएड पर लेट गए, कमरे में तीनो की सांस की आवाज़ गूंजने लगी..

बीएड जो इस बीच पुरे चरम पर था, उसकी चीख रानी और पूजा से ज़यादा थी, अब्ब तीनो की साँसों की आवाज़ तो थी रूम में, पारर अब्ब शांत था.. बीएड भी इतना दर्द पा कर दुखी नहीं था, इतना चीख चीख कर भी नहीं थका था, वो एक लम्बे समय के बाद फिरसे हम तीनो को खुद के ऊपर प्यार करते हुए पा कर ख़ुशी से झूम रहा था.. वो भी हमारी हसीं यादों में हमारा हमसफ़र रहा था..

हम तीनो और हमारे साथ दीदी का बीएड पुरसुकून हो चुके थे..




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सब अपनी अपनी रूटीन पर चल रहा था, बिज़नेस और गैंग भरपूर तरक्की कर रहे थे.. कहते हाँ क जिसकी निय्यत अच्छी हो, तो उसके सारे काम ऊपरवाला सही करना शुरू कर देता है, फिर कही भी कोई मुश्किल नहीं रहती.. सब काम आसान होने लगते हाँ....

मेरे और मुझसे जुड़े हुओं के साथ भी ऐसा hi हो रहा था, गुरनाम और संदीप की वजा से गैंग और क़ैदी बहुत स्पीड से स्ट्रांग बनते जा रहे थे..

संदीप और गुरनाम सब ऐसे कर रहे थे, जैसे ये सब स के लिए नहीं वो खुद क लिए गैंग बना रहे हों.. बिज़नेस के लिए शुशी दीदी और जूली कमल पर थी.. कई लड़के और लड़कियां उनके साथ ऐसे मिल चुके थे. क अब्ब बिज़नेस हो या कोई और काम कहीं भी कोई प्रॉब्लम नहीं रही थी...

एक ब्रोब्लेम थी और वो तो हमेशा hi रहने वाली थी, कोई भी बिजनेसमैन हो, कोई भी लीडर हो, सब hi एक जैसी सोच में मालिक नहीं होते, जैसा काम मई कर रहा था, जिस अंदाज़ से मई बिज़नेस स्टार्ट कर रहा था... उसके चलते बहुत से दुश्मन भी मेरे और मेरी गैंग के बनते जा रहे थे..

महक के महस्वारे भी बहुत काम आ रहे थे.. दीदी तो बिज़नेस एक्सपर्ट थी hi, लेकिन महक की बात hi अलग थी, अब्ब कहीं भी कोई फाइटिंग सन नहीं था, तो माहक कभी कभी दन्न से मिलकर उसे ज़लील करके दीदी और जूली के साथ बिज़नेस को देखने में लग जाती थी...

मरी सबके साथ प्यार भी चल रहा था, जिसके शिकंजे में मई आता वो मुझे लेजा कर मुझसे अपना प्यार वसूल कर लेती..

देखते hi देखते 20 दिन गुज़र गए.. गैंग ने अपना असली काम करना शरू कर दिए था.

और भी कई लोग शामिल हो चुके थे..

एक ख़ास काम जो 4 लोग मिलकर कर रहे the..PAPA.COMM.sandeep और गुरनाम वो ये था क जिस लोगों पर झूठे केस चलवाये जा रहे थे, उन्हें ख़तम करवा कर उन लोगों को सुपप्रोत देकर खुद से जोड़ा जा रहा था..

हर किसम क लोग उसमे शामिल होते जा रहे थे.. कोई आम हो या कोई ख़ास, कोई गरीब हो या कोई अमीर, अक्सर लोग हमसे जुड़ते जा रहे थे. हम बिना किसी मतलब के सबके hi काम आ रहे थे..

मीडिया भी ये सबब जान गई thi,wo भी इस सबब को टेलीकास्ट करने में लगी हुई थी, लेकिन वो ये नहीं जान पायी ये सबब करने वाले कौन हाँ..

मीडिया इस सबब से खुश भी थी.. क्यूंकि इस गैंग से पहले भी बहुत कुछ कर दिखाया था.. लड़कियों क लिए ये गैंग खास तौर पर वर्किंग में थी.. आस पास अब्ब कोई ऐसी घटना नहीं घाट रही थी, 90% दिल्ली ऐसी घंटों से मुक्त हो चूका था.

या सबब अभी शांत पड़े हुए थे.. हमारी गैंग के सर गरम होने से भी कई लोग खुद को लिमिट में रख चुके थे..

rupa,shikha और शीतल भी अब्ब मुझसे और भी ज़यादा खुलने लगी थी, वो जान गई थी क अब जल्द hi उनका नंबर भी आने वाला है, वो अभी मुझसे सिर्फ मस्ती hi कर रही थी, सील खुलवाने की वो भी ख्वाहिशमंद थी, पारर अभी उनकी स्टडी का बुर्दन था, तो 2 मंथ बाद वो तीनो मिलकर मुझसे अपना हिस्सा वसूल करना चाह रही थी, अपर्णा भी कुछ कुछ रंग बदलती जा रही थी.. पहले वो मुझे सबसे प्यार करते देख कर शांत रहती थी, पारर अब्ब उसकी छूट में भी आग बढ़ने लगी थी..

मेरा टाइम आ गया था अगले मिस्सों पर जाने क लिए.. अब्ब मुझे पुणे जाना था.. माँ से रिलेटेड मेरा जो मिशन था, वो वही रह कर पूरा करना था मुझे..

अब्ब दिल्ली में सबब सेट था, किसी में अब्ब हमसे उलझने की हिम्मत नहीं थी.. पैलेस के नीचे से एक सुरंग उसी एरिया की एक और बढ़ी कोठी तक्क बनाई गई थी... सुरंग इतनी बड़ी थी क एक छोटी गाडी उसमे से ैसिलय गुज़र सकती थी.. सब hi 2-4 उस सुरंग को उसे कर चुके थे.. ये इमरजेंसी के लिए बनाई गई थी..

शीशी दीदी से रिलेटेड मटर को भी सोल्वे कर दिए गया था.. उसके नामर्द पति से डाइवोर्स पेपर्स पर सिग्न करवा लिए गए थे, अब्ब दीदी मुझसे शादी क लिए बिलकुल फ्री थी.. और उनकी छूट भी अब्ब मेरे लुंड क लिए बेचैन थी.. लेकिन ये सबब अब्ब मिशन के कम्पलीट होने के बाद सबकी रज़ामंदी से होने वाला काम था.. तो मुझे अब्ब जल्द hi पुणे जा कर मिशन को पूरा करना था, और वापिस आ कर फिरसे सबके साथ मिलकर एक खुशियों भरी लाइफ जीनी थी..

दीदी के पति और उसके दोस्त को पैलेस के पास वाली कोठी में कई दिन तक्क रख उनकी गांड मार मार उन दोनों को अधमरा कर दिए था.. उनको सेक्स ड्रग्स दे कर ीनता पेला गया था, क अब्ब बाकी रहती ज़िन्दगी वो सिर्फ गांड hi मरवाते रहेंगे.. दोनों की गांड को अच्छा खासा खुला कर दिए गया था, उनकी गांड जब्ब लुंड के बिना रहे को तैयार न हुई तो उन्हें कोठी से निकल दिए गया था..

दीदी को बताया तो वो पेट पकड़ पकड़ कर हंसी थी, अब्ब मेरे साथ वो शादी करने वाली थी, पैलेस में hi बाकी की लाइफ सबके साथ मिलकर मुझसे चुड़ते हुए बीतनी थी, तो उन्हें भी अब्ब पूरी तरह से बेशरम बनना था, अब्ब वो इतनी खुश थी, क मुझसे हर किसम की बात कर लेती थी.. दोनों की गांड में लुंड घुसते हुए वो देखना चाहती थी, तो मैंने पैलेस में hi बैठे बैठे कक्तव कैमरा के ज़रिये उन्हें कोठी में हो रही दोनों की चुदाई दिखने लगा, दीदी वो सबब देख कर बहुत खुश भी हुई थी, दोनों से माइक के ज़रिये बात भी की थी.. पर वो दोनों बास ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ू यस

और तेज़ पुरे स्पीड से मेरी गांड मारो.... बास इतना hi बोल रहे थे, वो तो खुद गांड में लुंड लिए मज़े में थे..

दीदी उस दिन बहुत हंसी थीई..

फिर हम दोनों ने वही बैठे बैठे ओरल सेक्स भी किया, दीदी मेरे लुंड की दान थी और मैं उनकी इस आगे में सील पैक छूट का शैदाई हो गया था, वो मेरे लुंड के मज़े लेती तो मैं उनकी छूट में जीब घुसा कर मज़े लेता रहा.... दीदी पुरे चरम, पुरे मज़े से, आहें सिसकियाँ भरते हुए ओरल सेक्स का मज़ा ले रही थी..

मेरे और महक के जाने का समय आ गया था.. तो हमने तैयारी की और सबसे मिलकर हम दोनों पुणे क लिए निकल पड़े.. बाकि पैलेस में बहुत से ऐसे थे जो सारा निज़ाम संभल सकते थे.. हम हर किसम की टेंशन से फ्री होकर बी एयर पुणे क लिए निकल खड़े हुए..




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पुणे पोहचने से पहले hi पुणे में हमारे लिए पूरा सेटअप तैयार था.. 30 गार्ड्स भी हमारे यहाँ पर मौजूद थे..

इस बार का मिशन कुछ हट के था.. इस बार दन्न क घर की सभी महिलाओं को छोड़ना था.. और धमाकेदार छोड़ना था, ऐसा छोड़ना था क वो भूल जाएँ क इससे पहले कभी ऐसे चूड़ी होंगी...

पुणे में hi जूली ने हमारे लिए बहुत बड़ी और दुन्या भर की हर एक चीज़ से आरास्ता कोठी खरीद ली थी.. मई और महक यहाँ आने वाले थे, तो जूली ने पावर और पैसे का इस्तेमाल करते हुए मुझे और महक को हमारे आने से पहले hi आस पास के इलाके में इंट्रोडस करवा दिए था.. पुणे में मौजूद एक क्लब की मेम्बरशिप हमें मिल चुकी थी, और उस क्लब में भी हमारे नाम पहले से hi चलना शुरू हो गया था.. ऐसा कुछ नशे की आदि लड़कियों, औरतों और पैसे की लालची लड़कियों को खुश कर के किया था..

क्लब महक की सिस्टर इशिता का था, और वहां दन्न के घर की सभी लड़कियां सभी औरतें डेली या एक दिन छोड़ कर आती थी.. ये सबब महक ने बताया था..

अब्ब हमें वही घुस कर सबब को बारी बारी अपने शिकंजे में लाना था.. और मैं उन सबब को दबा कर छोड़ कर दन्न को बताना चाहता था क वो hi सबब कुछ नहीं कर सकता.. जैसा वो करता रहा है.. वो कोई और भी कर सकता है. अब्ब दन्न को अंदर से तोड़ने वाला मिशन पूरा करना था, अभी दन्न दर्द में था, खौफ में था.. पर अंदर से वो वैसे नहीं टूटा था, वो वैसे नहीं गिड़गिड़ाया था, जैसा हम सबब देखना चाहते थे.. दन्न को वो सबब याद करवाना था, जो वो कर चूका था..

लेकिन उससे पहले आप सबब को शार्ट में बताना पड़ेगा क असल में बीते समय में हुआ क्या था.. क्यों वो दुश्मनी इतना भयंकर रुख अख्तियार कर गई थी..




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दन्न के साथ श्वेता और जूही माँ ने मिलकर अच्छा सलूक किया.. जितना दर्द सहा है, उतनी सजा तो वो फ़ौरन hi उसे नहीं दे सकती थी.. लेकिन दिल को भड़ास कम् करने क लिए वो ये सबब कर गई.. अभी तो शुरआत है अभी दन्न के साथ आगे बहुत कुछ होने वाला है............. पहले जो ज़रूरी है वो विज्जू करेगा.. दन्न के साथ फिसिकल टार्चर अहमियत नहीं रखता.. दन्न को मेंटली टार्चर करने से hi सबको चैन मिलेगा..
 
थैंक्स बताने क लिए और मेरी सभी स्टोरीज को पढ़ने के लिए. आने वाली अपडेट का वेट करने क लिए.......

.कहाँ हो तुम मेरी जान (adultry..talash..action..etc). को अभी मेरा आगे बढ़ने का मैं नहीं हैई......

कुछ रंग जिदनागि के ऐसे भी................... उसे 2 महीने बाद फिरसे रीस्टार्ट करने का मैं है.. तब तक मेरी जो स्टोरीज कम्पलीट भी हो जाएँगी...

थे लाइफ ऑफ़ mine({story ऑफ़ ा monkey}{fantasy+Adultery+action}............ भी स्टार्ट होगी....... लेकिन वो बहुत लेट होगी........... अभी उसे शुरू करने का भी मैं नहीं है..

असल में बात ये है क इन तीनो स्टोरीज से भी अच्छी स्ट्रोरिएस मई लिख रहा हों.. वो सभी को बहुत पसंद आ रही हाँ.. स्टोरी कोई भी हो सबब लिखता तो आप सबब क लिए hi हों..

आप सबब क लिए मेरे पास और अच्छी स्टोरी का प्लाट बना तो मैंने पहली वाली को रोक कर ेक्सट को शुरू कर दिए था... वो भी आप सब को बहुत पसंद आने लगी..

एक अच्छी बात जो है आप सबब क लिए वो ये है क मैं स्फोरम पर आप सबब के बीच में मौजूद हों.. स्ट्रोरिएस अगर पेंडिंग भी हाँ तो मेरा नहीं ख्याल क कोई प्रॉब्लम है इसमें..

मई अगर स्फोरम को छोड़ कर कही ग़ायब हो जाता हों तो आप सबब क लिए परेशानी बन सकती है...... ोथेरविसे तो सबब ठीक hi है.. वैसे भी आप सबब देख रहे हाँ क मैं स्टोरीज को कितनी सपेद से लेके चल रहा हों.. जल्द hi पेंडिंग पड़ी स्टोरीज भी शुरू कर दी जाएँगी...................... पहले 1 महीने के अंदर मैं अपनी 2 स्टोरीज को कम्प्लेटे करके खुद को शो करवाना चाहता हों... ये दिखाना चाहता हो क मैं भागने वळून में से नहीं हों... THANKSSSSSSSSSSSSSSS
 
थैंक्स..!!

भाई मेरी कौनसी स्टोरी की अपडेट रूटीन ख़राब हुई है.. सब hi तो ठीक से चल रही हाँ.. जो पहले से hi पेंडिंग हाँ, उनके बारे में मैंने बता दिए था क वो अभी कुछ वक़्त क लिए मैं नहीं लिख पाऊँगा.. और मुझे तीन स्टोरीज को एक साथ लेके चलने में ज़यादा प्रॉब्लम भी नहीं है.. काम hi स्टोरीज डेली उड़पतेस दे रही हाँ.

अगर मेरी स्टोरैंस की एवरेज निकली जाये तो उड़पतेस की तादाद डेज के हिसाब से ज़यादा होगी.. चाहे वो पेंडिंग स्टोरी hi क्यों न हो..

अगर सचेडूले की बात करें तो अक्सर सचेडूले इंसान की लाइफ रूटीन से कनेक्टेड भी होता है.. मेरे पास टाइम ज़यादा हो तो मैं ज़यादा उपदटेस भी दे देता हों, अगर काम हो तो एक दिन छोड़ के अपडेट पोस्ट क्र देता हों.. अभी मेरे लिए सचेडूले की कोई प्रॉब्लम नहीं है.. अगर मैंने कुछ रूटीन को चेंज करने क लिए लिखा है तो उसका मतलब एक hi है............ क जैसे जैसे मई स्टोरीज लिख रहा हों, मेरे लिखने में भी फ़र्क़ आ रहा है.. और मेरा भी अब्ब स्टोरीज को अच्छे से लिखने का मैं होने लगा है.. इसीलिए मैंने लावारिस पे नोट छोड़ दिए था.. क्यों मेरा लिखा हुआ आप सबब ने hi तो पढ़ना है.. और आप सबब को अगर अच्छा लिखा हुआ मिला तो आप सबब को मज़ा आएगा...

और रही बात हिम्मत वाला को कम्पलीट करने की तो भाई मैंने आपस अब्ब से वडा कर लिया था क 1 महीने में hi हिम्मत वाला को ख़तम कर दूंगा..

जब्ब आप सबब से वडा कर लिया है तो फिर निभाना तो पड़ेगा hi.. राइटर और रीडर्स जब एक दूसरे से जुड़ जाते हाँ, तो एक दूसरे का ख्याल रखते हाँ.. मैं भी अपने किये वेड को पूरा करना छटा हों.. स्टोरी कैसे कम्पलीट होगी.. वो सबब राइटर के हाथ में होता है.. एक hi सन में वो स्टोरी का पुर रुख hi बदल कर रख सकता है.... लेकिन हिम्मत वाला की एंडिंग मैं आप सबब के लिए बहुत hi स्पेशल बना देने वाला हों.. मुझे उम्मीद है क हिम्मत वाला की एंडिंग आप सब को बहुत मज़ा दे जाएगी....

थैंक्स इतने प्यारे कमेंट और सुग्गेस्टिव क लिए.. ये मैट समझ लीजियेगा क मैंने मंद किया है.......... आप सबब रीडर्स और मई राइटर..

रीडर्स के बिना राइटर भी नहीं होता.. और फिर ईंटे समय से हम साथ हाँ तो हम सबब एक हाँ....... आप मेरे भाई हाँ और मैं आपका.. गॉड ब्लेस्स यू..
 
अपडेट ::: 133

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इंट्रोडूसशन.

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सुमित्रा: 62 आगे नागराज वाइफ

विमला : 60 आगे नागराज वाइफ

दन्न : 42 नागराज बीटा

radhika:wife दन्न

दन्न के दो बेटे और दो बेटियां हाँ..

sunil:age:23

gaurav:age:22

ishita:age:20

mehak:age:19

अनंत Nag:age:40...............DNN बरोथेर

surbhi...:age:38...wife..anant नाग

दो बाटे और 1 बेटी है इनकी..

akshay:age:20

mala:age:19:beti

mahesh:age:18.

Aniruddh:age:38...............DNN बरोथेर

deepika:age:37...Aniruddh

इनकी एक hi बेटी है..

sonali:age:18

Ashok:age:36...............DNN बरोथेर

बीवी बच्चो के साथ अमेरिका में रहता है..

पीयूष..... ...............दन्न brother..........mar चूका है..





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मनजोत Singh:age:64

आरती singh.:age:63

मनोज सिंह:42

मनीष सिंह:41

अतुल सिंह:37

अंकित सिंह:36

श्वेता सिंह:





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फ्लैशबैक

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सुमित्रा एक हरामज़ादी चैनल और घटिया तरीन चराकर वाली औरत थी.. किसी को भी देख ले, मैं बना ले तो वो उससे हर सूरत में चुद के रहती थी.. नागराज ने भी सुमित्रा को हर तरह की छूट दी हुई थी, सुमृतरा ने नागराज का बहुत साथ दिए था.. सुमित्रा के रहते नागराज को छूट की भी कभी कमी नहीं रही थी.. नागराज को सुमित्रा से क्यों परेशानी रहती वो तो सुमित्रा से कुछ ज़यादा hi खुश था..

दन्न 8 वर्षो का था, जब श्वेता के पिता मनजोत सिंह को सुमित्रा ने देखा..

सुमित्रा ने मनजोत सिंह देहका तो पहले से hi था, मनजोत सिंह बदमाश किसम का अकड़ू इंसान था, लेकिन वो लोगों की मदद भी कर दिए करता था.. ऐसी hi एक घटना में इलाके में नए ए कुछ घुँडो से मंजुत सिंह और उसके आदमियों का टकरा हो गया, इस ठाकरे में मनजोत सिंह ने खुल कर हाथो और लाठियों की लड़ाई लड़ी. और अपने जोहर दिखाए.. मनजोत सिंह पहलवान भी था, और लड़ने के देसी तरीके सबब hi जानता था.. मनजोत सिंह और उसके आदमियों ने गुंडों को मार मार कर उनका भरकस बना दिए.. लेकिन इस लड़ाई में मनजोत सिंह की कमीज पूरी hi फट कर उसके बदन से अलग हो गई thiiiiiiiiiiii... सरिता भी वही मौजूद थी..

मनजोत सिंह के कसरती बदन को देखा तो उसकी छूट ने टपकना शरू कर दिए.. वो तो थी hi चुड़क्कड़ औरत.. नागराज के रहते उसे किसी की परवा नहीं हुई थी.. मनजोत सिंह की प्वॉयर भी जानती थी, लेकिन अपनी छूट के आगे वो सबब भूल जाया करती थी...

मनजोत का बदन देख कर सुमित्रा ने मनजोत से छोड़ने का मैं बना लिया था.. वो कैसे भी करके मनजोत सिंह को अपने दाम में ला कर उसका लुंड लेकर खुद को शांत कर लेना छाती थी.. सुमित्रा की आदत थी, जो वो सोच ले, सुमित्रा वो हर सूरत करके hi रहती थी... सुमित्रा की सोच उसकी छूट की हद तक hi थी.. दिमाग से तेज़ थी.. ऐसे hi तो नहीं नागराज सुमित्रा के आगे पीछे घूमता रहता था..

सुमित्रा ने भी नागराज को बता दिए क वो मनजोत सिंह से छोड़ना चाहती है.. नागराज बह कुछ पावर हासिल कर चूका tha..lekin वो मनजोत सिंह से बढ़ कर नहीं था. लेकिन बात सुमित्रा की बात के आगे वो भी कुछ बोल नहीं पाया.. बास सुमित्रा को सबब सावधानी से करने का बोल दिए....

सुमित्रा ने भी नागराज से बात करने के बाद प्लान बनाना शरू कर दिए..

ऐसे hi एक प्लान बना कर सुमित्रा ने मनजोत से चुदाई कर ली.. पूरी रात वो उछाल उछाल कर मनजोत सिंह का लुंड पानी छूट में लेती रही.

नागराज भी इलाके में फेमस हो चूका था, उसका धनदा भी अच्छा चल रहा था. उसके पास भी कई गुंडे थे..

सुमित्रा बहुत बड़ी चुड़क्कड़ थी, कई रंडियों और आवारा औरतों से सुमित्रा के रिलेशन्स थे, उसी को काम में लाते हुए एक दिन सुमित्रा ने मनजोत को अपने जाल में फंसाया, मनजोत को ऐसी ड्रग्स दी गई, जिसके चलते वो सुमित्रा को दबा दबा के छोड़ने लगा. सुमित्रा की आरज़ू पूरी हुई..

लेकिन जैसे hi मनजोत के अंदर से उस ड्रग्स का असर ख़तम हुआ तो वो बहुत ग़ुस्से में आ गया.. सुमित्रा एक रंडी थी, और उसने मनजोत को अपने दाम में ला कर वो काम कर दिए था, जो मनजोत या मनजोत के खंडन में से कोई भी नहीं कर सका था..

सुमित्रा का प्लान था क वो चुदाई के बाद मनजोत को मार देगी.. बाद का सारा ताँता hi ख़तम हो जाएगा.. मनजोत सिंह की लाश को किसी दूर के इलाके में फ़ेंक दे गई.

लेकिन वो न हो सका, जो सुमित्रा ने सोचा था... सुमित्रा चुदाई कर करके थक गई, अगले प्लान पर अमल करने से पहले hi वो थकन से चूर होकर नींद की वादियों में जा पोहंची... मनजोत सिंह पहलवान था, वो अंदर और बहार से बहुत ज़यादा स्ट्रांग था.. ड्रग्स ने उसके दिमाग को सोचने लायक नहीं छोड़ा था.. लेकिन कई घंटों की चुदाई के बाद वो उसके अंदर की विल पावर ने उसके अंदर के ड्रग्स को कम् करना शरू कर दिए था.. सुमित्रा के सो जाने के कुछ देर बाद वो उठा और बाथरूम में जा कर नहाया.. नहाने से मनजोत के अंदर की ड्रग्स की पावर कुछ और भी कम् हो गई तो मनजोत का दिमाग कुछ कुछ काम करने लगा.. वो सबब समझ गया क उसके साथ छल करते हुए कितना घिनोना काम किया गया है.. मनजोत सिंह ग़ुस्से में आ गया. वो वापिस कमरे में आया, सुमित्रा को नंगे देख कर वो उसे मार देना चाहता था, लेकिन फिर वो कुछ सोच के पीछे हट गया..

मनजोत सिंह मैं hi मैं में कुछ और सोचते हुए सुमित्रा को अपने घर के लिए निकल गया.. वो अभी भी पूरी तरह से ड्रग्स के असर से बहार नहीं हुआ था.. लेकिन वो खुद क्या है, और उसके लाइफ गुजरने क क्या क्या अंदाज़ हाँ, वो असब वो बहुत अच्छे से जान पा रहा था....

मनजोत सिंह घर आया, कुछ देर की रेस्ट की, ड्रग्स के असर को कम् करने क लिए वो अपने दोस्त के पास गया, वो एक डॉक्टर भी था, वहां 2 इंजेक्शन लगवा कर मनजोत सिंह फिरसे घर लौट आया..

तैयारी की और

अपने आदमियों को साथ मिला कर नागराज के इलाके में जा घुसा, सुमित्रा भी अब्ब तक्क उठ कर नगर के पास आ पोहंची थी... वो दोनों अभी बातें कर hi रहे थे.. क मनजोत सिंह और उसके आदमी नागराज के घर में घुस गए....

नागराज के घर की हर एक चीज़ को तोड़ पोड दिए.. नागराज को मार मार कर अधमरा कर दिए गया.. सुमित्रा को भी मारते peet'te नंगा करके घर से बहार निकला गया, और उसे पुरे इलाके में नंगा घुमाया गया.. उसके सर्र के बाल काट कर उसके बदन को जगा जगा से काला कर दिए गया था.. मनजोत सिंह और उसके आदमी सुमित्रा के साथ हर वो सुलूक कर रहे थे.. जो सुमित्रा रानीद जैसी औरत एक साथ होना चाहिए था.

नागराज भयंकर मार सहन नहीं कर पाया और बेहोश हो gaya..nagraj की दूसरी पत्नी विल्मा को भी पीटा गया, उसके भी जिस्म की कई हड्डियां चटख गई थी.. पर उसे नंगा नहीं किया गया..

नागराज और सुमित्रा की बहुत ज़यादा बेइज़्ज़ती हुई थी..

सुमित्रा भी पुरे इलाके में सबके सामने नंगी हो चुकी थी, वो चुड़क्कड़ औरतों की सरदार थी, उसे कई आदमियों के सामने चुड़ते हुए भी शर्म न ए.. पारर जैसा सुलूक मनजोत सिंह सुमित्रा के साथ कर रहा था, वो सुमित्रा के लिए सहन कर पाना मुमकिन नहीं रहा था.... सुमित्रा नंगी हालत में सर्र के कटे बालों के साथ, काळा शरीर के साथ पुरे इलाके में घूमी थी.... सुमित्रा एक अंदर एक आग जल उठी थी.

तबसे hi सुमित्रा ने कसम खा ली क समय आने पर वो इस बेइज़्ज़ती का बदला ज़रूर लेगी.. दन्न भी ये सबब देख रहा था.. उसके छोटे भाई भी ये सबब देख रहे थे. लेकिन वो कुछ भी तो नहीं कर सकते थे..

नागराज की पावर उसके आदमी थे.. मनजोत सिंह और उसके आदमियों ने नागराज के सारे hi आदमियों को मार दिए था... नागराज की पावर ख़तम हो कर रह गई थी.. लेकिन अब्ब वो चुप नहीं बैठने वाले थे.. नागराज एक लुच्चा गुंडा था, और सुमित्रा एक चैनल औरत.. ऐसों को कभी सीढ़ी राह पर चलने की आदत नहीं पड़ती..

मनजोत सिंह का परिवार उस इलाके में hi नहीं पुरे पुणे सिटी में चाँद गिने चुने परिवारों में से एक था.. पैसे के मामले में और इज़्ज़त के मामले में.. पावर के मामले में..

उस समय कोई भी मनजोत या उसके परिवार का सामने करने की हिम्मत नहीं था.. बदले की भावना दिल में बसाये नागराज और सुमित्रा सही समय का इंतज़ार करने लगे..

मनजोत सिंह परिवार के मर्दों में एक बात अच्छी थी, क वो किसी परै औरत को नहीं देखते थे.. अपनी पत्नियों को hi वो दबा दबा कर छोड़ते थे, चाहे उनकी कैसी भी हालत हो.. लेकिन बहार किसी से मोहन नहीं मारते थे..

इसकी वजा ये थी क पूरा सिंह परिवार hi बेपनाह घमंडी था, औरतों को हंसः hi जुटे की नोक पर रखने का आदि था.. औरत सिर्फ बच्चे जानने के लये और लुंड को ठंडा करने क लिए होती है.. ऐसे इन सबब के विचार थे.. मनजोत सिंह के ऐसे कारणमो पर उसका पिता बहुत खुश हुआ करता था...

सुमित्रा मनजोत को हासिल कर गई थी, मनजोत की मर्ज़ी क बिना चुद गई थी.. मनजोत सिंह जो कभी किसी गैर औरत को देखने की शोक नहीं रखता था, वो कैसे किसी को छोड़ सकता था.. और फिर जैसा तरिएक सुमित्रा ने अपनाया था, वो मनजोत सिंह कैसे बर्दाश्त कर सकता था..

एक औरत जो जूतों की नोक पर रहने लायक थी, वो कैसे उस जैसे मर्द के साथ ऐसा सबब कुछ कर सकती है.. मनजोत ने भी खुद के हुए अपमान का खूब बदला लिया और नागराज को पीट पीट कर अधमरा कर दिए..

वक़्त गुजरने लगा, नागराज खुद को पॉवरफुल बनाने लगा, लेकिन वो पैसा तो काळा तरीके से खूब बना रहा था, पारर वो पावर नहीं बना पा रहा था.. वो मनजोत सिंह के बराबर या उससे बढ़कर बनना चाहता था.. लेकिन पावर में वो मनजोत सिंह परिवार से आगे नहीं बढ़ सका..

नागराज ने सारे बच्चो को बहार अब्रॉड भेज दिए फाड़ने क लिए..

समय बीतने लगा

मनजोत सिंह की बेटी श्वेता जवान हुई और आगे की स्टडी के लिए कॉलेज में एडमिशन ले लिया. इस बीच मनजोत सिंह के पिता इस दुन्या से चल बेस थे. मनजोत सिंह अकेला hi था, उसका कोई भाई या बेहेन नहीं थे..

नागराज ने अपने एक बेटे पीयूष को उसी कॉलेज में एडमिशन दिलवा दिए और उसे ये मिस्सों सौंप दिए क श्वेता को अपने प्यार के जाल के फाँस कर उससे शादी करले...

सुमित्रा ने hi प्लान बना कर पीयूष को बहार से यहाँ बुलवाया था, और श्वेता के लिए उसे आर्डर दे दिए था.. वो खुद भी कुछ नहीं भुला था, छोटा था पारर सबब याद था.. वो भी अपनी माँ और अपने पिता के साथ होने वाले बर्ताव का बदला लेना चाहता था.. इसलिए वो राज़ी हो गया..

पीयूष ने बहुत कोशिश की पारर श्वेता ने उससे बात तक करना गवारा नहीं किया.. रंजीत भी उस समय मौजूद था.. लेकिन वो श्वेता से प्यार करता है ये शो नहीं करवा सकता था..

एक बार रंजीत ने चेहरा छुपा के कॉलेज में hi पीयूष को बहुत पीटा भी था.. पीयूष फिर भी नहीं बाज़ आया, किसी मजनू की तरह श्वेता के पीछे पद गया था..

जब्ब भी श्वेता के गार्ड्स साइड में होते वो आ धमकता और श्वेता को परेशां करने लगता... श्वेता अपने गार्ड्स से कुछ नहीं कह पा रही थी.. श्वेता की स्टडी उसकी माँ की वजा से आगे बढ़ी थी.. घर में उसके पिता और भाई श्वेता की आगे की स्टडी के सख्त खिलाफ थे.. लेकिन श्वेता की माँ की बात पर मान गए..

सबने hi कह दिए था क अगर कोई छोटी सी बात भी हुई तो वो श्वेता की पढाई hi बंद नहीं होगी, उसकी हालत भी ख़राब कर दी जाएगी.. सबके सबब पुरे पुणे में इज़्ज़तदार थे, लेकिन औरत के मामले में सोच सबकी hi घटिया थी.. सब के सब औरत को दबा कर रखना चाहते थे..

इसी लिए श्वेता अपने घर या अपने गार्ड्स से कुछ नहीं कह पाई.. रंजीत भी इसी बात के चलते खुल कर श्वेता की हेल्प नहीं कर पा रहा था.. वर्ण वो तो पीयूष का खून hi कर देता..

रंजीत और श्वेता ने एक दूसरे के प्यार को एक्सेप्ट किया. एक साथ रात बिताई.. दोनों एक हुए, कुछ दिनों बाद कॉलेज के 3रह फ्लोर पारर किसी काम से गई तो पीयूष भी उसके पीछे जा पोहंचा..

वहां पीयूष ने फिरसे वही ड्रामा शुरू कर दिए.. कोई आस पास नहीं था तो पीयूष ने श्वेता को कुछ ज़यादा hi परेशां करना शुरू कर दिए.. श्वेता ने तंग आ कर पीयूष को धक्का दे दिया.. वो दोनों बालकनी के पास hi खड़े थे.. धक्का लगने से पीयूष बालकनी से नीचे गिर पड़ा.. श्वेता ने ये सबब नहीं चाहा था, पारर सबब हो चूका था.. वो पीयूष से बहुत तंग आ चुकी थी. धक्का देते समय वो धयान नहीं रख पाई, पास में hi बालकनी है....

3रद फ्लोर से गिरने की वजा से, और सर्र के बल फर्श पर टकराने की वजा से पीयूष मोके पर hi मर्डर गया.. किसी को कुछ पता नहीं चला.. श्वेता वहां से भाग गई..

लेकिन ऊपर जाने से पहले पीयूष अपने एक दोस्त को बता कर गया था.. वो भी पीयूष के hi इलाके से था. वो भी पियसोः को गिरते हुए देख चूका था.. वो सबब समझ गया क ज़रूर श्वेता ने hi उसे धक्का दिए hoga.kyunki उसने श्वेता को घबराते हुए भागते हुए देख लिए था...

श्वेता या उसके परिवार से डायरेक्ट कोई नहीं बिध सकता था.. इसलिए वो भी चुप रहा.. कॉलेज में उसने किसी को कुछ नहीं बताया.. कौन श्वेता के घर वळून से पन्गा ले.. सब hi तो जानते थे.. उन घटना को... उस घटना के बाद मनजोत सिंह की दहशत और दरिंग्डी हर जगा आम हो गई थी..

श्वेता ने रंजीत को सबब बता दिए और घर चली गई.... पीयूष के दोस्त ने नागराज को कॉल करके सबब बता दिए... कोई नहीं जानता था पीयूष के बारे में, सिवाए उसके एक दोस्त के.. पीयूष कलगे के पास में hi एक कोठी पर रह रहा था, श्वेता को हासिल करने के चक्कर में, वो माँ और पिता के बनाये प्लान के हिसाब से श्वेता क लिए कॉलेज में आया था.. लेकिन वो कुछ कर पाने से पहले hi दुन्या से चल बसा..

पुलिस आई और सब कार्रवाई करके लाश को लिए चली गई.... वहीँ से अपने आदमियों को समझा बुझा कर नागराज ने पीयूष की लाश को किसी और इलाके में लेजा कर उसका अंतिम संकसार कर दिए.. सब घर वाले भी वही पोहंच गए थे..

सब के दिलों में पल रही नफरत और बदले की आग बढ़ने लगी...

दन्न को खबर मिली तो वो भी फ़ौरन जो वापिस आ गया वो अपने भाइयों में सबसे अलग और सबसे कमीना था.. वो भी मनजोत सिंह और उसके परिवार से बदला लेना चाहता था.. लेकिन मनजोत परिवार बोहत ज़यादा स्ट्रांग था.. वो भी डायरेक्ट कुछ नहीं कर सकता था.. अब्रॉड में पढ़ते हुए दन्न अंडरवर्ल्ड से भी जुड़ चूका था..

वो इंडिया आया और अपने भाई की हत्या बारे पीयूष के दोस्त से सब जान लिए.. श्वेता के बारे में भी सबब जान लिए.. लेकिन वो अभी तक इस हालत में नहीं था क मनजोत सिंह के परिवार से लड़ सके.. दन्न और उसके घर वाले सब खामोश बैठ गए और प्लानिंग करने लगे...

दन्न दमाग और दरिंदगी में बेस्ट था.. उसने मनजोत के घर में काम करने वाली एक नौकरानी को खरीद लिया, वो नौकरानी घर की हर एक छोटी बड़ी खबर दन्न को पुहंचने लगी...

श्वेता के घर में भी कॉलेज वाली घंटा की खबर पोहंच चुकी थी, लेकिन वो ये नहीं जानते थे क श्वेता ने hi उस मरने वाले लड़के को धक्का दे कर नीचे फेंका था... श्वेता ने भी किसी को कुछ नहीं बताया था..

दन्न बलदा तो पहले से hi लेना चाहता था.. अपने पिता और माँ के साथ हुए उस सलूक को भूल नहीं पाया था वो.. अब वो श्वेता के पीछे पद गया था.. मनजोत सिंह से बदला तो लेना hi था, लेकिन अब्ब वो श्वेता के लिए दिल में बहुत सी आग लिए बैठा था.. अब वो खुद से कुछ करने लायक हो गया था..

कुछ दिन गुज़रे तो एक दिन सूबा ब्रेकफास्ट के समय श्वेता की श्वेता की हालत बिगड़ने लगी. श्वेता खाना छोड़ कर बाथरूम में घुसी और वोमिटिंग करने लगी.. घर की औरतें और मर्द सबब श्वेता की ऐसी हालत देख कर अचम्भे में पद गए..

सब श्वेता की हालत को देख कर शक में भी पद गए थे, मनजोत ने अपनी पत्नी से कह कर श्वेता को वापिस बुलवाया, श्वेता जिसकी हालत बहुत ख़राब दिख रही थी..

श्वेता भी सबब समझ गई थी क वो उस स्टेज पर ाँ पोहंची है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी, बिना शादी के hi वो प्रेग्नेंट हो गई थी. श्वेता के चेहरे के भाव बदलने लगे, वो अपने परिवार के सभी मर्दों को अच्छे से जानती thi..shweta डर गई, वो सोचने लगी क अब्ब क्या होगा, कैसे वो इतनी बड़ी गलती कर गई.. लेकिन अब्ब तो जो होना था वो हो गया था..

श्वेता के चेहरे के भाव देख कर किसी को कोई शक नहीं रहा..

मनजोत सिंह ने आग उगलती हुई आँखों से श्वेता को देखा, फिर अपने बेटों को देखा तो सबब अपने पिता की आँखों में देख कर सबब जान गए..

श्वेता के भाइयों ने श्वेता की हालत पर धयान दिए बिना hi उसे जानवरों की मारना शुरू कर दिए.. श्वेता की माँ श्वेता को बचने आई तो वो भी लपेट में आ गई.. मनजोत सिंह घर के अंदर जा घुसा और बंदूक उठा लाया वो श्वेता को गोली मार देना चाहता था..

श्वेता maa:-(manjot के पैरों में गिर गई) मेरी बेटी को मैट मारिये.. मई आपके पेअर पकड़ती हों, हमारी एक hi बेटी है, प्लस हमारी श्वेता को मैट मारिये, सब मेरी गलती है, मुझे गोली मार दीजिये पारर मेरी बेटी को बख्श दीजिये.... श्वेता माँ मनजोत के पैरों में गिर कर श्वेता की ज़िन्दगी के लिए गिड़गिड़ाने लगी.. इस घर में औरतों की कोई वैल्यू थी hi नहीं तो कैसे कोई इन दोनों माँ बेटियों पर धयान देता.

श्वेता की हालत बहुत ज़यादा ख़राब हो चुकी थी.. एक तो प्रेग्नेंट थी तो दूसरे उसे जानवरों की तरह से मार मार कर लहुलहान कर दिए गया था..

मनोज और मनीष सबसे बड़े थे तो वो सबसे ज़यादा श्वेता की धुनाई कर रहे थे,. श्वेता कुछ बोलना चाहती थी, पारर उसकी सुने बिना hi सबब भाई उसे मार रहे थे. अंकित सबसे छोटा था, वो श्वेता से भी छोटा था, वो एक बड़ा डंडा उठा लाया और श्वेता को उस डंडे से पीटने लगा.. इस बार की श्वेता की चीखें भयंकर थीं..

लेकिन कोई भी श्वेता की मदद करने क लिए तैयार नहीं था.. मनजोत श्वेता की हालत देख कर गोली मारने का मैं बदल लिया.. जैसे श्वेता की धुलाई हो रही थी, श्वेता के भाई वैसे hi उसे जान से मार देने वाले थे.. श्वेता की माँ मनजोत के पैरों में थी, श्वेता को गोली मार देने से मन कर रही थी..

लेकिन फिर श्वेता की चीखें सुनकर वो पलटी और श्वेता की हालत देख कर वो सहन नहीं पाई और वो धम्म से गिर कर बेहोश हो गई.. एक माँ की लाड़ली बेटी की ये हालत हो रही थी, कैसे एक माँ सहन कर पाती.. वो भी तो अपनी बेटी को नहीं बचा सकती थी.. श्वेता की दो बड़ी भाभियाँ भी साइड में कड़ी श्वेता की हालत इ ज़ार पर रो रही थी.. वो भी इस घर में मौजूद दूसरी औरतों की तरह से मजबूर थी. वो कुछ नहीं कर सकती थी.. बास श्वेता की हालत पर आंसू hi बहा सकती थी..

अंकित का एक डंडा श्वेता के मोहन पर लगा... श्वेता का जबड़ा hi हिल गया.. वो अब्ब चीखे से भी गई थी........ जिस्म के कई हिस्सों से खून निकल रहा था, अब्ब मोहन से भी खून निकलने लगा था..

कुछ देर और गुज़रती तो श्वेता मरने वाली हो जानी थी.. श्वेता को जिस तरह से उसके जल्लाद और दरिंदा सिफत भाई मार रहे थे.. श्वेता के बचने क कोई चांस hi नहीं थे.. कोई भी तो उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता था.. पुलिस तक्क इस परिवार के आगे बेबस थी..

इससे पहले क श्वेता की आत्मा शरीर से निकलती.. एक आवाज़ गूंजी.

"रुक जाओ सबके सबब" आवाज़ इतनी ऊंची थी क सब का hi धयान टूट गया.. जो कोई भी कुछ भी कर रहा था, सब रुक गए और आवाज़ की दिशा में देखने लगे..

मनजोत ने सामने देखा तो उसे 3 पीेछे सूट में एक लड़का खड़ा दिखा....

वो लड़का दन्न था.. वो आँखों पर चश्मा लगाए हुए था..

मनजोत सिंह के घर की नौकरानी ने कॉल करके दन्न को सब बता दिए था.. दन्न अपने घर से बहार निकल hi रहा था, जब उसे नौकरानी की कॉल आई थी, वो फ़ौरन hi मनजोत सिंह के घर की और निकल पड़ा था. दन्न को यहाँ पोहचने में ज़यादा देरी नहीं हुई थी... दन्न श्वेता की हालत देख चूका था.. श्वेता अब्ब बोलने लायक नहीं रही है.. वो ये भी जान गया था........... वो दिल hi दिल में बोलै..

वो मारा. दन्न दिल hi दिल में ख़ुशी से झूम उठा था.......... श्वेता की हालत दन्न के मक़सद के लिए बहुत फायदेमंद थी..

shawetaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa मेरी जान तुम्हारी ये हालत........ किसने की है तुम्हारी ये हालत मुझे बताओ... दन्न चीखता हुआ आगे बढ़ा और श्वेता के पास जा बैठा..

श्वेता को थम कर उसके ज़ख्मो से निकल रहे खून को हाथ लगा कर चेक करने लगा.

श्वेता के भाई दन्न की और बढ़ने लगे तो मनजोत ने इशारे से उन्हें रोक दिए.. और दन्न को देखने लगा.. वो शदीद ग़ुस्से में तो था hi, लेकिन पहले वो दन्न को देख लेना चाहता था....... कुछ देर घोर करने क बाद मनजोत सिंह बोलै

मनजोत:- कौन हो तुम, और मेरे घर में बिना किसी परमिशन के तुम गुहसे कैसे.. मनजोत सिंह कड़कदार आवाज़ में बोलै....... श्वेता के भाई भी दन्न को घूर रहे थे. दन्न कोई आम लड़का नहीं रहा था, उसे किसी के घूरने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था.... श्वेता के भाई मनजोत सिंह के सामने बोलने की हिम्मत नहीं रखते थे.. इसलिए चुप रहे... घर की औरतें दन्न को देख कर साइड में चुप गई थी.. और सबकी बातें सुन रही थी..

दन्न:- मेरा नाम सुरिया सिंह है, श्वेता और मई एक दूसरे से प्यार करते हाँ. मई श्वेता से मिलने चला आया था. लेकिन यहाँ आते hi शोर की आवाज़ सुनकर अंदर चला आया.. लेकिन यानन तो आप सबब मिलकर मेरी श्वेता को जान से मर रहे हाँ.. सबब दन्न की बात सुनकर आग बगुला हो गए.. श्वेता के भाई फिरसे दन्न को मारने क लिए आगे बढ़ने लगे, तो एक बार फिरसे मनजोत ने उन्हें रोक दिया..

दन्न जब्ब मनजोत हाउस में दाखिल हुआ था तो वो बहुत खुश और एक्ससिटेड था.. लेकिन फिर श्वेता की हालत देख कर और अपने प्लान को अंजाम देने क लिए खुद को श्वेता से प्यार और श्वेता के दर्द में दुखी हो गया था.. वो ऐसा शो करवाने लगा जैसे श्वेता को इस हालत में देख कर उससे सहन नहीं हो रहा है.. दन्न की आँखों पर चश्मा था.. इसलिए कोई सही से दन्न को जान नहीं पाया..

श्वेता दन्न को देख तो रही रही थी लेकिन वो बहुत दर्द में थी, बोहत चोटें आ गई थी उसे, खून उसकी आँखों में था, चेहरे पर था.. वो नहीं पहचान सकीय क उसके पास कौन है.. आवाज़ से जान गई क आने वाला इक अनजान इंसान है.. लेकिन वो बोल पाने की हालत में नहीं थी..

वो हाथ उठा कर अपने पिता और भाइयों से कह देना चाहती थी क वो इस आने वाले को नहीं जानती, और न hi इससे कोई रिलेशन रखती है.. लेकिन वो हाथ भी नहीं हिला सकीय.. पिता और भाइयों के मारने पर शारीरिक और मानसिक दर्द तो था hi श्वेता को.. लेकिन एक और इलज़ाम उस पर लगाया जा रहा था, वो भी एक अनजान लड़के क द्वारा, श्वेता सहन नहीं कर पा रही थी.. वो किसी भी पल बेहोश होने वाली थी, लेकिन खुद को बेहोश होने से बचने क लिए अंदर से खुद को मज़बूत बना रही थी.. उसके घर वाले उसके साथ कुछ भी करें लेकिन ये बहार का लड़का ....

श्वेता को अंदर hi अंदर कई कुछ बुरा होने का एहसास होने लगा था, लेकिन वो कुछ भी कर पाने की हालत में नहीं रही थी..

मनजोत जो श्वेता को जान से मार देना चाहता था.. वो दन्न की पर्सनालिटी देख कर और श्वेता से रिलेशन जान कर दन्न को घूरने लगा था.. श्वेता को जान से मार देना भी चाहता था.. लेकिन अब्ब श्वेता उसके लिए मर गई थी, श्वेता को अब्ब को कभी भी नहीं देखना चाहता tha..wo किसी दन्न को जांचते हुए किसी फैसले पर पोहचने की कोशिश कर रहा था..

मनजोत:- तुम कोण हो और कहाँ से आये हो मुझे इससे मतलब नहीं है.. लेकिन जो तुम कह रहे हो तो तुम आज की घटना बारे भी कुछ जानते हो क्या...

दन्न:- हाँ कुछ देर पहले hi मुझे श्वेता ने खुद से मुझे बताया था क ब्रेकफास्ट करते समय उसको वोमिटिंग हो रही थी.. उसने अपने शक का इज़हार किया था.. और बहुत ज़यादा डर भी रही थी.. मुझे फ़ौरन hi पोहचने क लिए बोल दिए.. मई भी फ़ौरन hi आ गया.. मुझे लगा था क ऐसा hi कुछ होगा, लेकिन आप सबने तो हद्द hi कर दी.. अगर मई कुछ और भी देर से पोहचता तो मेरी श्वेता को आप सबब मिलकर मार चुके होते..

श्वेता कुछ कुछ दन्न की बातें समझ रही थी.. उन कुछ बातों से hi श्वेता सबब जान गई थी.. क ये लड़का उसके खिलाफ कोई बहुत बड़ी गेम खेल रहा है.. वो दन्न को जानती तो नहीं थी. लेकिन पीयूष के चलते वो अंदाज़ा लगा सकती थी क दन्न का रिश्ता पीयूष से ज़रूर कुछ न कुछ है.. अपनी पूरी जान लगा कर श्वेता ने उठने की कोशिश की.. लेकिन साला हरामी दन्न कैसे इस मोके को हाथ से जाने देता.. श्वेता की हमदर्दी की चक्कर में वो श्वेता को कुछ बोलने या इशारा करने का कोई मौका नहीं देना चाहता था... दन्न अंडरवर्ल्ड से जुड़ा हुआ इंसान था. शातिर और दिमाग से तेज़

tha..badle की भावना भी दिल में रखता था.. अपने भाई के खून का बदला भी लेना चाहता था..

इतना कुछ उसके मैं में था फिर वो कैसे श्वेता को कोई भी मौका देता.. जैसी गलती श्वेता से हुई थी, उसके चलते श्वेता के चेहरे के भाव भी उसके घरवाले नहीं जान पाए.. और दन्न को घर से धक्के देने की बजाये कुछ और सोचने लगे..

दन्न की बायत सुनकर मनजोत सिंह और उसके भाई श्वेता को घूरने लगे थे... सबब दन्न पर कम् और श्वेता पर ज़यादा धयान दे रहे थे.. श्वेता ने खुद को बचने क लिए अपने आशिक़ को बुला लिया.. खुद को अपने पिता और भाइयों से बचने बचने क लिए एक अनजान लड़के से राब्ता कर लिया था.. सब यही सोच रहे थे.. कितने गलत थे सब एक सबब.. श्वेता क चेरहे के भाव जो खून के बावजूद भी देखे जा सकते थे.. वो सब की नज़रों से ओझल हुए पड़े थे.. सब श्वेता को किसी और hi नज़र से देख रहे थे.. दन्न को परखने और श्वेता से दन्न का रिलेशन जान्ने की कोशिश hi नहीं कर रहे थे. हक़ीक़त का जान लेना कितना ज़रूरी है सबब क लिए, लेकिन वो सबब सिर्फ एक औरत को सोच रहे थे, एक बार फिरसे एक औरत ज़ाद ने मनजोत सिंह की इज़्ज़त उछाल दी थी.......... दन्न की बात के जवाब में मनजोत बोलै..

मनजोत:- तुम साले हरामी आजकल के लड़के किसी की इज़्ज़त को कोई अहमियत hi नहीं देते.. शादी से पहले से हराम के कामों में पद जाते हो.. अगर इतनी hi आग लगी तो अपने घरवळून को हमारे हाँ भेज देते... तुम भी तो सिंह परिवार से हो.. तो बात आगे भी बधाई जा सकती थी..

दन्न:- हम से भूल हुई, पता hi नहीं चला और सब हो gaya,.vaise भी मेरे घर वाले यहाँ नहीं, अमेरिका में रहते हाँ.. मई श्वेता के बारे में उन्हें सबब बता चूका हों, श्वेता भी सबसे बात कर चुकी है.. जल्द hi वो सबब यहाँ आने वाले थे..

मनजोत एक उसूल परास्त इंसान भी था.. लेकिन औरत के चक्क्रों में उसकी सोच बहुत हट के थी.. इसी सोच के चलते hi तो उसने सुमित्रा का वो हाल किया था.. अब्ब भी वो श्वेता को अहमियत इस लिए नहीं दे रहे थे क वो भी एक लड़की थी.. भले hi वो उनकी बेटी थी... घर में किसी भी औरत की कोई वैल्यू नहीं थी.. श्वेता के इस काण्ड के चलते अब्ब श्वेता उन सबब के लिए मर्डर गई थी.. श्वेता की वैल्यू तो पहले से hi इस घर में नहीं थी.. पहले अगर किसी के दिल के कुछ था भी तो वो अब्ब नहीं रहा था..

मनजोत और उनके बेटों का दिमाग श्वेता की प्रेगनेंसी के बाद से कुछ सोचने लायक रहा hi नहीं था.. औरत से जुडी ऐसी घटना से उन सबब के दिमाग वैसे भी काम छोड़ दिया करते थे.. अजीब थे सब के सबब..

अगर थोड़ा सा दिमाग चल रहा था तो मनजोत का, तो वो भी श्वेता की बर्बादी क लिए hi था.. मनजोत दन्न की पर्सनालिटी और सिंह परिवार से होने की बिना पर कुछ और hi सोचने लगा था.. श्वेता को मार देना, या अपनी नज़रों से हमेशा क लिए दूर कर देना एक hi बात थी..

श्वेता की माँ अभी तक्क बेहोश पड़ी हुई थी, और श्वेता आधी बेहोशी में hi खुद क लिए नया क्या होने वाला है. वो जान्ने के लिए बेक़रार थी..

मनजोत:- तुमने और श्वेता एक साथ मिलकर गुना कर चुके हो.. ऐसा हमारे खंडन में कभी किसी ने नहीं किया.. हम एक समय एक hi काम कर सकते हाँ.. या तो तुम दोनों को मार दें, या तुम श्वेता के साथ शादी करके श्वेता को यहाँ से लेकर हमेशा हमेशा के लिए दफा हो जाओ.. बोलो क्या तुम ये सबब करने क लिए तैयार हो....

दन्न को और क्या चाहिए था.. वो जो चाह रहा था, वो बिना किसी मदद के hi उसे हासिल हो रहा था.. दन्न ने हाँ कह दी......... श्वेता ये सबब सुनकर बेहोश तो नहीं हुई.. उसे बहुत बड़ा सदमा पोहंच गया क उसके घरवाले उसके साथ इतना सबब भी कर सकते हाँ.. श्वेता की भाभियाँ भी ये सबब सुनकर शॉकेड हो गईं थी..

आने वाले को सही से जाने बिना hi कैसे ये सबब किया जाए रहा है, पहले श्वेता से साडी बात तो जान ले, असल बात क्या है, किसके बच्चे की वो माँ बनने वाली है..

ऐसे भी कोई करता है क्या.. औरतों को जुटे की नोक पर भले hi रखते hon,lekin अपनी बेटी की, अपने घर की इज़्ज़त की यौन hi तो नहीं ज़िन्दगी बर्बाद की जा सकती..

श्वेता की माँ होश में होती तो शायद वो ऐसा कुछ न होने देती.. श्वेता के भाई भी अपने पिता की बात मान गए, वो सबब भी मनजोत सिंह के hi जैसे थे..

श्वेता को उसी हालत में hi बिना किसी पंडित के एक लॉयर को बुलवा कर पेपर्स तैयार कवये गए.. बाद में जज का भी मसला हल किया जा सकता था.. सबब उनकी जेब में hi रहता था.. पुलिस हो या अदालत हो, सबसे उनके रिलेशन थे..

शादी क्या हुई श्वेता को घर से धक्का देने का एक बहाना था.. श्वेता के सिग्नेचर की जगा भी अंगूठा लगाया गया.. श्वेता होश में hi कहाँ थी.. दन्न हरामी ने भी भी अमेरिका जा कर सही से कोर्ट मैरिज करने का कह दिए..

श्वेता की रवानगी घर से ऐसे हुई, किसी मरे हुए के साथ भी कभी किसी ने ऐसा नहीं किया होगा ..... दन्न जब तक वहां रहा, श्वेता के साथ ऐसे रहा जैसे सच में hi शवेता का लवर हो..

वहां से निकला और सीधा अपने घर जा पोहंचा.. रास्ते में hi दन्न ने घर में फोन करके सब बता दिया था... घर में सब hi दन्न का सवागत करने क लिए तैयार थे.

वहां पोहंच कर भी श्वेता को कोई होश नहीं था.. वो वैसे hi सदमे में थी......

श्वेता को होश तब्ब आया जब्ब रात को दन्न और नागराज मिलकर कर श्वेता का रपे करने लगे.... श्वेरा की हालत पहले hi बिदगी हुई थी.. पुरे शरीर पर ज़ख़्म hi ज़ख़्म थे.. आत्मा भी घायल थी.. उसपर से अब्ब उसके साथ वो हो रहा था, जो कोई भी इज़्ज़ातदार लड़की कभी सोच भी नहीं सकती थी..

अब्ब जो उसके साथ हो रहा था, श्वेता पूरी तरह से टूट गई थी.. जीने की चाह hi ख़तम होकर रह गई थी.. ज़ख़्मी हालत में hi श्वेता का रात भर रपे होता रहा..

मोहन पर लगने वाली चोट बहुत ज़यादा थी. श्वेता बोलने की हालत में भी नहीं रही थी.. रपे के समय उसके सारे जिस्म और मोहन से खून निकलता रहा था.. सर्र से बह रहा खून जम्म चूका था.. आँखों की हालत भी वैसी hi थी..

श्वेता को एक हफ्ते जूस दिया जाता रहा.. और एक हफ्ते तक्क दन्न और नागराज मिलकर

श्वेता का रपे करते रहे.. सुमित्रा भी अपना ग़ुस्सा अतर रही थी... कभी वो श्वेता को डंडे से मारती तो कभी श्वेता की छूट में पूरा पंजा दाल कर श्वेता को दर्द देती....

एक हफ्ते बाद श्वेता की हालत बहुत ज़यादा बिगड़ने लगी तो श्वेता को मुंबई हॉस्पिटल लेजाया गया... वहां उसका ट्रीटमेंट हुआ और फिर उसे रेखा बाई के कोठे पर भेज दिए गया.......... दन्न वहां बार जाने लगा और श्वेता का शारीरिक और मानसिक बलात्कार करने लगा..

श्वेता के ठीक हो जाने के बाद दन्न ने पीयूष का बता दिए था, क वो उसका भाई था और ये भी वो सबब श्वेता से और उसके घरवळून से बलदा भी लेना छह रहे थे.. एक बदला उनका पूरा हो चूका था.. दन्न ने उस घर की बाकी की भी औरतों का भी यही हाल करने का कह dia..shweta ने रट हुए दन्न से कहा था क इस सबब में उसका कुआ कसूर था, उसे किश गुनाह की सजा मिली है. दन्न साला हस्स दिया था... श्वेता की जैसी हालत हो चुकी थी, उसे अब्ब किसी से कोई ग़र्ज़ नहीं रह गई थी, उसके बाद पूरी दुन्या जिए या मरे.. उसे उससे कोई लेना देना नहीं था.. श्वेता ने सुसाइड करने का बहुत सोचा पारर हर बार उसका हाथ उसके पेट पर चला जाता था.. कितने सपने देखे थे उसने.. वो सबब पानी का बुलबुला बन गए थे..

श्वेता ने अपने पेट में पल रहे बच्चे क लिए खुद को ज़िंदा रखने का सोच लिया था.

इसके इलावा श्वेता के मैं में कोई और बात नहीं थी.. कोठे पर रहते हर रात शारीरिक और आत्मा से घायल होने के बाद उसकी सोच वही थम सी गई थी.. वो जनन गई थी क अब्ब उसकी बाकी की बची लाइफ यही गुजरने वाली है..

श्वेता का दर्द तो कम् नहीं हुआ, पारर उसने खुद को उस कोठे का आदि बना लिया था.. श्वेता के पास इसके इलावा कोई और चारा भी तो नहीं था..





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श्वेता की माँ को होश आया तो उसे सबब पाया चला.. जैसे hi उसे पता चला क श्वेता के साथ इतना बड़ा ज़ुल्म हो चूका है तो उनसे पुरे घर को hi सर्र पर उठा लिया.. ज़िंदगी में पहली बार मनजोत सिंह हाउस में किसी औरत की आवाज़ गूंजी थी.

और ऐसी गूंजी थी, क पुरे घर में hi कोहराम सा मच गया था. सरे डरो दीवार हिला कर रख दिए थे श्वेता की चीखो पुकार ने... वो रो रो कर दुहाइयाँ दे रही थी.. लेकिन कोई उसकी सुनने वाला नहीं था.. उसके श्वेता के जैसे और भी औरतें इस घर में थी......... वो भी बास बच्चे jan'ne क लिए या रात को मर्दों के बिस्तर गरम करने क लिए थी....

मनजोत और उसके बेटे बहुत देर तक्क उसकी बातें सुनते रहे.. आखिर कार तंग आ कर मनजोत ने उसकी भी पिटाई शुरू कर दी.. एक तो उसे श्वेता का ग़ुस्सा था..

दूसरा फिरसे एक औरत उसके सामने तमाशा कर रही थी.... जिसकी औकात पैरों में रहने की थी... वो कब्ब के सर्र पर छाडे हुए भोंके जा रही थी..

एक बार फिरसे इस घर में एक औरत को पीटा जा रहा था... एक बार फिरसे एक औरत का खून इस घर के फर्श को रंगीन बना रहा था.. एक बार फिरसे इस घर में एक बेबस और लाचार औरत की चीखन गूँज रही थीई.. एक बार फिरसे इस घर में एक बेबस और लचर औरत की दाद राशि करने वाला कोई नहीं था...

श्वेता की माँ कब तक्क ज़ालिमों के ज़ुल्म को सेह सकती थी, वो तो पहले से hi घायल थी, उसकी फूल दी बच्ची को बर्बाद कर दिए गया था.. उसकी फूल सी बच्ची को लहुलहान करके किसी गिरी पड़ी चीज़ की तरह से घर से बहार फ़ेंक दिए गया था.

इतने ज़ख़्म एक माँ कैसे सहन कर सकती थी.. वो भी सदमे और दर्द को सहन न करते हुए बेहोशी की नींद जा सोई....

उस दिन के बाद से इस घर में औरत की वैल्यू और भी गई गुज़री हो गई थी.. कोठी को पुरे एक एकर पर पहला दिए गया. कोठी की बैक साइड में hi घर की औरतों क लिए ख़ास पोरशन बना दिए गए..

अब्ब से इस घर की सभी औरतों क लिए घर से निकलना बंद हो गया था.. जो इस घर में पहले से hi थी.. वो तो इस सबब की आदि हो चुकी थी. लेकिन श्वेता क दो बाकी के भाइयों के लिए मुश्किल से मिलने वाली लड़कियां भी घर में क़ैद होक रह गईं..

चरों भाइयों की किस्मत में भी लड़कियां hi लड़कियां लिख दी गाइएएएन..

मनजोत सिंह के 4 बेटे थे.. उपरवाले ने मनजोत सिंह को एक सजा दुन्या में रहते हुए hi दे दी.. उसके किसी भी बेटे से उसे कोई पोता नसीब नहीं हुआ... शायद ऊपरवाला इस घर को कुछ और भी आज़माना चाहता था.. इस घर में और भी कई लड़कियां भेज दीं..

चरों भाइयों की टोटल 15 बेटियां थीई.. किसी को बेटे की ख़ुशी नहीं मिली..

कोई बीटा नहीं था.. फिर भी किसी को अकाल नहीं आई क इस घर में औरत के साथ सरे मर्द जैसा सलूक करते हाँ, उसके बाद इस घर में किसी और मर्द की कोई गुंजाइश निकलती कहाँ है.. लेकिन वो सबब बूढी से महरूम थे.. बूढी थी उनके पास तो औरत से नफरत के लिए.. औरत को छोड़ने क लिए.. पैसा और पावर बढ़ने क लिए.. बदमाशी भी वो सबब किया करते थे.. पहले मनजोत से कोई पन्गा लेने hi हिम्मत नहीं रखता था, तो बाद में कोई मनजोत के बेटों से उलझने की हिम्मत खुद में नहीं प् सका था..

मनजोत ये सबब देख कर बहुत दुखी भी हुआ और रंजीदा भी.. अब्ब उसके बेटों से आगे कोई और मर्द नहीं जन्मा था... जो उनका नाम रोशन कर सके.....

मनजोत सिंह और उसके बेटे कोई भी बीटा तो नहीं पा सके पर उन सबब ने बिज़नेस में बहुत नाम कमाया.. पैसा और रिलेशन बहुत बड़े... पावर भी पहले से कई गुना बढ़ती चली गई...

उस घर में जन्मी बाद की साडी लड़कियां उसी घर में hi क़ैद हो कर रह गयी... मनजोत या श्वेता के भाई नहीं चाहते थे क श्वेता के जैसी कोई और भी निकले..

सबके लिए दुन्या की हर एक चीज़ उसी कोठी में ला कर दे दी जाती थी.. लेकिन कोठी से बहार की दुन्या उन सबब के लिए ख़तम हो कर रह गई thi..unki स्टडी भी कोठी में hi होती थी.. और इस बात का खास ख्याल रखा जाता था क कोई भी टीचर इस घर की किसी hi लड़की का मंद डाइवर्ट न कर सके...

दन्न ने तो ये सोचा था क श्वेता को कोठे पर बिठाने क बाद वो डंके की चोट पर मनजोत और उसके बेटों से कहेगा क देखो कैसे मैंने अपने पिता, अपनी माँ का बदला ले लिया है... लेकिन दन्न कुछ भी नहीं कर पाया....

दन्न ने तरक्की करते करते पुरे महाराष्ट्र पर hi अपनी हुकूमत कड़ी कर ली थी. लेकिन वो पॉवरफुल होने के बावजूद भी मनजोत सिंह को ये नहीं बता पाया क वो दन्न है और उसके बाप का नाम नागराज है, वो उसी सुमित्रा का बीटा है, जिसे मनजोत सिंह ने पुरे इलाके में नंगा घुमाया था..

दन्न को इस बात की बहुत खार थी.. दन्न कभी भी मनजोत सिंह का सामना भी नहीं कर सका... दन्न अक्सर hi महाराष्ट के अलग अलग शहरों में रह कर खुद को पॉवरफुल बनाने माँ लगा हुआ था.. वो कभी भी पुणे में खुल कर नहीं घूम सका था.. कभी भी मनजोत या उसके बेटों से उसका सामने नहीं हुआ था..

दिमाग का तेज़ था... लेकिन किसी की आँखों में ऑंखें दाल कर लड़ने की हिम्मत उसमे नहीं थी.. मनजोत सिंह भले hi आधे पुणे पर हुकूमत करता था... और दन्न पुरे महाराष्ट पर.... पारर मनजोत सिंह से टकराने की हिम्मत दन्न खुद में नहीं पा सका था.... उसका बदला सिर्फ श्वेता तक्क hi महदूद हो कर रह गया था.. दन्न भी श्वेता से के साथ सब कुछ करके खुद को ठंडा करता रहता था..

मनजोत सिंह और उसके बेटो ने अपने घर की सभी औरतों और लड़कियों को घर से निकलने पर पाबन्दी लगा दी थी.. ये उस घर की सभी महिलाओं पर ज़ुल्म भी था, तो एक हिसाब से अच्छा भी था........... क्यूंकि दन्न ऐसे hi किसी मोके की तलाश में था.. कोई लड़की या औरत घर से निकले तो वो उसे किडनैप करके श्वेता जैसा सलूक करे.. लेकिन दन्न को कोई भी ऐसा मौका नहीं मिल सका...

श्वेता की माँ उस दिन के बाद से आधी मर्डर गई थी.. वो बास अपनी साँसे पूरी कर रही थी.. वर्ण उसकी लाइफ में कुछ भी नहीं रह गया था... एक श्वेता का दुःख था. तो बाद में आई इस घर की लड़कियों को सोच कर वो और भी पल पल मर्डर रही थी.. वो कुछ कर भी तो नहीं प् रही थी किसी के लिए..

उस घर की औरतें और लड़कियां अब्ब परसेंट टाइम में आधी पागल हो चुकी थी.. पुरे दिमाग से ठीक हालत में कोई भी नहीं रही थी... साइकोलॉजिकल तौर पर वो भी बास ज़िंदा hi थी. वर्ण ज़िन्दगी का कोई भी रंग नहीं था उनकी लाइफ में ...

कोई भी किसी भी आस को लिए नहीं जी रही थी.. सबब hi जानती थी क उनकी आखरी साँसे भी अब्ब इसी घर में hi पूरी होंगी.. अक्सर उस घर की लड़कियां एक दूसरे से बिना किसी बात के लड़ने लगती थी.. कई लड़कियां तो अक्सर ये भी भूल जाती थीं क उसने आज लंच, डिनर भी किया है या नहीं.. साइकोलॉजी प्रॉब्लम की वजा से भूक पर भी असर पड़ा था.. कभी लगती तो कभी नहीं लगती.. कभी बहुत काम लगती तो कभी बेहाशे लगने लगती..

अक्सर औकात ऐसा होता क कोई लड़की एक hi टाइम के 3 टाइम का खाना भी खा जाती थी. वो खाने की टेबल पर बैठी खा तो रही होती थी.. पर उसका धयान कही और होता था.. अक्सर खाना खा कर भी ऐसा लगने लगता था क जैसे अभी उसने खाना खाया hi न हो...

श्वेता की माँ की हालत जो थी वो तो थी hi.. पारर श्वेता की भाभियाँ भी अपनी बेटियों को देख देख कर मरने की कगार पर ाँ पोहंची थीईईई.. उनके आंसू कभी कम् hi नहीं हुए थे..

ये सबब हालत हुए थे... जो पूजा और हर्ष चौहान जान गए थे..

तभी उस दिन शाम को पूजा ने थप्पड़ थप्पड़ मार कर विजय का मोहन सुजा दिए था.. तब्ब पूजा ने कहा था क किसी को भी माफ़ मैट करना.. सब को ऐसी सजा देना क उनकी रूह तक्क कांप उठे.......

पूजा ये सबब उस समय hi जान गई थी.. इतना दर्द था इस सब में क पूजा या कोई और फिर कभी इस सबब का ज़िक्र hi नहीं किसी से कर सके थे... श्वेता भी जब पैलेस में आई थी, तब उसे भी ये सबब नहीं बताया गया था..

वो ख़ुशी का समय था तो कोई भी ये सबब किसी को नहीं बताना चाहता था.. सब की hi खुशियों को दीमक लग जाती फिर...

अब्ब सबब hi ये सबब जान गए थे.. तो पैलेस का माहौल बहुत हद्द तक्क बदल गया था.. श्वेता ये सबब जान कर तो टूट hi गई थी, लेकिन विज्जू की वजा से वो सबब सहन कर पाने में सफल भी हो गई थी..





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