Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 29 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

गुदा के माहौल में महक के अंदर सेक्स ड्रग्स एक्टिव हुआ तो महक खुद की आग में जलने lagi..mehak ने विज्जू की मदद से खुद को शांत कर लिए.. लेकिन विज्जु ने महक को नहीं रोका. महक शांत हुई तो विज्जू की ऐसी ऐडा पर फ़िदा हो गई.. दिल में hi कही वो विजू को चाहने लगी हाइपर अभी वो खुद को सही से जाँच नहीं पा रही.

विज्जू ने महक की मांग भर कर महक को वो हक़ दे दिए है अब्ब महक जब चाहे विज्जु से अपना हिंसा वसूल कर सकती है.. महक भी विज्जु के साथ सब प्यार से करना चाहेगी.. थप्पड़ तो मारने hi थे महक ने विजु को..... जब लड़की को कोई ऐसा मिलता है तो वो खुद को ऐसे hi शो करवाती है
 
थैंक्स.!!

महक की मांग करके विज्जु ने सही किया. महक भी विज्जू के ऐसा करने से खुश हो गई.. हर लड़की को hi तो अपना एक लाइफ पार्टनर चाहिए होता है तो महक को भी विज्जू मिल गया..

अब्ब महक भी थोड़ा सा और खुल गई है तो मिलकर कर मज़ा कर रहे हाँ, मिशन पर भी अपना फोकस बढ़ा रहे हाँ.. अंदर उन्हें वो सब दिखा जो बच्चो को अपाहिज करने क लिए इस्तेमाल होता tha..pawan ऐसा धंदा करता है ये देख कर दोनों ग़ुस्से में ा गए और ग़ुस्से में hi पवन को चीयर पहाड़ डालने की कस्मे खाने लगे
 
थैंक्स..!!

ज़ख़्मी तो होना hi था.. इतने गुंडे मार कर अब्ब दन्न सतर्क हो गया था. वो भी अँधेरे में रहते हुए अपने आदमियों को लड़ने क लिए बोल चूका था... विज्जू और महक की किस्मत अच्छी थी जो बच गए.. . अब दोनों ने लाइट गन से लड़ने का सोच कर आगे बढ़ने का सोचा और सबको hi पल भर में hi सुला भी दिए.. ये सबब करने से पहले विज्जू और महक ने बचो और लड़कियों को सेफ क्र लिए
 
थैंक्स..!!

दन्न और उसके दोस्त कब्ज़े में आने hi थे.. कई घंटो की जानलेवा म्हणत का कुछ तो फल मिलना hi था डॉन को..... और जितनी म्हणत वो कर रहे थे. उसी के चलते दन्न कैसे दोनों से बच कर निकल सकता था.. दन्न और उसके दॉतों के धार लिए जाने के बाद विज्जू ने महक के साथ मज़ा लेना शुरू कर दिए और मेहक्क़ भी विज्जू की पत्नी होने का साबुत देने लगी..

पारर पूरी तरह से नहीं..
 
थैंक्स..!!

दन्न से मिलने के बाद विज्जउ पूजा और रानी के साथ पुराने बीएड पर पुराणी यायदन में खो गया... उसी बीएड पर वो पुराने समय को याद करते हुए प्यार भी करने लगे एक दूसरे से ..

रानी की गांड भी कब तक बचेगी.. बास श्वेता मटर टोटली कम्पलीट हो जाए तो रानी की गांड का पानी भी विज्जु निकल देगा. गैंग स्ट्रॉन हुई बुसिनेसमें भी चलने लग पड़ा.. हर कोई अपनी बेस्ट परफॉर्मन्स भी दे रहा है.. शुष्मा भी अब्ब विज्जू के मिल जाने से खुश है तो बिज़नेस को अब्ब वो टॉप पर ले जाएगी.. महक भी उसके साथ मिलकर सबब देख रही है

विज्जू को शुष्मा को डाइवोर्स दिलवा कर उसके क्ष पति और उसके दोस्त की गांड मरवा कर शुष्मा को लाइव दिखा दिए.... दोनों ने खूब फिर मस्ती और मज़ा भी किया..

अब्ब विज्जउ का नेक्स्ट मिशन शुरू हुआ विज्जू पुणे जा पोहंचा.. अब्ब वही सेउसे अपना बाकि का मिशन भी पूरा करना है. देखते हाँ विज्जू वहां का मिशन कैसे पूरा करता है
 
थैंक्स..!!

अपने hi गिरते हाँ नशेमन पे जिबलियन........ हमारे hi असह्याना बनने से पहले उजाड़ देते हाँ, खुद के बनाये उसूलूं पर, खुद के अहंकार के चक्रों में अपने hi खून को दर बा दर कर देते हाँ.. जिस जिस ने जो जो किया होगा.. सब को उसका दंड भुगतना पड़ेगा....... विज्जउ किसी को माफ़ नहीं करने वाला. जिसकी जैसी सजा बनती है उसे वैसी hi सजा दे गए...
 
अपडेट ::: 134

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प्रेसेंट टाइम


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मई और महक पुणे वाली कोठी में थे.. 3 घंटे की रेस्ट के बाद मैं ड्राइंग रूम में hi आ कर बैठ गया और न्यूज़ देखने लगा.. महक अभी नहीं आई थी..

महक मेरी आधी पत्नी बन चुकी थी पारर अभी वो मेरे साथ सोने के मूड में नहीं थी.. जब इस कोठी पर पोहंचे थे तो मैंने महक को अपने गले से लगा कर किश करदी थी और कहा था क आज से वो मेरे साथ hi सोया करेगी तो...

तो महक ने मुझे किश का जवाब एक हलकी और टाइट किश की सूरत में देते हुए अपने घुटने को उठा कर मेरे लुंड पर दबा दिए था.. " क्यों लुंड में खुराक होने लगी है, मांग क्या भर दी मेरी तुमने, तुम तो कुछ ज़यादा hi शोखे होते जा रहे हो, और तुम्हरा लुंड भी तो देखो अभी से भी इतना सख्त हो रहा था... भूल जाओ अभी तुम्हरे साथ नहीं सोने वाली.. और न hi तुम्हे कोई और मौका देने वाली हों.."

महक भी अब्ब मुझसे खूब मस्ती मज़ाक करने लगी थी, अब्ब भी महक पहले जैसी थी, लेकिन वो चेंज भी बहुत हद तक हो गई थी.. पैलेस में गीज़र पिछले कई दिनों में महक की छूट में एक बार फिरसे आग लग गई थी.. महक कमीनी ने मुझे बताये या मेरी कोई भी हेल्प लिए बिना hi खुद को एक रूम में बंद कर लिया और नंगी होकर खुद की छूट में ऊँगली दाल कर सारा पानी साड़ी बेचैनी ख़तम कर ली थी..

जब मैंने महक को फ्रेश फ्रेश देखा तो मुझे लगा था क महक फिरसे बेचैन होकर फिरसे शांत भी हो गई है. क्यूंकि अब्ब छूट की आग और आग के ठंडा हो जाने क बाद की कंडीशन में बहुत अच्छे से जान जाता था... मेरी चरों तरफ hi तो छूट और छूट की आग का खेल खेला जा रहा था.. अनगिनत छूटें मुझे देख के आग की लपेट में आ जाया करती थी.. फिर जब वो शांत होती थी तो मुझे बहुत अच्छे से अंदाज़ा भी हो जाया करता था.....

महक से भी मैंने पूछा था क वो इतनी फ्रेश क्यों है.. क्या उसकी बेचिअनि और छूट की आग फिरसे बढ़ गई थी... अगर ऐसा था तो मुझसे हेल्प क्यों नहीं ली..

तब भी महक ने मेरे गले से लग के मुझे एक ज़बरदस्त किसम की किश करके मेरे लुंड पर अपने घंटे को दबा कर यही बोलै था..

भूल जाओ सबब.. मई नहीं तुम्हारे हाथ में आने वाली. गुफा में तो मैं मजबूर थी और तुम मेरे पास भी तो सबब हो गया था.. अपने लुंड को अपनी maa,behno और दूसरी छूटों में दाल के ठंडा कर लिया करो, मेरी छूट के लिए तमहरा लुंड बना hi नहीं है.................... महक की आँखों में बेइंतेहा शरारत और चमक आ गई थी.. महक भी इस नयी लाइफ को और इस लाइफ ने बदलते रंगों को पूरा पूरा एन्जॉय कर रही थी..

पुणे वाली कोठी में भी महक ने कुछ वैसी hi मस्ती की थी.. बहुत मज़ा आ रहा था, महक के साथ टाइम स्पेंड करने में..

मई टीवी देख रहा था क महक भी ड्राइंग रूम में आ गई ... मैं महक को देखा तो मुझे एक झांकता लगा..

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महक एक कुछ ज़यादा hi शार्ट पंत में थी.. नाभि को नंगा किये एक छोटी सी और फिटिंग वाली बुनियाँ पहने हुए थी......... मैं महक को ताड़ने लगा.. महक मेरे पास आई.. और अपना एक पेअर उठा के मेरे लुंड पर रख दिए और झुक कर मेरी आँखों में देखने लगी....... मई तो महक के फिगर को hi घूर रहा था.. झुकने से उसके आधे बूब्स भी दिखने लगे थे.. कुछ तो वो पहले से hi शो करवा रही थी.. महक से मस्ती किये महक के बदन की खुशबु पाए बहुत दिन हो गए थे.. मुझे महक को ऐसी हालत में देख कर अजीब सी ख़ुशी अजीब सा मज़ा मिलने लगा....

महक अपने पेअर से मेरे लुंड को कुरेदते हुए, चुटकी बजाते हुए..

महक:- ोोू हेल्ल्लूओ ठरकी इंसान, पहले कभी किसी लड़की को ऐसे नहीं देखा क्या, और फिर मई तो तुम्हरे लिए वैसा पीेछे भी नहीं हों तो मुझे ऐसे तो मैट घूरो.

वर्ण अपने लुंड से हाथ धो बैठोगे..... मई क्यों महक के महकते बदन से नज़रें हटाता.. इतना ज़बरदस्त व्यू वो दिखा रही थी.. अब्ब तो लाइफ में मस्ती और मज़े hi थे, महक भी मेरी पत्नी बन्न चुकी थी.. और वो भी अब्ब मुझसे धीरे धीरे खुलती जा रही थी.. मुझसे हर किसम की बात हर किसम की मस्ती वो कर लिया करती थी. तो फिर मई क्यों ऐसे मोके को हाथ से जाने देता..

मैं के फिगर से नज़र हटा कर मैंने महक की आँखों में देखा.. जहाँ चमक, गहराई, भरोसा, मस्ती, शरारत सबब कुछ था..... लेकिन साली की आँखों में वो प्यार नहीं था.. जो दूसरी सबब आँखों में मुझे दीखता था..

फ्रेंडशिप वाला प्यार ज़रूर था, लेकिन लवर वाली फीलिंग से महक अभी दूर थी..

महक की आँखों में देखते हुए, मैंने महक के पेअर को पकड़ा और एक झटका दे कर महक को अपनी गॉड में बिठा लिए.. महक इस सबब क लिए रेडी नहीं थी, और न hi उसने ये सबब सोचा भी था.. महक मेरे लुंड बैठी तो महक की गांड की महक पा के मेरे लुंड ने सर्र उठाना शुरू कर दिए.. वो भी महक के मस्त फिगर को देख के मूड में आ गया था..

महक मेरी गॉड में आई तो 2 सेक् क लिए महक हड़बड़ा गई थी.. यहाँ लड़ाई वाला सन नहीं था. वर्ण महक किसी को ऐसा मौका कब्ब देती थी.. महक भी मेरी ऐसी मस्तियों को झेल लेती थी, लेकिन मई फ़ौरन hi ऐसा कर जाऊँगा ये महक ने नहीं सोचा था..

ouchhhhhhhhhhhhhhhhh.. महक क मोहन से आवाज़ निकली..

महक:- कुछ ज़यादा hi नहीं तुम खुद से बहार हो गए हो.. क्या पहले मुझे ऐसी हालत में कबि नहीं देखा क्या... मेरी ने सर घुसा कर मेरी आँखों में देखा, वहां ग़ुस्सा नहीं था... महक नार्मल थी.. बस उसकी ऑंखें चमक रही थी..

इतना खतरनाक फिगर पा कर महक उसे मेरे सामने पूरी तरह से एक्सपोज़ करते हुए मुझे नार्मल रहने को बोल रही थी.. उसे पहले इस हाल में देखा हो या न हो, जैसी वो अब्ब बन्न के आई थी कैसे मई मस्ती किये बिना महक को छोड़ सकता था..

महक के गाल पर किश करदी मैंने.. महक ने किश के बाद मेरे गाल पर हल्का सा थक्कद लगा दिए..

विजय:- आज तुम बहुत hi कातिल दिख रही हो मेरी जान..

mehak:-"meri जान" अरे वाह मई कबसे तुम्हारी जान हो गई हों, और कातिल तो मई हर दुम्म hi रही हों, फिगर से भी और कामो से भी.. तुम तो सबब जानते hi हो न.

बच के रहो कही तुम भी मेरे हाथो का कतल हो जाओ.. महक मेरे पास हो, मुझे मस्ती क मूड में देखे और खुद भी मस्ती के मूड में ना ए ये होना पॉसिबल नहीं था.. महक भी मुझे शरारती आँखों से घूरती हुई बोली..

मई महक के नंगे बाज़ो पर अपनी उँगलियाँ चलते हुए महक के क्षूलफेर महक की गर्दन पर हलके हलके किश करने लगा.. महक मुझे मुस्कुराती आँखों से देखने लगी.. महक साली मेरे किश करने से भी मज़े में या बेचैनी में नहीं हुई थी.. साली खुद को आधा मर्द समझ रही थी.. मेरा दूसरा हाथ महक के पेट पर आया और मैं महक की नाभि में ऊँगली फेरने लगा, महक को झटका सा लगा..

विजय:- कोई कब किसी की जान बन जाए, किसी को नहीं पता चलता, बास जब वो दूर होने लगे या कुछ ज़यादा और खतरनाक रूप में पास आने लगे तो वो जान लगने लगती है.. तुम कातिल हो तो क्या हुआ, मुझे भी कतल कर दो, और अपने नैनो की तीरो से, या अपने मस्त फिगर के नशे में मुझे इतना अधमरा कर दो क मई तुम्हरे नैनो की तीरों से घायल होकर तुम्हारे मस्त बदन की महक के नशे में खोता हुआ इस दुन्या से चला जाओ............... महक ने मेरे सर्र के बाल थाम लिए और मुझे झटका देने लगा...

महक:- ो मजनू की औलाद.. जैसा तुम बोल रहे हो, मई वैसी लड़की नहीं हों. ऐसे मुझे किसी को मारना नहीं आता और न hi मई किसी को ऐसे मारना चाहती हों.. महक हस्ती हुई मज़ा लेती हुई मुझसे बोली........... और आज तुम्हारे लुंड को क्या हुआ, वो क्यों अकड़ रहा है.. पहले तो वो मेरे पास रहते हुए किसी चूहे के जैसे सर्र नीचे रखते हुए पड़ा रहता था..

महक की गर्दन पर नाक रखते हुए उसकी महक को अपने अंदर उतरता हुआ.. एक ज़ोर की सांस ली aur...."majnu मुझे सबने मिलकर बना दिए है तो मई क्या कर सकता हों, और सबब hi तो मुझे मजनू बना हुआ देखने चाहते हाँ, मजनू बनुगा तो सब में अच्छे से प्यार बांटूंगा, तुम्हे भी तो मुझसे प्यार चाहिए, तुम भी तो अधूरी हो ना, देखो कैसे तुम्हरा बदन एक मर्द के प्यार के लिए मचल रहा है, तुम बास खुद को इस सबब से ज़बरदस्ती रोके हुए हो... छोड़ दो अपनी ज़िद्द और ले लो चार दिन की ज़िन्दगी के पुरे पुरे मज़े.. मेरे पापु को और अपनी मुनिया वो ख़ुशी दे दो.. जिसके लिए दोनों hi बेककर हाँ"

महक अब्ब धीरे धीरे मेरे रंग में रंगने लगी थी.. अंदर से शायद वो खुद भी ये सबब चाहती thi,lekin सैलून से खुद को ऐसे बनाया था महक ne..to उसे बाल्डने में टाइम तो लग्न hi था... धीरे धीरे करके वो एक नार्मल लड़की बनती भी जा रही थी.. मेरा साथ और मुझसे ऐसी मस्ती उसे बहुत मज़ा और सुकून भी देती थी...

लेकिन वो खुद में बंद थी, अभी वो खुद को पूरा नहीं खोल प् रही थी, या अभी वो खुद को ऐसे हैलमे को पूरी तरह से जीने का ढंग नहीं था.. या वो अभी ऐसी hi लाइफ जीना चाहती थी..

सेक्स hi लाइफ नहीं होता, प्यार और मस्ती के ये रंग भी इंसान क लिए ज़रूरी होते हाँ.

महक ने इस बार मुझे खुद से किश करदी..

महक:- तेरा मुन्न्ना तो हर दुम्म hi ख़ुशी ढूंढ़ता रहता है विजय, वो तो अब्ब आदि होता जा रहा है, अब्ब वो किसी की छूट में रहे बिना सुकून से नहीं होने वाला, साला किसी छूट की थोड़ी सी खुशबु क्या सूंग ली, मूड में आने लगता..... और फिर अभी मेरी मुनिया को सुकून में हुए कुछ hi दिन हुए हाँ तो तुम मेरी मुन्निया की फ़िक्र छोड़ कर खुद के मुन्ने की फ़िक्र करो... महक हस्ते हुए मेरे ऊपर से उठने लगी तो मैंने महक को पकड़ कर सूफी पर लिटा दिए और उसके ऊपर आ कर उसे किश करने लगा..

महक ने भी खुद को मुझसे छुड़ाने की या मेरे चुंगुल से निकलने की कोई कोशिश नहीं की.. महक भी अब्ब मज़ा लेना छह रही थी.. किश की आदत हम दोनों को hi पद चुकी थी, महक भी मुझे किश में साथ देने लगी.. महक तपते हुए होंठ मेरे होंटो से टकराये तो मेरे अंदर एक लहर सी दौड़ गई थी.. महक का एक हाथ मेरे सर्र पर औए और महक मेरे सर्र को दबती हुई मेरे होंठ का रस पीने लगी..

मैं एक हाथ चलता हुआ महक के एक दूध पर आ गया.. लेकिन मैंने दबाया नहीं.. महक ने मुझे किश करना छोड़ दिए.. मैंने सर्र उठा क्र महक की आँखों में देखा. महक का चेहरा नार्मल था... कोई ग़ुस्सा, नाराज़गी या बेचैनी वाले भाव नहीं थे.

विजय:- महक अब्ब थोड़ा सा आगे बढ़ जाते हाँ, क्या ख्याल है, अब्ब हमेहा hi तो ऐसे नहीं रहना न, आहार कुछ गलत लगे तो मुझे रोक देना.. और तुम भी खुद को जुगड़े क्र लेना, क अभी तुम ऐसे hi प्यार के मूड में आती हो या नहीं.. बुरा लगे तो आगे का यही स्टॉप कर देंगे..

महक मेरी आँखों में देखती hui.."vijay अब्ब मुझे तुमसे कोई टेंशन नहीं रही, और सच कहा तुमने मुझे भी इस सबब को एन्जॉय करना चाहिए, आखिर कब तक मई इस सब से भागती रहूंगी.. और न hi मई ऐसे हमेशा रहने वाली हों, तो जब हर एक लड़की को ये सबब अपनी लाइफ में करना पड़ता है तो मुझे धीरे धीरे से hi सही, लेकिन आगे तो बढ़ना hi चाहिए.. विजय लिमिट में रहकर तुम कुछ भी कर सकते हो"

फिर वो मस्ती और शरारत से मेरी आँखों में देखते हुए बोली..

महक:- अगर कही कुछ गड़बड़ हुई भी तो गिफा में hi तुमने मुझे परमिट थमा दिए था.. मैं किसी गिल्ट में गए बिना hi खुद की बेचैनी ख़तम कर सकती हों... अगर मेरे अंदर लवर्स वाली फीलिंग नहीं आ रही हाँ तो क्या हुआ, तुम हो तो अब्ब मेरे पति hi ना.. प्यार के लिए न सही खुद की बेचैनी को कम् करने क लिए तो मई कुछ भी तुम्हरे साथ कर सकती हों..

हाय महक के ये बोल महक का ये अंदाज़... मई तो घायल hi हो गया था.. नीचे कारपेट बिछा हुआ था.. मैं वैसे hi महक को थाम कर पलटा और महक को लिए नीचे कारपेट पर आ गिरा.... महक भी ऐसे स्टंट करती रहती थी, वो भी मेरे इस अंदाज़ पर फ़िदा हो गई...

नीचे गिरा तो महक मेरे ऊपर आ गई थी.. महक मेरे लुंड पर सही से होकर बैठ गई और मेरी आँखों में देखने लगी..

महक:- विजय साले तुमने ये क्या किया... पता है तुम्हरा ऐसा करने से मुझे एक अजीब सा मज़ा मिला था.. ऐसा hi तो सब कुछ मुझे पसंद है.. तुम्हारे ऐसा करने से मेरे दिल में एक अलग सी hi लहर उठी थी.. जैसे मनो क मुझे अब्ब सही से मेरे मतलब का मिला हो.. इतने दिनों से मई और तुम साथ में हाँ लेकिन कबि ऐसा नहीं हुआ जैसा इस बार हुआ है.. विजय सच में मज़ा आ गया..

मेरे अंदर भी कही क्लिक हुआ.. मई महक के बारे में कुछ आईडिया लगा चूका था.. महक से मस्ती करना का कौनसा रंग ऐसा हो सकता है, जो महक जल्द से जल्द मेरे पूरी तरह से परीब करदे.. महक एक स्टंट गर्ल थी.. तो महक को अपने लवर्स से भी कुछ ऐसा hi चाहिए था.. मई सबब समझ गया.. और अब्ब से महक मेरे दाम में पूरी तरह से जल्दी hi आने वाली थी..

महक मेरे ऊपर झुकी और मुझे वीलडली किश करने लगी.. इस बार महक के किश करने का अंदाज़ बदला हुआ था.. मैंने महक को खुद में कस के किश करना शुरू कर दिए.. इस बार हम दोनों hi जोश से एक दूसरे के होंटो को पि रहे थे.

महक को किश करते समय मैं महक को अपनी बहन में लेता हुआ घूम गया.. अब्ब मई महक के ऊपर था.. महक ने मेरी आँखों में देखा तो महक की आँखों की चमक और ख़ुशी बेपनाह बढ़ गई थी, महक को मेरा फिरसे ऐसा करना बहुत मज़ा दे गया था.. फिर तो बास काम hi शुरू हो गया..

जब तक हमारी सांस नहीं उखरि हम दोनों hi एक दूसरे के होंटो को वीलडली पीने में लगे, कभी मैं महक को पलट कर उसके ऊपर आ जाता तो कभी महक मुझे पलट मेरे ऊपर आ जाती.. हम दोनों hi ड्राइंग रूम में कारपेट पर लेते हुए एक दूसरे को किश कर रहे थे..

मेरे तो अंदर के रंग शुरू से hi बदला हुए थे. लेकिन मुझे लेके महक क दिल में भी कुछ कुछ नया होने लगा, शायद मेरे ऐसा करने से महक को वो मज़ा मिल रहा था, जिसे महक ढूंढ रही थी, या महक जिसकी कभी कप्लना कर रही थी..

या महक इस सबब के होने से खुद को नयी जाग रही फीलिंग्स की लपेट में आने से रोक नहीं पा रही थी.. महक की गरम और तेज़ सांस मेरी नाक से टकरा रही थी...

मैं भी फुल मूड में आ गया था, महक की hi तरह से मेरी भी साँसे पुरे चरम पर थी.. महक के अंदर के रंग बदले तो वो मुझे बहार से भी शो करवाने लगी, महक के अंदर और बहार का मौसम भी बदलने लगा था..

महक एक नए hi रंग में दिखने लगी थी, महक के अंदर की लड़की पूरी तरह से जागने लगी थी..

सांस उखड़ी तो हम ने किश तोड़ दिए, महक मेरे ऊपर hi थी, वो मेरे ऊपर hi गिर कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी.. मैं महक की पीठ और नंगी कमर सहलाने लगा.

आखिर महक भी कुछ बदल hi गई थी, महक के अंदर नयी फीलिंग्स जाग hi गई थी.. महक के अंदर का सेक्स ड्रग्स एक्टिव हो गया था.. महक का जिस्म भयंकर गरम हो चूका था. महक किश करते समय मेरे लुंड पर अपनी छूट भी रगड़ रही थी.. महक पहली बार मज़े की हालत में आई थी.. वर्ण इस से पहले तो महक मजबूर होकर ऐसे रंग में आया करती थी..

कुछ देर में महक की सांस बहाल हुई तो महक सर्र उठाया, मेरी आँखों में देखा..

महक की आँखों की चमक में लालजी बढ़ गई थी, महक की आँखों में नशा उतर गया था, महक की आँखों में मुझे वो रंग दिखने लगे थे, जो मैंने देखना छह रहा था.. महक में दिल में पूरी तरह से अटल पथल नहीं हुई थी, पर जितनी भी हुई तो वो मुझे महक की आँखों में दिख रही थी, महक मुझे बड़ी hi चाहत से, बड़े hi नशीले अंदाज़ से देख रही थी.. महक के बूब्स पर पसीने की बूँदें चमकाने लगी थी, मेरी उनपर नज़र नहीं पड़ी thi,lekin मुझे उसका एहसास हो रहा था.. महक की आँखों में देख कर लग रहा था क वो बेचैन तो है, अंदर एक सेक्स ड्रग के एक्टिव हो जाने की वजा से.. लेकिन वो अब्ब खुद के काबू में नहीं थी..

यही तो वो कमाल होता है. जब्ब दिल के अंदर की फीलिंग्स जाग उठती हाँ, तो खुद से लड़ने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है.. महक भी अब्ब बेचैन तो थी, पर खुद के कण्ट्रोल में थी, अब्ब वो बेकाबू होकर मुझपर टूट पड़ने वाली नहीं थी..

महक मुझसे टूटी भी थी, और अब्ब से वो मेरे लिए हमेशा hi ऐसी रेंगने वाली थी, लेकिन अब्ब महक वो सबब मेरे साथ प्यार से करने वाली थी.. छूट की आग का मसला भी था, पारर प्यार जाग उठा तो अब्ब महक उस प्यार वाले अंदाज़ को सामने रखते हुए मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया करेगी, मुझसे अपना हक़ वसूल किया करेगी..

मैंने महक को फिरसे पलट दिए.. महक के होंटो पर एक हल्का सा किश किया, महक खुश हो गई, अब्ब महक के अंदर भी लहरें दौड़ रही थी, तो मेरा एक एक किश, हर बार महक को मेरा टच होना, महक से मेरा प्यार करना महक को ख़ुशी और बेइंतेहा मज़ा देने वाला था.. hmmmmmmmmmm महक के मोहन से आखिर कार पहली सिसकी निकल hi गई..

मैं फिर महक के गालों पर चमक रहे पसीने को चाटने लगा, महक के हाथ मेरी पीठ कर आये, महक मेरी पथ को सहलाते हुए खुद को मेरे हवाले कर गई..

महक के गालों पर चमक रहे पसीने को चाटने के बाद मैंने महक के गालों पर हलके हलके किश करना शुरू कर दिए... महक कभी मुझे देखती तो कभी अपनी ऑंखें बंद कर लेती.. महक के गालों को चूमने चाटने के बाद मैंने महक की आँखों को भी चूमना शुरू क्र दिए.. महक की सांस फिरसे तेज़ हो गई. महक अब्ब पुरे मज़े में थी. महक के बदन की महक में मुझे भी सुरूर की दुन्या में उतार दिया था.. अब्ब मई सही से महक से प्यार कर रहा था, क्यूंकि महक की तरफ से मुझे लिमिट में रहते हुए पूरी छूट मिल गई थी.. वैसे भी अब्ब महक के अंदर का मौसम बदल गया था. तो महक मुझे कुछ भी करने से नहीं रोकने वाली थी...

लेकिन महक जैसी शराब को मई धीरे धीरे करके पीने वाला था, महक का महकते, खुशबु बखेरते बदन को मई धीरे धीरे करके प्यार करना चाहता था.

एक दुम्म से पूरी शराब की बोतल पि कर कही मई लुढ़क hi न जाऊं.. ऐसे hi नशे की मालिक थी महक... ऐसा hi नशा था महक के बदन का, महक के प्यार का..

महक ने गले पर को चाट चाट क्र साफ़ करते हुए मई महक के क्लीवेज तक आया.

महक की आँखों में देखा तो महक मुझे hi देख रही थी.. महक भी समझ गई क अब्ब मई उसके क्लीवेज पर आने वाला हों, महक ने मुझे आँखों की ज़ुबान से कह दिए,, विजय मई तुम्हारी पत्नी हों तुम मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो, और फिर मुझे भी तो उस प्यार को महसूस करना है, जो मैंने अभी अभी खुद में महसूस किया है.. मैंने की परमिशन मिली तो मैं महक के क्लीवेज पर जकूकता चला गया.. मेरी जीब जैसे hi महक के बूब्स से ऊपर दिल वाली साइड पर टच हुई तो ...

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiiiiiiii hmmmmmmmmmmmmmmm vijayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy

महक ने मुझे अपना रंग दिखा न शुरू कर दिए.. महक जैसे शेरनी पहले दरिंडगी से भरपूर थी, फिर सेक्स ड्रग्स के नशे में खोई, और अब्ब महक प्यार के नशे में खोते हुए सिसकी लेने लगी........... महक ने भी नए रंग में रंगते हुए आहें भरनी शुरू कर डीएन..

मेरी जीब महक के बूब्स पर लगे पसीने को चाटने लगी, पसीने का भी अपना एक टास्ते था, एक शेरनी का ये पसीना था, जो प्यार और मज़े से कारन आज पहली बार निकला था, टास्ते ज़बरदस्त तो होना hi था.. मेरी जीब बड़े प्यार से, बड़े चाओ से महक को सूंदर बूब्स को चाटने चूमने लगी, एक बूब्स के बाद मई दूसरे बूब्स पर गया.. दोनों को अच्छे से साफ़ करने क बाद मैंने महक को देखा तो वो ऑंखें बंद किये आहें भर रही थी, महक के बदन में सरसराहट बढ़ गई थी, महक का जिस्म कांप रहा था, कुछ नशे से कुछ मज़े से..

मेरे सुपर्ष ने, और महक के अंदर जाग चुकी नयी फीलिंग्स ने महक को कांपने पर मजबूर कर दिए था..

महक को देखने के बाद मैंने महक की बिनियाँ को पकड़ा और महक के बूब्स से नीचे सरका दिए.. नीचे एक शार्ट ब्रा भी थी, मैंने उसे भी महक की आँखों में देखते हुए उतार दिए.. महक ने मुझे देखा ज़रूर था, पर वो मुझे रोक नहीं रही थी.. महक की आँखों में कोई शर्म नहीं थी, भले hi ये सबब उसके साथ पहली बार हो रहा था, लेकिन जैसी लाइफ महक ने जी थी, महक भी तो एक बेशरम लड़की थी.

महक एक शेरनी भी थी, तो एक शेरनी एक शेर से क्यों शर्माएगी... भले hi एक कुंवारी लड़की थी............. महक के बूब्स नंगे हुए तो बूब्स की चमक मेरी आँखों से टकराई और मुझे मदहोश कर गई.. महक के पहले से hi सख्त बूब्स अब्ब पूरी तरह से फूले हुए थे, महक के बूब्स की उठान देख कर मई मोहित हो गया..... सच कहूंगा, महक के जैसे बूब्स माँ या पूजा दीदी के भी नहीं थे.. मेरी प्रिय के बूब्स बहुत hi मस्त थे, लेकिन महक के जैसे बूब्स किसी एक नहीं थे, खूबसूरती में सबब के hi बेमिसाल थे, लेकिन महक एक स्ट्रांग लड़की थी, उसके बदन एक एक अंग स्ट्रांग था, तो उसके बूसब्र भी फिर वैसे hi हुए.. महक के बूब्स के जैसी सख्ती और बनावट किसी के बूब्स में नहीं थी...

मेरे अंदर तक करंट की एक लेहेर दौड़ गई और मुझसे अब्ब रहा है गया, मई झुका और अपने होंठ महक के आग बरसते हुए दिल वाले दूध पर रख दिए..

hmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

महक को एक झटका लगा, महक के दूध और गैंग ऊपर उठ गई.. महक का मस्ती और मज़े से बुरा हाल होने लगा.. मेरी हालत भी कुछ हट के नहीं तह.. महक के बूब्स पर होंठ रखते hi मुझे अपने होंटो पर जलन सी महसूस हुई थी, इतने गरम थे महक के बूब्स.......... और मज़े की तो बात hi न करें..

मेरा लुंड भी झटके पर झटके खाने लगा.. कुछ महक के दूध पर होंठ रखने के बाद, महक के पसीने की भेणी भीनी स्मेल दे रहे दूध को सूँघता रहा, फिर मेरे मोहन से मेरी जीब निकली और महक के दूध पर चलने लगी, मैं जीब को महक के दूध के पुरे एरिया पर और निप्पल के चरों और घूमने लगा, मज़े से मेरा बुरा हाल था.. महक की हालत तो बयां करने लायक hi नहीं थी, महक बार बार झटके पर झटके खा रही थी.. कुछ देर महक को तड़पने क बाद मैं महक के दूसरे दूध पर गया, उसकी हालत भी वैसे hi की.. फिर राइट से महक के लेफ्ट दूध को थम कर दबाने लगा, और महक के राइट निप्पल को अपने मोहन में लेकर चूमने लगा.. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विजय ये क्या करदिया तुमने मुझे.. अह्ह्ह्ह विजय ओह्ह्ह्ह

मई मरजाएंगी विजय hmmmmmmmmmmmmmmm महक अपने हाथ को मेरे सर्र पर लाइ और अपने दूध पर दबाने लगी.... मई महक के निप्पल को चूसता हुआ महक के दुसरे दूध को दबाने लगा..

मेरी उनलगियां महक के सख्त दूध में धंसने की नाकाम कोशिश कर रही थी. महक के दूध इतने hi सख्त थे, पारर मज़ा हम दोनों को hi खूब मिल रहा था..

महक की सिसकियाँ शर्म पर थी. और मेरी जीब और मेरा हाथ खूब महक के दूध पर और निप्पल पर चल रहे थे....

महक तो पहले से hi किसी मर्द के सुपर्ष से महरूम लड़की थी, आज प्यार और सुपर्ष मिला तो महक से सहन करना मुश्किल हो रहा था, महक मज़े की इन्तहा तक जा पोहंची थी.. मेरे हाथ और गरम जेब की मेहनत महक सहन न कर पाई और मेरे नीचे दबी हुई झटके खाते हुए झड़ने लगी...

महक का ये पहला ऐसा चांस था, जब वो अपनी मर्ज़ी से, अपनी छह से किसी के साथ रोमांस करते हुए चार्म पर पोहंची थी...... महक झड़ने के बाद तेज़ शासन लेने लगी.. मैं महक के ऊपर से हैट गया और महक की साइड में करवट के बॉल लेट क्र महक को देखने लगा, महक की आँखों बंद थी.. और महक खुद को रिलैक्स करने में लगी हुई थी............

कुछ देर बाद महक रिलैक्स हुई और मुझे देखने लगी... महक की आँखों में प्यार और इन्तहा का सुकून था........................ महक मुझे निहारती हुई मेरे ऊपर आ गई.. और मुझे किश कर दिए....

महक:- विजय आज मेरे अंदर बोहत कुछ बलदा है, आज मैंने अपने दिल में वो महसूस किया है, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था, आज पहली बार मेरे दिल की धड़कन मेरे काबू से बहार हुई थी, आज दिल के धड़कने का अंदाज़ भी बदला हुआ था, आज मुझे लाइफ में पहली बार एक अजीब लज़्ज़त और अजीब सा सुकून मिला है, शायद इसे hi प्यार कहते हाँ विजय.. ी थिंक क मई उस स्टेज पर जा पोहंची हों, जिस स्टेज पर खुद को पाने का मुझे कभी अंदाज़ा नहीं था, सोचा न था क एक दिन इस शेरनी क दिल की भी धड़कने बदल जाएँगी.. विजय तुमने ये भी कर दिखाया..

आज सच में मई बहुत खुश हों, आज मुझे एक लड़की होने का पूरा पूरा एहसास हुआ है, वर्ण इससे पहले मई आधी मर्द और आधी लड़की थी.. थैंक जो तुमने मुझे पूरी लड़की बना दिए............... महक ने मुझे एक और किश कर दिए... मैंने भी महक को पलट दिए और महक के ऊपर आ कर उसे एक किश कर दिए..

विजय:- इस सबब का आईडिया भी तो मुझे तुमने hi दिए था...

mehak:-(hasste हुए) और तुमने उस आईडिया पर काम भी बहुत अच्छे से किया है.. वैसे तुम ये सबब करते बहुत कमल से हो, तुम्हारी पटरियों ने, तुम्हारी बहनो ने और बाकी सबब ने तुम्हे अच्छे से त्रिनेड कर दिए है..

विजय:- हाँ वो तो है, अब्ब जो बाकी की ट्रैंनिंग रहती है, वो तुम मुझे दे देना.

महक:- दुन्या का हर काम मुझे आता है विजय.. पर ये एक काम मुझे नहीं अत, अब्ब तो तुम hi मुझे ये काम सिखाओगे.. मई सीखने के बाद तुम्हे ट्रेंनेड कर दूंगी..

विजय:- तुम सच में hi मुझसे सबब कर लेना चाहती हो..... मई कुछ हैरान हुआ

महक:- इसमें हैरान वाली बात कौनसी है.. अब्ब तो मई अंदर से बदल गई हों, इन्तहा की आग मेरे अंदर है.. फिर तुम मेरी मांग भर कर मुझे अपनी पत्नी बना चुके हो.

तुम्हारा मुझपर और मेरा तुमपर पूरा पूरा हक़ है.. सेक्स के लिए तो मई बेचैन रहती hi हों, तो फिर पूरा मज़ा लेने से मई क्यों पीने हटने ले... मुझे भी तो अपनी लाइफ के एक एक पल को एन्जॉय करना है, और आज नयी जाग चुकी फीलिंग्स का भी भरपूर मज़ा लेना है..

विजय:- जो फिर आगे का शुरू करूँ....... मई शरारत से बोलै..

विजय ने मुझे धक्का दिए और

महक:- इतनी जल्दी क्या है.... गरम गरम खाना खाने से मोहन जल जाता है, थोड़ा थोड़ा करके पूरा प्यार भी वसूल कर लुंगी तुमसे........ अभी आज hi तो इस सबब का मज़ा आने लगा है.. तो, मैं तो इस सब को भरपूर एन्जॉय करुँगी..

महक मज़े लेते हुए बोली, और मई महक को इस नए रूप में देख के निहारने लगा, लड़की और एक रंग में हर एक रूप में अलग hi दिखती है... उसे हर रंग, हर रूम में देख के अच्छा लगता है, अगर वो दिल के करीब हो तो एक सुकून मिलता है....

 


अपडेट :::135


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पुणे में एक नाईट क्लब महक की बेहेन के नाम पर था, जिसका नाम था इशिता..

मई और महक उस क्लब में एक गोल टेबल की अतराफ़ में राखी चेयर्स पर बैठे हुए थे..

महक मेरी सेक्रेटरी बन्न कर आई थी, ये हम दोनों का मुश्तर्का प्लान था.. महक को मेरी सेक्रेटरी बनने पर कोई ऐतराज़ नहीं था..

बल्कि वो तो इस सबब का मज़ा ले रही थी, ऐसी लाइफ कब्ब उसने जी थी, किसी से प्यार होना और फिर किसी के अंडर रह कर उसके आर्डर को फॉलो करना, महक को ये सबब करके बहुत मज़ा आ रहा था..

दिल्ली से हम 30 के करीब हट्टे काटते गार्ड्स विथ लेटेस्ट गन्स लेकर आये थे... सब गार्ड्स एक जैसे कपड़ो में थे, वर्दी टाइप नहीं थे, पर थे वो बहुत hi एक्सपेंसिव किसम के थे.. गार्ड्स की पर्सनालिटी उनके फेस एक्सप्रेशन, उनके हाथों में लेटेस्ट और भयंकर मार करने वाले हथियार देखने से ताल्लुक़ रखते थे..

हमारे गार्ड्स को देख के हमारी पर्सनालिटी का अंदाज़ा दूर से hi लगाया जा सकता था. दूर से hi देख कर लोग साइड में खड़े हो जाते और मुझे और महक को देखने लगते. गार्ड्स तो सभी के पास होते हाँ, लेकिन ऐसे गार्ड्स कम् hi किसी क पास थे.

अच्छे और हट्टे काटते, लेटेस्ट एक्सपेंसिव ड्रेस और लेटेस्ट भयंकर हथियार.....

हमारे आने से पहले hi हमें मशहूर कर दिए गया था.. हम यहाँ पर कुछ दिन रहने क लिए आये थे.. यहाँ कोई कारोबार देखने का भी धंधोता पीटा गया था.. हमें कुछ ऐसे पुणे सिटी में इंट्रूडस करवाया था जूली ने क हमारे आने से पहले hi लोग हमें देखने और हमसे मिलने क लिए बेचैन रहने लगे थे..

महक की बटोर मेरी सेक्रेटरी बहुत पब्लिसिटी की गई थी.. महक hi की वजा से मई तरक्की कर पाया हों, ये बात सबमे पहला दी गई थी..

महक की पर्सनालिटी देख कर सब अच्छे से जान भी गए थे...

हमारे 3 गार्ड्स नाईट क्लब के अंदर गन्स लिए अलग अलग जगा खड़े हुए थे, उनकी नज़र क्लब में मौजूद हर एक इंसान पर थी.. महक की सिस्टर इशिता हर टाइम नहीं होती थी, दिन में किसी भी टाइम वो चक्कर लगा लिया करती थी, लेकिन रात के समय डेली hi क्लब में आया करती थी..

शाम होने के 1 घंटे बाद हम यहाँ क्लब में दाखिल हुए थे.. हमारे यहाँ पर पोहचते hi हर तरफ शोर सा मच गया था.. सब hi हमें देख कर शॉकेड हो गए थे, कोई भी हमें नहीं जानता था, तो जिन लड़कियों और औरतों को पैसे दिए गए थे, वो दूसरों को हमारे बारे में बताने लगीं.. सब हमें हैरत और शोक से देखने लगे...

मई और महक एक दूसरे से बातों के दौरान सब को hi तिरछी नज़रों से देख रहे थे.

ये क्लब दूसरे आम क्लब्स से हट कर था.. यहाँ सिर्फ कपल्स hi नहीं आते थे, यहाँ पर हर किसम के लोग आते थे...

मतलब, ये क्लब सिर्फ कपल्स को hi इंटरटेन करने क लिए नहीं था.. यहाँ सिटी के रिष पर्सन बिगड़ी हुई हर आगे की लकड़ियों और औरतें भी आती थी.. सिटी के बेस्ट बुसिनेस्स्में यहाँ आ कर अपनी पसंद शराब से दिल बहलाते, यहाँ पर बनाये हुए अपने दोस्तों से बात चीत करते, बिज़नेस के बारे में भी अक्सर यही लोकल मीटिंग्स भी होती रहती थी..

जैसे किसी चाय वाले ढाबे पर बैठ कर लोग इधर उधर की बातों में लगे रहते हाँ, यहाँ पर भी कुछ ऐसा hi था.... बुसिनेस्स्में खुद के बिज़नेस की बातें करते, किसका बिज़नेस कैसे चल रहा है, वो सबब डिसकस किया करते थे..

कपल्स के लिए डांस का भी एक साइड में इंतेज़ाम था, बाकी आगे के हिसाब से भी सब सेट था, जिसका मैं होता वो उठ कर डांस करने लगता था..

कई लड़कियां और बड़ी आगे की औरतें यहाँ पर भड़कते हुए ड्रेस पहन कर अमीर लोगों को अपने झांसे में लाने की कोशिशें भी करते रहती थी..

ये क्लब हर लिहाज़ से एक मुनफ़रद क्लब था.. ये सबब इशिता के खुद की म्हणत से खड़ा किया हुआ क्लब था, सपोर्ट दन्न की थी, लेकिन म्हणत इशिता ने की थी..

इशिता के बारे में अगर बार करें तो वो महक से भी बढ़कर सरफिरी लड़की थी..

इन्तहा की घमंडी, हर किसी को जुटे की नोक पर रखने वाली.. अमीर लोगों से वो अच्छे से बात करती थी, काम हैसियत लोगों को वो मोहन नहीं लगाती थी.. ऐटिटूड और घमंड में ये अपने घर में सबसे आगे थी....

अपने क्लब को चलने क लिए वो अपने कस्टमर का अच्छे से ख्याल भी रखती थी..

कुछ देर गुज़री तो हमें बैठे हुए तो कुछ बहुत से लोग हमारी तरफ आने लगे.. जिनमे लड़के, लड़कियां, बड़ी आगे के बुसिनेस्स्में और औरतें शामिल थी..

सब हमारे पास पोहंचे तो एक 50 साला थोड़ा सा मोटा आदमी किसी के कुछ बोलने से पहले hi हमसे मुखतिब हो गया..

वो:- hello यंग मन, मेरा नाम दिलीप आयरन मन है, वो हस्ते हुए बोलै... उसके बोलने का अंदाज़ बड़े मज़े वाला था, मई और महक भी हस्स दिए...

दिलीप:- यही.. यही.. यही हस्सी मुझे दूसरे के चेहरों पर देखने का बड़ा शोक है.. नाम तो मेरा दिलीप शर्मा है, पुरे पुणे सिटी में और साथ के दो शहरों में मेरा लोहे का बिज़नेस पहला हुआ है, एक दिन एक दोस्त ने मुझे मज़ाक में hi ये नाम दे दिए तो मैंने भी खुद को फिर आयरन मन hi कहलवाना शुरू कर दिए.. वैसे इस नाम का भी एक अलग hi मज़ा है.......... बड़ा दिलचस्प आदमी था.. मैं महक और बाकी सबब भी उसकी बातों पर हस्सन लगे....

महक:- नीस तो मीट यू सर..............

दिलीप:- no..no.... यंग मन मुझसे हिंदी में बात करो, मुझे ज़यादा इंग्लिश इंग्लिश नहीं आती और न hi मज़ा.. हम हिंदुस्तानी है तो हिंदी में hi बात करेंगे........ एक हाथ में शराब का गिलास थामे, थोड़ा सा डोलते हुए वो बड़े स्टाइल से बात करने का आदि था.

उसकी बात के जवाब में महक बोली.

महक:- अंकल आपने भी तो सुरिया सर को यंग कह कर आधी इंग्लिश में बात करि है.....

दिलीप:- ीनंण.. अच्छाआआआ, मई ऐसा बोलै क्या. (फिर वो अपने हाथ में पकड़ी शराब को घूरने लगा) साली ये भी मुझे इंग्लिश सीखने में लगी हुई है, आज से शराब बंद.. लेकिन पहले मई इसे ख़तम karlun.........(galas में मौजूद बची हुई शराब एक hi घूँट में जातक गया) हाँ अब्ब से शराब बंद........... इस बार फिरसे सबब हस्सन लगे... इतने मज़े के आदमी की बातो पर हम भी हिस्से बिना नहीं रह पा रहे थे..

विजय:- अंकल आप खड़े क्यों हाँ, बैठ जाइये..

दिलीप:- नहीं.. तुम दोनों उठो और हमारे साथ हमति कंपनी एन्जॉय करो.. हम बूढ़े हाँ तो क्या हुआ, अंदर से तो हम जवान hi है ना, और फिर ऐसे क्लब में आ कर कौन बूढा रह सकता है.... मरस मल्होत्रा को hi देख लो. कैसे आग बरसते हुए कपडे पहन कर आई है. क्या क्या जलवे नहीं दिखा रही हाँ वो मुझे, और सबको.. मरस मल्होत्रा को ऐसे देख के कैसे कोई बूढा हो सकता है..

इसलिए मई भी जवान हों....... मैं और महक हस्ते हुए उठ खड़े हुए.. कुछ फासले पर सूफी और चेयर्स राखी हुई थी. सबसे पहले मुझे और महक को बड़ी इज़्ज़त से बिठाया गया.. इस में अगर कुछ मतलब के लिए भी क्लब में आते थे, पर ेर्स्पेक्ट वो भी दिलसे कर रहे थे.. बात सब पैसे और पर्सनालिटी की थी..

दिलीप सबका hi इंट्रो करवाने लगा, कौन किस फॅमिली से है, कौन किस हैसियत का है, कौन किस नेचर की है.. कौनसी लड़की या औरत यहाँ किश मक़सद से आती है. दिलीप की बात का कोई भी बुरा नहीं मन रहा था, सबब दिलीप की बातों हंसी से लूट पूत हो रहे थे... दिलीप का अंदाज़ था hi बहुत निराला..

साडी लड़कियां मुझे दिल लुभाने वाली नज़रों से देख रही थी, बड़ी उम्र की औरतें अपने कपडे ठीक करने क बहाने मुझे अपना फिगर दिखा रही थी.. उनकी नज़रों में दावत गुना थी.. अंदर से खोखली हो चुकी मुझसे छोड़ने की फ़िराक में थी, और मुझसे पैसे ऐंठने के चक्कर में .........

महक भी उन सबब को देख कर अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थी.. लेकिन वो यहाँ मेरी सेक्रेटरी बन कर आई थी तो वो यहाँ कुछ हट क नहीं बोल सकती थी, और फिर उसे कुछ बोलने की ज़रूरत भी क्या थी...

वो सब hi तो जानती थी मेरे बारे में.. मैं तो एक ऐसा इंसान था, जिसके लिए छूटों की लाइन लगी हुई थी, यहाँ कोई आ कर सबके सामने hi अपनी छूट खोल कर मेरे लुंड को ले ले तो महक को कोई परेशानी नहीं होने वाली thi,wo तो उल्टा इस सबब के मज़े लेती...

सबसे इंट्रो हुआ, सबब से रिलेशन भी बने, अमीर लड़कियों घायल अदाओं से मुझसे बातें करती रही.. ठाकरी लड़कियों को छोड़ कर डेन्ट लड़कियां भी मुझे लाइन मार रही theee.aur बुसिनेसमान लड़के महक को ताड़ रहे थे... महक जैसी सेक्रेरटय भी तो किसी के पास नहीं थी......... महक जैसा शरीर किसी का भला कैसे हो सकता था..

2 घंटे वहां अच्छे गुज़रे, इशिता आई थी, सबब से hello हाय हुए, वो महक को नहीं पहचान सकीय थी.. हम दोनों hi बदले हुए चेहरे के साथ थे..

इशिता ने मुझे जंचती नज़रों से देखा था, मेरी पर्सनालिटी से इम्प्रेस तो हुई थी, लेकिन वो अपने hi घमंड में थी, मुझे या यहाँ पर मौजूद किसी और को ज़यादा भाव नहीं दिया था.. नॉर्मल सी बात करके चली गई थी..'

मैं और महक सबके से मिलकर क्लब से निकल लिए.........

जाने से पहले मैंने आयरन मन को कुछ गिफ्ट भी दिए थे.. वही मौजूद 2 बड़ी आगे की औरतों को और दो लड़कियों को भी गिफ्ट दिए थे.. गिफ्ट बहुत ज़यादा एक्सपेंसिव थे,

सब बहुत खुश हुए थे. इशिता कड़ी हुई इशिता ये सब देख रही थी.. मई और महक उसे तिरछी नज़रों से देख रहे थे..

क्लब से निकले तो हम दोनों hi एक रेस्टोरेंट में जा पोहंचे.. वही से डिनर करके हम वापिस कोठी जा पोहंचे...

ऐसे hi 3 दिन हम रोज़ क्लब जाने लगे.. रोज़ hi हम किसी न किसी को कोई गिफ्ट दे दिए करते थे.. सब हम से घुल मिल गए थे.. बहुत अच्छा समय बीत रहा था..

बातों बातों में hi दन्न के घर वाली दूसरी लड़कियों और औरतों का भी पता किया था.

तो पता चला था क वो किसी शादी में शिरकत क लिए मुंबई गई हुई हाँ.. जैसी वो सबब फैशनेबुल थी, कही भी जाएँ तो पूरी मस्ती कर के आएंगी...

इशिता कुछ अलग टाइप की थी.. शायद क्लब की वजा से वो नहीं जा पाई थी.. या कोई और वजा होगी.. मई नहीं जानता था..

इन 3 दिनों में इशिता के चेहरे के भाव भी कुछ बदल रहे थे.. लेकिन वो अपने घमंड से बहार नहीं निकल सकती थी.. इसलिए वो साइड में hi रहती थी..

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दन्न के दिल्ली जाने की बात नागराज या घर में कोई और नहीं जानता था, दन्न अक्सर hi घर से ग़ायब रहता था.

नागराज या दन्न के दूसरे भाई दन्न के बारे में नहीं जानते थे.. वो यहाँ का और आस पास का धंदा अच्छे से संभाले हुए थे.. दन्न दिल्ली के लिए प्लान बना रहा है, वहां भी धंदा करने का सोच रहा है, कोई नहीं जानता था..

लेकिन दिल्ली में हुए काण्ड के बाद सब hi जान गए थे.. उन्हें इन्फो मिली थी क दन्न पहाड़ों में मौजूद एक बेस पर फंसा हुआ है.. और उनके बच निकलने क चांस बहुत hi कम् हाँ.......... नागराज और दन्न के भाई ज़यादा चिंता में नहीं ए थे.. वो जानते थे क दन्न कभी किसी के शिकंजे में नहीं आ सकता..

लेकिन उनकी गलत फेहमी जल्द hi दूर भी हो गई.. मीडिया ने सब कुछ hi शो करके रख दिए था.. दन्न और उसके दोस्त पकडे गए हाँ. ये वो नै जान सके.. लेकिन वहां अपने आदमियों की लाशें मौजूद पा कर वो बोखला गए और दन्न से राब्ता करने की कोशिहों में लग गए.. लेकिन दन्न से या उसके दोस्तों से कोई राब्ता नहीं हुआ..

वो दिन गुज़रा फिर हर गुज़रे दिन के साथ hi उनकी टेंशन भी बढ़ने लगी थी.. वो सबब दन्न क बिना कुछ भी नहीं थे.. जो भी पावर थी.. वो भी दन्न की वजा से थी..

दन्न कही नहीं मिल प् रहा था.. नागराज और दन्न के भाई बहुत ज़यादा चिंता में आ गए थे... जैसे उनके काम थे, जैसे उन सबब की दुश्मनी थी, दन्न के बिना कैसे वो इतने लोगों की दुश्मनी झेल पाएंगे..

नागराज कुछ दिन तो हवेली में hi बंद रहा.. उसके दूसरे बेटे भी हवेली में hi रहे. और दन्न को ढूंढ़ते रहे.. लेकिन वो कहीं भी से दन्न को नहीं पा सके.. दन्न का ऐसा कौनसा दुश्मन सो सकता है, जिसके कब्ज़े में दन्न होगा.. वो नहीं जान पाए थे..

दन्न की चिंता में कई दिन गुज़र गए, तो वो सबब फिरसे नार्मल लाइफ की तरफ आने लगे, दन्न की गैर मौजूगदी में धंदे को सँभालने लगे........ अभी उनके पास बहुत बड़ी फ़ौज थी. वो इतने भी कमज़ोर नहीं थे. क कोई उन सबब को आसानी से मार सके हाँ दन्न की बात अलग थी, दन्न की पावर और दहशत ज़यादा थी..

बास अगर वो सबब दर्रे हुए थे तो मनजोत सिंह की फॅमिली से.. वो भी श्वेता को ले के.. कहीं वो श्वेता के बारे में सबब जान hi न जाएँ.. क्यूंकि अब्ब श्वेता कोठे पर नहीं थी, अगर श्वेता अपने घर राब्ता करके सबब को बता दे क वो किस दुश्मनी के बल बोते पर किया गया था.. तो मनजोत सिंह परिवार सबब को पल भर hi काट डालेगा.. एंटी दहशत थी मनजोत सिंह और उसके बेटों की.





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मैंने और महक एक प्लान बनाया, वो एक शॉर्टकट था, नागराज और मनजोत सिंह को सबज़ सीखने का, और ऐसा करने में मज़ा भी बहुत आने वाला था.. दूसरे hi दिन मैंने दिलीप को एक पार्टी देने क लिए मन लिया था.. पार्टी का सारा खर्चा मैं अफ़्फोर्ड करने वाला था, तो दिलीप को क्यों कोई ऐतराज़ होता.. क्लब के दूसरे साथी भी खुश हो गए थे...

जब मैंने दिलीप से अकेले में कहा क उस पार्टी में मनजोत सिंह परिवार के सरे मर्द और नागराज के घर के सभी मम्मर्स भी पार्टी में होने चाहिए तो

दिलीप:- सुरिया बीटा नागराज और मनजोत सिंह कभी किसी एक पार्टी में एक साथ शामिल नहीं हुआ हाँ, आज तक दोनों को कही भी एक साथ नहीं देखा है.. शायद hi कभी कोई चांस बना हो क दोनों एक साथ एक hi पार्टी में मौजूद हों, वर्ण लोग दोनों को एक साथ नहीं बुलाते... सब गहि तो जानते हाँ क दोनों परिवार एक दूसरे के दुश्मन हाँ, और कही कोई हंगामा न मच जाये, बास इसी के चलते दोनों एक साथ नहीं देखे जाते..

मैंने दिलीप को फिर भी मन लिया था... दिलीप को भी ज़यादा टेंशन नहीं थी.. कबिह दोनों की लड़ाई हुई भी तो नहीं थी, बस एक hi तो घटना हुई थी, फिर उसके बाद सब शांत हो गया था..

उस पार्टी में नागराज और मनजोत सिंह परिवार दोनों hi शामिल होने वाले थे..

हंगामी बुनियादों पर पार्टी अर्रंगे की गई. नागराज और उसका परिवार, मनजोत सिंह और उसके बेटे उस पार्टी में शामिल हुए..

सिटी के सभी बड़े बड़े बुसिनेस्स्में को पार्टी में बुलाया गया था.. नागराज और मनजोत सिंह कैसे न आ पाते... वो भी सबब पार्टी में शामिल होने क लिए चले आये..

सब के पोहंच जाने क बाद मेरी और महक की एंट्री होनी थी.. हम भी धांसू अंदाज़ में पार्टी में शामिल होने वाले थे. पार्टी में मैं दिलीप सिंह का दोस्त और महक मेरी सेक्रेटरी बन्न कर जाने वाले थे..

पार्टी एक 5 स्टार होटल में राखी गई थी.. जैसे hi सबब पोहंच गए तो फिर हमारी एंट्री हुई......... दिलीप सिंह हमें देखते hi भाग कर हमारे पास आया, मेरे गले मिलकर ख़ुशी का इज़हार करने लगा..

मैं भी अच्छे से दिलीप सिंह के गले मिला.. दिलीप मेरा हाथ थाम कर मुझे स्टेज पर ले गया. और माइक थाम कर मेरे बारे में लम्बी लम्बी छोड़े लगा.. जैसी लम्बी लम्बी मैंने दिलीप और क्लब में मौजूद सबसे सामने झड़ी थी, दिलीप भी सबब वैसे hi बता रहा था.. हाल में क्लब वाले साथी भी थे.. इशिता भी अपनी फॅमिली के साथ मौजूद थी, दन्न के घर की जो लड़कियां शादी क लिए गई हुई थी, वो भी आज पार्टी में मौजूद थी... नागराज और उसके बेटे कैसे न आते.. पार्टी थी hi ऐसी, हंगामी बुनियादों पर व्विप कार्ड्स छपवाए गए थे, और बहुत कुछ उसमे लिखा हुआ था.. दिलीप ने भी कोई कसार नहीं छोड़ी थी..

दिलीप मेरा इंट्रो दे रहा था सबको, लम्बी लम्बी मेरे बारे में छोड़ रहा था.. और

मैं हाल में मौजूद सबको देख रहा था.. यहाँ आते hi मनजोत सिंह और नागज परिवार की पूरी डिटेल हमें मिल गई थी.. सबकी पिक्स भी मैं और महक देख चुके थे.. महक भी मेरे साथ स्टेज पर थी.......... सबकी नज़रें हम पर hi ठहरी हुई थीई..

हमारे यहाँ आते hi हामरे अंदाज़ और हमारे गार्ड्स को देख कर सब hi मोहित हो गए थे.. सबके सब हमें हैरत और शोक से देख रहे थे.. नागराज की आँखों में हैरत थी तो मनजोत सिंह और उसके बेटों की आँखों में घमंड..

मेरे बारे में अच्छे से जान लेने क बाद सबने hi मुझे बहुत ख़ुशी का इज़हार किया.. मनजोत सिंह और उसके बेटे भी अब्ब कुछ नार्मल दिख रहे थे. वो खुद को बहुत बड़ी टॉप समझ रहे थे.. वो सब थे भी वैसे hi जैसे वो खुद को समझ रहे थे.. पावर तो थी उनके पास..

कुछ देर बाद मैं और महक स्टेज से नीचे उतरे और सब से मिलने लगे. सब hi मुझसे अच्छे से मिल रहे थे. एक और फेमस पर्सनालिटी वाला लड़का उनके शहर में आया था तो वो कैसे पीछे रहते, लड़के लकड़ियां खुश अख़लाक़ी से मुझसे और महक से मिले, दिलीप सबके बारे में हमें बता रहा था, दिलीप भी पार्टीज का रॉय था, सबके बारे में जानता था, अब्ब हमें भी सबके बारे में बता रहा था..

मेरा और महक का धयान नागराज और मनजोत सिंह पर ज़यादा था... वो दोनों भी मुझे बार बार देख रहे थे.. अभी मई उनके पास नहीं गया था. कई लोगों से मिलने के बाद मई महक और दिलीप के साथ नागराज की पास जा पोहंचा.....

मैं मनजोत सिंह और उसके बेटो को छोड़ कर पहले नागराज की तरफ बढ़ गया... नागराज खुश हो गया और मनजोत सिंह और उसके बेटो की आँखों में मुझे बेइज़्ज़ती महसूस हुई.. वो चाहते थे क पहले मई उनके पास आऊं.. हम उनके करीब थे और नागराज हमसे दूर.. इसलिए भी वो इंसल्ट फील कर गए थे..

कैसे हो बीटा.. सबसे मिलने के बाद नागराज ने मुझसे कहा.. बड़ा नाम बना लिया है तुमने तो.. आने से पहले hi तुम्हारा नाम पुणे की हाई सोसाइटी में गूंजने लगा था.

तुम्हे देख कर अच्छा भी लगा.... नागराज के पास उसके दो बेटे भी थे, वो भी मुझसे अच्छे से मिले थे..

विजय:- मुझे भी अच्छा लगा.. कौन नहीं जानता आपको, बहुत बड़ी शख्सियत हाँ आप पुणे सिटी की.. और फिर आपका एक बीटा भी तो पुरे महाराष्ट का बाप है.. हमारी इतनी हैसियत कहाँ.. आपके मुकाबले में तो हम कुछ भी नहीं हाँ..

नागराज:- अरे नहीं नहीं. हम कहाँ इतने बड़े हाँ, और लोग हमें जानते हाँ तो ये उनका बड़ापन है.. वैसे बीटा तुम देखने तो एक पहलवान लगते हो.. बिजनेसमैन और ऐसी पर्सनालिटी कम् hi देखने में आती है.. और सेक्रटरी भी खूब राखी है तुमने........ नागराज की आँखों में एक पल के लिए हवसी चमक भी आई.. लेकिन उसने खुद पर जल्दी hi काबू पा लिया, साला वो नहीं जानता था क मेरी सेक्रटरी उसकी सगी पोती है.... बड़े लोगों की पार्टी थी तो नागराज खुद की नज़रों को कण्ट्रोल में रखे हुए था... मनजोत सिंह भी यही मौजूद था तो वो उससे भी डरता था..

कुछ देर नागराज और उससे बेटों से बात hui.sabse मिलना था तो इस वक़्त टाइम कम् था. इसलिए नागराज से माज़रत करते हुए आगे बढ़ गए थे.... नागराज ने फिर मिलने क लिए कह दिए.. अब्ब तो नागराज से रेगुलर hi वास्ता पड़ने वाला था, वो कहा जानता था क मैं और महक उनके काल बन कर पुणे में ाँ वार्ड हुए हाँ.. नागराज के घर की महिलाएं अभी अपनी साथी महिलयों में बिजी थी, लेकिन वो भी मुझे मुद मुद कर देख रही थी, इशिता भी कभी कभी मुझे देख लेती थी, लेकिन वो अपने घमंड से बहार नहीं निकलना चाहती थी..

कुछ लोगों से मिलने के बाद हम मनजोत सिंह के पास जा पोहंचे. मैंने जान बूझ कर देरी की थी.. उन्हें कुछ जलना था और कुछ गड़बड़ी को मौका भी चांस बने तो मैं पीछे नहीं हटने वाला था.... वह पोहंचे तो उनके तेवर hi बदले हुए थे... लेकिन पार्टी का करके वो खुद पर काबू भी पाए हुए थे. लेकिन उनकी ऑंखें सब बता रही थी, क वो मुझसे बस रस्मी सी hi बात चीत कर रहे हाँ...

मनजोत सिंह के एक बेटे से नहीं रहा गया..

मनोज सिंह:- देखने में hi पावरफुल लग रहे हो, या सच में hi कुछ दम ख़म है तुममे.. गार्ड्स तो कोई भी 4 पैसे दे कर हिरे कर सकता है.. 4 पैसे दे के पर्सनालिटी का दिखावा भी किया जा सकता है.. मनजोत सिंह जो नहीं कह पाया था वो उसके बेटे ने कह दिए था.. मनोज सिंह के बोलने से मनजोत सिंह की आँखों में मुझे ख़ुशी दिखी, मनजोत सिंह के हिसाब से उसके बेटे ने बोलकर मेरी बेइज़्ज़ती कर दी थी.. सबके सब पहलवान थे वो भी.. पहलवानी उनके खंडन में थी, तो खुद को सबसे बढ़कर समझ रहे थे.. कभी खुद से बढ़कर तगड़े पहलवान से पला नहीं पड़ा था.. इसलिए वो अकड़ कर रहते थे.. दिलीप की तो घिघि hi बांध गई थी. वो समझा मई अपनी इंसल्ट बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगा.. और हाल में कोई हुंगमा बरपा हो जायेगा... दिलीप नहीं जानता था क हंगामा तो बरपा होगा hi, पारर जैसे वो सोच रहा है, वैसे नहीं, हमारे हिसाब से....... ये पार्टी ऐसे hi तो नहीं राखी गई थी.. कुछ तो करने वाले थे हम..

मैंने महक को देखा तो महक ऑंखें चमक रही थी.. जैसा मौका हम ढूंढ रहे थे, मनोज सिंह वो मौका हमें खुद से फ़राहम कर दिए था..

मनोज सिंह की आवाज़ आस पास खड़े हुए और भी कई लोगों से सुन ली थी.. सब hi तो मनजोत सिंह को जानते थे, उनके बच्चो को भी जानते थे.. वो कैसे हाँ ये सबब भी जानते थे..

उनके हिसाब से मनजोत सिंह परिवार से पन्गा लेकर कोई सलामत नहीं रहा था.. सब मुझे हमदर्दी से देख रहे थे..

मैंने एक नज़र नागराज को भी देखा और फिर मनजोत सिंह की आँखों में आँखों दाल कर ऊंची आवाज़ में बोलै

विजय:- मर मन्जिओट सिंह, बहुत सुन रखा है मैंने तुम्हारे खंडन के बारे में.. बहुत नाम कमा रखा है तुमने.. (पार्टी में मौजूद सब लोगो को देखते हुए) आअज से पहले तुम्हे या तुम्हारे बेटो को कभी कोई मर्द मिला hi नहीं.. अगर मिल चूका होता तो तुम सबब का नाम एक मोहल्ला से निकल कर दूसरे मोहल्ला तक न पोहंच पाटा.... (मेरी बात से मनजोत सिंह और उसके बेटे तैश में आ गए.. उनमे से एक बोलने लगा तो मैंने उसे टोक दिए) अभी मेरी बात ख़तम नहीं हुई है मर सिंह....... मैंने कहा न क अभी तक तुम में से किसी का पला भी किसी मर्द से नहीं पड़ा... मनजोत सिंह तुम और तुम्हरे बेटो में मर्दानगी है तो आज यही सबके सामने वो मुझसे मुकाबला करके अपनी मर्दानगी का साबुत दें.............. है तुम्हारे बेटो में से किसी में हिम्मत.. है किसी की रगों में एक मर्द का खून..... मुझे मेरी पर्सनालिटी बारे कह सुना रहे थे ना..

अब्ब तुम सबब अपने दुम्म को इन सबब लोगों के सामने दिखाओ, या आजतक सिर्फ अपने आदमियों की सपोर्ट पर hi दनदनाते फिर रहे हो...

सब को hi सांप सूंघ गया था. पुरे हाल में घूर सन्नाटा फेल गया था. सिर्फ साँसों की hi आवाज़ सुनाई दे रही thi..sab अपनी अपनी बातें भूल कर हमारी तरफ देखने लगे थे.. कभी ऐसा कोई मौका नहीं आया था क मनजोत सिंह या इसके बेटो के सामने किसी ने ऐसी बात की हो.. कभी ऐसा नहीं हुआ था क शहर के जाने माने लोगों के सामने मनजोत सिंह या उसके बेटो को किसी ने चैलेंज किया हो..

महक, नागराज और उसके परिवार वाले मुझे मुस्कुराते हुए देख रहे थे. उनकी आँखों की ख़ुशी छुपाये नहीं छुप रही थी....

मनजोत सिंह और उसके बेटे की आँखों से आग बरस रही थी, महक बहुत अच्छे से जानती थी क वो सबब औरत को जुटे की नोक पर रखते हाँ.. वो भी इस मोके पर चुप नहीं रह सकीय....

महक:- और मर मनजोत सिंह तुम्हारे बेटो में से किसी में इतना दुम्म नहीं क वो मुझसे पंजा भी लड़ा सकें.. वो क्या मेरे बॉस से लड़ने की हिम्मत खुद में पाएंगे....

तुम्हरे खंडन में आजतक कभी किसी ने कोई मर्द भी पैदा किया है क्या.. औरतों पर पावर का इस्तेमाल करके खुद को बहुत बड़े सूरमा समझते हो.. मुझसे मुकाबला करवा कर देखो अपने किसी बेटे का.. फिर मई तुम्हे दिखाऊँगी क औरत की पावर क्या होतीहै, घर की औरतें तो अपने घर को टूटने से बचने क लये मजबूर होती हाँ, वर्ण तुम जैसों में इतना दुम्म कहाँ क एक औरार का मुकाबला कर सको.. महक की कड़कदार आवाज़ पुरे हाल में hi गूँज रही थी..

इस बार मैं महक को मुस्कुरा कर देख रहा था... पुरे हॉल में सन्नाटा छा गया था.. इस बार फिरसे दिलीप की गांड फट गई थी.. पहले वो मेरी वजा से टेंशन में था तो अब्ब मनजोत सिंह की वजा se..manjot सिंह से पन्गा लेकर कोई पुणे में कैसे रह सकता था...

महक की बात पर नागराज की मुस्कान और भी गहरी हो गई.. तो मनोत सिंह और उसके बेटो की तो झांटो में hi आग लग गई थी.. उनके चेहरे मारे ग़ुस्से और तैश के टमाटर के जैसे लाल हो गए थे...

मनजोत सिंह की या उसके बेटो की कभी ऐसे भरी महफ़िल में कभी बेइज़्ज़ती नहीं हुई थी, मारे ग़ज़ब के उन सबब का बुरा हाल था.. वो सारे ग़ुस्से से कापंने लगे थे. मेरी बात पर वो सब इतने नहीं भड़के थे, जितने महक की बात ने उस सबब की झांटो में आग लगा दी थी.. सब के सब हम दोनों को ऐसे घूर रहे थे.. जैसे पल भर में hi हमे कच्चा खा जायेंगे.

कम भी वही मौजूद था.. उसे भी मैंने दिलीप से कह के बुलवा लिया था. भरी महफ़िल में बात न बड़े इसलिए वो पूरी तरह से सतर्क था.. वो भी मुझे नहीं जानता था लेकिन मेरी पेसोनालित्य को देख कर वो कुछ गलत भी नहीं बोल सकता था.

मुझे जाने बिना सो खुद की सहमत नहीं बुलाना चाहता था..

मनजोत सिंह:- बहुत बोल चुके तुम और बहुत सुन लिया हमने.. अब्ब जो कुछ तुम बोल चुके हो. उससे तुम पीछे नहीं हट सकते, अब्ब तो मुकाबला हो कर रहेगा.. हम भी सिंह परिवार से हाँ, अपने बाप दादा का नाम नहीं डूबने देंगे.. बोलो किस्से और कहाँ लड़ना चाहते हो तुम..

यही तो मैं चाहता था, क वो सबके सामने मुझसे अपने बेटो को लड़वाने की बात करे.. बात मुझे बढ़ानी थी, लेकिन बात मनोज सिंह ने बढ़ा दी थी... मैंने और महक ने उस बात को इस हद तक ला पोहंचाया था क अब्ब वो पीछे नहीं हट सकते थे....

vijay:-(comm से) कम साब आप क्या कहते हाँ इस सबब के बारे में.. बात मैंने शुरू नहीं की थी, ये तो आप भी जानते हाँ.. मनजोत सिंह के बेटे ने बात को गलत रुख दिए था, जो बढ़ते हुए इस सतह तक्क आ पोहंची.. अब्ब जब्ब मुकाबले करके लिए हम दोनों hi तैयार हाँ तो आप इस शहर के कम हाँ, मैं आप की भी गए जानना चाहता हों... कम मेरी बात सी खुश हो गया, लेकिन मनजोत सिंह के सामने वो अपनी ख़ुशी का इज़हार नहीं कर सकता था...........

कम:- शुक्रिया बेटे तुमने मुझसे गए मांगी, अब्ब जब सिंह साब ने खुद से hi मुकाबले क लिए कह दिए है, तो मुकाबला तो अब्ब ज़रूर होगा.. लेकिन इस नाचीज़ की गए है क मुकाबला यहाँ नहीं किसी खुली जगा पर हो..

मनजोत सिंह:- मुझे मंज़ूर है कम, इससे पूछ ये मेरे कौनसे बेटे से लड़ना चाहेगा..

कम और बाकी सबब मुझे देखने लगे..

विजय:- मर मनजोत सिंह भरी महफ़िल में मुझे डीग्रेड किया गया है... मैंने तुम्हारे बेटे से कुछ भी तो गलत नहीं कहा था.. अब्ब मुकाबला बिना किसी दो के नहीं होगा.. तुम अपने सारे बेटों को एक साथ मेरे मुकाबले पर ला सकते हो.. अगर मई हार गया तो मैं अपनी साड़ी प्रोपोरेटी तुम्हारे बेटों के नाम कर डोंगा.. और वो इतनी ज़यादा है, न तो तुम आज तक उतनी कमा सके और न hi तुम्हारे बेटे.. पैसा मेरे पास इतना है क वो मैं तुम जैसो में बांटना शुरू कर डॉन.. तो भी सालों तक्क ख़तम न हो... बात अब्ब मान सम्मान की भी आ गई है.. इस मुकाबले में दोनों का सबब कुछ दो पर लगेगा.. बोलो मंज़ूर है......

महक ने मेरे हाथ को दबा कर अपनी ख़ुशी का इज़हार कर दिए.. मेरी इस बात पर पुरे हाल में hi शोर मचने लगा, कोई मुझे सरफिरा कहने लगे, जो कोई मुझे पागल, कोई मुझे जायला और बहादुर कहने लगे, तो कोई ये कह रहा था क मैं अपनी बेइज़्ज़ती के चलते अपने आप से बहार हो गया हों...

मनजोत सिंह को मेरे हर एक बोल पर चोट लग रही थी.. ग़रूर में साडी लाइफ hi जी ली थी पुरे परिवार के मर्दों ने.. उनकी अकड़ के सामने किसी की नहीं चली थी, मेरी बात न मान कर वो किसी के सामने अपना सर्र नहीं झुका सकते थे..

पहले भी कई बार औरत के चक्कर में ये सबब होनी अकाल खो बैठे थे.. महक के बोल और महक की नज़रों का कैसे सामने कर सकते थे.. महक मुसलसल hi उन्हें हकरत भरी नज़रों से देख रही थी.. मेरी बातें और महक की नज़रें उन्हें अंदर hi अंदर सब कुछ भुलाने लगी थी... मेरे चरों मां भी अपने बाप के जैसे अपने आप से बहार होते जा रहे थे.. सेहत में वो मुझसे कम् नहीं थे.. वो पहलवान भी थे... साडी उम्र वो लड़ते भी आ रहे थे..

मनजोत सिंह:- बात अब्ब तुम भी इस हद्द तक ले आये हो बच्चे तो फिर मुझे तुम्हारी हर एक शर्त मंज़ूर है.. लेकिन मेरी भी फिर एक शर्त है... अगर मेरे बेटे जीते तो तुम्हारी सेक्रटरी की शादी मेरे बेटे के साथ होगी. . और तुम भी हमेशा के लिए खुद को मेरी ग़ुलामी में दे डोज.. तुम मेरे hi घर मेरे एक घुलम बन्न कर रहोगे.

बोलो मंज़ूर है तुम्हे...

मुझसे पहले hi महक बोल उठी.. महक किसी शेरनी के जैसे दहाड़ते हुए बोली......

mehak:-maine कहा था न मर सिंह क तुम्हारे बेटो में से किसी में भी उतना दुम्म नहीं है, जो मुझसे लड़ सके, जो मुझसे मुकाबला कर सके.... तुम तो फिर भी मेरे बॉस से लड़ने की बात कर रहे हो.. और तुम जैसे कह रहे क अगर तुम्हारे बेटो में से कोई जीता तो मुझे उससे शादी करनी होगी.. तो अगर तुम्हे या किसी और को कोई शक्क है तो वो अभी से मुझसे जहाँ चाहे सिग्न करवा ले.. जैसी चाहे ज़मानत मांग ले.. हम कायर नहीं हाँ मर सिंह.. और मैं अपने कहे से कभी पीछे नहीं हटती..

लेकिन मैं भी वही मुतालबा दोहराती हों.... अगर मेरा बॉस जीत गया तो तुम सबब खुद को पुरे मजमे के सामने पूरी मीडिया के सामने मेरे बॉस में ग़ुलामी में देंगे.. तुम सबब हारने के बाद मेरे बॉस के तलवे चाटोगे.... और एक बात मुकाबला पुणे शहर के सबसे बड़े ग्राउंड में होगा.. पूरा शहर देखेगा ये मुकाबला.. हार जीत का फैसला भी सबके सामने होगा.. कम साब आप ये सबब अर्रंगे करवा देनेंगे या हम खुद से hi सब कर लें..

कम:- मई कर लूंगा रीना बेटी................. मेरा नया नाम सुरिया चौहान था और महक का माया शर्मा..

जब सब फाइनल हो गया था, तो मनजोत सिंह लाल टिमटिमाते चेहरों के साथ वहां से निकल पड़े... जो मनजोत सिंह परिवार से दिल hi दिल में खार रखते थे, वो हमरे पास आ गए.............. नागराज और उसकी फॅमिली सबसे करीब थी हमारे..

मुझे और महक को लेके वो सबब बहुत खुश थे, जो कोई न कर पाया था, वो आज मैंने और महक ने कर दिखाया था.. नागराज और उसकी फॅमिली तो खुश होनी hi थी.

जैसा समा यहाँ बांध चूका था, इशिता की पर्सनालिटी से कहीं बढ़कर था वो.

एक तो हमने खुद को सबसे बढ़ कर शो करवा दिया था, और दूसरा उसके सबसे बड़े दुश्मन को मैंने और महक ने नको चने चबवा दिए थे.. िशिस्टा भी अपने ऐटिटूड और घमंड से निकल कर हमसे अच्छे से बात करने लगी... इशिता की आँखों में मैंने खुद के लिए सताइश देख ली थी.. वो अंदर hi अंदर मुझसे िम्पेर्स हो गई थी.. इसी को hi तो सीढही बना कर तो मैं पूरी तरह से नागराज की हवेली में घुस्सने वाला था..

जल्द hi बहुत कुछ भयंकर होने वाला था, नागराज की फॅमिली के साथ भी.. कल का दिन मनजोत सिंह के लिए था, उसके बाद से नागराज परिवार की सहमत शुरू होने वाली थी..

 
थैंक्स..!!

मनजोत सिंह परिवार बहुत बड़ा गांडू है, औरों पर ज़ुल्म करके खुद को मैरड समझते han..sumitra चुड़क्कड़ की छूट की आएग ने ये सब हालत पैदा किये थे.. बहुत बुर्रा होगा उसके साथ... बदला लेने क लिए दन्न पीछे रहने वाला नहीं था, श्वेता की बाद किस्मती क वो प्रेगनंट हो गई.. लेकिन ये उसकी खुशकिस्मती भी ठहरी क वो विज्जू जैसे एक बेटे की माँ भी बन गई,, अगर वो प्रेग्नेंट न होती और फिर दन्न के कब्ज़े में आ जाती तो कैसे बदतरीन लाइफ से चुकतकरा प् सकती थी
 
थैंक्स..!!

आखिर कार महक के अंदर की लड़की जाग उठी और विज्जू से प्यार करते हुए दिल के अरमानो के साथ पहला चार्म प्राप्त कर लिए.. महक ये जो नहीं सोचा था, वो वैसी फीलिंग्स में धोब गई.. उसके अंदर के सरे रंग विज्जू ने उसे दिखने शुरू कर दिए.. कुछ रह गए तो वो बाद में विज्जू उसे दिखा देगा, पर अब महक एक लव रकि तरह से विज्जू से सब करेगी..
 
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