अपडेट ::: 134
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प्रेसेंट टाइम
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मई और महक पुणे वाली कोठी में थे.. 3 घंटे की रेस्ट के बाद मैं ड्राइंग रूम में hi आ कर बैठ गया और न्यूज़ देखने लगा.. महक अभी नहीं आई थी..
महक मेरी आधी पत्नी बन चुकी थी पारर अभी वो मेरे साथ सोने के मूड में नहीं थी.. जब इस कोठी पर पोहंचे थे तो मैंने महक को अपने गले से लगा कर किश करदी थी और कहा था क आज से वो मेरे साथ hi सोया करेगी तो...
तो महक ने मुझे किश का जवाब एक हलकी और टाइट किश की सूरत में देते हुए अपने घुटने को उठा कर मेरे लुंड पर दबा दिए था.. " क्यों लुंड में खुराक होने लगी है, मांग क्या भर दी मेरी तुमने, तुम तो कुछ ज़यादा hi शोखे होते जा रहे हो, और तुम्हरा लुंड भी तो देखो अभी से भी इतना सख्त हो रहा था... भूल जाओ अभी तुम्हरे साथ नहीं सोने वाली.. और न hi तुम्हे कोई और मौका देने वाली हों.."
महक भी अब्ब मुझसे खूब मस्ती मज़ाक करने लगी थी, अब्ब भी महक पहले जैसी थी, लेकिन वो चेंज भी बहुत हद तक हो गई थी.. पैलेस में गीज़र पिछले कई दिनों में महक की छूट में एक बार फिरसे आग लग गई थी.. महक कमीनी ने मुझे बताये या मेरी कोई भी हेल्प लिए बिना hi खुद को एक रूम में बंद कर लिया और नंगी होकर खुद की छूट में ऊँगली दाल कर सारा पानी साड़ी बेचैनी ख़तम कर ली थी..
जब मैंने महक को फ्रेश फ्रेश देखा तो मुझे लगा था क महक फिरसे बेचैन होकर फिरसे शांत भी हो गई है. क्यूंकि अब्ब छूट की आग और आग के ठंडा हो जाने क बाद की कंडीशन में बहुत अच्छे से जान जाता था... मेरी चरों तरफ hi तो छूट और छूट की आग का खेल खेला जा रहा था.. अनगिनत छूटें मुझे देख के आग की लपेट में आ जाया करती थी.. फिर जब वो शांत होती थी तो मुझे बहुत अच्छे से अंदाज़ा भी हो जाया करता था.....
महक से भी मैंने पूछा था क वो इतनी फ्रेश क्यों है.. क्या उसकी बेचिअनि और छूट की आग फिरसे बढ़ गई थी... अगर ऐसा था तो मुझसे हेल्प क्यों नहीं ली..
तब भी महक ने मेरे गले से लग के मुझे एक ज़बरदस्त किसम की किश करके मेरे लुंड पर अपने घंटे को दबा कर यही बोलै था..
भूल जाओ सबब.. मई नहीं तुम्हारे हाथ में आने वाली. गुफा में तो मैं मजबूर थी और तुम मेरे पास भी तो सबब हो गया था.. अपने लुंड को अपनी maa,behno और दूसरी छूटों में दाल के ठंडा कर लिया करो, मेरी छूट के लिए तमहरा लुंड बना hi नहीं है.................... महक की आँखों में बेइंतेहा शरारत और चमक आ गई थी.. महक भी इस नयी लाइफ को और इस लाइफ ने बदलते रंगों को पूरा पूरा एन्जॉय कर रही थी..
पुणे वाली कोठी में भी महक ने कुछ वैसी hi मस्ती की थी.. बहुत मज़ा आ रहा था, महक के साथ टाइम स्पेंड करने में..
मई टीवी देख रहा था क महक भी ड्राइंग रूम में आ गई ... मैं महक को देखा तो मुझे एक झांकता लगा..
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महक एक कुछ ज़यादा hi शार्ट पंत में थी.. नाभि को नंगा किये एक छोटी सी और फिटिंग वाली बुनियाँ पहने हुए थी......... मैं महक को ताड़ने लगा.. महक मेरे पास आई.. और अपना एक पेअर उठा के मेरे लुंड पर रख दिए और झुक कर मेरी आँखों में देखने लगी....... मई तो महक के फिगर को hi घूर रहा था.. झुकने से उसके आधे बूब्स भी दिखने लगे थे.. कुछ तो वो पहले से hi शो करवा रही थी.. महक से मस्ती किये महक के बदन की खुशबु पाए बहुत दिन हो गए थे.. मुझे महक को ऐसी हालत में देख कर अजीब सी ख़ुशी अजीब सा मज़ा मिलने लगा....
महक अपने पेअर से मेरे लुंड को कुरेदते हुए, चुटकी बजाते हुए..
महक:- ोोू हेल्ल्लूओ ठरकी इंसान, पहले कभी किसी लड़की को ऐसे नहीं देखा क्या, और फिर मई तो तुम्हरे लिए वैसा पीेछे भी नहीं हों तो मुझे ऐसे तो मैट घूरो.
वर्ण अपने लुंड से हाथ धो बैठोगे..... मई क्यों महक के महकते बदन से नज़रें हटाता.. इतना ज़बरदस्त व्यू वो दिखा रही थी.. अब्ब तो लाइफ में मस्ती और मज़े hi थे, महक भी मेरी पत्नी बन्न चुकी थी.. और वो भी अब्ब मुझसे धीरे धीरे खुलती जा रही थी.. मुझसे हर किसम की बात हर किसम की मस्ती वो कर लिया करती थी. तो फिर मई क्यों ऐसे मोके को हाथ से जाने देता..
मैं के फिगर से नज़र हटा कर मैंने महक की आँखों में देखा.. जहाँ चमक, गहराई, भरोसा, मस्ती, शरारत सबब कुछ था..... लेकिन साली की आँखों में वो प्यार नहीं था.. जो दूसरी सबब आँखों में मुझे दीखता था..
फ्रेंडशिप वाला प्यार ज़रूर था, लेकिन लवर वाली फीलिंग से महक अभी दूर थी..
महक की आँखों में देखते हुए, मैंने महक के पेअर को पकड़ा और एक झटका दे कर महक को अपनी गॉड में बिठा लिए.. महक इस सबब क लिए रेडी नहीं थी, और न hi उसने ये सबब सोचा भी था.. महक मेरे लुंड बैठी तो महक की गांड की महक पा के मेरे लुंड ने सर्र उठाना शुरू कर दिए.. वो भी महक के मस्त फिगर को देख के मूड में आ गया था..
महक मेरी गॉड में आई तो 2 सेक् क लिए महक हड़बड़ा गई थी.. यहाँ लड़ाई वाला सन नहीं था. वर्ण महक किसी को ऐसा मौका कब्ब देती थी.. महक भी मेरी ऐसी मस्तियों को झेल लेती थी, लेकिन मई फ़ौरन hi ऐसा कर जाऊँगा ये महक ने नहीं सोचा था..
ouchhhhhhhhhhhhhhhhh.. महक क मोहन से आवाज़ निकली..
महक:- कुछ ज़यादा hi नहीं तुम खुद से बहार हो गए हो.. क्या पहले मुझे ऐसी हालत में कबि नहीं देखा क्या... मेरी ने सर घुसा कर मेरी आँखों में देखा, वहां ग़ुस्सा नहीं था... महक नार्मल थी.. बस उसकी ऑंखें चमक रही थी..
इतना खतरनाक फिगर पा कर महक उसे मेरे सामने पूरी तरह से एक्सपोज़ करते हुए मुझे नार्मल रहने को बोल रही थी.. उसे पहले इस हाल में देखा हो या न हो, जैसी वो अब्ब बन्न के आई थी कैसे मई मस्ती किये बिना महक को छोड़ सकता था..
महक के गाल पर किश करदी मैंने.. महक ने किश के बाद मेरे गाल पर हल्का सा थक्कद लगा दिए..
विजय:- आज तुम बहुत hi कातिल दिख रही हो मेरी जान..
mehak:-"meri जान" अरे वाह मई कबसे तुम्हारी जान हो गई हों, और कातिल तो मई हर दुम्म hi रही हों, फिगर से भी और कामो से भी.. तुम तो सबब जानते hi हो न.
बच के रहो कही तुम भी मेरे हाथो का कतल हो जाओ.. महक मेरे पास हो, मुझे मस्ती क मूड में देखे और खुद भी मस्ती के मूड में ना ए ये होना पॉसिबल नहीं था.. महक भी मुझे शरारती आँखों से घूरती हुई बोली..
मई महक के नंगे बाज़ो पर अपनी उँगलियाँ चलते हुए महक के क्षूलफेर महक की गर्दन पर हलके हलके किश करने लगा.. महक मुझे मुस्कुराती आँखों से देखने लगी.. महक साली मेरे किश करने से भी मज़े में या बेचैनी में नहीं हुई थी.. साली खुद को आधा मर्द समझ रही थी.. मेरा दूसरा हाथ महक के पेट पर आया और मैं महक की नाभि में ऊँगली फेरने लगा, महक को झटका सा लगा..
विजय:- कोई कब किसी की जान बन जाए, किसी को नहीं पता चलता, बास जब वो दूर होने लगे या कुछ ज़यादा और खतरनाक रूप में पास आने लगे तो वो जान लगने लगती है.. तुम कातिल हो तो क्या हुआ, मुझे भी कतल कर दो, और अपने नैनो की तीरो से, या अपने मस्त फिगर के नशे में मुझे इतना अधमरा कर दो क मई तुम्हरे नैनो की तीरों से घायल होकर तुम्हारे मस्त बदन की महक के नशे में खोता हुआ इस दुन्या से चला जाओ............... महक ने मेरे सर्र के बाल थाम लिए और मुझे झटका देने लगा...
महक:- ो मजनू की औलाद.. जैसा तुम बोल रहे हो, मई वैसी लड़की नहीं हों. ऐसे मुझे किसी को मारना नहीं आता और न hi मई किसी को ऐसे मारना चाहती हों.. महक हस्ती हुई मज़ा लेती हुई मुझसे बोली........... और आज तुम्हारे लुंड को क्या हुआ, वो क्यों अकड़ रहा है.. पहले तो वो मेरे पास रहते हुए किसी चूहे के जैसे सर्र नीचे रखते हुए पड़ा रहता था..
महक की गर्दन पर नाक रखते हुए उसकी महक को अपने अंदर उतरता हुआ.. एक ज़ोर की सांस ली aur...."majnu मुझे सबने मिलकर बना दिए है तो मई क्या कर सकता हों, और सबब hi तो मुझे मजनू बना हुआ देखने चाहते हाँ, मजनू बनुगा तो सब में अच्छे से प्यार बांटूंगा, तुम्हे भी तो मुझसे प्यार चाहिए, तुम भी तो अधूरी हो ना, देखो कैसे तुम्हरा बदन एक मर्द के प्यार के लिए मचल रहा है, तुम बास खुद को इस सबब से ज़बरदस्ती रोके हुए हो... छोड़ दो अपनी ज़िद्द और ले लो चार दिन की ज़िन्दगी के पुरे पुरे मज़े.. मेरे पापु को और अपनी मुनिया वो ख़ुशी दे दो.. जिसके लिए दोनों hi बेककर हाँ"
महक अब्ब धीरे धीरे मेरे रंग में रंगने लगी थी.. अंदर से शायद वो खुद भी ये सबब चाहती thi,lekin सैलून से खुद को ऐसे बनाया था महक ne..to उसे बाल्डने में टाइम तो लग्न hi था... धीरे धीरे करके वो एक नार्मल लड़की बनती भी जा रही थी.. मेरा साथ और मुझसे ऐसी मस्ती उसे बहुत मज़ा और सुकून भी देती थी...
लेकिन वो खुद में बंद थी, अभी वो खुद को पूरा नहीं खोल प् रही थी, या अभी वो खुद को ऐसे हैलमे को पूरी तरह से जीने का ढंग नहीं था.. या वो अभी ऐसी hi लाइफ जीना चाहती थी..
सेक्स hi लाइफ नहीं होता, प्यार और मस्ती के ये रंग भी इंसान क लिए ज़रूरी होते हाँ.
महक ने इस बार मुझे खुद से किश करदी..
महक:- तेरा मुन्न्ना तो हर दुम्म hi ख़ुशी ढूंढ़ता रहता है विजय, वो तो अब्ब आदि होता जा रहा है, अब्ब वो किसी की छूट में रहे बिना सुकून से नहीं होने वाला, साला किसी छूट की थोड़ी सी खुशबु क्या सूंग ली, मूड में आने लगता..... और फिर अभी मेरी मुनिया को सुकून में हुए कुछ hi दिन हुए हाँ तो तुम मेरी मुन्निया की फ़िक्र छोड़ कर खुद के मुन्ने की फ़िक्र करो... महक हस्ते हुए मेरे ऊपर से उठने लगी तो मैंने महक को पकड़ कर सूफी पर लिटा दिए और उसके ऊपर आ कर उसे किश करने लगा..
महक ने भी खुद को मुझसे छुड़ाने की या मेरे चुंगुल से निकलने की कोई कोशिश नहीं की.. महक भी अब्ब मज़ा लेना छह रही थी.. किश की आदत हम दोनों को hi पद चुकी थी, महक भी मुझे किश में साथ देने लगी.. महक तपते हुए होंठ मेरे होंटो से टकराये तो मेरे अंदर एक लहर सी दौड़ गई थी.. महक का एक हाथ मेरे सर्र पर औए और महक मेरे सर्र को दबती हुई मेरे होंठ का रस पीने लगी..
मैं एक हाथ चलता हुआ महक के एक दूध पर आ गया.. लेकिन मैंने दबाया नहीं.. महक ने मुझे किश करना छोड़ दिए.. मैंने सर्र उठा क्र महक की आँखों में देखा. महक का चेहरा नार्मल था... कोई ग़ुस्सा, नाराज़गी या बेचैनी वाले भाव नहीं थे.
विजय:- महक अब्ब थोड़ा सा आगे बढ़ जाते हाँ, क्या ख्याल है, अब्ब हमेहा hi तो ऐसे नहीं रहना न, आहार कुछ गलत लगे तो मुझे रोक देना.. और तुम भी खुद को जुगड़े क्र लेना, क अभी तुम ऐसे hi प्यार के मूड में आती हो या नहीं.. बुरा लगे तो आगे का यही स्टॉप कर देंगे..
महक मेरी आँखों में देखती hui.."vijay अब्ब मुझे तुमसे कोई टेंशन नहीं रही, और सच कहा तुमने मुझे भी इस सबब को एन्जॉय करना चाहिए, आखिर कब तक मई इस सब से भागती रहूंगी.. और न hi मई ऐसे हमेशा रहने वाली हों, तो जब हर एक लड़की को ये सबब अपनी लाइफ में करना पड़ता है तो मुझे धीरे धीरे से hi सही, लेकिन आगे तो बढ़ना hi चाहिए.. विजय लिमिट में रहकर तुम कुछ भी कर सकते हो"
फिर वो मस्ती और शरारत से मेरी आँखों में देखते हुए बोली..
महक:- अगर कही कुछ गड़बड़ हुई भी तो गिफा में hi तुमने मुझे परमिट थमा दिए था.. मैं किसी गिल्ट में गए बिना hi खुद की बेचैनी ख़तम कर सकती हों... अगर मेरे अंदर लवर्स वाली फीलिंग नहीं आ रही हाँ तो क्या हुआ, तुम हो तो अब्ब मेरे पति hi ना.. प्यार के लिए न सही खुद की बेचैनी को कम् करने क लिए तो मई कुछ भी तुम्हरे साथ कर सकती हों..
हाय महक के ये बोल महक का ये अंदाज़... मई तो घायल hi हो गया था.. नीचे कारपेट बिछा हुआ था.. मैं वैसे hi महक को थाम कर पलटा और महक को लिए नीचे कारपेट पर आ गिरा.... महक भी ऐसे स्टंट करती रहती थी, वो भी मेरे इस अंदाज़ पर फ़िदा हो गई...
नीचे गिरा तो महक मेरे ऊपर आ गई थी.. महक मेरे लुंड पर सही से होकर बैठ गई और मेरी आँखों में देखने लगी..
महक:- विजय साले तुमने ये क्या किया... पता है तुम्हरा ऐसा करने से मुझे एक अजीब सा मज़ा मिला था.. ऐसा hi तो सब कुछ मुझे पसंद है.. तुम्हारे ऐसा करने से मेरे दिल में एक अलग सी hi लहर उठी थी.. जैसे मनो क मुझे अब्ब सही से मेरे मतलब का मिला हो.. इतने दिनों से मई और तुम साथ में हाँ लेकिन कबि ऐसा नहीं हुआ जैसा इस बार हुआ है.. विजय सच में मज़ा आ गया..
मेरे अंदर भी कही क्लिक हुआ.. मई महक के बारे में कुछ आईडिया लगा चूका था.. महक से मस्ती करना का कौनसा रंग ऐसा हो सकता है, जो महक जल्द से जल्द मेरे पूरी तरह से परीब करदे.. महक एक स्टंट गर्ल थी.. तो महक को अपने लवर्स से भी कुछ ऐसा hi चाहिए था.. मई सबब समझ गया.. और अब्ब से महक मेरे दाम में पूरी तरह से जल्दी hi आने वाली थी..
महक मेरे ऊपर झुकी और मुझे वीलडली किश करने लगी.. इस बार महक के किश करने का अंदाज़ बदला हुआ था.. मैंने महक को खुद में कस के किश करना शुरू कर दिए.. इस बार हम दोनों hi जोश से एक दूसरे के होंटो को पि रहे थे.
महक को किश करते समय मैं महक को अपनी बहन में लेता हुआ घूम गया.. अब्ब मई महक के ऊपर था.. महक ने मेरी आँखों में देखा तो महक की आँखों की चमक और ख़ुशी बेपनाह बढ़ गई थी, महक को मेरा फिरसे ऐसा करना बहुत मज़ा दे गया था.. फिर तो बास काम hi शुरू हो गया..
जब तक हमारी सांस नहीं उखरि हम दोनों hi एक दूसरे के होंटो को वीलडली पीने में लगे, कभी मैं महक को पलट कर उसके ऊपर आ जाता तो कभी महक मुझे पलट मेरे ऊपर आ जाती.. हम दोनों hi ड्राइंग रूम में कारपेट पर लेते हुए एक दूसरे को किश कर रहे थे..
मेरे तो अंदर के रंग शुरू से hi बदला हुए थे. लेकिन मुझे लेके महक क दिल में भी कुछ कुछ नया होने लगा, शायद मेरे ऐसा करने से महक को वो मज़ा मिल रहा था, जिसे महक ढूंढ रही थी, या महक जिसकी कभी कप्लना कर रही थी..
या महक इस सबब के होने से खुद को नयी जाग रही फीलिंग्स की लपेट में आने से रोक नहीं पा रही थी.. महक की गरम और तेज़ सांस मेरी नाक से टकरा रही थी...
मैं भी फुल मूड में आ गया था, महक की hi तरह से मेरी भी साँसे पुरे चरम पर थी.. महक के अंदर के रंग बदले तो वो मुझे बहार से भी शो करवाने लगी, महक के अंदर और बहार का मौसम भी बदलने लगा था..
महक एक नए hi रंग में दिखने लगी थी, महक के अंदर की लड़की पूरी तरह से जागने लगी थी..
सांस उखड़ी तो हम ने किश तोड़ दिए, महक मेरे ऊपर hi थी, वो मेरे ऊपर hi गिर कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी.. मैं महक की पीठ और नंगी कमर सहलाने लगा.
आखिर महक भी कुछ बदल hi गई थी, महक के अंदर नयी फीलिंग्स जाग hi गई थी.. महक के अंदर का सेक्स ड्रग्स एक्टिव हो गया था.. महक का जिस्म भयंकर गरम हो चूका था. महक किश करते समय मेरे लुंड पर अपनी छूट भी रगड़ रही थी.. महक पहली बार मज़े की हालत में आई थी.. वर्ण इस से पहले तो महक मजबूर होकर ऐसे रंग में आया करती थी..
कुछ देर में महक की सांस बहाल हुई तो महक सर्र उठाया, मेरी आँखों में देखा..
महक की आँखों की चमक में लालजी बढ़ गई थी, महक की आँखों में नशा उतर गया था, महक की आँखों में मुझे वो रंग दिखने लगे थे, जो मैंने देखना छह रहा था.. महक में दिल में पूरी तरह से अटल पथल नहीं हुई थी, पर जितनी भी हुई तो वो मुझे महक की आँखों में दिख रही थी, महक मुझे बड़ी hi चाहत से, बड़े hi नशीले अंदाज़ से देख रही थी.. महक के बूब्स पर पसीने की बूँदें चमकाने लगी थी, मेरी उनपर नज़र नहीं पड़ी thi,lekin मुझे उसका एहसास हो रहा था.. महक की आँखों में देख कर लग रहा था क वो बेचैन तो है, अंदर एक सेक्स ड्रग के एक्टिव हो जाने की वजा से.. लेकिन वो अब्ब खुद के काबू में नहीं थी..
यही तो वो कमाल होता है. जब्ब दिल के अंदर की फीलिंग्स जाग उठती हाँ, तो खुद से लड़ने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है.. महक भी अब्ब बेचैन तो थी, पर खुद के कण्ट्रोल में थी, अब्ब वो बेकाबू होकर मुझपर टूट पड़ने वाली नहीं थी..
महक मुझसे टूटी भी थी, और अब्ब से वो मेरे लिए हमेशा hi ऐसी रेंगने वाली थी, लेकिन अब्ब महक वो सबब मेरे साथ प्यार से करने वाली थी.. छूट की आग का मसला भी था, पारर प्यार जाग उठा तो अब्ब महक उस प्यार वाले अंदाज़ को सामने रखते हुए मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया करेगी, मुझसे अपना हक़ वसूल किया करेगी..
मैंने महक को फिरसे पलट दिए.. महक के होंटो पर एक हल्का सा किश किया, महक खुश हो गई, अब्ब महक के अंदर भी लहरें दौड़ रही थी, तो मेरा एक एक किश, हर बार महक को मेरा टच होना, महक से मेरा प्यार करना महक को ख़ुशी और बेइंतेहा मज़ा देने वाला था.. hmmmmmmmmmm महक के मोहन से आखिर कार पहली सिसकी निकल hi गई..
मैं फिर महक के गालों पर चमक रहे पसीने को चाटने लगा, महक के हाथ मेरी पीठ कर आये, महक मेरी पथ को सहलाते हुए खुद को मेरे हवाले कर गई..
महक के गालों पर चमक रहे पसीने को चाटने के बाद मैंने महक के गालों पर हलके हलके किश करना शुरू कर दिए... महक कभी मुझे देखती तो कभी अपनी ऑंखें बंद कर लेती.. महक के गालों को चूमने चाटने के बाद मैंने महक की आँखों को भी चूमना शुरू क्र दिए.. महक की सांस फिरसे तेज़ हो गई. महक अब्ब पुरे मज़े में थी. महक के बदन की महक में मुझे भी सुरूर की दुन्या में उतार दिया था.. अब्ब मई सही से महक से प्यार कर रहा था, क्यूंकि महक की तरफ से मुझे लिमिट में रहते हुए पूरी छूट मिल गई थी.. वैसे भी अब्ब महक के अंदर का मौसम बदल गया था. तो महक मुझे कुछ भी करने से नहीं रोकने वाली थी...
लेकिन महक जैसी शराब को मई धीरे धीरे करके पीने वाला था, महक का महकते, खुशबु बखेरते बदन को मई धीरे धीरे करके प्यार करना चाहता था.
एक दुम्म से पूरी शराब की बोतल पि कर कही मई लुढ़क hi न जाऊं.. ऐसे hi नशे की मालिक थी महक... ऐसा hi नशा था महक के बदन का, महक के प्यार का..
महक ने गले पर को चाट चाट क्र साफ़ करते हुए मई महक के क्लीवेज तक आया.
महक की आँखों में देखा तो महक मुझे hi देख रही थी.. महक भी समझ गई क अब्ब मई उसके क्लीवेज पर आने वाला हों, महक ने मुझे आँखों की ज़ुबान से कह दिए,, विजय मई तुम्हारी पत्नी हों तुम मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो, और फिर मुझे भी तो उस प्यार को महसूस करना है, जो मैंने अभी अभी खुद में महसूस किया है.. मैंने की परमिशन मिली तो मैं महक के क्लीवेज पर जकूकता चला गया.. मेरी जीब जैसे hi महक के बूब्स से ऊपर दिल वाली साइड पर टच हुई तो ...
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiiiiiiii hmmmmmmmmmmmmmmm vijayyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy
महक ने मुझे अपना रंग दिखा न शुरू कर दिए.. महक जैसे शेरनी पहले दरिंडगी से भरपूर थी, फिर सेक्स ड्रग्स के नशे में खोई, और अब्ब महक प्यार के नशे में खोते हुए सिसकी लेने लगी........... महक ने भी नए रंग में रंगते हुए आहें भरनी शुरू कर डीएन..
मेरी जीब महक के बूब्स पर लगे पसीने को चाटने लगी, पसीने का भी अपना एक टास्ते था, एक शेरनी का ये पसीना था, जो प्यार और मज़े से कारन आज पहली बार निकला था, टास्ते ज़बरदस्त तो होना hi था.. मेरी जीब बड़े प्यार से, बड़े चाओ से महक को सूंदर बूब्स को चाटने चूमने लगी, एक बूब्स के बाद मई दूसरे बूब्स पर गया.. दोनों को अच्छे से साफ़ करने क बाद मैंने महक को देखा तो वो ऑंखें बंद किये आहें भर रही थी, महक के बदन में सरसराहट बढ़ गई थी, महक का जिस्म कांप रहा था, कुछ नशे से कुछ मज़े से..
मेरे सुपर्ष ने, और महक के अंदर जाग चुकी नयी फीलिंग्स ने महक को कांपने पर मजबूर कर दिए था..
महक को देखने के बाद मैंने महक की बिनियाँ को पकड़ा और महक के बूब्स से नीचे सरका दिए.. नीचे एक शार्ट ब्रा भी थी, मैंने उसे भी महक की आँखों में देखते हुए उतार दिए.. महक ने मुझे देखा ज़रूर था, पर वो मुझे रोक नहीं रही थी.. महक की आँखों में कोई शर्म नहीं थी, भले hi ये सबब उसके साथ पहली बार हो रहा था, लेकिन जैसी लाइफ महक ने जी थी, महक भी तो एक बेशरम लड़की थी.
महक एक शेरनी भी थी, तो एक शेरनी एक शेर से क्यों शर्माएगी... भले hi एक कुंवारी लड़की थी............. महक के बूब्स नंगे हुए तो बूब्स की चमक मेरी आँखों से टकराई और मुझे मदहोश कर गई.. महक के पहले से hi सख्त बूब्स अब्ब पूरी तरह से फूले हुए थे, महक के बूब्स की उठान देख कर मई मोहित हो गया..... सच कहूंगा, महक के जैसे बूब्स माँ या पूजा दीदी के भी नहीं थे.. मेरी प्रिय के बूब्स बहुत hi मस्त थे, लेकिन महक के जैसे बूब्स किसी एक नहीं थे, खूबसूरती में सबब के hi बेमिसाल थे, लेकिन महक एक स्ट्रांग लड़की थी, उसके बदन एक एक अंग स्ट्रांग था, तो उसके बूसब्र भी फिर वैसे hi हुए.. महक के बूब्स के जैसी सख्ती और बनावट किसी के बूब्स में नहीं थी...
मेरे अंदर तक करंट की एक लेहेर दौड़ गई और मुझसे अब्ब रहा है गया, मई झुका और अपने होंठ महक के आग बरसते हुए दिल वाले दूध पर रख दिए..
hmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
महक को एक झटका लगा, महक के दूध और गैंग ऊपर उठ गई.. महक का मस्ती और मज़े से बुरा हाल होने लगा.. मेरी हालत भी कुछ हट के नहीं तह.. महक के बूब्स पर होंठ रखते hi मुझे अपने होंटो पर जलन सी महसूस हुई थी, इतने गरम थे महक के बूब्स.......... और मज़े की तो बात hi न करें..
मेरा लुंड भी झटके पर झटके खाने लगा.. कुछ महक के दूध पर होंठ रखने के बाद, महक के पसीने की भेणी भीनी स्मेल दे रहे दूध को सूँघता रहा, फिर मेरे मोहन से मेरी जीब निकली और महक के दूध पर चलने लगी, मैं जीब को महक के दूध के पुरे एरिया पर और निप्पल के चरों और घूमने लगा, मज़े से मेरा बुरा हाल था.. महक की हालत तो बयां करने लायक hi नहीं थी, महक बार बार झटके पर झटके खा रही थी.. कुछ देर महक को तड़पने क बाद मैं महक के दूसरे दूध पर गया, उसकी हालत भी वैसे hi की.. फिर राइट से महक के लेफ्ट दूध को थम कर दबाने लगा, और महक के राइट निप्पल को अपने मोहन में लेकर चूमने लगा.. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विजय ये क्या करदिया तुमने मुझे.. अह्ह्ह्ह विजय ओह्ह्ह्ह
मई मरजाएंगी विजय hmmmmmmmmmmmmmmm महक अपने हाथ को मेरे सर्र पर लाइ और अपने दूध पर दबाने लगी.... मई महक के निप्पल को चूसता हुआ महक के दुसरे दूध को दबाने लगा..
मेरी उनलगियां महक के सख्त दूध में धंसने की नाकाम कोशिश कर रही थी. महक के दूध इतने hi सख्त थे, पारर मज़ा हम दोनों को hi खूब मिल रहा था..
महक की सिसकियाँ शर्म पर थी. और मेरी जीब और मेरा हाथ खूब महक के दूध पर और निप्पल पर चल रहे थे....
महक तो पहले से hi किसी मर्द के सुपर्ष से महरूम लड़की थी, आज प्यार और सुपर्ष मिला तो महक से सहन करना मुश्किल हो रहा था, महक मज़े की इन्तहा तक जा पोहंची थी.. मेरे हाथ और गरम जेब की मेहनत महक सहन न कर पाई और मेरे नीचे दबी हुई झटके खाते हुए झड़ने लगी...
महक का ये पहला ऐसा चांस था, जब वो अपनी मर्ज़ी से, अपनी छह से किसी के साथ रोमांस करते हुए चार्म पर पोहंची थी...... महक झड़ने के बाद तेज़ शासन लेने लगी.. मैं महक के ऊपर से हैट गया और महक की साइड में करवट के बॉल लेट क्र महक को देखने लगा, महक की आँखों बंद थी.. और महक खुद को रिलैक्स करने में लगी हुई थी............
कुछ देर बाद महक रिलैक्स हुई और मुझे देखने लगी... महक की आँखों में प्यार और इन्तहा का सुकून था........................ महक मुझे निहारती हुई मेरे ऊपर आ गई.. और मुझे किश कर दिए....
महक:- विजय आज मेरे अंदर बोहत कुछ बलदा है, आज मैंने अपने दिल में वो महसूस किया है, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था, आज पहली बार मेरे दिल की धड़कन मेरे काबू से बहार हुई थी, आज दिल के धड़कने का अंदाज़ भी बदला हुआ था, आज मुझे लाइफ में पहली बार एक अजीब लज़्ज़त और अजीब सा सुकून मिला है, शायद इसे hi प्यार कहते हाँ विजय.. ी थिंक क मई उस स्टेज पर जा पोहंची हों, जिस स्टेज पर खुद को पाने का मुझे कभी अंदाज़ा नहीं था, सोचा न था क एक दिन इस शेरनी क दिल की भी धड़कने बदल जाएँगी.. विजय तुमने ये भी कर दिखाया..
आज सच में मई बहुत खुश हों, आज मुझे एक लड़की होने का पूरा पूरा एहसास हुआ है, वर्ण इससे पहले मई आधी मर्द और आधी लड़की थी.. थैंक जो तुमने मुझे पूरी लड़की बना दिए............... महक ने मुझे एक और किश कर दिए... मैंने भी महक को पलट दिए और महक के ऊपर आ कर उसे एक किश कर दिए..
विजय:- इस सबब का आईडिया भी तो मुझे तुमने hi दिए था...
mehak:-(hasste हुए) और तुमने उस आईडिया पर काम भी बहुत अच्छे से किया है.. वैसे तुम ये सबब करते बहुत कमल से हो, तुम्हारी पटरियों ने, तुम्हारी बहनो ने और बाकी सबब ने तुम्हे अच्छे से त्रिनेड कर दिए है..
विजय:- हाँ वो तो है, अब्ब जो बाकी की ट्रैंनिंग रहती है, वो तुम मुझे दे देना.
महक:- दुन्या का हर काम मुझे आता है विजय.. पर ये एक काम मुझे नहीं अत, अब्ब तो तुम hi मुझे ये काम सिखाओगे.. मई सीखने के बाद तुम्हे ट्रेंनेड कर दूंगी..
विजय:- तुम सच में hi मुझसे सबब कर लेना चाहती हो..... मई कुछ हैरान हुआ
महक:- इसमें हैरान वाली बात कौनसी है.. अब्ब तो मई अंदर से बदल गई हों, इन्तहा की आग मेरे अंदर है.. फिर तुम मेरी मांग भर कर मुझे अपनी पत्नी बना चुके हो.
तुम्हारा मुझपर और मेरा तुमपर पूरा पूरा हक़ है.. सेक्स के लिए तो मई बेचैन रहती hi हों, तो फिर पूरा मज़ा लेने से मई क्यों पीने हटने ले... मुझे भी तो अपनी लाइफ के एक एक पल को एन्जॉय करना है, और आज नयी जाग चुकी फीलिंग्स का भी भरपूर मज़ा लेना है..
विजय:- जो फिर आगे का शुरू करूँ....... मई शरारत से बोलै..
विजय ने मुझे धक्का दिए और
महक:- इतनी जल्दी क्या है.... गरम गरम खाना खाने से मोहन जल जाता है, थोड़ा थोड़ा करके पूरा प्यार भी वसूल कर लुंगी तुमसे........ अभी आज hi तो इस सबब का मज़ा आने लगा है.. तो, मैं तो इस सब को भरपूर एन्जॉय करुँगी..
महक मज़े लेते हुए बोली, और मई महक को इस नए रूप में देख के निहारने लगा, लड़की और एक रंग में हर एक रूप में अलग hi दिखती है... उसे हर रंग, हर रूम में देख के अच्छा लगता है, अगर वो दिल के करीब हो तो एक सुकून मिलता है....