Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 24 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)



अपडेट :::111


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लड़की जब्ब बोली तो कोशिश के बावजूद भी उसके मोहन से आवाज़ नहीं निकल पाई..

लड़के के सूख चुके होंठ फटे हुए थे.. लड़की ाकि आँखों में आंसू भी नहीं थे.. रो रो कर शायद उसकी आँखों के आंसू भी ख़तम हो चुके थे. जिस बच्ची को उसने उठाया हुआ था, वो शायद बेहोश थी, भूक की वजा से उस बच्ची का पेट भी कमर से चिपका हुआ था..

लड़की अपने मोहन से बोल कर हमे अपने हाथ में पड़की हुई पिछ दिखा रही थी. पिछ एक 10 साला बच्चे की थी. जिसके बारे में कुछ पूछना छह रही थी..

महक ने एक जहटके में hi उसे गले से लगा लिया.. मैं स्पीड से गाडी के अंदर से पानी की बोतल निकल लाया.. महक ने मुझसे पानी की बोतल ली और लड़की

को पानी पीने का कहा.. लड़की जो पहले बहुत हम्मत से उस पिछ वाले लड़के के बारे में पूछ रही थी, हमारा प्यार देख कर उसकी हिम्मत टूट गई और वो महक की बहन में झोल गई, उसकी बहन में मौजूद लड़की गिरने लगी थी, मैंने उसे थाम लिया..

महक:- विजय गाडी का दूर खोलो इसे हम पैलेस में लेकर चलते हाँ.. वही इसकी देख भाल करेंगे और वही से इसके बारे में जान भी लेंगे..

मैंने भी कोई बात नहीं की, फट से गाड़ी का दूर खोला महक ने लड़की को बैक सीट पर लिटाया, कूद भी उसके साथ hi बैठ गई. मैंने बच्ची को महक के हवाले किया, देर किये बिना hi मैंने गाडी को स्टार्ट करके पैलेस की तरफ भगा दिया..

ऐसे भी हालातों में लोग जी रहे हाँ.. क्या सबब hi अंदर से मर्डर गए हाँ.. कोई भी इस बेबस लड़की की मदद नहीं कर पाया था, भुकी पियासी उस लड़के को ढूंढ रही थी..

जल्द hi हम पैलेस में पोहंच गए थे, मैं किसी भी सिग्नल पर रुके बिना hi गाडी को फुल स्पीड से भागते हुए पैलेस पोहंचा था..

गाडी पैलेस में एंटर करते hi मैं सीधा उसे पैलेस की बिल्डिंग के पास ले गया.. साथ hi मैं हॉर्न भी बजा रहा था.. सब hi समझ गए क कुछ गड़बड़ है.. पैलेस क अंदर से मेरी तितलियाँ, अपर्णा शिखा, rupa,shetal, रानी भागते

भागते हुए बहार निकलीं.. मैंने गाडी रोकी.. महक ने झट से दूर खोला.. प्रिय फ़ौरन hi गाइड के पास आ गई थी, उसने भी अंदर का सबब देख लिया था, अंदर महक के पास से छोटी बच्ची को ले लिया, महक ने लड़की को उठाया और भाग आकर अंदर जाने लगी..

vijay:-(naukar से) डॉक्टर को फ़ौरन पोहचने को बुलाओ.. नौकर भाग खड़ा हुआ.. सबब मुझे hi देख रहे थे..... मैं भी महक के पीछे हो लिया..

महक ने लड़की को सूफी पर लिटाया..

mehak:-(rani से) रानी जल्दी से किसी बर्तन में पानी ले कर आओ.. शिखा तुम अंदर से कोई जूस ले कर आओ... gooooooooooo फाआआआआस्स्स्सस्ट्ट्ट्ट

दोनों hi दौड़ पड़ीं, और कुछ hi देर में दोनों पानी और जूस ले आएं.. प्रिय बच्ची को देखे जा रही थी, प्रिय की आँखों में आंसू आने लगे थे, हालत मेरी भी सही नहीं थी... मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था.. दोनों को ऐसी हालत में देख कर.. लड़की के हाथ में पिछ अभी भी थी...

रूपा ने वो पिछ उस लड़की के हाथ से ले ली..... सबब hi उस पिछ को देखने लगे.. राज और अनिल भी आ गए थे.. शोर की आवाज़ सुनकर एक एक करके सबब hi आने लगे थे..

किसी ने कुछ नहीं पूछा था, सबब hi महक जो लड़की के साथ कर रही थी, वो देहक रहे थे.. महक ने पहले एक गीले कपडे से लड़की के चहेरे को साफ़ किया उसके होंटो पर से गार्ड को साफ़ किया.. फिर थोड़ा थोड़ा करके जूस उसके मोहन में उतारने लगी.. जल्द hi डॉक्टर भी आ गया था..

सबब डॉक् को देख के साइड में हो गए.. महक भी साइड में होकर डॉक् को उसका काम करने में मदद देने लगी...

डॉक्टर:- कई दिन से भुकी होने की वजा से ये बेहोश हुई है.. उसे पहले ड्रिप लगा कर एनर्जी दी जाएगी, फिर hi कुछ और दिया जा सकता है..

priya:-(bachhi को दिखते हुए) डॉक्टर अंकल इस बच्ची को भी देखें ना ये भी बेहोश है, लड़की के चक्कर में सब उस बच्ची को भूल गए थे.. डॉक्टर ने बच्ची को देखा तो

डॉक्टर:- इसे फ़ौरन hi होस्पिटलिज़्ड करना पड़ेगा. इसकी हालत ज़यादा ख़राब है..

विजय:- डॉक्टर और लड़की को..

डॉक्टर:- नहीं वो जल्दी hi रिकवर करलेगी.. उसे यही ड्रिप लगा दी जाएगी..

पैलेस के अंदर इमरजेंसी के लिए बहुत कुछ था. ड्रिप का भी सामान मौजूद था, सबसे पहले लड़की को एक रूम में शिफ्ट किया गया.. सभी लड़की के पास थे तो मैं प्रिय और नताशा दीदी के साथ बच्ची को लिए हॉस्पिटल की और निकल गया.

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TIME:10:20:PM:

मैं पैलेस वापिस लौर आया था, हॉस्पिटल में पद्मा आंटी, मालिकान रानी और पूजा दीदी मौजूद थी.. बच्ची के लिए खतरा टालल चूका था..

डिहाइड्रेशन की वजा से बच्ची की हालत बहुत ख़राब थी, बार वक़्त ट्रीटमेंट की वजा से बच्ची बच गई थी..

बच्ची बहुत hi कम् आगे की थी, उसकी असली खुराक दूध hi थी, जिस वजा से उसकी ये हालत होगी थी, लड़की उस बच्ची के लिए दूध का करेंगे नहीं कर सकीय होगी जिस वजा से बच्ची ऐसी हालत तक्क आ पोहंची..

रूम में सबब hi थे, लड़की को 2 ड्रिप्स लगाईं गई थीं, अब्ब वो किसी भी वक़्त होश में आ सकती थी..

लड़की के फेस को वाश कर दिया गया था, अब्ब वो 24 के करीब दिख रही थी, अभी भी वो अपनी रियल आगे की नहीं दिख रही थी, उसके फेस की स्किन बहुत ज़यादा डैमेज हो चुकी थी. भुक्क की वजा से उसके गालों में गधे से बन्न गए थे..

पता नै कितने दिनों से कुछ खाया पिया नहीं था..

10 मिंट बाद लड़की के वजूद में कुछ हलचल सी हुई तो महक hi आगे बढ़ी.

महक उनके सर्र के बालो में उँगलियाँ चलने लगी, धीरे धीरे लड़की की जिस्म में मूवमेंट बढ़ने लगी.. लड़की अभी पूरी तरह से होश में नहीं आई थी, वो अपने हाथों में शायद उस बच्ची को महसूस करने की कोशिश कर रही थी..

जब उसे अपने पास बच्ची का एहसास नहीं हुआ तो वो एक झटके में hi उठ गई..

लड़की:- nishaaaaaaaaaaaaaaaaaaa meriiiiiiiiiiiiiiiiiii beheeeeennnnnnnnnnn..

वो बच्ची लड़की की बेहेन थी, वो उसके लिए मचलने लगी, महक ने उसे गले से लगा लिया.. लड़की की आवाज़ अभी भी पूरी तरह से बहाल नहीं थी.. लड़की ने महक की पकड़ से खुद को अलग किया.

लड़की फिर सबब को hi देखने लगी.

लड़की:- मेरी निशा कहाँ है..

दीक्षा आंटी भी लड़की के पास जा बैठी..

आंटी:- बेटी तुम अब्ब अपनों में हो, तुम और तुम्हारी बहन अब्ब ठीक है.. मुझे अपनी माँ hi समझो... डरो नहीं देखो सबब की तरफ सबब hi तुम्हे अपने लगेंगे..

महक:- मैं hi तुम्हे रोड से यहाँ लाइ हों, तुम्हारी निशा की हालत ज़यादा खिताब थी तो सबसे पहले उसे होपितल में ले जा कर उसका इलाज करवाया है. अब्ब भी वो वही है.. जल्द hi तुम भी अपनी नन्ही बेहेन के पास होगी..

लड़की ने सबब के चेहरे देखे और फिर अचानक से hi उसने अपने घुटने उठाये और अपने घुटनो पर सर्र रख कर रोने लगी.. दीक्षा आंटी ने उस लड़की को अपने गले से लगा लिया.. लड़की आंटी के गले लग कर ऐसे रोइ क रूम में मौजूद सबब के hi दिल देहल गए..

माँ चक्कर लगा कर चली गई थी, माँ की गांड सच में hi बहुत बुरी तरह से फट गई थी, माँ का दर्द तो कम् हो hi गया था, पारर माँ सबब के सामने यौन लंगड़ाते हुए नहीं चलना चाहती थी..

इसलिए शुरू में hi एक चक्कर लगा कर जल्दी से वापिस भी चली गई थी..

भाभी, सोना आंटी और जूही माँ लड़की के पास जा कर उन्हें अपना प्यार देने लगीं.. लड़की इतना प्यार पा कर और भी रोने लगी..

20 मिंट तक लड़की शांत हो गई, अब्ब उसके चेहरे पर दर्द कम् था, नयी लाइफ मिल जाने की आशा भी थी..

महक ने पिछ लड़की को दिखते उहे कहा..

महक:- ये तस्वीर किसकी है.?

लड़की ने पिछ झपट ली.

लड़की:- राहुल मेरा भाआईई.. लड़की फिरसे रोने लगी......... कोई मुझे मेरा भाई ला कर दे दो...... लड़की पिछ को चूमने लगी.. सभी लड़की की पीठ को मसलने लगी..

भाभी:- बीटा तुम्हारा नाम क्या है..

लड़की:- sss...sonam.......... लड़की रट हुए बोली.... मुझे मेरा भाई ला दो..

महक:- कब से गुम्म है तुम्हारा भाई..

सोनम:- 10 दिन से.... वही तो था, जो 1.5 महीनो से हमें खिला रहा था, फूल बेच बेच कर दो वक़्त की रोटी का इंतेज़ाम करता था.. वो hi गुम्म हो गया.. पता नहीं कहा गया मेरा है..

महक- किश एरिया में था, जब्ब वो गुम्म हुआ.....

लड़की ने सबब डिटेल बता दी.. सबब ने भी लड़की को उसका भाई जल्द मिल जाने का कह दिया..... महक मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने पिछ की स्नेप अपने मोब पर लेकर राजा पार्टी को फारवर्ड करदी... जूली को भी सेंड करदी...

लड़की को कुछ हल्का फुल्का खिलाया गया.. फिर महक उसकी और भी खातिर दारी में लग गई.. अभी लड़की से साड़ी डिटेल नहीं ली गई थी..

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जेल के खतरनाक क्रिमिनल्स का शामे वही किया गया था वो पहले से hi प्लांड था, अब्ब वो हमारा मटर नहीं रहा था..

अपने मतलब के कैदियों को फार्महाउस में पोहंचा दिया गया था.. वो अब्ब पूरी तरह से होश में थे..

एक रात और एक दिन उन्हें बेहोश hi रखा गया था.. उन्हें तीन हिस्सों में रखा गया था. उन्हें सबब डिटेल से बता दिया गया था क वो अब्ब जेल से बहार हाँ, वो जेल में hi बेहोश हो गए थे, इसलिए सभी यकीन नहीं कर पाए थे.. रत के समय उन्हें फार्महाउस की छत पर ले जा कर बहार का व्यू भी दिखा दिया गया था, जब्ब जा के कहीं उन्हें यकीन आया था..

फिर तो जैसे सबब ने hi खुशियां माननी शुरू कर दीं.. अक्सर तो ज़ारो कतार रोने लगे थे... उन रोने वळून में रिच पर्सन्स भी थे.. वो पावर में रहते हुए भी खुद क लिए कुछ नहीं कर पाए थे..

उन्हें जेल से किस लिए भगाया गया था, वो सबब डिटेल में बता दिया गया था.. ये भी क अब्ब कुछ वक़्त के लिए वो यही क़ैद रहेंगे..

ये उनके लिए कैद नै थी, उन्हें जीने की राह दिख गई थी.. सभी राज़ी ख़ुशी सबब की बात मान गए,..

गैंग के बारे में भी सबब डिटेल उनके सामने राखी गई.. उन्हें किसी के भी अंडर काम करने की जर्रूरत नहीं थी.. सबब hi फ्रेंडली रहें वाले थे.. बैकग्राउंड में रहते हुए वो कुछ भी अपनी फॅमिली के लिए कर सकते थे...

नयी लाइफ सबब क लिए hi एडवेंचर्स से भरपूर थी.... 2-4 दिनों में hi सबब की ट्रैंनिंग शुरू की जाने वाली थी... अभी वो सबब खुल की अजाडी को महसूस कर लेना चाहते थे... उन्हें हर तरह की सहूलत दे दी गई थी..

जेल से भाग जाने की वजा से कई लोगों को अपने घर वळून की भी टेंशन थी क कही उनके भाग जाने से कही पुलिस उनके घरवळून को परेशां न करे..

सभी क़ैदियों को हर तरह से mutma'in कर दिया गया था.. जल्द hi कुछ ऐसा भी किया जाएगा क सब hi अपने घर वळून से मिल लिया करेंगे और कभी कोई टेंशन भी नहीं रहेगी...

और क्या चाहिए था कैदियों को, सबब hi तो उन्हें मिल रहा था, आज़ादी मिली जीने का मक़सद भी मिला, घर वळून के लिए भी कर पाने के काबिल भी बना दिए जाने वाले थे..





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नेक्स्ट डे था मेरी और पूजा दीदी की शादी का...

हॉस्पिटल से भी सभी आ गए थे.. छोटी सी बच्ची अब्ब कमज़ोर तो थी, पारर अब्ब खतरे से बहार थी, बाकी का ट्रीटमेंट उसका पैलेस में भी हो सकता था..

पैलेस के माहौल में सभी का प्यार प् कर दोनों जल्द hi ठीक होने वाली थी...

सोनम को अच्छे से ख्याल रखा गया था.. रात महक hi सोनम क साथ सोइ थी, महक ने उस लड़की को खुद नहलाया था.. लड़की अब्ब ठीक थी, वो खुद भी नाहा सकती थी.. पारर महक नहीं मानी, महक ने उसके सारे काम खुद अपने हाथो से किये थे.... कल जब्ब वो लाइ गई थी, तो उसकी शकल देख क पहचानी hi नहीं जा रही थी.. अब्ब वो अपनी असली आगे में दिख रही थी, महक ने उसे पूरी तरह से चमका दिया था... नई और खूबसूरत कपडे उसे पहना दिए गए थे... अभी उसके चेहरे पर फ्रेशनेस लौट कर नहीं आई थी, उसके लिए कुछ दिन लगने वाले थे.

शुष्मा दीदी कल चली गई थी, अगले दिन आते hi सबसे पहले सोनम और महक से hi मिली..

जैसे hi दीदी सोनम के सामने पोहंची तो

दीदी:- soniiiiiiiiiiiiiiiiii tummmmmmmmmmmmmm yahannnnnnnnnnnnn....

सोनम ने जैसे hi दीदी को देखा तो चीखती हुई आगे बढ़ी और दीदी के गले लग कर पुरे जोरसे रोने लगी... सोनी दीदी को देख कर फिरसे एक बार खुद का आप खो बैठी थी.. वो हिचकियों में रोने लगी थी

महक हैरान रह गई.. महक ने फ़ौरन hi मुझे कॉल करदी.. मैं भी फ़ौरन hi वहां पोहंचा.. महक ने मुझे सबब बता दिए.. ये जान कर सोनम और दीदी एक दूसरे को जानती हाँ.. मैं अपना सर्र खुजाने लगा..

सोनम और दीदी दोनों hi एक दूसरे के गले से लगी रो रही थीं...

दीदी:- मेरी सोनी तेरा ये क्या हाल हो गया.. और दीदी कहाँ हाँ.. भैया कहा हाँ........

दीदी क मोहन से दीदी और भैया सुनकर मई और भी ज़यादा हैरान रह गया... पारर अभी मई कुछ पूछ नहीं सकता था..

सोनम:- (हिचकियों में रट हुए) ddd......diiiiidiiiiiiiiiii... mmm..mummyy पापा मारे गए और राहुल गुम्म ह गया है.... सोनम फिरसे रोने लगी..

दीदी:- सोनी ये तू क्या कह रही है, भैया और दीदी को कोई क्यों मारेगा...

महक:- दीदी अभी आप प्लीज बैठ जाएँ, पहले उसे रिलैक्स होने दें.. बाद में सबब पूछ लेना..

माँ भी रूम में आ गई थी.. माँ ने भी सबब सुन लिया था..

माँ:- शुशी ये कौन है.. दीदी और भैया का क्या चक्कर है..

दीदी ने माँ को देखा..

didi:-(maa से) दीदी ये सोनी मेरी हमारे घर के पास में hi रहा करते थे.. 2 साल पहले ये सबब घर बेच कर कही चले गए थे.. बहुत प्यार था मुझे सही से.. अब्ब ये कह रही है क भैया और दीदी को किसी ने मार दिया है.. विज्जू प्लीज इस सबब का पता लगाओ....

महक:- सोनम सच में hi तुम्हारे मम्मी पापा मारे गए हाँ...

सोनम:- हाँ दीदी, हम सबब रात में सो रहे थे तो कोई घर में घुसा था, मम्मी पापा को मार दिया था, उन कुत्तो ने.. एक को पापा ने मार दिया था, मैं भाई और छोटी को लेकर घर से भाग गई थी, और फिर कही छुप गई थी..

महक:- उसके बाद क्या तुम वहां गई थी..

सोनम:- नहीं दीदी मैं फिर वहां कभी नहीं गई.. मैं बहुत डर गई थी..

महक ने उस रात क्या हुआ सबब डिटेल में सोनम से जाना .. एक बार तो हम सबब ज़रूर पता लगाना चाहते थे..

राहुल को भी ढूंढ़ना था...

दीदी ने सोनम को संभल लिया था, दीदी का सहारा पा कर सोनम अब्ब ज़यादा संभल गई थी.. निशा को सही सलामत पा कर भी सोनम खुश हो गई थी, अब्ब राहुल रह गया था.. उसका भी जल्द मिलना ज़रूरी था, वर्ण सोनम फिरसे टूट जाती..

राजा पार्टी सब इन्फो निकलने में लगी हुई थी... मैंने सोनम क मम्मी पापा वाले काण्ड की डिटेल भी आगे फारवर्ड कर दी थी..

आज शादी थी, तो बाकी के टाइम शादी की तैयारी में लगने लगा... राजा पार्टी भी शादी में इन्वितेद थी...

दिल्ली शहर की और भी कई बड़ी बैड हस्तियों को इन्विते किया गया था..

शादी सिंपल होकर भी सिंपल नहीं थी, पैलेस को आज फिरसे सजाया गया था.. शाम के बाद का टाइम रखा गया था शादी क लिए..

कम साब के जान्ने वाले एक फेमस पंडित को बुलवाया गायत था.. जूली ने मुझे बताये बिना से सबब तैयारी कर राखी थी, जैसे hi शादी वाला दिन शुरू हुआ था, जूली के बुलाये गए वेडिंग प्लानर्स आ गए थे..

जूली के अपने कॉन्टेक्ट्स थे.. जूली ने दिल्ली के बेस्ट वेडिंग प्लानर्स को पहले से कॉन्ट्रैक्ट दे दिया था.... और उन्हें टाइम का भी बता दिया था..

सबब आते hi काम कर लग गए थे... शाम से पहले hi पूरा पैलेस की दुल्हन की तरह से चमकने लगा था....

मेरी शादी थी, वो भी पूजा दीदी के साथ.. जूली सिंपल कैसे रहने देती....

बाकी का सबब हर्ष अंकल के करवा दिया था.. मैं तो खुद में hi मगन था.. मुझे इस सबब का आईडिया नहीं था......

पूजा दीदी के लिए पार्लर वालियां भी यही आ गई थी.. जूली कमीनी ने सबब hi कर दिए था... मेरे लिए क्या किया था मुझे नहीं पता था.. वैसे भी मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं था..

पारर फिर माँ ने मुझे पकड़ लिया..

माँ:- विज्जू बीटा क्या तुम ऐसे hi रहने वाले हो.. खुद को तैयार नहीं करना क्या, दूल्हा बने बिना टी दुल्हन भी नहीं मिलती.... पीछे से सभी के हस्सन की आवाज़ आई तो मैंने और माँ ने देखा तो पूरी मण्डली hi कड़ी हुई थी...

अपर्णा:- माँ विज्जू भाई को आज मैं तैयार करुँगी.........

ऐ लुओ इसकी भी सुनलो... ये मुझे तैयार करेगी..

सबब एक बार फिरसे हस्सन लगीं..

राज:- तुम भाई को रहने दो.. मुझे hi चमका दो..

शीतल:- तुम्हे मई hi न चमका डॉन.. जैसा माहौल है, तुम्हे उससे भी ज़यादा हसीं न बना दिए तो मेरा नाम बदल देना..

राज का मोहन देखने वाला हो गया.. सबब एक बार फिरसे हस्सन लगे..

जूली भी हस्ते हुए आई..

जूली:- विजय क लिए सबब इंतेज़ाम है..

माँ:- जा विज्जू बीटा टाइम कम् है.. ये तो सभी ऐसे hi टाइम को बर्बाद करती रहेंगी..

विजय:- चल राज दूल्हा बनना है तो आ जा..

शीतल:- हाँ हाँ ले जाओ इसे, वन कही मैं इसका मुखर यही पे hi ना हसीं बना डॉन..

राज:- बहू उड़द रही हो तुम हाँ.. देखना कही भारी न पद जाए..

मैं सभी को हस्ता हुआ छोड़ कर जूली के साथ बढ़ गया..




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अपडेट :::112


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कम ने मीडिया से कहा था क जल्द hi वो जेल से भागे हए क़ैदियों को कही से भी ढूंढ निकालेंगे..

अगले दिन की सूबा हुई तो पास के सिटी के जंगलों में जेल से भागे हुए क़ैदियों के पाए जाने की इन्फो मिल गई.. उस सिटी की पुलिस ने उन कैदियों को चरों और से ग़ैर लिया ....

ये वो टाइम था जब जेल से भागे हुए क़ैदी और दिल्ली गैंग्स के गुंडे होश में आ रहे थे.. उनके आस पास वेपन्स भी मौजूद थे..

फिर शुरू हुई एक जुंग.. क़ैदी सबब कुछ तो नहीं समझ सके पारर अपने पास मौजूद वैपन्स को देख कर लड़ने क लिए तैयार हो गए.. कुछ क़ैदी लाडे बगैर hi वाहन से भागने लगे..

ऐसे लोगों क लिए कम के ख़ास आदमी वही कही छुपे हुए.. सारे क़ैदी और गुंडे एक एक करके मारे जाने लगे.. पुलिस ने भी फायरिंग शुरू कर दी थी..

गुंडे और क़ैदी मरे तो पुलिस का नाम बन्न गया.. कम के आदमी वहां से खुद को बचा कर निकल गए...

सरे क़ैदी तो नहीं मिल सके थे.. लेकिन बात किसी हद्द तक कण्ट्रोल में आ गई थी.. इंटेलिजेंस एजेंसीज अपने काम में लगी हुई थीं. ये सबब उनके के लिए हज़म करने लायक नहीं था.. पारर अब्ब बात दो शहरों में बैठत चुकी थी..

सभी अपने अपने हिसाब से इस काण्ड बारे चर्चा करने लगे.. सभी अपने हिसाब से इस घंटा के मास्टरमाइंड को ढूढ़ने में लगे हुए थे.. पारर ये सबब इतना आसान भी नहीं था...




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कम का नाम एक बार फिरसे अच्छे अंदाज़ में लिए जाने लगा....

कम साब थोड़ा सा टाइम निकाल कर मेरी शादी में शामिल होने क लिए आये थे..

शादी में मौजूद गेस्ट कम को बधाई दे रहे थे.. खतरनाक क़ैदियों के मारे जाने से आम जनता खुश थी..

कम साब ने मेरे कान में हस्ते हुए कहा था..

कम:- बच्चे जैसे तुम्हारे काम हाँ, तुम्हे शादी नहीं करनी चाहिए.. शादी क लिए रोज़ रत को सुरक्षित घर आना पड़ता है. और बीवी की दांत भी सुन्नी पड़ती है.. जिस दिन घर लेट आये, उस दिन खुद की पिटाई से बचने क लिए सबब सेट कर लेना.. ये एक फ्री की अडवीसे है..

कम हस्ते हुए इतना बोल कर दूसरों से मिलने चले गए थे..

एक बात का मुझे दुःख था, क कोठे से लाइ गए महिलाओं को शादी में शामिल नहीं किया गया था... माँ और बहनो और aparna,kriti सोना का फेस मैंने किसी हद्द तक चेंज कर दिया था.. बाकी सभी को बेसमेंट में रहने का बोल दिया गया था..

अनिल ने अपने फेस पर मास्क पहन कर शादी में शिरकर करि थी.. कैसी बात थी, ऐसे ख़ुशी के मोके पर भी सही दर्रे हुए थे, और सही को इस ख़ुशी के मोके पर शामिल होने नहीं दिया गया था...

कोई भी किसी को भी देख कर पहचान सकता था.. आज आये हुए लोगों में दन्न से रिलेटेड भी कई हो सकते थे.. एक छोटी सी गलती और बहुत कुछ बर्बाद हो सकता था..

दन्न जैसे खतरनाक गैंगस्टर से बच क रहने में hi भलाई थी..

जूली कमीनी ने यहाँ भी मुझे हैरान कर दिया था.. शादी के फंक्शन को जल्द ख़तम करके मुंबई से लाइ गई महिलाओं को शादी की ख़ुशी में शामिल करने क लिए 2 घंटे का प्रोग्राम अर्रंगे किया गया था..

मुझे इस सबब का पता नहीं था..

जब्ब शादी हो गई, सबब मेहमान चले गए.. पुरे पैलेस को अच्छे से चेक कर लिया गया.. तब्ब सभी को पैलेस की छत पर ले जाय गया...

जहाँ मुंबई से लाइ गई सभी महिलाएं मौजूद थी.. सभी लेटेस्ट ड्रेस में थी.. जूली ने सबब के लिए बढ़िया से ड्रेस पूर्चसे किये थे..

सभी lash-pash पैलेस की छत पर मौजूद थी.. उन्हों ने भी अपने मैं की सारी हसरतें पूरी की.. मई सिर्फ अपनों के लिए hi स्पेशल नहीं था. इस सभी क लिए भी मई स्पेशल hi था, मेरी hi वजा से ये सबब यही सेफ थी, और अपनी मर्ज़ी की लाइफ जी रही थीं..

सभी ने मुझे और मेरी पत्नी को बहुत बौहत बधाई दी.. मेरी माँ से भी शादी हो चुकी है, ये नहीं जानती थी, वर्ण वो माँ को भी बधाई देती..

पैलेस की छत पर सभी आज़ाद थी, किसी को अब्ब कोई टेंशन नहीं थी, किसी क भी पहचान लिए जाने का डर नहीं था.. तो जो हंगामा नीचे नहीं हो सका वो अब्ब छत पर होने लगा...

मेरे लिए और मेरी पत्नी के लिए छोटा सा स्टेज भी बनाया गया था.. पूजा दीदी की तारीफ बाद में की जायेगी फुर्सत से... अभी अधूरी तारीफ करने का मैं नहीं था..

पैलेस की पूरी छत hi जगमग जगमग कर रही थी, एक से बढ़कर एक खूबसूरत थी, कोठे पार्स लाइ गयी लड़कियां और औरतें भी सभी hi बेमिसाल ब्यूटी की मालिक थी.. इनकी यही ब्यूटी hi तो उन्हें ले डूबी थी..

आज उनकी ब्यूटी आज़ादी मिलने के बाद औरत भी ज़यादा बढ़ गई थी.. सही एक दूसरे से बढ़कर खूबसूरत दिख रही थीई...,. सभी के दिल अंदरूनी ख़ुशी से जगमगा रहे थे..

सभी कोठे वालियां थी, मेरी माँ और मेरी बहने भी कोठे वालियां थी.. तो जैसे के अक्सर शादी क मौका पर डांस होता है, तो यहाँ तो सभी एक से बढ़कर एक डांसर थी. लेकिन कोठे से कनेक्शन रखने वाली किसी को भी डांस नहीं करने दिया गया.. कोई ये न कह दे क कोठे से है डांस तो अच्छा करेगी hi..

थे सभी अपने hi लेकिन किसी का दिल न दुःख जाए इस बात का ख्याल भी रखा गया था... कभी सभी को अकेले में टाइम मिला तो देखि जायेगी..

shetal,rani,rupa,shikha और राज ने डांस किया था.. पांसुः hi डांस में अच्छे थे, रौनक hi लगाई थी, कौनसा किसी कॉम्पिटिशन में डांस कर रहे थे..

ग़र्ज़ सभी ने अपने दिल की हसरत को पूरा किया.... किसी एक का नाम क्या लेना.. वो माँ हो या मेरी बहनो में से कोई एक.. सभी मेरे अपने थे..

तो सभी ने इस ख़ुशी को पुरे मैं से सेलिब्रेट किया... papa,ajit bhai,harsh अंकल, कारन और अनिल भी पीछे नहीं रहे थे..

शेखर भाई की कारन से अच्छी जमने लगी थी.. वो अक्सर उनके साथ hi दिखने लगे..

राजा पार्टी मेरी पहली फ्रेंड कंपनी..

राजा को छोड़ कर सभी ने भी डांस किया, जैसा डांस वो कर सकते थे अपने दिल की ख़ुशी के लिए वो कर दिखाया.. और खूब दाद वसूल की...

जब्ब सबब जाने क लिए रेडी हुए तो जूली जो सबब की सेवा में लगी हुई थी.. उसने कुछ और भी सोच रखा था..

अचानक से hi अँधेरा हुआ, और फिर जल्द hi रौशनी भी हो गई, पैलेस की छत के ऊपर कोई छत नहीं थी, अवर्ण जूली कुछ और भी बढ़िया से इंतेज़ाम करती..

ब्लू कलर की रौशनी छत की साइड में रोशन हुई और जूली वेस्ट्रन ड्रेस में दिखने लगी.. बहुत hi शार्ट ड्रेस था.. बल्कि ये कहना सही होगा क जूली नंगी hi थी.........

पैलेस में शर्म नाम को तो थी नहीं.. जूली क्यों करती शर्म.. आधे बूब्स को दिखते हुए, छोटी सी पंतय पहने, जो सिर्फ उसकी छूट को hi छुपा पा रही थी, पीछे से उनकी गांड की दरार में फँसी हुई थी उसकी पंतय, उसके पुरे hi चुत्तड़ दिख रहे थे.. जूली कमनीनी से घूम कर सभी को अपनी गांड अच्छे से दिखाई थी..

ब्लू रंग की रौशनी कुछ और बढ़ी तो जूली ने अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया, पता नहीं कौनसा डांस कर रही थी, क्या नाम था डांस का...

पर जूली ने फिर डांस के वो कमाल दिखाए.. क चरों और से तालियों की गूँज hi ख़तम होने में नहीं आ रही थी.. जूली के बदन में बिजलियाँ सी भरी हुई महसूस होने लगीं.. पल भर में hi जूली एक जगा से दूसरी जगा जा पोहंचती.. जूली के ने तो हर तरफ आग सी लगा दी थी..

तालियां सीटिजन हूँ हां हूँ हां की शोर से पूरा पैलेस hi गूँज उठा.. जूली कमीनी ने ज़रूर ड्रिंक की हुई थी, शायद वोडका पि थी उसने.. जो उसके अंदर के अंदर क आग hi कम् नहीं हो पा रही थी.. ब्लू रौशनी जब जूली के बदन पार्स स्लिप होकर नीचे गिरती तो दिल की ढकने hi रुकने वाली हो जाती..

मैं बैठा तो पूजा दीदी क साथ था, पारर मेरा दिल की जूली ने कण्ट्रोल में की हुई थी.. पूजा दीदी के हाथ का दबाओ मेरे हाथ पर बढ़ा तो मैंने पूजा दीदी को देखा.

दीदी:- क्यों जूली के बदन से नज़र hi नहीं हट रही मेरे हस्बैंड की.. दीदी शर्मा तो रही थी.. दुल्हन जो थीं.. पारर अभी किसी की नज़र हमारी तरफ नहीं थी. तो दीदी ने इसका फायदा उठा कर मुझसे बात कर ली थी, वर्ण तो दीदी को मुझसे बात करते देख कर सभी उन्हें छेड़ने लगती..

विजय:- हाँ वो तो है, जूली का बदन आज सच में hi आग बरसा रहा है, आपके बदन की तपिश तो इन कपड़ों ने छुपा ली है. वो तो मैं रूम में hi जा कर महसूस कर पाऊँगा.. अभी तो जूली के बदन की तपिश से hi मुझे सैराब होने दो. आप भी तो जूली का पूरा पूरा मज़ा ले रही हाँ ना...

दीदी:- जूली तो आज सच में hi आग बरसा रही है.. कितनी बोल्ड होकर जूली डांस कर रही है... दीदी ने नज़रें नहीं चुराएं थी ये बात करते हुए..

मैंने दीदी का हाथ थाम लिया..

विजय:- चलो हम भी जूली के साथ शामिल हो जाएँ.. तीनो मिलकर धाम्नाल मचाते हाँ..

didi:-(hasste हुए) तुम और डांस.?

विजय:- तो क्या हुआ. क्या मैं डांस नहीं कर सकता.. ज़रूरी नहीं क सीखने से hi सबब आता है.. कुछ काम देख के भी सीखे जा सकते हाँ.. जैसा क

दीदी:- बस बस अब्ब आएगी का रहने दो..

मैं हस्ता हुआ जूली के डांस को देखने लगा... जूली का डांस ऐसा था क कोई भी जूली के साथ शामिल नहीं हो सकता था.. भले hi सभी एक्सपर्ट हों..

जूली के डांस का सच में hi कोई मोले नहीं था.. 20 मिंट तक्क जूली ने हर तरफ आग बरसाई फिर वो थम्म गई..

मेरी नज़र पापा पर गई, तो वो हर्ष अंकल और अजित भाई क साथ खड़े हुए जूली का डांस देख रहे थे..

तीनो hi बहुत चहक रहे थे...

विजय:- दीदी देखो papa,harsh अंकल और अजित भाई कैसे जूली के मज़े ले रहे हाँ, इनके लिए तो ऐसा है जैसे तीनो को पेरिस यही दिख गया हो..

दीदी हस्सन लगी.......

माँ, शुष्मा दीदी और मेरी तितलियाँ मेरे पास आएं और फिर से एक बार सभी मुझे चूमने लगीं...

विजय:- बास करो सभी, कुछ मेरी पत्नी के लिए भी बचा रहने दो.. सारा hi चाट कर जाओगी क्या..

मेरी बात कर दीदी ने मुझे चुटकी काट दी.. और बाकी सबब जोरसे हस्सन लगीं..

शादी का हंगामा रात 1 बजे तक्क चलता रहा........ किसी को भी हम दोनों पर तरस ना आया. पहले से हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़प रहे थे..

भला कोई तुक है, एक नए नए जोड़े को इतना तड़पने की... सभी अपनी ख़ुशी में गुम्म थे.. सभी अपनी मस्ती में गुम्म थे, सभी मेरी और पूजा दीदी की शादी की ख़ुशी मन रहे थे.. पारर हमें hi भूले हुए थे..

विजय:- दीदी ये तो हमें रूम में hi नहीं जाने दे रहे, चलो न हम इन्हे यही छोड़ के अकेले hi रूम में चलते हाँ.. कही ये खूबसूरत रात ऐसे hi हंगामे में न ख़तम हो जाए..

दीदी ने मुझे घूर कर देखा... और फिर धीरे धीरे हस्सन लगीं..

दीदी:- अपनी आग को काबू में रखो समझे, देख नहीं रहे सबब कितने खुश हाँ..

विजय:- तो फिर ठीक है, यहाँ से चलते hi मई तो रूम में जा के सो जाऊँगा. और मुझे ज़यादा आग नहीं लगी हुई..

दीदी:- रूम में पोहंचो तो सही, फिर तुम मुझे सो के दिखाना.. होऊं.. सो जाऊँगा. बड़ा आया सोने वाला.................

मुझे दीदी क अंदाज़ पर हंसी आने लगी, पर मई हंसा नहीं

विजय:- अगर सोने नहीं देना तो क्या करने का इरादा है आपका.. कही आप मेरे साथ वो तो नहीं करने वाली ना... न न मई वो सबब नहीं करने वाला..

इस बार दीदी फिरसे हस्सन लगीं,

दीदी:- ये नौटंकी करना छोडो समझे, लफंगे कही के..

मैंने आस पास देख कर दीदी को छेड़ने का सोचा, दीदी पहले से hi सबब भांप गईं..

दीदी:- माआआआआ... माँ कुछ फासले पर जूही माँ और दीक्षा आंटी के साथ hi कड़ी थी...

माँ चल क आई और

माँ:- क्या बात है पूजा बेटी..

दीदी ने ना में सर्र हिला दिया.. माँ भी सबब समझते हुए हस्सन लगीं..

माँ;- विज्जू बीटा क्यों तंग कर रहा है अपनी पत्नी को, आज तो उसे माफ़ी दे दे.

विजय:- माँ आप खुश तो हाँ ना..

माँ:- हाँ बीटा मई बहुत खुश हों..

विजय:- माँ मेरी पत्नी बैठे बैठे थक गई है, उसे भी रेस्ट करनी चाहिए.. दीदी ने मुझे फिरसे चुटकी काट दी....

माँ:- (हस्ते हुए) मुझे पता है तुझे बहुत बेचैनी हो रही है, आधा घंटा और वेट करो फिर तुम्हे छुट्टी मिल जाएगी.. अभी जाना है तो तुम जा सकते हो, पूजा बेटी यही रहेगी..

विजय:- माँ ये तो ज़ुल्म है..

माँ हस्ती हुई फिरसे वहीँ लौट गई..




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रात के 2 बजे का टाइम था.. मेरी दुल्हन अंदर रूम में थी और रूम का दूर बंद किये हुए नताशा दीदी के साथ साड़ी hi गर्ल्स रूम के दूर ओर कब्ज़ा जमाये हुए कड़ी थीं....

हाय ये भी होना था मेरे साथ, अंदर वो बेचारी अकेली मेरा इंतज़ार कर रही होगी..

साड़ी गर्ल्स hi मुझसे अपनी अपनी डिमांड्स पूरी करवाना छह रही थी.. करलो बात............ किसकी डिमांड मैंने कबि अधूरी छोड़ी है.

गर्ल्स में से shetal,rupa,shikha,aparna,kriti और जूही hi थीं जिन्हे मैंने अभी उनके हिस्से का प्यार नहीं दिया था..

aparna,kirti और जूही वैसे प्यार की लिस्ट में नहीं थी, इनका तो बनता hi है..

रानी और नताशा दीदी की तो छूट खोल ार साड़ी डिमांड्स मैंने पूरी कर दी थी.

मेरी तितलियों की भी डिमांड्स मैंने पूरी कर दी थी.. उनकी भी छूट मैंने अच्छे से खोल दी थी..

shetal,rupa और शिखा का भी नंबर जल्दी लगने वाला था.. फिर इस टाइम मुझे परेशां करने की क्या ज़रूरत थी.. पैसों का भी कोई मसला नहीं था, ख़तम करने पर भी ख़तम नहीं होने वाले थे...

मेरे पास पैसे नहीं थे, मुझे क्या पता था क मुझे अपने hi रोम में अपनी hi दुल्हन के पास जाने क लिए ढेरों पैसे खर्च करने पड़ेंगे....

मर्द हज़रात सभी अपने अपने रूम में जा चुके थे.. बड़ी आगे की लेडीज पीछे कड़ी हुई सभी गर्ल्स का हौसला बढ़ने में लगी हुई थीई..

अब्ब मैंने तो अपनी लाइफ में कभी किसी की शायद होते हुए नहीं देखि तो मुझे क्या पता क क्या करना है, कैसे करना है.. अर्जेंट पैसे मई कहाँ से लाऊँ..

पैसों क लिए ऐसे ज़िद्द कर रही थी.. जैसे पैसे के अहमियत उन सबब की नज़र में मुझसे भी बढ़के हो.. कोई भी कुछ भी सुनंने के मूड में नहीं थी..

सभी कुछ न कुछ बोलने में लगी हुई थीं....

सभी गर्ल्स को 5000-5000 चाइये थे. और जितनी गर्ल्स थी, मई इतने पैसे कहाँ से लाता.. मेरी तो साड़ी hi जेबें खली थीं...

माँ को hi मुझपर तरस आया.. माँ मेरे पास आई और चुपके से मेरी जेब में टोनो की गाड़ियां दाल दीं.. माँ को ये सबब पता था.. माँ ने पहले से hi अपने पर्स में पैसे रखे हुए थे.. या वो कुछ देर पहल hi रूम से लाइ होंगी.

विजय:- किसको कितने पैसे चाहिए..

मेरी बात सुनके प्रिय माँ को घूरने लगी, माँ हस्ती हुई तेज़ी से दूर होने लगी..

priya:-(natasha दीदी से) दीदी सबब चौपट हो गया है..

नताशा दीदी:- वो कैसे...

प्रिय ने मेरी पॉकेट से पैसे निकले और दिखती हुई बोली..

प्रिय:- आईसीएएएएए

बात पैसों की नहीं थी, बात कुछ और थी, पैसों का तो बास एक नाम था.. पैसा हाथ में आता तो, सबब hi मायूस होकर दूर से हट गईं...

दूर के पास पोहंच आकर..

विजय:- मेरे सारे दुश्मन जब्ब ख़तम हो जायेंगे तो सबब को hi पुरे 1 महीने तक्क पुरे इंडिया में घुमाओगे.. ये मेरी तरफ से तुम सबब के लिए गिफ्ट है..

मेरी बात सुनके सबब hi उछलने लगी..

सबब:- नाचते हुए yaaaaaaaaahooooooooooooooooo.. बास यही तो थी हमारी डिमांड, अब्ब तुम अंदर जा सकते हो.............




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अपडेट ::: 113


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मैं रूम में दाखिल हुआ.. दूर को अंदर से लॉक किया, और चलता हुआ अपने दुल्हन के पास जा पोहंचा.. दीदी मेरी ऑफिशियली वाइफ बन्न चुकी थी..

मैं सामने बैठा दीदी को देखने लगा. दीदी सर्र झुकाये हुए बैठी थी, दीदी के होंटो पारर मुस्कान थी, दीदी ने मुझे पा लिया था... दीदी इस पैलेस की 2ंद मलिका बन्न चुकी थी.. पहली माँ थी..

पारर सबब की hi नज़रों में दीदी पहली मलिका थी इस पैलेस की..

मैंने दीदी के हाथो को thama......didi के मेहँदी से रेंज होठो को उठा कर अपने होंटो से लगा दिया.. दीदी ने मुझे तिरछी आँख से मुझे देखा और मुस्कुराने लगीं.

विजय:- दीदी कोंग्रटुलतिओं.... हम दोनों एक हो गए हाँ..

दीदी:- तुम्हे भी बधाई हो मेरे जानू.. मेरे सरताज.. तुम मेरे लाइफ में आये तो भाई बन्न कर थे, पारर तुम मेरे खवाबो के हीरो बन्न गए.. मैं बहुत ज़यादा खुश हों अपने खवाबो के हीरो को अपनी ज़िंदगी में पूरी तरह से पा कर ..

दीदी शर्मा भी रही थीं.. और सबब बोल कर अपने अंदर का हाल भी बता रही थी.. दीदी आज बहुत खुश थी.. खुश तो मैं भी बहुत था.. दीदी का प्यार तो मुझे हमेशा hi मिलने वाला था, पारर शादी होना दीदी के साथ ये मेरे लिए ज़यादा ख़ुशी की बात थी..

दीदी गुलाबी ब्लाउज, साड़ी और लेहेंगा में थी .. सर्र पर ओढ़नी थी.. मैंने दीदी के सर्र से ओढ़नी को अलग किया... ओढ़नी एक पिन से आत्ताच थी,

दीदी के दूधिया कलर पर ये ब्राइडल ड्रेस बहुत जांच रहा था, होंटो पर पिंक कलर की लिपस्टिक... आँखों के दरमियान बिंदिया, गले में नेकलेस और मोतियों की खूबसरूआत माला.. और माला से नीचे..

नीचे का सबब साड़ी ने छुपाया हुआ था, मैंने साड़ी को पकड़ कर लूसे कर दिया... दीदी की सांस तेज़ हो गई..

साड़ी से इस सबब को छुपाने की के ज़रूरत थी भला, मुझे hi तो सबब देखना था.. और मुझसे hi छुपाया जा रहा था..

विजय:- दीदी मोतियों की माला नीचे कही जा रही है मुझे देखना है आगे ये कहाँ तक्क जाती है, चलो साड़ी को हटा कर मुझे वो माला दिखाएँ.. दीदी मुस्कान देने लगी..

didi:-mai कुन दिखाओं, तुम्हारा मैं है देकने का ो खुद hi देख लो... दीदी शरारती मुस्कान देती हुई बोली......

मैं दीदी की साडी को पकड़ कर उसे दीदी के गोर बदन से अलग ाकरने लगा.. मेरी नज़र दीदी क बूब्स पर hi थी.. दीदी मुझे देख रही थी. और मैं दीदी के बूब्स को

कुछ देर में साडी दीदी के बूब्स स अलग हुई तो रूम में अचानक से hi रौशनी बढ़ गई.. दीदी का व् शेप ब्लाउज क़यामत धता मेरी मजरों के सामने आ गया..

वीजा:- दीदी इतना डीपली ब्लाउज क्यों पहना है, मुझे घायल कर देने का इरादा है काया........... दीदी शरमन लगी.. मैं माला को पकड़ कर दीदी की स्लीवसे पर रगड़ने लगा...

विजय:- आज आपका बदन किनता छम्मक रहा है ना..

दीदी:- ये तो रोज़ hi चमकता है, आज तुम्हारे देखने का अंदाज़ बदला हुआ है, तो तुम्हे कुछ ज़यादा hi चमकता हुआ लग रहा है..

विजय:- दीदी क्या गिफ्ट डॉन माँ आपको.. सबब कुछ hi तो है आपके paas.jo नहीं है वो तो मैंने आपको आज दे hi डोंगा.... ये जो नेकलेस आपने पहना है, ये भी बौह्त खूबसूरत hai..aur वैसे भी आपको नेकलेस की जौरात hi कहाँ है, आप तो किसी भी और चीज़ के बिना hi बहुत खूबसूरत हाँ.... अब्ब देहकना ये है क बिना कपड़ों के ये सबब ज़ेवर आपके बदन कर कैसे लगते हाँ..

दीदी:- तो करलो न चेक किसने तुम्हे रोका है.... दीदी की मुस्कान कम् यह नहीं हो रही थी, दीदी मुसलसल hi मुझे निहार रही थी.. उनके होतनो पर एक पायरी सी मुस्कान हमेशा के लिए चिपक गई थी.. उनके मोतियों जैसे दांत उसकी मुस्कान को दुन्या की सबसे खूबसूरत मुस्कान बनाये दे रहे थे.... मेरी उँगलियाँ दीदी के बोओब्स के ऊपरी हिस्से कर चलने लगीं, दीदी की मुस्कान एकदम से hi थम्म गई, दीदी की आँखों ने पल भर में hi रंग बदल लिया..

विजय:- दीदी दुन्या हमारे लिए कितनी खूबसूरत हो गई है नाआ...

दीदी:- हाँ विज्जउ मेरे जानू ये दुन्या अब्ब बहुत खूबसृरत हो गई है, हर तरफ hi अब्ब ठंडी और खुशगवार चवायें चलती हुई महसूस होने लगी हाँ..

हर तरफ hi एक साज़ सा बजता हुआ महसूस होने लगता है.. हर एक चीज़ hi चहकती हुई महसूस होने लगी.... और अब्ब जब्ब तुम मेरे जीवन साथी बन्न गए हो तो अब्ब तो हर एक चीज़ गुनगुनाती हुई महसूस होती है... इस रूम में मौजूद हर एक चीज़ भी मुझे बहुत खुश दिख रही है....

विजय:- तो फिर इस रूम में मौजूद हर एक चीज़ को आपकी सुंदरता दिखा कर और भी ख़ुशी दे दी जाए..... मैं दीदी अपनी पत्नी की सुंदरता के नशे में खोने लगा.. दीदी की सांस और भी तेज़ होने लगी, दीदी के बूब्स ऊपर नीचे होने लगे.. मेरे हाथ दीदी एक ब्लाउज को खोलने में मसरूफ हो गए, दीदी ने अपनी ऑंखें बंद कर लीं.... मैं कभी दीदी को देखता तो कबि दीदी के ब्लाउज से छेड़ छड़ करता..

ब्लाउज के बटन पीछे थे.. मेरे हाथ दीदी के पीठ परे गए.. मेरे चेहरा दीदी एक चेहरे के पास आया तो दीदी की सांस कुछ और भी तेज़ हो गई.. मैं दीदी के चेहरे पर हलकी हलकी फूंकने मारता हुआ ब्लाउज को खोलने लगा..

जैसे hi ब्लाउज के बटन खुले मैंने ब्लाउज को दोनों कंधे से नीचे सरका दिया

दीदी की हालत खराब होने लगी थी, दीदी क लिए ये सबब नया नहीं था, पारर ये रात तो हम दोनों के लिए hi नयी थी, दीदी की साँसे और भी तेज़ होने लगी..

ब्लाउज बूब्स से नीचे हुआ तो मैंने फिरसे से माला को पकड़ कर दीदी एक बूब्स पर गिरने शुरू कर दिया.. मोतियों की रगड़ से दीदी मदहोश होने लगी थी मदहोश तो मैं भी होने लगा था..

फर्स्ट नाईट की फीलिंग्स थी, मदहोशी कैसे न होती, दीदी के क्लीवेज की गहराई पसीने से टर्र होने लगी..

मैं झुका और दीदी के बूब्स पर चमकने वाली पसीने की बोब्देन को छत्त लिया.

siiiiiiiiii हममममममममम दीदी की सिसकी निकल गई, मैं फिर वही नहीं रुका, टाइम कम् मिला था हमें तो मैं आज दीदी जके शराबी बदन की साड़ी hi शराब पि लेना चाहता था..

दीदी क लिए भी मैंने एक नेकलेस लिया था, नेकलेस की कोई वैल्यू तो नहीं थी, फिर भी उसे दीदी के गले में मैंने पहना दिया, अब्ब दीदी को भी माँ के जैसे बिना कपड़ो के देखना चाहता था, दीदी ने पहले कभी नेकलेस नहीं पहना था, बास सिंपल सा hi हार पहन लिया करती थीं.. आज उनके गले के मंगलसूत्र एक नेछलके एक माला और फिरसे एक और नेकलेस.. देहकना पड़ेगा दीदी इस सबब चीज़ो को पहन कर कैसी दिखती हाँ...

कपड़ो में तो दिख hi चुकी थी अब्ब बिना कपड़ो में कैसे दिखेंगी वो मैं देखना छटा था...

दीदी भी मुझे जल्द से जल्द पूरी तरह से पा लेना चाहती थी, इसलिए मैंने देर न करते हुए एक एक करके उनके बदन से सभी कपडे hi उतार दिए.. फिर मैंने भी अपने कपडे उतार दिए.. दीदी ने अपनी नज़रे झुका ली थी..

अब हम दोनों के hi बदन पर कुछ भी नहीं था.. कपडे बीएड की साइड में धरे थे..

मैं अपना लाया हुआ नेकलेस दीदी को पहना दिया, दीदी के बदन की चमक उस नेकलेस से बढ़ी या नहीं, पारर दीदी की आँखों की चमक ज़रूर बढ़ गई थी...

दीदी नीचे से पूरी नंगी थी और बूब्स से ऊपर दीदी बहुत hi खूबसूरत दिख रही थीं..

दीदी भी माँ की hi तरह से आज अपने असली हुसैन से कई गुना बढ़ कर हसीं दिख रही थीं..

मैंने दीदी की चीन कोप पकड़ कर ऊपर उठाया तो दीदी की पलकें झुकती चली गईं..

विजय:- दीदी इसी समय के लिए hi तो हम इंतज़ार में थे ना.. देहको अब्ब वो समय आ गया है, जब्ब हम एक दूसरे में समां जायेंगे..

दीदी:- हाँ विज्जू आज हम एक होने जा रहे हाँ, मेरे दिल की सारे hi हसरतें आज पूरी होने वाली हाँ.. मई बहुत खुश हों. आज मुझे इतना प्यार दो क मेरे लिए ये रात हमेशा क लिए यादगार बन जाए..

मैंने दीदी की ये रात यादगार बनाने की कोशिश शुरू कर दी... मैंने दीदी को बीएड पर लिटा दिया.. और दीदी क ऊपर आ कर दीदी क होंटो पर अपने होंठ रख दिए,

दीदी क बदन में सरसराहट सी होने लगी.. दीदी के बूब्स मेरे सीने पर ददने लगे.. नेकलेस और माला की रगड़ भी हम दोनों को बेचैन करने लगी.. मैं आज इन्हे उतारे बिना hi दीदी को छोड़ने वाला था..

दीदी क होंटो का अमृत मैं धीरे धीरे करके अपने अंदर उतरने अलग, दीदी भी ये रात और इस रात का कोई भी लम्हा मिस नहीं करना चाहती थी..

दीदी ने भी मेरे सर्र पर हाथ रखते हुए मुझे किश करनी शुरू कर di..didi ेमेरे ऊपर वाले होंठ को अपने होंटो में लिए चूसने लगी.... दीदी बहुत प्यार से मेरे होंटो का रस पी रही थी.. मेरे हिस्से में दीदी का नीचे वाला होंठ आ गया..

दीदी को किश करते हुए मैं थोड़ा सा ऊपर हुआ और अपने एक हाथ को दीदी के एक दूध पर रख दिया और दीदी को किश करते हुए दूध को भी हलके हलके दबाने अलग, दीदी की किश में कुछ तेज़ी आ गई, दीदी का दूध अभी हार्ड नहीं हुआ था, तो मुझे दबाने में बहुत मज़ा आने लगा. मेरी उँगलियाँ भी दीदी के निप्पल की साइड में उनके बूब्स पर चलने लगी, मुझे और भी सुकून मिलने लगा, मेरा लुंड में भी सरसराहट बढ़ने लगी, दीदी की छूट की खुशबु तो पहले से hi पा चूका था, जैसे hi मेरा लुंड जगाने लगा, दीदी की छूट एक पानी भी रिसना शुरू हो गया..

छूट के पानी के रिसने से मेरे लुंड को दीदी की छूट की खुशबु मिल गई और वो देर किये बिना हुई पूरी तरह से अकड़ने लगा, दीदी को भी मेरे लुंड की अकड़ महसूस यही तो दीदी अपनी गांड को हिलाते हुए मुझे जोश से किश करने ालगीं, मैंने भी दीदी क होंटो का रस पीने की स्पीड बढ़ा दी.. फिर हम दोनों कभी ऊपर वाले होंठ का रस पीते तो कभी नीचे वाले होंठ का दीदी होनी होने लगी थी.. दीदी का दूध भी अब्ब फूलने अलग था, मैंने दीदी के निप्पल को पकड़ कर दबाना भी शुरू कर दिए था..

जब हमारी सांस उखाड़ने लगी तो उहंने किश तोड़ दिया, दोनों की hi सांस फूल गई थी..

कुछ देर बाद मैं दीदी की गर्दन कर किश करते हुए नीचे आने लगा,. दीदी की क्लीवेज पर आया तो मई वहां जीब फेरने अलग.. सीईईई अह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म विज्जू मेरी जांणण अह्ह्ह्ह दीदी की सिसकियाँ सुरु हो गई थी.. दीदी के हाथ अब्ब भी मेरे सरत पर थे.. दीदी अब्ब मेरे सर्र पर अपने हाथो का दबो बढ़ने लैग थी

दीदी की बूब्स के साइड एरिया को अच्छी तरह से जेल करने के बाद मैंने होंठ दीदी के राइट दूध पर आ ठीके.. मैंने दीदी के निप्पल को मोहन में लेने में देर नै लगाईं, मोहन में आते hi मैंने दीदी क निप्पल को चूसना शुरू कर दिया.. दीदी को एक झटका लगा, दीदी की गांड कुछ ऊपर उठ गई थी..

दीदी:- आह्ह्ह्ह मेरी जान पीई जा अपनी दीदी क दूध को बहुत दिन से भरे पड़े हाँ, पि जा अपनी पत्नी का दूध अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह मेरे जानू....

मैंने दूसरे हाथ से दीदी के दूसरे दूध को भी निचोड़ने में लगा हुआ था, उसका दूध भी मुझे अपनी और खेंच रहा था.. मुझे उसकी भी तालाब होने लगी, तो मैंने उसपर टूट पड़ा, फिर मैंने बार बार दोनों hi दूध के मटकों को खाली करने लगा.. मटके तो खली नहीं हुए पारर दीदी जकी सिसकियाँ और बेताबी इन्तहा तक्क जा पोहंची..

मैं अब्ब अपनी दीदी ौनि पत्नी जको और नहीं तड़पना चाहता था.. मैंने दीदी क बूब्स छोड़ दिए.. जो मेरे चूसने से लाल हो गए थे.. आज मेरा जोशः कुछ और किसम का था.. आज मेरे अंदाज़ भी बदला हुआ था.. पहले कभी दीदी क साथ अकेले में ये सबब नहीं किया था.. दीदी मुझे अकेली मिली तो मैंने एक नए hi रंग में आने लगा था..

दीदी को चूमता chaat'ta हुआ मैं दीदी की नाभि पर पोहंचा जब्ब मेरी प्यार वहां भी बरसा तो दीदी क हाथो का दबाओ मेरे सर्र पर और भी बढ़ गया..

दीदी:- विज्जउ और मैट तड़पाओ, मैं अंदर से बोहतु जल रही हों, प्लीज कुछ करो mera..oiiiiiiii maaaaaaaaaa अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़

मैं और भी नीचे हुए तो मेरा लुंड दीदी क घुटनो से टकराता हुआ नीचे जाने लगा.. मेरा मोहन दीदी की छूट पर जा पोहंचा तो मैं दीदी की छूट को चूम कर चाटने लगा..

दीदी की बेकरारी और भी बढ़ गई थी.. दीदी के बढ़ना की कम्पन बहुत बढ़ गई थी, दीदी के बदन से बह रहे पसीने की तो कोई सीमा hi नहीं थी..

मैंने दीदी के पैरों को खोला दीदी की जांघों को पकड़ कर उठा दया. दीदी ने अपनी पेअर खुद hi हवा में उठा लिए मैंने दीदी के पैरों को छोड़ा..

अपने हाथ की उनलगियों से दीदी की छूट की फैंको को खोला तो मुझे दीदी की पानी बहती खुसबू छोड़ती गुलाबी छूट दिखने लगी.. कुछ ऊपर दीदी की छूट का दाना भी छूट के पानी से चमकता हुआ दिख रहा था.. मैं झुका और दीदी की छूट के पानी को अपने अंदर उतार लिया..

दीदी ने अपने हाथ मेरे सर्र पर से हटा आकर बीएड की शीट को पकड़ लिया.. दीदी की मुठियों में बीएड शीट चुरमुरा गई थी.. दीदी अपन सर्र पटकने अलगी..

मैंने दीदी की छूट के दाने को चाटने के बाद दीदी की छूट के छेड़ में अपनी जीब गुहसा दी, गीली और गरम छूट में मुझे बोहतु मज़ा दिया, मेरा अंदर करेंट दौड़ने लगा, मेरा लुंड और भी अकड़ने लगा.....

दीदी से सहन करना मुश्किल होने लगा..

दीदी:- विज्जउ saaariiiiiiiiii जिब्ब घुसा मेरी छूट में.... फ़क में विथ योर टंग.. पहाड़ दो मेरी छूट की सील को अपनी जीब से कर दो मुझे खून ो खून

ahhhhhhhhhh माआआ मर्डर गईइइइइइ विजजूउउउउ ायर अंदर .. उफ्फ्फ हाँ ऐसे hi chaatooooooooooooooooooo.. oiiiiiiiiii हम्मम्मम्मम्म ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊ cccccccccc

विज्जू maiiiiiiiiiiiiiiii gaiiiiiiiiiii

दीदी की छूट में अपनी जीब का बढ़ाओ मैंने और बी बढ़ा दिया, गरम जीब छूट की गर्मी में घुली तो छूट की दीवारों का बंद टूटना शुरू हो गया..

दीदी ने एक बार फिरसे मेरे सर्र पर अपने हाथ रख दिए और फिर मेरे सर्र को पुरे ज़ोर से अपनी छूट पर दबाते हुए सिसकियाँ लेते हुए जहदने लगीं..

दीदी की छूट का नमकीन पानी मेरे मोहन में जाने लगा और मैं दीदी की छूट का चटपटा पानी मज़े से पाने लगा..

रूम में दीदी की साँसों का शोर सुनाई देने लगा.. मैंने दीदी की छूट से अपना मोहन हटा लिया.. और बीएड पर लेट गया..

कुछ देर बाद दीदी की सांस ठीक हुए तो दीदी मेरे ऊपर आ आकर मुझे किश करने लगी.. मेरे होंटो पर लगे हुए अपनी छूट के पानी के चाटने के बाद वो मेरी आँखों में प्यार से देखने लगी..

दीदी:- विजजूउ आज बहुत दिनों बाद तुम्हरा प्यार प् के बहुत सुकून मिला है..

दीदी इतना बोल कर मेरे चेहरे को चूमने लगी, फिर वो भी मेरी hi तरह से मेरे चेहरे को चूमती यही नीचे जाने लगी.. मेरी गर्दन पर अपना प्यार जताने के बाद दीदी मेरे लुंड की तरफ बढ़ी..

सबसे पहले दीदी के हाथ लगाए बिना hi मेरे लुंड को ऊपर से लेकर नीचे तक्क और नीचे से लेकर ऊपर तक्क किश करना शुरू कर दिया.. जब्ब पुरे लुंड को चूम लिया तो दीदी ने मुझे देखा..

विजय:- क्या देख रही हो जाने मैं.

दीदी:- विजजूउउ आज तेरे लुंड को खुल कर प्यार करने का मौका मिल रहा है.. बहुत तरसी हों मैं इसके पुरे प्यार के लिए... आज मैं सबब करुँगी जो मेरे दिल को सुकून दे..

विजय:- मैं भी आपका हों दीदी और मेरा लुंड भी आपका.. आज करलें अपने दिल के सारे चा पुरे..

दीदी:- हाँ वो तो मैं आज ज़रूर पुरे करुँगी..

दीदी ने मेरे लुंड को पकड़ा और सुपडे पर किश करते हुए उसे चाटने लगी.. कुछ देर hi हुई थी क दीदी ने मेरे लुंड को अपने मोहन ले लिया और मेरी आँखों में देखती हुई लोल्लिपोप की तरह से चूसने लगी.... दीदी ने मेरी आंखौं से नज़रें अनहि हटाई थीं.. वो बहुत मज़े से मेरे लुंड को मोहन में लिए चूस रही थी... कुछ देर मेरे लुंड को छोस्ने के बाद दीदी ने मेरे लुंड के बाकी बचे हुए हिस्से को दबाते हुए मसलने लगी.. दीदी प्रेशर के साथ मेरे लुंड को मसल रही थी.. आज वो सबब अपने मैं की करने वाली थी..

मैं दीदी को देख कर मुस्कुराने लगा.. दीदी भी मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए आँखों से मुस्कुराने लगी...

मेरा पूरा लुंड दीदी की थूक से गीला हो चूका था.. दीदी और भी ठऊक निकल निकल कर मेरे लुंड को गीला करते हुए मसलने लगी...

दीदी का मैं तो नहीं भरा था, पारर पूरी hi रत तो वो मेरा लुंड मोहन में नहीं ले सकती थी..

दीदी ने मेरे लुंड को अपने मोहन से निकला और मेरे लुंड की गोलियों को अपने मोहन में लेकर चूसने लगी.. कुछ देर बाद वो साइड में हो गईं और बीएड पर लेट कर मुझे देखने लगी.. उनकी ऑंखें मुझसे कह रही थी..

विज्जउ अब्ब देर न करो देखो मैंने तुम्हरे लुंड को भी रेडी कर दिया है, अपना सारा प्यार भी उसे दे दिया है.. अब्ब तो मेरी सालों की हसरत को पूरा कार्डो.. पहाड़ तो मेरी छूट की सील को और बना दो मुझे लड़की से औरत..

मैं भी दीदी की आँखों की मानते हुए उठ खड़ा हुआ.. दीदी खुश हो गईं और मुझे मुस्कान देते हुए दहकने लगी....

जब मैं दीदी का पैरों में बैठने लगा तो दीदी की नज़र मेरे लुंड पर चली गई तो अचानक से hi दीदी की ख़ुशी काफूर हो गई अब्ब वो चिंता में डूब गई थी..

इतना बड़ा लुंड उनकी छूट में जाते हुए उन्हें कितना दर्द देगा..... उनकी आँखों में डर दिखने लगा.. और मैं और भी मुस्कुराने अलग..

विजय:- क्यों दीदी आप क्या समझती हाँ, दर्द के बिना hi आप पूरी हो जाएंगी.. लड़की से औरत बनने के लिए दर्द की झील को तो लांगना hi पड़ता है ना..

जिस कश्ती पर सवार हो कर आप झील पार करना चाहती हाँ वो बहुत बड़ी है.

मैंने अपने लुंड को एक हाथ से पकड़ कर झूलते हुए कहा.... मेरा भयंकर अकड़ चूका लुंड मुसलसल hi दीदी की छूट की हवा को टाइट किये हुए था.

विजय:- दर्रो नहीं मेरी जान मैं सबब प्यार से करूंगा ना.. प्रिय आपसे कितनी छोटी है.. उसने भी तो बड़े मज़े से मेरा लुंड ले लिया था..

दीदी:- vvvv..vijjj..vijjuuu मेरे bhai,mere जानू अपनी दीदी का अपनी पत्नी का ख्याल कर लेना... उसकी छूट बहुत तंग अहइ, धयान से फाड़ता अपनी दीदी की छूट को.. उसे ज़यादा दर्द मैट देना.

विजय:- डरो नहीं दीदी मैं प्यार से आपको छोडूंगा....

दीदी:- पक्का ना, तुम झूट तो नहीं बोल रहे ना..

विजय:- हाँ बिलकुल पक्का.. ज़यादा दर्द नहीं होगा..

जितना बड़ा मेरा लुंड है दर्द तो दीदी को बहुत होना था.. पारर उन्हें पहले से दर्जन की क्या ज़रूरत है..

मैं दीदी क पैरों में बैठा . दीदी के पैरों को अच्छे से खोल कर साइड में किया. एक छोटा तकिया उठाया और दीदी की गांड के नीचे रख दिए.. पहले मैंने किसी की गांड क नीचे ये नहीं रखा था..

पहले मुझे इस का ख्याल नहीं आया था.. दीदी की छूट कुछ ऊपर हुई तो मैंने अपने लुंड को पकड़ कर दीदी की छूट पर सेट आकर दिया, दीदी काँप सी गई मेरे लुंड को अपनी कहत पर पा कर.. वो समझ गई थी क अब्ब लुंड उनकी छूट को फाड़ने hi वाला है.. मैंने दीदी को देखा तो दीदी दर्री यही मुझे देख रही थी.. दीदी का चेहरा पसीने से भरा हुआ था..

मैंने दीदी को देखना छोड़ कर अपने लुंड को दीदी की छूट के लिप्स खोल कर अंदर फंसाया.. दीदी के पैरों को कस के पकड़ लिया और फिर एक धक्का मार दिए..

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maarrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiii

मेरे लुंड का मोटा सुपड दीदी की छूट के छेड़ में फँस चूका था,. दीदी की छूट खुल चुकी थी, अब्ब लुंड अंदर जाने क लिए रेडी था.. मैंने दीदी को नहीं देखा.. दीदी को अभी और भी दर्द देना था.. तो एक बार दर्द देकर दीदी को शांत किया जा सकता था..

मैंने दीदी के पैरों को छोड़ा और दीदी की कमर को पकड़ लिया और कुछ ऊपर झुकते हुए पुरे ज़ोर का एक धक्का मार diya...mera लुंड दीदी की छूट की सील कर तोड़ता हुआ 3.5" तक्क अंदर घुसता चला गया... दीदी की भयानक चीख रूम में गूँज गई...

दीदी की चीखों के साथ दीदी के बदन ने भी बुरी तरह से कांपना शरू कर दिया था.. मेरा लुंड दीदी की छूट में बुरी तरह से फँस चूका था.. मैंने एक नज़र दीदी को देखा तो दीदी बीएड शीट को मुठियों में कैसे हुए आंसू बहा रही थी..'

मैंने दीदी की छूट को खोलने क लिए एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया.. इस बार की दीदी की चीख और भी भयानक थी.. मेरा लुंड दीदी की छूट में 6: तक्क घुस चूका था..

मैं दीदी के ऊपर झुका और दीदी के बूब्स को अपने मोहन में लेकर चूसना शुरू कर दिया.. दीदी के होंटो को मैंने बंद नहीं किया था..

दीदी बुरी तरह से तड़प रही थी.. मैं दीदी के एक बूब्स को मोहन में लिए जोश से चूसने लगा दूसरे आहत से दीदी क निप्पल को मरोड़ने लगा.. दीदी जल्दी शांत होने वाली नहीं थी..

दीदी रोटी रही और मैं दीदी क बूब्स से मैं बहलाता रहा.. दीदी के बूब्स दर्द के कारण पसीना पसीना हो चुके थे.. मैं अपनी दीदी के दर्द को कम् करने के लिए दीदी क बूब्स को दबा और चूस रहा था...

दीदी दर्द से तड़प रही थी.. मैं तब्ब तक्क दीदी के बूब्स पर अपना प्यार बरसता रहा जब्ब टककक दीदी शांत नहीं हो गई, दीदी की छूट गरम होकर दर्द को भूल नहीं गई... दीदी के बूब्स मेरे हाथ और मोहन में फौल नहीं गए..

दीदी के हाथ मेरे सर्र पर फिरसे आये और इस बार दीदी मेरे सर्र के बालों में प्यार से अपनी उंगिलयां फेरने लगीं..

दीदी:- थैंक्स विज्जउ मुझे सुकून देने के लिए.. मुझे लड़की से औरत बनाने क लिए.. मुझे अपना पूरा प्यार दे कर मुझे पूरा करने क लिए...

ी लव यू विजजूउउ .. ी लव यू मेरे भाई.. ी लव यू मेरे साजन..




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थैंक्स अलोक भाई... :थैंक्यू:

अलोक भाई भरपाई तो करनी hi थी, और आप सक्क का ख्याल भी तो मुझे रखना था.. हम सबब एक hi तो हाँ, सभी को एक दूसरे का ख्याल है.. आप सबब की दुआओं से मई जल्द ठीक होकर फिरसे आप सबब के बीच में लौट आया हों.. उड़पतेस को पसंद करने क लिए बहुत बहुत शुक्रिया... जल्द hi रोमांस और सेक्स के बाद भरपूर एक्शन शुरू होने वाला है
 
थैंक्स..!!

विज्जउ अभी बहुत बिजी है, वर्ण वो तो सबब क लिए बहुत कुछ करने वाला है.. जल्द hi दन्न से निपट कर वो सभी के लिए और भी बहुत कुछ karega...padma आंटी और मालिकान भी विज्जू से चुद एक सुकून में हो गई han,unke अंदर की तड़प को भी विज्जू ने ख़तम कर दिए, उनके अंदर अपना प्यार उतार कर और भी उन्हें खुश कर dia..laali का भी नुम्बे रजल्द hi आने वाला है
 
थैंक्स..!!

रेखा बाई को कैसे शॉक लग सकता था, उसकी हालत hi इतनी ख़राब हो गई थी, वो कभी ऐसे हालातो से गुज़री जो नहीं थी, कुछ hi दिनों में रेखा बाई की हालत बहुत ख़राब हो गई है, अभी उसके लिए और भी बहुत कुछ होना बाकी है.. जैस घटिया लाइफ रेखा ने गुज़री थी, वो इसी लायक थी, अपने माँ बाप को नहीं छोड़ा उसने, बाक़िओं का वो काया ख्याल करती..

शुष्मा भी अंदर से बहुत दुखी है, कुछ तो चल रहा है उसके मैं में, विज्जू जल्द hi सब उससे यगलवा लेगा.. जल्द hi विज्जू उसे पूरी ातरः से खोल देगा
 
थैंक्स..!!

विज्जउ का जेल के क़ैदियों और दोनों गैंग्स के घूंसों के साथ बहुत सही किया है.. क़ैदियों को भी जीने का हक़ था, जो विज्जू ने उसे दिए.. गुंडों को भी उसके किये की सजा मिलनी थी, जो उन्हें दे दी गई..

शुष्ही को वीजजजजउ से खुलना hi था, विज्जउ है भी कमल कर इंसान ,,, और सब उससे से प्यार भी बहुत करते हाँ... शुशी कैसे विज्जू के प्यार के आगे न झुकती.. शुशी ने कभी ऐसी लाइफ नहीं, पारर उसके मैं में कही ये सबब करने की छह भी तो है..

शवेता और विज्जउ की शादी हो गई.. और सब को बताना भी ज़रूरी था.. बाद में किसी को कोई प्रोव्लम न हो.. अजित समेत सभी को बहुत ख़ुशी हुई विज्जू अरु श्वेता की शादी को लेके..

दोनों ने बहुत hi प्यार से एक दूसरे को अपने दिल का हाल बताया.. श्वेता के मैं की अब्ब सबब hi पूरी होगी है.. अब्ब उसे कभी कोई ग़म नहीं रहेगा..
 
थैंक्स..!!

महक और वीजजू भी एक दूसरे के करीब आते जा रहे हाँ, दोनों hi एक दूसरे के करीब आते जा रहे हाँ, पारर अभी भी दोनों में कोई और फीलिंग्स नहीं जाएगी हाँ. जोड़ी तो दोनों की hi परफेक्ट है, भगवन ने जब्ब दोनों को बनाया hi एक दसूरे के लिए है, तोर परफेक्ट तो होंगे hi.. महक में मैं में विज्जू के लिए अच्छे विचार हाँ, फ्यूचर में भी वो विजजू क लिए hi सोच रही है.. लेकिन उसके मैं में विज्जू सेक्स बारे कोई फीलिंग्स नहीं हाँ.. अगर कभी कोई ऐसा मौका बना तो वो सबब विज्जू के साथ प्यार में रह के करेगी, न क सेक्स ड्रग के नशे में..
 
थैंक्स..!!

दोनों के hi दिल नरम हाँ तो कैसे वो उस दुखियारी को छोड़ सकती थी.. दोनों ने अच्छे से लड़की और बच्चो का ख्याल रखा.. बाद में वही लड़की विज्जू की दद की निगहबॉर निकली.. बेचारी सोनम के साथ भी बहुत ज़ुल्म हुआ है.. सभी उसके हालत जान कर दुखी हाँ... सोनम विज्जु की दीदी से कनेक्टेड है तो विज्जू से भी वो कनेक्टेड हो गई है, विज्जू तो हर अपने क लिए कुछ भी करेगा
 
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