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अपडेट :::111
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लड़की जब्ब बोली तो कोशिश के बावजूद भी उसके मोहन से आवाज़ नहीं निकल पाई..
लड़के के सूख चुके होंठ फटे हुए थे.. लड़की ाकि आँखों में आंसू भी नहीं थे.. रो रो कर शायद उसकी आँखों के आंसू भी ख़तम हो चुके थे. जिस बच्ची को उसने उठाया हुआ था, वो शायद बेहोश थी, भूक की वजा से उस बच्ची का पेट भी कमर से चिपका हुआ था..
लड़की अपने मोहन से बोल कर हमे अपने हाथ में पड़की हुई पिछ दिखा रही थी. पिछ एक 10 साला बच्चे की थी. जिसके बारे में कुछ पूछना छह रही थी..
महक ने एक जहटके में hi उसे गले से लगा लिया.. मैं स्पीड से गाडी के अंदर से पानी की बोतल निकल लाया.. महक ने मुझसे पानी की बोतल ली और लड़की
को पानी पीने का कहा.. लड़की जो पहले बहुत हम्मत से उस पिछ वाले लड़के के बारे में पूछ रही थी, हमारा प्यार देख कर उसकी हिम्मत टूट गई और वो महक की बहन में झोल गई, उसकी बहन में मौजूद लड़की गिरने लगी थी, मैंने उसे थाम लिया..
महक:- विजय गाडी का दूर खोलो इसे हम पैलेस में लेकर चलते हाँ.. वही इसकी देख भाल करेंगे और वही से इसके बारे में जान भी लेंगे..
मैंने भी कोई बात नहीं की, फट से गाड़ी का दूर खोला महक ने लड़की को बैक सीट पर लिटाया, कूद भी उसके साथ hi बैठ गई. मैंने बच्ची को महक के हवाले किया, देर किये बिना hi मैंने गाडी को स्टार्ट करके पैलेस की तरफ भगा दिया..
ऐसे भी हालातों में लोग जी रहे हाँ.. क्या सबब hi अंदर से मर्डर गए हाँ.. कोई भी इस बेबस लड़की की मदद नहीं कर पाया था, भुकी पियासी उस लड़के को ढूंढ रही थी..
जल्द hi हम पैलेस में पोहंच गए थे, मैं किसी भी सिग्नल पर रुके बिना hi गाडी को फुल स्पीड से भागते हुए पैलेस पोहंचा था..
गाडी पैलेस में एंटर करते hi मैं सीधा उसे पैलेस की बिल्डिंग के पास ले गया.. साथ hi मैं हॉर्न भी बजा रहा था.. सब hi समझ गए क कुछ गड़बड़ है.. पैलेस क अंदर से मेरी तितलियाँ, अपर्णा शिखा, rupa,shetal, रानी भागते
भागते हुए बहार निकलीं.. मैंने गाडी रोकी.. महक ने झट से दूर खोला.. प्रिय फ़ौरन hi गाइड के पास आ गई थी, उसने भी अंदर का सबब देख लिया था, अंदर महक के पास से छोटी बच्ची को ले लिया, महक ने लड़की को उठाया और भाग आकर अंदर जाने लगी..
vijay:-(naukar से) डॉक्टर को फ़ौरन पोहचने को बुलाओ.. नौकर भाग खड़ा हुआ.. सबब मुझे hi देख रहे थे..... मैं भी महक के पीछे हो लिया..
महक ने लड़की को सूफी पर लिटाया..
mehak:-(rani से) रानी जल्दी से किसी बर्तन में पानी ले कर आओ.. शिखा तुम अंदर से कोई जूस ले कर आओ... gooooooooooo फाआआआआस्स्स्सस्ट्ट्ट्ट
दोनों hi दौड़ पड़ीं, और कुछ hi देर में दोनों पानी और जूस ले आएं.. प्रिय बच्ची को देखे जा रही थी, प्रिय की आँखों में आंसू आने लगे थे, हालत मेरी भी सही नहीं थी... मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था.. दोनों को ऐसी हालत में देख कर.. लड़की के हाथ में पिछ अभी भी थी...
रूपा ने वो पिछ उस लड़की के हाथ से ले ली..... सबब hi उस पिछ को देखने लगे.. राज और अनिल भी आ गए थे.. शोर की आवाज़ सुनकर एक एक करके सबब hi आने लगे थे..
किसी ने कुछ नहीं पूछा था, सबब hi महक जो लड़की के साथ कर रही थी, वो देहक रहे थे.. महक ने पहले एक गीले कपडे से लड़की के चहेरे को साफ़ किया उसके होंटो पर से गार्ड को साफ़ किया.. फिर थोड़ा थोड़ा करके जूस उसके मोहन में उतारने लगी.. जल्द hi डॉक्टर भी आ गया था..
सबब डॉक् को देख के साइड में हो गए.. महक भी साइड में होकर डॉक् को उसका काम करने में मदद देने लगी...
डॉक्टर:- कई दिन से भुकी होने की वजा से ये बेहोश हुई है.. उसे पहले ड्रिप लगा कर एनर्जी दी जाएगी, फिर hi कुछ और दिया जा सकता है..
priya:-(bachhi को दिखते हुए) डॉक्टर अंकल इस बच्ची को भी देखें ना ये भी बेहोश है, लड़की के चक्कर में सब उस बच्ची को भूल गए थे.. डॉक्टर ने बच्ची को देखा तो
डॉक्टर:- इसे फ़ौरन hi होस्पिटलिज़्ड करना पड़ेगा. इसकी हालत ज़यादा ख़राब है..
विजय:- डॉक्टर और लड़की को..
डॉक्टर:- नहीं वो जल्दी hi रिकवर करलेगी.. उसे यही ड्रिप लगा दी जाएगी..
पैलेस के अंदर इमरजेंसी के लिए बहुत कुछ था. ड्रिप का भी सामान मौजूद था, सबसे पहले लड़की को एक रूम में शिफ्ट किया गया.. सभी लड़की के पास थे तो मैं प्रिय और नताशा दीदी के साथ बच्ची को लिए हॉस्पिटल की और निकल गया.
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TIME:10:20
मैं पैलेस वापिस लौर आया था, हॉस्पिटल में पद्मा आंटी, मालिकान रानी और पूजा दीदी मौजूद थी.. बच्ची के लिए खतरा टालल चूका था..
डिहाइड्रेशन की वजा से बच्ची की हालत बहुत ख़राब थी, बार वक़्त ट्रीटमेंट की वजा से बच्ची बच गई थी..
बच्ची बहुत hi कम् आगे की थी, उसकी असली खुराक दूध hi थी, जिस वजा से उसकी ये हालत होगी थी, लड़की उस बच्ची के लिए दूध का करेंगे नहीं कर सकीय होगी जिस वजा से बच्ची ऐसी हालत तक्क आ पोहंची..
रूम में सबब hi थे, लड़की को 2 ड्रिप्स लगाईं गई थीं, अब्ब वो किसी भी वक़्त होश में आ सकती थी..
लड़की के फेस को वाश कर दिया गया था, अब्ब वो 24 के करीब दिख रही थी, अभी भी वो अपनी रियल आगे की नहीं दिख रही थी, उसके फेस की स्किन बहुत ज़यादा डैमेज हो चुकी थी. भुक्क की वजा से उसके गालों में गधे से बन्न गए थे..
पता नै कितने दिनों से कुछ खाया पिया नहीं था..
10 मिंट बाद लड़की के वजूद में कुछ हलचल सी हुई तो महक hi आगे बढ़ी.
महक उनके सर्र के बालो में उँगलियाँ चलने लगी, धीरे धीरे लड़की की जिस्म में मूवमेंट बढ़ने लगी.. लड़की अभी पूरी तरह से होश में नहीं आई थी, वो अपने हाथों में शायद उस बच्ची को महसूस करने की कोशिश कर रही थी..
जब उसे अपने पास बच्ची का एहसास नहीं हुआ तो वो एक झटके में hi उठ गई..
लड़की:- nishaaaaaaaaaaaaaaaaaaa meriiiiiiiiiiiiiiiiiii beheeeeennnnnnnnnnn..
वो बच्ची लड़की की बेहेन थी, वो उसके लिए मचलने लगी, महक ने उसे गले से लगा लिया.. लड़की की आवाज़ अभी भी पूरी तरह से बहाल नहीं थी.. लड़की ने महक की पकड़ से खुद को अलग किया.
लड़की फिर सबब को hi देखने लगी.
लड़की:- मेरी निशा कहाँ है..
दीक्षा आंटी भी लड़की के पास जा बैठी..
आंटी:- बेटी तुम अब्ब अपनों में हो, तुम और तुम्हारी बहन अब्ब ठीक है.. मुझे अपनी माँ hi समझो... डरो नहीं देखो सबब की तरफ सबब hi तुम्हे अपने लगेंगे..
महक:- मैं hi तुम्हे रोड से यहाँ लाइ हों, तुम्हारी निशा की हालत ज़यादा खिताब थी तो सबसे पहले उसे होपितल में ले जा कर उसका इलाज करवाया है. अब्ब भी वो वही है.. जल्द hi तुम भी अपनी नन्ही बेहेन के पास होगी..
लड़की ने सबब के चेहरे देखे और फिर अचानक से hi उसने अपने घुटने उठाये और अपने घुटनो पर सर्र रख कर रोने लगी.. दीक्षा आंटी ने उस लड़की को अपने गले से लगा लिया.. लड़की आंटी के गले लग कर ऐसे रोइ क रूम में मौजूद सबब के hi दिल देहल गए..
माँ चक्कर लगा कर चली गई थी, माँ की गांड सच में hi बहुत बुरी तरह से फट गई थी, माँ का दर्द तो कम् हो hi गया था, पारर माँ सबब के सामने यौन लंगड़ाते हुए नहीं चलना चाहती थी..
इसलिए शुरू में hi एक चक्कर लगा कर जल्दी से वापिस भी चली गई थी..
भाभी, सोना आंटी और जूही माँ लड़की के पास जा कर उन्हें अपना प्यार देने लगीं.. लड़की इतना प्यार पा कर और भी रोने लगी..
20 मिंट तक लड़की शांत हो गई, अब्ब उसके चेहरे पर दर्द कम् था, नयी लाइफ मिल जाने की आशा भी थी..
महक ने पिछ लड़की को दिखते उहे कहा..
महक:- ये तस्वीर किसकी है.?
लड़की ने पिछ झपट ली.
लड़की:- राहुल मेरा भाआईई.. लड़की फिरसे रोने लगी......... कोई मुझे मेरा भाई ला कर दे दो...... लड़की पिछ को चूमने लगी.. सभी लड़की की पीठ को मसलने लगी..
भाभी:- बीटा तुम्हारा नाम क्या है..
लड़की:- sss...sonam.......... लड़की रट हुए बोली.... मुझे मेरा भाई ला दो..
महक:- कब से गुम्म है तुम्हारा भाई..
सोनम:- 10 दिन से.... वही तो था, जो 1.5 महीनो से हमें खिला रहा था, फूल बेच बेच कर दो वक़्त की रोटी का इंतेज़ाम करता था.. वो hi गुम्म हो गया.. पता नहीं कहा गया मेरा है..
महक- किश एरिया में था, जब्ब वो गुम्म हुआ.....
लड़की ने सबब डिटेल बता दी.. सबब ने भी लड़की को उसका भाई जल्द मिल जाने का कह दिया..... महक मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने पिछ की स्नेप अपने मोब पर लेकर राजा पार्टी को फारवर्ड करदी... जूली को भी सेंड करदी...
लड़की को कुछ हल्का फुल्का खिलाया गया.. फिर महक उसकी और भी खातिर दारी में लग गई.. अभी लड़की से साड़ी डिटेल नहीं ली गई थी..
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जेल के खतरनाक क्रिमिनल्स का शामे वही किया गया था वो पहले से hi प्लांड था, अब्ब वो हमारा मटर नहीं रहा था..
अपने मतलब के कैदियों को फार्महाउस में पोहंचा दिया गया था.. वो अब्ब पूरी तरह से होश में थे..
एक रात और एक दिन उन्हें बेहोश hi रखा गया था.. उन्हें तीन हिस्सों में रखा गया था. उन्हें सबब डिटेल से बता दिया गया था क वो अब्ब जेल से बहार हाँ, वो जेल में hi बेहोश हो गए थे, इसलिए सभी यकीन नहीं कर पाए थे.. रत के समय उन्हें फार्महाउस की छत पर ले जा कर बहार का व्यू भी दिखा दिया गया था, जब्ब जा के कहीं उन्हें यकीन आया था..
फिर तो जैसे सबब ने hi खुशियां माननी शुरू कर दीं.. अक्सर तो ज़ारो कतार रोने लगे थे... उन रोने वळून में रिच पर्सन्स भी थे.. वो पावर में रहते हुए भी खुद क लिए कुछ नहीं कर पाए थे..
उन्हें जेल से किस लिए भगाया गया था, वो सबब डिटेल में बता दिया गया था.. ये भी क अब्ब कुछ वक़्त के लिए वो यही क़ैद रहेंगे..
ये उनके लिए कैद नै थी, उन्हें जीने की राह दिख गई थी.. सभी राज़ी ख़ुशी सबब की बात मान गए,..
गैंग के बारे में भी सबब डिटेल उनके सामने राखी गई.. उन्हें किसी के भी अंडर काम करने की जर्रूरत नहीं थी.. सबब hi फ्रेंडली रहें वाले थे.. बैकग्राउंड में रहते हुए वो कुछ भी अपनी फॅमिली के लिए कर सकते थे...
नयी लाइफ सबब क लिए hi एडवेंचर्स से भरपूर थी.... 2-4 दिनों में hi सबब की ट्रैंनिंग शुरू की जाने वाली थी... अभी वो सबब खुल की अजाडी को महसूस कर लेना चाहते थे... उन्हें हर तरह की सहूलत दे दी गई थी..
जेल से भाग जाने की वजा से कई लोगों को अपने घर वळून की भी टेंशन थी क कही उनके भाग जाने से कही पुलिस उनके घरवळून को परेशां न करे..
सभी क़ैदियों को हर तरह से mutma'in कर दिया गया था.. जल्द hi कुछ ऐसा भी किया जाएगा क सब hi अपने घर वळून से मिल लिया करेंगे और कभी कोई टेंशन भी नहीं रहेगी...
और क्या चाहिए था कैदियों को, सबब hi तो उन्हें मिल रहा था, आज़ादी मिली जीने का मक़सद भी मिला, घर वळून के लिए भी कर पाने के काबिल भी बना दिए जाने वाले थे..
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नेक्स्ट डे था मेरी और पूजा दीदी की शादी का...
हॉस्पिटल से भी सभी आ गए थे.. छोटी सी बच्ची अब्ब कमज़ोर तो थी, पारर अब्ब खतरे से बहार थी, बाकी का ट्रीटमेंट उसका पैलेस में भी हो सकता था..
पैलेस के माहौल में सभी का प्यार प् कर दोनों जल्द hi ठीक होने वाली थी...
सोनम को अच्छे से ख्याल रखा गया था.. रात महक hi सोनम क साथ सोइ थी, महक ने उस लड़की को खुद नहलाया था.. लड़की अब्ब ठीक थी, वो खुद भी नाहा सकती थी.. पारर महक नहीं मानी, महक ने उसके सारे काम खुद अपने हाथो से किये थे.... कल जब्ब वो लाइ गई थी, तो उसकी शकल देख क पहचानी hi नहीं जा रही थी.. अब्ब वो अपनी असली आगे में दिख रही थी, महक ने उसे पूरी तरह से चमका दिया था... नई और खूबसूरत कपडे उसे पहना दिए गए थे... अभी उसके चेहरे पर फ्रेशनेस लौट कर नहीं आई थी, उसके लिए कुछ दिन लगने वाले थे.
शुष्मा दीदी कल चली गई थी, अगले दिन आते hi सबसे पहले सोनम और महक से hi मिली..
जैसे hi दीदी सोनम के सामने पोहंची तो
दीदी:- soniiiiiiiiiiiiiiiiii tummmmmmmmmmmmmm yahannnnnnnnnnnnn....
सोनम ने जैसे hi दीदी को देखा तो चीखती हुई आगे बढ़ी और दीदी के गले लग कर पुरे जोरसे रोने लगी... सोनी दीदी को देख कर फिरसे एक बार खुद का आप खो बैठी थी.. वो हिचकियों में रोने लगी थी
महक हैरान रह गई.. महक ने फ़ौरन hi मुझे कॉल करदी.. मैं भी फ़ौरन hi वहां पोहंचा.. महक ने मुझे सबब बता दिए.. ये जान कर सोनम और दीदी एक दूसरे को जानती हाँ.. मैं अपना सर्र खुजाने लगा..
सोनम और दीदी दोनों hi एक दूसरे के गले से लगी रो रही थीं...
दीदी:- मेरी सोनी तेरा ये क्या हाल हो गया.. और दीदी कहाँ हाँ.. भैया कहा हाँ........
दीदी क मोहन से दीदी और भैया सुनकर मई और भी ज़यादा हैरान रह गया... पारर अभी मई कुछ पूछ नहीं सकता था..
सोनम:- (हिचकियों में रट हुए) ddd......diiiiidiiiiiiiiiii... mmm..mummyy पापा मारे गए और राहुल गुम्म ह गया है.... सोनम फिरसे रोने लगी..
दीदी:- सोनी ये तू क्या कह रही है, भैया और दीदी को कोई क्यों मारेगा...
महक:- दीदी अभी आप प्लीज बैठ जाएँ, पहले उसे रिलैक्स होने दें.. बाद में सबब पूछ लेना..
माँ भी रूम में आ गई थी.. माँ ने भी सबब सुन लिया था..
माँ:- शुशी ये कौन है.. दीदी और भैया का क्या चक्कर है..
दीदी ने माँ को देखा..
didi:-(maa से) दीदी ये सोनी मेरी हमारे घर के पास में hi रहा करते थे.. 2 साल पहले ये सबब घर बेच कर कही चले गए थे.. बहुत प्यार था मुझे सही से.. अब्ब ये कह रही है क भैया और दीदी को किसी ने मार दिया है.. विज्जू प्लीज इस सबब का पता लगाओ....
महक:- सोनम सच में hi तुम्हारे मम्मी पापा मारे गए हाँ...
सोनम:- हाँ दीदी, हम सबब रात में सो रहे थे तो कोई घर में घुसा था, मम्मी पापा को मार दिया था, उन कुत्तो ने.. एक को पापा ने मार दिया था, मैं भाई और छोटी को लेकर घर से भाग गई थी, और फिर कही छुप गई थी..
महक:- उसके बाद क्या तुम वहां गई थी..
सोनम:- नहीं दीदी मैं फिर वहां कभी नहीं गई.. मैं बहुत डर गई थी..
महक ने उस रात क्या हुआ सबब डिटेल में सोनम से जाना .. एक बार तो हम सबब ज़रूर पता लगाना चाहते थे..
राहुल को भी ढूंढ़ना था...
दीदी ने सोनम को संभल लिया था, दीदी का सहारा पा कर सोनम अब्ब ज़यादा संभल गई थी.. निशा को सही सलामत पा कर भी सोनम खुश हो गई थी, अब्ब राहुल रह गया था.. उसका भी जल्द मिलना ज़रूरी था, वर्ण सोनम फिरसे टूट जाती..
राजा पार्टी सब इन्फो निकलने में लगी हुई थी... मैंने सोनम क मम्मी पापा वाले काण्ड की डिटेल भी आगे फारवर्ड कर दी थी..
आज शादी थी, तो बाकी के टाइम शादी की तैयारी में लगने लगा... राजा पार्टी भी शादी में इन्वितेद थी...
दिल्ली शहर की और भी कई बड़ी बैड हस्तियों को इन्विते किया गया था..
शादी सिंपल होकर भी सिंपल नहीं थी, पैलेस को आज फिरसे सजाया गया था.. शाम के बाद का टाइम रखा गया था शादी क लिए..
कम साब के जान्ने वाले एक फेमस पंडित को बुलवाया गायत था.. जूली ने मुझे बताये बिना से सबब तैयारी कर राखी थी, जैसे hi शादी वाला दिन शुरू हुआ था, जूली के बुलाये गए वेडिंग प्लानर्स आ गए थे..
जूली के अपने कॉन्टेक्ट्स थे.. जूली ने दिल्ली के बेस्ट वेडिंग प्लानर्स को पहले से कॉन्ट्रैक्ट दे दिया था.... और उन्हें टाइम का भी बता दिया था..
सबब आते hi काम कर लग गए थे... शाम से पहले hi पूरा पैलेस की दुल्हन की तरह से चमकने लगा था....
मेरी शादी थी, वो भी पूजा दीदी के साथ.. जूली सिंपल कैसे रहने देती....
बाकी का सबब हर्ष अंकल के करवा दिया था.. मैं तो खुद में hi मगन था.. मुझे इस सबब का आईडिया नहीं था......
पूजा दीदी के लिए पार्लर वालियां भी यही आ गई थी.. जूली कमीनी ने सबब hi कर दिए था... मेरे लिए क्या किया था मुझे नहीं पता था.. वैसे भी मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं था..
पारर फिर माँ ने मुझे पकड़ लिया..
माँ:- विज्जू बीटा क्या तुम ऐसे hi रहने वाले हो.. खुद को तैयार नहीं करना क्या, दूल्हा बने बिना टी दुल्हन भी नहीं मिलती.... पीछे से सभी के हस्सन की आवाज़ आई तो मैंने और माँ ने देखा तो पूरी मण्डली hi कड़ी हुई थी...
अपर्णा:- माँ विज्जू भाई को आज मैं तैयार करुँगी.........
ऐ लुओ इसकी भी सुनलो... ये मुझे तैयार करेगी..
सबब एक बार फिरसे हस्सन लगीं..
राज:- तुम भाई को रहने दो.. मुझे hi चमका दो..
शीतल:- तुम्हे मई hi न चमका डॉन.. जैसा माहौल है, तुम्हे उससे भी ज़यादा हसीं न बना दिए तो मेरा नाम बदल देना..
राज का मोहन देखने वाला हो गया.. सबब एक बार फिरसे हस्सन लगे..
जूली भी हस्ते हुए आई..
जूली:- विजय क लिए सबब इंतेज़ाम है..
माँ:- जा विज्जू बीटा टाइम कम् है.. ये तो सभी ऐसे hi टाइम को बर्बाद करती रहेंगी..
विजय:- चल राज दूल्हा बनना है तो आ जा..
शीतल:- हाँ हाँ ले जाओ इसे, वन कही मैं इसका मुखर यही पे hi ना हसीं बना डॉन..
राज:- बहू उड़द रही हो तुम हाँ.. देखना कही भारी न पद जाए..
मैं सभी को हस्ता हुआ छोड़ कर जूली के साथ बढ़ गया..
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